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    <title>Farmer News: Government Schemes for Farmers, Successful Farmer Stories &#45; : Cooperatives</title>
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    <description>Farmer News: Government Schemes for Farmers, Successful Farmer Stories &amp;#45; : Cooperatives</description>
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    <item>
        <title><![CDATA[इफको ने वर्ष 2025–26 में दर्ज किया रिकॉर्ड लाभ और उत्कृष्ट समग्र प्रदर्शन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-posts-record-profit-and-excellent-overall-performance-in-2025–26.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 01 Apr 2026 23:45:47 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-posts-record-profit-and-excellent-overall-performance-in-2025–26.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>विश्व की अग्रणी सहकारी उर्वरक संस्था इफको ने वित्त वर्ष 2025&ndash;26 में शानदार प्रदर्शन की घोषणा की है। इफको ने अब तक का सर्वाधिक, Rs 4,106 करोड़ से अधिक का अनुमानित कर-पूर्व लाभ (PBT) अर्जित करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। साथ ही, पारंपरिक एवं नैनो उर्वरकों के उत्पादन और बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।</p>
<p>यह अभूतपूर्व लाभ न केवल इफको की वित्तीय सुदृढ़ता और परिचालन उत्कृष्टता को दर्शाता है, बल्कि किसानों के कल्याण एवं ग्रामीण समृद्धि के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।</p>
<h3>उत्पादन प्रदर्शन</h3>
<p>वित्त वर्ष 2025&ndash;26 के दौरान इफको ने कुल 90.62 लाख टन उर्वरकों का उत्पादन किया। इसमें 48.28 लाख टन यूरिया तथा 42.34 लाख टन एनपीके, डीएपी, डब्ल्यूएसएफ एवं विशेष उर्वरक शामिल हैं।</p>
<p>इफको के फूलपुर, आंवला और पारादीप संयंत्रों में रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया गया। साथ ही, पारादीप में बेहतर बंदरगाह संचालन के कारण लॉजिस्टिक्स दक्षता में भी वृद्धि हुई। मजबूत उत्पादन के चलते, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद किसानों को उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिली।</p>
<h3>बिक्री प्रदर्शन</h3>
<p>इफको ने वित्त वर्ष 2025&ndash;26 में 119.68 लाख टन उर्वरकों की कुल बिक्री की, जो देशभर में इसकी सुदृढ़ वितरण प्रणाली और बढ़ती मांग को दर्शाती है। पारंपरिक उर्वरकों की बिक्री 118.75 लाख टन पर मजबूत बनी रही।</p>
<p>वित्त वर्ष के दौरान नैनो उर्वरकों की कुल बिक्री 301 लाख बोतलों से अधिक रही। इसमें 221 लाख बोतल नैनो यूरिया प्लस लिक्विड और 64.89 लाख से अधिक बोतल नैनो डीएपी लिक्विड शामिल हैं। इस वर्ष नैनो जिंक और नैनो कॉपर की बिक्री की भी शुरुआत हुई।</p>
<p>पारंपरिक और नैनो उर्वरकों में यह संतुलित वृद्धि उत्पादकता और स्थिरता के प्रति इफको की दोहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। साथ ही, कृषि में आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में किसानों का रुझान भी बढ़ रहा है।</p>
<h3><strong>नैनो उर्वरकों पर जोर</strong></h3>
<p>इफको के अध्यक्ष <strong>दिलीप संघाणी</strong> ने कहा कि हम &lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; के लक्ष्य को साकार कर रहे हैं। हमारी हर उपलब्धि केवल व्यावसायिक सफलता नहीं, बल्कि किसानों की बेहतर सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने किसानों से नैनो उर्वरकों को अपनाने और सहकारिता की शक्ति का लाभ उठाने का आह्वान किया।</p>
<p>इफको के प्रबंध निदेशक <strong>के.जे. पटेल</strong> ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय इफको परिवार और सहयोगी संस्थाओं को दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त उपक्रमों और सहयोगी संस्थाओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का परिणाम है।</p>
<h3>नवाचार और आत्मनिर्भरता</h3>
<p>इफको ने नैनो उर्वरकों, बायो-स्टिमुलेंट्स और उन्नत कृषि तकनीकों के माध्यम से आत्मनिर्भर कृषि को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। संस्था का मानना है कि इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और मृदा स्वास्थ्य में सुधार आएगा।</p>
<p>इसके तहत रासायनिक भार कम करने, पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।</p>
<h3>एग्री 2.0 की ओर अग्रसर</h3>
<p>आगामी वित्त वर्ष 2026&ndash;27 के लिए इफको ने &lsquo;एग्री 2.0&rsquo; का रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत नवाचार के विस्तार, वैश्विक सहयोग को मजबूत करने और कृषि मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।</p>
<p>इफको ने स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिकता केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि और मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण भी है। संस्था संतुलित पोषण, किफायती इनपुट्स और उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग के प्रति किसानों में जागरूकता बढ़ाने पर कार्य कर रही है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको ने वर्ष 2025–26 में दर्ज किया रिकॉर्ड लाभ और उत्कृष्ट समग्र प्रदर्शन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीईएल ने सहकारी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए पंजाब और लद्दाख के साथ किए समझौते]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncel-to-promote-cooperative-exports-through-mou-with-punjab-and-ladakh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 28 Mar 2026 16:42:40 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncel-to-promote-cooperative-exports-through-mou-with-punjab-and-ladakh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) ने सहकारी क्षेत्र के कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मार्कफेड पंजाब और लद्दाख के बागवानी विभाग के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन साझेदारियों का उद्देश्य वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाना, मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करना और क्षेत्र-विशिष्ट उत्पादों को बढ़ावा देना है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो और भारत एक विश्वसनीय कृषि निर्यात केंद्र के रूप में उभरे।</p>
<p>24 मार्च 2026 को चंडीगढ़ में एनसीईएल ने मार्कफेड पंजाब के साथ राज्य के कृषि और संबद्ध उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए समझौता किया। इस MoU पर एनसीईएल के प्रबंध निदेशक <strong>अनुपम कौशिक</strong> और मार्कफेड पंजाब के प्रबंध निदेशक <b>गिरीश दयालन</b> ने हस्ताक्षर किए।</p>
<p>इस साझेदारी का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता सुधारना, वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ाना और कुशल व टिकाऊ मूल्य श्रृंखलाएं विकसित करना है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके। अधिकारियों के अनुसार, यह साझेदारी सहकारी नेटवर्क के माध्यम से निर्यात क्षमता को मजबूत करेगी और ग्रामीण आय में वृद्धि करेगी।</p>
<p>इससे पहले 19 मार्च 2026 को एनसीईएल ने नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में लद्दाख के बागवानी विभाग के साथ एक अन्य MoU पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते पर <strong>अनुपम कौशिक</strong> और लद्दाख के बागवानी निदेशक<strong> त्सेवांग पंचोक</strong>&nbsp;ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69c7b771a39f6.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>यह दीर्घकालिक सहयोग लद्दाख की सहकारी समितियों से निर्यात योग्य कृषि और संबद्ध उत्पादों की पहचान और प्रोत्साहन पर केंद्रित होगा। इसके तहत बाजार संपर्क, खरीद सहायता और क्षेत्र की विशेष परिस्थितियों के अनुरूप टिकाऊ एवं लाभकारी मूल्य श्रृंखलाएं विकसित की जाएंगी।</p>
<p>इस पहल के तहत लद्दाख के विशिष्ट उत्पादों जैसे खुबानी, ऊन, सीबकथॉर्न और उच्च ऊंचाई वाले जैविक उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रदर्शित किया जाएगा।</p>
<p><strong>एनसीईएल</strong> भारत में सहकारी निर्यात के लिए एक प्रमुख संस्था के रूप में कार्य करती है। ये पहलें &ldquo;सहकार से समृद्धि&rdquo; के उसके संकल्प को दर्शाती हैं, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों सहित देशभर में किसानों और सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाना और भारत को वैश्विक कृषि बाजार में एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करना है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीईएल ने सहकारी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए पंजाब और लद्दाख के साथ किए समझौते ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको के नैनो एनपीके को एफसीओ के तहत मंजूरी, फर्टिलाइजर इनोवेशन में अहम कदम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-nano-npk-approved-under-fco-significant-step-towards-fertilizer-innovation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Mar 2026 22:13:49 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-nano-npk-approved-under-fco-significant-step-towards-fertilizer-innovation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उर्वरक क्षेत्री की प्रमुख सहकारी संस्था इफको ने नैनो उर्वरक तकनीक के क्षेत्र में एक कदम हुए अपने स्वदेशी नैनो एनपीके लिक्विड (8-8-10) और नैनो एनपीके दानेदार (20-10-10) को फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर (एफसीओ) के तहत मंजूरी प्राप्त की है। इस संबंध में अधिसूचना भारत सरकार के राजपत्र में जारी की गई है।</p>
<p>इफको के प्रबंध निदेशक के.जे. पटेल ने इस उपलब्धि को नैनो नवाचार की दिशा में &ldquo;ऐतिहासिक मील का पत्थर&rdquo; बताते हुए इसे देश के लिए गर्व का विषय कहा। उन्होंने कहा कि इफको ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर नैनो उर्वरक तकनीक में अग्रणी भूमिका निभाई है।</p>
<p><strong>संतुलित पोषण को बढ़ावा</strong></p>
<p>इफको द्वारा विकसित ये नैनो फॉर्मूलेशन संतुलित पोषण प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। नैनो एनपीके लिक्विड फसलों के पत्तीदार पोषण (फोलियर एप्लिकेशन) के लिए तैयार किया गया है, जबकि नैनो एनपीके दानेदार (20-10-10) मृदा एवं जड़ पोषण के लिए उपयोगी है।</p>
<p>दोनों उत्पाद मिलकर फसलों की जरूरत के अनुसार सटीक और लक्षित पोषण उपलब्ध कराते हैं, जिससे पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ती है। उम्मीद है कि इन नवाचारों के माध्यम से पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी, किसानों की लागत घटेगी और उन्हें बेहतर उपज के साथ उच्च गुणवत्ता वाला उत्पादन प्राप्त होगा।&nbsp;</p>
<p>पटेल के अनुसार, इन उत्पादों से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होगा और फसल उत्पादकता में वृद्धि होगी। साथ ही, पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी, जिससे किसानों की लागत घटेगी और बेहतर गुणवत्ता की उपज प्राप्त होगी।</p>
<p><strong>आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम</strong></p>
<p>वैश्विक स्तर पर उर्वरक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जारी भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच यह उपलब्धि भारत के लिए अहम मानी जा रही है। इससे उर्वरकों के आयात पर निर्भरता कम करने और खेती की आवश्यकता पूरी करने में मदद मिल सकती है।&nbsp;</p>
<p>पटेल ने कहा कि यह पहल आत्मनिर्भर और सहकार के विजन के अनुरूप है।&nbsp;इफको ने किसानों के हित में आधुनिक, कुशल और पर्यावरण-अनुकूल कृषि समाधान विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है और नैनो उर्वरक तकनीक के क्षेत्र में आगे भी ऐसे नवाचार जारी रखेगा।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको के नैनो एनपीके को एफसीओ के तहत मंजूरी, फर्टिलाइजर इनोवेशन में अहम कदम ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बहु&amp;#45;राज्य सहकारी समितियों में पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे: कृष्ण पाल गुर्जर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/krishan-pal-gurjar-pushes-for-transparent-elections-in-multi-state-cooperatives.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Mar 2026 13:33:04 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/krishan-pal-gurjar-pushes-for-transparent-elections-in-multi-state-cooperatives.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा है कि सरकार बहु-राज्य सहकारी समितियों में पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मजबूत कदम उठा रही है, ताकि सहकारी संस्थाओं में लोकतांत्रिक शासन और जवाबदेही को और मजबूत किया जा सके।</p>
<p>नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित &ldquo;पारदर्शिता और शुचिता से बहु-राज्य सहकारी समितियों के चुनाव&rdquo; विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम ऐतिहासिक है और सहकारिता आंदोलन के लिए मील का पत्थर साबित होगा।&nbsp;</p>
<p>इस कार्यक्रम में बहु-राज्य सहकारी समितियों के अध्यक्ष, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, निदेशक मंडल के सदस्य, रिटर्निंग अधिकारी, जिला मजिस्ट्रेट, राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरणों के अध्यक्ष, सहकारिता क्षेत्र के विशेषज्ञ तथा केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।</p>
<p>अपने संबोधन में गुर्जर ने कहा कि पहली बार देशभर की बहु-राज्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्र हुए हैं, जहां सहकारी चुनावों में पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत करने पर चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के &ldquo;सहकार से समृद्धि&rdquo; के विजन के अनुरूप है और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता तंत्र को मजबूत करने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69b3c3e9a309d.jpg" alt="" /></p>
<p><em>कार्यक्रम को संबोधित करते सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर।</em></p>
<p>उन्होंने बताया कि सहकारी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और लोकतांत्रिक बनाने के लिए मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटीज (अमेंडमेंट) एक्ट, 2023 के माध्यम से कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। इस संशोधित अधिनियम के तहत सबसे महत्वपूर्ण कदम एक स्वतंत्र सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण की स्थापना है, जिसे 11 मार्च 2024 को औपचारिक रूप से अधिसूचित किया गया। यह प्राधिकरण बहु-राज्य सहकारी समितियों में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एक अन्य महत्वपूर्ण सुधार बहु-राज्य सहकारी समितियों के निदेशक मंडलों के कार्यकाल को निश्चित करना है। पहले ऐसी व्यवस्था थी कि चुनाव होने तक बोर्ड अनिश्चितकाल तक कार्य करता रह सकता था, जिसे समाप्त कर दिया गया है। इससे प्रशासनिक अनुशासन बढ़ेगा और चुनाव कराने में देरी की आशंका कम होगी। गुर्जर ने बताया कि सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण अब तक करीब 240 चुनाव सफलतापूर्वक आयोजित कर चुका है, जबकि लगभग 70 चुनाव वर्तमान में जारी हैं। आने वाले वित्त वर्ष में करीब 130 और चुनाव कराए जाने की संभावना है।</p>
<p>उन्होंने यह भी बताया कि संशोधित अधिनियम के तहत बहु-राज्य सहकारी समितियों के बोर्ड में महिलाओं के लिए दो सीटें तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए एक-एक सीट आरक्षित की गई हैं, ताकि सहकारी शासन में अधिक समावेशिता सुनिश्चित की जा सके। हालांकि अब तक हुए चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षित छह सीटें और एससी/एसटी के लिए आरक्षित तेरह सीटें खाली हैं और मंत्रालय इन पदों को भरने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।</p>
<p>सहकारिता राज्य मंत्री ने कहा कि बैंकिंग नियमन (संशोधन) अधिनियम, 2025 के माध्यम से सहकारी बैंकों, विशेषकर बहु-राज्य सहकारी बैंकों के बोर्ड के कार्यकाल को संविधान के अनुच्छेद 243ZJ के अनुरूप किया गया है, जिससे सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में लोकतांत्रिक शासन को और मजबूती मिलेगी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि सहकारी बैंकों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए यह प्रावधान किया गया है कि वे केंद्रीय सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार द्वारा अनुमोदित पैनल से ही ऑडिटर नियुक्त करें। इसके अलावा बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 में संशोधन कर यह भी सुनिश्चित किया गया है कि बहु-राज्य सहकारी बैंकों के निदेशक लगातार दस वर्ष से अधिक समय तक पद पर नहीं रह सकते, जिससे नए और युवा नेतृत्व को अवसर मिलेगा।</p>
<p>गुर्जर ने कहा कि सहकारी समितियां सहकारिता के मूल सिद्धांतों पर आधारित होती हैं, जिनमें सदस्यों की समान भागीदारी और लोकतांत्रिक नियंत्रण सुनिश्चित किया जाता है। उन्होंने कहा कि सहकारिता व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासनिक ढांचे की आवश्यकता है। भर्ती और खरीद प्रक्रियाओं में भी पारदर्शिता और योग्यता आधारित व्यवस्था अपनानी चाहिए, ताकि सहकारी संस्थाएं पेशेवर ढंग से संचालित हो सकें और विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान दे सकें।</p>
<p>उन्होंने यह भी बताया कि मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटीज एक्ट, 2002 में संशोधन के बाद सरकार ने 5 मार्च 2024 को राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से सहकारी लोकपाल (Cooperative Ombudsman) की नियुक्ति की है, ताकि सहकारी समितियों के सदस्यों के हितों की रक्षा की जा सके। यह लोकपाल सदस्यों की शिकायतों की जांच करता है और सहकारी सूचना अधिकारियों के आदेशों के खिलाफ अपील की सुनवाई भी करता है। अब तक 38,000 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से बड़ी संख्या का निपटारा सहकारी लोकपाल द्वारा जारी आदेशों के माध्यम से किया जा चुका है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69b3c3e87f61c.jpg" alt="" /></p>
<p><em>सेमीनार को कोऑपरेटिव इलेक्शन अथॉरिटी के चेयरमैन देवेंद्र कुमार सिंह ने भी संबोधित किया।</em></p>
<p>इस अवसर पर सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण के चेयरमैन देवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्राधिकरण अपने कार्यकाल के तीसरे वर्ष में प्रवेश कर रहा है और विभिन्न सहकारी संस्थाओं में चुनाव कराने का महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त कर चुका है। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियां लोकतांत्रिक सदस्य नियंत्रण के सिद्धांत पर कार्य करती हैं, इसलिए चुनाव प्रक्रिया का पारदर्शी, सहभागी और विश्वसनीय होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि सहकारी समितियों के उपनियमों में स्पष्टता होना जरूरी है, ताकि चुनाव के दौरान विवादों से बचा जा सके। विशेष रूप से मतदान अधिकार, सक्रिय सदस्यता और चुनाव लड़ने की पात्रता जैसे प्रावधान स्पष्ट रूप से परिभाषित होने चाहिए।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि कई राज्यों और जिलों में काम करने वाली बड़ी बहु-राज्य सहकारी समितियों में बोर्ड का प्रतिनिधित्व सदस्यों की विविधता को प्रतिबिंबित करना चाहिए।</p>
<p>इस अवसर पर दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनके विषय थे &ldquo;चुनावों के माध्यम से पारदर्शिता को बढ़ावा देना&rdquo; और &ldquo;चुनावी प्रक्रियाओं में शुचिता और निष्पक्षता को मजबूत करना&rdquo;। इन सत्रों में सहकारी चुनाव प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर प्रतिभागियों ने सक्रिय चर्चा की।&nbsp;</p>
<p>संगोष्ठी का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि सहकारी चुनावों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक भागीदारी को और मजबूत किया जाएगा, ताकि सहकारिता आंदोलन भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना रहे और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में योगदान दे सके।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b3c3e7720ab.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बहु-राज्य सहकारी समितियों में पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे: कृष्ण पाल गुर्जर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ओडिशा में अमित शाह इफको का सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट राष्ट्र को समर्पण करेंगे, कई परियोजनाओं का होगा शुभारंभ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/amit-shah-to-dedicate-iffco-sulphuric-acid-plant-and-launch-cooperative-initiatives-in-odisha.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Mar 2026 20:24:08 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/amit-shah-to-dedicate-iffco-sulphuric-acid-plant-and-launch-cooperative-initiatives-in-odisha.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span times="" new="" roman="" serif="" font-size:16px="">केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 6 मार्च 2026 को ओडिशा यात्रा के दौरान पारादीप में इफको द्वारा स्थापित सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट (SAP-III) को राष्ट्र को समर्पित करेंगे तथा सहकारिता, डेयरी विकास और गृह मंत्रालय से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शुभारंभ करेंगे।</span></p>
<p><span times="" new="" roman="" serif="" font-size:16px="">एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार,&nbsp;</span><span>पारादीप में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह इफको के पारादीप संयंत्र में स्थापित सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट (SAP-III) राष्ट्र को समर्पित करेंगे। </span><span>इसके पश्चात भुवनेश्वर स्थित आईडीसीओ प्रदर्शनी मैदान, यूनिट-III में सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहलों का शुभारंभ किया जाएगा। इनमें राज्य सहकारिता नीति का विमोचन, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के स्कूल की स्थापना के लिए समझौता-ज्ञापन, बदाम्बा शुगर उद्योग के पुनर्जीवन के लिए समझौता-ज्ञापन, तथा PACS/LAMPS द्वारा संचालित 1567 कॉमन सर्विस सेंटरों का समर्पण शामिल है।</span></p>
<p><span>इसके अतिरिक्त 141 PACS के लिए आवश्यकता-आधारित अवसंरचना का वर्चुअल उद्घाटन, आरसीएस कार्यालय पोर्टल का शुभारंभ, राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक लिमिटेड के डायरेक्ट-टू-कंज़्यूमर (D2C) पोर्टल का डिजिटल लॉन्च तथा राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड द्वारा विकसित &ldquo;Coop Marque&rdquo; और &ldquo;Savidya&rdquo; एआई-सक्षम बहुभाषी डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का शुभारंभ भी किया जाएगा।</span></p>
<p><span>डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से कार्यक्रम में ओएमफेड से संबंधित पहलों की प्रस्तुति दी जाएगी तथा दो दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को पंजीकरण प्रमाणपत्र वितरित किए जाएंगे। साथ ही मुख्यमंत्री कामधेनु योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को अनुदान जारी किया जाएगा तथा प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र के उन्नयन के लिए एनडीडीबी के साथ समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।</span></p>
<p><span>इस अवसर पर कुल 1159.03 करोड़ रुपये की लागत वाली 69 परियोजनाओं का उद्घाटन और 2116.06 करोड़ रुपये की लागत वाली 130 परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया जाएगा।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ओडिशा में अमित शाह इफको का सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट राष्ट्र को समर्पण करेंगे, कई परियोजनाओं का होगा शुभारंभ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तेलंगाना के सहकारी क्षेत्र से कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए एनसीईएल और हाका के बीच समझौता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncel-signs-mou-with-haca-to-boost-cooperative-exports-from-telangana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 17 Feb 2026 16:19:23 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncel-signs-mou-with-haca-to-boost-cooperative-exports-from-telangana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-path-to-node="3">तेलंगाना के कृषि क्षेत्र को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए <b data-path-to-node="3" data-index-in-node="155">नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (NCEL)</b> और&nbsp;<b data-path-to-node="3" data-index-in-node="104">हैदराबाद एग्रीकल्चरल को-ऑपरेटिव एसोसिएशन (HACA)</b> ने एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस रणनीतिक साझेदारी का उद्देश्य राज्य की सहकारी समितियों द्वारा उत्पादित कृषि उत्पादों के निर्यात को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना है।&nbsp;हैदराबाद में आयोजित इस कार्यक्रम में तेलंगाना सरकार के कृषि एवं सहकारिता सचिव <b data-path-to-node="4" data-index-in-node="78">के. सुरेंद्र मोहन (IAS)</b> सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।</p>
<p data-path-to-node="3">एनसीईएल के प्रबंधन निदेशक <strong>अनुपम कौशिक</strong> ने बताया कि&nbsp;एचएसीए और एनसीईएल के बीच यह साझेदारी तेलंगाना की सहकारी समितियों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने और उनके उत्पादों को प्रतिस्पर्धा में लाने का प्रयास करेगी। यह समझौता किसानों, सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण समुदायों को निर्यात आधारित सतत विकास के माध्यम से सशक्त बनाने की दोनों संगठनों की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।</p>
<h3 data-path-to-node="5"><b data-path-to-node="5" data-index-in-node="0">वैश्विक बाजारों से जुड़ेंगे स्थानीय किसान</b></h3>
<p data-path-to-node="6">इस समझौता के तहत:</p>
<ul data-path-to-node="7">
<li>
<p data-path-to-node="7,0,0"><b data-path-to-node="7,0,0" data-index-in-node="0">बाजार पहुंच:</b> स्थानीय सहकारी समितियों को सीधे वैश्विक खरीदारों से जोड़ा जाएगा। निर्यात योग्य कृषि एवं संबद्ध उत्पादों की पहचान और प्रोत्साहन</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="7,1,0"><b data-path-to-node="7,1,0" data-index-in-node="0">प्रतिस्पर्धात्मकता:</b> उत्पादों की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।&nbsp;</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="7,2,0"><b data-path-to-node="7,2,0" data-index-in-node="0">खरीद और विपणन:</b> NCEL निर्यात योग्य अधिशेष (Surplus) उत्पादों की खरीद और मार्केटिंग में सक्रिय भूमिका निभाएगा</p>
</li>
<li><strong>लाभकारी मूल्य श्रृंखला:</strong> निर्यात योग्य उत्पादों के लिए एक सतत और लाभकारी मूल्य श्रृंखला विकसित की जाएगी, जो
<p data-start="1462" data-end="1717">जो अंतरराष्ट्रीय मानकों और मांग को पूरा कर सके और किसानों को दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करे।</p>
</li>
</ul>
<h3 data-start="1719" data-end="1743">समावेशी विकास पर जोर</h3>
<p data-path-to-node="9">समझौते के तहत NCEL की निर्यात विशेषज्ञता और HACA के जमीनी नेटवर्क का यह मेल राज्य को एक प्रमुख 'एक्सपोर्ट हब' के रूप में विकसित करने में सहायक होगा और&nbsp;</p>
<p data-path-to-node="9">तेलंगाना के कृषि एवं सहकारिता सचिव के. सुरेंद्र मोहन ने कहा,"यह सहयोग तेलंगाना के कृषि उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा।"<b data-path-to-node="11" data-index-in-node="0"></b></p>
<p data-path-to-node="12">HACA के अधिकारियों के अनुसार, यह साझेदारी बाजार पहुंच (Market Access) से जुड़ी पुरानी बाधाओं को दूर करेगी। अब तक सहकारी समितियों के पास अधिशेष उत्पादन तो था, लेकिन वैश्विक खरीदारों तक पहुंचने के लिए संरचित चैनलों की कमी थी। यह समझौता उस कमी को पूरा कर किसानों की आय में सीधे वृद्धि करेगा।</p>
<p data-path-to-node="12">यह साझेदारी&nbsp;तेलंगाना के सहकारी निर्यात परिदृश्य को नया स्वरूप देने और राज्य को उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों के प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ तेलंगाना के सहकारी क्षेत्र से कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए एनसीईएल और हाका के बीच समझौता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अरुणाचल प्रदेश से सहकारी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एनसीईएल और एपीसीसीएफ के बीच समझौता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/अरणचल-परदश-स-सहकर-नरयत-क-बढव-दन-क-लए-एनसईएल-और-एपससएफ-क-बच-समझत.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Feb 2026 17:43:20 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/अरणचल-परदश-स-सहकर-नरयत-क-बढव-दन-क-लए-एनसईएल-और-एपससएफ-क-बच-समझत.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="257" data-end="602">पूर्वोत्तर क्षेत्र से सहकारी ढांचे के माध्यम से निर्यात को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अरुणाचल प्रदेश कंज्यूमर कोऑपरेटिव फेडरेशन (APCCF) ने राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) के साथ नई दिल्ली में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।</p>
<p data-start="257" data-end="602">इस समझौते पर एनसीईएल की ओर से सहकारी सेवाओं के प्रमुख <strong>सत्य प्रकाश शर्मा</strong> और एपीसीसीएफ की ओर से प्रबंध निदेशक <strong>निकलेन लेगो</strong> ने हस्ताक्षर किए। अधिकारियों ने इसे अरुणाचल की सहकारी संस्थाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।&nbsp;</p>
<p data-start="604" data-end="892">इस समझौते का उद्देश्य अरुणाचल प्रदेश की कृषि और संबद्ध उत्पादों के निर्यात अवसरों को सहकारी ढांचे के माध्यम से बढ़ाना है। सहयोग के तहत कीवी, संतरा, अनानास, अदरक और इलायची जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों के निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा, जिनकी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी मांग है।</p>
<p data-start="894" data-end="1235">एमओयू के तहत एनसीईएल राज्य की सहकारी समितियों को बाजार संपर्क और खरीद सहायता प्रदान करेगा। साथ ही, टिकाऊ वैल्यू चेन विकसित करने, गुणवत्ता मानकों में सुधार लाने और उत्पादकों को बेहतर मूल्य दिलाने पर भी जोर दिया जाएगा। सहकारी समितियों के माध्यम से उत्पादों का एकत्रीकरण कर लेनदेन लागत घटाने और किसानों की सौदेबाजी क्षमता बढ़ाने की उम्मीद है।</p>
<p data-start="1237" data-end="1511"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x500_698c71aff13c2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अरुणाचल प्रदेश से सहकारी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एनसीईएल और एपीसीसीएफ के बीच समझौता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहकारिता&amp;#45;आधारित टैक्सी सेवा ‘भारत टैक्सी’ लांच की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/union-home-and-cooperation-minister-amit-shah-launched-first-cooperative-based-taxi-service-bharat-taxi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Feb 2026 22:30:37 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/union-home-and-cooperation-minister-amit-shah-launched-first-cooperative-based-taxi-service-bharat-taxi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div class="container">
<div id="accessories">
<div class="pull-right"></div>
</div>
<div class="innner-page-main-about-us-content-right-part">
<p><span>केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में भारत की पहली सहकारिता-आधारित टैक्सी सेवा &lsquo;भारत टैक्सी&rsquo; का औपचारिक शुभांरभ किया।&nbsp;</span><span>कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए मालिकाना हक का एक मॉडल तैयार कर रहा है। तीन साल के अंदर कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामख्या तक सहकार टैक्सी हमारे टैक्सी सारथियों के कल्याण का एक बहुत बड़ा माध्यम बन जाएगी। मैने जब पहली बार संसद के सामने सहकार टैक्सी का विषय रखा तो बहुत सारे लोगों</span><span>,&nbsp;</span><span>खासकर टैक्सी परिचालन से जुड़ी कंपनियों</span><span>,&nbsp;</span><span>ने सवाल उठाया कि सरकार टैक्सी के क्षेत्र में क्यों प्रवेश कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को &lsquo;सहकार&rsquo; और &lsquo;सरकार&rsquo; के बीच का भेद नहीं मालूम है। सरकार टैक्सी के क्षेत्र में प्रवेश नहीं रही</span><span>,&nbsp;</span><span>बल्कि सहकार (</span><span>Cooperation)&nbsp;</span><span>टैक्सी के क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है।</span></p>
<p><span>केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि शायद पूरी दुनिया में पहली बार ऐसी अनूठी कंपनी अस्तित्व में आ रही है</span><span>,&nbsp;</span><span>जिसका असली मालिक कोई व्यक्ति या बाहरी कंपनी नहीं</span><span>,&nbsp;</span><span>बल्कि टैक्सी चलाने वाला सारथी ही है। सहकार टैक्सी से जुड़े हर एक सारथी भाई-बहन ही इस सहकारी टैक्सी समिति के सच्चे मालिक हैं। उन्होंने कहा कि यह संकल्पना सहकार टैक्सी से जुड़ने वाले सारथियों के जीवन</span><span>,&nbsp;</span><span>आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिति में आमूल-चूल परिवर्तन लाने वाली है। शाह ने यह भी कहा कि हमारे देश में पहले ऐसे कई मॉडल सफल हो चुके हैं। सिर्फ 11 दूध उत्पादकों ने अमूल की शुरुआत की थी। आज गुजरात में 36 लाख से अधिक पशुपालक महिलाओं का विशाल वटवृक्ष खड़ा हो चुका है। यह पशुपालक महिलाएं सवा लाख करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार करती हैं। उन्होंने कहा कि यह मॉडल दर्शाता है कि जब आम लोग स्वयं मालिक बनते हैं</span><span>,&nbsp;</span><span>तो छोटी शुरुआत भी बहुत बड़े परिणाम दे सकती है। उन्होंने कहा कि पशुपालक बहनें आज दूध बेचकर एक करोड़ रुपए तक की सालाना कमाई कर रही हैं</span><span>,&nbsp;</span><span>जो सहकारी मॉडल का कमाल है।</span></p>
<p><span>उन्होंने टैक्सी सारथियों से अपील की कि वे अभी भी टैक्सी चलाते हैं</span><span>,&nbsp;</span><span>सहकार टैक्सी से जुड़ने के बाद भी टैक्सी चलाएँगे</span><span>,&nbsp;</span><span>लेकिन दोनों में एक बड़ा फर्क होगा। अभी टैक्सी का पहिया किसी और की जेब में पैसे डालता है</span><span>,&nbsp;</span><span>लेकिन अब सारथियों की टैक्सी के पहिये की कमाई सारथियों की जेब में ही जाएगी। उन्होंने कहा कि यह विचार सहकारिता की भावना से ही जन्म लेता है। सहकारिता का असली अर्थ यही है कि जब ढेर सारे छोटे-छोटे पूंजी वाले लोग अपनी ताकत को एकत्रित कर लेते हैं</span><span>,&nbsp;</span><span>तो वे मिलकर बहुत बड़े-बड़े काम कर पाते हैं। जिनके पास बहुत बड़ी पूंजी होती है</span><span>,&nbsp;</span><span>वे अकेले बड़ा काम करते हैं और मुनाफा भी कुछ ही लोगों तक सीमित रहता है।आज जिस सहकारिता मॉडल की बात की जा रही है</span><span>,&nbsp;</span><span>वही आज के समय में सबसे नई और सबसे सफल शुरुआत है। उन्होंने कहा कि अब टैक्सी का पहिया किसी और की कमाई के लिए नहीं</span><span>,&nbsp;</span><span>बल्कि टैक्सी सारथियों की समृद्धि और खुशहाली के लिए घूमेगा।</span></p>
<p><span>केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत में कई विश्व-स्तरीय सहकारी मॉडल खड़े हो चुके हैं</span><span>,&nbsp;</span><span>जिनमें अमूल</span><span>,&nbsp;</span><span>इफको</span><span>,&nbsp;</span><span>कृभको जैसी संस्थाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से किसी भी सहकारी संस्था में शुरूआती पूंजी बहुत बड़ी नहीं थी। इसी तरह सहकार टैक्सी में सबसे बड़ी शेयर पूंजी सिर्फ 500 रुपये है और वही 500 रुपये सारथियों को असली मालिक का दर्जा दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह छोटी सी राशि टैक्सी सारथियों की मेहनत</span><span>,&nbsp;</span><span>आत्मसम्मान और उनकी आर्थिक आजादी की नींव बनने जा रही है।</span></p>
<p><span>अमित शाह ने कहा कि हर पाँच साल पर होने वाले चुनाव के बाद टैक्सी सारथियों द्वारा चुने गए दो प्रतिनिधि बोर्ड में बैठेंगे। वे ही उनके हितों की देखभाल करेंगे और उनके लिए फैसले करेंगे। यही सहकारिता की आत्मा और सच्चे मालिकाना हक की भावना है। उन्होंने कहा कि सहकार टैक्सी कुल मुनाफे में सिर्फ 20 फीसदी पैसे ही अपने पास रखेगी</span><span>,&nbsp;</span><span>यानि 100 रुपए में से 20 रुपए ही सहकार टैक्सी अपने पास रखेगी</span><span>,&nbsp;</span><span>जिसके मालिक सारथी ही हैं। उन्होंने कहा कि सारा मुनाफा भारत टैक्सी से जुड़े सारथी के अकाउंट में ही जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी के पूंजी खाते में पड़े 20 रुपए के मालिक भी सारथी ही होंगे।</span></p>
<p><span>केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत टैक्सी की कल्पना मौजूदा तीनों प्रकार के टैक्सी वाहनों को एक साथ जोड़कर की गई है जिसमें चार पहिया टैक्सी</span><span>,&nbsp;</span><span>तीन पहिया और दो पहिया वाहन शामिल हैं। उन्होंने भारत टैक्सी महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखेगी। उन्होंने कहा कि हमने सारथी दीदी की एक खास संकल्पना तैयार की है जिसके तहत आने वाले समय में ऐप में &lsquo;सारथी दीदी&rsquo; के लिए एक अलग विंडो होगी</span><span>,&nbsp;</span><span>जिसके जरिए रजिस्ट्रेशन कराने वाली किसी भी महिला को केवल &lsquo;सारथी दीदी&rsquo; ही पिक करने आएंगी। &lsquo;सारथी दीदी&rsquo; दो पहिया वाहन लेकर आएंगी और बहुत कम किराए में सुरक्षित रूप से गंतव्य तक पहुंचाएंगी। उन्होंने कहा कि यह सुविधा महिलाओं के लिए बहुत बड़ी और व्यावहारिक राहत साबित होगी। आने वाले दिनों में सारथी दीदी के माध्यम से देश की मातृ शक्ति को एक सुरक्षित</span><span>,&nbsp;</span><span>किफायती और सम्मानजनक यात्रा का विकल्प उपलब्ध होगा। यह सिर्फ एक सेवा नहीं बल्कि महिलाओं की सुरक्षा</span><span>,&nbsp;</span><span>स्वावलंबन और सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</span></p>
<p><span>केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस</span><span>,&nbsp;</span><span>दिल्ली मेट्रो रेल निगम</span><span>,&nbsp;</span><span>एयरपोर्ट अथॉरिटी</span><span>,&nbsp;</span><span>इफको टोक्यो इंश्योरेंस</span><span>,&nbsp;</span><span>स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सहित कुल नौ प्रमुख संस्थाओं के साथ भारत टैक्सी ने समझौता (एमओयू) किया है। इन समझौतों के जरिए भारत टैक्सी के ग्राहकों को कई अतिरिक्त सुविधाएँ मिलेंगी और साथ ही इन सभी संस्थाओं को भारत टैक्सी की सेवाएँ आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने कहा कि ये संस्थाएँ अब सहकार टैक्सी की सफलता में हिस्सेदार बन चुकी हैं। यह स्वामित्व मॉडल पर आधारित नया टैक्सी कॉन्सेप्ट आज पहली बार भारत में लॉन्च किया गया है</span><span>,&nbsp;</span><span>जो न केवल सारथियों के लिए मालिकाना हक की भावना लाता है</span><span>,&nbsp;</span><span>बल्कि यात्रियों और विभिन्न संस्थाओं के लिए भी एक भरोसेमंद और सुविधाजनक विकल्प प्रस्तुत करता है।</span></p>
<p><span>अमित शाह ने कहा कि भारत टैक्सी द्वारा तय किया गया फिक्स्ड चार्ज सारथियों के अकाउंट से अलग रहेगा। इसके अलावा</span><span>,&nbsp;</span><span>भारत टैक्सी सारथियों की पसीने की कमाई से एक प्रतिशत भी कमीशन नहीं काटेगी</span><span>,&nbsp;</span><span>जिससे उनकी समृद्धि तेजी से बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी का उद्देश्य कंपनी की पूंजी को बढ़ाना नहीं</span><span>,&nbsp;</span><span>बल्कि भारत टैक्सी के असली मालिक</span><span>,&nbsp;</span><span>सारथी भाइयों और सारथी दीदियों</span><span>,&nbsp;</span><span>का मुनाफा और आय बढ़ाना है। शाह ने कहा कि ग्राहक द्वारा किया गया भुगतान सीधे सारथी के अकाउंट में तत्काल ऑटोमैटिकली ट्रांसफर हो जाएगा। इसके लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। किसी भी सारथी का अकाउंट बिना उचित सुनवाई के बंद नहीं किया जाएगा। हालांकि</span><span>,&nbsp;</span><span>सारथियों का भी दायित्व है कि वे ग्राहकों के साथ अच्छा व्यवहार करें</span><span>,&nbsp;</span><span>अपनी टैक्सी की गुडविल बनाए रखें और सेवा की गुणवत्ता पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि शिकायतों की सुनवाई के लिए पूरी व्यवस्था की गई है और निष्पक्ष सुनवाई के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी।</span></p>
<p><span>केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि अब तक बुकिंग फीस</span><span>,&nbsp;</span><span>प्लेटफॉर्म फीस और भारी कमीशन जैसी बातें कंपनी की बैलेंस शीट को मोटा करती थीं और सारथी की कमाई को घटाती थीं। भारत टैक्सी में ऐसी कोई फीस या कमीशन की व्यवस्था ही नहीं है और सारथी ही मालिक होंगे। यह विचार पश्चिमी सोच वाले लोगों को शायद समझ न आए</span><span>,&nbsp;</span><span>लेकिन यही सहकारिता की असली ताकत है।</span></p>
<p><span>अमित शाह ने कहा कि भारत टैक्सी की शुरुआत सहकारिता क्षेत्र के लिए नए आयाम खोलने की भी शुरुआत है। पिछले 125 वर्षों से भारत में सहकारिता आंदोलन चल रहा है</span><span>,&nbsp;</span><span>लेकिन अब समय आ गया है कि सहकारी मॉडल को नए-नए क्षेत्रों में ले जाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए मालिकाना हक वाला मॉडल तैयार कर रहा है। आने वाले समय में हम तीन-चार ऐसे क्षेत्रों में इस मॉडल को आगे बढ़ाएंगे</span><span>,&nbsp;</span><span>जहां मेहनत करने वाले व्यक्ति के पसीने और परिश्रम का फल उसी के पास रहेगा।</span></p>
<p><span>केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत टैक्सी के चार मूल मंत्र हैं&mdash;स्वामित्व (</span><span>ownership),&nbsp;</span><span>सुरक्षा कवच (</span><span>security),&nbsp;</span><span>सम्मान (</span><span>dignity)&nbsp;</span><span>और सबका पहिया</span><span>,&nbsp;</span><span>सबकी प्रगति</span><span>,&nbsp;</span><span>यानी सभी के लिए लाभांश का उचित वितरण। इन्हीं चार उद्देश्यों के साथ भारत टैक्सी की शुरुआत हुई है और आने वाले समय में यह एक बहुत सफल प्रयोग साबित होगा। उन्होंने कहा कि 6 जून 2025 को इसकी स्थापना हुई और आज से यह कमर्शियली लॉन्च हो रही है। महज 8 महीनों के भीतर दिल्ली और गुजरात में किसी भी अन्य टैक्सी कंपनी से ज्यादा सारथी और ग्राहक भारत टैक्सी से जुड़ चुके हैं। इतने कम समय में इतने बड़े पैमाने पर रजिस्ट्रेशन किसी अन्य कंपनी ने नहीं कराए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हमारे सारथी भाइयों-बहनों को इंश्योरेंस</span><span>,&nbsp;</span><span>सरकारी रोजगार योजनाओं</span><span>,&nbsp;</span><span>लोन</span><span>,&nbsp;</span><span>सब्सिडी और गिग वर्कर से जुड़ी सभी सरकारी योजनाओं का लाभ स्वतः मिल सकेगा। हम इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं ताकि हर सारथी को पूरा सम्मान</span><span>,&nbsp;</span><span>सुरक्षा और आर्थिक मजबूती मिल सके।</span></p>
<p><span>अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने वर्ष 2020-21 में&nbsp;</span><span>Gig Workers&nbsp;</span><span>के कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की थी। अब 2025-26 के बजट में भारत सरकार देश भर के सवा करोड़ से अधिक&nbsp;</span><span>Gig Workers&nbsp;</span><span>के लिए ढेर सारी योजनाएं और सुविधाएं लेकर आई हैं। पहले ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन का अधिकार केवल उन लोगों को था जिनकी पेंशन कटती थी या जो औपचारिक रूप से मान्यता प्राप्त श्रमिक के रूप में पंजीकृत थे। अब इस सीमा को हटाकर देश के सवा करोड़&nbsp;</span><span>Gig Workers&nbsp;</span><span>ई-श्रम पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी से जुड़े सभी सारथी अब आसानी से ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के बाद उन्हें प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पांच लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज अपने और अपने परिवार के लिए स्वतः उपलब्ध हो जाएगा। भारत टैक्सी से जुड़ते ही सारथियों को यह मुफ्त चिकित्सा सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। इसके अलावा ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिकों के लिए उपलब्ध अन्य कई सामाजिक सुरक्षा योजनाएं भी आपके लिए अपने आप सक्रिय हो जाएंगी।</span></p>
<p><span>केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत टैक्सी का मॉडल न केवल सारथियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा</span><span>,&nbsp;</span><span>बल्कि उनके सम्मान</span><span>,&nbsp;</span><span>सुरक्षा और स्वामित्व को भी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी के ऐप में&nbsp;</span><span>SoS&nbsp;</span><span>अलर्ट की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है</span><span>,&nbsp;</span><span>जिसके माध्यम से आपातकालीन स्थिति में तुरंत सुरक्षा और सहायता प्राप्त की जा सकती है। अभी दिल्ली-एनसीआर में आठ हेल्पलाइन और सहायता केन्द्र स्थापित किए जा चुके हैं और आने वाले समय में देशभर में ऐसे केन्द्रों का एक व्यापक जाल बिछाया जाएगा। शिकायत निवारण की पूरी प्रक्रिया तीन स्तरों पर संचालित होगी&mdash;ऐप के माध्यम से</span><span>,&nbsp;</span><span>वेबसाइट पर और टोल-फ्री नंबर के जरिए। इसके साथ ही हमारे प्रतिनिधि नियमित रूप से सारथियों के साथ बैठकें करेंगे ताकि हर समस्या का समय पर समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि आज से सारथी&nbsp;</span><span>hidden charges&nbsp;</span><span>से पूरी तरह मुक्त हैं।&nbsp;</span><span>hidden charge&nbsp;</span><span>लेना सारथी के साथ एक तरह का छल है। टोल</span><span>,&nbsp;</span><span>पार्किंग और अन्य सभी तरह के अतिरिक्त शुल्क से भी मुक्ति मिलेगी। साथ ही 24 घंटे</span><span>,&nbsp;</span><span>सातों दिन हेल्पलाइन सारथियों के लिए हमेशा उपलब्ध रहेगी। फिलहाल इसकी शुरुआत गुजरात के कुछ शहरों</span><span>,&nbsp;</span><span>दिल्ली और एनसीआर में हो रही है। लेकिन अगले तीन साल से भी कम समय में हम देश के हर राज्य और हर बड़े शहर तक पहुंच जाएंगे।</span></p>
<p><span>केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि आने वाले दिनों में हम भारत टैक्सी में बहुत सारी नई सेवाओं को शामिल करेंगे और इसे लगातार विस्तार देंगे। उन्होंने दिल्ली-एनसीआर के सभी ग्राहकों और सारथियों को संदेश दिया कि आज से भारत टैक्सी उनकी सेवा में पूरी तरह शुरू हो रही है। यह सिर्फ एक टैक्सी सेवा नहीं है</span><span>,&nbsp;</span><span>बल्कि हमारे देश के करोड़ों सारथियों की समृद्धि</span><span>,&nbsp;</span><span>आत्मसम्मान और आर्थिक मजबूती बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि अब तक दिल्ली-एनसीआर में 2.5 लाख से ज्यादा ड्राइवर भारत टैक्सी के साथ जुड़ चुके हैं</span><span>,&nbsp;</span><span>8.5 लाख से अधिक यात्री इस परिवार का हिस्सा बन चुके हैं और कई बड़ी कंपनियों के साथ हमारे समझौते भी अंतिम चरण में हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत टैक्सी का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।</span><span>कार्यक्रम</span><span>&nbsp;</span><span>के</span><span>&nbsp;</span><span>दौरान</span><span>&nbsp;</span><span>केंद्रीय</span><span>&nbsp;</span><span>गृह</span><span>&nbsp;</span><span>एवं</span><span>&nbsp;</span><span>सहकारिता</span><span>&nbsp;</span><span>मंत्री</span><span>&nbsp;</span><span>की</span><span>&nbsp;</span><span>उपस्थिति</span><span>&nbsp;</span><span>में</span><span>&nbsp;</span><span>सार्वजनिक</span><span>&nbsp;</span><span>एवं</span><span>&nbsp;</span><span>निजी</span><span>&nbsp;</span><span>भागीदारों</span><span>&nbsp;</span><span>के</span><span>&nbsp;</span><span>साथ</span><span>&nbsp;</span><span>नौ</span><span>&nbsp;</span><span>समझौता</span><span> ज्ञापनों का आदान प्रदान किया गया।</span><span>&nbsp;</span><span>जिनका</span><span>&nbsp;</span><span>उद्देश्य</span><span>&nbsp;</span><span>परिचालन</span><span>&nbsp;</span><span>एकीकरण</span><span>,&nbsp;</span><span>डिजिटल</span><span>&nbsp;</span><span>सक्षमता</span><span>&nbsp;</span><span>तथा</span><span>&nbsp;</span><span>सेवा</span><span>&nbsp;</span><span>गुणवत्ता</span><span>&nbsp;</span><span>को</span><span>&nbsp;</span><span>सुदृढ़</span><span>&nbsp;</span><span>करना</span><span>&nbsp;</span><span>है।</span></p>
</div>
</div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x500_6989ec33b7a82.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहकारिता-आधारित टैक्सी सेवा ‘भारत टैक्सी’ लांच की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारिता को नया स्वरूप और नई भूमिका दे रही है केंद्र सरकार: आनंदी, सहकारिता रजिस्ट्रार, राजस्थान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/central-government-renewed-thrust-on-cooperatives-to-boost-farmers-incomes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 04 Feb 2026 16:15:51 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/central-government-renewed-thrust-on-cooperatives-to-boost-farmers-incomes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सहकारिता को नई ऊर्जा और स्पष्ट दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। इसी सोच के तहत सहकारिता के लिए अलग मंत्रालय का गठन किया गया है, जिस पर केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह पूरी तरह से फोकस किए हुए हैं। पहले सहकारिता कृषि मंत्रालय का ही एक अंग थी, लेकिन अब इसे नया स्वरूप दिया गया है और इसकी नई भूमिका तय की जा रही है। ये बातें राजस्थान सरकार में सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारिता आनंदी ने यह बातें कहीं। वह जयपुर में कृषक भारती को-ऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) द्वारा राजस्थान राज्य के लिए आयोजित व्यापार योजना समीक्षा एवं योजना बैठक 2026&ndash;27 को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित कर रही थीं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राजस्थान में सहकारिता के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। कृषि और उद्योग, दोनों ही क्षेत्रों में सहकारिता के माध्यम से बेहतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह वास्तव में प्रसन्नता का विषय है कि कृभको राजस्थान के किसानों के लिए सहकारिता के माध्यम से सराहनीय कार्य कर रहा है।</p>
<p>सहकारिता रजिस्ट्रार ने कहा कि पहले हमारा दृष्टिकोण किसानों तक कृषि इनपुट, जैसे बीज और खाद पहुंचाने तक सीमित था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सोच में बदलाव किया है। अब प्राथमिक लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना है। हम जो भी योजनाएं बना रहे हैं, उनका उद्देश्य किसानों की आमदनी में वृद्धि करना होना चाहिए। प्रधानमंत्री के इसी नजरिये को ध्यान में रखते हुए सभी को अपनी योजना बनानी है और कृभको इस दिशा में पूरी तरह सक्षम है। कृभको से जो अपेक्षाएं थीं, वे पूरी हो रही हैं। यह बैठक न केवल कृभको, बल्कि राजस्थान राज्य के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।</p>
<p>कृभको के निदेशक (वित्त एवं विपणन), मनीष कुमार ने कहा कि कृभको देशभर में, विशेषकर राजस्थान जैसे कृषि-प्रधान राज्यों में, किसानों की समृद्धि को केंद्र में रखकर निरंतर कार्य कर रहा है। उन्नत उर्वरकों की समय पर उपलब्धता, सहकारी संस्थाओं के सशक्तिकरण और किसान-हितैषी पहलों के माध्यम से कृभको ने खेती को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और आधुनिक बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि राजस्थान में कृभको द्वारा सहकारी नेटवर्क को मजबूत करने, किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि इनपुट उपलब्ध कराने तथा जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नई कृषि तकनीकों से जोड़ने का कार्य प्रभावी रूप से किया जा रहा है। इससे न केवल उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिली है। कृभको का निरंतर प्रयास है कि सहकार से समृद्धि के मंत्र को साकार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्ष्य &lsquo;विकसित भारत 2047&rsquo; में कृषि क्षेत्र को एक मजबूत आधार प्रदान किया जाए। आने वाले समय में भी कृभको नवाचार, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन के साथ देश के किसानों के भरोसे पर खरा उतरता रहेगा।</p>
<p>कृभको के उप महाप्रबंधक (विपणन, उत्तर), गजेंद्र कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थान जैसे विस्तृत और विविध कृषि-परिस्थितियों वाले राज्य में कृभको किसानों की आवश्यकताओं को समझते हुए जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। राज्य के प्रत्येक कोने तक गुणवत्तापूर्ण उर्वरकों की समय पर आपूर्ति, सहकारी समितियों के साथ निरंतर समन्वय और किसान-केंद्रित विपणन पहलों के माध्यम से कृभको कृषि विकास को नई दिशा दे रहा है। राजस्थान में कृभको द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता शिविर, किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रचार-प्रसार से किसानों को न केवल उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल रही है, बल्कि लागत घटाकर आय में स्थिरता भी आ रही है। सहकारिता के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाना कृभको की प्राथमिकता रही है।</p>
<p>बैठक के दौरान बताया गया कि राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है, जहाँ कृषि मुख्यतः मानसून और सीमित सिंचाई पर निर्भर है। राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 60 प्रतिशत भाग कृषि के अंतर्गत आता है, जो ग्रामीण आजीविका और राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।</p>
<p>बैठक में राजस्थान के उर्वरक बाजार की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए संतुलित पोषण और कुशल इनपुट प्रबंधन की बढ़ती आवश्यकता पर बल दिया गया। कृभको द्वारा यूरिया, डीएपी, एनपीके, जैव उर्वरक, जिंक सल्फेट, बीज एवं अन्य उत्पादों की आपूर्ति के माध्यम से राज्य की कृषि आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है।</p>
<p>कृभको प्रबंधन ने वर्ष 2026&ndash;27 के लिए उर्वरक एवं कृषि इनपुट की उपलब्धता सुदृढ़ करने, वितरण नेटवर्क को और मजबूत करने, किसान-केंद्रित सेवाओं के विस्तार तथा उत्पाद मिश्रण को बेहतर बनाने की रणनीति साझा की। बैठक के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया।</p>
<p>कार्यक्रम के समापन अवसर पर वरिष्ठ प्रबंधन द्वारा आगामी कार्ययोजना पर मार्गदर्शन प्रदान किया गया तथा राजस्थान में कृषि विकास और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कृभको की सतत भूमिका को दोहराया गया।</p>
<p>इस बैठक में कृभको के राज्य प्रबंधक (विपणन) श्री आर.एस. राठौर; संयुक्त महाप्रबंधक (विपणन) डॉ. तेजिंदर कुमार; संयुक्त महाप्रबंधक (विपणन) डॉ. प्रदीप कुमार; उप महाप्रबंधक (विपणन) श्री अजय सिंह; व संयुक्त महाप्रबंधक (विपणन एवं जनसंपर्क) डॉ. वी.के. तिवारी आदि उपस्थित थे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारिता को नया स्वरूप और नई भूमिका दे रही है केंद्र सरकार: आनंदी, सहकारिता रजिस्ट्रार, राजस्थान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बजट में कोऑपरेटिव को टैक्स बेनिफिट, एनसीईएल को 450 करोड़ की ग्रांट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/tax-benefits-to-cooperatives-in-the-budget-grant-of-rs-450-crore-to-ncel.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 01 Feb 2026 17:25:15 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/tax-benefits-to-cooperatives-in-the-budget-grant-of-rs-450-crore-to-ncel.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किया गया केंद्रीय बजट 2026&ndash;27 सहकारिता क्षेत्र के लिए कई फायदे लेकर आया है। एक ओर जहां सहकारी संस्थाओं को लाभांश पर कटौती (डिडक्शन) की सुविधा देकर किसानों और सहकारी सदस्यों को आर्थिक लाभ का रास्ता खोला गया है, वहीं सहकारी कृषि निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए स्थापित <strong>नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीईएल)</strong> को 450 करोड़ रुपये की ग्रांट दी गई है, जो उसे प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगी।</p>
<p>बजट घोषणा के मुताबिक, सहकारी क्षेत्र के लिए कई टैक्स रियायतों का ऐलान किया गया है। अब पशु आहार और कपास बीज की आपूर्ति करने वाली प्राथमिक सहकारी समितियों को भी कटौती (डिडक्शन) का लाभ मिलेगा, बशर्ते यह आपूर्ति सरकारी संगठनों या फेडरल कोऑपरेटिव को की जाए।</p>
<p>नई कर व्यवस्था के तहत&nbsp;<strong>अंतर-सहकारी समिति लाभांश आय</strong>&nbsp;(Inter-Cooperative Society Dividend Income) यानी एक सहकारी समिति से अन्य सहकारी समिति को दिए जाने वाले लाभांश को भी कटौती के रूप में मान्य किया जाएगा, बशर्ते इसे आगे सदस्यों में वितरित किया जाए।</p>
<p>अधिसूचित&nbsp;<strong>राष्ट्रीय सहकारी महासंघ</strong>&nbsp;(National Cooperative Federation) को किसी कंपनी में किए गए निवेश से प्राप्त लाभांश आय पर तीन वर्षों के लिए टैक्स छूट दी जाएगी। यह छूट 31 जनवरी 2026 तक हुए निवेश पर मिलेगी और सहकारी समितियों में वितरित किए गए लाभांश पर ही मान्य होगी।</p>
<p>इस टैक्स रियायतों से सहकारी क्षेत्र को फायदा पहुंचेगा, क्योंकि किसानों के हाथ में जाने वाला पैसा टैक्स फ्री रहेगा। इसके साथ ही डिडक्शन की व्यवस्था लागू होने के बाद सहकारी समितियों को अपने मुनाफे पर कम टैक्स देना होगा। अभी तक सहकारी समितियों और संस्थानों को अपने लाभ से लाभांश देना पड़ता था, लेकिन नए वित्त वर्ष से उन्हें ऐसा नहीं करना होगा। सरकार का यह कदम सहकारी क्षेत्र को आर्थिक मजबूती देने के साथ-साथ सहकारिता के विस्तार में भी सहायक साबित होगा।</p>
<p>सहकारी क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक किसानों और सदस्यों से अर्जित मुनाफा एक तरह से उनकी ही कमाई है, जो उनके उत्पादन और कारोबार से ही प्राप्त होती है। ऐसे में इसे कृषि आय के रूप में देखा जाना चाहिए। सरकार ने इसी तर्क को स्वीकार करते हुए यह कर छूट प्रदान की है।</p>
<p>बजट में सहकारिता क्षेत्र के लिए दूसरी बड़ी घोषणा एनसीईएल को 450 करोड़ रुपये की ग्रांट-इन-एड देने की है। इसका उद्देश्य एनसीईएल को एक निर्यातक के रूप में प्रतिस्पर्धी बनाना है। सरकार द्वारा स्थापित तीन नई सहकारी संस्थाओं में एनसीईएल की स्थापना किसानों को कृषि निर्यात का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए की गई है। ऐसे में उसे पहले से मौजूद निर्यात कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करनी है। इसी उद्देश्य से सरकार ने एनसीईएल को वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया है।</p>
<p>सहकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि कृषि निर्यात में बड़े घरेलू व्यापारियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुकाबले एनसीईएल को सरकार की आर्थिक मदद मिलने से किसानों को सीधा लाभ होगा। देश भर की किसान सहकारी समितियां इसकी सदस्य बन रही हैं, जिससे निर्यात से होने वाली आय का लाभ सीधे किसानों तक पहुंच सकेगा।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बजट में कोऑपरेटिव को टैक्स बेनिफिट, एनसीईएल को 450 करोड़ की ग्रांट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमित शाह से मिले IFFCO एमडी किरीट पटेल, नैनो उर्वरकों के वैश्विक विस्तार और कोऑपरेटिव विजन पर हुई चर्चा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-md-kirit-kumar-j-patel-meets-amit-shah-highlights-global-expansion-of-nano-fertilisers-and-cooperative-vision.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 18 Jan 2026 13:45:06 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-md-kirit-kumar-j-patel-meets-amit-shah-highlights-global-expansion-of-nano-fertilisers-and-cooperative-vision.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव (इफको) के प्रबंध निदेशक कीर्ति कुमार जे. पटेल ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात में भारत के कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के परिवर्तन में सहकारी संस्थाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया गया।</p>
<p>बैठक को प्रेरक बताते हुए पटेल ने मंत्री को इफको के समग्र प्रदर्शन की जानकारी दी। इसमें पारंपरिक और विशेष उर्वरकों के निर्माण तथा बिक्री में हुई प्रगति शामिल रही। चर्चा का प्रमुख केंद्र नैनो उर्वरक, विशेष रूप से नैनो यूरिया रहा, जो सहकारी क्षेत्र की एक प्रमुख नवाचार पहल के रूप में उभरकर सामने आया है।</p>
<p>पटेल ने मंत्री को नैनो यूरिया के निर्यात में लगातार हो रही वृद्धि की जानकारी दी और इसे वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता तथा भारतीय सहकारी क्षेत्र के नेतृत्व वाली नवाचार पर बढ़ते भरोसे का संकेत बताया। उन्होंने एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि भी साझा की। ब्राजील की एक कंपनी के साथ इफको के संयुक्त उपक्रम इफको नैनोवेंशंस के जरिए ब्राजील में स्थापित किया जा रहा नैनो उर्वरक निर्माण संयंत्र जून 2026 तक चालू हो जाने की उम्मीद है। यह परियोजना विदेशी मैन्युफैक्चरिंग में इफको की भागीदारी को दर्शाएगी और सतत कृषि इनपुट्स के क्षेत्र में भारत की मौजूदगी को और मजबूत करेगी।</p>
<p>इसे &ldquo;सहकार से समृद्धि&rdquo; की सोच का प्रमाण बताते हुए पटेल ने कहा कि यह पहल सहकारिता को विकास और आत्मनिर्भरता के इंजन के रूप में मजबूत करने पर केंद्रीय मंत्री के फोकस को प्रतिबिंबित करती है।</p>
<p>अमित शाह ने किसानों के साथ मजबूत साझेदारी पर आधारित सहकारी संस्था के रूप में इफको की नेतृत्वकारी भूमिका को और सुदृढ़ करने पर अपने विचार साझा किए। चर्चा के दौरान जमीनी स्तर पर नैनो उर्वरकों को प्रभावी ढंग से अपनाने के लिए किसान शिक्षा, जागरूकता और क्षमता निर्माण से जुड़ी इफको की चल रही पहलों पर भी बात हुई।</p>
<p>दोनों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने, किसान संस्थाओं को मजबूत बनाने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए इफको के व्यापक और भरोसेमंद सहकारी नेटवर्क के प्रभावी उपयोग पर विचार-विमर्श किया। पटेल ने मंत्री के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया और वैश्विक स्तर पर पहचान रखने वाले समृद्ध किसानों और मजबूत सहकारिताओं के निर्माण के प्रति इफको की प्रतिबद्धता दोहराई।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_696c9629e2f24.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमित शाह से मिले IFFCO एमडी किरीट पटेल, नैनो उर्वरकों के वैश्विक विस्तार और कोऑपरेटिव विजन पर हुई चर्चा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_696c9629e2f24.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[त्रिपुरा से सहकारी कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए त्रिपुरा मार्कफेड और एनसीईएल के बीच समझौता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/tripura-markfed-and-ncel-sign-mou-to-promote-cooperative-exports-from-tripura.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 15 Jan 2026 18:17:19 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/tripura-markfed-and-ncel-sign-mou-to-promote-cooperative-exports-from-tripura.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="91" data-end="344">सहकारी क्षेत्र के माध्यम से कृषि निर्यात को मजबूत करने की दिशा में <strong>त्रिपुरा मार्कफेड</strong> तथा <strong>राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL)</strong> ने सोमवार को अगरतला में एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया गया।&nbsp;</p>
<p data-start="346" data-end="681">इस समझौते का उद्देश्य त्रिपुरा की सहकारी समितियों की वैश्विक बाजारों में भागीदारी बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक सहयोग का ढांचा तैयार करना है। समझौते पर त्रिपुरा मार्कफेड के अध्यक्ष अविजीत देब की मौजूदगी में एनसीईएल के प्रबंध निदेशक अनुपम कौशिक तथा त्रिपुरा मार्कफेड के प्रबंध निदेशक जोगेश रियांग ने हस्ताक्षर किए।</p>
<p data-start="1468" data-end="1814">इस अवसर पर एनसीईएल के प्रबंध निदेशक <strong>अनुपम कौशिक</strong> ने कहा कि यह पहल भारत के सहकारी क्षेत्र के लिए समावेशी और टिकाऊ निर्यात मार्ग तैयार करने की एनसीईएल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वहीं, त्रिपुरा मार्कफेड के प्रबंध निदेशक<strong> जोगेश रियांग</strong> ने कहा कि राज्य के किसानों और सहकारी समितियों में राष्ट्रीय निर्यात वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देने की अपार क्षमता है।</p>
<p data-start="1816" data-end="2120">त्रिपुरा मार्कफेड के अध्यक्ष <strong>अविजीत देब</strong> ने इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह साझेदारी न केवल त्रिपुरा के कृषि उत्पादों की पहचान को बढ़ाएगी, बल्कि किसानों को लाभकारी बाजारों तक सीधी पहुंच भी प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे और सहकारी व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।</p>
<p data-start="1816" data-end="2120">यह समझौता &ldquo;सहकार से समृद्धि&rdquo; के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप सहकारी निर्यात को सशक्त बनाने की दिशा में त्रिपुरा मार्कफेड और एनसीईएल की साझा सोच को दर्शाता है। इसके तहत दोनों संस्थाएं मिलकर त्रिपुरा की सहकारी समितियों द्वारा उत्पादित निर्यात योग्य कृषि और संबद्ध उत्पादों की पहचान और उनका संवर्धन करेंगी, खासकर उन उत्पादों का जिनमें बाजार योग्य अधिशेष है।</p>
<p data-start="1816" data-end="2120">एनसीईएल सहकारी समितियों को मजबूत बाजार संपर्क उपलब्ध कराएगी और आवश्यकता अनुसार निर्यात-तैयार उत्पादों की खरीद व विपणन में सहयोग करेगी। इसके साथ ही किसानों और सहकारी संस्थाओं के लिए टिकाऊ और लाभकारी मूल्य शृंखला विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।</p>
<p data-start="1127" data-end="1466">समझौते के अंतर्गत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में संयुक्त रूप से भागीदारी कर त्रिपुरा के सहकारी उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा और नए कारोबारी अवसर तलाशे जाएंगे। खास तौर पर त्रिपुरा के विशिष्ट कृषि उत्पादों, विशेषकर सुगंधित चावल के निर्यात को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाएगा, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी संभावनाएं हैं।</p>
<p data-start="1816" data-end="2120"></p>
<p data-start="2122" data-end="2275" data-is-last-node="" data-is-only-node=""></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_6968e1c5931da.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ त्रिपुरा से सहकारी कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए त्रिपुरा मार्कफेड और एनसीईएल के बीच समझौता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृभको के उपाध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव सर्वसम्मति से ICA&amp;#45;AP के दूसरी बार अध्यक्ष चुने गये]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/kribhco-vice-chairman-dr-chandra-pal-singh-yadav-re-elected-unopposed-as-ica-ap-president.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 28 Nov 2025 17:41:15 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/kribhco-vice-chairman-dr-chandra-pal-singh-yadav-re-elected-unopposed-as-ica-ap-president.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) के उपाध्यक्ष, डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव, इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस &ndash; एशिया पैसिफिक (ICA-AP) के अध्यक्ष पद पर सर्वसम्मति से पुनः निर्वाचित हुए हैं। यह चुनाव 27 नवम्बर, 2025 को कोलंबो, श्रीलंका में आयोजित 17वीं ICA-AP क्षेत्रीय सभा के दौरान संपन्न हुआ, जो एशिया प्रांत क्षेत्र के सदस्य देशों के बीच उनके नेतृत्व पर मजबूत विश्वास को दर्शाता है। कृभको द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई।</p>
<p>डॉ. यादव ने अपार समर्थन के लिए गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा, &ldquo;एशिया-प्रशांत सहकारी समुदाय का यह नवीकृत विश्वास मुझे क्षेत्रीय एकता को और मजबूत करने तथा साझा समृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है।&rdquo; उन्होंने इस उपलब्धि को सामूहिक जीत बताया और कहा कि इसका श्रेय जमीनी स्तर के किसानों, मजदूरों, कारीगरों और उन सभी सहकार बंधुओं को जाता है जो क्षेत्र की विशाल सहकारी संभावनाओं को साकार करने के लिए एकजुट होकर कार्य कर रहे हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x_69299157a1f09.jpg" alt="" /></p>
<p>सभा में उपस्थित भारतीय सहकारी नेताओं ने इस परिणाम को वैश्विक सहकारिता में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका की सशक्त पुष्टि बताया।</p>
<p>झांसी से साधारण पृष्ठभूमि से उभरकर अंतर्राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रमुख व्यक्तित्व बनने तक डॉ. यादव की यात्रा दृढ़ संकल्पित नेतृत्व का उदाहरण है। 19 मार्च, 1959 को जालौन, उत्तर प्रदेश में स्वतंत्रता सेनानी एवं कृषक परिवार में जन्मे डॉ. यादव के पास M.Sc., B.Ed., LL.B. और Ph.D. जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यताएँ हैं। उन्होंने इससे पहले कृभको व इसकी सहायक कंपनियों के अध्यक्ष, नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया (NCUI) के अध्यक्ष, ICA-AP के उपाध्यक्ष (2010-2021), लोकसभा एवं राज्यसभा सदस्य, विधायक और NCCF, NAFED तथा इंटरनेशनल राइफाइजन यूनियन (जर्मनी) के बोर्ड सदस्य के रूप में योगदान दिया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6929913b995fc.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृभको के उपाध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव सर्वसम्मति से ICA-AP के दूसरी बार अध्यक्ष चुने गये ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025: सहकार से विकसित भारत का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/national-cooperative-policy-2025-driving-prosperity-powering-a-developed-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 26 Oct 2025 12:12:07 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/national-cooperative-policy-2025-driving-prosperity-powering-a-developed-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में संगठित सहकारिता आंदोलन का लगभग सवा सौ वर्षों का सफर उपलब्धियों से भरा है। भारत में इस आंदोलन का सबसे बड़ा उदाहरण अमूल पूरी दुनिया के लिए केस स्टडी बन चुका है। लेकिन समय के साथ सहकारिता में अनेक खामियां पनपीं और नित नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। अनेक सहकारी समितियों में चुनाव में देरी ने भ्रष्टाचार को जन्म दिया। कुछ समितियों के तो उपनियम ही कामकाज में बाधक बन गए। हम जानते हैं कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मुकाबला सहकारी क्षेत्र ही कर सकता है। इसी सहकारी क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए 2021 में नया सहकारिता मंत्रालय गठित किया गया और 23 साल बाद नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 जारी की गई। यह नीति सहकारी क्षेत्र को पेशेवर और सशक्त बनाने का खाका प्रस्तुत करती है।</p>
<p>राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 जारी करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के &lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; के विजन को पूरा करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है। शाह के अनुसार, &ldquo;बीते चार साल में कोऑपरेटिव सेक्टर के लिए कई बड़े कदम उठाए गये हैं। वर्ष 2020 से पहले सहकारिता को मृतप्राय बताने वाले लोग ही आज सहकारिता को भविष्य बताते हैं।&rdquo;</p>
<p>नई नीति &lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; के जरिए 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सहकारी क्षेत्र के विकास पर केंद्रित है। शाह का कहना है, &ldquo;140 करोड़ लोगों को साथ रखकर देश के आर्थिक विकास की क्षमता केवल और केवल सहकारिता क्षेत्र में है। इसलिए नई सहकारी नीति बनाते समय यह ध्यान रखा गया कि नीति का केन्द्र बिंदु 140 करोड़ लोग हों। गांव, किसान, युवा, ग्रामीण महिलाएं, दलित और आदिवासी हों।&rdquo;</p>
<p>सहकारी उर्वरक कंपनी कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) और इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस (एशिया पैसिफिक के प्रेसिडेंट डॉ.चंद्रपाल सिंह ने रूरल वर्ल्ड के साथ खास बातचीत (आगे पढ़ें पूरा इंटरव्यू) में इसका थोड़ा और विस्तार किया, &ldquo;हमारा मुख्य उद्देश्य है ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, किसान को खुशहाल बनाना, किसान के खेत का उत्पादन बढ़ाना, बैंकों के माध्यम से कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराना, सही मात्रा, सही कीमत और सही समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराना।&rdquo;</p>
<p><strong>हर गांव में एक सहकारी समिति का लक्ष्य</strong><br />वर्ष 2021 में सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद सितंबर, 2022 में नई सहकारिता नीति बनाने की पहल शुरू हुई थी। इसके लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु के नेतृत्व में 48 सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति ने हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद वर्तमान नीति का मसौदा तैयार करने के लिए कुल 648 सुझाव एकत्र किए।</p>
<p>राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 सहकारी क्षेत्र को पेशेवर, सशक्त और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ाने का खाका प्रस्तुत करती है। सहकारी उद्यमों को पेशेवर, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और जिम्मेदार आर्थिक इकाइयों के तौर पर बढ़ावा देने और प्रत्येक गांव में कम से कम एक सहकारी इकाई स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। पर्यटन, टैक्सी, बीमा और हरित ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में उनके कार्यक्षेत्र के विस्तार का सुझाव दिया गया है। सहकार टैक्सी इस दिशा में कदम है। निर्यात, बीज और ऑर्गेनिक उत्पादों की मार्केटिंग को बढ़ावा देने के लिए तीन राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं की भी स्थापना गई है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68fcb76632104.jpg" alt="" /></p>
<p>डॉ. चंद्रपाल कहते हैं, &ldquo;हमारा हमेशा प्रयास है कि कोऑपरेटिव की पहुंच एक-एक गांव में हो। देश में आठ लाख कोऑपरेटिव सोसाइटी हैं, और उनके माध्यम से हमारी पहुंच 90-95% गांवों तक है। लेकिन हमें इतनी जागरूकता पैदा करनी है कि उसकी पहुंच एक-एक व्यक्ति तक हो जाए।&rdquo;</p>
<p>सहकारिता मंत्रालय के मुताबिक, देश में फिलहाल 8.50 लाख से सहकारी समितियां हैं, जिनमें 2 लाख ऋण सहकारी समितियां और 6 लाख गैर-ऋण सहकारी समितियां शामिल हैं जो आवास, डेयरी, मत्स्य पालन आदि क्षेत्रों में फैली हुई हैं। 30 करोड़ से ज़्यादा सदस्यों वाली ये समितियां, खासतौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देती हैं। फिर भी इनका योगदान जीडीपी में अपेक्षाकृत कम है। नई नीति इसी अंतर को पाटने का रोडमैप सुझाती है। सहकारिता क्षेत्र के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए छह मिशन स्तंभ और 16 उद्देश्य निर्धारित किए गए हैं।</p>
<p><strong>जीडीपी में योगदान एक दशक में तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य</strong><br />केंद्र सरकार ने वर्ष 2034 तक सहकारी क्षेत्र का देश की जीडीपी में योगदान तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। देश के 50 करोड़ नागरिक, जो वर्तमान में सहकारी क्षेत्र के सक्रिय सदस्य नहीं हैं या सदस्य ही नहीं हैं, उन्हें सक्रिय सदस्य बनाया जाएगा। सहकारी समितियों की संख्या भी 30 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य है। प्रत्येक पंचायत में कम से कम एक प्राथमिक सहकारी इकाई होगी, जो प्राथमिक कृषि ऋण समिति (PACS), प्राथमिक डेयरी, प्राथमिक मत्स्य पालन समिति, प्राथमिक बहुउद्देश्यीय पैक्स या अन्य प्राथमिक इकाई हो सकती है। इनके माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जाएंगे। पारदर्शिता, वित्तीय स्थिरता और संस्थागत विश्वास बढ़ाने के लिए एक क्लस्टर और निगरानी तंत्र भी विकसित किया जाएगा।</p>
<p>कोऑपरेटिव इलेक्शन अथॉरिटी के चेयरपर्सन और पूर्व सहकारिता सचिव देवेंद्र कुमार सिंह (आगे पढ़ें उनका आलेख) बताते हैं, &ldquo;सरकार की पहल समावेशी रही है और सहकारी समितियों के समूचे पारिस्थितिकी तंत्र को इसमें शामिल किया गया है। इसमें पैक्स (PACS) के लिए आदर्श उपनियम (मॉडल बायलॉज) बनाना भी शामिल है ताकि पारिस्थितिकी तंत्र का आधार मजबूत किया जा सके। यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है कि इन आदर्श उपनियमों को सभी राज्य सरकारों ने अपनाया है। इन सुधारों ने पैक्स को बहुद्देश्यीय व्यावसायिक संस्थाओं में बदलने की एक व्यवस्था प्रदान की।&rdquo;</p>
<p>अब तक 45 हज़ार नई पैक्स बनाने और उनके कम्प्यूटरीकरण का काम लगभग समाप्त हो चुका है। पैक्स के साथ जोड़े गए 25 नए कामों में से हर काम में कुछ न कुछ प्रगति हुई है। पीएम जनऔषधि केन्द्र के लिए अब तक 4108 पैक्स को स्वीकृति मिल चुकी है। पेट्रोल और डीजल के रिटेल आउटलेट के लिए 393 पैक्स आवेदन कर चुके हैं। एलपीजी वितरण के लिए 100 से अधिक पैक्स ने आवेदन किया है। हर घर नल से जल का प्रबंधन और पीएम सूर्य घर योजना आदि के लिए भी पैक्स काम कर रहे हैं।</p>
<p>सहकारिता नीति में राज्यों को प्रत्येक ज़िले में कम से कम एक आदर्श सहकारी गांव विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया गया है, जो बहुउद्देशीय पैक्स पर केंद्रित होगा। ज़िले के अन्य गांवों को पहले आदर्श गांव के साथ तालमेल बिठाने और फिर राज्य के सर्वश्रेष्ठ गांवों में से एक बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। मॉडल सहकारी गांव नाबार्ड की पहल है जिसकी शुरुआत सबसे पहले गांधीनगर में हुई थी। सहकारिता को आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए केंद्रीय सहकारिता मंत्री का कहना है, &ldquo;ग्रामीण, कृषि इकोसिस्टम और गरीबों को अर्थतंत्र का विश्वसनीय हिस्सा बनाने का काम इस सहकारिता नीति के माध्यम से करेंगे। हमने हर राज्य में संतुलित सहकारी विकास का भी रोडमैप तैयार किया है। यह सहकारिता नीति दूरदृष्टिपूर्ण, व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी है। सहकारिता आंदोलन इस नीति के आधार पर 2047 में देश की आज़ादी की शताब्दी तक आगे बढ़ेगा।&rdquo;</p>
<p><strong>कैसे लागू होगी नई नीति</strong><br />पहली राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2002 में बनी थी। तब इंटरनेट भी गांवों तक पूरी तरह नहीं पहुंचा था। अब डिजिटल इंडिया है, ई-कॉमर्स है और बाजार से जुड़ने के अवसर खुल रहे हैं। वैश्वीकरण, डिजिटलीकरण और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के चलते सहकारी क्षेत्र को नए सिरे से मजबूती देने की जरूरत है। इसके अलावा, सहकारी संस्थाओं की खराब वित्तीय स्थिति, लचर प्रशासन, पारदर्शिता की कमी और राजनीतिक दबाव जैसी कई खामियां सहकारी क्षेत्र के विकास को अवरुद्ध कर रही हैं। इसलिए नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।</p>
<p>सहकारिता नीति पर प्रभावी अमल के लिए एक बहु-स्तरीय व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इसके लिए सहकारिता मंत्रालय में एक 'कार्यान्वयन प्रकोष्ठ' बनाया जाएगा। केंद्रीय सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में सहकारिता नीति पर राष्ट्रीय संचालन समिति बनाई जाएगी। &nbsp;राज्यों के साथ समन्वय, कार्यान्वयन संबंधी बाधाओं का समाधान, समय-समय पर निगरानी और मूल्यांकन आदि के लिए केंद्रीय सहकारिता सचिव की अध्यक्षता में नीति कार्यान्वयन और निगरानी समिति गठित की जाएगी।</p>
<p><strong>युवा, सहकार और नवाचार</strong><br />नई नीति के तहत युवाओं को सहकारिता के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए सहकारिता से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में पेशेवर शिक्षा और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। युवाओं को सहकारी प्रणाली से जोड़ने और उनके प्रशिक्षण के लिए एक राष्ट्रीय शीर्ष संस्था की स्थापना की जाएगी, जो राज्य स्तरीय सहकारी शिक्षण और प्रशिक्षण संस्थानों के साथ समन्वय कर भविष्य के लिए नेतृत्व तैयार करेगी। त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी की स्थापना इसी दिशा में उठाया गया कदम है।</p>
<p>युवाओं को सहकारिता से जोड़ने के महत्व पर डॉ. चंद्रपाल कहते हैं, &ldquo;कोऑपरेटिव मूवमेंट जवान रहे, इसके लिए आने वाली नई पीढ़ी को हमें जोड़ना है। युवाओं को जोड़ने के लिए त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय बनाने का बहुत अच्छा काम हुआ है। वहां से पढ़-लिखकर युवा आएंगे तो कोऑपरेटिव के प्रति उनमें ज्ञान होगा, जागरूकता होगी तो निश्चित रूप से उसका लाभ मिलेगा।&rdquo;</p>
<p><strong>सहकारी समितियों में पारदर्शी चुनाव&nbsp;</strong><br />नई नीति में सहकारी समितियों में समय पर चुनाव कराने पर खास जोर दिया गया है। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की भी कोशिश की गई है। जिला कलेक्टर चुनाव की सूचना जारी करते हैं, जिसे संबंधित समिति के कार्यक्षेत्र के समाचार पत्रों में भी प्रकाशित किया जाता है, ताकि सदस्यों को जानकारी मिल सके। चुनाव संबंधी सभी जानकारी समिति को अपनी वेबसाइट पर भी उपलब्ध करानी होती है। मल्टी-स्टेट सोसायटी के सदस्य दो या तीन अलग-अलग राज्यों से संबंधित होते हैं, इसलिए पहले उन्हें अक्सर यह भी पता नहीं होता था कि चुनाव कब हो रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>कोऑपरेटिव इलेक्शन अथॉरिटी के चेयरपर्सन देवेंद्र कुमार सिंह कहते हैं, &ldquo;मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी एक्ट की धारा 45 के अंतर्गत एक सहकारी चुनाव प्राधिकरण (सीईए) की स्थापना गवर्नेंस में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन है। पहले समितियां स्वयं चुनाव कराती थीं, जिनमें अक्सर पारदर्शिता का अभाव होता था। इस प्राधिकरण की शुरुआत के साथ यह प्रक्रिया कहीं अधिक पारदर्शी हो गई है।&rdquo;</p>
<p>सहकारिता को मजबूत बनाने के लिए नई नीति में और कई प्रावधान किए गए हैं। इस क्षेत्र में कार्यरत लोगों के प्रशिक्षण और कौशल विकास के लिए एक संगठित तंत्र विकसित किया जाएगा। सहकारी शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के लिए उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना की जाएगी। नए और उभरते क्षेत्रों में सामाजिक उद्यम इनक्यूबेटर स्थापित किए जाएंगे जो ग्रामीण और सामुदायिक स्तर पर उद्यमशीलता को बढ़ावा देंगे।</p>
<p>राष्ट्रीय डिजिटल सहकारी रोजगार एक्सचेंज की स्थापना का सुझाव दिया गया है, जो योग्य उम्मीदवारों और सहकारी संस्थाओं के बीच सीधा और पारदर्शी संपर्क सुनिश्चित करेगा। एक राष्ट्रीय शिक्षक और प्रशिक्षक डेटाबेस भी तैयार किया जाएगा, जिससे नियुक्ति की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो सकेगी। इसके अलावा, रेफ्रिजरेशन, एक्वाकल्चर, फार्म प्रबंधन जैसे बाजार-उन्मुख कौशलों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत की योजना है। अब जरूरत बस सही नीयत से नीति पर अमल की है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/01/image_750x500_63c6b14a7e26d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025: सहकार से विकसित भारत का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/01/image_750x500_63c6b14a7e26d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृभको को 693 करोड़ रुपये का कर&amp;#45;पूर्व लाभ, 20% लाभांश की घोषणा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/kribhco-records-pre-tax-profit-of-rs-693-crore-declares-20-percent-dividend.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 27 Sep 2025 13:36:22 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/kribhco-records-pre-tax-profit-of-rs-693-crore-declares-20-percent-dividend.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत की प्रमुख उर्वरक उत्पादक किसान सहकारी समितियों में से एक, कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (KRIBHCO) ने वित्त वर्ष 2024-25 में 692.74 करोड़ रुपये का कर-पूर्व लाभ दर्ज किया है। संस्था ने इस वर्ष अपनी सदस्य सहकारी समितियों की इक्विटी पूंजी पर 20% लाभांश की घोषणा की है।</p>
<p>नई दिल्ली में हाल ही आयोजित 45वीं वार्षिक आम सभा (KRIBHCO AGM) में सोसाइटी के सालाना एकाउंट को अनुमोदित किया गया। यह वार्षिक आम सभा विशेष रूप से महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह नवगठित निदेशक मंडल की पहली एजीएम थी। बैठक की अध्यक्षता कृभको चेयरमैन वी. सुधाकर चौधरी ने की। इसमें देश की विभिन्न सदस्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</p>
<p><strong>क्षमता उपयोग 100% के पार</strong><br />वित्त वर्ष 2024-25 में कृभको ने उत्पादन आंकड़े उल्लेखनीय रहे। यूरिया उत्पादन 24.34 लाख मीट्रिक टन और अमोनिया उत्पादन 14.26 लाख मीट्रिक टन रहा। इनमें क्रमशः 110.91% और 114.33% क्षमता का उपयोग हुआ। कृभको के पोर्टफोलियो में न केवल नीम कोटेड यूरिया, बल्कि आयातित डीएपी, एमएपी, एमओपी, कॉम्प्लेक्स, बायो फर्टिलाइजर, कम्पोस्ट, प्रमाणित बीज, संकर बीज, एसएसपी, जिंक सल्फेट, प्राकृतिक पोटाश, माइकोराइजा और सीवीड फोर्टिफाइड बायो-स्टिमुलेंट भी शामिल हैं। वर्ष के दौरान कृभको ने 51.80 लाख टन उर्वरक (यूरिया और पी एंड के उर्वरक सहित) की बिक्री की।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x_68d79a11a34aa.jpg" alt="" /></p>
<p><em>गुजरात के अरविदभाई तगड़िया को कृभको "सहकारिता शिरोमणि पुरस्कार" से सम्मानित करते हुए कृभको वाइस-चेयरमैन डॉ. चंद्रपाल सिंह व अन्य।</em></p>
<p>कृभको की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी कंपनी, कृभको फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (केएफएल) ने भी 11.35 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 6.96 लाख मीट्रिक टन अमोनिया का उत्पादन करके क्रमशः 131.26% और 138.88% क्षमता उपयोग किया। केएफएल ने वर्ष के लिए 14.40 करोड़ रुपये का लाभांश घोषित किया। कृभको के प्रबंध निदेशक एसएस यादव ने उपस्थित लोगों को कृभको और उसकी सहायक कंपनियों द्वारा बनाए गए उत्पादन और परिचालन दक्षता के बारे में जानकारी दी।</p>
<p><strong>कृभको की सहायक कंपनियों का प्रदर्शन</strong><br />कृभको की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियां, कृभको एग्री बिजनेस लिमिटेड (केएबीएल) ने वित्त वर्ष 2024-25 में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों बाजारों में खाद्य तेल, अरहर, सोयाबीन, हल्दी, चावल, मिर्च, मक्का, चिकोरी और कॉफी की बिक्री के साथ 1752 करोड़ रुपये का कारोबार हासिल किया। कृभको ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड गुजरात के हजीरा और आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में दो संयंत्रों का निर्माण कर रही है, जिनके वित्त वर्ष 2025-26 में चालू होने की उम्मीद है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x_68d79a0fa5671.jpg" alt="" /></p>
<p><em>महाराष्ट्र की शैलजादेवी डी निकम को कृभको सहकारिता विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।</em></p>
<p>एजीएम के दौरान कृभको ने भारत में सहकारी आंदोलन में उल्लेखनीय योगदान के लिए दो प्रतिष्ठित सहकारी समितियों को सम्मानित भी किया। गुजरात के अरविदभाई तगड़िया को कृभको "सहकारिता शिरोमणि पुरस्कार" से सम्मानित किया गया। महाराष्ट्र की शैलजादेवी डी निकम को कृभको सहकारिता विभूषण पुरस्कार मिला।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68d79a0ce3f13.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृभको को 693 करोड़ रुपये का कर-पूर्व लाभ, 20% लाभांश की घोषणा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृभको के अध्यक्ष बने वी. सुधाकर चौधरी, डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव उपाध्यक्ष निर्वाचित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/v.-sudhakar-chowdary-elected-chairman-and-dr-chandrapal-singh-yadav-vice-president-of-kribhco.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 16 Sep 2025 19:34:52 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/v.-sudhakar-chowdary-elected-chairman-and-dr-chandrapal-singh-yadav-vice-president-of-kribhco.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश की प्रमुख सहकारी संस्था <strong>कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (</strong><strong>KRIBHCO)</strong> <span>ने अपने नए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्वाचान की घोषणा की है। आंध्र प्रदेश के सहकारिता से जुड़े नेता और व्यवसायी <strong>वल्लभनेनी सुधाकर चौधरी</strong> को सर्वसम्मति से कृभको का अध्यक्ष चुना गया है। इससे पहले वे उपाध्यक्ष पद पर कार्य कर चुके हैं। </span></p>
<p>इसके साथ ही, <span>सहकारिता क्षेत्र के दिग्गज नेता <strong>डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव</strong></span>, <span>को सर्वसम्मति से कृभको का उपाध्यक्ष निर्वाचित किया गया है। वे फिलहाल इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस-एशिया पैसिफिक </span>(ICA-AP<span>) के अध्यक्ष है और कृभको के अध्यक्ष रह चुके हैं। </span></p>
<p>कृभको की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, <span>सहकारी आंदोलन और कृषि क्षेत्र में वी. सुधाकर चौधरी के व्यापक अनुभव से किसानों को सशक्त बनाने और सतत कृषि विकास को बढ़ावा देने का कृभको का मिशन और सशक्त होगा। साथ ही</span>, <span>डॉ. चंद्रपाल सिंह के व्यापक अनुभव</span>, <span>विशेषज्ञता और सहकारी मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से संस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मदद मिलेगी। </span></p>
<p>कृभको के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन 15 सितम्बर 2025 को NCUI, नई दिल्ली<span> में संपन्न हुए। अध्यक्ष वी. सुधाकर चौधरी और उपाध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव के साथ-साथ वर्तमान निदेशक मंडल में डॉ. बिजेंद्र सिंह</span>, भंवर सिंह शेखावत, मगनलाल धनजीभाई वडाविया, राजन्ना राजेन्द्र, भीखाभाई ज़वेरभाई पटेल, बिपिनभाई नरनभाई पटेल, कविता मंजीरी परीडा, अजय राय और शिल्पी अरोड़ा<span> शामिल हैं।</span></p>
<p>इस अवसर पर नव निर्वाचित अध्यक्ष सुधाकर चौधरी ने सभी निदेशकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कृभको किसानों के हितों को केंद्र में रखकर सहकारी सशक्तिकरण, <span>उर्वरक उत्पादन में नवाचार और सतत कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। यह नेतृत्व परिवर्तन कृभको की देशभर के लाखों किसानों की सेवा की निरंतर यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ता है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68c96d70a0d83.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृभको के अध्यक्ष बने वी. सुधाकर चौधरी, डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव उपाध्यक्ष निर्वाचित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[NCEL और APEDA ने सहकारी कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए समझौता किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncel-and-apeda-signed-mou-to-boost-cooperative-led-agricultural-exports.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 10 Sep 2025 14:30:17 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncel-and-apeda-signed-mou-to-boost-cooperative-led-agricultural-exports.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत के कृषि निर्यात को सहकारी ढांचे के माध्यम से नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए <strong>राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (</strong><strong>NCEL) </strong>और <strong>कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (</strong><strong>APEDA) </strong>ने मंगलवार को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी की उपस्थिति में संपन्न हुआ। समझौते पर APEDA की ओर से चेयरमैन <strong>अभिषेक देव</strong> और NCEL की ओर से प्रबंध निदेशक <strong>अनुपम कौशिक</strong> ने हस्ताक्षर किए।</p>
<p>इस अवसर पर <strong>डॉ. आशीष कुमार भूटानी</strong> ने कहा कि APEDA की निर्यात सुविधा को NCEL के व्यापक नेटवर्क से जोड़ने से किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा, ग्रामीण आजीविकाओं को मजबूती मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की स्थिति सुदृढ़ होगी। <span>सहकारिता मंत्रालय, सहकारी संस्थाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। डॉ. भूटानी ने बताया कि</span>&nbsp;इस समझौते के माध्यम से सहकारी समितियां प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कार्यशालाओं के माध्यम से वैश्विक गुणवत्ता मानकों, खाद्य सुरक्षा और निर्यात दस्तावेज़ीकरण के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगी।</p>
<p>सहकारिता मंत्रालय के अपर सचिव <strong>पंकज कुमार बंसल</strong> ने कहा कि यह समझौता APEDA की तकनीकी विशेषज्ञता और नीतिगत सहयोग से NCEL को सशक्त बनाएगा, जिससे सदस्य सहकारी संस्थाएं निर्यात के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए नए बाजारों तक पहुंच बना सकेंगी और अपनी उपज का बेहतर दाम प्राप्त कर पाएंगी।</p>
<p>यह समझौता <strong>सहकारी निर्यात इकोसिस्टम</strong> को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। APEDA की बाजार पहुंच और निर्यात सुविधाओं को NCEL के व्यापक नेटवर्क से जोड़कर किसानों को लाभ दिलाने, भारतीय निर्यात के विस्तार और राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025 के उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। सहकारी निर्यात के लिए राष्ट्रीय संगठन के रूप में NCEL की भूमिका और बाजार विकास एवं निर्यात संवर्धन की APEDA की क्षमताओं का लाभ उठाकर यह साझेदारी निर्यात तैयारी, ब्रांडिंग, अवसंरचना विस्तार और क्षमता निर्माण को गति प्रदान करेगी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ NCEL और APEDA ने सहकारी कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए समझौता किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68c13ef13d88f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीईएल की चौथी वार्षिक आम बैठक में सहकारी निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर, 20% लाभांश को मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/emphasis-on-promoting-cooperative-exports-in-the-4th-annual-general-meeting-of-ncel-approval-of-20-pc-dividend.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 12 Aug 2025 21:47:55 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/emphasis-on-promoting-cooperative-exports-in-the-4th-annual-general-meeting-of-ncel-approval-of-20-pc-dividend.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span lang="HI">सहकारिता मंत्रालय द्वारा स्थापित देश की शीर्ष सहकारी निर्यात संस्था</span>,<strong> <span lang="HI">राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (</span>NCEL)</strong>, <span lang="HI">की नई दिल्ली में चौथी <strong>वार्षिक आम बैठक (</strong></span><strong>AGM)</strong> <span lang="HI">आयोजित की गई। बैठक में भारत के सहकारी निर्यात तंत्र में व्यापक बदलाव की प्रतिबद्धता को दोहराया गया। हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित इस बैठक में देशभर से सदस्य सहकारी संस्थाओं ने प्रत्यक्ष और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से भाग लिया। </span><o:p></o:p></p>
<p><span lang="HI">एजीएम में एनसीईएल की अब तक की प्रगति</span>, <span lang="HI">निर्यात को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार-विमर्श और भावी रणनीतियों पर चर्चा हुई। वित्त वर्ष </span>2024&ndash;25<span lang="HI"> में एनसीईएल ने </span>₹4,283<span lang="HI"> करोड़</span><span lang="HI"> का कारोबार दर्ज किया। </span><o:p></o:p></p>
<p><span lang="HI">किसान समूहों</span>, <span lang="HI">उत्पादक संगठनों और ग्रामीण उद्यमों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से स्थापित एनसीईएल ने पिछले दो वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। संगठन ने विभिन्न क्षेत्रों की </span>10,000<span lang="HI"> से अधिक सहकारी संस्थाओं को अपने साथ जोड़ा है। इन्हें निर्यात के लिए तैयार करने</span>, <span lang="HI">क्षमता निर्माण और बाजार तक पहुंच दिलाने के प्रयास किये जा रहे हैं। ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मूल्य संवर्धित व्यापार के अवसर भुनाए जा सकें।</span><o:p></o:p></p>
<p><span lang="HI">एजीएम में सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही और नवाचार</span>, <span lang="HI">निर्यात रणनीतियों व किसान समूहों को सशक्त बनाने पर चर्चा हुई। बैठक में सदस्य सहकारी संस्थाओं को </span>20%<span lang="HI"> लाभांश</span><span lang="HI"> वितरित करने की मंजूरी भी दी गई।</span><o:p></o:p></p>
<p><span lang="HI">कार्यक्रम में एनसीईएल नेतृत्व ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "सहकार से समृद्धि" के विज़न और केंद्रीय गृह एवं सहयोग मंत्री अमित शाह द्वारा प्रस्तुत सहकार के </span>5<span lang="HI">पी के सिद्धांत को आगे बढ़ाने में एनसीईएल की अहम भूमिका पर जोर दिया। एनसीईएल ने सहकारी-नेतृत्व वाले निर्यात के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। एजीएम में समावेशी विकास</span>, <span lang="HI">स्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के मिशन को रेखांकित किया गया।</span><o:p></o:p></p>
<p style="line-height: 15.05pt; background: white;"><span lang="HI">संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय सहकारी वर्ष </span>2025 <span lang="HI">के उपलक्ष्य में</span>, <span lang="HI">एनसीईएल सहकारी संस्थाओं को समानता आधारित व्यापार और ग्रामीण समृद्धि के प्रमुख वाहक के रूप में स्थापित करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_689b6923480e8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीईएल की चौथी वार्षिक आम बैठक में सहकारी निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर, 20% लाभांश को मंजूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_689b6923480e8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारिता के क्षेत्र में 100 से अधिक नई पहल, देश में 35,395 नई सहकारी समितियां गठित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/35395-new-cooperative-societies-formed-more-than-100-new-initiatives-in-the-field-of-cooperatives.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Aug 2025 13:30:51 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/35395-new-cooperative-societies-formed-more-than-100-new-initiatives-in-the-field-of-cooperatives.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री <strong>अमित शाह</strong> ने मंगलवार को नई दिल्ली में सहकारिता मंत्रालय की संसदीय&nbsp;<span>सलाहकार&nbsp;</span>समिति की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल और मुरलीधर मोहोल, समिति के सदस्य, सहकारिता मंत्रालय के सचिव और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</p>
<p>बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि 5 साल में देश में 2 लाख बहुउद्देशीय सहकारी समितियों की स्थापना के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के तहत अब तक <strong>35,395</strong> नई सहकारी समितियां बनाई जा चुकी हैं, जिनमें 6,182 बहुद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (MPACS), 27,562 डेयरी और 1,651 मत्स्य सहकारी समितियाँ शामिल हैं।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने समिति के सभी सदस्यों से अपने-अपने राज्यों में डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कहा ताकि सहकारिता को बल मिले। उन्होंने बताया कि सहकारिता मंत्रालय ने पिछले चार वर्षों में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), डेयरी, मत्स्य, सहकारी बैंक, चीनी सहकारी समितियों और शासन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए<strong> 100</strong> से अधिक पहल की हैं। इनमें डिजिटल सुधार, नीतिगत परिवर्तन, वित्तीय सहायता और संस्थागत क्षमता निर्माण शामिल हैं।</p>
<p><span>अमित शाह ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र, कृषि और किसानों की समृद्धि के लिए तीन राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियों का गठन किया गया है। <strong>राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक लिमिटेड (NCOL)</strong> किसानों के ऑर्गेनिक उत्पादों की प्रमाणिकता, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग सुनिश्चित करती है, ताकि किसानों को उनके उत्पादों का अच्छा मूल्य मिल सके। <strong>राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL)</strong> किसानों के उत्पादों को अतंर्राष्ट्रीय बाज़ार में निर्यात करने से संबंधित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराती है जिसका लाभ किसानों को मिलता है। <strong>भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL)</strong> भारत के परंपरागत बीजों के संरक्षण, संग्रहण और उत्पादन की दिशा में काम करती है। सरकार परंपरागत बीजों के लिए <strong>छोटे किसानों</strong> के साथ भी अनुबंध करेगी, जिससे उन्हें भी इसका फायदा मिल सके।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_68930f5e9b3f2.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><span>केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि </span><strong>राष्ट्रीय सहकारी नीति-2025</strong> देश में सतत सहकारी विकास के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रदान करती है। इसमें भारत सरकार की योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) और अन्य के साथ समन्वय भी शामिल है ताकि जमीनी स्तर पर सहकारी इकोसिस्टम को मजबूत किया जा सके। सहकारी समितियों के नेतृत्व में श्वेत क्रांति 2.0 के तहत अगले पांच वर्षों में दूध की खरीद को 50% बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p>बैठक के दौरान <strong>सहकारिता मंत्रालय</strong> द्वारा समिति को पिछले चार वर्षों में की गई विभिन्न पहलों की जानकारी दी गई। मंत्रालय की ओर से बताया गया कि प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी के लिए संस्थागत तंत्र जैसे अंतर-मंत्रालयी समिति (IMC), राष्ट्रीय स्तर समन्वय समिति (NLCC), राज्य सहकारी विकास समितियां (SCDC), और जिला सहकारी विकास समितियां (DCDC) गठित की गई हैं।</p>
<p>मंत्रालय द्वारा बताया गया कि संसदीय अधिनियम के माध्यम से स्थापित <strong>त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी</strong> को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया है। श्वेत क्रांति 2.0 के लक्ष्य की ओर भी तेजी से बढ़ा जा रहा है। इसके तहत अब तक 15,691 नई डेयरी सहकारी समितियां पंजीकृत की गई हैं और 11,871 मौजूदा डेयरी सहकारी समितियों को मजबूत किया गया है।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB)</strong> और 15 राज्यों में 25 मिल्क यूनियनों ने डेयरी सहकारी समितियों में बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। जैविक उत्पादों, निर्यात और बीज क्षेत्रों में तीन नई बहु-राज्य सहकारी समितियां स्थापित की गई हैं, जिनका उद्देश्य सहकारी मूल्य श्रृंखला में स्केल, गुणवत्ता और ब्रांडिंग को बढ़ाना है।</p>
<p><strong>सलाहकार&nbsp;समिति</strong> ने सहकारी क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए अपने सुझाव साझा किए। मंत्रालय ने ग्रामीण भारत में विकास, समानता और आत्मनिर्भरता के इंजन के रूप में सहकारी समितियों को सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_68930dff7ae27.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारिता के क्षेत्र में 100 से अधिक नई पहल, देश में 35,395 नई सहकारी समितियां गठित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_68930dff7ae27.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[के.जे. पटेल इफको के नए प्रबंध निदेशक, चेयरमैन दिलीप संघाणी ने किया ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/k.j.-patel-is-new-managing-director-of-iffco-announced-by-chairman-dilip-sanghani.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 31 Jul 2025 14:19:06 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/k.j.-patel-is-new-managing-director-of-iffco-announced-by-chairman-dilip-sanghani.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इफको के चेयरमैन दिलीप संघाणी ने के. जे. पटेल को इफको के नए और 9वें प्रबंध निदेशक के रूप में घोषित किया। के. जे. पटेल इफको में तकनीकी निदेशक के पद पर कार्यरत थे और उर्वरक उद्योग में व्यापक अनुभव लेकर आते हैं। वे सौराष्ट्र विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियर हैं और नाइट्रोजनयुक्त एवं फॉस्फेटिक उर्वरक संयंत्रों के रखरखाव में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने इफको के पारादीप संयंत्र का नेतृत्व किया है, जो भारत का सबसे बड़ा कॉम्प्लेक्स उर्वरक संयंत्र है।</p>
<p>दिलीप संघाणी ने के. जे. पटेल का नए प्रबंध निदेशक के रूप में स्वागत करते हुए कहा कि पटेल गहन उद्योग ज्ञान और सिद्ध रणनीतिक सोच का दृष्टिकोण लेकर आते हैं, जो इफको के लक्ष्यों से पूरी तरह मेल खाता है। उन्होंने आगे कहा कि बोर्ड को पूर्ण विश्वास है कि के. जे. पटेल इफको को नवाचार और मूल्य सृजन के एक नए युग में ले जाएंगे तथा इफको अपनी मजबूत नींव पर निर्माण करता रहेगा और किसानों एवं सहकारी बंधुओं के कल्याण की दिशा में कार्य करता रहेगा।</p>
<p>दिलीप संघाणी ने निवर्तमान एमडी डॉ. यू. एस. अवस्थी को इफको एवं देशभर के किसानों के प्रति उनके अमूल्य योगदान एवं समर्पण के लिए धन्यवाद भी दिया।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_688b2dfa2107a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ के.जे. पटेल इफको के नए प्रबंध निदेशक, चेयरमैन दिलीप संघाणी ने किया ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_688b2dfa2107a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डॉ. यू. एस. अवस्थी ने इफको से ली विदा, चार दशक के शानदार नेतृत्व का समापन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/dr-us-awasthi-bids-farewell-to-iffco-ending-four-decades-of-leadership.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 30 Jul 2025 19:19:37 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/dr-us-awasthi-bids-farewell-to-iffco-ending-four-decades-of-leadership.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>विश्व की प्रमुख उर्वरक सहकारी संस्था, इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइज़र कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) में आज एक युग का समापन हुआ, जब प्रबंध निदेशक <strong>डॉ. उदय शंकर अवस्थी</strong> 31 जुलाई 2025 को 80 वर्ष की आयु पूरी कर सेवा से निवृत्त हो रहे हैं। चार दशकों से अधिक समय तक इफको की कमान संभालने वाले डॉ. अवस्थी ने न केवल संगठन को वैश्विक पहचान दिलाई, बल्कि इसे बुलंदियों पर पहुंचाया। इफको के <span>नए प्रबंध निदेशक के नाम का अभी तक ऐलान नहीं हुआ है।&nbsp;</span></p>
<p>इस मौके पर अपने संदेश में डॉ. अवस्थी ने कहा कि उनका हृदय सदैव किसानों और सहकारिता के लिए धड़कता रहा, और यही भावना उन्हें जीवनपर्यंत इस क्षेत्र की सेवा के लिए प्रेरित करती रही।</p>
<p>बीएचयू से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक डॉ. अवस्थी ने नवंबर 1976 में इफको में कदम रखा था। विभिन्न महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने 1993 में प्रबंध निदेशक का पदभार संभाला। अपने नेतृत्व में उन्होंने इफको को एक विश्वस्तरीय, पेशेवर रूप से प्रबंधित सहकारी समूह में परिवर्तित कर दिया। उनके मार्गदर्शन में इफको ने न केवल उर्वरक क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की, बल्कि अनेक विविध क्षेत्रों में विस्तार करते हुए किसानों को सीधे लाभ पहुँचाया।</p>
<p>डॉ. अवस्थी के नेतृत्व में इफको ने सेनेगल, ओमान, जॉर्डन और यूएई में रणनीतिक निवेश किए। उन्होंने कई ऐतिहासिक संयुक्त उपक्रमों की नींव रखी, जिनमें इफको-टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी और इफको-मित्सुबिशी कैमिकल्स शामिल हैं। उन्होंने इफको बाजार (ई-कॉमर्स), IFFDC (वन एवं बीज उत्पादन), इफको किसान लॉजिस्टिक्स, इफको किसान सुविधा और इफको किसान फाइनेंस जैसी अनेक सहायक कंपनियों की स्थापना की।</p>
<p>कृषि क्षेत्र में नैनो टेक्नोलॉजी को अपनाने वाले डॉ. अवस्थी अग्रणी रहे। उन्होंने कलोल स्थित नैनो टेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर और इफको Nanoventions Pvt. Ltd. की स्थापना कर इफको नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, <span>नैनो जिंक </span>और नैनो जैसे उत्पादों की शुरुआत कराई। उनके कार्यकाल में गुजरात (कलोल, कांडला), उत्तर प्रदेश (आंवला, फूलपुर), ओडिशा (पारादीप), बेंगलुरु, देवघर और असम में नैनो उर्वरक संयंत्र स्थापित किए गये।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_688a22699e2ce.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>कृषि और सहकारिता क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इनमें Rochdale Pioneers Award (अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन), &ldquo;Fertiliser Man of India&rdquo; (सहकार भारती) सहित कई सम्मान शामिल हैं। वे इंटरनेशनल फर्टिलाइजर एसोसिएशन और फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया में नेतृत्वकारी भूमिका में भी रहे।</p>
<p>अपने संदेश में <strong>डॉ. अवस्थी </strong>ने कहा, "मैं इफको परिवार, उसकी सभी सहयोगी, संयुक्त उपक्रमों और संबद्ध संस्थानों का आभार प्रकट करता हूँ। मैं अतीत और वर्तमान के सभी बोर्ड सदस्यों, सहकारी सदस्य, इफको के सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों, साझेदारों, आपूर्तिकर्ताओं, और भारत के किसानों का हार्दिक धन्यवाद करता हूं। यदि मैं सभी के नाम नहीं ले पा रहा हूँ, तो भी हर किसी का मेरे जीवन में योगदान अविस्मरणीय है।"</p>
<p>इफको के चेयरमैन <strong>दिलीप संघानी </strong>ने कहा, "अवस्थी जी ने इफको और इसके सभी उपक्रमों में जिस समर्पण और सेवा-भाव से कार्य किया, वह अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने अपने परिवार से दूर रहकर संस्था की सेवा की है। अब जब वह अवकाश ले रहे हैं, तो हमें प्रसन्नता है कि वे अपने परिवार के साथ समय बिता पाएंगे। हम फिर भी उनसे निवेदन करते हैं कि वे नए प्रबंधन को समय-समय पर मार्गदर्शन देते रहें।"</p>
<p>इफको की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, डॉ. अवस्थी की विदाई, इफको में एक युग का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है, जहां उनकी दूरदृष्टि और अनुभव संस्था की आगामी पहलों को मार्गदर्शन देते रहेंगे। उनके आदर्श, नवाचार और सेवा-भावना, आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_688a2241ebd6f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ डॉ. यू. एस. अवस्थी ने इफको से ली विदा, चार दशक के शानदार नेतृत्व का समापन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025: युवाओं को सहकारी क्षेत्र से जोड़ने की व्यापक रणनीति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/national-cooperation-policy-2025-apex-institution-and-youth-at-the-core-of-cooperative-transformation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 28 Jul 2025 07:00:24 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/national-cooperation-policy-2025-apex-institution-and-youth-at-the-core-of-cooperative-transformation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="284" data-end="715">केंद्र सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 की घोषणा करते हुए सहकारी क्षेत्र को पेशेवर, सशक्त और नवाचार की दिशा में आगे ले जाने का खाका प्रस्तुत किया है। यह नीति न केवल सहकारी संस्थानों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने पर केंद्रित है, बल्कि युवाओं को सहकारी विकास से जोड़ने की भी रणनीति प्रस्तुत करती है।</p>
<p>इस नीति के केंद्र में दो प्रमुख पहल हैं: सहकारी शिक्षा, प्रशिक्षण और नवाचार के लिए एक सर्वोच्च राष्ट्रीय स्तर के संगठन का निर्माण, और सहकारी आंदोलन में युवा पीढ़ी को शामिल करने हेतु एक व्यापक रणनीति।</p>
<p data-start="758" data-end="1085">नई नीति के तहत युवाओं को सहकारी उद्यमों में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए सहकारिता से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में पेशेवर शिक्षा और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के युवाओं को सहकारी क्षेत्र में रोजगार प्राप्त करने के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल से दक्ष बनाया जाएगा।</p>
<h3 data-start="1087" data-end="1124"><strong>शीर्ष राष्ट्रीय संस्था की स्थापना</strong></h3>
<p data-start="1126" data-end="1403">युवाओं को सहकारी प्रणाली से जोड़ने और उनके प्रशिक्षण के लिए एक <strong>राष्ट्रीय शीर्ष संस्था</strong> की स्थापना की जाएगी, जो राज्य स्तरीय सहकारी शिक्षण और प्रशिक्षण संस्थानों के साथ समन्वय कर भविष्य के लिए नेतृत्व तैयार करेगी, जिससे सहकारी संस्थाओं का संचालन अधिक पेशेवर रूप से किया जा सके।</p>
<p data-start="1405" data-end="1667">यह शीर्ष संस्था पाठ्यक्रम, प्रवेश प्रक्रिया, शिक्षक नियुक्ति और मूल्यांकन जैसी व्यवस्थाओं का मानकीकरण करेगी। साथ ही, समाज विज्ञान में डिग्री व डिप्लोमा प्रदान करने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों को सहकारिता से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।</p>
<h3 data-start="1669" data-end="1705"><strong>कौशल विकास और नवाचार पर जोर</strong></h3>
<p data-start="1707" data-end="1977">नीति के अंतर्गत सहकारी क्षेत्र में कार्यरत लोगों के प्रशिक्षण और कौशल विकास हेतु एक संगठित तंत्र विकसित किया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा स्थापित या वित्तपोषित प्रशिक्षण संस्थानों का एक <strong>डेटाबेस</strong> तैयार किया जाएगा, ताकि प्रशिक्षण की व्यवस्था और पहुंच बेहतर हो सके।</p>
<p data-start="1979" data-end="2221">इसके अलावा, सहकारी शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के लिए <strong>उत्कृष्टता केंद्रों </strong>की स्थापना की जाएगी। साथ ही, नए और उभरते क्षेत्रों में <strong>सामाजिक उद्यम इनक्यूबेटर (SEI)</strong> स्थापित किए जाएंगे, जो ग्रामीण और सामुदायिक स्तर पर उद्यमशीलता को बढ़ावा देंगे।</p>
<h3 data-start="2223" data-end="2263"><strong>सहकारी रोजगार के लिए डिजिटल एक्सचेंज</strong></h3>
<p data-start="2265" data-end="2563">नीति में राष्ट्रीय डिजिटल सहकारी रोजगार एक्सचेंज की स्थापना का सुझाव दिया गया है, जो योग्य उम्मीदवारों और सहकारी संस्थाओं के बीच सीधा और पारदर्शी संपर्क सुनिश्चित करेगा। साथ ही, एक राष्ट्रीय शिक्षक और प्रशिक्षक डेटाबेस भी तैयार किया जाएगा, जिससे नियुक्ति की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो सकेगी।</p>
<p data-start="2609" data-end="2938">नीति में स्थानीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री तैयार करने, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने, और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया है। इसके अलावा, रेफ्रिजरेशन, एक्वाकल्चर, फार्म प्रबंधन जैसे बाजार-उन्मुख कौशलों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत की योजना है।</p>
<h3 data-start="2940" data-end="2977"><strong>शैक्षणिक शोध और फैलोशिप&nbsp;</strong></h3>
<p data-start="2979" data-end="3305">सहकारी अर्थव्यवस्था, नवाचार और शासन सुधार जैसे क्षेत्रों में <strong>डॉक्टोरल</strong> और <strong>पोस्ट-डॉक्टोरल फैलोशिप</strong> शुरू करने की योजना भी प्रस्तावित की गई है। इसका उद्देश्य सहकारी मॉडल पर आधारित अकादमिक शोध को बढ़ावा देना है। प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शोधार्थियों को सहकारी तंत्र के प्रमुख पहलुओं पर गहन अनुसंधान के लिए प्रेरित किया जाएगा।</p>
<p data-start="3312" data-end="3635" data-is-last-node="" data-is-only-node="">राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 सहकारी आंदोलन को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह नीति सहकारिता को ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ के रूप में सशक्त बनाने के साथ-साथ युवाओं, महिलाओं और उद्यमियों को एक समावेशी और आत्मनिर्भर विकास मॉडल से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करती है।</p>
<p data-start="3312" data-end="3635" data-is-last-node="" data-is-only-node=""></p>
<p data-start="3312" data-end="3635" data-is-last-node="" data-is-only-node=""></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_68873f2a0bc3d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025: युवाओं को सहकारी क्षेत्र से जोड़ने की व्यापक रणनीति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राष्ट्रीय सहकारिता नीति&amp;#45;2025 जारी, सहकारी क्षेत्र के जीडीपी में तीन गुना योगदान का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/national-cooperative-policy-2025-unveiled-aiming-to-triple-the-contribution-of-cooperative-sector-to-gdp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 24 Jul 2025 22:51:50 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/national-cooperative-policy-2025-unveiled-aiming-to-triple-the-contribution-of-cooperative-sector-to-gdp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="319" data-end="736">केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में <strong>राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025</strong> का शुभारंभ किया। इस नीति के तहत &lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; के विजन को साकार करने के लिए वर्ष 2034 तक सहकारी क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान को तीन गुना बढ़ाने, 50 करोड़ लोगों को सहकारिता से जोड़ने, और देश के हर गांव में कम से कम एक सहकारी समिति की स्थापना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।</p>
<p data-start="738" data-end="1155">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय सहकारिता मंत्री <strong>अमित शाह</strong> ने कहा कि वर्ष 2002 में पहली बार भारत सरकार ने सहकारिता नीति पेश की थी। उस समय भी उनकी पार्टी की सरकार थी। आज, वर्ष 2025 में जब भारत सरकार ने दूसरी बार सहकारिता नीति प्रस्तुत की है, तब भी हमारी ही सरकार है। यह नई नीति प्रधानमंत्री <strong>नरेंद्र मोदी</strong> के &lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; के विजन को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।</p>
<p data-start="1157" data-end="1719">अमित शाह ने कहा, &ldquo;जो लोग पहले कहते थे कि सहकारिता का कोई भविष्य नहीं है, आज वही मानते हैं कि सहकारिता का ही भविष्य है।&rdquo; उन्होंने कहा कि देश के 140 करोड़ लोगों को साथ लेकर आर्थिक विकास की क्षमता सिर्फ सहकारी क्षेत्र में है। इसलिए, नीति निर्माण के समय यह सुनिश्चित किया गया कि इसका केंद्र बिंदु <strong>गांव, कृषि, ग्रामीण महिलाएं, दलित</strong> और <strong>आदिवासी</strong> समुदाय हों। इस नीति का विजन है &mdash; सहकारिता के माध्यम से समृद्ध भारत का निर्माण, और मिशन है &mdash; प्रत्येक गांव में कम से कम एक पेशेवर, पारदर्शी, तकनीक-समर्थ, जिम्मेदार और आर्थिक रूप से स्वतंत्र सहकारी इकाई की स्थापना।</p>
<p data-start="1998" data-end="2273">केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पर्यटन, टैक्सी, बीमा और हरित ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में सहकारी मॉडल को अपनाने की विस्तृत योजना तैयार की गई है। विशेष रूप से टैक्सी और बीमा क्षेत्रों में बहुत जल्द प्रभावशाली शुरुआत की जाएगी ताकि एक मजबूत सहकारी इकोसिस्टम तैयार हो सके। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2034 तक सहकारी क्षेत्र का देश की जीडीपी में योगदान तीन गुना किया जाए। साथ ही, वर्तमान में सहकारी क्षेत्र से बाहर के <strong>50 करोड़</strong> नागरिकों को इसमें सक्रिय सदस्य बनाया जाए। सहकारी समितियों की संख्या में 30 प्रतिशत वृद्धि, और हर पंचायत में कम से कम एक प्राथमिक सहकारी समिति की स्थापना भी इस नीति के लक्ष्यों में शामिल है।</p>
<p data-start="2634" data-end="2976">अमित शाह ने बताया कि राज्य सहकारी बैंकों के माध्यम से प्रत्येक तहसील में <strong>5 मॉडल सहकारी गांव</strong> स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा, &ldquo;हमने हर राज्य के लिए संतुलित सहकारी विकास का रोडमैप तैयार किया है।&rdquo; नई सहकारिता नीति दूरदर्शी, व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी है, जो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहकारिता की निर्णायक भूमिका सुनिश्चित करेगी। <span>श्वेत क्रांति 2.0 के माध्यम से महिलाओं की सहभागिता को इससे जोड़ा जाएगा।</span></p>
<p data-start="2978" data-end="3438">उन्होंने कहा कि 45,000 नई PACS (प्राथमिक कृषि ऋण समितियों) के गठन का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, और उनका कंप्यूटरीकरण भी किया जा चुका है। साथ ही, <strong>त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी</strong>&nbsp;के माध्यम से सहकारी क्षेत्र को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा ताकि यह क्षेत्र युवाओं के लिए आकर्षक करियर विकल्प बन सके। शाह ने यह भी बताया कि इस साल के अंत तक 'सहकार टैक्सी' योजना भी शुरू की जाएगी, जिसमें प्रत्यक्ष मुनाफा ड्राइवर के खाते में जाएगा।</p>
<p data-start="3440" data-end="3607">उन्होंने कहा कि यह नीति न केवल ग्रामीण, महिला, दलित और आदिवासी वर्गों को सशक्त बनाएगी, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में सहकारिता की अहम भूमिका निभाएगी। यह नीति आने वाले 25 वर्षों तक सहकारिता क्षेत्र को प्रासंगिक, प्रभावशाली और गतिशील बनाए रखने में मदद करेगी।</p>
<p data-start="3749" data-end="3950">नई सहकारिता नीति पूर्व केंद्रीय मंत्री <strong>सुरेश प्रभु</strong> की अध्यक्षता में गठित 40 सदस्यीय समिति द्वारा तैयार की गई है, जिसने 17 बैठकें आयोजित कर 750 से अधिक सुझावों और आरबीआई व नाबार्ड के परामर्श के आधार पर इसे अंतिम रूप दिया।</p>
<p data-start="3952" data-end="4135">कार्यक्रम में केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, मुरलीधर मोहोल, सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी और पूर्व मंत्री सुरेश प्रभु सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</p>
<p data-start="3952" data-end="4135"></p>
<p data-start="3952" data-end="4135"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 जारी, सहकारी क्षेत्र के जीडीपी में तीन गुना योगदान का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अशोक चौधरी जीसीएमएमएफ के नए अध्यक्ष, गोर्धन धमेलिया उपाध्यक्ष बने]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ashok-choudhary-new-chairman-of-gcmmf-gordhan-dhamelia-becomes-vice-chairman.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 23 Jul 2025 16:59:14 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ashok-choudhary-new-chairman-of-gcmmf-gordhan-dhamelia-becomes-vice-chairman.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अमूल ब्रांड से उत्पाद बेचने वाली देश की प्रमुख सहकारी संस्था, <strong><em>गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (</em><em>GCMMF)</em> </strong><span>में नए नेतृत्व ने कमान संभाल ली है। मेहसाणा दुग्ध उत्पादक संघ (दूधसागर डेयरी) के अध्यक्ष <strong>अशोक चौधरी</strong> को जीसीएमएमएफ का नया अध्यक्ष निर्विरोध चुना गया है। वहीं</span>, राजकोट जिला दुग्ध उत्पादक संघ (गोपाल डेयरी) के अध्यक्ष <strong>गोर्धन धमेलिया</strong> उपाध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।</p>
<p>आनंद जिला कलेक्टर और निर्वाचन अधिकारी प्रवीण चौधरी ने बताया कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए कोई अन्य नामांकन प्राप्त नहीं हुआ, इसलिए दोनों नेताओं को निर्विरोध चुना गया। यह चुनाव जीसीएमएमएफ की दो साल छह महीने की कार्यकारिणी का कार्यकाल पूरा होने के चलते हुआ।</p>
<p><strong>36 </strong><strong>लाख डेयरी किसानों का नेतृत्व</strong></p>
<p>चुनाव के बाद, <span>अशोक</span> चौधरी और गोर्धन धमेलिया ने अमूल को वैश्विक डेयरी ब्रांड के रूप में स्थापित करने में उनके दूरदर्शी नेतृत्व के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया।</p>
<p>अशोक चौधरी ने कहा कि वह जीसीएमएमएफ की प्रगति के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे। इससे करीब 36 लाख डेयरी किसानों की आजीविका जुड़ी है और इसका सशक्तिकरण उनकी प्राथमिकता होगी।</p>
<p><strong>सहकारिता क्षेत्र में मजबूत पहचान</strong></p>
<p>55 वर्षीय अशोक चौधरी उत्तर गुजरात के सहकारिता क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वे मेहसाणा जिले के विसनगर तालुका स्थित चितरोडिपुरा गांव के निवासी हैं और भाजपा की मेहसाणा इकाई में प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। वे 2005 से 2007 तक मेहसाणा नगरपालिका के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।</p>
<p>चौधरी 2015 में दूधसागर डेयरी के निदेशक बने और 2021 में उन्होंने जीसीएमएमएफ के पूर्व अध्यक्ष विपुल चौधरी के समर्थित पैनल को हराकर दूधसागर डेयरी के अध्यक्ष बने थे।</p>
<p><strong>18 </strong><strong>सहकारी दुग्ध संस्थाएं जीसीएमएमएफ की सदस्य</strong></p>
<p>जीसीएमएमएफ गुजरात की 18 सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों का एक महासंघ है, जिसकी स्थापना किसानों को सशक्त बनाने और उन्हें उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से की गई थी। &lsquo;अमूल&rsquo; ब्रांड के माध्यम से यह संस्था राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है।</p>
<p><strong>निर्विरोध चुनाव की परंपरा </strong></p>
<p>जीसीएमएमएफ की विज्ञप्ति के अनुसार, "चुनाव प्रक्रिया आनंद के जिला कलेक्टर और गुजरात सरकार के सहकारी रजिस्ट्रार की उपस्थिति में आयोजित की गई। 1973 में अपनी स्थापना के बाद से, जीसीएमएमएफ ने अपने नेतृत्व के लिए सर्वसम्मति से चुनाव की परंपरा को बनाए रखा है।"</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_6880c98305603.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अशोक चौधरी जीसीएमएमएफ के नए अध्यक्ष, गोर्धन धमेलिया उपाध्यक्ष बने ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_6880c98305603.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केन्द्रीय मंत्री अमित शाह ने देश के पहले सहकारी विश्वविद्यालय ‘त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी’ का भूमि पूजन किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/union-minister-amit-shah-performs-the-bhoomi-poojan-of-tribhuvan-sahkari-university.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 05 Jul 2025 20:35:20 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/union-minister-amit-shah-performs-the-bhoomi-poojan-of-tribhuvan-sahkari-university.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को गुजरात के आणंद में देश के पहले सहकारी विश्वविद्यालय &lsquo;त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी&rsquo; का भूमि पूजन किया। इस मौके पर शाह ने कहा कि 125 एकड़ में 500 करोड़ रुपये की लागत से देश की पहली सहकारी यूनिवर्सिटी बनेगी। आज देशभर में 40 लाख कर्मी सहकारिता आंदोलन के साथ जुड़े हैं, 80 लाख बोर्ड के सदस्य हैं और 30 करोड़ लोग, यानी देश का हर चौथा व्यक्ति सहकारिता आंदोलन से जुड़ा हुआ है।</p>
<p>शाह ने कहा कि आज का दिन सहकारिता क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने कहा कि चार साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के करोड़ों गरीबों और ग्रामीणों के जीवन में आशा का संचार करने और उन्हें आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की थी। मंत्रालय की स्थापना के बाद पिछले 4 साल में सहकारिता मंत्रालय ने भारत में सहकारिता क्षेत्र के विकास, संवर्धन और समविकास के लिए 60 नई पहल की हैं। ये सभी पहल सहकारिता आंदोलन को चिरंजीव, पारदर्शी, लोकतांत्रिक बनाने, विकसित करने, सहकारिता के माध्यम से किसानों की आय को बढ़ाने और सहकारिता आंदोलन में मातृशक्ति और युवाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए की गईं। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल और केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।</p>
<p>केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र के विकास के लिए सहकारिता के कर्मचारियों और सहकारी समितियों के सदस्यों के प्रशिक्षण के लिए पहले कोई सुचारू व्यवस्था नहीं थी। पहले कोऑपरेटिव में भर्ती के बाद कर्मचारी को ट्रेनिंग दी जाती थी, लेकिन अब यूनिवर्सिटी बनने के बाद जिन्होंने प्रशिक्षण लिया है, उसी को नौकरी मिलेगी। इसके कारण सहकारिता में भाई-भतीजावाद खत्म हो जाएगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_68693f0ed9832.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने कहा कि इस यूनिवर्सिटी में युवा तकनीकी विशेषज्ञता, अकाउंटेंसी, वैज्ञानिक अप्रोच और मार्केटिंग के सारे गुण तो सीखेंगे ही, साथ ही उन्हें सहकारिता के संस्कार भी सीखने को मिलेंगे कि सहकारिता आंदोलन देश के दलित, महिलाओं और आदिवासियों के लिए है। उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र की कई समस्याओं का समाधान इस सहकारी यूनिवर्सिटी से हो जाएगा।</p>
<p>अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश में 2 लाख नई प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS) बनाने का निर्णय लिया है जिनमें से 60 हज़ार नए पैक्स इस वर्ष के अंत तक बन जाएंगे। उन्होंने कहा कि 2 लाख पैक्स में ही 17 लाख कर्मचारी होंगे। इसी प्रकार, कई ज़िला डेयरी बन रही हैं और इन सबके लिए ट्रेंड मैनपावर की ज़रूरत भी त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय पूरा करेगा।&nbsp;</p>
<p>शाह ने कहा कि यह यूनिवर्सिटी सहकारिता में नीति निर्माण, डेटा विश्लेषण और देश के कोऑपरेटिव के विकास की 5 साल, 10 साल और 25 साल की रणनीति बनाने का काम करेगी। अनुसंधान को भी इस यूनिवर्सिटी के साथ जोड़ा गया है। यह यूनिवर्सिटी सिर्फ सहकारी कर्मचारी तैयार नहीं करेगी बल्कि यहां से त्रिभुवन दास जी जैसे समर्पित सहकारी नेता भी निकलेंगे जो भविष्य में सहकारिता क्षेत्र का नेतृत्व करेंगे। CBSE ने 9 से 12 कक्षा के पाठ्यक्रम में सहकारिता विषय को जोड़ा है। गुजरात सरकार को भी अपने पाठ्यक्रम में सहकारिता विषय को जोड़ना चाहिए जिससे आम लोग सहकारिता के बारे में जान सकें।</p>
<p>केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी का नाम त्रिभुवन दास किशिभाई पटेल के नाम पर रखा गया है। त्रिभुवन दास जी ने सरदार पटेल के मार्गदर्शन में इसी भूमि पर एक नए विचार का बीज बोने का काम किया था। त्रिभुवन दास जी ने दूध इकट्ठा करने की एक छोटी सी मंडली बनाई और उसके माध्यम से किसानों को सशक्त करने के लिए एक बहुत बड़ा अभियान चलाया। श्री शाह ने कहा कि 1946 में खेड़ा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ की स्थापना हुई और आज त्रिभुवन दास द्वारा बोया गया वह बीज एक विशाल वट वृक्ष बनकर खड़ा है, जिसमें 36 लाख बहनें 80 हज़ार करोड़ रुपए का कारोबार करती हैं और किसी की 100 रुपए से अधिक पूंजी नहीं लगी है।&nbsp;</p>
<p>केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि जिस मेगा वैक्यूम ने हमारे सहकारिता आंदोलन को सिकोड़कर रख दिया था उसे भरने का काम यह यूनिवर्सिटी करेगी जिसके कारण अब सहकारिता आंदोलन फलेगा, फूलेगा, आगे बढ़ेगा और भारत पूरे विश्व में सहकारिता का गढ़ बनेगा। त्रिभुवन सहकारिता यूनिवर्सिटी, यहां बनाई हुई नीतियां और अभ्यासक्रम, सहकारिता के आर्थिक मॉडल को एक जनआंदोलन में परिवर्तित करने का काम करेंगे।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ केन्द्रीय मंत्री अमित शाह ने देश के पहले सहकारी विश्वविद्यालय ‘त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी’ का भूमि पूजन किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[‘अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025’ के उपलक्ष्य में कृभको और आईएमएस गाजियाबाद ने आयोजित की राष्ट्रीय वाद&amp;#45;विवाद प्रतियोगिता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/kribhco-and-ims-ghaziabad-organized-national-declamation-contest-to-mark-‘iyc-2025’.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 05 Jul 2025 13:45:05 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/kribhco-and-ims-ghaziabad-organized-national-declamation-contest-to-mark-‘iyc-2025’.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) ने आईएमएस गाजियाबाद के सहयोग से 3 जुलाई 2025 को आईएमएस गाजियाबाद परिसर में &lsquo;इंटर-इंस्टीट्यूट नेशनल डिक्लेमेशन प्रतियोगिता&rsquo; का आयोजन किया। यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 (IYC 2025) के उपलक्ष्य में किया गया, जिसका विषय था "सहकारिता: एक बेहतर विश्व के लिए समावेशी और सतत समाधान"।</p>
<p>प्रतियोगिता में 400 से अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रमुख संस्थानों से 100 से अधिक पंजीकृत प्रतिभागी शामिल थे। उद्योग विशेषज्ञों ने भी अपने भाषणों के माध्यम से सहयोग, समावेश और सस्टेनेबिलिटी पर अपने दृष्टिकोण साझा किए।</p>
<p>प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के रूप में सहकारिता मंत्रालय के निदेशक (मीडिया और प्रकाशन) और आईएएस कपिल मीणा उपस्थिति रहे। मीणा ने सहकारी मूल्यों पर सार्थक चर्चा में युवाओं को शामिल करने में इस पहल की भूमिका की सराहना की। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में कृभको के निदेशक (मानव संसाधन) एस.एस. यादव, आईसीए-एपी के क्षेत्रीय निदेशक बालासुब्रमण्यम (बालू) अय्यर और आईएमएस गाजियाबाद के निदेशक डॉ. प्रसून एम. त्रिपाठी शामिल थे।</p>
<p>एक प्रतिष्ठित जूरी पैनल, जिसमें जनसंपर्क, शिक्षा, वित्त और मीडिया के क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल थे, ने छात्रों की परफॉर्मेंस का मूल्यांकन किया। प्रतियोगिता दो राउंड में आयोजित की गई थी। 100 से अधिक छात्रों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग के बाद, पहले दौर में 53 से अधिक छात्रों ने भाग लिया, जिनमें से 8 फाइनलिस्ट को दूसरे दौर में शीर्ष तीन स्थानों के लिए प्रतिस्पर्धा करने के लिए चुना गया।&nbsp;</p>
<p>विजेताओं को प्रथम स्थान के लिए 51,000 रुपये, दूसरे स्थान के लिए 31,000 रुपये और तीसरे स्थान के लिए 21,000 रुपये का पुरस्कार दिया गया। कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि ने विजेताओं को संबंधित राशि का चेक सौंपा। कार्यक्रम का आयोजन कृभको और आईएमएस गाजियाबाद ने संयुक्त रूप से किया। कृभको के संयुक्त महाप्रबंधक (विपणन और जनसंपर्क) डॉ. वी.के. तिवारी और आईएमएस गाजियाबाद के निदेशक डॉ. प्रसून एम. त्रिपाठी इस मेगा इवेंट के संयोजक थे।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ‘अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025’ के उपलक्ष्य में कृभको और आईएमएस गाजियाबाद ने आयोजित की राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत ऑर्गेनिक्स मेले में दिखी सहकारी क्षेत्र के उत्पादों की झलक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/minister-of-state-for-cooperation-krishan-pal-gurjar-inaugurated-the-bharat-organics-mela-2025.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 04 Jul 2025 16:13:40 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/minister-of-state-for-cooperation-krishan-pal-gurjar-inaugurated-the-bharat-organics-mela-2025.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) द्वारा सहकारिता मंत्रालय और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारत ऑर्गेनिक्स मेला&nbsp;2025&nbsp;का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ आशीष कुमार भूटानी और सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा देश भर से आए जैविक किसान समूह मौजूद थे।</span></p>
<p><span>इस अवसर पर बोलते हुए,&nbsp;सहकारिता राज्य मंत्री ने कहा, &ldquo;भारत ऑर्गेनिक्स मेला इस बात का उदाहरण है कि कैसे सहकारी मॉडल छोटे किसानों को सशक्त बना सकता है और भारतीय घरों तक सुरक्षित,&nbsp;जैविक भोजन पहुँचा सकता है।&nbsp;NCOL&nbsp;जैविक खेती को किसानों के साथ एक राष्ट्रीय जन आंदोलन में बदल रहा है। प्रधान मंत्री मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में, NCOL, &lsquo;संपूर्ण सरकार&rsquo; दृष्टिकोण को अपनाकर, &lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; के दृष्टिकोण को वास्तविकता में ला रहा है। आइए हम सब मिलकर जैविक खेती को न केवल एक विकल्प बल्कि एक आंदोलन बनाएँ - जिससे हमारे पर्यावरण,&nbsp;हमारी मिट्टी और हमारी आने वाली पीढ़ियों को लाभ हो।&rdquo;</span></p>
<p><span>सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, "NCOL को भारत ऑर्गेनिक्स ब्रांड के तहत ब्रांडिंग, प्रमाणन और बाजार पहुंच के माध्यम से जैविक किसानों को संगठित करने और उनका उत्थान करने के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में देखा जाता है। यह मेला एक पारदर्शी और किसान-प्रथम जैविक अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है जो जमीनी स्तर के उत्पादकों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों से जोड़ सकता है। अब, जैविक किसान समूहों को विपणन मुद्दों के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि NCOL उनकी मदद के लिए यहाँ है। NCOL न केवल प्रीमियम मूल्य प्रदान करेगा, बल्कि किसान सहकारी समितियों के साथ लाभ भी साझा करेगा।"</span></p>
<p><span>भारत ऑर्गेनिक्स मेले में अरुणाचल प्रदेश,&nbsp;असम,&nbsp;मणिपुर,&nbsp;मेघालय,&nbsp;मिजोरम,&nbsp;नागालैंड,&nbsp;सिक्किम,&nbsp;त्रिपुरा,&nbsp;तेलंगाना,&nbsp;कर्नाटक, छत्तीसगढ़, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित&nbsp;15&nbsp;राज्यों के लगभग&nbsp;30&nbsp;किसान समूहों (FPOs/FPCs) ने&nbsp;60&nbsp;से अधिक उत्पादों के साथ भाग लिया। मेले में किसान समूहों द्वारा प्रमाणित जैविक उत्पादों को प्रदर्शित करने वाले 30&nbsp;से अधिक स्टॉल शामिल थे।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_6867b043cd368.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><span>NCOL&nbsp;के अध्यक्ष मीनेश शाह ने कहा, "19&nbsp;राज्यों की&nbsp;7,000&nbsp;से अधिक सहकारी समितियों के साथ,&nbsp;भारत ऑर्गेनिक्स एक मजबूत,&nbsp;विश्वसनीय और समावेशी आपूर्ति श्रृंखला बना रहा है जो भारत के जैविक उत्पादकों को घरेलू और वैश्विक उपभोक्ताओं से जोड़ती है।&nbsp;NCOL&nbsp;का लक्ष्य अगले दशक में घरेलू जैविक बाजार में अग्रणी खिलाड़ियों में से एक बनना है और भारत के लिए किसान-स्वामित्व वाला,&nbsp;पारदर्शी और स्केलेबल जैविक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना जारी रखेगा।"</span></p>
<p><span>NCOL&nbsp;के प्रबंध निदेशक विपुल मित्तल ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए सभी हितधारकों को धन्यवाद दिया और कहा, "NCOL&nbsp;सभी हितधारकों-किसानों,&nbsp;सहकारी समितियों,&nbsp;मंत्रालयों और भागीदारों के समर्थन के लिए बहुत आभारी है। आज का मेला उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य और किसानों को मूल्य प्रदान करने के हमारे मिशन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। हम यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे कि भारत ऑर्गेनिक्स ब्रांड एक बड़ी सफलता बने और जैविक किसानों और उपभोक्ताओं दोनों की सेवा करना जारी रखे।"</span><span></span></p>
<p><span>मेले का मुख्य आकर्षण भारत ऑर्गेनिक्स के प्रीमियम-क्वालिटी ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर (ACV)&nbsp;का लॉन्च था,&nbsp;जिसे भारत के सबसे बड़े सिरका उत्पादक,&nbsp;उनाती कोऑपरेटिव के सहयोग से विकसित किया गया है। NCOL&nbsp;के साथ इसका सहयोग ग्रामीण आजीविका,&nbsp;स्वदेशी स्वास्थ्य परंपराओं और सतत विकास को बढ़ावा देने के साझा मिशन को रेखांकित करता है।&nbsp;</span></p>
<p><span>दिन भर चलने वाले इस कार्यक्रम ने जमीनी स्तर के उत्पादक समूहों को बाज़ारों से जोड़ने,&nbsp;उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाने और भारत के बढ़ते सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र की ताकत का जश्न मनाने के लिए एक मंच के रूप में काम किया। यह कार्यक्रम सहकारी मॉडल के माध्यम से भारत के जैविक खेती आंदोलन को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कदम था और इसे अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के राष्ट्रीय पालन के हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था।</span></p>
<p><span>NCOL&nbsp;</span><span>किसान सहकारी समितियों द्वारा संचालित भारत का सबसे बड़ा जैविक पारिस्थितिकी तंत्र बना रहा है। भारत ऑर्गेनिक्स के माध्यम से</span><span>, NCOL</span><span>&nbsp;शुद्ध</span><span>, traceable</span><span>&nbsp;और नैतिक रूप से प्राप्त जैविक उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाता है</span><span>,&nbsp;</span><span>जिससे किसानों के लिए बेहतर मूल्य और घरों के लिए प्रामाणिक गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।</span></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत ऑर्गेनिक्स मेले में दिखी सहकारी क्षेत्र के उत्पादों की झलक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी उद्योग की इथेनॉल व एमएसपी संबंधी मांगों पर जीओएम करेगा विचारः प्रल्हाद जोशी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/gom-will-consider-the-demands-of-sugar-industry-union-minister-pralhad-joshi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 03 Jul 2025 19:07:56 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/gom-will-consider-the-demands-of-sugar-industry-union-minister-pralhad-joshi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री <strong>प्रल्हाद जोशी</strong> ने कहा है कि सरकार चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) और पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा इथेनॉल की खरीद मूल्य बढ़ाने से जुड़ी चीनी उद्योग की मांगों पर मंत्रियों के समूह (GoM) में विचार करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है और अब 2030 तक 25% तक पहुंचने के लिए रोडमैप तैयार किया जा रहा है।</p>
<p>प्रल्हाद जोशी गुरुवार को <strong>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ (NFCSF)</strong> द्वारा नई दिल्ली में आयोजित <strong>कोऑपरेटिव शुगर इंडस्ट्री कॉन्क्लेव 2025</strong> और नेशनल एफिशिएंसी अवार्ड समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर देशभर की 25 सहकारी चीनी मिलों को चीनी रिकवरी, वित्तीय प्रबंधन और तकनीकी दक्षता जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।</p>
<p>NFCSF, देश की 260 सहकारी चीनी मिलों और 9 राज्य महासंघों का प्रतिनिधित्व करने वाली शीर्ष संस्था है। यह संगठन हर वर्ष अपने सदस्य मिलों को नवाचार, स्थिरता और उत्कृष्टता बढ़ाने के उद्देश्य से "दक्षता पुरस्कार" प्रदान करता है।</p>
<p><strong>समाधान का आश्वासन&nbsp;</strong></p>
<p>प्रल्हाद जोशी ने कहा कि सरकार को गन्ना किसानों, चीनी मिलों और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना होता है। यह क्षेत्र हर साल ₹1.3 लाख करोड़ से अधिक का आर्थिक योगदान देता है। भारत दुनिया की 20% चीनी का उत्पादन करता है और इसकी 15% खपत देश में ही होती है। उन्होंने उद्योग की चीनी MSP और इथेनॉल कीमतों में बढ़ोतरी की मांगों के उचित समाधान का आश्वासन दिया।</p>
<p>उन्होंने यह भी बताया कि सहकारी चीनी मिलों ने इथेनॉल उत्पादन क्षमता में भारी निवेश किया है। भारत अब 1,788 करोड़ लीटर की स्थापित इथेनॉल उत्पादन क्षमता तक पहुंच चुका है। सरकार अब यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है कि ऑफ-सीजन में इथेनॉल और बायो-CNG का उत्पादन बढ़ाकर मिलें पूरे साल काम कर सकें।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_686696a1782f4.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>सहकारिता पर जोर&nbsp;</strong></p>
<p>केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मोदी सरकार के दौरान लिए गए नीतिगत निर्णयों को रेखांकित किया, जिनमें इथेनॉल ब्लेंडिंग, चीनी निर्यात और FRP (उचित एवं लाभकारी मूल्य) में बढ़ोतरी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 2024-25 का 83% गन्ना भुगतान पहले ही किया जा चुका है। जोशी ने कहा कि 10 लाख टन चीनी के निर्यात से घरेलू बाजार में कीमतों में ₹3 प्रति किलो का सुधार हुआ, जिससे उद्योग को स्थिरता मिली।</p>
<p>उन्होंने कहा, &ldquo;भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में सहकारिता क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।&rdquo; उन्होंने सहकारी क्षेत्र को नीतिगत निर्णयों, कर राहत, निवेश प्रोत्साहन और बहु-आयामी कार्यक्षमता के माध्यम से सशक्त करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सहकारिता मंत्रालय की स्थापना को सराहा और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी गोदामों और व्यवसाय मॉडल को बढ़ावा देने की पहल की प्रशंसा की।</p>
<p><strong>उद्योग की मांग और सुझाव</strong></p>
<p>NFCSF के अध्यक्ष <strong>हर्षवर्धन पाटिल</strong> ने किसानों, सहकारी चीनी मिलों और सहकारी क्षेत्र के हित में लिए गए निर्णयों के लिए नरेंद्र मोदी सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने चीनी का MSP ₹40 प्रति किलो तक बढ़ाने और उद्योग में स्थिरता लाने के लिए 10-वर्षीय नीतिगत रोडमैप बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।&nbsp; उन्होंने यह भी कहा कि इथेनॉल की खरीद मूल्य में वृद्धि की जानी चाहिए क्योंकि चीनी मिलों ने इथेनॉल क्षमता निर्माण में भारी वित्तीय निवेश किया है।</p>
<p>पाटिल ने सरकार द्वारा एनसीडीसी के ज़रिए ₹10,000 करोड़ का रियायती ऋण और कर राहत उपलब्ध कराने के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन कहा कि उद्योग को निरंतर समर्थन की आवश्यकता है।</p>
<p>सम्मेलन में पूर्व केंद्रीय मंत्री <strong>सुरेश प्रभु</strong>, राज्य मंत्री&nbsp;<a href="https://sansad.in/ls/members/biographyM/5614?from=members" target="_blank" rel="noopener"></a>निमुबेन बांभणिया<a href="https://sansad.in/ls/members/biographyM/5614?from=members" target="_blank" rel="noopener"></a>, और हरियाणा के सहकारिता मंत्री<strong> डॉ. अरविंद शर्मा</strong> ने भी अपने विचार रखते हुए चीनी मिलों की सामाजिक-आर्थिक भूमिका को रेखांकित किया।</p>
<p><strong>गन्ना खेती में AI पर तकनीकी संगोष्ठी</strong></p>
<p>अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के तहत, NFCSF ने 2 और 3 जुलाई 2025 को गन्ना खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग पर एक तकनीकी संगोष्ठी का आयोजन किया। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. प्रसांता कुमार दास, सहायक महानिदेशक, ICAR ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में प्रतापराव पवार ने इस क्षेत्र की संभावनाओं और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डाला।&nbsp;</p>
<p>कार्यक्रम का संचालन NFCSF के सचिव सुमित झा ने किया। अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल और प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे ने मुख्य अतिथियों का स्वागत किया।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_6866966d084d9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी उद्योग की इथेनॉल व एमएसपी संबंधी मांगों पर जीओएम करेगा विचारः प्रल्हाद जोशी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[स्वतंत्रता शताब्दी तक आदर्श कोऑपरेटिव स्टेट बनाने पर जोर, सहकारिता मंत्रियों के साथ हुआ मंथन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/emphasis-on-creating-an-ideal-cooperative-state-by-the-centenary-of-independence-brainstorming-meeting-with-cooperative-ministers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 01 Jul 2025 16:25:46 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/emphasis-on-creating-an-ideal-cooperative-state-by-the-centenary-of-independence-brainstorming-meeting-with-cooperative-ministers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नई दिल्ली में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों के साथ सहकारिता क्षेत्र की प्रगति और विकास पर "मंथन बैठक&rdquo; की अध्यक्षता की। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष - 2025 के उपलक्ष्य में आयोजित इस बैठक में देश भर के सहकारिता मंत्रियों, अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों और सहकारिता विभागों के सचिवों ने भाग लिया। बैठक में सहकारिता से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा और उपलब्धियों का आंकलन किया गया।</p>
<p>अपने संबोधन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश के हर व्यक्ति के लिए रोजगार के सृजन के लिए सहकारिता के सिवा कोई अन्य विकल्प नहीं है। इसीलिए 4 साल पहले सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की गई। हमें देश के करोड़ों छोटे किसानों और ग्रामीणों के कल्याण के लिए सहकारिता को पुनर्जीवित करना ही होगा, क्योंकि इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।</p>
<p>अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार का लक्ष्य है कि अगले 5 साल में देश में एक भी गांव ऐसा न रहे, जहां कोई कोऑपरेटिव न हो। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि हर राज्य की कम से कम एक सहकारी प्रशिक्षण संस्था, त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी के साथ जुड़े और राज्य के कोऑपरेटिव सेक्टर की ट्रेनिंग की व्यवस्था त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी के माध्यम से ही हो।</p>
<p>शाह ने कहा कि केंद्र सरकार जल्द ही राष्ट्रीय सहकारिता नीति की घोषणा करेगी, जो 2025 से 2045 तक, यानी लगभग भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी तक प्रभावी रहेगी। राष्ट्रीय नीति के तहत हर राज्य स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी सहकारिता नीति बनाए और विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित हों। तभी हम स्वतंत्रता की शताब्दी तक एक आदर्श सहकारी राज्य बन पाएंगे। राज्यों को 31 जनवरी 2026 तक अपनी सहकारिता नीति घोषित करने को कहा गया है।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति के तहत प्रत्येक राज्य की सहकारिता नीति उस राज्य की सहकारिता स्थितियों के अनुसार बनाई जाएगी तथा विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि तभी हम आजादी की शताब्दी तक आदर्श सहकारी राज्य बन पाएंगे। श्री शाह ने कहा कि</p>
<p><span>उन्होंने कहा कि पूरे देश में सहकारिता के क्षेत्र में अनुशासन, नवाचार और पारदर्शिता लाने का काम मॉडल एक्ट से होगा। देश में 2 लाख प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) की स्थापना के संबंध में वित्तीय वर्ष 2025-26 का लक्ष्य अगले वर्ष फरवरी तक ही पूरा कर लिया जाना चाहिए, तभी महत्वाकांक्षी लक्ष्य को समय पर पूरा कर सकेंगे।</span></p>
<p>तीन नवगठित राष्ट्रीय बहु-राज्य सहकारी समितियों - राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL), राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) के कामकाज का समर्थन करने में राज्यों की भूमिका पर भी बैठक में चर्चा की गई। साथ ही सस्टेनेबल और सर्कुलर डेयरी अर्थव्यवस्था बनाने के उद्देश्य से श्वेत क्रांति 2.0 पहल पर विचार-विमर्श किया गया। आत्मनिर्भर भारत के तहत दालों और मक्का के लिए समर्थन मूल्य पर खरीद से संबंधित नीतिगत मामलों पर भी चर्चा हुई।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_6863bf1504e8d.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>अमित शाह ने कहा कि अर्बन कोऑपरेटिव बैंक और क्रेडिट सोसायटी पर हमें विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है। कोऑपरेटिव बैंक को हम बैंकिंग एक्ट के तहत ले आए हैं और भारतीय रिज़र्व बैंक ने भी इनकी कई समस्याएं दूर की हैं। उन्होंने कहा कि बाकी बची समस्याएं तभी दूर हो सकती हैं, जब पारदर्शिता के साथ बैंक का संचालन और कर्मचारियों की भर्ती करें।</p>
<p>केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि सभी राज्यों के सहकारिता मंत्री अपने-अपने राज्यों में कृषि मंत्रियों के साथ समन्वय स्थापित कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें। उन्होंने गुजरात का उदाहरण देते हुए &lsquo;सहकारिताओं के बीच सहयोग&rsquo; (Cooperation Amongst Cooperatives) पर जोर दिया। बैठक में सहकारिता मंत्रालय द्वारा की गई पहलों के व्यापक मूल्यांकन पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिससे राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं, नीति सुझावों और कार्यान्वयन रणनीतियों के सार्थक आदान-प्रदान हो सके।</p>
<p>सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के कार्यान्वयन पर भी बैठक के दौरान विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में भाग ले रहे प्रतिनिधियों ने सहकार से समृद्धि के दृष्टिकोण के तहत "अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025" में अपनी योजनाओं और योगदान को भी सामने रखा।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ स्वतंत्रता शताब्दी तक आदर्श कोऑपरेटिव स्टेट बनाने पर जोर, सहकारिता मंत्रियों के साथ हुआ मंथन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दो लाख नए पैक्स और अनाज भंडारण योजना पर चर्चा के लिए सहकारिता मंत्रालय की ‘मंथन बैठक’]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/states-to-discuss-2-lakh-new-pacs-grain-storage-scheme-at-manthan-baithak.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 29 Jun 2025 22:26:47 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/states-to-discuss-2-lakh-new-pacs-grain-storage-scheme-at-manthan-baithak.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय 30 जून 2025 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों की एक &lsquo;मंथन बैठक&rsquo; आयोजित करने जा रहा है। बैठक में 2 लाख नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना जैसे प्रमुख विषयों पर चर्चा की जाएगी, जो ग्रामीण सेवा वितरण को अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए अहम है।&nbsp;</p>
<p>बैठक में सहकारी क्षेत्र में &lsquo;विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना&rsquo; पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा, जिसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना और किसानों को सशक्त बनाना है। इसके साथ ही, &lsquo;सहकारिता में सहकार&rsquo; अभियान और &lsquo;अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025&rsquo; के अंतर्गत राज्यों की प्रगति और सहभागिता पर भी चर्चा होगी।</p>
<p>केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि बैठक का मुख्य उद्देश्य सहकारिता मंत्रालय की अब तक की पहलों और योजनाओं की समग्र समीक्षा करना, अब तक हुई प्रगति का मूल्यांकन करना और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से अनुभवों, श्रेष्ठ प्रक्रियाओं और रचनात्मक सुझावों का आदान-प्रदान सुनिश्चित करना है। यह बैठक &lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; के दृष्टिकोण को सामूहिक प्रयासों के माध्यम से आगे बढ़ाने के लिए साझा समझ और समन्वित रणनीति विकसित करने की दिशा में कार्य करेगी।</p>
<p>तीन नई बहु-राज्यीय राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं, राष्ट्रीय सहकारी निर्यात &nbsp;लिमिटेड (NCEL), राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) में राज्यों की भागीदारी की समीक्षा की जाएगी। साथ ही श्वेत क्रांति 2.0 और भारत के डेयरी क्षेत्र में सर्कुलरिटी एवं सस्टेनेबिलिटी की अवधारणाओं को अपनाने तथा आत्मनिर्भरता अभियान के अंतर्गत दलहन व मक्का उत्पादक किसानों के लिए समर्थन मूल्य पर चर्चा होगी।&nbsp;</p>
<p>PACS कंप्यूटरीकरण और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (RCS) के कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण जैसे डिजिटल परिवर्तन संबंधी पहलों की भी समीक्षा की जाएगी, विशेष रूप से राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस और इसकी नीति-निर्माण में उपयोगिता पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।</p>
<p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली इस बैठक में सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों एवं सहकारिता विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव भाग लेंगे। यह मंच सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए प्रगति की समीक्षा, विचारों के आदान-प्रदान और भविष्य की कार्ययोजना तैयार करने का अवसर प्रदान करेगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दो लाख नए पैक्स और अनाज भंडारण योजना पर चर्चा के लिए सहकारिता मंत्रालय की ‘मंथन बैठक’ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकार टैक्सी को प्रमोट करेंगे 8 दिग्गज सहकारी संगठन, उबर&amp;#45;ओला को टक्कर देने की तैयारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/8-major-cooperatives-will-promote-sahakar-taxi-preparing-to-compete-with-uber-ola.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 20 Jun 2025 08:43:52 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/8-major-cooperatives-will-promote-sahakar-taxi-preparing-to-compete-with-uber-ola.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में पहली बार ऐप-आधारित सहकारी टैक्सी सेवा<span> शुरू होने जा रही है जो उबर और ओला को टक्कर दे सकती है। <strong>&lsquo;सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव&rsquo; </strong>को&nbsp;</span>300 करोड़ रुपये की अधिकृत शेयर पूंजी के साथ बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम के तहत पंजीकृत कराया गया है।</p>
<p>सहकारिता मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, <span>सहकार टैक्सी को केवल लाभ कमाने के उद्देश्य से नहीं चलाया जा रहा है। इसमें यात्रियों से उचित किराया लिया जाएगा और लाभ का बड़ा हिस्सा ड्राइवरों में बांटा जाएगा। साथ ही ड्राइवरों की सामाजिक सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाएगा।&nbsp;</span></p>
<p><strong>दिल्ली</strong><strong>, </strong><strong>गुजरात और महाराष्ट्र से शुरुआत</strong></p>
<p>सहकार टैक्सी का संचालन इस वर्ष दिसंबर से दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र में शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद यह सेवा चरणबद्ध तरीके से देशभर में शुरू की जाएगी।</p>
<p>गौरतलब है कि कुछ महीने पहले केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने टैक्सी संचालन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं के विस्तार की बात कही थी। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए सहकार टैक्सी सेवा शुरू की जा रही है। ऑनलाइन ऐप आधारित इस प्लेटफार्म के जरिए दोपहिया, रिक्शा, टैक्सी और अन्य चार पहिया वाहनों का संचालन किया जाएगा।</p>
<p><strong>आठ प्रमुख सहकारी संगठन बने प्रमोटर </strong></p>
<p>सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव को देश के आठ प्रमुख सहकारी संगठन मिलकर आगे बढ़ाएंगे। इनमें नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NCDC), अमूल (Anand Milk Union), नेफेड (NAFED), नाबार्ड (NABARD), इफको (IFFCO), कृभको (KRIBHCO), राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), और नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (NCEL) शामिल हैं। प्रत्येक प्रमोटर ने प्रारंभिक चरण में ₹10 करोड़ की प्रतिबद्धता जताई है। दिग्गज सहकारी संगठनों का सपोर्ट मिलने से सहकार टैक्सी को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>सहकार टैक्सी के संचालन की निगरानी के लिए एक अंतरिम बोर्ड गठित किया गया है। NCDC के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर रोहित गुप्ता बोर्ड के अध्यक्ष हैं। अन्य प्रमुख सदस्य हैं वी. श्रीधर (NDDB), तरुण हांडा (NAFED), नवीन कुमार (NABARD), संतोष शुक्ला (IFFCO), और एल. पी. गॉडविन (KRIBHCO)। टैक्सी सेवा का मोबाइल एप विकसित करने हेतु तकनीकी भागीदारों से बातचीत शुरू हो चुकी है।</p>
<p><strong>सहकार की भावना से संचालन &nbsp;</strong></p>
<p>उबर और ओला जैसे निजी प्लेटफार्म से इतर सहकार टैक्सी को सहकारिता की भावना से चलाया जाएगा। इसमें यात्रियों से उचित किराया लिया जाएगा और सर्ज चार्ज जैसी वसूली नहीं होगी। लाभ को ड्राइवरों के बीच बांटा जाएगा और उन्हें सामाजिक सुरक्षा भी प्रदान की जाएगी।</p>
<p><strong>कैसे जुड़ेंगे ड्राइवर </strong></p>
<p>शुरुआती चरण में लगभग 400-500 ड्राइवरों को इस सेवा से जोड़ने की तैयारी है। छह महीने की सेवा के बाद प्रत्येक ड्राइवर 100 रुपये के पांच शेयर खरीदकर सहकारी समिति का सदस्य बन सकेगा।</p>
<p>यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पहल उबर-ओला जैसे स्थापित ब्रांड्स को किस प्रकार चुनौती देती है और यात्रियों व ड्राइवरों के हित में कैसे काम करती है। राष्ट्रीय स्तर पर तीन सहकारी संस्थाओं के गठन के बाद यह सहकारिता मंत्रालय की एक नई पहल है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_6854d15ae4f7f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकार टैक्सी को प्रमोट करेंगे 8 दिग्गज सहकारी संगठन, उबर-ओला को टक्कर देने की तैयारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_6854d15ae4f7f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको को ₹3,811 करोड़ का कर&amp;#45;पूर्व मुनाफा, नैनो उर्वरकों की बिक्री में 47% की वृद्धि]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-records-pre-tax-profit-of-rs-3811-crore-nano-fertilizer-sales-rise-47-pc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 30 May 2025 00:06:29 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-records-pre-tax-profit-of-rs-3811-crore-nano-fertilizer-sales-rise-47-pc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="90" data-end="442">विश्व की प्रमुख फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव, <strong>भारतीय किसान उर्वरक सहकारी संस्था (इफको)</strong>, ने वित्त वर्ष 2024&ndash;25 में 3,811 करोड़ रुपये का कर-पूर्व मुनाफा (प्री-टैक्स प्रॉफिट) दर्ज किया है। इस दौरान इफको का टर्नओवर 4.5% बढ़कर 41,244 करोड़ रुपये तक पहुंचा और नैनो उर्वरकों की बिक्री में 47% की वृद्धि हुई।&nbsp;</p>
<p data-start="459" data-end="672">गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में इफको की 54वीं वार्षिक आम बैठक आयोजित हुई, जिसमें देशभर से सहकारी प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में बताया गया कि पिछले वित्त वर्ष में शुद्ध लाभ 16% बढ़कर 2,823 करोड़ रुपये हो गया।</p>
<p data-start="674" data-end="939">मीडिया से बात करते हुए इफको के चेयरमैन <strong>दिलीप संघानी</strong> ने बताया कि संस्था ने लगातार तीसरे साल 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का लाभ अर्जित किया है और पिछले 23 वर्षों से शेयर पूंजी पर 20% लाभांश प्रदान कर रही है। यह इफको की समावेशी और सतत विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p>
<p data-start="941" data-end="1089">दिलीप संघानी ने कहा, "दुनिया में पहली बार इफको ने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और नैनो जिंक को पेश किया है, जो कृषि क्रांति को नई दिशा देने वाला कदम है।"</p>
<p data-start="1091" data-end="1554">इफको के प्रबंध निदेशक <strong>डॉ. यू.एस. अवस्थी</strong> ने नैनो उर्वरकों की बिक्री में 47 फीसदी की वृद्धि को वित्त वर्ष 2024-25 की प्रमुख उपलब्धि बताते हुए कहा कि&nbsp;जल्द ही दानेदार रूप में <strong>नैनो एनपीके</strong> उर्वरक भी लांच किया जाएगा। नैनो एनपीके उर्वरक मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक और कॉपर से समृद्ध होगा, जिससे पोषक तत्वों की दक्षता और फसल उत्पादकता में सुधार होगा। इफको ने 100 मिलीलीटर की बोतल में नैनो जिंक और नैनो कॉपर भी तरल रूप बाजार में उतारा है, जिसकी कीमत 200 रुपये है। साथ ही, इफको ने कलोल इकाई में एक अत्याधुनिक बीज नवाचार केंद्र स्थापित करने की पहल भी की है।&nbsp;</p>
<p data-start="1556" data-end="1875"><strong>डॉ. अवस्थी</strong> ने बताया कि संस्था किसानों को नैनो उर्वरकों के लाभों के प्रति जागरूक कर रही है। उन्होंने कहा, &ldquo;नैनो टेक्नोलॉजी, ड्रोन टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से इफको देश की कृषि और खाद्य व्यवस्था में बदलाव ला रही है। हमारे नैनो उर्वरकों को दुनिया भर में मान्यता मिल रही है और ब्राजील, केन्या और अमेरिका जैसे देश इनमें दिलचस्पी ले रहे हैं।&rdquo; इफको ने 40 से अधिक देशों में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_6838a907ea333.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="1877" data-end="1932"><strong data-start="1877" data-end="1932">नैनो यूरिया प्लस (लिक्विड) की बिक्री में 31% वृद्धि</strong></p>
<p data-start="1934" data-end="2218">वित्त वर्ष 2024&ndash;25 में इफको ने नैनो उर्वरक की कुल <strong>365.09</strong> लाख बोतलें ( 500 मिली) बेची, जबकि पिछले वर्ष 248.95 लाख बोतलें बेची थीं। इसमें से 268 लाख बोतलें नैनो यूरिया प्लस (लिक्विड) और 97 लाख बोतलें नैनो डीएपी (लिक्विड) की बेची गईं। इस तरह नैनो यूरिया प्लस की बिक्री में 31% और नैनो डीएपी की बिक्री में 118% की वृद्धि हुई। इफको का दावा है कि नैनो उर्वरकों की यह&nbsp;बिक्री पारंपरिक यूरिया के 12 लाख टन और पारंपरिक डीएपी के 4.85 लाख टन के बराबर है।&nbsp;</p>
<p data-start="2367" data-end="2415"><strong data-start="2367" data-end="2415">नैनो उर्वरकों में 2,500 करोड़ रुपये का निवेश</strong></p>
<p data-start="2417" data-end="2701">डॉ. अवस्थी ने बताया कि इफको ने फसल उत्पादकता बढ़ाने और मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए नैनो उर्वरकों में लगभग 2,500 करोड़ रुपये का निवेश किया है। जुलाई 2024 में देशभर में &lsquo;<strong>मॉडल नैनो गांव/क्लस्टर परियोजना</strong>&rsquo; की शुरुआत की गई, जिसमें 203 गांव क्लस्टरों (प्रत्येक 2,000 एकड़) का चयन किया गया। अब तक 90,000 से अधिक किसान नैनो विलेज पोर्टल पर पंजीकृत हैं, जिन्होंने नैनो उर्वरकों का उपयोग किया। उनकी 5 लाख एकड़ भूमि में से 72,000 एकड़ में कृषि ड्रोन से छिड़काव किया गया। इस पहल से रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में 28.73% की कमी आई और फसल उत्पादन में 5.8% की वृद्धि हुई।</p>
<p data-start="2972" data-end="3004"><strong data-start="2972" data-end="3004">विशेष उर्वरकों में 2% वृद्धि</strong></p>
<p data-start="3006" data-end="3231">इफको के जल में घुलनशील और विशेष उर्वरकों की बिक्री 1.30 लाख टन रही, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2% अधिक है। सागरिका लिक्विड की बिक्री 11.55 लाख लीटर रही, जो 33% अधिक है। जैव उर्वरकों की बिक्री 35% बढ़कर 8.61 लाख लीटर हो गई।</p>
<p data-start="3233" data-end="3425" data-is-last-node="" data-is-only-node="">35,600 से अधिक सहकारी संस्थाओं और देश-विदेश में 10 उत्पादन इकाइयों के नेटवर्क के साथ इफको भारत की अग्रणी उर्वरक निर्माता संस्था है, जो देशभर में 5 करोड़ से अधिक किसानों को सेवा प्रदान करती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_6838a8e4e8e07.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको को ₹3,811 करोड़ का कर-पूर्व मुनाफा, नैनो उर्वरकों की बिक्री में 47% की वृद्धि ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_6838a8e4e8e07.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार डेयरी क्षेत्र के लिए तीन नई बहु&amp;#45;राज्य सहकारी समितियों की स्थापना करेगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/government-to-set-up-three-new-multi-state-cooperative-societies-for-dairy-sector.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 21 May 2025 15:47:32 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/government-to-set-up-three-new-multi-state-cooperative-societies-for-dairy-sector.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="217" data-end="496">केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नई दिल्ली में सहकारी डेयरी क्षेत्र में "सस्टेनेबिलिटी और सर्क्युलैरिटी" विषयक एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में डेयरी क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए तीन नई बहुराज्यीय सहकारी समितियों की स्थापना का निर्णय लिया गया।&nbsp;</p>
<p data-start="498" data-end="734">प्रस्तावित समितियों में पहली समिति पशु आहार उत्पादन, कृत्रिम गर्भाधान और रोग नियंत्रण पर कार्य करेगी। दूसरी समिति गोबर प्रबंधन के लिए प्रभावी मॉडल विकसित करेगी, जबकि तीसरी समिति मृत मवेशियों के अवशेषों के सर्क्युलर उपयोग को बढ़ावा देगी।</p>
<p data-start="736" data-end="1096">बैठक को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत सहकारी नेटवर्क का निर्माण आवश्यक है। उन्होंने वैज्ञानिक मॉडलों के माध्यम से किसानों को कार्बन क्रेडिट का प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाने पर बल दिया। साथ ही, दुग्ध संघों और सहकारी समितियों को सशक्त बनाने और डेयरी संयंत्रों में खाद्य प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की।</p>
<p data-start="1098" data-end="1409">अमित शाह ने कहा, "हमें 'सस्टेनेबिलिटी से सर्क्युलैरिटी' तक का बहुआयामी सफर तय करना है। जो कार्य आज निजी क्षेत्र कर रहे हैं, उन्हें अब किसान अपनी सहकारी संस्थाओं के माध्यम से करेंगे।" इसमें तकनीकी सेवाएँ, पशु आहार, कृत्रिम गर्भाधान, रोग नियंत्रण, गोबर प्रबंधन और कृषि-डेयरी से जुड़ी संपूर्ण प्रक्रिया शामिल होगी।</p>
<p data-start="1411" data-end="1734">उन्होंने अमूल जैसे सफल सहकारी मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि &ldquo;सहकार से समृद्धि&rdquo; का विजन अब साकार हो रहा है और &ldquo;सहकारिता में सहकार&rdquo; इसकी आधारशिला बन चुका है। सहकारिता मंत्रालय, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के समन्वय से नीति निर्माण, वित्त पोषण और ग्राम स्तर तक सहकारी ढांचे के विस्तार का कार्य तेज गति से हो रहा है।&nbsp;</p>
<p data-start="1852" data-end="2134">अमित शाह ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और नाबार्ड जैसी संस्थाओं के योगदान की भी प्रशंसा की। उन्होंने विश्वास जताया कि इनके परस्पर सहयोग से सहकारिता आंदोलन को नई गति मिलेगी और किसान-केन्द्रित योजनाएं पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू की जा सकेंगी। एनडीडीबी द्वारा विकसित बायोगैस और गोबर प्रबंधन कार्यक्रमों की भी सराहना की गई, जो अब देशभर में विस्तार पा रहे हैं।</p>
<p data-start="2136" data-end="2383">बैठक में केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल सिंह गुर्जर, मुरलीधर मोहोल, सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी, पशुपालन व डेयरी विभाग की सचिव अलका उपाध्याय, एनडीडीबी अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह और नाबार्ड अध्यक्ष शाजी के.वी. भी उपस्थित थे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार डेयरी क्षेत्र के लिए तीन नई बहु-राज्य सहकारी समितियों की स्थापना करेगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों के ऑर्गेनिक उत्पादों को बाजार दिलाने में जुटी एनसीओएल, किसानों के लिए बड़ा अवसर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncol-is-creating-big-market-for-organic-farmers-and-providing-healthy-food-to-consumers-at-reasonable-price.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 20 May 2025 12:17:55 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncol-is-creating-big-market-for-organic-farmers-and-providing-healthy-food-to-consumers-at-reasonable-price.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड</strong> (एनसीओएल) किसानों को ऑर्गेनिक खेती के लिए प्रोत्साहित करने और उनके ऑर्गेनिक उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के दोहरे उद्देश्य के साथ काम कर रही है। वर्ष 2023 में स्थापित तीन राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं में से एक एनसीओएल के सदस्यों में अब तक 7,000 सहकारी समितियां शामिल हो चुकी हैं, जिनसे एक करोड़ से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। एनसीओएल किसानों को बेहतर प्रीमियम देकर उनके आर्गेनिक उत्पाद खरीद रही है। इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर दाम और उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर आर्गेनिक उत्पाद उपलब्ध कराकर इन उत्पादों का एक बड़ा बाजार खड़ा करना भी है।</p>
<p>एनसीओएल की रणनीति है कि उपभोक्ताओं को पारंपरिक खाद्य उत्पादों की तुलना में केवल 10-15 फीसदी अतिरिक्त मूल्य पर प्रमाणिक ऑर्गेनिक उत्पाद उपलब्ध कराए जाएं। इससे एक बड़ा बाजार तैयार किया जा सकेगा, जो ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसानों के लिए नए अवसर खोलेगा। एनसीओएल के प्रबंध निदेशक <strong>विपुल मित्तल</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> से बातचीत में यह जानकारी दी।</p>
<p>विपुल मित्तल ने बताया कि ऑर्गेनिक उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने एक पहल की है। एनसीओएल के हर उत्पाद पर एक <strong>क्यूआर कोड</strong> मौजूद है, जिसे स्कैन कर उपभोक्ता उस बैच की टेस्ट रिपोर्ट देख सकते हैं। क्यूआर कोड स्कैन के बाद बैच नंबर व अन्य विवरण दर्ज करने पर पेस्टिसाइड रेसिड्यू की पूरी रिपोर्ट मिल जाती है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के बीच एनसीओएल के उत्पादों की गुणवत्ता और प्रामाणिकता को लेकर विश्वास कायम करना है।<br />फिलहाल एनसीओएल ने <strong>'भारत ऑर्गेनिक</strong>' ब्रांड के तहत चार श्रेणियों में उत्पाद बाजार में उतारे हैं&mdash;दालों की 15 किस्में, आटा, चावल की तीन किस्में, मसालों में जीरा, धनिया, हल्दी और अजवायन समेत छह मसाले तथा मीठे में गुड़, शक्कर, ब्राउन शुगर और खांडसारी। एनसीओएल ने नोएडा में एक पैकेजिंग फैसिलिटी शुरू की है। साथ ही पंजाब व हरियाणा में चावल और गेहूं के लिए प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं।</p>
<p>एनसीओएल के प्रमोटर <strong>एनडीडीबी</strong>,<strong> एनसीसीएफ</strong>, <strong>एनसीडीसी</strong> और <strong>जीसीएमएमएफ (अमूल</strong>) हैं, जिनमें एनडीडीबी मुख्य प्रमोटर है। एनसीओएल को मदर डेयरी के विपणन नेटवर्क का लाभ मिल रहा है। साथ ही इसके उत्पाद जनरल रिटेल चेन, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और क्विक कॉमर्स सेवाओं के माध्यम से भी उपभोक्ताओं को उपलब्ध हैं।</p>
<p>विपुल मित्तल ने बताया कि उत्पादों की खरीद केवल उन्हीं किसानों से की जा रही है जिनके पास अधिकृत सर्टिफिकेशन है। एनडीडीबी की लैब में केमिकल रेसिड्यू की जांच की जाती है। मानकों पर खरे उतरने वाले उत्पाद ही खरीदे जाते हैं। एनसीओएल ने अब तक <strong>15 राज्यों</strong> के साथ ऑर्गेनिक खाद्य उत्पादों की नोडल एजेंसी के रूप में एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।</p>
<p>विपुल कहते हैं कि देश में ऑर्गेनिक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उनका किफायती कीमत पर उपलब्ध होना जरुरी है। इसके लिए किसानों को बाजार मुहैया कराना होगा क्योंकि तभी ऑर्गेनिक उपज का उत्पादन बढ़ सकता है। मांग और उत्पादन बढ़ने पर ही उपभोक्तों को ऑर्गेनिक उत्पाद काफायती दाम पर उपलब्ध कराना संभव है। ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा मिलेगा तो मिट्टी की सेहत भी सुधरेगी। इसी उद्देश्य के तहत एनसीओएल किसानों को ऑर्गेनिक खेती के लिए प्रोत्साहित करने और उनके उत्पादों को बाजार दिलाने की दिशा में कार्यरत है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों के ऑर्गेनिक उत्पादों को बाजार दिलाने में जुटी एनसीओएल, किसानों के लिए बड़ा अवसर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको ने एफपीओ को सशक्त बनाने के लिए एफडीआरवीसी के साथ मिलाया हाथ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-joins-hands-with-fdrvc-to-empower-fpos.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 15 May 2025 21:22:05 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-joins-hands-with-fdrvc-to-empower-fpos.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको)</strong> ने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को सशक्त बनाने के उद्देश्य से <strong>ग्रामीण मूल्य श्रृंखला विकास न्यास (एफडीआरवीसी)</strong> के साथ एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU) <span>पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी एफपीओ को नैनो उर्वरकों और टिकाऊ कृषि आदानों तक पहुंच दिलाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।</span></p>
<p><strong>एफडीआरवीसी,</strong> <span>ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक पहल है</span>, <span>जिसका उद्देश्य उत्पादक-स्वामित्व वाले सामूहिक उद्यमों को बढ़ावा देना है। इस समझौते से देश भर के </span>800 <span>से अधिक एफपीओ और लगभग </span>10 <span>लाख किसानों को प्रत्यक्ष लाभ होगा।</span></p>
<p>समझौते पर इफको के निदेशक (विपणन) <strong>योगेन्द्र कुमार</strong> और एफडीआरवीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी <strong>बिपिन बिहारी</strong> ने हस्ताक्षर किए। इसके तहत इफको, <span>एफडीआरवीसी से जुड़े एफपीओ को नैनो उर्वरक</span>, <span>विशेष उर्वरक</span>, <span>जैविक इनपुट</span>, <span>जैव-उर्वरक और जैव-अपघटक जैसे टिकाऊ और उन्नत कृषि इनपुट्स की आपूर्ति करेगा।&nbsp;</span>इस पहल का उद्देश्य कृषि उत्पादकता और लाभप्रदता को बढ़ाना, <span>साथ ही सामूहिक खेती के माध्यम से टिकाऊ और जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देना है। </span></p>
<p><span>इफको के निदेशक (विपणन) <strong>योगेन्द्र कुमार</strong> ने कहा कि इफको किसानों की समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है और यह समझौता इफको के उन्नत उत्पादों को देश के दूरस्थ इलाकों तक पहुंचाने में मदद करेगा</span>, <span>जिससे छोटे किसानों को विश्वस्तरीय कृषि आदान किफायती मूल्य पर उपलब्ध हो सकेंगे।&nbsp;</span></p>
<p>एफडीआरवीसी के माध्यम से एफपीओ को न केवल गुणवत्तापूर्ण आदान उपलब्ध होंगे, <span>बल्कि संस्थागत क्षमताओं का निर्माण कर उन्हें आत्मनिर्भर ग्रामीण उद्यमों के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही</span>, <span>इस साझेदारी के तहत किसान शिक्षा</span>, <span>नवाचार और स्थानीय नेतृत्व को भी प्रोत्साहन मिलेगा।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_682606f197558.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको ने एफपीओ को सशक्त बनाने के लिए एफडीआरवीसी के साथ मिलाया हाथ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको की आंवला और फूलपुर यूनिट में नैनो डीएपी का उत्पादन शुरू, रोजाना दो&amp;#45;दो लाख बोतल की उत्पादन क्षमता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/production-of-nano-dap-started-in-iffcos-amla-and-phulpur-units-daily-capacity-now-9.5-lakh-bottles.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 13 May 2025 17:08:52 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/production-of-nano-dap-started-in-iffcos-amla-and-phulpur-units-daily-capacity-now-9.5-lakh-bottles.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="80" data-end="414" class="">इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) ने उत्तर प्रदेश के दो नए नैनो खाद संयंत्रों &ndash; आंवला (बरेली) और फूलपुर (प्रयागराज) &ndash; में <strong data-start="220" data-end="247">इफको नैनो डीएपी लिक्विड</strong> का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है। प्रत्येक प्लांट की दैनिक उत्पादन क्षमता 2 लाख बोतल है, जिससे किसानों के लिए इस अत्याधुनिक खाद की उपलब्धता में बड़ा इजाफा होगा।&nbsp;</p>
<p data-start="416" data-end="747" class="">इन दो संयंत्रों के जुड़ने के साथ ही, इफको अब देश भर में <strong>पांच</strong> नैनो खाद संयंत्रों का संचालन कर रहा है। इसके साथ ही नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की कुल दैनिक उत्पादन क्षमता बढ़कर <strong data-start="588" data-end="613">9.5 लाख बोतल प्रतिदिन</strong> हो गई है। यह पहल देश भर के किसानों को नैनो खाद उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p data-start="749" data-end="1130" class="">इस उपलब्धि पर इफको के प्रबंध निदेशक और सीईओ <strong>डॉ. यू.एस. अवस्थी</strong> ने कहा, <em data-start="819" data-end="1068">&ldquo;किसानों से नैनो डीएपी लिक्विड को मिली शानदार प्रतिक्रिया के बाद इफको की आंवला और फूलपुर इकाइयों में इसका वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो गया है। दोनों इकाइयों की उत्पादन क्षमता 2-2 लाख बोतल प्रतिदिन है, जो देश में नैनो डीएपी की आपूर्ति को बढ़ावा देगा।&rdquo;</em> उन्होंने दोनों इकाइयों की टीमों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।</p>
<p data-start="1132" data-end="1479" class=""><strong>नैनो डीएपी लिक्विड</strong> को पारंपरिक डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) का एक अच्छा विकल्प माना जा रहा है। 100 नैनोमीटर से छोटे कणों से निर्मित यह खाद पौधों को पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण सुनिश्चित करता है, मिट्टी की सेहत सुधारता है, और फसलों की वृद्धि व उपज को बढ़ावा देता है।&nbsp;</p>
<p data-start="1481" data-end="1678" class="">गौरतलब है कि इफको पहले ही <strong data-start="1507" data-end="1522">नैनो यूरिया</strong> के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा चुका है। अब नैनो डीएपी के उत्पादन का विस्तार भारत को सतत और आत्मनिर्भर कृषि की ओर ले जाने में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।</p>
<p data-start="1481" data-end="1678" class=""></p>
<p data-start="1481" data-end="1678" class=""></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_68232d6c7be67.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको की आंवला और फूलपुर यूनिट में नैनो डीएपी का उत्पादन शुरू, रोजाना दो-दो लाख बोतल की उत्पादन क्षमता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय से सहकारिता क्षेत्र को बड़ी उम्मीदें, बताया ऐतिहासिक कदम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperative-sector-pins-high-hopes-on-tribhuvan-cooperative-university-hailed-as-a-historic-step.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 27 Mar 2025 19:02:04 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperative-sector-pins-high-hopes-on-tribhuvan-cooperative-university-hailed-as-a-historic-step.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गुजरात के आनंद में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए लोकसभा ने बुधवार को एक विधेयक पारित किया। यह भारत का पहला सहकारी विश्वविद्यालय होगा जिसे ग्रामीण प्रबंधन संस्थान आनंद (गुजरात) में सहकारिता आंदोलन के बड़े नेता त्रिभुवन दास पटेल के नाम पर स्थापित किया जाएगा। सहकारिता क्षेत्र की प्रमुख संस्थाओं और लोगों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है।</p>
<p>त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री <strong>अमित शाह</strong> ने कहा कि आजादी के 75 वर्षों बाद देश को पहला सहकारिता विश्वविद्यालय मिल रहा है। इसका नाम त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय रखने का निर्णय लिया गया है।&nbsp;<strong>त्रिभुवन दास पटेल</strong>, सरदार पटेल जैसे महान नेता के सानिध्य में रहकर भारत में सहकारिता की नींव डालने वाले व्यक्तियों में से एक थे। आज जिस गुजरात राज्य सहकारी दुग्ध विपणन संघ (GCMMF) को हम सब अमूल के नाम से जानते हैं, वह त्रिभुवन जी के विचार की ही देन है।</p>
<p>देश में कोऑपरेटिव क्षेत्र के विकास और विस्तार को देखते हुए प्रशिक्षित मानव संसाधन की जरूरत है। त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय इस जरूरत को पूरा करने का काम करेगा। अमित शाह ने बताया कि हमने यूनिवर्सिटी बनने से पहले ही कोऑपरेटिव क्षेत्र की जरूरत को ध्यान में रख कर कोर्स डिजाइन का काम शुरू कर दिया है। यूनिवर्सिटी में डिग्री, डिप्लोमा कोर्स होंगे और पीएचडी की डिग्री भी दी जाएगी। साथ ही सहकारिता के क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए अल्पावधि का सर्टिफिकेट कोर्स भी होगा। यह विश्वविद्यालय सहकारिता क्षेत्र में नवाचार,<span> अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा।</span>&nbsp;</p>
<p>सहकारी क्षेत्र की प्रमुख संस्था इफको के एमडी व सीईओ <strong>डॉ. यूएस अवस्थी</strong> ने त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना को ऐतिहासिक कदम करार देते हुए कहा कि इससे सहकारी क्षेत्र में एक नई क्रांति आएगी। भारतीय कृषि, किसानों और ग्रामीण विकास के लिये यह बहुत बड़ा कदम है जो हमारे गांवों को और मजबूती प्रदान करेगा।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (<span>एशिया और प्रशांत</span>)<span> के अध्यक्ष<strong> चंद्रपाल सिंह</strong> ने त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय को भारत के सहकारी क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह अनुसंधान और प्रशिक्षण के माध्यम से सहकारी समितियों को मजबूत करते हुए गेम-चेंजर साबित होगा। साथ ही समावेशिता व सामूहिक विकास के मूल मूल्यों को बनाए रखते हुए उन्हें कॉरपोरेट्स के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाएगा।</span>&nbsp;</p>
<p>राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ (<em>NFCSF</em>) के अध्यक्ष <strong>हर्षवर्धन पाटिल</strong> ने कहा कि त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना भारत के सहकारी आंदोलन के लिए एक नए युग का प्रतीक है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में,&nbsp;सहकारिता मंत्रालय ने एक परिवर्तनकारी कदम उठाया है जो सहकारी समितियों के भविष्य को आकार देगा। यह विश्वविद्यालय ज्ञान केंद्र के रूप में काम करेगा और सहकारी क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता से पेशेवरों को लैस करेगा।</p>
<p>जीसीएमएमएफ (अमूल) के प्रबंध निदेशक <strong>जयेन मेहता</strong> ने कहा कि&nbsp;श्वेत क्रांति के पीछे अहम भूमिका निभाने वाले त्रिभुवन दास पटेल को अब उनके नाम पर एक विश्वविद्यालय का सम्मान दिया जा रहा है। यह संस्थान सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने और पेशेवर प्रबंधन को बढ़ाने में सहायक होगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67e552d63075b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय से सहकारिता क्षेत्र को बड़ी उम्मीदें, बताया ऐतिहासिक कदम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67e552d63075b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारी चीनी मिलों को राष्ट्रीय स्तर के दक्षता पुरस्कारों की घोषणा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/national-level-efficiency-awards-in-sugar-industry-announced.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 24 Mar 2025 14:20:13 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/national-level-efficiency-awards-in-sugar-industry-announced.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div>
<div dir="ltr" class="css-146c3p1 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-37j5jr r-a023e6 r-16dba41 r-1adg3ll r-1b5gpbm r-a8ghvy"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-a8ghvy">राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ (एनएफसीएसएफ), जो देश भर की सभी 260 सहकारी चीनी मिलों और नौ राज्य सहकारी चीनी महासंघों का शीर्ष संगठन है, ने वर्ष 2023-24 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली 25 सहकारी चीनी कारखानों के लिए पुरस्कारों का ऐलान किया है। इन पुरस्कारों की घोषणा एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल ने महासंघ के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे की उपस्थिति में की।</span></span></div>
<div dir="ltr" class="css-146c3p1 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-37j5jr r-a023e6 r-16dba41 r-1adg3ll r-1b5gpbm r-a8ghvy"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-a8ghvy"></span></span></div>
<div dir="ltr" class="css-146c3p1 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-37j5jr r-a023e6 r-16dba41 r-1adg3ll r-1b5gpbm r-a8ghvy"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-a8ghvy">प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए सहकारिता मंत्रालय के संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति द्वारा सहकारी चीनी मिलों का मूल्यांकन किया गया था। </span></span><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-a8ghvy">समिति में एनसीडीसी, नई दिल्ली के निदेशक; डीएफपीडी, नई दिल्ली के अवर सचिव; राष्ट्रीय चीनी संस्थान, कानपुर के निदेशक; वीएसआई, पुणे के महानिदेशक; और एनएफसीएसएफ के प्रबंध निदेशक शामिल थे। एक कठिन प्रक्रिया के बाद, विशेषज्ञ समिति ने गन्ना विकास, तकनीकी दक्षता, वित्तीय प्रबंधन, सर्वाधिक गन्ना पेराई, और सर्वाधिक चीनी रिकवरी में मिल-वार प्रदर्शन का मूल्यांकन किया।</span></span></div>
<div dir="ltr" class="css-146c3p1 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-37j5jr r-a023e6 r-16dba41 r-1adg3ll r-1b5gpbm r-a8ghvy"><strong><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-a8ghvy"></span></span></strong></div>
<div dir="ltr" class="css-146c3p1 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-37j5jr r-a023e6 r-16dba41 r-1adg3ll r-1b5gpbm r-a8ghvy"><strong><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-a8ghvy">रिकॉर्ड भागीदारी</span></span></strong></div>
<div dir="ltr" class="css-146c3p1 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-37j5jr r-a023e6 r-16dba41 r-1adg3ll r-1b5gpbm r-a8ghvy"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-a8ghvy">इस वर्ष (2023-24) के राष्ट्रीय दक्षता पुरस्कारों में देश भर की रिकॉर्ड 103 सहकारी चीनी मिलों ने भागीदारी की। इनमें से 41 महाराष्ट्र से, 12-12 उत्तर प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु से, 10 हरियाणा से, 9 पंजाब से, 5 कर्नाटक से, और एक-एक मध्य प्रदेश और उत्तराखंड से थीं।&nbsp;</span></span></div>
<div dir="ltr" class="css-146c3p1 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-37j5jr r-a023e6 r-16dba41 r-1adg3ll r-1b5gpbm r-a8ghvy"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-a8ghvy"></span></span></div>
<div dir="ltr" class="css-146c3p1 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-37j5jr r-a023e6 r-16dba41 r-1adg3ll r-1b5gpbm r-a8ghvy"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-a8ghvy">समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए, देश के चीनी क्षेत्र को दो समूहों में विभाजित किया गया। पहला समूह, जिसमें महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक शामिल थे, जहां चीनी रिकवरी दर अधिक है, वहां से कुल 58 सहकारी चीनी कारखानों ने भाग लिया। दूसरा समूह, जिसमें शेष राज्य शामिल थे, से 45 सहकारी चीनी कारखानों ने भाग लिया।</span></span></div>
<div dir="ltr" class="css-146c3p1 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-37j5jr r-a023e6 r-16dba41 r-1adg3ll r-1b5gpbm r-a8ghvy"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-a8ghvy"></span></span></div>
<div dir="ltr" class="css-146c3p1 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-37j5jr r-a023e6 r-16dba41 r-1adg3ll r-1b5gpbm r-a8ghvy"><strong><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-a8ghvy">महाराष्ट्र का दबदबा&nbsp;</span></span></strong></div>
<div dir="ltr" class="css-146c3p1 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-37j5jr r-a023e6 r-16dba41 r-1adg3ll r-1b5gpbm r-a8ghvy">कुल 25 पुरस्कारों में से महाराष्ट्र ने 10 पुरस्कार जीतकर शीर्ष स्थान प्राप्त किया, इसके बाद तमिलनाडु को 5 पुरस्कार मिले। उत्तर प्रदेश तीसरे स्थान पर रहा, जहां की मिलों को 4 पुरस्कार मिले, जबकि गुजरात चौथे स्थान पर रहा, जिसे 3 पुरस्कार मिले। पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश की मिलों को 1-1 पुरस्कार मिला।</div>
<div dir="ltr" class="css-146c3p1 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-37j5jr r-a023e6 r-16dba41 r-1adg3ll r-1b5gpbm r-a8ghvy"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-a8ghvy"></span></span></div>
<div dir="ltr" class="css-146c3p1 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-37j5jr r-a023e6 r-16dba41 r-1adg3ll r-1b5gpbm r-a8ghvy">पुरस्कार वितरण समारोह जल्द ही नई दिल्ली में एक भव्य आयोजन में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा।</div>
</div>
<p style="text-align: center;"><strong>राष्ट्रीय दक्षता पुरस्कार 2023-24</strong></p>
<p style="text-align: center;"><strong>(उच्च चीनी रिकवरी क्षेत्र)</strong></p>
<p><span><strong>गन्ना विकास</strong></span><span> प्रथम पुरस्कार: श्री विघ्नहर सहकारी साखर कारखाना लिमिटेड, जुन्नर, अंबेगांव, जिला पुणे, महाराष्ट्र द्वितीय पुरस्कार: क्रांतिअग्रणी डॉ. जी.डी. बापू लाड सहकारी साखर कारखाना लिमिटेड, कुंडल, पालस, जिला सांगली, महाराष्ट्र तृतीय पुरस्कार: श्री महुवा प्रदेश सहकारी खांड उद्योग मंडली लिमिटेड, महुवा, जिला सूरत, गुजरात</span></p>
<p><span><strong>तकनीकी दक्षता</strong></span><span> प्रथम पुरस्कार: यशवंतराव मोहिते कृष्णा सहकारी साखर कारखाना लिमिटेड, कराड, जिला सतारा, महाराष्ट्र द्वितीय पुरस्कार: कर्मयोगी सुधाकरपंत परिचारक पांडुरंग सहकारी साखर कारखाना, श्रीपुर, जिला सोलापुर, महाराष्ट्र तृतीय पुरस्कार: डॉ. पतंगराव कदम सोनहिरा सहकारी साखर कारखाना लिमिटेड, वांगी, जिला सांगली, महाराष्ट्र</span></p>
<p><span><strong>वित्तीय प्रबंधन</strong></span><span> प्रथम पुरस्कार: कर्मयोगी अंकुशराव टोपे समर्थ SSK लिमिटेड, अंकुशनगर, अंबड, जिला जालना, महाराष्ट्र द्वितीय पुरस्कार: श्री खेडूत सहकारी खांड उद्योग मंडली लिमिटेड, पांडवाई, जिला भरूच, गुजरात तृतीय पुरस्कार: श्री नर्मदा खांड उद्योग सहकारी मंडली लिमिटेड, धारिखेड़ा, पी.ओ. तिम्बी, तह. राजपीपला (नंदोद), जिला नर्मदा, गुजरात</span></p>
<p><span><strong>सर्वाधिक गन्ना पेराई</strong></span><span> प्रथम पुरस्कार: विट्ठलराव शिंदे सहकारी साखर कारखाना लिमिटेड, गंगामाईनगर-पिंपळनेर, तह. माढा, जिला सोलापुर, महाराष्ट्र</span></p>
<p><span><strong>सर्वाधिक चीनी रिकवरी</strong></span><span> प्रथम पुरस्कार: कुंभी-कसारी सहकारी साखर कारखाना लिमिटेड, कुडित्रे, जिला कोल्हापुर, महाराष्ट्र</span></p>
<p><span><strong>उच्च चीनी रिकवरी क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ सहकारी चीनी मिल</strong></span><span> प्रथम पुरस्कार: श्री सोमेश्वर SSK लिमिटेड, सोमेश्वरनगर, बारामती, जिला पुणे, महाराष्ट्र</span></p>
<p style="text-align: center;"><strong>(अन्य चीनी रिकवरी क्षेत्र)</strong></p>
<p><span><strong>गन्ना विकास</strong></span><span> प्रथम पुरस्कार: द बुधेवाल कोऑपरेटिव शुगर मिल्स लिमिटेड, जिला लुधियाना, पंजाब द्वितीय पुरस्कार: कल्लकुरिची-II कोऑपरेटिव शुगर मिल्स लिमिटेड, कचिरायपलायम, जिला विल्लुपुरम, तमिलनाडु तृतीय पुरस्कार: द किसान सहकारी चीनी मिल्स लिमिटेड, पुवायन, जिला शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश</span></p>
<p><span><strong>तकनीकी दक्षता</strong></span><span> प्रथम पुरस्कार: द करनाल कोऑपरेटिव शुगर मिल्स लिमिटेड, मेरठ रोड, जिला करनाल, हरियाणा द्वितीय पुरस्कार: द चेय्यार कोऑपरेटिव शुगर मिल्स लिमिटेड, अनक्कावूर, जिला तिरुवन्नामलाई, तमिलनाडु तृतीय पुरस्कार: द किसान सहकारी चीनी मिल्स लिमिटेड, सथिआओन, जिला आजमगढ़, उत्तर प्रदेश</span></p>
<p><span><strong>वित्तीय प्रबंधन</strong></span><span> प्रथम पुरस्कार: नवल सिंह सहकारी साखर कारखाना मर्यादित, नवलनगर (जिरी), तह. बुरहानपुर, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश द्वितीय पुरस्कार: चेंगलरायन कोऑपरेटिव शुगर मिल्स लिमिटेड, पेरियासेवलई, तिरुवेन्नैनल्लूर, जिला विल्लुपुरम, तमिलनाडु तृतीय पुरस्कार: द धर्मपुरी जिला कोऑपरेटिव शुगर मिल्स लिमिटेड, थिम्मनाहल्ली, जेरथलाव पोस्ट, पलाकोडे, जिला धर्मपुरी, तमिलनाडु</span></p>
<p><span><strong>सर्वाधिक गन्ना पेराई</strong></span><span> प्रथम पुरस्कार: रामाला सहकारी चीनी मिल्स लिमिटेड, रामाला बड़ौत, दिल्ली-सहारनपुर रोड, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश</span></p>
<p><span><strong>सर्वाधिक चीनी रिकवरी</strong></span><span> प्रथम पुरस्कार: द किसान सहकारी चीनी मिल्स लिमिटेड, गजरौला, तह. हसनपुर, जिला अमरोहा, उत्तर प्रदेश</span></p>
<p><span><strong>अन्य चीनी रिकवरी क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ सहकारी चीनी मिल</strong></span><span> प्रथम पुरस्कार: सुब्रमणिया शिवा कोऑपरेटिव शुगर मिल्स लिमिटेड, गोपालपुरम, अलापुरम पोस्ट, तह. पप्पिरेड्डीपट्टी, जिला धर्मपुरी, तमिलनाडु</span></p>
<p><span><strong>प्रतिष्ठित वसंतदादा पाटिल पुरस्कार (पैन-इंडिया सर्वश्रेष्ठ सहकारी चीनी मिल)</strong></span><span> भीमाशंकर सहकारी साखर कारखाना लिमिटेड, दत्तात्रयनगर, तह. अंबेगांव, जिला पुणे, महाराष्ट्र</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारी चीनी मिलों को राष्ट्रीय स्तर के दक्षता पुरस्कारों की घोषणा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्यप्रदेश में भारतीय बीज सहकारी समिति सहित सहकारिता क्षेत्र में 19 एमओयू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/19-mous-in-cooperative-sector-including-bhartiya-beej-sahkari-samiti-limited-in-madhya-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 25 Feb 2025 18:06:42 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/19-mous-in-cooperative-sector-including-bhartiya-beej-sahkari-samiti-limited-in-madhya-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भोपाल में आयोजित <strong>ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025</strong> के दौरान मंगलवार को <strong>कोऑपरेटिव पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (सीपीपीपी)</strong> मॉडल के तहत 2305 करोड़ रुपये के 19 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गये।</p>
<p>किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने तथा सहकारिता के माध्यम से किसानों के सशक्तिकरण के लिए <strong>मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बीज उत्पादक एवं विपणन संघ मर्यादित</strong> तथा राष्ट्रीय स्तर की बहु-राज्य सहकारी समिति <strong>भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल)</strong> के बीच सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गये।</p>
<p>मुख्यमंत्री <strong>डॉ. मोहन यादव</strong> ने सहकारिता पर केंद्रित संवाद सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार सहकारिता आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रही है। आने वाले समय में व्यापार-व्यवसाय में सहकारिता की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होगी। इसमें राज्य सरकार पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी।</p>
<p>प्रदेश के सहकारिता मंत्री <strong>विश्वास कैलाश सारंग</strong> ने बताया मध्यप्रदेश का सीपीपीपी मॉडल देश की सहकारिता को बदलने का काम करेगा। इसके तहत कुल 2305 करोड़ रूपये की राशि के 19 एमओयू किये गये हैं। उन्होंने बताया कि सहकारिता विभाग में निवेश विंग की स्थापना भी की जा रही है। &nbsp;</p>
<p>केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय में संयुक्त सचिव<strong> सिद्धार्थ जैन</strong> ने कहा कि भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में सहकारिता क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। केंद्र ने पैक्स को विभिन्न क्षेत्रों में विविधीकरण की अनुमति दी है। यह साल अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के तौर पर भी मनाया जा रहा है। उन्होंने मध्यप्रदेश के सीपीपीपी मॉडल को भारत सरकार की ओर से पूरा सहयोग कर आगे बढ़ाने का भरोसा दिलाया।</p>
<p><strong>जय प्रकाश सिंह,</strong> प्रमुख (सहकारी सेवाएं), भारतीय बीज सहकारी समिति का कहना है कि इस सहमति ज्ञापन के माध्यम से किसानों को उचित मूल्य पर उन्नत बीज उपलब्ध कराने तथा सहकारी समितियों के सशक्तिकरण की दिशा में सफलता मिलेगी। दलहन व तिलहन फसलों के साथ-साथ पारंपरिक बीज उत्पादन व बिक्री को बढ़ावा दिया जाएगा।</p>
<p>इस अवसर पर मध्यप्रदेश के अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, बीज संघ के प्रबंध संचालक महेंद्र दीक्षित तथा सहकारिता व निजी क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित थे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67be047743520.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्यप्रदेश में भारतीय बीज सहकारी समिति सहित सहकारिता क्षेत्र में 19 एमओयू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67be047743520.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको ने ई&amp;#45;कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उत्पादों की अनधिकृत बिक्री के खिलाफ किसानों को आगाह किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-cautions-farmers-against-unauthorised-sale-of-products-on-ecommerce-platforms.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 12 Feb 2025 18:15:38 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-cautions-farmers-against-unauthorised-sale-of-products-on-ecommerce-platforms.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको) ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने उत्पादों की अनधिकृत बिक्री के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की है। इफको ने किसानों और खुदरा विक्रेताओं को अनधिकृत बिक्री से आगाह करते हुए कहा है कि अनधिकृत प्लेटफॉर्म खरीदारों को गुमराह कर रहे हैं।</p>
<p>इफको की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "इफको ने किसी भी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को अपने उत्पाद बेचने की अनुमति नहीं दी है। इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से की गई खरीदारी पूरी तरह से खरीदार के अपने जोखिम और जिम्मेदार पर है। ये अनधिकृत प्लेटफॉर्म खरीदारों को गुमराह कर रहे हैं, अनुचित रेट वसूलते हैं और खराब उत्पाद बेच रहे हैं।"</p>
<p>इफको ने चेतावनी दी है कि वह एफसीओ लाइसेंस या इफको से अनिवार्य 'ओ' फॉर्म के बिना उसके उत्पाद बेचने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा। केवल अधिकृत रिटेलर ही अधिकृत चैनलों के माध्यम से इफको के उत्पाद बेच सकते हैं।</p>
<p>इफको ने किसानों, खुदरा विक्रेताओं और कृषि क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि नैनो उर्वरकों सहित सभी इफको उत्पादों की आधिकारिक कीमतें इसकी वेबसाइट <a href="http://www.iffco.in">www.iffco.in</a> पर उपलब्ध हैं।</p>
<p>इफको ने लोगों को धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े से बचने की सलाह दी है, जिसमें फर्जी इफको फ्रेंचाइजी देना या इसके नाम पर पैसे मांगना शामिल हैं। प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए, किसानों को सलाह दी कि वे इफको के अधिकृत स्टोर या इफको की वेबसाइट के माध्यम से उत्पाद खरीदें।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x_67ac979e594e5.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67ac97708da6d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उत्पादों की अनधिकृत बिक्री के खिलाफ किसानों को आगाह किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67ac97708da6d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पैक्स को पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी चलाने की अनुमति, 26 समितियों का चयन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/pacs-allowed-to-run-petrol-pumps-and-gas-agencies-26-committees-selected.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 11 Feb 2025 19:26:28 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/pacs-allowed-to-run-petrol-pumps-and-gas-agencies-26-committees-selected.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को खुदरा पेट्रोल/डीजल आउटलेट (पेट्रोल पंप) के संचालन तथा एलपीजी वितरकों के रूप में कार्य करने की अनुमति दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इसके लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके आधार पर पैक्स का चयन किया जाएगा।</p>
<p>सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि <span>25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 286 पैक्स ने खुदरा पेट्रोल/डीजल आउटलेट स्थापित करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए हैं</span><span>,&nbsp;</span><span>जिनमें से 26 पैक्स का चयन तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा किया गया है। </span>इसके अतिरिक्त, 5 राज्यों के 116 पैक्स ने अपने थोक उपभोक्ता पंपों को खुदरा आउटलेट्स में बदलने के लिए सहमति दी है, जिनमें से 56 को चालू कर दिया गया है। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए, झारखंड में दो पैक्स ने आवेदन किया है।</p>
<p>संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, पैक्स को खुदरा पेट्रोल/डीजल डीलरशिप के लिए संयुक्त श्रेणी 2 (सीसी-2) और एलपीजी वितरकों के लिए संयुक्त श्रेणी (सीसी) में शामिल किया गया है, जिसके लिए वे तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा जारी विज्ञापनों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, पैक्स को अपने थोक उपभोक्ता पंपों को खुदरा दुकानों में बदलने का एक बार का विकल्प दिया गया है।</p>
<p>दिशानिर्देशों में पात्रता मानदंड भी परिभाषित किए गए हैं, जिनमें पेट्रोल पंप और एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए आवेदक पीएसीएस द्वारा पंजीकरण, भूमि उपलब्धता, वित्त आदि से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करना शामिल है।&nbsp;</p>
<p><strong>पैक्स अनाज भंडारण योजना में प्रगति</strong></p>
<p>सहकारिता मंत्री अमित शाह ने "सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना" की प्रगति के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पायलट योजना के तहत, 11 राज्यों के 11 पैक्स में गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 10 राज्यों के 500 पैक्स में आधारशिला रखी गई है।</p>
<p>इस योजना का उद्देश्य कृषि अवसंरचना कोष और कृषि विपणन अवसंरचना योजना जैसी योजनाओं के तहत वित्त पोषण कर भंडारण को विकेंद्रीकृत करना, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।&nbsp;योजना है कि पैक्स खरीद और भंडारण केंद्रों के रूप में कार्य कर अपनी आर्थिक स्थिति और ग्रामीण खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त बनाएंगे।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पैक्स को पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी चलाने की अनुमति, 26 समितियों का चयन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीडीसी ने सहकारी चीनी मिलों के लिए ब्याज दरें घटाईं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-reduces-interest-rates-to-support-cooperative-sugar-factories.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 11 Jan 2025 13:58:48 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-reduces-interest-rates-to-support-cooperative-sugar-factories.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने सहकारी चीनी मिलों के लिए सावधि ऋण और कार्यशील पूंजी ऋण के लिए ब्याज दरों को कम करने की घोषणा की है। सहकारिता मंत्रालय के तहत एक सांविधिक निगम, एनसीडीसी सहकारी समितियों को प्रोत्साहन देता है और उनका वित्तपोषित करता है।</p>
<p>एनसीडीसी की अधिसूचना के अनुसार, संशोधित दरें सावधि ऋण के लिए 8.5% और कार्यशील पूंजी ऋण के लिए 8% निर्धारित की गई हैं। ये ब्याज दरें केंद्रीय क्षेत्र योजना - सहकारी चीनी मिलों (सीएसएम) को मजबूत करने के लिए अनुदान सहायता, के तहत संशोधित की गई हैं। यह पहल केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय द्वारा देश भर में सहकारी चीनी मिलों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ब्याज की नई दरें नये कर्ज पर ही लागू होगी।</p>
<p>एनसीडीसी की ब्याज दरों में कमी से सहकारी चीनी मिलों (सीएसएम) को वित्तीय सहायता और देश में चीनी उद्योग को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। देश में करीब पांच करोड़ गन्ना किसान चीनी उद्योग से जुड़े हैं। सस्ते कर्ज से सहकारी चीनी मिलों की परिचालन दक्षता में सुधार होगा और आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारी चीनी मिलों की अहम भूमिका है।</p>
<p>एनसीडीसी द्वारा ब्याज दरों में कटौती सहकारी चीनी मिलों को सशक्त बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, हालांकि चीनी उद्योग को अभी भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस साल गन्ने की फसल पर मौसम और रोगों की मार के चलते गन्ना उत्पादन प्रभावित हुआ है। चीनी उद्योग की ओर से निर्यात की अनुमति, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि और एथेनॉल की कीमतों में वृद्धि की मांग की जा रही है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीडीसी ने सहकारी चीनी मिलों के लिए ब्याज दरें घटाईं ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[10,000 नई पैक्स का शुभारंभ, 5 साल से पहले बनेंगी 2 लाख सहकारी समितियां]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/10000-new-pacs-launched-2-lakh-cooperative-societies-will-be-formed-within-5-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 26 Dec 2024 13:02:10 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/10000-new-pacs-launched-2-lakh-cooperative-societies-will-be-formed-within-5-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को <span>नवगठित</span> <span>10,000 बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समितियों </span>का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सरकार 2 लाख पैक्स की स्थापना का अपना लक्ष्य पांच साल से पहले ही हासिल कर लेगी।</p>
<p>नई दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के दिन 10 हजार नई बहुद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), डेयरी व मत्स्य सहकारी समितियों का शुभारंभ हो रहा है। संविधान में 97वां संशोधन अटल जी के समय में ही आया और बहुत समय से हाशिए पर पड़ी सहकारिता को अटल जी ने फिर से महत्व दिया था।</p>
<p>अमित शाह ने कहा कि कहा कि 'सहकार से समृद्धि' तभी संभव है जब हर पंचायत में सहकारिता उपस्थिति हो और वहां किसी न किसी रूप में काम करे। देश के त्रिस्तरीय सहकारिता ढांचे को सबसे ज़्यादा ताकत प्राथमिक सहकारी समिति ही दे सकती है, इसीलिए मोदी सरकार ने 2 लाख नए पैक्स बनाने का निर्णय किया था। हमने 86 दिन के अंदर ही 10 हजार पैक्स को रजिस्टर करने का काम पूरा कर लिया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_676d06713f67f.jpg" alt="" /></p>
<p>केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि नाबार्ड, एनडीडीबी और एनएफडीबी ने 10 हजार प्राथमिक सहकारी समितियों के पंजीकरण में बड़ी भूमिका निभाई है। सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद सबसे बड़ा काम सभी पैक्स का कम्प्यूटराइजेशन करने का किया गया। इससे पैक्स को 32 प्रकार की नई गतिविधियों से जोड़ा गया। पैक्स को बहुआयामी बनाकर उन्हें भंडारण, खाद, गैस, उर्वरक और जल वितरण के साथ जोड़ा गया है। शाह ने कहा कि ट्रेन्ड मैनपावर न होने के कारण ये सब हम नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि इसके लिए आज प्रशिक्षण मॉड्यूल का भी शुभारंभ हुआ है जो पैक्स के सदस्यों और कर्मचारियों को संपूर्ण प्रशिक्षण देने का काम करेंगे।</p>
<p>इस अवसर पर 10 सहकारी समितियों को RuPay किसान क्रेडिट कार्ड और माइक्रो एटीएम का वितरण किया गया। आने वाले दिनों में हर प्राथमिक डेयरी को माइक्रो-एटीएम दिया जाएगा। शाह ने कहा कि गांव में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) जब पैक्स बन जाता है तो गांव के हर नागरिक को किसी न किसी रूप में पैक्स के दायरे में आना पड़ता है। यह एक बहुद्देशीय कार्यक्रम है, जिससे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का एक मजबूत प्रयास होगा।</p>
<p>मोदी सरकार ने अगले पांच साल में 2 लाख नए पैक्स गठित करने का लक्ष्य रखा है। पहले चरण में नाबार्ड 22,750 पैक्स और दूसरे चरण में 47,250 पैक्स बनाएगा। इसी प्रकार एनडीडीबी 56,500 नई समितियाँ बनाएगा और 46,500 मौजूदा समितियों को सुदृढ़ बनाएगा। एनएफडीबी 6,000 नई मत्स्य सहकारी समितियाँ बनाएगा और 5,500 मौजूदा मत्स्य सहकारी समितियों का सशक्तिकरण करेगा। इनके अलावा राज्यों के सहकारी विभाग 25000 पैक्स बनाएंगे। नए मॉडल बायलॉज के साथ अब तक 11,695 नई प्राथमिक सहकारी समितियां पंजीकृत हुई हैं।</p>
<p>नए पैक्स बनने के बाद फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेजेस के माध्यम से किसानों की उपज को वैश्विक बाजार में पहुंचाना बड़ा सरल हो जाएगा।&nbsp;बंद पड़े पैक्स के परिसमापन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की, जिससे 15,000 गांवों में नई समितियों की स्थापना की जा सकेगी। मौजूदा मानदंडों के तहत, जब तक कि बंद घोषित न कर दिया जाए, तब तक किसी गांव में दूसरी पैक्स स्थापित नहीं की जा सकती।</p>
<p>इस अवसर पर केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी एवं पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह, केन्द्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल और मुरलीधर मोहोल और सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ 10,000 नई पैक्स का शुभारंभ, 5 साल से पहले बनेंगी 2 लाख सहकारी समितियां ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सीएससी और इफको के बीच समझौता, एफपीओ को मजबूत करेंगे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/mou-between-csc-and-iffco-will-strengthen-10000-fpos.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Dec 2024 19:12:35 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/mou-between-csc-and-iffco-will-strengthen-10000-fpos.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड ने इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) सहित सभी एफपीओ को आवश्यक कृषि इनपुट्स प्रदान किए जाएंगे। यह एमओयू सीएससी एसपीवी के प्रबंध निदेशक और सीईओ संजय राकेश और इफको के मार्केटिंग डायरेक्टर योगेंद्र कुमार की उपस्थिति में संपन्न हुआ।</p>
<p>भारत सरकार की "10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन और संवर्धन" योजना, साल 2020 में शुरू की गई थी। इस योजना के तहत एफपीओ को कॉमन सर्विस सेंटर्स (सीएससी) के रूप में सशक्त किया जा रहा है। इस पहल से ग्रामीण विकास और रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।</p>
<p>इस समझौते के माध्यम से एफपीओ इफको द्वारा प्रदान किए जाने वाले उर्वरक, बीज और कृषि रसायन जैसे आवश्यक कृषि इनपुट्स प्राप्त कर सकेंगे। इस सहयोग से किसानों की उत्पादकता बढ़ेगी और देश भर में सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>इस अवसर पर सीएससी एसपीवी के प्रबंध निदेशक और सीईओ श्री संजय राकेश ने कहा, "यह हमारे लिए बड़े ही गर्व की बात है कि इफको के माध्यम से एफपीओ को आवश्यक कृषि इनपुट्स उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पहल से एफपीओ से जुड़े छोटे और सीमांत किसान सीएससी और इफको की व्यापक सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे, जिससे ग्रामीण विकास और देश में डिजिटल सशक्तिकरण को एक नई दिशा मिलेगी। हमें उम्मीद है कि सीएससी द्वारा प्रदान की जाने वाली कृषि संबंधी सेवाओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।"</p>
<p>देश के दूरदराज ग्रामीण इलाकों में फैले व्यापक सीएससी नेटवर्क के माध्यम से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई), टेली-कंसल्टेशन, फसल बीमा, ई-पशु चिकित्सा सेवाएं, किसान क्रेडिट कार्ड सहायता, और पीएम किसान योजना का समर्थन जैसी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इफको के साथ यह नई साझेदारी ग्रामीण समृद्धि और किसान कल्याण के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_675c39b3e0226.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सीएससी और इफको के बीच समझौता, एफपीओ को मजबूत करेंगे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको के एमडी डॉ. यूएस अवस्थी को सहकार भारती का &amp;apos;फर्टिलाइजर मैन ऑफ इंडिया&amp;apos; सम्मान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-md-dr-us-awasthi-honoured-with-fertilizer-man-of-india-by-sahakar-bharati.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 09 Dec 2024 18:10:59 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-md-dr-us-awasthi-honoured-with-fertilizer-man-of-india-by-sahakar-bharati.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उर्वरक क्षेत्र की विश्व की सबसे बड़ी सहकारी संस्था इफको के प्रबंध निदेशक <strong>डॉ. उदय शंकर अवस्थी</strong> को सहकार भारती द्वारा <strong>"फर्टिलाइजर मैन ऑफ इंडिया"</strong> की उपाधि से सम्मानित किया गया। अमृतसर में आयोजित सहकार भारती के 8वें राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह (महासचिव) <strong>दत्तात्रेय होसबोले</strong>, सहकार भारती के राष्ट्रीय महासचिव <strong>डॉ. उदय जोशी</strong> और पंजाब के राज्यपाल सह चंडीगढ़ के प्रशासक <strong>गुलाब चंद कटारिया</strong> ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।<br />&nbsp;<br />डॉ. अवस्थी को यह उपाधि उर्वरक और कृषि के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दी गई है। नैनो उर्वरकों के बारे में उनकी अभिनव सोच से देश के साथ-साथ वैश्विक कृषि और उर्वरक क्षेत्र का कायाकल्प हो सकता है। डॉ. अवस्थी ने मिट्टी में पोषक तत्वों की वृद्धि हेतु किसानों को हरी जैविक खाद के प्रयोग संबंधी प्रशिक्षण दिलाने के साथ-साथ देश भर में &lsquo;मृदा बचाओ अभियान&rsquo; की शुरुआत की। उर्वरक उद्योग के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान का उल्लेख करते हुए उन्हें प्रशस्ति पत्र और ताम्र पत्र (कांस्य पट्टिका) से सम्मानित किया गया। इफको की उल्लेखनीय प्रगति और भारतीय सहकारी आंदोलन में उनके योगदान के लिए डॉ. अवस्थी को हाल ही में<strong> इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस (आईसीए)</strong>&nbsp;के <strong>रोशडेल पायनियर्स पुरस्कार</strong> से भी सम्मानित किया गया है।<br />&nbsp;<br />डॉ. अवस्थी ने कहा, "मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि सहकारिता जगत ने किसानों और सहकारी समितियों के विकास के लिए किए गए मेरे काम को पहचाना है। मैं इस प्रतिष्ठित सम्मान और उपाधि के लिए सहकार भारती को हृदय से धन्यवाद देता हूं।" उन्होंने आगे कहा कि हमें उर्वरकों के मामले में आत्मनिर्भर बनना होगा और नवीन नैनो प्रौद्योगिकी आधारित उर्वरकों को अपनाकर उर्वरकों के कच्चे माल के आयात पर निर्भरता कम करनी होगी। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और साथ ही रॉक फॉस्फेट, पोटाश और प्राकृतिक गैस की खपत भी कम होगी।<br />&nbsp;<br />डॉ. अवस्थी ने सहकार भारती से आग्रह किया कि वे दूरदराज के गांवों में छोटी सहकारी समितियों को सहायता प्रदान कर सहकार को बढ़ावा दें तथा उन्हें स्थायी व्यवसाय मॉडल खड़ा करने में मदद करें। उन्होंने सहकार भारती से देश भर के किसानों को नैनो उर्वरकों के फायदों के बारे में बताने तथा भारत को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की इसकी क्षमता पर जोर देना चाहिए।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_6756e506e9d53.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको के एमडी डॉ. यूएस अवस्थी को सहकार भारती का 'फर्टिलाइजर मैन ऑफ इंडिया' सम्मान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारी चीनी मिलों ने महाराष्ट्र में गन्ना श्रमिकों के शोषण की रिपोर्ट को &amp;apos;षड्यंत्र&amp;apos; बताया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperative-sugar-mills-term-reports-of-exploitation-of-sugarcane-workers-in-maharashtra-as-a-conspiracy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 28 Nov 2024 16:55:26 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperative-sugar-mills-term-reports-of-exploitation-of-sugarcane-workers-in-maharashtra-as-a-conspiracy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में सहकारी चीनी मिलों के संगठन <strong>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज (एनएफसीएसएफ)</strong> ने अमेरिकी मीडिया की उन खबरों का खंडन किया है जिनमें महाराष्ट्र में गन्ना कटाई श्रमिकों के शोषण का मुद्दा उठाया गया है। फेडरेशन के चेयरमैन हर्षवर्धन पाटिल ने अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट को चीनी उद्योग के खिलाफ 'षड्यंत्र' करार दिया।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>हर्षवर्धन पाटिल</strong> का कहना है कि महाराष्ट्र में गन्ना कटाई श्रमिकों के उत्पीड़न के गलत आरोपों के जरिये महाराष्ट्र की चीनी मिलों के कारोबार को निशाना बनाने की साजिश हो रही है। नई दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों को महाराष्ट्र की मिलों से चीनी खरीदने से रोकने की साजिश के तहत श्रमिकों के कथित उत्पीड़न की खबरें अमेरिका के एक बड़े अखबार में प्रकाशित हुई हैं और इसके पीछे गैर सरकारी संगठनों का हाथ है।&nbsp;</p>
<p><strong>आरोपों की जांच&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>महाराष्ट्र में गन्ना कटाई श्रमिकों के शोषण को लेकर पिछले दिनों अमेरिकी मीडिया में खबरें प्रकाशित हुई थी। हर्षवर्धन पाटिल ने उन खबरों को जमीनी हकीकत से दूर बताते हुए कहा कि इस मामले को लेकर अमेरिकी दूतावास, केंद्रीय गृह मंत्रालय और पीएमओ के संज्ञान में लाया गया है और केंद्र सरकार की एजेंसियां जांच कर रही हैं। पाटिल ने दावा किया कि महाराष्ट्र में गन्ना कटाई में लगे श्रमिकों को चीनी मिलों द्वारा एडवांस भुगतान के साथ ही उनके लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, इंश्योरेंस और आवास की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। चीनी मिलों के ऊपर लगाये गये आरोप हकीकत से कोसों दूर हैं और मामले की जांच के बाद इस साजिश से जुड़े लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।</p>
<p><strong>चीनी उद्योग की चिंता&nbsp;</strong></p>
<p>महाराष्ट्र में कुल 205 चीनी मिलें हैं जिनमें से 105 सहकारी मिलें हैं। देश में चीनी की घरेलू खपत का करीब 65 फीसदी हिस्सा कोल्ड ड्रिंक, बिस्किट, मिठाई और दूसरे बड़े औद्योगिक खरीदारों को जाता है। पाटिल का कहना है कि ऐसे में अगर पेप्सी और कोका कोला जैसी अमेरिकी कंपनियां महाराष्ट्र की मिलों से चीनी नहीं खरीदती हैं तो राज्य के चीनी उद्योग के लिए संकट पैदा हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह महाराष्ट्र की सहकारी चीनी मिलों से बड़े खरीदारों को उत्तर भारत की चीनी मिलों की तरफ ले जाने की साजिश है।</p>
<p>महाराष्ट्र की चीनी मिलों में केवल चार माह पेराई होती है। ऐसे में मिलें गन्ना कटाई श्रमिकों को एडवांस पैसा देती है ताकि वह पूरे साल अपना खर्च चला सकें। कटाई शुरू होने के बाद उनके 15 दिन के काम से किस्तों के रूप में इस एडवांस को एडजस्ट किया जाता है। फेडरेशन ने दावा किया कि महाराष्ट्र में गन्ना मजदूरों के शोषण की कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर चीनी मिलें श्रमिकों को आश्रय, भोजन, समय पर भुगतान, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य बीमा सहित व्यापक सहायता प्रदान कर रही हैं।</p>
<p><strong>हार्वेस्टर खरीद की योजना&nbsp;</strong></p>
<p>पाटिल ने बताया कि बेहतर शिक्षा के कारण गन्ना कटाई श्रमिक दूसरे काम करने लगे हैं। इसलिए इनकी संख्या घट रही है। एक दशक पहले गन्ना मजदूरों की संख्या करीब 15 लाख थी जो घटकर अब 7 लाख रह गई है। फेडरेशन ने गन्ना कटाई के काम में हार्वेस्टर मशीनों के उपयोग को बढ़ाने की योजना बनाई है। इसके लिए 10 हजार हार्वेस्टर खरीदे जाएंगे। नेशनल कोआपरेटिव डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनसीडीसी) के पास कर्ज के लिए प्रस्ताव भेजा है। हार्वेस्टर खरीदने के लिए तहत 90 फीसदी कर्ज एनसीडीसी से लेने और 10 फीसदी पैसा चीनी मिलों द्वारा लगाने की योजना है। लेकिन यह योजना तभी कारगर होगी जब केंद्र सरकार हार्वेस्टर के लिए 50 फीसदी तक सब्सिडी देगी। उसी स्थिति में पांच साल में कर्ज का रिपेमेंट संभव है।&nbsp;</p>
<p><strong>अपना सकते हैं यूपी जैसी व्यवस्था</strong></p>
<p>पाटिल ने बताया कि महाराष्ट्र में 105, कर्नाटक में 50 और गुजरात में 28 सहकारी चीनी मिलें हैं। इन मिलों में गन्ने की कटाई का जिम्मा चीनी मिलें उठाती है। ऐसे में इनके खिलाफ साजिश सहकारी चीनी उद्योग के सामने संकट खड़ा कर सकती है। उत्तर प्रदेश समेत दूसरे उत्तरी राज्यों में चीनी मिलों तक गन्ना पहुंचाने का जिम्मा किसान का है। अगर हमारा संकट बढ़ता है तो हमें भी उत्तर प्रदेश जैसी व्यवस्था अपनानी पड़ सकती है जो हमारे किसानों के लिए एक नई मुश्किल पैदा कर सकती है।</p>
<p>एनएफसीएसएफ ने सरकार से चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य में वृद्धि, 15 लाख टन सरप्लस चीनी के निर्यात की अनुमति और एथेनॉल खरीद मूल्य बढ़ाने की मांग की है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_674855cbe19e8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारी चीनी मिलों ने महाराष्ट्र में गन्ना श्रमिकों के शोषण की रिपोर्ट को 'षड्यंत्र' बताया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको के एमडी डॉ. उदय शंकर अवस्थी प्रतिष्ठित रोशडेल पायनियर्स अवार्ड 2024 से सम्मानित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/rochdale-pioneers-award-of-ica-bestowed-to-dr-u-s-awasthi-md-iffco-second-indian-after-kurien-to-receive-award.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 26 Nov 2024 23:30:06 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/rochdale-pioneers-award-of-ica-bestowed-to-dr-u-s-awasthi-md-iffco-second-indian-after-kurien-to-receive-award.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी को प्रतिष्ठित रोशडेल पायनियर्स अवार्ड 2024 प्रदान किया गया है। डॉ. वर्गीस कुरियन के बाद यह पुरस्कार पाने वाले डॉ. अवस्थी दूसरे भारतीय हैं। डॉ. कुरियन को वर्ष 2001 में यह पुरस्कार प्रदान किया गया था। रोशडेल पायनियर्स अवार्ड इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस (आईसीए) द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। इस अवार्ड की शुरुआत वर्ष 2000 में हुई थी। इसका उद्देश्य एक व्यक्ति या विशेष परिस्थितियों में एक सहकारी संगठन को मान्यता देना है, जिसने नवीन और वित्तीय रूप से टिकाऊ सहकारी गतिविधियों में योगदान दिया है जिससे उनके सदस्यों को काफी लाभ हुआ है।</p>
<p>केमिकल इंजीनियर डॉ. अवस्थी 1976 में इफको में नियुक्त हुए। उनके नेतृत्व में इस सहकारी संस्था ने अपनी उत्पादन क्षमता में 292% और शुद्ध संपत्ति में 688% की वृद्धि की। उनके नेतृत्व में इफको ने विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में कदम रखा है, अपने व्यवसाय में विविधता लाई है और भारत के किसानों के लिए सफलतापूर्वक नवाचार और स्वदेशी नैनो उर्वरक विकसित किया है।</p>
<p>आईसीए के अध्यक्ष एरियल ग्वार्को ने भारत में पहली बार आयोजित हो रहे आईसीए के वैश्विक सहकारी सम्मेलन में एक विशेष समारोह के दौरान 25 नवंबर को डॉ. अवस्थी को यह पुरस्कार प्रदान किया। इफको लिमिटेड आईसीए और केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की साझेदारी में आईसीए महासभा और वैश्विक सहकारी सम्मेलन 2024 की मेजबानी कर रहा है। यह सम्मेलन नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है जो 30 नवंबर, 2024 को समाप्त होगा।</p>
<p>इफको ने नैनो डीएपी (तरल) की 44 लाख बोतलों का उत्पादन और नैनो यूरिया (तरल) की 2.04 करोड़ से अधिक बोतलें बेचकर उल्लेखनीय परिचालन सफलता हासिल की है। इसने 80,000 क्षेत्रीय प्रदर्शन आयोजित किए, 80,000 से अधिक किसानों और 1,500 ग्रामीण उद्यमियों को प्रशिक्षण दिया। इफको का कुल उर्वरक उत्पादन 88.95 लाख टन तक पहुंच गया, जिसमें 48.85 लाख टन यूरिया और 40.10 लाख टन एनपीके, डीएपी, डब्ल्यूएसएफ और विशेष उर्वरक शामिल हैं। जबकि घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बिक्री कुल 112.26 लाख टन रही। इससे जैविक और रासायनिक उर्वरक के उपयोग में और वृद्धि हुई है।</p>
<p>पुरस्कार ग्रहण करने के बाद इफको के एमडी डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कहा, &ldquo;मैं इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को पाकर बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूं। यह पुरस्कार माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के "सहकार से समृद्धि" के दृष्टिकोण का प्रतीक है। साथ ही यह माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में इफको के असाधारण प्रयासों को उजागर करता है। हम भारत के सहकारी आंदोलन को वैश्विक मंच पर मजबूती प्रदान करने के उनके दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित हैं। मैं इस सम्मान के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (आईसीए) का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं, जो हमें विश्व स्तर पर सहकारी भावना को बनाए रखने और आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है।&rdquo;</p>
<p>डॉ. अवस्थी ने कहा, &ldquo;इफको ने नैनो डीएपी और नैनो यूरिया (तरल) जैसे नैनो उर्वरकों के माध्यम से टिकाऊ कृषि का समर्थन किया, कृषि पद्धतियों में बदलाव किया और पर्यावरण-अनुकूल समाधानों की मांग को पूरा किया है। स्वदेशी नैनो उर्वरकों ने लॉजिस्टिक मुद्दों से &nbsp;निपटने, भारत की उर्वरक आयात निर्भरता कम करने और भारी पैकेजिंग को कॉम्पैक्ट बोतलों से बदल दिया। इन नवाचारों ने मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार किया, किसानों की लाभप्रदता को बढ़ावा दिया और पर्यावरण की दृष्टि से जिम्मेदार खेती को बढ़ावा दिया है।&ldquo; इफको के नए स्वदेशी उत्पाद नैनो यूरिया (तरल) और नैनो डीएपी (तरल) का उपयोग अब पूरे देश के किसान खुशी से कर रहे हैं। भारत के हर कोने और कुछ अन्य देशों, विशेष रूप से पड़ोसी देशों के किसानों द्वारा व्यापक रूप से इसे स्वीकार किया जा रहा है। नैनो उर्वरकों की आपूर्ति के लिए अन्य देश भी इफको से संपर्क कर रहे हैं। भविष्य में हम 25 और देशों में नैनो उर्वरक निर्यात करने की योजना बना रहे हैं।&rdquo;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको के एमडी डॉ. उदय शंकर अवस्थी प्रतिष्ठित रोशडेल पायनियर्स अवार्ड 2024 से सम्मानित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारिता से वैश्विक सहयोग को मिल सकती है नई ऊर्जा: प्रधानमंत्री मोदी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperation-can-give-new-energy-to-global-cooperation-prime-minister-modi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 25 Nov 2024 17:49:14 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperation-can-give-new-energy-to-global-cooperation-prime-minister-modi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में <strong>अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता गठबंधन (आईसीए)</strong> के <strong>वैश्विक सहकारी सम्मेलन-2024</strong> का उद्घाटन और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित <strong>अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष- </strong><span><strong>2025</strong> </span>का आधिकारिक शुभारंभ किया। आईसीए के 130 साल के इतिहास में वैश्विक सहकारी सम्मेलन और आईसीए महासभा का आयोजन पहली बार भारत में हो रहा है।&nbsp;</p>
<p>वैश्विक सहकारी सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री <strong>नरेंद्र मोदी</strong> ने कहा कि सहकारिता आंदोलन मुनाफा नहीं मानवता के भाव को आगे लेकर बढ़ता है। दुनिया के लिए यह जरूरी है कि वह विकास को मानव-केंद्रित नजरिए से देखे। उन्होंने कहा कि सहकारिता से वैश्विक सहयोग को नई ऊर्जा मिल सकती है। खासतौर पर ग्लोबल साउथ के देशों को जिस प्रकार की ग्रोथ की जरूरत है उसमें कोऑपरेटिव्स मदद कर सकती हैं। <span>प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि </span>सहकारिता को दुनिया में अखंडता और आपसी सम्मान का ध्वजवाहक बनाने की जरूरत है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x_67446f208dfa1.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>स्वतंत्रता आंदोलन में सहकारिता की भूमिका को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि <span>भारत में सहकारिता ने विचार से आंदोलन, आंदोलन से क्रांति और क्रांति से सशक्तिकरण तक का सफर किया है।</span> दुनिया के लिए सहकारिता केवल एक मॉडल है, लेकिन भारत के लिए यह संस्कृति का आधार और जीवन शैली है। हम सहकार से समृद्धि के मंत्र पर चल रहे हैं।<span>&nbsp;सरकार और सहकार की शक्ति को एक साथ जोड़कर विकसित भारत बनाने में जुटे हैं।</span></p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपने भविष्य के विकास में सहकारिता की बड़ी भूमिका देखता है। हमारा प्रयास सहकारी समितियों को बहुउद्देशीय बनाना है।&nbsp;इसी लक्ष्य के साथ भारत सरकार ने अलग से एक सहकारिता मंत्रालय बनाया। पिछले 10 वर्षों में कई सुधारों के जरिए सहकारिता के <span>पूरे इकोसिस्टम को बदलने का काम किया है।&nbsp;</span>प्रधानमंत्री ने सहकारी क्षेत्र में स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने पर भी विचार करने को जरूरी बताया।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि <span>भारत में आज 8 लाख सहकारी समितियां हैं। दुनिया की हर चौथी सहकारी समिति भारत में है। करीब 30 करोड़ लोग, यानी हर पांच में से एक भारतीय सहकारी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। सहकारी समितियां चीनी, उर्वरक, मत्स्य पालन और दूध उत्पादन उद्योगों में बहुत बड़ी भूमिका निभाती हैं। सहकारी बैंकों में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक जमा हैं, जो इन संस्थाओं के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। पीएम मोदी ने बताया कि सरकार सहकारी बैंकों को सशक्त बनाकर उन्हें अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है।&nbsp;</span></p>
<p>पीएम मोदी ने सहकारिता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि हमारा फोकस महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास पर है, जो<span> दुनिया के लिए महिला सशक्तिकरण का एक बड़ा मॉडल बन सकता है। </span><span>आज भारत के सहकारिता क्षेत्र में 60 फीसदी से ज्यादा भागीदारी महिलाओं की है। महिलाओं के कितने ही कोऑपरेटिव आज इस सेक्टर की ताकत बने हुए हैं।&nbsp;</span></p>
<p>प्रधानमंत्री कहा कि सहकार से समृद्धि के दृष्टिकोण का लक्ष्य सहकारी संस्थाओं को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना है। आज<span>&nbsp;सहकारिता के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए नए तरीके खोजने की आवश्यकता है और इसमें वैश्विक सहकारिता सम्मेलन बहुत मददगार हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।&nbsp; &nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x_67446e554decd.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सहकारिता आंदोलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। इसके डिजाइन में कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, उपभोक्ता सहकारी समितियां और आवास जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है, साथ ही ड्रोन भी दिखाया गया है जो कृषि में आधुनिक तकनीक के महत्व को दर्शाता है।</p>
<p>इफको द्वारा भारत सरकार तथा सहकारी संस्थाओं अमूल व कृभको के सहयोग से आयोजित वैश्विक सहकारी सम्मेलन 25 से 30 नवंबर तक चलेगा।<span>&nbsp;</span>सम्मेलन में भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे, फिजी के उप-प्रधानमंत्री मनोआ कामिकामिका और 100 से अधिक देशों के लगभग 3,000 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस आयोजन<span>&nbsp;</span>के माध्यम से भारत सहकारी क्षेत्र में अपनी क्षमताओं और सफलताओं को विश्व मंच पर प्रस्तुत कर रहा है।</p>
<p><span>पीएम मोदी ने 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र को धन्यवाद दिया।&nbsp;</span>इस अवसर पर गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी, इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. उदय शंकर अवस्थी, कृभको के चेयरमैन डॉ. चंद्रपाल सिंह, अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर जयेन मेहता, एनएफसीएसएफ के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नायकनवरे समेत विभिन्न सहकारी संस्थानों के पदाधिकारी और राज्यों के सहकारिता मंत्री भी मौजूद थे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x_67446f30a0c2e.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारिता से वैश्विक सहयोग को मिल सकती है नई ऊर्जा: प्रधानमंत्री मोदी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश में सहाकरिता आंदोलन का पुनर्गठन हो रहा है, हर गांव में होंगी पैक्सः अमित शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/indian-cooperative-movement-is-being-restructured-each-village-will-have-pacs.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 25 Nov 2024 17:19:13 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/indian-cooperative-movement-is-being-restructured-each-village-will-have-pacs.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि भारत में सहकारिता आंदोलन का पुनर्गठन हो रहा है। सरकार सहकारिता के फायदों को देश के हर गांव, हर किसान तक पहुंचाने के लिए काम कर रही है। इसके लिए अगले तीन साल में दो लाख प्राइमरी एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव समितियां (पैक्स) का गठन किया जा रहा है ताकि देश में कोई भी गांव ऐसा न रहे जहां पैक्स नहीं है। नई दिल्ली में इंटरनेशनल कोआपरेटिव अलायंस (आईसीए) की ग्लोबल कोआपरेटिव कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बातें कही। उन्होंने कहा कि पहली बार भारत में आईसीए की कांफ्रेंस हो रही है और इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) द्वारा साल 2025 को सहकारिता वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा भी भारत में ही रही है।</p>
<p>अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र <span>मोदी &lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; के मंत्र को चरितार्थ कर देश के करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव ला रहे हैं। </span><span>चाहे पैक्स के आधुनिकीकरण और विस्तार से ग्रामीण अर्थतंत्र को सशक्त बनाना हो, तीन बहु-राज्य सहकारी समितियों का गठन हो, या मॉडल बायलॉज लाना, मोदी सरकार सहकारी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए एक के बाद एक कदम उठा रही है।&nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x_6744cbe3d906d.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><span>वैश्विक सहकारिता सम्मेलन से संयुक्त राष्ट्र संघ के 'अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025' के शुभारंभ को अमित शाह ने भारत के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि&nbsp;</span>सहकारिता को महत्व देते हुए 75 साल बाद देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने सहकारिता मंत्रालय का गठन किया। इसका मकसद सहकारिता को मजबूत करना है। तीन साल पहले प्रधानमंत्री ने सहकारिता समृद्धि का द्वार का नारा दिया था और सरकार सहकारिता के फायदे को देश के हर वर्ग तक पहुंचाने का काम कर रही है।</p>
<p>शाह ने <span>भारत जैसे विशाल देश में लोगों की समृद्धि के लिए सहकारिता को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि </span>देश में अमूल, इफको और कृभको जैसी सहकारी संस्थानों ने विश्व स्तर पर अपनी पहचान कायम की है। अब सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर तीन सहकारी समिति एनएसईएल, एनओसीएल और एनएससीएल की स्थापना की है। इनके जरिये किसानों के उत्पादों को देश और दुनिया के बाजारों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि&nbsp;सरकार एक सहकारिता विश्वविद्यालय स्थापित करने जा रही है। सहकारिता नीति भी इसी साल आ जाएगी।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x_6744cc6650381.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_67446f6848942.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश में सहाकरिता आंदोलन का पुनर्गठन हो रहा है, हर गांव में होंगी पैक्सः अमित शाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पांच वर्षों में 15 हजार करोड़ का टर्नओवर करेगी भारतीय बीज सहकारी समिति: योगेंद्र कुमार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/indian-seed-cooperative-society-aims-for-rs-15000-crore-turnover-in-five-year-plan-says-yogendra-kumar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 28 Sep 2024 18:31:29 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/indian-seed-cooperative-society-aims-for-rs-15000-crore-turnover-in-five-year-plan-says-yogendra-kumar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसानों को उन्नत गणुवत्ता और अधिक उपज देने वाले बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पिछले साल सहकारिता मंत्रालय के मार्गदर्शन में गठित <strong>भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड </strong>(बीबीएसएसएल) ने पांच साल में 15 हजार करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। समिति की द्वितीय वार्षिक आम सभा का आयोजन शनिवार को इफको मुख्यालय में किया गया।</p>
<p><strong>बीबीएसएसएल</strong> के अध्यक्ष तथा <strong>इफको</strong> के विपणन निदेशक <strong>योगेंद्र कुमार</strong> ने अपने उद्बोधन में कहा कि सभी प्रवर्तक संस्थाओं और सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच चर्चा के उपरांत पांचवें वित्तीय वर्ष के अंत में 15 हजार करोड़ रुपये के टर्नओवर का अनुमान लगाया गया है। बीज उत्पादन के लिए प्रदेशों में कार्यरत सहकारी संस्थाओं से वार्ता कर प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही समिति अपने बीजों के विक्रय हेतु राज्य सरकारों से सम्पर्क कर निविदाओं में सम्मिलित होने का प्रयास कर रही है।</p>
<p>पांचों प्रवर्तक संस्थाओं (<strong>इफको, कृभको, नाफेड, एनसीडीसी</strong> एवं <strong>एनडीडीबी</strong>) से एक-एक प्रतिनिधि को चुन कर अंतरिम बोर्ड का गठन हुआ। नियमित बोर्ड का गठन जुलाई 2023 में हुआ और बोर्ड के सदस्यों के चुनाव के बाद योगेंद्र कुमार को सर्वसम्मति से बोर्ड का अध्यक्ष चुना गया।<br /><br />योगेंद्र कुमार ने बताया कि भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने भारतीय बीज सहकारी समिति को दालों व तिलहन फसलों में बीजों के वितरण हेतु नोडल संस्थाओं में शामिल कर लिया है। वर्ष 2023-24 की रबी फसलों के बीज उत्पादन हेतु चार राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं गुजरात में 78 बीज उत्पादकों के प्रक्षेत्रों में लगभग 1100 एकड़ क्षेत्र में गेंहू, चना, सरसों एवं मटर फसलों के आधारीय बीजों का उत्पादन कराया गया है। इन्हें आने वाले वर्ष की रबी फसलों के प्रमाणित बीज उत्पादन में प्रयोग किया जाएगा। <br /><br />भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड ने वित्तीय वर्ष के शुरुआत से ही सदस्यता अभियान की शुरूआत कर दी थी। कुल 11759 आवेदकों के शेयर प्रमाण पत्र जारी किया जाना प्रस्तावित है, तथा 14 आवेदकों के आवेदन वापस कर दिए गए है। योगेंद्र कुमार ने सभी समितियों से निवेदन किया की वह शीघ्र-अतिशीघ्र अपने पंजीकरण कर लें। किसान ऐप के माध्यम से भी पंजीकरण कर सकते हैं।</p>
<p>सहकारिता मंत्रालय के साथ मिलकर भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड उन्नत एवं पारम्परिक बीजों के उत्पादन एवं वितरण का प्रयास करेगी। समिति के स्वयं के उत्पादित बीजों का व्यवसाय रबी 2025-26 से प्रारंभ हो जाएगा। जिसके लिए कई राज्यों की संस्थाओं के साथ व्यवसायिक समझौते भी किए जा रहे।<br /><br />कार्यक्रम में डीके वर्मा, निदेशक सहकारिता, कपिल मीना, निदेशक सहकारिता भारत सरकार, डॉ आरके यादव, संयोजक मण्डल, बीबीएसएसएल, चेतन जोशी, प्रबंध निदेशक, बीबीएसएसएल, दिनेश कुमार, उप-निदेशक, एनसीडीसी एवं बाल्मीकि त्रिपाठी, आद्यक्ष यूपीपीसीएफ कार्यक्रम में उपस्थित रहे एवं अन्य गणमान्य व्यक्तिगन एवं सहकारी बंधु ऑनलाइन रूप से जुड़े रहे। आम सभा को हाइब्रिड रूप से आयोजित किया गया, जिसमें 7000 से अधिक किसान एवं सदस्य विडिओ कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े हुए थे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66f7f9c659b29.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पांच वर्षों में 15 हजार करोड़ का टर्नओवर करेगी भारतीय बीज सहकारी समिति: योगेंद्र कुमार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश की हर पंचायत में होगी बहुद्देशीय प्राथमिक सहकारी समिति, दो लाख नये पैक्स गठित करने का फैसलाः अमित शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/two-lakh-primary-cooperative-societies-will-be-formed-in-the-country-amit-shah-counted-the-achievements-of-100-days-of-centre-govt.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Sep 2024 19:41:22 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/two-lakh-primary-cooperative-societies-will-be-formed-in-the-country-amit-shah-counted-the-achievements-of-100-days-of-centre-govt.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश की हर पंचायत में प्राथमिक सहकारी समितियों का गठन किया जाएगा। इन समितियों के गठन से छोटे किसानों को मदद मिलेगी और देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सहकारिता मंत्रालय द्वारा नई सरकार के 100 दिन में सहकारिता के लिए गये फैसलों और सहकारी क्षेत्र के लिए सरकार की योजनाओं को रेखांकित करने लिए गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने यह बातें कही। उन्होंने कहा कि गांव और पंचायत स्तर पर दो लाख नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) का गठन होगा जो डेयरी, मत्स्य पालन और दूसरे क्षेत्रों के लिए काम करेंगी। इस मौके पर श्वेत क्रांति 2.0 के लिए एक मार्गदर्शिका भी जारी की गई। इस दौरान केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह भी वहां मौजूद रहे। सम्मेलन में तीन तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया ।&nbsp;</p>
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<p>अमित शाह ने कहा कि देश में लगभग 2.7 लाख ग्राम पंचायतें हैं, लेकिन कई पंचायतों में अभी भी कृषि ऋण समितियां, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों का गठन नहीं हुआ है। देश के संतुलित विकास में इन सहकारी समितियों की अहम भूमिका को देखते हुए, सरकार ने उन पंचायतों में नई बहुउद्देशीय कृषि ऋण समितियां, डेयरी और मत्स्य समितियां बनाने की योजना मंजूर की है। इन समितियों से छोटे किसानों को मदद मिलेगी और देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अच्छा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया था, तब उद्देश्य था कि देश के हर जिले और गांव में सहकारी संस्थाओं को पुनर्जीवित किया जाए। इस उद्देश्य की दिशा में पिछले तीन वर्षों में काफी काम किया गया है, जिसके तहत अब तक 60 से अधिक नई पहल की गई हैं, जो सहकारिता क्षेत्र को परिपूर्ण करने में बहुत बड़ा योगदान देंगी।</p>
<p>अमित शाह ने कहा कि सरकार ने दो लाख पैक्स, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों का एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार करके पूरे देश में भेजा था। सभी राज्यों ने इसे स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि एक बार दो लाख प्राथमिक सहकारी समितियां पंजीकृत हो जाएंगी, तो देश में एक भी पंचायत ऐसी नहीं बचेगी जहां पैक्स, डेयरी या मत्स्य सहकारी समिति न हो। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर सहकारिता पूरे देश तक पहुंच सकेगी, जिससे तहसील और जिला स्तर पर सहकारी संस्थाओं का निर्माण होगा तथा राज्य संस्थाओं को भी नई ताकत और गति मिलेगी।</p>
<p><span>अमित शाह ने कहा कि श्वेत क्रांति 2.0 की मानक संचालन प्रक्रिया आज जारी की गई है। श्वेत क्रांति 2.0 महिला स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा कि श्वेत क्रांति 2.0 जहां एक तरफ महिलाओं को सशक्त बनाएगी, वहीं कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को भी ताकत देगी। दूध की उपलब्धता बढ़ने से इसका सबसे बड़ा लाभ गरीब और कुपोषित बच्चों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे</span> रोजगार सृजन होगा, जैविक खेती को मजबूती मिलेगी और देश में जैविक खेती के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ेगी।</p>
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<p>केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि "श्वेत क्रांति 2.0" का मकसद महिलाओं को सशक्त बनाना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और सहकारी समितियों का विस्तार करना है। उन्होंने कहा कि इससे पांच साल के अंदर डेयरी सहकारी समितियों द्वारा हर दिन दस करोड़ लीटर दूध खरीदने का अनुमान है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आजीविका में सुधार होगा। यह पहल डेयरी प्रसंस्करण और अवसंरचना विकास निधि (डीआईडीएफ), राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) और पशुपालन एवं डेयरी विभाग की योजनाओं का लाभ उठाएगी।</p>
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<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>सहकारिता मंत्रालय ने अगले पांच सालों में 70 हजार नई बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समितियां बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें 2026 तक 22,752 और 2029 तक 47,248 समितियां स्थापित होंगी। इसके अलावा, 56,500 नई डेयरी सहकारी समितियां और 6000 मत्स्य सहकारी समितियां बनाई जाएंगी। 46,500 मौजूदा डेयरी सहकारी समितियों और 5,500 मौजूदा मत्स्य सहकारी समितियों को भी सरकारी योजनाओं के जरिए मजबूत किया जाएगा। साथ ही, राज्य सरकारें 25,000 नई कृषि ऋण, डेयरी और मत्स्य समितियों का गठन करेंगी ताकि गांवों में आसानी से ऋण और अन्य सेवाएं मिल सकें।</p>
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	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश की हर पंचायत में होगी बहुद्देशीय प्राथमिक सहकारी समिति, दो लाख नये पैक्स गठित करने का फैसलाः अमित शाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

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        <title><![CDATA[वैश्विक सहकारी सम्मेलन से बढ़ेगी भारतीय सहकारिता की पहचानः दिलीप संघाणी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ica-general-assembly-and-global-cooperative-conference-will-boost-the-identity-of-indian-cooperatives-dileep-sanghani.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Sep 2024 19:06:55 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ica-general-assembly-and-global-cooperative-conference-will-boost-the-identity-of-indian-cooperatives-dileep-sanghani.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सहकारी क्षेत्र की प्रमुख संस्था इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड <strong>(इफको)</strong> के अध्यक्ष <strong>दिलीप&nbsp;संघाणी</strong> का कहना है कि पहली बार भारत में आयोजित होने वाले <strong>अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (आईसीए)</strong> के <strong>वैश्विक सहकारी सम्मेलन</strong> से पूरे विश्व में भारतीय सहकारिता की पहचान बढ़ेगी। सम्मेलन के बारे में जानकारी देते हुए दिलीप संघाणी ने बताया कि नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में <strong>25-30 नवंबर</strong> तक आयोजित होने वाले वैश्विक सहकारी सम्मेलन के दौरान लगभग <strong>100 देशों</strong> के प्रतिनिधियों को भारतीय सहकारिता क्षेत्र को जानने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सहकारिता मंत्रालय बनाने से देश में सहकारिता क्षेत्र को काफी बढ़ावा मिला है। इसी कड़ी में वैश्विक सहकारी सम्मेलन का भारत में आयोजन देश के सहकारिता आंदोलन को विश्व में एक अग्रणी स्थान दिलाएगा।&nbsp;</p>
<p>सहकारिता क्षेत्र के अनुभवी नेता <strong>दिलीप संघाणी</strong> का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के &lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; के स्वप्न को साकार करने के लिए केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता से जुड़े कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। देश के आर्थिक विकास और पांच ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने में सहकारिता क्षेत्र का बड़ा योगदान होगा। पैक्स का राष्ट्रीय डेटाबेस बनाना हो, या फिर पैक्स का कम्यूटरीकरण, केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में बहुत सारे मूलभूत बदलाव किए गए। देश में सहकार की भावना को प्रोत्साहन मिला है। इसी कड़ी में आईसीए के 130 साल के इतिहास में पहली बार आईसीए महासभा और वैश्विक सहकारी सम्मेलन की मेजबानी भारत द्वारा की जाएगी।&nbsp;</p>
<p>इफको 17 अन्य आईसीए सदस्य संगठनों के साथ मिलकर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। यह आयोजन सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के विशेष सहयोग और मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>जी-20 की तर्ज पर होंगे कार्यक्रम</strong></p>
<p>दिलीप संघाणी ने बताया कि जिस तरह भारत ने जी-20 सम्मेलन का सफल आयोजन किया था, उसी तरह वैश्विक सहकारी सम्मेलन भारत में आयोजित किया जाएगा है। सम्मेलन के दौरान भारतीय सहकारी समितियों को अपनी उपलब्धियों, चुनौतियों और योगदान को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान मिलेगा। कार्यक्रम में सहकारिता संबंधित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इफको की ओर से पूरे विश्व से आए सहकारी बंधुओं के समक्ष भारतीय सहकारिता आंदोलन की उपलब्धियां प्रदर्शित की जाएगी। &lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; की भावना से प्रेरित सम्मेलन की थीम &ldquo;सहकारिता: सबकी समृद्धि का द्वार&rdquo; रखी गई है।</p>
<p><strong>भारत से होगा अंतरराष्ट्रीय सहकारी वर्ष का ऐलान&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>सम्मेलन के दौरान वर्ष 2025 को संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय सहकारी वर्ष के रूप में मनाने की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। सम्मेलन में सहकारी क्षेत्र से युवाओं और महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने की योजनाओं पर भी विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन में भूटान के प्रधानमंत्री, संयुक्त राष्ट्र आर्थिक परिषद के अध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन के अध्यक्ष, फिजी के उप प्रधानमंत्री, संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों सहित 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों समेत लगभग 1500 अतिथियों के भाग लेने की संभावना है।&nbsp;</p>
<p><strong>कार्बन न्यूट्रल आयोजन&nbsp;</strong></p>
<p>संघाणी ने बताया कि कार्यक्रम के तहत देश की सहकारी समितियों को दूसरे देशों के सहकारी संगठनों के साथ जोड़ने का प्रयास भी किया जाएगा। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को भारत के विभिन्न राज्यों में ले जाकर वहां के सहकारी क्षेत्र के उत्कृष्ट कार्यों से रूबरू कराया जाएगा। संघानी ने बताया कि यह कार्यक्रम कार्बन तटस्थ होगा। यहां आने वाले प्रतिनिधियों की संख्या के लिहाज से करीब 4 हजार पीपल के पेड़ लगाने की जरूरत थी। लेकिन हमारी ओर से करीब 10 हजार पेड़ लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। कार्यक्रम को पूर्णरूप से मदिरा रहित और शुद्ध शाकाहारी बनाने की योजना है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ वैश्विक सहकारी सम्मेलन से बढ़ेगी भारतीय सहकारिता की पहचानः दिलीप संघाणी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृभको और नोवोनेसिस ने किसानों को एग्री बॉयो सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने के  लिए एमओयू किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/kribhco-and-novonesis-signed-an-mou-to-bring-biological-solution-to-indian-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 16 Sep 2024 15:49:58 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/kribhco-and-novonesis-signed-an-mou-to-bring-biological-solution-to-indian-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">देश की प्रमुख उर्वरक उत्पादक सहकारी कंपनी <strong>कृषक भारती सहकारी लिमिटेड (कृभको)</strong> और एग्री बॉयो सॉल्यूशंस का कारोबार करने वाली कंपनी <strong>नोवोनेसिस</strong> ने सोमवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत दोनों संस्थान एग्री बॉयो सॉल्यूशंस के क्षेत्र में सहयोग करेंगे जिससे फसलों की उपज और खेत की मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकेगा।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">पहले चरण में, भारत के किसानों को उन्नत माइकोरिज़ल जैव उर्वरक <strong>कृभको राइज़ोसुपर</strong> उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद,अगले चरण में अपने उद्योग क्षेत्र की ये दोनों अग्रणी कंपनियां नोवोनेसिस के अन्य बॉयो सॉल्यूशंस को भारत में उपलब्ध कराने की संभावनाओं का पता लगाएंगी। इसके अतिरिक्त, नोवोनेसिस कृभको को उसकी जैव उर्वरक उत्पादन सुविधा को मजबूत करने और अपनी माइक्रोबियल तकनीक की मदद से उत्पादों की संख्या को समृद्ध बनाने में भी सहायता करेगी।</p>
<p style="text-align: justify;">'कृभको राइजोसुपर&rsquo; फसलों के लिए उपयोगी कवकों के गुच्छों का जड़ों के पास की मिट्टी में तेजी से फैलाव करने मे सहायक होता है और राइजोस्फीयर (जड़ के आसपास की मृदा) में लाभकारी माइक्रोबियल गतिविधि को बढ़ाता है। इस प्रौद्योगिकी से पौधे की वृद्धि मजबूत होती है और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारती है। यह तकनीक फॉस्फेट वाले उर्वरक, अन्य पोषक तत्वों और पानी के व्यावहारिक उपयोग को संवर्धित करने में भी सहायक है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस साझेदारी के बारे में जानकारी देते हुए कृभको के प्रबंध निदेशक <strong>एम.आर. शर्मा</strong> ने कहा, &ldquo;यह साझेदारी एक नए युग की शुरुआत करेगी, जिसमें भारतीय किसानों को अत्याधुनिक जैव कृषि समाधान सुलभ होंगे। कृभको अपने किसानों को अभिनव कृषि जैव समाधानों के साथ उनको सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आधुनिक कृषि जैविक समाधान न केवल फसलों की उपज और मिट्टी की गुणवत्ता को बढ़ाते हैं, बल्कि पारिस्थितिकी की दृष्टि से स्वस्थ तरीकों से की जाने वाली कृषि के उद्देश्य को भी पूरा करते हैं। कृभको राइजोसुपर को अपनाकर, भारतीय किसान न केवल अपनी फसल की पैदावार में सुधार कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करते हुए हमारी भूमि के संरक्षक भी बन रहे हैं।&rdquo;</p>
<p style="text-align: justify;">नोवोनेसिस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (पश्चिम एशिया, भारत और अफ्रीका बाजार)<strong> कृष्ण मोहन पुव्वाडा</strong> ने कहा कि हम भारत में अग्रणी किसान सहकारी समितियों में से एक कृभको के साथ मिलकर एक अद्वितीय और अभिनव माइकोरिज़ल बायोफर्टिलाइज़र पेश करने को लेकर उत्साहित हैं। कृषि में जैव समाधानों की क्षमता का उपयोग कर, हम न केवल फसल पैदावार बेहतर के लिए नवाचार कर रहे हैं, बल्कि एक स्वस्थ भविष्य के लिए भी काम कर रहे हैं। यह साझेदारी जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और भारत में एक टिकाऊ कृषि का मार्ग प्रशस्त करने में महत्वपूर्ण है। इस साझेदारी को दोनों कंपनियों की विशेषज्ञता से लाभ होगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृभको और नोवोनेसिस ने किसानों को एग्री बॉयो सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने के  लिए एमओयू किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नेफेड को 2023&amp;#45;24 में 492 करोड़ रुपये का मुनाफा, 15% लाभांश देने की घोषणा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/nafed-earns-net-profit-of-rs-492-crore-in-2023-24-announces-15-percent-dividend.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 14 Sep 2024 15:19:06 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/nafed-earns-net-profit-of-rs-492-crore-in-2023-24-announces-15-percent-dividend.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित (नेफेड) ने वित्त वर्ष 2023-24 में 26,520.34 करोड़ रुपये का कारोबार और 492.38 करोड़ का शुद्ध लाभ अर्जित किया। यह नेफेड की स्थापना से अब तक का सबसे अधिक लाभ है। इस असाधारण प्रदर्शन को देखते हुए सदस्य संघों/सोसाइटियों को 15% लाभांश देने की घोषणा की गई है। शुक्रवार 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित नेफेड की 67वीं वार्षिक सामान्य बैठक (एजीएम) में इसके प्रबंध निदेशक रितेश चौहान ने यह जानकारी दी। एजीएम में विभिन्न सदस्य समितियों और राज्य संघों के लगभग 600 प्रतिनिधि मौजूद थे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66e43f9bbafef.jpg" alt="" /></p>
<p><em><strong>नेफेड चेयरमैन जेठाभाई अहीर।</strong></em></p>
<p>नेफेड अध्यक्ष जेठाभाई अहीर ने अपने मुख्य भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सहकारी क्षेत्र के कल्याण के लिए अलग मंत्रालय के गठन और इस मंत्रालय की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को सौंपने के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने सहकारिता मंत्रालय के उन प्रयासों की सराहना की जिन्होंने पैक्स को कृषि उपार्जन, डेयरी, मछली पालन, भण्डारण, दवा वितरण, खाद वितरण, पानी समिति, पेट्रोल पम्प संचालन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में बहुउद्देशीय बना दिया।&nbsp;</p>
<p>नेफेड अध्यक्ष ने केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्री प्रल्हाद जोशी, राज्य सरकारों और सभी एजेंसियों का भी आभार व्यक्त किया जिनके सहयोग से नेफेड विभिन्न योजनाओं को लागू कर सका। ऐसी ही एक पहल भारत ब्रांड उत्पादों की शुरुआत है, जो उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार के खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग की ओपन मार्केट सेल स्कीम (ओएमएसएस) के तहत की गई है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को सस्ती कीमतों पर उत्पाद उपलब्ध कराना और किसानों की उपज के लिए एक विश्वसनीय बाजार प्रदान करना है। इस मौके पर वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली कुछ चयनित शाखाओं और सदस्य समितियों को सम्मानित किया गया।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66e440b680fdd.jpg" alt="" /></p>
<p><em><strong>नेफेड एमडी रितेश चौहान।</strong></em></p>
<p>नेफेड (Nafed) के प्रबंध निदेशक रितेश चौहान ने किसानों के कल्याण के लिए संघ के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला, जिसमें केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा 4 जनवरी 2024 को प्रारंभ किया गया ई-समृद्धि पोर्टल शामिल है। अब तक लगभग 17.5 लाख किसान इस पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं और यह संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्री ने नेफेड दौरे में संघ को प्रेरित किया और इसे कृषि विपणन गतिविधियों के विस्तार के लिए प्रोत्साहित किया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नेफेड को 2023-24 में 492 करोड़ रुपये का मुनाफा, 15% लाभांश देने की घोषणा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृभको ने सत्येन्द्र नारायण सिंह को सहकारिता शिरोमणि और सेंथिल कुमार को सहकारिता विभूषण पुरस्कार दिया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/satyendra-narayan-singh-gets-sahakarita-shiromani-award-of-kribhco-senthil-kumar-gets-sahakarita-vibhushan-award.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Sep 2024 15:19:00 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/satyendra-narayan-singh-gets-sahakarita-shiromani-award-of-kribhco-senthil-kumar-gets-sahakarita-vibhushan-award.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) ने सामाजिक, सहकारी और कृषि विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए दो प्रतिष्ठित सहकारी संचालकों को पुरस्कृत किया है। कृभको की नई दिल्ली में 12 सितंबर को आयोजित 44वीं सालाना आम सभा (एजीएम) में वर्ष 2023-24 के लिए बिहार के सत्येन्द्र नारायण सिंह को सहकारिता शिरोमणि पुरस्कार और तमिलनाडु के वी. के.एस.के. सेंथिल कुमार को सहकारिता विभूषण पुरस्कार दिया।</p>
<p>कृभको सहकारिता शिरोमणि पुरस्कार 2023-24 से सम्मानित सत्येन्द्र नारायण सिंह बिहार के भोजपुर जिले से आते हैं। कृभको द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि वह बिहार सहकारी आंदोलन के एक प्रतिष्ठित मार्गदर्शक हैं। सहकारी विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता विभिन्न नेतृत्व भूमिकाओं में उनकी व्यापक सेवा के माध्यम से स्पष्ट होती है। उन्होंने 2003 से 2011 तक बिहार राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष के रूप में सेवा की और वर्तमान में केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष हैं।</p>
<p>उनका सहकारी क्षेत्र में योगदान पिछले कई दशकों से जारी है, और उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई), बिहार राज्य औद्योगिक सहकारी संघ और बिहार राज्य वित्त निगम जैसे संगठनों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी सेवाओं ने सहकारी आंदोलन को मजबूत किया और ग्रामीण विकास के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को आज सराहा जा रहा है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66e4038d68d43.jpg" alt="" width="585" height="412" /><br /><strong>कृभको के अध्यक्ष डॉ. चंद्र पाल सिंह से पुरस्कार ग्रहण करते हुए वी. के. एस. के. सेंथिल कुमार</strong></p>
<p><strong>1990 के दशक से सहकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं सेंथिल कुमार&nbsp;</strong></p>
<p>तमिलनाडु के कोयंबटूर के वी. के. एस. के. सेंथिल कुमार 1990 के दशक से ही सहकारिता के क्षेत्र से जुड़े हैं। उन्होंने इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीई की डिग्री प्राप्त की और मानव संसाधन (एचआर) में एमबीए किया। 1996 से 2001 तक थुडियालुर कोऑपरेटिव एग्रीकल्चरल सर्विसेज लिमिटेड के उपाध्यक्ष और निदेशक के रूप में कार्य किया। उनकी नेतृत्व क्षमता ने उन्हें सहकारी क्षेत्र में शीघ्र ही एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया। 2022 से वह कोयंबटूर जिला कृषि उत्पादन पहल के सक्रिय सदस्य हैं और अपने क्षेत्र में कृषि और सहकारी सेवाओं को निरंतर मजबूत कर रहे हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66e403184f86f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृभको ने सत्येन्द्र नारायण सिंह को सहकारिता शिरोमणि और सेंथिल कुमार को सहकारिता विभूषण पुरस्कार दिया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66e403184f86f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृभको ने वित्त वर्ष 2023&amp;#45;24 में मजबूत वृद्धि दर्ज की, 20 फीसदी लाभांश की घोषणा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/kribhco-records-robust-growth-in-fy-2023-24-declares-20-per-cent-dividend.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 12 Sep 2024 19:57:41 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/kribhco-records-robust-growth-in-fy-2023-24-declares-20-per-cent-dividend.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश की प्रमुख उर्वरक उत्पादक किसान सहकारी समिति <strong>कृषक भारती कोआपरेटिव लिमिटेड </strong><strong>(</strong><strong>कृभको</strong><strong>)</strong> ने वित्त वर्ष 2023-2024 में 334.12 करोड़ रुपये का कर-पूर्व लाभ अर्जित किया है। कृभको ने इस वर्ष अपनी इक्विटी पूंजी पर 20 फीसदी लाभांश घोषित किया।&nbsp;</p>
<p>गुरुवार को नई दिल्ली के एनसीयूआई सभागार में आयोजित कृभको की 44वीं वार्षिक आमसभा की बैठक के दौरान सोसायटी के वार्षिक खातों को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्&zwj;यक्षता निदेशक मंडल की उपस्थिति में कृभको के अध्यक्ष डॉ. चंद्र पाल सिंह ने की। बैठक में देश भर की विभिन्&zwj;न सदस्&zwj;य सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर कृभको के अध्यक्ष <strong>डॉ. चंद्र पाल सिंह</strong> ने कहा कि कृभको ने वित्&zwj;त वर्ष 2023-2024 में उल्&zwj;लेखनीय प्रदर्शन किया है। कृभको का यूरिया उत्&zwj;पादन 23.35 लाख मीट्रिक टन और अमोनिया उत्&zwj;पादन 13.88 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। इस प्रकार क्रमश: 106.4 फीसदी और 111.32 फीसदी क्षमता उपयोग हुआ। किसानों की विविध आवश्&zwj;यकताओं को पूरा करने के लिए उत्&zwj;पादों का विस्&zwj;तार करते हुए कृभको के पोर्टफोलियों में न केवल नीम लेपित यूरिया बल्कि आयातित डीएपी, एमएपी, एमओपी, कॉम्&zwj;प्&zwj;लेकस, जैव उर्वरक, खाद, प्रमाणित बीज, हाइब्रिड बीज, एसएसपी, जिंक सल्&zwj;फेट, प्राकृतिक पोटाश और सी वीड फोर्टिफाइ बायो-उत्&zwj;तेजक भी शामिल हैं। वर्ष के दौरान कृभको ने कुल मिलाकर 52.82 लाख मीट्रिक टन उर्वरक (यूरिया और कॉम्&zwj;प्&zwj;लेकस उर्वरक सहित) बेचे। डॉ. चंद्र पाल सिंह का कहना है कि कृभको देश के गांव-किसान और सहकारी आंदोलन को मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66e2fdd5b151f.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>कृभको के पूर्ण स्&zwj;वामित्&zwj;व वाली सहायक कंपनी <strong>कृभको फर्टिलाइजर्स लिमिटेड </strong><strong>(</strong><strong>केएफएल</strong><strong>)</strong> ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए 10.66 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 6.54 लाख मीट्रिक टन अमोनिया का उत्&zwj;पादन किया जिससे क्रमश: 123.23 फीसदी और 130.46 फीसदी क्षमता उपयोग हुआ। &nbsp;केएफएल ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए 14.40 करोड़ रुपये का लाभांश घोषित किया है।&nbsp;</p>
<p>कृभको के प्रबंध निदेशक <strong>एम. आर. शर्मा</strong> ने कृभको और उसकी सहायक कंपनियों द्वारा स्थापित उत्&zwj;पादन और परिचालन दक्षता के उच्&zwj;च मानकों के बारे में जानकारी दी। कृभको ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए नए क्षेत्रों में भी कदम रखा है। इसकी पूर्ण स्&zwj;वामित्&zwj;व वाली सहायक कंपनियां कृभको एग्री बिजनेस लिमिटेड (केएबीएल) और कृभको ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड महत्&zwj;वपूर्ण योगदान दे रही है। केएबीएल ने वित्&zwj;त वर्ष 2023-2024 में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चावल, मिर्च, मक्&zwj;का, मखाना और दाल जैसे विभिन्न कृषि उत्पादों की बिक्री से 821 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। कृभको ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड अक्षय ऊर्जा उत्पादन के लिए हजीरा, गुजरात और नैलोर, आंध्र प्रदेश में दो संयंत्रों का निर्माण कर रहा है, जिनके वित्&zwj;त वर्ष 2024-2025 में चालू होने की उम्&zwj;मीद है।&nbsp;</p>
<p>वार्षिक आम सभा के दौरान कृभको ने भारत में सहकारी आंदोलन में उल्&zwj;लेखनीय योगदान के लिए दो प्रतिष्ठित सहकारी बंधुओं को सम्&zwj;मानित किया। बिहार के <strong>सत्&zwj;येन्&zwj;द्र नारायण सिंह</strong> को <strong>&lsquo;</strong><strong>कृभको सहकारिता शिरोमणि</strong><strong>&rsquo;</strong> पुरस्&zwj;कार और तमिलनाडु के <strong>वी.के.एस.के. सेंथिल&nbsp; कुमार</strong> को <strong>&lsquo;</strong><strong>कृभको सहकारिता विभूषण</strong><strong>&rsquo;</strong> पुरस्&zwj;कार से सम्&zwj;मानित किया गया।&nbsp;</p>
<p>ग्रामीण विकास के प्रति समर्पित कृभको का <strong>ग्रामीण विकास ट्रस्&zwj;ट (जीवीटी)</strong> इस साल अपनी 25वीं वर्षगांठ मना रहा है। जीवीटी ने ग्रामीण विकास, स्&zwj;वास्&zwj;थ्&zwj;य सेवा, शिक्षा और लैंगिक समानता पर केंद्रित पहल के माध्&zwj;यम से 25 राज्&zwj;यों में 15 लाख लोगों के जीवन पर सकारात्&zwj;मक प्रभाव डाला है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>सहकारिता मंत्रालय के मार्गदर्शन में भारत सरकार के &lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; के दृष्टिकोण के अनुरूप कृभको भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) &nbsp;के प्रमुख प्रवर्तक और राष्&zwj;ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) के संयुक्&zwj;त प्रवर्तक के रूप में सहकारी समितियों के बीच बीज और निर्यात गतिविधियों को बढावा देने में महत्&zwj;वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कृभको को अपने उत्&zwj;कृष्&zwj;ठ प्रदर्शन के लिए एफएआई और अन्&zwj;य प्रतिष्ठित संगठनों से कई पुरस्&zwj;कार प्राप्&zwj;त हुए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृभको ने वित्त वर्ष 2023-24 में मजबूत वृद्धि दर्ज की, 20 फीसदी लाभांश की घोषणा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिल्ली में क्रेडिट सोसाइटियों की ऋण सीमा बढ़ी, अब दे पाएंगी 5 लाख तक का कर्ज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/loan-limit-increased-for-credit-societies-in-delhi-now-members-will-be-able-to-take-loan-up-to-rs-5-lakh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Sep 2024 15:18:04 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/loan-limit-increased-for-credit-societies-in-delhi-now-members-will-be-able-to-take-loan-up-to-rs-5-lakh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दिल्ली में क्रेडिट सोसाइटियों की ऋण सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी गई है। सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। अब सामान्य सदस्यों के लिए ऋण सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये और वेतनभोगी सदस्यों के लिए यह सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है।&nbsp;</p>
<p>सहकार भारती से जुड़े यूनाइटेड थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटीज फेडरेशन ऑफ दिल्ली लिमिटेड (यूटीसीएसएफ) के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। संगठन की ओर से काफी समय से क्रेडिट सोसायटियों की कर्ज सीमा बढ़ाने की मांग की जा रही थी। कर्ज सीमा बढ़ाने से दिल्ली की सैकड़ों क्रेडिट सोसाइटियों और उनके सदस्यों को फायदा होगा, जो विभिन्न जरूरी खर्चों के लिए इन ऋणों पर निर्भर रहते हैं। पिछले दस सालों से ऋण सीमा में कोई वृद्धि नहीं हुई थी।</p>
<p>रजिस्ट्रार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि क्रेडिट सोसाइटियों की ऋण सीमा में पिछले दस साल से कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि इस दौरान मुद्रास्फीति और खर्चों में वृद्धि हुई है। ऐसे में सामान्य सदस्यों के लिए ऋण सीमा बढ़ाकर 4 लाख रुपये और वेतनभोगी सदस्यों के लिए बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। सामान्य बचत और ऋण समितियों में ऋण की सीमा सदस्यों के चुकता शेयरों के मूल्य का बीस गुना होगी, जबकि वेतनभोगी समितियों के लिए यह पच्चीस गुना तक बढ़ाई जा सकती है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66e167d0a6e59.jpg" alt="" width="528" height="662" /></p>
<p>यूनाइटेड थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटीज फेडरेशन ऑफ दिल्ली लिमिटेड ने इस आदेश का स्वागत करते हुए इसे बड़ी उपलब्धि बताया है। सहकार भारती के वरिष्ठ अधिकारी और महासंघ के अध्यक्ष <strong>सुनील गुप्ता</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि यह कदम दिल्ली में सहकारी आंदोलन को मजबूत करेगा और महासंघ की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p>
<p>गुप्ता ने कहा कि सहकार भारती और महासंघ भविष्य में भी सहकारी आंदोलन को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे। उन्होंने तीन साल पहले अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान को भी सराहा। गुप्ता के अनुसार, महासंघ सरकार के मजबूत और सक्षम सहकारी क्षेत्र के दृष्टिकोण का समर्थन करता रहेगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिल्ली में क्रेडिट सोसाइटियों की ऋण सीमा बढ़ी, अब दे पाएंगी 5 लाख तक का कर्ज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत में होगा वैश्विक सहकारिता सम्मेलन का आयोजन, जुटेंगे 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/global-cooperative-conference-will-be-organized-in-india-experts-from-all-over-the-world-will-explore-the-future-path-of-cooperative-sector.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 09 Sep 2024 19:53:21 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/global-cooperative-conference-will-be-organized-in-india-experts-from-all-over-the-world-will-explore-the-future-path-of-cooperative-sector.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (आईसीए) के 130 साल के इतिहास में पहली बार भारत में आईसीए महासभा और वैश्विक सहकारिता सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जो इफको की पहल पर हो रहा है। 28 जून 2023 को ब्रुसेल्स में आईसीए निवेशक मंडल की बैठक के दौरान इफको ने इस सम्मेलन की मेजबानी का प्रस्ताव रखा था, जिसे आईसीए के निदेशक मंडल ने मंजूरी दी। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुई बैठक में तय हुआ कि इस सम्मेलन के दौरान 2025 को संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के रूप में मनाया जाएगा।</p>
<p>वैश्विक सहकारिता सम्मेलन 25 से 30 नवंबर 2024 तक नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित होगा। केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह 25 नवंबर को कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे और मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करेंगे। इस मौके पर 2025 के अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष पर एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया जाएगा। इस आयोजन की घोषणा सोमवार को दिल्ली में इफको द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई, जिसमें आईसीए के महानिदेशक जेरोन डगलस, केंद्रीय सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी और इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी मौजूद थे।</p>
<p>इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कहा कि "इस सम्मेलन का विषय 'सहकारिता: सबकी समृद्धि का द्वार' है, जिसका उद्देश्य समृद्ध और सुरक्षित सहकारिता आंदोलन को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में सहकारिता क्षेत्र के भविष्य के विकास और सहकारी समितियों में सुधार पर चर्चा की जाएगी। सम्मेलन के दौरान भारतीय सहकारी उत्पादों और सेवाओं को प्रदर्शित करने के लिए "हाट" का आयोजन भी किया जाएगा, जिसका थीम भारतीय गांव होगा। उन्होंने कहा कि भारत में करीब 8 लाख सहकारी समितियां हैं, जो विश्व में 30 लाख सहकारी समितियों में से एक बड़ी संख्या है, और भारत के सहकारी क्षेत्र ने कृषि और संबंधित क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
<p>आईसीए के महानिदेशक जेरोन डगलस ने कहा कि इफको आईसीए का एक प्रमुख साझेदार है। इस सम्मेलन में भूटान के प्रधानमंत्री, संयुक्त राष्ट्र आर्थिक परिषद के अध्यक्ष, आईसीए के अध्यक्ष, संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि और 100 से अधिक देशों के 1500 से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे।</p>
<p>केंद्रीय सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि इस सम्मेलन का विषय भारत सरकार के "सहकार से समृद्धि" नारे के अनुरूप है। सहकारिता मंत्रालय के गठन के पश्चात केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारी आंदोलन के सशक्तिकरण हेतु 54 नई पहल शुरू की गई है जो भारतीय सहकारी क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर सिद्ध होंगी। जिनमें पैक्स का कंप्यूटरीकरण और नए क्षेत्रों में सहकारी समितियों का गठन शामिल है। इन कदमों से भारत वैश्चिक सहकारिता आंदोलन में सर्वाधिक तेजी से बढ़ रहे देशों में शामिल हो गया है।\</p>
<p>इस आयोजन को पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए इफको ने इसे कार्बन न्यूट्रल रखने का निर्णय लिया है। संभावित कार्बन उत्सर्जन की भरपाई के लिए 10 हजार पीपल के पौधे लगाए जाएंगे। भारतीय और वैश्विक सहकारिताओं के बीच परस्पर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 'कॉप-टू-कॉप' विदेशी व्यापार सत्र भी आयोजित किए जाएंगे, जो सहकारिता आंदोलन के भविष्य को और मजबूत करेंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत में होगा वैश्विक सहकारिता सम्मेलन का आयोजन, जुटेंगे 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृभको ने एमआर शर्मा को प्रबंध निदेशक नियुक्त किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/kribhco-announces-the-appointment-of-mr-sharma-as-managing-director.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 02 Sep 2024 16:11:28 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/kribhco-announces-the-appointment-of-mr-sharma-as-managing-director.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सहकारी क्षेत्र की अग्रणी संस्था कृषक भारती सहकारी लिमिटेड (कृभको) ने <strong>एमआर शर्मा</strong> को प्रबंध निदेशक नियुक्त करने का ऐलान किया है। वह 1 सितंबर, 2024 से नया पदभार संभालेंगे। अपनी नई भूमिका के अलावा, एमआर शर्मा कृभको के निदेशक (तकनीकी) के रूप में भी कार्य करते रखेंगे।&nbsp;</p>
<p>आईआईटी रुड़की (1981) से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक एमआर शर्मा उर्वरक उद्योग में, विशेष रूप से अमोनिया और यूरिया उत्पादन एकीकृत परिसरों में 42 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वह कृभको के प्रबंध निदेशक के पद तक पहुंचने वाले पहले स्नातक इंजीनियर प्रशिक्षु (जीईटी) हैं, जिन्होंने 1982 में कृभको के साथ अपने करियर की शुरूआत की थी।&nbsp;</p>
<p>कृभको में अपने शानदार करियर के दौरान, एमआर शर्मा ने कई परियोजनाओं का नेतृत्व किया और उत्पादन क्षमता का विस्तार करने के लिए अमोनिया और यूरिया परिसर के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कोविड-19 के दौरान, जब पश्चिमी भारत के अधिकांश उर्वरक संयंत्र कच्चे माल और कार्यबल की अनुपलब्धता के कारण बंद होने को मजबूर थे, तब एमआर शर्मा रिकॉर्ड ऊर्जा दक्षता के साथ उत्पादन सुविधा को 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर चालू रखने में कामयाब रहे थे। उनके सराहनीय योगदान के लिए, उन्हें दक्षिणी गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा उत्कृष्ट सीईओ के रूप में सम्मानित किया गया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृभको ने एमआर शर्मा को प्रबंध निदेशक नियुक्त किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनएफसीएसएफ ने इथेनॉल पर सरकार के फैसले का स्वागत किया, लंबित मांगों को भी पूरा करने का किया अनुरोध]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/nfcsf-welcomes-governments-decision-on-ethanol-also-requests-to-fulfill-pending-demands.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 30 Aug 2024 19:24:32 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/nfcsf-welcomes-governments-decision-on-ethanol-also-requests-to-fulfill-pending-demands.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए गन्ने के रस, चीनी की चाशनी और बी-हैवी मोलेसेस <span></span>से इथेनॉल उत्पादन पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया है। यह प्रतिबंध 6 दिसंबर, 2023 को लगाया गया था, जिसमें 15 दिसंबर, 2023 को आंशिक रूप से राहत दी गई थी, लेकिन अब 29 अगस्त, 2024 को पूरी तरह से हटा लिया गया है। इस फैसले से अब देश की <span>डिस्टलीरिज&nbsp;</span>2024-25 सीजन में इन सामग्रियों से अपनी पूरी क्षमता तक इथेनॉल का उत्पादन कर सकेंगी।</p>
<p>जुलाई 2024 के अंत तक देश की इथेनॉल उत्पादन क्षमता 1,590 करोड़ लीटर थी, लेकिन 2023-24 के वित्तीय वर्ष में तेल कंपनियों ने सिर्फ 505 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदा। पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण 13.3 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, और सरकार का लक्ष्य इसे 2025-26 के अंत तक 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का है। सरकार के इस फैसले से इथेनॉल उत्पादन में बढ़ोतरी और चीनी के इथेनॉल में डायवर्जन से चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद है।</p>
<p>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंत्रियों अमित शाह, हरदीप सिंह पुरी, और प्रह्लाद जोशी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि एनएफसीएसएफ ने इस मुद्दे को सरकार के सामने सक्रिय रूप से उठाया है। 10 अगस्त 2024 को नई दिल्ली में हुए एक सम्मेलन में एनएफसीएसएफ ने अपना पक्ष रखा था।</p>
<p>एनएफसीएसएफ के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाईकनवरे ने कहा कि गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हैवी मोलेसेस से बने इथेनॉल की खरीद दरों की घोषणा पिछले दस महीने से नहीं की गई है। उन्होंने जोर दिया कि इन दरों की जल्द घोषणा जरूरी है ताकि चीनी मिलें अपनी उत्पादन योजनाओं को अंतिम रूप दे सकें। साथ चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य भी अभी तय नहीं हुआ है, और एनएफसीएसएफ इस मुद्दे को हल करने के प्रयास में जुटा हुआ है।</p>
<p>नाईकनवरे ने कहा कि 24 अप्रैल, 2024 को सरकार द्वारा जारी एक अध्यादेश के माध्यम से 7.5 लाख टन बी-हैवी मोलेसेस का उपयोग इथेनॉल उत्पादन के लिए करने की अनुमति दी गई है। इस इथेनॉल को 1 अगस्त से 31 अक्टूबर 2024 तक तेल कंपनियों द्वारा खरीदा जाएगा, जिससे चीनी मिलों को 2,300 करोड़ रुपये तक की आय हो सकती है। उन्होंने कहा कि&nbsp;एनएफसीएसएफ ने 93 चीनी मिलों को अपनी मशीनरी को उन्नत करने और मक्का से इथेनॉल उत्पादन के लिए सुझाव दिया है। सरकार ने मक्का से बने इथेनॉल की खरीद दर 71.86 रुपये प्रति लीटर तय की है। इसके अलावा, एनएफसीएसएफ इन मिलों के लिए ब्याज छूट योजना को भी लागू करने के प्रयास कर रहा है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66d1ccb68f111.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनएफसीएसएफ ने इथेनॉल पर सरकार के फैसले का स्वागत किया, लंबित मांगों को भी पूरा करने का किया अनुरोध ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्रीय उर्वरक मंत्री जे पी नड्डा से मिले इफको के एमडी, नैनो उर्वरकों और अन्य परियोजनाओं पर हुई चर्चा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-md-dr-us-awasthi-met-jp-nadda-discussed-nano-fertilizers-and-other-projects.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 21 Aug 2024 18:54:40 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-md-dr-us-awasthi-met-jp-nadda-discussed-nano-fertilizers-and-other-projects.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इफको के प्रबंध निदेशक (एमडी) और सीईओ, डॉ. यू.एस. अवस्थी ने बुधवार को केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा से दिल्ली स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात की। इस बैठक में डॉ. अवस्थी ने केंद्रीय उर्वरक मंत्री को इफको द्वारा विश्व में पहली बार विकसित किए गए इफको नैनो यूरिया प्लस और नैनो डीएपी तरल जैसे नैनो उर्वरकों व किसानों के लिए इफको की परियोजनाओं व पहल की जानकारी दी।&nbsp;</p>
<p>डॉ. अवस्थी ने केंद्रीय मंत्री को इफको की देश भर में चल रही ड्रोन ग्रामीण उद्यमी परियोजना और इफको नैनो ग्राम की गतिविधियों के बारे में भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि इफको किसानों के लाभ के लिए विभिन्न सेवाओं को संचालित कर रही है और इन प्रयासों से किसानों की उपज और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">आज केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और रसायन और उर्वरक मंत्री माननीय श्री <a href="https://twitter.com/JPNadda?ref_src=twsrc%5Etfw">@JPNadda</a> जी से मुलाक़ात उनके कार्यालय में हुई। इफको द्वारा विश्व में पहली बार बनाये गये नैनो उर्वरकों जैसे की इफको नैनो यूरिया प्लस व नैनो डी ए पी तरल के बारे में जानकारी दी। इफको की देश में चलायी जा रही&hellip; <a href="https://t.co/oytguo2BoT">pic.twitter.com/oytguo2BoT</a></p>
&mdash; Dr. U S Awasthi (@drusawasthi) <a href="https://twitter.com/drusawasthi/status/1826212419972014090?ref_src=twsrc%5Etfw">August 21, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>डॉ. अवस्थी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के अपने हैंडल पर बैठक की जानकारी साझा की। एक ट्वीट में उन्होंने बताया कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री को इफको के ड्रोन ग्रामीण उद्यमी कार्यक्रम के बारे में बताया, जिसमें देशभर के 1,700 से अधिक ग्रामीण उद्यमियों को नैनो उर्वरकों के छिड़काव के लिए प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने इफको की नैनो मॉडल विलेज पहल पर भी चर्चा की जिसका लक्ष्य 800 से अधिक गांवों में नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूकता और प्रोत्साहन देना है।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने इफको की देश सेवा और किसानों और सहकारिता के प्रति उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी सहकारी संस्था इफको हमेशा किसानों की भलाई और कृषि क्षेत्र के विकास के लिए काम करती रहेगी।</p>
<div class="mt-1 flex gap-3 empty:hidden -ml-2">
<div class="items-center justify-start rounded-xl p-1 flex">
<div class="flex items-center">
<div class="flex items-center pb-0"><span class="overflow-hidden text-clip whitespace-nowrap text-sm"></span></div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66c5e1aceccb5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्रीय उर्वरक मंत्री जे पी नड्डा से मिले इफको के एमडी, नैनो उर्वरकों और अन्य परियोजनाओं पर हुई चर्चा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमित शाह से मिले इफको के एमडी, आईसीए कॉन्फ्रेंस की तैयारियों पर चर्चा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-md-dr-us-awasthi-met-amit-shah-briefed-preparations-for-ica-global-cooperative-conference.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 01 Aug 2024 18:01:56 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-md-dr-us-awasthi-met-amit-shah-briefed-preparations-for-ica-global-cooperative-conference.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस (आईसीए) की ग्लोबल कोऑपरेटिव कॉन्फ्रेंस पहली बार भारत में आयोजित होने जा रही है। इफको के प्रबंध निदेशक और सीईओ डॉ. यू.एस. अवस्थी ने आईसीए के आगामी सम्मेलन और कई महत्वपूर्ण पहलों के बारे में केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की।</p>
<p>गुरुवार को संसद भवन स्थित लोकसभा सचिवालय में हुई बैठक के दौरान डॉ. अवस्थी ने आईसीए के वैश्विक सहकारी सम्मेलन की तैयारियों और इसके महत्व के बारे में केंद्रीय मंत्री अमित शाह को अवगत कराया। नवंबर, 2024 में आयोजित होने वाले सम्मेलन में भाग लेने के लिए दुनिया भर के सहकारी नेता भारत आएंगे। यह पहली बार है कि भारत आईसीए की ग्लोबल कोऑपरेटिव कॉन्फ्रेंस की मेजबानी करेगा। यह वैश्विक सहकारी क्षेत्र में देश के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।</p>
<p>सम्मेलन के अलावा, डॉ. अवस्थी ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह को इफको के हालिया नवाचारों के बारे में बताया, जिसमें इफको नैनो यूरिया प्लस और इफको नैनो डीएपी की शुरूआत शामिल है। ये उत्पाद अधिक कुशल और टिकाऊ समाधानों के साथ कृषि में क्रांतिकारी बदलाव लाने के इफको के मिशन का हिस्सा हैं। डॉ. अवस्थी ने ग्रामीण उद्यमियों को कृषि-ड्रोन संचालन में प्रशिक्षित करने की इफको की पहल के बारे में भी अमित शाह को अवगत कराया। इसका उद्देश्य सटीक कृषि को बढ़ावा देना और ग्रामीण समुदायों के लिए नए अवसर प्रदान करना है। डॉ. अवस्थी ने बताया कि केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री के साथ काफी अच्छी बैठक हुई।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66ab7a49e93e7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमित शाह से मिले इफको के एमडी, आईसीए कॉन्फ्रेंस की तैयारियों पर चर्चा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नैनो उर्वरक पर 50 फीसदी सब्सिडी देगी गुजरात सरकार, सहकारिता दिवस पर कई ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/gujarat-government-will-give-50-percent-subsidy-on-nano-fertilizer-many-announcements-on-cooperative-day.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 06 Jul 2024 16:39:25 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/gujarat-government-will-give-50-percent-subsidy-on-nano-fertilizer-many-announcements-on-cooperative-day.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गुजरात सरकार किसानों को नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की खरीद पर 50 फीसदी सब्सिडी देगी। आज अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह तथा सहकारिता मंत्री <strong>अमित शाह</strong> ने गुजरात सरकार द्वारा नैनो उर्वरक की खरीद के लिए किसानों को 50 फीसदी की सहायता राशि देने की योजना का शुभारंभ किया। साथ ही, नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक लिमिटेड (NCOL) द्वारा निर्मित <strong>भारत ऑर्गेनिक आटा</strong> का लोकार्पण भी किया।&nbsp;</p>
<p>102वें अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर गुजरात के गांधीनगर में आयोजित <strong>&lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo;</strong> सम्मेलन में अमित शाह ने सहकारिता और कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई योजनाओं का लोकार्पण किया। आज ही के दिन वर्ष 2021 में केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की गई थी। सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय किसानों, पशुपालकों व मत्स्य पालकों की आय को बढ़ाने और देश व दुनिया को शुद्ध खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। जल्द ही केंद्र सरकार राष्ट्रीय <strong>सहकारिता नीति</strong> लाने जा रही है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>अमित शाह ने कार्यक्रम के दौरान नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल) द्वारा निर्मित भारत ऑर्गेनिक आटा लॉन्च किया तथा दिल्ली के मयूर विहार में <strong>अमूल</strong> <strong>ऑर्गेनिक स्टोर</strong> का वर्चुअल उद्घाटन किया। उन्होंने किसानों को नैनोफर्टिलाइजर किट भी वितरित कीं। सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि आज भी देश में 2 लाख पंचायतें ऐसी हैं जहां एक भी सहकारी संस्था नहीं है। अगले 5 वर्षों में हम इन दो लाख पंचायतों में बहुउद्देशीय पैक्स बनाने का काम करेंगे। आज देश में 65,000 क्रियाशील पैक्स में से 48,000 ने अपने आप में कुछ नई गतिविधि जोड़कर व्यवहार्य बनने की दिशा में पहल की है।</p>
<p>सहकारिता क्षेत्र की मजबूती के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों की जानकारी देते हुए अमित शाह ने कहा कि सरकार ने <strong>एथेनॉल</strong> को बढ़ावा देने और <strong>मक्का</strong> उत्पादक किसानों की समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार की दो बड़ी सहकारी संस्थाएं किसानों द्वारा उत्पादित मक्का को ऑनलाइन न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदेंगी तथा उससे एथेनॉल बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे न केवल किसान समृद्ध होंगे बल्कि पेट्रोल के आयात को कम कर देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इसी तरह अब भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) और उपभोक्ता सहकारी संस्थाएं भी 4 प्रकार की दालों की खरीद एमएसपी पर करेंगी।</p>
<p>सहकारी समितियों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर देते हुए केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि यदि हम सहकारी क्षेत्र के सभी आर्थिक लेन-देन सहकारी क्षेत्र में ही करेंगे तो हमें बाहर से एक पैसा भी लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने इस दिशा में गुजरात के<strong> बनासकांठा</strong> और<strong> पंचमहल</strong> जिलों में शुरू की गई पायलट परियोजनाओं की प्रगति की सराहना की। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और सहकारिता क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_668926034a066.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668925d4aca90.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नैनो उर्वरक पर 50 फीसदी सब्सिडी देगी गुजरात सरकार, सहकारिता दिवस पर कई ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668925d4aca90.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको के नैनो उर्वरक संवर्धन महाअभियान की शुरुआत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-nano-fertilizer-promotion-campaign-launched.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 02 Jul 2024 20:00:23 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-nano-fertilizer-promotion-campaign-launched.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नैनो उर्वरकों के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए&nbsp; नैनो उर्वरक उपयोग संवर्धन महाअभियान की शुरुआत 1 जुलाई 2024 को इफको द्वारा की गई है। इसके अंतर्गत इफको द्वारा 200 मॉडल नैनो ग्राम समूह (क्लस्टर) चयनित किए गए हैं। इसके माध्यम से 800 गाँवों के किसानों को इफको द्वारा नैनो यूरिया प्लस, नैनो डीएपी एवं सागरिका के मूल्य (MRP) पर 25 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है ताकि किसान अपने खेतों में नैनो उर्वरकों का अधिक से अधिक प्रयोग कर सकें। इसके साथ ही इफको द्वारा ड्रोन उद्यमी को 100 रुपए प्रति एकड़ की दर से अनुदान दिया जाएगा जिससे किसानों को कम दरों पर छिड़काव की सुविधा प्राप्त हो सके। इन मॉडल नैनो गाँवों में जो फसल होगी उसकी गुणवत्ता एवं उत्पादन की वृद्धि का आंकलन कर किसानों को अवगत कराया जाएगा।</p>
<p>नैनो उर्वरकों का खेती में प्रयोग बढ़ाने के लिए माननीय प्रधान मंत्री जी ने भी 100 दिवसीय कार्य योजना&nbsp; की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत 413 जिलों में नैनो डीएपी (तरल) के 1270 प्रदर्शन एवं 100 जिलो में नैनो यूरिया प्लस (तरल) के 200 परीक्षण किये जाएंगे। इन परीक्षणों में कृषि विज्ञान केंद्र, राज्य कृषि विश्वविद्यालय एवं अन्य शोध संस्थानों की मदद ली जाएगी और भारत सरकार द्वारा भी इसकी निगरानी की जाएगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_66840ea8d1927.jpg" alt="" /></p>
<p>इफको द्वारा नैनो उर्वरकों को सहकारी समिति एवं अन्य बिक्री केंद्र तक उपलब्ध कराया जाएगा।&nbsp; नैनो उर्वरकों के लाभ के बारे में किसानों को बताया जाएगा। नैनो उर्वरकों के छिड़काव हेतु इफको द्वारा 2500 कृषि ड्रोन किसानों के लिए उपलब्ध कराये जा रहे हैं जिसके लिए 300 &lsquo;नमो ड्रोन दीदी&rsquo; तथा ड्रोन उद्यमी तैयार किए गए हैं। इसके अतिरिक्त अन्य प्रकार के स्प्रेयर भी उपलब्ध कराये गये हैं जिनके माध्यम से किसान आसानी से अपने खेतों में नैनो उर्वरकों का छिड़काव कर सकेंगे। 245 लाख एकड़ क्षेत्र पर ड्रोन द्वारा स्प्रे करने के लिए 15 संस्थाओं से अनुबंध किया गया है जो किसानों के खेतों में छिड़काव करेंगे। प्रत्येक स्प्रे पर 100 रुपए प्रति एकड़ का इंसेंटिव भी प्रदान किया जाएगा।</p>
<p>अगस्त 2021 से 26 जून 2024 तक इफको द्वारा उत्पादित कुल 7.55 करोड़ नैनो यूरिया एवं 0.69 करोड़ नैनो डीएपी की बोतलों का उपयोग किसानों द्वारा किया जा चुका है। किसानों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने हेतु इफको द्वारा वर्ष 2024-25 में 4 करोड़ नैनो यूरिया प्लस एवं 2 करोड़ नैनो डीएपी बोतलों के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी क्रम में अप्रैल 2024 से इफको द्वारा किसानों को अधिक सांद्रता वाला नैनो यूरिया प्लस (तरल) 20% w/v N&nbsp; उपलब्ध कराया गया है, जिससे गुणवत्तापूर्ण फसल उत्पादकता बढ़ाने एवं पर्यावरण सुरक्षा में मदद मिलेगी।</p>
<p>इस महाअभियान के अंतर्गत इफको द्वारा देश के समस्त जिलों में प्रचार-प्रसार, क्षेत्र-परीक्षण, सहकारी समितियों के सचिवों के प्रशिक्षण आदि की योजना भी बनाई गई है। इस योजना को लागू करने हेतु उर्वरक मंत्रालय द्वारा भी सहयोग किया जायेगा ताकि खेतों में रासायनिक उर्वरकों की जगह नैनो उर्वरकों के प्रयोग को बढ़ावा&nbsp; मिल सके। इस महाअभियान&nbsp; के अंतर्गत नैनो उर्वरकों की 6 करोड़ बोतलें उपलब्ध कराने की योजना बनाई गयी है जिसका वितरण इफको की 36000&nbsp; सदस्य सहकारी समितियों एवं अन्य सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_66840ec5bdf25.jpg" alt="" /></p>
<p>यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि नैनो उर्वरकों की उपलब्धता प्रत्येक प्रधान मंत्री किसान समृद्धि केंद्रों (PMKSK) पर हो सके। इफको द्वारा इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL), फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स त्रावणकोर (FACT), ब्रह्मपुत्र वैली फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BVFCL), राष्ट्रीय केमिकल्स एवं फर्टिलाइजर्स लिमिटेड&zwj; (RCF), नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड&zwj; (NFL) आदि संस्थानों के साथ विपणन करार कर किसानों को&nbsp; नैनो उर्वरक उपलब्ध कराये जा रहे हैं।</p>
<p>अगस्त 2021 में इफको ने नैनो तकनीक आधारित विश्व के पहले स्वदेशी नैनो यूरिया का व्यावसायिक उत्पादन कर पूरे विश्व को पारंपरिक यूरिया का एक बेहतरीन विकल्प दिया है। मार्च 2023 में इफको&nbsp; द्वारा डीएपी उर्वरक के प्रयोग को कम करने के लिए नैनो डीएपी (तरल) को भी किसानों&nbsp; को उपलब्ध कराया है। विश्व भर में पर्यावरण असंतुलन की बढ़ती गंभीर समस्या को देखते हुए नैनो उर्वरकों&nbsp; द्वारा खेती में पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग में कमी लाने की आवश्यकता है। इसके परिणामस्वरूप&nbsp; पर्यावरण सुरक्षा के साथ &lsquo;आत्मनिर्भर कृषि&rsquo; एवं &lsquo;आत्मनिर्भर भारत&rsquo; की परिकल्पना को साकार करते हुए आर्थिक एवं वैश्विक स्तर पर भी देश को मज़बूत बनाया जा सकता है।</p>
<p>यूरिया के अंधाधुंध प्रयोग से होने वाले नुकसान की बात करें तो यूरिया की उपयोग दक्षता 30 प्रतिशत से भी कम होने से 70 प्रतिशत से अधिक मात्रा गैस के रूप में (NOx) पर्यावरण को, नाइट्रेट (NO3)&nbsp; के रूप में जल प्रदूषण करके और अमोनिया (NH4+, NO3) के रूप में मृदा स्वास्थ्य को हानि पहुँचाती है। कीटों और बीमारियों का अधिक प्रकोप होना, फसल गिरना और फसल द्वारा प्रतिकूलता सहन न कर पाने में कहीं न कहीं पारंपरिक यूरिया की भूमिका है। नैनो उर्वरकों के कई लाभ हैं जिसमें मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जल एवं वायु प्रदूषण में कमी, फसल उत्पादन एवं गुणवत्ता में वृद्धि, पारंपरिक उर्वरकों के प्रयोग में कमी, कीटों एवं रोगों के प्रकोप में कमी; परिवहन एवं भंडारण में आसानी तथा पर्यावरण अनुकूलता आदि प्रमुख हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66840ed1199a7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको के नैनो उर्वरक संवर्धन महाअभियान की शुरुआत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66840ed1199a7.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गुजरात के जेठाभाई अहीर नेफेड के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गये]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/jethabhai-ahir-of-gujarat-elected-unopposed-as-president-of-nafed.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 22 May 2024 20:36:35 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/jethabhai-ahir-of-gujarat-elected-unopposed-as-president-of-nafed.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश की प्रमुख सहकारी संस्था भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) के निदेशक मंडल के चुनावों में गुजरात के जेठाभाई अहीर (भरवाड) को अध्यक्ष चुना गया है। गुजरात विधानसभा के उपाध्यक्ष जेठाभाई भरवाड भाजपा नेता हैं और वे पंचमहल डेयरी और पीडीसी बैंक के अध्यक्ष भी हैं। बुधवार को हुए नेफेड के चुनावों में जेठाभाई भरवाड निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए। वे नेफेड के निवर्तमान अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह की जगह लेंगे। कांग्रेस से जुड़े बिजेंद्र सिंह 2009 से 2014 और 2019 से 2024 तक कुल 12 साल नेफेड के अध्यक्ष रहे। बिजेंद्र सिंह अब भी नेफेड के निदेशकों में शामिल रहेंगे।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x_664e0b192232c.jpg" alt="" /></p>
<p>कर्नाटक के सहकारी नेता सिद्दप्पा होट्टी और पंजाब मार्कफेड के तरलोक सिंह नेफेड के उपाध्यक्ष चुने गये हैं।&nbsp;</p>
<p>नेफेड निदेशक मंडल के चुनाव के लिए 21 मई को दिल्ली स्थिति एनसीयूआई मुख्यालय में मतदान हुआ था। उल्लेखनीय है कि इस बार नेफेड के 21 निदेशकों में से 15 निर्विरोध चुने गये। जबकि सहकारिता क्षेत्र के कई दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा। इसी के साथ नेफेड में भाजपा और गुजरात के प्रभुत्व का दौर शुरू हो गया है। इससे पहले देश की प्रमुख सहकारी संस्था इफको में भी गुजरात के भाजपा नेता दिलीप संघाणी को निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया था।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p>नेफेड निदेशकों के चुनाव में नेफेड के निवर्तमान उपाध्यक्ष और बिहार से आरजेडी के एमएलसी सुनील कुमार सिंह को पराजय का सामना करना पड़ा। उन्हें पूर्वी क्षेत्र से विशाल सिंह ने हराया। सुनील सिंह को 191 वोट मिले जबकि विशाल सिंह को 262 मत प्राप्त हुए। <span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">विशाल सिंह सहकारिता क्षेत्र के दिग्गज नेता और बिहार से सांसद रहे अजीत सिंह के पुत्र हैं और वे फिलहाल एनसीसीएफ के </span><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">चेयरमैन हैं। विशाल सिंह भाजपा से जुड़े हैं।&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p>15 निदेशकों के निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद नेफेड निदेशकों की छह सीटों के लिए ही मतदान हुआ। इन छह पदों के लिए कुल 27 उम्मीदवार मैदान में थे। कृभको के चेयरमैन और पूर्व सपा सांसद चंद्रपाल सिंह नेफेड के निदेशक चुने गए हैं। राजकोट से भाजपा सांसद रहे मोहन कुंडारिया भी निर्विरोध नेफेड के निदेशक चुने गये हैं।&nbsp;</p>
<p>नेफेड के लिए चुने गय निदेशकों में निवर्तमान अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह, डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव, मोहन कुंडारिया, विशाल सिंह, रघुवीर सिंह रघुवंशी, रमेश कुमार, राम प्रकाश चौधरी, रमेश कुमार, रघुवीर सिंह रघुवंशी, अशोक ठाकुर, शेखर गेड्डाम, दीपक सोनी, केडा अहीर, जेठाभाई अहीर, जे गणेशन, गुरानाथा रेड्डी, अशोक कुमार सिंह, तरलोक सिंह, सिद्दप्पा हॉती, सुधांश पंत, मारा गंगा रेड्डी और राकेश गुप्ता शामिल हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_664e08de0aaea.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गुजरात के जेठाभाई अहीर नेफेड के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गये ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_664e08de0aaea.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिलीप संघाणी इफको के अध्यक्ष और बलवीर सिंह उपाध्यक्ष चुने गये]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/dileep-sanghani-elected-as-the-chairman-of-iffco-balvir-singh-as-the-vice-chairman-of-iffco.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 10 May 2024 16:31:39 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/dileep-sanghani-elected-as-the-chairman-of-iffco-balvir-singh-as-the-vice-chairman-of-iffco.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सहकारी क्षेत्र के दिग्गज दिलीप संघाणी को इफको का अध्यक्ष और बलबीर सिंह को उपाध्यक्ष चुना गया है। देश की प्रमुख सहकारी संस्था इफको ने निदेशक मंडल के लिए 15वीं प्रतिनिधि महासभा के चुनाव आयोजित किये, जिसमें 36 हजार से अधिक सहकारी समितियों के सदस्यों की सहभागिता रही। मार्च के महीने में शुरू हुई यह व्यापक प्रक्रिया 9 मई को इफको सदन, नई दिल्ली में हुए निदेशक मंडल के चुनाव के साथ संपन्न हुई। इसमें दिलीप संघाणी इफको के अध्यक्ष और बलवीर सिंह उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। गुजरात सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके पूर्व सांसद दिलीप संघाणी लगातार दूसरी बार इफको के अध्यक्ष बने हैं।&nbsp;</p>
<p>एक बयान में, इफको ने कहा कि उसने दो महीने की व्यापक, पारदर्शी और नियमानुसार प्रक्रिया के बाद अपने बोर्ड के चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न कर लिए हैं। निदेशकों के 21 पदों के लिए 9 मई 2024 को इफको सदन, नई दिल्ली में चुनाव हुए थे। इस चुनाव में&nbsp;जगदीप सिंह नकई, उमेश त्रिपाठी, प्रह्लाद सिंह, बलवीर सिंह, रामनिवास गढ़वाल, जयेशभाई वी रदाड़िया, ऋषिराज सिंह सिसोदिया, विवेक बिपिनदादा कोल्हे, सिमाचल पाढ़ी, के श्रीनिवास गौड़ा, एस शक्तिकवेल, प्रेम चंद्र मुंशी, डॉ. वर्षा एल कस्तूरकर, दिलीप संघाणी, सुधांश पंत, आलोक कुमार सिंह, जे. गणेशन, एम.एन. राजेंद्र कुमार, पी.पी. नागी रेड्डी, बाल्मिकी त्रिपाठी और मारा गंगा रेड्डी अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र से निदेशक मंडल के सदस्य चुने गए।&nbsp;</p>
<p>इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कहा कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुए। उन्होंने अध्यक्ष दिलीप संघाणी, उपाध्यक्ष बलवीर सिंह और निदेशक मंडल के सभी सदस्यों को उनके बहुमूल्य योगदान के लिए बधाई दी। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता हेतु सभी सहकारी समितियों और मतदाताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।</p>
<p>चुनाव पोर्टल के लॉन्च के साथ इस बार इफको के चुनाव की शुरुआत हुई थी। 36000 से अधिक सदस्य सहकारी समितियों के साथ इफको ने आम सभा सहित प्रतिनिधि महासभा के सदस्यों का चुनाव किया। यह प्रक्रिया दो महीने तक चली, जो इफको की पहुंच और संचालन की व्यापकता को दर्शाता है। इ<span>फको में इस बार नई चुनाव प्रणाली अपनाई गई जिसमें आवेदन जमा करने या नामांकन दाखिल करने के लिए दिल्ली में व्यक्तिगत उपस्थिति की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया था।&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिलीप संघाणी इफको के अध्यक्ष और बलवीर सिंह उपाध्यक्ष चुने गये ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको का नैनो यूरिया प्लस तीन साल के लिए अधिसूचित, इसमें 20 फीसदी नाइट्रोजन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffcos-nano-urea-plus-notified-for-three-years-contains-20-percent-nitrogen.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 17 Apr 2024 13:13:51 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffcos-nano-urea-plus-notified-for-three-years-contains-20-percent-nitrogen.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश की प्रमुख उर्वरक निर्माता इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) नैनो यूरिया के बाद नया प्रोडक्ट नैनो यूरिया प्लस लेकर आई है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने इफको के नैनो यूरिया प्लस (तरल) को तीन साल के लिए अधिसूचित किया है। नैनो यूरिया प्लस इफको के नैनो यूरिया का उन्नत फॉर्मूलेशन है। इस अधिसूचना के जारी होने के बाद किसानों को नैनो यूरिया प्लस मिलना शुरू हो जाएगा।</p>
<p>इफको के एमडी एवं सीईओ <strong>डॉ. यू.एस. अवस्थी</strong> ने नैनो यूरिया प्लस की अधिसूचना जारी होने की जानकारी देते हुए कहा, &ldquo;<span class="css-1qaijid r-bcqeeo r-qvutc0 r-poiln3">मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इफको के नैनो यूरिया प्लस (तरल) <span>16% एन w/w जो 20% एन w/v के बराबर है</span>, को भारत सरकार के कृषि मंत्रालय </span><span class="css-1qaijid r-bcqeeo r-qvutc0 r-poiln3">द्वारा 3 वर्ष की अवधि के लिए अधिसूचित किया गया है। इफको नैनो यूरिया प्लस, नैनो यूरिया का एक उन्नत संस्करण है जो पौधे के विकास के विभिन्न चरणों में नाइट्रोजन की बेहतर आपूर्ति और पोषण प्रदान करता है। मृदा स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक यूरिया और अन्य नाइट्रोजन उर्वरकों की जगह इसका प्रयोग किया जा सकता है। यह सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता और दक्षता को भी बढ़ाता है। यह क्लोरोफिल चार्ज करते हुए उपज वृद्धि और स्मार्ट खेती में मदद करता है।</span>&rdquo;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x_661f9b6907c3e.jpg" alt="" /></p>
<p>इफको ने नैनो यूरिया प्लस की कीमत में कोई वृद्धि नहीं की गई है। इसकी 500 मिली की बोतल 225 रुपये की दर से मिलेगी। केंद्र सरकार दानेदार यूरिया की बजाय तरल नैनो यूरिया के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। इन्हीं प्रयासों के तहत नैनो यूरिया के बाद अब इफको द्वारा नैनो यूरिया प्लस लाया जा रहा है।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको का नैनो यूरिया प्लस तीन साल के लिए अधिसूचित, इसमें 20 फीसदी नाइट्रोजन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको के लिए शानदार रहा यह साल, 3000 करोड़ से ज्यादा मुनाफे की उम्मीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/this-year-was-great-for-iffco-expected-profit-of-more-than-rs-3000-crore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 01 Apr 2024 16:45:26 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/this-year-was-great-for-iffco-expected-profit-of-more-than-rs-3000-crore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>विश्व की अग्रणी फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव <strong>इफको</strong> के लिए वित्त वर्ष 2023-24 शानदार रहा है। इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने बेहतर संपूर्ण इफको परिवार, किसानों, सहकारी बंधुओं और इफको से जुड़े सभी लोगों को वित्त वर्ष 2023-24 के बेहतर सालाना परिणामों की बधाई दी। साथ ही नए वित्त वर्ष 2024-25 के और भी अच्छा साबित होने की उम्मीद जताई।</p>
<p>नए वित्त वर्ष की शुरुआत के मौक पर अपने संदेश में <strong>डॉ. उदय शंकर अवस्थी</strong> ने कहा कि वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनीटर, आईसीए की रिपोर्ट में इफको को पुनः दुनिया की शीर्ष 300 सहकारी समितियों में प्रथम स्थान मिला है। इफको भारतीय किसानों के लिए नैनो उर्वरक और कृषि ड्रोन जैसी अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी लाकर कृषि व उर्वरक क्षेत्र के विकास में सकारात्मक भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री के सहकार से समृद्धि, आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर कृषि तथा किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को पूरा करने के लिए इफको लगातार काम कर रहा है।</p>
<p><strong>डॉ. अवस्थी</strong> ने बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 में इफको का कर-पूर्व लाभ <strong>3000 करोड़</strong> रुपये से अधिक होने की आशा है। स्ट्रैटेजिक प्रबंधन समूह की विशेषज्ञता के कारण लाभप्रद प्रचालन और विदेशी उद्यमों से उच्च वित्तीय रिटर्न सुनिश्चित हुआ है। डॉ. यूएस अवस्थी ने कहा कि इफको परिवार ने इस वर्ष हर क्षेत्र में शानदार परिणाम प्राप्त किये हैं। उन्होंने इफको की सभी टीमों को उनकी मेहनत और कुशल कार्यान्वयन के लिए बधाई दी।</p>
<p>बीते वित्त वर्ष 2023-24 में इफको ने नैनो डीएपी लॉन्च किया था। इफको द्वारा <strong>कलोल (गुजरात)</strong> में स्थापित भारत के पहले नैनो डीएपी संयंत्र की शुरुआत हुई। साथ ही देवघर (झारखंड) में इफको नैनो यूरिया संयंत्र और कांडला (गुजरात) में इफको नैनो डीएपी संयंत्र की आधारशिला रखी गई। इफको ने इस वित्त वर्ष में अपनी पारादीप इकाई में एक नया सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट- III चालू किया है।</p>
<p>इफको की प्रगति की जानकारी देते हुए डॉ. अवस्थी ने बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान इफको नैनो यूरिया तरल की लगभग<strong> 2.04 करोड़</strong> बोतलों से अधिक और इफको नैनो डीएपी तरल की लगभग 44 लाख से अधिक बोतलों की बिक्री करने में सफल रहे। नैनो उर्वरकों को लेकर इफको ने अब तक <strong>80 हजार</strong> से अधिक क्षेत्र प्रदर्शन और 1500 से अधिक ग्रामीण उद्यमियों को प्रशिक्षित किया है। उन्होंने कहा कि नैनो उत्पादों के पेटेंट के पंजीकरण के लिए हमारी विधिक टीम ने सराहनीय कार्य किया है।&nbsp;</p>
<p>इफको संयंत्रों ने वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान <strong>88.95 लाख टन</strong> उर्वरकों का उत्पादन किया जिसमें 48.85 लाख टन यूरिया और 40.10 लाख टन एनपीके/डीएपी/डब्ल्यूएसएफ और विशेष उर्वरक शामिल हैं। देश भर में इफको ने कुल <strong>112.26 लाख टन</strong> उर्वरकों की बिक्री की है जिसमें 110.46 लाख टन थोक उर्वरक, 1.80 लाख टन डब्ल्यूएसएफ/विशेष उर्वरक/ सागरिका ग्रेन्युल उर्वरक और 8.63 लाख लीटर सागरिका तरल शामिल है। इफको ने बीते वित्त वर्ष में <strong>113.06 लाख टन</strong> यूरिया/एनपी/ एनपीके/डीएपी/डब्ल्यूएसएफ, विशेष उर्वरक तथा नैनो उर्वरकों की बिक्री की है। मृदा स्वास्थ्य के लिए उपयोगी 8.37 लाख लीटर जैव उर्वरकों की बिक्री की है।</p>
<p>इस वर्ष इफको ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित कृषि ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में कदम रखा। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के छिड़काव के लिए किसानों को इफको किसान ड्रोन उपलब्ध कराने की एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की गयी है। डॉ. अवस्थी के अनुसार, इफको के इस कदम से देश भर में 5000 ग्रामीण उद्यमी पैदा होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'नमो ड्रोन दीदी' की पहल के अनुसरण में इफको ने 300 नमो ड्रोन दीदी को कृषि ड्रोन और ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग दी। &nbsp;</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको के लिए शानदार रहा यह साल, 3000 करोड़ से ज्यादा मुनाफे की उम्मीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान उत्पादक संगठनों के मेले में 18 राज्यों के एफपीओ ने प्रदर्शित किए उत्पाद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/farmer-producer-organizations-from-18-states-participated-in-ncdcs-fpo-fair.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 21 Mar 2024 14:37:28 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/farmer-producer-organizations-from-18-states-participated-in-ncdcs-fpo-fair.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) और लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी) की तरफ से दिल्ली में एफपीओ मेले का आयोजन किया गया। तीन दिवसीय एफपीओ मेले में 18 राज्यों के 40 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) ने भाग लेकर अपने उत्पादों को प्रदर्शित किया।&nbsp;</p>
<p>दिल्ली के हौज खास स्थित एनसीडीसी परिसर में 19 मार्च से शुरू हुए तीन दिवसीय एफपीओ का उद्घाटन सहकारिता मंत्रालय के सचिव <strong>डॉ. आशीष कुमार भूटानी</strong> ने किया था। इस अवसर पर एनसीडीसी के एमडी <strong>पंकज कुमार बंसल</strong> तथा एसएफएसी की एमडी <strong>डॉ. मनिंदर कौर द्विवेदी</strong> भी मौजूद रहीं।&nbsp;</p>
<p>एफपीओ मेले में किसान उत्पाद संगठनों ने कृषि और जैविक उत्पादों के साथ-साथ ग्रामोद्योग, हस्तशिल्प और लोक कलाओं से जुड़े अपने उत्पादों को भी प्रदर्शित किया। लोगों ने किसानों द्वारा जैविक विधि से तैयार क्रीम, साबुन, गुलाल, मसाले व खाने-पीने की अन्य चीजों की खरीदारी की।</p>
<p>राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम एफपीओ को बाजार मुहैया कराने और आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है। इस मेले का आयोजन इन्हीं प्रयासों के तहत किया गया। जहां एफपीओ के उत्पादों को बिक्री और बाजार से जुड़े का मंच प्रदान किया गया। &nbsp;<br /><br />&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65fbf8c277a5a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान उत्पादक संगठनों के मेले में 18 राज्यों के एफपीओ ने प्रदर्शित किए उत्पाद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तीन नई सहकारी समितियों के दिल्ली में नए कार्यालय भवन का उद्घाटन ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/inauguration-of-new-office-buildings-of-three-cooperative-societies-in-new-delhi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 14 Mar 2024 14:18:38 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/inauguration-of-new-office-buildings-of-three-cooperative-societies-in-new-delhi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को नई दिल्&zwj;ली में तीन बहुराज्यीय सहकारी समितियों - भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL), नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) और नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड (NCEL) के नए कार्यालय भवन का उद्घाटन किया।&nbsp;</p>
<p>इस अवसर अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि तीन कोऑपरेटिव्स के नए कार्यालय के उद्घाटन के रूप में एक बहुत बड़े काम का बीज बोया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सहकार से समृद्धि की कल्पना के साथ हम आगे बढ़े हैं। 31 हज़ार वर्गफीट क्षेत्रफल वाले इस कार्यालय में इन समितियों का मुख्यालय शुरू होने जा रहा है। ये तीनों समितियां किसानों की अलग &ndash;अलग प्रकार की ज़रूरतों को पूरा करने वाली हैं।</p>
<p>केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि बहुत कम समय में हमने तीनों समितियों को बनाने के लिए देश की प्रमुख सहकारी समितियों, अमूल, नेफेड, एनसीसीएफ, इफ्को, कृभको, एनडीडीबी और एनसीडीसी को इनके मूल प्रमोटर के रूप में एकत्रित किया और इन सभी संस्थाओं ने मिलकर इन तीनों समितियों को स्थापित करने का काम किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड को कोऑपरेटिव समितियों से लगभग 7,000, ऑर्गेनिक लिमिटेड को 5,000 औऱ बीज सहकारी समिति को 16,000 सदस्यता आवेदन मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह बताता है कि काम का दायरा कितना बढ़ा है।</p>
<p>अमित शाह ने कहा कि अगले 5 साल में निर्यात कोऑपरेटिव सोसाइटी के टर्नओवर को सालाना एक लाख करोड़ रूपए तक पहुचाएंगे। निर्यात में फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज स्थापित कर दलहन के आयात की कमी को भी इसी माध्यम से पूरा किया जाएगा। ऐसी व्यवस्था की गई है कि कम से कम 50% मुनाफा PACS के माध्यम से सीधा किसान के बैंक अकाउंट में जाए। शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि इन तीन समितियों के माध्यम से आने वाले दिनों में ऑर्गेनिक प्रोडक्ट, बीज संरक्षण और संवर्धन और एक्सपोर्ट के क्षेत्र में सभी गैप्स को भरने में सफलता मिलेगी।</p>
<p>प्राकृतिक खेती पर जोर देते हुए अमित शाह ने कहा कि पिछले 3 साल में प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की संख्या में 7 गुना वृद्धि हुई है, जो बताता है कि ये प्रयोग सफल रहा है। अगले 5 साल में देश का एक भी जिला ऐसा नहीं होगा जहां ऑर्गेनिक भूमि और प्रोडक्ट का परीक्षण नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जहां ऑर्गेनिक उपज ज़्यादा है वहां तक इस प्रक्रिया को ले जाकर और इसे किसानों को उपलब्ध करा कर उत्पाद को सर्टिफाइड कर बाजार का मुनाफा उस तक पहुंचने का काम करेंगे।</p>
<p>केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि हमने बीज सहकारी लिमिटेड के लिए 5 वर्ष में 10 हज़ार करोड़ रूपए से ज्यादा टर्नओवर का लक्ष्य तय किया है। 2030 तक ऑर्गेनिक्स भारत के घरेलू बाजार में 50% से ज्यादा हिस्सेदारी रखेगा। आज वैश्विक ऑर्गेनिक बाजार लगभग 10 लाख करोड़ रूपए का है और इसमें भारत का निर्यात 7 हज़ार करोड़ रूपए है, जिसे बढ़ाकर हम 70 हज़ार करोड़ रूपए तक पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक कृषि उपज बाज़ार 2155 अरब डॉलर है और इसमें भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 45 अरब डॉलर है, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमने तय किया है कि 2030 तक एक बड़ी छलांग लगाकर इसे 115 अरब डालर तक पहुंचाएंगे।&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर केन्द्रीय सहकारिता राज्यमंत्री श्री बी एल वर्मा और डॉ. आशीष कुमार भूटानी, सचिव, सहकारिता मंत्रालय के साथ-साथ NCEL, NCOL और BBSSL के अध्यक्ष एवं मैनेजिंग डायरेक्टर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ तीन नई सहकारी समितियों के दिल्ली में नए कार्यालय भवन का उद्घाटन  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारी चीनी मिलों के एसडीएफ लोन की रिस्ट्रक्चरिंग में 619.43 करोड़ रुपये की ब्याज राहत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/restructuring-of-sdf-outstanding-loans-bring-619.43-cr-interest-relief-to-cooperative-sugar-mills.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 01 Mar 2024 18:19:28 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/restructuring-of-sdf-outstanding-loans-bring-619.43-cr-interest-relief-to-cooperative-sugar-mills.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="font-weight: 400;">सहकारी चीनी मिलों के शुगर डेवपमेंट फंड (एसडीएफ) के बकाया कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग में मिलों को 619.43 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ब्याज बकाया से छूट मिल गई है। केंद्र सरकार द्वारा एसडीएफ लोन की गाइडलाइन में 28 फरवरी, 2024 को जो बदलाव किया है उससे देश भर की 33 सहकारी मिलों को फायदा मिला है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोआपरेटिव शुगर फैक्टरीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि 28 फरवरी को संशोधित गाइडलाइन से यह राहत मिली है। इन 33 चीनी मिलों पर बकाया 1378 करोड़ रुपये के कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग की गई है।&nbsp;</p>
<p style="font-weight: 400;">बकाया कर्ज में महाराष्ट्र की चीनी मिलों पर 861.23 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर 202.48 करोड़ रुपये, तमिलनाडु की चीनी मिलों पर 113.15 करोड़ रुपये, कर्नाटक की चीनी मिलों पर 103.20 करोड़ रुरये और गुजरात की सहकारी चीनी मिलों पर 39.37 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया था। बाकी कर्ज आंध्र प्रदेश और ओड़िशा की सहकारी चीनी मिलों पर था। कुल बकाया कर्ज 566.83 करोड़ रुपये प्रिंसिपल के रूप में और 191.79 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में बकाया थे। वहीं 619.43 करोड़ रुपये की राशि अतिरिक्त ब्याज के रूप में बकाया थी। रिस्ट्रक्चरिंग के तहत अतिरिक्त ब्याज (एडिशनल इंटरेस्ट) की 619.43 करोड़ रुपये की राशि को माफ कर दिया गया है। वहीं बकाया प्रिंसिंपल अमाउंट और ब्याज की राशि के भुगतान को सात साल की अवधि के लिए रि-शेड्यूल कर दिया गया है। पहले दो साल तक किसी किस्त का भुगतान नहीं करना होगा। रिपेमेंट तीसरे साल से शुरू होगा।&nbsp;</p>
<p style="font-weight: 400;">इसके साथ ही सरकार ने शुगर डेवलपमेंट फंड (एसडीएफ) के बकाया लोन के वन-टाइम पेमेंट की योजना भी लागू की है। इस योजना के तहत छह माह के भीतर कर्ज का भुगतान किया जा सकेगा। इन दोनों योजनाओं को लागू करने के लिए खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों की एक कमेटी गठित की गई है।&nbsp;</p>
<p style="font-weight: 400;">एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल ने कहा है कि यह दोनों योजनाएं देश की सहकारी चीनी मिलों के लिए एक बड़ी राहत साबित होंगी। फेडरेशन का प्रयास होगा कि चीनी मिलें वन-टाइम रिपेमेंट स्कीम का फायदा उठा सकें। इसके साथ ही हमारी कोशिश होगी कि जीएसटी का कुछ पैसा एसडीएफ में लाया जा सके।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारी चीनी मिलों के एसडीएफ लोन की रिस्ट्रक्चरिंग में 619.43 करोड़ रुपये की ब्याज राहत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम मोदी ने विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के पायलट प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/pm-modi-inaugurates-pilot-project-of-the-world-largest-grain-storage-plan-in-cooperative-sector.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 24 Feb 2024 16:50:55 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/pm-modi-inaugurates-pilot-project-of-the-world-largest-grain-storage-plan-in-cooperative-sector.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सहकारी क्षेत्र से जुड़ी कई पहलों का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री ने विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 11 राज्यों की प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) में अनाज भंडारण के लिए 11 गोदामों का उद्घाटन किया। साथ ही गोदामों और अन्य कृषि बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए देश भर में अतिरिक्त 500 पैक्स की आधारशिला रखी।</p>
<p>नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि आज हमने अपने किसानों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी स्टोरेज स्कीम शुरू की है। इसके तहत देश के कोने-कोने में हजारों वेयर-हाउसेस बनाए जाएंगे, हजारों गोदाम बनाए जाएंगे। आज 18 हजार पैक्स के कंप्यूटराइजेशन का बड़ा काम भी पूरा हुआ है। ये सभी काम देश में कृषि इनफ्रास्ट्रक्चर को नया विस्तार देंगे, कृषि को आधुनिक टेक्नालजी से जोड़ेंगे। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>पीएम मोदी ने 1.25 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ दुनिया का सबसे बड़ा अनाज भंडारण कार्यक्रम शुरू किया। इसके तहत अगले पांच वर्षों में सहकारी क्षेत्र में हजारों गोदामों का निर्माण कर 700 लाख टन भंडारण क्षमता बनाई जाएगी। उन्होंने 500 और पैक्स में गोदाम और अन्य कृषि बुनियादी ढांचे के निर्माण की नींव भी रखी। इसका उद्देश्य पैक्स गोदामों को खाद्यान्न आपूर्ति श्रृंखला से जोड़कर खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है। यह काम कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ), कृषि विपणन अवसंरचना (एएमआई) आदि जैसी विभिन्न मौजूदा योजनाओं के माध्यम से किया जा रहा है।&nbsp;</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि भंडारण से जुड़े इनफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में किसानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ता था। लेकिन, आज सहकारी समितियों के जरिए इस समस्या को हल किया जा रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी भंडारण योजना के तहत, अगले 5 वर्षों में 700 लाख मीट्रिक टन भंडारण की क्षमता तैयार की जाएगी। इस पर सवा लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का खर्च आएगा। इससे किसान अपने उत्पादों को अपनी जरूरत के मुताबिक भंडारण में रखकर के स्टोर कर पाएंगे। उन्हें बैंकों से ऋण लेने में भी आसानी होगी। और वो सही समय पर अपने उत्पाद को बाजार में बेच सकेंगे।&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री ने सहकारी क्षेत्र से भारत को खाद्य तेलों और उर्वरकों सहित कृषि उत्पादों पर आयात निर्भरता कम करने में मदद करने का आग्रह किया। उन्होंने "सहकार से समृद्धि" के तहत सहकारी क्षेत्र के विकास के लिए पिछले 10 वर्षों में सरकार द्वारा किए गये कामों और विशेष रूप से अलग सहकारिता मंत्रालय बनाने के बारे में बताया। पीएम मोदी ने सहकारी समितियों में चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता लाने के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि इससे सहकारी आंदोलन में लोगों की अधिक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>किसान उत्पाद संगठन यानी एफपीओ का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एफपीओ के माध्यम से आज गांव के छोटे किसान भी उद्यमी बन रहे हैं, अपने उत्पादों को विदेशों तक निर्यात कर रहे हैं। देश में 10 हजार FPOs बनाने का लक्ष्य रखा था।&nbsp;अलग सहकारिता मंत्रालय होने का नतीजा ये है कि देश में 8 हजार एफपीओ का गठन हो चुका है। सहकारिता का लाभ अब पशुपालकों और मछली-पालकों तक भी पहुंच रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम मोदी ने विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के पायलट प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारिता को मजबूती देने के लिए फोरम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/forum-to-strengthen-the-cooperative-movement.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 14 Feb 2024 15:58:09 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/forum-to-strengthen-the-cooperative-movement.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सहकारिता को विस्तार देने के लिए और उसके जरिये आर्थिक तरक्की का मजबूत रास्ता बनाने के लिए एक ऐसा फोरम तैयार हो गया है जिसमें देश के सभी बड़े सहकारी संस्थानों का शीर्ष नेतृत्व मिलकर मंथन करता है। इस अनौपचारिक फोरम की अभी तक पांच बैठकें हो चुकी हैं और उन सभी बैठकों में राजनीतिक विचारधारा को दरकिनार करते हुए सहकारिता में काम करने वाले दिग्गज शामिल हैं।</p>
<p>मंगलवार को भी फोरम की एक बैठक हुई। इस बैठक का आयोजन सहकार भारती के मंच पर किया गया। इसमें सहकारिता मंत्रालय से नये सचिव आषीश भूटानी, सहकारिता मंत्रालय के पूर्व सचिव ज्ञानेश कुमार और सहकारिता मंत्रालय का गठन होने के साथ उसके पहले सचिव और अब कोआपरेटिव इलेक्शन अथॉरिटी के प्रमुख डीके सिंह शामिल थे। इसके साथ ही इफको के चेयरमैन दिलीप संघानी, इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. यू एस अवस्थी, कृभको के चेयरमैन डॉ. चंद्रपाल सिंह, नेफेड के चेयरमैन बिजेंद्र सिंह, नेफकब के नव नियुक्त चेयरमैन, एनसीसीएफ के चेयरमैन विशाल सिंह और सहकारिता से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पदाधिकारी इस बैठक में मौजूद थे।</p>
<p>सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. डीएन ठाकुर ने इस मौके पर कहा कि सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए काम कर रहे इस अनौपचारिक फोरम के जरिये हम लगातार मिलकर मंथन कर रहे हैं। इसके साथ ही सहकारी संस्थानों के पदाधिकारियों के साथ सरकार के अधिकारियों के इसमें शामिल होने के चलते यह फोरम एक ब्रिज का काम रहा है। सरकार और सहकारी क्षेत्र के संस्थानों के इस संयुक्त प्रयास के कई बेहतर नतीजे हमें सहकारिता मत्रालय द्वारा लिये गये फैसलों और पहल के जरिये देखने को मिले हैं।</p>
<p>बैठक में शामिल सभी लोगों ने सहमति जताई है कि इस फोरम को भले ही हम अनौपचारिक कहें लेकिन इसकी बैठकें लगातार होनी चाहिए। इन बैठकों के माध्यम से सहकारिता और उसके फायदों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के प्रयासों पर बेहतर तरीके से अमल हो सकेगा और नीतिगत स्तर पर भी सही दिशा में काम हो सकेगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारिता को मजबूती देने के लिए फोरम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृभको को मिले बेस्ट वीडियो सहित एफएआई के तीन पुरस्कार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/kribhco-gets-three-awards-at-the-annual-fai-awards-2023.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 07 Dec 2023 17:42:41 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/kribhco-gets-three-awards-at-the-annual-fai-awards-2023.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>विश्व की प्रमुख उर्वरक उत्पादक सहकारी संस्था कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) ने एफएआई वार्षिक सेमिनार में तीन पुरस्कार जीते हैं। वीडियो फिल्म श्रेणी में कृभको को पहला पुरस्कार मिला है।</p>
<p>एक बयान में बताया गया है कि कृभको की वीडियो फिल्म जिसका शीर्षक "समृद्धि की नई राह" है, "कृषि अपशिष्ट प्रबंधन" पर आधारित है, को वीडियो फिल्म श्रेणी में प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया है। इसके अलावा, जैव उर्वरक/जैविक उर्वरक/सिटी कम्पोस्ट के उत्पादन, संवर्धन और विपणन का पुरस्कार भी मिला है। कृभको के हजीरा प्लांट ने "नाइट्रोजन उर्वरक संयंत्र श्रेणी में पर्यावरण संरक्षण" के लिए उपविजेता पुरस्कार जीता है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_6571b49a19e2f.jpg" alt="" /></p>
<p><em>केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया से जैविक उर्वरक के उत्पादन, संवर्धन और विपणन का पुरस्कार लेते कृभको के मार्केटिंग डायरेक्टर वीएसआर प्रसाद।</em></p>
<p>ये पुरस्कार 6 दिसंबर को नई दिल्ली में आयोजित एफएआई (फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया) के वार्षिक सेमिनार 2023 में केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने दिए गए। कृभको के मैनेजिंग डायरेक्टर राजन चौधरी, ऑपरेशन डायरेक्टर एम.आर. शर्मा और मार्केटिंग डायरेक्टर वी.एस.आर. प्रसाद ने ये पुरस्कार प्राप्त किए।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_6571b4a40d3bf.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृभको को मिले बेस्ट वीडियो सहित एफएआई के तीन पुरस्कार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विकसित भारत बनाने में योगदान दे सहकारिता क्षेत्रः नरेंद्र तोमर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperative-sector-should-contribute-in-making-developed-india-said-narendra-tomar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 02 Dec 2023 20:36:02 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperative-sector-should-contribute-in-making-developed-india-said-narendra-tomar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा है कि देश की चुनौतियों को स्वीकर करते हुए सहकारिता क्षेत्र विकसित भारत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। सहकार भारती द्वारा आयोजित क्रेडिट सोसायटी के दो दिवसीय (2-3 दिसंबर) राष्ट्रीय अधिवेशन के शनिवार को उद्घाटन मौके पर उन्होंने यह बात कही। नई दिल्ली के पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के मेला मैदान में आयोजित इस अधिवेशन में देशभर के हजारों प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।</p>
<p>बतौर मुख्य अतिथि अधिवेशन को संबोधित करते हुए नरेंद्र तोमर ने कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में काम करने वाले प्रतिनिधियों का सक्षम और सशक्त नुमाइंदगी करने वाला संगठन सहकार भारती है। इस सम्मेलन में देशभर के क्रेडिट सोसायटियों का इतनी बड़ी संख्या में इकट्ठा होना महत्वपूर्ण बात है। उन्होंने कहा कि सहकार का भाव आत्मा में होता है। पहले गांवों में मकान कच्चे होते थे, लेकिन सहकार के भाव के कारण संबंध पक्के होते थे। उन्होंने अधिवेशन में शामिल हुए क्रेडिट सोसायटी के प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में सहकारिता क्षेत्र बढ़-चढ़ कर योगदान दे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_656b472ccb1f8.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद से इस क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है और आने वाले समय में सहकारिता क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पैक्स का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है, उनकी क्षमता बढ़ाई जा रही है। साथ ही सस्ते ब्याज पर कर्ज उपलब्ध कराकर दुनिया की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना शुरू की जा रही है। पैक्स को पीडीएस की दुकानें चलाने, पेट्रोल पंप एवं रसोई गैस एजेंसी खोलने, जन औषधि केंद्र आदि खोलने की मंजूरी दी गई है। इससे न सिर्फ पैक्स सशक्त बनेंगे, बल्कि उपभोक्ताओं को भी फायदा होगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_656b471e7a10c.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने कहा कि जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी सहकारी समितियां बनाई जा रही हैं। सरकार की तरफ से इस बात की कोशिश हो रही है कि हर व्यक्ति सहकार के आंदोलन से जुड़े। केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने भी अधिवेशन को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों पर रोशनी डाली।</p>
<p>इस मौके पर सहकार भारती के ध्येय गीत एवं स्मारिका का भी विमोचन किया गया। अधिवेशन को सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दीनानाथ ठाकुर, मुख्य वक्ता उदय जोशी, अधिवेशन के स्वागताध्यक्ष राधेश्याम चांडक, नेफकब के अध्यक्ष ज्योतिंद्र भाई मेहता ने भी संबोधित किया। इस मौके पर अन्ना साहब जोल्हे, टीएमसीसी अध्यक्ष एन.एस. जयकुमार, महाराष्ट्र फेड अध्यक्ष काका साहेब कोयटे, कार्यक्रम संयोजक-सहकार भारती के राष्ट्रीय मंत्री सुनील गुप्ता, सहकार भारती क्रेडिट प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रमुख प्रकाश वेल्लिप आदि भी उपस्थित थे</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ विकसित भारत बनाने में योगदान दे सहकारिता क्षेत्रः नरेंद्र तोमर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_656b470b5b2a0.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विकसित भारत संकल्प यात्रा के लिए जागरूकता बढ़ाएं सहकारी समितियांः रूपाला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperative-should-increase-awareness-for-viksit-bharat-sankalp-yatra-says-rupala.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 17 Nov 2023 13:49:02 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperative-should-increase-awareness-for-viksit-bharat-sankalp-yatra-says-rupala.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय पशुपायलन, डेरी और मत्स्यपालन मंत्री परशोत्तम रूपाला ने कहा है कि सहकारी समितियों को &ldquo;सरकार के विकसित भारत संकल्प यात्रा&rdquo; के बारे में जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। देश में सहकारी समितियों का बहुत बड़ा नेटवर्क और पहुंच है। सहकारी कार्यकर्ताओं को इस यात्रा के लाभों के बारे में पूरे देश में जानकारी प्रसारित करनी चाहिए। भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) द्वारा आयोजित 70वें अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह का गुरुवार को उद्घाटन करते हुए उन्होंने यह बात कही।</p>
<p>इस वर्ष के सहकारी सप्ताह समारोह का विषय <strong>&ldquo;</strong><strong>देश की </strong><strong>5</strong> <strong>ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में सहकारी समितियों की भूमिका एवं सतत विकास लक्ष्य</strong><strong>&rdquo;</strong> है। इस समारोह में देशभर के सहकारी संगठनों के 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हर वर्ष एनसीयूआई द्वारा अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह 14-20 नवंबर तक मनाया जाता है।</p>
<p>समारोह को संबोधित करते हुए रूपाला ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से जितना रोजगार मिल रहा है उनकी संख्या को अधिकृत रूप से प्रकाशित करने का हमें प्रयास करना चाहिए। &nbsp;इफको का कारोबार कितना है, उत्पादन कितना है और कितना रोजगार दिया जा रहा है, यह जानना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस डाटा को एनसीयूआई के माध्यम से प्रकाशित करना चाहिए।</p>
<p>अमेरिका, जर्मनी और जापान जैसे देशों के सफल मॉडलों का हवाला देते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम सहकारी प्रथाओं को अपनाने की वकालत की। उन्होंने भारत के सहकारी क्षेत्र के लिए प्रेरणा के रूप में सहकारी समितियों के माध्यम से अमेरिका के विद्युतीकरण, जर्मनी की मजबूत सहकारी बैंकिंग, आवास और ऊर्जा मॉडल और जापान की प्रभावी कृषि सहकारी प्रणाली का उल्लेख किया। उन्होंने सहकारी समितियों में युवाओं और महिलाओं को शामिल करने, बेहतर उपज की गुणवत्ता के लिए सीधे उत्पादक से उपभोक्ता कनेक्शन को बढ़ावा देने और सेवा क्षेत्र की सहकारी समितियों को स्थापित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x_65572137df776.jpg" alt="" /></p>
<p>एनसीयूआई के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने सहकारी मॉडल के माध्यम से महिला और युवा सशक्तिकरण को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के मुताबिक महिलाओं को आत्मनिर्भरता के लिए कौशल से लैस करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए एनसीयूआई हाट जैसी पहल पर प्रकाश डाला।</p>
<p>इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कहा कि सहकारी मॉडल ही यह सुनिश्चित करता है कि विकास का लाभ समाज के सबसे निचले तबके तक पहुंचे। उन्होंने सहकारी समितियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में सहकारिता के माध्यम से अपार संभावनाओं पर जोर दिया और सहकारिता मंत्रालय की परिवर्तनकारी पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से तीन नई गठित बहु-राज्य सहकारी समितियों पर प्रकाश डाला, जिससे सहकारिता और भारतीय कृषि में क्रांति आएगी।</p>
<p>एनसीयूआई के उपाध्यक्ष और नेफेड के अध्यक्ष डॉ. बिजेंद्र सिंह ने देश में सहकारी विकास के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। जमीनी स्तर के विकास पर इसके गहरे प्रभाव पर जोर देते हुए उन्होंने सामुदायिक प्रगति और कल्याण को बढ़ावा देने में सहकारी समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_655721478db02.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ विकसित भारत संकल्प यात्रा के लिए जागरूकता बढ़ाएं सहकारी समितियांः रूपाला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_655721478db02.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जैविक खेती का लक्ष्य हासिल करने को बहुआयामी दृष्टिकोण की जरूरतः अमित शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/multidimensional-approach-needed-to-achieve-the-goal-of-organic-farming-says-amit-shah.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 08 Nov 2023 18:40:52 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/multidimensional-approach-needed-to-achieve-the-goal-of-organic-farming-says-amit-shah.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और इसे 50 <span>फीसदी से ऊपर ले जाने का लक्ष्य एक बहुआयामी दृष्टिकोण के बिना पूरा नहीं हो सकता। भारत के लिए यह संतोषजनक बात है कि कृषि उपज के क्षेत्र में आज हम न सिर्फ आत्मनिर्भर हैं</span>, <span>बल्कि सरप्लस हैं और हमें इस यात्रा का मूल्यांकन करना होगा। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ाने में फर्टिलाइजर्स और पेस्टीसाइड्स के अत्यधिक उपयोग के बुरे परिणाम सामने आने लगे हैं। इनके अत्यधिक उपयोग ने भूमि की उर्वरता को कम और भूमि</span>, <span>पानी को प्रदूषित करने के साथ ही कई प्रकार की बीमारियां भी दी हैं। बुधवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल</span>)&nbsp;<span>द्वारा आयोजित सहकारिता के माध्यम से जैविक उत्पाद को बढ़ावा देने पर राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए यह बात कही। </span></p>
<p>इस मौके पर उन्होंने एनओसीएल का लोगो, वेबसाइट और&nbsp;<span>ब्राउशर भी जारी किया। उन्होंने कहा कि पिछले </span>5-6 <span>सालों में देश के लाखों किसानों ने जैविक खेती को अपनाया है। धीरे-धीरे ऐसे किसानों की संख्या बढ़ रही है। </span>प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को एक मंच देने और उनके उत्पादों की मार्केटिंग की व्यवस्था करने के लिए राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड <span>(एनसीओएल</span>)&nbsp; की स्थापना की गई है। प्राकृतिक खेती से फर्टिलाइजर्स की मांग भी कम होगी और खाद्यान्न का उत्पादन भी बढ़ेगा। स्वस्थ नागरिक, सुरक्षित भूमि, जल संरक्षण और समृद्ध किसान के लक्ष्य को सिद्ध करने में <span>एनसीओएल</span>&nbsp;अहम भूमिका निभाएगा। यह एक बहुउद्देशीय शुरुआत है, जो देश की भूमि व जल संरक्षण और अन्&zwj;न उत्पादन बढ़ाने के मिशन को गति और दिशा देगी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य उत्पादों से होने वाले मुनाफे का 50 फीसदी छोटे किसानों तक पहुंचाना है। यह अगले 5 साल में देश का सबसे बड़ा उपक्रम होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि <span>एनसीओएल</span>&nbsp;की आधिकारिक लॉचिंग के साथ ही भारत ऑर्गेनिक के 6 <span>उत्पादों को भी बाजार में उतारा गया है। आने वाले दिनों में भारत ऑर्गेनिक्स न सिर्फ भारत बल्कि वैश्विक ऑर्गेनिक उत्पाद बाजार में सबसे विश्वसनीय और बड़ा ब्रांड बनेगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष दिसंबर तक कुल </span>20 <span>उत्पादों को लॉन्च किया जाएगा और इनका उत्पादन करने वाले किसानों को इसका लाभ मिलने लगेगा। इन </span>6 <span>उत्पादों की बिक्री की शुरुआत आज से ही मदर डेयरी के </span>150 <span>आउटलेट्स के माध्यम से हो रही है और ये उत्पाद ऑनलाइन भी उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही</span>&nbsp;<span>एक ही छत के नीचे ऑर्गेनिक (</span>Organic Under One Roof)&nbsp;के कॉन्सेप्ट के साथ आज से सभी ऑर्गेनिक उत्पादों की एक रिटेल आउटलेट नेटवर्क की भी शुरुआत हो रही है।</p>
<p>सहकारिता मंत्री ने कहा कि गोबर का कमर्शियल दृष्टि से इस्तेमाल बहुत बड़ी क्रांति ला सकता है और देश के करोड़ों पशुपालकों एवं किसानों की आय में अच्छी-खासी वृद्धि भी कर सकता है। उन्होंने कहा कि एनडीडीबी&nbsp;<span>द्वारा वाराणसी में स्थापित बायोगैस संयंत्र के माध्यम से जैविक खाद की मूल्य श्रृंखला परंपरा की शुरुआत हो रही है। देश में गोबर का उपयोग भूमि सुधार</span>, <span>प्राकृतिक खेती और किसानों की आय बढ़ाने में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी</span>)&nbsp;<span>और</span>&nbsp;<span>गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर एंड केमिकल्स लिमिटेड (जीएसएफसी) ने उच्च गुणवत्ता वाले गोबर के लिए एक ब्रांड को भी पंजीकृत किया है। वाराणसी में </span>4000 <span>घनमीटर की क्षमता वाला गोबर गैस प्लांट लगाया गया है।</span></p>
<p>राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड को अमूल, <span>नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनसीसीएफ</span>),&nbsp;<span>नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नेफेड</span>),&nbsp;<span>राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी</span>)&nbsp;<span>और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी</span>)&nbsp;<span>द्वारा संयुक्त रूप से</span>&nbsp;<span>प्रमोट</span>&nbsp;<span>किया गया है। </span>500<span> करोड़ रुपये की अधिकृत पूंजी के साथ इसकी शुरुआत हुई है। </span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जैविक खेती का लक्ष्य हासिल करने को बहुआयामी दृष्टिकोण की जरूरतः अमित शाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीयूआई का सहकार मेला शुरू हुआ, हाथ से बने उत्पाद हैं आकर्षण का केंद्र]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncui-holds-cooperative-fair.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 04 Nov 2023 08:54:13 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncui-holds-cooperative-fair.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एनसीयूआई अध्यक्ष दिलीप संघाणी और अंतर्राष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (एशिया प्रशांत) के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव ने नई दिल्ली स्थित भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ परिसर में 3-8 नवंबर तक चलने वाले सहकार मेला 2023 का उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह के दौरान इफको के कई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर, एनसीयूआई के मुख्य कार्यकारी डॉ. सुधीर महाजन और उप मुख्य कार्यकारी सावित्री सिंह के साथ-साथ सहकारी संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।</p>
<p>एनसीयूआई ने लगातार तीसरे वर्ष अपने लोकप्रिय सहकार मेला का आयोजन किया है। पिछले दो मेले अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह (14-20 नवंबर) के मौके पर आयोजित किए गए थे। मगर इस बार लोगों की भारी मांग पर सहकार मेला 2023 को दिवाली से पहले आयोजित किया गया है। &nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x_6545b8d57b9e0.jpg" alt="" /></p>
<p>सहकार मेला 2022 के दौरान सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लगभग 75 स्टॉल लगाए गए थे, जिसमें भारतीय कारीगरों की बिक्री 50 लाख रुपये की हुई थी। सहकार मेला 2023 में सहकारी समितियों, एसएचजी और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के लगभग 45 स्टॉल और कुछ आकर्षक खाद्य स्टॉल लगाए गए हैं।</p>
<p>दिल्ली-एनसीआर के लोग सहकार मेला 2023 में &rsquo;उचित&rsquo; कीमतों पर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की खरीदारी कर सकते हैं। विभिन्न सहकारी समितियों, एसएचजी और एफपीओ से जुड़े प्रामाणिक कारीगरों, हस्तशिल्प, हथकरघा और परिधान, सजावटी सामान, खाद्य पदार्थ आदि इस वन-स्टॉप डेस्टिनेशन पर उपलब्ध हैं। मेले में भाग लेने वाली सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों को मुफ्त स्टॉल, भोजन और आवास की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_6545b87b4f31c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीयूआई का सहकार मेला शुरू हुआ, हाथ से बने उत्पाद हैं आकर्षण का केंद्र ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों को वैज्ञानिक रूप से उत्पादित प्रमाणित बीज उपलब्ध कराएगी बीज सहकारी समिति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/new-coop-society-bbssl-to-provide-scientifically-produced-certified-seeds-to-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 26 Oct 2023 17:40:33 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/new-coop-society-bbssl-to-provide-scientifically-produced-certified-seeds-to-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि घरेलू उत्पादन के साथ-साथ प्रमाणित बीजों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक नई सहकारी समिति, <span>बीबीएसएसएल की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि इस बीज सहकारी समिति का पूरा मुनाफा सीधे बीज उत्पादन करने वाले किसानों के बैंक खातों में जाएगा। भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) द्वारा "सहकारी क्षेत्र में उन्नत एवं पारंपरिक बीजोत्पादन&rdquo; &nbsp;विषय पर नई दिल्ली में गुरुवार को आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में उन्होंने यह बात कही।</span></p>
<p>बीबीएसएसएल को भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको), <span>कृषक भारती सहकारी लिमिटेड (कृभको)</span>, <span>भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नेफेड</span>), <span>राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी</span>) <span>और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी</span>) <span>संयुक्त रूप से बढ़ावा दे रहे हैं। </span></p>
<p>कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने बीबीएसएसएल के लोगो, <span>वेबसाइट और ब्रोशर का अनावरण किया और बीबीएसएसएल सदस्यों को सदस्यता प्रमाण पत्र भी वितरित किए। उन्होंने कहा कि बीबीएसएसएल ने एक छोटी शुरुआत की है लेकिन यह सहकारी समिति भारत के बीज उत्पादन में एक बड़ा योगदान देने के लिए तैयार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले वर्षों में यह नई सहकारी समिति भारत के बीज संरक्षण</span>, <span>बीज संवर्धन और बीज क्षेत्र में अनुसंधान कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।</span></p>
<p>उन्होंने कहा कि देश के हर किसान को आज वैज्ञानिक रूप से बनाया और तैयार किया गया बीज उपलब्ध नहीं है, <span>इसीलिए ये हमारी जिम्मेदारी है कि इस विशाल देश के हर किसान के पास प्रमाणित और वैज्ञानिक रूप से तैयार किया गया बीज पहुंचे और ये काम भी यही सहकारी समिति करेगी। भारत दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों में से एक है जहां कृषि की अधिकृत शुरुआत हुई और इसी कारण हमारे परंपरागत बीज गुण और शारीरिक पोषण के लिए सबसे अधिक उपयुक्त हैं। उन्होंने कहा कि भारत के परंपरागत बीजों का संरक्षण कर उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है</span>, <span>जिससे स्वास्थ्यपूर्ण अन्न</span>, <span>फल और सब्जियों का उत्पादन निरंतर होता रहे और यह काम बीबीएसएसएल करेगी। </span></p>
<p>उन्होंने कहा कि हमारे यहां उत्पादित होने वाले बीज कमोबेश विदेशी तरीकों से शोध एवं अनुसंधान करके बनाए गए हैं, <span>लेकिन हमारे कृषि वैज्ञानिकों को अगर एक अच्छा प्लेटफॉर्म मिले तो वे विश्व में सबसे अधिक उत्पादन करने वाले बीज बना सकते हैं। शोध एवं अनुसंधान का काम भी बीबीएसएसएल करेगी। शाह ने कहा कि विश्व में बीजों के निर्यात का बहुत बड़ा मार्केट है और इसमें भारत का हिस्सा एक प्रतिशत से भी कम है। भारत जैसे कृषि-प्रधान देश को वैश्विक बीज मार्केट में एक बड़ा हिस्सा हासिल करने का एक समयबद्ध लक्ष्य रखना चाहिए।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x_653a56d862ae3.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने कहा कि ये समिति कृषि, <span>बागवानी</span>, <span>डेयरी</span>, <span>मत्स्यपालन सहित हर प्रकार की समितियों की तरह पैक्स को बीज उत्पादन के साथ जोड़ने का काम करेगी। पैक्स के माध्यम से हर किसान अपने खेत में बीज उत्पादन कर सकेगा</span>, <span>इसका सर्टिफिकेशन भी होगा और ब्राडिंग के बाद न सिर्फ पूरे देश बल्कि विश्व में इस बीज को पहुंचाने में ये समिति योगदान देगी। इस सहकारी समिति के माध्यम से बीजों की उच्च आनुवांशिक शुद्धता और भौतिक शुद्धता से बिना कोई समझौता किए इन्हें बरकरार रखा जाएगा और उपभोक्ता के स्वास्थ्य की भी चिंता की जाएगी</span>, <span>इन तीनों बातों का संयोजन करते हुए उत्पादन बढ़ाना ही हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि इस सहकारी समिति का लक्ष्य केवल मुनाफा कमाना नहीं है बल्कि इसके माध्यम से हम विश्व की औसत पैदावार के साथ भारत की पैदावार को मैच करना चाहते हैं। इसके साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के अकुशल उत्पादन की जगह किसान को प्रशिक्षण देकर वैज्ञानिक तरीके से बीजों के उत्पादन के साथ हम जोड़ने का काम करेंगे। </span></p>
<p>आज भारत में ही बीजों की आवश्यकता लगभग 465 <span>लाख क्विंटल है</span>, <span>जिसमें से </span>165 <span>लाख क्विंटल सरकारी व्यवस्था से उत्पादित होता है। कोऑपरेटिव से ये उत्पादन </span>1 <span>प्रतिशत से भी नीचे है</span>, <span>हमें इस अनुपात को बदलना होगा। उन्होंने कहा कि भारत के घरेलू बीज बाजार का वैश्विक बाजार में हिस्सा सिर्फ </span>4.5 <span>प्रतिशत है</span>, <span>इसे बढ़ाने की जरूरत है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_653a56cfee9ff.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों को वैज्ञानिक रूप से उत्पादित प्रमाणित बीज उपलब्ध कराएगी बीज सहकारी समिति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको के कलोल स्थित नैनो डीएपी प्लांट का अमित शाह ने किया उद्घाटन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/amit-shah-inaugurates-iffco-nano-dap-plant-at-kalol.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 24 Oct 2023 16:51:32 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/amit-shah-inaugurates-iffco-nano-dap-plant-at-kalol.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उर्वरक क्षेत्र की सबसे बड़ी राष्ट्रीय सहकारी संस्था इफको के नैनो डीएपी (तरल) प्लांट का उद्घाटन मंगलवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया। गुजरात के कलोल स्थित यह प्लांट नैनो डीएपी का दुनिया का सबसे पहला प्लांट है। इस प्लांट में 500 एमएल नैनो डीएपी के 2 लाख बोतलों का रोजाना उत्पादन होगा। नैनो डीएपी (तरल) प्लांट की यह यूनिट इफको के मौजूदा प्लांट परिसर में ही बनाया गया है।</p>
<p>इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी देते हुए लिखा है, &ldquo;आज इफको कलोल में इफको नैनो डीएपी संयंत्र का लोकार्पण केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं रसायन उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया भी इस मौके पर मौजूद रहे। यह संपूर्ण इफको परिवार के लिए गौरव का क्षण है।&rdquo;</p>
<p>नैनो फर्टिलाइजर का विकास दुनिया में पहली बार इफको के ही वैज्ञानिकों ने किया है। इफको ने नैनो डीएपी (तरल) के अलावा नैनो यूरिया (तरल) भी बनाया है। नैनो यूरिया की बिक्री पहले से की जा रही है, जबकि नैनो डीएपी को इसी साल लॉन्च किया गया था। 500 एमएल वाले नैनो डीएपी बोतल की कीमत 600 रुपये रखी गई है। नैनो फर्टिलाइजर के विकास से भारत फर्टिलाइजर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर होगा। इससे न सिर्फ उर्वरकों का आयात घटेगा, बल्कि बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_6537a83491f58.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको के कलोल स्थित नैनो डीएपी प्लांट का अमित शाह ने किया उद्घाटन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीईएल को मिले 7,000 करोड़ के ऑर्डर, सदस्य किसानों को मुनाफे में मिलेगी हिस्सेदारीः अमित शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/coop-export-body-ncel-gets-rs-7000cr-orders-so-far-to-share-profit-with-member-farmers-said-amit-shah.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 23 Oct 2023 18:03:17 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/coop-export-body-ncel-gets-rs-7000cr-orders-so-far-to-share-profit-with-member-farmers-said-amit-shah.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) को अब तक 7,000<span> करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले हैं और 15 हजार करोड़ रुपये के ऑर्डर को लेकर बातचीत चल रही है। केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को दिल्ली में एनसीईएल का नया लोगो और वेबसाइट लॉन्च करते हुए कहा कि एनसीईएल यह सुनिश्चित करेगी कि निर्यात का लाभ सहकारी समितियों के सदस्य किसानों तक पहुंचे और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अलावा निर्यात लाभ का लगभग </span>50 <span>फीसदी उनके साथ साझा करेगी।</span></p>
<p>इस मौके पर अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड का एक प्रकार से औपचारिक उद्घाटन हो रहा है। इसकी स्थापना कई उद्देश्यों के साथ बहुत विचार-विमर्श के बाद की गई। इसके पीछे हमारे लक्ष्यों में निर्यात, विशेषकर कृषि निर्यात को बढ़ाना, किसानों को समृद्ध बनाना, <span>फसलों के पैटर्न में बदलाव लाना और </span>2027 <span>तक देश के </span>2 <span>करोड़ किसानों को उनकी भूमि को प्राकृतिक घोषित करने में सक्षम बनाना शामिल है। यह मल्टीस्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी प्राकृतिक खेती करने वाले </span>2 <span>करोड़ से अधिक किसानों के ऑर्गेनिक उत्पादों को एक अच्छी पैकेजिंग, विश्वसनीय ब्रांडिंग और उच्च गुणवत्ता के सर्टिफिकेट के साथ वैश्विक बाजार में बेचेगी। इससे किसानों को उनके ऑर्गेनिक उत्पादों के अभी मिल रहे मूल्य से लगभग डेढ़ या दो गुना मूल्य सीधे प्राप्त होगा और किसानों के लिए समृद्धि का रास्ता खुलेगा।</span></p>
<p>उन्होंने कहा कि अब तक लगभग 1500 <span>कोऑपरेटिव्स एनसीईएल के सदस्य बन चुके हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में हर तहसील इसके साथ जुड़ कर किसानों की आवाज बनेंगे। अब तक एनसीईएल के पास </span>7<span>,</span>000 <span>करोड़ रुपये के ऑर्डर आ चुके हैं और </span>15,000 <span>करोड़ रुपये के ऑर्डर्स पर समझौता चल रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले दिनों में इफको, कृभको और अमूल की तरह एनसीईएल भी एक बहुत बड़ा और सफल कोऑपरेटिव वेंचर साबित होगा।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x_6536678f91a24.jpg" alt="" /></p>
<p>अमित शाह ने कहा कि आज किसान के हाथ निर्यात से हुआ मुनाफा नहीं आता है, <span>लेकिन राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड के माध्यम से निर्यात का कम से कम </span>50% <span>मुनाफा किसानों के पास सीधे जाएगा। किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की जाएगी और फिर </span>6 <span>माह की बैलेंसशीट बनने के बाद एमएसपी के अनुसार किए गए भुगतान के अतिरिक्त आने वाले मुनाफे का </span>50 <span>प्रतिशत सीधा किसान के बैंक अकाउंट में जाएगा। इससे निर्यात योग्य उत्पादन बढ़ाने के प्रति किसानों का उत्साह भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सरकारी निर्यात लिमिटेड सिर्फ मुनाफे की तरफ ध्यान नहीं देगा</span>, <span>बल्कि किसान पर ध्यान देना इसका मुख्य लक्ष्य होगा। </span></p>
<p>अमित शाह ने कहा कि देश के कुल खाद्य उत्पादन का 30%<span>,चीनी उत्पादन का </span>30%, <span>दूध उत्पादन का लगभग </span>17% <span>हिस्सा कोऑपरेटिव्स का है। देश के किसानों को होने वाले कुल फाइनेंस का लगभग </span>42 <span>प्रतिशत कोऑपरेटिव द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि चीनी उत्पादन में सहकारिता का योगदान </span>30% <span>है लेकिन चीनी के निर्यात में एक प्रतिशत है और दूध उत्पादन में सहकारिता का योगदान </span>17% <span>है लेकिन दुग्ध उत्पादों के निर्यात में </span>2% <span>से भी कम है। इसका अर्थ ये है कि सहकारिता क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और उनका दोहन करने के लिए एक जरिया चाहिए था</span>, <span>जो किसान</span>, <span>सहकारी समिति और वैश्विक बाजार के बीच कड़ी बने और राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड उस कड़ी के रूप में काम करेगी। &nbsp;उन्होंने कहा कि एनसीईएल छोटी समितियों को भी आवश्यक फाइनेंस और उसकी जानकारी उपलब्धता कराएगा</span>, <span>निर्यात की मानसिकता और इसके लिए जरूरी सावधानियों के बारे में जानकारी देगा</span>, <span>निर्यात अनुकूल मैटीरियल के उत्पादन के लिए भी काम करेगा। इसके अलावा ब्रांड के बारे में सजगता</span>, <span>गुणवत्ता के प्रति जागरूकता</span>, <span>जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और उत्पाद के स्टैंडर्डाइजेशन के लिए पैरामीटर तय करने जैसे काम भी नाममात्र शुल्क पर छोटे किसानों के लिए करेगा।</span></p>
<p>उन्होंने कहा कि एनसीईएल पूरे सहकारिता क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था बनेगी और आने वाले दिनों में इसमें खरीद, भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन, ब्रांडिंग, लेबलिंग, पैकेजिंग, <span>सर्टिफिकेशन</span>, <span>रिसर्च एंड डेवलपमेंट जैसे सभी पहलुओं को शामिल करते हुए एक संपूर्ण निर्यात इकोसिस्टम बनाने का काम किया जाएगा। </span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_65366784441e2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीईएल को मिले 7,000 करोड़ के ऑर्डर, सदस्य किसानों को मुनाफे में मिलेगी हिस्सेदारीः अमित शाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_65366784441e2.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीसीएफ बने आत्मनिर्भर, वित्त वर्ष 2027&amp;#45;28 तक 50 हजार करोड़ रुपये का हासिल करे टर्नओवरः अमित शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/nccf-should-change-business-approach-to-achieve-rs-50000cr-turnover-by-fy28-said-amit-shah.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 21 Oct 2023 13:17:47 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/nccf-should-change-business-approach-to-achieve-rs-50000cr-turnover-by-fy28-said-amit-shah.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनसीसीएफ) को वर्ष 2027-28 तक 50 हजार करोड़ रुपये का टर्नओवर प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनना चाहिये। एनसीसीएफ के निदेशक मंडल को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश भर की प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) और अन्य सहकारी संस्थाओं को अपना सदस्य बनाने पर एनसीसीएफ को जोर देना चाहिए। इसके लिए अपना बिजनेस प्लान डेवलप करने तथा बिजनेस एप्रोच में बदलाव लाना होगा।</p>
<p>केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय ने देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने और जीडीपी में सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए पिछले 26 महीनों में 52 पहल की हैं। एनसीसीएफ को आत्मनिर्भर सहकारी संस्था बनने के लिए अगले 10 वर्ष का एक रोडमैप बनाना चाहिए।&nbsp;इसे क्रियान्वित करने में सहकारिता मंत्रालय अपना पूर्ण सहयोग दे सकता है। उन्होंने NCCF द्वारा अपनी सहयोगी कंपनियों के साथ एथेनॉल के उत्पादन के लिए गुजरात, बिहार और अन्य राज्यों के किसानों से मक्के की खरीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।</p>
<p>अमित शाह ने कहा कि अगर एनसीसीएफ और नेफेड चाहे तो सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) से डिजिटल प्लेटफार्म पर अपना एक कॉमन ऐप तैयार करवा सकते हैं और इस कॉमन ऐप के माध्यम से सामंजस्य स्थापित कर मक्के की खरीदारी की जा सकती हैं। उन्होंने किसानों से दलहन की खरीदारी कर निर्यात के अवसर तलाशने और इस खरीद को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सुनिश्चित करने पर जो दिया। उन्होंने एग्रेसिव एक्सटेंशन और मार्केटिंग अपनाने, किसानों को पूर्व में आश्वासन देकर खरीद करने तथा कॉमन कलेक्शन सेंटर बनाए जाने पर भी जोर दिया।</p>
<p>अमित शाह ने कहा कि एनसीसीएफ प्याज एवं दालों की खरीद के लिए पैक्स के साथ संबद्ध हो सकता है, ताकि सहकारिता के क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी भंडारण योजना के तहत इसके भंडारण की व्यवस्था बनाई जा सके। उन्होंने कृषि उत्पादों में निर्यात के अवसर और चावल की खरीदारी कर राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NECL) द्वारा उसे निर्यात करने के अवसर तलाशने को भी कहा।</p>
<p>एनसीसीएफ के चेयरमैन विशाल सिंह ने आश्वस्त किया कि वे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता द्वारा सुझाए गए लक्ष्यों को पूर्ण करेंगे। निदेशक मंडल की बैठक में सहकारिता मंत्रालय के सचिव ज्ञानेश कुमार और एनसीसीएफ के प्रबंध निदेशक एनिस जोसेफ चंद्र भी शामिल हुए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीसीएफ बने आत्मनिर्भर, वित्त वर्ष 2027-28 तक 50 हजार करोड़ रुपये का हासिल करे टर्नओवरः अमित शाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम ने आयोजित किया एफपीओ मेला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/fpo-mela-held-at-national-cooperative-development-corporation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 21 Oct 2023 12:39:24 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/fpo-mela-held-at-national-cooperative-development-corporation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) एवं लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी) द्वारा दो दिवसीय एफपीओ मेला का आयोजन 19-20 अक्टूबर को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के मुख्यालय नई दिल्ली में किया गया l&nbsp;मेला का उद्घाटन कृषि एंव किसान कल्याण मंत्रालय के अपर सचिव फैज अहमद किदवई ने किया। इस मौके पर लघु कृषक कृषि व्यापार संघ के प्रबंध निदेशक, एनसीडीसी के कार्यकारी निदेशक और &nbsp;मुख्य निधेशक भी मौजूद थे।</p>
<p>मेले में देश के प्रमुख किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) ने भाग लिया। इस मेले में 40 से अधिक एफपीओ ने एक से बढ़कर एक उत्पादों की प्रदर्शनी की। किसान उत्पादक संगठन किसानों का एक समूह होता है जो अपने क्षेत्र में फसल उत्पादन से लेकर खेती-किसानी से जुड़ी तमाम व्यावसायिक गतिविधियां चलाता है। एफपीओ तैयार फसल एवं उसकी प्रोसेसिंग करके उत्पाद को मार्केट में बेचते हैं| इससे FPO से जुड़े किसानों की आर्थिक अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलती है। मेले के दौरान बाजारों तक किसानों की पहुंच आसान बनाने के क्रम में सभी एफपीओ को ओएनडीसी प्लेटफॉर्म पर शामिल किया गया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x_6533788b8136b.jpg" alt="" /></p>
<p>मेले में किसान उत्पादक संगठनों द्वारा तैयार सामान जैसे, सरसों तेल, मूंगफली का तेल, मूंगफली का मक्खन, आंवला मुरब्बा, बासमती चावल, मशरूम, मसाले, चना दाल, मूंग दाल, रागी बिस्कुट, बाजरा नमकीन, बाजरा लड्डू, बाजरा बिस्कुट, बेसन, सत्तू, घी, शहद, कटिया गेहूं दलिया, मल्टीग्रेन आटा, अचार, स्क्वैश (संतरा, आंवला), मंडुआ आटा, मसाले, काख्या, कच्चा मखाना, मखाना आटा, मखाना खीर मिक्स, मखाना वीटा, मखाना शिशु आहार पेश किया गया। इसके अलावा देसी चावल चुरा, बांस के उत्पाद (पेन होल्डर, दीवार की सजावट और बांस की लकड़ी की कला), बाजरा-खाखरा, मेथी रोटला, गुड़ रोटला, बहु बाजरा&ndash;खाखरा, आंवला कैंडी, लहसुन पाउडर, गुच्छे, लहसुन नमकीन, सेब, केसर, मिक्स ड्राई फ्रूट्स, अखरोट बादाम, सूखी खुबानी, लाल चावल, काला गेहूं, काला नमक चावल, कतरनी पोहा, कतरनी चावल आदि को भी प्रदर्शित किया गया। मेले में आए लोगों ने इन उत्पादों को खूब सराहा एवं खरीददारी भी की।</p>
<p>मेले के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रकार की प्रतिक्रिया से सभी एफपीओ को नई पहचान मिलीl एक अनुमान के मुताबिक, भारत में अधिकांश लघु एंव सीमांत किसानों को उत्पादन और उत्पादन के बाद के काम जैसे टेक्&zwj;नोलॉजी तक पहुंच, उचित कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण साजो-सामान, बीज उत्पादन, खेती की मशीनरी की इकाई, मूल्य वर्धित उत्&zwj;पाद, प्रसंस्करण, कर्ज, निवेश और सबसे महत्वपूर्ण उत्पाद के लिए बाजार में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार, एफपीओ के गठन के माध्यम से ऐसे उत्पादकों का सामूहिकीकरण द्वारा इन चुनौतियों का समाधान करने और उनकी आय बढ़ाने के लिए अवसर प्रदान किया जा रहा है। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम ने आयोजित किया एफपीओ मेला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विश्व सहकारी आर्थिक मंच का गठन, दुनिया की 3 करोड़ों सहकारी संस्थाओं की आवाज उठाएगा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/world-coop-eco-forum-set-up-to-give-voice-to-over-3mn-cooperatives-across-globe.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Oct 2023 13:31:59 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/world-coop-eco-forum-set-up-to-give-voice-to-over-3mn-cooperatives-across-globe.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दुनिया की 3 करोड़ से ज्यादा सहकारी संस्थाओं की आवाज उठाने के लिए सहकारी क्षेत्र के अग्रणी व्यक्तियों ने मिलकर 'विश्व सहकारी आर्थिक मंच' (वर्ल्ड कोऑपरेटिव इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूकॉपईएफ) का गठन किया है। ये सहकारी संस्थाएं अकेले विश्व के कुल कर्मचारियों में से 10 फीसदी को नौकरियां प्रदान करती हैं।</p>
<p>डब्ल्यूकॉपईएफ वैश्विक स्तर पर इस क्षेत्र के मुद्दों को सरकारों और अन्य हितधारकों के समक्ष उठाने के साथ-साथ सहकारी सोच और आंदोलन को बढ़ावा देगा। दुनिया की 300 बड़ी सहकारी संस्थाएं कई आवश्यक वस्तु एवं सेवाएं उपलब्ध कराकर 2.1 ट्रिलियन डॉलर की आय उत्पन्न करती हैं।&nbsp; कई देशों में बाजार की असफलताओं के सुधार, हाशिये पर पड़े लोगों के सशक्तिकरण, रोजगार के अवसर पैदा कर और सतत विकास को बढ़ावा देकर सहकारी क्षेत्र उन देशों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है।&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>संगठन के संस्थापक सदस्यों में शामिल दिलीप संघाणी ने एक बयान में कहा, &ldquo;डब्ल्यूकॉपईएफ की यात्रा व्यवहारिकता के धरातल पर समतामूलक अर्थव्यवस्था के विचार के द्वार से शुरू हो रही है। इसके जरिये अंतरराष्ट्रीय सहकारी आर्थिक व्यवस्था के साथ हम नए विमर्श की शुरुआत कर रहे हैं। कई चुनौतियां उभरी हैं जिसके कारण एक नए मंच की आवश्यकता है जो इस क्षेत्र की समस्यायों की आलोचनात्मक जांच-पड़ताल करेगा और उसके प्रतिउत्तर में उचित नीति विकसित करेगा"। दिलीप संघाणी उर्वरक क्षेत्र की अग्रणी सहकारी संस्था 'इफको' के चेयरमैन और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) के अध्यक्ष होने के साथ-साथ इससे पहले संसद सदस्य और गुजरात सरकार में मंत्री रह चुके हैं।&nbsp;</p>
<p>डब्ल्यूकॉपईएफ के अन्य संस्थापकों में कृषि सुधारों पर बनी एमएसपी समिति के सदस्य बिनोद आनंद, ग्रामीण प्रबंधन सस्थान आनंद (इरमा) में प्रोफेसर डॉ. राकेश अर्रावतिया और व्हरर्ल (Whrrl - www.WHR.loans) के संस्थापक आशीष आनंद हैं।</p>
<p>बिनोद आनंद ने कहा, "सामजिक और एकजुटता अर्थव्यवस्था&nbsp; पर मंथन करने के लिए डब्ल्यूकॉपईएफ सर्वप्रथम सहकारी क्षेत्र के पेशेवरों, समाजशास्त्रियों, सहकारी अर्थशास्त्रियों, नीति-निर्माताओं और भिन्न-भिन्न प्रकार के हितधारकों को एक मंच पर लाएगा।" उन्होंने कहा कि यह मंच हितधारकों के लिए न सिर्फ समस्याओं से पार पाने में उनकी सहायता करेगा, बल्कि सहकारी अर्थव्यवस्था को निर्धारित करने के लिए जरूरी जानकारी उपलब्ध कराएगा।"</p>
<p>डब्ल्यूकॉपईएफ का उद्देश्य एक न्यायपूर्ण और समतामूलक विश्व में मजबूत और सम्पन्न समाज के निर्माण के लिए सहकारी नीति को और अधिक सहयोगात्मक बनाने की दिशा में काम करना है। मंच भारतीय सहकारी आंदोलन को एक ऐसे निर्णायक क्षण में देखता है, जहां से वो दीर्घकालीन सतत वृद्धि को बढ़ावा देने की दिशा में वैश्विक विमर्श को आकार देने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।</p>
<p>अन्य कार्यों के अलावा डब्ल्यूकॉपईएफ वैश्विक विचार-विमर्श और नीतियों को प्रभावित करने के लिए भारतीय सहकारी अनुभवों को साझा करेगा। दुनियाभर के सरकार के निर्णयकर्ताओं, सहकारी क्षेत्र के हितधारकों, शिक्षा जगत की हस्तियों और सिविल सोसाइटी को जागरूक करने के लिए गैर-पक्षपातपूर्ण, स्वतंत्र, अच्छी तरह से शोध की गई सामिग्री उपलब्ध कराएगा।&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>यह वैश्विक मंच नीति विमर्श में नए विचार लाने के साथ-साथ सहकारी सोच की नई पीढ़ी को मंच भी प्रदान करेगा। संपूर्ण कार्य को अर्थपूर्ण और परिणाम-आधारित बनाने के लिए मंच अग्रणी बुद्धिजीवियों, शिक्षा जगत की हस्तियों, नीति-निर्माताओं, सहकारी नेतृत्वकर्ताओं, संस्थानों और सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ताओं को शामिल करेगा। वृहद् उद्देश्य हमेशा सभी हितधारकों के लाभ के लिए वैश्विक स्तर पर सहकारी आंदोलन को बढ़ावा देना रहेगा।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ विश्व सहकारी आर्थिक मंच का गठन, दुनिया की 3 करोड़ों सहकारी संस्थाओं की आवाज उठाएगा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीडीसी ने विजयवाड़ा में खोला उप&amp;#45;कार्यालय, आंध्र की सहकारी समितियों को होगा फायदा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-spreads-its-wings-sets-up-sub-office-in-vijayawada.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Oct 2023 17:03:47 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-spreads-its-wings-sets-up-sub-office-in-vijayawada.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में एक उप-कार्यालय खोला। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रीय योजनाओं को जिले और आसपास के क्षेत्रों में सहकारी समितियों तक पहुंचाना है। यह ऑफिस विजयवाड़ा के जवाहर ऑटो नगर स्थित एपी मार्कफेड भवन के परिसर में खोला गया है।</p>
<p>आंध्र प्रदेश कोऑपरेशन एवं मार्केटिंग डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी चिरंजीव चौधरी ने इस ऑफिस का उद्घाटन करते हुए कहा,<span> "</span>एनटीआर जिले के प्रशासनिक मुख्यालय विजयवाड़ा में एनसीडीसी का उप-कार्यालय होना गर्व का क्षण है। यह क्षेत्र में सहकारी समितियों तक शीर्ष ऋणदाता की वित्तीय सेवाओं की परेशानी मुक्त पहुंच सुनिश्चित करेगा।" उन्होंने कहा कि सहकारी समितियां, विशेष रूप से कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की समितियां एनसीडीसी अधिकारियों के साथ मिलकर अपनी व्यावसायिक योजनाएं तैयार कर सकती हैं और निगम की वित्तीय सेवाओं से लाभ उठा सकती हैं।</p>
<p>एनसीडीसी के क्षेत्रीय निदेशक वामशी दुबासी ने कहा कि निगम लंबे समय से आंध्र प्रदेश में सहकारी समितियों की जरूरतों को पूरा कर रहा है। उप-कार्यालय के खुलने से इसकी सेवाओं का उपयोग करने में और आसानी होगी। साथ ही, पूरे राज्य में सहकारी समितियों को सेवाएं देने की एनसीडीसी की पहुंच में सुधार होगा।</p>
<p>इस मौके पर एपी मार्कफेड लिमिटेड के एमडी राहुल पांडे, जीएम आदिनारायण, एपी मार्कफेड के अन्य अधिकारियों के साथ अन्य सहकारी समितियों के अधिकारी मौजूद थे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_652687eea1a82.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीडीसी ने विजयवाड़ा में खोला उप-कार्यालय, आंध्र की सहकारी समितियों को होगा फायदा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको ने महिलाओं को कृषि&amp;#45;ड्रोन पायलट का प्रशिक्षण देना शुरू किया  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-starts-training-women-as-agri-drone-pilots.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Oct 2023 15:26:30 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-starts-training-women-as-agri-drone-pilots.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश की सबसे बड़ी फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव इफको ने महिलाओं को एग्री-ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग देने की शुरुआत कर दी है। इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. यूएस अवस्थी ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स पर इसकी जानकारी दी है। इफको ने देशभर में किसानों को 2500 एग्री-ड्रोन देने और ड्रोन उड़ाने के लिए प्रशिक्षण देने की घोषणा पहले ही कर रखी है।</p>
<p>इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. यूएस अवस्थी ने एक्स पर किए पोस्ट में लिखा है, ''आज एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि इफको द्वारा ग्वालियर और उत्तर प्रदेश के प्रयाग में फूलपुर प्लांट में महिला ड्रोन पायलटों के पहले बैच के लिए कृषि ड्रोन प्रशिक्षण शुरू किया गया है।''</p>
<p>अपने ट्वीट में उन्होंने कहा, "शुरुआत में हम 300 महिलाओं को प्रशिक्षण देंगे। इफको किसान ड्रोन पायलट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "लखपति दीदी योजना'' के मुताबिक है। ड्रोन के संचालन और मरम्मत में महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा यह एक नई पहल और दृष्टिकोण है। देश के विकास के लिए किसानों और महिलाओं के विकास के लिए इफको प्रतिबद्ध है।"</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x_6526711ce520d.jpg" alt="" /></p>
<p>केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया ने हाल ही में इलेक्ट्रिक वाहन सहित समग्र इफको किसान ड्रोन व्यवस्था का निरीक्षण किया था जिसमें यह कृषि ड्रोन ले जाएगा। इस अवसर पर इफको के एमडी डॉ. अवस्थी ने केंद्रीय मंत्री को इसकी विशेषताओं से अवगत कराया और बताया कि यह किस प्रकार खेतों में छिड़काव कर सकता है। इफको के मार्केटिंग डायरेक्टर योगेन्द्र कुमार भी उनके साथ थे।</p>
<p>एग्री ड्रोन के परिवहन के लिए इफको किसानों को 2,500 इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर भी दे रही है। ड्रोन सभी आधुनिक तकनीकों से लैस होगा। एक ड्रोन की कीमत करीब 13.50 लाख रुपये है जो रोजाना 20 एकड़ क्षेत्र में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी एवं कीटनाशकों का छिड़काव कर सकता है। ये ड्रोन इफको के लिए अत्याधुनिक स्प्रे समाधान के रूप में काम करेंगे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_65267111d74bb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको ने महिलाओं को कृषि-ड्रोन पायलट का प्रशिक्षण देना शुरू किया   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_65267111d74bb.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारी समितियों की जीडीपी में हिस्सेदारी बढ़ाने को 27 महीनों में हुई 52 पहलः अमित शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/52-initiatives-taken-in-27-months-to-increase-the-share-of-cooperative-societies-in-gdp-said-amit-shah.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 10 Oct 2023 10:21:46 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/52-initiatives-taken-in-27-months-to-increase-the-share-of-cooperative-societies-in-gdp-said-amit-shah.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने और जीडीपी में सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए 27 महीनों में 52 पहल की गई है। नई दिल्ली में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की महापरिषद की 89वीं बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।</p>
<p>अमित शाह ने कहा कि एनसीडीसी 'सहकार से समृद्धि' के विजन को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। देश के 60 करोड़ ऐसे लोगों जिनके पास पूंजी नहीं है, की आर्थिक समृद्धि का एकमात्र रास्ता सहकारिता है। सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने और जीडीपी में सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए पिछले 27 महीनों में 52 पहल की गई हैं। इन पहलों में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में की गई पहलों में पैक्स का कंप्यूटरीकरण, मॉडल उपनियम और पैक्स के कामकाज के विस्तार के लिए डेयरी, गोदामों की स्थापना, एलपीजी/पेट्रोल/हरित ऊर्जा वितरण एजेंसी,&nbsp;बैंकिंग संवाददाता, &nbsp;पैक्स द्वारा सामान्य सेवा केन्द्र&nbsp;(सीएससी) के रूप में 300 से अधिक सेवाएं प्रदान करना और सहकारी समितियों का अद्यतन डेटाबेस तैयार करने जैसी 30 से अधिक व्यावसायिक गतिविधियां शामिल हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि एनसीडीसी&nbsp;ने वित्त वर्ष&nbsp;2022-23 में ग्रामीण क्षेत्रों सहित पूरे देश में&nbsp;41,000 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता वितरित की है। मुझे भरोसा है कि चालू वित्तीय वर्ष 2023-2024 के लिए तय किए गए 50,000 करोड़ रुपये रुपये के लक्ष्य को हासिल करने में एनसीडीसी सक्षम होगा। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि निगम का शुद्ध एनपीए 2022-23 में 99% से अधिक ऋण वसूली दर होने के साथ 'शून्य' पर बना हुआ है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x_6524d843f4134.jpg" alt="" /></p>
<p>केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि एनसीडीसी&nbsp;को प्रत्येक तिमाही के लक्ष्यों के साथ-साथ अगले 3 वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक वितरण लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। निगम को कम दरों पर कर्ज लेने के जरिये ढूंढने चाहिए और ब्याज दर कम रखते हुए सहकारिता क्षेत्र को कर्ज देना चाहिए। एनसीडीसी का उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं बल्कि सहकारिता क्षेत्र के समग्र विकास का होना चाहिए।</p>
<p>अमित शाह ने कहा कि एनसीडीसी की क्षमता को पहचानते हुए इसे सहकारी क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य भंडारण योजना के तहत परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। एनसीडीसी भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं जैसे 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के गठन और संवर्धन को बढ़ावा देने वाली कार्यान्वयन एजेंसियों में से एक है, जो FPO के रूप में नई सहकारी समितियों का पंजीकरण और उन्हें समर्थन प्रदान करती है। यह प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत मछली किसान उत्पादक संगठन&nbsp;(FFPOs) के गठन और संवर्धन के लिए एक कार्यान्वयन एजेंसी भी है। इसे निर्यात, जैविक और बीज उत्पादन पर गठित तीन नई राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि ये समितियां सहकारी क्षेत्र की कई दिग्गज कंपनियों की तरह अपने व्यवसाय में आगे बढ़ें।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारी समितियों की जीडीपी में हिस्सेदारी बढ़ाने को 27 महीनों में हुई 52 पहलः अमित शाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नेफेड मुख्यालय में हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह का आयोजन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/hindi-fortnight-closing-ceremony-organized-at-nafed-headquarters.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Oct 2023 16:42:48 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/hindi-fortnight-closing-ceremony-organized-at-nafed-headquarters.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के प्रमुख सहकारी संघ भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित (नेफेड) ने अपने नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में राजभाषा पखवाड़े का आयोजन किया और विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया।</p>
<p>नेफेड ने एक बयान में कहा है कि सरकार के निर्देशानुसार राजभाषा पखवाड़े का आयोजन किया गया और विभिन्न हिंदी प्रतियोगिताओं के विजेताओं एवं प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। पुरस्कार वितरण समारोह में अपर प्रबंध निदेशक (हिंदी) संतोष कुमार वर्मा ने सभी प्रतिभागियों को हिंदी को बढ़ावा देने और दैनिक कार्यालयी कार्य में हिंदी को शामिल करने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होने सभी प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि हमारा संघ एक किसान हितैषी संगठन होने के नाते भी कृषक समुदाय से जुड़ना आवश्यक हो जाता है जो केवल हिंदी भाषा के माध्यम से संभव हो सकता है। इसलिए भी हमें अधिकतर संचार हिंदी में करने चाहिए क्योंकि पूरे भारत में अधिकतर लोग हिंदी समझते हैं।</p>
<p>नेफेड सरकारी योजनाओं को सीधे किसानों तक पहुंचाने के लिए एक अग्रणी एजेंसी के तौर पर कार्य करता है जो किसान हितैषी गतिविधियों के माध्यम से किसानों से जुड़ा हुआ है। नेफेड हमेशा सरकार के निर्देशों को तत्परता से पूरा करता है जिसमें किसानों से दलहन-तिलहन एवं खाद्यान्नों की खरीद करना शामिल है। नेफेड सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे पीएसएस एवं पीएसएफ आदि के तहत किसानों से कृषि उपज की खरीद करता है जिससे उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार होता है।</p>
<p>नेफेड की योजनाएं किसान से जवान तक जुड़ी हुई है क्योंकि नेफेड किसानों से खाद्यान्न, दलहन, तिलहन आदि कृषि उपजों की खरीद करके सेना एवं अर्धसैनिक बलों को आपूर्ति करता है। इसके अलावा नेफेड विभिन्न राज्य सरकारों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए कृषि उत्पादों की आपूर्ति करता है। नेफेड हमेशा से ही सभी सरकारी निर्देशों के अनुपालन के क्रम में अग्रसर रहते हुए अपने कार्य में निरंतर उन्नति कर रहा है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_651feb7f8aaf3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नेफेड मुख्यालय में हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह का आयोजन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको नैनो उर्वरक नेटवर्क परियोजना सम्मेलन में नैनो उर्वरकों के फायदों और बेहतर नतीजों पर मंथन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-nano-fertiliser-network-project-meet-catapults-iffco-nanofertilisers-to-next-level.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 28 Sep 2023 20:22:09 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-nano-fertiliser-network-project-meet-catapults-iffco-nanofertilisers-to-next-level.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>विश्व की सबसे बड़ी उर्वरक उत्पादक और विपणन सहकारी समिति&nbsp; इफको ने नैनो उर्वरकों की नेटवर्क परियोजना पर सम्मेलन का आयोजन किया था जिसमें प्रतिष्ठित कृषि विज्ञान संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और कुलपतियों ने हिस्सा लिया। नैनो उर्वरकों पर आधारित इस बैठक का उद्देश्य उर्वरकों के क्षेत्र में अनुसंधान व विकास तथा कृषि 2.0 की दिशा में नयी संभावनाओं पर विचार करना था, ताकि देश के किसान अधिकाधिक लाभान्वित हो सकें । इस सम्मेलन में कई मुख्य संस्थाओं जैसे टीएनएयू, आईसीएआर-क्रीडा, आईएनएसटी मोहाली, वीएनएमकेवी, परभनी, आरवीएसकेवीवी, ग्वालियर और आईसीएआर-आईएआरआई, पूसा, दिल्ली ने भाग लिया था । इस सम्मेलन के दौरान, एक तकनीकी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से इफको नैनो यूरिया तरल के ढांचागत, संरचनागत और कार्यकुशलता के बारे में विस्तार से चर्चा की गई । साथ ही, यह भी बताया गया कि किस प्रकार नैनो नेटवर्किंग परियोजना से फसल और कृषि जलवायु क्षेत्रों के अनुसार इफको नैनो उर्वरकों के बारे में अद्यतन और उत्तम जानकारी प्राप्त होगी ।<br />इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने नैनो उर्वरकों के लिए आयोजित इस नेटवर्क बैठक की सराहना की । उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और सीमित संसाधनों के कारण उत्पन्न कृषि की वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए स्वदेशी तकनीकों का विकास करना होगा। उन्होंने इफको की ड्रोन पारिस्थितिकी प्रणाली विकास परियोजना के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि इसके प्रयोग से किसान न्यूनतम लागत पर 25 लाख एकड़ से अधिक भूमि पर फैली पत्तियों पर नैनो उर्वरकों का छिड़काव कर सकेंगे।<br />टीएनएयू के कुलपति डॉ. वी गीतालक्ष्मी ने विश्वास जताया कि सामान्य उर्वरकों के प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य के नुकसान को रोकने के लिए नैनो उर्वरक एक समाधान के रूप में आया है । इस संबंध में टीएनएयू, कोयंबटूर के मुख्य विभागों द्वारा आलेख भी प्रस्तुत किये गये हैं । उन्होंने यह भी बताया कि इफको नैनो उर्वरकों की नेटवर्किंग परियोजना से विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में उगायी जाने वाली फसलों में इफको नैनो उर्वरकों के गुणवत्तायुक्त और विश्वसनीय आंकड़े सामने लाने में मदद मिलेगी ।<br />डॉ. वी.के. सिंह, निदेशक, सीआरआईडीए ने सीआरआईडीए द्वारा किए गए बहु-स्थान परीक्षणों के आधार पर वर्षा आधारित और शुष्क भूमि वाली फसलों में नैनो यूरिया तरल जैसे नैनो उर्वरकों की उपयोगिता के बारे में जानकारी प्रदान की। नैनो यूरिया बाजरा फसल की उत्पादकता के लिए वरदान सिद्ध हो सकता है क्योंकि यह प्रकाश संश्लेषण गतिविधि को बढ़ाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बहु-स्थानों पर पोषक तत्वों के खनन और पोषक तत्वों के संतुलन पर अध्ययन से नैनो उर्वरकों के प्रचार-प्रसार में और मूल्य वृद्धि होगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x_6515921525977.jpg" alt="" /></p>
<p><br />डॉ. इंद्र मणि, कुलपति, वीएनएमकेवी, परभणी ने नैनो यूरिया को व्यापक रूप से अपनाने और नैनो उर्वरकों के साथ ड्रोन प्रौद्योगिकी के संयोजन के लिए इफको नैनोफॉर्मूलेशन हेतु स्थल विशिष्ट एसओपी विकसित करने पर जोर दिया। डॉ. ए.के. शुक्ला, कुलपति, आरवीएसकेवीवी, ग्वालियर ने सुझाव दिया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग के बारे में विभिन्न प्रकार की स्क्रीनिंग से नैनो उर्वरकों की लोकप्रियता और उपयोग बढ़ जाएगा । डॉ. राजीव शुक्ला, जीबीपीयूएटी, पंतनगर और डॉ. अश्विनी कुमार, आईसीएआर-सीएसएसआरआई, करनाल ने साझा किया कि अपने परीक्षणों के माध्यम से उन्होंने पाया है कि बल्क यूरिया के प्रयोग में 50 प्रतिशत तक की कमी लाना संभव है। नैनो यूरिया का अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए पौधों पर नैनो उर्वरकों के प्रयोग की विधि और फसलों की पत्तियों के विकास के संबंध में उचित समझ विकसित करनी होगी। इन परीक्षणों के दौरान यह देखा गया कि नैनो डीएपी के प्रयोग से बीजों के अंकुरण में वृद्धि होती है। इफको किसान ड्रोन सेवाओं को डिजिटल और वास्तविक माध्यमों से प्रदर्शित किया गया। डॉ. एस. पज़ानिवेलन, टीएनएयू ने बताया कि धान में 1800 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया स्प्रे से जीएचजी उत्सर्जन में कमी के साथ उपज में 7 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। श्री योगेन्द्र कुमार, विपणन निदेशक, इफको ने संक्षेप में बताया कि नैनो यूरिया तरल के विकास से वैज्ञानिक क्षेत्र का विस्तार हुआ है जो निश्चित रूप से न केवल भारतीय कृषि, बल्कि विश्व कृषि के लिए एक वरदान होगा। सभी प्रतिभागियों ने किसानों के खेतों में नैनो उर्वरकों का छिड़काव करने के लिए ड्रोन सुविधा युक्त वहां लगी इफको ईवी का दौरा किया और उसकी सराहना की।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको नैनो उर्वरक नेटवर्क परियोजना सम्मेलन में नैनो उर्वरकों के फायदों और बेहतर नतीजों पर मंथन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृभको को 763.16 करोड़ रुपये का लाभ, बीस फीसदी लाभांश की घोषणा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/fertiliser-cooperative-kribhco-turnover-jumps-95-pc-declares-20-pc-dividend-for-fy23.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 22 Sep 2023 16:00:13 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/fertiliser-cooperative-kribhco-turnover-jumps-95-pc-declares-20-pc-dividend-for-fy23.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश की प्रमुख उर्वरक उत्पादक और बिक्री करने वाली किसानों के स्वामित्व वाली सहकारी संस्था कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान 763.16 करोड़ रुपये का कर-पूर्व लाभ अर्जित किया है। सोसायटी ने वित्तीय वर्ष के लिए इक्विटी पूंजी पर 20% की दर से लाभांश की घोषणा की है। इस दौरान कृभको का टर्नओवर 25715.07 करोड़ रुपये पर पहुंच गया जो इसके पहले साल के मुकाबले 95 फीसदी अधिक है।</p>
<p>सोसायटी के वार्षिक खातों को 21 सितंबर, 2023 को नई दिल्ली में आयोजित 43वीं वार्षिक आम सभा (एजीएम) की बैठक में सदस्यों द्वारा अनुमोदित किया गया है, जिसकी अध्यक्षता कृभको के अध्यक्ष डॉ. चंद्र पाल सिंह ने की और कृभको के निदेशकों और सदस्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया।</p>
<p>एजीएम को संबोधित करते हुए कृभको के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह कहा कि कृभको ने 2022-23 में 763.16 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया है। इसके साथ ही समिति ने इक्विटी पूंजी पर 20 फीसदी लाभांश देने का फैसला लिया है जिसके लिए 77.68 करोड़ रुपये की राशि को प्रबंधन ने मंजूरी दी है।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने बताया कि&nbsp;वर्ष 2022-23 के दौरान कृभको का यूरिया उत्पादन 22.21 लाख मीट्रिक टन और अमोनिया उत्पादन क्रमशः 101.20% और 106.16% क्षमता उपयोग के साथ 13.24 लाख मीट्रिक टन था। सोसायटी की उत्पाद श्रृंखला में न केवल नीम लेपित यूरिया बल्कि जैव उर्वरक, खाद, प्रमाणित बीज, बीटी कपास के बीज, हाइब्रिड बीज, एसएसपी, जिंक सल्फेट और आयातित डीएपी, एमएपी, एमओपी, एनपीएस, प्राकृतिक पोटाश और समुद्री खरपतवार फोर्टिफाइड जैव उत्तेजक भी शामिल हैं। कृभको ने 2022-23 के दौरान 57.08 लाख मीट्रिक टन उर्वरक (यूरिया के साथ-साथ जटिल उर्वरक) की बिक्री की।</p>
<p>कृभको की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कृभको फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (केएफएल) ने क्रमशः 126.65% और 134.30% की क्षमता उपयोग के साथ अब तक की सबसे अधिक मात्रा में 10.95 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 6.74 लाख मीट्रिक टन अमोनिया का उत्पादन किया है।</p>
<p>कृभको के प्रबंध निदेशक श्री राजन चौधरी ने सभा को सूचित किया कि कृभको ने उत्पादन और अन्य मापदंडों के मामले में उपलब्धि के उच्चतम मानकों को बनाए रखा है। उन्होंने यह भी बताया कि सोसायटी की सहायक कंपनी केएफएल ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए 6 प्रतिशत लाभांश देने की घोषणा की है।</p>
<p>संतुलित उर्वरक को बढ़ावा देने के लिए, कृभको ने सबसे अधिक मात्रा में डीएपी, एनपीके/एस उर्वरकों का आयात किया है। अपने परिचालन में विविधता लाने के लिए कृभको ने दो पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों, कृभको एग्री बिजनेस लिमिटेड (केएबीएल) और कृभको ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड को शामिल किया है। ऑपरेशन के पहले ही वर्ष में केएबीएल ने रु. 200 करोड़ का कारोबार हासिल किया है। कृभको ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के तीन प्लांट क्रमशः गुजरात, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हजीरा, नेल्लोर और जगतियाल में बनाए जा रहे हैं। इन संयंत्रों में उत्पादन वर्ष 2024 से शुरू होने की उम्मीद है।</p>
<p>भारत सरकार के "सहकार से समृद्धि" के दृष्टिकोण के अनुरूप और अच्छी गुणवत्ता वाले बीज को अपनाने, उपलब्धता को बढ़ावा देने एवं वर्तमान बीज प्रतिस्थापन दर को बढ़ाने के लिए, कृभको भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) का प्रमुख प्रमोटर बन गया है। जमीनी स्तर की सहकारी समितियों को शामिल करके कृषि उत्पाद निर्यात की संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा देने और प्रबंधित करने के लिए, कृभको ने संयुक्त रूप से राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) को भी बढ़ावा दिया है। ये दोनों पहल भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के सक्रिय समर्थन और मार्गदर्शन से की गई हैं। सोसायटी को संचालन के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कई पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।</p>
<p>कृभको ने देश में सहकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दो प्रतिष्ठित सहकारी समितियों को सम्मानित किया है। कर्नाटक से श्री के श्रीनिवास गौड़ा&nbsp; को कृभको सहकारिता शिरोमणि पुरस्कार प्रदान किया गया। और गुजरात से श्री जयेशभाई रादडिया को कृभको सहकारिता विभूषण पुरस्कार प्रदान किया गया।</p>
<p>कृभको, एक किसान संगठन होने के नाते, मुफ्त मिट्टी परीक्षण, किसानों की शिक्षा और एकीकृत कृषि को बढ़ावा देने के आधार पर उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग के साथ खेती की लागत में कमी के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कृभको अपने ग्रामीण विकास ट्रस्ट के माध्यम से समावेशी और टिकाऊ ग्रामीण विकास की सुविधा भी प्रदान करता है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृभको को 763.16 करोड़ रुपये का लाभ, बीस फीसदी लाभांश की घोषणा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_650d6c9a10f91.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीयूआई का उन्नत भारत अभियान से एमओयू, सहकार से समृद्धि को मिलेगी मजबूती]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncui-inks-pact-with-unnat-bharat-abhiyan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 18 Aug 2023 12:04:52 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncui-inks-pact-with-unnat-bharat-abhiyan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) ने अंतर-क्षेत्रीय सहयोग के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के तहत सहकारी समितियों को सशक्त बनाने और 'सहकार से समृद्धि' के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए उन्नत भारत अभियान (यूबीए) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है। एनसीयूआई देश में सहकारी आंदोलन का प्रतिनिधित्व करने वाला शीर्ष संगठन है। एनसीयूआई के अध्यक्ष दिलीप संघानी, आईसीए-एपी के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव और नेफेड के अध्यक्ष और एनसीयूआई के उपाध्यक्ष डॉ. बिजेंद्र सिंह की उपस्थिति में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।</p>
<p>उन्नत भारत अभियान (यूबीए) भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 2014 में शुरू किया गया एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका मिशन उच्च शिक्षण संस्थानों को ग्रामीण भारत के लोगों के साथ मिलकर विकास की चुनौतियों की पहचान करने और टिकाऊ वृद्धि को गति देने के लिए उचित समाधान विकसित करने में सक्षम बनाना है। इसका उद्देश्य उभरते व्यवसायों के लिए ज्ञान और व्यवहारिकता प्रदान कर समाज और समावेशी शैक्षणिक प्रणाली के बीच एक अच्छा संबंध बनाना और ग्रामीण भारत की विकास आवश्यकताओं के लिए सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की क्षमताओं को उन्नत करना है।</p>
<p>मौजूदा समय में यूबीए के पास देश भर में 3,600 से अधिक कॉलेजों और 18,000 गांवों का नेटवर्क है। यूबीए के सहयोग से एनसीयूआई किसानों और सहकारी समितियों की प्रमुख चुनौतियों और संबंधित समाधानों की पहचान करने के लिए अनुसंधान और विकास कार्य करेगा। साथ ही समाज के जरूरतमंद वर्गों और यूबीए के तहत अपनाए गए गांवों के बीच उद्यमिता विकास के लिए प्रौद्योगिकी और नवीन प्रक्रियाओं की शक्ति का उपयोग करेगा।</p>
<p>दोनों संगठन किसानों के बीच मोटा अनाज के उत्पादन सहित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए रणनीतियों और प्रक्रियाओं को तैयार करेंगे और पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए स्थायी जीवन शैली और प्रकृति के अनुकूल उपायों को बढ़ावा देंगे। साथ ही आमदनी और संभावनाओं को बढ़ाने के लिए उपयुक्त स्वदेशी उत्पादों, प्रक्रियाओं और कारीगरों के पारंपरिक कौशल की पहचान करेंगे, उन्हें तैयार करेंगे और बढ़ावा देंगे।</p>
<p>एनसीयूआई और यूबीए अपने नेटवर्क में युवाओं और महिलाओं को शामिल करके अर्थव्यवस्था के उभरते क्षेत्रों में नई सहकारी समितियां बनाने के लिए भी मिलकर काम करेंगे। कैंपस और अन्य प्रकार की सहकारी समितियों के गठन के लिए यूबीए छात्रों के बीच सहकारी पहचान को बढ़ावा देगा। इस करार से कारीगरों और सहकारी समितियों के हित में कम लागत और कुशल उत्पादन और प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों की पहचान करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए एनसीयूआई को यूबीए के तकनीकी संसाधन से लाभ होगा। ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में सफल तकनीकी नवाचारों के अनुसंधान और प्रदर्शन के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने और राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर की कार्यशालाएं भी आयोजित करने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p>एमओयू पर हस्ताक्षर करने के बाद यूबीए के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. वी.के. विजय ने एनसीयूआई के अध्यक्ष को यूबीए की हालिया पहल और उपलब्धियों के बारे में बताया और एनसीयूआई की ओर से निकट भविष्य में किए जाने वाले उद्यमिता विकास और सहयोग केंद्र के सहयोग से किए जाने वाले कुछ प्रमुख हस्तक्षेपों पर भी चर्चा की।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64df1016e5ff2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीयूआई का उन्नत भारत अभियान से एमओयू, सहकार से समृद्धि को मिलेगी मजबूती ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64df1016e5ff2.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको नैनो डीएपी (तरल) का गांधीधाम में बनेगा प्लांट, अमित शाह ने किया शिलान्यास]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-nano-dap-plant-to-be-built-in-gandhidham-cooperative-minister-amit-shah-laid-the-foundation-stone.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 12 Aug 2023 18:36:56 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-nano-dap-plant-to-be-built-in-gandhidham-cooperative-minister-amit-shah-laid-the-foundation-stone.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को गुजरात के गांधीधाम में इफको नैनो डीएपी (तरल) संयंत्र का भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया। 70 एकड़ में बनने वाले इस संयंत्र पर करीब 350 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस मौके पर इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी, मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. उदय शंकर अवस्थी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।</p>
<p>इस मौके पर अमित शाह ने कहा कि गांधीधाम में बनने वाला यह संयंत्र इफको के मौजूदा 30 <span>लाख टन डीएपी उत्पादन करने वाले संयंत्र से भी अधिक उत्पादन करेगा। इस संयंत्र से प्रतिदिन </span>500 <span>मिलीलीटर की दो लाख नैनो बोतल देश और दुनिया में भेजी जाएंगी जिससे यूरिया की </span>6 <span>करोड़ बोरियों का आयात कम होगा और भारत फर्टिलाइजर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा। उन्होंने कहा कि इससे लगभग </span>10,000 <span>करोड़ रुपये की खाद सब्सिडी और करीब </span>3<span>,</span>500 <span>करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा भी बचेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि एक साल के अंदर ही इस संयंत्र में नैनो (तरल) डीएपी का उत्पादन शुरू हो जाएगा। यह प्लांट जीरो लिक्विड डिसचार्ज के आधार पर बनाया गया है जिससे पर्यावरण की सुरक्षा होगी और फर्टिलाइजर के दाम में भी कमी आएगी।</span>&nbsp;</p>
<p>सहकारिता मंत्री ने कहा कि तरल उर्वरक देश के अर्थतंत्र और कृषि क्षेत्र को मल्टी डाइमेनशनल फ़ायदा देने वाला है।&nbsp;नैनो&nbsp;डीएपी (तरल) के छिड़काव से भूमि प्रदूषित नहीं होगी जिससे प्राकृतिक खेती की राह आसान होगी। इससे मिट्टी की उर्वरकता के साथ-साथ कृषि उत्पादन भी बढ़ेगा और भूमि संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए इफको को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इफको ने न केवल दुनियाभर में सबसे पहले नैनो फर्टिलाइजर की शुरुआत की है बल्कि इससे फर्टिलाइजर के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x_64d782ce92f4b.jpg" alt="" /></p>
<p>अमित शाह ने कहा कि देश को एक बार फिर हरित क्रांति की जरूरत है, <span>लेकिन यह हरित क्रांति एक अलग प्रकार की होगी और इसका लक्ष्य सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं होगा। नई हरित क्रांति में भारत को दुनिया को प्राकृतिक खेती का रास्ता बताना होगा और इसके लिए प्राकृतिक खेती की हरित क्रांति लानी होगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की हरित क्रांति लानी होगी जिससे किसानों को उनकी उपज का ज्यादा मूल्य मिले और वे प्रति एकड़ में अधिक से अधिक उपज हासिल कर सकें। साथ ही भारत के किसानों के ऑर्गेनिक उत्पादों को दुनियाभर में बेच कर भारत में संपत्ति लाने का काम इस हरित क्रांति से करना होगा।</span></p>
<p>उन्होंने कहा कि नई हरित क्रांति के तीन लक्ष्य हैं। पहला, उत्पादन के साथ-साथ गेहूं, <span>चावल</span>, <span>दलहन और तिलहन सहित सभी खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर बनना। दूसरा, किसान की प्रति एकड़ उपज को बढ़ाना और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर भूमि का संरक्षण करना। तीसरा, प्राकृतिक कृषि उत्पादों को विश्व भर के बाज़ारों में निर्यात कर किसान के घर तक समृद्धि पहुंचाना। भारत सरकार इन तीनों लक्ष्यों के प्रति पूरी तरह समर्पित है।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको नैनो डीएपी (तरल) का गांधीधाम में बनेगा प्लांट, अमित शाह ने किया शिलान्यास ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी संशोधन कानून अधिसूचित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/govt-notifies-coop-act-to-strengthen-cooperatives.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 08 Aug 2023 16:47:21 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/govt-notifies-coop-act-to-strengthen-cooperatives.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने बहु-राज्य सहकारी समिति (संशोधन) अधिनियम, 2023 की अधिसूचना जारी कर दी है। नए कानून में सहकारी समितियों के कामकाज को और अधिक पारदर्शी बनाने, नियमित चुनाव कराने और समिति के सदस्यों के पारिवारिक सदस्य और रिश्तेदारों की नियुक्ति पर रोक लगाकर कोऑपरेटिव को मजबूत करने का मार्ग प्रशस्त किया गया है।</p>
<p>25 जुलाई को लोकसभा ने और 1 अगस्त को राज्यसभा ने मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी (संशोधन) बिल, 2023 को ध्वनिमत से पारित कर दिया था। इसके बाद इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था। राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद यह संशोधन विधेयक कानून बन गया और 3 अगस्त को इसकी अधिसूचना जारी की गई। नए कानून से भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में काफी मदद मिलने की उम्मीद है, जो सहकारी क्षेत्र की प्रगतिशील भूमिका के बिना संभव नहीं है।</p>
<p>इस कानून में सहकारी समितियों में कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए कड़े मानदंड का प्रावधान किया गया है जिससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भाई-भतीजावाद न हो। सहकारी क्षेत्र में रोजगार सृजन की काफी संभावनाएं हैं। जब रोजगार सृजन की बात आती है तो निजी क्षेत्र की एक सीमा होती है। सहकारी क्षेत्र नौकरियां बढ़ा सकता है क्योंकि सरकार एलपीजी और पेट्रोल पंप डीलरशिप जैसे क्षेत्रों में कार्य क्षेत्र का विस्तार करके सहकारी समितियों को मजबूत कर रही है।</p>
<p>नए कानून में सहकारी क्षेत्र में चुनाव सुधार करने के उद्देश्य से एक 'सहकारी चुनाव प्राधिकरण' स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। इसमें एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन से अधिक सदस्य नहीं होंगे जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा। एनसीयूआई (नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में लगभग 8.6 लाख सहकारी समितियां हैं। इनमें से लगभग 63,000 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां (पैक्स) सक्रिय हैं।</p>
<p>जैविक उत्पादों, बीजों और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इसी साल जनवरी में तीन नई बहु-राज्य सहकारी समितियों की स्थापना करने का निर्णय लिया था। बीमार बहु-राज्य सहकारी समितियों के पुनरुद्धार के लिए सहकारी पुनर्वास, पुनर्निर्माण और विकास निधि स्थापित करने के लिए इस कानून में एक नया खंड जोड़ा गया है। इस कानून में सहकारी समितियों के लिए ऑडिट, शिकायतों के निवारण के लिए तंत्र, एक या अधिक सहकारी लोकपाल और सहकारी सूचना अधिकारी की नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा इसमें आर्थिक जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है जो सहकारी समितियों द्वारा नियमों के उल्लंघन करने पर लगाया जाएगा।</p>
<p>इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक रूप में आवेदन, दस्तावेज, रिटर्न, विवरण, खातों का विवरण दाखिल करने का प्रावधान इसमें किया गया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64d2240de089c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी संशोधन कानून अधिसूचित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव संशोधन विधेयक संसद से पास, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/parliament-passes-multi-state-coop-soc-amendment-bill.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 01 Aug 2023 19:57:29 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/parliament-passes-multi-state-coop-soc-amendment-bill.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संसद ने बहु-राज्य सहकारी सोसायटी (संशोधन) विधेयक, 2023 को पारित कर दिया है। इसमें सहकारी समितियों के कामकाज को अधिक पारदर्शी बनाकर नियमित चुनावों की प्रक्रिया शुरू करने और सहकारी समिति के सदस्यों के पारिवारिक सदस्य और रिश्तेदारों की नियुक्ति पर रोक लगाकर समिति को मजबूत बनाने का प्रावधान किया गया है। मंगलवार को यह विधेयक राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया। इससे पहले 25 जुलाई को लोकसभा में यह पारित हो गया था। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और उनकी मंजूरी मिलते ही यह विधेयक कानून बन जाएगा।</p>
<p>राज्यसभा में विधेयक को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने कहा कि इस विधेयक में कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए कड़े मानदंड का प्रावधान किया गया है जिससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भाई-भतीजावाद न हो। &nbsp;उन्होंने कहा कि 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य सहकारी क्षेत्र की प्रगतिशील भूमिका के बिना हासिल नहीं किया जा सकता है। जब रोजगार सृजन की बात आती है तो निजी क्षेत्र की एक सीमा होती है। सहकारी क्षेत्र नौकरियां बढ़ा सकता है क्योंकि सरकार एलपीजी और पेट्रोल पंप डीलरशिप जैसे क्षेत्रों में कार्य क्षेत्र का विस्तार करके सहकारी समितियों को मजबूत कर रही है।</p>
<p>विधेयक में सहकारी क्षेत्र में चुनाव सुधार करने के उद्देश्य से एक 'सहकारी चुनाव प्राधिकरण' स्थापित करने का प्रावधान है। इसमें एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन से अधिक सदस्य नहीं होंगे जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा। एनसीयूआई (नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में लगभग 8.6 लाख सहकारी समितियां हैं। इनमें से लगभग 63,000 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां (पैक्स) सक्रिय हैं।</p>
<p>जैविक उत्पादों, बीजों और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इसी साल जनवरी में तीन नई बहु-राज्य सहकारी समितियों की स्थापना करने का निर्णय लिया था। बीमार बहु-राज्य सहकारी समितियों के पुनरुद्धार के लिए सहकारी पुनर्वास, पुनर्निर्माण और विकास निधि स्थापित करने के लिए इस विधेयक में एक नया खंड जोड़ा गया है। इस विधेयक में सहकारी समितियों के लिए ऑडिट, शिकायतों के निवारण के लिए तंत्र, एक या अधिक सहकारी लोकपाल और सहकारी सूचना अधिकारी की नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा इसमें आर्थिक जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है जो सहकारी समितियों द्वारा नियमों के उल्लंघन करने पर लगाया जाएगा।</p>
<p>इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक रूप में आवेदन, दस्तावेज, रिटर्न, विवरण, खातों का विवरण दाखिल करने का प्रावधान इसमें किया गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव संशोधन विधेयक संसद से पास, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मल्टी&amp;#45;स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी संशोधन बिल लोकसभा से पास]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/multi-state-coop-societies-amendment-bill-2022-passed-in-ls.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 26 Jul 2023 17:26:27 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/multi-state-coop-societies-amendment-bill-2022-passed-in-ls.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी (संशोधन) विधेयक, 2022 लोकसभा से पास हो गया है। अब इस पर राज्यसभा में चर्चा होगी और वहां से पास होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर यह नया कानून बन जाएगा। इसके जरिये सहकारिता क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और सहकारी समितियों की पारदर्शिता, जवाबदेही और मुनाफा बढ़ाने में मदद मिलेगी।</p>
<p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने विधेयक पर लोकसभा में मंगलवार को हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस विधेयक में सहकारी समितियों का स्वतंत्र चुनाव करवाने और चुनाव सुधार लागू करने के लिए निर्वाचन प्राधिकरण का प्रावधान किया गया है। यह निर्वाचन आयोग के लगभग बराबर शक्तिशाली होगा और इसमें सरकारी दखल नहीं होगा। इसके अलावा, अगर निदेशक मंडल की एक-तिहाई संख्या खाली हो जाती है तो फिर चुनाव करवाने की व्यवस्था की गई है। साथ ही बोर्ड की बैठकों में अनुशासन, सहकारी समितियों के कार्यकलाप सुचारू रूप से चलाने के भी प्रावधान इसमें किए गए हैं।</p>
<p>शाह ने लोकसभा को बताया कि इस विधेयक में सहकारी समितियों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों को तीन महीने में बोर्ड बैठक बुलाना अनिवार्य किया गया है। साथ ही सहकारी समिति के शासन में पारदर्शिता लाने के लिए इक्विटी शेयरधारक को बहुमत का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों के बोर्ड में एक अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति और एक महिला सदस्य को अनिवार्य रूप से रखने का प्रावधान किया गया है ताकि समितियों में इन वर्गों का प्रतिनिधित्व बढ़े।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विभिन्न संवैधानिक अपेक्षाओं का अनुपालन नहीं करने पर बोर्ड के सदस्यों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इसके अलावा कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया में किसी &nbsp;भी बोर्ड सदस्य के पारिवारिक सदस्यों (जिनसे खून का रिश्ता हो) या नजदीकी रिश्तेदारों को नौकरी नहीं दी जा सकेगी। इस विधेयक में सूचना के अधिकार को भी शामिल किया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सदन द्वारा यह बिल पारित करने के साथ ही देश के सहकारिता आंदोलन में एक नए युग की शुरूआत होगी। सहकारिता क्षेत्र को मजबूती देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए अमित शाह ने कहा कि इस वर्ष दीपावली से पहले नई राष्ट्रीय सहकारी नीति सामने आ जाएगी जो अगले 25 सालों का सहकारिता का मानचित्र देश के सामने रखेगी।</p>
<p>सुरेश प्रभु की अध्यक्षता वाली 49 सदस्यीय समिति ने पिछले महीने नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति का मसौदा सहकारिता मंत्री को सौंपा था जिसमें कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं। सहकारिता की मौजूदा नीति 2002 में बनाई गई थी लेकिन बदलते आर्थिक परिवेश में इस नीति में संशोधन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसे देखते हुए सरकार ने सितंबर 2022 में नई नीति का मसौदा तैयार करने के लिए इस समिति का गठन किया था। &nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पैक्स को पुनर्जीवित करने, उन्हें व्यावहारिक और बहुआयामी बनाने के लिए कई प्रयास किए हैं। 63,000 पैक्स को 2500 करोड़ रुपये की लागत से कम्प्यूटराइज्ड किया जा रहा है। इससे पैक्स जिला सहकारी बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों और नाबार्ड के साथ जुड़ जाएंगे और उनके ऑडिट की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन हो जाएगी। ये कई प्रकार के नए व्यवसाय कर सकेंगे। अब पैक्स एफपीओ का भी काम कर सकेंगे। 1100 पैक्स एफपीओ के रूप में रजिस्टर्ड हो चुके हैं। पैक्स एलपीजी वितरण, जनऔषधि केंद्र चलाने और पानी समिति बनकर जल वितरण का काम भी कर सकेंगे। इसे भंडारण क्षमता के साथ भी जोड़ा जा रहा है। ये भंडारण का भी काम करेंगे।</p>
<p>सरकार ने सहकारिता को मजबूत करने के लिए तीन नई बहुराज्यीय सोसायटी बनाने का निर्णय लिया। पहली सोसायटी किसान की उपज को निर्यात करने के प्लेटफार्म के रूप में काम करेगी। दूसरी सोसायटी बीजों के उत्पादन के साथ छोटे किसानों को जोड़ेगी और इससे 1 एकड़ भूमि वाले किसान भी बीज उत्पादन के साथ जुड़ सकेंगे। तीसरी सोसायटी ऑर्गेनिक खेती के उत्पादों की देश और दुनिया में मार्केटिंग कर किसानों को उनकी उपज का उचित दाम दिलाएगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_64c109638e9f2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी संशोधन बिल लोकसभा से पास ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सत्रह हजार पैक्स में अगस्त से मिलेंगी सीएससी की सुविधाएं, 14 हजार ग्रामीण युवाओं को मिलेगा रोजगार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/csc-facilities-will-be-available-in-seventeen-thousand-packs-from-august-14-thousand-rural-youth-will-get-employment.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 22 Jul 2023 14:17:46 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/csc-facilities-will-be-available-in-seventeen-thousand-packs-from-august-14-thousand-rural-youth-will-get-employment.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सहकारिता को बढ़ावा देने के लिए देश के 17 हजार से ज्यादा पैक्स अगले महीने की शुरुआत तक कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) की सेवाएं देने लगेंगे। इनमें से 6,670 पैक्स ने इसकी शुरुआत कर दी है। इसके जरिये केंद्र और राज्य सरकारों की 300 छोटी-बड़ी योजनाओं का फायदा लाभार्थी उठा सकेंगे। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) <span>द्वारा कॉमन सर्विस सेंटर </span>(CSC) <span>की सेवाएं शुरू करने के उद्घाटन मौके पर यह बात कही। </span></p>
<p>अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकारों&nbsp; <span>की </span>300 <span>से अधिक छोटी-छोटी लाभार्थी योजनाओं को सीएससी के साथ जोड़ दिया गया है। अब पैक्स और सीएससी एक हो रहे हैं। इससे गरीबों की सुविधाओं में बढ़ोतरी तो होगी ही साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा और ताकत मिलेगी। &nbsp;अब तक सीएससी में </span>17,176 <span>पैक्स अपना रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। इनमें से करीब </span>6,670 <span>ने अपना काम शुरू कर दिया है और अगले </span>15 <span>दिनों में बाकी के पैक्स भी काम करना शुरू कर देंगे। इससे करीब </span>14,000 <span>ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलेगा। ये युवा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और गांव की सुविधाओं को मजबूत करने का काम भी करेंगे। </span></p>
<p>उन्होंने कहा कि पैक्स और सीएससी के जुड़ने से सहकारिता को मजबूत करने व डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के दो संकल्प एक साथ पूरे हो रहे हैं। अगर सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाना है तो इसकी सबसे छोटी इकाई पैक्स को मजबूत बनाना होगा। जब तक पैक्स मजबूत नहीं होते सहकारिता आंदोलन खड़ा नहीं हो सकता। इसलिए सरकार ने यह तय किया है कि पैक्स का कम्प्यूटरीकरण कर उन्हें पारदर्शी बनाया जाए, <span>जवाबदेही सुनिश्चित की जाए और उनका आधुनिकीकरण किया जाए ताकि सरकार की डिजिटाइज्ड योजनाओं को पैक्स के साथ जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि </span>2<span>,</span>500 <span>करोड़ रुपये से </span>65,000 <span>पैक्स का कंप्यूटरीकरण हो रहा है।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x_64bb969b04d16.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार ने पैक्स का कम्प्यूटरीकरण करने, <span>उन्हें बहुउद्देशीय बनाने और एफपीओ </span>(<span>किसान उत्पादक संघ) बनाने का काम किया है। साथ ही बीज उत्पादन</span>, <span>जैविक खेती की मार्केटिंग तथा किसानों की उपज के निर्यात के लिए तीन बहुराज्यीय सहकारी समितियों का गठन किया है। उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी खाद्यान्न भंडारण योजना की शुरुआत भी की &nbsp;गई है। अगले </span>5 <span>साल में छोटे-छोटे पैक्स देश के </span>30<span> फीसदी खाद्यान्न का भंडारण करने का काम करेंगे।</span></p>
<p>अब पैक्स एलपीजी, <span>डीजल और पेट्रोल डिस्ट्रीब्यूटशन कर सकते हैं</span>, <span>साथ ही उचित मूल्य की दुकान</span>, <span>जन औषधि केंद्र</span>, <span>प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र और फर्टिलाइजर की दुकान भी खोल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इनके माध्यम से पैक्स गांव की आर्थिक गतिविधियों की आत्मा बन जाएंगी। </span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_64bb969195507.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सत्रह हजार पैक्स में अगस्त से मिलेंगी सीएससी की सुविधाएं, 14 हजार ग्रामीण युवाओं को मिलेगा रोजगार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_64bb969195507.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहारा समूह की कोऑपरेटिव सोसायटी के निवेशकों को 45 दिन में मिलेगा रिफंड, पोर्टल के जरिये 10 हजार रुपये तक की मिलेगी राशि  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/sahara-group-cooperative-society-investors-will-get-refund-in-45-days.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 18 Jul 2023 16:28:20 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/sahara-group-cooperative-society-investors-will-get-refund-in-45-days.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सहारा समूह की सहकारी समितियों में निवेश कर फंसने वाले निवेशकों का इंतजार खत्म हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार ने निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए सहारा रिफंड पोर्टल की शुरुआत की है। इस पोर्टल पर आवेदन करने के 45 दिन के भीतर निवेशकों का पैसा उनके बैंक खाते में आ जाएगा। अभी निवेशकों को 10 हजार रुपये तक की राशि लौटाई जाएगी।</p>
<p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पंजीयक - सहारा रिफंड पोर्टल&nbsp;<a href="https://mocrefund.crcs.gov.in/">https://mocrefund.crcs.gov.in</a>&nbsp;का शुभारंभ किया। इस पोर्टल को सहारा समूह की 4 सहकारी समितियों - सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसायटी लिमिटेड, हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के निवेशकों द्वारा दावा प्रस्तुत करने के लिए विकसित किया गया है।</p>
<p>इस मौके पर अमित शाह ने कहा कि सहारा के निवेशकों की फंसी पूंजी लौटाने के लिए इस पोर्टल को शुरू किया गया है। इस मामले में सरकार की ओर से पहल की गई और सभी स्टेकहोल्डर्स से बैठक कर इस बात पर विचार किया गया कि क्या कोई ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है जिससे छोटे निवेशकों की राशि लौटाई जा सके। सभी ऐजेंसियों ने मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला दिया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति का गठन कर उनके निर्देशन में पारदर्शी तरीके से भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो। उन्होंने कहा कि ट्रायल बेसिस पर पारदर्शी तरीके से आज निवेशकों को 5,000 करोड़ रुपये की राशि लौटाने की शुरूआत हो रही है। जब 5,000 करोड़ रुपये का भुगतान हो जाएगा तब बाकी बचे निवेशकों की राशि लौटाने के लिए एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि&nbsp;आज लॉन्च हुए पोर्टल के माध्यम से उन निवेशकों को जिनकी जमाराशि 10,000 रुपये या इससे अधिक है उसमें से 10,000 रुपये तक की राशि का भुगतान किया जाएगा। इस पोर्टल पर आवेदन करने के लिए चारों समितियों का पूरा डेटा ऑनलाइन उपलब्ध है। उन्होंने निर्देश दिए कि आवेदन भरने के लिए कॉमन सर्वस सेंटर (CSC) की व्यवस्था की जाए। उन्होंने सभी निवेशकों से अनुरोध किया कि वे सीएसई के माध्यम से अपना ऑनलाइन पंजीकरण कराएं। इस प्रक्रिया की दो प्रमुख शर्तें हैं- निवेशक का आधार कार्ड उसके मोबाइल के साथ लिंक्ड हो और आधार कार्ड बैंक अकाउंट के साथ लिंक्ड हो। उन्होंने निवेशकों को विश्वास दिलाते हुए कहा कि 45 दिनों में पैसा उनके बैंक अकाउंट में जमा हो जाएगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x_64b66fda59476.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने कहा कि देश में पहली बार पारदर्शिता के साथ निवेशकों का घोटाले में फंसा पैसा वापस मिलना शुरू हो रहा है। लगभग 1.78 करोड़ ऐसे छोटे निवेशकों जिनका 30,000 रुपये तक का पैसा फंसा है, को अपना पैसा वापस मिलेगा।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने 29 मार्च, 2023 के अपने आदेश में निर्देश दिया था कि सहारा समूह की सहकारी समितियों के प्रामाणिक जमाकर्ताओं के वैध बकाए के भुगतान के लिए "सहारा-सेबी रिफंड खाते" से 5000 करोड़ रुपये सहकारी समितियों के केन्द्रीय रजिस्ट्रार (सीआरसीएस) को हस्तांतरित किए जाएं।&nbsp;भुगतान की पूरी प्रक्रिया की निगरानी और इसका पर्यवेक्षण सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं जिसमें उनकी सहायता के लिए वकील गौरव अग्रवाल (Amicus Curiae) को नियुक्त किया गया है। इन चारों समितियों से संबंधित रिफंड प्रक्रिया में सहायता के लिए 4 वरिष्ठ अधिकारियों को ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) के रूप में नियुक्त किया गया है।</p>
<p>इस पोर्टल को सहकारिता मंत्रालय की वेबसाइट के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है। इन समितियों के प्रामाणिक जमाकर्ताओं को पोर्टल पर उपलब्ध ऑनलाइन आवेदन पत्र को जरूरी दस्तावेजों के साथ अपलोड कर अपने दावे प्रस्तुत करने होंगे। उनकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए जमाकर्ताओं का आधार कार्ड के जरिये सत्यापन किया जाएगा। उनके दावों और अपलोड किए गए दस्तावेजों के सत्यापन के लिए नियुक्त सोसायटी, ऑडिटर्स और ओएसडी द्वारा सत्यापन के बाद उपलब्धता के अनुसार धनराशि, जमाकर्ताओं द्वारा ऑनलाइन दावा पेश करने के 45 दिनों के अंदर सीधे उनके आधार से जुड़े बैंक खाते में ट्रांस्फर कर दी जाएगी और उन्हें एसएमएस/पोर्टल के माध्यम से इसकी सूचना दे दी जाएगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_64b66fea0d910.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहारा समूह की कोऑपरेटिव सोसायटी के निवेशकों को 45 दिन में मिलेगा रिफंड, पोर्टल के जरिये 10 हजार रुपये तक की मिलेगी राशि   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एफपीओ के जरिये पैक्स को मिलेगी मजबूती, 14 जुलाई को मेगा कॉन्क्लेव का उद्घाटन करेंगे अमित शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/amit-shah-to-inaugurate-mega-conclave-on-jul-14-on-strengthening-pacs-through-fpo.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 10 Jul 2023 17:36:18 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/amit-shah-to-inaugurate-mega-conclave-on-jul-14-on-strengthening-pacs-through-fpo.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 14 <span>जुलाई को नई दिल्ली में "एफपीओ के माध्यम से पैक्स को मजबूत करना" विषय पर एक दिवसीय मेगा कॉन्क्लेव का उद्घाटन करेंगे। कॉन्क्लेव का उद्देश्य किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स</span>) <span>को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करना है।</span></p>
<p>इस कॉन्क्लेव में क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ-साथ देशभर के एफपीओ के सदस्य भी भाग लेंगे। इस मेगा कॉन्क्लेव का आयोजन केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) <span>द्वारा किया जा रहा है।</span></p>
<p>सहकारिता मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण पहल के साथ, <span>कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में सहकारिता क्षेत्र को बढ़ावा देने और व्यापक समर्थन प्रदान करने की योजना के तहत पैक्स को मजबूत करने के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को सहायता देने के लिए सहकारी क्षेत्र में 1100 एफपीओ बनाने और उन्हें प्रोत्साहन देने के लिए एनसीडीसी को अतिरिक्त ब्लॉक आवंटित किए हैं।</span></p>
<p>एफपीओ योजना के तहत प्रत्येक एफपीओ को 33 <span>लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। जबकि एफपीओ को प्रोत्साहन देने और सहायता करने के लिए क्लस्टर आधारित व्यावसायिक संगठनों (सीबीबीओ</span>) <span>को प्रति एफपीओ</span> 25 <span>लाख रुपये दिए जाते हैं।</span> एफपीओ खेती को टिकाऊ बनाने, <span>आजीविका को बढ़ावा देने और कृषि पर निर्भर लोगों के जीवनस्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये छोटे और सीमांत किसानों/उत्पादकों को उनके उत्पादों की बेहतर कीमत दिलाने</span>, <span>परिवहन लागत कम करने और पूर्ण उत्पादकता बढ़ाने में मदद करते हैं।</span></p>
<p>सरकार एफफीओ योजना में पैक्स के एकीकरण पर जोर दे रही है जिससे किसान अपनी व्यावसायिक गतिविधियों का दायरा, <span>उत्पादन इनपुट की आपूर्ति</span>, <span>कल्टीवेटर</span>, <span>टिलर</span>, <span>हार्वेस्टर आदि जैसे कृषि उपकरण और प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन</span>, <span>जिसमें सफाई</span>, <span>परख</span>, <span>छंटाई</span>, <span>ग्रेडिंग</span>, <span>पैकिंग</span>, <span>भंडारण</span>, <span>परिवहन आदि शामिल हैं</span>, <span>जैसी गतिविधियों के विस्तार से बढ़ाने में सक्षम हो सकें।</span></p>
<p>एनसीडीसी सहकारिता मंत्रालय के तहत एक वैधानिक संगठन है, <span>जिसे उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने और फसल कटाई के बाद की सुविधाएं प्रदान करने के लिए सहकारी समितियों के लिए योजना बनाने</span>, <span>उन्हें बढ़ावा देने और उनका वित्त पोषण करने का अधिकार है। वित्त वर्ष </span>2022-23 <span>के दौरान एनसीडीसी ने कृषि प्रसंस्करण</span>, <span>सहकारी समितियों के कम्प्यूटरीकरण</span>, <span>सेवा</span>, <span>ऋण</span>, <span>युवा सहकारी समितियों और कमजोर वर्गों सहित विभिन्न क्षेत्रों में </span>41,031.39 <span>करोड़ रुपये का वितरण किया है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_64a04050e1019.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एफपीओ के जरिये पैक्स को मिलेगी मजबूती, 14 जुलाई को मेगा कॉन्क्लेव का उद्घाटन करेंगे अमित शाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको किसान ड्रोन अभियान की शुरुआत,  2500  ड्रोन से  तैयार होंगे 5000 ग्रामीण उद्यमी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-will-prepare-5000-rural-entrepreneurs-will-give-training-on-spraying-drones-under-kisan-drone-campaign.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 04 Jul 2023 12:59:29 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-will-prepare-5000-rural-entrepreneurs-will-give-training-on-spraying-drones-under-kisan-drone-campaign.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इफको ने नैनो यूरिया (तरल) और नैनो डीएपी (तरल) के इस्तेमाल को आसान बनाने के लिए "इफको किसान ड्रोन" नाम से एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। इसके तहत 2500 ड्रोन खरीदे जाएंगे और ग्रामीण इलाके में वितरित किए जाएंगे। इससे 5000 ग्रामीण उद्यमी तैयार होंगे। ड्रोन से छिड़काव का प्रशिक्षण देने के लिए इफको ने इनकी पहचान की है। ड्रोन को किसानों के खेत तक ले जाने के लिए एल-5 श्रेणी के 2500 इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर (लोडर) भी दिए जाएंगे।</p>
<p>इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कहा कि इफको का यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और सतत कृषि एवं समग्र सहकारी विकास की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि 2500 ड्रोन के साथ इफको किसान ड्रोन का यह अभियान स्मार्ट कृषि समाधान का देश का सबसे बड़ा अभियान है।</p>
<p>इफको की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि तकनीकी क्षमताओं, विनिर्माण क्षमता, विनिर्माण प्रक्रिया, गुणवत्ता प्रक्रियाओं, प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, बुनियादी ढांचे तक पहुंचने के लिए इफको &nbsp;प्रतिष्ठित सलाहकार ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया, नई दिल्ली की सेवाएं ले रहा है। ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया ने विशिष्टताओं का मूल्यांकन किया और बताया किया कि नैनो उर्वरकों के छिड़काव के लिए इफको द्वारा खरीदे जा रहे कृषि ड्रोन की तकनीकी विशिष्टताएं उद्योग मानकों के अनुसार हैं। अनुमान है कि एक ड्रोन रोजाना 20 एकड़ क्षेत्र में इफको नैनो उर्वरक, जल विलेय उर्वरक, सागरिका जैसे जैव-उत्तेजक, कृषि-रसायन आदि का छिड़काव करने में सक्षम होगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x_64a3ca0947bf8.jpg" alt="" /></p>
<p>ड्रोन को किसानों के खेत तक ले जाने के लिए इफको एल-5 श्रेणी के 2500 इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर (लोडर) भी खरीदेगा। ये इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर पर्यावरण हितैषी हैं। यह रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करने और योजना के तहत राज्यों को अधिक सक्षम बनाकर पीएम प्रणाम योजना का भी समर्थन करेगा। इसके अलावा, इस राष्ट्रव्यापी अभियान को मजबूत करने के लिए इफको ने नैनो उर्वरकों के छिड़काव के लिए ट्रैक्टर माउंटेड बूम स्प्रेयर, ट्रैक्टर माउंटेड होज़ रील स्प्रेयर, गन वाले एचटीपी पावर स्प्रेयर, स्टेटिक/पोर्टेबल स्प्रेयर, नियो स्प्रेयर का भी ऑर्डर दिया है। ड्रोन और दूसरे स्प्रेयर का उपयोग किसी भी प्रकार के छिड़काव के लिए किया जा सकता है।</p>
<p>इफको नैनो टेक्नोलॉजी आधारित उर्वरकों, कृषि-ड्रोन के प्रचार, ग्रामीण ई-कॉमर्स, किसानों और खेतों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने आदि सहित विभिन्न अग्रणी कृषि-प्रौद्योगिकियों को लेकर आ रही है या उनमें निवेश किया है। इफको का उद्देश्य सतत कृषि के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए एंटरप्रेन्योर और प्रगतिशील ग्रामीण-उद्यमियों के साथ काम करके एक ब्रांड के रूप में आधुनिक भारतीय कृषि का ध्वजवाहक बनना है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_64a3c9fdcc5d7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको किसान ड्रोन अभियान की शुरुआत,  2500  ड्रोन से  तैयार होंगे 5000 ग्रामीण उद्यमी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_64a3c9fdcc5d7.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पैक्स की मजबूती से ग्रामीण क्षेत्रों का होगा आर्थिक विकासः ओम बिरला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/economic-development-of-rural-areas-will-happen-with-the-strength-of-pacs-said-om-birla.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 03 Jul 2023 13:09:34 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/economic-development-of-rural-areas-will-happen-with-the-strength-of-pacs-said-om-birla.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि यदि प्रत्येक पंचायत में सहकारी समिति की स्थापना की जाए तो यह ग्रामीण परिवर्तन के लिए आर्थिक विकास के मॉडल के रूप में कार्य कर सकती है। उन्होंने कहा कि संकट के समय, जैसे कीमतों में वृद्धि, लोगों को बुनियादी जरूरतें प्रदान करना आदि में सहकारी समितियों ने हमेशा संकट को दूर किया है। नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय 17वें भारतीय सहकारी महासम्मेलन के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद हुए बदलावों की ओर इशारा करते हुए ओम बिरला ने पैक्स को मजबूत करने में सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि अगर पैक्स मजबूत होंगे तो किसानों के भंडारण की क्षमता में सुधार होगा और किसानों को उपज का उचित मूल्य मिलेगा। श्वेत क्रांति और नीली क्रांति में सहकारी समितियों की सफलता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों की सफलता की कहानियों को जन-जन तक पहुंचाना होगा।</p>
<p>भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) द्वारा आयोजित दो दिवसीय भारतीय सहकारी कांग्रेस का रविवार को समापन हुआ। इस सम्मेलन में देश के विभिन्न सहकारी संगठनों के 3500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x_64a27aed198b8.jpg" alt="" /></p>
<p>केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री परषोत्तम रुपाला ने समापन मौके कहा कि इफको की नैनो यूरिया ने सहकारिता आंदोलन के गौरव को बढ़ाया है। सहकारी क्षेत्र को नैनो यूरिया को लोकप्रिय बनाने के लिए संयुक्त प्रयास करने चाहिए ताकि हर किसान तक इसकी पहुंच हो सके। उन्होंने गुजरात के बाल गोपाल बैंक जिसका टर्नओवर 16 करोड़ रुपये है, का उदाहरण देते हुए कहा कि सहकारी समितियों में बचत की आदत विकसित करने की आवश्यकता है।</p>
<p>आईसीए-एपी और कृभको के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव ने कहा कि पैक्स के मॉडल उपनियम, जिसके माध्यम से पैक्स 40 प्रकार की बहु-विविध गतिविधियां करेंगे, पैक्स को आत्मनिर्भर बनाएगा। एनसीयूआई के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ सरकार के सहकारिता आंदोलन को सशक्त करने के प्रयासों में पूरा सहयोग करेगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_64a27ae1d8ac9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पैक्स की मजबूती से ग्रामीण क्षेत्रों का होगा आर्थिक विकासः ओम बिरला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_64a27ae1d8ac9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार व सहकार मिलकर करेंगे देश के विकास का प्रयासः पीएम मोदी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/government-and-cooperatives-will-work-together-for-the-development-of-the-country-said-pm-modi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 01 Jul 2023 20:35:06 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/government-and-cooperatives-will-work-together-for-the-development-of-the-country-said-pm-modi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सरकार व सहकार मिलकर देश के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे। भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) द्वारा नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय 17वें भारतीय सहकारी महासम्मेलन का शनिवार को उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार विकसित तथा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है जिसमें सबका प्रयास भी चाहिये। सहकारिताएं भी सभी के प्रयास से चलती हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने एनसीयूआई द्वारा विकसित ई-कॉमर्स वेबसाइट के ई-पोर्टल एवं सहकारी विस्तार और सलाहकार सेवा पोर्टल का भी शुभारंभ किया।</p>
<p>इस महासम्मेलन का विषय &ldquo;अमृत काल - जीवंत भारत के लिए सहकार से समृद्धि&rdquo; है। 1 और 2 जुलाई के इस महासम्मेलन में देश के 3500 से ज्यादा सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा मलेशिया, श्रीलंका, फिलीपींस, बंगलादेश सहित 25 से भी अधिक देशों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को दूध व चीनी के उत्पादन में विश्व का अग्रणी देश बनाने में सहकारिताओं का बड़ा योगदान रहा है। डेयरी उद्योग में देश की महिलाओं का 60 फीसदी का योगदान है। देश के कई हिस्सों में सहकारी समितियां किसानों की बड़ी सहायता कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार हमारी सरकार ने सहकारिता मंत्रालय का गठन किया और कई कदम उठाए गए। जैसे- गन्ना मिलों व गन्ना किसानों के भुगतान पर टैक्स लगता था उसे खत्म किया जो 1000 करोड़ रुपये था। किसानों के बकाया भुगतान के लिए 20,000 करोड़ रुपये का पैकेज दिया एवं उन्हें एथेनॉल बनाने के लिए प्रोत्साहित भी किया। चीनी मिलों से 70,000 करोड़ रुपये का एथेनॉल खरीदा गया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x_64a03f5e66acc.jpg" alt="" /></p>
<p>प्रधानमंत्री ने दाल व तिलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए सहकारी संगठनों का आह्वान किया ताकि आयात पर निर्भरता को कम किया जा सके। इससे भारत का 2.5 लाख करोड़ रुपये बचेगा जो किसानों के पास जाएगा। उन्होंने सहकारिताओं में पारदर्शिता लाने के लिए प्रौद्योगिकी अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमने प्राथमिक सहकारी समितियों का कम्प्यूटरीकरण करने का लक्ष्य रखा था जो लगभग 80 फीसदी पूरा हो गया है। उन्होंने पीएम मत्स्य संपदा योजना पर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल क्षेत्र रखने वाले गांवों में किसानों के लिए अधिक लाभ का स्रोत बन गया है। इसमें 25,000 मत्स्य सहकारी समितियां कार्य कर रही है। उन्हें प्रसंस्करण, &nbsp;भंडारण के कारण बढ़ावा मिला है। इससे देश में मछली पालन दोगुना हो गया है। उन्होंने कहा कि अब शहद उत्पादन से भी किसानों को लाभ मिल रहा है।</p>
<p>जैविक अनाज उत्पादन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सहकारी संगठन को रसायन मुक्त उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने के लिए आगे आना चाहिये। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि &nbsp;सहकारी समितियां प्रत्येक जिले में 5 गांव गोद लेकर जैविक खेती कराये ताकि जमीन का स्वास्थ्य ठीक रहे। उन्होंने मोटे अनाज &ldquo;श्री अन्न&rdquo; की पैदावार बढ़ाने व भोजन में इसका हिस्सा बढ़ाने का भी आह्वान किया।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना की चर्चा करते हुए कहा कि भारत जितना अनाज पैदा करता है उसका 50 फीसदी से भी कम भंडारण हो पाता है। अगले 5 वर्षों में 700 लाख टन भंडारण बढ़ाने की योजना है। उन्होंने &nbsp;गांवों को सहकारी मॉडल पर विकसित करने का सुझाव दिया और गोबर धन योजना के माध्यम से बिजली व जैविक खाद बनाने पर प्रकाश डाला।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x_64a03f8db0744.jpg" alt="" /></p>
<p>सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने &nbsp;बताया कि व्यापार करने में आसानी लाने के लिए बहु-राज्य सहकारी समितियों (एमएससीएस) पर कानून में संशोधन का विधेयक 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में लाया जाएगा। 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के लिए मसौदा मॉडल उप-कानूनों पर अपनी रजामंदी दे दी है। इसका अर्थ है कि सितंबर से देश के बड़े हिस्से में एक समान उप-कानून होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार एक नया सहकारी कानून बनाना चाहती है जो अगले 25 वर्षों में इस क्षेत्र का विस्तार करने में मदद करेगा। इसके अलावा एक सहकारी विश्वविद्यालय स्थापित करने की भी योजना है जिसके लिए अंतर-मंत्रालयी चर्चा शुरू की गई है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x_64a040518687e.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने कहा कि 6 जुलाई, 2021 को सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद सहकारिता के क्षेत्र में कई बदलाव संभव हुए हैं और भविष्य में भी बदलाव होते रहेंगे। अब सहकारी समितियों पर कॉरपोरेट के बराबर टैक्स लगेगा। राज्य &nbsp;सरकारों के साथ मिलकर प्राथमिक सहकारी समितियों के उपनियम को बदला गया है। अब वे लगभग 40 प्रकार के व्यापार, पैट्रोल, डीजल, गैस वितरण का लाइसेंस, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के कार्य, बीमा, आधारकार्ड, डेयरी, मछली, मेडिकल स्टोर जैसे सभी कार्य करके लाभ कमा सकेंगी तथा जनता को एक जगह सभी सुविधाएं मिलेगी। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ का धन्यवाद देते हुए कहा कि सरकार ने जो 45 कदम उठाए हैं उसमें सभी कार्यों में सहकारी संघ का बखूबी साथ मिला है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार व सहकार मिलकर करेंगे देश के विकास का प्रयासः पीएम मोदी ]]></media:description>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम मोदी कल दो दिवसीय 17वें भारतीय सहकारी सम्मेलन का करेंगे उद्घाटन, ई&amp;#45;कॉमर्स प्लेटफॉर्म एनसीयूआई हाट की भी होगी लॉन्चिंग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/pm-to-inaugurate-17th-indian-coop-congress-on-jul-1-launch-e-commerce-platform-ncui-haat.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 30 Jun 2023 14:04:33 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/pm-to-inaugurate-17th-indian-coop-congress-on-jul-1-launch-e-commerce-platform-ncui-haat.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस 1 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में आयोजित होने वाले दो दिवसीय 17वें भारतीय सहकारी कांग्रेस का उद्घाटन और सहकारी उत्पादों के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म एनसीयूआई हाट का शुभारंभ करेंगे। सहकारी विस्तार और सलाहकार सेवा पोर्टल का भी वह अनावरण करेंगे जो 'शिक्षण प्रबंधन प्रणाली' पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री सहकारिता मंत्रालय की पहल पर एक फिल्म के अलावा 'भारत में सहकारी विकास और रुझान' पर एक पुस्तक, सहकारी आंदोलन पर एक स्मारिका, "सहकारिता में सदस्यों की भूमिका" और "सहकारिता में शासन" पर प्रशिक्षण मॉड्यूल का भी अनावरण करेंगे।</p>
<p>केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) द्वारा आयोजित कांग्रेस के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करेंगे जो "अमृत काल - जीवंत भारत के लिए सहयोग के माध्यम से समृद्धि" विषय पर केंद्रित होगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला 2 जुलाई को समापन समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया और पशुपालन, मत्स्य पालन और डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला भी समापन समारोह में उपस्थित रहेंगे।</p>
<p>एनसीयूआई और इफको के अध्यक्ष दिलीप संघानी ने नई दिल्ली में मीडिया को सम्मेलन की जानकारी देते हुए कहा, " सहकारी कांग्रेस का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र के सामने आने वाले प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करना और 'अमृत काल' के लिए एक प्रभावी रोडमैप तैयार करना है।" प्रधानमंत्री सहकारी उत्पादों के लिए एनसीयूआई के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'एनसीयूआई हाट' का शुभारंभ करेंगे। इससे उत्पादों के पंजीकरण, ब्रांडिंग और प्रचार में निःशुल्क क्षमता निर्माण सहायता की सुविधा मिलेगी। प्रधानमंत्री का उद्घाटन भाषण विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही सहकारी समितियों को एक नई दिशा और मार्गदर्शन देगा। संघानी ने कहा कि इस कार्यक्रम में न केवल देश भर से बल्कि दुनिया भर से सहकारी संगठनों के 3,500 प्रतिनिधि भाग लेंगे।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन एशिया-प्रशांत (आईसीए-एपी) और कृभको के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव ने कहा, इस वर्ष की भारतीय सहकारी कांग्रेस अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के मौके पर आयोजित हो रही है जो हर साल जुलाई के पहले शनिवार को मनाया जाता है। नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, ईरान, मलेशिया, फिलीपींस और पापुआ न्यू गिनी सहित आठ देशों के प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके अलावा 34 देशों के प्रतिनिधि जो आईसीए के सदस्य हैं वे इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।</p>
<p>तकनीकी सत्र कुछ प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित होंगे। इनमें सहकारी कानून और नीति सुधार, सहकारी आंदोलन को मजबूत करने के लिए अंतर-क्षेत्रीय सहयोग, सहकारी शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान को मजबूत करना, प्रतिस्पर्धी सहकारी व्यावसायिक उद्यमों के लिए व्यवसाय करने में आसानी, सहकारी शासन के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी, लैंगिक समानता और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना और भारतीय अर्थव्यवस्था में सहकारी ऋण प्रणाली का महत्व जैसे विषय शामिल होंगे।</p>
<p>17वें भारतीय सहकारी महासम्मेलन का विशेष महत्व है क्योंकि इसका आयोजन ऐसे समय में किया जा रहा है जब नवगठित सहकारिता मंत्रालय द्वारा सहकारी आंदोलन को मजबूत करने के लिए कई नई पहल की गई है। पैक्स डिजिटलीकरण, नई सहकारी नीति का निर्माण, बीज उत्पादन, जैविक खेती, निर्यात हेतु नवीन बहुराज्यीय सहकारी समितियों का गठन और सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना आदि कुछ प्रमुख पहल हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम मोदी कल दो दिवसीय 17वें भारतीय सहकारी सम्मेलन का करेंगे उद्घाटन, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म एनसीयूआई हाट की भी होगी लॉन्चिंग ]]></media:description>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पराग को पुनर्जीवित करने को एनडीडीबी और यूपी सरकार कर रहे प्रयास : मीनेश शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/nddb-and-up-government-are-working-together-to-revive-parag-said-meenesh-shah.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 29 Jun 2023 15:52:43 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/nddb-and-up-government-are-working-together-to-revive-parag-said-meenesh-shah.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के दुग्ध सहकारी संघ पराग को पुनर्जीवित करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) को मिली है। एनडीडीबी के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह का कहना है कि उत्तर प्रदेश में डेरी क्षेत्र के विकास के लिए एनडीडीबी वचनबद्ध है। इसके लिए प्रदेश सरकार के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। प्रदेश के कोऑपरेटिव डेरी संघ पराग को पुनर्जीवित करने के लिए खाका तैयार हो चुका है। पराग की बेकार पड़ी क्षमता के बेहतर इस्तेमाल के लिए बातचीत चल रही है।</p>
<p>मीनेश शाह के मुताबिक, "लगभग एक साल पहले वाराणसी दुग्ध यूनियन की 2 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले डेरी प्लांट की कमान जब एनडीडीबी ने अपने हाथों में ली तब यह मुश्किल से 6,000 से 7,000 लीटर पर काम कर रही थी। आज यह एक लाख लीटर प्रतिदिन से ज्यादा पर संचालित हो रहा है। इससे पता चलता है कि दुग्ध उत्पादकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने और संचालन में व्यावसायिक और कार्य कुशलता लाने से उत्तर प्रदेश में डेरी कोऑपरेटिव को पुनर्जीवित किया जा सकता है। मगर कोऑपरेटिव रणनीतियों के माध्यम से उत्तर प्रदेश में डेरी सेक्टर को पुनर्जीवित करने के लिए डेरी कोऑपरेटिव और दुग्ध उत्पादक संगठनों दोनों को मिलकर काम करना होगा।"</p>
<p>आगरा में उपभोक्ताओं के घरों तक खुले ठंडे दूध की बिक्री के लिए मोबाइल दुग्ध वेंडिंग वैन का उन्होंने मंगलवार को उद्घाटन किया। इसके अलावा उन्होंने आस-पास के गावों में दुग्ध शीतलीकरण संयंत्र और एक बायो-गैस प्लांट का भी उट्घाटन किया। गुणवत्ता युक्त चारे को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने सहज मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के डेरी किसानों को मक्के के बीज भी वितरित किए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बनारस, गोरखपुर और रायबरेली में दुग्ध उत्पादक संगठनों सहित उत्तर प्रदेश में डेरी कोऑपरेटिव की सहायता के लिए एनडीडीबी ने महत्वपूर्ण पहल की है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में किसानों को सेवाएं प्रदान करने वाले संगठनों की विविधता से दुग्ध उत्पादकों की स्थिति बेहतर रहती है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x_649d5a5451b32.jpg" alt="" /></p>
<p>किसान की दूध खरीद आय का लगभग 70 फीसदी खर्च चारे पर होता है। बेहतर चारे की उपलब्धता की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए मीनेश शाह ने कहा कि एनडीडीबी इस दिशा में बड़ी पहलें कर रहा है। इसमें राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत सर्टिफाइड चारा बीजों को बढ़ावा और चारा प्लस एफपीओ का गठन शामिल है। लंबी अवधि का चारा बनाना, फसल अवशेष को सुरक्षित करना, संपूर्ण मिश्रित राशन आदि अनेक दूसरी पहलें भी की जा रही हैं।</p>
<p>लगभग 54 फीसदी महिला दुग्ध उत्पादकों सहित एक लाख से अधिक डेयरी किसानों की सदस्यता वाले &lsquo;सहज&rsquo; की एक दिवसीय यात्रा पर आए शाह ने कहा कि यह दुग्ध उत्पादक संगठन 5,000 बायो-गैस संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य बना रहा है जो गैस पंप सहित मात्र छह से सात हजार रुपये की लागत पर सिस्तेमा बायो से खरीदे जाएंगे। इनकी कीमत पहले लगभग 35,000 रुपये तक थी। अब हम पूरे देश में दुग्ध किसान संगठनों के लिए कम से कम 50,000 बायो गैस संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य बना रहे हैं क्योंकि इससे किसानों की आय में वृद्धि के अलावा पर्यावरण को सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी।</p>
<p>&lsquo;सहज&rsquo; पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 10 जिलों में रोजाना 4 लाख लीटर से अधिक दूध खरीदती है। यह एक उभरती मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अपने कुल राजस्व (लगभग 850 करोड़ रुपये) का 87 फीसदी अपने सदस्य किसानों को खरीद मूल्य, बोनस, लाभांश और प्रोत्साहन राशि के रूप में वापस देती है।</p>
<p>सहज को चालू वित्त वर्ष के दौरान सदस्यता 30 फीसदी बढ़कर लगभग 1.25 लाख और राजस्व 25 फीसदी बढ़कर 1,000 करोड़ रुपये को पार करने की उम्मीद है। इन जिलों में संगठित संगठनों के बीच इसकी बाजार हिस्सेदारी 33 फीसदी है। <span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पराग को पुनर्जीवित करने को एनडीडीबी और यूपी सरकार कर रहे प्रयास : मीनेश शाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आईसीए की आमसभा 128 साल में पहली बार भारत में होगी, इफको के प्रयासों से हुआ संभव, ग्लोबल कोऑपरेटिव कॉन्फ्रेंस भी होगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-brings-international-cooperative-alliance-general-assembly-to-india-for-the-1st-time-in-128-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 28 Jun 2023 16:11:49 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-brings-international-cooperative-alliance-general-assembly-to-india-for-the-1st-time-in-128-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>विश्व के नंबर एक सहकारी संगठन इफको के प्रयासों की बदौलत भारतीय सहकारिता जगत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर का आगाज हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय सहकारी संगठन (आईसीए) के 128 साल के इतिहास में पहली बार निदेशक मंडल ने सर्वसम्मति से जून, 2024 में नई दिल्ली में आईसीए वैश्विक बोर्ड, महासभा और एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया है। आईसीए दुनिया भर के 107 देशों के 310 से अधिक सहकारी संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है।</p>
<p>इफको की ओर से बुधवार को जारी एक बयान के मुताबिक, ब्रुसेल्स में चल रही आईसीए के निदेशक मंडल की बैठक में इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने भारत में बैठक की मेजबानी का प्रस्ताव रखा। आईसीए के निदेशक मंडल ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव का अनुमोदन किया। बयान में कहा गया है कि वैश्विक सहकारी आंदोलन पर इफको की छाप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "सहकार से समृद्धि" के ध्येय और सहकारिता मंत्री अमित शाह के कुशल नेतृत्व की प्रेरणा का परिणाम है। इफको का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना देश के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए एक और बड़ा कदम है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x_649c1716d55c7.jpg" alt="" /></p>
<p>इस अंतरराष्ट्रीय सहकारिता कार्यक्रम का उद्देश्य पूरे विश्व से आईसीए के सदस्य सहकारी संगठन के नेताओं के अनुभवों को इकट्ठा करना और आदान-प्रदान करना, नए संघों पर चर्चा करना और महत्वपूर्ण संस्थागत निर्णय लेना है। संगठनों के लोकतंत्र और एकजुटता का प्रदर्शन करने वाली आईसीए महासभा सहकारी संगठनों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्यक्रम है।</p>
<p>इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कहा, &ldquo;भारत में आईसीए महासभा और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करना इफको और भारत में सहकारी व्यवसायों के लिए गर्व का क्षण है। यह भारतीय सहकारी क्षेत्र में हम सभी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे सहकारी क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे जहां भारतीय सहकारी समितियां वैश्विक व्यवसायों में शामिल हो सकेंगी।&rdquo;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x_649c0c2c5cd2d.jpg" alt="" /></p>
<p>इफको ने पिछले कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय सहकारी क्षेत्र में भारत का गौरव बढ़ाया है। आईसीए के वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनिटर द्वारा इफको को दुनिया की शीर्ष 300 सहकारी समितियों में नंबर 1 सहकारी समिति का दर्जा दिया गया है। हाल ही में इफको ने रासायनिक उर्वरक के उपयोग को कम करने और फसल उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से विश्व का पहला नैनो उर्वरक इफको नैनो यूरिया (तरल) और इफको नैनो डीएपी (तरल) विकसित किया है जो सतत कृषि की दिशा में एक बड़ा कदम है।</p>
<p>आईसीए दुनिया भर में सहकारी समितियों को एकजुट, उनका प्रतिनिधित्व और उन्हें सेवाएं प्रदान करता है। 1895 में स्थापित यह सबसे पुराने गैर-सरकारी संगठन होने के साथ ही 1 अरब सहकारी सदस्य प्रतिनिधित्व के साथ लोगों की संख्या के आधार पर दुनिया के सबसे बड़े संगठनों में से एक है। यह सहकारी समितियों का प्रतिनिधित्व करने वाली शीर्ष संस्था है जिनकी संख्या दुनिया भर में लगभग 30 लाख होने का अनुमान है। यह सहकारी समितियों के लिए और उनके बारे में ज्ञान, विशेषज्ञता और समन्वित कार्रवाई के लिए एक वैश्विक आवाज और मंच प्रदान करती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_649c0c22055ee.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आईसीए की आमसभा 128 साल में पहली बार भारत में होगी, इफको के प्रयासों से हुआ संभव, ग्लोबल कोऑपरेटिव कॉन्फ्रेंस भी होगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको नैनो यूरिया की अब अमेरिका में होगी बिक्री, कैलिफोर्निया की कंपनी से हुआ एमओयू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-nano-urea-will-now-be-sold-in-america-mou-signed-with-california-company.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 22 Jun 2023 18:19:09 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-nano-urea-will-now-be-sold-in-america-mou-signed-with-california-company.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दुनिया की नंबर एक सहकारी संस्था इफको द्वारा स्वदेशी रूप से आविष्कृत और निर्मित विश्व के पहले नैनो यूरिया (तरल) की बिक्री अब अमेरिका में भी होगी। अमेरिका को निर्यात करने के संबंध में इफको ने कैलिफोर्निया स्थित कपूर एंटरप्राइजेज इंकांर्पोरेटेड के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इफको की ओर से गुरुवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई है।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि अमेरिका को नैनो यूरिया का निर्यात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहकार से समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इफको नैनो यूरिया (तरल) &nbsp;की कुल 5 लाख से अधिक बोतलें अब तक 25 से अधिक देशों में निर्यात की जा चुकी हैं। नैनो यूरिया बेहतर पोषण गुणवत्ता के साथ उत्पादन बढ़ाता है और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में भी कमी लाता है। यह जल, वायु और मृदा प्रदूषण को कम करता है जिससे भूमिगत जल और मिट्टी की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नैनो यूरिया (तरल) को पौधों के पोषण के लिए प्रभावी और दक्ष पाया गया है।</p>
<p>बयान के मुताबिक, इफको के कलोल स्थित नैनो बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर में कई वर्षों के शोध के बाद स्वदेशी रूप से नैनो यूरिया (तरल) को विकसित किया गया है। इफको पूरे विश्व के किसानों के लिए नैनो डीएपी (तरल) भी लेकर आई है। नैनो डीएपी पौधों की उत्पादकता को बढ़ाने वाला एक प्रभावी उत्पाद है। यह परंपरागत डीएपी से सस्ता है। साथ ही यह वनस्पति और जीव-जंतुओं के प्रयोग के लिए लिए सुरक्षित और विष रहित है। इसके प्रयोग से परंपरागत डीएपी पर निर्भरता काफी कम हो जाती है तथा सभी स्तरों पर पैसे की बचत होती है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x_649442b757cdd.jpg" alt="" /></p>
<p>वैश्विक परामर्शदायी संस्था अर्नेस्ट एंड यंग की रिपोर्ट में कहा गया कि नैनो यूरिया की पांच बोतलों के प्रयोग से ग्रीन हाउस गैस की बचत होती है जो एक पौधे के बराबर है। साथ ही इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्रीय रेनफेड लोलैंड राइस रिसर्च स्टेशन, गेरुआ (असम) की प्राथमिक रिपोर्ट और आईआरआरआई-आईएसएआरसी परीक्षण (खरीफ 2021) के अनुसार यदि चावल की खेती के 50 फीसदी भाग पर नैनो यूरिया का प्रयोग किया जाए तो इससे 46 लाख टन कार्बन डाई-ऑक्साइड के बराबर ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_649442bece6e6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको नैनो यूरिया की अब अमेरिका में होगी बिक्री, कैलिफोर्निया की कंपनी से हुआ एमओयू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पैक्स से ही उर्वरक खरीद सकेंगे किसान, कीटनाशक छिड़काव के लिए ड्रोन भी मिलेगा  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/pacs-will-sale-fertilizers-drone-will-also-be-available-for-spraying-pesticides-for-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 09 Jun 2023 14:15:48 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/pacs-will-sale-fertilizers-drone-will-also-be-available-for-spraying-pesticides-for-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सहकारिता के जरिये ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है। इसके लिए पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियां) को पहले से ज्यादा सक्रिय बनाकर उनका विविधीकरण किया जा रहा है और उन्हें ज्यादा अधिकार दिया जा रहा है। इसी कड़ी में अब यह फैसला किया गया है कि उन पैक्स की पहचान की जाएगी जो उर्वरकों की खुदरा बिक्री नहीं कर रही हैं। उनकी व्यवहार्यता के आधार पर उन्हें चरणबद्ध तरीके से खुदरा विक्रेता के रूप में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x_647f5b56f2e40.jpg" alt="" /></p>
<p>केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की रसायन और उर्वरक मंत्री श्री मनसुख एस मांडविया के साथ पिछले दिनों हुई एक बैठक में यह फैसला किया गया। इस बैठक में पैक्स को 2000 जन औषधि केंद्र खोलने के अलावा पांच अन्य महत्वपूर्ण फैसले किए गए। सहकारिता मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में इसकी जानकारी दी गई है। बैठक में ये 5 <span>महत्वपूर्ण फैसले किए गएः-</span></p>
<ol>
<li>देशभर में लगभग एक लाख पैक्स हैं। इनमें से जो उर्वरक खुदरा विक्रेता के रूप में काम नहीं कर रहीं हैं उनकी पहचान की जाएगी और व्यवहार्यता के आधार पर उन्हें चरणबद्ध तरीके से खुदरा विक्रेता के रूप में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।</li>
<li>जो पैक्स अभी प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों (PMKSK) <span>के रूप में कार्य नहीं कर रही हैं उन्हें </span>PMKSK <span>के दायरे में लाया जाएगा।</span></li>
<li>जैविक उर्वरकों, <span>विशेष रूप से फर्मेंटेड जैविक खाद (</span>FoM)/<span>तरल फर्मेंटेड जैविक खाद (</span>LFOM)/<span>फॉस्फेट समृद्ध जैविक खाद (</span>PROM) <span>की मार्केटिंग में पैक्स को जोड़ा जाएगा।</span></li>
<li>उर्वरक विभाग की मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस (MDA) <span>योजना के तहत उर्वरक कंपनियां छोटे बायो-ऑर्गेनिक उत्पादकों के लिए एक एग्रीगेटर के रूप में कार्य कर अंतिम उत्पाद की मार्केटिंग करेंगी। इस आपूर्ति और विपणन श्रृंखला में थोक/खुदरा विक्रेताओं के रूप में पैक्स को भी शामिल किया जाएगा।</span></li>
<li>उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए पैक्स को ड्रोन उद्यमियों के रूप में भी कार्यरत किया जा सकेगा। साथ ही, <span>ड्रोन का उपयोग संपत्ति सर्वेक्षण के लिए भी किया जा सकता है।</span><span></span></li>
</ol>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/cooperatives/pacs-will-be-able-to-open-2000-jan-aushadhi-kendras-cheap-medicines-available-in-villages-through-cooperatives.html" title="पैक्स जन औषधि केंद्र" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः पैक्स को जन औषधि केंद्र खोलने की मंजूूरी, 2000 सहकारी समितियों के जरिये गांवों में भी मिलेंगी सस्ती दवाइयां</strong></a></p>
<p>बयान में कहा गया है कि इन महत्वपूर्ण फैसलों से पैक्स के कार्य क्षेत्रों में विस्तार होगा जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के भी अवसर बढ़ेंगे और किसानों को उर्वरक, <span>कीटनाशक</span>, <span>बीज तथा कृषि मशीनरी आदि स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेगी।</span></p>
<p>इससे पहले सरकार पैक्स को पेट्रोल पंप, जन औषधि केंद्र खोलने सहित अन्य कई कार्य करने की अनुमति दे चुकी है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_646b1e996cb65.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पैक्स से ही उर्वरक खरीद सकेंगे किसान, कीटनाशक छिड़काव के लिए ड्रोन भी मिलेगा   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पैक्स को जन औषधि केंद्र खोलने की मंजूरी, 2000 सहकारी समितियों के जरिये गांवों में भी मिलेंगी सस्ती दवाइयां]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/pacs-will-be-able-to-open-2000-jan-aushadhi-kendras-cheap-medicines-available-in-villages-through-cooperatives.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 06 Jun 2023 21:34:14 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/pacs-will-be-able-to-open-2000-jan-aushadhi-kendras-cheap-medicines-available-in-villages-through-cooperatives.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण समितियों) भी अब जन औषधि केंद्र खोल सकेंगे। केंद्र सरकार ने 2000 पैक्स को जन औषधि केंद्र खोलने की अनुमति देने का फैसला किया है। इनमें से 1000 केंद्र इस साल अगस्त तक और बाकी 1000 दिसंबर तक खोले जाएंगे। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मंगलवार को स्वास्थ्य, &nbsp;रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख एस मांडविया के साथ हुई एक बैठक में यह निर्णय लिया गया।</p>
<p>केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि देशभर में 2000 पैक्स की पहचान प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र के रूप में खोलने के लिए की जाएगी। इस महत्वपूर्ण फैसले से न केवल पैक्स की आमदनी बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सस्ती कीमत पर दवाइयां भी उपलब्ध होंगी। बैठक में सहकारिता मंत्रालय के सचिव, रसायन एवं उर्वरक विभाग के सचिव और सहकारिता मंत्रालय व रसायन एवं उर्वरक विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।</p>
<p>देशभर में अभी तक 9400 से अधिक प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं। इनमें 1800 प्रकार की दवाइयां एवं 285 अन्य मेडिकल डिवाइस उपलब्ध हैं। ब्रांडेड दवाइयों की तुलना में जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयां 50-90 फीसदी सस्ती होती हैं। जन औषधि केंद्र खोलने के लिए पात्रता मानदंड के तहत व्यक्तिगत आवेदकों को डी.फार्मा/बी.फार्मा होना चाहिए। इसके लिए कोई भी संगठन, एनजीओ, धर्मार्थ संगठन एवं हॉस्पिटल आवेदन के लिए बी.फार्मा/डी.फार्मा डिग्री धारकों को नियुक्त कर सकता है।</p>
<p>जन औषधि केंद्र के लिए स्वयं या किराये का कम से कम 120 वर्ग फुट स्थान होना चाहिए। इसके लिए आवेदन शुल्क 5000 रुपये है। महिला उद्यमी, दिव्यांग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और भूतपूर्व सैनिक विशेष श्रेणी में आते हैं। जबकि आकांक्षी जिले, हिमालयी पर्वतीय क्षेत्र, उत्तर-पूर्वी राज्य और द्वीप समूह विशेष क्षेत्र में आते हैं। विशेष श्रेणी एवं विशेष क्षेत्र के आवेदकों को आवेदन शुल्क में छूट है।</p>
<p>जन औषधि केंद्र के लिए प्रोत्साहन राशि 5 लाख रुपये (मासिक खरीद का 15 फीसदी या अधिकतम 15,000 रुपये प्रति माह) है। विशेष श्रेणियों एवं क्षेत्रों में आईटी और इन्फ्रा खर्च के लिए प्रतिपूर्ति के रूप में 2 लाख रुपये की एक मुश्त अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पैक्स को जन औषधि केंद्र खोलने की मंजूरी, 2000 सहकारी समितियों के जरिये गांवों में भी मिलेंगी सस्ती दवाइयां ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_647f5b56ceee8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. उदय शंकर अवस्थी के जीवन पर दो पुस्तकों का विमोचन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-chairman-unveiled-book-named-the-joys-of-crisis-on-life-of-iffco-md-dr-u-s-awasthi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 31 May 2023 14:43:39 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-chairman-unveiled-book-named-the-joys-of-crisis-on-life-of-iffco-md-dr-u-s-awasthi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. उदय शंकर अवस्थी के जीवन पर दो पुस्तकों का विमोचन किया गया है। "संघर्ष का सुख" और "द जॉय ऑफ क्राइसिस" शीर्षक नाम से यह पुस्तकें हिंदी और अंग्रेजी में हैं। पुस्तकों को विमोचन मंगलवार को इफको की 52वीं सालाना आम सभा (एजीएम) में इफको के चेयरमैन दिलीप संघणी और उस मोके पर मौजूद इफको के पदाधिकारियों ने किया। इस मौके पर इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. अवस्थी ने एक कहा कि मुझे गर्व और खुशी हो रही है कि इफको के चेयरमैन दिलीप संघाणी और इफको के निदेशक मंडल व डेलीगेट्स मेरे जीवन पर लिखी पुस्तक &lsquo;द जॉय ऑफ क्राइसिस&rsquo; का विमोचन हुआ है।</p>
<p>इन पुस्तकों में अंग्रेजी संस्करण &lsquo;द जॉय ऑफ क्राइसिस&rsquo; का लेखन अरनब मित्रा ने किया है और हिंदी संस्करण &lsquo;संघर्ष का सुख&rsquo; का लेखन अखिलेश सौरभ ने किया है। इन पुस्तकों में एक सामान्य शुरुआत से लेकर विश्व की सबसे बड़ी उर्वरक सहकारी संस्था के शीर्ष तक पहुंचने के डॉ. अवस्थी संघर्ष और कामयाबी की गाथा है।</p>
<p>पुस्तकों के बारे में अपने संबोधन में इफको के चेयरमैन दिलीप संघाणी ने कहा कि पुस्तका शीर्षक ही अपने आप में रोचक है। जिस तरह से संघर्ष में सुख जैसी परिस्थिति को चरितार्थ करने वाले डॉ. अवस्थी जैसे कुछ विरले लोग ही होते हैं। छोटी आयु में ही पिता का साया उठने के बाद अपनी मात्रा को एक मजबूत स्तंभ की देखा और कदम दर कदम अपने को मुकाम पर आगे बढ़ते गये। संघाणी ने कहा कि मेरे डॉ. अवस्थी के साथ व्यक्तिगत अनुभव हैं जो उनकी आंतरिक शक्ति को साबित करते रहे हैं। कई मुश्किल मौकों पर जब लोगों को लगता है कि वह कैसे इनका सामना करेंगे तो हमने डॉ. अवस्थी को हर मौके पर मजबूत व्यक्तित्व के रूप में ही देखा और हर मुश्किल कोएक नायक की तरह पार करते हुए आगे बढ़े।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x_64770f8f4b477.jpg" alt="" /></p>
<p>इफको के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से भी कई लोगों ने इस मौके पर इन पुस्तकों को केंद्र में रखते हुए डॉ. अवस्थी के बारे में अपने अनुभव साझा किये। &nbsp;</p>
<p>इस मौके पर पुस्तक के लेखकों ने भी पुस्तक लिखने के समय डॉ. अवस्थी के साथ काम करने के अपने अनुभव भी साझा किये। इन पुस्तकों में डॉ. अवस्थी के जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण अवसरों के चित्र हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_64770f70816e0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. उदय शंकर अवस्थी के जीवन पर दो पुस्तकों का विमोचन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कोऑपरेटिव में बनेंगे 11 सौ नए एफपीओ, एनसीडीसी को मिली आवंटन की जिम्मेदारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/1100-new-fpos-will-be-formed-in-cooperative-ncdc-got-the-responsibility-of-allocation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 18 May 2023 14:04:32 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/1100-new-fpos-will-be-formed-in-cooperative-ncdc-got-the-responsibility-of-allocation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने कोऑपरेटिव क्षेत्र में 1,100 नए एफपीओ (किसान उत्पाद संगठन) बनाने का फैसला किया है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) को इसके आवंटन की जिम्मेदारी दी गई है। सरकार की ओर से जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई है। "सहकार से समृद्धि" के सपने को साकार करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 हजार एफपीओ बनाने का फैसला किया है। इसमें से करीब 5,000 एफपीओ बन चुके हैं।</p>
<p>सरकारी बयान में कहा गया है कि "सहकार से समृद्धि" के सपने को साकार करने तथा सहकारिता क्षेत्र में नए किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ)&nbsp; के गठन और संवर्धन द्वारा किसानों को लाभ पहुंचाने के केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रयासों से सहकारिता क्षेत्र में 1,100 एफपीओ के गठन का निर्णय लिया गया है। &nbsp;कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने एफपीओ योजना के तहत एनसीडीसी को इन अतिरिक्त एफपीओ के आवंटन का निर्णय लिया है।</p>
<p>एफपीओ योजना के तहत प्रत्येक एफपीओ को केंद्र सरकार द्वारा 33 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। साथ ही, क्लस्टर आधारित व्यापार संगठन (CBBO) को एफपीओ गठन के लिए प्रति एफपीओ को 25 लाख रुपये की राशि दी जाती है।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/latest-news/cabinet-approves-nutrient-based-subsidy-rates-for-kharif-season-2023.html" title="फर्टिलाइजर सब्सिडी को मंजूरी" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः खरीफ के लिए फर्टिलाइजर सब्सिडी की नई दरों को मंजूरी, एनबीएस के तहत 38 हजार करोड़ का प्रावधान, दाम में बदलाव की संभावना कम</strong></a></p>
<p>देशभर में प्राथमिक कृषि ऋण सोसायटी (पैक्स) से लगभग 13 करोड़ किसान जुड़े हैं। इस निर्णय से पैक्स, जो आमतौर पर अल्पकालिक कर्ज और बीज, उर्वरक आदि के वितरण का कार्य करती हैं, अब अन्य कृषि संबंधित आर्थिक कार्यकलाप करने में भी सक्षम होंगी। एफपीओ योजना में पैक्स के एकीकरण से उन्हें कृषि उत्पादन इनपुट, कृषि उपकरण जैसे कल्टीवेटर, टिलर, हारवेस्टर आदि की आपूर्ति तथा प्रसंस्करण जैसे अनाज की सफाई, परख, छंटाई, ग्रेडिंग, पैकिंग, भंडारण, परिवहन आदि गतिविधियों में अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार करने में सहायता मिलेगी। इसके अलावा मधुमक्खी पालन, मशरूम की खेती आदि जैसे ज्यादा आमदनी वाले उद्यम स्थापित करने में भी पैक्स सक्षम होंगी।</p>
<p>यह पहल सहकारी समितियों को आवश्यक बाजार लिंकेज प्रदान कर उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने में भी सहायक होगी। इससे पैक्स की व्यावसायिक गतिविधियों में भी विविधता आएगी तथा आय के नए और स्थायी स्रोत उत्पन्न होंगे। देश भर में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए सहकारिता मंत्रालय द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों के साथ यह पहल सहकारिता क्षेत्र, खासतौर पर पैक्स को और गतिशील, व्यवहार्य व वित्तीय रूप से स्थायी बनाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/07/image_750x500_62c3029098c17.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कोऑपरेटिव में बनेंगे 11 सौ नए एफपीओ, एनसीडीसी को मिली आवंटन की जिम्मेदारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/07/image_750x500_62c3029098c17.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको ने नैनो डीएपी&amp;#45;यूरिया का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए शुरू किया ड्रोनाई, ड्रोन और एआई की मदद से स्मार्ट खेती को मिलेगा बढ़ावा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-integrating-drone-nano-and-ai-technologies-for-smart-farming.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 08 May 2023 14:42:17 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-integrating-drone-nano-and-ai-technologies-for-smart-farming.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव इफको ने ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के जरिये नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। इसके लिए इफको ने ड्रोनाई (DRONAI) योजना की शुरुआत की है। देशभर में कृषि विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के सहयोग से इस योजना को अमल में लाया जाएगा।</p>
<p>ड्रोनाई एक एकीकृत कार्यक्रम है जो ड्रोन, नैनो फर्टिलाइजर (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मोबाइल टेक्नोलॉजी को मिलाकर नैनो फर्टिलाइजर और अन्य कृषि रसायनों के उपयोग को बढ़ावा देता है। किसान अपने मोबाइल पर ऐप के माध्यम से इन उन्नत तकनीकों का उपयोग कर सकते हैं जो तरल उर्वरकों और अन्य रसायनों के छिड़काव को कुशल, लागत प्रभावी और सुरक्षित बनाती है। छिड़काव करते समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सॉफ्टवेयर फसल की वृद्धि और स्वास्थ्य का पता लगा सकता है और किसानों को स्मार्ट खेती की ओर मार्गदर्शन कर सकता है।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/rural-connect/niti-aayog-panel-pitches-for-capital-assistance-for-gaushalas.html" title="नीति आयोग गौशाला" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः नीति आयोग ने गौशालाओं को आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाने की वकालत की, रियायती दरों पर पूंजी उपलब्ध कराने की बताई जरूरत</strong></a></p>
<p>इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद सफल ड्रोन छिड़काव प्रणाली का निर्माण करना, ग्रामीण युवाओं/किसानों के सहयोग से इस प्रणाली को संचालित करना और उन्हें उन्नत तकनीकों में प्रशिक्षित करना है। इससे अंततः ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। इसके तहत ड्रोन, उसके परिवहन वाहन और सुरक्षित उड़ान से संबंधित सभी अनिवार्य प्रोटोकॉल शामिल हैं और किसान हितैषी मोबाइल ऐप द्वारा संचालित हैं। इस एकीकृत ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने से &nbsp;किसानों को उच्च तकनीक वाली स्मार्ट खेती करने में मदद करेगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x_6458bc0c0e6e2.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>ड्रोनाई</strong> <strong>की विशेषताएं</strong></p>
<ul>
<li>कृषि में प्रभावी रूप से ड्रोन तकनीक की निगरानी और मार्गदर्शन करने में ड्रोनाई मदद करता है और किसानों को कम लागत पर बड़े क्षेत्रों में सुरक्षित रूप से नैनो उर्वरक और कृषि रसायनों के छिड़काव को बढ़ावा देता है।</li>
<li>किसानों के खेतों तक ड्रोन के सुरक्षित परिवहन के लिए एक इलेक्ट्रिक तिपहिया विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।</li>
<li>एक एकीकृत सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म जो किसी भी मोबाइल से चल सकता है, किसानों के लिए उपलब्ध होगा। यह सभी उपयोगकर्ताओं (ड्रोन ऑपरेटर, किसान, फील्ड ऑफिसर और केंद्रीय नियंत्रण इकाई) को जोड़ेगा।</li>
<li>यह ड्रोन की निगरानी करने और छिड़काव दक्षता (एकड़ प्रति दिन) की निगरानी करने में मदद करेगा।</li>
<li>इसके अलावा, ऐप में बस एक क्लिक से आराम से किसान छिड़काव की बुकिंग करा सकेंगे।</li>
<li>ड्रोनाई तकनीक के माध्यम से समय बचाने और कृषि रसायनों के परंपरागत छिड़काव से जुड़े कठिन परिश्रम और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचने के अलावा किसानों की छिड़काव लागत 50 फीसदी तक कम हो जाएगी।</li>
</ul>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x_6458bc13ae026.jpg" alt="" /></p>
<p>इफको द्वारा ड्रोनाई का परीक्षण मॉड्यूल कोयम्बटूर स्थित तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (टीएनएयू) के कृषि अनुसंधान केंद्र के तकनीकी सहयोग से 2 मई को लॉन्च किया गया था। इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. यू.एस. अवस्थी ने टीएनयू के वाइस चांसलर डॉ. वी. गीतालक्ष्मी की मौजूदगी में इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इफको के मार्केटिंग डायरेक्टर योगेंद्र कुमार और इफको-नैनोवेंशन्स के प्रबंध निदेशक डॉ. ए. लक्ष्मणन ने स्मार्ट खेती में एकीकृत ड्रोन तकनीक के महत्व पर किसानों को संबोधित किया। टीएनएयू और इफको द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न जिलों के लगभग 450 किसानों ने हिस्सा लिया।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_6458bc1b4568e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको ने नैनो डीएपी-यूरिया का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए शुरू किया ड्रोनाई, ड्रोन और एआई की मदद से स्मार्ट खेती को मिलेगा बढ़ावा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_6458bc1b4568e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कोऑपरेटिव के जरिये बनेंगे 10 हजार भंडारण गृह, पैक्स हुए चिन्हित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/10-thousand-cereal-warehouses-to-be-built-through-cooperative-pacs-identified.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 27 Apr 2023 16:33:20 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/10-thousand-cereal-warehouses-to-be-built-through-cooperative-pacs-identified.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सहकारी समितियों (कोऑपरेटिव) को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कदम बढ़ा दिया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मुताबिक, विकेंद्रित अन्न भंडारण केंद्र बनाने के लिए शुरुआती तौर पर 10 हजार पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण समिति) चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा पैक्स का मॉडल बायलॉज सभी राज्यों को भेजा गया है। 17 राज्यों ने इस बायलॉज को स्वीकार कर लिया है।</p>
<p>ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए सरकार ने &ldquo;सहकार से समृद्धि&rdquo; का नारा दिया है और दुनिया की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना बनाई है। वित्त वर्ष 2023-24 का बजट पेश करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसकी घोषणा की थी। इसके तहत ग्रामीण इलाकों में कोऑपरेटिव के जरिये भंडारण गृह बनाए जाएंगे। इससे न सिर्फ पैक्स को मजबूती मिलेगी और कोऑपरेटिव के लिए बड़े मौके उपलब्ध होंगे बल्कि बड़े पैमाने पर अनाजों की बर्बादी भी रूकेगी।</p>
<p>इफको नैनो (तरल) डीएपी की लॉन्चिंग के मौके पर मीडिया से बातचीत में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बताया कि विकेंद्रित भंडारण गृह बनाने के लिए 10 हजार पैक्स की पहचान कर ली गई है। <strong>रूरल वॉयस</strong> द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या भंडारण गृह बनाने और योजना के कार्यान्वयन के लिए कोई समय सीमा तय की गई है, उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी योजना के लिए कोई तय समय नहीं है लेकिन जैसे-जैसे चीजें आगे बढ़ती जाएंगी योजना का क्रियान्वयन होता जाएगा। साथ ही और पैक्सों को चिन्हित किया जाता रहेगा।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/latest-news/isma-director-general-sonjoy-mohanty-resigns.html" title="इस्मा डीजी का इस्तीफा" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः इस्मा के डायरेक्टर जनरल सॉन्जॉय मोहंती ने दिया इस्तीफा, अक्टूबर 2022 में संभाला था पद</strong></a></p>
<p>अमित शाह ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के सबसे पहले प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को मजबूत करना पड़ेगा। इसके लिए अगले 5 साल में देश के उन 2 लाख पंचायतों में नए मल्टीडाइमेंशनल पैक्स बनाए जाएंगे जहां अभी पैक्स नहीं हैं। इनके लिए डेयरी, मछुआरा कोऑपरेटिव, किसानों को कृषि कर्ज देने की व्यवस्था, इफको डीलरशिप, सस्ते अनाज की दुकान, कॉमन सर्विस सेंटर, जल व्यवस्थापन समिति जैसे 32 प्रकार के अलग-अलग काम निर्धारित होंगे। अभी देश में करीब 85 हजार पैक्स हैं जिनमें से 63 हजार बेहतर संचालन की स्थिति में हैं। बाकी को पुनर्जीवित किया जाएगा। मॉडल बायलॉज में इसके लिए प्रावधान किया गया है।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/latest-news/amit-shah-launches-nano-dap-rs-600-for-one-bottle-sales-start-in-eight-states.html" title="इफको नैनो डीएपी" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः अमित शाह ने इफको के नैनो डीएपी को किया लॉन्च, 600 रुपये में मिलेगी आधा लीटर बोतल, आठ राज्यों में बिक्री शुरू</strong></a></p>
<p>उन्होंने बताया कि मल्टीडाइमेंशनल पैक्स के तहत विविध उपयोगी, मछुआरा, आर्थिक रूप से किसानों को कर्ज देने वाली और डेयरी, चारों तरह की पैक्स एक ही पैक्स में समाहित हो जाएंगी। इससे वे जीवंत हो जाएंगी और उनकी आमदनी भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि देश के करीब 80 फीसदी लोग सहकारिता से जुड़े हुए हैं। हम इसे सही अर्थ में बहु-आयामी बनाने जा रहे हैं। &nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_644a5f3964ae1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कोऑपरेटिव के जरिये बनेंगे 10 हजार भंडारण गृह, पैक्स हुए चिन्हित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पेट्रोल पंप खोलने की पैक्स को मिली मंजूरी, एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप भी मिलेगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/pacs-gets-approval-to-open-petrol-pump-will-also-get-lpg-distributorship.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 12 Apr 2023 22:24:33 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/pacs-gets-approval-to-open-petrol-pump-will-also-get-lpg-distributorship.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पेट्रोल और डीजल के मौजूदा थोक लाइसेंसधारी पैक्स (PACS)<strong>&nbsp;</strong><span>भी अब रिटेल पंप खोल सकेंगे। साथ ही नए पेट्रोल</span>/डीजल डीलरशिप के आवंटन में पैक्स को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा पैक्स भी एलपीजी (रसोई गैस) डिस्ट्रीब्यूटर बन सकेंगे। पैक्स को सशक्त बनाने के मकसद से केंद्र सरकार ने यह फैसला किया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ बुधवार को हुई एक अहम बैठक में ये फैसले किए गए। &nbsp;</p>
<p>एक सरकारी बयान में इन फैसलों की जानकारी दी गई है। बयान के मुताबिक, मौजूदा थोक पेट्रोल/डीजल डीलरशिप लाइसेंसधारी पैक्स (PACS)<strong>&nbsp;</strong><span>को रिटेल आउटलेट में बदलने की पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सहमति दे दी है। इसके तहत मौजूदा पैक्स को अपने थोक उपभोक्ता पंपों को रिटेल आउटलेट में बदलने के लिए एक बार विकल्प दिया जाएगा।</span>&nbsp;<span>बयान में कहा गया है कि देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए नए पेट्रोल/डीजल डीलरशिप के आवंटन में पैक्स को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही अब पैक्स को भी एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप मिल सकेगी। इसके लिए पैक्स की पात्रता को मंजूरी मिल गई है।</span></p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/from-the-ground/how-cumin-became-a-diamond-for-farmers-read-the-full-story.html" title="जीरा बना हीरा" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः जीरा कैसे बना किसानों के लिए &lsquo;हीरा&rsquo;, यहां पढ़ें पूरी कहानी</strong></a></p>
<p>पेट्रोलियम मंत्रालय एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए पैक्स को पात्र बनाने के लिए नियमों में भी बदलाव करेगा। नए पेट्रोल/डीजल डीलरशिप के आवंटन में पैक्स को स्वतंत्रता सेनानी तथा स्पोर्ट्स कोटे के साथ संयुक्त श्रेणी 2 &nbsp;<span>में रखा जाएगा।</span> एक अन्य फैसले में सहकारी चीनी मिलों को प्रोत्साहन देने के लिए उनके द्वारा उत्पादित एथेनॉल खरीद के लिए भी प्राथमिकता देने पर सहमति जताई गई है। एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के तहत पेट्रोलियम मंत्रालय सुनिश्चित करेगा कि सहकारी चीनी मिलों को एथेनॉल खरीद के लिए अन्य निजी कंपनियों के मुताबिक प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा अब पैक्स खुद भी खुदरा आउटलेट का संचालन कर सकेंगे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x_6436e124f4152.jpg" alt="" /></p>
<p>सहकारिता मंत्रालय ने प्राथमिक कृषि कर्ज समितियों (पैक्स) को मजबूत करने के लिए कई और महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पैक्स के लिए मॉडल बायलॉज बनाए गए हैं जिनके माध्यम से देशभर के लगभग एक लाख पैक्स ग्रामीण आर्थिक विकास का आधार बन सकेंगी। 25 <span>से भी अधिक विभिन्न गतिविधियों के जरिये देश के </span>13 <span>करोड़ से भी अधिक किसानों की आय बढ़ाने में ये पैक्स सहायक साबित होंगे। </span>इसके अलावा पैक्स को मजबूत करने के लिए सहकारिता मंत्रालय द्वारा पैक्स के कम्प्यूटरीकरण की केन्द्रीय प्रायोजित योजना चलाई जा रही है जिससे पैक्स एक कॉमन नेशनल सॉफ्टवेयर के माध्यम से नाबार्ड से जुड़ पाएंगी।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/national/cumin-price-created-history-crossed-rs-50000-mark-for-the-first-time.html" title="जीरा 50 हजारी" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः जीरा के भाव ने रचा इतिहास, पहली बार 50 हजार रुपये के पहुंचा पार</strong></a></p>
<p>सहकारिता मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, <span>नाबार्ड और सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के साथ भी एक समझौता भी किया है। इसके तहत सीएससी</span>&nbsp;की 300 <span>से भी अधिक ई-सेवाओं को पैक्स के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आम जनता तक पहुंचाया जा सकेगा। </span></p>
<p>मंत्रालय ने&nbsp;अगले पांच वर्षों में सभी पंचायतों/गांवों में 2 <span>लाख बहुद्देशीय पैक्स व प्राथमिक डेयरी/मत्स्यपालन सहकारी समितियां बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही</span>&nbsp;जेम (GEM) <span>पोर्टल पर सहकारी समितियों को खरीददार के रूप में शामिल किया गया है। पैक्स के स्तर पर भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं का विकेंद्रीकरण भी किया जा रहा है</span>।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पेट्रोल पंप खोलने की पैक्स को मिली मंजूरी, एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप भी मिलेगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको को रिकॉर्ड 4,000 करोड़ रुपये का मुनाफा होने का अनुमान, 2022&amp;#45;23 में 95.62 लाख टन रहा उर्वरक उत्पादन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-estimates-record-profit-of-rs-4000-crore-said-md-uday-shankar-awasthi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 01 Apr 2023 20:27:16 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-estimates-record-profit-of-rs-4000-crore-said-md-uday-shankar-awasthi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>फर्टिलाइजर सहकारी समिति इफको का मुनाफा वित्त वर्ष 2022-23 में 4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रहने का अनुमान है। इस दौरान इफको का उर्वरक उत्पादन 95.62 लाख टन रहा है। इस वित्त वर्ष में समूह का मूल्यांकन 1.05 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है। इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. उदय शंकर अवस्थी द्वारा जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई है।</p>
<p>डॉ. अवस्थी ने कहा, &ldquo;इफको वित्तीय वर्ष <span>2022-23</span> के दौरान <span>95.62</span> लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का उत्पादन करने में सफल रहा है। इसमें <span>48.80</span> लाख मीट्रिक टन यूरिया<span>, 30</span> लाख मीट्रिक टन डीएपी और <span>46.75</span> लाख मीट्रिक टन एनपी/एनपीके/डीएपी/जल विलेय उर्वरक और विशिष्ट उर्वरक शामिल हैं। यह प्रशंसनीय है कि इफको के जल विलेय उर्वरक/विशिष्ट उर्वरकों/सागरिका ग्रेन्युल फर्टिलाइजर्स ने <span>2.38</span> लाख टन और सागरिका लिक्विड ने <span>12</span> लाख लीटर की उल्लेखनीय बिक्री हासिल की है। इस दौरान हम <span>126.25</span> लाख मीट्रिक टन उर्वरक बेचने में सफल रहे। साथ ही <span>129.07</span> लाख मीट्रिक टन यूरिया/एनपी/एनपीके/डीएपी/जल विलेय उर्वरकों और विशिष्ट उर्वरकों का प्रेषण करने में सक्षम रहे।&rdquo;</p>
<p>उन्होंने कहा कि हमारा कर पूर्व लाभ 4,000 करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है जो इफको के लिए अब तक का सर्वाधिक लाभ है। सामरिक प्रबंधन समूह की विशेषज्ञता ने लाभदायक संचालन और विदेशी उद्यमों से उच्च वित्तीय रिटर्न सुनिश्चित किया है। वित्त वर्ष <span>2022-23</span> के दौरान इफको समूह का मूल्यांकन 1.05 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान लगाया गया है। इस दौरान बीमा कंपनी इफको टोक्यो ने <span>10</span>,<span>000</span> करोड़ रुपये का अब तक सर्वाधिक प्रीमियम अर्जित किया है।</p>
<p>डॉ. अवस्थी के मुताबिक, इफको के पारादीप संयंत्र ने न केवल एकल स्ट्रीम फॉस्फोरिक एसिड संयंत्र से <span>8.4</span> लाख मीट्रिक टन (<span>100</span>फीसदी) <span>P2O5</span> का विश्व का उच्चतम वार्षिक फॉस्फोरिक एसिड उत्पादन किया है बल्कि निरीक्षण के बाद पहली बार <span>2</span> मिलियन मीट्रिक टन उर्वरक उत्पादन के मील का पत्थर भी पार किया। इसके साथ ही <span>114</span> फीसदी उपयोग क्षमता हासिल की। वर्ष <span>2022-23</span> में फूलपुर-<span>II </span>इकाई ने अब तक का सर्वाधिक <span>12.20</span> लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया का उत्पादन और प्रेषण किया जो यूरिया के लिए <span>5.14</span> जी कैल/मी. टन&nbsp; की अब तक की न्यूनतम ऊर्जा खपत के साथ है। इसके अलावा हमने यूरिया की <span>5.25</span> जी कैल/मी. टन अमोनिया यूरिया इकाइयों की अब तक की सबसे कम समग्र ऊर्जा खपत हासिल की है।</p>
<p>कलोल संयंत्र ने इस दौरान क्रमशः <span>4</span> लाख मीट्रिक टन और <span>6.61</span> लाख मीट्रिक टन अमोनिया और यूरिया का उच्चतम वार्षिक उत्पादन हासिल किया है। जबकि कांडला इकाई को आयातक श्रेणी के तहत सीमा शुल्क विभाग द्वारा वर्ष <span>2022-23</span> के लिए दूसरे उच्चतम सीमा शुल्क भुगतानकर्ता के रूप में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में नैनो तकनीक के रूप में इफको की उन्नति पिछले वर्ष उर्वरक क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि रही है। इफको नैनो डीएपी को भी एफसीओ की मंजूरी मिल गई जो एक ऐतिहासिक कदम है। नैनो यूरिया (तरल), नैनो डीएपी जैसे तकनीकी नवाचार पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करके कृषि-खाद्य क्षेत्र के भविष्य को संवार रहे हैं। इस प्रकार लागत कम करके एवं उत्पादकता को बढ़ाते हुए हम खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं।</p>
<p>वित्तीय वर्ष <span>2022-23</span> में इफको नैनो यूरिया (तरल) की <span>3.26</span> करोड़ से अधिक बोतलों की बिक्री करने में सफल रही है। नैनो तकनीक के रूप में सतत कृषि की दिशा में इफको का प्रयास पिछले साल उर्वरक क्षेत्र के लिए गेम चेंजर रहा है। इफको नैनो यूरिया की <span>4.80</span> करोड़ बोतलों के रूप में हमने <span>21.60</span> लाख मीट्रिक टन के बराबर यूरिया का भी उत्पादन किया है। उन्होंने कहा कि इफको किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से सहकारी समितियों और किसानों की सेवा करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।</p>
<p>डॉ. अवस्थी ने इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी,उपाध्यक्ष बलवीर सिंह और इफको निदेशक मंडल के सभी सदस्यों को भी धन्यवाद देते हुए कहा कि आपका समर्थन और मार्गदर्शन हमें लगातार मिलता रहा। उन्होंने कहा कि मैं इफको के सभी कर्मचारियों,इफको एम्पलाइज यूनियन और&nbsp; इफको ऑफिसर्स एसोसिएशन को उनके निरंतर सहयोग और समर्थन के लिए धन्यवाद देता हूँ। मैं भारत सरकार के उर्वरक विभाग,कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, सहकारिता मंत्रालय तथा भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ जिनका बहुमूल्य सहयोग और समर्थन हमें समय-समय पर मिलता रहा है।</p>
<p>डॉ. अवस्थी ने इफको के सभी कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा है कि इफको से जुड़े प्रत्येक कर्मचारी के वर्षों से समन्वित प्रयास से ही इफको ने तरक्की की है। संयंत्र और विपणन टीम के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी<span>,</span> कर्मठ और मेहनती कर्मचारियों के उत्कृष्ट समन्वय<span>,</span> ऊर्जा और संयुक्त प्रयासों से ही हम ये परिणाम हासिल कर सके हैं। उनके अथक प्रयासों और मेहनत के लिए उन्होंने उन्हें बधाई दी है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_6428461e1ef13.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको को रिकॉर्ड 4,000 करोड़ रुपये का मुनाफा होने का अनुमान, 2022-23 में 95.62 लाख टन रहा उर्वरक उत्पादन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नाफेड का हिंदुस्तान पेट्रोलियम से बायोफ्यूल के सह&amp;#45;उत्पादों एवं फीडस्टॉक के लिए हुआ एमओयू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/nafed-mou-with-hpcl-for-biofuels-by-products-and-feedstock.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 02 Mar 2023 17:06:41 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/nafed-mou-with-hpcl-for-biofuels-by-products-and-feedstock.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रीय कृषि सहकारी संस्था नाफेड ने सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) से एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैडिंग) किया है। बायोफ्यूल प्रोजेक्ट्स के सह-उत्पादों की मार्केटिंग और फीडस्टॉक की सप्लाई के लिए यह समझौता किया गया है। इस समझौता ज्ञापन पर नाफेड के एमडी राजबीर सिंह की मौजूदगी में एचपीसीएल और नाफेड के अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए।</p>
<p>नाफेड ने इस एमओयू की जानकारी अपने ट्विटर हैंडल पर दी है। एक ट्वीट कर नाफेड ने बताया है कि नाफेड के कार्यकारी निदेशक और एचपीसीएल के सीजीएम (बायोफ्यूल्स) ने फीडस्टॉक की सोर्सिंग और अंतिम उत्पादों की मार्केटिंग में सहायता के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ट्वीट में इस मौके की तस्वीर भी साझा की गई है। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित नाफेड मुख्यालय में हुए एमओयू के इस मौके पर दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा नाफेड के एमडी भी मौजूद थे।</p>
<p>इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने लिखा है, &ldquo;शानदार, यह आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन के लिए एक समग्र समाधान प्रदान करेगा।&rdquo;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/03/image_750x500_64008a21cab8a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नाफेड का हिंदुस्तान पेट्रोलियम से बायोफ्यूल के सह-उत्पादों एवं फीडस्टॉक के लिए हुआ एमओयू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पांच साल में दो लाख पैक्स एवं सहकारी समितियां बनाने की कैबिनेट ने दी मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cabinet-approves-setting-up-of-two-lakh-pacs-and-cooperatives-in-five-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 16 Feb 2023 08:37:57 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cabinet-approves-setting-up-of-two-lakh-pacs-and-cooperatives-in-five-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सहकारिता आंदोलन को मजबूती देने और इसकी पहुंच को जमीनी स्तर तक व्&zwj;यापक बनाने को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत अगले पांच साल में दो लाख प्राथमिक कृषि सहकारी साख समिति (पैक्स) एवं डेयरी/मत्स्य सहकारी समितियां बनाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला किया गया।</p>
<p>सरकार का लक्ष्य हर उस पंचायत में पैक्स और डेयरी सहकारी समितियां बनाना है जो अभी तक इससे वंचित हैं। साथ ही प्रत्येक तटीय पंचायतों एवं बड़े जलाशयों वाले पंचायतों में मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना करने की योजना सरकार ने बनाई है। इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए नाबार्ड,&nbsp;राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) द्वारा कार्य योजना तैयार की जाएगी। इसमें सरकार की पहले से चल रही योजनाओं को शामिल किया जाएगा। डेयरी&nbsp;<span>सहकारी समितियों के लिए</span>&nbsp;<span>पशुपालन और डेयरी विभाग की योजना राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी)</span>&nbsp;और डेयरी प्रसंस्करण एवं अवसंरचना विकास कोष (डीआईडीएफ) का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी तरह मत्स्य सहकारी समितियों के लिए मत्स्य पालन विभाग की योजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई)&nbsp;और मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ) का इस्तेमाल होगा।</p>
<p>पैक्स और सहकारी समिति बनाने की यह योजना देश भर में सदस्य किसानों को उनकी उपज का मार्केटिंग करने,&nbsp;उनकी आय बढ़ाने,&nbsp;गांव के स्&zwj;तर पर ही कर्ज सुविधाएं और अन्य सेवाएं प्राप्&zwj;त करने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। इनसे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे&nbsp;जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा। यह योजना किसानों को उनके उत्पादों की बेहतर कीमत दिलाने,&nbsp;अपने बाजारों के आकार का विस्तार करने और उन्हें आपूर्ति श्रृंखला में सुचारु रूप से शामिल करने में भी सक्षम बनाएगी। खस्ताहाल पैक्स जिन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता है उसकी पहचान कर उनके परिचालन क्षेत्र में नए पैक्स की स्थापना की जाएगी।</p>
<p>केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में कृषि और किसान कल्याण मंत्री और मत्स्य पालन,&nbsp;पशुपालन और डेयरी मंत्री के साथ एक उच्च स्तरीय अंतर मंत्रालयी समिति का भी गठन किया गया है।&nbsp;इसमें संबंधित विभाग के सचिव,&nbsp;नाबार्ड के अध्यक्ष,&nbsp;एनडीडीबी और एनएफडीबी के मुख्य कार्यकारी को भी सदस्यों के रूप में शामिल किया गया है। सहकारिता मंत्रालय द्वारा सभी हितधारकों से परामर्श के बाद पैक्स के उपनियम तैयार किए गए हैं&nbsp;ताकि उसकी व्यवहार्यता बढ़ाने और पंचायत स्तर पर उन्हें जीवंत आर्थिक संस्था बनाने के लिए उनकी व्यावसायिक गतिविधियों में विविधता लाई जा सके। पैक्स के ये उपनियम उन्हें&nbsp;25&nbsp;<span>से अधिक व्यावसायिक गतिविधियां करने में सक्षम बनाएंगे</span>।&nbsp;इनमें डेयरी,&nbsp;मत्स्य पालन,&nbsp;गोदामों की स्थापना,&nbsp;खाद्यान्नों,&nbsp;उर्वरकों,&nbsp;बीजों को खरीदने,&nbsp;एलपीजी/सीएनजी/पेट्रोल/डीजल वितरक,&nbsp;कर्ज देना,&nbsp;कस्टम हायरिंग सेंटर,&nbsp;कॉमन सर्विस सेंटर,&nbsp;उचित मूल्य की दुकानें,&nbsp;सामुदायिक सिंचाई,&nbsp;बिजनेस कॉरेस्पोंडें जैसी गतिविधियां शामिल हैं।</p>
<p>सहकारिता मंत्रालय द्वारा एक राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस भी तैयार किया जा रहा है।&nbsp;इसकी बदौलत ऐसे पंचायतों और गांवों की सूची तैयार की जा सकेगी&nbsp;जहां पैक्स,&nbsp;डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों की सेवाएं उपलब्&zwj;ध नहीं हैं। फिलहाल देशभर में लगभग&nbsp;98,995&nbsp;<span>पैक्स हैं और इनके सदस्&zwj;यों की संख्&zwj;या</span>&nbsp;13&nbsp;<span>करोड़ है</span>।&nbsp;1.6&nbsp;<span>लाख पंचायत में अभी तक पैक्स से वंचित हैं। प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों की संख्&zwj;या लगभग</span>&nbsp;1,99,182&nbsp;<span>है और इनके सदस्&zwj;यों की संख्&zwj;या लगभग</span>&nbsp;1.5&nbsp;<span>करोड़ हैं</span>।&nbsp;लगभग&nbsp;2&nbsp;<span>लाख पंचायतों में डेयरी सहकारी समिति नहीं है। प्राथमिक मत्स्य सहकारी समितियों की संख्&zwj;या लगभग</span>&nbsp;25,297&nbsp;<span>है और इनके सदस्&zwj;यों की संख्&zwj;या लगभग</span>&nbsp;38&nbsp;<span>लाख है</span>।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63ed9bdcc0604.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पांच साल में दो लाख पैक्स एवं सहकारी समितियां बनाने की कैबिनेट ने दी मंजूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने उत्तर प्रदेश में इफको के दो नये नैनो यूरिया संयंत्र राष्ट्र को समर्पित किये]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/mandsukh-mandaviya-dedicated-two-iffco-nano-urea-manufacturing-plants-to-the-nation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 14 Feb 2023 20:06:51 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/mandsukh-mandaviya-dedicated-two-iffco-nano-urea-manufacturing-plants-to-the-nation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने आज प्रसंस्कृत उर्वरक के क्षेत्र में दुनिया की नंबर 1 सहकारी संस्था इफको के दो अतिरिक्त नैनो यूरिया संयंत्र राष्ट्र को समर्पित किए। बरेली में इफको आंवला इकाई और इफको फूलपुर, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में दो विनिर्माण इकाइयों की स्थापना की गयी है।<br />इफको द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन दो नये नैनो यूरिया संयंत्रों की उत्पादन क्षमता प्रति दिन दो लाख बोतल होगी। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भारतीय उर्वरक क्षेत्र के इतिहास में देश के किसानों के हित में यह एक और बड़ी उपलब्धि है, जो भारत को आत्म-निर्भर बनाएगा । यह उर्वरक क्षेत्र को और मजबूत करेगा और आयात निर्भरता वाले पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करने में मददगार साबित होगा। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "आत्मनिर्भर भारत" और "आत्मनिर्भर कृषि" के ध्येय से प्रेरित है।<br />इफको नैनो यूरिया सदी का नवाचार है। उर्वरक के विकास के लिए नए मानदंड स्थापित करते हुए यह पोषक तत्व प्रबंधन में आमूलचूल बदलाव लेकर आएगा। नैनोटेक्नोलॉजी में इफको के अनुसंधान एवं विकास वैश्विक स्तर पर वांछित रासायनिक संरचना के साथ उर्वरक उत्पादन को बेहतर बनाने की क्षमता प्रदान करता है, पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता में सुधार करता है जो पर्यावरणीय दुष्प्रभाव को कम करता है और पौधों की उत्पादकता को बढ़ाता है।<br />इफको किसानों के हित में अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में लगातार काम कर रहा है। इफको द्वारा विकसित दुनिया का पहला नैनो उर्वरक, नैनो यूरिया निश्चित रूप से फसल उत्पादकता को बढ़ाते हुए पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव और कार्बन फुटप्रिंट को कम करेगा। यह सतत कृषि की दिशा में एक बड़ा कदम है। किसानों की आय दोगुनी करने के प्रधानमंत्री जी के सपने को साकार करने की दिशा में इफको काम कर रही है। इफको कृषि नवाचार के क्षेत्र में सबसे आगे रहा है और जल्द ही देश के किसानों के लाभ और बेहतरी के लिए इफको नैनो डीएपी पेश करेगा जिसे हाल ही में व्यावसायिक उपयोग के लिए मंजूरी मिल गई है।<br />इस मौके पर केन्द्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि यहां केवल नैनो यूरिया का उत्पादन ही नहीं होता है। लेकिन जब नैनो यूरिया बनता है तब देश को सच्चा और तरल उर्वरक मिलता है जो प्रदूषण को कम करता है, मिट्टी को बचाता है और किसानों का खर्च कम करते हुए उत्पादन बढ़ाता है।<br />इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कहा कि नैनो यूरिया (तरल) फसल की पोषण गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने में बहुत प्रभावी पाया गया है और इसका भूमिगत जल और पर्यावरण की गुणवत्ता पर बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप ग्लोबल वार्मिंग में महत्वपूर्ण कमी आई है।<br />इफको अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत और सहकार से समृद्धि के ध्येय के अनुरूप नैनो यूरिया (तरल) विकसिता किया गया है। इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) बीते वर्ष दुनिया का पहला इफको नैनो यूरिया (तरल) लेकर आया जो उर्वरक नियंत्रण आदेश (एफसीओ, 1985) में शामिल है। इफको नैनो यूरिया (तरल) को कलोल, गुजरात में इफको के नैनो बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (एनबीआरसी) में प्रोप्रइटरी टेक्नोलॉजी के माध्यम से स्वदेशी रूप से विकसित किया गया था। इफको का नैनो यूरिया (तरल) एक क्रांतिकारी उत्पाद है और सतत कृषि की दिशा में एक सशक्त प्रयास है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने उत्तर प्रदेश में इफको के दो नये नैनो यूरिया संयंत्र राष्ट्र को समर्पित किये ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारिता आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए बन रही राष्ट्रीय नीतिः अमित शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/amit-shah-said-national-policy-being-prepared-to-promote-cooperative-based-development.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 08 Feb 2023 11:11:35 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/amit-shah-said-national-policy-being-prepared-to-promote-cooperative-based-development.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>'सहकार से समृद्धि' के नारे को साकार करने, सहकारिता आधारित आर्थिक विकास मॉडल को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर तक इसकी पहुंच को मजबूत करने के मकसद से केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर एक समिति का गठन किया है। सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में गठित इस समिति में सहकारी क्षेत्र के विशेषज्ञ, सहकारी समितियों के प्रतिनिधि, राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता सचिव और आरसीएस, केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में 'सहकारिता पर राष्ट्रीय नीति' पर एक लिखित प्रश्न का जवाब देते हुए यह जानकारी दी।</p>
<p>केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने अपने लिखित जवाब में बताया कि नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति तैयार करने के लिए पहले सहकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों से परामर्श किया गया था। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, राज्यों, संघ शासित प्रदेशों, राष्ट्रीय सहकारी संघों, संस्थानों और आम जनता से भी सुझाव मांगे गए थे। राष्ट्रीय समिति नई नीति का प्रारूप तैयार करने के लिए इन सुझावों और सिफारिशों का विश्लेषण करेगी। उन्होंने बताया कि सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद सहकारी ढांचे को देश की आर्थिक और सामाजिक आवश्यकताओं के साथ समन्वित करते हुए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें पैक्स का कंप्यूटरीकरण, पैक्स को कॉमन सेवा केंद्र (सीएससी) के रूप में संचालित करने, सहकारी चीनी मिलों को राहत देने, सहकारी समितियों के लिए विभिन्न टैक्स की दरों में कटौती जैसे उपाय शामिल हैं। जबाव में बताया गया है कि 2,516 करोड़ रुपये के व्यय के साथ ईआरपी आधारित सामान्य राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर 63,000 कार्यशील पैक्स ऑनबोर्ड करने की प्रक्रिया शुरू हुई है। साथ ही पैक्स को डेयरी, मत्स्य पालन, गोदामों की स्थापना, एलपीजी/पेट्रोल/हरित ऊर्जा वितरण एजेंसी, बैंकिंग संवाददाता, सीएससी आदि जैसी 25 से अधिक व्यावसायिक गतिविधियों को करने में सक्षम बनाने के लिए संबंधित राज्य सहकारिता अधिनियम के अनुसार मॉडल उपनियम तैयार किए गए हैं। पैक्स को सीएससी के रूप में संचालित करने से उसकी व्यवहार्यता में सुधार करने, ग्रामीण स्तर पर ई-सेवाएं देने और रोजगार सृजन करने में मदद मिलेगी।</p>
<p>अमित शाह ने अपने जवाब में कहा कि सहकारी समितियों के प्रामाणिक और अद्यतन डेटाबेस बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इससे नीति निर्माण और कार्यान्वयन में सुविधा मिलेगी। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा स्वयं सहायता समूहों के लिए 'स्वयंशक्ति सहकार', लंबी अवधि के कृषि कर्ज के लिए 'दीर्घावधि कृषक सहकार', डेयरी के लिए 'डेयरी सहकार' और मत्स्य पालन के लिए 'नील सहकार' जैसी नई योजनाएं शुरू की गई हैं। वित्त वर्ष 2021-22 में इसके लिए 34,221 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है। इसके अलावा सहकारी समितियों को जीईएम (जेम) पोर्टल पर 'खरीदार' के रूप में पंजीकरण करने की अनुमति दी गई है। इससे वे अधिक पारदर्शी तरीके से लगभग 40 लाख विक्रेताओं से किफायती दर पर सामान और सेवाएं खरीद सकेंगी।</p>
<p>प्रो. अच्युतानंद सामंत द्वारा पूछे गए लिखित सवाल के जवाब में सहकारी मंत्री अमित शाह ने बताया कि एक से 10 करोड़ रुपये तक की आय वाली सहकारी समितियों के लिए अधिभार 12 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया गया है। इसी तरह न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) को 18.5 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी किया गया है। इसी तरह नई सहकारी समितियों के लिए टैक्स की दर कम करने की घोषणा 2023-24 के बजट में की गई है। 31 मार्च, 2024 तक विनिर्माण गतिविधियां शुरू करने वाली नई सहकारी समितियों के लिए 30 फीसदी की मौजूदा दर की तुलना में 15 फीसदी की दर से टैक्स वसूलने की घोषणा की गई है। जबकि सहकारी समितियों के लिए नकद निकासी की सीमा को बिना टीडीएस के 1 करोड़ से 3 करोड़ रुपये सालाना करने की घोषणा की गई है। बजट में पैक्स और प्राथमिक सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों (PCARDBs) द्वारा नकद जमा और कर्ज के लिए प्रति सदस्य सीमा 20 हजार रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने की भी घोषणा की गई है।</p>
<p>सहकारिता मंत्री के जवाब में बताया गया है कि सहकारी चीनी मिलों को किसानों को उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) या राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) तक गन्ने के अधिक मूल्य का भुगतान करने के लिए अतिरिक्त आयकर के अधीन नहीं लाया जाएगा। साथ ही उन्हें निर्धारण वर्ष 2016-17 से पहले की अवधि के लिए गन्ना किसानों को उनके बकाया भुगतान को व्यय के रूप में दावा करने की अनुमति देने की घोषणा की गई है। इससे उन्हें लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की राहत मिली है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारिता आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए बन रही राष्ट्रीय नीतिः अमित शाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जैविक खाद्य उत्पादों के लिए पहली बार बनी राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समिति, वैश्विक बाजार में पैठ बढ़ाने पर फोकस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/eying-to-cash-in-the-booming-organic-food-market-via-cooperatives.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 07 Feb 2023 17:37:02 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/eying-to-cash-in-the-booming-organic-food-market-via-cooperatives.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसानों की आमदनी बढ़ाने और भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मकसद से केंद्र सरकार ने जैविक खाद्य उत्पादों (ऑर्गेनेकि फूड) को बढ़ावा देने और इसका निर्यात बढ़ाने का फैसला किया है। इसके लिए अपनी तरह की पहली पहल करते हुए जैविक उत्पादों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सहकारी समिति बनाने की घोषणा की गई है। ऑर्गेनिक फूड का ग्लोबल मार्केट अनुमानित <span>10 </span>लाख करोड़ रुपये का है। इसमें भारत की हिस्सेदारी सिर्फ <span>2.7 </span>फीसदी है। इस बाजार में भारत की पैठ बढ़ाने के असीमित अवसर हैं। सरकार इस अवसर का लाभ उठाना चाहती है। इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि निर्यात में भी इजाफा होगा।</p>
<p>राष्ट्रीय स्तर की यह सहकारी समिति अन्य सहकारी समितियों की सहायता करेगी ताकि उनके सदस्य किसानों को उनकी उपज की ज्यादा से ज्यादा कीमत मिल सके। राष्ट्रीय समिति ऑर्गेनिक उत्पादों का बड़े पैमाने पर एकत्रीकरण<span>, </span>ब्रांडिंग और मार्केटिंग करने के साथ-साथ उनके परीक्षण और कम लागत पर प्रमाणीकरण की सुविधा भी मुहैया कराएगी। इसके लिए उन मान्यता प्राप्त जैविक परीक्षण प्रयोगशालाओं और प्रमाणन निकायों को सूचीबद्ध करेगी जो परीक्षण और प्रमाणन की लागत को कम करने के लिए समिति के मानदंडों को पूरा करेगी। &nbsp;अमूल के ब्रांड और मार्केटिंग नेटवर्क का इस्तेमाल कर विभन्न कारोबारी मॉडल को अपनाया जाएगा और खुद का नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसके अलावा समिति जैविक उत्पादकों के तकनीकी मार्गदर्शन<span>, </span>प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण आदि की भी सुविधा मुहैया कराएगी।</p>
<p>इस समय देश में 8.54 लाख पंजीकृत सहकारी समितियां हैं जिनके 29 करोड़ से अधिक सदस्य हैं। इन सदस्यों में से ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों से हैं जो कृषि और संबद्ध क्षेत्र से संबंधित गतिविधियों में लगे हुए हैं। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सहकारी क्षेत्र की इस ताकत का उपयोग ऑर्गेनिक क्लस्टर और इसकी पूरी आपूर्ति श्रृंखला के विकास के लिए किया जाएगा। तीन प्रमुख सहकारी समितियों गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (<span>GCMMF), </span>नेशनल एग्रीकल्चरल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (<span>NAFED), </span>नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (<span>NCCF) </span>और राष्ट्रीय स्तर के दो संगठन राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने इस क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर की इकाई स्थापित करने के लिए हाथ मिलाया है। देश में इस तरह के अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही थी। दुनिया में भारत के जैविक उत्पादकों की सबसे बड़ी संख्या होने के बावजूद प्रति उत्पादक कम भूमि और अपर्याप्त उपज के कारण जैविक उत्पाद बाजार में उनका योगदान कम है। दुनिया के कुल जैविक उत्पादकों में से लगभग आधे करीब 16 लाख भारत के हैं। इसके अलावा प्रक्रियाओं<span>, </span>बाजार की स्थितियों और ऐसे उत्पादों से मुनाफा कमाने के बारे में उत्पादकों में जानकारी और जागरूकता की कमी है।</p>
<p>मौजूदा समय में प्रमाणित भारतीय जैविक उत्पाद का खुदरा बाजार लगभग 27,000 करोड़ रुपये का है जिसमें 7,000 करोड़ रुपये का निर्यात भी शामिल है। दुनिया भर में लगभग 34 लाख जैविक उत्पादक हैं जो 749 लाख हेक्टेयर (दुनिया की कुल कृषि भूमि का 1.6%) भूमि में जैविक उत्पाद की खेती करते हैं। इनमें से सबसे ज्यादा ऑस्ट्रेलिया में 357 लाख हेक्टेयर में इन उत्पादों की खेती होती है। जबकि 27 लाख हेक्टेयर भूमि के साथ भारत चौथे स्थान पर है। मध्य प्रदेश में 7.6 लाख हेक्टेयर, राजस्थान में 3.5 लाख हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 2.8 लाख हेक्टेयर जमीन में जैविक उत्पादों की खेती होती है। जबकि सिक्किम 2016 से पहले से ही पूरी तरह से जैविक राज्य है। पिछले तीन वर्षों में भारत द्वारा निर्यात किए गए 10 प्रमुख जैविक उत्पादों में प्रसंस्कृत खाद्य<span>, </span>तिलहन<span>, </span>अनाज और बाजरा<span>, </span>चीनी<span>, </span>मसाले, दालें<span>, </span>चाय<span>, </span>चारा और कॉफी शामिल हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जैविक खाद्य उत्पादों के लिए पहली बार बनी राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समिति, वैश्विक बाजार में पैठ बढ़ाने पर फोकस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देवघर में बनेगा इफको का पांचवां नैनो यूरिया प्लांट, सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया शिलान्यास]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/fifth-nano-urea-plant-of-iffco-to-be-built-in-deoghar-amit-shah-laid-the-foundation-stone.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 04 Feb 2023 21:13:22 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/fifth-nano-urea-plant-of-iffco-to-be-built-in-deoghar-amit-shah-laid-the-foundation-stone.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को झारखंड के देवघर में इफको (IFFCO) के पांचवें नैनो यूरिया प्लांट का भूमि पूजन और शिलान्यास किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भूमि संरक्षण के लिए तरल यूरिया बहुत जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमि संरक्षण को प्रमुख मुद्दा बना इससे जुड़े सभी कार्यों को प्राथमिकता दी है, चाहे वह प्राकृतिक खेती हो, ऑर्गेनिक खेती हो या नैनो यूरिया के अनुसंधान से लेकर उत्पादन तक की प्रक्रिया को गति देने की बात हो। इस प्लांट में सालाना लगभग 6 करोड़ तरल यूरिया की बोतलों का निर्माण किया जाएगा, जिससे यूरिया के आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा। शिलान्यास के मौके पर इफको के चेयरमैन दिलीप संघाणी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि 500 ग्राम की छोटी बोतल यूरिया के एक पूरे बैग का विकल्प है। किसान यूरिया के साथ-साथ तरल यूरिया का छिड़काव भी करते हैं जिससे न केवल फसल को बल्कि भूमि को भी नुकसान होता है। भूमि के सरंक्षण के लिए ही नैनो तरल यूरिया का अनुसंधान किया गया है। केमिकल फर्टिलाइजर जमीन में मौजूद कुदरती खाद बनाने वाले केंचुओं को मार देता है, जबकि तरल यूरिया का छिड़काव करने पर जमीन किसी भी प्रकार से दूषित नहीं होगी। केमिकल फर्टिलाइजर के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए अमित शाह ने कहा कि यदि जल्द ही कृषि से रसायन और यूरिया के उपयोग को समाप्त नहीं किया गया तो दुनिया के कई देशों की तरह यहां भी जमीन की उत्पादकता पर नकारात्मक असर पड़ेगा।&nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x_63de8618b0225.jpg" alt="" /></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उन्होंने बताया कि किसानों की सहकारिता से बने इफको ने विश्व में पहली बार तरल नैनो यूरिया बनाया और अब डीएपी (डी-अमोनियम फॉस्फेट) की ओर आगे बढ़ रहा है। यह भारत और पूरे सहकारिता क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। सहकारिता को बढ़ावा देने के लिए बजट में कई योजनाओं की घोषणा की गई है। इसके तहत उत्पादन के क्षेत्र में नई सहकारिता इकाईयों के लिए इनकम टैक्स की दर 26 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी कर दी गई है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज पांच देशों को तरल यूरिया का निर्यात किया जा रहा है। इफको द्वारा बनाया गया यह तरल यूरिया न केवल भारत बल्कि विश्व के किसानों की भी मदद करेगा। भारत कभी यूरिया का आयात करता था लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा यूरिया के कई कारखाने पुनर्जीवित किए गए। देवघर में 30 एकड़ में बन रहा तरल यूरिया का यह कारखाना आयातित 6 करोड़ यूरिया खाद के बैग का विकल्प बनेगा। इससे किसान की भूमि भी संरक्षित रहेगी और उत्पादन में भी वृद्धि होगी। यह कारखाना न केवल झारखंड बल्कि बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के किसानों के खेतों में भी उत्पादन बढ़ाने में उपयोगी साबित होगा।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अमित शाह ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद पूरे भारत के सहकारिता के डेटा बैंक को बनाने का काम किया गया है। अगले 5 वर्षों में सरकार हर पंचायत में नई बहुउद्देशीय सहकारी समितियों, प्राथमिक मत्स्य समितियों और डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना की सुविधा प्रदान करेगी।</span> <span style="font-weight: 400;">उन्होंने कहा कि देश में सालों से ऐसी भंडारण प्रक्रिया चल रही है जो हमारे देश के अनुकूल नहीं हैं। किसान की उपज को पहले गोदामों में लाया जाता है और फिर उसे वापस वितरण के लिए गांव ले जाया जाता है। इससे सरकार गरीब को जितना फायदा देना चाहती है उसका 50 फीसदी आवागमन में खर्च हो जाता है। मगर अब हर तहसील में दो से पांच हजार टन भंडारण क्षमता वाले आधुनिक गोदाम बनाए जाएंगे जिससे किसान का उत्पाद तहसील सेंटर पर ही स्टोर होगा और वहीं से मध्याह्न भोजन और गरीबों को मुफ्त अनाज के रूप में उस तहसील में वितरित किया जाएगा। इससे अनाज के परिवहन खर्च में लगभग 80 फीसदी की कमी आएगी। इसके लिए इस बार बजट में विश्व की सबसे बड़ी को-ऑपरेटिव अन्न भंडारण योजना की घोषणा की गई है। इससे पैक्स बहुआयामी बनेंगे और उनकी इनकम बढ़ेगी।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ देवघर में बनेगा इफको का पांचवां नैनो यूरिया प्लांट, सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया शिलान्यास ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पैक्स के जरिये सीएससी की सुविधाएं देने के लिए सहकारिता मंत्रालय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच एमओयू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/mou-signed-between-ministry-of-cooperation-and-ministry-of-electronics-and-it-for-csc-services-through-pacs.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 02 Feb 2023 19:23:37 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/mou-signed-between-ministry-of-cooperation-and-ministry-of-electronics-and-it-for-csc-services-through-pacs.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स</span><span>) को सामान्य सेवा केन्द्रों द्वारा दी जाने वाली सेवाएं प्रदान करने हेतु समर्थ करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केन्द्रीय इलेक्&zwj;ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, अश्विनी वैष्&zwj;णव की उपस्थिति में सहकारिता मंत्रालय, इलेक्&zwj;ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, नाबार्ड और सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज़ इंडिया लिमिटेड के बीच नई दिल्ली में इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्&zwj;ताक्षर किए गए। इस अवसर पर सहकारिता राज्यमंत्री बी एल वर्मा, सहकारिता मंत्रालय और इलेक्&zwj;ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव, सहकारिता मंत्रालय, नाबार्ड और एनसीडीसी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</span></p>
<p><span>इस मौके पर अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि पैक्स सहकारिता की आत्मा हैं। इन्हें लगभग 20 सेवाओं के प्रदाता बनाकर बहुद्देश्यीय बनाने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़ग़ार के अवसरों में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और कृषि विकास में पैक्स की भूमिका और योगदान बहुत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने इस समझौते को सबके लिए विन-विन सिचुएशन बताते हुए कहा कि इससे सहकार से समृद्धि और सहकारिता को ग्रामीण विकास की रीढ़ बनाने का प्रधानमंत्री मोदी जी का स्वप्न तो पूरा करने में मदद मिलेगी ही, साथ ही सहकारिता और किसान दोनों मज़बूत भी होंगे। अमित शाह ने कहा कि इससे सामान्य सेवा केन्द्रों (सीएससी) का कॉंसेप्ट देश की छोटी से छोटी इकाई तक बेहद सरलता से पहुंच सकेगा।</span></p>
<p><span>उन्होंने कहा कि देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में सहकारिता से जुड़ी है और इतने बड़े सेक्टर के विकास को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री&nbsp; नरेन्द्र मोदी जी ने अलग सहकारिता मंत्रालय बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि सहकारिता क्षेत्र के सामने पैक्स को आर्थिक रूप से व्यवहार्य&nbsp;बनाना सबसे बड़ी समस्या थी और आज पैक्स की कार्यप्रणाली में कई नए आयामों को जोड़कर एक नई शुरूआत हुई है। पैक्स अब जल वितरण, भंडारण, बैंक मित्र सहित 20 अलग-अलग गतिविधियां चला सकेंगे। उन्होंने कहा कि सबसे पहला और महत्वपूर्ण कार्य समान सेवा केन्द्र द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं को पैक्स के माध्यम से ग्रामीण आबादी को उपलब्ध कराना है।</span></p>
<p><span>केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि इ</span>स वर्ष के बजट में सहकारिता क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट में अगले 5 साल में 2 लाख पैक्स बनाने और हर पंचायत में एक बहुद्देश्यीय पैक्स की रचना का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा बजट में सहकारिता क्षेत्र के लिए विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना की नींव भी रखी गई है। उन्होंने&nbsp; कहा कि सहकारिता क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने का काम लगभग 70 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। इसके अलावा सभी स्टेकहोलडर्स के साथ चर्चा करके मॉडल बायलॉज बनाकर सभी राज्यों को भेजे गये हैं।</p>
<p><span>केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज हुए इस समझौते के अंतर्गत पैक्स अब सामान्य सेवा केंद्रों के रूप में कार्य करने के लिए सक्षम तो होंगी ही, इसके साथ ही पैक्स के 13 करोड़ किसान सदस्यों सहित ग्रामीण आबादी को पैक्स के माध्यम से 300 से भी अधिक सीएससी सेवाएं भी उपलब्ध हो पाएंगी। इसके अलावा इससे पैक्स की व्यावसायिक गतिविधियों में वृद्धि होगी और उन्हें आत्मनिर्भर आर्थिक संस्था बनने में मदद मिलेगी। इस पहल से पैक्स, सीएससी योजना के डिजिटल सेवा पोर्टल पर सूचीबद्ध सभी सेवाएं नागरिकों को प्रदान करने में सक्षम होंगी, जिनमें बैंकिंग, इंश्योरेंस, आधार नामांकन/अपडेट, कानूनी सेवाएं, कृषि-इनपुट जैसे कृषि उपकरण, पैन कार्ड और आईआरसीटीसी, रेल, बस व विमान टिकट सम्बन्धी सेवाएँ, आदि शामिल हैंI उन्होंने कहा कि वर्तमान में चल रही पैक्स कम्प्यूटरीकरण की केंद्र प्रायोजित परियोजना के तहत विकसित किये जा रहे राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर&nbsp;का उपयोग पैक्स को सीएससी के रूप में कार्य करने के लिए भी किया जाएगा, जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पैक्स के जरिये सीएससी की सुविधाएं देने के लिए सहकारिता मंत्रालय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच एमओयू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बजट में कोऑपरेटिव को इनकम टैक्स में छूट का प्रावधान होः  डी.एन. ठाकुर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/dn-thakur-says-cooperative-should-be-exempted-from-income-tax.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Jan 2023 11:22:12 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/dn-thakur-says-cooperative-should-be-exempted-from-income-tax.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कोऑपरेटिव को जो भी प्रॉफिट होता है, वह उसके सदस्यों में बंटता है। जो सदस्य इनकम टैक्स के दायरे में आता है, वह टैक्स देता ही है, इसलिए कोऑपरेटिव को इनकम टैक्स से छूट मिलनी चाहिए। यह कहना है सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. डी.एन. ठाकुर का। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में कोऑपरेटिव को टैक्स से छूट का प्रावधान किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि हाल ही सरकार ने राष्ट्रीय स्तर के तीन कोऑपरेटिव बनाने की घोषणा की है।</p>
<p>रूरल वॉयस से बातचीत में ठाकुर ने कहा कि बिजनेस के तीन रूप हैं सरकार, कॉरपोरेट और कोऑपरेटिव। कोऑपरेटिव की प्रासंगिकता आज ज्यादा हो गई है। यहां फोकस लोगों पर होता है, पूंजी पर नहीं। इसलिए सरकार को इनके क्षमता निर्माण, एफिशिएंसी और मैनेजमेंट क्षमता बेहतर करने पर फोकस करना चाहिए। सरकार को इसमें इक्विटी लेने के बजाय इसके कामकाज का जिम्मा पूरी तरह प्रोफेशनल लोगों के हाथ में दे दना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत में कोऑपरेटिव की जड़ें काफी मजबूत हैं। ये खाद्य सुरक्षा और रोजगार के लिए सबसे योग्य संस्थान हैं। सरकार को उचित नीतियों और इन्सेंटिव के माध्यम से किसानों को कोऑपरेटिव के तौर पर संगठित करने में मदद करनी चाहिए। किसानों को प्राकृतिक और आर्थिक संसाधनों की पूलिंग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि उन संसाधनों का प्रभावी और सस्टेनेबल इस्तेमाल हो सके, उन्हें संरक्षित रखा जा सके।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार को बजट में कोऑपरेटिव के माध्यम से फूड मैनेजमेंट पर फोकस करना चाहिए। इससे सरकार का पैसा बचेगा और लोग भी जुड़ेंगे। गांव में ही भंडारण सुविधा विकसित कर उसे नेशनल ग्रिड से जोड़ा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि कोऑपरेटिव को सस्ता कर्ज मिले।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/01/image_750x500_63c6b14a7e26d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बजट में कोऑपरेटिव को इनकम टैक्स में छूट का प्रावधान होः  डी.एन. ठाकुर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राष्ट्रीय स्तर की बहु&amp;#45;राज्य सहकारी निर्यात समिति, बीज समिति और आर्गेनिक समिति  की स्थापना को कैबिनेट की मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cabinet-approves-setting-up-of-national-level-multi-state-cooperatives-for-export-seed-and-organic-society-under-mscs-act-2002.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Jan 2023 18:56:45 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cabinet-approves-setting-up-of-national-level-multi-state-cooperatives-for-export-seed-and-organic-society-under-mscs-act-2002.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बहु-राज्य सहकारी समिति (एमएससीएस) अधिनियम</span><span>, 2002</span><span> के तहत निर्यात, बीज और आर्गेनिक उत्पादों के लिए राष्ट्रीय स्तर की समितियां गठित करने को मंजूरी दी है। इन समितियों की स्थापना एमएससीएस अधिनियम, 2002 के तहत की जाएगी। जो राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न&nbsp; उत्पादों के निर्यात,&nbsp; गुणवत्ता पूर्ण बीजों के उत्पादन, विपणन और शोध व आर्गेनिक उत्पादों के उत्पादन, विपणन और निर्यात को प्रोस्ताहित करने का काम सहकारी समितियों के साथ मिलकर करेंगी।</span></p>
<p><span> निर्यात सहकारी समिति संबंधित मंत्रालयों</span><span>,&nbsp;</span><span>विशेष रूप से विदेश मंत्रालय तथा वाणिज्य विभाग</span><span>,&nbsp;</span><span>वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के समर्थन से एक राष्ट्रीय स्तर की बहु-राज्य सहकारी निर्यात समिति की स्थापना और इसके संवर्धन को मंजूरी दे दी है।&nbsp;</span></p>
<p><span>निर्यात समिति के जरिये प्रासंगिक केंद्रीय मंत्रालय</span><span>, '</span><span>संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण</span><span>'&nbsp;</span><span>का पालन करते हुए अपनी निर्यात संबंधी नीतियों</span><span>,&nbsp;</span><span>योजनाओं और एजेंसियों के माध्यम से सहकारी समितियों और संबंधित संस्थाओं द्वारा उत्पादित सभी वस्तुओं व सेवाओं के निर्यात के लिए प्रस्तावित समिति को समर्थन प्रदान करेंगे।&nbsp; &nbsp;</span></p>
<p><span>प्रस्तावित समिति निर्यात करने और इसे बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक (अम्ब्रेला) संगठन के रूप में कार्य करते हुए सहकारी क्षेत्र से निर्यात पर जोर देगी। इससे वैश्विक बाजारों में भारतीय सहकारी समितियों की निर्यात क्षमता को गति देने में मदद मिलेगी। प्रस्तावित समिति&nbsp;'संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण'&nbsp;के माध्यम से सहकारी समितियों को भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की विभिन्न निर्यात संबंधी योजनाओं और नीतियों का लाभ प्राप्त करने में भी सहायता प्रदान करेगी। यह सहकारी समितियों के समावेशी विकास मॉडल के माध्यम से "सहकार-से-समृद्धि" के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी मदद करेगी,&nbsp;जहां सदस्य,&nbsp;एक ओर अपनी वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात के माध्यम से बेहतर मूल्य प्राप्त करेंगे,&nbsp;वहीँ दूसरी ओर वे समिति द्वारा उत्पन्न अधिशेष से वितरित लाभांश द्वारा भी लाभान्वित होंगे।</span></p>
<p><span>प्रस्तावित समिति के माध्यम से होने वाले उच्च निर्यात के कारण सहकारी समितियां,&nbsp;विभिन्न स्तरों पर अपनी वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि करेंगी,&nbsp;जिससे सहकारी क्षेत्र में रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा होंगे। वस्तुओं के प्रसंस्करण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सेवाओं को बेहतर बनाने से भी रोजगार के अतिरिक्त अवसर पैदा होंगे। सहकारी उत्पादों के निर्यात में वृद्धि, "मेक इन इंडिया" को भी प्रोत्साहन देगी,&nbsp;जिससे अंततः आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा मिलेगा</span></p>
<p><span>इसी तरह बीजों के उत्पादन, विपणन, प्रसंस्करण, संरक्षण और शोध के लिए बहु-राज्य बीज सहकारी समिति बनाने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है। इस समिति की स्थापना एमएससीएस एक्ट 2002 के तहत होगी। यह समिति&nbsp; गुणवत्ता वाले बीजों के उत्पादन, उनकी खरीद, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, लेबलिगं, पैकेजिंग, स्टोरेज, मार्केटिंग और वितरम का काम करेगी। साथ ही यह स्थानीय और भारतीय मूल के बीजों के संरक्षण, शोध और विकास का काम भी करेगी। यह सहकारी समिति कृषि मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और नेशनल सीड कारपोरेशन के साथ मिलकर काम करेगी।</span></p>
<p><span>वहीं आर्गेनिक उत्पादों के लिए भी एक बहु-राज्य सहकारी समिति बनाने को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। यह समिति कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और पूर्वोत्तर राज्यों के विकास मंत्रालय के साथ उनकी नीतियों और कार्यक्रमों के अनुसार आर्गेनिक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कार्य करेगी।</span></p>
<p><span>यह समिति आर्गेनिक उत्पादों के सर्टिफिकेन का भी काम करेगी और उनके उत्पादन व निर्यात को प्रोत्साहित करने का भी काम करेगी। जिसके तहत आर्गेनिक उत्पादों का एकत्रीकरण, ब्रांडिंग, मार्केटिंग&nbsp; और टेस्टिंग जैसे काम भी शामिल हैं। साथ ही यह निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए आर्गेनिक उत्पादों की खरीद, स्टोरेज, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, लेबलिंग, पैकेजिंग और ढांचागत सुविधाओं के साथ&nbsp; कम लागत पर मार्केंटिग की सुविधाएं भी तैयार करेगी।&nbsp; यह काम प्राथमिक सहकारी समितियों, कृषि ऋण सहकारी समितियों और फार्मर्स प्रॉड्यूसर आर्गनाइजेशंस (एफपीओ) के जरिये किया जाएगा।&nbsp;</span></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राष्ट्रीय स्तर की बहु-राज्य सहकारी निर्यात समिति, बीज समिति और आर्गेनिक समिति  की स्थापना को कैबिनेट की मंजूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. आर एस सोढ़ी ने इस्तीफा दिया, अब जयेन मेहता संभालेंगे यह जिम्मा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/amul-managing-director-r-s-sodhi-resigns-jayen-mehta-will-take-charge.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 09 Jan 2023 22:38:30 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/amul-managing-director-r-s-sodhi-resigns-jayen-mehta-will-take-charge.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश की सबसे बड़ी डेयरी बाजार हिस्सेदारी वाली सहकारी संस्था गुजरात कोआपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ), अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. आर. एस. सोढ़ी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जीसीएमएमएफ के बोर्ड ने उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है। उनकी जगह अब अमूल के चीफ आपरेटिंग आफिसर (सीओओ) जयेन मेहता यह जिम्मा संभालेंगे। डॉ. सोढ़ी ने मार्च 1982 में अमूल में सीनियर सेल्स आफिसर के रूप में अपने कार्यकाल की शुरुआत की थी और जून 2010 में वह अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर बने थे।&nbsp;</p>
<p><strong>रूरल वॉयस</strong> के साथ बात करते हुए डॉ. आर.एस. सोढ़ी ने कहा कि मैने जीसीएमएमएफ के बोर्ड को अपने इस्तीफे की पेशकश की जिसे बोर्ड ने स्वीकार कर लिया है। उन्होंने बताया कि दो साल पहले उनका कार्यकाल समाप्त हो गया था जिसके बाद जीसीएमएमएफ बोर्ड ने उनको एक्सटेंशन दिया था। डॉ. सोढ़ी ने बताया कि 40 साल नौ माह तक काम करने के बाद मैने जीसीएमएमएफ से अपने आप को अलग किया है। जब मैने जीसीएमएमएफ में अपने करियर की शुरुआत की थी&nbsp; उस समय जीसीएमएमएफ का टर्नओवर 121 करोड़ रुपये था। जबकि इस साल अमूल ब्रांड का टर्नओवर 71 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच जाएगा। मेरे कार्यकाल के दौरान अमूल का जो विस्तार हुआ वह मेरे लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है।&nbsp;</p>
<p>जीसीएमएमएफ के मैनेजिंग डायरेक्टर का पद संभालने के पहले डॉ. सोढ़ी अमूल के चीफ जनरल मैनेजर थे। उनके कार्यकाल में अमूल ने जहां दूध की खरीद में भारी बढ़ोतरी की वहीं इसके टर्नओवर में भारी बढ़ोतरी हुई और इसी दौरान अमूल ने गुजरात के बाद दूध खरीदने के साथ ही अपने कारोबार का बड़ा विस्तार किया।</p>
<p>उन्होंने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि जब मैने मार्च, 1982 में अमूल में अपना कार्यकाल शुरू किया तो उस समय इसका टर्नओवर 121 करोड़ रुपये था। उस समय हमारी छह जिला यूनियन खेड़ा, मेहसाणा, साबरकांठा, बड़ौदा, सूरत और बनासकांठा मिलकर 12 लाख किलो दूध प्रतिदिन की खरीद करती थी। अपने 40 साल नौ माह के कार्यकाल के दौरान मैने अमूल के कारोबार को नई ऊंचाइयों तक जाते हुए देखा। पिछले साल जीसीएमएमएफ का टर्नओवर 46,481 करोड़ रुपये पर पहुंच गया और इस साल अमूल ब्रांड का टर्नओवर 71 हजार करोड़ रुये पर पहुंच जाएगा।</p>
<p>डॉ. सोढ़ी के मैनेजिंग डायरेक्टर बनने के पहले 2009-10 में जीसीएमएमएफ का टर्नओवर 8005 करोड़ रुपये था जो 2021-22 में बढ़कर 46,481 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस दौरान जीसीएमएमफ का दूध संग्रह 93.02 लाख किलो प्रति दिन से बढ़कर 263.66 लाख किलो प्रतिदिन पर पहुंच गया। इसके साथ ही किसानों को मिलने वाले दूध की कीमत भी 337 रुपये प्रति किलो फैट से बढ़कर 820 रुपये प्रति किलो फैट तक पहुंच गई। वहीं जीसीएमएमएफ को दूध देने वाले किसानों की सदस्य संख्या भी इस दौरान 29.10 लाख से बढ़कर 36.40 लाख पर पहुंच गई।&nbsp;</p>
<div>डॉ. सोढ़ी के मैनेजिंग डायरेक्टर के कार्यकाल के दौरान अमूल ने गुजरात के बाहर दूध खरीदना शुरू किया और इस समय यह हर रोज 42 लाख लीटर से अधिक दूध दूसरे राज्यों से खरीदती है।&nbsp;</div>
<div><br />
<div class="yj6qo">डॉ. सोढ़ी इंडियन डेयरी एसोसिएशन (आईडीए) के अध्यक्ष भी हैं और पिछले दिनों इंटरनेशनल डेयरी कांफ्रेंस में उन्होंने एक प्रजेंटेशन दिया था जिसमें आने वाले समय में दुनिया में भारत का दूध उत्पादन सबसे अधिक तेज बढ़ेगा और दुनिया के कुल अतिरिक्त उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी सबसे अधिक होगी। <strong>रूरल वॉयस</strong> की दूसरी वर्षगांठ पर रिलीज किये गये <strong>रूरल वॉयस</strong> के स्पेशल प्रिंट संस्करण के लिए भी डॉ. आर. एस. सोढ़ी ने भारत में डेयरी क्षेत्र की संभावनाओं पर एक आलेख लिखा है।</div>
<div class="adL"></div>
</div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/10/image_750x500_634aa1b186c25.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. आर एस सोढ़ी ने इस्तीफा दिया, अब जयेन मेहता संभालेंगे यह जिम्मा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/10/image_750x500_634aa1b186c25.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मल्टी&amp;#45;स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी संशोधन विधेयक जेपीसी को भेजा गया, समिति बजट सत्र में देगी रिपोर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/multi-state-cooperative-societies-amendment-bill-sent-to-jpc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 21 Dec 2022 15:39:50 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/multi-state-cooperative-societies-amendment-bill-sent-to-jpc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी से जुड़े कानून में संशोधन से जुड़ा एक विधेयक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया है। विपक्षी दलों को डर है कि इस विधेयक के प्रावधान राज्य सरकारों के अधिकारों का हनन करते हैं। इस जेपीसी में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे।<br />गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में यह जानकारी दी। यह समिति बजट सत्र के दूसरे हिस्से में लोकसभा में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। बजट सत्र का दूसरा हिस्सा आम तौर पर मार्च में शुरू होता है।&nbsp;<br />मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी (संशोधन) विधेयक 2022 का घोषित उद्देश्य इस सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है। इसमें गवर्नेंस मजबूत करने, चुनाव प्रक्रिया में सुधार लाने, मॉनिटरिंग की व्यवस्था सुधारने और मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी में ईज ऑफ डुइंग बिजनेस सुनिश्चित करने की भी बात है।<br />यह विधेयक 7 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया गया था। तब विपक्षी सदस्यों ने स्क्रूटनी के लिए इसे स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की थी। उनका कहना था कि इसके प्रावधानों से राज्य सरकारों के अधिकारों का हनन होगा।<br />जेपीसी में लोकसभा के 21 सदस्यों में कनिमोझी करुणानिधि (डीएमके), कल्याण बनर्जी (टीएमसी), चंद्र प्रकाश जोशी (भाजपा) और मनीष तिवारी (कांग्रेस) शामिल हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी संशोधन विधेयक जेपीसी को भेजा गया, समिति बजट सत्र में देगी रिपोर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकारी योजनाओं का लाभ महिलाओं तक पहुंचाने में महिला सहकारी समितियां अहमः संघाणी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/benefits-of-govt.-schemes-should-reach-women-coops-says-sanghani.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 15 Dec 2022 14:40:21 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/benefits-of-govt.-schemes-should-reach-women-coops-says-sanghani.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने कहा है सरकारी योजनाओं का लाभ महिलाओं तक पहुंचना चाहिए जिसके लिए महिला सहकारी समितियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।&nbsp;सेवा सहकारी संघ, भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई), अंतर्राष्ट्रीय सहकारी गठबंधन-एशिया और प्रशांत (आईसीए-एपी), और सेवा भारत द्वारा &ldquo;एकजुटता को मजबूत करनाः महिलाओं की सहकारी समितियों और सामूहिक उद्यमों को पनपने में सक्षम बनाना&rdquo; विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए उन्होंने यह बातें कहीं। संघाणी ने भारत में महिला सहकारी समितियों को मजबूत करने के लिए एनसीयूआई द्वारा हर संभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया। उन्होंने महिला सहकारी उत्पादों के मजबूत विपणन की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यशाला में 20 राज्यों की 100 से अधिक महिला सहकारी समितियों ने भाग लिया।</p>
<p>संघाणी ने आगे कहा कि &rsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; के उद्देश्य को साकार करने के लिए सभी को रोजगार प्रदान किया जाना चाहिए और इसके लिए महत्वपूर्ण रूप से महिला सहकारी समितियों के नेटवर्क का विस्तार किया जाना चाहिए। उदाहरण के तौर पर उन्होंने कहा कि भाग्यलक्ष्मी महिला सहकारी बैंक, महाराष्ट्र में अच्छे कार्य से किसानों को काफी लाभ हुआ है।</p>
<p>&nbsp;इस अवसर पर आईसीए-एपी के अध्यक्ष&nbsp; डॉ. चंद्र पाल सिंह यादव ने कहा कि सेवा जैसी महिला सहकारी समितियों और अन्य सहकारी समितियों के अच्छे काम के आधार पर पूरे देश में महिलाओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए ताकि महिलाओं को सहकारी समितियों के गठन के लिए प्रेरित किया जा सके। उन्होंने कहा कि पूरे देश में एनसीयूआई सहकारी शिक्षा परियोजना के कर्मचारियों को महिला सहकारी समितियों के पंजीकरण में मदद करनी चाहिए और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं को पुरुषों के समान नेतृत्व के अवसर प्रदान करने चाहिए ताकि उनकी भागीदारी बढ़ाई जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय नीति में सहकारी समितियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।</p>
<p>इस अवसर पर बोलते हुए, सेवा सहकारी संघ के अध्यक्ष मिराई चटर्जी ने कहा कि इस कार्यशाला की सिफारिशें राष्ट्रीय सहकारी नीति को अंतिम रूप देने के लिए गठित राष्ट्रीय समिति के विभिन्न उपसमितियों को प्रस्तुत किया जायेगा। गीता बेन, बोर्ड सदस्य, दिल्ली क्रेडिट कोऑपरेटिव ने उल्लेख किया कि कैसे उनके सहकारी सदस्यों को जंतर-मंतर पर 2007 में अपने सहकारी समिति को पंजीकृत करने के लिए विरोध के साथ लगभग 3 वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा, बेहतर ऋण प्रावधान सुनिश्चित करने और पंजीकरण के सरलीकरण पर उन्होंने बल दिया।&nbsp;सेवा भारत की अध्यक्ष रेनाना झाबवाला ने नई सहकारी समितियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने उभरती महिला सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों के लिए लचीला और आसान ऋण प्रावधान सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई और एनसीडीसी से इस तरह की पहल का समर्थन करने का आग्रह किया।</p>
<p>कार्यशाला के पूर्ण सत्र में, डॉ. सुधीर महाजन, मुख्य कार्यकारी, एनसीयूआई ने उल्लेख किया कि एनसीयूआई हाट महिला सहकारी समितियों/ स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के विक्रय मंच ने एक साल के अंदर 2 करोड रुपये&nbsp; की बिक्री दर्ज की है।</p>
<p>&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकारी योजनाओं का लाभ महिलाओं तक पहुंचाने में महिला सहकारी समितियां अहमः संघाणी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको बना दुनिया का शीर्ष कोऑपरेटिव, आईसीए रैंकिंग में अमूल को दूसरा स्थान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/in-ica-ranking-iffco-gets-top-rank-and-amul-2nd-position.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 03 Dec 2022 11:37:46 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/in-ica-ranking-iffco-gets-top-rank-and-amul-2nd-position.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) को दुनिया के 300 प्रमुख कोऑपरेटिव में पहला स्थान मिला है। यह रैंकिंग इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस (आईसीए) की तरफ से जारी 11वें सालाना वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनिटर (डब्लूसीएम) में दी गई है। यह रैंकिंग टर्नओवर और प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात के आधार पर तैयार की गई है। इससे पता चलता है कि इफको देश की जीडीपी और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान कर रही है। वैश्विक सहकारिता आंदोलन में इफको की यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन सहकार से समृद्धि से प्रेरित है जिसका नेतृत्व केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह कर रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">टर्नओवर और प्रति व्यक्ति जीडीपी के अनुपात के आधार पर जो शीर्ष 300 कोऑपरेटिव कि रैंकिंग की गई है उसमें इफको के बाद दूसरे स्थान पर गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (जीसीएमएमएफ) यानी अमूल है। तीसरे स्थान पर फ्रेंच ग्रुपे क्रेडिट एग्रिकोल है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">करीब 36000 सदस्य कोऑपरेटिव वाला इफको दुनिया के सबसे बड़े कोऑपरेटिव संस्थानों में सर्वोच्च स्थान रखता है। हाल ही इसने दुनिया का पहला नैनो फर्टिलाइजर इफको नैनो यूरिया लिक्विड तैयार किया है। इसका मकसद रासायनिक उर्वरक का इस्तेमाल कम करना और फसल की उत्पादकता को बढ़ाना है। यह टिकाऊ खेती की दिशा में एक बड़ा कदम है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आईसीए और यूरोपियन रिसर्च इंस्टिट्यूट फॉर कोऑपरेटिव एंड सोशल एंटरप्राइज ने वर्ल्ड कॉपरेटिव मॉनिटर के इस साल का संस्करण गुरुवार को एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में जारी किया। इसमें दुनिया के शीर्ष 300 कोऑपरेटिव की रैंकिंग की गई है। साथ में मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने में कोऑपरेटिव के योगदान का विश्लेषण भी किया गया है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ यू एस अवस्थी ने कहा, यह इफको और अन्य कोऑपरेटिव के लिए गर्व का समय है। यह भारत के सहकारिता आंदोलन के बड़ी उपलब्धि है। इफको के चेयरमैन दिलीप संघाणी ने कहा कि हम हमेशा देश के किसानों के विकास और भारतीय कोऑपरेटिव आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम इनोवेशन और डिजिटाइजेशन में विश्वास रखते हैं क्योंकि यह सफलता की कुंजी है। मैं इफको के सभी सदस्यों और देश के समस्त कोऑपरेटिव जगत को इस उपलब्धि के लिए बधाई देता हूं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सिर्फ टर्नओवर के आधार पर की गई रैंकिंग में दो फाइनेंशियल और एक कमर्शियल एंटरप्राइज है। पिछले साल की तरह फ्रेंच ग्रुपे क्रेडिट एग्रिकोल (2020 में टर्नओवर 88.7 अरब डॉलर) और जर्मन कोऑपरेटिव आरईडब्ल्यूई (77.93 अरब डॉलर) शीर्ष पर हैं। तीसरे स्थान पर जर्मन कोऑपरेटिव फाइनेंशियल नेटवर्क बीवीआर (58.02 अरब डॉलर) है। शीर्ष 300 उपक्रमों में ज्यादातर औद्योगिक देशों के हैं। इनमें अमेरिका के 71, फ्रांस के 42, जर्मनी के 71 और जापान के 22 उपक्रम हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आईसीए को दुनिया के कोऑपरेटिव की आवाज माना जाता है। यह 110 देशों के 315 से अधिक कोऑपरेटिव फेडरेशन और संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है। इसका मुख्यालय ब्रसेल्स, बेल्जियम में है। उसके चार क्षेत्रीय कार्यालय यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका और एशिया प्रशांत देशों में हैं। इसके अधीन 8 सेक्टर ऑर्गेनाइजेशन हैं। इनमें बैंकिंग, कृषि, फिशरीज, बीमा, स्वास्थ्य, हाउसिंग, कंज्यूमर कोऑपरेटिव और सर्विस तथा इंडस्ट्री कोऑपरेटिव शामिल हैं। आईसीए एक नॉनप्रॉफिट अंतरराष्ट्रीय एसोसिएशन है। इसकी स्थापना 1895 में हुई थी।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको बना दुनिया का शीर्ष कोऑपरेटिव, आईसीए रैंकिंग में अमूल को दूसरा स्थान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार हर गांव तक सहकारी समितियों का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्धः बी एल वर्मा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/to-increase-the-members-of-the-corpus-from-23-crore-to-70-crore-govt-committed.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 14 Nov 2022 20:30:12 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/to-increase-the-members-of-the-corpus-from-23-crore-to-70-crore-govt-committed.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सरकार सहकारी समितियों की सदस्यता 25 करोड़ से बढ़ाकर 70 करोड़ करने के लिए कटिबद्ध है और इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी। सरकार हर गांव को सहकारी समितियों से जोड़ना चाहती है और कोई भी गांव बिना सहकारी समितियों के अछूता नहीं रहना चाहिए। प्राथमिक सहकारी समितियों को 2,516 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) द्वारा आयोजित 69वें अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह एवं सहकार मेला-2022 का उद्घाटन करते हुए केन्द्रीय सहकारिता राज्य मंत्री बी.एल वर्मा ने यह बातें कहीं।&nbsp; उन्होंने कहा कि नये मॉडल उपनियम पास होने के बाद प्राथमिक सहकारितायां हर तरह के ऋण किसानों को प्रदान करेगी जिससे उनका जीवन स्तर सुधरेगा।</p>
<p>सहकारिता राज्य मंत्री ने आगे कहा कि सहकारी समितियों का डिजिटलीकरण उनकी कार्यकुशलता में वृद्धि करने के साथ-साथ उनके कार्य में पारदर्शिता भी लाएगा। उन्होंने कहा कि प्राथमिक सहकारी समितियों, जिला सहकारी बैंकों और राज्य सहकारी बैंकों को सॉफ्टवेयर के माध्यम से जोड़ा जाएगा जिससे उनके खरीद कार्य में सुधार होगा। राज्य मंत्री ने कहा कि जेम पोर्टल पर सहकारी समितियों की ऑनबोर्डिंग से इन सहकारी समितियों की दक्षता बढ़ेगी और उत्तर-पूर्व में ऐसी सहकारी समितियों के उत्पादों&nbsp; को अब इस पोर्टल के माध्यम से बेचा जा सकता है।</p>
<p>बीएल वर्मा ने आगे कहा कि सरकार अमूल के माध्यम से एक एक्सपोर्ट हाउस बना रही है जिसके माध्यम से जैविक उत्पादों को प्रमाणित किया जा सकता है और उनके माध्यम से किसानों की उपज को उचित मूल्य मिलेगा और उनकी उपज का निर्यात किया जाएगा।&nbsp; उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों में युवाओं को शामिल करने की बहुत जरूरत है और उन्हें इन समितियों का नेतृत्व करने का मौका भी मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि न केवल चयनित कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए बल्कि निचले स्तर के कर्मियों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है। इसके लिए सरकार जल्द ही एक सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना कर रही है.</p>
<p>भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के उपाध्यक्ष शिवदासन नैय्यर ने इस मौके पर अपने स्वागत भाषण में कहा कि सहकारिता आंदोलन की गति तेज हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार सहकारी समितियों का पूरा ख्याल रख रही है और सहकारी समितियों के लिए एक साथ खुद को मजबूत करने का यह एक सुनहरा अवसर है। भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ की महत्वपूर्ण भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सहकारी आंदोलन को केवल भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ ही मजबूत कर सकता है।</p>
<p>भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के मुख्य कार्यकारी&nbsp; डॉ. सुधीर महाज ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ ने "समृद्धि से सहयोग" लक्ष्य के मुताबिक हाल ही में नए जरूरी कदम उठाए हैं। एनसीयूआई हाट की स्थापना भी की गई है जो स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद खरीदने के लिए एक अच्छा मंच देता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार हर गांव तक सहकारी समितियों का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्धः बी एल वर्मा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इंटरनेशनल  मिलेट  वर्ष 2023  को बढ़ावा देने के लिए कृषि मंत्रालय और नेफेड के बीच एमओयू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/mou-signed-between-department-of-agriculture-and-nafed-to-boost-international-year-of-millets.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 06 Oct 2022 22:29:37 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/mou-signed-between-department-of-agriculture-and-nafed-to-boost-international-year-of-millets.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नेफेड) के बीच एक <span>एमओयू</span><span> (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए गए। इसका मकसद इंटरनेशनल मिलेट वर्ष&nbsp; 2023&nbsp; को बढ़ावा देना है।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">भारत सरकार की पहल के चलते संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष 2023 का आयोजन कर रहा है। इसे <span>विश्व भर में&nbsp; मनाया जाएगा। इस बात को ध्यान में&nbsp; रखते हुए दोनों संगठन &nbsp;मिलकर बाजरा संबंधित उत्पादों का प्रचार और उनकी मार्केटिंग &nbsp;करने के लिए काम करेंगे। भारत इस दुनिया के नक्शे पर बाजरे को वापस लाने के लिए अपनी कमर कस चुका है। इसलिए यह दोनो संगठन बाजरा-आधारित उत्पादों के लिए समर्थन जुटाएंगे, उनका प्रचार करेंगे और &nbsp;बाजार का विस्तार करेंगे ताकि मिलेट के वैल्यू और उससे संबंधित उत्पादों की मांग में देश भर में&nbsp; बढ़ोतरी लाई जा सके।</span></p>
<p style="text-align: justify;">कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और नेफेड मूल्यवर्धित बाजरा उत्पादों को विकसित करने के लिए इन उत्पादों के उत्पादकों को सलाहकार सहायता की सुविधा देने में सहयोग करेंगे। इसमें स्टार्ट-अप्स की ऑन-बोर्डिंग भी शामिल है। जिसमें भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान (आईआईएमआर) के पैनल में शामिल स्टार्ट-अप शामिल हैं। विशेष रूप से बाजरा आधारित उत्पादों की एक श्रृंखला विकसित करने के लिए एफपीओ का गठन, नेफेड बाजार स्टोर्स और नेफेड से जुड़े अन्य संस्थानों के नेटवर्क के माध्यम से बाजरा आधारित उत्पादों को बढ़ावा देना और विपणन करना &nbsp;है ।</p>
<p style="text-align: justify;">इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर में विभिन्न स्थानों पर बाजरा उत्पादों के लिए वेंडिंग मशीनों की स्थापना और बाजरा-आधारित उत्पादों का वितरण करना जैसे कदम भी उठाए जाएंगे।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इंटरनेशनल  मिलेट  वर्ष 2023  को बढ़ावा देने के लिए कृषि मंत्रालय और नेफेड के बीच एमओयू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृभको को वित्त वर्ष 2021&amp;#45;22 के दौरान 1493.26 करोड़ रुपये का  लाभ, शेयर पूंजी पर बीस फीसदी लाभांश घोषित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/kribhco-earned-profit-of-rs-1493-crore-and-26-lakh-during-2021-22-twenty-percent-dividend-announced.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 30 Sep 2022 22:35:49 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/kribhco-earned-profit-of-rs-1493-crore-and-26-lakh-during-2021-22-twenty-percent-dividend-announced.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">कृषक भारती सहकारी लिमिटेड (कृभको) ने वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 1493.26 करोड़ रुपये का कर-पूर्व लाभ अर्जित किया है। समिति ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए शेयर पूंजी पर 20 फीसदी&nbsp; की दर से लाभांश घोषित किया है। कृभको एक अग्रणी उर्वरक उत्पादक सहकारी समिति&nbsp; है।</p>
<p style="text-align: justify;">कृभको समिति की 42वीं वार्षिक आमसभा की बैठक दिनांक 29 सितम्&zwj;बर, 2022 को एनसीयूआई सभागार, नई दिल्ली में आयोजित की गई जिसमें समिति के वार्षिक लेखे पारित किए गए। इस बैठक में कृभको के निदेशकों और देश के विभिन्न भागों से आए सदस्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक की अध्&zwj;यक्षता कृभको के अध्यक्ष डॉ. चन्&zwj;द्र पाल सिंह ने की।</p>
<p style="text-align: justify;">कृभको का वर्ष 2021-22 के दौरान यूरिया उत्पादन 22.08 लाख टन और अमोनिया उत्पादन 13.29 लाख टन रहा जो क्रमशः 100.60 फीसदी और 106.50 फीसदी उत्&zwj;पादन क्षमता उपयोग के बराबर है। समिति की उत्पाद श्रृंखला में न केवल नीम लेपित यूरिया है बल्कि इसके उत्&zwj;पादों में जैव उर्वरक, कम्&zwj;पोस्&zwj;ट खाद, प्रमाणित बीज, बीटी काटन बीज, संकर बीज, एसएसपी, जिंक सल्फेट और आयातित डीएपी, एमओपी, एनपीएस और प्राकृतिक पोटाश भी शामिल हैं। कृभको ने 2021-22 के दौरान 44.00 लाख टन उर्वरक बेचे है।</p>
<p style="text-align: justify;">कृभको की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कृभको फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (केएफएल) ने 9.65 लाख टन यूरिया और 6.05 लाख टन अमोनिया का उत्पादन किया है जो क्रमश: 112 फीसदी और 121 फीसदी उत्&zwj;पादन क्षमता उपयोग के समतुल्&zwj;य है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/09/image_750x_63372167924ab.jpg" alt="" /></p>
<p style="text-align: justify;"><em><strong>डॉ. चंद्रपाल सिंह, चेयरमैन, कृभको, एजीएम को संबोधित करते हुए&nbsp;</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">कृभको के प्रबंध निदेशक राजन चौधरी आम सभा को बताया &nbsp;कि कृभको ने उत्पादन और अन्य मानदण्&zwj;डों के मामले में उपलब्धि के उच्चतम मानकों को बनाए रखा है। कृभको ने अब तक का सर्वाधिक लाभ अर्जित किया है। उन्होंने यह भी बताया कि समिति की सहायक कंपनी केएफएल ने अच्छा प्रदर्शन किया है और पांच फीसदी लाभांश की घोषणा की है।</p>
<p style="text-align: justify;">संतुलित उर्वरक इस्&zwj;तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कृभको ने सबसे अधिक मात्रा में डीएपी, एनपीके उर्वरकों का आयात किया है। अपने प्रचालन में विविधता लाने के लिए कृभको ने दो पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों कृभको एग्री बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड और कृभको ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड का गठन किया है। समिति को अपने कार्य प्रचालन के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए कई पुरस्कार मिले हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">कृभको ने देश में सहकारिता के क्षेत्र में भरपूर योगदान देने के लिए दो जाने-माने सहकार बंधुओं को सम्मानित किया है। कृभको एक किसान संगठन होने के नाते, मुफ्त मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के विवेकपूर्ण इस्&zwj;तेमाल के साथ खेती की लागत में कमी, किसानों को शिक्षा और एकीकृत कृषि को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कृभको अपने ग्रामीण विकास ट्रस्ट के माध्यम से किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के गठन की सुविधा भी देती है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृभको को वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 1493.26 करोड़ रुपये का  लाभ, शेयर पूंजी पर बीस फीसदी लाभांश घोषित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राष्ट्रीय सहकारिता नीति का प्रारूप तैयार करने के लिए  सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में  समिति का गठन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/suresh-prabhu-will-head-national-level-committee-for-drafting-the-national-cooperation-policy-document.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 07 Sep 2022 12:22:05 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/suresh-prabhu-will-head-national-level-committee-for-drafting-the-national-cooperation-policy-document.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्&zwj;ट्रीय सहकारिता नीति दस्&zwj;तावेज का प्रारूप तैयार करने के लिए एक राष्ट्रीय समिति के गठन की घोषणा की। पूर्व केन्&zwj;द्रीय मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु की अध्&zwj;यक्षता में गठित इस समिति में देश के सभी हिस्&zwj;सों से 47 सदस्यों को शामिल किया गया है। केद्रीय सहकारिता मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक&nbsp; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्&zwj;व में&nbsp;&lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo;&nbsp;की परिकल्पना को साकार करने के लिए नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति&nbsp;बनाई जा रही&nbsp;है। इस समिति में सहकारी क्षेत्र के विशेषज्ञ,&nbsp;राष्&zwj;ट्रीय,राज्&zwj;य, जिला व प्राथमिक सहकारी समितियों के प्रतिनिधि,&nbsp;राज्&zwj;यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सचिव (सहकारिता) और सहकारी समितियों के पंजीयक&nbsp; तथा केन्&zwj;द्रीय मंत्रालयों व विभागों के अधिकारी शामिल हैं।</span></p>
<p><span>इसके साथ ही केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री 8 सितंबर, 2022 को दिल्ली में राज्य सहकारिता मंत्रियों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। सम्मेलन में देश के सभी राज्य सरकारों व केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सहकारिता रजिस्ट्रार और प्रतिनिधि भाग लेंगे।</span></p>
<p><span>राज्य सहकारिता मंत्रियों का दो दिन का राष्ट्रीय सम्मेलन सम्मेलन प्रतिभागियों को अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा और समन्वय के माध्यम से एक कार्यान्वयन योग्य नीति और योजना ढांचा तैयार करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। साथ ही इसमें सहकारी समितियों के पूरे जीवन चक्र और उनके व्यवसाय व संचालन के सभी पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा। सम्मेलन में </span><span>राष्ट्रीय सहकारिता नीति, </span><span>राष्ट्रीय सहकारिता डेटाबेस जैसे नीतिगत मसलों पर चर्चा होगी। इसके अलावा&nbsp;</span><span>हर पंचायत में पैक्स (PACS), </span><span>कृषि आधारित और अन्य उत्पादों का निर्यात, </span><span>जैविक उत्पादों को प्रोत्साहन तथा विपणन और </span><span>सहकारिता का नए क्षेत्रों में विस्तार जैसी योजनाओं के अलावा </span>&nbsp;पैक्स और माडल बाइलाज पर भी चर्चा होगी। इसमें&nbsp;&nbsp;<span>पैक्स&nbsp; के कम्प्यूटरीकरण, </span><span>अक्रियाशील पैक्स के पुनर्जीवीकरण करने की कार्य योजना और</span><span>&nbsp;सहकारी अधिनियमों में एकरूपता लाना शामिल है। वहीं&nbsp;</span><span>&nbsp;प्राथमिक सहकारी समितियों के&nbsp; </span><span>दीर्घकालीन वित्तपोषण को प्राथमिकता देने और </span><span>दुग्ध&nbsp; वह मतस्य सहकारी समितियों के बारे में चर्चा होगी।&nbsp;</span></p>
<p><span>विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार सहकार से समृद्धि की अपनी परिकल्पना द्वारा सहकारिता से जुड़े लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए कटिबद्ध हैं। इस विज़न को साकार करने के लिए&nbsp; 6 जुलाई 2021 को सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में मंत्रालय, सहकारिता क्षेत्र के विकास को एक नई गति देने, मजबूत करने और इसे सर्वस्पर्शीय व सर्वसमावेशी विकास का मॉडल बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।</span></p>
<p><span>मौजूदा&nbsp;राष्ट्रीय&nbsp;सहकारिता नीति,&nbsp;सहकारी समितियों&nbsp;के&nbsp;चहुंमुखी विकास और उन्हे आवश्यक सहयोग देने,&nbsp;प्रोत्साहित करने और सहायता प्रदान करने के&nbsp;उद्देश्य&nbsp;से वर्ष&nbsp;2002&nbsp;में लागू की गई थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सहकारी समितियां एक स्वायत्त,&nbsp;आत्मनिर्भर और लोकतांत्रिक रूप से प्रबंधित&nbsp;संस्थाओं&nbsp;के तौर पर कार्य कर सकें जो अपने सदस्यों के प्रति उत्तरदायी हों और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था&nbsp; में महत्वपूर्ण&nbsp; योगदान कर सकें। आज भारत में लगभग&nbsp;8.5&nbsp;लाख सहकारी समितियां&nbsp;हैं&nbsp;जो करीब 29&nbsp;करोड़ सदस्यों के साथ पूरे देशभर में फैली हैं।&nbsp; ये&nbsp;सहकारी समितियां कृषि प्रसंस्करण,&nbsp;डेयरी,&nbsp;मत्स्यपालन,&nbsp;आवासन,&nbsp;बुनाई,&nbsp;ऋण और विपणन समेत विविध कार्यकलापों में सक्रिय हैं।</span></p>
<p><span>नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति दस्&zwj;तावेज का निर्माण नए सहकारिता मंत्रालय को दिये गए अधिदेश (Mandate)&nbsp;को पूरा करने की दृष्टि से किया जा रहा है।&nbsp; जिसमें अन्य&nbsp; बातों के साथ-साथ, &lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo;&nbsp;की परिकल्पना को साकार करना;&nbsp;देश में सहकारी आंदोलन को सशक्तश बनाना और जमीनी&nbsp;स्तर&nbsp;पर इसकी पहुंच को मजबूत करना,&nbsp;सहकारिता आधारित आर्थिक विकास मॉडल का संवर्धन करना और सहकारिता क्षेत्र को&nbsp;उसकी&nbsp;क्षमता हासिल करने में सहायक नीतिगत,&nbsp;कानूनी व संस्थागत अवसंरचना का निर्माण करना है।&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राष्ट्रीय सहकारिता नीति का प्रारूप तैयार करने के लिए  सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में  समिति का गठन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पैक्स से अपेक्स तक मजबूत मार्केटिंग व्यवस्था के लिए माडल एक्ट जल्दः अमित शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/government-will-come-with-an-act-for-a-strong-pacs-to-apex-marketing-system-said-amit-shah.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 06 Sep 2022 14:35:57 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/government-will-come-with-an-act-for-a-strong-pacs-to-apex-marketing-system-said-amit-shah.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) को बहुद्देश्यीय बना रही है। इसके साथ ही पैक्स से अपेक्स तक के एक मजबूत मार्केटिंग सिस्टम के लिए सरकार मॉडल एक्ट लेकर आएगी। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भारतीय राष्ट्रीय सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नेफेड) द्वारा 'कृषि विपणन में सहकारी संस्थाओं की भूमिका' विषय पर&nbsp; भोपाल में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले किसानों की आय दो गुना करने के लिए पिछले आठ साल में कई ठोस काम किये हैं। इसमें सबसे मुख्य कृषि उपज की लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने का काम उन्होंने किया है।</p>
<p>इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि भारत के संस्कार में सहकार की आत्मा बसती है। वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि&nbsp; मध्य प्रदेश में 4500 पैक्स सामान्य सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किये गये हैं।&nbsp;</p>
<p>अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा उठाये गये कदमों का फायदा यह हुआ है कि देश में खाद्यान्न उत्पादन 31.4 करोड़ टन को पार कर गया है। कृषि उपज की मार्केटिंग को सुचारू और अत्याधुनिक करने के लिए कई कार्य किये गये हैं। इनमें ई -नाम प्रमुख है। ई -नाम से देश की एक हजार मंडियां जुड़ चुकी हैं। पौने दो करोड़ किसान और ढाई लाख व्यापारी इस पर पंजीकरण करा चुके हैं। ई-नाम से 20 राज्यों के 2100 से ज्यादा कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को जोड़ने का काम किया गया है। यह एक पारदर्शी व्यवस्था है जिसके चलते किसानों को बेहतर दाम मिल रहा है।&nbsp; ई-नाम पर अब तक दो लाख करोड़ रूपये का कारोबार हो चुका है।</p>
<p>गृह और सहकारिता मंत्री ने कहा देश से कृषि उत्पादों का निर्यात 50 अरब डॉलर को पार कर चुका है जो कृषि और सहकारिता क्षेत्र के लिए बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि पैक्स से अपैक्स तक एक मजबूत मार्केटिंग व्यवस्था के लिए नेफेड के साथ-साथ जिला&nbsp; व तहसील के फेडरेशनों को भी मार्केटिंग के साथ जोड़ना होगा। भारत सरकार पैक्स को बहुद्देश्यीय बनाने के लिए अनेक बातें इसके साथ जोड़ रहे हैं। हम पैक्स पर एक मॉडल एक्ट लेकर आ रहे हैं। इसके लिए विचार-विमर्श किया गया है।&nbsp; एक माह के भीतर ही हम पैक्स के मॉडल बायलाज को देश के सभी राज्यों को भेजेंगे। इससे पैक्स एफपीओ की योग्यता हासिल कर लेंगे और किसानों की उपज खरीदकर नेफेड और स्टेट फेडरेशंस को दे पाएंगे। पैक्स स्टोरेज क्षमता भी स्थापित कर सकेंगे और परिहन व गैस एजेंसी लेने के काम भी कर सकेंगे। सरकार इनके साथ ही 22 गतिविधियों को जोड़ने जा रही है। इनके माध्यम से किसानों को अधिक फायदा होगा और बेहतर दाम मिलेंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अब नेफेड को भई अधिक काम का दायरा बढ़ाना होगा और टेक्नोलॉजी का उपयोग इसे मजबूत करना होगा। सहकारिता की मजबूत व्यवस्था के जरिये मुनाफा सीधे किसानों के पास जाएगा। वहीं कारपोरेट खेती की जगह कोआपरेटिव खेती को बढ़ावा मिलेगा। अमित शाह ने कहा कि इफको, कृभको और अमूल हमारी सक्सेस स्टोरी है। सभी पैक्स का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है। सहकारिता विश्वविद्यालय भी स्थापित किया जा रहा है। जल्द ही सहकारिता क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का अनुभव कर पाएंगे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/09/image_750x_6318300e420c5.jpg" alt="" /></p>
<p>इस मौके पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर&nbsp; ने कहा कि भारत के संस्कार में सहकार की आत्मा बसती है। प्रधानमंत्री जी &nbsp;ने इसी&nbsp; भावना समझते हुए देश में सहकारिता क्षेत्र को सशक्त करने का बीड़ा उठाया है। तोमर ने कहा कि सहकारिता का क्षेत्र भाव जितना प्रबल होगा, उतनी ही प्रगति होगी और उतनी ही देशज भावना विकसित होगी। हम एक-दसूरे<br />का सहयोग कर एक-दसूरे की ताकत बढ़ाएंगे और मदद करेंगे तो इसका परिणाम देश की ताकत बढ़ाने के<br />रूप में होगा। सहकारिता में पवित्रता व पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है। तोमर ने कहा कि इफको व अमूल दुनिया के सबसे बड़े सहकारिता संगठन होकर देश व सहकारिता का गौरव बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने सहकार<br />से समद्धि की परिकल्पना गुजरात के मुख्यमंत्री के रहते की व प्रधानमंत्री बनने के बाद देश भर में इसके लिए<br />कदम उठाए हैं। तोमर ने कहा कि पीएम चाहते हैं कि आम लोग, आम ग्रामवासी, आम किसान आगे बढ़े,<br />वे सहकारिता से जुड़े और स्वयं के साथ ही देश को भी आत्मनिर्भर बनाएं, इसलिए पीएम ने अलग से<br />सहकारिता मंत्रालय बनाया व सहकारिता मंत्री के रूप में यह जिम्मेदारी अमित शाह को दी, जो<br />आज भी गुजरात में अपनी पैक्स के अध्यक्ष हैं व&nbsp; उन्होंने वर्षों तक सहकारिता के क्षेत्र में काम किया<br />है।</p>
<p>मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सहकारिता भारत की माटी में है, सबके भीतर है, एक सबके लिए<br />और सब एक के लिए सहकारिता है। सहकारिता के इसी भाव को ध्यान में&nbsp; मोदीजी ने अलग से<br />सहकारिता मंत्रालय का गठन किया। सीएम ने बताया कि म.प्र. में सहकारिता क्षेत्र में कई कदम उठाए गए<br />हैं, पैक्स के कम्प्यूटीकरण का काम किया जा रहा है। 4,500 से ज्यादा पैक्स को सामान्य सुविधा केंद्र के<br />रूप में विकसित किया है। नई सहकारिता नीति बनाने का प्रयास कर रहे हैं। सहकारिता के सिद्धांतों के<br />अधार पर संस्थाओं को मजबूत बनाना एव इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप को खत्म करना भी उद्देश्य है।<br />कार्यक्रम में केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री बी.एल वर्मा, मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल, सहकारिता<br />मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया, केंद्रीय सहकारिता सचिव ज्ञानेश कुमार, नेफेड अध्यक्ष डॉ. विजेंद्र सिंह, नेफेड के मैनेजिंग डायरेक्टर राजबीर सिंह, इफको के अध्यक्ष दिलीप संघानी, कृभको अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह भी मौजूद थे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पैक्स से अपेक्स तक मजबूत मार्केटिंग व्यवस्था के लिए माडल एक्ट जल्दः अमित शाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको और एनपीसी ने सहकारी समितियों में उत्पादकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए  एमओयू  किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-and-npc-to-join-hands-to-promote-innovation-and-productivity-in-cooperatives.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 24 Aug 2022 10:00:16 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-and-npc-to-join-hands-to-promote-innovation-and-productivity-in-cooperatives.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">देश की प्रमुख सहकारी संस्था इफको और राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (एनपीसी) ने कृषि एवं<span> संबद्ध क्षेत्रों में उत्पादकता तथा नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आपस में तालमेल बिठाने &nbsp;के लिए एक एमओयू किया गया है। एनपीसी मुख्यालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इस अवसर पर इफको के चेयरमैन दिलीप भाई संघानी ने कहा कि देश में एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र में निर्णायक सुधार लाने के लिए एनपीसी को अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियां एमएसएमई के भीतर बड़ा समूह बनाती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पांच ट्रिलियन डॉलर भारतीय अर्थव्यवस्था को साकार करने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए इफको और एनपीसी के बीच साझेदारी&nbsp; एक सही कदम है।</p>
<p style="text-align: justify;">एनपीसी के महानिदेशक संदीप नायक ने <span>कहा, एनपीसी के आत्मनिर्भर भारत की ओर नारे का मतलब उत्पादकता आंदोलन को फिर से जीवंत करना है। देश भर में प्राथमिक स्तर पर सहकारी समितियों की सहायता करने के लिए 12 क्षेत्रीय कार्यालयों और 27 स्थानीय उत्पादकता परिषदों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एनपीसी में नवाचार के लिए डीपीआईआईटी द्वारा वित्त पोषित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भारत इंडस्ट्री 4.0 सहित कई पहल शुरू की गई हैं। इसका मुख्य फोकस गांव की महिलाओं</span>, <span>युवाओं और सहकारी समितियों को डिजिटलाइजेशन करना है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इफको और एनपीसी पूरे भारत में उत्पादकता में सुधार हो, इसको बढ़ावा देने के लिए&nbsp; एक रोडमैप तैयार हो , इस पर&nbsp; ध्यान केंद्रित करेंगे। इससे भारत और विदेशों में एनपीसी और इफको के तत्वाधान में किसानों के लिए टैलेंट पूल सिस्टम तैयार किए जाने की उम्मीद है। साल 2016 से भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर है, <span>जिसका कुल विनिर्माण मूल्य 420 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है। पिछले दशकों में भारत का विनिर्माण क्षेत्र औसतन सात फीसदी सालना की दर से बढ़ा है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">अब बागवानी और पशुधन/डेयरी क्षेत्रों सहित कृषि उत्पादकता में सुधार और नई प्रौद्योगिकियों पर ध्यान देने की जरूरत है। सहकारी समितियों में कुशल युवाओं और व्यवसायिक प्रबंधन से बड़े बदलाव&nbsp; की उम्मीद है।&nbsp; क्योकि भारत&nbsp; में लगभग&nbsp; 94 फीसदी किसान किसी ने किसी&nbsp; एक सहकारी समिति के सदस्य हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">भारत सरकार ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) को कम्प्यूटरीकृत करने और प्रत्येक पंचायत में कम से कम एक पैक्स स्थापित करने के लिए एक सुनियोजित कार्यक्रम तैयार किया गयै&nbsp; &nbsp;है। इफको और एनपीसी की संयुक्त गतिविधि&nbsp; इस संदर्भ में देखा जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align: justify;">1950 के दशक में शुरू किए गए राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद के नेतृत्व में उत्पादकता आंदोलन ने भारत के सामाजिक आर्थिक विकास में बड़े पैमाने पर योगदान दिया है। अगले चरण और उत्पादकता आंदोलन में तेजी की अब पहले से कहीं अधिक जरूरत है, <span>विशेष रूप से आत्मानिर्भर भारत के संदर्भ में। </span>इस अवसर पर इफको एमडी डॉ यूएस अवस्थी और इसके निदेशक &nbsp;योगेंद्र कुमार ने भी संबोधित किया।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/08/image_750x500_6305a9317b563.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको और एनपीसी ने सहकारी समितियों में उत्पादकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए  एमओयू  किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तीन लाख पैक्स बन जाएं तो कोऑपरेटिव के विस्तार को कोई नहीं रोक सकताः अमित शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/no-body-can-hold-expansion-of-cooperatives-if-3-lakh-pacs-are-formed.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Aug 2022 21:44:26 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/no-body-can-hold-expansion-of-cooperatives-if-3-lakh-pacs-are-formed.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि पैक्स सिर्फ एग्रीकल्चर फाइनेंस करने वाली संस्था नहीं रहेगी बल्कि 22 नए कामों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। अगर तीन लाख पैक्स का बेस बन जाता है तो कोऑपरेटिव के विस्तार को कोई नहीं रोक सकता। ग्रामीण सहकारी बैंक भी पैक्स के माध्यम से मीडियम और लॉंग टर्म फाइनेंस कर सकते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सहकारिता मंत्री ने ये बातें&nbsp; विज्ञान भवन में ग्रामीण सहकारी बैंकों के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन ना केवल एक-दूसरे की बेस्ट प्रैक्टिसिस के आदान प्रदान&nbsp; करते हैं बल्कि पूरे भारत में कृषि ऋण के क्षेत्र में काम करने वाले सहकारी कार्यकर्ताओं के लिए एक कॉमन थ्रस्ट एरिया का निर्माण करने में भी उपयोगी सिद्ध होते हैं।&nbsp;&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अमित शाह ने कहा कि हमारे कृषि ऋण के खाके को मजबूती प्रदान करने के साथ इसमें सुधार की भी ज़रूरत है। हर क्षेत्र में सहकारिता पहुंचे और इसके माध्यम से ही कृषि ऋण मिले, इस पर काम किए जाने की ज़रूरत है। उन्होंने ने कहा&nbsp; कि सरकार का उद्धेश्य है समाज के अंतिम व्यक्ति तक अर्थतंत्र को पहुंचाना। अर्थतंत्र के साथ-साथ अंतिम व्यक्ति का आर्थिक विकास केवल सहकारिता क्षेत्र ही कर सकता है। सहकारिता क्षेत्र के विस्तार और इसे समृद्ध बनाने के लिए इससे ज्यादा अनुकूल समय और कोई नहीं हो सकता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत के लगभग 120 साल पुराने सहकारिता आंदोलन की बहुत सारी उपलब्धियां हैं। कुछ राज्यों में हर क्षेत्र में सहकारिता आंदोलन आगे बढ़ा है, कुछ राज्यों में यह संघर्ष कर रहा है जबकि कुछ राज्यों में सहकारिता आंदोलन सिर्फ़ किताबों में रह गया है। अगर हम पूरे देश में सहकारिता आंदोलन का विकास करना चाहते हैं तो हमें इसकी अलग रणनीति सोचनी होगी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">शाह ने कहा कि पैक्स&nbsp; हमारी कृषि ऋण व्यवस्था की आत्मा हैं और सरकार&nbsp; ने पैक्स का कंप्यूटरीकरण कर इसे अधिक पारदर्शी व सशक्त बनाने का काम कर रही है। हमारे कृषि ऋण के खाके को मज़बूती प्रदान करने के साथ इसमें सुधार की भी ज़रूरत है। हर क्षेत्र में सहकारिता पहुंचे और इसके माध्यम से ही कृषि ऋण मिले, इस पर काम किए जाने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा&nbsp; कि जैसे-जैसे पैक्स बढ़ेंगे और मजबूत होंगे वैसे-वैसे जिला और स्टेट कोऑपरेटिव बैंक मजबूत होती जाएंगे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने ग्रामीण सहकारी बैंकों का विस्तार करने की भी एक योजना बनाई है जिसे कई जगह खेती बैंक कहते हैं। ग्रामीण सहकारी बैंक आज किसान को डायरेक्ट फाइनेंस करते हैं और अभी विचार हो रहा है कि ग्रामीण सहकारी बैंक भी पैक्स के माध्यम से मीडियम और लॉंग टर्म फाइनेंस कर सकें। उन्होंने कहा कि हमने सहकारिता के क्षेत्र में विगत 100 सालों में बहुत अच्छा काम किया है, मगर यह पर्याप्त नहीं है। आजादी के अमृत महोत्सव के वर्ष में हमें संकल्प करना चाहिए कि जो किया है इससे बहुत अच्छा अगले 100 साल में करेंगे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से 10 लाख करोड़ के कृषि फाइनेंस का हमारा लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने बताया कि बीमार पैक्स के लिए भी एक प्रोविज़न राज्यों को सुझाया गया है। बीमार पैक्स को लिक्विडेट कर नया पैक्स बनाया जाए। गांव के किसानों को सहकारिता के लाभों से वंचित नहीं रखना चाहिए। नया पैक्स बनाने का प्रोविजन भी कानूनन बायलॉज में और राज्यों के सहकारिता कानून में करना होगा, तब हम तीन लाख पैक्स तक पहुंच पाएंगे।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ तीन लाख पैक्स बन जाएं तो कोऑपरेटिव के विस्तार को कोई नहीं रोक सकताः अमित शाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमित शाह ने गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस पोर्टल पर सहकारिताओं की ऑनबोर्डिंग का ई&amp;#45;लॉन्च किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/amit-shah-e-launches-onboarding-of-cooperatives-on-gem-portal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 09 Aug 2022 20:26:15 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/amit-shah-e-launches-onboarding-of-cooperatives-on-gem-portal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार नई दिल्ली में गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर सहकारिताओं की ऑनबोर्डिंग को ई-लॉन्च किया। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय,भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) और जेम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, केन्द्रीय सहकारिता एवं उत्तर पूर्व क्षेत्र विकास राज्य मंत्री बी एल वर्मा और एनसीयूआई के अध्यक्ष दिलीप संघानी भी इस मौके पर&nbsp; उपस्थित थे।</span></p>
<p><span>इस मौके पर अमित शाह ने कहा कि आज सहकारिता के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है, आज देशभर की सभी सहकारी समितियों के लिए GeM के दरवाजे खुल गए हैं। </span><span>सहकारिता क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और इस क्षेत्र के विस्तार के लिए GeM पोर्टल एक बहुत उपयोगी प्लेटफार्म सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि&nbsp; </span><span>प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी समितियों के लिए ढेर सारे उपाय किए हैं और पिछले एक साल में मंत्रालय ने 25 से 30 इनिशिएटिव पर लगातार समांतर रूप से काम कर रहा है।</span></p>
<p><span>सहकारिता मंत्री ने कहा कि&nbsp; पैक्स से लेकर अपैक्स तक एक हॉलिस्टिक अप्रोच के साथ सहकारिता नीति भी बनाई जा रही है, सरकार को सहकारिता का विस्तार करना है लेकिन इसका कोई डेटाबेस ही नहीं है इसलिए मंत्रालय सभी प्रकार की सहकारी समितियों का एक राष्ट्रस्तर का डेटाबेस भी बना रहा है। </span><span>देश के 60 करोड लोग ऐसे थे जिनका पूरा दिन दो वक्त के खाने और अन्य रोज़मर्रा की चीजों का इंतजाम करने की चिंता में ही बीत जाता था। </span><span>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने गरीबों के बैंक अकाउंट, गैस सिलेंडर, शौचालय, बिजली, शुद्ध पीने का पानी और मुफ्त अनाज देकर उनकी प्राथमिक जरूरतों को पूरा कर इन 60 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं को जीवित किया है, और सहकारिता में ही इन सभी आकांक्षाओं को पूरा करने की संभावनाएं है।</span></p>
<p><span>उन्होंने कहा कि सहकारिता का मॉडल ही एक ऐसा मॉडल है जिसमें कम पूंजी के साथ भी लोग एक साथ आकर बड़े से बड़े काम को सरलता से कर सकते हैं। </span><span>कोई भी व्यवस्था समय के साथ खुद को नहीं बदलती तो वह कालबाह्य हो जाती है, सहकारिता क्षेत्र के विस्तार के लिए इसमें सुधार करना आवश्यक है। </span><span>&nbsp;</span><span>सहकारिता यूनिवर्सिटी की स्थापना का काम भी आगे बढ़ा है, इससे नए प्रोफेशनल तैयार होंगे और सहकारिता क्षेत्र में काम करने वाले लोगों और नए कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था भी उपलब्ध होगी। </span><span>एक एक्सपोर्ट हाउस भी रजिस्टर किया जा रहा है जो दिसंबर तक हो पूरा जाएगा, यह देश भर के कोऑपरेटिव को एक्सपोर्ट करने के लिए&nbsp; प्लेटफार्म प्रदान करेगा</span></p>
<p><span>अमित शाह ने कहा कि अब सहकारिता क्षेत्र के साथ कोई दोयम दर्जे का व्यवहार नहीं कर सकता परंतु हमें भी बदलाव की शुरुआत करनी पड़ेगी, पारदर्शिता की दिशा में आगे जाना होगा और अपने आप को तैयार करना पड़ेगा। </span><span>सहकारिता के क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए GeM पोर्टल बहुत उपयोगी साबित होगा, और पारदर्शिता होगी तभी किसानों व दुग्ध उत्पादकों का भरोसा भी समितियों और उनके सदस्यों पर बढेगा। </span><span>GeM पोर्टल लाकर मोदी जी ने सरकारी खरीद में पारदर्शिता लाने का काम किया है, एक नई व्यवस्था है, शुरुआत में कुछ प्रशासकीय समस्याएं आ सकती है लेकिन इसके इरादे पर किसी को शंका नहीं होनी चाहिए। </span><span>मुझे विश्वास है कि 5 वर्षों में पारदर्शिता से सरकारी खरीद का यह सफल मॉडल पूरी दुनिया देखेगी। </span><span>आज GeM का जो विस्तार हुआ है वह अकल्पनीय है, GeM पर करीब 62000 सरकारी खरीदार उपलब्ध हैं और लगभग 49 लाख विक्रेता पंजीकृत हैं। </span><span>साथ ही लगभग 10,000 से ज्यादा उत्पाद और 288 से ज्यादा सर्विसेज सूचीबद्ध हो चुकी हैं, अब तक 2 लाख 78 हजार करोड़ रुपये का व्यापार भी पूरा हो चुका है जोकि GeM की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।</span></p>
<p><span>उन्होंने कहा कि लगभग 100 करोड़ रुपए के टर्नओवर में जोड़ी जाने वाली समितियों में 589 राज्य सरकार की थी और आज तक उनमें से 289 समितियां जुड़ चुकी है, साथ ही 54 मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव में से 45 जुड़ चुके हैं ,यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि आज जेम का जो विस्तार हुआ है वह अकल्पनीय है, जेम पर करीब 62000 सरकारी खरीदार उपलब्ध हैं और लगभग 49 लाख विक्रेता पंजीकृत हैं। साथ ही लगभग 10,000 से ज्यादा उत्पाद और 288 से ज्यादा सर्विसेज सूचीबद्ध हो चुकी हैं। अब तक 2 लाख 78 हजार करोड़ रुपये का व्यापार भी पूरा हो चुका है जोकि जेम की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।&nbsp; शाह ने कहा कि आज हमारे देश के लिए एक पवित्र दिन है, आज ही के दिन भारत छोड़ो आंदोलन हुआ था, 6 साल पहले आज ही के दिन जेम की शुरुआत हुई और आज जेम पर सहकारिताओं की ऑनबोर्डिंग शुरू हुई है। इसके लिए सहकारिता से जुड़े सभी लोगों,जेम की पूरी टीम और सभी 8 लाख सहकारी समितियों और विशेषकर पीयूष गोयल जी को बहुत बहुत बधाई।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमित शाह ने गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस पोर्टल पर सहकारिताओं की ऑनबोर्डिंग का ई-लॉन्च किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव एक्ट में संशोधन के कई प्रस्तावों पर एनसीयूआई की असहमति, स्वायत्तता के सिद्धातों के विपरीत बताया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/draft-amendment-to-multi-state-cooperative-societies-act-2002-dont-align-with-cooperative-principles.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 25 Jul 2022 10:32:54 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/draft-amendment-to-multi-state-cooperative-societies-act-2002-dont-align-with-cooperative-principles.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सरकार ने मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी एक्ट 2002 में संशोधन के लिए जो ड्राफ्ट जारी किया है उसके कुछ प्रावधानों पर नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया (एनसीयूआई) ने असहमति दर्ज कराई है। यह ड्राफ्ट संशोधन मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी में चुनाव, गवर्नेंस, भर्तियों, पारदर्शिता और कार्यक्षमता को लेकर है। एनसीयूआई का कहना है कि ये प्रावधान कोऑपरेटिव के लोकतांत्रिक और स्वायत्तता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हैं।</p>
<p>सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद से ही मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट 2002 में संशोधन सरकार की प्राथमिकता में है। इसके लिए सरकार ने एक ड्राफ्ट तैयार किया है और उसे सभी राष्ट्रीय फेडरेशन को उनकी राय जानने के लिए भेजा है। इस पर चर्चा के लिए एनसीयूआई ने पिछले दिनों एक कांफ्रेंस का आयोजन किया था। इस एक्ट में संशोधन का विधेयक संसद के चालू मानसून सत्र में रखा जाना प्रस्तावित है।</p>
<p>चर्चा में शामिल विभिन्न कोऑपरेटिव संगठनों के प्रतिनिधियों ने माना कि कुछ संशोधन प्रावधान सहकारिता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हैं। एक संशोधन प्रस्ताव यह है कि कोऑपरेटिव के शेयर सरकार की पूर्व अनुमति के बिना रिडीम (बाय बैक) नहीं किए जा सकेंगे। ये शेयर रिडेंप्शन अधिकारियों की अनुमति के मुताबिक शेयर की बुक वैल्यू या फेस वैल्यू के आधार पर होगी। चर्चा में शामिल प्रतिनिधियों के अनुसार कोऑपरेटिव सिद्धांतों के मुताबिक किसी भी कोऑपरेटिव सोसाइटी के शेयर फेस वैल्यू पर ही जारी या रिडीम किए जाते हैं। उनका कहना है कि कोऑपरेटिव के शेयर ना तो स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड होते हैं ना ही उनकी ट्रेडिंग की जा सकती है।</p>
<p>एक संशोधन प्रस्ताव यह भी है कि मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी के मौजूदा डायरेक्टर के किसी परिजन को उस सोसाइटी में नौकरी पर नहीं रखा जा सकता है। सदस्यों का कहना है कि यह संविधान में दिए गए आजीविका के मौलिक अधिकारों का हनन है। ड्राफ्ट में एक प्रावधान यह है कि किसी भी मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी या बैंक के ऐसे बोर्ड का डायरेक्टर जिसे हटा दिया गया हो, वह किसी दूसरी मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी या बैंक में 5 वर्षों तक डायरेक्टर नहीं बन सकता है। चर्चा में शामिल सदस्यों के अनुसार यह प्रावधान भेदभावपूर्ण और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।</p>
<p>एक प्रावधान के अनुसार सरकार कोऑपरेटिव पुनर्वास, पुनर्गठन और विकास फंड का गठन कर सकती है। यह बीमार मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी के रिवाइवल के लिए होगा। मुनाफे वाली मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी इसके लिए फंड में योगदान करेंगी। सदस्यों का कहना है कि यह मुनाफे वाली कोऑपरेटिव सोसायटी पर अतिरिक्त बोझ होगा। इससे उन्हें अपना बिजनेस बढ़ाने में फंड की कमी होगी।</p>
<p>एक प्रावधान यह भी है कि नॉन क्रेडिट मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी में रिजर्व बैंक के पैनल से ही ऑडिटर नियुक्त किए जा सकेंगे। सदस्यों का कहना है कि इससे सोसाइटी के कामकाज पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा क्योंकि मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी और मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के कामकाज का तरीका बिलकुल अलग होता है। इसलिए मौजूदा एक्ट के प्रावधानों को ही बरकरार रखा जाना चाहिए।</p>
<p>कोऑपरेटिव एजुकेशन फंड का रखरखाव केंद्र सरकार को देने तथा इस फंड की राशि एनसीयूआई अथवा किसी अन्य एजेंसी के जरिए दिए जाने के प्रावधान पर सदस्यों का कहना है कि केंद्र द्वारा फंड के मैनेजमेंट से एनसीयूआई का महत्व कम होगा। अभी यह संगठन कोऑपरेटिव आंदोलन की शीर्ष संस्था है जो कॉपरेटिव शिक्षा और प्रशिक्षण पर फोकस करती है। इसलिए मौजूदा कानून के अनुसार एनसीयूआई को फंड के लिए धन जुटाने और उसका प्रबंधन करने का जो अधिकार एनसीयूआई को मिला हुआ है, वह जारी रहे। एनसीयूआई ने कोऑपरेटिव प्रतिनिधियों की टिप्पणियों को सहकारिता मंत्रालय के विचार के लिए भेज दिया है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव एक्ट में संशोधन के कई प्रस्तावों पर एनसीयूआई की असहमति, स्वायत्तता के सिद्धातों के विपरीत बताया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पैक्स को मल्टीपर्पज बिजनेस इकाई बनाने के लिए  ड्राफ्ट नियम जल्द]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/bye-laws-for-pacs-under-preparation-to-make-them-vibrant-multipurpose-business-entities.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 21 Jul 2022 18:55:58 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/bye-laws-for-pacs-under-preparation-to-make-them-vibrant-multipurpose-business-entities.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को बहुउद्देशीय व्यावसायिक इकाइयों में तब्दील करने के लिए सरकार मॉडल ड्राफ्ट नियमों पर काम कर रही है। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने यह बातें कही हैं। राज्य सरकारों, राष्ट्रीय सहकारी संघों और अन्य सभी हितधारकों के परामर्श से मॉडल और नियम तैयार किए जा रहे हैं। इन मॉडल निमयों में&nbsp; पैक्स के संचालन में व्यावसायिक पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए विभिन्न प्रावधान होंगे। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि पैक्स सभी राज्य सहकारी कानूनों के तहत पंजीकृत और प्रशासित हो। यह बातें सहकारिता मंत्री अमित शाह ने संसद में कही।<br />सरकार सहकारी समितियों के लिए एक नई राष्ट्रीय स्तर की नीति भी तैयार की जा रही है। नई सहकारिता नीति पर 12 और 13 अप्रैल, 2022 को दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता सचिवों / आरसीएस के साथ आयोजित किया गया था। जिसमें इससे संबंधित कानूनी ढांचा, नियामक, नीति और परिचालन बाधाओं की पहचान, व्यापार करने में आसानी, शासन को मजबूत करने के लिए सुधार, नई और सामाजिक सहकारी समितियों को बढ़ावा देना, निष्क्रिय लोगों को पुनर्जीवित करना है। सहकारी समितियों को जीवंत आर्थिक संस्था बनाना, सहकारी समितियों के बीच सहयोग और सहकारी समितियों की सदस्यता बढ़ाना सहित कई बिंदुओं पर चर्चा की गई।<br />देश के 63 हजार पैक्स के कम्प्यूटरीकरण के लिए एक केंद्र द्वारा एक योजना शुरु की गई है। जिससे वह अपने व्यवसायिक कार्यों के लिए डिजिटलीकरण और एंड-टू-एंड ऑटोमेशन में अधिक मदद मिल सके। इससे पैक्स के कामकाज में पारदर्शिता आएगी और विश्वसनीयता बढ़ेगी और उन्हें विभिन्न सेवाओं के लिए ब्याज छूट स्कीम, पीएमएफबीवाई, डीबीटी के लिए नोडल सेवा प्वाइंट के जरिए उर्वरक, बीज जैसे इनपुट के वितरण में मदद करेंगी। यह अखिल भारतीय आईटी परियोजना और पैक्स द्वारा मॉडल उप-नियमों को अपनाने के माध्यम से कानूनी सुधार पैक्स के लिए जीवंत बहुउद्देश्यीय व्यावसायिक इकाई बनने के लिए सक्षम वातावरण तैयार करेंगे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/07/image_750x500_62c3029098c17.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पैक्स को मल्टीपर्पज बिजनेस इकाई बनाने के लिए  ड्राफ्ट नियम जल्द ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कोऑपरेटिव सशक्त बनें, तभी भारत को 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगी: अमित शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperatives-can-contribute-in-making-india-5-trillion-dollar-economy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 17 Jul 2022 10:30:55 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperatives-can-contribute-in-making-india-5-trillion-dollar-economy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सरकार सहकारिता क्षेत्र को सुविधाएं तो प्रदान कर सकती है, लेकिन इस क्षेत्र को खुद को सशक्त करना होगा। तभी वे देश को 5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने में योगदान कर सकती हैं। वे नेशनल कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर रूरल डेवलपमेंट बैंक्स फेडरेशन लि. की तरफ से आयोजित कृषि एवं ग्रामीण बैंकों (एआरडीबी) के राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने सिंचाई कोऑपरेटिव बनाने का भी सुझाव दिया जिनके लिए एआरडीबी फाइनेंसिंग कर सकते हैं। सम्मेलन में देश के कृषि ग्रामीण विकास बैंकों के 700 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विगत 25 वर्षों में दीर्घकालीन कृषि ऋण का हिस्सा 50 प्रतिशत से घटकर 25 प्रतिशत रह गया है, जिसे बढ़ाना कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों की प्राथमिकता होनी चाहिये। उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि 90 वर्षों में कृषि और ग्रामीण फाइनेंसिंग निचले स्तर तक नहीं पहुंच सका है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए किसानों के लिए दीर्घ अवधि की फाइनेंसिंग की बाधाएं दूर करनी पड़ेगी।&nbsp;</p>
<p>शाह ने कहा कि बैंकों का फोकस सिर्फ फाइनेंसिंग ना रहे बल्कि फाइनेंसिंग का मकसद कोऑपरेटिव बैंक को बहुद्देशीय बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआरडीबी ने 3 लाख ट्रैक्टर की फाइनेंसिंग की है लेकिन नया लक्ष्य 8 करोड़ का होना चाहिए ताकि आगे तेज विकास हो सके। इसी तरह अल्पावधि और मध्यम अवधि की फाइनेंसिंग 13 करोड़ किसानों तक पहुंचनी चाहिए।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नाबार्ड को सभी बैंकिंग संस्थाओं के लिए व्यापक नीति लानी चाहिए। बैंक सुधार सिर्फ बैंक विशेष ना हो बल्कि वह सेक्टर विशेष भी हो। दीर्घकालीन फाइनेंसिंग पर आने वाले दिनों में नाबार्ड, एनसीएआरडीबी फेडरेशन और कोऑपरेटिव संगठनों की एक संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि पैक्स के कामकाज में पारदर्शिता के लिए उनका डिजिटाइजेशन, राष्ट्रीय कोऑपरेटिव यूनिवर्सिटी के गठन का फैसला या कोऑपरेटिव को जीईएम पोर्टल पर लाने जैसे जो भी कदम उठाए गए हैं वह ऐतिहासिक हैं। ये कदम कोऑपरेटिव को नई ऊंचाई पर ले कर जाएंगे। शाह ने कहा कि हमारे पास फिशरीज कोऑपरेटिव, सिंचाई कोऑपरेटिव, पैक्स इत्यादि का कोई डेटा नहीं है। इसलिए कोऑपरेटिव का एक डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इससे उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी जहां सरकार या मंत्रालय को ध्यान देने की जरूरत है।</p>
<p>उन्होंने सभी राज्यों और कोऑपरेटिव सेक्टर के प्रतिनिधियों से पैक्स के मॉडल नियम के लिए सुझाव देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि डिजिटाइजेशन से पैक्स बहुद्देशीय बॉडी की तरह काम कर सकेंगे। ये कृषि इनपुट बिक्री करने, उर्वरकों और बीज का वितरण करने, सस्ते अनाज के लिए पीडीएस के तौर पर काम करने, कोल्ड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध कराने, पेट्रोल पंप ऑपरेट करने जैसे कार्य कर सकते हैं। यहां तक कि इन्हें एफपीओ में भी बदला जा सकता है।</p>
<p>इस अवसर पर केन्द्रीय राज्य सहकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने कहा कि युवाओं को सहकारिता से जोड़ना बहुत आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों को अपनी आय को काफी मजबूत करना होगा ताकि वे सहकारिता में &rsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; के ध्येय को प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि हाल में रिजर्व बैंक ने शहरी ग्रामीण विकास बैंकों को काफी रियायतें दी हैं जिससे उन्हें काफी फायदा होगा।</p>
<p>भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ ने हाल में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित कर सभी सहकारी समितियों से बहुराज्यीय सहकारी अधिनियम 2002 संशोधित ड्राफ्ट पर राय मांगी है। इसे सरकार को सौंपा जायेगा और सरकार को इसे गंभीरता से लेना होगा, ताकि सहकारिता की प्रजातांत्रिक प्रणाली और स्वायत्तता मजबूत रहे।</p>
<p>इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने चार सहकारी कृषि ग्रामीण विकास बैंकों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत किया। वे बैंक हैं (1) केरल राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, (2) कर्नाटक राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, (3) गुजराज राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक और (4) पश्चिम बंगाल राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक। इसके अलावा चार 100 वर्ष पुराने बैंकों को भी पुरस्कृत किया गया, वे हैं- (1) अजमेर सहकारी भूमि विकास बैंक, (2) तमिलनाडु सहकारी राज्य कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, (3) त्रिसूर प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक और (4) बीरभूम सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/07/image_750x500_62d2fd47c0619.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कोऑपरेटिव सशक्त बनें, तभी भारत को 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगी: अमित शाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बेंगलुरु में स्थापित किया जा रहा है इफको का नया  नैनो यूरिया प्लांट, सालाना 5 करोड़ बोतलों का होगा उत्पादन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-laid-foundation-stone-of-its-nano-urea-plant-in-bengaluru-for-the-south-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 16 Jul 2022 16:04:49 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-laid-foundation-stone-of-its-nano-urea-plant-in-bengaluru-for-the-south-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक कोऑपरेटिव इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव (इफको) लिमिटेड बेंगलुरु में नैनो यूरिया का नया प्लांट लगाने जा रहा है। यहां से दक्षिण भारतीय बाजारों में नैनो यूरिया की आपूर्ति की जाएगी। शनिवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया की मौजूदगी में इस प्लांट की आधारशिला रखी। इस मौके पर इफको के चेयरमैन दिलीप संघाणी और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. यू एस अवस्थी भी मौजूद थे।</p>
<p>नैनो यूरिया खेती के लिए एक क्रांतिकारी पहल है। इसके लिए भंडारण की जगह तो कम चाहिए ही यह सस्ता भी पड़ता है और इससे उत्पादकता भी बेहतर होती है। इसलिए 1970 के दशक में अधिक उपज वाली बीज टेक्नोलॉजी के आविष्कार के बाद नैनो यूरिया को खेती में सबसे बड़ी खोज माना जाता है। इसे हरित क्रांति 2.0 का भी नाम दिया गया है।</p>
<p>नैनो यूरिया के इस्तेमाल से सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी कम होगा। इससे यूरिया आयात पर निर्भरता भी कम होगी। ड्रोन के इस्तेमाल से नैनो यूरिया का छिड़काव किया जा सकता है। इस तरह उर्वरक के छिड़काव में भी कम समय लगता है। यह किसानों और मिट्टी दोनों के लिए लाभदायक है। नैनो यूरिया के बाद नैनो डाई अमोनियम फास्फेट (डीएपी) अभी ट्रायल की प्रक्रिया में है। इसके बाद भारत और उर्वरकों के मामले में काफी हद तक आत्मनिर्भर हो जाएगा।</p>
<p>इस मौके पर मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने दानेदार यूरिया की तुलना कीमोथेरेपी से करते हुए कहा कि इससे जल और मिट्टी दोनों प्रदूषित होती है। नैनो यूरिया को किसान हितैषी बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके ट्रांसपोर्टेशन और भंडारण में किसानों को कम खर्च करना पड़ता है और उत्पादकता भी बढ़ती है।</p>
<p>&nbsp;इफको के मैनेजिंग डायरेक्एटर&nbsp; डॉ. अवस्थी ने बताया कि यह प्लांट 15 महीने में बनकर तैयार हो जाने की उम्मीद है। यहां हर साल नैनो यूरिया की करीब 5 करोड़ बोतलें तैयार की जाएंगी जिनकी आपूर्ति कर्नाटक और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में होगी। उन्होंने बताया कि 5 करोड़ बोतल यूरिया सामान्य यूरिया के 5 करोड़ बैग (22.5 लाख टन) के बराबर है। इस पर लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग का खर्च कम होने के साथ यह सुरक्षित, स्वच्छ, पर्यावरण हितैषी भी है। इससे किसानों का मुनाफा बढ़ेगा।</p>
<p>इफको चेयरमैन दिलीप संघाणी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और सहकार से समृद्धि विजन को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने बताया कि इफको नैनो यूरिया कोऑपरेटिव की अपनी टेक्नोलॉजी के माध्यम से ही बनाया गया है। यह किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह कोऑपरेटिव सेक्टर के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी खोज किसानों की कॉपरेटिव ने की है। इससे होने वाला मुनाफा सीधे किसानों को मिलेगा।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बेंगलुरु में स्थापित किया जा रहा है इफको का नया  नैनो यूरिया प्लांट, सालाना 5 करोड़ बोतलों का होगा उत्पादन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पैक्स को मिल सकती है पेट्रोल&amp;#45;डीजल की डीलरशिप, सरकार के ड्राफ्ट में राशन दुकान चलाने का भी है प्रस्ताव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/government-issues-draft-as-pacs-may-be-allowed-to-sell-petrol-diesel-and-run-pds-shops.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 05 Jul 2022 00:09:27 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/government-issues-draft-as-pacs-may-be-allowed-to-sell-petrol-diesel-and-run-pds-shops.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्राथमिक कृषि कर्ज समितियों (पैक्स) को पेट्रोलियम उत्पादों की डीलरशिप और राशन की दुकान चलाने तथा अस्पताल और शिक्षण संस्थान विकसित करने की अनुमति दी जा सकती है। सहकारिता मंत्रालय ने इस आशय का एक ड्राफ्ट जारी किया है। इस ड्राफ्ट पर 19 जुलाई तक राज्य सरकारों तथा अन्य पक्षों से सुझाव मांगे गए हैं। मौजूदा फ्रेमवर्क में पैक्स अपने कोर बिजनेस के अलावा और कोई कार्य नहीं कर सकते हैं।</p>
<p>ड्राफ्ट में कहा गया है कि पैक्स को बैंक मित्र और कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) की तरह काम करने, कोल्ड स्टोरेज और गोदाम की सुविधा उपलब्ध कराने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसके अलावा इन्हें डेयरी, फिशरीज, सिंचाई और हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) के क्षेत्र में भी काम करने की इजाजत दी जानी चाहिए। ये सहकारी समितियां शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, पर्यावरण और स्थायी विकास जैसी गतिविधियों में कम्युनिटी आधारित सेवा उपलब्ध करा सकती हैं।</p>
<p>ड्राफ्ट में कहा गया है कि इन सहकारी समितियों का लक्ष्य अपने सदस्यों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में अल्पावधि और मध्यम अवधि के लिए कर्ज उपलब्ध कराना है। यह कर्ज खेती के अलावा चिकित्सा तथा अन्य कार्यों के लिए भी दिया जा सकता है। हालांकि कर्ज के बदले कोलेटरल यानी गिरवी रखने की भी बात है।</p>
<p>ड्राफ्ट के अनुसार पैक्स इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, कम्युनिटी सेंटर, अनाज की खरीद, राशन की दुकान या कोई भी सरकारी स्कीम चलाने का काम कर सकती हैं। अगर इन्हें रसोई गैस, पेट्रोल, डीजल, ग्रीन एनर्जी, खेत या घरों में इस्तेमाल होने वाली चीजें, कृषि मशीनरी आदि की डीलरशिप, एजेंसी या डिस्ट्रीब्यूटरशिप दी जाए तो समिति और उसके सदस्यों की आमदनी बढ़ेगी।</p>
<p>पैक्स राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं इसलिए ड्राफ्ट में दिए गए सुझावों पर राज्यों की सलाह मांगी गई है। कैबिनेट ने पिछले हफ्ते देश की 63000 पैक्स को अगले 5 वर्षों में कंप्यूटरीकृत करने के लिए 2516 करोड़ रुपए के खर्च को मंजूरी दी। अभी ज्यादातर पैक्स कंप्यूटरीकृत ना होने के कारण वहां मैनुअल कामकाज होता है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पैक्स को मिल सकती है पेट्रोल-डीजल की डीलरशिप, सरकार के ड्राफ्ट में राशन दुकान चलाने का भी है प्रस्ताव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारिता मंत्रालय  एनसीयूआई के साथ मिलकर  सहकारिता विश्वविद्यालय स्थापित करेगा: अमित शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/the-ministry-of-cooperatives-will-set-up-a-cooperative-university-in-collaboration-with-ncui.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 04 Jul 2022 21:23:53 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/the-ministry-of-cooperatives-will-set-up-a-cooperative-university-in-collaboration-with-ncui.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">केंद्रीय सहकारिता और गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि<span> देश में सहकारी शिक्षा को लोकप्रिय बनाने के लिए सहकारिता मंत्रालय&nbsp; और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ&nbsp; (</span><span>एनसीयूआई)</span><span> मिलकर जल्द ही एक सहकारी विश्वविद्यालय का गठन &nbsp;किया जाएगा। सोमवार को सौवें अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।&nbsp; </span><span>कार्यक्रम का आयोजन सहकारिता मंत्रालय और एनसीयूआई&nbsp; द्वारा किया गया था। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर इस वर्ष का थीम था "सहकारिता से आत्मानिर्भर भारत और एक बेहतर दुनिया का निर्माण करना</span>&rdquo;<span>। </span></p>
<p style="text-align: justify;">अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि सहकारी समितियों के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए और किसानों को उनकी जैविक उपज पर 30 फीसदी &nbsp;से अधिक लाभ मिल सके इसके लिए सरकार अमूल को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। अमूल एक आधुनिक प्रयोगशाला स्थापित कर जैविक उत्पादों के लिए प्रमाण पत्र प्रदान करेगी ।&nbsp; साथ ही सहकारी समितियों के जैविक उत्पादों के साथ अपने जैविक उत्पादों की मार्केटिंग के साथ साथ अपनी सहकारी समितियों के उत्पादों की ब्रांडिंग भी करेगी। उन्होंने कहा कि मिट्टी सुधार के लिए इफको और कृभको के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी कि अगले पांच साल में फसलों की उत्पादकता में कम से कम &nbsp;25-30 फीसदी &nbsp;की वृद्धि हो।</p>
<p style="text-align: justify;">सहकारिता मंत्री ने घोषणा की कि सहकारी समितियां के लिए एक निर्यात एजेंसी को स्थापित किया जायेगा,<span> ताकि उनके उत्पाद को दुनिया भर में निर्यात किया जा सके और सहकारी समितियों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। &nbsp;सहकारी संगठन&nbsp; के लोग इस एजेंसी के सदस्य होंगे</span>, <span>जो &nbsp;सहकारी समितियों के उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के लिए काम करेगी। </span>उन्होंने आगे कहा कि सरकार सहकारी समितियों पर एक डेटाबेस तैयार कर रही है जिसके माध्यम से उन क्षेत्रों के बारे में पता लगाया जा &nbsp;सके जहां सहकारी समितियों की जरूरत &nbsp;है। इसके लिए सरकार एनसीयूआई, <span>राज्य सहकारी बैंकों और नाबार्ड के सहयोग से विस्तार कार्यक्रम शुरू करेंगीं।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/07/image_750x_62c302c03d9d4.jpg" alt="" /></p>
<p style="text-align: justify;">इस अवसर पर बोलते हुए केंद्रीय मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा कि सहकारी समितियों को बचत करने की अपनी प्रवृत्ति को विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा अगर सभी सहकारी समितियां बचत की आदत विकसित कर लें, <span>तो उन्हें कभी भी फंड &nbsp;पैदा करने की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा ।</span></p>
<p style="text-align: justify;">पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने अपने भाषण में कहा कि 2030 के मिशन के साथ-साथ सहकारी समितियों को जलवायु परिवर्तन, <span>स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और कृषि जैव-विविधता पर ध्यान देना चाहिए</span>, <span>जिसके लिए सरकार को नीतिगत समर्थन देना होगा। उन्होंने आगे कहा कि राज्य के नेतृत्व वाली सहकारी समितियों के अर्थव्यवस्था की सीमाओं के अनुसार &nbsp;सरकार को एक बाजार संचालित विकास आर्थिक मॉडल तैयार करना चाहिए जो समाज का विकास कर सके</span>, <span>और इसके लिए सहकारी समितियां</span>,<span>सामाजिक-आर्थिक विकास में बेहतर कार्य कर सकती है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री बी.एल. के वर्मा ने &nbsp;मंत्रालय द्वारा की नई पहल के बारे में बताते हुए कहा कि &nbsp;हाल ही में 63,000 पैक्स का डिजिटलीकरण करने का निर्णय लिया गया है। यह कदम सहकारी समितियों को और मजबूत करेगा और उनकी कार्यक्षमता में भी &nbsp;सुधार लाएगा ।</p>
<p style="text-align: justify;">एनसीयूआईके अध्यक्ष दिलीप संघानी ने हाल ही में एनसीयूआई&nbsp; की &nbsp;गई पहल पर प्रकाश डालते हुए बताया कि एनसीयूआई हाट सहकारी समितियों और&nbsp; एसएचजी के&nbsp; उत्पादों के लिए एक बिक्री मंच प्रदान कर रहा है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस अवसर पर कृभको के चेयरमैन और इंटरनेशनल कोआपरेटिल अलायंस (आईसीए) , एशिया पैसिफिक के अध्यक्ष डॉ.चंद्रपाल सिंह ने अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय सहकारिता आंदोलन इस तरह से विकसित होना चाहिए कि हम सहकारिता आंदोलन का वैश्विक स्तर पर नेतृत्व &nbsp;कर सकें।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारिता मंत्रालय  एनसीयूआई के साथ मिलकर  सहकारिता विश्वविद्यालय स्थापित करेगा: अमित शाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कोऑपरेटिव सर्विस सेक्टर समेत विभिन्न क्षेत्रों में करें विस्तार: बालू अय्यर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperatives-should-expand-in-different-sectors-including-services.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 02 Jul 2022 11:44:46 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperatives-should-expand-in-different-sectors-including-services.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस एशिया पैसिफिक (आईसीए-एपी) के सीईओ बालासुब्रमण्यम अय्यर ने कहा है कि भारत में कोऑपरेटिव को विभिन्न क्षेत्रों मैं विस्तार करने की जरूरत है। उनकी छवि कृषि और क्रेडिट तक सीमित है इसे उन्हें बदलना चाहिए। बालू अय्यर रूरल वॉयस और सहकार भारती की तरफ से आयोजित परिचर्चा 'सहकार से समृद्धि: मेनी पाथवेज' के एक सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने दूसरे देशों के उदाहरण भी दिए जहां विभिन्न क्षेत्रों में कोऑपरेटिव ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने जिस सत्र को संबोधित किया उसका विषय था सहकारिता में वैश्विक अनुभवों का भारत कैसे फायदा उठा सकता है।</p>
<p>अय्यर ने कहा कि अगर भारत वैश्विक अनुभवों का लाभ ले सकता है तो बाकी दुनिया भी भारत के अनुभवों का फायदा उठा सकती है। अमूल और इफको जैसी कोऑपरेटिव दुनिया के लिए उदाहरण हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव खासकर सर्विस सेक्टर में कई संभावनाओं का दोहन कर सकते हैं। भारत की जीडीपी में सर्विस सेक्टर का योगदान 50 फ़ीसदी से अधिक है लेकिन इसका बड़ा हिस्सा अनौपचारिक अथवा असंगठित क्षेत्र में है। इसलिए कोऑपरेटिव के लिए इस क्षेत्र में काम करने की बहुत गुंजाइश है। सर्विस ऐसा सेक्टर है जिसके दायरे में इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी से लेकर सड़क के किनारे सामान बेचने वाले तक आते हैं।</p>
<p>ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां 1974 में 17 ऑटो मैकेनिक ने मिलकर एक कोऑपरेटिव का गठन किया था। ऐसा उन्होंने इसलिए किया क्योंकि उन्हें लगा कि हुए अलग-अलग काम करते हुए अपने मूल बिजनेस पर फोकस नहीं कर पा रहे थे। अगर कोऑपरेटिव का गठन कर लिया जाए तो सामान खरीदने, कार्ज, मार्केटिंग, एकाउंटिंग जैसे नॉन-कोर क्षेत्र के कार्य कोऑपरेटिव कर सकते हैं। आज उनकी कैप्रीकॉर्न नामक कोऑपरेटिव न्यूजीलैंड में भी पैर पसार चुकी है। इसके 25000 से अधिक सदस्य हैं और सालाना टर्नओवर दो अरब डॉलर को पार कर चुका है।</p>
<p>अय्यर ने सामाजिक कोऑपरेटिव की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्ग होता जा रहा है। कोऑपरेटिव के पास उनके लिए कुछ करने की काफी संभावनाएं हैं। जापान की कृषि कोऑपरेटिव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां जब कोई बच्चा जन्म लेता है तो वह कोऑपरेटिव का हिस्सा बन जाता है क्योंकि वह जिस अस्पताल में जन्म लेता है वह कोऑपरेटिव की तरफ से चलाया जा रहा होता है। इसी तरह वहां बुजुर्गों से लेकर अंतिम संस्कार तक के कोऑपरेटिव हैं। अय्यर ने कहा कि कोऑपरेटिव को सिर्फ कृषि या कर्ज पर नहीं बल्कि उन्हें सदस्यों पर फोकस करना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव को टेक्नोलॉजी को भी बड़े स्तर पर अपनाने की जरूरत है। अभी ओला, उबर, अमेजॉन, फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफार्म मुनाफे के लिए काम करते हैं। हम प्लेटफार्म कोऑपरेटिव स्थापित करने पर विचार कर सकते हैं। इसका मालिकाना हक कोऑपरेटिव के सदस्यों का होगा। उन्होंने अमेरिका की अप एंड गो कोऑपरेटिव का उदाहरण दिया जो घरों की सफाई का काम करती है। उन्होंने कहा कि इस कोऑपरेटिव के सदस्यों की कमाई अनेक निजी कंपनियों के कर्मचारियों की तुलना में ज्यादा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आज के युवा स्टार्टअप में काफी रुचि दिखा रहे हैं। कोऑपरेटिव भी स्टार्टअप से अलग नहीं हैं। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए और कोऑपरेटिव को स्टार्टअप के तौर पर समझना चाहिए। कई प्रमुख देशों में कोऑपरेटिव को ऐसी मान्यता मिली हुई है। उन्होंने कोऑपरेटिव की छवि बदलने की जरूरत भी बताई और कहा कि आज के युवा कोऑपरेटिव का नाम सुनते ही पारंपरिक तौर पर गांव और खेती के लिए काम करने वाली संस्था समझते हैं। यह सोच बदलने की जरूरत है। इसके लिए हम दूसरे देशों का अनुसरण कर सकते हैं।</p>
<p>अय्यर ने कोऑपरेटिव के लिए फंड की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि संयुक्त अरब अमीरात में कोऑपरेटिव को आईपीओ के जरिए पैसे जुटाने की अनुमति दी गई है। इसी तरह फ्रांस और इटली के उदाहरण से भी हम सीख ले सकते हैं। कोऑपरेटिव में गवर्नेंस का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि इसमें भी हम दूसरे देशों का उदाहरण देख सकते हैं। जैसे न्यूजीलैंड में अगर आप किसी को ऑपरेटिव के बोर्ड में शामिल होना चाहते हैं तो आपको पहले एक सर्वे का सामना करना पड़ता है जिसमें आप से पूछा जाता है कि आप क्यों वह पद चाहते हैं। उसके बाद इंटरव्यू होता है। इस तरह वही व्यक्ति बोर्ड में जाता है जो वास्तव में कॉपरेटिव को आगे बढ़ाने का इच्छुक होता है।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कोऑपरेटिव सर्विस सेक्टर समेत विभिन्न क्षेत्रों में करें विस्तार: बालू अय्यर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको की बड़ी उपलब्धि, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के लिए मिला 20 साल का पेटेंट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-bags-the-patent-for-nano-urea-and-nano-dap-for-20-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 01 Jul 2022 19:22:07 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-bags-the-patent-for-nano-urea-and-nano-dap-for-20-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक सहकारी संगठन इफको लिमिटेड ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसके क्रांतिकारी नैनो प्रौद्योगिकी आधारित उर्वरक इफको नैनो यूरिया और इफको नैनो डीएपी का पेटेंट इसे मिल गया है। इफको ने भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के लिए 20 वर्षों का पेटेंट प्राप्त किया है। कंपनी की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि यह आत्मानिर्भर भारत और आत्मानिर्भर कृषि का एक सही उदाहरण है। यह सहकार से समृद्धि के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ी छलांग है।</p>
<p>इफको के एमडी, डॉ. यू.एस. अवस्थी ने ट्वीट किया, &ldquo;इफको नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की यह बौद्धिक संपदा कृषि के लिए इनपुट लागत को कम करके भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी, किसानों की आय दोगुनी करने में मदद करेगी।&rdquo;</p>
<p>नैनो यूरिया और नैनो डीएपी अगली पीढ़ी के उर्वरक हैं जो किसानों और पर्यावरण को लाभ पहुंचा रहे हैं। ये उत्पाद मिट्टी, वायु और जल प्रदूषण को कम करने में सहायक होंगे। गुणवत्तापूर्ण फसलों के उत्पादन के लिए इनकी बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है, साथ ही साथ मिट्टी को भी स्वस्थ रखते हैं। यह मिट्टी को रसायनों के अत्यधिक इस्तेमाल से भी बचाने का एक प्रयास है।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको की बड़ी उपलब्धि, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के लिए मिला 20 साल का पेटेंट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्राथमिक कृषि ऋण समितियों का होगा कम्प्यूटरीकरण, कैबिनेट ने मंजूर किए 2516 करोड़ रुपए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ccea-approves-a-budget-of-rs-2516-crore-for-computerisation-of-pacs.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 29 Jun 2022 17:48:12 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ccea-approves-a-budget-of-rs-2516-crore-for-computerisation-of-pacs.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) की दक्षता बढ़ाने और उनके संचालन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही लाने के लिए इनके कम्प्यूटरीकरण को मंजूरी दी है। इस परियोजना में कुल 2516 करोड़ रुपये का खर्च आएगा जिसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 1528 करोड़ रुपये की होगी। साथ पांच वर्षों की अवधि में लगभग 63,000 कार्यरत पैक्स के कम्प्यूटरीकरण का लक्ष्य है। कंप्यूटरीकरण से पैक्स को अपने व्यवसाय में विविधता लाने में भी मदद मिलेगी। इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी और अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने कैबिनेट के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे देश की ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।</p>
<p>पैक्स देश में अल्पकालिक सहकारी ऋण (एसटीसीसी) की त्रि-स्तरीय व्यवस्था में सबसे निचले स्तर पर अपनी भूमिका निभाती हैं। लगभग 13 करोड़ किसान इसके सदस्य हैं। देश में सभी संस्थाओं द्वारा दिए गए केसीसी ऋणों में पैक्स का हिस्सा 41 प्रतिशत (3.01 करोड़ किसान) है। पैक्स के माध्यम से इन केसीसी ऋणों में से 95 प्रतिशत (2.95 करोड़ किसान) छोटे व सीमांत किसानों को दिए गए हैं। अन्य दो स्तरों अर्थात राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी) और जिला केन्द्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) को पहले ही नाबार्ड ऑटोमेटेड कर चुका है और उन्हें साझा बैंकिंग सॉफ्टवेयर (सीबीएस) के तहत लाया गया है।</p>
<p>अधिकांश पैक्स को अब तक कम्प्यूटरीकृत नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप उनके संचालन में अक्षमता और भरोसे की कमी दिखाई देती है। कुछ राज्यों में पैक्स का आंशिक कम्प्यूटरीकरण किया गया है। लेकिन उनके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर में कोई समानता नहीं है और वे डीसीसीबी एवं एसटीसीबी के साथ जुड़े हुए नहीं हैं।</p>
<p>पैक्स के कंप्यूटरीकरण से वित्तीय समावेशन के उद्देश्यों को पूरा करने तथा किसानों, विशेष रूप से छोटे व सीमांत किसानों को दी जाने वाली सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी। यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटलीकरण को बेहतर बनाने के अलावा बैंकिंग गतिविधियों के साथ-साथ गैर-बैंकिंग गतिविधियों के केन्द्र के रूप में पैक्स की पहुंच को बेहतर बनाने में मदद करेगी। इसके बाद डीसीसीबी खुद को विभिन्न सरकारी योजनाओं (जिसमें ऋण और अनुदान शामिल होती हैं), जिन्हें पैक्स के माध्यम से लागू किया जा सकता है, के कार्यान्वयन के महत्वपूर्ण विकल्पों में से एक के रूप में नामांकित कर सकते हैं। यह कदम ऋण के त्वरित निपटान, अपेक्षाकृत कम हस्तांतरण लागत, त्वरित ऑडिटिंग और राज्य सहकारी बैंकों एवं जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के साथ भुगतान व लेखांकन संबंधी असंतुलन दूर करेगा।</p>
<p>इस परियोजना में साइबर सुरक्षा एवं आंकड़ों के संग्रहण के साथ-साथ क्लाउड आधारित साझा सॉफ्टवेयर का विकास, पैक्स को हार्डवेयर संबंधी सहायता प्रदान करना, रख-रखाव संबंधी सहायता एवं प्रशिक्षण सहित मौजूदा रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण शामिल है। यह सॉफ्टवेयर स्थानीय भाषा में होगा जिसे राज्यों की जरूरतों के अनुसार एडजस्ट किया जा सकेगा। केन्द्र और राज्य स्तर पर परियोजना प्रबंधन इकाइयां स्थापित की जाएंगी। लगभग 200 पैक्स के समूह में जिला स्तरीय सहायता भी प्रदान की जाएगी। उन राज्यों के मामले में जहां पैक्स का कम्प्यूटरीकरण पूरा हो चुका है, 50,000 रुपये प्रति पैक्स की दर से भुगतान किया जाएगा, बशर्ते वे साझा सॉफ्टवेयर के साथ एकीकृत होने/अपनाने के लिए सहमत हों, उनका हार्डवेयर आवश्यक निर्देशों को पूरा करता हो और उनका सॉफ्टवेयर 1 फरवरी, 2017 के बाद शुरू किया गया हो।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>उर्वरक बनाने वाली विश्व की सबसे बड़ी सहकारी संस्था इफको ने पैक्स के कम्प्यूटरीकरण के ऐतिहासिक कदम का स्वागत किया है। इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने इस पहल का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को धन्यवाद और बधाई दी। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से सुदूर क्षेत्रों में बैठा किसान भी देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ जाएगा और इससे देश की ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।</p>
<p>इफको अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने कहा कि यह भारतीय किसानों और ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के 'सहकार से समृद्धि' के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना पैक्स के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के साथ ही पैक्स के विकास के लिए भी क्रांतिकारी साबित होगी।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्राथमिक कृषि ऋण समितियों का होगा कम्प्यूटरीकरण, कैबिनेट ने मंजूर किए 2516 करोड़ रुपए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उपज की अधिक कीमत दिलाकर या लागत घटाकर ही बढ़ाई जा सकती है किसानों की आय: जयेन मेहता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/higher-prices-of-produce-or-reducing-the-cost-are-the-two-ways-to-increase-income-of-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 29 Jun 2022 09:49:47 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/higher-prices-of-produce-or-reducing-the-cost-are-the-two-ways-to-increase-income-of-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसानों की आय बढ़ाने के दो रास्ते हैं- पहला, उनकी उपज की कीमत अधिक मिले, और दूसरा, किसानों की लागत कम हो। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) उपभोक्ताओं के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन यह किसानों के लिए ठीक नहीं है। गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) अमूल के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर जयेन मेहता ने पिछले दिनों कोऑपरेटिव पर आयोजित एक परिचर्चा में यह विचार रखे। 'सहकार से समृद्धि: मेनी पाथवेज' विषय पर आयोजित इस परिचर्चा का आयोजन रूरल वॉयस और सहकार भारती ने किया था।&nbsp;</p>
<p>अमूल का जिक्र करते हुए मेहता ने कहा कि उपभोक्ता के द्वारा खर्च की गई रकम का 80 से 85 फ़ीसदी दुग्ध किसानों को मिलता है। दुनिया के अन्य हिस्सों में किसानों को सिर्फ एक तिहाई रकम मिलती है। बाकी पैसा रिटेलर और प्रोसेसर के बीच जाता है। मेहता के अनुसार कोऑपरेटिव किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और इस तरह उनकी लागत घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</p>
<p>उन्होंने 10 साल पहले रिटेल में एफडीआई पर एक कॉन्फ्रेंस का जिक्र किया और कहा कि एफडीआई उपभोक्ताओं के लिए अच्छा हो सकता है लेकिन किसानों के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि आज की सत्तारूढ़ पार्टी जब विपक्ष में थी तब उसने संसद में यह मुद्दा उठाया था और रिटेल में एफडीआई से संबंधित विधेयक का विरोध किया था।</p>
<p>मेहता के अनुसार मूल्य का मतलब सबके लिए अलग-अलग है। जैसे मार्केटिंग के लोग 4पी की बात करते हैं- प्रोडक्ट यानी उत्पाद, प्राइस यानी कीमत, प्लेस यानी स्थान और प्रमोशन। लेकिन किसानों के मामले में दो और पी- पॉलिसी और परमेश्वर जुड़ जाते हैं। यहां परमेश्वर का अर्थ बारिश-बाढ़ जैसी बातों से है जिनका नियंत्रण किसानों के हाथ में नहीं होता है।</p>
<p>कोऑपरेटिव से किसानों को किस तरह लाभ हो सकता है इसके लिए उन्होंने अमेरिका का एक उदाहरण दिया। उन्होंने बताया, कुछ समय पहले जीसीएमएमएफ अमेरिका में अपनी शाखा खोलना चाहती थी। अमेरिकी अधिकारियों ने सी यानी कोऑपरेटिव शब्द पर आपत्ति की। उनका कहना था कि अमेरिकी कानून के मुताबिक किसी कोऑपरेटिव का तभी रजिस्ट्रेशन हो सकता है जब वे स्थानीय किसानों के साथ मिलकर काम करें। तब अमूल ने नाम बदलकर जीएसएमएमएफ रखा जिसमें एफ का मतलब सहकारी था। हालांकि अमेरिकी अधिकारी तब भी नहीं माने। मेहता के अनुसार नवगठित सहकारिता मंत्रालय भारतीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए इस तरह के कानून ला सकता है।</p>
<p>उन्होंने बताया की अमूल के साथ 36 लाख किसान जुड़े हुए हैं। इसका सालाना टर्नओवर 61 हजार करोड़ रुपए के आसपास है। अमूल में इन सबका मालिकाना हक किसानों के पास है। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव किसानों को उपभोक्ताओं से जोड़ती है, वैल्यू एडिशन करती है और बिचौलिए की भूमिका को खत्म करती है। यहां उत्पादन प्रसंस्करण और मार्केटिंग तीनों स्तर पर किसान ही मालिक हैं। अमूल इसी मॉडल पर काम करता है। देश की अन्य दुग्ध कोऑपरेटिव ने इसी मॉडल को अपनाया है।</p>
<p>भारत में दुग्ध कोऑपरेटिव की संभावनाओं के बारे में उन्होंने कहा कि अभी दुनिया का 22 फ़ीसदी दूध उत्पादन भारत में होता है। एक दशक में यह 33 फ़ीसदी हो जाएगा। अगले 10 वर्षों में जो अतिरिक्त दूध उत्पादन होगा उसमें भारत का हिस्सा दो-तिहाई होगा।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उपज की अधिक कीमत दिलाकर या लागत घटाकर ही बढ़ाई जा सकती है किसानों की आय: जयेन मेहता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रूरल वॉयस परिचर्चा: विशेषज्ञों ने दिया कोऑपरेटिव को मजबूत बनाने पर जोर, कहा सरकारी हस्तक्षेप इनकी विफलता का एक कारण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/experts-call-for-strengthening-of-cooperatives-and-warn-against-government-intervention.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 25 Jun 2022 07:39:12 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/experts-call-for-strengthening-of-cooperatives-and-warn-against-government-intervention.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अगर सरकार कोऑपरेटिव की सफलता चाहती है तो वह उनका समर्थन करे, उनके कामकाज में हस्तक्षेप ना करे। यह कहना है इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमैंट, आणंद&nbsp; (इरमा) के प्रोफेसर डॉ. शाश्वत विश्वास का। डॉ. विश्वास <strong>रूरल वॉयस</strong> और <strong>सहकार भारती</strong> द्वारा पिछले दिनों 'सहकार से समृद्धि: मैनी पाथवेज' विषय पर आयोजित एक परिचर्चा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव 1841 में शुरू हुए थे। तब से अब तक दुनिया काफी बदल गई है। अब इनके बारे में नए तरीके से सोचने का समय आ गया है। कृषि कोऑपरेटिव की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उनके पास मोलभाव करने की कोई क्षमता नहीं होती है। कृषि कमोडिटी के दाम में काफी उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। इसलिए कोऑपरेटिव मैनेजमेंट को तत्काल फैसला लेना पड़ता है। लेकिन यहां व्यक्ति के पास ना तो यह अधिकार होता है ना उसके पास इसकी योग्यता होती है। डॉ विश्वास 'कोऑपरेटिव को प्रासंगिक कैसे बनाया जाए' विषय पर आयोजित तीसरे सत्र में बोल रहे थे। ऊपर दिए वीडियो लिंक पर क्लिक करके आप इस सत्र को सुन सकते हैं।</p>
<p>सरकारी हस्तक्षेप की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के समर्थन के बिना कोई भी कॉरपोरेट्स या इंडस्ट्री नहीं चल सकती है। देश के दो बड़े कॉर्पोरेट घरानों ने सरकारी बैंकों से पांच लाख करोड़ रुपए का कर्ज लिया है। लेकिन कॉरपोरेट्स में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है। जबकि कोऑपरेटिव की मदद करने के नाम पर सरकार उसमें किसी ब्यूरोक्रेट को एमडी बना देती है। वह व्यक्ति उनके प्रति जवाबदेह नहीं होता जिनके पैसे के बल पर वह काम कर रहा है। सरकारी हस्तक्षेप को कोऑपरेटिव की विफलता के का एक कारण बताते हुए डॉ विश्वास ने कहा की कंपनी रजिस्ट्रार कभी किसी कॉरपोरेट से यह नहीं पूछता है कि वह किसे नियुक्त कर रहा है, जबकि कोऑपरेटिव में रजिस्ट्रार की अनुमति के बिना कोई नियुक्ति नहीं की जा सकती है।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत में कोऑपरेटिव अब भी पुराने तौर-तरीकों से चल रहे हैं। वह जुरासिक पार्क युग में हैं। टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से उनके कामकाज में पारदर्शिता लाई जा सकती है। कोऑपरेटिव के गवर्नेंस में सुधार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि कई बार इनके चुनाव सामान्य चुनावों से भी बदतर हो जाते हैं। जिन लोगों का कॉपरेटिव से कोई लेना देना नहीं होता वह भी इनमें चुनाव लड़ते हैं और जीत भी जाते हैं।</p>
<p><strong>कोऑपरेटिव अपना ब्रांड बनाएं और मार्केटिंग करें: नायकनवरे</strong></p>
<p>एनएफसीएसएफ लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) प्रकाश नायकनवरे ने कहा कि इस साल भारत के 100 लाख टन चीनी निर्यात में 55 फ़ीसदी हिस्सा कोऑपरेटिव का है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में शुगर कोऑपरेटिव ने प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों रूप से अनेक रोजगार का सृजन किया है। वह न सिर्फ चीनी मिल चला रहे हैं बल्कि अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, अन्य शिक्षण संस्थान, कंजूमर स्टोर, कोऑपरेटिव बैंक आदि भी चला रहे हैं। यह अन्य सेक्टर और अन्य जगहों पर भी हो सकता है।</p>
<p>कोऑपरेटिव के कामकाज में पेशेवर तौर-तरीकों की कमी का जिक्र करते हुए नायकनवरे ने कहा कि प्रशिक्षण और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से इसे सुधारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में कोऑपरेटिव राजनीतिक सत्ता की सीढ़ी के तौर पर काम करती है। इसलिए कोऑपरेटिव में छोटी-छोटी बातों पर भी बड़े समारोह आयोजित किए जाते हैं और उन पर पैसा जाया होता है। गुजरात की कोऑपरेटिव ऐसा नहीं करती है।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने शुगर कोऑपरेटिव से दीर्घकालिक लक्ष्य बनाकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अभी हम सिर्फ आग लगने पर कुआं खोदने की नीति पर चल रहे हैं। कोऑपरेटिव को मार्केटिंग पर भी ध्यान देना चाहिए जो अभी नहीं हो रहा है। उन्हें अपना ब्रांड बनाना चाहिए और घरेलू तथा विदेशी बाजारों में उसकी मार्केटिंग करनी चाहिए। कोऑपरेटिव में काम करने वालों के प्रशिक्षण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अक्सर ऐसे मौकों पर निचले स्तर के कर्मचारियों को भेज दिया जाता है जबकि प्रबंधन के लोगों को प्रशिक्षण की ज्यादा जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि नवगठित सहकारिता मंत्रालय काफी तेजी से काम कर रहा है और यह स्वागत योग्य है।</p>
<p><strong>किसानों को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी: राम इकबाल सिंह</strong></p>
<p>नैकॉफ के वर्किंग चेयरमैन राम इकबाल सिंह ने परिचर्चा के आयोजन का स्वागत करते हुए कहा कि यहां विशेषज्ञों की तरफ से दिए गए सुझावों पर सरकार को अमल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों की नकल करने के बजाय हमें अपनी समस्याओं को पहचानना और उनका समाधान तलाशना चाहिए। सरकारी कामकाज के तौर-तरीके में भी बदलाव की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी छोटे किसान के लिए अधिकारी से मिलना या उससे उस तक अपनी बात पहुंचाना बड़ा मुश्किल होता है क्योंकि अधिकारी के पास छोटे किसानों से मिलने का समय ही नहीं होता।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जरूरत सब्सिडी की नहीं बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की है। कोऑपरेटिव का कोई विकल्प नहीं है इसलिए राज्य स्तरीय और राष्ट्र स्तरीय कोऑपरेटिव को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कोऑपरेटिव नियमों में भी संशोधन की जरूरत बताई।&nbsp;</p>
<p><strong>कोऑपरेटिव बाहरी कारणों से विफल होते हैं: डीएन ठाकुर</strong></p>
<p>सहकार भारती के नेशनल प्रेसिडेंट डॉ. डीएन ठाकुर ने इस मौके पर कहा कि आज तक कोई भी कोऑपरेटिव अपनी वजह से विफल नहीं हुई है। विफलता का कारण बाहरी रहा है। उन्होंने कहा कि जब कोऑपरेटिव विफल हो नहीं सकती तो वह अप्रासंगिक कैसे हो सकती है। कोऑपरेटिव हमेशा प्रासंगिक रहे हैं और रहेंगे। चाहे खाद्य सुरक्षा की बात हो, उर्जा सुरक्षा की या सामाजिक सौहार्द की यह सब कोऑपरेटिव के माध्यम से ही सुनिश्चित किया जा सकता है।</p>
<p>डॉ. ठाकुर ने कहा कि कम्युनिटी आधारित मॉडल कभी फेल नहीं हो सकता क्योंकि सभ्यता की शुरुआत के साथ ही इसकी भी शुरुआत हुई। प्रकृति भी कोऑपरेशन की तरह कार्य करती है जिससे संतुलन बना रहता है। उन्होंने कहा कि अगर आप इस मूल सिद्धांत को समझ लें तो आप कभी कोऑपरेटिव को अप्रासंगिक नहीं कहेंगे और ना कभी ऐसा होने देंगे। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव का कोई विकल्प नहीं है, इनके ना होने से समस्या बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अगर कोऑपरेटिव को अधिक प्रासंगिक बनाना है तो इसकी ओनरशिप इसके सदस्यों के हाथ में ही होनी चाहिए।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/06/image_750x500_62a9e31c806dd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रूरल वॉयस परिचर्चा: विशेषज्ञों ने दिया कोऑपरेटिव को मजबूत बनाने पर जोर, कहा सरकारी हस्तक्षेप इनकी विफलता का एक कारण ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सर्विस, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग में इंटीग्रेटेड अप्रोच से ही कोऑपरेटिव का विकास संभव: सतीश मराठे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/integrated-approach-in-service-manufacturing-and-agriculture-sector-is-must-for-developing-cooperatives.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 18 Jun 2022 18:10:56 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/integrated-approach-in-service-manufacturing-and-agriculture-sector-is-must-for-developing-cooperatives.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रिजर्व बैंक के डायरेक्टर और सहकार भारती के संस्थापक सदस्य सतीश मराठे ने कहा है कि कोऑपरेटिव को अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्र सर्विस सेक्टर, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग में लाना होगा। इंटीग्रेटेड नजरिया अपनाने से ही उनका विकास हो सकता है। उन्होंने भारत के संदर्भ में फ्रांस, जर्मनी और नीदरलैंड्स के कोऑपरेटिव आंदोलन का अध्ययन करने का सुझाव दिया। कृषि क्षेत्र के लिए फ्रांस और नीदरलैंड तथा मैन्युफैक्चरिंग के लिए जर्मनी के मॉडल का अध्ययन किया जा सकता है। इस तरह अंतरराष्ट्रीय अनुभवों का इस्तेमाल भारत में कोऑपरेटिव के विकास में किया जा सकता है। वे रूरल वॉयस और सहकार भारती की तरफ से आयोजित &lsquo;सहकार से समृद्धिः रास्ते अनेक&rsquo; विषय पर आयोजित परिचर्चा के एक सत्र में बोल रहे थे। इस सत्र का विषय था &lsquo;सहकारिता में वैश्विक अनुभव का भारत कैसे फायदा उठाए&rsquo;।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव सेक्टर को अतीत में दो बड़े झटके लगे। पहला 1967 में जब योजना आयोग ने कोऑपरेटिव को बढ़ावा देने के साथ ये शब्द जोड़ दिए - यदि संभव हो। इससे कोऑपरेटिव को प्राथमिकता देने की बात 1967 में ही समाप्त हो गई। दूसरा धक्का 1991 में लगा जब कोऑपरेटिव सेक्टर को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। देश को आर्थिक सुधारों और उदार उदारीकरण की जरूरत थी। इस प्रक्रिया में सार्वजनिक क्षेत्र की रत्न कंपनियों और निजी क्षेत्र को बढ़ावा तो दिया गया लेकिन कोऑपरेटिव को भुला दिया गया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव को सभी देशों में ओनरशिप के एक अलग रूप के रूप में स्वीकार किया गया है। विकसित देशों में इन्हें आर्थिक या बिजनेस एंटरप्राइज के रूप में माना जाता है जबकि भारत में ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में भी कोऑपरेटिव मुनाफे में हैं लेकिन इन संस्थानों का मकसद मुनाफा कमाना नहीं। हम जानते हैं कि सामाजिक पूंजी का सबसे ज्यादा निर्माण कोऑपरेटिव के माध्यम से ही हुआ है। इन मुद्दों पर किसी भी पार्टी की सरकार ने विचार नहीं किया, जो बड़ी अड़चन है। इन मुद्दों पर राष्ट्रीय सहमति बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों में कोऑपरेटिव के हर रूप को मान्यता दी गई है, चाहे वह कॉर्पोरेट के रूप में हो एलएलपी के रूप में हो या किसी अन्य रूप में। भारत में भी ऐसा किया जा सकता है।</p>
<p>उन्होंने कोऑपरेटिव और बैंकिंग के बीच इंगेजमेंट बढ़ाने की जरूरत बताई। विकसित देशों में ऐसी व्यवस्था है। भारत में ऐसा करने के लिए निवेश नियमों में बदलाव की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा कि भारत में विकास क्रेडिट की उपलब्धता पर निर्भर है। अपनी पूंजी किसी के पास भी सीमित होती है जबकि निवेश की जरूरत हर सेक्टर में है। कोऑपरेटिव में निवेश के लिए उनका बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ जुड़ाव जरूरी है। सेबी को भी इन्हें पूंजी बाजार में जाने की अनुमति देनी चाहिए। फ्रांस में कोऑपरेटिव 'एक व्यक्ति एक वोट' की व्यवस्था को बरकरार रखते हुए पूंजी बाजार से पैसा जुटा सकते हैं। विकसित देशों में कोऑपरेटिव के लिए पूंजी जुटाने के कई रास्ते हैं जबकि भारत में इसका अभाव है। उन्होंने कहा कि दीर्घकाल में ब्याज मुक्त धन के बिना कोऑपरेटिव बड़ा असर नहीं डाल सकते हैं।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि कोऑपरेटिव के रोज का कामकाज देखने वाले मैनेजमेंट और उनकी ओनरशिप दोनों को अलग करना जरूरी है। बोर्ड को रोज का कामकाज नहीं देखना चाहिए। इसके लिए इंडोनेशिया के मॉडल का अध्ययन किया जा सकता है। इन संस्थाओं को 100 फीसदी स्वामित्व वाली कंपनी बनाने की अनुमति भी मिलनी चाहिए। सरकार के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि वह रेगुलेशन तो करे लेकिन कोऑपरेटिव का माइक्रोमैनेजमेंट ना करे। कोऑपरेटिव को सरकारी मदद साझीदार की तरह होनी चाहिए। जब संस्था अपने पैरों पर खड़ी हो जाए तो सरकार को उससे बाहर निकल जाना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें जो कानून बनाती हैं उसका लक्ष्य कोऑपरेटिव के लिए बिजनेस का वातावरण बेहतर बनाना होना चाहिए ना कि उन पर नियंत्रण करना। सभी देशों में कॉपरेटिव के लिए मजबूत रेगुलेशन और सुपरविजन की व्यवस्था है। लेकिन उनका माइक्रोमैनेजमेंट नहीं किया जाता है। उन्हें कामकाज की पूरी आजादी होती है।</p>
<p>मराठे के अनुसार बहुत से नए सेक्टर में कोऑपरेटिव की पहल की आवश्यकता है। कंज्यूमर कोऑपरेटिव भी इनमें एक है। बीमा और फाइनेंशियल सेक्टर जैसे क्षेत्रों में कॉपरेटिव को आना चाहिए। उन्होंने कहा कि ई-कॉमर्स का जिस तेजी से विस्तार हो रहा है उसे देखते हुए कंज्यूमर कोऑपरेटिव को मजबूत करने की जरूरत है।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/06/image_750x500_62adc85dadd9a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सर्विस, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग में इंटीग्रेटेड अप्रोच से ही कोऑपरेटिव का विकास संभव: सतीश मराठे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/06/image_750x500_62adc85dadd9a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कोऑपरेटिव को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, इससे युवाओं की रुचि बढ़ेगीः डॉ. चंद्रपाल सिंह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/dr-chandrapal-batted-for-including-cooperative-in-syllabus.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 17 Jun 2022 12:05:42 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/dr-chandrapal-batted-for-including-cooperative-in-syllabus.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आज युवा कोऑपरेटिव में रुचि नहीं लेते। अगर कोऑपरेटिव को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए तो युवाओं को इसकी संभावनाओं का पता चलेगा और उनकी रुचि भी बनेगी। जिन कोऑपरेटिव सोसायटी का कामकाज बंद पड़ा है उन्हें युवाओं को सौंपा जा सकता है। इससे उन्हें तो रोजगार मिलेगा ही, वे दूसरों को भी रोजगार देने की स्थिति में होंगे। यह कहना है इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस, एशिया पैसिफिक के प्रेसिडेंट और कृभको के चेयरमैन डॉ. चंद्रपाल सिंह का। वे रूरल वॉयस और सहकार भारती की तरफ से आयोजित &lsquo;सहकार से समृद्धिः रास्ते अनेक&rsquo; विषय पर आयोजित एक परिचर्चा के दूसरे सत्र में बोल रहे थे। इस सत्र का विषय था &lsquo;सहकारिता में वैश्विक अनुभव का भारत कैसे फायदा उठाए&rsquo;। इस चर्चा को आप ऊपर दिए वीडियो लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं।</p>
<p>डॉ. चंद्रपाल ने कहा कि बिना कोऑपरेटिव आंदोलन के देश को आर्थिक रूप से मजबूत नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत में सहकारिता आंदोलन कृषि आधारित है। कृषि मजबूत हो तो सहकारिता भी मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि गरीबी दुनिया के हर देश में हैं। उन्हें सहकारी संस्थाओं के माध्यम से ही लाभ पहुंचाया जा सकता है। जिन देशों में ऐसा हुआ है, वहां लोग सक्षम हुए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आज युवा अच्छे पैकेज के कारण कॉरपोरेट सेक्टर की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उन्हें कोऑपरेटिव से जोड़ने की आवश्यकता है। उच्च शिक्षा में अगर एक विषय कोऑपरेटिव रखा जाए तो युवाओं को इसकी संभावनाओं का पता चलेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं के अलावा महिलाओं को भी कोऑपरेटिव आंदोलन से जोड़ने की आवश्यकता है। सोसायटी की आधी सदस्यता उन्हें दी जानी चाहिए।</p>
<p>इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस (आईसीए) का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया की 12 फ़ीसदी आबादी कोऑपरेटिव से जुड़ी है। पूरे विश्व में 30 लाख के आसपास कोऑपरेटिव हैं। दुनिया की बड़ी कोऑपरेटिव से हमें सीखने की आवश्यकता है, उनके विचारों को लिया जा सकता है। कोऑपरेटिव संस्थाओं को प्रोफेशनल तरीके से चलाने के लिए उन्होंने प्रशिक्षण की जरूरत बताई। कहा कि लोगों को अपनी जिम्मेदारियां ही नहीं मालूम। चुने गए लोगों को प्रोफेशनल तरीके से काम करना सिखाना होगा।&nbsp;</p>
<p><strong>सेवा, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग तीनों में कोऑपरेटिव जरूरी</strong></p>
<p>भारतीय रिजर्व बैंक के डायरेक्टर सतीश मराठे ने इस सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि उदारीकरण जरूरी है, लेकिन 1991 में जो उदारीकरण किया गया उसमें कोऑपरेटिव को नजरअंदाज किया गया। निजी कंपनियों और सरकारी रत्न कंपनियों को तरजीह दी गई। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव को अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्र सर्विस सेक्टर, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग में लाना होगा तभी उनका विकास हो सकता है। उन्होंने फ्रांस, जर्मनी और नीदरलैंड्स के कोऑपरेटिव आंदोलन का अध्ययन करने का सुझाव दिया। कृषि क्षेत्र के लिए फ्रांस और नीदरलैंड तथा मैन्युफैक्चरिंग के लिए जर्मनी के मॉडल का अध्ययन किया जा सकता है।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कोऑपरेटिव और बैंकिंग के बीच इंगेजमेंट बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने यह भी कहा कि कोऑपरेटिव के रोज का कामकाज देखने वाले मैनेजमेंट और उनकी ओनरशिप दोनों को अलग करना जरूरी है। इन संस्थाओं को 100 फीसदी स्वामित्व वाली कंपनी बनाने की अनुमति भी मिलनी चाहिए। सरकार के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि वह रेगुलेशन तो करे लेकिन कोऑपरेटिव का माइक्रोमैनेजमेंट ना करे। कोऑपरेटिव को सरकारी मदद साझीदार की तरह होनी चाहिए। जब संस्था अपने पैरों पर खड़ी हो जाए तो सरकार को उससे बाहर निकल जाना चाहिए। उन्होंने कंज्यूमर कोऑपरेटिव सोसायटी की सख्त जरूरत बताई जो अभी लगभग खत्म हो गई हैं।</p>
<p><strong>पांच विकसित देशों में कोऑपरेटिव से सीखने की जरूरत</strong></p>
<p>खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के भारत में असिंसटेंट एफएओआर डॉ. कोंडा रेड्डी चावा ने पांच विकसित देशों जापान, डेनमार्क, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड और फ्रांस से सीखने की जरूरत बताई। जापान में 694 क्षेत्रीय कोऑपरेटिव का एक राष्ट्रीय समूह है, जिसका नाम जापान एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव है। ये कोऑपरेटिव किसानों को इनपुट सप्लाई करने से लेकर पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन और मार्केटिंग तक का काम करते हैं। वे किसानों को वित्तीय सेवाएं भी उपलब्ध कराते हैं। यह जापान के छोटे किसान बहुल कोऑपरेटिव सेक्टर की रीढ़ बन गया है। जापान मॉडल जब बांग्लादेश में लागू किया गया तो उससे बिचौलियों को खत्म करने में मदद मिली। इस तरह कोऑपरेटिव जापान की अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ बनाना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि डेनमार्क में कृषि कोऑपरेटिव उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक सब में सक्रिय है। ये कृषि उत्पादों के बड़े निर्यातक हैं। कंपनी का मालिकाना हक पूरी तरह सदस्यों का होता है और मुनाफा उनमें बांटा जाता है। कोऑपरेटिव की भूमिका पूरे फूड चेन में होती है। इन्होंने खाद्य सुरक्षा और इनोवेशन में भी प्रमुख भूमिका निभाई है। उन्होंने खुद को बाजार में एक ताकत के रूप में खड़ा किया और किसानों के उत्पादों को भी लोकप्रियता दिलाई। डेनमार्क से हमें सीख मिलती है कि स्थानीय किसानों को कोऑपरेटिव से जोड़ना जरूरी है। यह भी जरूरी है कि किसानों पर कोऑपरेटिव थोपने के बजाय उनके पास ही इसका मालिकाना हक रहे। कोऑपरेटिव लंबे समय में ग्रामीण आबादी में गरीबी दूर करने भी सहायक रहे हैं।</p>
<p>नीदरलैंड में 41 कोऑपरेटिव हैं। वहां नियम कानून कोऑपरेटिव के पक्ष में हैं। वहां किसी भी कोऑपरेटिव में ज्यादातर सदस्य एक जैसे ही होते हैं। कोऑपरेटिव के ढांचे में जो बातें प्रासंगिक नहीं रह जाती हैं, उन्हें लगातार दूर किया जाता है। उन्होंने बताया कि न्यूजीलैंड के 40 कोऑपरेटिव हर साल 28 अरब डॉलर का कारोबार करते हैं। छोटा देश होने के बावजूद 29 फीसदी लोग कोऑपरेटिव के सदस्य हैं। देश की जीडीपी में इनका योगदान 19 फीसदी है। कोऑपरेटिव की एक बॉडी है जो हर तरह की संस्थाओं को आपस में जोड़ती है। फ्रांस में करीब एक हजार कोऑपरेटिव सदस्यों को सप्लाई चेन समेत विभिन्न क्षेत्रों में मदद करते हैं। वे किसानों के उत्पादों की मार्केटिंग भी करते हैं। इससे ज्यादा से ज्यादा लोग सदस्यता लेने को इच्छुक रहते हैं।</p>
<p><strong>सेवा क्षेत्र में कोऑपरेटिव के लिए संभावनाएं, सोशल कोऑपरेटिव की भी जरूरत</strong></p>
<p>इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस, एशिया-पैसिफिक के सीईओ बालसुब्रमण्यन जी. अय्यर ने कहा कि सर्विस सेक्टर में कोऑपरेटिव के लिए अनेक संभावनाएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि देश की जीडीपी में सर्विस सेक्टर का योगदान 50 फ़ीसदी से अधिक है लेकिन इसका बड़ा हिस्सा असंगठित है। अमेरिका का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां सफाई कर्मियों ने मिलकर कोऑपरेटिव खड़ा किया है। इसके सदस्यों को निजी कंपनियों की तुलना में अधिक आमदनी होती है। इसके अलावा कोऑपरेटिव को जो मुनाफा होता है उसमें उनकी हिस्सेदारी भी होती है। अय्यर ने भी कोऑपरेटिव के लिए पूंजी जुटाने के तरीकों पर विचार करने की बात कही।</p>
<p>उन्होंने सोशल कोऑपरेटिव की भी जरूरत बताई। कहा कि देश की बड़ी आबादी बुजुर्ग हो रही है। उनके लिए कोऑपरेटिव सेक्टर क्या कर रहा है। कोऑपरेटिव अस्पताल जैसे कदम उठाए जाने चाहिए। इससे लोगों को कम कीमत में अच्छी सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से इसमें काफी मदद मिल सकती है। इन संस्थाओं के लिए पूंजी जुटाने का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि कई देशों में इसके लिए व्यवस्था की गई है। संयुक्त अरब अमीरात में भी कोऑपरेटिव को आईपीओ लाने और पूंजी बाजार से धन जुटाने की अनुमति दी गई है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कोऑपरेटिव को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, इससे युवाओं की रुचि बढ़ेगीः डॉ. चंद्रपाल सिंह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रूरल वॉयस परिचर्चा: कोऑपरेटिव में गवर्नेंस बड़ा मुद्दा, इनमें चुनाव की जिम्मेदारी चुनाव आयोग को देने का सुझाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/speakers-in-rural-voice-dialogue-suggest-election-through-election-commission-in-cooperatives.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 16 Jun 2022 12:11:18 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/speakers-in-rural-voice-dialogue-suggest-election-through-election-commission-in-cooperatives.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अगर कोऑपरेटिव में चुनाव की जिम्मेदारी चुनाव आयोग को दे दी जाए तो इससे ना सिर्फ चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवाद कम होंगे बल्कि कोऑपरेटिव के कामकाज में भी पारदर्शिता आएगी। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस करने वाले मीडिया संस्थान रूरल वॉयस और सहकार भारती की तरफ से बुधवार को 'सहकार से समृद्धि: रास्ते अनेक' विषय पर आयोजित एक परिचर्चा में यह महत्वपूर्ण सुझाव दिया गया। इस परिचर्चा का मकसद सहकारिता आंदोलन की अड़चनों को पहचानना और सहकारिता को आगे बढ़ाने के लिए नई संभावनाओं पर विचार करना था। परिचर्चा में सहकारिता क्षेत्र की कई जानी-मानी हस्तियों ने हिस्सा लिया। <em>ऊपर दिए वीडियो लिंक पर क्लिक करके आप पूरा सत्र देख सकते हैं।</em></p>
<p><strong>टेक्नोलॉजी से आएगी पारदर्शिता: सिराज हुसैन</strong></p>
<p>'बेहतर आय के लिए कोऑपरेटिव को मजबूत करना' विषय पर पहले सत्र की शुरुआत करते हुए पूर्व कृषि सचिव सिराज हुसैन ने नए सहकारिता मंत्रालय के गठन को अच्छा कदम बताते हुए कहा कि इसे कोऑपरेटिव के कामकाज में पारदर्शिता लाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि कोऑपरेटिव में टेक्नोलॉजी का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इससे उनके काम में पारदर्शिता आएगी। उन्होंने बताया कि तेलंगाना में सभी प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) का कंप्यूटराइजेशन हो गया है जबकि उत्तर प्रदेश में अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर किसी कोऑपरेटिव में गड़बड़ी होती है तो टेक्नोलॉजी से उसका जल्दी पता लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि व्यापक चर्चा से ही बेहतर नीति बनेगी&nbsp;</p>
<p>पूर्व कृषि सचिव के अनुसार सरकार को सीधे कोऑपरेटिव को रेगुलेट नहीं करना चाहिए वरना इससे तनाव बढ़ेगा। सरकार इन संस्थाओं को रेगुलेट तो करें लेकिन इस तरह कि सदस्यों को कोई नुकसान ना हो। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कोऑपरेटिव का आकार बढ़ता जाता है उसकी वित्तीय शक्ति भी बढ़ती है। ऐसे में उन पर नियंत्रण के लिए लोगों में होड़ मचती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बीते दो दशक में कोऑपरेटिव का असर कम हुआ है। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में डेयरी कोऑपरेटिव का हिस्सा लगातार कम होता जा रहा है। कोऑपरेटिव में होने वाली खरीद सरकारी ई-कॉमर्स पोर्टल जैम के जरिए किए जाने के फैसले का उन्होंने स्वागत किया और कहा कि इससे पारदर्शिता आएगी।</p>
<p><strong>किसानों को अधिक कीमत मिले और लागत कम हो: जयेन मेहता</strong></p>
<p>अमूल के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर जयेन मेहता ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए जरूरी है कि उन्हें उनके उत्पाद की अधिक से अधिक कीमत मिले और उनकी लागत कम हो। अमूल इसी मॉडल पर काम करता है। भारत में डेयरी कोऑपरेटिव की संभावनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अभी दुनिया का 22 फ़ीसदी दूध उत्पादन भारत में होता है। 10 साल में यह 35 फ़ीसदी हो जाएगा। इन 10 वर्षों में जो अतिरिक्त दूध उत्पादन होगा उसका भी दो तिहाई भारत से आएगा। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव किसानों की उत्पादकता बढ़ाने उनका खर्च घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने बताया कि अमूल उपभोक्ताओं से दूध की जो कीमत लेता है किसानों को उसका 85 फ़ीसदी मिलता है। अमूल की उपलब्धियां बताते हुए उन्होंने कहा कि करीब 36 लाख किसान इससे जुड़े हैं। कोई भी किसान इससे आसानी से जुड़ सकता है। इस संस्था का सालाना टर्नओवर 61 हजार करोड़ रुपए पहुंच गया है।</p>
<p><strong>क्रेडिट कोऑपरेटिव को बीमा कवरेज मिले: डॉ उदय जोशी</strong></p>
<p>सहकार भारती के राष्ट्रीय महासचिव डॉ उदय जोशी ने कोऑपरेटिव में सुधार को जरूरी बताते हुए कहा कि इनमें मलिन छवि की बात काफी समय से चलती आ रही है। पहले भी कहा गया है कि कोऑपरेटिव विफल हुए हैं लेकिन इन्हें सफल होना चाहिए। संविधान के 97वें संशोधन के बाद उसका ऑपरेशनल हिस्सा खारिज किया गया लेकिन यह बात खारिज नहीं हुई कि कोऑपरेटिव बनाना मौलिक अधिकार है। देश में 95000 से अधिक प्राथमिक कृषि कोऑपरेटिव सोसाइटी (पैक्स) हैं। इनमें कुछ तो काम नहीं कर रही लेकिन ज्यादातर सुचारू रूप से चल रही हैं। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव के सदस्यों को ट्रस्टीशिप की भावना से काम करना चाहिए। कॉपरेटिव में रोजगार सृजन की क्षमता को देखते हुए इनकी छवि सुधारने की जरूरत है।</p>
<p>डॉ जोशी ने कॉपरेटिव के प्रति लोगों का नजरिया बदलने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि बार-बार रजिस्ट्रार के पास जाना अनुमति लेना इन सब में काफी समय जाया होता है। उन्होंने कोऑपरेटिव सोसाइटी में चुनाव की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर देते हुए कहा कि चुनाव आयोग को इसकी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इससे इन संस्थाओं में चुनाव को लेकर विवाद भी कम होंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नए मंत्रालय के गठन के बाद सहकारिता से जुड़े कानून में संशोधन के अनेक सुझाव आए हैं, लेकिन सहकार भारती का मानना है कि पहले राष्ट्रीय नीति तैयार की जानी चाहिए फिर उस नीति के आधार पर संशोधन किए जाने चाहिए। इससे आगे चलकर बार-बार बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव में जरूरत के मुताबिक पूंजी निवेश नहीं हो रहा है। इनके लिए बांड, डिबेंचर, प्रेफरेंस शेयर आदि के जरिए धन जुटाने के रास्ते तलाशने की जरूरत है। पैक्स में डिपॉजिट मोबिलाइजेशन की सुविधा है, इसे और बढ़ाया जाए तो यह और बेहतर तरीके से काम करेंगे।&nbsp;</p>
<p>डॉ जोशी ने सभी क्रेडिट सोसाइटी को डिपॉजिट इंश्योरेंस कवरेज की जरूरत बताई। क्रेडिट सोसाइटी को काफी नकदी की हैंडलिंग करनी पड़ती है इसलिए उन्हें नेशनल पेमेंट सिस्टम में मेंबरशिप मिलनी चाहिए। इससे कैशलेस ट्रांजैक्शन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि पैक्स ग्रामीण क्षेत्र में एफपीओ का काम कर सकते हैं। इसके लिए नियमों में कुछ बदलाव करने पड़ेंगे। भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने के लिए पैक्स को मजबूत करना जरूरी है।</p>
<p><strong>एनसीयूआई अपनी भूमिका निभाने में नाकाम: अजय जाखड़</strong></p>
<p>भारत कृषक समाज के चेयरमैन अजय वीर जाखड़ ने कोऑपरेटिव से जुड़े लोगों के प्रशिक्षण की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इस कार्य के लिए एनसीयूआई का गठन किया गया लेकिन उसके काम को संतोषजनक नहीं कहा जा सकता है। ज्यादातर अधिकारी कोऑपरेटिव से जुड़े कानूनों से परिचित ही नहीं हैं। अधिकारी स्तर पर पारदर्शिता नहीं होती। इन परिस्थितियों को बदलना जरूरी है। जाखड़ ने कहा कि ज्यादातर कोऑपरेटिव नहीं चाहते कि वह अपने मुनाफे का हिस्सा एनसीयूआई के साथ साझा करें। कोऑपरेटिव क्षेत्र में सफलता के लिए जरूरी है कि उन कारणों को भी समझा जाए जिनकी वजह से कोऑपरेटिव विफल हुई हैं। उन्होंने कहा कि 1965 में भी कोऑपरेटिव में सुधार के लिए एक रिपोर्ट आई थी। उसमें जो मुद्दे बताए गए थे वह मुद्दे आज भी बरकरार हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव सरकार की मदद के बिना नहीं चल सकते। लेकिन सरकारी मदद के साथ सरकार यानी राजनीतिक हस्तक्षेप भी बढ़ने लगता है। कोऑपरेटिव के कामकाज में हस्तक्षेप बढ़ने के कारण ही अब एफपीओ को तरजीह दी जाने लगी है। हालांकि एफपीओ के नियमों में भी कुछ समस्याएं हैं इसकी मुख्य वजह यह है कि नियम बनाते वक्त विदेशी सलाहकारों से बात की जाती है जो जमीनी हकीकत से वाकिफ नहीं होते।</p>
<p>जाखड़ ने कहा कि कोऑपरेटिव बैंकों को बड़े स्केल की जरूरत है। इसके बिना वे प्रतिस्पर्धी नहीं बन सकते। इसके लिए उन्होंने जिला कोऑपरेटिव बैंकों को राज्यस्तरीय बैंकों के साथ जोड़ने का सुझाव दिया। हालांकि उन्होंने पूंजी जुटाने के लिए डॉ जोशी के डिबेंचर और शेयर जारी करने के सुझाव पर असहमति जताई। उन्होंने यह भी कहा कि जो कोऑपरेटिव काम नहीं कर रही है उन्हें चुनाव प्रक्रिया से बाहर किया जाना चाहिए।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रूरल वॉयस परिचर्चा: कोऑपरेटिव में गवर्नेंस बड़ा मुद्दा, इनमें चुनाव की जिम्मेदारी चुनाव आयोग को देने का सुझाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रूरल वॉयस परिचर्चा: सहकारी समितियों में पारदर्शिता और इनके लिए फंड जुटाने के रास्ते तलाशना जरूरी, कोऑपरेटिव को पाठ्यक्रम में शामिल करने का भी सुझाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/transparency-and-ways-to-raise-funds-for-cooperative-is-necessary.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 15 Jun 2022 19:19:12 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/transparency-and-ways-to-raise-funds-for-cooperative-is-necessary.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस करने वाले मीडिया संस्थान रूरल वॉयस और सहकार भारती ने बुधवार को सहकारिता पर एक परिचर्चा का आयोजन किया। इसका मकसद सहकारिता आंदोलन की अड़चनों को पहचानना और सहकारिता को आगे बढ़ाने के लिए नई संभावनाओं पर विचार करना था। परिचर्चा में सहकारिता क्षेत्र की कई जानी-मानी हस्तियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने सहकारी समितियों के कामकाज में पारदर्शिता लाने, इसके लिए टेक्नोलॉजी को अपनाने, कोऑपरेटिव के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने, इनके लिए फंड जुटाने के नए रास्ते तलाशने, युवाओं को कोऑपरेटिव से जोड़ने के लिए इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने और सर्विस सेक्टर में कोऑपरेटिव का हस्तक्षेप बढ़ाने जैसे सुझाव दिए।</p>
<p>परिचर्चा का विषय था 'सहकार से समृद्धि: रास्ते अनेक'। इसमें में तीन सत्र रखे गए थे। पहले सत्र का विषय था बेहतर आय के लिए कोऑपरेटिव को मजबूत करना। दूसरे सत्र का विषय था सहकारिता में वैश्विक अनुभव का भारत कैसे फायदा उठाए। तीसरे और आखिरी सत्र का विषय था कोऑपरेटिव को कैसे प्रासंगिक बनाया जाए।</p>
<p>पहले सत्र की शुरुआत करते हुए पूर्व कृषि सचिव सिराज हुसैन ने नए सहकारिता मंत्रालय के गठन को अच्छा कदम बताते हुए कहा कि इसे कोऑपरेटिव के कामकाज में पारदर्शिता लाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि कोऑपरेटिव में टेक्नोलॉजी का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इससे उनके काम में पारदर्शिता आएगी। उन्होंने बताया कि तेलंगाना में सभी प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) का कंप्यूटराइजेशन हो गया है जबकि उत्तर प्रदेश में अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर किसी कोऑपरेटिव में गड़बड़ी होती है तो टेक्नोलॉजी से उसका जल्दी पता लगाया जा सकता है।</p>
<p>अमूल के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर जयेन मेहता ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए जरूरी है कि उन्हें उनके उत्पाद की अधिक से अधिक कीमत मिले और उनकी लागत कम हो। अमूल इसी मॉडल पर चलता है। भारत में डेयरी कोऑपरेटिव की संभावनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अभी दुनिया का 22 फ़ीसदी दूध उत्पादन भारत में होता है। 10 साल में यह 35 फ़ीसदी हो जाएगा। इन 10 वर्षों में जो अतिरिक्त दूध उत्पादन होगा उसका भी एक तिहाई भारत से आएगा। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव किसानों की उत्पादकता बढ़ाने उनका खर्च घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>सहकार भारती के राष्ट्रीय महासचिव डॉ उदय जोशी ने कहा कि कोऑपरेटिव के सदस्यों को ट्रस्टीशिप की भावना से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नए मंत्रालय के गठन के बाद सहकारिता से जुड़े कानून में संशोधन के अनेक सुझाव आए हैं, लेकिन सहकार भारती का मानना है कि पहले राष्ट्रीय नीति तैयार की जानी चाहिए फिर उस नीति के आधार पर संशोधन किए जाने चाहिए। इससे आगे चलकर बार-बार बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव में जरूरत के मुताबिक पूंजी निवेश नहीं हो रहा है। इनके लिए बांड, डिबेंचर, प्रेफरेंस शेयर आदि के जरिए धन जुटाने के रास्ते तलाशने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने के लिए पैक्स को मजबूत करना जरूरी है।&nbsp;</p>
<p>भारत कृषक समाज के चेयरमैन अजय वीर जाखड़ ने कोऑपरेटिव से जुड़े लोगों के प्रशिक्षण की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इस कार्य के लिए एनसीयूआई का गठन किया गया लेकिन उसके काम को संतोषजनक नहीं कहा जा सकता है। ज्यादातर अधिकारी कोआपरेटिव से जुड़े कानूनों से परिचित ही नहीं हैं। अधिकारी स्तर पर पारदर्शिता नहीं होती। इन परिस्थितियों को बदलना जरूरी है। जाखड़ ने कहा कि कोऑपरेटिव क्षेत्र में सफलता के लिए जरूरी है कि उन कारणों को भी समझा जाए जिनकी वजह से कोऑपरेटिव विफल हुई हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/06/image_750x_62a9e2d630a3b.jpg" alt="" /></p>
<p>दूसरे सत्र में चर्चा की शुरुआत करते हुए इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस, एशिया-पैसिफिक के प्रेसिडेंट और कृभको के चेयरमैन डॉ. चंद्रपाल सिंह ने कहा कि बिना कोऑपरेटिव आंदोलन के देश को आर्थिक रूप से मजबूत नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत में सहकारिता आंदोलन कृषि आधारित है। कृषि मजबूत हो तो सहकारिता भी मजबूत होगी। इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस (आईसीए) का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया की 12 फ़ीसदी आबादी कोऑपरेटिव से जुड़ी है। पूरे विश्व में 30 लाख के आसपास कोऑपरेटिव हैं। युवाओं को कोऑपरेटिव से जोड़ने के लिए उन्होंने उच्च शिक्षा में कोऑपरेटिव को एक विषय के तौर पर जोड़ने का सुझाव दिया। कोऑपरेटिव संस्थाओं को प्रोफेशनल तरीके से चलाने के लिए उन्होंने प्रशिक्षण की जरूरत बताई।</p>
<p>भारतीय रिजर्व बैंक के डायरेक्टर सतीश मराठे ने कहा कि कोऑपरेटिव को अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्र सर्विस सेक्टर, एग्रीकल्चर और मैन्युफैक्चरिंग में लाना होगा तभी उनका विकास हो सकता है। उन्होंने फ्रांस, जर्मनी और नीदरलैंड्स के कोऑपरेटिव आंदोलन का अध्ययन करने का सुझाव दिया। कृषि क्षेत्र के लिए फ्रांस और नीदरलैंड तथा मैन्युफैक्चरिंग के लिए जर्मनी के मॉडल का अध्ययन किया जा सकता है। उन्होंने कोऑपरेटिव और बैंकिंग के बीच इंगेजमेंट बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने यह भी कहा कि कोऑपरेटिव के रोज का कामकाज देखने वाले मैनेजमेंट और उनकी ओनरशिप दोनों को अलग करना जरूरी है। सरकार के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि वह रेगुलेशन तो करे लेकिन कोऑपरेटिव का माइक्रोमैनेजमेंट ना करे। उन्होंने कहा कि एग्रो प्रोसेसिंग के क्षेत्र में कॉपरेटिव के विकास की काफी संभावनाएं हैं।</p>
<p>खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के कोंडा रेड्डी चावा ने जापान, डेनमार्क, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड और फ्रांस के अध्ययनों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि डेनमार्क में कृषि कोऑपरेटिव उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक सब में सक्रिय है। भारत में भी किसानों को बड़े स्तर पर जोड़ने की जरूरत है। न्यूजीलैंड का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां किसान कई बड़े बिजनेस और उद्योग संभाल रहे हैं।</p>
<p>इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस, एशिया-पैसिफिक के सीईओ बालू अय्यर ने कहा कि सर्विस सेक्टर में कोऑपरेटिव के लिए अनेक संभावनाएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि देश की जीडीपी में सर्विस सेक्टर का योगदान 50 फ़ीसदी से अधिक है लेकिन इसका बड़ा हिस्सा असंगठित है। अमेरिका का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां सफाई कर्मियों ने मिलकर कोऑपरेटिव खड़ा किया है। इसके सदस्यों को निजी कंपनी की तुलना में अधिक आमदनी होती है। इसके अलावा कोऑपरेटिव को जो मुनाफा होता है उसमें उनकी हिस्सेदारी भी होती है। अय्यर ने भी कोऑपरेटिव के लिए पूंजी जुटाने के तरीकों पर विचार करने की बात कही।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/06/image_750x_62a9e31d052e9.jpg" alt="" /></p>
<p>तीसरे सत्र में इरमा के डॉ. शाश्वत विश्वास ने कोऑपरेटिव के कामकाज में पेशेवर तौर तरीके अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव के साथ निजी क्षेत्र को भी सरकार की मदद की जरूरत पड़ती है लेकिन सरकार निजी कंपनियों के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करती जबकि कोऑपरेटिव के काम में उसका हस्तक्षेप होता है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर कोऑपरेटिव आज भी बहुत पुराने तौर तरीके से चल रहे हैं। टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से उनके कामकाज में पारदर्शिता लाई जा सकती है। उन्होंने कोऑपरेटिव के गवर्नेंस में सुधार पर भी जोर दिया।&nbsp;</p>
<p>एनएफसीएसएफ लिमिटेड के एमडी प्रकाश नायकनवरे ने विभिन्न क्षेत्रों में कोऑपरेटिव की अहमियत बताते हुए कहा कि महाराष्ट्र की शुगर कोऑपरेटिव मिल चलाने के साथ अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, शिक्षण संस्थान, कंज्यूमर स्टोर, कॉपरेटिव बैंक सब कुछ चला रहे हैं। ऐसा दूसरी जगहों और दूसरे क्षेत्रों में भी हो सकता है। उन्होंने भी कॉपरेटिव के कामकाज में प्रोफेशनलिज्म की कमी का मुद्दा उठाया और कहा कि प्रशिक्षण तथा टेक्नोलॉजी के जरिए इसे दूर किया जा सकता है। उन्होंने शुगर कोऑपरेटिव को दीर्घकालिक लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कॉपरेटिव को अपनी मार्केटिंग पर भी ध्यान देना चाहिए जो अभी वे नहीं करते हैं।</p>
<p>नैकॉफ चेयरमैन राम इकबाल सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम में जो सुझाव दिए जा रहे हैं उन पर सरकार को अमल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि छोटे किसानों के लिए सरकारी अधिकारियों के पास जाना और अपनी बात कह पाना मुश्किल होता है। इसलिए कॉपरेटिव के नियम आसान होने चाहिए। राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संगठनों की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव का कोई विकल्प नहीं है।</p>
<p>सहकार भारती के प्रेसिडेंट डॉ डीएन ठाकुर ने कहा कि कोऑपरेटिव ना कभी अप्रासंगिक हुए और ना कभी हो सकते हैं। चाहे खाद्य सुरक्षा हो, ऊर्जा की सुरक्षा हो या सामाजिक सामंजस्य यह सब कोऑपरेटिव के जरिए ही सुनिश्चित हो सकता है। अभी तक कोई भी कोऑपरेटिव अंदरूनी कारणों से नहीं बल्कि बाहरी तत्वों के कारण विफल हुआ है। कोऑपरेटिव की तुलना प्रकृति से करते हुए उन्होंने कहा की प्रकृति की तरह इसमें भी संतुलन जरूरी है। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव का कोई विकल्प नहीं है। इसके बिना समस्या बढ़ेगी। कोऑपरेटिव को प्रासंगिक बनाने के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण और जागरूकता जरूरी है।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/06/image_750x500_62a9e29c2adbf.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रूरल वॉयस परिचर्चा: सहकारी समितियों में पारदर्शिता और इनके लिए फंड जुटाने के रास्ते तलाशना जरूरी, कोऑपरेटिव को पाठ्यक्रम में शामिल करने का भी सुझाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको के 2025 तक 10 नैनो उर्वरक प्लांट होंगे, एजीएम में  20 फ़ीसदी लाभांश की घोषणा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-to-have-10-nano-fertiliser-plant-by-2025-announces-20-percent-dividend.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 03 Jun 2022 08:50:26 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-to-have-10-nano-fertiliser-plant-by-2025-announces-20-percent-dividend.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सहकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी उर्वरक उत्पादक और विपपण करने वाली संस्था इफको को वित्त वर्ष 2021-22 में 2598 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड कर पूर्व मुनाफा हुआ है। नई दिल्ली में एक जून को आयोजित इफको की 51वीं सालाना आमसभा (एजीएम) में चेयरमैन दिलीप संघाणी ने यह जानकारी दी। उन्होंने पिछले वित्त वर्ष के लिए 20 फ़ीसदी लाभांश की भी घोषणा की। एजीएम में उपस्थित लोगों को नई किसान और सहकार नीतियों के साथ इफको के नए नैनो यूरिया और इसकी अन्य सेवाओं के बारे में बताया गया। नैनो यूरिया 31 मई 2021 को लांच किया गया था। लिक्विड नैनो यूरिया की आधे लीटर की बोतल में बिक्री होती है।</p>
<p>इस मौके पर इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. यू एस अवस्थी ने बताया कि इस वर्ष नैनो उर्वरकों की आठ करोड़ बोतल बनाने का लक्ष्य है। इससे 24000 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत होगी। अगले साल 25 करोड़ बोतल बनाने का लक्ष्य है जिससे देश की 75000 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा बचेगी। उन्होंने बताया कि 2025 तक इफको के 10 नैनो प्लांट होंगे जहां नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, जिंक, सल्फर, कॉपर आदि बनाए जाएंगे।</p>
<p>डॉ. अवस्थी ने कहा कि आत्मनिर्भर बनने के लिए केमिकल पर निर्भरता खत्म करना जरूरी है। इफको के वैज्ञानिक इसी दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादा हीटवेव, बेमौसम बारिश, ज्यादा ठंड, फसलों में कीड़े लगना इन सब का कारण वातावरण का प्रदूषण है जो जीवाश्म ईंधन से होता है। उर्वरक, कीटनाशक, प्लास्टिक यह सब जीवाश्म ईंधन से ही बनते हैं। हम इस ईंधन का आयात करते हैं। नैनो टेक्नोलॉजी से हम इन पर अपनी निर्भरता को कम कर सकते हैं।</p>
<p>डॉ. अवस्थी ने कहा कि अभी हम किसानों को 50 फ़ीसदी यूरिया और 50 फ़ीसदी नैनो उर्वरक का इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं। धीरे-धीरे हम यह प्रयास कर रहे हैं कि यूरिया, डीएपी या अन्य रसायनों की जरूरत ही ना पड़े। इफको के डिविडेंड की चर्चा करते हुए डॉ. अवस्थी ने कहा कि हमने अगले 25 वर्षों के लिए 20 फ़ीसदी डिविडेंड के लायक पैसा जमा कर लिया है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार नियमों में ढील दे तो डिविडेंड बढ़ाया भी जा सकता है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको के 2025 तक 10 नैनो उर्वरक प्लांट होंगे, एजीएम में  20 फ़ीसदी लाभांश की घोषणा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारिता सम्मेलन को संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री मोदी, नैनो यूरिया प्लांट का भी करेंगे उद्घाटन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/pm-to-address-a-seminar-of-leaders-of-various-cooperative-institutions-on-sahakar-se-samriddhi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 27 May 2022 15:43:02 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/pm-to-address-a-seminar-of-leaders-of-various-cooperative-institutions-on-sahakar-se-samriddhi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को गुजरात के गांधीनगर में विभिन्न सहकारी संस्थानों के प्रमुखों को 'सहकार से समृद्धि' विषय पर संबोधित करेंगे। शनिवार को ही वे गुजरात के कलोल में सार्वजनिक क्षेत्र की उर्वरक कंपनी इफको के नैनो यूरिया प्लांट का उद्घाटन करेंगे।</p>
<p>गुजरात का कोऑपरेटिव सेक्टर पूरे देश के लिए रोल मॉडल रहा है। प्रदेश के कोऑपरेटिव सेक्टर में 84 हजार से अधिक सोसाइटी हैं। इन सोसाइटी से 2.31 करोड़ सदस्य जुड़े हुए हैं। राज्य में सहकारिता आंदोलन को और मजबूत बनाने के लिए विभिन्न सहकारी संस्थाओं के शीर्ष अधिकारियों का एक सेमिनार आयोजित किया जा रहा है। शनिवार को आयोजित होने वाले इस सेमिनार का विषय है सहकार से समृद्धि। प्रदेश की विभिन्न सहकारी संस्थाओं के सात हजार से अधिक प्रतिनिधि इस सेमिनार में हिस्सा लेंगे।</p>
<p>शनिवार को ही प्रधानमंत्री कलोल में इफको के नैनो यूरिया (लिक्विड) प्लांट का उद्घाटन करेंगे। यह प्लांट 175 करोड़ रुपए की लागत से बना है। यह अत्याधुनिक उर्वरक प्लांट नैनो यूरिया के इस्तेमाल से फसलों की उपज बढ़ाने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर स्थापित किया गया है। इस प्लांट में 500 मिलीलीटर वाली 1.5 लाख बोतल लिक्विड नैनो यूरिया का उत्पादन रोजाना हो सकेगा।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारिता सम्मेलन को संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री मोदी, नैनो यूरिया प्लांट का भी करेंगे उद्घाटन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ग्रामीण युवाओं में सहकारी मॉडल को लोकप्रिय बनाना जरूरीः डॉ. चंद्रपाल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/involving-youth-in-rural-areas-with-coops-is-key-says-icaap-president.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 26 May 2022 19:58:06 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/involving-youth-in-rural-areas-with-coops-is-key-says-icaap-president.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंटरनेशल कोऑपरेटिव अलायंस (एशिया-प्रशांत) के अध्यक्ष और कृभको के चेयरमैन डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव ने कहा है कि देश में सहकारी आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए ग्रामीण युवाओं के बीच सहकारी मॉडल को लोकप्रिय बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ऐसे तरीकों पर विचार किया जाना चाहिए ताकि गांवों के युवा प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के सदस्य बन सकें। उन्होंने कहा कि अगर युवा हिस्सा नहीं लेंगे तो सहकारिता आंदोलन आगे नहीं बढ़ सकता।</p>
<p>डॉ. यादव पिछले दिनों इंटरनेशल कोऑपरेटिव अलायंस &ndash; एशिया प्रशांत (आईसीए-एपी) का अध्यक्ष चुने गए हैं। उन्हें सम्मानित करने के लिए नेशनल फेडरेशन ऑफ फिल्म एंड फाइन कोऑपरेटिव्स (नाफैक) ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसी कार्यक्रम में डॉ. यादव ने उक्त बातें कही। नाफैक की स्थापना 1985 में फिल्म निर्माण, वृत्तचित्र आदि के जरिए सहकारी समितियों की छवि को मजबूत करने के लिए की गई थी। इस समारोह में एनसीयूआई, इफको और अन्य सहकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</p>
<p><span>डॉ. यादव ने एक अलग सहकारिता मंत्रालय बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की। उन्होंने कहा कि सहकार से समृद्धि के माध्यम से सरकार सहकारी समितियों के जरिए सामाजिक-आर्थिक समृद्धि लाने के लिए गंभीर है। उन्होंने नाफैक से सहकारी समितियों की सफलता की कहानियों को लोकप्रिय बनाने का आग्रह किया।</span></p>
<p><span>इस अवसर पर एनसीयूआई के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने कहा कि सोशल मीडिया सहकारी समितियों की छवि निर्माण के लिए एक प्रभावी उपकरण हो सकता है। इसमें नाफैक की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने कहा कि सहकारिता की अवधारणा जाति और धर्म के सभी भेदों से ऊपर है। इस अवसर पर एनसीयूआई के मुख्य कार्यकारी डॉ. सुधीर महाजन भी उपस्थित थे।</span></p>
<p><span>इससे पहले नाफैक की कार्यकारी अध्यक्ष आरती बिसारिया ने सहकारी समितियों को बढ़ावा देने में नाफैक को आर्थिक मदद देने के लिए एनसीयूआई सहित सभी सहकारी संगठनों को धन्यवाद दिया। उन्होंने दीर्घकाल में नाफैक को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक रूपरेखा भी बताई। बिसारिया को एनसीयूआई द्वारा आईसीए-एपी महिला समिति के लिए नामित किया जा रहा है।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ग्रामीण युवाओं में सहकारी मॉडल को लोकप्रिय बनाना जरूरीः डॉ. चंद्रपाल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारिता नीति पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन, सहकारिता मंत्री ने कहा इस क्षेत्र में राज्यों के कानून ही लागू होंगे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/two-day-national-seminar-on-cooperative.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 14 Apr 2022 17:06:17 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/two-day-national-seminar-on-cooperative.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नवगठित सहकारिता मंत्रालय ने 12 और 13 अप्रैल को दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन को 6 सत्र में बांटा गया था। इनमें सहकारिता के वर्तमान कानूनी ढांचे से लेकर इसके संचालन की बाधाएं, उन्हें दूर करने के उपाय, पूंजी तक सहकारी संस्थाओं की पहुंच, इनकी गतिविधियों का विविधीकरण, प्रशिक्षण, शिक्षा, महिलाओं, युवाओं और कमजोर वर्गों को सहकारिता से जोड़ना जैसे विषयों पर चर्चा की गई।&nbsp;सम्मेलन का उद्घाटन गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया। सहकारिता राज्य मंत्री&nbsp;बी एल वर्मा ने भी अपनी उपस्थिति से इस अवसर की शोभा बढ़ाई। सहकारिता क्षेत्र को उचित गति प्रदान करने तथा सहकार से समृद्धि की प्राप्ति के उद्देश्य से नए सहकारिता मंत्रालय का गठन दिनांक&nbsp;6&nbsp;जुलाई&nbsp;2021&nbsp;को किया गया था।&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि पूरे देश के स्तर पर सहकारिता कानून बनाने का सरकार का कोई इरादा नहीं है। इसमें राज्यों के बनाए नियम ही चलेंगे। लेकिन उन्होंने साथ में यह भी कहा कि विभिन्न राज्यों में सहकारिता कानून अलग अलग समय के बने हुए हैं और उनमें सामंजस्य जरूरी है।</p>
<p>पहले सत्र का विषय था सहकारिता से संबंधित वर्तमान कानूनी ढांचा,&nbsp;नियामक नीति की पहचान,&nbsp;संचालन संबंधी बाधाएं और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक उपाय जिससे व्यापार करने में आसानी हो और सहकारी समितियों और अन्य आर्थिक संस्थाओं को एक समान अवसर प्रदान किया जा सके। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ.&nbsp;जी.आर.&nbsp;चिंताला,&nbsp;अध्यक्ष,&nbsp;नाबार्ड ने की।&nbsp;</p>
<p>सम्मेलन के दूसरे सत्र में सहकारी सिद्धांतों, लोकतांत्रिक सदस्य नियंत्रण, सदस्यों की बढ़ती भागीदारी, पारदर्शिता, नियमित चुनाव, मानव संसाधन नीति, अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं का लाभ उठाने, खाता रखने और लेखा परीक्षा सहित शासन को मजबूत करने के लिए सुधार पर चर्चा हुई। इस सत्र की अध्यक्षता मनोज आहूजा, सचिव, कृषि और किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार ने की।</p>
<p>तीसरा सत्र &nbsp;बुनियादी ढांचे को मजबूत करने,&nbsp;इक्विटी आधार को मजबूत करने,&nbsp;पूंजी तक पहुंच,&nbsp;गतिविधियों का विविधीकरण,&nbsp;उद्यमिता को बढ़ावा देने,&nbsp;ब्रांडिंग, जैसे विषयों पर आधारित था जिसकी अध्यक्षता उपेंद्र प्रसाद सिंह,&nbsp;सचिव,&nbsp;कपड़ा मंत्रालय ने की। चौथे सत्र में प्रशिक्षण,&nbsp;शिक्षा,&nbsp;ज्ञान साझा करना और जागरूकता निर्माण जिसमें सहकारी समितियों को मुख्यधारा में लाना,&nbsp;प्रशिक्षण को उद्यमिता से जोड़ना,&nbsp;महिलाओं,&nbsp;युवा और कमजोर वर्गों को शामिल करना जैसे विषयों पर चर्चा हुई जिसकी अध्यक्षता डॉ.&nbsp;त्रिलोचन महापात्रा,&nbsp;सचिव&nbsp;(डेयर)&nbsp;ने&nbsp;की।</p>
<p>पांचवें सत्र में &nbsp;नई सहकारी समितियों को बढ़ावा देना, सहकारी समितियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना, सदस्यता बढ़ाना, सामूहिकता को औपचारिक बनाना, सतत विकास के लिए सहकारी समितियों का विकास करना, क्षेत्रीय असंतुलन को कम करना जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। छठे और आखिरी सत्र में सहकारिता को बढ़ावा देना और सामाजिक सुरक्षा में सहकारी समितियों की भूमिका पर चर्चा हुई। राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन दिवस के दिन दो दर्जन से अधिक केंद्रीय मंत्रालयों के सचिव तथा संयुक्त सचिव, 36 राज्य सरकारों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और रजिस्ट्रार सहकारिता, 40 सहकारी तथा लगभग 40 सहकारी और अन्य प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों एवं सहकारी संगठनों के प्रमुख तथात सदस्यों ने भाग लिया ।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_623da5c03d070.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारिता नीति पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन, सहकारिता मंत्री ने कहा इस क्षेत्र में राज्यों के कानून ही लागू होंगे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नई सहकारिता नीति पर चर्चा के लिए अगले हफ्ते मंत्रालयों और राज्यों के साथ बैठक, अगले चरण में सहकारी संगठनों के साथ होगी चर्चा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperative-ministry-to-meet-next-week-with-stakeholders-to-draft-new-policy .html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 08 Apr 2022 13:27:01 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperative-ministry-to-meet-next-week-with-stakeholders-to-draft-new-policy .html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नवगठित सहकारिता मंत्रालय कोऑपरेटिव सेक्टर के लिए नई पॉलिसी बनाने जा रहा है। इसके लिए वह सभी पक्षों के साथ बैठक करेगा। यह बैठक दो चरणों में होगी। इन बैठकों में मिले सुझावों के आधार पर पॉलिसी को अंतिम रूप दिया जाएगा। केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि कोऑपरेटिव सेक्टर को कैसे बढ़ावा दिया जा सके।</p>
<p>उक्त अधिकारी ने बताया कि पहली बैठक अगले हफ्ते होगी। इसमें विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों और राज्यों के प्रतिनिधियों को बुलाया जाएगा। बैठक पूरे दिन चलने की उम्मीद है। इस बैठक में सहकारिता क्षेत्र को लेकर अंतरमंत्रालयी स्तर के मुद्दों और अंतर-राज्यीय और केंद्र व राज्यों के स्तर पर सहकारी क्षेत्र से जुड़े मसलों पर बातचीत के साथ ही सहकारिता को एक प्रभावी आर्थिक गतिविधि&nbsp; और रोजगार सृजन के स्रोत के रूप में मजबूत करने के लिए जरूरी नीतिगत प्रावधानों पर बातचीत की जाएगी।&nbsp;</p>
<p>दूसरे चरण में सहकारी क्षेत्र से संबंधित संस्थाओं भारतीय रिजर्व बैंक और&nbsp; नाबार्ड सहित उन सभी संस्थाओं के साथ बैठक की जाएगी जिनकी सहकारिता क्षेत्र में भूमिका है। वह भूमिका नियामक के रूप में हो या सहकारिता क्षेत्र को बढ़ावा देने के के रूप में हो। इसके साथ ही सहकारी क्षेत्र से जुड़े संस्थानों और फेडरेशनों के साथ बैठक की जाएगी। इसमें नेशनल कोआपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया (एनसीयूआई), इफको, अमूल, नेफेड, कृभको और विभिन्न क्षैेत्रों&nbsp; में काम कर रही देश भर की संस्थाएं शामिल होंगी। कोआपरेटिव संगठनों और रिजर्व बैंक आदि के अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी।</p>
<p>सरकार द्वारा सहकारिता का नया मंत्रालय गठित करने के कुछ समय बाद से ही मंत्रालय सहकारिता क्षेत्र के नई नीति लाने पर काम कर रहा है और इस संबंध में जरूरी कदम उठाये जा रहे हैं। सहकार से समृद्धि के मंत्र को केंद्र में रखकर सहकारिता को एक महत्वपूर्ण आर्थिक विकल्प के रूप में मजबूत करना ही नये मंत्रालय के गठन का मुख्य मकसद है। चालू साल के बजट में सहाकरिता क्षेत्र से जुड़े प्रत्यक्ष कर प्रावधानों में बदलाव कर उनको कारपोरेट जगत के लिए लागू प्रावधानों के बराबर लाया गया है। इसके साथ ही मंत्रालय सहकारिता क्षेत्र से जुड़े प्रोफेशनल्स की ट्रेनिंग के लिए जहां सहकारिता क्षेत्र में मौजूद प्रशिक्षण संस्थानों को अधिक प्रभावी बना रहा है वहीं दूसरे प्रबंधन संस्थानों के साथ भी तालमेल कर रहा है।&nbsp;</p>
<p>इन बैठकों के बाद कोऑपरेटिव सेक्टर के लिए नई पॉलिसी तैयार करने का काम अंतिम चरण में पहुंचने की उम्मीद है।</p>
<p>दरअसल अर्थव्यवस्था के दो प्रमुख सेगमेंट हैं सरकारी क्षेत्र और निजी क्षेत्र। तीसरा महत्वपूर्ण क्षेत्र है कोऑपरेटिव। सरकार का मानना है कि कोऑपरेटिव सेक्टर ज्यादा समावेशी है और इसके माध्यम से ज्यादा लोगों को विकास में सहभागी बनाया जा सकता है।</p>
<p>सहकारिता मंत्रालय का गठन जुलाई 2021 में किया गया था। यह मंत्रालय इन दिनों नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति का ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया में है। मंत्रालय ने मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट 2002 में संशोधन के लिए मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज अमेंडमेंट बिल 2022 भी तैयार किया है।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नई सहकारिता नीति पर चर्चा के लिए अगले हफ्ते मंत्रालयों और राज्यों के साथ बैठक, अगले चरण में सहकारी संगठनों के साथ होगी चर्चा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[संसदीय समिति की सिफारिश, सहकारिता मंत्रालय संघीय ढांचे का रखे ख्याल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/parliamentary-panel-says-cooperation-ministry-schemes-must-safeguard-federal-structure.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 25 Mar 2022 16:51:46 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/parliamentary-panel-says-cooperation-ministry-schemes-must-safeguard-federal-structure.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण पर संसद की स्थायी समिति ने सहकारिता (कोऑपरेटिव) के लिए अलग मंत्रालय बनाने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही उसने चेतावनी भी दी है कि राष्ट्रीय स्तर पर कोऑपरेटिव की नीतियां बनाते समय इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि देश के संघीय ढांचे पर किसी तरह की आंच ना आए। समिति ने सहकारिता मंत्रालय के लिए अनुदान मांगों से संबंधित एक रिपोर्ट गुरुवार को संसद में रखी। गौरतलब है कि सहकारिता मंत्रालय का प्रभार इस समय गृह मंत्री अमित शाह के जिम में है।</p>
<p>समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन करना सरकार का अच्छा निर्णय है। इससे सहकारिता से संपन्नता के विजन को साकार किया जा सकेगा। रिपोर्ट के अनुसार सहकारी समिति विषय संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची दो (राज्य सूची) में आइटम नंबर 32 में शामिल है। राज्य कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट के तहत रजिस्टर्ड सहकारी समितियां संबंधित रजिस्ट्रार द्वारा संचालित होती हैं।</p>
<p>सहकारी समितियों को बढ़ावा देने के मकसद से अनेक सहकारी संस्थान राज्य सहकारिता नियम के तहत भी स्थापित किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए समिति का मानना है कि सहकारिता मंत्रालय को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी गतिविधियां, योजनाएं और कार्यक्रम तय करते समय इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि देश का संघीय ढांचा इससे प्रभावित ना हो और सहकारिता क्षेत्र के सभी अंशधारकों को इसका लाभ मिले।&nbsp;</p>
<p>समिति ने मंत्रालय से स्थापना से जुड़े सभी कार्यो को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की सलाह दी है। इसने यह सिफारिश भी की है कि मंत्रालय को मंजूर पदों पर भर्तियां जल्द करनी चाहिए। मंत्रालय को 2022-23 के बजट में 900 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। हालांकि मंत्रालय ने मांग 3250 करोड़ रुपए की की थी।</p>
<p>समिति ने मंत्रालय की नई नीतिगत पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति सभी संबंधित पक्षों के साथ सलाह मशविरे और तमाम मुद्दों के विश्लेषण के बाद बनाई जाएगी। रिपोर्ट में मंत्रालय के हवाले से कहा गया है कि सहकारिता क्षेत्र सक्षम गवर्नेंस, नेतृत्व और प्रोफेशनल मैनेजमेंट के अभाव के साथ तकनीक अपनाने में भी पीछे है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ संसदीय समिति की सिफारिश, सहकारिता मंत्रालय संघीय ढांचे का रखे ख्याल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत  एनसीडीसी मत्स्य निर्यात को बढ़ावा देगा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-to-boost-fisheries-exports-under-pm-matsya-sampada-yojana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 19 Mar 2022 14:48:47 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-to-boost-fisheries-exports-under-pm-matsya-sampada-yojana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>मंगलुरु, 19 मार्च 2022</strong></p>
<p>कॉपएक्सिल, सहकारी क्षेत्र निर्यात संवर्धन परिषद ने 19 मार्च 2022 को कर्नाटक के मंगलुरु में प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत मत्स्य निर्यात संवर्धन कार्यशाला का आयोजन किया। एनसीडीसी, केंद्र सरकार के शीर्ष विकास वित्त संस्थान ने सहकारी समितियों के लक्ष्य को साकार करने के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद में एक प्रमुख हिस्से का योगदान दिया है।</p>
<p>कार्यशाला में अपनी बात रखते हुए, एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप नायक ने कहा कि फ्लैगशिप पीएमएमएसवाई ने आत्मनिर्भर भारत पैकेज के हिस्से के रूप में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को निर्धारित&nbsp; किया है। अनुमान है कि वर्ष 2024-25 तक भारत में मछली उत्पादन बढ़कर 22 मिलियन टन हो जाएगा और मत्स्य निर्यात आय 1,00,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी।</p>
<p>कार्यशाला में मछुआरों, सहकारी संस्थानों, मछली प्रसंस्करणकर्ताओं, मछली निर्यातकों, सरकारी निकायों, शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यापक वर्गों के हितधारकों द्वारा हिस्सा लिया गया।&nbsp; सहकार भारती के पदाधिकारियों ने भी कार्यशाला के आयोजन में एनसीडीसी के साथ भागीदारी की ।&nbsp; सहकार भारती के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश वैद्य ने क्षेत्र की मत्स्य सहकारी समितियों की क्षमता को मुख्य धारा में लाने के एनसीडीसी के प्रयासों की सराहना की।</p>
<p>केंद्र सरकार के मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने मत्स्य निर्यात में बनाए गए सहायक इकोसिस्टम पर प्रकाश डाला।&nbsp; कार्यशाला के दौरान चर्चा में समुद्री खाद्य निर्यात, निर्यात प्रोत्साहन के लिए बुनियादी ढांचा समर्थन, निर्यात के लिए गहरे समुद्र में मछली पकड़ने और निर्यात के लिए गुणवत्ता मानकीकरण के मुद्दे शामिल थे। डॉ. राजीव रंजन, पूर्व सचिव (मत्स्य पालन), केंद्र सरकार और वर्तमान में एनसीडीसी में वरिष्ठ सलाहकार ने मुख्य वक्तव्य दिया।&nbsp; चर्चा में महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और कर्नाटक राज्यों और एनएफडीबी, सीएमएफआरआई जैसे केंद्रीय संगठनों के विशेषज्ञों ने काफी योगदान दिया।&nbsp; कॉलेज ऑफ फिशरीज, मंगलुरु के विशेषज्ञों ने भी भाग लिया।</p>
<p>कार्यशाला के माध्यम से, क्षेत्र में बाधाओं को चिह्नित किया गया और विभिन्न स्तरों पर आवश्यक हस्तक्षेपों की रूपरेखा तैयार की गई। ब्रांड विकास, लीवरेजिंग नेटवर्क, मार्केट इंटेलिजेंस, संयुक्त उद्यम, जलीय कृषि में ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज विस्तार, नई प्रौद्योगिकियों की शुरूआत, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान आदि जैसे अन्य मुद्दों पर प्रकाश डाला गया।</p>
<p>कार्यशाला के दौरान एनसीडीसी और मत्स्य पालन कॉलेज, मंगलुरु के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए कॉपएक्सिल द्वारा आयोजित की जा रही मत्स्य निर्यात कार्यशालाओं की श्रृंखला का उद्देश्य मत्स्य निर्यात में वृद्धि के लिए एक रूपरेखा रोड मैप तैयार करना है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत  एनसीडीसी मत्स्य निर्यात को बढ़ावा देगा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीयूआई प्रेसिडेंट संघाणी बोले, सहकारिता से भी महिलाओं का हो रहा सशक्तीकरण ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/sanghani-of-ncui-says-cooperatives-are-empowering-women.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 09 Mar 2022 12:08:22 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/sanghani-of-ncui-says-cooperatives-are-empowering-women.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आत्मनिर्भर भारत के लिए महिलाओं को सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत है। नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ़ इंडिया (एनसीयूआई) के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही। इस कार्यक्रम में सरकारी संगठनों के महिला प्रतिनिधि और अन्य अधिकारी शामिल थे। संघाणी ने एनसीयूआई की तरफ से आयोजित हाट की जानकारी दी जो कम जानी-मानी कोऑपरेटिव के लिए बिक्री का बड़ा प्लेटफार्म बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब भारत अपनी आजादी का 75वां वर्ष मना रहा है तब सहकारिता मंत्रालय का गठन सहकारिता आंदोलन को आगे बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्राथमिक कृषि कोऑपरेटिव को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार की पहल से देश में सहकारिता आंदोलन मजबूत होगा। उन्होंने सफल कोऑपरेटिव के बारे में महिलाओं को जानकारी देने की जरूरत बताई ताकि वह भी प्रेरित हो सकें। उन्होंने बताया कि महिलाओं ने जो एनसीयूआई कोऑपरेटिव एजुकेशन फील्ड प्रोजेक्ट का गठन किया है उससे महिलाओं का सशक्तीकरण हो रहा है। संघाणी ने महिलाओं की मदद किए जाने पर जोर दिया ताकि वे अपने संघर्ष में आगे बढ़ सके।</p>
<p>एनसीयूआई के चीफ एग्जीक्यूटिव रिटायर्ड आईएएस डॉक्टर सुधीर महाजन ने महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि एनसीयूआई अपेक्षाकृत कम चर्चित कोऑपरेटिव और स्वयं सहायता समूह को अपने उत्पाद अच्छी कीमत पर बेचने का प्लेटफार्म मुहैया कराता है। उन्होंने बताया कि एनसीयूआई हाट में बीते छह 7 महीने में बिक्री एक करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। उन्होंने एनसीयूआई की अन्य पहल के बारे में भी जानकारी दी जिनमें 15 स्वयं सहायता समूहों का गठन भी शामिल है जिनकी 300 महिलाओं को एनसीयूआई के इनक्यूबेशन सेंटर में प्रशिक्षण दिया जाएगा।</p>
<p>एनसीयूआई के उपाध्यक्ष डॉ विजेंद्र सिंह ने कहा कि हमारे देश में महिलाओं को न सिर्फ सहकारिता के क्षेत्र में बल्कि रोजमर्रा के जीवन में भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। केंद्र की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सावित्री सिंह ने कहा कि एनसीयूआई के फील्ड प्रोजेक्ट और अन्य पहल महिलाओं को बड़े पैमाने पर सशक्त बना रहे हैं।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीयूआई प्रेसिडेंट संघाणी बोले, सहकारिता से भी महिलाओं का हो रहा सशक्तीकरण  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रेहड़ी&amp;#45;पटरी वालों  के  विकास के लिए एनसीयूआई और नासवी के बीच  एमओयू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncui-and-nasavi-have-signed-maus-for-the-development-and-improvement-of-living-standards-of-the-people-of-rehri-patri.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 15 Feb 2022 17:00:46 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncui-and-nasavi-have-signed-maus-for-the-development-and-improvement-of-living-standards-of-the-people-of-rehri-patri.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div style="text-align: justify;"><span>कमजोर वर्गों के उत्थान और विकास के लिए सहकारी समितियों के बीच अपनी पहचान को बढ़ावा देने के लिए भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ&nbsp; (एनसीयूआई ) और नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स ऑफ इंडिया (नासवी) के बीच आज एक एमओयू&nbsp; पर हस्ताक्षर किए गए। इस एमओयू पर&nbsp; एनसीयूआई&nbsp; की तरफ से&nbsp; मुख्य कार्यकारी डॉ. सुधीर महाजन और नासवी की तरफ से राष्ट्रीय समन्वयक अरविंद सिंह द्वारा हस्ताक्षर किए गए ।</span></div>
<div style="text-align: justify;"><span>&nbsp;</span></div>
<div style="text-align: justify;"><span>एनसीयूआई और नासवी का उद्देश्य है कि साहकारिता के माध्यम से, स्ट्रीट वेंडर्स से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर आम सहमति बनाने के लिए राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर हितधारक परामर्श कार्यशालाओं का आयोजन करना, स्ट्रीट वैंडर्स के आजीविका विकल्पों को बढ़ाने के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकियों और दृष्टिकोणों की पहचान करना और सहकारिता&nbsp; को बढ़ावा देना। </span></div>
<div style="text-align: justify;"><span>इस एमओयू पर हस्ताक्षर देश में रेहड़ी-पटरी वालों की आजीविका और स्थिति के विकास और उनके कार्य क्षेत्र,स्वच्छता और प्रशिक्षण सुविधाओं पर तत्काल ध्यान देने के साथ उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए नियम बनाने के आधार पर हुआ है ।</span></div>
<div style="text-align: justify;"><span>&nbsp;</span></div>
<div style="text-align: justify;"><span>नासवी और एनसीयूआई ने स्थायी आजीविका मॉडल विकसित करने के लिए पायलट परियोजनाओं क्रियावन्न की भी&nbsp; योजना बनाई है और अपने व्यावसायिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया और तकनीकी हस्तक्षेपों के जरिये उनकी&nbsp; क्षमता का निर्माण में&nbsp; किया गया है।&nbsp;</span></div>
<div style="text-align: justify;"><span>डॉ.सुधीर महाजन ने नासवी के प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि एनसीयूआई नासवी को स्ट्रीट वेंडरों की क्षमता निर्माण और स्ट्रीट वेंडरों की सहकारी समितियों को सशक्त बनाने के लिए उन्हें पंजीकृत करने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेगा। </span><span>समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने से पहले, एनसीयूआई के अधिकारियों और सहकारी उद्यमिता विकास प्रकोष्ठ की नासवी टीम के बीच सहयोग के तौर-तरीकों की पहचान करने और दिल्ली में कुछ स्थानों की पहचान करने के लिए कुछ बैठकें संयुक्त रूप से आयोजित की बात कही गई।&nbsp;</span></div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620b9460965b3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रेहड़ी-पटरी वालों  के  विकास के लिए एनसीयूआई और नासवी के बीच  एमओयू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारिता मंत्रालय के लिए बजट में 900 करोड़ रुपए का प्रावधान, सहकारी समितियों के लिए मैट और सरचार्ज में कटौती]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/government-reduces-mat-and-surcharge-on-cooperative-socities.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 02 Feb 2022 14:13:20 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/government-reduces-mat-and-surcharge-on-cooperative-socities.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सहकारिता क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में कई अहम घोषणाएं की गई हैं। सबसे महत्वपूर्ण घोषणा सहकारी समितियों पर लगने वाले न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) में कटौती का है। इसे 18.5 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी कर दिया गया है। सालाना एक से दस करोड़ रुपए तक आय वाली सहकारी समितियों के लिए सरचार्ज में भी 5 फीसदी की कटौती की गई है। इसे 12 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी किया गया है। नवगठित सहकारिता मंत्रालय के लिए बजट में 900 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यह 2021-22 के संशोधित अनुमान 403 करोड़ रुपए के दोगुने से भी ज्यादा है।</p>
<p>प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के डिजिटाइजेशन के लिए 350 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस स्कीम के तहत करीब 63000 पैक्स को कंप्यूटराइज किया जाएगा ताकि उनकी क्षमता, लाभप्रदता और पारदर्शिता बढ़ने के साथ जवाबदेही भी बढ़े। 'सहकारिता से संपन्नता' स्कीम के लिए 274 करोड रुपए रखे गए हैं। इस स्कीम के तहत कई छोटी-छोटी स्कीमें होंगी।</p>
<p>एनसीयूआई के प्रेसिडेंट दिलीप संघाणी ने सहकारी समितियों पर मैट घटाने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे ये समितियां कंपनियों के समकक्ष हो गई हैं, जिससे उन्हें बराबर का मौका मिलेगा। संघाणी ने एक करोड़ से दस करोड़ रुपए तक आय वाली समितियों पर सरचार्ज घटाने का भी स्वागत किया। एनसीयूआई के चीफ एग्जीक्यूटिव डॉ. सुधीर महाजन ने कहा कि सहकारी समितियों के भले के लिए किसी भी नीतिगत बदलाव का स्वागत है। कोऑपरेटिव को हर स्तर पर बढ़ावा दिया जाना चाहिए। एनसीयूआई के पूर्व प्रेसिडेंट और कॉपरेटिव बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन जी एच अमीन ने कहा कि इस साल के बजट से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव को उनकी उचित जगह है मिल गई है। मैट घटाने से उन्हें कॉरपोरेट के बराबर अवसर मिलेंगे।</p>
<p>नैफकब प्रेसिडेंट ज्योतिंद्र मेहता के अनुसार इस साल का बजट 5 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी को हासिल करने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने बजट में पूंजीगत व्यय, इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, स्टार्टअप और डिजिटाइजेशन पर फोकस किए जाने की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मैट और सरचार्ज घटाने से कोऑपरेटिव के पास ज्यादा रिजर्व होगा।&nbsp;</p>
<p>नैफकब के एमडी और इंटरनेशनल कोऑपरेटिव बैंकिंग एसोसिएशन के प्रेसिडेंट बी सुब्रमण्यम ने मैट में कटौती का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम बहुत पहले उठाया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव के लिए इनकम टैक्स में छूट काफी देर से दी गई है। सुब्रमण्यम के अनुसार इस वर्ष के बजट में कृषि, कृषि कर्ज, ग्रामीण सहकारिता क्रेडिट बैंकिंग सिस्टम को उचित स्थान नहीं दिया गया है। यही नहीं, सहकारिता मंत्रालय के एक भी प्रस्ताव पर विचार नहीं किया गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारिता मंत्रालय के लिए बजट में 900 करोड़ रुपए का प्रावधान, सहकारी समितियों के लिए मैट और सरचार्ज में कटौती ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कथाकार शिवमूर्ति को इस वर्ष का श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य पुरस्कार, 31 जनवरी को किए जाएंगे सम्मानित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/this-year-shrilal-shukla-iffco-literary-award-to-storyteller-shivamurti.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 29 Jan 2022 18:53:18 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/this-year-shrilal-shukla-iffco-literary-award-to-storyteller-shivamurti.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिंदी के वरिष्ठ कथाकार शिवमूर्ति को प्रतिष्ठित श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान-2021 के लिए चुना गया है। भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको) की ओर से श्रीमती चित्रा मुद्गल की अध्यक्षता में गठित चयन समिति के निर्णय के बाद शिवमूर्ति के नाम की घोषणा की गई। उन्हें यह सम्मान 31 जनवरी, 2022 को लखनऊ में आयोजित एक समारोह में दिया जाएगा।</p>
<p>चयन समिति ने कथाकार शिवमूर्ति का चयन खेती-किसानी, ग्रामीण जनजीवन और ग्रामीण यथार्थ पर केन्द्रित उनके व्यापक साहित्यिक अवदान को ध्यान में रखकर किया है।</p>
<p>मूर्धन्य कथा शिल्पी श्रीलाल शुक्ल की स्मृति में वर्ष 2011 में शुरू किया गया यह सम्मान अब तक विद्यासागर नौटियाल, शेखर जोशी, संजीव, मिथिलेश्वर, अष्टभुजा शुक्ल, कमलाकान्त त्रिपाठी, रामदेव धुरंधर, रामधारी सिंह दिवाकर, महेश कटारे, रणेंद्र को प्रदान किया गया है। सम्मानित साहित्यकार को एक प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र तथा ग्यारह लाख रुपये की राशि का चेक दिया जाता है।</p>
<p>सम्मान समारोह में सम्मानित लेखक शिवमूर्ति के गांव के किसान बंधु, सम्मान समिति के सदस्य जय प्रकाश कर्दम समेत उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकार व पत्रकार भी उपस्थित रहेंगे। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी, प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी, विपणन निदेशक योगेंद्र कुमार, उत्तर प्रदेश के राज्य विपणन प्रबंधक अभिमन्यु राय व इफको के अन्य कर्मचारीगण भी इस मौके पर मौजूद रहेंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कथाकार शिवमूर्ति को इस वर्ष का श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य पुरस्कार, 31 जनवरी को किए जाएंगे सम्मानित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको  निदेशक मंडल ने  दिलीप संघाणी को 17वां अध्यक्ष चुना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/the-board-elects-sanghani-as-the-17th-chairman-of-iffco-in-the-elections-held-toda.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 19 Jan 2022 16:26:47 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
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        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">विश्व की नंबर एक और सबसे बड़ी सहकारी समिति इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) ने 19 जनवरी को अध्यक्ष पद के लिए आयोजित चुनाव में दिलीप संघाणी को सर्व सम्मति 17 वां अध्यक्ष चुन लिया। इफको के निवर्तमान अध्यक्ष बलविंदर सिंह नकई का 11 <span>अक्टूबर </span>2021 <span>को निधन हो जाने के कारण यह चुनाव आयोजित किया गया। इफको के सर्वोच्च शासी निकाय निदेशक मंडल ने 19 जनवरी को दिलीप संघाणी को अध्यक्ष निर्वाचित किया। वह इससे पहले इफको के उपाध्यक्ष थे।</span></p>
<p style="text-align: justify;">अध्यक्ष चुने जाने के बाद दिलीप संघाणी ने कहा कि इफको किसानों औऱ सहकारिता के लिए समर्पित है। प्रधानमंत्री के सहकार से समृद्धि&nbsp; की ओर स्लोगन के आधार पर हम किसानों के हित में लगातार काम कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">इस अवसर पर इफको के प्रंबनध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कहा कि हम आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर कृषि के जरिए किसानों की आय दोगुनी करने के&nbsp; प्रधानमंत्री जी के सपने को साकार करने की दिशा में कार्य करते रहेंगे ।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">दिलीप संघाणी गुजरात के वरिष्ठ सहकारी बंधु हैं। वह वर्ष 2017 <span>से गुजरात स्टेट कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (गुजकोमासोल) के अध्यक्ष हैं। गुजरात सरकार में कृषि</span>, <span>सहकारिता</span>, <span>पशुपालन</span>, <span>मत्स्य पालन</span>, <span>गौ-पालन</span>, <span>जेल</span>, <span>उत्पाद विधि व न्याय</span>, <span>विधायी व संसदीय मामलों के वे मंत्री भी रह चुके हैं । वह लोकसभा में चार बार अमरेली संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं ।</span>&nbsp; <span>वर्ष </span>2019 <span>में वे इफको के उपाध्यक्ष चुने गए। वर्ष </span>2021 <span>में वह ऐतिहासिक दौर आया</span>&nbsp;<span>जब &nbsp;दिलीप संघाणी को भारतीय सहकारी समितियों के शीर्ष निकाय भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ का</span> <span>अध्यक्ष चुना गया ।</span>&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इफको <span>अपने स्थापना काल से ही भारतीय किसानों के कल्याण के लिए तत्पर रहा है। </span>1970 <span>के दशक में हरित क्रांति हो या </span>2000 <span>के दशक में ग्रामीण मोबाइल संचार से लेकर डिजिटल माध्यम से आधुनिक तकनीक और सेवाएं प्रदान करके किसानों का विश्वास जीतना हो</span>, <span>इफको ने दशकों से किसानों के लिए सेवारत रहते हुए यह साख हासिल की है । इफको</span>, <span>नैनो तकनीक आधारित उर्वरक नैनो तरल यूरिया को सफलतापूर्वक लाने वाली विश्व की सबसे पहली उर्वरक उत्पादक कंपनी है । इफको नेतृत्व नवोन्मेष को बढ़ावा देने के मामले में अहम भूमिका निभाता रहा है</span>&nbsp; <span>।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको  निदेशक मंडल ने  दिलीप संघाणी को 17वां अध्यक्ष चुना ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आईसीएएपी और एनसीडीसी ने सहकारिताओं में  वैश्विक उत्तम कार्यप्रणालियों के लिए  हाथ मिलाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/icaap-and-ncdc-join-hands-for-good-practices-in-global-cooperatives.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 18 Jan 2022 22:53:04 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/icaap-and-ncdc-join-hands-for-good-practices-in-global-cooperatives.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आईसीएएपी के अध्यक्ष डॉ. चंद्र पाल सिंह यादव और एनसीयूआई के अध्यक्ष दिलीप संघानी ने एनसीडीसी के लक्ष्मणराव इनामदार राष्ट्रीय सहकारिता अनुसंधान एवं विकास अकादमी द्वारा आयोजित 'सहकारिताओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय उत्तम कार्यप्रणाली मंच पर विचार मंथन सत्र पर आधारित सहकारिताओं के लिए सहकार प्रज्ञा उत्तम कार्यप्रणाली पर एक नीति सिफारिश हैंडबुक जारी की। इसके द्वारा भारत और विदेशों में सहकारी समितियों को न केवल प्रतिस्पर्धी बने रहने बल्कि खुद को सफल वाणिज्यिक संस्थाओं के रूप में अलग करने के लिए सर्वोत्तम मॉडल अपनाने और अपनाने में मदद किए जाने की उम्मीद है। एनसीडीसी मुख्यालय में 18 जनवरी को आयोजित समारोह में इस हैंडबुक को जारी किया गया जिसमें एनसीडीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप नायक और सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डीएन ठाकुर भी मौजूद थे।</p>
<p>इस अवसर पर अपनी बात रखते हुए हुए आईसीएएपी के अध्यक्ष डॉ. चंद्र पाल सिंह&nbsp; यादव ने कहा कि सहकारिता के पास गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा और रोजगार सृजन- आत्मनिर्भरता का मार्ग जैसी समस्याओं से निपटने में अंतर्निनिहित लाभ हैं । यह कोविड -19 के दौरान भी देखा गया है। मुझे यकीन है कि यह हैंडबुक कई सहकारी समितियों के लिए प्रकाश की किरण होगी जो आत्मनिर्भर भारत में योगदान करना चाहती हैं।</p>
<p>दिशा-निर्देशों, संसाधनों, पद्धतियाँ, प्रमुखशिक्षा, भारत और विदेशों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली सहकारी समितियों की केस स्टडी और परिणाम तथा प्रभाव के एक संग्रह के रूप में यह पुस्तिका एक कार्य योजना के रूप में काम करेगी जो इन संस्थाओं को आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद कर सकती है।</p>
<p>दिलीप संघानी ने कहा कि यह जानकर खुशी हो रही है कि सहकारिता मंत्री अमित शाह जी से प्रेरणा लेते हुए एनसीडीसी-लिनाक और एशिया प्रशांत अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता गठबंधन (आईसीएएपी) विदेशों में सहकारी समितियों की भारतीय अच्छी प्रथाओं को प्रसारित करने तथा भारत में विदेशी समितियों की अच्छी कार्यप्रणालियों से अवगत कराने हेतु अपने व्यापक अनुभव और विचारों को साझा करने का एक मंच स्थापित करने के लिए एक साथ आए हैं।</p>
<p>इस संबंध में, एनसीडीसी-लिनैक और आईसीएएपी ने सहकारी क्षेत्र के विकास के लिए अनुसंधान, अध्ययन, प्रलेखन और प्रशिक्षण की उन्नति के हित में संबंधित पक्षों की मुख्य ताकत, अनुभव और संस्थागत उद्देश्यों को आत्मसात करने और विकसित करने के उद्देश्य से एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। लिनाक की ओर से लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ बलजीत सिंह, मुख्य निदेशक, लिनाक, गुरुग्राम ने समझौते पर हस्ताक्षर किए जबकि आईसीएएपी को क्षेत्रीय निदेशख&nbsp; बालासुब्रमण्यम अय्यर ने दूसरे पक्ष का प्रतिनिधित्व किया।</p>
<p>एनसीडीसी के एमडी संदीप नायक ने याद दिलाया कि हैंडबुक को लिनाक-एनसीडीसी द्वारा प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और सहकारी समितियों के क्षेत्र में अग्रणी संगठनों के परामर्श से विकसित किया गया है। माननीय गृह और सहकारिता मंत्री के विचारों से प्रेरित होकर हैंडबुक के लिए परामर्श प्रक्रिया नवंबर 2021 में शुरू की गई थी ।</p>
<p>देश भर के अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों और अन्य प्रतिभागियों ने सहकारी समितियों के संचालन में आने वाली कठिनाइयों और उन चुनौतियों के संभावित समाधानों पर विचार-विमर्श किया।</p>
<p>अंतिम प्रारूप में देश में कई सहकारी समितियों द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को शामिल करते हुए फोकस ग्रुप चर्चा भी सम्मिलित थी, जिससे उन्हें कोविड -19 महामारी से उत्पन्न आर्थिक निराशा से कुशलतापूर्वक निपटने में मदद मिली।</p>
<p>हैंडबुक में दूध, क्रेडिट और बैंकिंग सहकारी समिति क्षेत्रों से कुछ सर्वोत्तम कर्यप्रणालियाँ थीं जिनके विवरण सरकार के आत्मानिर्भर भारत के दृष्टिकोण पर केन्द्रित हैं।</p>
<p>भारत में विशेष रूप से कृषि और कृषि-संबद्ध क्षेत्र, बैंकिंग और आवास क्षेत्रों में 8 लाख से अधिक पंजीकृत सहकारी समितियां हैं। सहकारी समितियों को सुव्यवस्थित करने के लिए एक अलग प्रशासनिक कानूनी और नीतिगत ढांचा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में सहकारिता मंत्रालय बनाए जाने के बाद देश में सहकारिता आंदोलन ने फिर से ध्यान आकृष्ट किया है।</p>
<p style="text-align: justify;">सरकार नई सहकारी नीति बनाने की प्रक्रिया में भी है और सहकारी आंदोलन को मजबूत करने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव है जिसे अब विकास का एक महत्वपूर्ण मुद्दा माना जा रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आईसीएएपी और एनसीडीसी ने सहकारिताओं में  वैश्विक उत्तम कार्यप्रणालियों के लिए  हाथ मिलाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि में उत्पादकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एनसीडीसी और एनपीसी ने  हाथ मिलाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-and-npc-joined-hands-to-promote-productivity-and-innovation-in-the-country.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 05 Jan 2022 21:54:04 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-and-npc-joined-hands-to-promote-productivity-and-innovation-in-the-country.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) और राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (एनपीसी) ने कृषि &nbsp;एवं&nbsp; कृषि संबद्ध क्षेत्रों में उत्पादकता तथा नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अपनी गतिविधियों में तालमेल बिठाने &nbsp;के लिए एक समझौता किया है। एनपीसी सचिव, विजय कुमार, और कार्यकारी निदेशक, एनसीडीसी श्री मुकेश कुमार द्वारा 4 जनवरी&nbsp; 2022 को नई दिल्ली में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। एनसीडीसी द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई।</p>
<p style="text-align: justify;">इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद&nbsp; मुकेश कुमार ने कहा कि&zwj;&nbsp; हमने सहकारिता मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय तथा मत्स्य पालन एवं पशुपालन मंत्रालय जैसे केंद्रीय मंत्रालयों की योजनाओं के माध्यम से संयुक्त रूप &nbsp;से काम करने के लिए विभिन्न गतिविधियों की पहचान की है। ऐसे मामलों में जहां खाद्य, प्रसंस्करण एवं उद्योग मंत्रालय, पर्यावरण, वानि&zwj;की एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय और एनसीडीसी एक कार्यान्वयन एजेंसी है और&nbsp; कार्यक्रम/योजना/गतिविधि को लागू करना चाहते है&nbsp; वहां वह इस समझौते के तहत आवश्यकता के अनुसार एनपीसी की सेवाएं ले सकते हैं और उसी तरह एनसीडीसी के लिए एनपीसी पर भी यह बातें लागू होती हैं।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">पांच वर्षों के समझौता ज्ञापन के अंतर्गत एनपीसी और एनसीडीसी संयुक्त रूप से एक दूसरे को प्रायोजित करने या आमंत्रित करने या संयुक्त रूप से राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय संस्थान निर्माण गतिविधियों, अनुसंधान, सर्वेक्षण, क्षमता विकास, खरीददार विक्रेता बैठक, सम्मेलनों, कार्यशालाओं एवं अध्ययनों का आयोजन करने के प्रयास करने हेतु कार्यक्रम तैयार करेंगे ।<br />एनपीसी उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत एक निकाय है। उत्पादकता के क्षेत्र में सेवाएं प्रदान करने के अतिरिक्त&nbsp; यह औद्योगिक इंजीनियरिंग, कृषि-व्यवसाय, पर्यावरण प्रबंधन, स्वचालन, प्रदूषण नियंत्रण, चिकित्सा अपशिष्ट आदि के क्षेत्रों में अनुसंधान तथा प्रशिक्षण सेवाएं प्रदान करता रहा है । वर्ष 1958 में स्थापित, एनपीसी का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में सहायता करने हेतु सेवाओं की स्थिति प्रदान करने के लिए उत्पादकता में ज्ञान का पथ-प्रदर्शक बनना है ।</p>
<p style="text-align: justify;">एनसीडीसी, जो अब नये गठित केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है विभिन्न योजनाओं के माध्यम से देश में सहकारिता आंदोलन के विकास के लिए काम करता है। सहकारिताओं को बढ़ावा देने के लिए एनसीडीसी विभिन्न क्षेत्रों में सहकारी विकास कार्यक्रमों की योजना, समन्वय तथा वित्तपोषण&nbsp; का काम करता है । वर्ष 1963 में स्थापित एनसीडीसी ने अब तक लगभग दो लाख करोड़ रुपये की विभिन्न सहकारी पहलों को<br />वित्तपोषित किया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि में उत्पादकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एनसीडीसी और एनपीसी ने  हाथ मिलाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीडीसी रूरल क्रेडिट पर ध्यान केंद्रित कर रहा है: संदीप कुमार नायक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-focus-is-on-rural-credit.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 27 Dec 2021 08:36:05 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-focus-is-on-rural-credit.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">नेशनल प्नॉडक्टिविटी काउंसिल (एनपीसी) के डायरेक्टर जनरल और एनसीडीसी प्रबंध निदेशक संदीप कुमार नायक का कहना है कि हमें कृषि और ग्रामीण समृद्धि को विकसित करने के लिए कृषि को उसके संबद्ध क्षेत्रों के साथ समग्रता में देखने की जरूरत है। इसलिए हमें केवल "एग्रीकल्चर क्रेडिट" तक सीमित नहीं रहना चाहिए &nbsp;बल्कि ग्रामीणों की आवश्यकता के अनुसार "रूरल क्रेडिट" पर ध्यान देना चाहिए। कृषि और सहकारिता क्षेत्र में लंबे अनुभव वाले नायक <span>1988 बैच के जम्मू और कश्मीर कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। दिल्ली &nbsp;में आयोजित रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव और NEDAC अवार्ड्स 2021 में&nbsp; सहकारी समितियों और किसानों के समूह के माध्यम से कृषि और ग्रामीण समृद्धि सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बातें कहीं।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि एनसीडीसी ग्रामीण ऋण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और पिछले कुछ वर्षों में सहकारी समितियों के ऋण फ्लो में तेजी आई &nbsp;है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 में &nbsp;ऋण का आकार 24,<span>000 करोड़ रुपये था जबकि चालू वित्त वर्ष में यह अभी तक 35</span>,<span>000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह वाणिज्यिक बैंक जितना उधार देते हैं</span>, <span>यह ऋण उसका एक छोटा सा अंश है। इस समस्या के समाधान&nbsp; के लिए एनसीडीसी और नाबार्ड दोनों की बड़ी भूमिका है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">एनईडीएसी प्रबंध निदेशक ने कहा, <span>एनसीडीसी रूरल वॉयस का सपोर्ट कर रहा है, क्योंकि ये प्लेटफार्म प्रमुखता से ग्रामीण और किसानों के साथ जुड़ने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि रूरल वॉयस प्लेटफार्म एक तटस्थ में भूमिका निभा रहा है&nbsp; नायक ने बाताया कि एनसीडीसी &nbsp;पिछले कुछ महीनों से रूरल वॉयस पर आने वाला कृषि कार्यक्रम रूरल वॉयस एग्रीटेक शो को सपोर्ट कर रहा है। इस कार्यक्रम में किसानों और कृषि में विकास के लिए नई तकनीकों की जानकारी को प्रस्तुत किया जा रहा है । आज के समय में ग्रामीण भारत के लिए एक आदर्श प्लेटफार्म&nbsp; है और यह संचार का एक प्रमुख साधन बन गया है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">एनसीडीसी प्रबंध निदेशक ने कहा कि <span>कृषि में समृद्धि लाने में टेक्ऩोलॉजी और प्रॉडक्टिविटी की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। हम केवल आईसीएआर और सरकारी संस्थानों पर निर्भर नहीं रह सकते आज के समय में हमारे पास बहुत से टेक्ऩोलॉजी बेस्ड स्टार्ट-अप्स हैं, जिनके पास नई टेक्नालॉजी उपलब्ध है। अब हमें इन स्टार्ट-अप्स को सहकारी समितियों के साथ जोड़ने की जरूरत है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि सहकारी&nbsp; समितिायां और कृषक उत्पादन संगठनों में कोई मालिक या कार्यकर्ता नहीं होता है इसके सभी सदस्य पार्टनर होते हैं और सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी होती है। यह नियम सभी समूहों पर लागू होती है। चाहे वह स्व-सहायता समूह (<span>एसएचजी</span>)<span> हो या</span> कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) हों। उनका कहना है कि सहकारिता भारतीय़ कृषि और ग्रामीण समृद्धि को आगे बढ़ाने में एक भागीदार बनकर प्रमुख निभा &nbsp;सकती&nbsp; है।</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीडीसी रूरल क्रेडिट पर ध्यान केंद्रित कर रहा है: संदीप कुमार नायक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारी समितियों को  कमर्शियल आर्गनाइजेशन   के रूप में देखा जाना चाहिएः देवेंद्र कुमार सिंह, सचिव, सहकारिता मंत्रालय]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperatives-should-be-seen-as-business-entities-devendra-kumar-singh-secretary-ministry-of-cooperation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 26 Dec 2021 05:55:18 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperatives-should-be-seen-as-business-entities-devendra-kumar-singh-secretary-ministry-of-cooperation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">अभी देश के लोग इस बात को लेकर काफी उत्सुक हैं कि हाल ही में गठित सहकारिता मंत्रालय देश में क्या कर रहा है। जिसके मंत्री अमित शाह हैं और&nbsp; इस नये मंत्रालय के सचिव देवेंद्र कुमार सिंह हैं। 1989 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी सिंह ने 23 दिसंबर को नई दिल्ली में रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव और नेडेक अवार्ड्स 2021 के एक सत्र में सहकारिता के माध्यम से किसानों, <span>कृषि और ग्रामीण समृद्धि पर बात की।</span></p>
<p style="text-align: justify;">केंद्रीय सहकारिता सचिव ने कहा कि सहकारिता के इस नए मंत्रालय से देश की जनता को काफी उम्मीदें हैं। सरकार ने अपने नए सफर की चीजों को समझने की कोशिश करते हुए अपना नया काम शुरू किया है। उन्होंने कहा कि सरकार सहकारिता के माध्यम से समृद्धि का विजन लेकर आई है और मंत्रालय ने लोगों के विकास के लिए समृद्धि की दिशा में सहकारिता का मंत्र दिया है। इसके लिए नई नीति पेश की जाएगी और मंत्रालय ने इस नीति को लाने के लिए विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी है।</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि&nbsp; सहकारी समि<span>तियों को व्यावसायिक संस्थाओं के रूप में देखा जाना चाहिए। इसका लक्ष्य लोगों का आर्थिक सुधार है</span>&nbsp;<span>और हम इस नए दृष्टिकोण पर आगे की कार्ययोजना बना रहे हैं। इसके लिए हम सभी को बिजनेस आधारित सिद्धांतों को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि </span><span>हमने सहकारी समितियों और समूहों के व्यवसाय विकास के लिए आईआईएम से सुझाव मांगे हैं। इसी तरह आईआईटी से तकनीकी सुझाव मांगे गए हैं। इसके लिए मंत्रालय ने आईआईटी</span>, <span>एनआईटी और आईआईआईटी को सहकारी क्षेत्र में व्यापक तकनीकी कमियों को दूर करने के लिए पत्र लिखा है।</span>&nbsp;<span>उनमें से एक आईआईएम जम्मू ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">सहकारिता सचिव&nbsp; ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि मैने पहले अतिरिक्त सचिव और विकास आयुक्त के रूप में कार्य किया है। <span>&nbsp;सहकारिता एक उद्यम है</span>, <span>जिसके लिए उन्होंने सूक्ष्म</span>, <span>लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) में अपने कार्य के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि&nbsp; &nbsp;एमएसएमई मंत्रालय में&nbsp; उद्यमों का पंजीकरण शुरू किया। सहकारिता मंत्रालय में&nbsp; हमने </span><span>उद्यम डेटा मंगाया तो यह दिलचस्प बात सामने आई कि उद्यम प्लेटफार्म पर पंजीकृत 60 लाख उद्यमियों में से 6000 सहकारी समितियों ने उस पर पंजीकरण कराया है और वह भी 86 श्रेणियों में है। इस प्रकार से सरकारी समितियां </span><span>खुद को एक उद्यमी मानती हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">देवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मंत्रालय ने शुरूआत में त्रि-आयामी फोकस रखा है। पैक्स का कम्प्यूटरीकरण, सहकारिता पर एक समग्र राष्ट्रीय नीति और&nbsp; सहकारिताओं को मुख्य धारा में लाना।<span> हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि विभिन्न मंत्रालयों की योजनाओं में सहकारी समितियों को शामिल किया जाए। अगर सहकारी समितियां किसी विशेष योजना के लिए पात्र नहीं हैं</span>, <span>तो इस पर सोच समझकर फैसला होना चाहिए और इसकी अनदेखी नहीं होनी चाहिए।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">केंद्रीय सहकारिता सचिव कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को <span>पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था तक पहुंचाने में सहकारिता क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है&nbsp; रहेगी और हम इसी दृष्टि के साथ काम करने की कोशिश कर रहे हैं।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारी समितियों को  कमर्शियल आर्गनाइजेशन   के रूप में देखा जाना चाहिएः देवेंद्र कुमार सिंह, सचिव, सहकारिता मंत्रालय ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सफलता के लिए  हमें भारतीय तरीके अपनाने की जरूरत हैः डॉ. उदय शंकर अवस्थी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/we-need-to-adopt-the-indian-way-to-become-successful-dr-us-awasthi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 25 Dec 2021 10:47:05 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/we-need-to-adopt-the-indian-way-to-become-successful-dr-us-awasthi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कहा है कि हमें प्रगति करने के ऐसे प्रभावी तरीकों की तलाश करने की आवश्यकता है जिसमें संसाधन बर्बाद न हों। ग्रामीण समृद्धि को ग्लैमरस खपत से प्रेरित नहीं किया जाना चाहिए। हमें &nbsp;सफलता &nbsp;के लिए भारतीय तरीके को अपनाने की जरूरत है। डॉ. अवस्थी ने यह बातें कृषि और ग्रामीण क्षेत्र को समर्पित डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म रूरल वॉयस की पहली वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव एंड NEDAC अवार्ड्स 2021 के एक सत्र को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं ।</p>
<p style="text-align: justify;"><span>डॉ. अवस्थी ने&nbsp; कहा</span>&nbsp;<span>कि मैंने हमेशा से माना है कि गांवों की भाषा और खेती की भाषा के बारे में बहुत कुछ ऐसा बोला जाता है जो समझ में बहुत कम ही आता है। दुर्भाग्य से आवाज छिपा दी जाती है या दबा दी जाती है। अगर उस दबी हुई आवाज को सुना जा सकता है तो इस दिशा में प्रयास होना चाहिए। </span></p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद पर कारोबार के हिसाब से इफको दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी समिति है। हालांकि लोग इसके बारे में कम ही जानते हैं। इफको ग्लैमरस शहरों की बजाय गांवों में अपना ज्यादा काम करती है और यह इसके कामकाज के बारे में लोगों की कम जानकारी की वजह हो सकती है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">सहकारिता की दुनिया में व्यापक अनुभव रखने वाले डॉ.&nbsp;अवस्थी उन चार सदस्यों में से एक थे जिन्होंने " एग्रीकल्चर एंड रूरल प्रास्परिटी थ्रू कोआपरेटिव एंड फार्मर्स कलेक्टिव्ज" विषय से संबंधित पैनल में हिस्सा लिया। उनके अलावा इस पैनल में नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद, केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के सचिव देवेंद्र कुमार सिंह और नेशन प्रॉडक्टिव काउंसिल (एनपीसी) के डायरेक्टर जनरल व एनसीडीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप कुमार नायक शामिल थे। डॉ. अवस्थी ने <strong>रूरल व़ॉय</strong>स &nbsp;के एडिटर- इन- चीफ हरवीर सिंह को उनके रूरल व़ॉयस &nbsp;सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि मुझे खुशी है कि गांव की दबी हुई आवाज&nbsp; इस मीडिया प्लेटफार्म से उठेगी और <strong>रूरल वॉयस</strong> इस दिशा में लगातार काम कर रहा है।</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि इफको ने अपने संसाधनों का विकास किया है जो<span> एक अनूठी उपलब्धि है। डॉ. अवस्थी ने कहा कि वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनिटर ने इफको को नंबर 1 और अमूल को नंबर 2 का दर्जा दिया है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि देश को आत्मनिर्भर &nbsp;बनाने के लिए हमे सोचने के तरीके को बदलने की जरूरत है। हमारे अंदर विभिन्न मॉडलों के साथ प्रयोग करने की इच्छा होनी चाहिए। हर मॉडल सफल नहीं हो सकता लेकिन जो मायने रखता है वह है सोचने का तरीका<span>।</span></p>
<p style="text-align: justify;">अवस्थी ने इफको के नैनो यूरिया के बारे में बताया किअगर नैनो टेक्नोलॉजी का उपयोग दवा और अंतरिक्ष क्षेत्र में हो सकता है <span>तो कृषि में क्यों नहीं </span>? <span>और इसलिए हमने नैनो यूरिया विकसित किया। इसने देश के 6,000 करोड़ रुपये बचाए हैं। यह इस बात का एक उदाहरण है कि कैसे सहकारी समितियों ने देश की समृद्धि में योगदान दिया है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">डॉ. अवस्थी ने कहा कि इफको ने छह साल पहले रूरल कोआपरेटिव डेलवपमेंट प्लेटफार्म शुरू किया जिसके जरिये&nbsp; बिना किसी अतिरिक्त ढुलाई खर्च के<span> किसानों को आवश्यक सामान पहुंचाता जाता है। लेकिन यह हम किसी तरह का घाटा सहकर नहीं कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वैल्यूवेशन बढ़ाने की धारणा से काम नहीं करते हैं । हम देश के साथ -साथ आगे बढ़ना है।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सफलता के लिए  हमें भारतीय तरीके अपनाने की जरूरत हैः डॉ. उदय शंकर अवस्थी ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केन्द्र सरकार जल्द ही  नई सहकारिता नीति लाएगी : अमित शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/central-government-will-soon-bring-cooperative-policy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 17 Dec 2021 22:48:34 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/central-government-will-soon-bring-cooperative-policy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सहकारिता को मजबूत करने के लिए पारदर्शी चुनाव और बिना भेदभाव के ऑडिट हो तभी इस आंदोलन को गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि सरकार एक नई सहकारिता नीति लाने की तैयारी कर रही है। कुछ ही समय में सहकारिता मंत्तालय के जरिए इसकी प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा। ऐसे में सहकारिता व्यवस्था अच्छे से काम कर सके&nbsp; यह बातें केन्द्रीय सहकारिता मंत्री व गृह मंत्री अमित शाह ने लखनऊ में आयोजित सहकार भारती के 7<span>वें राष्ट्रीय अधिवेशन में देश के </span>600 <span>से ज्यादा जिले से आए तीन हजार से अधिक प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कही।</span>&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि 10 से 15 <span>वर्ष में सहकारिता की हर गांव में सहभागिता हो इसकी तैयारी करनी होगी। इसके लिए तीन हिस्सों में रणनीति बनानी होगी। जिसमें सहकारिता की दृष्टि से विकसित राज्य</span>, <span>विकसित होते राज्य जैसे यूपी समेत अन्य को जोड़ना होगा।&nbsp; उन्होने कहा </span>&nbsp;सभी प्राथमिक कृषि समितियों को कम्प्यूटरीकृत किया जाएगा। पूरी व्यवस्था पारदर्शी होगी। जल्द ही बदलाव होंगे। वेबसाइट पर सुझाव के लिए डेढ़ माह का समय दिया जाएगा। जल्द ही मसौदा तैयार कर लिया जाएगा। समाज इसे ठीक से तभी कम करेगा जब हम प्राथमिक सदस्य को प्रशिक्षित करेंगे। प्राकृतिक खेती के लिए सहकारिताओं को भी आगे आना होगा।आगे अपने संबोधन में कहा- हम इस पर भी योजना बना रहे हैं। सहकारी समितियों को अब द्वितीयक नहीं माना जाएगा। न तो साम्यवाद और न ही पूंजीवाद सभी का विकास कर सकता है। सहकारिता ही सबको समान रूप से विकसित करेगी। गांव में जहां सोसायटी नहीं है वहां नई व्यवस्था की जाएगी। समस्या का समाधान होना चाहिए। सहकार भारती को समाधान पर काम करना चाहिए।</p>
<p style="text-align: justify;">सहाकारिता मंत्री ने कहा कि कई महापुरुषों ने सहकारिता को जिस तरह देश की आत्मा बनाने का काम किया है। उस सहकारिता का योगदान अगर देखना है लिज्जत पापड़, <span>अमूल का दूध</span>, <span>किसानों को मिलने वाली इफको खाद हैं यह सबमें सहकारिता का सफल योगदान है। उन्होंने बताया कि </span><span>दूध की खरीद और उत्पादन में </span>20 <span>फीसदी शेयर</span>, <span>धान की खरीद में </span>20 <span>फीसदी शेयर सहकारिता का है। उन्होंने कहा कि यह कितनी बड़ी व्यवस्था है। इसकी कमाई की बड़ी मात्रा किसी की जेब में नहीं जाती बल्कि बैंक के खाते में जमा हो जाती है। सहकारिता का योगदान और बड़ा होने वाला है। इस व्यवस्था में छोटे से छोटे व्यक्ति को काम दिलाने और उसको रोजगार दिलाया जा सकता है। आर्थिक विकास का फायदा अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे यही सहकारिता का लक्ष्य है। मोदी जी ने जब सहकारिता मंत्तालय बनाया तो कई संगठन इसमें जुड़कर काम कर रहे हैं। गुजरात</span>, <span>कर्नाटक</span>, <span>यूपी</span>, <span>बिहार जैसे कई राज्यों में काम कर रहे हैं।&nbsp;</span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ केन्द्र सरकार जल्द ही  नई सहकारिता नीति लाएगी : अमित शाह ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको ने किसानों को ट्रेनिंग देकर ड्रोन  का ग्रीन पायलट बनाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-made-green-pilot-of-drone-by-training-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 10 Dec 2021 22:42:09 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-made-green-pilot-of-drone-by-training-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) ने WOW गो ग्रीन के सहयोग से कृषि ड्रोन के उपयोग पर दस दिवसीय गहन प्रशिक्षण का आयोजन किया। जिसमे किसान प्रतिभागियों को जो पहले कभी किसी ड्रोन को नहीं छुआ था, लेकिन कुछ दिनों के प्रशिक्षण के बाद उन्होंने इसे कुशलता से उड़ाना शुरू कर दिया। कृषि ड्रोन के उपयोग में अच्छी तरह से प्रशिक्षित प्रतिभागियों को ग्रीन पायलट नाम दिया गया था। इन ग्रीन पायलटों ने ना केवल अपने खेतों में इस तकनीक का उपयोग करने बल्कि इसके बारे में जागरूकता फैलाने और अन्य किसानों के साथ अपने-अपने क्षेत्रों में जानकारी साझा करने का संकल्प लिया। इस आयोजन का &nbsp;उद्देश्य गांव के लोगों में उद्यमिता का विकास करना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों, उद्यमियों, एफपीओ और सहकारी समितियों सहित विभिन्न राज्यों के कुल 36 प्रतिभागियों ने भाग लिया। किसानों के लिए देश में पहली बार इस अनोखा आयोजन किया गया। पहले स्टीमुलेटर्स, फिर&nbsp; छोटे ड्रोन और अंत में पूर्ण विकसित कृषि ड्रोन के बारे में प्रशिक्षण दिया गया । &nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इफको के एमडी डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि कृषि में ड्रोन का उपयोग आधुनिक उन्नत कृषि की दिशा में एक अग्रणी कदम है। इसके उपयोग से न केवल किसानों की लागत कम होगी बल्कि फसलों के उत्पादन और गुणवत्ता को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। ग्रामीणों को उद्यमिता के नए अवसर मिलेंगे। इस प्रकार ड्रोन तकनीक में प्रशिक्षण किसानों के लिए बहुत फायदेमंद होगा।</p>
<p style="text-align: justify;">इफको, विपणन निदेशक, योगेंद्र कुमार, जिन्होंने पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम को &nbsp;बड़ी सुगम तरीके संचालन किया उन्होनें, कहा कि यह कार्यक्रम कृषि में नई तकनीकों के उपयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा। जब सरकार कृषि ड्रोन के उपयोग पर नीति लाने जा रही है, तो किसानों को इस तकनीक के बारे में प्रशिक्षित करना आवश्यक है। ताकि आधिकारिक घोषणा होने पर लोग इसे स्वीकार कर सकें। कृषि ड्रोन द्वारा 2.5 एकड़ भूमि पर 15 मिनट में उर्वरक का छिड़काव किया जा सकता है</p>
<p style="text-align: justify;">केंद्रीय कृषि मंत्रालय के उर्वरक विभाग के अवर सचिव सचिन कुमार ने भी एफएमडीआई की अपनी यात्रा के दौरान ग्रीन पायलटों को संबोधित किया और इफको के प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना की। इफको के संयुक्त प्रबंध निदेशक राकेश कपूर ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र में कहा कि इफको द्वारा विकसित व्यवसाय मॉडल के उद्यमियों के सफल होने की अधिक संभावना है।</p>
<p style="text-align: justify;">इफको का एफएमडीआई हजारों किसानों और कृषि प्रेमियों को कृषि के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण प्रदान करता है। यह देश के सर्वश्रेष्ठ किसान प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। इसमें 100 से अधिक प्रशिक्षुओं के लिए आवासीय सुविधाएं हैं। इफको, आईसीएआर सहित अन्य प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ और वैज्ञानिक नियमित रूप से यहां आते हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको ने किसानों को ट्रेनिंग देकर ड्रोन  का ग्रीन पायलट बनाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आईसीए&amp;#45;एशिया प्रशांत के अध्यक्ष बने डॉ. चंद्रपाल सिंह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/dr-chandrapal-singh-got-elected-chairman-ica-asia-pacific.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 06 Dec 2021 21:38:00 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/dr-chandrapal-singh-got-elected-chairman-ica-asia-pacific.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">डॉ चंद्रपाल सिंह यादव को &nbsp;इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस (आईसीए) &nbsp;के एशिया प्नशांत क्षेत्र का अध्यक्ष चुना गया है। डॉ. यादव वर्तमान में कृषक भारती कोआपरेटिव लिमिटेड (कृभको) के अध्यक्ष हैं। उन्होंने दक्षिण कोरिया के सिओल में 30 नवंबर को हुए चुनाव में यह जीत हासिल की। पहली बार किसी भारतीय को इस पद के लिए चुना गया है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इस चुनाव में डॉ. यादव को 185 वोट मिले थे जबकि जापान के उनके प्रतिद्वंद्वी चितोस अराय को सिर्फ 83 वोट मिले थे.।अंतरराष्ट्रीय सहकारिता की राजनीति में भारत की सौ से अधिक मतों से जीत बहुत बड़ी बात है।</p>
<p style="text-align: justify;">भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) की संचालन परिषद के सदस्य डॉ. यादव इस बार आईसीए के इस पद के लिए चुनाव लड़ रहे थे। अंतर्राष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (आईसीए) एक विश्व स्तरीय सहकारी संघ है, <span>जो दुनिया भर में सहकारी आंदोलन का प्रतिनिधित्व करता है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इसकी स्थापना 1895 में दुनिया भर में सहकारी समितियों को एकजुट करने के लिए की गई थी। वर्तमान में 112 देशों की कुल 318 सहकारी समितियां इसके सदस्य हैं। जिसके माध्यम से यह संगठन दुनिया भर में लगभग एक अरब व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करता है।</p>
<p style="text-align: justify;">गठबंधन के सदस्य अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में काम करते हैं, <span>जिनमें कृषि</span>, <span>बैंकिंग</span>, <span>उपभोक्ता</span>, <span>मत्स्य पालन</span>, <span>स्वास्थ्य</span>, <span>आवास</span>, <span>बीमा और श्रम शामिल हैं। सहकारी समितियां अपने सदस्यों के स्वामित्व वाले मूल्य आधारित व्यवसाय हैं</span>, <span>चाहे वे ग्राहक हों</span>, <span>कर्मचारी हों या निवासी हों</span>, <span>सदस्यों को व्यवसाय में समान अधिकार और हिस्सेदारी मिलती है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">आईसीए में 20 शासी सदस्यीय बोर्ड, <span>एक महासभा</span>, <span>चार क्षेत्र (अफ्रीका</span>, <span>यूरोप</span>, <span>एशिया-प्रशांत और अमेरिका के लिए एक-एक)</span>, <span>क्षेत्रीय संगठन और विषयगत समितियां शामिल हैं।लगभग 34 देशों के 100 से अधिक सदस्यों के साथ एशिया प्रशांत अंतर्राष्ट्रीय सहकारी गठबंधन का गठन किया गया था। आईसीए एशिया पैसिफिक का मुख्यालय वर्तमान में नई दिल्ली में है।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>डॉ. यादव अपने गांव में प्राथमिक सहकारी समितियों से शुरू होकर भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) के अध्यक्ष के पद तक पहुंचने के लिए 30 से अधिक वर्षों से भारतीय सहकारिता आंदोलन के अग्रणी नेता रहे हैं। जिन्होंने हाल के दिनों में राज्यसभा के सदस्य के रूप में कार्य किया। इससे पहले</span>, <span>वह में झांसी निर्वाचन क्षेत्र से </span>14<span> वीं लोकसभा के सदस्य थे ।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आईसीए-एशिया प्रशांत के अध्यक्ष बने डॉ. चंद्रपाल सिंह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वर्ल्ड कोआपरेटिव मॉनीटर की रिपोर्ट में  इफको शीर्ष सहकारी संस्था घोषित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-ranks-top-among-300-cooperatives-in-the-world.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 02 Dec 2021 19:26:14 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-ranks-top-among-300-cooperatives-in-the-world.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>नई दिल्ली, 2 दिसम्बर 2021 </strong></em></p>
<p>इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) को लगातार दूसरे वर्ष दुनिया की शीर्ष 300 सहकारिताओं में पहला स्थान मिला है। यह रैंकिंग प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर कारोबार के अनुपात पर आधारित है। यह दर्शाता है कि इफको राष्ट्र के सकल घरेलू उत्पाद और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इंटरनेशनल कोआपरेटिव एलायंस की 10वीं वार्षिक वर्ल्ड कोआपरेटिव मॉनीटर रिपोर्ट के 2021 संस्करण के अनुसार यह देश के सकल घरेलू उत्पाद एवं आर्थिक विकास में इफको के कारोबारी योगदान को दर्शाता है। कुल कारोबार के मामले में इफको पिछले वित्तीय वर्ष के अपने 65वें स्थान के मुकाबले 60वें स्थान पर पहुंच गई है।<br />इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कहा कि "यह इफको और भारतीय सहकारिता आंदोलन के लिए गौरव का क्षण है। इफको में, हम किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि देश भर के किसानों का विकास सुनिश्चित हो सके और सहकारी आंदोलन को मजबूत किया जा सके। हम नवाचार में विश्वास करते हैं क्योंकि यही सफलता की कुंजी है। इस क्रम में हम कृषि क्षेत्र के विकास हेतु नैनो तकनीक आधारित &lsquo;इफको नैनो यूरिया तरल&rsquo; से शुरू करते हुए अन्य वैकल्पिक उर्वरक ला रहे हैं। भारतीय किसानों द्वारा &lsquo;इफको नैनो यूरिया तरल&rsquo; का जोरदार स्वागत किया गया है जिससे हमारा संकल्प और मजबूत हुआ है। हम जल्द ही इफको नैनो डीएपी और नैनो तकनीक आधारित अन्य उत्पादों को लॉन्च करेंगे। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर मैं इफको और देश की पूरी सहकारी बिरादरी को बधाई देता हूँ।"<br />इस रिपोर्ट में इफको को मिला स्थान &lsquo;मेक इन इंडिया&rsquo; परियोजना को बढ़ावा देने तथा &lsquo;आत्मानिर्भर भारत और आत्मानिर्भर कृषि&rsquo; के सपने को साकार करने की दिशा में भारतीय सहकारिता के उत्साहजनक कदम को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के &lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; के ध्येय से प्रेरणा लेते हुए इफको नैनो तकनीक आधारित &lsquo;इफको नैनो यूरिया तरल&rsquo; के सफल लॉन्च के साथ नवाचार के पथ पर अग्रसर है। नैनो यूरिया तरल एक ऐसा उत्पाद है जिसमें परंपरागत कृषि के तरीकों में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की क्षमता है। नवगठित केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के मंत्री अमित शाह से मिल रहे सहयोग और समर्थन से हमारे प्रयासों को गति मिली है। &lsquo;नैनो डीएपी&rsquo; और अन्य नवोन्मेषी उत्पादों के साथ, इफको वैश्विक सहकारी मंच पर अपनी उपस्थिति को और भी अधिक मजबूत करते हुए पहले से अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है। इफको की रैंकिंग में हुआ सुधार इसका परिचायक है।<br />इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस&nbsp; और यूरोपियन रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑन कोऑपरेटिव एंड सोशल एंटरप्राइजेज ने आज एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार के दौरान वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनिटर का 2021 संस्करण जारी किया। यह 10वीं वार्षिक रिपोर्ट है जो दुनिया भर की सबसे बड़ी सहकारिताओं और उनके आर्थिक और सामाजिक प्रभाव की पड़ताल करने के साथ-साथ शीर्ष 300 सहकारिताओं की रैंकिंग, सेक्टर रैंकिंग और वर्तमान वैश्विक चुनौतियों : कोविड और जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिक्रिया का विश्लेषण करती है।<br /><br /></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ वर्ल्ड कोआपरेटिव मॉनीटर की रिपोर्ट में  इफको शीर्ष सहकारी संस्था घोषित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कथाकार शिवमूर्ति को मिलेगा श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य पुरस्कार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/shrilal-shukla-smriti-iffco-literary-award-for-storyteller-shivamurti.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 27 Nov 2021 23:19:23 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/shrilal-shukla-smriti-iffco-literary-award-for-storyteller-shivamurti.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div dir="auto" style="text-align: justify;">उर्वरक क्षेत्र की अग्रणी सहकारी संस्था इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) द्वारा वर्ष 2021 के &lsquo;श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान&rsquo; के लिए कथाकार&nbsp; शिवमूर्ति के नाम की घोषणा की गई है। सुप्रसिद्ध साहित्यकार&nbsp; चित्रा मुद्गल की अध्यक्षता वाली चयन समिति में&nbsp; मधुसूदन आनंद, विष्णु नागर, जयप्रकाश कर्दम, मुरली मनोहर प्रसाद सिंह और डॉ. दिनेश कुमार शुक्ल शामिल थे। इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने शिवमूर्ति को बधाई दी है।साल 2021 के श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान के लिए ग्रामीण जन-जीवन पर लिखने वाले कथाकार शिवमूर्ति को चुनने के लिए उन्होंने सम्मान चयन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया है ।</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">शिवमूर्ति ने अपने कथा साहित्य में ग्रामीण जीवन की विशेषताओं, विषमताओं और अंतर्विरोधों का यथार्थ चित्रण किया है। उनकी रचनाओं में सामंती व्यवस्था की विद्रूपता और ग्रामीण जीवन का कटु यथार्थ खुलकर सामने आता है।&nbsp; उनकी &lsquo;कसाईबाड़ा&rsquo;, &lsquo;अकालदण्ड&rsquo;, &lsquo;तिरिया चरित्तर&rsquo; आदि कहानियों में महिलाओं, दलितों और कमजोर तबके के लोगों की विवशताओं और संघर्षों&nbsp; की सशक्त अभिव्यक्ति हुई है। अपनी रचनाओं के माध्यम से शिवमूर्ति ने यह दिखाया है कि किस प्रकार पितृसत्तात्मक समाज में स्त्रियाँ गाँव, देश, समाज और यहाँ तक कि घर में भी सुरक्षित नहीं हैं।&lsquo;अकालदण्ड&rsquo; की सुरजी या फिर &lsquo;केशर-कस्तूरी&rsquo; की केशर, इनके साथ जो कुछ भी घटित होता है उनमें पितृसत्तात्मक&nbsp; समाज की क्रूरतम विकृतियाँ हैं।</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">&nbsp;</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">शिवमूर्ति की कृतियों में त्रिशूल, तर्पण, आखिरी छलाँग (उपन्यास) तथा केशर कस्तूरी (कहानी संग्रह: ) प्रमुख हैं। इनकी कहानी &lsquo;कसाईबाड़ा&rsquo; और &lsquo;तिरिया चरित्तर&rsquo; पर फिल्म भी बनी है जबकि कई कहानियां देशी-विदेशी भाषाओं में अनूदित हुईं हैं ।</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">&nbsp;</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">मूर्धन्य कथाशिल्पी श्रीलाल शुक्ल की स्मृति में वर्ष 2011 में शुरू किया गया यह सम्मान प्रत्येक वर्ष ऐसे हिन्दी लेखक को दिया जाता है जिसकी रचनाओं में मुख्यत: ग्रामीण व कृषि जीवन तथा हाशिए के लोग, विस्थापन आदि से जुड़ी समस्याओं, आकांक्षाओं और संघर्षों का चित्रण किया गया हो।</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">&nbsp;</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">अब तक यह सम्मान विद्यासागर नौटियाल, शेखर जोशी, संजीव, मिथिलेश्वर, अष्टभुजा शुक्ल, कमलाकांत त्रिपाठी, रामदेव धुरंधर, रामधारी सिंह &lsquo;दिवाकर&rsquo;, महेश कटारे और रणेंद्र को दिया गया है। सम्मानित साहित्यकार को एक प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र तथा ग्यारह लाख रुपये की राशि का चैक प्रदान किया जाता है।&nbsp; शिवमूर्ति को यह सम्मान 31 जनवरी, 2022&nbsp; को&nbsp; प्रदान किया जाएगा।</div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/11/image_750x500_61a26f50a4a43.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कथाकार शिवमूर्ति को मिलेगा श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य पुरस्कार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारी समितियों के पास होंगे बेहतर कार्यप्राणली के मॉडल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperatives-to-have-best-practices-models-soon.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 21 Nov 2021 14:09:44 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperatives-to-have-best-practices-models-soon.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पांच ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र द्वारा सहकारी क्षेत्र को एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में प्रोत्साहित किया जा रहा है<span>, </span>इन संस्थाओं के भीतर उनके सुचारू और पारदर्शी कामकाज के लिए एक मानक के रूप में माना जाने वाला सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का एक सेट विकसित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।<span>&nbsp; </span></p>
<p>इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए<span>, </span>राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम<span> (</span>एनसीडीसी<span>) </span>द्वारा सहकार प्रज्ञा के रूप में संकल्पित<span>&nbsp; '</span>सहकारिता के लिए अच्छी अंतर्राष्ट्रीय कार्यप्रणालियां<span>' </span>पर पहला विचार<span>-</span>मंथन सत्र गुड़गांव में लिनाक परिसर में प्रौद्योगिकियों<span>, </span>सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का पता लगाने और सहकारी क्षेत्र के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आयोजित किया गया।<span>&nbsp;</span></p>
<p>इस अवसर पर अपनी बात रखते हुए<span>, </span>एनसीयूआई के अध्यक्ष दिलीप संघानी ने इस बात पर जोर दिया कि सहकारिता व्यक्ति की अपनी आय बढ़ाने में एक बड़ी भूमिका निभाएगी और इस तरह भारत प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुसार आत्मनिर्भर बनेगा।<span>&nbsp; </span>इसलिए हर सरकारी योजना इन संस्थाओं के संदर्भ में तैयार की जानी चाहिए ।</p>
<p>सत्र में मुख्य अतिथि रहे अध्यक्ष दिलीप संघानी ने&nbsp; कहा कि 'सबका साथ सबका विकास' का सपना सहकारी समितियों के माध्यम से ही संभव था, जिससे देश के लगभग 95 प्रतिशत किसान लगभग 8.50&nbsp; लाख&nbsp; सहकारी समितियों में काम कर रहे हैं।</p>
<p>सहकार प्रज्ञा जिसे एनसीडीसी द्वारा शुरू किया गया, एक मंच है जिसका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र के अवसरों और दायरे को समझने से लाभान्वित होने के लिए ज्ञान के पारस्परिक आदान-प्रदान और विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं को शामिल करना है। नई सहकारी समितियों की मदद करना।</p>
<p style="text-align: justify;">एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप नायक ने कहा कि ज्ञान के आदान-प्रदान से 21वीं सदी के तकनीकी समर्थन समझने और शामिल करने में भी मदद मिलेगी, जिससे सहकारी समितियों की दक्षता और उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और सभी क्षेत्रों में मूल्य में वृद्धि हो सकती है और आपूर्ति श्रृंखला में वृद्धि हो सकती है। .</p>
<p style="text-align: justify;">वी श्रीनिवास, विशेष सचिव, डीएआर और पीजी एंड डीजी, एनसीजीजी ने अपने भाषण में व्यक्तिगत पहचान रखने वाली सभी सहकारी समितियों के लिए वन स्टॉप पोर्टल का सुझाव दिया, यहां तक ​​कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के लिए सरकार द्वारा की गई विभिन्न ई-पहलों का भी जिक्र किया। जेम, आधार कार्ड, डिजिटल हेल्थ मिशन और माई जीओवी प्लेटफॉर्म का डिजिटल परिवर्तन।</p>
<p style="text-align: justify;">सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश वैद्य ने यह भी कहा कि सहकारिता "परिवर्तन के अदृश्य एजेंट" हैं और देश को आत्मनिर्भर बनाने और भारत को विश्व मानचित्र पर पहले स्थान पर रखने के प्रधान मंत्री के सपने को साकार करने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने सहकारी समितियों की आय बढ़ाने और विभिन्न नवीन योजनाओं का नेतृत्व करने में मदद करने के लिए एनसीडीसी के एमडी नायक की प्रतिबद्धता की भी सराहना की।</p>
<p style="text-align: justify;">कैप्टन प्रो. पवनेश कोहली, सलाहकार, एनसीडीसी द्वारा आयोजित संवाद सत्र के दौरान, सतीश मराठे, सदस्य, केंद्रीय बोर्ड, आरबीआई और ज्योतिंद्र मेहता जैसे विशेषज्ञों ने भी भौगोलिक क्षेत्रों में काम करने और तैयार तरीकों, अनुशंसित मॉडल और प्रक्रियाओं पर चर्चा की जो बहुपक्षीय निकाय हैं। जैसे आईसीए, एफएओ।, एनईडीएसी द्वारा प्रस्तावित, विश्व बैंक, यूएनडीपी, आईएलओ, यूनेस्कोपी, ओईसीडी आदि पर चर्चा की गई।</p>
<p>नायक ने बाद में कहा कि हितधारकों से नवंबर के अंत तक अपने सुझाव प्रस्तुत करने का अनुरोध किया गया है, जिसे उचित विचार के लिए संकलित किया जाना चाहिए। उनके इनपुट के आधार पर, हम सर्वोत्तम प्रथाओं का एक सेट विकसित करेंगे जो सहकारी समितियां अपनी आवश्यकता और सुविधा के अनुसार अपना सकती हैं।</p>
<p>&nbsp;सत्र के दौरान, क्षेत्र में सफल संस्थानों की सर्वोत्तम प्रथाओं को भी प्रदर्शित किया गया। इनमें केरल का प्रतिनिधित्व करने वाले किशोर, यूएलसीसीएस, यूएलसीसीएस, नेफेड के एमडी संजीव चड्ढा और उत्तराखंड सरकार के सचिव डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम द्वारा प्रतिनिधित्व प्राथमिक सहकारी समितियों में शामिल हैं।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारी समितियों के पास होंगे बेहतर कार्यप्राणली के मॉडल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश  का पहला  मत्स्यपालन बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर  लॉन्च]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/country’s-first-fisheries-business-incubator-launched.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 16 Nov 2021 22:18:07 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/country’s-first-fisheries-business-incubator-launched.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">राष्टीय सहकारी विकास निगम ( एनसीडीसी) द्वारा लिनाक गुरुग्राम में देश का अपनी तरह के पहले 3.23 करोड़ की लागत वाले&nbsp; मत्स्य पालन बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर ( लिफिक) स्टार्ट-अप का उद्घाटन केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री &nbsp;पुरुषोत्तम रूपाला ने किया। यह सेंटर मछली पालन से जुडे़ उद्यमियों के बीच उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने के लिए मौजूदा बाजार परिस्थिति के अनुसार उनके बिजनेस को बढ़ाने में काफी मददगार होगा। &nbsp;<br />केंद्रीय मंत्री रूपाला ने कहा कि फिशरी के क्षेत्र में यह इनक्यूबेशन सेंटर मील के पत्थर के रूप में कार्य करेगा । इसके माध्यम से भविष्य में फिशरी क्षेत्र को और बड़ा करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए पिछले साल शुरू की गई केन्द्र सरकार की प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना &nbsp;(पीएमएमएसवाई) &nbsp;के तहत मछली पालन करने वालों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।&nbsp;<br />रूपाला ने कहा कि इनक्यूबेशन सेंटर पर मछली पालन करने वाले उद्यमी को ट्रेनिंग तथा उनके इन्टरप्रंयोर आइडिय़ा को सशक्त बिजनेस मॉडल में बदलने में पूरी सहायता करेगा। अगर कोई उद्यमी इस सेक्टर में बड़ा कार्य करना चाहता है तो सीड मनी को शेयर बांटने में भी मदद करेगी। &nbsp;<br />शुरूआत के लिए लिफिक की एक कार्यान्वयन एजेंसी एनसीडीसी ने&nbsp; चार राज्यों- बिहार, हिमाचल प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से दस इनक्यूबेटस के पहले बैच की पहचान की है। इनमें से 6 नव-निर्मित मछली किसान उत्पादक संगठनों से हैं, जिन्हें पीएमएमएसवाईके तहत वित्तीय अनुदान का समर्थन प्राप्त है।&nbsp;<br />उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र &nbsp;की तरह मत्स्य पालन &nbsp;के लिए सहकारी सहकारी समितियां अभी तक नहीं हैं। &nbsp;लेकिन मात्स्यिकी क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी है।<br />केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय को अलग मंत्रालय इस लिए बनाया गया कि विभिन्न क्षेत्रों में सहकारी समितियों की स्थापना की जा सके। मत्स्य पालन सहित&nbsp; कृषि के अन्य सेक्टर को सहाकारिता से &nbsp;बढ़ावा मिल सके।&nbsp;<br />केंद्रीय मंत्री ने यह भी साझा किया कि साथ ही, इस दिशा में, हम जल्द ही किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के आधार पर मछुआरों और पशुधन व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी क्रेडिट कार्ड प्रदान करने के लिए एक अभियान शुरू करेंगे।<br />मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री डॉ. एल मुरुगन ने कहा कि केंद्र यह सुनिश्चित करेगा कि मत्स्यपालन क्षेत्र सामान्य रूप से केवल व्यवसाय न करें बल्कि हितधारकों की आय को बढ़ाने में मदद करें । उन्होंने समिति के सर्वांगीण विकास के लिए प्रधान मंत्री के मार्गदर्शन में मत्स्य पालन इनक्यूबेशन केंद्र की स्थापना सहित पहली बार उठाए गए विभिन्न नवीन कदमों को सूचीबद्ध किया ।<br />&ldquo;मत्स्य पालन भारत में उन्नति करने वाला उद्योग है, जो वार्षिक रूप से 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। माननीय प्रधान मंत्री ने वर्ष 2025 तक 22 मिलियन टन मछली उत्पादन और एक लाख करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य रखा है। यह अगले चार वर्षों के भीतर हासिल करने के लिए एक बहुत लंबा लक्ष्य है, क्योंकि वर्तमान में मछली उत्पादन 130 लाख टन और निर्यात 46,000 करोड़ रुपये है ।<br />केंद्रीय मत्स्य सचिव&nbsp; जतिंद्र नाथ स्वैन ने कहा कि भारत में मत्स्य पालन के लिए इस पहले व्यवसायिक इनक्यूबेशन केंद्र की स्थापना इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक कदम है। हमें स्टार्टअप्स के लिए बहुत सारे इनोवेशन को बढ़ावा देने, प्रोत्साहन देने और लक्ष्य हासिल करने के लिए मात्स्यिकी क्षेत्र में सहकारिताओं को प्रोत्साहित करने पर काम करने की जरूरत है।मत्स्य पालन क्षेत्र में कुल मिलाकर लगभग 30,000 सहकारिताएं हैं ।<br />एनसीडीसी के एमडी संदीप नायक ने लॉन्च किए गए नए केंद्र के बारे में कहा कि यह एक विशुद्ध रूप से व्यावसायिक केंद्र है और न कि केवल एक प्रौद्योगिकी केंद्र या एकसीलरेटर है। उन्होंने यह भी कहा कि यह अनूठी पहल मुख्य रूप से उद्यमशीलता के विचारों को व्यावसायिक मॉडल में परिवर्तित करने पर केंद्रित होगी और फिर व्यवसाय संचालन की शुरुआत में सहयोग करेगी। लिफिक इस क्षेत्र में स्थायी राजस्व सृजन और व्यवसाय संचालन के उद्देश्य से बाजार की गतिशीलता के असंख्य पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए उद्यमों को भी सहयोग प्रदान करेगा ।<br />एक महत्वपूर्ण इनपुट, क्रेडिट लिंकेज, सफल इन्क्यूबेटरों को प्रदान किया जा सकता है जो एनसीडीसी से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री रूपाला ने लिनाक परिसर में सरदार पटेल सभागार का भी उद्घाटन किया। कार्यक्रम के अवसर पर पूर्व केंद्रीय मत्स्य सचिव डॉ राजीव रंजन, एरोमा मैजिक अध्यक्ष ब्लॉसम कोचर,एनएफडीबी के मुख्य कार्यकारी डॉ सी सुवर्णा, नेडैक बैंकॉक के निदेशक डॉ के.आर. सालिन और सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश वैद्य उपस्थित थे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश  का पहला  मत्स्यपालन बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर  लॉन्च ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अगले पांच साल में तीन लाख पीएसी स्थापित करने का लक्ष्य:  बीएल वर्मा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/aim-to-set-up-3-lakh-pacs-in-the-next-five-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 15 Nov 2021 23:23:46 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/aim-to-set-up-3-lakh-pacs-in-the-next-five-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>नई&nbsp; दिल्ली</strong></em></p>
<p>केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री ने कहा है कि सरकार अगले पांच वर्षों में तीन लाख पीएसी स्थापित करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के मद्देनजर प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि एक सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को डीसीसीबी और राज्य सहकारी बैंकों से जोड़ा जाएगा, जिसमें नाबार्ड की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। <span>भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) द्वारा आयोजित &nbsp;68 वें&nbsp; अखिल&nbsp; सहकारी&nbsp; सम्मेलन&nbsp; और&nbsp; सहकार मेला&nbsp; 2021 के उद्घाटन&nbsp; समारोह को संबोधित करते हुए&nbsp; उन्होंने यह बातें कहीं। उन्होंने सहकारी क्षेत्र को और बढ़ावा देने के लिए सहकारी समितियों के सामने आने वाली समस्याओं को हल करने की जरूरत पर बल दिया।</span></p>
<p>वर्मा ने कहा कि सहकारी बैंकों के कामकाज में आरबीआई के हस्तक्षेप और नियंत्रण को बढ़ाने के संबंध में कई सहकारी संगठनों द्वारा आवाज उठाई गई है। इस <span>उन्होंने कहा कि सरकार के परामर्श से आरबीआई और अन्य संस्थान जल्द ही सहकारी समितियों के पक्ष में फैसले लेकर आएंगे।</span></p>
<p>वर्मा ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में सहकारी क्षेत्र की भूमिका को समझते हुए नया सहकारिता मंत्रालय बनाया गया है। सहकारी समितियां न केवल छोटे बल्कि बड़े व्यवसाय भी चला सकती हैं।</p>
<p>सहकारी बैंकों को वर्ष भर बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकी के साथ अपग्रेड करने की जरूरत &nbsp;है। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों में पेशेवर तरीके से काम करने के लिए कम्प्यूटर प्रशिक्षण में तेजी लाने की भी जरूरत है।उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय का गठन देश में सहकारी आंदोलन को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 30 करोड़ से अधिक सदस्यों वाली लगभग 8.60 लाख सहकारी समितियों के मौजूदा स्तर से करने के उद्देश्य से किया गया है। वर्मा ने 68वें अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह के उद्घाटन के अवसर पर एनसीयूआई की मासिक पत्रिका '<span>सहकारिता</span>' <span>का भी अनावरण किया।</span></p>
<p>&nbsp;इस अवसर पर एनसीयूआई के अध्यक्ष दिलीप संघानी ने कहा कि सहकारी समितियों के स्वायत्त और पेशेवर कामकाज के लिए सहकारी समितियों पर नई राष्ट्रीय नीति लाने का सरकार का निर्णय बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नए सहकारिता मंत्रालय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकार योजना और बजट निर्माण में सहकारिता की उपेक्षा न करे।अपने संबोधन में सहकारी क्षेत्र के सामने आने वाली बाधाओं को सूचीबद्ध किया और सहकारी बैंकों के प्रति रिजर्व बैंक के भेदभावपूर्ण रवैये का मुद्दा उठाया।उन्होंने कहा, "<span>निजी बैंकों की तुलना में रिजर्व बैंक का सहकारी बैंकों के प्रति अलग रवैया है। निजी क्षेत्र के विपरीत</span>, <span>एक छात्र को सहकारी बैंक से विदेश में अध्ययन के लिए शिक्षा ऋण पर सब्सिडी नहीं मिलेगी। क्या वह सही है</span>?&nbsp;</p>
<p>संघानी ने कहा कि सहकारिता के प्रति '<span>असमानता</span>' <span>का रवैया है और उम्मीद है कि नए मंत्रालय की स्थापना के साथ यह बदल जाएगा।</span>उन्होंने कहा कि भारत में एक भी गांव ऐसा नहीं है जहां सहकारिता काम नहीं कर रही हो। सहकारिता से ही देश का विकास संभव है, <span>लेकिन इनकम टैक्स जैसी बाधाएं आड़े आ रही हैं।</span></p>
<p>संघानी ने आशा व्यक्त की कि तैयार की जा रही नई सहकारी नीति से लोगों में देश के विकास में सहकारिता की भूमिका के बारे में विश्वास पैदा होगा और युवाओं के लिए नए रास्ते खुलेंगे।</p>
<p>एनसीयूआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुधीर महाजन ने कहा कि सहकारी समितियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान प्रभावित सहकारिता को मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि छोटे सहायता समूहों को सशक्त बनाने के लिए लगभग 41 क्षेत्रीय परियोजनाओं को लागू किया गया है, <span>दिल्ली में एनसीयूआई परिसर में युवाओं और यहां तक </span>​​कि एनसीयूआई हाटों को प्रशिक्षित करने के लिए नोएडा में एक कौशल विकास केंद्र स्थापित किया जा रहा है।पिछले तीन महीनों में अच्छी प्रतिक्रिया भी मिली है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अगले पांच साल में तीन लाख पीएसी स्थापित करने का लक्ष्य:  बीएल वर्मा ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारिताओं के लिए  मत्स्यपालन बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर  लांच होगा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/linac-ncdc-fisheries-business-incubation-centre-to-be-launched.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Nov 2021 21:50:31 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/linac-ncdc-fisheries-business-incubation-centre-to-be-launched.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;"><strong>नई दिल्ली</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मछली पालन से जुडे उद्यमियों के बीच उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने के लिए मौजूदा बाजार परिस्थिति के अनुसार एनसीडीसी द्वारा लिनाक गुड़गांव में प्रस्तावित &nbsp;मत्स्यपालन बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर ( लिफिक) स्टार्ट-अप&nbsp; का उद्घाटन केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री &nbsp;पुरुषोत्तम रूपाला द्वारा 16 नवंबर को गुरुग्राम, हरियाणा में किया जाएगा। इस समारोह में मत्स्य पालन, पशुपालन तथा डेयरी राज्य मंत्री डॉ. एल मुरुगन भी &nbsp;उपस्थित रहेंगे।</p>
<p style="text-align: justify;">रूपाला ने गुरुग्राम में लिनाक परिसर से शुरू की जा रही अनूठी पहल के बारे में यह कहा कि इस तरह के मत्स्य पालन बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर केन्द्र सरकार द्वारा&nbsp; जल्द ही देश भर में बनाए जाएंगे, जैसा कि पिछले साल शुरू की गई केंद्रीय फ्लैगशिप योजना प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएसवाई) के तहत नीली क्रांति लाने के उद्देश्य से प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत और जिम्मेदार विकास के माध्यम से कल्पना की थी।</p>
<p style="text-align: justify;">डॉ. मुरुगन ने कहा कि भारत इस क्षेत्र में नवाचार, उद्यमिता और आविष्कार को बढ़ावा देकर विश्व मत्स्य पालन मानचित्र में एक प्रमुख स्थान के रूप में उभरने के लिए कार्य कर रहा है। नवाचार और स्टार्ट-अप में तेजी लाने के लिए इस इन्क्युबेशन केंद्र की स्थापना से मैं बहुत खुश हूं।</p>
<p style="text-align: justify;">एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप नायक ने कहा कि यह अनूठी पहल मुख्य रूप से उद्यमशीलता के विचारों को बिजनेस मॉडल में बदलने पर ध्यान केंद्रित करेगी और फिर बिजनेस ऑपरेशंस के लॉन्च का समर्थन करेगी। लिफिक इस क्षेत्र मेंनस्थायी राजस्व सृजन और व्यवसाय संचालन के उद्देश्य से बाजार की असीमित गतिशीलता पर ध्यान देते हुए उद्यमों को भी संभालेगा।</p>
<p style="text-align: justify;">सबसे पहले, एनसीडीसी ने चार राज्यों से लिफिक के लिए दस इनक्यूबेट्स के पहले बैच की पहचान की है। उनमें से 6 पीएमएमएसवाई के तहत वित्तीय दिग्गज के समर्थन से नव निर्मित मछली किसान उत्पादक संगठनों से हैं। मत्स्य व्यवसाय में दिखाई गई उनकी गहरी उद्यमशीलता की रुचि के आधार पर इनक्यूबेटी चयनित होते हैं। &ldquo;</p>
<p style="text-align: justify;">वास्तव में पीएमएमएसवाई के तहत मत्स्य पालन केंद्र (एफआईसी) युवा पेशेवरों, उद्यमियों, सहकारी समितियों, संघों,प्रगतिशील मछली किसानों, मत्स्य पालन आधारित उद्योगों और अन्य संस्थाओं को प्रासंगिक इन्क्यूबेशन सहयोग करेगें जिससे उनके नवाचारों और नवीन विचारों को प्रदर्शित और व्यवसायीकरण किया जा सके।</p>
<p style="text-align: justify;"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारिताओं के लिए  मत्स्यपालन बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर  लांच होगा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारी समितियों के सुरक्षित संचालन के लिए एनसीडीसी ने साइबर सुरक्षा ढांचा  विकसित किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-develops-cyber-security-framework-to-help-cooperatives.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 09 Nov 2021 23:17:25 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-develops-cyber-security-framework-to-help-cooperatives.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">न<em><strong>ई दिल्ली</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">साइबर दुनिया में छिपे हुए अपराधियों से अपने संचालन को सुरक्षित रखने के लिए सहकारी समितियां अब राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा निर्धारित एक व्यापक साइबर-सुरक्षा ढांचे की सहायता प्राप्त कर सकती हैं। यह कदम देश भर में सभी प्राथमिक कृषि ऋण समितियों(<span>पीएसीएस) को कम्प्यूटरीकृत करने और उन्हें जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों</span>, <span>राज्य शीर्ष सहकारी बैंकों और नाबार्ड के साथ जोड़ने के उद्देश्य से एककार्य योजना तैयार करने के केंद्र के फैसले के बाद लिया गया है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इस ढांचे से सहकारी समितियों के नेटवर्क सुरक्षित करने के रूप में सुरक्षा संपत्तियों, <span>पहचान</span>, <span>संरक्षण</span>, <span>पता लगाना</span>, <span>प्रतिक्रिया देना और रिकवरी करने के संबंध में क्या करें और क्या न करें उस</span><span>के विषय में एक दिशानिर्देश प्रदान करता है । </span></p>
<p style="text-align: justify;">कोराना महामारी के बाद लोगों में डिजिटल तरीके से लेन देन व्यापक हो गया है, <span>प्रत्येक सहकारिता के लिए पर्याप्त साइबर रक्षा तंत्र होना जरूरी हो जाता है ताकि वह हैकर्स का शिकार न हों। अपनी ओर से</span>, <span>हमने रूपरेखा तैयार की है</span>, <span>जिसके मसौदे पर सहकारी क्षेत्र के हितधारकों के बीच हाल ही में हुई एक बैठक में चर्चा की गई थी और कुछ सुझावों के साथ इसे पूर्ण रूप से अपनाया गया था।</span></p>
<p style="text-align: justify;">एनसीडीसी के सहकारी संस्थानों साइबर सुरक्षा सलाहकार फोरम (सीसैफ़) के तहत हाइब्रिड माध्यम में आयोजित बैठक में एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप नायक ने कहा कि <span>साइबर सुरक्षा जोखिम के प्रबंधन पर एक संगठन को मार्गदर्शन प्रदान करने के उद्देश्य से </span>42-<span>पृष्ठ की रूपरेखा अब सभी डीसीसीबी और एससीबी के लिए उपलब्ध है।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>पूर्व राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक</span>, <span>नीति के प्रमुख</span>, <span>और केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के शीर्ष वित्तीय संगठन एनसीडीसी के वरिष्ठ सलाहकार हैं डॉ गुलशन राय ने कहा कि</span>&nbsp;<span>उपयोगकर्ता सहभागिता के लिए साइबर-सुरक्षा और आईटी दिशानिर्देश में स्थित चार स्तरों का उद्देश्य उन प्रणालियों और संरचनाओं को प्रदान करना है जिन्हें एक संगठन में स्थापित करने की जरूरत होती है। </span><span>सिस्टम/आईटी संपत्तियों को सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए कदम उठाए जाने का प्रावधान करता है। यह उन उपायों के लिए भी प्रदान करता है जो साइबर खतरों को रोकने</span>, <span>पता लगाने और पुन: प्राप्त करने के लिए आईटी संपत्तियों की बढ़ोत्तरी की ओर ले जाते हैं। साथ ही</span>, <span>आईसीटी प्रणाली की आधारभूत जोखिम-आधारित निगरानी की भी परिकल्पना की गई है</span>,</p>
<p style="text-align: justify;"><span>डॉ राय ने कहा कि उन्होंने सभी क्षेत्रों में साइबर हमलों के बढ़ते मामलों की पृष्ठभूमि में इस तरह के ढांचे की जरूरत को रेखांकित किया</span>, <span>जिसमें </span>3<span> ही वर्षों में से कम </span>15<span> ऐसे मामले सामने आए हैं। जो कई लोगों द्वारा रिपोर्ट नहीं किए गये&nbsp; हैं। </span><span>उन्होंने यह भी कहा कि यह फ्रेमवर्क वित्तीय</span>, <span>सुरक्षा और परिचालन जोखिम के समान साइबर सुरक्षा जोखिम के प्रबंधन पर एक संगठन को मार्गदर्शन प्रदान करता है।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>बैठक में संदीप नायक ने कहा कि इस बैठक में </span><span>साइबर सुरक्षा के प्रमुखों एवं सहकारिताओं के व्यापक स्पेक्ट्रम के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया । इसमें केरल</span>, <span>कर्नाटक</span>, <span>हिमाचल प्रदेश</span>, <span>महाराष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के सहकारी बैंकों के अलावा नैफेड</span>, <span>कृभको और एनसीडीसी के अधिकारी शामिल हुए हैं। </span>वर्तमान में, <span>लगभग </span>65,000<span> पैक्स हैं</span>, <span>जिन्हें केंद्र ने देश को आत्मानिर्भर बनाने के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए अगले पांच वर्षों में </span>3<span> लाख सेअधिक की योजना बनाई है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">पूर्व केंद्रीय उर्वरक सचिव एवं एनसीडीसी के वरिष्ठ सलाहकार <span>डॉ. छबीलेंद्र राउल ने एनसीडीसी के कदम को फ्रेमवर्क लाने में एक अच्छी शुरुआत बताया क्योंकि साइबर क्राइम करने वाले हमेशा आईटी डेवलपर्स से आगे होते हैं</span>,</p>
<p style="text-align: justify;"><span>पूर्व केंद्रीय मत्स्य सचिव और वर्तमान में वरिष्ठ एनसीडीसी के सलाहकार डॉ. राजीव रंजन ने लघु सहकारिताओं एवं व्यवसाय के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करने पर जोर दिया</span>, <span>जो महत्वपूर्ण आईटी या सूचना सुरक्षा बजट के बिना वेब सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष कर सकते हैं। राजीव रंजन जीएसटी परिषद के विशेष सचिव थे</span>,<span>जिसने देश की अर्थव्यवस्था को वैट प्रणाली से जीएसटी में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारी समितियों के सुरक्षित संचालन के लिए एनसीडीसी ने साइबर सुरक्षा ढांचा  विकसित किया ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डेयरी क्षेत्र को आत्मनिर्भर  बनाने  के लिए  5000 करोड़ रुपये की डेयरी सहकार योजना लांच]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/dairy-sahakar-with-rs-5000-crore-outlay-launched-to-help-make-dairy-sector.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 01 Nov 2021 18:56:57 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/dairy-sahakar-with-rs-5000-crore-outlay-launched-to-help-make-dairy-sector.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अमूल के 75 वें स्थापना वर्ष पर आयोजित एक समारोह के दौरान आणंद&nbsp; गुजरात में "डेयरी सहकार" योजना शुरू की है। डेयरी सहकार योजना का कुल परिव्यय 5000 करोड़ रुपये है। यह योजना सहकारिता मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा लागू की जाएगी।यह पहली बार है कि भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग की साझेदारी में एनसीडीसी द्वारा डेयरी व्यवसाय के सभी पहलुओं से संबंधित सहकारी समितियों के लिए विशेष रूप से एक व्यापक योजना तैयार की गई है।</p>
<p style="text-align: justify;">अमित शाह ने कहा कि हमें कृषि और पशुपालन जैसे क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए इस सहकारी मॉडल को लागू करने की जरुरत है। एनसीडीसी द्वारा 5000 करोड़ रुपये की डेयरी सहकार योजना उसी दिशा में एक कदम है। उन्होंने कहा कि अमूल की स्थापना 1946 में आणंद में एक सहकारी आंदोलन के रूप में सरदार वल्लभ भाई पटेल और सहकारिता नेता त्रिभुवनदास पटेल के मार्गदर्शन में&nbsp; हुई थी। शाह ने कहा कि अमूल दुनिया के लिए एक मॉडल है। &nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इस योजना को प्रारंभ करने से पहले गुजरात के आणंद में दूध डेयरी सहकारी कंपनी अमूल के 75वें स्थापना वर्ष का उत्सव मनाने केलिए आयोजित एक कार्यक्रम में शाह ने कहा कि डेयरी क्षेत्र और सहकारी समितियों की भारत को न केवल 5 ट्रिलियन अमरीकी डालर की अर्थव्यवस्था में बदलने में बल्कि कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने में भी प्रमुख भूमिका है।<br />केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने भी इसी तरह के विचारों को व्यक्त किया और सराहना की कि कैसे अमूल ने राज्य की अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को को बढ़ावा देने में मदद की। उन्होंने कहा कि डेयरी भारत में सबसे बड़े कृषि-व्यवसायों में से एक है और भारतीय अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हैl उन्होंने डेयरी सहकार योजना तैयार करने के लिए केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के तहत सहकारी समितियों के लिए एक विशाल वित्तपोषण संगठन एनसीडीसी की सराहना की।</p>
<p style="text-align: justify;">रूपाला ने कहा कि&nbsp; डेयरी सहकार देश में डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के मौजूदा प्रयासों का पूरक होगा। यह एनसीडीसी की ओर से केंद्र सरकार की विभिन्न उपलब्ध योजनाओं का लाभ उठाने वाला पहला और एकमात्र डेयरी केंद्रित व्यापक ढांचा है। डेयरी सहकार के अंतर्गत एनसीडीसी ने 5,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं। पशुपालन एवं डेयरी जैसे केंद्र सरकार के अन्य मंत्रालयों के अभिसरण से इसे और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा । यह योजना सहकारिताओं द्वारा विभिन्न प्रकार के व्यवसायों के लिए महत्वपूर्ण क्रेडिट लिंकेज प्रदान करेगी।</p>
<p style="text-align: justify;">एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप कुमार नायक ने इस कार्यक्रम में बताया कि योजना को लाभार्थियों को लाभान्वित करने हेतु विभिन्न केंद्रीय योजनाओं को राज्य सरकारों, संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन विकास एजेंसियों एवं अन्य के साथ समायोजित किया जाएगा। ऋण की अवधि 5-10 वर्षों के लिए होगी, जिसमें परियोजना के प्रकार और राजस्व स्रोत के आधार पर मूलधन के पुनर्भुगतान पर 1-2 वर्ष की स्थगन अवधि शामिल है। नायक ने यह भी कहा कि यह योजना शुरू में वर्ष 2021-22 से वर्ष 2025-26 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू की जाएगी । उन्होंने कहा कि पात्र सहकारिताओं द्वारा परियोजनाओं को वित्तीय सहायता की कोई न्यूनतम या अधिकतम सीमा नहीं है। इस कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल, सहकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा ,संचार राज्य मंत्री देवु सिंह चौहान और पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव अतुल चतुर्वेदी भी उपस्थित थे। इस मौके पर सहकारिता मंत्रालय के सचिव देवेंद्र कुमार सिंह और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव संजय अग्रवाल भी उपल्थित थे। साथ ही अमूल के पदाधिकारी और अन्य विशिष्ट अतिथिगण&nbsp; उपस्थित थे ।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ डेयरी क्षेत्र को आत्मनिर्भर  बनाने  के लिए  5000 करोड़ रुपये की डेयरी सहकार योजना लांच ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको के अध्यक्ष बलविंदर सिंह नकई का निधन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-chairman-balwinder-singh-nakai-passes-away.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 12 Oct 2021 15:03:42 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-chairman-balwinder-singh-nakai-passes-away.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;"><span>इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) के अध्यक्ष </span><span>बलविंदर सिंह नकई का सोमवार को यहां निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। पंजाब के भटिंडा में </span>5 <span>दिसंबर</span>, 1934 <span>को जन्मे नकई पिछले पांच दशकों से सहकारिता क्षेत्र में काम कर रहे थे। देश के सहकारिता क्षेत्र में सबसे अनुभवी लोगों में शुमार बलविंदर सिंह नकई ने जीवभर सहकारिता में अपनी सेवाए दी। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह और इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. उदय शंकर अवस्थी समेत तमाम लोगों ने दुख व्यक्त किया है।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>नकई सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने में शामिल रहे और वह इफको के साथ </span>5 <span>दशकों से अधिक समय तक जुड़े रहे। उन्हें&nbsp; सबसे पहले&nbsp; </span>28 <span>अक्टूबर </span>1977 <span>से </span>11 <span>फरवरी </span>1981 <span>के दौरान पंजाब मार्कफेड</span>,<span> चंडीगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए इफको के बोर्ड में निदेशक नामित किया गया था। 28 अक्टूबर 1984 से अब तक वह लगातार 9 बार इफको के बोर्ड के सदस्य के लिए चुने गए थे</span> । इसके बाद 1986 से लेकर साल 2014 तक &nbsp;के दौरान पांच बार इफको के बोर्ड के उपाध्यक्ष के लिए नामित हुए थे। वह पहली बार 14 <span>मई </span>2014 <span>को इफको के बोर्ड के अध्यक्ष चुने गए और </span>9 <span>मई </span>2019 <span>को फिर दोबारा इस पद के लिए चुने गए थे।</span></p>
<p style="text-align: justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इफको अध्यक्ष&nbsp; के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि सरदार बलविंदर सिंह नकई जी कृषि और सहकारिता क्षेत्र के अग्रणी व्यक्ति थे। उन्होंने किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में बहुत योगदान दिया है। उनके परिवार और शुभचिंतको के प्रति मेरी गहरी संवेदना है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बलविंदर सिंह नकई के निधन पर शोक जताते हुए अपने ट्विट में कहा है, "<span>इफको अध्यक्ष सरदार बलविंदर सिंह नकई जी के निधन की खबर से दुखी हूं। </span><span>वह पिछले तीन दशकों से सहकारिता क्षेत्र में सक्रिय थे। उनके शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदना है।" केंद्रीय </span>कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी&nbsp; नकई के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।</p>
<p style="text-align: justify;">इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. उदयशंकर अवस्थी बलविंदर सिंह कई के निधन पर शोक जताते हुए कहा है कि हमारे प्रिय इफको के अध्यक्ष&nbsp; सरदार बलविंदर सिंह नकई जी के निधन से गहरा दुख हुआ है और मैं स्तबध हूं। वह एक बडे़ कोआपरेटर थे। उनके &nbsp;परिवार प्रति &nbsp;मेरी &nbsp;गहरी हार्दिंक संवेदना है ।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको के अध्यक्ष बलविंदर सिंह नकई का निधन ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीडीसी ने हरियाणा में एमएसपी पर धान खरीद के लिए 6836.48 करोड़ रुपये मंजूर किये]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/big-support-for-msp-paddy-procurement-in-haryana-by-ncdc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Oct 2021 21:40:00 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/big-support-for-msp-paddy-procurement-in-haryana-by-ncdc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong><em>नई दिल्ली</em></strong></p>
<p style="text-align: justify;">राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने हरियाणा, में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीफ मार्केटिंग सीजन 2021-22 के दौरान धान की सरकारी खरीद के लिए 6836.48 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप नायक ने कहा कि 1,000 करोड़ रुपये की राशि पहले ही दो चरणों में संवितरण किया जा चुका है और शेष राशि जल्द ही संवितरित की जाएगी। उन्होंने&nbsp; कहा कि समयबद्ध तरीके से उठाए गए इस कदम से राज्य की एजेंसियों को तुरंत धान खरीद अभियान शुरू करने में मदद मिलेगी।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">सहकारी समितियां इन अल्पावधि ऋणों का उपयोग राज्य की खरीद एजेंसियों की ओर से किसानों को तत्काल भुगतान करने के लिए किसानों से खाद्यान्न की खरीद के लिए करेंगी ताकि उन्हें अपने बकाये के लिए इंतजार न करना पड़े। हरियाणा ने पहले ही 3 अक्टूबर से एमएसपी पर धान की खरीद शुरू कर दी है।</p>
<p style="text-align: justify;">भारत सरकार में सहकारिता सचिव डी के सिंह ने कहा कि यह राज्य की एजेंसियों द्वारा समय पर उठाया गया कदम है। सहकारी समितियों और किसानों के माध्यम से धान खरीद गतिविधियों की तत्काल शुरुआत सुनिश्चित करेंगे। विशेष रूप से कोविड-19 के दौरान सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर&nbsp; उपजअपनी बेचने के लिए जरूरी सहायता प्रदान करेगा ।</p>
<p style="text-align: justify;">कुछ महीने पहले अपनी स्थापना के बाद से यह पहली बार है जब केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने अपना महत्वपूर्ण वित्तीय योगदान दिया है। संस्थान एनसीडीसी के माध्यम से एमएसपी संचालन के तहत खाद्यान्नों की खरीद के लिए किसानों की सहायता करने के लिए आगे बढ़ गया है।</p>
<p style="text-align: justify;">विशेष रूप से सहकारी समितियों के लिए एक प्रमुख संस्थान के रूप में एनसीडीसी&nbsp; देश में एमएसपी पर फसलों की खऱीद के संचालन का समर्थन करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और आज की तारीख में इसने संचयी रूप से पूरे देश में एमएसपी संचालन के लिए 98,071 करोड़ रुपये और अकेले हरियाणा को&nbsp; 20,844 करोड़ रुपये संवितरित किए हैं ।</p>
<p style="text-align: justify;"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/09/image_750x500_615010d4396c6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीडीसी ने हरियाणा में एमएसपी पर धान खरीद के लिए 6836.48 करोड़ रुपये मंजूर किये ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत में सहकारिता परिवर्तन का साधन रही है और दुनिया का नेतृत्व कर सकती है: डॉ एरियल ग्वारको]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperatives-in-india-have-been-instrument-of-change-and-can-lead-the-world-says-dr.-ariel-guarco-president-international-cooperative-alliance.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 28 Sep 2021 16:13:02 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/cooperatives-in-india-have-been-instrument-of-change-and-can-lead-the-world-says-dr.-ariel-guarco-president-international-cooperative-alliance.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (आईसीए) के अध्यक्ष डॉ. एरियल ग्वारको ने कहा है कि कोविड-19 के दौरान दुनिया भर में&nbsp; सहकारितायों द्वारा दिखाई गई सहजता ने यह प्रदर्शित किया है कि यह सहयोग है और प्रतिस्पर्धा नहीं है जिससे हम आर्थिक विकास, <span>सामाजिक एकजुटता एवं स्थिरता की ओर अग्रसर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि </span>भारत में सहकारिता परिवर्तन का साधन रही है और दुनिया का नेतृत्व कर सकती है। सोमवार 27 सितंबर को नई दिल्ली में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी), मुख्यालय के अपने दूसरे दौरे के दौरान उन्होंने यह बातें कहीं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कोविड -19 के इस संकट ने समझाया है कि हमें आपसी सहयोग तथा नई दुनिया बनाने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है जहां लैंगिक समानता, <span>शांति एवं विकास हो। </span><span>उन्होंने भारत में सहकारिता के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में यह देश में परिवर्तन का साधन रहा है ।</span></p>
<p>आईसीए अध्यक्ष, <span>जिन्होंने अपनी भारत दौरे के दौरान नए सहकारिता मंत्री अमित शाह से भी भेंट की कहा,&nbsp; "भविष्य में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए उनके पास बहुत कुछ है ।</span>"</p>
<p>ग्वारको जी ने कहा कि विशेष रूप से सहकारिताओं के लिए मंत्रालय स्थापित करने से इस क्षेत्र विशेष में नए अवसर और संभावनाएं भी खुलती हैं, <span>जिसमें कोविड -19 वैश्विक महामारी जैसे संकट के दौरान समाज को सुरक्षित करने की अद्भुत क्षमता है।</span></p>
<p>यह कहते हुए कि सरकारों को सहकारिताओं को बढ़ावा देना चाहिए, <span>ग्वारको जो खुद अर्जेंटीना से एक कोरपोरेटर है</span>, <span>ने वैश्विक गठबंधन के माध्यम से भारत में सहकारी क्षेत्र को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया । यह सहकारी आंदोलन तीस लाख से अधिक सहकारिताओं से बना है</span>, <span>जिसमें सभी क्षेत्रों एवं अंचलों से दुनिया भर में लगभग एक अरब&nbsp; लोग शामिल हैं ।</span></p>
<p>एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक&nbsp; संदीप कुमार नायक ने आईसीए अध्यक्ष का स्वागत करते हुए कहा कि मंत्रालय तीन क्षेत्रों में आईसीए के समर्थन की इच्छा रखता है, <span>जिसमें भारत में सहकारिताओं में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर एक केंद्र स्थापित करने में सहायता</span>, <span>सहकारी से सहकारी (सी2सी) के बीच निर्यात को बढ़ावा देना तथा विश्व सहकारी बैठक में नई सहकारिताओं के लिए कुछ महीने बाद सियोल में एक विशेष सत्र आयोजित करना शामिल है ।</span></p>
<p>इस अवसर पर<span> कृषक भारती सहकारी लिमिटेड (कृभको) के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह ने कहा</span>, <span>नए मंत्रालय के गठन के साथ सरकार "सहकार से समृद्धि की ओर" पर काम करने की इच्छुक है तथा एनसीडीसी गरीब लोगों एवं किसानों को ऋण प्रदान करके सहकारिताओं के विकास में सहायता कर रही है । उन्हें आशा है कि नए मंत्रालय की स्थापना से सहकारिताएं नई ऊंचाइयां प्राप्त करेगी ।</span></p>
<p>इस मौके पर अपना विचार व्यक्त करते हुए, <span>भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) के अध्यक्ष दिलीप संघानी ने कहा कि मंत्रालय के गठन से देश भर में सहकारिताओं को सुदृढ़ करने में न सिर्फ सहायता मिलेगी। एक कोरपोरेटर के रूप में उन्होंने सहकारिताओं को बढ़ावा देने में एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक के प्रयासों की बहुत सराहना की । संघानी ने कहा कि देश के युवाओं को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है ताकि वह सहकारिता को विकास एवं समृद्धि के भविष्य के मॉडल के रूप में देखें ।</span></p>
<p>उन्होंने कहा, "<span>सहकारिता को एक आंदोलन के रूप में लिया जाना चाहिए ताकि स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने हेतु आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके ।"</span></p>
<p>कार्यक्रम में <span>राष्ट्रीय शहरी सहकारी बैंक तथा ऋण समिति महासंघ मर्यादित (</span>NAFCUB) के अध्यक्ष ज्योतिंद्र एम मेहता <span>ने भारत में इस क्षेत्र में कर(टैक्स) संबंधी मुद्दों एवं कर लगाने के कारण उन्हें होने वाले लाभ एवं नुकसान को जानने की भी उत्सुकता दिखाई ।</span></p>
<p>बाद में एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप नायक ने आईसीए अध्यक्ष के साथ निगम के कामकाज के बारे में विवरण साझा किया और कहा कि पिछले कुछ वर्षों में एनडीए सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं का उद्देश्य भारत को 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में सहकारिताओं को केंद्र में रखना है । एनसीडीसी ने हाल ही में कई अन्य पहल जैसे कि युवा सहकार, <span>सहकार मित्र</span>, <span>आयुष्मान सहकार</span>, <span>सहकार प्रज्ञा आदि</span>, <span>विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय सहकारिताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए किए हैं । </span>उन्होंने यह भी साझा किया कि आज देश के लगभग 91 प्रतिशत गांवों में सहकारी संगठन काम कर रहे हैं । साढ़े आठ लाख से अधिक ऋण सहकारिताएँ हैं जबकि गैर ऋण वाली सहकारिताओं की संख्या 60 लाख से अधिक है । साथ ही 17 से अधिक राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्थाएं , <span>33 राज्य स्तरीय सहकारी बैंक हैं&nbsp; जबकि जिला स्तरीय सहकारी बैंकों की संख्या 363 है।</span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत में सहकारिता परिवर्तन का साधन रही है और दुनिया का नेतृत्व कर सकती है: डॉ एरियल ग्वारको ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नई सहाकारिता नीति 2022 में, पांच साल में पांच गुना हो जाएंगी सहकारी समितियां : अमित शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/a-new-cooperative-policy-in-the-year-2022.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 26 Sep 2021 06:19:42 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/a-new-cooperative-policy-in-the-year-2022.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong><em>नई दिल्ली&nbsp;</em></strong></p>
<p style="text-align: justify;">नई दिल्ली में 25 सितंबर को आयोजित पहले राष्ट्रीय सहाकारिता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में सहकारिता को मजबूत करने के लिए सरकार नई सहकारी नीति लाएगी। नई सहकारिता नीति 2022 में आ जाएगी। सहकारी समितियों को जमीनी स्तर तक ले जाने का जिम्मेदारी अब सहकारिता मंत्रालय&nbsp; उठाएगा।</p>
<p style="text-align: justify;">अमित शाह ने राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन में कहा कि यह सबसे बड़ी बात&nbsp; है कि सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पहला सहकारिता मंत्री बनने का मौका दिया है । जो हमारे लिए बड़े गर्व की बात है।&nbsp; उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय सभी राज्यों के सहकार सहयोग से चलेगा और इसे किसी भी राज्य से टकराव के लिए नहीं बनाया गया है । शाह ने कहा कि इस मंत्रालय का मूल मंत्र सहकारी समितियों के माध्यम से जमीनी स्तर तक समृद्धि हासिल करना है</p>
<p style="text-align: justify;">अमित शाह ने स्टेडियम में मौजूद दो हजार से अधिक सहकारी सदस्यों और सोशल मीडिया से जुड़े करीब छह करोड़ लोगों को संबोधित किया। उन्होंने दुनिया की नंबर एक उर्वरक सहकारी संस्था इफको द्वारा निर्मित दुनिया के पहले नैनो लिक्विड यूरिया की सराहना की और कहा कि इससे कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा।</p>
<p style="text-align: justify;">सहकारिता आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व के बारे में शाह ने कहा कि <span>मैं </span>25 <span>वर्षों से सहकारिता आंदोलन से जुड़ा हूं। देश पर जब भी कोई विपदा आई है</span>, <span>सहकारिता आंदोलनों ने देश को बाहर निकाला है। सहकारी बैंक केवल भारत की सहयोग संस्कृति के कारण बिना लाभ के उद्देश्य के लोगों के लिए काम कर रहे हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने अमूल और लिज्जत का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां देश के करोड़ों किसान अमूल से जुड़े हैं, <span>वहीं लिज्जत पापड़ से हजारों महिलाओं को रोजगार मिला है। सहकारी समितियों के आधुनिकीकरण के माध्यम से अब देश में सहकारिता को मजबूत करने की जरूरत है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">अपने मंत्रालय की योजनाओं को साझा करते हुए <span>अमित शाह ने घोषणा की कि केंद्र जल्द ही बहु-राज्य सहकारी समितियों के कामकाज को सुविधाजनक बनाने के लिए बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम</span>, 2002 <span>में संशोधन करेगा।</span></p>
<p style="text-align: justify;">समारोह के दौरान शाह ने कहा कि छह लाख गांवों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 63,000 <span>प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पीएसीएस) पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए हम आने वाले पांच वर्षों में हर दूसरे गांव में&nbsp; पैक्स स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित करेंगे। पैक्स की संख्या </span>6<span>3</span>,000 <span>से बढ़ाकर तीन </span><span>लाख करने के लिए के लिए सहकारिता मंत्रालय एक उचित कानूनी ढांचा तैयार करेगा, जो सुझाव व्यहवारिक होगा हम उसे राज्य सरकारों को भेजेंगे। राज्य अपने कानूनों हिसाब से&nbsp; बदलाव कर सकते हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">शाह ने कहा, "<span>हमने एक नई सहकारी नीति लाने का फैसला किया है जो पहली बार </span>2002 <span>में अटल जी द्वारा लाई गई थी और अब मोदी जी </span>2022 <span>में नई सहकारिता नीति लाएंगे। हम इस अमृत महोउत्सव अवसर के दौरान नई सहकारी नीति बनाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। </span></p>
<p style="text-align: justify;">देश के विकास में सहकारिता के योगदान के महत्व को बताते हुए शाह ने कहा कि भारत के 91 <span>प्रतिशत गांवों में सहकारी समितियां है। उन्होंने इस तथ्य पर जोर दिया कि भारत को </span>5 <span>ट्रिलियन डॉलर की इकनॉमी के लिए सहकारिता की जरूरत है । उन्होंने कहा कि करीब </span>36 <span>लाख करोड़ परिवार सहकारिता से जुड़े हैं।&nbsp; सहकारी समितियां गरीबों और पिछड़ों के विकास के लिए हैं।</span>&nbsp;<span>शाह ने कहा कि इफको ने देश के गरीबों को एक नई दिशा देने का काम किया है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इस समारोह में सहकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा, <span>अंतर्राष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (वैश्विक) के अध्यक्ष डॉ एरियल ग्वार्को,</span>&nbsp;<span>इफको के अध्यक्ष बलविंदर सिंह,</span>&nbsp;<span>इफको के प्रबंध निदेशक उदय शंकर अवस्थी, सहकारिता मंत्रालय के सचिव</span>&nbsp;<span>देवेंद्र कुमार सिंह </span><span>और कृभको के अध्यक्ष चंद्रपाल सिंह यादव भी इस कार्यक्रम में शामिल होने वालों में थे&nbsp; जिन्होंने सम्मेलन को संबोधित किया ।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नई सहाकारिता नीति 2022 में, पांच साल में पांच गुना हो जाएंगी सहकारी समितियां : अमित शाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[25 सितंबर को पहले राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन को संबोधित करेंगे अमित शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/amit-shah-to-address-the-first-national-cooperative-conference-on-25-september.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 23 Sep 2021 18:29:47 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/amit-shah-to-address-the-first-national-cooperative-conference-on-25-september.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;"><em><strong>नई दिल्ली 23, सितंबर 2021</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">केंद्र सरकार के सहकारिता विभाग और इफको द्वारा &nbsp;भारत के पहले सहकारिता सम्मेलन का आयोजन 25 सितंबर को किया जा रहा है। सहकारिता मंत्रालय के पहले मंत्री के रूप &nbsp;में अमित शाह शनिवार को देश भर की विभिन्न सहकारी समितियों के सदस्यों को इस सम्मेलन के जरिये संबोधित करेंगे।</p>
<p style="text-align: justify;">इस राष्ट्रीय सहकारी सम्मेलन में 2,000 लोग व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे, जबकि दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में सहकारी&nbsp; क्षेत्र से वीडियो क्राफ्रसिंग के जरिए देश भर के सहकारी सदस्य शामिल होंगे। सहकारिता मंत्रालय के विजन को प्रदर्शित करने वाला यह पहला कार्यक्रम होगा।</p>
<p style="text-align: justify;">इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण 25 सितम्बर 2021 को प्रातः 11 बजे से इफको, भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ,अमूल, सहकार भारती, नैफेड, कृभको के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एवं अन्य माध्यमों से किया जाएगा जिससे देश एवं विदेश के करोड़ों लोग इस कार्यक्रम को देखेंगे। हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया है और मंत्रालय की बागडोर अमित शाह को सौंपी गयी । देश में सहकारिता आंदोलन को मज़बूत करने के लिए एक अलग प्रशासनिक, कानूनी और नीतिगत ढाँचा प्रदान करने, सहकारी समितियों को जमीनी स्तर तक पहुँचाने वाले एक जन आधारित आंदोलन के रूप में मज़बूत करने में मदद करने एवं सहकारी समितियों के लिए ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस के लिए प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और बहु-राज्य सहकारी समितियों (एमएससीएस) के विकास को सक्षम करने के लिए गठित सहकारिता मंत्रालय का मूल मंत्र है ।</p>
<p style="text-align: justify;">प्रधानमंत्री मोदी जी के &lsquo;सबका साथ, सबका विकास&rsquo; के स्वप्न को अमली जामा पहनाने हेतु सहकारिता मंत्रालय निश्चित रूप से अभूतपूर्व कार्य करेगा। भारत के पहले सहकारिता सम्मेलन का आयोजन भारत की अग्रणी सहकारी संस्था इफको,भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ, अमूल, सहकार भारती, नैफेड, कृभको एवं अन्य सहकारी संगठन मिलकर कर रहे हैं। देशभर के अलग-अलग राज्यों एवं विभिन्न सहकारी क्षेत्रों के प्रतिनिधि इस सम्मेलन में शामिल&nbsp; होंगे।</p>
<p style="text-align: justify;">इस सम्मेलन में इंटरनेशनल कोआपरेटिव एलांयस (ग्लोबल) के अध्यक्ष डॉ. एरियल ग्वार्को भी शामिल हो रहे हैं। विश्व के110 देशों की लगभग 30 लाख सहकारी संस्थाएँ इंटरनेशनल कोआपरेटिव एलांयस (ग्लोबल)से जुड़ी हुई हैं।</p>
<p style="text-align: justify;"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ 25 सितंबर को पहले राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन को संबोधित करेंगे अमित शाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीडीसी और एम्स रायपुर की संयुक्त पहल से छत्तीसगढ़ के मछुआरों को मिलेगी टेलीमेडिसिन सुविधा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/telemedicine-for-fishers-community-of-chhattisgarh-by-ncdc-and-aiims-raipur-joint-initiative.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 21 Sep 2021 12:04:57 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/telemedicine-for-fishers-community-of-chhattisgarh-by-ncdc-and-aiims-raipur-joint-initiative.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय पशुपालन, मत्स्य पालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने 20 सितंबर को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत मत्स्य सहकारी समितियों के सदस्यों के लिए टेलीमेडिसिन सेवाओं पर एक पायलट परियोजना शुरू की। यह परियोजना राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के माध्यम से एम्स रायपुर द्वारा संचालित की जाएगी। छत्तीसगढ़ में मत्स्य सहकारी समितियों के सदस्य अब अपनी चिकित्सा आवश्यकताओं के लिए एम्स रायपुर के डॉक्टरों से परामर्श कर सकेंगे।</p>
<p>एनसीडीसी की एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक पायलट प्रोजेक्ट को किकस्टार्ट करने के लिए एम्स रायपुर के निदेशक और सीईओ डॉ नितिन एम नागरकर को प्रोजेक्ट के लिए 50 लाख रुपये का चेक सौंपने के बाद रूपाला ने कहा, "यह सुनिश्चित करेगा कि छत्तीसगढ़ में मत्स्य सहकारी समितियों के सदस्यों को जब भी चिकित्सा की आवश्यकता होगी वह&nbsp; टेलीमेडिसिन सुविधा के माध्यम से अपने दूरस्थ स्थानों से एम्स रायपुर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों से संपर्क कर सकेंगे।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने कहा, "हमारे देश में टेलीहेल्थ सेवाओं की जबरदस्त संभावनाएं हैं जहां शहरों में स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत अधिक केंद्रित हैं जबकि गांवों और तटीय क्षेत्रों जैसे दूरदराज के इलाकों में इस तरह के लाभों से लोग वंचित हैं।"</p>
<p>एम्स, रायपुर द्वारा अगले तीन वर्षों के लिए एक स्टार्टअप गतिविधि के रूप में प्रस्तावित परियोजना को पांच केंद्रों, पीएचसी पाटन (दुर्ग जिला), पीएचसी साजा (बेमेतरा), पीएचसी रतनपुर (बिलासपुर), पीएचसी धमतरी और एम्स रायपुर से पायलट मोड में लॉन्च किया जा रहा है। यह केंद्र सरकार, छत्तीसगढ़ सरकार, एनसीडीसी और एम्स रायपुर का संयुक्त प्रयास है।</p>
<p>रूपाला ने कहा कि यह परियोजना हमारे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित डिजिटल इंडिया मिशन को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने का एक तरीका है। एक महामारी प्रभावित दुनिया में, टेलीहेल्थ सहित प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवाएं पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई हैं। इसे देखते हुए, मुझे खुशी है टेलीमेडिसिन सुविधा का उद्घाटन किया, जो मत्स्य पालन और मत्स्य पालन सहकारी समितियों से संबंधित लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा परामर्श सेवाओं तक पहुंच प्रदान करने में मदद करेगी।</p>
<p>एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप नायक ने बताया कि सुविधाओं के शुभारंभ के साथ, सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ में संबंधित सहकारी समितियों से जुड़े मछुआरों और मछुआरा समुदाय के बीच स्वास्थ्य संबंधी असमानताओं को दूर करना है। उन्होंने कहा की टेलीमेडिसिन सुविधा शुरू करने का निर्णय तब लिया गया जब यह पाया गया कि सहकारी समितियों के कई सदस्य दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने, गरीबी या कोविड के भय के कारण चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठाने से कतरा रहे थे। नायक ने कहा,&nbsp; &ldquo;यह विचार दूरदराज के क्षेत्रों में मत्स्य सहकारी समितियों के सदस्यों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने के साथ-साथ उनके चिकित्सा खर्च में कटौती करने का है। दूर-दराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रवेश से मत्स्य समुदाय के बीच स्वास्थ्य जागरूकता भी पैदा होगी। &rdquo;</p>
<p>मत्स्य पालन विभाग के सचिव जतिंद्र नाथ स्वैन ने एनसीडीसी के साथ एम्स, रायपुर के सहयोगात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, "इससे उन्हें रोकथाम, निदान और स्वास्थ्य की स्थिति पर अधिक सूचित निर्णय लेने में भी मदद मिलेगी।"</p>
<p>एम्स, रायपुर के निदेशक नीतिन नागरकर ने कहा, "हम मत्स्य पालन सहकारी समितियों के सदस्यों को शहरी केंद्रों में प्रदाताओं और विशेषज्ञों द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल प्रदान करने के लिए एनसीडीसी के साथ जुड़कर खुश हैं।"</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीडीसी और एम्स रायपुर की संयुक्त पहल से छत्तीसगढ़ के मछुआरों को मिलेगी टेलीमेडिसिन सुविधा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[लगातार चार साल के मुनाफे के चलते नेफेड की नेटवर्थ पॉजिटिव हुई, 15 फीसदी लाभांश देगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/continued-improved-performance-makes-nafed-net-worth-positive.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 17 Sep 2021 22:26:51 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/continued-improved-performance-makes-nafed-net-worth-positive.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>नई दिल्ली, 17, सितंबर, 2021</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">नेशनल एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नेफेड) ने पिछले चार वर्षों में लगातार मुनाफा कमाया है जिसके चलते उसकी नेटवर्थ पॉजिडिव हो गई है। नेफेड के चेयरमैन डॉ. बिजेंद्र सिंह ने नेफेड की 64वीं वार्षिक आम सभा (एजीएम) को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। &nbsp;उन्होंने बताया की साल 2016 -17 के बाद से &nbsp;नेफेड लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही &nbsp;है &nbsp;जिसके चलते साल &nbsp;2020 -21 &nbsp;में नेफेड की नेटवर्थ पॉजिटिव हो गई है &nbsp;जो नेफेड के लिए एक अच्छी उपलब्धि है । उन्होंने कहा कि यह सब &nbsp;नेफेड द्वारा की गई नई पहल और सरकार के समर्थन से संभव हुआ है।</p>
<p style="text-align: justify;">डॉ. बिजेंद्र सिंह बताया कि निदेशक मंडल ने 2020-21 के लिए 15 फीसदी लाभांश के प्रस्ताव पर सहमति दी है। यह लाभांश मेंबर फेडरेशन और कोआपरेटिव को दिया जाएगा। यह बाते आज नेफेड की 64<span>वीं वार्षिक आम सभा बैठक (एजीएम) का आयोजन नई दिल्ली में कही।</span></p>
<p style="text-align: justify;">डॉ. बिजेंद्र सिंह &nbsp;ने नेफेड को सार्वजनिक वितरण सहित और विभिन्न कार्यों को सौंपकर कृषि मंत्रालय ने नेफेड पर जो विश्वास व्यक्त किया औऱ निरंतर समर्थन और मार्गदर्शन दिया है उसके लिए&nbsp; केंद्रीय कृषि मंत्री&nbsp; नरेंद्र सिंह तोमर&nbsp; सहित &nbsp;कृषि मंत्रालय से जुड़े मंत्रियों और कृषि मंत्रालय को धन्यवाद दिया है। इसके साथ ही&nbsp; उन्होंने&nbsp; नेफेड की तरफ से सरकार को आश्वासन दिया कि नेफेड अपने कार्यों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करेगा। &nbsp;नेफेड चैयरमैन ने अलग से सहकारिता मंत्रालय बनाने औऱ अमित शाह जैसे सक्षम और गतिशील नेतृत्व देने के लिए &nbsp;प्रधान मंत्री को धन्यवाद दिया।</p>
<p style="text-align: justify;">नेफेड चेयरमैन ने कहा इससे न&nbsp; केवल सहकारिता आंदोलन के मुद्दों का शीघ्र समाधान होगा बल्कि कृषि, <span>बागवानी</span>, <span>पशुपालन</span>, <span>मत्स्य पालन</span>, <span>चीनी &nbsp;उद्योग सहित सहकारी क्षेत्र को बढ़ावा&nbsp; मिलेगा। &nbsp;पशुपालन</span>, <span>मत्स्य पालन</span>, <span>चीनी और बहुत कुछ</span>,<span>जहां सीधे तौर से किसान जुड़े हुए हैं&nbsp; उनकी उन्नति&nbsp; में मदद मिलेगी ।&nbsp; उन्होंने कहा कि सरकार के सभी स्तर पर सहयोग से निदेशक मंडल के स्तर पर सही नीतिगत निर्णय और नेफेड के प्रबंध निदेशक</span>, <span>अधिकारियों और कर्मचारियों की कड़ी मेहनत से </span><span>नेफेड आर्थिक रूप से प्रगति के पथ पर अग्रसर है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि, 25<span> सितंबर</span>, 2021<span> को राष्ट्रीय सहकारी सम्मेलन इंद्रप्रस्थ इंडोर स्टेडियम</span>,<span> नई दिल्ली में आय़ोजन किया जा रहा है जिसमें विचार किया जाएगा की समग्र विकास में सहकारी क्षेत्र &nbsp;की भूमिका को कैसे औऱ बढ़ाया जाए। इ</span><span>समें मुख्य अतिथि &nbsp;गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह &nbsp;होंगे। इस आयोजन को इफको और एनसीयूआई समन्वय से </span><span>कृभको</span>, <span>नेफेड</span>, <span>अमूल और अन्य सहकारी संस्थाएं आयोजित कर रही हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">नेफेड के प्रबंध निदेशक संजीव कुमार चड्ढा ने एजीेम <span>में&nbsp; बताया कि साल 2020 -21 दौरान नेफेड ने </span>36,894.95<span> करोड़ का कारोबार हासिल किया औऱ </span>243.89<span> करोड़ का शुद्ध लाभ कमाया है। उन्होंने बताया कि दलहन के लिए &nbsp;बफर बनाने के साथ समर्थन मूल्य पर दलहन और तिलहन खरीदारी के लिए नेफेड केंद्रीय नोडल एजेंसियों में से एक है। साल </span>2020-21<span> के दौरान 17 </span>413.09<span> करोड़ की </span>34.56<span> लाख टन &nbsp;तिलहन और दालों खरीद &nbsp;की गयी थी। &nbsp;इसमें भारत सरकार की ओर से बफर स्टॉक के लिए &nbsp;पीसीएफ के अंतर्गत 529.36 करोड़ रुपये की दालों की खरीद भी शामिल है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">प्रबंध निदेशक ने बताया कि नेफेड ने एजेंसी के रूप सरकार की विभिन्न योजनाओं&nbsp; प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और आत्मनिर्भर भारत योजना &nbsp;सहित एमडीएम, <span>पीडीएस ,सशस्त्र बलो और केंद्र शासित और राज्य सरकारों को 18.76 लाख टन&nbsp; प्रोसेस्ड दाल और साबुत दालों की आपूर्ति की। जिससे लगभग 20 करोड़&nbsp; गरीब परिवार लाभान्वित हुए है। इससे नेफेड को 122 .10 करोड़ रुपये की आय सर्विस चार्ज के रूप में अर्जित हुई है। </span></p>
<p style="text-align: justify;">संजीव कुमार चड्ढा ने बताया कि विदेश मंत्रालय के आदेश पर भारत सरकार की&nbsp; ओर से नेफेड ने मालदीव, <span>जाम्बिया</span>, <span>सीरिया आदि देशों को मानवीय सहायता के तौर पर 31 करोड़ के घरेलू वस्तुएं ,कृषि उत्पादों का निर्यात किया है। इसके अलावा डेढ़ </span><span>लाख टन &nbsp;गैर-बासमती चावल जी टु जी पहल के तहत बांग्लादेश सरकार को निर्यात किया गया है। उन्होंने कहा कि नेफेड ने &nbsp;देश के विभिन्न राज्यों में &nbsp;</span>1113<span> करोड़ रुपये कीमत के </span>5.89<span> लाख खाद्यान्न की खरीद की</span>, <span>जिसमें धान</span>, <span>गेहूं और मक्का की शामिल हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">प्रबंध निदेशक ने कहा कि नेफेड के कार्य का &nbsp;विस्तार हो रहा है नेफेड को कृषि मंत्रालय ने दस हजार एफपीओ गठित करने के राष्ट्रीय कार्यान्वन एजेंसी के तौर पर नियुक्त किया है। जिसका उद्देश्य किसानों को उपज के अच्छे मूल्य के लिए बाजार से सम्पर्क कर किसानों की सहायता करना है। इसके अलावा नेफेड ने राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन&nbsp; और शहद मिशन, बीज उत्पादन, बायो फर्टिलाइजर उत्पादन जैसे नये कार्यो की शुरूआत की है । जिससे नेफेड अपनी आय में बढोतरी के साथ किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रही है ।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ लगातार चार साल के मुनाफे के चलते नेफेड की नेटवर्थ पॉजिटिव हुई, 15 फीसदी लाभांश देगी ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नाबार्ड के पूर्व चेयरमैन  हर्ष कुमार भानवाला एग्रीटेक कंपनी आर्या के स्वतंत्र निदेशक  नियुक्त]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/former-nabard-chairman-dr-harsh-kumar-bhanwala-joins-arya-as-an-independent-director.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 20 Aug 2021 23:01:54 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/former-nabard-chairman-dr-harsh-kumar-bhanwala-joins-arya-as-an-independent-director.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">एग्रीटेक स्टार्ट अप कंपनी आर्या ने नाबार्ड के पूर्व चेयरमैन डॉ. हर्ष कुमार भानवाला को कंपनी का गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया है। डॉ.भानवाला आर्या कम्पनी के सलाहकार के &nbsp;रूप में कार्य करते हुए आर्या कंपनी के विकास और उसके द्वारा संचालित &nbsp;कृषि सेवाओं के&nbsp; कार्यो को बड़े स्तर पर बढ़ाने और उनके&nbsp; सेवाओं के विस्तार के लिए आर्या कंपनी के &nbsp;प्लेटफॉर्म Arya.ag के माध्यम से सलाह देगें ।</p>
<p style="text-align: justify;">डॉ.भानवाला छह साल तक नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) के अध्यक्ष थे। उन्हें दिसंबर 2013 में&nbsp; नाबार्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया था और 26 मई, 2020&nbsp; को वह सेवा मुक्त हुए थे । नाबार्ड कृषि ऋण के सभी पहलुओं के साथ-साथ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों की देखरेख करता है। नाबार्ड के पहले, वह इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी (आईआईएफसीएल)&nbsp; के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत नाबार्ड से की थी जहां पर उन्होंने लगभग तीन दशकों तक काम किया था। हर्ष कुमार भानवाला 2020 में नाबार्ड छोड़ने के बाद से गैर-बैंकिंग वित्तीय कैपिटल इंडिया फाइनेंस लिमिटेड के कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त हुए थे।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">आर्या की डिजिटल मार्केटप्लेस वेयरहाउस डिस्कवरी, फाइनेंसिंग और मार्केट लिंकेज को जोड़कर एक ऐसी एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाती है जहां वैल्यू चेन तक छोटे-धारक किसानों से लेकर बड़े कॉरपोरेट्स तक की पहुंच &nbsp;हो। आर्य के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक प्रसन्ना राव &nbsp;ने कहा, &ldquo;हम डॉ. भानवाला को आर्य के निदेशक मंडल में पाकर बेहद खुश हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हमारा मानना ​​है कि भारत के कृषि परिदृश्य के बारे में उनकी गहरी समझ हमारे लिए बहुत उपयोगी होगी क्योंकि हम समावेशी विकास और अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए समान कृषि मूल्य श्रृंखला का निर्माण कर पाएंगे।</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;डॉ. भानवाला ने कहा, &ldquo;आर्या अपनी मल्टीपल सर्विस&nbsp; के माध्यम से कृषि मूल्य चैन को मजबूत करने के लिए फार्म गेट पर काम कर रही है। मुझे इस गतिशील टीम का हिस्सा बनकर खुशी हो रही है क्योंकि वे छोटे धारकों और उनके संगठनों को बाजार में मजबूत बनाने के लिए अधिक तकनीकी में सक्षम, व्यवहार्य विकल्प बनाते हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नाबार्ड के पूर्व चेयरमैन  हर्ष कुमार भानवाला एग्रीटेक कंपनी आर्या के स्वतंत्र निदेशक  नियुक्त ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारिताओं द्वारा समुद्री शैवाल कृषि उद्यमिता पुस्तिका  का विमोचन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/seaweed-farming-entrepreneurship-by-cooperatives-booklet-released.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Aug 2021 12:21:02 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/seaweed-farming-entrepreneurship-by-cooperatives-booklet-released.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>नई दिल्ली</strong></em></p>
<p><span> </span><span>मत्स्य पालन</span><span>, </span><span>पशुपालन और डेयरी मंत्रालय</span><span>, </span><span>भारत सरकार के मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने मंगलवार को संदीप कुमार नायक प्रबंध निदेशक</span><span>, </span><span>एनसीडीसी और जतिंद्र नाथ स्वैन</span><span>, </span><span>सचिव</span><span>, </span><span>मत्स्य पालन विभाग</span><span>, </span><span>भारत सरकार की उपस्थिति में एक कार्यक्रम में </span><span>'</span><span>सहकारिता द्वारा समुद्री शैवाल खेती उद्यमिता</span><span>' </span><span>में चुनौतियों और अवसरों का अवलोकन प्रदान करने वाली एक पुस्तिका का विमोचन किया। </span></p>
<p>दस्तावेज़ जारी करने के बाद केंद्रीय मंत्री <span>पुरुषोत्तम</span> रूपाला ने कहा, "इस क्षेत्र में निहित क्षमता को देखते हुए, सरकार ने समुद्री शैवाल प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने और समुद्री शैवाल की खेती से मेल खाने के लिए एक रोडमैप विकसित किया है। भारत अगले पांच वर्षों में समुद्री शैवाल उत्पादन को 2500 टन के मौजूदा उत्पादन स्तर से बढ़ाकर 11.5 लाख टन करने का लक्ष्य लेकर कार्य कर रहा है। वास्तव में, यह भारत की 8000 किलोमीटर लंबी तटरेखा के केवल एक फीसदी का उपयोग करके प्राप्त किया जा सकता है।"</p>
<p>एनसीडीसी द्वारा दिए गए वक्तव्य के अनुसार, 28 जनवरी, 2021 को सहकारी समितियों के माध्यम से समुद्री शैवाल व्यवसाय और इसके मूल्य-श्रृंखला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित "सहकारिता द्वारा समुद्री शैवाल व्यवसाय के माध्यम से उद्यमिता विकास" पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार से उत्पन्न होने वाले इनपुट और अनुशंसाओं को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।</p>
<p>वेबिनार&nbsp; मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार, लिनाक-एनसीडीसी, एशिया एवं प्रशांत कृषि सहकारिता विभाग (नेडैक), बैंकॉक जो&nbsp; कि संयुक्त राष्ट्र&nbsp; खाद्य तथा कृषि संगठन (यूएन-एफएओ) द्वारा स्थापित एक क्षेत्रीय मंच है, के द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था।</p>
<p>एनसीडीसी का कहना है कि भारत के अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, कंबोडिया, कनाडा, फ्रांस, आइसलैंड, इंडोनेशिया, इटली, म्यांमार, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड, त्रिनिदाद और टोबैगो, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और वेनेजुएला के अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ और अन्य प्रतिभागियों ने इस क्षेत्र में सहकारी समितियों के बीच उद्यमिता विकसित करने की चुनौतियों और उन चुनौतियों के संभावित समाधान पर विचार-विमर्श किया।</p>
<p>कार्यशाला में भाग लेने वालों में सहकारी समितियों के सदस्य, उद्यमी, नीति निर्माता, शोधकर्ता और शिक्षाविद, समुद्री शैवाल उद्योग के अन्य हितधारक सम्मिलित हुए ।</p>
<p>इसका उद्देश्य समुद्री शैवाल व्यवसाय में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के एजेंडे में , विशेष रूप से सहकारी समितियों के माध्यम से, योगदान करना हैऔर देश में समुद्री शैवाल किसानों और अन्य हितधारकों की सामाजिक-आर्थिक भलाई में वृद्धि करना है।</p>
<p>एनसीडीसी के वक्तव्य में कहा गया है कि इसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया गया और समुद्री शैवाल की खेती में व्यापार के अवसरों और समुद्री शैवाल किसानों, विशेष रूप से महिलाओं की आय बढ़ाने की क्षमता को रेखांकित किया गया।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारिताओं द्वारा समुद्री शैवाल कृषि उद्यमिता पुस्तिका  का विमोचन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री  पुरुषोत्तम रूपाला ने एफएफपीओ  पर पहली हैंडबुक  लॉन्च की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/parshottam-rupala-minister-of-fisheries-animal-husbandry-and-dairying-releases-handbook-on-ffpos.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Aug 2021 19:07:50 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/parshottam-rupala-minister-of-fisheries-animal-husbandry-and-dairying-releases-handbook-on-ffpos.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>केंद्रीय मत्स्य पालन</span><span>, </span><span>पशुपालन एवं डेयरी मंत्री</span>&nbsp;&nbsp;<span>पुरुषोत्तम रूपाला </span><span>ने मंगलवार को प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत मछली किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) के गठन एवं संवर्धन पर पहली हैंडबुक जारी की। </span><span>इस अवसर पर </span><span>राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के&nbsp; प्रबंध निदेशक संदीप कुमार नायक और </span><span>मत्स्य पालन विभाग के सचिव </span><span>जतिंद्र नाथ स्वैन </span><span>भी उपस्थित थे।</span></p>
<p><span>इस मौके पर केंद्रीय </span><span>मंत्री पुरुषोत्तम&nbsp; रूपाला ने बताया कि पीएमएमएसवाई </span><span>&nbsp;</span><span>मछुआरों के लिए एक प्रमुख योजना एफएफपीओ की स्थापना के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करती है। जो मछली किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित आत्मनिर्भर बनाने की ओर लाभ हेतु मोल-तोल की शक्ति को बढ़ाने में सहायक है।</span></p>
<p>एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप कुमार नायक ने इस मौके पर कहा, &ldquo;<span>हम पिछले कई महीनों से एफएफपीओ के संवर्धन के लिए विभिन्न जागरूकता एवं संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं ।</span> <span>एनसीडीसी ने देश में एफएफपीओ सहकारिताओं के पंजीकरण में अपना मार्गदर्शन प्रदान किया है ।</span></p>
<p><span>मत्स्य विभाग के सचिवे स्वैन ने कहा कि </span>मत्स्य पालन विभाग ने देश में 500 <span>एफएफपीओ </span>बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिसमें से एनसीडीसी द्वारा सहकारी समिति अधिनियम के तहत पहले वर्ष में 50 एफएफपीओ का गठन किया जाएगा ।</p>
<p>यह हैंडबुक सहकारिता के रूप में एफएफपीओ की स्थापना के लिए पथ प्रशस्त करती है तथा एनसीडीसी से जुड़े समुदाय आधारित व्यापार संगठन द्वारा उठाए जाने वाले सरल उपायों का वर्णन करती है ।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/08/image_750x500_611d0cbca18eb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री  पुरुषोत्तम रूपाला ने एफएफपीओ  पर पहली हैंडबुक  लॉन्च की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नैनो यूरिया से 50 फीसदी नाइट्रोजन की होगी बचत, बढ़ेगा उत्पादन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/Nano-Ureas-saves-nitrogen-and-increases-crop-production.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 07 Aug 2021 15:26:07 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/Nano-Ureas-saves-nitrogen-and-increases-crop-production.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="font-weight: 400;"></p>
<p style="font-weight: 400;">केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया का कहना है कि इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव<span>&nbsp; लिमिटेड (इफको) </span>द्वारा विकसित नैनो यूरिया का उपयोग फसलों में&nbsp; 50 फीसदी नाइट्रोजन की बचत करता है साथ इससे फसल की पैदावार में भी वृद्धि होती है। राज्य सभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में उर्वरक मंत्री ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि ही नैनो यूरिया का उपयोग पर्यावरण प्रदूषण को कम करने और&nbsp; मृदा स्वास्थय के लिए लाभकारी है ।</p>
<p style="font-weight: 400;">इफको नैनो यूरिया एक नया तरल उर्वरक है । इस प्रकार का उर्वरक दुनिया में पहली बार इफको द्वारा गुजरात के कलोल स्थित नैनो बायोटेक्नाल़ॉजी&nbsp; रिसर्च सेंटर में&nbsp; इफको की पेटेंटेड तकनीक से विकसित किया गया है।&nbsp; इफको के प्रबंध निदेशक डॉ उदय शंकर अवस्थी ने 31 मई , 2021 को नई दिल्ली में &nbsp;हुई इफको की 50 वीं आम सभा में बताया था इसके बारे में जानकारी दी थी। इफको द्वारा विकसित नैनो यूरिया अति सूक्ष्म अकार औऱ सतही विशेषताओं और गुण के कारण इसका पौधों की पत्तियों &nbsp;पर छिड़काव करने से &nbsp;पौधों द्वारा आसानी से अवशोषित कर लिया जाता है । इसके बाद नैनो-उर्वरक पौधों के उच्च पोषक तत्व उपयोग दक्षता में योगदान करते &nbsp;हुए पौधों के जिन भागों में नाइट्रोजन की जरूरत होती है, इसके कण पहुंचकर &nbsp;संतुलित मात्रा में पोषक तत्व पहुंचा देते है।</p>
<p style="font-weight: 400;">उर्वरक मंत्री के बयान पर ट्विटर पर&nbsp; अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शकर अवस्थी ने कहा कि नैनो यूरिया के विभिन्न फसलों पर गये परीक्षणों के बाद मिली सफलता के बाद हमारे देश के किसानों के लिए नैनो यूरिया बेहद लाभकारी साबित होगा ,उनके अनुसार इसके फसलों में उपयोग से नाइट्रोजन की बचत होगी, जिससे किसानों के लागत खर्च में कमी आएगी औऱ फसलों की पैदावार में बढोत्तरी होगी और नैनो यूरिया &nbsp;पर्यावरण के नजरिए से भी लाभकारी है । उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र &nbsp;मोदी ने सुझाव दिया था कि &nbsp;खेती में केमिकल्स की निर्भरता को कम करने के लिए काम होना चाहिए। इफको का नैनो यूरिया विकसित करना उसी की तरफ &nbsp;एक कदम है ।</p>
<p style="font-weight: 400;">राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (एनएआरएस) के माध्यम से आईसीएआर अनुसंधान संस्थान/राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में धान,<span>&nbsp;</span><span>गेहूं</span>,<span>&nbsp;</span><span>सरसों</span>,<span>&nbsp;</span><span>मक्का</span>,<span>&nbsp;</span><span>टमाटर</span>,<span>&nbsp;</span><span>गोभी</span>,<span>&nbsp;</span><span>खीरा</span>,<span>&nbsp;</span><span>शिमला मिर्च और प्याज सहित 7 विभिन्न फसलों पर 2019 -20 की रबी और जायद की फसलों पर प्रयोगिक परीक्षण किया गया। इस परीक्षणो से पता चला कि नैनो यूरिया कृषि नजरिये से सही होने साथ काफी लाभकारी है। इसके &nbsp;इस्तेमाल से फसलों में&nbsp; नाइट्रोजन&nbsp; 50 फीसदी बचत के साथ साथ फसल की &nbsp;पैदावार &nbsp;बढ़ सकती है। नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों का असंतुलित इस्तेमाल और इनके कम पोषक तत्व उपयोग क्षमता के कारण खेत की मिट्टी , हवा और पानी को प्रदूषित करता है।&nbsp; </span><span>नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों के इस्तेमाल से पत्तेदार सब्जियों में अधिक नाइट्रेट जमा &nbsp;हो जाते है जिसकी वजह से मानव स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंचाता है। इसलिए भावी पीढ़ियों के लिए हमारे कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए वैकल्पिक समाधानों की तलाश करना जरूरी &nbsp;है। &nbsp;इन सब चिंताओ को दूर करने के लिए इफको का नैनो यूरिया वैकल्पिक सामाधान के रूप में उभरा है ।</span></p>
<p style="font-weight: 400;">नैनो यूरिया बेहतर उपयोग दक्षता है क्योकि जितने एरिया में फसलों के लिए किसान को एक &nbsp;बैग यूरिया की जरूरत होती है वहां मात्र आधा लीटर की बोतल नैनो युरिया के प्रयोग से फसल से अच्छी पैदावार मिलेगी। &nbsp;नैनो यूरिया के आने से&nbsp; पारंपरिक तौर&nbsp; में इस्तेमाल यूरिया के उपयोग में कमी &nbsp;होने के के अतिरिक्त सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण की नजर से नैनो यूरिया के उपयोग काफी लाभकारी &nbsp;है क्योकि इसके प्रयोग से &nbsp;मिट्टी के स्वास्थ्य कोई नुकसान नही पहुंचेगा और फसल से बेहतर गुणवत्ता वाली अधिक उपज मिलेगी ।</p>
<p style="font-weight: 400;">सार्वजनिक क्षेत्र की दो उर्वरक उत्पादक कंपनियों नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल) और राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (आरसीएफ)&nbsp; नैनो यूरिया के उत्पादन के लिए इसकी उत्पादन की तकनीक के&nbsp; हस्तांतरण के लिए इफको के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है।</p>
<p style="font-weight: 400;">&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नैनो यूरिया से 50 फीसदी नाइट्रोजन की होगी बचत, बढ़ेगा उत्पादन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में अपने कृषि उत्पादों को  बढ़ावा देने के लिए नेफेड   की नई पहल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/Nafed-new-initiative-to-promote-its-agricultural-products-in-Haryana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Aug 2021 01:33:05 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
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        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;"><strong>दिल्ली</strong><strong>, 4अगस्त ,&nbsp;2021</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सहकारी क्षेत्र के शीर्ष संस्था नेशनल एग्रीकल्चरल कोआपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमटेड (नेफेड)&nbsp; और हरियाणा कृषि उद्योग निगम लिमिटेड&nbsp; (एचएआईसीएल) &nbsp;ने एक &nbsp;समझौता (एमओयू) साइन किया है। इसके तहत नेफेड के उत्पादों को एचएआईसीएल अभी हाल में लांच किए हरहित ब्रांड स्टोरों के जरिये बेचा जाएगा। बाजार की परिस्पर्धा को &nbsp;देखते हुए&nbsp; हरियाणा सरकार ने हाल ही में राज्य में खुदरा &nbsp;विस्तार योजना 2020 के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम एचएआईसीएल के हरहित ब्रांड के तहत 2000 स्टोर खोलने का निर्णय लिया है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस परियोजना को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने हरहित ब्रांड के लिए एक नया लोगो डिजाइन करने का फैसला किया है। जिसके लिए खुली प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा, <span>जिसमें राज्य का कोई भी व्यक्ति भाग ले सकता है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">वहीं नेफेड इस नये करार को लेकर बेहद उत्साहित है कि वह अब हरियाणा कृषि उद्योग निगम के साथ मिलकर वह हरियाणा &nbsp;में अपने उपभोक्तओं को बेहतर सेवा दे सकेगा। &nbsp;कृषि उद्योग को बढ़ावा देने के लिए नेफेड और एचएआईसीएल प्रयास करेंगे जिससे हरहित स्टोर से राज्य के किसानों को नेफेड के उत्पाद&nbsp; का&nbsp; लाभ मिल सके ।</p>
<p style="text-align: justify;">नेफेड भारत की&nbsp; बहुराज्य सहकारी संस्था है &nbsp;जिसका मुख्य उद्देश्य है कृषि सहयोग और किसान कल्याण है जिसका मुख्य कार्य सहकारी क्षेत्र में कृषि, उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देना मुख्य कार्य है। नेफेड ने उपभोक्ता विपणन में अपनी गतिविधियों के विविधीकरण की दिशा में बढ़ाया है&nbsp; <span>ताकि उपभोक्ताओं को दैनिक आवश्यकता की आवश्यक वस्तुओं को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जा सके ।दालों</span>, <span>मसालों</span>, <span>चाय और अन्य उत्पादों का नेफेड ब्रांड बेहतर गुणवत्ता के कारण उपभोक्ताओं के बीच काफी लोकप्रिय है। नेफेड भारत में उत्पादित सभी प्रकार की दालों और मसालों का कारोबार करता है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">नेफेड सबसे महत्वपूर्ण उपभोक्ता उत्पादों में से एक नेफेड ब्रांड की चाय है जो दो प्रकारों में उपलब्ध है, <span>नेफेड सीटीसी और नेफेड प्रीमियम। नेफेड ब्रांड के टीबैग्स में दस फ्लेवर जोड़े गए हैं। चाय का सम्मिश्रण और पैकेजिंग गुवाहाटी में चाय उत्पादक क्षेत्र में स्थित अपनी इकाई में किया जाता है।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में अपने कृषि उत्पादों को  बढ़ावा देने के लिए नेफेड   की नई पहल ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकारिता आंदोलन को मजबूत करेगी सरकार : अमित शाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/Government-will-strengthen-Cooperative-Movement-says-Amit-Shah.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 10 Jul 2021 12:32:52 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/Government-will-strengthen-Cooperative-Movement-says-Amit-Shah.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div dir="auto">केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को सहकारी संस्थाओं के एक प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि सरकार सहकारिता आंदोलन को सशक्त करेगी ताकि जमीनी स्तर की सहकारिताओं को इसका लाभ मिले। उन्होंने कहा कि देश की 38000 हेक्टेयर जमीन जो खाली पड़ा है, वहां सहकारी समितियां जैसे इफको, कृभको जैसी सहकारी संस्थाओं को बीज उत्पादन के क्षेत्र में भी आगे आना होगा ताकि कृषि को मज़बूत किया जा सके। इसके साथ ही सहकारिताओं को जैविक खेती में भी आगे आना होगा। नेशनल कोआपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया (एनसीयूआई) द्वारा इस संबंध में जारी एक प्रेस रिलीज में यह बातें कही गई हैं।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">एनसीयूआई के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा हाल के मंत्रिमंडल विस्तार के ठीक पहले गठित नये सहकारिता मंत्रालय का सबसे पहले मंत्री के रूप में जिम्मा संभालने वाले अमित शाह को शनिवार को मिलने वाले सहकारी क्षेत्र के संगठनों के प्रतिनिधियों में भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के अध्यक्ष दिलीप संघानी, नेफेड अध्यक्ष बिजेन्दर सिंह, कृभको अध्यक्ष चंद्रपाल सिंह यादव, इफको के अध्यक्ष बी. एस. नकई&nbsp; इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. यू.एस. अवस्थी शामिल थे।</div>
<div dir="auto">
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x_60e99363e0102.jpg" alt="" /></p>
</div>
<div dir="auto">&nbsp;केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को हाल के मंत्रीमंडल विस्तार के समय नवगठित सहकारिता मंत्रालय का जिम्मा भी दिया गया है जो सरकार द्वारा इस क्षेत्र को लेकर गंभीरता को दर्शाता है।&nbsp;</div>
<div dir="auto">केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि फार्मर प्रॉड्यूसर आर्गनाइजेशन (एफपीओ) को जो सुविधाएं और रियायतें दी जा रहीं हैं यह सुविधाएं प्राथमिक सहकारी समितियों को भी दी जाएंगी ताकि उन्हें सशक्त किया जा सके।</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकारिता आंदोलन को मजबूत करेगी सरकार : अमित शाह ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि मंत्री  मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मध्य प्रदेश  के किसानों के लिए नैनो यूरिया की खेप को हरी झंडी दिखाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/union-agriculture-minister-flagged-off-nano-urea-dispatch-for-farmers-in-madhya-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 04 Jul 2021 16:54:35 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/union-agriculture-minister-flagged-off-nano-urea-dispatch-for-farmers-in-madhya-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div style="display: none;"></div>
<p><em><strong>नई दिल्ली, 04 जुलाई, 2021</strong></em></p>
<p>केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री&nbsp; नरेंद्र सिंह तोमर ने हरी झंडी दिखाकर मध्य प्रदेश के किसानों के लिए नैनो यूरिया की खेप को रवाना किया। 75 टन यूरिया से लदे ट्रक को गुजरात के कलोल संयंत्र से मध्य प्रदेश के जबलपुर भेजा गया। नैनो यूरिया के उपयोग से फसल उत्पादकता में सुधार होगा और किसानों की आय बढ़ेगी। साथ ही आदान लागत तथा रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग में कमी आएगी।<br />केंद्रीय कृषि मंत्री ने मध्य प्रदेश के किसानों के लिए नैनो यूरिया की खेप को झंडी दिखाकर रवाना करते हुए कहा कि &ldquo;मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि इफको ने मेक इन इंडिया के तहत इस नवीन उत्पाद को विकसित किया है। यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा बल्कि रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने में भी मदद करेगा। इससे हमारे पर्यावरण की स्थिति बेहतर होगी। नैनो यूरिया फसलों के लिए प्रभावी होने के साथ ही पर्यावरण हितैषी है।<br />इस अवसर पर इफको के प्रबंध निदेशक डॉ उदय शंकर अवस्थी ने कहा कि &ldquo;इस उत्पाद के माध्यम से इफको आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में अपना योगदान दे रहा है। यह उत्पाद अब अखिल भारतीय स्तर पर सभी के लिए उपलब्ध है। फसलों पर प्रभाव की दृष्टि से नैनो यूरिया की आधे लीटर की एक बोतल यूरिया के एक बैग के बराबर है। इसके छोटे आकार के कारण दुर्गम इलाकों में किसानों द्वारा इसका उपयोग करना सुविधाजनक है। &rdquo;<br />&nbsp;कई फसलों पर नैनो यूरिया का परीक्षण किया गया है और परिणामों में यह देखा गया कि फसलों की उपज के साथ-साथ उनके पोषण की गुणवत्ता बढ़ाने में भी नैनो यूरिया लाभकारी है। यह जल और पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में भी मदद करता है जिससे पृथ्वी मनुष्यों और अन्य जीवित प्राणियों के लिए सुरक्षित हो जाता है।<br />डॉ अवस्थी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन के हिस्से के रूप में ब्राजील, अर्जेंटीना और कुछ और देशों में भी नैनो यूरिया उत्पादन संयंत्र लगाए जाने हैं।<br />इफको ने इससे पहले हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर को नैनो यूरिया की खेप भेजी थी और आधे घंटे के भीतर ही सारा स्टॉक बिक गया था।<br />&nbsp;पहले चरण में वर्ष 2021-22 के दौरान इफको की गुजरात स्थित कलोल इकाई तथा उत्तर प्रदेश की आंवला और फूलपुर इकाई में नैनो यूरिया संयंत्रों का निर्माण चल रहा है। शुरू में इन संयंत्रों में 500 मि.ली. की नैनो यूरिया की कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता 14 करोड़ बोतल होगी जो बाद में बढ़कर 18 करोड़ बोतल हो जाएगी।<br />&nbsp;कलोल संयंत्र से प्रतिदिन एक ट्रक में 15000 बोतल नैनो यूरिया की आपूर्ति की जा रही है और आने वाले समय में संयंत्र से हर दिन ऐसे 10 ट्रक भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि कलोल संयंत्र से प्रतिदिन 6750 टन यूरिया का उत्पादन हो रहा है, जिससे सरकार को सब्सिडी के मद में 35,000 करोड़ रुपये की बचत होगी और किसानों को 35000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी।<br />&nbsp;दूसरे चरण में, वर्ष 2022-23 तक चार और संयंत्र चालू हो जाएंगे। इस प्रकार, नैनो यूरिया की अतिरिक्त 18 करोड़ बोतलों का उत्पादन होगा। आईसीएआर के 20 अनुसंधान संस्थानों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के जरिए 11,000 से अधिक स्थानों और 94 फसलों पर इसका परीक्षण किया गया है।<br />हरी झंडी दिखाये जाने के आभासी कार्यक्रम में इफको के अध्यक्ष बी. एस. नकई, उपाध्यक्ष दिलीप संघाणी और संयुक्त प्रबंध निदेशक&nbsp; राकेश कपूर भी मौजूद थे।<br />&nbsp;<br />&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_60e1e6099d59e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि मंत्री  मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मध्य प्रदेश  के किसानों के लिए नैनो यूरिया की खेप को हरी झंडी दिखाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीडीसी ने मनाया अंतरराष्ट्रीय सहकारिता  दिवस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/NCDC-Celebrates-International-Day-of-Cooperatives.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 03 Jul 2021 10:54:30 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/NCDC-Celebrates-International-Day-of-Cooperatives.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कोविड-19 संकट के समय में, भारत में कई सहकारी समितियों ने आगे बढ़कर कोविड-19 महामारी का मुकाबला करने के लिए अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में सिक्किम सरकार के सहकारिता&nbsp; विभाग के अपर मुख्य सचिव भगवान शंकर ने यह बातें कहीं। वह अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर आयोजित &ldquo;सहकारिता और कोविड -19 महामारी की चुनौतियां&rdquo; विषय पर व्याख्यान दे रहे रहे थे।&nbsp; इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस का विषय सहकारी समितियों के लोगों से अधिक लाभ वाले व्यवसाय मॉडल के लचीलापन और स्थिरता को उजागर करने के लिए "एक साथ बेहतर पुनर्निर्माण" है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान, सहकारी समितियां अपनी जिम्मेदारियों से नहीं कतराईं, बल्कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करके सदस्यों, परिवारों और समुदायों की मदद और समर्थन करने के लिए सबसे आगे आईं, जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है। सहकारिता सभी उपचारों के लिए रामबाण नहीं हो सकती है, लेकिन देश भर में संसाधनों को वितरित करने में मदद करने के लिए वे निश्चित रूप से महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।</p>
<p>वास्तव में, कई सहकारी समितियों ने कोविड संकट के दौरान बहुत सक्रिय भूमिका निभाई।&nbsp; सहकारी समितियों ने उदाहरण स्थापित किए जहां वह जरूरतमंद जनता को ऑक्सीजन और नकद हस्तांतरण की आपूर्ति में आगे आए।&nbsp; यह केवल चंद उदाहरण हैं। भगवान शंकर ने कोविड जनित संकट के दौरान अपने राज्य में सहकारी समितियों द्वारा किए गए महत्वपूर्ण योगदान के बारे में भी विस्तार से बात की।</p>
<p>हालांकि, यह देखते हुए कि महामारी के कारण कई सहकारी समितियों की कमाई प्रभावित हुई है, उन्होंने कहा, &ldquo;सरकार के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वह संकट के दौरान उन्हें पोषण देने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करें। सहकारी क्षेत्रों के सूत्रधार को ऐसे सहकारिता आधारित व्यवसायों के लिए अनुदान, सब्सिडी और सॉफ्ट लोन के रूप में आसानी से उपलब्ध वित्त के संदर्भ में पहले से कहीं अधिक समर्थन की आवश्यकता है। &rdquo;</p>
<p>वर्तमान में, देश में लगभग आठ लाख सहकारी समितियां हैं जो इस क्षेत्र में 10 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार दे रही हैं।</p>
<p>इससे पहले एनसीडीसी के कार्यकारी निदेशक मुकेश कुमार ने बताया कि महामारी के बावजूद कई सहकारी समितियां अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।&nbsp; इस अवसर के दौरान, उन्होंने दर्शकों, मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालयों के एनसीडीसी अधिकारियों के अलावा सहकारी समितियों के सदस्यों को कोविड-19 के उचित व्यवहार के बारे में याद दिलाया, जिसमें उनसे टीकाकरण, हाथ धोने, दूरी बनाए रखने और मास्क का उपयोग करने का आग्रह किया गया था क्योंकि "हम अभी भी महामारी के अंदर गहराई में हैं ।&rdquo;</p>
<p>दुनिया भर की सहकारिताएं दिखा रही हैं कि किस प्रकार वे एकजुटता और लचीलेपन के साथ कोविड-19 संकट का सामना कर रही हैं और समुदायों को जन-केंद्रित और पर्यावरणीय रूप से ठीक होने की पेशकश भी कर रही हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_60e0449d10277.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीडीसी ने मनाया अंतरराष्ट्रीय सहकारिता  दिवस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मुरैना के मधुमक्खीपालक किसानों के लिए नेफेड  की प्रसंस्करण और गुणवत्ता परीक्षण यूनिट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/nafed-empowering-the-beekeepers-of-morena-by-setting-up-processing-unit-and-lab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 02 Jul 2021 07:17:58 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/nafed-empowering-the-beekeepers-of-morena-by-setting-up-processing-unit-and-lab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div style="display: none;"></div>
<p>मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के देवरी गांव में नेफेड द्वारा राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (एनबीबी) के सहयोग से राष्ट्रीय मधुमक्खीपालन एवं शहद मिशन (एनबीएचएम.) के तहत प्रारंभ की जाने वाली, शहद एवं मधुमक्खीपालन के अन्य उत्पादों के प्रसंस्करण व गुणवत्ता परीक्षण हेतु प्रयोगशाला-इकाई का भूमि पूजन गुरुवार 1 जुलाई को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया। इसका संचालन चंबल फेड शहद उत्पादक सहकारी समिति (एफपीओ) के अंतर्गत होगा। कार्यक्रम में तोमर ने कहा कि इन सुविधाओं के साथ ही भविष्य में भी सरकार की ओर से हरसंभव सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएगी। जिस प्रकार से सरसों के कारण चंबल क्षेत्र पूरे देश में जाना जाता है, उसी प्रकार से शहद उत्पादन में अग्रणी मुरैना जिले सहित चंबल क्षेत्र देशभर में जल्द ही हनी हब के रूप में प्रसिद्धि पाएगा। ये हनी मिशन मुरैना क्षेत्र के गरीब किसानों के जीवन में सार्थक बदलाव लाएगा और इससे उनकी आय बढ़ेगी।</p>
<p>एनबीबी ने एनबीएचएम के तहत नेफेड को मुरैना एफपीओ में शहद व मधुमक्खीपालन एवं अन्य उत्पादों के प्रसंस्करण, एकत्रीकरण, ट्रेडिंग, ब्रांडिंग, स्टोरेज आदि परियोजनाओं को स्वीकृत किया है। जिनमें से प्रसंस्करण व गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशाला का भूमि पूजन हुआ।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री कि शहद उत्पादन में मध्य प्रदेश में मुरैना अग्रणी है। यहां लगभग छह हजार मधुमक्खी पालक&nbsp; और एक&nbsp; लाख मधुमक्खियों के बक्सों की संख्या है। जिससे तीन हजार टन शहद का उत्पादन होता है। नेफेड के जरिये केंद्र सरकार ने एक एफपीओ यहां बनाया है। कृषि अनुसंधान केंद्र मुरैना में समन्वित मधुमक्खीपालन केंद्र हैं जो ट्रेनिंग देकर मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दे रहा है। साथ ही, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अखिल भारतीय समन्वित हनी बी एवं पालीनेटर केंद्र कृषि विश्वविद्यालय के मुरैना क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र पर स्थापित होने से यहां मधुमक्खी पालन पर नवीन अनुसंधान का लाभ मधुमक्खी पालकों को मिल सकेगा। मीठी क्रांति को आगे बढ़ाने का जिम्मा लेने के लिए कृषि मंत्री ने नेफेड को बधाई और शुभकामनाएं दी।</p>
<p>&nbsp;उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी&nbsp; के नेतृत्व में कृषि सुधार के लिए एक के बाद एक ठोस कदम उठाए गए हैं। यूपीए सरकार के समय उनके पास यह अवसर था कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को मानकर किसानों को एमएसपी व अन्य माध्यम से लाभ पहुंचाते लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी व निहित स्वार्थों के चलते तत्कालीन सरकार ने किसान हित में कदम नहीं उठाए, वहीं नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की केंद्र में सरकार बनने पर स्वामीनाथन आयोग की 201 में से 200 सिफारिशों को पूरी तरह लागू किया गया है।</p>
<p>तोमर ने कहा कि हमारे देश के कृषि व ग्रामीण क्षेत्र बहुत ताकतवर है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की भी एक बड़ी ताकत है। किसानों को संबल व सुविधाएं मोदी जी की सरकार लगातार दे रही है, जिनसे कृषि क्षेत्र और मजबूत होता जाएगा। देश में लगभग 86 प्रतिशत किसान छोटे व मझौले हैं, जिनका जीवन स्तर ऊंचा उठाने का जिम्मा केंद्र सरकार ने लिया है। उन्होंने देश में बन रहे 10 हजार नए एफपीओ की स्कीम से होने वाले लाभ की जानकारी देते हुए किसानों से नई तकनीकों के साथ उन्नत बीज-उन्नत फसलों के साथ खेती करने की अपील की। उन्होंने कहा&nbsp; कि एक लाख करोड़ रुपये के कृषि इंफ्रा फंड द्वारा गांव-गांव व खेतों तक सुविधाएं बढ़ेगी। भारत सरकार तन-मन-धन से पूरी तरह किसानों के साथ है और किसानों की आय बढ़ाने के लिए संकल्पित है। नए कृषि सुधार कानून भी इसी दिशा में केंद्र सरकार का ऐतिहासिक कदम है, ये नए कानून भी देशभर के करोड़ों किसानों के लिए दीर्घकालीन लाभदायक साबित होंगे। कार्यक्रम में नेफेड के मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव चड्ढा,&nbsp; ए.एम.डी. पंकज प्रसाद सिंह (फीफा के एमडी), राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के एम.डी. राजबीर सिंह और मधुमक्खीपालकों के एफपीओ व शहद उत्पादन से जुड़े किसान उपस्थित थे। केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल, अपर सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी व कृषि मंत्रालय-शहद मिशन के अन्य अधिकारी वर्चुअल जुड़े थे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मुरैना के मधुमक्खीपालक किसानों के लिए नेफेड  की प्रसंस्करण और गुणवत्ता परीक्षण यूनिट ]]></media:description>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    <item>
        <title><![CDATA[नेफेड ने प्याज की अधिक उत्पादकता वाली किस्म का बीज लांच किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/NAFED-launches-high-yielding-onion-seed-variety.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 01 Jul 2021 06:36:04 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/NAFED-launches-high-yielding-onion-seed-variety.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p></p>
<p>नेशनल एग्रीकल्चरल को-आपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नेफेड) ने प्याज की अधिक उत्पादकता वाली किस्म (एचवाईवी) का बीज विकसित किया है। फेडरेशन ने इस बीज की इस किस्म का विकास महाराष्ट्र के 600 किसानों के साथ चलाए गये एक बीज उत्पादन प्रोग्राम तहत किया है। फेडरेशन ने बीज की इस किस्म को बाजार में लांच कर दिया है।</p>
<p>नेफेड के मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव कुमार चड्ढा प्याज की इस उच्च उत्पादकता वाली किस्म के बीज की लांचिंग की। नेफेड द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है। नेफेड का कहना है कि सरकार ने उसे 2500 क्विंटल बीज के उत्पादन का लक्ष्य दिया था। नेफेड द्वारा प्याज की उच्च उत्पादकता वाली किस्म के बीज का वितरण राज्य सरकारों, सहकारी समितियों और फारमर प्राड्यूसर आर्गनाइजेशंस (एफपीओ) के जरिये किसानों को किया जाएगा। प्याज की यह किस्म जहां अधिक उत्पादकता वाली है वहीं इसके जरिये प्याज का उत्पादन भी अधिक किफायती है। इसकी यह दोनों खासियत किसानों की आय वृद्दि में सहायक साबित होंगी।</p>
<p>नेफेड का कहना है कि वह बीज उत्पादन के अपने प्रोग्राम को नेफेड ब्रांड के तहत विस्तार देने की योजना पर काम कर रही है। इन बीजों के जरिये किसानों को आय को दोगुना करने के प्रधानमंत्री के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी क्योंकि इसके किसानों का उत्पादन बढ़ेगा और लागत कम होगी।&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के बरेली में 28 फरवरी, 2016 को एक रैली को संबोधित करते हुए घोषणा की थी कि सरकार छह साल में किसानों की आमदनी को दोगुना करेगी। इसके लिए सरकार ने कई कार्यक्रम चलाए हैं वहीं कृषि मंत्रालय द्वारा एक समिति भी गठित की गई थी जिसकी रिपोर्ट में किसानों की आय दो गुना करने के लिए जरूरी उपायों के सुझाव दिये गये हैं।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नेफेड ने प्याज की अधिक उत्पादकता वाली किस्म का बीज लांच किया ]]></media:description>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीडीसी ने मनाया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/NCDC-celebrates-International-Yoga-Day.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 22 Jun 2021 10:55:59 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/NCDC-celebrates-International-Yoga-Day.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>नई दिल्ली, 21 जून,2021</strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सोमवार को कहा कि समस्त विश्व में तबाही मचाने वाली कोविड-19 महामारी के बीच योग सभी के लिए आशा की किरण है क्योंकि यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करता है बल्कि हमें तनावपूर्ण और चिंताजनक समय में मानसिक रूप से भी स्वस्थ रखता है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन कार्यक्रम में बोलते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि हर साल 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है जिन्होंने वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में इसके संबंध में प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने कहा किदुनिया भर के 175 से अधिक देशों द्वारा इसके पक्ष में एक प्रस्ताव पारित करने के बाद इसे सभा द्वारा अपनाया गया था।</p>
<p>&ldquo;योग एक शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यास है जो लोगों को कोविड -19 की पृष्ठभूमि में एक स्वस्थ जीवन शैली जीने में मदद कर रहा है। महामारी न केवल लोगों के शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है बल्कि प्रतिबंधित जीवन जीने को मजबूर लोगों के मनोवैज्ञानिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रही है।&rdquo;</p>
<p>उन्होंने कहा, " इसलिए यह समझना जरूरी है कि खुद को मानसिक रूप से स्वस्थ रखना बेहद आवश्यक है । जब हम मानसिक रूप से फिट होते हैं तो हम किसी भी संकट से अच्छे से निपट सकते हैं। कोविड-19 के बीच योग हम सभी के लिए आशा की किरण है।"&nbsp; उन्होंने आगे कहा कि यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करते हुए हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने, बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।</p>
<p>कृषि मंत्री ने ग्रामीण भारत पर ध्यान आकृष्ट करने के साथ पिछले साल शुरू की गई एनसीडीसी की आयुष्मान सहकार योजना के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि यह एक अनूठी योजना है जिसका उद्देश्य देश भर में विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाओं में सुधार करना है। अगले कुछ वर्षों में लाभार्थियों तक पहुंचने के लिए योजना के तहत 10,000 करोड़ रुपये का ऋण दिया जाएगा।</p>
<p>स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान (एस-व्यास) बेंगलुरू के कुलपति गुरुजी डॉ एच.आर. नागेंद्र ने बताया कि कैसे योग ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के लिए जागरूकता, आत्म-जागरूकता और कई अन्य स्वास्थ्य लाभ लाने में मदद कर सकता है जहां वायरस ने तबाही मचाई है। लोगों को संक्रमित किया है और कई लोगों की जान ली है।</p>
<p>मास्क के उपयोग और सामाजिक दूरी के मानदंडों जैसे कोविड-19 के उचित व्यवहार को अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने वायरस से लड़ने के लिए शरीर की प्रतिरक्षा में सुधार करने के लिए रोजाना कम से कम आधे घंटे योग अभ्यास करने की सलाह दी।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमने देखा है कि वर्तमान में यह कहने के लिए कुछ हद तक साक्ष्य हैं कि योग अभ्यास शरीर को बहुत आवश्यक प्रतिरक्षा प्रदान कर सकता है और शरीर के लिए एक रोग-मुक्त होमियोस्टैटिक स्थिति का आश्वासन दे सकता है।" उन्होंने कहा कि कोविड -19 महामारी के दौरान हर किसी को अपने परिवार के सदस्यों के साथ घर पर रहने का एक शानदार अवसर मिला जो दो साल पहले भागदौड़ भरे व्यस्त जीवन में संभव नहीं था।</p>
<p>इस अवसर पर एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप नायक ने कहा कि महामारी के दौरान योग का महत्व बढ़ गया है और यह लोगों को स्वस्थ, धनवान और बुद्धिमान बनाने में मदद करेगा। एनसीडीसी की पहल के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि निगम ने देश भर के अपने कर्मचारियों और सहकारी समितियों के सदस्यों के लिए 14 जून से सप्ताह में तीन बार दो महीने का योग सत्र ऑनलाइन शुरू किया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि योग सत्र पिछले साल एनसीडीसी और एस-व्यास के बीच हुए समझौते के तहत आयोजित किया जा रहा है। समझौते के अनुसार&nbsp; दोनों संगठन स्थानीय सहकारिता की मदद से पूरे देश में संयुक्त रूप से योग स्वास्थ्य केंद्र और प्राकृतिक चिकित्सा सुविधाएं स्थापित करने पर सहमत हुए हैं।</p>
<p>इससे पूर्व, लक्ष्मणराव इनामदार राष्ट्रीय सहकारिता अनुसंधान एवं विकास अकादमी (लिनाक)-एनसीडीसी के मुख्य निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल बलजीत सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि योग भारत की प्राचीन प्रणाली में गहरी जड़ें जमा चुका है और कोविड -19 संकट के कारण दैनिक जीवन में अशांति की दृष्टि से इसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।</p>
<p>वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान, एस-व्यास के योग गुरु पवन सिंह ने एनसीडीसी मुख्यालय और इसके क्षेत्रीय कार्यालयों के साथ-साथ देश भर की सहकारी समितियों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई प्रतिभागियों के लाभ के लिए योग कक्षाएं आयोजित कीं।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीडीसी ने मनाया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ]]></media:description>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    <item>
        <title><![CDATA[एनसीडीसी और एस&amp;#45;व्यास ने दो माह का योग कार्यक्रम शुरू किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-and-s-vyasa-launch-two-month-long-online-yoga-programme.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 14 Jun 2021 07:59:22 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-and-s-vyasa-launch-two-month-long-online-yoga-programme.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div style="display: none;"></div>
<p><span>कोविड -</span>19 <span>महामारी के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता निर्माण में योग की महत्वपूर्ण भूमिका को सामने लाने, </span>&nbsp;<span>शरीर और मन को राहत प्रदान करने के साथ</span>&nbsp;<span>संक्रमण के बाद तेजी से स्वास्थ्य लाभ के लिए </span><span>राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने अपने कर्मचारियों और सहकारी समितियों के सदस्यों के लिए सप्ताह में तीन दिन </span>14 <span>जून से दो महीने का ऑनलाइन योग कार्यक्रम शुरू किया है ।</span></p>
<p>स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान (एस-व्यास) , <span>बेंगलुरु स्थित वैश्विक योग विश्वविद्यालय के योग विशेषज्ञ वर्चुअल योग कक्षाएं आयोजित करेंगे। </span>21 <span>जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारी के साथ सोमवार</span>, <span>बुधवार और शनिवार को सुबह </span>6 <span>से </span>7 <span>बजे </span>14 <span>अगस्त तक कक्षाएं आयोजित की जाएंगी।</span></p>
<p>यह सत्र ग्रामीण स्वास्थ्य देखभाल पर केंद्रित एनसीडीसी की आयुष्मान सहकार पहल के रूप में तथा एनसीडीसी द्वारा एस-व्यास के साथ हस्ताक्षरित एक समझौते के हिस्से के रूप में आयोजित किया जा रहा है। यह दोनों संगठन स्थानीय सहकारिताओं के माध्यम से देश भर में संयुक्त रूप से योग स्वास्थ्य केंद्र और प्राकृतिक चिकित्सा सुविधाएं स्थापित करने पर भी सहमत हुए हैं।</p>
<p>योग विशेषज्ञ और एस-व्यास अस्पताल के सीएमओ&nbsp; अमित सिंह योग <span>सत्र आयोजित करेंगे। उन्होंने</span><span>&nbsp;कहा कि योग प्रतिभागियों को विश्राम</span>, <span>शारीरिक लचीलापन</span>, <span>सांस लेने के व्यायाम से जुड़े आसन सिखाए जाएंगे। </span></p>
<p>&ldquo;<span>रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में</span>, <span>विशेष रूप से कोविड -</span>19 <span>के दौर में योग के महत्व से जनता परिचित है। ऐसे कई नैदानिक निष्कर्ष हैं जिनसे पता चला है कि योग न केवल शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकता है बल्कि लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को भी सुनिश्चित कर सकता है।"&nbsp; उन्होंने जोर देकर कहा कि योग को एक विज्ञान के रूप में देखा जाना चाहिए जो प्रभावी रूप से तनाव पैदा करने वाले हार्मोन को कम कर सकता है</span>, <span>तंत्रिका तंत्र को मजबूत कर सकता है</span>, <span>शरीर से विषाक्त पदार्थों को हटाते हुए लसीका तंत्र को उत्तेजित कर सकता है।</span></p>
<p>एनसीडीसी और एस-व्यास&nbsp; के संयुक्त कार्यक्रम के लिए एस-व्यास के कुलपति गुरुजी नागेंद्र को धन्यवाद देते हुए एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप नायक&nbsp; ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में योग का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यूट्यूब में सहकार कॉपट्यूब चैनल पर ऑनलाइन योग सत्रों की श्रृंखला ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी समितियों के सदस्यों के अलावा देश भर के एनसीडीसी कर्मचारियों के हित के लिए है। एनसीडीसी समय-समय पर नियमित स्वास्थ्य वार्ता श्रृंखला भी चलाता है और एम्स जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ एनसीडीसी के कर्मचारियों और सहकारी समितियों के सदस्यों के साथ बातचीत करते हैं। उन्होंने योग को वैश्विक समुदाय के लिए भारतीय विरासत का वरदान बताया। ग्रामीण क्षेत्रों में योग कल्याण केंद्रों से स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए सहकारी समितियों के लिए अच्छे व्यवसाय मॉडल बनाने की उम्मीद है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीडीसी और एस-व्यास ने दो माह का योग कार्यक्रम शुरू किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कोविड वैश्विक महामारी के दौरान मानसिक स्वास्थ्य एवं सहकारिताएं  पर एनसीडीसी की वर्कशाप]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/NCDC-Organised-workshop-on-Mental-health-during-Covid-pandemic-and-cooperatives.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 07 Jun 2021 12:40:16 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/NCDC-Organised-workshop-on-Mental-health-during-Covid-pandemic-and-cooperatives.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली&nbsp;</p>
<p><span>कोविड -</span>19 <span>वैश्विक महामारी के कारण चिंता</span>, <span>वित्तीय हानि</span>, <span>एवं जीवनशैली में आये बदलाव जैसे कि सामाजिक दूरी एवं मृत्यु के नियमों ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला हैं।&nbsp; राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने शुक्रवार को यहां देश भर से अपने कार्मिकों एवं सहकारी समितियों के सदस्यों के लिए मानसिक स्वास्थ्य वार्ता पर एक ऑनलाइन सत्र आयोजित करके अपनी सहानुभूति दर्शायी है ।</span></p>
<p>"<span>एनसीडीसी हेल्थ टॉक-कोविड एंड मेंटल हेल्थ" शीर्षक से एक वर्चुअल संवाद सत्र आयोजित किया गया जिसके माध्यम से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली में मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर नंद कुमार &nbsp;</span><span>ने वैश्विक रूप से फैली महामारी के दौरान मानसिक स्वास्थ्य संकट को दूर करने के तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी ।</span></p>
<p>इस कार्यक्रम का संचालन राजकोट महिला ऋण सहकारिता (Rajkot Women Credit Cooperative) की अध्यक्ष प्रीतिबेन पटेल द्वारा किया गया । डॉ. नंद कुमार का स्वागत करते हुए डॉ. के.टी. चेन्नेशप्पा, <span>कार्यकारी निदेशक</span>, <span>एनसीडीसी ने कहा कि कोविड-19 के कारण हुई मृत्यु</span>, <span>लॉकडाउन एवं बेरोजगारी के परिणामस्वरूप चिंता और अवसाद काफी व्यापक हैं। ऐसी स्थिति में इस प्रकार के एक सत्र की बहुत आवश्यकता है । </span>&ldquo;<span>लोग कई तरह के मानसिक आघातों से गुज़र रहे हैं</span>, <span>जिनके बारे में बात करने की ज़रूरत है। डॉ. के.टी. चेन्नेशप्पा, कोरोना पीड़ित (कोविड सर्वाइवर) ने कहा कि</span>&nbsp;<span>एनसीडीसी आयुष्मान सहकार योजना एक प्रतिक्रिया है तथा हम अपने प्रबंध निदेशक, संदीप कुमार नायक द्वारा की गई पहल के रूप में ऐसे सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित कर रहे हैं ।</span></p>
<p>एक घंटे से अधिक के इस सत्र के दौरान डॉ नंद कुमार ने कोविड -19 से संबंधित विभिन्न मुद्दों के बारे में बात की जिसमें मनोविज्ञान पर इसके प्रभाव, <span>शारीरिक स्वास्थ्य के रूप में लोगों को लगातार घबराहट</span>, <span>चिड़चिड़ापन</span>, <span>कमजोर एकाग्रता</span>, <span>अनिद्रा</span>, <span>व्याकुलता संबंधी विकार एवं भय जैसे कि समय पर चिकित्सा उपचार न मिलने का डर शामिल है, जो शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा देता है ।</span></p>
<p>उन्होंने बताया कि महामारी के दौरान सामान्य तनाव आना स्वभाविक है लेकिन सामाजिक अनुभव जैसे स्वयं या परिवार के सदस्यों के लिए कोविड निदान, <span>लॉकडाउन</span>, <span>प्रवास</span>, <span>घर से काम</span>, <span>ऑनलाइन शिक्षा</span>, <span>आदि</span>, <span>जो कभी किसी मानक पैमाने पर नहीं रहे हैं, इसने व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला है ।</span></p>
<p>वर्चुअल माध्&zwj;यम जैसे फोन और वीडि&zwj;यो के द्वारा अपने परि&zwj;जनों के साथ संपर्क बनाये रखें, आरोग्य शारीरि&zwj;क क्रि&zwj;याकलाप जैसे ताजी हवा में टहलना, योगा करना तथा हल्का-फुल्का शारीरि&zwj;क व्यायाम, ध्&zwj;यान लगाना एवं मानसि&zwj;क स्&zwj;वास्&zwj;थ्&zwj;य समस्&zwj;या को दूर करने के लि&zwj;ए डॉक्&zwj;टर द्वारा सुझाये कुछ उपायों को अपनी रोजमर्रा की दि&zwj;नचर्या में बनाये रखना चाहिए। प्रोफेसर नंद कुमार ने जोर देते हुए यह भी कहा कि&zwj; जब भी संभव हो सके लोगों की मदद करें, इससे तृप्&zwj;ति&zwj; की भावना उत्पन्न होती है और अशांत मन को शांति&zwj; मिलती है ।</p>
<p>उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि&zwj; बि&zwj;स्&zwj;तर पर बि&zwj;ना सोचे समझे सर्फिंग न करें या बहुत अधि&zwj;क सोशल मीडि&zwj;या ने देखें, क्&zwj;योंकि&zwj; इससे अधि&zwj;क थकान हो सकती है और लंबे समय में इसका प्रभाव मानसि&zwj;क स्&zwj;वास्&zwj;थ्&zwj;य पर पड़ सकता है । उन्होंने यह भी कहा कि संतुलित भोजन का सेवन करें तथा जंक एवं फ्रोजन खाद्य पदार्थ को कम करके सेहतमंद रहा जा सकता है। उन्&zwj;होंने बताया कि&zwj; रोग प्रति&zwj;रोधक शक्&zwj;ति&zwj; को बढ़ाने के लि&zwj;ए अनुपूरक (सप्&zwj;लीमेंट) या वि&zwj;टामि&zwj;न की दवाइयों को अधि&zwj;क मात्रा में लेने की आवश्&zwj;यकता नहीं है। उन्&zwj;होंने सामान्&zwj;य कहावत पर जोर देते हुए कहा कि&zwj; "<strong>एक स्&zwj;वस्&zwj;थ शरीर में स्&zwj;वस्&zwj;थ मन का वास होता है </strong>।"</p>
<p>संवाद सत्र के दौरान प्रोफेसर नंद कुमार ने सहभागि&zwj;यों द्वारा उठाए गए प्रश्&zwj;नों का उत्तर दि&zwj;या । पोस्&zwj;ट कोवि&zwj;ड कफ से संबंधि&zwj;त मुद्दे के बारे में एक दर्शक द्वारा कि&zwj;ए गए प्रश्&zwj;न पर उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि&zwj; ऐसी कि&zwj;सी भी समस्&zwj;या को नजरंदाज न करें तथा तत्&zwj;काल डॉक्&zwj;टर से संपर्क करें, इसके अलावा अन्&zwj;य ने जानना चाहा कि&zwj; घर से कार्य तथा घर के लि&zwj;ए कार्य के बीच संतुलन कैसे&nbsp; बनाया&nbsp; जाए। इस संबंध में प्रोफेसर नंद कुमार ने कहा कि&zwj; कार्यालय कार्य के लिए समय नि&zwj;र्धारि&zwj;त करना तथा इसके साथ परि&zwj;वार के सदस्&zwj;यों सहि&zwj;त बच्&zwj;चों को भी समय देना महत्&zwj;वपूर्ण है । उन्&zwj;होंने यह भी महसूस कि&zwj;या कि&zwj; परि&zwj;जनों को बच्&zwj;चों के साथ कार्यकलापों में शामि&zwj;ल होना चाहि&zwj;ए, जो इस समय मानसि&zwj;क आघात से गुजर रहे हैं क्&zwj;योंकि&zwj; कोवि&zwj;ड के समय में ऑन लाइन कक्षाएं भी चल रही हैं ।</p>
<p>इसी क्रम में उन्&zwj;होंने कहा , ''कोवि&zwj;ड शीघ्र अथवा देरी से जाएगा लेकि&zwj;न इस वायरस के द्वारा जो आघात हुआ है वह लंबे समय तक बना रहेगा'' । &nbsp;हम अपने दैनि&zwj;क कार्यकलापों एवं ज्ञानात्&zwj;मक लचीलेपन को पुन: बहाल करके इससे शीघ्र अति&zwj;-शीघ्र बाहर नि&zwj;कल सकते हैं। उन्&zwj;होंने सुझाव देते हुए कहा कि&zwj; जब आपको घबराहट हो तो इस मंत्र को सोचो&zwj;<strong> ''यह वक्&zwj;त भी गुजर जाएगा ।''</strong> &nbsp;</p>
<p>इस प्रकार के सत्र आयोजि&zwj;त करने की आवश्&zwj;यकता के बारे में बताते हुए&nbsp; प्रीतिबेन पटेल ने कहा कि&zwj; मानसि&zwj;क स्&zwj;वास्&zwj;थ्&zwj;य संकट महि&zwj;लाओं को बड़े पैमाने पर प्रभावि&zwj;त करता है और दूसरी लहर ने परि&zwj;वारों पर गहरा प्रभाव डाला है ।</p>
<p>एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक, संदीप नायक ने कहा, "<span>एक संगठन के रूप में</span>, <span>यह एनसीडीसी की जिम्मेदारी है कि हम अपने कार्मिकों एवं सहकारी समितियों के साथ खड़े रहें और उन्हें इस तरह की स्थितियों से निपटने के तरीके खोजने में मदद करें ।"</span></p>
<p>इस कार्यक्रम में एनसीडीसी मुख्यालय एवं इसके 18 <span>क्षेत्रीय कार्यालयों के कार्मिकों के अतिरिक्त राज्यों की </span>150 <span>सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया ।</span></p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कोविड वैश्विक महामारी के दौरान मानसिक स्वास्थ्य एवं सहकारिताएं  पर एनसीडीसी की वर्कशाप ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीडीसी की आंध्र के युवाओं को सहकारी क्षेत्र में उद्यमी बनाने की पहल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/NCDC-to-support-Andhra-youth-to-become-cooperative-business-leaders.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 31 May 2021 11:03:08 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/NCDC-to-support-Andhra-youth-to-become-cooperative-business-leaders.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span> राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) अपने यूट्यूब चैनल 'सहकार कॉपट्यूब एनसीडीसी इंडिया' पर सहकारिता से जुड़े विषयों पर कार्यक्रम चला रहा है और वीडियो </span>देश में युवाओं और किसानों के मध्य उनके करियर संबंधी मार्गदर्शन के चलते काफी लोकप्रिय हो रहे हैं।&nbsp; जो युवाओं और किसानों को <span>सहकारिता को आय के स्रोत के रूप में केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित करने जुड़े विषयों पर केंद्रित हैं। </span><span>&nbsp;राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम ने 27 मई, गुरुवार को आंध्र प्रदेश के युवाओं तक तेलुगु भाषा के माध्यम से अपनी पहुंच बनाने के क्रम में इसी तरह की एक और पहल शुरू की।</span></p>
<p>सहकारिताओं के बारे में सम्पूर्ण जानकारी सहित यह वीडियो सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं, <span>एनसीडीसी के यूट्यूब चैनल</span>, '<span>सहकार कॉपट्यूब एनसीडीसी इंडिया</span>' <span>पर अपलोड किए गए हैं तथा युवाओं एवं सहकारी क्षेत्र में प्रवेश करने के इच्छुक लोगों के लिए यह केंद्रित हैं । </span></p>
<p>डॉ. के राजेश्वर राव, <span>विशेष सचिव</span>, <span>नीति आयोग ने</span>&nbsp;<span>आंध्र प्रदेश में सहकारी समितियों के गठन और पंजीकरण पर मार्गदर्शन वीडियो को ऑनलाइन लॉन्च करते हुए कहा कि इस तरह की पहल सहकारी समितियों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ युवाओं तथा संभावित सहकारी समितियों को उनकी आय बढ़ाने में मदद करेगी</span>, <span>इस प्रकार यह देश की अर्थव्यवस्था में योगदान प्रदान करेगी । इन वीडियो का उद्देश्य देश में </span>10,000 <span>किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को बढ़ावा देने तथा सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख उपायों को सुदृढ़ करने के साथ इनकी जड़ों को मजबूत करना है ।</span></p>
<p>पिछले साल<span> केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री</span><span>&nbsp;नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों एवं युवाओं को सहकारिता से लाभान्वित एवं प्रोत्साहित करने के लिए एनसीडीसी का यूट्यूब चैनल </span>'<span>सहकार कॉपट्यूब एनसीडीसी इंडिया</span>' <span>लॉन्च किया था । उन्होंने एनसीडीसी द्वारा </span>'<span>सहकारिता के गठन एवं पंजीकरण</span>' <span>पर 18 अलग-अलग राज्यों में जैसे ओडिया</span>, <span>बंगाली</span>, <span>गुजराती</span>, <span>तमिल</span>, <span>पंजाबी और मिजोरम सहित हिंदी के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में मार्गदर्शन वीडियो भी तैयार किए थे ।</span></p>
<p>डॉ. राव ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि एक ही स्थान पर दिशानिर्देश होना और स्थानीय भाषाओं में वीडियो लॉन्च करना एक अच्छा विचार है क्योंकि यह नए लोगों को इस क्षेत्र में आने के लिए प्रोत्साहित करेगा । "उस क्षेत्र विशेष के युवा भी इससे जुड़ाव महसूस करेंगे ।" डॉ. राव ने सुझाव दिया कि वीडियो को ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में संभावित सहकारिता के बीच लोकप्रिय बनाया जाए । उन्होंने कहा, "<span>उम्मीद है कि यह ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों तक जाएगा और अधिक से अधिक युवाओं को सहकारिताएं अपनी आकर्षित करेगा तथा अधिक से अधिक समितियों बनाएगा।"</span></p>
<p>इस अवसर पर <span>कर्नल (डॉ.) बलजीत सिंह</span>, <span>मुख्य निदेशक</span>,<span> लिनाक-एनसीडीसी ने मुख्य अतिथि डॉ. राव का स्वागत करते हुए आशा व्यक्त की कि मार्गदर्शन वीडियो विशेष रूप से आंध्र प्रदेश में सहकारी समितियों के प्रचार और विकास में एक लंबा सफर तय करेगा ।</span></p>
<p><span>एनसीडीसी के टीचिंग फैकल्टी और </span><span>मार्गदर्शन वीडियो पहल का मार्गदर्शन करने वाले एस.के टक्कर ने कहा </span><span>&nbsp;कि मार्गदर्शन वीडियो का उद्देश्य युवाओं</span>, <span>महिलाओं एवं उन सभी तक पहुंचना है जो संभावित सहकारी व्यवसाय उद्यमी हो सकते हैं</span>, <span>उनका मार्गदर्शन करते हुए कि कैसे सहकारी समितियां राज्य-विशिष्ट विनियमों के संबंध में विशेष रूप से आंध्र प्रदेश में गठित और पंजीकृत किया जा सकता है ।</span>इस ऑनलाइन कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश की विभिन्न सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों के अलावा किसान, <span>कृषि विज्ञान केंद्र (केविके</span>), <span>क्लस्टर-आधारित व्यावसायिक संगठन (सीबीबीओ</span>) <span>और एनसीडीसी के अधिकारी शामिल हुए।&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीडीसी की आंध्र के युवाओं को सहकारी क्षेत्र में उद्यमी बनाने की पहल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको ने लांच किया नैनो यूरिया, दुनिया की पहली नैनो यूरिया उत्पादक बनी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/IFFCO-first-manufacturer-to-Introduce-Nano-Urea-to-farmers-across-the-World.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 31 May 2021 08:23:26 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/IFFCO-first-manufacturer-to-Introduce-Nano-Urea-to-farmers-across-the-World.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>नई दिल्ली, 31 मई, 2021</strong></em></p>
<p>इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) ने अपनी 50वीं वार्षिक आम बैठक में अपनी प्रतिनिधि महासभा के सदस्यों की उपस्थिति में पूरी दुनिया के किसानों के लिए विश्व का पहला नैनो यूरिया उत्पाद लांच किया है जो तरल रूप में है। इफको के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की रिसर्च के बाद नैनो यूरिया तरल को स्वदेशी और प्रोपाइटरी तकनीक के माध्यम से कलोल स्थित नैनो जैवप्रौद्योगिकी अनुसंधान केन्द्र में तैयार किया है । यह नवीन उत्पाद 'आत्मनिर्भर भारत' और 'आत्मनिर्भर कृषि' की दिशा में एक सार्थक कदम है । इफको द्वारा इस संबंध में जारी एक प्रेस वक्तव्य में यह जानकारी दी गई है।</p>
<p>इफको का कहना है कि&nbsp; नैनो यूरिया का उत्पादन जून 2021 से आरंभ होगा और शीघ्र ही इसका व्यावसायिक विपणन भी शुरू हो जाएगा । इफको ने किसानों के लिए 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल की कीमत 240 रुपये निर्धारित की है जो सामान्य यूरिया के एक बैग के मूल्य से 10 प्रतिशत कम है ।&nbsp;</p>
<p>इफको ने कहा है कि इफको नैनो यूरिया तरल को पौ धों के पोषण के लिए प्रभावी व असरदार पाया गया है । इसके प्रयोग से फसलों की पैदावार बढ़ती है तथा पोषक तत्वों की गुणवत्ता में सुधार होता है । नैनो यूरिया भूमिगत जल की गुणवत्ता सुधारने तथा जलवायु परिवर्तन व टिकाऊ उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव डालते हुए ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा ।</p>
<p>किसानों द्वारा नैनो यूरिया तरल के प्रयोग से पौधों को संतुलित मात्रा में पोषक तत्व प्राप्त होंगे और मिट्टी में यूरिया के अधिक प्रयोग में कमी आएगी। यूरिया के अधिक प्रयोग से पर्यावरण प्रदूषित होता है, मृदा स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है, पौधों में बीमारी और कीट का खतरा अधिक बढ़ जाता है, फसल देर से पकती है और उत्पादन कम होता है । साथ ही फसल की गुणवत्ता में भी कमी आती है । नैनो यूरिया तरल फसलों को मजबूत और स्वस्थ बनाता है तथा फसलों को गिरने से बचाता है ।<br />इफको नैनो यूरिया किसानों के लिए सस्ता है और यह किसानों की आय बढ़ाने में प्रभावकारी होगा । इफको नैनो यूरिया तरल की 500 मिलीलीटर&nbsp; की एक बोतल सामान्य यूरिया के कम से कम एक बैग के बराबर होगी । इसके प्रयोग से किसानों की लागत कम होगी ।&zwnj; नैनो यूरिया तरल का आकार छोटा होने के कारण इसका परिवहन की आसान है और भंडारण लागत में भी काफी कमी आएगी ।<br />इफको ने कहा है कि राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (एनएआरएस) के तहत 20 आईसीएआर संस्थानों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केन्द्रों में 43 फसलों पर किये गये बहु-स्थानीय और बहु-फसली परीक्षणों के आधार पर इफको नैनो यूरिया तरल को उर्वरक नियंत्रण आदेश (एफसीओ, 1985) में शामिल कर लिया गया है । इसकी प्रभावशीलता का परीक्षण करने के लिए पूरे भारत में 94 से अधिक फसलों पर लगभग 11,000 कृषि क्षेत्र परीक्षण (एफएफटी) किये गये थे । हाल ही में पूरे देश में 94 फसलों पर हुए परीक्षणों में फसलों की उपज में औसतन 8 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है ।<br />इफको नैनो यूरिया तरल को सामान्य यूरिया के प्रयोग में कम से कम 50 प्रतिशत कमी लाने के प्रयोजन से तैयार किया गया है । इसके 500 मिलीलीटर&nbsp; की एक बोतल में 40,000 पीपीएम नाइट्रोजन होता है जो सामान्य यूरिया के एक बैग के बराबर नाइट्रोजन पोषक तत्व प्रदान करेगा ।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/05/image_750x_60b49f6e3e3bd.jpg" alt="" /></p>
<p><br />इफको नैनो यूरिया का उत्पादन जून 2021 तक आरंभ होगा और शीघ्र ही इसका व्यावसायिक विपणन भी शुरू हो जाएगा । इफको ने किसानों के लिए 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल की कीमत 240 रुपये निर्धारित की है जो सामान्य यूरिया के एक बैग के मूल्य से 10 प्रतिशत कम है । इस उत्पाद के बारे में किसानों को पूरी जानकारी देने के लिए इफको ने एक व्यापक देशव्यापी प्रशिक्षण अभियान चलाने की योजना बनायी है । ये उत्पाद इफको के ई-कॉमर्स प्लेटफार्म www.iffcobazar.in.के अतिरिक्त मुख्य रूप से सहकारी बिक्री केन्द्रों और अन्य विपणन माध्यमों से किसानों को उपलब्ध कराये जाएंगे ।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको ने लांच किया नैनो यूरिया, दुनिया की पहली नैनो यूरिया उत्पादक बनी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीडीसी सीनियर मैनेजमेंट में  नये एक्सपर्ट्स की नियुक्तियां करेगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/NCDC-to-induct-fresh-experts-in-its-senior-management-pool.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 21 May 2021 09:49:32 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/NCDC-to-induct-fresh-experts-in-its-senior-management-pool.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>नई दिल्ली, 21 मई, 2021</strong></em></p>
<p>सहकारी समितियों के क्षेत्र में भारत की तरक्की की गति को और तेज करने के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम 'एनसीडीसी' ने विभिन्न संगठनों के पेशेवरों को मुख्य निदेशक के रूप में प्रतिनियुक्ति पर आने के लिए आमंत्रित किया हैI</p>
<p>एनसीडीसी आठ मुख्य निदेशकों की भर्ती करना चाहता हैI इसके लिए पात्र व्यक्ति केंद्र सरकार,&nbsp; राज्य सरकार, सहकारी संगठन,सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू)&nbsp;</p>
<p>और स्वायत्त निकाय आदि से जुड़े &nbsp;होने चाहिए। पात्र व्यक्ति एनसीडीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध विज्ञापन के अनुसार आवेदन कर सकते हैं I</p>
<p>एनसीडीसी के कार्यकारी निदेशक डॉ. के.टी. चेनेशप्&zwj;पा (मानव संसाधन)&nbsp; ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एनसीडीसी समय-समय पर विभिन्न संगठनों के लोगों को प्रतिनियुक्ति के आधार पर अपने यहां नियुक्त करता रहा है I कृषि क्षेत्र पर सरकार के विशेष ध्यान देने के चलते सीधी भर्ती और प्रतिनियुक्ति जैसे विभिन्न माध्यमों से पेशेवरों की भर्ती आवश्यक हो गई है। वर्तमान में एनसीडीसी में दोनों प्रक्रियाएं चल रही हैं।</p>
<p>डॉ. चेनेशप्&zwj;पा ने कहा कि निर्दिष्ट संगठनों में मुख्य निदेशक के अनुरूप पद धारण करने वाले या लेवल -12 पदों में 5 वर्ष या उससे अधिक की सेवाओं के साथ कार्य करने वाले व्&zwj;यक्ति इस पद हेतु आवेदन करने के पात्र हैं। एनसीडीसी, सहकारी या वित्त या बैंकिंग क्षेत्रों में 10 साल के अनुभव वाले पेशेवरों को वरीयता देगा I इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 8 जून 2021 हैI</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/05/image_750x500_60a7816046453.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीडीसी सीनियर मैनेजमेंट में  नये एक्सपर्ट्स की नियुक्तियां करेगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको की डीलरशिप देने की धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ इफको करेगी सख्त कानूनी कार्रवाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/IFFCO-to-take-strict-actions-against-fraud-and-false-entities-offering-dealership-or-franchise.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 13 May 2021 15:47:06 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/IFFCO-to-take-strict-actions-against-fraud-and-false-entities-offering-dealership-or-franchise.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>फर्टिलाइजर्स फ्रेंचाइजी के नाम से वेबसाइट, इंटरनेट व सोशल मीडिया पर #iffco ब्रांच होने का दावा कर फ्रैंचाइज़ी, डीलरशिप देने के नाम पर कुछ लोग अवैध वसूली कर रहे हैं। ऐसे लोगों और कंपनियों के खिलाफ इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) ठोस कदम उठा रही है। इफको द्वारा गुरुवार शाम एक प्रेस बयान जारी कर कहा है कि ऐसे असामाजिक तत्वों के ख़िलाफ़ सख्त कानूनी कदम उठाया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>इफको द्वारा जारी बयान में कहगा गया है कि हमें यह जानकारी मिली है कि कुछ शरारती तत्वों द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में इंटरनेट और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सक्रिय रहकर फर्टिलाइजर्स फ्रेंचाइजी ( Website &nbsp; www.fertilizerfrenchies.com ) के नाम व शैली से इफको (इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड) की शाखा होने का झूठा दावा कर रहे हैं ।&zwnj; ऐसे तत्व बेईमानी और धोखे से आम जनता को उर्वरक डीलरशिप और/या फ्रेंचाइजी देने का प्रस्ताव कर रहे हैं ।&zwnj; इस तरह का गैरकानूनी काम करने यह लोग आम जनता और खासतौर से बेरोजगार युवाओं से आवेदन मांगकर उन्हें लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। उर्वरक की डीलरशिप/फ्रेंचाइज देने की आड़ में ये उर्वरकों की आपूर्ति हेतु लाइसेंस शुल्क, जमा राशि और बुकिंग आदि के नाम पर आम जनता से बड़ी रकम &nbsp;ऐंठ रहे हैं ।<br />ऐसे व्यक्तियों/संस्थाओं से इफको का किसी प्रकार का कोई संबंध नहीं है । इफको के नाम का प्रयोग करके ये आम जनता को धोखा देने और ठगने का काम कर रहे हैं।<br />आम जनता को सलाह दी जाती है है कि वह अधिक सावधान रहे और इंटरनेट व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ऐसे भ्रामक विज्ञापनों का शिकार न हो ।<br />यदि कोई भी व्यक्ति/संस्था इस तरह का लेन-देन कर रहा है तो वह ऐसा अपने खुद के जोखिम पर करेगा । इफको इसके लिए कहीं से जिम्मेदार नहीं होगा ।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/05/image_750x500_609d49dcec9f4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको की डीलरशिप देने की धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ इफको करेगी सख्त कानूनी कार्रवाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पारादीप में इफको का चौथा ऑक्सीजन संयंत्र]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-fourth-oxygen-plant-paradeep.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 29 Apr 2021 16:34:15 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-fourth-oxygen-plant-paradeep.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इफको ने राष्ट्र हित में अस्पतालों को ऑक्सीजन की निःशुल्क आपूर्ति करने के लिए उड़ीसा स्थित अपनी&nbsp; #पारादीप इकाई में 150 क्युबिक मीटर/घंटे की क्षमता वाला चौथा ऑक्सीजन संयंत्र लगाने का आदेश दिया है। इससे प्रति दिन 520 सिलेण्डर का उत्पादन 15 जून से शुरू हो जाएगा।</p>
<p>राष्ट्र हित में उड़ीसा और उसके निकटवर्ती अस्पतालों को नि:शुल्क ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए उड़ीसा के पारादीप स्थित इफको के चौथे ऑक्सीजन संयंत्र से प्रति दिन 520 बड़े डी टाइप और 200 मंझोले आकार वाले बी टाइप मेडिकल ऑक्सीजन सिलेण्डर की रिफ़िलिंग होगी।</p>
<p>इफको द्वारा उड़ीसा और आसपास स्थित अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर मुफ्त में भरा जाएगा। रिफिल के लिए खुद का सिलेंडर लाना होगा। इफको से सिलिंडर लेने पर सुरक्षा राशि ली जाएगी&nbsp; ताकि ऑक्सीजन की जमाखोरी को रोका जा सके।</p>
<p>इफको जल्द से जल्द सभी प्लांटों को चालू करने की कोशिश करेगी।&nbsp;इफको ने चार ऑक्सीजन संयंत्रों पर लगभग 30 करोड़ रुपये का निवेश किया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पारादीप में इफको का चौथा ऑक्सीजन संयंत्र ]]></media:description>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीडीसी को डॉएच्‍च बैंक से 68.87 मिलियन यूरो का  ऋण मिला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/NCDC-SECURES-EURO-68.87-MILLION-LOAN-FROM-DEUTSCHE-BANK.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 13 Apr 2021 09:58:35 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/NCDC-SECURES-EURO-68.87-MILLION-LOAN-FROM-DEUTSCHE-BANK.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने देश में सहकारी समितियों को ऋण प्रदान करने के लिए जर्मनी के सबसे बड़े बैंक डॉएच्च बैंक से यूरो 68.87 मिलियन (600 करोड़ रुपये) का ऋण लिया है। मंगलवार &nbsp;नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री, नरेन्द्र सिंह तोमर की उपस्थिति में एनसीडीसी और जर्मन बैंक के बीच एक समझौता किया गया । इसके साथ ही केंद्रीय कृषि मंत्री की उपस्थिति में बाजारों के साथ किसानों के संबंध को बढ़ावा देने के लिए इंडि&zwj;यन चैंबर ऑफ कॉमर्स और एनसीडीसी के बीच हुए एक समझौते पर हस्ताक्षर के हुए। इस कार्यक्रम की भी उन्होंने अध्यक्षता की।</p>
<p>इस असवर पर कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत के कृषि परिदृश्य और जर्मनी के साथ अपने आर्थिक संबंधों को एक नई दृष्टि दी है । उन्होंने कहा कि देश में स्थापित किए जा रहे किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), आईसीसी और डॉएच्च बैंक के साथ एनसीडीसी समझौतों के माध्यम से आसान ऋण और बाजार तक पहुंच बना सकेंगे ।</p>
<p>यह पहली बार है कि दुनिया के सबसे बड़े यूरोपीय बैंकों में से यह बैंक एनसीडीसी को ऋण प्रदान कर रहा है जो भारतीय विकास वित्त संस्थान में वैश्विक वित्तीय संस्थान के आत्मविश्वास को दर्शाता है। वि&zwj;शेष रूप से ऐसे समय में जब कोविड -19 संकट द्वारा उत्पन्न वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल ने ऋण को एक चुनौतीपूर्ण कथ्य बना दिया है ।</p>
<p>डॉएच्च बैंक एजी के सीईओ और भारत में प्रमुख, कौशिक शपारिया ने एक बयान में कहा कि वह एनसीडीसी के साथ कृषि क्षेत्र में मजबूत संबंधों की उम्मीद कर रहे हैं ।</p>
<p>इस दौरान एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप नायक ने कहा कि किसानों को टिकाऊ, जलवायु-अनुकूल कृषि की दिशा में एक सफल केंद्र बिंदु बनाने में वित्त एनसीडीसी की मदद करेगा । प्रबंध निदेशक ने कहा कि &ldquo;सहकारी संस्थाओं के लिए 1963 से एक संगठन के रूप में हमारी स्थापना के बाद से हम हमेशा किसानों को टिकाऊपन आजीविका हासिल करने में सहयोग देने के लिए प्रयासरत रहे हैं ।&rdquo;</p>
<p>सहकारि&zwj;ताएं जर्मनी के लि&zwj;ए कोई नया वि&zwj;षय नहीं है तथापि&zwj;, आज जर्मनी के 7,500 सहकारी उद्यमों में 20 दो करोड़ से भी अधि&zwj;क सदस्&zwj;य हैं । इसकी तुलना में भारत की सहकारि&zwj;ताओं की संख्&zwj;या वि&zwj;श्&zwj;व में शीर्ष&nbsp; रैंकिंग पर है । लगभग 94% भारतीय कि&zwj;सान कम से कम एक सहकारि&zwj;ता के सदस्&zwj;य हैं । भारत सरकार की आधुनि&zwj;क कृषि&zwj; पहलें सहकारि&zwj;ताओं को जमीनी स्&zwj;तर से परि&zwj;वर्ति&zwj;त कर रही हैं ।</p>
<p>भारत में डॉएच्&zwj;च बैंक द्वारा की गई पहल, पिछले वर्षों में भारत में जर्मन कंपनि&zwj;यों द्वारा दि&zwj;खाये गई व्&zwj;यवसाय अभि&zwj;रुचि&zwj;यों में से एक है । इस समय भारत में 1700 से अधि&zwj;क जर्मन कंपनि&zwj;यां सक्रि&zwj;य हैं जो लगभग चार लाख प्रत्&zwj;यक्ष एवं अप्रत्&zwj;यक्ष नौकरि&zwj;यां प्रदान करती हैं । यूरोप और भारत के मुख्&zwj;य दस वैश्&zwj;वि&zwj;क व्&zwj;यापारि&zwj;क भागीदारों में, जर्मनी भारत का सबसे शीर्ष व्&zwj;यापारि&zwj;क भागीदार है ।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/04/image_750x_60756b1e1bbde.jpg" alt="" /></p>
<p>एनसीडीसी कृषि&zwj; एवं कि&zwj;सान कल्&zwj;याण मंत्रालय के अंतर्गत एक वि&zwj;कासात्&zwj;मक एवं वि&zwj;त्&zwj;त पोषण संस्&zwj;थान है । वर्ष 2014 से अब तक वि&zwj;भि&zwj;न्&zwj;न प्रकार की सहकारि&zwj;ताओं को 16 बि&zwj;लि&zwj;यन यूरो ऋण प्रदान कर चुका है । शून्&zwj;य शुद्ध एनपीए के साथ एनसीडीसी सभी राज्&zwj;यों में अपने 18 क्षेत्रीय नि&zwj;देशालयों के साथ इसकी अखि&zwj;ल भारतीय उपस्&zwj;थि&zwj;ति&zwj; है । &nbsp;</p>
<p>इसी प्रकार, डॉएच्च बैंक निगमों, सरकारों एवं अन्य को कॉर्पोरेट व बैंक लेन-देन, ऋण, केंद्रित निवेश बैंकिंग के साथ-साथ खुदरा एवं निजी बैंकिंग प्रदान करता है । पिछले 40 वर्षों में डॉएच्च बैंक भारत के सबसे बड़े विदेशी बैंकों में से एक बन गया है, जिसकी देशभर के 16 शहरों में शाखाएं हैं । शपारि&zwj;या ने कहा कि&zwj; बैंक ने समाज और लोगों की बेहतरी के लि&zwj;ए सामान्&zwj;य लक्ष्य की प्राप्ति&zwj; हेतु एक जैसी विचारधारा वाले भागीदारों के साथ काम किया ।</p>
<p>इस कार्यक्रम में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स कमेटी के सह-अध्यक्ष आदित्य बागड़ी ने कहा कि कृषि- व्यापार एवं खाद्य प्रसंस्करण &nbsp;वि&zwj;षय पर आईसीसी-एनसीडीसी समझौता ज्ञापन का विशेष ध्यान एफपीओ द्वारा निर्यात संवर्धन पर केंद्रि&zwj;त होगा ।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीडीसी को डॉएच्‍च बैंक से 68.87 मिलियन यूरो का  ऋण मिला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[युवा उद्यमियों द्वारा मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्यात में कॉपएक्सिल बनेगी सहायक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/COOPEXCIL-can-help-young-entrepreneurs-export-value-added-products.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 25 Mar 2021 12:04:21 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/COOPEXCIL-can-help-young-entrepreneurs-export-value-added-products.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सहकारी समितियाँ ग्रामीण विकास में विशेष रूप से कृषि के लिए एक साधन बन सकती हैं। सहकारिता क्षेत्र में युवाओं के लिए आर्थिक अवसर उपलब्ध हैं लेकिन इसके लिए हमें उनको सहकारिता में आकर्षित करना होगा। युवाओं को सहकारिता के आर्थिक मॉडल और उसमें उपलब्ध मौकों के प्रति जागरूक करना होगा। लेकिन युवा &nbsp;प्रत्यक्ष रूप सहाकारिता से जुड़ने में कम रुचि दिखा रहे हैं। उनके लिए सहकारिता बुजुर्गों द्वारा संचालित कोई पुराने जमाने की अवधारणा है। इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन्हें सहकारिता का एक अंग बनाएं जो देश की आर्थिक वृद्धि को अग्रसर करने में बड़ी क्षमता रखते हैं। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने बुधवार को सहकारी क्षेत्र निर्यात संवर्धन परिषद (कॉपएक्सिल) की पहली साधारण आम बैठक (जीबीएम) को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियाँ ग्रामीण विकास में विशेष रूप से कृषि के लिए परिवर्तन का एक साधन बन सकती हैं।</p>
<p>कॉपएक्सिल की स्थापना राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के नेतृत्व में की गई है, जो केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अंतर्गत एक सहकारिता केंद्रित वित्तीय संगठन है। मूल्यवर्धन उत्पादों के निर्यात में सहकारी समितियों का मार्गदर्शन करता है।</p>
<p>इस मौके पर भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) के अध्यक्ष दिलीप संघानी ने कहा कि सहकारिता को एक आंदोलन के रूप में लिया जाना चाहिए जिससे कि स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को पूरा किया जा सके ।</p>
<p>रूपाला ने कहा कि मेरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना अनुसार,वर्ष 2024-25 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहकारिताएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि हमारे किसानों ने यह बार-बार प्रमाणित किया है। विशेषकर वैश्विक महामारी के दौरान जीडीपी में उनका योगदान सबसे बेहतर रहा है। केद्रीय मंत्री ने कहा कि बेहतर तकनीक, निवेश, वित्त तथा बाजार की बेहतर पहुँच के माध्यम से छोटे तथा सीमांत किसानों को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा स्थापित कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को एनसीडीसी का सहयोगी बहुत उपयोगी हो सकता है। सरकार द्वारा 10,000 एफपीओ की स्थापना की योजना के तहत सहकारिताओं के रूप में गठित एफपीओ को भी कॉपएक्सिल द्वारा सुविधा प्रदान की जाएगी ।</p>
<p>इस मौके पर केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने कहा कि अक्टूबर 2019 में आयोजित पहले भारतीय अंतरराष्ट्रीय सहकारी व्यापार मेले से हुए लाभ का सहकारिताओं के किसानों के लिए सदुपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्यात में सभी प्रकार की सहकारिताओं को शामिल करने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण का सुझाव दिया ।</p>
<p>सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 94 प्रतिशत किसान एक या उससे अधिक सहकारिताओं के सदस्य हैं । आई.आई.सी.टी.एफ. का उद्देश्य सहकारिताओं को भारत के अंतर्गत तथा विदेश में सहकारिताओं के साथ व्यापार करते हुए मुख्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ाना था । इस तथ्य को ध्यान मे रखते हुए कि भारतीय कृषि समाज की रीढ़ बनी हुई है, जो लगभग 50 प्रतिशत जनसंख्या को आजीविका प्रदान करती है। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री जी ने कहा कि कृषि क्षेत्र का भारत के निर्यात में 10 प्रतिशत से अधिक योगदान है । कृषि निर्यात नीति 2018 कृषि निर्यात को दोगुना करने एवं भारतीय किसानों तथा कृषि उत्पादों को वैश्विक मूल्य श्रृंखला के साथ जोड़ने पर केंद्रित है ।&nbsp;</p>
<p>रुपाला ने कहा कि "मुझे यह बताया गया कि एनसीडीसी ने दिनांक 16 मई 2019 को सभी राज्यों के हितधारकों के साथ राष्ट्रीय स्तरीय परामर्श का आयोजन किया है जिसका निष्कर्ष यह रहा कि उच्च मूल्य प्राप्त करने हेतु सहकारी समितियों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अपने संस्थागत नेतृत्व के अंतर्गत एनसीडीसी को सहकारी क्षेत्रक निर्यात संवर्धन निकाय का गठन करना चाहिए ।"</p>
<p>भारतीय अंतर्राष्ट्रीय सहकारी व्यापार मेले के आयोजन के अवसर पर &nbsp;केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा 2 जुलाई, 2019 को संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान एनसीडीसी द्वारा सहकारी क्षेत्रक निर्यात संवर्धन निकाय के गठन की औपचारिक घोषणा की गई थी ।</p>
<p>भारतीय सहकारिताओं के लिए निर्यात संवर्धन गतिविधि के रूप में एनसीडीसी और दूसरे सहयोगियों द्वारा अक्टूबर, 2019 में पहली बार आई.आई.सी.टी.एफ.का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया । इस मेले में 35,000 से अधिक लोगों ने शिरकत की और 125 विदेशी खरीददारों ने भी हिस्सा लिया। इसमें लगभग 1.2 अरब डॉलर मूल्य के 75 व्यावसायिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गये। व्यापार मेले की सफलता ने कॉपएक्सिल के शुरुआती कार्यान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया। रूपाला ने यह सुझाव दिया कि कॉपएक्सिल के सामान्य निकाय, जिसमें सभी हितधारकों एपीडा, एमपीडा, इफको, नैफेड, ट्राईफेड आदि का प्रतिनिधित्व है। इन संस्थाओं &nbsp;के स्वयं के महासचिव एवं सचिवालय हों। निकाय के संवर्धक के रूप में एनसीडीसी को अपने संसाधनों को कॉपएक्सिल को उपलब्ध कराना चाहिए ।</p>
<p>देशभर में सहकारिताओं को वित्तपोषण कर संवर्धित करने में, एनसीडीसी की भूमिका पर जोर देते हुए मंत्री जी ने कहा कि, एनसीडीसी ने अपने गठन से अब तक सहकारिताओं को 1.76 लाख करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है । एनसीडीसी ने सहकारिताओं की आवश्यकताओं के लिए हाल ही में अनेक नई पहल जैसे युवा सहकार, सहकार मित्र, आयुष्मान सहकार एवं सहकार प्रज्ञा प्रारंभ की हैं । मेरा सुझाव है कि सहकारिताओं की आवश्यकताओं को समझते हुए वित्तपोषण के लिए एनसीडीसी द्वारा निर्यात सहकार योजना तैयार की जाए । &nbsp;&nbsp;</p>
<p>&nbsp;बैठक में एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप नायक ने सभी सहभागियों के समर्थन को स्वीकार करते हुए कहा कि परिषद अपने उत्पादों के निर्यात के लिए सहकारी समितियों हेतु समन्वयक की भूमिका निभाएगी । उन्होंने आगे कहा कि एनसीडीसी का युवा-लक्षित कार्यक्रम, युवा- सहकार इसका एक मुख्य संचालक होगा ।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ युवा उद्यमियों द्वारा मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्यात में कॉपएक्सिल बनेगी सहायक ]]></media:description>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको नहीं बढ़ाएगी  कांप्लेक्स उर्वरकों के दाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/IFFCO-will-not-increase-price-of-complex-fertilizers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 03 Mar 2021 12:59:43 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/IFFCO-will-not-increase-price-of-complex-fertilizers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दुनिया की सबसे बड़ी उर्वरक उत्पादक सहकारी संस्था, इफको ने अपने डीएपी, एनपीके और एनपीएस उर्वरकों के एमआरपी में 31 मार्च 2021 तक कोई भी वृद्धि नहीं करने की घोषणा की है । इफको के इस पूरे माह मौजूदा कीमतों पर ही इन उर्वरों की खरीद कर सकेंगे।&nbsp;</p>
<p>इफको&nbsp; द्वारा जारी सूचना में कहा गया है कि डीएपी की कीमत 1200 रुपये, एनपीके 10:26:26&nbsp; की कीमत 1175 रुपये&nbsp; है। एनपीके 12:32:16 की कीमत 1185&nbsp; रुपये और पीपीएस 20: 20: 0 :1 3&nbsp; कीमत 925 रुपये प्रति बोरी है। इफको हमेशा किसानों की सेवा करने और किसानों की कृषि उत्पादन लागत कम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पिछले रबी सीजन में भी&nbsp; इफको ने कांप्लेक्स उर्वरकों की कीमत नहीं बढ़ाई थी। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने की योजना के अनुरूप है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन किसानों के हित के लिए इफको की प्रतिबद्धता बरकरार है ।&nbsp;<br />इफको के पास भारत में 5 उर्वरक संयंत्र है । उर्वरक क्षेत्र में इफको देश की सबसे बड़ी और प्रमुख संस्था है। इफको ने सामान्य बीमा, ग्रामीण दूरसंचार, ग्रामीण खुदरा, कृषि रसायन, खाद्य प्रसंस्करण और ऑर्गेनिक्स में निवेश करके अपने व्यवसाय में विविधता प्राप्त की है। पिछले 54 वर्षों में, इफको इस कारण से भारतीय किसानों को विश्व स्तर के&nbsp; भू-पोषक तत्व और कृषि-सेवाएँ प्रदान करता रहा है और&nbsp; उन्हें सशक्त बनाने में इफको की महत्वपूर्ण भूमिका है। &nbsp;</p>
<p>इफको भारत में उत्पादित फॉस्फेटिक के लगभग 32.1 फीसदी और नाइट्रोजन उर्वरकों के 21.3 फीसदी का योगदान देता है। वर्ल्ड कोआपरेटिव मानिटर रिपोर्ट द्वारा दुनिया में शीर्ष 300 सहकारी समितियों में से&nbsp; (जीडीपी पर प्रति व्यक्ति आधार पर कारोबार) में प्रथम स्थान पर रहा। इफको ने फॉर्चून 500 भारत कंपनियों की सूची 2020 में 57 वां स्थान प्राप्त किया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको नहीं बढ़ाएगी  कांप्लेक्स उर्वरकों के दाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको को मिला ज्यादा सबसे ज्यादा कर देने वाले करदाता का पुरस्कार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-received-the-highest-taxpayer-award.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 30 Jan 2021 14:09:02 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/iffco-received-the-highest-taxpayer-award.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><br />दुनिया के अग्रणी उर्वरक सहकारी संस्थान इफको को कस्टम विभाग द्वारा सबसे ज्यादा कर देने वाले करदाता का पुरस्कार दिया गया है। कंपनी को यह पुरस्कार गुजरात के कांडला में दिया गया है। हाल ही में इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस द्वारा सालाना प्रकाशित 9 वीं&nbsp; वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनिटर रिपोर्ट के अनुसार, इको को ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट के टर्नओवर के अनुपात में टॉप 300 ग्लोबल कोऑपरेटिव्स में पहला स्थान मिला है। सहकारी और सामाजिक उद्यम पर आईसीए और यूरोपियन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित इस रिपोर्ट से स्पष्ट है कि इफको जीडीपी और राष्ट्र की समग्र अर्थव्यवस्था में काफी योगदान दे रहा है। वर्ष 2020 के लिए फॉर्च्यून इंडिया 500 की सूची में इफको को 57 वें स्थान मिला है।</p>
<p>&nbsp;इफको भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे बड़ा उर्वरक निर्माता है। इफको का भारत में 29,412 करोड़ रुपये का टर्नओवर है।&nbsp; वैश्विक आधार पर उसका &nbsp;57,778 करोड़ रुपये टर्नओवर है। इफको दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी समितियों में से एक है । वह उर्वरकों के उत्पादन, बिक्री और वितरण का काम करती है। सिर्फ 57 सहकारी समितियों के साथ 1967 में स्थापित, इफको के साथ आज 35,000 से अधिक सहकारी समितियां हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको को मिला ज्यादा सबसे ज्यादा कर देने वाले करदाता का पुरस्कार ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत में 221 समुद्री शैवाल की प्रजातियां, दुनिया के बिजनेस में होगी प्रमुख भूमिका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/potential-of-seaweed-business-in-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 29 Jan 2021 15:36:40 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/potential-of-seaweed-business-in-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत में समुद्री शैवाल की 221 से ज्यादा ऐसी प्रजातियां हैं, जिनके जरिए भारत दुनिया में समुद्री शैवाल बिजनेस में अहम हिस्सेदारी निभा सकता है। भारत के अंडमान निकोबार ,तमिलनाडु , लक्षद्वीप से लेकर गुजरात तक के लंबे समुद्री क्षेत्र में वाणिज्यिक शैवाल की प्रजातियां मौजूद हैं। अगर इनका सही से इस्तेमाल किया जाय तो जल्द ही भारत जापान, चीन, इंडोनेशिया के प्रभुत्व वाले इस बाजार में अहम हिस्सेदारी हासिल कर सकता है। वर्तमान में, भारत की समुद्री शैवाल की खेती का लगभग 20,000 टन उत्पादन है, जिसका मूल्य लगभग 50 करोड़ रुपये है।</p>
<p>मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव रंजन ने यह बातें समुद्री शैवाल के बिजनेस में सहकारिता की भूमिका पर आयोजित वेबिनार में यह बातें कहीं हैं। वेबिनार का आयोजन भारत सरकार के पशुपालन और मत्स्य मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग, एनआईएनएसी-राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, <span>&nbsp;</span>कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि,सहकारिता विभाग, बैंकॉक के एनईडीएसी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया है। वेबिनार में विएतनाम, फिलिपींस, कनाडा के विशेषज्ञ भी शामिल हुए।</p>
<p>इस मौके पर एनसीडीसी के एमडी संदीप नायक ने कहा एशिया-प्रशांत क्षेत्रों के देशों के साथ समुद्री शैवाल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए साझेदारी बढ़ाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। वेबिनार के आयोजन में अहम भूमिका निभाने पर एनईडीएसी के डायरेक्टर प्रोफेसर कृष्णा आर.सालीन ने संदीप नायक का धन्यवाद दिया। समुद्री शैवाल के कारोबार में चीन,जापान और इंडोनेशिया की करीब 80 फीसदी हिस्सेदारी है। जापान की केल्प, यूकेमा और ग्रासिलेरिया जैसी प्रजातियों की प्रमुख मांग हैं।</p>
<p>&nbsp;<strong><u>&nbsp;</u></strong></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत में 221 समुद्री शैवाल की प्रजातियां, दुनिया के बिजनेस में होगी प्रमुख भूमिका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सहकार से स्वरोजगार और स्वरोजगार से आत्मनिर्भर पर विश्वास करना होगा: दिलीपभाई संघानी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-welcome-ncui-president.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 22 Jan 2021 08:18:49 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-welcome-ncui-president.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एनसीयूआई के नवनिर्वाचित अध्यक्ष दिलीपभाई संघानी का कहना है कि माननीय प्रधान मंत्री के सपनों को जल्द से जल्द साकार करने के लिए हमें सहकार से स्वरोजगार और स्वरोजगार से आत्मनिर्भर पर विश्वास करना होगा।&nbsp; सहकारिता आय बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाएगी और जिससे भारत आत्मनिर्भर हो जाएगा। नेशनल कोआपरेटिव डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनसीडीसी) ने नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में नेशनल कोआपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया (एनसीयूआई) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष दिलीपभाई संघानी के स्वागत के लिए मंगलवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में एनसीडीसी के देश भर के सभी क्षेत्रीय कार्यालयों और बैंकाक स्थित एनईडीएसी कार्यालय के पदाधिकारी भी शामिल हुए।</p>
<p>दिलीपभाई संघानी का स्वागत करते हुए एनसीडीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप कुमार नायक ने कहा कि दिलीपभाई एनसीडीसी के साथ लंबे समय से जुड़े हुए हैं। वह इसकी जनरल काउंसिल के सदस्य के रूप में, देश में सहकारी बैंकों के शीर्ष निकाय एनएएफएससीओबी के अध्यक्ष के रूप में साथ ही जीयूजेसीएएमओएसएल के अध्यक्ष के रूप में और नाफेड के पूर्व अध्यक्ष&nbsp; के रूप में सहकारिता में अपना योगदान देते रहे हैं। वह इफको के उपाध्यक्ष हैं और देश भर के सहकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। एनसीडीसी को हमेशा उनका सहयोग मिलता रहा है।&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर दिलीप संघानी ने कहा कि एनसीडीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर&nbsp; संदीप कुमार नायक के नेतृत्व में एनसीडीसी की टीम ने ईमानदार प्रयासों से एनसीडीसी को देश में सहकारी समितियों के लिए एक प्रमुख विकास वित्तीय संस्थान बना दिया है।&nbsp; उन्होंने कहा कि अब मेरे&nbsp; एनसीयूआई के अध्यक्ष के रूप में आने से एनसीडीसी के साथ संबंधों में एक नया आयाम जुड़ गया है।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने नवंबर 2018 में एनईडीएसी की दिल्ली में&nbsp; हुई जनरल एसेंबली का जिक्र करते हुए कहा कि उससे दो दिन से सत्र में एशिया पेसिफिक क्षेत्र में सहकारिता को बढ़ावा देने पर विचार विमर्श किया गया। उसी के परिणाम के रूप में अक्तूबर 2019 में पहला इंडिया इंटरनेशनल कोआपरेटिव ट्रेड फेयर आयोजित किया गया। उन्होंने ट्रेड फेयर की सफलता में शानदार भूमिका के लिए एनसीडीसी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एनसीयूआई के अध्यक्ष के नाते मेरा प्रयास होगा कि सरकार की योजनाओं में सहकारिता क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका जिससे वह नई ऊंचाई हासिल कर सकें।&nbsp;</p>
<p>सहकारिता क्षेत्र देश की आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है। वह प्रगति में एक बदलाव के अदृष्य एजेंट के रूप में काम करता रहा है लेकिन जनमानस के बीच उसे सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र की तरह पहचान नहीं मिली है। देश के कृषि उत्पादन, उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा प्रबंधन मेंं&nbsp; सहकारिता क्षेत्र की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। पहले से मौजूद सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने और न्यू जेनरेशन कोआपरिटिव बनाने के प्रयास कृषि क्षेत्र की कई तरह की मौजूदा समस्याओं का निदान करने वाले कदम साबित होंगे। इसके साथ ही न्यू जेनरेशन कोआपरेटिव से महिलाओं और युवाओं को जोड़कर कौशल और प्रोफेशनलिज्म को बढ़ावा देकर बेहतर परिणाम हासिल किये जा सकते हैं।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सहकार से स्वरोजगार और स्वरोजगार से आत्मनिर्भर पर विश्वास करना होगा: दिलीपभाई संघानी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीडीसी और एस व्यास में समझौता, योग को मिलेगा बढ़ावा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-tie-up-with-s-vyas-for-yoga.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 24 Dec 2020 15:16:21 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/ncdc-tie-up-with-s-vyas-for-yoga.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: left;"><span>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत सहकारी समितियों के वित्तीय संस्थान राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम और स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान (एस-व्यास), बेंगलुरु के वैश्विक योग विश्विद्यालय ने सहकारिताओं के माध्यम से देश भर में योग वेलनेस केंद्र तथा प्राकृतिक चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने के लिए समझौता किया है l&nbsp;</span></p>
<p><span>इस मौके पर केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने कहा कि दोनों प्रमुख संस्थानों द्वारा कदम समय से उठाए गए हैं और इससे ग्रामीण क्षेत्र में योग को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय ऐसी पहलों का समर्थन करता है जो&nbsp;&nbsp;भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली, जिसमें योगभी शामिल है</span>।</p>
<p><span>इस अवसर पर, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने एनसीडीसी&nbsp;&nbsp;द्वारा किसान कल्याण कार्यक्रमों को आयुष्मान सहकार, जिसे उन्होंने दो महीने पहले लांच किया था, के अंतर्गत विस्तार देकर जोड़े गए नए आयाम के लिए सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए योग वेलनेस सेंटर भी सहकारिताओं के लिए अच्छा बिजनेस मॉडल हैं ।</span></p>
<p><span>एनसीडीसी के एम.डी. संदीप नायक ने कहा कि एनसीडीसी की योजना आयुष्मान सहकार 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 19 अक्टूबर,&nbsp;2020 को शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य सहकारी समितियों के लिए वित्तीय सहायता का विस्तार करना है ।</span></p>
<p><span>इस योजना में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे और सेवाओं के वित्तपोषण के लिए व्यापक और समग्र दृष्टिकोण है। इसमें अस्पताल,&nbsp;हेल्थकेयर की बुनियादी सुविधाएँ,&nbsp;मेडिकल शिक्षा,&nbsp;नर्सिंग शिक्षा,&nbsp;पैरामेडिकल शिक्षा,&nbsp;दवा विनिर्माण,&nbsp;डिजिटल हेल्थ,&nbsp;लेबोरेटरी सेवाएँ,&nbsp;हेल्थ इंश्योरेंस और भारतीय पारंपरिक प्रणाली जैसे आयुर्वेद,&nbsp;योग,&nbsp;नेचुरोपैथी,&nbsp;यूनानी,&nbsp;सिद्धा और होम्योपैथी शामिल हैं।</span></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीडीसी और एस व्यास में समझौता, योग को मिलेगा बढ़ावा ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि क्षेत्र को बदलने के लिए सहकारिता को केंद्र में रखने की जरूरत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/role-of-cooperative-in-agriculture-sector.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 23 Dec 2020 03:11:05 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/role-of-cooperative-in-agriculture-sector.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div dir="ltr">
<p></p>
<p><span lang="HI">भारत का कृषि क्षेत्र मुख्य रूप से प्रति एकड़</span><span>/<span lang="HI">प्रति किसान कम उत्पादकता, कृषि और गैर कृषि क्षेत्र के बीच व्यापार की प्रतिकूल शर्तों और छोटे तथा सीमांत किसानों की अधिकता के लिए जाना जाता है। देश में कृषि उपज का एक बड़ा हिस्सा का यही छोटे और सीमांत किसान उत्पादन करते हैं, जिनके पास बेहतर उत्पादन के लिए संसाधनों का अभाव रहता है। इससे न सिर्फ उनका व्यक्तिगत विकास रुकता है बल्कि कृषि क्षेत्र का विकास भी बाधित होता है। किसान भी विकास को हासिल कर सकें और उनका जोखिम कम हो, इसके लिए जरूरी है कि कर्ज और बीमा जैसी सेवाओं तक उनकी पहुंच हो</span>,&nbsp;<span lang="HI">इनपुट और बाजार तक उनकी पहुंच समान और आसान की जाए</span>,&nbsp;<span lang="HI">नीति निर्माताओं, कृषि शोध संस्थानों और किसानों के बीच अबाध जुड़ाव स्थापित किया जाए।</span></span><span></span></p>
<p><span lang="HI">भारत में कृषि क्षेत्र के लिए सप्लाई आधारित नजरिया अपनाया जाता है। लेकिन यह नजरिया न तो किसानों की सभी जरूरतें पूरी करने में कामयाब रहा और न ही उपभोक्ताओं की। यह नजरिया इस अवधारणा की उपज है कि शीर्ष स्तर पर जो भी योजना बनाई जाएगी वह नीचे तक सभी लोगों तक समान और सही तरीके से पहुंचेगी। लेकिन यह बात सही नहीं है, क्योंकि हमने देखा है कि किसानों के मालिकाना हक और उनके द्वारा नियंत्रित संस्थागत फ्रेमवर्क के बिना देश के<span>&nbsp;</span></span><span>30&nbsp;<span lang="HI">करोड़ से अधिक किसानों की समस्याओं को सुलझाना बहुत मुश्किल है। बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं जिनकी पहुंच सूचनाएं और जानकारी देने वाले संस्थानों तक नहीं है। वे औपचारिक रूप से वित्तीय सेवाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं। ये अड़चनें किसानों की क्षमता को बाधित करती हैं और उनके विकास की राह में रोड़े बनती हैं।</span></span><span></span></p>
<p><strong><span lang="HI">आगे क्या किया जाना चाहिए</span>?</strong><span></span></p>
<p><span lang="HI">ग्रामीण क्षेत्र में जो भी गतिविधियां होती हैं, उन सब पर कृषि का प्रभाव होता है और कृषि भी उन सबसे प्रभावित होती है। कृषि क्षेत्र का विकास गैर कृषि क्षेत्र के विकास का भी इंजन है। किसान और पूरे देश की संपन्नता कृषि क्षेत्र के बदलाव पर काफी हद तक निर्भर करती है। कृषि हमारी अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ही नहीं, बल्कि यह बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार और आमदनी भी उपलब्ध कराती है।</span><span></span></p>
<p><span lang="HI">भारत में कृषि योग्य भूमि की प्रचुरता</span><span>,&nbsp;<span lang="HI">खेती के लिए अनुकूल मौसम और लोगों की बढ़ती कमाई के कारण खपत के पैटर्न में बदलाव</span>,&nbsp;<span lang="HI">ये सब ऐसी वजहें हैं जिनसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ सकती है। किसानों के सशक्तीकरण पर कृषि क्षेत्र के विकास का असर भी स्पष्ट है। माना जाता है कि कृषि क्षेत्र में एक फ़ीसदी अतिरिक्त बढ़ोतरी होने पर किसानों के हाथ में&nbsp;</span>75<span lang="HI">,</span>000&nbsp;<span lang="HI">करोड़ रुपए की अतिरिक्त आमदनी आती है। इससे आखिरकार उनकी क्रय क्षमता बढ़ती है।</span></span><span></span></p>
<p><span lang="HI">कृषि और जलवायु के मामले में विविध और अनुकूल परिस्थितियां कृषि उत्पादन में भारत को प्रतिस्पर्धी बनाती हैं। भारत में ऊंची कीमत और अच्छी क्वालिटी की उपज का उत्पादन करने की क्षमता है। यदि इन क्षमताओं का पूरी तरह से दोहन किया जाए तो भारत दुनिया का प्रमुख खाद्य सप्लायर बन सकता है। यही नहीं</span><span>,&nbsp;<span lang="HI">भारत की आबादी&nbsp;</span>130&nbsp;<span lang="HI">करोड़ से अधिक है जिसमें युवा अधिक हैं। इस लिहाज से भारत स्वयं भी खाद्य उत्पादों की खपत का बड़ा हब है।</span></span><span></span></p>
<p><span lang="HI">कृषि अर्थव्यवस्था को लाभदायक बनाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में बड़ी आबादी इससे जुड़ी हुई है। अंतिम उपभोक्ता जिस कीमत पर कोई वस्तु खरीदता है, उसका बड़ा हिस्सा किसानों को मिलना चाहिए। इससे किसान खेती को लेकर उत्साहित होंगे। वरना जिस तरह से खेती से जुड़ी गतिविधियों में किसानों की रुचि कम हो रही है, वह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए निराशाजनक और नुकसानदायक साबित हो सकती है। कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत और प्रभावी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना जरूरी है, ताकि इस क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ सके।</span><span></span></p>
<p><span lang="HI">इन दिनों नए कानूनों के जरिए कॉरपोरेट और किसानों के बीच सीधे संपर्क स्थापित करने की जो बात कही जा रही है, वह न तो व्यावहारिक रूप से संभव है न ही यह व्यवस्था हमारे देश के किसानों की समस्याओं को दूर करने में सक्षम होगी। भारत के संकटग्रस्त कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की समस्याएं दूर करने के लिए सशक्तीकरण</span><span>,&nbsp;<span lang="HI">भागीदारी और समावेशिता को हमें अपने विचारों के केंद्र में रखना पड़ेगा। कोऑपरेटिव और इस तरह के अन्य समूह आधारित तरीके कृषि विकास के नए और व्यावहारिक मॉडल बन सकते हैं। भारत में यह मॉडल काफी जांचा परखा भी है।</span></span><span></span></p>
<p><span lang="HI">कोऑपरेटिव और किसान समूहों का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की आर्थिक परिस्थितियां बेहतर करना है। इसके लिए वे अकेले काम न करके साथ मिलकर काम करते हैं। इस परंपरा ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया, पेशेवर तौर-तरीका, स्थानीय स्तर पर आर्थिक और सामाजिक विकास तथा समुदाय के स्तर पर उद्यमिता विकसित करने जैसे मूल्यों को बढ़ावा दिया है। लेकिन ये मूल्य अब गिरावट की राह पर हैं और कोऑपरेटिव सरकार के नियंत्रित संस्थानों की तरह कार्य कर रहे हैं।</span><span></span></p>
<p><span lang="HI">कोऑपरेटिव के प्रबंधन और कामकाज दोनों में लोकतांत्रिक चरित्र को बरकरार रखने की जरूरत है। यदि इन संस्थाओं का प्रबंधन चुने हुए सदस्यों के हाथों में दिया जाए और उन्हें पूरे अधिकार के साथ काम करने की आजादी मिले तो ये संस्थाएं सच्चे अर्थों में सहकारी बन सकती हैं। कोऑपरेटिव को किसी पेशेवर संगठन की तरह काम करने की भी जरूरत है। उन्हें भविष्य को ध्यान में रखकर योजनाएं बनानी चाहिए ताकि लंबे समय में उनकी बाजार हिस्सेदारी न सिर्फ बनी रहे बल्कि बढ़े भी।</span><span></span></p>
<p><span lang="HI">कोऑपरेटिव के उद्देश्य रक्षात्मक और अति सक्रिय दोनों होते हैं। रक्षात्मक उद्देश्य यह है कि कोऑपरेटिव छोटे उत्पादकों को असमान प्रतिस्पर्धा से बचाते हैं। अति सक्रिय उद्देश्य के तहत कोऑपरेटिव बिजनेस के नए अवसरों का लाभ उठाते हैं। नए बाजार खुलने, सरकार की तरफ से आयोजित कार्यक्रम बंद होने या उनके निजीकरण से बिजनेस के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। अति सक्रिय कोऑपरेटिव खुद को अनुकूल बना कर बाजार में खड़े रहते हैं जिसका उनके सदस्यों को निरंतर फायदा मिलता रहता है। इन इनोवेटिव और सफल कोऑपरेटिव ने सहकारिता के सिद्धांतों की नए तरीके से व्याख्या की है, जिससे ये अपने सदस्यों के इस्तेमाल और निवेश के लिहाज से ज्यादा लाभकारी साबित होते हैं। कोऑपरेटिव के सदस्य उपयोगकर्ता के साथ निवेशक की भी भूमिका निभा सकें, इसके लिए जरूरी है कि कोऑपरेटिव नए तरीके अपनाएं</span><span>,&nbsp;<span lang="HI">तभी वे सफल हो सकेंगे।</span></span><span></span></p>
<p><span lang="HI">आगे बढ़ने और प्रतिस्पर्धा के कारण कोऑपरेटिव जटिल होते जाते हैं। इसके अलावा ज्यादा मुक्त और सक्षम बाजार के कारण अवसर बढ़ने से कोऑपरेटिव के सदस्यों की मांग भी बढ़ने लगती है। इन बदलावों से पारंपरिक तरीकों को चुनौती मिलती है। इस चुनौती से निपटने के लिए नई वित्तीय रणनीति बनाने की जरूरत है जिससे सदस्यों को कोऑपरेटिव को संरक्षण देने का प्रोत्साहन मिले और वे उसके कामकाज में लोकतांत्रिक तरीके से फैसले लेने में सक्रिय भूमिका निभा सकें।</span><span></span></p>
<p><span lang="HI">कोऑपरेटिव संस्थानों का गठन<span>&nbsp;</span></span><span>&lsquo;<span lang="HI">वर्टिकल इंटीग्रेशन</span>&rsquo;<span lang="HI">&nbsp;के सिद्धांत पर आत्म निर्भर प्रणाली के तौर पर किया गया था। लेकिन इन संस्थानों ने धीरे-धीरे&nbsp;</span>&lsquo;<span lang="HI">वर्टिकल इंटीग्रेशन</span>&rsquo;<span lang="HI">&nbsp;से&nbsp;</span>&lsquo;<span lang="HI">हॉरिजॉन्टल रिलायंस</span>&rsquo;<span lang="HI">&nbsp;का रूप ले लिया। पहले की तरह कोऑपरेटिव की प्रमुखता को बनाए रखने के लिए इस ट्रेंड को बदलने की जरूरत है। समय आ गया है कि प्रासंगिकता और क्षमता के लिहाज से कोऑपरेटिव संस्थाओं के ढांचे की नए सिरे से जांच की जाए।</span></span><span></span></p>
<p><span lang="HI">भारत में कोऑपरेटिव संस्थाओं का विशाल नेटवर्क है। इनकी<span>&nbsp;</span></span><span>8&nbsp;<span lang="HI">लाख से अधिक इकाइयां हैं। किसी उचित संस्थागत व्यवस्था के तहत इन्हें जोड़ा जा सकता है। इससे न सिर्फ ये संस्थाएं ताकतवर होंगी बल्कि अभी अकेले काम करने की वजह से इनकी जो भी कमजोरियां हैं, वे भी दूर हो सकेंगी। सिस्टम को इस तरह जोड़ने पर एक कॉमन डिजिटल प्लेटफॉर्म डिजाइन</span>,&nbsp;<span lang="HI">एक पेशेवर प्रबंधन प्रणाली और सक्षम फंड मैनेजमेंट की समस्या भी दूर हो सकती है। इस व्यवस्था में सभी कोऑपरेटिव संस्थान अपने काम अलग-अलग तरीके से करते रहेंगे</span>,&nbsp;<span lang="HI">उनके मैनेजमेंट भी अलग होंगे</span>,&nbsp;<span lang="HI">लेकिन वे एक बड़े संस्थान का हिस्सा होंगे। यह नई व्यवस्था उन्हें एक विशाल आकार और कामकाज का फायदा दे सकती है क्योंकि एक होल्डिंग संस्था के रूप में यह देश का सबसे बड़ा बिजनेस नेटवर्क होगा, जिससे बड़ी संख्या में लोग और संसाधन जुड़े होंगे।</span></span><span></span></p>
</div>
<p><span>(<strong>लेखक राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम (एनसीडीसी) के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर रहे हैं)</strong></span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि क्षेत्र को बदलने के लिए सहकारिता को केंद्र में रखने की जरूरत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रास्ता तो सही, मंजिल जरूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/cooperatives/how-to-raise-farm-income.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 15 Dec 2020 23:03:29 GMT]]></pubDate>
		<category>cooperatives</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/cooperatives/how-to-raise-farm-income.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाना चाहती है। यह दोगुना होगी या नहीं<span>, </span>और तय साल तक हो पाएगी<span>, </span>यह कहना मुश्किल है। इसके लिए तमाम तरह के आंकड़े और मानक ही सवालों के घेरे में हैं। लेकिन इस बीच एक रास्ता बनाने की गंभीर कोशिश जरूर हुई है। नए साल <span>2020-21</span> के बजट प्रस्तावों में एक रोडमैप काफी हद तक मंजिल की ओर जाने के लिए आश्वस्त कर सकता है<span>, </span>बशर्ते इस पर गंभीरता से अमल हो। किसानों के उत्पादों की मार्केटिंग और मुनाफा ऐसा मसला है जिसका हल एक पहेली बना हुआ है। इस पहेली को देश के कई हिस्सों में सहकारिता यानी कोऑपरेटिव के आर्थिक मॉडल के जरिए हल करने की कोशिशें हुई हैं<span>, </span>और कुछ बहुत कामयाब भी रही हैं। लेकिन उत्तरी राज्यों समेत देश के बड़े हिस्से में यह उतना कारगर नहीं हुआ<span>, </span>क्योंकि इसमें राजनेता और नौकरशाही की दखल के चलते प्रोफेशनल मैनेजमेंट और कौशल की लगातार कमी रही है। ऐसे में<span>, </span>किसानों के उत्पादक संगठनों (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशंस) यानी एफपीओ का एक विकल्प सामने आया। यानी सहकारी समितियों की तर्ज पर किसान अपना एफपीओ बना लें। इसके जरिए वे कृषि उत्पादन के लिए इनपुट से लेकर उत्पादों की मार्केटिंग तक<span>, </span>सबकुछ संगठित रूप से कर सकते हैं और कमाई बढ़ा सकते हैं। लेकिन इस मोर्चे पर अभी उतनी सफलता नहीं मिली है जितनी इसे एक बड़े विकल्प के रूप में स्थापित करने के लिए मिलनी जरूरी है। चालू साल के बजट के दौरान सरकार ने दस हजार एफपीओ स्थापित करने की घोषणा की थी। इसमें सरकार इक्विटी के लिए ग्रांट फंड भी देती है। यानी अगर किसान एफपीओ बनाते हैं तो उसके लिए सरकार अपनी ओर से पैसा देती है<span>, </span>जिसे इक्विटी का हिस्सा माना जाता है। लेकिन इसने गति नहीं पकड़ी। स्मॉल फार्मर्स एग्रीबिजनेस कंसोर्सियम और नाबार्ड को जिम्मा दिया गया है कि वे एफपीओ स्थापित करने में मदद करें।</p>
<p>नए बजट में इसका खाका काफी साफ किया गया है। इसके लिए <span>500</span> करोड़ रुपये का बजट निर्धारित करने के साथ एक हजार एफपीओ बनाकर उनके साथ पांच लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इक्विटी ग्रांट फंड देने के लिए <span>1,250</span> एफपीओ का लक्ष्य है। किसी एक एफपीओ से जुड़ने वाले किसानों की संख्या <span>500</span> होनी चाहिए। हालांकि पूर्वोत्तर के राज्यों और पहाड़ी क्षेत्रों में यह सीमा <span>200</span> किसानों की होगी। उद्देश्य साफ है कि पारंपरिक और मौजूदा मंडी-व्यवस्था के मुकाबले एफपीओ के सदस्य किसानों की आमदनी कितनी बढ़ी और विपणन लागत कितनी कम हुई है। यानी सीधा मतलब है कि किसानों की आय बढ़ रही है या नहीं।</p>
<p>इस क्षेत्र में काम करने वाले एक अधिकारी बताते हैं कि कुछ बदलाव ऐसे भी किए गए हैं जिससे एफपीओ बनाना आसान और व्यवहार्य होगा। मसलन<span>, </span>आप कंपनी कानून या सहकारिता के तहत एफपीओ बना सकते हैं। यही नहीं<span>, </span>सोसायटी एक्ट के तहत और ट्रस्ट एक्ट के तहत भी एफपीओ बन सकता है। यानी दायरा बड़ा कर दिया गया है। पैसे के जरिए मदद का प्रावधान भी है<span>, </span>लेकिन इसके लिए सबसे जरूरी बात किसानों में भरोसा पैदा करना है<span>, </span>ताकि वे इस दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित हों। यह काम नौकरशाही के पुराने ढर्रे से नहीं हो सकता। इसके लिए इसे एक आंदोलन की तरह देखना होगा। मसलन<span>, </span>सहकारिता भी एक विकल्प है<span>, </span>जिसके प्रसार के लिए इसे एक आंदोलन की तरह ही देखा गया। गुजरात<span>, </span>महाराष्ट्र और कुछ दक्षिणी राज्यों में सहकारिता के मजबूत होने का सीधा संबंध सहकारिता आंदोलन में किसानों का भरोसा जीतने से है। इसके लिए ऐसा नेतृत्व चाहिए जिस पर लोग भरोसा कर सकें। यह वह मसला है जिसकी कमी के चलते अब कई हिस्सों में सहकारिता आंदोलन कमजोर हो रहा है या हुआ है। असली मसला साख का है। सरकारी विभागों की तर्ज पर एफपीओ खड़े नहीं किए जा सकते हैं। उत्तर के कई बड़े राज्यों में लोगों को सहकारी संस्थाओं और सरकारी विभागों के बीच अंतर ही नहीं पता<span>, </span>क्योंकि यहां स्वायत्तता है ही नहीं और नौकरशाह ही सहकारी संस्थानों को भी चलाते हैं। पूर्ण स्वायत्तता<span>, </span>पारदर्शी प्रशासन और नेतृत्व के साथ प्रोफेशनल प्रबंधन इसकी सफलता की गारंटी है। अमूल<span>, </span>इफको और कुछ दूसरे संस्थान इसके कामयाब उदाहरण के रूप में हमारे सामने हैं। जहां यह फार्मूला नहीं है<span>, </span>उनके नाकाम होने की लंबी फेहरिस्त भी है। इसलिए<span>, </span>एफपीओ को बढ़ावा देने के लिए रोडमैप बनाने का काम तो आगे बढ़ गया है<span>, </span>लेकिन उसकी कामयाबी के लिए जरूरी दूसरे पक्ष भी उपबल्ध हों<span>, </span>तभी किसानों की आय बढ़ाने का यह विकल्प अपने मकसद की तरफ बढ़ पाएगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रास्ता तो सही, मंजिल जरूरी ]]></media:description>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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