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    <title>Farmer News: Government Schemes for Farmers, Successful Farmer Stories &#45; : Agri Start&#45;Ups</title>
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    <description>Farmer News: Government Schemes for Farmers, Successful Farmer Stories &amp;#45; : Agri Start&amp;#45;Ups</description>
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    <item>
        <title><![CDATA[पांच वर्षों में 1,708 एग्री स्टार्टअप को 122 करोड़ की फंडिंग, जानिए क्या है योजना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/funding-of-rs-122-crore-to-1708-agri-startups-in-five-years-know-what-is-the-scheme.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 12 Dec 2024 14:38:24 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/funding-of-rs-122-crore-to-1708-agri-startups-in-five-years-know-what-is-the-scheme.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि के क्षेत्र में उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार एग्री स्टार्टअप पर काफी जोर दे रही है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत &ldquo;नवाचार एवं कृषि उद्यमिता&rdquo; कार्यक्रम के जरिए पिछले पांच वर्षों में 1,708 एग्री स्टार्टअप को 122.5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की जा चुकी है। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।</p>
<p><strong>कैसे मिलती </strong><strong>है फंडिंग</strong></p>
<p>कृषि मंत्रालय वर्ष 2018-19 से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत &ldquo;नवाचार और कृषि-उद्यमिता&rdquo; कार्यक्रम चला रहा है। इसका उद्देश्य कृषि और कृषि से जुड़े क्षेत्रों में स्टार्टअप को प्रोत्साहित करना है। इसके तहत स्टार्टअप को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है। इस कार्यक्रम के लिए 5 नॉलेज पार्टनर (केपी) और 24 आरकेवीवाई कृषि व्यवसाय इनक्यूबेटर (आर-एबीआई) प्रशिक्षण प्रदान करते हैं और स्टार्टअप को इनक्यूबेट करते हैं।</p>
<p>कार्यक्रम के तहत, पहले चरण में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र के स्टार्टअप को आइडिया/प्री सीड स्टेज में 5 लाख रुपये तक और दूसरे चरण यानी सीड स्टेज में 25 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस फंडिंग का इस्तेमाल प्रोडक्ट, सर्विसेज या प्लेटफार्म शुरू करने और व्यवसाय को बढ़ाने में किया जाता है।</p>
<p>इस योजना के बारे में अधिक जानकारी यहां से प्राप्त कर सकते हैं: <strong><a href="https://agristartup.gov.in/">Innovation and Agri-enterpreneurship Programme of Rashtriya Krishi Vikas Yojana (RKVY)</a></strong></p>
<p><strong>750 करोड़ का एग्रीश्योर फंड </strong></p>
<p>इस वर्ष जुलाई में, भारत सरकार ने राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की सहायक कंपनी &nbsp;NABVENTURES Ltd. के साथ मिलकर ग्रामीण व एग्री स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए 750 करोड़ रुपये का &lsquo;एग्री श्योर&rsquo; फंड लॉन्च किया था। इस फंड को इनोवेटिव, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन और एग्रीकल्चर में हाई इम्पैक्ट एक्टिविटी को प्रमोट करने के लिए शुरू किया गया है।&nbsp;</p>
<p>यह फंड श्रेणी II सेबी पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोष है जिसकी कुल राशि 750 करोड़ रुपये में भारत सरकार और नाबार्ड द्वारा 250-250 करोड़ रुपये का योगदान है और शेष 250 करोड़ रुपये बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य निजी संस्थाओं से जुटाए जाएंगे।&nbsp;</p>
<p>एग्रीश्योर स्कीम के बारे में अधिक जानकारी यहां से प्राप्त कर सकते हैं:<strong> <a href="https://www.nabventures.in/agrisure.aspx">Nabventures</a>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>राष्ट्रीय कृषि नवाचार निधि</strong></p>
<p>राष्ट्रीय कृषि नवाचार निधि के जरिए आईसीएआर के संस्थानों में 50 एग्री-बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर (एबीआईसी) के माध्यम से कृषि और इसके संबद्ध क्षेत्र में स्टार्टअप को बढ़ावा देता है। ये केंद्र तकनीक और कौशल को अपग्रेड करते हैं। इन स्टार्टअप्स को कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जाती है, केवल तकनीकी सहायता दी जाती है।</p>
<p>राष्ट्रीय कृषि नवाचार निधि की अधिक जानकारी यहां से प्राप्त कर सकते हैं:<strong> <a href="https://www.naip.icar.gov.in/index.htm">www.naip.icar.gov.in</a>&nbsp;</strong></p>
<p><br /><br /></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पांच वर्षों में 1,708 एग्री स्टार्टअप को 122 करोड़ की फंडिंग, जानिए क्या है योजना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आर्य.एजी इंपैक्ट रिपोर्टः 85 प्रतिशत किसानों ने वित्तीय सेवाओं का लाभ उठाया, कृषि अपशिष्ट में 67 प्रतिशत की कमी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/eighty-five-percent-farmers-used-financial-services-sixty-seven-percent-reduction-in-agricultural-waste-arya-ag-impact-performance-report.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 29 Sep 2024 19:05:03 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/eighty-five-percent-farmers-used-financial-services-sixty-seven-percent-reduction-in-agricultural-waste-arya-ag-impact-performance-report.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आर्य.एजी के प्लेटफॉर्म के माध्यम से 85 प्रतिशत किसानों ने वित्तीय सेवाओं का लाभ उठाया जबकि 87 प्रतिशत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) ने कार्यशील पूंजी का उपयोग किया। आर्य.एजी की इंपैक्ट परफॉर्मेंस रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 60 प्रतिशत किसानों ने आर्य.एजी की अनूठी पेशकशों को अनिवार्य माना, क्योंकि उन्हें इसके विकल्प ढूंढ़ने में कठिनाई हुई। रिपोर्ट के अनुसार, आर्य.एजी की सेवाओं के कारण 79 प्रतिशत किसानों की आय में वृद्धि हुई।</p>
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<p>आर्य.एजी की रिपोर्ट कृषि क्षेत्र में किसानों और मध्यम उद्यमों पर इसके परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाती है। यह रिपोर्ट 60 डेसिबल्स के सहयोग से तैयार की गई है और क्वोना कैपिटल द्वारा प्रायोजित है। रिपोर्ट में आर्य.एजी की भूमिका को उजागर किया गया है, जो वित्तीय समावेशन को बढ़ाने और कृषि मूल्य श्रृंखला में बर्बादी को कम करने में महत्वपूर्ण है।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p>आर्य.एजी के हस्तक्षेप का एक प्रमुख परिणाम कृषि उत्पादों की बर्बादी में उल्लेखनीय कमी है। 67 प्रतिशत किसानों ने बर्बादी में कमी की सूचना दी। 73 प्रतिशत व्यक्तिगत किसानों ने और 58 प्रतिशत किसान उत्पादक संगठनों से जुड़े किसानों ने बर्बादी में कमी देखी। दक्षिण भारत में 64 प्रतिशत किसानों ने कृषि उत्पादों की बर्बादी में महत्वपूर्ण कमी की सूचना दी, जबकि अन्य हिस्सों में यह अनुपात 35 प्रतिशत था।</p>
<p>मध्यम उद्यमों के लिए आर्य.एजी का प्रभाव समान रूप से महत्वपूर्ण रहा। 86 प्रतिशत मध्यम उद्यमों ने कार्यशील पूंजी की योजना बनाने और प्रबंधन में सुधार की सूचना दी, जबकि 89 प्रतिशत ने सही समय पर कच्चे माल तक पहुंच का अनुभव किया।</p>
<p>आर्य.एजी के सीईओ और सह-संस्थापक प्रसन्ना राव ने रिपोर्ट के बारे में कहा, "ये परिणाम कृषि में न्यायसंगत मूल्य श्रृंखलाएं बनाने के हमारे मिशन को मान्यता देते हैं। वित्त और बाजार पहुंच में महत्वपूर्ण अंतराल को पाटकर, हम न केवल व्यवसायों को सुधार रहे हैं, बल्कि जीवन को भी बदल रहे हैं।"</p>
<p>आर्य.एजी इन जानकारियों के आधार पर अपनी सेवाओं को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है और अगले 3-4 वर्षों में इसने एक करोड़ से अधिक किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। कंपनी 300 करोड़ डॉलर से अधिक कृषि ऋण प्रदान करने और 400 करोड़ डॉलर से अधिक के व्यापारिक संबंध बनाने की योजना बना रही है। कंपनी ने 2028 तक अपने भंडारण को चार गुना बढ़ाने का भी लक्ष्य रखा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आर्य.एजी इंपैक्ट रिपोर्टः 85 प्रतिशत किसानों ने वित्तीय सेवाओं का लाभ उठाया, कृषि अपशिष्ट में 67 प्रतिशत की कमी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[क्या एग्री स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं आप? नाबार्ड देगा फंडिंग, जानें क्या है पूरी योजना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/nabard-will-launch-agrisure-to-provide-funds-for-agri-startups-to-youngsters.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 15 Jul 2024 12:23:22 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/nabard-will-launch-agrisure-to-provide-funds-for-agri-startups-to-youngsters.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अगर आप कृषि से जुड़ा कोई स्टार्टअप शुरू करने का प्लान बना रहे हैं, तो इसमें नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) आपकी मदद कर सकता है। नाबार्ड जल्द ही<strong> 'एग्रीफंड फॉर स्टार्टअप एंड रूरल एंटरप्राइज' </strong>यानी<strong> एग्रीश्योर फंड</strong>&nbsp;शुरू करने जा रहा है। इससे उन लोगों को फायदा होगा, जो कृषि के क्षेत्र में कुछ नया तो करना चाहते हैं लेकिन फंड की कमी के चलते कर नहीं पाते। इस फंड के जरिए तहत 80 एग्री स्टार्टअप को 25-25 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार ने स्टार्टअप और ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए 750 करोड़ रुपये का फंड शुरू करने की योजना बनाई है। नाबार्ड और कृषि मंत्रालय इस कोष में 250-250 करोड़ रुपये का योगदान करेंगे जबकि बाकी राशि अन्य संस्थानों से जुटाई जाएगी। इस फंड के जरिए कृषि में इनोवेशन, कृषि उपज मूल्य श्रृंखला को बढ़ाने, ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण, रोजगार सृजन और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को मदद दी जाएगी। यह फंड किसानों के लिए आईटी-आधारित समाधान और सेवाओं को भी प्रोत्साहन देगा।</p>
<p>एग्रीश्योर का फंड मैनेजर नेबवेंचर्स होगी जो नाबार्ड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। यह फंड 10 साल के लिए के लिए बनाया गया है, जिसे दो या अधिक वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकता है।</p>
<p><strong>एग्रीश्योर</strong> के जरिए स्टार्टअप और उद्यमों को अनुदान, इक्विटी समर्थन और ऋण सहित वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। यह फंड मुख्य रूप से प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप्स और उद्यमों के लिए है। जिससे उन्हें कारोबार को बढ़ाने, इनोवेशन और टिकाऊ खेती के समाधान पेश करने में मदद मिलेगी। कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह पहल उत्पादकता में सुधार करने, किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के समग्र विकास में योगदान देगी।&nbsp;</p>
<p>नाबार्ड मुख्यालय मुंबई में बीते दिनों इस योजना की प्री-लॉन्च स्टेकहोल्डर मीट आयोजित हुई थी। नाबार्ड ने <a href="https://hack2skill.com/hack/nabard-2024"><strong>एग्रीश्योर ग्रीनथॉन 2024</strong> </a>भी लॉन्च किया है। हैकथॉन का उद्देश्य तीन प्रमुख समस्या-समाधानों को सामने लाना है। ये थीम हैं: स्मार्ट कृषि, एग्री वेस्ट को मुनाफे में बदलना तथा रिजनरेटिव एग्रीकल्चर के लिए तकनीकी समाधान।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ क्या एग्री स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं आप? नाबार्ड देगा फंडिंग, जानें क्या है पूरी योजना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आर्य.एजी ने प्री&amp;#45;सीरीज डी फंडिंग में 2.9 करोड़ डॉलर जुटाए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/arya-ag-raises-29-million-dollar-in-pre-series-d-funding-from-blue-earth-capital.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 11 Jul 2024 13:37:45 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/arya-ag-raises-29-million-dollar-in-pre-series-d-funding-from-blue-earth-capital.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एग्रीटेक प्लेटफॉर्म आर्य.एजी ने घोषणा की कि उसने प्री-सीरीज डी फंडिंग राउंड में 2.9 करोड़ डॉलर (242 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व स्विट्जरलैंड स्थित निवेश फर्म ब्लू अर्थ कैपिटल ने किया, जो आर्य.एजी में एक नया निवेशक है। इस राउंड में मौजूदा निवेशकों एशिया इम्पैक्ट और क्वोना कैपिटल की भागीदारी भी शामिल थी। कंपनी ने 2023-24 में 360 करोड़ रुपये के राजस्व पर 17 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया है। वित्त वर्ष 2022-23 की तुलना में यह 36 फीसदी अधिक है।&nbsp;</p>
<p>ब्लू अर्थ कैपिटल में निजी इक्विटी भागीदारी के निदेशक रोहन घोष ने कहा, "हमें आर्य.एजी में निवेश करने पर अविश्वसनीय रूप से गर्व है, एक ऐसी कंपनी जो भारत में अधिक गतिशील और लचीला कृषि बाजार बनाने में मदद कर रही है। यह निवेश दुनिया की कुछ सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करने के ब्लू अर्थ कैपिटल के मिशन के साथ पूरी तरह से मेल खाता है। हम इस सहयोग के जरिए न केवल कृषि उन्नति को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि भारत भर में ग्रामीण समुदायों और किसानों की आर्थिक वृद्धि और स्थिरता में भी योगदान दे रहे हैं।"</p>
<p>एशिया इम्पैक्ट के मुख्य निवेश अधिकारी क्रिश्चियन बन्नो ने कहा, "एशिया इम्पैक्ट में हम मानते हैं कि सार्वजनिक भलाई के लिए निजी पूंजी का लाभ उठाने से सभी के लिए अधिक न्यायसंगत और टिकाऊ भविष्य बनाने में मदद मिल सकती है। आर्य.एजी का किसानों, एफपीओ और &lsquo;जलवायु चैंपियन&rsquo; के साथ विश्वास बनाने, संसाधन आवंटन को अनुकूलित करने और प्रतिकूल पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिए काम बेहद प्रभावशाली रहा है। खासकर कृषि में जलवायु-प्रेरित तनाव के सामने। हमें उम्मीद है कि हम साथ मिलकर इन नेटवर्क को मजबूत कर सकते हैं और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र में सभी हितधारकों के लिए मूल्य बना सकते हैं।"</p>
<p>आर्य.एजी के सीईओ और सह-संस्थापक प्रसन्ना राव ने कहा, "ब्लू अर्थ कैपिटल से प्री-सीरीज डी फंडिंग, एशिया इम्पैक्ट और क्वोना कैपिटल से निरंतर समर्थन के साथ, कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र में सभी हितधारकों को मूल्य प्रदान करने वाले व्यावसायिक रूप से आकर्षक व्यवसाय मॉडल बनाने के हमारे दर्शन को मान्य करता है। यह निवेश हमारे विकास प्रक्षेपवक्र को तेज करने में मदद करेगा। इन निधियों के साथ, हम अपनी पहुंच का विस्तार करने, अधिक किसानों और खरीदारों की सेवा करने और भारत के सबसे भरोसेमंद कृषि-वाणिज्य मंच के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए अभिनव पेशकश पेश करने की योजना बना रहे हैं।"&nbsp;</p>
<p>आर्या.एजी एक कृषि-वाणिज्य मंच प्रदान करता है, जो वाणिज्य को सुविधाजनक बनाने और सुव्यवस्थित करने, दक्षता बढ़ाने और बर्बादी को कम करने के लिए कृषि उत्पादों के विक्रेताओं और खरीदारों को सहजता से जोड़ता है। यह प्लेटफॉर्म गोदाम खोज, फार्मगेट-स्तरीय भंडारण, वित्त और बाजार संबंधों को एकीकृत करता है। बाजार की अकुशलताओं को संबोधित करते हुए संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में एक व्यापक समाधान प्रदान करता है।</p>
<p>आर्य.एजी का लक्ष्य अगले 3-4 वर्षों के भीतर सही समय पर और सही खरीदार को अपनी उपज बेचने के लिए उन्हें सशक्त बनाकर 10 मिलियन से अधिक किसानों को प्रभावित करना है। कंपनी की योजना 2028 तक अपने भंडारण पदचिह्न को चार गुना से अधिक बढ़ाते हुए 3 बिलियन डॉलर से अधिक कृषि-ऋण की सुविधा प्रदान करने और 4 बिलियन डॉलर से अधिक के वाणिज्य संबंध बनाने की है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आर्य.एजी ने प्री-सीरीज डी फंडिंग में 2.9 करोड़ डॉलर जुटाए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डेयरी स्टार्टअप सिड्स फार्म ने ओमनिवोर और एनएसएफओ से जुटाई 1 करोड़ डॉलर की फंडिंग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/dairy-startup-sids-farm-raises-10-million-dollar-from-omnivore-and-nsfo.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 25 Jun 2024 16:30:51 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/dairy-startup-sids-farm-raises-10-million-dollar-from-omnivore-and-nsfo.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>डी2सी डेयरी ब्रांड, सिड्स फार्म ने ओमनिवोर और नरोत्तम सेखसारिया फैमिली ऑफिस (एनएसएफओ) से 1 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटाई है। सिड्स फार्म इस फंडिंग के जरिए हैदराबाद और बेंगलुरु में अपने डेयरी ब्रांड को और मजबूत करेगा। इसके लिए कंपनी उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाएगी। साथ ही विभिन्न कार्यों में शीर्ष प्रतिभाओं को आकर्षित करने और बनाए रखने के लिए एक मजबूत टीम का निर्माण भी करेगी।</p>
<p>सिड्स फार्म हैदराबाद स्थित एक डेयरी ब्रांड है। जिसकी शुरुआत 2016 में हुई थी। यह स्टार्टअप किसानों से सीधे सोर्सिंग करके और पोषक तत्वों से भरपूर, एडिटिव-मुक्त दूध सुनिश्चित करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला में कठोर गुणवत्ता परीक्षण करके दूध और दूध उत्पादों की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को नियंत्रित करता है</p>
<p>ओमनीवोर के पार्टनर रीहेम रॉय ने कहा कि आईएमएआरसी ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डेयरी उद्योग 2023 में 16,792 अरब रुपये के आकार तक पहुंच चुका है और 2032 तक इसके 49,953 अरब रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। डी2सी प्लेटफ़ॉर्म पर प्रीमियम डेयरी ब्रांड और उत्पादों से इस वृद्धि का नेतृत्व करने की उम्मीद है। हम देखते हैं कि एंटीबायोटिक-मुक्त, हार्मोन-मुक्त, परिरक्षक-मुक्त दूध और दूध उत्पादों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ सिड्स फ़ार्म इस क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है।</p>
<p>एनएसएफओ के नारायणन वेंकटरामन ने कहा कि हम पिछले कुछ वर्षों में सिड्स फ़ार्म द्वारा किए जा रहे बेहतरीन काम का अनुसरण कर रहे हैं। उन्हें अगले स्तर पर ले जाने में मदद करने के लिए उनमें निवेश करने और उनके साथ काम करने का यह उपयुक्त समय है। उन्होंने कहा कि हमारा दृढ़ विश्वास है कि वास्तविक चिंताओं के ईमानदार समाधान वाले सिड्स फ़ार्म जैसे उद्यम आने वाले समय में उपभोग की आदतों को बढ़ावा देंगे।</p>
<p>वहीं, सिड्स फार्म के संस्थापक डॉ. किशोर इंदुकुरी ने कहा कि हम ओमनीवोर और एनएसएफओ से इस अपार समर्थन को पाकर रोमांचित हैं। उपभोक्ताओं को बेहतरीन गुणवत्ता वाले मिलावट-मुक्त दूध और डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने के हमारे दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता में उनका विश्वास हमारे प्रयासों की जबरदस्त पुष्टि है। यह निवेश हमारे विकास पथ को गति देने के मदद करेगा। साथ ही&nbsp;हमें हैदराबाद और बेंगलुरु में ग्राहकों को ताजा, स्वस्थ और जिम्मेदारी से प्राप्त भोजन उपलब्ध कराने में सक्षम बनाने में सहायक होगा।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ डेयरी स्टार्टअप सिड्स फार्म ने ओमनिवोर और एनएसएफओ से जुटाई 1 करोड़ डॉलर की फंडिंग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नेकॉफ ऊर्जा ने टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए एसपीवी लॉन्च किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/nacof-oorja-launches-special-purpose-vehicle-to-promote-sustainable-farming-in-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 02 May 2024 18:56:18 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/nacof-oorja-launches-special-purpose-vehicle-to-promote-sustainable-farming-in-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बहु-राज्य सहकारी समिति नेकॉफ द्वारा समर्थित भारत के अग्रणी नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर्स और ऑपरेटरों में से एक नेकॉफ ऊर्जा ने टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए एक विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) <span><strong>ई एस्ट्रा नेकॉफ ऊर्जा प्राइवेट लिमिटेड</strong> की लॉन्चिंग का ऐलान किया। </span></p>
<p>यह एसपीवी नेकॉफ ऊर्जा की एग्रीकल्चर मोबिलिटी विंग के रूप में काम करेगा और भारतीय कृषक समुदाय को बैटरी चालित उपकरण और वाहन उपलब्ध कराएगा।</p>
<p>नवगठित एसपीवी विशेष कृषि उपकरण और वाहन जैसे ई-वीडर, <span>ई-रीपर</span>, <span>ई-ब्रश कटर और ई-कार्गो मल्टी-यूटिलिटी थ्री व्हीलर के साथ-साथ टिकाऊ डेयरी फार्मिंग पर केंद्रित </span>20-<span>लीटर मिल्किंग कम चिलर यूनिट भी पेश करता है।</span>&nbsp;</p>
<p>नेकॉफ ऊर्जा के अध्यक्ष <strong>राम इकबाल सिंह</strong> ने एसपीवी को लेकर कंपनी का दृष्टिकोण बताते हुए कहा कि <span>भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के प्रयासों को लेकर हमारी प्रतिबद्धता इस नई पहल के पीछे अहम निभा भूमिका रही है। किसान हमारे अन्नदाता हैं। स्वच्छ ऊर्जा से चलने वाले अत्याधुनिक स्वदेशी और किफायती कृषि उपकरण कृषक समुदाय की उत्पादकता को कई गुना बढ़ाने में मददगार होंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा विश्लेषण से युक्त हमारे डिजिटल खेती समाधान उनके लिए उपयोगी साबित होंगे। </span></p>
<p>नेकॉफ ऊर्जा के प्रबंध निदेशक<strong> सुरेश बाबू पी.</strong> ने कहा कि टिकाऊ कृषि समय की मांग है। बेहतर उपकरण और मोबिलिटी उत्पादों को किसानों की जरूरतों से जोड़कर हम उन्हें उत्पादकता बढ़ाने के लिए सशक्त बना सकते हैं ताकि कृषि उनके लिए आय का लाभकारी जरिया बनी रहे।&nbsp;एसपीवी द्वारा पेश कृषि उपकरणों को मेक इन इंडिया के अनुरुप स्वदेशी तकनीकों के जरिए डिजाइन और मैन्युफैक्चर किया गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नेकॉफ ऊर्जा ने टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए एसपीवी लॉन्च किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत के एग्रीफूडटेक स्टार्टअप की फंडिंग में 60 फीसदी की गिरावट: रिपोर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/60-percent-drop-in-funding-for-india-agrifoodtech-startups-report.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 30 Apr 2024 19:12:39 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/60-percent-drop-in-funding-for-india-agrifoodtech-startups-report.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत के एग्रीफूडटेक स्टार्टअप की फंडिंग में 60 फीसदी की कमी आई है और यह कोविड महामारी से पहले के स्तर तक गिर गई है। यह तथ्य वेंचर कैपिटल फर्म एगफंडर और ओम्निवोर की&nbsp;<a href="https://agfunder.com/research/india-2024-agrifoodtech-investment-report/"><strong>भारत एग्रीफूडटेक निवेश रिपोर्ट 2024</strong></a>&nbsp;में सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 में भारतीय एग्रीफूडटेक स्टार्टअप्स ने 94 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटाई थी जो वर्ष 2022 में जुटाए 240 करोड़ डॉलर से 60 फीसदी कम है। यह गिरावट एग्रीफूडटेक निवेश में वैश्विक कमी के अनुरूप है, जिसमें सालाना आधार पर 50 फीसदी की गिरावट आई है।</p>
<p>फंडिंग में कमी के बावजूद भारतीय एग्रीफूडटेक स्टार्टअप्स ने 2023 में 129 डील की, जो 2022 की तुलना में केवल चार ही कम है। इसका अर्थ है कि छोटी डील ज्यादा हुई हैं। प्री-कोविड 2019 में भारतीय एग्रीफूडटेक स्टार्टअप्स ने 130 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटाई थी जो 2023 के मुकाबले बहुत अधिक नहीं है। जबकि वैश्विक एग्रीफूडटेक में 2023 में कुल फंडिंग 2019 के स्तर (21 अरब डॉलर) से 20 फीसदी कम थी।</p>
<p>2022 की तुलना में 2023 में प्रारंभिक चरण की डील अधिक हुई, जो इस श्रेणी में निवेशकों की निरंतर रुचि को दर्शाता है, लेकिन पिछले वर्षों की तुलना में ये डील बहुत कम वैल्यूएशन पर हुई। रिपोर्ट में कहा गया है, साल 2023 कुछ हद तक "भारतीय कृषि खाद्य स्टार्टअप के लिए औसत से उलट" था। ई-ग्रोसरी अभी भी एग्रीफूडटेक में सबसे अधिक फंडिंग प्राप्त करने वाली श्रेणी है, हालांकि सालाना आधार पर इसकी फंडिंग में 46 फीसदी की गिरावट आई है। करीब 16.2 करोड़ डॉलर की फंडिंग के साथ एग्रीबिजनेस मार्केटप्लेस और फिनटेक दूसरी सबसे अच्छी वित्त पोषित श्रेणी थी, जिसमें 62 फीसदी की गिरावट आई।</p>
<p>एगफंडर न्यूज की प्रबंध संपादक <strong>लुइसा बर्डवुड-टेलर</strong> ने कहा, "एग्रीफूड निवेश में वैश्विक मंदी का कारण कम और छोटी डील हैं, लेकिन भारत में स्थिति एक बुनियादी बदलाव का संकेत देती है। हालांकि डील की संख्या में ज्यादा कमी नहीं आई है लेकिन भारत में निवेश दृष्टिकोण अधिक चयनात्मक और योग्यता-आधारित हो गया है, जो इस क्षेत्र के क्रमिक और आशाजनक सुधार का सुझाव देता है।"</p>
<p>ओम्निवोर के मैनेजिंग पार्टनर,<strong> मार्क काह्न</strong> ने कहा, &ldquo;हम रियलिस्टिक वैल्यूएशन की वापसी देख रहे हैं जो कंपनियों की परिचालन और वित्तीय उपलब्धियों को दर्शाता है। बेलगाम विकास रणनीतियों की बजाय ध्यान पूरी तरह से एक मजबूत व्यवसाय मॉडल के निर्माण को प्राथमिकता देने, लाभप्रदता पर ध्यान केंद्रित करने और ग्राहकों और हितधारकों के लिए मूल्य सृजित करने पर है। 2023 की तरह, यह वर्ष आशाजनक स्टार्टअप्स में निवेश करने के लिए एक शानदार वर्ष होगा। विशेष रूप से उन संस्थापकों के लिए जो शुरू से ही कुछ हटकर और इकाई आर्थिक रूप से व्यवहार्य कारोबार खड़ा कर रहे हैं।&rdquo;</p>
<p>एक चिंताजनक प्रवृत्ति एग्रीफूड निवेशकों की सीमित भागीदारी है। यह परिदृश्य सभी चरणों में अधिक प्रतिबद्ध निवेशकों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_6630f7668592c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत के एग्रीफूडटेक स्टार्टअप की फंडिंग में 60 फीसदी की गिरावट: रिपोर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्री स्टार्टअप नर्चर ने चावल मूल्य श्रृंखला को टिकाऊ बनाने के लिए आंध्र&amp;#45;तेलंगाना में शुरू किया पायलट प्रोजेक्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/nurture-dot-farm-kickstarts-sustainable-rice-program.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 08 Dec 2023 10:48:24 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/nurture-dot-farm-kickstarts-sustainable-rice-program.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एग्रीटेक स्टार्टअप नर्चर डॉट फार्म ने चालू रबी सीजन 2023-24 के लिए सतत चावल कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम का मकसद खेती के तरीकों को सुव्यवस्थित करने वाली तकनीकों को लागू करके चावल मूल्य श्रृंखला को टिकाऊ बनाना है। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पानी संरक्षण प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाकर किसानों की ज्यादा से ज्यादा मदद करना, डाटा इकट्ठा करना, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना और कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देकर किसानों, खरीदार और पर्यावरण के लिए स्थायी परिणाम हासिल करना है।&nbsp;तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के धान किसानों के लिए इसे शुरू किया गया है।</p>
<p>नर्चर डॉट फार्म (Nurture.farm) के सस्टेनेबिलिटी हेड हर्षल सोनावणे ने रूरल वॉयस से कहा, "सैकड़ों किसानों ने धान की खेती के तरीके को बदलकर बदलाव का नेतृत्व करने का संकल्प लिया है और हमारे कार्यक्रम में शामिल हुए हैं। कार्यक्रम के कार्यान्वयन की निगरानी आंध्र प्रदेश के मरुतेरु के रीजनल एग्रीकल्चर स्टेशन के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. एम. भरतलक्ष्मी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में कृषि-उद्योग विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं की मदद से की जा रही है।"</p>
<p>कार्यक्रम को सफल बनाने में मदद करने के लिए इस संस्थान की साझेदारी के अलावा यूपीएल एसएएस के सीईओ आशीष डोभाल जैसे कृषि-उद्योग के बड़े लोग अपना समर्थन, मार्गदर्शन और संसाधन दे रहे हैं। डोभाल ने कहा, "भारत चावल का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है, जो दुनिया के कुल चावल उत्पादन का 21 फीसदी उत्पादित करता है। अकेले धान की खेती कुल जीएचजी उत्सर्जन में 1.5% का योगदान देती है। इसके अलावा, इसकी खेती में बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है। पानी से भरे खेतों में मिट्टी के कार्बनिक पदार्थों का अपघटन होता है, जिससे मीथेन उत्सर्जन होता है और मिट्टी की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। इससे अक्सर पोषक तत्वों का रिसाव होता है और मिट्टी का क्षरण होता है जिससे कृषि उत्पादकता कम हो जाती है। इसे रोकने या कम करने के लिए टिकाऊ खेती प्रथाओं में परिवर्तन की आवश्यकता है।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "सतत चावल कार्यक्रम एक उज्जवल, समावेशी और बेहतर कल के लिए लचीली और टिकाऊ कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का मुख्य मिशन है। यह कार्यक्रम महत्वाकांक्षी है क्योंकि यह शुरू से अंत तक कार्यान्वयन प्रदान करने और सुधार में मदद करने का वादा करता है। उपज की गुणवत्ता, मिट्टी का स्वास्थ्य, रकबा, इनपुट उपयोग और पानी की खपत को अनुकूलित करना, फसल चक्र को छोटा करना, कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देना और जीएचजी पर लाभप्रदता और मापने योग्य स्थायी प्रभाव को सुनिश्चित करते हुए खेती की लागत को कम करने में यह कार्यक्रम मददगार है।"</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_6572a6839dcd0.jpg" alt="" /></p>
<p>सोनावणे ने कहा, "हमें इस पहल को शुरू करने पर गर्व है क्योंकि यह इतिहास बनाने और टिकाऊ कृषि के बड़े नैरेटिव में योगदान करने का एक अवसर है, जो प्रकृति के साथ सद्भाव में विकास के एक नए युग की शुरुआत करने में मदद करता है। यह कार्यक्रम टिकाऊ चावल के दूसरे कार्यक्रमों से अलग है।"</p>
<p>उन्होंने बताया कि किसानों को नर्चर डॉट फार्म ऐप पर सीधे और डिजिटल टच प्वॉइंट के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल किया जाता है। हम सुनिश्चित करते हैं कि हिस्सा लेने वाले किसानों को बड़े पैमाने पर अच्छी कृषि प्रथाओं और टिकाऊ चावल की खेती की तकनीकों के लिए प्रशिक्षित किया जाए और जमीनी स्तर पर प्रथाओं के कार्यान्वयन की लगातार निगरानी की जाए। इसके अलावा, इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले किसानों को प्रतिस्पर्धी वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा, वे उपज अनुकूलन तकनीकों के बारे में सीखेंगे, मिट्टी के स्वास्थ्य को लेकर उनकी समझ बढ़ेगी और चावल की लाभदायक और टिकाऊ खेती सुनिश्चित करने के लिए जमीन पर हमारी टीम के लोगों से उन्हें सलाह और समर्थन दिया जाएगा।</p>
<p>यह कार्यक्रम मीथेन उत्सर्जन को 50 फीसदी तक कम करने, धान की खेती में पानी के उपयोग को 30 फीसदी तक कम करने, किसानों के लिए इनपुट लागत को 500 रुपये प्रति एकड़ तक कम करने और उपज में 10 फीसदी तक सुधार करने में मदद करेगा।</p>
<p>नर्चर डॉट फार्म के सस्टेनेबल राइस कार्यक्रम का उद्देश्य छोटे किसानों को शिक्षित और प्रशिक्षित करना, प्रौद्योगिकी और जानकारी तक उनकी पहुंच बढ़ाना और उपज, मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण से समझौता किए बिना लाभकारी खेती करने में उनकी मदद करना है। इस पायलट प्रोजेक्ट को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 10,000 एकड़ तक लागू किया जा रहा है।2030 तक इसे 10 लाख एकड़ से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए अभी तक 5,000 से अधिक किसानों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है। इस कार्यक्रम को पूरे चावल मूल्य श्रृंखला को टिकाऊ बनाने और बड़े पैमाने पर किसानों के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्री स्टार्टअप नर्चर ने चावल मूल्य श्रृंखला को टिकाऊ बनाने के लिए आंध्र-तेलंगाना में शुरू किया पायलट प्रोजेक्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बायोमटेरियल्स स्टार्टअप अल्टएम ने ओमनिवोर से जुटाया 35 लाख अमेरिकी डॉलर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/biomaterials-startup-altm-raises-usd-35-lakh-seed-round-from-omnivore-new-fund.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 08 Sep 2023 18:12:08 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/biomaterials-startup-altm-raises-usd-35-lakh-seed-round-from-omnivore-new-fund.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बायोमटेरियल्स स्टार्टअप अल्टएम ने वेंचर कैपिटल फर्म ओमनिवोर से 35 लाख अमेरिकी डॉलर जुटाने की घोषणा की है। अल्टएम के अन्य निवेशकों में थिया वेंचर्स, थाई वाह वेंचर्स, संजीव रंगरास, नेहा मुदलियार, ओयो के मनिंदर गुलाटी, स्पेक्ट्रम इम्पैक्ट के मिरिक गोगरी और ऑरियोलिस वेंचर्स की पाउला मारीवाला शामिल हैं।</p>
<p>ओमनिवोर का अल्टएम में अपने तीसरे फंड से पहला निवेश है। ओमनिवोर ने हाल ही में &nbsp;15 करोड़ अमेरिकी डॉलर की इस फंड की घोषणा की थी। यह ओमनीएक्स बायो पहल के तहत कंपनी का चौथा निवेश भी है जिसे 2021 में शुरुआती चरण के कृषि खाद्य जीवन विज्ञान स्टार्टअप को समर्थन देने के लिए स्थापित किया गया था। अल्टएम का लक्ष्य बड़े उद्योगों को उनकी आपूर्ति श्रृंखलाओं में कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद करने के लिए स्केलेबल बायोमटेरियल का विकास और निर्माण करना है।</p>
<p>यह स्टार्टअप लिग्नोसेल्यूलोसिक कृषि अवशेषों का अपने कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करता है और उससे उन्नत सामग्री का उत्पादन करता है। लिग्नोसेल्यूलोसिक बायोमास की टिकाऊ क्षमता और कार्यात्मक गुणों को देखते हुए यह बायोमटेरियल्स बनाने की बेहतरीन तकनीक प्रदान करता है।</p>
<p>अल्टएम बेंगलुरु स्थित कंपनी है जिसकी स्थापना 2022 में अपूर्व गर्ग और युगल राज जैन ने की थी। अमेरिका कंपनी टेस्ला में काम करने के दौरान दोनों मिले थे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_64fb164c81186.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बायोमटेरियल्स स्टार्टअप अल्टएम ने ओमनिवोर से जुटाया 35 लाख अमेरिकी डॉलर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_64fb164c81186.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आयोटेक के नए कृषि ड्रोन एग्रीबोट ए6 को डीजीसीए से मिला टाइप सर्टिफिकेट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/iotech-new-agricultural-drone-agribot-a6-receives-type-certificate-from-dgca.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 27 Jul 2023 16:38:05 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/iotech-new-agricultural-drone-agribot-a6-receives-type-certificate-from-dgca.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि-ड्रोन निर्माता कंपनी आयोटेकवर्ल्ड एविगेशन प्राइवेट लिमिटेड के स्वदेशी डिजाइन एग्रीबोट ए6 कृषि-ड्रोन को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से 'टाइप सर्टिफिकेट' मिला है। ड्रोन के लिए टाइप सर्टिफिकेट डीजीसीए द्वारा जारी एक आधिकारिक दस्तावेज है जो प्रमाणित करता है कि एक विशिष्ट प्रकार का ड्रोन भारत में संचालन के लिए सभी तकनीकी मानकों और सुरक्षा मानकों को पूरा करता है।</p>
<p>एग्रीबोट ए6 के लिए टाइप सर्टिफिकेशन मिलने पर कंपनी के सह-संस्थापक और निदेशक दीपक भारद्वाज ने कहा, एग्रीबोट ए6 ड्रोन एग्रीबोट के पिछले मॉडल की तुलना में 30 फीसदी अधिक कॉम्पैक्ट, बेहतरीन और विश्वसनीय है। एग्रीबोट ए6 के उन्नत डिजाइन के बावजूद कीमत में किसी प्रकार की बढ़ोत्तरी नहीं की गई है। &nbsp;एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड यानी एआईएफ एग्रीबॉट ए6 के लिए उपलब्ध है जिसमें 90 फीसदी कोलैटरल फ्री कर्ज की ब्याज दर पर 3 फीसदी छूट उपलब्ध है।</p>
<p>कंपनी के एक अन्य सह-संस्थापक और निदेशक अनूप उपाध्याय ने कहा, एग्रीबोट ए6 पूरे देश में तीन वेरिएंट्स बाइक, बैक पैक और 4-व्हीलर मॉडल में उपलब्ध है। इच्छुक ग्राहक इसे डीलरों के नेटवर्क से या सीधे कंपनी से खरीद सकते हैं। हम देश में कृषि-ड्रोन के अग्रणी हैं। हमें पिछले साल देश का पहला टाइप सर्टिफिकेट मिला था। हमारे नए उत्पाद के लिए मिला सर्टिफिकेट उच्च गुणवत्ता वाले और नए उत्पादों को विकसित करने के हमारे निरंतर प्रयास का प्रमाण है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x_64c24ff51f102.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने कहा, &ldquo;एग्रीबोट ए6 में वैश्विक गुणवत्ता मानक हैं और डीजीएफटी द्वारा हाल ही में घोषित उदार निर्यात नीति के साथ इसकी वैश्विक बाजारों तक पहुंच आसान होगी। हमें पूरा विश्वास है कि नए मॉडल को अच्छी प्रतिक्रिया मिलेगी।''</p>
<p>आयोटेक को अग्रणी 'बाइक मॉडल' का श्रेय दिया जाता है जिसे आसानी से मोटर साइकिल पर खेतों तक ले जाया जा सकता है। आयोटेक ने एग्रोकेमिकल कंपनी सिंजेटा के साथ साझेदारी की है और देश के विभिन्न हिस्सों में 25,000 किलोमीटर से अधिक की ड्रोन यात्रा की है।</p>
<p>आयोटेकवर्ल्ड का चालू वित्त वर्ष में 3,000 से अधिक ड्रोन बेचने का लक्ष्य है। कंपनी सार्क देशों, दक्षिण पूर्व एशिया, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका आदि देशों में निर्यात के अवसर तलाश रही है। वर्तमान में कंपनी के 12 राज्यों में 30 से अधिक चैनल पार्टनर हैं। कंपनी बड़े पैमाने पर कृषि-उद्यमियों को बढ़ावा दे रही है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_64c24f72e5508.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आयोटेक के नए कृषि ड्रोन एग्रीबोट ए6 को डीजीसीए से मिला टाइप सर्टिफिकेट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_64c24f72e5508.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको से आयोटेकवर्ल्ड को मिला 500 एग्री ड्रोन का ऑर्डर, दिसंबर तक करेगी आपूर्ति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/iotechworld-gets-order-of-500-agri-drones-from-iffco-will-supply-till-december.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 10 Jul 2023 14:16:28 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/iotechworld-gets-order-of-500-agri-drones-from-iffco-will-supply-till-december.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एग्री ड्रोन निर्माता कंपनी आयोटेकवर्ल्ड एविगेशन प्राइवेट लिमिटेड को फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव इफको से 500 ड्रोन का बड़ा ऑर्डर मिला है। इन ड्रोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से इफको के नैनो तरल यूरिया और नैनो डीएपी के छिड़काव में किया जाएगा। आयोटेकवर्ल्ड ने सोमवार को इसकी घोषणा की है।</p>
<p>इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) ने हाल ही में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे अपने उत्पादों के छिड़काव के लिए 2500 ड्रोन खरीदने की घोषणा की थी। इसके जरिये इफको की 5000 ग्रामीण उद्यमी तैयार करने की योजना है जिन्हें ड्रोन से छिड़काव के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।</p>
<p>इफको से मिले ऑर्डर पर जानकारी देते हुए आयोटेकवर्ल्ड एविगेशन के सह-संस्थापक अनूप उपाध्याय ने कहा कि कृषि-ड्रोन की खरीद के लिए इफको से मिले सबसे बड़े ऑर्डर को प्राप्त करना हमारे लिए सम्मान की बात है। कंपनी इस वर्ष के अंत तक इफको को 500 ड्रोन मुहैया करा देगी। उन्होंने कहा कि आयोटेकवर्ल्ड की स्थापना के समय से ही हमारा प्रयास कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने का रहा है, इसीलिए कंपनी देश में कृषि-ड्रोन की अगुआ रही है।</p>
<p>देश के पहले डीजीसीए टाइप सर्टिफिकेट (टीसी) प्राप्त ड्रोन &lsquo;एग्रीबोट&rsquo; की निर्माता कंपनी आयोटेकवर्ल्ड की सह-स्थापना दीपक भारद्वाज और अनूप उपाध्याय ने वर्ष 2017 में की थी। कंपनी के दूसरे सह-संस्थापक &nbsp;दीपक भारद्वाज ने कहा कि ड्रोन बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। उर्वरक एवं कीटनाशक दवा कंपनियों सहित विभिन्न कंपनियों के साथ-साथ किसानों व ग्रामीण उद्यमियों से बड़ी मांग आ रही है। हमारे एग्रीबोट (कृषि ड्रोन) को उर्वरकों के लिए विशेष तौर पर डिजाइन और प्रोग्राम किया गया है। इफको से मिला ऑर्डर &nbsp;कृषि ड्रोन क्षेत्र में हमारी विशेषज्ञता और सामर्थ्य का परिचायक है। इफको के अलावा आयोटेकवर्ल्ड ने कृषि रसायन कंपनी सिंजेंटा के साथ भी साझेदारी की है।</p>
<p>अनूप उपाध्याय ने बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी का लक्ष्य 3,000 ड्रोन की बिक्री करना है। यह &nbsp;पिछले वर्ष के मुकाबले 5-6 गुना ज्यादा है। इसके आलावा हम निर्यात की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं। सरकार द्वारा ड्रोन निर्यात की नीति के उदारीकरण के हालिया निर्णय ने कई संभावनाएं खोल दी हैं और विदेशी बाजार में मांग भी काफी अच्छी है।</p>
<p>कंपनी सार्क, दक्षिण-पूर्व एशिया, लैटिन अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्राजील, ओमान, बांग्लादेश, वियतनाम, फिलीपींस, नेपाल और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में निर्यात की संभावनाएं तलाश रही है। आयोटेक ने कई रिमोट पायलट ट्रेनिंग संगठन भी स्थापित किए हैं जहां ड्रोन उड़ाने के लिए लोगों को प्रशिक्षित किया जाता है। वर्तमान में कंपनी के 12 राज्यों में 30 से अधिक चैनल पार्टनर हैं और कंपनी बड़े पैमाने पर कृषि-उद्यमियों को बढ़ावा दे रही है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको से आयोटेकवर्ल्ड को मिला 500 एग्री ड्रोन का ऑर्डर, दिसंबर तक करेगी आपूर्ति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्रीफूड&amp;#45;टेक स्टार्टअप में निवेश 33 फीसदी घटा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/india-agrifoodtech-investment-report-marks-33pc-yoy-fall.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 24 May 2023 14:13:16 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/india-agrifoodtech-investment-report-marks-33pc-yoy-fall.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के एग्रीफूड-टेक स्टार्टअप में निवेश में 2022 में 33 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है। वर्ष 2021 के 3.6 अरब डॉलर के मुकाबले निवेश घटकर 2.4 अरब डॉलर रह गया है। एगफंडर (AgFunder) और ओमनिवोर (Omnivore) की ओर से जारी पांचवीं इंडिया एग्रीफूडटेक इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ही नहीं दुनियाभर की एग्रीफूड-टेक स्टार्टअप में निवेश में गिरावट आई है। यह ऐसा क्षेत्र है जिसके उज्जवल भविष्य को देखते हुए निवेशकों ने किसानों और जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित नवाचारों का समर्थन किया है। एगफंडर और ओमनिवोर की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारतीय कृषि पर जलवायु परिवर्तन के असर को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। छोटे किसानों के लिए किफायती और अनुकूल समाधान देने के प्रयासों ने निवेशकों को प्रोत्साहित किया है।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि किसानों से जुड़े और आपूर्ति श्रृंखला में नवाचार करने वाले अपस्ट्रीम स्टार्टअप्स ने वैश्विक गिरावट को पीछे छोड़ते हुए 2022 में 61.7 करोड़ डॉलर जुटाने में सफलता हासिल की है। यह 2021 से 50 फीसदी अधिक है। 2021 में इन स्टार्टअप्स ने 40.9 करोड़ डॉलर जुटाए थे। इस दौरान फार्मटेक निवेश भी अपेक्षाकृत मजबूत रहा। 2022 में इस क्षेत्र में निवेश 1.1 अरब डॉलर रहा है जो 2021 की तुलना में केवल 15 फीसदी कम है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x_646dcd5a0006a.jpg" alt="" /></p>
<p>बयान में कहा गया है कि एग्रीबिजनेस मार्केटप्लेस और फिनटेक अपस्ट्रीम श्रेणी में निवेशकों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय रहे। जबकि डाउनस्ट्रीम, फूड डिलीवरी और थोड़े नए नवाचार वाले स्टार्टअप में निवेशकों की दिलचस्पी कम रही। भारत में पूंजी की उपलब्धता दुनिया के बाकी हिस्सों के साथ कम हो गई है। हालांकि विकसित बाजारों जितनी तेजी से पूंजी उपलब्लधता घटी है वैसी स्थिति भारत में नहीं है। भारतीय वेंचर इनवेस्टर्स अपस्ट्रीम एग्रीफूड-टेक इनोवेशंस को लेकर उत्साहित हैं। खासकर, उनमें जो जमीनी स्तर पर संचालन और आपूर्ति श्रृंखला में काम कर रहे हैं, जो छोटे किसानों के लिए बेहतर पेशकश और किफायती समाधान प्रदान करते हैं।</p>
<p>इसके विपरीत, पिछले कुछ वर्षों में भारी फंडिंग को आकर्षित करने के बावजूद डाउनस्ट्रीम स्टार्टअप्स में निवेश 2022 में साल-दर-साल 37 फीसदी घट गया है। महामारी का असर कम होने और लॉकडाउन खत्म होने के बाद कई डाउनस्ट्रीम स्टार्टअप्स 2020 और 2021 की ग्रोथ की रफ्तार बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे थे। कोविड-19 के दौरान 2020 और 2021 में इन स्टार्टअप्स की ग्रोथ काफी तेज रही थी। खासकर ऐसे स्टार्टअप्स जिनका पूरा फोकस होम डिलीवरी पर था। होम डिलीवरी बाजार में अब निवेशकों की रुचि कम हो गई है। बयान में कहा गया है कि उम्मीद है कि आने वाले महीनों में इस बाजार में बहुत कम स्टार्टअप आएंगे। मौजूदा कंपनियों के बीच विलय और अधिग्रहण की गतिविधि अधिक होगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x_646dcd4d2e859.jpg" alt="" /></p>
<p>एगफंडर के संस्थापक भागीदार माइकल डीन ने कहा, &ldquo;विश्व स्तर पर स्टार्टअप्स के लिए चुनौतीपूर्ण फंडिंग का माहौल है। भारत इससे अलग नहीं है। अपस्ट्रीम फाइनेंसिंग में हालांकि वृद्धि दर्ज की गई है जो इस क्षेत्र के उज्जवल भविष्य को दर्शाता है। साथ ही खाद्य उत्पादन और वितरण प्रणालियों की कई खामियों को दर्शाने वाली प्रौद्योगिकियों को वित्त पोषित करने की तात्कालिकता को दर्शाता है जो जलवायु परिवर्तन और भूख में योगदान करते हैं।</p>
<p>ओमनिवोर के मैनेजिंग पार्टनर मार्क कान ने कहा, &ldquo;भारत का एग्रीफूड-टेक इकोसिस्टम 2023 में टेस्ट स्टार्टअप्स पर जोर देगा। जबकि वेंचर कैपिटल कम वैल्यूएशन वाले बेहतर सौदे कर सते हैं। अस्थायी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारत में एग्रीफूड-टेक आगे बढ़ना जारी रखेगा।&rdquo;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_646dcd658aaed.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्रीफूड-टेक स्टार्टअप में निवेश 33 फीसदी घटा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गाय&amp;#45;भैंसों की भी होगी ऑनलाइन खरीद&amp;#45;बिक्री, एनिमपेट ने लॉन्च किया एनिमस्टॉक डॉट कॉम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/cow-buffalo-will-also-be-bought-and-sold-online-animpet-launched-animstock-dot-com.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 05 May 2023 18:39:06 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/cow-buffalo-will-also-be-bought-and-sold-online-animpet-launched-animstock-dot-com.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एग्रीटेक स्टार्टअप एनिमपेट ईकॉम प्रा. लि. ने पशुधन, डेयरी उत्पाद, पोल्ट्री मांस उत्पादों, पशु चारा, पोषक तत्वों और पशुओं की दवाओं के साथ-साथ पशु चिकित्सा सेवाओं के लिए एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म एनिमस्टॉक डॉट कॉम लॉन्च किया है। यह अपनी तरह का भारत का पहला हाइब्रिड ई-मार्केटप्लेस है।</p>
<p>गुरुग्राम स्थित एनिमपेट को 2021 में भास्कर पाठक, आशीष गुप्ता और करिश्मा डागर ने शुरू किया था। कंपनी की ओर से शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि 25 हजार से अधिक वेंडर्स और 1.5 लाख उत्पादों और सेवाओं की पेशकश के सफल परीक्षण के बाद हाइब्रिड ई-मार्केटप्लेस एनिमेटस्टॉक डॉट कॉम (Animstok.com) को लॉन्च किया गया है। कंपनी का कहना है कि उसका लक्ष्य देश में पशु संपदा के अनुमानित 32 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करना है।</p>
<p>ऐनिमस्टॉक डॉट कॉम की सह-<span>संस्थापक और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर करिश्मा डागर ने कहा कि वेंडर्स की संख्या को बढ़ाकर </span>10 <span>लाख और</span>&nbsp; <span>उत्पादों की पेशकश को 1 करोड़ तक जल्द ही लाया जाएगा। यह प्लेटफार्म असंगठित एवं फुटकर बाजार को डिजिटल एवं संगठित मार्केटप्लेस देने का प्रयास है। यह एक ही मंच पर बी</span>2<span>बी</span>, <span>बी</span>2<span>सी और सी</span>2<span>सी सेवाएं उपलब्ध कराता है। </span>उन्होंने कहा कि इस प्लेटफार्म पर पशुधन व्यापार, डेयरी और उत्पाद, पोल्ट्री, मांस और उत्पाद, पशु चारा, पोषक तत्व, दवाएं और पशु चिकित्सा सेवाओं से लेकर 15 वर्टिकल होंगे।</p>
<p>डागर ने कहा कि भारत दुग्ध उत्पादन में विश्व में अग्रणी है, मछली पालन में नंबर दो है, अंडा उत्पादन में नंबर तीन और भैंस के मांस के निर्यात में नंबर चार है। फिर भी विडंबना यह है कि पूरी पशु अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर असंगठित है। हमने इसको समझा और चार साल तक इस विषय पर रिसर्च करने के साथ-साथ इस उद्देश्य के लिए तकनीक के इस्तेमाल का परिणाम एनिमस्टॉक के रूप में सामने आया है।</p>
<p>कारोबार और लेन-<span>देन में आसानी के लिए लॉजिस्टिक्स</span>) <span>और भुगतान गेटवे की व्यवस्था की गई है। डागर ने कहा कि विस्तार के उद्देश्य से कंपनी भारत और विदेश के संभावित निवेशकों से बात कर रही है। उन्होंने इस कॉन्सेप्ट का स्वागत किया है और जल्द ही प्रस्तुतियां</span> (<span>प्रेजेंटेशन</span>) <span>होंगी। देश के हर क्षेत्र और जिले में हमारे प्रतिनिधि होंगे। प्रारंभिक चरण में एनिमस्टॉक खाड़ी क्षेत्र में भी काम करेगा। पशु आहार के लिए संयुक्त अरब अमीरात में कुछ खरीददारों ने रुचि दिखाई है जो इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से आपूर्तिकर्ताओं तक पहुंच सकते हैं। </span></p>
<p>यह सभी के लिए खुला प्लेटफॉर्म है जहां कोई भी, एक स्थापित ब्रांड से लेकर स्थानीय विक्रेता तक, शून्य ज्वाइनिंग फीस के लाभ के साथ अपनी सेवाओं और उत्पादों को पंजीकृत और बेच सकता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गाय-भैंसों की भी होगी ऑनलाइन खरीद-बिक्री, एनिमपेट ने लॉन्च किया एनिमस्टॉक डॉट कॉम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[लीड्स कनेक्ट का इक्रिसैट से एमओयू, कृषि के टिकाऊ समाधान विकसित करने को हुआ करार  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/leads-connect-icrisat-sign-an-mou-to-develop-sustainable-solutions-for-agriculture.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 03 May 2023 17:49:44 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/leads-connect-icrisat-sign-an-mou-to-develop-sustainable-solutions-for-agriculture.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि मूल्य श्रृंखला के डायनैमिक्स का अध्ययन करने और कृषि में सभी हितधारकों के लिए टिकाऊ समाधान विकसित करने को लीड्स कनेक्ट ने इक्रिसैट (ICRISAT) के साथ समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मकसद कृषि मूल्य श्रृंखला के बीच की खाई को पाटना है। साथ ही उपज व फिनटेक सपोर्ट के लिए किसान केंद्रित समाधान उपलब्ध कराना है।</p>
<p>लीड्स कनेक्ट एग्रीटेक डेटा, जोखिम प्रबंधन और वित्तीय सेवा क्षेत्र की कंपनी है। हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। यह कार्यक्रम किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के लिए मार्केटिंग रणनीतियों को लेकर आयोजित किया गया था। लीड्स कनेक्ट सर्विसेज ने इसे एग्रीबिजनेस व इनोवेशन प्लेटफॉर्म 'इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरीड ट्रॉपिक्स' (AIP-ICRISAT) के सहयोग से आयोजित किया।</p>
<p>लीड्स कनेक्ट सर्विसेज के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक नवनीत रविकर और इक्रिसैट के प्रतिनिधि डॉ. विक्टर अफारी-सेफा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। विक्टर इक्रिसैट के ग्लोबल रिसर्च प्रोग्राम इनेबलिंग सिस्टम्स ट्रांसफॉर्मेशन के डायरेक्टर हैं। इक्रिसैट एक गैर-लाभकारी संगठन है जो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में ग्रामीण विकास के लिए कृषि अनुसंधान करता है। यह कृषि समुदाय के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए वर्कशॉप, सेमिनार और नॉलेज सेशन भी आयोजित करता है।</p>
<p>लीड्स कनेक्ट पहले से मिर्च, दाल और हल्दी मूल्य श्रृंखला पर काम कर रही है। यह एमओयू पूरे भारत में सीबीबीओ (CBBO), एफपीओ के लिए नए रास्ते खोलेगा ताकि कृषि मूल्य श्रृंखला में बाधाओं को दूर करने, किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देने, उनकी उपज के लिए बेहतर कीमत उपलब्ध कराने के लिए लीड्स कनेक्ट सेवाओं के साथ सहयोग किया जा सके।</p>
<p>इस मौके पर लीड्स कनेक्ट ने अपना गेम-चेंजिंग ऐप 'अग्रणी' भी लॉन्च किया। यह ऐप कृषि में सभी हितधारकों के लिए विकसित किया गया एंड-टू-एंड सास-बेस्ड प्लेटफॉर्म है। इसका मकसद कृषि स्पेक्ट्रम में फार्म-टू-फोर्क के सभी बिंदुओं को जोड़ना और स्पेस टेक एनालिटिक्स व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके 'फार्मर फर्स्ट' समाधान उपलब्ध कराना है। यह एग्रीटेक की पहल 'खेत से किचन तक' का एक हिस्सा है।</p>
<p>लीड्स कनेक्ट सर्विसेज के सीएमडी नवनीत रविकर ने कहा, "अग्रणी को लॉन्च करना और एमओयू पर हस्ताक्षर करना हमारे लिए एक क्रांतिकारी अवसर है।" अग्रणी का मकसद कृषि सलाह, वित्तीय सेवाओं और बाजार लिंकेज को किसानों, कृषि व्यवसायों और एफपीओ के दरवाजे तक लाना है। यह भंडारण, प्रोसेसिंग और परिवहन जैसी कम्युनिटी इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों के लिए एफपीओ और कृषि व्यवसायों को समय पर फाइनेंस भी मुहैया कराता है।</p>
<p>रविकर कहते हैं, "यह एक परिवर्तनकारी मूल्य श्रृंखला प्लेटफॉर्म है, जो मंडियों और एफपीओ में होने वाले लेन-देन में बेहद जरूरी पारदर्शिता लाएगा। हमारा मिशन टिकाऊ, स्केलेबल कृषि व्यवसाय इकोसिस्टम बनाने के लिए कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को सशक्त बनाना और जोड़ना है। अग्रणी के साथ हम किसान केंद्रित समाधान प्रदान करके इस मिशन को पूरा करने की दिशा में एक कदम उठा रहे हैं।"</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_64525108a2ea3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ लीड्स कनेक्ट का इक्रिसैट से एमओयू, कृषि के टिकाऊ समाधान विकसित करने को हुआ करार   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_64525108a2ea3.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जैव ईंधन इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बायोफ्यूल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/buyofuel-an-online-platform-promoting-the-use-of-biofuel.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 02 May 2023 06:26:40 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/buyofuel-an-online-platform-promoting-the-use-of-biofuel.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जलवायु परिवर्तन में सबसे ज्यादा भूमिका निभाने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना जरूरी है। इसकी जगह आधुनिक और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की जरूरत है। भारत ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत के रूप में जैव ईंधन (bio-fuel) के उपयोग को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। आधुनिक और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने में देश में कई कंपनियां काम कर रही हैं। उन्हीं में से एक है तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित कंपनी बायोफ्यूल (Buyofuel)। यह भारत की पहली कंपनी है जो बायो-फ्यूल (जैव ईंधन) की ऑनलाइन मार्केटिंग करती है। इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से न सिर्फ खरीददार जुड़े हैं बल्कि जैव ईंधन बनाने वाले निर्माता और दूसरे विक्रेता भी जुड़े हुए हैं।</p>
<p>बायोफ्यूल के सीईओ किशन करुणाकरन <strong>रूरल वॉयस</strong> से बातचीत में कहते हैं, &ldquo;बायोफ्यूल भारत का पहला ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जहां हर तरह के जैव ईंधन की खरीद बिक्री होती है। चाहे वह तरल जैव ईंधन हो, ठोस हो या फिर गैसीय जैव ईंधन। कच्चे माल के उत्पादकों से लेकर निर्माताओं और जैव ईंधन उपभोक्ताओं तक हर कोई हमारे ऑनलाइन मार्केटप्लेस से मोबाइल ऐप से भी जुड़ सकते हैं। उत्सर्जन मुक्त स्वच्छ वातावरण को वापस लाने के लिए हरित ईंधन नेटवर्क की पहुंच को मजबूत करना हमारा लक्ष्य है। जैव ईंधन नवीकरणीय बायोमास जैसे पौधों की सामग्री (लकड़ी के छिलके, टुकड़े, बुरादा आदि), कृषि अपशिष्ट (पराली, धान की भूसी, कॉफी एवं काजू के छिलके आदि) एवं पशु अपशिष्ट (गोबर, वसा) से प्राप्त ईंधन हैं। इन्हें जीवाश्म ईंधन का एक स्वच्छ विकल्प माना जाता है क्योंकि ये कम ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन करते हैं और गैर-नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता को कम करते हैं।&rdquo;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x_644f37e43e729.jpg" alt="" /></p>
<p>ठोस जैव ईंधन गैर-जीवाश्म कार्बनिक पदार्थों से प्राप्त होते हैं जिनका उपयोग फैक्ट्रियों में और बिजली उत्पादन के लिए ईंधन के रूप में किया जा सकता है। आमतौर पर भारत में औद्योगिक बॉयलर कोयले के विकल्प के रूप में उनका उपयोग करते हैं। जबकि तरल जैव ईंधन वनस्पति तेल, पशु वसा और अपशिष्ट से उत्पादित होते हैं। मुख्य रूप से परिवहन, बिजली उत्पादन और ताप के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। इस्तेमाल किया हुआ खाद्य तेल (यूसीओ) भी तरल जैव ईंधन के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। गैसीय जैव ईंधन अक्षय ऊर्जा का एक रूप है जो जैविक सामग्री जैसे कृषि अपशिष्ट, लकड़ी और अन्य बायोडिग्रेडेबल सामग्री से उत्पन्न होते हैं। बायो-सीएनजी और ग्रीन हाइड्रोजन गैसीय जैव ईंधन हैं। ये पारंपरिक ईंधन की तुलना में बहुत कम उत्सर्जन और प्रदूषण पैदा करते हैं।</p>
<p>यह कंपनी कैसे काम करती है इस बारे में करुणाकरन बताते हैं, &ldquo;विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट से जैव ईंधन बनाने वाले निर्माताओं की हम मदद करते हैं और उनके लिए ज्यादा से ज्यादा अपशिष्ट इकट्ठा करने वाले एग्रीगेटर बना रहे हैं। इसी तरह हम बड़े उद्योगों जैसे बड़े ईंधन उपभोक्ताओं की मदद करते हैं। उन्हें जीवाश्म ईंधन से स्वच्छ विकल्प की ओर ले जाने में हम उनकी सहायता करते हैं। जैव ईंधन निर्माताओं से हम उन्हें सीधे जोड़ते हैं। इस तरह हम दोतरफा काम करते हैं। एक तरफ जैव ईंधन निर्माताओं के लिए हम अपशिष्ट की उपलब्धता बढ़ाते हैं और दूसरी तरफ ईंधन उपभोक्ताओं को जैव ईंधन उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। हम जैव ईंधन का मार्केट बनाने और उसका प्रबंधन दोनों कर रहे हैं। उनके लिए इसकी खरीद और बिक्री दोनों करते हैं।&rdquo;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x_644f37f8609ce.jpg" alt="" /></p>
<p>करुणाकरन ने अपने बिजनेस मॉडल के बारे में बताया कि इस क्षेत्र में जितनी भी कंपनियां काम कर रही हैं उनसे हमारा मॉडल बिल्कुल अलग है। ऑनलाइन मार्केट में अभी हमारा कोई प्रतिस्पर्धी नहीं है। जो प्राइमरी प्लेयर्स हैं (एग्रीगेटर्स) वे असंगठित क्षेत्र के हैं। जबकि सेकेंडरी प्लेयर्स (निर्माता) सब्सक्रिप्शन के आधार पर काम कर रहे हैं और वे सभी तरह के जैव ईंधन कारोबार में नहीं हैं। हमारे प्लेटफॉर्म पर एक ही जगह सभी तरह के जैव ईंधन उपलब्ध हैं और सब्सक्रिप्शन आधारित नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हम एग्रो प्रोसेसिंग इंडस्ट्री और उन एग्रीगेटर्स के साथ भी मिलकर काम कर रहे हैं जो स्थानीय तौर पर पौधों, फसलों और पशुओं के अपशिष्ट इकट्ठा करते हैं ताकि जैव ईंधन निर्माताओं के लिए कच्चा माल उपलब्ध करवा सकें। उन्होंने बताया कि बायोफ्यूल के बड़े खरीददारों में आदित्य बिड़ला समूह, वेल्सपन, आईटीसी, अल्ट्राटेक, रैमको सीमेंट, पिरामल फार्मास्युटिकल्स, जेएसडब्ल्यू, टीवीएस टायर्स जैसी कंपनियां शामिल हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x_644f381396a25.jpg" alt="" /></p>
<p>यह कंपनी अभी तमिलनाडु में काम कर रही है और विस्तार की ओर अग्रसर है। करुणाकरन कहते हैं, &ldquo;कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली-एनसीआर, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना में विस्तार की कंपनी की महत्वपूर्ण योजना है। इसके अलावा सभी तरह के जैव ईंधन में काम करने की हमारी योजना है। हम अपने कारोबार का डायवर्सिफिकेशन कर रहे हैं। एग्री वेस्ट, फ्यूल वेस्ट, सॉलि़ड बायोफ्यूल और लिक्विड बायोफ्यूल जैसे बायो-डीजल बायो-एथेनॉल, बायो-सीएनजी यह सब अभी शुरुआती स्तर पर हैं। हम इसके जरिये वॉल्यूम और वैल्यू दोनों बढ़ाने की योजना पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा हम अपने कारोबार का विस्तार यूरोप में कैसे कर सकते हैं जहां जैव ईंधन क्षेत्र काफी बढ़ रहा है, उस पर काम कर रहे हैं। यूरोप पूरे भारत से अपशिष्ट चाहता है क्योंकि वहां उतना अपशिष्ट पैदा नहीं होता जितनी वहां जरूरत है।&rdquo;</p>
<p>किशन के मुताबिक, ऑर्गेनिक वेस्ट एक अलग प्रयास है जिस पर कंपनी की निगाह है। कंपनी की योजना किसानों और जैव ईंधन निर्माताओं को मदद करने की है। पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य जहां पराली किसानों की बड़ी समस्या है वहां कार्बन क्रेडिट मॉडल लंबे समय में उनकी मदद कर सकता है। कंपनी निर्यात की भी योजना बना रही है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x_644f382252935.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने बताया कि पिछले वित्त वर्ष (2022-23) में कंपनी का टर्नओवर करीब 25 करोड़ रुपये रहा है। चालू वित्त वर्ष 2023-24 में इसके 10 गुना बढ़ने की उम्मीद है। बढ़ती मांग और भारत जैसे बड़े बाजार को देखते हुए हम उम्मीद कर रहे हैं कि इस वर्ष हमारा कारोबार 200 से 250 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। पिछले साल हमारा वॉल्यूम 80 गुना बढ़ा है। इसमें भी इस साल हम 10 गुना वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जैव ईंधन इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बायोफ्यूल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बायोप्राइम एग्रीसॉल्यूशंस को मिला सर्वश्रेष्ठ बायोएजी स्टार्टअप अवार्ड]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/pune-startup-bioprime-agrisolutions-bags-best-bioag-award.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 01 May 2023 17:22:34 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/pune-startup-bioprime-agrisolutions-bags-best-bioag-award.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पुणे स्थित एग्री स्टार्टअप बायोप्राइम एग्रीसॉल्यूशंस को सर्वश्रेष्ठ बायोएजी स्टार्टअप पुरस्कार से नवाजा गया है। नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित बायोएजी इंडिया सम्मेलन में शीर्ष वैश्विक और भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों की मौजूदगी में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बायोप्राइम को यह पुरस्कार दिया।</p>
<p>अत्याधुनिक दृष्टिकोणों का इस्तेमाल कर जैविक विकास पर उन्नत कार्य के लिए बायोप्राइम को शीर्ष स्थान पर रखा गया। इसमें अणु (मॉलिक्यूल) और सूक्ष्म जीवों की खोज, नए प्लेटफॉर्म का निर्माण और नई तकनीकों को विकसित करना शामिल है।</p>
<p>इसके अलावा बायोप्राइम को ब्राजील के रियो डी जनेरियो में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध बायोएजी वर्ल्ड कांग्रेस में आमंत्रित किया गया है। कंपनी को इनोवेटर अवार्ड के लिए नामांकित भी किया गया है। यह अवार्ड कृषि जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नवाचार के लिए प्रतिष्ठित वैश्विक मान्यता है। बायोप्राइम की ओर से जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई है।</p>
<p>इस अवार्ड के लिए पूरी दुनिया में केवल 12 कंपनियों का चयन किया गया है। बायोप्राइम इस पुरस्कार के लिए नामांकित होने वाली पहली भारतीय स्टार्टअप है। तकनीक निर्माण के लिए भारत लौटे जापान के शोधकर्ता डॉ. राहुल जोग इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में बायोप्राइम का प्रतिनिधित्व करेंगे। बायोप्राइम का काम न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्र में रौशन कर रहा है।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/national/nafed-opens-millets-outlet-in-delhi-haat-millets-dishes-and-products-will-be-available-here.html" title="दिल्ली हाट में खुला मिलेट्स आउटलेट" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः दिल्ली हाट में नैफेड ने खोला मिलेट्स आउटलेट, मोटा अनाज से बने व्यंजनों एवं उत्पादों का उठा सकेंगे लुत्फ</strong></a></p>
<p>पुरस्कार और नामांकन के बारे में बायोप्राइम एग्रीसॉल्यूशंस प्रा. लि. की सीईओ डॉ. रेणुका ने कहा, "भारत और वैश्विक स्तर पर बायोएजी में अपनी पहचान बनाना बहुत गर्व की बात है। बायोप्राइम इस बात का उदाहरण है कि अकादमिक शोधकर्ता कैसे बदलाव और व्यावसायिक रूप से सफल प्रौद्योगिकियां और उत्पाद का निर्माण कर सकते हैं। देश में बदलते परिवेश, बीआईआरएसी जैसे सरकारी फंड की उपलब्धता और वेंचर सेंटर जैसे इन्क्यूबेटरों के लिए मैं धन्यवाद देती हूं।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "हम दुनिया के लिए भारत में अत्याधुनिक तकनीक का निर्माण करने और जलवायु परिवर्तन, प्रतिरोध निर्माण, अवशेषों और खराब पोषण गुणवत्ता जैसी कृषि क्षेत्र की &nbsp;सबसे प्रासंगिक चुनौतियों का समाधान करने पर बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं।"</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/international/g20-meeting-of-agricultural-chief-scientists-grapples-with-food-insecurity-malnutrition.html" title="जी20 कृषि वैज्ञानिक" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः खाद्य असुरक्षा और कुपोषण की चुनौतियों से निपटने में जुटे हैं जी20 के कृषि वैज्ञानिक</strong></a></p>
<p>बायोएजी वर्ल्ड कांग्रेस एग्रीकल्चरल बायोटेक विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और इस क्षेत्र की कंपनियों के शीर्ष लोगों की सबसे बड़ी वार्षिक वैश्विक बैठकों में से एक है। यह इस क्षेत्र में नवीनतम प्रगति को प्रदर्शित करने, वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करने और सबसे अधिक दबाव वाले मुद्दों को हल करने के लिए सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करता है। साथ ही यह प्रतिभागियों को सीखने, ज्ञान साझा करने और आपसी संबंध मजबूत करने के लिए प्रस्तुतियों, प्रदर्शनों और नेटवर्किंग के अवसरों की सुविधा प्रदान करती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_644fa7b31b07b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बायोप्राइम एग्रीसॉल्यूशंस को मिला सर्वश्रेष्ठ बायोएजी स्टार्टअप अवार्ड ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अक्षय कुमार और वीरेंद्र सहवाग ने टीबीओएफ में किया निवेश, एग्री स्टार्टअप ने जुटाए 14.5 करोड़]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/akshay-kumar-and-virender-sehwag-invest-in-tbof-agri-startup-raises-rs-14-crore-50-lakh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 21 Apr 2023 13:32:43 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/akshay-kumar-and-virender-sehwag-invest-in-tbof-agri-startup-raises-rs-14-crore-50-lakh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जानेमाने फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार और पूर्व दिग्गज क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने पुणे स्थित एग्री स्टार्टअप टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म्स (टीबीओएफ) में निवेश किया है। कंपनी ने इन दोनों निवेशकों सहित अन्य निवेशकों से 14.5 करोड़ रुपये जुटाए हैं। सत्यजित हंगे और अजिंक्य हंगे नामक दो भाइयों द्वारा स्थापित इस स्टार्टअप से 16 हजार से ज्यादा किसान जुड़े हुए हैं।</p>
<p>टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म्स की ओर से जारी एक बयान में दोनों दिग्गज हस्तियों द्वारा किए गए निवेश की जानकारी दी गई है। हालांकि, यह जानकारी नहीं दी गई है कि किसने कितना निवेश किया है। बयान में कहा गया है कि इस फंडिंग का उपयोग टीबीओएफ की विनिर्माण क्षमता का विस्तार करने, किसान प्रशिक्षण केंद्र बनाने और अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारोबार का विस्तार करने में किया जाएगा। साथ ही किसानों को सशक्त बनाने, गांवों में महिलाओं के लिए अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने और ग्रामीणों के जीवन सुधारने में इस निवेश से मदद मिलेगी।</p>
<p>टीबीओएफ विभिन्न प्रकार के ऑर्गेनिक और प्राकृतिक तत्वों पर आधारित उत्पादों को बेचता है। इसमें &nbsp;एक विस्तृत रेंज का कल्चर्ड ए2 घी, मिलेट और अन्य अनाजों का आटा, वुड प्रेस्ड तेल और नट बटर शामिल हैं। साथ ही फलों, सब्जियों, अनाज एवं दालों की प्राकृतिक एवं जैविक खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण एवं बढ़ावा देता है। टीबीओएफ पिछले कुछ वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ा है और हजारों परिवारों से जुड़ा हुआ है। इसके अधिकांश ग्राहक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, मोबाइल ऐप और प्रमुख खाद्य सुपरस्टोर के माध्यम से देश के 1,000 शहरों समेत 53 देशों में हैं।</p>
<p>पुणे के भोदाणी के रहने वाले हंगे ब्रदर्स किसान परिवार से हैं। दोनों ने एमबीए करने के बाद बैंकर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। कॉरपोरेट की नौकरी छोड़कर दोनों ने अपनी जड़ों से जुड़ने और कृषि क्षेत्र में काम करने का फैसला किया। 2013 में उन्होंने टीबीओएफ की स्थापना की। पिछले कुछ वर्षों में कुशल कृषि में टीबीओएफ ने 16,000 से अधिक किसानों को प्रशिक्षित किया है। इसके अलावा किसानों को जैविक खेती का महत्व को समझाने के लिए कई पहल किए हैं।</p>
<p>अक्षय कुमार ने टीबीओएफ में किए निवेश पर कहा, "मैं टीबीओएफ के दृष्टिकोण और जैविक खेती के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने के लिए उनकी प्रतिबद्धता में विश्वास रखता हूं। मुझे खुशी है कि मैं उन सभी का हिस्सा हूं जो टीबीओएफ को आगे बढ़ने की यात्रा में जुड़े हुए हैं।"</p>
<p>वीरेंद्र सहवाग ने कहा, टीबीओएफ द्वारा की जा रही खेती को देखने के बाद इसमें निवेश करने का मैंने फैसला किया है। टीबीओएफ की सतत कृषि और ग्रामीण विकास के मिशन को समर्थन देने के लिए मैं उत्साहित हूं। उनके द्वारा किसानों के जीवन में लाए गए सकारात्मक परिणाम देखकर दिल खुश हुआ।"</p>
<p>टीबीओएफ के सह-संस्थापक सत्यजित हंगे ने कहा, "निवेशकों के सहयोग से हम भारत में ऑर्गेनिक खेती को क्रांतिकारी बनाना जारी रखेंगे और ग्रामीण समुदायों पर सकारात्मक प्रभाव डालेंगे।"</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अक्षय कुमार और वीरेंद्र सहवाग ने टीबीओएफ में किया निवेश, एग्री स्टार्टअप ने जुटाए 14.5 करोड़ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ग्लोबल एग्री फूड प्रोसेसिंग का हब बन सकता है भारतः एग्रीजी फाउंडर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/india-can-become-the-hub-of-global-agri-food-processing-said-agrizy-founder-vicky-dodani.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 08 Apr 2023 14:50:24 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/india-can-become-the-hub-of-global-agri-food-processing-said-agrizy-founder-vicky-dodani.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि खाद्य उत्पादों की बर्बादी को रोकने के लिए इनकी प्रोसेसिंग को बढ़ाया जाना चाहिए। इसके जरिये भारत ग्लोबल एग्री फूड प्रोसेसिंग हब बन सकता है। इसके लिए प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की क्षमता विस्तार की जरूरत नहीं है बल्कि मौजूदा क्षमता के ही इस्तेमाल को बढ़ाकर इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। अभी देश के ज्यादातर प्रोसेसर्स खासकर छोटे एवं मध्यम (एसएमई) प्रोसेसर्स अपनी क्षमता का 50-70 फीसदी ही इस्तेमाल कर रहे हैं। यह कहना है एग्री फूड प्रोक्योरमेंट स्टार्टअप एग्रीजी के संस्थापक विक्की डोडानी का है।</p>
<p><strong>रूरल वॉयस </strong>को दिए इंटरव्यू में विक्की डोडानी ने कहा, &ldquo;भारत ग्लोबल एग्री फूड प्रोसेसिंग हब बन सकता है। एग्रीजी का विजन भी यही है। अगर वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो जो भी कृषि खाद्य पदार्थ हैं उसमें ज्यादातर में पैदावार के मामले भारत पहले या दूसरे नंबर पर है या फिर शीर्ष पांच देशों में शुमार है लेकिन वैश्विक व्यापार के मामले में भारत काफी नीचे है। भारत में काफी सारे कृषि खाद्य पदार्थ खासकर फल एवं सब्जियां बर्बाद हो जाते हैं। इसकी वजह से किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है। अगर इसकी प्रोसेसिंग को बढ़ाया जाए तो न सिर्फ बर्बादी रूकेगी बल्कि भारत प्रोसेस्ड एग्री फूड में काफी आगे बढ़ सकता है और इन उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ाया जा सकता है।&rdquo; &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>विक्की डोडानी के मुताबिक, वैल्यू एडेड प्रोसेस्ड प्रॉडक्ट में निर्यात की काफी संभावनाएं हैं। एसएमई प्रोसेसर्स अपनी क्षमता का अभी पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। ये प्रोसेसर्स अभी 50-70 फीसदी क्षमता का ही इस्तेमाल कर पा रहे हैं। साथ ही वे घरेलू और विदेशी खरीदारों के मानकों के मुताबिक प्रोसेस्ड नहीं कर पाते हैं। एग्रीजी उनकी मांग बढ़ाकर उनकी क्षमता को बढ़ाने में योगदान दे रही है। साथ ही उन्हें घरेलू और विदेशी खरीदारों के मानकों के मुताबिक प्रॉडक्ट प्रोसेस्ड करने में मदद करती है। एग्रीजी इन प्रोसेसर्स को वैश्विक मानकों के मुताबिक सर्टिफिकेशन में और उनकी गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करती है और उन्हें घरेलू और विदेशी बाजार के लिए पूरी तरह से तैयार करती है। एसएमई के प्रोसेस्ड प्रॉडक्ट की बिक्री बढ़ाने और बाजार में उन्हें बेचने में भी एग्रीजी मदद करती है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x_643130881d440.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने बताया कि एग्रीजी का फोकस वैल्यू एडेड प्रोसेसिंग में ज्यादा है। इस क्षेत्र में कंपनी की वृद्धि भी काफी ज्यादा है। एग्रीजी प्रोसेस्ड फूड एवं वेजिटेबल्स का निर्यात भारत के पड़ोसी देशों बांग्लादेश, नेपाल सहित दक्षिण एशियाई और खाड़ी देशों को कर रही है। इसके अलावा मसालों का भी निर्यात कर रही है। विदेशों के जो बड़े खरीदार हैं कंपनी उनको सीधे निर्यात करती है। डोडानी ने बताया कि एग्रीजी एसएमई और बड़े दोनों तरह के प्रोसेसर्स के लिए काम कर रही है। मार्च 2022 की तुलना में मार्च 2023 तक एग्रीजी के कारोबार में 35 गुणा की बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p>एग्रीजी बी2बी (बिजनेस टू बिजनेस) प्लेटफॉर्म है और प्रोसेसर्स पर केंद्रित है। एग्रीजी का प्राथमिक ग्राहक एग्री फूड प्रोसेसर्स और मिलर्स हैं। कंपनी की सारी सेवाएं इनके लिए ही हैं। कंपनी प्रोसेसर्स के लिए कच्चा माल खरीदने, प्रोसेस्ड उत्पादों की बिक्री बढ़ाने और उनकी वर्किंग कैपिटल की जरूरत को एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी) के माध्यम से मुहैया कराने में मदद करती है। इस प्लेटफॉर्म के जरिये सप्लायर्स और बायर्स कृषि खाद्य पदार्थों की खरीद-बिक्री करते हैं। यह काम एग्रीजी के ऐप पर ही होता है। यह स्टार्टअप कंपनी सभी तरह के एग्री फूड प्रोससर्स के लिए कच्चा माल खरीदती है। इनमें घरेलू और विदेशी खरीदार शामिल हैं। विदेशी खरीदारों में प्रोसेस्ड कृषि खाद्य उत्पाद, सब्जियां और मसालों के खरीदार शामिल हैं। जबकि घरेलू प्रोसेसर्स के लिए सभी तरह के अनाजों और तिलहन फसलों की खरीद एग्रीजी करती है। &nbsp;</p>
<p>एग्रीजी अभी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात और राजस्थान के अलग-अलग इलाकों से प्रोसेसर्स के लिए कच्चा माल खरीदती है। इन प्रोसेसर्स के लिए लॉजिस्टिक सुविधाएं भी एग्रीजी मुहैया कराती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_643135492314f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ग्लोबल एग्री फूड प्रोसेसिंग का हब बन सकता है भारतः एग्रीजी फाउंडर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_643135492314f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्री&amp;#45;ड्रोन को बढ़ावा देने के लिए आयोटेकवर्ल्ड का वसंतराव नाइक कृषि विद्यापीठ से करार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/ayotechworld-mou-with-vasantrao-naik-marathwada-agricultural-university-to-promote-agri-drone.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 24 Feb 2023 16:49:01 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/ayotechworld-mou-with-vasantrao-naik-marathwada-agricultural-university-to-promote-agri-drone.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एग्री-ड्रोन निर्माता <strong>आयोटेकवर्ल्ड एविगेशन</strong> ने परभणी (महाराष्ट्र) स्थित <strong>वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ (वीएनएमकेवी)</strong> से एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस करार का मकसद कृषि पैदावार में वृद्धि के लिए एग्री ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। गुरुग्राम की इस कंपनी ने पिछले महीने ही राहुरी (महाराष्ट्र) स्थित महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ (कृषि विश्वविद्यालय) के साथ भी इसी तरह के करार की घोषणा की थी।</p>
<p>आयोटेकवर्ल्ड की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि वीएनएमकेवी के साथ यह समझौता ड्रोन प्रौद्योगिकी में अनुसंधान को बढ़ाने के अलावा कृषि उत्पादन बढ़ाने में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के बारे में किसानों को जागरूक बनाने के लिए किया गया है। इस &nbsp;एमओयू पर <strong>वीएनएमकेवी के कुलपति डॉ. इंद्र मणि और</strong> आयोटेकवर्ल्ड एविगेशन के सह-संस्थापक और निदेशक <strong>अनूप कुमार उपाध्याय</strong> ने हस्ताक्षर किए। एमओयू के बारे में जानकारी देते हुए अनूप उपाध्याय ने कहा कि आयोटेकवर्ल्ड एविगेशन ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी का उद्देश्य अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहन देना है। समझौते के तहत दोनों पक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग करेंगे और कृषि में ड्रोन के उपयोग को बढ़ावा देंगे। साथ ही रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (आरपीटीओ) विकसित करने के लिए मिलकर काम करेंगे।</p>
<p><strong>आयोटेकवर्ल्ड के सह-संस्थापक दीपक भारद्वाज</strong> ने कहा कि विश्वविद्यालयों के साथ गठजोड़ से कंपनी को किसान समूहों के बीच जागरूकता पैदा करने के अलावा ड्रोन तकनीक में ज्यादा शोध करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि किसानों के बीच कृषि-ड्रोन का उपयोग बढ़ रहा है और कई किसान संगठन भी इस अभियान में शामिल हो गए हैं। ये मानवरहित हवाई रोबोट बहुत ही काम के हैं क्योंकि ये न केवल लागत बचाने में मदद करते हैं बल्कि समय भी बचाते हैं।</p>
<p>करार का एक अन्य प्रमुख उद्देश्य किसान हित के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल और विश्वविद्यालय में प्रस्तावित आरपीटीओ में ड्रोन पायलट बनाना है। उन्होंने कहा कि आयोटेकवर्ल्ड वीएनएमकेवि के साथ कृषि ड्रोन के लिए रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (आरपीटीओ) की स्थापना में तकनीकी भागीदार होगा जो देश में ड्रोन पायलट की कमी को कम करने में मदद करेगा। सरकार के एक अनुमान के अनुसार भारत को अगले साल तक कम से कम 1 लाख ड्रोन पायलटों की आवश्यकता होगी। आयोटेकवर्ल्ड का अपना आरपीटीओ है जहां किसानों को ड्रोन उड़ाने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। कंपनी किसानों को ड्रोन पायलट लाइसेंस हासिल करने में भी मदद करती है। मौजूदा समय में कंपनी के 12 राज्यों में 30 से अधिक चैनल पार्टनर हैं। कंपनी बड़े पैमाने पर कृषि उद्यमियों को बढ़ावा दे रही है।</p>
<p>केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने भी ड्रोन तकनीक को किफायती बनाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। सरकार ने कृषि, वानिकी (फॉरेस्ट्री) और गैर-फसली क्षेत्रों में फसल सुरक्षा के लिए कीटनाशकों और मिट्टी और फसल पोषक तत्वों के छिड़काव के लिए ड्रोन एप्लिकेशन के उपयोग के लिए एसओपी भी तैयार की है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/01/image_750x500_63d782b0e2e73.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्री-ड्रोन को बढ़ावा देने के लिए आयोटेकवर्ल्ड का वसंतराव नाइक कृषि विद्यापीठ से करार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/01/image_750x500_63d782b0e2e73.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 ने ग्रामिक को शिखर के 10 स्टार्ट&amp;#45;अप में सूचीबद्ध किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/gramik-listed-among-top-ten-agri-start-ups-at-global-investors-summit-2023.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 16 Feb 2023 10:21:40 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/gramik-listed-among-top-ten-agri-start-ups-at-global-investors-summit-2023.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश का पहला पीयर एग्री-कामर्स प्लेटफॉर्म (साथी कृषि-वाणिज्य मंच), ग्रामिक हाल में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के 10 शिखर के स्टार्ट-अप में चुना गया। कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए समर्पित ग्रामिक को हाल ही में लखनऊ में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (वैश्विक निवेशक सम्मेलन) में यह मान्यता मिली। तीन दिन के इस आयोजन की शुरुआत माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इसका मकसद स्टेकहोल्डर्स के बीच उत्तर प्रदेश को एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में मजबूत करना था।शिखर सम्मेलन के दौरान, राज्य सरकार को 33.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।</p>
<p>स्टार्ट-अप के लिए यह सम्मेलन कई जाने-माने निवेशकों और सरकारी अधिकारियों के बीच अपनी दृष्टि और विकास की उपलब्धियों को प्रस्तुत करने के लिए एक जोरदार मंच साबित हुआ। कृषि-क्षेत्र की प्रमुख इकइयों या संस्थाओं में से एक के रूप में ग्रामिक अपने आशाजनक राजस्व मॉडल और विकास की संभावनाओं के लिए निवेशकों और सरकारी अधिकारियों दोनों से सराहना और समर्थन प्राप्त किया।&nbsp;</p>
<p>अपनी उपलब्धियों के बारे में बताते हुए ग्रामिक के संस्थापक राज यादव ने कहा, &ldquo;हम संभावित निवेशकों और सरकारी अधिकारियों दोनों से सराहना और समर्थन प्राप्त करके सम्मानित और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। इस तरह की मान्यता ने हमें और भी ऊंचे लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रेरित किया है। यह वर्षों से पूरी ग्रामिक टीम की कड़ी मेहनत और समर्पण का प्रमाण है । और हम उद्योग में सकारात्मक प्रभाव जारी रखने के लिए तत्पर हैं ।"</p>
<p>ग्रामिक के उद्देश्य और समाधान राज्य सरकार की कृषि संबंधी योजनाओं के अनुरूप हैं, यह इसे मान्यता के लिए उपयुक्त पसंद बनाता है। ग्रामिक पूरे भारत में किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले इनपुट, पूर्ण फसल मार्गदर्शन, व्यक्तिगत सलाह और बाजार कनेक्शन की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है।<br />पहले एग्रीजंक्शन के रूप में जाना जाने वाला ग्रामिक हाल ही में किसानों, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं के लिए गुणवत्ता वाले कृषि इनपुट, विशेषज्ञ ज्ञान, तकनीकी प्रगति और आजीविका व व्यावसायिक कौशल तक पहुंच प्रदान करके ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने और बदलने के संगठन के मुख्य लक्ष्य के कारण खुद को फिर से ब्रांड किया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 ने ग्रामिक को शिखर के 10 स्टार्ट-अप में सूचीबद्ध किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आयोटेकवर्ल्ड का एसबीआई से करार, एग्री ड्रोन के लिए तीन फीसदी ब्याज छूट पर मिलेगा लोन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/iotechworld-avigation-agreement-with-sbi-for-agri-drone-loan-will-be-available-at-three-percent-interest-discount.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 07 Feb 2023 21:01:36 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/iotechworld-avigation-agreement-with-sbi-for-agri-drone-loan-will-be-available-at-three-percent-interest-discount.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एग्री ड्रोन बनाने वाली कंपनी आयोटेकवर्ल्ड एविगेशन ने देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से समझौता किया है। इस समझौते के तहत आयोटेकवर्ल्ड के एग्री ड्रोन खरीदने के लिए एसबीआई किसानों को केंद्र सरकार की योजना के तहत रियायती दर पर लोन उपलब्ध कराएगा। यह लोन कोलेटरल फ्री होगा यानी लोन लेने के लिए किसानों को कुछ भी गिरवी नहीं रखना होगा।&nbsp;</p>
<p>गुरुग्राम स्थित ड्रोन निर्माता कंपनी के सह-संस्थापक दीपक भारद्वाज ने बताया कि आयोटेकवर्ल्ड एविगेशन के ग्राहकों को एसबीआई बाजार दर पर लोन उपलब्ध कराएगा। उस कर्ज पर भारत सरकार के एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ) के तहत ब्याज में 3 फीसदी की छूट दी जाएगी। यह समझौता 1 फरवरी को हुआ। इस समझौते पर एसबीआई के डीजीएम (आईसी एवं जीएल, एबीयू एवं जीएसएस) योगेंद्र शेल्के और आयोटेकवर्ल्ड एविगेशन प्रा. के निदेशक एवं सह-संस्थापक दीपक भारद्वाज ने हस्ताक्षर किए। भारद्वाज ने कहा, "भारत के कृषि क्षेत्र के लिए ड्रोन वरदान साबित होने वाला है। एसबीआई की कर्ज सुविधा उन किसानों के लिए बेहद मददगार साबित होगी जो संस्थागत वित्त सुविधा के अभाव में ड्रोन नहीं खरीद पा रहे थे।" आयोटेकवर्ल्ड एविगेशन के 'एग्रीबोट ड्रोन' को भारत का सबसे पहला डीजीसीए "टाइप सर्टिफिकेशन" प्राप्त है। केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कंपनी को यह सर्टिफिकेशन जून 2022 में दिया था।&nbsp;&nbsp;<br />इस साझेदारी पर खुशी जताते हुए आयोटेकवर्ल्ड एविगेशन के सह-संस्थापक अनूप उपाध्याय ने कहा, "ड्रोन खेती में इस्तेमाल होने वाले उर्वरक और कीटनाशक के छिड़काव में सहायता करते हैं। इससे खेती की लागत में कमी आती है। ड्रोन के इस्तेमाल से न सिर्फ पैदावार बढ़ती है, बल्कि समय भी बचाता है। भारतीय कृषि के लिए ड्रोन चमत्कार साबित होने वाले हैं।" वर्ष 2020 में शुरू की गई एआईएफ योजना के तहत वित्त वर्ष 2025-26 तक एक लाख करोड़ रुपये वितरित करने और 2032-33 तक ब्याज में छूट एवं कर्ज गारंटी सहायता दी जानी है। अभी तक एआईएफ के तहत 15,000 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। इसके तहत किसान, कृषि क्षेत्र के स्टार्टअप एवं उद्यमी, एफपीओ, पीएसीएस, विपणन, सहकारी समितियां, स्वयं सहायता समूह, संयुक्त देयता समूह, बहुउद्देशीय सहकारी समितियां और केंद्र व राज्यों की एजेंसी या स्थानीय निकाय द्वारा पोषित पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप प्रोजेक्ट्स कटाई के बाद फसल प्रबंधन और तकनीकी विकास के लिए दो करोड़ रुपये तक का लोन ले सकते हैं। इसमें ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और आपूर्ति श्रृंखला सेवाओं जैसे ई-मार्केटिंग प्लेटफार्म, वेयर हाउस, सायलो, पैक हाउसेस, जांच ईकाई, छंटाई एवं श्रेणीकरण इकाइयां (सॉर्टिंग एंड ग्रेडिंग यूनिट्स), कोल्ड स्टोरेज, माल ढुलाई सुविधाएं, प्राइमरी प्रोसेसिंग सेंटर्स और रायपानिंग चैम्बर्स आदि के लिए कर्ज की सुविधा शामिल है।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आयोटेकवर्ल्ड का एसबीआई से करार, एग्री ड्रोन के लिए तीन फीसदी ब्याज छूट पर मिलेगा लोन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्रीकल्चर एक्सलरेटर फंड कृषि क्षेत्र में खोल सकता है स्टार्टअप्स के लिए संभावनाओं के नए द्वार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/agriculture-accelerator-fund-might-open-new-avenues-for-startups.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 05 Feb 2023 14:02:54 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/agriculture-accelerator-fund-might-open-new-avenues-for-startups.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में घोषित एग्रीकल्चर एक्सलरेटर फंड कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप्स के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल सकता है। वैसे तो कृषि क्षेत्र में पहले ही अनेक स्टार्टअप आ चुके हैं और अच्छा काम किया है। सरकार भी रफ्तार योजना के तहत स्टार्टअप्स की मदद कर रही है। लेकिन उनके लिए अलग फंड बनने से इसे और गति मिल सकती है। हालांकि अभी सिर्फ घोषणा की गई है। बजट में इसके लिए रकम का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। फिर भी विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में कृषि का आकार इतना विशाल है कि इनपुट से लेकर उपज की बिक्री तक हर जगह मौके हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">नए स्टार्टअप्स के लिए कृषि क्षेत्र में कहां अवसर हैं, इस पर प्रमुख एग्री स्टार्टअप आर्य.एजी के सह-संस्थापक प्रसन्ना राव ने बताया कि गांवों में स्थानीय स्तर पर अगर युवा आगे आएं तो वे इस दिशा में बेहतर कार्य कर सकते हैं। स्थानीय होने के नाते वे अपने इलाके के किसानों से आसानी से जुड़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में इनपुट और फसल तैयार होने के बाद उनकी मार्केटिंग में तो अवसर हैं ही, किसानों को फाइनेंस उपलब्ध कराने वाले एग्री-फिनटेक भी आ सकते हैं।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">राव के अनुसार डेल्हीवरी जैसे कुछ स्टार्टअप्स ने लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में काम किया है, लेकिन अब भी ग्रामीण क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन में बहुत काम करने की गुंजाइश है। राव का मानना है कि ग्रामीण युवाओं के लिए यह अच्छा मौका है। बजट भाषण में एक्सलरेटर फंड का ऐलान करते समय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा भी कि इसका उद्देश्य यह है कि ग्रामीण युवा किसानों की समस्याओं का नया और सस्ता सॉल्यूशन लेकर आएं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">फसल लगाने से पहले मिट्टी की जांच भी एक अहम क्षेत्र के रूप में उभर रहा है, क्योंकि मिट्टी पर ही फसल की पैदावार निर्भर करती है। सॉयल टेस्टिंग किट बनाने वाली कंपनी हार्वेस्ट के हर्ष दहिया ने बताया कि इसमें भी गांव के स्तर पर नए उद्यमी बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल स्तर तक पढ़े और टेक्नोलॉजी की मामूली समझ रखने वाले युवा भी यह काम कर सकते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">हाल में खेती में ड्रोन, सेंसर और ऑटोमेशन का प्रयोग बढ़ा है। हाइड्रोपोनिक्स के क्षेत्र में काफी काम कर चुके आदित्य भल्ला के मुताबिक इसमें काफी संभावनाएं हैं। किसान इसे इसलिए भी अपना रहे हैं कि इससे उनका खर्च कम हो रहा है। जैसे, खेत में कब उर्वरक डालना उचित होगा, कितना पानी देना चाहिए, कौन सा कीटनाशक कितनी मात्रा में देना चाहिए, अगर किसान को इन बातों की सटीक जानकारी मिले तो वह कम खर्च में ही अच्छी उपज ले सकता है। भल्ला एरोगेनिक्स नाम की कंपनी के संस्थापक हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी स्टार्टअप की सफलता के लिए जरूरी है कि उसका आइडिया बिल्कुल नया होना चाहिए। कई बार आइडिया तो नया नहीं होता, लेकिन उस पर काम करने का तरीका औरों से अलग होता है। इसके अलावा, टेक्नोलॉजी का समावेश भी जरूरी है। यही नहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आदि के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी का निरंतर विकास हो रहा है, इसलिए स्टार्टअप को भी अपनी टेक्नोलॉजी को अपडेट करते रहना पड़ेगा।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्रीकल्चर एक्सलरेटर फंड कृषि क्षेत्र में खोल सकता है स्टार्टअप्स के लिए संभावनाओं के नए द्वार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बॉयोप्राइम एग्रीसॉल्यूशंस को अबॉयोटिक स्ट्रैस मैनेज करने वाले बॉयो फार्मूलेशन के लिए पेटेंट मिला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/bioprime-agrisolutions-gets-patent-for-a-novel-bio-formulation-to-manage-abiotic-stress-in-plants.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Jan 2023 16:35:55 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/bioprime-agrisolutions-gets-patent-for-a-novel-bio-formulation-to-manage-abiotic-stress-in-plants.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जलवायु परिवर्तन के चलते असामान्य रूप से बढ़ता तापमान फसलों के लिए घातक साबित हो रहा है। लेकिन पौधों को अधिक तापमान के बावजूद बचाये रखने के लिए एग्री टेक स्टार्ट-अप कंपनी बॉयोप्राइम एग्रीसॉल्यूशंस ने एक बॉयो फार्मूलेशन विकसित किया है। इस नोवल बॉयो-फार्मूलेशन की अबॉयोटिक स्ट्रैस मैनेज करने की क्षमता के लिए बॉयोप्राइम एग्रीसॉल्यूशंस को भारत सरकार के पेटेंट आफिस ने पेटेंट प्रदान किया है। यह बॉयो फार्मूलेशन पौधे के आंतरिक संचार सिस्टम में मौजूद अति सूक्ष्म कार्बन पार्टिकल्स नैनो डॉट्स और मॉलिक्यूल्स का उपयोग करते हुए फसल में जलवायु के अनुसार जीवित रहने का लचीलापन लाने की क्षमता विकसित करता है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>पेटेंट मिलने के बारे में जानकारी देन के लिए बॉयोप्राइम द्वारा जारी बयान के मुताबिक यह शोध आने वाले समय में&nbsp; कार्बन क्वांटम डॉट्स (सीक्यूडी) क्लोरोफिल पिगमेंट द्वारा प्रकाश ग्रहण करने क्षमता बढ़ाकर फोटोसिंथेसिस की प्रभावशीलता को भी स्थापित करेगा। यह प्रक्रिया पौधों को प्रकास के जरिए ऊर्जा प्राप्त करने की भूमिका निभाती है। जब पौधा स्ट्रैस में होता है तो यह मॉलिक्यूल उसको नुकसान से बचाव की क्षमता में वृद्दि करता है। यह पौधे के सैल्स को मृत सैल्स में बदलने की प्रक्रिया रोकता है। जिसके चलते पौधा जहां स्टैस से लड़ता है वहीं वह उसके स्वास्थ्य को वापस लाने में मदद करता है। सिगनलिंग मॉलीक्यूल्स का यह फार्मूलेशन सीओडी पौधों को अबॉयोटिक स्ट्रैस से बचने में मदद करता है उसे जलवायु में होने वाले बदलाव के प्रति लचीला बनाता है। यह शोध एक टेक्नोलॉजी का उदाहरण है जो देश और दुनिया में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/01/image_750x_63b6aed31ee3a.jpg" alt="" /></p>
<p>इस बारे में बॉयोप्राइम एग्रीसॉल्यूशंस की सीईओ डॉ. रेणुका दीवान ने कहा है कि यह तकनीक फोटोसिंथेसिस को नियंत्रित करने का वह तरीका प्रदान करती है जो पहले संभव नहीं था। प्रभावित पौधों के सैल्स को बचाने के लिए जो मौका इस तकनीक ने दिया है वह जलवायु परिवर्तन से चलते होने वाले फसल नुकसान को कम करने में सक्षम है। हमारी सोच है कि हम दुनियाभर के किसानों को तापमान में उतार चढ़ाव, सूखे, बीमारी और कीट से होने वाले फसल नुकसान से लड़ने में मदद करने वाली तकनीक विकसित करें। जिसके जरिये छोटे-बड़े हर खेत में फसलों की उत्पादकता बढ़े, बेहतर पोषकता वाले खाद्य उत्पाद पैदा हों और उसके साथ ही हम पर्यावरण को भी संरक्षित रख सकें।</p>
<p>रेणुका दीवान ने रूरल वॉयस को बताया कि हाल के समय में भारत में तापमान में भारी बढ़ोतरी का स्तर देखा गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबि 19 मई, 2016 को राजस्थान के फलौदी में 50.6 डिग्री सेल्सियस का अधिकतम तापमान दर्ज किया गया था। इसी तरह के रिकॉर्ड 2018 और 2022 में भी देश में दर्ज किये गये। तापमान का यह स्तर देश में कोई इक्का दुक्का घटना नहीं है बल्कि देश और दुनिया में इस तरह का ट्रेंड आने वाले दिनों में भी देखने को मिलेगा। इस तरह की हीट स्ट्रैस कंडीशन में फसलों की उत्पादकता में 10 से 30 फीसदी तक का नुकसान होता है।&nbsp; यह तरह का नुकसान जहां खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करता है वहीं यह सीमित सिंचाई सुविधाओं वाले किसानों पर प्रतिकूल असर डालता है। भारत में अभी भी आधे से अधिक कृषि योग्य भूमि सिंचिंत नहीं है। ऐसे में इस तरह जलवायु परिस्थिति देश के अधिकांश किसानों के लिए मुश्किल पैदा करती हैं और इनमें अधिकांश छोटे किसान होते हैं।&nbsp;</p>
<p>ऐसे में नया शोध कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी राहत लेकर आ सकता है। बॉयोप्राइम एग्रीसॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड तीन वैज्ञानिकों द्वारा स्थापित की गई है। जिसका मुख्य शोध जलवायु परिवर्तन, कीट और बीमारियों से फसलों के संरक्षण और उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित है।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बॉयोप्राइम एग्रीसॉल्यूशंस को अबॉयोटिक स्ट्रैस मैनेज करने वाले बॉयो फार्मूलेशन के लिए पेटेंट मिला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ ने अपनी तकनीक के प्रसार के लिए नम फार्मर्स के साथ एमओयू किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/icar-iisr-lucknow-signed-mou-with-namfarmers.com-for-faster-dissemination-of-technologies-in-digital-mode.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 12 Nov 2022 07:22:09 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/icar-iisr-lucknow-signed-mou-with-namfarmers.com-for-faster-dissemination-of-technologies-in-digital-mode.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की संस्था भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर) लखनऊ ने अपनी तकनीक के तेजी से प्रसार के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म NamFarmers.com के साथ समझौता (एमओयू) किया है। आईआईएसआर लखनऊ गन्ने के अनुसंधान और विकास में शामिल एक शीर्ष संस्था है, जबकि नम फार्मर्स एक मोबाइल आधारित डिजिटल स्वदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, जो कृषि से जुड़े सभी हितधारकों को जोड़ता है ।</p>
<p>नम फार्मर्स दुनिया भर में कृषि सूचनाओं, तकनीकों और कृषि से जुड़े सभी हितकारकों के लिए उनसे जुड़ी सूचनाएं पहुंचाता है। यह कोयंबटूर स्थित तारा ब्लूम्स प्राइवेट लिमिटेड का एक सूचना प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म है। नम फार्मर्स स्वदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कृषि के लिए समर्पित है, और किसानों के उपज को बेचने के लिए ऑनलाइन मार्केटप्लेस भी उपलब्ध कराता है। जिससे किसान कृषि उत्पादों को बेहतर कीमतों पर बेच सकते हैं।</p>
<p>आईआईएसआर लखनऊ और नम फार्मर्स का एमओयू आईआईएसआर की तकनीकों का तेजी से प्रसार करने में सहायक होगा। इस एमओयू पर आईआईएसआर लखनऊ की तऱफ से संस्थान के निदेशक डॉ. ए.डी. पाठक और नम फार्मर्स की तरफ से जनरल मैनेजर आसिफ रियाज ने हस्ताक्षर किए।</p>
<p>इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) के एडीजी (सीसी) डॉ. आर.के. सिंह भी उपस्थित थे। समझौते का स्वागत करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. ए.डी. पाठक ने कहा कि इसमें अपार संभावनाएं हैं। उन्नत गन्ना उत्पादन प्रौद्योगिकी के प्रसार में नम फार्मर्स मुख्य भूमिका निभा सकता है।</p>
<p>डॉ. आर.के. सिंह, एडीजी (सीसी) बताया कि, आईसीएआर-आईआईएसआर, लखनऊ ने पहले पीपीपी मोड के तहत डीएससीएल शुगर्स के साथ एमओयू किया। उसके बेहतर परिणाम आए हैं। इससे किसानों की आय दोगुनी करने में सहायता मिली है। डॉ. ए.के. साह, प्रधान वैज्ञानिक एवं नोडल अधिकारी ने कहा कि यह समझौता किसानों तक आईआईएसआर तकनीक को पहुंचाने में मदद करेगा। इस अवसर पर आईआईएसआर लखनऊ के सभी डिविजन के हेड उपस्थित थे।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/11/image_750x500_636ce2fde59fb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ ने अपनी तकनीक के प्रसार के लिए नम फार्मर्स के साथ एमओयू किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्री स्टार्टअप्स को बढ़ाने के लिए 500 करोड़ रुपये का एक्सीलरेटर प्रोग्राम शुरू किया जाएगा: तोमर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/rs-500cr-accelerator-programme-to-enhance-successful-initiatives-of-agri-start-ups-says-tomar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 19 Oct 2022 10:46:40 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/rs-500cr-accelerator-programme-to-enhance-successful-initiatives-of-agri-start-ups-says-tomar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एग्री स्टार्टअप्स की सफल पहलों को आगे बढ़ाने के लिए 500 करोड़ रुपये का एक्सीलरेटर प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही कृषि स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के समग्र मार्गदर्शन के लिए कृषि मंत्री की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय संचालन समिति गठित की जाएगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को पूसा मेला ग्राउंड, दिल्ली में पीएम किसान सम्मान सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित एग्री स्टार्टअप कांफ्रेंस में यह बातें कहीं।</p>
<p>बड़ी संख्या में उपस्थित एग्री स्टार्टअप प्रतिनिधियों के बीच केंद्रीय मंत्री ने ऐलान किया कि कृषि सचिव की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें संबंधित एजेंसियों जैसे डेयर, डीपीआईआईटी, कृषि इनक्यूबेटर व ज्ञान भागीदारों, कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, प्रमुख निवेशकों, अन्य हितधारकों के शीर्ष स्तर के अधिकारी शामिल होंगे। साथ ही, कृषि मंत्रालय में कृषि स्टार्टअप के लिए संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में अलग डिवीजन बनाया जाएगा। प्रमाणन एजेंसियों, वित्तीय संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों आदि के साथ एग्री स्टार्टअप के लिए आवश्यक सभी लिंकेज की सुविधा के लिए सिंगल विंडो एजेंसी के रूप में काम करने के लिए सेल भी बनाया जाएगा। तोमर ने बताया कि एग्री स्टार्टअप द्वारा विकसित उत्पादों की, बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए ई-नाम व नेफेड जैसी संस्थाओं के साथ एक मार्केटिंग लिंकेज बनाया जाएगा। सभी कृषि स्टार्टअप के लिए एक डेटाबेस तैयार करने और उनके विकास की निगरानी के लिए एक पोर्टल भी विकसित किया जाएगा। श्री तोमर ने कहा कि कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एग्री स्टार्टअप कॉन्क्लेव का आयोजन राष्ट्रीय व क्षेत्रीय स्तर पर करने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p>उन्होंने&nbsp; कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले आठ साल में लगातार यह कोशिश रही है कि देश की ताकत उभरकर दुनिया के राजनीतिक मंच पर आना चाहिए। हमारे देश के किसान, नौजवान, स्टार्टअप आदि की ताकत को नियोजित तरीके से उभारकर लक्ष्य साधकर काम किया जाएं तो वह दिन दूर नहीं जब भारत सबका मार्गदर्शन करने दुनिया के राजनीतिक मंच पर खड़ा होगा। प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत बनाने व वोकल फार लोकल का आह्वान किया है। आज हमारे कई युवा साथी विदेश में अच्छा जाब भी छोड़कर हिंदुस्तान में ही कोई उद्यम या आजीविका पूरी ताकत से करते हुए गौरव का अनुभव कर रहे हैं। यह बदलाव शुभ संकेत हैं। आठ साल पहले मात्र 80-100<span> कृषि स्टार्टअप थे</span>,<span> वहीं आज इनकी संख्या दो हजार से भी अधिक है</span>,<span> जिनमें से सैकड़ों को कृषि मंत्रालय की योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण व आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई है। केंद्र सरकार का इन्हें </span>10<span> हजार करने का लक्ष्य है।</span></p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार तकनीक को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार चाहती है कि हमारे स्टार्टअप विद्यमान चुनौतियों का समाधान करते हुए देश-दुनिया के काम आएं,<span> इस दिशा में कृषि मंत्रालय के साथ ही कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग (डेयर) व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) सहित अन्य संस्थाओं द्वारा पूरी शिद्दत से काम किया जा रहा है। तोमर ने कहा कि टेक्नोलाजी का लोकव्यापीकरण होना जरूरी है</span>,<span> तभी जन-जन को इसका वास्तविक लाभ होगा</span>,<span> साथ ही तकनीक ऐसी हो कि जिसकी लागत आम लोग वहन कर सकें। स्टार्टअप को अपनी दिशा व क्षेत्र तय कर काम करना चाहिए</span>,<span> ताकि किसानों को इनके कार्यों का पूरा लाभ मिल सकें। देश-दुनिया की बढ़ती आबादी के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा के लिए भी काम करना चाहिए</span>,<span> साथ ही जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए भी समाधान की दिशा में काम करना होगा। स्टार्टअप दूरदृष्टि व पक्के इरादे के साथ नवाचार करें। प्रधानमंत्री के आह्वान के अनुरूप</span>,<span> देश की आजादी के </span>100 <span>वर्ष होने तक देश को पूरी तरह से विकसित करने में हमें कामयाब होना है।भारत सरकार इसके लिए स्टार्टअप के साथ कंधे से कंधा और कदम से कदम मिलाकर खड़ी हुई है। </span></p>
<p>इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी व शोभा करंदलाजे भी उपस्थित थी। कृषि सचिव मनोज अहूजा व आईसीएआर के महानिदेशक डा. हिमांशु पाठक ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्री स्टार्टअप्स को बढ़ाने के लिए 500 करोड़ रुपये का एक्सीलरेटर प्रोग्राम शुरू किया जाएगा: तोमर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एमडी बोटैनिकल्स, कोंडागांव को मिला प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप का एक्सीलेंस अवार्ड&amp;#45;2022]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/md-botanicals-from-kondagaon-received-best-start-up-excellence-award-2022.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 13 Oct 2022 00:11:24 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/md-botanicals-from-kondagaon-received-best-start-up-excellence-award-2022.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बस्तर के कोंडागांव की अपूर्वा त्रिपाठी द्वारा शुरू किए गए स्टार्टअप "एमडी बॉटनिकल्स" को सर्वश्रेष्ठ उद्यमी का पुरस्कार दिया गया। यह एक्सीलेंस अवार्ड जसराज बरड़िया की स्मृति में दिया जाता है। चयन समिति &nbsp;द्वारा अंतिम रूप से चयनित नव उद्यमियों को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदान किया गया।<br />कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और विशिष्ट अतिथि पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल थे।<br />कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव&nbsp; बस्तर के किसानों द्वारा अपने खेतों में उगाई गई विभिन्न जड़ी बूटियों,मसालों, काली मिर्च स्टीविया जैसे प्रमाणित जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर लाने में अपूर्वा त्रिपाठी और उनके स्टार्टअप एमडी बोटैनिकल्स के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रदेश के अन्य युवाओं के लिए निश्चित रूप से प्रेरणादायक साबित होगा।<br />कोंडागांव, बस्तर की एमडी बॉटनिकल्स, "माँ दंतेश्वरी हर्बल ग्रुप" का एक विस्तार है, जिसका उद्देश्य ग्राहकों को सीधे रिटेल रेंज में गुणवत्तापूर्ण जड़ी-बूटियाँ और खाद्य पूरक प्रदान कर रहा है।<br />अपूर्वा त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में अपने प्रेरणा स्रोत डॉ. राजाराम त्रिपाठी, हर्बल वैज्ञानिक और प्रख्यात किसान नेता का उल्लेख करते हुए कहा कि डॉ. त्रिपाठी ने &nbsp;वर्ष 1996 में जैविक और हर्बल किसानों के जिस एक छोटे से समूह "माँ दंतेश्वरी हर्बल समूह" की स्थापना की थी वह तीन दशकों के कठिन संघर्ष के बाद आज &nbsp;सामूहिक भागीदारी के सिद्धांत पर कार्य करने वाला&nbsp; "एमडीएचपी ग्रुप" देश के प्रमाणिक जैविक जड़ी-बूटी उत्पादक किसानों का सबसे बड़ा समूह &nbsp;बन गया है। अपूर्वा ने बताया कि वह 2015 &nbsp;से एमडीएचपी समूह से जुड़ी हैं। अपूर्वा एक "बौद्धिक संपदा अधिकार कानून" की कांऊसलर भी हैं और बस्तर की जनजातियों के पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के बौद्धिक संपदा अधिकारों विषय पर पीएचडी कर रही हैं। अपूर्वा ने खुदरा रेंज में सर्वोत्तम गुणवत्ता, विशुद्ध प्राकृतिक, सिंथेटिक वह&nbsp; केमिकल मुक्त जैविक जड़ी-बूटियों और खाद्य संपूरकों की बढ़ती मांग और आवश्यकता को समझते हुए &nbsp;वर्ष 2022 में "एमडी बॉटनिकल " &nbsp;की स्थापना की और &nbsp;100 ग्राम और 200 ग्राम के खुदरा पैकिंग में और &nbsp;कैप्सूल के रूप में भी जैविक उत्पादों की एक श्रृंखला पेश की। उत्पादों में इम्युनिटी बूस्टर, सर्टिफाइड ऑर्गेनिक पाउडर्स और फूड सप्लीमेंट्स शामिल हैं। वर्तमान में उनके पास लगभग 34 उत्पाद है और जल्द ही वह अपने उत्पादों की श्रृंखला की संख्या में और वृद्धि करना चाहती हैं। बस्तर की आदिवासी महिलाओं का समूह इन उत्पादों को तैयार करने के लिए एमडी बॉटनिकल का मुख्य हिस्सा हैं।<br />एमडी बॉटनिकल्स की पहली यूएसपी यह है कि यह किसी भी कच्चे माल को आउटसोर्स नहीं करता है बल्कि उन्हें अपने खेतों में ही पैदा करते हैं, ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। इस संस्थान की दूसरी यूएसपी यह है कि इस संस्था में 90% सहभागी बस्तर कीआदिवासी महिलाएं हैं। इनके पास राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सभी स्तर पर सभी आवश्यक गुणवत्ता प्रमाणपत्र हैं।</p>
<p>सोने और चांदी के आभूषणों के निर्माण तथा निर्यात के लिए विख्यात एटी ग्रुप द्वारा रोटरी हेरिटेज रायपुर के तत्वावधान में प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप को प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार उन नए स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए दिये गए जो समाज में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला रहे हैं। अपूर्व त्रिपाठी के अलावा पुरस्कार पाने वालों &nbsp;रितेश अग्रवाल, देव गर्ग और द टेकमेम्ट टेक्नोलॉजी शामिल हैं। कार्यक्रम के आयोजक और एटी ग्रुप के सनत जैन ने बताया कि इस पुरस्कार के आवेदन और जूरी द्वारा पुरस्कारों के लिए ऊंचे मापदंड तय किए गए थे। चयन समिति के&nbsp; सदस्यों में&nbsp; इंदिरा मिश्रा (रि.आईएएस), अजय पांडे (आईआरएस),एटी ग्रुप के शांतिलाल बरड़िया, सनत जैन, महेंद्र कश्यप, पंकज शर्मा और तोशन चंद्राकर शामिल थे।&nbsp;<br /><br /></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एमडी बोटैनिकल्स, कोंडागांव को मिला प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप का एक्सीलेंस अवार्ड-2022 ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फार्म&amp;#45;टू&amp;#45;कंज्यूमर ब्रांड डीप रूटेड ने विस्तार के लिए निवेशकों से 1.25  करोड़ डॉलर जुटाए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/farm-to-consumer-brand-deep-rooted-raises-rs-1.25-cr-from-ivy-cap-ventures-and-accel.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 24 Sep 2022 00:00:00 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/farm-to-consumer-brand-deep-rooted-raises-rs-1.25-cr-from-ivy-cap-ventures-and-accel.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">फल और सब्जियों के फार्म-टू-कंज्यूमर स्टार्टअप डीप रूटेड ने सीरीज ए फंडिंग में 1.25 करोड़ डॉलर जुटाए हैं। इस फंडिंग का नेतृत्व आइवी कैप वेंचर्स ने किया। अन्य निवेशकों में एक्सेल, ओमनिवोर और मेफील्ड तथा मौजूदा निवेशक हैं। इवीकैप वेंचर्स 2011 में स्थापित फंड है। यह भारत के अग्रणी घरेलू उद्यम पूंजी कोषों में से एक है जो भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती प्रदान करता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">डीप रूटेड शहरी उपभोक्ताओं को किसानों द्वारा उगाए गए गुणवत्ता वाले फलों और सब्जियों का सीधी पहुंच प्रदान करता है। वर्तमान में डीप रूटेड बैंगलोर, हैदराबाद और चेन्नई में उपभोक्ताओं को 200 से अधिक किस्मों के फलों और सब्जियों को ताजा और स्वस्थ अवस्था में पहुंचाने के लिए वन-स्टॉप शॉप बन गया है। डीप रूटेड ग्रीनहाउस नेटवर्क के माध्यम से पारंपरिक खेती की तुलना में पानी और जमीन का दसवां भाग इस्तेमाल करता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">डीप रूटेड की योजना दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों में अगले 12 महीनों में विस्तार करने की है। बैंगलोर में डीप रूटेड की स्थापना 2020 में अविनाश बीआर, गुरुराज राव, अरविंद मुरली और संतोष नरसीपुरा ने की थी।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">डीप रूटेड के सह-संस्थापक अविनाश बीआर ने कहा हम आइवीकैप के साथ साझेदारी करके उत्साहित हैं क्योंकि हम दक्षिण भारत में विस्तार कर रहे हैं, सीधे किसानों के साथ काम कर रहे हैं और शहरी उपभोक्ताओं को ताजे फल और सब्जियां पहुंचा रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आईवीकैप वेंचर्स के पार्टनर आशीष वाधवानी ने कहा कि, ताजा फल और सब्जियां को एक श्रेणी के रूप में परिपक्व कर रहे हैं। एक्सेल के पार्टनर प्रशांत प्रकाश ने कहा कि उपभोक्ता विश्वास जीतने के लिए दो प्रमुख कारक हैं लगातार उच्च गुणवत्ता और निरंतर उपलब्धता। उन्होंने कहा कि डीप रूटेड ने उपभोक्ताओं का एक बड़ा आधार बना लिया है।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ फार्म-टू-कंज्यूमर ब्रांड डीप रूटेड ने विस्तार के लिए निवेशकों से 1.25  करोड़ डॉलर जुटाए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्री स्टार्ट&amp;#45;अप  इंटेलीकैप और टीआरआईएफ ने दस लाख  किसानों के लिए कार्बन फाइनेंस प्लेटफॉर्म लॉन्च किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/agri-start-ups-intellicap-and-trif-launch-carbon-finance-platform-for-10-lakh-small-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 10 Aug 2022 21:46:36 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/agri-start-ups-intellicap-and-trif-launch-carbon-finance-platform-for-10-lakh-small-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">इंटेलीकैप और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (टीआरआईएफ) ने एक राष्ट्रीय कार्बन फाइनेंस प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की घोषणा की है, जो &nbsp;छोटे किसानों को &nbsp;टिकाऊ कृषि-वानिकी, जलवायु के अनुसार स्मार्ट कृषि और अन्य गतिविधियों के लिए मदद करेगा। जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होने की संभावना है। इसके लिए यह दस लाख से अधिक छोटी जोत वाले किसानों के साथ काम करेगा। <span>&nbsp;जिन्हें जलवायु-स्मार्ट कृषि और कृषि वानिकी के लिए सहायता और प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।</span></p>
<p style="text-align: justify;">वैश्विक स्तर पर <span>सामुदायिक आर्थिक विकास</span>, <span>बेहतर स्वास्थ्य </span>, <span>जैव विविधता वृद्धि</span>, <span>लैंगिक समानता आदि जैसे लाभ देने वाली परियोजनाओं से कार्बन क्रेडिट की मांग बाजार में बढ़ रही है। हालांकि</span>&nbsp;<span>भारतीय लोगों में &nbsp;कार्बन उत्पादक जलवायु&nbsp; कार्बन वित्तपोषण सिस्टम के बारे में &nbsp;कम जागरूकता</span>, <span>उच्च गुणवत्ता वाली कार्बन परियोजनाओं को डिजाइन और कार्यान्वित करने की सीमित तकनीकी क्षमता है औऱ इसके प्रति &nbsp;कानूनी व्यवस्था पर लोगों मे स्पष्टता की कमी के कारण इस लाभ नही ले पाते हैं।</span>इसलिए एक ऐसे प्लेटफार्म की जरूरत है जो स्वेच्छा से &nbsp;कार्बन को कम करने के लिए &nbsp;छोटे किसानों की क्षमता को बढ़ाए।</p>
<p style="text-align: justify;">नया लॉन्च किया गया यह प्लेटफॉर्म विभिन्न प्रकार के कार्बन प्रोजेक्ट जैसे, <span>कृषि वानिकी</span>, <span>स्वच्छ खाना पकाने</span>, <span>अपशिष्ट प्रबंधन</span>,<span> इत्यादि और उनके लाभों के बारे में जागरूकता पैदा करके छोटे किसानों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।&nbsp; साथ ही</span>&nbsp;<span>उच्च डिजाइन और कार्यान्वयन की तकनीकी क्षमता को बढ़ाएगा। बड़े पैमाने पर गुणवत्ता वाली कार्बन परियोजनाएं</span>, <span>कार्बन परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण में मदद करना और परियोजनाओं के पूर्व-वित्तपोषण</span>, <span>कार्बन लाभ साझा करने के लिए उचित प्रक्रिया मानक स्थापित करनेगा। </span><span>एक बेहतर वाटरशेड</span>, <span>कूलर माइक्रॉक्लाइमेट</span>, <span>मिट्टी के कटाव की रोकथाम के माध्यम से छोटे किसान समूहों तो जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता लाकर &nbsp;सुधार करना है</span>&nbsp;<span>और जैव विविधता को बढ़ाना इसका मकसद है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">टीआरआईएफ विभिन्न प्रकार की कार्बन ऑफसेट परियोजनाओं को पंजीकृत करेगा जिसमें छोटे किसान भाग लेने के लिए तैयार&nbsp; होंगे और स्वच्छता कार्बन बाजार में एक स्वतंत्र कार्बन क्रेडिट तंत्र के तहत उत्पन्न होने वाले कार्बन क्रेडिट के मुद्रीकरण से लाभान्वित होंगे। वैश्विक स्वैच्छिक कार्बन बाजार 2050 तक 200 अरब डॉलर का होने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align: justify;">टीआरआईएफ इस मंच को लॉन्च करने के बारे में उत्साहित हैं जो छोटे किसानों और कमजोर समुदायों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के साथ-साथ भारत को अपने शुद्ध शून्य लक्ष्यों को स्थायी रूप से प्राप्त करने में सहायता करते हुए उचित मूल्य प्रदान करेगा।ज बकि जलवायु वित्त और कार्बन वित्त उद्यमों और बड़े कॉरपोरेट्स के लिए जलवायु कार्रवाई के वित्तपोषण का एक प्रमुख स्रोत बन रहे छोटे किसानों को उन परियोजनाओं के लिए जलवायु वित्त तक पहुंच प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है । इस मंच का उद्देश्य जलवायु वित्त औऱ कार्बन वित्त के लिए इन छोटे जोत वाले किसानों का मार्गदर्शक करके उनको इस क्षेत्र में अग्रणी&nbsp; बनाना है।</p>
<p style="text-align: justify;">एग्री एंड क्लाइमेट, <span>इंटेलेकैप के प्रबंध निदेशक </span><span>संतोष के. सिंह ने कहा कि</span>&nbsp;<span>हम छोटे किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें जलवायु-स्मार्ट कृषि में पारंगत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। </span><span>&nbsp;यह प्लेटफॉर्म उन कॉरपोरेट्स और अन्य हितधारकों की भी मदद करता है जो कार्बन के शून्य लक्ष्यों के लिए प्रतिबद्धहैं और परियोजनाओं से अपने अवशिष्ट कार्बन पदचिह्नों को ऑफसेट करना चाहते हैं जो न केवल उन्हें कार्बन उत्सर्जन में कमी देते हैं बल्कि स्थानीय समुदायों को सशक्त और लाभान्वित करते हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इंटेलीकैप, <span>आविष्कार समूह का एक हिस्सा है जो</span><span> एक टिकाऊ और न्यायसंगत समाज बनाने और जरूरी वित्त पोषण करने के लिए सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र निर्माण में अग्रणी है। टीआरआईएफ ग्रामीण जीवन के मानकों में बड़ा परिवर्तन लाने के लिए पहल करने वाली संस्था है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/08/image_750x500_62f287b9058a9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्री स्टार्ट-अप  इंटेलीकैप और टीआरआईएफ ने दस लाख  किसानों के लिए कार्बन फाइनेंस प्लेटफॉर्म लॉन्च किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ओमनीवोर ने  एक्वाकल्चर प्रबंधन स्टार्ट&amp;#45;अप इरुवाका को न्यूट्रेको को बेचने की घोषणा की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/omnivore-announces-sale-of-aquaculture-management-startup-eruvaka-to-nutreco.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 02 Aug 2022 21:48:39 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/omnivore-announces-sale-of-aquaculture-management-startup-eruvaka-to-nutreco.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">आज एग्रीटेक वेंचर कैपिटल फर्म ओमनीवोर ने एग्रीटेक स्टार्ट-अप इरुवाका को न्यूट्रेको को बेचने की घोषणा की। यह भारतीय एग्रीटेक में अब तक की सबसे बड़ी ब्रिक्री डील है। विजयवाड़ा स्थित इरुवाका क्लाउड-आधारित आर्टिफिशियल इंटिजिलेंस तकनीक&nbsp; (<span>एआई </span>) <span>&nbsp;के </span>जरिए एक्वाकल्चर औऱ फिश पॉन्ड्स मैनेजमेंट में सटीक प्रबंधन और स्मार्ट फीडिंग पर काम करती है। इस डील के जरिए न पशुओं के पोषण उत्पादों और एक्वाकल्चर में अग्रणी ग्लोबल प्लेयर न्यूट्रेको ने इरुवाका में बड़ी हिस्सेदारी हासिल कर ली है। न्यूट्रेको द्वारा इरुवाका के अधिग्रहण से इसके एक्वाकल्चर बिजनेस स्क्रेटिंग को विश्व स्तर पर एक्वाकल्चर फारमर्स को ऑन-फार्म सॉफ्टवेयर और स्मार्ट उपकरण बेचने की की क्षमता आएगी।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इरुवाका एक्वाकल्चर टेक्नोलॉजी पर किसानों के&nbsp; जोखिम को कम करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए ऑन-फार्म ​​उपकरण और एक्वाकल्चर में बेहतर प्रबंधन, निगरानी और स्वचालित सेंसर, मोबाइल कनेक्टिविटी और सटीक निर्णय लेने वाले एकीकृत उपकरण विकसित करती है। एक्वाकल्चर में प्रौद्योगिकी के उपयोग में तेजी लाना इरुवाका मिशन है । यह किसानों को उनके तालाबों की बेहतर तरीके से निगरानी करने और उन्हें टिकाऊ बनाने के लिए उनके उत्पादन लागत को कम करने में मदद करता है।</p>
<p style="text-align: justify;">न्यूट्रेको न्यूट्रेको ट्रू न्यूट्रिशन के माध्यम से पशुधन फ़ीड में और स्केरेटिंग के माध्यम से एक्वाकल्चर में ग्लोबल प्लेयर है ।न्यूट्रेको&nbsp; प्राइज चैन में अगली पीढ़ी के सफल नवाचारों को पहचानने, <span>विकसित करने और निवेश करने के लिए काम करती है यह कम्पनी 100 से अधिक सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही है ।</span></p>
<p style="text-align: justify;">ओमनिवोर ने 2013 में इरुवाका में निवेश किया था। इसके&nbsp; एक साल पहले इस स्टार्ट-अप को श्रीराम रवि द्वारा शुरू किया गया था, जो पहले सेमीकंडक्टर्स अनुभवी &nbsp;इंजीनियर थे। रवि का मानना है कि दुनिया भर में झींगा पालन वाले किसान &nbsp;तालाब प्रबंधन &nbsp;संबधी कार्यों में ज्यादा मेहनत और &nbsp;संघर्ष कर रहे हैं। इस क्षेत्र में सुधार के लिए&nbsp; उन्होंने इंटरनेट आफ थिंग्स (आईओटी) के जरिए&nbsp; इसके प्रंबधन और विकास के लिए काम करना शुरू किया।</p>
<p style="text-align: justify;">कुछ ही साल के भीतर आंध्र प्रदेश के इस स्टार्टअप ने इक्वेडोर, होंडुरास और मैक्सिको सहित कई देशों में अपने टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन के लिए मांग पैदा कर ली। इरुवाका वित्तीय वर्ष 2018-19 से मुनाफे में रही है और वित्तीय साल&nbsp; 2017-18 से इसने 168.5 फीसदी की कंपाउंड दर से कमाई में वृद्धि हासिल की है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इसकी ब्रिकी हो जाने पर &nbsp;इरुवाका के संस्थापक श्रीराम रवि ने कहा कि मैं विजयवाड़ा में अपनी उत्कृष्ट टीम का बहुत आभारी हूं, जिन्होंने मेरे विजन में भरोसा जताते हुए एरुवाका को सटीक एक्वाकल्चर तकनीक में ग्लोबल लीडर बनाने मजबूती से काम किया।&nbsp; हमारे&nbsp; उपर विश्वास करने और इरुवाका को इस क्षण तक मार्गदर्शन देने के लिए हम ओमनिवोर के आभारी हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि इरुवाका न्यूट्रेको के नेतृत्व में फल-फूलेगा। जिससे दुनिया भर में एक्वाकल्चर फार्मों में डिजिटलीकरण होगा और मजबूती आएगी।</p>
<p style="text-align: justify;">ओमनीवोर के मैनेजिंग पार्टनर मार्क कान ने भी कहा कि एरुवाका मेक इन इंडिया का अच्छा उदाहरण है जो विश्व स्तर पर एक्वाकल्चर फार्मरस को मार्डन एग्रीटेक तकनीक प्रदान करता है।न्यूट्रेको द्वारा इरुवाका के अधिग्रहण के साथ भारतीय एग्रीटेक इकोसिस्टम ने अपना पहला बड़ा ब्रिकी डील है।और आने वाले वर्षों में और भी बहुत कुछ होगा। यह ओमनिवोर के लिए, इरुवाका के लिए और भारत में एग्रीटेक के लिए बहुत गर्व का क्षण है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस अवसर पर न्यूट्रेको के सीईओ फुल्को वान लेडे ने कहा कि हम उन सभी के आभारी हैं जिनके ज्ञान और दूरदर्शिता ने आज इरुवाका को यहां तक ​​पहुंचाया है और विशेष रूप से कंपनी के समर्पित कर्मचारी इसकी सबसे मूल्यवान संपत्ति है। उन्होंने कहा इसके संस्थापक श्रीराम रावी, जिन्होंने न केवल मूल अवधारणा का आविष्कार किया है बल्कि जिनकी दूरदृष्टि और अभियान इसे सफलतापूर्वक बाजार में लाया और हम अपनी इस टीम के साथ इरुवाका को और विकसित करने की आशा कर रहे हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ओमनीवोर ने  एक्वाकल्चर प्रबंधन स्टार्ट-अप इरुवाका को न्यूट्रेको को बेचने की घोषणा की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पियात्रिका बायोसिस्टम्स को अंकुर कैपिटल से मिली फंडिंग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/piatrika-biosystems-and-ankur-capital-create-a-platform-to-discover-new-sustainable-seeds.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 21 Jul 2022 21:56:36 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/piatrika-biosystems-and-ankur-capital-create-a-platform-to-discover-new-sustainable-seeds.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">भारत और यूके में काम करने वाले कृषि टेक्नालॉजी आधारित स्टार्टअप <span> पियात्रिका बायोसिस्टम्स ने </span>अंकुर कैपिटल के साथ&nbsp; मिलकर सस्ते&nbsp; टिकाऊ उन्नत किस्मों के बीज की खोज और कृषि रसायन के लिए समझौता किया है। इसके तहत <span>अंकुर कैपिटल से पियात्रिका बायोसिस्टम्स को 12 लाख डॉलर की फंडिंग मिली है। यह स्टार्ट-अप&nbsp; टिकाऊ सस्ते बीज किस्म&nbsp; और कृषि रासायन बाजार में ला रही है। कंपनी का मुख्य उदेश्य ये है कि इस निवेश से देश में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के साथ फसलों की नई किस्मों के लिए एक मजबूत टीम बनाना है। साथ ही बीजों पर अधिक गहन शोध करके एमवीपी के उत्पादन और व्यावसायीकरण में तेजी लाना है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">अंकुर कैपिटल का मानना है कि 2050 <span>तक दुनिया की अनुमानित&nbsp; </span>9 <span>अरब की आबादी के लिए वैश्विक खाद्य उत्पादन में </span>50 <span>से </span>70 <span>फीसदी बढ़ोत्तरी करने की जरूरत है। जलवायु परिवर्तन के साथ यह बढ़ती वैश्विक जनसंख्या आने वाले दशकों में कृषि में चुनौतियों का अभूतपूर्व कारण बन सकती है इसलिए इसकी तरफ अभी से ध्यान देने की जरूरत है। वहीं मौजूदा दौर में पूरी दुनिया&nbsp; वैश्विक खाद्य आपूर्ति के लिए अभूतपूर्व मुद्दों का सामना कर रही है। जैसे खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में असंतुलन के चलते कुछ फसलों का अधिक उत्पादन होना और उन फसलों में पोषक तत्वों की कमी पाया जाना है। ऐसे में इन मुद्दों के लिए केवल सामाजिक और आर्थिक स्थिरता के लिए जैविक या अजैविक के साथ फसलों में जरूरी &nbsp;पोषण के अधिक या कम उत्पादन और स्थानीय फसलों में बायोएथेनॉल </span><span>&nbsp;जैसे बेहतर विकल्पों की खोज करना &nbsp;है। इसके लिए टिकाऊ यानी स्थाई कृषि की जरूरत के साथ-साथ एक तेजी से विकास रणनीति&nbsp; के लिए&nbsp; प्रक्रिया के&nbsp; प्रबंधन में बदलाव लाने की जरूरत </span>&nbsp;है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस मौके पर अंकुर कैपिटल की पार्टनर <span>रितु वर्मा ने बताया कि हम कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी के माध्यम से नए बीजों को बेहतर करने के साथ उन्हें बनाने के लिए पियात्रिका बायोसिस्टम्स के साथ साझेदारी करने के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि देश में जलवायु परिवर्तन समस्या के बीच &nbsp;खाद्य मांग की पूर्ति करना कृषि के सामने बडी चुनौती है। </span>इसलिए बीज के क्षेत्र में नवाचार महत्वपूर्ण है। इसलिए कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी में प्रगति के साथ हम इसे नए बीजों को बाजार में तेजी से लाने के लिए सोच रहे हैं।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">वहीं पियात्रिका बायोसिस्टम्स के सह-संस्थापक और सीईओ वासुदेव कुमांडूरी ने बताया अत्याधुनिक अनुसंधान और इसके व्यावहारिक कार्यान्वयन के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध होता है। इसका मतलब ये है कि, जहां हाल के सालों में कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी/जीनोमिक्स, <span>डेटा साइंस</span>, <span>क्लाउड और इंस्ट्रुमेंटेशन में जमीनी स्तर शोध की गई है। इस महत्वपूर्ण शोध को खेतीबाड़ी में समय पर व्यावहारिक तरीके से लागू नहीं किया गया है। ऐसे में जैव सूचना विज्ञान के जरिए&nbsp; किसान और उपभोक्ता के लाभ के लिए तत्काल लागू करने की जरूरत &nbsp;है। उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य है कि वैज्ञानिक अनुसंधान और वाणिज्यिक उद्यम समाधानों के बीच की खाई को पाटना है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">वासुदेव कुमांडूरी जानकारी दी है कि पियात्रिका बायोसिस्टम्स कृषि-जीनोमिक्स खोजों और प्लांट ब्रीडिंग निर्णय समर्थन, <span>कार्यक्रम डिजाइनिंग और निगरानी के लिए एक नया नवाचार क्लाउड-आधारित उद्यम प्लेटफॉर्म-ए-ए-सर्विस (पीएएएस) भी बना रहा है। जिसके माध्यम से उन्नत बीजों की खोज के साथ ही साथ बीजों के स्थानिक डेटा कैप्चर को खोजने प्रक्रिया को बढ़ाने में मदद मिलेगी</span> ।</p>
<p style="text-align: justify;">वहीं पियात्रिका बायोसिस्टम्स के दूसरे सह-संस्थापक और सीओओ फनी यारलागड्डा ने बताया कि, मौजूदा दौर में जलवायु परिवर्तन रूस-युक्रेन युद्ध और कोरोना वायरस ने वैश्विक खाद्य प्रणालियों को बाधित कर दिया है। जिसके चलते देश में कम संसाधनों का उपयोग करके अधिक पैदावार के लिए अत्यधिक दबाव है। ऐसे में बीज कंपनियां और कृषि-अनुसंधान संस्थान किफायती एंटरप्राइज ग्रेड प्लग-इन समाधानों की तलाश कर रहे हैं। जिससे किसान लैब से बीज लेकर अनुकूल परिस्थितियों में &nbsp;इन बीजों से अपनी खेती में लाभ &nbsp;ले सकें।</p>
<p style="text-align: justify;">पियात्रिका बायोसिस्टम्स एनआईएबी कैम्ब्रिज, यूके और आईसीआरआईएसएटी हैदराबाद की शाखा है। <span>यह देश से बाहर रहकर रिसर्चर</span>, <span>बीज कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों के साथ काम कर रही है। इस साल जून </span>2022 <span>में एफएओ</span> <span>ने पियात्रिका बायोसिस्टम्स को खाद्य और कृषि में शोध करने के लिए चुना है वहीं अंकुर कैपिटल डिजिटल और डीप साइंस टेक्नोलॉजी कंपनियों में निवेश करने वाला शुरुआती चरण का वेंचर कैपिटल फंड है। इसकी स्थापना </span>2014 <span>में हुई थी। फिलहाल अंकुर कैपिटल के&nbsp; पोर्टफोलियो में </span>25 <span>कंपनियां हैं।</span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पियात्रिका बायोसिस्टम्स को अंकुर कैपिटल से मिली फंडिंग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्री&amp;#45;फिनटेक स्टार्ट&amp;#45;अप हेसा 60 हजार से अधिक लोगों को वित्तीय सुविधा  प्रदान करेगा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/agri-fintech-start-up-hesa-to-provide-financial-solutions-to-over-60k-hesaathis.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 13 Jul 2022 19:24:43 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/agri-fintech-start-up-hesa-to-provide-financial-solutions-to-over-60k-hesaathis.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">हैदराबाद की &nbsp;कृषि-फिनटेक स्टार्ट-अप हेसा ने घोषणा की है कि दूसरे और तीसरे श्रेणी के शहरो तीस हजार गांवों के 60 <span>हजार से अधिक लोगों को वित्तीय </span>सुविधा प्रदान करने लक्ष्य रखा है । इस वित्तीय सुविधा से&nbsp; ग्रामीणों को बिल भुगतान, <span>पैसे निकालने के लिए खाता खोलने</span>, <span>मोबाइल रिचार्ज</span>, <span>बस टिकट बुकिंग</span>, <span>डीमैट खाते खोलने</span>, <span>सावधि जमा खाता खोलने आदि जैसे लेन-देन में आसानी होगी।</span></p>
<p style="text-align: justify;">हेसा एक एकीकृत सामाजिक,<span>फिजिकल और डिजिटल कामर्शियल प्लेटफार्म है जो ग्रामीण भारत में उत्पादों और सेवाओं के डिजिटल लेनदेन को मजबूत बनाने का काम करती है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">हेसा इन वित्तीय सेवाओं के साथ, <span>ऐप के माध्यम से फाइनेंस सर्विस प्रोवाइडर है। जो अंतिम उपभोक्ता तक एक पुल का काम करता है, जिससे कि दोनो के संबधो के बीच &nbsp;जो खाई &nbsp;को कम किया जा सके ।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">हेसा &nbsp;फिजिटल अप्रोच का इस्तेमाल करके खरीदने और बेचने में तकनीक और मानवीय क्षमताओं सही उपयोग कर व्यवसायिक रूप से विस्तार करने और उसका &nbsp;सही लाभ मिल सके, इसके &nbsp;लिए रूरल प्राइस चेन को &nbsp;मजबूती प्रदान करता है। हेसा के ऐप का उद्देश्य दूरदराज के ग्रामीण स्थानों में वित्तीय चुनौतियों को &nbsp;हल करना है । इसके साथ &nbsp;ही ग्राहकों और ब्रांडों दोनों को खरीदने, <span>बेचने</span>, <span>बढ़ावा देने और वितरित करने के लिए तकनीक को मजबूत करना है। वर्तमान में यह ऐप की सुविधा &nbsp;तेलंगाना</span>, <span>आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में उपलब्ध है और जल्द ही देश के पांच और राज्यों में इसका विस्तार होगा।</span><span> अगली तिमाही से महाराष्ट्र में भी शुरूआत होगी।</span></p>
<p style="text-align: justify;">अधिकांश दूरदराज के गांवों में वर्तमान में बैंक नहीं है, <span>इसलिए किसान को वित्तीय सुविधा प्राप्त करने&nbsp; दूर के गांव और शहरों में&nbsp; जाना पड़ता है। इस प्रकार ग्रामीण लोगों के बहुत समय का नुकसान &nbsp;होता है। हेसा की वित्तीय सेवाओं &nbsp;सुविधा से इस तरह की समस्याओं का समाधान हो जाता&nbsp; है और लोगों के समय की&nbsp; बचत होती है ।&nbsp; कंपनी का दावा है कि इसके द्वारा प्रदान की गई वित्तीय सेवाओं से किसानों की उत्पादकता में वृद्धि होती हैं। इस सुविधा लाभ उन लोगों के लिए भी है जो है जो ग्रामीण बाजार में अलग-अलग व्यवसाय कर रहे हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">हेसा के चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर और हेड- फिनटेक,<span>&nbsp; ऋषभ शाह का&nbsp; कहना है कि&nbsp; हम एक ऐसे युग में हैं जहां फिनटेक अपनाने की दर बहुत अधिक है क्योंकि भारत में स्मार्टफोन रखने वालों की की दर में तेजी से वृद्धि हुई है। &nbsp;मोबाइल के द्वारा पैसे का लेन देन और भुगतान शहरी ओर ग्रामीण दोनों के लिए&nbsp; सुविधाजनक है। उन्होंने कहा कि हम अपनी सर्विस से &nbsp;ग्रामीण भारत को इस तरह से सशक्त बनाना चाहते हैं कि वह अपने स्वयं के व्यवसाय के स्वामी हों और साथ ही साथ हमारे साथ जुड़े हों ताकि उनके पास रोजगार के विकल्प हों। वर्तमान में</span>&nbsp;<span>प्लेटफॉर्म में एक महीने में 15 लाख से अधिक लोगों का लेनदेन होता हैं और हमारा लक्ष्य 2022 के अंत तक एक महीने में 30 लाख से अधिक लोगों का &nbsp;लेनदेन करना है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि कंपनी का दृष्टिकोण न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करना है <span>बल्कि सभी प्रकार की सेवाएं प्रदान करना है जो मेट्रो सिटी में आसानी से उपलब्ध हैं ताकि वह&nbsp; इसी प्रकार ग्रामीण भारत के लिए वन-स्टॉप डेस्टिनेशन बने।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्री-फिनटेक स्टार्ट-अप हेसा 60 हजार से अधिक लोगों को वित्तीय सुविधा  प्रदान करेगा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आर्य.एजी ने अपने फिनटेक प्लेटफॉर्म ‘आर्यधन’ से 500 करोड़ का दिया कर्ज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/arya-ag-crosses-inr-500-crore-milestone-on-its-fintech-platform.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 29 Jun 2022 11:50:42 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/arya-ag-crosses-inr-500-crore-milestone-on-its-fintech-platform.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">इंटीग्रेटेड ग्रेन कॉमर्स प्लेटफॉर्म आर्य.एजी ने अपने फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म आर्यधन पर कर्ज देने के मामले में 500 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लिया है। कंपनी की तरफ से जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि इस प्लेटफॉर्म को छोटे किसानों और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) की जरूरतों के मुताबिक कस्टमाइज किया गया है। कर्ज की उपलब्धता सुलभ होने के कारण किसान, एफपीओ और वैल्यू चेन में जुड़ने वाले अन्य पक्ष तरलता की किसी भी जरूरत को आसानी से पूरा कर सकते हैं। इससे अपनी उपज को ओने-पौने दाम पर बेचने की नौबत भी नहीं आती है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आर्य.एजी की टेक्नोलॉजी इंटरनेट आफ थिंग्स, एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर आधारित है। यहां कर्ज लेने वालों के लिए ट्रांजैक्शन की लागत और ब्याज दर दोनों कम होती है। कर्ज की रकम वितरित करने में भी अधिक समय नहीं लगता है। कंपनी का दावा है कि उसका आर्यधन प्लेटफॉर्म वेयरहाउस रिसीट फाइनेंस (डब्ल्यूआरएफ) में सबसे बड़ी एनबीएफसी है। इसका मॉडल उन स्थानों पर अधिक कारगर है जहां बैंक जोखिम की आशंकाओं को देखते हुए कर्ज देने में हिचकिचाते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">कंपनी ने अपनी डिजिटल कर्ज सेवा के कुछ फायदे गिनाए हैं। इनमें प्रमुख हैं- प्रोसेसिंग में कम समय लगना, 95 फ़ीसदी ट्रांजैक्शन की प्रोसेसिंग 20 मिनट में हो जाती है। 350 से अधिक स्थानों पर हजारों ट्रेडर के साथ मार्केट लिंकेज। पूरी पारदर्शिता जिसमें किसान के पास उपलब्ध डिवाइस पर सभी सूचनाएं आसानी से उपलब्ध होती हैं। ब्याज की दरें कम होती है और कोई छिपा हुआ शुल्क भी नहीं होता है। एक और खास बात यह है कि किसानों को सिर्फ उतने दिनों के लिए ही ब्याज देना पड़ता है जितने दिन वह पैसा रखते हैं।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/06/image_750x500_6298899dac0da.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आर्य.एजी ने अपने फिनटेक प्लेटफॉर्म ‘आर्यधन’ से 500 करोड़ का दिया कर्ज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जलवायु अनुकूल खेती में ग्राम उन्नति की पहल, किसानों को ज्यादा आय, प्रति एकड़ 4000 लीटर पानी भी बचाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/2000-farmers-benefit-as-gram-unnati-brings-climate-compatible-agriculture-to-over-5000-acres-of-farmland-in-uttarakhand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 09 Jun 2022 12:39:13 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/2000-farmers-benefit-as-gram-unnati-brings-climate-compatible-agriculture-to-over-5000-acres-of-farmland-in-uttarakhand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ऐसे समय में जब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं गिरते भूजल स्तर के कारण स्थायी खेती के रास्ते तलाश रही हैं, <span>एकीकृत एग्रीटेक सॉल्यूशन कंपनी ग्राम उन्नति ने उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में इस दिशा में बड़ी पहल की है। इसने किसानों की मदद के लिए कई हितधारकों के साथ मिलकर काम किया जिससे 5</span>,<span>000 एकड़ से अधिक खेत में जलवायु के अनुकूल खेती करते हुए प्रति एकड़ 4</span>,<span>000 लीटर पानी बचाने में मदद मिली है।</span></p>
<p>ग्राम उन्नति ने स्थानीय जिला प्रशासन, <span>स्थानीय मक्का प्रोसेसर</span>, <span>इनपुट कंपनियों और प्रमुख किसानों के साथ मिलकर 18 महीने की अल्प अवधि में 2</span>,<span>000 किसानों को जलवायु के अनुकूल फसलों की ओर जाने के लिए प्रेरित किया जो व्यावसायिक रूप से भी व्यवहार्य हों। यह लाखों भारतीय किसानों के लिए एक सीख हो सकती है।</span></p>
<p><span>ग्राम उन्नति के सीईओ और संस्थापक अनीश जैन ने कहा</span><span>, &ldquo;परियोजना की सफलता ऐसे समय में आई है जब हम दुनिया भर में पानी की गंभीर कमी से जूझ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2050 तक पांच अरब से अधिक लोग पानी की कमी से प्रभावित हो सकते हैं। भारत, जहां विश्व की 16% आबादी रहती है, के पास विश्व के जल संसाधनों का केवल 4% है। उत्तराखंड में हमारी पायलट परियोजना की सफलता से अन्य किसान भी बिना उपज और रिटर्न पर प्रभाव डाले जलवायु के अनुकूल फसलों की ओर जाने के लिए प्रेरित होंगे।</span><em>&rdquo;&nbsp;</em></p>
<p><span>उधम सिंह नगर और उत्तर प्रदेश के आसपास के इलाकों (रामपुर</span><span>, बरेली और पीलीभीत) में किसान परंपरागत रूप से रबी की फसल के बाद और खरीफ की बुवाई से पहले कम अवधि की धान की फसल लेते हैं। शोध के आधार पर ग्राम उन्नति ने मक्का को ग्रीष्मकालीन धान के एक उचित विकल्प के रूप में पहचाना। मक्का न केवल छोटी अवधि की फसल है, बल्कि इसमें धान की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है। इस पर आय भी अधिक होती है। इसका इस्तेमाल भी भोजन के अलावा चारा और फीड में होता है।</span></p>
<p><span>जैन के अनुसार, </span><span>&ldquo;पायलट प्रोजेक्ट में 5,000 एकड़ भूमि में मक्का बुवाई की गई जिससे 4,000 लीटर प्रति एकड़ पानी की पर्याप्त बचत हुई। समान भूमि पर 25 प्रतिशत अधिक उपज मिली। यह 'प्रति बूंद अधिक फसल' का एक अच्छा उदाहरण है।&rdquo; जैन ने कहा कि ऊधमसिंह नगर में परियोजना की सफलता ने ग्राम उन्नति को नई चुनौतियां स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित किया है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/06/image_750x500_62a19c28b768c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जलवायु अनुकूल खेती में ग्राम उन्नति की पहल, किसानों को ज्यादा आय, प्रति एकड़ 4000 लीटर पानी भी बचाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/06/image_750x500_62a19c28b768c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आईआईटी कानपुर का प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर में, एग्रीटेक समेत विभिन्न क्षेत्रों में बिजनेस बढ़ाने पर होगी चर्चा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/iit-kanpur-partners-singapore-to-enrich-indian-startup-ecosystem.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 May 2022 10:50:15 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/iit-kanpur-partners-singapore-to-enrich-indian-startup-ecosystem.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आईआईटी कानपुर ने एग्रीटेक समेत विभिन्न तरह के स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए सिंगापुर के साथ हाथ मिलाया है। आईआईटी कानपुर में एक स्टार्टअप इनक्यूबेशन एंड इन्नोवेशन सेंटर (एसआईआईसी) है। इसने कई सेक्टर के बिजनेस प्रतिनिधियों को सिंगापुर भेजा है। प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्षता एसआईआईसी के सीईओ निखिल अग्रवाल कर रहे हैं। यह प्रतिनिधिमंडल 16 से 20 मई तक सिंगापुर में अपने समकक्ष लोगों और इंडस्ट्री के साथ अनेक मुद्दों पर चर्चा करेगा।</p>
<p>आईआईटी कानपुर के अनुसार प्रतिनिधिमंडल में एग्रीटेक के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, मैन्युफैक्चरिंग और साइबर सिक्योरिटी से जुड़े 16 प्रमुख स्टार्टअप के लोग शामिल हैं। यह सिंगापुर में कई अंतरराष्ट्रीय उद्योगपतियों और वेंचर कैपिटलिस्ट के साथ बातचीत करेंगे। उनकी मुलाकात आईआईटी एलुमनाई एसोसिएशन सिंगापुर के साथ भी होगी। विभिन्न उद्योगपतियों के साथ चर्चा में नेटवर्किंग के अवसर तलाशे जाएंगे तथा सिंगापुर स्थित वेंचर कैपिटलिस्ट और निवेशकों के साथ आगे जुड़ाव की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।</p>
<p>एसआईआईसी के प्रोफेसर इंचार्ज (इनक्यूबेशन और इनोवेशन) प्रो. अमिताभ बंदोपाध्याय ने कहा, एसआईआईसी में बनी अनेक कंपनियों के प्रोडक्ट विश्व स्तर के हैं इसलिए उनका वैश्विक ग्राहकों के साथ जुड़ाव होना जरूरी है। एसआईआईसी के सीईओ अग्रवाल ने कहा, भारतीय स्टार्टअप को ऐसे इनोवेशन करने चाहिए जिनका ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर फायदा लिया जा सके। उन्होंने कहा कि आईआईटी कानपुर का प्रतिनिधिमंडल जो सिंगापुर गया है उससे भारतीय इनोवेटर को अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, प्रौद्योगिकी एक्सचेंज तथा निवेश के मामले में काफी फायदा होगा।</p>
<p>एसआईआईसी की स्थापना वर्ष 2000 में हुई थी। यह भारत के सबसे पुराने टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर में एक है। यह इनोवेशन सेंटर विचारों को बिजनेस में तब्दील करने के बीच की सभी खामियों को पूरा करता है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आईआईटी कानपुर का प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर में, एग्रीटेक समेत विभिन्न क्षेत्रों में बिजनेस बढ़ाने पर होगी चर्चा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ट्रैक्टर जंक्शन ने सीड फंडिंग में जुटाए 57 लाख डॉलर, इन्फो एज वेंचर्स तथा ओमनीवोर ने किया निवेश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/rural-vehicle-marketplace-tractor-junction-raises-57-lakh-dollars-in-seed-funding-from-info-edge-ventures-and-omnivore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 28 Apr 2022 12:56:10 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/rural-vehicle-marketplace-tractor-junction-raises-57-lakh-dollars-in-seed-funding-from-info-edge-ventures-and-omnivore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ग्रामीण क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले वाहनों का मार्केटप्लेस ट्रैक्टर जंक्शन ने सीड फंडिंग के रूप में 57 लाख डॉलर जुटाए हैं। इन्फो एज वेंचर्स और ओमनीवोर ने कंपनी में निवेश किया है। इनके अलावा कंपनी के पुराने निवेशकों एजी फंडर ग्रो इंपैक्ट फंड तथा रॉकस्टार एग्रीफूड फंड ने भी पैसा लगाया है। एंजेल निवेशक विक्रम चोपड़ा और मेहुल अग्रवाल ने भी ट्रैक्टर जंक्शन में निवेश किया है। यह दोनों कार्स 24 के सह संस्थापक हैं। मुरुगप्पा ग्रुप के वेल्लयन सुब्बैया और अरुण वेंकटचलम तथा संजीव रनग्रास ने भी पैसा लगाया है।</p>
<p>ट्रैक्टर जंक्शन नए और पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण और ग्रामीण कमर्शियल वाहनों की खरीद बिक्री फाइनेंसिंग और बीमा का डिजिटल मार्केटप्लेस है। कृषि क्षेत्र में मैकेनाइजेशन बढ़ने के बावजूद भारतीय किसान जब वाहन खरीदने जाते हैं तो उन्हें सूचनाओं की कमी, ऊंची कीमत तथा सहज ट्रांजैक्शन के लिए भरोसेमंद स्रोत की कमी का सामना करना पड़ता है। डीलर्स को भी अपने ग्राहकों तक पहुंचने, पुराने वाहनों की उचित कीमत तय करने तथा इन्वेंटरी खाली करने में संघर्ष करना पड़ता है। ट्रैक्टर जंक्शन कृषि मशीनरी पर जरूरी सूचनाएं और समीक्षा उपलब्ध कराने के अलावा यूजर्स को विभिन्न विकल्पों में तुलना करने और कीमतों में पारदर्शिता लाने में मदद करता है।</p>
<p>नोएडा स्थित ट्रैक्टर जंक्शन की स्थापना 2019 में अनिमेष अग्रवाल, रजत गुप्ता और शिवानी गुप्ता ने की थी। अनिमेष ने आईआईएम शिलांग से पढ़ाई की है। वे पहले कार्स 24 के उत्तर भारत के ऑपरेशंस के प्रमुख थे। वे महिंद्रा फार्म इक्विपमेंट बिजनेस में भी काम कर चुके हैं। रजत गुप्ता दूसरी पीढ़ी के ट्रैक्टर प्रोफेशनल हैं। वे पहले महिंद्रा ट्रैक्टर डीलरशिप चलाते थे। राजस्थान के अलवर में उन्होंने शिवानी गुप्ता के साथ मिलकर ट्रैक्टर जंक्शन की अवधारणा तैयार की थी।</p>
<p>बीते 2 वर्षों में ट्रैक्टर जंक्शन का सालाना रेवेन्यू 7 गुना बढ़ा है। यह ऑपरेशनल प्रॉफिट में है। दिसंबर 2021 में ट्रैक्टर जंक्शन ने दूसरे सबसे बड़े फार्म मशीनरी पोर्टल ट्रैक्टर गुरु का अधिग्रहण किया था और अपनी स्थिति मजबूत की थी। बीते 12 महीने में ट्रैक्टर जंक्शन पोर्टल पर तीन करोड़ यूनिक विजिटर आए तथा ग्रामीण भारत में इस ब्रांड को अच्छी पहचान मिली। ट्रैक्टर जंक्शन इस फंडिंग का इस्तेमाल नई प्रतिभाओं को जोड़ने, फाइनेंसियल सर्विसेज के विकास और उत्तर भारत में पुराने ट्रैक्टर के स्टोर खोलने में करेगी।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ट्रैक्टर जंक्शन ने सीड फंडिंग में जुटाए 57 लाख डॉलर, इन्फो एज वेंचर्स तथा ओमनीवोर ने किया निवेश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्रीटेक स्टार्टअप ओटीपी करेगी विस्तार, सीरीज बी फंडिंग में जुटाए 235 करोड़ रुपए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/agritech-startup-otipy-raises-rs-235-crores-in-series-b-funding.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 08 Mar 2022 19:23:34 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/agritech-startup-otipy-raises-rs-235-crores-in-series-b-funding.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एग्रीटेक स्टार्टअप ओटीपी (Otipy) ने सीरीज बी फंडिंग में 235 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इस फंडिंग में मुख्य भागीदारी वेस्टब्रिज कैपिटल की रही है। पुराने निवेशकों एसआइजी और ओमिडयार नेटवर्क इंडिया ने भी इस सीरीज में पैसा लगाया है। करीब छह महीने पहले ओटीपी ने सीरीज ए फंडिंग के तहत 76 करोड़ रुपए जुटाए थे। ओटीपी भारत का पहला कम्युनिटी ग्रुप खरीद प्लेटफॉर्म है जो ताजे उत्पाद खरीदता है। इसका संचालन क्रोफार्म एग्रीप्रोडक्ट्स करती है।</p>
<p>दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में ओटीपी ऑनलाइन सेगमेंट में प्रमुख कंपनी है, जो रोजाना 100 टन से ज्यादा ताजे उत्पाद खेत से उपभोक्ताओं तक पहुंचाती है। उत्पाद नष्ट होने का अनुपात सिर्फ तीन फीसदी है। यह इंडस्ट्री में सबसे कम तो है ही, पारंपरिक सप्लाई चेन की तुलना में दस गुना बेहतर है। इसके वेयरहाउस से उपभोक्ता तक उत्पाद पहुंचाने का लॉजिस्टिक्स खर्च भी इंडस्ट्री में सबसे कम, सिर्फ चार रुपए प्रति किलो है।</p>
<p>ओटीपी के संस्थापक और सीईओ वरुण खुराना ने कहा, &ldquo;अपने तेज सप्लाई चेन और कम्युनिटी नेटवर्क के जरिए हमारा लक्ष्य उपभोक्ताओं तक ताजा और बेहतर क्वालिटी के उत्पाद कम कीमत पर उपलब्ध कराना है। सीरीज बी फंडिंग से हमें नए इलाकों में विस्तार करने, सप्लाई चेन मजबूत करने और नई टेक्नोलॉजी में निवेश करने में मदद मिलेगी।&rdquo;</p>
<p>ओटीपी फसल की तुड़ाई के बाद 12 घंटे के भीतर उसे उपभोक्ताओं तक पहुंचाती है। इस वित्त वर्ष में इसका कारोबार पांच गुना बढ़कर 100 करोड़ रुपए को पार कर जाने की उम्मीद है। दिल्ली एनसीआर के अलावा सोनीपत, मेरठ और भिवाडी जैसे शहरों में इसके पांच लाख ग्राहक हैं।</p>
<p>वेस्टब्रिज कैपिटल के एमडी संदीप सिंघल ने कहा, &ldquo;ओटीपी के साझेदारी करके हम बहुत खुश हैं। कम्युनिटी ग्रुप खरीद मॉडल के जरिए इन्होंने रोजाना इस्तेमाल होने वाली आवश्यक वस्तुओं के बाजार में अच्छी दखल बनाई है। इससे किसानों, कम्युनिटी लीडर्स और उपभोक्ताओं सबको फायदा हो रहा है।&rdquo;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्रीटेक स्टार्टअप ओटीपी करेगी विस्तार, सीरीज बी फंडिंग में जुटाए 235 करोड़ रुपए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्रीटेक वेंचर फंड ओमनिवोर ने एग्रीफूड लाइफ साइंसेज&amp;#45;केंद्रित ओमनीएक्स बायो को लांच किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/agritech-venture-fund-omnivore-launche-omnix-bio.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 21 Dec 2021 08:20:35 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/agritech-venture-fund-omnivore-launche-omnix-bio.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">एग्रीटेक वेंचर कैपिटल फर्म ओमनीवर ने कल ओमनीएक्स बायो लॉन्च किया,जो पहले चरण में एग्रीफूड लाइफ साइंसेज स्टार्टअप्स को सहायता करने के लिए एक पहल है। इस प्रोग्राम का उद्देश्य उन भारतीय उद्यमियों का समर्थन करना है, जो &nbsp;एग्रीकल्चर बॉयो टेक्नालॉजी&nbsp; के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">कंपनी ने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत, कंपनी नई कृषि प्रणालियों, बायोएनेर्जी और बायोमैटिरियल्स के साथ-साथ वैकल्पिक प्रोटीन सहित नवीन खाद्य पदार्थों पहल पर नई पहल में निवेश करेगी ।</p>
<p style="text-align: justify;">ओमनिवोर ने कहा कि यह घरेलू और निर्यातित देशों में सेल प्वाईंट तक पहुंच सके । इसके लिए ग्लोबल फूड लाइफ साइंस लीडर और संस्थागत भागीदारी के साथ परामर्श के अलावा, <span>व्यवसाय के विकास में सपोर्ट के लिए ओमनीएक्स बायो को ओमनिवोर&nbsp; वित्तीय मदद करेगी। </span></p>
<p style="text-align: justify;">कंपनी ने कहा&nbsp; कि इस कार्यक्रम में ओमनिवोर टीम के सभी सदस्य ओमनीएक्स बायो मदद करेगें । इसके साथ कंपनी का कहना था कि इस पहल की निगरानी के लिए &nbsp;फिलॉसफी के पीएचडी धारक लाइफ साइंटिस्ट 2022 में टीम में शामिल किया जाएगा । पूरे भारत में &nbsp;एग्रीकल्चर लाइफ साइंस इकोसिस्टम को विकसित करने में मदद करेगें।</p>
<p style="text-align: justify;">ओमनिवोर &nbsp;के अनुसार एग्री फूड लाइफ साइंसेज में भारत की प्रगति पिछले दो दशकों से रुकी हुई है जो जल्द ही जलवायु परिवर्तन का खामियाजा भुगतेंगे। इसलिए देश को भविष्य के लिए अपनी कृषि और खाद्य प्रणालियों के सिंथेटिक जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी में नए अविष्कारों &nbsp;की जरूरत है । ओमनिवोर ने कहा कि एग्रीफूड लाइफ साइंसेज, भारतीय किसानों के भविष्य को सुरक्षित करते हुए, भारत के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>
<p style="text-align: justify;">ओमनिवोर के मैनेजिंग पार्टनर&nbsp; मार्क कान ने कहा कि हम भारत में कृषि खाद्य जीवन विज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से शुरू करने में मदद करने के लिए ओमनीएक्स बायो को लॉन्च करने के लिए उत्साहित हैं। इस क्षेत्र में तकनीकी प्रगति भारतीय कृषि में कुछ सबसे कठिन चुनौतियों को प्रभावी ढंग से हल कर सकती है।</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;ओमनिवोर ने कहा कि ओमनीएक्स बॉयो &nbsp;के पहले बॉयो प्राइम नाम के एक स्टार्टअप का समर्थन किया है, जो जैविक फसल इनपुट विकसित करता है जो पर्यावरण या किसानों और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाए बिना पैदावार बढ़ाता है। वेंचर कैपिटल फर्म ने निवेश का ब्योरा नहीं दिया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्रीटेक वेंचर फंड ओमनिवोर ने एग्रीफूड लाइफ साइंसेज-केंद्रित ओमनीएक्स बायो को लांच किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आदित्य बायोइनोवेशन को मिला बेस्ट इनोवेटिव एग्री स्टार्ट&amp;#45;अप अवार्ड]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/aditya-bioinnovation-wins-best-innovative-agri-startup-at-agri-food-empowering-india-awards-2021.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 18 Nov 2021 07:23:25 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/aditya-bioinnovation-wins-best-innovative-agri-startup-at-agri-food-empowering-india-awards-2021.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;"><em><strong>नई दिल्ली</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">आदित्य बायोइनोवेशन को बेस्ट एग्रीन इनोवेटिव एग्री स्टार्ट-अप का अवार्ड मिला है। यह अवार्ड एग्री फूड एम्पावरिगं इंडिया अवार्ड्स, 2021 में फसलों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता करने के लिए नैनो टेक्नोलॉजी आधारित हर्बल बेस प्लांट प्रोटेक्टर और बॉयो उत्प्ररेक विकसित करने के लिए दिया गया।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">यह पुरस्कार भारत सरकार की विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के तहत दिया गया है। नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और जल शक्ति राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने आदित्य बायोइनोवेनसन को यह अवार्ड&nbsp; प्रदान किया।</p>
<p style="text-align: justify;">आदित्य बायोइनोवेशन को कृषि इनपुट के क्षेत्र में प्लांट बेस इनोवेशन और साल्यूशंस के लिए के लिए यह पुरस्कार दिया गया है जो पौधों में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को 50 फीसदी तक कम करते हैं। इन उत्पादों की कम मात्रा का इस्तेमाल करना होता है और यह बेहतर नतीजे देने के साथ ही पर्यावरण के अनुकूल और किसानों के लिए किफायती हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">इस &nbsp;उपलब्धि पर बायोइनोवेशन के सह-संस्थापक और तकनीकी सलाहकार, डॉ सुरज्योति बागची और&nbsp; इसके निदेशक, विकास गुप्ता ने कहाकि&nbsp; यह पुरस्कार भारत में नवीन, पर्यावरण के अनुकूल कृषि आदानों की दिशा में हमारे प्रयासों की स्वीकृति है जो हमारे लिए खुशी की बात है। इससे भारत में जैविक खेती में आगे काम करने की प्रेरणा मिलेगी। हम आगे चाय और कॉफी के प्लांट प्रोटेक्शन के समाधान के लिए काम कर रहे हैं क्योंकि इनमें हानिकारक &nbsp;कीटों से ज्यादा नुकसान होता है। हमारा लक्ष्य भारत में कृषि विकास में योगदान देना है। उन्होंने ने कहा कि हमारे स्टार्ट-अप का उद्देश्य अपने इनोवेशन के माध्यम से छोटे किसानों के सशक्तिकरण में योगदान औऱ उनके समस्याओं का समाधान करना&nbsp; है।</p>
<p style="text-align: justify;">आदित्य बायोइनोवेशन की स्थापना तीन उद्यमियों द्वारा साल 2017-18 में की गई थी। इस&nbsp; स्टार्ट- अप ने&nbsp; साल 2019 में अपने उत्पादों का व्यावसायीकरण किया। इस स्टार्ट-अप को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में इनक्यूबेट किया गया था और&nbsp; 2020-21 में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय से इनको अनुदान प्राप्त हुआ।&nbsp;&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">आदित्य बायोइनोवेशन ने अपने पोर्टफोलियो में नौ उत्पादों के साथ 2019-20 में अपने दो उत्पादों के लिए भारतीय पेटेंट प्राप्त किए हैं। इसके उत्पादों में&nbsp; बायो स्टिमुलेंट कोहिनूर गोल्ड, एंटी-बोरर सुजलम और एंटीफंगल निवारण शामिल हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/11/image_750x500_6195aff48291a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आदित्य बायोइनोवेशन को मिला बेस्ट इनोवेटिव एग्री स्टार्ट-अप अवार्ड ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आर्या  ने कमोडिटी खरीद के लिए बीएनपीएल सेवा शुरू की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/startup-arya-for-the-first-time-in-agritech-launches-bnpl-service-for-commodity-purchase.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 11 Nov 2021 19:21:56 GMT]]></pubDate>
		<category>agri-start-Ups</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agri-start-ups/startup-arya-for-the-first-time-in-agritech-launches-bnpl-service-for-commodity-purchase.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">इन्ट्रीग्रेटेड पोस्ट-हार्वेस्ट सेवाओं को ध्यान रखते हुए एग्रीटेक स्टार्ट-अप आर्या एजी ने बाय नाउ पे लेटर (बीएनपीएल) सर्विस लांच की है। एग्रीटेक स्टार्ट-अप आर्या &nbsp;ने कहा है भारतीय एग्रीटेक में पहली बार &nbsp;किसी कंपनी ने यह सर्विस शुरू की है। यह &nbsp;सर्विस &nbsp;हर खरीदार के लिए &nbsp;Arya.ag प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। कमोडीटी कारोबारी इसके तहत शून्य ब्याज दर के साथ 14 दिनों के लिए 25 लाख रुपये तक का क्रेडिट प्राप्त कर सकते हैं। यह राशि जल्द ही दो करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। एक प्रेस विज्ञप्ति में आर्या &nbsp;ने कहा है भारतीय किसी&nbsp; एग्रीटेक कंपनी ने पहली बार यह सेवा लांच की है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">आर्या ने कहा है कि यह सर्विस &nbsp;हर खरीदार के लिए उपयोगी है जो अनाज, तिलहन, दालें जैसे उत्पादों का लगभग 150-200<span> टन सालाना की खरीदारी का कारोबार करता है । यह सर्विस कमोडिटी खरीदने के क्षेत्र में वित्त की सदियों पुरानी चुनौतियों को कम करने में मदद करेगी ।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">बीएनपीएल का लाभ उठाने के लिए, <span>खरीदारों को अपना मूल केवाईसी और वित्तीय विवरण अपलोड करना होगा। एक बार अपलोड हो जाने पर कुछ ही मिनटों में&nbsp; वह क्रेडिट प्राप्त कर सकते हैं। एक मंच के रूप में</span>, Arya.ag <span>बीएनपीएल सेवाओं की पेशकश करने वाले कई प्लेयर को एक साथ ला रहा है और इन वित्तीय समाधानों को वेयरहाउस किराया</span>, <span>ऋण चुकाने के एरिया में तक विस्तारित करने की योजना बना रहा है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">आर्य एजी के सीईओ प्रसन्ना राव ने बीएनपीएल के लॉन्च करते समय,<span> कहा कि हर क्षेत्र में हमेशा एक सरल और अभिनव वित्तीय समाधान की जरूरत होती है। बीएनपीएल</span>, <span>जो ज्यादातर खुदरा क्षेत्र में उपलब्ध है</span>, <span>अब कृषि वस्तुओं के बी </span>2<span>बी व्यापार में लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। बीएनपीएल सेवा के माध्यम से</span>&nbsp;आर्य एजी <span>वाणिज्य और बाजार लिंकेज लेनदेन में अधिक आसानी और विश्वास लाएगा । यह सर्विस आपूर्तिकर्ता के लिए भुगतान जोखिम को कम करेगा और खरीदार के विश्वास देगा</span>&nbsp;<span>जिससे किसानों</span>, <span>एफपीओ और इस प्लेटफार्म पर बेचने वाले छोटे कृषि व्यवसायों को लाभ होगा।</span></p>
<p style="text-align: justify;">यह 370<span> अरब डॉलर के&nbsp; कृषि कोडिटी बाजार में&nbsp; अपनी तरह की एक अनूठी सेवा है। व्यापार वित्तपोषण पहले से ही कृषि व्यवसाय सुरक्षित तरीके से होता है</span>; <span>हालांकिृ</span>&nbsp;<span>यह असुरक्षित वित्त के लिए पहली बार है। </span>वित्तीय समाधानों की मांग कमोडिटी बाजार का केंद्र बिंदू है और बीएनपीएल के अगले 6 <span>से </span>12 <span>महीनों में &nbsp;अच्छे वॉल्यूम के साथ संचालन करने होने &nbsp;उम्मीद है। यह सेवा पूरे देश में आर्य एजी </span>&nbsp;<span>प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत सभी विक्रेताओं और खरीदारों के लिए उपलब्ध है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/11/image_750x500_618d1ed88712f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आर्या  ने कमोडिटी खरीद के लिए बीएनपीएल सेवा शुरू की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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