<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" ?>
<rss version="2.0" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/">
<channel>
    <title>Farmer News: Government Schemes for Farmers, Successful Farmer Stories &#45; : Elections 2022</title>
    <link>https://www.ruralvoice.in/</link>
	<atom:link href="https://www.ruralvoice.in/elections-2022.xml" rel="self" type="application/rss+xml" />
    <description>Farmer News: Government Schemes for Farmers, Successful Farmer Stories &amp;#45; : Elections 2022</description>
    <dc:language>hi-in</dc:language>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
    

    <item>
        <title><![CDATA[गुजरात में लगातार सातवीं बार बनेगी भाजपा की सरकार, हिमाचल फतह से कांग्रेस को बूस्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-to-form-government-for-the-7th-time-in-gujarat-as-it-gives-way-to-congress-in-himachal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 08 Dec 2022 14:24:06 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-to-form-government-for-the-7th-time-in-gujarat-as-it-gives-way-to-congress-in-himachal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय जनता पार्टी गुजरात में लगातार सातवीं बार सरकार बनाने जा रही है। यहां 1 और 5 दिसंबर को हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को 150 से ज्यादा सीटों पर जीत मिलने के आसार हैं। 182 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 92 सीटें चाहिए। यहां 2017 के चुनाव में भाजपा को 99 सीटों पर जीत मिली थी और कांग्रेस 77 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही थी। कांग्रेस इस बार भी दूसरे नंबर पर है, लेकिन उसकी सीटों की संख्या 20 से भी कम हो गई है। नई एंट्री के तौर पर आम आदमी पार्टी को पांच और अन्य को तीन सीटों पर जीत मिलती नजर आ रही है।<br />गुजरात के विपरीत हिमाचल में भाजपा के हाथ से सत्ता छिनती दिख रही है। वैसे भी यहां हर पांच साल में दूसरी पार्टी की सरकार बनने का ट्रेंड रहा है। भाजपा ने इस बार 'राज नहीं, रिवाज बदलेगा' का नारा दिया था, लेकिन वैसा होता नहीं दिख रहा। यहां की कुल 68 सीटों में से कांग्रेस को करीब 40 मिलने के आसार बन रहे हैं, जबकि भाजपा 25 सीटों पर सिमटती दिख रही है। 2017 के चुनाव में भाजपा को 44 और कांग्रेस को 21 सीटें मिली थीं।<br />गुजरात में भाजपा की यह सबसे बड़ी जीत है। इससे पहले 2002 में उसे 127 सीटें मिली थीं। राज्य में कांग्रेस का रिकॉर्ड 149 सीटों का है, जो उसने माधव सिंह सोलंकी के नेतृ्त्व में 1985 में बनाया था। भाजपा उससे भी आगे निकल गई है। किसी राज्य में लगातार सात बार सरकार बनाने का रिकॉर्ड पश्चिम बंगाल में लेफ्ट फ्रंट ने बनाया था। गुजरात में भाजपा ने उस रिकॉर्ड को भी छू लिया है।&nbsp;<br />विश्लेषकों का कहना है कि गुजरात में आम आदमी पार्टी का फैक्टर भी काफी हद तक कारगर रहा है। उसने भाजपा से ज्यादा कांग्रेस पार्टी के वोट काटे हैं। इसी का नतीजा है कि कांग्रेस ने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया है।<br />कांग्रेस के इस प्रदर्शन के पीछे एक कारण पार्टी के चुनाव अभियान में कमी को भी माना जा रहा है। यहां केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से प्रचार पर कोई जोर नहीं था। राहुल गांधी ने मुश्किल से दो रैलियां कीं। पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे भी गिनी-चुनी सभाओं में ही गए। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत यहां चुनाव की अगुवाई कर रहे थे।<br />कांग्रेस के विपरीत भाजपा ने हमेशा की तरह पूरा दमखम लगा दिया था। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 से ज्यादा रैलियां कीं। गृह मंत्री अमित शाह करीब दो महीने तक राज्य में ही बैठकर चुनाव अभियान का जायजा ले रहे थे। इन दोनों शीर्ष नेताओं के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा तथा सभी केंद्रीय मंत्री प्रचार में लगे थे। यहां पार्टी 1995 से लगातार सत्ता में है।<br />गुजरात में कांग्रेस ग्रामीण इलाकों में पकड़ रखती थी, लेकिन इस बार वहां भी उसकी स्थिति कमजोर हुई है। खास कर सौराष्ट्र के क्षेत्र में भाजपा की स्थिति मजबूत हुई है। आम आदमी पार्टी ने जो मुफ्त बिजली-पानी के वादे किए थे, उसका सीमित असर ही दिखा है। हालांकि यहां विधानसभा में मौजूदगी दर्ज कराने के बाद उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल हो सकता है।<br />हिमाचल प्रदेश में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने अपने ही परिवार से नया मुख्यमंत्री बनाने की बात कहकर अपने बेटे विक्रमादित्य के लिए दावेदारी रख दी है। वे तीसरी बार विधायक बने हैं। हालांकि पार्टी में उनसे भी वरिष्ठ नेता हैं और दावेदारी उनकी तरफ से भी आने की उम्मीद है। पार्टी ने यहां महंगाई, बेरोजगारी, पुरानी पेंशन स्कीम जैसे आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर चुनाव लड़ा था। यहां प्रियंका गांधी ने सघन प्रचार किया था।<br />आम आदमी पार्टी ने हिमाचल में कोई खास जोर नहीं लगाया था, लेकिन भाजपा ने महिलाओं और युवाओं पर काफी फोकस किया था। राज्य में 1998 के बाद से महिलाओं का वोट प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा है। पार्टी पहली बार महिलाओं के लिए अलग से घोषणापत्र लेकर आई थी।<br />हिमाचल में जीत से कांग्रेस को बूस्ट मिलेगा। उत्तर भारत में एक मात्र हिमाचल में ही उसकी सरकार होगी। बाकी देश में सिर्फ राजस्थान और छत्तीसगढ़ में उसकी अपने दम पर सरकार है। अगले साल मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और राजस्थान विधानसभा चुनावों में पार्टी अपनी स्थिति सुधारने की कोशिश करेगी। लेकिन गुजरात में करारी हार के बाद उसके हाथ से 2024 में विपक्षी मोर्चे की अगुवाई करने का मौका छिन सकता है। वैसे भी पार्टी नेताओं का कहना है कि वे विधानसभा चुनावों पर कम, 2024 के आम चुनावों पर अधिक फोकस कर रहे हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/12/image_750x500_6391a59ba9e90.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गुजरात में लगातार सातवीं बार बनेगी भाजपा की सरकार, हिमाचल फतह से कांग्रेस को बूस्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/12/image_750x500_6391a59ba9e90.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खतौली विधानसभा  उपचुनाव में 2018 के कैराना लोक सभा सीट के उप चुनाव की झलक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/khatauli-assembly-by-election-has-become-a-reflection-of-2018-kairana-lok-sabha-by-election.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 04 Dec 2022 14:41:22 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/khatauli-assembly-by-election-has-become-a-reflection-of-2018-kairana-lok-sabha-by-election.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">चुनाव प्रचार के आखिरी दिन के अंतिम कुछ घंटों में केंद्रीय पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन राज्य मंत्री संजीव बालियान बिना किसी तामझाम के फुलत, पलड़ी, याहियापुर, खेड़ी कुरैश जैसे गावों में मतदाताओं के बीच भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार राजकुमारी सैनी को जिताने के लिए जन संपर्क करते हैं। इन गावों का अंतिम दिन ही प्रचार के लिए चुनाव क्यों, इस सवाल पर वह कहते हैं कि इन गांवों में एक खास समानता है। वह है यहां दलित व मुस्लिम मतदाताओं का बाहुल्य। <strong>रूरल वॉयस</strong> के सवाल पर वह आगे कहते हैं, हमारी कोशिश है कि जो वोट परंपरागत भाजपा का नहीं है उसके एक बड़े हिस्से को जोड़ा जाए। पिछले करीब 15 दिन से वह इसी विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं।&nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/12/image_750x_638c62cfe1586.jpg" alt="" /></p>
<p><span style="font-weight: 400;">दूसरी ओर संयुक्त विपक्ष के रूप में यहां से राष्ट्रीय लोक दल के उम्मीदवार मदन भैया चुनाव लड़ रहे हैं। राष्ट्रीय लोक दल इस सीट को जीतने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने दस दिन से अधिक समय इस विधानसभा क्षेत्र में प्रचार के लिए लगाया। विधानसभा के लगभग सभी 70 गांवों में वह मतदाताओं तक पहुंचे। जयंत चौधरी के राजनीतिक जीवन में किसी एक विधानसभा के लिए इतना सघन प्रचार करने का यह पहला उदाहरण है। इस बारे में <strong>रूरल वॉयस</strong> के साथ बात करते हुए वह कहते हैं कि यह चुनाव राष्ट्रीय लोक दल और विपक्ष के लिए बहुत अहम है। इस सीट को जीतने में हम अपने प्रयासों में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते हैं।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/12/image_750x_638c62573f1ee.jpg" alt="" /></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश पार्टी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी समेत पार्टी के अनेक पदाधिकारी और मंत्री लगातार मतदाताओं के बीच पहुंचे। भूपेंद्र चौैधरी तो 3 दिसंबर को प्रचार के अंतिम दिन कई सभाएं करने के लिए यहां आए। इसी में एक सभा जंधेड़ी गांव में हुई जिसको लेकर राष्ट्रीय लोक दल ने आरोप लगाया कि यह सभा चुनाव प्रचार की निर्धारित अवधि के बाद की गई। इस संबंध में जयंत चौधरी ने कहा कि हम इसकी शिकायत चुनाव आयोग से करेंगे। उनका आरोप है कि भूपेंद्र चौधरी 5 बजकर 45 दिन मिनट पर भी चुनाव प्रचार कर रहे थे जबकि चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक चुनाव प्रचार शाम पांच बजे बंद हो गया था।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">असल में यहां के समीकरण बड़े अहम हैं। खतौली विधानसभा सीट मुजफ्फरनगर लोक सभा सीट का हिस्सा है। इस समय मुजफ्फरनगर लोक सभा सीट में आने वाली पांच विधानसभा सीटों में से तीन सीटें चरथावल, बुढ़ाना और मीरापुर विपक्ष के पास हैं। बुढ़ाना और मीरापुर राष्ट्रीय लोक दल के पास हैं जबकि चरथावल समाजवादी पार्टी के पास। मुजफ्फरनगर सीट भाजपा के पास है और खतौली सीट पर भाजपा के जीते हुए विधायक विक्रम सैनी को मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगों&nbsp; के एक मामले में सजा होने के चलते विधायकी गंवानी पड़ी है। उसी के चलते यहां उप चुनाव हो रहा है। भाजपा ने विक्रम सैनी की पत्नी राजकुमारी सैनी को टिकट दिया है। राष्ट्रीय लोक दल ने मदन भैया को टिकट दिया है जो गाजियाबाद के लोनी से एक बार विधायक रहे और 2022 के विधानसभा चुनाव में उस सीट से ही हार गये थे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">राष्ट्रीय लोक दल 90 हजार से अधिक मुस्लिम, करीब 22 हजार गूजर व करीब 25 हजार जाट मतों को जीत का आधार मान रहा है। जबकि भाजपा अपने परंपरागत मतों के आधार पर जीत की उम्मीद बनाए हुए है। लेकिन यहां के चुनाव को करीब से देखने वाले लोगों की मानें तो फैसला करीब 45 हजार दलित मतदाताओं के रुख से होगा। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) उप चुनाव नहीं लड़ रही है। ऐसे में भाजपा नेताओं का कहना है यह मत भाजपा को मिलेंगे क्योंकि मायावती सपा गठबंधन को भाजपा से बड़ा दुश्मन मानती है। दलित मतदाता बसपा का परंपरागत वोट हैं। इसी साल फरवरी में हए विधानसभा चुनावों में बसपा की कम सक्रियता के आधार पर विश्लेषकों का मत रहा है कि बड़े पैमाने पर दलित मत भाजपा को मिले थे।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">विपक्ष भी इन मतों की अहमियत समझ रहा है। राष्ट्रीय लोक दल गठबंधन ने यहां आम समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर को अपने साथ ले लिया है। चंद्रशेखर और जयंत चौधरी ने संयुक्त रैली भी की, साथ ही साथ जनसंपर्क भी किया। इसलिए राष्ट्रीय लोक दल का दावा है कि दलित मतों का बड़ा हिस्सा उसे मिलने जा रहा है। पिछले चुनाव में राष्ट्रीय लोक दल के परंपरागत जाट मतों का एक बड़ा हिस्सा भाजपा को गया था, लेकिन इस बार लोक दल का दावा है कि अधिकांश जाट मत उसे मिलेंगे। इसके लिए उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने जमीनी स्तर पर प्रचार में बहुत मशक्कत की है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">जहां तक उम्मीदवारों की बात है तो दोनों उम्मीदवारों की बजाय उनकी पार्टी के बड़े नेता खुद के लिए वोट मांग रहे हैं। विक्रम सैनी के विवादित बयानों को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है और अब उनकी पत्नी चुनाव लड़ रही हैं तो यह नाराजगी बरकरार है। यह चुनाव प्रचार के समय दिख जाती है। वहीं मदन भैया को बाहरी होने के साथ उनकी बाहुबली छवि को भी उनके विरोध में इस्तेमाल किया जा रहा है। राष्ट्रीय लोक दल यहां गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) की अभी तक घोषणा नहीं किये जाने को किसानों के बीच मुद्दा बना रहा है। वह कह रहा है कि पांच तारीख को भाजपा के खिलाफ वोट कर किसान सरकार को चेतावनी दे देगा। संजीव बालियान कहते हैं इस सीट पर खतौली और मंसूरपुर चीनी मिलें हैं और दोनों का भुगतान बहुत बेहतर हैं। इसलिए समय से भुगतान मिलने के चलते किसान को राहत है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मई 2018 में कैराना लोक सभा उप चुनाव एक बड़ी राजनीतिक हलचल में बदल गया था। 2019 के आम चुनावों से करीब एक साल पहले उस उपचुनाव में भारी राजनीतिक जोर आजमाइश के बीच लोकदल ने जीत दर्ज की थी। राष्ट्रीय लोक दल और विपक्ष खतौली विधान सभा सीट के उप चुनाव को उसी रणनीति के तहत लड़ रहा है। इसके बड़े नेताओं का कहना है कि 2024 के लोक सभा चुनावों के पहले अगर यह सीट हम जीत लेते हैं तो हम पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नया राजनीतिक माहौल बनाने में कामयाब हो जाएंगे। वहीं भाजपा किसी भी कीमत पर यह सीट खोना नहीं चाहती क्योंकि यहां हार से गलत संदेश जाएगा। यही वजह है कि इसको लेकर पार्टी और स्थानीय सांसद व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान दिन-रात एक किए हुए हैं। ऐसे में मुकाबला उम्मीदवारों के बीच कम और राष्ट्रीय लोक दल गठबंधन और भाजपा के बीच अधिक हो गया है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/12/image_750x500_638c63b93bdc1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खतौली विधानसभा  उपचुनाव में 2018 के कैराना लोक सभा सीट के उप चुनाव की झलक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/12/image_750x500_638c63b93bdc1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सेब उत्पादक किसान  प्रभावित कर सकते हैं हिमाचल प्रदेश के चुनाव नतीजे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/himachal-polls-apple-growers-may-influence-outcome.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 10 Nov 2022 08:34:21 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/himachal-polls-apple-growers-may-influence-outcome.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">हिमाचल प्रदेश अपने सेब के बागानों के लिए जाना जाता है यह यहां के लोगों की आय का एक बड़ा जरिया है। सेब हिमाचल की&nbsp; अ<span>र्थव्यवस्था में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। देश में सेब का कुल उत्पादन </span>24<span> लाख टन है और इसका </span><span>&nbsp;</span>26<span> फीसदी से अधिक इस पहाड़ी राज्य से आता है। जिसके जरिये राज्य को 5</span>000 से 5,500<span> करोड़ रुपये की सालाना आय होती है और यह </span><span>राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग </span>5<span> फीसदी का योगदान देती है। राज्य के सेब किसान भाजपा सरकार से नाराज दिख रहे हैं और करीब 20 विधान सभा सीटों पर बड़ी संख्या में हैं। उनकी नाराजगी चुनावों में भाजपा के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि <span>पिछले कुछ सालों से सेब बागानों के किसानों कठिन दौर से गुजर रहे हैं। एक कीटनाशक के एक पैकेट की कीमत जहां पहले </span>800<span> रुपये हुआ करती थी लेकिन </span><span>अब यही करीब दोगुना हो गई है। वहीं सेब की पैकेजिंग के मैटीरियल की कीमत भी 20 फीसदी बढ़ गई है। एक तरफ जहां &nbsp;उत्पादन की लागत में वृद्धि हुई है लेकिन वहीं दूसरी तरफ यह बिडम्बना है कि सेब की कीमतों में कमी आई है और किसानों की आय घट गई है।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">सेब की खेती में लागत के बढ़ने में कई कारक हैं जहां पहले पैकेजिंग सामग्री पर जीएसटी 12<span> फीसदी थी जो अब </span>18<span> फीसदी हो गया है।</span><span> लागत बढ़ने में इसे एक मुख्य कारक माना जा रहा है। </span>इसमें कोई आश्चर्य करने बात करने वाली बात नहीं है कि चुनाव के अंतिम चरण के प्रचार के दौरान सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस ने सेब की खेती करने वाले किसानों को अपनी तरफ लुभाने के लिए पूरी&nbsp; ताकत लगा दी है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">राज्य विधानसभा में 68<span> सीटें हैं और </span>20<span> सीटों पर सेब की खेती करने वालों की अच्छी खासी संख्या है। हिमाचल प्रदेश में </span>12<span> नवंबर को मतदान होगा और वोटों की गिनती </span>8<span> दिसंबर को होगी। </span>अभी दो महीने पहले सेब&nbsp; <span>बागान मालिक अधिक उत्पादन लागत और सेब की कम कीमतों के विरोध में सड़कों पर उतर आए थे। </span>हिमाचल प्रदेश में माकपा विधायक राकेश सिंघा ने अन्य मुद्दों के अलावा पैकेजिंग सामग्री पर मूल्य वृद्धि और जीएसटी के खिलाफ सेब की खेती करने वालों के विरोध का जिक्र करते हुए कहा, <span>मैं साल </span>1987<span> से सेब किसानों से जुड़ा हुआ हूं। सेब किसानों के दो बड़े आंदोलन हुए हैं।</span>&nbsp;<span>पहले भाजपा और फिर कांग्रेस के शासन के दौरान आंदोलन हुआ।</span></p>
<p style="text-align: justify;">हिमाचल प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला ने पूछा कि भाजपा ने कहा है कि सेब उत्पादकों के लिए जीएसटी 12<span> फीसदी तक सीमित होगा</span>&nbsp;<span>लेकिन वे जीएसटी को खत्म क्यों नहीं कर रहे हैं।</span>&nbsp;<span>शुक्ला ने कहा कि सेब उत्पादकों के प्रतिनिधित्व के साथ एक कृषि और उत्पादक समिति का गठन किया जाएगा जो फलों और फसलों की कीमत तय करेगी।</span></p>
<p style="text-align: justify;">कांग्रेस नेता अलका लाम्बा ने दावा किया कि राज्य में सेब उत्पादक एमएसपी की गारंटी देने वाले कानून के अभाव में अपनी उपज कम दरों पर बेचने को मजबूर हैं। उनका मानना है उनकी पार्टी सत्ता विरोधी लहर पर है और मतदाताओं से राज्य में भाजपा को दोबारा न चुनने का आग्रह कर रही है।</p>
<p style="text-align: justify;">भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने राज्य के प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों में एक के बाद एक तीन चुनावी सभाओं को संबोधित किया, <span>जो कांग्रेस के गढ़ हैं। </span>सेब बेल्ट में नड्डा के खिलाफ राजस्थान से कांग्रेस के नेता सचिन पायलट थ, <span>जिन्होंने जुब्बल-कोटखाई में सेब के मुख्य व्यापारिक केंद्र</span>&nbsp;<span>खरापाथर में एक रैली को संबोधित किया। </span>पायलट ने आरोप लगाया कि सरकार के नासमझी भरे रवैये के कारण सेब की अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। <span>सेब राज्य की सबसे बड़ी कमाई के साधनों में से एक है। भाजपा सरकार ने राज्य में कीटनाशकों और फफूंदनाशकों पर सब्सिडी समाप्त कर दी है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">दूसरी ओर&nbsp; <span>सत्तारूढ़ दल भाजपा का मानना </span>​​है कि उसने सेब किसानों की मदद के लिए बहुत कुछ किया है। उनका कहना है कि सेब के बागवानों को ठोस योजना बनाकर हर रूप से &nbsp;क्षमता में विकास में मदद की है। यह आंदोलन राजनीतिक है <span>जिसे हमारे विरोधियों ने बनाया है। </span>हाल ही में, <span>संयुक्त किसान मंच (एसकेएम) ने सेब किसानों से अपील की है कि एक विशेष पार्टी ने उनके हितों की रक्षा के लिए क्या किया है और अपने घोषणापत्र में किए गए वादों पर अमल किया है कि नही&nbsp; इसका आकलन करने के बाद और सोच&nbsp; विचार करके&nbsp; ही वोट डालें।</span></p>
<p style="text-align: justify;">सेब किसानों के मुताबिक उन्हें सरकार की ओर से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। कई किसानों का मानना ​​है कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने उनकी उपेक्षा की है और इस वजह से उनका मुनाफा कम हो गया है। सरकार ने कवकनाशी और अन्य चीजों पर सब्सिडी को हटा दिया और उद्योग के लिए आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी बढ़ा दिया <span>और इसने किसानों की परेशानी में इजाफा किया है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/07/image_750x500_62ded50bd53fc.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सेब उत्पादक किसान  प्रभावित कर सकते हैं हिमाचल प्रदेश के चुनाव नतीजे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/07/image_750x500_62ded50bd53fc.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजनीतिक पार्टियों ने हिमाचल प्रदेश विधान सभा चुनावों   के पहले लगाई  वादों की झड़ी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/promises-galore-in-poll-bound-himachal-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 09 Nov 2022 10:28:37 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/promises-galore-in-poll-bound-himachal-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">चुनाव आते ही राजनीतिक दल मतदाताओं को लुभाने में एक-दूसरे से होड़ में एक से एक लुभावने वादा कर रहे हैं&nbsp; <span>भले ही इसका मतलब &nbsp;चांद को लाने जैसा वादा ही क्यों न हो। इस बार हिमाचल प्रदेश में होने वाले विधान सभा चुनाव की स्थिति कुछ अलग नहीं है। </span>बीजेपी और कांग्रेस मतदाताओं को लुभाने के लिए तरह-तरह के ऐलान करते हुए महिलाओं से जुड़े मुद्दों को उठा रही हैं। विधान सभा के लिए 12<span> नवंबर को होने वाले मतदान की लड़ाई को जीतने की तैयारी के लिए धर्म भी दोनों पार्टियों के चुनावी घोषणापत्र का अहम हिस्सा है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि पहाड़ी राज्य की आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग आधी (49<span> फीसदी) है</span>, <span>इन दोनों प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों ने इस बार महिलाओं अपने तरफ खीचने &nbsp;के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">महिलाओं पर पार्टियों का जोर इस तथ्य में निहित है कि हिमाचल प्रदेश में मतदान में महिलाओं की संख्या 1998 <span>से सभी चुनावों में पुरुषों से अधिक रही है। साथ ही</span>&nbsp;55,74,793 <span>मतदाताओं में से </span>28,46,201 <span>पुरुष और </span>27,28,555 <span>महिलाएं हैं।</span><span></span></p>
<p style="text-align: justify;">कांग्रेस ने घोषणापत्र में '<span>हर घर लक्ष्मी</span>, <span>नारी सम्मान निधि</span>' का वादा <span>किया है</span>, <span>जिसमें </span>300<span> यूनिट मुफ्त बिजली के अलावा वरिष्ठ महिलाओं को </span>1500<span> रुपये प्रति माह देने का वादा किया गया है। जिससे इन महिलाओं का जीवन थोड़ा आसान होने की संभावना है। दूसरी ओर भाजपा ने महिला मतदाताओं को अपने पक्ष में कर विधानसभा चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए एक महिला संकल्प भी जारी किया है। इसने स्कूल जाने वाली लड़कियों से लेकर महिलाओं तक पहुंचने की कोशिश की है। </span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>भाजपा के घोषणापत्र में स्कूल जाने के लिए साइकिल</span>, <span>कॉलेज के छात्रों के लिए स्कूटी और बीपीएल परिवारों की लड़कियों की शादी के लिए शगुन योजना के तहत आर्थिक सहायता बढ़ाने का वादा किया है। इसके अलावा</span>,<span> सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में महिलाओं के लिए स्त्री संकल्प में </span>33<span> प्रतिशत आरक्षण का वादा किया &nbsp;है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">स्त्री संकल्प पत्र में महिला उद्यमियों के लिए होमस्टे के लिए 500<span> करोड़ रुपये का कोष स्थापित किया जाएगा और महिला उद्यमियों को ब्याज मुक्त ऋण प्रदान करने का वादा किया गया है। शगुन में बीपीएल महिलाओं को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को </span>31,000<span> रुपये से बढ़ाकर </span>51,000<span> रुपये किये जाने वादा किया गया है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">दोनों पार्टियों के घोषणापत्र में धर्म पर जोर दिया गया है।&nbsp; <span>बीजेपी ने नई दिल्ली</span>, <span>जयपुर</span>, <span>चंडीगढ़</span>, <span>मेरठ और मथुरा से </span>45 <span>विशेष बसों को लॉन्च करके प्रमुख मंदिरों और शक्ति पीठ को जोड़ने के लिए "हिम तीरथ सर्किट" का वादा किया है।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/11/image_750x_636a8a646912f.jpg" alt="" /></p>
<p style="text-align: justify;">कांग्रेस ने पहली बार अपने घोषणा पत्र में "देवस्थान और तीर्थयात्रा" पर एक खंड को शामिल किया है। इस खंड में <span>कांग्रेस ने सभी वरिष्ठ नागरिकों (एक परिचारक के साथ) के लिए अपनी पसंद के मंदिर में मुफ्त तीर्थयात्रा के लिए भुगतान करने का वादा किया है। इसने राज्य से आर्थिक सहयोग पाने वाले मंदिरों में वार्षिक योगदान को दोगुना करने और मंदिर के पुजारियों के वेतन को दोगुना करने का भी वादा किया है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">भाजपा ने समान नागरिक संहिता लागू करने और वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण करने का भी वादा किया। कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में धार्मिक पर्यटन को मजबूत करने के लिए पर्यटन सर्किट विकसित करने और मंदिरों के जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण के लिए एक विशेष बजट प्रदान करने का वादा किया है ।</p>
<p style="text-align: justify;">भाजपा ने गरीब परिवारों की महिलाओं को तीन मुफ्त एलपीजी सिलेंडर, <span>30 वर्ष से अधिक उम्र के गरीब परिवारों की सभी महिलाओं को अटल पेंशन योजना के तहत नामांकन</span>, <span>सरकारी स्कूलों की 50,000 मेधावी छात्राओं को स्नातक स्तर की पढ़ाई के दौरान 2500 रुपये प्रति माह देने का वादा किया है। साथ ही स्त्री शक्ति कार्ड देने का वादा किया है </span></p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव में भाजपा को महिला मतदाताओं का काफी सपोर्ट मिलने के काऱण भाजपा ने दोबारा ऐतिहासिक जीत के पाई थी। <span>जहां पर&nbsp; साइलेन्ट महिला मतदाताओं द्वारा वोट देकर दोबारा भाजपा को चुनाव जीता कर सत्ता में लाने के पीछे एक निर्णायक भूमिका थी। इसके चलते </span><span>&nbsp;37 वर्षों&nbsp; के बाद किसी भी सरकार की लगातार दोबारा सत्ता में वापसी हुई थी।</span></p>
<p style="text-align: justify;">भाजपा ने यूपी में अपनी प्रतिद्वंद्वी पार्टी सपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के मुकाबले मुफ्त अनाज, <span>रसोई गैस कनेक्शन और शौचालय&nbsp; जैसी योजनाों के काऱण महिला मतदाताओं के बीच 16 प्रतिशत की बढ़त हासिल की थी। इस तरह की लाभार्थी योजनाओं के कारण भाजपा को चुनावों में महिला मतदाताओं का समर्थन मिला।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा पर उसके हिमाचल प्रदेश चुनाव घोषणापत्र को लेकर निशाना साधा है। <span>इसे उनके पांच साल पुराने वादों का "कट-कॉपी-पेस्ट" करार दिया है और काग्रेस&nbsp; के कुछ हिस्सों से उधार लिया बताया है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि भाजपा के घोषणापत्र में पुरानी पेंशन योजना के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा गया है</span>, <span>जिसे बहाल करना सरकारी कर्मचारियों की प्रमुख मांग रही है।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span><em><strong>(लेखक नई दिल्ली में वरिष्ठ पत्रकार और पब्लिक पॉलिसी विश्लेषक हैं)</strong></em></span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/11/image_750x500_636a6baabea77.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजनीतिक पार्टियों ने हिमाचल प्रदेश विधान सभा चुनावों   के पहले लगाई  वादों की झड़ी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/11/image_750x500_636a6baabea77.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान आंदोलन से क्या वाकई विधान सभा चुनाव के नतीजे बेअसर रहे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/are-assembly-election-results-really-unaffected-by-farmers-movement.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 12 Mar 2022 15:22:23 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/are-assembly-election-results-really-unaffected-by-farmers-movement.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पांच राज्यों की विधान सभा चुनावों के नतीजों के आधार पर कहा जा रहा है कि दिल्ली की सीमाओं पर 13 माह से अधिक समय तक चले किसान आंदोलन से चुनाव बेअसर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के नतीजों को देखें तो एकबारगी ऐसा लगता भी है क्योंकि भाजपा यहां बहुमत के साथ सत्ता में वापस आई है। लेकिन इन नतीजों और आंदोलन के प्रभाव वाले जिलों के परिणामों को करीब से देखने पर यह नहीं कहा जा सकता है कि किसान आंदोलन का मुद्दा बिलकुल बेअसर रहा है। हां यह विपक्ष को उतना मजबूत नहीं कर सका कि राज्य में सत्ता परिवर्तन हो जाए। आंदोलन पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड की तराई व मैदानी इलाकों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान चला रहे थे। इन स्थानों के चुनाव नतीजों को देखना आंदोलन के असर के आकलन का बेहतर तरीका हो सकता है। जो साबित करता है कि जहां पंजाब में आंदोलन का असर व्यापक रहा, वहीं उत्तर प्रदेश में यह पश्चिम के चार जिलों में नतीजे प्रभावित कर सका।</p>
<p>केंद्र सरकार के तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन पंजाब में सबसे मुखर रहा और दिल्ली की सीमाओं पर भी पंजाब के किसानों की भागीदारी अधिक रही। राज्य में सत्ता के दावेदार शिरोमणि अकाली दल की केंद्र सरकार में भागीदारी थी लेकिन विरोध बढ़ता देख जनाधार को बचाने के लिए पार्टी की एकमात्र मंत्री ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। आंदोलन का पार्टी ने समर्थन किया लेकिन वह नुकसान को नहीं रोक पाई और दशकों के बाद चुनाव नतीजों में वह सबसे कमजोर स्थिति में है। जहां तक भाजपा की बात है तो उसने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी और दूसरे कुछ दलों के साथ गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा। प्रधानमंत्री से लेकर उनके मंत्रिमंडल के तमाम सहयोगियों ने वहां प्रचार किया लेकिन पार्टी दो सीटों तक ही सीमित रह गयी। पांच विधान सभा चुनावों में चार में बहुमत से सरकार बनाने वाली पार्टी को पंजाब में केवल दो सीटें मिलना साबित करता है कि तीनों कृषि कानूनों की वापसी के बाद भी वह किसानों की नाराजगी कम नहीं कर पाई। कांग्रेस और उसकी वहां की सरकार ने किसान आंदोलन का समर्थन किया लेकिन उसकी अपनी खामियां उसे ले डूबी और किसानों को वह अपने साथ नहीं रख सकी। वहीं दलित मुख्यमंत्री का उसका कार्ड राज्य के जाट किसानों को उससे दूर ले गया और दलित कार्ड का भी फायदा नहीं हुआ।</p>
<p>अब बात उत्तर प्रदेश की करें तो किसान आंदोलन का असर और उसे दिल्ली की सीमाओं पर सबसे अधिक समर्थन सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ बिजनौर और बागपत जिले का ही सबसे अधिक था। शामली जिले की तीनों सीटें राष्ट्रीय लोकदल और समाजवादी पार्टी के गठबंधन ने जीतीं। बागपत की तीन में से एक सीट रालोद को मिली लेकिन दूसरी सीट करीब दो सौ वोटों से और तीसरी सीट भी सात हजार वोटों से रालोद ने गंवाई। मुजफ्फरनगर जिले की छह सीट में से चार सीटें गठबंधन ने जीतीं और केवल दो सीट भाजपा को मिली, जबकि 2017 में सभी छह सीटें भाजपा ने जीती थीं। मेरठ में सात सीटों में से पांच गठबंधन को मिली। बिजनौर में भी गठबंधन का प्रदर्शन भाजपा से बेहतर रहा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/10/image_750x_615d949f88277.jpg" alt="" /></p>
<p>प्रदेश स्तर पर किसान आंदोलन नतीजों पर बहुत असर छोड़ता नहीं दिखता है। फिर भी मुजफ्फरनगर और शामली जिलों में भाजपा को नुकसान और गठबंधन को बड़ा फायदा हुआ तो इसकी बड़ी वजह है सांप्रदायिकता के आधार पर मतों का विभाजन रुकना। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ये दो जिले 2013 के सांप्रदायिक दंगों का केंद्र रहे थे। लेकिन इन दोनों जिलों में गठबंधन की जीत का मतलब यहां के मुस्लिम और जाट मतदाताओं का वोट उन्हें मिला है।</p>
<p>हालांकि भाजपा ने अपने चुनाव प्रचार को इस इलाके में सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की थी। केंद्रीय गृह मंत्री ने कैराना में चुनाव प्रचार शुरू कर वहां से धार्मिक आधार पर पलायन का मुद्दा उठाया था। इसी तरह की बातें मुजफ्फरनगर में भी की गई थीं। लेकिन सितंबर में भारतीय किसान यूनियन द्वारा आयोजित किसान महापंचायत में इस सांप्रदायिक विभाजन को रोकने पर जोर दिया गया। किसान आंदोलन का योगदान यहां सांप्रदायिक सद्भाव स्थापित करने में रहा और इसी का फायदा रालोद-सपा गठबंधन को हुआ है। इसके चलते ही थानाभवन से राज्य के कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा, सरधना से संगीत सोम और बुढ़ाना के विधायक उमेश मलिक चुनाव हार गये और उनकी हार का अंतर भी काफी अधिक रहा है। इन तीनों पूर्व विधायकों पर मुजफ्फरनगर दंगों के आरोप रहे हैं। इनकी हार की सबसे बड़ी वजह मुस्लिम और जाट मतदाताओं का एक साथ भाजपा के खिलाफ और गठबंधन के पक्ष में वोट करना रहा है।</p>
<p>इसलिए जब राज्य में भाजपा 255<span> सीटें जीतकर आ रही है</span>,<span> तब भाजपा के इन कद्दावर नेताओं का हारना यह साबित करता है कि यहां पर किसान आंदोलन का चुनाव पर असर रहा है। खास बात यह है कि भारतीय किसान यूनियन का मुख्यालय सिसौली भी मुजफ्फरनगर जिले में ही है और यूनियन ने भाजपा के खिलाफ वोट देने का आह्वान किया था। हालांकि इसके नेताओं ने खुद चुनाव लड़ने से परहेज किया, जो समझदारी भरा कदम माना जा सकता है क्योंकि पंजाब में आंदोलन मे शामिल रही 22 जत्थेबंदियों के सर्व समाज मोर्चा के उम्मीदवारों का जो हश्र हुआ वह किसान संगठनों के लिए राजनीति से दूर रखने के लिए एक बड़ी सीख है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_622992a4e3588.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान आंदोलन से क्या वाकई विधान सभा चुनाव के नतीजे बेअसर रहे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_622992a4e3588.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पांच में से चार राज्य जीतने के बाद भाजपा के लिए 2024 की राह हुई आसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/after-winning-4-out-of-5-states-way-of-2024-is-now-easy-for-bjp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 11 Mar 2022 12:22:52 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/after-winning-4-out-of-5-states-way-of-2024-is-now-easy-for-bjp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव को 2024 के आम चुनाव से पहले का बड़ा मुकाबला माना जा रहा था, जिसमें भारतीय जनता पार्टी कामयाब रही है। पांच में से चार राज्यों में जीत के बाद भाजपा के लिए 2024 की राह आसान हो गई है। पंजाब के रूप में पहली बार पूर्ण राज्य मिलने के बाद आम आदमी पार्टी की नजर अब इसी साल होने वाले हिमाचल प्रदेश और गुजरात के चुनावों पर है। कांग्रेस के लिए यह निश्चित रूप से आत्मावलोकन का समय है क्योंकि अब उसके पास सिर्फ दो राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ रह गए हैं। महाराष्ट्र में वह शिवसेना और एनसीपी के साथ सरकार में है।</p>
<p>जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, &ldquo;2019 के चुनाव नतीजों के बाद कुछ ज्ञानियों ने कहा था कि 2019 की जीत में क्या है, यह तो 2017 में ही तय हो गई थी क्योंकि 2017 में यूपी यूपी का रिजल्ट आया था। मैं मानता हूं कि इस बार भी ये ज्ञानी जरूर कहने की हिम्मत करेंगे कि 2022 के नतीजों ने 2024 के नतीजे तय कर दिए हैं।&rdquo;</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, यह उत्सव भारत के लोकतंत्र के लिए है। हमारी माताओं बहनों और युवाओं ने जिस तरह भाजपा को भरपूर समर्थन दिया वह अपने आप में बहुत बड़ा संकेत है। उन्होंने कहा कि हमारे कार्यकर्ताओं ने जीत का चौका लगाया है।&nbsp;उत्तर प्रदेश ने देश को अनेक प्रधानमंत्री दिए लेकिन 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले किसी मुख्यमंत्री को दोबारा चुने जाने का यह पहला उदाहरण है। गुड गवर्नेंस की बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमने गवर्नेंस का डिलीवरी सिस्टम बेहतर किया। भाजपा गरीब को भरोसा देती है कि प्रत्येक गरीब तक सरकार की दी गई सुविधाएं जरूर पहुंचेंगी।</p>
<p>इस चुनाव की एक खास बात यह रही कि उत्तर प्रदेश में मायावती ने अपना नुकसान करके भाजपा को फायदा पहुंचाया है। चुनाव प्रचार के दौरान ज्यादातर समय वे चुप रहीं और जब भी बोलीं तब समाजवादी पार्टी के खिलाफ ही बोलीं। बसपा ने करीब सवा सौ सीटों पर ऐसे उम्मीदवार खड़े किए थे जो सपा के उम्मीदवार की जाति के ही थे। उनमें से 68 सीटें भाजपा ने जीती हैं। समाजवादी पार्टी को जयंत चौधरी के राष्ट्रीय लोक दल गठबंधन का भी बहुत फायदा मिलता नहीं दिखा। किसान आंदोलन के बावजूद भाजपा बड़ी संख्या में जाट वोट हासिल करने में कामयाब रही।</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेशः भाजपा की सीटें घटीं, पर सरकार तो बनेगी</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x_622af131b5353.jpg" alt="" /></p>
<p>उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को 255 सीटें मिली हैं। हालांकि यह 2017 के 312 की तुलना में 57 सीटें कम हैं। उसके सहयोगी अपना दल सोनेलाल को 12 और निषाद पार्टी को 6 सीटें मिली हैं। प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी की सीटों की संख्या 47 से बढ़कर 111 हो गई है। उसके सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल को 8 और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को 6 सीटों पर जीत मिली है। बहुजन समाज पार्टी ने अब तक का अपने सबसे खराब प्रदर्शन किया है और उसे सिर्फ एक सीट पर जीत मिली है। यही हाल कांग्रेस का भी रहा जिसे सिर्फ 2 सीटों पर जीत मिली। 2 सीटें जनसत्ता दल लोकतांत्रिक को मिली हैं।</p>
<p>वोटों के लिहाज से देखें तो भारतीय जनता पार्टी को 41.29 फ़ीसदी, प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी को 32.1 फ़ीसदी, बहुजन समाज पार्टी को 12.88 फ़ीसदी, और कांग्रेस को 2.33 फ़ीसदी वोट मिले हैं। बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के लिए यह अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन है।</p>
<p><strong>पंजाबः आप को तीन चौथाई से भी ज्यादा सीटें</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x_622af14d38279.jpg" alt="" /></p>
<p>पंजाब में आम आदमी पार्टी ने रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया है। इसने 117 में से 92 सीटें जीतकर तीन चौथाई से भी अधिक बहुमत हासिल कर लिया है। प्रदेश की पारंपरिक पार्टियों कांग्रेस और अकाली दल को भी कभी इतना बड़ा बहुमत नहीं मिला था। 2017 में आप को 20 सीटें मिली थीं। कांग्रेस 77 सीटों से घटकर 18 पर सिमट गई। बहुजन समाज पार्टी को एक, भारतीय जनता पार्टी को दो और शिरोमणि अकाली दल को 3 सीटें मिली हैं। वोट प्रतिशत देखा जाए तो आम आदमी पार्टी को 42 फ़ीसदी, कांग्रेस को 22.98 फीसदी, भाजपा को 6.6 फ़ीसदी और बसपा को 1.77 फ़ीसदी वोट मिले हैं।</p>
<p><strong>उत्तराखंडः सीटें घटीं, पर लगातार दूसरी बार बहुमत</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x_622af1602611d.jpg" alt="" /></p>
<p>उत्तराखंड में लगातार दूसरी बार भाजपा बहुमत हासिल करने में कामयाब हुई है। उसकी सीटें तो कम हुई हैं लेकिन इसके बावजूद वह आराम से सरकार बनाने की स्थिति में है। उसे 44.33 फ़ीसदी वोट के साथ 47 सीटों पर जीत हासिल हुई है। कांग्रेस की सीटें बढ़ी हैं। उसे 19 जगहों पर जीत मिली। उसका वोट प्रतिशत 37.9 1 फ़ीसदी रहा। बहुजन समाज पार्टी 2 सीटें जीतने में कामयाब हुई। उसे 4.82 फ़ीसदी वोट मिले। दो निर्दलीय उम्मीदवार भी जीते हैं। आम आदमी पार्टी कोई सीट तो नहीं जीत सकी लेकिन उसे 3.31 फ़ीसदी वोट जरूर मिले।</p>
<p><strong>गोवाः समर्थन से बनेगी भाजपा सरकार</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x_622af17e557f9.jpg" alt="" /></p>
<p>40 सीटों वाले गोवा में किसी दल को बहुमत नहीं मिला, लेकिन भारतीय जनता पार्टी 20 का आंकड़ा छूने में जरूर कामयाब हुई। यहां बहुमत के लिए 21 सीटें चाहिए। 3 निर्दलीय और महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के दो विजेताओं ने भाजपा को साथ देने का फैसला किया है। भाजपा के प्रदेश चुनाव प्रभारी देवेंद्र फडणवीस के अनुसार पांचों विधायकों ने भाजपा को समर्थन देने का पत्र दिया है। प्रदेश में वोटों के बंटवारे के कारण कांग्रेस सिर्फ 11 जगहों पर सिमट कर रह गई। आम आदमी पार्टी को दो, गोवा फॉरवर्ड पार्टी को एक और रिवॉल्यूशनरी गोवन्स पार्टी को एक सीट मिली है।</p>
<p>वोट प्रतिशत देखें तो भाजपा को 33.31 फ़ीसदी, कांग्रेस को 23.46 फ़ीसदी, आम आदमी पार्टी को 6.77 फ़ीसदी, तृणमूल कांग्रेस को 5.21 फ़ीसदी, गोवा फॉरवर्ड पार्टी को 1.84 फ़ीसदी वोट मिले। तृणमूल को वोट तो आम आदमी पार्टी से थोड़े ही कम मिले, लेकिन वह एक भी सीट जीतने में नाकाम रही।</p>
<p><strong>मणिपुरः बीरेन सिंह की वापसी, चौथे नंबर पर पहुंची कांग्रेस</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x_622af192ccec4.jpg" alt="" /></p>
<p>मणिपुर में भाजपा के लिए इस बार उपलब्धि यह है कि उसे सरकार बनाने के लिए किसी के समर्थन की जरूरत नहीं है 60 सीटों वाली विधानसभा में वह 32 सीटें जीतने में कामयाब हुई है। 2017 में उसे नेशनल पीपुल्स पार्टी और नगा पीपुल्स फ्रंट तथा कुछ निर्दलीयों के साथ मिलकर सरकार बनाना पड़ा था। तब उसे सिर्फ 21 सीटें मिली थी और कांग्रेस 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इस बार कांग्रेस 5 सीटें जीतकर चौथे नंबर पर पहुंच गई है। नेशनल पीपुल्स पार्टी ने 7 और जनता दल यूनाइटेड ने 6 सीटें जीती हैं। नगा पीपुल्स फ्रंट को भी 5 सीटें मिली हैं। इसके अलावा कुकी पीपुल्स अलायंस पहली बार चुनाव लड़ कर दो सीटें जीतने में कामयाब हुई है। तीन सीटें निर्दलीयों को मिली हैं।</p>
<p>वोट प्रतिशत देखें तो भाजपा को 37.83 फ़ीसदी, कांग्रेस को 16.83 फ़ीसदी, जनता दल यूनाइटेड को 10.77 फ़ीसदी, नेशनल पीपुल्स पार्टी को 17.29 फ़ीसदी और नगा पीपुल्स फ्रंट को 8.09 फ़ीसदी वोट मिले हैं।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_622af11a74fe7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पांच में से चार राज्य जीतने के बाद भाजपा के लिए 2024 की राह हुई आसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_622af11a74fe7.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विधानसभा चुनावः भाजपा और आप के लिए जश्न का मौका, लेकिन विपक्ष सिमटा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/big-day-for-bjp-after-winning-four-states.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 10 Mar 2022 20:40:07 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/big-day-for-bjp-after-winning-four-states.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश,<span> उत्तराखंड, गोवा और मिजोरम चारों राज्यों में दोबारा सरकार बनाने में कामयाब हो गई है। इस कामयाबी से उसके लिए </span>2024 <span>में लोकसभा चुनाव की राह भी आसान हो गई। हालांकि विपक्षी खेमे के लिए नतीजों का दिन मायूसी भरा रहा। देश के स्तर पर भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के हाथ से एक और बड़ा राज्य पंजाब निकल गया। सिर्फ निकला नहीं बल्कि उसे आम आदमी पार्टी के हाथों बहुत ही बुरी तरह पराजित होना पड़ा। पहली बार देश के किसी पूर्ण राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी। इस चुनाव ने एक बार फिर यह साबित किया कि भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़ा जिताऊ चेहरा हैं। चुनाव से पहले मोदी ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लगातार दौरे किए थे। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में जीत के बाद अगले राष्ट्रपति चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी को कोई खास मुश्किल नहीं आएगी। मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल </span>24 <span>जुलाई </span>2022 <span>को खत्म हो रहा है।</span>&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए इसे जीत का चौका बताते हुए कहा कि चुनाव के नतीजे पार्टी के गवर्नेंस मॉडल पर मुहर की तरह हैं। पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने कई प्रधानमंत्री दिए, लेकिन इसने पहली बार किसी मुख्यमंत्री को दोबारा चुना है।</p>
<p>शिवसेना के नेता संजय राउत ने चार राज्यों में भाजपा की जीत पर कहा कि पार्टी बेहतर चुनाव मैनेजमेंट के कारण जीती है और उसे सफलता को हजम करना सीखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में कांग्रेस पार्टी का चुनाव मैनेजमेंट ठीक नहीं था। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की साझा सरकार है।</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेशः धरे रह गए महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x_6229c1f2d1763.jpg" alt="" /></p>
<p>चुनाव आयोग की तरफ से शाम 8 <span>बजे तक दी गई जानकारी के अनुसार भारतीय जनता पार्टी </span>253 <span>सीटों पर आगे थी या जीत चुकी थी</span>। उसके सहयोगी दल अपना दल (सोनेलाल) 11 <span>और निषाद पार्टी </span>7 <span>सीटों पर आगे थी या जीत चुकी थी</span>। समाजवादी पार्टी 113, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी छह और राष्ट्रीय लोक दल 8 <span>सीटों पर आगे थी या जीत चुकी थी</span>। अन्य दलों में बहुजन समाज पार्टी को एक, कांग्रेस को दो, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक को दो सीटें मिलीं। प्रदेश में कुल 403 सीटें हैं।</p>
<p>विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को धार्मिक ध्रुवीकरण के अलावा सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिला, खासकर मुफ्त राशन वितरण काय़ पिछले साल पश्चिम बंगाल में भी मुफ्त राशन और महिलाओं को प्रतिमाह नकद राशि देने का फायदा सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को मिला था। इस चुनाव के बाद निश्चित रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कद और बड़ा होगा। उन्हें संसदीय बोर्ड में भी जगह मिल सकती है।</p>
<p>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में पार्टी की जीत पर कहा कि यह गांव, गरीब और किसान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कल्याणकारी योजनाओं पर लोगों का भरोसा है। लोगों ने योगी आदित्यनाथ के बेहतर प्रशासन पर भी ठप्पा लगाया है। प्रदेश में 36 <span>साल के बाद पहली बार सत्तारूढ़ भाजपा दोबारा सरकार बनाएगी।</span></p>
<p>करीब तीन दशक तक प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहने के बाद पहली बार बहुजन समाज पार्टी हाशिए पर गई है। 2017 <span>में उसे </span>19 <span>सीटें मिली थी और उसका वोट प्रतिशत </span>21 <span>रहा था, लेकिन इस बार वह घटकर </span>12.7 <span>फ़ीसदी रह गया है। माना जा रहा है कि बहुजन समाज पार्टी के अनेक मतदाताओं ने भाजपा का साथ दिया। असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के बारे में माना जा रहा था कि वह समाजवादी पार्टी का वोट काटेगी, हालांकि वह कोई बड़ा फेरबदल करने में नाकाम रही। उसे कुल मिलाकर </span>0.43 <span>फ़ीसदी वोट ही मिले। किसी भी सीट पर उसे </span>5000 <span>से अधिक वोट नहीं मिले।</span></p>
<p>महंगाई और बेरोजगारी आवारा पशु जैसे विपक्ष के मुद्दे प्रचार में ही सुनाई दिए, <span>नतीजों पर उनका कोई बड़ा असर होता नहीं दिख रहा है। हालांकि इतना असर जरूर हुआ है कि समाजवादी पार्टी की सीटें लगभग </span>3 <span>गुना हो गई है। भाजपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नुकसान ज्यादा हुआ है जिसका फायदा समाजवादी पार्टी के गठबंधन को मिला है।</span></p>
<p><strong>पंजाबः राजनीति के नए अध्याय की शुरुआत</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x_6229c1c9e686f.jpg" alt="" /></p>
<p>पंजाब में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 <span>सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। कांग्रेस को 18, शिरोमणि अकाली दल को तीन, बहुजन समाज पार्टी को एक, भारतीय जनता पार्टी को दो और निर्दलीय को एक सीट मिली है</span>। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी दोनों सीटों पर चुनाव हार गए तो अमृतसर पूर्व से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और अकाली नेता विक्रम सिंह मजीठिया को आप की जीवनजोत कौर ने हरा दिया। कैप्टन अमरिंदर के लिए यह आखिरी चुनाव हो सकता है, जो पटियाला से हार चुके हैं।</p>
<p>आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि विरोधियों ने पार्टी को रोकने के लिए बड़े षड्यंत्र रचे इसके बावजूद जनता ने पार्टी का समर्थन किया। उन्होंने कहा, &ldquo;<span>उन लोगों ने मुझे आतंकवादी कहा लेकिन जनता ने कहा कि केजरीवाल आतंकवादी नहीं, सच्चा देशभक्त है। पंजाब चुनाव के नतीजे बड़ा इंकलाब है। इसने पंजाब की बड़ी-बड़ी कुर्सियों को हिला दिया है।</span>&rdquo;<span> पार्टी के दूसरे नेताओं का कहना है कि आम आदमी पार्टी के दिल्ली मॉडल ने पंजाब के मतदाताओं को काफी आकर्षित किया।</span></p>
<p>तीन दशक में पहली बार होगा जब पंजाब विधानसभा में बादल परिवार का एक भी सदस्य नहीं होगा। लंबी में प्रकाश सिंह बादल आम आदमी पार्टी के गुरमीत सिंह कोदियां से 11 <span>हजार से अधिक वोटों से हार गए। उनके बेटे और शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल जलालाबाद में आम आदमी पार्टी के जगदीप कंबोज से </span>31000 <span>वोटों से हारे। प्रकाश सिंह बादल के भतीजे मनप्रीत बादल बठिंडा शहरी सीट से, सुखबीर बादल के संबंधी बिक्रम सिंह मजीठिया अमृतसर पूर्व सीट से और प्रकाश सिंह बादल के दामाद आदेश प्रताप सिंह कैरों पट्टी सीट से हार गए।</span></p>
<p>पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत पर एनसीपी नेता शरद पवार ने कहा कि यह कांग्रेस के लिए एक झटके की तरह है। आम आदमी पार्टी को यहां सफलता दिल्ली में उसकी पार्टी के प्रदर्शन के कारण मिली है। पवार ने यह भी कहा कि भाजपा विरोधी पार्टियों को हताश नहीं होना चाहिए बल्कि उन कारणों पर गौर करना चाहिए जिनकी वजह से उनकी हार हुई है।</p>
<p><strong>उत्तराखंडः मोदी है तो मुमकिन है</strong></p>
<p>उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी 45 <span>सीटों पर आगे है या जीत चुकी है। कांग्रेस के हिस्से </span>19<span>, बहुजन समाज पार्टी के दो और निर्दलीय के हिस्से दो सीटें आई हैं</span>। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा से अपना चुनाव तो हार गए लेकिन प्रदेश में पार्टी की दो तिहाई बहुमत मिलने जीत पर लोगों को धन्यवाद देते हुए कहा कि मैंने हमेशा लोगों को यह ध्यान दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सड़क और स्वास्थ्य क्षेत्र में राज्य सरकार ने जो काम किया है उसे ध्यान में रखिए। उन्होंने इस बात पर खुशी भी जताई कि प्रदेश में हर पांच साल बाद सरकार (पार्टी) बदलने का ट्रेंड इस बार जनता ने तोड़ दिया।</p>
<p>राज्य के 21 <span>साल के इतिहास में पहली बार कोई पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता में आएगी। नतीजों से साफ है कि यहां मोदी लहर चली और उसके सामने लोग स्थानीय मुद्दे भूल गए। भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर जो नेता बागी होकर लड़ रहे थे, वे भी हार गए।</span></p>
<p>एक समय माना जा रहा था कि प्रदेश में एंटी इनकंबेंसी है। कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें उन्होंने उत्तराखंड में भाजपा की सरकार बनने पर संदेह जताया था। कांग्रेस ने यहां कुछ ही महीने के अंतराल में तीन मुख्यमंत्री बदलने को मुद्दा बनाया था, लेकिन वे सब मुद्दे फीके रहे। हालांकि मुख्य विपक्षी दल को पार्टी के भीतर आपसी लड़ाई से भी काफी नुकसान हुआ है।</p>
<p><strong>गोवाः समर्थन के सहारे फिर भाजपा सरकार</strong></p>
<p>गोवा में भाजपा 20 <span>सीटें जीतने में कामयाब हुई है</span>। यहां आम आदमी पार्टी को दो, गोवा फॉरवर्ड पार्टी को एक, कांग्रेस को 11, महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी को दो और रिवॉल्यूशनरी गोअंस पार्टी को एक सीट मिली है। यहां भाजपा ने महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के दो और तीन निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन का दावा किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सदानंद तंवनडे ने कहा कि पार्टी को उनकी तरफ से समर्थन का पत्र मिला है।</p>
<p>प्रदेश कांग्रेस प्रमुख गिरीश चोडनकर ने पार्टी की हार स्वीकार करते हुए कहा कि मैं इसकी जिम्मेदारी लेता हूं। हम वोट बंटने से रोकने के लिए लोगों को ठीक से समझा नहीं सके। उन्होंने यह भी कहा कि गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रेसिडेंट के तौर पर मैं विफल रहा और मेरी जगह किसी और को नियुक्त करने का समय आ गया है।</p>
<p><strong>मणिपुरः इस बार अपने दम पर सरकार</strong></p>
<p>मणिपुर की 60 <span>सीटों में से </span>32 <span>सीटें भाजपा जीत चुकी है या आगे है। कांग्रेस को </span>5 <span>सीटें मिली हैं। जनता दल यूनाइटेड को छह, कुकी पीपुल्स एलाइंस को दो, नगा पीपुल्स फ्रंट को </span>5<span>, नेशनल पीपुल्स पार्टी को सात और निर्दलीयों को </span>3 <span>सीटें मिली है</span>ं। 2017 में यहां भाजपा ने नगा पीपुल्स फ्रंट और नेशनल पीपुल्स पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। लेकिन इस बार अगर उसे 32 सीटें मिल गईं तो सरकार बनाने के लिए किसी की मदद की जरूरत नहीं पड़ेगी।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_622aeeadb4bf4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ विधानसभा चुनावः भाजपा और आप के लिए जश्न का मौका, लेकिन विपक्ष सिमटा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_622aeeadb4bf4.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में भाजपा की वापसी पर धामी हारे, मणिपुर और गोवा में भी पार्टी सरकार बनाने के करीब]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/for-the-first-time-bjp-government-to-be-repeated-in-uttarakhand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 10 Mar 2022 11:35:53 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/for-the-first-time-bjp-government-to-be-repeated-in-uttarakhand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड के 21 साल के इतिहास में पहली बार कोई पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता में आएगी। नतीजों से साफ है कि यहां मोदी लहर चली और उसके सामने लोग स्थानीय मुद्दे भूल गए। भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर जो नेता बागी होकर लड़ रहे थे, वे भी हार गए। लेकिन मौजूदा मुख्यमंत्री के हारने का सिलसिला इस बार भी जारी रहा और पुष्कर सिंह धामी खटीमा से हार गए। सरकार बनाने के सपने देख रही कांग्रेस के लिए इससे बुरा और क्या होगा कि उसके नेता हरीश रावत खुद अपनी सीट नहीं बचा सके।</p>
<p>शाम 5.05 बजे तक मतगणना के रुझानों के अनुसार भाजपा को यहां बहुमत मिलता दिख रहा है। पार्टी के प्रत्याशी 15 सीटें जीत चुके थे और 32 सीटों पर आगे थे। अगर यही रुझान अंत तक रहा तो उसे 10 सीटों का नुकसान होगा। कांग्रेस ने चार सीटें जीती हैं और 15 पर आगे है। उसे पिछली बार के मुकाबले आठ सीटें ज्यादा मिलेंगी। बहुजन समाज पार्टी दो और निर्दलीय दो सीटों पर आगे हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 57 और कांग्रेस को 11 सीटें मिली थीं। राज्य विधानसभा में 70 सीटें हैं।</p>
<p>प्रमुख उम्मीदवारों में लाल कुआं से हरीश रावत हार चुके हैं। उन्हें भाजपा के मोहन सिंह बिष्ट ने हराया है। आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार अजय कोठियाल भी पीछे हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता सुबोध उनियाल नरेंद्र नगर सीट पर कांग्रेस के ओम गोपाल रावत से पीछे हैं। चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में वापसी करने वाले यशपाल आर्य भी बाजपुर सीट पर भाजपा के राजेश कुमार से पीछे हैं।</p>
<p>यहां भाजपा को 44.08 फीसदी, कांग्रेस को 38.95 फीसदी, बसपा को 4.63 फीसदी और आम आदमी पार्टी को 3.46 फीसदी वोट मिले हैं।</p>
<p><strong>गोवा</strong></p>
<p>गोवा में भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के करीब है। दोपहर 3.50 बजे तक के मतगणना के रुझानों के मुताबिक सत्तारूढ़ पार्टी 14 सीट जीत चुकी थी और छह सीटों पर आगे थी। कांग्रेस को भी 5 सीटों पर जीत मिली और 6 जगहों पर उसके उम्मीदवार &nbsp;आगे चल रहे थे। गोवा विधानसभा में कुल 40 सीटें हैं। हालांकि मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता प्रमोद सावंत सैंक्वेलिम विधानसभा सीट पर कांग्रेस के धर्मेश सगलानी से पीछे चल रहे थे। महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी दो सीटों पर आगे चल रही थी। आम आदमी पार्टी एक सीट जीत चुकी है और एक पर आगे है, गोवा फॉरवर्ड पार्टी एक सीट जीत चुकी है। चार जगहों पर निर्दलीय और अन्य उम्मीदवार जीते।</p>
<p>यहां के दोनों उपमुख्यमंत्री चुनाव हार चुके हैं। मनोहर अजगांवकर को विपक्ष के नेता और कांग्रेस प्रत्याशी दिगंबर कामत ने मारगाओ में करीब छह हजार मतों से हराया। पूर्व मुख्यमंत्री कामत मारगाओ में 1994 से जीतते आए हैं। दूसरे उप मुख्यमंत्री चंद्रकांत कवलेकर क्यूपेम में कांग्रेस के एल्टोन डिकोस्टा से हार गए। डिकोस्टा पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>मणिपुर</strong></p>
<p>60 विधानसभा सीटों वाले मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी दोबारा सरकार बनाएगी। चुनाव आयोग की तरफ से जारी शाम 5.10 बजे तक के रुझानों के मुताबिक भाजपा के प्रत्याशी 15 सीटें जीत चुके थे और 14 सीटों पर आगे चल रहे थे। नगा पीपुल्स फ्रंट पांच और नेशनल पीपुल्स पार्टी सात सीटों पर आगे थी या जीत चुकी थी। भाजपा ने 2017 में इन दोनों पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। कांग्रेस ने तीन सीटें जीती हैं और एक पर उसे बढ़त है। जनता दल यूनाइटेड पांच सीटें जीत चुकी है और दो पर आगे चल रही है। कुकी पीपुल्स एलायंस एक सीट जीतक एक पर आगे है। निर्दलीय दो सीट जीत चुके हैं और एक पर आगे चल रहे हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_622a00231482f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में भाजपा की वापसी पर धामी हारे, मणिपुर और गोवा में भी पार्टी सरकार बनाने के करीब ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_622a00231482f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में आप की आंधी, मुख्यमंत्री चन्नी, सिद्धू, बादल, कैप्टन अमरिंदर सब हारे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/aap-to-form-government-in-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 10 Mar 2022 11:30:34 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/aap-to-form-government-in-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आम आदमी पार्टी पहली बार दिल्ली से बाहर कदम रखते हुए पंजाब में भी सरकार बनाने जा रही है। कॉमेडियन से नेता बने भगवंत मान उर्फ जुगनू प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री होंगे। चुनाव आयोग की तरफ से दोपहर 5.10 बजे तक दी गई जानकारी के अनुसार आम आदमी पार्टी 79 सीटें जीत चुकी थी और 13 पर आगे थी। प्रदेश में इतनी सीटें कभी कांग्रेस और अकाली दल को भी नहीं मिलीं। 2017 के चुनाव में इसे 20 सीटें मिली थीं। आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री चेहरा भगवंत मान धूरी से जीत गए हैं।</p>
<p>कांग्रेस 59 सीटों के नुकसान के साथ 18 सीटों पर सिमटती दिख रही है। अकाली दल को 12 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है। उसके प्रत्याशी सिर्फ तीन सीटों पर जीत दर्ज कर सके। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल भी चुनाव हार गए हैं। भाजपा, कैप्टन अमरिंदर सिंह की पंजाब लोग कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल संयुक्त गठबंधन को सिर्फ दो सीटें मिली हैं।</p>
<p>मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी दोनों सीटों पर चुनाव हार चुके हैं। अमृतसर पूर्व से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और अकाली नेता विक्रम सिंह मजीठिया को आप की जीवनजोत कौर ने हरा दिया। चुनाव प्रचार के दौरान यही माना जा रहा था कि यहां मुख्य मुकाबला सिद्धू और मजीठिया के बीच है। बहुत से मतदाता तो यह तक नहीं जानते थे कि आप का प्रत्याशी कौन है।</p>
<p>चन्नी सरकार के कई मंत्री भी हार चुके हैं। वरिष्ठ अकाली नेता 92 साल के प्रकाश सिंह बादल ने पहली बार हार का स्वाद चखा है। उनके और कैप्टन अमरिंदर के लिए यह आखिरी चुनाव हो सकता है, जो पटियाला से हार चुके हैं। सोनू सूद की बहन मालविका सूद जो मोगा से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ रही थीं, वे भी हार गई हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_6229c1c96ebc4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में आप की आंधी, मुख्यमंत्री चन्नी, सिद्धू, बादल, कैप्टन अमरिंदर सब हारे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_6229c1c96ebc4.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश फिर भाजपा सरकार, 36 साल बाद कोई पार्टी लगातार दोबारा सत्ता में आएगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-in-position-to-form-government-again-in-up.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 10 Mar 2022 11:24:54 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-in-position-to-form-government-again-in-up.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>विधानसभा चुनाव के नतीजे भारतीय जनता पार्टी के लिए उत्साहजनक साबित हुए। दोपहर करीब चार बजे तक के रुझानों के मुताबिक उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी की सरकार दोबारा बनाने जा रही है। कांग्रेस के हाथ से एक और बड़ा राज्य पंजाब निकल गया है। यहां आम आदमी पार्टी कांग्रेस और अकाली दल जैसे स्थापित और पुरानी पार्टियों को पछाड़ती हुई पहली बार सत्ता सरकार बनाने की स्थिति में आ गई है। इस लिहाज से देखा जाए तो 7 मार्च को आए ज्यादातर एग्जिट पोल के नतीजे सही साबित हो रहे हैं।</p>
<p>चुनाव आयोग की तरफ से शाम 5 बजे तक दी गई जानकारी के अनुसार 403 विधानसभा वाले उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी 252 सीटों पर आगे चल रही थी या जीत चुकी थी। 2017 में उसे 312 सीटें मिली थीं, यानी उसे 60 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है। समाजवादी पार्टी गठबंधन 115 सीटों पर आगे चल रही थी। भाजपा सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) 12 और निषाद पार्टी सात सीटों पर आगे थीं। बहुजन समाज पार्टी एक, कांग्रेस दो, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक दो, राष्ट्रीय लोकदल सात और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी पांच सीटों पर आगे चल रहे थीं।</p>
<p>भाजपा का वोट प्रतिशत 41.80 फीसदी रहा है। बसपा को 12.68 फीसदी और कांग्रेस को सिर्फ 2.4 फीसदी वोट मिले हैं। सपा को 31.91 फीसदी और राष्ट्रीय लोक दल को 3.14 फीसदी वोट हासिल हुए।</p>
<p>प्रदेश में 36 साल के बाद पहली बार सत्तारूढ़ भाजपा दोबारा सरकार बनाएगी। उसकी सीटें तो 2017 के मुकाबले कम जरूर हुई हैं लेकिन इसके बावजूद वह आसानी से सरकार बनाने की स्थिति में है। विश्लेषकों का कहना है कि धार्मिक ध्रुवीकरण के साथ साथ मुफ्त राशन के मुद्दे ने भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में निर्णायक भूमिका निभाई है। पार्टी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त प्रशासक की छवि का भी नुकसान फायदा होता नजर आ रहा है।</p>
<p>महंगाई और बेरोजगारी आवारा पशु जैसे विपक्ष के मुद्दे प्रचार में ही सुनाई दिए, नतीजों पर उनका कोई बड़ा असर होता नहीं दिख रहा है। हालांकि इतना असर जरूर हुआ है कि समाजवादी पार्टी की सीटें लगभग 3 गुना हो गई है। भाजपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नुकसान ज्यादा हुआ है जिसका फायदा समाजवादी पार्टी के गठबंधन को मिला है।</p>
<p>प्रमुख उम्मीदवारों में यहां गोरखपुर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, करहल से समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, जसवंत नगर से शिवपाल यादव आगे चल रहे हैं। लेकिन सिराथू से उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पीछे हैं। फाजिलनगर में स्वामी प्रसाद मौर्य और तुमकुही राज से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू भी पीछे चल रहे हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर सपा में आए थे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_6229c1f28a829.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश फिर भाजपा सरकार, 36 साल बाद कोई पार्टी लगातार दोबारा सत्ता में आएगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_6229c1f28a829.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पांच राज्यों की 690 विधानसभा सीटों पर मतगणना, उत्तर प्रदेश के नतीजों पर सबकी नजर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/counting-going-on-in-1200-halls-for-690-assembly-seats-of-five-states.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 10 Mar 2022 08:07:02 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/counting-going-on-in-1200-halls-for-690-assembly-seats-of-five-states.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के मतदान पूरे होने के बाद अब नतीजों का दिन आ गया है। आज उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में मतों की गणना का काम सुबह 8 <span>बजे से चल रहा है। इन राज्यों में कुल 690 विधानसभा सीटें हैं। चुनाव आयोग ने मतगणना के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। इसके लिए </span>50,000 <span>से अधिक अधिकारी नियुक्त किए गए हैं जो करीब </span>1200 <span>काउंटिंग हॉल में मतों की गिनती करेंगे। सभी मतगणना केंद्रों पर वीडियो और स्टैटिक कैमरा लगाए गए हैं। चुनाव आयोग ने </span>8 <span>जनवरी को पांचों राज्यों में मतदान की तारीखों का ऐलान किया था और उसके बाद आचार संहिता लागू हो गई थी।</span></p>
<p>देश में सबसे अधिक 403 <span>विधानसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में </span>750 <span>काउंटिंग हॉल में मतगणना होगी। पंजाब में </span>200 <span>से ज्यादा काउंटिंग हॉल में मतों की गिनती का काम होगा। पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए </span>600 <span>से ज्यादा ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं। सबसे पहले पोस्टल बैलट की गिनती होगी उसके बाद ईवीएम में डाले गए वोटों को गिना जाएगा।</span></p>
<p>मंगलवार को उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर ईवीएम पाए जाने पर विपक्षी दलों ने काफी हंगामा किया। कुछ ईवीएम ट्रकों में मिले तो कुछ नगर निगम की कूड़ा ले जाने वाली गाड़ियों में पाए गए। हालांकि आयोग ने सफाई दी है कि ये ईवीएम प्रशिक्षण में इस्तेमाल किए गए थे, इसके बावजूद विपक्ष खासकर समाजवादी पार्टी ने आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं।</p>
<p>7 <span>मार्च को उत्तर प्रदेश में आखिरी चरण के मतदान के बाद हुए एग्जिट पोल में यहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार दोबारा बनने की संभावना जताई गई थी। पंजाब में आम आदमी पार्टी और मणिपुर में भाजपा की सरकार बनने के आसार एग्जिट पोल में दिखे। लेकिन गोवा और उत्तराखंड में त्रिशंकु विधानसभा बनती दिखी।</span></p>
<p>अगर उत्तर प्रदेश में भाजपा जीतती है तो करीब तीन दशक में पहली बार यहां कोई पार्टी दोबारा सत्ता में आएगी। 2017 <span>के विधानसभा चुनाव में भाजपा को </span>312 <span>और उसके सहयोगी दलों को </span>13 <span>सीटों पर जीत मिली थी। समाजवादी पार्टी को </span>47<span>, बहुजन समाज पार्टी को </span>19<span>, अपना दल (एस) को </span>9 <span>और कांग्रेस को </span>7 <span>सीटें मिली थीं। हालांकि इस बार के चुनाव में भाजपा और सपा दोनों के गठबंधन में बदलाव हुए हैं।</span></p>
<p>पंजाब में सभी मतगणना केंद्रों पर धारा 144 <span>लगा दी गई है। मतगणना के लिए करीब </span>7500 <span>अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल सीआरपीएफ कि </span>45 <span>कंपनियां सुरक्षा के लिहाज से तैनात की गई हैं। यहां मतगणना पूरी होने तक सरकार ने शराब की दुकानें बंद रखने का आदेश दिया है। जीतने वाला प्रत्याशी खुद या उसका प्रतिनिधि दो व्यक्तियों के साथ जाकर जीत का सर्टिफिकेट ले सकता है। </span></p>
<p>उत्तराखंड में भी 70 <span>विधानसभा सीटों के लिए सुबह </span>8 <span>बजे मतगणना शुरू हुई है। ज्यादातर एग्जिट पोल में त्रिशंकु विधानसभा की भविष्यवाणी की गई है। यहां </span>70 <span>में से करीब </span>4<span>2 सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। बाकी सीटों पर लड़ाई त्रिकोणीय है। मतगणना से पहले मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय देहरादून पहुंच गए थे। उन्हें राजनीतिक जोड़-तोड़ में माहिर माना जाता है। </span>2016 <span>में कांग्रेस की हरीश रावत सरकार के खिलाफ विद्रोह के समय उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी। यहां कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भेजा है।</span></p>
<p>40 <span>विधानसभा सीटों वाले गोवा में भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के प्रयास में है। हालांकि अधिकतर एग्जिट पोल में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं दिखाया गया है। यहां कुल </span>302 <span>प्रत्याशी मैदान में हैं। यहां दो जगहों पर मतों की गिनती होगी। मार्मगोआ के दामोदर कॉलेज में और पणजी के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ पॉलिटेक्निक में। यहां मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है। इनके अलावा गोवा फॉरवर्ड पार्टी, महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी, आम आदमी पार्टी तृणमूल कांग्रेस और कुछ निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में हैं। </span>2017 <span>के चुनावों में यहां कांग्रेस को </span>17 <span>सीटें मिली थी लेकिन सरकार बनाई थी </span>13 <span>सीटें पाने वाली भाजपा ने।</span></p>
<p>60 <span>सीटों वाले मणिपुर में मतगणना </span>41 <span>काउंटिंग हॉल में चल रही है। मतगणना से पहले ही विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेता जम चुके थे। कांग्रेस की तरफ से पार्टी महासचिव मुकुल वासनिक और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव समेत कई वरिष्ठ नेता हैं तो भाजपा की तरफ से पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा तैनात किए गए हैं। यहां भी </span>2017 <span>के चुनाव में कांग्रेस </span>28 <span>सीटें जीतने के बावजूद सरकार नहीं बना पाई थी। तब राज्यपाल ने सिर्फ </span>21 <span>सीटें जीतने वाली भाजपा को सरकार बनाने का ऑफर दिया था। नेशनल पीपुल्स पार्टी और जनता दल यूनाइटेड ने सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का दावा किया है। दोनों भाजपा की सहयोगी पार्टियां हैं, नेशनल पीपुल्स पार्टी राज्य में भाजपा के साथ सरकार में है, लेकिन दोनों दलों ने चुनाव अलग-अलग लड़ा है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_622964449722d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पांच राज्यों की 690 विधानसभा सीटों पर मतगणना, उत्तर प्रदेश के नतीजों पर सबकी नजर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_622964449722d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एक्जिट पोल: यूपी में भाजपा की वापसी संभव, जानिए बाकी चार राज्यों में किसकी बन सकती है सरकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/exit-poll-says-bjp-might-come-back-in-up-uttarakhand-and-manipur.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 07 Mar 2022 20:04:39 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/exit-poll-says-bjp-might-come-back-in-up-uttarakhand-and-manipur.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव के सभी चरण सोमवार को पूरे हो गए। इन सभी राज्यों में एक्जिट पोल के नतीजे भी आ गए हैं। अगर इन नतीजों को सही माना जाए तो उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने वाली है, हालांकि उसकी सीटें कम हो जाएंगी। दिल्ली से बाहर पहली बार आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब में बनने की संभावना दिख रही है। उत्तराखंड में एक्जिट पोल के नतीजे मिश्रित लग रहे हैं। गोवा में त्रिशंकु विधानसभा के आसार लग रहे हैं तो मणिपुर में एक बार फिर भाजपा की सरकार बनती नजर आ रही है।</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश में भाजपा गठबंधन को 210 से 275 सीटें</strong></p>
<p>आज तक, एबीपी न्यूज, सीएनएन न्यूज 18, रिपब्लिक टीवी और न्यूज एक्स चैनलों पर जो एक्जिट पोल के नतीजे दिखाए गए उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश में भाजपा गठबंधन को 210 से 275 सीटें मिलेंगी। प्रदेश में कुल 403 सीटें हैं और सामान्य बहुमत के लिए 202 सीटें चाहिए। इस एक्जिट पोल के अनुसार भाजपा की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी के गठबंधन को 119 से 160 सीटें मिलेंगी। हालांकि सपा के सहयोगी ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि 10 मार्च को नतीजे के दिन ये आंकड़े गलत साबित होंगे और राज्य में सपा गठबंधन की ही सरकार बनेगी।</p>
<p><strong>पंजाब में आप को 56 से 90 सीटों तक का अनुमान</strong></p>
<p>पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं और यहां बहुमत के लिए 59 सीटें चाहिए। ज्यादातर एक्जिट पोल के नतीजे बता रहे हैं कि वहां अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को सरकार बनाने लायक सीटें मिल जाएंगी। आप को इंडिया टुडे एक्सिस के पोल में 76 से 90 सीटें, सी वोटर के सर्वे में 51 से 61 सीटें और न्यूज 18 टार्गेट के पोल में 66 सीटें मिलने की संभावना बताई गई है। टीवी9 भारतवर्ष और पोलस्ट्रैट के सर्वे में आप को पंजाब में 56 से 61 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।</p>
<p>पंजाब के सभी एक्जिट पोल में सत्तारूढ़ कांग्रेस को दूसरे नंबर पर दिखाया गया है। भाजपा, कैप्टन अमरिंदर की पंजाब लोक कांग्रेस और शिअद (संयुक्त) गठबंधन को अलग अलग सर्वे में एक से 13 सीटें मिलती दिखाई गई हैं। सी वोटर ने सात से 13 सीटों की संभावना जताई है। इसके मुताबिक कांग्रेस को 22 से 28 और अकाली और बसपा गठबंधन को 20 से 26 सीटें मिल सकती हैं। इंडिया टुडे एक्सिस के सर्वे में कांग्रेस को 19 से 31 सीटें मिलती दिखाई गई हैं। न्यूज एक्स के अनुसार कांग्रेस को 24 से 29 सीटें मिलेंगी।</p>
<p><strong>उत्तराखंड में भाजपा की वापसी के आसार</strong></p>
<p>70 विधानसभा सीटों वाले उत्तराखंड में एक्जिट पोल के विभिन्न एजेंसियों के नतीजे अलग अलग हैं। टुडेज चाणक्य ने भाजपा को 43, कांग्रेस को 24 और अन्य को तीन सीटें मिलने की संभावना जताई है। लेकिन सी वोटर के अनुसार भाजपा को 26 से 32 और कांग्रेस को 32 से 38 सीटें मिलने की संभावना है। इसके मुताबिक आम आदमी पार्टी समेत अन्य को तीन से नौ सीटों पर संतोष करना पड़ेगा।</p>
<p><strong>गोवा में किसी का आंकड़ा बहुमत के पार नहीं</strong></p>
<p>गोवा विधानसभा में 40 सीटें हैं और बहुमत के लिए 21 सीटें चाहिए। लेकिन किसी भी एक्जिट पोल में किसी भी पार्टी को इतनी सीटें मिलती नहीं दिखाई दे रही हैं। ग्राउंड जीरो ने जरूर कांग्रेस को 20 से 25 सीटें मिलने की संभावना जताई है। इसके मुताबिक सत्तारूढ़ भाजपा को 10 से 14 सीटों पर संतोष करना पड़ेगा। हालांकि बाकी सर्वे में भाजपा को कांग्रेस से ज्यादा सीटें मिलने की उम्मीद जताई गई है, लेकिन किसी में भी वह बहुमत का आंकड़ा पार करती नहीं दिख रही है। टाइम्स नाउ ने कांग्रेस को 16, भाजपा को 14, आप को चार और अन्य को छह सीटें मिलने की उम्मीद जताई है।</p>
<p><strong>मणिपुर में भाजपा फिर बना सकती है गठबंधन सरकार</strong></p>
<p>मणिपुर में सत्तारूढ़ भाजपा की सरकार दोबारा बन सकती है। न्यूज 18 ने यहां भाजपा गठबंधन को 27 से 31 तथा कांग्रेस गठबंधन को 11 से 17 सीटें मिलने की संभावना जताई है। जी न्यूज के अनुसार भाजपा को 32 से 38 और कांग्रेस को 12 से 17 सीटें मिलेंगी। इंडिया न्यूज के मुताबिक भाजपा गठबंधन को 23 से 28 और कांग्रेस गठबंधन को 10 से 14 सीटें मिलेंगी। मणिपुर विधानसभा में 60 सीटें हैं और बहुमत के लिए 31 सीटें चाहिए। यहां भाजपा ने 2017 में एनपीपी और एनपीएफ के साथ गठबंधन में सरकार बनाई थी, लेकिन इस बार भी चुनाव तीनों ने अलग-अलग लड़ा है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61efa709da79c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एक्जिट पोल: यूपी में भाजपा की वापसी संभव, जानिए बाकी चार राज्यों में किसकी बन सकती है सरकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61efa709da79c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में नौ जिलों की 54 सीटों पर मतदान पूरा, आखिरी चरण में शाम 5 बजे तक 54.2 फीसदी वोटिंग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/54-percent-voting-in-54-assembly-seats-in-uttar-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 07 Mar 2022 17:59:43 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/54-percent-voting-in-54-assembly-seats-in-uttar-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="margin: 0in 0in 10.0pt 0in;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सातवें और आखिरी चरण की वोटिंग आज खत्म हो गई। चुनाव आयोग के अनुसार शाम 5 बजे तक 54.2 फीसदी वोटिंग हुई। इस चरण में </span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">9 <span lang="HI">जिलों की </span>54 <span lang="HI">सीटों पर मतदान हुआ। ये जिले हैं आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर, भदोही और सोनभद्र। सोनभद्र जिले की रॉबर्ट्सगंज और दुद्धी सीटों तथा चन्दौली की चकिया सीट पर सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक मतदान हुआ। बाकी 51 सीटों पर शाम छह बजे तक मतदान हुआ। इन 54 सीटों पर कुल 613 प्रत्याशी मैदान में हैं जिनमें 75 महिलाएं हैं।</span><o:p></o:p></span></p>
<p style="margin: 0in 0in 10.0pt 0in;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">इस चरण के प्रमुख प्रत्याशियों में ओमप्रकाश राजभर और दारा सिंह चौहान शामिल हैं। राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी पिछली बार भारतीय जनता पार्टी के साथ थी, इस बार उन्होंने अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया है। दारा सिंह चौहान चुनाव की घोषणा होने से पहले भारतीय जनता पार्टी छोड़कर अखिलेश के साथ आ गए थे। चौहान घोसी से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला भाजपा के विजय कुमार राजभर और बसपा के वसीम इकबाल से है। मऊ सीट पर मौजूदा विधायक मुख्तार अंसारी, जो अभी जेल में हैं, उनके बेटे अब्बास अंसारी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला भाजपा के अशोक सिंह और बहुजन समाज पार्टी के भीम से है। मुख्तार अंसारी </span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">1996 <span lang="HI">से इस सीट पर लगातार विधायक रहे हैं।</span></span></p>
<p style="margin: 0in 0in 10.0pt 0in;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">2017 <span lang="HI">के विधानसभा चुनाव में इन </span>54 <span lang="HI">सीटों में से भारतीय जनता पार्टी को </span>29<span lang="HI">, समाजवादी पार्टी को </span>11<span lang="HI">, बहुजन समाज पार्टी को </span>6<span lang="HI">, कांग्रेस को </span>4 <span lang="HI">और बाकी चार सीटें अन्य को मिली थीं। हालांकि उससे पहले </span>2012 <span lang="HI">में स्थिति बिल्कुल इसके विपरीत थी। तब </span>34 <span lang="HI">सीटें समाजवादी पार्टी को, </span>7 <span lang="HI">सीटें बहुजन समाज पार्टी को, चार भारतीय जनता पार्टी को, </span>3 <span lang="HI">कांग्रेस को और </span>6 <span lang="HI">सीटें अन्य को मिली थीं।</span></span></p>
<p style="margin: 0in 0in 10.0pt 0in;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">वोट प्रतिशत देखें तो </span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">2012 <span lang="HI">में भाजपा को </span>10.74 <span lang="HI">फ़ीसदी और </span>2017 <span lang="HI">में </span>31.26 <span lang="HI">फ़ीसदी वोट मिले थे। बहुजन समाज पार्टी को </span>27.38 <span lang="HI">और </span>25.85 <span lang="HI">फ़ीसदी वोट मिले थे। समाजवादी पार्टी को </span>32.38 <span lang="HI">तथा </span>23.13 <span lang="HI">फ़ीसदी वोट मिले। कांग्रेस का वोट प्रतिशत गिर गया था। उसे </span>2012 <span lang="HI">में </span>8.3 <span lang="HI">फ़ीसदी और </span>2017 <span lang="HI">में </span>5.02 <span lang="HI">फ़ीसदी वोट मिले थे।</span></span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_6225faaf8db36.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में नौ जिलों की 54 सीटों पर मतदान पूरा, आखिरी चरण में शाम 5 बजे तक 54.2 फीसदी वोटिंग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_6225faaf8db36.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में नौ जिलों की 54 सीटों पर मतदान, ओपी राजभर और दारा सिंह चौहान की भी किस्मत होगी तय]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/voting-on-54-assembly-seats-in-uttar-pradesh-is-on.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 07 Mar 2022 10:41:50 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/voting-on-54-assembly-seats-in-uttar-pradesh-is-on.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सातवें और आखिरी चरण की वोटिंग आज सुबह से जारी है। इस चरण में 9 <span>जिलों की </span>54 <span>सीटों पर मतदान हो रहा है। ये जिले हैं आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर, भदोही और सोनभद्र। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है तो आजमगढ़ समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। वाराणसी दक्षिणी से भाजपा के डॉक्टर नीलकंठ तिवारी का मुकाबला समाजवादी पार्टी के कामेश्वर दीक्षित से है। तिवारी योगी आदित्यनाथ सरकार में पर्यटन मंत्री हैं।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x_622593c4b14eb.jpg" alt="" /></p>
<p><em><strong>जौनपुर में सुबह से ही मतदाताओं की भीड़</strong></em></p>
<p>प्रमुख प्रत्याशियों में ओमप्रकाश राजभर और दारा सिंह चौहान शामिल हैं। राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी पिछली बार भारतीय जनता पार्टी के साथ थी, इस बार उन्होंने अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया है। दारा सिंह चौहान चुनाव की घोषणा होने से पहले भारतीय जनता पार्टी छोड़कर अखिलेश के साथ आ गए थे। चौहान घोसी से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला भाजपा के विजय कुमार राजभर और बसपा के वसीम इकबाल से है। मऊ सीट पर मौजूदा विधायक मुख्तार अंसारी, जो अभी जेल में हैं, उनके बेटे अब्बास अंसारी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला भाजपा के अशोक सिंह और बहुजन समाज पार्टी के भीम से है। मुख्तार अंसारी 1996 <span>से इस सीट पर लगातार विधायक रहे हैं।</span></p>
<p>2017 <span>के विधानसभा चुनाव में इन </span>54 <span>सीटों में से भारतीय जनता पार्टी को </span>29<span>, समाजवादी पार्टी को </span>11<span>, बहुजन समाज पार्टी को </span>6<span>, कांग्रेस को </span>4 <span>और बाकी चार सीटें अन्य को मिली थीं। हालांकि उससे पहले </span>2012 <span>में स्थिति बिल्कुल इसके विपरीत थी। तब </span>34 <span>सीटें समाजवादी पार्टी को, </span>7 <span>सीटें बहुजन समाज पार्टी को, चार भारतीय जनता पार्टी को, </span>3 <span>कांग्रेस को और </span>6 <span>सीटें अन्य को मिली थीं।</span></p>
<p>वोट प्रतिशत देखें तो 2012 <span>में भाजपा को </span>10.74 <span>फ़ीसदी और </span>2017 <span>में </span>31.26 <span>फ़ीसदी वोट मिले थे। बहुजन समाज पार्टी को </span>27.38 <span>और </span>25.85 <span>फ़ीसदी वोट मिले थे। समाजवादी पार्टी को </span>32.38 <span>तथा </span>23.13 <span>फ़ीसदी वोट मिले। कांग्रेस का वोट प्रतिशत गिर गया था। उसे </span>2012 <span>में </span>8.3 <span>फ़ीसदी और </span>2017 <span>में </span>5.02 <span>फ़ीसदी वोट मिले।</span></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_622593ca873b1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में नौ जिलों की 54 सीटों पर मतदान, ओपी राजभर और दारा सिंह चौहान की भी किस्मत होगी तय ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_622593ca873b1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[2024 के लोकसभा चुनाव से पहले मोदी के लिए यूपी में जीत जरूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/up-win-crucial-for-modi-ahead-of-2024-lok-sabha-polls.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 04 Mar 2022 15:33:25 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/up-win-crucial-for-modi-ahead-of-2024-lok-sabha-polls.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव अब आखिरी चरण में पहुंच चुका है। प्रदेश में 7 <span>मार्च को बाकी बची </span>54 <span>सीटों पर मतदान होना है। हालांकि इससे पहले ही चुनाव विश्लेषक नतीजों का विश्लेषण करने लगे हैं। गुरुवार </span>3 <span>मार्च को छठे चरण में </span>10 <span>जिलों की </span>57 <span>विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ। इनमें गोरखपुर जिला भी शामिल है जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ माना जाता है। सोमवार यानी </span>7 <span>मार्च को जिन </span>9 <span>जिलों की </span>54 <span>सीटों पर मतदान होना है उनमें वाराणसी भी है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय चुनाव क्षेत्र है। आखिरी चरण के मतदान के बाद बाकी चार राज्यों के साथ उत्तर प्रदेश में भी मतगणना </span>10 <span>मार्च को होगी और उसी दिन दोपहर तक तस्वीर साफ हो जाएगी।</span></p>
<p>भारतीय जनता पार्टी आसान जीत की उम्मीद कर रही थी लेकिन जिस तरह से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कई छोटे दलों के साथ गठबंधन करके प्रचार अभियान चलाया उससे भाजपा की राह मुश्किल नजर आ रही है। समाजवादी पार्टी की रैलियों में न सिर्फ भारी भीड़ उमड़ी बल्कि अखिलेश ने मोदी और योगी समेत भाजपा के शीर्ष नेताओं को लगातार अपने निशाने पर रखा। सोशल मीडिया पर भी यह लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करने में सफल रही।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x_6221e3c879295.jpg" alt="" /></p>
<p><em><strong>गाजीपुर में एक सभा को संबोधित करते अखिलेश यादव</strong></em></p>
<p>मीडिया और सोशल मीडिया में समाजवादी पार्टी के चुनाव प्रबंधन की प्रशंसा हो रही है। हालांकि यह भी एक तथ्य है कि अखिलेश को छोड़ दें तो पार्टी के पास बड़े नेताओं का अभाव चुनाव प्रचार के दौरान दिखा। पार्टी के पुराने नेताओं जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री और अखिलेश के पिता मुलायम सिंह यादव भी शामिल हैं, <span>का पार्टी के रोजमर्रा के कार्यों में अब कोई दखल नहीं रह गया है।</span></p>
<p>भाजपा नेता आम सभाओं में तथा मीडिया के साथ बातचीत के दौरान बार-बार यह दावा कर रहे हैं कि पार्टी को इस बार भी 403 <span>में से </span>300 <span>से अधिक सीटें मिलेंगी और गठबंधन के बाकी दलों के साथ मिलकर पिछली बार की तरह </span>325 <span>के आसपास सीटें जीतेगी। हालांकि प्रदेश में जब चुनाव अभियान शुरू हुआ तब से तुलना की जाए तो केसरिया पार्टी की राह अब ज्यादा मुश्किल लगने लगी है। हर चरण के बाद यह धारणा मजबूत होती लग रही है कि समाजवादी पार्टी अगली सरकार बना सकती है।</span></p>
<p>योगी तो पूरा प्रयास कर ही रहे हैं कि भाजपा की सरकार दोबारा बने, <span>प्रधानमंत्री मोदी भी नतीजों को लेकर इसलिए चिंतित होंगे कि </span>2024 <span>के लोकसभा चुनाव में बस </span>2 <span>साल रह गए हैं। भारत का राजनीतिक इतिहास देखें तो पाएंगे कि उत्तर प्रदेश में जिस पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया है केंद्र में या तो उसकी सरकार बनी है या उसने किंग मेकर की भूमिका निभाई है।</span></p>
<p>2014 <span>के लोकसभा चुनाव में विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से देखें तो भाजपा को प्रदेश में </span>282 <span>सीटों पर बढ़त मिली थी। तब भाजपा को एक चौथाई यानी </span>71 <span>सीटें उत्तर प्रदेश से ही मिल गई थीं</span>, <span>जिसका नतीजा यह हुआ की पार्टी मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनाने में कामयाब हुई। </span>2019 <span>के लोकसभा चुनावों में भी पार्टी को </span>300 <span>विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त मिली</span>, <span>हालांकि संसदीय सीटों की संख्या घटकर </span>62 <span>रह गई। इसके बावजूद भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में कामयाब रही। इसलिए इस विधानसभा चुनाव में अगर नतीजे भाजपा के खिलाफ आते हैं या सीटों की संख्या में भी बड़ी गिरावट आती है तो पार्टी और मोदी के लिए </span>2024 <span>के लोकसभा चुनाव की लड़ाई भी मुश्किल हो जाएगी।</span></p>
<p>इस बीच तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को वाराणसी में अखिलेश यादव के साथ चुनाव प्रचार किया। यह भी इस सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगता है कि 2024 <span>के चुनावों में वे मोदी को टक्कर देंगी। चुनावी सभा में उन्होंने दावा किया कि भाजपा खुद इस बात का संकेत देने लगी है कि वह उत्तर प्रदेश से जा रही है और प्रदेश में अगली सरकार समाजवादी पार्टी की बनने वाली है।</span></p>
<p>इन हालात में इसमें आश्चर्य नहीं कि भाजपा उत्तर प्रदेश के चुनावों को 2024 <span>के लेंस से देख रही है। अब यह तस्वीर </span>10 <span>मार्च को ही साफ होगी जब पता चलेगा कि मोदी-योगी की बहु प्रचारित जोड़ी कामयाब होती है या अखिलेश यादव अकेले दम पर सबको परास्त करते हैं।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2020/12/image_750x500_5fd8e62d26e82.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले मोदी के लिए यूपी में जीत जरूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2020/12/image_750x500_5fd8e62d26e82.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी चुनावः छठे चरण में शाम 5 बजे तक 53.31 फीसदी वोटिंग, 403 में से 349 सीटों पर मतदान पूरा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/with-53-percent-voting-in-6th-phase-polling-on-349-seats-over.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 03 Mar 2022 18:21:31 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/with-53-percent-voting-in-6th-phase-polling-on-349-seats-over.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के छठे चरण में गुरुवार को शाम 5 बजे तक 53.31 फीसदी वोटिंग हुई। इस चरण में 10 <span>जिलों की </span>57 <span>सीटों पर मतदान हुआ। ये सभी सीटें प्रदेश के उत्तर पूर्वी इलाके में हैं। इन सीटों पर कुल </span>676 <span>उम्मीदवार मैदान में हैं जिनमें </span>65 <span>महिलाएं हैं। कुल वोटरों की संख्या </span>2.14 <span>करोड़ है। इसके साथ ही प्रदेश की 403 सीटों में से 349 पर चुनाव हो चुके हैं। अब सातवें चरण में 7 मार्च को 54 सीटों पर मतदान होंगे।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x_6220b9a63409c.jpg" alt="" /></p>
<p>इस चरण की चर्चित सीटों में सबसे महत्वपूर्ण गोरखपुर शहरी है जहां से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी की सुभावती शुक्ला से है जो भाजपा के ही दिवंगत नेता उपेंद्र शुक्ला की पत्नी हैं। योगी आदित्यनाथ पांच बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं लेकिन इससे पहले उन्होंने विधानसभा चुनाव कभी नहीं लड़ा। एक और महत्वपूर्ण सीट फाजिलनगर है जहां से 5 <span>बार के विधायक और योगी सरकार में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव के ऐलान से पहले वे भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में आ गए थे। उनके सामने भाजपा के सुरेंद्र कुमार कुशवाहा हैं।</span></p>
<p>अन्य महत्वपूर्ण सीट हैं चिल्लूपार जहां से समाजवादी पार्टी के विनय शंकर तिवारी और भाजपा के राजेश त्रिपाठी और इटवा, जहां से छह बार के विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडे चुनाव लड़ रहे हैं, शामिल हैं। पांडे समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं और उनका मुकाबला भाजपा के सतीश चंद्र द्विवेदी से है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x_6220b9ad3512a.jpg" alt="" /></p>
<p>खास बात यह है कि आखिरी 2 <span>चरणों का मतदान समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दोनों के सहयोगी दलों के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन दोनों प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों ने जिन दलों के साथ समझौता किया है उनका आधार इन इलाकों में ही ज्यादा है।</span></p>
<p>2017 <span>के विधानसभा चुनाव में इन </span>57 <span>सीटों में से भाजपा को </span>46<span>, समाजवादी पार्टी को दो, बहुजन समाज पार्टी को </span>5 <span>सीटें मिली थीं। कांग्रेस को सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ा था। हालांकि उससे पहले </span>2012 <span>के चुनाव में यह इलाका समाजवादी पार्टी का था। तब </span>57 <span>में से </span>32 <span>सीटें सपा ने जीती थीं। बसपा को 9, भाजपा को </span>8 <span>तथा कांग्रेस को </span>3 <span>सीटें मिली थीं। वोट प्रतिशत देखा जाए तो </span>2012 <span>और </span>2017 <span>में भाजपा को क्रमशः </span>15.87 <span>और </span>37.77<span> फीसदी</span>, <span>सपा को </span>29.67 <span>और </span>20.31<span> फीसदी</span>, <span>बसपा को </span>23.88 <span>और </span>22.99 <span>फीसदी तथा कांग्रेस को </span>10.27 <span>और </span>5.84 <span>फ़ीसदी वोट मिले थे।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_6220b99b2d42b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी चुनावः छठे चरण में शाम 5 बजे तक 53.31 फीसदी वोटिंग, 403 में से 349 सीटों पर मतदान पूरा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_6220b99b2d42b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में पांचवें चरण में 12 जिलों की 61 सीटों पर शाम पांच बजे तक 54 फीसदी मतदान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/54-percent-voting-in-5th-phase-of-up-assembly-election.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 27 Feb 2022 19:25:45 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/54-percent-voting-in-5th-phase-of-up-assembly-election.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण में रविवार को 12 जिलों की 61 <span>सीटों पर शाम पांच बजे तक 53.93 फीसदी मतदान हुआ। ये सीटें उत्तर में तराई से लेकर दक्षिण में बुंदेलखंड और अवध क्षेत्र में हैं। यहां कुल </span>693 <span>उम्मीदवार हैं जिनमें </span>90 <span>महिलाएं हैं। मतदाताओं की संख्या </span>2.2 <span>करोड़ है। </span>61 <span>सीटों में से </span>13 <span>अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित हैं। पांचवें चरण में के प्रमुख उम्मीदवारों में सिराथु से उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य, इलाहाबाद पश्चिम से सिद्धार्थ नाथ सिंह और कुंडा से राजा भैया शामिल हैं। इस चरण में प्रदेश के सात मंत्री चुनाव लड़ रहे हैं।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_621b82d86c048.jpg" alt="" /></p>
<p>2012 <span>के विधानसभा चुनाव में </span>61 <span>में से </span>41 <span>सीटें समाजवादी पार्टी को और </span>5 <span>सीटें भारतीय जनता पार्टी को मिली थीं। बहुजन समाज पार्टी को 7 और कांग्रेस को </span>6 <span>सीटों पर जीत मिली थी। वोट शेयर देखें तो समाजवादी पार्टी को </span>30.8<span> फीसदी, बहुजन समाज पार्टी को </span>24.8<span> फीसदी, भाजपा को </span>13.1<span> फीसदी और कांग्रेस को </span>12.8<span> फीसदी वोट मिले थे।</span></p>
<p>सीटों की संख्या 2017 <span>में बिल्कुल उलट गई। </span>61 <span>सीटों में से भाजपा को </span>47 <span>तो समाजवादी पार्टी को सिर्फ </span>5 <span>सीटें मिली थीं। बहुजन समाज पार्टी तीन और कांग्रेस एक सीट पर सिमट कर रह गई। वोट प्रतिशत की बात करें तो भाजपा को </span>37.3 <span>फ़ीसदी, सपा को </span>21.7 <span>फीसदी, बसपा को भी </span>21.7 <span>फ़ीसदी वोट मिले थे। कांग्रेस को सिर्फ </span>6.4 <span>फीसदी मतदाताओं ने वोट दिए।</span></p>
<p>2019 <span>के लोकसभा चुनाव में भी विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से देखें तो सीटों की संख्या </span>2017 <span>के आसपास ही थी। भाजपा </span>45 <span>विधानसभा क्षेत्रों में आगे थी। सपा </span>4<span>, बसपा</span> 7 <span>और कांग्रेस सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र में आगे थी। उस चुनाव में भाजपा और सपा दोनों का वोट प्रतिशत बढ़ा। भाजपा को </span>49.9 <span>फ़ीसदी और सपा को </span>22.5 <span>फ़ीसदी वोट पड़े। बहुजन समाज पार्टी का वोट प्रतिशत घटकर </span>13.1 <span>रह गया। कांग्रेस का वोट प्रतिशत भी थोड़ा बढ़कर </span>8.1 <span>हो गया।</span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_621b82c26f746.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में पांचवें चरण में 12 जिलों की 61 सीटों पर शाम पांच बजे तक 54 फीसदी मतदान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_621b82c26f746.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चिदंबरम का आरोप, योगी ने उत्तर प्रदेश को कर्ज के जाल में फंसाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/chidambaram-accuses-yogi-of-sinking-up-into-debt-trap.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 27 Feb 2022 19:18:46 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/chidambaram-accuses-yogi-of-sinking-up-into-debt-trap.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर प्रदेश को कर्ज के जाल में फंसाने का आरोप लगाया है। रविवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में मीडिया के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि 2016-17 <span>में प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की वृद्धि दर </span>11.4 <span>फ़ीसदी थी जो </span>2020-21 <span>में घटकर शून्य से </span>6.4 <span>फ़ीसदी नीचे आ गई।</span></p>
<p>चिदंबरम के अनुसार राज्य पर कर्ज का बोझ 6.62 <span>लाख करोड़ रुपए का हो गया है। यह जीएसडीपी का </span>34.4 <span>फ़ीसदी है। इस कर्ज में से </span>40 <span>फ़ीसदी योगी सरकार के दौरान जमा हुआ है। मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को आर्थिक मामलों की कोई समझ नहीं है।</span></p>
<p>उन्होंने कहा, जहां तक मुझे लगता है योगी जी को इकोनॉमिक्स की बिल्कुल समझ नहीं है। उनकी सरकार जीएसडीपी का आधार बढ़ाने के कदम उठाए बिना कर्ज पर कर्ज ले रही है। यही कारण है कि सरकार पर कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि देश का सबसे अधिक आबादी वाला और देश को आठ प्रधानमंत्री देने वाला राज्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश सभी सामाजिक आर्थिक पैमाने पर पिछड़ा हुआ है, चाहे वह स्वास्थ्य की बात हो, नौकरी की या शिक्षा की।</p>
<p>उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय देश के औसत के आधे से भी कम है और योगी शासन के दौरान इसमें 1.9 <span>फ़ीसदी की कमी आई है। चिदंबरम ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की </span>38 <span>फ़ीसदी आबादी गरीब है। प्रदेश के </span>12 <span>जिले ऐसे हैं जहां आधी आबादी भीषण गरीबी में है। तीन जिले तो ऐसे हैं जहां की </span>70 <span>फ़ीसदी आबादी बेहद गरीब है। </span></p>
<p>उन्होंने कहा कि राज्य में बेरोजगारी दर देश के औसत का लगभग दोगुना है, जिसका असर यहां के युवाओं पर हो रहा है। उन्हें नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। पूर्व वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में बड़े पैमाने पर पद खाली हैं, लेकिन आर्थिक संसाधन ना होने के चलते पद नहीं भरे जा रहे हैं। चिदंबरम ने भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में प्रदेश की तथाकथित दुर्दशा से निकलने के लिए लोगों से कांग्रेस को वोट देने की अपील की।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_621b88669c12d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चिदंबरम का आरोप, योगी ने उत्तर प्रदेश को कर्ज के जाल में फंसाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_621b88669c12d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में चुनाव दर चुनाव घट रहे हैं प्रत्याशी, ईवीएम की जरूरत भी कम हुई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/candidate-numbers-falling-in-successive-up-elections.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 24 Feb 2022 19:47:54 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/candidate-numbers-falling-in-successive-up-elections.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का आधा से ज्यादा बीत चुका है। यहां कुल सात चरणों में मतदान होने हैं और चार चरण पूरे हो चुके हैं। हाल के चुनावों में एक अलग तरह का ट्रेंड देखने को मिला है। चुनाव दर चुनाव प्रत्याशियों की संख्या लगातार घट रही है।</p>
<p>चाहे उम्मीदवार किसी राजनीतिक दल के हों या निर्दलीय। प्रदेश में 2012 <span>में जो विधानसभा चुनाव हुए थे उनमें कुल </span>6839 <span>उम्मीदवार मैदान में थे। </span>2017 <span>के चुनाव में प्रत्याशियों की संख्या घटकर </span>4853 <span>रह गई। और अब </span>2022 <span>के चुनाव में </span>403 <span>विधानसभा सीटों के लिए कुल </span>4441 <span>उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यानी अगर </span>2012 <span>और </span>2022 <span>की तुलना की जाए तो </span>10 <span>वर्षों में ही उम्मीदवारों की संख्या करीब </span>35 <span>फीसदी घट गई है।</span></p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव पूर्व गठबंधन इसका एक प्रमुख कारण है। बड़ी राजनीतिक पार्टियां छोटे दलों के साथ गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ रही हैं ताकि वोटों का बंटवारा रोका जा सके। मौजूदा चुनाव में भी यह देखा जा सकता है। एक तरफ सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने अपना दल समेत कई छोटे दलों के साथ गठबंधन किया है, <span>तो दूसरी तरफ प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने भी </span>9 <span>छोटे दलों के साथ हाथ मिलाया है।</span></p>
<p>पहले विरोधी पार्टी का वोट बांटने के लिए पार्टियां एक और चाल चलती थीं। वे विरोधी उम्मीदवार के मिलते जुलते नाम या उसी जाति के उम्मीदवार खड़े कर देती थीं। इससे एक तो वोट बंटते थे और दूसरे, <span>मतदाताओं में भ्रम की स्थिति भी पैदा हो जाती थी। लेकिन यह डमी उम्मीदवार खड़ा करने का ट्रेंड भी कम हुआ है। वर्ष </span>2002 <span>में प्रदेश में जो चुनाव हुए थे उनमें </span>5533 <span>प्रत्याशी मैदान में थे। </span>2007 <span>में प्रत्याशियों की कुल संख्या </span>6086 <span>थी।</span></p>
<p>प्रत्याशियों की संख्या कम होने से चुनाव आयोग को भी आसानी हुई है। पहले उसे अधिक उम्मीदवार होने के चलते अनेक सीटों के मतदान केंद्रों पर एक से अधिक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) रखनी पड़ती थी। लेकिन 2022 <span>के चुनाव में सिर्फ चार विधानसभा क्षेत्रों में एक से अधिक ईवीएम रखने की जरूरत पड़ी है। किसी एक ईवीएम में अधिकतम </span>16 <span>उम्मीदवारों के नाम आ सकते हैं। </span>2012 <span>में एक से अधिक ईवीएम की जरूरत वाली </span>227 <span>और </span>2017 <span>में </span>37 <span>सीटें थीं।</span></p>
<p>इस बार मैनपुरी जिले की करहल सीट पर सबसे कम उम्मीदवार हैं। यहां सिर्फ तीन लोग ही चुनाव लड़ रहे हैं। एक तो भारतीय जनता पार्टी की तरफ से केंद्रीय मंत्री और सांसद एसपी सिंह बघेल हैं। दूसरे, <span>समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं। करहल में मुकाबला इन्हीं दोनों के बीच माना जा रहा है।</span></p>
<p>चुनाव आयोग के अनुसार प्रदेश की 403 <span>विधानसभा सीटों के लिए </span>15 <span>करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड मतदाता हैं। हालांकि अब तक के चार चरणों में </span>2017 <span>की तुलना में वोटिंग प्रतिशत कम ही देखने को मिला है। यहां बाकी तीन चरण के मतदान </span>27 <span>फरवरी और </span>3 <span>तथा </span>7 <span>मार्च को होने हैं। मतों की गिनती </span>10 <span>मार्च को होगी।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_621793868bbf6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में चुनाव दर चुनाव घट रहे हैं प्रत्याशी, ईवीएम की जरूरत भी कम हुई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_621793868bbf6.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मोदी के बाद योगी भी बोले&amp;#45; आवारा पशुओं से खेत बचाएंगे, प्रियंका बोलीं खुशी है कि पीएम ने कांग्रेस की नीति मानी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/after-modi-yogi-also-says-to-save-farm-fields-from-stray-animals.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 23 Feb 2022 19:54:31 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/after-modi-yogi-also-says-to-save-farm-fields-from-stray-animals.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="margin: 0in 0in 10.0pt 0in;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">उत्तर प्रदेश में अभी तीन और चरण का मतदान होना बाकी है। बुधवार को अमेठी जिले में चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी आवारा पशुओं को लेकर चिंता जताई। दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसका जिक्र कर चुके हैं। प्रदेश के अनेक जिलों में आवारा पशुओं की समस्या से किसान बुरी तरह परेशान हैं। यह एक अहम चुनावी मुद्दा बना हुआ है। आदित्यनाथ ने कहा कि हमने अवैध बूचड़खाने को पूरी तरह बंद कर दिया है। मैं वादा करता हूं कि हम गोमाता की हत्या नहीं होने देंगे</span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">, <span lang="HI">लेकिन साथ ही साथ किसानों के खेत को भी आवारा पशुओं से बचाएंगे। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में गौशाला में बनाई जाएंगी जहां गायों को रखा जाएगा।</span></span><o:p></o:p><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;"><span lang="HI"></span></span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_6216439771ecc.jpg" alt="" /></p>
<p style="margin: 0in 0in 10.0pt 0in;"><em><strong><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">अमेठी में चुनाव प्रचार करतीं प्रियंका गांधी वाड्रा</span><span lang="HI"><o:p></o:p></span></strong></em></p>
<p style="margin: 0in 0in 10.0pt 0in;"><span style="white-space: pre-wrap;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">अमेठी में ही प्रचार अभियान के दौरान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि अगर उनकी पार्टी की सरकार बनती है तो यहां भी आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ की तरह योजना लागू की जाएगी। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने गाय का गोबर खरीदने की विशेष योजना लागू की है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि </span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">10 <span lang="HI">मार्च के बाद भाजपा की सरकार बनने पर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए नई नीति बनाई जाएगी। इस पर प्रियंका ने कहा कि हमें खुशी है कि प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की नीति को स्वीकार किया है।</span></span></span><o:p></o:p></p>
<p style="margin: 0in 0in 10.0pt 0in;"><span style="white-space: pre-wrap;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने लोगों से दो रुपए प्रति किलो की दर से गाय का गोबर खरीदने की योजना चलाई है। शुरू में लोगों ने इस योजना का काफी मजाक उड़ाया था लेकिन धीरे-धीरे लोगों को बात समझ में आई। वे आवारा पशुओं की देखभाल करने लगे और गाय का गोबर सरकार को बेचने लगे। गोबर का इस्तेमाल वर्मी कंपोस्ट, खाद और गोबर गैस बनाने में किया जा रहा है। इस तरह छत्तीसगढ़ सरकार ने आवारा पशुओं की समस्या से सफलतापूर्वक निपट लिया है। </span></span><o:p></o:p><span style="white-space: pre-wrap;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">कांग्रेस महासचिव ने कहा कि उनकी पार्टी की सरकार बनने पर न सिर्फ यह योजना उत्तर प्रदेश में भी लागू की जाएगी बल्कि आवारा पशुओं से प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ </span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">3000 <span lang="HI">रुपए का मुआवजा भी दिया जाएगा।</span></span></span></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें... आखिर सरकार ने मानी आवारा पशुओं की समस्या की बात</strong><strong>, </strong><strong>पढ़िए रूरल वॉयस की ग्राउंड रिपोर्ट</strong></p>
<p><strong><a href="https://www.ruralvoice.in/from-the-ground/pm-has-accepted-the-problems-faced-by-farmers-due-to-stray-cattle.html">https://www.ruralvoice.in/from-the-ground/pm-has-accepted-the-problems-faced-by-farmers-due-to-stray-cattle.html</a></strong></p>
<p><strong></strong></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_621643335a8ba.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मोदी के बाद योगी भी बोले- आवारा पशुओं से खेत बचाएंगे, प्रियंका बोलीं खुशी है कि पीएम ने कांग्रेस की नीति मानी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_621643335a8ba.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपीः चौथे चरण में शाम 5 बजे तक 57.45 फीसदी वोटिंग, 59 सीटों पर हैं 624 उम्मीदवार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/57.45-percent-polling-in-up-4th-phase.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 23 Feb 2022 19:40:01 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/57.45-percent-polling-in-up-4th-phase.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="margin: 0in 0in 10.0pt 0in;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए चौथे चरण में </span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">9 <span lang="HI">जिलों की </span>59 <span lang="HI">सीटों पर बुधवार को मतदान पूरा हो गया। चुनाव आयोग के मुताबिक शाम </span>5:00 <span lang="HI">बजे तक </span>57.45 <span lang="HI">फ़ीसदी मतदाताओं ने वोट डाले। मतदान शाम छह बजे तक हुआ। इसलिए अंतिम आंकड़े आने पर मतदान प्रतिशत बढ़ सकता है। पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, लखनऊ, रायबरेली, बांदा और फतेहपुर जिलों की इन सीटों पर </span>624 <span lang="HI">उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां </span>2.3 <span lang="HI">करोड़ मतदाता हैं।</span><o:p></o:p></span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_62163f8391124.jpg" alt="" /></p>
<p style="margin: 0in 0in 10.0pt 0in;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की सीट करहल (मैनपुरी जिला) के बूथ नंबर </span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">266 <span lang="HI">पर बुधवार को दोबारा मतदान हुआ। जिसमें शाम </span>5:00 <span lang="HI">बजे तक </span>73.6 <span lang="HI">साथ फ़ीसदी वोटिंग हुई। यहां तीसरे चरण में </span>20 <span lang="HI">फरवरी को वोटिंग हुई थी। लेकिन भाजपा उम्मीदवार एसपी सिंह बघेल की शिकायत पर आयोग ने फेसबुक पर दोबारा मतदान कराने का फैसला किया था।</span></span><o:p></o:p></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_62163f9089ca1.jpg" alt="" /></p>
<p style="margin: 0in 0in 10.0pt 0in;"><em><strong><span style="white-space: pre-wrap;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">पीलीभीत में मतदान के लिए खड़े मतदाता</span></span></strong></em></p>
<p style="margin: 0in 0in 10.0pt 0in;"><span style="white-space: pre-wrap;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">बुधवार को जिनमें </span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">59 <span lang="HI">सीटों पर मतदान हुआ उनमें से </span>2017 <span lang="HI">में भाजपा को </span>51 <span lang="HI">सीटों पर जीत मिली थी। समाजवादी पार्टी के हिस्से चार, बहुजन समाज पार्टी के हिस्से तीन सीटें आई थीं। बाकी एक सीट भाजपा के सहयोगी अपना दल सोनेलाल को मिली थी। पिछली बार इन सीटों पर औसतन </span>62.55 <span lang="HI">फ़ीसदी मतदान हुआ था। </span>2019 <span lang="HI">के लोकसभा चुनावों में यहां मतदान का प्रतिशत </span>60.03 <span lang="HI">रहा था</span>।</span></span><o:p></o:p></p>
<p style="margin: 0in 0in 10.0pt 0in;"><span style="white-space: pre-wrap;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">लखीमपुर खीरी में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी ने भी वोट डाला। उन्होंने मीडिया से बचने की कोशिश की। यहां पिछले साल अक्टूबर में जीप से रौंदे जाने के बाद </span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">4 <span lang="HI">किसानों समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी। बाद की हिंसा में तीन और लोग मारे गए थे। इस घटना में अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा आरोपी हैं। हाल ही उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत मिली है। पीड़ित किसानों ने जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।</span></span></span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_62163f6fece40.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपीः चौथे चरण में शाम 5 बजे तक 57.45 फीसदी वोटिंग, 59 सीटों पर हैं 624 उम्मीदवार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_62163f6fece40.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपीः सपा के यादव से ज्यादा मुस्लिम उम्मीदवार, पर कुल प्रत्याशियों में एम&amp;#45;वाय सिर्फ 30 फीसदी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/samajwadi-party-fields-more-muslim-than-yadav-candidates-in-up-polls.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 22 Feb 2022 15:09:23 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/samajwadi-party-fields-more-muslim-than-yadav-candidates-in-up-polls.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस बार उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी ने यादवों से ज्यादा मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है। राज्य की 403 <span>विधानसभा सीटों में से समाजवादी पार्टी </span>348 <span>सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी ने </span>45 <span>यादव उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। तुलनात्मक रूप से देखें तो इसके मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या </span>53 <span>है।</span></p>
<p>समाजवादी पार्टी को एमवाई यानी मुस्लिम यादव पार्टी कहा जाता रहा है। लेकिन इस बार उसने इस छवि को तोड़ने की कोशिश की है। मुसलमानों और यादवों को मिलाकर 98 <span>उम्मीदवार होते हैं जो पार्टी के कुल उम्मीदवारों का सिर्फ </span>30 <span>फ़ीसदी है। इस बार टिकट वितरण में अखिलेश यादव ने दूसरी जाति और समुदाय के लोगों को भी शामिल किया है ताकि </span>7 <span>चरणों में होने वाले चुनाव में हर समुदाय को जोड़ा जा सके।</span></p>
<p>पार्टी ने करीब 70 <span>टिकट दलित उम्मीदवारों को दिए हैं। इसके अलावा </span>21 <span>ब्राह्मण और </span>20 <span>राजपूतों को इसने टिकट दिया है। बाकी उम्मीदवारों में गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक, गैर यादव अन्य पिछड़ा वर्ग जैसे पटेल, मौर्य, कुशवाहा आदि शामिल हैं।</span></p>
<p>समाजवादी पार्टी प्रदेश में 348 <span>सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इसने अपने सहयोगी दलों राष्ट्रीय लोक दल, अपना दल (कमेरावादी), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी आदि के लिए </span>55 <span>सीटें छोड़ी हैं। राष्ट्रीय लोक दल के लिए सपा ने </span>33 <span>और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के लिए </span>18 <span>सीटें छोड़ी हैं।</span></p>
<p>रोचक बात यह है कि समाजवादी पार्टी ने जिन दलों के साथ गठबंधन किया है उनके भी कुछ उम्मीदवार सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसा जानबूझकर किया गया है ताकि चुनाव के नतीजे आने के बाद वे दलबदल ना करें। छोटे दलों में विधायकों की संख्या कम होने के कारण दलबदल आसानी से हो जाता है। सपा के विधायक अधिक होने से अगर अपेक्षाकृत कम विधायक दलबदल करते हैं तो उनकी सदस्यता खतरे में पड़ सकती है।</p>
<p>2017 <span>के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था</span>, <span>लेकिन तब भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने </span>325 <span>सीटें जीतकर सरकार बनाई थी।</span></p>
<p>पिछले चुनाव में समाजवादी पार्टी का वोट प्रतिशत 2012 <span>के </span>29.13 <span>फ़ीसदी की तुलना में </span>21.8<span>2 फ़ीसदी रह गया था। </span>2019 <span>के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने मायावती की बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन बनाया था। इसके बावजूद प्रदेश की </span>80 <span>लोकसभा सीटों में से समाजवादी पार्टी को सिर्फ पांच और बहुजन समाजवादी पार्टी को </span>10 <span>सीटों पर जीत मिली थी।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6214902b4ee78.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपीः सपा के यादव से ज्यादा मुस्लिम उम्मीदवार, पर कुल प्रत्याशियों में एम-वाय सिर्फ 30 फीसदी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6214902b4ee78.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में 63 फीसदी मतदान, तीसरे चरण में यूपी की 59 सीटों पर 57 फीसदी वोटिंग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/57-percent-polling-in-uttar-pradesh-and-63-percent-in-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 20 Feb 2022 20:46:32 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/57-percent-polling-in-uttar-pradesh-and-63-percent-in-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब विधानसभा की 117 सीटों और उत्तर प्रदेश के तीसरे चरण में 16 जिलों की 59 सीटों के लिए मतदान रविवार को पूरा हो गया। उत्तर प्रदेश में शाम पांच बजे तक 57.58 फीसदी वोट डाले गए। हालांकि पंजाब में वोटिंग ज्यादा रही। चुनाव आयोग के अनुसार वहां शाम पांच बजे तक 63.44 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_62125af241fa5.jpg" alt="" /></p>
<p>उत्तर प्रदेश के ललितपुर में सबसे ज्यादा 67.38 फीसदी वोट डाले गए। सबसे कम वोटिंग कानपुर नगर में रही जहां 50.76 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। प्रदेश में जिन सीटों पर मतदान हुआ उनमें करहल सीट भी है, जहां से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने भाजपा के एस.पी. सिंह बघेल हैं जो केंद्र में मंत्री हैं। प्रदेश में चौथे चरण में 23 फरवरी को भी 59 सीटों पर मतदान होना है। इसके लिए चुनाव प्रचार सोमवार को खत्म हो जाएगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_62125ad26b1dc.jpg" alt="" /></p>
<p>उत्तर प्रदेश में रविवार को जिन 59 सीटों पर मतदान हुए वे 16 जिलों में हैं। यहां विभिन्न दलों के और निर्दलीय मिलाकर कुल 627 प्रत्याशी हैं। मतदाताओं की संख्या 2.15 करोड़ है। लेकिन शाम पांच बजे तक सिर्फ 1.23 करोड़ (57.58 फीसदी) मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। 2017 के विधानसभा चुनाव में यहां 62.21 फीसदी वोट पड़े थे। तब 59 में से 49 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। समाजवादी पार्टी को नौ और एक पर कांग्रेस को विजय मिली थी। बहुजन समाज पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी।</p>
<p><strong>पंजाब में 63.44 फीसदी वोटिंग</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_62125af9c3a82.jpg" alt="" /></p>
<p>पंजाब में शाम पांच बजे तक 63.44 फीसदी वोटिंग हुई। मतदाताओं की संख्या 2.14 करोड़ है। यहां 63.44 फीसदी वोटिंग के अनुसार 1.35 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। यहां 93 महिलाओं समेत कुल 1304 प्रत्याशी मैदान में हैं, इनमें 461 निर्दलीय हैं। रविवार को चुनाव आयोग ने अभिनेता सोनू सूद को मोगा में मतदान केंद्रों पर जाने से रोक लगा दी। अकाली दल ने आरोप लगाया था कि वे मतदाताओं को प्रभावित कर रहे थे। सोनू सूद की बहन मालविका सूद सच्चर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_621213762a269.jpg" alt="" /></p>
<p>प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस,<span> आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल-बसपा गठबंधन, भाजपा-पंजाब लोक कांग्रेस-शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) गठबंधन और किसानों के संगठन संयुक्त समाज मोर्चा के बीच पंचकोणीय मुकाबला है। प्रमुख उम्मीदवारों में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, प्रकाश सिंह बादल,</span> राजिंदर कौर भट्ठल, आम आदमी पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा भगवंत मान, पंजाब कांग्रेस के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और पंजाब भाजपा अध्यक्ष अश्विनी शर्मा शामिल हैं। चन्नी अपनी पुरानी सीट चमकौर साहिब के साथ बरनाला जिले की भदौर सीट से भी लड़ रहे हैं।</p>
<p>2017 <span>के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने </span>77 <span>सीटें जीत कर अकाली-भाजपा गठबंधन के </span>10 <span>साल के शासन को खत्म किया था। उस चुनाव में आम आदमी पार्टी को </span>20 <span>और अकाली भाजपा गठबंधन को सिर्फ </span>18 <span>सीटें मिली थीं। </span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_62125ae737ab0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में 63 फीसदी मतदान, तीसरे चरण में यूपी की 59 सीटों पर 57 फीसदी वोटिंग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_62125ae737ab0.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शाम पांच बजे तक उत्तर प्रदेश में 57 फीसदी, पंजाब में 63 फीसदी मतदान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/polling-continues-in-uttar-pradesh-and-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 20 Feb 2022 15:20:43 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/polling-continues-in-uttar-pradesh-and-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब विधानसभा की 117 सीटों और उत्तर प्रदेश तीसरे चरण की 59 सीटों के लिए मतदान जारी है। उत्तर प्रदेश में शाम पांच बजे तक 57.58 फीसदी वोट डाले गए थे। पंजाब में 63.44 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले थे। उत्तर प्रदेश में जिन सीटों पर मतदान हो रहा है, उनमें करहल सीट भी है, जहां से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं।</p>
<p>उत्तर प्रदेश की जिन 59 सीटों पर मतदान हो रहे हैं, वे 16 जिलों में हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में इन जिलों में 62.21 फीसदी वोट पड़े थे। तब 59 में से 49 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। समाजवादी पार्टी को नौ और एक पर कांग्रेस को विजय मिली थी। बहुजन समाज पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_62120ee8e1b50.jpg" alt="" /></p>
<p>पंजाब में शाम 6:00 बजे तक वोट डाले जा सकेंगे। यहां 93 महिलाओं समेत कुल 1304 प्रत्याशी मैदान में हैं, इनमें 461 निर्दलीय हैं। करीब 2.14 करोड़ मतदाता उनकी किस्मत का फैसला करेंगे। चुनाव आयोग ने अभिनेता सोनू सूद को मोगा में मतदान केंद्रों पर जाने से रोक लगा दी। आरोप है कि वे मतदाताओं को प्रभावित कर रहे थे। सोनू सूद की बहन मालविका सूद सच्चर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं।</p>
<p>प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस,<span> आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल-बसपा गठबंधन, भाजपा-पंजाब लोक कांग्रेस-शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) गठबंधन और किसानों के संगठन संयुक्त समाज मोर्चा के बीच पंचकोणीय मुकाबला हो रहा है। प्रमुख उम्मीदवारों में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, प्रकाश सिंह बादल,</span> राजिंदर कौर भट्ठल, आम आदमी पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा भगवंत मान, पंजाब कांग्रेस के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और पंजाब भाजपा अध्यक्ष अश्विनी शर्मा शामिल हैं। चन्नी अपनी पुरानी सीट चमकौर साहिब के साथ बरनाला जिले की भदौर सीट से भी लड़ रहे हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_621213762a269.jpg" alt="" /></p>
<p>शिरोमणि अकाली दल लंबे अरसे के बाद भारतीय जनता पार्टी से अलग होकर बहुजन समाज पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। प्रदेश में भाजपा का अपना आधार कम है। उसका प्रदर्शन दूसरे दलों से आए नेताओं पर टिका है। एक तो उसने पंजाब लोक कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है, जिसके प्रमुख अमरिंदर सिंह हैं। लेकिन पंजाब लोक कांग्रेस की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसके कई नेता भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। गठबंधन में शामिल शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के नेता सुखदेव सिंह ढींडसा भी अकाली दल से अलग होकर ही आए हैं। अब देखना है कि भाजपा को इन बुजुर्ग नेताओं से कितनी मदद मिल पाती है।</p>
<p>संयुक्त समाज मोर्चा 22 <span>किसान संगठनों को मिलाकर बनाया गया है, जिसके नेता बलबीर सिंह राजेवाल हैं। इन किसान संगठनों ने कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल से ज्यादा चले आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी। मोर्चा पहली बार चुनाव लड़ रहा है और विश्लेषकों को इसके कुछ खास प्रदर्शन की उम्मीद नहीं है।</span></p>
<p>मतदाताओं को लुभाने के लिए सभी पार्टियों ने बढ़ चढ़कर वादे किए हैं। आम आदमी पार्टी ने मुफ्त बिजली के साथ सभी महिलाओं को एक 1000 <span>रुपए प्रतिमाह देने का वादा किया है। कांग्रेस ने भी कुछ शर्तों के साथ </span>11<span>00 रुपए प्रतिमाह देने का वादा किया है। अकाली-बसपा गठबंधन का वादा गरीबी रेखा से नीचे के परिवार की महिलाओं को </span>2000 <span>रुपए प्रतिमाह देने का है। कांग्रेस के साथ अकाली-बसपा गठबंधन ने भी एक लाख सरकारी नौकरियां देने की बात कही है। चन्नी ने कहा है कि कांग्रेस की अगली सरकार बनी तो कैबिनेट का पहला फैसला सरकारी नौकरियों का होगा। भाजपा गठबंधन ने सरकारी नौकरियों में प्रदेश के युवाओं के लिए </span>75 <span>फ़ीसदी आरक्षण देने का वादा किया है, तो अकाली-बसपा गठबंधन ने सरकारी के साथ निजी क्षेत्र में भी आरक्षण देने की बात कही है।</span></p>
<p>2017 <span>के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने </span>77 <span>सीटें जीत कर अकाली-भाजपा गठबंधन के </span>10 <span>साल के शासन को खत्म किया था। उस चुनाव में आम आदमी पार्टी को </span>20 <span>और अकाली भाजपा गठबंधन को सिर्फ </span>18 <span>सीटें मिली थीं। इस बार भाजपा हिंदू बहुल सीटों पर फोकस कर रही है जिनमें पठानकोट, अबोहर, फाजिल्का, मुकेरियां, होशियारपुर, फगवाड़ा, लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और राजपुरा जैसी सीटें शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इन इलाकों में ज्यादा प्रचार किया है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_621212e6d17b5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ शाम पांच बजे तक उत्तर प्रदेश में 57 फीसदी, पंजाब में 63 फीसदी मतदान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_621212e6d17b5.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब की सभी 117 और यूपी में अखिलेश की करहल समेत 59 सीटों पर मतदान शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/before-voting-on-all-117-seats-in-punjab-on-sunday-fir-against-channi-and-kejriwal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 20 Feb 2022 00:00:00 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/before-voting-on-all-117-seats-in-punjab-on-sunday-fir-against-channi-and-kejriwal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब विधानसभा की 117 <span>सीटों के लिए रविवार सुबह से मतदान हो रहे हैं। </span>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण में भी 59 <span>सीटों के लिए भी मतदान हो रहा है</span>। इनमें करहल सीट भी शामिल है जहां से समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं।</p>
<p>पंजाब में <span>शाम </span>6:00 <span>बजे तक वोट डाले जा सकेंगे</span>। यहां 93 <span>महिलाओं समेत कुल </span>1304 <span>प्रत्याशी मैदान में है</span>ं, इनमें 461 <span>निर्दलीय है</span>ं। करीब 2.14 <span>करोड़ मतदाता उनकी किस्मत का फैसला करेंगे</span>। प्रदेश में पहली बार पंचकोणीय मुकाबला हो रहा है। एक तरफ सत्तारूढ़ कांग्रेस है तो दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल-बसपा गठबंधन, भाजपा-पंजाब लोक कांग्रेस-शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) गठबंधन और किसानों का संगठन संयुक्त समाज मोर्चा। प्रमुख उम्मीदवारों में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, प्रकाश सिंह बादल, राजिंदर कौर भट्ठल, आम आदमी पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा भगवंत मान, पंजाब कांग्रेस के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और पंजाब भाजपा अध्यक्ष अश्विनी शर्मा शामिल हैं। चन्नी अपनी पुरानी सीट चमकौर साहिब के साथ बरनाला जिले की भदौर सीट से भी लड़ रहे हैं।</p>
<p>इस बीच, पंजाब के मुख्य चुनाव अधिकारी ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अकाली दल की शिकायत पर ऐसा किया गया है। शिकायत में कहा गया है कि केजरीवाल ने अकाली नेताओं के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाए हैं। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और कांग्रेस प्रत्याशी सिद्धू मूसेवाला के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। इन दोनों पर शुक्रवार को प्रचार के आखिरी दिन शाम छह बजे समय खत्म होने के बाद भी चुनाव प्रचार करने के आरोप हैं।</p>
<p>शुक्रवार शाम को चुनाव प्रचार खत्म होने से पहले कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेता अपने-अपने बयानों की वजह से सुर्खियों में आए। कांग्रेस ने पार्टी के खिलाफ बने माहौल को देखते हुए अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था। पार्टी की जीत का सारा दारोमदार अब चन्नी के ऊपर है। लेकिन चन्नी ने पिछले दिनों एक विवादास्पद बयान दिया जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को भैया संबोधित करते हुए उन्हें प्रदेश में ना घुसने देने की बात कही थी। विवाद बढ़ा तो उन्होंने सफाई दी कि उनका आशय आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल से था।</p>
<p>दूसरी तरफ केजरीवाल पर खालिस्तान समर्थकों के करीबी होने के आरोप लगे हैं। यह आरोप पार्टी के पुराने नेता और संस्थापकों में एक कुमार विश्वास ने लगाए हैं। इन आरोपों के बाद चन्नी ने केंद्र सरकार से शिकायत की तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इसकी जांच कराई जाएगी। केजरीवाल ने जनता के सामने अपने गवर्नेंस के दिल्ली मॉडल को पेश किया है और उसी के दम पर वोट मांग रहे हैं। अनेक विश्लेषकों का मत है कि आम आदमी पार्टी इस बार चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। 2017 <span>के चुनाव में वह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी</span>।</p>
<p>शिरोमणि अकाली दल लंबे अरसे के बाद भारतीय जनता पार्टी से अलग होकर बहुजन समाज पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। प्रदेश में भाजपा का अपना आधार कम है। उसका प्रदर्शन दूसरे दलों से आए नेताओं पर टिका है। एक तो उसने पंजाब लोक कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है, जिसके प्रमुख अमरिंदर सिंह हैं। लेकिन पंजाब लोक कांग्रेस की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसके कई नेता भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। गठबंधन में शामिल शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के नेता सुखदेव सिंह ढींडसा भी अकाली दल से अलग होकर ही आए हैं। अब देखना है कि भाजपा को इन बुजुर्ग नेताओं से कितनी मदद मिल पाती है।</p>
<p>संयुक्त समाज मोर्चा 22 <span>किसान संगठनों को मिलाकर बनाया गया है, जिसके नेता बलबीर सिंह राजेवाल हैं। इन किसान संगठनों ने कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल से ज्यादा चले आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी। मोर्चा पहली बार चुनाव लड़ रहा है और विश्लेषकों को इसके कुछ खास प्रदर्शन की उम्मीद नहीं है</span>।</p>
<p>मतदाताओं को लुभाने के लिए सभी पार्टियों ने बढ़ चढ़कर वादे किए हैं। आम आदमी पार्टी ने मुफ्त बिजली के साथ सभी महिलाओं को एक 1000 <span>रुपए प्रतिमाह देने का वादा किया है। कांग्रेस ने भी कुछ शर्तों के साथ </span>11<span>00 रुपए प्रतिमाह देने का वादा किया है। अकाली-बसपा गठबंधन का वादा गरीबी रेखा से नीचे के परिवार की महिलाओं को </span>2000 <span>रुपए प्रतिमाह देने का है। कांग्रेस के साथ अकाली-बसपा गठबंधन ने भी एक लाख सरकारी नौकरियां देने की बात कही है। चन्नी ने कहा है कि कांग्रेस की अगली सरकार बनी तो कैबिनेट का पहला फैसला सरकारी नौकरियों का होगा। भाजपा गठबंधन ने सरकारी नौकरियों में प्रदेश के युवाओं के लिए </span>75 <span>फ़ीसदी आरक्षण देने का वादा किया है, तो अकाली-बसपा गठबंधन ने सरकारी के साथ निजी क्षेत्र में भी आरक्षण देने की बात कही है</span>।</p>
<p>2017 <span>के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने </span>77 <span>सीटें जीत कर अकाली-भाजपा गठबंधन के </span>10 <span>साल के शासन को खत्म किया था। उस चुनाव में आम आदमी पार्टी को </span>20 <span>और अकाली भाजपा गठबंधन को सिर्फ </span>18 <span>सीटें मिली थीं। इस बार भाजपा हिंदू बहुल सीटों पर फोकस कर रही है जिनमें पठानकोट, अबोहर, फाजिल्का, मुकेरियां, होशियारपुर, फगवाड़ा, लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और राजपुरा जैसी सीटें शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इन इलाकों में ज्यादा प्रचार किया है</span>।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f2d2ad89c4b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब की सभी 117 और यूपी में अखिलेश की करहल समेत 59 सीटों पर मतदान शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f2d2ad89c4b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी चुनाव गन्ना क्षेत्र से अब आलू क्षेत्र में आया, इस इलाके में पारंपरिक रूप से सपा रही है मजबूत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/up-polling-shifts-from-sugar-bowl-to-potato-belt.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 17 Feb 2022 10:11:22 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/up-polling-shifts-from-sugar-bowl-to-potato-belt.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में दो चरणों के मतदान के बाद राजनीतिक दलों का फोकस गन्ना क्षेत्र से हटकर अब आलू क्षेत्र पर केंद्रित हो गया है। पहले दो चरणों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनाव हुए और यह इलाका गन्ना क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। अब तीसरे चरण में 20 फरवरी को 59 सीटों पर मतदान होने हैं।&nbsp;</p>
<p>ये सीटें प्रदेश के मध्य, पश्चिम और बुंदेलखंड इलाके के 16 जिलों में स्थित हैं। इन 59 सीटों में से 60 फीसदी यानी 36 सीटों के इलाके में आलू की पैदावार काफी होती है। देश के कुल आलू उत्पादन का करीब 30 फीसदी यहीं होता है।</p>
<p>यहां आलू उत्पादन करने वाले किसानों के लिए आलू की कीमत, इसके भंडारण की सुविधा और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। रोचक बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस, तीनों ने आलू से जुड़े मुद्दों को अपने-अपने घोषणा पत्र में शामिल किया है। जाहिर है कि इसका मकसद आलू किसानों को रिझाना है।</p>
<p>सत्तारूढ़ भाजपा ने आलू और टमाटर को एमएसपी में शामिल करने के साथ इनके लिए एक हजार करोड़ रुपए का प्राइस स्टैबिलाइजेशन फंड बनाने का वादा किया है। सपा का वादा कन्नौज में आलू निर्यात का क्लस्टर बनाने का है। कांग्रेस ने कहा है कि उसकी सरकार बनने पर हर ब्लॉक में कोल्ड स्टोरेज खोले जाएंगे और प्रोसेसिंग की व्यवस्था की जाएगी।</p>
<p>खेती में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की बढ़ती कीमत, खासकर डीजल की, बाजार में आलू की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव, यूरिया और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता की समस्या आलू किसानों के लिए कुछ बड़े मुद्दे हैं।</p>
<p>दरअसल, सीजन में जब आलू उत्पादन के बाद सप्लाई बढ़ती है तो कई बार बिक्री न होने पर किसानों को अपनी उपज खुले में फेंकनी पड़ती है। कई बार तो उन्हें मिलने वाली कीमत आलू को कोल्ड स्टोरेज में रखने की लागत से भी कम होती है। प्रदेश में करीब छह लाख हेक्टेयर में आलू की खेती की जाती है। सालाना उत्पादन 147 लाख टन के आसपास है।</p>
<p>प्रदेश में तीसरे चरण में 20 फरवरी को जिन 16 जिलों में मतदान होना है, उनमें हाथरस, फिरोजाबाद, अलीगंज, एटा, मैनपुरी, फर्रूखाबाद, कन्नौज, इटावा, ओरैया, कानपुर, कानपुर देहात, कासगंज, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर और महोबा शामिल हैं।</p>
<p>पारंपरिक रूप से देखा जाए तो समाजवादी पार्टी का इन जिलों में अच्छा प्रभाव रहा है। एटा, इटावा, मैनपुरी, कन्नौज, फिरोजाबाद, ओरैया आदि जिलों में पार्टी के पूर्व प्रमुख मुलायम सिंह यादव की खासी पकड़ रही है। पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष अखिलेश यादव मैनपुरी जिले की करहल सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620dd1e44a9f1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी चुनाव गन्ना क्षेत्र से अब आलू क्षेत्र में आया, इस इलाके में पारंपरिक रूप से सपा रही है मजबूत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620dd1e44a9f1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी चुनाव: अखिलेश की चुनावी सभाओं में जुट रही है भारी भीड़, सत्तारूढ़ भाजपा की चिंता बढ़ी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/packed-rallies-of-akhilesh-yadav-ring-alarm-bells-for-bjp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 15 Feb 2022 22:53:34 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/packed-rallies-of-akhilesh-yadav-ring-alarm-bells-for-bjp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के 7 चरणों में से दो चरणों के चुनाव हो चुके हैं। इन दो चरणों में अभी तक 113 सीटों पर मतदान हुआ है और बाकी पांच चरणों में बाकी 290 सीटों पर मतदान होने हैं। लेकिन अब भी समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की सभाओं में जिस तरह भारी भीड़ उमड़ रही है, उसने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के लिए चिंता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में भी उतनी भीड़ नहीं आ रही है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_620be3a99e439.jpg" alt="" /></p>
<p>इस विधानसभा चुनाव में अखिलेश अपने दम पर पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं। इसलिए यह उनके लिए भी नेतृत्व और संगठन को चलाने की क्षमता साबित करने की चुनौती है। इस चुनाव के लिए अखिलेश ने राष्ट्रीय लोक दल समेत कई छोटी-बड़ी पार्टियों के साथ समझौता किया है। इनमें जाति आधारित पार्टियां भी शामिल हैं। अखिलेश की चुनावी रैलियों में लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। खासकर युवाओं में उनके प्रति काफी आकर्षण देखा जा रहा है। स्थिति यह है कि रैली की जगहों पर दूर-दूर तक खचाखच भीड़ नजर आती है।</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी अभी तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्माई चेहरे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम पर चुनाव लड़ रही थी। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ रहे हैं और अखिलेश की सभाओं में भीड़ बढ़ रही है, भाजपा ने अखिलेश पर हमले तेज कर दिए हैं। पार्टी के नेता चुनावी सभाओं में 2012 से 2017 के दौरान अखिलेश सरकार के समय तथाकथित कानून व्यवस्था का मुद्दा उठा रहे हैं और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगा रहे हैं। हालांकि विपक्षी नेता भी योगी सरकार पर भ्रष्टाचार हॉट सांप्रदायिकता फैलाने के आरोप लगा रहे हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने सोमवार को कानपुर देहात में एक रैली को संबोधित किया। उसमें समाजवादी पार्टी के सरकार के समय भाई भतीजावाद, किसानों, गरीबों और महिलाओं की अनदेखी किए जाने के आरोप लगाए। स्थिति को संभालने के लिए भाजपा के शीर्ष नेताओं ने आने वाले चरणों में घर-घर जाकर प्रचार अभियान तेज करने की योजना बनाई है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने पक्ष में वोट देने के लिए राजी किया जा सके। हालांकि पहले दो चरणों में कई भाजपा नेताओं को तब मायूसी का सामना करना पड़ा जब घर-घर प्रचार के दौरान उनका स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध किया और नारे भी लगाए। कई जगहों से उन्हें खदेड़ने की खबरें भी आई।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_620be3bf27c4c.jpg" alt="" /></p>
<p>अखिलेश यादव अभी तक अमरोहा, उन्नाव, लखनऊ, बिजनौर, जालौन, मेरठ, फिरोजाबाद, महोबा, रामपुर जैसी जगहों पर चुनावी सभाएं आयोजित कर चुके हैं। समाजवादी पार्टी ने आने वाले चरणों के लिए उनकी और कई सभाएं करने की योजना बनाई है।&nbsp;</p>
<p>एक खास बात यह भी देखने को मिल रही है कि अखिलेश चुनाव प्रचार में काफी राजनीतिक परिपक्वता दिखा रहे हैं। वह भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी पर सीधे हमले कर रहे हैं। लेकिन उन्होंने कांग्रेस या बहुजन समाज पार्टी के खिलाफ बहुत कम बोला है। इस तरह उन्होंने मतदाताओं में यह संदेश भेजने की कोशिश की है कि इस चुनाव में मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_620be15fee1e0.jpg" alt="" /></p>
<p>समाजवादी पार्टी को समाज के गरीब और वंचित वर्ग के हित में बताते हुए वे बहुजन समाज पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक को भी तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। प्रदेश में मतदान की शुरुआत पश्चिमी इलाके से हुई है। यहां मुस्लिम आबादी बड़ी संख्या में है। समाजवादी पार्टी का बड़ा वोट बैंक मुस्लिम और यादव समुदाय में माना जाता है। इसलिए इस इलाके में पार्टी को काफी फायदा मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट वोटरों को साथ लेने के लिए अखिलेश ने राष्ट्रीय लोक दल के जयंत चौधरी के साथ समझौता किया। दोनों चरणों में उन्हें इसका फायदा भी मिलता दिख रहा है। कृषि कानूनों के चलते जाट किसानों में भारतीय जनता पार्टी को के प्रति काफी नाराजगी रही है।</p>
<p>प्रदेश में 10 और 14 फरवरी के बाद 20, 23, 27 फरवरी और 3 तथा 7 मार्च को मतदान होने हैं। मतगणना बाकी अन्य चार राज्यों के साथ 10 मार्च को होगी। उत्तर प्रदेश विधानसभा में 403 सीटें हैं और मतदाताओं की संख्या 15 करोड़ से अधिक है।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620be37ba14f8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी चुनाव: अखिलेश की चुनावी सभाओं में जुट रही है भारी भीड़, सत्तारूढ़ भाजपा की चिंता बढ़ी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620be37ba14f8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चुनाव प्रचार में प्लास्टिक की सामग्री का इस्तेमाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयोग और सरकारी विभागों को भेजा नोटिस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/allahabad-hc-notice-to-election-commission-over-plastic-use-in-up-polls.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 15 Feb 2022 06:02:24 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/allahabad-hc-notice-to-election-commission-over-plastic-use-in-up-polls.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के दौरान प्लास्टिक की प्रचार सामग्री के खुलेआम इस्तेमाल को लेकर चुनाव आयोग और इससे जुड़े अन्य विभागों को नोटिस जारी किया है। चुनाव में प्लास्टिक के उपयोग और उसके बाद अनियोजित बंदोबस्त के संबंध में गाजियाबाद&nbsp; निवासी आकाश की तरफ से दायर की गई एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर हाईकोर्ट ने यह नोटिस जारी किया। इसमें कहा गया है कि चुनाव में प्लास्टिक के प्रयोग से पर्यावरण को खतरा पैदा हो सकता है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">हाईकोर्ट ने इसके संबध में उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और इसके साथ उत्तर प्रदेश सरकार को भी नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता ने चुनाव प्रचार में पॉलीविनाइल क्लोराइड (पीवीसी) और अन्य क्लोरीनयुक्त प्लास्टिक-आधारित बैनर, होर्डिंग्स, फ्लेक्स, साइनेज और झंडे जैसे विज्ञापन और प्रचार वस्तुओं के निर्माण और प्रयोग पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अदालत ने जनहित याचिका में उजागर किए इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए कहा कि यह एक गंभीर मामला है और स्थिति की गंभीरता केवल चुनावों तक सीमित नहीं है। अदालत ने इस बात को भी रेखांकित किया कि चुनाव के बाद भी ऐसी सामग्री के इस्तेमाल पर रोक लगाने की जरूरत है। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि उत्तर प्रदेश के चुनावों में प्लास्टिक प्रचार सामग्री का व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे चुनाव के बाद खुले में छोड़ दिया जाएगा जो पर्यावरण के हानिकारक है। इस तरह प्लास्टिक का इस्तेमाल पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 में निहित प्रावधानों का उल्लंघन है। अदालत ने प्रतिवादियों से दिए गये नोटिस का जबाब तीन सप्ताह के अन्दर देने को कहा है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक विधान सभा सीटों वाला राज्य है। यहां कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 15 करोड़ से अधिक है। विधानसभा चुनाव 10, 14, 20, 23, 27 फरवरी और 3 और 7 मार्च को सात चरणों में हो रहे हैं। वोटों की गिनती 10 मार्च को होगी।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61efa709da79c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चुनाव प्रचार में प्लास्टिक की सामग्री का इस्तेमाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयोग और सरकारी विभागों को भेजा नोटिस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61efa709da79c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में मतदान का दूसरा चरणः आवारा पशुओं से फसलों को नुकसान से मंत्री चिंतित, किसान परेशान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/crop-damage-by-stray-is-a-big-problem-for-farmers-and-worry-for-politicians.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 14 Feb 2022 07:20:10 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/crop-damage-by-stray-is-a-big-problem-for-farmers-and-worry-for-politicians.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>नगलिया बल्लू, चंदौसी, संभल, निघासन, लखीमपुर खीरी से<br /></strong></em></p>
<p>आज उत्तर प्रदेश में 55 विधान सभा सीटों के लिए दूसरे चरण का मतदान होना है। तमाम मुद्दों के बीच राज्य में अवारा पशुओं से फसलों को होने वाला नुकसान एक बड़ा मुद्दा है। इसका क्या असर होगा यह तो पूरी तरह से कहना अभी मुश्किल है लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर रूहेलखंड और तराई तक किसान इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर करने से नहीं चूकते हैं।</p>
<p>चुनाव प्रचार के लिए गांव-गांव घूम रही चंदौसी की विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री, माध्यमिक शिक्षा विभाग, गुलाब देवी के काफिले को ढूंढ़ते हुए चंदौसी से करीब 20 किलोमीटर दूर गांव नगलिया बल्लू में यह नजारा देखने को मिला जो इस स्टोरी के साथ फोटो में दिख रहा है। किसानों ने अपनी फसलों को अवारा पशुओं से बचाने के लिए पुरानी साड़ियों की बाड़ बनाई हुई है। इसकी वजह शायद कम खर्च हो या फिर रंग-बिरंगी साड़ियां देखकर जानवर कम आते हों। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर रुहेलखंड और तराई तक आवारा पशुओं से फसलों को बचाने की जद्दोजहद करते किसानों के किस्से सुनने को मिले। यहां के एक किसान रतिराम कहते हैं, &ldquo;हम क्या कर सकते हैं। किसी न किसी तरह खेतों की रात भर हिफाजत करते हैं।&rdquo;</p>
<p>इससे थोड़ा पहले आने वाले बड़ा गांव के किसान रामआसरे बताते हैं, &ldquo;आवारा पशु यहां बड़ी समस्या बन गये हैं। छोटे-बड़े सभी किसान इससे परेशान हैं। गौशाला बना कर इनको रोकने के प्रशासन के दावे हकीकत से परे हैं।&rdquo; सरकारी नौकरी में ट्यूबवैल आपरेटर से रिटायर इस दलित किसान का कहना है कि आवारा पशुओं का मुद्दा वोटों पर असर डालेगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_620908719cc64.jpg" alt="" /></p>
<p><em><strong>फोटोः गुलाब देवी, राज्यमंत्री माध्यमिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश, विधायक चंदौसी</strong></em></p>
<p>राज्य सरकार में मंत्री गुलाब देवी चंदौसी से भाजपा की विधायक हैं। वे लगातार चार बार यहां से जीत चुकी हैं और पांचवीं बार चुनाव लड़ रही हैं। गांव के बाहर जब उनसे बात होती है तो वह चिंतित दिखती हैं और वह स्वीकारती हैं कि आवारा पशुओं की समस्या बड़ी है। सरकार द्वारा बनाई गौशालाओं के बारे में वह कहती हैं कि सरकार आने पर इनके खिलाफ सख्ती करेंगे क्योंकि यह पशुओं को रात में छोड़ देते हैं।</p>
<p>गुलाब देवी इस बार थोड़ा परेशान हैं क्योंकि इस बार चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जाटव समुदाय की विमलेश को यहां टिकट दिया है। चंदौसी रिजर्व सीट है और गुलाब देवी धोबी समुदाय से हैं। उनकी बिरादरी के करीब 15 हजार वोट हैं। यहां 84 हजार मुसलमान नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। जाटव समुदाय के 65 हजार वोट हैं और 22 हजार यादव हैं। ऐसे में मुकाबला मुश्किल हो गया है। हालांकि वह दावा करती हैं कि उनको हर समुदाय और जाति का वोट मिलता है इसलिए चिंता की बात नहीं है।</p>
<p>असल में इस चुनाव में आवारा पशु किसानों के लिए एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रहा है। कुछ माह पहले एक राजनीतिक दल के रणनीतिकार ने इस लेखक से जानना चाहा कि अगर उनकी पार्टी पशुओं से फसल को हुए नुकसान के लिए नकद मुआवजा घोषित करे तो क्या उसका असर वोटों पर होगा।</p>
<p>पश्चिम के शामली जिले में आने वाले ताजपुर सिंभालका गांव के किसान तेजपाल सड़क पर बैठे सांढ़ों के झुंड का फोटो लेने के लिए कहते हैं। उनका कहना है, &ldquo;रात भर इनको रोकने के लिए खेतों में रहना पड़ता है।&rdquo; जहां भी जाइए इसी तरह की कहानी किसान कहते मिलते हैं। कैराना विधान सभा सीट के तहत आने वाले गांव सिंगापुर के किसान कीमत सिंह भी इसी बात को लेकर परेशान हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_620908a48c4a1.jpg" alt="" /></p>
<p><em><strong>फोटोः फतेह सिंह, खरवैया नंबर दो फार्म, निघासन रोड</strong></em></p>
<p>चंदौसी से करीब दो सौ किलोमीटर दूर लखीमपुर खीरी की निघासन रोड विधान सभा के खरवैया नंबर दो फार्म के किसान फतेह सिंह कहते हैं कि आवारा पशु खेतों को बरबाद कर रहे हैं। जरा सी ढील हुई नहीं कि खड़ी फसल को ये नुकसान पहुंचा देते हैं। इसका हल क्या है, यह पूछने पर वह कहते हैं कि इस पर कोई कुछ नहीं कर रहा है। सब वोटों का मामला है। इससे किसानों में नाराजगी है।</p>
<p>दरअसल, सरकार द्वारा गौवंश की सुरक्षा को लेकर सख्त कानून लागू करने के चलते अवारा पशुओं की समस्या बढ़ी है। इनकी खरीद-फरोख्त और इनकी ढुलाई करने वालों को कई तरह की समस्याओँ का सामना करना पड़ता है। राज्य भर में गौरक्षकों की फौज खड़ी हो गई है जो इस पर मुद्दे पर बहुत आक्रामक है। हालांकि राज्य सरकार ने गौवंश के संरक्षण के लिए राज्य भर में गौशालाएं खोलने का दावा किया है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। राज्य भर में किसान रात में टार्च लेकर खेतों पर जाने को मजबूर हैं। इसका चुनावों पर कितना असर पड़ेगा यह तो नतीजे आने पर ही पता लगेगा। लेकिन यह भी दिलचस्प बात है कि नगलिया बल्लू के जिस किसान का इस खबर में ऊपर जिक्र है, उनका कहना है कि पहले जानवरों की चोरी हो जाती थी। गांव के बाहर से हमारी दो भैंस चोर ले गये और हम रोक भी नहीं पाये क्योंकि उन्होंने हमारे ऊपर फायर दिया था। अब कानून व्यवस्था ठीक है इसलिए हम भाजपा के पक्ष में ही वोट करेंगे। यह बात अलग है कि सभी किसानों की राय एक जैसी नहीं है और इस मुश्किल के चलते उनकी नाराजगी का असर मतों पर पड़ सकता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6209083936057.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में मतदान का दूसरा चरणः आवारा पशुओं से फसलों को नुकसान से मंत्री चिंतित, किसान परेशान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6209083936057.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी चुनाव में क्यों इतने महत्वपूर्ण हो गये जाट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/why-jaats-have-become-so-important-in-current-up-assembly-elections.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 13 Feb 2022 13:54:43 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/why-jaats-have-become-so-important-in-current-up-assembly-elections.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में पहले चरण के मतदान के एक दिन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के साथ संयुक्त प्रेस क्रांफ्रेंस में कई बार जाट बिरादरी की बात की। उनको निडर बताया और नारा भी दिया- अबकी बार जाट सरकार। इसके कुछ दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में जाट बिरादरी के लोगों की एक बैठक सांसद प्रवेश वर्मा के घर पर बुलाई थी। उसमें उन्होंने कहा कि जाट बिरादरी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का हमेशा साथ दिया है, इसलिए उत्तर प्रदेश विधान सभा के मौजूदा चुनावों में भी वह मदद करें।</p>
<p>इन दोनों नेताओं का जाटों से दूर-दूर तक कोई सीधा नाता नहीं है। ऐसा क्या हो गया कि उत्तर प्रदेश में केवल चार फीसदी आबादी वाली जाट बिरादरी इतनी महत्वपूर्ण हो गई कि राजनीतिक दलों के साथ मीडिया में भी वही फोकस में है। उनसे कहीं अधिक आबादी वाली जातियों पर इस तरह से फोकस नहीं है।</p>
<p>असल में जाट मतों का असली असर उनकी संख्या से कहीं अधिक है। जिसे कहते हैं &lsquo;मोर दैन देयर वेट&rsquo; और इसलिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जाटलैंड कहा जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जाट बिरादरी के दो सबसे बड़े नेताओं, सर छोटू राम और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने खुद को कभी जाट के रूप में पहचान देने की कोशिश नहीं की। सर छोटू राम जमींदारा की बात करते थे और उनकी पार्टी का नाम यूनियनिस्ट पार्टी था। चौधरी चरण सिंह ने हमेशा खुद को किसान नेता के रूप में पेश किया और किसानों की हिमायत की। उन्होंने कभी जाटों की अलग से कोई बैठक भी नहीं की।</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि जाट बिरादरी के समर्थन से खड़ी पार्टी राष्ट्रीय लोक दल के प्रमुख जयंत चौधरी भी अक्सर यही कहते हैं कि हमारी पार्टी केवल जाटों की पार्टी नहीं है। यह किसानों की पार्टी है और इसमें सभी जाति धर्म के लोग हैं।</p>
<p>फिर ऐसा क्यों हो रहा है कि उत्तर प्रदेश के चुनावों में जाटों को इतना महत्व दिया जा रहा है? जाट पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही अधिक हैं। यहां की सीटों पर उनकी आबादी पांच फीसदी से लेकर 25 फीसदी तक है। इसलिए यहां के करीब 15 जिलों की सीटों पर उनका वोट काफी महत्व रखता है। लेकिन यह भी सच है कि किसी सीट पर वह इतनी तादाद में नहीं हैं कि अकेले किसी पार्टी के सदस्य को जिता सकें। लेकिन यह बात भी सच है कि वह जिस पार्टी के साथ जुड़ते हैं, उसके लिए माहौल बनाने का काम जरूर करते हैं। पिछले कई चुनावों में बड़ी तादाद में भाजपा को वोट देने के बावजूद हिंदू मतों के रूप में उनकी पहचान नहीं बन सकी। इसलिए भाजपा नेता उनको अपने साथ जोड़ने के लिए अलग बैठक करने को मजबूर हैं। 2017 के चुनावों से पहले भी अमित शाह ने जाटों की एक बैठक दिल्ली में बुलाकर उनकी नाराजगी को दूर करने की कोशिश की थी। उस समय यह कोशिश काम भी कर गई और भाजपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों का अच्छा खासा वोट मिला।</p>
<p>लेकिन इस बार स्थिति बदली हुई है। तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन की धुरी जाट किसान ही थे। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस बिरादरी की जो कड़ी जुड़ी वह किसान आंदोलन को इतना प्रभावशाली बना गई कि सरकार ने आखिर में नवंबर, 2021 में तीनों कानूनों को वापस ले लिया। लेकिन इससे भाजपा को राजनीतिक नुकसान काफी ज्यादा हुआ है। पंजाब में जाट किसान उसके खिलाफ खड़े हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी वह भाजपा के खिलाफ हैं। इस लेखक ने चुनावों के पहले और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 58 सीटों पर पहले चरण के 10 फरवरी के मतदान के दौरान यह नाराजगी जमीन पर देखी। इसी नाराजगी को कम करने की कोशिश भाजपा के केंद्रीय नेता और स्थानीय नेता लगातार करते रहे।</p>
<p>जहां तक भाजपा के अंदर की बात है तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के सबसे बड़े जाट नेता के रूप में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री संजीव बालियान की उभरते दिख रहे हैं। मौजूदा विधान सभा चुनाव में जाटों के बीच उनकी ही सक्रियता भाजपा के बाकी नेताओं से अधिक रही है। बहुचर्चित सीट बागपत के सांसद सत्यपाल सिंह जाट नेता के रूप में पिछड़ रहे हैं और इन चुनावों में भाजपा की कोई मदद कर पायेंगे, इसकी संभावना बहुत कम है। लेकिन संजीव बालियान की भी अपनी सीमा है, क्योंकि किसान आंदोलन का केंद्र सिसौली उनके लोक सभा क्षेत्र में है। साथ ही उनके बालियान खाप के प्रमुख ही भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष हैं। इसके साथ ही किसान आंदोलन ने भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की छवि देश में बड़े किसान नेता की बन गई है। राकेश टिकैत भी जाट हैं, ऐसे में जब वह भाजपा सरकार के खिलाफ बात करते हैं तो उसका संदेश भी जाट बिरादरी में जाता है।</p>
<p>अगर जाट भाजपा से दूर जाते हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय के साथ मिलकर वोट करें तो तमाम समीकरण बदल जाते हैं। मुस्लिम आबादी इन जिलों में 20 फीसदी से 50 फीसदी तक है। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के गठबंधन ने यह समीकरण बना दिया है। भाजपा का जाटों को इस गठबंधन से दूर रखने की कोशिश का कितना असर हुआ यह तो 10 मार्च को ही पता चलेगा, लेकिन यह बात साफ होती दिख रही है कि पश्चिम में जाटों ने भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने का काम किया है। इसका असर चुनाव में तटस्थ मतों पर पड़ा है। प्रभावी किसान बिरादरी होने के चलते जाट बिरादरी उनके साथ काम करने वाली दूसरी जातियों को भी प्रभावित करती है और इसी नुकसान से भाजपा बचने की कोशिश इन बैठकों में कर रही थी।</p>
<p>यह सवाल फिर भी वाजिब है कि जाट बिरादरी के बड़े राजनेताओं ने कभी खुद को जाट दिखाने की कोशिश कर उसका फायदा लेने पर जोर नहीं दिया। यह बात अलग है कि स्वाधीनता के पहले सर छोटू राम ने फजले हसन के साथ यूनियनिस्ट पार्टी की सरकार में पंजाब में राजस्व मंत्री रहते हुए किसानों के फायदे के लिए एतिहासिक कानून बनवाये। वहीं चौधरी चरण सिंह ने उत्तर प्रदेश की कांग्रेस सरकार में मंत्री रहते हुए जमींदारा खात्मा जैसे कानून बनवाये, जिनका फायदा सभी जातियों के किसानों को मिला। लेकिन यह बात भी सच है कि जाट बिरादरी का ताना-बाना अब भी इतना मजबूत बना हुआ है कि बिरादरी के नाम पर या खाप व्यवस्था के जरिये पर यह कई बार अपने हितों के लिए एकजुट होती रही है। यह एकजुटता राजनीतिक नतीजे बदलने में भी कामयाब रही है। यही वजह है कि गैर-जाट राजनेता इस बिरादरी को अपने साथ जोड़ने की जुगत लगाते हैं। एक तथ्य यह भी है कि इस बिरादरी के नेता प्रधानमंत्री, उप प्रधानमंत्री, कृषि मंत्री, वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री, लोक सभा अध्यक्ष समेत तमाम प्रमुख पदों पर रहे हैं। मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार आजाद भारत की पहली सरकार है जिसमें एक भी जाट कैबिनेट मंत्री तक नहीं है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6208c026a681f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी चुनाव में क्यों इतने महत्वपूर्ण हो गये जाट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6208c026a681f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में भाजपा का नौकरियों में 75 फीसदी आरक्षण का वादा, पर जहां पार्टी की सरकारें हैं वहां ऐसा नहीं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-promises-75-percent-reservation-for-locals-in-punjabgovernment-jobs.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 13 Feb 2022 12:28:52 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-promises-75-percent-reservation-for-locals-in-punjabgovernment-jobs.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजनीतिक दल चुनावों से पहले अक्सर बढ़-चढ़कर वादे करते हैं। भले ही अपनी सरकार वाले प्रदेशों में उन वादों पर अमल करने की उनकी कोई रुचि ना हो। कुछ ऐसे ही वादे पंजाब के लिए भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने भी किए हैं। इसने जो घोषणा पत्र जारी किया है उसमें सरकारी नौकरियों में प्रदेश के युवाओं के लिए 75 <span>फीसदी आरक्षण, निजी क्षेत्र की नौकरियों में भी स्थानीय युवाओं के लिए </span>50 <span>फीसदी आरक्षण, सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए </span>35 <span>फीसदी आरक्षण और बेरोजगारी भत्ता देने का वादा शामिल है। पड़ोसी राज्य हरियाणा समेत देश के अनेक राज्यों में भाजपा की सरकार है, लेकिन पार्टी ने ऐसे कानून नहीं बनाए हैं। हरियाणा में जरूर निजी क्षेत्र के नौकरियों में स्थानीय युवाओं को </span>75 <span>फीसदी आरक्षण देने का कानून बनाया था, लेकिन उस पर भी कोर्ट ने रोक लगा दी है।</span></p>
<p>घोषणा पत्र के अनुसार बेरोजगार युवाओं को ग्रेजुएट की डिग्री हासिल करने के बाद दो साल तक 4000 <span>रुपये प्रति माह की दर से महंगाई भत्ता दिया जाएगा। सरकारी नौकरियों में महिलाओं को </span>35 <span>फीसदी आरक्षण मिलेगा। इनमें कॉन्ट्रैक्ट वाली नौकरियां भी शामिल हैं। लेकिन यहां देखने वाली बात यह है कि जिन डेढ़ दर्जन प्रदेशों में पार्टी की अपनी या गठबंधन की सरकारें हैं, उनमें से कितने राज्यों में उसने ऐसा प्रावधान लागू किया है। पंजाब में भारतीय जनता पार्टी अमरिंदर सिंह इसकी पंजाब लोग कांग्रेस और सुखविंदर सिंह ढींडसा के शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है।</span></p>
<p>पार्टी इससे पहले ग्रामीण इलाकों और किसानों से जुड़ी घोषणाएं भी कर चुकी है। इसमें 5 <span>एकड़ से कम जमीन वाले किसानों के सभी कर्ज माफ करने का वादा किया गया था। घोषणा पत्र जारी करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए एक लाख करोड़ रुपए का फंड बनाया जाएगा, जिसका इस्तेमाल </span>5 <span>वर्षों में होगा। एमएसपी और फसल विविधीकरण के लिए </span>5000 <span>करोड़ रुपए का प्रावधान करने की बात है।</span></p>
<p>धर्म ग्रंथों की बेअदबी 2017 <span>के चुनावों में बड़ा मुद्दा था। इस बार भी चुनाव की घोषणा से पहले बेअदबी की कुछ घटनाएं हुई थीं। पार्टी ने कहा है कि ऐसी घटनाओं के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। इनके समयबद्ध निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी। इसमें पंजाब की अर्थव्यवस्था के रिवाइवल और ड्रग्स की समस्या से निजात पाने का रोड मैप भी बताया गया है। सीमा पार से घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए पार्टी ने ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी करने और इलेक्ट्रिक फेंसिंग का वादा किया है।</span></p>
<p>अन्य वादों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों से निपटने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का की बात है। एनआरआई दूल्हे जो भारत में अपनी पत्नियों को छोड़ देते हैं, वैसे मामलों को से निपटने के लिए अलग कानून बनाया जाएगा। आतंकवाद से पीड़ित परिवारों की शिकायतें दूर करने के लिए एक आयोग बनाया जाएगा और ऐसे हर परिवार को 5<span> लाख रुपये का मुआवजा भी मिलेगा। ड्रग्स के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए हर जिले में विशेष ड्रग प्रिवेंशन टास्क फोर्स गठित करने का वादा किया गया है। ड्रग्स से संबंधित अपराधों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट भी गठित किए जाएंगे।</span></p>
<p>एमएसएमई के रिवाइवल के लिए उन्हें 4 <span>रुपये प्रति यूनिट की दर से और अन्य औद्योगिक इकाइयों को </span>5 <span>रुपए की दर से बिजली सप्लाई का वादा है। हर घर के लिए </span>300 <span>यूनिट बिजली मुफ्त होगी। उसके बाद प्रति यूनिट </span>3<span> रुपए की दर से शुल्क लिया जाएगा। आंगनवाड़ी और कार्यकर्ताओं का वेतन बढ़ाकर </span>10000 <span>और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का </span>6000 <span>रुपए प्रतिमाह किया जाएगा। अनुसूचित जाति पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के </span>50000<span> रुपए तक के कर्ज माफ किए जाएंगे। ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को मुफ्त हॉस्टल सुविधा दी जाएगी।</span></p>
<p>कॉलेज और यूनिवर्सिटी के सभी छात्र-छात्राओं को टू व्हीलर पर ब्याज में 50 <span>फीसदी सब्सिडी देने का भी वादा किया गया है। गरीबों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराने के लिए पूरे प्रदेश में गुरु कृपा कैंटीन खोले जाएंगे जहां सिर्फ </span>5<span> रुपए में भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। पुलिस कर्मियों के काम के घंटे भी तय किए जाएंगे।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6208ac1f73dcc.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में भाजपा का नौकरियों में 75 फीसदी आरक्षण का वादा, पर जहां पार्टी की सरकारें हैं वहां ऐसा नहीं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6208ac1f73dcc.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपीः दूसरे चरण में 260 उम्मीदवार करोड़पति, शाहजहांपुर के निर्दलीय प्रत्याशी के पास सिर्फ 6,700 रुपए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/in-second-phase-of-up-election-260-candidates-are-crorepatis.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 12 Feb 2022 12:53:26 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/in-second-phase-of-up-election-260-candidates-are-crorepatis.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के लिए 14 फरवरी को 55 सीटों पर मतदान होना है। ये सीटें अमरोहा, बरेली, बिजनौर, बदायूं, मुरादाबाद, रामपुर, सहारनपुर, संबलपुर और शाहजहांपुर जिलों में हैं। इस चरण में जो सबसे अमीर उम्मीदवार है उसके पास 296 करोड़ और सबसे गरीब उम्मीदवार के पास 6700 रुपए की संपत्ति है। उत्तर प्रदेश इलेक्शन वाच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने एक रिपोर्ट में बताया है कि उन्होंने 586 उम्मीदवारों में से 584 उम्मीदवारों के हलफनामे के आधार पर यह विश्लेषण निकाला है। इनमें से 260 यानी 45 फ़ीसदी प्रत्याशी करोड़पति हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार सबसे अमीर उम्मीदवार रामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी नवाब काजिम अली खान हैं। उन्होंने 296 करोड़ रुपए की संपत्ति बताई है। दूसरे नंबर पर बरेली कैंट सीट से समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी सुप्रिया ऐरन हैं, जिनके पास 157 करोड़ रुपए की संपत्ति है। नौगांव से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार देवेंद्र नागपाल तीसरे सबसे अमीर प्रत्याशी हैं। उनके पास 140 करोड़ रुपए की संपत्ति है।&nbsp;</p>
<p>दूसरी तरफ शाहजहांपुर सीट से संजय कुमार निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं और उन्होंने सिर्फ 6700 के ऐसेट होने की जानकारी दी है। उनके पास कोई अचल संपत्ति नहीं है। सबसे कम संपत्ति वालों में दूसरे और तीसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार हैं। नेहतौर से विशाल कुमार और सहारनपुर नगर से उस्मान मलिक। इन्होंने क्रमशः 13,500 और 15,000 रुपए की संपत्ति होने की जानकारी दी है।</p>
<p>पार्टियों के हिसाब से देखा जाए तो भाजपा के 98 प्रतिशत, समाजवादी पार्टी के 92 प्रतिशत, बहुजन समाज पार्टी के 84 प्रतिशत, राष्ट्रीय लोकदल के 67 प्रतिशत, कांग्रेस के 57 प्रतिशत और आम आदमी पार्टी के 33 प्रतिशत उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके पास कम से कम एक करोड़ रुपए की संपत्ति है। सभी प्रत्याशियों की औसत संपत्ति 4.11 रुपए है। औसत संपत्ति के मामले में समाजवादी पार्टी सबसे ऊपर है। उसके प्रत्याशियों के पास औसतन 11.26 करोड़ रुपए की संपत्ति है। भाजपा 9.95 करोड़ रुपए के साथ दूसरे नंबर पर है।</p>
<p>एडीआर ने कहा है कि बाहुबल और धनबल का चुनाव में कितना महत्व है, इस बात का अंदाजा इससे लग जाता है कि दूसरे चरण में पार्टियों के 35 से 98 प्रतिशत तक उम्मीदवार करोड़पति हैं। यही नहीं 14 प्रतिशत से 67 प्रतिशत तक उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसने नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि प्रदेश की 38 प्रतिशत जनता गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर करती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61efa709da79c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपीः दूसरे चरण में 260 उम्मीदवार करोड़पति, शाहजहांपुर के निर्दलीय प्रत्याशी के पास सिर्फ 6,700 रुपए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61efa709da79c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में 25 फीसदी उम्मीदवार दागी, आधे सिर्फ 12वीं तक पढ़े]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/almost-25-percent-candidates-in-punjab-have-criminal-cases-against-them.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 12 Feb 2022 00:26:13 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/almost-25-percent-candidates-in-punjab-have-criminal-cases-against-them.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब विधानसभा की 117 सीटों के लिए चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में करीब एक चौथाई के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स और पंजाब इलेक्शन वॉच की एक रिपोर्ट के अनुसार 20 फरवरी को होने वाले मतदान के लिए 1304 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें से 1276 के एफिडेविट के विश्लेषण से पता चलता है कि इनमें से 315 उम्मीदवारों ने आपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है।</p>
<p>इनमें से 218 के खिलाफ गंभीर किस्म के मामले हैं। 15 ने महिलाओं के खिलाफ अपराध की जानकारी दी है। दो पर बलात्कार का आरोप है। 2017 में सिर्फ 9 फीसदी उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी थी। पार्टियों के हिसाब से देखा जाए तो शिरोमणि अकाली दल के 68 फीसदी, आम आदमी पार्टी के 58 फीसदी और भारतीय जनता पार्टी के 27 फीसदी उम्मीदवारों ने एफिडेविट में अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है।</p>
<p>एडीआर की इकाई पिउ के राज्य संयोजक जसकीरत सिंह ने यह रिपोर्ट जारी की। आधे से ज्यादा उम्मीदवारों ने 12वीं तक की ही पढ़ाई की है। 695 प्रत्याशियों ने पांचवी से 12वीं तक की शिक्षा ग्रहण की है। सिर्फ 483 प्रत्याशी ऐसे हैं जिनकी शिक्षा ग्रेजुएट या इससे ऊपर की है।</p>
<p>इस बार चुनाव लड़ने वालों के पास पिछली बार के मुकाबले ज्यादा पैसे हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में औसत संपत्ति 3.49 करोड़ रुपए थी, इस बार 4.31 करोड़ रुपए है। आम आदमी पार्टी के मोहाली से उम्मीदवार कुलवंत सिंह के पास सबसे ज्यादा 238 करोड़ रुपए की संपत्ति है। कुलवंत सिंह रियल एस्टेट बिजनेस में हैं। दूसरे नंबर पर शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल (202 करोड़) और तीसरे नंबर पर मुक्तसर से कांग्रेस प्रत्याशी करण कौर बरार (155 करोड़) हैं। 226 प्रत्याशियों के पास पांच करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f2d2ad89c4b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में 25 फीसदी उम्मीदवार दागी, आधे सिर्फ 12वीं तक पढ़े ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f2d2ad89c4b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंडः असम के मुख्यमंत्री की राहुल के खिलाफ ओछी टिप्पणी, अन्य मामले में भाजपा को आयोग की हिदायत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/assam-cm-himanta-sarma-slanders-against-rahul.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 12 Feb 2022 00:23:43 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/assam-cm-himanta-sarma-slanders-against-rahul.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चुनाव प्रचार में नीचे गिरने की एक और हद पार करते हुए असम के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के खिलाफ बड़ी ही ओछी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि क्या भाजपा ने कभी इस बात का सबूत मांगा है कि राहुल, राजीव गांधी के बेटे हैं।</p>
<p>राहुल ने सितंबर 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक के तथाकथित रूप से सबूत मांगे थे और कोविड-19 वैक्सीन की क्षमता पर भी सवाल उठाए थे। उसी का जिक्र करते हुए असम के मुख्यमंत्री ने देहरादून में एक चुनावी सभा में यह टिप्पणी की। वे उत्तराखंड विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कभी मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने के बाद कहती है तो कभी मदरसा की, उसे हर एक की शिक्षा की बात करनी चाहिए।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_6206b0aa378fb.jpg" alt="" /></p>
<p>शुक्रवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का एक वीडियो वायरल हुआ। जिसमें वे ये कह रहे हैं कि &ldquo;उत्तराखंड में तो भाजपा गई&rdquo;। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को रुद्रपुर में चुनावों सभा को संबोधित करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भी हरिद्वार, रायपुर और सहसपुर में सभाएं हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ टिहरी और कोटद्वार में चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा शनिवार को हल्द्वानी, खटीमा और श्रीनगर में स्वाभिमान रैली को संबोधित करेंगी।</p>
<p><strong>उत्तराखंड भाजपा को चुनाव आयोग की हिदायत</strong></p>
<p>इस बीच चुनाव आयोग ने भारतीय जनता पार्टी की उत्तराखंड इकाई को चुनाव आचार संहिता का पालन करने की हिदायत दी है। पार्टी ने हाल ही कांग्रेस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को मौलवी के रूप में दिखाते हुए तस्वीर ट्वीट की थी। इस पर चुनाव आयोग ने पिछले हफ्ते भाजपा को नोटिस जारी किया था। शुक्रवार को उसने चेतावनी दी।</p>
<p>आयोग के अनुसार पार्टी ने जो जवाब दिया है उसमें उसने कहा है कि ट्वीट करने का मकसद चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करना या धर्म, जाति, नस्ल या भाषा के आधार पर लोगों के बीच मतभेद पैदा करना नहीं था। पार्टी ने यह भी कहा है कि उस ट्वीट को उसके ट्विटर हैंडल से हटा दिया गया है।</p>
<p>आयोग का कहना है कि उसे उत्तराखंड भाजपा का यह जवाब संतोषजनक नहीं लगा। भारतीय दंड संहिता और जनप्रतिनिधित्व कानून की विभिन्न धाराओं के तहत एफआइआर भी दर्ज की गई है। 70 सीटों वाली उत्तराखंड विधानसभा के लिए 14 फरवरी को मतदान होना है। मतगणना बाकी चार राज्यों के साथ 10 मार्च को होगी।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6206b089a1c13.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंडः असम के मुख्यमंत्री की राहुल के खिलाफ ओछी टिप्पणी, अन्य मामले में भाजपा को आयोग की हिदायत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6206b089a1c13.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में पहले चरण में 60 फीसदी से कुछ अधिक वोटिंग, सबसे ज्यादा मतदान शामली और मुजफ्फरनगर में]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/up-first-phase-polls-record-over-60-percent-turnout.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 10 Feb 2022 22:40:52 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/up-first-phase-polls-record-over-60-percent-turnout.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार को पहले चरण का मतदान पूरा हो गया। प्रदेश की 11 जिलों की 58 सीटों पर वोट डाले गए। हालांकि मतदान का प्रतिशत बहुत उत्साहजनक नहीं रहा। 2017 के 63.47 फीसदी की तुलना में इस बार 60 फीसदी से कुछ अधिक मतदाताओं ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया।</p>
<p>चुनाव आयोग के अनुसार शामली में सबसे ज्यादा 69.42 फीसदी वोट पड़े। मुजफ्फरनगर में 65.34 फीसदी, मथुरा में 63.28 फीसदी, बागपत में 61.35 फीसदी, मेरठ में 60.91 फीसदी, बुलंदशहर में 60.52 फीसदी, हापुड़ में 60.50 फीसदी, अलीगढ़ में 60.49 फीसदी, आगरा में 60.33 फीसदी, गौतमबुद्ध नगर में 56.73 फीसदी और गाजियाबाद में सबसे कम 54.77 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले। लगता है कि एनसीआर के दोनों जिलों में मतदाताओं ने छुट्टी का इस्तेमाल घूमने और आराम करने में किया।</p>
<p>अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी बीडी राम तिवारी के अनुसार कुछ जगहों से ईवीएम में शिकायतें आई थीं, लेकिन उन्हें जल्दी ही बदल दिया गया। गाजियाबाद में एक बूथ पर भाजपा नेता वीके सिंह और कांग्रेस के राजन कांत के समर्थकों के बीच उस समय विवाद हो गया जब सिंह मतदान केंद्र परिसर में ही पत्रकारों को भाजपा सरकार के काम गिनाने लगे।</p>
<p>राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी समय पर न पहुंचने के कारण वोट नहीं डाल सके, हालांकि उनकी पत्नी चारू चौधरी ने मथुरा में वोट डाला। यहां सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी संजय लाथर ने पुलिस पर पार्टी कार्यकर्ताओं को पीटने का आरोप लगाया है।</p>
<p>इन 58 सीटों के लिए कुल 623 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें योगी सरकार में मंत्री श्रीकांत शर्मा, सुरेश राणा, संदीप सिंह, कपिलदेव अग्रवाल, अतुल गर्ग और चौधरी लक्ष्मी नारायण शामिल हैं। अन्य चर्चित उम्मीदवारों में संगीत सोम, नाहिद हसन शामिल हैं। 2017 में भाजपा ने 58 में से 53 सीटों पर जीत दर्ज की थी। सपा और बसपा को दो-दो तथा रालोद को एक सीट मिली थी।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620548b82e185.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में पहले चरण में 60 फीसदी से कुछ अधिक वोटिंग, सबसे ज्यादा मतदान शामली और मुजफ्फरनगर में ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620548b82e185.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी चुनावः पहले चरण में गठबंधन के साथ सीधी टक्कर में भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ीं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/in-first-phase-of-up-election-bjp-seems-in-trouble.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 10 Feb 2022 17:37:14 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/in-first-phase-of-up-election-bjp-seems-in-trouble.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>सरधना, भैंसवाल (थानाभवन) और अजीजपुर (कैराना) से</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार को पहले चरण में 58 सीटों पर मतदान हुआ। शाम तक 60 फीसदी से कुछ ज्यादा वोट डाले गए। हालांकि शाम पांच बजे तक कैराना के अजीजपुर गांव समेत कई जगहों पर मतदाताओं की लंबी कतार दिखी। मतदान के समय रूरल वॉयस ने कई इलाकों का दौरा किया। मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी-राष्ट्रीय लोक दल गठबंधन के बीच ही दिखा। अनेक जगहों पर लोग बसपा प्रत्याशियों के नाम तक नहीं बता सके। एक खास बात यह दिखी कि जाट और मुस्लिम वोट नहीं टूट रहे। कुछ दलित मतदाता जरूर भाजपा का समर्थन करते दिखे।</p>
<p>अच्छी बात यह रही कि इक्का-दुक्का घटनाओं को छोड़ दें तो मतदान के दौरान कहीं तनाव का माहौल नहीं दिखा। कहीं भी पुलिस या प्रशासन को सख्ती करने की नौबत नहीं आई। हां, अनेक जगहों पर लोगों ने वोट कटने की शिकायत जरूर की। उनके नाम वोटर लिस्ट में नहीं थे। लेकिन यह शिकायत सभी पक्ष के लोगों की है।</p>
<p>हाई प्रोफाइल सीटों में मेरठ जिले की सरधना सीट पर भाजपा के मौजूदा विधायक संगीत सोम के लिए चुनौती मुश्किल होती दिख रही है। सोम का यह तीसरा चुनाव है। यहां जाट और मुसलमानों के साथ गुर्जर भी सपा-रालोद गठबंधन का समर्थन करते दिखे। पिछली बार यहां से अतुल प्रधान करीब 24 हजार वोटों से हारे थे। इस बार वे ही गठबंधन के उम्मीदवार हैं। यहां चांदना गांव के जाट किसान अजय कुमार ने बताया कि ज्यादातर जाट प्रधान के पक्ष में हैं। बुढाना सीट के बिटावदा गांव के अशोक सिंह और शामली के सिंभालका गांव के जसवीर सिंह की राय भी यही थी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_6204ffe351049.jpg" alt="" /></p>
<p>शामली जिले के थानाभवन विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों का दौरा करने पर पता चला कि जाट वोट यहां भी नहीं बंट रहे। गांव भैंसवाल निवासी राजबीर सिंह और उदयवीर सिंह ने बताया कि यहां प्रदेश के गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा के प्रति मतदाताओं में काफी नाराजगी है। जिला पंचायत सदस्य और स्थानीय रालोद नेता उमेश पंवार ने बताया कि यहां ज्यादातर वोट गठबंधन उम्मीदवार को ही मिल रहे हैं।</p>
<p>शामली सदर में भाजपा और सपा-रालोद, दोनों के जाट प्रत्याशी हैं। शामली शहर में हिंदू कन्या इंटर कॉलेज में बने मतदान केंद्र पर रालोद प्रत्याशी प्रसन्न चौधरी के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस को हल्की सख्ती करनी पड़ी। यहां बड़े गांवों के जाट मतदाता गठबंधन का समर्थन करते दिखे। इस सीट से भाजपा प्रत्याशी और मौजूदा विधायक तेजिंदर निरवाल को जाटों के वोट मिलते नहीं दिखे। लेकिन शहरी इलाकों में व्यापारी वर्ग और दलित वोटों का लाभ उन्हें मिल सकता है। सिवालखास सीट के दबथुआ गांव के रामवीर सिंह ने बताया कि जाट वोटरों ने रालोद प्रत्याशी गुलाम मोहम्मद को वोट दिया है।</p>
<p>बहुचर्चित और मुस्लिम बहुल कैराना विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह की स्थिति इस बार भी कमजोर लग रही है। मृगांका यहां के बड़े नेता रहे स्व. हुकुम सिंह की बेटी हैं। उनके निवास की बैठक में ही मायूसी दिखी। वहां लोग-बाग भी गिने चुने ही थे। इस सीट पर मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में वोट डालते दिखे। यहां करीब आठ हजार सिख भी हैं, उनका वोट भी गठबंधन की तरफ था। आमवाली, कमालपुर जैसे जाटों के गांव में रालोद के कारण बहुमत वोट गठबंधन के प्रत्याशी नाहिद हसन को गया है। यहां करीब 20 हजार जाट मतदाता हैं। हालांकि गुर्जर बहुल कंडेला गांव में ज्यादातर मतदाता भाजपा के पक्ष में दिखे।</p>
<p>बसपा को कुछ ही दलित वोट मिल रहे हैं। दलित वोटों पर भाजपा और गठबंधन का भी दावा है। मेरठ कैंट में बसपा प्रत्याशी का बैनर भी दिखा और मेरठ कैंट में सरधना रोड पर कुछ मतदाता बसपा का समर्थन करते भी दिखे। यह सीट रालोद की सबसे कमजोर सीट बताई जा रही है। हालांकि यहां भी जाट मतदाता जयंत चौधरी के नाम पर वोट डाल रहे हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_62050b8367450.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी चुनावः पहले चरण में गठबंधन के साथ सीधी टक्कर में भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ीं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_62050b8367450.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में पहले चरण के मतदान में भाजपा और सपा&amp;#45;रालोद गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/in-first-phase-of-up-polls-fight-is-between-bjp-and-sp-rld-alliance.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 10 Feb 2022 08:36:57 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/in-first-phase-of-up-polls-fight-is-between-bjp-and-sp-rld-alliance.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>बागपत, बड़ौत और शामली से</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 58 सीटों के लिए आज मतदान हो रहा है। चुनिंदा सीटों को छोड़ दें तो अधिकांश सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल-समाजवादी पार्टी गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला है। किसान आंदोलन और जाट-मुस्लिम समीकरण के साथ आने के अलावा बेरोजगारी ऐसा बड़ा मुद्दा है जिसने युवाओं को इस चुनाव के केंद्र में ला दिया है। पिछले तीन चुनावों 2014 के लोक सभा चुनाव, 2017 के विधान सभा चुनाव और 2019 के लोक सभा चुनावों में पहले चरण का मतदान भी इस इलाके में ही हुआ था और वह भाजपा के लिए फायदेमंद रहा था। लेकिन इस बार की परिस्थितियां भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी करती दिख रही हैं। बागपत, गाजियाबाद, मेरठ, शामली, हापुड़ और मुजफ्फरनगर जिलों की विधान सभा सीटों पर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) चुनाव लड़ती नहीं दिख रही है। ऐसे में मुकाबला भाजपा और रालोद-सपा गठबंधन के बीच ही दिख रहा है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_62040390eaead.jpg" alt="" /></p>
<p>बागपत में जूते की दुकान चलाने वाले सुनील जैन कहते हैं कि इस सीट पर रालोद प्रत्याशी अहमद हमीद और भाजपा प्रत्याशी योगेश धामा के बीच सीधा मुकाबला है। वह नहीं जानते कि यहां बसपा से कौन चुनाव लड़ रहा है। ऑनलाइन रिटेल कंपनियों और जूते पर जीएसटी दरों में बढ़ोतरी के चलते कमजोर पड़ते कारोबार से परेशान सुनील जैन कहते हैं कि कोरोना के बाद से कारोबार पटरी पर नहीं आ रहा है। महंगाई एक बड़ा मुद्दा है। किसान आंदोलन का असर इस चुनाव पर वह देखते हैं। साथ ही उनका कहना है एक बेटा है जो कामकाज की उम्र का हो चुका है। नौकरी नहीं मिली इसलिए उसने इसी दुकान का काम देखना शुरू कर दिया है। भाजपा समर्थक जैन बताते हैं कि इस सीट पर जाट मत चुनाव तय करेंगे। अगर योगेश धामा अधिक जाट वोट ले गये तो अहमद हमीद के लिए मुश्किल हो सकती है।</p>
<p>इससे थोड़ा आगे बड़ौत सीट है। यहां मौजूदा भाजपा विधायक कृष्ण पाल मलिक अपनी ही पार्टी के लोगों की बेरुखी से परेशान हैं। हालांकि वह आश्वस्त हैं कि चुनाव जीत रहे हैं। लेकिन बड़ौत में रालोद कार्यालय का माहौल बहुत आशावादी है। वहां विक्रम सिंह आर्य समझाते हैं कि 80 हजार जाट वोट और 55 हजार मुस्लिम वोट से नतीजा हमारे पक्ष में होगा। उनका दावा है कि बसपा का दलित वोट भी हमारे पास आ रहा है। वैसे बसपा वोटों के लिए भाजपा और रालोद-सपा गठबंधन दोनों अपने अपने-अपने दावे करते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश दिख जाते हैं। यहां से थोड़ा आगे बावली गांव में जिस तरह रालोद प्रत्याशी का सैकड़ों लोगों का काफिला चलता दिखता है वह चुनाव के माहौल को काफी हद तक साफ करता है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_6204039b0a5b5.jpg" alt="" /></p>
<p>इससे आगे कैराना, शामली, थानाभवन, बुढ़ाना, चरथावल, मुजफ्फरनगर, पुरकाजी, मीरापुर, खतौली, सरधना, सिवालखास, मेरठ दक्षिण, मेरठ शहर, किठौर, मोदीनगर, मुरादनगर, हापुड़, धौलाना और लोनी समेत तमाम सीटों पर सीधा मुकाबला गठबंधन और भाजपा के बीच साफ दिख जाता है। वोटरों के बीच किसी तरह का असमंजस भी नहीं है।</p>
<p>मसलन कैराना सीट के आमवाली गांव के नसीम कहते हैं बच्चों को रोजगार नहीं मिल रहा है। वहीं किसान ओमवीर कहते हैं कि किसानों ने 13 महीने दिल्ली में बिताये जो हमें वोट डालते वक्त याद रहेगा। हालांकि वह कहते हैं कि बिजली तो बेहतर आ रही है और अब खेत में पानी देने के लिए रात में नहीं जागना पड़ता, लेकिन वह इतनी महंगी है कि हमारे लिए इसके दाम चुकाना भारी पड़ रहा है। ओमवीर की शिकायत गन्ना मूल्य भुगतान में देरी और योगी सरकार में राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में केवल 35 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी भी है।</p>
<p>सरधना के योगेश उपाध्याय कहते हैं कि बेरोजगारी हमारे लिए बहुत बड़ी मुश्किल है। बैट्री रिक्शा चलाकर गुजारा करने वाले उपाध्याय कहते हैं कि कोरोना में खुद का और पत्नी का इलाज कराने में दो लाख रुपये से ज्यादा लगे, जिसके लिए कर्ज लिया था जो चुकाना मुश्किल हो रहा है। वे रिक्शा चलाते हैं और पत्नी चाय की दुकान चलाती हैं, कमाई फिर भी बहुत कम है। थानाभवन सीट में आने वाले गांव भैंसवाल के रहने वाले जिला पंचायत सदस्य उमेश पंवार का कहना है कि हमारी सीट से विधायक राज्य के गन्ना विकास मंत्री हैं, लेकिन हमारे यहां गन्ना भुगतान को लेकर स्थिति बदतर है।</p>
<p>महंगाई, बेरोजगारी और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले अवारा पशु एक बड़ी समस्या है। किसान कहते हैं कि शाम को हम सभी को खेतों में जाना पड़ता है। यह मुद्दा पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है।</p>
<p>चुनावों में दलित युवकों का एक बड़ा वर्ग बसपा के साथ न जाकर विपक्ष के साथ जा सकता है और उसकी वजह रोजगार की खराब होती स्थिति को माना जा रहा है। अधिकांश दलित अपनी पहचान जाहिर नहीं कर इस तरह की बातें करते हैं। यह बातें हर विधान सभा सीटों पर सुनने को मिलती हैं। असल में दलित, मुस्लिम, जाट और दूसरी जातियों के युवाओं को सरकार के खिलाफ नाराज करने का सबसे बड़ा काम बेरोजोगारी के मुद्दे ने किया है। इसका कोई ठोस जवाब भाजपा और सरकार के पास नहीं है। यह बात भी साफ होती है कि चुनावों के इस चरण में हिंदू-मुस्लिम के आधार पर मतों का बहुत बड़ा विभाजन होता नहीं दिखता है। मुस्लिम मतों में बंटवारे की संभावना भी बहुत कमजोर है।</p>
<p>हालांकि भाजपा नेताओं का दावा है कि कानून व्यवस्था की बेहतर स्थिति और लाभार्थियों को मिलने वाली सरकारी योजनाओं के फायदे के चलते दलित मतों का बड़ा हिस्सा भाजपा को मिलेगा। इसके चलते जाट-मुस्लिम गठबंधन का गणित गड़बड़ा जाएगा। बड़ी संख्या में कमजोर तबके के लोग भी स्वीकार करते हैं कि उन्हें मुफ्त अनाज मिल रहा है और राशन के तहत भी अनाज मिल रहा है।</p>
<p>पहले चरण का मतदान अगले चरणों पर असर डाल सकता है। हालांकि पहले चरण में आगरा, मथुरा, बुलंदशहर और अलीगढ़ की सीटों पर रालोद-सपा गठबंधन उतना मजबूत नहीं है जितना दोआब के उपरी हिस्से में है। अलीगढ़ और आगरा में कुछ सीटों पर जरूर बसपा भी लड़ती दिख रही है। इसलिए इस मुकाबले ने मतदान के पहले चरण को काफी दिलचस्प बना दिया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6204c918df0f9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में पहले चरण के मतदान में भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6204c918df0f9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कांग्रेस का वादा&amp;#45; गन्ने की कीमत 400 रुपये होगी, 20 लाख सरकारी नौकरियां सृजित की जाएंगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/the-congress-said-that-if-it-comes-to-power-in-uttar-pradesh-the-price-of-sugarcane-will-be-rs-400-per-quintal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 09 Feb 2022 19:04:52 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/the-congress-said-that-if-it-comes-to-power-in-uttar-pradesh-the-price-of-sugarcane-will-be-rs-400-per-quintal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण के मतदान से एक दिन पहले कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को घोषणा पत्र जारी किया। इसमें कृषि कर्ज की माफी और सब्सिडी वाली बिजली देने का वादा किया गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद के साथ यूपी की प्रभारी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने राज्य पार्टी मुख्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, कि हम यूपी में सरकार बनाने के 10 दिनों के भीतर किसानों के कर्ज माफ करने का वादा करते हैं। मंगलवार को भाजपा और समाजवादी पार्टी ने अपने घोषणा पत्र जारी किए थे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो 2027 तक राज्य में कृषि क्षेत्र को कर्ज से मुक्त कर देगी।</p>
<p>प्रियंका ने कहा कि लोगों से फीडबैक लेकर और उनकी आकांक्षाओं को शामिल कर यह घोषणा पत्र तैयार किया गया है। पार्टी ने सत्ता में आने पर गन्ने की कीमत 400 रुपये प्रति क्विंटल और धान तथा गेहूं की कीमत 2500 रुपये प्रति क्विंटल तय करने का वादा किया है। कंपोस्टिंग के लिए कांग्रेस सरकार दो रुपये प्रति किलो की दर से गाय का गोबर खरीदेगी। पार्टी के इस मॉडल को छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार ने लागू किया है।</p>
<p>प्रियंका गांधी ने कहा कि कांग्रेस सरकार बिजली बिलों को आधा कर देगी, जबकि कोविड अवधि के बकाया बिजली बिल माफ कर दिए जाएंगे। कोराना महामारी के कारण आर्थिक रूप से प्रभावित परिवारों को 25,000 रुपये का अनुदान दिया जाएगा।</p>
<p>पार्टी ने 12 लाख रिक्तियों को भरने के अलावा राज्य में 20 लाख सरकारी नौकरियां सृजित करने का वादा किया है। इनमें से चालीस फीसदी नौकरियां महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। पार्टी ने कहा कि अगर वह सत्ता में आती है तो सरकारी विभागों में संविदा नौकरी का खाका खत्म कर देगी और शिक्षा मित्र के रोजगार को भी नियमित कर देगी। कांग्रेस सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के कल्याण के लिए पुरानी पेंशन योजना को भी खत्म करने के पक्ष में है।</p>
<p>कांग्रेस पार्टी ने सबसे वंचित वर्गों को उप-कोटा आरक्षण देने की बात कही है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में एक पद भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित किया जाएगा। प्रियंका गांधी ने कहा &nbsp;मीडियाकर्मियों के खिलाफ उनकी स्वतंत्र रिपोर्टिंग से जुड़े &nbsp;मामलों को भी खत्म कर देंगे।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6203d5db3cbe7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कांग्रेस का वादा- गन्ने की कीमत 400 रुपये होगी, 20 लाख सरकारी नौकरियां सृजित की जाएंगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6203d5db3cbe7.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सपा का पुरानी पेंशन योजना फिर शुरू करने का वादा, जानिए और क्या है सपा और भाजपा के घोषणापत्र में]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/samajwadi-party-announces-in-its-manifesto-to-resume-old-pension-system.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 09 Feb 2022 12:33:10 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/samajwadi-party-announces-in-its-manifesto-to-resume-old-pension-system.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में पहले चरण के मतदान से दो दिन पहले मंगलवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने अपने चुनाव घोषणा पत्र जारी किए। भाजपा अपने घोषणा पत्र को संकल्प पत्र कहती है तो समाजवादी पार्टी ने अपने&nbsp; घोषणापत्र को समाजवादी वचन पत्र नाम दिया है। सपा ने केंद्र सरकार की स्कीम मनरेगा की तर्ज पर शहरी रोजगार गारंटी कानून लाने, सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 33 फ़ीसदी आरक्षण देने के साथ किसानों से भी कई वादे किए हैं। एक और महत्वपूर्ण वादा पेंशन का है। सपा ने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि उनकी सरकार बनने पर सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना फिर से लागू की जाएगी। सपा का वादा शिक्षामित्रों को तीन साल में नियमित सरकारी नौकरी देने और एमएसएमई सेक्टर में एक करोड़ रोजगार सृजित करने का है। भाजपा ने भी किसानों से कुछ वादे किए हैं। अभी तक मुफ्त योजनाओं से परहेज करने वाली पार्टी ने भी ऐसी कुछ घोषणाएं की हैं। उसने यह भी कहा है कि देवबंद में 5 साल के भीतर एंटी टेररिस्ट कमांडो सेंटर की स्थापना का कार्य पूरा किया जाएगा। इसी तरह के केंद्र मेरठ, रामपुर, आजमगढ़, कानपुर और बहराइच में खोले जाएंगे। भगवान राम से जुड़े शोध कार्यों के लिए रामायण विश्वविद्यालय स्थापित करने का भी वादा है।</p>
<p><strong>किसानों से वादे</strong></p>
<p>किसानों से वादे की बात करें तो सपा ने सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने और किसानों को गन्ने की कीमत का भुगतान 15 दिनों में सुनिश्चित करने का वादा किया है। पार्टी का कहना है कि अगर जरूरी हुआ तो इसके लिए अलग फंड भी बनाया जाएगा। सभी किसानों को 2025 तक कर्ज मुक्त करने और बेहद गरीब किसानों के लिए कर्ज राहत कानून लाने की भी बात है। दो एकड़ से कम जमीन वाले किसानों को दो बैग डीएपी, पांच बैग यूरिया, सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली, कर्ज मुक्त लोन, बीमा और पेंशन के साथ किसान आंदोलन में जान गंवाने वालों के परिजनों को 25-25 लाख रुपए देने का वादा किया गया है। मृत किसानों की याद में मेमोरियल बनाने और हर जिले में किसान बाजार स्थापित करने का भी वादा है। भाजपा ने किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली, गन्ने के भुगतान में तेजी और गेहूं तथा चावल के लिए एमएसपी व्यवस्था को मजबूत बनाने का वादा किया है। पार्टी का कहना है कि अगर चीनी मिलों ने 14 दिनों के भीतर गन्ने का भुगतान नहीं किया तो बाकी बची रकम पर ब्याज का प्रावधान किया जाएगा।</p>
<p><strong>साल में दो गैस सिलिंडर</strong></p>
<p>पार्टियों ने सामान्य मतदाताओं के लिए भी कुछ घोषणाएं की हैं। सपा ने गरीबी रेखा से नीचे के हर परिवार को साल में दो मुफ्त रसोई गैस सिलिंडर, दोपहिया वाहन को प्रतिमाह एक लीटर पेट्रोल और ऑटो रिक्शा ड्राइवर को 3 लीटर पेट्रोल और 6 किलो सीएनजी देने का वादा किया गया है। भाजपा का वादा है कि होली और दीपावली के मौके पर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की हर लाभार्थी को एक-एक रसोई गैस सिलिंडर मुफ्त दिया जाएगा। सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं के लिए शौचालय बनाए जाएंगे और इसके लिए 1000 करोड़ रुपए खर्च करने की बात कही गई है।</p>
<p><strong>शहरी रोजगार गारंटी कानून</strong></p>
<p>समाजवादी पार्टी के घोषणा पत्र के अनुसार मनरेगा की तर्ज पर शहरी रोजगार गारंटी योजना कानून लाया जाएगा। आईटी सेक्टर में तेजी लाने के लिए समीक्षा की जाएगी ताकि 22 लाख लोगों को रोजगार दिलाया जा सके। एमएसएमई सेक्टर को भी रिवाइव करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि वे विकास का इंजन बन सकें तथा 2027 तक उनमें एक करोड़ लोगों को रोजगार मिल सके। शिक्षामित्रों का पारिश्रमिक बढ़ाया जाएगा और तीन साल में उन्हें सरकारी नियमित नौकरी दी जाएगी। पार्टी ने समाजवादी पेंशन योजना शुरू करने की बात कही है जिसके तहत बुजुर्गों तथा गरीबी रेखा से नीचे की महिलाओं को प्रतिवर्ष 18000 रुपये पेंशन दी जाएगी। इससे एक करोड़ गरीब परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। गरीब श्रमिकों और बेघर लोगों के लिए समाजवादी किराना स्टोर खोलने की बात है तो 10 रुपए में समाजवादी थाली देने का भी वादा है। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में गरीबों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराने के लिए मां अन्नपूर्णा कैंटीन खोलने की बात कही है। युवाओं के लिए पांच वर्षों में तीन करोड़ स्वरोजगार के अवसर पैदा करने का वादा है। इसने कहा है कि हर परिवार में कम से कम एक को नौकरी या स्वरोजगार का अवसर मुहैया कराया जाएगा।</p>
<p><strong>बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का वादा</strong></p>
<p>घोषणा पत्र जारी करते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने के अपने पुराने वादे को दोहराते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में 24 घंटे बिजली सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने 2027 तक प्रदेश को 100 फ़ीसदी साक्षर बनाने का भी वादा किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का स्वास्थ्य बजट तीन गुना बढ़ाया जाएगा ताकि गरीबों को भी अच्छी क्वालिटी की स्वास्थ्य सेवा मिल सके। भाजपा का वादा है कि हर जिले में आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित एक सरकारी अस्पताल बनाया जाएगा और प्रदेश को 2025 तक टीबी मुक्त किया जाएगा।</p>
<p><strong>महिला सशक्तीकरण के लिए</strong></p>
<p>महिला सशक्तीकरण के लिए सपा का वादा है कि सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 33 फ़ीसदी आरक्षण दिया जाएगा, महिला हेल्पलाइन 1090 को मजबूत किया जाएगा।&nbsp; ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए भी शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी। कन्या विद्या धन योजना शुरू की जाएगी जिसके तहत 12वीं कक्षा पास करने वाली लड़कियों को एकमुश्त 36000 रुपए दिए जाएंगे। महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी घोषणा यह है कि केजी स्तर से लेकर मास्टर्स तक लड़कियों को मुफ्त शिक्षा दी जाएगी। भाजपा ने रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत मेधावी छात्राओं को मुफ्त में स्कूटी देने का वादा किया है। स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत दो करोड़ टेबलेट और स्मार्टफोन छात्र-छात्राओं को दिए जाएंगे।</p>
<p><strong>जीरो टॉलरेंस बनाम लव जिहाद</strong></p>
<p>भारतीय जनता पार्टी, सपा की पिछली सरकार के समय के कानून व्यवस्था मुद्दे को बार-बार उठा रही है। अपने घोषणा पत्र में सपा ने सभी गांवों और शहरों में एक साल के भीतर सीसीटीवी कैमरा लगाने का वादा किया है। एक और वादा सभी थानों को भ्रष्टाचार मुक्त करने का भी है। पुलिसकर्मियों को सप्ताह में एक दिन छुट्टी मिलेगी और लंबित प्रमोशन जारी किए जाएंगे। महिलाओं अल्पसंख्यकों और दलितों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले अपराध के प्रति पार्टी ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का वादा किया है। भाजपा ने अपने लोक कल्याण संकल्प पत्र में कहा है कि धर्म बदलने पर रोक लगाने वाले कानून में संशोधन करके कम से कम 10 साल कैद और एक लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा। अपराधियों और माफिया के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। हर थाने में एक साइबर हेल्प डेस्क बनाई जाएगी। महिलाओं तथा पुरुष पुलिसकर्मियों के लिए अलग-अलग बैरक बनाए जाएंगे।</p>
<p>भाजपा के घोषणा पत्र में 5 वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित करने, अटल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत औद्योगिक क्षेत्रों को आधुनिक बनाने, मेजर ध्यानचंद मिशन के तहत हर सरकारी स्कूल और कॉलेज में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के वादे भी हैं। लोक संगीत, नृत्य और नाटक को बढ़ावा देने के लिए लता मंगेशकर परफॉर्मिंग आर्ट्स अकादमी खोलने की बात कही गई है।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_62036724b7480.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सपा का पुरानी पेंशन योजना फिर शुरू करने का वादा, जानिए और क्या है सपा और भाजपा के घोषणापत्र में ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_62036724b7480.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार से नाराज हर वर्ग हमारे साथ हैः इक़रा हसन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/iqra-hasan-says-everyone-unhappy-with-the-government-is-with-us.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 09 Feb 2022 10:18:08 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/iqra-hasan-says-everyone-unhappy-with-the-government-is-with-us.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गुरुवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के पहले चरण में 58 सीटों पर मतदान होने हैं। शामली जिले की कैराना सीट इस चरण में सबसे चर्चित है। केंद्रीय गृह मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अमित शाह ने 22 जनवरी को यहीं से अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की और पलायन का मुद्दा उठाकर माहौल बदलने की कोशिश की। यहां भारतीय जनता पार्टी की तरफ से पूर्व सांसद स्वर्गीय हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह और समाजवादी पार्टी तथा राष्ट्रीय लोक दल गठबंधन की तरफ से नाहिद हसन मुख्य उम्मीदवार हैं। नाहिद ने 2017 के चुनाव में मृगांका को 21 हजार से अधिक वोटों से हराया था। उससे पहले 2014 के उपचुनावों में भी नाहिद को जीत मिली थी। हालांकि उससे पहले 2007 और 2012 में भाजपा के हुकुम सिंह जीते थे। नाहिद के पिता स्वर्गीय मुनव्वर हसन भी दो बार कैराना से विधायक और मुजफ्फरनगर से दो बार सांसद रहे। इस बार सपा प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद नाहिद को 16 जनवरी को अचानक गिरफ्तार कर लिया गया। उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट और असामाजिक गतिविधि (रोकथाम) एक्ट के तहत 2021 में दर्ज एक मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई। दो बार सांसद रह चुकी उनकी मां तबस्सुम हसन पर भी गैंगस्टर एक्ट लगा दिया गया।</p>
<p>इन परिस्थितियों में नाहिद के लिए चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी उनकी बहन<strong> इक़रा हसन</strong> ने उठाई। दिल्ली यूनिवर्सिटी के हाई प्रोफाइल लेडी श्रीराम कालेज से हिस्ट्री में ग्रेजुएट इक़रा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ही स्कूल ऑफ लॉ से एलएलबी की है। उसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के स्कूल ऑफ ओरियंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (एसओएएस) से इंटरनेशनल लॉ&nbsp; एंड पालिटिक्स में मास्टर्स किया। कभी सक्रिय राजनीति में नहीं आने की ख्वाहिश रखने वाले इक़रा ने बड़ी शिद्दत के साथ भाई नाहिद के लिए प्रचार किया और अब जीत के प्रति आश्वस्त हैं। उनके लिए इस चुनाव के क्या मायने हैं, किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा, चुनाव से क्या उम्मीद है, इन सब मुद्दों पर <strong>इकरा हसन</strong> से बात की <strong>रूरल वॉयस</strong> के संपादक <strong>हरवीर सिंह</strong> ने। यह बातचीत 6 फरवरी को हुई। मुख्य अंशः-</p>
<p><strong>चुनाव तो नाहिद हसन का है। आपकी मां भी चुनाव प्रचार नहीं कर सकीं। इस जिम्मेदारी को निभाते हुए आपको कैसा लगा</strong><strong>?</strong></p>
<p>बहुत कठिन परिस्थितियां रहीं। एक तरह से हमारे परिवार की घेराबंदी करने की कोशिश की गई। हमारा राजनीतिक परिवार रहा है, उसे खत्म करने की साजिश है। मेरे भाई का चरित्र हनन करने की कोशिश की गई। उसके खिलाफ सभी मामले राजनीति से प्रेरित हैं। 2017 में भाजपा यहां से हारी थी, जब उसने पलायन का मुद्दा उठाया था। फिर हमने 2018 में भी हराया। तभी से उन्होंने मेरे भाई को निशाने पर ले लिया था। सारे मामले उसके बाद के ही हैं। उस पर गैंगस्टर एक्ट लगा दिया गया है। मेरी मां एक सम्मानित महिला हैं, उन पर भी गैंगस्टर एक्ट लगाया गया है। सारे मामले बेबुनियाद हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_6203475465789.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>आपकी मां दो बार सांसद रह चुकी हैं। उन पर गैंगस्टर एक्ट किस मामले में लगाया गया है</strong><strong>?</strong></p>
<p>हमारे विधानसभा क्षेत्र के एक गांव में दो गुटों के बीच झगड़ा हुआ था। उसी मामले में अन्य लोगों के साथ मेरे भाई और मां के ऊपर भी गैंगस्टर एक्ट लगा दिया गया।</p>
<p><strong>आपके भाई के सामने मृगांका सिंह उम्मीदवार हैं। वे भी राजनीतिक परिवार से हैं। हालांकि वे पहले भी नाहिद से चुनाव हार चुकी हैं। नाहिद की तरफ से आप ही चुनाव प्रचार में लगी हैं। तो क्या इसे दो राजनीतिक परिवारों के बीच प्रॉक्सी उम्मीदवारों की लड़ाई मानी जाए</strong><strong>?</strong></p>
<p>मेरे विचार से मृगांका सिंह को प्रॉक्सी उम्मीदवार कहना ठीक नहीं होगा, क्योंकि उनकी अपनी व्यक्तिगत पहचान भी है। वे अपने दम पर चुनाव लड़ने में सक्षम हैं।</p>
<p><strong>जो उम्मीदवार दो बार चुनाव हार चुका हो, उसे तीसरी बार आसानी से टिकट नहीं मिलता। वे हुकुम सिंह की बेटी हैं, शायद इसलिए उन्हें बार-बार मौका मिल रहा है। मेरा सवाल उस संदर्भ में है।</strong></p>
<p>मेरे विचार से यहां का जातिगत समीकरण उन्हें उम्मीदवार बनाने की एक प्रमुख वजह है। अगर आप यहां की डेमोग्राफी देखें तो उससे आपको इसका अंदाजा हो जाएगा। यहां अगड़ी और पिछड़ी जातियों का भी समीकरण है। यहां सबसे बड़ी जाति कश्यप है। पहले किसी कश्यप को ही टिकट दिए जाने की चर्चा थी, लेकिन उनका टिकट काटकर मृगांका सिंह को टिकट दिया गया है।</p>
<p><strong>आपको अलग तरह का परिवेश मिला, इसलिए आप काफी आगे तक गईं। चुनाव लड़ने का माद्दा भी रखती हैं। लेकिन आम तौर पर इस इलाके की महिला मतदाता उतनी मुखर नहीं हैं। आपके समुदाय में भी। वोट देने में महिलाओं का निजी फैसला नहीं होता, परिवार का फैसला ही प्रमुख होता है। इस पर आपकी क्या राय है</strong><strong>?</strong></p>
<p>इसकी बड़ी वजह यहां साक्षरता बहुत कम है, पितृसत्तात्मक समाज है और पिछड़ापन है। यह पिछड़ापन सिर्फ मुस्लिम समुदाय में नहीं बल्कि किसी भी धर्म या जाति की महिलाओं में दिखता है। आपका यह कहना बिल्कुल सही है कि अधिकतर महिलाएं परिवार के पुरुषों के कहने के मुताबिक मतदान करती हैं। क्षेत्रीय राजनीति में महिलाओं को प्रतिनिधित्व नहीं मिलना भी इसका एक कारण है।</p>
<p><strong>भाई और मां के खिलाफ मामले दर्ज हैं, तो ऐसे में अगर पार्टी आपको टिकट देती तो उस परिदृश्य में क्या होता</strong><strong>?</strong></p>
<p>मेरी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं रही है। राजनीति में मेरी हमेशा दिलचस्पी रही, लेकिन खुद राजनीति में कभी हिस्सा नहीं लेना चाहती थी। लेकिन हमारे परिवार की जो घेराबंदी करने की कोशिश की जा रही है, उसका किसी न किसी को तो सामना करना ही था। घर में मेरे अलावा और कोई नहीं जो इस काम को संभाल सकता था। इसलिए मुझे आगे आना पड़ा। मैं चुनाव लड़ने के लिए तैयार थी। मैंने नामांकन भी दाखिल किया था। हमारी रणनीति थी कि अगर किसी कारण मेरे भाई का नामांकन रद्द होता है तो मैं चुनाव लडूंगी। लेकिन अगर भाई का नामांकन रद्द नहीं हुआ तो मैं अपना नाम वापस ले लूंगी। यह बस एहतियात के तौर पर उठाया गया कदम था। इसलिए जैसे ही भाई का नामांकन स्वीकार हुआ, मैंने अपना नाम वापस ले लिया।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_620347750b0c0.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>आपको जीत का भरोसा है तो उसके पीछे आपका चुनावी गणित क्या है</strong><strong>?</strong><strong> वे कौन से समीकरण हैं जो आपको अपने पक्ष में नजर आते हैं</strong><strong>?</strong></p>
<p>एंटी इनकंबेंसी बहुत बड़ी भूमिका निभाएगी। हर वर्ग के लोग सरकार से नाराज हैं। सत्तारूढ़ पार्टी ने पलायन का खोखला मुद्दा फिर से उठाया है। यह दरअसल किसान आंदोलन से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश है। हमारा क्षेत्र गन्ना क्षेत्र है और यहां अनेक लोग खेती-बाड़ी करते हैं। इसलिए किसानों का मुद्दा ही यहां प्रमुख है।</p>
<p><strong>यहां एक बड़ा मुद्दा था हिंदू-मुसलमान का, खासतौर से जाटों और मुसलमानों का। आरएलडी-सपा गठबंधन के कारण आपको कितने जाट वोट मिलने की उम्मीद है</strong><strong>?</strong></p>
<p>मुझे लगता है कि हमें बड़ी संख्या में जाटों के वोट मिलेंगे। यहां राष्ट्रीय लोक दल के प्रमुख जयंत चौधरी जी की भी रैली की थी। उन्होंने लोगों से कहा कि आप सब यह सोचकर वोट दीजिए कि मैं खुद यहां से लड़ रहा हूं। मेरे विचार से इससे बड़ी बात और नहीं हो सकती है। यहां सबने हमें आश्वासन दिया है। इसलिए बड़ी संख्या में जाट, सिख, मुस्लिम, कश्यप वोट हमें मिलने की उम्मीद है। शिक्षामित्र बड़ी तादाद में हमारे साथ हैं। ऐसा नहीं कि कोई खास समुदाय ही हमें वोट दे रहा है। जो लोग इस सरकार के कार्यकाल में पीड़ित रहे, वे सब हमारे साथ हैं।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6203472b2c60f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार से नाराज हर वर्ग हमारे साथ हैः इक़रा हसन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6203472b2c60f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ग्रामीण पंजाब के लिए भाजपा का 11 सूत्री संकल्प, टिकाऊ खेती के लिए 5,000 करोड़ रुपये का वादा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-promises-5000-crore-for-sustainable-agriculture-in-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 08 Feb 2022 20:27:02 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-promises-5000-crore-for-sustainable-agriculture-in-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी, पंजाब लोक कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) गठबंधन ने ग्रामीण क्षेत्र के लिए 11 सूत्री संकल्प पत्र जारी किया है। इसमें टिकाऊ खेती और जैविक खेती के लिए 5,000 करोड़ रुपये का प्रावधान करने, भूजल स्तर बढ़ाने के लिए रेनवाटर हारवेस्टर यूनिट लगाने और खेती से जुड़े क्षेत्रों को बढ़ावा देने के वादे किए गए हैं। संकल्प पत्र भाजपा के प्रदेश प्रभारी गजेंद्र सिंह शेखावत, <span>शिअद (संयुक्त) के सुखदेव सिंह ढींढसा और भाजपा के अन्य नेताओं की मौजूदगी में जारी किया गया। प्रदेश में 20 फरवरी को मतदान होना है।</span></p>
<p>गठबंधन पांच एकड़ से कम जमीन वाले किसानों के सभी कर्ज माफ करने, फल, सब्जी, दालों और तिलहन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने, भूमिहीन किसानों को एक लाख एकड़ शामलात जमीन खेती के लिए देने और पीएम किसान सम्मान योजना के तहत हर भूमिहीन किसान को सालाना छह हजार रुपये की वित्तीय मदद देने का वादा पहले कर चुका है।</p>
<p>इस मौके पर शेखावत ने कहा कि सोलर ट्यूबवेल और कैनाल पर सोलर पैनल लगाने के लिए किसानों को सब्सिडी दी जाएगी। महत्वपूर्ण पारंपरिक बीज किस्मों के लिए सीड बैंक स्थापित किया जाएगा। लंबित पड़े सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने और नए प्रोजेक्ट शुरू करने का भी वादा किया गया है।</p>
<p>संकल्प पत्र में कहा गया है कि हर गांव में मिल्क चिलिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा ताकि डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा मिल सके। दुग्ध किसानों की मदद के लिए संगठित मार्केटिंग प्रणाली और प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जाएंगी। नए कोल्ड स्टोरेज स्थापित किए जाएंगे। पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की जो महिलाएं डेयरी फार्मिंग, पोल्ट्री फार्मिंग और मधुमक्खी पालन का काम शुरू करेंगी, उन्हें सब्सिडी दी जाएगी।</p>
<p>पीएम रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत कृषि आधारित उद्योगों के लिए सब्सिडी का भी वादा है। मेगा फूड प्रोसेसिंग पार्क भी स्थापित किए जाएंगे। घोषणा पत्र में गांवों के स्तर पर उद्योगों को बढ़ावा देने की बात है। हर गांव में स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने का वादा किया गया है। इसमें कहा गया है कि सभी ग्रामीण क्षेत्रों में 15 मिनट के अंदर एंबुलेंस सेवा पहुंचाई जाएगी।</p>
<p>एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए संकल्प पत्र में ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को कोलेटरल फ्री लोन देने का वादा किया गया है। गांवों में स्मार्ट स्कूल खोलने, छात्र-छात्राओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, गांव के स्तर पर खेल के मैदान विकसित करने और हॉकी तथा कबड्डी में विश्व स्तरीय खिलाड़ी तैयार करने के लिए सुविधाएं विकसित करने जैसे वादे भी किए गए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर और विकलांग छात्रों और दसवीं कक्षा तक अनुसूचित जाति के सभी छात्रों को वार्षिक भत्ता देने का वादा भी है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620284af28a59.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ग्रामीण पंजाब के लिए भाजपा का 11 सूत्री संकल्प, टिकाऊ खेती के लिए 5,000 करोड़ रुपये का वादा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620284af28a59.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपीः भाजपा का किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली, बोरवेल के लिए ग्रांट का वादा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-promises-free-electricity-for-irrigation-and-grant-for-borewell.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 08 Feb 2022 19:44:33 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-promises-free-electricity-for-irrigation-and-grant-for-borewell.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहले चरण का मतदान होने से चंद घंटे पहले सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को अपना घोषणा पत्र जारी किया। इसे लोक कल्याण संकल्प पत्र 2022 नाम दिया गया है। इसमें किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली देने के साथ-साथ बोरवेल तथा ट्यूबवेल लगाने और तालाब विकसित करने के लिए ग्रांट देने की बात कही गई है। मंगलवार को लखनऊ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा पत्र जारी किया।</p>
<p>कृषि कानूनों की वापसी के बाद किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी की मांग कर रहे हैं। भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में एमएसपी पर गेहूं और धान खरीदने का वादा किया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों में भुगतान को लेकर नाराजगी है। इसे देखते हुए घोषणा पत्र में कहा गया है कि गन्ना किसानों को 14 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। हालांकि यह वादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहले कर चुके हैं।</p>
<p>घोषणापत्र में लव जिहाद कानून तोड़ने वालों को 10 साल की कैद और एक लाख रुपए जुर्माना लगाने का नियम बनाने का वादा है। प्रदेश में 18 डिवीजन हैं और हर डिवीजन में एंटी करप्शन इकाई स्थापित करने का वादा भी किया गया है। अयोध्या में, जहां राम मंदिर का निर्माण कार्य अभी चल रहा है, वहां भगवान राम पर शोध के लिए रामायण विश्वविद्यालय स्थापित करने की बात कही गई है। बुजुर्ग संतों, पुजारियों और पुरोहितों के कल्याण योजनाएं लागू करने के लिए एक बोर्ड का भी गठन किया जाएगा</p>
<p>भाजपा के घोषणा पत्र में देवबंद में एंटी टेररिस्ट कमांडो सेंटर की स्थापना और मेरठ, रामपुर, आजमगढ़, कानपुर और बहराइच में एटीएस सेंटर स्थापित करने का वादा है। साथ ही इसमें कहा गया है कि गुंडों और अपराधियों के खिलाफ उनकी सरकार सख्त कार्रवाई जारी रखेगी।</p>
<p>कुछ वादे महिलाओं के नाम पर भी किए गए हैं। इसमें प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत होली और दीपावली के मौके पर दो मुफ्त रसोई गैस सिलेंडर, 60 साल से अधिक उम्र की वृद्धाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा तथा रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत कॉलेज जाने वाली मेधावी छात्राओं को मुफ्त में स्कूटी देने का वादा है। सभी सार्वजनिक जगहों और शिक्षण संस्थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इनके अलावा महिलाओं के लिए अलग से 3000 थाने खोले जाएंगे। मिशन पिंक टॉयलेट लॉन्च करने की बात भी घोषणा पत्र में है। सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं के लिए बनने वाले इस टॉयलेट पर 1000 करोड़ रुपए खर्च करने का वादा है।</p>
<p>पार्टी ने घोषणा पत्र में यह वादा भी किया है कि अगले पांच वर्षों के दौरान उसकी सरकार प्रदेश में 10 लाख करोड़ पर निवेश आकर्षित करेगी। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के नाम पर एक योजना चलाई जाएगी। इसके तहत सभी गांवों में में इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जाएगा। इसमें रोड कनेक्टिविटी, ड्रेनेज सिस्टम, बस स्टॉप, सोलर स्ट्रीट लाइट और इंटरनेट कनेक्टिविटी शामिल हैं। विधानसभा चुनाव के पहले तीन चरणों में जिन सीटों पर मतदान होना है वहां लोध समुदाय की अच्छी संख्या है। कल्याण सिंह इसी समुदाय के नेता थे।</p>
<p>पार्टी ने अगली बार सरकार बनाने पर वरिष्ठ नागरिकों, विकलांगों और विधवा स्त्रियों के लिए पेंशन की राशि बढ़ाकर 1500 रुपये करने का वादा किया है। कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में काम करने वाले सभी मजदूरों को मुफ्त में जीवन बीमा की सुविधा देने और उनके बच्चों को ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई मुफ्त में कराने जैसे वादे भी किए गए हैं। पार्टी ने पहले रविवार को घोषणा पत्र जारी करने की योजना बनाई थी। लेकिन उस दिन लता मंगेशकर का निधन हो जाने के चलते कार्यक्रम टाल दिया था। घोषणा पत्र में उनके नाम पर लता मंगेशकर परफॉर्मिंग आर्ट्स अकादमी खोलने का वादा किया गया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_62027abb99a5a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपीः भाजपा का किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली, बोरवेल के लिए ग्रांट का वादा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_62027abb99a5a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों में सामान्य दौर की वापसी के संकेत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/indications-of-returning-of-normalcy-in-uttar-pradesh-assembly-elections.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 08 Feb 2022 19:16:19 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/indications-of-returning-of-normalcy-in-uttar-pradesh-assembly-elections.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>आमवाली, कैराना, शामली, मुजफ्फरनगर</strong></em></p>
<p>उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनावों के पहले चरण की 58 सीटों पर चुनाव प्रचार बंद हो गया है। इन सीटों पर 10 फरवरी को मतदान होगा। इसके दो दिन पहले इस चरण की सबसे चर्चित विधान सभा सीट कैराना के तहत आने वाला गांव आमवाली। यहां जाट किसान, मुसलमान और बाकी जातियों के लगभग बराबर वोट हैं। योगेंद्र सिंह तोमर, नसीम और ओमवीर सिंह से जब मुलाकात होती है, उसके कुछ देर पहले ही यहां समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी नाहिद हसन के लिए प्रचार कर रहीं उनकी बहन इकरा हसन एक नुक्कड़ मीटिंग करके दूसरे गांव में निकली हैं। चुनावी मुद्दों के बारे में बात करने पर योगेंद्र और ओमवीर युवाओँ में बेरोजगारी, महंगी बिजली, गन्ना भुगतान में देरी और अवारा पशुओं की समस्या गिनवाते हैं। टेंट का काम करने वाले नसीम का जोर बेरोजगारी और धंधा खत्म होने पर है। यह बात किसी को भी चौंका सकती है कि जिस विधान सभा सीट से गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा का चुनाव प्रचार शुरू किया और हिंदू पलायन की बात की, वहां वोटरों के बीच हिंदू मुस्लिम कोई मुद्दा नहीं है।</p>
<p>बात केवल आमवाली गांव के इन वोटरों की नहीं है, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, देवबंद, मेरठ, बिजनौर और गाजियाबाद के खासतौर से ग्रामीण हिस्सों में आम लोगों के साथ बातचीत में यह बात साफ होती है कि उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील माने जाने वाले इन जिलों में धार्मिक आधार पर विभाजन इस चुनाव का मुख्य मुद्दा नहीं बन रहा है। बल्कि यह कहना ज्यादा ठीक होगा कि उत्तर प्रदेश में इस बार के चुनाव में लोगों के जीवन से जुड़े मसलों और स्थानीय मुद्दों की वापसी हुई है। चुनावों में सामान्य मुद्दों का लौटना भारतीय जनता पार्टी के लिए अच्छा संकेत नहीं है क्योंकि यह उसकी चुनावी रणनीति के लिए ठीक नहीं।</p>
<p>असल में विधान सभा चुनावों का पहला चरण भाजपा के लिए मुश्किलें और गठबंधन के लिए बेहतर नतीजों के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। भाजपा के कई बड़े नेताओं ने इस लेखक के साथ अनौपचारिक बातचीत में स्वीकार किया कि उनको नुकसान हो रहा है। इसके लिए आबादी के गणित को समझना होगा।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में मुसलमानों की आबादी 20 फीसदी से अधिक है। इनमें 14 जिले ऐसे हैं जहां मुस्लिम आबादी 30 फीसदी से अधिक है। सिद्धार्थ नगर में मुस्लिम आबादी 29.23 फीसदी और बागपत में 27.98 फीसदी है। यानी इन 16 जिलों में अगर मुस्लिम वोट एकजुट होते हैं तो भाजपा के विरोधी दलों के पास एक बड़ा वोट बैंक हो जाएगा। इसमें अगर वे किसी दूसरी जाति का वोट जोड़ने में कामयाब होते हैं तो भाजपा के लिए चुनाव जीतना मुश्किल हो सकता है।</p>
<p>इन सभी जिलों की बात करें तो अमरोहा में मुस्लिम आबादी 40.78 फीसदी, बहराइच में 33.53 फीसदी, बरेली में 34.5 फीसदी, बिजनौर में 43.04 फीसदी, बदायूं में 23.26 फीसदी, हापुड़ में 32.39 फीसदी, गाजियाबाद में 22.53 फीसदी, मेरठ में 34.43 फीसदी, मुरादाबाद में 50.80 फीसदी, मुजफ्फरनगर में 41.11 फीसदी, पीलीभीत में 24.11 फीसदी, रामपुर में 50.57 फीसदी, सहारनपुर में 41.95 फीसदी, संभल में 32.58 फीसदी, शामली में 41.73 फीसदी, संत कबीरनगर में 23.50 फीसदी, अमेठी में 20.96 फीसदी, बाराबंकी में 20.96 फीसदी, लखीमपुर खीरी में 20.18 फीसदी, लखनऊ में 21.46 फीसदी और श्रावस्ती में 30.79 फीसदी है।</p>
<p>मौजूदा चुनावों में भाजपा के चुनाव प्रचार की रणनीति अब भी बहुसंख्यक मतदाताओं को साथ लेने की है। इसी रणनीति के तहत कानून व्यवस्था को बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा है और बेरोजगारी, महंगाई और किसानों के मुद्दों पर पार्टी ज्यादा बात नहीं कर रही है। लेकिन भाजपा की यह रणनीति मुस्लिम मतदाताओं को एकजुट कर रही है। वहीं गैर-मुस्लिम मतदाता आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर बात कर रहे हैं। हालांकि सामान्य मतदाता यह जरूर स्वीकार करता है कि राज्य में कानून व्यवस्था अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार से बेहतर है। लेकिन उन पर मुस्लिम विरोध की चुनावी रणनीति काम नहीं कर रही है। वे महंगाई पर भी बात करते हैं तो युवा बेरोजगारी की बात कहते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चार जिलों शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद में गन्ना मूल्य के भुगतान में देरी पर उसकी नाराजगी तो काफी अधिक है।</p>
<p>इस स्थिति ने मौजूदा विधान सभा चुनावों को सातवें दशक के सामान्य चुनावों के समकक्ष खड़ा कर दिया है। जहां मुस्लिम मतदाता तो एकजुट हो रहे हैं लेकिन बहुसंख्यक मतदाता विभाजित हैं। ऐसे में किसी भी एक जाति के वोट मुस्लिम मतों के साथ जुड़े तो नतीजे प्रभावित हो सकते हैं।</p>
<p>पहले चरण की 58 सीटों वाले जिलों में कई जिले मुस्लिम मतों की बड़ी संख्या वाले हैं। इन जिलों में राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी के गठबंधन के चलते मुस्लिम वोट गठबंधन के साथ एकजुट होते दिख रहे हैं। किसान आंदोलन में मुख्य भूमिका निभाने वाले जाट इस चुनाव में जयंत चौधरी की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय लोक दल के साथ खड़े हैं और उसका फायदा गठबंधन के समाजवादी पार्टी उम्मीदवारों को भी मिल रहा है। किसान आंदोलन का राष्ट्रीय लोक दल को भारी फायदा मिल रहा है क्योंकि इसका मुख्य आधार जाट वोट हैं। गठबंधन के चलते जाट-मुस्लिम मत बड़ी संख्या में नतीजों को पलटते दिख रहे हैं।</p>
<p>इस चुनाव का एक अहम पक्ष है इक्का-दुक्का सीटों को छोड़कर बसपा का चुनावों से लगभग गायब होना। अधिकांश सीटों पर बसपा उम्मीदवारों के बारे में आम मतदाता को जानकारी भी नहीं है और न ही उसका प्रचार कहीं दिखता है। पहले चरण के लिए बसपा प्रमुख मायावती ने केवल आगरा में एक चुनावी सभा की है।</p>
<p>हालांकि भाजपा ने पहले चरण के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है। गृह मंत्री अमित शाह के अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ताबड़तोड़ दौरे किये हैं, लेकिन उनके भाषणों में बहुसंख्यक मतों को खुश करने की कोशिश और कानून व्यवस्था के मुद्दे ही प्रमुख रहे हैं।</p>
<p>इसलिए यह चुनाव उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया दौर लाते दिख रहे हैं। भाजपा 2014, 2017 और 2019 में हिंदुत्व और बहुसंख्यक मतों को एकजुट करने की रणनीति से चुनावी कामयाबी हासिल करती रही, लेकिन इस बार अभी तक चुनावी फिजा उसकी रणनीति के अनुरूप नहीं बन रही है। यह राज्य में चुनावों के सामान्य दौर (नार्मलाइजेशन) के लौटने का संकेत है। मुजफ्फरनगर के अपने घर में इस लेखक के साथ लंबी बातचीत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत कहते हैं कि उत्तर प्रदेश का चुनाव हिंदू-मुस्लिम के बंटवारे की धारणा को नकार रहा है। जाट और गैर जाट के बारे में वे कहते हैं कि हम दूसरी बिरादारी को कह रहे हैं कि जाटों का साथ मत छोड़ना। हम खेती किसानी, महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर लोगों को अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए कह रहे हैं। हालांकि वे किसी पार्टी विशेष के लिए मतदान या विरोध पर सीधे किसी भी टिप्पणी करने से बचते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620273e40aff9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों में सामान्य दौर की वापसी के संकेत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620273e40aff9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मतदान से दो हफ्ते पहले राम रहीम को पैरोल, जानिए पंजाब की राजनीति में डेरों का महत्व]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/ram-rahim-gets-parole-two-weeks-before-punjab-polls.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 07 Feb 2022 17:24:12 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/ram-rahim-gets-parole-two-weeks-before-punjab-polls.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम 21 <span>दिन की पैरोल पर हरियाणा के रोहतक जिले की सुनारिया जेल से बाहर आ चुके हैं। खास बात यह है कि राम रहीम को यह पैरोल पंजाब में मतदान से </span>2 <span>हफ्ते पहले मिली है। पंजाब की राजनीति में डेरों का बड़ा महत्व रहा है। यहां डेरा सच्चा सौदा के अलावा राधा स्वामी सत्संग, डेरा नामधारी, डेरा निरंकारी, डेरा सचखंड समेत कई बड़े डेरे हैं। इनका </span>60 <span>से </span>70 <span>सीटों पर प्रभाव माना जाता है</span>। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों की संख्या सबसे बड़ी बताई जाती है। अतीत में ये डेरे अपने अनुयायियों से किसी खास दल को वोट देने की अपील करते रहे हैं।</p>
<p>राम रहीम को अपनी दो शिष्या के साथ बलात्कार के मामले में 2017 <span>में </span>20 <span>साल कैद की सजा सुनाई गई थी। उसे एक पत्रकार की हत्या के मामले में भी दोषी ठहराया गया है। राम रहीम को पिछले साल भी पैरोल पर छोड़ा गया था, लेकिन वह सिर्फ एक दिन के लिए था जब बीमार मां को देखने के लिए उसे छूट मिली थी</span>। 25 <span>अगस्त </span>2017 <span>को जब राम रहीम को सजा सुनाई गई थी तो उसके बाद हुई हिंसा में पंचकूला और सिरसा में 41 लोगों की मौत हो गई और </span>250 <span>से ज्यादा घायल हो गए थे</span>।</p>
<p>राम रहीम को पैरोल पर रिहा करने के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकार की आलोचना की है। एसजीपीसी का कहना है कि यह चुनाव से दो हफ्ते पहले पंजाब में भाईचारा को नुकसान पहुंचाने वाला फैसला है। खास बात यह है कि हरियाणा के जेल मंत्री रणजीत सिंह चौटाला ने दो दिन पहले ही कहा था कि पैरोल लेना हर कैदी का अधिकार है। उसी के बाद राम रहीम को 21 <span>दिन की पैरोल मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले सिरसा में एक चुनावी रैली में राम रहीम की प्रशंसा कर चुके हैं</span>। गुरमीत राम रहीम भले ही जेल में हो, लेकिन उसके डेरे का महत्व कम नहीं हुआ है। डेरा के नाम घरों में बड़ी-बड़ी स्क्रीन के जरिए राम रहीम के वीडियो दिखाए जाते हैं।</p>
<p>जेल मंत्री चौटाला ने कहा है कि राम रहीम को जेल मैनुअल के हिसाब से पैरोल पर छोड़ा गया है। इसमें राज्य सरकार का कोई लेना-देना नहीं। पैरोल किसी भी कैदी का कानूनी अधिकार है। तीन साल सजा काटने के बाद कोई भी कैदी पैरोल पाने का अधिकारी हो जाता है। जून 2019 <span>में राम रहीम ने </span>42 <span>दिनों का पैरोल मांगा था। उस समय विपक्ष के हंगामे और भाजपा सरकार पर राम रहीम का पक्ष लेने के आरोपों के बाद उसने पैरोल का आवेदन वापस ले लिया था। </span></p>
<p>राम रहीम राजनीतिक पार्टियों और नेताओं को करीब दो दशक से अपने अनुयायियों के जरिए समर्थन देता रहा है। 2014 <span>के लोकसभा चुनाव और फिर हरियाणा विधानसभा चुनाव में डेरा सच्चा सौदा ने भारतीय जनता पार्टी को वोट देने की अपील की थी। </span>2017 <span>के पंजाब विधानसभा चुनाव में डेरा सच्चा सौदा ने शिरोमणि अकाली दल और भाजपा गठबंधन का समर्थन किया था, हालांकि इसके बावजूद गठबंधन बुरी तरह हार गया था</span>।</p>
<p>2007 <span>में डेरा सच्चा सौदा ने कांग्रेस का समर्थन किया था, हालांकि इसके बावजूद पार्टी को </span>44 <span>सीटें मिली थीं। अकाली दल और भाजपा गठबंधन </span>67 <span>सीटें जीत कर सरकार बनाने में सफल रहा था। तब अकाली दल को </span>48 <span>और भाजपा को </span>19 <span>सीटें मिली थीं। </span>2012 <span>में कांग्रेस की तरफ से कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राम रहीम से समर्थन मांगा था, लेकिन तब उन्होंने अकाली दल का समर्थन किया। उस चुनाव में अकाली दल की सीटें </span>48 <span>से बढ़कर </span>56 <span>हो गई थी।</span></p>
<p>पंजाब विधानसभा की 117 <span>सीटों में से </span>69 <span>सीटें मालवा क्षेत्र में है। अगर डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी अपने धर्म गुरु के आदेश का पालन करें तो </span>35 <span>से </span>40 <span>सीटों पर नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। पंजाब के </span>23 <span>जिलों में </span>300 <span>बड़े डेरे हैं जो राज्य देश की राजनीति में दखल रखते हैं। ये डेरे मालवा के अलावा माझा और दोआबा क्षेत्र में भी हैं। अभी तक कांग्रेस के विजय इंदर सिंगला, साधु सिंह धरमसोत, भाजपा के हरजीत ग्रेवाल और सुरजीत ज्याणी, आम आदमी पार्टी के जगरूप गिल और शिरोमणि अकाली दल के गुलजार सिंह समेत कई नेता डेरों के चक्कर लगा चुके हैं। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल भी जालंधर में डेरा सचखंड का चक्कर लगा चुके हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू भी डेरा सचखंड गए थे। </span>राधास्वामी डेरा ब्यास के प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों जट सिख हैं। इसलिए जट नेताओं में उनकी अच्छी पैठ मानी जाती है। मुख्यमंत्री चन्नी तीन बार डेरा ब्यास के चक्कर लगा चुके हैं।</p>
<p>हालांकि अभी तक किसी भी डेरे ने किसी भी राजनीतिक दल या नेता को समर्थन नहीं दिया है। लेकिन मतदान में अभी 13 दिनों का वक्त है। बाकी डेरे किसी दल का समर्थन करें या नहीं, जिस तरह डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को चुनाव से ऐन पहले छोड़ा गया है, उससे कयास लग रहे हैं कि राम रहीम किसी न किसी दल का समर्थन कर सकते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_62010858bafc7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मतदान से दो हफ्ते पहले राम रहीम को पैरोल, जानिए पंजाब की राजनीति में डेरों का महत्व ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_62010858bafc7.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चन्नी ही घोषित किए गए कांग्रेस का सीएम चेहरा, राहुल संग एक ही गाड़ी में बैठे जाखड़, सिद्धू और चन्नी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/channi-is-the-cm-face-of-congress-in-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 06 Feb 2022 18:11:54 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/channi-is-the-cm-face-of-congress-in-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री का चेहरा चरणजीत सिंह चन्नी ही होंगे। पार्टी नेता राहुल गांधी ने रविवार को लुधियाना में एक वर्चुअल रैली के दौरान उनके नाम का ऐलान किया। उन्होंने कहां कि यह राहुल गांधी का नहीं बल्कि पंजाब का फैसला है। पंजाब के लोगों ने कहा कि हम गरीब घर का मुख्यमंत्री चाहते हैं और मैं उनसे सहमत हूं। चमकौर साहिब से तीन बार के विधायक चरणजीत सिंह चन्नी को पिछले साल कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने के बाद कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बनाया था।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_61ffd5573cab0.jpg" alt="" /></p>
<p><span style="font-weight: 400;">चन्नी का नाम घोषित करने के लिए राहुल गांधी रविवार को जब लुधियाना में हलवारा से होटल पहुंचे, तो उनकी गाड़ी में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के साथ पूर्व प्रदेश पार्टी अध्यक्ष सुनील जाखड़ भी मौजूद थे। जाखड़ राहुल गांधी के साथ वाली सीट पर बैठे थे। आपसी खींचतान से जूझ रही पंजाब कांग्रेस में यह सब ठीक-ठाक दिखाने की एक कोशिश थी। जाखड़ ने पिछले दिनों कहा था कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाए जाने के बाद जब नए मुख्यमंत्री के लिए विधायकों से राय मांगी गई थी तो 42 विधायकों ने जाखड़ का और सिर्फ दो ने चन्नी का नाम लिया था।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मुख्यमंत्री पद की कतार में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धू भी थे। लेकिन चुनाव से पहले चिमनी की लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें ही चेहरा बनाने का फैसला किया है। सिद्धू को एक और झटका तब लगा जब रविवार को ही पार्टी की तरफ से जारी उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए स्टार प्रचारकों की सूची मैं उनका नाम नहीं था। हालांकि मुख्यमंत्री चन्नी का नाम 30 स्टार प्रचारकों की इस सूची में शामिल है। पंजाब में विधानसभा चुनावों के बाद उत्तर प्रदेश में चौथे पांचवें छठे और सातवें चरण के चुनाव होंगे।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x_61ffd55ed4836.jpg" alt="" /></p>
<p><span style="font-weight: 400;">जाखड़ को हटाकर जब सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया तो उन्होंने इस फैसले को कोई नाराजगी जताए बिना स्वीकार कर लिया था। लेकिन मुख्यमंत्री न बनाए जाने से वे काफी खफा बताए जा रहे थे। हालांकि उनकी नाराजगी दूर करने के लिए&nbsp; आलाकमान ने चन्नी व सिद्धू के साथ पार्टी के आधिकारिक पोस्टर पर उनकी तस्वीर भी लगवाई और चुनाव समिति तथा प्रचार अभियान समिति का प्रमुख भी बनाया। इसके बाद भी जाखड़ चन्नी और सिद्धू को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े करते रहे हैं। हालांकि रविवार को राहुल गांधी के लुधियाना पहुंचने से ठीक पहले जाखड़ ने साफ कर दिया कि वे मुख्यमंत्री चेहरे की रेस में नहीं हैं और पार्टी जो भी फैसला करेगी उन्हें मंजूर होगा। चुनाव प्रचार में सक्रिय रूप से हिस्सा न लेने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं चुनाव नहीं लड़ रहा हूं। मुख्यमंत्री चेहरे के ऐलान से पहले जाखड़ के अलावा नवजोत सिद्धू ने भी कहा कि राहुल गांधी जो भी फैसला लेंगे, उसका पालन करेंगे।&nbsp;</span></p>
<p>पिछले साल चन्नी को सीएम बनाए जाने के पार्टी के फैसले का स्वागत करते हुए सिद्धू ने कहा कि मैं कभी किसी पद के लालच में नहीं था। <span style="font-weight: 400;">चन्नी ने नवजोत सिद्धू की तारीफ करते हुए कहा कि सिद्धू का भाषण काफी प्रभावशाली था। चन्नी ने इस मौके पर सिद्धू , सुनील जाखड़ व अन्य नेताओं की तारीफ की और उनका धन्यवाद किया। चन्नी ने कहा कि हमारी सरकार ने राज्य के लोगों के बिजली-पानी के बिल माफ किए और पेट्रोल-डीजल-डीजल सस्ते दामों पर उपलब्ध कराया। रेत माफिया पर शिकंजा कसते हुए रेत की कीमतों में काफी कमी की गई। उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि उसने उन पर ईडी की रेड करवाई लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6200040c6fc4c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चन्नी ही घोषित किए गए कांग्रेस का सीएम चेहरा, राहुल संग एक ही गाड़ी में बैठे जाखड़, सिद्धू और चन्नी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_6200040c6fc4c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपीः पहले चरण में कितने प्रत्याशी अनपढ़, किस पर राजद्रोह का मुकदमा, क्या बोले अखिलेश और प्रियंका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/15-candidates-are-illiterate-in-the-first-phase-of-up-election.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 05 Feb 2022 23:03:08 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/15-candidates-are-illiterate-in-the-first-phase-of-up-election.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान 10 फरवरी को होना है। इस चरण में प्रदेश के 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है। इन सीटों के लिए करीब 615 उम्मीदवार मैदान में हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के अनुसार पहले चरण के कुल उम्मीदवारों में 125 आठवीं तक पढ़े हैं, जबकि 15 का पढ़ाई-लिखाई से कोई नाता नहीं रहा है।</p>
<p>एडीआर के मुताबिक 15 अनपढ़ उम्मीदवारों के अलावा 10 ने पांचवीं कक्षा तक, 62 ने आठवीं तक, 65 ने दसवीं तक और 102 ने 12वीं तक की पढ़ाई की है। इनके अलावा एक सौ ग्रेजुएट, 78 ग्रेजुएट प्रोफेशनल, 108 पोस्टग्रेजुएट, 18 डॉक्टरेट और 7 डिप्लोमाधारी भी हैं। मजे की बात यह है कि 12 उम्मीदवारों ने अपनी पढ़ाई-लिखाई का कोई ब्योरा नहीं दिया है। कुल उम्मीदवारों में 39 फ़ीसदी ने पांचवीं से बारहवीं के बीच पढ़ाई की है, 49 फ़ीसदी ग्रेजुएट या उससे ऊपर हैं। उम्र के लिहाज से देखा जाए तो पहले चरण में काफी युवा उम्मीदवारों को पार्टियों ने टिकट दिया है। 214 उम्मीदवारों की उम्र 25 से 40 साल के बीच और 328 की उम्र 41 से 60 साल के बीच है। 61 से 80 साल की उम्र के 73 उम्मीदवार हैं।</p>
<p><strong>कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा</strong></p>
<p>वाराणसी जिले की पेंड्रा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय के खिलाफ शनिवार को राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है। उन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नफरत की भाषा का इस्तेमाल करने, चुनाव आचार संहिता तथा कोविड-19 प्रोटोकॉल के उल्लंघन का आरोप है। प्रशासन का कहना है कि अजय राय के खिलाफ कई शिकायतें आईं। जांच के लिए चार सदस्यों की टीम बनाई गई जिसने उन्हें दोषी पाया है। अजय राय पर आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति के प्रचार अभियान चलाया। राय 2017 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट से लड़े थे और तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बीच आगरा में 2 फरवरी को बहुजन समाज पार्टी की रैली आयोजित करने वाले के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। आयोजकों पर कोविड-19 निर्देशों और चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।</p>
<p><strong>राजनाथ ने की राहुल गांधी की आलोचना</strong></p>
<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सैनिकों की वीरता और साहस पर तथाकथित रूप से सवाल उठाने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना की है। राहुल गांधी ने हाल ही संसद में कहा था कि लद्दाख की गलवन घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प में चीन की तुलना में भारतीय सैनिक अधिक संख्या में शहीद हुए थे। दो दिन पहले ऑस्ट्रेलिया के एक अखबार ने दावा किया है कि उस झड़प में चीन के 38 से 50 सैनिकों की जान गई थी। राजनाथ सिंह ने कहा, राहुल गांधी चीन के अखबारों पर भरोसा करते हैं और भारतीय सैनिकों की वीरता और साहस पर सवाल उठाते हैं।</p>
<p><strong>अखिलेश बोले- हमें दिल्ली भेजिए, आपकी समस्याएं खत्म करेंगे</strong></p>
<p>समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अलीगढ़ में लोगों से कहा कि आप हमें दिल्ली भेजिए और हम जातिगत जनगणना करवाकर आपकी समस्याओं का समाधान करेंगे। अलीगढ़ में भी पहले चरण यानी 10 फरवरी को मतदान होना है। अखिलेश ने कहा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश का माहौल बताता है कि लोगों ने भाजपा को उखाड़ फेंकने का मन बना लिया है और वह समाजवादी पार्टी तथा उसके सहयोगी दलों की सरकार बनाना चाहते हैं। सपा प्रमुख ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए वापस लिया। पहले तो सरकार इन कानूनों की तारीफ करती रही लेकिन जब चुनाव में करीब आ गए और किसान आंदोलन से हट नहीं रहे थे, तब सरकार ने उन कानूनों को वापस ले लिया।</p>
<p><strong>गर्मी-चर्बी की नहीं, हम भर्ती निकालने की बात कर रहेः प्रियंका</strong></p>
<p>कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी शनिवार को अलीगढ़ में थीं। वहां एक व्यक्ति के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कुछ लोग गर्मी निकालने की और चर्बी निकालने की बात करते हैं। लेकिन हम भर्ती निकालने की बात कर रहे हैं। यहां जो युवा खड़े हैं, वे बेरोजगार हैं। प्रदेश में 12 लाख पद खाली पड़े हैं। बाद में उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने ट्वीट किया कि इस बार उन्हें वोट दीजिए जो भर्ती निकालने की बात कह रहे हैं, चर्बी निकालने वालों और गर्मी निकालने वालों को नहीं।</p>
<p><strong>शिवसेना ने केंद्रीय एजेंसियों की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल</strong></p>
<p>शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत शनिवार को लखनऊ में थे। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी 50 से 60 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। रावत ने प्रवर्तन निदेशालय और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की विश्वसनीयता पर यह कहते हुए सवाल उठाए कि उनके अधिकारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीतिक पार्टी जॉइन कर रहे हैं। लखनऊ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए शिवसेना नेता ने कहा कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों के अफसरों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ करती है और उसके बाद उन्हें चुनाव लड़ने के लिए टिकट देती है। गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी राजेश्वर सिंह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद लखनऊ की सरोजिनी नगर सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>योगी के खिलाफ बसपा ने ख्वाजा शमसुद्दीन को उतारा</strong></p>
<p>बहुजन समाज पार्टी ने शनिवार को अपने 54 उम्मीदवारों की सूची जारी की। इनमें सबसे प्रमुख ख्वाजा शमसुद्दीन हैं जो गोरखपुर शहरी सीट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। पार्टी के उम्मीदवार संतोष तिवारी कुशीनगर जिले की फाजिलनगर सीट पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ खड़े होंगे। स्वामी प्रसाद मौर्य पहले बहुजन समाज पार्टी में ही थे और नंबर दो की हैसियत रखते थे। बसपा छोड़ने के बाद वे भाजपा में आए और योगी सरकार में मंत्री भी रहे। कुछ दिनों पहले ही वह भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे। बसपा के इन 54 प्रत्याशियों में से 7 मुस्लिम हैं। जिन सीटों के लिए इन्हें प्रत्याशी बनाया गया है उन सीटों पर 3 मार्च को छठे चरण में मतदान होना है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61efa709da79c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपीः पहले चरण में कितने प्रत्याशी अनपढ़, किस पर राजद्रोह का मुकदमा, क्या बोले अखिलेश और प्रियंका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61efa709da79c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राहुल की लुधियाना में रविवार को वर्चुअल रैली, कर सकते हैं सीएम चेहरे का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/rahul-might-announce-cm-face-in-virtual-rally-on-6-february.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 04 Feb 2022 23:11:30 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/rahul-might-announce-cm-face-in-virtual-rally-on-6-february.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के भतीजे की गिरफ्तारी के बीच कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी 6 फरवरी को लुधियाना एक वर्चुअल रैली को संबोधित करेंगे। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के मुताबिक राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों से पार्टी के उम्मीदवार पार्टी वर्करों और लोगों को वर्चुअल इस रैली से जोड़ेंगे। माना जा रहा है कि उसी दिन वे पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री चेहरे का ऐलान भी कर सकते हैं।</p>
<p>पिछले दिनों पंजाब में एक सभा में राहुल गांधी ने कहा था कि चुनाव से पहले कांग्रेस मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करेगी। उन्होंने यह भी कहा था कि मुख्यमंत्री चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने उन्हें भरोसा दिया है कि चाहे जिसे प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जाए, दूसरा उसका समर्थन करेगा।</p>
<p>इस बीच, पूर्व प्रदेश पार्टी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने एक सभा में यह खुलासा करके पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी थीं कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाए जाने के बाद वोटिंग में सिर्फ दो विधायकों ने चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने का समर्थन किया था। खुद को सीए दावेदार बताने वाले सिद्धू के बयान भी पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ाने का काम कर रही हैं। उनका ताजा बयान है कि पार्टी के शीर्ष नेता कमजोर मुख्यमंत्री चाहते हैं ताकि उसे उंगलियों पर नचाया जा सके।</p>
<p>चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए हरीश चौधरी ने कहा कि ईडी की कार्रवाई का मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय विपक्षी पार्टियों पर दबाव बनाने के लिए केंद्र पहले भी ऐसी कार्रवाई कर चुका है। उन्होंने तमिलनाडु में स्टालिन, पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और महाराष्ट्र में अजित पवार के परिवार पर हुई इस तरह की कार्रवाई के उदाहरण दिए।</p>
<p>प्रवर्तन निदेशालय ने बीती आधी रात मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के भतीजे भूपिंदर सिंह उर्फ हनी को तथाकथित मनीलॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है। मामला अवैध रेत खनन से जुड़ा है। गिरफ्तारी से पहले ईडी ने जालंधर ऑफिस में हनी से कई घंटे तक पूछताछ की थी। शुक्रवार को उसे जालंधर की ही विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें पांच दिन की हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले 18 जनवरी को ईडी ने हनी के परिसरों पर छापे मारे थे और आठ करोड़ रुपये नकद जब्त करने का दावा किया था।</p>
<p>हरीश चौधरी ने कहा कि किसान आंदोलन के समय मुख्यमंत्री चन्नी ने किसानों का साथ दिया था। इसीलिए केंद्र सरकार ने उन्हें निशाने पर ले रखा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, उसके कार्यकर्ता और पंजाब के लोग मुख्यमंत्री के साथ खड़े हैं और चुनाव में ऐसे लोगों को मुंहतोड़ जवाब देंगे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f2dca23ae6f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राहुल की लुधियाना में रविवार को वर्चुअल रैली, कर सकते हैं सीएम चेहरे का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f2dca23ae6f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेशः भाजपा का घोषणापत्र शनिवार को, किसानों, युवाओं और महिलाओं पर होगा फोकस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-to-release-up-elections-manifesto-on-saturday.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 04 Feb 2022 22:00:16 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-to-release-up-elections-manifesto-on-saturday.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से 5 दिन पहले सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी अपना चुनाव घोषणा पत्र जारी करेगी। पार्टी अपने घोषणा पत्र को संकल्प पत्र कहती है। इसमें प्रदेश के 15 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड मतदाताओं को लुभाने की कोशिश होगी। उत्तर प्रदेश में अन्य किसी भी राज्य की तुलना में अधिक 403 विधानसभा क्षेत्र हैं। यहां 7 चरणों में 10, 14, 20, 23 और 27 फरवरी तथा 3 और 7 मार्च को मतदान होने हैं।</p>
<p>पार्टी सूत्रों के अनुसार वैसे तो घोषणा पत्र में समाज के हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ होगा, लेकिन सबसे अधिक फोकस किसानों, युवाओं और महिलाओं पर रहेगा। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पार्टी के प्रदेश चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की मौजूदगी में यह घोषणा पत्र जारी किया जाएगा।</p>
<p>भाजपा का यह घोषणा पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर शहरी क्षेत्र से नामांकन दाखिल करने के एक दिन बाद जारी हो रहा है। आदित्यनाथ पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। अभी वे विधान परिषद यानी ऊपरी सदन के सदस्य हैं।</p>
<p>पार्टी सूत्रों के अनुसार घोषणा पत्र में किसानों की आमदनी दोगुनी करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तेजी देने के लिए उपायों के बारे में बताया जाएगा। इसके साथ ही महिला रोजगार, उनकी सुरक्षा तथा गरिमा से जुड़े मुद्दे होंगे। कुछ नई और लोकलुभावन योजनाओं की भी घोषणा हो सकती है।</p>
<p>इस बार के विधानसभा चुनाव में खास बात यह है कि सभी पार्टियां महिलाओं पर विशेष रूप से ध्यान दे रही हैं। खासकर कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी के &lsquo;पिंक मेनिफेस्टो&rsquo; जारी करने के बाद, जिसमें महिलाओं के बारे में अनेक घोषणाएं हैं। भाजपा के घोषणा पत्र में युवाओं और रोजगार सृजन पर जोर दिया जा सकता है, खासकर सामाजिक आर्थिक रूप से पिछड़े पूर्वांचल और बुंदेलखंड इलाकों के लिए।</p>
<p>इसके साथ ही भाजपा के घोषणा पत्र में कानून व्यवस्था के अहम मुद्दे को भी स्थान मिल सकता है, क्योंकि यह निजी निवेश आकर्षित करने और आर्थिक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। केसरिया पार्टी हमेशा की तरह घोषणा पत्र में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और धार्मिक पर्यटन का भी जिक्र कर सकती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f3eb05e7e96.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेशः भाजपा का घोषणापत्र शनिवार को, किसानों, युवाओं और महिलाओं पर होगा फोकस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f3eb05e7e96.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[‘सिर्फ दो विधायकों के समर्थन वाले चन्नी बने सीएम’, सुनील जाखड़ के खुलासे से पंजाब कांग्रेस मुश्किल में]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/punjab-congress-in-trouble-after-sunil-jakhar-says-that-channi-was-made-cm-despite-support-from-only-two-mla.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 03 Feb 2022 10:58:48 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/punjab-congress-in-trouble-after-sunil-jakhar-says-that-channi-was-made-cm-despite-support-from-only-two-mla.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान में अब सिर्फ दो हफ्ते का समय रह गया है, लेकिन सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें थम नहीं रही हैं। पार्टी नेता राहुल गांधी ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री चेहरे के लिए चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच सुलह कराने की कोशिश की, तो पूर्व प्रदेश पार्टी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। जिस चन्नी को पार्टी आलाकमान मास्टरस्ट्रोक बता रहा है, उनके बारे में जाखड़ ने कहा है कि सिर्फ दो विधायकों के समर्थन के बावजूद उन्हें सीएम बनाया गया।</p>
<p>पिछले दिनों चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि पार्टी जल्दी ही मुख्यमंत्री चेहरे का ऐलान करेगी। इस ऐलान से पहले जाखड़ के इस बयान ने पार्टी में खलबली मचा दी है। जाखड़ के मुताबिक चन्नी को सीएम बनाने के बाद आलाकमान ने उन्हें डिप्टी सीएम पद का ऑफर किया था।</p>
<p>आश्चर्य की बात यह है कि चन्नी ने यह बात चुनाव प्रचार के दौरान कही। उन्होंने कहा, सितंबर 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाने का फैसला करने के बाद कांग्रेस ने वोटिंग कराई थी। पार्टी के 79 विधायकों में से 42 चाहते थे कि जाखड़ को मुख्यमंत्री बनाया जाए। चन्नी का समर्थन सिर्फ दो विधायकों ने किया था। इसके बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया। जाखड़ के अनुसार वोटिंग में 16 विधायकों ने सुखजिंदर सिंह रंधावा और 12 विधायकों ने कैप्टन अमरिंदर की पत्नी महारानी परनीत कौर का नाम लिया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को सिर्फ छह विधायकों का समर्थन मिला था।</p>
<p>कैप्टन अमरिंदर को हटाए जाने के बाद सुनील जाखड़ का मुख्यमंत्री बनना तय माना जा रहा था। लेकिन आखिरी समय में कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने यह कह कर अड़ंगा लगाया कि पंजाब एक सिख बहुल राज्य है और यहां मुख्यमंत्री कोई सिख चेहरा ही होना चाहिए। जाखड़ हिंदू चेहरा हैं और पंजाब में 38 फीसदी हिंदू वोटर हैं। तब मौजूदा उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम आया, जिन्हें वोटिंग में 16 विधायकों का समर्थन मिला था। लेकिन किसी जट्ट सिख को सीएम बनाने की बात उठते ही सिद्धू ने भी दावा ठोक दिया था।</p>
<p><strong>आप की तरह फोन पर सीएम चेहरा चुनेगी कांग्रेस</strong></p>
<p>इस बीच, आम आदमी पार्टी की तर्ज पर कांग्रेस भी मुख्यमंत्री चेहरे पर लोगों से फोन पर राय मांग रही है। लोगों को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के नाम से फोन किया जा रहा है। इसमें तीन विकल्प दिए जा रहे हैं। चन्नी को मुख्यमंत्री चेहरा बनाने के लिए &lsquo;<span>1</span>&rsquo;<span>, सिद्धू के लिए </span>&lsquo;2&rsquo;<span> और बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव में जाने के लिए </span>&lsquo;3&rsquo;<span> का विकल्प दिया गया है। इससे पहले जब आम आदमी पार्टी ने फोन-सर्वे के जरिए भगवंत सिंह मान को सीएम चेहरा घोषित किया था तो सिद्धू ने उसे घोटाला करार दिया था। कहा जा रहा है कि अगले हफ्ते तक पार्टी सीएम चेहरे का ऐलान कर देगी, लेकिन जाखड़ के खुलासे के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या सीएम चेहरा सचमुच लोगों की मर्जी का होगा</span>?</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_61fb6802ee01f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ‘सिर्फ दो विधायकों के समर्थन वाले चन्नी बने सीएम’, सुनील जाखड़ के खुलासे से पंजाब कांग्रेस मुश्किल में ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_61fb6802ee01f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विधान सभा टिकटों को लेकर भाजपा  असमंजस  में]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-dragging-feet-over-giving-tickets-in-modi’s-varanasi-constituency.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 31 Jan 2022 16:53:37 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-dragging-feet-over-giving-tickets-in-modi’s-varanasi-constituency.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गोरखपुर<span>, </span>प्रयागराज और अयोध्या सहित सभी प्रमुख धार्मिक शहरों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है<span>, </span>लेकिन अभी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में आने वाली विधान सभा सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। विधानसभा चुनाव में टिकट देने को लेकर बीजेपी अभी भी अंजमजस में &nbsp;है।&nbsp;</p>
<p>वाराणसी&nbsp; प्रधान मंत्री के प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। इसलिए बीजेपी उम्मीदवारों के चयन में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। वाराणसी में कुल आठ विधानसभा क्षेत्र हैं। सूत्रों के अनुसार रोहनिया<span>, </span>पिंडरा<span>, </span>वाराणसी उत्तर<span>, </span>वाराणसी दक्षिण<span>, </span>वाराणसी कैंट<span>, </span>अजगरा<span>, </span>शिवपुर और सेवापुरी में भाजपा की सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) वाराणसी में दो विधानसभा सीटों की मांग कर रही है।</p>
<p><span>2017 </span>के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने वाराणसी की आठ विधानसभा सीटों में से छह पर जीत हासिल की थी<span>&nbsp;</span>जबकि बीजेपी की सहयोगी अपना दल (एस) ने सेवापुरी विधानसभा सीट और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) ने अजगरा सीट पर जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार एक सहयोगी ओम प्रकाश राजभर के नेतृत्व में एसबीएसपी ने <span>2022 </span>के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन किया है।</p>
<p>इस बीच<span>&nbsp;</span>कांग्रेस ने पहले ही वाराणसी में क्रमशः पिंडरा और रोहनिया निर्वाचन क्षेत्रों से अजय राय और राजेश्वर सिंह पटेल की उम्मीदवारी की घोषणा करके माहौल को दिलचस्प बना दिया है।&nbsp;अनुप्रिया पटेल के नेतृत्व वाला अपना दल (एस) सेवापुरी के अलावा वाराणसी के एक अन्य निर्वाचन क्षेत्र रोहनिया या पिंडरा से चुनाव लड़ना चाहता है।</p>
<p>सूत्रों ने कहा कि अपना दल (एस) द्वारा भाजपा उम्मीदवारों के चयन के साथ-साथ वाराणसी में दो सीटों की मांग के मुद्दे को संतोषजनक ढंग से हल नहीं किया गया है इसलिए अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व में उच्च स्तर पर ही लिए जाने की संभावना है।</p>
<p>इस बीच, भाजपा ने अब तक यूपी के लिए 37 महिलाओं सहित 295 उम्मीदवारों की घोषणा की है जबकि उसके सहयोगी अपना दल (एस) ने चार सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है। भाजपा उत्तर प्रदेश में अपना दल (एस) को 14 सीटें देने पर राजी हो गई है, छोटे सहयोगियों को 4-5 सीटें दी जाएंगी।</p>
<p>इसके अलावा भाजपा उत्तर प्रदेश की एक अन्य सहयोगी संजय निषाद के नेतृत्व वाली निषाद पार्टी को उम्मीदवार को&nbsp; भाजपा अपने चुनाव चिन्ह पर लड़ना चाहती है लेकिन संजय निषाद इसके लिए तैयार नहीं हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f81312a45c1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विधान सभा टिकटों को लेकर भाजपा  असमंजस  में ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f81312a45c1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चुनाव प्रचार में जनता के मुद्दे गायब, पिछली सरकार की खामियों या धर्म के आधार पर ही मतदाताओं को लुभाने की कोशिश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/no-public-issues-raised-in-state-election-campaign.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 30 Jan 2022 13:06:32 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/no-public-issues-raised-in-state-election-campaign.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>लगता है सत्तारूढ़ पार्टियों को 5 साल तक अपने किए गए कार्यों पर भरोसा नहीं रह गया है। राज्यों में सरकार चाहे जिस पार्टी की हो, चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ पार्टियां या तो पिछले सरकार की खामियां गिनाने में व्यस्त हैं या फिर धर्म के आधार पर ध्रुवीकरण करने की हर मुमकिन कोशिश की जा रही है। जाति का भी बोलबाला है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है, जनता के मुद्दे पार्टियों के प्रचार से गायब होते जा रहे हैं। प्रचार अभियान में बेरोजगारी, महंगाई, कानून व्यवस्था, समाज कल्याण जैसे जनता के मुद्दों पर कम ही सुनने को मिल रहा है। कोई भी सत्तारूढ़ पार्टी यह नहीं कह रही है कि हमने विकास के ये कार्य किए हैं, इसलिए हमें वोट दीजिए।<br />गृह मंत्री अमित शाह के उत्तर प्रदेश में चल रहे चुनाव अभियान को ही लीजिए। शनिवार को उन्होंने फिर 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों की बात उठाई। उन्होंने बिना किसी संकोच के सीधे-सीधे यह भी कह दिया कि अगर लोगों ने गलत पार्टी को वोट दिया तो फिर दंगे होंगे। शनिवार को ही गाजियाबाद के मुरादनगर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मुजफ्फरनगर दंगों का मुद्दा उठाया। बल्कि मतदाताओं को लुभाने के लिए तो वे और पीछे चले गए और बोले, "राम भक्तों के ऊपर गोलियों से जिनकी टोपियां रंगी हो, वे आज शांति और सौहार्द का संदेश दे रहे हैं।" विरोधी दलों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, "एक पार्टी है चाचा-भतीजे की, एक है भाई-बहन की और तीसरी है बुआ-भतीजा की। इनकी पार्टियों में और किसी के लिए जगह नहीं है।" लेकिन अपने पूरे भाषण में योगी ने यह नहीं बताया कि मुरादनगर या गाजियाबाद में विकास के लिए कौन-कौन से काम उन्होंने कराए।<br />प्रदेश में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है। नीति आयोग ने ही पिछले दिनों जो मल्टीडाइमेंशनल गरीबी इंडेक्स जारी किया उसमें उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक गरीबी वाले राज्यों में शामिल किया है। लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी इन समस्याओं को दूर करने का कोई रोड मैप नहीं बता रही है। वैसे प्रदेश में भाजपा को सबसे अधिक टक्कर देने वाली समाजवादी पार्टी के नेता भी चुनाव प्रचार में ऐसे किसी रोड मैप की बात नहीं करते हैं।<br />उत्तराखंड में भी नौकरियों की कमी, जिसके चलते युवाओं को प्रदेश से पलायन करना पड़ता है, उच्च शिक्षण संस्थाओं की कमी, पानी की समस्या, गांवों को सड़कों से जोड़ने की समस्या- यह सब आम जनता के मुद्दे हैं। लेकिन ना तो सत्तारूढ़ भाजपा ना ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस यह बता रही है की इन समस्याओं को दूर करने के लिए वे क्या रणनीति अपनाएंगी। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी 5 वर्षों के अपने काम कम गिना रही है, कांग्रेस की पिछली सरकारों की खामियां अधिक बता रही है। यही स्थिति गोवा और मणिपुर में भी है। मणिपुर में स्थानीय लोगों के लिए ससस्त्र बल कानून (अफस्पा) बड़ा मुद्दा है। लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस दोनों इस पर खुलकर कुछ कहने को तैयार नहीं। सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल एनपीपी ने जरूर कहा है कि वह इस कानून को वापस लेने की मांग करेगी।<br />ऐसा नहीं कि सिर्फ भाजपा शासित राज्यों में चुनाव प्रचार से जनता के मुद्दे गायब हैं। पंजाब में भी कमोबेश यही स्थिति है। यहां आम आदमी पार्टी के 'मुफ्त' सुविधाओं की घोषणाओं के बाद सत्तारूढ़ कांग्रेस भी उसी राह पर चल पड़ी है। पार्टी यह नहीं बता रही है कि इन घोषणाओं को पूरा करने के लिए पैसा कहां से आएगा। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी हों या प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू, या तो 'मुफ्त' की घोषणाएं कर रहे हैं या पिछली अकाली-भाजपा सरकार की खामियां गिना रहे हैं। पांच साल में कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में विकास के क्या कार्य किए इसका उल्लेख नेताओं के भाषणों में बहुत कम होता है। यहां तो पार्टी का ज्यादा समय यह तय करने में जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद का दावेदार कौन होगा।<br />सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी (सीएमआईई) के अनुसार देश में बेरोजगारी दर लगातार आठ फीसदी के आसपास बनी हुई है। ऐसे में किसी भी चुनाव में बेरोजगारी सबसे अहम मुद्दा होना चाहिए था। गरीबी हो, प्रेस की आजादी हो या कोई और मुद्दा, ग्लोबल इंडेक्स में हम लगातार नीचे रह रहे हैं। लेकिन चुनावों में इनकी कहीं कोई चर्चा नहीं होती है। स्वास्थ्य सुविधाएं कैसे बेहतर की जाएंगी ताकि भविष्य में कोरोना जैसी किसी और महामारी का सामना आसानी से किया जा सके, इसकी चर्चा कोई नहीं करता। महामारी के दौरान बंद हुई करोड़ों लघु और छोटी औद्योगिक इकाइयों का कैसे रिवाइवल किया जाए, इसकी बात कोई नहीं करता। ना ही कोई यह कहता है कि भविष्य में फिर कभी मजदूरों के पलायन की स्थिति ना आए, उसके लिए उनकी पार्टी की सरकार क्या करेगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61efa709da79c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चुनाव प्रचार में जनता के मुद्दे गायब, पिछली सरकार की खामियों या धर्म के आधार पर ही मतदाताओं को लुभाने की कोशिश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61efa709da79c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमृतसर पूर्व बनी पंजाब की सबसे हॉट सीट, जानिए मजीठिया के बारे में क्या बोले सिद्धू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/amritsar-east-becomes-the-hottest-seat-in-punjab-as-sidhu-and-majithia-are-in-fray.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 29 Jan 2022 15:45:45 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/amritsar-east-becomes-the-hottest-seat-in-punjab-as-sidhu-and-majithia-are-in-fray.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब विधानसभा चुनाव में अमृतसर पूर्व सीट काफी रोचक हो गई है। यहां कांग्रेस और अकाली दल के दो दिग्गज नेता आमने-सामने हैं। शनिवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने यहां नामांकन दाखिल किया। उनके सामने शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया हैं। दोनों बड़े प्रतिद्वंद्वियों के चलते यह सीट पूरे प्रदेश में सबसे खास हो गई है। शनिवार को ही आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री चेहरे भगवंत मान ने धुरी से नामांकन दाखिल किया।</p>
<p>नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में नवजोत सिंह सिद्धू ने मजीठिया पर हमला किया। उन्होंने कहा कि अकाली नेता दो सीटों से चुनाव लड़कर जीत हासिल करना चाहते हैं। सिद्धू ने उन्हें चुनौती दी कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे मजीठा सीट छोड़कर सिर्फ अमृतसर पूर्वी सीट से चुनाव लड़ें। प्रदेश कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि मुझे राजनीति में आए 17 साल हो गए हैं। मेरा यह सफर कैसा रहा यह सब लोग जानते हैं। भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आने वाले सिद्धू बोले, &ldquo;मैंने कभी अपना ईमान नहीं बेचा, लेकिन इन्होंने प्रदेश में नशा बेचा है और पंजाब के युवाओं को तबाह कर दिया।&rdquo;</p>
<p>एक समय ऐसा था जब सिद्धू मजीठिया की खूब तारीफ किया करते थे और उन्हें अपना छोटा भाई बताते थे। लेकिन मजीठिया के खिलाफ नशे का मामला दर्ज होने में अकाली दल सिद्धू की ही बड़ी भूमिका मानता है। पार्टी प्रमुख सुखबीर बादल ने एक अंग्रेजी दैनिक के साथ साक्षात्कार में कहा कि सिद्धू को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा।</p>
<p>अमृतसर सिद्धू के लिए पुराना इलाका है तो मजीठिया के लिए भी नया नहीं है। मजीठिया के पिता सत्यजीत सिंह यहां के मशहूर खालसा कॉलेज की गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन हैं और खालसा यूनिवर्सिटी के चांसलर भी हैं। इस लिहाज से भी मजीठिया परिवार के प्रति लोगों में लगाव है। अकाली दल और भाजपा की 10 साल की सरकार रही थी, इस नाते भाजपा के नेता भी मजीठिया के करीबी हैं। माना जा रहा है कि मजीठिया को कुछ भाजपा नेताओं का भी समर्थन मिल सकता है।</p>
<p><strong>भगवंत मान बोले, सबसे अधिक अंतर से जीतूंगा</strong></p>
<p>धुरी एसडीएम दफ्तर में मां के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंचे भगवंत मान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह धुरी के पास इतिहास रचने का एक मौका है। उन्होंने दावा किया कि लोग उन्हें सबसे अधिक अंतर से जीत आएंगे। भगवंत मान इससे पहले दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। 2014 में वे मनप्रीत सिंह बादल की पार्टी पीपीपी के टिकट पर लहरागागा से लड़े थे। उसके बाद 2017 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर जलालाबाद में सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ खड़े हुए थे। दोनों विधानसभा चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि बाद में हुए आम आदमी पार्टी के टिकट पर सांसद बने।</p>
<p><strong>चन्नी बोले, केजरीवाल आम नहीं हाई प्रोफाइल नेता हैं</strong></p>
<p>इस बीच मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल पंजाब के लोगों को यह कहकर गुमराह कर रहे हैं कि वे आम आदमी हैं। हकीकत तो यह है कि वे हाई प्रोफाइल नेता हैं। दिल्ली जाकर उनकी सच्चाई का पता लगाया जा सकता है। चन्नी ने यह भी कहा कि केजरीवाल पहले तो अपने विरोधियों के खिलाफ बड़े बड़े आरोप मढ़ते हैं, लेकिन बाद में उनसे माफी मांग लेते हैं। उन्होंने मेरे खिलाफ भी अपमानजनक टिप्पणियां की हैं, लेकिन हो सकता है कल चुनाव खत्म होने के बाद वे मुझसे भी माफी मांग लें। चन्नी ने दावा किया कि प्रदेश में कांग्रेस के जीतने की संभावनाएं ज्यादा हैं, इसलिए पार्टी में टिकट के लिए सबसे अधिक होड़ मची है।</p>
<p><strong>दिल्ली तलब किए गए पांच कांग्रेस सांसद</strong></p>
<p>इस बीच राहुल गांधी के चुनाव अभियान शुरू करने के मौके पर अमृतसर और जालंधर में पंजाब के 5 कांग्रेसी सांसदों के ना रहने को पार्टी ने गंभीरता से लिया है। उस दिन तो पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सफाई दी थी कि सांसदों की तरफ से राहुल गांधी के कार्यक्रम का बहिष्कार करने जैसी कोई बात नहीं है। कार्यक्रम में गैरमौजूद रहने वाले सांसद जसबीर सिंह गिल ने भी ट्वीट किया था कि यह कार्यक्रम विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों के लिए था, इसलिए वे उसमें नहीं गए। इसमें बहिष्कार जैसी कोई बात नहीं है। लेकिन अब सूत्रों का कहना है कि हाईकमान ने गिल के अलावा कार्यक्रम में गैरमौजूद रहने वाले सांसदों मनीष तिवारी, रवनीत सिंह, परनीत कौर और मोहम्मद सादिक को दिल्ली तलब किया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f513c31414c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमृतसर पूर्व बनी पंजाब की सबसे हॉट सीट, जानिए मजीठिया के बारे में क्या बोले सिद्धू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f513c31414c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में भाजपा की सातवीं सूची में 91 नाम, 13 मंत्रियों को फिर से मिला टिकट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-declares-91-candidates-for-up-polls-13-ministers-get-party-ticket.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 28 Jan 2022 18:39:41 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-declares-91-candidates-for-up-polls-13-ministers-get-party-ticket.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को अपने प्रत्याशियों की सातवीं सूची जारी की है। इस सूची में 91 प्रत्याशियों के नाम हैं, जिनमें 13 मंत्री हैं। जाति के हिसाब से देखें तो अन्य पिछड़ा वर्ग के 23, अनुसूचित जाति के 22 और अगड़ी जातियों के 46 उम्मीदवार हैं। पार्टी अब तक 295 प्रत्याशियों का ऐलान कर चुकी है।</p>
<p>प्रदेश के सहकारिता मामलों के मंत्री मुकुट बिहारी &zwj;वर्मा को टिकट नहीं दिया गया है, उनकी जगह उनके बेटे गौरव बहराइच की कैसरगंज सीट से लड़ेंगे। पार्टी ने अयोध्या के मौजूदा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता को फिर से टिकट दिया है। उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी के तेज नारायण से होगा, जिन्हें वे 2017 में हरा चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी को देवरिया से टिकट दिया गया है। अखिलेश यादव के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए भाजपा ने तीन यादवों को भी टिकट दिया है। रुदौली से रामचंद्र यादव, निजामाबाद से मनोज यादव, सिकंदरपुर से संजय यादव प्रत्याशी बनाए गए हैं।</p>
<p>इस सूची में नौ महिला प्रत्याशी हैं, जिनमें चार ब्राह्मण, चार अनुसूचित जाति और एक ठाकुर हैं। एक दिन पहले ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए प्रियंका गांधी के सलाहकार टीम के सदस्य और पूर्व सांसद राकेश सचान भोगनीपुर से लड़ेंगे। इस सूची में 17 मौजूदा विधायकों का टिकट काटा गया है। इनमें गोंडा की करनैलगंज विधानसभा सीट से अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया भी शामिल हैं। लल्ला भैया छह बार विधायक रह चुके हैं। बाहुबली राजा भैया के इलाके कुंडा से पार्टी ने सिंधुजा मिश्रा को टिकट दिया है।</p>
<p>टिकट पाने वाले मंत्रियों में इलाहाबाद पश्चिम से सिद्धार्थ नाथ सिंह, इलाहाबाद दक्षिण से नंद गोपाल गुप्ता, पाथरदेव से सूर्य प्रताप शाही, जगदीशपुर से सुरेश कुमार पासी, पट्टी से राजेंद्र प्रसाद, बलरामपुर से पलटूराम, मनकापुर से रमापति शास्ति, बंसी से जय प्रताप सिंह, खजनी से श्रीराम चौहान, रुद्रपुर से जयप्रकाश निषाद, फेहाना से उपेंद्र तिवारी, जौनपुर से गिरीश चंद्र यादव शामिल हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f3eb05e7e96.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में भाजपा की सातवीं सूची में 91 नाम, 13 मंत्रियों को फिर से मिला टिकट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f3eb05e7e96.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कोरोना प्रतिबंधों का असर, अमित शाह समेत बड़े भाजपा नेता घर&amp;#45;घर प्रचार अभियान में जुटे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/top-bjp-generals-amit-shah-yogi-turn-foot-soldiers-to-win-up.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 28 Jan 2022 18:07:40 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/top-bjp-generals-amit-shah-yogi-turn-foot-soldiers-to-win-up.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कोविड-19 महामारी के कारण चुनावी रैलियों और रोड शो पर 31 जनवरी तक प्रतिबंध के चलते उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता घर-घर जाकर चुनाव प्रचार में लगे हैं। इनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हैं।</p>
<p>इन तीनों बड़े नामों के अलावा भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा और प्रदेश के अन्य शीर्ष नेता भी खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में घर-घर जाकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इनमें उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा भी हैं। अमित शाह कुछ इलाकों में लोगों के घर जाते और पर्चे बांटते भी नजर आए। हालांकि उनके पर्चे बांटने के तरीके और साथ में उमड़ी भारी भीड़ पर विपक्षी दलों ने एतराज भी जताया है।</p>
<p>भाजपा नेता चुनाव प्रचार के दौरान भी धर्म को साथ रखना चाहते हैं। इसलिए वे जिन इलाकों में प्रचार के लिए जाएंगे, वहां वे स्थानीय स्तर पर मशहूर मंदिरों में पूजा-अर्चना भी करेंगे। इसके जरिए उनकी कोशिश सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को दिखाने की है।</p>
<p>कृषि कानूनों को लेकर किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए अमित शाह बुधवार को कुछ जाट नेताओं से भी मिले। समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा को कड़ी टक्कर मिल रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में जाट भाजपा के साथ थे, लेकिन इस बार कृषि कानूनों पर पार्टी और सरकार के रवैए के चलते वे नाराज बताए जाते हैं।&nbsp;</p>
<p>अमित शाह 27 जनवरी से 2 फरवरी तक मथुरा, गौतम बुद्ध नगर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, रामपुर, संभल, कन्नौज और कानपुर शहर में घर-घर जाकर चुनाव प्रचार करेंगे। इसी तरह मुख्यमंत्री आदित्यनाथ बिजनौर, मुजफ्फरनगर, बदायूं, कासगंज, जालौन, कानपुर ग्रामीण, आगरा, मैनपुरी, मेरठ और हापुड़ जिलों का दौरा करेंगे। पार्टी प्रमुख जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य और दिनेश शर्मा भी घर-घर प्रचार अभियान में शामिल हैं।</p>
<p>इस बीच, बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती के 2 फरवरी को आगरा में छोटी जनसभा को संबोधित करने की उम्मीद है। चुनाव आयोग ने अभी तक 31 अगस्त तक जनसभाओं और रोड शो पर रोक लगा रखी है। इसी को देखते हुए बसपा ने 2 फरवरी की तारीख तय की है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f3e386e20b4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कोरोना प्रतिबंधों का असर, अमित शाह समेत बड़े भाजपा नेता घर-घर प्रचार अभियान में जुटे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f3e386e20b4.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सपा में अब तक सिर्फ 30 फीसदी मुस्लिम&amp;#45;यादव प्रत्याशी, पार्टी ने दलितों और अगड़ों को भी दिया है टिकट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/only-30-percent-samajwadi-candidates-are-muslim-yadav.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 28 Jan 2022 16:49:26 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/only-30-percent-samajwadi-candidates-are-muslim-yadav.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>समाजवादी पार्टी ने इस बार उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मुसलमानों और यादवों की पार्टी होने की छवि तोड़ने की कोशिश की है। पार्टी ने प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से इस हफ्ते 159 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया। इनमें सिर्फ 49 यानी 30 फ़ीसदी प्रत्याशी ही मुस्लिम और यादव हैं। बाकी प्रत्याशी अन्य पिछड़ा वर्ग और दलितों के साथ अगड़ी जातियों के भी हैं।</p>
<p>मुस्लिम-यादव वोट बैंक हमेशा समाजवादी पार्टी के पक्ष में रहा है। पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव ने भी इस फार्मूले को आजमाया था। इस वोट बैंक के चलते ही 1992 के बाद मुलायम सपा को प्रदेश की नंबर एक पार्टी बनाने में कामयाब हुए थे। इस मुस्लिम-यादव यानी एम-वाय फैक्टर के चलते उत्तर प्रदेश में तीन बार समाजवादी पार्टी की सरकार बनी- दो बार मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में और एक बार अखिलेश यादव के नेतृत्व में।</p>
<p>अब जब उत्तर प्रदेश में मतदान शुरू होने में दो हफ्ते का समय रह गया है, तो अखिलेश ने एम-वाय की पुरानी छवि को तोड़ने की कोशिश की है और अन्य वर्ग के प्रत्याशियों को भी टिकट दिया है।</p>
<p>एम-वाय फैक्टर के चलते ही भारतीय जनता पार्टी 2017 से पहले लगातार 15 वर्षों तक सत्ता से बाहर रही। लेकिन 2017 के चुनावों में उसने समाजवादी पार्टी के मुस्लिम-यादव वोट बैंक का मुकाबला करने के लिए अगड़ी जातियों, गैर-यादव अन्य पिछड़ा वर्ग और गैर-जाटव दलितों को अपने साथ लिया। भाजपा को इसका फायदा भी मिला और वह प्रदेश की 75 फ़ीसदी सीटें जीतने में कामयाब हुई। दूसरे शब्दों में कहें तो समाजवादी पार्टी के एम-वाय वोट बैंक पर भाजपा का अगड़ा-ओबीसी-दलित फार्मूला भारी पड़ गया।</p>
<p>समाजवादी पार्टी इस बार गैर-यादव अन्य पिछड़ा वर्ग को भी अपने साथ लेने की कोशिश कर रही है। इसी रणनीति के तहत उसने योगी सरकार में मंत्री रहे भाजपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी में शामिल कराया है। अन्य पिछड़ा वर्ग के अलावा वह अगड़ी जातियों में भी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। अभी तक उसने जो 159 उम्मीदवार घोषित किए हैं, उनमें 31 दलित और 24 अगड़ी जातियों के हैं।</p>
<p>समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय लोक दल के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन का ऐलान किया है। राष्ट्रीय लोक दल ने अभी तक 33 सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित किए हैं। इस तरह सपा और रालोद गठबंधन 192 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुका है। इन 192 टिकट में से 20 फीसदी यानी 36 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार हैं। इनमें ज्यादातर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं। यहां कई विधानसभा क्षेत्रों में 30 से 40 फ़ीसदी आबादी मुसलमानों की है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में फरवरी और मार्च में 7 चरणों में मतदान होना है। मतदान की तारीख 10, 14, 20, 23 तथा 27 फरवरी और 3 तथा 7 मार्च हैं। मतगणना 10 मार्च को होगी। चुनाव आयोग के अनुसार प्रदेश में 15 करोड़ से अधिक मतदाता हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f3d1307b989.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सपा में अब तक सिर्फ 30 फीसदी मुस्लिम-यादव प्रत्याशी, पार्टी ने दलितों और अगड़ों को भी दिया है टिकट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f3d1307b989.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में कांग्रेस चन्नी को ही बना सकती है मुख्यमंत्री चेहरा, बहन के दावे से सिद्धू की मुश्किलें बढ़ीं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/congress-may-name-channi-as-cm-face-in-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 28 Jan 2022 15:54:49 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/congress-may-name-channi-as-cm-face-in-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कांग्रेस चरणजीत सिंह चन्नी को ही पंजाब के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर पेश कर सकती है। सूत्रों के अनुसार फिलहाल इस बात पर चर्चा हो रही है कि चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने पर उनके प्रतिद्वंद्वी नवजोत सिंह सिद्धू और उनके समर्थकों को क्या पद दिए जाएं ताकि सत्ता का संतुलन बना रहे। पार्टी के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा था कि कांग्रेस मुख्यमंत्री चेहरे के साथ ही चुनाव लड़ेगी और जल्दी ही नाम की घोषणा की जाएगी। राहुल ने यह भी कहा था कि जिसे भी मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया जाएगा, दूसरे सभी नेता उनका साथ देंगे। चिन्नी और सिद्धू का नाम लेते हुए राहुल ने कहा कि इन दोनों नेताओं ने भी उन्हें यह भरोसा दिलाया है।</p>
<p>चन्नी के पक्ष में जो बातें जाती हैं उन्हें सबसे अहम यह है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद बहुत ही कम समय में उन्होंने काफी लोकप्रियता हासिल कर ली है। सिर्फ पार्टी के भीतर नहीं बल्कि आम लोगों में भी। पार्टी के अपने सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि चन्नी आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार भगवंत मान और अकाली दल के सुखबीर बादल से भी आगे हैं। चन्नी को मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करने से कांग्रेस को दलितों के बड़े वोट बैंक का भी लाभ मिल सकता है। चन्नी चमकौर साहिब से और सिद्धू अमृतसर पूर्व से चुनाव लड़ रहे हैं।</p>
<p>प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू भी खुद को अगले मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करते रहे हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने के बाद जब कांग्रेस ने चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया तब सिद्धू ने अपनी नाराजगी जताने में कोई कोताही नहीं बरती थी। वे लगातार अपनी पार्टी की ही सरकार की आलोचना कर रहे थे। इस बीच शुक्रवार को उनकी मुश्किल तब और बढ़ गई जब उनकी 70 वर्षीय बड़ी बहन सुमन तूर ने दावा किया कि नवजोत सिद्धू ने 1986 में मां को घर से निकाल दिया था और 1989 में मां की दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लावारिस स्थिति में मौत हो गई थी। सुमन अमेरिका में रहती हैं। शुक्रवार को उन्होंने चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में यह दावा किया।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f3c45ef2520.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में कांग्रेस चन्नी को ही बना सकती है मुख्यमंत्री चेहरा, बहन के दावे से सिद्धू की मुश्किलें बढ़ीं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f3c45ef2520.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भाजपा से सपा में आए दारा सिंह चौहान घोसी से चुनाव लड़ेंगे, मुख्यमंत्री योगी के खिलाफ अभी तक सपा उम्मीदवार तय नहीं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/dara-singh-chauhan-gets-ticket-from-ghosi-sp-yet-to-announce-its-candidate-against-chief-minister-yogi-adityanath.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 28 Jan 2022 12:07:55 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/dara-singh-chauhan-gets-ticket-from-ghosi-sp-yet-to-announce-its-candidate-against-chief-minister-yogi-adityanath.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपनी तीसरी सूची जारी की है। इस सूची में अवध और पूर्वांचल क्षेत्र के 56 उम्मीदवारों के नाम हैं। खास बात यह है कि इस सूची में बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी से आए कई पिछड़े वर्ग और ब्राह्मण नेताओं के नाम हैं। प्रदेश में 10 फरवरी से 7 मार्च तक 7 चरणों में मतदान होने हैं। मतगणना 10 मार्च को होगी।</p>
<p>पार्टी ने गोरखपुर की 9 सीटों में से 7 सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। लेकिन गोरखपुर शहरी सीट पर अभी तक उसने अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है। गोरखपुर शहरी सीट से भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनाव लड़ रहे हैं। नई सूची के मुताबिक योगी सरकार में पर्यावरण मंत्री रहे और हाल ही मंत्री पद तथा पार्टी से इस्तीफा देने वाले दारा सिंह चौहान को मऊ जिले की घोसी सीट से टिकट दिया गया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में दारा सिंह चौहान ने मऊ जिले की मधुबन सीट से चुनाव लड़ा था।</p>
<p>अंबेडकर नगर को पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के समय 1995 में अलग जिला बनाया गया था। यहां बीते एक साल के दौरान उनकी बहुजन समाज पार्टी से समाजवादी पार्टी में आए नेताओं को टिकट दिया गया है। मायावती ने अन्य पिछड़ा वर्ग के वरिष्ठ नेताओं लालजी वर्मा और राम अचल राजभर को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। दोनों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए गए थे। इन दोनों नेताओं को क्रमशः कटेहरी और अकबरपुर से टिकट दिया गया है।</p>
<p>बसपा के पूर्व सांसद त्रिभुवन दत्त को आलापुर से तथा एक अन्य पूर्व बसपा सांसद राकेश पांडे को जलालपुर से टिकट मिला है। बाहुबली हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय तिवारी को गोरखपुर कि चिल्लूपुर से टिकट मिला है। वह भी पहले बसपा के विधायक थे और हाल ही पार्टी छोड़कर समाजवादी सपा में शामिल हुए थे। गैंगस्टर अतीक अहमद ने जिस राजू पाल नाम के नेता की हत्या की थी उनकी पत्नी पूजा पाल को कौशांबी की चायल सीट से टिकट दिया गया है। वे दो बार बसपा के टिकट पर विधायक रह चुकी हैं। उन्होंने 2017 में सपा जॉइन कर ली थी। 2019 में उन्होंने लोकसभा चुनाव भी लड़ा था लेकिन हार गई थीं। सपा नेता बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे राकेश को पार्टी ने बाराबंकी जिले की कुरसी सीट से टिकट दिया है। पिछली सपा सरकार में मंत्री रहे अरविंद गोप को दरियाबाद से टिकट मिला है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f38f368ef3d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भाजपा से सपा में आए दारा सिंह चौहान घोसी से चुनाव लड़ेंगे, मुख्यमंत्री योगी के खिलाफ अभी तक सपा उम्मीदवार तय नहीं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f38f368ef3d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में कांग्रेस जल्द घोषित करेगी सीएम चेहरा, जानिए इस मुद्दे पर क्या बोले राहुल गांधी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/congress-to-go-in-to-punjab-polls-with-cm-face.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 27 Jan 2022 22:43:49 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/congress-to-go-in-to-punjab-polls-with-cm-face.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ऐसे समय जब पंजाब की सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्री पद के लिए कयासों का दौर चल रहा है, पार्टी नेता राहुल गांधी ने कहा है कि मुख्यमंत्री के चेहरे की घोषणा जल्द ही की जाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विचार विमर्श के बाद मुख्यमंत्री चेहरे पर निर्णय लिया जाएगा। बकौल राहुल, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश पार्टी अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू दोनों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि जो भी व्यक्ति मुख्यमंत्री चुना जाएगा, वे उसका समर्थन करेंगे।</p>
<p>राहुल गांधी का यह बयान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि चन्नी और सिद्धू पिछले काफी समय से खुद को मुख्यमंत्री चेहरा बताने की कोशिश कर रहे हैं। चुनावी सभाओं में चन्नी जो वादे कर रहे हैं, सिद्धू उनसे अलग वादे कर रहे हैं। कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने के बाद जब चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था, तभी से सिद्धू और चन्नी के बीच होड़ दिख रही है। अब पार्टी कार्यकर्ताओं को वर्चुअल रैली में संबोधित करते हुए राहुल ने जल्दी ही मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की बात कही है।</p>
<p>कार्यकर्ताओं को सिद्धू और चन्नी ने भी संबोधित किया। सिद्धू ने कहा कि लोग इस बात को लेकर आश्वस्त होना चाहते हैं कि पार्टी का एजेंडा और उसके रोडमैप को कौन लागू करेगा। उसके बाद जब चन्नी की बारी आई तो सिद्धू को बड़ा भाई बताते हुए उन्होंने कहा कि मैंने कभी किसी पद की इच्छा नहीं की। मुख्यमंत्री के तौर पर जिसके नाम की भी घोषणा होगी, मैं पूरे दिल से उसका समर्थन करूंगा। इस मौके पर चन्नी ने आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को भी आड़े हाथों लिया। बोले, &ldquo;मैं नहीं चाहता कि केजरीवाल यहां आएं और कहें कि उनके (कांग्रेस) घर में झगड़ा चल रहा है इसलिए आप हमें मौका दीजिए। इससे पंजाब को नुकसान होगा।&rdquo;</p>
<p>राहुल ने दूसरे राजनीतिक दलों को सारे अधिकार प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के हाथों सौंप देने का आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारों के केंद्रीकरण के चलते ही देश और राज्यों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा नरेंद्र मोदीजी हों, भाजपा हो या कोई दूसरी पार्टी, यहां तक कि आम आदमी पार्टी भी, ये सभी दल अधिकारों का केंद्रीकरण करते हैं। ये सभी अधिकार मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को दे देते हैं। लेकिन कांग्रेस की विचारधारा में अधिकार जनता के पास होना चाहिए और हम जनता को ही अधिकार देना चाहते हैं।</p>
<p>राहुल ने गुरुवार को अमृतसर से पार्टी का चुनाव अभियान लांच किया, लेकिन इस मौके पर पार्टी के पांच सांसदों की गैरमौजूदगी चर्चा में रही। ये सांसद हैं मनीष तिवारी, जसवीर सिंह गिल, रवनीत सिंह, परनीत कौर और मोहम्मद सादिक। चुनाव अभियान लांच करते समय राहुल के साथ मुख्यमंत्री चन्नी और प्रदेश पार्टी अध्यक्ष सिद्धू थे। हालांकि पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पांच सांसदों के ना आने पर स्पष्टीकरण दिया कि यह उनकी तरफ से कोई बहिष्कार नहीं था। गिल ने ट्वीट किया कि सिर्फ 117 विधानसभा क्षेत्रों से कांग्रेस प्रत्याशियों को आमंत्रित किया गया था, सांसदों को नहीं। इसलिए बहिष्कार करने का सवाल नहीं उठता है। पार्टी अभी तक 117 में से 109 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर चुकी है। पंजाब में 20 फरवरी को मतदान होना है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f2dca23ae6f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में कांग्रेस जल्द घोषित करेगी सीएम चेहरा, जानिए इस मुद्दे पर क्या बोले राहुल गांधी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f2dca23ae6f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में कांग्रेस ने हरीश रावत समेत कई नेताओं की सीट बदली, कांग्रेस&amp;#45;भाजपा दोनों के सामने बागियों को मनाने की चुनौती]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/congress-changes-seat-of-harish-rawat-and-several-others.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 27 Jan 2022 11:53:42 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/congress-changes-seat-of-harish-rawat-and-several-others.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कांग्रेस पार्टी ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की नई सूची जारी की है। पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश में पार्टी के चुनाव अभियान प्रमुख हरीश रावत अब रामनगर से नहीं बल्कि लालकुआं सीट से चुनाव लड़ेंगे। दरअसल हरीश रावत के पुराने करीबी रंजीत रावत रामनगर सीट पर दावा कर रहे थे। उन्होंने हरीश रावत को इस सीट से टिकट देने के लिए पार्टी की आलोचना भी की थी। नई सूची के मुताबिक रंजीत रावत सल्ट सीट से लड़ेंगे, जहां से 2012 में वे हार गए थे। लालकुआं में संध्या दलकोटी की जगह हरीश रावत को टिकट दिया गया है। रामनगर से पार्टी ने महेंद्र पाल सिंह को टिकट दिया है, जिन्हें पहले कालाढूंगी से प्रत्याशी बनाया गया था।</p>
<p>पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजीव माहेश्वरी ने कहा है कि लालकुआं से हरीश रावत के जीतने की संभावना बहुत अच्छी है। रामनगर से भी वे जीत जाते, लेकिन लालकुआं में संभावनाएं ज्यादा हैं। माहेश्वरी के अनुसार रंजीत रावत रामनगर सीट से लड़ना चाहते थे। उन्हें सल्ट सीट दी गई है जहां से वे पहले भी लड़ चुके हैं। पार्टी ने कुल मिलाकर 5 बदलाव किए हैं। इस तरह वह 70 सीटों वाली विधानसभा में से 69 सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर चुकी है।</p>
<p>इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने भी प्रदेश में अपने प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी की है। पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी की बेटी रितु भूषण खंडूरी समेत 9 नाम इस सूची में हैं। सुश्री खंडूरी को कोटद्वार से टिकट दिया गया है। पिछले चुनाव में उन्होंने यमकेश्वर से जीत दर्ज की थी। कोटद्वार में वे कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह नेगी को टक्कर देंगी। दरअसल पार्टी ने यमकेश्वर से रेनू बिष्ट को टिकट दिया है क्योंकि पार्टी के अपने सर्वेक्षण में सुश्री खंडूरी के प्रति लोगों में नाराजगी की बात सामने आई थी। भाजपा प्रदेश में अब तक 68 सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम घोषित कर चुकी है।</p>
<p>प्रत्याशियों के ऐलान के बाद सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों के सामने अब चुनौती यह है कि पार्टी का टिकट पाने की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं को बागी बनने से कैसे रोका जाए। जिन नेताओं को टिकट नहीं मिला है उनमें अनेक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भर सकते हैं। इन नेताओं का अपने इलाके में कुछ न कुछ जनाधार तो है ही, इसलिए वे पार्टी के प्रत्याशियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कांग्रेस में तो रामनगर से टिकट ना मिलने पर रंजीत रावत के ही नाराज होने की चर्चा है। इसके अलावा लालकुआं, डोईवाला और ऋषिकेश में भी पार्टी को अपने पुराने नेताओं के विद्रोह का सामना करना पड़ सकता है। इसी तरह, भाजपा को अल्मोड़ा में चुनौती मिल सकती है। यहां पार्टी ने रघुनंदन चौहान की जगह कैलाश शर्मा को टिकट दिया है। पार्टी चौहान को इस बात के लिए मनाने में लगी है कि वे आधिकारिक प्रत्याशी कैलाश शर्मा के पक्ष में प्रचार करें।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f23a6345f83.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में कांग्रेस ने हरीश रावत समेत कई नेताओं की सीट बदली, कांग्रेस-भाजपा दोनों के सामने बागियों को मनाने की चुनौती ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61f23a6345f83.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सपा&amp;#45;रालोद के जाट&amp;#45;मुस्लिम समीकरण पर कितना होगा मायावती का असर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/mayawati-may-upset-sp-rld-jat-muslim-equatuon-in-up-polls.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 25 Jan 2022 17:57:53 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/mayawati-may-upset-sp-rld-jat-muslim-equatuon-in-up-polls.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती की टिकट बंटवारे की रणनीति से पश्चिमी यूपी में जाट-मुस्लिम समीकरण बिगड़ने की संभावना है। यह समाजवादी पार्टी (सपा) और सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) गठबंधन के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। उत्तर प्रदेश में होने वाले पहले दो चरणों के चुनाव के लिए बसपा के घोषित कुल 109 उम्मीदवारों में से, 39 मुस्लिम उम्मीदवार हैं। इस तरह करीब 36 फीसदी टिकट मुसलमानों को दिए गए हैं। इसका सबसे ज्यादा असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में है, जहां अल्पसंख्यक समुदायों की बड़ी आबादी है।</p>
<p>सपा-रालोद गठबंधन पश्चिमी यूपी में जाट और मुस्लिम गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। बसपा महत्वपूर्ण सीटों पर अल्पसंख्यक समुदाय के मजबूत उम्मीदवार उतारकर सपा-रालोद गठबंधन से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रही है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हमेशा अल्पसंख्यक वोटों के विभाजन से फायदा हुआ है। इसलिए, करीबी मुकाबले वाली सीटों पर मुस्लिम वोटों का विभाजन भाजपा उम्मीदवारों के लिए जीत की संभावना बड़ा सकता है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के दूसरे चरण के लिए शनिवार को बसपा द्वारा जारी 51 उम्मीदवारों की दूसरी सूची में 23 मुस्लिम, 13 पिछड़ी जाति (ओबीसी), 10 जाट और 5 ऊंची जातियों के हैं। मुस्लिम उम्मीदवारों में अमरोहा से मोहम्मद नावेद अयाज, नौगांव सादत से शादाब खान, रामपुर से सदाकत हुसैन, संभल से शकील अहमद कुरैशी और अन्य शामिल हैं। बसपा के 58 उम्मीदवारों की पहली सूची में 16 मुस्लिम नाम हैं। इसके उलट सपा-रालोद गठबंधन ने अल्पसंख्यक समुदाय के सिर्फ 13 उम्मीदवारों को टिकट दिया है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पिछले विधानसभा और संसदीय चुनावों में बसपा को काफी सीटों का नुकसान हुआ है। लेकिन उसका अपना एक मतदाता वर्ग है जिसमें ज्यादा गिरावट नहीं आई है। जहां बीजेपी, एसपी और कांग्रेस सभी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए प्रचार प्रसार कर रही हैं, वहीं बसपा चुपचाप उम्मीदवारों के चयन की अपनी चुनावी रणनीति और बूथ और कैडर स्तर पर काम कर रही है। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मायावती की बसपा छिपा रुस्तम साबित हो सकती हैं।</p>
<p>सपा-रालोद गठबंधन ने जहां मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है, वहीं कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों के चयन पर असंतोष के स्वर भी सामने आए हैं। अगर भाजपा चुनाव प्रचार के दौरान इस तरह की भावनाओं के साथ खेलती है, तो यह संभावित रूप से गठबंधन की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है।</p>
<p>विपक्षी दल 2022 के यूपी चुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ हालिया कृषि कानूनों के विरोध और जाट समुदाय के गुस्से को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उनकी यह कोशिश सीट में बदले, इसके लिए जरूरी है कि मुस्लिम और जाट वोट विभाजित न हों और सपा-रालोद उम्मीदवारों को एक साथ वोट दें।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के &nbsp;विधानसभा चुनाव के लिए&nbsp; मतदान 10, 14, 20, 23, 27 फरवरी और 3 और 7 मार्च&nbsp; को सात चरणों में होंगे। मतगणना 10 मार्च को होगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61efa709da79c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सपा-रालोद के जाट-मुस्लिम समीकरण पर कितना होगा मायावती का असर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61efa709da79c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में सपा की एम&amp;#45;वाय छवि तोड़ने की कोशिश, गैर&amp;#45;यादव ओबीसी के 48 लोगों को टिकट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/sp-tries-to-break-my-image-gives-48-tickets-to-non-yadav-obc-for-first-three-phases.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 25 Jan 2022 13:00:33 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/sp-tries-to-break-my-image-gives-48-tickets-to-non-yadav-obc-for-first-three-phases.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी पर मुसलमानों और यादवों की पार्टी होने के आरोप लगते रहे हैं। इस छवि को तोड़ने के लिए पार्टी ने सोमवार को जारी 159 उम्मीदवारों की पहली सूची में गैर-यादव अन्य पिछड़ा वर्ग के 48 नाम शामिल किए हैं। इनके अलावा अन्य वर्ग के लोगों को भी उसने टिकट दिया है। यह सूची पहले तीन चरण के लिए है। प्रदेश में 14 फरवरी से सात चरणों में मतदान होना है। मतगणना 10 मार्च को होगी।</p>
<p>सपा की सूची में यादवों की संख्या 15 है। मुस्लिम और दलित समुदाय के 31 प्रत्याशियों को टिकट दिया गया है। इसके अलावा 11 महिलाएं हैं। 18 सीटों से ऐसे लोगों को टिकट दिया गया है जो भाजपा या दूसरे दलों से दलबदल करके आए हैं। इनके अलावा नौ ब्राह्मण, इतने ही वैश्य और सात ठाकुरों को भी टिकट दिया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बाकी बची सीटों के लिए भी इसी तर्ज पर टिकटों का वितरण किया जाएगा।</p>
<p>पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव करहल से चुनाव लड़ेंगे। उनके चाचा शिवपाल यादव अपनी पुरानी सीट जसवंतनगर से समाजवादी पार्टी के चिन्ह पर ही चुनाव लड़ेंगे। पिछले चुनावों में उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा था। वरिष्ठ नेता आजम खान, जो अभी जेल में हैं, को उनकी पुरानी सीट रामपुर से टिकट दिया गया है। पार्टी ने उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को भी पास की स्वार सीट से टिकट दिया है।</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी छोड़कर सपा में हाल ही शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य पहली सूची में अपने बेटे उत्कृष्ट को टिकट दिलाने में नाकाम रहे हैं। दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी के दामाद उमर अली बेहट से लड़ेंगे। दलबदल कर आने वाले जिन नेताओं को सपा ने टिकट दिया है उनमें पूर्व मंत्री धर्म सिंह सैनी (नकुड़) और रोशन लाल वर्मा (तिलहर) शामिल हैं। भाजपा छोड़कर आने वाले पूर्व विधायक रामहेतु भारती, भगवती प्रसाद सागर और नीरज मौर्य को भी टिकट मिला है।</p>
<p><strong>ओवैसी ने 27 उम्मीदवार घोषित किए, इनमें चार हिंदू</strong></p>
<p>इस बीच असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने 27 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया है। इनमें चार टिकट पार्टी ने हिंदुओं को दिए हैं। मुजफ्फरनगर जिले की संवेदनशील बुढाना सीट से भी पार्टी ने हिंदू (भीम सिंह बालियान) को ही टिकट दिया है। पार्टी के प्रदेश प्रमुख शौकत अली का कहना है कि आने वाले दिनों में और अधिक हिंदुओं को टिकट दिया जाएगा।</p>
<p><strong>अखिलेश के पाकिस्तान संबंधी बयान को भाजपा ने बनाया मुद्दा</strong></p>
<p>अमरिंदर सिंह ने पंजाब के चुनाव में पाकिस्तान की एंट्री कराई तो उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के चीन और पाकिस्तान को लेकर बयान को भाजपा मुद्दा बना रही है। अखिलेश ने कहा था कि चीन भारत का ज्यादा बड़ा शत्रु है, लेकिन भाजपा राजनीतिक मकसद से पाकिस्तान का नाम बार-बार लेती रहती है। एक अंग्रेजी दैनिक के साथ इंटरव्यू में अखिलेश ने कहा था, &ldquo;पाकिस्तान महज एक राजनीतिक शत्रु है और भाजपा वोट की राजनीति के लिए उस पर हमला करती है।&rdquo; भाजपा नेता और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने अखिलेश के बयान को जिन्ना से जोड़ते हुए कहा, &ldquo;जो जिन्ना से करे प्यार, वह पाकिस्तान से कैसे करे इनकार।&rdquo; पात्रा ने ओपिनियन पोल पर प्रतिबंध लगाने की समाजवादी पार्टी की मांग की भी आलोचना की।</p>
<p><strong>हिंदू युवा वाहिनी करेगी योगी के लिए प्रचार</strong></p>
<p>इस बीच हिंदू युवा वाहिनी ने गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए प्रचार में उतरने का निर्णय लिया है। आदित्यनाथ ने ही 2002 में हिंदू युवा वाहिनी का गठन किया था। गोरखपुर में छठे चरण में 3 मार्च को मतदान होना है, लेकिन वाहिनी के कार्यकर्ता अभी से मुख्यमंत्री के पक्ष में प्रचार में उतर गए हैं। हालांकि कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि गोरखपुर से भी योगी आदित्यनाथ जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं, इसीलिए हिंदू युवा वाहिनी को प्रचार में उतारा गया है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61efa709da79c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में सपा की एम-वाय छवि तोड़ने की कोशिश, गैर-यादव ओबीसी के 48 लोगों को टिकट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61efa709da79c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में भाजपा 65 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, अमरिंदर को 37 और ढींढसा को 15 सीटें]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-to-contest-65-seats-in-punjab-amarinder-gets-37-and-dhindsa-15-seats.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 24 Jan 2022 19:44:44 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-to-contest-65-seats-in-punjab-amarinder-gets-37-and-dhindsa-15-seats.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए अपने गठबंधन की सीटों का ऐलान कर दिया। इस गठबंधन में भाजपा के साथ पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस और पुराने अकाली नेता सुखदेव सिंह ढींढसा की पार्टी शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) शामिल हैं। कुल 117 <span>सीटों वाली विधानसभा में से भाजपा </span>65 <span>सीटों पर चुनाव लड़ेगी। कैप्टन अमरिंदर की पार्टी </span>37 <span>सीटों पर और ढींढसा की पार्टी बाकी बची </span>15 <span>सीटों पर चुनाव लड़ेगी। राज्य में </span>20 <span>फरवरी को मतदान होना है। वोटों की गिनती </span>10 <span>मार्च को होगी</span>।</p>
<p>इस सीमाई प्रदेश में भाजपा पहली बार बड़े भाई की भूमिका में है। अब तक के चुनावों में वह शिरोमणि अकाली दल (बादल) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ती थी। पिछली बार उसने 23 <span>सीटों पर चुनाव लड़ा था, हालांकि उसे जीत सिर्फ </span>3 <span>सीटों पर मिली थी।</span></p>
<p>सीट बंटवारे का ऐलान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने नई दिल्ली स्थित पार्टी के मुख्यालय में किया। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन न सिर्फ प्रदेश में सरकार बदलने के लिए, बल्कि भावी पीढ़ी को बचाने तथा पंजाब की स्थिरता के लिए चुनाव लड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने के लिए डबल इंजन सरकार की जरूरत है।</p>
<p>नड्डा ने कहा कि पंजाब एक सीमाई राज्य है, देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि वहां एक स्थिर और मजबूत सरकार हो। हम जानते हैं कि पाकिस्तान किस तरह हमारे देश में दखल देने की कोशिश करता रहा है। हमने वहां ड्रग्स और हथियारों की स्मगलिंग होते देखी है। पंजाब की 600 <span>किलोमीटर लंबी सीमा पाकिस्तान के साथ लगती है</span>।</p>
<p>इस मौके पर सुखदेव सिंह ढींढसा ने कहा कि उनकी पार्टी ने पंजाब में माफिया को रोकने के लिए भाजपा के साथ गठबंधन किया है। अमरिंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने देश की स्थिरता और सुरक्षा के लिए भाजपा के साथ हाथ मिलाया है। अपने ही शासन काल की आलोचना करते हुए अमरिंदर ने कहा कि जब वे पंजाब के मुख्यमंत्री थे तब राज्य में हथियारों और ड्रग्स की सीमा पार से तस्करी की कई घटनाएं हुईं।</p>
<p>अमरिंदर ने आरोप लगाया कि उनके मुख्यमंत्री रहते पाकिस्तान से कोई पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को मेरी कैबिनेट में शामिल कराना चाहता था। उन्होंने कहा, &ldquo;<span>जब मैंने नवजोत सिद्धू को अपनी सरकार से हटाया तो मुझे पाकिस्तान से संदेश मिला कि सिद्धू उनके प्रधानमंत्री (इमरान खान) के पुराने दोस्त हैं, और अगर उन्हें सरकार में बनाए रखें तो वे बहुत कृतज्ञ होंगे। अगर सिद्धू काम ना करें तो आगे आप उन्हें निकाल सकते हैं।</span>&rdquo;<span> अमरिंदर ने कहा कि सिद्धू अक्षम और बेकार आदमी हैं</span>। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि पाकिस्तान से किसने ऐसा आग्रह किया था।</p>
<p>भाजपा ने बीते शुक्रवार को पंजाब की 117 <span>सीटों में से </span>34 <span>प्रत्याशियों की अपनी पहली सूची जारी की। इनमें </span>13 <span>सिख, </span>9 <span>दलित और </span>2 <span>महिलाएं हैं। सूची में शामिल अन्य वर्गों में </span>12 <span>किसान परिवार से और </span>9 <span>अनुसूचित जाति के हैं। जिनके नाम इस सूची में शामिल हैं उनमें पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया, हाल ही कांग्रेस से आए विधायक राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी, अकाली नेता गुरचरण सिंह तोहड़ा के पोते कंवर वीर सिंह तोहड़ा भी शामिल हैं। नड्डा ने एक-दो नाम बदले जाने के भी संकेत दिए।</span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>मजीठिया को झटका, अग्रिम जमानत याचिका खारिज</strong></p>
<p>इस बीच, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस लीजा गिल ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया। कोर्ट ने पहले उनकी अंतरिम जमानत स्वीकार करते हुए जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था। पंजाब सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि जांच में उन्होंने अभी तक पूरा सहयोग नहीं दिया है। पंजाब में एक दिन बाद चुनाव के लिए नामांकन दाखिल शुरू होना है। ऐसे में कोर्ट का यह आदेश मजीठिया के लिए बड़ा झटका है। अब उन्हें या तो समर्पण करना पड़ेगा या राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ेगा। उनके खिलाफ पिछले साल 20 <span>दिसंबर को मोहाली में नारकोटिक्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था</span>।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61eeb447a415d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में भाजपा 65 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, अमरिंदर को 37 और ढींढसा को 15 सीटें ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61eeb447a415d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के बाद 11 करोड़ 40 लाख रुपये जब्त किए गए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/11-crore-40-lakh-rupees-seized-after-the-code-of-conduct-came-into-force-in-uttar-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 23 Jan 2022 20:53:49 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/11-crore-40-lakh-rupees-seized-after-the-code-of-conduct-came-into-force-in-uttar-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश में चुनाव आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद राज्य की पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अब तक लगभग 11.40 करोड़ रुपये नकदी जब्त की है।</p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) अजय कुमार शुक्ला के अनुसार, <span>23 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के &nbsp;6.7 टन नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं।उन्होंने कहा कि पुलिस</span>, <span>आयकर</span>, <span>आबकारी और नार्कोटिक्स विभाग सहित सभी &nbsp;कानून प्रवर्तन एजेंसियां </span>​​आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन करने वाले लोगों से निपटने और उन पर कठोर करवाई &nbsp;करने के लिए सब &nbsp;मिलकर काम कर रही हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">राज्य पुलिस ने 42 किलोग्राम तक के कीमती धातुएं भी जब्त की है &nbsp;जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 72 लाख से&nbsp; अधिक है। इस दौरान आबकारी विभाग और पुलिस विभाग ने राज्यव्यापी छापेमारी कर पांच लाख लीटर &nbsp;से अधिक की अवैध शराब बरामद की है। इसकी कीमत लगभग 11.54 करोड़ रुपये &nbsp;है। &nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;राज्य में फरवरी और मार्च में होने चुनाव को &nbsp;स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए अब तक &nbsp;202 लाइसेंसी हथियार जब्त किए जा चुके है और 611 लाइसेंस रद्द किए गए हैं। &nbsp;इसके अलावा 17 लाख 40 हजार लोगों को राज्य में आने से रोका गया। चुनाव के मतदान आचरण के तहत पुलिस ने 7 लाख 10 हजार से अधिक लाइसेंसी &nbsp;हथियार राज्य के लोगों से जमा करा लिया गया है &nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">राज्य के अधिकारियों ने &nbsp;राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए 329 हथियारों के लाइसेंस जब्त किए हैं, <span>जबकि 937 लाइसेंस भी रद्द कर दिए &nbsp;हैं। &nbsp;लगभग 25 लाख लोगों को सीआरपीसी के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा, <span>चुनाव मानदंडों के उल्लंघन के आरोप में 309 लोगो पर विभिन्न धाराओं के तहत पूलिस ने एफ आई आर दर्ज किए हैं। इस दौरन रा &nbsp;पुलिस ने 5,357 आग्नेयास्त्र</span>, <span>5,587 कारतूस</span>, <span>214 विस्फोटक और 132 बम जब्त किए हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">वहीं विजिलेंस टीमों ने पूरे यूपी में सार्वजनिक और निजी स्थानों से लगभग 56 लाख अधिक प्रचार सामग्री को हटा दिए है। इनमें दीवार पर बने ग्रैफिटी/लेखन, <span>पोस्टर</span>, <span>बैनर और अन्य सामान शामिल हैं।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61ed721c21b0a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के बाद 11 करोड़ 40 लाख रुपये जब्त किए गए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61ed721c21b0a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी&amp;#45;पंजाब के प्रत्याशियों की भाजपा की सूची में पिछड़ों&amp;#45;दलितों को प्रमुखता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/obcs-and-dalits-get-priority-in-bjp-list-for-up-and-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 22 Jan 2022 12:58:17 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/obcs-and-dalits-get-priority-in-bjp-list-for-up-and-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में अपने 85 प्रत्याशियों की चौथी सूची और पंजाब में 34 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की। उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से भाजपा अब तक 195 सीटों के लिए अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। पार्टी ने 15 जनवरी को पहली सूची जारी की थी जिसमें 107 प्रत्याशियों के नाम थे। प्रदेश में 10 फरवरी से 7 मार्च तक 7 चरणों में मतदान होना है। मतगणना बाकी चार राज्यों के साथ 10 मार्च को ही होगी।</p>
<p>उत्तर प्रदेश की चौथी सूची में भाजपा ने 80 फ़ीसदी टिकट मौजूदा विधायकों को ही दिए हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में इन 85 में से 72 पर पार्टी को जीत मिली थी। शुरुआत में चर्चा थी की पार्टी करीब डेढ़ सौ विधायकों का टिकट काटेगी, लेकिन उसके बाद जिस तरह पार्टी छोड़कर विधायक दूसरे दलों में जाने लगे, माना जा रहा है कि यह उसी का नतीजा है की वह ज्यादातर मौजूदा विधायकों को टिकट देने पर मजबूर हुई है। 85 सीटों में से 30 सीटें अन्य पिछड़ा वर्ग और 19 दलित प्रत्याशियों को टिकट दिए गए हैं। 29 टिकट ठाकुरों और ब्राह्मणों को मिले हैं। इसके अलावा छह टिकट दूसरे दलों से आए नेताओं को दिए हैं।</p>
<p>चौथी सूची में 15 महिलाएं हैं। इनमें रायबरेली की पूर्व कांग्रेसी नेता अदिति सिंह भी शामिल हैं। अन्य प्रत्याशियों में कांग्रेस से ही हाल में आए राकेश सिंह और पिछले दिनों आईपीएस की नौकरी छोड़कर पार्टी ज्वाइन करने वाले असीम अरुण भी शामिल हैं।</p>
<p>अदिति सिंह और राकेश सिंह दोनों कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के रायबरेली संसदीय क्षेत्र से विधायक हैं। अदिति को भाजपा ने रायबरेली से और राकेश सिंह को हरचंदपुर से उम्मीदवार बनाया है। हाल ही समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में आने वाले मुलायम सिंह यादव के रिश्तेदार और विधायक हरिओम यादव का नाम भी इस सूची में है। उन्हें पार्टी ने सिरसागंज से टिकट दिया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में रायबरेली संसदीय क्षेत्र की 5 विधानसभा सीटों में से भाजपा और कांग्रेस ने दो दो और समाजवादी पार्टी ने एक सीट जीती थी।</p>
<p>भाजपा ने लखीमपुर खीरी जिले में भी अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं जहां प्रदर्शनकारी किसानों पर थार जीप चढ़ा देने की घटना हुई थी। उस घटना में 4 किसान और एक पत्रकार समेत 8 लोगों की जान चली गई थी। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्रा इस मामले में मुख्य आरोपी हैं।</p>
<p>यहां भाजपा ने निघासन से शशांक वर्मा, गोला गोकरननाथ से अरविंद गिरी, श्रीनगर से मंजू त्यागी, लखीमपुर खीरी से योगेश वर्मा, कस्ता सुरक्षित से सौरभ सिंह सोनू, मोहम्मदी से लोकेंद्र प्रताप सिंह और पलिया से हरविंदर रोमी साहनी को टिकट दिया है। पिछले चुनाव में भी यह पार्टी के प्रत्याशी थे।</p>
<p>चौथी सूची में जिन महिला प्रत्याशियों के नाम हैं उनमें अदिति सिंह के अलावा हाथरस से अंजुला माहौर, तिलहर से सलोना कुशवाह, श्रीनगर से मंजू त्यागी, महमूदाबाद से आशा मौर्य, शाहाबाद से रजनी तिवारी, संडीला से अलका अर्कवंशी, छिबरामऊ से अर्चना पांडे, इटावा से सरिता भदौरिया, बिधूना से रिया शाक्य, अकबरपुर रनिया से प्रतिभा शुक्ला, कल्याणपुर से नीलिमा कटियार, रथ से मनीषा अनुरागी, नारायणी से ओमानी वर्मा और खागा से कृष्णा पासवान शामिल हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>पंजाब में </strong><strong>13 </strong><strong>सिखों और </strong><strong>9 </strong><strong>दलितों को टिकट</strong></p>
<p>भाजपा ने शुक्रवार को पंजाब की 117 सीटों में से 34 प्रत्याशियों की अपनी पहली सूची जारी की। इनमें 13 सिख, 9 दलित और 2 महिलाएं हैं। यह सूची दिल्ली में पार्टी के महासचिव तरुण चुग ने जारी की। सूची में शामिल अन्य वर्गों में 12 किसान परिवार से और 9 अनुसूचित जाति के हैं। इनके अलावा कुछ प्रोफेशनल्स को भी पार्टी ने टिकट दिया है।</p>
<p>जिनके नाम इस सूची में शामिल हैं उनमें पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया, हाल ही कांग्रेस से आए विधायक राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी, अकाली नेता गुरचरण सिंह तोहड़ा के पोते कंवर वीर सिंह तोहड़ा भी शामिल हैं।</p>
<p>प्रदेश में 20 फरवरी को मतदान होना है। भाजपा यहां अमरिंदर सिंह की नई पार्टी पंजाब लोग कांग्रेस और पूर्व अकाली नेता सुखदेव सिंह ढींढसा के शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। गठबंधन की तरफ से अभी तक यह नहीं बताया गया है कि कुल 117 सीटों में से कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा। लेकिन भाजपा सूत्रों के अनुसार पार्टी 65 सीटों पर, पंजाब लोग कांग्रेस 34 और शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) 18 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।</p>
<p>भाजपा एक और क्षेत्रीय दल लोक इंसाफ पार्टी के साथ भी गठबंधन पर चर्चा कर रही है, जिसका असर लुधियाना और आसपास के इलाकों में है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अकाली दल के साथ गठबंधन में 23 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन उसे सिर्फ 3 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। बाद में उपचुनाव में इनमें से भी एक सीट वह हार गई थी। इस तरह पार्टी के सिर्फ दो विधायक बच गए थे दिनेश सिंह बब्बू और अरुण नारंग। बब्बू को सुजानपुर से और नारंग को अबोहर से टिकट दिया गया है। 1997 के बाद पहली बार होगा जब भारतीय जनता पार्टी शिरोमणि अकाली दल (बादल) के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ेगी।</p>
<p>भाजपा का टिकट पाने वालों में चार पूर्व कांग्रेसी और चार पूर्व अकाली नेता हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाने वाले अरविंद खन्ना को पार्टी ने संगरूर से प्रत्याशी बनाया है। पूर्व विधायक और कांग्रेस से भाजपा में आए मोहन लाल बंगा को बंगा सीट से टिकट दिया है। पूर्व कांग्रेसी निमिष मेहता को गढ़शंकर से टिकट मिला है। पुराने अकाली नेताओं में दीदार सिंह भाटी को फतेहगढ़ साहिब और रवि प्रीत सिद्धू को तलवंडी साबो से टिकट दिया गया है। जलालाबाद से पार्टी ने पूरन चंद को खड़ा किया है जहां शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल भी खड़े हैं।</p>
<p>ढींढसा की पार्टी ने 12 प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं। इनमें दो बार की सांसद परमजीत कौर गुलशन भी शामिल हैं जो मार्च 2020 में शिरोमणि अकाली दल छोड़कर ढींढसा के साथ आ गई थीं। गुलशन जैते सुरक्षित सीट से लड़ेंगी। पार्टी ने सुखदेव सिंह ढींढसा के बेटे परमिंदर ढींढसा को लहरगग्गा से प्रत्याशी बनाया है। वे 2017 में शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर इस सीट से जीते थे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61ebb206bedda.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी-पंजाब के प्रत्याशियों की भाजपा की सूची में पिछड़ों-दलितों को प्रमुखता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61ebb206bedda.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भाजपा ने उत्तराखंड के 59 प्रत्याशी घोषित किए, लेकिन पंजाब में ऊहापोह जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-announces-59-candidates-in-uttarakhand-but-yet-to-decide-in-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 21 Jan 2022 12:56:18 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/bjp-announces-59-candidates-in-uttarakhand-but-yet-to-decide-in-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को 70 सीटों वाली उत्तराखंड विधानसभा की 59 सीटों के लिए अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए। पार्टी ने 10 मौजूदा विधायकों का टिकट काट दिया है, लेकिन ने कुछ विधायकों के परिजनों को उसने टिकट जरूर दिया है। जिनका टिकट कटा है उनमें पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी की बेटी रितु खंडूरी भी हैं। एक और खास बात यह है कि पार्टी ने सभी नौ मंत्रियों को टिकट दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा से और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन कौशिक हरिद्वार से चुनाव लड़ेंगे। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल अपनी पुरानी सीट ऋषिकेश से चुनाव लड़ेंगे।</p>
<p>हरक सिंह रावत के भाजपा से निष्कासन और उनके कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा के बाद सत्तारूढ़ पार्टी ने कांग्रेस के उन सभी असंतुष्ट विधायकों को टिकट देने का निर्णय लिया है जिन्होंने 2016 में हरीश रावत सरकार के खिलाफ बगावत कर दी थी। बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल को पार्टी ने चकराता सीट से उम्मीदवार घोषित किया है।</p>
<p>इस सूची में जातिगत समीकरणों को भी साधने की कोशिश की गई है। जिन 59 सीटों के लिए नाम घोषित किए गए हैं उनमें 22 ठाकुर, 15 ब्राह्मण, 6 सुरक्षित वर्ग के और 3 बनिया समुदाय के हैं। प्रदेश की आबादी में लगभग 35 फ़ीसदी ठाकुर और 25 फ़ीसदी ब्राह्मण हैं। माना जा रहा है कि भाजपा के साथ कांग्रेस भी इन्हीं जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित करेगी।</p>
<p>भाजपा ने उत्तराखंड में भले ही 85 फ़ीसदी सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हों, पंजाब में वह अभी तक ऐसा नहीं कर पाई है। यहां पार्टी अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस और पूर्व अकाली नेता सुखदेव सिंह ढींढसा की शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है।</p>
<p>दरअसल यहां कांग्रेस को भी अपने बाकी बचे 31 उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देना है। दोनों पार्टियां एक-दूसरे की तरफ से नाम घोषित करने का इंतजार कर रही हैं। कांग्रेस चाहती है कि भाजपा अपने प्रत्याशी घोषित कर दे उसके बाद वह अपने लोगों के नाम घोषित करेगी, ताकि असंतुष्ट नेता भाजपा से टिकट लेने के चक्कर में दलबदल ना कर लें। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस के असंतुष्ट भाजपा में जाएं या ना जाएं, वे अमरिंदर की पंजाब लोक कांग्रेस में जरूर जा सकते हैं।</p>
<p>कांग्रेस को जिन 31 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित करने हैं उनमें 13 पर पार्टी के मौजूदा विधायक हैं। पहली सूची में इन विधायकों के नाम नहीं थे। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के भी सिर्फ उनकी पुरानी सीट से चुनाव लड़ने की संभावना है। पहले कहा जा रहा था कि वे चमकौर साहिब के अलावा आदमपुर से भी खड़े हो सकते हैं।</p>
<p>भाजपा नीत गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी ही बड़े भाई की भूमिका में है। माना जा रहा है कि वह 117 में से 80 से 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। अगर वह 80 सीटों पर भी लड़ती है तो बाकी बची 37 सीटों पर ही पंजाब लोक कांग्रेस और ढींढसा के शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) को संतोष करना पड़ेगा। पंजाब में मतदान की तारीख 14 फरवरी से बढ़ाकर 20 फरवरी किए जाने के बाद वहां नामांकन की तारीख भी आगे बढ़ गई है। अब 1 फरवरी तक प्रत्याशी नामांकन कर सकते हैं।</p>
<p>आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री प्रत्याशी भगवंत मान संगरूर जिले की धूरी सीट से लड़ेंगे। मान 2014 और 2019 के आम चुनाव में संगरूर लोकसभा सीट से ही जीते थे। इस लोकसभा क्षेत्र के धुरी विधानसभा इलाके में उन्हें ज्यादा मत मिले थे। शायद इसी बात को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने उन्हें धुरी से खड़ा करने का फैसला किया है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61ea6fe6321fb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भाजपा ने उत्तराखंड के 59 प्रत्याशी घोषित किए, लेकिन पंजाब में ऊहापोह जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61ea6fe6321fb.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब, उत्तराखंड में कांग्रेस में फिर असंतोष की सुगबुगाहट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/dissent-voices-murmur-again-in-punjab-and-uttarakhand-congress.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 18 Jan 2022 12:00:24 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/dissent-voices-murmur-again-in-punjab-and-uttarakhand-congress.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आसन्न विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में कांग्रेस पार्टी में एक बार फिर असंतोष की सुगबुगाहट दिखने लगी है। सभी राज्यों में स्थानीय स्तर के नेता चाहते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करे, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व अभी तक ऐसा करने से बच रहा है। शायद उसे भी इस बात का एहसास है कि किसी एक नाम का ऐलान करने के बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी तेज हो सकती है। केंद्रीय नेतृत्व चुनाव से पहले इससे बचना चाहता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे महत्वपूर्ण राज्य पंजाब में उसने इस बात का संकेत दे दिया है कि मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ही आगे मुख्यमंत्री के उम्मीदवार रहेंगे। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी एक बार फिर बढ़ने के आसार हो गए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह और अब चन्नी के कामकाज की वे लगातार आलोचना भी करते रहे हैं। वे चुनाव प्रचार में चन्नी से अलग वादे भी कर रहे हैं।</p>
<p>इस बीच एक नए घटनाक्रम के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के भतीजे भूपिंदर सिंह के ठिकाने पर छापा मारा है। ईडी ने मंगलवार सुबह 10 जगहों पर छापे मारे जिनमें एक भूपिंदर सिंह का ठिकाना भी है। ईडी का कहना है किए छापे अवैध रेत खनन के सिलसिले में मारे गए हैं।</p>
<p>दरअसल, सोमवार को पंजाब कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से एक वीडियो जारी किया गया। उस वीडियो में अभिनेता सोनू सूद चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री के तौर पर पेश कर रहे हैं। वैसे तो सोनू सूद अगर अपने ट्विटर हैंडल से ऐसा वीडियो जारी करते तो कोई बात नहीं थी, लेकिन यह वीडियो पार्टी के आधिकारिक हैंडल से जारी हुआ है इसलिए माना जा रहा है कि यह केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से ही हुआ है। सोनू सूद की बहन मालविका सूद हाल ही कांग्रेस पार्टी में शामिल हुई हैं। पार्टी ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए टिकट भी दिया है।</p>
<p>कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री रहते नवजोत सिंह सिद्धू ने उनके खिलाफ अभियान सा छेड़ रखा था। जिसके बाद अंततः कैप्टन को जाना पड़ा। सिद्धू को उम्मीद थी कि पार्टी नेतृत्व उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर बिठाएगा। लेकिन नेतृत्व ने दलित चेहरे के रूप में चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया, जिसे मास्टर स्ट्रोक भी बताया गया। वैसे अभी तक चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला सही लग रहा है। पार्टी के खिलाफ आम लोगों में जो माहौल था चन्नी ने 3 महीने में उसे कम करने में सफलता पाई है। इसके अलावा वह भाजपा और उसके नेतृत्व का जिस अंदाज में मुकाबला कर रहे हैं, उसे भी पार्टी के भीतर काफी तारीफ मिल रही है। सोशल मीडिया पर भी उनकी प्रशंसा हो रही है। किसी ने लिखा, &ldquo;हाल के वर्षों में कांग्रेस के साथ एक ही अच्छी बात हुई, और वह हैं चरणजीत सिंह चन्नी।&rdquo;</p>
<p>लेकिन चन्नी को मिल रहे इस समर्थन से सिद्धू की आकांक्षाओं पर पानी फिरता दिख रहा है। इस वीडियो के आने के बाद 24 घंटे तक तो सिद्धू की तरफ से कोई बयान नहीं आया। लेकिन पार्टी नेताओं का कहना है कि सिद्धू जिस तरह की शख्सीयत है देर-सबेर जरूर सामने आएंगे।</p>
<p>कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के लिए सिर्फ पंजाब में पार्टी को एकजुट रखने की समस्या नहीं, बल्कि उत्तराखंड और गोवा में भी उसे इसका सामना करना पड़ रहा है। उत्तराखंड में हरीश रावत चाहते हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया जाए तो गोवा में दिगंबर कामत मुख्यमंत्री बनने का सपना पाले हुए हैं। शायद यह भी वजह है कि केंद्रीय नेतृत्व ने अभी तक चन्नी को आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित नहीं किया है। वैसे भी 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने मतदान से करीब एक हफ्ता पहले ही अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया था। अभी पंजाब में मतदान होने में एक महीने का समय बाकी है।</p>
<p>उत्तराखंड में पार्टी को एक और समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वहां भाजपा सरकार में मंत्री रहे हरक सिंह रावत को भाजपा ने निकाल दिया है। अब उनके कांग्रेस में वापस आने की चर्चा है। हरक सिंह रावत 2017 से पहले हरीश रावत की कांग्रेस सरकार में मंत्री थे। लेकिन 18 मार्च 2016 को उन्होंने बगावत कर दी थी जिससे हरीश रावत सरकार संकट में आ गई थी। इसलिए हरीश रावत किसी भी सूरत में हरक सिंह रावत को कांग्रेस में वापस लिए जाने के पक्ष में नहीं हैं।</p>
<p>लेकिन यहां भी दूसरे समीकरण मायने रखते हैं। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रीतम सिंह की हरीश रावत के साथ अच्छी नहीं बनती है। वे चाहते हैं कि हरक सिंह रावत पार्टी में वापस आएं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव भी हरक सिंह रावत की वापसी के पक्ष में हैं। वैसे हरीश रावत के विरोध के बावजूद हरक सिंह रावत की वापसी तय मानी जा रही है। ऐसे में यह देखना होगा कि खुद को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करवाने का दबाव डालने वाले हरीश रावत, हरक सिंह के साथ आगे किस तरह एडजस्ट करते हैं। फिलहाल तो वे यही कह रहे हैं कि व्यक्ति महत्वपूर्ण नहीं है, पार्टी सामूहिक स्तर पर जो फैसला करेगी वही होगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61e65e6d5a03b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब, उत्तराखंड में कांग्रेस में फिर असंतोष की सुगबुगाहट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61e65e6d5a03b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में धान खरीद चुनावी मुद्दा, अब तक 27 फीसदी धान ही एमएसपी पर खरीदा गया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/paddy-procurement-is-becoming-an-issue-among-farmers-in-the-uttar-pradesh-assembly-elections.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 18 Jan 2022 11:08:41 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/paddy-procurement-is-becoming-an-issue-among-farmers-in-the-uttar-pradesh-assembly-elections.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">आसन्न चुनाव वाले राज्यों उत्तर प्रदेश और पंजाब में किसानों के बीच धान खरीद बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। उपभोक्&zwj;ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा के 10 तक के आंकड़ो के अनुसार<span style="font-size: 10pt;">&nbsp;</span>उत्तर प्रदेश में&nbsp; 6.56 लाख किसानों से 46.50 लाख टन धान एमएसपी पर खरीदा गया है। इस प्रकार, राज्य में कुल धान उत्पादन का केवल 27 फीसदी एमएसपी पर खरीदा गया है। &nbsp;जबकि &nbsp; पिछले साल किसान आंदोलन की एक मुख्य मांग यह थी कि सरकार किसानों की कुल उपज एमएसपी के आधार पर खरीदे या ऐसी व्यवस्था करे कि किसानों की उपज जहां बेची जाए उसे एमएसपी पर ही खरीदा जाए। इस खरीद का असर विधानसभा चुनाव में दिख सकता है।</p>
<p style="text-align: justify;">राज्य में कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 में 169.48 लाख टन और वर्ष 2020-21 में 171.36 लाख टन धान का उत्पादन हुआ। इस साल&nbsp; इस सीजन में&nbsp; इसे से अधिक उत्पादन की उम्मीद है। पिछले वर्ष के बराबर उत्पादन भी होता है, तो अभी तक उत्तर प्रदेश में 46.50 लाख टन धान की खरीद एमएसपी पर की&nbsp; गई है। इस तरह राज्य में कुल धान उत्पादन का 27 फीसदी ही एमएसपी पर खरीदा गया है। एक साल से ज्यादा चले किसान आंदोलन की मुख्य मांग यही थी कि सरकार किसानों की उपज का शत-प्रतिशत एमएसपी पर खरीदने की व्यवस्था करे। इस आंदोलन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों ने भी हिस्सा लिया था।</p>
<p style="text-align: justify;">सहारनपुर जिले के नंदी फिरोजपुर गांव के एक किसान विनोद चौधरी का कहना है कि हमने अपना धान बेचने के लिए सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। लेकिन जब धान खरीदने की बात आती है, तो धान केंद्र पर काम करने वाले कर्मचारियों ने धान की गुणवत्ता में कमी बता कर हमारी कुल उपज का 25 प्रतिशत ही खरीदा। मजबूरी में बाकी धान को बाहर &nbsp;बेचना पड़ा। उनका कहना था अधिकांश किसानों के साथ ऐसा ही व्यवहार किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align: justify;">दूसरी ओर, पंजाब में अब तक 9.24 लाख किसानों से एमएसपी पर 186.85 लाख टन धान की खरीद की जा चुकी है। किसानों को 36623.64 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इस वर्ष जहां पंजाब में धान का उत्पादन 180 लाख टन से अधिक होने का अनुमान था, वहीं एमएसपी के आधार पर 100 फीसदी &nbsp;से अधिक धान की खरीद की गई है।</p>
<p style="text-align: justify;">छत्तीसगढ़ में खरीफ में धान का उत्पादन 80 लाख टन से अधिक है। वर्तमान में एमएसपी के आधार पर 16.90 लाख किसानों से 67.65 लाख टन धान की खरीद की गई है। इस तरह राज्य सरकार ने कुल धान उत्पादन का लगभग 84 फीसदी खरीद लिया है।</p>
<p style="text-align: justify;">दक्षिणी राज्य तेलंगाना में धान की खेती रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रही है। साल 2014-15 में धान का रकबा मात्र 12.23 लाख एकड़ था जो 2021 में रिकॉर्ड 63 लाख एकड़ हो गया। ऐसी बढ़ोतरी चंद्रशेखर राव की सरकार आने के पांच-छह साल बाद हुई है। खरीफ सीजन 2021 में तेलंगाना में धान का उत्पादन 148 लाख टन होने का अनुमान है। जहां 9.67 लाख किसानों से 65.54 लाख एमएसपी के आधार पर खरीद की गई है। इस प्रकार, इस राज्य में कुल उत्पादन का लगभग 44 प्रतिशत एमएसपी पर खरीदा गया है।</p>
<p style="text-align: justify;">किसान एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान का कहना है कि सरकार अपने वादे के मुताबिक धान की खरीद नहीं कर रही है। उत्तर प्रदेश में पहले किसान पंजीकरण के समय किसानों को परेशानी हो रही थी। उनका कहना है कि&nbsp; किसानों को एमएसपी पर बेचने के&nbsp; काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसके बाद बहुत कम किसान अपनी धान की उपज को एमएसपी पर मंडियों और क्रय केंद्रों में बेच पाते हैं। इस कारण किसान अपनी उपज को बाजारों में बहुत कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि किसान सरकार और धान खरीद केंद्रों से काफी नाखुश हैं क्योंकि किसानों ने अपनी मेहनत और इस महंगाई के समय पर ज्यादा खर्च करके अपनी उपज तैयार की है।</p>
<p style="text-align: justify;">भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी होशियार सिंह का कहना है&nbsp; कि धान की खरीदारी एमएसपी पर बहुत कम हुई है। इससे यूपी के किसानों की परेशानी बढ़ गई है। हमने इस मामले की जानकारी धान क्रय केंद्र से जुड़े सरकारी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों को दे दी है। लेकिन सरकार इस मुद्दे पर सुनवाई नहीं कर रही है। हम &nbsp;31 जनवरी को किसान संगठन धरना-प्रदर्शन के जरिए जोर-शोर से सरकार के सामने बात रखेंगे।</p>
<p style="text-align: justify;">इस बार सरकार और विपक्ष के चुनावी मुद्दे में पहली बार किसान मुख्य केंद्र बना हुआ है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) को लेकर किसान राजनीति हमेशा तेज रही है। कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के चलते किसान संगठनों ने राज्य सरकार पर गन्ने के दाम बढ़ाने का दबाव बनाने की रणनीति बनाई थी। अब धान खरीद में उनकी भूमिका तेज होती जा रही है। तेलंगाना, पंजाब और छत्तीसगढ़ किसानों की उपज को एमएसपी पर खरीदने में आगे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि उत्तर प्रदेश के नाराज किसानों का रुख विधानसभा चुनावों में क्या रहता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/11/image_750x500_61a64dbe4fad0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में धान खरीद चुनावी मुद्दा, अब तक 27 फीसदी धान ही एमएसपी पर खरीदा गया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/11/image_750x500_61a64dbe4fad0.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सत्ता में आये तो सभी फसलों पर एमएसपी, गन्ने का भुगतान 15 दिन के भीतर करेंगेः अखिलेश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/akhilesh-promise-msp-for-all-crops-sugarcane-payment-in-15-days-if-sp-comes-to-power.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 18 Jan 2022 10:14:01 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/akhilesh-promise-msp-for-all-crops-sugarcane-payment-in-15-days-if-sp-comes-to-power.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो किसानों को सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिया जाएगा। इसके साथ ही गन्ना किसानो को 15 दिन के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। सोमवार को पार्टी के कार्यक्रम अन्न &nbsp;संकल्प में उन्होंने यह वादा करते हुए कहा कि किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को सपा सरकार के गठन पर 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि किसानों पर लगाई गई सभी एफआईआर को वापस लिया जाएगा। उन्होंने किसानों को मुफ्त रिवाल्विंग बजट और सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली देने का भी वादा किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के घोषणा पत्र में &nbsp;एक-एक शब्द शामिल हैं।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">अखिलेश यादव ने कहा कि जिन्होंने किसानों के साथ अन्याय और अत्याचार किया है, हम उन्हें सत्ता से हटा देंगे। इस मौके पर तराई किसान संगठन के नेता और लखीमपुर कांड में गंभीर रूप से घायल हुए तेजिंद्र सिंह विर्क भी मौजूद थे। मंच पर विर्क के साथ उनके दो साथी भी थे। अखिलेश यादव इस प्रेस कांफ्रेस में कहा कि तेजिंद्र सिंह विर्क आज हमारे साथ हैं भगवान की कृपा से उनकी जान बच गई। उस समय &nbsp;ही मुझे जैसे पता चला मैंने घटना की जानकारी ली।</p>
<p style="text-align: justify;">प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश ने किसानों की बात करते हुए कहा किसरकार ने किसानों पर काला कानून थोपा किसान शहीद हुए, उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए गए। सरकार ने किसानों के हित में कोई फैसला नहीं लिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस दौरान &nbsp;अखिलश यादव ने किसान नेताओं को धन्यवाद दिया।</p>
<p style="text-align: justify;">चुनाव आयोग ने 8 जनवरी को उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की घोषणा की थी. राज्य की 403 सीटों वाली 18वीं विधानसभा के लिए सात चरणों में 10 फरवरी से सात मार्च तक मतदान होगा। चुनाव के नतीजे 10 मार्च को आएंगे। उत्तर प्रदेश में सात चरणों में 10 फरवरी, <span>14 फरवरी</span>, <span>20 फरवरी</span>, <span>23 फरवरी</span>, <span>27 फरवरी</span>, <span>3 मार्च और 7 मार्च को वोटिंग होगी.योगी सरकार ने राज्य के किसानों को अपने दायरे में लाने की चुनावी घोषणा से एक दिन पहले ही किसानों को बिजली के दाम आधे कर दिए थे।</span></p>
<p style="text-align: justify;"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61e61b1430dd5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सत्ता में आये तो सभी फसलों पर एमएसपी, गन्ने का भुगतान 15 दिन के भीतर करेंगेः अखिलेश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61e61b1430dd5.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में मतदान अब 20 फरवरी को, यहां प्रचार में स्थानीय मुद्दे अहम तो उत्तराखंड में स्थानीय मुद्दों की कोई चर्चा नहीं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/punjab-to-now-vote-on-20th-february-local-issues-are-there-in-punjab-but-not-in-uttarakhand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 17 Jan 2022 16:42:35 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/punjab-to-now-vote-on-20th-february-local-issues-are-there-in-punjab-but-not-in-uttarakhand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में अब 14 फरवरी के बजाय 20 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, भाजपा और अन्य दलों की मांग पर यह फैसला किया है। दरअसल 16 फरवरी को गुरु रविदास जयंती है। पार्टियों का कहना था कि इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग घरों से बाहर यात्रा कर रहे होंगे और वे वोट नहीं डाल सकेंगे। इसलिए आयोग को मतदान की तारीख आगे बढ़ा देनी चाहिए। प्रदेश में करीब 32 फ़ीसदी दलित मतदाता हैं। कांग्रेस ने 2017 <span>में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित </span>34 <span>सीटों में </span>21 <span>सीटें जीती थीं।</span></p>
<p>पंजाब में मतदान की तारीख भले करीब हफ्ते भर आगे बढ़ गई हो, पंजाब के साथ-साथ उत्तराखंड में इन दिनों जो चुनाव प्रचार चल रहा है उसमें एक बड़ा ही बुनियादी फर्क नजर आता है। कांग्रेस शासित पंजाब में स्थानीय मुद्दों की चर्चा अधिक हो रही है तो भाजपा शासित उत्तराखंड में डबल इंजन नारे पर फोकस किया जा रहा है। वहां भाजपा ही नहीं, कांग्रेस भी आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर बात करने के बजाए भाजपा सरकार की खामियों की बातें ज्यादा कर रही है।</p>
<p>पंजाब के पिछले विधानसभा चुनाव में धर्म ग्रंथों की बेअदबी और ड्रग्स के मुद्दे की चर्चा सबसे अधिक थी। इस बार भी चुनाव से पहले बेअदबी की छिटपुट घटनाएं हुई हैं। पिछली बार ऐसी घटनाएं 2017 <span>के चुनाव से कुछ दिनों पहले हुई थीं। पूर्ववर्ती अमरिंदर सिंह सरकार के समय इसके लिए दोषी लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा सकी जबकि उस चुनाव में यह बड़ा मुद्दा था। कांग्रेस ने दोषियों को जल्द पकड़ने का वादा भी किया था। अमरिंदर के जाने के बाद चरणजीत सिंह चन्नी के कार्यकाल में भी इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। चन्नी ने तीन रुपये यूनिट बिजली</span>, <span>हर साल एक लाख युवाओं को नौकरियां और ब्याज-मुक्त कर्ज देने के वादे किए हैं। आम आदमी पार्टी यहां अपना दिल्ली मॉडल दोहराने की कोशिश कर रही है। उसी को ध्यान में रखते हुए केजरीवाल ने </span>300 <span>यूनिट मुफ्त बिजली और सभी महिला मतदाताओं को हर महीने एक हजार रुपये देने का वादा किया है।</span></p>
<p>पिछले चुनाव में कांग्रेस ने एक महीने में ड्रग्स की समस्या खत्म करने का वादा किया था, <span>लेकिन </span>5 <span>साल बाद भी यह समस्या जस की तस बनी हुई है। चुनाव को प्रभावित करने वाले अन्य प्रमुख मुद्दों में कृषि सबसे अहम है। केंद्र सरकार के तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब के किसान एक साल से ज्यादा समय तक दिल्ली के सीमा पर धरने पर बैठे रहे। सवाल है कि राजनीतिक दलों को इस मुद्दे का कितना फायदा मिलेगा</span>, <span>क्योंकि आंदोलन करने वाले </span>32 <span>किसान संगठनों में से </span>22 <span>संगठन खुद मोर्चा बनाकर चुनाव लड़ रहे हैं।</span></p>
<p><strong>भाजपा का सीएम चेहरा स्पष्ट नहीं</strong></p>
<p>कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री का चेहरा चन्नी हैं तो अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन का चेहरा सुखबीर बादल हैं। आम आदमी पार्टी मंगलवार को आपने मुख्यमंत्री चेहरे का ऐलान करेगी। पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 13 जनवरी को एक नंबर जारी करते हुए कहा था कि लोग अपनी पसंद के मुख्यमंत्री का नाम इस नंबर पर भेजें। पार्टी का दावा है कि अब तक 14 लाख लोग इस नंबर पर अपना जवाब भेज चुके हैं। किसान मोर्चा की तरफ से उनके नेता बलबीर सिंह राजेवाल मुख्यमंत्री के दावेदार हैं। लेकिन भाजपा अमरिंदर और सुखदेव सिंह ढींडसा के गठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा यह अभी तक तय नहीं हो पाया है। भाजपा इससे पहले अकाली दल के साथ गठबंधन में 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी। पहली बार वह करीब 80 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने पर विचार कर रही है। जाहिर है ऐसे में 117 सीटों वाली विधान सभा में अमरिंदर और ढींढसा के प्रत्याशियों के लिए सीटें बहुत कम रह जाएंगी।</p>
<p>पंजाब के चुनाव अभियान में स्थानीय मुद्दों की चर्चा तो कुछ हद तक मिल जाती है लेकिन उत्तराखंड में जनता के मुद्दे गायब नजर आ रहे हैं। इसके विपरीत दोनों प्रमुख राजनीतिक दल वादों से ही मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा डबल इंजन नारे के सहारे अपनी नैया पार लगाने की कोशिश में है तो कांग्रेस आम लोगों के मुद्दे उठाने के बजाय भाजपा सरकार की खामियों पर ही फोकस कर रही है। पलायन, <span>रोजगार</span>, <span>पानी</span>, <span>स्वास्थ्य</span>, <span>शिक्षा</span>, <span>सड़क और कृषि यहां के स्थानीय मुद्दे हैं</span>, <span>लेकिन इन मुद्दों की चर्चा कोई भी राजनीतिक पार्टी नहीं कर रही है। आय के पर्याप्त साधन उपलब्ध ना होने के कारण पहाड़ों से पलायन जारी है। पानी</span>, <span>स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से लोग आज भी जूझ रहे हैं। चार धाम जैसे प्रोजेक्ट की चर्चा तो बहुत हो रही है लेकिन गांव को सड़क से जोड़ने का काम बहुत ही धीमी गति से चल रहा है। आम आदमी पार्टी यहां भी तीसरी ताकत बनने की कोशिश में है लेकिन अभी उसकी मौजूदगी बहुत कम है। वह यहां भी </span>'<span>मुफ्त मॉडल</span>' <span>अपनाने की कोशिश कर रही है। उसने महिलाओं को हर माह आर्थिक सहायता</span>, <span>मुफ्त बिजली</span>, <span>बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा के साथ सैनिकों</span>, <span>पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों के लिए अपनी घोषणाएं की हैं। अब </span>10 <span>मार्च को पता चलेगा की जनता ने किस राजनीतिक दल के वादों पर ज्यादा भरोसा किया है।</span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61e54f0e5c6f8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में मतदान अब 20 फरवरी को, यहां प्रचार में स्थानीय मुद्दे अहम तो उत्तराखंड में स्थानीय मुद्दों की कोई चर्चा नहीं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61e54f0e5c6f8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में कांग्रेस ने जारी की 86 उम्मीदवारों की पहली सूची, मुख्यमंत्री चन्नी चमकौर साहिब से और सिद्धू अमृतसर पूर्व से लड़ेंगे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/congress-releases-1st-list-for-punjab-assembly-polls-channi-to-contest-from-chamkaur-sahib-sidhu-from-amritsat-east.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 16 Jan 2022 16:11:51 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/congress-releases-1st-list-for-punjab-assembly-polls-channi-to-contest-from-chamkaur-sahib-sidhu-from-amritsat-east.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">पंजाब में 14 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होने हैं। सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की जो पहली सूची जारी की है, उसमें मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी समेत 86 नाम हैं। चन्नी अपनी पुरानी विधानसभा सीट चमकौर साहिब से चुनाव लड़ेंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर पूर्व से लड़ेंगे। पार्टी ने उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा को डेरा बाबा नानक और ओम प्रकाश सोनी को अमृतसर सेंट्रल से टिकट दिया है। ये दोनों नेता अभी इन सीटों से ही विधायक हैं। कांग्रेस से पहले शिरोमणि अकाली दल-बहुजन समाज पार्टी गठबंधन और आम आदमी पार्टी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। अब भाजपा-अमरिंदर गठबंधन और 22 किसान संगठनों के संयुक्त समाज मोर्चा के उम्मीदवारों का एलान बाकी है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">कांग्रेस ने 4 मौजूदा विधायकों को टिकट न देने का फैसला किया है। इनमें मोगा से हरजोत कमल, श्री हरगोविंदपुर साहिब से बलविंदर सिंह लड्डी, बल्लुआना से नाथूराम और मलोट से अजायब सिंह भट्टी हैं। भट्टी विधानसभा के उपाध्यक्ष भी हैं। लड्डी ने विधायक फतेह जंग बाजवा के साथ 28 दिसंबर को भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर ली थी, लेकिन 6 दिनों के बाद ही वह वापस कांग्रेस में आ गए थे। चार सीटों को छोड़कर बाकी सभी मौजूदा विधायकों को टिकट दिया गया है। वह सब अपनी पुरानी सीट से ही चुनाव लड़ेंगे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">गुरुवार को पार्टी अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी की अध्यक्षता में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में इस सूची को अंतिम रूप दिया गया। पहली सूची में 9 महिलाओं को जगह दी गई है यानी करीब 10 फ़ीसदी उम्मीदवार महिलाएं हैं। उत्तर प्रदेश में पार्टी ने 40 फ़ीसदी सीटें उम्मीदवारी महिलाओं को दी है। वहां पार्टी ने अब तक 125 प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं जिनमें से 50 महिलाएं हैं। पार्टी ने एक परिवार एक टिकट का फार्मूला भी अपनाया है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">विवादास्पद पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला कुछ दिनों पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे, वह मानसा से चुनाव लड़ेंगे। अभिनेता सोनू सूद की बहन मालविका सूद को मोगा से टिकट दिया गया है। मूसेवाला मौजूदा विधायक नजर सिंह की जगह चुनाव लड़ेंगे। राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा इस बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। उन्हें गुरदासपुर जिले की कादियान सीट से टिकट दिया गया है। पहले यहां उनके भाई फतेह जंग सिंह बाजवा विधायक थे। पंजाब कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और प्रचार अभियान समिति के प्रमुख सुनील जाखड़ चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनकी जगह उनके भतीजे संदीप जाखड़ को अबोहर सीट से टिकट दिया गया है। इसी तरह मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा की जगह उनके बेटे मोहित मोहिंद्रा पटियाला ग्रामीण सीट से चुनाव लड़ेंगे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अन्य प्रमुख प्रत्याशियों में वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल बठिंडा शहरी क्षेत्र से , पीडब्ल्यूडी मंत्री विजय इंदर सिंगला संगरूर से, जलापूर्ति और स्वच्छता मंत्री रजिया सुल्तान मलेरकोटला से और उद्योग मंत्री गुरकीरत सिंह कोटली खन्ना से पर्चा भरेंगे। अन्य मंत्रियों में राणा गुरजीत सिंह कपूरथला से, तृप्त राजिंदर बाजवा फतेहगढ़ चूड़ियां से, रणदीप सिंह नाभा अमरोहा से, अमरिंदर सिंह राजा गिद्दड़बाहा से और परगट सिंह जालंधर कैंट से फिर चुनाव लड़ेंगे। पूर्व उपमुख्यमंत्री राजेंद्र कौर भट्ठल को लहरा सीट से टिकट दिया गया है। हालांकि पिछले चुनाव में वह यहां से हार गई थीं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुई रुपिंदर कौर रूबी को मलोट सुरक्षित सीट से टिकट दिया गया है। पिछले चुनाव में वे आम आदमी के टिकट पर बठिंडा ग्रामीण से चुनाव जीती थीं। </span><span style="font-weight: 400;">पंजाब युवा कांग्रेस के पूर्व प्रमुख अमरप्रीत सिंह लल्ली को गढ़शंकर से टिकट दिया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की पटियाला शहरी सीट से अभी पार्टी ने नाम तय नहीं किया है। पार्टी 117 सीटों वाली विधानसभा में से बाकी बची 31 सीटों के लिए भी नामों की घोषणा जल्द करेगी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सुखपाल सिंह खैरा को भुलत्थ से टिकट दिया गया है। खैरा ने 2019 में आम आदमी पार्टी से अलग होकर अपनी अलग पार्टी लांच की थी। लेकिन उसी साल कांग्रेस में आ गए थे। वे पहले भी कांग्रेस में ही थे, 2015 में आम आदमी पार्टी में चले गए थे। पार्टी ने बलबीर सिंह सिद्दू, साधू सिंह, सुंदर शाम अरोड़ा और गुरप्रीत सिंह कांगड़ को भी टिकट दिया है। चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद पिछले साल इन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। पार्टी ने मोगा के मौजूदा विधायक हरजोत कमल को टिकट नहीं दिया। उसके बाद वे भाजपा में शामिल हो गए। इस बीच पूर्व मंत्री जोगिंदर सिंह मान कांग्रेस के साथ 50 साल पुराना रिश्ता तोड़ कर आम आदमी पार्टी में चले गए हैं।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61e3fd0733c32.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में कांग्रेस ने जारी की 86 उम्मीदवारों की पहली सूची, मुख्यमंत्री चन्नी चमकौर साहिब से और सिद्धू अमृतसर पूर्व से लड़ेंगे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61e3fd0733c32.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बीजेपी ने जारी की यूपी के लिए  107 उम्मीदवारों की  लिस्ट, गोरखपुर से लड़ेगे योगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/the-first-list-of-candidates-released-by-bjp-yogi-will-fight-from-gorakhpur.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 15 Jan 2022 17:58:23 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/the-first-list-of-candidates-released-by-bjp-yogi-will-fight-from-gorakhpur.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">बीजेपी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पहले दो चरणों के 105 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर शहर और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को सिराथू से चुनाव लड़ाने का ऐलान किया है।इनको मिलाकर पार्टी ने 107 उम्मीदवारों की सूची जारी की है।<span>&nbsp;</span>इससे पहले योगी को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो चुकी हैं। उनके कभी अयोध्या से तो कभी मथुरा से चुनाव लड़ने चर्चा चली थी लेकिन बीजेपी की ओर से जारी लिस्ट में योगी के गोरखपुर से चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ ही अटकलों पर विराम लग गया है। गोरखपुर में छठे चरण के तहत <span>3</span> मार्च को और सिराथू में पांचवें चरण के तहत <span>27</span> फरवरी को मतदान होना है।</p>
<p style="text-align: justify;">केंद्रीय मंत्री और भाजपा के उत्तर प्रदेश में चुनाव इंचार्ज धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आज हमने 105 उम्मीदवारों की घोषणा की है। इन सीटों पर भाजपा के 83 मौजूदा विधायक थे। हमने उनमें से 63 को फिर से टिकट दिया है। पहले और दूसरे चरण में कुल 113 सीटों पर मतदान होना है। पार्टी ने पहले चरण और दूसरे चरण की आठ सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। प्रधान ने कहा कि इन आठ सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा हो चुकी है और इस पर फैसला करने का अधिकार भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा पर छोड़ दिया गया है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">प्रधान ने कहा कि भाजपा की सर्वोच्च नीति बनाने वाली संस्था संसदीय बोर्ड ने योगी को गोरखपुर से और मौर्य को सिराथू से चुनाव लड़ाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी<span>, </span>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह<span>, </span>भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा<span>, </span>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह<span>, </span>केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति के अन्य सदस्यों ने गुरुवार को हुई बैठक में अब तक घोषित नामों पर मुहर लगाई।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>योगी ने&nbsp; किसी विशेष सीट से चुनाव लड़ने का कोई अनुरोध नहीं किया</strong></p>
<p style="text-align: justify;">योगी आदित्यनाथ के अयोध्या सीट से चुनाव लड़ने की काफी चर्चा हुई और पार्टी में इसकी चर्चा भी हुई लेकिन अंतिम फैसला पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) पर छोड़ दिया गया। इस बारे में पूछे जाने पर प्रधान ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने किसी विशेष सीट से चुनाव लड़ने का कोई अनुरोध नहीं किया था। पार्टी ने उन्हें गोरखपुर शहर से मैदान में उतारने का फैसला किया और योगी आदित्यनाथ ने इसे सहर्ष स्वीकार कर लिया। पहले और दूसरे चरण के लिए घोषित उम्मीदवारों में मथुरा से ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा<span>, </span>शाहजहांपुर से वित्त और संसदीय मामलों के राज्य मंत्री सुरेश खन्ना<span>, </span>थानाभवन से गन्ना विकास और चीनी उद्योग मंत्री सुरेश राणा<span>, </span>उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य आगरा ग्रामीण से<span>, </span>नोएडा से पंकज सिंह<span>, </span>सरधना से संगीत सोम प्रमुख नाम हैं।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बीजेपी&nbsp; में 21 नए लोगों को&nbsp; मिला&nbsp; टिकट दिया</strong></p>
<p style="text-align: justify;">प्रधान ने कहा कि पार्टी ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले युवाओं<span>, </span>महिलाओं और प्रबुद्ध लोगों सहित <span>21</span> नए चेहरों को टिकट दिया है। उन्होंने कहा कि जीत की संभावना के साथ पार्टी और उसकी विचारधारा के प्रति समर्पण को उम्मीदवारों के चयन का मुख्य आधार बनाया गया।&nbsp;उन्होंने दावा किया कि भाजपा गठबंधन को चुनावों में स्पष्ट बहुमत मिला और <span>300</span> से अधिक सीटें जीतीं।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दस फरवरी को 58 सीटों पर होगा मतदान</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मालूम हो कि उत्तर प्रदेश में सात चरणों में मतदान होना है। इसकी शुरुआत <span>10</span> फरवरी को राज्य के पश्चिमी हिस्से के <span>11</span> जिलों की <span>58</span> सीटों पर मतदान के साथ होगी। दूसरे चरण में राज्य की <span>55</span> सीटों पर <span>14</span> फरवरी को मतदान होगा। उत्तर प्रदेश की <span>403</span> सदस्यीय विधानसभा के लिए तीसरे चरण में <span>59</span> सीटें<span>, 23</span> फरवरी को चौथे चरण में <span>60</span> सीटें<span>, 27</span> फरवरी को पांचवें चरण में <span>60</span> सीटें<span>, 3</span> मार्च को छठे चरण में <span>57</span> सीटें और सातवें चरण में <span>7</span> मार्च को <span>54</span> सीटों पर मतदान होगा।</p>
<p>शामली से तजेंद्र सिंह निर्वाल<span>, </span>बुढाना से उमेश मलिक<span>, </span>चरथवल से सपना कश्यप<span>, </span>पुरकाजी से प्रमोद ओटवाल<span>, </span>मुजफ्फरनगर से कपिल देव अग्रवाल<span>, </span>खतौली से विक्रम सैनी<span>, </span>मीरापुर से प्रशांत गुर्जर<span>, </span>शिवलखास से मनेंद्र पाल सिंह<span>, </span>सरदाना से संगीत सोम<span>, </span>हस्तिनापुर से दिनेश खटीक<span>, </span>मेरठ कैंट से अमित अग्रवाल<span>, </span>किठौर से सत्यवीर त्यागी<span>, </span>मेरठ से कमलदत शर्मा<span>, </span>मेरठ दक्षिण से सोमेंद्र तोमर<span>, </span>छपरौली से सहेंद्र सिंह रमाला<span>, </span>बड़ौत से के पी सिंह मलिक<span>, </span>बागपत से योगेश धामा<span>, </span>लोनी से नंदकिशोर गुर्जर<span>, </span>मुरादनगर से अजीतपाल त्यागी<span> को&nbsp; टिकट दिया गया है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61e2c52feb243.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बीजेपी ने जारी की यूपी के लिए  107 उम्मीदवारों की  लिस्ट, गोरखपुर से लड़ेगे योगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61e2c52feb243.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पांच राज्यों की विधानसभा चुनाव में जानिए कब, कहां और कितने चरणों में होंगे चुनाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/elections-2022/know-when-how-many-phases-votes-will-be-held-in-the-assembly-elections-of-five-states.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 15 Jan 2022 12:53:51 GMT]]></pubDate>
		<category>elections-2022</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/elections-2022/know-when-how-many-phases-votes-will-be-held-in-the-assembly-elections-of-five-states.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में चुनावी बिगुल बज चुका है. चुनाव आयोग ने 9 जनवरी को पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया था .उसी दिन से , आचार संहिता (एमसीसी) तत्काल प्रभाव से लागू हो गई थी । उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में चुनाव संपन्न होने तक राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए आदर्श आचार संहिता भी लागू कर दी है&nbsp; वोटों की गिनती 10 मार्च को होगी, यानी 10 मार्च को तय होगा कि किस राज्य में कौन पार्टी की सत्ता में वापसी होगी कौन मुख्यमंत्री &nbsp;​बनेगा।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 7 चरणों में 10 फरवरी से 7 मार्च के बीच होंगे</strong></p>
<p>राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर इस बार सात चरणों में मतदान होगा और इसकी शुरुआत 10 फरवरी से राज्य के पश्चिमी हिस्से के 11 जिलों की 58 सीटों पर मतदान के साथ होगी। यूपी में मतदान का पहला चरण 10 फरवरी, दूसरा चरण 14 फरवरी, तीसरा चरण 20 फरवरी, चौथा चरण 23 फरवरी, पांचवां चरण 27 फरवरी, छठा चरण 3 मार्च, सातवां चरण 7 मार्च को होगा।</p>
<p><strong>पंजाब में एक ही चरण में 117 सीटों पर वोट डाले जाएंगे</strong></p>
<p>चुनाव आयोग के मुताबिक पंजाब की सभी 117 सीटों पर एक ही चरण में 14 फरवरी को वोटिंग होगी. राज्य के नतीजे 10 मार्च को मतगणना के बाद घोषित किए जाएंगे। पंजाब विधानसभा का कार्यकाल 27 मार्च, 2022 को समाप्त हो रहा है।</p>
<p><strong>उत्तराखंड में कितने चरणों में होंगे वोट</strong></p>
<p>उत्तराखंड में इस बार एक ही चरण में चुनाव होंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक राज्य की सभी सीटों पर 14 फरवरी को मतदान होगा.&nbsp; इसका भी चुनाव&nbsp; परिणाम 10 मार्च को आएंगे। उत्तराखंड में विधानसभा की 70 सीटें हैं।</p>
<p><strong>मणिपुर की 60 सीटों के लिए 27 फरवरी और 3 मार्च को मतदान होगा</strong></p>
<p>मणिपुर की 60 सीटों के लिए दो चरणों में मतदान होगा. मणिपुर में पहले चरण का मतदान 27 फरवरी को और दूसरे चरण का मतदान 3 मार्च को होगा. परिणाम 10 मार्च को घोषित किए जाएंगे। मणिपुर विधानसभा में 60 सीटें हैं और इस समय बीजेपी की सरकार है।&nbsp;</p>
<p><strong>गोवा में 14 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे</strong></p>
<p>गोवा में, जिसमें 40 विधानसभा सीटें हैं, एक चरण में 14 फरवरी को मतदान होगा और परिणाम 10 मार्च को घोषित किए जाएंगे। फिलहाल गोवा में बीजेपी की सरकार है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61dac26938ccb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पांच राज्यों की विधानसभा चुनाव में जानिए कब, कहां और कितने चरणों में होंगे चुनाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/01/image_750x500_61dac26938ccb.jpg" width="220"/>
    </item>
    </channel>
</rss>