<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" ?>
<rss version="2.0" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/">
<channel>
    <title>Farmer News: Government Schemes for Farmers, Successful Farmer Stories &#45; : Agribusiness</title>
    <link>https://www.ruralvoice.in/</link>
	<atom:link href="https://www.ruralvoice.in/agribusiness.xml" rel="self" type="application/rss+xml" />
    <description>Farmer News: Government Schemes for Farmers, Successful Farmer Stories &amp;#45; : Agribusiness</description>
    <dc:language>hi-in</dc:language>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
    

    <item>
        <title><![CDATA[2030 तक पॉपकॉर्न मक्का उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर भारत, उत्पादन बढ़ाने में मिली कामयाबी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-on-track-to-achieve-self-sufficiency-in-popcorn-maize-production-by-2030-success-in-increasing-production.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 27 Mar 2026 18:56:05 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-on-track-to-achieve-self-sufficiency-in-popcorn-maize-production-by-2030-success-in-increasing-production.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत वर्ष 2030 तक पॉपकॉर्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की राह पर है। एक दशक पहले तक भारत पॉपकॉर्न मक्का के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर था, क्योंकि घरेलू उत्पादन बहुत कम था। लेकिन देश में मक्का की उन्नत किस्मों के विकास और निजी कंपनी व किसानों की भागीदारी से इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है।</p>
<p>कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक <strong>डॉ. एम. एल. जाट</strong> ने बताया कि भारत का पॉपकॉर्न मक्का बाजार 2014-15 के 50 हजार टन से बढ़कर 2025-26 में 1.30 लाख टन तक पहुंच गया है। वर्ष 2030 तक इसके करीब 1.80 लाख टन तक पहुंचने की संभावना है। वर्तमान में देश की लगभग 70 प्रतिशत मांग की पूर्ति घरेलू उत्पादन से हो रही है, जिससे आयात पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई है और किसानों के लिए आय के नए अवसर बने हैं।</p>
<p>डॉ. जाट के अनुसार, पॉपकॉर्न मक्का के घरेलू उत्पादन में वृद्धि के कारण आयात में आई गिरावट से 2025-26 में लगभग 810 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। देश में करीब 90,000 टन पॉपकॉर्न मक्का का उत्पादन इस उपलब्धि का संकेत है। यह बढ़ोतरी भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के विकास और अनुसंधान संस्थानों, निजी कंपनियों तथा किसानों के बीच मजबूत साझेदारी का परिणाम है।</p>
<p><strong>अनुसंधान और उद्योग की साझेदारी </strong></p>
<p>पॉपकॉर्न मक्का उत्पादन में आए बदलाव के पीछे आईसीएआर के लुधियाना स्थित <strong>भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (IIMR)</strong> और देश की प्रमुख पॉपकॉर्न कंपनी <strong>गॉरमेट पॉपकॉर्निका एलएलपी</strong> के बीच साझेदारी की अहम भूमिका रही है। इसके जरिए पॉपकॉर्न मक्का की किस्मों में सुधार, बुवाई क्षेत्र में विस्तार और वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर दिया गया।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69c6857e4fd12.jpg" alt="" width="557" height="443" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>आईसीएआर-आईआईएमआर द्वारा विकसित स्वदेशी हाइब्रिड किस्म <strong>LPCH 3</strong> को लेकर फरवरी 2021 में हुए समझौतों के बाद इन प्रयासों में तेजी आई। यह हाइब्रिड किस्म उच्च उपज, अच्छी पॉपिंग गुणवत्ता और प्रमुख कीट एवं रोगों के प्रति सहनशीलता के लिए जानी जाती है। बाद में, गॉरमेट पॉपकॉर्निका ने भारतीय और अमेरिकी पॉपकॉर्न के गुणों को मिलाकर नए हाइब्रिड विकसित किए, जिसका उद्देश्य उपज और गुणवत्ता को और बेहतर बनाना था।</p>
<p><strong>वैल्यू चेन का विस्तार</strong></p>
<p>गॉरमेट पॉपकॉर्निका देश में नौ राज्यों के 17,500 से अधिक किसानों के साथ काम कर रही है और 36,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में पॉपकॉर्न मक्का की खेती कराई जा रही है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, कृषि सहायता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए कंपनी ने एक संगठित और भरोसेमंद बाजार तैयार करने में मदद की है। इससे किसानों को बेहतर आय के अवसर मिल रहे हैं, वहीं प्रसंस्करण उद्योग और उपभोक्ताओं के लिए स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है।</p>
<p>मजबूत अनुसंधान और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए भारत न केवल अपनी घरेलू मांग पूरी करने के लिए तैयार है, बल्कि 2030 तक उच्च गुणवत्ता वाले पॉपकॉर्न मक्का का भरोसेमंद निर्यातक बनने की स्थिति में पहुंच सकता है।</p>
<p><strong>भावी संभावनाएं </strong></p>
<p>पॉपकॉर्न मक्का में कामयाबी की यह कहानी उदाहरण है कि कैसे फसल विविधीकरण, अनुसंधान और उद्योग की साझेदारी एक आयात-निर्भर उत्पाद को घरेलू मूल्य श्रृंखला में बदल सकती है। यह मॉडल किसानों की आय बढ़ाने, आयात पर निर्भरता घटाने और विशेष खाद्य आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने का उदाहरण बन रहा है।</p>
<p>भारत की पॉपकॉर्न मक्का पर आयात निर्भरता एक दशक पहले शत-प्रतिशत से घटकर आज लगभग 30 फीसदी रह गई है। यदि वर्तमान रुझान जारी रहते हैं, तो भारत 2030 तक अपनी लगभग 1.80 लाख टन की पूरी घरेलू मांग को खुद पूरा कर सकता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69c6854ee2005.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ 2030 तक पॉपकॉर्न मक्का उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर भारत, उत्पादन बढ़ाने में मिली कामयाबी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69c6854ee2005.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फरवरी में ही देश की 248 चीनी मिलों में पेराई बंद, गन्ना पैदावार में कमी का असर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/crushing-at-248-sugar-mills-across-the-country-closed-in-february-due-to-the-decline-in-sugarcane-production.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 28 Feb 2026 18:15:41 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/crushing-at-248-sugar-mills-across-the-country-closed-in-february-due-to-the-decline-in-sugarcane-production.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="194" data-end="420">देश के करोड़ों गन्ना किसानों की आजीविका जिस चीनी उद्योग पर निर्भर है, उसके सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। गन्ने की पैदावार और उत्पादन में गिरावट के चलते इस साल फरवरी में ही देश की 248 चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है। गन्ना पैदावार में गिरावट के कारण चीनी मिलों के लिए पर्याप्त आपूर्ति जुटाना मुश्किल हो गया है।&nbsp;</p>
<p data-start="422" data-end="714">नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रिज (एनएफसीएसएफ) की रिपोर्ट के अनुसार, चालू चीनी सीजन 2025-26 के दौरान देशभर में कुल 536 चीनी मिलों ने पेराई शुरू की थी। फरवरी के अंत तक इनमें से 248 चीनी मिलों ने पेराई कार्य बंद कर दिया है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 186 चीनी मिलों ने पेराई बंद की थी।</p>
<p data-start="716" data-end="825">गौरतलब है कि पिछले साल गन्ने की फसल पर रोगों के प्रकोप और मौसम की मार के चलते चीनी उत्पादन प्रभावित हुआ था।</p>
<p data-start="827" data-end="1112">एनएफसीएसएफ के आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी तक देश में कुल 246 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जो गत वर्ष की समान अवधि में हुए 220 लाख टन उत्पादन से 26 लाख टन अधिक है।</p>
<p data-start="827" data-end="1112">उद्योग सूत्रों से <strong>रूरल वॉयस</strong> को मिली जानकारी के मुताबिक इस साल चीनी मिलों के जल्द बंद होने के कारण सीजन के अंत तक कुल चीनी उत्पादन लगभग 290 लाख टन तक पहुंचने की संभावना भी काफी कम है।</p>
<p data-start="1114" data-end="1409">निजी चीनी मिलों के संगठन इस्मा ने वर्ष 2025-26 में कुल 324 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया है, जिसमें से करीब 31 लाख टन चीनी का डायवर्जन एथेनॉल उत्पादन के लिए होगा। इसके बाद नेट शुगर प्रोडक्शन 293 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 261 लाख टन नेट उत्पादन से करीब 12 प्रतिशत अधिक है। इस्मा ने सीजन की शुरुआत में 349 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया था।&nbsp;</p>
<p data-start="1411" data-end="1615">इस प्रकार, देश में करीब 283 लाख टन चीनी की घरेलू खपत और 7 लाख टन निर्यात कोटे के बाद चालू साल के उत्पादन के आधार पर सरप्लस स्टॉक नहीं बचेगा। चालू सीजन की शुरुआत में पिछले साल के बकाया लगभग 50 लाख टन के स्तर पर ही आगामी सीजन का ओपनिंग स्टॉक से होने का अनुमान है।</p>
<h3 data-start="1622" data-end="1652">यूपी में घटी गन्ना पैदावार</h3>
<p data-start="1654" data-end="1851">उत्तर प्रदेश में गन्ने की उपज शुरुआती अनुमानों से कम रही है। गन्ने की लोकप्रिय किस्म सीओ-0238 के रोगग्रस्त होने के बाद किसानों को समय पर वैकल्पिक किस्में नहीं मिल पाने से उत्पादन प्रभावित हुआ है।</p>
<p data-start="1853" data-end="1969">यूपी की चीनी मिलों ने 28 फरवरी तक 737 लाख टन गन्ने की पेराई की, जो पिछले साल की समान अवधि से करीब 30 लाख टन कम है।</p>
<p data-start="1971" data-end="2201">हालांकि, यूपी में चीनी की रिकवरी पिछले सीजन के 9.45 प्रतिशत की तुलना में इस साल बढ़कर 10.05 प्रतिशत रही है। 28 फरवरी तक प्रदेश में लगभग 74 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ, जो पिछले साल की समान अवधि में हुए 72 लाख टन से थोड़ा अधिक है।</p>
<p data-start="2203" data-end="2410">यूपी की 120 में से 18 चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है और कई मिलें मार्च के मध्य तक सीजन समाप्त करने की घोषणा कर सकती हैं। राज्य में कुल चीनी उत्पादन पिछले साल के बराबर लगभग 92 लाख टन रहने का अनुमान है।</p>
<h3 data-start="2417" data-end="2452">महाराष्ट्र और कर्नाटक की स्थिति</h3>
<p data-start="2454" data-end="2655">महाराष्ट्र और कर्नाटक के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में भी पैदावार शुरुआती अनुमानों से कम रही है। यह कमी रोग और मौसम की प्रतिकूलता, खासकर समय से पहले फूल आने (अर्ली फ्लावरिंग) के कारण देखी गई है।</p>
<p data-start="2657" data-end="2888">28 फरवरी तक महाराष्ट्र का चीनी उत्पादन 95 लाख टन तक पहुंचा है, जो पिछले साल इसी समय तक करीब 75 लाख टन था। महाराष्ट्र की 210 में से 130 चीनी मिलें पेराई बंद कर चुकी हैं। राज्य का कुल चीनी उत्पादन 106 लाख टन तक पहुंचने के आसार हैं।</p>
<p data-start="2890" data-end="3093">कर्नाटक में चीनी उत्पादन 44 लाख टन तक पहुंच चुका है, जो पिछले साल इसी अवधि में 38 लाख टन था। कर्नाटक की 81 में से 60 चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं। सीजन के अंत तक यहां 48 लाख टन चीनी उत्पादन की उम्मीद है।</p>
<h3 data-start="3100" data-end="3144">एथेनॉल और निर्यात के मोर्चे पर मुश्किलें</h3>
<p data-start="3146" data-end="3383">चीनी मिलों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में शुरू किए गए एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम में उनकी हिस्सेदारी घटती दिख रही है। इस्मा ने चालू सीजन में एथेनॉल उत्पादन के लिए शुगर डायवर्जन के अनुमान को 35 लाख टन से घटाकर 31 लाख टन कर दिया है।</p>
<p data-start="3385" data-end="3641">निर्यात के मोर्चे पर भी हालात अनुकूल नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम कम होने के कारण निर्यात चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। केंद्र सरकार ने 10 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन सीजन के अंत तक लगभग 7 लाख टन ही निर्यात हो पाने की उम्मीद है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x_69a2e55fc0f7f.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x500_69a2e522d4a80.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ फरवरी में ही देश की 248 चीनी मिलों में पेराई बंद, गन्ना पैदावार में कमी का असर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x500_69a2e522d4a80.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इंडियन पोटाश लिमिटेड को कांडला और विशाखापत्तनम बंदरगाहों पर सम्मान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/indian-potash-limited-wins-accolades-at-kandla-and-vizag-ports.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Feb 2026 18:16:43 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/indian-potash-limited-wins-accolades-at-kandla-and-vizag-ports.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उर्वरक क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) को अंतरराष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस 2026 के अवसर पर कांडला बंदरगाह और विशाखापत्तनम बंदरगाह पर उत्कृष्ट आयात प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया है।</p>
<p>आईपीएल को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए गुजरात के कांडला बंदरगाह पर &lsquo;टॉप इम्पोर्टर&rsquo; का पुरस्कार प्रदान किया गया।</p>
<p>साथ ही, आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम बंदरगाह पर वर्ष 2025 में &lsquo;इम्पोर्टर (पीएसयू)&rsquo; श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले संगठनों में शामिल होने पर भारत सरकार के सीमा शुल्क विभाग द्वारा प्रशंसा प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।</p>
<p>&lsquo;टॉप इम्पोर्टर&rsquo; पुरस्कार 15 फरवरी 2026 को गांधिधाम स्थित इफको ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। यह पुरस्कार कांडला के सीमा शुल्क आयुक्त नितिन सैनी ने मुख्य अतिथि पद्मश्री सम्मानित नारायण जोशी (कच्छ) की उपस्थिति में प्रदान किया।</p>
<p>आईपीएल की ओर से गुजरात (कच्छ) के सेल्स ऑफिसर श्री जतिन शाह ने यह पुरस्कार प्राप्त किया।</p>
<p>विशाखापत्तनम में आईपीएल को प्राप्त प्रशंसा प्रमाण पत्र पीएसयू क्षेत्र में सर्वाधिक आयात करने वाले संगठनों में शामिल होने की मान्यता है। यह समारोह 16 फरवरी 2026 को सागरमाला कन्वेंशन हॉल, सालाग्रामपुरम में आयोजित हुआ।</p>
<p>इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. शंखब्रत बागची, आईपीएस, पुलिस आयुक्त, विशाखापत्तनम ने प्रमाण पत्र प्रदान किया। आईपीएल की ओर से पोर्ट ऑपरेशंस की डिप्टी मैनेजर सुश्री अप्तकामा सारंगी ने इसे प्राप्त किया।</p>
<p>ये सम्मान आईपीएल की कार्यकुशलता, नियमों के अनुपालन और पारदर्शी व्यापार पद्धतियों के प्रति उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। ये पुरस्कार इस बात का प्रमाण हैं कि कंपनी बड़े स्तर पर आयात कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने में सक्षम है तथा उच्च प्रशासनिक मानकों का पालन करती है।</p>
<p>इस सम्मान पर प्रतिक्रिया देते हुए आईपीएल के प्रबंध निदेशक डॉ. पी.एस. गहलौत ने कहा: &ldquo;ये सम्मान हमारे आयात कार्यों में उत्कृष्टता, नियमों के अनुपालन और विश्वसनीयता पर हमारे मजबूत फोकस को दर्शाते हैं। यह देशभर के बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स केंद्रों पर कार्यरत हमारी टीम के समर्पण और मेहनत का परिणाम है। हम पारदर्शी व्यापार पद्धतियों को सुदृढ़ करने और भारत की कृषि आपूर्ति श्रृंखला को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।&rdquo;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x500_6995b4aadd2d4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इंडियन पोटाश लिमिटेड को कांडला और विशाखापत्तनम बंदरगाहों पर सम्मान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x500_6995b4aadd2d4.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन गुजरात में ग्रीनफील्ड फॉर्मुलेशन प्लांट स्थापित करेगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/crystal-crop-protection-announces-investment-with-greenfield-formulation-plant-in-gujarat- .html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Feb 2026 12:16:11 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/crystal-crop-protection-announces-investment-with-greenfield-formulation-plant-in-gujarat- .html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एग्रोकेमिकल कंपनी क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड ने गुजरात के झगड़िया (भरूच) में एक नया अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने की घोषणा की है। यह कदम कंपनी की विनिर्माण क्षमताओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।</p>
<p>इसके तहत कंपनी ने कर्ल-ऑन लिमिटेड से 1,25,714 वर्ग मीटर से अधिक भूमि और संपत्तियों का अधिग्रहण किया है। यह निवेश एक पूरी तरह स्वचालित, विश्वस्तरीय और एकीकृत विनिर्माण इकाई की स्थापना के लिए किया जा रहा है। यहां कृषि रसायनों के फॉर्मुलेशन और तकनीकी उत्पादों का निर्माण किया जाएगा।</p>
<p>इस ग्रीनफील्ड परियोजना में तीन वर्षों में कुल 100 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। संयंत्र की प्रारंभिक उत्पादन क्षमता 50,000 टन प्रति वर्ष होगी। भविष्य में मांग के अनुसार इसे बढ़ाकर 1,20,000 टन प्रति वर्ष तक किया जा सकेगा।</p>
<p>यह संयंत्र शाकनाशी, कवकनाशी और कीटनाशी सहित विभिन्न कृषि रसायन उत्पादों का निर्माण करेगा। ये उत्पाद भारतीय बाजार के साथ-साथ एशिया और अफ्रीका के निर्यात बाजारों की आवश्यकताओं को पूरा करेंगे। यहां क्रिस्टल के प्रमुख उत्पाद जैसे टॉपर, टिल्ट, प्रो-क्लेम, मिसाइल, एसीएम-9, अमोरा और सिकोसा आदि का उत्पादन किया जाएगा।</p>
<p>इस अवसर पर क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन के कार्यकारी चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अंकुर अग्रवाल ने कहा, &ldquo;क्रिस्टल में हमारा उद्देश्य हमेशा किसानों और ग्राहकों को उच्च गुणवत्ता वाले, भरोसेमंद और नवोन्मेषी उत्पाद उपलब्ध कराना रहा है। गुजरात के झगड़िया में बनने वाला यह विश्वस्तरीय संयंत्र हमारी इसी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। यह कंपनी के लिए एक नया और उत्साहजनक अध्याय है, जो हमें वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार बनाएगा।&rdquo;</p>
<p>कंपनी ने संयंत्र के लिए गुजरात को इसलिए चुना, क्योंकि यहां लागत-प्रभावी संचालन, स्पष्ट नियामक ढांचा, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और भविष्य में विस्तार की बेहतर संभावनाएं उपलब्ध हैं। इससे कंपनी को संचालन और अनुपालन के साथ-साथ दीर्घकालिक मूल्य सृजन में भी लाभ मिलेगा।</p>
<p>कंपनी के पूर्णकालिक निदेशक एवं उपाध्यक्ष (तकनीकी विनिर्माण) कवेश्वर कलांबे&nbsp;ने कहा, &ldquo;हमें क्षेत्र के आर्थिक विकास में योगदान देने पर गर्व है। झगड़िया में बनने वाला यह संयंत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के कई अवसर पैदा करेगा। यह संयंत्र इंडस्ट्री 4.0 तकनीक पर आधारित होगा और भविष्य में इंडस्ट्री 5.0 के अनुरूप विस्तार के लिए भी सक्षम रहेगा।&rdquo;</p>
<p>गुजरात पहले से ही रसायन निर्माण और निर्यात का एक प्रमुख केंद्र है। यहां उत्कृष्ट बुनियादी ढांचा, सुविधाएं और बंदरगाह कनेक्टिविटी उपलब्ध है। झगड़िया में स्थित यह संयंत्र दहेज, हजीरा और जेएनपीटी जैसे प्रमुख बंदरगाहों के निकट होने के कारण क्रिस्टल की निर्यात क्षमताओं को और मजबूत करेगा।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x500_698ec8aa04d6c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन गुजरात में ग्रीनफील्ड फॉर्मुलेशन प्लांट स्थापित करेगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x500_698ec8aa04d6c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वैश्विक खाद्य तेल बाजार संरचनात्मक अस्थिरता के चरण में: आईवीपीए अध्यक्ष]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/global-edible-oil-markets-enter-structurally-volatile-phase-says-ivpa-president.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 09 Feb 2026 17:00:58 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/global-edible-oil-markets-enter-structurally-volatile-phase-says-ivpa-president.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वैश्विक खाद्य तेल बाज़ार व्यापारिक पुनर्गठन, बायोफ्यूल अनिवार्यताओं और आपूर्ति की में कमी के कारण संरचनात्मक अस्थिरता के एक चरण में प्रवेश कर चुके हैं। यह बात इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईवीपीए) के अध्यक्ष एवं एमामी एग्रोटेक लिमिटेड के सीईओ सुधाकर देसाई ने कुआलालंपुर में आयोजित 'UOB काय हियान कॉन्फ्रेंस' को संबोधित करते हुए कही।</p>
<p>&ldquo;वैश्विक खाद्य तेलों में संरचनात्मक बदलाव: भारत के लिए निहितार्थ&rdquo; विषय पर बोलते हुए<strong>&nbsp;</strong>देसाई ने कहा कि भू-राजनीतिक बदलाव ने वैश्विक कारोबार के साझेदारों को बदल दिया है, जिससे आर्बिट्राज के अवसर कम हो गए हैं और ऊर्जा की कीमतों, मुद्रा के उतार-चढ़ाव और नीतिगत झटकों का असर खाद्य तेल बाजारों पर अधिक बढ़ गया है। ड्यूटी या व्यापार प्रवाह में छोटे बदलाव भी अब पूरी सप्लाई चेन में कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव पैदा कर रहे हैं।"</p>
<p>वैश्विक और घरेलू परिदृश्य वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए&nbsp; देसाई ने कहा कि 2025-26 में चार प्रमुख वनस्पति तेलों का उत्पादन 208.4 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में केवल मामूली वृद्धि है। जहां पाम और रेपसीड तेल का उत्पादन बढ़ रहा है, वहीं सूरजमुखी तेल का उत्पादन सीमित बना हुआ है।</p>
<p>बायोफ्यूल मैंडेट एक प्रमुख कारक बनकर उभरा है। अकेले इंडोनेशिया का बायोडीजल कार्यक्रम लगभग 14 मिलियन टन पाम तेल की खपत करता है, जबकि अमेरिकी बायोफ्यूल नीतियां सोयाबीन तेल की कीमतों को प्रभावित कर रही हैं।</p>
<p>देसाई&nbsp;ने कहा, "खाद्य तेल अब शुद्ध खाद्य वस्तुओं के बजाय ऊर्जा से जुड़े रणनीतिक इनपुट के रूप में कार्य कर रहे हैं, जिससे कीमतों का आधार (price floor) बढ़ गया है।"</p>
<p>भारत के संदर्भ में देसाई ने बताया कि खाद्य तेल वर्ष 2025-26 (अक्टूबर&ndash;सितंबर) में घरेलू उत्पादन 9.6 मिलियन टन अनुमानित है, जो भारत की जरूरतों का केवल 40 प्रतिशत है। इससे लगभग 16.7 मिलियन टन आयात पर भारत की निर्भरता बनी रहेगी। इस आयात में 8&ndash;8.5 मिलियन टन पाम तेल, 5&ndash;5.5 मिलियन टन सोयाबीन तेल, 2.8&ndash;3 मिलियन टन सूरजमुखी तेल और लगभग 200,000 टन अन्य तेल शामिल होने की उम्मीद है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पाम तेल का आयात 2021-22 के 10 मिलियन टन से घटकर लगभग 8 मिलियन टन रह गया है, क्योंकि सोयाबीन और सूरजमुखी तेल से मिल रही प्रतिस्पर्धा ने बाजार की हिस्सेदारी बदल दी है।</p>
<p>भारत के बारे में चर्चा करते हुए देसाई ने कहा कि तेल वर्ष 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) में घरेलू खाद्य तेल उत्पादन 9.6 मिलियन टन होने का अनुमान है, जो भारतीय जरूरतों का केवल 40 प्रतिशत ही पूरा करता है। यह लगभग 16.7 मिलियन टन आयात पर भारत की संरचनात्मक निर्भरता को और पुख्ता करता है। आयात में 8&ndash;8.5 मिलियन टन पाम तेल, 5&ndash;5.5 मिलियन टन सोयाबीन तेल, 2.8&ndash;3 मिलियन टन सूरजमुखी तेल और लगभग 200,000 टन अन्य तेल शामिल होने की उम्मीद है, जिसमें नेपाल के रास्ते आने वाला शून्य-शुल्क आयात भी शामिल है।</p>
<p>भारत का आयात बास्केट तेलों के बीच मूल्य अंतर, विशेषकर पाम और सोयाबीन तेल के बीच, के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। उन्होंने कहा, "कीमतों के अंतर में 50&ndash;60 अमेरिकी डॉलर प्रति टन का बदलाव भी बड़े पैमाने पर मात्रा (वॉल्यूम) को एक तेल से दूसरे तेल में स्थानांतरित करने के लिए पर्याप्त है।" पाम तेल का आयात 2021-22 के 10 मिलियन टन से गिरकर लगभग 8 मिलियन टन रह गया है, क्योंकि सोयाबीन और सूरजमुखी तेल से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा ने बाजार हिस्सेदारी के समीकरण बदल दिए हैं। उन्होंने आगे कहा कि रिफाइनिंग मार्जिन दबाव में बना हुआ है, जिससे मांग की गति सीमित हो रही है।</p>
<p>व्यापार नीति पर<strong>&nbsp;</strong>देसाई ने कहा कि अमेरिका, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, यूएई और साफ्टा (SAFTA) सदस्यों जैसे भागीदारों के साथ हाल ही में किए गए मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) और द्विपक्षीय व्यवस्थाएं अब बाजार मूल्य निर्धारण और सोर्सिंग निर्णयों का अभिन्न हिस्सा बन गई हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, "ये समझौते अब सीधे तौर पर लैंडेड कॉस्ट स्ट्रक्चर, आर्बिट्राज फ्लो और रिफाइनिंग इकोनॉमिक्स को प्रभावित करते हैं।" उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अमेरिकी सोयाबीन तेल के लिए संभावित टैरिफ रियायतों या कोटा तंत्र पर अधिक विवरण मिलने से बाजार में और स्पष्टता आएगी।</p>
<p>अपना मूल्य दृष्टिकोण साझा करते हुए, देसाई ने मलेशिया का पाम तेल उत्पादन 19.9 मिलियन टन (पिछले वर्ष 20.2 मिलियन टन) और इंडोनेशिया का 51.8 मिलियन टन (पिछले वर्ष 51.2 मिलियन टन) रहने का अनुमान लगाया, क्योंकि दोनों देशों में पुनर्रोपण (replanting) की प्रगति धीमी है। निकट अवधि में आपूर्ति की तंगी मार्च 2026 तक कीमतों को समर्थन दे सकती है। हालांकि, सोयाबीन तेल पर बने रहने वाले प्रीमियम के कारण भारत में पाम और सूरजमुखी तेल की खपत सीमित रहने की संभावना है।</p>
<p>उन्हें उम्मीद है कि BMD (बुर्सा मलेशिया डेरिवेटिव्स) की कीमतें एक सीमित दायरे में रहेंगी लेकिन नीति-संचालित होंगी। अप्रैल-जून के दौरान व्यापार <strong>4,000&ndash;4,400</strong> की सीमा में और जुलाई-सितंबर में <strong>4,200&ndash;4,600</strong> की सीमा में रहने का अनुमान है। सूरजमुखी तेल की कीमतें अगले उत्पादन चक्र तक ऊंची रहने की संभावना है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि ऐसे बाजार में जो पारंपरिक आपूर्ति चक्रों के बजाय नीतिगत झटकों से अधिक संचालित है, उपभोक्ताओं तक कीमतों के अनचाहे हस्तांतरण को रोकने के लिए स्थिर और पूर्वानुमानित शुल्क ढांचा महत्वपूर्ण है। उन्होंने खाद्य तेल मूल्य श्रृंखला में संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए नीति निर्माताओं और वैश्विक हितधारकों के साथ आईवीपीए के निरंतर जुड़ाव को दोहराया।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68f3a3c705e5e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ वैश्विक खाद्य तेल बाजार संरचनात्मक अस्थिरता के चरण में: आईवीपीए अध्यक्ष ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68f3a3c705e5e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोनालीका ने दिसंबर में 12,392 ट्रैक्टरों की बिक्री के साथ शानदार प्रदर्शन दर्ज किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sonalika-records-strong-performance-with-sales-of-12392-tractors-in-december.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 03 Jan 2026 16:16:53 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sonalika-records-strong-performance-with-sales-of-12392-tractors-in-december.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के प्रमुख ट्रैक्टर ब्रांड सोनालीका ट्रैक्टर्स ने वर्ष 2025 का शानदार समापन करते हुए दिसंबर में अब तक की सर्वाधिक कुल <strong>12,392 ट्रैक्टरों</strong> की बिक्री दर्ज की है। रबी की अच्छी बुवाई, किसानों के मजबूत मनोबल और हैवी-ड्यूटी ट्रैक्टरों पर निरंतर फोकस के चलते कंपनी ने ट्रैक्टर बाजार में अपनी स्थिति मजबूत की है।</p>
<p>कंपनी के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए <strong>रमन मित्तल, </strong>जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर, इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड, ने कहा,<br />&ldquo;दिसंबर में 12,392 ट्रैक्टरों की रिकॉर्ड बिक्री हमारे हैवी-ड्यूटी ट्रैक्टरों की मजबूत क्षमता और निरंतर फोकस को दर्शाती है। किसानों का मनोबल लगातार बढ़ा हुआ है। पिछले वर्ष की तुलना में रबी की बुवाई का क्षेत्र बढ़ा है, जो आशाजनक है। 2026 में हम कृषि मशीनीकरण को गति देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।&rdquo;</p>
<p>मित्तल का कहना है कि&nbsp;पिछले कई वर्षों में सोनालीका ने किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हैवी-ड्यूटी ट्रैक्टरों का विकास किया है। होशियारपुर स्थित कंपनी का प्लांट और उसका व्यापक चैनल पार्टनर नेटवर्क उन्नत ट्रैक्टरों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करता है, जिससे किसानों के खेतों में कार्यक्षमता लगातार बढ़ रही है।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_6958f22cb14cb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोनालीका ने दिसंबर में 12,392 ट्रैक्टरों की बिक्री के साथ शानदार प्रदर्शन दर्ज किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_6958f22cb14cb.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ड्यूटी&amp;#45;फ्री कपास आयात की समय&amp;#45;सीमा खत्म, 1 जनवरी से 11 प्रतिशत शुल्क लागू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/deadline-for-duty-free-cotton-imports-ends-11-pc-duty-applicable-from-january-1.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 02 Jan 2026 14:06:17 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/deadline-for-duty-free-cotton-imports-ends-11-pc-duty-applicable-from-january-1.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ड्यूटी-फ्री कपास आयात की समय-सीमा बुधवार को समाप्त हो गई, <span>लेकिन इसे आगे बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार की ओर से कोई नई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। ऐसे में </span>1 <span>जनवरी से कपास के आयात पर फिर से </span>11 <span>प्रतिशत सीमा शुल्क लागू हो गया है।</span></p>
<p><span>कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर <strong>ललित कुमार गुप्ता</strong> ने <em>रूरल वॉयस</em> को बताया कि 1 जनवरी, 2026 से कॉटन आयात पर 10 फीसदी सीमा शुल्क और एक फीसदी उपकर समेत कुल 11 फीसदी का सीमा शुल्क लागू हो गया है। आर्थिक रूप से कमजोर देश (लिस्ट डेवलप्ड कंट्रीज) से आयात पर 5.5 फीसदी का कुल सीमा लागू है। इनमें कुछ अफ्रीकी देश आते हैं।</span></p>
<p><span>&nbsp;इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सीसीआई द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कॉटन की खरीद जारी है और एक जनवरी, 2026 तक सीसीआई ने 65 लाख गांठ (170 किलोग्राम) कॉटन की खरीद की है।&nbsp; उन्होंने बताया कि तय गुणवत्ता की कॉटन मिलने तक सीसीआई की खरीद जारी रहेगी।&nbsp;</span><span></span></p>
<p>इससे कपास उगाने वाले किसानों को राहत मिलेगी, <span>हालांकि टेक्सटाइल उद्योग की ओर से ड्यूटी-फ्री आयात की समय-सीमा आगे बढ़ाने की कोशिशें की जा रही थीं। उद्योग जगत को आशंका है कि शुल्क लागू होने से आयात महंगा होगा</span>, <span>हालांकि इससे घरेलू बाजार में कपास की कीमतों को सहारा मिल सकता है।</span></p>
<p>अगस्त 2025 <span>में एक अधिसूचना जारी कर केंद्र सरकार ने 30 सितंबर तक के लिए&nbsp; कपास आयात पर लागू 11 फीसदी सीमा शुल्क समाप्त कर दिया था</span>, <span>जिसे बाद में दिसंबर के अंत तक बढ़ाया गया। इस छूट का मकसद घरेलू आपूर्ति बढ़ाना और उन टेक्सटाइल इकाइयों को राहत देना था</span>, <span>जो अमेरिका द्वारा लगाए गए </span>50 <span>प्रतिशत टैरिफ के कारण दबाव में थीं।</span></p>
<p>टेक्सटाइल मिलों की चिंता की बड़ी वजह कपास की घटती उपलब्धता है। इस साल कपास की आवक पिछले साल की तुलना में कम से कम 60 <span>लाख गांठ (प्रति गांठ </span>170 <span>किलो) कम है। इसके साथ ही</span>, <span>इस वर्ष कुल उत्पादन भी </span>300 <span>लाख गांठ से नीचे रहने का अनुमान है। </span></p>
<p>उद्योग का तर्क है कि सीमित घरेलू आपूर्ति और बढ़ती लागत के बीच शुल्क दोबारा लागू होने से स्पिनिंग और टेक्सटाइल इकाइयों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। यदि ड्यूटी-फ्री आयात को लेकर कोई नई अधिसूचना जारी नहीं होती है, <span>तो आयातित कपास महंगी होगी</span>, <span>जिससे घरेलू कीमतों में मजबूती आ सकती है</span>, <span>लेकिन कपड़ा उद्योग के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ेगी। </span></p>
<p>पिछले कुछ महीनों में ड्यूटी-फ्री आयात के चलते चलते विदेशी कपास भारतीय बाजार में अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर पहुंच रही थी। इससे कपड़ा उद्योग को कच्चा माल आसानी से मिल रहा था, <span>लेकिन घरेलू किसानों को कीमतों के दबाव का सामना करना पड़ा। अब छूट खत्म होने के बाद स्थिति बदल सकती है।</span></p>
<p>ड्यूटी-फ्री आयात के चलते किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दाम पर कपास बेचने को मजबूर हैं। बाजार में कपास की कीमतें 7,500 <span>से</span> 7,700 <span>रुपये प्रति क्विंटल के बीच बनी हुई हैं</span>, <span>जबकि सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य </span>(MSP) 8,110 <span>रुपये प्रति क्विंटल है। इससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। किसान संगठनों की ओर से कपास आयात पर शुल्क दोबारा लागू करने की मांग की जा रही थी। </span></p>
<p><strong>क्यों हटाई गई थी आयात ड्यूटी</strong></p>
<p>अगस्त 2025 <span>में अंतरराष्ट्रीय व्यापार तनाव</span>, <span>खासकर अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद के बीच भारत ने कपास आयात पर लगने वाला </span>11 <span>प्रतिशत शुल्क हटा दिया था। इसका मकसद घरेलू उद्योग को राहत देना और कच्चे माल की कमी को पूरा करना था। अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति के आंकड़ों के अनुसार</span>, <span>सितंबर के मध्य तक भारत करीब </span>36 <span>लाख गांठ कपास का आयात कर चुका था</span>, <span>जिसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी ब्राजील की थी। इसके बाद अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का स्थान रहा। दिसंबर के अंत तक करीब 50 लाख गांठ कॉटन का आयात होने का अनुमान उद्योग ने लगाया था।&nbsp;</span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_695782bc19899.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ड्यूटी-फ्री कपास आयात की समय-सीमा खत्म, 1 जनवरी से 11 प्रतिशत शुल्क लागू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_695782bc19899.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान दिवस पर धानुका एग्रीटेक ने की पलवल जिले को गोद लेने की घोषणा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/on-farmers-day-dhanuka-agritech-adopted-palwal-district-at-dart.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 23 Dec 2025 20:15:09 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/on-farmers-day-dhanuka-agritech-adopted-palwal-district-at-dart.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>धानुका एग्रीटेक लिमिटेड ने किसान दिवस के अवसर पर पलवल स्थित सेंटर धानुका एग्रीटेक रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी (DART), पलवल में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें पूरे पलवल ज़िले को गोद लेने की घोषणा की गई। इस अवसर ने सतत कृषि, अनुसंधान-आधारित नवाचार और तकनीक-संचालित समाधानों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने के प्रति धानुका एग्रीटेक की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य पलवल को एक आदर्श कृषि ज़िला बनाना है।</p>
<p>कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. पी. के. सिंह, कृषि आयुक्त, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, डॉ. हरीश वशिष्ठ, उपायुक्त, पलवल, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के चेयरमैन एमेरिटस, डॉ. आर. जी. अग्रवाल भी मंच पर उपस्थित थे। उनके साथ अन्य प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों में डॉ. साईं दास, पूर्व निदेशक, ICAR-IIMR; डॉ. पी. के. चक्रवर्ती, पूर्व सदस्य, ASRB; तथा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।</p>
<p>इस मौके पर धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के चेयरमैन एमेरिटस डॉ. आर. जी. अग्रवाल ने बताया कि धानुका ने पलवल ज़िले को गोद लिया है और इसे एक आदर्श कृषि ज़िला बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि पलवल ज़िले के सिहोल गाँव में स्थित धानुका के आरएंडडी केंद्र के माध्यम से किसानों तक सही जानकारी और आधुनिक तकनीक पहुँचाकर सभी तरह की जानकारी और तकनीकी कमियों को दूर किया जाएगा। उन्होंने किसानों के कल्याण के प्रति धानुका एग्रीटेक लिमिटेड की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि नवाचार, शिक्षा और टिकाऊ फसल संरक्षण समाधान किसानों की आय बढ़ाने और दीर्घकालीन खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहद ज़रूरी हैं।</p>
<p>सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने अच्छी कृषि पद्धतियों को अपनाने, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया, ताकि मिट्टी और पर्यावरण की सेहत बनाए रखते हुए खेती की उत्पादकता बढ़ाई जा सके। डॉ. पी. के. सिंह, कृषि आयुक्त, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने किसानों को उभरती कृषि चुनौतियों से निपटने के लिए शोध-आधारित समाधानों से अपडेट रहने की आवश्यकता पर बल दिया।<br />पलवल के उपायुक्त&nbsp;डॉ. हरीश वशिष्ठ ने जमीनी स्तर पर किसान जागरूकता बढ़ाने और सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में धानुका एग्रीटेक की भूमिका की सराहना की। उन्होंने ग्रामीण विकास के लिए अनुसंधान संस्थानों, प्रशासन और किसानों के बीच सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला और किसानों से इनपुट व आउटपुट दोनों स्तरों पर बेहतर सौदेबाज़ी शक्ति के लिए किसान उत्पादक संगठन (FPO) बनाने का आग्रह किया।</p>
<p>कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें क्षेत्र के विभिन्न गांवों के सरपंच, प्रगतिशील किसान, विभिन्न किसान यूनियनों के अध्यक्ष और बड़ी संख्या में किसान समुदाय के सदस्य शामिल थे।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों के साथ समेकित कीट प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य में सुधार, आधुनिक फसल सुरक्षा तकनीकों और सतत कृषि विधियों जैसे विषयों पर संवाद किया। कार्यक्रम का समापन एक इंटरैक्टिव सत्र के साथ हुआ, जिसने अनुसंधान, तकनीक और ज्ञान-साझाकरण के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने के प्रति धानुका एग्रीटेक की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_694aaae94d806.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान दिवस पर धानुका एग्रीटेक ने की पलवल जिले को गोद लेने की घोषणा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_694aaae94d806.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मदर डेयरी के एमडी मनीष बंदलिश का इस्तीफा, 30 नवंबर को समाप्त होगा कार्यकाल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mother-dairy-md-manish-bandlish-resigns-term-ends-on-november-30.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 28 Nov 2025 17:11:47 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mother-dairy-md-manish-bandlish-resigns-term-ends-on-november-30.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक (MD) मनीष बंदलिश ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका कार्यकाल 30 नवंबर को समाप्त हो जाएगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बंदलिश ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पद छोड़ने का निर्णय लिया है। उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू माना जा रहा है।&nbsp;</p>
<p>हालांकि, अभी तक मदर डेयरी की तरफ से इस बारे में कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की गई है। कंपनी ने अभी तक नए एमडी के नाम की घोषणा भी नहीं की है। लेकिन मदर डेयरी से जुड़े सूत्रों ने प्रबंधन निदेशक के इस्तीफे की बात स्वीकार की है।&nbsp;</p>
<p>फिलहाल मदर डेयरी के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर को एमडी की जिम्मेदारियां दी गई है। यह अंतरिम व्यवस्था कंपनी के संचालन को सुचारू रखने के लिए की गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही नए एमडी की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।</p>
<p>मनीष बंदलिश मार्च, 2021 से मदर डेयरी का नेतृत्व कर रहे थे और कंपनी के कारोबार विस्तार में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में मदर डेयरी ने दिल्ली-एनसीआर के बाहर अपनी उपस्थिति बढ़ाई और धारा ब्रांड के तहत खाद्य तेल तथा सफल ब्रांड के तहत फल-सब्जी व्यवसाय को मजबूत किया।&nbsp;</p>
<p>बंदलिश के इस्तीफे के बाद मदर डेयरी में नए प्रबंध निदेशक की नियुक्ति को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। उद्योग के जानकारों का कहना है कि नए नेतृत्व का चयन कंपनी की रणनीति और भविष्य की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होगा।</p>
<p>नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) की सहायक कंपनी, मदर डेयरी, देश की प्रमुख डेयरी कंपनियों में से एक है, जिसका कारोबार 17000 करोड़ रुपये से अधिक का है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_69298a8f330b2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मदर डेयरी के एमडी मनीष बंदलिश का इस्तीफा, 30 नवंबर को समाप्त होगा कार्यकाल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_69298a8f330b2.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देरी के बावजूद चीनी सीजन 2025&amp;#45;26 की मजबूत शुरुआत, 325 मिलों में पेराई शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/despite-delays-sugar-season-2025-26-gets-off-to-a-strong-start-with-crushing-commencing-at-325-mills.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 17 Nov 2025 17:39:47 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/despite-delays-sugar-season-2025-26-gets-off-to-a-strong-start-with-crushing-commencing-at-325-mills.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू चीनी पेराई वर्ष 2025-26 <span>की शुरुआत में देरी के बावजूद सीजन का आगाज मजबूती के साथ हुआ है। आमतौर पर गन्ना सीजन की शुरुआत मानसून की विदाई के बाद 1 अक्टूबर से मानी जाती है। लेकिन इस बार गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में अक्टूबर-नवंबर तक बारिश हुई</span>, <span>जिसके चलते गन्ना कटाई देर से शुरू हुई। </span></p>
<p>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) <span>की ओर से जारी पहले पखवाड़े की रिपोर्ट के अनुसार</span>, <span>चालू सीजन में </span>325 <span>मिलों ने पेराई शुरू कर दी है</span>, <span>जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान </span>144 <span>मिलें शुरू हुई थीं।</span>&nbsp;</p>
<p>चालू सीजन में अब तक 128 <span>लाख टन गन्ने की पेराई हुई है जबकि पिछले साल इस अवधि तक </span>91 <span>लाख टन गन्ने की पेराई हुई थी। चीनी उत्पादन </span>10.50 <span>लाख टन हो चुका है जो पिछले साल समान अवधि में </span>7.10 <span>लाख टन था। औसत चीनी रिकवरी दर भी पिछले साल के </span>7.8 <span>फीसदी की तुलना में इस बार </span>8.2 <span>फीसदी है।</span></p>
<p>बेमौसम बरसात से जहां खरीफ की तैयार फसलों को नुकसान पहुंचा, <span>वहीं गन्ने का वजन बढ़ने का अनुमान है। लेकिन खेतों में पानी भरा होने की वजह से गन्ना सीजन की शुरुआत देरी से हुई। महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की कीमतों को लेकर चल रहे किसानों के आंदोलन ने भी पेराई की गति को और प्रभावित किया है। पिछले साल महाराष्ट्र में चुनावों के कारण</span>, <span>सत्र नवंबर के अंत में शुरू हुआ था। इन सबके बावजूद चालू सीजन की स्थिति फिलहाल बेहतर नजर आ रही है।</span></p>
<p><strong>उत्पादन और निर्यात</strong></p>
<p>नए पेराई सत्र में देरी से शुरुआत के बावजूद, <span>शुगर फेडरेशन वर्ष </span>2025-26 <span>के लिए </span>350 <span>लाख टन सकल चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया है। महाराष्ट्र में (</span>125 <span>लाख टन</span>), <span>उत्तर प्रदेश में (</span>110 <span>लाख</span>), <span>और कर्नाटक में (</span>70 <span>लाख टन</span>) <span>चीनी उत्पादन की उम्मीद है। </span></p>
<p>इथेनॉल उत्पादन के लिए अनुमानित 35 <span>लाख शुगर डायवर्जन और लगभग </span>290 <span>लाख टन की घरेलू खपत के बाद</span>,<span> इस सीजन में </span>20-25 <span>लाख टन चीनी का सरप्लस रहेगा होगा। सरकार ने जनवरी और अप्रैल </span>2026 <span>के बीच </span>15 <span>लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी है। फेडरेशन ने उम्मीद जताई कि चालू सीजन में आगे चलकर </span>10 <span>लाख टन चीनी निर्यात की मंजूरी दी जा सकती है।</span>&nbsp;</p>
<p>फेडरेशन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार समय रहते 10 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देती है तो इससे चीनी मिलों को राहत मिलेगी। पिछले 6 वर्षों से चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) <span>में संशोधन न होने और पिछले 3 वर्षों से इथेनॉल की खरीद कीमतों के स्थिर रहने के कारण चीनी मिलें वित्तीय दबाव में हैं।</span><strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>शुगर एमएसपी और इथेनॉल की कीमतें बढ़ाने की मांग&nbsp;</strong></p>
<p>नेशनल कोऑपरेटिव शुगर फेडरेशन के अध्यक्ष <strong>हर्षवर्धन पाटिल</strong> ने कहा, "<span>हम किसानों की बेहतर दाम की मांग का समर्थन करते हैं। लेकिन किसानों को भुगतान और बकाया चुकाने के लिए चीनी के एमएसपी और इथेनॉल की कीमतों को बढ़ाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।"</span>&nbsp;</p>
<p>पाटिल ने गन्ना किसानों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) <span>तकनीक अपनाने का भी आग्रह किया</span>, <span>जिससे पैदावार में </span>40% <span>तक बढ़ोतरी और लागत </span>30% <span>कम करने में सफलता मिली है। देश में गन्ने का रकबा </span>55-57 <span>लाख हेक्टेयर से आगे नहीं बढ़ पा रहा है और उपज </span>75-77 <span>टन प्रति हेक्टेयर पर स्थिर है। ऐसे में कम लागत पर अधिक गन्ना उत्पादन के लिए आधुनिक तकनीक को अपनाना जरूरी है।</span>&nbsp;</p>
<p>फेडरेशन के प्रबंध निदेशक <strong>प्रकाश नाइकनवरे</strong> ने कहा, "हमारे तीन प्रमुख मुद्दे हैं। चीनी के एमएसपी को एक्स-फैक्ट्री कीमतों के अनुरूप बढ़ाना, चीनी-आधारित इथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी और चीनी-आधारित इथेनॉल आवंटन में वृद्धि।"</p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_691b10563a2cc.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ देरी के बावजूद चीनी सीजन 2025-26 की मजबूत शुरुआत, 325 मिलों में पेराई शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_691b10563a2cc.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इस साल 20 हजार करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल करेगी मदर डेयरीः मनीष बंदलिश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mother-dairy-will-achieve-the-turnover-target-of-rs-20000-crore-manish-bandlish.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 11 Nov 2025 11:12:15 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mother-dairy-will-achieve-the-turnover-target-of-rs-20000-crore-manish-bandlish.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="277" data-end="907">देश की सबसे बड़ी डेयरी और फूड बिजनेस कंपनियों में शुमार <span>मदर डेयरी फ्रूट एंड वेजिबल प्राइवेट लिमिटेड&nbsp;</span> चालू वित्त वर्ष (2025-26) में 20 हजार करोड़ रुपये के टर्नओवर लक्ष्य को हासिल करने को लेकर आश्वस्त है। कंपनी देशभर में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है और राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड पहचान स्थापित करने की रणनीति के तहत अब तक लगभग एक दर्जन राज्यों के बाजार में प्रवेश कर चुकी है।</p>
<p data-start="277" data-end="907">मदर डेयरी के मैनेजिंग डायरेक्टर <strong>मनीष बंदलिश</strong> ने<strong> रूरल वॉयस</strong> के साथ एक बातचीत में बताया कि दूध की खरीद कीमतें बढ़ने से किसानों को लाभ हो रहा है। फ्लश सीजन की स्थिति का सही आकलन दिसंबर में ही संभव हो पाएगा, लेकिन दूध की बढ़ती खरीद कीमतों के चलते डेयरी कंपनियों पर दबाव जरूर है।&nbsp; जहां तक मदर डेयरी के चालू वित्त वर्ष के लिए लक्षित 20 हजार करोड़ रुपये के टर्नओवर की बात हो हम उसे हासिल करने की ओर अग्रसर हैं। पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में मदर डेयरी का टर्नओवर 17,300 करोड़ रुपये रहा था।</p>
<p data-start="909" data-end="1228">मनीष बंदलिश के अनुसार कंपनी की ग्रोथ सभी उत्पाद कैटेगरी में बेहतर है। केंद्र सरकार द्वारा डेयरी उत्पादों पर जीएसटी दरों में की गई कटौती के बाद कंपनी ने कीमतों को घटा कर उसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया है। हालांकि आइसक्रीम पर जीएसटी में कमी का बिक्री में बढ़ोतरी का पूरा फायदा इस साल नहीं मिल पाया, क्योंकि जीएसटी की दरों में कटोती लागू होने के पहले ही आइसक्रीम सीजन का मुख्य निकल चुका था।&nbsp;</p>
<p data-start="1230" data-end="1715">दूध की खरीद के दाम पर उन्होंने बताया कि कंपनी का डेयरी डॉक प्राइस 60 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जो 6.5 फीसदी फैट वाले दूध के लिए है। इस साल फ्लश सीजन में दूध की सप्लाई बहुत बेहतर नहीं है, लेकिन सीजन को लेकर अभी ठोस निष्कर्ष निकालना मुश्किल है, क्योंकि इस साल त्योहार जल्दी आ गये थे और उसके बाद शादियों का सीजन शुरू हो गया। असल में त्योहारों और शादी के सीजन में स्थानीय स्तर पर दूध की खपत बढ़ जाती है। फैट और स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) की उपलब्धता बेहतर है। एसएमपी की कीमतें बेहतर हुई हैं और इस समय ह 270 रुपये प्रति किलो के आसपास हैं, जबकि फैट की कीमत 425 से 430 रुपये प्रति किलो के बीच चल रही हैं।</p>
<p data-start="1717" data-end="2480">मदर डेयरी की विस्तार योजनाओं पर उन्होंने कहा कि कंपनी केवल एनसीआर ब्रांड की छवि से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत उपस्थिति वाले ब्रांड के रूप में स्थापित होने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके लिए हमें हमारे बोर्ड से मैंडेट भी मिला है। डेयरी के साथ धारा ब्रांड खाद्य तेल तथा फल-सब्जी व्यवसाय को भी विस्तार दिया जा रहा है, साथ ही प्रोसेसिंग क्षमता भी बढ़ाई जा रही है। मदर डेयरी दूध की खरीद मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (MPO) के माध्यम से करती है। कंपनी MPO को मल्टी कमोडिटी मॉडल में बदलने पर काम कर रही है, ताकि खाद्य तेल, फल और सब्जी बिजनेस में किसानों की सीधी भागीदारी बढ़ सके। सरसों खरीद के लिए अलवर में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है और इसी तरह का प्रोजेक्ट कोटा में भी प्रारंभ किया जा रहा है। धारा खाद्य तेल व्यवसाय में 15 फीसदी ग्रोथ दर्ज की जा रही है और कुल खाद्य तेल व्यवसाय में धारा सरसों तेल की हिस्सेदारी 60 फीसदी है।</p>
<p data-start="2482" data-end="2812">दूध बिजनेस के विस्तार पर मनीष बंदलिश ने बताया कि राजस्थान में दूध बिक्री 14 लाख लीटर प्रतिदिन के स्तर को पार कर चुकी है और अब वहां नई क्षमता बढ़ाने के लिए एक नया प्लांट लगाया जा रहा है। इसी तरह बिहार में भी अच्छी ग्रोथ मिल रही है, जहां मुंगेर में नया डेयरी प्लांट लगाया जाएगा। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में भी कंपनी की ग्रोथ मजबूत है।</p>
<p data-start="2814" data-end="3455">फल और सब्जी व्यवसाय पर उन्होंने बताया कि कंपनी इस सेगमेंट में कुछ नए कदम उठा रही है। अब ऑनलाइन बिक्री का विकल्प भी शुरू किया जा रहा है और इसके लिए एक ऐप विकसित किया गया है। फलों और सब्जियों के व्यवसाय में 7-8 फीसदी ग्रोथ है। उन्होंने कहा कि यह बिजनेस चुनौतीपूर्ण है क्योंकि गुणवत्ता बनाए रखना कठिन होता है और कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते मार्जिन कम है। इस साल अल्फांसो और तोतापुरी आम की आवक अच्छी रहने से कीमतें कम रहीं, जिससे पल्प निर्यात बिजनेस में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। इस साल पल्प बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 25-30 फीसदी रहने का अनुमान है। मदर डेयरी आम का पल्प बड़े स्तर पर निर्यात करती है और इसके प्रमुख बाजार अमेरिका और यूरोपीय देश हैं।</p>
<p data-start="2814" data-end="3455">इसके साथ ही मदर डेयरी आलू के प्रसंस्करण का काम भी शुरू करने जा रही है। इसके लिए गुजरात में आलू प्रसंस्करण का एक संयंत्र जल्दी ही उत्पादन शुरू कर देगा।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_690f21b22b9b7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इस साल 20 हजार करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल करेगी मदर डेयरीः मनीष बंदलिश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_690f21b22b9b7.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गुणवत्ता खेत से ही जन्म लेती है: बेहतरीन फ़्रेंच फ्राई बनाई नहीं जाती, उगाई जाती है]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/quality-starts-in-the-field-because-a-great-french-fry-is-grown-not-made.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 05 Nov 2025 12:13:51 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/quality-starts-in-the-field-because-a-great-french-fry-is-grown-not-made.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span> </span>भारत आज विश्व के सबसे बड़े आलू उत्पादक देशों में से एक है। लेकिन प्रोसेसिंग<span>-</span>ग्रेड आलू के संदर्भ में केवल उत्पादन की मात्रा ही मूल्य निर्धारित नहीं करती। वैश्विक नेतृत्व की पहचान निरंतरता है<span> &mdash; </span>हर मौसम में ऐसे आलू उपलब्ध कराना जिनमें सही ड्राई मैटर<span>, </span>आकार और लंबाई में समानता<span>, </span>सतह की बेहतर फिनिश<span>, </span>और फ्राई के दौरान आकर्षक सुनहरा रंग लगातार प्राप्त हो।</p>
<p>और यह निरंतरता फैक्ट्री गेट से शुरू नहीं होती। यह उससे भी पहले शुरू होती है &mdash; उस बीज से जिसे हम चुनते हैं, उस मिट्टी से जिसे हम पोषण देते हैं, और उस फसल प्रबंधन से जिसे हम खेत में लागू करते हैं। प्रोसेसिंग वैल्यू चेन में गुणवत्ता कोई कटाई के बाद सुधारी जाने वाली चीज़ नहीं है, बल्कि यह कटाई से पहले की अनुशासनात्मक और वैज्ञानिक खेती का परिणाम है।&nbsp;</p>
<p>यही है हायफार्म के<span> &ldquo;</span>सीड<span>-</span>टू<span>-</span>शेल्फ़ अप्रोच<span>&rdquo; </span>का सार<span> &mdash; </span>जहाँ गुणवत्ता को एक निरंतर यात्रा माना जाता है। यह यात्रा उच्च गुणवत्ता वाले बीज के गुणन<span>&nbsp; </span>से शुरू होती है<span>, </span>वैज्ञानिक वाणिज्यिक खेती और उन्नत भंडारण प्रथाओं के माध्यम से परिपक्व होती है<span>,</span>और अंत में उपभोक्ता की थाली में एक संपूर्ण फ्रेंच फ्राई के रूप में अपना परिणाम देती है।</p>
<p>एस. सौंदराजन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), हायफार्म<strong>,</strong> कहते हैं, &ldquo;प्रोसेसिंग-ग्रेड आलू में आने वाली लगभग 80% गुणवत्ता संबंधी चुनौतियाँ खेत में ही रोकी जा सकती हैं। कोल्ड स्टोर्स केवल गुणवत्ता को सुरक्षित रखते हैं &mdash; वे दोषों को दूर नहीं कर सकते। खेत स्तर पर गुणवत्ता सुनिश्चित करना ही ऐसे स्वस्थ, उच्च-स्तरीय कंदों की नींव रखता है, जो प्रोसेसरों और उपभोक्ताओं &mdash; दोनों के कड़े गुणवत्ता मानकों को पूरा करते हैं।&rdquo;</p>
<p>भारत की प्रोसेसिंग किस्मों में, सैंटाना फ्रेंच-फ्राई क्षेत्र की रीढ़ की हड्डी के रूप में प्रतिष्ठित है। गुजरात के आलू क्षेत्र - मेहसाणा, पालनपुर और हिम्मतनगर - में व्यापक रूप से उगाई जाने वाली सैंटाना अपने एकसमान आकार, उच्च शुष्क पदार्थ और उत्कृष्ट फ्राई रंग के लिए बेशकीमती है। फिर भी, उत्तरी गुजरात की उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में अप्रैल से दिसंबर तक इन गुणों को बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। तापमान और आर्द्रता में उतार-चढ़ाव महीनों की मेहनत पर पानी फेर सकता है। सैंटाना की प्रोसेसिंग गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए बीज से लेकर कोल्ड स्टोर तक, हर चरण पर अनुशासन और सटीकता की आवश्यकता होती है।</p>
<p><strong>यह</strong> <strong>सब</strong> <strong>बीज</strong> <strong>से</strong> <strong>शुरू</strong> <strong>होता</strong> <strong>है</strong></p>
<p>गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बीजों का प्रबंधन पहला और सबसे निर्णायक कदम है। समय से पहले अंकुरण या फफूंद की वृद्धि से बचने के लिए कंदों को अच्छी तरह हवादार जगह पर संग्रहित किया जाना चाहिए। रोगग्रस्त या क्षतिग्रस्त बीजों को फेंक देना चाहिए और हर सतह पर समान रूप से रासायनिक उपचार करना चाहिए। समान अंकुरण सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक कटे हुए टुकड़े में कम से कम दो सक्रिय नेत्र कलिकाएँ होनी चाहिए। स्वच्छ चाकू, उचित वायु संचार और सावधानीपूर्वक संचालन रोग के प्रसार और शारीरिक तनाव को रोकते हैं - जो मूल्य श्रृंखला में "छिपे हुए नुकसान" के शुरुआती रूप हैं।</p>
<p><strong>रोपण</strong> <strong>में</strong> <strong>सटीकता</strong></p>
<p>जब रोपण शुरू होता है, तो सटीकता ही सफलता की कुंजी होती है। मिट्टी की बनावट और जल निकासी के लिए उसे अच्छी तरह से जोतना चाहिए, और संतुलित पोषण सुनिश्चित करने के लिए मृदा परीक्षण के अनुसार उर्वरक का प्रयोग करना चाहिए। उदाहरण के लिए, सैन्टाना के लिए, 5.5 से 6 इंच की इष्टतम गहराई &nbsp;ग्रीनिंग (हरापन) को रोकती है, जबकि पंक्तियों के बीच 30-46 इंच की दूरी वायु संचार और स्वस्थ कंद वृद्धि को बढ़ावा देती है। समय भी उतना ही महत्वपूर्ण है - सही नमी और तापमान वाली मिट्टी में बोए गए बीज एक समान अंकुरण, एक समान रंग और बेहतर उपज देते हैं।</p>
<p><strong>एस</strong><strong>. </strong><strong>सौंदरारादजाने</strong>&nbsp;कहते हैं, "पूरे फसल उत्पादन के मौसम में, किसान द्वारा लिया गया हर निर्णय&mdash;सिंचाई से लेकर पोषक तत्व प्रबंधन तक&mdash;अंतिम फसल की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करता है। ड्रिप सिस्टम के माध्यम से सटीक सिंचाई एक समान नमी और कुशल पोषक तत्व अवशोषण सुनिश्चित करती है, जिससे कंद विकास को प्रभावित करने वाले उतार-चढ़ाव को रोका जा सकता है। उर्वरक कार्यक्रमों को मृदा परीक्षणों द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए, जिसमें म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) के बजाय सल्फेट ऑफ पोटाश (एसओपी) का उपयोग किया जाना चाहिए ताकि तलना का रंग बेहतर हो और प्रसंस्कृत उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़े।"</p>
<p><strong>विज्ञान</strong> <strong>के</strong> <strong>साथ</strong> <strong>विकास</strong> <strong>का</strong> <strong>प्रबंधन</strong></p>
<p>नाइट्रोजन और कैल्शियम नाइट्रेट का संतुलित उपयोग शुष्क पदार्थ की मात्रा को बढ़ाने, कंद संरचना को मज़बूत करने और समग्र ठोस पदार्थों में सुधार करने में मदद करता है। रोग और कीट प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण है - प्रारंभिक और पछेती झुलसा के विरुद्ध निवारक छिड़काव, कंदों के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं, जबकि बीज उपचार स्कैब और राइज़ोक्टोनिया जैसे मृदा जनित रोगजनकों को नियंत्रण में रखते हैं। रोगिंग के माध्यम से किस्म की शुद्धता बनाए रखना - 30 से 40 दिनों के भीतर अलग प्रकार के या विषाणु-संक्रमित पौधों को हटाना - PVX, PVY और PVS जैसे विषाणुओं के प्रसार को रोकता है। जो किसान मौसम के बदलावों, मिट्टी की नमी और कीटों की गतिशीलता पर सक्रिय रूप से नज़र रखते हैं, वे समय पर हस्तक्षेप करने के लिए बेहतर ढंग से सक्षम होते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि फसल पूरे मौसम में स्वस्थ, एकसमान और टिकाऊ बनी रहे।</p>
<p>कटाई का मौसम ही महीनों की मेहनत की परीक्षा लेता है। सही समय तब होता है जब बेलें पीली और सूख चुकी होती हैं और आलू का छिलका रगड़ने पर भी नहीं उतरता - जो परिपक्वता और रोग प्रतिरोधक क्षमता का पक्का संकेत है।</p>
<p>विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कटाई नम लेकिन गीली न हो, दिन के ठंडे घंटों में, और चोट लगने से बचाने के लिए समायोजित हार्वेस्टर बेल्ट का उपयोग करें। कंदों को सावधानी से संभालना चाहिए और उन्हें साफ, हवादार वाहनों में ले जाना चाहिए, और पूरी तरह से पता लगाने के लिए किस्मों को अलग-अलग रखना चाहिए। अंत में, भंडारण से पहले, आलू एक अंतिम गुणवत्ता परीक्षण से गुजरते हैं - छंटाई और ग्रेडिंग। दरार, पपड़ी, हरेपन या यांत्रिक क्षति वाले कंदों को हटा देना चाहिए; एक भी सड़ा हुआ आलू पूरे समूह को संक्रमित कर सकता है। प्रोसेसिंग में एकरूपता बनाए रखने के लिए छोटे आकार के कंदों (35 मिमी से कम) को अलग-अलग किया जाता है। परिवहन के दौरान, सावधानी से संभालने से काले धब्बे और अंदर से भूरापन नहीं आता। साफ, गद्देदार वाहन और कोल्ड स्टोर में शीघ्र स्थानांतरण गुणवत्ता बनाए रखता है और शेल्फ लाइफ बढ़ाता है।</p>
<p><strong>गुणवत्ता</strong> <strong>एक</strong> <strong>साझा</strong> <strong>ज़िम्मेदारी</strong> <strong>है</strong></p>
<p>भारत के फ्रेंच-फ्राई उद्योग के लिए, वैश्विक उत्कृष्टता की यात्रा फैक्ट्री से नहीं, बल्कि खेत से शुरू होती है। बीज भंडारों को हवादार करने से लेकर ट्रकों में माल लादने तक, हर कदम उस गुणवत्ता को परिभाषित करता है जो अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचती है। अगर किसान और प्रोसेसर वैज्ञानिक और खेत-आधारित आश्वासन के माध्यम से कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कुछ प्रतिशत तक भी कम करने के लिए सहयोग करें, तो आर्थिक और प्रतिष्ठा संबंधी लाभ परिवर्तनकारी हो सकते हैं।</p>
<p>सही विज्ञान, देखभाल और प्रतिबद्धता के साथ, गुजरात का सैन्टाना न केवल वैश्विक मानकों को पूरा कर सकता है, बल्कि उन्हें स्थापित भी कर सकता है - यह साबित करते हुए कि हर बढ़िया फ्रेंच फ्राइ वास्तव में उगाई जाती है, बनाई नहीं जाती।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_690af0dfb9456.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गुणवत्ता खेत से ही जन्म लेती है: बेहतरीन फ़्रेंच फ्राई बनाई नहीं जाती, उगाई जाती है ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_690af0dfb9456.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी उत्पादन में 16% वृद्धि का अनुमान, 20 लाख टन निर्यात की संभावना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-estimates-16-increase-in-sugar-production-2-million-tonnes-export-potential.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 04 Nov 2025 18:56:00 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-estimates-16-increase-in-sugar-production-2-million-tonnes-export-potential.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>भारतीय चीनी एवं बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA)</strong> ने 2025-26 शुगर सीज़न के लिए चीनी उत्पादन के अपने पहले अग्रिम अनुमान जारी किए हैं। इस्मा ने अनुमान लगाया है कि इस सीज़न में एथेनॉल डायवर्जन से पहले सकल चीनी उत्पादन <strong>343.5</strong> लाख टन तक पहुँच सकता है, जो पिछले वर्ष के 296.1 लाख टन की तुलना में लगभग 16% अधिक है।</p>
<p>अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में प्राप्त सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर, इस्मा का अनुमान है कि देश में गन्ने का कुल रकबा <strong>57.35</strong> लाख हेक्टेयर है, जो पिछले वर्ष के 57.11 लाख हेक्टेयर की तुलना में थोड़ा अधिक है।</p>
<p>इन निष्कर्षों की समीक्षा 4 नवंबर को हुई इस्मा की कार्यकारी समिति की बैठक में की गई, जिसमें देशभर के चीनी उत्पादक राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस समीक्षा में इमेजरी विश्लेषण, फील्ड रिपोर्ट, अपेक्षित पैदावार, रिकवरी दर, बारिश का प्रभाव और जलाशयों में उपलब्ध जल स्तर जैसे कारकों को शामिल किया गया।</p>
<p><strong>राज्यवार स्थिति</strong></p>
<p><strong>महाराष्ट्र:</strong> गन्ने का क्षेत्रफल 6% बढ़कर 14.71 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष 13.82 लाख हेक्टेयर था। बेहतर बारिश, जल उपलब्धता और प्लांट केन के उच्च अनुपात की वजह से फसल की स्थिति &ldquo;अच्छी से बहुत अच्छी&rdquo; बताई जा रही है। राज्य में चीनी का सकल उत्पादन बढ़कर 130 लाख टन पहुँच सकता है, जो पिछले वर्ष के 93.51 लाख टन से 39% अधिक है।</p>
<p><strong>कर्नाटक:</strong> गन्ने का रकबा 6% बढ़कर 6.8 लाख हेक्टेयर हो चुका है। बेहतर वर्षा और पानी की उपलब्धता के कारण इस बार बेहतर पैदावार व रिकवरी की उम्मीद है। सकल चीनी उत्पादन 54.89 लाख टन से बढ़कर 63.5 लाख टन होने का अनुमान है जो लगभग 16% वृद्धि है।</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश:</strong> गन्ने का रकबा 3% घटकर 22.57 लाख हेक्टेयर हो गया है, लेकिन फसल की स्थिति पिछले वर्ष से काफी बेहतर है। मिल स्तर पर केन डेवलपमेंट प्रोग्राम, समयबद्ध हस्तक्षेप और किस्मों के प्रतिस्थापन से रेड रॉट जैसी बीमारियों को कम रखने में मदद मिलेगी। यूपी में चीनी उत्पादन 101.01 लाख टन से बढ़कर 103.2 लाख टन होने का अनुमान है।</p>
<p><strong>संतुलित बैलेंस शीट&nbsp;</strong></p>
<p>एथेनॉल उत्पादन के लिए अनुमानित 34 लाख टन चीनी डायवर्ट करने के बाद, 2025-26 में नेट चीनी उत्पादन 309.5 लाख टन रहने की उम्मीद है। 50 लाख टन के ओपनिंग स्टॉक और 285 लाख टन घरेलू खपत के साथ, सितंबर 2026 के अंत में क्लोजिंग स्टॉक लगभग 74.5 लाख टन अनुमानित है, जो पर्याप्त उपलब्धता को दर्शाता है।</p>
<p><strong>2025-26 </strong><strong>सीज़न बैलेंस शीट:</strong><br />ओपनिंग स्टॉक (1 अक्टूबर 2025): 50 लाख टन<br />नेट उत्पादन: 309.5 लाख टन<br />कुल उपलब्धता: 359.5 लाख टन<br />आंतरिक खपत: 285 लाख टन<br />क्लोजिंग स्टॉक (30 सितंबर 2026): 74.5 लाख टन</p>
<p><strong>निर्यात नीति पर स्पष्टता की मांग</strong></p>
<p>पर्याप्त चीनी उपलब्धता को देखते हुए इस्मा का कहना है कि भारत इस सीजन में लगभग 20 लाख टन चीनी निर्यात करने की स्थिति में है। इस्मा ने सरकार से अनुरोध किया है कि निर्यात नीति जल्द से जल्द घोषित की जाए, ताकि चीनी मिलें समय रहते&nbsp;चीनी उत्पादन की रणनीति तैयार कर सकें।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6909fe42bc46a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी उत्पादन में 16% वृद्धि का अनुमान, 20 लाख टन निर्यात की संभावना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6909fe42bc46a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अक्टूबर में ट्रैक्टर की बिक्री में तेजी, महिंद्रा की सेल 13 फीसदी बढ़ी, एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने पकड़ी रफ्तार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/october-tractor-sales-rise-on-festive-boost-mahindra-leads-escorts-kubota-stays-steady.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 03 Nov 2025 12:56:25 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/october-tractor-sales-rise-on-festive-boost-mahindra-leads-escorts-kubota-stays-steady.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय ट्रैक्टर बाजार ने सितंबर से शुरू हुई तेजी को अक्टूबर 2025 में भी जारी रखा। फेस्टिव सीजन की मांग, जलाशयों में बेहतर जलस्तर और नीतिगत समर्थन के चलते कंपनियों और डीलरों को बिक्री में मजबूती मिली। अग्रणी ट्रैक्टर कंपनियों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार, <span>त्योहारी सीजन से पहले खरीदारी और अच्छी मॉनसून बारिश के चलते बेहतर बिक्री दर्ज की। </span></p>
<p><strong>महिंद्रा एंड महिंद्रा (फार्म इक्विपमेंट बिज़नेस) </strong>ने उद्योग में बढ़त बनाए रखी और मजबूत डबल-डिजिट ग्रोथ हासिल की। कंपनी की घरेलू बिक्री अक्टूबर 2025 <span>में </span>72,071 <span>यूनिट रही</span>, <span>जो अक्टूबर </span>2024 <span>में </span>64,326 <span>यूनिट थी यानी </span>12% <span>सालाना वृद्धि। एक्सपोर्ट करीब </span>41% <span>बढ़कर </span>1,589 <span>यूनिट पर पहुंचा। इस तरह कंपनी की <strong>कुल ट्रैक्टर बिक्री</strong> (घरेलू + निर्यात) अक्टूबर </span>2024 <span>के </span>65,453 <span>यूनिट की तुलना में अक्टूबर 2025 में बढ़कर </span>73,660 <span>यूनिट हो गई जो </span><strong>13%</strong> <span>की वृद्धि को दर्शाता है।&nbsp;</span></p>
<p>प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए महिंद्रा एंड महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस के प्रेसिडेंट <strong>विजय नाकरा</strong> ने कहा, &ldquo;सितंबर और अक्टूबर 2025 को मिलाकर फेस्टिव पीरियड में बिक्री में पिछले साल की तुलना में 27.4% की ग्रोथ रही है। अच्छा मॉनसून और सितंबर में घोषित GST दर में कटौती से इस मजबूत प्रदर्शन में बढ़ावा मिला। आगे रबी बुवाई की समय पर शुरुआत और खरीफ की अच्छी प्रगति ट्रैक्टर बिक्री के लिए सकारात्मक संकेत दे रही है।&rdquo;</p>
<p><strong>एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड</strong> ने भी बिक्री में वृद्धि दर्ज की। कंपनी की कुल ट्रैक्टर बिक्री अक्टूबर 2025 में बढ़कर <strong>18,798 </strong><strong>यूनिट</strong> हो गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 18,110 यूनिट से <strong>3.8%</strong> अधिक है। घरेलू बिक्री में <strong>3.3%</strong> की बढ़त दर्ज करते हुए यह <strong>18,423 </strong><strong>यूनिट</strong> रही जबकि निर्यात में <strong>38.4%</strong> की तेजी के साथ बिक्री बढ़कर <strong>375 </strong><strong>यूनिट</strong> तक पहुंच गई। कंपनी ने कहा कि फेस्टिव खरीदारी, GST में कटौती और कृषि के अनुकूल परिस्थितियों से मांग में सहारा मिला।</p>
<p>हालांकि ट्रैक्टर इंडस्ट्री के सामने कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। उत्तर और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में लंबी चली बारिश से कुछ राज्यों में तैयार फसलें प्रभावित हुईं और बुवाई में देरी आई। इसके बावजूद कंपनियां रबी सीजन में मांग को लेकर आशावादी बनी हुई हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि फेस्टिव डिमांड, बेहतर जलस्तर और सरकारी समर्थन नीतियों का संयुक्त प्रभाव आने वाले महीनों में ट्रैक्टर बिक्री की तेजी को बनाए रख सकता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए यह सकारात्मक संकेत है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6908590f024fd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अक्टूबर में ट्रैक्टर की बिक्री में तेजी, महिंद्रा की सेल 13 फीसदी बढ़ी, एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने पकड़ी रफ्तार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6908590f024fd.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[होर्टीरोड2इंडिया ने इंडो&amp;#45;डच साझेदारी के माध्यम से भारतीय कृषि में बदलाव लाने के लिए पेश किया ब्लूप्रिन्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/hortiroad-to-india-charts-blueprint-to-transform-indian-agriculture-through-indo-dutch-collaboration.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 31 Oct 2025 19:39:46 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/hortiroad-to-india-charts-blueprint-to-transform-indian-agriculture-through-indo-dutch-collaboration.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>एनएल होर्टीरोड2इंडिया ने सस्टेनेबल, टेक-इनेबल्ड एवं संयुक्त इंडो-डच समाधानों के ज़रिए भारतीय कृषि में बदलाव लाने के उद्देश्य से व्यापक योजनाओं को पेश किया। नई दिल्ली में आयोजित एक एक प्रेस कांफ्रेंस में इसे जारी किया गाय जो नीदरलैण्ड्स सरकार तथा डच ग्रीनहाउस होर्टीकल्चर टेक्नोलॉजी में ग्लोबल लीडर्स के बीच तीन वर्षीय सार्वजनिक-निजी साझेदारी में एक महत्वपूर्ण पल रहा।</span><br /><span>एनएल होर्टीरोड2इंडिया ने बैंगलुरू और चण्डीगढ़ में भी क्षेत्रीय हितधारकों और मीडिया के साथ बातचीत की। बैंगलुरू में बातचीत का मुख्य आकर्षण था फार्म-टू-टेबल डिनर जहां हितधारकों को व्यंजनों के विशिष्ट अनुभव के ज़रिए सस्टेनेबल होर्टीकल्चर (स्थायी बागवानी) के बारे में जानने का मौका मिला।</span><br /><span>इसके अलावा, भारत का अन्न भंडार होने के नाते पंजाब में बड़े उपजाऊ मैदान हैं, राज्य में खेती की मजबूत विरासत है तथा इनोवेशन की ओर विशेष झुकाव भी है। क्षेत्र की इस क्षमता को ध्यान में रखते हुए एनएल होर्टीरोड2 इंडिया ने गुणवत्ता एवं उत्पादकता के परिणामों में सुधार लाने के लिए हितधारकों के साथ बातचीत की।</span><br /><span>पिछले तीन साल के दौरान एनएल होर्टीरोड2इंडिया टीम ने सैंकड़ों हितधारकों के साथ मिलकर भारत की वास्तविक चुनौतियों को समझने का प्रयास किया है जैसे कटाई के बाद होने वाला नुकसान, भोजन सुरक्षा, श्रम की स्थिति, ग्रेडिंग की अप्रभाविता तथा सुलभ फाइनैंस की कमी।</span></p>
<p>डच ग्रीनहाउस डेटा में इंडिया डायरेक्टर और एनएल होर्टीरोड2इंडिया के कोऑर्डिनेटर देश<span>&nbsp;रा</span>मनाथ ने बताया कि <span>एनएल होर्टीरोड2इंडिया,&nbsp; विभिन्न मार्केट वैल्यू वाली फसलों के लिए मध्यम एवं निम्न- टेक समाधान शामिल करने के लिए अपने दायरे का विस्तार कर रहा है। यह साझेदारी भारतीय एवं डच इनोवेटर्स के बीच स्टार्ट-अप कोलाबोरेशन को भी बढ़ावा दे रही है ताकि वे एक साथ मिलकर तकनीकों का विकास कर सकें, स्थानीय उत्पादन युनिट्स स्थापित कर सकें, रोज़गार के अवसर उत्पन्न कर सकें, लागत कम कर सकें तथा भारत एवं अफ्रीका में क्षेत्रीय एग्री-टेक फ्रेमवर्क को बढ़ावा दे सकें।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_6904c3894b7fa.jpg" alt="" /></p>
<p><br /><span>इन सभी रूझानों ने ऐसे समाधान विकसित किए हैं, जिनसे एक ब्लूप्रिन्ट तैयार हुआ, जो समग्र दृष्टिकोण को अपनाता है। इसमें आधुनिक ग्रीनहाउस टेक्नोलॉजी, मार्केट के साथ जुड़ाव, प्रशिक्षण, शिक्षा एवं दीर्घकालिक फाइनैंसिंग शामिल है। इस साझेदारी के तहत अग्रणी कृषि उद्यमियों को पहचान कर अपने साथ जोड़ा गया है। ये उद्यमी प्रगतिशील किसान हैं, जिनके पास हाई-टेक ग्रीनहाउस प्रोजेक्ट्स को पायलट के तौर पर लागू करने के लिए सकारात्मक सोच, नेटवर्क एवं विश्वसनीयता है। ये पायलट 2026 के अंत तक लागू हो जाएंगे तथा बड़े पैमाने के क्षेत्र-विशिष्ट मॉडल्स के लिए अवधारणाओं का प्रमाण बन जाएंगे, जिन्हें जलवायु, फसल के प्रकार और मार्केट की उपलब्धता के आधार पर देश भर में अपनाया जा सकेगा।</span><br /><span>एनएच होर्टीरोड2इंडिया ने भारत में ताज़े उत्पादों के बारे में लोगों की सोच एवं नीतियों में बदलाव लाने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया, क्योंकि आज जिन फलों और सब्ज़ि़यों का सेवन किया जाता है, उनमें से ज़्यादातर में रसायन होते हैं तथा उन्हें अस्थायी परिस्थितियों में उगाया जाता है</span></p>
<p><span>इसके अलावा एनएल होर्टीरोड2इंडिया का उद्देश्य न सिर्फ पर्यावरण एवं स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को हल करना है बल्कि किसानों की आय बढ़ाना, भोजन की बर्बादी को कम करना तथा आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता को बढ़ावा देना भी है किसानों, रीटेलरों, शेफ एवं उपभोक्ताओं के लिए समाधान विकसित कर यह पहल भारत को अधिक सुरक्षित, अधिक स्थायी खाद्य विकल्पों की ओर अग्रसर करेगी।</span><br /><br /><span>&lsquo;एनएल होर्टीरोड2इंडिया में हम डच इनोवेशन एवं भारतीय महत्वाकांक्षाओं के संचालन द्वारा समावेशी विकास, खाद्य सुरक्षा और जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देना चाहते हैं। स्थानीय ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए तकनीकों के विकास द्वारा हम स्वस्थ उत्पादन एवं प्रत्यास्थ खाद्य प्रणाली की संभावनाएं विकसित कर रहे हैं, जिससे देश को लाभ होगा, साथ ही विश्वस्तरीय साझेदारियों को भी बढ़ावा मिलेगा।&lsquo; मिस टिफेनी, मेजर, प्रोजेक्ट मैनेजर, इंटरनेशनल ट्रेड- इनोवेशन क्वार्टर और रोटरडैम पार्टनर्स एंड को-कोऑर्डिनेटर, होर्टीरोड2इंडिया ने कहा।</span><br /><br /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_6904c360b946b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ होर्टीरोड2इंडिया ने इंडो-डच साझेदारी के माध्यम से भारतीय कृषि में बदलाव लाने के लिए पेश किया ब्लूप्रिन्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_6904c360b946b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इथेनॉल आवंटन घटने और शुगर MSP न बढ़ने से गहरा सकता है गन्ना भुगतान का संकट: इस्मा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/reduction-in-ethanol-allocation-and-no-increase-in-sugar-msp-may-deepen-sugarcane-payment-crisis-isma.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 29 Oct 2025 22:40:55 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/reduction-in-ethanol-allocation-and-no-increase-in-sugar-msp-may-deepen-sugarcane-payment-crisis-isma.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div><strong>भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA)</strong> ने चिंता जताई है कि इथेनॉल आवंटन में कमी और पिछले छह वर्षों से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) में कोई बढ़ोतरी न होने से देश का चीनी उद्योग गंभीर आर्थिक संकट में फंस सकता है। जिससे किसानों के बकाया भुगतान की समस्या बढ़ सकती है।&nbsp;</div>
<div data-smartmail="gmail_signature">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="ltr">
<div dir="auto">
<p>नई दिल्ली में बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ISMA के उपाध्यक्ष <strong>नीरज शिवगांवकर</strong> ने कहा कि सरकार को गन्ना रस और बी-हेवी शीरे से बनने वाले इथेनॉल को प्राथमिकता पुनः बहाल करनी चाहिए। क्योंकि सरकार द्वारा आवंटन नीति में असंतुलन से उद्योग की तरलता और संचालन पर सीधा असर पड़ रहा है।</p>
<p><strong>इथेनॉल आवंटन में असंतुलन&nbsp;</strong></p>
<p>ISMA के अनुसार, इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए कुल 1,049 करोड़ लीटर में से केवल 289 करोड़ लीटर (28%) इथेनॉल गन्ने आधारित स्रोतों से आवंटित किया गया है, जबकि 760 करोड़ लीटर (72%) अनाज आधारित इथेनॉल को दिया गया है। संघ ने इस असंतुलन को लेकर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि इससे चीनी उद्योग पर गंभीर असर पड़ेगा। गन्ना आधारित डिस्टिलरियों को आधी क्षमता से भी कम पर चलना पड़ सकता है, जिससे लगभग 34 लाख टन कम चीनी डायवर्जन होगा और घरेलू बाजार में अधिशेष स्टॉक बढ़ने से चीनी के दाम गिर सकते हैं। इससे गन्ना किसानों के भुगतान में देरी व बकाया बढ़ने की आशंका है।&nbsp;</p>
<p>ISMA ने कहा कि यह नीति आयोग के 2021 के जैव ईंधन रोडमैप के विपरीत है, जिसमें 2025-26 तक 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 55% योगदान चीनी क्षेत्र से आने का अनुमान लगाया गया था। इस दिशा में उद्योग ने अब तक 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर करीब 900 करोड़ लीटर की इथेनॉल उत्पादन क्षमता तैयार की है।</p>
<p><strong>इथेनॉल कीमतें और शुगर MSP बढ़ाने की मांग</strong></p>
<p>इस्मा ने बताया कि 2022-23 से अब तक गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) ₹305 से बढ़कर ₹355 प्रति क्विंटल हो गया है, यानी 16.5% की वृद्धि, लेकिन इथेनॉल की खरीद कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। बी-हेवी शीरे से इथेनॉल उत्पादन लागत ₹66.09 प्रति लीटर और गन्ना रस से ₹70.70 प्रति लीटर है, जबकि सरकार इनकी खरीद क्रमशः ₹60.73 और ₹65.61 प्रति लीटर पर कर रही है। प्रति लीटर लगभग ₹5 के घाटे के कारण गन्ना आधारित इथेनॉल उत्पादन आर्थिक रूप से अव्यवहार्य हो गया है, जिससे मिलों की वित्तीय स्थिति और किसानों को भुगतान दोनों प्रभावित हो रहे हैं।</p>
<p>ISMA के महानिदेशक <strong>दीपक बल्लानी</strong> ने कहा कि फरवरी 2019 से शुगर का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) ₹31 प्रति किलो पर स्थिर है, जबकि गन्ने का FRP ₹275 से बढ़कर ₹355 प्रति क्विंटल हो चुका है &mdash; यानी लगभग 29% की वृद्धि। इससे चीनी की उत्पादन लागत ₹40.24 प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि बाजार में कीमतें घटने के संकेत हैं। दिसंबर 2025 तक घरेलू बाजार में चीनी के दाम उत्पादन लागत से नीचे जा सकते हैं, जिससे मिलों की नकदी स्थिति खराब होगी और किसानों के भुगतान में गंभीर देरी होगी।</p>
<p>बल्लानी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (SAP) ₹30 प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है, जिससे किसानों को लगभग ₹3,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त भुगतान मिलेगा। यह किसानों के लिए सकारात्मक कदम है, लेकिन इससे चीनी मिलों की लागत भी बढ़ेगी। ऐसे में सरकार को ऐसी नीतियां लानी चाहिए जिससे मिलें किसानों को समय पर भुगतान करने में सक्षम रहें।</p>
<p><strong>सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग</strong></p>
<p>इस्मा ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कई कदम उठाने की अपील की है। इसमें इथेनॉल आवंटन में संतुलन लाकर कम से कम 50% हिस्सा चीनी आधारित फीडस्टॉक को देना, दूसरे चक्र के लिए 150 करोड़ लीटर इथेनॉल की खरीद गन्ना रस और बी-हेवी शीरे से करने, इथेनॉल खरीद मूल्य में वृद्धि और शुगर MSP को FRP तथा उत्पादन लागत के अनुरूप संशोधित करना शामिल है।&nbsp;</p>
<p>चीनी उद्योग ने इथेनॉल मिश्रण को E20 से आगे बढ़ाने और चीनी निर्यात नीति शीघ्र घोषित करने की मांग भी की है ताकि अतिरिक्त स्टॉक का प्रबंधन किया जा सके और मिलों की नकदी स्थिति सुधरे।</p>
<p></p>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_690250767b8ce.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इथेनॉल आवंटन घटने और शुगर MSP न बढ़ने से गहरा सकता है गन्ना भुगतान का संकट: इस्मा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_690250767b8ce.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इस्मा और IFGE ने सरकार से ई&amp;#45;20 के बाद का रोडमैप जारी करने की अपील की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/isma-and-ifge-urge-the-government-to-release-a-post-e20-roadmap.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 15 Oct 2025 16:18:34 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/isma-and-ifge-urge-the-government-to-release-a-post-e20-roadmap.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA)</strong> और <strong>इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी (IFGE)</strong> ने केंद्र सरकार से &lsquo;नेशनल इथेनॉल मोबिलिटी रोडमैप&rsquo; जारी करने की अपील की है, ताकि 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण के बाद अब अगले चरणों की रूपरेखा स्पष्ट की जा सके।</p>
<p>संयुक्त बयान में दोनों संगठनों ने सरकार से फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFVs) और स्मार्ट हाइब्रिड वाहनों पर जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने तथा उपभोक्ताओं को ईवी जैसी प्रोत्साहन योजनाओं (जैसे FAME) का लाभ देने की मांग की है।</p>
<p>भारत ने 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण (ई-20) का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच साल पहले ही हासिल कर किया है। लेकिन इस उपलब्धि के साथ ही सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को लेकर विवादों से घिर गई। हालिया विवाद के बाद इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के भविष्य को लेकर संदेह बढ़ गया है।</p>
<p>इथेनॉल उत्पादन क्षमता में अग्रणी भूमिका निभाने वाला चीनी उद्योग अब तक लगभग 40,000 करोड़ रुपये का निवेश कर 900 करोड़ लीटर प्रति वर्ष से अधिक उत्पादन क्षमता स्थापित कर चुका है। ऐसे में अगर इथेनॉल मिश्रण 20 फीसदी से अधिक नहीं बढ़ता है तो उद्योग को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।</p>
<p>पिछले दिनों तेल कंपनियों (ओएमसी)<span> ने 10</span>,50 करोड़ लीटर इथेनॉल के लिए टेंडर निकाला था जिस पर 17,76 करोड़ लीटर इथेनॉल आपूर्ति की पेशकश की गई। कुल प्रस्तावों में से, 471 <span>करोड़ लीटर गन्ना आधारित इकाइयों द्वारा और </span>1304 <span>करोड़ लीटर से अधिक अनाज आधारित इथेनॉल निर्माताओं द्वारा पेश किया गया।</span></p>
<p>सरकारी तेल कंपनियों (ओएमसी) द्वारा इथेनॉल की खपत कम होने के कारण कई इथेनॉल प्लांट ठप हो सकते हैं, जिसका असर निवेश और ऋण पर पड़ सकता है। इसलिए इंडसट्री की ओर से पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की मात्रा को वर्तमान 20% से अधिक बढ़ाने की मांग की जा रही है।</p>
<p>इस्मा के महानिदेशक <strong>दीपक बल्लानी</strong> ने कहा, &ldquo;भारतीय चीनी उद्योग ने समय से पहले इथेनॉल वादे को पूरा किया है। अब इस क्रांति को जारी रखने के लिए नीति में निरंतरता जरूरी है। उद्योग फिलहाल 1,776 करोड़ लीटर इथेनॉल आपूर्ति के लिए तैयार है, जबकि तेल विपणन कंपनियों की जरूरत 1,050 करोड़ लीटर की है। इससे स्पष्ट है कि उद्योग 27% मिश्रण तक समर्थन देने में सक्षम है। लेकिन यदि ई-20 के बाद का रोडमैप तय नहीं हुआ, तो उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाएगा, जिससे निवेश ठप पड़ सकता है और नवाचार पर असर पड़ेगा।&rdquo;</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि बी-हैवी मोलासेस और गन्ने के रस से बने इथेनॉल की खरीद कीमत तीन साल से नहीं बढ़ाई गई है, जिससे वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में स्पष्ट और चरणबद्ध रोडमैप आवश्यक है ताकि इथेनॉल उद्योग की गति बनी रहे और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि होती रहे।</p>
<p>IFGE के अध्यक्ष <strong>डॉ. प्रमोद चौधरी</strong> ने कहा, &ldquo;भारत की इथेनॉल सफलता उद्योग और सरकार के मजबूत सहयोग का परिणाम है। अब जरूरत है कि नेशनल इथेनॉल मोबिलिटी रोडमैप 2030 घोषित किया जाए, जिसमें ई-20 के आगे के स्पष्ट लक्ष्य हों। इसमें वाहनों के अनुकूलन मानक, उन्नत जैव ईंधनों (जैसे 2G/3G इथेनॉल, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, ग्रीन केमिकल्स) के प्रोत्साहन और अनुसंधान को भी शामिल किया जाना चाहिए।&rdquo;</p>
<p>संयुक्त अपील में कहा गया है कि फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स और स्मार्ट हाइब्रिड कारें भारत के पारंपरिक इंजन आधारित परिवहन से स्वच्छ ऊर्जा वाहनों की ओर संक्रमण में सेतु का काम कर सकती हैं। ये वाहन E-100 तक के मिश्रण पर भी कुशलता से चल सकते हैं और पेट्रोलियम निर्भरता व उत्सर्जन दोनों को घटा सकते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68ef8228debd1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इस्मा और IFGE ने सरकार से ई-20 के बाद का रोडमैप जारी करने की अपील की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68ef8228debd1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गुजरात की आलू बेल्ट में मिट्टी संरक्षण को बढ़ावा दे रहा हायफार्म]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/hyfarm-drives-soil-stewardship-across-gujarat-potato-belt.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 15 Oct 2025 13:42:01 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/hyfarm-drives-soil-stewardship-across-gujarat-potato-belt.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गुजरात के प्रसिद्ध आलू बेल्ट में किसान एक धीमा लेकिन चिंताजनक बदलाव महसूस करने लगे हैं। पैदावार घट रही है<span>, </span>औसत आलू का आकार छोटा हो गया है<span>, </span>और जो खेत कभी एक समान व उच्च गुणवत्ता वाले आलू के लिए जाने जाते थे<span>, </span>अब वहां आकार और गुणवत्ता में असमानता दिख रही है। प्रोसेसिंग यूनिट्स में भी अब रिजेक्शन बढ़ने लगे हैं<span> &mdash; </span>खराब स्किन फिनिश<span>, </span>असमान फ्राई रंग और आंतरिक दोषों के कारण। इन दिखने वाले संकेतों के पीछे असली समस्या छुपी है<span> &mdash; &ldquo;</span>मिट्टी में।<span>&rdquo; </span></p>
<p>क्षेत्र के मिट्टी वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं<span> &mdash; </span>लगातार केवल आलू की खेती<span> (</span>मोनोकल्चर<span>), </span>अत्यधिक सिंचाई<span>, </span>और रासायनिक खाद पर भारी निर्भरता।<span><br /></span>समय के साथ<span>, </span>इन तरीकों ने मिट्टी के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ दिया है<span>, </span>जिससे खारापन बढ़ गया है और पौधों की वृद्धि के लिए ज़रूरी जैविक कार्बन और सूक्ष्म जीवों की सक्रियता में भारी कमी आई है।</p>
<p>इस साल की शुरुआत में<span>, </span>कंपनी ने उत्तर गुजरात के<span> 17 </span>सूक्ष्म क्षेत्रों<span> (</span>माइक्रो<span>-</span>पॉकेट्स<span>) </span>से<span> 500 </span>से अधिक मिट्टी के नमूने एकत्र कर उनका विश्लेषण किया।<span><br /></span>अध्ययन में पाया गया कि कई क्षेत्रों में मिट्टी का<span> <strong>pH </strong></span><strong>स्तर<span> 8.0 </span></strong><strong>से </strong><strong>ऊपर</strong> चला गया है<span> &mdash; </span>जो कि आलू की अच्छी फसल के लिए आवश्यक<span> <strong>6.5 </strong></span><strong>से<span> 7.5 </span></strong><strong>के </strong><strong>आदर्श </strong><strong>स्तर</strong> से काफी अधिक है।</p>
<p>इसके अलावा<span>, </span>बढ़ती क्षारीयता<span> (alkalinity) </span>मिट्टी में <strong>फॉस्फोरस<span>, </span></strong><strong>जिंक </strong><strong>और </strong><strong>आयरन</strong> जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्धता को प्रभावित करती है।</p>
<p>किसान अक्सर इसे संतुलित करने के लिए ज्यादा खाद डालते हैं<span>, </span>लेकिन इसका बड़ा हिस्सा पौधों द्वारा उपयोग नहीं हो पाता।</p>
<p>इन निष्कर्षों के आधार पर<span>, </span>हायफार्म की तकनीकी टीम किसानों के साथ मिलकर <strong>बड़े </strong><strong>बदलावों </strong><strong>की </strong><strong>बजाय </strong><strong>छोटे </strong><strong>और व्यावहारिक सुधार लागू कर रही है। किसानों को ph स्तर कम करने और जड़ों के आस-पास का क्षेत्र स्वस्थ बनाने के लिए मापी गई मात्रा में फॉस्फोरिक एसिड या गंधक (सल्फर) के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। </strong></p>
<p><strong>राकेशभाई </strong><strong>पटेल</strong><span>, </span>विजापुर के एक किसान<span>, </span>ने बताया कि मिट्टी की जांच के बाद उन्हें अपने खेत में पोटाश की मात्रा अधिक<span>, </span>लेकिन <strong>जिंक </strong><strong>की </strong><strong>मात्रा </strong><strong>कम</strong> पाई गई।<span> &ldquo;</span><em>हमने </em><em>खाद </em><em>योजना </em><em>में </em><em>बदलाव </em><em>किया </em><em>और </em><em>सिर्फ </em><em>दो </em><em>हफ्तों </em><em>में </em><em>साफ़ </em><em>सुधार </em><em>देखने </em><em>को </em><em>मिला<span>,</span></em><span>&rdquo; </span>उन्होंने कहा।</p>
<p>विश्लेषण से यह भी सामने आया कि कई स्थानों पर मिट्टी में <strong>जैविक </strong><strong>कार्बन</strong><span> &mdash; </span>जिसे अक्सर मिट्टी की<span> '</span>जीवन ऊर्जा<span>' </span>कहा जाता है<span> &mdash; <strong>0.3 </strong></span><strong>प्रतिशत </strong><strong>से </strong><strong>भी </strong><strong>नीचे</strong> गिर गया है। इसके बिना मिट्टी की <strong>पानी </strong><strong>और </strong><strong>पोषक </strong><strong>तत्वों </strong><strong>को </strong><strong>संजोने </strong><strong>की </strong><strong>क्षमता</strong> घट जाती है।</p>
<p>इस प्राकृतिक संतुलन को दोबारा बनाने के लिए विशेषज्ञ <strong>गोबर </strong><strong>की </strong><strong>खाद<span>, </span></strong><strong>कम्पोस्ट</strong> और <strong>हरी </strong><strong>खाद </strong><strong>वाली </strong><strong>फसल </strong><strong>चक्र </strong><strong>प्रणाली<span> (crop rotation)</span></strong> अपनाने की सलाह दे रहे हैं।<span><br /></span>इस तरह के उपाय मिट्टी को समृद्ध बनाने के साथ<span>-</span>साथ <strong>लंबे </strong><strong>समय </strong><strong>में </strong><strong>उर्वरक </strong><strong>की </strong><strong>लागत </strong><strong>भी </strong><strong>घटाते </strong><strong>हैं।</strong> एक और अहम पहल <strong>पोटाश </strong><strong>के </strong><strong>प्रकार</strong> को लेकर की जा रही है।</p>
<p><strong>एमओपी<span> (</span></strong><strong>म्यूरिएट </strong><strong>ऑफ </strong><strong>पोटाश<span>)</span></strong><span>, </span>जिसमें क्लोराइड होता है<span>, </span>को धीरे<span>-</span>धीरे <strong>एसओपी<span> (</span></strong><strong>सल्फेट </strong><strong>ऑफ </strong><strong>पोटाश<span>)</span></strong> से बदला जा रहा है।</p>
<p><strong>एसओपी</strong> मिट्टी में <strong>नमक </strong><strong>के </strong><strong>जमाव </strong><strong>को </strong><strong>कम </strong><strong>करता </strong><strong>है</strong> और <strong>आलू </strong><strong>के </strong><strong>आकार<span>, </span></strong><strong>रंग </strong><strong>और </strong><strong>फ्राय </strong><strong>क्वालिटी</strong> को बेहतर बनाता है<span> &mdash; </span>जो प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p><strong>फील्ड </strong><strong>ट्रायल्स</strong> से यह भी साबित हुआ है कि <strong>कैल्शियम </strong><strong>नाइट्रेट</strong> को अगर फसल के बढ़ने के दौरान तीन छोटी खुराकों में दिया जाए<span>, </span>तो इससे आलू की त्वचा मजबूत होती है और <strong>फसल </strong><strong>कटाई </strong><strong>के </strong><strong>बाद </strong><strong>नुकसान</strong> में कमी आती है।</p>
<p><strong>एस<span>. </span></strong><strong>सौंदरराजन<span>, </span></strong><strong>सीईओ<span>, </span></strong><strong>हायफार्म</strong><span>, </span>कहते हैं<span>, &ldquo;</span>हायफार्म की पहल एक सरल सिद्धांत पर आधारित है<span> &mdash; </span>बीज बोने से पहले मिट्टी को जानो। जैसे इंसानों की नियमित जांच से स्वास्थ्य ठीक रहता है<span>, </span>वैसे ही मिट्टी की जांच खेतों को स्वस्थ रखती है। जब किसान समझ जाते हैं कि उनकी मिट्टी को वास्तव में क्या चाहिए<span>, </span>तो वे सही और संतुलित इनपुट्स का इस्तेमाल कर बेहतर नतीजे पा सकते हैं।<span>&rdquo; </span></p>
<p><strong><span>"</span></strong><strong>सॉइल </strong><strong>स्टूर्डशिप </strong><strong>ड्राइव<span>"</span></strong> अभी अपनी शुरुआती अवस्था में है<span>, </span>लेकिन इसकी दिशा स्पष्ट है<span> &mdash;<br /></span><strong>आधुनिक<span>, </span></strong><strong>वैज्ञानिक </strong><strong>और </strong><strong>डेटा<span>-</span></strong><strong>आधारित<span> &lsquo;</span></strong><strong>मिट्टी </strong><strong>पहले<span>&rsquo; </span></strong><strong>दृष्टिकोण</strong> की ओर।</p>
<p>इसका उद्देश्य है कि <strong>मिट्टी </strong><strong>की </strong><strong>जांच </strong><strong>को </strong><strong>बुवाई </strong><strong>जितना </strong><strong>ही </strong><strong>नियमित </strong><strong>और </strong><strong>जरूरी </strong><strong>हिस्सा</strong> बना दिया जाए <strong>लैब </strong><strong>एनालिसिस<span>, </span></strong><strong>फील्ड </strong><strong>डेमो </strong><strong>और </strong><strong>डिजिटल </strong><strong>टूल्स</strong> के साथ मिलाकर<span>, </span>ताकि नतीजों पर निगरानी और सुधार लगातार होते रहें।</p>
<p><strong>ग्लोबल </strong><strong>आलू </strong><strong>विशेषज्ञ </strong><strong>एंगेल </strong><strong>लुवेस</strong><span>, </span>जिन्होंने गुजरात में लंबे समय तक काम किया है<span>, </span>मानते हैं कि इस तरह के प्रयास <strong>गुजरात </strong><strong>को </strong><strong>प्रोसेसिंग<span>-</span></strong><strong>ग्रेड </strong><strong>आलू </strong><strong>क्षेत्र </strong><strong>में </strong><strong>भारत </strong><strong>की </strong><strong>अग्रणी </strong><strong>स्थिति </strong><strong>बनाए </strong><strong>रखने</strong> में मदद कर सकते हैं।</p>
<p>वह कहते हैं<span>, &ldquo;</span><em>गुजरात </em><em>में </em><em>जो </em><em>कुछ </em><em>हो </em><em>रहा </em><em>है<span>, </span></em><em>वह </em><strong><em>रिएक्टिव </em></strong><strong><em>खेती </em></strong><strong><em>से </em></strong><strong><em>जानकार<span>&nbsp; </span></em></strong><strong><em>खेती </em></strong><strong><em>की </em></strong><strong><em>ओर </em></strong><strong><em>एक </em></strong><strong><em>बदलाव</em></strong> <em>है। </em><em>यह </em><em>सुधार </em><em>एक </em><em>दिन </em><em>में </em><em>नहीं </em><em>होगा<span>, </span></em><em>लेकिन </em><em>किसानों </em><em>की </em><em>प्रतिबद्धता </em><em>और </em><em>हायफार्म </em><em>की </em><em>सॉइल </em><em>स्टूवर्डशिप </em><em>ड्राइव </em><em>उम्मीद </em><em>जगाती </em><em>है।</em><span>&rdquo; </span></p>
<p><strong>हायफार्म </strong><strong>की<span> &lsquo;</span></strong><strong>सॉइल </strong><strong>स्टूवर्डशिप </strong><strong>ड्राइव<span>&rsquo;</span></strong> एक साधारण लेकिन ताक़तवर संदेश देती है<span> &mdash; </span><strong>जब </strong><strong>किसान </strong><strong>अपनी </strong><strong>मिट्टी </strong><strong>का </strong><strong>ध्यान </strong><strong>रखते </strong><strong>हैं<span>, </span></strong><strong>तो </strong><strong>मिट्टी </strong><strong>उनकी </strong><strong>फसल </strong><strong>का </strong><strong>ध्यान </strong><strong>रखती </strong><strong>है।</strong> और गुजरात <strong>चुपचाप<span>, </span></strong><strong>लेकिन </strong><strong>मज़बूती </strong><strong>से </strong>के आलू क्षेत्र में यह जुड़ाव <strong>एक </strong><strong>बार </strong><strong>फिर </strong><strong>जड़ें </strong><strong>जमा </strong><strong>रहा </strong><strong>है </strong><strong>।</strong></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685ce47b3d1c8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गुजरात की आलू बेल्ट में मिट्टी संरक्षण को बढ़ावा दे रहा हायफार्म ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685ce47b3d1c8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत से 2024&amp;#45;25 सीजन में 7.75 लाख टन चीनी का निर्यात, नए सीजन के लिए जल्द कोटा घोषित करने की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-exports-7.75-lakh-tonnes-of-sugar-in-2024-25-season-trade-body-seeks-early-quota-announcement-for-next-year.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 13 Oct 2025 14:47:48 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-exports-7.75-lakh-tonnes-of-sugar-in-2024-25-season-trade-body-seeks-early-quota-announcement-for-next-year.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) के अनुसार, भारत ने सितंबर में समाप्त हुए शुगर सीजन 2024-25 में लगभग 7.75 लाख टन चीनी का निर्यात किया है। एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया है कि 2025-26 विपणन वर्ष के लिए निर्यात कोटा जल्द घोषित किया जाए, ताकि समय रहते निर्यात की तैयारी की जा सके।</p>
<p>केंद्र सरकार ने इस 2024-25 सीजन में 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी। AISTA के अनुसार, फरवरी से सितंबर के बीच 7.75 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया, जिसमें 6.13 लाख टन व्हाइट शुगर, 1.04 लाख टन रिफाइंड शुगर और 33.34 <span>हजार</span> टन रॉ शुगर शामिल थी। इसके अलावा, 21 <span>हजार टन रॉ शुगर का निर्यात विशेष आर्थिक क्षेत्र (</span>SEZ) की रिफाइनरी को आपूर्ति के रूप में किया गया।</p>
<p>भारत से जिन देशों को सर्वाधिक चीनी निर्यात हुआ है उनमें जिबूती (1.46 लाख टन), <span>सोमालिया (</span>1.35 लाख टन), श्रीलंका (1.34 लाख टन) और अफगानिस्तान (75,533 टन) प्रमुख हैं। अनुमान जताया है कि 2024-25 में कुल निर्यात लगभग 8 लाख टन तक पहुंचेगा।</p>
<p>AISTA <span>ने सरकार से आग्रह किया है कि </span>2025-26 <span>सीजन के लिए निर्यात कोटा नवंबर </span>2025 <span>तक घोषित कर दे</span>, <span>ताकि चीनी मिलें समय रहते निर्यात की तैयार कर सकें। साथ ही निर्यात नीति और कोटा आवंटन की प्रक्रिया वही रखी जाए जो </span>2024-25 में अपनाई गई थी।</p>
<p>एसोसिएशन का कहना है कि यदि सरकार नवंबर 2025 तक नया निर्यात कोटा घोषित करती है, तो मिलों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुरूप तैयारी करने में आसानी होगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68ecc35328770.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत से 2024-25 सीजन में 7.75 लाख टन चीनी का निर्यात, नए सीजन के लिए जल्द कोटा घोषित करने की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68ecc35328770.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मदर डेयरी ने GST का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए कीमतों में की कटौती]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mother-dairy-reduces-prices-to-pass-on-gst-benefits-to-consumers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 16 Sep 2025 14:30:57 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mother-dairy-reduces-prices-to-pass-on-gst-benefits-to-consumers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="83" data-end="402">मदर डेयरी, जो नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है, ने आज कई डेयरी उत्पादों और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों (सफल ब्रांड के तहत) की कीमतों में कटौती की घोषणा की, ताकि भारत सरकार द्वारा हाल ही में घोषित GST सुधारों का लाभ सीधे ग्राहकों तक पहुंच सके।</p>
<p data-start="404" data-end="815">मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक <strong>मनीष बंदलिश</strong> ने कहा, &ldquo;डेयरी और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की विस्तृत श्रेणी पर हाल की GST कटौती एक प्रगतिशील कदम है, जो उपभोक्ताओं की खपत को बढ़ाएगा और सुरक्षित, उच्च गुणवत्ता वाले पैकेज्ड उत्पादों को अपनाने की गति को तेज करेगा। एक उपभोक्ता-केंद्रित संगठन के रूप में, हम इस सुधार की भावना के अनुरूप 22 सितंबर 2025 से सभी टैक्स लाभ सीधे हमारे ग्राहकों को पहुंचा रहे हैं।&rdquo;</p>
<p data-start="817" data-end="1246">उन्होंने आगे कहा, &ldquo;इस बदलाव के साथ हमारा पूरा उत्पाद पोर्टफोलियो अब या तो <strong>GST छूट/शून्य या न्यूनतम 5% स्लैब</strong> के तहत आता है। हमें विश्वास है कि इस कदम से पूरी वैल्यू चेन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा: किसानों को पैकेज्ड खाद्य उत्पादों की बढ़ती मांग से लाभ होगा, साथ ही कृषि उपकरण और संबंधित सामान पर GST कटौती से भी सहारा मिलेगा, जबकि उपभोक्ताओं को किफायती कीमतों और पैकेज्ड डेयरी व प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों तक बेहतर पहुँच मिलेगी।&rdquo;</p>
<p data-start="1248" data-end="1388">मदर डेयरी ने यह भी स्पष्ट किया कि पांच दूध (जैसे, फुल क्रीम मिल्क, टोंड मिल्क) हमेशा से GST से मुक्त रहा है और इसका मूल्य अपरिवर्तित रहेगा।&nbsp;</p>
<p data-start="1390" data-end="1430"><strong data-start="1390" data-end="1428">मुख्य उत्पादों की कीमतों में कटौती</strong></p>
<p data-start="1432" data-end="1501">नई कीमतें विभिन्न उत्पाद श्रेणियों पर लागू GST दरों को दर्शाती हैं:</p>
<ul data-start="1502" data-end="2403" data-is-only-node="">
<li data-start="1502" data-end="1704">
<p data-start="1504" data-end="1704"><strong data-start="1504" data-end="1539">UHT मिल्क (टेट्रा पैक) और पनीर:</strong> UHT (टेट्रा पैक) दूध और पनीर पर GST 5% से घटाकर 0% कर दिया गया है। इससे, 1 लीटर UHT टोंड मिल्क की कीमत ₹77 से घटकर ₹75 और 200 ग्राम पनीर ₹95 से घटकर ₹92 हो गई है।</p>
</li>
<li data-start="1705" data-end="1929">
<p data-start="1707" data-end="1929"><strong data-start="1707" data-end="1755">घी, मक्खन, चीज, मिल्कशेक और फ्रोजन स्नैक्स:</strong> इन उत्पादों पर GST 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। उदाहरण के लिए, 1 लीटर घी अब ₹645 में उपलब्ध होगा, जो पहले ₹675 था। मक्खन (100 ग्राम) अब ₹58 में मिलेगा, पहले ₹62 का था।</p>
</li>
<li data-start="1930" data-end="2107">
<p data-start="1932" data-end="2107"><strong data-start="1932" data-end="1945">आइसक्रीम:</strong> आइसक्रीम पर सबसे अधिक GST कटौती हुई है, 18% से घटाकर 5%। इससे 50 मिली वैनिला कप की कीमत ₹10 से घटकर ₹9 और 1 लीटर स्ट्रॉबेरी क्रश टब ₹330 से घटकर ₹300 हो गई है।</p>
</li>
<li data-start="2108" data-end="2403">
<p data-start="2110" data-end="2403"><strong data-start="2110" data-end="2125">सफल उत्पाद:</strong> सफल ब्रांड के तहत कई प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद जैसे फ्रोजन स्नैक्स, जैम, अचार और टमाटर प्यूरी पर GST 12% से घटाकर 5% किया गया है। सफल फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज (400 ग्राम) अब ₹95 में उपलब्ध है, पहले ₹100 था, और 400 ग्राम सफल नींबू का अचार ₹130 से घटकर ₹120 हो गया है।&nbsp;</p>
</li>
</ul>
<h3 data-start="151" data-end="210"><strong data-start="155" data-end="208">मदर डेयरी और सफल उत्पाद &ndash; GST कटौती एवं नई कीमतें</strong></h3>
<div class="_tableContainer_1rjym_1">
<div class="group _tableWrapper_1rjym_13 flex w-fit flex-col-reverse" tabindex="-1">
<table data-start="212" data-end="1466" class="w-fit min-w-(--thread-content-width)">
<thead data-start="212" data-end="286">
<tr data-start="212" data-end="286">
<th data-start="212" data-end="221" data-col-size="sm">श्रेणी</th>
<th data-start="221" data-end="231" data-col-size="sm">SKU/वजन</th>
<th data-start="231" data-end="248" data-col-size="sm">पुराना MRP (₹)</th>
<th data-start="248" data-end="262" data-col-size="sm">नया MRP (₹)</th>
<th data-start="262" data-end="275" data-col-size="sm">पुराना GST</th>
<th data-start="275" data-end="286" data-col-size="sm">नया GST</th>
</tr>
</thead>
<tbody data-start="364" data-end="1466">
<tr data-start="364" data-end="423">
<td data-start="364" data-end="393" data-col-size="sm"><strong data-start="366" data-end="392">UHT मिल्क (टेट्रा/पॉच)</strong></td>
<td data-start="393" data-end="402" data-col-size="sm">1 लीटर</td>
<td data-start="402" data-end="407" data-col-size="sm">77</td>
<td data-start="407" data-end="412" data-col-size="sm">75</td>
<td data-start="412" data-end="417" data-col-size="sm">5%</td>
<td data-start="417" data-end="423" data-col-size="sm">0%</td>
</tr>
<tr data-start="424" data-end="457">
<td data-start="424" data-end="427" data-col-size="sm"></td>
<td data-start="427" data-end="436" data-col-size="sm">450 ml</td>
<td data-start="436" data-end="441" data-col-size="sm">33</td>
<td data-start="441" data-end="446" data-col-size="sm">32</td>
<td data-start="446" data-end="451" data-col-size="sm">5%</td>
<td data-start="451" data-end="457" data-col-size="sm">0%</td>
</tr>
<tr data-start="458" data-end="499">
<td data-start="458" data-end="469" data-col-size="sm"><strong data-start="460" data-end="468">पनीर</strong></td>
<td data-start="469" data-end="478" data-col-size="sm">200 gm</td>
<td data-start="478" data-end="483" data-col-size="sm">95</td>
<td data-start="483" data-end="488" data-col-size="sm">92</td>
<td data-start="488" data-end="493" data-col-size="sm">5%</td>
<td data-start="493" data-end="499" data-col-size="sm">0%</td>
</tr>
<tr data-start="500" data-end="535">
<td data-start="500" data-end="503" data-col-size="sm"></td>
<td data-start="503" data-end="512" data-col-size="sm">400 gm</td>
<td data-start="512" data-end="518" data-col-size="sm">180</td>
<td data-start="518" data-end="524" data-col-size="sm">174</td>
<td data-start="524" data-end="529" data-col-size="sm">5%</td>
<td data-start="529" data-end="535" data-col-size="sm">0%</td>
</tr>
<tr data-start="536" data-end="575">
<td data-start="536" data-end="539" data-col-size="sm"></td>
<td data-start="539" data-end="553" data-col-size="sm">मलाई 200 gm</td>
<td data-start="553" data-end="559" data-col-size="sm">100</td>
<td data-start="559" data-end="564" data-col-size="sm">97</td>
<td data-start="564" data-end="569" data-col-size="sm">5%</td>
<td data-start="569" data-end="575" data-col-size="sm">0%</td>
</tr>
<tr data-start="576" data-end="616">
<td data-start="576" data-end="579" data-col-size="sm"></td>
<td data-start="579" data-end="593" data-col-size="sm">मलाई 500 gm</td>
<td data-start="593" data-end="599" data-col-size="sm">305</td>
<td data-start="599" data-end="605" data-col-size="sm">285</td>
<td data-start="605" data-end="610" data-col-size="sm">5%</td>
<td data-start="610" data-end="616" data-col-size="sm">0%</td>
</tr>
<tr data-start="617" data-end="660">
<td data-start="617" data-end="629" data-col-size="sm"><strong data-start="619" data-end="628">मक्खन</strong></td>
<td data-start="629" data-end="638" data-col-size="sm">100 gm</td>
<td data-start="638" data-end="643" data-col-size="sm">62</td>
<td data-start="643" data-end="648" data-col-size="sm">58</td>
<td data-start="648" data-end="654" data-col-size="sm">12%</td>
<td data-start="654" data-end="660" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
<tr data-start="661" data-end="713">
<td data-start="661" data-end="672" data-col-size="sm"><strong data-start="663" data-end="671">चीज़</strong></td>
<td data-start="672" data-end="689" data-col-size="sm">क्यूब्स 180 gm</td>
<td data-start="689" data-end="695" data-col-size="sm">145</td>
<td data-start="695" data-end="701" data-col-size="sm">135</td>
<td data-start="701" data-end="707" data-col-size="sm">12%</td>
<td data-start="707" data-end="713" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
<tr data-start="714" data-end="757">
<td data-start="714" data-end="717" data-col-size="sm"></td>
<td data-start="717" data-end="733" data-col-size="sm">स्लाइस 480 gm</td>
<td data-start="733" data-end="739" data-col-size="sm">405</td>
<td data-start="739" data-end="745" data-col-size="sm">380</td>
<td data-start="745" data-end="751" data-col-size="sm">12%</td>
<td data-start="751" data-end="757" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
<tr data-start="758" data-end="800">
<td data-start="758" data-end="761" data-col-size="sm"></td>
<td data-start="761" data-end="776" data-col-size="sm">ब्लॉक 200 gm</td>
<td data-start="776" data-end="782" data-col-size="sm">150</td>
<td data-start="782" data-end="788" data-col-size="sm">140</td>
<td data-start="788" data-end="794" data-col-size="sm">12%</td>
<td data-start="794" data-end="800" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
<tr data-start="801" data-end="847">
<td data-start="801" data-end="810" data-col-size="sm"><strong data-start="803" data-end="809">घी</strong></td>
<td data-start="810" data-end="823" data-col-size="sm">1 लीटर पॉच</td>
<td data-start="823" data-end="829" data-col-size="sm">675</td>
<td data-start="829" data-end="835" data-col-size="sm">645</td>
<td data-start="835" data-end="841" data-col-size="sm">12%</td>
<td data-start="841" data-end="847" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
<tr data-start="848" data-end="884">
<td data-start="848" data-end="851" data-col-size="sm"></td>
<td data-start="851" data-end="860" data-col-size="sm">500 ml</td>
<td data-start="860" data-end="866" data-col-size="sm">345</td>
<td data-start="866" data-end="872" data-col-size="sm">330</td>
<td data-start="872" data-end="878" data-col-size="sm">12%</td>
<td data-start="878" data-end="884" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
<tr data-start="885" data-end="938">
<td data-start="885" data-end="888" data-col-size="sm"></td>
<td data-start="888" data-end="914" data-col-size="sm">प्रीमियम गिर गाय 500 ml</td>
<td data-start="914" data-end="920" data-col-size="sm">999</td>
<td data-start="920" data-end="926" data-col-size="sm">984</td>
<td data-start="926" data-end="932" data-col-size="sm">12%</td>
<td data-start="932" data-end="938" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
<tr data-start="939" data-end="985">
<td data-start="939" data-end="954" data-col-size="sm"><strong data-start="941" data-end="953">मिल्कशेक</strong></td>
<td data-start="954" data-end="963" data-col-size="sm">180 ml</td>
<td data-start="963" data-end="968" data-col-size="sm">30</td>
<td data-start="968" data-end="973" data-col-size="sm">28</td>
<td data-start="973" data-end="979" data-col-size="sm">12%</td>
<td data-start="979" data-end="985" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
<tr data-start="986" data-end="1040">
<td data-start="986" data-end="1001" data-col-size="sm"><strong data-start="988" data-end="1000">आइसक्रीम</strong></td>
<td data-start="1001" data-end="1019" data-col-size="sm">50 ml वैनिला कप</td>
<td data-start="1019" data-end="1024" data-col-size="sm">10</td>
<td data-start="1024" data-end="1028" data-col-size="sm">9</td>
<td data-start="1028" data-end="1034" data-col-size="sm">18%</td>
<td data-start="1034" data-end="1040" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
<tr data-start="1041" data-end="1093">
<td data-start="1041" data-end="1044" data-col-size="sm"></td>
<td data-start="1044" data-end="1069" data-col-size="sm">1 लीटर स्ट्रॉबेरी क्रश</td>
<td data-start="1069" data-end="1075" data-col-size="sm">330</td>
<td data-start="1075" data-end="1081" data-col-size="sm">300</td>
<td data-start="1081" data-end="1087" data-col-size="sm">18%</td>
<td data-start="1087" data-end="1093" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
<tr data-start="1094" data-end="1151">
<td data-start="1094" data-end="1119" data-col-size="sm"><strong data-start="1096" data-end="1118">सफल फ्रोजन स्नैक्स</strong></td>
<td data-start="1119" data-end="1128" data-col-size="sm">400 gm</td>
<td data-start="1128" data-end="1134" data-col-size="sm">100</td>
<td data-start="1134" data-end="1139" data-col-size="sm">95</td>
<td data-start="1139" data-end="1145" data-col-size="sm">12%</td>
<td data-start="1145" data-end="1151" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
<tr data-start="1152" data-end="1197">
<td data-start="1152" data-end="1155" data-col-size="sm"></td>
<td data-start="1155" data-end="1175" data-col-size="sm">आलू टिक्की 400 gm</td>
<td data-start="1175" data-end="1180" data-col-size="sm">90</td>
<td data-start="1180" data-end="1185" data-col-size="sm">85</td>
<td data-start="1185" data-end="1191" data-col-size="sm">12%</td>
<td data-start="1191" data-end="1197" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
<tr data-start="1198" data-end="1245">
<td data-start="1198" data-end="1201" data-col-size="sm"></td>
<td data-start="1201" data-end="1223" data-col-size="sm">हरा भरा कबाब 200 gm</td>
<td data-start="1223" data-end="1228" data-col-size="sm">80</td>
<td data-start="1228" data-end="1233" data-col-size="sm">75</td>
<td data-start="1233" data-end="1239" data-col-size="sm">12%</td>
<td data-start="1239" data-end="1245" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
<tr data-start="1246" data-end="1318">
<td data-start="1246" data-end="1265" data-col-size="sm"><strong data-start="1248" data-end="1264">सफल अचार/जैम</strong></td>
<td data-start="1265" data-end="1294" data-col-size="sm">नींबू/आम/मिक्स अचार 400 gm</td>
<td data-start="1294" data-end="1300" data-col-size="sm">130</td>
<td data-start="1300" data-end="1306" data-col-size="sm">120</td>
<td data-start="1306" data-end="1312" data-col-size="sm">12%</td>
<td data-start="1312" data-end="1318" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
<tr data-start="1319" data-end="1366">
<td data-start="1319" data-end="1322" data-col-size="sm"></td>
<td data-start="1322" data-end="1344" data-col-size="sm">टमाटर प्यूरी 200 gm</td>
<td data-start="1344" data-end="1349" data-col-size="sm">27</td>
<td data-start="1349" data-end="1354" data-col-size="sm">25</td>
<td data-start="1354" data-end="1360" data-col-size="sm">12%</td>
<td data-start="1360" data-end="1366" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
<tr data-start="1367" data-end="1413">
<td data-start="1367" data-end="1370" data-col-size="sm"></td>
<td data-start="1370" data-end="1391" data-col-size="sm">नारियल पानी 200 ml</td>
<td data-start="1391" data-end="1396" data-col-size="sm">55</td>
<td data-start="1396" data-end="1401" data-col-size="sm">50</td>
<td data-start="1401" data-end="1407" data-col-size="sm">12%</td>
<td data-start="1407" data-end="1413" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
<tr data-start="1414" data-end="1466">
<td data-start="1414" data-end="1417" data-col-size="sm"></td>
<td data-start="1417" data-end="1442" data-col-size="sm">मिक्स फ्रूट जैम 500 gm</td>
<td data-start="1442" data-end="1448" data-col-size="sm">180</td>
<td data-start="1448" data-end="1454" data-col-size="sm">165</td>
<td data-start="1454" data-end="1460" data-col-size="sm">12%</td>
<td data-start="1460" data-end="1466" data-col-size="sm">5%</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
</div>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68c9272c9d65e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मदर डेयरी ने GST का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए कीमतों में की कटौती ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68c9272c9d65e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको&amp;#45;एमसी ने भारतीय किसानों को सशक्त बनाने के 10 वर्ष किये पूरे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/iffco-mc-complets-10-years-of-excellence-in-empowering-indian-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 04 Sep 2025 12:44:58 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/iffco-mc-complets-10-years-of-excellence-in-empowering-indian-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>भारतीय बाजार में एग्रो केमिकल बिजनेस के लिए इफको और जापान की मित्सुबिशी कॉरपोरेशन के संयुक्त उद्यम इफको-एमसी क्रॉप साइंस प्राइवेट लिमिटेड ने </span>भारतीय किसानों को गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय कृषि रसायन समाधान प्रदान करने में उत्कृष्टता का एक दशक पूरा किया है।</p>
<p>इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में राकेश कपूर<span> (</span>अध्यक्ष<span>, </span>इफको<span>-</span>एमसी<span>), </span>डॉ<span>. </span>आर<span>.</span>पी<span>. </span>सिंह<span> (</span>निदेशक<span>, </span>इफको<span>-</span>एमसी एवं निदेशक<span>, </span>मानव संसाधन एवं विधि<span>, </span>इफको<span>),</span>&nbsp;मकोतो हसेगावा<span> (</span>वरिष्ठ उपाध्यक्ष<span>, </span>मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन<span>),मनोज</span>&nbsp;वार्ष्णेय<span> (</span>एमडी एवं सीईओ<span>, </span>इफको<span>-</span>एमसी<span>),</span>&nbsp;रोहित चोपड़ा<span> (</span>संयुक्त सीईओ<span>, </span>इफको<span>-</span>एमसी<span>),</span>&nbsp;तरुण भार्गव<span> (</span>सीओओ<span>, </span>इफको<span>-</span>एमसी<span>),</span>&nbsp;माधवी विप्रदास<span> (</span>एमडी<span>, </span>आईएफएफडीसी<span>),</span>&nbsp;मधुलिका शुक्ला<span>(</span>सीईओ<span>, </span>इफको ई<span>-</span>बाजार<span>), </span>डॉ<span>. </span>आरपीएस यादव<span>, </span>प्रभारी<span>, </span>एफएमडीआई<span>,</span>&nbsp;प्रिंस मदान<span>, </span>उपाध्यक्ष<span>, </span>मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन और विकास सेठी<span>, </span>महाप्रबंधक<span>, </span>मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन शामिल रहे।&nbsp;</p>
<p><span>&nbsp;इस मौके पर</span>&nbsp;तरुण भार्गव<span> (</span>सीओओ<span>, </span>इफको<span>-</span>एमसी<span>) </span>ने&nbsp; कंपनी की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला और विश्वास व्यक्त किया कि अगला दशक और भी अधिक परिवर्तनकारी होगा। वहींं इस मौके पर<span>&nbsp; </span>विशेष रूप से तैयार की गई<span> 10 </span>साल की यात्रा पर आधारित फिल्म प्रदर्शित की गई<span>, </span>जिसमें इफको<span>-</span>एमसी की भारतीय कृषि रसायन बाजार के प्रति लचीलेपन<span>, </span>नवाचार और प्रतिबद्धता की कहानी को दर्शाया गया। इफको<span>-</span>एमसी को अपनी नई कॉर्पोरेट वेबसाइट लॉन्च करने का भी गौरव प्राप्त हुआ<span>, </span>जो हितधारकों के साथ जुड़ाव को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म है।</p>
<p>इफको<span>-</span>एमसी के मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज वार्ष्णेय<span>&nbsp;</span>ने कंपनी की उपलब्धियों और उसके किसान<span>-</span>केंद्रित सिद्धांतों पर विचार व्यक्त किए। एंड्रयू कार्नेगी को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा<span>: &ldquo;</span>टीमवर्क एक साझा दृष्टिकोण की दिशा में मिलकर काम करने की क्षमता है। यह वह ईंधन है जो आम लोगों को असाधारण परिणाम प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। उन्होंने<span>&nbsp; </span>कहा<span>&nbsp; 500 </span>से ज़्यादा पेशेवर कर्मचारियों का निर्माण<span>, 10 </span>मजबूत ब्रांड बनाना<span>, </span>एक अद्वितीय निश्चित एमआरपी एकल<span>-</span>स्तरीय वितरण मॉडल स्थापित करना<span>, </span>और वित्त वर्ष<span> 2024-25 </span>में रिकॉर्ड राजस्व के साथ निरंतर लाभप्रदता हासिल करना। किसान सुरक्षा बीमा योजना जैसी किसान<span>-</span>केंद्रित पहल<span>, </span>ज़ेननेक्सा ब्रांड के तहत जैविक फसल समाधानों का विस्तार<span>, </span>खरीफ<span> 2026-27 </span>में एक पेटेंट प्राप्त उत्पाद का नियोजित लॉन्च और लोगों के विकास<span>, </span>तकनीक और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता अगले दशक के प्रेरक कारक होंगे।</p>
<p><span>&nbsp;</span>योशिदा<span> (</span>निदेशक<span>, </span>इफको<span>-</span>एमसी<span>) </span>ने इफको और मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन के बीच<span> 10 </span>वर्षों की साझेदारी पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा<span>, &ldquo;</span>यह सहयोग व्यवसाय से आगे बढ़ गया है<span>, </span>यह आपसी सम्मान और साझा महत्वाकांक्षा पर आधारित एक सच्ची साझेदारी है।<span>&rdquo; </span>डॉ<span>. </span>आर<span>.</span>पी<span>. </span>सिंह<span> (</span>निदेशक<span>, </span>इफको<span>-</span>एमसी<span>) </span>ने कहा<span>, &ldquo;</span>यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है। पिछला दशक शानदार रहा है<span>, </span>जो इफको ब्रांड के भरोसे<span>, </span>किसानों के साथ गहरे जुड़ाव और मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन के मजबूत समर्थन पर आधारित है।<span>&rdquo;</span></p>
<p>&nbsp;राकेश कपूर<span> (</span>अध्यक्ष<span>, </span>इफको<span>-</span>एमसी<span>) </span>ने कंपनी के भविष्य के दृष्टिकोण पर ज़ोर देते हुए कहा<span>, &ldquo;</span>नए ऊर्जा के साथ<span>, </span>हमारा लक्ष्य आने वाले दशक में तेज़ी से विस्तार करना है। हम नए अणुओं और टिकाऊ समाधानों के साथ अपने पोर्टफोलियो को मजबूत करने के लिए तत्पर हैं।</p>
<p><span></span>भारतीय किसानों को सशक्त बनाने के<span> 10 </span>वर्ष पूरे किये जाने पर इफको<span>-</span>एमसी ने दोहराया कि वह किसानों को गुणवत्ता<span>, </span>भरोसेमंद और नवाचारी फसल संरक्षण समाधान उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मजबूत साझेदारी<span>, </span>नवाचार और किसानों के विश्वास को केंद्र में रखते हुए कंपनी आने वाले दशक में सफलता की नई कहानी लिखने के लिए तैयार है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68b939b5021be.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको-एमसी ने भारतीय किसानों को सशक्त बनाने के 10 वर्ष किये पूरे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68b939b5021be.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कॉटन पर आयात शुल्क हटते ही कीमतों में 1100 रुपये की गिरावट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/after-removal-of-import-duty-on-cotton-prices-fell-by-rs-1100.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 20 Aug 2025 17:38:08 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/after-removal-of-import-duty-on-cotton-prices-fell-by-rs-1100.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="145" data-end="373">केंद्र सरकार द्वारा कॉटन पर 11 फीसदी आयात शुल्क समाप्त करने के तुरंत बाद ही कीमतों में गिरावट का दौर शुरू हो गया। दो दिन के भीतर ही <strong>कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई)</strong> ने कॉटन के दामों में 1,100 रुपये प्रति कैंडी की कटौती कर दी।</p>
<p data-start="375" data-end="722">वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, 19 अगस्त से कॉटन पर आयात शुल्क समाप्त हो गया है। इसी दिन सीसीआई ने कॉटन के दाम 600 रुपये घटाए, और अगले दिन इसमें 500 रुपये की और कटौती की गई। नई कीमतों के तहत 28 एमएम कॉटन का दाम 55,100 रुपये, 29 एमएम का दाम 55,400 रुपये और 30 एमएम का दाम 55,700 रुपये प्रति कैंडी महाराष्ट्र के लिए तय किया गया है।</p>
<p data-start="724" data-end="1084">ट्रंप टैरिफ की मार से जूझ रहा भारत का टेक्सटाइल उद्योग कॉटन पर आयात शुल्क हटाने की मांग कर रहा था, क्योंकि अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ से इस क्षेत्र को नुकसान पहुंचने की आशंका है। भारत सरकार का यह कदम अमेरिका के साथ व्यापार तनाव कम करने की दिशा में भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे अमेरिका के साथ बातचीत के नए रास्ते खुल सकते हैं।</p>
<p data-start="1086" data-end="1405">कॉटन पर आयात शुल्क खत्म कराने के लिए टेक्सटाइल उद्योग कई माह से प्रयासरत था। इसके लिए अप्रैल के अंतिम सप्ताह में टेक्सटाइल मंत्रालय के साथ उद्योग प्रतिनिधियों की बैठकें हुईं, लेकिन उस समय कोई निर्णय नहीं हो पाया। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, अगस्त के दूसरे सप्ताह तक भी अधिकारी शुल्क समाप्त करने को लेकर सहमत नहीं थे।</p>
<p data-start="1407" data-end="1637">हालांकि, अमेरिका के साथ अटकी द्विपक्षीय व्यापार वार्ता और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद बने हालात को उद्योग ने आयात शुल्क समाप्त करवाने के लिए अवसर के रूप में इस्तेमाल किया।</p>
<p data-start="1639" data-end="1925">अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा कपास निर्यातक है और भारतीय बाजार तक व्यापक पहुंच बनाने के लिए दबाव बना रहा है। अमेरिका बड़े पैमाने पर भारत को कॉटन निर्यात करना चाहता है। ऐसे में सरकार का यह निर्णय दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता में आई कड़वाहट को कम करने का संकेत भी माना जा रहा है।</p>
<p data-start="1927" data-end="2167">उधर, देश में कपास की खेती का रकबा और उत्पादन लगातार घट रहा है। भारत में कॉटन उत्पादन अपने उच्चतम स्तर 390 लाख गांठ से करीब 90 लाख गांठ घटकर 300 लाख गांठ पर आ चुका है और एक बड़े निर्यातक के रूप में स्थापित होने के बाद अब भारत कॉटन का बड़ा आयातक बन गया है।</p>
<p data-start="2169" data-end="2475">भारत सरकार के आयात शुल्क समाप्त करने के फैसले पर <strong data-start="2195" data-end="2208">रूरल वॉयस</strong> ने अपनी पहली रिपोर्ट में ही आशंका जताई थी कि इसका नतीजा कीमतों में गिरावट के रूप में सामने आएगा। इसका असर नई फसल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। साथ ही, उन घरेलू स्टॉकिस्टों को भी नुकसान होगा जिन्होंने सीसीआई से कॉटन इसलिए खरीदी थी कि वे लीन सीजन में मुनाफा कमा सकें।</p>
<p data-start="2477" data-end="2764">उद्योग सूत्रों का कहना है कि आगामी सीजन में कॉटन के दाम कम ही रहेंगे। 30 सितंबर 2025 तक करीब छह लाख गांठ आयात होने का अनुमान है। दूसरी ओर, चालू खरीफ सीजन में कपास का क्षेत्रफल 3.24 लाख हेक्टेयर घटा है, जो पिछले साल के मुकाबले 2.91 फीसदी कम है। पिछले साल भी कॉटन का क्षेत्रफल कम हुआ था।</p>
<p data-start="2766" data-end="3051">कॉटन आयात पर शुल्क समाप्त कर केंद्र सरकार उद्योग जगत की मुश्किलों और अमेरिका के साथ व्यापार मोर्चे पर दिक्कतों को दूर करने में भले सफल हो जाए, लेकिन यह गहराते कपास संकट की आहट है।&nbsp;</p>
<p data-start="2766" data-end="3051"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_68a5ba48cab10.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कॉटन पर आयात शुल्क हटते ही कीमतों में 1100 रुपये की गिरावट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_68a5ba48cab10.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोनालीका ने 53,772 ट्रैक्टर बिक्री के साथ अप्रैल&amp;#45;जुलाई में शानदार प्रदर्शन किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sonalika-performed-well-in-april-july-with-53772-tractor-sales.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 08 Aug 2025 14:13:04 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sonalika-performed-well-in-april-july-with-53772-tractor-sales.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="454" data-end="967">भारत के प्रमुख ब्रांड सोनालीका ने वित्त वर्ष 2026 की शुरुआत में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी ने अप्रैल-जुलाई 2025 के बीच 53,772 ट्रैक्टरों की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की है जो उसके नवाचार और मजबूत बाजार पकड़ को दर्शाती है। महज़ चार महीनों में 50,000 ट्रैक्टर बिक्री का आंकड़ा पार करना कंपनी के लिए एक नया मील का पत्थर है।</p>
<p data-start="476" data-end="856"><span>पंजाब के होशियारपुर में स्थित&nbsp;</span>एकीकृत ट्रैक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में सोनालीका हर 2 मिनट में एक हैवी ड्यूटी ट्रैक्टर तैयार करने में सक्षम है। यह प्लांट उन्नत प्रक्रियाओं से लैस है और यहाँ ट्रैक्टर में लगने वाली लगभग हर पार्ट बनाया जाता है। कंपनी आगामी त्योहारी सीज़न की मांग को पूरा करने हेतु पूरी तरह तैयार है।</p>
<p>नए रिकॉर्ड प्रदर्शन पर इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर <strong>रमन मित्तल</strong> ने कहा, &ldquo;हमारे हैवी ड्यूटी ट्रैक्टर किसानों को आगे बढ़ने में मदद करने के उद्देश्य से तैयार किये गए हैं। हमें खुशी है कि हमने 4 महीनों में 50 हजार ट्रैक्टर बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है और अप्रैल-जुलाई 2025 में कुल 53,772 ट्रैक्टर बिक्री दर्ज की है। सितंबर 2025 तक मानसून के आशाजनक पूर्वानुमान और बंपर रबी फसल के साथ, किसान बेहतर कृषि उत्पादकता के लिए नए समाधानों को तेज़ी से अपना रहे हैं।"</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_6895b88894c86.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोनालीका ने 53,772 ट्रैक्टर बिक्री के साथ अप्रैल-जुलाई में शानदार प्रदर्शन किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_6895b88894c86.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जून में भारत का चाय उत्पादन 9 फीसदी गिरा, खराब मौसम और कीट हमलों का असर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-tea-production-fell-9-percent-in-june-affected-by-bad-weather-and-pest-attacks.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 04 Aug 2025 18:19:58 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-tea-production-fell-9-percent-in-june-affected-by-bad-weather-and-pest-attacks.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="244" data-end="489">भारत में जून 2025 के दौरान चाय उत्पादन में करीब 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जून में देश का चाय उत्पादन घटकर 13.35 करोड़ किलोग्राम रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह आंकड़ा 14.67 करोड़ किलोग्राम था। यह जानकारी टी बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों में सामने आई है।</p>
<p data-start="491" data-end="683">चाय उत्पादन में इस गिरावट के पीछे खराब मौसम और कीटों के प्रकोप को वजह बताया जा रहा है, जिससे उद्योग को नुकसान उठाना पड़ा है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले महीनों में चाय की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।</p>
<p data-start="685" data-end="988">हालांकि जून में गिरावट के बावजूद, वर्ष 2025 की पहली छमाही (जनवरी से जून) के दौरान देश का कुल चाय उत्पादन बढ़कर 46.97 करोड़ किलोग्राम हो गया है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 41.41 करोड़ किलोग्राम था। यदि मौसम की परिस्थितियां सामान्य रहीं, तो आगामी महीनों में चाय उत्पादन में सुधार की संभावना बनी हुई है।</p>
<p data-start="1289" data-end="1535">बड़े और संगठित बागान संचालकों द्वारा जून में 5.52 करोड़ किलोग्राम चाय का उत्पादन किया गया, जो पिछले वर्ष इसी महीने 6.84 करोड़ किलोग्राम था। वहीं, छोटे उत्पादकों का उत्पादन घटकर 6.83 करोड़ किलोग्राम रह गया, जो जून 2024 में 7.83 करोड़ किलोग्राम था।</p>
<p data-start="1537" data-end="1841">गत जून में असम का चाय उत्पादन 10 प्रतिशत घटकर 6.85 करोड़ किलोग्राम रह गया, जो पिछले वर्ष जून में 7.59 करोड़ किलोग्राम था। असम घाटी में यह गिरावट और भी अधिक, लगभग 11 प्रतिशत रही। वहीं, कछार क्षेत्र में इस दौरान चाय उत्पादन 12 प्रतिशत बढ़कर 43.2 लाख किलोग्राम हो गया, जो जून 2024 में 38.6 लाख किलोग्राम था।</p>
<p data-start="1843" data-end="2114">पश्चिम बंगाल में चाय उत्पादन हल्की गिरावट के साथ 4.06 करोड़ किलोग्राम रहा, जो पिछले वर्ष जून में 4.14 करोड़ किलोग्राम था। हालांकि, दार्जिलिंग में चाय उत्पादन में मामूली वृद्धि दर्ज की गई, जहां जून में उत्पादन 5.3 लाख किलोग्राम रहा, जबकि पिछले साल यह 5.1 लाख किलोग्राम था।</p>
<p data-start="1843" data-end="2114">दक्षिण भारत में भी चाय उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट मुख्य रूप से अधिक वर्षा और कम धूप वाले दिनों के कारण हुई। तमिलनाडु में चाय उत्पादन 11 प्रतिशत घटकर 1.60 करोड़ किलोग्राम रह गया, जो 2024 में 1.80 करोड़ किलोग्राम था। केरल के चाय उत्पादन में 31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और&nbsp; कर्नाटक में भी चाय उत्पादन घटकर 0.37 मिलियन किलोग्राम रह गया, जो जून 2024 में 0.53 मिलियन किलोग्राम था।</p>
<p data-start="1843" data-end="2114"></p>
<p></p>
<p data-start="2116" data-end="2324">जून में सबसे अधिक उत्पादन सीटीसी चाय का हुआ, जो 11.78 करोड़ किलोग्राम रहा। इसके बाद ऑर्थोडॉक्स चाय का उत्पादन 1.38 करोड़ किलोग्राम और ग्रीन टी का उत्पादन 18.4 लाख किलोग्राम रहा है।&nbsp;</p>
<p data-start="2116" data-end="2324"></p>
<p data-start="2116" data-end="2324"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_6890abd27ea50.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जून में भारत का चाय उत्पादन 9 फीसदी गिरा, खराब मौसम और कीट हमलों का असर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_6890abd27ea50.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ग्वालियर में मधु क्रांति: कैसे मधुमक्खी पालन से मोरार ब्लॉक की महिलाएं सशक्त हो रही हैं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sweet-revolution-in-gwalior-how-honey-bee-villages-are-empowering-women-in-morar-block.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 02 Aug 2025 14:39:02 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sweet-revolution-in-gwalior-how-honey-bee-villages-are-empowering-women-in-morar-block.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश के ग्वालियर के मोरार ब्लॉक के एकारा और उदयपुर गांव जमीनी स्तर पर बदलाव का अनुभव कर रहे हैं। जो क्षेत्र कभी पारंपरिक कृषि और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर था, वह अब एक नए और मधुर अवसर से गुलजार है - मधुमक्खी पालन। विंध्यांचल किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड (VFPCL), CSIR-NBRI लखनऊ और ग्वालियर जिला प्रशासन की पहल की बदौलत, ये गांव ग्रामीण नवाचार और महिला सशक्तीकरण के आदर्श के रूप में उभरे हैं।</p>
<p>इस "मधुमक्खी गांव" मॉडल के पीछे का विचार सरल किन्तु प्रभावशाली है: महिलाओं के लिए कम लागत, उच्च-लाभ वाली आजीविका का विकल्प बनाने के लिए मौजूदा ग्रामीण बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक विशेषज्ञता का लाभ उठाना। इसके लिए ग्वालियर की ज़िला कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान का दूरदर्शी सहयोग मिला है। इस परियोजना की शुरुआत के लिए एकारा और उदयपुर गांवों की पहचान उनके कृषि आधार और FPO कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के कारण की गई।</p>
<p>इस पहल के तहत इन गावों की 25 से ज़्यादा महिलाओं को मधुमक्खी पालन, मधुमक्खी पालन बक्सों के प्रबंधन और शहद निकालने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रत्येक प्रतिभागी को मधुमक्खी पालन के बक्से और किट निःशुल्क प्रदान किए गए, जिससे वे तुरंत उत्पादन शुरू कर सकीं। सीएसआईआर-एनबीआरआई के वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिक तरीकों और मौसमी फसल-मधुमक्खी इंटीग्रेशन सुनिश्चित करने में मदद की। इससे न केवल शहद का उत्पादन बढ़ा, बल्कि आसपास के खेतों में फसल परागण से जैव विविधता भी बढ़ी।</p>
<p>एकारा गांव की निवासी रजनी बाई ने इस बदलाव पर कहा, "पहले हम मज़दूरी पर निर्भर थे। अब हमें शहद से आय होती है और हमें अपने काम पर गर्व है।" उनकी इस भावना से कई महिलाएं सहमत हैं, जो अब शहद की बिक्री से सालाना 40,000 रुपये से 60,000 रुपये तक कमाती हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_688dd5445c847.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>वीएफपीसीएल का मौजूदा बुनियादी ढांचा परियोजना की सफलता में महत्वपूर्ण साबित हुआ। एफपीओ के ग्रामीण केंद्र में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए, जबकि इसकी संग्रहण और भंडारण इकाइयों ने शहद एकत्रीकरण को सुगम बनाया। गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए एक स्थानीय ट्रेसेबिलिटी प्रणाली भी विकसित की गई और महिलाओं को आगे की सहायता के लिए सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया। कलेक्टर कार्यालय ने इन प्रयासों को जोड़ने, संस्थानों के बीच समन्वय को सुगम बनाने और ग्रामीण विकास के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में इस पहल को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p>इन गांवों में अब तक 200 से अधिक मधुमक्खी बक्सों का वितरण किया गया है। इससे जैव विविधता में सुधार हुआ है और ग्रामीण महिलाओं को आय का एक विश्वसनीय, सम्मानजनक स्रोत मिला है। इस मॉडल का अब विस्तार किया जा रहा है। एक स्थानीय प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन इकाई स्थापित करने, शहद की एक ब्रांडेड और ट्रेस करने योग्य श्रृंखला शुरू करने और शहद क्लस्टर मॉडल के हिस्से के रूप में परियोजना को पांच और गांवों तक ले जाने की योजनाएं प्रगति पर हैं।</p>
<p>ग्वालियर की कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने इस पहल के गहन प्रभाव पर ज़ोर देते हुए कहा, "यह पहल सिर्फ आय के बारे में नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक नवाचार और स्थानीय नेतृत्व के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की गरिमा और उनकी शक्ति को उजागर करने के बारे में भी है।"</p>
<p>मोरार ब्लॉक में यह "मीठी क्रांति" देश भर में ग्रामीण सशक्तीकरण के लिए एक अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत करती है, जो सामुदायिक लचीलेपन पर आधारित है, विज्ञान द्वारा निर्देशित है और ग्रामीण महिलाओं की उद्यमशीलता की भावना से प्रेरित है।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_688dd54363289.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ग्वालियर में मधु क्रांति: कैसे मधुमक्खी पालन से मोरार ब्लॉक की महिलाएं सशक्त हो रही हैं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_688dd54363289.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश के चीनी उत्पादन में 18.38% की गिरावट, रिकवरी घटकर 9.30% रह गई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-sugar-production-fell-by-18.38-pc-recovery-fell-to-9.30-pc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 30 Jul 2025 17:33:34 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-sugar-production-fell-by-18.38-pc-recovery-fell-to-9.30-pc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल देश के चीनी उत्पादन में 18 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। गन्ने से चीनी की रिकवरी भी घटकर 9.30 फीसदी रह गई है जो पिछले साल 10.10 फीसदी थी। यह समूचे चीनी उद्योग के लिए संकट की आहट है।</p>
<p><strong>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ लिमिटेड (NFCSF)</strong> ने चीनी सीजन 2024-25 के लिए राज्यवार पेराई रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, 30 जुलाई 2025 तक कुल चीनी उत्पादन 258.20 लाख टन रहा, जो पिछले साल के 316.35 लाख टन चीनी उत्पादन के मुकाबले 18.38% कम है।</p>
<p>हालांकि, कर्नाटक और तमिलनाडु में जून से सितंबर तक चलने वाले विशेष पेराई सीजन में गतिविधियां तेज हुई हैं। इस बार जुलाई के अंत तक कर्नाटक में 7 और तमिलनाडु में 9 मिलें चालू थीं, जबकि पिछले साल ये आंकड़े क्रमशः 1 और 11 थे। NFCSF को उम्मीद है कि सीजन का समापन लगभग 261 लाख टन चीनी उत्पादन के साथ होगा जो पिछले साल 319 लाख था।</p>
<p>NFCSF के अध्यक्ष <strong>हर्षवर्धन पाटिल</strong> ने बताया कि सहकारिता क्षेत्र में बदलाव की दिशा में <strong>राष्ट्रीय सहकारिता नीति</strong><strong>&ndash;2025</strong> एक बड़ा कदम है। नीति में 83 क्रियान्वयन योग्य सुधार शामिल हैं, जिनमें से कई पहले ही शुरू हो चुके हैं।</p>
<p><strong>अगले सीजन का आउटलुक</strong><br />NFCSF ने 2025-26 चीनी सीजन को लेकर उम्मीद जताई है कि अनुकूल मानसून, महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ना क्षेत्रफल में वृद्धि और सरकार द्वारा उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) में समयबद्ध वृद्धि से कुल चीनी उत्पादन <strong>350 लाख टन</strong> तक पहुंचने की संभावना है।</p>
<p>फेडरेशन के प्रबंध निदेशक <strong>प्रकाश नाइकनवरे</strong> ने कहा फेडरेशन ने केंद्र सरकार से इथेनॉल के खरीद मूल्य में संशोधन, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को बढ़ाने और अधिशेष स्टॉक प्रबंधन के लिए चीनी निर्यात की अनुमति देने का अनुरोध किया है। इससे न केवल चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और देश सहकारिता व इथेनॉल क्षेत्र में अपनी प्रगति को बनाए रख पाएगा।</p>
<p><strong>इथेनॉल मिश्रण में बड़ी उपलब्धि</strong><br />भारत ने 2025 तक पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 5 साल पहले ही हासिल कर लिया है। NFCSF ने इसे बड़ी उपलब्धि करार दिया है। वर्ष 2014 में इथेनॉल मिश्रण केवल 1.5% था, वहीं अब यह 20% तक पहुंच गया है।</p>
<p>चालू इथेनॉल वर्ष में 1126 करोड़ लीटर आवंटन के मुकाबले 700 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति की जा चुकी है, जिसमें 38% हिस्सा गन्ना आधारित स्रोतों और 62% हिस्सा अनाज आधारित फीड स्टोक से आया है। यह बदलाव कच्चे माल में विविधता का संकेत है, लेकिन इथेनॉल उत्पादन की दीर्घकालिक स्थिरता कैसे सुनिश्चित की जाएगी, यह सवाल भी खड़ा होता है।</p>
<p><strong>मल्टी-फीड डिस्टिलरियों को मंजूरी</strong><br />महाराष्ट्र सरकार ने 23 जुलाई 2025 को राज्यभर में मल्टी-फीड डिस्टिलरियों की स्थापना और संचालन को मंजूरी दी है। यह निर्णय राष्ट्रीय जैव ऊर्जा नीति और भारत के इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 30% इथेनॉल मिश्रण है।</p>
<p>नई डिस्टिलरियों से सहकारी चीनी मिलों को विभिन्न फीडस्टोक्स &nbsp;का उपयोग कर इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने की सुविधा मिलेगी। साथ ही वे केंद्र सरकार की इथेनॉल ब्याज सब्सिडी योजना का लाभ भी उठा सकेंगी।</p>
<p><strong>चीनी उत्पादन में यूपी अव्वल</strong><strong>, </strong><strong>लेकिन रिकवरी घटी </strong><strong>&nbsp;</strong></p>
<p>पेराई सीजन 2024-25 के दौरान देश में सर्वाधिक 92.75 लाख टन चीनी उत्पादन के साथ उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। हालांकि, यूपी में चीनी उत्पादन पिछले साल 103.65 लाख टन रहा था। लेकिन चीनी उत्पादन में गिरावट महाराष्ट्र में और भी अधिक है। महाराष्ट्र का चीनी उत्पादन पिछले साल के 110.20 लाख टन से घटकर 80.95 लाख टन रह गया है। इसी तरह कर्नाटक में चीनी उत्पादन पिछले साले के 53 लाख टन से घटकर 42 लाख टन रहने का अनुमान है।</p>
<p>यूपी में शुगर रिकवरी पिछले साल 10.60 फीसदी थी जो इस साल 9.70 फीसदी रह गई है। इसी तरह महाराष्ट्र में शुगर रिकवरी से 10.30 फीसदी से घटकर 9.50 फीसदी पर आ गई है। कर्नाटक में शुगर रिकवरी 8.05 फीसदी है जो पिछले साल 9.30 फीसदी थी।</p>
<p><strong>त्योहारों में बढ़ सकती है मांग</strong><br />फेडरेशन के अनुसार, चीनी की एक्स-मिल कीमतें निर्यात कोटा घोषित होने के बाद 3,900 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास थीं, लेकिन मई 2025 के मध्य से इसमें गिरावट देखने को मिली है। आने वाले त्योहारों के सीजन में मांग बढ़ने की संभावना है, जिससे कीमतें स्थिर हो सकती हैं। यह स्थिरता चीनी मिलों के लिए जरूरी रखरखाव कार्य और आगामी सीजन की तैयारी के लिहाज से अहम होगी।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_688a066f77247.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश के चीनी उत्पादन में 18.38% की गिरावट, रिकवरी घटकर 9.30% रह गई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_688a066f77247.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी उत्पादन में 15% वृद्धि की संभावना, चीनी मिलों का राजस्व 6&amp;#45;8% तक बढ़ने का अनुमान: इक्रा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sugar-production-likely-to-increase-by-15-pc-sugar-mill-revenue-expected-to-grow-by-6-8-pc-icra-report.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 17 Jul 2025 16:58:16 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sugar-production-likely-to-increase-by-15-pc-sugar-mill-revenue-expected-to-grow-by-6-8-pc-icra-report.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में इस साल अच्छे मानसून के चलते चीनी उत्पादन में 15 फीसदी बढ़ोतरी हो सकती है। रेटिंग एजेंसी <strong>ICRA</strong> की हालिया <strong><a href="https://www.icra.in/CommonService/OpenMediaS3?Key=40b02b0c-2b39-49b1-9735-a81163e722bc">रिपोर्ट</a></strong> के अनुसार, वर्ष 2025-26 में देश की प्रमुख एकीकृत चीनी मिलों का राजस्व <strong>6-8% </strong>तक बढ़ने का अनुमान है। एजेंसी ने इस बात पर जोर दिया कि डिस्टिलरी क्षेत्र की लाभप्रदता बनाए रखने के लिए एथेनॉल की कीमतों में संशोधन आवश्यक है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, सामान्य से अधिक मानसून के कारण महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की खेती का रकबा बढ़ेगा। इसके बावजूद, यदि इथेनॉल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो चीनी मिलों के लिए परिचालन लाभ वित्त वर्ष 2026 में मामूली होगा। चीनी क्षेत्र के लिए ICRA का दृष्टिकोण स्थिर है, जो राजस्व में प्रत्याशित सुधार, स्थिर लाभप्रदता और आरामदायक ऋण कवरेज के साथ-साथ इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (EBP) सहित सरकार के नीतिगत समर्थन पर आधारित है।</p>
<p>ICRA के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग) <strong>गिरीश कुमार कदम</strong> का कहना है कि सामान्य से बेहतर मानसून और प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में गन्ने के रकबे और उपज में अपेक्षित सुधार के बीच <strong>सकल चीनी उत्पादन </strong>SY2025 के 296 लाख टन से बढ़कर SY2026 में 340 लाख टन होने का अनुमान है। इथेनॉल उत्पादन के लिए 40 लाख टन के अनुमानित डायवर्जन के बाद, शुद्ध चीनी उत्पादन SY2026 में 300 लाख टन रहेगा, जो SY2025 में 262 लाख टन था।</p>
<p>रेटिंग एजेंसी ने उम्मीद जताई है कि 30 सितंबर, 2025 तक चीनी का क्लोजिंग स्टॉक लगभग 52 लाख टन होगा, जो 30 सितंबर, 2024 को 80 लाख टन के चीनी स्टॉक से कम है। यह देश में 2 महीने की चीनी खपत के बराबर है। अगर घरेलू खपत और निर्यात कोटा 2025 के समान रहता है, तो 30 सितंबर, 2026 तक क्लोजिंग स्टॉक बढ़कर 63 लाख टन (लगभग 2.5 महीने की खपत) रहने की उम्मीद है।</p>
<p>इथेनॉल मिश्रण पर टिप्पणी करते हुए, <strong>गिरीश कुमार कदम</strong> ने कहा कि भारत सरकार द्वारा निर्धारित 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। सरकार अब इसे 20% से अधिक करने पर विचार कर रही है, जो डिस्टिलरी क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, जूस और बी-हेवी मोलासेस आधारित एथेनॉल की कीमतों में पिछले दो वर्षों से कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि इस दौरान गन्ने के एफआरपी (उचित एवं लाभकारी मूल्य) में लगभग 11.5% की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसलिए, डिस्टिलरीज और चीनी उद्योग की लाभप्रदता को बनाए रखने के लिए इथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी आवश्यक है।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_6878ddec6edf9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी उत्पादन में 15% वृद्धि की संभावना, चीनी मिलों का राजस्व 6-8% तक बढ़ने का अनुमान: इक्रा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_6878ddec6edf9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इथेनॉल आयात पर पाबंदियां जारी रखने की मांग, ISMA ने सरकार को लिखा पत्र]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/isma-wrote-a-letter-to-government-demanding-continuation-of-restrictions-on-ethanol-import.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 15 Jul 2025 19:04:10 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/isma-wrote-a-letter-to-government-demanding-continuation-of-restrictions-on-ethanol-import.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत <strong>इथेनॉल आयात</strong> पर लगी पाबंदियां हटाने की अटकलों से शुगर और इथेनॉल उद्योग की चिंताएं बढ़ गई हैं।</p>
<p><strong>भारतीय चीनी और जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA)</strong> ने वाणिज्य और उद्योग मंत्री <strong>पीयूष गोयल</strong> को पत्र लिखकर इथेनॉल आयात पर वर्तमान प्रतिबंधों को जारी रखने का अनुरोध किया है। ISMA का कहना है कि इन प्रतिबंधों की बदौलत भारत का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ा है और गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित हो पाया है। इसके अलावा, इस क्षेत्र में नीतिगत स्थिरता और निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए भी इन पाबंदियों को बनाए रखना आवश्यक है।</p>
<p>ISMA ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए चिंता जताई है कि भारत सरकार अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता के दौरान इथेनॉल आयात पर लगे प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रही है। संगठन ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह ऐसा कोई भी कदम न उठाए जिससे घरेलू इथेनॉल उद्योग को नुकसान पहुंचे या किसानों के हित प्रभावित हों।</p>
<p>पत्र में ISMA ने उल्लेख किया कि राष्ट्रीय जैव-ईंधन नीति (2018) के तहत ईंधन के लिए इथेनॉल आयात को "प्रतिबंधित श्रेणी" में रखना एक दूरदर्शी और निर्णायक कदम था, जिसने देश में आत्मनिर्भर इथेनॉल उद्योग की नींव मजबूत की। इससे गन्ना किसानों की आय में बढ़ोतरी, समय पर भुगतान और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता में कमी जैसे अहम राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल किया गया है।</p>
<p>वर्ष 2018 से अब तक भारत की इथेनॉल उत्पादन क्षमता में 140 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है और इसमें ₹40,000 करोड़ से अधिक का निवेश हुआ है। नतीजतन, इथेनॉल मिश्रण दर 18.86 प्रतिशत तक पहुंच गई है और देश समय से पहले 20 प्रतिशत मिश्रण के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में अग्रसर है।</p>
<p>ISMA ने सरकार से अपील की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए <strong>"अन्नदाता से ऊर्जादाता"</strong> के मूलमंत्र से मिली उपलब्धियों को बचाया जाए और उन्हें आगे बढ़ाया जाए। इसके लिए जरूरी है कि घरेलू इथेनॉल उद्योग के हितों का बचाव हो ताकि नीतिगत स्थिरता बनी रहे और इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिल सके।&nbsp;</p>
<p>सरकार को आगाह करते हुए ISMA ने कहा है कि यदि इथेनॉल आयात पर प्रतिबंध हटाए गए, तो इससे घरेलू क्षमता निर्माण, निवेश और रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा, गन्ना किसानों के भुगतान में भी समस्याएं आ सकती हैं, क्योंकि घरेलू इथेनॉल इकाइयों की उत्पादन क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाएगा। यह कदम राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और हरित ईंधन में आत्मनिर्भरता के प्रयासों को कमजोर करेगा।</p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_687658543012a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इथेनॉल आयात पर पाबंदियां जारी रखने की मांग, ISMA ने सरकार को लिखा पत्र ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_687658543012a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र सरकार ने 17 सीबीजी संयंत्रों को जैविक खाद की थोक बिक्री के लिए अधिकृत किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/central-government-authorized-17-cbg-plants-for-bulk-sale-of-fermented-organic-manure.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 10 Jul 2025 20:10:11 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/central-government-authorized-17-cbg-plants-for-bulk-sale-of-fermented-organic-manure.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट से निकलने वाली मैली को जैविक उर्वरक का दर्जा देने के बाद सरकार ने इसकी बिक्री की राह आसान बना दी है।&nbsp;</span>केंद्र सरकार ने 17 उत्पादकों को <span>फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM) और लिक्विड फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (LFOM) थोक में सीधे किसानों को बेचने</span> की अनुमति दी है।&nbsp;</p>
<p>8 जुलाई को<strong> केंद्रीय कृषि मंत्रालय</strong> की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार ने फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM) तथा लिक्विड फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (LFOM) का उत्पादन करने वाले 17 संयंत्रों को इनकी थोक बिक्री के लिए अधिकृत किया है। उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत इस अधिसूचना के अनुसार, ये संयंत्र अगले तीन साल के लिए किसानों को सीधे फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM) तथा लिक्विड फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (LFOM) की बिक्री कर सकेंगी।&nbsp;</p>
<p>सीबीजी प्लांट से प्राप्त जैविक खाद किसानों को बेचने के लिए अधिकृत इन 17 प्लांट में से 8 प्लांट रिलायंस समूह से जुड़े हैं। मंत्रालय की मंजूरी प्राप्त करने वाले संयंत्रों में 3 गुजरात, 3 हरियाणा, 3 पंजाब, 5 उत्तर प्रदेश, 2 महाराष्ट्र और एक राजस्थान में हैं।&nbsp;</p>
<p>इससे पहले&nbsp;<strong>08 मार्च 2025</strong> को केंद्र सरकार ने <span><strong>7 कंपनियों</strong> को&nbsp;फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM)&nbsp;और&nbsp;लिक्विड फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (LFOM)&nbsp;किसानों को थोक में सीधे बेचने की अनुमति दी है। यह मंजूरी&nbsp;फर्टिलाइज़र (इनऑर्गेनिक,&nbsp;ऑर्गेनिक या मिक्स्ड) (कंट्रोल) ऑर्डर, 1985&nbsp;के&nbsp;क्लॉज&nbsp;22&nbsp;के सब-क्लॉज (c)&nbsp;के तहत दी गई है। यह आदेश सरकारी गजट में प्रकाशित होने की तारीख से तीन साल तक प्रभावी रहेगा।</span></p>
<p><strong>उर्वरक का दर्जा मिलने से बिक्री की राह खुली&nbsp;</strong></p>
<p>सीबीजी प्लांट से प्राप्त जैविक खाद को उर्वरक के तौर पर कानूनी मान्यता मिलने से इसकी बिक्री का रास्ता खुला है। इससे खेती में इसके उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। &nbsp;</p>
<p>कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG)&nbsp;संयंत्रों से सह-उत्पाद के तौर पर प्राप्त होने वाली&nbsp;बायो-स्लरी&nbsp;पोषक तत्वों से युक्त होती है और&nbsp;<strong>ऑर्गेनिक कार्बन एन्हांसर</strong> का काम करती है। जबकि सीबीजी प्लांट के लिए इस बाई-प्रोडक्ट का निस्तारण एक बड़ी चुनौती है। लेकिन सरकार ने फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर में संशोधन कर सीबीजी प्लांट से प्राप्त ऑर्गेनिक कार्बन एन्हांसर को उर्वरकों की एक नई श्रेणी में शामिल कर दिया है। इससे सीबीजी संयंत्रों की आय बढ़ेगी, साथ ही टिकाऊ खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>27&nbsp;मार्च&nbsp;2025&nbsp;</strong>को सरकार ने&nbsp;फर्टिलाइजर (कंट्रोल) ऑर्डर, 1985&nbsp;में संशोधन कर&nbsp;फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM)&nbsp;तथा&nbsp;लिक्विड फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (LFOM) को ऑर्गेनिक कार्बन संवर्द्धक की श्रेणी में शामिल करते हुए&nbsp;इनके मानक तय कर दिए थे। इससे पहले&nbsp;<strong>17&nbsp;</strong><strong>फरवरी</strong> को जारी अधिसूचना के जरिए सीबीजी प्लांट से प्राप्त ऑर्गेनिक कार्बन संवर्द्धक को उर्वरकों की परिभाषा में शामिल करते हुए एक <strong>नई</strong>&nbsp;<strong>अनुसूची&nbsp;VIII</strong> &nbsp;- सीबीजी प्लांट से प्राप्त ऑर्गेनिक कार्बन संवर्द्धक शामिल कर दी थी।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_686fd16f08cdc.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र सरकार ने 17 सीबीजी संयंत्रों को जैविक खाद की थोक बिक्री के लिए अधिकृत किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_686fd16f08cdc.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोनालीका ने पहली तिमाही में 43,603 ट्रैक्टरों की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sonalika-registers-record-sales-of-43603-tractors-in-q1.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 08 Jul 2025 12:12:44 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sonalika-registers-record-sales-of-43603-tractors-in-q1.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रमुख ट्रैक्टर ब्रांड सोनालीका ट्रैक्टर्स ने अप्रैल-जून 2025 के दौरान कुल 43,603 ट्रैक्टरों के साथ पहली तिामही में अब तक की सर्वाधिक बिक्री दर्ज की है। इस छलांग के साथ सोनालीका ट्रैक्टर्स की कंपनी इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स ने साल की बेहतरीन शुरुआत की है।</p>
<p>देश भर में मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से करीब 15 फीसदी अधिक बारिश के कारण खरीफ की बुवाई में भी तेजी आई है। अच्छे मानसून का असर ट्रैक्टर कंपनियों की बिक्री पर भी दिख रहा है।</p>
<p><strong>इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड</strong> के <strong>जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर</strong> <strong>रमन मित्तल</strong> का कहना है कि हमने अपने हैवी ड्यूटी ट्रैक्टरों के साथ कृषि में सार्थक योगदान देने का लक्ष्य रखा है। हमने कुल 43,603 ट्रैक्टरों की अब तक की सर्वाधिक Q1 ट्रैक्टर बिक्री दर्ज की है, जिसमें हमारा अब तक का सर्वश्रेष्ठ जून बिक्री का प्रदर्शन भी शामिल है। मॉनसून ने पहले ही किसानों के बीच सकारात्मक माहौल बना दिया है जिससे रिकॉर्ड खरीफ बुवाई हो सकती है, और फलस्वरूप अच्छे फसल अनुमानों के साथ किसानों के लिए बेहतर आय होनी चाहिए।"</p>
<p>कंपनी का कहना है कि उसके 400 से ज़्यादा कुशल इंजीनियरिंग विशेषज्ञ हैं जो उन्नत तकनीक से चलने वाले ट्रैक्टर विकसित करने के काम में जुटे हैं। सोनालीका का हर हेवी ड्यूटी ट्रैक्टर उच्चतम गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक रोबोटिक और ऑटोमेशन तकनीकों का उपयोग करके विकसित किया गया है। पंजाब के होशियारपुर में कंपनी एकीकृत ट्रैक्टर निर्माण प्लांट में हर 2 मिनट में एक नया ट्रैक्टर बनाती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_686cbdb9adef7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोनालीका ने पहली तिमाही में 43,603 ट्रैक्टरों की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_686cbdb9adef7.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्रोकेमिकल आयात में उछाल भारतीय उद्योग के लिए बनी चुनौती, सीसीएफआई ने की आयात शुल्क बढ़ाने की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/surge-in-agrochemical-imports-alarms-indian-industry.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 28 Jun 2025 13:50:00 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/surge-in-agrochemical-imports-alarms-indian-industry.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय एग्रोकेमिकल उद्योग ने चीन से आयात में तेज उछाल को लेकर सरकार को चेताया है। क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (CCFI), जो देश के 50 से अधिक प्रमुख एग्रोकेमिकल निर्माताओं का शीर्ष संगठन है, ने सरकार के सामने इस संबंध में कई बार अपनी बात रखी है। संगठन ने एक बार फिर वित्त मंत्रालय से इस बारे में आग्रह किया है। फेडरेशन ने मंत्रालय को लिखे एक पत्र में कहा है कि वह आयातित एग्रोकेमिकल फॉर्मुलेशन और टेक्निकल-ग्रेड कीटनाशकों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर घरेलू निर्माताओं को समान अवसर दे।</p>
<p><strong>व्यापार अधिशेष, लेकिन उद्योग दबाव में</strong><br />भारत के एग्रोकेमिकल क्षेत्र को निर्यात क्षमता और आत्मनिर्भरता के कारण चैंपियन सेक्टर घोषित किया गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र ने 22,147 करोड़ रुपये का व्यापार अधिशेष दर्ज किया, जो मुख्य रूप से जेनेरिक एग्रोकेमिकल्स के निर्यात से संभव हुआ है।</p>
<p>इसके बावजूद, सस्ते चाइनीज आयात से घरेलू उद्योग पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच एग्रोकेमिकल्स का आयात 9,096 करोड़ से बढ़कर 13,998 करोड़ रुपये हो गया। यानी इसमें 53% की वृद्धि हुई है। कुल 80,000 करोड़ के एग्रोकेमिकल बाजार में घरेलू हिस्सा लगभग 36,000 करोड़ रुपये का है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_685fa4ffd1a08.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>कस्टम ड्यूटी में वृद्धि की मांग</strong><br />CCFI ने सरकार से मांग की है कि वह आयातित तैयार फॉर्मुलेशन पर 30% कस्टम ड्यूटी और टेक्निकल-ग्रेड कीटनाशकों पर 20% ड्यूटी तत्काल लगाए। इसके विकल्प के रूप में फॉर्मुलेशन और टेक्निकल के बीच कम से कम 10% का ड्यूटी अंतर तय किया जाए, जिससे रेडी-टू-यूज उत्पादों के आयात को हतोत्साहित किया जा सके।</p>
<p>संगठन के अनुसार यह अंतर बेहद आवश्यक है ताकि चीन से होने वाले अनियंत्रित डंपिंग पर रोक लग सके। चीन की डंपिंग ने देश में 40,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने वाले निर्माताओं को नुकसान पहुंचाया है।</p>
<p>इसका कहना है कि कस्टम ड्यूटी बढ़ाने से किसानों पर बोझ बढ़ने की आशंका को लेकर चिंता जताई जाती है। हालांकि, विशेषज्ञों और डॉ. अशोक दलवई (आईएएस) की रिपोर्ट के अनुसार, कीटनाशक फसल लागत का 1% से भी कम हिस्सा होते हैं। ऐसे में कस्टम ड्यूटी में तर्कसंगत वृद्धि से किसानों की लागत पर कोई बड़ा असर नहीं होगा।</p>
<p><strong>मौजूदा आयात व्यवस्था की चुनौतियां</strong><br />उद्योग ने मौजूदा आयात प्रणाली में कई खामियां बताई हैं। इसका कहना है कि आयातित टेक्निकल और फॉर्मुलेशन पर कम ड्यूटी होने के कारण घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन नहीं मिलता। आयातित उत्पादों पर सक्रिय तत्वों की शुद्धता और शेल्फ लाइफ जैसी कठोर नियामक जांच नहीं होती। कस्टम वर्गीकरण में 'अन्य श्रेणी का अत्यधिक दुरुपयोग हो रहा है क्योंकि केवल 57 उत्पादों के ही विशिष्ट HSN कोड हैं, जबकि 800 से अधिक उत्पाद प्रचलन में हैं। CCFI के अनुसार, इस तरह की अनियमितता से घटिया उत्पाद भारतीय बाजार में आ रहे हैं, जो फसलों की सुरक्षा और पर्यावरण के लिए खतरा बन सकते हैं।</p>
<p>भारत में एग्रोकेमिकल उत्पादन की 45% क्षमता का अब भी उपयोग नहीं हो रहा है। देश के पास आधुनिक फॉर्मुलेशन बनाने की तकनीक और क्षमता है, लेकिन आयात की मार से इनका लाभ नहीं उठाया जा पा रहा। आयातित उत्पाद भारत में बनने वाले समकक्ष उत्पादों की तुलना में 2 से 2.5 गुना महंगे होते हैं और विदेशी कंपनियों को 200% तक लाभ देते हैं। यदि स्थानीय निर्माण को बढ़ावा दिया जाए तो यह लाभ भारत में ही रह सकता है।</p>
<p>सीसीएफआई का कहना है कि भारत पहले ही एग्रोकेमिकल निर्यात में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन चुका है। यह अमेरिका को भी पीछे छोड़ चुका है। यदि सरकार नीतिगत समर्थन दे, तो भारत इनका वैश्विक विनिर्माण हब बन सकता है।</p>
<p><strong>उद्योग की मुख्य मांगें</strong><br />उद्योग ने वित्त मंत्रालय के सामने कई मांगें रखी हैं। इसका कहना है कि सभी एग्रोकेमिकल उत्पादों के लिए विशेष HSN कोड बनाकर उचित वर्गीकरण और आयात पर निगरानी सुनिश्चित की जाए, आयातित फॉर्मुलेशन पर सब्सिडी और वित्तीय सहायता को वापस लिया जाए, फॉर्मुलेशन आयात से पहले टेक्निकल-ग्रेड कीटनाशकों का अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए, चीन की तरह ड्यूटी ड्रा-बैक या सब्सिडी (9-16%) जैसे प्रोत्साहन दिए जाएं, बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा ट्रांसफर प्राइसिंग पर रोक लगे।</p>
<p>उद्योग का कहना है कि यदि इन मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो &lsquo;मेक इन इंडिया&rsquo; और &lsquo;आत्मनिर्भर भारत&rsquo; जैसे अभियान केवल नारे बनकर रह जाएंगे, और देश की विनिर्माण क्षमता एवं रोजगार के अवसर विदेशी उत्पादों की भेंट चढ़ जाएंगे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685fa4ff2e3ff.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्रोकेमिकल आयात में उछाल भारतीय उद्योग के लिए बनी चुनौती, सीसीएफआई ने की आयात शुल्क बढ़ाने की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685fa4ff2e3ff.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वैश्विक व्यापार में परिवर्तन के बीच अमेरिका कैसे बदल रहा है अपनी कृषि निर्यात रणनीति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/how-the-us-is-recalibrating-agricultural-exports-amid-global-trade-shifts.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 15 Jun 2025 10:37:00 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/how-the-us-is-recalibrating-agricultural-exports-amid-global-trade-shifts.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत के साथ जारी व्यापार वार्ता और चीन के साथ ट्रेड वार के बीच अमेरिका अपनी कृषि निर्यात रणनीति को फिर से तैयार कर रहा है। आने वाले समय में वह थोक कमोडिटी की जगह अधिक मूल्य वाले और &nbsp;उपभोक्ता-उन्मुख उत्पादों पर अधिक ध्यान दे सकता है।</p>
<p>एक समय सोयाबीन, मक्का, गेहूं और कपास जैसी बल्क कमोडिटी अमेरिकी कृषि निर्यात का मुख्य आधार थे। लेकिन अब यह परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अब अमेरिकी कृषि निर्यात में प्रोसेस्ड फूड, फल, सब्जियां, मांस और डेयरी उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक भू-राजनीतिक और व्यापार समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।</p>
<p>अमेरिकी कृषि मंत्रालय की विदेश कृषि सेवा (FAS) की रिपोर्ट - "द राइज एंड फॉल ऑफ बल्क कमोडिटीज ऐज अ शेयर ऑफ टोटल यूएस एग्रीकल्चरल एक्सपोर्ट्स"&mdash;इस बदलाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। 2014 से 2020 के बीच, बल्क जिंस कुल कृषि निर्यात का लगभग 31% हिस्सा थीं। यह हिस्सेदारी 2022 में अस्थायी रूप से 38% तक पहुंची, लेकिन हालिया अनुमानों के अनुसार यह घटकर 28.5% रह गई है।</p>
<p>यह उतार-चढ़ाव संरचनात्मक और बाहरी दोनों तरह के दबावों को दर्शाता है। निर्यात की मात्रा अब भी अधिक होने के बावजूद बल्क जिंसों का मूल्य उपभोक्ता-उन्मुख और अधिक मुनाफा देने वाले उत्पादों की तुलना में घट रहा है। भारत जैसे नए व्यापार साझेदारों की तलाश में अमेरिका के लिए यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।</p>
<p><strong>व्यापारिक तनाव के बीच रणनीतिक विविधता</strong><br />इन परिवर्तनों की पृष्ठभूमि जटिल है। अमेरिका-चीन टैरिफ युद्ध ने व्यापार प्रवाह को गंभीर रूप से बाधित किया। चीन द्वारा लगाए गए प्रतिशोधी शुल्क के कारण अमेरिकी निर्यात में भारी गिरावट आई। जैसे, चीन को सोयाबीन की बिक्री 2015 के 25 अरब डॉलर से घटकर 2018 में 10 अरब डॉलर से भी नीचे आ गई। हालांकि कुछ हद तक यह गिरावट अब सुधरी है, लेकिन चीन को निर्यात अब भी टैरिफ से पहले के स्तर से नीचे है।</p>
<p>दूसरी ओर भारत संभावित वृद्धि वाला एक नया बाजार बनकर उभरा है। जैसे-जैसे व्यापार वार्ताएं आगे बढ़ रही हैं, अमेरिका अपने कृषि उत्पादों - जैसे डेयरी, पोल्ट्री, फल, मेवे और प्रोसेस्ड फूड - के लिए भारतीय बाजार में अधिक पहुंच की मांग कर रहा है। यह रणनीति अमेरिका की उच्च-मूल्य वाले उत्पादों का निर्यात बढ़ाने की नीति से मेल खाती है। वह भारत के बढ़ते मध्यम वर्ग और आधुनिक होते खुदरा क्षेत्र का लाभ उठाना चाहता है।</p>
<p>उपभोक्ता-उन्मुख उत्पाद अमेरिका के कृषि निर्यात मूल्य का 42% हिस्सा हैं, जबकि बल्क जिंसों का हिस्सा 32% रह गया है। इनमें ट्री नट्स, प्रोसेस्ड फूड और ताजा फल-सब्जियां शामिल हैं जो बेहतर मुनाफा, स्थिर मांग और ब्रांडिंग की संभावनाएं प्रदान करते हैं। खास बात यह है कि ये उत्पाद भारत की आयात आवश्यकताओं के अनुरूप हैं, जहां गुणवत्ता वाले मूल्यवर्धित उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।</p>
<p>प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स और मार्केटिंग में प्रगति ने अमेरिकी कृषि कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाया है। वर्ष 2024 में ही ऐसे उत्पादों से 37 अरब डॉलर का निर्यात हुआ जो कुल कृषि निर्यात मूल्य का 19% था।</p>
<p><strong>ट्रेड डेस्टिनेशन का विविधीकरण</strong><br />परिवर्तित व्यापार परिस्थितियों के बीच अमेरिका ने चीन से परे अपने निर्यात डेस्टिनेशन का विस्तार किया है। 2024 में बल्क निर्यात की मात्रा मैक्सिको (+29%), कोलंबिया (+20%), जापान (+43%) और दक्षिण कोरिया (+107%) में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। हालांकि अमेरिकी बल्क निर्यात मात्रा में चीन का हिस्सा अब भी 24% है, लेकिन घटती कीमतों के कारण इसका वैल्यू शेयर घट गया है।</p>
<p><strong>नीतिगत संकेत और भविष्य की रणनीति</strong><br />FAS की रिपोर्ट एक नए दृष्टिकोण की आवश्यकता को उजागर करती है। दशकों तक अमेरिकी कृषि नीति और इन्फ्रास्ट्रक्चर बल्क कमोडिटी पर केंद्रित रही। लेकिन अब सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उपभोक्ता-उन्मुख उत्पादों के लिए मूल्य श्रृंखला - प्रोसेसिंग यूनिट, कोल्ड स्टोरेज, बंदरगाह लॉजिस्टिक्स और ब्रांडिंग में कितना निवेश किया जाता है।</p>
<p>अमेरिकी किसानों के सामने मात्रा बनाम मूल्य की चुनौती है। अच्छी फसल के कारण 2024 में बल्क निर्यात मात्रा में 22% की वृद्धि हुई, लेकिन नरम कीमतों के चलते कुल निर्यात मूल्य 191 अरब डॉलर ही रहा, जो 2022 में रिकॉर्ड 213 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। FAS का विश्लेषण स्पष्ट संकेत देता है कि अब बल्क कमोडिटी अमेरिकी कृषि निर्यात की पहचान नहीं रह गई हैं। मात्रा के लिहाज से वे अब भी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन भविष्य अधिक मूल्य वाले उपभोक्ता-उन्मुख उत्पादों में है।&nbsp;</p>
<p>चूंकि ट्रंप प्रशासन भारत के साथ व्यापार वार्ता कर रहा है, ये तथ्य नीतिगत दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। अमेरिकी वार्ताकार भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार में मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों के लिए अधिक पहुंच की मांग कर सकते हैं, जबकि भारत अपने 70 करोड़ कृषि-निर्भर नागरिकों के हितों की सुरक्षा चाहता है। एक संतुलित और परस्पर लाभकारी व्यापार समझौता दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_684d57e4abb3a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ वैश्विक व्यापार में परिवर्तन के बीच अमेरिका कैसे बदल रहा है अपनी कृषि निर्यात रणनीति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_684d57e4abb3a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सीमा शुल्क घटने के पहले ही खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट,  पाम  ऑयल का आयात छह महीने के उच्चतम स्तर पर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/edible-oil-prices-expected-to-fall-palm-oil-imports-at-six-month-high.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 12 Jun 2025 19:07:55 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/edible-oil-prices-expected-to-fall-palm-oil-imports-at-six-month-high.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="315" data-end="680">केंद्र सरकार ने कच्चे खाद्य तेलों जैसे कि कच्चे सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम ऑयल पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) को 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया है। इसके चलते क्रूड और रिफाइंड खाद्य तेलों के बीच आयात शुल्क का अंतर 8.75% से बढ़कर 19.25% हो गया है। सरकार ने यह कदम खाद्य तेलों की कीमतों को कम करने और घरेलू रिफाइनिंग उद्योग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया है।</p>
<p data-start="315" data-end="680">उद्योग सूत्रों के मुताबिक, सरकार द्वारा सीमा शुल्क में की गई कटौती का असर अगले 15 दिन के बाद ही दिखेगा। वहीं पिछले करीब एक माह में खाद्य तेलों की कीमतों में 6 से 7 फीसदी तक की कमी आई है। सरकार के हालिया फैसले के चलते घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में और अधिक गिरावट आ सकती है।</p>
<p data-start="315" data-end="680">इससे उपभोक्ताओं को खाद्य तेलों की महंगाई से कुछ राहत मिलेगी, हालांकि किसानों को तिलहनों के बेहतर दाम मिलने की संभावनाओं को झटका लग सकता है। इस निर्णय का असर सरसों जैसे घरेलू तिलहन और खाद्य तेलों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।</p>
<p data-start="1017" data-end="1423">खाद्य तेल उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में खाद्य तेलों की कीमतें दबाव में रहेंगी। हालांकि, ईरान और इस्राइल के बीच बढ़ते तनाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के चलते पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिसका असर इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों से पाम आयल की आपूर्ति पर पड़ सकता है। क्रूड ऑयल की कीमतों में अधिक बढ़ोतरी की स्थिति में इंडोनेशिया पॉम ऑयल को पेट्रोलियम उत्पादों के विकल्प में रूप में अधिक इस्तेमाल करने का फैसला ले सकता है।&nbsp;</p>
<p data-start="1425" data-end="1682">इस बीच, केंद्र सरकार ने खाद्य तेल उद्योग से जुड़ी कंपनियों और संगठनों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि कच्चे खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचे। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रमुख तेल उद्योग संघों को यह एडवाइजरी जारी की गई।&nbsp;</p>
<p data-start="1828" data-end="1852"><strong data-start="1828" data-end="1852">पाम ऑयल का आयात बढ़ा</strong></p>
<p data-start="1854" data-end="2053">मई 2025 में भारत का पाम ऑयल आयात छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इसकी प्रमुख वजह सोया ऑयल और सूरजमुखी तेल की तुलना में पाम ऑयल की कीमत में छूट है, जिससे रिफाइनर पाम ऑयल की खरीद बढ़ा रहे हैं।</p>
<p data-start="2055" data-end="2339"><strong>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA)</strong> के अनुसार, मई में पाम ऑयल का आयात अप्रैल की तुलना में 84 प्रतिशत बढ़कर 5.93 लाख टन हो गया, जो नवंबर 2024 के बाद सबसे अधिक है। सोया ऑयल का आयात 10.4 प्रतिशत बढ़कर 3.99 लाख टन और सूरजमुखी तेल का आयात 1.9 प्रतिशत बढ़कर 1.84 लाख टन हो गया।</p>
<p data-start="2341" data-end="2508">पाम और सोया तेल के अधिक आयात के चलते मई में भारत का कुल वनस्पति तेल आयात एक महीने पहले की तुलना में 33 प्रतिशत बढ़कर 11.9 लाख टन हो गया, जो दिसंबर के बाद सबसे अधिक है।</p>
<p data-start="2510" data-end="2644">भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम ऑयल, जबकि अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन से सोया ऑयल और सूरजमुखी तेल आयात करता है।</p>
<p data-start="2510" data-end="2644"></p>
<p data-start="2510" data-end="2644"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_684ad6e7ab909.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सीमा शुल्क घटने के पहले ही खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट,  पाम  ऑयल का आयात छह महीने के उच्चतम स्तर पर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_684ad6e7ab909.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीएपी की कीमत 720 डॉलर तक पहुंची, सरकार पर बढ़ेगा सब्सिडी का बोझ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/price-of-dap-reached-720-dollar-in-the-international-market-subsidy-burden-on-the-government-will-increase.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 13 May 2025 19:01:07 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/price-of-dap-reached-720-dollar-in-the-international-market-subsidy-burden-on-the-government-will-increase.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>यूरिया के बाद देश में सर्वाधिक खपत वाले उर्वरक <strong>डाई अमोनियम फॉस्फेड</strong> (डीएपी) की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में <strong>720 डॉलर</strong> प्रति टन पर पहुंच गई है। इससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा। हालांकि, अभी डीएपी के दाम बढ़ने की संभावना नहीं है क्योंकि बढ़ी कीमतों का बोझ सरकार वहन करेगी।</p>
<p>सरकार द्वारा <strong>खरीफ 2025</strong> (अप्रैल से सितंबर, 2025) के लिए डीएपी पर दी जाने वाली सब्सिडी को बढ़ाकर 27799 रुपये प्रति टन करने के बावजूद डीएपी का आयात फर्टिलाइजर कंपनियों के लिए घाटे का सौदा बना हुआ है। बढ़ती कीमतों के बाद भी कंपनियां डीएपी का लगातार आयात कर रही हैं।</p>
<p>उर्वरक उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक फरवरी में डीएपी की कीमत 640 डॉलर प्रति टन थी। जो पिछले सप्ताह 720 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई। एक भारतीय कंपनी ने इस कीमत पर डीएपी का आयात सौदा किया है। उक्त सूत्र का कहना है कि डीएपी की कीमतों में बढ़ोतरी का यह रुख जारी रह सकता है। वहीं डीएपी के कच्चे माल <strong>फॉस्फोरिक एसिड</strong> की कीमत 1153 डॉलर प्रति टन चल रही है।</p>
<p>देश में सालाना करीब <strong>100 लाख</strong> टन डीएपी की खपत होती है। इसमें से 48 लाख टन का देश में उत्पादन होता है और बाकी मात्रा का आयात किया जाता है। हालांकि घरेलू उत्पादन के लिए भी कच्चे माल <strong>रॉक फॉस्फेट</strong> और <strong>फॉस्फोरिक एसिड</strong> का आयात होता है। एक तरह डीएपी के मामले में लगभग पूरी तरह से हम आयात पर ही निर्भर हैं।</p>
<p>चालू खरीफ सीजन के लिए सरकार ने <strong>न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी</strong> (एनबीएस) के तहत डीएपी पर सब्सिडी को बढ़ाकर 27799 रुपये प्रति टन कर दिया है। जबकि डीएपी का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) अभी भी 27 हजार रुपये प्रति टन (1350 रुपये प्रति बैग) है। ऐसे में कंपनियों को सब्सिडी और एमआरपी के आधार पर एक टन डीएपी पर 54799 रुपये की कमाई होती है। जबकि 720 डॉलर प्रति टन की मौजूदा कीमतों पर डीएपी का दाम 61200 रुपये प्रति टन बैठता है। इसके ऊपर सीमा शुल्क, बैगिंग और हैंडलिंग जैसी लागत आती है। जिसके चलते आयात के बाद डीएपी का मूल्य 65000 रुपये प्रति टन को पार कर जाता है।</p>
<p>उद्योग सूत्रों का कहना है कि<strong> सरकार</strong> ने भरोसा दिया है कि डीएपी के आयात पर जो भी खर्च बढ़ेगा, उसकी भरपाई की जाएगी। हालांकि, इस संबंध में कोई लिखित आदेश की जानकारी नहीं है। हालांकि, कुछ कंपनियों की पुरानी सब्सिडी भी बकाया है। रबी सीजन के लिए 1 अक्तूबर, 2024 से 31 मार्च, 2025 तक के लिए डीएपी पर 21911 रुपये प्रति टन की सब्सिडी निर्धारित की गई थी। इसके अलावा 3500 रुपये प्रति टन का स्पेशल इंसेंटिव भी दिया था। उर्वरक विभाग द्वारा 28 मार्च को जारी नोटिफिकेशन के जरिये चालू खरीफ सीजन में सब्सिडी को बढाकर 27799 रुपये प्रति टन कर दिया गया।</p>
<p><strong>डीएपी आयात</strong> को सुगम बनाने के लिए सरकार ने मोरक्को और सऊदी अरब के साथ करीब 20-20 लाख टन सालाना आयात के दीर्घकालिक समझौते किये हैं। मोरक्को की सरकारी कंपनी ओसीपी दुनिया की सबसे बड़ी डीएपी निर्यातक कंपनी है। सऊदी अरब की कंपनी माडेन इसका निर्यात करती है। हालांकि, कुछ आयात चीन और रूस से भी होता है। उद्योग सूत्रों का कहना है कि चीन से आयात अभी खुला नहीं है। इसलिए कीमतों में मजूबती बनी हुई है। चीन से निर्यात शुरू होने के बाद कीमतों पर असर पड़ सकता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_6777efce49c40.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीएपी की कीमत 720 डॉलर तक पहुंची, सरकार पर बढ़ेगा सब्सिडी का बोझ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_6777efce49c40.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चालू सीजन में अप्रैल तक हुआ 4.70 लाख टन का चीनी निर्यात]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/4.70-lakh-tonnes-of-sugar-exported-till-april-in-the-current-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 12 May 2025 15:56:59 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/4.70-lakh-tonnes-of-sugar-exported-till-april-in-the-current-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार द्वारा चालू शुगर सीजन (2024-25) में 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी गई है। उसमें से 30 अप्रैल, 2025 तक 4.70 लाख टन चीनी का निर्यात हो चुका है। ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (आईस्टा) द्वारा जारी एक विज्ञप्ति मे यह जानकारी दी गई है। चीनी के निर्यात में व्हाइट शुगर, रॉ शुगर और रिफाइंड शुगर शामिल है। आईइस्टा के मुताबिक चालू सीजन के लिए दी गई 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति के मुकाबले सितंबर, 2025 तक करीब आठ लाख टन चीनी के निर्यात की संभावना है।</p>
<p>अभी तक हुए निर्यात में 3,27,972 टन व्हाइट शुगर, 77,603 टन रिफाइंड शुगर, 18514 टन रॉ शुगर निर्यात हुई है। इसके अलावा 21003 टन रॉ शुगर डीम्ड टू एक्सपोर्ट एसईजेड को आपूर्ति की गई है और 25,002 टन चीनी की अभी शिप लोडिंग होनी है।</p>
<p>निर्यात हुई चीनी में सबसे अधिक 21 फीसदी निर्यात सोमालिया को किया गया है। इसके अलावा अफगानिस्तान, श्रीलंका, दिजीबूती,यूएई, नेपाल, बांग्लादेश, लीबिया, तंजानिया और सिंगापुर समेत दर्जन भर देशों को चीनी का निर्यात किया गया है।</p>
<p>आईस्टा का कहना है कि चालू सीजन में चीनी का निर्यात करीब आठ लाख टन ही रहने का अनुमान है। इसके साथ ही कहा है कि सरकार ने आगामी सीजन (2025-26) के लिए गन्ने के फेयर एंड रिम्यूनेरेटिव प्राइस (एफआरपी) में बढ़ोतरी की है। ऐसे में सरकार को चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) और एथेनॉल के दाम में भी बढ़ोतरी करनी चाहिए। &nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668534db9b9c0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चालू सीजन में अप्रैल तक हुआ 4.70 लाख टन का चीनी निर्यात ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668534db9b9c0.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खांडसारी इकाइयों पर लागू होगा शुगर कंट्रोल ऑर्डर, देना पड़ेगा गन्ने का एफआरपी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/khandsari-sugar-units-will-be-regulated-by-new-sugar-control-order-to-ensure-payment-of-frp-to-cane-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 01 May 2025 17:49:18 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/khandsari-sugar-units-will-be-regulated-by-new-sugar-control-order-to-ensure-payment-of-frp-to-cane-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <pre class="tw-data-text tw-text-large tw-ta" data-placeholder="Translation" id="tw-target-text" data-ved="2ahUKEwiU2rHQ1YSNAxUsS2wGHdOyKRcQ3ewLegQICBAV" dir="ltr" aria-label="Translated text: केंद्र सरकार ने खांडसारी चीनी और खांडसारी चीनी इकाइयों को चीनी (नियंत्रण) आदेश, 2025 के नियामक ढांचे के तहत लाने के लिए छह दशक पुराने चीनी (नियंत्रण) आदेश में संशोधन किया है।

चीनी (नियंत्रण) आदेश, 2025 चीनी क्षेत्र को आधुनिक बनाने का प्रयास करता है, लेकिन यह विशेष रूप से खांडसारी इकाइयों के लिए अनुपालन दबाव भी लाता है। डिजिटल एकीकरण, सख्त नियंत्रण और विस्तारित दायरे से परिचालन लागत बढ़ सकती है और लचीलापन कम हो सकता है।"><span class="Y2IQFc" lang="hi"></span></pre>
<p>केंद्र सरकार ने छह दशक पुराने शुगर (कंट्रोल)<span> ऑर्डर</span>, 1966<span> में संशोधन कर <strong>खांडसारी चीनी</strong> और <strong>खांडसारी इकाइयों</strong> को नियमन के दायरे में लाने का फैसला किया है। अब प्रतिदिन 500 टन पेराई क्षमता (टीसीडी) वाली खांडसारी इकाइयों को भी चीनी मिलों की तरह नियम-कायदों का पालन करना होगा और किसानों को गन्ने का <strong>उचित एवं लाभकारी मूल्य </strong></span><strong>(एफआरपी)</strong> देना पड़ेगा। इस तरह सरकार ने खांडसारी चीनी उद्योग पर रेगुलेशन का शिकंजा कसने की तरफ कदम बढ़ा दिया है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय खाद्य सचिव <strong>संजीव </strong><strong>चोपड़ा</strong> ने गुरुवार को कहा कि भारत सरकार ने शुगर (कंट्रोल) ऑर्डर, 1966&nbsp;<span>की व्यापक समीक्षा के बाद <strong>शुगर (कंट्रोल) ऑर्डर</strong></span><strong>, 2025</strong>&nbsp;<span>तैयार किया है। </span>500&nbsp;<span>टीसीडी से अधिक पेराई क्षमता वाली खांडसारी इकाइयों को शुगर </span>(कंट्रोल)<span> ऑर्डर</span>, 2025<span> में शामिल किया गया है। इससे खांडसारी इकाइयों द्वारा किसानों को एफआरपी का भुगतान सुनिश्चित होगा और चीनी उत्पादन का सटीक अनुमान लगाने में मदद मिलेगी। नए शुगर </span>(कंट्रोल)<span> ऑर्डर की अधिसूचना जल्द ही जारी हो जाएगी। </span></p>
<p><strong>सरकारी विज्ञप्ति</strong> के अनुसार, <span>शुगर कंट्रोल ऑर्डर में संशोधन का उद्देश्य उद्योग में बदलाव और तकनीकी प्रगति के अनुरूप चीनी क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे को सरल और सुव्यवस्थित करना है।</span></p>
<p><strong>खाद्य मंत्रालय</strong> के अनुसार, <span>देश में कुल</span>&nbsp;373&nbsp;<span>खांडसारी इकाइयां (लगभग</span>&nbsp;95000&nbsp;<span>टीसीडी की कुल क्षमता के साथ) काम कर रही हैं। इनमें से</span>&nbsp;66 <span>खांडसारी इकाइयां</span> (<span>लगभग</span>&nbsp;55200&nbsp;<span>टीसीडी की कुल क्षमता के साथ)</span>&nbsp;500&nbsp;<span>टीसीडी से अधिक क्षमता की हैं। ऐसी इकाइयों द्वारा पर्याप्त मात्रा में खांडसारी चीनी का उत्पादन किया जा रहा है। इन्हें अब शुगर कंट्रोल ऑर्डर के तहत रेगुलेट किया जाएगा।&nbsp;</span></p>
<p>अब <strong>500 टीसीडी</strong> से अधिक क्षमता वाली खांडसारी इकाइयों को चीनी उत्पादन का डेटा सरकार के साथ डिजिटली साझा करना होगा। खाद्य मंत्रालय के अनुसार, प्रणालियों के एकीकरण से कार्यकुशलता बढ़ेगी और रियल टाइम डेटा उपलब्ध होगा। 450 से अधिक चीनी मिलें पहले ही खाद्य विभाग के पोर्टल के साथ एकीकृत हो चुकी हैं। इसके अलावा, चीनी मिलों द्वारा चीनी की बिक्री से संबंधित जीएसटीएन डेटा भी पोर्टल के साथ एकीकृत है।</p>
<p><strong>शुगर (कंट्रोल) ऑर्डर, 202</strong><span><strong>5</strong> के जरिए सरकार चीनी उद्योग के आधुनिकीकरण और पारदर्शिता लाने का प्रयास कर रही है। हालांकि,</span>&nbsp;इससे खांडसारी इकाइयों पर नियम-कायदों के अनुपालन का दबाव बढ़ जाएगा। है। डिजिटल इंटीग्रेशन, सख्त नियंत्रण और नियमों का बोझ पड़ने से खांडसारी उद्योग की लागत बढ़ेगी और संचालन में मिल रही छूट कम हो जाएगी।</p>
<table border="1" style="border-collapse: collapse; width: 100%; height: 136px;">
<tbody>
<tr style="height: 136px;">
<td style="width: 100%; height: 136px;">
<p><span style="color: #066f1f;"><em><strong>यह भी पढ़ें&nbsp;</strong></em></span></p>
<p><span>केंद्र सरकार काफी दिनों से खांडसारी इकाइयों पर नियमन का शिकंजा कसने की तैयारी कर रही थी, इस बारे में <strong>रूरल वॉयस</strong> ने पिछले साल सितंबर में <strong>यह खबर</strong> प्रकाशित की थी।&nbsp;</span><span></span></p>
<p><em><span style="color: #066f1f;"><a href="https://www.ruralvoice.in/agribusiness/preparations-to-control-sugar-industry-control-will-increase-with-sugar-control-order-2024.html" style="color: #066f1f;"><strong>खांडसारी उद्योग पर कंट्रोल की तैयारी</strong><strong>, शुगर कंट्रोल ऑर्डर 2024 से बढ़ेगा नियंत्रण</strong></a></span></em></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>सरकार ने शुगर प्राइस (कंट्रोल) ऑर्डर, 2018 के प्रावधानों को भी शुगर (कंट्रोल) ऑर्डर, 2025 में भी शामिल कर लिया है। परिणामस्वरूप, अब अलग से कोई शुगर प्राइस (कंट्रोल) ऑर्डर नहीं होगा।</p>
<p><strong>रॉ शुगर पर भी लागू होगा आदेश</strong><strong></strong></p>
<p>सरकार ने शुगर कंट्रोल ऑर्डर में संशोधन कर रॉ शुगर को भी इसमें शामिल किया है। खाद्य मंत्रालय का कहना है कि कच्ची चीनी को नियंत्रण आदेश में शामिल कर हम अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा कर सकेंगे। रॉ शुगर को देश भर में चीनी के कुल स्टॉक में शामिल किया जाएगा, <span>जिससे वास्तविक स्टॉक के आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे। वर्तमान में रॉ शुगर को खांडसारी/ऑर्गेनिक नाम से बेचा जा रहा है।</span>&nbsp;<span>नियमन के दायरे में आने से रॉ शुगर को भ्रामक नामों से बेचने पर रोक लगेगी।</span><span></span></p>
<p><strong>विभिन्न सह-उत्पाद शामिल </strong></p>
<p>गन्ने से चीनी उत्पादन को प्रभावित करने वाले विभिन्न सह-उत्पाद जैसे खोई, शीरा, प्रेस मड केक या इथेनॉल (शीरा, गन्ना रस, शुगर सिरप या चीनी से उत्पादित) सहित अन्य वैकल्पिक उत्पाद नए आदेश में शामिल होंगे। <span> सरकार का दावा है कि इससे घरेलू खपत के लिए चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और चीनी डायवर्जन को रेगुलेट करने में मदद मिलेगी।</span></p>
<p><strong>चीनी की विभिन्न परिभाषाएं शामिल&nbsp;</strong></p>
<p>संशोधित आदेश में विभिन्न प्रकार की चीनी के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) <span>की परिभाषाओं को शामिल किया गया है। इनमें चीनी</span>,&nbsp;<span>सफेद चीनी</span>,&nbsp;<span>परिष्कृत चीनी</span>,&nbsp;<span>खांडसारी चीनी</span>,&nbsp;<span>गुड़ या जैगरी</span>,&nbsp;<span>बूरा</span>, <span>क्यूब शुगर</span>, <span>शामिल हैं। इससे चीनी उत्पादों की परिभाषा में एकरूपता सुनिश्चित होगी। हालांकि, </span><span>इससे गुड़, बूरा आदि बनाने वाली तमाम छोटी इकाइयां भी नियमन के दायरे में आ सकती हैं।&nbsp;</span><span></span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_681364e22c14f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खांडसारी इकाइयों पर लागू होगा शुगर कंट्रोल ऑर्डर, देना पड़ेगा गन्ने का एफआरपी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_681364e22c14f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[निवेश और मार्केट विस्तार के साथ मदर डेयरी का लक्ष्य नेशनल प्लेयर बनना: मनीष बंदलिश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mother-dairy-aims-to-become-a-national-player-with-investment-and-market-expansion-says-md-manish-bandlish.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 25 Apr 2025 18:26:02 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mother-dairy-aims-to-become-a-national-player-with-investment-and-market-expansion-says-md-manish-bandlish.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में डेयरी सेक्टर की अग्रणी कंपनी मदर डेयरी फ्रूट एंड वेजिबल प्राइवेट लिमिटेड दिल्ली-एनसीआर से जुड़ी अपनी छवि को तोड़कर राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। मार्च, 2025 में समाप्त वित्त वर्ष में मदर डेयरी का टर्नओवर 17300 करोड़ रुपये रहा है और कंपनी करीब 1200 करोड़ रुपये की निवेश परियोजनाओं पर काम कर रही है। इसमें जहां दिल्ली, एनसीआर के बाहर महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश के साथ पूर्वी और दक्षिण भारत के मार्केट में विस्तार शामिल है,<span> वहीं उत्तर भारत में भी कारोबार बढ़ाने की योजनाएं हैं। पिछले साल मदर डेयरी के दूध कारोबार में करीब सात फीसदी, आइसक्रीम बिजनेस में 12 फीसदी और बेवरेज बिजनेस में 30 फीसदी की दर से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मदर डेयरी के मैनेजिंग डायरेक्ट <strong>मनीश बंदलिश</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> के साथ एक बातचीत में यह जानकारी दी। </span></p>
<p><strong>मनीश बंदलिश</strong> ने बताया कि दूध के मोर्चे पर कीमतों का दबाव महसूस किया जा रहा है। पिछले करीब एक माह में किसानों से दूध खरीद की लागत में चार से पांच रुपये की बढ़ोतरी हुई है। साढ़े छह फीसदी फैट वाले भैंस के दूध के लिए किसानों को करीब 54 रुपये लीटर का दाम मिल रहा है जबकि डेयरी तक पहुंचने तक कीमत लगभग 57 रुपये प्रति लीटर पड़ रही है। गर्मी बढ़ने और शादियों का सीजन होने के चलते दूध की कीमतों पर असर पड़ा है। इसके साथ ही फैट और स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) के दाम भी बढ़े हैं। फैट की कीमत करीब 400 रुपये प्रति किलोग्राम और एसएमपी की कीमत 280 से 290 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। दूध की उपलब्धता के बारे में उन्होंने बताया कि हमारी दूध की खरीद भी बेहतर हो रही है और हमारे पास फैट व एसएमपी का भी पर्याप्त स्टॉक है। ऐसे में हमें बढ़ती मांग को पूरा करने में कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन डेयरी सेक्टर को कीमतों के दबाव का सामना करना पड़ेगा।</p>
<p><strong>दूध खरीद</strong> के बारे में पूछे गये सवाल का जबाव देते हुए मदर डेयरी के मैनेजिंग डायरेक्टर कहते हैं कि हम प्रतिदिन करीब 60 लाख लीटर दूध की खरीदते हैं। मदर डेयरी नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) की कंपनी है और हमारी दूध की खरीद का सारा जिम्मा अब एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज उठा रही है। एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज का फोकस दूध उत्पादक कंपनियां (एमपीसी) खड़ी करने पर है और हम करीब 98 फीसदी दूध इन दूध उत्पादक कंपनियों से एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज के जरिये खरीद रहे हैं। दूध उत्पादक कंपनियां किसानों द्वारा संचालित कंपनियां हैं जिससे उन्हें बेहतर कीमत का सीधे फायदा मिल रहा है। मदर डेयरी से अभी ऐसी 22 एमपीसी जुड़ी हैं जिनमें करीब दस लाख दूध उत्पादक किसान शामिल हैं।</p>
<p><strong>डेयरी उत्पादों</strong> की बिक्री के ट्रेंड के बारे में मनीश बंदलिश बताते हैं कि वैल्यू एडेड उत्पादों में बेवरेज की बिक्री काफी तेजी से बढ़ रही है। हमें लस्सी की क्षमता को पिछले साल से दोगुना करना पड़ा है। मदर डेयरी के कुल टर्नओवर में 28 से 30 फीसदी बिक्री वैल्यू एडेड उत्पादों से आ रही है जबकि 70 फीसदी हिस्सेदारी दूध की है।</p>
<p><strong>निवेश योजनाओं</strong> के बारे में मनीष बताते हैं कि मदर डेयरी के नागपुर संयंत्र पर 550 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। वहीं गुजरात के इटोला में स्थापित हो रहे प्रोसेसिंग प्लांट और आंध्र प्रदेश के कुप्पम में स्थापित हो रहे प्रोसेसिंग प्लांट समेत हमारा कैपिटल इनवेस्टमेंट करीब 1200 करोड़ रुपये है। गुजरात और आध्र प्रदेश के संयंत्र फ्रूट एंड वेजिटेबल प्रसंस्करण संयंत्र हैं। इटोला के&nbsp; संयंत्र में पोटैटो फ्रेंच फ्राइज और आलू के दूसरे उत्पाद तैयार होंगे। वहीं आंध्र प्रदेश के संयंत्र में फ्रूट और वेजिटेबल पल्प तैयार होगा।&nbsp; इसके साथ ही मदर डेयरी ने निर्यात पर भी फोकस बढ़ा दिया है। जहां कई देशों को फ्रूट बेजिटेबल पल्प का निर्यात किया जा रहा है। वहीं खाडी देशों में अब मदर डेयरी के दूसरे उत्पादों का निर्यात भी बढ़ रहा है। करीब 35 से 40 देशों में मदर डेयरी 150 करोड़ रुपये का निर्यात कर रही है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_680b7a269a7fe.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ निवेश और मार्केट विस्तार के साथ मदर डेयरी का लक्ष्य नेशनल प्लेयर बनना: मनीष बंदलिश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_680b7a269a7fe.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण 18 फीसदी से अधिक हुआ, गन्ने और अनाज का लगभग बराबर योगदान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/ethanol-blending-in-petrol-crossed-18-pc-sugarcane-and-grain-contributes-almost-equally.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 08 Apr 2025 08:18:04 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/ethanol-blending-in-petrol-crossed-18-pc-sugarcane-and-grain-contributes-almost-equally.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत ने अपने इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम में उल्लेखनीय प्रगति की है। जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और हरित ईंधन को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे इस कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में इथेनॉल ब्लैंडिंग बढ़कर 18 फीसदी से अधिक हो गई है। इसमें सर्वाधिक हिस्सेदारी गन्ने आधारित इथेनॉल की है जबकि लगभग इतना ही योगदान अनाज से बने इथेनॉल का है।</p>
<p>उद्योग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, <span>चालू इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2024-25 </span>(नवंबर-अक्टूबर) के दौरान 9 मार्च तक पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण 18.08 फीसदी हो गया है। इस अवधि में देश में कुल 302.70 करोड़ लीटर इथेनॉल का उपयोग किया गया। इसमें 151.46 करोड़ लीटर इथेनॉल गन्ना आधारित था जबकि इससे कुछ ही कम 151.24 करोड़ लीटर इथेनॉल अनाज आधारित था।</p>
<p>इस साल अनाज आधारित इथेनॉल में सबसे ज्यादा 130.26 करोड लीटर इथेनॉल की आपूर्ति मक्का से बने इथेनॉल की हुई, जबकि लगभग 21 करोड़ लीटर इथेनॉल खराब अनाज से बनकर आया। गन्ने के जूस से उत्पादित 123.21 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई। 25.38 करोड़ लीटर इथेनॉल बी-हैवी मोलासेस से बनकर पेट्रोल मिश्रण के लिए सप्लाई हुआ।</p>
<p>पिछले वर्ष 2023-24 के दौरान इथेनॉल मिश्रण का स्तर 15 फीसदी तक पहुंच गया था। इसमें अनाज आधारित इथेनॉल की मात्रा गन्ने से बने इथेनॉल के मुकाबले काफी अधिक थी। क्योंकि पिछले साल सरकार ने गन्ने के जूस से इथेनॉल बनाने पर रोक लगा दी थी। इस साल यह रोक नहीं है, लेकिन गन्ना उत्पादन में गिरावट के चलते अनाज और गन्ने से लगभग बराबर मात्रा में इथेनॉल की आपूर्ति हुई।&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सरकार इथेनॉल उत्पादन को कई तरह से बढ़ावा दे रही है। मक्का से इथेनॉल पर काफी जोर दिया जा रहा है। साथ ही इथेनॉल की खरीद और दाम तय करने के लिए एक व्यवस्था बनाई है।</p>
<p>वर्ष 2013-14 <span>में तेल कंपनियों द्वारा कुल इथेनॉल मिश्रण </span>38 <span>करोड़ लीटर था जो वर्ष </span>2023-24 में बढ़कर 707 करोड़ लीटर हो गया। वर्ष 2014 तक पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का स्तर 1.53 <span>फीसदी था जो </span>2024 <span>में </span>15 <span>फीसदी तक पहुंच गया था। </span></p>
<p>केंद्र सरकार का दावा है कि पिछले दस वर्षों के दौरान इथेनॉल मिश्रण के परिणामस्वरूप लगभग 1.13 लाख करोड़ रुपये से अधिक विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और लगभग 193 लाख टन कच्चे तेल की जगह इथेनॉल का उपयोग हुआ है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67f3e49a560b8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण 18 फीसदी से अधिक हुआ, गन्ने और अनाज का लगभग बराबर योगदान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67f3e49a560b8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बायो गैस प्लांट से प्राप्त जैविक खाद उर्वरक की श्रेणी में शामिल, मानकों की अधिसूचना भी जारी  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-recognized-organic-manure-from-cbg-plants-as-a-fertilizer-notification-of-specifications-issued.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 01 Apr 2025 21:00:53 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-recognized-organic-manure-from-cbg-plants-as-a-fertilizer-notification-of-specifications-issued.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) संयंत्रों से प्राप्त होने वाली खाद को उर्वरकों की एक नई श्रेणी में शामिल किया है। इसके लिए फर्टिलाइजर (कंट्रोल) ऑर्डर, 1985 में संशोधन किया गया था। अब सरकार ने इस खाद के ठोस रूप (Fermented Organic Manure) और तरल स्वरूप (Liquid Fermented Organic Manure) के मानक तय कर उसकी भी अधिसूचना जारी कर दी है। <span>सीबीजी प्लांट की खाद को उर्वरक के तौर पर कानूनी मान्यता मिलने से इसकी बिक्री आसान हो जाएगी और खेती के लिए जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।&nbsp;</span></p>
<p><strong>कंप्रेस्ड बायो गैस (</strong><strong>CBG)</strong> संयंत्रों से सह-उत्पाद के तौर पर प्राप्त होने वाली <strong>बायो-स्लरी</strong> पोषक तत्वों से युक्त होती है और <strong>ऑर्गेनिक कार्बन एन्हांसर</strong> का काम करती है। यह मिट्टी की सेहत सुधारने व उर्वरता बढ़ाने में मददगार है। जबकि सीबीजी प्लांट के लिए इस बाई-प्रोडक्ट को संभालना एक बड़ी चुनौती है। लेकिन अब सरकार ने फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर में संशोधन कर सीबीजी प्लांट से प्राप्त ऑर्गेनिक कार्बन एन्हांसर को उर्वरकों की एक नई श्रेणी में शामिल कर दिया है। <span>इससे सीबीजी संयंत्रों की आय बढ़ेगी, साथ ही टिकाऊ खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।&nbsp;</span></p>
<p><strong>27 </strong><strong>मार्च</strong> को कृषि मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने <strong>फर्टिलाइजर (कंट्रोल) ऑर्डर</strong><strong>, 1985</strong> में संशोधन कर <strong>फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (</strong><strong>FOM)</strong> तथा <strong>लिक्विड फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (</strong><strong>LFOM)</strong> को ऑर्गेनिक कार्बन संवर्द्धक की श्रेणी में शामिल करते हुए&nbsp;इनके मानक तय कर दिए हैं।&nbsp;संशोधित आदेश के मुताबिक, सीबीजी प्लांट से प्राप्त जैविक खाद का सैंपल इंस्पेक्टर द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लिया जा सकेगा। प्रत्येक उर्वरक निर्माता को कंटेनरों पर स्पष्ट रूप से लिखना होगा कि लिक्विड जैविक खाद का उपयोग बुवाई से 15-20 दिन पहले किया जाएगा। उर्वरक निर्माता लेबल पर उल्लेख कर जैविक खाद को पोषक तत्वों से समृद्ध करेगा।&nbsp;</p>
<p>इससे पहले <strong>17 </strong><strong>फरवरी</strong> को जारी अधिसूचना के जरिए सीबीजी प्लांट से प्राप्त ऑर्गेनिक कार्बन संवर्द्धक को उर्वरकों की परिभाषा में शामिल किया था। सरकार ने फर्टिलाइजर (कंट्रोल) ऑर्डर, 1985 में संशोधन कर एक <strong>नई</strong> <strong>अनुसूची </strong><strong>VIII</strong> &nbsp;- सीबीजी प्लांट से प्राप्त ऑर्गेनिक कार्बन संवर्द्धक को जोड़ दिया था। <strong>ऑर्गेनिक कार्बन संवर्द्धक</strong> से अभिप्राय ऐसी जैविक सामग्री से है जो फर्मेंटेशन के माध्यम से मुख्य या सह-उत्पाद के रूप में प्राप्त होती है और मिट्टी में कार्बन के स्तर को बढ़ाने या बनाए रखने में मददगार है।&nbsp;</p>
<p><strong>सीबीजी प्लांट</strong> से निकलने वाली खाद को उर्वरक के तौर पर कानूनी मान्यता मिलने और मानक तय होने से इसकी बिक्री की अड़चनें दूर हो सकेंगी। इससे सीबीजी प्लांट की आय के अवसर बढ़ेंगे, साथ ही किसानों को मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए जैविक खाद की उपलब्धता बढ़ेगी। किसानों के सामने मिट्टी की घटती उर्वरता, पोषक तत्वों की कमी और गिरता कार्बन स्तर एक बड़ी समस्या है।&nbsp;</p>
<p>उद्योग संगठन <strong>भारतीय ग्रीन एनर्जी महासंघ (आईएफजीई)</strong> ने सरकार ने इस कदम को ऐतिहासिक करार देते हुए इसका स्वागत किया है। सीबीजी संयंत्रों से प्राप्त जैविक खाद मिट्टी की सेहत सुधारने, ऑर्गेनिक कार्बन को बढ़ाने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है।&nbsp;</p>
<p>आईएफजीई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व आईएफजीई सीबीजी प्रोड्यूसर फोरम के अध्यक्ष <strong>वाईबी रामकृष्ण</strong> ने कहा कि फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर में यह संशोधन आईएफजीई के समर्पित प्रयासों का प्रमाण है। हमारे नीति-निर्माताओं के साथ निरंतर संवाद और शोधपरक सिफारिशें अनुसूची VIII के तहत सीबीजी से प्राप्त सह-उत्पादों को औपचारिक मान्यता दिलाने में मददगार रही हैं। इससे न केवल टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलेगा बल्कि सीबीजी तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।&nbsp;</p>
<p>आईएफजीई के उपाध्यक्ष और वर्बियो इंडिया के एमडी <strong>आशीष कुमार</strong> ने कहा कि सीबीजी से प्राप्त एफओएम और एलएफओएम को ऑर्गेनिक कार्बन संवर्द्धक के रूप में औपचारिक मान्यता मिलना एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को बढ़ावा मिलेग, बल्कि मिट्टी की सेहत को सुधारने में भी मदद मिलेगी। यह कदम निवेश और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देगा, साथ ही भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67ec069b5cdc6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बायो गैस प्लांट से प्राप्त जैविक खाद उर्वरक की श्रेणी में शामिल, मानकों की अधिसूचना भी जारी   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67ec069b5cdc6.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मदर डेयरी ने प्रोटीन&amp;#45;रिच उत्पादों के क्षेत्र में कदम रखा, लॉन्च किया ‘प्रोमिल्क’]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mother-dairy-forays-into-protein-rich-segment-launches-promilk.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 26 Mar 2025 20:52:39 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mother-dairy-forays-into-protein-rich-segment-launches-promilk.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत की अग्रणी डेयरी कंपनी <strong>मदर डेयरी</strong> ने अपने उत्पादों की <strong>&lsquo;प्रो&rsquo; रेंज</strong> लॉन्च करते हुए प्रोटीन-रिच उत्पादों के क्षेत्र में कदम रखने का ऐलान किया है। इस सेगमेंट में मदर डेयरी का पहला उत्पाद उच्च-प्रोटीन युक्त <strong>&lsquo;</strong><strong>प्रोमिल्क&rsquo;</strong> है जिसे रोजमर्रा के उपभोग के लिए तैयार किया गया है।</p>
<p>इस अवसर पर मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक <strong>मनीष बंदलिश</strong> ने कहा, &ldquo;आज की तेज-रफ्तार जिंदगी में संतुलित आहार बनाए रखना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, जिसमें प्रोटीन संपूर्ण स्वास्थ्य का एक आधारभूत तत्व है। हालांकि, अध्ययनों से पता चलता है कि 70-80% भारतीय अपनी दैनिक प्रोटीन आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाते, जबकि प्रोटीन कई रूपों में उपलब्ध है। मदर डेयरी ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए &lsquo;प्रो&rsquo; रेंज के तहत ऐसे उत्पाद तैयार किए हैं जो रोजमर्रा की जीवनशैली में सहज रूप से शामिल किए जा सकते हैं।&rdquo;</p>
<p><strong>मदर डेयरी</strong> की &lsquo;प्रो&rsquo; रेंज के तहत पेश किया गया पहला उत्पाद प्रोमिल्क एक पॉली पैक दूध है जिसे सभी आयु वर्ग के लोगों द्वारा दैनिक उपभोग के लिए तैयार किया गया है। इसमें 30% अधिक प्रोटीन (40 ग्राम प्रति लीटर) और अधिक कैल्शियम, विटामिन ए व डी है। कंपनी के अनुसार, प्रोमिल्क आसानी से पचने योग्य और स्वाद में बेहतरीन है। यह दही, छाछ, चाय और कॉफी बनाने के लिए भी अच्छा है।&nbsp;</p>
<p>मदर डेयरी &lsquo;प्रो&rsquo; रेंज का विस्तार करते हुए जल्द ही पनीर और दही (पाउच एवं सेट दही) जैसे अन्य प्रोटीन-समृद्ध डेयरी उत्पाद भी लॉन्च करने की योजना बना रही है। यह पहल उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को पूरा करने के मद्देनजर की जा रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>मनीष बंदलिश </strong>का कहना है कि हम अपने प्रोटीन-आधारित पोर्टफोलियो को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं और जल्द ही उपभोक्ताओं के लिए प्रोटीन-युक्त पनीर, दही और अन्य डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराएंगे।</p>
<p>प्रोमिल्क को चरणबद्ध तरीके से एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में मदर डेयरी के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों चैनलों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही, उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए कंपनी एक विस्तृत मार्केटिंग अभियान भी शुरू करने जा रही है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67e41b2572466.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मदर डेयरी ने प्रोटीन-रिच उत्पादों के क्षेत्र में कदम रखा, लॉन्च किया ‘प्रोमिल्क’ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67e41b2572466.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सात कृषि जिंसों के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध एक साल के लिए बढ़ाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/ban-on-futures-trading-of-7-agricultural-commodities-extended-for-one-year.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 25 Mar 2025 19:49:23 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/ban-on-futures-trading-of-7-agricultural-commodities-extended-for-one-year.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत में सात कृषि जिंसों के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध को एक और साल के लिए बढ़ा दिया गया है। बाजार नियामक <strong>भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी)</strong> ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए कहा कि यह रोक अब <strong>31 </strong><strong>मार्च, </strong><strong>2026</strong> तक लागू रहेगी। जिन कृषि जिंसों के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध जारी रहेगा, उनमें <strong>धान (गैर-बासमती)</strong><strong>, </strong><strong>गेहूं</strong><strong>, </strong><strong>चना</strong><strong>, </strong><strong>सरसों और इसके उत्पाद</strong><strong>, </strong><strong>सोयाबीन और इसके उत्पाद</strong><strong>, </strong><strong>कच्चा पाम तेल और मूंग</strong> शामिल हैं।</p>
<p>माना जा रहा है कि सेबी ने यह कदम खाद्य महंगाई को काबू में रखने और इन कृषि जिंसों की कीमतों में सट्टेबाजी रोकने के उद्देश्य से उठाया है। यह प्रतिबंध पहली बार दिसंबर 2021 में लगाया गया था, जिसे बाद में दिसंबर 2022 और दिसंबर 2023 में एक-एक साल के लिए बढ़ाया गया। तब से इन कृषि उपजों में वायदा कारोबार की अनुमति नहीं है। प्रतिबंध के तहत कमोडिटी एक्सचेंजों पर नए अनुबंध शुरू करने और मौजूदा अनुबंधों में कारोबार करने पर रोक है।</p>
<p>इस प्रतिबंध के जारी रखने इस धारणा को बल मिला है कि वायदा कारोबार से कृषि जिंसों की कीमतों में अस्थिरता बढ़ सकती है। हालांकि, कमोडिटी एक्सचेंज कीमतों में उतार-चढ़ाव के जोखिम के मद्देनजर प्राइस डिस्कवरी के लिए वायदा कारोबार को उपयोगी मानते हैं जबकि एक मत यह भी है कि इससे सट्टेबाजी और कीमतों में अस्थिरता की आशंका है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67e2bb4c6faa9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सात कृषि जिंसों के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध एक साल के लिए बढ़ाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67e2bb4c6faa9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महिला एमपीओ ‘मराठवरहाड’ का 5 साल में 11 लाख किलो दूध प्रतिदिन खरीद  का लक्ष्य   ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/marathvarhad-mpo-aims-to-increase-milk-procurement-to-11-lakh-kg-per-day-in-5-year.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 18 Mar 2025 11:53:32 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/marathvarhad-mpo-aims-to-increase-milk-procurement-to-11-lakh-kg-per-day-in-5-year.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महिला नेतृत्व वाले दुग्ध उत्पादक संगठन (एमपीओ) 'मराठवरहाड' ने अगले 5 साल में दूध की खरीद के लिए 11 लाख किलो प्रतिदिन और सालाना टर्नओवर 1800 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।</p>
<p>उत्पादकों के स्वामित्व वाले संगठनों को बढ़ावा देने के एनडीडीबी के उद्देश्य के अनुसार विदर्भ और मराठवाड़ा डेयरी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (वीएमडीडीपी) के वर्तमान ऑपरेशन को मराठवरहाड दुग्ध उत्पादक संगठन के अंतर्गत लाया जाएगा।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>वर्ष 2013 में महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों के किसानों के लिए दीर्घकालीन आजीविका साधन तैयार करने के लिए डेयरी विकास के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और महाराष्ट्र सरकार के बीच समझौता हुआ था।&nbsp; इस समझौते पर किसानों के जोखिमों में विविधता लाने के उद्देश्य से हस्ताक्षर किए गए थे क्योंकि अधिक समावेशी आजीविका विकल्प होने के कारण डेयरी इन सूखाग्रस्त और संकटग्रस्त क्षेत्रों में कृषि फसलों की तुलना में बेहतर विकल्प साबित हुआ है।</p>
<p>विदर्भ और मराठवाड़ा डेयरी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के अंतर्गत 10 जिलों के दुग्ध उत्पादकों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए एनडीडीबी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी मदर डेयरी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। &nbsp;</p>
<p>यह प्रोजेक्ट वर्ष 2016 से विदर्भ क्षेत्र के अकोला, अमरावती, वर्धा, नागपुर, चंद्रपुर और बुलढाणा, और मराठवाड़ा क्षेत्र के नांदेड़, उस्मानाबाद, लातूर और जालना के 10 जिलों में चल रहा था।</p>
<p>प्रोजेक्ट में किसानों का विश्वास और भरोसा इसी बात से सिद्ध होता है कि सभी 10 जिलों में फैले 2,500 मिल्क पूलिंग प्वाइंट्स से इन क्षेत्रों के लगभग 35,000 डेयरी किसानों से प्रतिदिन 4 लाख लीटर दूध की खरीदी की जा रही है।</p>
<p>इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य पूरा हो गया है, इसलिए 9 जनवरी, 2025 को नागपुर में रजिस्टर्ड ऑफिस के साथ महिला स्वामित्व वाले दुग्ध उत्पादक संगठन (एमपीओ) '&lsquo;मराठवरहाड दुग्ध उत्पादक संगठन&rsquo; की स्थापना की गई है। &nbsp;ऐसे किसान स्वामित्व वाले संगठनों को बढ़ावा देने वाली एनडीडीबी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज (एनडीएस) को मराठवरहाड एमपीओ को टेक्निकल सहायता देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।&nbsp;वहीं मदर डेयरी मराठवरहाड एमपीओ द्वारा खरीदे गए दूध को मार्केट उपलब्ध कराती रहेगी।</p>
<p>महिला-स्वामित्व और महिलाओं के नेतृत्व वाले मराठवरहाड एमपीओ ने संगठित दुग्ध खरीदी नेटवर्क के अंतर्गत विदर्भ और मराठवाड़ा के 6000 गांवों तक विस्तार और 1.85 लाख महिला सदस्यों को पंजीकृत करने का लक्ष्य रखा है।</p>
<p>मराठवरहाड एमपीओ की योजना सभी गांवों में स्वचालित निष्पक्ष एवं पारदर्शी दूध संग्रहण प्रणाली स्थापित करने की भी है। इसका उद्देश्य सभी महिला सदस्यों के बैंक खाते में नियमित और समय से सीधा भुगतान है।&nbsp;&nbsp; &nbsp;</p>
<p>नागपुर मुख्यालय वाला यह एमपीओ अपने ऑपरेशन वाले क्षेत्र में दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण पशु खाद्य पदार्थ व चारे का उत्पादन और आपूर्ति सहित टेक्निकल इनपुट सेवाएं किसानों को उपलब्ध कराएगा।&nbsp;इसके अलावा एमपीओ की पूरी वैल्यू चेन से जुड़े उत्पादक निदेशकों, सदस्यों और दूसरे हितधारकों के अनवरत क्षमता निर्माण पर भी ध्यान दिया जाएगा। साथ ही कचरे के प्रबंधन, जल संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्रों में भी पहलों का आयोजन किया जाएगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63f332ba9a84e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ महिला एमपीओ ‘मराठवरहाड’ का 5 साल में 11 लाख किलो दूध प्रतिदिन खरीद  का लक्ष्य    ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63f332ba9a84e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[NFCSF ने चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर 259 लाख टन किया, उत्पादन आंकड़ों में ‘अस्पष्टता’ पर जताई चिंता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/nfcsf-revised-sugar-production-estimate-to-259-lakh-tonnes-raising-concerns-over-ambiguity-in-estimates.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 17 Mar 2025 16:03:37 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/nfcsf-revised-sugar-production-estimate-to-259-lakh-tonnes-raising-concerns-over-ambiguity-in-estimates.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में<span> गन्ने की कमी के कारण चीनी उत्पादन में काफी गिरावट आई है। सहकारी चीनी मिलों के संगठन&nbsp;<strong>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (</strong></span><strong>NFCSF)</strong> <span>ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए देश में चीनी उत्पादन के अनुमान को घटा दिया है।</span></p>
<p data-start="615" data-end="840">NFCSF <span>के अनुसार</span>, चालू&nbsp;<span>चीनी सीजन</span> 2024-25 <span>में भारत का कुल चीनी उत्पादन </span><strong>259 </strong><span><strong>लाख टन</strong> तक पहुंचने का अनुमान है</span>, <span>जो पिछले सत्र के </span><strong>319 </strong><span><strong>लाख टन</strong> के मुकाबले 18.81 फीसदी कम है। इससे पहले</span>, NFCSF <span>ने चालू सत्र में </span>265 <span>लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया था।</span></p>
<p data-start="842" data-end="1229"><strong>15 </strong><span><strong>मार्च</strong> तक</span>, <span>भारत का चीनी उत्पादन </span>16.11 <span>प्रतिशत घटकर </span>237.15 <span>लाख टन रह गया है</span>, <span>जिससे सरकार की उन नीतियों के सामने चुनौती खड़ी हो गई है जो प्रारंभिक उच्च अनुमानों के आधार पर बनाई गई थीं। </span>इस सीजन में पेराई करने वाली 533 <span>चीनी मिलों में से </span>329 <span>ने पेराई कार्य पूरा कर लिया है</span>, <span>जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक केवल </span>176 <span>मिलें बंद हुई थीं। चीनी की रिकवरी दर भी पिछले साल के </span>9.95 <span>प्रतिशत से घटकर इस सीजन में </span>9.32 <span>प्रतिशत रह गई है।</span></p>
<h3 data-start="1231" data-end="1265"><strong data-start="1235" data-end="1263">अनुमानों में </strong><strong>&lsquo;<span>अस्पष्टता</span>&rsquo;</strong></h3>
<p data-start="1266" data-end="1468">NFCSF <span>ने चीनी उत्पादन के आंकड़ों में "अस्पष्टता" को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि </span>&ldquo;2024-25 <span>चीनी सीजन &nbsp;की शुरुआत से ही गन्ने की उपलब्धता और संभावित चीनी उत्पादन के अनुमानों में लगातार बदलाव देखा गया।</span>&rdquo;</p>
<p data-start="1470" data-end="1688">NFCSF <span>ने एक बयान में कहा</span>, &ldquo;<span>चीनी उत्पादन के आंकड़ों में अस्पष्टता आज भी बनी हुई है। उद्योग के एक वर्ग ने केंद्र सरकार को </span>333 <span>लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान सौंपा था</span>, <span>जिसके आधार पर सरकार ने अपनी नीतियां बनानी शुरू कीं।</span>&rdquo;</p>
<p data-start="1690" data-end="1859">गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने जनवरी 2025 <span>में प्रारंभिक उत्पादन अनुमान और उद्योग की मांग को देखते हुए </span>10 <span>लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी</span>, <span>लेकिन तब से चीनी उत्पादन का अनुमान लगातार घटता जा रहा है।</span></p>
<h3 data-start="1861" data-end="1893"><strong data-start="1865" data-end="1891">राज्यवार उत्पादन रुझान</strong></h3>
<p data-start="1894" data-end="2181">NFCSF <span>के आंकड़ों के अनुसार</span>, 15 <span>मार्च तक <strong data-start="1934" data-end="1948">महाराष्ट्र</strong> में चीनी उत्पादन घटकर </span>78.60 <span>लाख टन रह गया</span>, <span>जो पिछले वर्ष की समान अवधि में </span>100.45 <span>लाख टन था। <strong>उत्तर प्रदेश</strong> में उत्पादन </span>88.55 <span>लाख टन से घटकर </span>80.95 <span>लाख टन रह गया</span>, <span>जबकि <strong data-start="2119" data-end="2130">कर्नाटक</strong> में यह </span>49.50 <span>लाख टन से घटकर </span>39.10 <span>लाख टन हो गया।</span></p>
<p data-start="2183" data-end="2478">उत्तर प्रदेश में प्रमुख गन्ना किस्म <strong data-start="2219" data-end="2230">Co-0238</strong> <span>पर <em data-start="2234" data-end="2243">रेड रॉट</em> और <em data-start="2247" data-end="2261">टॉप शूट बोरर</em> जैसी बीमारियों का भारी प्रकोप देखा गया है। वहीं</span>, <span>महाराष्ट्र और कर्नाटक में खड़ी फसल में बड़े पैमाने पर समय से पहले फूल आने के कारण गन्ने की बढ़वार प्रभावित हुई है</span>, <span>जिससे चीनी की पैदावार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।</span></p>
<h3 data-start="2480" data-end="2507"><strong data-start="2484" data-end="2505">उद्योग की चिंताएं</strong></h3>
<p data-start="2508" data-end="2724">NFCSF <span>के अध्यक्ष <strong data-start="2525" data-end="2544">हर्षवर्धन पाटिल</strong> ने कहा कि मौजूदा रुझान को देखते हुए देश भर में पेराई सत्र</span>&mdash;<span>उत्तर प्रदेश को छोड़कर</span>&mdash;<span>मार्च के अंत तक समाप्त हो जाएगा</span>, <span>जबकि उत्तर प्रदेश की मिलें अप्रैल के मध्य तक पेराई बंद कर देंगी।</span></p>
<p data-start="2726" data-end="2959">पाटिल ने कहा कि महाराष्ट्र जैसे प्रमुख राज्य में, <span>जहां </span>200 <span>चीनी मिलें हैं</span>, <span>इस वर्ष पेराई सत्र केवल </span><strong data-start="2832" data-end="2844">83 <span>दिनों</span></strong><span> तक चला है। किसी भी मिल के लिए </span>140 <span>से </span>150 <span>दिनों तक संचालन आवश्यक होता है</span>, <span>तभी वह टिकाऊ रह सकती है। इस साल महाराष्ट्र का पूरा चीनी उद्योग भारी वित्तीय संकट में फंस गया है। </span></p>
<h3><strong>भावी संभावनाएं</strong></h3>
<p data-start="3154" data-end="3386">NFCSF <span>के प्रबंध निदेशक <strong data-start="3216" data-end="3235">प्रकाश नाईकनवरे</strong> ने </span>2025-26 <span>सत्र के लिए आशावाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अनुकूल मौसम परिस्थितियों और बढ़ी हुई गन्ना बुवाई से उत्पादन में सुधार होने की संभावना है। नाईकनवरे ने कहा कि यदि मौसम की परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं</span>, <span>तो </span>2025-26 <span>में चीनी उत्पादन में सुधार होगा और यह </span>2026-27 <span>तक वृद्धि बनाए रख सकता है।&nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67d80232db78d.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_6543697e057f4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ NFCSF ने चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर 259 लाख टन किया, उत्पादन आंकड़ों में ‘अस्पष्टता’ पर जताई चिंता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_6543697e057f4.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आलू किसानों के साथ हाईफन फूड्स की कारगर पहल, बनी फ्रेंच फ्राइज की सबसे बड़ी निर्यातक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/hyfun-foods-initiative-with-potato-farmers-becomes-india-largest-french-fries-exporter.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 12 Mar 2025 10:13:26 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/hyfun-foods-initiative-with-potato-farmers-becomes-india-largest-french-fries-exporter.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span lang="HI">गुजरात के बनासकांठा जिले के मोटा कोटरा गांव के तुलसीभाई 13 एकड़ में आलू की खेती करते हैं। उनकी पैदावार 13 टन प्रति एकड़ है और इसे 13.50 रुपये किलो बेचकर वह तमाम खर्चों के बाद भी 25 फीसदी मुनाफा कमा लेते हैं जो एक एकड़ में 45 हजार रुपये से अधिक बैठता है</span><span lang="EN-US">,</span><span lang="HI"><span>&nbsp;</span>और वह भी 100 से 110 दिन की फसल में।</span><span lang="EN-US"></span><span lang="EN-US">&nbsp;</span></p>
<p><span lang="HI">गुजरात के बनासगांठ, साबरकांठा और मेहसाणा जिले में तलसीभाई जैसे करीब 7500 किसान हैं और ऐसे कुछ किसान मध्य प्रदेश के मालवा के देवास, उज्जैन जिलों में भी हैं। यह कमाई वह आलू की प्रोसेसिंग करने वाली कंपनी<span>&nbsp;</span><b>हाईफन फूड्स</b><span>&nbsp;</span>के साथ कांट्रैक्ट फार्मिंग के जरिये कर पा रहे हैं। ये किसान आलू प्रोसेसिंग के लिए अच्छी मानी जाने वाली <strong>सेंटाना</strong> वैरायटी का उत्पादन करते हैं जिसकी प्रोसेसिंग कर कंपनी फ्रेंच फ्राई और हैश ब्राउन, फ्लैक और चिप्स बनाकर उनका निर्यात करती है।</span><span lang="EN-US"></span><span lang="EN-US">&nbsp;</span></p>
<p><span lang="HI">साल 2015 में 500 किसानों के साथ शुरुआत करने वाली हाईफन इस समय भारत से सबसे अधिक फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज निर्यात करने वाली कंपनी बन गई है जो 40 देशों को निर्यात करती है। खास बात यह है कि वर्ष 1992 में अमेरिकी कंपनी लैंब वेस्टन ने भारत में फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज का आयात शुरू किया था और उसके बाद कनाडा की कंपनी मकैन फूड्स ने मैकडॉनल्ड चेन को आपूर्ति के लिए फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज का आयात शुरू किया था। लेकिन अब भारत दुनिया का प्रमुख फ्रेंच फ्राइज निर्यातक बन गया है। भारत से हर साल लगभग 1500 करोड़ रुपये की एक टन लाख टन से अधिक फ्रेंच फ्राइज का निर्यात होता है। इसमें सबसे अधिक हिस्सेदारी हाईफन फूड्स की है।</span><span lang="EN-US"></span><span lang="EN-US">&nbsp;</span></p>
<p><b><span lang="HI">आलू की आढ़त से शुरुआत</span></b><b><span lang="EN-US"></span></b><span lang="EN-US">&nbsp;</span></p>
<p><span lang="HI">हाईफन फूड्स के मैनेजिंग डायेक्टर और सीईओ<span>&nbsp;</span><b>हरेश करमचंदानी<span>&nbsp;</span></b>की आलू प्रोसेसिंग और निर्यात के क्षेत्र में कामयाबी की कहानी काफी दिलचस्प है।<span>&nbsp;</span><b><i>रूरल वॉयस</i></b><span>&nbsp;</span>के साथ एक मुलाकात में वह बताते हैं कि हमारा आलू की आढ़त का पुश्तैनी कारोबार था। परिवार के लोग नहीं चाहते थे कि मैं आढ़त पर बैठूं। इसलिए मैं भी ग्रेजुशन के बाद मल्टीप्लेक्स चेन से लेकर ऑटो डीलरशिप जैसे विकल्पों के बारे में सोच रहा था</span><span lang="EN-US">,</span><span lang="HI"><span>&nbsp;</span>लेकिन आखिरकार अहमदाबाद में अपने पुश्तैनी काम के साथ ही जुड़ गया।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67d112e718966.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><span lang="HI">हरेश बताते हैं कि यहीं से मुझे आइडिया आया कि इस धंधे में किसान और कारोबारी कोई भी बड़ा फायदा नहीं ले पाता</span><span lang="EN-US">,<span>&nbsp;</span></span><span lang="HI">फिर ऐसा क्या किया जाए कि कारोबार का नक्शा ही बदल जाए। इसी सोच के साथ मैंने आलू प्रोसेसिंग प्लांट लगाने का फैसला किया। इससे लिए मैंने इस कारोबार को गहराई से स्टडी किया</span><span lang="EN-US">,<span>&nbsp;</span></span><span lang="HI">दुनिया भर के फूड फेयर्स में गया और साल 2010 में इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का पक्का मन बना लिया। 2015 में हमने पहला संयंत्र लगाया। इसके लिए यूरोप से अत्याधुनिक मशीनों का आयात किया गया और मेहसाणा में 26 टन प्रति घंटे की उत्पादन क्षमता का फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज प्लांट स्थापित किया। साथ में चार टन प्रति घंटे की उत्पादन क्षमता का हैश ब्राउन का प्लांट भी लगाया।</span><span lang="EN-US"></span><span lang="EN-US">&nbsp;</span></p>
<p><b><span lang="HI">पहली चुनौती: आलू की सही किस्म &nbsp;</span></b><b><span lang="EN-US"></span></b><span lang="EN-US">&nbsp;</span></p>
<p><span lang="HI">हरेश करमचंदानी</span><span lang="HI"><span>&nbsp;</span>बताते हैं कि प्रोसेसिंग के लिए आलू का कच्चे माल के रूप में उपलब्ध होना एक बड़ी चुनौती थी</span><span lang="EN-US">,</span><span lang="HI"><span>&nbsp;</span>क्योंकि देश में पैदा होने वाले लगभग 95 फीसदी आलू टेबल पोटेटो हैं और यह प्रोसेसिंग क्वालिटी का आलू नहीं होता है। इसमें ड्राई मैटर 15 से 16 फीसदी होता है</span><span lang="EN-US">,</span><span lang="HI"><span>&nbsp;</span>शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है</span><span lang="EN-US">,</span><span lang="HI"><span>&nbsp;</span>साथ ही इसका साइज भी छोटा है। जबकि प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली आलू किस्मों में डाई मैटर 20 से 23 फीसदी तक होता है। इसलिए हमने नीदरलैंड से सेंटाना व दूसरी किस्मों के आलू का आयात किया और उसे देश में उगाने के लिए कानूनी अधिकारी (आईपीआर) हासिल किये</span><span lang="EN-US">,</span><span lang="HI"><span>&nbsp;</span>जिसके लिए हम यूरोपीय कंपनी को रॉयल्टी चुकाते हैं। इस आलू को हम कांट्रैक्ट फार्मिंग के जरिये किसानों से उगवाते करवाते हैं।</span><span lang="EN-US"></span><span lang="EN-US">&nbsp;</span></p>
<p><strong><span lang="HI">हाईफार्म पाठशाला प्रोजेक्ट</span></strong></p>
<p><span lang="HI">हाईफन फूड्स ने साल 2015-16 में 500 किसानों के साथ आलू की कांट्रैक्ट फार्मिंग शुरू की थी और अब इन किसानों की तादाद बढ़कर 7500 हो गई है। हाईफन फूड्स के चीफ ऑपरेटिंग आफिसर (सप्लाई चेन मैनेजमैंट)<span>&nbsp;</span><b>मोहम्मद आरिफ<span>&nbsp;</span></b>बताते हैं कि हम किसानों को सही किस्म और गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराते हैं। उन्हें बढ़िया उत्पादन के लिए खेती के तरीकों की जानकारी और मदद देते हैं। इसके लिए हमने किसानों को एक एप्लीकेशन पर जोड़ा है और हाईफार्म पाठशाला प्रोजेक्ट के तहत किसानों को फसल के दौरान जरूरी जानकारी देते हैं। इससे वे खाद</span><span lang="EN-US">,<span>&nbsp;</span></span><span lang="HI">बीज</span><span lang="EN-US">,<span>&nbsp;</span></span><span lang="HI">पानी आदि का सही इस्तेमाल करते हैं और बेहतरीन फसल लेते हैं। किसानों की उपज को हाईफन खरीदती है और किसानों को सीधे भुगतान करती है।</span><span lang="EN-US"></span><span lang="EN-US">&nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67d113c863875.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><b><span lang="HI">उत्पादन बढ़ा</span></b><b><span lang="EN-US">,<span>&nbsp;</span></span></b><b><span lang="HI">पानी बचा &nbsp;</span></b><b><span lang="EN-US"></span></b></p>
<p><span lang="HI">बनासकांठा के जिस खेत में हम गये</span><span lang="EN-US">,</span><span lang="HI"><span>&nbsp;</span>वहां आलू की हार्वेस्टिंग चल रही थी। खेत पर मौजूद किसान ने बताया कि हमने पांच रुपये किलो की कीमत पर आलू का कांट्रैक्ट शुरू किया था और इस साल हमें 13.50 रुपये किलो का भाव मिल रहा है। साथ ही खेती के सही तरीके की जानकारी कंपी के वैज्ञानिकों व अधिकारियों द्वारा दी जाती है। एप के जरिये सिंचाई का समय पता लग जाता है क्योंकि मिट्टी में नमी, मौसम और हवा में नमी की जानकारी हमें मिल जाती है।</span><span lang="EN-US"></span><span lang="EN-US">&nbsp;</span></p>
<p><span lang="HI">मोहम्मद आरिफ बताते हैं कि हमारे सारे किसान मिनी स्प्रिंकर और ड्रिप इरीगेशन तकनीक का इस्तेमाल करते हैं और इससे 25 फीसदी पानी की बचत कर रहे हैं। आलू की खेती के लिए किसानों को 30 इंच की बजाय 48 इंच की दूरी पर बेड बनाने का सुझाव दिया गया</span><span lang="EN-US">,</span><span lang="HI"><span>&nbsp;</span>इससे आलू का उत्पादन बढ़ गया क्योंकि आलू का आकार बढ़ गया है। सेंटाना किस्म का आलू पारंपरिक किस्मों की तरह मिट्टी में नीचे की तरफ नहीं बढ़ता है</span><span lang="EN-US">,<span>&nbsp;</span></span><span lang="HI">बल्कि चौड़ाई में बढ़ता है और बेड के बीच दूरी अधिक होने से उसे अधिक जगह मिलती है। इसके चलते उत्पादन 11 टन से बढ़कर 13 टन प्रति हैक्टेयर हो गया है।</span><span lang="EN-US"></span><span lang="EN-US">&nbsp;</span></p>
<p><span lang="HI">कंपनी किसानों के खेत से आलू को सीधे स्टोरेज ले जाती है। हाईफन बल्क चैंबर स्टोरेज वाले कोल्ड स्टोरेज का भी इस्तेमाल कर रही है। वहां खुला स्टोर किया जाता है। इसमें कूलिंग के लिए टनल्स का इस्तेमाल किया जाता है। इनकी क्षमता 1500 से 2000 टन है। हाईफन अपना 20 फीसदी आलू इस तरह के स्टोरेज में रखती है बाकी करीब 8 फीसदी आलू पंरपरागत तरीके के बैग में भरकर कोल्ड स्टोरेज में रखती है। असल में आलू को 8 से 9 माह के लिए स्टोर करना पड़ता है क्योंकि पूरे साल प्रोसेसिंग के लिए उसकी जरूरत होती है।</span><span lang="EN-US"></span><b><span lang="EN-US">&nbsp;</span></b></p>
<p><b><span lang="HI">शीड टू शेल्फ मॉडल</span></b></p>
<p><span lang="HI">गुजरात में देश का 7.5 फीसदी आलू पैदा होता है लेकिन प्रोसेसिंग के लिए 90 फीसदी से अधिक आलू गुजरात में ही उगाया जाता है क्योंकि यहां की जलवायु प्रोसेसिंग वाली आलू किस्मों के लिए बेहतर है।</span></p>
<p><span lang="HI">हाईफन फूड्स का बिजनेस मॉडल<span>&nbsp;</span><i>सीड टू शैल्फ<span>&nbsp;</span></i>वाला है। इसमें बीज की अहमियत काफी अधिक है। हरेश करमचंदानी बताते हैं कि हम जनरेशन जीरो (जी-0) से शुरूआत करते हैं जिसके लिए जर्मप्लाज्म सेंटोना कंपनी से लेते हैं। उसके बाद इसे कंट्रोल्ड फार्मिंग में जी-वन पर लाते हैं। फिर कांट्रेक्ट फार्मिंग के जरिए इससे जी-2 का उत्पादन करते हैं और उसके बाद जी-3 के लिए मल्टीप्लाई करते हैं।</span><span lang="EN-US"></span><span lang="EN-US">&nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67d11405cb8bd.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><span lang="HI"> हरेश बताते हैं कि बीज उत्पादन का काम पंजाब में कांट्रैक्ट फार्मिंग में कराते हैं क्योंकि वहां की जलवायु उसके लिए मुफीद है और वहां फार्म भी बड़े हैं। वहां से सीड पोटेटो लाकर हम अपने कांट्रैक्ट वाले किसानों को देते हैं। यह एक पांच साल की प्रक्रिया है। इसके लिए हमारे मॉडल फार्म भी हैं और अब हम शुरुआती स्टेज के लिए अक्वापोनिक और हाइड्रोपोनिक तकनीक का इस्तेमाल करने वाले हैं। </span></p>
<p><span lang="HI">सीड के बाद की अगली स्टेज है प्रोक्योरमेंट, फिर स्टोरेज और उसके बाद की स्टेज है प्रोसेसिंग जिसके बाद कोल्ड सप्लाई चेन का रोल आता है। हम प्रोसेस्ड फ्रेंच फ्राइज और हैश ब्राउन व दूसरे उत्पादों को माइनस 18 डिग्री पर फ्रीज करते हैं। जहां से यह निर्यात होता है और घरेलू बाजार में भी पहुंचता है।</span><span lang="EN-US"></span></p>
<p><strong><span lang="HI">उत्पादन का 80 फीसदी निर्यात&nbsp;</span></strong></p>
<p><span lang="HI">हाईफन अपने 80 फीसदी उत्पादन को निर्यात करती है और करीब 20 फीसदी उत्पादन घरेलू मार्केट में खपत के लिए जाता है। जहां निर्यात के लिए यूरोप, अमेरिका, खाड़ी के देश और जापान, कोरिया के साथ दूसरे पूर्वी व दक्षिण एशिया के 40 देशों को हम निर्यात करते हैं। भारत में बर्गर किंग और केएफसी जैसी चेन को फ्रेंच फ्राई की आपूर्ति करते हैं। भारत से 2022-23 में 1478.73 करोड़ रुपये की 1,35,877 टन फ्रेंच फ्राइज का निर्यात किया गया, जबकि चालू साल में अप्रैल से दिसंबर, 2024 तक 1056.92 करोड़ रुपये की 106,506 टन फ्रेंच फ्राई का निर्यात किया गया। हाईफन ने पिछले साल 85 हजार टन फ्रेंच फ्राई और 8000 टन हैश ब्राउन का निर्यात किया था।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67d1141a1edc8.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><span lang="EN-US"></span><strong><span lang="EN-US">गुणवत्ता पर जोर&nbsp;&nbsp;</span></strong></p>
<p><span lang="HI">हरेश कहते हैं कि हमारा पहला निर्यात आर्डर थाइलैंड को गया था और वहां फेल हो गया था। इस कड़वे अनुभव ने हमें मार्केट को पहचानने और सही मार्केट के लिए सही उत्पाद का चयन करने की सीख दी। हमारी पूरी उत्पादन प्रक्रिया वर्ल्ड क्लास है और गुणवत्ता मानकों पर दुनिया के बेहतर मानकों को पूरा करती है। यही वजह है कि हमारा निर्यात लगातार बढ़ रहा है।</span><span lang="EN-US"></span></p>
<p><span lang="HI">हरेश कहते हैं जिस तरह से यूरोप में जलवायु परिवर्तन का आलू उत्पादन पर असर पड़ रहा है। उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए जमीन की उपलब्धता चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में दुनिया के तमाम मार्केट फ्रोजन फ्रेंच फ्राई, हैश ब्राउन, चिप्स और फ्लैक के लिए भारत को एक संभावित बड़े सप्लायर के रूप में देख रहे हैं और यह हमारे लिए एक मौका है।</span><span lang="EN-US"></span></p>
<p><span lang="HI"><strong>भावी योजनाएं</strong></span></p>
<p><span lang="HI">हाईफन फूड्स 2027 तक एक हजार करोड़ रुपये के निवेश से 20 टन प्रति घंटा की फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज और 4 टन प्रति घंटा की क्षमता की हैश ब्राउन उत्पादन लाइन स्थापित कर रही है। </span><span lang="EN-US"></span><span lang="HI">कंपनी आलू की नीदरलैंड की कंपनियों स्टेट, एचजेडपीसी और मीजेर कंपनियों की किस्में सेंटाना, इन्नोवेटर, केनीबैक, लेडी रोसैटा के साथ शिमला स्थित सेंट्रल पोटेटो रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपीआरआई) की किस्म कुफरी फ्राईसोना और कुफरी फ्राइयोम का फ्रेंच फ्राई के उत्पादन के लिए इस्तेमाल कर रही है।</span></p>
<p><span lang="HI">इसके साथ की आलू की आपूर्ति के लिए मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र और उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में आलू की कांट्रैक्ट फार्मिंग की योजना पर अमल करने जा रही है। मध्य प्रदेश में इसकी शुरुआत हो चुकी है और उत्तर प्रदेश में अगले सीजन से कांट्रैक्ट फार्मिंग शुरू कर सकती है।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67d11450eaa07.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67d1119bab77a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आलू किसानों के साथ हाईफन फूड्स की कारगर पहल, बनी फ्रेंच फ्राइज की सबसे बड़ी निर्यातक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67d1119bab77a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत ने मसूर दाल के आयात पर 11% शुल्क लगाया, पीली मटर का ड्यूटी&amp;#45;फ्री आयात 31 मई तक बढ़ाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-imposes-11-percent-duty-on-lentil-imports-extends-duty-free-import-of-yellow-peas-till-may-31.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 09 Mar 2025 14:40:15 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-imposes-11-percent-duty-on-lentil-imports-extends-duty-free-import-of-yellow-peas-till-may-31.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दलहन आयात को लेकर भारत सरकार ने दो निर्णय लिए हैं। <strong>वित्त मंत्रालय</strong> की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, <strong>मसूर दाल</strong><span> पर</span> 11 <span>प्रतिशत आयात शुल्क लगाया गया है</span>, <span>जबकि <strong>पीली मटर</strong> के शुल्क-मुक्त आयात को </span>31 <span>मई</span>, 2025 <span>तक बढ़ा दिया है। </span></p>
<p><strong>वित्त मंत्रालय की अधिसूचना </strong>के&nbsp;अनुसार, 8 <span>मार्च से सरकार ने मसूर दाल पर </span>5 <span>प्रतिशत मूल सीमा शुल्क </span>(BCD), 5 <span>प्रतिशत कृषि अवसंरचना विकास उपकर (</span>AIDC<span>) </span>और 1 फीसदी समाज कल्याण प्रभार (SWC) लगाया है। अभी तक देश में मसूर दाल का ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट हो रहा था।</p>
<p>देश में पीली मटर के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दिसंबर, 2023 <span>में दी गई थी</span>, <span>जिसे कई बार बढ़ाते हुए</span> 28 <span>फरवरी</span>, 2025 <span>तक बढ़ाया गया। देश में आयात होने वाली दालों में लगभग आधा हिस्सा पीली मटर का है। दालों की महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने </span>2023 <span>में ही कई दालों के </span>2025 <span>तक ड्यूटी-फ्री आयात का ऐलान कर दिया था।</span>&nbsp;</p>
<p>साल 2017 <span>में देश में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने पीली मटर पर </span>50 <span>फीसदी आयात शुल्क लगा दिया था</span>, <span>लेकिन बाद में इस नीति से यू-टर्न लेते हुए </span>2023 <span>में पीली मटर के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी गई। सस्ती होने के कारण पीली मटर का इस्तेमाल आमातौर पर चने की जगह किया जाता है।</span></p>
<p><strong>चने की कीमतों पर पड़ेगा असर</strong></p>
<p>माना जा रहा था कि भारत सरकार दालों के ड्यूटी-फ्री आयात को आगे जारी नहीं रखेगी, <span>लेकिन पीली मटर के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया है। इससे </span>चने के दाम नीचे आ सकते हैं।</p>
<p>दालों के शुल्क-मुक्त आयात का असर घरेलू बाजार में दालों की कीमतों पर पड़ता है और किसानों की दलहन उपज को सही दाम नहीं मिल पाता है। उम्मीद है कि मसूर दाल पर 11&nbsp;<span>फीसदी आयात शुल्क लगने से दलहन किसानों को सस्ते आयात की मार से बचाने में मदद मिलेगी। </span></p>
<p>लेकिन पीली मटर के ड्यूटी-फ्री आयात को जारी रख केंद्र सरकार ने दालों में आत्मनिर्भरता लाने और किसानों को उपज का सही दाम दिलाने की मंशा के विपरीत काम किया है। पीली मटर के शुल्क-मुक्त आयात का असर चने के अलावा अन्य दालों की कीमतों पर भी पड़ेगा।</p>
<p><strong>चने की अच्छी फसल, दाम गिरने लगे एमएसपी से नीचे</strong>&nbsp;</p>
<p>इस रबी सीजन (2024-25) के दौरान देश में चने का रकबा पिछले साल के 95.87 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 98.55 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है और चने के अच्छे उत्पादन की उम्मीद की जा रही है। लेकिन रबी की नई फसल मंडियों में आने के साथ ही चने की कीमतें कई जगह 5650 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे आ गई हैं।</p>
<p>दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक होने के बावजूद भारत हर साल अपनी दलहन जरूरत का करीब 15-20 <span>फीसदी यानी करीब सालाना करीब </span>60-70 <span>लाख टन दालों का आयात करता है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67cd6817bc8fd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत ने मसूर दाल के आयात पर 11% शुल्क लगाया, पीली मटर का ड्यूटी-फ्री आयात 31 मई तक बढ़ाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67cd6817bc8fd.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी उत्पादन में 14% की गिरावट, अब तक 186 चीनी मिलों में पेराई बंद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/14-percent-drop-in-sugar-production-crushing-stopped-in-186-sugar-mills.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 28 Feb 2025 20:15:56 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/14-percent-drop-in-sugar-production-crushing-stopped-in-186-sugar-mills.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू पेराई सीजन 2024-25 में अब तक देश के चीनी उत्पादन में लगभग 14 फीसदी की गिरावट आई है और 186 चीनी मिलें पेराई बंद कर चुकी हैं। ऐसे में सीजन के आखिर तक कुल चीनी उत्पादन घटकर 265 लाख टन रहने का अनुमान है जो पिछले साल के 319 लाख टन चीनी उत्पादन से लगभग 17 फीसदी कम है।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना संघ लिमिटेड (एनएफसीएसएफ)</strong> की ओर से 28 फरवरी को जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में अब तक 219.95 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 254 टन चीनी उत्पादन से लगभग 14 फीसदी कम है। एनएफसीएसएफ के अनुसार, अब तक देश भर में 186 चीनी मिलें पेराई बंद कर चुकी हैं जबकि पिछले साल इस अवधि तक केवल 72 चीनी मिलें बंद हुई थीं।</p>
<p><strong>इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा)</strong> <span>ने भी 28 फरवरी तक देश में 219.78 लाख टन चीनी उत्पादन का आंकड़ा दिया है। इस्मा के अनुसार</span>, <span>अब तक 177 चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है</span>,<span> जबकि 355 मिलें चालू हैं। सीजन की शुरुआत 532 चीनी मिलों में पेराई से हुई थी। </span></p>
<p>महाराष्ट्र और कर्नाटक में पिछले पखवाड़े में चीनी मिलें तेजी से बंद हुई हैं। एनएफसीएसएफ के अनुसार, 28 <span>फरवरी तक यूपी में 15</span>, <span>महाराष्ट्र में 94 और कर्नाटक में 52 चीनी मिलें पेराई बंद कर चुकी हैं। &nbsp;</span></p>
<p style="font-weight: 400;"><strong>चीनी उत्पादन की स्थिति&nbsp;</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x_67c1cc179ad48.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><em>स्रोत: NFCSF</em></p>
<p></p>
<p><strong>उत्पादन को झटका </strong></p>
<p>इस साल गन्ने की फसल पर मौसम और रोगों की मार के चलते चीनी मिलों को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल पाया। यही कारण है कि फरवरी के आखिर तक देश की लगभग एक तिहाई चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं। इसी का नतीजा है कि इस साल देश का चीनी उत्पादन घटकर 265 लाख टन रहने का अनुमान है। यह एथेनॉल उत्पादन के लिए हुए चीनी डायवर्जन के अलावा है।&nbsp;</p>
<p>अब तक लगभग 21 लाख टन चीनी का डायवर्जन एथेनॉल उत्पादन के लिए हुआ है। चीनी उत्पादन में गिरावट से एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम और चीनी निर्यात की नीति पर भी सरकार को पुनर्विचार करना पड़ा सकता है।</p>
<p><strong>रिकवरी में कमी </strong></p>
<p>इस साल शुगर रिकवरी में भी काफी गिरावट आई है।&nbsp;एनएफसीएसएफ के अनुसार, देश में शुगर रिकवरी पिछले साल 9.95 फीसदी थी जो 28 फरवरी तक घटकर 9.22 फीसदी रह गई। शुगर रिकवरी में सर्वाधिक गिरावट कर्नाटक में दर्ज की गई है जहां शुगर रिकवरी 8.50 फीसदी है। यूपी में 9.45 फीसदी और महाराष्ट्र में 9.35 फीसदी शुगर रिकवरी दर्ज की गई है। पिछले साल यूपी में 10.30 फीसदी और महाराष्ट्र में 10 फीसदी शुगर रिकवरी थी।</p>
<p>हालांकि, इस्मा का कहना है कि यूपी में गन्ने में सुक्रोज कंटेंट में सुधार हो रहा है और यह पिछले सीजन के स्तर पर पहुंच गया है। इससे सीजन के आखिर तक, पहले हाफ के दौरान हुई कम चीनी रिकवरी की आंशिक रूप से भरपाई हो सकती है।&nbsp;</p>
<p></p>
<table width="58%" style="font-weight: 400;">
<tbody>
<tr>
<td width="23%" style="text-align: center;">
<p><strong>YTD</strong></p>
</td>
<td colspan="4" width="76%" style="text-align: center;">
<p><strong>28<sup>th</sup>&nbsp;Feb&rsquo;2025</strong></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="23%" style="text-align: center;">
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
</td>
<td colspan="3" width="51%" style="text-align: center;">
<p><strong>Number of Factories</strong></p>
</td>
<td rowspan="2" width="24%" style="text-align: center;">
<p><strong>Sugar Production (Lac Tons)</strong></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="23%" style="text-align: center;">
<p><strong>ZONE</strong></p>
</td>
<td width="16%" style="text-align: center;">
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>Started</strong></p>
</td>
<td width="16%" style="text-align: center;">
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>Closed</strong></p>
</td>
<td width="18%" style="text-align: center;">
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>Operating</strong></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="23%" style="text-align: center;">
<p>U.P.</p>
</td>
<td width="16%" style="text-align: center;">
<p>122</p>
</td>
<td width="16%" style="text-align: center;">
<p>14</p>
</td>
<td width="18%" style="text-align: center;">
<p>108</p>
</td>
<td width="24%" style="text-align: center;">
<p>72.93</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="23%" style="text-align: center;">
<p>Maharashtra&nbsp;</p>
</td>
<td width="16%" style="text-align: center;">
<p>200</p>
</td>
<td width="16%" style="text-align: center;">
<p>86</p>
</td>
<td width="18%" style="text-align: center;">
<p>114</p>
</td>
<td width="24%" style="text-align: center;">
<p>74.80</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="23%" style="text-align: center;">
<p>Karnataka</p>
</td>
<td width="16%" style="text-align: center;">
<p>78</p>
</td>
<td width="16%" style="text-align: center;">
<p>55</p>
</td>
<td width="18%" style="text-align: center;">
<p>23</p>
</td>
<td width="24%" style="text-align: center;">
<p>38.20</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="23%" style="text-align: center;">
<p>Gujarat&nbsp;&nbsp;</p>
</td>
<td width="16%" style="text-align: center;">
<p>15</p>
</td>
<td width="16%" style="text-align: center;">
<p>2</p>
</td>
<td width="18%" style="text-align: center;">
<p>13</p>
</td>
<td width="24%" style="text-align: center;">
<p>6.82</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="23%" style="text-align: center;">
<p>Tamil Nadu</p>
</td>
<td width="16%" style="text-align: center;">
<p>30</p>
</td>
<td width="16%" style="text-align: center;">
<p>3</p>
</td>
<td width="18%" style="text-align: center;">
<p>27</p>
</td>
<td width="24%" style="text-align: center;">
<p>2.90</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="23%" style="text-align: center;">
<p>Others</p>
</td>
<td width="16%" style="text-align: center;">
<p>87</p>
</td>
<td width="16%" style="text-align: center;">
<p>17</p>
</td>
<td width="18%" style="text-align: center;">
<p>70</p>
</td>
<td width="24%" style="text-align: center;">
<p>24.13</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="23%" style="text-align: center;">
<p><strong>ALL INDIA</strong></p>
</td>
<td width="16%" style="text-align: center;">
<p><strong>532</strong></p>
</td>
<td width="16%" style="text-align: center;">
<p><strong>177</strong></p>
</td>
<td width="18%" style="text-align: center;">
<p><strong>355</strong></p>
</td>
<td width="24%" style="text-align: center;">
<p><strong>219.78</strong></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="font-weight: 400;"><em>&nbsp;(स्रोत: ISMA, चीनी उत्पादन के आंकड़े एथेनॉल के लिए शुगर डायवर्जन के बाद के हैं)</em></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67c1c9f1c794b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी उत्पादन में 14% की गिरावट, अब तक 186 चीनी मिलों में पेराई बंद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67c1c9f1c794b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृभको और नीदरलैंड की फार्म फ्राइट्स शाहजहांपुर में लगाएंगे हाई&amp;#45;टेक आलू प्रोसेसिंग यूनिट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/kribhco-and-netherlands-farm-frites-will-set-up-high-tech-potato-processing-unit-in-shahjahanpur.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 12 Feb 2025 20:33:08 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/kribhco-and-netherlands-farm-frites-will-set-up-high-tech-potato-processing-unit-in-shahjahanpur.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>कृषक भारती सहकारी लिमिटेड (कृभको)</strong> और नीदरलैंड की अग्रणी आलू प्रोसेसिंग कंपनी <strong>फार्म फ्राइट्स</strong> ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में अत्याधुनिक आलू प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने के लिए एक संयुक्त उद्यम समझौते (जेवीए) पर हस्ताक्षर किए हैं।&nbsp;इस अवसर पर कृभको की ओर से प्रबंध निदेशक <strong>एम.आर. शर्मा</strong> और फार्म फ्राइट्स की ओर से अध्यक्ष <strong>पीटर डी ब्रुइजन</strong> ने कृभको के चेयरमैन <strong>डॉ. चंद्रपाल सिंह</strong> और अन्य बोर्ड सदस्यों की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर किए।</p>
<p>इस परियोजना के तहत नीदरलैंड की विशेष आलू किस्मों जैसे <strong>सैंटाना</strong> और <strong>क्विंटेरा</strong> की खेती शाहजहांपुर क्षेत्र में की जाएगी। कृभको और फार्म फ्राइट्स की एक समर्पित टीम इन किस्मों के बीजों की आपूर्ति करेगी और तकनीकी मार्गदर्शन देगी।&nbsp;अत्याधुनिक आलू प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना से <strong>शाहजहांपुर</strong> और आसपास के क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने में सहायता मिलेगी। उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीति के अनुसार, यह एक सुपर मेगा प्रोजेक्ट होने जा रहा है।</p>
<p><strong>कृभको</strong> भारत की अग्रणी उर्वरक सहकारी समितियों में से एक है। कृषको का गुजरात के हजीरा में एक मेगा गैस-आधारित यूरिया संयंत्र है, जिसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 23 लाख मीट्रिक टन यूरिया है। कृभको फर्टिलाइजर्स लिमिटेड के माध्यम से उत्तर प्रदेश में एक अन्य गैस-आधारित उर्वरक संयंत्र संचालित किया जाता है, जो सालाना 11 लाख टन यूरिया उत्पादन करने में सक्षम है। कृभको ओमान इंडिया फर्टिलाइजर कंपनी के प्रमुख प्रमोटर में से एक है।</p>
<p>1971 में स्थापित, <strong>फार्म फ्राइट्स</strong> आलू प्रसंस्करण उद्योग की जानी-मानी कंपनी है। एक निजी स्वामित्व वाली पारिवारिक कंपनी, फार्म फ्राइट्स, आलू फ्राई और अन्य आलू-आधारित उत्पादों के उत्पादन में अग्रणी और दुनिया के 100 से अधिक देशों में अपने उत्पादों की बिक्री करती है। कंपनी सालाना 15 लाख टन से अधिक आलू उगाती है और दुनिया भर में 80 से अधिक प्रकार के&nbsp;फ्राई, आलू स्पेशलिटी और ऐपेटाइज़र की आपूर्ति करती है।&nbsp;</p>
<p>कृभको और फार्म फ्राइट्स के बीच संयुक्त उद्यम भारत के आलू प्रसंस्करण उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल से उत्तर प्रदेश में आलू की खेती के पारिस्थितिकी तंत्र में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है, जिससे किसानों को बेहतर बीज, उन्नत कृषि तकनीक और सुनिश्चित बाजार पहुंच मिल सकेगी।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67acb90d10297.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृभको और नीदरलैंड की फार्म फ्राइट्स शाहजहांपुर में लगाएंगे हाई-टेक आलू प्रोसेसिंग यूनिट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67acb90d10297.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राष्ट्रीय बीज निगम ने 35.30 करोड़ रु. का लाभांश घोषित किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/national-seed-corporation-declared-rs-35.30-crore-dividend.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 04 Feb 2025 20:23:36 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/national-seed-corporation-declared-rs-35.30-crore-dividend.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम राष्ट्रीय बीज निगम लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए 35.30 करोड़ रुपये का अंतिम लाभांश घोषित किया है, जो इसके निवल मूल्य का 5% है। निगम का अब तक का यह सर्वाधिक लाभांश है। कृषि भवन में निगम की अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक डॉ. मनिंदर कौर द्विवेदी ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लाभांश का चेक प्रदान किया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री सिंह ने कहा कि किसानों को सदैव अच्छी क्वालिटी के बीज मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय बीज निगम को इस संबंध में अग्रणी भूमिका निभाना चाहिए। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव (बीज) अजीत कुमार साहू और कृषि मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।</p>
<p>कृषि मंत्रालय द्वारा जारी एक प्रेस रिलीज के मुताबिक कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत आने वाला निगम भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली एक अनुसूची 'बी'-मिनीरत्न श्रेणी-I कंपनी है। वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान निगम ने अपने वित्तीय प्रदर्शन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। परिचालन से राजस्व पिछले वर्ष के रू 1,078.23 करोड़ से बढ़कर रुपये 1,143.26 करोड़ रुपये हो गया, जबकि कुल आय 1,182.48 करोड़ हो गई। कंपनी की लाभप्रदता में भी पर्याप्त वृद्धि देखी गई, कर से पूर्व लाभ (PBT) 64.74% बढ़कर 86.81 करोड़ रुपये हो गया और कर के पश्चात लाभ (PAT) 38.15% बढ़कर सर्वाधिक 73.64 करोड़ रुपये हो गया।</p>
<p>कंपनी ने&nbsp; 1005 करोड़ रुपये का बीज बिक्री राजस्व हासिल किया, जो पिछले वर्ष के&nbsp; 947 करोड़ रुपये था। गैर-सब्सिडी वाले बीजों की बिक्री&nbsp; 847.83 करोड़ रुपये से बढ़कर 920 करोड़ रुपये पर पहुंची है। कंपनी ने 992 नए डीलरों की नियुक्ति कर अपनी बाजार उपस्थिति को मजबूत किया, जिससे कुल डीलर नेटवर्क 4,665 हो गया। कंपनी ने 2,126 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और पीएसी और एलएएमपी भी नियुक्त किए हैं।</p>
<p>उत्पादन के मोर्चे पर, रा.बी.नि.ने अपनी क्षमताओं को बढ़ाना जारी रखाऔर कच्चे बीज का उत्पादन/खरीद 17.10 लाख क्विंटल तक पहुँच गया। बुनियादी ढाँचे में सुधार से समर्थित बीज प्रसंस्करण क्षमता बढ़कर 25.67 लाख क्विंटल हो गई। इसके अतिरिक्त, रा.बी.नि. ने सरकारी कृषि पहलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, सरकार, राज्य सरकारों, डीलरों को बीज की आपूर्ति की और ओएनडीसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन बिक्री भी की।</p>
<p>निगम के सभी बीज और अधिकांश रोपण सामग्री ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) पर उपलब्ध हैं। इन्हें ऑनलाइन ऑर्डर किया जा सकता है तथा इन्हें लॉजिस्टिक भागीदारों के माध्यम से घर पर डिलीवर किया जाता है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67a22a7321957.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राष्ट्रीय बीज निगम ने 35.30 करोड़ रु. का लाभांश घोषित किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67a22a7321957.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[Arya.ag को एचएसबीसी से 250 करोड़ की फंडिंग के लिए मिली गारंटी, दो साल में आईपीओ लाने की योजना  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/guarantco-offers-partial-guarantee-to-hsbc-india-for-an-inr-250-cr-loan-to-arya.ag.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 23 Jan 2025 15:47:11 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/guarantco-offers-partial-guarantee-to-hsbc-india-for-an-inr-250-cr-loan-to-arya.ag.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के बड़े ग्रेन कामर्स प्लेटफार्म आर्या.एजी को 250 करोड़ रुपये की फंडिंग के लिए गारंटको ने एचएसबीसी को गारंटी दी है। प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट ग्रुप (पीआईडीजी) की सहयोगी गारंटको वित्तीय समावेश और कमजोर आय वर्ग के समू्हों के लिए काम करती है। आर्या द्वारा इस फंडिंग का उपयोग किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और छोटे एग्रीबिजनेस कारोबारियों को पोस्ट हार्वेस्ट वित्तीय जरूरतों को पूरा करने किया जाएगा ताकि सांस्थानिक वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के जरिये किसान अपनी उपज की बेहतर कीमत हासिल करने के साथ ही भंडारण सुविधाओं का उपयोग कर बेहतर आय हासिल कर सकें। आर्या.एजी के संस्थापकों प्रसन्ना राव, आनंद चंद्रा और चट्टानाथन देवराजन ने गुरुवार को एक मीडिया राउंडटेबल में यह जानकारी साझा की। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि आर्या.एजी वित्त वर्ष 2027 तक आईपीओ लाने की योजना पर भी काम कर रही है।</p>
<p>आर्या.एजी के मुताबिक गारंटको के जरिये भारत के कृषि क्षेत्र में यह पहली फंडिंग है और उसका फोकस वित्तीय समावेशन को मजबूत करना व जलवायु अनुकूलता पर है। देश में 60 फीसदी कार्यबल कृषि क्षेत्र में आजीविका पाता है और देश की जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी 20 फीसदी है। लेकिन अभी तक भी कृषि क्षेत्र की संभावनाओं का पूरा उपयोग नहीं हो सका है और अभी भी कृषि परिवारों में आधे लोगों को सांस्थानिक वित्तीय सुविधाओं का फायदा नहीं मिल सका है।</p>
<p>गारंटको की क्रेडिट गारंटी से मिलने वाले कर्ज को एचएसबीसी आर्या.एजी की दो सहयोगी कंपनियों को देगी इनमें एक है इंटीग्रेटेड कामर्स प्लेटफार्म आर्याटेक और दूसरी है फिनटेक कंपनी आर्याधन. आर्या को पीआईडीजी ट्रस्ट द्वारा टेक्नीकल असिस्टेंट ग्रांट भी मिली है।</p>
<p>आर्या के को-फाउंडर और सीईओ प्रसन्ना राव ने बताया कि आर्या तीन तरह से काम करती है। कंपनी किसानों को उनकी उपज की बेहतर कीमत दिलाने के लिए उनकी उपज को अपने स्टोरेज नेटवर्क के जरिये भंडारण की सुविधा उपलब्ध कराती है। साथ ही वह पैसे की किल्लत के चलते अपनी उपज को कम दाम पर बेचने को मजबूर हो तो उसके लिए उनको अपनी एफएमसी कंपनी और बैंकों के जरिये कर्ज उपलब्ध कराती है। साथ ही कंपनी ने खुद की स्टोरेज क्षमता के साथ भंडारण स्टोरेज का नेटवर्क तैयार किया जो डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध है। वहीं कंपनी के स्टोरेज नेटवर्क में स्टोर उपज की बिक्री के लिए खरीदार और विक्रेता को जोड़ती है और किसानों को उनकी उपज का तुरंत भुगतान सुनिश्चित करती है। इस स्टेज पर खरीदार की वित्तीय जरूरतों के लिए कर्ज भी उपलब्ध कराने का काम आर्या करती है। हमारा अधिकांश काम डिजिटली होता है और हमारी कोशिश किसानों का वित्तीय समावेशन, उनका पोस्ट हार्वेट नुकसान कम करना और कृषि उपज की डिस्ट्रेस सेल से किसानों को सुरक्षा प्रदान करना है। इसका सीधा फायदा किसानों को हो रहा है और उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p>आर्या के कोफाउंडर और सीओओ आनंद चंद्रा ने कहा कि हमारा मकसद अपने कस्टमर को वैल्यू प्रदान करना है। साथ हमारे द्वारा दिये जा रहे कर्ज में 52 फीसदी डिजीटली डिस्बर्स किया जा रहा है इसे हम एक साल में 75 फीसदी पर ले जाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। आर्या जहां हमारे साथ काम करने वाले किसानों की आय बढ़ाने में कामयाब रही है वहीं ग्रेन के वेस्टेज में कमी लाने में भी हमने मदद की है।</p>
<p>आईपीओ के बारे में प्रसन्ना राव ने कहा कि हम 2027 के वित्त वर्ष को लक्ष्य लेकर चल रहे हैं और हम स्टाक मार्केट के मुख्य प्लेटफार्म पर ही आएंगे। &nbsp;इसके पहले हम कंपनी के मुनाफे जो 150 से 200 करोड़ रुपये के स्तर पर जाने का लक्ष्य रखकर चल रहे हैं।</p>
<p>एग्रीटेक में फंडिंग और यूनिकार्न नहीं होने सवाल पर उन्होंने कहा कि जो भी कंपनी वैल्यू क्रियेट करने का लक्ष्य लेकर चलेगी वही कामयाब रहेगी। वहीं हमने देखना है कि हमें अपनी वैल्यूएशन अपने मुनाफे वाले कारोबार के साथ बढ़ानी है या कैश बर्न के जरिये, इसमें हम पहले विकल्प को ही मानकर चल रहे हैं। हर साल हमारा मुनाफा दो गुना हो रहा है। खाद्यान्न के मुख्य बिजनेस पर उनका कहना है जो कमोडिटी तीन माह की शेल्फ वैल्यू वाली है हम उसी पर काम कर रहे हैं, लेकिन आने वाले दिनों में आर्या पेरिसेबल एग्री प्रॉडक्ट के बिजनेस में उतरने की योजना पर भी काम कर रही है लेकिन इसके लिए फार्म गेट पर बेहतर नतीजे देने वाली टेक्नोलॉजी की जरूरत है और उसके लिए हम कई एग्रीटेक कंपनियों के साथ बात कर रहे हैं।</p>
<p>गारंटको के मैनेजिंग डायरेक्टर, एशिया इनवेस्टमेंट, निशांत कुमार ने कहा कि भारत के एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए अहम मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही कंपनी आर्या और एचएसबीसी के साथ काम करने की हमे खुशी है। आर्या एक विशिष्ट इन्नोवेटिव कंपनी है जो किसानों की स्टोरेज और वित्तीय जरूरतों को पूरा कर उनकी आय बढ़ाने के लिए काम कर रही है। इस फंडिंग के जरिये आर्या के इंटिग्रेडिट वैल्यू चेन को बढ़ावा मिलेगा और देश के पोस्ट हार्वेस्ट मार्केट का विस्तार होगा। गारंटिको कम आय वर्ग वाले समुदायों को सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>वहीं एचएसबीसी की इंक्लुसिव बैंकिंग यूनिट की प्रमुख और एमडी सोनाली शाहपुरवाला ने कहा कि हमें&nbsp; गारंटिको और आर्या के साथ जुड़कर खुशी हो रही है। भारत की अर्थव्यवस्था के मुख्य क्षेत्र एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए यह फंडिंग अहम है। आर्या जैसे बिजनेस को सपोर्ट करने वाली यह फंडिंग हमारे उस कमिटमेंट को पुख्ता करती है जिसका मकसद समावेशी और टिकाऊ विकास है।</p>
<p>आर्या एजी के को-फाउंडर आनंद चंद्रा ने कहा कि गारंटको और एचएसबीसी के साथ पार्टनरशिप से किसानों, एफपीओ और एग्री आंत्रप्रन्योर के साथ काम करने की हमारी क्षमता में बढ़ोतरी होगी और हम मार्केट लिंकेज व समावेशी कृषि इकोसिस्टम का दायरा बढ़ा सकेंगे।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_679215de9e02d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ Arya.ag को एचएसबीसी से 250 करोड़ की फंडिंग के लिए मिली गारंटी, दो साल में आईपीओ लाने की योजना   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_679215de9e02d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र सरकार ने 10 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी, इंडस्ट्री को बड़ी राहत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/center-allows-export-of-10-lakh-tonnes-of-sugar-big-relief-to-the-industry.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 21 Jan 2025 06:37:28 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/center-allows-export-of-10-lakh-tonnes-of-sugar-big-relief-to-the-industry.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चीनी उत्पादन में गिरावट की आशंकाओं के बावजूद केंद्र सरकार ने 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी है। चीनी उद्योग की तरफ से काफी समय से यह मांग की जा रही थी। निर्यात की अनुमति मिलने से चीनी मिलें सरप्लस स्टॉक का निर्यात कर राजस्व जुटा सकेंगी।&nbsp;</p>
<p><span>उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी</span> ने सोशल मीडिया पर निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि भारत सरकार ने वर्ष 2024-25 के लिए 10 लाख टन चीनी निर्यात कोटा को मंजूरी दे दी है। इससे 5 करोड़ किसान परिवारों, 5 लाख श्रमिकों और शुगर सेक्टर को मजबूती मिलेगी।</p>
<p>खाद्य मंत्रालय ने चीनी मिलों को उनके तीन साल के औसत उत्पादन का 3.174% का एक समान निर्यात कोटा आवंटित किया है, जिसे वे सीधे या व्यापारी निर्यातकों के माध्यम से निर्यात कर सकते हैं। आवंटित मात्रा के भीतर सभी ग्रेड की चीनी के निर्यात की अनुमति दी गई है। चीनी मिलें 30 सितंबर तक निर्यात कर सकती हैं। उनके पास 31 मार्च तक कोटा सरेंडर करने या निर्यात कोटा को घरेलू मासिक रिलीज मात्रा के साथ बदलने का विकल्प रहेगा।</p>
<p>इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। इस्मा के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा, "यह निर्णय चीनी मिलों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान करता है, जिससे उन्हें राजस्व जुटाने और किसानों को समय पर गन्ना भुगतान करने में मदद मिलेगी।"</p>
<p>भारत से चीनी निर्यात शुरू होने से घरेलू बाजारों में चीनी की गिरती कीमतों को सुधारने में मदद मिल सकती है जबकि इस फैसले से वैश्विक कीमतों पर गिरावट का दबाव पड़ सकता है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब गन्ने की फसल पर रोगों और मौसम की मार के चलते चीनी उत्पादन घटने का अनुमान है।</p>
<p>चालू पेराई सत्र 2024-25 में देश का चीनी उत्पादन घटकर 270 लाख टन रहने का अनुमान है जो पिछले सीजन 2023-24 में 320 लाख टन रहा था। 15 जनवरी तक कुल चीनी उत्पादन 130 लाख टन रहा है जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 13.66 प्रतिशत कम है। चीनी उत्पादन में गिरावट की चिंताओं के कारण ही सरकार ने वर्ष 2023-24 में चीनी निर्यात पर रोक लगा दी थी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668534db9b9c0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र सरकार ने 10 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी, इंडस्ट्री को बड़ी राहत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668534db9b9c0.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिसंबर तक देश का चीनी उत्पादन 16 फीसदी घटा, रिकवरी घटकर 8.69 फीसदी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/indias-sugar-production-fell-by-16-percent-till-december-recovery-fell-to-8.69-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 02 Jan 2025 19:43:16 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/indias-sugar-production-fell-by-16-percent-till-december-recovery-fell-to-8.69-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गन्ने की फसल पर रोग और मौसम की मार के चलते चालू पेराई सत्र 2024-25 में 31 दिसंबर तक देश का चीनी उत्पादन पिछले साल की तुलना में करीब 16 फीसदी घटा गया है। इस गिरावट का प्रमुख कारण उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में गन्ने की कमजोर फसल और कम चीनी मिलों का संचालन है।&nbsp;</p>
<p>सहकारी चीनी मिलों के संगठन नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) के आंकड़ों के अनुसार, चालू पेराई सत्र में 31 दिसंबर तक 493 चीनी मिलें संचालित थी जबकि पिछले साल इस अवधि तक 518 चीनी मिलें चल रही थीं। इन चीनी मिलों ने कुल 95.10 लाख टन चीनी उत्पादन किया जो पिछले साल के 112.80 लाख टन चीनी उत्पादन से 15.69 फीसदी कम है। अक्टूबर से शुरू हुए पेराई सीजन में अब तक कुल 10.95 करोड़ टन गन्ने की पेराई हुई है जो पिछले साल के मुकाबले 10.92 फीसदी कम है।&nbsp;</p>
<p>चालू सीजन के पहले तीन महीनों में गन्ने से चीनी की रिकवरी घटकर 8.68 फीसदी रह गई जो पिछले साल 31 दिसंबर तक 9.23 फीसदी थी। यूपी के चीनी उत्पादन में करीब 2 लाख टन और महाराष्ट्र के चीनी उत्पादन में 8 लाख टन से अधिक की गिरावट आई है। इस प्रकार देश में कुछ चीनी उत्पादन करीब 17.70 लाख टन कम हुआ है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>देश के सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन पहले तीन महीनों में घटकर 32.60 लाख टन रह गया, जो एक साल पहले इसी अवधि में 34.65 लाख टन था। देश के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन एक साल पहले के 38.20 लाख टन से घटकर 29.90 लाख टन रह गया, जबकि कर्नाटक में चीनी उत्पादन 24 लाख टन से घटकर 20.55 लाख टन रह गया।</p>
<p>चीनी उद्योग के संगठन इस्मा ने चीनी उत्पादन में गिरावट को इस वर्ष एथेनॉल के लिए अधिक चीनी डायवर्जन (23-24 में 21.5 लाख टन के मुकाबले 40 लाख टन का अनुमान) और महाराष्ट्र और कर्नाटक में चीनी मिलों की देर से शुरुआत को वजह माना है। इस्मा ने चीनी वर्ष 2024-25 में भारत की चीनी खपत 280 टन होने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वर्ष से लगभग 15 लाख टन कम है। पिछले साल देश में आम चुनाव के चलते चीनी की अधिक खपत हुई थी।</p>
<p>मौजूदा स्थिति को देखते हुए पेराई वर्ष 2024-25 (अक्टूबर-सितंबर) के अंत तक कुल चीनी उत्पादन 280 लाख टन रहने का अनुमान है जो पिछले साल के 319 लाख टन चीनी उत्पादन से 12.23 फीसदी कम है। इसमें एथेनॉल के लिए चीनी उत्पादन के आंकड़े शामिल नहीं हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_67769cb943733.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_67769ec869d28.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिसंबर तक देश का चीनी उत्पादन 16 फीसदी घटा, रिकवरी घटकर 8.69 फीसदी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_67769ec869d28.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एथेनॉल खरीद में सहकारी चीनी मिलों को दी जाएगी प्राथमिकता, निजी चीनी मिलों को झटका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/cooperative-sugar-mills-will-be-given-priority-in-ethanol-purchase-shock-to-private-sugar-mills.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 01 Jan 2025 15:40:31 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/cooperative-sugar-mills-will-be-given-priority-in-ethanol-purchase-shock-to-private-sugar-mills.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही के लिए लगभग 88 करोड़ लीटर एथेनॉल आपूर्ति की निविदा जारी की है। इसकी शर्तों के अनुसार, एथेनॉल खरीद में पहली वरीयता सहकारी चीनी मिलों (<span>सीएसएम</span>) <span>को दी जाएगी। उसके बाद </span>समर्पित एथेनॉल संयंत्रों (डीईपी) से एथेनॉल की खरीद होगी जबकि निजी चीनी मिलों को वरीयता क्रम में तीसरे स्तर पर रखा गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ)</strong> के प्रबंध निदेशक <strong>प्रकाश नाइकनवरे </strong>ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि तेल कंपनियों द्वारा एथेनॉल आपूर्ति के नए टेंडर में एनएफसीएसएफ के तहत आने वाली सहकारी चीनी मिलों को पहली प्राथमिकता दी है। उन्होंने इसे एथेनॉल बनाने वाली सहकारी चीनी मिलों के हित में उठाया गया कदम बताया। नाइकनवरे का कहना है कि सहकारी क्षेत्र को इसी प्रकार समर्थन दिए जाने की आवश्यकता है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_6775105f0a22d.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>टेंडर की शर्तों के अनुसार, जिन समर्पित एथेनॉल संयंत्रों (डीईपी) के पास ओएमसी के साथ वैध दीर्घकालिक उठाव समझौता (एलटीओए) हैं उन्हें एथेनॉल आपूर्ति के लिए आवंटन की दूसरी वरीयता दी जाएगी, जो प्रत्येक तिमाही के लिए आनुपातिक होगी। सहकारी चीनी मिलों और समर्पित एथेनॉल संयंत्रों से प्राथमिकता के आधार पर एथेनॉल मात्रा के आवंटन के बाद बची मात्रा के लिए अन्य एथेनॉल उत्पादकों (<span>निजी चीनी मिलें</span>) <span>से नियमानुसार खरीद की जाएगी।</span>&nbsp;</p>
<p>एथेनॉल आपूर्ति के टेंडर की इन शर्तों का सहकारी चीनी मिलों ने स्वागत किया है। हालांकि, एथेनॉल बनाने वाली निजी चीनी मिलें इससे नाखुश हैं। महाराष्ट्र में अधिकांश सहकारी चीनी मिलें हैं जो एथेनॉल उत्पादन भी करती हैं। इस फैसले का सबसे अधिक लाभ महाराष्ट्र की सहकारी चीनी मिलों को मिलेगा, जिससे किसानों को समय पर भुगतान करने में मदद मिलेगी। सरकार के इस कदम को सहकारिता को दिये जा रहे प्रोत्साहन के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p><strong>एथेनॉल उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी&nbsp;</strong></p>
<p>केंद्र सरकार ने साल 2025 तक पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है। एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2023-24 के आखिर तक एथेनॉल मिश्रण 14.6 फीसदी तक पहुंच गया है जो निर्धारित लक्ष्य के अनुरुप है। तेल कंपनियों द्वारा एथेनॉल आपूर्ति की जितनी मात्रा के लिए निविदाएं आमंत्रित की जा रही हैं, <span>एथेनॉल निर्माताओं की ओर से उससे अधिक एथेनॉल आपूर्ति के प्रस्ताव हैं। क्योंकि देश में गन्ना के जूस और शीरे पर आधारित एथेनॉल के अलावा ग्रेन आधारित एथेनॉल उत्पादन की क्षमता में काफी बढ़ोतरी हुई है। भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता सालाना 1</span>,<span>600 करोड़ लीटर से अधिक हो गई है। मांग से अधिक उत्पादन के कारण तेल कंपनियां एथेनॉल आपूर्ति के लिए वरीयता तय कर रही हैं।</span>&nbsp;</p>
<p>एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को देखते हुए देश भर में चीनी मिलों और एथेनॉल उत्पादकों ने डिस्टलरी स्थापना और क्षमता निर्माण में काफी निवेश किया है। सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों को प्राथमिकता मिलने से समर्पित एथेनॉल संयंत्र और निजी चीनी मिलों को झटका लगा है। चीनी के बाद एथेनॉल चीनी मिलों की आय का प्रमुख जरिया है।&nbsp;</p>
<p>तेल कंपनियों (ओएमसी) ने एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) 2024-25 के लिए कुल 916 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं। इसके जवाब में 970 करोड़ लीटर से अधिक एथेनॉल आपूर्ति के प्रस्ताव मिले हैं। इसमें करीब 60 फीसदी ग्रेन बेस्ड एथेनॉल है जबकि 40 फीसदी गन्ना से बना एथेनॉल है। गन्ना के रस और शुगर सीरप के अलावा बी हैवी मोलासेस, <span>सी हैवी मोलासेस</span>, <span>मक्का और खराब अनाज से एथेनॉल का उत्पादन होता है। &nbsp;</span></p>
<p><span></span></p>
<p><span></span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_677513d69b020.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एथेनॉल खरीद में सहकारी चीनी मिलों को दी जाएगी प्राथमिकता, निजी चीनी मिलों को झटका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_677513d69b020.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी के बहराइच की हल्दी खरीदेगी पतंजलि, तीन एफपीओ के साथ एमओयू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/patanjali-will-buy-turmeric-from-bahraich-up-mou-with-three-fpos.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 31 Dec 2024 16:57:31 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/patanjali-will-buy-turmeric-from-bahraich-up-mou-with-three-fpos.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पतंजलि आयुर्वेद उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से हल्दी खरीदेगी। योग गुरु स्वामी रामदेव ने बहराइच जिले में उगाई जाने वाली हल्दी खरीदने का फैसला किया है। इसके लिए तीन किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के साथ एक समझौते (<span>एमओयू</span>)<span> पर हस्ताक्षर किए गये हैं। </span></p>
<p>बहराइच जिले में वन डिस्ट्रिक्ट, <span>वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना के तहत हल्दी के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले से हल्दी खरीदने के लिए स्वामी रामदेव आगे आए हैं। पतंजलि आयुर्वेद के साथ हुए समझौते के तहत बहराइच से लगभग 50,000 टन हल्दी खरीदी जाएगी। इसका इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाओं व उत्पादों के निर्माण के लिए किया जाएगा। बहराइच की हल्दी की गुणवत्ता काफी अच्छी मानी जाती है। यही वजह है कि पतंजलि ने बहराइच की हल्दी खरीदने का फैसला किया है। </span></p>
<p>बहराइच की जिलाधिकारी मोनिका रानी ने बताया कि बहराइच का मिहिंपुरवा क्षेत्र उपजाऊ भूमि और अनुकूल जलवायु होने के कारण कृषि के लिए काफी उपयुक्त है। वहां हल्दी, <span>जिमीकन्द और हरी सब्जियों की काफी खेती की जाती है। इन्हें कई राज्यों के साथ ही प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी भेजा जाता है। जिले में </span>86 <span>कृषक उत्पादक संगठन एफपीओ गठित किये गये हैं। प्रति वर्ष लगभग </span>2000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में उगी 45-50 हजार टन हल्दी की खरीद पतंजलि से कराने की योजना है। इससे बड़ी संख्या में किसान लाभान्वित होंगे। &nbsp;</p>
<p>पतंजलि के साथ बहराइच की जिन तीन एफपीओ का हल्दी खरीदने के लिए एमओयू हुआ है, <span>उनमें प्रत्युष बायोएनर्जी फार्मर प्रोड्&zwnj;यूसर कंपनी लिमिटेड</span>, <span>वीरांगना लक्ष्मीबाई महिला किसान निर्माता कंपनी लिमिटेड और सीएससी राज किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड शामिल हैं। हल्दी उत्पादक किसानों को आयुर्वेद की आवश्यकता के अनुसार गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रशिक्षण देने की व्यवस्था बहराइच</span>, लखनऊ व पतंजलि (हरिद्वार) में की जा रही है।</p>
<p>हरिद्वार स्थिति पतंजलि योगपीठ में हुए एमओयू के दौरान स्वामी रामदेव, <span>आचार्य बालकृष्ण</span>, <span>बहराइच जिलाधिकारी मोनिका रानी</span>, <span>उप कृषि निदेशक टीपी शाही</span>, <span>सीएससी राज किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड मिहिंपुरवा के निदेशक अखिलेश सिंह आदि मौजूद रहे।&nbsp; &nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_6773d4ecda873.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी के बहराइच की हल्दी खरीदेगी पतंजलि, तीन एफपीओ के साथ एमओयू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_6773d4ecda873.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एआईसी ने स्थापना दिवस पर लॉन्च किया ‘फल सुरक्षा बीमा’]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/aic-launched-fruit-security-insurance-on-foundation-day.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 26 Dec 2024 21:42:48 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/aic-launched-fruit-security-insurance-on-foundation-day.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय कृषि बीमा कंपनी (AIC) ने हाल ही में अपना 22वां स्थापना दिवस बड़े उत्साह से मनाया। इस मौके पर एआईसी ने अपने नये उत्पाद &lsquo;फल सुरक्षा बीमा&rsquo; को भी लॉन्च किया, जिसे विशेष रूप से केला और पपीता की फसलों का बीमा करने हेतु तैयार किया गया है। यह उत्पाद किसानों की विशिष्ट जरूरतों को पूरा करता है और फसल सुरक्षा में सुधार लाने के प्रति एआईसी की प्रतिबद्धता का नतीजा है।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान&nbsp;भारतीय कृषि बीमा कंपनी की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) डॉ. लावण्या आर. मुंडायूर ने किसानों द्वारा एआईसी पर विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "एआईसी में लोगों का विश्वास ही हमें आगे बढने के लिए प्रेरित करता है, इसीलिए हम सदैव भारत के किसानों की भलाई में बेहतरीन उत्पाद बनाने हेतु प्रेरणा मिलती रहती है। 20 से अधिक वर्षों की यात्रा में हमने कई चुनौतियों का सामना किया है और इस दौरान एआईसी ने जबरदस्त विश्वास अर्जित करते हुए कृषि विकास में एक विश्वसनीय संसथान के रूप में पहचान पाई है।&rdquo;</p>
<p>इस अवसर पर एआईसी की फसल बीमा यात्रा पर एक प्रस्तुति दी गई, जिसमें कंपनी द्वारा वर्षों में तकनीक-आधारित और किसान-केंद्रित समाधानों के विकास को दिखाया गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत के कृषि क्षेत्र की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने वाले अभिनव उत्पादों को विकसित करने पर जोर दिया।&nbsp;इस अवसर पर कंपनी ने अपने व्यापक बीमा उत्पादों की जानकारी भी साझा की। इनमें सम्पूर्ण फसल कवच (SFK), परिणामस्वरूप फसल हानि (CCL), सम्पूर्ण ऋतु कवच (SRK) जैसी योजनाएं शामिल हैं।</p>
<p><strong>&ldquo;सर्व बीमित ग्राम&rdquo; पहल&nbsp;</strong></p>
<p>उद्धघाटन समारोह के दौरान, &ldquo;सर्बा बीमित ग्राम&rdquo; कार्यक्रम के तहत 22 गांवों को गोद लेने की घोषणा की गई। इस पहल का उद्देश्य इन गांवों के हर घर को कम से कम एक बीमा पॉलिसी से कवर करना है, जिसमें संपत्ति और पशुधन का बीमा भी शामिल है। यह कदम ग्रामीण समुदायों में बीमा को सुलभ बनाने और वित्तीय सुरक्षा को बढ़ावा देने में मदद करेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>एआईसी की नई प्रतिबद्धता</strong></p>
<p>भारतीय कृषि बीमा कंपनी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) की प्रमुख कार्यान्वयन एजेंसी है। इसके अलावा, कंपनी कृषि-संबंधी गतिविधियों के लिए सम्पूर्ण पशुधन कवच, सरल कृषि बीमा, झींगा बीमा, सिंचाई प्रणाली बीमा जैसे उत्पाद भी प्रदान करती है। ये उत्पाद किसानों की अनूठी चुनौतियों का समाधान करने और जोखिमों के प्रति उनकी सहनशीलता को बढ़ाने के लिए डिजाइन किए गए हैं।</p>
<p>23वें वर्ष में प्रवेश के साथ, एआईसी ने किसानों को कम खर्च में प्रभावी बीमा समाधानों के माध्यम से सशक्त बनाने के मिशन को दोहराया। इस अवसर पर दसरथी सिंह (कार्यकारी निदेशक), ललित खर्बंदा (महाप्रबंधक), के. वी. रमन (महाप्रबंधक), संदीप एस. कर्माकर (महाप्रबंधक) और रोहित सिंघल समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थिति रहे।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_676edf06d8d1a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एआईसी ने स्थापना दिवस पर लॉन्च किया ‘फल सुरक्षा बीमा’ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_676edf06d8d1a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फर्टिलाइजर इंडस्ट्री ने पोषण के आधार पर उर्वरकों के दाम तय करने की मांग की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/fertilizer-industry-demanded-to-fix-fertilizers-price-on-the-basis-of-nutritional-value.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 03 Dec 2024 17:53:05 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/fertilizer-industry-demanded-to-fix-fertilizers-price-on-the-basis-of-nutritional-value.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए फर्टिलाइजर इंडस्ट्री ने उर्वरकों के दाम पोषण के आधार पर तय करने की मांग की है। इस हिसाब से गैर-यूरिया उर्वरकों में डीएपी की कीमतें सबसे ज्यादा होनी चाहिए क्योंकि इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू सबसे ज्यादा है। इसके बाद अन्य उर्वरकों के दाम होने चाहिए।</p>
<p>फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) के 4 दिसंबर को होने वाले वार्षिक सम्मेलन के बारे में आयोजित प्रेस वार्ता में एफएआई के चेयरमैन <strong>एन. सुरेश कृष्णन</strong> ने गैर-यूरिया उर्वरकों की कीमतों को उनकी न्यूट्रिशनल वैल्यू के आधार पर तय करने पर जोर दिया। उनके मुताबिक, सबसे ज्यादा दाम डीएपी का होना चाहिए क्योंकि इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू अधिक है। इसके बाद एमओपी, एनपी/एनपीके और अन्य उर्वरकों के दाम उनमें पोषण के आधार पर निर्धारित होने चाहिए। इससे उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। &nbsp;</p>
<p>फर्टिलाइजर इंडस्ट्री की तरफ से डीएपी के दाम अधिक रखने का सुझाव ऐसे समय आया है जब देश के विभिन्न इलाकों से डीएपी की किल्लत की खबरें आ रही हैं। हालांकि, एफएआई के चेयरमैन ने देश में डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता का दावा करते हुए कहा कि अक्टूबर और नवंबर में डीएपी का आयात बढ़ने से स्थिति में सुधार आया है। साथ ही अन्य एनपीके उर्वरकों की खपत भी बढ़ी है।&nbsp;</p>
<p>फिलहाल डीएपी का दाम 1350 रुपये प्रति बैग, म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) का दाम 1500 से 1600 रुपये प्रति बैग, एनपी (20:20) का दाम 1200-1300 रुपये प्रति बैग और एनपीके (12:32:16) का दाम 1470 रुपये प्रति बैग है।&nbsp;</p>
<p><strong>डीएपी के उत्पादन</strong><strong>, </strong><strong>आयात और बिक्री में कमी</strong></p>
<p>एफएआई के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अप्रैल से अक्टूबर के बीच देश के डीएपी उत्पादन में 7.4 फीसदी की गिरावट आई जबकि डीएपी का आयात पिछले साल के मुकाबले 29.8 फीसदी कम हुआ। इस दौरान डीएपी की बिक्री में 25.4 फीसदी की गिरावट आई जबकि एमओपी की बिक्री 24.7 फीसदी तथा एनपीके की बिक्री 23.5 फीसदी बढ़ गई है। इन आंकड़ों से जाहिर है कि डीएपी की बिक्री में गिरावट के साथ एनपी/एनपीके उर्वरकों का इस्तेमाल बढ़ा है। इसे फर्टिलाइजर उद्योग अच्छा संकेत मान रहा है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>डीएपी आयात में कमी की वजह</strong></p>
<p>एफएआई चेयरमैन ने डीएपी आयात में कमी के पीछे चीन से डीएपी आयात कम होने, भू-राजनीतिक तनाव और लाल सागर के रास्ते परिवहन में दिक्कतों को वजह बताया। इसके अलावा ग्लोबल मार्केट में डीएपी उत्पादन की सीमित क्षमताओं और कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण भी आयात प्रभावित हुआ।</p>
<p>गौरतलब है कि भारत फॉस्फेटिक उर्वरकों की करीब 90 फीसदी खपत को आयात के जरिए पूरा करता है। देश में हर साल करीब 100 लाख टन डीएपी की खपत होती है जिसमें से लगभग 60 लाख टन डीएपी का आयात होता है।</p>
<p><strong>रबी बुवाई सीजन लंबा चलेगा</strong></p>
<p>कृष्णन का कहना है कि नंवबर में डीएपी की बिक्री बढ़ी है। साथ ही नवंबर में कम ठंड पड़ने के कारण रबी बुवाई सीजन लंबा खिंचेगा, जिससे डीएपी की मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। सितंबर में केंद्र सरकार की ओर से पीएंडके उर्वरकों की नई सब्सिडी दरें घोषित होने के बाद देश में डीएपी आयात बढ़ा है जिससे डीएपी की उपलब्धता में सुधार आएगा।</p>
<p>देश में यूरिया के दाम सरकारी नियंत्रण में हैं जबकि डीएपी, एनपीके समेत 28 पीएंडके उर्वरक नियंत्रणमुक्त हैं जिन पर सरकार की ओर से फर्टिलाइजर कंपनियों को न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी स्कीम (एनबीएस) के तहत सब्सिडी दी जाती है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_674efce695e95.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ फर्टिलाइजर इंडस्ट्री ने पोषण के आधार पर उर्वरकों के दाम तय करने की मांग की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_674efce695e95.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वैश्विक बीज बाजार में 2028 तक भारत की हिस्सेदारी 1.4 अरब डॉलर होने की संभावना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-could-achieve-1.4-billion-dollar-business-in-the-global-seed-market-by-2028..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 02 Dec 2024 14:53:56 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-could-achieve-1.4-billion-dollar-business-in-the-global-seed-market-by-2028..html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>भारत 2028 तक 14 अरब डॉलर के वैश्विक बीज बाजार में 1.4 अरब डॉलर की हिस्सेदारी हासिल कर सकता है। हाल ही में वाराणसी में आयोजित राष्ट्रीय बीज कांग्रेस में भारत के वैश्विक बीज बाजार में</span> 10% <span>हिस्सेदारी हासिल करने और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के फसल उत्पादन में योगदान को</span> 15-20% <span>से बढ़ाकर</span> 45% <span>तक ले जाने की संभावना पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बीज उत्पादकों के लिए अनुकूल तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।&nbsp;</span></p>
<p>भारत वैश्विक बीज बाजार में एक प्रमुख भागीदार है और सब्जियों, <span>मसालों तथा अनाज एवं दालों के निर्यात में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। उच्च उत्पादन वाले और रोग प्रतिरोधी किस्मों के निर्यात को बढ़ावा देने की महत्वत्ता को रेखांकित करते हुए</span>, <span>भारतीय बीज उद्योग महासंघ</span> (<span>एफएसआईआई</span>) <span>के चेयरमैन और सवाना सीड्स के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक अजय राणा ने कहा</span>, &ldquo;<span>भारत के विविध कृषि</span>-<span>जलवायु क्षेत्र इसे पारंपरिक और हाइब्रिड बीज उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाते हैं। निर्यात बाजार को सार्वजनिक</span>-<span>निजी भागीदारी और अनुकूल नीतिगत ढांचे के माध्यम से और मजबूत किया जा सकता है।</span> '<span>बीज निर्यात प्रोत्साहन योजना</span>' <span>और</span> '<span>कृषि निर्यात क्षेत्र</span>' <span>की स्थापना जैसी सरकारी पहल इस विकास में अहम भूमिका निभा रही हैं।</span>&rdquo;</p>
<p>&nbsp;बीज कांग्रेस के दौरान सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच सहयोग की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी में प्रगति और सतत कृषि पद्धतियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत वैश्विक बीज बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अच्छी स्थिति में है।&nbsp;<span>&nbsp;एफएसआईआई के सदस्य और महिको प्राइवेट लिमिटेड के कार्यकारी चेयरमैन</span>, <span>डॉ</span>. <span>राजेंद्र बारवाले ने कहा</span>, &ldquo;<span>सरकार द्वारा इस वर्ष कृषि के लिए रिकॉर्ड</span> ₹1.52 <span>लाख करोड़ का बजट आवंटन</span> &lsquo;<span>विकसित भारत</span>&rsquo; <span>की नींव के रूप में खेती को स्थापित करने की दृष्टि को दर्शाता है और निजी क्षेत्र में विश्वास पैदा करता है।</span>&rdquo;</p>
<p>डॉ. <span>बारवाले ने यह भी कहा कि प्रगति के लिए सार्वजनिक</span>-<span>निजी भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा</span>, &ldquo;<span>समानता आधारित बीज प्रणालियों के निर्माण के लिए सहयोगात्मक विशेषज्ञता आवश्यक है</span>, <span>जो छोटे किसानों और बड़े कृषि उद्यमियों</span>, <span>दोनों को लाभान्वित करे। स्थिरता और समावेशिता कोई विकल्प नहीं हैं</span>; <span>यह भारत के कृषि भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अनिवार्य हैं।</span>&rdquo;</p>
<p>भारत की अस्थिर मौसम पैटर्न के प्रति संवेदनशीलता जलवायु-<span>प्रतिरोधी फसलों के विकास की तात्कालिकता को उजागर करती है। एनएससी</span> 2024 <span>में</span>, <span>शोधकर्ताओं और उद्योग के नेताओं ने सूखा</span>-<span>प्रतिरोधी और रोग</span>-<span>प्रतिरोधी बीज किस्मों में प्रगति पर चर्चा की</span>, <span>जो खाद्य सुरक्षा को बढ़ाने और पर्यावरण की सुरक्षा का वादा करती हैं। इस आयोजन में नवाचार और सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया</span>, <span>जो भारत की कृषि के सतत और समावेशी भविष्य को आकार देने में सहायक होगी।</span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66ab2c0615848.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ वैश्विक बीज बाजार में 2028 तक भारत की हिस्सेदारी 1.4 अरब डॉलर होने की संभावना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66ab2c0615848.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इस साल में चीनी उत्पादन में 39 लाख टन की गिरावट का अनुमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sugar-production-is-estimated-to-decline-by-39-lakh-tonnes-in-the-current-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 15 Nov 2024 18:09:43 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sugar-production-is-estimated-to-decline-by-39-lakh-tonnes-in-the-current-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल भारत के चीनी उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले 39 लाख टन की गिरावट का अनुमान है। चालू शुगर सीजन (2024-25) में देश का चीनी उत्पादन 280 लाख टन रहने का अनुमान है जबकि पिछले साल 319 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ था। उत्पादन में गिरावट की एक बड़ी वजह उत्तर प्रदेश में चीनी की रिकवरी कम रहना है। इसके साथ ही चीनी उत्पादक राज्यों में गन्ने के क्षेत्रफल, फसल की स्थिति, चीनी की रिकवरी व एथेनॉल के लिए चीनी के डायवर्जन जैसे तमाम फैक्टर्स के आधार पह यह अनुमान लगाये गये हैं।</p>
<p>उद्योग सूत्रों के मुताबिक अभी तक सबसे अधिक चीनी मिलों में<strong> उत्तर प्रदेश</strong> में पेराई शुरू हुई है। वहां 15 नवंबर को 85 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी है जबकि पिछले साल उक्त तिथि को 75 मिलों में पेराई शुरू हुई थी। राज्य में 15 नवंबर तक 3.50 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है जो पिछले साल इस समय तक 3.40 लाख टन रहा था। यहां पिछले साल चीनी की रिकवरी का स्तर 8.6 फीसदी था जो इस साल घटकर 7.85 फीसदी पर आ गया है। मौजूदा ट्रेंड के आधार पर उत्तर प्रदेश में 98 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है जो पिछले साल 103.65 लाख टन रहा था।</p>
<p>दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य<strong> महाराष्ट्र</strong> में अभी चीनी मिलों ने पेराई शुरू नहीं की है लेकिन उत्पादन अनुमान में रखे गये मानकों के आधार पर वहां इस साल 87 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। महाराष्ट्र में पिछले साल 110.20 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।&nbsp;तीसरे बड़े चीनी उत्पादक राज्य कर्नाटक में चीनी का उत्पादन 45 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है जो पिछले साल 53 लाख टन रहा था।</p>
<p>उद्योग द्वारा तैयार रिपोर्ट के मुताबिक, 15 नवंबर तक देश भर में 144 चीनी मिलों में पेराई चल रही है और उनके द्वारा 7.10 लाख टन चीनी का उत्पादन किया गया है। पिछले साल इस समय तक 264 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी थी और चीनी उत्पादन 12.70 लाख टन तक पहुंच गया था।&nbsp;</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक चीनी उत्पादन के यह आंकड़े और अनुमान उद्योग की जानकारी, सरकारी जानकारी और जमीनी स्तर पर जुटाये गये आंकड़ों के आधार पर तैयार किये गये हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_6638eaf056ec9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इस साल में चीनी उत्पादन में 39 लाख टन की गिरावट का अनुमान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_6638eaf056ec9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एक महीने में ट्रैक्टर कंपनियों के स्टॉक 20 फीसदी तक गिरे, जानिए क्या है वजह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/tractor-companies-stocks-fell-by-20-percent-weakning-stock-market-and-poor-sales-are-the-reason.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 25 Oct 2024 13:15:00 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/tractor-companies-stocks-fell-by-20-percent-weakning-stock-market-and-poor-sales-are-the-reason.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>शेयर बाजार में लगातार जारी गिरावट के बीच, पिछले एक महीने में देश की प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों के शेयरों में स्टॉक मार्केट के सूचकांक से भी अधिक गिरावट दर्ज की गई है। पिछले एक महीने में ट्रैक्टर कंपनियों के स्टॉक 20 फीसदी तक गिर गये हैं। यह गिरावट बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के संवेदी सूचकांक में आई गिरावट से अधिक रही है। बीएसई के सेंसेक्स में पिछले एक महीने में <span>6.20 </span>फीसदी की गिरावट आई है। बीएसई सेंसेक्स 25 सितंबर को 85,169.87 के स्तर पर था जो 25 अक्टूबर को गिरकर <span>79,402.29</span> पर आ गया।&nbsp;</p>
<p>देश की प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों में <strong>एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड</strong> का शेयर सबसे ज्यादा गिरा है। बीएसई पर पिछले एक महीने में कंपनी के शेयर में 19.49 फीसदी की गिरावट आई है। 25 सितंबर को बीएसई पर एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड के शेयर का मूल्य 4373.45 रुपये था, जो 25 अक्टूबर को गिरकर 3521 रुपये रह गया।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>स्वराज ट्रैक्टर्स के इंजन बनाने वाली कंपनी <strong>स्वराज इंजन लिमिटेड</strong> का स्टॉक महीने भर में 12.09 फीसदी गिरा है। 25 सितंबर को इसका मूल्य 3257.90 रुपये था, जो 25 अक्टूबर को गिरकर 2864 रह गया है। <strong>महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड (महिंद्रा ट्रैक्टर्स)</strong> का स्टॉक पिछले एक महीने में 11.98 फीसदी गिरा है। 25 सितंबर को इसके एक शेयर का दाम 3089.10 रुपये था, जो 25 अक्टूबर को गिरकर 2716.95 रुपये रह गया है।</p>
<p>सोनालिका ट्रैक्टर्स की निर्माता कंपनी <strong>इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड (आईटीएल)</strong> के स्टॉक में 9.74 फीसदी की गिरावट आई है। एक महीने पहले इसका स्टॉक दाम 493 रुपये पर था, जो घटकर 445 रुपये रह गया है। <strong>आयशर लिमिटेड (आयशर ट्रैक्टर्स)</strong> के स्टॉक में 6.25 फीसदी की गिरावट आई है। एक महीने पहले इसका दाम 4894.45 रुपये था, जो आज गिरकर 4567.85 रुपये रह गया है। हालांकि, शेयर बाजरा में जारी भारी गिरावट के बीच <strong>वीएसटी टिल्लर्स ट्रैक्टर</strong> का शेयर पिछले एक महीने में अपेक्षाकृत कम गिरा है। एक महीने पहले कंपनी के शेयर का मूल्य 4580.85 रुपये था, जो आज 4491.00 रुपये है। इसमें 1.96 फीसदी की गिरावट आई है।</p>
<p>सितंबर महीने में ट्रैक्टरों की बिक्री भी घटी थी। मासिक आधार पर ट्रैक्टरों की बिक्री में 4.48 फीसदी की गिरावट आई है।&nbsp;<span>पिछले साल कमजोर मानसून के कारण ट्रैक्टरों की बिक्री कम रही थी। इस साल सामान्य मानसून के चलते ट्रैक्टरों की बिक्री में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन अब तक ऐसा होता नहीं दिखा है। </span></p>
<p><span>वित्त वर्ष 2024-25 के पहले छह महीनों में ट्रैक्टर की घरेलू बिक्री वित्त वर्ष 2023-24 के मुकाबले 8.82 फीसदी घटी है। </span><span>हालांकि, ट्रैक्टर कंपनियों को आने वाले त्योहारी सीजन में काफी उम्मीदे हैं। कई प्रमुख कंपनियों ने त्योहारी सीजन के लिए विशेष ऑफर और फाइनेंसिंग योजनाएं तैयार की हैं, जिससे ट्रैक्टरों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_671b7a05249da.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एक महीने में ट्रैक्टर कंपनियों के स्टॉक 20 फीसदी तक गिरे, जानिए क्या है वजह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_671b7a05249da.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी उत्पादन 18 लाख टन घटने का अनुमान, निर्यात पर रोक जारी रहने के आसार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/indian-sugar-production-estimated-to-decline-by-18-lakh-tonnes-restrictions-on-exports-likely-to-continue.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 17 Oct 2024 19:09:20 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/indian-sugar-production-estimated-to-decline-by-18-lakh-tonnes-restrictions-on-exports-likely-to-continue.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एक अक्टूबर से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्तूबर 2024 से सितंबर 2025) के दौरान देश में चीनी का कुल उत्पादन पिछले सीजन के मुकाबले 18 लाख टन गिरकर 325 लाख टन रहने का अनुमान है। महाराष्ट्र में गन्ने की कमजोर फसल और कम रिकवरी के चलते इस साल सबसे अधिक उत्पादन उत्तर प्रदेश में होने की संभावना है। हालांकि, इस साल उत्तर प्रदेश में भी गन्ने की फसल बहुत बेहतर नहीं है। इस स्थिति का असर पेराई सीजन की अवधि घटने के रूप में देखने को मिल सकता है।</p>
<p>चालू पेराई सीजन के लिए केंद्र सरकार ने गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 340 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जिसके लिए 10.25 फीसदी चीनी रिकवरी को आधार बनाया गया है। चीनी उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र की चीनी मिलों में गन्ने की पेराई 15 नवंबर से शुरू होगी जबकि उत्तर प्रदेश में नवंबर के पहले सप्ताह में पेराई शुरू हो जाएगी। महाराष्ट्र में गन्ने की कमजोर फसल के चलते पेराई सीजन 115-120 दिनों में समाप्त हो सकता है। जबकि सामान्य स्थिति में गन्ना पेराई सीजन 180 दिनों तक चलता है। गन्ने की कमजोर फसल और पेराई सीजन का छोटा होना चीनी मिलों की आर्थिक सेहत के लिए ठीक नहीं है। क्रशिंग सीजन के छोटा होने के पीछे चीनी मिलों द्वारा क्रशिंग क्षमता बढ़ाया जाना भी एक बड़ी वजह है।</p>
<p><strong>कुल चीनी उत्पादन 325 लाख टन&nbsp;</strong></p>
<p>पिछले साल देश में कुल 343 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ था। इसमें से 24 लाख टन चीनी का उपयोग एथेनॉल उत्पादन के लिए किया गया था। उद्योग के अनुमान के मुताबिक, इस साल कुल चीनी उत्पादन 325 लाख टन रहेगा जिसमें से 40 लाख टन चीनी का उपयोग एथेनॉल उत्पादन में किया जाएगा। इस तरह मार्केट में आने वाली चीनी यानी नेट शुगर प्रोडक्शन 285 लाख टन रहेगा जो पिछले सीजन में 319 लाख टन था।</p>
<p>पिछले साल 57.23 लाख टन के बकाया स्टॉक के साथ चीनी की कुल उपलब्धता 376.23 लाख टन रही थी। वहीं, चालू सीजन के शुरू में 80.23 लाख टन के बकाया स्टॉक के चलते चीनी की कुल उपलब्धता 365.23 लाख टन रहेगी। सालाना 295 लाख टन की खपत के चलते साल के अंत में 55.23 लाख टन का बकाया स्टॉक रहने का अनुमान है। देश में सामान्य रूप से तीन महीने की खपत के बराबर स्टॉक रहना चाहिए जो करीब 74 लाख टन बैठता है। इसलिए देश से चीनी निर्यात की संभावना नहीं है।</p>
<p><strong>चीनी निर्यात की गुंजाइश नहीं&nbsp;</strong></p>
<p>उद्योग सूत्रों के मुताबिक, इस स्थिति में चीनी के निर्यात की संभावना नहीं है। सरकार ने चीनी निर्यात को रेट्रिक्टेड लिस्ट में रखा हुआ है। पिछले सीजन में चीनी निर्यात का कोटा जारी नहीं होने से चीनी का निर्यात नहीं हुआ था। उत्पादन और स्टॉक के अनुमानों को देखते हुए इस बात की संभावना है कि सरकार चीनी निर्यात पर लागू रोक को जारी रख सकती है। चीनी को 31 अक्तूबर, 2024 के बाद भी रेट्रिक्टेड सूची में रखे जाने की उम्मीद जताई जा रही है। क्योंकि निर्यात की संभावना लगभग न के बराबर हैं।</p>
<p>इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत से निर्यात होने वाली चीनी की कीमत (एफओबी) व्हाइट शुगर के लिए 4540 रुपये प्रति क्विंटल और रॉ शुगर की कीमत 4315 रुपये प्रति क्विंटल चल रही है। वहीं, घरेलू बाजार में उत्तर प्रदेश में एम ग्रेड चीनी की कीमत 3915 रुपये प्रति क्विंटल, तमिलनाडु में एम ग्रेड की कीमत 3850 रुपये प्रति क्विंटल और महराष्ट्र में एस ग्रेड चीनी की कीमत 3600 रुपये प्रति क्विंटल व कर्नाटक में 3600 रुपये प्रति क्विंटल चल रही है।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_67110cac671fb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी उत्पादन 18 लाख टन घटने का अनुमान, निर्यात पर रोक जारी रहने के आसार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_67110cac671fb.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मैग्नस फार्म ने वैश्विक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण निवेश हासिल किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/magnus-farms-secures-strategic-investment-to-drive-global-growth-and-product-innovation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 16 Oct 2024 17:55:33 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/magnus-farms-secures-strategic-investment-to-drive-global-growth-and-product-innovation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ताजे फल व सब्जियों के प्रमुख उत्पादक व निर्यातक मैग्नस फार्म फ्रेश प्राइवेट लिमिटेड ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निवेश हासिल किया है। कंपनी में हाईब्रो सिक्योरिटीज के एमडी तरुण सिंह ने 3.5 फीसदी की हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया है। यह निवेश कंपनी के वैश्विक विस्तार और प्रोडक्ट इनोवेशन में अहम भूमिका निभाएगा। इस साझेदारी में अगले वर्ष के भीतर 3 मिलियन अमरीकी डॉलर के संभावित निवेश की योजना है जो मैग्नस फार्म की दीर्घकालिक सफलता के लिए तरुण सिंह की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p>
<p>यह निवेश मैग्नस फार्म के विस्तार में तेजी लाएगा, जिससे वह अपने उत्पादों में विविधता लाएगा और क्षमताओं का विस्तार कर सकेगा। कंपनी एक अत्याधुनिक प्रसंस्कृत खाद्य श्रृंखला विकसित करने जा रही है जिसमें इंडिविजुअली क्विक फ्रोजन (आईक्यूएफ) और रिटॉर्ट उत्पाद शामिल हैं। साथ ही, नई किस्मों के फलों की खेती की जाएगी, जिससे वैश्विक निर्यात क्षमताओं और बाजार में उपस्थिति में तेजी आएगी।</p>
<p>मैग्नस फार्म ने महाराष्ट्र के नासिक, सांगली, सोलापुर, पुणे, उस्मानाबाद और अहमदनगर सहित कई जिलों में 3,000 से अधिक प्रमाणिक उत्पादकों के मजबूत नेटवर्क के साथ यूरोप, ब्रिटेन, रूस, दक्षिण पूर्व एशिया, कनाडा और मध्य पूर्व जैसे प्रमुख बाजारों में मजबूत उपस्थिति बनाई है। इसके जरिए एडेका, नेटो, सुपरनी, एल्डी, लिडल, रीवे और एक्स5 जैसी प्रमुख सुपरमार्केट श्रृंखलाओं को ताजा उपज की आपूर्ति होती है।</p>
<p>तरुण सिंह का कहना है कि मैग्नस फार्म में निवेश करने का उनका निर्णय खाद्य उद्योग की संभावनाओं से उपजा है। मैग्नस फार्म ने अपने वैल्यूएशन, मजबूत नेतृत्व और इनोवेटिव बिजनेस मॉडल से प्रभावित किया। यूरोपीय खाद्य बाजार में अपने अनुभव के साथ वह मैग्नस फार्म को वैश्विक विस्तार में मदद करेंगे।</p>
<p>2020 में स्थापित, मैग्नस फार्म फ्रेश यूरोप, ब्रिटेन, रूस, दक्षिण पूर्व एशिया, कनाडा और मध्य पूर्व सहित प्रमुख बाजारों में ताजे फल व सब्जियों का निर्यात करता है। अपनी स्थापना के बाद से, मैग्नस फार्म ने प्रभावशाली वृद्धि हासिल की है। कंपनी का राजस्व वित्त वर्ष 2020-21 में 53 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 150 करोड़ रुपये हो गया।</p>
<p>नए निवेश के बारे में मैग्नस फार्म के संस्थापक और निदेशक लक्ष्मण सावलकर ने कहा, "हम मैग्नस फार्म में एक निवेशक और रणनीतिक भागीदार दोनों के रूप में तरुण सिंह का स्वागत करते हैं। उनका अनुभव और गहरी समझ हमें अपनी विस्तार योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। मैग्नस फ़ार्म्स वैश्विक निर्यात बाजार में नई ऊंचाइयों को छूते हुए नवाचार को बढ़ावा देने और भारत के कृषि और खाद्य निर्यात क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।&rdquo;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_670faf9d270ce.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मैग्नस फार्म ने वैश्विक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण निवेश हासिल किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_670faf9d270ce.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डेयरी प्रौद्योगिकी में जीरो वेस्ट मैनेजमेंट के लिए बीएल कामधेनु और स्वीडन की डेलावल के बीच एमओयू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mou-between-bl-kamdhenu-and-delaval-for-zero-waste-management-in-dairy-technology.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 21 Sep 2024 19:06:13 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mou-between-bl-kamdhenu-and-delaval-for-zero-waste-management-in-dairy-technology.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बीएल एग्रो ग्रुप की सहायक कंपनी, बीएल कामधेनु फार्म्स लिमिटेड ने शुक्रवार को स्वीडन की कंपनी डेलावल के साथ एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान स्वीडन के राजदूत, जान थेस्लेफ भी वहां मौजूद थे। यह साझेदारी मवेशी प्रजनन और डेयरी प्रौद्योगिकी में शून्य-अपशिष्ट अर्थव्यवस्था और दीर्घकालिक पर्यावरण अनुकूलता को बढ़ावा देने के लिए है। इसके लिए 1500 करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है। दोनों कंपनियां दूध उत्पादन, खेत प्रबंधन और अपशिष्ट प्रबंधन को एकीकृत करते हुए बेहतर पर्यावरण सुनिश्चित करने के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग करेंगी।</p>
<p>इस अवसर पर बीएल कामधेनु फार्म्स के निदेशक नवनीत रविकर ने कहा, &ldquo;डेलावल के साथ यह साझेदारी एक महत्वपूर्ण क्षण है। श्वेत क्रांति को नया रूप देने और बदलने के हमारे प्रयासों में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सहयोग के माध्यम से हम पूरी तरह से एकीकृत और पर्यावरण अनुकूल दूध मूल्य श्रृंखला बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम शून्य अपशिष्ट सुनिश्चित करके ही किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए इसे दीर्घकालिक रूप से लाभदायक बना सकते हैं।&rdquo;</p>
<p>स्वीडन के राजदूत महामहिम जान थेस्लेफ ने साझेदारी पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा, &ldquo;स्वीडन को पर्यावरण अनुकूल कृषि और डेयरी नवाचार की दिशा में भारत की यात्रा का हिस्सा बनने पर गर्व है। यह एमओयू नवाचार, स्थिरता और आर्थिक वृद्धि के हमारे साझा मूल्यों को दर्शाता है। हमारा मानना है कि बीएल कामधेनु फ़ार्म्स और डेलावल के बीच सहयोग दुनिया को दिखाएगा कि सीमाओं के पार साझेदारी सभी के लिए क्या कर सकती है।&rdquo;</p>
<p>डेलावल डेयरी फार्मिंग तकनीक में दुनिया की एक अग्रणी कंपनी है। यह उत्पादन और जानवरों की देखभाल को बेहतर बनाते हुए पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए काम करती है। यह ऐसी तकनीक और समाधान लाती है जो दूध की गुणवत्ता, उत्पादन की मात्रा और डेयरी किसानों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है। इसका दावा है कि यह साझेदारी भारत की डेयरी इंडस्ट्री को मजबूत करेगी और देश के स्थिरता लक्ष्यों में मदद करेगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66eec8fd15f06.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ डेयरी प्रौद्योगिकी में जीरो वेस्ट मैनेजमेंट के लिए बीएल कामधेनु और स्वीडन की डेलावल के बीच एमओयू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66eec8fd15f06.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत में 27.8 लाख डॉलर की मदद से कृषि तकनीक को बढ़ावा देगा वॉलमार्ट फाउंडेशन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/walmart-foundation-will-promote-agricultural-technology-in-india-with-the-help-of-27.8-lakh-dollar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 10 Sep 2024 17:39:35 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/walmart-foundation-will-promote-agricultural-technology-in-india-with-the-help-of-27.8-lakh-dollar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="font-weight: 400;">वॉलमार्ट फाउंडेशन ने भारत में कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार<span>&nbsp;</span>को बढ़ावा देने के लिए 27.8 लाख डॉलर के तीन नए अनुदानों की घोषणा की है। इस फंडिंग के माध्यम से नेशनल एंटरप्रेन्योरशिप नेटवर्क (एनईएन)<span>,&nbsp;</span>टाटा-कॉर्नेल इंस्टीट्यूट फॉर एग्रीकल्चर एंड न्यूट्रिशन (टीसीआई) के सहयोग से कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और प्रेसिजन डेवलपमेंट<span>&nbsp;</span><span>(पीएक्सडी)</span><span>&nbsp;</span>का मकसद संयुक्त रूप से भारत में 3 लाख से ज्यादा किसानों तक लाभ पहुंचना है।</p>
<p>इस पहल के तहत तकनीक-संचालित उपायों से किसानों की आय बढ़ाना, बाजार तक उनकी पहुंच में सुधार करना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है। वॉलमार्ट फाउंडेशन का लक्ष्य 2028 तक भारत के कृषि क्षेत्र में 50 फीसदी महिलाओं सहित 10 लाख छोटे किसानों तक पहुंचना है। &nbsp;<br /><strong></strong></p>
<p>वॉलमार्ट फाउंडेशन की वाइस प्रेसिडेंट जूली गेर्की ने कहा<span>, "</span>भारत में कृषि क्षेत्र को उन्नत करने में छोटी जोत वाले किसानों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे अनुदान प्राप्तकर्ता सतत कृषि प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने<span>,&nbsp;</span>छोटी जोत वाले किसानों के लिए ज्यादा अवसर सृजित करने और टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित समाधानों तक पहुंच बढ़ाने के लिए एफपीओ में निवेश कर रहे हैं। इनसे ऐसे किसानों को मदद मिलती है<span>,&nbsp;</span>जिनके पास वित्तीय संसाधनों की कमी है। इससे उनकी आय में उल्लेखनीय सुधार होगा। हम एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने और किसानों को सशक्त करने के लिए ज्यादा समावेशी मूल्य श्रृंखला बनाने की दिशा में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी<span>,&nbsp;</span>एनईएन और<span> पीएक्सडी </span>के टेक्नोलॉजी आधारित समाधानों के लिए उत्साहित हैं।"</p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="3c4f37eb-f56f-4749-9ae4-69e892e02d45" dir="auto" class="min-h-[20px] text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>नेशनल एंटरप्रेन्योरशिप नेटवर्क (एनईएन) को 15 लाख डॉलर से अधिक का अनुदान अनाज मूल्यांकन के लिए नए एआई आधारित समाधान विकसित करने के लिए दिया गया है। यह अनुदान मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के किसानों को सोयाबीन की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने और बेहतर बाजार पहुंच प्राप्त करने में मदद करेगा। इसके तहत, एनईएन का एआई-आधारित ऐप खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी योगदान देगा। इसके अलावा, एनईएन का लक्ष्य अन्य एग्री-टेक प्लेटफार्मों में एआई मॉडल को एकीकृत करना है, ताकि यह कृषि के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक संसाधन (डीपीजी) के रूप में काम कर सके, जो अनाज की गुणवत्ता के मूल्यांकन और प्रशिक्षण को सक्षम बनाएगा।</p>
<p>वॉलमार्ट फाउंडेशन ने टाटा-कॉर्नेल इंस्टीट्यूट फॉर एग्रीकल्चर एंड न्यूट्रिशन (टीसीआई) द्वारा समर्थित कॉर्नेल यूनिवर्सिटी को 9.9 लाख डॉलर का अनुदान प्रदान किया है। इसका उद्देश्य कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के एफपीओ प्लेटफॉर्म 'माय एफपीओ कनेक्ट' को और विकसित करना है, जिसे अगस्त 2021 में दिल्ली के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में एक हब के रूप में लॉन्च किया गया था। यह वेब-आधारित प्लेटफॉर्म 33,000 से अधिक एफपीओ से संबंधित जानकारी का सिंगल-पॉइंट सोर्स है, जिससे उत्पादक संगठनों को ढूंढना आसान हो जाता है। प्लेटफॉर्म के जरिए एफपीओ, शोधकर्ता और हितधारक फसलों, प्रायोजक एजेंसियों और वित्तीय आंकड़ों से जुड़ी विस्तृत जानकारी इंटरैक्टिव डैशबोर्ड के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, एफपीओ मॉडल की बेहतर समझ के लिए इसे क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराया जाएगा।</p>
<p>प्रेसिजन डेवलपमेंट (पीएक्सडी) कस्टमाइज्ड एडवाइजरी (सलाह) देते रहने के लिए आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में छोटे कॉफी किसानों के साथ काम जारी रखेगा। यह 2.6 लाख डॉलर का अनुदान वॉलमार्ट फाउंडेशन की ओर से पीएक्सडी को मिला दूसरा अनुदान है। नया अनुदान पीएक्सडी की डिजिटल एडवाइजरी सर्विस कॉफी कृषि तरंग (सीकेटी) को कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया के साथ संस्थागत करेगा, ताकि किसानों को खेती की जानकारी, मूल्य अपडेट और कॉफी उद्योग के विकास तक निरंतर पहुंच प्रदान की जा सके। यह सीकेटी में वॉयस-बेस्ड, प्रोवाइडर एग्नोस्टिक मौसम पूर्वानुमान सेवा को इंटीग्रेट करने में भी मदद करेगा और कॉफी बोर्ड के लिए प्रमुख कृषि प्रक्रियाओं पर वीडियो तैयार करेगा।</p>
<p>पीएक्सडी की डिजिटल कृषि सेवाओं ने पहले भी किसानों के सतत जुड़ाव को बढ़ावा दिया है। इसमें जारी किए जाने वाले नियमित मतदान के परिणाम जानकारी में बढ़ोतरी का भी संकेत देते हैं। 90 हजार किसानों के साथ सीकेटी किसानों की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार अपनी ऑफरिंग्स में बदलाव करता रहता है। नए अनुदान का लक्ष्य 1 लाख 30 हजार से अधिक छोटे किसानों तक पहुंचना है।</p>
<p>पीएक्सडी के प्रोग्राम हेड गगनदीप कौर ने कहा, "हम वॉलमार्ट फाउंडेशन की ओर से निरंतर मिलने वाले समर्थन की सराहना करते हैं। यह अनुदान किसानों को सतत कृषि प्रक्रियाएं अपनाने के लिए जरूरी उपकरण एवं संसाधन उपलब्ध कराते हुए सशक्त बनाने में सहायक होगा, जिनमें से 50 फीसदी महिलाएं होंगी। इससे आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में कॉफी उत्पादक समुदायों को मजबूत किया जा सकेगा, जिससे उनकी आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।"</p>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66e0375d8858b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत में 27.8 लाख डॉलर की मदद से कृषि तकनीक को बढ़ावा देगा वॉलमार्ट फाउंडेशन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66e0375d8858b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डेयरी स्टार्टअप अक्षयकल्प ऑर्गेनिक का इस वित्त वर्ष 400 करोड़ रुपये रेवेन्यू का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/dairy-startup-akshayakalpa-organic-aims-to-achieve-rs-400-crores-revenue-this-fiscal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 08 Sep 2024 15:24:25 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/dairy-startup-akshayakalpa-organic-aims-to-achieve-rs-400-crores-revenue-this-fiscal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>डेयरी स्टार्टअप <strong>अक्षयकल्प ऑर्गेनिक</strong> के संस्थापक <strong>शशि कुमार</strong> ने टेक्नोलॉजी की चकाचौंध भरी दुनिया छोड़ कर अपने परिवार के पारंपरिक पेशे कृषि को अपनाया है। टेक्नोलॉजी क्षेत्र में 17 साल गुजारने के बाद वे न सिर्फ कृषि परिदृश्य को बदल रहे हैं, बल्कि किसानों का जीवन भी बेहतर बना रहे हैं। किसानों को स्थायी आजीविका प्रदान करने के लिए 2010 में उन्होंने अक्षयकल्प ऑर्गेनिक की स्थापना की। <strong>रूरल वॉयस</strong> के एडिटर-इन-चीफ <strong>हरवीर सिंह</strong> के साथ बातचीत में उन्होंने बताया कि अक्षयकल्प ने कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना में अब तक 1,200 से अधिक किसानों को समृद्ध किया है। ऑर्गेनिक तौर-तरीकों और वैल्यू एडेड डेयरी उत्पादों पर उनका जोर पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर है। उनका लक्ष्य 2024-25 में अक्षयकल्प का टर्नओवर 400 करोड़ रुपये पहुंचाना है, जो पिछले साल 286 करोड़ रुपये था। बातचीत के मुख्य अंश:-</p>
<p><strong>अक्षयकल्प शुरू करने के पीछे क्या विचार था?</strong><br />मैंने कंप्यूटर विज्ञान में स्नातक की डिग्री ली और विप्रो टेक्नोलॉजीज में करियर शुरू किया। बाद में, मैंने शिकागो में इलिनोइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से टेलीकॉम इंजीनियरिंग में मास्टर्स किया। टेक इंडस्ट्री में 17 साल बिताने के बाद मैंने अपने जड़ों की ओर लौटने का फैसला किया। मैं कृषि क्षेत्र में ऐसे बदलाव लाना चाहता हूं जिससे लाखों छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।<br />मैं किसान परिवार से हूं और दूसरे परिवारों की तरह मेरे पिता भी नहीं चाहते थे कि मैं किसान बनूं। मेरी हमेशा यही इच्छा थी कि मैं अच्छी तरह से पढ़ाई करूं और अच्छी नौकरी हासिल करूं। लेकिन इस क्षेत्र में वर्षों बिताने के बाद, मुझे अपनी जड़ों की ओर लौटने और कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने की तीव्र इच्छा महसूस हुई, जिसके कारण अक्षयकल्प की स्थापना हुई।</p>
<p><strong>आप आईटी छोड़कर कृषि में आए तो इसकी शुरुआत कैसे हुई?</strong><br />मैं बैंगलोर के बाहरी इलाके अट्टीबेले से आता हूं, जो तमिलनाडु की सीमा के पास है। यहीं मेरा जन्म और पालन-पोषण हुआ। मेरे माता-पिता अभी तक वहां खेती करते हैं। मैंने विप्रो के 27 लोगों के साथ खेती में बदलाव पर अनौपचारिक चर्चा की। कॉफी टेबल पर बातचीत के रूप में शुरू हुई यह चर्चा धीरे-धीरे गंभीर होती गई। हम 27 लोगों ने मिलकर 2010 में काम शुरू करने का फैसला किया। उसके लिए हमने ही एक तरह से क्राउड फंडिंग की।<br />हमने एक एनजीओ शुरू किया और उन गांवों पर ध्यान केंद्रित किया जहां महिलाओं और बच्चों को सहायता की आवश्यकता थी। इनमें से कई लोगों के पास बहुत छोटी जमीन है- एक एकड़ या उससे भी कम जहां पारंपरिक खेती व्यवहार्य नहीं है। हमारा इरादा कृषि उद्यम स्थापित करने में उनकी मदद करना था, जिससे उन्हें स्थायी आजीविका मिल सके।<br />पहले वर्ष हमने लगभग 25 महिलाओं को एकत्र किया और उनके साथ काम करने लगे। हमने महसूस किया कि इन महिलाओं को अलग-अलग तरह की मदद की आवश्यकता थी। हर कोई उद्यमी नहीं बनना चाहती थीं। उनमें से कई को मनोवैज्ञानिक समर्थन की आवश्यकता थी, क्योंकि वे अपने जीवन में बेहद चुनौतीपूर्ण अनुभवों से गुजरी थीं।<br />उसके बाद हम किसानों और उनके परिवारों से मिलने लगे। हमने एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति देखी कि अनेक लोग खेती छोड़ रहे थे। खेत के मालिक होने के बावजूद वे विभिन्न कारणों से खेती से दूर जा रहे थे, क्योंकि खेती से उन्हें कमाई नहीं हो रही थी। वे नियमित कमाई वाली नौकरी तलाश रहे थे। भले ही कैब ड्राइवर या सिक्युरिटी गार्ड की नौकरी हो, लेकिन उससे नियमित कमाई होती रहे। खेती करने वाले परिवारों को भी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक नियमित मासिक आय की आवश्यकता होती है। इन परिवारों के पास एकमात्र संपत्ति उनकी जमीन थी, और इस जमीन से ही उनको स्थिर आय उत्पन्न करने की आवश्यकता थी।<br />हमने इस बारे में सोचना शुरू किया। हमारा समाधान डेयरी फार्मिंग को एक उद्यम के रूप में स्थापित करना था। डेयरी फार्मिंग किसानों को रोजाना आय देती है। इसके अतिरिक्त खाद के लिए मवेशियों का गोबर होता है जो जैविक कार्बन के साथ मिट्टी को फिर से जीवंत करने में मदद कर सकता है। इससे खेती टिकाऊ और लाभदायक दोनों हो सकती है। पिछले 14 वर्षों में यही हमारा फोकस रहा है। हमने लगभग 1,200 किसानों के साथ काम किया है। उन्हें डेयरी फार्मिंग के माध्यम से एक स्थिर आय हासिल करने में मदद की है।<br />हमने छोटी डेयरी इकाइयों के साथ छोटी बैकयार्ड पोल्ट्री की भी शुरुआत की। इस तरह के और प्रयास किए। समग्र और टिकाऊ खेती को ध्यान में रखकर इन मॉडलों को विकसित किया गया था। हमने 2011 में दो खेतों से शुरुआत की। प्रत्येक खेत दो या तीन एकड़ का था जिसका स्वामित्व एक किसान के पास था। इन खेतों का प्रबंधन किसान स्वयं करते थे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66dd74209ff18.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>आपने ये क्लस्टर कहां स्थापित किए और इनमें कितने किसान शामिल हैं?&nbsp;</strong><br />पहला क्लस्टर कर्नाटक के तुमकुर जिले के टिपटूर में, दूसरा तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले में और तीसरा तेलंगाना के गडवाल जिले में है। टिपटूर में लगभग 1,200 किसान हमारे साथ हैं। चेंगलपट्टू क्लस्टर में 80 और गडवाल में लगभग 50 किसान हैं। कुल मिलाकर इन क्लस्टर में 4,000 एकड़ खेती योग्य भूमि है। वर्तमान में इन किसानों के पास लगभग 16,000 पशु हैं जिनसे हम प्रतिदिन 1.2 लाख लीटर दूध एकत्र करते हैं। टिपटूर क्लस्टर 10 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। चेंगलपट्टू और गडवाल के क्लस्टर भी लगभग इतने ही बड़े हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>आप अपने दूध और दूध उत्पाद कहां बेचते हैं? आप तो अपने उत्पादों को प्रीमियम पर बेच रहे होंगे।&nbsp;</strong><br />हम अभी बैंगलोर, चेन्नई और हैदराबाद में दूध बेचते हैं। हमारे उत्पाद अक्षयकल्प ब्रांड नाम से बेचे जाते हैं। दूध हमारा मुख्य उत्पाद है। हम इससे पनीर, छाछ और दही जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद भी बनाते हैं। हमारा लगभग 40% दूध इन मूल्यवर्धित उत्पादों में जाता है। हम दूध ₹85 प्रति लीटर पर बेचते हैं, जिसमें आम तौर पर लगभग 4% वसा और 8.5% SNF (ठोस-वसा नहीं) होता है। हमारे घी की कीमत ₹1,500 प्रति किलो, पनीर की लगभग ₹800 प्रति किलो, दही की ₹150 प्रति किलो और छाछ की कीमत ₹30 प्रति 200 ग्राम है।</p>
<p><strong>क्या आप अपनी कंपनी का टर्नओवर और लाभ बता सकते हैं?</strong><br />हमारा टर्नओवर लगभग ₹30 करोड़ प्रति महीना है। पिछले वित्तीय वर्ष में यह ₹286 करोड़ था। लाभ के मामले में, हम बहुत ज़्यादा पैसा नहीं कमा रहे हैं, लेकिन हम ब्रेक इवन (न लाभ, न नुकसान) में हैं। बैंगलोर हमारे लिए बहुत लाभदायक बाजार है, जबकि चेन्नई और हैदराबाद नए बाजार हैं जहां हम अभी कुछ घाटे में चल रहे हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>आप यह कैसे सुनिश्चित करते हैं कि दूध जैविक है?</strong><br />कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) द्वारा नियुक्त प्रमाणन निकाय दूध को जैविक प्रमाणित करते हैं। इसके अतिरिक्त, इसका पालन सुनिश्चित करने के लिए 1,200 एक्सटेंशन अधिकारी किसानों को सेवाएं देते हैं। पशुओं का आहार पूरी तरह से जैविक होता है, जो जैविक रूप से उगाई गई खेती से प्राप्त होता है।</p>
<p><strong>आपकी कंपनी में कर्मचारियों की संख्या कितनी है?</strong><br />अक्षयकल्प में वर्तमान में करीब 1,000 लोग हैं। इसमें से 200 लोग एक्सटेंशन आउटरीच कार्यक्रमों में काम करते हैं, जिनमें 30 पैरामेडिक्स और 16 पशु चिकित्सक शामिल हैं। शेष विकास अधिकारी हैं जो किसानों के साथ मिलकर उनकी समस्याओं को समझते हैं और उनका समाधान करते हैं। जब कोई पशु बीमार हो जाता है और एंटीबायोटिक्स का उपयोग करना आवश्यक होता है, तो उसके दूध को अलग कर दिया जाता है। फार्म स्तर पर एंटीबायोटिक परीक्षण अनिवार्य है। चूंकि हम पशु चिकित्सा और पैरा चिकित्सा सेवाएं प्रदान करते हैं, इसलिए हमें पता रहता है कि किन फार्मों ने एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया है।&nbsp;</p>
<p><strong>आपके प्रसंस्करण संयंत्र कहां हैं? क्या आप बल्क चिलर का उपयोग करते हैं?</strong><br />हमारे पास दो प्रसंस्करण संयंत्र हैं। एक तुमकुर जिले के टिपटूर में, जिसकी क्षमता दो लाख लीटर है, और दूसरा चेंगलपट्टू के नीरपेयर में जिसकी क्षमता 40 हजार लीटर है। हम बल्क चिलर का उपयोग नहीं करते हैं। प्रत्येक फार्म में एक इंटीग्रेटेड चिलर है जिसकी क्षमता फार्म के आकार के आधार पर 50 से 200 लीटर तक होती है। दूध दुहने के तुरंत बाद उसे 4 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया जाता है, जिससे संग्रह केंद्रों की आवश्यकता नहीं रह जाती है। प्रत्येक किसान अपना चिलर चलाता है, और हम उन्हें इसके लिए प्रति लीटर ₹1.50 का अतिरिक्त भुगतान करते हैं।</p>
<p><strong>क्या किसानों को चिलर में निवेश करने की जरूरत है?</strong><br />किसानों को पहले से निवेश करने की जरूरत नहीं है। चिलर में निवेश लीजिंग कंपनी करती है या किसान और लीजिंग कंपनी मिलकर इसे लगाती हैं। तीन से पांच साल के बाद चिलर पूरी तरह किसान को हस्तांतरित कर दी जाती है। वर्तमान में लीजिंग सिस्टम इसी तरह काम करता है।</p>
<p><strong>आप किसानों से किस कीमत पर दूध खरीद रहे हैं?</strong><br />हम किसानों को लगभग ₹47 प्रति लीटर का भुगतान करते हैं, साथ ही चिलिंग के लिए अतिरिक्त ₹1.50 देते हैं। यह कुल मिलाकर लगभग ₹48 से ₹50 प्रति लीटर हो जाता है। कुछ खेत बेहतर पशु वंशावली के कारण और भी अधिक कमाते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>यह किसानों के लिए एक अच्छी कीमत है, लेकिन आप दूध ₹85 प्रति लीटर पर बेच रहे हैं। क्या आपको नहीं लगता कि आप किसानों को जो भुगतान करते हैं और आपकी बिक्री कीमत में बड़ा अंतर है? कुछ सहकारी समितियां उपभोक्ता मूल्य का 80% तक किसान को हस्तांतरित करने का दावा करती हैं।</strong><br />यह दावा पूरी तरह से सही नहीं है। वे आम तौर पर तरल दूध की कीमत का उल्लेख करती हैं लेकिन औसत रियलाइजेशन पर विचार नहीं करती हैं। हमारे मामले में तरल दूध के लिए औसत रियलाइजेशन लगभग ₹72 प्रति लीटर है। हम स्किम्ड दूध ₹60 और फुल-फैट दूध ₹75 पर बेचते हैं।</p>
<p><strong>किस तरह के लोग आपके उत्पाद को खरीद रहे हैं?</strong><br />आम तौर पर माता-पिता अपने लिए तो पारंपरिक दूध खरीदते हैं, लेकिन अपने बच्चों के लिए इस जैविक दूध को चुनते हैं। हमारे खरीदार ₹80,000 मासिक आय सीमा में आते हैं। हमारे लगभग 5% ग्राहक उच्च-प्रोफाइल वाले हैं। वे अपना सारा दूध और डेयरी उत्पाद हमसे खरीदते हैं। शेष 95% मध्यम-वर्ग और उच्च-मध्यम-वर्ग के परिवार हैं।</p>
<p><strong>जैविक उत्पादों का बाजार किस दर से बढ़ रहा है? इस वित्तीय वर्ष में आप कितनी वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं?</strong><br />पिछले पांच सालों में हमने 60% की वृद्धि की है और वर्तमान में हम देश में सबसे बड़े जैविक दूध उत्पादक हैं। मेरा मानना ​​है कि बाजार में साल दर साल 30% वृद्धि की क्षमता है। इस वर्ष हमें लगभग 30-35% वृद्धि की उम्मीद है। हमारा लक्ष्य पिछले साल के ₹286 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹400 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करना है। इस साल हम प्रॉफिट में भी आ सकते हैं। हम पिछली तिमाही में भी प्रॉफिट में थे।</p>
<p><strong>क्या आपने कुछ फंडिंग भी ली है, और किस वैल्यूएशन पर?</strong><br />पहले नौ सालों में हम पैसे नहीं जुटा पाए क्योंकि हमारा ध्यान खेती पर था। लेकिन 2019 में जब हमने अपना ध्यान बाजार पर लगाया, तो मैंने ₹40 करोड़ की पूंजी जुटाई। 2022 में हमने ब्रिटिश सरकार और जीरोधा के नितिन कामथ से ₹117 करोड़ जुटाए। फिर दिसंबर 2023 में हमने A91 पार्टनर्स से ₹250 करोड़ जुटाए। वैलुएशन हमारे रेवेन्यू का 1.75 गुना है।</p>
<p><strong>कंपनी में प्रमोटरों की इक्विटी कितनी है?</strong><br />यह लगभग 5% है। मैं एकमात्र प्रमोटर हूं। मेरे दोस्तों ने 2010 से 2019 तक निवेश किया, उनके पास भी लगभग 25% हिस्सेदारी है।</p>
<p><strong>अभी आपका बाजार तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक में है। क्या आपके पास विस्तार की कोई योजना है?</strong><br />हम महाराष्ट्र में पुणे बेल्ट में जाने पर विचार कर रहे हैं, जहां से हम मुंबई और पुणे दोनों बाजारों को आपूर्ति कर सकते हैं।</p>
<p><strong>आप पारंपरिक रिटेल चेन के माध्यम से बेच रहे हैं या अन्य प्लेटफॉर्म का भी उपयोग करते हैं?</strong><br />अभी, हमारा सबसे बड़ा चैनल तीन शहरों में अक्षयकल्प ऐप है। ऐप से हर महीने ₹18 करोड़ का राजस्व आता है। लोग ऐप डाउनलोड करते हैं, अग्रिम भुगतान करते हैं और सदस्यता लेते हैं। अक्सर 30 दिन पहले भुगतान करते हैं क्योंकि हमारे पास सरप्लस नहीं है। इसलिए उन्हें अपना ऑर्डर सुरक्षित करना होता है। दूसरा चैनल बिगबास्केट, ब्लिंकिट और जोमैटो जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म हैं, जो लगभग ₹10 करोड़ का राजस्व देते हैं। हम एक डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड हैं, और भारत में पहली बार कोई डेयरी कंपनी डिजिटल-फर्स्ट हुई है। आम तौर पर डेयरी ऑफलाइन बाजार है, लेकिन हम सब कुछ ऑनलाइन बेचते हैं। लगभग 8-10% रेवेन्यू ही ऑफलाइन स्टोर से आता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66dd7349c9131.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ डेयरी स्टार्टअप अक्षयकल्प ऑर्गेनिक का इस वित्त वर्ष 400 करोड़ रुपये रेवेन्यू का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66dd7349c9131.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खांडसारी उद्योग पर कंट्रोल की तैयारी, शुगर कंट्रोल ऑर्डर 2024 से बढ़ेगा नियंत्रण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/preparations-to-control-sugar-industry-control-will-increase-with-sugar-control-order-2024.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 03 Sep 2024 20:39:39 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/preparations-to-control-sugar-industry-control-will-increase-with-sugar-control-order-2024.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार चीनी के साथ खांडसारी उद्योग को भी अब नियंत्रण के दायरे में लाने पर विचार कर रही है। इसके लिए शुगर (कंट्रोल) आर्डर 2024 लाया जाएगा जो शुगर (कंट्रोल) आर्डर 1966 और शुगर प्राइस (कंट्रोल) आर्डर 2018 का स्थान लेगा। नये आर्डर को लागू करने की प्रक्रिया के तहत 24 अगस्त को एक ड्राफ्ट आर्डर जारी किया गया है जिस पर संबंधित पक्षों को 23 सितंबर तक राय देनी है। नये आदेश के तहत पहली बार खांडसारी उद्योग को नियंत्रण के दायरे में लाया जा रहा है। इसके लिए चीनी की परिभाषा के तहत ओपन पैन की प्रक्रिया के जरिये बनने वाली खांडसारी शुगर, बूरा और सल्फर खांडसारी को भी शामिल किया गया है।</p>
<p>यह आदेश लागू होता है तो उत्तर प्रदेश जैसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य में नये सिरे से स्थापित हो रहे खांडसारी क्रैशर उद्योग के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं क्योंकि चीनी उद्योग पर लागू होने वाले नियंत्रण उन पर भी लागू हो सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रस्तावित आर्डर राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।</p>
<p>केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के तहत आने वाले <strong>डायरेक्ट्रेट ऑफ शुगर</strong> के सूत्रों ने रूरल वॉयस को बताया कि अभी तक खांडसारी उद्योग शुगर कंट्रोल आर्डर का हिस्सा नहीं था, लेकिन नये ड्राफ्ट आर्डर में 500 टन प्रतिदिन या उससे की पेराई क्षमता (टीसीडी) वाली खांडसारी इकाइयों को इसके तहत लाने का प्रस्ताव है। इसके चलते सरकार के पास अधिकार होगा कि जो नियंत्रण चीनी मिलों पर लागू हैं वह इन इकाइयों पर भी लागू किए जा सकेंगे। इसमें खांडसारी के भंडारण, परिवहन, बिक्री और मूल्य निर्धारण शामिल हो सकता है।</p>
<p>गन्ने की कीमत के मामले ने <strong>फेयर एंड रिम्यूनेरेटिव प्राइस (एफआरपी)</strong> का जो प्रावधान चीनी मिलों पर लागू है वह भी खांडसारी इकाइयों पर लागू हो सकता है। हालांकि, फिलहाल शुगरकेन कंट्रोल आर्डर, 1966 में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है इसलिए गन्ना आरक्षित क्षेत्र जैसे प्रावधान इन इकाइयों पर फिलहाल लागू होने की संभावना नहीं है। किसी भी क्षमता के पावर क्रैशर को स्थापित करने के लिए उसके ऊपर चीनी मिल से 7.5 किलोमीटर की दूरी होने का प्रावधान अभी भी लागू है। जबकि दो चीनी मिलों के बीच 15 किलोमीटर की दूरी का प्रावधान है।</p>
<p><strong>चीनी उद्योग पर बढ़ेगा नियंत्रण&nbsp;</strong></p>
<p><strong>ड्राफ्ट शुगर&nbsp;(कंट्रोल)&nbsp;ऑर्डर 2024</strong>&nbsp;के मसौदे में कहा गया है कि गन्ने से चीनी और इसके किसी भी सह-उत्पाद का उत्पादन केवल तभी किया जा सकता है जब इसके लिए लाइसेंस जारी किया गया हो और उसकी शर्तों का पालन किया जाए। फिलहाल, खांडसारी उद्योग को सरकार से लाइसेंस लेना जरूरी नहीं है। लेकिन शुगर&nbsp;(कंट्रोल)&nbsp;ऑर्डर 2024&nbsp;<span>लागू होने के बाद चीनी और सह-उत्पाद बनाने वाले क्रैशर्स को भी लाइसेंस लेना पड़ सकता है। </span></p>
<p>शुगर&nbsp;(कंट्रोल)&nbsp;ऑर्डर 2024 के जरिए केंद्र सरकार चीनी उद्योग पर नियंत्रण और रेगुलेशन का दायरा बढ़ाने का प्रयास कर रही है जिसका सबसे अधिक असर असंगठित क्षेत्र की खांडसारी इकाइयों पर पड़ेगा। यह आदेश चीनी के अलावा इसके सह-उत्पादों जैसे शीरा, एथेनॉल और बायोगैस आदि के उत्पादन के साथ-साथ इनकी बिक्री, भंडारण, पैकेजिंग और परिवहन पर भी लागू होगा।</p>
<p>प्रस्तावित शुगर कंट्रोल ऑर्डर के जरिए केंद्र सरकार चीनी उत्पादन के साथ-साथ चीनी और उसके सह-उत्पादों की बिक्री, <span>भंडारण</span>, <span>ढुलाई और दाम निर्धारण पर नियंत्रण बढ़ाना चाहती है। इसे लेकर चीनी उद्योग की भी अपनी चिंताएं हैं।&nbsp;</span><span>मसौदे में कहा गया है कि कोई भी उत्पादक या डीलर केंद्र द्वारा लिखित निर्देश के </span>बिना चीनी और इसके सह-उत्पादों की बिक्री या डिलिवरी नहीं कर सकेगा। किसी को भी परमिट के बिना चीनी और इसके सह-उत्पादों के ट्रांसपोर्ट की अनुमति नहीं होगी।</p>
<p><strong>खांडसारी इकइयों के लिए चुनौती</strong></p>
<p>देश के सबसे अधिक गन्ना उत्पादन उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पिछले कुछ बरसों ने नये उद्यमियों ने टेक्नोलॉजी और निवेश के जरिये नई खांडसारी इकाइयां स्थापित की हैं। जिसे एक नये ट्रेंड के रूप में देखा जा रहा है। जिले के फुगाना में ऐसी एक गुड़ व खांडसारी यूनिट स्थापित करने वाले <strong>यशपाल मलिक</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> का बताया कि नया शुगर (<span>कंट्रोल</span>) <span>ऑर्डर खांडसारी उद्योग के ऊपर सरकारी शिकंजा कस देगा जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों लोगों को रोजगार देने वाले कुटीर व लघु उद्योग का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। इस आदेश का कड़ा विरोध होगा और खांडसारी उद्योग संगठित होकर सरकार को अपना विरोध दर्ज कराएगा। हम खांडसारी इकाइयों के प्रतिनिधि संयुक्त रूप से सरकार के सामने अपना पक्ष रखेंगे जिसके लिए पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की खांडसारी इकाइयों के प्रतिनिधि एकजुट हो रहे हैं।</span></p>
<p><strong>चीनी उद्योग की चिंताएं&nbsp;</strong></p>
<p>वहीं <strong>चीनी उद्योग</strong> के सूत्रों ने रूरल वॉयस को बताया कि प्रस्तावित आर्डर में एथेनॉल समेत सभी सह उत्पादों से होने वाली आय को भी शामिल किया जाएगा। ऐसे में किसानों को बेहतर दाम की संभावना बनेगी। हालांकि उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नियंत्रण आदेश के मौजूदा प्रावधानों को देखते हुए हमें लग रहा है कि सरकार चीनी उद्योग को और अधिक नियंत्रित करना चाहती है। ड्राफ्ट आर्डर पर उद्योग संगठन संयुक्त रूप से अपनी राय देंगे। इसके लिए 14 सितंबर को पुणे में संबंधित संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक हो रही है जिसमें उद्योग की राय को तैयार किया जाएगा।</p>
<p>इस बैठक में निजी क्षेत्र की चीनी मिलों के संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा), सहकारी चीनी मिलों के संगठन नेशनल फेडरेशन ऑफ कोआपरेटिव शुगर फैक्टरीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ), ऑल इंडिया शुगर ट्रेडर्स एसोसिएशन (आईएस्टा) और अन्य संबंधित संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। नये आर्डर में चीनी की ट्रेडिंग करने वाले संस्थानों को भी नियंत्रण के तहत लाने का प्रस्ताव है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>उदारीकरण से यू-टर्न&nbsp;</strong></p>
<p>करीब तीन दशक तक उदारीकरण की नीति पर चलने के बाद केंद्र सरकार अब लग रहा है कि चीनी उद्योग पर नियंत्रण बढ़ाने की तरफ कदम बढ़ा रही है। जबकि दूसरी तरफ सरकार स्वरोजगार को बढ़ावा देने और इज ऑफ डूइंग बिजनेस का दावा करती है। ऐसे में शुगर&nbsp;(कंट्रोल)&nbsp;ऑर्डर 2024&nbsp;<span>एक विरोधाभासी कदम साबित हो सकता है। प्रस्तावित आदेश एक दशक पहले रंगराजन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर शुरू हुए चीनी उद्योग को नियंत्रण मुक्त करने के सिलसिले के भी खिलाफ है। </span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66d7275d287ac.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खांडसारी उद्योग पर कंट्रोल की तैयारी, शुगर कंट्रोल ऑर्डर 2024 से बढ़ेगा नियंत्रण ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66d7275d287ac.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[टेक्नोलॉजी और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से ढाई लाख करोड़ सालाना की इंटीग्रेटेड इंडस्ट्री बन गई पोल्ट्री फार्मिंग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/poultry-farming-now-an-integrated-industry-worth-rs-2.5-lakh-crore-annually-due-to-technology-and-contract-farming.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 14 Aug 2024 04:54:22 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/poultry-farming-now-an-integrated-industry-worth-rs-2.5-lakh-crore-annually-due-to-technology-and-contract-farming.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>राजनांदगांव, छत्तीसगढ़</strong></em></p>
<p>पोल्ट्री फार्मिंग और बिजनेस को लेकर कुछ आंकड़े आपको चौंका सकते हैं। हर हफ्ते देश के संगठित पोल्ट्री फार्म्स में 14 करोड़ चिक्स प्लेस होते हैं। यानी साल में करीब 728 करोड़ चिक्स। करीब दस फीसदी मोर्टेलिटी रेट्स को शामिल करने के बाद औसतन दो किलो की 650 करोड़ बर्ड हर साल बाजार में बिकने के लिए तैयार होती है। उनका कुल वजन करीब 1300 करोड़ किलो बैठता है। औसतन 200 रुपये किलो के खुदरा मूल्य के आधार पर पोल्ट्री का सालाना कारोबार ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच गया है। इससे पोल्ट्री फार्मिंग किसानों को 15 हजार करोड़ रुपये अधिक की कमाई हो रही है, जो उनको एक दिन के चूजे यानी डे ओल्ड चिक्स (डीओसी) के फार्म में आने से 40 से 45 दिन के साइकल में उसे दो किलो या उससे अधिक की बर्ड के रूप में तैयार करने के लिए ग्रोइंग चार्जेस (जीसी) और इंसेंटिव के रूप में मिलती है। डीओसी सप्लाई करने वाली इंटीग्रेटर कंपनी बर्ड को फार्म से ही खरीदारों को बेच देती है, जहां से यह देश भर के पोल्ट्री मार्केट्स में पहुंचती है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66bc53be54707.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>&nbsp;राजनांदगांव जिले के मुंडगांव स्थित हैचरीज में पोल्ट्री फार्म में भेजने के तैयार डे ओल्ड चिक (डीओसी)। फोटो: हरवीर सिंह, रूरल वॉयस</em></p>
<p>देश में कुछ दशक पहले तक मुर्गी पालन को छोटे और भूमिहीन किसानों द्वारा घर के पिछवाड़े की जाने वाली एक असंगठित फार्मिंग के रूप में ही देखा जाता था। बचे हुए खाने और मामूली फीड के सहारे मुर्गियों को तैयार कर बेचा जाता था। अब भी भूमिहीन किसानों के लिए बैकयार्ड पोल्ट्री की सरकारी योजनाओं के जरिए उनको आय के एक अतिरिक्त स्रोत देने के प्रयास जारी हैं। लेकिन जिस तरह से पोल्ट्री फार्मिंग एक बड़े कांट्रैक्ट फार्मिंग और इंटीग्रेटेड बिजनेस के रूप में स्थापित हुई है, उसके पीछे टेक्नोल़ॉजी, रिसर्च, निवेश और मार्केट का एक मिक्स है। बेहतर कमाई और कम जोखिम के चलते बड़े पैमाने पर किसान इनवार्यनमेंटली कंट्रोल्ड (ईसी) फार्म, सेमी ईसी और ओपन फार्म में निवेश कर मोटी कमाई की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यहां किसान को इंटीग्रेटर कंपनी के सहारे ही धंधा करना है। इसके लिए जमीन तो अधिक नहीं चाहिए, लेकिन बड़ी पूंजी की जरूरत है।</p>
<p>ऐसे ही एक किसान, मिलिंद उत्तलवार राजानंदगांव जिले के सुकुदेहान गांव में ब्रॉयलर फार्म चलाते हैं। चालीस साल के उत्तलवार का राजनांदगांव में इलेक्ट्रानिक्स उत्पादों का बिजनेस भी है। उन्होंने रूरल वॉयस को बताया कि वे छह साल से पोल्ट्री फार्मिंग कर रहे हैं। उन्होंने 13 हजार मुर्गियों की क्षमता वाले दो ईसी शेड स्थापित किये हैं। शेड और इक्विपमेंट पर उन्होंने करीब 60 लाख रुपये का निवेश किया जो 450-500 रुपये प्रति बर्ड बैठता है। इन फार्म को कंप्यूटर कंट्रोल्ड पैनल से संचालित किया जाता है जो डीओसी से लेकर मुर्गी के दो किलो वजन होने तक अलग-अलग समय की जरूरत के मुताबिक तापमान, नमी, हवा और फीड व पानी की आपूर्ति को नियंत्रित करता है।&nbsp;</p>
<p>इन शेड में चारे और पीने के पानी की आटोमैटिक लाइन (प्रत्येक 30 मुर्गियों के लिए एक पैन और 10-12 मुर्गियों के लिए एक पानी का निप्पल), एग्जॉस्ट और एयर सर्कुलेशन पंखे, कूलिंग पैड, लाइटिंग और डीजल ब्रूडर (शुरुआती कुछ दिनों में चूजों को गर्म रखने के लिए) हैं। मुर्गियों के बढ़ने के लिए अधिकतम तापमान पहले तीन दिनों में 32-34 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए, जो धीरे-धीरे 12-24 दिनों के दौरान 26-28 डिग्री और 35 दिनों के बाद 24 डिग्री या उससे कम हो जाता है।</p>
<p>मिलिंद ने रूरल वॉयस को बताया कि वे हर साल 26 हजार मुर्गियों के छह चक्र (साइकल) निकालते हैं। उन्हें हर बैच में दस लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है। इसमें दस रुपये प्रति बर्ड का बेसिक जीसी रेट होता है। कम फीड में ब्रॉयलर का अधिक वजन, कम मोर्टेलिटी रेट और बाजार में अधिक दाम मिलने पर कंपनी इंसेंटिव भी देती है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66bc51acaf1db.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>आईबी ग्रुप की राजनांदगांव जिले के मुंडगांव स्थित हैचरीज में हैचिंग प्रक्रिया में उपयोग होने वाली सैटर मशीन</em></p>
<p>मिलिंद का फार्म राजानंदगांव स्थित आईबी ग्रुप ने स्थापित किया है। सालाना 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाले आईबी ग्रुप की मालिकाना कंपनी एबीआईएस एक्सपोर्ट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड देश की इंटीग्रेटेड पोल्ट्री बिजनेस की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार है। राजनांदगांव मुख्यालय वाली एबीआईएस एक्सपोर्ट्स - जिसका पहला नाम इसके संस्थापकों आमिर, बहादुर, इकबाल और सुल्तान अली के नाम के पहले अक्षर से लिया गया है।</p>
<p>एबीआईएस के प्रेसिडेंट डॉ. आरके जायसवाल ने रूरल वॉयस को बताया कि कंपनी के संस्थापक एवं चेयरमैन सुल्तान अली और संस्थापक एवं मैनेजिंग डायरेक्टर बहादुर अली ने 1982-83 में राजनांदगांव में 200 बर्ड्स के छोटे से फार्म और रिटेल शॉप से पोल्ट्री बिजनेस की शुरुआत की थी। वहां से आगे बढ़ते हुए एबीआईएस देश की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड पोल्ट्री बिजनेस कंपनियों में शुमार हो गई।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66bc50e053bc3.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>एबीआईएस के संस्थापक एवं मैनेजिंग डायरेक्टर बहादुर अली</em></p>
<p>कंपनी ईसी और ओपन फार्म किसानों को डीओसी की आपूर्ति करने के साथ ही फीड, मेडिसिन, क्लीनिंग मेटीरियल और वेटेरिनरी सर्विस देती है। यह किसानों से ब्रॉयलर्स वापस लेकर उनकी बिक्री करती है। यानी किसान को केवल डीओसी को बिक्री के लायक तैयार करने तक का काम करना है। उसका फार्म को चलाने और रखरखाव पर ही खर्च होता है। उसे तैयार बर्ड्स की मार्केटिंग की कोई चिंता नहीं होती है। कंपनी ने सभी किसानों और बर्ड्स खरीदने वाले कारोबारियों को एप के माध्यम से जोड़ा हुआ है। किसानों की एप पर उनका हर दिन का डाटा फीड होता है। जबकि खरीदारों के एप पर उनके नजदीक के फार्म में उपलब्ध मार्केटेबल बर्ड्स की जानकारी मिलती है।</p>
<p>राजनांदगांव जिले की ही डोंगरगढ़ तहसील के देवकट्टा गांव के रहने वाले 38 वर्षीय किसान रघुवेंद्र वर्मा के पास 2.5 एकड़ जमीन है, जिसमें से एक एकड़ में वह खेती करते हैं। बाकी 1.5 एकड़ जमीन पर वे दो पर्यावरण-नियंत्रित (ईसी) पोल्ट्री शेड में ब्रॉयलर मुर्गियां पालते हैं। एक की क्षमता11,000 और दूसरे शेड की 9,000 बर्ड्स की है। रूरल वॉयस से बातचीत में राघवेंद्र कहते हैं कि 35-45 ग्राम के एक दिन के चूजे (डीओसी) से लेकर उनके लगभग 2.5 किलोग्राम वजन तक की बर्ड तैयार होने में लगभग 37 दिन लगते हैं।</p>
<p>वर्मा भी साल में छह चक्र चलाते हैं, जिनमें से प्रत्येक लगभग 60 दिनों का होता है। इसमें कचरा हटाने, फर्श की सफाई और उपकरणों की प्रेशर वॉशिंग के लिए 20 दिनों का &lsquo;डाउनटाइम&rsquo; भी शामिल है। पिछले साल (मध्य मई 2023 से मध्य मई 2024 तक) उनके छह बैच में कुल 3,20,865 किलोग्राम वजन की मुर्गियां तैयार हुईं।</p>
<p><strong>कांट्रेक्ट फार्मिंग की सफलता</strong><br />वर्मा के फार्म में डोंगरगढ़ तहसील के मुंडगांव में आईबी ग्रुप की ब्रॉयलर हैचरी से डीओसी आते हैं। यह कंपनी उन्हें मुर्गियों के लिए फीड और फार्म की सफाई के केमिकल्स (कॉपर सल्फेट, फॉर्मेलिन, ब्लीचिंग पाउडर और हाइड्रोक्लोरिक एसिड) भी उपलब्ध कराती है।</p>
<p>ब्रॉयलर फीड तीन तरह के होते हैं। इनमें प्री-स्टार्टर (जब चूजे 12 दिनों में 400 ग्राम के हो जाते हैं), स्टार्टर (12 से 25 दिन, जब वे 1,300 ग्राम तक के हो जाते हैं) और फिनिशर (25 दिनों के बाद) शामिल हैं। कुल मिलाकर एक मुर्गी दो किलोग्राम तक वजन बढ़ने के लिए लगभग 3,300 ग्राम फीड और 2.5 किलोग्राम के लिए 4,000 ग्राम फीड खाती है।&nbsp;</p>
<p>वर्मा को मुर्गियां पालने के लिए कम से कम 10 रुपये प्रति किलोग्राम मिलते हैं। जो ईसी फार्म के ग्रोइंग चार्ज का बेस रेट (आधार दर) है। बाजार में कीमत बढ़ने, कम मृत्यु दर, औसत से अधिक वजन और कम चारे की खपत के लिए उन्हें भी इन्सेंटिव मिलता है। पिछले साल वर्मा को 14.89 रुपये प्रति किलोग्राम का औसत रेट मिला। इस तरह 3,20,865 किलोग्राम के लिए उनकी कुल आय 47.78 लाख रुपये रही। मजदूरी, बिजली, डीजल और चावल की भूसी (चूजों के लिए बेड के तौर पर इस्तेमाल की जाती है) पर होने वाले खर्च को घटाने के बाद, जो लगभग 2.5 लाख रुपये प्रति चक्र या 15 लाख रुपये सालाना है, उन्होंने 32-33 लाख रुपये कमाए। वर्मा ने दो पर्यावरण-नियंत्रित शेड पर 90 लाख रुपये का निवेश किया है।&nbsp;</p>
<p><strong>पर्यावरण नियंत्रित बनाम ओपन फार्म</strong><br />खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की खैरागढ़ तहसील के शिकारी टोला गांव के पांच एकड़ के किसान दिगेश्वर सिन्हा (30) के पास 2,500 मुर्गियों के लिए 3,300 वर्ग फुट का छोटा सा ओपन पोल्ट्री हाउस है। एक सामान्य शेड, फीडर और ड्रिंकर, पंखे, स्प्रिंकलर और गर्मी से बचने के लिए जूट के पर्दे, लकड़ी के बुरादे से जलने वाले बुखारी या गैस ब्रूडर उनके फार्म में है। दिगेश्वर सिन्हा ने रूरल वॉयस को बताया कि उन्होंने इस ओपन फार्म पर केवल नौ लाख रुपये है। एक गैस ब्रूडर 800-1,500 मुर्गियों के लिए पर्याप्त होता है, जबकि डीजल ब्रूडर 5,000 बर्ड्स के लिए पर्याप्त है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66b8c8363ab80.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की खैरागढ़ तहसील के शिकारी टोला गांव के किसान दिगेश्वर सिन्हा । फोटो: हरवीर सिंह, रूरल वॉयस</em></p>
<p>ओपन फार्म में प्रत्येक चूजे के लिए अधिक जगह की आवश्यकता होती है (ईसी शेड में 0.65 वर्ग फुट की तुलना में 1.3-1.4 वर्ग फुट)। यहां पाली जाने वाली मुर्गियों की मृत्यु दर आम तौर पर अधिक होती है (10-12% बनाम 3-5%)। मुर्गियों का वजन 2 किलोग्राम (34-35 बनाम 32-33 दिन) और 2.5 किलोग्राम होने में भी अधिक समय लगता है।</p>
<p>हालांकि, सिन्हा अपने परिश्रम से फार्म का प्रबंधन अच्छी तरह करते हैं। पिछले चक्र में 2,520 मुर्गियों में से केवल 71 की मृत्यु हुई। उनके यहां से बिकने वाली मुर्गियों का कुल वजन 5,954 किलोग्राम, यानी औसत 2.43 किलोग्राम था। उनके यहां 9,480 किलोग्राम फीड की खपत हुई। इस तरह उनका कन्वर्जन अनुपात 1.59 था। यह पर्यावरण-नियंत्रित शेड के लिए रहने वाली 1.45-1.6 की सीमा के भीतर था। ओपन फार्म जगहों के लिए कम से कम पालन शुल्क 8 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि आईबी ग्रुप ने उन्हें 13.25 रुपये प्रति किलोग्राम का भुगतान किया। कुल 78,890 रुपये की आय में से 21,000 रुपये का खर्च घटाने के बाद उस बैच से उनका मुनाफा लगभग 58,000 रुपये रहा। वे भी एक साल में छह साइकल (चक्र) चलाते हैं।</p>
<p>एबीआईएस एक्सपोर्ट्स के साथ देश भर में उत्तलवार, वर्मा और सिन्हा जैसे 30,000 से ज़्यादा ब्रॉयलर किसान हैं। उन्हें एक दिन के चूजे (प्रत्येक की कीमत 28 रुपये, उन्हें गम्बोरो/संक्रामक बर्सल रोग और न्यूकैसल रोग के लिए पहले से टीका लगाया जाता है), चारा (40 रुपये प्रति किलोग्राम) और तकनीकी इनपुट (हर चक्र के दौरान 5-6 बार सुपरवाइजर आते हैं) दिए जाते हैं। कंपनी पूरी तरह विकसित मुर्गियों की भी मार्केटिंग करती है जिन्हें व्यापारी सीधे उनके फार्म से उठाते हैं।</p>
<p><strong>ब्रॉयलर इंटीग्रेटर - संगठित पोल्ट्री फार्मिंग</strong><br />देश में इंटीग्रेडेट पोल्ट्री फार्मिंग को एक कामयाब कांट्रैक्ट फार्मिंग में तब्दील करने की शुरुआत कोयंबटूर स्थित सुगुना फूड्स ने की थी। पूरे भारत में ब्रॉयलर फार्मों में हर सप्ताह लगभग 14 करोड़ डीओसी दिए जाते हैं। इनमें आईबी ग्रुप/एबीआईएस और सुगुना हर सप्ताह एक से 1.1 करोड़ डीओसी की सप्लाई करती हैं। अन्य प्रमुख ब्रॉयलर इंटीग्रेटर में वेंकटेश्वर हैचरीज (वीएच) ग्रुप, बारामती एग्रो और प्रीमियम चिक फीड्स (दोनों पुणे में) और शालीमार ग्रुप (कोलकाता) हैं। प्रत्येक समूह हर सप्ताह 30-60 लाख चूजों की सप्लाई करता है। आईबी समूह के 30,000 किसानों में से लगभग 40% के पास पर्यावरण-नियंत्रित शेड हैं। हर शेड में 9-10 हजार से लेकर 24-25 तक चूजे होते हैं।&nbsp;</p>
<p>ब्रॉयलर उद्योग आज यकीनन भारत का सबसे संगठित और इंटीग्रेटेड कृषि व्यवसाय है। पोल्ट्री इंटीग्रेटर्स के पास अपने स्वयं के फीड प्लांट के साथ कॉमर्शियल ब्रॉयलर हैचरी भी होती हैं। आईबी/एबीआईएस के पास 10 हैचरी हैं - दो राजनांदगांव में हैं। इनके अलावा राजपुरा (पंजाब), मुजफ्फरपुर (बिहार), जगदीशपुर (उत्तर प्रदेश), जलपाईगुड़ी (पश्चिम बंगाल), नागांव (असम), जाजपुर (ओडिशा), औरंगाबाद (महाराष्ट्र) और कोलार (कर्नाटक) में हैचरीज हैं। इनमें लगाई गई मशीनों में हर साल चूजे तैयार करने के लिए 65 करोड़ से ज्यादा अंडे लोड करने की क्षमता है। डीओसी को 12-15 घंटों के भीतर ब्रॉयलर फार्म तक पहुंचा दिया जाता है। कंपनी के पास आठ फीड प्लांट हैं। बदनावर (मध्य प्रदेश) में 2,000 टन प्रतिदन क्षमता वाली भारत की सबसे बड़ी सोयाबीन प्रसंस्करण इकाई भी है। यह डी-ऑयल्ड केक (सोयामील) की आपूर्ति करती है जो पोल्ट्री फीड में मुख्य प्रोटीन घटक है।</p>
<p>आईबी ग्रुप के ब्रॉयलर हैचरी आपरेशन के हेड अमन भाटिया ने रूरल वॉयस को बताया कि पेरेंट फार्म से लाये गये मुर्गियों के अंडों को कृत्रिम रूप से सेया जाता है। पेरेंट फार्म में मादा और नर दोनों होते हैं। ये अंडे 18.5 दिनों के लिए सही तापमान और नमी पर &lsquo;सेटर&rsquo; मशीनों के अंदर रखे जाते हैं। इनके भीतर का वातावरण मुर्गियों द्वारा दिए जाने वाले प्राकृतिक वातावरण के समान होता है। वहां से, उन्हें &lsquo;हैचर&rsquo; मशीनों में भेज दिया जाता है, जहां 2.5 दिनों के बाद चूजे बाहर आते हैं।</p>
<p>भाटिया ने बताया कि आईबी की सभी हैचरी मशीनें यूरोपीय कंपनियों - पीटरसाइम (बेल्जियम), हैचटेक और रॉयल पास रिफॉर्म (दोनों नीदरलैंड) से आयात की गई हैं। हैचरी में जाने से पहले अंडे (मुर्गियों में नहीं) में वैक्सीनेशन एक अलग 'इन-ओवो' मशीन के द्वारा किया जाता है। यानी डीओसी के अंडे से बाहर आने के पहले इनका वैक्सीनेशन हो चुका होता है।</p>
<p><strong>बैकवर्ड और फॉरवर्ड इंटीग्रेशन&nbsp;</strong><br />सुगुना, आईबी/एबीआईएस और वीएच जैसी कंपनियों के पास पेरेंट फार्म और ब्रॉयलर हैचरी होती हैं। पेरेंट फार्म में मादा चूजों को 24-25 सप्ताह तक पाला जाता है और फिर 64-68 सप्ताह तक अंडे देने के लिए उनका संभोग/गर्भाधान किया जाता है। ब्रॉयलर हैचरी में अंडे डीओसी में बदल जाते हैं। कंपनियों के पास मुर्गे और मुर्गियों के ग्रैंड-पेरेंट (जीपी) फार्म भी हैं, जो पेरेंट स्टॉक का उत्पादन करते हैं।</p>
<p>आईबी ग्रुप के पास राजनांदगांव जिले के शिवपुरी और करियागोंडी में दो जीपी फार्म-कम-हैचरी हैं। आईबी ग्रुप अपने जीपी चूजे ब्रॉयलर जेनेटिक्स में विश्व बाजार की अग्रणी कंपनी एविएजन से लेता है। अमेरिका के हंट्सविले स्थित मुख्यालय वाली कंपनी एविएजन का तमिलनाडु में कोयंबतूर के पास उदुमलपेट में एक ग्रेट-ग्रैंड-पैरेंट (जीजीपी) फार्म और हैचरी है। यहां यह अपने &lsquo;रॉस 308 एपी&rsquo; ब्रॉयलर नस्ल के जीपी स्टॉक चूजों का उत्पादन करती है। जीजीपी को बढ़ाने और उनके अंडों को सेने के लिए शुद्ध वंशावली वाले स्टॉक चूजों का एविएजन इंडिया अमेरिका से आयात करती है।</p>
<p>भारत में उत्पादित और बेची जाने वाली ब्रॉयलर मुर्गियां मुख्य रूप से रॉस, हबर्ड और कॉब नाम की विदेशी वंशावली (जेनेटिक्स) स्टॉक की होती हैं। रॉस और हबर्ड के जेनेटिक्स का स्वामित्व एविएजन के पास है, जबकि वीएच समूह का अमेरिकी पोल्ट्री जेनेटिक्स कंपनी कॉब-वेंट्रेस के साथ संयुक्त उद्यम है। इन वंशावली की मुर्गियां भारतीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल होती हैं। सुगुना फूड्स ने अपनी खुद की &lsquo;सनब्रो&rsquo; ब्रॉयलर नस्ल विकसित की है।</p>
<p>भारतीय ब्रॉयलर उद्योग काफी हद तक बैकवर्ड इंटीग्रेटेड है। इस मामले में यह डेयरी से भी अधिक इंटीग्रेटेड है। लेकिन यह बिजनेस डेयरी की तरह फॉरवर्ड इंटीग्रेटेड नहीं है। डेयरियां ब्रांडेड पाउच दूध, दही, घी, मक्खन, पनीर और आइसक्रीम आदि बेचती हैं, जबकि ब्रॉयलर मुर्गियों को मुख्य रूप से थोक में पोल्ट्री मार्केट में बेचा जाता है, जहां से यह सड़कों के किनारे चलने वाली रिटेल दुकानों में भी पहुंचती हैं।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66bc529947021.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>एबीआईएस एक्सपोर्ट्स की डायरेक्टर जोया आफरीन आलम</em></p>
<p>एबीआईएस एक्सपोर्ट्स की डायरेक्टर जोया आफरीन आलम ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि हम अब फॉरवर्ड इंटीग्रेशन पर जोर दे रहे है। हमें रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट मीट के अलावा ड्रेस्ड, चिल्ड और पैक्ड चिकन की ब्रांडेड बिक्री की ओर बढ़ना होगा। इसके लिए उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव लाने की आवश्यकता है और इसमें समय लग सकता है। जोया ने बताया कि हम फॉरवर्ड इंटीग्रेशन के लिए दो प्रोसेसिंग प्लांट लगा रहे हैं। इनमें एक प्लांट महाराष्ट्र और दूसरा आंध प्रदेश में होगा। प्रत्येक संयंत्र में 12 हजार बर्ड प्रति घंटा की प्रसंस्करण क्षमता होगी। इनमें बोन ड्रेसिंग, चिलिंग और पैकेजिंग की सारी प्रक्रिया पूरी कर इनको बाजार में भेजा जाएगा।एफएसएसएआई के सभी मानक पूरा करने के साथ ही हमारे उत्पादों की ट्रेसिंग भी संभव होगी ताकि उपभोक्ता का भरोसा बढ़ाया जा सके। ट्रेसिंग से उपभोक्ता जान सकता है कि वह जो उत्पाद खरीद रहा है वह किस फार्म से आया है। हम साल 2026 तक इन संयंत्रों को शुरू करने की योजना पर काम कर रहे हैं। इन संयंत्रों के शुरू होने से पोल्ट्री बिजनेस में हम फॉरवर्ड इंटीग्रेशन को मजबूत कर सकेंगे।</p>
<p>इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि पोल्ट्री बिजनेस को डेयरी उद्योग की तरह फारवर्ड इंटीग्रेशन को बढ़ावा देना होगा। इस मामले में यह अभी उस दौर में जो जिसमें डेयरी उद्योग आठवें दशक में था। फारवर्ड इंटीग्रेशन बढ़ने से जहां पोल्ट्री कंपनियों की प्रति बर्ड अधिक कमाई हो सकेगी वहीं इसका फायदा पोल्ट्री फार्मर्स और उपभोक्ता दोनों को होगा। फिलहाल पोल्ट्री बिजनेस का बैकवर्ड इंटीग्रेशन तो करीब 90 फीसदी तक पहुंच गया है जबकि फॉरवर्ड इंटीग्रेशन का स्तर अभी पांच फीसदी के करीब ही है।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66bc6b3d80071.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ टेक्नोलॉजी और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से ढाई लाख करोड़ सालाना की इंटीग्रेटेड इंडस्ट्री बन गई पोल्ट्री फार्मिंग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66bc6b3d80071.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोनालीका ने 4 महीनों में बेचे 50 हजार ट्रैक्टर, घरेलू बाजार में बढ़ी हिस्सेदारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sonalika-sold-50-thousand-tractors-in-4-months-increased-share-in-the-domestic-market.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 10 Aug 2024 12:45:00 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sonalika-sold-50-thousand-tractors-in-4-months-increased-share-in-the-domestic-market.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ट्रैक्टर निर्माता कंपनी सोनालीका ने वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही की शुरुआत में ही <strong>50 हजार ट्रैक्टरों</strong> की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है। अप्रैल से जुलाई 2024 के बीच कंपनी ने कुल <strong>51,268 ट्रैक्टरों की बिक्री</strong> की है, जो घरेलू बाजार में एक मजबूत विकास का संकेत है। कंपनी ने घरेलू उद्योग में बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपनी बाजार हिस्सेदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।</p>
<p>कृषि क्षेत्र के लिए केंद्र सरकार द्वारा बजट 2024 में 1.52 लाख करोड़ रुपये के प्रावधान से उद्योग का योगदान बढ़ने की संभावना है, जिससे उन्नत कृषि मशीनरी की मांग में भी वृद्धि होगी। इस संदर्भ में सोनालीका ने 20 से 120 एचपी तक की सबसे बड़ी ट्रैक्टर रेंज पेश की है, जिसमें हैवी ड्यूटी माइलेज (एचडीएम), सीआरडीएस इंजन, मल्टी-स्पीड ट्रांसमिशन, और उन्नत 5जी हाइड्रोलिक्स जैसी उन्नत तकनीकें शामिल हैं। ये ट्रैक्टर भारतीय कृषि के उज्ज्वल भविष्य को आकार देने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।</p>
<p>कंपनी के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए, <strong>इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर रमन मित्तल</strong> ने कहा, "हम 50 हजार ट्रैक्टरों की बिक्री का आंकड़ा पार करने पर बेहद उत्साहित हैं। हमने जुलाई 2024 तक 51,268 ट्रैक्टरों की बिक्री हासिल की है, जो हमारे मजबूत दृष्टिकोण और घरेलू उद्योग में बेहतर प्रदर्शन का प्रमाण है। हमारी इन-हाउस उत्पादन क्षमताएं हमें बाजार और ग्राहक की आवश्यकताओं के अनुसार ट्रैक्टरों को अनुकूलित करने की शक्ति देती हैं, जिससे हम नए बाजारों में तेजी से प्रवेश कर रहे हैं।"</p>
<p>कंपनी ने भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं, क्योंकि ट्रैक्टर उद्योग आने वाले महीनों में अपने सबसे बड़े सीजन की तैयारी कर रहा है। सोनालीका का नवीनतम प्रदर्शन ब्रांड की गति को और भी मजबूत बना रहा है, जिससे कंपनी का घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में स्थान और भी सुदृढ़ हो रहा है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66b7122c4db11.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोनालीका ने 4 महीनों में बेचे 50 हजार ट्रैक्टर, घरेलू बाजार में बढ़ी हिस्सेदारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66b7122c4db11.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जुलाई में ट्रैक्टरों की बिक्री में 12 फीसदी की गिरावट, सोनालीका&amp;#45;जॉन डियर की सेल बढ़ी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/tractor-sales-declined-by-12-percent-in-july-2024-sonalika-john-deere-sales-increased.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 05 Aug 2024 17:09:32 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/tractor-sales-declined-by-12-percent-in-july-2024-sonalika-john-deere-sales-increased.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जुलाई 2024 में देश में ट्रैक्टरों की खुदरा बिक्री में <strong>11.94 फीसदी (करीब 12 फीसदी)</strong> की गिरावट आई है। जुलाई 2024 में कुल 79,970 ट्रैक्टर बेचे गए, जबकि पिछले साल जुलाई 2023 में 90,821 ट्रैक्टर बिके थे। यह गिरावट प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों के लिए चिंता का विषय है। जुलाई में महिंद्रा, सोनालिका, टैफे समेत तमामा ट्रैक्टर कंपनियों की ब्रिकी पिछले वर्ष की तुलना में घटी है। पिछला साल भी कमजोर मानसून के कारण ट्रैक्टर बिक्री के लिए अच्छा नहीं रहा था। हालांकि, इस साल सामान्य मानसून की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे आने वाले महीनों में बिक्री में सुधार की संभावना है।</p>
<p><strong>फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल एसोसिएशन</strong> के जुलाई 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, ट्रैक्टर कंपनियों की बिक्री पिछले साल की तुलना में कम हुई है। <strong>महिंद्रा एंड महिंद्रा</strong> की बिक्री जुलाई 2024 में 11.92 फीसदी घटी है। जुलाई में कंपनी ने 18,422 ट्रैक्टर बेचे, जो जुलाई 2023 में बेचे गए 20,914 ट्रैक्टरों के मुकाबले कम है। महिंद्रा एंड महिंद्रा की बाजार हिस्सेदारी जुलाई 2024 में 23.04 फीसदी रही, जो जुलाई 2023 में 23.03 फीसदी थी।&nbsp;</p>
<p>महिंद्रा की <strong>स्वराज डिविजन</strong> की बिक्री भी जुलाई में 0.72 फीसदी कम हुई। जुलाई 2024 में कंपनी ने 16,265 ट्रैक्टर बेचे, जबकि पिछले साल जुलाई में 16,383 ट्रैक्टर बेचे थे। हालांकि, स्वराज ट्रैक्टर की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 20.34 फीसदी हो गई, जो पिछले साल 18.04 फीसदी थी।</p>
<p><strong>टैफे लिमिटेड, एस्कॉर्ट्स ट्रैक्टर्स, आयशर ट्रैक्टर्स, सीएनएच इंडस्ट्रियल (इंडिया) और कुबोटा ट्रैक्टर्स</strong>की&nbsp;बिक्री में भी गिरावट आई है। टैफे ने जुलाई 2024 में 7,884 ट्रैक्टर बेचे, जबकि जुलाई 2023 में 12,420 ट्रैक्टर बेचे थे। <strong>एस्कॉर्ट्स</strong> ने जुलाई 2024 में 8,274 ट्रैक्टर बेचे, जो पिछले साल जुलाई में बेचे गए 8,534 ट्रैक्टरों की तुलना में कम है। <strong>आयशर ट्रैक्टर्स</strong> ने जुलाई 2024 में 5,420 ट्रैक्टर बेचे, जबकि जुलाई 2023 में 6,796 ट्रैक्टर बचे थे।&nbsp;</p>
<div class="flex flex-grow flex-col max-w-full">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="e4c7a85e-533c-4719-8498-90f7e929ea7d" dir="auto" class="min-h-[20px] text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-pre-wrap break-words [.text-message+&amp;]:mt-5 overflow-x-auto">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p><strong>सीएनएच इंडस्ट्रियल (इंडिया)</strong> ने जुलाई 2024 में 3,018 ट्रैक्टर बेचे, जो पिछले साल जुलाई में बेचे गए 3,191 ट्रैक्टरों के मुकाबले कम है। <strong>कुबोटा ट्रैक्टर्स</strong> ने जुलाई 2024 में 1,461 ट्रैक्टर बेचे, जबकि पिछले साल 1,876 ट्रैक्टर बेचे थे। वहीं, इन कंपनियों के अलावा <strong>अन्य ट्रैक्टर कंपनियों की बिक्री</strong> भी कम रही है। जुलाई 2024 में अन्य कंपनियों की बिक्री 1,834 यूनिट रही। जबकि, जुलाई 2023 में यह 4,115 यूनिट थी।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p><strong>सोनालीका-जॉन डियर की बिक्री बढ़ी&nbsp;</strong></p>
<p><strong>सोनालीका ट्रैक्टर्स</strong> की बिक्री जुलाई 2024 में बढ़ी है। कंपनी ने जुलाई में 11,141 ट्रैक्टर बेचे, जो पिछले साल जुलाई में बेचे गए 11,063 ट्रैक्टरों से अधिक है। सोनालीका की बाजार हिस्सेदारी भी बढ़कर 13.93 फीसदी हो गई, जो पिछले साल 12.18 फीसदी थी। इसी तरह, <strong>जॉन डियर</strong> ट्रैक्टर कंपनी की बिक्री भी जुलाई में बढ़ी है। कंपनी ने 7.82 फीसदी बजारा हिस्सेदारी के साथ जुलाई 2024 में कुल 6,251 ट्रैक्टर बेचे हैं। पिछले साल कंपनी ने 6.09 फीसदी हिस्सेदारी के साथ 5,529 ट्रैक्टर की बिक्री की थी।</p>
<table border="1" style="border-collapse: collapse; width: 100%; height: 321px;">
<tbody>
<tr style="height: 47px;">
<td style="width: 24.565%; text-align: center; height: 47px;">
<p><strong>ट्रैक्टर कंपनी&nbsp;</strong></p>
</td>
<td style="width: 19.833%; text-align: center; height: 47px;"><strong>&nbsp;जुलाई 2024 में बिक्री&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 18.7717%; text-align: center; height: 47px;"><strong>&nbsp;जुलाई 2024 में बाजार हिस्सेदारी&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 17.1712%; text-align: center; height: 47px;"><strong>&nbsp;जुलाई 2023 में बिक्री&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 19.659%; text-align: center; height: 47px;"><strong> जुलाई 2023 में बाजार हिस्सेदारी&nbsp;</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="width: 24.565%; height: 47px; text-align: center;">
<p><strong>महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड</strong></p>
</td>
<td style="width: 19.833%; height: 47px; text-align: center;">
<p>18,422&nbsp; &nbsp;</p>
</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 47px; text-align: center;">23.04%</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 47px; text-align: center;">20,914</td>
<td style="width: 19.659%; height: 47px; text-align: center;">23.03%</td>
</tr>
<tr style="height: 67px;">
<td style="width: 24.565%; height: 67px; text-align: center;">
<p><strong>महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड (स्वराज</strong></p>
<strong>डिवीजन) </strong></td>
<td width="64" style="width: 19.833%; height: 67px; text-align: center;">16,265&nbsp;</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 67px; text-align: center;">20.34%&nbsp;</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 67px; text-align: center;">16,383&nbsp;</td>
<td width="64" style="width: 19.659%; height: 67px; text-align: center;">18.04%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 24.565%; height: 20px; text-align: center;"><strong>इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड (सोनालिका ट्रैक्टर)</strong></td>
<td style="width: 19.833%; height: 20px; text-align: center;">11,141&nbsp;</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 20px; text-align: center;">13.93%&nbsp;</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 20px; text-align: center;">11,063&nbsp;</td>
<td width="64" style="width: 19.659%; height: 20px; text-align: center;">12.18%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 24.565%; height: 20px; text-align: center;"><strong>एस्कॉर्ट्स लिमिटेड&nbsp;</strong></td>
<td width="64" style="width: 19.833%; height: 20px; text-align: center;">8,274&nbsp;</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 20px; text-align: center;">10.35%&nbsp;</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 20px; text-align: center;">8,534&nbsp;</td>
<td width="64" style="width: 19.659%; height: 20px; text-align: center;">9.40%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 24.565%; height: 20px; text-align: center;"><strong>टैफे लिमिटेड </strong></td>
<td style="width: 19.833%; height: 20px; text-align: center;">7,884&nbsp;</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 20px; text-align: center;">9.86%&nbsp;</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 20px; text-align: center;">12,420&nbsp;</td>
<td width="64" style="width: 19.659%; height: 20px; text-align: center;">13.68%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 24.565%; height: 20px; text-align: center;"><strong>जॉन डीरे इंडिया प्राइवेट लिमिटेड </strong></td>
<td style="width: 19.833%; height: 20px; text-align: center;">6,251&nbsp;</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 20px; text-align: center;">7.82%&nbsp;</td>
<td width="64" style="width: 17.1712%; height: 20px; text-align: center;">5,529&nbsp;</td>
<td style="width: 19.659%; height: 20px; text-align: center;">6.09%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 24.565%; height: 20px; text-align: center;"><strong>आयशर ट्रैक्टर्स </strong></td>
<td style="width: 19.833%; height: 20px; text-align: center;">5,420&nbsp;</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 20px; text-align: center;">6.78%&nbsp;</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 20px; text-align: center;">6,796</td>
<td style="width: 19.659%; height: 20px; text-align: center;">7.48%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 24.565%; height: 20px; text-align: center;">
<p><strong>कुबोटा एग्रीकल्चरल मशीनरी इंडिया</strong></p>
<strong>प्राइवेट लिमिटेड </strong></td>
<td style="width: 19.833%; height: 20px; text-align: center;">1,461&nbsp;</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 20px; text-align: center;">1.83%</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 20px; text-align: center;">1,876&nbsp;</td>
<td width="64" style="width: 19.659%; text-align: center; height: 20px;">2.07%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 24.565%; height: 20px; text-align: center;"><strong>अन्य </strong></td>
<td style="width: 19.833%; height: 20px; text-align: center;">1,834</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 20px; text-align: center;">2.29%&nbsp;</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 20px; text-align: center;">4,115&nbsp;</td>
<td width="64" style="width: 19.659%; text-align: center; height: 20px;">4.53%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 24.565%; height: 20px; text-align: center;"><strong>कुल&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 19.833%; height: 20px; text-align: center;">79,970</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 20px; text-align: center;">100%</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 20px; text-align: center;">90,821</td>
<td width="64" style="width: 19.659%; text-align: center; height: 20px;">100%</td>
</tr>
</tbody>
</table> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6662f2c59169a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जुलाई में ट्रैक्टरों की बिक्री में 12 फीसदी की गिरावट, सोनालीका-जॉन डियर की सेल बढ़ी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6662f2c59169a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश के चीनी उत्पादन में 6.95 लाख टन की गिरावट का अनुमान, चीनी उत्पादन 333 लाख टन रहेगा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/estimated-decline-of-6.95-lakh-tonnes-in-the-countrys-sugar-production-sugar-production-will-be-333-lakh-tonnes..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 30 Jul 2024 19:52:34 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/estimated-decline-of-6.95-lakh-tonnes-in-the-countrys-sugar-production-sugar-production-will-be-333-lakh-tonnes..html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंडियन शुगर मिल्स एंड बॉयो इनर्जी&nbsp; मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार शुगर सीजन 2024-25 में चीनी उत्पादन में करीब सात लाख टन चीनी उत्पादन गिरावट का अनुमान है। जो चालू सीजन के मुकाबले करीब दो फीसदी कम है। इस्मा के मुताबिक जून 2024 के अंत में प्राप्त सैटेलाइट सर्वे के आधार पर भारत में गन्ने का रकबा 56.08 लाख हेक्टेयर होने का अनुमान है जो चालू शुगर सीजन 2023-24 में रहे 59.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की तुलना में छह फीसदी कम है।&nbsp;</p>
<p>इस्मा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शुगर सीजन 2024-25 में भारत का कुल चीनी उत्पादन 333 लाख टन (एथेनॉल के लिए डाइवर्जन के बिना) रहने का अनुमान है। जबकि चालू शुगर सीजन 2023-24 में देश का चीनी उत्पादन 339.95 लाख टन (एथेनॉल के लिए डाइवर्जन के बिना) रहने का अनुमान है। इस प्रकार चालू शुगर सीजन के मुकाबले अगले सीजन में देश का चीनी उत्पादन 6.95 लाख टन यानी करीब दो फीसदी घट सकता है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_66a8f703a9e3a.jpg" alt="" /></p>
<p>उत्तर प्रदेश में गन्ने की मौजूदा फसल की स्थिति मजबूत बनी हुई है। इस्मा के अनुसार, अगले सीजन में यूपी में गुड़ और खांडसारी इकाइयों में गन्ने की खपत का रुझान पिछले वर्ष की तुलना में कम रहने की उम्मीद है, जिससे चीनी उत्पादन में सकारात्मक योगदान मिलेगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_66a8f71d394e5.jpg" alt="" /></p>
<p>महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना क्षेत्र में क्रमशः लगभग 13 फीसदी और 8 फीसदी की कमी आई है। जिसका मुख्य कारण पिछले वर्ष प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में कम वर्षा है। हालांकि, चालू वर्ष में अच्छी बारिश हुई है, जो सामान्य से लगभग 30 फीसदी अधिक है, तथा शेष मानसून के लिए सकारात्मक पूर्वानुमान है। इससे गन्ना उत्पादकता और चीनी रिकवरी में वृद्धि का अनुमान है, जिससे गन्ना क्षेत्र में कमी के प्रभाव को कम किया जा सकेगा। परिणामस्वरूप, इन दोनों राज्यों में कुल चीनी उत्पादन में केवल 3-5 फीसदी गिरावट की उम्मीद है।</p>
<p>इस्मा के अनुमानों के अनुसार, आगामी शुगर सीजन 2024-25 की शुरुआत में 1 अक्टूबर, 2024 को देश में चीनी का ओपनिंग स्टॉक 90.5 लाख टन रहेगा। सीजन के दौरान कुल 333 लाख टन चीनी उत्पादन (एथेनॉल के लिए डाइवर्जन के बिना) समेत देश में चीनी की कुल उपलब्धता 423.5 लाख टन रहने का अनुमान है। देश में 290 लाख टन की घरेलू खपत और 55 लाख टन के नॉर्मेटिव स्टॉक के अलावा भी अगले सीजन के अंत तक करीब 78.50 लाख टन चीनी का अतिरिक्त स्टॉक बचेगा।&nbsp;</p>
<p>इस्मा का कहना है कि देश में चीनी का अतिरिक्त स्टॉक 2024-25 सीजन में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम और चालू सत्र में निर्यात के लिए पर्याप्त होगा, जिससे संतुलित चीनी बाजार बनेगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a8f772f1de2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश के चीनी उत्पादन में 6.95 लाख टन की गिरावट का अनुमान, चीनी उत्पादन 333 लाख टन रहेगा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a8f772f1de2.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश के सबसे अत्याधुनिक आइसक्रीम प्लांट की कहानी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/what-it-has-taken-to-build-indias-most-state-of-the-art-ice-cream-plant.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 22 Jul 2024 09:12:23 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/what-it-has-taken-to-build-indias-most-state-of-the-art-ice-cream-plant.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>गोविंदपुर थांडा (तेलंगाना)।&nbsp;</strong><br />सामान्य किस्म के टोंड दूध में 11.5% सॉलिड होता है। इसमें भी 3% फैट और 8.5% एसएनएफ (सॉलिड-नॉट-फैट) रहता है। फुल क्रीम दूध में सॉलिड की मात्रा 15% (6% फैट, 9% एसएनएफ) होती है। लेकिन &lsquo;असली&rsquo; आइसक्रीम के लिए दूध में सॉलिड की मात्रा काफी ज्यादा 21% होती है। इसमें 10% फैट और 11% एसएनएफ रहता है। इस तरह आइसक्रीम और कुछ नहीं बल्कि कंसेंट्रेटेड दूध होता है। बच्चों को इसे खिलाने के लिए जोर-जबरदस्ती नहीं करनी पड़ती है। इसलिए आपको आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि देश में असली आइसक्रीम बनाने वाली कंपनियां, जो फ्रोजन डेजर्ट में वनस्पति तेलों की जगह मिल्क फैट का प्रयोग करती हैं, वे वास्तव में डेयरी कंपनियां हैं। आइसक्रीम सबसे अधिक वैल्यू एडेड और संभवतः सबसे स्वादिष्ट दुग्ध उत्पाद है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_669bb13670fba.jpg" alt="" /></p>
<p><em><strong>हैटसन एग्रो प्लांट के बाहर का दृश्य।</strong></em></p>
<p>निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी डेयरी कंपनी हैटसन एग्रो प्रॉडक्ट लिमिटेड ने देश का पहला और सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी आधारित आइसक्रीम प्लांट स्थापित किया है। इसकी उत्पादन क्षमता प्रतिदिन दो लाख लीटर आइसक्रीम की है। यह प्लांट तेलंगाना के संगारेड्डी जिले की जहीराबाद तालुका के गोविंदपुर थांडा गांव में है। इसे लगाने में 600 करोड़ रुपए का खर्च आया है। हैटसन एग्रो प्रॉडक्ट का 31 मार्च 2024 को खत्म हुए वित्त वर्ष में राजस्व 7246.97 करोड़ रुपए था। इसके दो और आइसक्रीम प्लांट हैं। दोनों तमिलनाडु में हैं- एक सलेम जिले के करुमापुरम में और दूसरा चेन्नई के पास नल्लूर में। उनकी क्षमता क्रमशः 90 हजार लीटर और 40 हजार लीटर रोजाना की है। रूरल वर्ल्ड से बातचीत में हैटसन एग्रो के चेयरमैन आर.जी. चंद्रमोगन कहते हैं, &ldquo;यह न सिर्फ हमारा सबसे बड़ा बल्कि तकनीकी रूप से सबसे एडवांस आइसक्रीम प्लांट है।&rdquo; कुल 119 एकड़ के परिसर में यह प्लांट 20 एकड़ में फैला है। इस परिसर में 30 एकड़ में आम के बगीचे और 5 एकड़ में गन्ने के खेत के साथ काफी हरित क्षेत्र है।&nbsp;</p>
<p>चंद्रमोगन कहते हैं, &ldquo;हमारे सलेम प्लांट में रोजाना 70 हजार लीटर आइसक्रीम बनाने के लिए 900 कर्मचारी काम करते हैं, लेकिन इस प्लांट में प्रतिदिन दो लाख लीटर आइसक्रीम का उत्पादन होता है और कर्मचारियों की संख्या सिर्फ 500 है।&rdquo; 74 साल के चंद्रमोगन ने 1970 में पहली फैक्ट्री लगाई थी। वह चेन्नई के रोयापुरम में 125 वर्ग फुट में थी। उसमें 5 लीटर का बैच फ्रीजर था, जिसमें एक दिन में सिर्फ 10 हजार आइस कैंडी बनाए जा सकते थे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_669bb171cf930.jpg" alt="" /></p>
<p><em><strong>तेलंगाना के गोविंदपुर थांडा स्थित अपने प्लांट में हैटसन एग्रो के चेयरमैन आर.जी. चंद्रमोगन।</strong></em></p>
<p>आज हैटसन एग्रो गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (अमूल) के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी आइसक्रीम बनाने वाली कंपनी है। यह अरुण नाम से आइसक्रीम बनाती है जो काफी लोकप्रिय है। इबाको नाम से एक प्रीमियम प्रोडक्ट भी है। इन ब्रांड की बिक्री दक्षिण भारत के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में होती है।</p>
<p>इस प्लांट में दुनिया की नवीनतम तकनीक और मशीनों का इस्तेमाल किया गया है। यहां उत्पादन की लगभग सारी प्रक्रिया और यहां तक कि पैकिंग भी मशीनों और रोबोट के जरिए की जाती है। आइसक्रीम बॉक्स के कोल्ड स्टोर में पहुंचने से पहले उनको बास्केट में रखने के लिए ही कर्मचारी हाथ लगाते हैं। संयंत्र में आइसक्रीम उत्पादन करने वाली मशीनों को लंबे कनवेयर बेल्ट से जोड़ा किया गया है। इन्हें देखकर लगता है जैसे किसी बड़े स्टील प्लांट के फ्लोर के देख रहे हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_669bb1205ad26.jpg" alt="" /></p>
<p><em><strong>हैटसन एग्रो के प्लांट में कन्वेयर बेल्ट का इस्तेमाल होता है।&nbsp;</strong></em></p>
<p>मिल्क पाउडर और बटर से लेकर एनहाइड्रस फैट, कोकोआ, फ्लेवर, चीनी, इमल्सिफायर और स्टेबलाइजर- ये सब कच्चे माल कम तापमान पर स्टोर में रखे जाते हैं। यहां पाश्चराइजेशन, होमोजेनाइजेशन और एजिंग की प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमेटेड है। इसके बाद शून्य से 5 डिग्री कम तापमान पर आइसक्रीम बनाई जाती है। स्पीड की बात करें तो एक मशीन एक घंटे में पांच रुपये वाले 43000 पीस बनाती है। एक और मशीन भी है जिसकी गति 12000 कप की है। यह सारा काम ऑटोमेटिक होता है। आइसक्रीम बनने के बाद उसे फ्रीजिंग टनल में भेजा जाता है जहां उसके तापमान में कमी की जाती है। उसके बाद कन्वेयर बेल्ट के जरिए विभिन्न प्रोडक्ट कोल्ड स्टोर में जाते हैं।</p>
<p>चंद्रमोगन बताते हैं कि कंपनी के इस संयंत्र में आइसक्रीम कोन बनाने वाली मशीन भी स्थापित की गई है। आइसक्रीम कोन की बिक्री तेजी से बढ़ रही है और हम कोन की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए अपने संयंत्र में ही उनका उत्पादन कर रहे हैं। इस संयंत्र में कोन का उत्पादन कर यहीं पर उसमें आइसक्रीम फिलिंग कर प्रोडक्ट तैयार किये जा रहे हैं। इस संयंत्र में 15 हजार प्रति घंटा की दर पर कोन का उत्पादन होगा। इसके लिए कोन बेकिंग मशीन स्थापित की जा रही है। इस संयंत्र की क्षमता प्रति घंटा 27 हजार फिलिंग की है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_669bb1acb8f1a.jpg" alt="" /></p>
<p><em><strong>हैटसन एग्रो के प्लांट में लगाई गई आयायित मशीनरी।</strong></em></p>
<p>चंद्रमोगन बताते हैं कि यह एक विश्व स्तरीय फैक्ट्री है। यहां जो नवीनतम टेक्नोलॉजी और मशीनरी का इस्तेमाल किया गया है वह भारत में और कहीं नहीं है। इस प्लांट में अनेक तरह के आइसक्रीम प्रोडक्ट बड़ी मात्रा में बनाए जा सकते हैं। इस प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 2 लाख लीटर आइसक्रीम बनाने की है। इस प्लांट के लिए मशीनरी डेनमार्क की ग्राम इक्विपमेंट से मंगाई गई है। कोन बेकिंग की मशीनरी जर्मनी की वॉल्टर की है।</p>
<p>चंद्रमोगन का मानना है कि सरकार को आइसक्रीम को एलीट कंज्यूमर के बजाय आम लोगों के मिल्क प्रोडक्ट के तौर पर देखना चाहिए। यह स्वास्थ्यवर्धक के साथ स्वादिष्ट भी होता है। दूध पर तो कोई वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) नहीं लगता, लेकिन मिल्क पाउडर पर पांच प्रतिशत, मिल्क फैट (घी, मक्खन इत्यादि) पर 12% और आइसक्रीम पर 18% जीएसटी लगता है। इस तरह का कर ढांचा कृषि उपज के मूल्य संवर्धन के विचार के विपरीत है। आइसक्रीम बच्चों को दूध देने का एक बेहतर माध्यम बन सकता है। इस पर जीएसटी कम करके सरकार को इसे प्रमोट करना चाहिए।</p>
<p>चंद्रमोगन ने आइसक्रीम बनाने से शुरुआत की थी। उनकी कंपनी 1995 में पूरी तरह से डेयरी कंपनी बन गई जब उन्होंने आरोक्य ब्रांड के तहत दूध बेचना शुरू किया। आज हैटसन एग्रो भारत की निजी डेयरी कंपनियों में अलग स्थान रखती है। यह न सिर्फ अपने इलाके के सभी 4.5 लाख किसानों से पूरा दूध (35 लाख लीटर प्रतिदिन) खरीदती है, बल्कि कंपनी का 90% से अधिक रेवेन्यू ब्रांडेड कंज्यूमर प्रोडक्ट से आता है। इनमें आरोक्य पाउच दूध, हैटसन दही, अरुण और इबाको आइसक्रीम, हैप तथा हाविया चॉकलेट और पशुओं का चारा शामिल हैं। इस तरह हैटसन एग्रो एक वास्तव में बिजनेस-टू-फार्मर और बिजनेस-टू-कंज्यूमर कंपनी बन गई है। निजी क्षेत्र में डेयरी का बिजनेस करने वाले चंद्रमोगन पहले व्यक्ति हैं जिन्हें इंडियन डेयरी एसोसिएशन ने लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया है।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_669bb13aeb9ee.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश के सबसे अत्याधुनिक आइसक्रीम प्लांट की कहानी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_669bb13aeb9ee.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ऑर्गेनिक फार्मिंग सर्टिफिकेशन क्यों है जरूरी? जानें कैसे करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/organic-farming-certification-in-india-know-how-to-apply-and-process.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 09 Jul 2024 16:13:58 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/organic-farming-certification-in-india-know-how-to-apply-and-process.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खेती में उर्वरकों के बढ़ते इस्तेमाल और खान-पान के बदलने ट्रेंड के बीच अब किसान फिर ऑर्गेनिक फार्मिंग को ओर लौट रहे हैं। ऑर्गेनिक फार्मिंग एक कृषि पद्धति है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर के बिना केमिकल रसायनों, कीटनाशकों, और जैविक खादों के बिना खेती की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को सुरक्षित रखना, मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखना, और जैव विविधता को प्रोत्साहित करना होता है। यूं तो बाजार में बिकने वाले कई उत्पादों पर ऑर्गेनिक लिखा हुआ दिख जाता है। लेकिन, लिख देने से हर उत्पादन ऑर्गेनिक नहीं हो जाता है। इसके लिए <strong>ऑर्गेनिक फार्मिंग सर्टिफिकेशन</strong> की एक पूरी प्रक्रिया होती है। जिसके माध्यम से यह प्रमाणित किया जाता है कि फार्मिंग प्रैक्टिस ऑर्गेनिक मानकों का पूरा पालन करती है।&nbsp;</p>
<p>यह सर्टिफिकेशन किसानों को उनके उत्पादों को ऑर्गेनिक मार्केट में बेचने और उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता और रसायन मुक्त उत्पाद प्राप्त करने में मदद करता है। ऐसे में ध्यान रखें कि जब भी बाजार से कोई उत्पाद खरीदें, तो उसका ऑर्गेनिक फार्मिंग सर्टिफिकेशन जरूर चेक करें। ऑर्गेनिक फार्मिंग सर्टिफिकेशन की जरूरत किसान और उपभोक्ता दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। किसानों को इससे बाजार में बेहतर पहुंच मिलती है। साथ ही साथ उत्पाद पर उपभोक्ता का विश्वास भी बढ़ता है। वहीं, उपभोक्ताओं को इससे उत्पाद की शुद्धता, स्वास्थ्य लाभ, और पर्यावरणीय जिम्मेदारी सुनिश्चित होती है। इसलिए, ऑर्गेनिक उत्पादों का सर्टिफिकेशन प्राप्त करना और चेक करना दोनों ही आवश्यक है।</p>
<p>ऑर्गेनिक फार्मिंग सर्टिफिकेशन की जरूरत किसान, उपभोक्ता, प्रोसेसर्स, निर्यातक से लेकर रिटेलर्स तक को होती है। इससे उपभोक्ता यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जो उत्पाद वह खरीद रहे हैं, वह पूरी तरह प्राकृतिक है और बिना किसी रसायनों के तैयार किया गया है। ऑर्गेनिक उत्पाद अधिक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। यही वजह है कि अब उपभोक्ता भी सेहत को ध्यान में रखते हुए बाजार में ऑर्गेनिक उत्पाद खरीद रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>प्रोसेसर्स, निर्यातकों और रिटेलर्स की बात करें तो इन्हें उत्पादों के लेबलिंग और निर्यात के लिए सर्टिफिकेशन की आवश्यकता होती है। ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन से उत्पादों को बेचने में आसानी होती है। इतना ही नहीं कई देश केवल सर्टिफाइड ऑर्गेनिक उत्पादों को ही आयात करते हैं, इसलिए भी सर्टिफिकेशन जरूरी है। सर्टिफिकेशन रिटेलर्स को उपभोक्ताओं का विश्वास जीतने में भी मदद करता है, जिससे उनकी बिक्री बढ़ती है।</p>
<p><strong>कैसे करें ऑर्गेनिक प्रोडक्ट की पहचान&nbsp;</strong></p>
<p>भारत में ऑर्गेनिक फार्मिंग सर्टिफिकेशन विभिन्न मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेशन एजेंसियों द्वारा प्रदान किया जाता है। इन एजेंसियों को नियामक कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) द्वारा मान्यता प्राप्त होती है। ये एजेंसियां यह सुनिश्चित करती हैं कि किसान और उत्पादक ऑर्गेनिक मानकों का पालन कर रहे हैं। एपीडा ने जैविक प्रमाणीकरण के लिए कुछ दिशा-निर्देश भी निर्धारित किए हैं। सभी जैविक प्रमाणित उत्पादों पर 'इंडिया ऑर्गेनिक' लोगो प्रदर्शित किया जाता है, ताकि ग्राहक प्रमाणित उत्पादों को आसानी से पहचान सकें। ऑर्गेनिक फार्मिंग सर्टिफिकेशन के लिए नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन (एनपीओपी) के तहत कुछ मानक तय किए गए हैं, जिनका पालन सर्टिफिकेशन प्राप्त करने के लिए जरूरी होता है। आसान भाषा में कहें तो खेती की पूरी प्रक्रिया प्राकृतिक होनी चाहिए।&nbsp;</p>
<p><strong>कैसे मिलेगा ऑर्गेनिक फार्मिंग सर्टिफिकेशन&nbsp;</strong></p>
<p>भारत में ऑर्गेनिक फार्मिंग सर्टिफिकेशन प्राप्त करने के लिए दो तरह के सिस्टम है। पहला निर्यात के लिए <strong>नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन (एनपीओपी)</strong>। दूसरा घरेलू और स्थानीय बाजारों के लिए <strong>पार्टिसिपेशन गारंटी सिस्टम (पीजीएस)</strong>। एनपीओपी सर्टिफिकेशन सिर्फ उनके लिए होता है, जो अपने उत्पादों को भारत से बाहर निर्यात करते हैं। वहीं, पार्टिसिपेशन गारंटी सिस्टम सर्टिफिकेशन उनके लिए है जो भारत में ही अपने ऑर्गेनिक उत्पाद बेचना चाहते हैं।&nbsp;</p>
<p>कोई भी किसान या भूमिधारक उत्पादक समूह अपनी उपज के जैविक प्रमाणीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भूमि को जैविक के रूप में प्रमाणित नहीं किया जाता है। बल्कि भूमि से उपज प्रमाणित होती है। इसके अलावा, प्रोसेसर्स, निर्यातकों और रिटेलर्स भी ऑर्गेनिक फार्मिंग सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। किसी भी कृषि उपज के लिए जैविक प्रमाणपत्र केवल 3 साल के लिए वैध होते हैं। इसे 3 साल की समाप्ति के बाद फिर रिन्यू किया जाता है।&nbsp;</p>
<p>ऑर्गेनिक फार्मिंग सर्टिफिकेशन प्राप्त करने के लिए सबसे पहले <strong>पीजीएस इंडिया वेब पोर्टल</strong> पर जाएं और वहां लॉगिन करें। अगर नए यूजर है, तो पहले साइन करें और फिर आवेदन फॉर्म भरें। इसमें फार्म (खेत) की जानकारी, उपयोग की जाने वाली कृषि पद्धतियां, और उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी शामिल होती हैं। साथ ही आपको 25 हजार रुपये की फीस भी जमा करनी होती है। फॉर्म और फीस भरने के बाद आपके फार्म का निरीक्षण होता है। इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाता है कि आप ऑर्गेनिक मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। निरीक्षण के दौरान आपको विभिन्न दस्तावेज जैसे फसल के रिकार्ड, उपयोग किए गए बीज, खाद, और कीटनाशकों का रिकार्ड भी पेश करना होता है। अगर आपका फार्म सभी मानकों पर खरा उतरता है, तो आपको ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। सर्टिफिकेट जारी होने में 3 महीने से 1 साल तक का समय लग जाता है। अधिक जानकारी के लिए आप पीजीएस इंडिया वेब पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट <strong><a href="https://pgsindia-ncof.gov.in/">https://pgsindia-ncof.gov.in</a></strong> पर विजिट कर सकते हैं। साथ ही <strong>हेल्पलाइन नंबरों 91 120-2764906 या 91 120-2764212</strong> पर भी संपर्क किया जा सकता है।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668d027653322.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ऑर्गेनिक फार्मिंग सर्टिफिकेशन क्यों है जरूरी? जानें कैसे करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668d027653322.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश में 36 लाख टन सरप्लस चीनी का अनुमान, उद्योग ने मांगी चीनी निर्यात की अनुमति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/36-lakh-tonnes-of-surplus-sugar-estimated-in-the-country-industry-seeks-permission-to-export-sugar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 03 Jul 2024 16:55:35 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/36-lakh-tonnes-of-surplus-sugar-estimated-in-the-country-industry-seeks-permission-to-export-sugar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में चालू शुगर सीजन में 36 लाख टन सरप्लस चीनी उत्पादन का अनुमान है। देश में चीनी उद्योग के प्रमुख संगठन <strong>इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा)</strong> ने चालू सीजन 2023-24 में 36 लाख टन तक सरप्लस चीनी का अनुमान लगाया है। शुगर सीजन की शुरुआत यानी अक्टूबर 2023 में देश में लगभग 56 लाख टन का शुरुआती स्टॉक था। इस सीजन में लगभग 285 लाख टन की घरेलू खपत के बाद सितंबर 2024 के अंत तक चीनी का क्लोजिंग स्टॉक 91 लाख टन रहेगा। इस प्रकार 55 लाख टन चीनी के मानक स्टॉक के अलावा देश में 36 लाख टन चीनी का अनुमानित सरप्लस होगा जो चीनी मिलों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ाएगा।</p>
<p>इस्मा के अनुसार, देश में चीनी की घरेलू खपत और उपलब्धता की स्थिति काफी बेहतर है। एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के लिए भी कोई दिक्कत नहीं होगी। इस्मा ने मौजूदा स्थितियों को देखते हुए सरकार से सरप्लस चीनी के निर्यात की अनुमति देने पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। इस्मा का मानना है कि चीनी निर्यात की अनुमति देने से चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति सुधरेगी और सुचारू संचालन में मदद मिलेगी।&nbsp;</p>
<p>इस्मा के महानिदेशक <strong>दीपक बल्लानी</strong> ने कहा, "चीनी निर्यात की अनुमति देने से न केवल घरेलू खपत के लिए पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित होगा और एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (ईबीपी) की पूर्ति होगी, बल्कि चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति को बेहतर रखने में भी मदद मिलेगी, जिससे किसानों को समय पर भुगतान संभव हो सकेगा।&rdquo;</p>
<p>चीनी उद्योग गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में इस साल 25 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी के बाद 340 रुपये कुंतल तय करने से चीनी के उत्पादन की लागत में वृद्धि का तर्क देते हुए सरकार से कई रियायतों की मांग कर रहा है। इस्मा का कहना है कि एफआरपी में यह वृद्धि पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रही मिलों पर अतिरिक्त बोझ की तरह है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668534db9b9c0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश में 36 लाख टन सरप्लस चीनी का अनुमान, उद्योग ने मांगी चीनी निर्यात की अनुमति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668534db9b9c0.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पानी की कमी के चलते राजस्थान में नहीं लगेगा एस्कॉर्ट्स कुबोटा का नया प्लांट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/escorts-kubota-withdraws-plan-to-set-up-new-plant-in-ghiloth-rajasthan-due-to-water-shortage.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 20 Jun 2024 13:12:48 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/escorts-kubota-withdraws-plan-to-set-up-new-plant-in-ghiloth-rajasthan-due-to-water-shortage.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि उपकरण बनाने वाली कंपनी एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड ने राजस्थान के घिलोठ (अलवर) में अपना नया प्लांट स्थापित करने की योजना स्थगित कर दी है। कंपनी राजस्थान के इस क्षेत्र में नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने पर विचार कर रही थी, लेकिन पानी की कमी और अन्य आवश्यकताएं पूरी न होने के कारण कंपनी को इस योजना से कदम वापस खींचने पड़े।&nbsp;</p>
<p>बांबे स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड ने कहा कि कंपनी ने राजस्थान के घिलोठ में नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (रीको) को प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण हेतु प्रस्ताव (EOI) भेजा था। लेकिन लोकेशन का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद कंपनी इस नतीजे पर पहुंची कि यह जगह बड़े प्रोजेक्ट के लिए उपयुक्त नहीं है। इसलिए कंपनी ने यह प्रस्ताव वापस लेने का फैसला किया है।</p>
<p>एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड का कहना है कि वह इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है और राजस्थान सहित अन्य राज्यों में वैकल्पिक जगहों की तलाश जारी रहेगी।&nbsp;</p>
<p>राजस्थान के अलवर जिले में घिलोठ औद्योगिक क्षेत्र को नीमराणा की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर और दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के पास होने का लाभ इस क्षेत्र को मिल रहा है लेकिन वहां पानी की समस्या सहित कई अन्य दिक्कतें हैं।&nbsp;</p>
<p>एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड अपने नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए अगले तीन-चार साल में 4500 करोड़ रुपये के निवेश की योजना पर काम कर रही है। इसके जरिए कंपनी अपनी ट्रैक्टर निर्माण क्षमता को बढ़ाकर दोगुना करेगी।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6673cda9b38dd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पानी की कमी के चलते राजस्थान में नहीं लगेगा एस्कॉर्ट्स कुबोटा का नया प्लांट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6673cda9b38dd.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि व्यवसाय क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए इग्नू ने शुरू किया एमबीए एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट प्रोग्राम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/ignou-launches-mba-agribusiness-management-programme-to-boost-agribusiness-sector.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 15 Jun 2024 18:12:39 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/ignou-launches-mba-agribusiness-management-programme-to-boost-agribusiness-sector.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत के कृषि व्यवसाय क्षेत्र और किसान अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, इग्नू ने एमबीए एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट प्रोग्राम (एमबीए-एबीएम) शुरू करने का फैसला किया है। इस संबंध में इग्नू ने अधिसूचना भी जारी कर दी है। इग्नू की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, कृषि क्षेत्र में सक्षम व्यावसायिक पेशेवरों को तैयार करने के लिए एक नया दूरस्थ शिक्षा प्रोग्राम मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (कृषि व्यवसाय प्रबंधन) शुरू किया जा रहा है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है।</p>
<p>इग्नू ने कृषि के महत्व पर जोर देते हुए कहा है कि यह देश की बढ़ती आबादी को आजीविका और खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के मामले में राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। एमबीए-एबीएम प्रोग्राम की नींव इस तथ्य में निहित है कि कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद, पिछड़े और कृषि गतिविधियों में शामिल कृषक समुदाय और संबद्ध हितधारकों में प्रबंधन योग्यता विकसित करने की आवश्यकता है।</p>
<p>इसके अलावा, कृषि व्यवसाय पेशेवरों की आवश्यकताओं को पूरा करना और कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में शामिल हितधारकों के लिए प्रबंधन पाठ्यक्रमों की आसान पहुंच को पूरा करना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में जरूरत को पूरा करने के लिए, एमबीए-एबीएम प्रोग्राम का उद्देश्य कृषि व्यवसायों और कृषि आधारित उद्योगों को लाभप्रद रूप से प्रबंधित करने के लिए व्यावसायिक पेशेवरों को विकसित करना है।</p>
<p>इग्नू ने कहा है कि एमबीए-एबीएम प्रोग्राम प्रबंधकीय कौशल को बढ़ावा देगा और आवश्यकता-आधारित शिक्षा प्रदान करेगा, कृषि क्षेत्र में दक्षता बढ़ाएगा और अधिक आजीविका और लाभप्रदता पैदा करेगा, ताकि कृषि व्यवसाय में शामिल लोगों के लिए सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में सुधार हो सके। इग्नू के अनुसार, एमबीए-एबीएम प्रोग्राम का उद्देश्य कृषि, खाद्य, ग्रामीण और संबद्ध क्षेत्रों में सक्षम व्यावसायिक पेशेवर तैयार करना है।&nbsp;</p>
<p>किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री वाले उम्मीदवार एमबीए एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट प्रोग्राम में दाखिला लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह 2 साल का मैनेजमेंट प्रोग्राम है, जिसे अधिकतम 4 साल की अवधि में पूरा किया जा सकता है। जुलाई 2024 सत्र से इस प्रोग्राम को शुरू किया जा रहा है। अधिक जानकारी के लिए इग्नू की आधिकारिक वेबसाइट <strong><a href="http://www.ignou.ac.in/">http://www.ignou.ac.in/</a> </strong>पर विजिट कर सकते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_666d77eacc843.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि व्यवसाय क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए इग्नू ने शुरू किया एमबीए एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट प्रोग्राम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_666d77eacc843.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मई में ट्रैक्टरों की बिक्री में गिरावट, कुल 70,065 टैक्ट्रर बिके]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/tractor-sales-down-in-may-70065-tractors-sold.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 10 Jun 2024 16:26:20 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/tractor-sales-down-in-may-70065-tractors-sold.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मई 2024 में ट्रैक्टरों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (फाडा) के मुताबिक मई 2024 में कुल 70,065 ट्रैक्टर बेचे गए। जबकि, पिछले साल मई 2023 में कुल 70,813 ट्रैक्टरों की सेल हुई थी। इसके आधार पर इस साल मई में ट्रैक्टर की बिक्री में 1.06 प्रतिशत की गिरावट आई है। हालांकि कमजोर मानसून के चलते पिछला साल भी ट्रैक्टर बिक्री के लिए बेहतर नहीं रहा था। इस साल सामान्य मानसून के अनुमान के चलते आने वाले महीनों में ट्रैक्टर बिक्री सुधरने की उम्मीद है।&nbsp;</p>
<p>मई के लिए <strong><a href="https://fada.in/">फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल एसोसिएशन</a></strong>&nbsp;की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक कई बड़ी ट्रैक्टर कंपनियों ने बिक्री के स्तर को पिछले साल के स्तर पर ही बरकरार रखा है या मामूली बढ़ोतरी हासिल की है। फाडा की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई 2024 में सबसे ज्यादा ट्रैक्टर महिंद्रा ने बेचे हैं। महिंद्रा ने मई में कुल 15,926 ट्रैक्टरों की बिक्री की है, जो पिछले साल बेचे गए 15,836 ट्रैक्टरों से अधिक है। इस हिसाब से महिंद्रा की सेल में 0.57 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हांलांकि, बिक्री में वृद्धि के बावजूद महिंद्रा की बाजार हिस्सेदारी में कमी आई है। पिछले साल के मुकाबले बाजार हिस्सेदारी 0.37 प्रतिशत घटी है।&nbsp;</p>
<p>इसी तरह, महिंद्रा एंड महिंद्रा की ट्रैक्टर कंपनी स्वराज डिविजन ने भी मई 2024 में अच्छी टैक्टर सेल की है। कंपनी ने मई महीने में कुल 13,093 ट्रैक्टर बेचे हैं, जो पिछले साल के 12,776 ट्रैक्टर के मुकाबले 2.48 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, स्वराज ट्रैक्टर की बाजार हिस्सेदारी में 0.65 प्रतिश की वृद्धि हुई है। सोनालीका ट्रैक्टर्स (इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड) ने भी मई 2024 में वद्धि दर्ज की है। कंपनी ने मई महीने में कुल 9,225 ट्रैक्टर बेचे हैं, जो मई 2023 में 8,845 यूनिट्स थीं। कंपनी ने अपनी बाजार हिस्सेदारी में 0.68 प्रतिशत की वृद्धि की है। टैफे लिमिटेड की ट्रैक्टर सेल में गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी ने मई 2024 में कुल 8,515 ट्रैक्टर बेचे हैं, जो पिछले साल की तुलना में 4.67 प्रतिशत कम हैं। कंपनी ने मई 2023 में 8,932 यूनिट्स सेल की थी। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी में 0.46 प्रतिशत की गिरावट आई है।&nbsp;<br />&nbsp;<br />एस्कॉर्ट्स ट्रैक्टर की मई 2024 की सेल में गिरावट आई है। कंपनी ने मई 2024 में कुल 7,655 ट्रैक्टरों की सेल की है, जो पिछले साल के मुताबले 0.21 प्रतिशत कम है। कंपनी ने मई 2023 में कुल 7,671 ट्रैक्टर बेचे थे। हालांकि, कंपनी की बाजार हिस्सेदारी में 0.10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जॉन डेअर ट्रैक्टर कंपनी की सेल में मई 2024 में 0.18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कंपनी ने मई 2024 में कुल 5,149 ट्रैक्टर बेचे हैं, जो मई 2023 में 5,140 यूनिट थे। सेल में ग्रोथ के साथ ही कंपनी की बाजार हिस्सेदारी में 0.09 प्रतिशत बढ़ी है। आयशर ट्रैक्टर्स की ट्रैक्टर सेल में गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी ने मई 2024 में कुल 4,461 ट्रैक्टर बेचे हैं। जबकि मई 2023 में कंपनी ने 4,507 ट्रैक्टरों की सेल की थी। आयशर ट्रैक्टर्स की बिक्री में 1.02 प्रतिशत की गिरावट आई है। वहीं, बाज़ार हिस्सेदारी में 0.01 प्रतिशत बढ़ी है।&nbsp;</p>
<p>सीएनएच इंडस्ट्रियल (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड ने मई 2024 में कुल 2,898 &nbsp;ट्रैक्टरों की सेल की है, जो मई 2023 में 2,861 यूनिट थीं। इस हिसाब से कंपनी की सेल 1.29 बढ़ी है। वहीं, बाजार हिस्सेदारी में 0.10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कुबोटा ट्रैक्टर ने मई 2024 में पिछले साल के मुकाबले कम सेल की है। कंपनी ने मई 2024 में कुल 1,157 ट्रैक्टरों की सेल की है। जबकि, पिछले साल कंपनी ने मई महीने में 1,643 ट्रैक्टर बेचे थे। कंपनी की सेल में 29.58 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, बाजार हिस्सेदारी में लगभग 0.67 प्रतिशत घटी है।&nbsp;वहीं, इन कंपनियों के अलावा अन्य ट्रैक्टर कंपनियों की सेल में में 23.67 प्रतिशत की कमी आई। मई 2024 में अन्य कंपनियों की सेल 1,986 यूनिट रही। जबकि, मई 2023 में यह 2,602 यूनिट थी। इस हिसाब से बाजार हिस्सेदारी में 0.84% ​​की गिरावट आई है।&nbsp;</p>
<table border="1" style="border-collapse: collapse; width: 100%; height: 321px;">
<tbody>
<tr style="height: 47px;">
<td style="width: 24.565%; text-align: center; height: 47px;">
<p><strong>ट्रैक्टर कंपनी&nbsp;</strong></p>
</td>
<td style="width: 19.833%; text-align: center; height: 47px;"><strong>&nbsp;मई 2024 में बिक्री&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 18.7717%; text-align: center; height: 47px;"><strong>&nbsp;मई 2024 में बाजार हिस्सेदारी&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 17.1712%; text-align: center; height: 47px;"><strong>&nbsp;मई 2023 में बिक्री&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 19.659%; text-align: center; height: 47px;"><strong>&nbsp;मई 2023 में बाजार हिस्सेदारी&nbsp;</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="width: 24.565%; height: 47px; text-align: center;">
<p><strong>महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड</strong></p>
</td>
<td style="width: 19.833%; height: 47px; text-align: center;">15,926</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 47px; text-align: center;">22.73%</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 47px; text-align: center;">15,836</td>
<td style="width: 19.659%; height: 47px; text-align: center;">22.36%</td>
</tr>
<tr style="height: 67px;">
<td style="width: 24.565%; height: 67px; text-align: center;">
<p><strong>महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड (स्वराज</strong></p>
<strong>डिवीजन) </strong></td>
<td width="64" style="width: 19.833%; height: 67px; text-align: center;">
<p>13,093</p>
</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 67px; text-align: center;">18.69%</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 67px; text-align: center;">12,776</td>
<td width="64" style="width: 19.659%; height: 67px; text-align: center;">
<p>18.04%</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 24.565%; height: 20px; text-align: center;"><strong>इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड (सोनालिका ट्रैक्टर)</strong></td>
<td style="width: 19.833%; height: 20px; text-align: center;">9,225</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 20px; text-align: center;">13.17%</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 20px; text-align: center;">8,845</td>
<td width="64" style="width: 19.659%; height: 20px; text-align: center;">
<p>12.49%</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 24.565%; height: 20px; text-align: center;"><strong>एस्कॉर्ट्स लिमिटेड&nbsp;</strong></td>
<td width="64" style="width: 19.833%; height: 20px; text-align: center;">7,655</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 20px; text-align: center;">10.93%</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 20px; text-align: center;">7,671</td>
<td width="64" style="width: 19.659%; height: 20px; text-align: center;">
<p>10.83%</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 24.565%; height: 20px; text-align: center;"><strong>टैफे लिमिटेड </strong></td>
<td style="width: 19.833%; height: 20px; text-align: center;">
<p>8,515</p>
</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 20px; text-align: center;">12.15%</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 20px; text-align: center;">8,932</td>
<td width="64" style="width: 19.659%; height: 20px; text-align: center;">
<p>12.61%</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 24.565%; height: 20px; text-align: center;"><strong>जॉन डीयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड </strong></td>
<td style="width: 19.833%; height: 20px; text-align: center;">5,149</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 20px; text-align: center;">7.35%</td>
<td width="64" style="width: 17.1712%; height: 20px; text-align: center;">
<p>5,140</p>
</td>
<td style="width: 19.659%; height: 20px; text-align: center;">7.26%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 24.565%; height: 20px; text-align: center;"><strong>आयशर ट्रैक्टर्स </strong></td>
<td style="width: 19.833%; height: 20px; text-align: center;">4,461</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 20px; text-align: center;">6.37%</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 20px; text-align: center;">4,507</td>
<td style="width: 19.659%; height: 20px; text-align: center;">6.36%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 24.565%; height: 20px; text-align: center;">
<p><strong>कुबोटा एग्रीकल्चरल मशीनरी इंडिया</strong></p>
<strong>प्राइवेट लिमिटेड </strong></td>
<td style="width: 19.833%; height: 20px; text-align: center;">1,157</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 20px; text-align: center;">1.65%</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 20px; text-align: center;">1,643</td>
<td width="64" style="width: 19.659%; text-align: center; height: 20px;">
<p>2.32%</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 24.565%; height: 20px; text-align: center;"><strong>अन्य </strong></td>
<td style="width: 19.833%; height: 20px; text-align: center;">1,986</td>
<td style="width: 18.7717%; height: 20px; text-align: center;">2.83%</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 20px; text-align: center;">2,602</td>
<td width="64" style="width: 19.659%; text-align: center; height: 20px;">
<p>3.67%</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 24.565%; height: 20px; text-align: center;"><strong>कुल&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 19.833%; height: 20px; text-align: center;"><strong>70,065</strong></td>
<td style="width: 18.7717%; height: 20px; text-align: center;">-</td>
<td style="width: 17.1712%; height: 20px; text-align: center;"><strong>70,813</strong></td>
<td width="64" style="width: 19.659%; text-align: center; height: 20px;">-</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6666d626bf46b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मई में ट्रैक्टरों की बिक्री में गिरावट, कुल 70,065 टैक्ट्रर बिके ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6666d626bf46b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[धीमी हुई ट्रैक्टर उद्योग की रफ्तार, वित्त वर्ष 2023&amp;#45;24 में 7% घटी बिक्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/tractor-industry-slowed-down-sales-decreased-by-7-percent-in-financial-year-2023-24.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 08 Jun 2024 14:06:14 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/tractor-industry-slowed-down-sales-decreased-by-7-percent-in-financial-year-2023-24.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त वर्ष 2023-24 में ट्रैक्टर की बिक्री वर्ष 2022-23 के मुकाबले कम रही है। पिछले वर्ष घरेलू ट्रैक्टर की बिक्री में 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, ट्रैक्टर निर्यात पिछले वर्ष के मुकाबले 22 प्रतिशत कम रहा। पिछले साल खराब मानसून के कारण घरेलू बाजार में ट्रैक्टर की सेल कम हुई थी। हालांकि, इस बार सामान्य मानसून की संभावना है जिससे ट्रैक्टर बिक्री में वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।</p>
<p><strong>इन कारणों के चलते घटी टैक्टर सेल</strong></p>
<p>ट्रैक्टर एंड मैकेनाइजेशन एसोसिएशन (टीएमए) के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में ट्रैक्टर की कुल घरेलू बिक्री 8,74,504 यूनिट्स रही। जबकि, वित्त वर्ष 2022-23 में कुल 9,40,985 ट्रैक्टर बेचे गए थे। ट्रैक्टर की बिक्री में आई इस कमी के लिए पिछले साल कमजोर मानसून के चलते खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट को मुख्य वजह बताया गया है। ट्रैक्टर एंड मैकेनाइजेशन एसोसिएशन के मुताबिक पिछले साल अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून असमान रहा। खराब मानसून ने खरीफ फसल उत्पादन को प्रभावित किया, जिससे ट्रैक्टर की बिक्री घटी। विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों में ट्रैक्टर की सेल में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज गई।</p>
<p><strong>किस कंपनी के कितने ट्रैक्टर बिके?</strong></p>
<table border="1" style="border-collapse: collapse; width: 100%; height: 290px;">
<tbody>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 13.4094%; height: 20px; text-align: center;"><strong>उत्पादक&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; </strong></td>
<td style="width: 14.5494%; height: 20px; text-align: center;"><strong>वित्त वर्ष 2023-24&nbsp;&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 15.3638%; height: 20px; text-align: center;"><strong> वित्त वर्ष 2022-23</strong></td>
<td style="width: 11.3735%; height: 20px; text-align: center;"><strong>अंतर&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; </strong></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 13.4094%; height: 20px;">महिंद्रा एंड महिंद्रा&nbsp;&nbsp;&nbsp;</td>
<td style="width: 14.5494%; height: 20px;">3,64,526&nbsp;&nbsp; &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</td>
<td style="width: 15.3638%; height: 20px;">3,89,531&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</td>
<td style="width: 11.3735%; height: 20px;">-6.42% &nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 13.4094%; height: 20px;">टैफे&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; &nbsp;&nbsp; &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</td>
<td style="width: 14.5494%; height: 20px;">157,503 &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</td>
<td style="width: 15.3638%; height: 20px;">1,69,843 &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</td>
<td style="width: 11.3735%; height: 20px;">-7.27%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 13.4094%; height: 20px;">सोनालीका&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; &nbsp;&nbsp;&nbsp; &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</td>
<td style="width: 14.5494%; height: 20px;">1,15,369</td>
<td style="width: 15.3638%; height: 20px;">116,000 &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</td>
<td style="width: 11.3735%; height: 20px;">-0.54%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 13.4094%; height: 20px;">एस्कॉर्ट्स कुबोटा&nbsp;&nbsp;&nbsp;</td>
<td style="width: 14.5494%; height: 20px;">90,239 &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</td>
<td style="width: 15.3638%; height: 20px;">95,266 &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</td>
<td style="width: 11.3735%; height: 20px;">-5.28%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 13.4094%; height: 20px;">जॉन डियर&nbsp;&nbsp;</td>
<td style="width: 14.5494%; height: 20px;">71,408 &nbsp;</td>
<td style="width: 15.3638%; height: 20px;">82,658 &nbsp; &nbsp;</td>
<td style="width: 11.3735%; height: 20px;">-13.61%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 13.4094%; height: 20px;">न्यू हॉलैंड&nbsp;&nbsp;&nbsp;</td>
<td style="width: 14.5494%; height: 20px;">34,697</td>
<td style="width: 15.3638%; height: 20px;">35,367</td>
<td style="width: 11.3735%; height: 20px;">-1.89%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 13.4094%; height: 20px;">कुबोटा</td>
<td style="width: 14.5494%; height: 20px;">18,538 &nbsp;</td>
<td style="width: 15.3638%; height: 20px;">25,710</td>
<td style="width: 11.3735%; height: 20px;">-2.79%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 13.4094%; height: 20px;">इंडो फार्म&nbsp;&nbsp;</td>
<td style="width: 14.5494%; height: 20px;">5307 &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</td>
<td style="width: 15.3638%; height: 20px;">6445 &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</td>
<td style="width: 11.3735%; height: 20px;">-17.66%</td>
</tr>
<tr style="height: 10px;">
<td style="width: 13.4094%; height: 10px;">
<p>प्रीत&nbsp;</p>
</td>
<td style="width: 14.5494%; height: 10px;">5,488 &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</td>
<td style="width: 15.3638%; height: 10px;">6,390 &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</td>
<td style="width: 11.3735%; height: 10px;">-14.12%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 13.4094%; height: 20px;">वीएसटी टिलर्स ट्रैक्टर्स</td>
<td style="width: 14.5494%; height: 20px;">3708 &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</td>
<td style="width: 15.3638%; height: 20px;">5422 &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</td>
<td style="width: 11.3735%; height: 20px;">-31.61%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 13.4094%; height: 20px;">कैप्टन</td>
<td style="width: 14.5494%; height: 20px;">4548 &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</td>
<td style="width: 15.3638%; height: 20px;">4,254 &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</td>
<td style="width: 11.3735%; height: 20px;">6.91%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 13.4094%; height: 20px;">एसीई&nbsp; &nbsp;</td>
<td style="width: 14.5494%; height: 20px;">2475 &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</td>
<td style="width: 15.3638%; height: 20px;">3,074</td>
<td style="width: 11.3735%; height: 20px;">-19.49%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 13.4094%; height: 20px;">एसडीएफ&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</td>
<td style="width: 14.5494%; height: 20px;">698</td>
<td style="width: 15.3638%; height: 20px;">1,025</td>
<td style="width: 11.3735%; height: 20px;">-31.90% &nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 13.4094%; height: 20px;"><strong>कुल&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 14.5494%; height: 20px;"><strong>8,74,504</strong></td>
<td style="width: 15.3638%; height: 20px;"><strong>9,40,985 &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</strong></td>
<td style="width: 11.3735%; height: 20px;"><strong>-7.07%</strong></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;&nbsp;<br />(सोर्स: टीएमए)</p>
<p><strong>वित्त वर्ष 2024-25 में अच्छी ग्रोथ के आसार</strong></p>
<p>उद्योग विश्लेषकों का कहना है कि वित्त वर्ष 2023-24 में घरेलू बिक्री धीमी गति से समाप्त होने के बावजूद आगे निर्यात अच्छा रहने की उम्मीद है। वहीं, आईएमडी ने भी इस साल अच्छे मानसून का पूर्वानुमान जताया है। इससे&nbsp; ट्रैक्टर उद्योग को इस साल अच्छी सेल की उम्मीद है। टीएमए के मुताबिक, घरेलू ट्रैक्टर वॉल्यूम में सुधार होगा और उद्योग वित्त वर्ष 2025 में 3-5 फीसदी की वृद्धि दर्ज कर सकता है।</p>
<p><strong>भारत में मिनी ट्रैक्टर की बिक्री बढ़ी</strong></p>
<p>भारत में मिनी ट्रैक्टरों की बिक्री पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। यह ट्रैक्टर छोटे खेतों और घरेलू उपयोग के लिए अधिक सुविधाजनक होते हैं। इनकी बिक्री की वृद्धि का मुख्य कारण है कृषि उत्पादन में तकनीकी सुधार और कृषि में मशीनीकरण की बढ़ती मांग। इसके अलावा, पैदावार बढ़ाने के प्रयास, जमीन की बढ़ती कमी और किसानों की माली हालत में सुधार से भी इस बाजार को प्रोत्साहन मिल रहा है। इसके परिणामस्वरूप, मिनी ट्रैक्टरों की बिक्री में वृद्धि हो रही है।</p>
<p><strong>किसानों के बीच सबसे लोकप्रिय 45-50 एचपी के ट्रैक्टर</strong></p>
<p>भारत में कई रेंज के ट्रैक्टर हैं जो अपने विभिन्न फीचर्स और क्षमताओं के आधार पर बिकते हैं। हालांकि, 45 से 50 एचपी के ट्रैक्टर किसानों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। इस रेंज के ट्रैक्टरों की खास बात ये है कि इनसे खेती समेत कई व्यावसायिक कार्य आसानी से किए जा सकते हैं। किसान भी खेती के लिए 45 से 50 एचपी रेंज वाले ट्रैक्टरों का चयन करते हैं क्योंकि यह हेवी ड्यूटी ट्रैक्टरों के मुकाबले कम तेल खपत करते हैं और लगभग सभी कृषि उपकरणों को संचालित कर सकते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6662f2c59169a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ धीमी हुई ट्रैक्टर उद्योग की रफ्तार, वित्त वर्ष 2023-24 में 7% घटी बिक्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6662f2c59169a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शुरू करना चाहते हैं डेयरी से जुड़ा बिजनेस, मिलेगा 90 फीसदी लोन, यहां करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/what-is-ahidf-scheme-animal-husbandry-infrastructure-development-fund-pashupalan-loan-yojana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 06 Jun 2024 17:06:03 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/what-is-ahidf-scheme-animal-husbandry-infrastructure-development-fund-pashupalan-loan-yojana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (<strong><a href="https://ahidf.udyamimitra.in/">एएचआईडीएफ</a></strong>) के जरिए पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में संरचनात्मक विकास को बढ़ावा दे रही है। इस योजना के तहत, किसानों को पशुपालन से जुड़ी इकाईयों की स्थापना के लिए लोन दिया जाता है। ताकि पशुपालन के क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ें और उत्पादन क्षमता में भी सुधार हो।</p>
<p>केंद्र सरकार ने साल 2020 में इस योजना की शुरुआत की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान प्रोत्साहन पैकेज के तहत 15 हजार करोड़ रुपए के एएचआईडीएफ की स्थापना का ऐलान किया था। इसके तहत डेयरी प्रोसेसिंग, मीट प्रोसेसिंग, पशु चारा यूनिट, नस्ल सुधार फॉर्म, पशु टीका और कृषि अपशिष्ट प्रबंधन उद्योग स्थापित करने के लिए निवेश को प्रोत्साहन दिया जाता है। जिसका लाभ व्यक्तिगत उद्यमी, निजी कंपनियां, एमएसएमई और किसान उत्पादक संगठन उठा सकते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या है योजना के उद्देश्य?</strong></p>
<ul>
<li>दूध और मांस प्रसंस्करण क्षमता तथा उत्पाद की विविधता को बढ़ाना।</li>
<li>उत्पादकों को अधिक से अधिक दाम दिलाना।</li>
<li>घरेलू उपभोक्ताओं को अच्छी गुणवत्ता के दुग्ध व मांस उत्पाद उपलब्ध कराना।&nbsp;</li>
<li>देश की बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए प्रोटीन-युक्त अच्छी गुणवत्ता वाले भोजन को उपलब्ध कराना और कुपोषण को दूर करना।</li>
<li>उद्यमिता का विकास और रोजगार के अवसर पैदा करना।</li>
<li>निर्यात को बढ़ावा देना और निर्यात में दूध और मांस के योगदान को बढ़ाना।&nbsp;</li>
<li>मवेशियों के लिए सस्ते दाम पर चारा उपलब्ध करना।&nbsp;</li>
</ul>
<p><strong>कम ब्यान दर पर मिलेगा लोन?</strong></p>
<p>किसान भाई केंद्र सरकार की इस योजना के माध्यम से लोन लेकर पशुओं से जुड़ी कई मिल्क या फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित कर सकते हैं। जिसके लिए बैंकों से लोन के रूप में 90 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता बाजार से कम ब्याज दर पर प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप भी योजना के तहत बैंक से लोन लेना चाहते हैं तो उद्यमी मित्र पोर्टल पर जाकर उन बैंकों की सूची देख सकते हैं, जो योजना के तहत लोन की सुविधा देते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>इन इकाइयों की स्थापना के लिए मिलेगा लोन?</strong></p>
<ul>
<li>आइसक्रीम इकाई।</li>
<li>पनीर निर्माण इकाई।</li>
<li>दूध प्रोसेसिंग इकाई।&nbsp;</li>
<li>फ्लेवर्ड मिल्क निर्माण इकाई।</li>
<li>दूध पाउडर निर्माण इकाई।</li>
<li>मट्ठा पाउडर निर्माण इकाई।</li>
<li>विभिन्न प्रकार की मीट प्रोसेसिंग इकाई।&nbsp;</li>
<li>पशु-आहार संयंत्र इकाई। &nbsp;</li>
<li>पशु नस्ल सुधार फार्म।</li>
<li>पशु टीका और औषधि उत्पादन कारखानों की स्थापना।&nbsp;</li>
<li>पशु (भेड़, बकरी, गाय, भैंस) प्रजनन फार्म की स्थापना।&nbsp;</li>
</ul>
<p><strong>लोन के लिए कैसे करें आवेदन?</strong></p>
<p>एएचआईडीएफ के तहत लोन के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया बेहद आसान है। इसके लिए सबसे पहले आपको <strong><a href="https://www.udyamimitra.in/">उद्यमीमित्र पोर्टल</a></strong> पर जाकर अपना पंजीकरण कराना होगा। ऐसा करते हुए आपके सामने आवेदन के लिए नया पेज खुल जाएगा। यहां आप लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। जिसके बाद पशुपालन विभाग आपकी एप्लीकेशन की समीक्षा करेगा। विभाग ने अनुमति मिलने के बाद बैंक आपकी एप्लीकेशन को मंजूरी देगा और सभी जरूरी प्रकियाएं पूरी होने के बाद आपके खाते में लोन की राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी। अधिक जानकारी के लिए किसान <a href="https://www.udyamimitra.in/"><strong>उद्यमीमित्र पोर्टल</strong></a> पर विजिक कर सकते हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_66629127729c6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ शुरू करना चाहते हैं डेयरी से जुड़ा बिजनेस, मिलेगा 90 फीसदी लोन, यहां करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_66629127729c6.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महिंद्रा ट्रैक्टर्स और एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने जारी की सेल्स रिपोर्ट, जानें मई महीने में कैसी रही परफॉर्मेंस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mahindra-tractors-and-escorts-kubota-may-month-sales-report-tractor-sales.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 03 Jun 2024 18:53:43 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mahindra-tractors-and-escorts-kubota-may-month-sales-report-tractor-sales.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जून महीने की शुरुआत हो चुकी है। इसके साथ ही ट्रैक्टर उद्योग से जुड़ी कई कंपनियों ने मई 2024 में हुई बिक्री के आंकड़ें सार्वजनिक कर दिए हैं। मई महीने की सेल्स रिपोर्ट जारी करने वाली इन कंपनियों में भारत की शीर्ष ट्रैक्टर निर्माता कंपनी महिंद्रा ट्रैक्टर्स और एस्कॉर्ट्स कुबोटा शामिल हैं। आइए आपको इन कंपनियों की मई महीने की सेल्स के बारे में विस्तार से बताते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>महिंद्रा ट्रैक्टर्स की बिक्री बढ़ी</strong></p>
<p>महिंद्रा ट्रैक्टर्स की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में कंपनी का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है। मई 2024 में कंपनी की बिक्री में वृद्धि दर्ज की गई है। जहां, घरेलू बिक्री में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, कंपनी ने निर्यात बिक्री में 85 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की है। कंपनी ने घरेलू बाजार में मई 2024 में कुल &nbsp;35,237 ट्रैक्टर्स बेचे हैं। जबकि, पिछले साल मई महीने में बिक्री &nbsp;33,113 यूनिट्स थी। इस हिसाब से देखें तो घरेलू बिक्री में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कई गई है।&nbsp;</p>
<p>वहीं, बात अगर निर्यात बिक्री की करें तो कंपनी ने यहां भी अच्छा प्रदर्शन किया है। कंपनी ने मई 2024 में 1872 ट्रैक्टर्स को भारत से बाहर बेचा है। जबकि, पिछले साल ये आंकड़ा 1013 यूनिट्स था। इस हिसाब से कंपनी ने निर्यात बिक्री में 85 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।&nbsp;</p>
<table border="1" style="border-collapse: collapse; width: 100%; height: 100px;">
<tbody>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 18.2592%; height: 20px; text-align: center;"><strong>महिंद्रा ट्रैक्टर्स सेल्स (मई 2024)</strong></td>
<td style="width: 10.3122%; height: 20px;"></td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px;"></td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px;"></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 18.2592%; height: 20px; text-align: center;"></td>
<td style="width: 10.3122%; height: 20px; text-align: center;"><strong>वित्त वर्ष 2025</strong></td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px; text-align: center;"><strong>वित्त वर्ष 2024</strong></td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px; text-align: center;"><strong>% परिवर्तन</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 18.2592%; height: 20px; text-align: center;"><strong>घरेलू</strong></td>
<td style="width: 10.3122%; height: 20px; text-align: center;">35237</td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px; text-align: center;">33113</td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px; text-align: center;">6%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 18.2592%; height: 20px; text-align: center;"><strong>निर्यात</strong></td>
<td style="width: 10.3122%; height: 20px; text-align: center;">1872</td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px; text-align: center;">1013</td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px; text-align: center;">85%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 18.2592%; height: 20px; text-align: center;"><strong>कुल&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 10.3122%; height: 20px; text-align: center;">37109</td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px; text-align: center;">34126</td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px; text-align: center;">9%</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><strong>ट्रैक्टर की डिमांड बढ़ने की संभावना&nbsp;</strong></p>
<p>कंपनी के प्रदर्शन पर महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड, के प्रेसिडेंट एग्रीकल्चरल इंप्लीमेंट्स, हेमंत सिक्का ने एक बयान भी जारी किया है। हेमंत सिक्का ने कहा, "हमने मई 2024 के दौरान घरेलू बाजार में 35237 ट्रैक्टर बेचे हैं, जो पिछले साल की तुलना में 6% की वृद्धि है। केरल और पूर्वोत्तर राज्यों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के समय पर आगमन और सामान्य से अधिक मानसून के पूर्वानुमान ने किसानों की जमीनी भावनाओं में सुधार किया है। खरीफ फसलों के लिए भूमि तैयारी गतिविधियां समय पर शुरू होने की उम्मीद है, जिससे आने वाले महीनों में ट्रैक्टरों की मांग बढ़ने की संभावना है। निर्यात बाजार में अमेरिका को ओजेए निर्यात के दम पर, हमने 1872 ट्रैक्टर बेचे हैं, जो पिछले साल की तुलना में 85% की वृद्धि है।"</p>
<p><strong>एस्कॉर्ट्स कुबोटा की बिक्री घटी&nbsp;</strong></p>
<p>एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने भी अपनी मई महीने की सेल्स रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, मई महीने में कंपनी ने कुछ खास प्रदर्शन नहीं किया है। कंपनी ने मई 2024 में पिछले साल के मुकाबले कम ट्रैक्टर बेचे हैं। जिस वजह से कंपनी की सेल्स में गिरावट आई है। एस्कॉर्ट्स कुबोटा की कुल बिक्री (घरेलू + निर्यात बिक्री) में &nbsp;6.1 प्रतिशत की गिरावट आई है। कंपनी ने मई 2024 में कुल 8,612 ट्रैक्टर बेचे हैं, जबकि मई 2023 में 9,167 ट्रैक्टरों की बिक्री हुई थी।</p>
<table border="1" style="border-collapse: collapse; width: 100%; height: 100px;">
<tbody>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 18.2592%; height: 20px; text-align: center;"><strong>एस्कॉर्ट्स कुबोटा सेल्स (मई 2024)</strong></td>
<td style="width: 10.3122%; height: 20px;"></td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px;"></td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px;"></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 18.2592%; height: 20px; text-align: center;"></td>
<td style="width: 10.3122%; height: 20px; text-align: center;"><strong>वित्त वर्ष 2025</strong></td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px; text-align: center;"><strong>वित्त वर्ष 2024</strong></td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px; text-align: center;"><strong>% परिवर्तन</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 18.2592%; height: 20px; text-align: center;"><strong>घरेलू</strong></td>
<td style="width: 10.3122%; height: 20px; text-align: center;">8232</td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px; text-align: center;">8704</td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px; text-align: center;">-5.4%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 18.2592%; height: 20px; text-align: center;"><strong>निर्यात</strong></td>
<td style="width: 10.3122%; height: 20px; text-align: center;">380</td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px; text-align: center;">463</td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px; text-align: center;">-17.9%</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 18.2592%; height: 20px; text-align: center;"><strong>कुल&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 10.3122%; height: 20px; text-align: center;">8612</td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px; text-align: center;">9167</td>
<td style="width: 14.2857%; height: 20px; text-align: center;">-6.1%</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>एस्कॉर्ट्स कुबोटा की घरेलू बिक्री में 5.4 प्रतिशत और निर्यात बिक्री में 17.9 प्रतिशत की गिरावट आई है। कंपनी ने मई 2024 में घरेलू बाजार में 8,232 ट्रैक्टर बेचे हैं। जबिक, पिछले साल मई महीने में कंपनी ने 8,704 ट्रैक्टर बेचे थे। इसी तरह निर्यात बिक्री में भी कंपनी ने गिरावट दर्ज की है। कंपनी ने मई 2024 में 380 ट्रैक्टरों को निर्यात किया है, जबकि पिछले साल इसी महीने में कंपनी ने 463 ट्रैक्टर्स को भारत से बाहर बेचा था।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_665d92a5be6c0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ महिंद्रा ट्रैक्टर्स और एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने जारी की सेल्स रिपोर्ट, जानें मई महीने में कैसी रही परफॉर्मेंस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_665d92a5be6c0.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[World Milk Day: 50 साल में 10 गुना बढ़ा दूध का उत्पादन,  8 करोड़ किसानों को मिल रहा लाभ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/world-milk-day-milk-production-increased-10-times-in-50-years-eight-crore-farmers-getting-direct-benefits.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 01 Jun 2024 16:59:15 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/world-milk-day-milk-production-increased-10-times-in-50-years-eight-crore-farmers-getting-direct-benefits.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>World Milk Day:</strong> भारत का डेयरी सेक्टर तेजी से ग्रोथ कर रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था यानी जीडीपी में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है। खासतौर पर दूध इसमें अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं की भारत विश्व स्तर पर दूध का सबसे बड़ा उत्पादक है। आंकड़े बताते हैं कि बीते 50 सालों में दूध का उत्पादन 10 गुना तक बढ़ा है। 50 साल पहले देश में दूध का उत्पादन 2.4 करोड़ मीट्रिक टन था, जो अब बढ़कर 23.05 करोड़ मीट्रिक टन हो गया है।</p>
<p>2022-23 में दूध का वार्षिक उत्पादन 23.05 करोड़ टन से अधिक रहा। वहीं, &nbsp;वर्ष 2047 तक इसके 62.8 करोड़ टन तक पहुंच जाने का अनुमान है। डेयरी उद्योग में आई इस ग्रोथ की एक वजह इसमें हो रहा निवेश भी है। इंडियन डेयरी एसोसिएशन (आईडीए) के प्रेसीडेंट और अमूल के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. आर एस सोढ़ी के मुताबिक भारत में अगले 7-8 साल में डेयरी में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा। इससे नौकरियों के लाखों अवसर पैदा होंगे। नई दिल्ली में पिछले दिनों रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये के निवेश से संगठित क्षेत्र में दूध की रोजाना प्रोसेसिंग क्षमता बढ़कर 24 करोड़ लीटर हो जाएगी। अभी संगठित क्षेत्र में रोजाना 12 करोड़ लीटर दूध की प्रोसेसिंग होती है। उन्होंने आगे कहा कि इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। संगठित क्षेत्र में जहां एक लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग से 6000 लोगों को रोजगार मिलता है। वहीं, 12 करोड़ लीटर दूध की प्रोसेसिंग बढ़ेगी तो करीब 72 लाख नए रोजगार पैदा होंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आज दूध का उत्पादन 10 गुना तक बढ़ा है। 50 साल पहले देश में 2.4 करोड़ टन दूध का उत्पादन होता था, आज यह 23.1 करोड़ टन पर पहुंच गया है। 2047 तक इसके 62.8 करोड़ टन तक पहुंच जाने का अनुमान है। उन्होंने आगे कहा कि दूध उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ प्रति व्यक्ति खपत भी बढ़ेगी। अभी प्रति व्यक्ति खपत 460 ग्राम है। इसके 2047 में 850 ग्राम तक पहुंचने का अनुमान है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि कृषि बाजार अभी लगभग 50 लाख करोड़ रुपये का है। इसमें संगठित क्षेत्र 7 लाख करोड़ रुपये का है। इसमें भी आधा करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये का संगठित बाजार दूध का है। वर्ष 2030 तक खाने के सामान का बाजार 170 लाख करोड़ रुपए का हो जाएगा।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि दुग्ध क्षेत्र का विकास इसलिए हुआ क्योंकि इसमें किसान और उपभोक्ता दोनों फायदे की स्थिति में थे। आज ब्रांडेड फूड मार्केट महानगरों में ही नहीं, बल्कि टियर 2 और टियर 3 शहरों में भी फैल रहा है, खासकर छोटे पैक में। यहां यह देखने की बात है कि उपभोक्ता अच्छी क्वालिटी के लिए 10% से 20% प्रीमियम तो दे देता है, लेकिन उससे अधिक प्रीमियम होने पर प्रॉडक्ट में वैल्यू तलाशता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आज ग्राहकों में ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन, फैट और एनीमल सोर्स वाले उत्पादों की मांग बढ़ रही है। इसलिए किसानों को उसका उत्पादन बढ़ाना चाहिए जिसकी बाजार में मांग हो। उन्होंने कहा कि अगर आपके उत्पाद में स्वाद एवं न्यूट्रिशन होगा और वह बजट में रहेगा, तो उनकी मांग हमेशा बनी रहेगी। यह बाजार की सालों पुरानी परंपरा है जो आज भी कायम है और आने वाले समय में भी रहेगी।</p>
<p>भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का 15 प्रतिशत का योगदान है। इसमें से 5 प्रतिशत सिर्फ डेयरी योद्योग से आता है। पीआईबी की ओर से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, डेयरी उद्योग सीधे तौर पर 8 करोड़ से अधिक किसानों को रोजगार देता है। भारत दूध उत्पादन में पहले स्थान पर है, जो वैश्विक दूध उत्पादन में 24.64 प्रतिशत का योगदान देता है। पिछले 9 वर्षों में दूध उत्पादन 5.85% &nbsp;की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ रहा है, जो 2014-15 के दौरान 146.31 मिलियन टन से बढ़कर 2022-23 के दौरान 230.58 मिलियन टन हो गया है। तुलनात्मक रूप से देखें तो वर्ष 2021 की तुलना में 2022 के दौरान विश्व दूध उत्पादन में 0.51% की वृद्धि हुई है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_665b09ef8b47b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ World Milk Day: 50 साल में 10 गुना बढ़ा दूध का उत्पादन,  8 करोड़ किसानों को मिल रहा लाभ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_665b09ef8b47b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बासमती के दाम गिरने से बढ़ी निर्यातकों की मुश्किलें, सरकार से एमईपी हटाने की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/problems-of-exporters-increased-due-to-falling-price-of-basmati-requested-the-government-to-remove-mep.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 29 May 2024 13:48:49 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/problems-of-exporters-increased-due-to-falling-price-of-basmati-requested-the-government-to-remove-mep.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में बासमती चावल के बंपर उत्पादन और कीमतों में गिरावट को देखते हुए निर्यातकों ने सरकार ने न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) की पाबंदी समाप्त करने का अनुरोध किया है। निर्यातकों का कहना है कि बासमती चावल की कीमतों में फसल कटाई के बाद से करीब 15 फीसदी की गिरावट आ चुकी है, <span>लेकिन 950 डॉलर प्रति टन के </span><span>एमईपी </span><span>के चलते निर्यात करने में दिक्कतें आ रही हैं।</span>&nbsp;</p>
<p>हरियाणा और पंजाब के चावल निर्यातकों ने कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद विकास प्राधिकरण (एपीडा) को पत्र लिखकर बासमती पर न्यूनतम निर्यात मूल्य की पाबंदी समाप्त करने या फिर इसे कम करने की मांग की है। निर्यातकों को कहना है कि भारत में एमईपी अधिक होने के कारण पाकिस्तान के बासमती निर्यातकों को फायदा पहुंच रहा है जबकि भारत का बासमती निर्यात प्रभावित हो रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>हरियाणा राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन</strong> के अध्यक्ष <strong>सुशील जैन</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि इस साल देश में बासमती की अच्छी पैदावार हुई थी। लेकिन पहले सरकार ने बासमती पर 1200 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य लागू किया जिसकी वजह से निर्यात कम हुआ। अब भी बासमती पर 950 डॉलर का एमईपी लागू है। जबकि बासमती के दाम फसल आने के बाद से 15-20 फीसदी तक गिर चुके हैं। बासमती चावल की कई किस्मों और पैकिंग का रेट एमईपी से नीचे चल रहा है। ऐसे में बासमती निर्यात नहीं बढ़ पा रहा है। सुशील जैन का कहना है कि सरकार को बासमती चावल पर न्यूनतम निर्यात मूल्य की पाबंदी हटा देनी चाहिए या फिर इसे घटाकर 750 डॉलर करना चाहिए। तभी देश से बासमती का निर्यात हो पाएगा। अन्यथा पाकिस्तान से बासमती का निर्यात बढ़ेगा और भारत के बासमती व्यापार को नुकसान पहुंचेगा।&nbsp;</p>
<p>बाजार सूत्रों के अनुसार, बासमती चावल का निर्यात मूल्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम निर्यात मूल्य 950 डॉलर प्रति टन से नीचे गिरकर 850 डॉलर प्रति टन के आसपास पहुंच गया है। इसका असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ रहा है। निर्यात कम होने से बासमती की घरेलू कीमतें भी 75 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर 65 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास आ गई हैं। आगामी खरीफ सीजन में सामान्य मानसून के पूर्वानुमान को देखते हुए बासमती चावल की अच्छी पैदावार का अनुमान है। इससे कीमतों में और कमी आ सकती है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>वर्ष 2023-24 में भारत ने रिकॉर्ड 52 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया था जिसमें करीब 48 हजार करोड़ रुपये का व्यापार हुआ। देश के कुल कृषि निर्यात में बासमती चावल महत्वपूर्ण कमोडिटी है। लेकिन निर्यात पाबंदियों के चलते बासमती निर्यात को पिछले साल के स्तर पर बनाए रखना मुश्किल दिख रहा है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_6656e42a5dc83.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बासमती के दाम गिरने से बढ़ी निर्यातकों की मुश्किलें, सरकार से एमईपी हटाने की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_6656e42a5dc83.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत की एग्रोकेमिकल इंडस्ट्री में 2027&amp;#45;28 तक हर साल 9% ग्रोथ की संभावना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/agrochemical-industry-of-india-to-grow-at-9-percent-annually-till-2027-28.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 25 May 2024 12:45:37 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/agrochemical-industry-of-india-to-grow-at-9-percent-annually-till-2027-28.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत की एग्रोकेमिकल इंडस्ट्री के मौजूदा वित्त वर्ष से लेकर 2027-28 तक हर साल 9% बढ़ने की उम्मीद है। सरकारी समर्थन, उत्पादन क्षमता का विस्तार, घरेलू और निर्यात बाजार में वृद्धि तथा लगातार इनोवेटिव प्रोडक्ट के आने से यह संभव हो सकेगा। रिस्क मैनेजमेंट और मॉनिटरिंग कंपनी रूबिक्स डाटा साइंसेज ने अपनी मासिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।<br />रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की एग्रोकेमिकल इंडस्ट्री इस समय करीब 10.3 अरब डॉलर की है, यह वित्त वर्ष 2027-28 तक 14.5 अरब डॉलर की हो जाएगी। वर्ष 2022-23 में भारत से 5.4 अरब डॉलर के एग्रोकेमिकल का निर्यात हुआ। वर्ष 2018-19 से लेकर 2022-23 तक इसमें सालाना 14% की वृद्धि हुई।<br />रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्यात में यह वृद्धि आयात के बिल्कुल विपरीत है। समान अवधि में निर्यात में औसतन 6% सालाना की वृद्धि हुई है। इस तरह देखा जाए तो शुद्ध निर्यातक के रूप में भारत की स्थिति मजबूत हुई है।&nbsp;<br />रिपोर्ट के अनुसार एग्रोकेमिकल सेक्टर में हर्बिसाइड का निर्यात काफी बेहतर रहा है। इसके निर्यात में वर्ष 2018-19 से 2022-23 के दौरान हर साल औसतन 23% की वृद्धि हुई है। इस अवधि में भारत के कुल एग्रोकेमिकल निर्यात में हर्बिसाइड का हिस्सा 31% से बढ़कर 41% हो गया है।<br />भारत से एग्रोकेमिकल का निर्यात कई प्रमुख बाजारों में हुआ है। ब्राजील, अमेरिका, वियतनाम, चीन और जापान इनका आयात करने वाले शीर्ष पांच देश हैं। भारत से एग्रोकेमिकल के कुल निर्यात में इन देशों का हिस्सा 2018-19 में 48% था जो अब 65% के आसपास पहुंच गया है।<br />भारत में घरेलू स्तर पर एग्रोकेमिकल का प्रयोग सिर्फ 0.6 किलो प्रति हेक्टेयर के आसपास है। यह एशियाई देशों के औसत और विश्व औसत दोनों से बहुत कम है। विश्व औसत 2.4 किलो प्रति हेक्टेयर और एशियाई देशों का औसत 3.6 किलो प्रति हेक्टेयर है। रिपोर्ट के अनुसार कम इस्तेमाल यह दर्शाता है कि भारत में इसके बाजार के विस्तार की अभी अनेक संभावनाएं हैं।<br />रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस सेक्टर के लिए आगे की राह में कई चुनौतियां भी हैं। एक तो विश्व अर्थव्यवस्था में जो अनिश्चितता है, वह अपने आप में एक जोखिम है। चीन जैसे स्थापित खिलाड़ी की ओर से प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन भी परिस्थितियों में बदलाव ला रहा है। बारिश का अनुमान लगाना मुश्किल होता जा रहा है, जिससे कृषि का पैटर्न बाधित हुआ है। इन वजहों से फसलों की उत्पादकता प्रभावित हुई है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_66518fba8f68a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत की एग्रोकेमिकल इंडस्ट्री में 2027-28 तक हर साल 9% ग्रोथ की संभावना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_66518fba8f68a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोनालीका ने अप्रैल में 11,656 ट्रैक्टरों की रिकॉर्ड बिक्री की, बाजार हिस्सेदारी में बढ़ोतरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sonalika-sold-record-11656-tractors-in-april-market-share-increased.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 10 May 2024 14:46:41 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sonalika-sold-record-11656-tractors-in-april-market-share-increased.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के प्रमुख ट्रैक्टर ब्रांड सोनालीका ने वित्त वर्ष <span>2024-25</span> की शानदार शुरुआत की है। कंपनी ने अप्रैल में <span>11,656</span> ट्रैक्टर बिक्री के रिकॉर्ड के साथ बाजार हिस्सेदारी में बढ़ोतरी भी दर्ज की है।<span>&nbsp;</span>वित्त वर्ष <span>2023-24</span> में सोनालीका ट्रैक्टर्स ने अब तक की सर्वाधिक बाजार हिस्सेदारी हासिल की थी। भारत से ट्रैक्टर एक्सपोर्ट के मामले में सोनालीका नंबर वन ब्रांड है।</p>
<p>सोनालीका के ट्रैक्टर पंजाब के होशियारपुर स्थित विश्व के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड ट्रैक्टर प्लांट में बनाए जाते हैं जहां औसतन हर दो मिनट में एक नया ट्रैक्टर बनता है। भारत विश्व का सबसे बड़ा ट्रैक्टर बाजार है और सोनालीका ने देश में तीसरे सबसे बड़े ट्रैक्टर ब्रांड के रूप में अपनी पहचान बनाई है।</p>
<p><strong>अच्छे मानसून से आस&nbsp;</strong></p>
<p>सोनालीका ब्रांड की मालिक कंपनी <strong>इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड</strong> के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर <strong>रमन मित्तल</strong> का कहना है कि सोनालीका ने अप्रैल<span>'24</span> में कुल <span>11,656</span> ट्रैक्टरों की बिक्री के शानदार प्रदर्शन के साथ बाजार हिस्सेदारी में बढ़ोतरी दर्ज की है। यह हमारे लिए उत्साहजनक है। हमारी उन्नत और हैवी ड्यूटी ट्रैक्टर रेंज ने <span>15+ </span>लाख किसान परिवारों का भरोसा हासिल किया है।</p>
<p>वित्त वर्ष <span>2024-25 </span>की संभावनओं के बारे में रमन मित्तल ने बताया कि अल नीनो (<span>El Nino) </span>प्रभाव लगातार कमज़ोर हो रहा है और आने वाले वर्ष में सामान्य से अधिक मानसून की भविष्वाणी के साथ<span>, </span>जलाशयों के तेजी से सामान्य स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। जिससे इस वर्ष के दौरान ट्रैक्टर मांग में बढ़ोतरी हो सकती है। वे किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए नए उत्पाद पेश करते रहेंगे। &nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x_663de5d3ad986.jpg" alt="" width="592" height="333" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>क्षमता विस्तार पर जोर&nbsp;</strong></p>
<p>सोनालीका के होशियारपुर प्लांट का विस्तार किया जाएगा। 1300 करोड़ रुपये के निवेश से सोनालीका के होशियारपुर में दो नए प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। इससे कंपनी की वार्षिक क्षमता में एक लाख ट्रैक्टरों की वृद्धि होगी। किसानों का भरोसा बनाने के लिए सोनालीका ट्रैक्टरों पर <span>5</span> साल की वारंटी दी जा रही है साथ ही कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर ट्रैक्टर की कीमतें प्रदर्शित कर दी हैं।</p>
<p><strong>कृषि उपकरणों से ट्रैक्टर तक</strong></p>
<p>शुरुआत में कृषि उपकरण बनाने वाली पंजाब की यह कंपनी जब 1995 में ट्रैक्टर निर्माण के क्षेत्र में उतरी थी और कुछ ही वर्षों में ट्रैक्टर बाजार में अपनी पहचान बना ली। 2018 में सोनालीका ने सालाना एक लाख ट्रैक्टर बेचने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया था। वित्त वर्ष 2023-24 में सोनालीका ट्रैक्टर्स ने भारतीय ट्रैक्टर बाजार में 15.34 की हिस्सेदारी प्राप्त की थी जो कंपनी के लिए अब तक का सर्वाधिक है। निर्यात में सोनालीका की हिस्सेदारी करीब 34 फीसदी है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_663de48d6165b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोनालीका ने अप्रैल में 11,656 ट्रैक्टरों की रिकॉर्ड बिक्री की, बाजार हिस्सेदारी में बढ़ोतरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_663de48d6165b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मदर डेयरी का टर्नओवर 15 हजार करोड़, अब 15 फीसदी ग्रोथ का लक्ष्यः मदर डेयरी एमडी  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mother-dairys-turnover-is-rs-15-thousand-crore-now-target-of-15-percent-growth-mother-dairy-md.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 08 May 2024 07:44:05 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mother-dairys-turnover-is-rs-15-thousand-crore-now-target-of-15-percent-growth-mother-dairy-md.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के डेयरी सेक्टर से दूसरे सबसे बड़े ब्रांड मदर डेयरी की स्वामित्व वाली कंपनी मदर डेयरी फ्रूट एंड वेजिटेबल प्राइवेट लिमिटेड लगातार अपने मार्केट का विस्तार कर रही है। पिछले वित्त वर्ष (2023-24) में मदर डेयरी ने 15 हजार करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल किया और चालू वित्त वर्ष (2024-25) में वह इसमें 15 फीसदी वृद्धि का लक्ष्य लेकर चल रही है। दूध, आइसक्रीम, बटर, दही और दूध के वैल्यू एडेड उत्पादों के पोर्टफोलियो में बढ़ोतरी के साथ कंपनी विदर्भ और मराठवाड़ा, तेलंगाना और राजस्थान में अपने कारोबार का विस्तार कर रही है। इसके साथ ही नागपुर में मदर डेयरी छह लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता का अपना नया संयंत्र स्थापित करने जा रही है।</p>
<p>चालू वित्त वर्ष में मदर डेयरी के औसतन 60 लाख लीटर दूध प्रतिदिन खरीदने की संभावना है। दूध व दुग्ध उत्पादों के अलावा फल-सब्जियों, फ्रोजन प्रॉडक्ट्स और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स के साथ ही मदर डेयरी धारा ब्रांड बेजिटेबल ऑयल के बिजनेस में लगातार बढ़ोतरी के साथ चालू वर्ष में बेहतर वृद्धि की उम्मीद कर रही है। मदर डेयरी के मैनेजिंग डायरेक्टर <strong>मनीष बंदलिश</strong>&nbsp;ने <strong>रूरल वॉयस</strong> के साथ खास बातचीत में कंपनी की भावी योजनाओं और चालू वित्त वर्ष के कारोबारी लक्ष्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।&nbsp;</p>
<p>मनीष बंदलिश का कहना है कि इस साल डेयरी कारोबार पिछले साल से बेहतर रहने की संभावना है। इस साल दूध की खरीद कीमतों में कुछ उतार-चढ़ाया आया था लेकिन अब यह स्थिर हैं। मदर डेयरी किसानों द्वारा स्थापित प्रॉडयूसर कंपनियों के जरिये और सीधे भी पशुपालकों से दूध की खरीद करती है। वहीं सफल स्टोर के माध्यम से फल-सब्जियां बेचने के लिए भी सीधे किसानों से इनकी खरीद करती है। राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) की सब्सिडियरी होने के नाते यह मदर डेयरी का मेंडेट भी है कि वह किसानों से सीधे उनके उत्पादों की खरीद करें ताकि उनको बेहतर दाम मिल सकें।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x_663a2e35c0d14.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में विस्तार&nbsp;</strong></p>
<p>एक सवाल के जवाब में मनीष बंदलिश बताते है कि हमने विदर्भ और मराठवाड़ा के किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के उद्देश्य से पांच साल पहले वहां प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसका नतीजा यह रहा है कि अब हम वहां 28 हजार किसानों से चार लाख लीटर दूध प्रतिदिन खरीद रहे हैं। इसके लिए हमने नागपुर में एक प्लांट लगाया है। वहीं अब हम दूसरा प्लांट लगा रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही इस प्लांट के लिए आवंटित जमीन का पजेशन हमें मिला है। अगले दो साल में यह संयंत्र चालू हो जाएगा। छह लाख लीटर की प्रसंस्करण क्षमता वाले इस प्लांट की क्षमता को दस लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाया जा सकेगा। जल्द ही वहां दूध की खरीद पांच से छह लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच जाएगी। इस प्लांट के जरिये हम महाराष्ट्र के साथ छत्तीसगढ़ के मार्केट तक अपने उत्पाद पहुंचा सकेंगे क्योंकि नागपुर एक सेंट्रल लोकेशन वाली जगह है। वहां स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) के उत्पादन के लिए ड्रायर लगाने के साथ ही आइसक्रीम उत्पादन का संयंत्र की स्थापित किया जाएगा।</p>
<p><strong>मातृत्व भावना पर जोर </strong>&nbsp;</p>
<p>मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक मनीष बंदलिश ने कहा कि मदर डेयरी मातृ मूल्यों के महत्व को पहचानती है। मदर डेयरी ने अपने नवीनतम <a href="https://www.youtube.com/watch?v=hfsw3atqZsc">विज्ञापन कैंपेन</a> में "ममता जैसी शुद्ध, माँ जैसी ममता" शीर्षक से अपना ब्रांड एंथम तैयार किया है जिसे जाने-माने गीतकार गुलज़ार ने लिखा है। उनका कहना है, "मदर डेयरी में, हम अपने काम के हर पहलू को उसी प्यार और देखभाल से जोड़ने में विश्वास करते हैं जो एक मां की पहचान है।"</p>
<p><strong>40 देशों को पल्प का निर्यात&nbsp;</strong></p>
<p>आइसक्रीम के मौजूदा बिजनेस पर मदर डेयरी के एमडी ने बताया कि अभी हमारा आइसक्रीम का 70 फीसदी बिजनेस उत्तर भारत में है लेकिन अब इसका भी विस्तार दूसरे राज्यों में करेंगे। मदर डेयरी की स्थापना 1974 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के रूप में की गई थी। यह ऑपरेशन फ्लड के तहत एक पहल थी, जो दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी विकास कार्यक्रम था। इसके तहत दूध किसानों के लिए मार्केट तैयार करना था और शहरी उपभोक्ताओं को दूध की उपलब्धता मुहैया करना था।</p>
<p>सफल ब्रांड के बिजनेस के बारे में उन्होंने बताया कि हम अपने आउटलेट के जरिये फल और सब्जियों की बिक्री कर रहे हैं। इसके लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से कृषि उत्पादों को खरीदते हैं। मदर डेयरी का फ्रोजन उत्पादों का कारोबार भी तेजी बढ़ा है। इसके अलावा रांची और बेंगलुरु स्थित पल्प उत्पादन संयंत्रों में अल्फांसो और तोतापुरी आम के अलावा टमाटर और केला का प्रसंस्करण करने के साथ रांची में कोर्न का प्रसंस्करण भी करते हैं। हम 40 देशों को पल्प का निर्यात कर रहे हैं। पल्प का कारोबार बिजनेस टू बिजनेस यानी बी2बी होता है। खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को इसकी बिक्री होती है।</p>
<p><strong>धारा की बिक्री में जबरदस्त उछाल&nbsp;</strong></p>
<p>वहीं देश के सबसे पहले टेट्रा पैक में बिकने वाले खाद्य तेल ब्रांड धारा को लेकर मदर डेयरी प्रबंधन बहुत उत्साहित है। मनीश बेंदलिश का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में धारा की बिक्री में जबरदस्त उछाल आया है। इसमें करीब 65 फीसदी हिस्सेदारी कच्ची घानी और सरसों तेल के दूसरे वेरिएंट की है जो बिहार और पूर्वोत्तर के मार्केट में तेजी से बढ़ रहा है। दक्षिण भारत में बड़े कारोबार के रूप में स्थापित दही का बिजनेस उत्तर भारत में भी तेजी से बढ़ रहा है। मनीश बताते हैं कि अब यहां भी बड़ी पैकेजिंग में दही का बल्क बिजनेस बढ़ रहा है। कैटरिंग व फूड बिजनेस की दूसरी श्रेणियों में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। हम भी इसमें इजाफा कर रहे हैं। हालांकि यह बिजनेस बी2बी होता है।&nbsp;</p>
<p>पिछले साल के मुकाबले चालू साल के कारोबार में करीब 15 फीसदी बढ़ोतरी के लक्ष्य के बारे में मदर डेयरी के एमडी कहते हैं कि हम यह लक्ष्य वॉल्यूम यानी उत्पादों की अधिक मात्रा में बिक्री के आधार पर लेकर चल रहे हैं। इसमें कीमतों में बढ़ोतरी को अभी आधार नहीं बनाया है। ऐसे में उनका यह बयान उपभोक्ताओं के लिए एक अच्छी खबर है क्योंकि उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में दूध या उसके उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_663a2ddc1465a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मदर डेयरी का टर्नओवर 15 हजार करोड़, अब 15 फीसदी ग्रोथ का लक्ष्यः मदर डेयरी एमडी   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_663a2ddc1465a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत में 320 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान, उद्योग ने मांगी 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sugar-production-expected-to-reach-320-lakh-tonnes-industry-seeks-permission-to-export-20-lakh-tonnes-of-sugar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 06 May 2024 20:18:51 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sugar-production-expected-to-reach-320-lakh-tonnes-industry-seeks-permission-to-export-20-lakh-tonnes-of-sugar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत का चीनी उत्पादन 314 लाख टन के पार पहुंच गया है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने चालू पेराई सत्र 2023-24 में चीनी उत्पादन के आंकड़े जारी करते हुए अंतिम कुल चीनी उत्पादन 320 लाख टन के करीब रहने की उम्मीद जताई है जो पिछले साल के 328.2 लाख टन चीनी उत्पादन से करीब ढाई फीसदी कम है।</p>
<p>कर्नाटक और तमिलनाडु की चीनी मिलों से 5-6 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन के चलते इस साल चीनी उत्पादन 320 लाख टन तक पहुंचने की संभावना है जबकि देश में चीनी की खपत 285 लाख टन के आसपास है। देश में चीनी उत्पादन की स्थिति को देखते हुए इस्मा ने केंद्र सरकार से 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देने का आग्रह किया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x_6638e9fcc1ac1.jpg" alt="" /></p>
<p>इस्मा के महानिदेशक <strong>दीपक बल्लानी</strong> का कहना है कि चीनी उत्पादन का अनुमान सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है। चीनी मिलों की वित्तीय सेहत और किसानों को समय पर भुगतान उद्योग के सुचारू कामकाज के लिए जरूरी है। इसलिए हम सरकार से चालू सीजन में 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देने का आग्रह करते हैं। इससे न केवल उद्योग को लाभ होगा बल्कि गन्ना किसानों का भी भला हो सकेगा।</p>
<p>चुनावी साल में चीनी की कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर रोक लगा रखी है। जबकि पिछले साल लगभग 60 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी गई थी।</p>
<p>पिछले शुगर सीजन 2022-23 में देश में 328.2 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ था जबकि 38 लाख टन चीनी का उपयोग एथेनॉल बनाने के लिए हुआ था। इस प्रकार ग्रास चीनी उत्पादन 366 लाख टन रहा था। इस साल 320 लाख टन चीनी उत्पादन और 17 लाख टन चीनी के एथेनॉल के लिए डायवर्जन को मिलाकर कुल चीनी उत्पादन 337 लाख टन तक पहुंच सकता है। यह गत वर्ष के मुकाबले करीब 8 फीसदी कम है।</p>
<p>देश में चीनी की सालाना खपत करीब 285 लाख टन है। जबकि पिछले साल का शुरुआत स्टॉक 56 लाख टन था। इस प्रकार 30 सितंबर, 2024 को शुगर सीजन की समाप्ति पर देश में करीब 91 लाख टन चीनी क्लोजिंग स्टॉक होगा जो तीन माह की सामान्य खपत से कहीं अधिक है। चीनी का यह अतिरिक्त स्टॉक मिलर्स पर वित्तीय बोझ बढ़ा सकता है। इसलिए उद्योग ने सरकार से 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देने का आग्रह किया है।&nbsp;</p>
<p>इस्मा के अनुसार, अप्रैल के अंत तक देश में 516 चीनी मिलों ने अपना पेराई कार्य पूरा कर लिया था, जबकि पिछले साल इस अवधि तक 460 मिलें बंद हुई थीं। इस प्रकार अप्रैल के आखिरी में केवल 16 चीनी मिलों में पेराई चल रही है जबकि पिछले साल इसी तारीख तक 73 मिलें चल रही थीं। गन्ने की कम उपलब्धता के कारण इस साल उत्तर भारत की चीनी मिलों ने जल्द पेराई बंद की कर सीजन समाप्त कर दिया है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_6638eaf056ec9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत में 320 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान, उद्योग ने मांगी 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_6638eaf056ec9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गुजरात और महाराष्ट्र की राजनीति में फंसा प्याज, निर्यात की घोषणा पर संशय]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/onions-caught-in-the-politics-of-gujarat-and-maharashtra-doubts-on-the-announcement-of-export-permission.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 29 Apr 2024 15:52:22 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/onions-caught-in-the-politics-of-gujarat-and-maharashtra-doubts-on-the-announcement-of-export-permission.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्याज निर्यात पर प्रतिबंध को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। चुनाव के मद्देनजर प्याज की कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए केंद्र सरकार ने <strong>8 दिसंबर</strong> को प्याज निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसका महाराष्ट्र के किसानों ने खूब विरोध किया क्योंकि निर्यात पर प्रतिबंध से प्याज के दाम गिर गये और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। अब लोकसभा चुनाव के दौरान प्याज निर्यात पर प्रतिबंध का मुद्दा महाराष्ट्र में तूल पकड़ रहा है। इस बीच, प्याज निर्यात से जुड़े दो फैसलों ने महाराष्ट्र की प्याज राजनीति को और ज्यादा गरमा दिया है।</p>
<p>पिछले सप्ताह केंद्र सरकार ने 2000 टन <strong>सफेद प्याज</strong> के निर्यात की अनुमति दे दी। सफेद प्याज का उत्पादन मुख्यत: गुजरात में होता है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की अधिसूचना के अनुसार, सफेद प्याज के निर्यात के लिए गुजरात के बागवानी आयुक्त से वस्तु और मात्रा का प्रमाण-पत्र लेना होगा। यह निर्यात गुजरात के मुंद्रा और पिपावाव तथा मुंबई के न्हावा शेवा/<span>जेएनपीटी</span> बंदरगाह से होगा। गुजरात के अमरेली और भावनगर जिले सफेद प्याज की खेती के लिए जाने जाते हैं और दोनों जिलों में सात मई को मतदान होना है।</p>
<p>सफेद प्याज के निर्यात की छूट को गुजरात को फायदा पहुंचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। महाराष्ट्र के किसान संगठन स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के अध्यक्ष और पूर्व सांसद <strong>राजू शेट्टी </strong>ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि सफेद प्याज के निर्यात की छूट और लाल प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध, यह नीति सरासर गलत है। इसे लेकर महाराष्ट्र के किसानों में बहुत नाराजगी है। गुजरात और महाराष्ट्र के बीच इस तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>शरद पवार</strong> ने भी सफेद प्याज के निर्यात की छूट के मोदी सरकार के फैसले की आलोचना की।&nbsp;</p>
<p>सफेद प्याज के निर्यात की छूट का मुद्दा महाराष्ट्र में तूल पकड़ने लगा तो केंद्र सरकार ने आनन-फानन में <strong>छह देशों</strong> को<strong> 99,150 टन</strong> प्याज निर्यात की <a href="https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2018995"><strong>विज्ञप्ति</strong></a> जारी कर दी। 27<span> अप्रैल को </span>जारी विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्र सरकार ने बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, भूटान, बहरीन, मॉरीशस और श्रीलंका को 99,150 टन प्याज के निर्यात की अनुमति दी है। इन देशों को प्याज निर्यात के लिए <strong>नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीईएल) </strong>ने&nbsp;घरेलू प्याज की खरीद और निर्यात की व्यवस्था की है।</p>
<p><strong>केंद्र सरकार</strong> द्वारा छह देशों को 99,150 टन प्याज निर्यात की घोषणा शनिवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में प्रधानमंत्री <strong>नरेंद्र मोदी</strong> की चुनावी रैली से पहले की गई। इसे लेकर भाजपा नेताओं में प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देने की होड़ मच गई। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम <strong>देवेंद्र फड़णवीस</strong> ने ट्वीट किया, "99,150 टन प्याज के निर्यात की अनुमति हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत-बहुत धन्यवाद। इसे 6 देशों बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, भूटान, बहरीन, मॉरीशस और श्रीलंका में निर्यात किया जाएगा। इससे सबसे ज्यादा फायदा महाराष्ट्र के प्याज उत्पादकों को मिलेगा।"</p>
<p>केंद्र सरकार की इस घोषणा से लगा कि महाराष्ट्र के किसानों को कुछ राहत मिलेगी। लेकिन जल्द ही इस घोषणा को लेकर संशय पैदा हो गया। शेतकरी संगठन के पूर्व अध्यक्ष और किसान नेता <strong>अनिल घनवट </strong>ने दावा किया है कि केंद्र सरकार ने 99,150 टन प्याज निर्यात की जो घोषणा की है, वह कोई नई अनुमति नहीं है। सरकार किसानों को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। घनवट का कहना है कि गुजरात से सफेद प्याज निर्यात के फैसले के बाद महाराष्ट्र में प्याज उत्पादक नाराज थे। लोकसभा चुनाव पर इसका असर न पड़े, इसलिए केंद्र सरकार भ्रम फैला रही है। नए प्याज निर्यात के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x_662f72d74c6ab.jpg" alt="" width="438" height="311" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>अनिल घनवट का कहना है केंद्र सरकार ने अप्रैल, 2023 से अब तक विभिन्न देशों को कुल 99,150 टन प्याज निर्यात की अनुमति दी है। यह निर्यात एनसीईएल के माध्यम से किया जा रहा है। जबकि नये प्याज निर्यात को लेकर कोई आदेश नहीं है। उन्होंने गुजरात के व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए सफेद प्याज के निर्यात की अनुमति देने का भी आरोप लगाया।&nbsp;</p>
<p><strong>प्याज निर्यात</strong> की हालिया घोषणाओं से महाराष्ट्र के किसानों की नाराजगी कम होने की बजाय बढ़ती नजर आ रही है। नासिक से विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार शिवसेना (<span>यूटीबी</span>) <span>के <strong>राजाभाऊ वाजे</strong> ने छह देशों को प्याज निर्यात के ऐलान को किसानों के आंखों में धूल झोंकने की कोशिश करार दिया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने प्याज निर्यात से जुड़े पुराने फैसलों को ही दोबारा जारी कर दिया है।&nbsp;</span></p>
<p><span><strong>27 अप्रैल</strong> को जारी प्याज निर्यात संबंधी केंद्र सरकार की विज्ञप्ति में यह स्पष्ट नहीं है कि यह निर्णय कब से लागू होगा। न ही इस बारे में किसी अधिसूचना का कोई जिक्र है। इससे यह संदेह बढ़ता है कि यह प्याज के नए निर्यात के बारे में नहीं है। बल्कि पिछले एक साल में दी गई प्याज निर्यात की छूट से संबंधित है।&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p>केंद्र सरकार ने प्याज के निर्यात पर 31 मार्च, 2024 तक प्रतिबंध लगाया था जिसे 22 मार्च को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया था। प्याज निर्यात पर प्रतिबंध से महाराष्ट्र की थोक मंडियों में प्याज के दाम 65 फीसदी तक गिर चुके हैं जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_662f7e343b796.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गुजरात और महाराष्ट्र की राजनीति में फंसा प्याज, निर्यात की घोषणा पर संशय ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_662f7e343b796.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूरिया की बिक्री घटने से स्टॉक 10 साल में सर्वाधिक 100 लाख टन के पार पहुंचा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/due-to-decline-in-urea-sales-the-stock-crossed-100-lakh-tonnes-the-highest-in-10-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 25 Apr 2024 19:11:22 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/due-to-decline-in-urea-sales-the-stock-crossed-100-lakh-tonnes-the-highest-in-10-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले खरीफ सीजन में कमजोर मानसून समेत कई कारणों के चलते देश में यूरिया की बिक्री में कमी दर्ज की गई है। वहीं लगातार आयात और कुछ नये संयंत्रों में उत्पादन शुरू होने के चलते देश में यूरिया का स्टॉक 100 लाख टन के पार पहुंच गया है। इस साल 31 मार्च को यूरिया का स्टॉक 88 लाख टन था जबकि पिछले साल इसी समय यूरिया का स्टॉक 65 लाख टन पर था। उर्वरक उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उत्पादन बढ़ने के साथ ही बिक्री में आई गिरावट यूरिया स्टॉक बढ़ने की वजह है। देश में यूरिया का स्टॉक पिछले एक दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इससे उर्वरक कंपनियों की चिंता बढ़ गई है।&nbsp;</p>
<p><strong>भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी)</strong> के पिछले साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य रहने के दावे के बावजूद खरीफ सीजन में देश के कई हिस्सों में बहुत कम बारिश हुई थी। इसके चलते खरीफ सीजन में अधिकांश फसलों का उत्पादन गिर गया। बारिश में कमी का सीधा असर यूरिया की खपत पर पड़ा। वहीं रबी सीजन में भी देश का बड़ा हिस्सा सर्दियों में होने वाली बारिश से अछूता रहा। इसका असर भी यूरिया की खपत पर पड़ा है। कम बारिश के चलते जहां खरीफ में फसलों का उत्पादन गिरा, वहीं रबी सीजन में भी दलहन, तिलहन समेत अधिकांश फसलों का उत्पादन कम रहने के अनुमान हैं। गेहूं के मामले में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है हालांकि, मध्य प्रदेश में फसल के कमजोर रहने की सूचना आ रही है और चालू रबी मार्केटिंग सीजन (आरएमएस) 2024-25 में अभी तक गेहूं की सरकारी खरीद पिछले साल से कम चल रही है।</p>
<p>यूरिया की खपत में कमी को लेकर <strong>उर्वरक कंपनियां</strong> समीक्षा कर रही हैं। लेकिन कृषि क्षेत्र की पिछले वित्त वर्ष (2023-24) में कमजोर वृद्धि दर कृषि उत्पादन में गिरावट की हकीकत को बयां करने के लिए काफी है। कमजोर कृषि उत्पादन का उर्वरकों की खपत से सीधा संबंध है। सरकार लगातार यूरिया की खपत कम करने की कोशिश करती रही है और इसी रणनीति के तहत यूरिया के बैग का वजन 45 किलो किया गया था। इसके बावजूद पिछले दो साल में यूरिया की खपत बढ़ी थी। लेकिन अब बकाया स्टॉक के आंकड़ों को देखते हुए लगता है कि 2023-24 में यूरिया बिक्री 2022-23 के मुकाबले कम रहेगी।&nbsp;</p>
<p>देश में हर साल करीब 350 लाख टन यूरिया की खपत होती है। इसमें से करीब 240 से 250 लाख टन का उत्पादन देश में होता है और 100 लाख टन से अधिक यूरिया का आयात किया जाता है। <strong>उद्योग सूत्रों</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि इस साल जहां यूरिया की बिक्री में कमी आई वहीं आयात भी जारी रहा। इसके अलावा एचयूआरएल और मैटिक्स जैसी उत्पादन इकाइयों में उत्पादन शुरू होने से सप्लाई बढ़ी है। इसके चलते ही यूरिया का स्टॉक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है। इस स्थिति में लगता है कि आने वाले दिनों में यूरिया आयात में कमी आ सकती है। खरीफ सीजन के लिए यूरिया की अधिक मांग करीब दो माह बाद ही निकलेगी। ऐसे में उपलब्ध स्टॉक में और अधिक बढ़ोतरी हो सकती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_662a5d6e88fc6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूरिया की बिक्री घटने से स्टॉक 10 साल में सर्वाधिक 100 लाख टन के पार पहुंचा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_662a5d6e88fc6.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी मिलों को राहत, एथेनॉल के लिए 3.25 लाख टन सरप्लस चीनी के इस्तेमाल की अनुमति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/relief-to-sugar-mills-permission-to-use-3.25-lakh-tonnes-of-surplus-sugar-for-ethanol.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 25 Apr 2024 16:55:47 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/relief-to-sugar-mills-permission-to-use-3.25-lakh-tonnes-of-surplus-sugar-for-ethanol.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को राहत देते हुए एथेनॉल उत्पादन के लगभग 7 लाख टन बी-हैवी मोलासेस (शीरे) के उपयोग की अनुमति दे दी है। देश में चीनी उत्पादन में सुधार और शुगर इंडस्ट्री की मांग को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ (एनएफसीएसएफ)</strong> की विज्ञप्ति के अनुसार, लगभग 3.25 लाख टन सरप्लस चीनी को एथेनॉल उत्पादन में डायवर्ट किया जाएगा, जिससे 2300 करोड़ रुपये की लागत से 38 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन होगा। इस निर्णय से चीनी स्टॉक को कम करने में मदद मिलेगी और इससे स्थानीय चीनी के बिक्री रेट में सुधार आएगा।&nbsp;</p>
<p>एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष <strong>हर्षवर्धन पाटिल</strong> ने कहा है कि इस निर्णय से चीनी मिलों में बी हैवी मोलासेस के शेष स्टॉक में फंसे लगभग 700 करोड़ रुपये जारी होंगे। और 38 करोड़ लीटर एथेनॉल की बिक्री से लगभग 2300 करोड़ रुपये डिस्टलरियों वाली चीनी मिलों को उपलब्ध होंगे ताकि किसानों को समय पर पूरा भुगतान किया जा सके।</p>
<p>खाद्य मंत्रालय की सलाह पर, पेट्रोलियम मंत्रालय ने डिस्टलरियों को 31 मार्च, 2024 तक उनके पास मौजूद बी-हैवी मोलासेस के स्टॉक के आधार पर अतिरिक्त एथेनॉल आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। देश में चीनी उत्पादन की स्थिति में सुधार और शुगर इंडस्ट्री की मांग को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। &nbsp;</p>
<p>देश में चीनी उत्पादन में कमी की आशंका और आम चुनाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने&nbsp;<strong>7 दिसंबर</strong> को गन्ने के रस तथा बी-हैवी मोलासेज से एथेनॉल उत्पादन पर रोक लगा दी थी। इस फैसले से पूरा चीनी उद्योग सदमे में आ गया और केंद्र सरकार के एथेनॉल कार्यक्रम पर भी सवाल उठने लगा था। इसके अलावा, चीनी मिलों का एथेनॉल उत्पादन के लिए किया गया निवेश खतरे में पड़ गया था। इसके बाद सरकार ने एथेलॉन उत्पादन के लिए 17 लाख टन चीनी के डायवर्जन की सीमा तय कर दी थी। जबकि पिछले साल 45 लाख टन चीनी का डायवर्जन एथेनॉल उत्पादन के लिए किया गया था।</p>
<p>अब पेराई सत्र समाप्ति की ओर है तथा चीनी उत्पादन की स्थिति में सुधार आया है। दिसंबर, जनवरी और फरवरी में हुई बारिश से महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु में खड़े गन्ने को मदद मिली है। इससे चीनी उत्पादन शुरुआती अनुमान से 20 से 25 लाख टन बढ़ गया है।&nbsp;</p>
<p>इसलिए अब केंद्र सरकार ने एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी मिलों के पास पड़े बी-हैवी मोलासेस के उपयोग की अनुमति दी है। यह एथेनॉल उत्पादन के लिए इस साल निर्धारित 17 लाख टन चीनी के अतिरिक्त है। फिलहाल चीनी मिलों के पास करीब 7 लाख टन का बी-हैवी शीरा स्टॉक मौजूद है।</p>
<p><strong>चीनी उद्योग</strong> पिछले दो महीनों से केंद्र सरकार से सरप्लस चीनी और बाकी बचे लगभग 7 लाख टन बी-हैवी मोलासेस से एथेनॉल उत्पादन की अनुमति मांग कर रहा था। इस बारे में एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष हर्षवर्द्धन पाटिल ने 24 फरवरी को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह को एक मांग-पत्र भी सौंपा था।&nbsp;</p>
<p><strong>चालू पेराई सत्र 2023-24</strong> में देश में चीनी उत्पादन 315-320 लाख टन के बीच होने का अनुमान है। एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली 17 लाख टन चीनी इससे अलावा है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के मुताबिक, 15 अप्रैल तक देश भर में चीनी का कुल उत्पादन 310.93 लाख टन रहा है जबकि पिछले साल उक्त तिथि तक देश में कुल चीनी उत्पादन 312.38 लाख टन रहा था।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_662a3e8bd2923.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी मिलों को राहत, एथेनॉल के लिए 3.25 लाख टन सरप्लस चीनी के इस्तेमाल की अनुमति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_662a3e8bd2923.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ब्राजील और अर्जेंटीना से दलहन आयात की तैयारी, कैसे आएगी आत्मनिर्भरता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/import-of-pulses-from-brazil-argentina-what-about-self-reliance.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 16 Apr 2024 15:01:34 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/import-of-pulses-from-brazil-argentina-what-about-self-reliance.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दलहन के मामले में आत्मनिर्भरता के दावों के बावजूद दालों के आयात पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। सरकार ब्राजील और अर्जेंटीना से दालों का आयात करने जा रही है। इसके लिए दीर्घकालिक सौदे किए जाएंगे, जिन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है।&nbsp;</p>
<p>एक तरफ जहां देश के किसानों को दालों का सही भाव न मिलने की वजह से दलहन उत्पादन नहीं बढ़ पा रहा है, वहीं ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे देशों के साथ लॉन्ग टर्म सौदे कर दालों का आयात किया जाएगा। <strong>ब्राजील</strong> से 20 हजार टन से अधिक उड़द आयात की उम्मीद है जबकि <strong>अर्जेंटीना</strong> से अरहर का आयात किया जाएगा। भारत में मुख्य रूप से कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, मोजाम्बिक, तंजानिया और म्यांमार से दालों का आयात होता है।&nbsp;</p>
<p>चुनावी साल में दालों की <strong>महंगाई</strong> पर नियंत्रण रखना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। मार्च में दालों की खुदरा महंगाई दर 17 फीसदी से अधिक रही है जबकि फरवरी में यह 19 फीसदी के करीब थी। ऐसे में दालों की कमी दूर करने के लिए विदेशों से आयात करना पड़ रहा है। लेकिन सवाल है कि दालों का उत्पादन क्यों नहीं बढ़ पा रहा है और दालों के आयात की नौबत क्यों आ रही है?</p>
<p><strong>दालों का शुल्क मुक्त आयात&nbsp;</strong></p>
<p>मध्य प्रदेश के किसान नेता <strong>केदार सिरोही</strong> का कहना है कि सरकार एमएसपी की गारंटी देने की बजाय दालों के आयात की गारंटी दे रही है। जबकि किसान उपज के सही दाम से वंचित रह जाता है। इस साल चने के दाम पिछले साल के मुकाबले काफी कम हैं। लेकिन आयात शुल्क में 2025 तक छूट देकर दालों के आयात को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह किसानों के साथ-साथ देश की खाद्यान्न आत्मनिर्भरता के भी प्रतिकूल है।</p>
<p>केंद्र सरकार कई देशों के साथ <strong>लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट</strong> कर दालों की आपूर्ति में स्थिरता लाना चाहती है। दालों के आयात के लिए सरकार ने 31 मार्च, 2025 तक<strong> अरहर, उड़द </strong>और <strong>मसूर</strong> (मसूर) पर आयात शुल्क से मुक्त रखा है। इसके अलावा <strong>पीली मटर</strong> के शुल्क मुक्त आयात की छूट को 30 जून, 2024 तक बढ़ा दिया है। <span>पिछले चार महीनों में 12 लाख टन से अधिक पीली मटर के आयात का अनुमान है। इससे चने की नई फसल के दाम गिर गये हैं क्योंकि पीली मटर का इस्तेमाल चने के विकल्प के तौर पर किया जाता है।&nbsp;</span><span></span></p>
<p><strong>दलहन क्षेत्र और उत्पादन घटा&nbsp;</strong></p>
<p><strong>दलहन आयात</strong> की मजबूरी को देश में दालों के घटते उत्पादन से जोड़कर देखा जा सकता है। <strong>कृषि मंत्रालय</strong> का अनुमान है कि वर्ष 2023-24 में दालों का उत्पादन 234 लाख टन रहेगा, जबकि एक साल पहले देश में 261 लाख टन दालों का उत्पादन हुआ था। इस साल खरीफ सीजन में <strong>दलहन</strong> उत्पादन गत वर्ष के 76.21 लाख टन से घटकर 71.18 लाख टन रहने का अनुमान है।</p>
<p>दलहन आयात पर देश की निर्भरता इसलिए बढ़ी है क्योंकि पिछले दो-तीन साल में दलहन की बुवाई का<strong> क्षेत्र</strong> और <strong>उत्पादन</strong> बढ़ने की बजाय घटा है। 2021-22 में देश में दलहन की बुवाई का क्षेत्र 307.31 लाख हेक्टेअर था जो 2023-24 में घटकर 257.85 लाख हेक्टेअर रह गया। इसी तरह दलहन उत्पादन 2021-22 में 273 लाख टन तक पहुंच गया था जो वर्ष 2023-24 में घटकर 234 लाख टन रहने का अनुमान है। यानी दो साल में दलहन का क्षेत्र 16 फीसदी और उत्पादन 14 फीसदी घटा है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_661e3e237dd6e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ब्राजील और अर्जेंटीना से दलहन आयात की तैयारी, कैसे आएगी आत्मनिर्भरता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_661e3e237dd6e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चने की सरकारी खरीद शुरू, किसानों को देना पड़ सकता है एमएसपी से अधिक भाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/government-procurement-of-gram-begins-farmers-may-have-to-pay-more-than-msp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 10 Apr 2024 14:24:56 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/government-procurement-of-gram-begins-farmers-may-have-to-pay-more-than-msp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चुनावी सीजन में खाद्य महंगाई को रोकने के लिए सरकार पूरा जोर लगा रही है। जिन वस्तुओं के उत्पादन में थोड़ी भी कमी की आशंका है, उनके दाम बढ़ने से रोकने के उपाय किए जा रहे हैं। इस साल देश में चना उत्पादन पिछले साल के 122.67 लाख टन से घटकर 120 लाख टन के आसपास रह सकता है। देश की प्रमुख दलहन फसल चना का बुवाई क्षेत्र वर्ष 2023-24 में पिछले साल के 104.71 लाख हेक्टेअर से घटकर 101.92 लाख हेक्टेअर रह गया है। घटे क्षेत्र और मौसम की स्थितियों को देखते हुए सरकारी अनुमानों के अनुसार चना उत्पादन 121.61 लाख टन रहेगा।&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार ने चने की कीमतों पर नियंत्रण और बफर स्टॉक के लिए किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर चने की खरीद शुरू कर दी है। लेकिन मौजूदा स्थितियों को देखते हुए सरकार को चना खरीद के लिए किसानों को एमएसपी से अधिक भाव देना पड़ सकता है। क्योंकि थोक मंडियों में चने का बाजार भाव <strong>5440 रुपये</strong> प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक 5800 रुपये के आसपास चल रहा है।&nbsp;</p>
<p>वर्तमान में चने का <strong>मंडी भाव</strong> एमएसपी से अधिक होने के कारण सरकारी एजेंसियों को किसानों से चना खरीद में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। जबकि चने का बफर स्टॉक 10 लाख टन के मानक के मुकाबले घटकर 7 लाख टन के आसपास रह गया है। ऐसे में अगर चने की खरीद को बढ़ाना है तो एमएसपी से ऊपर बाजार भाव पर चने की खरीद करनी पड़ेगी, या फिर दाम कम होने का इंतजार करना होगा। हालांकि, उपभोक्ता मामलों की सचिव <strong>निधि खरे</strong> का कहना है कि चने की पैदावार कम नहीं हुई है और फिलहाल उत्पादन को लेकर कोई चिंता नहीं है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने चने के उत्पादन में गिरावट की आशंका को देखते हुए <strong>पीली मटर</strong> के ड्यूटी फ्री आयात की अवधि को 30 जून तक बढ़ा दिया है। इससे देश में पीली मटर का आयात बढ़ा है जो चने के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल की जाती है। चने की नई फसल के समय पीली मटर का आयात बढ़ने से चने की कीमतों पर असर पड़ा है।&nbsp;</p>
<p>राजस्थान के किसान <strong>बलकौर सिंह ढिल्लों</strong> ने रूरल वॉयस को बताया किसान मंडी और सरकारी भाव को देखकर कुछ दिनों बाद ही अपनी उपज बाजार में लेकर आएंगे। इस साल चने की फसल ठीक है लेकिन सरकार की आयात-निर्यात की नीतियों को चलते दलहन और तिलहन में किसानों को अक्सर नुकसान उठाना पड़ता है। &nbsp;</p>
<p>सरकार को उम्मीद है कि चने की नई फसल की आवक बढ़ने से मंडियों में चने के दाम एमएसपी के स्तर पर आ जाएंगे। इससे सहकारी संस्थाओं को खरीद बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस बीच, दालों की जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापारियों, आयातकों और मिलर्स के लिए <strong>15 अप्रैल</strong> से हर सप्ताह दालों के स्टॉक की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया है। राज्य सरकारों को दालों के स्टॉक पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गये हैं।&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार के लिए चने की सरकारी खरीद बढ़ाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि देश के लगभग 20 राज्य कल्याणकारी योजनाओं के जरिए चने का वितरण करना चाहते हैं। इससे बफर स्टॉक पर दबाव बढ़ा है और सरकारी खरीद बढ़ाने की आवश्यकता है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_6616545c7d0ed.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चने की सरकारी खरीद शुरू, किसानों को देना पड़ सकता है एमएसपी से अधिक भाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_6616545c7d0ed.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरसों के रिकॉर्ड 120 लाख टन उत्पादन का अनुमान, उपज में 35% तक बढ़ोतरी संभव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/record-production-of-120-lakh-tonne-of-mustard-is-estimated-in-the-country-production-may-increase-by-35.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 04 Apr 2024 19:52:51 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/record-production-of-120-lakh-tonne-of-mustard-is-estimated-in-the-country-production-may-increase-by-35.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खाद्य तेल उद्योग के संगठन <strong>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए)</strong> का अनुमान है कि 2023-24 सीजन में सरसों का उत्पादन <strong>120.90 लाख टन</strong> के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है। इस सीजन में सरसों बुवाई का क्षेत्र <strong>100 लाख</strong> हेक्टेयर के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है। जिसे देखते हुए उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना है। हालांकि, इस साल किसानों को सरसों का सही भाव नहीं मिल पा रहा है और दाम एमएसपी से नीचे चले गये हैं। हरियाणा और राजस्थान सरकारी खरीद के जरिए सरसों खरीद शुरू की गई है। लेकिन इसमें भी कई दिक्कतें आ रही हैं।</p>
<p><strong>2020 से सरसों उत्पादन में बढ़ोतरी&nbsp;</strong></p>
<p><strong>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए)</strong> ने कहा कि सरसों का उत्पादन 2020-21 में 86 लाख टन था जो 2022-23 में बढ़कर 113.5 लाख टन हो गया। 2023-24 में सरसों का उत्पादन 120 लाख टन उच्चतम स्तर को छूने की संभावना है। इससे खाद्य तेलों की घरेलू आपूर्ति को बढ़ाने में मदद मिलेगी। फरवरी में सरसों की फसल पर मौसम की मार के बावजूद इस साल सरसों की औसत पैदावार 12.01 क्विंटल प्रति हेक्टेअर रहने का अनुमान है।</p>
<p>एसईए का मानना है कि सरसों के उत्पादन में यह बढ़ोतरी अनुकूल मौसम, अच्छी कीमतों और सरसों मॉडल फार्म परियोजना जैसे प्रयासों से हुए क्षेत्र विस्तार के कारण हुई है। भारत में उत्पादित खाद्य तेल में लगभग एक-तिहाई हिस्सा सरसों का है और यह देश में तिलहन की प्रमुख फसल है।</p>
<p><strong>मौजूदा बीजों से 35 फीसदी बढ़ सकती है सरसों की उपज&nbsp;</strong></p>
<p>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) की <strong>सरसों मॉडल फार्म परियोजना</strong> के तहत पांच वर्षों में सरसों की औसत उपज में 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सरसों की उपज 17.87 क्विंटल प्रति हेक्टेअर से बढ़कर 24.15 क्विंटल प्रति हेक्टेअर हो गई है। एसईए ने कहा कि सरसों मॉडल फार्मों ने नवीन कृषि पद्धतियों, उन्नत तकनीकी और व्यापक किसान सहायता कार्यक्रमों के माध्यम से वर्तमान में उपलब्ध बीजों से ही सरसों की पैदावार बढ़ाने में कामयाबी हासिल की है। इस प्रक्रिया में आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) बीज का उपयोग नहीं किया गया।</p>
<p><strong>पांच राज्यों में चल रही है परियोजना</strong>&nbsp;</p>
<p>एसईए के कार्यकारी निदेशक<strong> बी.वी. मेहता</strong> का कहना है कि खाद्य तेलों के आयात पर देश की निर्भरता घटाने में सरसों सबसे अधिक मददगार साबित हो सकती है। किसानों तक सरसों की बेहतर कृषि पद्धतियों की जानकारी पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे अच्छे परिणाम आए हैं। 2020-21 में राजस्थान के पांच जिलों में 400 खेतों में शुरू की गई सरसों मॉडल फार्म परियोजना का विस्तार पांच राज्यों में लगभग 3,500 मॉडल फार्मों तक हो चुका है जिससे 125,000 से अधिक किसान जुड़े हैं।</p>
<p><strong>हर साल 60 फीसदी खाद्य तेलों का आयात&nbsp;</strong>&nbsp;</p>
<p>हर साल भारत अपनी घरेलू जरूरत का करीब 60 फीसदी खाद्य तेल आयात करता है। एसईए के अनुसार, 2022-23 (नवंबर से अक्टूबर) में भारत ने लगभग 1.38 लाख करोड़ रुपये मूल्य के लगभग 164.7 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_660ebd4395bd1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरसों के रिकॉर्ड 120 लाख टन उत्पादन का अनुमान, उपज में 35% तक बढ़ोतरी संभव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_660ebd4395bd1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[क्यों परेशान हैं गुजरात के तेल व्यापारी, पीएम मोदी को चिट्ठी में जताई चिंता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/why-are-gujarats-oil-traders-worried-they-wrote-a-letter-to-pm-modi-and-expressed-their-concern.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 03 Apr 2024 11:33:06 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/why-are-gujarats-oil-traders-worried-they-wrote-a-letter-to-pm-modi-and-expressed-their-concern.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गुजरात में खाद्य तेल और तिलहन से जुड़े व्यापारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर खाद्य तेलों के जरूरत से ज्यादा आयात पर चिंता जताई है। गुजरात राज्य खाद्य तेल और तिलहन संघ के अध्यक्ष समीर शाह ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा है कि खाद्य तेल आयात हमारी वास्तविक कमी से कहीं अधिक है। संगठन ने सरकार के कई निर्णयों पर निराशा जाहिर करते हुए संकटग्रस्त घरेलू खाद्य तेल उद्योग के लिए राहत पैकेज की मांग की है।</p>
<p>पत्र में लिखा है कि जब नरेंद्र मोदी ने 2014 में देश के प्रधान मंत्री का पद संभाला, तो वह इस मुद्दे पर बहुत गंभीर और निर्णायक थे। सरकार ने खाद्य तेलों के आयात को कम करने के लिए बहुत सख्त कदम उठाए। जिसके &nbsp;परिणामस्वरूप हमारा वार्षिक खाद्य तेल आयात लगभग 15 लाख टन कम हो गया। (लगभग 145 से 146 लाख टन से लगभग 131 लाख टन तक)</p>
<p>पत्र के मुताबिक, वर्ष 2022 में यूक्रेन/रूस युद्ध छिड़ने और इंडोनेशियाई सरकार के कुछ गलत कदमों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई। इससे हमारे देश में भी खाद्य तेलों की दरों में तीव्र वृद्धि देखी गई। इसके कारण सरकार ने खाद्य तेल आयात के लिए मानदंडों और कानूनों में ढील दी। अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में मूल्य वृद्धि एक अस्थायी घटना थी। दो-तीन महीने की अवधि में ही पूरी दुनिया में दरें कम होने लगीं। लेकिन विभिन्न घरेलू खाद्य तेल संघों के बार-बार अनुरोध के बावजूद, केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों के आयात पर प्रतिबंध नहीं लगाया।&nbsp;</p>
<p>इसके परिणामस्वरूप हमारे देश की कई रिफाइनर कंपनियों और खाद्य तेलों के लगभग पूरे व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान हुआ। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की दरें लगभग 50% कम हो गईं। लेकिन फिर भी केंद्र सरकार ने उच्च आयात नीति जारी रखी। इसलिए हमारे खाद्य तेलों के आयात में वृद्धि हो रही। हमने नवंबर, 2022 से अक्टूबर, 2023 तक खरीफ वर्ष के दौरान अब तक के सर्वाधिक 165 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/agribusiness/farmers-growing-soybean-again-in-crisis-again-prices-fell-below-msp.html"><strong>संकट में सोयाबीन के किसान, एमएसपी से नीचे गिरे दाम</strong></a></p>
<p>गुजरात खाद्य तेल संघ का कहना है कि किसानों को बढ़ती उत्पादन लागत से बचाने के लिए सरकार ने घरेलू तिलहनों के एमएसपी में तेजी से वृद्धि की। इससे हमारे उत्पाद (घरेलू तिलहनों से उत्पादित खाद्य तेल) सस्ते आयातित खाद्य तेलों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी नहीं रह गए और घरेलू खाद्य तेल उत्पादकों को पिछले कुछ वर्षों में भारी नुकसान हुआ है। देश में खाद्य तेलों के व्यापार से जुड़े आयातकों, रिफाइनरों, क्रशिंग इकाइयों और व्यापारियों से लेकर लगभग सभी को पिछले कुछ वर्षों में अत्यधिक नुकसान हुआ है और पूरा उद्योग संकट में है।</p>
<p>संघ का कहना है कि सरकार द्वारा उठाए गए कुछ अन्य दोषपूर्ण कदमों से संकट और गहरा गया है। सोयाबीन केक के आयात से घरेलू तिलहन की पेराई प्रभावित हुई। इसके परिणामस्वरूप सरसों और सोयाबीन के बीज का बहुत बड़ा स्टॉक जमा हो गया है। इसने घरेलू किसानों और उद्योग को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा लगभग दो वर्षों से वित्त मंत्रालय ने खाद्य तेलों की पैकिंग इकाइयों द्वारा जमा किए गए जीएसटी इनपुट क्रेडिट का रिफंड देना बंद कर दिया है।&nbsp;</p>
<p>गौरतलब है कि खाद्य तेलों पर जीएसटी 5% है और खाद्य तेल उद्योग में उपयोग की जाने वाली लगभग सभी पैकिंग सामग्री, मशीनरी, स्पेयर पार्ट्स पर 18% जीएसटी लगता है। इसलिए खाद्य तेल उद्योग की लगभग सभी पैकिंग इकाइयों ने भारी मात्रा में अप्रयुक्त जीएसटी इनपुट क्रेडिट जमा कर लिया है। इससे इस उद्योग की कार्यशील पूंजी में भारी कमी आई है।</p>
<p><strong><a href="https://www.ruralvoice.in/national/mustard-price-falls-upto-rs-900-compared-from-msp-farmers-wait-for-government-procurement.html">सरसों का भाव एमएसपी से 900 रुपये तक गिरा, किसानों को सरकारी खरीद का इंतजार</a></strong></p>
<p>इन सभी कारकों का खाद्य तेल व्यापार उद्योग के कामकाज पर प्रभाव पड़ा है। ऐसी कई इकाइयाँ और प्रतिष्ठान बंद हो गए हैं और कई अन्य आधी क्षमता पर चल रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप कई श्रमिकों को अपनी नौकरियाँ खोनी पड़ीं। कई तिलहन उत्पादक किसान अपनी उपज बेचने में सक्षम नहीं हैं जिसके परिणामस्वरूप घरेलू तिलहनों का भारी अप्रयुक्त स्टॉक पड़ा हुआ है।</p>
<p>गुजरात राज्य खाद्य तेल और तिलहन संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया है कि खाद्य तेल के आयात पर अंकुश लगाने के लिए तत्काल उपाय करें और संकट से जूझ रहे घरेलू तेल उद्योग को ब्याज माफी और कच्चे माल की खरीद के बजाय विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा तैयार माल की खरीद जैसी कुछ छूट और राहत दें। संघ ने लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए भाजपा के चुनाव घोषणापत्र में घरेलू खाद्य तेल उद्योग के लिए राहत पैकेज को भी शामिल करने की भी मांग की है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_660cf3ced3089.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ क्यों परेशान हैं गुजरात के तेल व्यापारी, पीएम मोदी को चिट्ठी में जताई चिंता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_660cf3ced3089.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी उत्पादन में उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर, महाराष्ट्र में उत्पादन बढ़ने का अनुमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/uttar-pradesh-ranks-second-in-sugar-production-production-expected-to-increase-in-maharashtra.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 30 Mar 2024 14:09:59 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/uttar-pradesh-ranks-second-in-sugar-production-production-expected-to-increase-in-maharashtra.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले साल कमजोर मानसून के चलते चालू पेराई सीजन (2023-24) में महाराष्ट्र और कर्नाटक में चीनी उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका बन गई थी। जिसके चलते उत्तर प्रदेश के चीनी उत्पादन में देश में पहले स्थान पर रहने की संभावना थी। लेकिन जैसे-जैसे सीजन आगे बढ़ा, स्थिति उलट गई। उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन पिछले साल के करीब या कुछ कम रहने के आंकड़े आ रहे हैं। <strong>उद्योग सूत्रों</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि इस साल उत्तर प्रदेश में&nbsp; चीनी उत्पादन 105 लाख टन के आसपास रहने की संभावना है क्योंकि राज्य में गन्ने की कमी से चीनी मिलें जल्द बंद हो रही हैं। सीजन के शुरुआत में उत्तर प्रदेश में 110 लाख टन चीनी उत्पादन की संभावना जताई गई थी। वही नवंबर-दिसंबर में बारिश के चलते महाराष्ट्र में गन्ने की फसल सुधरने से उत्पादन 106 से 107 लाख टन तक पहुंच सकता है। देश में कुल चीनी उत्पादन 320 लाख टन रहने का अनुमान है।</p>
<p>उद्योग सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इस साल गन्ना उत्पादन में कमी आई है। राज्य के कुछ हिस्सों में मानसून के शुरूआती दिनों में अधिक बारिश और बाढ़ ने गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाया। वहीं, गन्ने की फसल में <strong>रोगों</strong> का प्रकोप भी रहा। गन्ने की सबसे अधिक क्षेत्र में लगाई गई किस्म <strong>सीओ 0238</strong> में रेड रॉट और बोरर की बीमारियों ने भारी नुकसान पहुंचाया। किसानों के सामने मुश्किल यह है कि उन्हें गन्ने की 0238 प्रजाति की जगह लेने वाली कोई दूसरी कामयाब प्रजाति नहीं मिल पा रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह जिम्मा राज्य सरकार का है कि किसानों को नई प्रजाति के बीज उपलब्ध कराए। लेकिन इस मामले में किसानों को सरकार से ज्यादा मदद नहीं मिल रही है। गन्ना किसानों को प्रजाति रिप्लेस करने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास करने पड़ रहे हैं जो बहुत व्यवहारिक नहीं है।</p>
<p>इस सीजन में राज्य सरकार ने चीनी मिलों के लिए<strong> राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी)</strong> की घोषणा काफी देरी से की। पेराई सत्र अक्टूबर से शुरू हो जाता है जबकि गन्ने के रेट में 20 रुपये की बढ़ोतरी कर 370 रुपये प्रति क्विंटल के भाव का ऐलान यूपी सरकार ने 18 जनवरी को किया। इस बीच बड़े पैमाने पर किसानों ने गुड़ खांडसारी इकाइयों को गन्ने की आपूर्ति की क्योंकि वहां बेहतर रेट मिल रहा था। गुड़ और खांडसारी इकाइयों ने एसएपी या उससे अधिक का भुगतान किया और किसानों को नकद या उनके खातों में पैसा दिया। इसके उन्हें गन्ना अधिक मिला।</p>
<p><strong>चीनी उद्योग</strong> से जुड़े एक पदाधिकारी ने रूरल वॉयस को बताया कि चुनावी साल होने की वजह से इस बार गुड़ की मांग ज्यादा है और गुड़ के दाम अच्छे रहे हैं। वहीं खांडसारी के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं था। इसका फायदा भी खांडसारी इकाइयों को मिला क्योंकि वैश्विक बाजार में चीनी के दाम बहुत बेहतर चल रहे हैं। पिछले दिनों लंदन व्हाइट शुगर का दाम 48 रुपये प्रति किलो से अधिक पहुंच गया था।</p>
<p><strong>महाराष्ट्र</strong> में जनवरी के बाद से चीनी उत्पादन की स्थिति सुधरती गई। <strong>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोआपरेटिव शुगर फैक्टरीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) </strong>के मैनेजिंग डायरेक्टर <strong>प्रकाश नायकनवरे</strong> ने रूरल वॉयस को बताया कि नवंबर-दिसंबर में बारिश के चलते महाराष्ट्र में गन्ने का उत्पादन सुधरा है और इसके चलते राज्य में चीनी उत्पादन 106 से 107 लाख टन पर पहुंचने की संभावना है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन में जो गिरावट होगी, उसकी भरपाई महाराष्ट्र में होने से देश में कुल चीनी उत्पादन 320 लाख टन रहने का अनुमान है। यह मात्रा एथेनॉल के लिए डायवर्ट की गई 17 लाख टन चीनी से अलग है।</p>
<p><strong>उद्योग सूत्रों</strong> ने रूरल वॉयस को बताया कि चालू सीजन में चीनी का <strong>ग्रॉस प्रोडक्शन </strong><strong>337</strong> <strong>लाख</strong> टन रहने की संभावना है। जो पिछले साल 366 लाख टन के ग्रास प्रोडक्शन से करीब 8 फीसदी कम है। पिछले साल एथेनॉल उत्पादन के लिए 45 लाख टन चीनी का डायवर्सन किया गया था। इस साल अभी तक&nbsp; सरकार ने 17 लाख टन चीनी डायवर्जन की सीमा तय कर रखी है।</p>
<p>ऐसे में उद्योग का मानना है कि शुगर सीजन के अंत में चीनी की उपलब्धता पिछले साल के 57 लाख टन बकाया स्टॉक के साथ कुल 377 लाख टन होगी। वहीं देश में चीनी की अनुमानित खपत 285 लाख टन है। ऐसे में देश में करीब 92 लाख टन अतिरिक्त चीनी है। मानकों के आधार पर एक अक्तूबर को देश में 60 लाख टन चीनी का बकाया स्टॉक होना चाहिए। जबकि उत्पादन अनुमानों के आधार पर इस साल बकाया स्टॉक इससे अधिक रहेगा।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_6607cfaf0545a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी उत्पादन में उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर, महाराष्ट्र में उत्पादन बढ़ने का अनुमान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_6607cfaf0545a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गन्ना नहीं मिलने के चलते उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जल्दी बंद होने लगी चीनी मिलें ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/due-to-lack-of-sugarcane-supply-sugar-mills-closing-early-in-uttar-pradesh-uttarakhand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 19 Mar 2024 17:04:46 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/due-to-lack-of-sugarcane-supply-sugar-mills-closing-early-in-uttar-pradesh-uttarakhand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल पर्याप्त गन्ना आपूर्ति नहीं होने के कारण उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की चीनी मिलें समय से पहले बंद होने लगी हैं। पेराई जारी रखने के लिए चीनी मिलों को गन्ना नहीं मिल पा रहा है, <span>ऐसे में चीनी मिलों को चलाए रखना घाटे का सौदा है।</span>&nbsp;</p>
<p>इंडियर शुगर मिल्स एसोसिएशन (<span>इस्मा</span>) <span>से मिली जानकारी के अनुसार</span>, 15 <span>मार्च तक उत्तर प्रदेश में 18 चीनी मिलें पेराई बंद कर चुकी हैं जबकि पिछले साल इस अवधि तक 9 चीनी मिलें बंद हुई थीं। पिछले दो-तीन दिनों में यूपी में कई चीनी मिलों ने अपना सत्र समाप्त कर दिया है। इस साल मार्च के आखिर तक अधिकतर चीनी मिलों के बंद होने के आसार हैं।</span>&nbsp;</p>
<p>वहीं, <span>महाराष्ट्र में पेराई सीजन लंबा खिंच सकता है। वहां पिछले साल के मुकाबले इस साल आधी से भी कम चीनी मिलों ने पेराई बंद की है। </span>महाराष्ट्र में 18 मार्च तक 73 चीनी मिलों ने पेराई बंद कर दी है जबकि पिछले सीजन में इस समय तक 148 चीनी मिलों ने पेराई बंद की थी।&nbsp;</p>
<p>इस्मा के अनुसार, <span>इस साल 15 मार्च तक देश में 371 चीनी मिलें चल रही थीं जबकि पिछले साल इस दिन तक 325 चीनी मिलें पेराई कर रही हैं। फिलहाल देश में जहां पिछले साल से ज्यादा चीनी मिलें पेराई कर रही हैं वहीं देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में गन्ने की कमी के कारण चीनी मिलों का सत्र जल्दी समाप्त हो रहा है।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>चीनी मिलें ज्यादा, गन्ना कम&nbsp;</strong></p>
<p>15 मार्च तक यूपी में 102 चीनी मिलें चल रही थीं, <span>जबकि पिछले साल इस तारीख तक 108 चीनी मिलें पेराई कर रही थीं। इस साल राज्य में कुल 121 मिलें चली थीं</span>,<span> जबकि पिछले साल 117 मिलों ने पेराई की थी। इस प्रकार इस साल यूपी में कुल चीनी मिलों की संख्या तो अधिक है लेकिन गन्ना आपूर्ति ना होने के कारण पेराई सत्र मार्च में ही बंद होने लगी है। &nbsp;</span>&nbsp;</p>
<p>अधिक चीनी मिलें चलने के बावजूद देश के चीनी उत्पादन में कमी आई है। इसकी वजह गन्ने की फसल पर बारिश, <span>बाढ़ व रोग की मार है। इसका असर गन्ना उत्पादन और रिकवरी पर पड़ा है। </span>15 <span>मार्च तक देश का कुल चीनी उत्पादन 280.79 लाख टन तक रहा है जो पिछले साल इसी तारीख तक 282.60 लाख टन था। इस प्रकार चीनी उत्पादन करीब दो लाख टन की कमी आई है।</span></p>
<p><strong>गन्ने पर बारिश, बाढ़ और रोग की मार&nbsp;</strong>&nbsp;</p>
<p>बिजनौर जिले के कान्हा नंगला गांव के किसान राहुल सिंह का कहना है इस साल पहले अधिक बारिश और बाढ़ की मार गन्ने की फसल पर पड़ी। फिर फसल को कई तरह के रोग लग गये। गन्ने की बेहद कामयाब प्रजाति 0238 रोगग्रस्त हो चुकी है जिसके कारण पैदावार घटी है। इस साल गुड़ और खांडसारी उद्योग ने किसानों को अच्छा दाम दिया, <span>जिसके कारण चीनी मिलों को कम गन्ना मिला।&nbsp;</span></p>
<p>गन्ने की आवक बढ़ाने के लिए इस साल चीनी मिलों को गांव-गांव में जाकर किसानों से अपील करनी पड़ी। फरवरी के आखिर तक कई चीनी मिलों के सामने &ldquo;<span>नो केन</span>&rdquo;<span> की स्थिति पैदा हो गई और मार्च के दूसरे सप्ताह में ही संचालन बंद करना पड़ा। चीनी मिलों का पेराई लक्ष्य भी इस साल पूरा नहीं हो पाया है।</span>&nbsp;</p>
<p>उत्तर प्रदेश के शामली जिले में झिंझाना कस्बे के पास हंस हैरिटेज जैगरी एंड फार्म प्रॉड्यूस के सीईओ के पी सिंह ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि वह चीनी मिलों के बराबर 370 रुपये प्रति क्विंटल के दाम पर किसानों से गन्ना खरीद रहे हैं। लेकिन गन्ना कम होने के चलते मार्च के अंत तक ही वह अपनी यूनिट चला पाएंगे। उनके मुताबिक गन्ना का उत्पादन इस साल कम है और उसके चलते चीनी मिलें जल्दी पेराई बंद कर सकती हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>कई मिलों ने बंद की पेराई&nbsp;</strong></p>
<p>सहारनपुर जिले की टोडरपुर और बिडवी चीनी मिलें इस साल 25 फरवरी को ही बंद हो गई थीं। अप्रैल तक चलने वाली गागलहेड़ी चीनी मिल इस बार 12 मार्च को ही बंद हो गई। पिछले साल 13 मई तक चलने वाली सरसावा चीनी मिल का पेराई सत्र 14 मार्च को समाप्त हो गया है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>कम गन्ना मिलने की वजह से उत्तराखंड की लक्सर चीनी मिल ने 8 मार्च को मिल गेट पर गन्ना खरीद फ्री कर 13 मार्च को पेराई सत्र बंद करने का नोटिस जारी कर दिया था। मिल प्रबंधन का कहना है कि पिछले 15-20 दिनों से चीनी मिल को मांग से बहुत कम गन्ना मिल रहा है। इसलिए देहात के तौल केंद्र बंद कर दिए गये।&nbsp;</p>
<p>यूपी के पीलीभीत जिले की पूरनपुर चीनी मिल 17 मई को पर्याप्त गन्ना आपूर्ति ना होने के कारण बंद हो गई। बीसलपुर चीनी मिल 19 मार्च से पेराई बंद करने की घोषणा कर चुकी है। मुरादाबाद में सहसपुर की शुगर मिल का पेराई सत्र भी 19 मार्च को समाप्त होगा।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65f97a104d02e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गन्ना नहीं मिलने के चलते उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जल्दी बंद होने लगी चीनी मिलें  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65f97a104d02e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[संकट में सोयाबीन के किसान, एमएसपी से नीचे गिरे दाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/farmers-growing-soybean-again-in-crisis-again-prices-fell-below-msp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 18 Mar 2024 17:10:14 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/farmers-growing-soybean-again-in-crisis-again-prices-fell-below-msp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत अपनी खाद्य तेलों की जरूरत का करीब 57 फीसदी आयात के जरिए पूरा करता है। खाद्य तेलों के आयात पर हर साल करीब <span>20.56</span> अरब डॉलर का खर्च होता है। वहीं, दूसरी तरह देश में सोयाबीन की खेती करने वाले किसानों को उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।&nbsp;केंद्र सरकार ने सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4600 रुपये तय किया है लेकिन सोयाबीन उत्पादक मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में सोयाबीन के दाम एमएसपी से नीचे हैं और किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।&nbsp;</p>
<p>सरकारी पोर्टल <strong>एगमार्केट</strong> के अनुसार, इस महीने मध्यप्रदेश की कृषि मंडियों में सोयाबीन का औसत भाव 4385 रुपये प्रति क्विंटल रहा है जो एमएसपी से नीचे है और पिछले साल के मुकाबले 14.61 फीसदी कम है। प्रमुख सोयाबीन उत्पादक महाराष्ट्र में भी सोयाबीन का भाव पिछले साल के मुकाबले 14.15 फीसदी की गिरावट के साथ एमएसपी से नीचे रहा है।</p>
<p>यह दोनों राज्यों की मंडियों का इस महीने का औसत भाव है। वास्तव में, कई मंडियों में सोयाबीन का भाव का न्यूनतम भाव 3000-3500 हजार रुपये तक गिर चुका है। जबकि दो साल पहले सोयाबीन का भाव 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल से भी ऊपर चला गया था। अच्छा भाव मिलने के बाद किसानों का रुझान सोयाबीन की तरफ बढ़ा, लेकिन इस साल फिर सोयाबीन किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है।</p>
<p>मध्यप्रदेश में आम किसान यूनियन के नेता <strong>राम इनानिया</strong> का कहना है कि अच्छी क्वालिटी की सोयाबीन का भाव भी मुश्किल से 4000-4100 रुपये तक प्रति क्विंटल मिल पा रहा है। कई जगह रेट इससे भी कम है। 4600 रुपये एमएसपी के मुकाबले किसानों को प्रति क्विंटल 500-700 रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है। उपज के दाम एमएसपी से नीचे ना जाएं इसके लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी होनी चाहिए।&nbsp; &nbsp; &nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र में शेतकरी संगठन के नेता <strong>अनिल घनवट</strong> ने रूरल वॉयस को बताया कि यह लगातार तीसरा साल है जब किसानों को सोयाबीन के दाम नहीं मिल रहे हैं। एक तरफ सरकार तिलहन उत्पादन बढ़ाने की बात कहती है जबकि सस्ते खाद्य तेलों के आयात के चलते देश के तिलहन किसानों को सरकार द्वारा घोषित एमएसपी भी नहीं मिल पा रहा है। &nbsp;</p>
<p>इस बार मौसम की मार के चलते सोयाबीन को नुकसान पहुंचा था। फसल कटाई के बाद भाव बढ़ने के इंतजार में बहुत से किसानों ने सोयाबीन की बिक्री नहीं की और स्टॉक कर रखा था। होली, रमजान और शादियों के सीजन को देखते हुए मार्च में सोयाबीन का भाव बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन अब भी सोयाबीन की कीमतें किसानों की उम्मीदों के मुताबिक नहीं बढ़ी हैं। गत फरवरी में मध्यप्रदेश में सोयाबीन का औसत भाव 4300 रुपये प्रति क्विंटल था जबकि मार्च में यह मामूली बढ़ोतरी के साथ 4385 रुपये है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65f829240c8dc.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ संकट में सोयाबीन के किसान, एमएसपी से नीचे गिरे दाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65f829240c8dc.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डेयरी उद्योग को उपभोक्ताओं के साथ किसानों पर ध्यान देने की जरूरत: डॉ. आरएस सोढ़ी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/dairy-industry-needs-to-focus-on-farmers-along-with-consumers-dr.-rs-sodhi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 05 Mar 2024 13:31:06 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/dairy-industry-needs-to-focus-on-farmers-along-with-consumers-dr.-rs-sodhi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>हैदराबाद।</strong> भारत में दूध उत्पादन पिछले 50 वर्षों में लगभग 10 गुना बढ़ चुका है। इसी के साथ डेयरी उद्योग भी बढ़ तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन डेयरी इंडस्ट्री को उपभोक्ताओं के साथ-साथ पशुपालक किसानों का भी ध्यान रखना होगा, तभी यह सेक्टर आगे तरक्की कर सकता है। सोमवार को हैदराबाद में <strong>50वीं डेयरी इंडस्ट्री कॉन्फ्रेंस</strong> के उद्घाटन के अवसर पर <strong>इंडियन डेयरी एसोसिएशन</strong> के अध्यक्ष <strong>डॉ. आरएस सोढ़ी</strong> ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि पशुपालक किसानों के बूते ही भारत दुनिया में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाला देश बना है। इस कामयाबी को कायम रखने के लिए किसानों को फायदा कैसे मिले, यह सोचना बहुत जरूरी है। डेयरी इंडस्ट्री को उपभोक्ता के साथ-साथ किसानों का भी ध्यान रखना होगा।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>हैदराबाद के हाईटेक्स एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित 50वीं डेयरी इंडस्ट्री कॉन्फ्रेंस में <strong>30 देशों</strong> के डेयरी इंडस्ट्री से जुड़े लगभग <strong>2500 प्रतिनिधियों</strong> ने भाग लिया। अपने उद्घाटन भाषण में तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री <strong>मल्लू भट्टी विक्रमार्क</strong> ने कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डेयरी और पशुपालन के महत्व और इसमें महिलाओं की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में तेलंगाना सरकार डेयरी अर्थव्यवस्था के विकास और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए कई योजनाएं चला रही है। अपने संबोधन में उन्होंने श्वेत क्रांति में योगदान के लिए पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी के साथ-साथ मिल्कमैन ऑफ इंडिया डॉ. वी. कुरियन को भी याद किया।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x_65e6d3911a555.jpg" alt="" /></p>
<p>तेलंगाना के कृषि मंत्री <strong>थुम्मला नागेश्वर राव</strong> ने डेयरी एक्सपो का उद्घाटन करने के बाद विभिन्न स्टालों का दौरा किया। कृषि मंत्री ने कृषि अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने में डेयरी अर्थव्यवस्था के महत्व पर जोर दिया। डेयरी एक्सपो 11000 वर्ग मीटर में फैले सबसे बड़े एक्सपो में से एक है, जिसमें 30 से अधिक देश प्रदर्शनी में भाग ले रहे हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>इंडियन डेयरी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आरएस सोढ़ी ने अपने अध्यक्षीय भाषण के दौरान न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डेयरी के योगदान, बल्कि पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी इस क्षेत्र के योगदान के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों से भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, जबकि विश्व दूध उत्पादन की वृद्धि दर 2 फीसदी की तुलना में भारत में दूध उत्पादन 4.5 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। 50 साल पहले भारत में दूध उत्पादन 24 मिलियन टन था जो आज 231 मिलियन टन है। उन्होंने कहा कि दूध प्रोसेसिंग की क्षमता एक लाख लीटर बढ़ने पर लगभग &nbsp;छह हजार लोगों को रोजगार मिलता है। आने वाले समय में डेयरी सेक्टर में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी)</strong> के अध्यक्ष <strong>मीनेश शाह</strong> ने छोटे डेयरी किसानों को मजबूत करने तथा उपभोक्ताओं से होने वाली कमाई का बड़ा अंश दूध उत्पादकों को देने की जरूरत बताई। उन्होंने दूध सप्लाई चेन में दक्षता सुधार के लिए शुरू किए जा रहे विभिन्न पहलों के बारे में भी बताया। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल के निदेशक और कुलपति डॉ. धीर सिंह ने संस्थान की 100 वर्षों की यात्रा के माध्यम से एनडीआरआई के योगदान और संस्थान में विकसित की जा रही उपयुक्त प्रौद्योगिकियों के बारे में बताया।&nbsp;</p>
<p>भारतीय डेयरी में उल्लेखनीय योगदान के लिए देश भर के चुनिंदा डेयरी व्यवसायियों को पुरस्कृत किया गया।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x_65e6d0d5c32f3.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड:</strong>&nbsp;हैटसन एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष आर.जी. चंद्रमोगन को डेयरी उद्योग में उनके योगदान के लिए पहले लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>पैट्रन अवार्ड:</strong>&nbsp;अजय खोसला और डॉ.सी.एस.प्रसाद को एसोसिएशन के पैट्रन अवार्ड से सम्मानित किया गया।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>आईडीए के फेलो:</strong>&nbsp;डॉ. केएस रामचंद्र, आर.सी.चुघ, आदित्य जैन, राकेश सक्सेना को एसोसिएशन के फेलो चुना गया।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65e6d11abb883.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ डेयरी उद्योग को उपभोक्ताओं के साथ किसानों पर ध्यान देने की जरूरत: डॉ. आरएस सोढ़ी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65e6d11abb883.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी उत्पादन 1.19 फीसदी गिरावट के साथ 255.38 लाख टन तक पहुंचा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sugar-production-declined-by-1.19-percent-to-255-lakh-tonnes..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 04 Mar 2024 16:08:14 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sugar-production-declined-by-1.19-percent-to-255-lakh-tonnes..html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू चीनी वर्ष 2023-24 में देश का चीनी उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 1.19 प्रतिशत घटकर 255.38 लाख टन तक पहुंचा है। चीनी उद्योग के संगठन इस्मा ने सोमवार को यह जानकारी दी। चालू पेराई सीजन में फरवरी तक महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु में चीनी उत्पादन कम रहा है जबकि यूपी का चीनी उत्पादन बढ़ा है।&nbsp;</p>
<p>पिछले साल फरवरी के आखिर तक देश में 258.48 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था, जबकि इस साल 29 फरवरी तक चीनी उत्पादन 255.38 लाख टन रहा है। इस साल फरवरी के आखिर तक <strong>466</strong> चीनी मिलें चलीं, जबकि पिछले साल इस अवधि तक 447 चीनी मिलें चल रही थीं। चीनी मिलें देर तक चलने के कारण इस साल पेराई सीजन लंबा हो सकता है।&nbsp;</p>
<p>अगर राज्यवार चीनी उत्पादन की स्थिति देखें तो <strong>महाराष्ट्र</strong> में सबसे ज्यादा 90.92 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ, जबकि<strong> उत्तर प्रदेश</strong> 78.16 लाख टन चीनी उत्पादन के साथ दूसरे स्थान पर है। पिछले साल के मुकाबले महाराष्ट्र का चीनी उत्पादन 4.24 लाख टन कम रहा है जबकि यूपी में चीनी उत्पादन करीब 8 लाख टन अधिक हुआ है।<strong> कर्नाटक</strong> का चीनी उत्पादन गत वर्ष के 51.23 लाख टन से घटकर इस साल फरवरी के आखिर तक 47 लाख टन रहा है। गुजरात और तमिलनाडु में भी चीनी उत्पादन घटा है।&nbsp;</p>
<p><strong>इस्मा</strong> के अनुसार, मौजूदा सीजन में महाराष्ट्र और कर्नाटक में चीनी मिलों के बंद होने की दर पिछले साल की तुलना में धीमी है, जिससे संकेत मिलता है कि इस साल इन राज्यों में पेराई सीजन लंबा चल सकता है। महाराष्ट्र में फरवरी के आखिर तक 194 चीनी मिलें चल रही थीं जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 160 था। अब तक इन दोनों राज्यों में कुल 49 फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं, जबकि पिछले साल इस अवधि तक 74 फैक्ट्रियां बंद हो गई थीं। देश भर में 65 चीनी मिलों ने पेराई कार्य बंद कर दिया है, जबकि एक साल पहले इस अवधि तक यह आंकड़ा 86 था।</p>
<p>इस्मा ने 31 जनवरी को जारी दूसरे <strong>अग्रिम अनुमान</strong> में इस साल चीनी उत्पादन 10 फीसदी घटकर <strong>330.5</strong> लाख टन होने का अनुमान लगाया था, जो पिछले वर्ष 366.2 लाख टन था। चीनी उत्पादन में कमी को देखते हुए सरकार ने गन्ने के जूस से एथेनॉल बनाने पर रोक लगा दी थी।&nbsp;</p>
<p>इस साल महाराष्ट्र और कर्नाटक में मानसून के बिगड़े मिजाज के कारण गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा, जबकि यूपी में गन्ने को बाढ़ से नुकसान हुआ और रोगों का प्रकोप रहा है। <strong>कृषि मंत्रालय</strong> की ओर से जारी दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, चालू सीजन 2023-24 में देश में गन्ना उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 9 फीसदी घटकर 44.64 करोड़ टन रहने का अनुमान है। गन्ने की बुवाई का क्षेत्र भी 58.85 लाख हेक्टेअर से घटकर 56.48 लाख हेक्टेअर रह गया है। &nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65ba7964e5440.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी उत्पादन 1.19 फीसदी गिरावट के साथ 255.38 लाख टन तक पहुंचा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65ba7964e5440.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अब शुगर इंडस्ट्री ने उठाई चीनी का एमएसपी बढ़ाने की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/now-sugar-industry-seeks-increase-in-minimum-selling-price-of-sugar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 27 Feb 2024 10:46:42 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/now-sugar-industry-seeks-increase-in-minimum-selling-price-of-sugar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं। एमएसपी के मुद्दे को लेकर देश में बड़ी बहस छिड़ी है। इस बीच, <span>चीनी एक कमोडिटी ऐसी है जिसका <strong>न्यूनतम बिक्री मूल्य </strong></span><strong>(एमएसपी)</strong> <span>सरकार तय करती है और इससे नीचे कोई भी बिक्री नहीं होती है। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकारी खजाने में उतना बोझ नहीं पड़ता</span>, <span>जितना एमएसपी की बहस में कुछ लोग दावा कर रहे हैं।</span></p>
<p>केंद्र सरकार ने आगामी सत्र 2024-25 के लिए गन्ना का <strong>उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी)</strong> 25 <span>रुपये बढ़ाकर 340 रुपये प्रति क्विंटल तय करने का ऐलान किया है। इस घोषणा के बाद शुगर इंडस्ट्री की ओर से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य </span>(<span>एमएसपी</span>) <span>बढ़ाने की मांग उठ रही है। शुगर और एथेनॉल इंडस्ट्री के संगठन<strong> इस्मा</strong> ने चीनी के एमएसपी (न्यूनतम बिक्री मूल्य) में वृद्धि की मांग की है। इस्मा के अनुसार, गन्ने के एफआरपी 340 रुपये प्रति क्विंटल के आधार पर चीनी का एमएसपी 3,900 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। इसी प्रकार, एथेनॉल की कीमतों को भी गन्ने के बढ़े एफआरपी और बढ़ती लागत के आधार पर बढ़ाया जाना चाहिए। घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इस्मा ने सरकार को सीएसीपी की सिफारिश के आधार पर चीनी का एमएसपी तय कर शुगर इंडस्ट्री से हर साल 4-5 मिलियन टन चीनी खरीदने करने का सुझाव दिया है। ताकि उद्योग अचानक नीतिगत परिवर्तन से प्रभावित हुए बिना एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को समर्थन करना जारी रख सके।</span></p>
<p><strong>महाराष्ट्र राज्य सहकारी चीनी फैक्ट्रीज फेडरेशन लिमिटेड</strong> ने चीनी का एमएसपी बढ़ाने की मांग करते हुए कहा है कि गन्ने के एफआरपी के अनुरूप अगर चीनी का एमएसपी नहीं बढ़ाया गया तो चीनी मिलों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।&nbsp;</p>
<p>सरकार ने 2019 में चीनी का एमएसपी से <strong>3,100 प्रति क्विंटल</strong> तय किया था जो तब से इतना ही है। शुगर इंडस्ट्री की ओर से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाकर 3600-4000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की जा रही है। अगर चीनी का एमएसपी बढ़ता है तो मिलों के पास मौजूद चीनी स्टॉक की वैल्यू बढ़ जाएगी और बैंकों से अतिरिक्त कर्ज मिल सकता है। लेकिन चुनावी साल में सरकार चीनी का एमएसपी बढ़ाने पर बचना चाहेगी।&nbsp;</p>
<p>चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य तय होने से इससे कम मूल्य पर चीनी की बिक्री नहीं होती है, जिससे चीनी मिलें कीमतों में उतार-चढ़ाव के नुकसान से बच जाती हैं। हालांकि, बहुत कम मौकों पर सरकार को हस्तक्षेप की जरूरत पड़ती है क्योंकि चीनी का बाजार मूल्य एमएसपी से कहीं अधिक रहता है। इस तरह सरकार पर भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता है। इसी तरह की व्यवस्था किसान भी अपनी उपज पर चाहते हैं।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65dd702d79ff6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अब शुगर इंडस्ट्री ने उठाई चीनी का एमएसपी बढ़ाने की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65dd702d79ff6.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बढ़ेगी चीनी मिलों की कमाई, शीरे से बने पोटाश का भाव तय]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/earnings-of-sugar-mills-will-increase-price-of-potash-made-from-molasses-fixed.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 24 Feb 2024 13:38:06 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/earnings-of-sugar-mills-will-increase-price-of-potash-made-from-molasses-fixed.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चीनी मिलों और एथेनॉल डिस्टलरी के लिए कमाई का एक और रास्ता खुल गया है। चीनी मिलें शीरे से प्राप्त पोटाश को फर्टिलाइजर कंपनियों को बेचकर कमाई करेंगी। इसके लिए <strong>4,263 रुपये</strong> प्रति टन का भाव तय किया है।&nbsp;</p>
<p><strong>खाद्य मंत्रालय</strong> से मिली जानकारी के अनुसार, इस साल चीनी मिलें मोलासेज (शीरे) से प्राप्त पोटेशियम यानी पीडीएम को 4,263 रुपये प्रति टन के भाव पर उर्वरक कंपनियों को बेचेंगी। चीनी मिलों और फर्टिलाइजर कंपनियों के बीच पोटाश बिक्री के बीच आपसी सहमति से यह रेट तय हुआ है। पोटाश बनाने वाली चीनी मिलें न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी स्कीम (एनबीएस) के तहत 345 रुपये प्रति टन की दर से उर्वरक सब्सिडी भी प्राप्त कर सकती हैं।</p>
<p>एथेनॉल उत्पादन के दौरान अपशिष्ट रसायनों को बॉयलर में जलाया जाता है, जिससे राख निकलती है। पोटाश युक्त इस राख से 14.5 प्रतिशत पोटाश वाले पीडीएम का उत्पादन किया जाता है। इसका उपयोग किसानों द्वारा<strong> म्यूरिएट ऑफ पोटाश</strong> (एमओपी) के विकल्प के रूप में किया जा सकता है।</p>
<p>लंबे समय से फर्टिलाइजर कंपनियों और चीनी मिलों के बीच पोटाश के दाम को लेकर सहमति बनाने के प्रयास किए जा रहे थे। केंद्र सरकार के खाद्य मंत्रालय की पहल पर अब शीरे से बने पोटाश का दाम तय हो गया है। इससे चीनी मिलें और उर्वरक कंपनियां पोटाश की खरीद-बिक्री के लिए दीर्घकालिक सौदे कर सकेंगी।&nbsp;</p>
<p>भारत उर्वरकों के मामले में <strong>आयात</strong> पर निर्भर है। अगर देश में चीनी मिलों के जरिए पोटाश की उपलब्धता बढ़ती है तो इससे ना सिर्फ उर्वरकों के आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि देश में पोटाश की उपलब्धता बढ़ेगी। वर्तमान में चीनी मिलें लगभग 5 लाख टन पोटाश राख बेचती हैं, जबकि इसके उत्पादन की क्षमता 10-12 लाख टन तक पहुंच सकती है। इससे चीनी मिलों की कमाई बढ़गी और उन्हें किसानों को समय पर भुगतान करने में आसानी होगी।</p>
<p>लेकिन सवाल यह भी है कि चीनी मिलें गन्ने से निर्मित विभिन्न उत्पादों से जो कमाई कर रही हैं, क्या उसका लाभ किसानों तक भी पहुंच रहा है? चीनी के अलावा एथेनॉल, पोटाश और बायो एनर्जी शुगर इंडस्ट्री की आय के साधन हैं। &nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65d9a3d9c6315.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बढ़ेगी चीनी मिलों की कमाई, शीरे से बने पोटाश का भाव तय ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65d9a3d9c6315.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दलहन उत्पादन बढ़ाने का रोडमैप तैयार, 2027 तक आत्मनिर्भर होगा भारत: कृषि मंत्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/roadmap-ready-to-increase-pulses-production-india-will-be-self-reliant-by-2027.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 15 Feb 2024 16:49:48 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/roadmap-ready-to-increase-pulses-production-india-will-be-self-reliant-by-2027.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ग्लोबल पल्स कन्फेडरेशन (जीपीसी) और राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नेफेड) द्वारा आयोजित चार दिवसीय <strong>पल्सेस24 सम्मेलन</strong> का औपचारिक शुभारंभ आज केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा तथा केंद्रीय खाद्य एवं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने किया।</p>
<p>सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री <strong>अर्जुन मुंडा</strong> ने कहा कि भारत <span>सरकार दलहन के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। </span><span>दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए रोडमैप बनाया गया है। सरकार के प्रयासों से&nbsp;</span>2014 से अब तक दलहन फसलों में काफी प्रगति हुई है। भारत चना व कई अन्य दलहनी फसलों में आत्मनिर्भर बन चुका है। थोड़ी कमी अरहर (तूर) व उड़द में बाकी है। 2027 तक दालों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p>कृषि मंत्री ने कहा कि दलहन की नई किस्मों के बीजों की आपूर्ति बढ़ाई जा रही हैं, वहीं अरहर और उड़द का रकबा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है। इस रबी सीजन मसूर का रकबा करीब एक लाख हेक्टेअर बढ़ा है। अरहर की खरीद के लिए पोर्टल लांच किया गया है। किसान इस पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं और अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) या प्रचलित बाजार दर, जो भी अधिक हो, पर नेफेड और एनसीसीएफ को बेच सकते हैं। &nbsp;</p>
<p>मुंडा ने कहा कि <span>दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को नई तकनीक और उन्नत बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। दालों के गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता बढ़ाने हेतु एनएफएसएम के तहत दालों के 150 केंद्र खोले हैं, जिन्होंने एक लाख क्विंटल से अधिक गुणवत्ता वाली दालों के बीज का उत्पादन किया है। </span>मुंडा ने जलवायु अनुकूल किस्मों और अन्य प्रौद्योगिकियों के तेजी से प्रसार की आवश्यकता पर भी जोर दिया।</p>
<p><span>इस अवसर पर </span>केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्री<strong> पीयूष गोयल</strong> ने कहा कि सरकार किसानों को दलहन उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। पिछले एक दशक में दलों के एमएसपी में काफी वृद्धि की गई है। दलहन उत्पादन 2014 में 17 मिलियन टन से बढ़कर अब 26 मिलियन टन से ज्यादा हो गया। दालों की खरीद पिछले 10 वर्षों में 18 गुना बढ़ी है। किसानों के उज्जवल भविष्य के लिए केंद्र सरकार हरसंभव उपाय कर रही है। <strong>पीयूष गोयल ने कहा कि दालों के जरिये कृषि विविधिकरण और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार किसानों से दालों की सुनिश्चित खरीद के लिए नेफेड व एनसीसीएफ के माध्यम से पांच साल के कॉन्ट्रैक्ट करने के लिए तैयार है।&nbsp;</strong></p>
<p>जीपीसी का सम्मेलन 18 वर्षों के बाद भारत में आयोजित किया जा रहा है। पल्सेस24 सम्मेलन 14-17 फरवरी तक नई दिल्ली के ताज पैलेस में चलेगा। इस कार्यक्रम में लगभग 50 देशों के 700 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। पल्सेस24 के शुभांरभ के अवसर पर इथियोपिया के व्यापार मंत्री कासाहु गोफे बलामी, उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह, जीपीसी के प्रेसीडेंट विजय अयंगर, नेफेड अध्यक्ष डॉ. बिजेंद्र सिंह, एमडी रितेश चौहान, अतिरिक्त सचिव (कृषि) शुभा ठाकुर सहित केंद्र-राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय सहकारी संघों के अध्यक्ष - एमडी, किसानों-व्यापारियों के राष्ट्रीय संघों के पदाधिकारी, मिलर्स, निर्यातक-आयातक मौजूद थे।&nbsp;</p>
<p><strong>विश्व दलहन दिवस मनाया</strong>&nbsp;</p>
<p>दालों के उत्पादन और खपत को प्रोत्साहित करने के लिए ग्लोबल पल्स कन्फेडरेशन (जीपीसी) और नेफेड ने 14 फरवरी को विश्व दलहन दिवस मनाया। जीपीसी अध्यक्ष विजय अयंगर ने कहा कि जितना अधिक हम दालों के बारे में सीखते हैं, उतना ही अधिक हम अपने कृषि खाद्य प्रणालियों का समर्थन करने की उनकी शानदार क्षमता के बारे में जानते हैं... दालें पोषक तत्वों से भरपूर जीविका, अधिक पैदावार और बढ़ी हुई खाद्य सुरक्षा प्रदान करते हुए मिट्टी के स्वास्थ्य को बढ़ावा देती हैं, मिट्टी को पुनर्संतुलित और पुनर्जीवित करती हैं।&nbsp;</p>
<p>यूएसए के कृषि राजदूत क्ले हैमिल्टन ने भारत की बढ़ती आबादी और बढ़ती मांग के बारे में बात करते हुए यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि दालों का भारतीय बाजार में एक स्थान है जो अब की तुलना में और भी मजबूत है।&nbsp;</p>
<p>नेफेड के एएमडी सुनील कुमार सिंह ने कहा कि जब आप अधिक दालें उगाते हैं, तो उपलब्धता बढ़ जाती है जिससे अफोर्डेबिलिटी भी बढ़ जाती है। इसलिए किसान संगठनों, व्यापार, उद्योग नीति-निर्माताओं और सभी हितधारकों के एक समुदाय के रूप में हमारा प्रयास एक ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास करना चाहिए जहां उच्च उत्पादन, कम लागत और उच्च खपत के माध्यम से स्थिरता सुनिश्चित की जाए।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65cdf8ce41fb6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ दलहन उत्पादन बढ़ाने का रोडमैप तैयार, 2027 तक आत्मनिर्भर होगा भारत: कृषि मंत्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65cdf8ce41fb6.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम में तीन दिवसीय एफपीओ मेला आयोजित ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/three-day-fpo-fair-organized-in-national-cooperative-development-corporation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 10 Feb 2024 18:28:19 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/three-day-fpo-fair-organized-in-national-cooperative-development-corporation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा तीन दिवसीय एफपीओ मेले का आयोजन किया गया। नई दिल्ली में एनसीडीसी मुख्यालय में आयोजित एफपीओ मेले में देश के प्रमुख किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) ने भाग लिया। इस मेले में 40 से अधिक एफपीओ ने अपने उत्पादों को प्रदर्शित किया। &nbsp;</p>
<p>एनसीडीसी के प्रबंधन निदेशक पंकज कुमार बंसल, एनसीसीएफ की प्रबंध निदेशक एनिस जोसेफ चंद्रा और एसएफएसी की प्रबंधन निदेशक डॉ. मनिंदर कौर द्विवेदी की उपस्थिति में किसानों के हाथों एफपीओ मेले का उद्धाटन किया गया। मेले में 15 राज्यों के किसान उत्पादक संगठनों द्वारा तैयार उत्पादों जैसे सरसों तेल, मूंगफली का तेल, मूंगफली का मक्खन, आंवला मुरब्बा, बासमती चावल, मशरूम, मसाले, चना दाल, मूंग दाल, रागी बिस्कुट, बाजरा नमकीन, बाजरा लड्डू, बाजरा बिस्कुट, बेसन, सत्तू, घी, शहद, कटिया गेहूं दलिया, मल्टीग्रेन आटा, अचार, स्कैश (संतरा, आंवला), मंडुआ आटा, मसाले, काख्या, कच्चा मखाना, मखाना आटा, मखाना खीर मिक्स, मखाना वीटा, मखाना शिशु आहार प्रदर्शित किए गये। मेले में आए लोगों ने इन उत्पादों को खूब सराहा एवं खरीददारी भी की। एफपीओ को बढ़ावा देने के लिए एनसीडीसी की तरफ से कई प्रयास किए जा रहे हैं।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65c772d0d40b9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम में तीन दिवसीय एफपीओ मेला आयोजित  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65c772d0d40b9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं की स्टॉक लिमिट में फिर कटौती, अब 500 टन की सीमा तय]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/centre-revises-wheat-stock-limit-for-traders-wholesalers-now-500-ton-limit-fixed.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 08 Feb 2024 16:55:26 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/centre-revises-wheat-stock-limit-for-traders-wholesalers-now-500-ton-limit-fixed.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गेहूं की कीमतों और जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं की स्टॉक लिमिट में एक बार फिर कटौती कर दी है। खाद्य मंत्रालय ने व्यापारियों/थोक विक्रेताओं और बड़ी रिटेल चेन के लिए गेहूं की स्टॉक लिमिट 1000 टन से घटाकर <strong>500 टन</strong> निर्धारित की है। खुदरा विक्रेताओं के लिए तय 5 टन स्टॉक लिमिट में कोई बदलाव नहीं किया गया है जबकि प्रोसेसर्स के लिए स्टॉक लिमिट मासिक क्षमता के 70 फीसदी से घटाकर 60 फीसदी कर दी गई है। जिन व्यापारियों के पास तय सीमा से अधिक गेहूं का स्टॉक है उन्हें <strong>30 दिनों</strong> के भीतर इसे निर्धारित स्टॉक लिमिट के भीतर लाना होगा। केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारी स्टॉक लिमिट पर नजर रखेंगे ताकि देश में गेहूं की बनावटी किल्लत ना पैदा की जा सके।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार ने इससे पहले 8 दिसंबर, 2023 को गेहूं की स्टॉक लिमिट घटाई थी। तब थोक व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट<strong> 2000 टन</strong> से घटाकर 1000 टन और खुदरा विक्रेताओं के लिए 10 टन से घटाकर 5 टन की गई थी। एक तरफ सरकार गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन का दावा करती रही है, वहीं दूसरी तरफ गेहूं की कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए स्टॉक लिमिट कम करती जा रही है।&nbsp;</p>
<p>खाद्य मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, अब व्यापारियों को अपने गेहूं स्टॉक की जानकारी हर सप्ताह शुक्रवार को सरकारी पोर्टल <strong>(</strong><span><strong>https://evegoils.nic.in/wsp/login)</strong> </span>पर अपडेट करनी होगी। पोर्टल पर पंजीकरण नहीं करने और स्टॉक लिमिट का उल्लंघन करने वाले व्यापारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।&nbsp;</p>
<p>सरकार ने बाजार में गेहूं की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। <strong>ओपन मार्केट सेल स्कीम</strong> (ओएमएसएस) के तहत एफसीआई द्वारा 2150 रुपये प्रति क्विंटल की रियायती कीमत पर 101.5 लाख टन गेहूं घरेलू बाजार में उतारने के लिए आवंटित किया गया है। आवश्यकता के आधार पर जनवरी-मार्च 2024 के दौरान ओएमएसएस के तहत अतिरिक्त 25 लाख टन गेहूं बाजार में उतारा जा सकता है। अब तक एफसीआई द्वारा साप्ताहिक नीलामी के जरिए प्रोसेसरों को 80.04 लाख टन गेहूं बेचा गया है। इससे खुले बाजार में सस्ती कीमतों पर गेहूं की उपलब्धता बढ़ गई है।&nbsp;</p>
<p>नेफेड<span>, </span>एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार जैसे सहकारी संगठनों को एफसीआई <strong>'भारत आटा</strong><span><strong>'</strong> </span>के लिए रियायती कीमत पर गेहूं जारी कर रहा है। भारत आटा के लिए 7.5 लाख टन गेहूं आवंटित किया गया है। खाद्य मंत्रालय गेहूं की कीमतों को नियंत्रित करने और उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्टॉक की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65c4b91868f5b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं की स्टॉक लिमिट में फिर कटौती, अब 500 टन की सीमा तय ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65c4b91868f5b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी उत्पादन में 10 फीसदी गिरावट का अनुमान, यूपी होगा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-sugar-production-expected-to-decline-by-10-percent-up-will-be-largest-sugar-producer.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 31 Jan 2024 22:08:35 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-sugar-production-expected-to-decline-by-10-percent-up-will-be-largest-sugar-producer.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू पेराई सीजन 2024-25 में देश का चीनी उत्पादन गत वर्ष के मुकाबले 10 फीसदी घटकर <strong>330.5</strong> लाख टन रहने का अनुमान है। गन्ने की फसल पर मौसम की मार के चलते प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक के उत्पादन में गिरावट के कारण यह कमी आ सकती है। उत्पादन में गिरावट के बावजूद शुगर इंडस्ट्री का मानना है कि देश में पर्याप्त चीनी स्टॉक रहेगा।</p>
<p>शुगर इंडस्ट्री के संगठन <strong>इस्मा</strong> ने वर्ष 2023-24 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए चीनी उत्पादन का अपना दूसरा अग्रिम अनुमान जारी किया है। इस दौरान देश में कुल 330.5 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 366.2 लाख टन था। इस्मा के अनुसार, <strong>महाराष्ट्र</strong> में चीनी उत्पादन 118.5 लाख टन से घटकर 99.9 लाख टन रहेगा। जबकि <strong>कर्नाटक</strong> का चीनी उत्पादन 65.8 लाख टन से घटकर 49.7 लाख टन रह सकता है। हालांकि, इस साल <strong>उत्तर प्रदेश</strong> का चीनी उत्पादन 118.9 लाख टन से बढ़कर 119.9 लाख टन होने की उम्मीद है। यूपी इस बार देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य होगा।&nbsp;</p>
<p><strong>चीनी उत्पादन</strong> में गिरावट की आशंका को देखते हुए सरकार ने गन्ने के रस से एथेनॉल बनाने पर रोक लगा दी थी। साथ ही साल 2023-24 में एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल 17 लाख टन चीनी के डायवर्जन की अनुमति दी है। इस प्रकार शुद्ध चीनी उत्पादन लगभग 313.5 लाख टन रहेगा। जबकि गत वर्ष शुद्ध चीनी उत्पादन 328.2 लाख टन था। तब सरकार ने एथेनॉल के लिए 38 लाख टन चीनी के इस्तेमाल की अनुमति दी थी।</p>
<p>पेराई सीजन की शुरुआत में 1 अक्टूबर, 2023 को देश में लगभग 56 लाख टन चीनी का स्टॉक था। इस साल &nbsp;313.5 लाख टन चीनी के शुद्ध उत्पादन और करीब 285 लाख टन की घरेलू खपत को देखते हुए इस्मा ने सीजन के आखिर में 30 सितंबर, 2024 तक अंतिम स्टॉक <strong>84.5 लाख टन</strong> के आसपास रहने का अनुमान लगाया है।&nbsp;</p>
<p>इस्मा का मानना है कि सरकार इस साल एथेनॉल उत्पादन के लिए लगभग <strong>18 लाख टन</strong> अतिरिक्त चीनी डायवर्जन की अनुमति आराम से दे सकती है। फिर भी, अंतिम स्टॉक अगले सीजन में लगभग तीन महीने की आपूर्ति के लिए पर्याप्त होगा।</p>
<p><strong>अब तक कितना चीनी उत्पादन?</strong></p>
<p>इस्मा के अनुसार, चालू सीजन 2023-24 में अक्टूबर-जनवरी के दौरान देश में <strong>187.2 लाख टन</strong> चीनी का उत्पादन हुआ है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में लगभग 195 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ था।</p>
<p><strong>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज </strong>(एनएफसीएफएफ) के मुताबिक, जनवरी के अंत तक देश भर में 517 चीनी मिलों में कुल 1928 लाख टन गन्ने की पेराई की गई, जिससे <strong>9.71 प्रतिशत</strong> की औसत रिकवरी के साथ 187 लाख टन चीनी का उत्पादन किया गया। एनएफसीएफएफ का भी अनुमान है कि इस साल देश में कुल नया चीनी उत्पादन <strong>314 लाख टन</strong> रहेगा।</p>
<p>चीनी उत्पादन की स्थिति को देखते हुए <strong>एनएफसीएफएफ</strong> ने भी सरकार से एथेनॉल उत्पादन के लिए कम से कम <strong>15 लाख</strong> टन अतिरिक्त चीनी के उपयोग की अनुमति देने का अनुरोध किया है&nbsp;</p>
<p><strong>महाराष्ट्र</strong> में 9.60 प्रतिशत की औसत रिकवरी के साथ 676 लाख टन गन्ने की पेराई कर 65 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। महाराष्ट्र में पेराई सत्र मध्य अप्रैल तक चलने की उम्मीद है। <strong>उत्तर प्रदेश</strong> में 574 लाख टन गन्ने की पेराई से 10.5 प्रतिशत की औसत रिकवरी के साथ 57.65 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ है। उत्तर प्रदेश में चीनी सीजन मई के मध्य तक चलने की उम्मीद है। <strong>कर्नाटक</strong> ने 377 लाख टन चीनी की पेराई की है और 9.75 प्रतिशत की औसत रिकवरी के साथ 37 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_6449e11edd667.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी उत्पादन में 10 फीसदी गिरावट का अनुमान, यूपी होगा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_6449e11edd667.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शुगर इंडस्ट्री ने एथेनॉल के लिए 10&amp;#45;12 लाख टन अतिरिक्त चीनी डायवर्जन की मांग की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sugar-industry-demands-diversion-of-10-12-lakh-tonnes-of-additional-sugar-for-ethanol.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 24 Jan 2024 15:19:00 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sugar-industry-demands-diversion-of-10-12-lakh-tonnes-of-additional-sugar-for-ethanol.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गन्ने के जूस से एथेनॉल उत्पादन पर पाबंदी लगने के बाद शुगर इंडस्ट्री सरकार से लगातार रियायतें मांग रही है। अब चीनी मिलों के संगठन इस्मा ने सरकार से एथेनॉल उत्पादन के लिए चालू सीजन में 10-12 लाख टन अतिरिक्त चीनी के डायवर्जन की अनुमति देने का अनुरोध किया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में मौसम की गड़बड़ी के कारण चीनी उत्पादन में संभावित गिरावट को देखते हुए सरकार ने चालू सीजन 2023-24 (अक्टूबर-सितंबर) में एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी डायवर्जन को 17 लाख टन तक सीमित किया है।&nbsp;</p>
<p>इस्मा का कहना है कि चालू सीजन में 15 जनवरी तक मिलों ने <strong>149.52 लाख टन</strong> चीनी का उत्पादन किया है, जो एक साल पहले की अवधि में हुए 157.87 लाख टन चीनी उत्पादन से <strong>5.28 फीसदी</strong> कम है। हालिया मौसम गन्ने की खड़ी फसल के लिए अनुकूल रहा है और उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख राज्यों ने चालू सीजन के लिए अपने चीनी उत्पादन अनुमानों में 5-10 तक संशोधन किया है। चीनी उत्पादन के अनुमानों में सुधार को देखते हुए इस्मा ने सरकार से एथेनॉल उत्पादन के लिए 10-12 लाख टन अतिरिक्त चीनी के उपयोग की अनुमति दिए जाने की मांग की है।</p>
<p>इस्मा का कहना है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए अतिरिक्त चीनी की अनुमति देने के बाद भी, शेष सीजन में अगले कुछ महीनों के लिए पर्याप्त चीनी होगी। इस्मा ने चालू आपूर्ति वर्ष के लिए गन्ने के रस और बी-हैवी मोलासेज से बने एथेनॉल की खरीद लागत में बढ़ोतरी की मांग भी की है।</p>
<p>इस्मा के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में लगभग 520 मिलें चालू हैं जबकि गत वर्ष 515 मिलें चल रही थीं। देश के प्रमुख उत्पादक राज्य<strong> महाराष्ट्र</strong> में चीनी का उत्पादन चालू सीजन में 15 जनवरी तक घटकर 50.73 लाख टन रह गया, जबकि एक साल पहले की अवधि में यह 60.26 लाख टन था।&nbsp;इसी तरह, देश के तीसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक <strong>कर्नाटक</strong> में उत्पादन घटकर 31.16 लाख टन रह गया, जो एक साल पहले समान अवधि में 33.58 लाख टन था। हालांकि, <strong>उत्तर प्रदेश</strong> में चीनी उत्पादन चालू सीजन में 15 जनवरी तक 45.73 लाख टन से अधिक रहा, जबकि एक साल पहले की अवधि में यह 40.65 लाख टन था।</p>
<p>सरकार ने हाल ही में मक्के से बने एथेनॉल के लिए प्रोत्साहन की घोषणा की थी। इस्मा का कहना है कि चूंकि गन्ने की फसल पानी, पोषक तत्व, भूमि उपयोग या कार्बन पृथक्करण के मामले में मक्के की तुलना में अधिक कुशल है, इसलिए गन्ना भी सरकार द्वारा अधिक समर्थन का हकदार है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65b0de123deff.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ शुगर इंडस्ट्री ने एथेनॉल के लिए 10-12 लाख टन अतिरिक्त चीनी डायवर्जन की मांग की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65b0de123deff.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गुड़ इकाइयों में गन्ने का बेहतर भाव, चीनी मिलों के लिए समस्या]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/up-jaggery-industry-benefits-from-delay-in-announcement-of-sugarcane-price-prices-are-higher-than-sugar-mills.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 09 Jan 2024 17:37:28 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/up-jaggery-industry-benefits-from-delay-in-announcement-of-sugarcane-price-prices-are-higher-than-sugar-mills.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश की गुड़ इकाइयां किसानों को गन्ने का भाव देने में चीनी मिलों को टक्कर दे रही हैं। इसका असर चीनी मिलों की गन्ना आपूर्ति पर पड़ रहा है। चालू पेराई सत्र (2023-24) में<span> राज्य सरकार द्वारा गन्ना मूल्य </span>(<span>राज्य परामर्श मूल्य</span>)<span> की घोषणा काफी देर से की गई। इसका फायदा सूबे के गुड़ व खांडसारी उद्योग को मिला। जबकि चीनी मिलें को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल पा रहा है।&nbsp;</span></p>
<p><span>कोल्हू संचालक चीनी मिलों के बराबर या उससे अधिक दाम देकर किसानों से गन्ना खरीद रहे हैं। पश्चिमी यूपी में कई कोल्हू संचालक गन्ने का भाव 380-400 रुपये प्रति क्विंटल तक दे रहे हैं जबकि चीनी मिलें गन्ना मूल्य में 20 रुपये की बढ़ोतरी के बाद भी <strong>370</strong> रुपये प्रति क्विंटल की दर से एसएपी का भुगतान करेंगी। इस साल मौसन की मार और रोग आने के कारण गन्ने की पैदावर घटी है। इस कारण चीनी मिलों और कोल्हू संचालकों के बीच गन्ना खरीद को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।</span>&nbsp;</p>
<p>शामली जिले में ऊन के पास अत्याधुनिक गुड़ संयंत्र हंस हैरीटेज जैगरी के संस्थापक <strong>केपी सिंह </strong>ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि वह गन्ने का दाम 350 रुपये प्रति क्विंटल तक दे रहे हैं। जबकि बिजनौर क्षेत्र में कोल्हू पर गन्ने का भाव 380 रुपये के आसपास है। इस साल गन्ने की फसल कमजोर है। 10 फीसदी तक उत्पादकता प्रभावित हुई है। जिन इलाकों में रेड रॉट बीमारी का असर ज्यादा है वहां गन्ने की फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है।</p>
<p>इस साल गन्ने की पैदावार में कमी की खबरों से गुड़ की कीमतें 200 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़कर 3700 रुपये के आसपास पहुंच गई है। केपी सिंह की हंस हैरीटेज जैगरीज ऑटोमैटेड होने के चलते उन्हें 15 फीसदी से ज्यादा की रिकवरी मिल रही है जबकि सामान्य क्रेशर भी 13 फीसदी तक की रिकवरी हासिल कर रहे हैं। कोल्हू संचालक किसानों को गन्ने का बेहतर भाव और तुरंत भुगतान देकर लुभा रहे हैं। जबकि चीनी मिलों के लिए गन्ने की पर्याप्त आपूर्ति की समस्या खड़ी हो गई है।&nbsp;</p>
<p>मुजफ्फरनगर के फुगाना स्थित फ्रेयर फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर निश्चय मलिक ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया है कि क्रेशर पर गन्ने का रेट 340 से 360 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है। वहीं जिले के पुरकाजी इलाके में दाम 375 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहे हैं। पश्चिमी यूपी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गन्ने की फसल को काफी नुकसान हुआ जिससे पैदावार घटी है।&nbsp;</p>
<p>मुजफ्फरनगर जिले के बढ़ेडी गांव के गन्ना किसान <strong>संदीप चौधरी</strong> बताते हैं कि हर साल कोल्हू में गन्ने का भाव चीनी मिलों से काफी कम रहता था। इसलिए<span> किसान बहुत मजबूरी में ही कोल्हू को गन्ना बेचते थे। लेकिन इस साल स्थिति अलग है। कोल्हू पर चीनी मिलों के बराबर या उससे अधिक भाव मिल रहा है।&nbsp;</span></p>
<p>गुड़ कारोबार से जुड़े मुजफ्फरनगर के <strong>हेमराज सिंह</strong> बताते हैं कि गुड़ की मांग बढ़ी है। शहरों में भी लोगों के खानपान में गुड़ शामिल होता जा रहा है। मुजफ्फरनगर मंडी में गुंड का भाव औसत भाव 3700 रुपये क्विंटल है, <span>जबकि खुदरा बाजार में गुड़ 50 से 60 रुपये किलो के बीच बिक रहा है। गन्ने का भाव 350 रुपये क्विंटल देने पर भी गुड़ उद्योग फायदे की स्थिति में हैं क्योंकि एक क्विंटल गन्ने से करीब 12-15 किलोग्राम गुड़ बनता है। ऐसे में चीनी मिलों के लिए अपनी पेराई क्षमता के हिसाब से गन्ने की आपूर्ति सुनिश्चित करना मुश्किल हो गया है।&nbsp;</span></p>
<p><span>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ (एनएफसीएसएफ) के अनुसार</span>, <span>पेराई सत्र 2023-24 में देश का कुल चीनी उत्पादन 305 लाख टन होने का अनुमान लगाया है</span>, <span>जो 2022-23 सीजन में 330.90 लाख टन उत्पादन से करीब 26 लाख टन कम है। चालू पेराई सत्र 2023-24 के पहले तीन महीनों (अक्टूबर से दिसंबर) के दौरान चीनी का उत्पादन 7.7 प्रतिशत घटकर 112 लाख टन रह गया है।</span></p>
<p>चीनी उत्पादन में गिरावट के अनुमानों के बावजूद उत्तर प्रदेश में गन्ने का एसएपी 20 रुपये बढ़ाया गया है। ऐसे में कोल्हू संचालक चीनी मिलों के बराबर या उससे अधिक दाम देकर किसान से गन्ना खरीद रहे हैं। अगर सरकार समय रहते गन्ने का भाव बढ़ा देती तो कोल्हू संचालकों को भी रेट बढ़ाना पड़ता या फिर उन्हें गन्ना मिलना मुश्किल होता। लेकिन फिलहाल तो चीनी मिलों के लिए पेराई क्षमता के हिसाब से गन्ना जुटना मुश्किल हो गया है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_659d3377220c5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गुड़ इकाइयों में गन्ने का बेहतर भाव, चीनी मिलों के लिए समस्या ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_659d3377220c5.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारतीय उपभोक्ताओं के लिए स्वास्थ्यवर्द्धक खाद्य समाधान मुहैया करा रही कारगिल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/cargill-delivers-customized-food-solutions-matching-evolving-consumer-trends.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 11 Dec 2023 17:56:57 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/cargill-delivers-customized-food-solutions-matching-evolving-consumer-trends.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय उपभोक्ता इन दिनों स्वास्थ्य और अच्छी सेहत को काफी प्राथमिकता दे रहे हैं। इसे देखते हुए कारगिल इंडिया का कारगिल इनोवेशन सेंटर (सीआईसी) स्थानीय स्वाद और प्राथमिकताओं के लिए सबसे उपयुक्त खाद्य समाधान के लिए अपने अंतर्दृष्टि आधारित नवाचार के साथ आगे बढ़ रहा है।</p>
<p>सीआईसी बेकरी, खाद्य सेवा, डेयरी और पेय, विशेष पोषण, स्नैक्स और कन्फेक्शनरी श्रेणियों में नए उत्पाद बनाने के लिए बड़े और छोटे से मध्यम दोनों प्रकार के खाद्य निर्माताओं के साथ काम करता है। कंपनी के एक बयान में कहा गया है कि भारत में परिचालन के अपने पहले सफल वर्ष के बाद सीआईसी ने खाद्य समाधानों में कारगिल की व्यापक वैश्विक विशेषज्ञता और भारतीय उपभोक्ताओं के रुझानों मुताबिक स्थानीय रूप से विकसित कुछ उत्पाद विकसित किया है। सीआईसी का उद्घाटन 2022 में हुआ था।</p>
<p>वैश्विक खाद्य और पेय उद्योग पर कारगिल के स्वामित्व वाले ट्रेंडट्रैकर 2023 अध्ययन में कुछ ऐसे रुझानों पर प्रकाश डाला गया है जिन पर कंपनी अपने ग्राहकों के साथ काम कर रही है। अध्ययन के मुताबिक, उपभोक्ता आज स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहे हैं और स्वस्थ विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। वे अपने भोजन और पेय पदार्थों के विकल्पों के बारे में सोच समझ कर निर्णय ले रहे हैं। इनमें शामिल हैं:</p>
<p>- महामारी के बाद प्रतिरक्षा बढ़ाने, पाचन स्वास्थ्य, आंत स्वास्थ्य और उच्च फाइबर सामग्री पर ध्यान काफी बढ़ गया है।</p>
<p>- प्रोटीन के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश की जा रही है क्योंकि उपभोक्ता प्राकृतिक पौधों पर आधारित स्रोतों के माध्यम से अपनी दैनिक प्रोटीन आवश्यकताओं को पूरा करना चाहते हैं।</p>
<p>- उपभोक्ता स्वास्थ्यप्रद सामग्री का चयन कर रहे हैं और कम परिचित और अधिक प्राकृतिक सामग्री वाले उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारत में 82 फीसदी उपभोक्ता उत्पाद खरीदते समय पैकेट पर दिए गए स्वास्थ्य दावे को पढ़ते हैं।</p>
<p>- स्वच्छ लेबल उत्पाद उपभोक्ताओं को पसंद आते हैं और 10 में से 9 उपभोक्ता सक्रिय रूप से अपने लिए योग्य उत्पादों की तलाश करते हैं।</p>
<p>कारगिल अध्ययन से पता चलता है कि 28 फीसदी भारतीयों ने पिछले 12 महीनों में स्वादिष्ट स्नैक्स की खपत बढ़ाई है, जो उनकी प्राथमिकताओं में बदलाव का संकेत है। 39 फीसदी उपभोक्ता अपने स्नैक्स को 'स्वादिष्ट लेकिन स्वस्थ' बनाना पसंद करते हैं।</p>
<p>कारगिल के खाद्य समाधान कारोबार (दक्षिण एशिया) के मार्केटिंग और कमर्शियल एक्सिलेंस प्रमुख सुबिन सिवन ने कहा, &ldquo;भारत एक जीवंत उपभोक्ता बाजार है जो खाद्य और पेय निर्माताओं के लिए विकास की अपार संभावनाएं प्रदान करता है। स्वास्थ्यवर्धक और स्वाद से भरपूर उत्पादों की बढ़ती मांग के साथ हमारे ग्राहक नवोन्मेषी समाधानों के लिए हम पर भरोसा करते हैं।</p>
<p>हम अपने ग्राहकों की रणनीतिक प्राथमिकताओं को पूरा करने और उनकी पसंद में अपनी भूमिका को मजबूत करने के लिए रुझान आधारित अनुकूल खाद्य उत्पाद बनाने के लिए भारतीय बाजार में उपभोक्ता अंतर्दृष्टि और गहरे अनुभव के साथ अपनी वैश्विक विशेषज्ञता का लाभ उठाते हैं।"</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_6576ffdb67e19.jpg" alt="" /></p>
<p>कारगिल इनोवेशन सेंटर द्वारा भारत के लिए विकसित किए गए उत्पादों में प्रोटेक्स डीएस भी शामिल है। यह भारत में विकसित एक अभूतपूर्व वाइटल व्हीट ग्लूटेन विकल्प है, जिसे ब्रेड और रस्क निर्माताओं के लिए लागत दक्षता और कार्यात्मक श्रेष्ठता बढ़ाने, गेहूं पर निर्भरता कम करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका उपयोग बेकिंग में एक प्रमुख सामग्री के रूप में किया जाता है।</p>
<p>इसी तरह, इलीट च्वॉइस भारत की पहली स्वादयुक्त कुकी शॉर्टनिंग, ट्रांस-फैट मुक्त फैट है जो कुकीज को लंबे समय के लिए हल्का, कुरकुरा और स्वादिष्ट बनाती है और उपभोक्ता अनुभव को बढ़ाती है। सीआईसी में विकसित संशोधित लिपिड मूंगफली का मक्खन, फैट स्प्रेड, चॉकलेट स्प्रेड, रेडी-टू-यूज थेराप्यूटिक फूड, फ्रोजन फ्लैटब्रेड और अन्य विभिन्न खाद्य उत्पाद तेल को अलग करने के प्रबंधन करने में मददगार है। क्लासिक गोल्ड, एक हल्का बेकरी शॉर्टिंग है जिसका उपयोग पफ और पैटीज को हल्का और स्वादिष्ट बनाने में किया जाता है।</p>
<p>इसके अलावा, सीआईसी भारतीय बाजार के लिए कारगिल के वैश्विक नवाचारों को अपना रहा है। रेडिप्योर और प्रोटेक्स E8001G - प्राकृतिक, पौधा आधारित मटर प्रोटीन है जो बेहतर स्वाद और प्रोटीन का एक स्वस्थ विकल्प प्रदान करता है। इसका उपयोग डेयरी और बेवरेज इंडस्ट्री द्वारा किया जाता है।</p>
<p>एपिकॉर आंत के स्वास्थ्य के लिए एक पोस्ट बायोटिक घटक है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है। पोस्ट बायोटिक्स के प्रति उपभोक्ताओं के बढ़ते रुझान को ध्यान में रखते हुए कारगिल इनोवेशन सेंटर भारत में गमियों, चॉकलेट, चॉकलेट मिल्क शेक जैसे नए प्रयोगों के साथ डेयरी, कन्फेक्शनरी और बेकरी उद्योग के लिए प्रोटोटाइप का निर्माण कर रहा है।</p>
<p>कारगिल के फूड सॉल्यूशंस बिजनेस के बी2बी कमर्शियल लीडर (दक्षिण एशिया) कुणाल यादव ने कहा, &ldquo;हम ग्राहकसंचालित दृष्टिकोण अपनाते हैं और अपने ग्राहकों के लिए एंड-टू-एंड फूड सॉल्यूशंस और पेशकश बनाने के लिए आरएंडडी (रिसर्च एवं डेवलेपमेंट) सहायता प्रदान करते हैं। हमने हाल ही में भारत में अपने सबसे बड़े बेकरी ग्राहकों में से एक के लिए अपने मूल्यवर्धित वसा समाधानों का उपयोग करके चिपचिपाहट की समस्या को हल करने में मदद की है। इसके अलावा, मटर प्रोटीन में हमारी पेशकश का उपयोग ग्राहकों द्वारा पाउडर पेय पदार्थों में किया जा रहा है।"</p>
<p>खाद्य नवाचार का केंद्र होने के अलावा, सीआईसी भारतीय खाद्य उद्योग में क्षमता निर्माण का समर्थन करते हुए परिवर्तन के लिए उत्प्रेरक का भी काम रहा है। सीआईसी ने 100 से अधिक छोटे और मध्यम बेकर्स को सशक्त बनाया है। <span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_6576ffcfe9388.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारतीय उपभोक्ताओं के लिए स्वास्थ्यवर्द्धक खाद्य समाधान मुहैया करा रही कारगिल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_6576ffcfe9388.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कॉर्टेवा ने लॉन्च किया कीटनाशक स्पैडिन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/corteva-agriscience-launches-product-to-ensure-healthy-crop-better-yield.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 07 Dec 2023 15:26:46 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/corteva-agriscience-launches-product-to-ensure-healthy-crop-better-yield.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि क्षेत्र की वैश्विक कंपनी कॉर्टेवा एग्रीसाइंस ने स्पैडिन 11.7% एससी (आइसोक्लास्ट सक्रिय) को लॉन्च करने की घोषणा की है। यह एफिड नियंत्रक कीटनाशक है। इसकी व्यापक स्पेक्ट्रम गतिविधि और उत्कृष्ट अवशिष्ट नियंत्रण इसे एफिड्स को नियंत्रित करने, फसलों की रक्षा करने और उपज क्षमता को संरक्षित करने में मददगार है।</p>
<p>कॉर्टेवा एग्रीसाइंस ने एक बयान में कहा है कि स्पैडिन पारंपरिक कीटनाशकों से अलग तरीके से काम करता है। यह संपर्क में आने पर एफिड्स पर तत्काल नियंत्रण करता है और एक मजबूत फसल सुनिश्चित करता है। यह नवोन्वेषी समाधान एक नए रासायनिक वर्ग से संबंधित है जिसे सल्फोक्सिमाइन्स के नाम से जाना जाता है। स्पैडिन चुनौतीपूर्ण पर्यावरणीय परिस्थितियों में भी एफिड्स के खिलाफ लंबे समय तक फसलों को सुरक्षा प्रदान करता है।</p>
<p>कंपनी ने कहा है कि स्पैडिन वर्तमान में गेहूं में उपयोग के लिए पंजीकृत है, लेकिन भविष्य में यह कपास, मूंग और सब्जियों के लिए भी उपलब्ध होगा। इसे फोलियर स्प्रे के रूप में लगाया जाता है। यह तरल और ग्रेन्युल फॉर्मूलेशन दोनों में उपलब्ध है।</p>
<p>बयान के मुताबिक, यह लाभकारी कीटों पर न्यूनतम प्रभाव के साथ एक टिकाऊ कृषि उत्पाद है जो स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देता है। अपने अनुकूल पर्यावरणीय प्रोफाइल के कारण कीटनाशक मिट्टी में तेजी से नष्ट हो जाता है। यह पर्यावरण अनुकूल उत्पाद किसानों को नए और टिकाऊ समाधान प्रदान करने की कॉर्टेवा एग्रीसाइंस की प्रतिबद्धता का प्रमाण है जो उनकी फसलों की रक्षा करने और उनकी उत्पादकता और लाभप्रदता में सुधार करने में मदद करता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_65719692de05d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कॉर्टेवा ने लॉन्च किया कीटनाशक स्पैडिन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_65719692de05d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि व्यापार, कृषि&amp;#45;तकनीक और पशु विज्ञान क्षेत्रों में भारत से साझेदारी मजबूत करने को ग्रीस सरकार बीएल एग्रो से कर रही बात चीत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/greece-govt-in-talks-with-bl-agro-to-strengthen-indo-greece-partnership-in-agri-trade-agri-tech-animal-sciences-sectors.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 07 Nov 2023 17:27:32 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/greece-govt-in-talks-with-bl-agro-to-strengthen-indo-greece-partnership-in-agri-trade-agri-tech-animal-sciences-sectors.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ग्रीस सरकार कृषि प्रौद्योगिकी को अपनाने, कुशल कर्मियों के आदान-प्रदान, कृषि व्यापार, पशु विज्ञान को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन को कम करने के कदमों में रणनीतिक साझेदारी की संभावनाएं तलाशने के लिए भारतीय एफएमसीजी कंपनी बीएल एग्रो के साथ बात चीत कर रही है।</p>
<p>बीएल एग्रो ने एक बयान में कहा कि ग्रीस के ग्रामीण विकास और खाद्य मंत्री एलीफथेरियस एवगेनाकिस और भारत में ग्रीस के राजदूत दिमित्रियोस लोनौ ने हाल ही में ग्रीस दूतावास में आयोजित एक समारोह के दौरान बीएल एग्रो एफएमसीजी कंपनी के एमडी आशीष खंडेलवाल और लीड्स कनेक्ट सर्विसेज के चेयरमैन और एमडी नवनीत रविकर से मुलाकात की। बीएल एग्रो ग्रुप द्वारा आयोजित यह समारोह कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में भारत-ग्रीस संबंधों पर प्रकाश डालने के लिए मंत्री एवगेनाकिस के सम्मान में आयोजित किया गया था। द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से अगस्त 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ग्रीस यात्रा के बाद यह किसी उच्च पदस्थ यूनानी अधिकारी की पहली भारत यात्रा थी।</p>
<p>बयान के मुताबिक, ग्रीस के ग्रामीण विकास और खाद्य मंत्री एलीफथेरियस एवगेनाकिस ने कहा, &ldquo;हम भारत के साथ व्यापार संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं। हम कृषि और पशु विज्ञान के क्षेत्र में भी भारत के साथ गहन संवाद करना चाहते हैं। भारत और ग्रीस में किसानों की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को इस रणनीतिक साझेदारी से लाभ होना चाहिए&rdquo;</p>
<p>इस मौके पर, लीड्स कनेक्ट सर्विसेज (बीएल एग्रो की एक ग्रुप कंपनी) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक नवनीत रविकर ने कहा कि उन्होंने यूनानी मंत्री के साथ सार्थक बातचीत की और कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों की संभावनाओं को तलाशा। रविकर ने कहा, &ldquo;हमारी चर्चा मूलतः ग्रीस में हमारी प्रौद्योगिकी के उपयोग पर थी। हम ग्रीस को बेहतर कुशल श्रमबल, बेहतर कृषि प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन को कम करने के तरीके कैसे प्रदान कर सकते हैं। दूसरी चर्चा इस बारे में थी कि भारत यूनान को बेहतर कृषि और पशु चिकित्सा संस्थान बनाने में कैसे मदद कर सकता है।</p>
<p>रविकर ने कहा कि वे ग्रीस से फेटा चीज, ऑलिव ऑयल और वाइन आयात करने और भारत से उच्च गुणवत्ता वाले मिलेट्स, बासमती चावल, मसाले और अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात करने के विकल्पों की संभावनाएं तलाश रहे हैं। हाल ही में बीएल एग्रो ने आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में भोजन किट प्रदान करने के लिए ग्रीस स्थित सलस इंटरनेशनल ग्रुप के साथ एक संयुक्त उद्यम बनाया है। यह यूरोप में सहायता प्रदान करने वाली सबसे बड़ी फर्मों में से एक है।</p>
<p>रविकर ने बताया कि प्रौद्योगिकी स्टार्टअप के लिए भारत में फंड्स लाने के लिए लीड्स कनेक्ट ने यूनानी स्टार्ट-अप इनक्यूबेटर फर्म जोइस्ट (JOIST) इनोवेशन पार्क के साथ समझौता किया है। उन्होंने कहा, &ldquo;हम उन्हें भारत लाना चाहते हैं और विशेष रूप से कृषि-तकनीक के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता का उपयोग करना चाहते हैं। हम जल्द ही इस पर एक समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले हैं।&rdquo;</p>
<p>लीड्स कनेक्ट एक कृषि प्रौद्योगिकी कंपनी है जो कृषि उद्योग को उत्पादों और सेवाओं की एक श्रृंखला प्रदान करती है। कंपनी का मिशन एक टिकाऊ, स्केलेबल और लाभदायक कृषि व्यवसाय पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम करने के लिए कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को जोड़ना और सशक्त बनाना है। जबकि उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित बीएल एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी आज भारत में सभी ब्रांडेड खाद्य तेल और खाद्य उत्पाद कंपनियों के बीच सबसे बड़े वितरण नेटवर्क में से एक है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_654a25dc5f6be.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि व्यापार, कृषि-तकनीक और पशु विज्ञान क्षेत्रों में भारत से साझेदारी मजबूत करने को ग्रीस सरकार बीएल एग्रो से कर रही बात चीत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_654a25dc5f6be.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीन से प्रतिस्पर्द्धा के बावजूद 9 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि दर हासिल कर सकता है कृषि रसायन उद्योगः प्रो. रमेश चंद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/indian-agro-chem-industry-can-grow-over-9pc-despite-chinese-competition-said-niti-aayog-member-ramesh-chand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 07 Sep 2023 13:33:44 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/indian-agro-chem-industry-can-grow-over-9pc-despite-chinese-competition-said-niti-aayog-member-ramesh-chand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने कहा है कि भारत के कृषि-रसायन उद्योग में चीन से प्रतिस्पर्धा के बावजूद मौजूदा 9 फीसदी से अधिक की दर से बढ़ने की क्षमता है। यह भी देखा गया है कि कई पश्चिमी देश कृषि-रसायनों से जैव कीटनाशकों की ओर स्थानांतरित हो रहे हैं। भारतीय कंपिनयों को भी इस पहलू पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने एग्रो केमिकल फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसीएफआई) से कृषि रसायनों का व्यापार आसान करने को लेकर एक दस्तावेज लाने का आग्रह किया।</p>
<p>नई दिल्ली में एसीएफआई के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नीति आयोग के सदस्य ने कहा, "कृषि रसायन उद्योग ने 9 फीसदी की चमत्कारिक वृद्धि हासिल की है। इस वृद्धि दर का अधिकांश हिस्सा कोविड-19 महामारी के वर्षों के दौरान हासिल हुआ है जब उत्पादन गतिविधियां गंभीर रूप से बाधित थी।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि आर्थिक और उत्पादन बाधाओं के बावजूद घरेलू कृषि रसायन उद्योग ने 2017-18 और 2022-23 के बीच प्रभावशाली वृद्धि दिखाई है। इसके अलावा भारत का निर्यात 5 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गया है और चीन से भी आगे निकल गया है। नीति आयोग के सदस्य ने आगे कहा कि अगर भारत अनुकूल चीन कारक के अभाव में 9 फीसदी की विकास दर हासिल कर सकता है, तो चीन के साथ प्रतिस्पर्धा अब उतनी कठिन नहीं है जितनी पहले थी। उन्होंने कहा, "हम इस विकास दर को आसानी से 9 फीसदी से बढ़ाकर वास्तविकता के दायरे में कुछ भी कर सकते हैं।"</p>
<p>जैव-कीटनाशकों के बारे में उन्होंने कहा कि उद्योग को इस बात पर विचार करने की जरूरत है कि क्यों कई पश्चिमी देश कृषि रसायनों से जैव-कीटनाशकों की ओर स्थानांतरित हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैंने इसे कई देशों में देखा है। नीदरलैंड शायद ही कोई कृषि-रसायन बेचता है। पश्चिम के सभी देश उसी दिशा में जा रहे हैं। मुझे लगता है कि लंबे समय में भारतीय उद्योग को इस पहलू पर ध्यान देने की आवश्यकता है।"</p>
<p>निर्यात को बढ़ावा देने को लेकर उन्होंने कहा भारतीय कंपनियों को ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) से संबंधित मुद्दों का अनुपालन करते हुए जिम्मेदारी से कारोबार करने की जरूरत है। इस पर अब काफी चर्चा हो रही है। इसके अलावा, कृषि रसायन उद्योग को प्रदूषण को कम करने के लिए नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने और व्यापार करने में आसानी पर एक दस्तावेज लाने की जरूरत है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_64f9b82dc7af1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीन से प्रतिस्पर्द्धा के बावजूद 9 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि दर हासिल कर सकता है कृषि रसायन उद्योगः प्रो. रमेश चंद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_64f9b82dc7af1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कारगिल ने महाराष्ट्र में लॉन्च किया पशुआहार मिल्कजेन 10000, डेयरी किसानों को दूध उत्पादन बढ़ाने में मिलेगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/cargill-launches-innovative-dairy-feed-milkgen-10000-in-maharashtra-to-boost-milk-production.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 05 Sep 2023 16:46:50 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/cargill-launches-innovative-dairy-feed-milkgen-10000-in-maharashtra-to-boost-milk-production.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>डेयरी किसान दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए नए-नए तरीकों की तलाश में रहते हैं। इसे देखते हुए कारगिल ने दूध की गुणवत्ता, दूध उत्पादकता और समग्र पशु कल्याण को बढ़ाने पर ध्यान देने के साथ महाराष्ट्र में डेयरी उद्योग के लिए एक नया पशुआहार 'मिल्कजेन 10000' को लॉन्च किया है। महाराष्ट्र के 200 से अधिक डीलरों और भागीदारों की मौजूदगी में इसे लॉन्च किया गया।</p>
<p>जैसे-जैसे भारत का डेयरी क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है, किसान अपने पशुओं की दूध उत्पादन क्षमता को बढ़ाने &nbsp;के लिए बेहतर चारा प्रबंधन प्रथाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। 'मिल्कजेन 10000' विशेष रूप से किसानों की जरूरतों को पूरा करने, बेहतर मूल्य और पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर बनाया गया है। कारगिल की फॉर्मूलेशन तकनीक के साथ 'मिल्कजेन 10000' संतुलित प्रोटीन और स्टार्च प्रदान करता है। इसे दूध के घटकों, वसा और ठोस गैर-वसा के साथ-साथ दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है।</p>
<p>'मिल्कजेन 10000' ने पंजाब के डेयरी उद्योग पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। यहां के डेयरी फार्मों में पशु आहार का यह एक प्रमुख घटक है। पशु स्वास्थ्य और पोषण में अपने वैश्विक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी क्षमताओं का लाभ उठाते हुए कारगिल ने महाराष्ट्र में डेयरी फार्मिंग प्रथाओं में क्रांति लाने और भारतीय डेयरी क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए यह उत्पाद उतारा है।</p>
<p>इस मौके पर भारत में कारगिल के वाणिज्यिक निदेशक (पशु पोषण और स्वास्थ्य व्यवसाय) डॉ. प्रशांत शिंदे ने उभरते बाजार रुझानों और इस उत्पाद के कई लाभों पर कहा, &ldquo;यह लॉन्चिंग देश में फीड मिलर्स और किसानों दोनों के लिए अग्रणी आपूर्तिकर्ता और विश्वसनीय भागीदार बने रहने की हमारी आकांक्षाओं के अनुरूप है। यह कृषि आय में वृद्धि का समर्थन करके स्थानीय डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने की हमारी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। इस उत्पाद के साथ हमारा लक्ष्य महाराष्ट्र में डेयरी किसानों को अभूतपूर्व सफलता दिलाना है।''</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_64f70de9d0acf.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कारगिल ने महाराष्ट्र में लॉन्च किया पशुआहार मिल्कजेन 10000, डेयरी किसानों को दूध उत्पादन बढ़ाने में मिलेगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_64f70de9d0acf.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बैरिक्स से निकली ओमनिवोर, सुमितोमो केमिकल को बेची अपनी हिस्सेदारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/omnivore-exits-barrix-agro-sciences-to-sumitomo-chemical.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 02 Sep 2023 15:35:22 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/omnivore-exits-barrix-agro-sciences-to-sumitomo-chemical.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एग्रीटेक वेंचर कैपिटल फर्म ओमनिवोर ने बैरिक्स एग्रो साइंसेज से बाहर निकलने की घोषणा की है। ओमनिवोर ने जापान की सुमितोमो केमिकल की सहायक कंपनी सुमितोमो केमिकल इंडिया लिमिटेड (एससीआईएल) को अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। पिछले एक वर्ष में यह तीसरी कंपनी है जिसमें ओमनिवोर ने अपनी पूरी हिस्सेदारी बेची है। अगस्त 2022 में ओमनिवोर ने इरुवाका की अपनी हिस्सेदारी नीदरलैंड स्थित न्यूट्रेको को और इस साल की शुरुआत में मित्रा की पूरी हिस्सेदारी महिंद्रा समूह को बेची थी।</p>
<p>बेंगलुरु स्थित बैरिक्स की स्थापना 2011 में लोकेश मकाम ने की थी। यह इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (आईपीएम) और इंटीग्रेटेड प्लांट न्यूट्रिशन मैनेजमेंट (आईपीएनएम) उत्पादों की शुरुआती कंपनी है। बैरिक्स के अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास की वजह से कई पर्यावरण-अनुकूल फसल सुरक्षा और पोषण उत्पादों को बाजार में उतारा गया है। इसमें कीटों की निगरानी और उन्हें फंसाने के लिए फेरोमोन फैलाव तकनीक भी शामिल है।</p>
<p>बैरिक्स भारत के शुरुआती एग्रीटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम की सबसे शुरुआती कंपनियों में से एक है। ओमनिवोर 2013 में आईआईएम अहमदाबाद के सीआईआईई के साथ बैरिक्स की पहली संस्थागत निवेशक बनी थी।</p>
<p>ओमनिवोर के मैनेजिंग पार्टनर जिनेश शाह ने कहा, &ldquo;बैरिक्स से पहले भारतीय किसानों की प्रभावी, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल फसल सुरक्षा उत्पादों तक सीमित पहुंच थी। पिछले कुछ वर्षों में इस फर्म ने फसल क्षति और श्रम लागत को कम करने में अपने नवाचारों की प्रभावशीलता साबित की है। बैरिक्स के शुरुआती सहयोगी के तौर पर हमें बहुत गर्व है। कंपनी में सुमितोमो की हिस्सेदारी यह सुनिश्चित करती है कि दुनिया भर के किसानों को इन स्थायी समाधानों तक पहुंच प्राप्त होगी।</p>
<p>बैरिक्स एग्रो साइंसेज के प्रबंध निदेशक लोकेश मकाम ने कहा, &ldquo;हम एससीआईएल के साथ जुड़कर बहुत खुश और उत्साहित हैं। इस मुकाम तक हमारी यात्रा रोमांचक रही है और मैं शुरुआती वर्षों में ओमनिवोर के समर्थन के लिए आभारी हूं।</p>
<p>एससीआईएल के प्रबंध निदेशक चेतन शाह ने कहा, &ldquo;एससीआईएल के विशाल नेटवर्क और बैरिक्स के नवीन उत्पादों के साथ हम फसल सुरक्षा के लिए पारंपरिक और अतिरिक्त पूरक समाधानों के साथ संपूर्ण मूल्य श्रृंखला के माध्यम से किसानों की सेवा कर सकते हैं। इस अधिग्रहण से अधिक तालमेल बनेगा, हमारे शेयरधारकों को अधिकतम मूल्य मिलेगा और हमारे ग्राहकों के लिए व्यापक उत्पाद पोर्टफोलियो बनेगा।''</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_64f308b9f3733.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बैरिक्स से निकली ओमनिवोर, सुमितोमो केमिकल को बेची अपनी हिस्सेदारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_64f308b9f3733.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नामधारी सीड्स को बीज के स्वास्थ्य जांच के लिए मिली एनएबीएल मान्यता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/namdhari-seeds-bags-nabl-accreditation-for-seed-health-testing.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 05 Aug 2023 17:43:12 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/namdhari-seeds-bags-nabl-accreditation-for-seed-health-testing.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नामधारी सीड्स प्राइवेट लिमिटेड (एनएसपीएल) की प्रयोगशालाओं को एनएबीएल (नेशनल एक्रीडिशन बोर्ड) से बीज के स्वास्थ्य की जांच करने की मान्यता मिली है। एनएसपीएल की बेंगलुरु में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं हैं। एनएबीएल केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के तहत भारतीय गुणवत्ता परिषद का एक घटक बोर्ड है। यह परीक्षण प्रयोगशालाओं को तकनीकी क्षमता का मूल्यांकन करने की मान्यता देता है।</p>
<p>नामधारी समूह के सीईओ गुरमुख रूपरा ने कहा, "हमें अपने प्रयोगशालाओं के लिए प्रतिष्ठित एनएबीएल मान्यता प्राप्त करने पर गर्व है। यह उपलब्धि हमारे ग्राहकों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज देने की हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। पौधों के लिए सबसे घातक रोग &nbsp;'टमाटर ब्राउन रूगोज फ्रूट वायरस' की जांच के लिए मान्यता प्राप्त करने वाली भारत की पहली बीज स्वास्थ्य परीक्षण प्रयोगशालाओं में से एक के रूप में मान्यता मिलना, आधुनिक अनुसंधान और बीज उद्योग में उच्चतम मानकों को बनाए रखने के प्रति हमारे समर्पण को दर्शाता है।"</p>
<p>बीज स्वास्थ्य में मान्यता के दायरे में टोबैको मोजेक वायरस (TMV), टोमैटो मोजेक वायरस (ToMV), पेपर माइल्ड मोटल वायरस (PMMoV), टोमैटो ब्राउन रूगोज़ फ्रूट वायरस (ToBRFv), ककड़ी ग्रीन मोटल मोजेक वायरस (CGMMV), स्क्वैश मोजेक वायरस (SqMV) और जैंथोमोनास एसपीपी जैसे रोगजनकों का परीक्षण शामिल है। एनएसपीएल सभी रोगजनकों के परीक्षण के लिए सौ फीसदी आईएसटीए और आईएसएचआई-वेज प्रोटोकॉल का पालन करता है। इसके अलावा, मोलेक्यूलर बायोलॉजी और गुणवत्ता जांच (क्यूसी) प्रयोगशाला को कई फसलों में आनुवंशिक शुद्धता विश्लेषण (जीपीए), डीएनए फिंगरप्रिंटिंग, अंकुरण, भौतिक शुद्धता (पीपी) और नमी सामग्री परीक्षण के लिए मान्यता दी गई है।</p>
<p>नामधारी सीड्स के प्रेसीडेंट (बीज कारोबार) समीर सावंत ने कहा, "एनएबीएल मान्यता मिलना हमारे विशेषज्ञों की टीम की कड़ी मेहनत और समर्पण का प्रमाण है। एनएबीएल की आवश्यकताओं के अनुसार परीक्षण प्रक्रियाओं का पालन करना हमारे लिए चुनौतीपूर्ण यात्रा थी, लेकिन गुणवत्ता और निरंतर सुधार के प्रति हमारी प्रतिबद्धता ने हमें आगे बढ़ाया। यह मान्यता हमारे परिचालन नियंत्रण को बढ़ावा देगी और जोखिमों को कम करेगी। हमारा मकसद अंततः यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों को विश्वसनीय और सटीक रूप से परीक्षण किए गए उत्पाद प्राप्त हों।"</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64ce3c6307059.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नामधारी सीड्स को बीज के स्वास्थ्य जांच के लिए मिली एनएबीएल मान्यता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64ce3c6307059.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सिंजेंटा इंडिया ने पेश किए दो नए कीटनाशक, धान, कपास और सब्जियों को कीटों से मिलेगी प्रभावी सुरक्षा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/syngenta-india-introduces-two-products-to-tackle-pest-in-paddy-cotton-veg.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 20 Jul 2023 14:22:43 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/syngenta-india-introduces-two-products-to-tackle-pest-in-paddy-cotton-veg.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सिंजेंटा इंडिया ने दो नए कीटनाशक - इन्सिपियो और सिमोडिस पेश किए हैं। ये दोनों उत्पाद धान, कपास और सब्जियों में विभिन्न कीटों के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा प्रदान करते हैं। सिंजेंटा दुनिया की अग्रणी कृषि कंपनियों में से एक है, जिसमें सिंजेंटा क्रॉप प्रोटेक्शन और सिंजेंटा सीड्स शामिल हैं।</p>
<p>सिंजेंटा इंडिया ने एक बयान में कहा है कि प्लिनाज़ोलिन तकनीक पर आधारित ये उन्नत उत्पाद पैदावार और फसल की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करेंगे। इन्हें जलवायु परिवर्तन और कीड़ों से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का कुशलतापूर्वक सामना करने के लिए विकसित किया गया है। इनकी वजह से हर साल फसलों का बड़े पैमाने नुकसान होता है।</p>
<p>इन्सिपियो कीटनाशक धान की फसलों पर स्टेम बोरर्स और लीफ फोल्डर की नई प्रजातियों के हमले से प्रभावी ढंग से मुकाबला करता है, जबकि सिमोडिस धान, कपास और सब्जियों में तितलियों और पतंगों जैसे चूसने वाले और लेपिडोप्टेरा कीड़ों से सुरक्षा प्रदान करता है। यह काली मिर्च, बैंगन, कपास, मूंगफली, सोयाबीन और चना जैसी फसलों के लिए प्रभावी उत्पाद है। अगर सही समय पर प्रभावी ढंग से कीटों को नियंत्रित नहीं किया गया तो उपज में 30-40 फीसदी तक की हानि हो सकती है। सिंजेंटा ने कहा कि इन कीटों की उच्च संक्रमण दर और मौजूदा समाधानों के साथ कम अवधि के नियंत्रण के कारण कीटनाशकों का बार-बार इस्तेमाल करना पड़ता है जिससे कुल लागत में वृद्धि हो रही है।</p>
<p>सिंजेंटा इंडिया के कंट्री हेड और मैनेजिंग डायरेक्टर सुशील कुमार ने कहा, "इन्सिपियो और सिमोडिस कीटों की समस्याओं को हल करने में किसानों की मदद करने वाले नवीनतम समाधान हैं। हम एक वैकल्पिक समाधान लाने पर प्रसन्न हैं जो कीटों से प्रभावी, लंबी अवधि का नियंत्रण प्रदान करेगा।"</p>
<p>सिंजेंटा इंडिया के चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर केसी रवि ने कहा कि इन्सिपियो और सिमोडिस को विशेष रूप से देश में धान और सब्जी उत्पादकों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए तैयार किया गया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_64b8f59982683.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सिंजेंटा इंडिया ने पेश किए दो नए कीटनाशक, धान, कपास और सब्जियों को कीटों से मिलेगी प्रभावी सुरक्षा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_64b8f59982683.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्रोकेमिकल कंपनियों का परिचालन मुनाफा प्रभावित होने की संभावनाः केयरएज रेटिंग्स]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/aided-by-high-demand-agrochemicals-sector-cruises-through-headwinds-said-careedge-ratings.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 01 Jul 2023 12:14:17 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/aided-by-high-demand-agrochemicals-sector-cruises-through-headwinds-said-careedge-ratings.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि रसायन क्षेत्र (उर्वरक को छोड़कर) ने हाल के वर्षों में मांग में महत्पूर्ण वृद्धि दर्ज की है। सामान्य मानसून, उर्वरक सब्सिडी बजट में वृद्धि, निर्यात में सुधार और मैन्युफैक्चरिंग के नए अवसरों की वजह से यह वृद्धि हुई है। भारतीय कंपनियों ने पूंजीगत व्यय बढ़ाकर इन अनुकूल संभावनाओं को अपनाया है और मौजूदा समय में तुलनात्मक निवेश प्रगति पर है। इस क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाएं आशाजनक बनी हुई हैं, मगर वित्त वर्ष 2022-23 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) के बाद की अवधि में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ये चुनौतियां मुख्य रूप से चैनल इन्वेंट्री में बढ़ोतरी और इनपुट कीमतों में गिरावट से उत्पन्न हुई हैं जिस कारण इन्वेंट्री नुकसान हुआ है। इसकी वजह से वित्त वर्ष 2022-23 में बिक्री की वृद्धि दर और परिचालन लाभ में गिरावट आई है।</p>
<p>इसे देखते हुए केयरएज रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2023-24 में बिक्री की वृद्धि दर 10-12 फीसदी तक रहने का अनुमान लगाया है। इससे निकट अवधि में परिचालन लाभ पर दबाव पड़ने की उम्मीद है। केयरएज का कहना है कि मुनाफे में संभावित कमी के बावजूद पिछले कुछ वर्षों में मजबूत बैलेंस शीट के कारण सामान्य रूप से भारतीय एग्रोकेमिकल कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत रहने की उम्मीद है। देश में कृषि रसायनों की कुल बिक्री में वित्त वर्ष 2021-22 तक (कोविड के कारण वित्त वर्ष 2019-20 को छोड़कर) अच्छी वृद्धि देखी गई थी। मजबूत घरेलू मांग, निर्यात में सुधार, उर्वरक सब्सिडी के लिए पर्याप्त बजट और सामान्य मानसून की वजह से यह वृद्धि दर्ज की गई थी।</p>
<p>हालांकि, वित्त वर्ष 2022-23 में बिक्री की वृद्धि घटकर 13 फीसदी रह गई जो उच्च चैनल इन्वेंट्री के कारण वित्त वर्ष 2021-22 में पहले से ही ज्यादा थी। केयरएज ने उम्मीद जताई है कि है कि वित्त वर्ष 2022-23 के अंत तक उपलब्ध चैनल इन्वेंट्री को देखते हुए वित्त वर्ष 2023-23 में बिक्री की वृद्धि दर 10-12 फीसदी तक रहेगी। इस साल मानसून पर अल-नीनो के संभावित प्रभाव और इनपुट कीमतों में गिरावट का असर बिक्री पर पड़ने की उम्मीद है। कृषि रसायन कंपनियों के लिए परिचालन मुनाफा मार्जिन वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 में 14-15 फीसदी रहा है जिसे अच्छा माना जाता है। हालांकि, इनपुट कीमतों में गिरावट के कारण, खासकर वित्त वर्ष 2022-23 की दूसरी छमाही (अक्टूबर-मार्च) में इन्वेंट्री घाटे के कारण यह घटकर 13 फीसदी रह गया।</p>
<p>यह क्षेत्र में ज्यादा पूंजी लगती है। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में काफी पूंजीगत व्यय हुआ है। इस वर्ष भी काफी बड़ा पूंजीगत व्यय होने वाला है। यह पूंजीगत व्यय मुख्य रूप से मौजूदा उत्पाद क्षमताओं का विस्तार, वितरण नेटवर्क का विस्तार, अकार्बनिक अधिग्रहण, पिछड़े एकीकरण, नए उत्पाद विकास और बाजार में उनके लॉन्च पर होता है। केयरएज के मुताबिक, यदि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में परिचालन लाभ पर दबाव रहता है तो दूसरी छमाही में पूंजीगत व्यय में कमी आ सकती है।</p>
<p>केयरएज रेटिंग्स के निदेशक हार्दिक शाह ने कहा, &ldquo;मजबूत घरेलू मांग, चीन की नीति के कारण निर्यात मांग में सुधार, विनिर्माण तकनीकी और प्रमुख मध्यवर्ती में बैकवर्ड इंटीग्रेशन की अच्छी गुंजाइश, प्रतिस्पर्धी लागत संरचना के कारण कृषि रसायन क्षेत्र की दीर्घकालिक विकास की संभावनाएं बरकरार हैं। इसके अलावा कस्टम सिंथेसिस मैन्युफैक्चरिंग और पर्याप्त उर्वरक सब्सिडी बजट से भी काफी संभावनाएं हैं। इस अवसर का लाभ उठाने के लिए भारतीय कंपनियों ने बड़े पैमाने पर पूंजीगत व्यय किया है। उनकी बैलेंस शीट भी पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हो गई है। हालांकि, निकट अवधि में उच्च चैनल इन्वेंट्री, इनपुट कीमतों में गिरावट, चीन से ज्यादा आपूर्ति और अल- नीनो के कारण मौसम की अनिश्चितता से कुछ प्रतिकूल परिस्थितियां हैं। इस वजह से चालू वित्त वर्ष में परिचालन मुनाफा मार्जिन पर दबाव से बिक्री की वृद्धि कम होने की संभावना है।&rdquo;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_649fcb241b984.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्रोकेमिकल कंपनियों का परिचालन मुनाफा प्रभावित होने की संभावनाः केयरएज रेटिंग्स ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_649fcb241b984.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इंदौर में 22 जून से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सोया खाद्य सम्मेलन का होगा आयोजन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/two-days-9th-international-soya-food-conference-from-june-22-in-indore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 21 Jun 2023 16:18:51 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/two-days-9th-international-soya-food-conference-from-june-22-in-indore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सोया फूड प्रमोशन एंड वेलफेयर एसोसिएशन (एसएफपीडब्ल्यूए) मध्य प्रदेश के इंदौर में 9वां &nbsp;अंतरराष्ट्रीय सोया फूड कॉन्फ्रेंस आयोजित कर रहा है। 22 और 23 जून को आयोजित होने वाले इस कॉन्फ्रेंस में सोया खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नई प्रगति पर चर्चा होगी। इसके अलावा इस क्षेत्र के विकास और सहयोग के लिए रास्ते तलाशने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उद्योग विशेषज्ञ, शोधकर्ता, उद्मी, निवेशक और नीति निर्माता एक मंच पर आएंगे।</p>
<p>इस कॉन्फ्रेंस में "वैश्विक और भारतीय सोया उत्पादन, मांग और आपूर्ति, सोया खाद्य प्रसंस्करण और उपयोग के रूझान, सोया पोषण के साथ-साथ पोषण हस्तक्षेप कार्यक्रमों, नवाचारों और उद्यमिता/स्टार्ट-अप अवसरों में सोया की भूमिका" विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। इस सोया खाद्य सम्मेलन का उद्देश्य ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक समावेशी मंच प्रदान करना है। साथ ही सोया खाद्य प्रसंस्करण, उपयोग पर सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना, नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ सोया खाद्य व्यवसाय के अवसरों को उद्यमशीलता के दृष्टिकोण के साथ-साथ कम लागत पोषण प्रदान करने के लिए बढ़ावा देना और रोजगार के अवसर पैदा करना है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x_6492d4edb053a.jpg" alt="" /></p>
<p>सोया&nbsp;फूड&nbsp;प्रमोशन&nbsp;एंड&nbsp;वेलफेयर&nbsp;एसोसिएशन&nbsp;(एसएफपीडब्ल्यूए)&nbsp;के&nbsp;अध्यक्ष&nbsp;सुमित&nbsp;अग्रवाल&nbsp;ने कहा, "हम इस अंतरराष्ट्रीय सोया फूड सम्मेलन को लेकर बहुत उत्साहित हैं।यह सम्मेलन सोया खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों, बाजार विकास, उद्योग के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने और इस क्षेत्र को देश के खाद्य और पोषण सुरक्षा रोडमैप के साथ कैसे जोड़ा जाए, में प्रगति दिखाने के लिए एक मंच के रूप में काम करेगा। सोया खाद्य उत्पादों में देश और उससे आगे की खाद्य और पोषण सुरक्षा पर भरोसा करने की अपार संभावनाएं हैं।"</p>
<p>सोया फूड प्रमोशन एंड वेलफेयर एसोसिएशन भारत में सोया और सोया आधारित खाद्य उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए खाद्य और पोषण सुरक्षा में सुधार के लिए समर्पित है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_6492d4f603a8e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इंदौर में 22 जून से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सोया खाद्य सम्मेलन का होगा आयोजन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_6492d4f603a8e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बेयर का कारगिल से एमओयू, छोटे किसानों को डिजिटली  सशक्त बनाने और उनकी बाजार पहुंच बढ़ाने पर होगा फोकस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/bayer-cargill-to-provide-farmers-innovative-solutions-market-access.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 13 Jun 2023 20:03:06 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/bayer-cargill-to-provide-farmers-innovative-solutions-market-access.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि एवं स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी लाइफ साइंस क्षेत्र की ग्लोबल कंपनी बेयर (Bayer) ने अंतरराष्ट्रीय खाद्य कंपनी कारगिल (Cargill) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है। इस रणनीतिक साझेदारी का लक्ष्य किसानों को नवीनतम तकनीक प्रदान करते हुए कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाना और किसानों को उनकी उपज का वास्तविक मूल्य दिलाना है। साथ ही इस साझेदारी के जरिये छोटे किसानों की बाजार पहुंच को और बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी।</p>
<p>इसके लिए स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) संचालित और मोबाइल पर चलने वाले कारगिल के 'डिजिटल साथी' जैसे प्लेटफॉर्म और 5 लाख से ज्यादा किसानों की सहायता कर रहे बेयर के 'बेटर लाइफ फार्मिंग सेंटर्स' जैसे माध्यमों की क्षमताओं का लाभ उठाया जाएगा। &nbsp;बेयर और कारगिल साथ मिलकर किसानों को विभिन्न डिजिटल समाधानों से सक्षम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इनमें डिस्कशन फोरम एवं बाजार में चल रही कीमतों की जानकारी, मौसम का पूर्वानुमान और फसल के पहले व बाद के अनुमान जैसे समाधान शामिल हैं। बेयर की ई-कॉमर्स रणनीति के तहत डिजिटल साथी ऐप के माध्यम से स्थान विशेष के मुताबिक विकसित समाधान को विस्तार दिया जाएगा। इसकी शुरुआत कर्नाटक में मक्का की खेती से की जाएगी और फिर इसे अन्य फसलों व अन्य क्षेत्रों तक विस्तार दिया जाएगा।</p>
<p>इस साझेदारी के माध्यम से डिजिटल साथी प्लेटफॉर्म पर बेयर के कॉर्न पोर्टफोलियो डीकाल्ब (DEKALB) तक किसानों की पहुंच भी सुनिश्चित होगी जिससे उनकी कृषि क्षमता में सुधार होगा। डिजिटल साथी ऐप में फसल इनपुट, ई-कॉमर्स और फसल बिक्री के ऑफर से जुड़े फीचर्स भी उपलब्ध हैं जिससे उच्च-गुणवत्ता वाली फसल इनपुट तक किसानों की पहुंच सुनिश्चित हुई है और डिजिटल तरीके से संचालित मार्केटप्लेस के माध्यम से किसानों एवं एग्रीगेटर्स के बीच मार्केट लिंकेज भी स्थापित हुआ है। इस एकीकृत दृष्टिकोण का लक्ष्य किसानों की निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाना, कृषि से जुड़ी प्रक्रियाओं को सुगम बनाना और कृषि क्षेत्र की पूरी व्यवस्था के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करना है।</p>
<p>डिजिटल साथी से 50 हजार से ज्यादा छोटे किसान जुड़े हैं। 2027 तक कर्नाटक एवं मध्य प्रदेश समेत आठ राज्यों में इससे 30 लाख किसानों के जुड़ने का अनुमान है। कारगिल ने वैश्विक स्तर पर 2030 तक 1 करोड़ किसानों के लिए बाजार पहुंच को बेहतर करने और उन्हें पर्यावरण के अनुकूल खेती की प्रक्रियाओं में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है।</p>
<p>भारत, बांग्लादेश एवं श्रीलंका में बेयर के क्रॉप साइंस डिवीजन के कंट्री डिवीजनल हेड साइमन थॉर्टन वीबुश ने कहा<strong>,</strong> 'परामर्श, गुणवत्तापूर्ण इनपुट, क्रेडिट, टेक्नोलॉजी और बाजार तक पहुंच छोटे किसानों के लाभ की अहम कड़ी हैं और यह साझेदारी पूरी तरह से इन्हीं पर केंद्रित है। इस पूरे प्रयास के लिए डिजिटलीकरण बहुत अहम है। इसीलिए हम सभी संबंधित डिजिटल उपकरण का लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं ताकि हम सुनिश्चित कर पाएं कि छोटे किसानों को अधिकतम लाभ और बराबरी का मौका मिले।'</p>
<p>भारत में कारगिल के प्रेसिडेंट साइमन जॉर्ज ने कहा<span>, '</span><span>हम नए डिजिटल सॉल्यूशंस विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। बेयर के साथ किसानों के लिए उत्पादक एवं लाभदायक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में इस साझेदारी से हम उत्साहित हैं। पर्यावरण के अनुकूल एवं समृद्ध कृषि की दिशा में हमारे सफर में यह साझेदारी अहम पड़ाव है। अपनी साझा क्षमताओं</span><span>, </span><span>विशेषज्ञता और वैश्विक नेटवर्क का लाभ लेते हुए हम दुनियाभर में किसानों का सहयोग करने एवं एक मजबूत व समावेशी खाद्य व्यवस्था तैयार करने की अपनी प्रतिबद्धता पर टिके रहेंगे।</span><span>'</span></p>
<p>डिजिटल साथी के संस्थापक रमन सक्सेना ने कहा, <span>'</span><span>हमने इसी साल अपने प्लेटफॉर्म पर फार्म एडवाइजरी सब्सक्रिप्शन और फार्म मैनेजमेंट सर्विस (सॉइल टेस्टिंग) की शुरुआत की है जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी कृषि संबंधी जरूरतों के लिए संपूर्ण समाधान उपलब्ध कराना है। इस साझेदारी के माध्यम से हमारा लक्ष्य एग्री इनपुट मार्केटप्लेस के जरिये किसानों को उनकी उपज बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण इनपुट एवं क्रियान्वयन तक व्यापक पहुंच प्रदान करना है। साथ ही किसानों की आय को बढ़ाते हुए एक व्यापक समाधान देना भी है।</span><span>'</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_64887d9016d3f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बेयर का कारगिल से एमओयू, छोटे किसानों को डिजिटली  सशक्त बनाने और उनकी बाजार पहुंच बढ़ाने पर होगा फोकस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_64887d9016d3f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[लीड्स कनेक्ट सर्विसेज और एन्श्योरडिट ने की जॉइंट वेंचर की घोषणा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/leads-connect-services-and-ensuredit-sign-mou-for-jv.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 01 Jun 2023 17:43:24 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/leads-connect-services-and-ensuredit-sign-mou-for-jv.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: left;">लीड्स कनेक्ट सर्विसेज और एन्श्योरडिट संयुक्त रूप से लीड्स एन्श्योरडिट प्राइवेट लिमिटेड नाम का एक स्ट्रैटेजिक जॉइंट वेंचर स्थापित करने जा रहे हैं। इसके लिए दोनों कंपनियों ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। लीड्स कनेक्ट एक प्रमुख एग्रीटेक डेटा, जोखिम प्रबंधन और वित्तीय सेवा कंपनी है वहीं एन्श्योरएडिट एक एआई-बेस्ड प्लेटफॉर्म है जो इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन साइकिल में दक्षता रखती है।</p>
<p style="text-align: left;">यह सहभागिता टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिटिक्स और इंडस्ट्री इनसाइट्स की शक्ति का उपयोग करेगी ताकि किसानोंऔर कृषि व्यवसायियों के फाइनेंशियल रिजीलिएंस को बेहतर बनाने वाले बीमा उत्पाद विकसित किए जा सकें जो ज्यादा अच्छे जोखिम प्रबंधन के साथ मदद करते हों। किसानों, कृषि व्यवसायियों और वित्तीय संस्थानों की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लीड्स कनेक्ट कृषि क्षेत्र के लिए अग्रणी इन्वेंटिव सॉल्युशंस में आगे रही है। यह पूरे देश में किसानों के लिए पूंजी और वित्तीय सेवाओं तक सहज पहुंच सुनिश्चित करते हुए, एग्रीकल्चरल फाइनेंसिंग में काम करती है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: left;">एन्श्योरडिट भारत में एक स्थापित प्लेटफॉर्म-एज-ए-सर्विस इंश्योरटेक प्रदाता है। इसने अत्याधुनिक तकनीकी समाधानों के माध्यम से बीमा उद्योग में बदलाव लाते हुए लाखों व्यक्तियों और व्यवसायों को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। यह सहयोग दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता और क्षमताओं को एक साथ लाता है। यह कृषि ज्ञान, कृषि-अनुसंधान,आपदा जोखिम प्रबंधन का एक डायनैमिक फ्यूजन क्रिएट करता है, साथ ही किसानों व कृषि व्यवसायों के लिए लघु और मध्यम अवधि के प्रोडक्ट रोडमैप उपलब्ध कराने के लिए इंश्योरेंस टेक्नोलॉजी की समझ भी विकसित करता है।जॉइंट वेंचर का प्राथमिक उद्देश्य एक फ्यूचरिस्टिक इंश्योरटेक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना है जो व्यापक बीमा समाधान उपलब्ध कराएगा और कृषि-इंश्योरटेक क्षेत्र में इनोवेशन को बढ़ावा देगा। जॉइंट वेंचर के गठन के बाद प्रारंभिक चरण में, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सेवा पेशकशों के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।</p>
<p style="text-align: left;">लीड्स कनेक्ट एग्रीटेक और एन्श्योरडिट दोनों जॉइंट वेंचर की सफलता के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसकी ग्रोथ व विकास को सुनिश्चित करने के लिए सभी संसाधन प्रदान करेंगे। इसके अलावा, लीड्स एन्श्योरडिट ने 7 से 8 लोगों की एक प्रारंभिक कोर टीम को नियुक्त करने की योजना बनाई है, जिसे व्यावसायिक विकास की जरूरतों के आधार पर विस्तारित किया जाएगा.</p>
<p style="text-align: left;">एन्श्योरडिट के सीईओ अमित बोनी का कहना है कि हम इस रोमांचक जॉइंट वेंचर में लीड्स कनेक्ट के साथ साझेदारी करके रोमांचित हैं। एक-दूसरे की ताकत की मदद से हम इस क्षेत्र को अद्वितीय मूल्य प्रदान करेंगे। लीड्स एन्श्योरएडिट के साथ, हमारा उद्देश्य किसानों को ऐसे नवीन कृषि-फिनटेक समाधान प्रदान करके सकारात्मक प्रभाव डालना है जो उनकी उत्पादकता को बढ़ाएं, जोखिमों को कम करें और पूरे इकोसिस्टम में सुधार लाएं।</p>
<p style="text-align: left;">लीड्स कनेक्ट सर्विसेज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक नवनीत रविकर ने जॉइंट वेंचर को लेकर कहा कि लीड्स एन्श्योरडिट एग्रीटेक, फिनटेक और इंश्योरटेक की शक्ति का लाभ उठाकर कृषि परिदृश्य को बदलने के लिए एक अभूतपूर्व अवसर का प्रतिनिधित्व करता है। एन्श्योरडिट के तकनीकी कौशल के साथ हमारी कृषि विशेषज्ञता को मिलाकर, हमें विश्वास है कि हम अभूतपूर्व वित्तीय समावेशन प्रदान कर सकते हैं जो हर किसी को सशक्त बनाएगा और इस क्षेत्र में योगदान देगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_64788b52743ea.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ लीड्स कनेक्ट सर्विसेज और एन्श्योरडिट ने की जॉइंट वेंचर की घोषणा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_64788b52743ea.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[धानुका एग्रीटेक का शुद्ध मुनाफा जनवरी&amp;#45;मार्च तिमाही में 20.3 फीसदी बढ़कर 65.31 करोड़ रुपये पर पहुंचा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/dhanuka-agritech-net-profit-rose-above-20-percent-in-the-january-march-quarter.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 26 May 2023 14:57:21 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/dhanuka-agritech-net-profit-rose-above-20-percent-in-the-january-march-quarter.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एग्री-इनपुट कंपनी धानुका एग्रीटेक के शुद्ध मुनाफे में वित्त वर्ष 2022-23 की चौथी तिमाही में 20.3 फीसदी की वृद्धि हुई है। जनवरी-मार्च तिमाही में कंपनी को 65.31 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। जबकि पूरे वित्त वर्ष के मुनाफे में 11.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और यह 233.51 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।</p>
<p>धानुका ग्रुप की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी का राजस्व 1700.22 करोड़ रुपये रहा है। यह वित्त वर्ष 2021-22 की तुलना में 15.1 फीसदी ज्यादा है। 2021-22 में कंपनी का राजस्व 1477.78 करोड़ रुपये रहा था। बयान में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2021-22 में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 208.78 करोड़ रुपये रहा था जो 2022-23 में बढ़कर 233.51 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।</p>
<p>धानुका एग्रीटेक ने 'बायोलॉजिक' (BiologiQ) उत्पाद श्रृंखला के लॉन्च के साथ कृषि-जैविक क्षेत्र में भी उतरने की घोषणा की। कंपनी ने बायोलॉजिक के तीन उत्पाद 'वाइटएक्स' (Whiteaxe) जैविक कीटनाशक, डाउनिल&rsquo; (Downil) जैविक फफूंदीनाशक और 'स्पोरनिल' (Sporenil) जैविक कीटनाशक लॉन्च किए गए हैं। बायोलॉजिक दीर्घकालीन समाधानों की एक ऐसी श्रृंखला है जिसे पारंपरिक विज्ञान और नवीनतम कृषि तौर-तरीकों के मिश्रण से तैयार किया गया है।</p>
<p>बायोलॉजिक फसल सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य और पेड़-पौधों के लिए पोषण उत्पादों की व्यापक श्रेणी है जिसे प्रकृति से लिया गया है। फसल और मिट्टी से जुड़े भरपूर परिणाम के लिए एकीकृत पेस्ट एवं पोषण प्रबंधन (आईपीएनएम) के तहत बायोलॉजिक उत्पादों का अकेले या परंपरागत रासायनिक उत्पादों के साथ उपयोग किया जा सकता है। बायोलॉजिक पोर्टफोलियो विभिन्न प्रकार से प्रतिरोध, अवशेष, पुनरुत्थान और मिट्टी जीर्णोद्धार प्रबंधन को संभव करता है जिससे फसल की पैदावार ज्यादा होने के साथ-साथ खेत की उत्पादकता में भी वृद्धि होती है।</p>
<p>वाइटएक्स सफेद कीड़े, दीमक और छेदकों के लिए एक जैविक समाधान है। जबकि &lsquo;डाउनिल&rsquo; कोमल फफूंदी के लिए जैविक समाधान है। &lsquo;डाउनिल&rsquo; बीजाणु अंकुरण और बीमारी फैलाने वाले प्लांट रोगजनकों (प्लांट पैथोजन्स) को रोकता है। यह एंटीबायोटिक उत्पन्न करता है जो फंगल रोगजनकों की या तो वृद्धि रोक देती है या फिर उन्हें खत्म कर देती है। इसी तरह, 'स्पोरनिल' मुर्झाने, सड़ने और कम नमी जैसी विकृतियों के लिए जैविक समाधान है। स्पोरनिल 'ट्राईकोडर्मा हर्ज़ीयानम' नामक जैविक कंट्रोल एजेंट है जिसे रोगाणुओं के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>धानुका समूह के मैनेजिंग डायरेक्टर एमके धानुका ने बायोलॉजिक के बारे में कहा, <em>"</em>हम जैविक<em>-</em>कृषि क्षेत्र में वाइटएक्स<em>, &lsquo;</em>डाउनिल<em>&rsquo; </em>और स्पोरनिल तीन जैविक उत्पादों को लॉन्च कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर यह क्षेत्र काफी तेजी से बढ़ रहा है। भारत में भी इनकी अच्छी<em>-</em>खासी मांग है। आने वाले समय में हम बायोलॉजिक श्रृंखला में और भी जैविक उत्पाद लॉन्च करेंगे।<em>"</em> धानुका एग्रीटेक के मार्केटिंग प्रमुख मनोज वार्ष्णेय ने कहा कि रासायानिक पदार्थों के भरपूर इस्तेमाल के कारण कीट-पतंगों में जो प्रतिरोधक क्षमता पैदा हो गई है उसके समाधान में यह सहायक है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_64707b2d3b32c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ धानुका एग्रीटेक का शुद्ध मुनाफा जनवरी-मार्च तिमाही में 20.3 फीसदी बढ़कर 65.31 करोड़ रुपये पर पहुंचा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_64707b2d3b32c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बेयर ने ‘इंडिया हॉर्टिकल्चर फ्यूचर फोरम 2023’ का किया आयोजन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/more-use-of-fruits-and-vegetables-will-strengthen-nutritional-security.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 28 Apr 2023 17:31:31 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/more-use-of-fruits-and-vegetables-will-strengthen-nutritional-security.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पोषण सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को फलों और सब्जियों के माध्यम से दूर किया जा सकता है। बागवानी को बढ़ावा देकर इस चुनौती से निपटा जा सकता है। फलों-सब्जियों का उत्पादन बढ़ने से न सिर्फ पोषण सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि निर्यात के भी बेहतर मौकों का फायदा उठाया जा सकेगा। भारतीय बागवानी और पोषण सुरक्षा चिंताओं के भविष्य पर विचार-विमर्श करने के लिए ग्लोबल कंपनी बेयर ने एक राष्ट्रीय संगोष्ठी&nbsp;<strong><span>"इंडिया हॉर्टिकल्चर फ्यूचर फोरम</span>&nbsp;2023"</strong>&nbsp;<span>का आयोजन किया। ग्रांट थॉर्नटन (भारत) एलएलपी इस कार्यक्रम का नॉलेज पार्टनर था।</span></p>
<p>अपनी तरह के इस अनूठे आयोजन में बेहतर आर्थिक संभावनाओं के लिए छोटे किसानों को सशक्त बनाने के नजरिए से इस क्षेत्र की चुनौतियों,&nbsp;<span>अवसरों और प्रगति पर प्रकाश डाला गया। आयोजन के दौरान दिए गए एक विशेष संदेश में केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर</span>&nbsp;<span>ने कहा</span>, &ldquo;<span>देश आज बड़े पैमाने पर खाद्य सुरक्षा के मुद्दों को लक्षित करने से लेकर पोषण सुरक्षा के मुद्दों तक पहुंच गया है। इन्हें देखते हुए</span>&nbsp;<span>बागवानी उत्पादन दोनों चुनौतियों का समाधान करने की कुंजी है।"</span></p>
<p>बेयर के अध्यक्ष (दक्षिण एशिया)&nbsp;<span>और स्मॉलहोल्डर फार्मिंग के वैश्विक प्रमुख डी नारायण ने सम्मेलन में कहा</span>, &ldquo;<span>भारत अगले तीन दशकों के भीतर बागवानी फसलों की मांग और खपत में तीन गुना वृद्धि का गवाह बनेगा।</span>&nbsp;<span>इसके अलावा वैश्विक निर्यात से जुड़े अवसर भी होंगे। इस संदर्भ में</span>&nbsp;<span>इंडिया हॉर्टिकल्चर फ्यूचर फोरम जमीनी स्तर पर पोषण सुरक्षा और राष्ट्रीय आर्थिक विकास के क्षेत्र में बागवानी सेगमेंट की क्षमता का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए एक सहयोगी माहौल बनाने का एक प्रयास है।</span>&nbsp;<span>यह लाखों छोटे किसानों की आय और आजीविका को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। नए विचारों और हस्तक्षेपों के माध्यम से बड़े पैमाने पर कुछ प्रमुख चुनौतियों को हल करने के लिए&nbsp; स्पष्ट कार्रवाई योग्य एजेंडा चलाने के लिए सरकार और संपूर्ण वैल्यू चैन के हितधारकों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया से हम अभिभूत हैं।</span>&rdquo;</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/latest-news/isma-director-general-sonjoy-mohanty-resigns.html" title="इस्मा डीजी का इस्तीफा" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः इस्मा के डायरेक्टर जनरल सॉन्जॉय मोहंती ने दिया इस्तीफा, अक्टूबर 2022 में संभाला था पद</strong></a></p>
<p>2021&nbsp;<span>में वैश्विक बागवानी बाजार का आकार</span>&nbsp;20.4&nbsp;<span>अरब अमेरिकी डॉलर था। </span>2030&nbsp;<span>तक इसके</span>&nbsp;56.5&nbsp;<span>अरब अमेरिकी डॉलर को पार करने की उम्मीद है। इंडिया हॉर्टिकल्चर फ्यूचर फोरम</span>&nbsp;2023&nbsp;<span>में विकास के अवसरों पर चर्चा करते हुए भारत केंद्रित परिप्रेक्ष्य के साथ व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए। इस कार्यक्रम में "बागवानी पर केंद्रित एगटेक क्रांति</span>," "<span>बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए फल और सब्जियां</span>," "<span>बागवानी में भारत के लिए निर्यात अवसर</span>,"&nbsp;<span>और "नीतिगत विकास और प्रमुख विनियमों में अंतर्दृष्टि" के सत्र शामिल थे।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x_644b5c09dbeb4.jpg" alt="" /></p>
<p>ग्रांट थॉर्नटन एलएलपी के पार्टनर प्रोफेसर वी. पद्मानंद ने कहा, &ldquo;<span>बागवानी वैल्यू चैन को मजबूत करने के लिए उत्पादन</span>,&nbsp;<span>कटाई के बाद और प्रसंस्करण के बुनियादी ढांचे और विपणन और रसद क्षेत्र में हस्तक्षेप शामिल होगा। टीम ग्रांट थॉर्नटन इन क्षेत्रों में सरकार</span>,&nbsp;<span>निजी हितधारकों</span>,&nbsp;<span>किसानों के साथ-साथ वैश्विक विकास भागीदारों के साथ बड़े पैमाने पर काम कर रही है। समन्वित संयुक्त कार्रवाई के माध्यम से देश भर में सर्वोत्तम प्रथाओं और मॉडलों को उन्नत करना समय की मांग है।&rdquo;</span></p>
<p><span><a href="https://www.ruralvoice.in/cooperatives/10-thousand-cereal-warehouses-to-be-built-through-cooperative-pacs-identified.html" title="कोऑपरेटिव भंडारण गृह" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः कोऑपरेटिव के जरिये बनेंगे 10 हजार भंडारण गृह, पैक्स हुए चिन्हित</strong></a><br /></span></p>
<p>भारत निर्यात,&nbsp;<span>नीति विकास और प्रमुख विनियमों को प्राथमिकता देकर खाद्य और पेय उद्योग में अवसरों की सक्रिय रूप से तलाश कर रहा है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम)</span>, 2005-06&nbsp;<span>में शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है</span>,&nbsp;<span>जिसका उद्देश्य बागवानी उत्पादन में वृद्धि करना और किसानों की आय को दोगुना करना है। क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बावजूद</span>,&nbsp;<span>इसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है</span>,&nbsp;<span>जैसे कि फसल कटाई के बाद का नुकसान</span>,&nbsp;<span>अपर्याप्त भंडारण बुनियादी ढांचा</span>,&nbsp;<span>मौसमी और बाजार में उतार-चढ़ाव आदि। </span></p>
<p>इस कार्यक्रम में वरिष्ठ नीति निर्माताओं,&nbsp;<span>नियामकों</span>,&nbsp;<span>शोधकर्ताओं</span>,&nbsp;<span>शिक्षाविदों</span>,&nbsp;<span>विशेषज्ञों</span>,&nbsp;<span>कई कॉरपोरेट्स और वित्तीय संस्थानों और आयातक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</span> विशेषज्ञों ने बागवानी उत्पादन और वैल्यू चेन प्रणाली को एकीकृत और पुनर्जीवित करने,&nbsp;<span>स्वस्थ और अधिक पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने और किसानों की आय में सुधार करने के लिए आवश्यक कदमों पर चर्चा की। इन समस्याओं के व्यवहार्य समाधान और भारतीय बागवानी की अप्रयुक्त क्षमता पर भी द्वारा चर्चा की गई।&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_644b5d36b8276.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बेयर ने ‘इंडिया हॉर्टिकल्चर फ्यूचर फोरम 2023’ का किया आयोजन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_644b5d36b8276.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बेस्ट एग्रोलाइफ ने बाजार हिस्सेदारी 20 फीसदी करने का रखा लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/best-agrolife-to-raise-market-share-by-20pc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 20 Apr 2023 15:45:46 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/best-agrolife-to-raise-market-share-by-20pc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>शेयर बाजार में लिस्टेड एग्रोकेमिकल्स कंपनी बेस्ट एग्रोलाइफ लिमिटेड (बीएएल) ने 15-20 फीसदी बाजार हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी ने मध्यम से लंबी अवधि में इस लक्ष्य को हासिल करने की घोषणा की है। कंपनी 'ब्राउन फील्ड' और 'ग्रीन फील्ड' कैपेक्स प्लान के जरिये अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को भी बढ़ा रही है।</p>
<p>इसके अलावा कंपनी फॉर्मूलेशन कारोबार और बी2सी (बिजनेस टू कंज्यूमर) सेगमेंट की हिस्सेदारी बढ़ाकर राजस्व में 25-30 फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद कर रही है। इक्विटी पर बेहतर रिटर्न की पेशकश के जरिये यह बेहतर एबिटडा की निरंतरता सुनिश्चित करेगा। कंपनी वित्त वर्ष 2023-24 में विदेशी बाजारों में अपनी पैठ बढ़ा रही है ताकि घरेलू सफलता की कहानी को चुनिंदा देशों में दोहराया जा सके। इससे स्थायी और बेहतर लाभ मार्जिन सुनिश्चित हो सकेगा।</p>
<p>एक बयान में कंपनी के एमडी विमल अलावधी ने कहा, &ldquo;बेस्ट एग्रो अपनी अग्रणी स्थिति को बनाए रखने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। निवेश योजनाओं का उद्देश्य कंपनी की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना, निर्माण प्रक्रिया में बैकवर्ड इंटीग्रेशन बनाना और ग्रॉस मार्जिन और वर्किंग कैपिटल पूंजी प्रबंधन में सुधार करना है। हमारा मानना है कि निवेश के साथ 'मेक इन इंडिया' और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) जैसी योजनाएं घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देंगी। इससे इस क्षेत्र और कंपनी की वृद्धि होगी। हम विदेशी बाजारों में भी अपनी पैठ बढ़ा रहे हैं।&rdquo;</p>
<p>बयान में कहा गया है कि निर्यात पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने, व्यापार बाधाओं को कम करने और निर्यात के माध्यम से राजस्व बढ़ाने के लिए द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर ध्यान केंद्रित करने के दीर्घकालिक लाभों के बारे में कंपनी आशावादी है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_644110b8b3498.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बेस्ट एग्रोलाइफ ने बाजार हिस्सेदारी 20 फीसदी करने का रखा लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_644110b8b3498.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आविष्कार कैपिटल ने आईएनआई फार्म्स में किया 16 करोड़ रुपये का निवेश, फलों&amp;#45;सब्जियों का निर्यात करती है आईएनआई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/aavishkaar-capital-invests-inr-16-crores-in-ini-farms.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 12 Apr 2023 15:04:37 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/aavishkaar-capital-invests-inr-16-crores-in-ini-farms.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आविष्कार समूह की कंपनी आविष्कार कैपिटल द्वारा प्रबंधित ईएसजी फर्स्ट फंड ने आईएनआई फार्म्स में 16 करोड़ रुपये का निवेश किया है। आईएनआई फार्म्स फलों एवं सब्जियों के निर्यात की अग्रणी कंपनी है। जबकि आविष्कार कैपिटल उद्यमिता (आन्त्रप्रेन्योरशिप) आधारित कारोबार को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग करती है। जर्मनी सरकार के स्वामित्व वाले विकास बैंक केएफडब्ल्यू के साथ आविष्कार कैपिटल की साझेदारी है।</p>
<p>ईएसजी फर्स्ट फंड 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर का फंड है जो एशिया और अफ्रीका में निवेश पर केंद्रित है। यह सकारात्मक सामाजिक प्रभाव के साथ बेहतर पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ESG) परिणाम और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य वित्तीय रिटर्न के लिए काम करता है। इस फंड की स्थापना यूरोपीय बाजारों को सेवा देने वाली आपूर्ति श्रृंखलाओं में सुधार के प्राथमिक उद्देश्य से की गई थी।</p>
<p>आईएनआई फार्म्स की सीईओ और सह-संस्थापक पूर्णिमा खंडेलवाल ने कहा, "भारत का कृषि क्षेत्र कई गुना वृद्धि के लिए तैयार है। हमारा मानना ​​है कि किसानों को एडवाइजरी और इनपुट से लेकर आउटपुट ऑफटेक तक की सेवाएं देने वाले बड़े प्लेटफॉर्म इस परिवर्तन को आगे बढ़ाने वाले हैं। यह निवेश हमें संपूर्ण कृषि उत्पादन व्यवसाय में विस्तार और हमारी मजबूत आपूर्ति श्रृंखला क्षमताओं का लाभ उठाने के साथ कई गुना बढ़ने का एक शानदार मौका देगा।&rdquo;</p>
<p>आईएनआई फार्म्स की स्थापना पूर्णिमा और पंकज खंडेलवाल ने 2009 में की थी। यह कंपनी फलों और सब्जियों की प्रमुख निर्यातक है जो अनुबंध खेती, एकत्रीकरण, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन सहित वैश्विक स्तर पर खाद्य खुदरा विक्रेताओं को अपनी सेवा दे रही है। आईएनआई फार्म्स एग्रोस्टार के साथ मिलकर काम कर रही है। एग्रोस्टार भारत की अग्रणी कृषि-प्रौद्योगिकी फर्म है जिसने भारत का सबसे बड़ा कृषि विज्ञान सलाहकार केंद्र बनाया है। 50 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं के साथ यह डिजिटल किसान नेटवर्क है जिसका देशभर में 2,000 से ज्यादा स्टोर का खुदरा नेटवर्क है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x_64367adf66702.jpg" alt="" /></p>
<p>आविष्कार कैपटिल के पार्टनर (क्रेडिट) अभिषेक मित्तल ने इस निवेश पर टिप्पणी करते हुए कहा, "हम आईएनआई फार्म्स में निवेश करने और विकास के अगले चरण में उनका समर्थन करने के लिए उत्साहित हैं क्योंकि यह अपनी उत्पाद पेशकश और भौगोलिक पहुंच का विस्तार करता है। आईएनआई फार्म्स ने पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ और सामाजिक रूप से समावेशी तरीके से उत्पादित निर्यात-गुणवत्ता वाले फलों और सब्जियों को वितरित करने और वैश्विक मानकों को पूरा करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जारी रख है। उपभोक्ताओं की बढ़ती मांगों को पूरा करने में यह सक्षम है। एग्रोस्टार के साथ आईएनआई किसानों को सशक्त करते हुए वैश्विक बाजारों की मांगों को पूरा करने के लिए तैयार है।&rdquo;</p>
<p>अभिषेक मित्तल ने कहा कि हम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में काम करने वाले एशिया और अफ्रीका के उच्च विकास वाले व्यवसायों के साथ साझेदारी करने के लिए तत्पर हैं। हम ऐसे व्यवसायों के वित्तीय समाधानों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो उनकी विकास आवश्यकताओं के साथ बेहतर ढंग से जुड़े हों।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_64367ae7b7e8e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आविष्कार कैपिटल ने आईएनआई फार्म्स में किया 16 करोड़ रुपये का निवेश, फलों-सब्जियों का निर्यात करती है आईएनआई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_64367ae7b7e8e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आंध्र प्रदेश के एफपीओ को भारत में पहली बार मोटे अनाजों के लिए मिला इंडजी.ए.पी सर्टिफिकेट, मिलेट निर्यात के बढ़े अवसर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/exports-of-millet-to-get-a-boost.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 11 Mar 2023 09:52:57 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/exports-of-millet-to-get-a-boost.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>हैदराबाद।</strong> आंध्र प्रदेश के अनंतपुर स्थित एक किसान उत्पादक कंपनी (एफपीओ) मोटे अनाजों (फॉक्स मिलेट) के लिए इंडजी.ए.पी (IndG.A.P) सर्टिफिकेट पाने वाली पहली कंपनी बन गई है। इस उपलब्धि ने मोटे अनाजों के निर्यात का अवसर पैदा किया है। साथ ही एफपीओ और उत्पादकों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया है कि वे ज्यादा से ज्यादा संख्या में इस सर्टिफिकेट के लिए प्रयास करें। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि वर्ष 2023 को मोटे अनाजों के अंतरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है और भारत ने इसे आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है।</p>
<p>अनंतपुर के एफपीओ श्री रापथडू मंडला रायथु उटपट्टी दारुला एमएसीएस लिमिटेड को फॉक्सटेल मिलेट के लिए इंडजी.ए.पी सर्टिफिकेट मिला है। चेन्नई की समुन्नती और हैदराबाद की ईफ्रेश एग्रीबिजनेस सॉल्यूशंस ने इसके लिए एफपीओ का सहयोग किया था। इंडजी.ए.पी जैसी प्रमाणीकरण योजनाएं भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए वैश्विक खाद्य सुरक्षा मानकों को पूरा करने में मदद करने के लिए डिजाइन की गई हैं। वैश्विक बाजारों तक पहुंचने के लिए यह आवश्यक है। इंडजी.ए.पी. सर्टिफिकेट को भारत में एक विश्वसनीय प्रमाणन कार्यक्रम के रूप में मान्यता प्राप्त है। वर्तमान में इसे ग्लोबलजी.ए.पी. (GlobalG.A.P) जैसे वैश्विक मानकों से मुकाबले के लिए बेंचमार्क के रूप में तैयार किया जा रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मान्यता और विश्वसनीयता को और बढ़ाया जा सके।</p>
<p>इंडजी.ए.पी. सर्टिफिकेट प्राप्त करके भारतीय किसान और निर्यातक अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों के मुताबिक खुद को प्रदर्शित कर सकते हैं। इससे वैश्विक बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ेगी। यह सर्टिफिकेट कृषि उपज की गुणवत्ता और सुरक्षा में सुधार के लिए समय के साथ कृषि पद्धतियों में निरंतर सुधार की एक रूपरेखा भी प्रदान करता है। इससे संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी।</p>
<p>मोटे अनाजों के दुनिया के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक होने के बावजूद भारत ने 2021-22 के दौरान 3.432 करोड़ डॉलर के मोटे अनाज उत्पादों का निर्यात किया जो अपेक्षाकृत काफी कम मात्रा है। स्वस्थ और टिकाऊ खाद्य विकल्पों की बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए आने वाले वर्षों में भारत के पास मोटे अनाजों के उत्पादों का निर्यात बढ़ाने की पूरी क्षमता है। इसे हासिल करने के लिए मोटे अनाजों के अंतरराष्ट्रीय वर्ष और मेक इन इंडिया के माध्यम से केंद्र सरकार का मकसद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोटे अनाजों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा देना है।</p>
<p>समुन्नति के संस्थापक और सीईओ एसजी अनिल कुमार कहते हैं, &ldquo;जीएपी सत्यापित जैसे एक मजबूत सर्टिफिकेशन को अपनाने से किसानों को अपनी उपज की ज्यादा कीमत पाने में आसानी होगी और भारत कृषि निर्यात में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन जाएगा। यही कारण है कि समुन्नति ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा मानकों की एक्सपर्ट संस्था ईफ्रेश के साथ मिलकर इंडजी.ए.पी मानकों के प्रचार का नेतृत्व किया है। अनंतपुर के एफपीओ की इस उपलब्धि को सभी प्रमुख फसलों और जिंसों को समाहित करते हुए देश के सभी एफपीओ तक पहुंचाने की जरूरत है। यह देखकर खुशी हो रही है कि हमारे प्रयास अब सफल हो रहे हैं। साथ ही निकट भविष्य में भारत को "दुनिया का मोटे अनाजों का कटोरा" बनाने और निर्यात एवं किसानों की आमदनी बढ़ाने &nbsp;का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।"</p>
<p>ईफ्रेश के प्रबंध निदेशक श्रीहरि कोटेला ने कहा, &ldquo;अंतरराष्ट्रीय मानक आईएसओ 17065 के मुताबकि फॉक्सटेल मिलेट उत्पादन के लिए भारत में पहले एफपीओ को इंडजी.ए.पी से प्रमाणित होते हुए देखना बहुत संतोषजनक &nbsp;है। यह सही दिशा में एक बड़ा कदम है, खासकर बाजरा किसानों के लिए निर्यात और आमदनी बढ़ाने की दिशा में। इनमें से ज्यादातर छोटे किसान हैं।&rdquo; एसजी अनिल कुमार का कहना है, &ldquo;हमारा लक्ष्य निकट भविष्य में कम से कम 100 एफपीओ को इंडजी.ए.पी के तहत प्रमाणित करवाना है। इससे प्रमाणित होकर एफपीओ सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की पैदावार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर सकते हैं। इससे उनकी मार्केटिंग क्षमता और ज्यादा कीमात पाने वाले बाजारों तक पहुंच बढ़ सकती है। समुन्नति ने एफपीओ को व्यावसायिक रूप से व्यवहारिक बनाने के लिए पूरा समर्थन देते हुए उनके साथ जुड़ना जारी रखा है।&rdquo;</p>
<p>इंडजी.ए.पी हासिल करने की प्रक्रिया में दो मुख्य गतिविधियां शामिल हैं। पहली और सबसे महत्वपूर्ण है खेत और एफपीओ के स्तर पर कार्यान्वयन (कुल गतिविधि का 95%) जिसे समुन्नति और ईफ्रेश द्वारा सुगम बनाया जाता है। इसके बाद है एक मान्यता प्राप्त प्रमाणन संस्था द्वारा मूल्यांकन (कुल गतिविधि का 5%)। इंडजी.ए.पी सर्टिनफिकेशन के लिए टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड की सहायक कंपनी टीक्यू सर्ट सर्विसेज प्रा. लिमिटेड (TQ Cert Services Pvt Ltd) द्वारा मूल्यांकन किया गया था। यह भारतीय गुणवत्ता परिषद (Quality Council of India) द्वारा मान्यता प्राप्त एक स्वतंत्र निरीक्षण संस्था है।</p>
<p>चेन्नई मुख्यालय वाले समुन्नति की देश के 22 राज्यों में फैली 100 से अधिक कृषि मूल्य श्रृंखलाओं में उपस्थिति है। इसने अब तक 1.9 अरब डॉलर से अधिक के सकल लेनदेन मूल्य को संचालित किया है। इसकी पहुंच 4,600 किसानों समूहों तक है जिनके 80 से ज्यादा सदस्य हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/03/image_750x500_640c01ef8686e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आंध्र प्रदेश के एफपीओ को भारत में पहली बार मोटे अनाजों के लिए मिला इंडजी.ए.पी सर्टिफिकेट, मिलेट निर्यात के बढ़े अवसर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/03/image_750x500_640c01ef8686e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फ्लिपकार्ट से अब बाजार पहुंच बढ़ा सकेंगे किसान व एफपीओ, ई&amp;#45;कॉमर्स कंपनी ने शुरू किया &amp;apos;समर्थ कृषि&amp;apos; कार्यक्रम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/farmers-and-fpos-will-now-be-able-to-increase-market-access-from-flipkart-e-commerce-company-launched-samarth-krishi-program.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 10 Mar 2023 11:35:38 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/farmers-and-fpos-will-now-be-able-to-increase-market-access-from-flipkart-e-commerce-company-launched-samarth-krishi-program.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसान और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट के जरिये देश भर के बाजारों तक अपनी पहुंच बढ़ा सकेंगे। वे अपनी फसल का मोलभाव करके ज्यादा से ज्यादा कीमत हासिल कर सकने में समर्थ होंगे। फ्लिपकार्ट इंडिया प्रा. लिमिटेड ने इसी मकसद से <strong>'</strong>फ्लिपकार्ट समर्थ कृषि<strong>' </strong>कार्यक्रम शुरू किया है। किसानों को सशक्त बनाने और कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए इस कार्यक्रम का मकसद बाजार पहुंच बढ़ाना और किसानों की क्षमता निर्माण करना है। इसके अलावा<strong>&nbsp;</strong>इस योजना से किसानों को निरंतर विकास करने<strong>,&nbsp;</strong>बाजार के लिए तैयार होने और प्रासंगिक साझेदारी के माध्यम से मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनने में मदद करेगा।</p>
<p>इसके तहत किसानों और एफपीओ को उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रशिक्षित कर कुशल बनाया जाएगा। फ्लिपकार्ट की ओर से जारी एक बयान में बताया गया है कि फ्लिपकार्ट इंडिया ने एफपीओ को अपने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर जोड़ने के लिए कई उद्योग और सरकारी निकायों के साथ साझेदारी की है। इनमें आंध्र प्रदेश<strong>,&nbsp;</strong>बिहार<strong>,&nbsp;</strong>गुजरात<strong>,&nbsp;</strong>हरियाणा<strong>,&nbsp;</strong>कर्नाटक<strong>,&nbsp;</strong>मध्य प्रदेश<strong>,&nbsp;</strong>महाराष्ट्र<strong>,&nbsp;</strong>तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के कृषि विभाग शामिल हैं। इन साझेदारियों के माध्यम से फ्लिपकार्ट सीधे किसानों और एफपीओ से दालें<strong>,&nbsp;</strong>बाजरा तथा साबूत मसाले खरीद रहा है। इससे कृषि अर्थव्यवस्था और पूरे देश के हजारों किसानों की आजीविका को बढ़ावा मिला है।</p>
<p>फ्लिपकार्ट समूह के चीफ कॉरपोरेट अफेयर्स ऑफिसर रजनीश कुमार<strong>&nbsp;</strong>ने कहा<strong>, &lsquo;&lsquo;</strong>फ्लिपकार्ट इंडिया का किसानों और एफपीओ के साथ गठजोड़ किसानों की आमदनी बढ़ाने के रास्ते बनाने और राष्ट्रव्यापी स्तर पर उनकी उपज को बढ़ावा देने में मदद करने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप है। टेक्&zwj;नोलॉजी<strong>,&nbsp;</strong>इनोवेशन और ई-कॉमर्स की क्षमता का उपयोग करके<strong>&nbsp;</strong>फ्लिपकार्ट समर्थ कृषि कार्यक्रम भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देगा और मूल्य श्रृंखला में किसानों से लेकर उपभोक्ताओं तक सभी को लाभान्वित करेगा। इस कार्यक्रम का मकसद भारतीय कृषि क्षेत्र और ग्रामीण समुदायों के बीच महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव पैदा करना है।<strong>&rsquo;&rsquo;</strong></p>
<p>इस कार्यक्रम के तहत चावल<strong>,&nbsp;</strong>दालें<strong>,&nbsp;</strong>साबूत मसाले<strong>,&nbsp;</strong>आटा<strong>,&nbsp;</strong>बाजरा जैसी 100 <span>से अधिक जिंसों को समाहित किया गया है ताकि घरेलू अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में मदद मिले और फ्लिपकार्ट इंडिया के 45 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं को विभिन्न गुणवत्ता वाले उत्पाद मिल सके। समर्थ कृषि कार्यक्रम का मकसद 2023 के अंत तक किसानों की आजीविका को बढ़ाकर और 2,500 एफपीओ के साथ जुड़कर कृषि क्षेत्र के डिजिटल परिवर्तन को और अधिक समावेशी बनाना है।</span></p>
<p>फ्लिपकार्ट इंडिया पहले ही देश भर में कई एफपीओ जैसे एबीवाई फार्मर्स<strong>,&nbsp;</strong>श्री सत्य साई मैक फेड<strong>,&nbsp;</strong>जन जीवन<strong>,&nbsp;</strong>निराला हर्बल<strong>,&nbsp;</strong>सह्याद्री फार्म्स सप्लाई चेन और अन्य से जुड़ चुका है। फ्लिपकार्ट ने अभी तक 10<span> हजार से अधिक किसानों को उत्पाद की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रशिक्षित किया है और उन्हें अपनी बाजार पहुंच का विस्तार करने में सक्षम बनाया है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/03/image_750x500_640ac88654493.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ फ्लिपकार्ट से अब बाजार पहुंच बढ़ा सकेंगे किसान व एफपीओ, ई-कॉमर्स कंपनी ने शुरू किया 'समर्थ कृषि' कार्यक्रम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/03/image_750x500_640ac88654493.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[टैफे ने शुरू किया &amp;apos;मैसी डायनास्टार कॉन्टेस्ट&amp;apos;, नवाचारों और ग्रामीण उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/tafe-launches-massey-dynastar-contest-innovations-in-agriculture-and-rural-entrepreneurship-will-get-a-boost.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 17 Feb 2023 15:20:04 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/tafe-launches-massey-dynastar-contest-innovations-in-agriculture-and-rural-entrepreneurship-will-get-a-boost.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मैसी फर्ग्यूसन ट्रैक्टर की निर्माता कंपनी टैफे ट्रैक्टर्स एंड फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड ने 'मैसी डायनास्टार कॉन्टेस्ट 2023- सबसे बड़े ऑलराउंडर की तलाश&rsquo; के पहले सीजन की शुरुआत की है। मौलिक और रचनात्मक आइडिया वाले किसानों, उद्यमियों, स्टार्टअप्स, व्यक्ति विशेष या संस्था के लिए यह भारत की अपनी तरह की पहली ऑनलाइन खोज है जो मैसी फर्ग्यूसन डायनाट्रैक ट्रैक्टर का इस्तेमाल कर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।</p>
<p>कंपनी की ओर से जारी एक बयान में बताया गया है कि प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार विजेता को 7.5 लाख रुपये की कीमत का मैसी फर्ग्यूसन 241 डायनाट्रैक ट्रैक्टर दिया जाएगा। जबकि पहले दो उपविजेताओं में से प्रत्येक को 8 ग्राम सोने का सिक्का और शीर्ष 20 चयनित प्रतिभागियों में से प्रत्येक को 5,000 रुपये मूल्य के गिफ्ट हैंपर्स दिए जाएंगे। यही नहीं, पहले 100 वैध भागीदारों में से प्रत्येक को 500 रुपये मूल्य के गिफ्ट वाउचर्स और प्रतियोगिता के बारे में सर्वश्रेष्ठ तीन सोशल मीडिया पोस्ट्स को 2,000 रुपये के गिफ्ट वाउचर्स भी दिए जाएंगे। इस प्रतियोगिता में 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी भारतीय नागरिक बिना किसी एंट्री फीस के हिस्सा ले सकते हैं। प्रतिभागी MasseyFergusonIndia.com/DYNASTAR पर जाकर अपनी कॉन्टेस्ट एंट्री अपलोड कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन 27 फरवरी, 2023 तक खुले हैं।</p>
<p>प्रतिभागी भारत की किसी भी क्षेत्रीय भाषा या अंग्रेजी में वीडियो (अधिकतम 10 मिनट) या फिर अपने मूल विवरण के साथ लिखित रूप में इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कि 'डायनाट्रैक ट्रैक्टर के साथ आप क्या अलग और अनोखा कर सकते हैं?&rsquo; अपना मौलिक और अनोखा आइडिया सबमिट कर सकते हैं। यह जरूरी है कि प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत आइडिया अमल में लाने वाला और उपयोगी होना चाहिए। शॉर्टलिस्ट किए गए प्रतिभागियों को विशिष्ट कॉन्टेस्ट जूरी के सामने एक विस्तृत प्लान पेश करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा जिसमें उन्हें यह बताना होगा कि वे अपने आइडिया और उसमें बताए गए उद्देश्यों को कैसे अमल में लाएंगे।</p>
<p><strong>प्रतियोगिता में इस तरह भाग ले सकते हैं प्रतिभागी:</strong></p>
<ol>
<li>MasseyFergusonIndia.com/DYNASTAR वेबसाइट पर खुद को रजिस्टर करें</li>
<li>MF डायनाट्रैक ट्रैक्टर के बारे में 4 सरल प्रश्नों के उत्तर दें</li>
<li>वीडियो या लिखित रूप में अपनी कॉन्टेस्ट एंट्री के साथ अपना मूल विवरण सबमिट करें</li>
</ol>
<p>प्रतिभागी को अपने आइडिया में इस बात पर प्रकाश डालना होगा कि डायनाट्रैक ट्रैक्टर की अनूठी विशेषताएं और फीचर किस तरह से आपको अपने बिजनेस आइडिया को लेकर निम्न चीजों में मदद कर सकते हैं:</p>
<ol>
<li>खेती के लिए अनोखे समाधान तैयार करने में</li>
<li>नई कृषि तकनीकों को विकसित करने में</li>
<li>नए उपकरणों और अनुप्रयोगों के उपयोग में</li>
<li>नए व्यावसायिक अनुप्रयोगों या कृषि के लिए डायनाट्रैक का उपयोग करने में</li>
<li>अतिरिक्त आय कमाने में</li>
<li>एक नया स्थायी व्यवसाय स्थापित करने में</li>
<li>मौजूदा व्यवसाय या कृषि संबंधी कार्यों को बेहतर बनाने में</li>
<li>समाज या पर्यावरण में सकारात्मक परिवर्तन लाने में</li>
</ol>
<p>फाइनलिस्ट्स और विजेताओं की घोषणा मैसी फर्ग्यूसन इंडिया व टैफे की आधिकारिक वेबसाइट्स और आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर की जाएगी। जूरी द्वारा शीर्ष 20 प्रतियोगियों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा जिनमें से शीर्ष 10 प्रतियोगी फाइनलिस्ट होंगे। शीर्ष 10 प्रतियोगी टैफे के वरिष्ठ नेतृत्व के सामने अपने विचार पेश करेंगे जो विजेता का चयन करेंगे। मैसी डायनास्टार कॉन्टेस्ट का उद्देश्य भारतीय कृषि और ग्रामीण उद्यमी समुदाय के बीच रचनात्मकता और नवाचार की भावना को पहचान देना है ताकि उन्हें अपने सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने का अवसर और मंच प्रदान किया जा सके।</p>
<p>वर्तमान में मैसी फर्ग्यूसन 20 लाख से अधिक ग्राहकों के मजबूत आधार के साथ भारत का सबसे पसंदीदा ट्रैक्टर ब्रांड है। टैफे का डायनाट्रैक 42-50 हॉर्स पावर की श्रेणी में विश्व के पहले एक्सटेंडेबल व्हीलबेस के साथ कृषि, ढुलाई और कमर्शियल प्रयोगों के लिए सर्वोत्तम तकनीक प्रदान करता है जो इसे सबसे बड़ा ऑलराउंडर बनाता है। 1.8 लाख से अधिक ट्रैक्टरों की सालाना बिक्री के साथ टैफे दुनिया की तीसरी और भारत की दूसरी सबसे बड़ी ट्रैक्टर निर्माता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63ef457e43e70.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ टैफे ने शुरू किया 'मैसी डायनास्टार कॉन्टेस्ट', नवाचारों और ग्रामीण उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63ef457e43e70.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनबीएचसी ने तीन राज्यों में शुरू की खरीद केंद्र, किसानों से धान एवं मक्के की होगी सीधी खरीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/nbhc-started-direct-procurement-centers-in-three-states-for-purchase-of-paddy-and-maize.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 15 Feb 2023 11:26:15 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/nbhc-started-direct-procurement-centers-in-three-states-for-purchase-of-paddy-and-maize.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एग्रीटेक कंपनी नेशनल बल्क हैंडलिंग कॉरपोरेशन (एनबीएचसी) ने फसलों के तीन खरीद केंद्र शुरू करने की घोषणा की है। इनमें धान के लिए बूंदी (राजस्थान) व सासाराम (बिहार) और मक्का के लिए छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) केंद्र शामिल हैं। किसानों को निर्यातकों एवं प्रोसेसर्स जैसे अंतिम उपभोक्ताओं से सीधे जोड़ने के लिए एनबीएचसी ने पिछले खरीफ सीजन में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रत्यक्ष खरीद केंद्रों (डीपीसी) के जरिये किसानों से फसलों की सीधी खरीद शुरू की थी। पायलट प्रोजेक्ट के तहत 700 से ज्यादा किसानों को जोड़ा गया था और उनसे सफलतापूर्वक खरीद की गई थी। एनबीएचसी फसल कटाई के बाद के एग्री ईकोसिस्टम में उच्च स्तर की एकीकृत सेवाएं प्रदान करती है।</p>
<p>कंपनी की ओर से मंगलवार को जारी एक बयान में बताया गया है कि छिंदवाड़ा में किसानों से सीधे मक्का खरीदने के लिए एनबीएचसी ने महिंद्रा समूह की कृष-ए से साझेदारी की है। एनबीएचसी ने धान (बासमती, सोनम और कतरनी) और मक्का की 38,000 हजार क्विंटल से अधिक की खरीद की है जिसकी कुल कीमत 10.3 करोड़ रुपये है। 2021 में कंपनी ने 'कृषि सेतु' के माध्यम से अपनी सेवाओं का विस्तार किया था। फसल कटाई के बाद की एग्री वैल्यू चेन इकोसिस्टम में एंड-टू-एंड डिजिटल सेवाएं प्रदान करने के लिए कृषि सेतु एक ई-मार्केट प्लेटफॉर्म है। कृषि सेतु देश भर में एग्री कमोडिटी विक्रेताओं, खरीदारों और कर्जदाताओं के सबसे बड़े नेटवर्क तक पहुंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। वित्त वर्ष 2022-23 में एनबीएचसी ने 10 लाख क्विंटल का लेनदेन किया है जिसका मूल्य 265 करोड़ रुपये है।</p>
<p>एनबीएचसी के एग्री कॉमर्ज के सीनियर वॉइस प्रेसीडेंट और बिजनेस हेड दीपक कुमार सिंह ने इस उपलब्धि पर कहा, ''कृषि नीतियों में बदलाव से किसानों की सेवा करने के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में हमारे नव निर्मित डीपीसी में तौल, गुणवत्ता परख, सक्षम बाजार लिंकेज और वित्तपोषण विकल्पों में पारदर्शिता बनाए रखकर एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में किसानों की आमदनी बढ़ाने का हमारा प्रयास है। हमने डीपीसी तक फसल लाने के लिए &nbsp;स्थानीय सहायता प्रणाली "किसान साथी" की भी पेशकश की है। इसके तहत किसानों को लॉजिस्टिक मदद मुहैया कराई जाएगी तक वे अपनी उपज लेकर डीपीसी में आ सकें। इसके जरिये ग्रामीण स्तर के उद्यमियों को भी बढ़ावा मिलेगा। फिलहाल 50 से ज्यादा किसान साथी इन डीपीसी से जुड़े हैं। हम इस ग्रामीण उद्यमिता इकोसिस्टम को और बढ़ाना चाहते हैं। हमें इस बात की खुशी है कि हमारे डीपीसी को किसानों का बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। हमारी योजना वित्त वर्ष 2023-24 में खरीद केंद्रों की संख्या को बढ़ाकर 100 करने की है।&rdquo; एनबीएचसी एग्री कमोडिटीज के लिए तकनीक सक्षम खरीद, भंडारण, कमोडिटी देखभाल, कोलेटरल मैनेजमेंट और सप्लाई चेन समाधान जैसी एकीकृत सेवाएं प्रदान करती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63eb830c46f42.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनबीएचसी ने तीन राज्यों में शुरू की खरीद केंद्र, किसानों से धान एवं मक्के की होगी सीधी खरीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63eb830c46f42.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[धानुका एग्रीटेक का तीसरी तिमाही में शुद्ध लाभ 8.3% बढ़ा, आय में भी 10.2% का इजाफा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/net-profit-of-dhanuka-agritech-increased-in-the-third-quarter-income-also-increased.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 11 Feb 2023 11:18:30 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/net-profit-of-dhanuka-agritech-increased-in-the-third-quarter-income-also-increased.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एग्री इनपुट कंपनी धानुका एग्रीटेक के शुद्ध मुनाफे में चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 8.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के वित्तीय नतीजों की घोषणा करते हुए कंपनी की ओर से यह जानकारी दी गई है। गुरुग्राम स्थित मुख्यालय वाली कंपनी ने इस तिमाही में 46.07 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है। जबकि आमदनी 10.2 फीसदी बढ़कर 393.37 करोड़ रुपये हो गई है।</p>
<p>वित्तीय नतीजों के मुताबिक, अक्टूबर-दिसंबर 2021 में धानुका का शुद्ध मुनाफा 42.52 करोड़ रुपये रहा था। वहीं आमदनी 356.86 करोड़ रुपये रही थी। धानुका एग्रीटेक के प्रबंध निदेशक एमके धानुका ने वित्तीय नतीजों पर टिप्पणी करते हुए कहा, &ldquo;इंडस्ट्री की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद धानुका की टॉपलाइन में तर्कसंगत वृद्धि हुई है। जलवायु परिस्थितियां कीटनाशकों के इस्तेमाल के लिए अनुकूल नहीं थीं। अक्टूबर में ज्यादा बारिश के कारण कटाई में देरी के साथ-साथ रबी फसल की बुवाई में भी देरी हुई। कीट का प्रकोप बहुत कम था जिससे कीटनाशक की खपत प्रभावित हुई है। समग्र तौर पर कीमतों में गिरावट आ रही थी और कंपनी के पास ज्यादा लागत वाली इन्वेंटरी थी। हम इस ऊंची लागत को ग्राहकों पर डालने में सक्षम नहीं थे। इसलिए कंपनी ने खुद इसे वहन किया जिसकी वजह से नुकसान उठाना पड़ा।&rdquo;</p>
<p>उन्होंने कहा, &ldquo;भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है क्योंकि रबी फसल में तीन फीसदी की अतिरिक्त बुवाई की गई है। रबी फसल की स्थिति अच्छी है और कमोडिटी की कीमतें भी बढ़ रही हैं। ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है कि किसानों को फसलों से बहुत अच्छी आमदनी होगी। इसलिए वे अपनी फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए अधिक खर्च करने को तैयार होंगे जो कृषि रसायन उद्योग के लिए बेहतर रहेगा।&rdquo; अगली तिमाही और वित्त वर्ष 2023-24 के लिए धानुका एग्रीटेक के पास उत्पादों की मजबूत पाइपलाइन है। नए उत्पादों पर टिप्पणी करते हुए एमके धानुका ने कहा, &ldquo;हमें आशा है कि दो नए 9(3) उत्पादों के लिए हमें सीआईबी पंजीकरण मिल जाएगा। वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में पंजीकरण मिलते ही उन्हें भारत में पहली बार लॉन्च किया जाएगा। किसानों के लिए इसे हम दूसरी तिमाही तक लॉन्च करने में सक्षम होंगे। हमें उम्मीद है कि नए उत्पाद कंपनी की टॉपलाइन में वृद्धि लाएंगे।&rdquo;</p>
<p>अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कंपनी ने हरियाणा के पलवल में रिसर्च एवं टेक्नोलॉजी सेंटर की शुरुआत की है। यह केंद्र सभी प्रयोगशाला सुविधाओं और 100 किसानों की क्षमता वाले एक प्रशिक्षण हॉल से सुसज्जित है। कंपनी कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक, एआई एवं रोबोटिक्स और अन्य नई कृषि तकनीकों को पेश करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। वर्तमान में कंपनी के तीन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स गुजरात, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में स्थित हैं। कंपनी के देश भर में 41 वेयरहाउस हैं और 6,500 डिस्ट्रीब्यूटर एवं 80 हजार डीलरों का विस्तृत नेटवर्क है। धानुका ने अमेरिका, जापान और यूरोप सहित दुनिया की अग्रणी एग्रो-केमिकल कंपनियों के साथ साझेदारियां की हैं जिसके माध्यम से वह भारतीय किसानों को आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63e66c9fc4c2f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ धानुका एग्रीटेक का तीसरी तिमाही में शुद्ध लाभ 8.3% बढ़ा, आय में भी 10.2% का इजाफा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63e66c9fc4c2f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्रीजंक्शन ने बदला अपना ब्रांड नाम, ग्रामिक बनी नई पहचान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/agrijunction-changes-its-brand-name-gramik-becomes-new-brand-identity.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 09 Feb 2023 13:58:05 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/agrijunction-changes-its-brand-name-gramik-becomes-new-brand-identity.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के पहले सहकर्मी कृषि व्यापार प्लेटफॉर्म एग्रीजंक्शन ने ब्रांड ग्रामिक के रूप में अपनी नई पहचान की घोषणा की है यानी एग्रीजंक्शन का नाम अब ग्रामिक हो गया है। एग्रीजंक्शन किसानों को उच्च गुणवत्ता के कृषि संसाधन, फसलों के बारे में मार्गदर्शन, व्यक्तिगत सलाह और बाजार में संपर्क सहित अन्य सेवाएं मुहैया कराता है। ग्रामिक के नए लोगो (logo) में इस ब्रांड का लक्ष्य दिखता है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का डिजिटलीकरण करना है। इसमें एग्रीजंक्शन की पहचान का थम्बप्रिंट बरकरार रखा गया है ताकि मौजूदा यूजरों से संबंध और ब्रांड लॉयल्टी बनी रहे। एग्रीजंक्शन मिट्टी, खेती और पर्यावरण को आपस में जोड़ते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाने में सफल रहा है।</p>
<p>एग्रीजंक्शन को नयापन और नई पहचान देने का मकसद ब्रांड के बेहतर भविष्य के लिए नया और सरल दृष्टिकोण अपनाना है। ग्रामिक के सीईओ और संस्थापक राज यादव ने कहा, &lsquo;&lsquo;हमारे व्यवसाय की शुरुआत से अब तक इसमें काफी बदलाव आए हैं। इसलिए हमें लगा कि हमारे ब्रांड के चरित्र और इसके प्रति लोगों की धारणा भी बेहतर होनी चाहिए। हमारे ब्रांड का मुख्य लक्ष्य किसानों, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं को उच्च गुणवत्ता के कृषि संसाधन, विशेषज्ञतापूर्ण ज्ञान, तकनीकी प्रगति और आजीविका और व्यावसाय कौशल सुलभ कराते हुए पूरे ग्रामीण समुदाय को सशक्त बनाना और नए दौर की शुरुआत करना है। हमें विश्वास है कि यह नया नाम हर भारतीय किसान और संबंधित समुदायों की प्रगति के प्रति हमारे जुनून और प्रतिबद्धता को दर्शाएगा।&rsquo;&rsquo;</p>
<p>&nbsp;ग्रामिक के सह-संस्थापक और सीओओ गौरव कुमार ने कहा, &lsquo;&lsquo;हमारे ब्रांड वैल्यू में खेती के लिए मिट्टी, फसल और मौसम के महत्व की समझ है। इसलिए हमसे जुड़े किसान सोच-समझ कर निर्णय लेते हैं और इनसे जुड़े जोखिमों से बच सकते हैं।&rsquo;&rsquo;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63e4a865b81e3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्रीजंक्शन ने बदला अपना ब्रांड नाम, ग्रामिक बनी नई पहचान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63e4a865b81e3.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[समुन्नति बना ग्लोबल् जीएपी का सदस्य, फसलों के वैश्विक मानक को अपनाने में मिलेगी मदद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/samunnati-becomes-a-member-of-global-g-a-p-to-promote-sustainable-farming-at-scale-in-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 06 Feb 2023 19:05:29 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/samunnati-becomes-a-member-of-global-g-a-p-to-promote-sustainable-farming-at-scale-in-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के प्रमुख कृषि उद्यमों में से एक समुन्नति एग्रो सॉल्यूशंस प्रा. लिमिटेड जर्मनी स्थित ग्लोबल्ग एपी (GLOBALG.A.P) का सदस्य बना है। अनाजों, दालों और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों के लिए विकासशील मानकों में सहयोग करने के लिए यह समझौता हुआ है। ग्लोबल्ग एपी खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता आधारित कृषि उत्पादों के लिए वैश्विक मानकों को स्थापित करने वाली अग्रणी संस्था है। ग्लोबल्ग ए.पी. प्रोटोकॉल का इस्तेमाल कृषि उत्पादों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को सक्षम बनाने के लिए बेंचमार्क के रूप में किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार करने वाली कई बड़ी कंपनियां इसका इस्तेमाल करती हैं। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>समुन्नति के संस्थापक और सीईओ अनिल कुमार एसजी ने कहा<em>, &ldquo;</em>इस समझौते को हम स्थायी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख फसलों पर ध्यान केंद्रित करने वाले महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखते हैं। आपसी तालमेल का लाभ उठाकर घरेलू उपभोक्ताओं और निर्यात बाजारों दोनों के लिए सुरक्षित<em>, </em>पौष्टिक और अच्छी गुणवत्ता वाले भोजन का पर्याप्त उत्पादन सुनिश्चित करने के हम इच्छुक हैं। ग्लोबल्ग एपी प्रोटोकॉल अपनाने से हमारा घरेलू उत्पादन वैश्विक मानकों का पालन कर सकता है। इससे नए वैश्विक बाजारों तक भारत की पहुंच बढ़ेगी। ये प्रोटोकॉल उत्पादकता बढ़ाने और सस्टेनेबिलिटी में इफिसिएंसी की मदद से संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद करते हैं। इसके जरिये एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) निश्चित रूप से अपने सदस्यों को मानकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। यह किसान समूहों को निर्यात सहित लाभकारी बाजारों का पता लगाने में मदद करेगा। समुन्नति छोटे किसानों को केंद्र में रखते हुए इन सभी अवसरों का पता लगाएगी।&rdquo;</p>
<p>समुन्नति की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि एसोसिएट कम्युनिटी मेंबर के रूप में ग्लोबल्ग एपी नेटवर्क में शामिल होकर समुन्नति अनाजों, दालों और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों के लिए मानकों के विकास का समर्थन करने को इच्छुक है। खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक मानकों का पालन करने के एक विश्वसनीय उत्पादक के रूप में अंतर्राष्ट्रीय कृषि व्यापार में अपने कद को और बढ़ाने के लिए ये फसलें भारत के लिए सामरिक महत्व की हैं। बयान के मुताबकि, ग्लोबल्ग एपी विकासशील मानकों में अपनी वैश्विक विशेषज्ञता का इस्तेमाल भारत में करेगा जो किसानों, खासकर छोटे किसानों के लिए स्थानीय रूप से अनुकूल हैं।</p>
<p>भारत का सबसे बड़ा कृषि उद्यम समुन्नति एक खुला कृषि नेटवर्क है। इसके केंद्र में छोटे किसानों के साथ अरबों डॉलर की भारतीय कृषि क्षमता का विकास करना है। यह एग्री वैल्यू चेन कंपनियों, संबद्ध किसान समूहों और बड़े इकोसिस्टम को एक साथ लाकर विविध प्रौद्योगिकियों और साझेदारी के माध्यम से उन्हें अधिक कुशल और उत्पादक बनाने का काम करती है। चेन्नई मुख्यालय वाली समुन्नति की मौजूदगी 22 राज्यों में फैली 100 से अधिक एग्री वैल्यू चेन में है। साथ ही देश के 80 लाख से अधिक किसानों के सदस्य आधार के साथ 4600 से ज्यादा किसान समूहों तक इसकी पहुंच है। कंपनी ने अब तक 1.8 अरब डॉलर से अधिक के ग्रॉस ट्रांजेक्श्न वैल्यू संचालित किया है। कंपनी की योजना 2027 तक अपने नेटवर्क के माध्यम से प्रत्येक चार कृषक परिवारों में से एक को अपने साथ जोड़ने की है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63e0e9408d3d1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ समुन्नति बना ग्लोबल् जीएपी का सदस्य, फसलों के वैश्विक मानक को अपनाने में मिलेगी मदद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63e0e9408d3d1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बजट 2023&amp;#45;24: एफपीओ के लिए टैक्स छूट की अवधि बढ़े, मैट का प्रावधान खत्म किया जाए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/tax-rebate-period-for-fpos-should-be-extended-and-mat-abolished-in-the-budget.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 20 Jan 2023 11:49:57 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/tax-rebate-period-for-fpos-should-be-extended-and-mat-abolished-in-the-budget.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">वित्त वर्ष 2019-20 के बजट में घोषणा की गई थी कि अगले पांच वर्षों में 10 हजार नए फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (एफपीओ) खोले जाएंगे। उससे एक साल पहले 2018-19 के बजट में एफपीओ के लिए 5 साल तक टैक्स में छूट का प्रावधान किया गया था, जिसकी अवधि 2023-24 में खत्म हो जाएगी। नए एफपीओ को भी टैक्स छूट का फायदा मिलता रहे, इसलिए टैक्स छूट की अवधि बढ़ाई जानी चाहिए। यह कहना है मध्य भारत कंसोर्टियम ऑफ एफपीओ के सीईओ योगेश द्विवेदी का।</span></p>
<p><strong>मैट का प्रावधान खत्म होना चाहिए</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उन्होंने कहा कि सालाना 100 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाले एफपीओ के लिए टैक्स में छूट का प्रावधान के बावजूद उन्हें 18% न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) देना पड़ता है। इसे खत्म किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे छोटे किसानों के इन संगठनों को काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इसे पूरी तरह खत्म नहीं करना चाहती तो वह एफपीओ के टर्नओवर की सीमा तय कर सकती है। उस सीमा से कम टर्नओवर वाले एफपीओ को मैट से छूट होनी चाहिए।</span></p>
<p><strong>रजिस्ट्रेशन से पहले छानबीन होनी चाहिए</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">द्विवेदी के अनुसार एफपीओ का रजिस्ट्रेशन करने से पहले उनकी अच्छी तरह जांच की जानी चाहिए। एफपीओ बनाने का उद्देश्य छोटे किसानों की मदद करना था। कॉन्सेप्ट यह था कि जो छोटे किसान अपनी जरूरत से ज्यादा पैदावार करते हैं, उन्हें अपनी उपज बाजार में बेचने में आसानी हो। लेकिन वास्तव में एक ही व्यापारी परिवार के कई लोग मिलकर एफपीओ बना ले रहे हैं। अभी हर ब्लॉक में एक एफपीओ का नियम है। कुछ जगहों पर कॉरपोरेट को भी एफपीओ बनाने की जिम्मेदारी दे दी गई है। इस पर अंकुश लगना चाहिए।&nbsp;</span></p>
<p><strong>बैंक मांगते हैं दो साल की बैलेंस शीट</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">द्विवेदी के अनुसार सरकार ने यह प्रावधान तो कर दिया कि एफपीओ के कर्ज की गारंटी सरकार की होगी, लेकिन बैंक उससे संतुष्ट नहीं होते। बैंक एफपीओ से कम से कम दो साल की बैलेंस शीट मांगते हैं। इस तरह के प्रावधान के चलते नए एफपीओ को तो कर्ज मिल ही नहीं पाता है। द्विवेदी का कहना है कि एफपीओ को कर्ज के लिहाज से प्राथमिकता क्षेत्र में रखा जाना चाहिए।</span></p>
<p><strong>एफपीओ को मंडी टैक्स में छूट मिले</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उन्होंने एफपीओ को मंडी टैक्स में छूट देने की मांग भी की। उन्होंने कहा, भले ही पूरा टैक्स माफ ना किया जाए, सरकार कुछ रियायत तो दे ही सकती है। तभी छोटे किसानों के संगठन बड़े व्यापारियों के सामने प्रतिस्पर्धा में टिक पाएंगे। उन्होंने कहा कि कृषि में प्राकृतिक जोखिम ज्यादा होता है। इसलिए उन्हें इंडस्ट्री की तुलना में ज्यादा सहूलियत की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो कृषि में कोई निवेश करने के लिए तैयार नहीं होगा।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/06/image_750x500_62a19c28b768c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बजट 2023-24: एफपीओ के लिए टैक्स छूट की अवधि बढ़े, मैट का प्रावधान खत्म किया जाए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/06/image_750x500_62a19c28b768c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मिजोरम से हाटकोरा नींबू का इंग्लैंड और बांग्लादेश को शुरू हुआ निर्यात]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mizoram-exports-hatkora-citrus-to-bangladesh-and-uk.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 04 Dec 2022 09:31:14 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mizoram-exports-hatkora-citrus-to-bangladesh-and-uk.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">त्रिपुरा से कटहल और नगालैंड से किंग चिली लंदन निर्यात करने के बाद अब मिजोरम से हाटकोरा नाम का नींबू इंग्लैंड और बांग्लादेश निर्यात किया गया है। मिजोरम के मामित जिले में नींबू की यह वैरायटी पाई जाती है। इसके निर्यात में एपीडा की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। एपीडा की पहल से ही उत्तर पूर्व के त्रिपुरा, सिक्किम, असम, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय से कृषि उपज के निर्यात में काफी बढ़ोतरी हुई है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">बीते पांच वर्षों में यहां से कृषि उत्पादों का निर्यात 6.8 गुना बढ़ा है। 2016-17 में यहां से 25.2 लाख डॉलर के कृषि उत्पादों का निर्यात किया गया था जो 2021-22 में 1.72 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। इन राज्यों से सबसे ज्यादा निर्यात बांग्लादेश, भूटान, मध्य पूर्व, इंग्लैंड और यूरोप के देशों को किया जा रहा है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उत्तर पूर्वी राज्यों से ऑर्गेनिक कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की नीति के तहत केंद्र सरकार ने एपीडा के माध्यम से एजवाल स्थित मिजोरम यूनिवर्सिटी में वर्कशॉप एवं बायर सेलर मीट का आयोजन किया था। एपीडा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने वाली शीर्ष संस्था है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">बायर सेलर मीट का मकसद मिजोरम से कृषि और बागवानी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के अलावा किसानों, किसानों उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और किसान उत्पादक कंपनियों को मार्केट लिंकेज उपलब्ध कराना भी था। मिजोरम से निर्यात की जा सकने वाली संभावित कृषि उपज में अनानास, हाटकोरा, ड्रैगन फ्रूट, संतरे, स्क्वैश, एंथुरियम फ्लावर, अदरक, मिर्च और अंगूर से बनी वाइन शामिल हैं। बायर सेलर मीट में 17 निर्यातकों और 58 एफपीओ ने हिस्सा लिया। इनके अलावा राज्य सरकार, कॉफी बोर्ड, मसाला बोर्ड, नाबार्ड, उत्तर पूर्व क्षेत्र कृषि मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के 14 एक्जीबिटर ने भी वहां प्रदर्शन किया।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">संभावित मार्केट लिंकेज उपलब्ध कराने के लिए एपीडा ने आयातकों के लिए फील्ड विजिट की भी व्यवस्था की ताकि उन्हें खेती के तौर-तरीकों की भी जानकारी मिल सके। इसके लिए मध्य पूर्व, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के आयातकों को आमंत्रित किया गया था। फील्ड विजिट उत्तर पूर्व के सभी आठ राज्यों में किया गया। इससे पहले एपीडा ने मार्च 2021 में असम सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के साथ मिलकर निर्यात संवर्धन एवं बायर सेलर मीट का आयोजन एजवाल में किया था।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मार्च 2000 में गुवाहाटी में भी एपीडा ने एक अंतरराष्ट्रीय बायर सेलर मीट का आयोजन किया जिसमें राज्यभर से आए लोगों ने कृषि और बागवानी उत्पादों का प्रदर्शन किया। इनमें ताजे फल, सब्जियां, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद, काला चावल, लाल चावल, जोहा राइस, मसाले, चाय, कॉफी, शहद, प्रसंस्कृत मीट और अन्य ऑर्गेनिक उत्पाद शामिल थे। श्रीलंका, दुबई, बांग्लादेश, ओमान, नीदरलैंड, सिंगापुर और ग्रीस के आयातकों ने उस बायर सेलर मीट में हिस्सा लिया था।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/12/image_750x500_638b7f8287afd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मिजोरम से हाटकोरा नींबू का इंग्लैंड और बांग्लादेश को शुरू हुआ निर्यात ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/12/image_750x500_638b7f8287afd.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रेशम उत्पादन के लिए एसकेयूएएसटी और सेरीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट के बीच समझौता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mou-between-central-sericultural-research-and-training-institute-and-skuast-jammu.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 21 Nov 2022 11:35:08 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mou-between-central-sericultural-research-and-training-institute-and-skuast-jammu.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;"><strong>एसकेयूएएसटी चट्टा कैंपस, जम्मू</strong></span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">जम्मू-कश्मीर में रेशम कीट पालन को बढ़ावा देने के लिए शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (एसकेयूएएसटी) और सेंट्रल सेरीकल्चर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के बीच समझौता (एमओयू) हुआ है। पंपोर स्थित यह इंस्टीट्यूट केंद्रीय टेक्सटाइल मंत्रालय के सेंट्रल सिल्क बोर्ड के अधीन आता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एमओयू पर SKUAST के वाइस चांसलर प्रो. जे.पी. शर्मा और सेरीकल्चर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर-इन-चार्ज डॉ. सरदार सिंह ने दस्तखत किए। इस मौके पर एसकेयूएएसटी के रिसर्च डायरेक्टर डॉ. प्रदीप वाली, एसोसिएट रिसर्च डायरेक्टर डॉ. महितल जामवाल, क्षेत्रीय सेरीकल्चर रिसर्च स्टेशन के वैज्ञानिक डॉ. संतोष कुमार मगदम और डॉ. विनोद सिंह भी मौजूद थे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">डॉ. सरदार सिंह ने जम्मू-कश्मीर में रेशम कीट पालन के इतिहास की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह भारत में पारंपरिक रूप से रेशम कीट पालन करने वाले राज्यों में है। यह राज्य अच्छी क्वालिटी के &lsquo;बाइवोल्टिन सिल्क&rsquo; उत्पादन के लिए जाना जाता है, जिसकी देश में कमी है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिल्क उत्पादक है। लेकिन यहां मलबेरी सिल्क का ज्यादातर उत्पादन बाइवोल्टिन ब्रीड के बजाय क्रॉस ब्रीड से किया जाता है। बाइवोल्टिन सिल्क के क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने की काफी गुंजाइश है, खासकर जम्मू क्षेत्र में।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उन्होंने बताया कि आज राज्य में करीब 27,000 परिवार रेशम कीट पालन से जुड़े हैं। इनमें से 19,000 जम्मू क्षेत्र में हैं। जम्मू-कश्मीर में हर साल लगभग सात लाख किलो सिल्क ककून का उत्पादन होता है, जबकि क्षमता 35 लाख किलो की है। उन्होंने बताया कि अन्य किसी भी नकदी फसल की तुलना में रेशम उत्पादन में कम समय लगता है। अच्छी क्वालिटी के सूखे ककून की कीमत 2000 रुपये प्रति किलो तक मिल सकती है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस मौके पर प्रो. जे.पी. शर्मा ने खेत में उभरते ट्रेंड और विभिन्न संस्थाओं के बीच सहयोग के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस एमओयू को जल्दी ही जमीन पर उतारा जाएगा। समझौते के बाद दोनों संस्थान सूचनाएं साझा कर सकते हैं, मिलकर नई टेक्नोलॉजी विकसित कर सकते हैं, एक दूसरे की सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं, शोधार्थियों को गाइड कर सकते हैं और किसानों की जरूरतें पूरी कर सकते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/11/image_750x500_637ae355dde28.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रेशम उत्पादन के लिए एसकेयूएएसटी और सेरीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट के बीच समझौता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/11/image_750x500_637ae355dde28.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा के मुख्यमंत्री धानुका एग्रीटेक रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी सेंटर का  उद्घाटन करेंगे ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/haryana-chief-minister-will-inaugurate-dhanuka-agritech-research-and-technology-center-on-4th-november..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 03 Nov 2022 20:43:04 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/haryana-chief-minister-will-inaugurate-dhanuka-agritech-research-and-technology-center-on-4th-november..html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">देश की प्रमुख कृषि रसायन कंपनियों &nbsp;धानुका एग्रीटेक 10 करोड़ रुपये के निवेश के साथ ने हरियाणा के पलवल में एकआधुनिक कृषि अनुसंधान और विकास केंद्र स्थापित किया है। चार नवंबर को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल&nbsp; खट्टर <span>धानुका एग्रीटेक रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी सेंटर</span>' <span>का उद्घाटन करेंगे। &nbsp;. </span></p>
<p style="text-align: left;">धानुका द्वारा स्थापित सेंटर कृषि क्षेत्र के सभी शिक्षकों, <span>शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों के लिए खुली रहेगी। इस सेंटर में आर्गेनिक सिंथेसिस लैब,एनाटिकल लैब ,फार्मुलेशन लैब ,स्वायल एंड वाटर एनालसिस लैब</span>,<span>तकनीकी प्रयोगशाला</span>, <span>बॉयो-पेस्टीसाइड लैब,बोटेनिकल लैब, इंसेक्ट रेयरिग लैब </span><span>और प्रशिक्षण केंद्र की सुविधा है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इस सेंटर में भारतीय कृषि के सतत विकास की वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों को हल करने के लिए स्वदेशी और आधुनिक रिसर्च की जाएगी। धानुका का आर एंड डी सेंटर आधुनिक विस्तार रणनीतिक योजना से कई तरह से लाभान्वित करेगा। इन तकनीकों का उपयोग करके किसान अपने कृषि उत्पादन को बढ़ाने में सक्षम होंगे।</p>
<p style="text-align: justify;">धानुका का अनुसंधान और विकास केंद्र कृषि क्षेत्र के शोधकर्ताओं को वैज्ञानिक अध्ययन करने का अवसर भी प्रदान करेगा। यहां किसान पानी, <span>की जांच , मिट्टी की जांच बायो-पेस्टीसाइड जांच &nbsp;का लाभ भी उठा सकेंगे।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इसके बारे में धानुका ग्रुप के चेयरमैन आर जी अग्रवाल <span>ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हम कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक और अनुसंधान आधारित सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने का प्रयास कर रहे हैं। हमारा यह नया शोध केंद्र इस क्षेत्र&nbsp; में महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान करेगा। यह सुविधा किसानों और शोधकर्ताओ के लिए खुली है।</span>&nbsp;<span>जहां हम ड्रोन को भी प्रभावी औऱ खेती प्रेसीजन तकनीकों जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में मदद कर सकेंगे। यह कृषि नीति निर्धारकों और कृषि वैज्ञानिकों के लिए कारगर होगा जो सही सलाह देकर किसानों और पूरे कृषि क्षेत्र को लाभान्वित कर सकेंगे।</span></p>
<p style="text-align: justify;">शोध केंद्र के उद्घाटन कार्यक्रम में हरियाणा के कृषि मंत्री जे.पी. दलाल सहित, भारत सरकार के विद्युत और भारी उद्योग राज्य मंत्री,<span>कृष्ण पाल गुर्जर</span>,<span> </span><span>चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ बी.आर कंबोज, महाराणा प्रताप हार्टीकल्चर विश्वविद्यालय के&nbsp; कुलपति डॉ समर सिंह सहित&nbsp; कृषि से जुड़े कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।&nbsp; &nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/11/image_750x500_6363da3998c54.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा के मुख्यमंत्री धानुका एग्रीटेक रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी सेंटर का  उद्घाटन करेंगे  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/11/image_750x500_6363da3998c54.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[स्पाइसेस बोर्ड और फ्लिपकार्ट में समझौता, मसाला किसानों को दिया जाएगा प्रशिक्षण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/flipkart-kirana-and-spices-board-join-hands-to-train-spice-cultivators.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 30 Oct 2022 11:18:30 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/flipkart-kirana-and-spices-board-join-hands-to-train-spice-cultivators.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">मसाला किसानों के लिए यह एक अच्छी खबर है। भारतीय मसाला बोर्ड (spices board of india) और फ्लिपकार्ट किराना की मेंटरशिप में मसालों की खरीद तथा देश भर के बाजार में पहुंचने में उनकी मदद की जाएगी। फ्लिपकार्ट ने स्पाइस बोर्ड के साथ देश के मसाला किसानों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। केरल और तमिलनाडु में एक सौ किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के प्रतिनिधियों के साथ इस कार्यक्रम की शुरुआत होगी। बाद में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश के छोटे और सीमांत किसानों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस सिलसिले में फ्लिपकार्ट के समर्थ कार्यक्रम के एक हिस्से के तौर पर दोनों पक्षों में समझौते पर दस्तखत किए गए। इस कार्यक्रम के जरिए छोटे और मझोले मसाला किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद की जाएगी। फ्लिपकार्ट प्लेटफार्म उन किसानों के लिए अपने उत्पाद बेचने के काम आएगा। वॉलमार्ट के स्वामित्व वाले फ्लिपकार्ट ने एक बयान में कहा कि इस कार्यक्रम के तहत हार्वेस्टिंग की तकनीक, वेयरहाउसिंग और मेंटेनेंस, क्वालिटी कंट्रोल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में मदद की जाएगी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">फ्लिपकार्ट और स्पाइसेस बोर्ड की साझेदारी में कश्मीरी केसर, शहद और लाकडोंग हल्दी को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। वाणिज्य मंत्रालय के तहत कार्य करने वाला मसाला बोर्ड भारतीय निर्यातकों और विदेशी आयातकों के बीच अंतरराष्ट्रीय कड़ी है। कोविड-19 महामारी के बावजूद 2020 में भारत से मसालों का निर्यात बढ़ा है और पहली बार इसने चार अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया। पिछले वित्त वर्ष में 15.31 लाख टन मसालों और मसाला उत्पादों का निर्यात किया गया जिसकी कीमत 4.1 अरब डॉलर (30,576 करोड़ रुपए) थी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">फ्लिपकार्ट की वाइस प्रेसिडेंट और ग्रॉसरी प्रमुख स्मृति रविचंद्रन ने कहा कि केरल में स्पाइसेस बोर्ड के आने से उपभोक्ताओं को अच्छी क्वालिटी के मसाले मिल सकेंगे। इससे मसाला किसानों को भी मदद मिलेगी। तकनीकी दक्षता को देखते हुए फ्लिपकार्ट डिजिटल यात्रा में किसानों की मदद करेगा। फ्लिपकार्ट ग्रॉसरी देश के 28 राज्यों के 1800 से अधिक शहरों में सेवाएं दे रही है। इसके 28 फुलफिलमेंट सेंटर हैं और बीते 2 वर्षों में इसने तेजी से अपना विस्तार किया है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;"><em><strong>(लेखक नई दिल्ली में वरिष्ठ पत्रकार और पब्लिक पॉलिसी विश्लेषक हैं)</strong></em></span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/10/image_750x500_6357bbec6ab17.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ स्पाइसेस बोर्ड और फ्लिपकार्ट में समझौता, मसाला किसानों को दिया जाएगा प्रशिक्षण ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/10/image_750x500_6357bbec6ab17.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बायर ने कृषि में ड्रोन का कमर्शियल  प्रयोग शुरू किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/bayer-announces-commercial-use-of-drones-in-agriculture.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 14 Oct 2022 18:44:50 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/bayer-announces-commercial-use-of-drones-in-agriculture.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">स्वास्थ्य और कृषि से संबंधित क्षेत्र में ग्लोबल स्तर अग्रणी कंपनी बायर ने इस साल खरीफ सीजन में कृषि कार्यों के लिए ड्रोन के व्यावसायिक स्तर इस्तेमाल करने की शुरुआत की है। देश के सात से ज्&zwj;यादा राज्&zwj;यों में धान, <span>सोयाबीन</span>, <span>मक्&zwj;का एवं कपास समेत प्रमुख फसलों और बागवानी के लिए किया जाएगा । कमर्शियल&nbsp; स्&zwj;तर पर बायर ने </span>2021<span> में कृषि कार्यों में ड्रोन के प्रयोग को लेकर फील्&zwj;ड ट्रायल की शुरुआत&nbsp; की थी। बायर ड्रोन की लेबलिंग के लिए रेगुलेटरी डाटा जुटाने &nbsp;के लिए लिए विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों के साथ साझेदारी करने वाली पहली कंपनी है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">ड्रोन की वाणिज्यिक सेवाओं से पंजाब, <span>हरियाणा</span>, <span>मध्य प्रदेश</span>, <span>ओडिशा</span>, <span>महाराष्ट्र</span>, <span>आंध्र प्रदेश</span>, <span>कर्नाटक और कई अन्य राज्यों के छोटे जोत वाले किसानों को फायदा होगा। इससे किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और प्रगतिशील किसानों को भी फायदा होगा। इसके माध्यम से ऐसे ग्रामीण उद्यमी जो बेटर लाइफ फार्मिंग (बीएलएफ) केंद्रों का संचालन कर रहे हैं</span>, <span>उन्हें नए अवसर प्राप्त होंगे। छोटे किसानों को ड्रोन सेवाएं प्रदान करने के लिए सेटअप स्थापित करने के इच्छुक लोगों को भी अवसर मिलेगा। बायर ऐसे उद्यमियों को मशीनरी मुहैया कराएगा और उन्हें फसलों और उत्पादों की जानकारी देगा। व्यावसायिक सहयोग और प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की जाएगी।</span></p>
<p style="text-align: justify;">भारत, <span>बांग्लादेश और श्रीलंका में बायर्स क्रॉप साइंस डिवीजन के कंट्री डिवीजनल हेड साइमन-थॉर्स्टन वीबुश ने इस सेवा के लॉन्च पर कहा कि </span>'<span>फसल सुरक्षा के लिए ड्रोन का व्यावसायीकरण और भारतीय किसानों के लिए ड्रोन तकनीक के विकास को प्रोत्साहित प्रयोग की अनुमति देने के लिए सरकार का कदम &nbsp;का हम स्वागत करते हैं। यह सतत कृषि और छोटे जोत वाले किसानों की समृद्धि की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हम क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि क्षेत्र के उन्नत डिजिटलीकरण और मशीनीकरण के माध्यम से सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं ।</span></p>
<p style="text-align: justify;">बायर मेक इन इंडिया के लक्ष्य का सपोर्ट करती है।&nbsp; कंपनी ने भारत के बेहतरीन ड्रोन स्&zwj;टार्टअप्&zwj;स के साथ गठजोड़ किया है, <span>जिससे किसानों को ड्रोन आधारित सर्विसेज दी जा सकें तथा ग्रामीण उद्यमियों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित हों। कृषि क्षेत्र में ड्रोन के कई प्रयोग हैं</span>, <span>जैसे स्&zwj;प्रे</span>, <span>मैपिंग एवं सर्वे के जरिये फसलों की सुरक्षा सुनिश्&zwj;चित करना। इनकी मदद से कई मुश्&zwj;किल कार्यों को आसानी से किया जा सकता है। इनकी मदद से खरपतवार</span>, <span>कीट एवं बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रयोग होने वाले पेस्&zwj;टिसाइड्स को पूरे खेत में समान मात्रा में छिड़कना संभव होता है। इनसे समय बचता है और किसान अन्&zwj;य कार्यों पर ध्&zwj;यान देते हुए अपनी आमदनी बढ़ाने में सक्षम हो सकते हैं।</span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/10/image_750x500_634962ed46782.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बायर ने कृषि में ड्रोन का कमर्शियल  प्रयोग शुरू किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/10/image_750x500_634962ed46782.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खाद्य उत्पादों की  निर्यात क्षमता को बढ़ाना भारत के लिए हितकर: सिराज हुसैन  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-needs-to-enhance-food-export-potential-says-siraj-hussain-at-smart-protein-summit.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 14 Oct 2022 18:35:09 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india-needs-to-enhance-food-export-potential-says-siraj-hussain-at-smart-protein-summit.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>कृषि उत्पादों के क्षेत्र में भारत एक मजबूत निर्यातक देश है और इसे अपनी निर्यात क्षमता को निरंतर बढ़ाते रहना चाहिए। यूरोप समेत अन्य देशों की मांग को ध्यान में रखते हुए भारत को अपनी उत्पाद व उत्पादन क्षमता को बढ़ावा देना चाहिए। उद्योग चैंबर फिक्की के सलाहकार और पूर्व केंद्रीय कृषि सचिव सिराज हुसैन ने स्मार्ट प्रोटिन समिट 2022 को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं।&nbsp;</span><br /><br /><span>स्मार्ट प्रोटीन विषय पर बोलते हुए सिराज हुसैन ने कहा भारत को अपने निर्यात क्षमता को समझना होगा। अब समय आ गया है, जब भारत विदेशों की खाद्य आपूर्ति की मांग को ध्यान में रखते हुए उत्पादन करे। उन्होंने कहा कि सरकार का जोर देश के कुछ हिस्सों को शुद्ध शाकाहारी बना देने पर है। सरकार को मांसाहार को भी बढ़ावा देना चाहिए। पहले जो मांसाहार भोजन की जांच के लिए नगर निगम कि जांच व्यवस्था थी सरकार ने उसे भी खत्म कर दिया। ऐसे में हम खाद्य प्रोटीन की सफलता को कैसे हासिल कर पाएंगे। प्रोटीन प्रोडक्ट्स बेचने वालों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि उनके प्रोडक्ट्स को सभी लोग आसानी से खरीद सकें न कि सिर्फ पांच प्रतिशत लोग।</span></p>
<p><span>गुड फूड इंस्टीट्यूट इंडिया (जीएफआई)&nbsp; के प्रबंध निदेशक वरुण देशपांडे ने&nbsp;स्मार्ट प्रोटीन समिट 2022 को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना काल में इस बात को पाया गया कि एन्टीबायोटिक दवाओं का असर अब लोगों पर बहुत कम होता जा रहा है। यह अच्छी खबर नहीं है। अमेरिका, कतर, इरान में गुड फूड को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट न्यूट्रिशन को बढ़ावा देने के लिए फिक्की और गुड फूड इंडिया (जीएफआई) के सामूहिक प्रयास से नेशनल एक्सीलेंस फॉर स्मार्ट प्रोटीन (एनआईएसपी) का&nbsp; संस्था का गठन किया जा रहा है।</span><br /><br /><span>नेशनल कमोडिटीज मैनेजमेंट सर्विसेज लिमिटेड ( एनसीएमएल) के चेयरमैन सिराज अजमत चौधरी ने&nbsp; इस मौके पर कहा&nbsp; कि खाद्य से जुड़े विषयों पर हम हमेशा पश्चिमी देशों की समस्याओं को क्रेन्द्र में रखकर ही सोचते हैं। हमें अपनी इस आदत को छोड़ना पड़ेगा और अपने देश की समस्याओं को केन्द्र में रखकर उसको प्राथमिकता देनी होगी। साल&nbsp; 2021 में भारत ने 40 अरब डॉलर के&nbsp; खाद्य उत्पादों का निर्यात किया था जो कि एक बेहतरीन खबर है। हमें समस्या के समाधान के लिए अपने देश के अनुकूल सोचने की जरूरत है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए हमें अपने देश के निर्यात क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।</span><br /><span>इस कार्यक्रम में फूड एंड न्यूट्रिशन साइंटिस्ट, प्रोटीन फूड प्रोडक्ट्स निर्माताओं और खेती किसानी से जुड़े लोगों ने शिरकत की।&nbsp;</span></p>
<div class="yj6qo"></div>
<div class="adL"></div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/10/image_750x500_63490926964ff.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खाद्य उत्पादों की  निर्यात क्षमता को बढ़ाना भारत के लिए हितकर: सिराज हुसैन   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/10/image_750x500_63490926964ff.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बायर ने एसएफएसी के साथ 50 विशेष एफपीओ बनाने के लिए एमओय़ू किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/bayer-partners-with-sfac-to-form-50-specialized-fpos.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 04 Oct 2022 11:36:46 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/bayer-partners-with-sfac-to-form-50-specialized-fpos.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">स्मॉल फार्मर्स एग्री-बिजनेस कंसोर्टियम ( एसएफएसी ) <span>और बायर क्रॉपसाइंस लिमिटेड ने </span>50<span> विशेष किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ</span>) <span>को बनाने और उसको बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओय़ू</span>) <span>पर हस्ताक्षर किए हैं। </span>एसएफएसी के सहयोग से &nbsp;बायर क्रॉपसाइंस लिमिटेड ने 10<span> राज्यों में ऐसे कलस्टर की पहचान की। इसका उद्देश्य एफपीओ की स्थापना करके उसकी व्यवसाय योजना बनाना, इसे चलाने वाले सक्षम लोगों की पहचान करना और एफपीओ का बाजार लिंकेज स्थापित करना है। साथ ही तकनीकी ज्ञान की जानकारी&nbsp; देकर में छोटे किसानों की सहायता करना है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">बायर क्रॉपसाइंस लिमिटेड के साथ एसएफएसी की साझेदारी से &nbsp;दोनों सामुहिक रूप से एफपीओ को मजबूत करने में मदद करेंगे और किसान समूहों को लाभकारी और आत्मनिर्भर व्यावसायिक संस्थाओं के रूप में विकसित करने में मदद करेंगे। बायर क्रॉपसाइंस लिमिटेड दुनिया की&nbsp; क्राप साइंस कंपनियों&nbsp; में एक अग्रणी कंपनी है जो स्थायी कृषि में &nbsp;समाधान प्रदान करती है। भारत में एफपीओ की क्षमता निर्माण &nbsp;हो जिससे कि एफपीओ वल्यू चैन भागीदार की भूमिका निभा सके।&nbsp;&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">एसएफएसी और बायर की भागीदारी का मकसद किसानों के लाकर उनका सामूहिक संगठन बनाकर उसे एक सफल व्यवसायिक संस्था के रूप में कामयाब करना है। एफपीओ किसानों के सामाजिक-आर्थिक &nbsp;निर्माण, <span>उत्पादन और विपणन में उत्पादों की बड़ी मात्रा के इकोनॉमिक माडल का लाभ उठाने में एक बड़ी भूमिका निभाते हैं। बायर मूल्य श्रृंखला संगठनों को परियोजना के उद्देश्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका विशाल अनुभव और पहुंच निश्चित रूप से अंतिम प्राथमिक हितधारक को लाभान्वित करेगी।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इस अवसर पर <span>&nbsp;बायर्स क्रॉप साइंस डिवीजन के कंट्री डिवीजनल हेड (भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका) साइमन-थॉर्स्टन वीबुश ने कहा कि भारत छोटे किसानों का देश है। एफपीओ के एक जीवंत और मजबूत नेटवर्क के रूप में सामूहिक रूप से न केवल किसानों की आय में सुधार होगा बल्कि भारत की खाद्य सुरक्षा का सपोर्ट करेगा साथ ही</span>&nbsp;<span>खाद्य गुणवत्ता और निर्यात क्षमता में सुधार करने के लिए एक मजबूत खाद्य मूल्य श्रृंखला नेटवर्क का निर्माण भी होगा। उन्होंने कहा कि हमें </span>50<span> एफपीओ बनाने का अवसर देने के लिए बायर एसएफएसी के आभारी हैं। यह </span>2030<span> तक </span>10 करोड़<span> छोटी जोत वाले किसानों को सशक्त बनाने और भारतीय कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में योगदान देने के साथ-साथ उनकी उत्पादकता और आजीविका बढ़ाने के लिए जरूरी &nbsp;संसाधन प्रदान करने की हमारी वैश्विक प्रतिबद्धता को जीवंत और मूर्त रूप देता है।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">यह एमओय़ू <span>कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा </span>10,000 <span>एफपीओ बनाने के लिए शुरू की गई केंद्र सरकार की योजना के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में जुड़ा हुआ है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620dd1e44a9f1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बायर ने एसएफएसी के साथ 50 विशेष एफपीओ बनाने के लिए एमओय़ू किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620dd1e44a9f1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आयोटेक वर्ल्ड का साल  2022&amp;#45;23 के दौरान 1,000 से अधिक  किसान ड्रोन बेचने का लक्ष्य़]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/iotech-world-aims-to-sell-more-than-1000-farmer-drones-during-2022-23.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 29 Sep 2022 11:03:04 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/iotech-world-aims-to-sell-more-than-1000-farmer-drones-during-2022-23.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">ड्रोन उद्योग में विकास की अपार संभावनाओं को देखते हुए, <span>प्रमुख कृषि ड्रोन निर्माता </span>कंपनी आयोटेक वर्ल्ड एविगेशन प्राइवेट लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष&nbsp; 2022-23<span> के दौरान </span>1,000<span> से अधिक&nbsp; किसान ड्रोन बेचने और किसान ड्रोन बाजार में बड़ा हिस्सा </span>हासिल करने का लक्ष्य रखा है। किसान ड्रोन बाजार के<span>&nbsp;</span>2025-26<span> तक </span>5,000<span> करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">आयोटेक वर्ल्ड एविगेशन प्रा.लिमिटेड के सह-संस्थापक दीपक भारद्वाज ने बताया कि उनकी कंपनी भारत की पहली प्रमाणित ड्रोन निर्माता कंपनी है और हम फंड जुटाने के लिए निवेशकों से बातचीत कर रहे हैं, <span>जिसका इस्तेमाल इसके विस्तार के लिए किया जाएगा। पिछले साल कंपनी ने एग्रोकेमिकल कंपनी धानुका एग्रीटेक से करीब </span>30<span> करोड़ रुपये की फंडिंग जुटायी थी। कंपनी को ड्रोन और ड्रोन कंपोनेंट्स के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम के लिए चुना गया है।</span>आयोटेक वर्ल्ड एविगेशन का प्रमुख ड्रोन &lsquo;एग्रीबोट&rsquo; एक मल्टी-परपज़ किसान ड्रोन है, जो छिड़काव, बीज फैलाने और फसलों की सेहत पर निगरानी रखने में कारगर है।</p>
<p style="text-align: justify;">आयोटेक वर्ल्ड एविगेशन प्रा.लिमिटेड के सह-संस्थापक अनूप उपाध्याय <span>ने बताया </span><span>कि उनकी कंपनी ड्रोन में काम आने वाले अधिकांश उपकरणों को एक से दो </span><span>&nbsp;साल के भीतर स्वदेशी बनाने के लिए काम कर रही है। </span><span>कंपनी ने कृषि में ड्रोन के लाभों के बारे में किसानों को शिक्षित करने के लिए कई अभियान और </span>15000<span> किलोमीटर के ड्रोन टूर का आयोजन किया है। </span><span>रोजगार को बढ़ावा देने के लिए</span> आयोटेक वर्ल्ड एविगेशन ग्रामीण स्तर पर उद्यमियों और सेवा भागीदारों का विकास कर रहा है। उन्होंने बताया कि कंपनी के 12<span> राज्यों में केंद्र हैं जो किसानों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करते हैं। एक नया उद्यमी भी एग्री इंफ्रा फंड के तहत ऋण का लाभ उठा सकता है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;कंपनी के सहस्थापकों का कहना था कि आयोटेक वर्ल्ड द्रास मॉडल मोबाइल ऐप लॉन्च किया है जो नए उद्यमियों को आर्डर हासिल करने में मदद करता है। छोटे और सीमांत किसानों को भी अपनी सेवाएं प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि &nbsp;कंपनी ने एक बाइक बैक ड्रोन मॉडल और नई लिथियम आयन बैटरी लॉन्च की है <span>जो ड्रोन की परिचालन लागत को कम करती है और ड्रोन की गतिशीलता को बढ़ाती है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;<span>दीपक ने बताया कि कंपनी विभिन्न राज्य सरकारों के साथ </span>RPTO (<span>रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन) खोल रही है। इससे पीआईएल &nbsp;लाइसेंस कोर्स बेहद कम कीमत पर उपलब्ध हो जाएगा। उन्होने कहा कि कई केवीके</span>, <span>आईसीएआर संस्थानों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों ने ड्रोन खरीदे हैं और अब हम उन्हें सक्षम कर रहे हैं ताकि वह डेमो देकर किसानों को शिक्षित कर सकें।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इन कंपनी के पदाधिकारियों का कहना है कि कंपनी किसान मित्रों के लिए बहुभाषी यूजर इंटरफेस (हिंदी, <span>पंजाबी</span>, <span>तेलुगु</span>, <span>मराठी</span>, <span>तमिल</span>, <span>कन्नड़ आदि) प्रदान करती है ताकि वह इसका आसानी से उपयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि किसान आसानी से ड्रोन अपनाएं</span>&nbsp;<span>इसके लिए सरकार उन्हें </span>40-100<span> फीसदी सब्सिडी दी जाती है। </span>आयोटेक वर्ल्ड नेविगेशन ने मध्य प्रदेश सहित कई राज्य सरकारों के साथ करार किया है। <span>&nbsp;उन्होने बताया कि हाल ही में फिक्की-ईवाय द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक ड्रोन का बाज़ार 30 बिलियन डॉलर के आंकड़े तक पहुंच जाएगा। एक अनुमान के अनुसार कृषि ड्रोन का बाज़ार कुल ड्रोन बाज़ार में तकरीबन 30 फीसदी योगदान देता है।&nbsp; </span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/09/image_750x500_63353121d76e3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आयोटेक वर्ल्ड का साल  2022-23 के दौरान 1,000 से अधिक  किसान ड्रोन बेचने का लक्ष्य़ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/09/image_750x500_63353121d76e3.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[&amp;apos;डायबिटीज जैसी अनेक गंभीर बीमारियों का जोखिम कम करता है पौध आधारित आहार&amp;apos;]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/plant-based-foods-can-reduce-the-problem-of-climate-change..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 14 Sep 2022 14:03:54 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/plant-based-foods-can-reduce-the-problem-of-climate-change..html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">पूरी दुनिया में पशुपालन में अपनाई जा रही अनैतिक गतिविधियों से मानव शरीर को नुकसान हो रहा है। इसके विपरीत पौध-आधारित आहार शरीर को शुद्ध करता है। ये बातें <em><strong>द लैंड ऑफ अहिंसा</strong></em> नामक डॉक्यूमेंट्री फिल्म में बताई गई हैं। इस फिल्म की स्क्रीनिंग आईआईटी दिल्ली में क्लाइमेट हीलर्स, फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन (फियापो), एनएसएस और परीन प्लांट बेस्ड लिविंग ने मिलकर की। इस मौके पर प्लांट बेस्ड फूड्स इंडस्ट्री एसोसिएशन (पीबीएफआईए) ने एक पैनल चर्चा का भी आयोजन किया।&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">डॉक्यूमेंट्री में बताया गया है कि शाकाहारी भोजन से डायबिटीज और आंत्र सिंड्रोम जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम कम रहता है। इसके अलावा, लोगों को खिलाने के लिए पशुपालन में अधिक संसाधनों का इस्तेमाल करना प्रभावी तरीका नहीं है।&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस विषय पर अपने विचार साझा करते हुए पीबीएफआईए के कार्यकारी निदेशक, संजय सेठी ने कहा कि वैकल्पिक प्रोटीन एक वास्तविकता बन रहा है क्योंकि युवा उद्यमी टेम्पेह, हेंप-प्रोटीन, जई-आधारित उत्पादों के अवसर से लाभ उठाना चाहते हैं। भारतीय किसानों के पास प्लांट प्रोटीन आइसोलेट्स और कॉन्संट्रेट का निर्यात करके अपनी आय बढ़ाने का मौका है। हमारे हेल्थ सेक्टर के प्रोफेशनल लोगों और पोषण विशेषज्ञों ने अब एक दवा के रूप में भोजन को पहचानना शुरू कर दिया है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भारत में प्लांट-आधारित खाद्य बाजार लगभग 2000 करोड़ रुपये का है और अगले एक दशक में यह बढ़कर 40,000 करोड़ रुपये तक होने की उम्मीद है। टाटा और आईटीसी जैसी बड़ी कंपनियों ने डेयरी विकल्प, नगेट्स, पनीर और अन्य उत्पाद जैसे कीमा, बर्गर, पैटी, अंडे के विकल्प और कबाब सहित कई अन्य वैकल्पिक उत्पादों के साथ प्लांट-आधारित फूड इंडस्ट्री को गति दी है। पीबीएफआईए के भारत में पहले प्लांट प्रोटीन क्लस्टर जैसी अधिक से अधिक परियोजनाओं के जरिए देश दलहनी फसलों, बाजरा और अनाज की अपनी मूल फसलों की खेती&nbsp; से लाभ उठा सकता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इसका उद्देश्य पीबीएफआईए के माध्यम से यह निर्धारित करना होगा कि प्लांट-आधारित खाद्य उद्योग के लिए क्या किया जाना चाहिए। इसके लिए नीतिगत समर्थन, इनोवेशन, निवेश और सप्लाई चेन के कार्यक्षेत्र में सहायता प्रदान करने की जरूरत है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पैनल चर्चा में लोकसभा सदस्य और पूर्व मंत्री मेनका गांधी, पीबीएफआईए कार्यकारी निदेशक&nbsp; संजय सेठी, एपीडा महाप्रबंधक वीके विद्यार्थी, क्लाइमेट हीलर ऑर्गनाइजेशन के संस्थापक डॉ शैलेश राव, फिल्म निर्देशक डॉली व्यास ने भी अपने विचार साझा किए।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/09/image_750x500_631a1935bd8c4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ 'डायबिटीज जैसी अनेक गंभीर बीमारियों का जोखिम कम करता है पौध आधारित आहार' ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/09/image_750x500_631a1935bd8c4.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[स्वराज ट्रैक्टर्स ने 20 लाख उत्पादन का आंकड़ा पार किया, सिर्फ 9 साल में बनाए 10 लाख ट्रैक्टर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/swaraj-tractors-crosses-20-lakh-production-milestone.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 10 Sep 2022 09:43:38 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/swaraj-tractors-crosses-20-lakh-production-milestone.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">महिन्द्रा समूह के स्वामित्व वाले स्वराज ट्रैक्टर्स ने 20 लाख ट्रैक्टर बनाने का मील का पत्थर हासिल कर लिया है। स्वराज ट्रैक्टर्स ने 1974 में मोहाली में प्लांट का परिचालन शुरू किया और 2013 में पहले 10 लाख ट्रैक्टर उत्पादन की उपलब्धि हासिल की। अगले 10 लाख ट्रैक्टर का उत्पादन उसने सिर्फ नौ साल में किया है। स्वराज 15 बीएचपी से 64 बीएचपी तक क्षमता वाले ट्रैक्टर बनाती है और संपूर्ण मशीनीकरण समाधान सुविधा भी प्रदान करती है। बहुउद्देश्यीय समाधान पेश करके स्वराज बागवानी क्षेत्र के मशीनीकरण में अग्रणी प्लेयर बन गई है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड में स्वराज डिवीजन के सीईओ हरीश चव्हाण ने कंपनी के कर्मचारियों की मौजूदगी में एक विशेष कार्यक्रम में 20 लाखवें ट्रैक्टर को उतारा। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि ने स्वराज ब्रांड की प्रतिष्ठा को घरेलू ट्रैक्टर बाजार में सबसे भरोसेमंद और सबसे तेजी से बढ़ते मजबूत ब्रांडों में से एक बना दिया है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एमएंडएम लिमिटेड फार्म इक्विपमेंट सेक्टर के प्रेसिडेंट हेमंत सिक्का ने कहा, 20 लाख यूनिट उत्पादन तक पहुंचने की यात्रा हमारे लिए चुनौतीपूर्ण और रोमांचक रही है। उन्होंने कहा कि हम अधिक कृषि-आधारित समाधान प्रदान करने और मशीनीकरण को सक्षम करने के लिए तत्पर हैं। यह उपलब्धि कृषि को बदलने और जीवन को समृद्ध बनाने के हमारे मिशन को जीने की दिशा में एक और कदम है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">वर्तमान में स्वराज के दो ट्रैक्टर निर्माण संयंत्र हैं। इसकी अपनी फाउंड्री और अनुसंधान एवं विकास संस्थान है। ये सभी पंजाब में स्थित हैं। राज्य में एक और प्लांट आ रहा है।</span></p>
<p><br /><br /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/09/image_750x500_631874c3ce80e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ स्वराज ट्रैक्टर्स ने 20 लाख उत्पादन का आंकड़ा पार किया, सिर्फ 9 साल में बनाए 10 लाख ट्रैक्टर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/09/image_750x500_631874c3ce80e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जीएसपी को व्हाइटफ्लाई  नियंत्रक  कीटनाशक  पाइरीप्रोक्सीफेन और डिफेनथियूरोन फार्मुलेशन का पेटेंट मिला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/gsp-company-gets-patents-for-pyriproxyfen-and-difenthiuron-formulations.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 05 Sep 2022 15:32:55 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/gsp-company-gets-patents-for-pyriproxyfen-and-difenthiuron-formulations.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">भारत की अग्रणी क्रॉप साइंस एग्रोकेमिकल कंपनी जीएसपी को व्हाइटफ्लाई कीट के नियंत्रण वाली कीटनाशक दवा पाइरीप्रोक्सीफेन और डिफेनथियूरोन फार्मुलेशन का &nbsp;पेटेंट मिला है। <span>औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग के अंतर्गत आने वाले&nbsp; पेटेंट और डिज़ाइन नियंत्रक कार्यलय ने जीएसपी के पक्ष में इस संबंध में एक आदेश पारित किया है । जीएसपी इसे एक प्रमुख उपलब्धि के रूप में</span>,<span> देख रही है। &nbsp;यह कीटनाशक व्हाइटफ्लाई &nbsp;कीट नियंत्रण के लिए &nbsp;प्रयोग किया जाता है। कंपनी द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">जीएसपी क्रॉपसाइंस एग्रोकेमिकल&nbsp; कंपनी पहले से ही स्थानीय तकनीक से डायफेंथियूरोन का उत्पादन कर रही है <span>और इसको कई देशों में निर्यात कर रही है। किसी </span>SE<span>सूत्रीकरण में डायफेंथियूरोन + पाइरीप्रोक्सीफेन का एकमात्र सम्मिश्रण तैयार करने वाली पहली कम्पनी भी जीएसपी है। कृषि</span>, <span>बागवानी और वानिकी फसलों को नुकसान पहुंचाने में व्हाईट फ्लाईस एक बड़ा कारक रही हैं।</span><span> </span><span>भारत में यह नारियल,&nbsp; ताड़&nbsp; बागवानी&nbsp; और </span><span>कपास की फसल को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाती है।&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">जीएसपी का नया कीटनाशक फार्मुलेशन SLR 525 SE <span>किसानों का एक भरोसेमंद ब्रांड है और व्हाइट फ्लाई जैसे घातक कीट के नियंत्रण के लिए किसानों द्वारा ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।&nbsp; यह सतह पर जल्दी फैलने और एक सतह से दूसरी तक समान रूप से पहुँचने के गुण के कारण पौधों की सतह पर काफ़ी प्रभावी होता है। ये जल-आधारित मिश्रण होने के कारण ईसी फार्मुलेशन में काम में लिए गए विलायकों के पर्यावरण पर होने वाले हानिकारक प्रभावों को नष्ट कर देता है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">जीएसपी क्रॉप साइंस प्राइवेट लिमिटेड भारत की अग्रणी एग्रो केमिकल्स उत्पादन कंपनियों में से एक है। यह कीटनाशकों, <span>फफूंद नाशकों</span>, <span>खरपतवार नाशी , कीट क्निकल फार्मुलेशन और पौध नियंत्रकों की एक विस्तृत श्रृंखला का उत्पादन करती है। इस पेटेंट को हासिल करने के बाद</span>&nbsp;<span>जीएसपी क्रॉप साइंस प्राइवेट लिमिटेड के</span>&nbsp;<span>प्रबंध निदेशक भावेश शाह ने कहा कि हमारी टीम पिछले क़रीब आठ साल की मेहनत का परिणाम है कि जीएसपी को ऐसे संयोजित उत्पाद के लिए पेटेंट मिला है जो किसानों के लिए बहुत फ़ायदेमंद होगा । हमारा उत्पाद </span>SLR 525<span> जो कपास और सब्ज़ियों के हर चरण में व्हाईट फ्लाई कीट के हमलों से लड़ने में मदद करता है । भारतीय बाज़ार में अपनी किस्म का पहला उत्पाद है।</span></p>
<p style="text-align: justify;"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/09/image_750x500_6315b3623011d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जीएसपी को व्हाइटफ्लाई  नियंत्रक  कीटनाशक  पाइरीप्रोक्सीफेन और डिफेनथियूरोन फार्मुलेशन का पेटेंट मिला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/09/image_750x500_6315b3623011d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत में कृषि पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए बायर ने किया ‘सहभागी’ कार्यक्रम का विस्तार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/bayer-to-scale-up-its-sahbhaagi-program.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 04 Sep 2022 13:34:55 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/bayer-to-scale-up-its-sahbhaagi-program.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">भारत में व्यापक कृषि पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के उद्देश्य से ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाने के लिए कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय कंपनी बायर अपने सहभागी कार्यक्रम को आगे बढ़ाएगी। कंपनी ने इस कार्यक्रम की शुरूआत साल 2019 में की थी। आज इस कार्यक्रम से पूरे देश में 4000 से अधिक सहभागी जुड़े हुए हैं।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इसकी पहल ग्रामीण उद्यमियों के लिए बायर के साथ वैकल्पिक अवसरों का पता लगाने और किसानों तक कंपनी की पहुंच बढ़ाने के लिए की गई थी। सहभागी कार्यक्रम एक ग्रामीण सूक्ष्म उद्यमिता विकास मॉडल है जो किसानों, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं को सलाहकार बनने और छोटे किसानों को सही समाधान सुझाने का अधिकार देता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सहभागी कार्यक्रम के तहत पूरे देश के किसानों के साथ एक मजबूत नेटवर्क स्थापित करने के लिए अधिक से अधिक सहभागी भागीदारों को शामिल किया जाता है। 18 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति जिसे कृषि और स्मार्टफोन का ज्ञान है, वह सहभागी बन सकता है। इसमें युवा कृषि-उद्यमियों को शामिल करने के अलावा, महिलाओं की प्रमुख भूमिका के महत्व को समझते हुए उनको सहभागी बनाने पर जोर दिया जाता है।&nbsp;&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">बायर का मनना है कि स्मार्टफोन को अपनाने और डिजिटल तकनीक को विकसित करने से कार्यक्रम को और बढ़ावा मिलेगा। बायर सहभागियों को स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुसार छोटे किसानों को सही समाधान बताने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। बायर सहभागी की सहायता से छोटे किसानों को बायर उत्पादों तक डिजिटल रूप से पहुंच मिलती है। यह कार्यक्रम वर्तमान में 24 राज्यों में 470 से अधिक जिलों में चलाया जा रहा है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस अवसर पर भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका के लिए बायर के क्रॉप सांइस कंट्री डिविजनल हेड साइमन-थॉर्स्टन वीबुश ने कहा कि हम स्थानीय समुदायों के लाभ के लिए कृषि पद्धतियों में बदलाव कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य टिकाऊ और बेहतर खेती को प्रोत्साहित करके ग्रामीण उत्थान में मदद करना है। उन्होंने कहा कि बायर इन सहभागियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगी ताकि उनके गांवों में एक स्थायी पारिस्थितिकी तंत्र बनाया जा सके और नवीनतम कृषि और कृषि पद्धतियों को अपनाया जा सके।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">बायर ने ग्रामीण आबादी को अधिक जानकारी प्रदान करने और सहभागी कार्यक्रम में नामांकन की सुविधा के लिए एक टोल-फ्री नंबर 18001204049 भी जारी किया है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/09/image_750x500_6310e2e3d8585.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत में कृषि पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए बायर ने किया ‘सहभागी’ कार्यक्रम का विस्तार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/09/image_750x500_6310e2e3d8585.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पौध आधारित मीट के लिए बियॉन्ड मीट कंपनी ने अल्लाना के साथ की साझेदारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/beyond-meat-company-ties-up-with-allana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 06 Aug 2022 10:04:35 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/beyond-meat-company-ties-up-with-allana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">बियॉन्ड मीट कंपनी, अल्लाना समूह की एक सहायक कंपनी के साथ भारत में पौध आधारित मीट के व्यवसाय को आगे बढ़ाने जा रही है। बियॉन्ड मीट कंपनी पौध आधारित मीट का व्यवसाय करती है। अल्लाना कंज्यूमर प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का लक्ष्य देश-दुनिया में बढ़ती मीट की मांग को पूरा करना है, जिससे कि लोगों को स्वास्थ्यवर्धक, मिलावट मुक्त और उच्च गुणवत्ता युक्त वाले खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित किया जा सके।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">बियॉन्ड मीट अमेरिका में प्लांट-बेस्ड प्रोटीन के लिए अग्रणी और मार्केट लीडर कंपनी है। दरअसल नॉनवेज खाने वालों को प्लांट बेस मीट खाने पर अंतर कर पाना मुश्किल हो जाता है। अल्लाना कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने भारतीय बाजार में ग्लोबल स्तर पर पंसद किए जा रहे अपने उत्पाद को पूरे भारत में बेचने के लिए बियॉन्ड मीट के साथ भागीदारी की है। बियॉन्ड मीट उत्पादों की श्रेणी में स्वादिष्ट बियॉन्ड बर्गर, बियॉन्ड सॉसेज, बियॉन्ड मीटबॉल्स और बियॉन्ड मिंस शामिल हैं। ये सामान्य पौधों के सामग्री से बनाये जाते हैं और स्वास्थ्य के लिए बेहतर होने के साथ ही साथ पशु मांस के जैसा ही स्वाद है। कंपनी ने बताया है कि बियॉन्ड मीट उत्पादों में कोई जीएमओ, ग्लूटेन, सोया या कोलेस्ट्रॉल नहीं पाया जाता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस कंपनी के ग्रोथ के बारे में बताते हुए अल्लाना कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिवीजन के सीईओ मिलिंद पिंगले ने कहा कि भारत के लोग हेल्दी लाइफ के विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में लोग ऐसे उत्पादों की तलाश कर रहे हैं जो कि पर्यावरण के लिए टिकाऊ और बेहतर हो। उन्होंने कहा कि हमारी कंपनी का उद्देश्य है कि लोगों के स्वास्थ्य और जीवन शैली में बेहतरी के लिए ऐसे परिवर्तनों को प्रोत्साहित किया जाए।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पिंगले ने कहा कि ये उत्पाद उन मांसाहारियों के लिए एक बढ़िया विकल्प साबित होगा जो कि धीरे धीरे मांसाहारी भोजन को कम कर रहे हैं। इसके माध्यम से लोग बेहतर प्रोटीन के विकल्पों के साथ अपना सकते हैं।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">बियॉन्ड मीट के उत्पादों की चैन वर्तमान समय में मुंबई, दिल्ली, बैंगलोर, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता समेत 24 से अधिक शहरों में नेचर बास्केट, फूड हॉल, ले मार्चे, मॉडर्न बाजार, स्पेंसर आदि जैसे पेटू स्टोर के माध्यम से उपलब्ध हैं। यह अर्बन प्लैटर, वेगन डुकन, वेगन वर्ल्ड, वेवेगानो, ऑल्ट मार्ट और अन्य कई प्लेटफार्म पर भी उपलब्ध है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/08/image_750x500_62ebe40ecce90.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पौध आधारित मीट के लिए बियॉन्ड मीट कंपनी ने अल्लाना के साथ की साझेदारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/08/image_750x500_62ebe40ecce90.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल कम करने में निजी क्षेत्र सरकार की मदद करे: कृषि मंत्री तोमर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/private-sector-must-support-government-in-reducing-use-of-chemical-fertilisers-and-pesticides.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 23 Jun 2022 19:30:09 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/private-sector-must-support-government-in-reducing-use-of-chemical-fertilisers-and-pesticides.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल कम करने में निजी क्षेत्र को सरकार की मदद के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और अर्थव्यवस्था में इस सेक्टर का योगदान भी बहुत बड़ा है, लेकिन किसानों के लिए मुनाफा भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कृषि में मुनाफा बढ़ाना और फसल कटाई के बाद उसके नुकसान को कम करना बहुत जरूरी है। इससे किसानों को नुकसान कम से कम होगा। सरकार कई योजनाओं के जरिए इस दिशा में कार्य कर रही है। तोमर ग्यारहवें एग्रो केमिकल्स कॉन्फ्रेंस 2022 को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा रसायन एवं उर्वरक विभाग की मदद से उद्योग संगठन फिक्की ने किया था।</p>
<p>कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार अधिक कीमत वाली फसलें उपजाने में किसानों की मदद के लिए नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। फसल उत्पादन में एकरूपता सुनिश्चित करने के साथ उनमें गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में भी कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज देश में बागवानी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि भारत हर मामले में आत्मनिर्भर हो सके। अनाज के मामले में हमारी स्थिति बहुत अच्छी है। विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए हमें विकसित देशों की तरफ देखना होगा और उनके साथ आगे बढ़ना होगा।</p>
<p>इस मौके पर रसायन एवं उर्वरक राज्यमंत्री भगवंत खूबा ने कहा, सरकार किसानों के फायदे को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना चाहती है। आबादी बढ़ने के साथ खाद्य सुरक्षा पर फोकस करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना है कि किसानों की लागत कम हो और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि किसानों की आमदनी दोगुनी करना सरकार की सिर्फ प्रतिबद्धता नहीं बल्कि दृढ़ निश्चय भी है। उन्होंने इंडस्ट्री से जैविक कीटनाशकों पर फोकस करने का आग्रह किया और कहा कि इन्हें भारत में भी बनाने को बढ़ावा दिया जाना।&nbsp;</p>
<p>फिक्की की फसल सुरक्षा समिति के साथ-साथ धानुका समूह के चेयरमैन आर जी अग्रवाल ने कहा, हम सरकार से आग्रह करते हैं कि वह उर्वरकों की तरह कीटनाशकों पर भी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर घटाकर 5 फ़ीसदी करे। इससे छोटे और सीमांत किसानों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि सरकार को कीटनाशक उद्योग को प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव भी देना चाहिए ताकि देश में इन्हें बनाने को बढ़ावा मिल सके।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/06/image_750x500_62b471d896eca.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल कम करने में निजी क्षेत्र सरकार की मदद करे: कृषि मंत्री तोमर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/06/image_750x500_62b471d896eca.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तकनीक के जरिए किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य, लीड्स कनेक्ट ने सिग्मा पायलट किया लॉन्च]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/leads-connect-launches-pilot-project-of-sigmaa-to-double-farmer-income.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 12 Jun 2022 14:47:55 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/leads-connect-launches-pilot-project-of-sigmaa-to-double-farmer-income.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के बरेली के टुलिया गांव में किसानों के हित में नोएडा की कृषि तकनीक कंपनी लीड्स कनेक्ट सर्विसेज ने सिग्मा अध्ययन की लॉन्चिंग की। किसानों को कृषि तकनीक विश्लेषण आधारित सेवाएं देने के लिए निर्बाध डिजिटल कार्यान्वयन और जमीनी निगरानी मंच (सिग्मा) परियोजना की लॉन्चिंग सांसद संतोष गंगवार ने की। इस मौके पर टुलिया और जोगिथेर गांव के किसानों को टिकाऊ खेती के तरीके अपनाने और तकनीक के हस्तक्षेप पर सलाह दी गई। किसानों में जागरूकता लाने के लिए कार्यक्रम में किसान ड्रोन और उर्वरकों के छिड़काव का प्रदर्शन भी किया गया।</p>
<p>लीड्स कनेक्ट बरेली में इस कार्यक्रम का पायलट अध्ययन करेगी क्योंकि इस शहर में एक प्रमुख मार्केट लिंकेज केंद्र बनने की क्षमता है। सिग्मा अध्ययन का लक्ष्य बासमती चावल, गेहूं और सरसों जैसी ज्यादा कीमत और अच्छी गुणवत्ता वाली फसलों के लिए क्षेत्रों को चिह्नित करना और उन्हें विकसित करना है। इसके अतिरिक्त खेती की टिकाऊ विधियों और तकनीक की दखल से किसानों की आय दोगुनी करना भी लक्ष्य है। यह अध्ययन चार ऋतुओं में किया जाएगा, जिसकी शुरुआत खरीफ 2022-23 (जून 2022) से होगी और अंत रबी 2023-24 (अप्रैल 2024) में होगा।</p>
<p>पायलट अध्ययन के लिए एक फील्ड एप और प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए बरेली के इन दो गांवों से 150 किसानों को लिया जाएगा। प्रत्येक खेत और किसान के कृषि क्रेडिट स्कोर (एसीएस) की गणना करने के बाद विशेषज्ञों की सलाह पर बीज, उर्वरकों और कीटनाशकों का वितरण किया जाएगा। फसल चक्र के दौरान सीटू द्वारा रियल-टाइम निगरानी की जाएगी और यह वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाएगी। शोध से मिले परिणामों का उपयोग पूरे उत्तर प्रदेश में मॉडल विकसित करने और उन्हें लागू करने में किया जाएगा।</p>
<p>इस मौके पर मुख्य अतिथि और सांसद संतोष गंगवार ने कहा, ''तकनीक और आंकड़ों का सही उपयोग किया जाए तो किसानों की आय बढ़ाने में मदद की जा सकती है। इससे उपभोक्ता को बेहतर वैल्यू मिलेगी और भोजन की बरबादी भी कम होगी। मैं ऐसा उन्नत तकनीक सिस्टम तैयार करने के लिए लीड्स कनेक्ट सर्विसेज की पूरी टीम को बधाई देना चाहता हूं जिससे कृषि प्रक्रिया बेहतर करने में मदद मिल सकती है और किसानों को उनके उत्पाद की अधिकतम कीमत लेने में मदद कर सकती है।''</p>
<p>पायलट की लॉन्चिंग के मौके पर लीड्स कनेक्ट सर्विसेज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक नवनीत रविकर ने कहा, ''इस अध्ययन से किसानों को सिर्फ एक क्लिक से यह महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी कि कौन सी फसल और उसकी किस्म बोने के लिए उपयुक्त है। किसान खेती की रियल-टाइम गणना करने में सक्षम हो सकेंगे, अनुमान लगा सकेंगे और पैदावार बढ़ाने के लिए पूरे फसल चक्र के दौरान बेहतर प्रयास कर सकेंगे। हम फसलों की सेहत, उर्वरकों/कीटनाशकों के छिड़काव और फसल नुकसान के लिए किसानों को ड्रोन एनालिटिक्स एज ए सर्विस (DraaS) भी दे रहे हैं। पायलट अध्ययन किसानों की अभी तक की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक, मार्केट लिंकेज का भी समाधान करता है।''</p>
<p>लीड्स कनेक्ट महालनोबिस नेशनल क्रॉप फोरकास्ट सेंटर, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी और पैदावार आकलन से संबंधित शोध आधारित परियोजनाओं के लिए इरिगेशन एंड वाटरवेज डिपार्टमेंट, पश्चिम बंगाल, कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को मापने और बाढ़ संभावित क्षेत्र को हटाने के लिए क्रॉप कटिंग एक्सपेरीमेंट्स जैसी नोडल एजेंसियों के साथ काम कर रहा है। लीड्स कनेक्ट मुख्य रूप से कृषि-तकनीक पर फोकस वाली एक विश्लेषण कंपनी है जो डाटा विश्लेषण और मॉडलिंग, जोखिम प्रबंधन और वित्तीय सेवाओं का काम करती है।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/06/image_750x500_62a5af20f2d07.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ तकनीक के जरिए किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य, लीड्स कनेक्ट ने सिग्मा पायलट किया लॉन्च ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/06/image_750x500_62a5af20f2d07.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आर्य.एजी को मिली बड़ी सफलता, पहली बार ग्रेन एयूएम एक अरब डॉलर के पार पहुंचा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/arya-ag-ends-fy22-on-a-record-high-to-cement-hold-as-india-largest-agritech-firm.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 10 May 2022 21:41:55 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/arya-ag-ends-fy22-on-a-record-high-to-cement-hold-as-india-largest-agritech-firm.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंटीग्रेटेड ग्रेन कॉमर्स प्लेटफॉर्म आर्य.एजी ने वित्त वर्ष 2021-22 में अनाज का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 1.1 अरब डॉलर पार करने में सफलता हासिल की है। इस वर्ष इसका ग्रॉस ट्रांजैक्शन वैल्यू 27 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। खास बात यह रही कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में ट्रांजैक्शन वैल्यू पहली तिमाही की तुलना में 4 गुना बढ़ गई। इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए जाने वाले सॉल्यूशन का किसानों, एफपीओ, मिलर तथा कृषि निगमों ने इस्तेमाल किया</p>
<p>इस प्लेटफॉर्म से जुड़ा कर्ज देने का डिजिटल बिजनेस भी है। मार्च 2022 में इस प्लेटफॉर्म ने एक महीने में 100 करोड़ रुपए यानी 133 लाख डॉलर का कर्ज देने की उपलब्धि भी हासिल की। पूरी तरह सिक्योर्ड कर्ज पूरे वित्त वर्ष में दोगुना बढ़कर 650 लाख डॉलर हो गया। इसमें कंपनी की तरफ से लांच किए गए इंस्टा लोन का बड़ा योगदान रहा जिसमें कर्ज लेने की प्रक्रिया बहुत आसान कर दी गई है।</p>
<p>आर्य.एजी ने अपनी बैलेंस शीट से कर्ज देने के साथ-साथ 25 से ज्यादा बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भी दो हजार करोड़ रुपए (26.5 करोड़ डॉलर) का कर्ज देने में मदद की। इसमें 3 गुना वृद्धि हुई है।</p>
<p>डिजिटल वेयरहाउसिंग, डिजिटल लैंडिंग और डिजिटल मार्केटप्लेस की बदौलत आर्य.एजी ने एग्रीटेक सेक्टर में अपनी स्थिति और मजबूत की है। कंपनी का दावा है कि वह इंडस्ट्री में एकमात्र कंपनी है जो मुनाफे में है।</p>
<p>पिछले वित्त वर्ष में आर्य ने सीरीज सी फंडिंग के तहत 6 करोड़ डॉलर जुटाए। कंपनी में निवेश करने वालों में एशिया इंपैक्ट एसए, लाइट रॉक इंडिया, कोना कैपिटल और ओमनीवोर शामिल हैं।</p>
<p>आर्य.एजी के एमडी और सह संस्थापक प्रसन्ना राव ने कहा, "हम डिजिटल टेक्नोलॉजी का फायदा कृषि के इकोसिस्टम में पहली पायदान पर खड़ी महिला किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को भी दे रहे हैं। कोविड-19 महामारी के कारण हमारी इंटीग्रेटेड सेवा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा। भविष्य को लेकर भी हम काफी उत्साहित हैं।"</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/05/image_750x500_627a8ea51329c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आर्य.एजी को मिली बड़ी सफलता, पहली बार ग्रेन एयूएम एक अरब डॉलर के पार पहुंचा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/05/image_750x500_627a8ea51329c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको ने बनाया रिकॉर्ड, पारादीप संयंत्र में एक साल में आठ लाख टन फॉस्फोरिक एसिड का उत्पादन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/iffco-makes-record-by-producing-8-lakh-ton-of-phosphoric-acid.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Mar 2022 10:53:08 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/iffco-makes-record-by-producing-8-lakh-ton-of-phosphoric-acid.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इफको ने अपने पारादीप संयंत्र में वित्त वर्ष 2021-22 में 805,000 टन फॉस्फोरिक एसिड (P2O5) का उत्पादन किया है। यह दुनिया के किसी भी एक संयंत्र में एक साल में किया जाने वाला सबसे अधिक उत्पादन है। इफको ने यह उपलब्धि तो हासिल की ही है, इससे उच्च स्वदेशी फॉस्फेट आधारित उर्वरकों यानी डीएपी/एनपीएस आदि के उत्पादन में मदद मिली है और आयातित जटिल उर्वरकों पर निर्भरता कम हुई है।</p>
<p>फसलों के लिए फॉस्फेट (P2O5) एक प्रमुख पोषक तत्व है और अधिक उपज के लिए बहुत आवश्यक है। भारत में फॉस्फेट का भंडार बहुत कम है और हमें रॉक फॉस्फेट (कच्चा माल), फॉस्फोरिक एसिड (मध्यवर्ती उत्पाद) और जटिल उर्वरक (तैयार उत्पाद) के रूप में अन्य देशों से बहुत ज़्यादा आयात करने की आवश्यकता पड़ती है। इफको की पारादीप इकाई में 2650 टन प्रति दिन P2O5 उत्पादन की क्षमता है। इफको की इस इकाई में विश्व का सबसे बड़ा एकल रिएक्टर&nbsp; है।&nbsp;</p>
<p>देश को 'आत्मनिर्भर' बनाने के लिए प्रधान मंत्री की दृष्टि के अनुरूप, यह उपलब्धि भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर है। इससे न केवल किसानों को गुणवत्तापूर्ण और भारत में बने उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, बल्कि इसके परिणामस्वरूप कीमती विदेशी मुद्रा व्यय में भी बचत हुई है।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_623ea329e3f59.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको ने बनाया रिकॉर्ड, पारादीप संयंत्र में एक साल में आठ लाख टन फॉस्फोरिक एसिड का उत्पादन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_623ea329e3f59.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आर्या एजी ने किसानों को सिंगल क्लिक एग्री इंस्टा&amp;#45;लोन देने की घोषणा की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/aryaag-announces-single-click-agri-insta-loan-to-farmers-across-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 15 Mar 2022 21:21:45 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/aryaag-announces-single-click-agri-insta-loan-to-farmers-across-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">आर्या.एजी ने पूरे भारत के किसानों को सिंगल क्लिक एग्री इंस्टा-लोन देने की घोषणा की है। कंपनी एग्री इंस्टा-लोन जल्द ही अपने ग्राहकों को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आसानी से ऋण प्रदान करेगी। एक किसान अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार अपने संग्रहित माल के आधार पर अपने घर से तत्काल ऋण प्राप्त कर सकता है। आर्या एजी एक आर्या एजी इंटीग्रेटेड ग्रेन कॉमर्स प्लेटफॉर्म है।</p>
<p style="text-align: justify;">आर्या.एजी एमएल, एआई और आईओटी तकनीक का उपयोग कर &nbsp;डिजिटल रूप से सक्षम गोदामों में भंडार किये गये कृषि उपज के प्रत्येक बैग को इलेक्ट्रॉनिक बैलेंस में बदल देता है। कंपनी का खास डिजाइन किया हुआ सॉफ्टवेयर इंजिन इलेक्ट्रॉनिक बैलेंस के बदले कर्ज देने का आधार तैयार कर देता है।&nbsp; इस प्रकार का ऋण छोटे किसानों को आसानी से मिल जाता है, जो किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाता है। इस प्रकार का ऋण उपज की ब्रिकी के दौरान किसान के सामने उत्पन्न होने वाले किसी भी वित्तीय संकट का समाधान करने में सक्षम है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">छोटे किसान तत्काल वित्तीय सहायता से अपनी उपज की मूल्य श्रृंखला या अन्य जरूरतों को भी पूरा कर सकते हैं जिससे किसान को अपनी कृषि उपज का उचित मूल्य बाजार से मिल सकेगा।</p>
<p style="text-align: justify;">आरबीआई की पहले की एक रिपोर्ट के मुताबिर केवल 40 फीसदी भारतीय किसान ही संस्थागत ऋण सुविधा का लाभ उठा पाते हैं। अर्या.एजी &nbsp;इंस्टा-लोन के माध्यम से भारतीय किसानों के लिए वित्तीय जरूरत को पूरा करने का प्रयास करेगा। वित्त वर्ष 2023 में, कंपनी का लक्ष्य इंस्टा-लोन के माध्यम से 1000 करोड़ ऋण वितरित करने का &nbsp;है।</p>
<p style="text-align: justify;">आर्या.एजी के सह-संस्थापक चट्टानाथन देवराजन ने कहा है कि भारत में कृषि श्रृंखला के पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ाने में एग्रीटेक प्लेयर का दायरा बहुत बड़ा है। आर्या एजी का फोकस देश के किसानों को उनके कृषि उत्पादों के मूल्य को अधिकतम करना और उन्हें सशक्त बनाना है। हम इसे एंड-टू-एंड एकीकृत के माध्यम से सक्षम करते हैं। हम डिजिटल रूप से सक्षम गोदामों में फैले पूर्ण स्टैक समाधान, एम्बेडेड वित्त और वाणिज्य समाधान प्रदान करते हैं,</p>
<p style="text-align: justify;">देवराजन ने कहा कि तकनीकी रूप से सक्षम डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके लोन वितरित किए जाते हैं। हमारी कंपनी ने एक नया इंस्टा लोन पेश किया है जिसे व्यापक रूप से किसानों को तत्काल ऋण प्राप्त करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। उन्होंने कहा कि अधिकांश क्षेत्रों में तत्काल ऋण उपलब्ध हैं लेकिन यह पहली बार है कि किसानों को ऋण आसानी से और तुरंत मिल जाएगा ।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_6230b5bf8dfef.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आर्या एजी ने किसानों को सिंगल क्लिक एग्री इंस्टा-लोन देने की घोषणा की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_6230b5bf8dfef.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बी2बी प्लेटफॉर्म अग्रिम ने जुटाए एक करोड़ डॉलर, बिजनेस बढ़ाने में करेगी इस्तेमाल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/b2b-agri-inputs-platform-agrim-raises-10mn-dollars-in-series-a-round-from-kalaari-and-axis-bank.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 18 Feb 2022 11:41:24 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/b2b-agri-inputs-platform-agrim-raises-10mn-dollars-in-series-a-round-from-kalaari-and-axis-bank.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बी2बी प्लेटफॉर्म अग्रिम (एजीआरआईएम) ने सीरीज ए फंडिंग के तहत एक करोड़ डॉलर जुटाने की घोषणा की है। इस राउंड की फंडिंग करने वालों में वेंचर कैपिटल फर्म कलारी कैपिटल प्रमुख है। उसके अलावा मौजूदा निवेशकों ओमनीवोर, इंडिया कोशंट, एक्सियन वेंचर लैब्स ने भी निवेश किया है। एक्सिस बैंक ने भारत बैंकिंग इनीशिएटिव के तहत इस राउंड की फंडिंग में शिरकत की है।</p>
<p>अग्रिम भारत के 50 अरब डॉलर की एग्री इनपुट इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ा डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है। इसके लिए वह रिटेलर्स को सीधे मैन्युफैक्चरर से जोड़ती है और सभी पार्टियों को डिस्ट्रीब्यूशन, क्रेडिट, लॉजिस्टिक्स और मार्केटिंग के सॉल्यूशन प्रदान करती है। यह सभी तरह के एग्री इनपुट कैटेगरी के बिजनेस में है। जैसे बीज, फर्टिलाइजर, फसल सुरक्षा, मवेशी पोषण और फार्म इंप्लीमेंट्स।</p>
<p>ग्रामीण इलाकों में एग्री इनपुट बिक्री करने वाले रिटेलर्स के सामने सीमित मात्रा में उपलब्धता, कीमतों पर संशय, प्रोडक्ट की गुणवत्ता पर सवाल के साथ-साथ कार्यशील पूंजी की ऊंची लागत जैसी समस्याएं होती हैं। दूसरी तरफ एंग्री इनपुट निर्माताओं को अपना बिजनेस बढ़ाने, विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में अपने प्रोडक्ट की पहुंच बढ़ाने, कार्यशील पूंजी के प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स का बेहतर इस्तेमाल करने जैसी समस्याएं होती हैं। अग्रिम का डिजिटल प्लेटफॉर्म मौजूदा बहुस्तरीय डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को छोटा करता है।</p>
<p>अभी अग्रिम की मौजूदगी 500 जिलों में है। इसके प्लेटफार्म पर 2500 से अधिक मैन्युफैक्चरर्स और 170,000 से अधिक रिटेलर जुड़े हुए हैं। प्लेटफार्म इस राउंड की फंडिंग का इस्तेमाल बेहतर प्रतिभाओं को कंपनी से जोड़ने, फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट के डेवलपमेंट और बिजनेस बढ़ाने में करेगी। साल 2022 में इसे सालाना ग्रॉस मर्चेंडाइजिंग वैल्यू (जीएमवी 10 करोड़ डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। गुड़गांव स्थित अग्रिम की स्थापना अप्रैल 2020 में आईआईटी खड़गपुर के एल्युमनी तथा उद्यमी मुकुल गर्ग और अभि जैन ने की थी।</p>
<p>अग्रिम के सह संस्थापक और सीईओ मुकुल गर्ग ने कहा, &ldquo;बीते 15 महीने में हमने अपने प्रोडक्ट को बाजार के अनुरूप बनाने में सफलता पाई है। इस निवेश से हमें नई कैटेगरी और नए इलाकों में बिजनेस बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस फंड का इस्तेमाल बेहतरीन लोगों को प्लेटफार्म से जोड़ने और रिटेलर्स के लिए फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी सर्विसेज लॉन्च करने में किया जाएगा।&rdquo;</p>
<p>कलारी कैपिटल के पार्टनर वमषि कृष्ण रेड्डी ने कहा कि हम भारत के एग्री इनपुट रिटेल मार्केट को बदलने में अग्रिम के विजन के साथ शामिल होने को लेकर उत्साहित हैं। संस्थापकों की टीम का गहरा अनुभव है। साथ ही यूनिट स्तर पर लाभप्रदता पर उनका काफी फोकस है। इन बातों ने हमें निवेश के लिए प्रेरित किया।</p>
<p>एक्सिस बैंक के ग्रुप एक्जीक्यूटिव और भारत बैंकिंग प्रमुख मुनीष शारदा ने कहा, &ldquo;एक्सिस बैंक ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विशेष प्रोडक्ट और प्रोसेस से जुड़कर खास तरह का भारत बैंक बनने पर फोकस कर रहा है। अग्रिम में निवेश हमारी भारत बैंकिंग रणनीति के मुताबिक है। हम उनके ग्राहकों को उचित बैंकिंग प्रोडक्ट और सेवाएं उपलब्ध कराते हुए अग्रिम के साथ मजबूत साझेदारी का निर्माण करना चाहते हैं।&rdquo;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620f387e31bd2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बी2बी प्लेटफॉर्म अग्रिम ने जुटाए एक करोड़ डॉलर, बिजनेस बढ़ाने में करेगी इस्तेमाल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620f387e31bd2.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय अवसरों पर ध्यान देना जरूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/regional-opportunities-must-be-tapped-to-increase-agri-export.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 07 Feb 2022 20:58:40 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/regional-opportunities-must-be-tapped-to-increase-agri-export.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार की व्यापक कृषि निर्यात नीति 2018 में प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और निर्यात पर जोर दिया गया था। इसका लक्ष्य कृषि प्रसंस्करण के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए निवेश बढ़ाना और कृषि की निर्यात क्षमता का दोहन करना था। इस नीति को राज्य और जिला स्तर पर लागू करने के लिए राज्य विशिष्ट कृषि निर्यात कार्ययोजनाएं तैयार की गईं और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान की गई। इसके साथ प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, निर्यात और आयात प्रतिस्थापन के प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया।</p>
<p>केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों को शामिल करके कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए समूहों की पहचान की। एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) और मेगा फूड पार्क (एमएफपी) को लागू किया जिससे विभिन्न जिलों से कृषि निर्यात में तेजी लाने के लिए आधुनिक ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।</p>
<p><strong>राजस्थान</strong> <strong>से</strong> <strong>कृषि</strong> <strong>निर्यात</strong> <strong>की संभावनाएं</strong></p>
<p>2019-20 में राजस्थान के जीएसडीपी में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों ने 25.56 प्रतिशत का योगदान दिया। राज्य से कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय और कृषि निर्यात संवर्धन नीति 2019 के साथ एपीडा ने जीरा, इसबगोल और धनिया के फसल विशिष्ट समूहों पर विशेष जोर दिया। कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास और राज्य विशिष्ट नीतियां तैयार करने के लिए अतिरिक्त संसाधन आवंटित किए गए।</p>
<p>एपीडा ने फसल विशिष्ट समूहों और भारतीय मसाला बोर्ड ने पहली बार राजस्थान से बीजीय मसालों का निर्यात बढ़ाने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया है। सभी जानते हैं कि फिलहाल बीजीय मसालों के उत्पादन में राजस्थान का हिस्सा 60 प्रतिशत है और प्रदेश को बीजीय मसालों का हब कहा जाता है। अब एपीडा और भारतीय मसाला बोर्ड ने बीजीय मसालों, मूंगफली, तिल, ग्वार जैसी अन्य फसलों, औषधीय पौधों और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात बढ़ाने के लिए राजस्थान को एक संभावित राज्य के रूप में प्राथमिकता दी है। राजस्थान सरकार ने हाल ही मसाला प्रकोष्ठ स्थापना की है, जिससे राज्य में मसालों का उत्पादन, विपणन, प्रसंस्करण, अनुसंधान एवं निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके।</p>
<p>राजस्थान के दूरदराज के मरुस्थलीय क्षेत्रों में स्थित विषम जलवायु में भी मसाला उत्पादन किया जा रहा है। कम लागत में अच्छी पैदावार के साथ ही इससे अच्छी आय मिल जाती है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा बीज मसाला उत्पादक देश है। दुनिया की करीब 60 प्रतिशत मसाला आपूर्ति भारत से ही होती है। देश में हर साल अनुमानित 12.50 लाख हैक्टेयर में मसालों की खेती होती है, जिससे करीब 10.5 लाख टन मसालों का उत्पादन होता है। इनमें जीरा और धनिया करीब 10 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में उगाया जाता है।</p>
<p>मसाला मूलतः वनस्पति उत्पाद या उनका मिश्रण होता है, जो खाद्य पदार्थों को सुगंधित बनाने तथा स्वाद बढ़ाने में इस्तेमाल किया जाता है। यह अनेक बीमारियों से छुटकारा दिलाता है। राजस्थान के किसानों ने राज्य को एक समृद्ध कृषि केंद्र में बदलने का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है।</p>
<p>राजस्थान कृषि निर्यात में 1.5 प्रतिशत का योगदान करता है। सरसों, ग्वार, चना, दाल, सोयाबीन, तिलहन और बीज मसालों के उत्पादन में इसका बड़ा हिस्सा है। खाद्य तेल और प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत, मूंगफली और तिल, राजस्थान में व्यापक रूप से उगाई जाने वाली महत्वपूर्ण तिलहन फसलें हैं। इसी तरह, बागवानी फसलों के मामले में राजस्थान में अजवायन, मेंहदी, इसबगोल, सब्जियों और फलों में संतरे और अनार का उत्पादन काफी उत्पादन होता है।</p>
<p>वर्षों से यहां संरक्षित खेती में उच्च तकनीक वाले बुनियादी ढांचे को अपनाया गया है, जिसने क्लस्टर आधारित और मांग उन्मुख उत्पादन योजना का मार्ग प्रशस्त किया है। साथ ही पशुपालन में भी इसका योगदान उत्कृष्ट है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा भारत से अमेरिका को अनार (पॉमग्रेनेट) और अनार के दानों (पॉमग्रेनेट एरिल) के निर्यात की अनुमति राजस्थान के अनार किसानो के लिए मील का पत्थर साबित होगी।</p>
<p><strong>सुगंधित</strong> <strong>और</strong> <strong>बीजीय</strong> <strong>मसाले</strong> <strong>वाली</strong> <strong>फसलें</strong></p>
<p>कृषि जैव विविधता में समृद्ध राजस्थान अद्वितीय सुगंधित पौधों का उत्पादन करता है। यह जीरा, धनिया, सौंफ, अजवायन, तिल और सौंफ जैसे पौधों के लिए भी जाना जाता है जिनमें औषधीय गुण होते हैं। यहां क्षेत्र विशेष फसलों का भी उत्पादन होता है जिनमें मोठ बीन, ग्वार, नागौरी पान मेथी, मेथी, इसबगोल और मेहंदी शामिल हैं। मूल्यवर्धित बीजीय मसाले और कच्चे मसाले अब राजस्थान से चीन, बांग्लादेश, अमेरिका, यूरोप, मिस्र, मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशियाई सहित 135 से अधिक देशों में निर्यात किए जाते हैं।</p>
<p><strong>जैविक</strong> <strong>उत्पादन</strong> <strong>में</strong> <strong>शीर्ष पर</strong></p>
<p>राजस्थान जैविक खेती में भाग लेने वाले भारत के सबसे बड़े राज्यों में से एक है, जिसमें पंजीकृत जैविक कृषि क्षेत्र 80,000 हेक्टेयर से अधिक है। इसने शुष्क पश्चिमी राजस्थान में बागवानी फसलों से आय सृजन में एक और आयाम जोड़ा है। उत्पादों के प्रमाणीकरण और विपणन, फसल कटाई के बाद प्रबंधन, कृषि प्रसंस्करण और फलों और सब्जियों के मूल्यवर्धन के साथ विशेष जैविक खेती प्रथाओं पर किसानों को शिक्षित करके इसे आगे बढ़ाया गया। एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) आधारित उत्पादन छोटे किसानों के बीच लोकप्रिय हो रहा है, जो बाजार में प्रीमियम पर बिकता है। एग्रीगेटर और निर्यातक भी इसे किसानों से खरीदते हैं।</p>
<p><strong>किसानों</strong> <strong>के</strong> <strong>हित</strong> <strong>में</strong></p>
<p>हाल ही गुणवत्ता और अवशेष मुक्त उत्पादन करने और उत्पादन प्रौद्योगिकी को लोकप्रिय बनाने के प्रयास में भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने जोधपुर में एसएबीसी में पश्चिमी शुष्क क्षेत्र के लिए बायोटेक किसान हब की स्थापना की। प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए डीबीटी-एसएबीसी बायोटेक किसान हब आधुनिक उपकरणों और तकनीकों के साथ छोटे किसानों तक पहुंचा।</p>
<p><strong>इन्क्यूबेशन</strong> <strong>केंद्र</strong></p>
<p>राजस्थान में कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय और कृषि निर्यात संवर्धन नीति, 2019 के कार्यान्वयन के साथ कृषि निर्यात का पारिस्थितिकी तंत्र धीरे-धीरे विकसित हो रहा है। किसानों को प्रोसेसर और निर्यातकों से जोड़ने जैसे बाजार प्रोत्साहन के साथ भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं की स्थापना को बढ़ावा मिला है। विशिष्ट फसलों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की संभावनाएं बढ़ी हैं। इसके अलावा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के विभिन्न संस्थानों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (एसएयू) में कृषि और खाद्य इन्क्यूबेशन सुविधाओं की स्थापना ने कृषि निर्यात के अवसर प्रदान किए हैं।</p>
<p><strong>भविष्य</strong> <strong>में</strong> <strong>संभावनाएं</strong></p>
<p>कृषि निर्यात में तेजी लाने के लिए राजस्थान को उद्यमियों, स्टार्टअप, कृषि व्यवसायों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की पहचान और सुविधाओं पर ध्यान देने की जरूरत है। इससे राज्य से कृषि खाद्य निर्यात की संभावनाओं के बारे में जागरूकता पैदा होगी। गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने और मेगा कृषि खाद्य पार्कों और इन्क्यूबेशन केंद्रों में कृषि उद्यमियों को संसाधनों के आवंटन और प्रणाली के क्षमता विकास को प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी। राज्य को गुणवत्ता मानकों, प्रमाणन, पंजीकरण और स्वच्छता उपायों और वित्तीय प्रोत्साहनों पर हितधारकों की सहायता करनी चाहिए। यह कृषि वस्तुओं और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात की प्रक्रिया को सुगम बनाने में सहायता करेगा।</p>
<p>राजस्थान के जोधपुर और कोटा में खाद्य और कीटनाशक अवशेष परीक्षण सुविधा स्थापित करने की सख्त आवश्यकता है। एपीएमसी की प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, जैविक उत्पादन के पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने, कृषि उद्योग को राजस्थान से कच्चे माल की आपूर्ति बढ़ाने और खाद्य तथा मसाला पार्क में बुनियादी ढांचे में बदलाव करने से वास्तविक कृषि खाद्य निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<p><em><strong>(लेखक दक्षिण एशिया जैव प्रौद्योगिकी केंद्र के संस्थापक निदेशक और एपीडा के बोर्ड सदस्य हैं)</strong></em></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_62013a6ecbde5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय अवसरों पर ध्यान देना जरूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_62013a6ecbde5.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पश्चिम यूपी में गुरुवार को मतदान, यहां की राजनीति में गन्ना और चीनी उद्योग क्यों है सदाबहार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/why-sugarcane-and-sugar-industry-is-an-evergreen-issue-in-the-politics-of-uttar-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 05 Feb 2022 08:49:24 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/why-sugarcane-and-sugar-industry-is-an-evergreen-issue-in-the-politics-of-uttar-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में गन्ना और राजनीति को अलग करना लगभग असंभव सा है। इसकी दो वजह हैं। पहली यह कि गन्ना और चीनी उद्योग राज्य की आर्थिक गतिविधियों की लाइफलाइन की तरह है। इससे 40 लाख से अधिक किसान सीधे जुड़े हैं। यह राज्य का सबसे बड़ा उद्योग भी है। पिछले पांच सीजन से राज्य देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक बना हुआ है। यह एथनॉल का सबसे बड़ा उत्पादक होने के साथ पेट्रोल में 10 फीसदी ब्लैंडिंग हासिल करने वाला देश का पहला राज्य भी है। दिलचस्प बात यह है कि यह सब गन्ना और चीनी उद्योग पर केंद्रित राजनीति के साथ-साथ पिछले दो दशकों से कुछ कम अवधि में ही हो गया है। इस उपलब्धि के लिए तीन अलग राजनीतिक दल दावा कर सकते हैं। समाजवादी पार्टी, बसपा और मौजूदा भाजपा सरकार तीनों इस उपलब्धि को भुना सकती हैं। दूसरी वजह यह है कि इससे इतनी बड़ी संख्या में लोग जुड़े हैं कि राजनीतिक रूप से इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है।</p>
<p>इसकी शुरुआत 2003 में सत्ता में आई मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार ने की। वह 2004 में चीनी उद्योग में निवेश के लिए चीनी उद्योग प्रोत्साहन नीति लेकर आई। उस समय राज्य की कुल गन्ना पेराई क्षमता चार लाख टन थी। इस नीति के चलते अनेक नई चीनी मिलें स्थापित हुईं और पुरानी चीनी मिलों की पेराई क्षमता का विस्तार हुआ। 2006-07 में राज्य की कुल गन्ना पेराई क्षमता सात लाख टन पहुंच गई और मिलों की संख्या में भी काफी बढ़ोतरी हुई। इस समय राज्य में कुल 120 चीनी मिलें हैं और इनकी कुल पेराई क्षमता 7,87,275 टन प्रति दिन की है। देखा जाए तो राज्य में किसी एक सरकार के कार्यकाल में चीनी मिलों की स्थापना और निवेश का सबसे महत्वपूर्ण कार्यकाल मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व वाला रहा है।</p>
<p>उसके बाद 2007 में मायावती सत्ता में आईं। उनकी सरकार ने इस निवेश प्रोत्साहन नीति के तहत चीनी मिलों को मिलने वाले प्रोत्साहन में कटौती कर दी। लेकिन मायावती के कार्यकाल में गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई। उनके पांच साल के कार्यकाल में कुल 120 रुपये प्रति क्विटंल की बढ़ोतरी हुई। चीनी उद्योग को एक दूरी पर रखते हुए मायावती ने सख्त रुख अपनाया और चीनी की कीमतों को बेहतर रखने के लिए राज्य में रॉ शुगर के आयात पर भी रोक लगा दी थी। इसके साथ ही चीनी मिलों पर गन्ना किसानों को समय पर भुगतान करने को लेकर उनकी सरकार का रुख बहुत सख्त रहा। यहां यह बात भी सच है कि राजनीति के केंद्र में रहने वाले गन्ने और चीनी के मुद्दों ने सबसे अधिक चीनी मिल लगवाने वाले मुलायम सिंह यादव को दोबारा गद्दी नहीं सौंपी। सबसे अधिक गन्ना एसएपी बढ़ाने वाली मायावती को भी दोबारा गद्दी नहीं मिली और वह सत्ता से बाहर हो गईं।</p>
<p>मायावती के बाद सत्ता में आई अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान चीनी उद्योग और किसानों की मुश्कलें बढ़ीं, क्योंकि तब देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों में भारी गिरावट आ गई थी। इसके बावजूद उनके कार्यकाल में गन्ने के एसएपी में 65 रुपये प्रति क्विटंल की बढ़ोतरी हुई और राज्य सरकार ने उद्योग की मदद के लिए गन्ना किसानों को करीब 3000 करोड़ रुपये का सीधे भुगतान किया। हालांकि तीन साल तक गन्ने का एसएपी फ्रीज भी रहा।</p>
<p>राज्य में चीनी उद्योग और गन्ना किसानों के मामले में तीसरा बड़ा बदलाव मौजूदा योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में हुआ है। इसमें दो बातें अहम रहीं। एक तो गन्ने की नई प्रजाति सीओ-0238 का क्षेत्रफल तेजी से बढ़ने के चलते गन्ना की उत्पादकता में भारी बढ़ोतरी हुई। दूसरे, चीनी की रिकवरी भी दो से तीन फीसदी तक बढ़ गई। किसानों को गन्ने की अधिक उत्पादकता का फायदा मिला और चीनी मिलों को अधिक रिकवरी का। लेकिन एसएपी के मामले में किसानों को इस दौरान मायूस होना पड़ा, क्योंकि पांच साल में दो बार में केवल 35 रुपये प्रति क्विटंल की वृद्धि हुई। तीन साल एसएपी फ्रीज रहा। मौजूदा सरकार की उपलब्धि राज्य में एथनॉल उत्पादन का रफ्तार पकड़ना रही है। केंद्र सरकार द्वारा एथनॉल ब्लैंडिंग की नीति लागू करने के लिए दिये गये वित्तीय प्रोत्साहन और डिस्टीलरी स्थापित करने के लिए जरूरी मंजूरी प्रक्रिया में तेजी लाना इसकी वजह है।</p>
<p>इस समय उत्तर प्रदेश में एथनॉल की कुल उत्पादन क्षमता 107.21 करोड़ लीटर हो गई है। साल 2016-17 में उत्तर प्रदेश में एथनॉल की उत्पादन क्षमता 43.25 करोड़ लीटर थी। यानी यह 2020-21 में दोगुना से भी अधिक हो गई। इस अवधि में राज्य में एथनॉल उत्पादन करने वाली डिस्टीलरी की संख्या भी 44 से बढ़कर 75 हो गई है। राज्य में चीनी उद्योग का लक्ष्य ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) को चालू एथनॉल सीजन (दिसंबर 2021 से नवंबर 2022) में 160 करोड़ लीटर एथनॉल की आपूर्ति करने का है।</p>
<p>इस तरह राज्य में गन्ना और चीनी उद्योग की इस कामयाबी में तीन सरकारों की हिस्सेदारी है। भले ही पर्यावरणविदों का एक वर्ग कुछ भी दावा करे, हकीकत यह है कि उत्तर प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा जो सहारनपुर से शुरू होकर अपर दोआब, रुहेलखंड, तराई और पूरब में देवरिया तक जाता है, वह गन्ना उत्पादन के बहुत अनुकूल है। यहां पानी है, गन्ना उत्पादन के लिए बेहतर जलवायु है और अब उसके प्रसंस्करण के लिए देश के सबसे एफिशिएंट संयंत्रों का जाल बिछ गया है। यहां इसकी खेती करने वाले 40 लाख से अधिक किसान सालाना 20 करोड़ टन से अधिक गन्ना का उत्पादन करते हैं। उनके साथ काम करने वाले करीब उतने ही मजदूर हैं। राज्य की सबसे बड़ी इंडस्ट्री चीनी उद्योग में भी करीब 1.5 लाख कामगार और मजदूर काम करते हैं। लाखों लोग गुड़ और खांडसारी उद्योग में काम कर अपनी आजीविका और बिजनेस चलाते हैं। चीनी उद्योग के सहउत्पादों और उससे जुड़े उद्योगों में भी लोगों को काम मिलता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि 24 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में एक बड़ा हिस्सा प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से गन्ना और चीनी उद्योग से अपनी आजीविका हासिल करता है।</p>
<p>देश की राजनीति के लिए सबसे अहम उत्तर प्रदेश अब विधानसभा चुनावों में जा रहा है और 10 फरवरी को पहले चरण का मतदान होगा। सात चरणों में होने वाले मतदान के बाद 10 मार्च को आने वाले नतीजे तय करेंगे कि अगली सरकार किसकी होगी। लेकिन यह बात तय है कि गन्ना हर सरकार की नीतियों के केंद्र में था और रहेगा। यही वजह है कि राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य में जबरदस्त चुनाव प्रचार में लगे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सभी के वादों और उपलब्धियों में गन्ने का जिक्र होता है। वहीं मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और राज्य में नई सरकार के दावेदार अखिलेश यादव भी गन्ना किसानों को लुभाने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं। सपा की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी की कामयाबी के लिए गन्ना क्षेत्र ही सबसे अहम है, क्योंकि यही उनकी पार्टी का मुख्य प्रभाव क्षेत्र है।</p>
<p>सरकार किसी भी पार्टी की बने और मुख्यमंत्री कोई भी हो, उसके सामने राज्य में गन्ना उत्पादन की मौजूदा स्थिति बेहतर नतीजे लाने की क्षमता रखती है। केंद्र सरकार ने एथनॉल ब्लैंडिंग का स्तर 15 फीसदी तक ले जाने की नीति बनाई है। इसकी सबसे अधिक आपूर्ति उत्तर प्रदेश से ही संभव है। लेकिन इस पूरे गणित में किसान कहां है और किसान व उद्योग के हितों के बीच कैसा संतुलन बनता है, वही बात सरकार और राजनीति का भी संतुलन बनाने का काम करेगी।</p>
<p>बात केवल चीनी, बिजली और एथनॉल तक की नहीं है, गन्ने के जूस से सीधे एथनॉल बनाने की नीति के चलते चीनी उत्पादन जरूरी नहीं होगा। एथनॉल बनाने के बाद उससे निकलने वाले अपशिष्ट में पोटाश उर्वरक है, तो चीनी बनाने के समय निकलने वाले प्रैसमड को कंप्रैस कर बॉयो सीएनजी का उत्पादन भी होने लगा है। यानी एक कच्चे माल गन्ने से तैयार होने वाले उत्पादों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसलिए उत्तर प्रदेश को मिनी ब्राजील में तब्दील किया जा सकता है। लेकिन इसका फायदा अगर किसानों के साथ बांटा जाएगा तो राजनीतिक नतीजे भी बेहतर हो सकते हैं।</p>
<p><strong>&nbsp;</strong></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_61fd47aa92271.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पश्चिम यूपी में गुरुवार को मतदान, यहां की राजनीति में गन्ना और चीनी उद्योग क्यों है सदाबहार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_61fd47aa92271.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बजट में अनब्लेंडेड पेट्रोल पर अतिरिक्त एक्साइज के प्रावधान से एथेनॉल इंडस्ट्री को बढ़ावा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/ethanol-gets-booster-with-2-rupees-excise-levy-on-unblended-petrol.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 04 Feb 2022 08:54:54 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/ethanol-gets-booster-with-2-rupees-excise-levy-on-unblended-petrol.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>घरेलू एथेनॉल इंडस्ट्री को आम बजट से एक बूस्टर डोज मिला है। बजट में प्रावधान किया गया है कि 1 अक्टूबर 2022 से अनब्रांडेड पेट्रोल पर दो रुपए प्रति लीटर की दर से एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लगाई जाएगी। एथेनॉल का बड़ा हिस्सा गन्ने के रस से बनाया जाता है। इसलिए जब इस प्रावधान पर अमल होगा तो पेट्रोल में मिलाने के लिए ज्यादा एथेनॉल की मांग होगी। इससे चीनी उद्योग को बाजार के मौसमी उतार-चढ़ाव से बचाने में मदद मिलेगी। इससे किसानों को भी फायदा होगा।</p>
<p>राजस्व विभाग की अधिसूचना के अनुसार ब्लैंडेड फ्यूल (जिसमें एथेनॉल/मेथनॉल मिलाया जाता है) का बीआईएस मानकों के अनुसार होना जरूरी है। अभी ब्लेंडिंग 10 फ़ीसदी होती है। दो रुपये प्रति लीटर की एडिशनल एक्साइज ड्यूटी से बचने के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियां यह सुनिश्चित करेंगी कि वह ब्लडिंग के लक्ष्य को हासिल करें।</p>
<p>इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि इससे सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को बढ़ावा मिलेगा और एथेनॉल की मांग भी बढ़ेगी। एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के लिए केंद्र सरकार ने 2021-22 के संशोधित अनुमानों में 160 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। 2022-23 के लिए बजट में 300 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसका मकसद एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए मिलों को वित्तीय मदद उपलब्ध कराना है।</p>
<p>सरकार के इस निर्णय से एथेनॉल डिस्टलरी की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा जिससे सरप्लस चीनी में कमी आएगी और ब्लेंडिंग के लिए एथेनॉल की आपूर्ति बढ़ाई जा सकेगी। आखिरकार इस निर्णय से भारत का आयात बिल कम होगा और वायु प्रदूषण भी घटेगा।</p>
<p>इस बीच ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 31 जनवरी को एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट रुचि पत्र का चौथा चक्र जारी किया है। इसके मुताबिक 2021-22 के एथेनॉल सप्लाई वर्ष में यह कंपनियां लगभग 95 करोड लीटर एथेनॉल खरीदेंगी। यह आकलन 11 फ़ीसदी ब्लेंडिंग के आधार पर किया गया है। इससे भी इथेनॉल की मांग बढ़ेगी और सरप्लस चीनी को डाइवर्ट किया जा सकेगा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने निविदा जमा करने की आखिरी तारीख 4 फरवरी रखी है।</p>
<p>चीनी मिलें इस बात से भी खुश हैं कि बजट में 2021-22 के संशोधित अनुमानों में चीनी उद्योग के लिए आवंटन 2,507 करोड़ रुपए बढ़ा दिया गया है। बजट आवंटन 4,337 करोड़ रुपए का था, संशोधित अनुमानों में इसे बढ़ाकर 6,844 करोड़ किया गया है।</p>
<p>इसका मुख्य मकसद 2019-20 के लिए चीनी मिलों की मदद करने की योजना और 2020-21 के लिए निर्यात समर्थन योजना के तहत मिलों के बकाए का भुगतान करना है। इस्मा का कहना है कि यह सरकार की तरफ से उठाया गया एक सकारात्मक कदम है। इस भुगतान से किसानों को पैसे दिए जाएंगे जिससे उनका बकाया कम होगा और सीधे-सीधे किसान समुदाय लाभान्वित होगा।</p>
<p>31 जनवरी तक पूरे देश में 507 मिलें चल रही थीं। उन्होंने 187 लाख टन से अधिक चीनी का उत्पादन किया है। पिछले साल 491 मिलों ने 177 लाख टन चीनी का उत्पादन किया था। महाराष्ट्र में&nbsp;72.9 लाख टन और उत्तर प्रदेश में 50.3 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_61041c81aea9c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बजट में अनब्लेंडेड पेट्रोल पर अतिरिक्त एक्साइज के प्रावधान से एथेनॉल इंडस्ट्री को बढ़ावा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_61041c81aea9c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत के सबसे बड़े ग्रेन प्लेटफॉर्म आर्य ने जुटाए छह करोड़ डॉलर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india’s-largest-grain-commerce-platform-arya-ag-raises-usd-60-million-series-c.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 19 Jan 2022 06:32:49 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/india’s-largest-grain-commerce-platform-arya-ag-raises-usd-60-million-series-c.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड ग्रेन कॉमर्स प्लेटफॉर्म आर्य.एजी ने &lsquo;सी सीरीज&rsquo; फंडिंग दौर के समापन की घोषणा की है। कंपनी ने इस राउंड में इक्विटी और ऋण के मिश्रण से 6 करोड़ अमेरिकी डॉलर जुटाए हैं। इक्विटी राउंड में मुख्य रूप से एशिया इम्पैक्ट एसए, लाइटरॉक इंडिया और कोना कैपिटल ने हिस्सा लिया। इस एग्रीटेक प्लेटफॉर्म ने अन्य स्रोतों के अलावा अमेरिका स्थित इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (डीफएसी) से ऋण भी जुटाया। यह जानकारी आर्य के सह-संस्थापक चट्टानाथन देवराजन ने दी।</p>
<p>आर्य प्लेटफॉर्म कृषि उत्पादों के विक्रेताओं और खरीदारों को जोड़ने का काम करता है। कंपनी सही मात्रा, गुणवत्ता और भुगतान का दावा भी करती है। उसका यह भी कहना है कि इस प्लेटफॉर्म के कारण किसानों को अफरा-तफरी में अपनी उपज बेचने की नौबत नहीं आती। आर्य 10 हजार से ज्यादा कमोडिटी स्टोरेज से जुड़ी है, इसलिए यह एसएमई और कॉरपोरेट खरीदारों को पूरे साल कमोडिटी सप्लाई कर सकती है।</p>
<p>देवराजन ने बताया कि आर्य के प्लेटफॉर्म पर दो अरब डॉलर से अधिक मूल्य के कृषि उत्पादों की उपलब्धता है। उन्होंने कहा, यह संख्या और बढ़ेगी क्योंकि हम देश भर के गोदामों से डेटा एकत्र कर रहे हैं। इस राउंड की फंडिंग से हमें अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने और नई सेवाएं शुरू करके कृषि के क्षेत्र में भारत का सबसे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बनने में मदद मिलेगी।</p>
<p>इस दौरान एशिया इम्पैक्ट एसए के निदेशक माटेओ पुसिनेरी ने कहा, &ldquo;कोराना महामारी के दौरान हमने आर्य को पूरे भारत में कृषि-वाणिज्य को बदलते देखा है। आर्य पूरे एशिया में ग्रामीण इलाकों के वंचित कृषि समुदाय को बड़े पैमाने पर बाजारों से जोड़ने में एशिया इम्पैक्ट के दृष्टिकोण को पूरा करने में मदद करेगा। हमें विश्वास है कि प्रसन्ना राव, आनंद चंद्रा और देवराजन के नेतृत्व में आर्य ग्रामीण भारत के सतत विकास में मददगार अलग ईकोसिस्टम तैयार करेगा।&rdquo;</p>
<p>लाइटरॉक इंडिया के पार्टनर वैदेही रवींद्रन ने कहा, "हम आर्य के साथ अपनी निरंतर साझेदारी को लेकर उत्साहित हैं क्योंकि उनके पास देश का सबसे बड़ा अनाज प्लेटफॉर्म है।" उन्होंने कहा, पिछले कुछ वर्षों में आर्य ने एक मजबूत और लाभदायक नींव तैयार की है। आगे नए बाजारों के जुड़ने से इसका विकास बहुत तेजी से होगा। इनोवेशन के साथ बेहतर जोखिम प्रबंधन वाली टीम के साथ हमें उम्मीद है कि आर्य पूरे अनाज बाजार को बदलेगा।</p>
<p>कोना कैपिटल के पार्टनर वरुण मल्होत्रा ​​ने कहा, &nbsp;हमारा मानना ​​है कि अधिक पारदर्शिता लाकर लंबी अवधि के संरचनात्मक परिवर्तनों को तेज किया जा सकता है। ग्रामीण भारत में आर्य की जो पहुंच है, उसकी कोई सानी नहीं। इसका सर्विस मॉडल तकनीक संचालित है। इन बातों ने आर्य को भारत में सबसे तेजी से बढ़ते कृषि-वाणिज्य प्लेटफार्म में से एक बना दिया है। आर्य गुणवत्ता, मात्रा और भुगतान पर पूर्ण पारदर्शिता और आश्वासन के माध्यम से फसल के बाद के कृषि लेनदेन में विश्वास की खाई को सफलतापूर्वक पाट रहा है। हम आर्य के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत करने के लिए उत्साहित हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61e76311da18f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत के सबसे बड़े ग्रेन प्लेटफॉर्म आर्य ने जुटाए छह करोड़ डॉलर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61e76311da18f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कारगिल ने भारत में खोला पहला फूड इनोवेशन सेंटर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/cargill-opens-first-food-innovation-centre-in-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 11 Jan 2022 05:49:08 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/cargill-opens-first-food-innovation-centre-in-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>नई दिल्ली</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">वैश्विक स्तर की खाद्य की &nbsp;प्रमुख कंपनी &nbsp;कारगिल ने अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) फोकस पर करते हुए 10 जनवरी को गुरुग्राम, हरियाणा में कारगिल इनोवेशन सेंटर खोला है। इससे भारत में भारत में खाद्य और पेय बाजार (एफएंडबी) के लिए बाजार के रूझान के हिसाब नये नये नवाचार औऱ समाधान विकसित किया जा सके।</p>
<p style="text-align: justify;">कारगिल ने कहा कि वह भारत में अपने एफएंडबी कस्टमर साथ उपभोक्ता मांगों की पहचान करने, <span>वैश्विक उद्योग के रुझानों को स्थानीय अनुप्रयोगों में बदलने और ग्राहक उत्पाद नवाचार पाइपलाइनों में तेजी लाने के लिए साझेदारी करेगी। जिससे उपभोक्ताओं के लिए स्वस्थ</span>, <span>पौष्टिक भोजन विकल्पों का विकास कर सके </span>।</p>
<p style="text-align: justify;">कंपनी ने एक बयान में कहा कि यह भारत में यह पहलाअत्याधुनिक इनोवेशन सेंटर जो लगभग 17,000 वर्ग फुट में फैला हुआ है। इसमें सेनसुरी लेबोरेटरी और किचेन डिस्पले शामिल है <span>जिसमें डेयरी</span>, <span>पेय</span>, <span>बेकरी और सुविधा खाद्य उद्योग के साथ-साथ अन्य स्पेशल &nbsp;कल्यूनेरी&nbsp; औऱ अनुप्रयोगों की सेवा करने की क्षमता होगी। &nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>कारगिल इंडिया के प्रेसिडेंट साइमन जॉर्ज ने कहा कि स्वाद से समझौता किए बिना उपभोक्ता तेजी से स्वस्थ भोजन के&nbsp; विकल्प ओर बढ़ रहे हैं और इसके लिए उत्पाद नवाचार की जरूरत है। इस इनोवेशन सेंटर के माध्यम से हम भारत में अपने कस्टमर&nbsp; को समझदार, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के लिए इनोवेटिव समाधान के लिए सह-निर्माण केंद्र बिंदु बना रहे हैं&nbsp; जिससे</span><span> हम स्वस्थ और पौष्टिक उत्पादों को विकसित करने में मदद करेंगे और जो बाजार के रुझानों को प्रतिबिंबित करता हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इनोवेशन सेंटर में 27 फूड एक्सपर्ट और वैज्ञानिक होंगे और यह अकादमिक, <span>कृषि व्यवसाय और खाद्य क्षेत्रों की इच्छुक प्रतिभाओं </span>​को भी अवसर प्रदान करेगा। यह सभी आकार की कंपनियों के लिए आरएंडडी सहयोग की भी अनुमति देगा।</p>
<p style="text-align: justify;">कारगिल का&nbsp; यह केंद्र&nbsp; खाद्य तेलों और विशेष वसा सहित विभिन्न उद्योग क्षेत्रों में कारगिल की विशेषज्ञता को जोड़ता है। <span>स्टार्च</span>, <span>स्वीटनर</span>, <span>टेक्सचराइज़र,</span>&nbsp;<span>कोको और चॉकलेट के एक ही छत के नीचे मिश्रित सामग्री</span>&nbsp;<span>एफ एंड बी उद्योग के लिए एक संपूर्ण उत्पाद पर एक नवाचार समाधान ला रही है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">कारगिल ने कहा कि यह केंद्र ग्राहकों को स्वाद और बनावट बनाए रखते हुए एक स्वस्थ और स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने के लिए कम वसा, नमक और चीनी वाले उत्पादों को बेहतर बनाने में मदद करेगा।</p>
<p style="text-align: justify;">कारगिल ने भारत में,<span>1987 में कारोबार शुरू किया था &nbsp;यह रिफाइंड तेल</span>, <span>खाद्य पदार्थों</span>, <span>अनाज और तिलहन</span>, <span>कपास</span>, <span>पशु पोषण</span>, <span>जैव-औद्योगिक व्यापार ,स्टक्चर फाइनेंस में काम करता है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">कारोबार में 10 से अधिक विनिर्माण संयंत्रों के साथ, <span>कारगिल इंडिया नेचर फ्रेश</span>, <span>जेमिनी</span>, <span>स्वीकर</span>, <span>लियोनार्डो ऑलिव ऑयल</span>, <span>रथऔर सनफ्लावर ब्रांडों जैसे खाद्य तेलों के प्रमुख उपभोक्ता ब्रांडों से हाइड्रोजनीकृत वसा का &nbsp;मार्केटिग करती है। यह </span>'<span>नेचर फ्रेश</span>' <span>ब्रांड के तहत गेहूं का आटा बेचता है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61dcccd8ba1b9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कारगिल ने भारत में खोला पहला फूड इनोवेशन सेंटर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61dcccd8ba1b9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रिफाइंड खाद्य तेल के आयात  को अधिकतम सीमा शुल्क  के जरिये हतोत्साहित करना जरूरीः  बीकेएस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/import-of-refined-oil-instead-of-crude-oil-will-hurt-the-self-reliance-of-farmers-and-country.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 28 Dec 2021 22:59:49 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/import-of-refined-oil-instead-of-crude-oil-will-hurt-the-self-reliance-of-farmers-and-country.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने कहा है कि खाद्य तेलों में सस्ते खाद्य तेस को मिलाने से इसकी कीमत कम हो जाती है। नतीजतन, भारत में उत्पादित तिलहन लाभहीन हो जाते हैं। इसका देश में तिलहन क्षेत्रफल पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और देश में आयातित तेल पर निर्भरता बढ़ी है। किसान संघ द्वारा जारी एक बयान में यह बातें कही गई हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">बीकेएस के अनुसार, खाद्य तेल पर आयात शुल्क को 17.5 प्रतिशत से घटाकर 12.5 प्रतिशत करने का भारत सरकार का हालिया निर्णय विनाशकारी है। क्रूड ऑयल खाद्य तेल की जगह रिफाइंड तेल का आयात देश के किसानों और देश की आत्मनिर्भरता दोनों को नुकसान पहुंचाएगा जो अंततः भारत को नुकसान पहुंचाएगा।भारत में खाद्य तेल आयात मुख्य रूप से मलेशिया और इंडोनेशिया से सस्ते पाम तेल हैं। यहां की अनुकूल जलवायु उत्पादन को बढ़ाती है और लागत को कम करती है। यह देश दूसरे देशों को बहुत सस्ते दामों पर निर्यात करते हैं और भारत इसका मुख्य खरीदार है क्योंकि देश के कुल खपत का करीब 70 फीसदी खाद्य तेल विदेशों से आयात किया जाता है। यह आयातित तेल अपने सस्ते होने के कारण देश में सस्ते में बिक जाते हैं। परिणामस्वरूप किसानों को देश में उत्पादित तेल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">इसके लिए भारतीय किसान संघ ने सुझाव दिया है कि सबसे जरूरी स्थिति&nbsp; में क्रूड खाद्य तेल का ही आयात किया जाना चाहिए, न कि रिफाइंड आरबीडी पॉमोलीन का। इस पर आयात शुल्क को कम नहीं किया जाना चाहिए। किसी भी स्थिति में न्यूनतम समर्थन मूल्य का आयात नहीं किया जाना चाहिए। इसके बजाय, आयात शुल्क को अधिकतम सीमा तक बढ़ाया जाना चाहिए ताकि भविष्य में आयात बंद हो जाए।</p>
<p style="text-align: justify;">तिलहन किसानों को बाजार में खाद्य तेल की कीमत बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन के रूप में सब्सिडी की राशि क्षेत्र के अनुपात में उनके खाते में जमा की जानी चाहिए जिससे लागत कम हो जाएगी। गरीबी रेखा से नीचे की आबादी को औसत उपभोग की राशि पर नकद अनुदान उपलब्ध होना चाहिए। सभी खाद्य तेलों में ब्लैंडिंग को मिलावट माना जाना चाहिए। हाल ही में सरसों तेल में ब्लैंडिंग करने के अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। लोगों को शुद्ध सरसों का तेल मिला और सरसों किसानों को अच्छे दाम मिले जिसके चलते इस साल सरसों का रकबा बढ़ा है।</p>
<p style="text-align: justify;">देश भर में तिलहन फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सुनिश्चित की जानी चाहिए। तिलहन और दालों का एमएसपी सी-2 प्लस 50 फीसदी के आधार पर तय होना चाहिए। तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ने से बॉयोडायवर्सिटी भी बनी रहेगी। तिलहन और दालों की एमएसपी पर खरीद होनो से धान की सरकारी खरीद भी घटेगी। इसके साथ ही बीकेएस ने कहा है कि दिलन और दालों में दोबारा वायदा कारोबार शुरू किया जाना चाहिए लेकिन इसके लिए डिलीवरी की शर्त होनी चाहिए। यह कदम देश को खाद्य तेलों और दालों में तीन साल में आत्मनिर्भर कर सकते हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/09/image_750x500_613a1bcdb0fbc.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रिफाइंड खाद्य तेल के आयात  को अधिकतम सीमा शुल्क  के जरिये हतोत्साहित करना जरूरीः  बीकेएस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/09/image_750x500_613a1bcdb0fbc.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी मिल 10 फीसदी इथेनॉल ईधन सम्मिश्रण हासिल करने के लिए पूरी तरह अग्रसर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sugar-mill-all-set-to-achieve-ten-percent-ethanol-fuel-blending.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 20 Dec 2021 22:36:02 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sugar-mill-all-set-to-achieve-ten-percent-ethanol-fuel-blending.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">घरेलू चीनी उद्योग चालू &nbsp;साल 2021-22 में 10 फीसदी &nbsp;एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल करने को लेकर काफी सकरात्मक है। 10 फीसदी सम्मिश्रण के लिए इथेनॉल की 4.59 बिलियन लीटर (बीएल) के कुल जरूरत &nbsp;के मुकाबले ऑयल मार्केटिग कंपनियों ने (ओएमसी) एक्सप्रेसन ऑफ इंट्रेस्ट के पहले दो चक्रो के बाद अभी तक 3.66 बिलियन लीटर आवंटित किया है ।सोमवार को इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने कहा, "हमें चालू वर्ष में 10 फीसदी &nbsp;ईधन सम्मिश्रण हासिल करने की उम्मीद है क्योंकि शेष आवश्यकता को बाद के ईओआई में आवंटित किया जाएगा</p>
<p style="text-align: justify;">30 नवंबर 2021 को समाप्त होने वाले 2020-21 इथेनॉल सप्लाई ईयर &nbsp;(इसआई) में, भारत में डिस्टिलरीज द्वारा लगभग 3.02 बीएल की आपूर्ति की गई है जिससे 8.1फीसदी का अखिल भारतीय औसत सम्मिश्रण प्राप्त हुआ है। इस्मा ने कहा, &ldquo;यह अपने आप में बडा रिकार्ड है &nbsp;क्योकि 2019-20 में केवल 5 फीसदी इथेनॉल ब्लेडिंग हासिल हुई</p>
<p style="text-align: justify;">इस बीच, भारत में चीनी मिलों ने, 15 दिसंबर तक, 2020-21 गन्ना सीजन में (अक्टूबर-सितंबर) की &nbsp;किए गए 73.3लाख &nbsp;टन उत्पादन की तुलना में इस साल का अवधि में 78 लाख टन (एमटी) चीनी का उत्पादन किया है । पश्चिमी राज्यों &nbsp;में गन्ने की पेराई जल्दी शुरू होने के कारण चालू वर्ष उत्पादन अधिक है।</p>
<p style="text-align: justify;">देश के शीर्ष चीनी उत्पादक &nbsp;राज्य उत्तर प्रदेश में 117 मिलें चालू हैं और उन्होंने 2 मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन किया है। महाराष्ट्र में, 186 चीनी मिलों ने 3.2 मीट्रिक टन का उत्पादन किया है। जबकि तीसरे सबसे बड़े उत्पादक कर्नाटक ने 1.84 मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन किया है।</p>
<p style="text-align: justify;">बाजार की रिपोर्ट और ट्रेडिग हाऊस से एकत्र किए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए, इस्मा ने बताया कि पिछले साल निर्यात किए गए 3 लाख टन की तुलना में चालू सीजन में नवंबर 2021 के अंत तक 6.5लाख टन चीनी का भौतिक रूप से निर्यात किया गया था।</p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा, चालू चीनी मौसम में 37 लाख टन चीनी निर्यात के अनुबंधों का अनुबंध किया गया है। इनमें से अधिकांश अनुबंधों पर तब हस्ताक्षर किए गए थे जब वैश्विक स्तर पर चीनी की कीमतें कच्ची चीनी के प्रति पाउंड 20-21 सेंट के दायरे में थीं।</p>
<p style="text-align: justify;">कच्चे चीनी की वैश्विक स्तर की &nbsp;कीमतों में लगभग 19 सेंट/पाउंड की गिरावट के कारण आगे के निर्यात अनुबंधों पर हस्ताक्षर धीमा हो गया है। हालांकि, अब वैश्विक स्तर कीमतों में कुछ हद तक सुधार हुआ है, जो 19.5 सेंट/पाउंड के आसपास &nbsp;आ गया है, फिर भी भारतीय चीनी के लिए निर्यात अभी भी अव्यावहारिक लगता है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस्मा के अनुसार,चूंकि चालू सीजन में अभी &nbsp;9 महीने से अधिक समय बचा है इसलिए मिलों के पास अभी भी एक उपयुक्त वक्त &nbsp;आने इंतजार करने का समय है जब वे कच्चे चीनी की कीमतों में उछाल आने के बाद निर्यात अनुबंध कर सकते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/11/image_750x500_618537fa36190.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी मिल 10 फीसदी इथेनॉल ईधन सम्मिश्रण हासिल करने के लिए पूरी तरह अग्रसर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/11/image_750x500_618537fa36190.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कारगिल ने खाद्य तेल रिफाइनरी में 35 मिलियन डॉलर का निवेश किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/cargill-invests-in-krishnapatnam-port-edible-oil-refinery.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 30 Nov 2021 22:22:03 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/cargill-invests-in-krishnapatnam-port-edible-oil-refinery.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">बहुराष्ट्रीय कमोडिटी ट्रेडिंग कंपनी कारगिल ने आंध्र प्रदेश के नेल्लोर स्थित खाद्य तेल <span>रिफाइनरी का अधिग्रहण किया है। खाद्य </span><span>तेल रिफाइनरी के अधिग्रहण और विकास के लिए कारगिल </span>35 <span>मिलियन डॉलर का निवेश करेगी। कंपनी ने कहा है कि इससे दक्षिण भारत की खाद्य तेल</span> <span>उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी होगी और खाद्य तेल की बढ़ती मांग को मौजूदा आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती मिलेगी। </span></p>
<p style="text-align: justify;">अधिग्रहित की गई रिफाइनरी के कंपनी सुविधाओं के साथ मई 2022 <span>में चालू होने की उम्मीद है। इस अधिग्रहण पर कारगिल के खाद्य तेल बिजनेस </span><span>के प्रबंध निदेशक पीयूष पटनायक ने कहा कि हमने भारत में खाद्य तेलों के कारोबार में अच्छी वृद्धि की है और इस अधिग्रहण से दक्षिण भारत में हमारे विस्तार को और बल मिलेगा। यह कदम भारत देश में हमारी ग्राहकों के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">नई अधिग्रहित की गई रिफाइनरी से कारगिल को रिफाइंड पॉम तेल, वनस्पति और सूरजमुखी तेल की आपूर्ति करने में फायदा मिलेगा।&nbsp; यह सुविधा &nbsp;कारगिल को खाद्य तेल ब्रांडों का उत्पादन और पैकेज करके अपने &nbsp;खुदरा विक्रेताओं बेकरी और खाद्य सेवा ग्राहकों को बेहतर सेवा देने का मौका &nbsp;देती है। इस रिफाइनरी &nbsp;के चलते कारगिल आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में अपनी सर्विस का विस्तार कर सकती &nbsp;है।</p>
<p style="text-align: justify;">पटनायक ने कहा, "हम &nbsp;लगातार अपने बिजनेस को मॉडर्न बनाने काम कर रहे है और अपनी सेवाओं के विस्तार पर निवेश कर रहे हैं। यह अधिग्रहण एशिया के लिए हमारे अनुरूप और स्थानीय बाजार दृष्टिकोण के हमारे अनुरूप है और इससे खाद्य और कृषि में क्षेत्र में&nbsp; विकास को गति मिलेगी।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">कारगिल ने 2001 से भारत में अपना खाद्य तेल कारोबार शुरू&nbsp; किया था। यह खाद्य उद्योग के साथ-साथ घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरत को पूरा करने के लिए देश में उत्पादित और आयातित खाद्य तेलों और वसा की एक विस्तृत श्रृंखला को संसाधित, परिष्कृत और मार्केटिंग करती है। इसके ब्रांड में&nbsp; नेचरफ्रेश, जेमिनी, स्वीकर, लियोनार्डो, रथ और सनफ्लावर जैसे प्रमुख खाद्य तेलों और वसा ब्रांड शामिल हैं ।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/09/image_750x500_613a1bcdb0fbc.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कारगिल ने खाद्य तेल रिफाइनरी में 35 मिलियन डॉलर का निवेश किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/09/image_750x500_613a1bcdb0fbc.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जेएफपीआर ने महाराष्ट्र में एग्री बिजनेस डेवलपमेंट के लिए 20 लाख डालर की सहायता दी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/jfpr-grant-to-enhance-market-linkages-for-farmers-in-maharashtra.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 08 Nov 2021 20:55:43 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/jfpr-grant-to-enhance-market-linkages-for-farmers-in-maharashtra.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>नई दिल्ली, 8 नवम्बर 2021</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">महाराष्ट्र में खेती में आय बढ़ाने और खाद्य सामग्री के नुकसान को कम करने के उद्देश्य से एग्री बिजनेस के विकास के लिए शिक्षा और टेक्नीकल सपोर्ट&nbsp; के लिए द जापान फंड आफ पावर्टी रिडक्सन&nbsp; (जेएफपीआर) ने एशियन डबलपमेंट बैंक&nbsp; (एडीबी) वित्त पोषित परियोजना के लिए 20 लाख डालर के अनुदान को मंजूरी दी है ।</p>
<p style="text-align: justify;">यह अनुदान एडीबी के पांच लाख डॉलर के तकनीकी सहायता विशेष फंड के साथ 10 करोड़ डॉलर के महाराष्ट्र एग्रीबिजनेस नेटवर्क प्रोजेक्ट को सपोर्ट करेगा ।</p>
<p style="text-align: justify;">इस परियोजना का उद्देश्य की महाराष्ट्र में छोटे और सीमांत किसानों को उनकी फसल कटाई के बाद और विपणन क्षमता में सुधार करने, <span>खाद्य नुकसान को कम करने और बाजार से अधिक मूल्य दिलाने, क्षमता निर्माण और बागवानी मूल्य चेन बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से &nbsp;लोगों के आय में वृद्धि करने में मदद करना है ।</span></p>
<p style="text-align: justify;">जेएफपीआर फंडिंग अपनी &nbsp;परियोजना के उद्देश्य की प्राप्ति के लिए &nbsp;किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को बढ़ावा देकर और अच्छी कृषि पद्धतियों, <span>नई फसल किस्मों और अन्य तकनीकी नवाचारों&nbsp; के प्रति किसानों को संवेदनशील बनाने में सहयोग करेगी । यह एग्री बिजनेस वैल्यू चेन में एग्रीगेशन</span>, <span>स्टोरेज</span>, <span>प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स से लेकर मार्केटिंग तक उच्च स्तरीय इनोवेटिव टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देगी।</span></p>
<p style="text-align: justify;">यह अनुदान कम से कम 12 एफपीओ और &nbsp;संभावित एफपीओ की&nbsp; पहचान कर बागवानी &nbsp;के लिए क्षमता विकास करके फसलों के आधार पर उत्कृष्टता केंद्र बनाने और किसानों के उत्पाद की घरेलू और निर्यात बाजार तक पहुंच बनाने और उसका&nbsp; विस्तार करने में मदद करेगी। इन एफपीओ में वैल्यू चेन एक्सलरेसन और मार्केट सर्विस में कम से कम 20 फीसदी &nbsp;महिलाओं के स्वामित्व या नेतृत्व में होगा ।</p>
<p style="text-align: justify;">एडीबी परियोजना और जेएफपीआर महाराष्ट्र और बिहार में एडीबी समर्थित कृषि व्यवसाय अवसंरचना विकास निवेश कार्यक्रम के लिए का सफल तरीके से पिछला जेएफपीआर अनुदान का इस्तेमाल हुआ था। यह परियोजना साल 2010-2018 के दौरान लागू की गई थी। &nbsp;इस अनुदान का&nbsp; उपयोग 1,400 से अधिक एफपीओ स्थापित करने और उनके क्षमता विकास करने &nbsp;में की गई थी।</p>
<p style="text-align: justify;">पिछले अनुदान के माध्यम से पहचाने गए अनुवर्ती कार्यों को नई परियोजना में एफपीओ को निरंतर समर्थन और आधुनिक कृषि पद्तियों के अपने तकनीकी ज्ञान को विकसित करने, <span>खरीदार-विक्रेता लिंक को मजबूत करने और कृषि और मूल्य-चेन गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने में &nbsp;किया जा रहा है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">जेएफपीआर की स्थापना 2000 में एडीबी परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए स्थापित की गई थी जो एशिया और प्रशांत क्षेत्र में सबसे गरीब और सबसे कमजोर समूहों की जरूरतों को पूरा करती हैं। जेएफपीआर ने अपनी स्थापना के बाद से<span> दिसंबर, 2020 तक 491 एडीबी परियोजनाओं के लिए 96.3 करोड़ डालर की मंजूरी दी है।&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/11/image_750x500_618941308f64d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जेएफपीआर ने महाराष्ट्र में एग्री बिजनेस डेवलपमेंट के लिए 20 लाख डालर की सहायता दी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/11/image_750x500_618941308f64d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्री सप्लाई चेन स्टार्ट&amp;#45;अप ओनाटो ने  जुटाई 22 लाख  डॉलर की फंडिंग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/agri-supply-chain-startup-onato-raises-fund.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 19 Oct 2021 23:57:14 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/agri-supply-chain-startup-onato-raises-fund.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">एग्री सप्लाई चेन स्टार्ट-अप ओनाटो ने वर्टेक्स वेंचर्स और ओमनिवोर की अगुवाई में सीड राउंड में 22 लाख डॉलर की फंडिंग जुटाई है। ओनाटो &nbsp;इस फंडिंग के उपयोग के लिए टैलेंट एक्वायर और अपने कार्य क्षेत्र को बढ़ाने लिए &nbsp;की योजना बनाई है&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">ओनाटो<span> ताजा उत्पादों के लिए बिजनेस टू बिजनेस डेटा संचालित प्लेटफार्म है। </span><span>सीड की घोषणा करते हुए कंपननी ने कहा है कि इस राउण्ड की अगुवाई वर्टेक्स वेंचर्स साउथ इस्ट एशिया इंडिया ने ओमनीवीर की साझेदारी में की है। ओनाटो भारत के फल सब्जी बिजनेस के लिए 100 अरब डॉलर का टेक्नालॉजी प्लेट फार्म तैयार कर रहा है। </span></p>
<p style="text-align: justify;">ओनाटो कंपनी की स्थापना फरवरी, 2021<span> में वेदांत कटियार और आशीष जिंदल ने की थी। वेदांत एफएमएस दिल्ली के पूर्व छात्र और</span>&nbsp;<span>एग्रीटेक स्टार्टअप गोबास्को के सह-संस्थापक थे। इसके बाद उन्होंने ओनाटो को लॉन्च करने से पहले विभिन्न एग्रीटेक बिजनेस मॉडल का पता लगाया। आशीष ने आईआईटी &nbsp;दिल्ली से ग्रेजुएशन के बाद अमेजन, स्विगी</span>&nbsp;<span>और एस्ट्राक जैसी कंपनियों में नौ साल से अधिक समय तक कार्य किया।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">वेदांत कटियार ने &nbsp;अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में,<span>चर्चा करते हुए बताया कि </span><span>भारत की </span>60 फीसदी<span>&nbsp;से अधिक आबादी कृषि पर निर्भर है और फिर भी </span>एग्री सप्लाई चेन तकनीक की पहुंच काफी कम है। इसके बारे में निर्णय लेना ज्यादातर स्वविवेक से प्रेरित होता है जिससे कीमतों और खर्च में बहुत अधिक अस्थिरता होती है। वेदांत का कहना है कि उचित मूल्य के लिए &nbsp;पारदर्शिता लाने और प्रौद्योगिकी के माध्यम से पूर्ति करने के लिए एग्री सप्लाई चेन और निर्णय लेने को सुव्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाएगी।</p>
<p style="text-align: justify;">आशीष जिंदल ने कहा कि <span>हमारा मानना </span>​​है कि ऑन-ग्राउंड डेटा की शक्ति का उपयोग करके <span>हम मौजूदा </span>एग्री सप्लाई चेन में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं, <span>जिसके परिणामस्वरूप किसान से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक सभी प्रतिभागियों के लिए बेहतर वैल्यू गेन होगा।</span></p>
<p style="text-align: justify;">वर्टेक्स वेंचर्स दक्षिण पूर्व एशिया और भारत की कार्यकारी निदेशक कनिका मेयर ने कहा, "<span>भारत की अधिकांश ताजा उत्पादों की आपूर्ति व्यवस्था छोटी </span><span>मात्रा</span>, <span>मनमाने मूल्य निर्धारण और जटिल क्रेडिट प्रबंधन के कारण अक्षम आपूर्ति श्रृंखलाओं के माध्यम से चलती है। ओनाटो का लक्ष्य इन बाधाओं को दूर करना है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/10/image_750x500_616f0d3c4c709.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्री सप्लाई चेन स्टार्ट-अप ओनाटो ने  जुटाई 22 लाख  डॉलर की फंडिंग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/10/image_750x500_616f0d3c4c709.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बढ़ती  कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बफर स्टाक से प्याज  जारी किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/to-check-rising-prices-government-issued-onion-from-buffer-stock.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 18 Oct 2021 13:37:19 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/to-check-rising-prices-government-issued-onion-from-buffer-stock.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;"><em><strong>नई दिल्ली,</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि बफर स्टॉक से प्याज के बाजार&nbsp; में जारी होने से प्याज की कीमतों में स्थिरता आ रही है। कीम<span>तों में कमी के लिए न्यूनतम भंडारण हानि सुनिश्चित करने के लिए अगस्त के अंतिम सप्ताह से फर्स्ट-इन-फर्स्ट-आउट (फीफो) के आधार पर बाजार में प्याज उपलब्ध कराया जा रहा है। केंद्र सरकार ने कहा है </span><span>कि प्याज का बफर स्टॉक उन राज्यों में जारी किया जा रहा है </span><span>जहां कीमतें अखिल भारतीय औसत से ऊपर हैं और पिछले महीने की तुलना में बढ़ रही हैं। इसका नतीजा यह रहा कि </span>14<span> अक्टूबर को महानगरों में प्याज का खुदरा भाव </span>42 से 57<span> रुपये प्रति किलो के दायरे में रहा। प्याज का अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य </span>37.06<span> रुपये प्रति किलो था </span><span>जबकि औसत थोक भाव </span>14<span> अक्टूबर को </span>30<span> रुपये प्रति किलो था।</span></p>
<p style="text-align: justify;">खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि प्याज का बफर स्टॉक उन राज्यों में जारी किया जा रहा है <span>जहां कीमतें अखिल भारतीय औसत से ऊपर हैं और कीमतें पिछले महीने की तुलना में बढ़ रही हैं।&nbsp; इसके साथ मंत्रालय ने कहा है कि </span>12 <span>अक्टूबर</span>, 2021 <span>को दिल्ली</span>, <span>कोलकाता</span>, <span>लखनऊ</span>, <span>पटना</span>, <span>रांची</span>, <span>गुवाहाटी</span>, <span>भुवनेश्वर</span>, <span>हैदराबाद</span>, <span>बंगलुरू</span>, <span>चेन्नई</span>, <span>मुंबई</span>, <span>चंडीगढ़</span>, <span>कोच्चि और रायपुर जैसे प्रमुख बाजारों में कुल </span>67,357 <span>टन प्याज जारी किया गया।</span></p>
<p style="text-align: justify;">मंत्रालय ने आगे कहा कि प्याज का स्टॉक खुदरा विपणन में शामिल केंद्रीय और राज्य एजेंसियों को या तो 21<span> रुपये प्रति किलो की प्री-स्टोरेज दर पर या परिवहन लागत को शामिल करने के बाद आपूर्ति के लिए उपलब्ध है। मदर डेयरी की रिटेल चेन </span>'<span>सफल</span>' <span>को </span>26<span> रुपये किलो प्याज देने की बात हो रही है. कीमतों को कम करने के लिए प्रभावी बाजार हस्तक्षेप के उद्देश्य से सरकार मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के तहत प्याज बफर बनाती है। </span>2021-22<span> में दो लाख टन के लक्ष्य की तुलना में अप्रैल से जुलाई </span>2021 के दौरान <span>&nbsp;रबी 2021 की फसल से </span>2.08<span> लाख टन प्याज का बफर स्टॉक बनाया गया था।&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/10/image_750x500_616d2b1b48378.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बढ़ती  कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बफर स्टाक से प्याज  जारी किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/10/image_750x500_616d2b1b48378.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[स्टार्टअप कंपनी करात फार्म्स ने प्री&amp;#45;सीड फंडिंग जुटाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/karat-farms-raises-pre-seed-funding.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Oct 2021 06:50:59 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/karat-farms-raises-pre-seed-funding.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;"><em><strong> बैंगलोर</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;बैंगलोर से संचालित होने वाली स्मार्ट किचन गार्डन की कंपनी&nbsp; करात फार्म्स ने अपने व्यापार तेजी से वृद्धि लाने के लिए वृक्ष इंपैक्ट पार्टनर्स (वीआईपी) से अघोषित प्री-सीड फंडिंग जुटाई है। जिससे इस निवेश किए फंड से अधिक से अधिक ग्राहकों तक पहुंच बना सके&nbsp; और अपने उत्पाद के अच्छा बनाने के लिए योजना बना रही हैं। इस कंपनी का उद्देश्य एक स्थायी भविष्य बनाना है। जहां पर पौधे आधारित जीवन के माध्यम से प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर सके ।करात फार्म्स को एनएसआरसीईएल में इनक्यूबेट किया गया था जो आईआईएम बैंगलोर द्वारा संचालित भारत में एक अग्रणी स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर है।&nbsp; लाकडाउन के दौरान संस्थापक और निवेशक एक दूसरे से जुड़े और &nbsp;फंड को इकठ्ठा किया उन्होंने इस&nbsp; फंड को इकट्ठा करने &nbsp;की प्रक्रिया को दूर से संचालित ही &nbsp;किया।</p>
<p style="text-align: justify;">कंपनी का कहना है कि ,करात फ़ार्म का उत्पति लोगों को फिर से दोबारा कैसे &nbsp;शक्ति &nbsp;दी जाय इस उद्देश्य से हुआ था।&nbsp; घर&nbsp; में एक किचन गार्डन से हमारे भोजन से&nbsp; जुड़ने के साथ, ही हमें पोषण,<span>मानसिक स्वास्थ्य</span>, <span>और प्रकृति जुड़ने में जबरदस्त प्रभाव डालते है और&nbsp; मिली इस &nbsp;फंडिग से करात जो अभी सीड फंडिंग रूप में है इससे अपने आप को पेड़ रूप विकसित करेगा। </span></p>
<p style="text-align: justify;">वीआईपी के सह-संस्थापक और निदेशक प्रेरणा गोयल ने कहा की इस फंडिंग का उपयोग करात फार्म अपना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को बढ़ाने &nbsp;और अपनी पहचान बनाने के लिए करेगें । और दुनिया भर से बिषय विशेषज्ञो से संपर्क करके करात फार्म की सहायता करेगें । उन्होंने कहा कि&nbsp; हमारा ध्यान प्रभावी निर्माण और हम सभी सौदों में एक मजबूत स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करना है।</p>
<p>करात फार्म्स का विजन है &nbsp;किचन गार्डनिंग के कानसेप्ट को लोगों तक पहुंचना और यह सुनिश्चित करना की इसको घर घर में अपनाया जाय । &nbsp;इस तरह के दृष्टिकोण और विचारों&nbsp; को भारतीय उपमहाद्वीप में आगे बढ़ाने के लिए वीआईपी ने प्लांट-आधारित व्यवसायों को बड़े पैमाने पर विस्तार करने लिए रणनीतिक दिशा निर्धारण, <span>संचालन</span>, <span>वित्तीय प्रबंधन</span>, <span>भोजन</span>, <span>पोषण और स्वास्थ्य में विशेषज्ञो को जोड़कर अपने विजन को मजबूती दे रहा है ।</span></p>
<p>करात फार्म्स के सह-संस्थापक कुरैशी यूसुफ ने कहा कि एनएसआरसीईएल में इनक्यूबेशन प्रोग्राम ने हमें करात फार्म के पीछे की कहानी को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने में मदद की और फंड जुटाना और निवेशकों को इस विचार और इसकी क्षमता के बारे में उत्साहित करना आसान बना दिया। इसने हमें रणनीति बनाने, <span>बजट और प्रतिभा को काम पर रखने की स्पष्टता दी है । हम आशा करते है कि इनक्यूबेशन के बाद</span>, <span>हम प्रतिभा को आकर्षित करना जारी रखे सकेंगे</span>, <span>अपने उपयोगकर्ताओं के लिए एक सहज उत्पाद का निर्माण करेंगे और अपने मूल्य प्रस्ताव पर ध्यान केंद्रित करते रहेंगे।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/10/image_750x500_615cf9d1ca130.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ स्टार्टअप कंपनी करात फार्म्स ने प्री-सीड फंडिंग जुटाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/10/image_750x500_615cf9d1ca130.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृभको ने कृषि इनपुट की मार्केटिंग के लिए सीएससी से हाथ मिलाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/kribhco-ties-up-with-csc-for-marketing-of-agricultural-inputs.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 03 Oct 2021 21:17:32 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/kribhco-ties-up-with-csc-for-marketing-of-agricultural-inputs.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>नई दिल्ली</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">किसान अब कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) से खाद और बीज खरीद सकेंगे। सीएसी ई-गवर्नेंस सर्विसेज ने कृषक भारती कोआपरेटिव लिमिटेड (कृभको) के साथ समझौता किया है। सीएससी की पहुंच गांवों तक है। ऐसे में इस फैसले से किसानों को फायदा होगा। वे उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरक की आपूर्ति करने में सक्षम होंगे।</p>
<p style="text-align: justify;">एक बयान में कहा गया है कि कृभको के उत्पादों को साझा सेवा केंद्रों (सीएससी) के माध्यम से बेचा जाएगा। इनमें आयातित यूरिया, <span>डीएपी</span>, <span>एनपीके/एनपीएस</span>, <span>जैव उर्वरक</span>, <span>शहरी खाद</span>, <span>जिंक सल्फेट</span>, <span>प्रमाणित बीज और हाईब्रीड बीज जैसे उर्वरक शामिल हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">कॉमन सर्विस सेंटर में ई-गवर्नेंस सेवाओं के चार लाख ग्राम स्तरीय उद्यमी हैं, <span>जो इस कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम देंगे। सीएससी के साथ कृषक भारती सहकारी (कृभको) में शामिल होने से किसानों के लिए उर्वरक और अन्य कृषि आदानों तक आसान पहुंच सुनिश्चित होगी। कृभको द्वारा उर्वरक</span>, <span>कृषि आदानों और बीजों का निर्माण</span>, <span>आयात और विपणन किया जाता है। इस वर्ष की शुरुआत में सीएससी ने अपने ग्राम स्तरीय उद्यमी (वीएलई) और कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से कृषि आदानों जैसे बीज</span>, <span>कीटनाशकों और कृषि मशीनरी को पट्टे या पट्टे पर देने और कृषि उपज के व्यापार की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कृषि सेवाओं का संचालन किया। फोरम का गठन किया गया था।</span></p>
<p style="text-align: justify;">सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक दिनेश त्यागी ने कहा कि कृभको के साथ हमारी साझेदारी किसानों और कृषक समुदाय की सेवा करने के सरकार के एजेंडे को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है।उन्होंने कहा कि सीएससी के साथ हमारी साझेदारी विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण कृषि इनपुट की समय पर आपूर्ति के साथ गांवों में किसानों और नागरिकों तक पहुंचने में मदद करेगी। किसानों को उर्वरक, <span>बीज और अन्य कृषि उत्पाद वितरित करना सीएससी के साथ हमारी गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण पहलू है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">कृभको के प्रबंध निदेशक राजन चौधरी ने &nbsp;कहा कि साझेदारी एक नए युग की शुरुआत करेगी जहां किसान माउस और स्मार्टफोन के क्लिक पर लागत प्रभावी कृषि इनपुट प्राप्त कर सकते हैं। हमारी साझेदारी से डिजिटल इंडिया को भी बढ़ावा मिलेगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2020/12/image_750x500_5fd98debdfa7b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृभको ने कृषि इनपुट की मार्केटिंग के लिए सीएससी से हाथ मिलाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2020/12/image_750x500_5fd98debdfa7b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ब्राजील और थाईलैंड में कम उत्पादन के चलते अगले सीजन में 60 लाख टन  चीनी निर्यात की संभावना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/indian-sugar-exports-to-gain-from-output-woes-of-brazil-thailand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 10 Sep 2021 14:34:53 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/indian-sugar-exports-to-gain-from-output-woes-of-brazil-thailand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देश ब्राजील और थाइलैंड&nbsp; में &nbsp;कम चीनी उत्पादन&nbsp; के चलते&nbsp; वैश्विक स्तर पर मांग की पूर्ति के लिए &nbsp;भारतीय चीनी उद्योग &nbsp;को चीनी निर्यात में बढ़ोत्तरी&nbsp; होने के कारण लाभ होने की संभावना है। अंतराष्ट्रीय चीनी संगठन (आईएसओ)&nbsp; और अन्य ग्लोबल एजेंसियो&nbsp; के अनुसार&nbsp; वैश्विक बाजार में शुगर सीजन 2021 -22 (अक्टूबर से सितंबर) में मांग के मुकाबले 40 से 50 लाख टन&nbsp; कम चीनी उपलब्ध होगी।&nbsp; इसका भारत को फायदा होगा और अगले सीजन में देश का चीनी निर्यात 60 लाख टन रहने की संभावना है। &nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएश (इस्मा) की एक प्रेस रिलीज के अनुसार अंतराष्ट्रीय चीनी की अंतरराष्ट्रीय कीमतें आज के समय में लगभग 20<span> सेंट/पौंड पर हैं जिसकी&nbsp; पिछले चार साल की तुलना किया जाय तो चीनी की अंतराष्ट्रीय कीमतें उच्चतम मूल्य स्तर पर है ।</span></p>
<p style="text-align: justify;">एक रिपोर्ट के अनुसार चीनी उत्पादक देश ब्राजील में सूखे के बाद &nbsp;शुष्क मौसम और पाले के काऱण&nbsp; अपने चीनी के चालू सीजन में दक्षिण ब्रजील में अप्रैल 2021 में मार्च 2022 तक कम चीनी उत्पादन होने के अनुमान की वजह से&nbsp; चीनी की कीमतो में तेजी रहने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस्मा के मुताबिक ब्राजील में पिछले 90<span> वर्षों में अब तक के सबसे भीषण&nbsp; सूखे के कारण ब्राजील का अगला चीनी सीजन भी प्रभावित हो सकता है। इसके आलावा थाइलैंड में अगला सीजन अच्छा होने के बावजूद &nbsp;भी&nbsp; उत्पादन से 150 लाख&nbsp; टन&nbsp; से&nbsp; कम रहने का अनुमान है। &nbsp;एक&nbsp; अनुमान के तहत यहां पर भी &nbsp;30 से 35&nbsp; लाख टन टन कम चीनी&nbsp; उत्पादन होने की संभावना है।&nbsp; </span></p>
<p style="text-align: justify;">थाईलैंड की चीनी बाजार में जनवरी, 2022 के&nbsp; बाद ही आएगी । इसका मतलब भारतीय चीनी मिलों को&nbsp; जनवरी 2022 तक यानि चार महीने तक&nbsp; और उसके बाद अप्रैल 2022 तक&nbsp; ब्राजील की चीनी आने के पहले&nbsp; ग्लोबल मार्केट में &nbsp;अधिक से अधिक चीनी निर्यात करने&nbsp; का अवसर मिलेगा।&nbsp; आने वाले सीजन में इस अवसर का लाभ उठाने के लिए चीनी मिलों ने पहले से अनुबंध कर लिए हैं इसलिए उम्मीद की जाती है कि&nbsp; भारतीय चीनी मिलें&nbsp; 60 लाख टन निर्यात करने &nbsp;में सक्षम होगी ।</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;पोर्ट से किए गये निर्यात की सूचना और बाजार आंकडों के अनुसार चालू सीजन में देश के चीनी मिलों ने &nbsp;66.7 लाख&nbsp; टन चीनी का निर्यात दूसरे देशों को किया है। यह आंकडा पिछले 11 महीने &nbsp;(अक्टूबर- अगस्त)&nbsp; के दौरान सीजन 2020 -21 का है । जो पिछले सीजन में इसी अवधि के दौरान निर्यात की गई चीनी 55.78<span> लाख टन की तुलना में लगभग </span>11<span> लाख टन अधिक&nbsp; है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इस निर्यात में मैक्सिमम एडमिसीबल कोटा (एम ए ई क्यू ) योजना के तहत 4.49 लाख टन का&nbsp; निर्यात भी शामिल है। इसे 31 दिसंबर, 2020 तक बढ़ा दिया &nbsp;गया था।&nbsp; इसका मतलब&nbsp; है &nbsp;कि &nbsp;साल 2021 के जनवरी से अगस्त &nbsp;महीने के दौरान अधिकतर चीनी निर्यात&nbsp; किया गया था। वह ज्यादातर 2020 -21&nbsp; सीजन के एमएईक्यू और क्वालिटी अंडर द ओपन जनरल लाइसेंस (ओजीएल) के तहत तहत किया गया था।</p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा एक जानकारी के अनुसार &nbsp;6 सितम्बर तक अभी दूसरे देशों की मांग पर&nbsp; लगभग 2.<span>29 लाख टन चीनी बंदरगाहों पर स्टोर है जो मालावाहक जहाजों के आने &nbsp;के बाद दूसरे देशो को भेज दी जाएगी। इसके चलते मौजूदा सीजन में 70 लाख&nbsp; टन चीनी निर्यात होने का अनुमान है।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">भारत से चीनी मुख्य रूप से इंडोनेशिया, <span>अफगानिस्तान</span>,<span>श्रीलंका</span>, <span>सोमालिया</span>, <span>संयुक्त अरब अमीरात</span>, <span>चीन</span>, <span>सऊदी अरब और</span>&nbsp;<span>सूडान को निर्यात की जाती है। इसमें </span><span>इंडोनेशिया </span>29 फीसदी <span>&nbsp;हिस्सेदारी के साथ&nbsp; सबसे ऊपर है। इसके बाद अफगानिस्तान को कुल निर्यात का </span>13 फीसदी<span> हिस्सा है।</span>अभी तक&nbsp; किए गये कुल चीनी निर्यात में 34.28 लाख टन रॉ शुगर&nbsp; 25.66 लाख <span>टन व्हाइट शुगर&nbsp; और </span>18.8<span>0 लाख टन रिफाइंड शुगर का निर्यात शामिल है। इसके अलावा चीनी मिलों ने बंदरगाह स्थित रिफाइनरियों को लगभग </span>7.17 लाख <span>&nbsp;टन रॉ शुगर की डिलीवरी होने की सूचना दी है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/09/image_750x500_613b1f9ca0191.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ब्राजील और थाईलैंड में कम उत्पादन के चलते अगले सीजन में 60 लाख टन  चीनी निर्यात की संभावना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/09/image_750x500_613b1f9ca0191.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको किसान ने पशु चारा खरीद के लिए अमरेली जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ के साथ समझौता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/iffco-kisan-ties-up-with-amreli-district-cooperative-to-buy-cattle-feed.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 08 Sep 2021 07:27:27 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/iffco-kisan-ties-up-with-amreli-district-cooperative-to-buy-cattle-feed.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em>नई दिल्ली , 7 सितम्बर ,2021</em></p>
<p style="text-align: justify;">देश की सहकारी क्षेत्र की उर्वरक उत्पादन और विपणन की अग्रणी कंपनी इफको की सहायक कंपनी इफको किसान संचार लिमटेड ने अमरेली जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड के साथ उच्च गुणवत्ता युक्त पशु चारे की खरीद के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की। अब यह कंपनी अपने प्लेटफार्म के जरिए इफको किसान ब्राड के जरिए चारे की मार्केटिंग करेगी।</p>
<p style="text-align: justify;">इफको किसान की तरफ से जानकारी दी गयी कि समझौते के अनुसार, इफको किसान शुरू में अमरेली जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ से 300 टन पशु चारा खरीदेगी और अगले कुछ महीनों में खरीद को बढ़ाकर 1,000 टन करने का लक्ष्य है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस समझौते पर इफको किसान के प्रबंध निदेशक संदीप मल्होत्रा और अमरेली जिला सहकारिता के प्रबंध निदेशक, आर एस पटेल ने हस्ताक्षर किए। समझौते के अनुसार, अमरेली जिला इफको किसान को बीआईएस मार्क पशु आहार की आपूर्ति करेगा, जिसे गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में बेचा जाएगा।</p>
<p style="text-align: justify;">अमरेली जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ गुजरात के अमरेली में एक मेगा पशु चारा संयंत्र संचालित करता है, जिसकी कुल उत्पादन क्षमता 5,000 टन प्रति माह है।</p>
<p style="text-align: justify;">ताजा समझौता को मिलाकर इफको किसान अब तक पशु चारा की खरीद या प्राप्ति के लिए 10 संस्थाओं के साथ गठजोड़ कर चुका &nbsp;है।</p>
<p style="text-align: justify;">इफको किसान संचार लिमिटेड के नेशनल सेल्स हेड गणेश दास ने कहा, &ldquo;वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान, हमने 160 करोड़ रुपये मूल्य के एक लाख टन पशु चारों की बिक्री की और चालू वित्तवर्ष में, हम 300 करोड़ रुपये के कारोबार का टारगेट लेकर चल रहे हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">गणेश दास ने कहा, &lsquo;&lsquo;विकास परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए हम और उत्पादकों के साथ गठजोड़ करना चाहते हैं और अमरेली जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ के साथ सहयोग उस दिशा में एक कदम है।&rsquo;&rsquo;</p>
<p style="text-align: justify;">पशु&nbsp; चारा व्यवसाय अब इफको किसान के कुल कारोबार में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान देता है जो कंपनी के विकास का एक प्रमुख केंद्र है।</p>
<p style="text-align: justify;">इफको ने भारती एयरटेल और स्टार ग्लोबल रिसोर्सेज लिमिटेड के सहयोग के साथ इफको किसान संचार लिमिटेड बनाया। यह चार प्रमुख वर्टिकल - स्मार्ट कृषि समाधान प्रदाता, पशु चारा व्यवसाय, कृषि-प्रौद्योगिकी, दूरसंचार और कॉल सेंटर सेवाओं के क्षेत्र में काम करता है</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/09/image_750x500_613818623c498.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको किसान ने पशु चारा खरीद के लिए अमरेली जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ के साथ समझौता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/09/image_750x500_613818623c498.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कलगुडी के कुबेर किसानों और छोटे व्यवसायियों को बना रहे हैं  आर्थिक रूप से सशक्त]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/kuber-from-kalgudi-to-help-farmers-stakeholders.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 04 Sep 2021 12:33:13 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/kuber-from-kalgudi-to-help-farmers-stakeholders.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;"><em><strong>हैदराबाद</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">हैदराबाद की कृषि-डिजिटल समाधान कंपनी कलगुडी उद्यमियों, उत्साही किसानों और ग्रामीण युवाओं को कृषि इनपुट और आउटपुट मार्केटप्लेस के जरिए आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में काम कर रही है। इस कंपनी ने कृषि और ग्रामीण आजीविका क्षेत्रों के लिए एक सामाजिक वाणिज्य आईटी प्लेटफार्म '<span>कुबेर</span>'<span> विकसित किया है। यह छोटे व्यवसायियों और व्यक्तियों को अपने सामाजिक चैनलों के माध्यम से अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद करती है। हाल ही में हैदराबाद में आयोजित एग्री बिज़नेस समिट एंड एग्री अवार्डस, 2021 के आयोजन के दौरान इस एप को लांच किया गया।&nbsp; &nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कुबेर कैसे काम करता है</strong></p>
<p style="text-align: justify;">किसान कड़ी मेहनत कर विभिन्न प्रकार के कृषि उत्पादों का उत्पादन करता हैं। लेकिन उनको अपने उत्पादन का उचित मूल्य हासिल करने के लिए सप्लाई चैन के आखिरी पड़ाव&nbsp; तक पहुंचने में कई मुद्दों और परेशानी का सामना करना पड़ता है। कलगुडी कंपनी के संस्थापक राज वल्लभनेनी कहते हैं कि कुबेर <span>इस समस्या के समाधान के समाधान के लिए ही काम आता है। यह महत्वाकांक्षी ग्रामीण युवाओं और छोटे व्यवसाइयों को सशक्त बनाने और किसानों की परेशानी को हल करने का एक प्रयास है। </span></p>
<p style="text-align: justify;">सबसे पहले ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है जिन्हें कलगुडी कुबेर कहा जाता है। इसके बाद ग्रामीण युवा कलगुडी प्लेटफार्म के ज़रिए किसानों&nbsp; के समाजिक संबंधों का उपयोग करके किसानों को सही सुझाव देता है ताकि कमियों को दूर किया जा सके।</p>
<p style="text-align: justify;">कलगुडी का सबसे पहला उद्देश्य यह होता है कि कुबेरों को कृषि उत्पादों के बारे में उचित शिक्षा देकर सक्षम बनाया जाए। उसके बाद सामाजिक नेटवर्क &nbsp;का उपयोग करके उस क्षेत्र में लाए जा सकने वाले&nbsp; संभावित उत्पादों का पता लगाया जाता है। उनका इस्तेमाल किन फसलों के लिए किया जा सकता है और उनके अपयोग से कैसे नतीजे मिलते है, इसका भी अध्ययन किया जाता है।&nbsp; कलगुडी कुबेरों को किसानो से &nbsp;प्रभावी तरीके से जुड़ने मे मदद भी करता है ।</p>
<p style="text-align: justify;">इसके बाद संभावित बाजार की प्रतिस्पर्धा को पहचान कर कुबेर सप्लाई चेन के खरीददार और किसान के बीच व्हाट्सएप या अन्य माध्यमों जरिए उत्पाद के बारे में जानकारी और कीमत साझा करता है । सप्लाई चेन के आखिरी पड़ाव में खरीददार की सहमति मिल जाने के बाद उत्पाद को डिलीवरी करेगा । जिस कीमत पर कुबेर ने उत्पाद सप्लाई चेन के आखिरी पड़ाव वाले उपभोक्ता को बेचा है किसान की उस कीमत में कुबेर मार्जिन शामिल है, <span>लेकिन यह अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तक सीमित है ।</span></p>
<p style="text-align: justify;">वल्लभनेनी कहते हैं, "<span>कलगुडी</span>, <span>जो एक मूल संगठन है</span>, <span>पहले से ही डिजिटल मार्केटप्लेस के माध्यम से कृषि इनपुट बी2बी (एफपीओ या बड़े किसानों को बिक्री) के साथ काम करता है। कुबेर के किसी भी थोक ऑर्डर को हमारी बी2बी प्रक्रियाओं के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है।"</span></p>
<p style="text-align: justify;">2018 में लॉन्च किए गए कलगुडी प्लेटफॉर्म में देश भर के लाखों किसान जुड़े हुए हैं। कलगुडी<span>&nbsp;मुख्य रूप से तेलंगाना</span>, <span>आंध्र प्रदेशऔर कर्नाटक में काम कर रही है। आने वाले समय में इसकी देश </span><span>भर में कलगुडी का विस्तार करने की योजना है। राज वल्लभनेनी कहते हैं</span>, "<span>ग्रामीण भारत के हर उत्पाद की एक कहानी है और हम यह सुनिश्चित करते हैं कि यह सब हमारे प्लेटफार्म के अंदर आ जाए ।</span></p>
<p style="text-align: justify;">कलगुडी एक फ्री प्लेटफॉर्म है जिसका इस्तेमाल कृषि संबंधित नई पहल करने के लिए किया जा सकता है। इस ऐप को मोबाइल और वेब ब्राउज़र के माध्यम से उपयोग कर सकते हैं । यह ऐप खेती से जुडे़ सुझाव देता है और किसानो को बाजार से जुड़ने मे भी मदद करता है। वर्तमान समय मे कलगुडी आईसीआरआईएसएटी (इक्रीसेट) और&nbsp; सीसीजी के साथ उनके कृषि विस्तार के कार्यक्रमों से भी जुड़ी हुई है । &nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा कंपनी ने कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी)&nbsp; के प्रबंधन के लिए आईएग्रीमार्क (IAgriMarC)<span> नाम से एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित किया है जिसका उद्देश्य कृषि उपज विपणन समिति की मंडियो के गेट&ndash;टू-गेट &nbsp;संचालन और राज्यों की सभी मंडियो को जोडना । </span></p>
<p style="text-align: justify;">मंडी संचालन के लिए इस सॉफ्टवेयर को कर्नाटक कृषि मार्केटिंग विभाग मे 2009-2017 के दौरान डिजाइन और संचालित किया गया था। वल्लभनेनी का दावा है कि इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से 45 हजार से भी ज्यादा व्यापारियों और दस लाख से ज्यादा किसानों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर फायदा हुआ है ।</p>
<p style="text-align: justify;"><em><strong>(एम. सोमशेखर, हैदराबाद के स्वतंत्र पत्रकार हैं। वह डेवपलमेंट से संबंधित मुद्दों, साइंस और बिजनेस पर लिखते हैं )</strong></em></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/09/image_750x500_6135fb920de41.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कलगुडी के कुबेर किसानों और छोटे व्यवसायियों को बना रहे हैं  आर्थिक रूप से सशक्त ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/09/image_750x500_6135fb920de41.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फार्मकार्ट किसानों को कृषि उपकरण किराये पर देने की सुविधा देगा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/farmkart-forays-into-agri-equipment-rental-business-via-rent4farm-platform.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Aug 2021 20:41:54 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/farmkart-forays-into-agri-equipment-rental-business-via-rent4farm-platform.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;"><em><strong>बड़वानी, मध्य प्रदेश</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">कृषि नवाचार स्टार्ट अप फार्मकार्ट ने तकनीकी प्लेटफार्म&nbsp; रेंट4फार्म की पेशकश के साथ कृषि में उपयोग होने वाले उपकरणों को किराये पर उपल्बध कराने के क्षेत्र&nbsp; में कदम रखा है। कंपनी ने कहा है कि &nbsp;&lsquo;रेंट4फार्म&rsquo; किसानों को उचित किराये दर&nbsp; पर अच्छी क्वालिटी&nbsp; वाली &nbsp;कृषि मशीनरी और उपकरण को किराए पर &nbsp;किसानों को देकर &nbsp;मदद करेगा।</p>
<p style="text-align: justify;">अभी पहले चरण में फार्मकार्ट ने 100 सर्टीफाइड कृषि उपकरण आपूर्तिकर्ताओं के साथ साझेदारी करके&nbsp; जिला बड़वानी मध्य प्रदेश के&nbsp; नजदीक 200 गांवों में किराये&nbsp; पर उपकरणों को देकर&nbsp; अपनी सेवाएं देना शुरू कर कर दिया है।</p>
<p style="text-align: justify;">फार्मकार्ट के संस्थापक और सीईओ अतुल पाटीदार ने कहा, &lsquo;&lsquo;हमने इसी साल जून के मध्य में रेंट4फार्म शुरू किया था &nbsp;लोगों की तरफ से इसका अच्छा फीडबैक आया। अब हम एक बड़े एरिया में&nbsp; इस सुविधा का विस्तार कर रहे हैं और कम से कम 10,000 किसानों को &nbsp;सेवा देने की उम्मीद कर रहे हैं।&rsquo;&rsquo;</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 के अंत तक कंपनी की योजना पूरी तरह से संचालित मोबाइल एप्लिकेशन के साथ 3,500 स्थानों के 20 हजार किसानों तक सेवा पहुंचाने की है। मौजूदा समय में एक लाख से अधिक किसान फार्मकार्ट से जुड़े हुए हैं। फार्मकार्ट के उत्पाद और सेवाएं मध्य प्रदेश के 3,500 गांवों में उपलब्ध हैं और कंपनी अन्य भौगोलिक क्षेत्रों में भी अपनी पहुंच कायम करने की प्रक्रिया में है।</p>
<p style="text-align: justify;">फार्मकार्ट का मुख्य कार्यालय बड़वानी मध्यप्रदेश में है और इसकी रणनीतिक टीम (स्ट्रेटजी टीम) टोरंटो, कनाडा में कार्यरत है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/08/image_750x500_611e747a61570.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ फार्मकार्ट किसानों को कृषि उपकरण किराये पर देने की सुविधा देगा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/08/image_750x500_611e747a61570.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ईरान को चीनी का निर्यात करने की अनुमति चाहते हैं निर्यातक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/Sugar-lobby-wants-shipments-to-Iran-to-expand-export-basket.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 14 Aug 2021 20:21:49 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/Sugar-lobby-wants-shipments-to-Iran-to-expand-export-basket.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>लखनऊ</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">घरेलू चीनी व्यापारियों ने मांग की है कि ईरान के लिए चीनी निर्यात की अनुमति दी जानी चाहिए। इस कदम से वह अपने निर्यात बाजार का विस्तार करने का मौका हासिल कर सकेंगे। ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (एआईएसटीए)&nbsp; के अनुसार <span>भारत ने ईरान को चीनी निर्यात किए बिना ही इस सीजन में लगभग </span>6<span>0 लाख टन चीनी निर्यात की है। वहीं एक अनुमान के मुताबिक ईरान में लगभग 12 लाख टन चीनी&nbsp; खरीदने की बाजार क्षमता है ।</span></p>
<p style="text-align: justify;">आल इंडिया शुगर ट्रेड एशोसियन के (<span>एआईएसटीए</span>)<span> अध्यक्ष प्रफुल्ल विठलानी ने कहा है कि ग्लोबल मार्केट में बदलती राजनीतिक परिस्थिति के अनुसार ईरान को चीनी निर्यात करने के लिए कोई &nbsp;न कोई उपाय खोजना ही समझदारी होगी ।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अगले सीजन के लिए सही योजना बनाकर चीनी निर्यात के लिए समय से घोषणा करने की तत्काल जरूरत है। उन्होंने ने कहा कि पिछले साल के किए गये कई निर्यात की सब्सिडी का अभी तक &nbsp;निपटारा नहीं किया गया है। जिसका जल्द से जल्द निपटारा किया जाय क्योंकि अगले सीजन में चीनी मिलों को शुरू करने के लिए के लिए धन की जरूरत होगी ।</p>
<p style="text-align: justify;">एआईएसटीए का कहना है कि समुद्री माल ढुलाई भाड़े में अधिक वृद्धि और कंटेनरों की अनुपलब्धता ने निर्यात करने वालों के लिए मार्जिन को कम कर दिया है जो निर्यात में एक अड़चन साबित हो रहा है। <span>साल </span>&nbsp;2020-21<span> योजना के तहत 60 लाख टन </span>निर्यात अधिकतम स्वीकार्य निर्यात कोटा (एमएईक्यू) अनुबंध किया गया था। इसके तहत जनवरी से लेकर 5<span> अगस्त </span>2021<span> तक &nbsp;50 लाख टन से अधिक चीनी का निर्यात&nbsp; किया जा चुका है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">मौजूदा सीजन में भारतीय चीनी निर्यात 33<span> प्रतिशत इंडोनेशिया को किया गया है जो लगभग 17 लाख टन रहा। इसके बाद क्रमशः </span>12<span> प्रतिशत और </span>9<span> प्रतिशत के साथ अफगानिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात हैं। इसके आलावा प्रमुख रूप से जिन देशों को चीनी की निर्यात किया गया है उनमें श्रीलंका</span>, <span>सोमालिया</span>,<span>सऊदी अरब</span>, <span>बांग्लादेश</span>, <span>जिबूती</span>, <span>इराक</span>, <span>मलयेशिया</span>, <span>सूडान</span>, <span>यमन</span>, <span>तंजानिया</span>, <span>चीन आदि शामिल हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">पहले की प्रक्रिया के तहत किया जो&nbsp; चीनी निर्यात की गई उस चीनी का मूल्य लगभग 2.5<span> बिलियन अमेरिकी डॉलर यानि लगभग </span>18,600<span> करोड़ रुपये से अधिक है।</span><span> जो देश की निर्यात आय में बड़ा योगदान है इसके साथ ही कोरोना महामारी साल में गन्ना किसानों के भुगतान करने के लिए और चीनी मिलों की आय़&nbsp; में बढोत्तरी होगी जिससे आगे सीजन में शुगर मिलों को आसानी&nbsp; से चलाने में मदद&nbsp; होगी।</span></p>
<p style="text-align: justify;">एआईएसटीए के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी का दाम 10<span> जुलाई</span>, 2021 <span>के </span>17.28<span> सेंट प्रति पाउंड से बढ़कर </span>11<span> अगस्त</span>, 2021<span> को </span>19.59<span> सेंट प्रति पाउंड हो गया</span>, <span>जो लगभग </span>13.4 प्रतिशत<span> की वृद्धि है। दुनिया में &nbsp;चीनी की कीमतों में &nbsp;यह वृद्धि ब्राजील में खराब मौसम &nbsp;के कारण हुई है।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के मुताबिक चालू सीजन </span>2020-21<span> के लिए अनुमानित चीनी उत्पादन </span>309<span> लाख टन</span>, <span>जिसमें&nbsp; इस सीजन के दौरान </span>260<span> लाख टन की घरेलू बिक्री और </span>70<span> लाख टन के निर्यात की उम्मीद है।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>&nbsp;<em><strong>( वीरेंद्र सिंह रावत, लखनऊ में कार्यरत जर्नलिस्ट हैं। वह इकोनॉमी, बजट, एग्रीकल्चर और समसामयिक विषयों पर लिखते हैं )</strong></em></span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/08/image_750x500_6117d83f37f76.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ईरान को चीनी का निर्यात करने की अनुमति चाहते हैं निर्यातक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/08/image_750x500_6117d83f37f76.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जुलाई में महिंन्द्रा की ट्रैक्टर बिक्री में पांच फीसदी की वृद्धि  रही]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mahindra-farm-equipment-sector-sells-25769-tractor-in-india-during-july-2021.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 03 Aug 2021 10:55:34 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/mahindra-farm-equipment-sector-sells-25769-tractor-in-india-during-july-2021.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong><em>मुम्बई</em></strong><strong><em>, 3<span>अगस्त , </span>2021</em></strong></p>
<p>महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड की फार्म इक्विपमेंट डिविजन ने जुलाई 2021 माह के आंकड़े जारी करते हुए कहा कि उनने इस साल&nbsp; &nbsp;25,769 टैक्ट्रर की बिक्री की है जबकि पिछले साल जुलाई, 2020 में की समान अवधि &nbsp;में 24463 टैक्ट्ररों की बिक्री हुई &nbsp;थी। कंपनी ने इस साल घरेलू और निर्यात बाजार में कुल 27229 ट्रैक्टरों की बिक्री की है। जिसमें 1460&nbsp; ट्रैक्टरों का निर्यात किया गया है। पिछले साल निर्यात समेत कुल ट्रैक्टर बिक्री 25,402 रही थी।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इस प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के फार्म इक्विपमेंट डिविजन के अध्यक्ष <span>हेमंत सिक्का</span>&nbsp;<span>ने कहा है कि</span>&nbsp;<span>कम्पनी ने जुलाई, 2021 के दौरान घरेलू बाजार में पिछले वर्ष की तुलना में पांच फीसदी की वृद्धि के साथ 25,769 ट्रैक्टर बेचे हैं। जुलाई में मांग में तेजी बनी रही क्योंकि सभी क्षेत्रों में मानसून अच्छा होने से &nbsp;फसल की बुवाई के कार्यों में तेजी आई है।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>दूसरी तऱफ रबी फसल की रिकॉर्ड खरीद और कोरोना प्रतिबंधों में ढील के कारण कृषि क्षेत्र में आई मजबूती, &nbsp;कृषि आय &nbsp;औऱ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है। उन्होंने आशा वयक्त की किआने वाले में महीने अच्छे मानसून और खरीफ फसलों की &nbsp;एमएसपी में वृद्धि और आगामी त्योहारों के सीजन के कारण ट्रैक्टर की मांग सकरात्मक बनी रहेगी । इसके साथ उन्होंने बताया कि, जुलाई माह के 1460 टैक्ट्ररों का निर्यात कर कम्पनी ने ट्रैक्टर निर्यात में 55 फीसदी की वृद्धि हासिल की है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/08/image_750x500_6109200e73254.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जुलाई में महिंन्द्रा की ट्रैक्टर बिक्री में पांच फीसदी की वृद्धि  रही ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/08/image_750x500_6109200e73254.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर भारत में सिल्क करोबार का  विस्तार करेगी रेशा मंडी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/ReshaMandi-eyes-expansion-of-silk-portfolio-in-Delhi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 31 Jul 2021 13:07:32 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/ReshaMandi-eyes-expansion-of-silk-portfolio-in-Delhi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>दिल्ली, 31 जुलाई 2021</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">भारत की पहली सिल्क एग्रीटेक कंपनी रेशा मंडी ने देश के उत्तरी राज्यों में अपनी योजनाओं के विस्तार की घोषणा की है इस&nbsp; &nbsp;कार्य के&nbsp; संचालन के लिए&nbsp; दिल्ली में सेटअप स्थापित किया है । बेंगलुरु की स्टार्ट-अप कंपनी&nbsp; रेशा मंडी के दिल्ली&nbsp; में सेटअप स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य है दक्षिण भारत के रेशम उत्पादक राज्यों, उत्तर भारत में बुनकरों और रिटेलर्स के बीच सही तरीके से संपर्क स्थापित करना है। जिससे सप्लाई चेन में जो कमियां हैं उनको दूर किया जा सके। जिससे इस &nbsp;व्यवसाय से जुड़े लोगों &nbsp;का आर्थिक जोखिम को कम किया जाय औऱ तकनीक का इस्तेमाल कर बिचौलियों के हाथों रिटेलर्स और बुनकरों के शोषण को समाप्त किया जाय।</p>
<p style="text-align: justify;">कोरोना महामारी के कारण जो प्रतिबंध लगाए गए थे उसकी <span>वजह से सिल्क की दुकानों में घटती मांग और घटते फुटफॉल के कारण रेशम बुनकरों और रिटेलर्स की कमाई करने के अवसरों में भारी कमी आई गई है। दिल्ली में रेशा मंडी का यह ब्ल्यू प्रिंट एक व्यवहारिक कदम के रूप में देखा जा सकता है जिसका उद्देश्य अनियमित क्षेत्र में स्टैंडर्डाइज़ेशन और ट्रांसपेरेंसी लाना है। कंपनी के मुख्य प्रस्तावों में बुनकर समुदाय के लिए</span>&nbsp;<span>उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) परीक्षण क्वालिटी वाले ग्रेडेड यार्न शामिल हैं ताकि इससे उत्पाद का बेहतर दाम मिल सके। कंपनी वित्तीय सहायता देने के साथ करोबार टर्नओवर बढ़ाने के लिए भी मदद करेगी । रेशा मंडी </span>300 <span>से अधिक खुदरा विक्रेताओं के नेटवर्क के साथ काम करती है और सामान बेचने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदान करती है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;रेशा मंडी कम्पनी&nbsp; के संस्थापक और सीईओ, <span>मयंक तिवारी ने कहा है कि </span><span>दिल्ली में हमारी सेवाओं का विस्तार हमारी व्यापार विकास रणनीति और रेशम में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए है । दक्षिणी राज्यों में अपने पैर जमाने के बाद</span>,<span> अब हम उत्तर में रेशम बुनकरों और खुदरा विक्रेताओं (रिटेलर्स ) के व्यवसाय को &nbsp;विकसित करेंगे। उन्होंने कहा हमने जो नेटवर्क बनाया है औऱ तकनीक विकसित की हैं उसके आधार पर हम क्षमताओं का लाभ उठाते हुए भारत के रेशम उद्योग को एक नई दिशा प्रदान करेंगे जिससे कि रेशम करोबार में देश और आगे बढ़ सके इसके लिए &nbsp;देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच मजबूत सहयोग हो इसकी उम्मीद करते हैं ताकि, देश रेशम &nbsp;में आत्मनिर्भरता के सपने की ओर हम अग्रसर हो सकें।</span></p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;रेशा मंडी ने मार्च 2021 <span>में सीड फंडिंग के तहत </span>17 लाख <span>डॉलर जुटाए। </span>&nbsp;2020 <span>में कंपनी की स्थापना के बाद रेशा मंडी ने कर्नाटक</span>, <span>आंध्र प्रदेश</span>, <span>तमिलनाडु और महाराष्ट्र में अपने आप को सफलतापूर्वक मजबूत किया है</span>, <span>जहां यह </span>12000 <span>से अधिक रेशम किसानों</span>, 560 <span>रीरिलर्स</span>, 3840 <span>बुनकरों और </span>300 <span>खुदरा विक्रेताओं के नेटवर्क के साथ सीधे काम कर रही है रेशम उद्योग के उत्थान के लिए उत्पादन की बेहतर पद्यति और वैज्ञानिक तकनीक से भी लोगों के अवगत कराते हैं। इस पहल से रेशम उत्पादन में बढोत्तरी के साथ इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के आय में वृद्धि हुई है। साथ ही ऱेशम के बने समान खरीदने वाले अंतिम उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में कमी आई है।</span><span> रेशा मंडी इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को मोबाइल एप्लिकेशन से जोड़ती है और उनके रेशम उत्पादों के उत्पादन और आपूर्ति की सुविधा प्रदान करता है।</span></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_6105461b4018d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर भारत में सिल्क करोबार का  विस्तार करेगी रेशा मंडी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_6105461b4018d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पहली तिमाही में इफको किसान का पशु चारा कारोबार 30 फीसदी बढ़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/iffco-kisan-registers-30-per-cent-jump-in-the-cattle-feed-business-in-first-quarter.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 27 Jul 2021 15:03:15 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/iffco-kisan-registers-30-per-cent-jump-in-the-cattle-feed-business-in-first-quarter.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div dir="auto">
<p><em><strong>नई दिल्ली, 27 जुलाई, 2021</strong></em></p>
<strong> </strong> इफको किसान संचार ने मवेशी चारा कारोबार के पहले तीन महीने पुरे होने पर अच्छा प्रदर्शन दर्ज किया हैं।&nbsp; इस कारोबार में लगभग 30 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है।&nbsp; इफको भारत की सबसे बड़ी सहकारी समितियों में से एक है, जिसका पूर्ण स्वामित्व भारतीय सहकारी समितियों के पास है।&nbsp;</div>
<div dir="auto">मंगलवार को इफको किसान संचार ने मवेशी चारा कारोबार के पहले तीन महीने पूरे होने पर चारा बिक्री में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। वित्तीय वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही अप्रैल-जून के दौरान कंपनी ने 49.13 करोड़ रुपये के पशु आहार की बिक्री कर 29.73 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। वही कंपनी ने पिछले साल 2019-20 में पहली तिमाही के दौरान 37.87 करोड़ रुपये के पशु आहार की बिक्री की थी।&nbsp; नेशनल सेल्स हेड, गणेश दास ( इफको किसान संचार लिमिटेड) ने कहा कि &lsquo;अप्रैल-जून 2021 के दौरान कोविड-19 की दूसरी लहर की वजह से बाजार में कठिन परिस्थितियों के बावजूद हमने पहली तिमाही में अपने पशु चारा व्यवसाय में एक सराहनीय वृद्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि जून में कारोबार शुरू हुआ क्योंकि कोरोनो वायरस के मामले घट रहे थे और कंपनी ने अकेले इसी महीने में 10,000&nbsp; टन पशु चारा बेचा क्योंकि पशु चारा बिक्री में वृद्धि, उसके गुणवत्ता वाले पशु आहार के कारण और किसानों में जागरूकता बढ़ने की वजह से हुई है।</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">गणेश दास ने कहा कि इफको किसान पशु चारा उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ निर्मित किया जाता हैं जिसके परिणामस्वरूप ही कंपनी को देश भर के ग्राहकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।&nbsp; वित्त वर्ष 2020-21 में अपने संचालन के पहले पूर्ण वर्ष में कंपनी ने 160 करोड़ रुपये मूल्य का एक लाख टन पशु चारा बेचा था। वहीं इसके पहले वित्त वर्ष 2019-20 में प्रायोगिक आधार पर मिश्रित पशु चारा व्यवसाय में प्रवेश किया। यह इफको किसान के कुल कारोबार में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान देता है और कंपनी के विकास का एक प्रमुख केंद्र है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">गणेश दास ने कहा कि &ldquo;इफको किसान, किसानों के साथ मिलकर काम करते हुए कच्चा माल सीधे खेतों से प्राप्त करते है, जिस वजह से गुणवत्ता की जांच करना आसान हो जाता है,सभी गुणवत्ता की जांच हमारी स्वयं की प्रयोगशालाओं यानि की लैब में किया जाता हैं , गुणवत्ता आश्वासन के साथ ही किसान को उपज का उचित मूल्य मिलता है क्योंकि इसमें कोई बिचौलिया शामिल नहीं हैं , इफको किसान&nbsp; गुणवत्ता वाले पशु चारे को उपलब्ध कराकर और उनकी उपज का उचित मूल्य दिलवा कर दोनों तरफ से किसानों को लाभ पहुँचता हैं साथ ही किसान समुदाय में गुणवत्तापूर्ण पशु आहार का उपयोग करने के लिए जागरूकता बढ़ रही है क्योंकि घटिया मिलावटी उत्पाद मवेशियों के स्वास्थ्य पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डालता है जबकि इफको किसान मवेशी चारा बेहतर पशु स्वास्थ्य और दूध की गुणवत्ता के लिए तैयार किया गया एक संतुलित आहार है।</div>
<div dir="auto"></div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_61001e4ca1502.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पहली तिमाही में इफको किसान का पशु चारा कारोबार 30 फीसदी बढ़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_61001e4ca1502.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एसएलसीएम के  एआई और एमएल आधारित क्वालिटी एप के लिए यूरोपियन अनुदान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/slcm-gets-european-grant-for-ai-and-ml-based-applications.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 14 Jul 2021 05:59:24 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/slcm-gets-european-grant-for-ai-and-ml-based-applications.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div style="display: none;"></div>
<p><em><strong>नई दिल्ली, 14 जुलाई 2021</strong></em></p>
<p>नई दिल्ली स्थित ऐग्री टेक्नोलॉजी और वेयरहाउसिंग सॉल्यूशंस कंपनी सोहन लाल कमॉडिटी मैनेजमेंट (SLCM) ने अपने खाद्यान्न एवं दालों की क्वालिटी एप्लीकेशन के विकास के लिए टेक्निकल असिस्टेंस फैसिलिटी ऑफ इनकोफिन agRIF फंड (agTAF) और स्मॉलहोल्डर सेफ्टी नैट अपस्केलिंग प्रोग्राम (SSNUP) से 1,25,901 यूरो (एक करोड़ 11 लाख रुपये)&nbsp; का अनुदान प्राप्त किया है।</p>
<p>वेयरहाउसिंग कंपनियों की श्रेणी में किसी भारतीय कंपनी द्वारा हासिल किया गया यह सबसे बड़ा और अपनी तरह का अकेला प्रतिष्ठित यूरोपियन तकनीकी सहायता अनुदान है।</p>
<p>इस अनुदान को पाने के लिए और भी कई वैश्विक उम्मीदवार थे। agTAF प्रक्रिया के मुताबिक, इसके लिए तीन स्तरीय चयन प्रक्रिया रखी गई थी जिसमें प्रारंभिक आंकड़े संकलन, प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए जांच और उच्चस्तरीय विशेषज्ञों वाली समिति द्वारा अनुमोदन शामिल होते हैं।&nbsp;</p>
<p>agTAF समिति द्वारा सभी प्रस्तावों को चार कसौटियों पर परखा गया। वित्तीय एवं रणनीतिक प्रदर्शन बढ़ाने की क्षमता, सामाजिक, पर्यावरणीय प्रदर्शन और सुशासन, जोखिम का प्रबंधन व उसे कम करना और&nbsp; आपातकालीन सहायता। इनके अंतर्गत यह समीक्षा की गई कि छोटे किसानों को बेहतर सेवाएं और अहम कार्यवाही योग्य सूचनाएं देकर उनकी पैदावार एवं गुणवत्ता बेहतर करने की दिशा में क्या काम किया गया। प्रमाणन प्रक्रिया के अनुपालन तथा निष्पक्ष कारोबार या अन्य ऑर्गेनिक बाजारों तक उनकी पहुंच को सुगम करने के लिए छोटे किसानों की क्षमता में कैसे इज़ाफा किया गया। जोखिम घटाने के लिए प्रबंधन में बेहतरी, जिसमें कृषि-ऋण योजना और अन्य कृषि मूल्य श्रृंखला फाइनेंसिंग मॉडल भी शामिल हों। साथ ही, संकट काल में अथवा अन्य अप्रत्याशित स्थितियों में काम जारी रखने के लिए आपात प्रतिक्रिया पैकेज का प्रावधान।</p>
<p>SSNUP समिति कृषि के महत्व से संबंधित विविध कसौटियों पर प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन करती है।&nbsp; जिनमें मांग, छोटे किसानों से उन्हें जोड़े जाने की मापनीयता, संवहनीय कृषि विधियां, जेंडर संबंधी उपयोगिता और खाद्य सुरक्षा शामिल हैं। समिति यह भी जांच करती है कि कृषि मूल्य श्रृंखला में संगठन किस प्रकार शामिल है। वित्तीय एवं संस्थागत आत्मनिर्भरता, पर्यावरणीय, सामाजिक व गवर्नेंस (ईएसजी) व्यापारिक अभ्यास, कारोबारी सौदों को गहनता और विस्तार देने हेतु क्षमता व प्रतिबद्धता तथा कृषि जोखिम घटाने व समाधान स्थानांतरित करने के लिए परीक्षण या सुधार हेतु तैयारी।&nbsp;</p>
<p>SLCM को अनुदान के लिए चुने जाने पर SSNUP चयन समिति ने अपने वक्तव्य में कहा, &rsquo;&rsquo;हमारा मानना है कि यह बहुत दिलचस्प और अभिनव प्रस्ताव है जो SSNUP की कई प्राथमिकताओं को पूरा करता है। कृषि वेअरहाउस बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए यदि सूचना की विषमताओं को दूर करने व सौदों की लागत को कम करने में कामयाबी मिली तो न केवल छोटे किसानों को बल्कि समस्त मूल्य श्रृंखला को लाभ होगा और इस प्रकार पूरा ईकोसिस्टम बेहतर बनेगा।&rsquo;&rsquo;</p>
<p>विकास की प्रक्रिया में चल रहे प्रोजेक्ट पर भरोसा जताने के लिए एसएलसीएम के सीईओ संदीप सभरवाल ने agTAF और SSNUP को धन्यवाद देते हुए ने कहा, "पहले उद्योग 4.0 की शुरुआत कई अप्रत्याशित बदलाव आए और फिर 2019 के आखिर में वैश्विक कारोनावायरस महामारी से इन्हें और गति मिली। एक डिजिटाइज़्ड उपक्रम होने के नाते SLCM ग्रुप में हम कृषि उद्योग में अपने कार्यक्षेत्र में व्यापक स्तर पर डिजिटलीकरण के कार्य में अग्रदूत बनने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। एक और साहसिक कदम आगे बढ़ाते हुए हम इस AI एवं ML-ऐनेबल्ड ऐप को अपने उस लक्ष्य की दिशा में तैनात करेंगे जिसके तहत हम इलेक्ट्रॉनिकली कनेक्टिड कृषि मूल्य श्रृंखला तैयार करना चाहते हैं। 1,25,901 यूरो का यह अनुदान हमारे सतत प्रयासों की गवाही देता है जिनके जरिए हम अपने स्टेकहोल्डरों व ग्राहकों की आसानी के लिए प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण में लगे हैं तथा फसल कटाई के बाद भारतीय कृषि मूल्य श्रृंखला को आधुनिक बनाने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। हम अपने निवेशकों, कारोबारी भागीदारों व ग्राहकों को धन्यवाद देते हैं की उन्होंने एसएलसीएम के डिजिटल उत्पादों व समाधानों पर अपना भरोसा लगातार बनाए रखा है।&rsquo;&rsquo;</p>
<p>2009 में स्थापित एसएलसीएम ग्रुप भारत व म्यांमार में टेक्नोलॉजी &nbsp;से चलने वाली वेअरहाउसिंग सेवाएं देता है जैसे कि कृषि कमॉडिटीज़ का वैज्ञानिक भंडारण, फ्यूमिगेशन, परीक्षण व प्रमाणन और भंडारण रसीद पर वित्तीय मदद। वर्तमान में कंपनी का नेटवर्क 7,088 वेअरहाउस का है और बीते तीन वर्षों में किसानधन यूनिट के जरिए इन्होंने रु. 2,307.04 करोड़ के ऋण वितरित किए हैं। यह कंपनी अपनी सेवाएं किसानों, संसाधकों, कारोबारियों और कमॉडिटी एक्सचेंजों को देती है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>एसएलसीएम क्वालिटी ऐपः अपनी तरह का पहला &rsquo;मेड इन इंडिया&rsquo; समाधान<br />स्मार्टफोन व टैबलेट पीसी जैसे उपकरणों पर डाउनलोडिंग के लिए उपलब्ध रहने वाला यह ऐप कारोबारी या किसान को इस काबिल बनाएगा की वह गुणवत्ता जांच हेतु फसल के बीजों को स्कैन कर सके। यह ऐप विविध खाद्यान्नों व दालों जैसे गेहूं, चावल, चना, ग्वार, मूंग व तूर की किस्मों को अनेक क्वालिटी पैरामीटरों पर जांचने में सक्षम होगा। प्रयोगशाला परिणामों के मुकाबले मिनटों में 90 प्रतिशत सटीकता के साथ यह ऐप अपना काम करेगा। परिणामों की तुलना बैक-ऐंड &nbsp;सिस्टम पर पहले से दर्ज डाटा के साथ की जाती है जो रियल टाइम बेसिस पर पायथॉन प्रोग्रामिंग के साथ मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करते हुए खुद को नियमित रूप से अपडेट कर सकता है।<br /><br /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_60ee7d31cdb04.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एसएलसीएम के  एआई और एमएल आधारित क्वालिटी एप के लिए यूरोपियन अनुदान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_60ee7d31cdb04.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बीएएसएफ वेंचर कैपिटल ने  अर्बन किसान में निवेश किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/BASF-Venture-Capital-invests-in-Indian-hydroponics-pioneer-UrbanKisaan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 13 Jul 2021 17:06:54 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/BASF-Venture-Capital-invests-in-Indian-hydroponics-pioneer-UrbanKisaan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p></p>
<p><em><strong>हैदराबाद, 13 जुलाई, 2021</strong></em></p>
<p>बीएएसएफ ( BASF)&nbsp; वेंचर कैपिटल ने भारत की एक&nbsp; स्टार्टअप कंपनी &ldquo;अर्बन किसान&rdquo; &nbsp;कम्पनी में निवेश किया है। अर्बन किसान&nbsp; &nbsp;हाइड्रोपोनिक तरीके से सब्जियों और हर्ब्स को उगाने के क्षेत्र&nbsp; में काम करने वाली देश की सबसे पहली कंपनियों में शामिल हैं। बीएएसएफ वेंचर कैपिटल का यह शुरुआती निवेश है और भारत में निवेश करने के उसके फैसले के तहत यह पहलना निवेश है। अर्बन किसान की परिकल्पना साल 2017 में &nbsp;की गई थी जो आजकल हैदाराबाद और बंगलौर जैसे मेट्रो शहरों में&nbsp; ग्रीन हाउस, वर्टिकल&nbsp; औऱ इनडोर फार्म संचालित कर रही है । यह कम्पनी ताजा और स्वास्थ्य के अनुकूल सब्जियों को उगाकर बेचती है। इसमें से बहुत सी सब्जियों को वह सीधे अपने खुद की जगह और फ्रेंचाइजी के जरिये उगाती है और उसके लिए ऐप और औऱ बेवसाइट का इस्तेमाल करती है। अर्बन किसान और बीएएसएफ वेंचर कैपिटल के बीच निवेश के ब्यौरे को साझा नहीं करने पर सहमति है।&nbsp;</p>
<p>अर्बन किसान ने हाइड्रोपोनिक तकनीक को भारत जैसे सब ट्रापिकल जलवायु में इस्तेमाल करने के लिए अनुकुलित किया&nbsp; है। पारंपरिक हाइड्रोपोनिक की तुलना में&nbsp; अर्बन किसान की तकनीक में केवल दसवां हिस्सा लागत आती है। अर्बन किसान का मानना है कि आनलाइन फूड रिटेलिंग के बढ़ते चलन का वह फायदा उठा सकती है। अर्बन किसान के सीईओ और सह संस्थापक विहारी कोनूकोल्लू का कहना है कि हम हाइड्रोपोनिक की संभावना का बेहतर उपयोग करते हैं और इसके साथ ही हमारी उत्पादन लागत भी काफी किफायती है। हमारे उत्पाद उत्पादन की टिकाऊ प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं क्योंकि यह एक साफ और हाइजनिक फार्म में उत्पादित होते हैं। इसके जरिये हम कार्बन फुटप्रिंट में भी कटौती करने में सहयोग कर रहे हैं। जिसके लिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) के जरिये मानिटरिंग तकनीक का उपयोग करते हैं। हम पेस्टिसाइड का इस्तेमाल नहीं करते हैं। जिस तरह से हमारे ग्राहक बढ़ रहे हैं उसे देखते हुए यह साबित होता है कि हमारे काम को लोगों के बीच जगह मिल रही है।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;बीएएसएफ वेंचर कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर मारकस सोलीबिएदा ने कहा कि अर्बन किसान हाइड्रोपोनिक क्षेत्र में काम करने वाली सबसे पहली कंपनियों&nbsp; में और उसने उत्पादन और बिक्री का एक खास बिजनेस मॉडल तैयार किया है। एगटेक दुनिया भर में निवेश का एक विकल्प के रूप में उभर रहा है। इन्नोवेटिव एग्रीकल्चर को प्रोत्साहन हमारे महत्वपूर्ण लक्ष्य का हिस्सा है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_60edc81d50c84.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बीएएसएफ वेंचर कैपिटल ने  अर्बन किसान में निवेश किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_60edc81d50c84.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कम्प्रेस्ड बायोगैस एनर्जी सेक्टर और कृषि  क्षेत्र के लिए गेम चेंजर होगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/Compressed-Bio-Gas-will-be-a-game-changer-for-the-energy-and-agriculture-sector.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 11 Jul 2021 08:32:28 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/Compressed-Bio-Gas-will-be-a-game-changer-for-the-energy-and-agriculture-sector.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अब किसान कम्प्रेस्ड बायोगैस की मदद से आर्थिक गतिविधियों को उर्जा सुरक्षा दे पाएंगे,प्रदूषण को कम कर&nbsp; पाएंगे और पर्यावरण को स्वच्छ बना पाएंगे, इस बात की जानकारी भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विभाग के सचिव तरूण कपूर ने पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा 9 जूलाई को नई दिल्ली में आयोजित वर्चुअल कॉन्क्लेव में दी&nbsp; उन्होने&nbsp; बताया&nbsp; बायो-गैस से भारी बाहन से लेकर टैक्ट्रर औऱ चार पहिया वाहन चल सकते है ।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कम्प्रेस्ड बायोगैस एनर्जी सेक्टर के साथ-साथ कृषि के अवशेषो का बेहतर इस्तेमाल होगा इससे किसानों आमदनी के साथ-साथ शहरों को स्वस्छ वातावरण मिलेगा। उनका कहना है कि अब हमारी कोशिश है कि पराली को भी सही तरीके से इस्तेमाल किया जाय जिससे कि प्रदूषण कम हो ।</p>
<p>तरूण कपूर ने कहा कि मंत्रालय का लक्ष्य&nbsp; उच्च क्षमता वाले कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित करने की योजना है जिससे ज्यादा ज्यादा कम्प्रेस्ड बायोगैस&nbsp; का उत्पादन&nbsp; हो सके । अगर हम कॉम्प्रेस्ड बायोगैस&nbsp; को नेचुरल गैस के साथ मिलाते है आगे चलकर नेचुरल गैस में कॉम्प्रेस्ड बायोगैस के मिश्रण को औऱ बढाया जा सकता है। अगले कुछ साल में कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट की गति को बढाना ,भूमि अधिग्रहण ,इस योजना के लिए वित्तीय प्रबंधन जैसे चुनौतियों का तरूण कपूर ने जिक्र किया । उन्होंने ने कहा कि बायोगैस प्लांटो की स्थापना से&nbsp; उद्योग के लिए अवसर भी&nbsp; आएंगे । बायो गैस से लाभ के अवसरों के बारे में बात करते&nbsp; हुए कपूर ने&nbsp; कहा कि हमारा मंत्रालय बायो फर्टिलाइजर के क्षेत्र में कई स्टार्टअप को बढ़ावा दे रहा है। जिससे बायोगैस प्लांट का मूल्यवर्धन&nbsp; होगा।</p>
<p>इस वर्चुअल कॉन्क्लेव में मौजूदा वक्त में स्वच्छ औऱ सस्ते ईंधन की उप्लब्धता, निवेश के अवसर, पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकी के नवाचार &nbsp;और भारत के गैस उत्पादन के लक्ष्य पर भी चर्चा&nbsp; की गई ।</p>
<p>कम्प्रेस्ड बायोगैस हमारे लिए वरदान साबित हो सकती है । इसके ईंधन के रूप में इस्तेमाल से न सिर्फ पर्यावरण स्वच्छ हो पाएगा साथ ही पेट्रोलियम उत्पादों पर हमारी निर्भरता कम &nbsp;हो सकेगी ।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_60eaac887ec2a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कम्प्रेस्ड बायोगैस एनर्जी सेक्टर और कृषि  क्षेत्र के लिए गेम चेंजर होगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_60eaac887ec2a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पॉम ऑयल के आयात में दी गई छूट  पर घरेलू खाद्य तेल उद्योग  को आपत्ति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/free-import-of-refined-palm-oils-will-kill-the-domestic-industry-says-industry-body-sea.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 07 Jul 2021 10:13:17 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/free-import-of-refined-palm-oils-will-kill-the-domestic-industry-says-industry-body-sea.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div style="display: none;"></div>
<p>घरेलू खाद्य तेल उद्योग के संगठनों का कहना है कि रिफाइंड पॉम ऑयल के आयात पर प्रतिबंध हटाने के सरकार के फैसले का देश में खाद्य तेल उद्योग और तिलहन उत्पादक किसानों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।&nbsp; खाद्य तेल उद्योग के संगठन द सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीईए) और सेंट्रल आर्गनाइजेशन ऑफ ऑयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड (कॉएट) ने बयान जारी कर यह बात कही है। इन संगठनों का कहना है कि सरकार को रिफाइंड पॉम ऑयल औऱ पॉमोलीन के प्रतिबंध मुक्त आयात के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए । इन उत्पादों के आय़ात को खुली छूट देने के फैसले से देश मे तेल की घरेलू इकाइयां बर्बाद हो जाएंगी और तिलहन उत्पादक किसानों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा।</p>
<p>असल में पिछले एक साल में खाद्य तेलों के दाम बहुत तेजी से बढ़े हैं और खाद्य महंगाई दर में बढ़ोतरी की यह एक बड़ी वजह रही है। कुछ खाद्य तेलों के मामले में खुदरा कीमतें लगभग दो गुनी हो चुकी हैं। इस महंगाई पर अंकुश के लिए सरकार आयात के मोर्चे पर कई फैसले लिए। इनमें पॉम ऑयल की कुछ श्रेणियों को प्रतिबंधित सूची से हटाकर मुक्त आयात की सूची में रखने का आदेश 30 जून को जारी किया। इसी कदम का उद्योग विरोध कर रहा है।</p>
<p>इस संबध में कॉएट के&nbsp; अध्यक्ष&nbsp; सुरेश नागपाल ने <strong>रूरल वॉयस</strong> कि&nbsp; हमे डर है कि &nbsp;सरकार के इस फैसले से&nbsp; घरेलू तेल उद्योग पर बुरा प्रभाव पड़ेगा । दूसरी तरफ सार्क देशो से आयात की शुल्क मुक्त सुविधा के चलते भी खाद्य तेल आय़ात में भारी बढोतरी होगी। इस आयात से सरकार को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। नागपाल का कहना है कि पिछले साल सार्क देशों से आयात के चलते लगभग 1200 करोड़ रुपये के राजस्व&nbsp; नुकसान हुआ था।</p>
<p>वहीं वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को लिखे एक पत्र में सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीईए) ने&nbsp; मांग की है कि आऱबीडी पॉम ऑयल औऱ आरबीडी पॉमोलीन &nbsp;के आय़ात को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा जाना चाहिए।</p>
<p>एसईए के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने इस पत्र में कहा है कि तेल तिलहन उद्योग&nbsp; 31 दिसंबर, 2021 तक आरबीडी पॉमोलिन और आरबीडी पॉम ऑयल के मुक्त आयात को अनुमति देने के सरकार के फैसले से हैरान है।</p>
<p>एसईए का कहना है कि 8 जनवरी, 2020 से डीजीएफटी की अधिसूचना के माध्यम से आरबीडी पॉमोलीन और आरबीडी पॉम ऑयल के आयात को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया था जिसका परिणाम यह रहा देश में पामोलीन का आय़ात 2018-19 में 27.3 लाख टन से घटकर साल 2019-20 में 4.21 लाख टन रह गया।</p>
<p>चालू विपणन साल में नवम्बर, 2020 से मई, 2021 की अवधि के दौरान मुश्किल से इस तेल की 21 हजार टन मात्रा ही भारत में आय़ात हुई है।</p>
<p>चतुर्वेदी ने कहा कि हमे लगता है कि खाद्य तेल की बढ़ी कीमतों से मुद्रसफीति पर होने वाले प्रभाव से सरकार की चिंता थोड़ी बढ़ी है। मगर थोक मूल्य सुचकांक (डब्ल्यूपीआई) मे खाद्य तेल का भार केवल 2.64293 फीसदी ही है। ऐसे में तेल की कीमतों को लेकर ज्यादा चिंता नही करनी चाहिए। सरकार को किसानों औऱ उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाने की जरूरत है।</p>
<p>अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि वनस्पति तेल की बढ़ी कीमतें देश के किसानों के लिए वरदान साबित होंगी क्योंकि इससे देश में निश्चित रूप से तिलहन की खेती का क्षेत्रफल बढ़ेगा जो तेल के आय़ात की निर्भरता को कम करने के लिए सहायक होगा। उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों में वनस्पति तेलों की कीमतों में 25 फीसदी की गिरावट आई है ।</p>
<p>एसईए के अनुसार पॉम ऑयल के मुक्त आयात की अनुमति देने से कीमतों में कोई गिरावट नहीं आएगी बल्कि घरेलू तेल उद्योग बरबाद हो जाएंगे। संगठन का कहना है कि देश में रिफाइनिंग मिलें पहले से ही कम क्षमता और कम लाभ पर काम कर रही हैं। पिछले डेढ़ साल से रिफाइंड पॉम ऑयल के प्रतिबंधित सूची में होने से इस उद्योग में निवेशकों की अधिक रुचि बढ़ी है। सरकार के इस निर्णय से इसमें निवशकों का मनोबल गिरेगा और इससे उन तक एक गलत संदेश जाएगा। इसके साथ आरबीडी पॉमोलीन औऱ आरबीडी पॉम ऑयल को खुली आयात की छूट देने से किसानों पर विपरीत असर पड़ेगा क्योंकि इससे घरेलू तिलहन की कीमतों को कम करने का दबाव बढ़ेगा ।</p>
<p>एसईए ने यह भी कहा कि जहां 2 जुलाई, 2021 से लेकर क्रूड पॉम ऑयल (सीपीओ) पर इंडोनेशिया की लेवी और निर्यात शुल्क 291 डॉलर है वहीं आरबीडी पॉमोलीन पर 187 डॉलर प्रति टन का शुल्क है। साथ ही मलयेशिया मे भी रिफायंड पॉम ऑयल की तुलना में सीपीओ पर निर्यात शुल्क 90 डॉलर है। इसलिए हम सरकार से आग्रह करते हैं कि&nbsp; 30 जून,2021 की डीजीएफटी अधिसूचना को वापस लेने और घरेलू खाद्य तेल रिफाइननरों के हित में अन्य रिफायंड तेलो को &ldquo;प्रतिबंधित&rdquo; श्रेणी मे रखने का फैसला लिया जाए।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_60e57e306b50d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पॉम ऑयल के आयात में दी गई छूट  पर घरेलू खाद्य तेल उद्योग  को आपत्ति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_60e57e306b50d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत&amp;#45;ईयू एफटीए में डेयरी उत्पादों के रियायती आयात  के विरोध में इंडस्ट्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/Dairy-Industry-opposing-concession--to-dairy-import-under-proposed-India-EU-FTA.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 25 Mar 2021 08:09:02 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/Dairy-Industry-opposing-concession--to-dairy-import-under-proposed-India-EU-FTA.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>&nbsp;</p>
<p>भारत और यूरोपीय यूनियन (ईयू) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के तहत डेयरी उत्पादों के आयात की सुविधा देने के प्रस्ताव का विरोध शुरू हो गया है। इस समय एफटीए पर वाणिज्य मंत्रालय संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है ताकि उनसे जुड़े मुद्दों पर समझौते को अंतिम रूप देने के पहले राय बनाई जा सके। यह विरोध कुछ उसी तरह का है जिस तरह के विरोध के चलते सरकार ने नवंबर, 2019 में रीजनल कांप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसेप) में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में शामिल होने से इनकार कर दिया था क्योंकि उस समय भी आरसेप में शामिल न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया से सस्ते डेयरी उत्पादों के आयात के कारण देश के करोड़ों डेयरी किसानों के लिए संकट पैदा होने की आशंका जताई गई थी। वाणिज्य मंत्री&nbsp; पीयूष गोयल कई बार बयान दे चुके हैं कि भारत और ईयू के बीच जल्दी ही एफटीए हो जाएगा। इस समझौते के तहत ईयू के देश भारत के डेयरी और ऑटोमोबाइल बाजार में प्रवेश के लिए रियायत पर जोर दे रहे हैं।</p>
<p>देश के डेयरी उद्योग के लोगों का कहना है कि डेयरी क्षेत्र में ईयू को एफटीए के तहत छूट देने का मतलब होगा कि देश के करीब करोड़ों दुग्ध किसानों के सामने संकट का खड़ा होना। देश में डेयरी सेक्टर पिछले कुछ साल में लगातार किसानों की आय का बेहतर स्रोत बन रहा है। उनका कहना है कि एफटीए के मसौदे को अंतिम रूप देने के पहले हमें डेयरी किसानों के हितों को ध्यान में रखने की जरूरत है। हमें किसी भी कीमत पर किसानों के&nbsp; हितों पर समझौता नहीं करना चाहिए।</p>
<p>इस समय देश में चीज, आइसक्रीम और यॉगर्ट का 30 फीसदी की दर आयात करने की अनुमति है। बटर और फैट पर 40 फीसदी और मिल्क पाउडर पर 60 फीसदी का आयात शुल्क लागू है। इंडस्ट्री सूत्रों का कहना है कि ऐसे में हमें अपना डेयरी मार्केट ईयू के लिए क्यों खोलना चाहिए। यही नहीं टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) के तहत हर साल दस हजार टन स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) का आयात 15 फीसदी के रियायती आयात शुल्क पर करने की अनुमति है। इसके उपर की मात्रा पर 60 फीसदी का आयात शुल्क लागू है।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक इस समय वाणिज्य मंत्रालय भारत-ईयू एफटीए के लिए संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श की प्रक्रिया पर काम कर रहा है। डेयरी उद्योग इन बैठकों में अपनी आशंका जाहिर कर चुका है। उसका कहना है कि यूरोपीय यूनियन के सदस्य देश डेयरी निर्यात में बड़े प्लेयर हैं और कई उत्पादों के मामले में उनके पास निर्यात बाजार की बड़ी हिस्सेदारी है। इसकी बड़ी वजह वहां पर डेयरी किसानों को मिलने वाली भारी सब्सिडी है। ऐसे में हमारे करोड़ों छोटे दूध किसानों के लिए इस प्रतिस्पर्धा में टिकना मुश्किल हो जाएगा।</p>
<p>असल में ईयू को चीज जैसी ऊंची कीमत वाले डेयरी उत्पाद के आयात में रियायत पर विचार किया जा रहा है। डेयरी उद्योग का कहना है कि जब पहले से ही 30 फीसदी के आयात शुल्क पर चीज की कितनी भी मात्रा का आयात किया जा सकता है तो अलग से छूट देने की क्या जरूरत है। भारत में चीज का बाजार करीब 70 हजार टन का है और यह करीब &nbsp;2100 करोड़ रुपये का मार्केट है। इसमें करीब तीन चौथाई हिस्सा कंज्यूमर पैक में बिकता है जबकि बाकी पीजा हट, डोमिनो, बर्गर किंग, मैकडोनॉल्ड व केएफसी जैसी कंपनियों को जाता है। लेकिन चीज का यह मार्केट सेगमेंट काफी तेजी से बढ़ रहा है।&nbsp;</p>
<p>उक्त सूत्र का कहना है कि सरकार ने प्रॉडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम में निर्यात प्रोत्साहन के लिए मोजरैला चीज को शामिल किया है। इसके चलते डेयरी इंडस्ट्री चीज उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी कर रही है और यह क्षमता दो लाख टन के करीब पहुंच गई है।&nbsp; ऐसे में ईयू से चीज के आयात पर रियायत देना सरकार की खुद की स्कीम के उद्देश्य के उलट होगा।</p>
<p>भारत हर साल करीब 3000 टन चीज का आयात करता है। जो ऊंची कीमत वाली श्रेणी की चीज होती है। साल 2020 के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया के कुल 212.22 लाख टन चीज उपादन में ईयू की हिस्सेदारी 103.5 लाख टन की थी। इसी तरह दुनिया के कुल 21.62 लाख टन चीज निर्यात में ईयू की हिस्सेदारी 9.31 लाख टन थी। जो चीज के कुल वैश्विक बाजार का करीब 34 फीसदी है। वहीं ईयू के देश अपने डेयरी किसानों को भारी सब्सिडी देते हैं। जिसके चलते वहां से दूध के उत्पादों और खासतौर से मिल्क पाउडर, घी और बटर जैसे उत्पादों के सस्ते आयात का खतरा काफी बड़ा है। साथ ही एफटीए के तहत इस सब्सिडी पर चर्चा संभव नहीं है। किसी भी तरह की रियायत का मतलब है कि वहां के डेयरी उत्पादों की भारत में डंपिंग की संभावना बढ़ना। जो देश के करोड़ों डेयरी किसानों के लिए घातक साबित हो सकता है। वहीं नॉन टैरिफ बेरियर्स के जरिये ईयू हमारे डेयरी उत्पादों को अपने मार्केट में प्रवेश से रोकता है। इसलिए जब हम ईयू के साथ एफटीए पर बातचीत करें तो हमारे दिमाग में यह तथ्य होने चाहिए।</p>
<p>भारत ने नवंबर 2019 में आसियान, दक्षिणी कोरिया, जापान, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और चीन समेत 15 देशों वाले रीजनल कांप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसेप) के तहत होने वाले एफटीए में शामिल होने से इनकार कर दिया था। इसकी सबसे बड़ी वजह आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से एफटीए के तहत सस्ते डेयरी उत्पादों के आयात का डर था जो देश के करोड़ों दूध किसानों के लिए मुश्किल पैदा करने वाला साबित हो सकता था। डेयरी उद्योग सूत्रों का कहना है कि अब इसी तरह का समझौता अगर ईयू के साथ होता है तो इसे कैसे जायज ठहराया जा सकता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/03/image_750x500_605bf783c6a88.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत-ईयू एफटीए में डेयरी उत्पादों के रियायती आयात  के विरोध में इंडस्ट्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/03/image_750x500_605bf783c6a88.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार देश में जेनेटिकली मॉडीफाइड तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देः सीओओआईटी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/government-should-promote-cultivation-of-Genetically-Modified-Oil-seeds.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 18 Mar 2021 13:02:32 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/government-should-promote-cultivation-of-Genetically-Modified-Oil-seeds.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस समय देश की खाद्य तेल मांग को पूरा करने के लिए हमारा तिलहन उत्पादन पर्याप्त नहीं है। <span>&nbsp;</span>इसी के मद्देनज़र तेल उद्योग एवं कारोबार संगठन<span>&nbsp;</span>सेंट्रल ऑर्गेनाइज़ेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री एण्ड ट्रेड (सीओओआईटी) <span>&nbsp;</span>ने सुझाव दिया है कि सरकार को देश में जेनेटिकली मॉडीफाइड (जीएम) तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देना चाहिए। तिलहन की जीएम फसलों की उत्पादकता अधिक है और यह देश की खाद्य तेल जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो सकती हैं।&nbsp;</p>
<p>सीओओआईटी&nbsp; का कहना है कि इसके परिणामस्वरूप देश को ज़रूरी खाद्य तेल क्षेत्र में<span> &lsquo;</span>आत्मनिर्भर<span>&rsquo;</span>बनाने में मदद मिलेगी। तिलहन खेती को बढ़ावा देने के लिए<span>, </span>ज़रूरी है कि किसानों के उत्पादों के मद्देनज़र उनके हितों का संरक्षण किया जाए। <span>&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p><span>1994-95 </span>में भारत की खाद्य तेल आयात निर्भरता मात्र<span> 10 </span>फीसदी थी<span>, </span>जो बढ़ती आबादी एवं बेहतर होती जीवनशैली के चलते मांग बढ़ने लेकिन उसके अनुपात में उत्पादन नहीं बढ़ने से 70 फीसदी हो गई है। इसकी एक बड़ी वजह तिलहन फसलों की कम उत्पादकता है।</p>
<p>देश का खाद्य तेलों का प्रति व्यक्ति सालाना उपभोग<span>&nbsp;2012-13 </span>में<span> 15.8 </span>किलो से बढ़कर अब<span> </span><span>19-19.5 </span>किलो तक पहुंच गया है। हालांकि<span> 1200 </span>किलो<span>/ </span>हेक्टेयर पर<span>, </span>भारतीय तेलबीजों की उत्पादकता<span>, </span>दुनिया के औसत की तकरीबन आधी है और शीर्ष पायदान के उत्पादकों की एक तिहाई से भी कम है।</p>
<p><span>सीओओआईटी के चेयरमैन बाबू लाल डाटा का कहना है कि </span>अगर स्वदेशी उत्पादकता और उत्पादन बहुत अधिक नहीं बढ़ते<span>, </span>तो हमारी आयातित तेलों पर निर्भरता बढ़ती चली जाएगी। मौजूदा स्थिति को देखते हुए<span> ,</span>उपभोक्ताओं को तुरंत राहत प्रदान करने के लिए सरकार को खाद्य तेलों पर से<span> 5 </span>फीसदी जीएसटी हटाने पर विचार करना चाहिए।</p>
<p><span>सीओओआईटी 20 </span>और<span> 21 </span>मार्च,<span> 2021 </span>को दिल्ली <span>41</span>वां अखिल भारतीय रबी सेमिनार आयोजित कर रहा है। इस दौरान तिलहनों से जुड़े कारोबार और अन्य संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। सेमिनार का विषय होगा<span> &lsquo;</span>तिलहन<span>, </span>तेल कारोबार एवं उद्योग<span>&rsquo;</span>।</p>
<p>सेमिनार में तिलहन फसल उत्पादन की संभावनाओं<span>; </span>मांग एवं आपूर्ति की स्थिति<span>; </span>कीमत,<span>&nbsp;</span>विदेशी कारोबार<span>; </span>सरकारी नीतियों, किफ़ायती दरों पर<span>&nbsp; </span>सभी वर्गों के लोगों की पोषण संबंधी ज़रूरतों का पूरा करने के लिए खाद्य तेलों की उचित आपूर्ति जैसे विषयों पर विचार<span>-</span>विमर्श किया जाएगा। <span>1958 </span>में स्थापित सीओओआईटी वनस्पति तेल सेक्टर के विकास में सक्रिय है जो अर्थव्यवस्था का बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। सीओओआईटी राष्ट्रीय स्तर की सर्वोच्च संस्था है जो देश में सम्पूर्ण वनस्पति तेल क्षेत्र और इसके सदस्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है<span>, </span>जिनमें राज्य स्तरीय संगठन<span>, </span>प्रमुख निर्माता<span>/ </span>उद्योग जगत के कारोबार<span>, </span>कारोबार एवं निर्यात सदन आदि शामिल हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/03/image_750x500_60530201e7439.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार देश में जेनेटिकली मॉडीफाइड तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देः सीओओआईटी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/03/image_750x500_60530201e7439.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारी समितियां अधिनियम के तहत देश का पहला एफपीओ गठित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/First-FPO-under-Cooperative-Societies-Act.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 02 Mar 2021 16:21:22 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/First-FPO-under-Cooperative-Societies-Act.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सहकारिता समिति अधिनियम के तहत देश का पहला कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र, वाराणसी में पंजीकृत किया गया है । यह एफपीओ हरी मिर्च और मशरूम प्रसंस्करण इकाई स्थापित करेगा। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा जारी एक प्रेस रिलीज के मुताबिक 26 फरवरी, 2021 को पंजीकृत, उत्तर प्रदेश में वाराणसी के काशी विद्यापीठ ब्लॉक के अंतर्गत स्थित टिकरी गाँव में कृषक उत्पादक संगठन एवं उद्यानिक विपणन सहकारी समिति को उच्च स्तरीय सब्जी उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए स्थापित किया जाएगा । एफपीओ द्वारा मुख्य केंद्रित वस्तुओं में मशरूम एवं हरी मिर्च हैं।</p>
<p>सामान्यतः एफपीओ, कंपनी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत होते हैं। यह पहली बार है कि सहकारी समिति अधिनियम के अंतर्गत सरकार की केंद्रीय क्षेत्रक योजना के एक भाग के रूप में &ldquo;कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन एवं संवर्धन&rdquo; नामक ऐसी इकाई स्थापित की गई है, जिसके अंतर्गत 10,000 नए एफपीओ का गठन किया जाएगा और उन्हें बढ़ावा दिया जाएगा । इस योजना को 29 फरवरी, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लांच किया गया था। इसका मकसद किसानों को &lsquo;आत्मनिर्भर&rsquo; बनने में मदद करना है।&nbsp;</p>
<p>इस योजना की पहली वर्षगांठ के अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने&nbsp; कहा कि वर्तमान विपणन प्रणाली में रणनीतिक हस्तक्षेप करने तथा कृषि के विकास की दिशा में तेजी से किसान केंद्रित सुधार लाने पर जोर दिया गया है। इस योजना को, देश के कृषि इको-सिस्टम में एक गेम चेंजर बताते हुए उन्होंने कहा कि कम-से-कम एक ब्लॉक एक एफपीओ के साथ कुल 10,000 एफपीओ स्थापित करने का सरकार का लक्ष्य है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक एफपीओ अपने आप में एक रोल मॉडल हो ताकि अन्य किसान भी उनसे प्रेरणा ले सकें।</p>
<p>इस अवसर पर आयोजित एक वर्चुअल इवेंट में मंत्रालय के संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा अपने सहयोगियों केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी&nbsp; उपस्थिति थे।</p>
<p>इस योजना की कार्यान्वयन एजेंसियों में से एक, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अंतर्गत एक शीर्ष वित्त संस्था है, जो मशरूम उत्पादन और खेती के लिए बहु-सेवा केंद्र सुविधाओं की स्थापना में आगामी पांच वर्षों के लिए एफपीओ को संभालेगी । इसके साथ ही, एक पूर्णतः विकसित प्रयोगशाला निर्मित की जाएगी, जिसमें किसानों को मशरूम उत्पादन पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। वैक्यूम नाइट्रोजन ड्राइंग &nbsp;की क्षमता वाले ड्रायर की स्थापना करके हरी मिर्च ड्राइंग प्रणाली को बेहतर बनाना है।</p>
<p>एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप नायक ने कहा कि देश में किसान एफपीओ स्थापित करने के इच्छुक हैं क्योंकि यह उनकी आय को बढ़ाने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा । उन्होंने कहा कि यह तो अभी सिर्फ शुरुआत है। उन्होंने कहा कि सरकार की देश में 10,000 नए एफपीओ बनाने और उन्हें बढ़ावा देने की योजना है, जिसके लिए 6,865 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। सरकार का लक्ष्य एफपीओ के माध्यम से कृषि को एक स्थायी उद्यम में परिवर्तित करना है।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 1 जनवरी 2021 को वर्ष 2023-24 तक देश में 10,000 एफपीओ की स्थापना एवं संवर्धन के लिए नए परिचालन दिशानिर्देश जारी किए थे। कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ), कृषि उत्पादकों के एक समूह द्वारा बनाई गई और संगठन के शेयरधारकों के रूप में उत्पादकों के साथ एक पंजीकृत निकाय है। यह कृषि उत्पाद से संबंधित व्यावसायिक गतिविधियों से संबंधित है और इसके सदस्य उत्पादकों के लाभ के लिए काम करता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/03/image_750x500_603e189bb4407.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारी समितियां अधिनियम के तहत देश का पहला एफपीओ गठित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/03/image_750x500_603e189bb4407.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कोरोना संकट के बावजूद खूब चली चीनी मिलें, 23% बढ़ा उत्पादन, महाराष्ट्र अव्वल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/Sugar-production-increased-by-23-in-Corona-crisis.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 18 Feb 2021 09:20:29 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/Sugar-production-increased-by-23-in-Corona-crisis.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले वर्ष से जारी कोविड-19 संकट के बावजूद गन्ना किसानों और चीनी मिलों ने बढ़-चढ़कर काम किया है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पेराई सत्र 2020-21 में 15 फरवरी तक देश में 208.89 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ। जबकि गत वर्ष इसी तारीख तक 170.01 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस तरह कोराना संकट के बावजूद चीनी उत्पादन में करीब 23 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।&nbsp;</p>
<p>पहली अक्टूबर से शुरू मौजूदा पेराई सत्र में 497 चीनी मिलें काम कर रही थीं, जिनमें से 33 चीनी मिलें गन्ना उपलब्ध नहीं होने के कारण पेराई रोक चुकी हैं। चीनी मिलों का यह आंकड़ा भी गत वर्ष से अधिक है जब कुल 447 चीनी मिलों ने पेराई शुरू की थी जिनमें से इस समय तक 20 मिलें बंद हो चुकी थी।</p>
<p><strong>चीनी उत्पादन में महाराष्ट्र नंबर वन </strong></p>
<p>चीनी उत्पादन के मामले में इस साल महाराष्ट्र ने फिर बाजी मार ली है। 15 फरवरी तक महाराष्ट्र की 183 चीनी मिलों ने कुल 75.46 लाख टन चीनी उत्पादन किया है। उत्तर प्रदेश 116 चीनी मिलों में 65.13 लाख टन चीनी उत्पादन के साथ दूसरे स्थान पर है। गत वर्ष के मुकाबले इस साल महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन 43.38 लाख टन से बढ़कर 75.46 लाख टन पहुंचा है जबकि यूपी में चीनी उत्पादन गत वर्ष 66.34 लाख टन से घटकर 65.13 लाख टन रहा है। महाराष्ट्र और यूपी के बाद कर्नाटक चीनी उत्पादन में तीसरे स्थान पर है जहां 15 फरवरी तक 39.07 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ। यहां भी गत वर्ष की अपेक्षा चीनी उत्पादन बढ़ा है।</p>
<p><strong>चीनी निर्यात बढ़ने की उम्मीद </strong></p>
<p>इस्मा से मिली जानकारी के अनुसार, चालू पेराई सत्र में 31 जनवरी, 2021 तक करीब 7 लाख टन चीनी का निर्यात हो चुका है। इसके अलावा करीब 25 लाख टन चीनी निर्यात के सौदे होने की जानकारी मिली है। केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर, 2020 को चीनी के निर्यात कोटे का ऐलान किया था। अगर केंद्र सरकार ईरान को चीनी निर्यात में आ रही अड़चनें दूर कर देती है तो निर्यात और बढ़ सकता है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/02/image_750x500_602e313f9f55d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कोरोना संकट के बावजूद खूब चली चीनी मिलें, 23% बढ़ा उत्पादन, महाराष्ट्र अव्वल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/02/image_750x500_602e313f9f55d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चालू शुगर सीजन में 302 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/Isma-estimate-302-lakh-tonns-sugar-production-in-current-sugar-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 29 Jan 2021 15:36:07 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/Isma-estimate-302-lakh-tonns-sugar-production-in-current-sugar-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p></p>
<p>चालू शुगर सीजन (अक्तूबर, 2020 से सितंबर2021) में देश में 302 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। जो पिछले सीजन से 30 लाख टन अधिक है। हालांकि पिछले साल देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में चालू सीजन में चीनी का उत्पादन करीब 21 लाख टन घटकर 105 लाख टन रह जाएगा। इसकी वजह गन्ने की उत्पादकता और चीनी रिकवरी में कमी आना है। चालू सीजन में महाराष्ट्र के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य बनने का अनुमान है। हालांकि यह अंतर मामूली ही रहेगा। &nbsp;इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) द्वारा 28 जनवरी को जारी दूसरे आरंभिक अनुमानों में यह जानकारी दी गई है। इस्मा का कहना है कि करीब 20 लाख टन चीनी के उत्पादन के बराबर बी-हैवी मॉलेसेस से एथनॉल बनाने के बाद 302 लाख टन चीनी का यह उत्पादन रहेगा। इसके पहले इस्मा ने जून, 2020 में जारी अनुमान में चीनी उत्पादन के 320 लाख टन रहने और अक्तबूर, 2021 में जारी अनुमानों में चीनी उत्पादन 310 लाख टन रहने की बात कही थी।</p>
<p>इस्मा के मुताबिक जनवरी के दूसरे सप्ताह में सेटेलाइज इमेज के जरिये अभी तक हार्वेस्ट किये गये गन्ने और खेतों में खड़े गन्ने के आधार पर और चीनी उत्पादक राज्यों के उद्योग प्रतिनिधियों की बैठक में दी गई जानकारी के आधार पर यह अनुमान तैयार किये गये हैं। इस्मा के मुताबिक उत्तर प्रदेश में चालू सीजन में 105 लाख टन चीनी का उत्पादन होगा जो पिछले सीजन में 126.37 लाख टन रहा था। उत्पादन घटने की वजह गन्ने की उत्पादकता घटना और चीनी की रिकवरी घटने के साथ सीधे एथनॉल का उत्पादन करना है। &nbsp;बी-हैवी मोलेसेस से एथनॉल बनाने के कारण 6.74 लाख टन चीनी उत्पादन घटेगा। इसके अलावा गुड़ और खांडसारी इकाइयों में गन्ने का डायवर्जन भी एक वजह है।</p>
<p>दूसरे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में चालू सीजन में चीनी उत्पादन उत्तर प्रदेश से मामूली अधिक 105.41 लाख टन रहेगा जो पिछले सीजन में 61.69 लाख रहा था। वहां इस सीजन में उत्पादन 48 फीसदी अधिक रहेगा। महाराष्ट्र में गन्ने के रस से तैयार बी-हैवी मोलेसेस से तैयार एथनॉल के चलते चीनी उत्पादन 6.55 लाख टन घटेगा। तीसरे बड़े चीनी उत्पादक राज्य कर्नाटक में भी इस साल उत्पादन पिछले सीजन के 34.94 लाख टन से बढ़कर 42.5 लाख पर पहुंच जाएगा। पिछले सीजन में महराष्ट्र ओर कर्नाटक में चीनी उत्पादन घटने की वजह वहां सूखा पड़ना रहा था। बाकी चीनी उत्पादक राज्यों में उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले कोई बड़ा अंतर नहीं रहेगा।</p>
<p>इस्मा के मुताबिक चालू सीजन के शुरू में अक्तूबर, 2020 को चीनी का ओपनिंग स्टॉक 107 लाख टन था। इसमें से 260 लाख टन की घरेलू खपत और 60 लाख टन के निर्यात की तय सीमा और 302 लाख टन के उत्पादन को देखते हुए सीजन के अंतर में 30 सितंबर, 2021 को चीनी का बकाया स्टॉक 89 लाख टन रहने का अनुमान है।</p>
<p>इस्मा का कहना कि सरकार ने उद्योग के लिए नकदी प्रवाह बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण&nbsp; फैसले लिये हैं। जिनमें &nbsp;60 लाख टन चीनी का निर्यात और एथनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी शामिल है। इससे गन्ना किसानों को भुगतान करने में मदद मिलेगी। लेकिन चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) पर अभी तक फैसला नहीं लिया गया जो किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है। इस समय चीनी का एमएसपी 31 रुपये किलो है। उद्योग सूत्रों का कहना है कि इसे बढ़ाकर 33 रुपये करने पर सचिवों की समिति और मंत्रियों का समूह सहमति दे चुका है। लेकिन अभी इस पर कैबिनेट की मुहर लगना बाकी है। इस पर समय से लिया गया फैसला गन्ना किसानों के भुगतान की मिलों की क्षमता बढ़ाएगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/01/image_750x500_6013ddfc38927.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चालू शुगर सीजन में 302 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/01/image_750x500_6013ddfc38927.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान हित की बात तो अर्धसत्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/agribusiness/अमेरिका,-ऑस्ट्रेलिया-और-यूरोपीय-देश-भारतीय-बाजार-में-अपना-माल-खपाने-के-लिए-लॉबिंग-करते-हैं,-लेकिन-हम-क्या-करते-हैं,-यह-साफ-नहीं.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 15 Dec 2020 07:25:46 GMT]]></pubDate>
		<category>agribusiness</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/agribusiness/अमेरिका,-ऑस्ट्रेलिया-और-यूरोपीय-देश-भारतीय-बाजार-में-अपना-माल-खपाने-के-लिए-लॉबिंग-करते-हैं,-लेकिन-हम-क्या-करते-हैं,-यह-साफ-नहीं.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आजकल सरकार के एक फैसले को लेकर काफी चर्चा है और उसको श्रेय भी दिया जा रहा है। मामला है रीजनल कांप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) समझौते से भारत के बाहर होने का। यानी हमने इस फैसले के जरिए देश के करोड़ों किसानों की रोजी-रोटी छिनने से बचा ली है। बात तो सही है। समझौता होता तो ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से सस्ते डेयरी उत्पाद हमारे डेयरी किसानों के लिए संकट पैदा कर देते। लेकिन इसके अलावा और कौन-से कृषि उत्पाद हैं जो किसानों के लिए संकट पैदा करते<span>? </span>उनमें से कई तो दशकों से संकट पैदा कर रहे हैं। यह लगातार जारी है<span>, </span>क्योंकि हमारी नीतियों की खामियां देश के किसानों को न तो पूरा संरक्षण देती हैं और न ही उनके लिए वैश्विक बाजार तलाशती हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मामले में देश में सबसे कमजोर और असहाय कृषि क्षेत्र ही है<span>, </span>क्योंकि सरकार के मंत्रालयों के बीच ही बेहतर तालमेल नहीं है।</p>
<p>अब बात उन एशियाई देशों की लें<span>, </span>जो आरसीईपी में हिस्सेदार हैं। हम दुनिया में सबसे अधिक खाद्य तेल आयात करने वाले देशों में शुमार होते हैं और मलयेशिया और इंडोनेशिया हमें भारी मात्रा में पॉम ऑयल का निर्यात करते हैं। नौवें दशक में हम खाद्य तेलों के मामले में लगभग आत्मनिर्भर थे और जरूरत का <span>10</span> से <span>15</span> फीसदी ही आयात करते थे। लेकिन अब तो बात <span>40</span> फीसदी तक आ पहुंची है। हमें निर्यात करने वाले देशों में ब्राजील<span>, </span>कनाडा और अमेरिका सहित तमाम देश शामिल हो गए हैं। और तो और<span>, </span>ऑलिव ऑयल के लिए एक अच्छा-खासा बाजार देश में तैयार कर लिया गया है। इन देशों की सरकारों या उनके उत्पादक संगठनों ने देश में अच्छी-खासी लॉबिंग की और यहां बाजार खड़ा कर लिया है। लेकिन हमारे नौकरशाह और सरकारें ऐसा कुछ नहीं करती हैं। हमने <span>1984</span> में ऑयलसीड एंेड पल्सेज टेक्नोलॉजी मिशन बनाया<span>, </span>लेकिन इसके नतीजे नहीं आए और हम बड़े आयातक बनते चले गए।</p>
<p>इसमें थोड़ा बदलाव करीब तीन साल पहले आया जब उस वक्त के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता वाली समिति ने दाल उत्पादक किसानों के लिए ऊंचे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने और सरकारी खरीद बढ़ाने की सिफारिश की। उस पर अमल हुआ और दनहन की बंपर उपज हो गई। लेकिन दो साल बाद किसानों को एमएसपी से काफी नीचे दालें बेचनी पड़ीं। जहां तिलहन उगाने वाले किसानों को अधिकांश मामलों में एमएसपी नहीं मिलता है<span>, </span>वहां किसान पैदावार कैसे बढ़ाएं। लेकिन तेल आयात तो जारी है। दाम बढ़ते ही सीमा शुल्क कम होने लगता है। यही हाल गन्ना किसानों का है। देश में चीनी का बंपर उत्पादन होने से स्टॉक बहुत ज्यादा है। नतीजा<span>, </span>किसानों को अभी पिछले पेराई सीजन का कई हजार करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश की सरकार ने अभी राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) तय नहीं किया है जबकि नया पेराई सीजन शुरू हुए डेढ़ माह बीत गया है। प्याज के दाम बढ़ते ही निर्यात पर अंकुश सामान्य बात है। अमेरिका से लेकर ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देश भारतीय बाजार में अपना माल खपाने के लिए लगातार लॉबिंग करते हैं<span>, </span>लेकिन हम इस मामले में क्या करते हैं<span>, </span>कुछ साफ नहीं दिखता है। मसलन<span>, </span>अमेरिकी सेब<span>, </span>कैलिफोर्निया के बादाम और पीच उत्पादकों के एसोसिएशन हमारे देश में विज्ञापन देकर बाजार तैयार कर रहे हैं। भले ही कश्मीर और हिमाचल प्रदेश का सेब बाजार में बेहतर स्थिति में न पहुंचे<span>, </span>लेकिन चीन का फ्यूजी एप्पल बाजार में मिल जाता है। यह किसी महंगे बाजार की बात नहीं है। सामान्य रिटेल स्टोरों में यह सब उपलब्ध है।</p>
<p>इस मोर्चे पर कृषि, खाद्य, वाणिज्य और विदेश मंत्रालयों के बीच कोई तालमेल ही नहीं दिखता। कृषि उपजों के मामले में उनकी प्राथमिकता भी काफी नीचे है। इसलिए, भले हम इस मुगालते में रहें कि इस बार किसानों की आवाज ज्यादा असरदार रही और सरकार ने आरसीईपी से हाथ खींच लिए, असल में यह अर्धसत्य ही है। असल बात उद्योग, सेवाओं, निवेश और ऑनलाइन रिटेल पर अटकी है। वरना अब भी मुक्त व्यापार समझौतों के तहत तमाम कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में आ रहे हैं और इसका खामियाजा घरेलू किसानों को उठाना पड़ता है। दीर्घकालिक निर्यात नीति का न होना भी किसानों के खिलाफ जाता है। इसलिए संरक्षण मिल जाना ही काफी नहीं है, बल्कि बड़ा बाजार और वहां पहुंचने के लिए मौके मिलना भी उतना ही अहम है। तभी देश के किसानों की बेहतर कमाई के रास्ते भी खुलेंगे। लेकिन इसके लिए उनको प्रतिस्पर्धी भी करनी होगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2020/12/image_750x500_5fd8b2238d339.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान हित की बात तो अर्धसत्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2020/12/image_750x500_5fd8b2238d339.jpg" width="220"/>
    </item>
    </channel>
</rss>