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    <title>Farmer News: Government Schemes for Farmers, Successful Farmer Stories &#45; : National</title>
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    <description>Farmer News: Government Schemes for Farmers, Successful Farmer Stories &amp;#45; : National</description>
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    <item>
        <title><![CDATA[कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहा तो 6% के पार जाएगी महंगाईः एचएसबीसी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/inflation-may-cross-6-percent-if-crude-oil-stays-above-100-dollars-per-barrel-hsbc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 03 Apr 2026 19:04:09 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/inflation-may-cross-6-percent-if-crude-oil-stays-above-100-dollars-per-barrel-hsbc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ईरान युद्ध के कारण महंगाई एक बार फिर बढ़ने का दबाव बनने लगा है। HSBC के आकलन के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो भारत में खुदरा महंगाई 6% के पार जा सकती है। ऐसी स्थिति में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को अपने मौजूदा रुख में बदलाव करते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर विचार करना पड़ सकता है।</p>
<p>HSBC के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस समय भारत &ldquo;दोराहे&rdquo; पर खड़ा है। महंगाई की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर से नीचे आती हैं या ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं। यदि कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो महंगाई RBI की ऊपरी सीमा को पार कर सकती है। वहीं, यदि औसत कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तो महंगाई 4.5-5% के दायरे में नियंत्रित रह सकती है और सख्त मौद्रिक नीति की जरूरत नहीं पड़ेगी।</p>
<p><strong>कच्चा तेल क्यों है निर्णायक</strong></p>
<p>भारत की सबसे बड़ी कमजोरी आयातित तेल पर निर्भरता है। देश की लगभग 85% पेट्रोलियम जरूरतें आयात के जरिए पूरी होती हैं। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इससे ईंधन महंगा होता है, परिवहन लागत बढ़ती है और अंततः खाद्य पदार्थों व जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा होता है। इस तरह यह प्रभाव किसी एक क्षेत्र तक सीमित न रहकर व्यापक महंगाई पैदा करता है।</p>
<p>अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत में महंगाई लगभग 55-60 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ सकती है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में पहले ही उछाल आ चुका है और ब्रेंट हाल के हफ्तों में 100 डॉलर से ऊपर बना हुआ है।</p>
<p>अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ऊर्जा आपूर्ति में लंबे समय तक व्यवधान रहने से इसके कई प्रभाव सामने आ सकते हैं। जैसे माल ढुलाई महंगी होना, आपूर्ति में कमी और आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती। ये सब कारक महंगाई को और बढ़ा सकते हैं। तेल आयात बिल बढ़ने से रुपये पर दबाव पड़ेगा, जिससे आयातित महंगाई और तेज हो सकती है।</p>
<p><strong>रिजर्व बैंक क्या करेगा?</strong></p>
<p>यदि महंगाई 6% से ऊपर जाती है, तो RBI के पास सख्त मौद्रिक नीति अपनाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं होंगे। HSBC के मुताबिक, कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने रहने पर चालू वित्त वर्ष में कम से कम 25 बेसिस प्वाइंट तक ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। गौरतलब है कि आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक 7-9 अप्रैल को होनी है।</p>
<p>ब्याज दरों में बढ़ोतरी से आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक अनिश्चितताएं पहले ही मांग पर दबाव डाल रही हैं। फिलहाल भारत में महंगाई RBI के निर्धारित दायरे में है, लेकिन स्थिति तेजी से बदल रही है। यदि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के आसपास बनी रहती हैं, तो महंगाई 6% के पार जाने का खतरा वास्तविक है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहा तो 6% के पार जाएगी महंगाईः एचएसबीसी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट के बीच प्रमुख पेट्रोकेमिकल आयात पर सीमा शुल्क में 3 माह के लिए छूट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-grants-full-customs-duty-exemption-on-key-petrochemicals-amid-west-asia-crisis.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 03 Apr 2026 12:15:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-grants-full-customs-duty-exemption-on-key-petrochemicals-amid-west-asia-crisis.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण आपूर्ति में आ रही बाधाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने चुनिंदा महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर 30 जून 2026 तक सीमा शुल्क में पूरी छूट देने की घोषणा की है। इससे पैकेजिंग तथा अन्य उद्योगों को मदद मिलेगी जो इनपुट के तौर पर पेट्रोकेमिकल का इस्तेमाल करते हैं।</p>
<p>वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि इस फैसले का उद्देश्य घरेलू उद्योगों के लिए आवश्यक पेट्रोकेमिकल कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं के कारण बढ़ती लागत के दबाव को कम करना है।</p>
<p>सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कदम आपूर्ति में स्थिरता बनाए रखने के लिए एक लक्षित हस्तक्षेप है, क्योंकि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के चलते प्रमुख कच्चे माल की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ा है।</p>
<p>इस निर्णय से प्लास्टिक, पैकेजिंग, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स और अन्य क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जो बड़े पैमाने पर पेट्रोकेमिकल इनपुट पर निर्भर हैं।&nbsp;</p>
<p>यह अस्थायी छूट उद्योगों को बढ़ती इनपुट लागत से राहत देगी और उत्पादन में व्यवधान के जोखिम को कम करेगी। इससे आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित कर औद्योगिक उत्पादन को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।</p>
<p>छूट के दायरे में एनहाइड्रस अमोनिया, मेथनॉल, टोल्यून, स्टाइरीन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर और मोनोएथिलीन ग्लाइकोल जैसे प्रमुख पेट्रोकेमिकल इनपुट शामिल हैं। इसके अलावा पीवीसी, पीईटी चिप्स, एपॉक्सी रेजिन, पॉलीकार्बोनेट और पॉलीयूरेथेन जैसे व्यापक रूप से उपयोग होने वाले पॉलिमर और रेजिन पर भी छूट दी गई है।</p>
<p>ये सामग्री पैकेजिंग, निर्माण, वस्त्र और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों की आपूर्ति शृंखला की रीढ़ हैं, और इनकी कमी से कई उद्योगों पर व्यापक असर पड़ सकता है।</p>
<p>सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह एक समयबद्ध कदम है, जिसका उद्देश्य बाहरी कारणों से उत्पन्न तात्कालिक चुनौतियों से निपटना है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पश्चिम एशिया संकट के बीच प्रमुख पेट्रोकेमिकल आयात पर सीमा शुल्क में 3 माह के लिए छूट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भू&amp;#45;राजनीतिक तनाव के बीच भारत में सूरजमुखी तेल की खपत में 10% गिरावट की आशंका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sunflower-oil-consumption-set-to-wilt-10-percent-amid-geopolitical-heat.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 02 Apr 2026 13:10:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sunflower-oil-consumption-set-to-wilt-10-percent-amid-geopolitical-heat.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><br />मौजूदा वित्त वर्ष में भारत में रिफाइंड सूरजमुखी तेल की खपत में करीब 10% की गिरावट आने की आशंका है। इसकी दो प्रमुख वजह हैं- पहला, पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं, और दूसरा, बढ़ती लॉजिस्टिक लागत के चलते कीमतों में तेजी। इसके चलते उपभोक्ता सस्ते विकल्प जैसे राइस ब्रान और सोयाबीन तेल की ओर रुख कर सकते हैं। हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी से होने वाली बेहतर प्राप्तियों के कारण कुल राजस्व स्थिर रहने की उम्मीद है। यह संकेत रेटिंग एजेंसी CRISIL द्वारा रेट किए गए नौ सूरजमुखी तेल रिफाइनरों के विश्लेषण से मिलता है। ये रिफाइनरी कंपनियों की लगभग 36,000 करोड़ रुपये के उद्योग में 70% हिस्सेदारी है।</p>
<p>भारत में कुल 250-260 लाख टन वार्षिक खाद्य तेल खपत होती है। इसमें रिफाइंड सूरजमुखी तेल की हिस्सेदारी करीब 12-14% है। यह उद्योग कच्चे सूरजमुखी तेल के आयात पर काफी निर्भर है, जिससे यह वैश्विक व्यापार व्यवधानों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति संवेदनशील बना रहता है।</p>
<p>सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा यूक्रेन और रूस से आयात किया जाता है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते जहाज अब केप ऑफ गुड होप जैसे लंबे मार्गों से होकर आ रहे हैं, जिससे दूरी और ट्रांजिट समय बढ़ गया है। इसके अलावा, संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों के लिए युद्ध जोखिम बीमा प्रीमियम भी बढ़ गया है। परिणामस्वरूप, भारतीय रिफाइनरों के लिए कच्चे सूरजमुखी तेल की लैंडेड लागत बढ़ गई है।</p>
<p>क्रिसिल रेटिंग्स की निदेशक जयश्री नंदकुमार ने कहा, &ldquo;पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद से कच्चे सूरजमुखी तेल का औसत आयात मूल्य बढ़कर वर्तमान में 1,420-1,440 डॉलर प्रति टन हो गया है, जबकि पिछले 12 महीनों में यह औसतन 1,275 डॉलर प्रति टन था। रुपये की कमजोरी और बढ़ी हुई शिपिंग लागत भारत में इसकी लैंडेड लागत को और बढ़ा रही है।&rdquo;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/04/image_750x_69ce1cb384ccf.jpg" alt="" /></p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, सूरजमुखी के कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अंततः रिफाइंड सूरजमुखी तेल के खुदरा दामों पर पड़ेगा। वर्तमान में रिफाइंड सूरजमुखी तेल की कीमत 170-175 रुपये प्रति लीटर के आसपास है, जो जनवरी 2026 में करीब 150 रुपये प्रति लीटर थी। वहीं, राइस ब्रान और सोयाबीन तेल, सूरजमुखी तेल से 10-20 रुपये प्रति लीटर सस्ते मिल रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं का आंशिक रुझान इन विकल्पों की ओर बढ़ सकता है। इसके चलते वित्त वर्ष 2027 में सूरजमुखी तेल की मांग में करीब 10% की गिरावट का अनुमान है।</p>
<p>हालांकि, मांग में कमी के बावजूद रिफाइनरों की लाभप्रदता मजबूत बनी रहने की उम्मीद है, क्योंकि वे 10-15 दिनों की देरी के साथ कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकते हैं। साथ ही, कीमतों में गिरावट के जोखिम से बचने के लिए रिफाइनरों के पास मजबूत हेजिंग नीतियां हैं। कम कीमत पर खरीदे गए स्टॉक से होने वाला लाभ, मांग में गिरावट के कारण परिचालन पर पड़ने वाले नकारात्मक असर की भरपाई करेगा। इस कारण कंपनियों का ऑपरेटिंग मार्जिन 4.8-5% के आसपास स्थिर रहने का अनुमान है। हालांकि युद्ध शुरू होने के बाद से घरेलू सूरजमुखी तेल रिफाइनरों के पास इन्वेंटरी स्तर लगातार घट रहे हैं।</p>
<p>क्रिसिल रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर ऋषि हरि ने कहा, &ldquo;रिफाइनर आमतौर पर आपूर्ति में व्यवधान और कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए 30-45 दिनों का कच्चे माल का भंडार रखते हैं। हालांकि, पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कीमतों में बढ़ोतरी के बीच यह भंडार घटकर 20-30 दिन रह गया है।&rdquo; यदि यह व्यवधान लंबा खिंचता है तो आपूर्ति और सख्त हो सकती है, जिससे कीमतों और खरीद रणनीति पर दबाव बढ़ेगा।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत में सूरजमुखी तेल की खपत में 10% गिरावट की आशंका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तकनीक और नवाचार पर केंद्रित कृषि जोनल कॉन्फ्रेंसों की श्रृंखला 7 अप्रैल: शिवराज सिंह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/a-series-of-zonal-agricultural-conferences-focused-on-technology-and-innovation-will-commence-on-april-7-says-shivraj-singh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 01 Apr 2026 19:14:05 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/a-series-of-zonal-agricultural-conferences-focused-on-technology-and-innovation-will-commence-on-april-7-says-shivraj-singh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय देश भर में क्षेत्रवार जोनल कॉन्फ्रेंस की श्रृंखला शुरू कर रहा है। जिसके तहत अप्रैल&ndash;मई 2026 में पश्चिम, उत्तर, पूर्व सहित सभी प्रमुख जोन में उच्चस्तरीय विचार-विमर्श होगा। इन जोनल कॉन्फ्रेंसों से कृषि क्षेत्र में नवाचार, निवेश, तकनीकी अपनाने की गति तेज होगी और आने वाले वर्षों में किसानों की आय, उत्पादकता एवं ग्रामीण विकास को नई दिशा मिलेगी। सम्मेलनों में केंद्र और राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान, किसान संगठन, एफपीओ, स्टार्टअप और निजी क्षेत्र एक साथ बैठकर योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे और जमीन से जुड़े अनुभवों के आधार पर आगे की कार्ययोजना तय करेंगे।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यह जानकारी देते हुए बताया कि पश्चिमी क्षेत्र का पहला जोनल सम्मेलन 7 अप्रैल 2026 को जयपुर में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा के प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसमें राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित संबद्ध राज्यों के कृषि मंत्री और सभी वरिष्ठ कृषि अधिकारी शामिल होंगे।</p>
<p>इसके बाद 17 अप्रैल को लखनऊ में उत्तर भारत के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों&ndash; दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू‑कश्मीर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, पंजाब और उत्तराखंड के लिए जोनल कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी।</p>
<p>शिवराज सिंह के मुताबिक, 24 अप्रैल को भुवनेश्वर में पूर्वी जोन के लिए सम्मेलन प्रस्तावित है, जिसमें बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। श्रृंखला की निरंतरता में मई माह के अंत में हैदराबाद और गुवाहाटी में भी जोनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी, ताकि दक्षिण और उत्तर‑पूर्वी क्षेत्र की विशेष चुनौतियों और संभावनाओं पर केंद्रित चर्चा हो सके।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इन जोनल कॉन्फ्रेंसों का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को और मजबूत करना तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप केंद्रीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी जी का संकल्प और दिशा-निर्देश भी रहा है। इन बैठकों में आत्मनिर्भर दलहन मिशन, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन, प्राकृतिक खेती मिशन, डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन जैसी प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा होगी और बाधाओं की पहचान कर समाधान तय किए जाएंगे। राज्यों के सफल मॉडल, जैसे सिंचाई, उर्वरक वितरण, एग्री‑स्टैक, बागवानी और मूल्य श्रृंखला प्रबंधन की सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा कर अन्य राज्यों में भी लागू करने की रूपरेखा बनेगी।</p>
<p>शिवराज सिंह के अनुसार, इन सम्मेलनों में संबंधित राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, ICAR वैज्ञानिक, KVK विशेषज्ञ, NABARD और बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ‑साथ प्रगतिशील किसान, FPO, कृषि स्टार्टअप और निजी उद्यमी भी भाग लेंगे, ताकि नीति निर्माण में जमीनी अनुभव और बाज़ार की जरूरतें दोनों प्रतिबिंबित हों।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ तकनीक और नवाचार पर केंद्रित कृषि जोनल कॉन्फ्रेंसों की श्रृंखला 7 अप्रैल: शिवराज सिंह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत का सरसों उत्पादन 3.5 फीसदी बढ़ने की उम्मीद, रबी 2025&amp;#45;26 में 119.4 लाख टन उत्पादन का अनुमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-rapeseed-mustard-production-expected-to-increase-by-3.5-pc-estimated-to-reach-11.94-million-tonnes-in-rabi-2025-26.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 31 Mar 2026 14:00:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-rapeseed-mustard-production-expected-to-increase-by-3.5-pc-estimated-to-reach-11.94-million-tonnes-in-rabi-2025-26.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>तिलहन उत्पादन के मोर्चे पर अच्छी खबर है।&nbsp;<strong>साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA)</strong> ने रबी सीजन 2025-26 के लिए रेपसीड-सरसों उत्पादन का पहला अनुमान जारी किया है। एसोसिएशन के अनुसार, इस साल देश में सरसों का कुल उत्पादन <strong>119.4 </strong><strong>लाख टन</strong> रहने की संभावना है, जो पिछले साल के 115.2 लाख टन के मुकाबले लगभग <strong>3.5 </strong><strong>प्रतिशत</strong> अधिक है।</p>
<p>एसईए के अध्यक्ष <strong>संजीव अस्थाना</strong> ने जयपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उत्पादन में यह वृद्धि बेहतर खेती के तरीकों, किसानों में बढ़ती जागरूकता और सरकारी नीतियों के सकारात्मक प्रभाव का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सरसों की अच्छी फसल देश में खाद्य तेलों की उपलब्धता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगी।</p>
<p>संजीव अस्थाना ने बताया कि 2019-20 में सरसों का उत्पादन महज 86 लाख टन था, जो अब 120 लाख टन के करीब पहुंच रहा है। यह वृद्धि खाद्य तेलों के आयात पर देश की निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगी।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69cb8638c29ca.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>प्रमुख आंकड़ों पर एक नजर</strong></p>
<p>एसोसिएशन द्वारा नियुक्त एजेंसी 'एग्रीवाच' के सर्वेक्षण और रिमोट सेंसिंग आंकड़ों के आधार पर निम्नलिखित महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं:</p>
<ul>
<li><strong>बुवाई का रकबा:</strong> इस साल सरसों की बुवाई का क्षेत्रफल बढ़कर <strong>93.91 </strong><strong>लाख हेक्टेयर</strong> हो गया है, जो पिछले साल 92.15 लाख हेक्टेयर था।</li>
<li><strong>औसत पैदावार (Yield):</strong> बेहतर मौसम और खेती की उन्नत तकनीकों के कारण औसत पैदावार भी <strong>1,250 </strong><strong>किग्रा/हेक्टेयर से बढ़कर 1,271 </strong><strong>किग्रा/हेक्टेयर</strong> होने का अनुमान है।</li>
</ul>
<p><strong>सरसों में राजस्थान फिर अव्वल</strong></p>
<p>राज्यवार आंकड़ों में राजस्थान देश का सबसे बड़ा सरसों उत्पादक बना हुआ है, जहां उत्पादन 53.9 लाख टन रहने का अनुमान है। उत्तर प्रदेश में उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ यह 18.1 लाख टन तक पहुंच सकता है। हरियाणा में भी उत्पादन बढ़कर 12.7 लाख टन होने का अनुमान है।</p>
<p>हालांकि, मध्य प्रदेश में उत्पादन थोड़ा घटकर 13.9 लाख टन रहने का अनुमान है। वहीं पश्चिम बंगाल और गुजरात में क्रमशः 7.4 लाख टन और 5.9 लाख टन उत्पादन का अनुमान है। असम में उत्पादन घटकर 2.1 लाख टन रहने की संभावना है, जबकि बिहार में उत्पादन लगभग 0.9 लाख टन पर स्थिर रह सकता है।</p>
<table data-path-to-node="2">
<thead>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 126.672px;"><strong>राज्य</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><strong>बुवाई क्षेत्र 2024-25 (हेक्टेयर)</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><strong>बुवाई क्षेत्र 2025-26 (हेक्टेयर)</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><strong>पैदावार 2024-25 (किग्रा/हे.)</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><strong>पैदावार 2025-26 (किग्रा/हे.)</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><strong>उत्पादन 2024-25 (लाख टन)</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><strong>उत्पादन 2025-26 (लाख टन)</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 126.672px;"><span data-path-to-node="2,1,0,0"><b data-path-to-node="2,1,0,0" data-index-in-node="0">राजस्थान</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,1,1,0">34,74,000</span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,1,2,0">35,77,958</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,1,3,0">1,498</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,1,4,0">1,506</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,1,5,0">52.0</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,1,6,0">53.9</span></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 126.672px;"><span data-path-to-node="2,2,0,0"><b data-path-to-node="2,2,0,0" data-index-in-node="0">उत्तर प्रदेश</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,2,1,0">14,23,000</span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,2,2,0">15,41,444</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,2,3,0">1,096</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,2,4,0">1,172</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,2,5,0">15.6</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,2,6,0">18.1</span></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 126.672px;"><span data-path-to-node="2,3,0,0"><b data-path-to-node="2,3,0,0" data-index-in-node="0">मध्य प्रदेश</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,3,1,0">14,86,000</span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,3,2,0">14,04,368</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,3,3,0">987</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,3,4,0">993</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,3,5,0">14.7</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,3,6,0">13.9</span></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 126.672px;"><span data-path-to-node="2,4,0,0"><b data-path-to-node="2,4,0,0" data-index-in-node="0">हरियाणा</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,4,1,0">7,14,000</span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,4,2,0">7,30,270</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,4,3,0">1,723</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,4,4,0">1,733</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,4,5,0">12.3</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,4,6,0">12.7</span></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 126.672px;"><span data-path-to-node="2,5,0,0"><b data-path-to-node="2,5,0,0" data-index-in-node="0">पश्चिम बंगाल</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,5,1,0">6,83,000</span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,5,2,0">7,37,861</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,5,3,0">995</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,5,4,0">997</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,5,5,0">6.8</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,5,6,0">7.4</span></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 126.672px;"><span data-path-to-node="2,6,0,0"><b data-path-to-node="2,6,0,0" data-index-in-node="0">गुजरात</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,6,1,0">2,62,000</span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,6,2,0">2,83,970</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,6,3,0">2,055</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,6,4,0">2,067</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,6,5,0">5.4</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,6,6,0">5.9</span></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 126.672px;"><span data-path-to-node="2,7,0,0"><b data-path-to-node="2,7,0,0" data-index-in-node="0">असम</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,7,1,0">3,15,000</span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,7,2,0">3,20,332</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,7,3,0">798</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,7,4,0">667</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,7,5,0">2.5</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,7,6,0">2.1</span></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 126.672px;"><span data-path-to-node="2,8,0,0"><b data-path-to-node="2,8,0,0" data-index-in-node="0">बिहार</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,8,1,0">85,581</span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,8,2,0">85,942</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,8,3,0">1,086</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,8,4,0">1,031</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,8,5,0">0.9</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,8,6,0">0.9</span></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 126.672px;"><span data-path-to-node="2,9,0,0"><b data-path-to-node="2,9,0,0" data-index-in-node="0">निगरानी वाले राज्य</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,9,1,0"><b data-path-to-node="2,9,1,0" data-index-in-node="0">84,42,581</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,9,2,0"><b data-path-to-node="2,9,2,0" data-index-in-node="0">86,82,145</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,9,3,0"><b data-path-to-node="2,9,3,0" data-index-in-node="0">1,306</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,9,4,0"><b data-path-to-node="2,9,4,0" data-index-in-node="0">1,322</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,9,5,0"><b data-path-to-node="2,9,5,0" data-index-in-node="0">110.2</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,9,6,0"><b data-path-to-node="2,9,6,0" data-index-in-node="0">114.9</b></span></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 126.672px;"><span data-path-to-node="2,10,0,0">अन्य राज्य</span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,10,1,0">7,72,419</span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,10,2,0">7,09,273</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,10,3,0">638</span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,10,4,0">640</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,10,5,0">4.9</span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,10,6,0">4.5</span></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 126.672px;"><span data-path-to-node="2,11,0,0"><b data-path-to-node="2,11,0,0" data-index-in-node="0">भारत (कुल)</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,11,1,0"><b data-path-to-node="2,11,1,0" data-index-in-node="0">92,15,000</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 166.141px;"><span data-path-to-node="2,11,2,0"><b data-path-to-node="2,11,2,0" data-index-in-node="0">93,91,418</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,11,3,0"><b data-path-to-node="2,11,3,0" data-index-in-node="0">1,250</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 158.703px;"><span data-path-to-node="2,11,4,0"><b data-path-to-node="2,11,4,0" data-index-in-node="0">1,271</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,11,5,0"><b data-path-to-node="2,11,5,0" data-index-in-node="0">115.2</b></span></td>
<td style="text-align: center; width: 165.641px;"><span data-path-to-node="2,11,6,0"><b data-path-to-node="2,11,6,0" data-index-in-node="0">119.4</b></span></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><strong>बदलते मौसम पर रहेगी नजर</strong></p>
<p>SEA के कार्यकारी निदेशक <strong>डॉ. बी.वी. मेहता</strong> ने स्पष्ट किया कि यह अनुमान फिलहाल प्रारंभिक हैं और मौसम की स्थिति, फसल की प्रगति तथा रिमोट सेंसिंग व फील्ड सर्वे के आधार पर इनमें बदलाव संभव है। अंतिम अनुमान अप्रैल-मई के दौरान तीसरे और <strong>अंतिम सर्वे</strong> के बाद जारी किया जाएगा। एसोसिएशन के अनुसार, कुल मिलाकर इस वर्ष सरसों की फसल सकारात्मक संकेत दे रही है, जिससे देश में तिलहन क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है।&nbsp;</p>
<p>रेपसीड-मस्टर्ड प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन विजय डाटा ने इस फसल को भारतीय तिलहन क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत बताया है, जिससे बाजार में खाद्य तेलों की उपलब्धता बेहतर होगी।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_67613bc84dca8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत का सरसों उत्पादन 3.5 फीसदी बढ़ने की उम्मीद, रबी 2025-26 में 119.4 लाख टन उत्पादन का अनुमान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_67613bc84dca8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तीन राज्यों में एमएसपी पर 11,698 करोड़ रुपये की दलहन&amp;#45;तिलहन खरीद को मंजूरी, इसमें से 9,341 करोड़ सिर्फ यूपी के लिए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-clears-rs-11698-crore-msp-procurement-for-rabi-crops-across-3-states-up-to-get-9341-crore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 31 Mar 2026 13:35:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-clears-rs-11698-crore-msp-procurement-for-rabi-crops-across-3-states-up-to-get-9341-crore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी 2025-26 सीजन के लिए हरियाणा, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 18 लाख मीट्रिक टन से अधिक दलहन और तिलहन की खरीद को मंजूरी दी है। इस पर कुल करीब 11,698 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। यह खरीद मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत की जाएगी।</p>
<p><strong>हरियाणा में चना और सरसों की खरीद</strong></p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने हरियाणा सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए रबी 2026 सीजन के लिए एमएसपी पर 13,082 मीट्रिक टन चना और 3,60,528 मीट्रिक टन सरसों की खरीद की अनुमति दे दी है। यह खरीद पीएसएस के अंतर्गत की जाएगी और इन स्वीकृतियों का कुल एमएसपी मूल्य 2,312.12 करोड़ रुपये से अधिक होगा।</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश में चना, मसूर और सरसों की खरीद</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश के पीएसएस प्रस्ताव के अंतर्गत रबी 2026 सीजन के लिए एमएसपी पर 2,24,000 मीट्रिक टन चना की खरीद को स्वीकृति दे दी गई है, जिसका एमएसपी मूल्य 1,316 करोड़ रुपये है। मसूर की 6,77,000 मीट्रिक टन की पूरी मांग (100 प्रतिशत) को स्वीकृति दी गई है, जिस पर एमएसपी मूल्य 70,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से 4,739 करोड़ रुपये होगा। सरसों के लिए स्वीकृत मात्रा 5,30,000 मीट्रिक टन का एमएसपी मूल्य 62,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से 3,286 करोड़ रुपये होगा।</p>
<p><strong>कर्नाटक में कुसुम (सैफ्लावर) की खरीद</strong></p>
<p>कर्नाटक में रबी 2025-26 सीजन के दौरान कुसुम (सैफ्लावर) की फसल के लिए पीएसएस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है, जिसके तहत स्वीकृत मात्रा 6,923 मीट्रिक टन की उपज एमएसपी पर खरीदी जाएगी। राज्य की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव में 25 प्रतिशत मात्रा (6,923 मीट्रिक टन) को मंजूरी दी गई है। वर्ष 2025-26 के लिए कुसुम का एमएसपी 65,400 रुपये प्रति मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है, जिससे कुल एमएसपी मूल्य 45.27 करोड़ रुपये बनता है।</p>
<p>हरियाणा, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक के लिए स्वीकृत पीएसएस प्रस्तावों के माध्यम से, चना, मसूर, सरसों और कुसुम (सैफ्लावर) जैसी महत्वपूर्ण दलहन और तिलहन फसलों की एमएसपी पर वैज्ञानिक और सुव्यवस्थित खरीद सुनिश्चित की जाएगी। इससे न केवल किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के देश में खाद्य और पोषण सुरक्षा बढ़ाने, तिलहन और दलहन उत्पादन बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के संकल्प को भी बल मिलेगा। इसके साथ ही, राज्यों द्वारा पीओएस आधारित खरीद की व्यवस्था पहले से ही सुदृढ़ होने के कारण, किसानों के लिए पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69cb7f837d412.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ तीन राज्यों में एमएसपी पर 11,698 करोड़ रुपये की दलहन-तिलहन खरीद को मंजूरी, इसमें से 9,341 करोड़ सिर्फ यूपी के लिए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69cb7f837d412.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मालनपुर प्लांट की क्षमता बढ़ाने के लिए 30 करोड़ निवेश करेगी नोवा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/nova-to-invest-rs-300-million-to-expand-malanpur-plant-capacity.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 30 Mar 2026 12:39:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/nova-to-invest-rs-300-million-to-expand-malanpur-plant-capacity.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>डेयरी उद्योग की कंपनी और नोवा ब्रांड के तहत डेयरी उत्पादन बेचने वाली कंपनी स्टर्लिंग एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड मध्य प्रदेश के मालनपुर स्थित अपने डेयरी संयंत्र की क्षमता में बढ़ोतरी के लिए करीब 25 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। स्टर्लिंग एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड के डायरेक्टर रवीन सलूजा ने रूरल वॉयस के साथ एक बातचीत में यह जानकारी दी। कंपनी अपने प्रसंस्करण संयंत्र को पुनर्व्यवस्थित करने की योजना के तहत उत्तर प्रदेश के कासगंज स्थित संयंत्र को बंद करेगी क्योंकि इसकी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो रहा है। वह हरियाणा के कुंडली और मध्य प्रदेश के मालनपुर स्थित संयंत्र के जरिये ही डेयरी उत्पादों का उत्पादन करने की योजना पर काम कर रही है।</p>
<p>नोवा डेयरी उद्योग का एक पुराना ब्रांड है और उसका फोकस दूध की बजाय दूध उत्पादों पर अधिक है। सलूजा के मुताबिक हम घरेलू बाजार में 40 फीसदी वृद्धि दर के लक्ष्य को लेकर चल रहे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान में दूध की खरीद के लिए नयी टीम तैयार कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा, हम निर्यात बाजार में भी फोकस बढ़ा रहे हैं। कंपनी अपने उत्पाद का करीब 20 फीसदी निर्यात करती है। यह निर्यात थाईलैंड, इंडोनेशिया और दूसरे एशियाई देशों को होता है। इसमें घी, मिल्क पाउडर और बटर ऑयल का निर्यात प्रमुख है। बिजनेस टू बिजनेस मार्केट पर कंपनी का अधिक फोकस है। इस मार्केट में घी, पनीर, मिल्क पाउडर, टेबल बटर, फ्लेवर्ड मिल्क और दही शामिल हैं।&nbsp;</p>
<p>रवीन कहते हैं कि हम अपने बिजनेस के कंसोलिडेशन पर फोकस कर रहे हैं और उसी के तहत उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी के साथ इसमें नया निवेश कर रहे हैं। दूध की खरीद के बारे में वह कहते है कि हम वेंडर्स के जरिये ही अधिक दूध खरीदते हैं। लेकिन दूध के दाम इस साल काफी बढ़े हैं और हमारी खरीद लागत भैंस के 6.5 फीसदी फैट वाले दूध के लिए 59 रुपये लीटर तक पहुंच गई है।&nbsp;</p>
<p>रवीन का कहना है कि सरकार की नीतियों में सहकारी क्षेत्र को अधिक मदद की जाती है जबकि निजी क्षेत्र को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। कई राज्यों में सरकारें सहकारी समितियों द्वारा खरीदे जाने वाले दूध पर सब्सिडी देती हैं जो एक समान प्रतिस्पर्धी बाजार के सिद्धांत के प्रतिकूल है।</p>
<p>डेयरी सेक्टर में आ रहे स्टार्टअप्स के बारे में उनका कहना है कि वह कुछ खास उत्पादों जैसे ए2 मिल्क, चीज और प्रोटीन वाले उत्पादों पर फोकस बढ़ा रहे हैं क्योंकि ये महंगे उत्पाद हैं और कंपनियां अपने संस्थागत निवेशकों को प्रभावित कर अधिक फंडिंग जुटाने के मकसद से इस रणनिति पर अमल करती हैं। इससे मार्केट डिसरप्शन तो आते हैं साथ ही यह बिजनेस टू कंज्यूमर (बीटूसी) प्रीमियम सेगमेंट में कंपटीशन खड़ा कर रहे हैं।</p>
<p>रवीन कहते हैं कि रेगूलेटरी अथारिटी की जिम्मेदारी है कि गलत और फेक उत्पाद बाजार में न बिक सकें। अगर रेगूलेटर सही तरीके से काम करेंगे तो यह किसानों और उपभोक्ताओं के साथ उद्योग के लिए भी बेहतर होगा। साथ ही बाजार भी स्थिर रहेगा और गैर-जरूरी उतार-चढ़ाव नहीं होंगे। हमारी कंपनी का फोकस ब्रांड लायल्टी को मजबूत करने के साथ ही अपने ब्रांड की साख को बेहरतर करना है। इसके लिए तय गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए बाजार की उम्मीदों पर खरा उतरने की हमारी कोशिश रहती है।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मालनपुर प्लांट की क्षमता बढ़ाने के लिए 30 करोड़ निवेश करेगी नोवा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[संकट के बीच केरोसिन की वापसी: PDS और पेट्रोल पंप से होगी बिक्री, नियमों में ढील]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/kerosene-returns-amid-lpg-crisis-sales-through-pds-and-petrol-pumps-rules-relaxed.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 30 Mar 2026 11:28:45 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/kerosene-returns-amid-lpg-crisis-sales-through-pds-and-petrol-pumps-rules-relaxed.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे कई देशों में ईंधन संकट गहराया है। हालात को देखे हुए&nbsp;<span>केंद्र सरकार ने केरोसिन पर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने चुनिंदा पेट्रोल पंप और </span>पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के जरिए सुपीरियर केरोसिन ऑयल (SKO) आपूर्ति की अस्थायी अनुमति दी है। इससे ईंधन की किल्लत से जूझ रही आम जनता को कुछ राहत मिलेगी।</p>
<p>देश के 21 &ldquo;केरोसीन-फ्री&rdquo; राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में PDS के जरिए केरोसीन (SKO) की आपूर्ति फिर से शुरू करने के लिए यह अस्थायी कदम उठाया गया है। चुनिंदा&nbsp;पेट्रोल पंपों को भी सीमित मात्रा में SKO भंडारण और बिक्री की इजाजत होगी।&nbsp;</p>
<p>29 मार्च को जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 60 दिनों के लिए एड-हॉक आधार पर केरोसिन तेल (SKO) उपलब्ध कराने की अनुमति दी है। यह आपूर्ति विशेष रूप से घरेलू उपयोग जैसे खाना पकाने और रोशनी के लिए होगी, ताकि दुरुपयोग को रोका जा सके।</p>
<p>सरकार ने पेट्रोलियम नियम, 2002 के तहत अस्थायी छूट देते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा संचालित चयनित चुनिंदा पेट्रोल पंपों को केरोसिन के भंडारण और वितरण की अनुमति दी है। प्रत्येक चयनित पेट्रोल पंप अधिकतम 5,000 लीटर तक केरोसिन स्टोर कर सकेगा।&nbsp;<span>हर जिले में अधिकतम दो पेट्रोल पंपों को इसके लिए नामित किया जाएगा, जहां केरोसिन बिक्री के लिए उपलब्ध होगा।</span></p>
<p>इसके साथ ही, केरोसिन वितरण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए लाइसेंसिंग नियमों में भी ढील दी गई है। PDS डीलरों और अधिकृत एजेंटों को कुछ शर्तों के तहत लाइसेंस संबंधी प्रावधानों से अस्थायी छूट दी गई है। जिससे<span>&nbsp;घरों तक केरोसिन की आपूर्ति को आसान बनाया जा सके।&nbsp;</span></p>
<p>गौरतलब है कि भारत में पिछले एक दशक में केरोसिन पर निर्भरता को कम करने की नीति अपनाई गई है। इसके चलते PDS के माध्यम से सब्सिडी वाले केरोसिन की आपूर्ति धीरे-धीरे घटाई गई। कई राज्यों ने तो खुद को &ldquo;केरोसिन मुक्त&rdquo; घोषित कर दिया था। लेकिन ईरान में छोड़ी जंग ने केरोसिन की तरफ लौटने पर मजबूर कर दिया।&nbsp;</p>
<p>यह निर्णय खासकर गरीब और ग्रामीण परिवारों के लिए राहत देगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी है और स्थिति सामान्य होने पर इसे वापस लिया जाएगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69ca12087c6bd.jpg" alt="" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69ca11d48e951.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ संकट के बीच केरोसिन की वापसी: PDS और पेट्रोल पंप से होगी बिक्री, नियमों में ढील ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के पहले चरण का उद्घाटन किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/prime-minister-inaugurates-phase-1-of-the-noida-international-airport-in-jewar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 28 Mar 2026 14:24:41 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/prime-minister-inaugurates-phase-1-of-the-noida-international-airport-in-jewar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के पहले चरण का उद्घाटन किया। इस एयरपोर्ट की शुरुआत को भारत के वैश्विक एविएशन हब बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लिए एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय गेटवे के रूप में परिकल्पित यह परियोजना देश के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69c791d8b6a70.jpg" alt="" /></p>
<p>इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, इटावा, बुलंदशहर, फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों को बहुत बड़ा लाभ होने वाला है।</p>
<p>उन्होंने कहा, &ldquo;यह एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, छोटे और लघु उद्योगों, यहां के नौजवानों के लिए अनेक नए अवसर लेकर आने वाला है। यहां से दुनिया के लिए विमान तो उड़ेंगे ही, साथ ही यह विकसित उत्तर प्रदेश की उड़ान का भी प्रतीक बनेगा। मैं विशेष कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता को इस एयरपोर्ट के लिए बधाई देता हूं।&rdquo;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69c791d872d88.jpg" alt="" /></p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, पश्चिम एशिया में एक महीने से युद्ध चल रहा है। युद्ध की वजह से कई देशों में खाने-पीने के समान, पेट्रोल, डीजल, गैस, खाद जैसी कई जरूरी चीजों का संकट पैदा हो गया है। हर देश इस संकट का सामना करने के लिए कुछ न कुछ कोशिश कर रहा है। भारत भी इस संकट का पूरी शक्ति से मुकाबला कर रहा है। भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस युद्ध से प्रभावित क्षेत्र से मंगाता है। सरकार हर वह कदम उठा रही है जिससे सामान्य परिवारों पर, हमारे किसान भाई-बहनों पर इस संकट का बोझ ना पड़े।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69c791d8eafa9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के पहले चरण का उद्घाटन किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69c791d8eafa9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[MC14: डब्ल्यूटीओ वार्ता में भारत पर बढ़ा दबाव; कृषि, फिशरीज सब्सिडी और ई&amp;#45;कॉमर्स समझौतों पर फोकस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/mc14-pressure-mounts-on-india-as-wto-talks-focus-on-agriculture-fisheries-and-e-commerce.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 28 Mar 2026 13:29:10 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/mc14-pressure-mounts-on-india-as-wto-talks-focus-on-agriculture-fisheries-and-e-commerce.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कैमरून के याउंडे में आयोजित WTO के 14वीं मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) का तीसरा दिन निर्णायक बनता दिख रहा है। मंत्रियों की बैठक चार प्रमुख क्षेत्रों- कृषि, फिशरीज सब्सिडी, निवेश सुविधा और ई-कॉमर्स- पर हो रही है। साथ ही खुली बैठकों में देश अपने-अपने रुख स्पष्ट कर रहे हैं। इस बीच, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सम्मेलन के दूसरे दिन कहा कि सहमति आधारित निर्णय प्रक्रिया डब्ल्यूटीओ की वैधता की आधारशिला है। उन्होंने जोर दिया कि डब्ल्यूटीओ सुधारों में उरुग्वे वार्ता से उत्पन्न असमानताओं को शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही, सभी सदस्य देशों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, रोजगार सृजन करने और वैश्विक व्यापार में सार्थक भागीदारी का समान अवसर मिलना जरूरी है।</p>
<p>हालांकि किसी बड़े मुद्दे पर समाधान की संभावना कम है, लेकिन शनिवार की चर्चा अंतिम नतीजों की दिशा तय कर सकती है। दिल्ली स्थित थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (GTRI) के अनुसार सबसे बड़ा मतभेद ई-कॉमर्स पर कस्टम ड्यूटी मोरेटोरियम को लेकर है। अमेरिका इसे स्थायी रूप से बढ़ाने की वकालत कर रहा है, जबकि भारत और अन्य विकासशील देश राजस्व नुकसान और नीतिगत सीमाओं का हवाला देते हुए इसका विरोध कर रहे हैं। इस मुद्दे पर 2-4 साल के अस्थायी समझौते की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है।</p>
<p>निवेश सुविधा समझौते (IFD) पर अब भारत लगभग अकेला पड़ता दिख रहा है, क्योंकि अन्य देशों का विरोध कमजोर पड़ गया है। तुर्किये ने भी अपना विरोध वापस ले लिया है। छोटे समूहों की &ldquo;ग्रीन रूम&rdquo; बैठकों और WTO के महानिदेशक के सीधे हस्तक्षेप के जरिए नई दिल्ली पर दबाव बढ़ने की संभावना है। भारत की चिंता इस समझौते से अधिक उस बात को लेकर है, जो यह स्थापित कर सकता है कि ऐसे बहुपक्षीय समझौतों का रास्ता खोलना डब्ल्यूटीओ की बहुपक्षीय प्रकृति को बदल सकते हैं।</p>
<p>कृषि क्षेत्र में कुछ सदस्य, जिनमें केयर्न ग्रुप भी शामिल है, नए वार्ता एजेंडा की मांग कर सकते हैं, जिससे मौजूदा मुद्दे पीछे छूट सकते हैं। इनमें कुछ मुद्दे खासकर भारत के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं। खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण (PSH) पर भारत की स्थायी समाधान की मांग पर किसी नतीजे की उम्मीद नहीं है। फिशरीज सब्सिडी के मुद्दे पर भी मतभेद बने रहने से सीमित प्रगति की संभावना है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69c789c466e88.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>भारत ने उठाए संरचनात्मक असमानताओं के मुद्दे</strong></p>
<p>सम्मेलन के दूसरे दिन पीयूष गोयल ने कहा कि सहमति आधारित निर्णय ही डब्ल्यूटीओ &nbsp;की विश्वसनीयता का आधार है और किसी भी सदस्य के संप्रभु अधिकार की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। इसके तहत वह उन नियमों से बंधने के लिए बाध्य नहीं है जिनसे वह सहमत नहीं है। भारत ने यह भी कहा कि सहमति से निर्णय लेने में आ रही चुनौतियों को दूर करने के लिए भरोसे का पुनर्निर्माण जरूरी है। इसके साथ ही, डब्ल्यूटीओ &nbsp;को मौजूदा गतिरोध और उसके कारणों की गंभीर समीक्षा करनी चाहिए।&nbsp;</p>
<p>&lsquo;समान अवसर (लेवल प्लेइंग फील्ड)&rsquo; के मुद्दे पर गोयल ने कहा कि चर्चाओं में उरुग्वे दौर से उत्पन्न असमानताओं को ध्यान में रखना होगा। उन्होंने खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक भंडारण (PSH) और कपास पर विशेष सुरक्षा तंत्र (SSM) जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया। विवाद निपटान प्रणाली की लगातार निष्क्रियता को रेखांकित करते हुए भारत ने कहा कि प्रभावी न्यायिक व्यवस्था के बिना नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं हो सकता।</p>
<p>भारत ने यह भी चेतावनी दी कि पारदर्शिता का इस्तेमाल व्यापारिक प्रतिशोध को उचित ठहराने या घरेलू नीतियों को चुनौती देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसके बजाय, इसे ठोस और निरंतर क्षमता निर्माण के साथ जोड़ा जाना चाहिए, ताकि सभी सदस्य अपने दायित्वों को निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से पूरा कर सकें। भारत ने दोहराया कि सभी देशों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, रोजगार सृजन करने और वैश्विक व्यापार में भागीदारी का समान अवसर मिलना चाहिए।</p>
<p>दूसरे दिन का समापन WTO सुधार और पारदर्शिता पर मंत्रीस्तरीय पूर्ण सत्र के साथ हुआ। इस सत्र में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने समयबद्ध तरीके से सुधार प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने के लिए भारत का समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया ठोस साक्ष्यों और सदस्य देशों के प्रस्तावों व मंत्रीस्तरीय निर्णयों के आधार पर आगे बढ़नी चाहिए। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि चुनिंदा मुद्दों को प्राथमिकता देने और पूर्व निर्धारित रुख अपनाने से बचना चाहिए।</p>
<p>भारत ने डब्ल्यूटीओ समितियों की भूमिका को अधिक महत्व देने की भी आवश्यकता बताई। बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को कमजोर करने वाले बहुपक्षीय समझौतों के प्रति सावधान करते हुए अग्रवाल ने कहा कि सहमति आधारित प्रक्रिया खुलापन, पारदर्शिता, समावेशिता और सदस्य-प्रधान सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए।</p>
<p>सम्मेलन के दूसरे दिन गोयल ने अमेरिका, चीन, कोरिया, स्विट्जरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, मोरक्को और ओमान के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन बैठकों में MC14 के एजेंडा के साथ-साथ द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69c789c50703a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ MC14: डब्ल्यूटीओ वार्ता में भारत पर बढ़ा दबाव; कृषि, फिशरीज सब्सिडी और ई-कॉमर्स समझौतों पर फोकस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जैव उर्वरकों की बिक्री के लिए पैकेट के वजन की सीमा निर्धारित, कृषि मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-ministry-notifies-weight-limits-for-bio-fertilizer-pack-sales.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 28 Mar 2026 12:18:44 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-ministry-notifies-weight-limits-for-bio-fertilizer-pack-sales.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में जैविक उर्वरक कितने बड़े पैकेट में बेचे जा सकते हैं, सरकार ने इसकी सीमा निर्धारित कर दी है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने इस बारे में एक अधिसूचना जारी की है, जिसमें लिक्विड बायो फर्टिलाइजर, कैरियर आधारित बायोफर्टिलाइजर और वीएएम फर्टिलाइजर के पैकेट के वजन के बारे में बताया गया है।&nbsp;</p>
<p>कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की तरफ से जारी अधिसूचना में बताया गया है कि वेसिकुलर अर्बुस्कुलर माइक्रोराइजा (वीएएम) जैव उर्वरक के पैकेट कम से कम 500 ग्राम के होंगे। इसके पैकेट अधिकतम 5 किलोग्राम तक के हो सकते हैं। बीजाणु आधारित माइक्रोरिजल फॉर्मूलेशन के लिए न्यूनतम वजन 100 ग्राम निर्धारित किया गया है।&nbsp;</p>
<p>वाहक यानी कैरियर आधारित जैव उर्वरकों के पैकेट कम से कम 200 ग्राम के होंगे। इन्हें अधिकतम एक किलोग्राम के पैकेट में बेचा जा सकता है। तरल जैव उर्वरक के लिए कम से कम 50 मिलीलीटर की सीमा निर्धारित की गई है। इस उर्वरक की अधिकतम एक लीटर के पैकेट में बिक्री की जा सकेगी।&nbsp;</p>
<p>अधिसूचना में निर्धारित वजन सीमा 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश इस अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से पहले पैक की गई सामग्री पर लागू नहीं होगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69c77978961a6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जैव उर्वरकों की बिक्री के लिए पैकेट के वजन की सीमा निर्धारित, कृषि मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69c77978961a6.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पेट्रोल&amp;#45;डीजल पर विशेष उत्पाद शुल्क में 10&amp;#45;10 रुपये की कटौती]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-cuts-excise-duty-on-petrol-diesel-by-rs-10-per-litre-amid-west-asia-crisis.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 27 Mar 2026 11:39:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-cuts-excise-duty-on-petrol-diesel-by-rs-10-per-litre-amid-west-asia-crisis.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ईरान युद्ध के कारण जारी उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में कटौती की है। सरकारी आदेश के अनुसार पेट्रोल पर यह शुल्क घटाकर 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इस तरह दोनों ईंधनों पर 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार यह राहत तुरंत लागू हो गया है।</p>
<p>पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, &ldquo;सरकार ने कर राजस्व में बड़ा नुकसान उठाते हुए यह कदम उठाया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल के कारण तेल कंपनियों को हो रहे भारी नुकसान (पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर) को कम किया जा सके।&rdquo;&nbsp;</p>
<p>इससे पहले अप्रैल 2025 में केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। गुरुवार को ही देश की सबसे बड़ी निजी ईंधन खुदरा कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।&nbsp;</p>
<p>इसके अलावा सरकार ने अलग-अलग अधिसूचनाओं के जरिए विमान ईंधन (ATF) पर भी शुल्क ढांचे में बदलाव किया है। एक अधिसूचना में ATF पर 50 रुपये प्रति लीटर का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया गया है, जबकि अन्य प्रावधानों के तहत कुछ हिस्सों में छूट या संशोधित दरें लागू की गई हैं। इससे विमानन क्षेत्र को आंशिक राहत मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>शुल्क में यह कटौती ऐसे समय की गई है जब भारत वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और आपूर्ति बाधाओं का सामना कर रहा है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति के प्रमुख मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) काफी हद तक बाधित है, जिससे शिपिंग और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और अपनी 90 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67f3abe7842b0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पेट्रोल-डीजल पर विशेष उत्पाद शुल्क में 10-10 रुपये की कटौती ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67f3abe7842b0.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ICAR&amp;#45;IARI ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में बनाई जगह, कृषि और वानिकी श्रेणी में मिला स्थान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/iari-makes-it-to-the-qs-world-rankings-2026-ranks-first-in-agriculture-and-forestry-rankings.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 26 Mar 2026 16:14:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/iari-makes-it-to-the-qs-world-rankings-2026-ranks-first-in-agriculture-and-forestry-rankings.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में कृषि शिक्षा और अनुसंधान के प्रमुख केंद्र आईसीएआर के <strong>भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान </strong>(आईएआरआई) ने पहली बार QS <span>वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग </span>2026 में कृषि एवं वानिकी विषय श्रेणी में जगह बनाई है। संस्थान को 151&ndash;200 के बैंड में स्थान मिला है।</p>
<p>121 वर्ष पुराने इस प्रतिष्ठित संस्थान के साथ इस श्रेणी में <strong>बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, आईआईटी खडगपुर </strong>और <strong>दिल्ली यूनिवर्सिटी</strong> भी शामिल हैं। QS <span>वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में जगह बनाने से </span>आईएआरआई की देश-दुनिया के अग्रणी कृषि और वानिकी शिक्षा संस्थानों में स्थिति और मजबूत हुई है। &nbsp;</p>
<p>आईएआरआई की इस उपलब्धि पर <strong>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद </strong><strong>(</strong><strong>आईसीएआर</strong><strong>) </strong>के महानिदेशक तथा सचिव (डेयर) <strong>डॉ. एम. एल. जाट</strong> ने कहा कि दिसंबर 2025 में मुख्य सचिवों के सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने &lsquo;विकसित भारत&rsquo; के लक्ष्य को पाने के लिए कुशल मानव संसाधन के विकास पर विशेष जोर दिया था। देश में एग्रीकल्चरल हायर एजुकेशन को मजबूत करना आईसीएआर और कृषि मंत्रालय की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। नेशनल एग्रीकल्चरल रिसर्च एजुकेशन एंड एक्सटेंशन सिस्टम (NAREES) के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में वर्ल्ड क्लास मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च-इंटेंसिव एजुकेशन इकोसिस्टम को मजबूत किया जा रहा है।</p>
<p>QS <span>वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग </span>2026 की कृषि एवं वानिकी विषय श्रेणी में <strong>तमिलनाडु एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी</strong> को 201-250 के बैंड में, <strong>अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी</strong> और <strong>शूलिनी यूनिवर्सिटी</strong> को 251-300 के बैंड में और<strong> चौधरी चरण सिंह हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी</strong> को 301-350 के बैंड में जगह मिली है।</p>
<p>क्यूएस रैंकिंग में संस्थानों का मूल्यांकन अकादमिक प्रतिष्ठा, नियोक्ता प्रतिष्ठा, शोध उद्धरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मानकों पर किया जाता है। आईएआरआई की यह उपलब्धि कृषि-खाद्य प्रणालियों, कुशल मानव संसाधन विकास और सतत विकास लक्ष्यों में उसके बहुआयामी योगदान को दर्शाती है। इसमें संस्थान की शिक्षण और शोध गुणवत्ता के साथ-साथ उसके सामाजिक योगदान का भी मूल्यांकन किया जाता है।&nbsp;</p>
<p>वैश्विक स्तर पर कृषि विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच आईएआरआई का प्रदर्शन उल्लेखनीय माना जा रहा है। आईएआरआई के उत्कृष्ट प्रदर्शन के पीछे फंडामेंटल रिसर्च, ट्रांसलेशनल साइंस और फील्ड-लेवल आउटरीच के समन्वय की अहम भूमिका रही है, जिसके माध्यम से संस्थान ने फसल सुधार और जलवायु-सहिष्णु कृषि जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके साथ ही मजबूत पूर्व छात्र नेटवर्क और हितधारकों का भरोसा भी संस्थान की वैश्विक पहचान को बढ़ाने में सहायक रहा है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ICAR-IARI ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में बनाई जगह, कृषि और वानिकी श्रेणी में मिला स्थान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कैबिनेट ने 2031&amp;#45;35 के लिए भारत के नए उत्सर्जन लक्ष्यों को दी मंजूरी, रिन्यूएबल एनर्जी का टारगेट बढ़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-indias-new-climate-targets-for-2031-35-raises-ambition-on-emissions-and-clean-energy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Mar 2026 19:30:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-indias-new-climate-targets-for-2031-35-raises-ambition-on-emissions-and-clean-energy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जलवायु प्रतिबद्धताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2031-2035 की अवधि के लिए भारत के नए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को मंजूरी दे दी है। इन संशोधित लक्ष्यों को जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के फ्रेमवर्क कन्वेंशन में भेजा जाएगा।</p>
<p>नई प्रतिबद्धताओं के तहत, भारत ने 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक अपनी जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता को 47 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा है। यह पहले के लक्ष्य की तुलना में महत्वपूर्ण वृद्धि है। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत ने बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। 2035 तक अपनी कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 60 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य है। उल्लेखनीय है कि फरवरी 2026 तक भारत पहले ही 52 प्रतिशत से अधिक गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल कर चुका है। वह लक्ष्य समय से काफी पहले पूरा हो गया था।</p>
<p>नए NDC का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 2035 तक 3.5 से 4.0 अरब टन CO₂ समतुल्य का कार्बन सिंक बनाना है। भारत इस दिशा में पहले ही उल्लेखनीय प्रगति कर चुका है और 2021 तक 2.29 अरब टन का कार्बन सिंक तैयार कर चुका है।</p>
<p>भारत का जलवायु प्रदर्शन समय से पहले लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जाना जाता है। 2015 में प्रस्तुत प्रारंभिक एनडीसी में 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता में 33-35 प्रतिशत कमी और 40 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा गया था, जिन्हें समय से पहले ही हासिल कर लिया गया। 2005 से 2020 के बीच उत्सर्जन तीव्रता में 36 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।</p>
<p>नया NDC भारत की जलवायु महत्वाकांक्षा को और मजबूत करता है। इसमें सतत विकास, जलवायु अनुकूलन और समावेशी परिवर्तन पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार ने कहा कि ये लक्ष्य शासन और दैनिक जीवन में स्थिरता को शामिल करने, समावेशी विकास को बढ़ावा देने और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। यह भारत की आर्थिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कैबिनेट ने 2031-35 के लिए भारत के नए उत्सर्जन लक्ष्यों को दी मंजूरी, रिन्यूएबल एनर्जी का टारगेट बढ़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ बुवाई के लिए उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित कराने पर जोर, शिवराज ने दिए कालाबाजारी रोकने के निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-steps-up-kharif-preparedness-amid-global-crisis-chouhan-orders-tight-supply-monitoring.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Mar 2026 15:42:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-steps-up-kharif-preparedness-amid-global-crisis-chouhan-orders-tight-supply-monitoring.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक का उद्देश्य आगामी खरीफ सीजन के लिए कृषि क्षेत्र की तैयारियों को मजबूत करना था। बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उर्वरकों की आपूर्ति निर्बाध और समान रूप से सुनिश्चित की जाए। साथ ही, उर्वरक और बीजों की कालाबाजारी तथा जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>उर्वरक आपूर्ति और फार्मर आईडी</strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने उर्वरकों की समान और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को 'फार्मर आईडी' के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए ताकि वितरण व्यवस्था पारदर्शी हो सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए वे जल्द ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कृषि मंत्रियों के साथ बैठक भी करेंगे।</p>
<p><strong>कालाबाजारी और जमाखोरी पर नकेल</strong></p>
<p>वैश्विक संकट का लाभ उठाकर खाद और बीजों की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। चौहान ने कहा कि राज्य सरकारों को भी इस दिशा में कड़े कदम उठाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।</p>
<p><strong>बीज उत्पादन और पैकेजिंग सहायता</strong></p>
<p>बैठक में बीज सुखाने के लिए आवश्यक गैस और एग्रो-केमिकल्स की उपलब्धता की समीक्षा की गई। कृषि मंत्री ने कहा कि वैश्विक संकट में पैकेजिंग सामग्री (विशेषकर दूध और अन्य कृषि उत्पादों के लिए) की कमी न हो। इसके लिए उन्होंने पेट्रोलियम मंत्रालय और संबंधित विभागों के साथ समन्वय करने के निर्देश भी दिए।</p>
<p><strong>निगरानी के लिए स्पेशल सेल का गठन</strong></p>
<p>मौजूदा हालात में कृषि क्षेत्र की निगरानी के लिए एक विशेष सेल का गठन भी किया गया है। यह सेल खाद, बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता की साप्ताहिक रिपोर्ट केंद्रीय कृषि मंत्री को प्रस्तुत करेगा।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ बुवाई के लिए उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित कराने पर जोर, शिवराज ने दिए कालाबाजारी रोकने के निर्देश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने बनाए 7 एम्पावर्ड ग्रुप, आपूर्ति बनाए रखने पर जोर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/prime-minister-forms-7-empowered-groups-to-deal-with-the-impact-of-the-iran-war-focus-on-maintaining-supplies.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Mar 2026 14:04:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/prime-minister-forms-7-empowered-groups-to-deal-with-the-impact-of-the-iran-war-focus-on-maintaining-supplies.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="203" data-end="529">पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दुष्प्रभाव से देश को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने कोशिशें तेज कर दी हैं। ईरान युद्ध से पैदा हुए संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात सशक्त समूहों (एम्पावर्ड ग्रुप्स) के गठन की घोषणा की है, जो ईंधन, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर नजर रखेंगे और बाधाओं का समाधान सुनिश्चित करेंगे।</p>
<p data-start="531" data-end="991">मंगलवार को राज्यसभा में अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जैसे कोरोना काल में अलग-अलग सेक्टर्स की चुनौतियों से निपटने के लिए एक्सपर्ट्स और अधिकारियों के एम्पावर्ड ग्रुप बनाए गए थे, वैसे ही अब सात नए एम्पावर्ड ग्रुप गठित किए गए हैं। ये समूह सप्लाई चेन, पेट्रोल-डीजल, उर्वरक, गैस और महंगाई जैसे विषयों पर त्वरित और दीर्घकालिक रणनीति के तहत काम करेंगे। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि इन साझा प्रयासों से देश परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाएगा।</p>
<p data-start="993" data-end="1318">मौजूदा संकट से निपटने की रणनीति पर जानकारी देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सरकार शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म प्रभावों को ध्यान में रखते हुए काम कर रही है। भारत सरकार ने एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप भी बनाया है, जो नियमित रूप से बैठक कर आयात-निर्यात में आने वाली चुनौतियों का आकलन करता है और उनके समाधान पर काम करता है।</p>
<p data-start="1320" data-end="1659">पीएम मोदी ने कहा कि वर्तमान संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया है। पश्चिम एशिया में हुए नुकसान से उबरने में दुनिया को समय लगेगा। उन्होंने कहा कि भारत में इसका न्यूनतम असर हो, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स मजबूत हैं और सरकार बदलते हालात पर लगातार नजर रखे हुए है।</p>
<p data-start="1661" data-end="1910">सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन सात सशक्त समूहों का नेतृत्व सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे। इनमें रणनीतिक मामलों, ऊर्जा, आर्थिक मामलों और आपूर्ति शृंखला, कृषि इनपुट, उपभोक्ता मामलों, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स, तथा संचार एवं जनसंपर्क जैसे क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p data-start="1912" data-end="2207">आगामी खरीफ बुवाई सीजन को ध्यान में रखते हुए किसानों को पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि किसी भी संकट का बोझ किसानों पर न पड़े। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार हर चुनौती के समाधान के लिए उनके साथ खड़ी है।</p>
<p data-start="2209" data-end="2594">राज्यसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया है, जो भारत के लिए भी चिंता का विषय है। इस युद्ध के कारण व्यापार मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, जिससे पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में कई जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय क्रू मेंबर्स शामिल हैं।</p>
<p data-start="2596" data-end="2915">प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले 11 वर्षों में ऊर्जा आयात के स्रोतों का विविधीकरण किया है। पहले जहां क्रूड ऑयल, एलएनजी और एलपीजी जैसी जरूरतों के लिए 27 देशों से आयात होता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गई है। देश में 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी विकसित किया गया है।</p>
<p data-start="2917" data-end="3338">प्रधानमंत्री ने देशवासियों से हर चुनौती के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध के दुष्प्रभाव लंबे समय तक रह सकते हैं। कोरोना संकट के दौरान केंद्र और राज्यों ने मिलकर &lsquo;टीम इंडिया&rsquo; के रूप में जिस तरह कोविड प्रबंधन का सफल मॉडल पेश किया था, उसी भावना के साथ काम करने की जरूरत है। उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से देश इस वैश्विक संकट का प्रभावी तरीके से सामना करेगा।&nbsp;</p>
<p data-start="2917" data-end="3338"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पश्चिम एशिया संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने बनाए 7 एम्पावर्ड ग्रुप, आपूर्ति बनाए रखने पर जोर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देहात ने नासिक में एनएचबी के साथ शुरू किया अंगूर क्लस्टर विकास कार्यक्रम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/dehaat-launches-nhb-supported-grapes-cluster-development-program-in-nashik.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Mar 2026 11:46:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/dehaat-launches-nhb-supported-grapes-cluster-development-program-in-nashik.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत की अग्रणी एग्रीटेक कंपनी देहात ने अपने नासिक स्थित निर्यात संस्थान फ्रेशट्रॉप के साथ, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) के सहयोग से नासिक में अंगूर क्लस्टर विकास कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य भारत की अंगूर उत्पादन एवं निर्यात क्षमता को वैश्विक बाजार में और अधिक मजबूत करना है।</p>
<p>वैश्विक अंगूर बाजार में तेजी से प्रीमियम और लाइसेंस प्राप्त किस्मों की मांग बढ़ रही है, जबकि भारत में अब भी पारंपरिक ओपन वैरायटी, जैसे थॉम्पसन सीडलेस का बोलबाला है। इस कार्यक्रम के जरिए किसान उच्च मूल्य वाले बाजारों तक आसानी से पहुंच बना सकेंगे, जहां किस्मों के चयन, उपज को उच्च गुणवत्तापूर्ण बनाए रखने और ट्रेसबिलिटी पर अधिक जोर दिया जा रहा है।</p>
<p>नासिक के अंगूर उत्पादक किसानों के लिए यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण समय पर शुरू किया गया है। मौजूदा समय में वैश्विक बाजार में प्रीमियम और अलग-अलग किस्मों की मांग बढ़ रही है, ऐसे में निर्यात के लिए उपयुक्त न्यू जनरेशन की किस्मों को जल्दी अपनाने वाले किसानों को बाजार में बेहतर पहुंच, खरीदारों की प्राथमिकता और बेहतर दाम मिलने की संभावना अधिक होगी।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के उप निदेशक रविंद्र दांगी</strong> ने बताया, यह कार्यक्रम इस तरह से तैयार किया गया है कि अंगूर उत्पादक किसानों को वित्तीय सहायता और पूरी वैल्यू चेन का समर्थन मिल सके, जिससे वे उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाकर संगठित और निर्यात बाजारों से प्रभावी रूप से जुड़ सकें।</p>
<p>यह कार्यक्रम किसानों को कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहायता करेगा, जैसे नई किस्मों के तहत अंगूर उत्पादक क्षेत्रों का विस्तार, ड्रिप सिंचाई, जीएपी (GAP) और आईपीएम (IPM) का पालन, कैनोपी और बागानों का नवीनीकरण तथा कटाई के बाद की प्रक्रियाएं और निर्यात में मदद। इसके अलावा कृषि सामान पर एनएचबी के निर्धारित मानकों और दिशानिर्देशों के अनुसार 30-50% तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।</p>
<p>ब्लूम फ्रेश के कमर्शियल मैनेजर कैरेन स्मिट-लोट्रिएट ने अपना मत साझा करते हुए बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार अब नई जनरेशन की अंगूर किस्मों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो बेहतर गुणवत्ता, लंबी शेल्फ लाइफ और उपभोक्ताओं की पसंद के अनुरूप हों। ऐसे में नई किस्मों की खेती, वैश्विक बाजार में लंबे समय तक बने रहने के लिए जरूरी हो गयी है।</p>
<p>देहात इस कार्यक्रम को अपने &lsquo;सीड्स टू मार्केट&rsquo; प्लेटफॉर्म के माध्यम से लागू करेगा, जिसमें विशेषज्ञ सलाह, इनपुट डिलीवरी, उत्पाद एकत्रीकरण और बाजार से जुड़ाव जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।&nbsp;</p>
<p>देहात के चीफ डिजिटल ऑफिसर निखिल तोषनीवाल का कहना है कि, &ldquo;नासिक लंबे समय से भारत के प्रमुख अंगूर उत्पादक क्षेत्रों में से एक रहा है। अब विकास का अगला चरण उन किसानों का होगा जो वैश्विक बाजार की जरूरतों के अनुसार बेहतर किस्में, मजबूत गुणवत्ता प्रणाली और पूर्ण ट्रेसबिलिटी अपनाएंगे।</p>
<p>आने वाले 3-5 वर्षों में इस कार्यक्रम के माध्यम से किसान तेजी से अंगूर की नई किस्में अपना सकेंगे और निर्यात प्रणाली भी बेहतर &nbsp;होगी, जिससे नासिक को वैश्विक स्तर पर अंगूर उत्पादन केंद्र बनाने में मदद मिलेगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ देहात ने नासिक में एनएचबी के साथ शुरू किया अंगूर क्लस्टर विकास कार्यक्रम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र ने यूपी, बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र को 15वें वित्त आयोग के तहत 4,384 करोड़ रुपये का अनुदान जारी किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centre-disburses-rs-4384-crores-as-xv-fc-grants-to-bihar-up-jharkhand-and-maharashtra.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 24 Mar 2026 18:01:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centre-disburses-rs-4384-crores-as-xv-fc-grants-to-bihar-up-jharkhand-and-maharashtra.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 15वें वित्त आयोग (XV-FC) के ग्रांट के तहत बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और महाराष्ट्र के पंचायती राज संस्थानों (PRIs) और ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLBs) को 4,383.98 करोड़ रुपये की अनुदान राशि जारी की है। यह राशि ग्रामीण स्थानीय शासन को और मजबूत करने के उद्देश्य से दी गई है।</p>
<p><strong>बिहार</strong> को 1,203.60 करोड़ की राशि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए दूसरी किस्त के रूप में सभी 38 जिला पंचायतों, 533 ब्लॉक पंचायतों और 8,053 ग्राम पंचायतों को जारी की गई है। इसके अलावा, पहली किस्त के रोके गए हिस्से से 2.09 करोड़ की अतिरिक्त राशि 3 ब्लॉक पंचायतों और 7 ग्राम पंचायतों को जारी की गई है, जो अब पात्र हो चुकी हैं।</p>
<p>इसी प्रकार, <strong>उत्तर प्रदेश</strong> के लिए 2,339.10 करोड़ रुपये की राशि दूसरी किस्त के रूप में सभी 75 जिला पंचायतों, 826 ब्लॉक पंचायतों और 57,694 ग्राम पंचायतों को जारी की गई है। साथ ही, पहली किस्त के रोके गए हिस्से से 16.52 करोड़ की अतिरिक्त राशि 2 जिला पंचायतों, 13 प्रखंड पंचायतों और 61 ग्राम पंचायतों को दी गई है, जो अब पात्र हो गई हैं।</p>
<p><strong>झारखंड</strong> के लिए अनुदान के तहत 412.69 करोड़ की राशि सभी 24 जिला पंचायतों, 253 पात्र ब्लॉक पंचायतों और 4,342 पात्र ग्राम पंचायतों के लिए निर्धारित की गई है।</p>
<p><strong>महाराष्ट्र</strong> को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अनुदान की पहली किस्त के रोके गए हिस्से से 104.04 करोड़ की राशि 12 अतिरिक्त पात्र जिला पंचायतों, 125 ब्लॉक पंचायतों और 50 ग्राम पंचायतों के लिए जारी की गई है। इसके अलावा, उसी वर्ष की दूसरी किस्त के रोके गए हिस्से से 120.61 करोड़ की राशि 12 जिला पंचायतों, 125 ब्लॉक पंचायतों और 324 ग्राम पंचायतों को जारी की गई है, जो अब पात्र हो गई हैं।</p>
<p>अबंधित (untied) अनुदान के तहत वित्त वर्ष 2023-24 की पहली किस्त के रोके गए हिस्से से 106.20 करोड़ की राशि 12 अतिरिक्त पात्र जिला पंचायतों, 125 ब्लॉक पंचायतों और 1,120 ग्राम पंचायतों को जारी की गई है। साथ ही, दूसरी किस्त के रोके गए हिस्से से 79.13 करोड़ की राशि 12 जिला पंचायतों, 125 ब्लॉक पंचायतों और 183 ग्राम पंचायतों को दी गई है, जो अब पात्र हो चुकी हैं।</p>
<p>केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) राज्यों के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए अनुदानों की सिफारिश करते हैं, जिसके बाद वित्त मंत्रालय यह राशि जारी करता है। इन अनुदानों को एक वित्त वर्ष में दो किस्तों में जारी किया जाता है।</p>
<p>अबंधित (untied) अनुदान का उपयोग पंचायती राज संस्थाएं संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में शामिल 29 विषयों के अंतर्गत स्थानीय जरूरतों के अनुसार कर सकती हैं, हालांकि इसका उपयोग वेतन और अन्य प्रशासनिक खर्चों के लिए नहीं किया जा सकता।</p>
<p>वहीं, बंधित (tied) अनुदान का उपयोग बुनियादी सेवाओं के लिए किया जाता है, जिसमें स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति को बनाए रखना शामिल है। इसके अंतर्गत घरेलू कचरे का प्रबंधन, मानव मल और फीकल स्लज का उपचार शामिल है। इसके अलावा पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और वाटर रीसाइक्लिंग जैसी गतिविधियां भी शामिल हैं।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69c28390ba9ac.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र ने यूपी, बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र को 15वें वित्त आयोग के तहत 4,384 करोड़ रुपये का अनुदान जारी किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[संकट में याद आया इथेनॉल, पेट्रोल में मिश्रण 30 फीसदी तक बढ़ाने की मांग ने जोर पकड़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/ethanol-remembered-in-crisis-demand-for-increasing-blending-in-petrol-to-30-pc-gained-momentum.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 24 Mar 2026 16:10:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/ethanol-remembered-in-crisis-demand-for-increasing-blending-in-petrol-to-30-pc-gained-momentum.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="173" data-end="522">कुछ महीनों पहले देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के खिलाफ काफी माहौल बनाया जा रहा था। खासकर गाड़ियों के माइलेज और मेंटेनेंस को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर निशाना साधा गया। इथेनॉल को लेकर &lsquo;फूड बनाम फ्यूल&rsquo; की बहस भी छिड़ी। नतीजा यह हुआ कि पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण 20 फीसदी पर ही रुक गया और ब्लेंडिंग प्रोग्राम को लेकर भी संशय पैदा हो गया।</p>
<p data-start="524" data-end="982">लेकिन जैसे ही पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात बने और खाड़ी देशों से पेट्रोलियम व गैस की आपूर्ति बाधित हुई, इथेनॉल की अहमियत समझ आने लगी। ब्रेंट क्रूड तीन हफ्ते पहले 60-70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था, जिसकी कीमत अब लगभग 40 फीसदी बढ़ चुकी है। देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भरता बहुत अधिक है और मौजूदा संकट ने इस चुनौती को उजागर कर दिया है। ताजा हालात को देखते हुए पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी करने की मांग तेज हो गई है।</p>
<p data-start="984" data-end="1386">इस बीच, प्रधानमंत्री <strong>नरेंद्र मोदी</strong> ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर लोकसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 10-11 वर्षों में इथेनॉल उत्पादन और उसकी ब्लेंडिंग पर अभूतपूर्व काम हुआ है। एक दशक पहले तक देश में सिर्फ 1-1.5 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग क्षमता थी, जबकि आज हम पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग के करीब पहुंच चुके हैं। इसके कारण प्रतिवर्ष करीब साढ़े चार करोड़ बैरल कम तेल आयात करना पड़ रहा है।</p>
<p data-start="1388" data-end="1742">पीएम मोदी ने भरोसा जताया कि जिस पैमाने पर वैकल्पिक ईंधनों पर काम हो रहा है, उससे भारत का भविष्य और अधिक सुरक्षित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार सभी सेक्टर के स्टेकहोल्डर्स के साथ लगातार चर्चा कर रही है और जहां भी जरूरत है, वहां आवश्यक समर्थन दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री के इस बयान को इथेनॉल उत्पादक डिस्टिलरी उद्योग ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है।</p>
<p data-start="1744" data-end="2164"><strong>ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन</strong> (AIDA) ने केंद्र सरकार से पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी (E30) करने की मांग की है।&nbsp; एसोसिएशन की डीडीजी <strong>भारती बालाजी</strong> ने केंद्रीय मंत्री <strong>नितिन गडकरी</strong> को पत्र लिखकर कई सुझाव दिए हैं। इनमें ब्राजील की तर्ज पर 100 फीसदी इथेनॉल पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देना, घरेलू व औद्योगिक कुकिंग में इथेनॉल के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना और डीजल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ाना शामिल है।</p>
<p data-start="2415" data-end="2814">मंगलवार को AIDA के डिस्टिलर्स कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए केंद्रीय खाद्य सचिव <strong>संजीव चोपड़ा</strong> ने कहा कि हर संकट एक अवसर लेकर आता है और इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम में सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए यह उपयुक्त समय है। उन्होंने बताया कि 2014 से 2025 के बीच इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के कारण कच्चे तेल का आयात लगभग 277 लाख टन कम हुआ है, जिससे 1.63 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।</p>
<p data-start="2816" data-end="3111"><strong>इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन</strong> (ISMA) ने भी प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर E20 से आगे इथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए एक चरणबद्ध और तेज रोडमैप तैयार करने की मांग की है। संगठनों का मानना है कि मौजूदा उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग करने के लिए ब्लेंडिंग लक्ष्य बढ़ाना जरूरी है।</p>
<p data-start="3113" data-end="3591">इस्मा के डायरेक्टर जनरल <strong>दीपक बल्लानी</strong> ने कहा, &ldquo;प्रधानमंत्री का यह कहना कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से 4.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल के आयात में बचत हुई है, बायोफ्यूल को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के एक अहम स्तंभ के रूप में स्थापित करता है।&rdquo; उन्होंने कहा कि इथेनॉल उद्योग 20 फीसदी से अधिक ब्लेंडिंग के लिए आपूर्ति बढ़ाने को तैयार है। इस्मा के अनुसार, देश में सालाना करीब 2,000 करोड़ लीटर से अधिक घरेलू इथेनॉल उत्पादन क्षमता है, जो 20 फीसदी मिश्रण के लिए आवश्यक 1,100 करोड़ लीटर से काफी ज्यादा है। इस तरह भारत इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की स्थिति में है।&nbsp;</p>
<p><strong>ग्रेन इथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन</strong> (GEMA) के अध्यक्ष <strong>सी.के. जैन</strong> का कहना है कि देश में इथेनॉल को लेकर नीति समर्थन जारी रहा तो यह क्षेत्र कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। अनाज आधारित इथेनॉल उत्पादन से किसानों को अतिरिक्त बाजार और बेहतर आय के अवसर मिल रहे हैं।</p>
<p data-start="3113" data-end="3591"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69c26d70993a1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ संकट में याद आया इथेनॉल, पेट्रोल में मिश्रण 30 फीसदी तक बढ़ाने की मांग ने जोर पकड़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पश्चिम एशिया संघर्ष पर लोकसभा में पीएम मोदी का संबोधन, भारतीयों की सुरक्षा और एनर्जी सिक्योरिटी पर जोर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-modi-address-in-parliament-on-west-asia-conflict-emphasis-on-safety-and-energy-security-of-indians.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 23 Mar 2026 18:50:17 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-modi-address-in-parliament-on-west-asia-conflict-emphasis-on-safety-and-energy-security-of-indians.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध ने भारत के सामने भी अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इस संकट को तीन सप्ताह से अधिक समय हो चुका है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। इसलिए पूरी दुनिया इसके शीघ्र समाधान के लिए सभी पक्षों से अपील कर रही है।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि<span> हम कोरोना के समय भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। अब हमें फिर से उसी तरह तैयार रहने की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य सरकारों से आग्रह किया कि ऐसे समय में कालाबाजारी और जमाखोरी करने वाले एक्टिव हो जाते हैं, इसके लिए कड़ी मॉनिटरिंग जरूरी है। जहां से भी ऐसी शिकायतें आती हैं, वहां त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए।&nbsp;</span></p>
<p><strong>भारत की चिंताएं</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्धरत और प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक संबंध हैं। जिस क्षेत्र में संघर्ष हो रहा है, वह वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं और समुद्री व्यापार में भी बड़ी संख्या में भारतीय क्रू सदस्य कार्यरत हैं। इन सभी कारणों से भारत की चिंताएं स्वाभाविक हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर संसद से एकजुट और स्पष्ट संदेश दुनिया तक जाना चाहिए।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि <span>भारत की भूमिका स्पष्ट है। शुरुआत से ही हमने इस संघर्ष को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत हमेशा से मानवता के हित में और शांति के पक्ष में अपनी आवाज उठाता रहा है। बातचीत और कूटनीति ही इस समस्या का समाधान है।&nbsp;</span></p>
<p><strong>भारतीयों की सुरक्षा प्राथमिकता</strong></p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से प्रभावित देशों में हर भारतीय को आवश्यक सहायता दी जा रही है। उन्होंने स्वयं पश्चिम एशिया के कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से दो दौर की बातचीत की है और सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है। विदेशों में मौजूद भारतीय मिशन लगातार सहायता में जुटे हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>3.75 </strong><strong>लाख भारतीय सुरक्षित लौटे</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं। ईरान से लगभग 1000 भारतीयों को वापस लाया गया है, जिनमें 700 से अधिक मेडिकल छात्र शामिल हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>एनर्जी सिक्योरिटी पर फोकस</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में कच्चा तेल, गैस और उर्वरक जैसी कई जरूरी वस्तुएं होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती हैं। युद्ध के बाद यहां जहाजों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो गई है। सरकार का प्रयास है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो और आम नागरिकों को कम से कम परेशानी हो।</p>
<p>उन्होंने बताया कि भारत के पास 53 लाख टन से अधिक का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार है और बीते 11 वर्षों में रिफाइनिंग क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार विभिन्न देशों के सप्लायर्स के साथ संपर्क में है ताकि आपूर्ति बनी रहे। <span>भारत डिप्लोमेसी के जरिए युद्ध के माहौल में भी, भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। </span>हाल के दिनों में होर्मुज क्षेत्र में फंसे कई भारतीय जहाज सुरक्षित आए हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>खेती को संकटों से बचाएंगे </strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसानों ने देश के अन्न भंडार भर रखे हैं और भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध है। कोरोना काल में भी वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई थी, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत 3000 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गई थी, जबकि भारतीय किसानों को यह 300 रुपये से भी कम कीमत पर उपलब्ध कराया गया।</p>
<p>उन्होंने बताया कि किसानों को ऐसे संकटों से बचाने के लिए पिछले एक दशक में 6 नए यूरिया संयंत्र शुरू किए गए, जिससे सालाना 76 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जुड़ी है। DAP और NPK उर्वरकों का घरेलू उत्पादन भी करीब 50 लाख टन बढ़ाया गया है और आयात स्रोतों को भी विविधीकृत किया गया है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को &lsquo;मेड इन इंडिया&rsquo; नैनो यूरिया का विकल्प दिया गया है और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। पीएम कुसुम योजना के तहत 22 लाख से अधिक सोलर पंप लगाए गए हैं, जिससे डीजल पर निर्भरता कम हुई है। पीएम मोदी ने कहा,&nbsp;&ldquo;मैं इस सदन के माध्यम से देश के किसानों को विश्वास दिलाता हूं कि सरकार किसानों को हर संभव मदद करती रहेगी।&rdquo;&nbsp;</p>
<p><strong>एथेनॉल ब्लेंडिंग से राहत</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दशक में एथेनॉल उत्पादन और ब्लेंडिंग में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पहले जहां एथेनॉल ब्लेंडिंग लगभग 1-2 प्रतिशत थी, अब यह 20 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। इससे हर साल करीब साढ़े चार करोड़ बैरल तेल आयात कम हुआ है।</p>
<p>रेलवे के विद्युतीकरण से भी बड़े पैमाने पर डीजल की बचत हुई है। यदि यह न हुआ होता, तो हर साल लगभग 180 करोड़ लीटर अतिरिक्त डीजल की आवश्यकता पड़ती। साथ ही, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के तहत राज्यों को 15,000 इलेक्ट्रिक बसें दी गई हैं।</p>
<p></p>
<p></p>
<p><strong>&nbsp;</strong></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पश्चिम एशिया संघर्ष पर लोकसभा में पीएम मोदी का संबोधन, भारतीयों की सुरक्षा और एनर्जी सिक्योरिटी पर जोर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फसलों पर मौसम की मार के बाद 72 घंटे अहम: जानिए कैसे दें फसल नुकसान की सूचना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/72-hours-are-crucial-after-the-weather-hits-crops-know-how-to-get-compensation-for-crop-loss.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 23 Mar 2026 13:58:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/72-hours-are-crucial-after-the-weather-hits-crops-know-how-to-get-compensation-for-crop-loss.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="120" data-end="585">पिछले एक सप्ताह के दौरान हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में बेमौसम बारिश, आंधी और ओलावृष्टि से रबी की तैयार फसलों को नुकसान पहुंचा है। किसानों की मेहनत पर आपदा की मार के बाद राहत और मुआवजे का इंतजार शुरू हो गया है। जिन किसानों की फसलों का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा हुआ है, उन्हें फसल नुकसान पर बीमा क्लेम मिलता है, बशर्ते समय पर फसल नुकसान की सूचना बीमा कंपनी, कृषि विभाग या संबंधित बैंक शाखा को दी जाए।</p>
<p data-start="587" data-end="821">केंद्रीय कृषि मंत्री<strong> शिवराज सिंह चौहान</strong> का कहना है कि <span>हमने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के सभी नियमों में संशोधन किया और यह तय किया कि अगर एक भी किसान का नुकसान होता है, तो बीमा कंपनी को उस नुकसान का मुआवजा देना होगा। राज्यों से तुरंत संपर्क कर नुकसान का आकलन कराया जा रहा है। SDRF के तहत राज्य सरकारें राहत दे रही हैं, वहीं फसल बीमा योजना के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कर किसानों को राहत उपलब्ध कराई जाए।</span></p>
<p data-start="823" data-end="961">प्राकृतिक आपदाओं जैसे बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि या सूखे से होने वाले फसल नुकसान के लिए मुख्य रूप से दो तरीकों से सहायता प्रदान की जाती है:</p>
<p data-start="963" data-end="1307"><strong data-start="963" data-end="1005">1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)</strong><br data-start="1005" data-end="1008" />यह योजना उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपनी फसल का बीमा कराया है। फसल कटाई के बाद अधिकतम 14 दिनों तक खेत में रखी फसल यदि असामयिक वर्षा या प्राकृतिक आपदाओं के कारण खराब होती है, तो उसे बीमा कवरेज में शामिल किया जाता है। इससे प्रभावित किसानों को व्यक्तिगत आधार पर भी नुकसान की भरपाई का प्रावधान है।</p>
<p data-start="1309" data-end="1598">इसके लिए किसानों को फसल नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर देना अनिवार्य है। यह सूचना कृषि रक्षक पोर्टल <strong><a data-start="1410" data-end="1435" rel="noopener" target="_new" class="decorated-link" href="https://pmfby.gov.in/krph">https://pmfby.gov.in/krph,</a>&nbsp;&lsquo;क्रॉप इंश्योरेंस ऐप&rsquo;</strong> (Crop Insurance App) या हेल्पलाइन नंबर<strong> 14447</strong> के माध्यम से दी जा सकती है। किसान व्हाट्सऐप चैटबॉट नंबर <strong>7065514447</strong> पर भी संदेश भेज सकते हैं।</p>
<p data-start="1600" data-end="1727">इसके अलावा, किसान संबंधित बीमा कंपनी, नजदीकी कृषि कार्यालय या बैंक शाखा के माध्यम से जानकारी दे सकते हैं।</p>
<p data-start="2108" data-end="2245"><strong data-start="2108" data-end="2141">2. राज्य आपदा राहत कोष (SDRF)</strong><br data-start="2141" data-end="2144" />जिन किसानों ने बीमा नहीं कराया है, उन्हें राज्य सरकारें अपने नियमों के अनुसार राहत प्रदान करती हैं।</p>
<ul data-start="2247" data-end="2469">
<li data-section-id="k75vk9" data-start="2247" data-end="2341"><strong data-start="2249" data-end="2268">न्यूनतम नुकसान:</strong> आमतौर पर 33% से अधिक नुकसान होने पर ही किसान सहायता के पात्र होते हैं।</li>
<li data-section-id="1w5hlp1" data-start="2342" data-end="2469"><strong data-start="2344" data-end="2358">सर्वेक्षण:</strong> नुकसान का आकलन करने के लिए संबंधित जिले के अधिकारी (राजस्व विभाग/कृषि विभाग) गिरदावरी या सर्वेक्षण करते हैं।</li>
</ul>
<p>उपरोक्त दोनों ही स्थितियों में किसानों को फसल नुकसान होते ही इसकी जानकारी बीमा कंपनी और कृषि विभाग के माध्यम में जरूर दर्ज करानी चाहिए। साथ ही खराब फसलों की तस्वीरें व वीडियों और उस दिन मौसम में आए बदलाव की जानकारी भी रखनी चाहिए।&nbsp;</p>
<p>हाल की बारिश और ओलावृष्टि के बाद&nbsp;विभिन्न राज्य सरकारों के कृषि विभागों ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे मौके पर पहुंचकर फसल खराबे का निरीक्षण करें और प्रभावित किसानों को त्वरित राहत दिलाने में सहयोग करें। सरकार ने&nbsp;फसल बीमा कंपनियों को भी निर्देश दिया गया है कि प्राप्त सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई करते हुए फील्ड सर्वे शुरू किया जाए, ताकि नुकसान का सही आकलन कर शीघ्र बीमा क्लेम का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69c108cac1a5b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ फसलों पर मौसम की मार के बाद 72 घंटे अहम: जानिए कैसे दें फसल नुकसान की सूचना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69c108cac1a5b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों पर ईरान युद्ध का असर, कीटनाशक होंगे महंगे, अप्रैल से 25 से 30 फीसदी तक दाम बढ़ने के आसार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/iran-war-hits-farmers-pesticides-could-become-25–30-percent-more-expensive-from-april.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 22 Mar 2026 19:31:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/iran-war-hits-farmers-pesticides-could-become-25–30-percent-more-expensive-from-april.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p dir="ltr">अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के युद्ध का असर अब व्यापक होता जा रहा है। इस तनाव के कारण कीटनाशकों (पेस्टीसाइड्स) की कीमतों में 25 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी होना लगभग तय है। चूंकि खरीफ सीजन में कीटनाशकों की खपत अधिक होती है, इसलिए इस मोर्चे पर किसानों की लागत बढ़ना निश्चित है। एग्रोकेमिकल कंपनियों का कहना है कि लागत में वृद्धि के कारण उन्हें दाम बढ़ाने पड़ेंगे और अब नया उत्पादन बढ़ी हुई कीमतों के साथ ही बाजार में आएगा। कीमतों में यह उछाल अप्रैल से दिखना शुरू हो जाएगा। <span style="font-weight: 400;">कीटनाशकों की घरेलू उपलब्धता की समस्या के साथ इनका निर्यात भी प्रभावित होने की आशंका है।</span></p>
<p dir="ltr">​एक बड़ी एग्रोकेमिकल कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) ने <b>'रूरल वॉयस'</b> को बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में इजाफे के कारण रिफाइनरियों ने पेट्रोकेमिकल उत्पादों के दाम 25 से 30 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं। साथ ही, पैकेजिंग उत्पादों की कीमतों में भी 15 से 30 फीसदी की वृद्धि हुई है। अधिकारी के अनुसार, सप्लायरों ने पहले से तय अनुबंधों (कॉन्ट्रैक्ट्स) की कीमतें भी बढ़ा दी हैं। इसके अलावा, रिफाइनरियों ने सल्फर के दामों में भारी बढ़ोतरी की है। कंपनियां कीटनाशकों के अलावा 'प्लांट ग्रोथ स्टिमुलस' भी बनाती हैं, जिसके कच्चे माल के रूप में सल्फर का बड़ा योगदान होता है।</p>
<p dir="ltr">​कीटनाशकों के उत्पादन में उपयोग होने वाले अधिकांश रसायन चीन से आते हैं और चीन ने न केवल कीमतों में भारी बढ़ोतरी की है, बल्कि निर्यात में भी कटौती कर दी है। इसी सप्ताह चीन में केमिकल और फर्टिलाइजर पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हो रहा है, जिसमें दुनिया की बड़ी उर्वरक और एग्रोकेमिकल कंपनियों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस बैठक के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।</p>
<p dir="ltr">​एक अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से कीटनाशकों में इस्तेमाल होने वाले <b>सॉल्वेंट और इमल्सीफायर</b> महंगे हो गए हैं, जो एग्रोकेमिकल्स का मुख्य हिस्सा होते हैं। वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 93 रुपये के स्तर को पार कर गया है। युद्ध के मौजूदा हालात देखते हुए इसके और टूटने की आशंका है, जिससे कच्चे माल की आयात लागत बढ़ गई है। साथ ही, शिपिंग चार्जेस और इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ने से भी आयात महंगा हुआ है। ऐसे में कंपनियों के पास दाम बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो भविष्य में आपूर्ति (सप्लाई चेन) भी एक बड़ी चुनौती बन जाएगी।</p>
<p dir="ltr">​हाल ही में कीटनाशक निर्माताओं की संस्था <b>'क्रॉपलाइफ इंडिया'</b> ने भी एक बयान जारी कर कीमतों में 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी की आशंका जताई है।</p>
<p dir="ltr"><span style="font-weight: 400;">मध्य पूर्व की समस्या भारत से एग्रोकेमिकल निर्यात को भी प्रभावित कर रही है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एग्रोकेमिकल निर्यातक है। देश से हर साल इनका 5.5 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात होता है।</span></p>
<p dir="ltr">​पश्चिम एशिया के इस युद्ध की आंच अब भारतीय किसानों के करीब पहुंच गई है। उर्वरकों (फर्टिलाइजर) के मोर्चे पर भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं, हालांकि वहां सरकार सब्सिडी बढ़ाकर किसानों को राहत दे सकती है। लेकिन कीटनाशकों की कीमतों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।</p>
<p dir="ltr">हाल के वर्षों में फसल उत्पादन की कुल लागत में कीटनाशकों के खर्च का हिस्सा बढ़ा है। पिछले एक साल में किसानों को उनकी उपज का उचित दाम नहीं मिला है, ऐसे में बढ़ती लागत का यह नया बोझ उनकी मुश्किलें और बढ़ा देगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों पर ईरान युद्ध का असर, कीटनाशक होंगे महंगे, अप्रैल से 25 से 30 फीसदी तक दाम बढ़ने के आसार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आईसीएआर&amp;#45;आईवीआरआई ने उन्नत प्रजनन तकनीक से साहीवाल बछिया उत्पादन में हासिल की बड़ी सफलता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/icar-ivri-achieves-breakthrough-in-producing-sahiwal-calves-using-advanced-reproductive-technology.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 21 Mar 2026 13:41:29 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/icar-ivri-achieves-breakthrough-in-producing-sahiwal-calves-using-advanced-reproductive-technology.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के पशुधन क्षेत्र में एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल करते हुए भारतीय पशु अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईवीआरआई) ने उन्नत सहायक प्रजनन तकनीक (ART) का उपयोग कर स्वदेशी साहीवाल नस्ल की बछियों का उत्पादन किया है। संस्थान को अल्ट्रासाउंड-निर्देशित ओवम पिक-अप, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन और एम्ब्रियो ट्रांसफर (OPU-IVF-ET) तकनीक के माध्यम से यह पहली सफलता है। इससे स्वदेशी नस्लों के तेज आनुवंशिक सुधार का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।</p>
<p>यह उपलब्धि वर्ष 2022-23 में शुरू किए गए उस विशेष कार्यक्रम का परिणाम है, जिसका उद्देश्य देश की प्रमुख दुग्ध नस्लों- साहीवाल, थारपारकर और मुर्रा भैंस की आनुवंशिक क्षमता को मजबूत करना था। वैज्ञानिकों ने खेत और फार्म दोनों परिस्थितियों में OPU-IVF-ET तकनीक को मानकीकृत करने पर काम किया।</p>
<p>वैज्ञानिकों के सतत प्रयासों का परिणाम 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए मात्र पांच दिनों में देखने को मिला, जब OPU-IVF-ET तकनीक से पांच स्वस्थ साहीवाल बछियों का जन्म हुआ। ये बछड़े उच्च गुणवत्ता वाले जर्मप्लाज्म से तैयार किए गए। इसके लिए 12 लीटर प्रतिदिन से अधिक दूध देने वाली उच्च उत्पादक साहीवाल गाय से ओसाइट लिए गए, जबकि निषेचन के लिए ऐसे सांड के वीर्य का उपयोग किया गया जिसकी मातृ वंशावली का दुग्ध उत्पादन लगभग 3,320 किलोग्राम रहा है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69be525649698.jpg" alt="" /></p>
<p>अनुसंधान के दौरान वैज्ञानिकों ने बिना हार्मोनल स्टिमुलेशन के भी सफलतापूर्वक ओसाइट प्राप्त किए। औसतन थारपारकर में 14.5, साहीवाल में 13.14 और मुर्रा भैंस में 4.5-5.5 ओसाइट प्राप्त हुए। वहीं भ्रूण विकास की सफलता दर भी उल्लेखनीय रही, जिसमें मवेशियों में 47 प्रतिशत से अधिक और भैंसों में 42 प्रतिशत से अधिक ब्लास्टोसिस्ट उत्पादन दर दर्ज की गई, जो वैश्विक स्तर की प्रयोगशालाओं के बराबर है।</p>
<p>इस उपलब्धि की सराहना करते हुए डॉ. राघवेंद्र भट्ट, उप महानिदेशक (पशु विज्ञान), आईसीएआर एवं निदेशक, आईसीएआर-आईवीआरआई ने कहा कि यह सफलता सहायक प्रजनन तकनीक के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगी और भविष्य में और भी महत्वपूर्ण उपलब्धियों का मार्ग प्रशस्त करेगी। यह शोध कार्य डॉ. बृजेश कुमार के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम द्वारा किया गया, जिसे डॉ. एस.के. सिंह का मार्गदर्शन प्राप्त था।&nbsp;</p>
<p>संस्थान के अनुसार, यह उपलब्धि भविष्य में बड़े पैमाने पर लागू की जा सकने वाली तकनीक का मॉडल है। आईसीएआर-आईवीआरआई अब इस तकनीक के विस्तार के माध्यम से उत्कृष्ट स्वदेशी पशुधन के उत्पादन को तेज़ करने की दिशा में कार्य करेगा, जिससे आनुवंशिक सुधार कार्यक्रमों को मजबूती मिलेगी और देशी जर्मप्लाज्म का संरक्षण होगा।</p>
<p>संस्थान क्षमता निर्माण पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। OPU-IVF-ET तकनीक पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए कुशल मानव संसाधन तैयार किए जा रहे हैं, जिससे पशुधन क्षेत्र में उद्यमिता और स्टार्टअप को बढ़ावा मिल सके।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आईसीएआर-आईवीआरआई ने उन्नत प्रजनन तकनीक से साहीवाल बछिया उत्पादन में हासिल की बड़ी सफलता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ईरान युद्ध से वैश्विक कृषि आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव, उर्वरक, कीटनाशक और ईंधन महंगे होने से खाद्य महंगाई बढ़ने का खतरा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/middle-east-conflict-fertiliser-prices-food-inflation-2026.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 21 Mar 2026 11:19:47 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/middle-east-conflict-fertiliser-prices-food-inflation-2026.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध (Iran War) ने वैश्विक कृषि आपूर्ति श्रृंखला के लिए गंभीर चिंता उत्पन्न कर दी है। कच्चा तेल और गैस के साथ उर्वरकों के दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। यदि यह संकट लंबा खिंचता है तो इसका असर खाद्य उत्पादन, कीमतों और वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कीटनाशक उत्पादन की लागत 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।</p>
<p>क्रॉप लाइफ इंडिया के चेयरमैन और क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लि. के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन और एमडी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि युद्ध के कारण जो शिपिंग रूट बाधित हुआ है, उससे कीटनाशकों के उत्पादन की लागत 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। फलस्वरूप किसानों की लागत भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इस व्यवधान के कारण महत्वपूर्ण कृषि सीजन में कीटनाशकों की कमी भी हो सकती है। इसका असर उत्पादकता और गुणवत्ता पर होगा।</p>
<p>रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। आईजीसी की गुरुवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, यह दुनिया के लगभग 25% तेल और 20% एलएनजी निर्यात का प्रमुख मार्ग है। इसके अलावा, यह क्षेत्र उर्वरक उत्पादन और व्यापार का भी बड़ा केंद्र है। यहां से वैश्विक यूरिया का करीब 35% और अमोनिया का लगभग 30% निर्यात होता है। मौजूदा हालात में शिपिंग बाधाएं और कुछ उत्पादन इकाइयों के बंद होने से उर्वरक कीमतों में तेज वृद्धि देखी जा रही है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और अन्य एजेंसियों के अनुसार, यह जलडमरूमध्य वैश्विक स्तर पर व्यापार होने वाले लगभग 30% उर्वरकों के परिवहन के लिए भी अहम है। कुछ आकलनों में युद्ध के कारण 65% से 70% तक यूरिया आपूर्ति पर खतरे की आशंका जताई गई है। उर्वरकों की कीमतें पहले ही 30% से 40% तक बढ़ चुकी हैं, जिससे खेती की लागत में बड़ा इजाफा हो रहा है।</p>
<p>हालांकि उत्तरी गोलार्ध के अधिकांश अनाज और तिलहन उत्पादक देशों ने अगली बुवाई के लिए पर्याप्त उर्वरक भंडारण रखा है, लेकिन एशिया और अफ्रीका के अनेक देश खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर हैं। यदि संकट लंबा चला, तो इन क्षेत्रों में बुवाई के फैसलों पर असर पड़ सकता है। उर्वरकों की कमी या ऊंची कीमतों के कारण किसानों को उर्वरक उपयोग घटाना पड़ सकता है, जिससे फसल उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं।</p>
<p>ऊर्जा कीमतों में भी तेज उछाल आया है। वैश्विक तेल और गैस की कीमतें युद्ध से पहले की तुलना में लगभग 50% बढ़ चुकी हैं। इसका सीधा असर कृषि उत्पादन, परिवहन और आपूर्ति लागत पर पड़ रहा है। नाइट्रोजन-आधारित उर्वरकों पर निर्भर गेहूं और मक्का जैसी प्रमुख फसलें सबसे पहले प्रभावित हो सकती हैं, जिससे खाद्य श्रृंखला पर व्यापक असर पड़ेगा। पशु चारा महंगा होने से डेयरी और मांस उत्पादों की कीमतों में भी वृद्धि की संभावना है।</p>
<p>यह संकट खाद्य सुरक्षा की क्षेत्रीय कमजोरियों को भी उजागर कर रहा है। फारस की खाड़ी क्षेत्र में हर महीने औसतन 20 लाख टन अनाज, तिलहन और संबंधित उत्पादों की आपूर्ति होती है। हालांकि यह वैश्विक व्यापार का केवल 3% है, लेकिन खाड़ी देशों की आयात पर निर्भरता बहुत अधिक है। होर्मुज मार्ग के बाधित होने से वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग सीमित हो गए हैं, हालांकि कुछ हद तक रेड सी या कैस्पियन सागर के रास्ते पुनः मार्ग निर्धारण संभव है। स्थानीय भंडार अल्पकालिक राहत दे सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक व्यवधान रहने पर खाद्य आपूर्ति संकट गहरा सकता है।</p>
<p>विकासशील देशों पर इसका असर अधिक गंभीर हो सकता है, जहां खुदरा महंगाई में खाद्य और ईंधन की हिस्सेदारी 30% से 50% तक होती है, जबकि विकसित देशों में यह 25% से कम रहती है। इससे इन अर्थव्यवस्थाओं में बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है। केन्या में उर्वरक कीमतें पहले ही करीब 40% तक बढ़ चुकी हैं। इसके विपरीत, लैटिन अमेरिका के कुछ देश अपेक्षाकृत कम प्रभावित हैं, हालांकि वहां भी आपूर्ति बाधाओं की आशंका बनी हुई है।&nbsp;</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि 2022 के यूक्रेन संकट के विपरीत, इस बार सीधा असर अनाज निर्यात पर नहीं बल्कि उर्वरकों और ऊर्जा लागत के माध्यम से उत्पादन पर पड़ेगा। इससे खाद्य महंगाई की दूसरी लहर देखने को मिल सकती है। हाल के वर्षों में वैश्विक खाद्य महंगाई में कमी आई थी और जनवरी में यह 2017 के बाद के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई थी, लेकिन मौजूदा संकट इस परिस्थिति को उलट सकता है।&nbsp;</p>
<p>यदि यह संकट कुछ सप्ताह से अधिक समय तक जारी रहता है, तो वैश्विक स्तर पर बुवाई, उत्पादन और खाद्य आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और महंगाई दोनों पर दीर्घकालिक दबाव बनने की आशंका है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ईरान युद्ध से वैश्विक कृषि आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव, उर्वरक, कीटनाशक और ईंधन महंगे होने से खाद्य महंगाई बढ़ने का खतरा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_695fccaf95ed1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कई राज्यों में रबी की तैयार फसलों पर बारिश&amp;#45;आंधी व ओलावृष्टि का कहर, शिवराज ने की समीक्षा बैठक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rain-storm-and-hailstorm-wreak-havoc-on-ready-rabi-crops-in-many-states-how-will-losses-of-farmers-be-compensated.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 20 Mar 2026 15:08:45 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rain-storm-and-hailstorm-wreak-havoc-on-ready-rabi-crops-in-many-states-how-will-losses-of-farmers-be-compensated.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रबी सीजन की जिन फसलों को किसानों ने कई महीनों की मेहनत, लागत और लगन से तैयार किया है, वे अब असमय बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि की मार झेल रही हैं। देश के कई राज्यों में अचानक बदले मौसम ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। फसलों को हुए नुकसान की समीक्षा के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने नुकसान का तुरंत सर्वेक्षण कराने और आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए।</p>
<p>पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी दर्ज की गई, जबकि हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि से रबी फसलों को व्यापक क्षति हुई है।</p>
<p>इस समय सरसों की कटाई कई क्षेत्रों में शुरू हो चुकी है, वहीं गेहूं की फसल दाना भरने और पकने की अवस्था में है। ऐसे में तेज बारिश और ओलावृष्टि से बालियां झुकने, फसल गिरने, दानों के काले पड़ने और गुणवत्ता में गिरावट का खतरा बढ़ गया है। चना और मसूर जैसी दलहनी फसलें भी प्रभावित हुई हैं, जिससे उत्पादन में कमी की आशंका जताई जा रही है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69bd167fa8ac8.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>आईसीएआर के पूर्व डीडीजी (एनआरएम) <strong>डॉ. जे.एस. सामरा </strong>ने<strong> रूरल वायस</strong> को बताया कि कटाई के लिए तैयार सरसों और गेहूं की अगैती फसल को भारी बारिश और ओले पड़ने से भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में जलभराव होने से फसलें गिर गई हैं। इससे पैदावार की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और कटाई में देरी होगी।</p>
<p>हरियाणा के करनाल जिले के बुटाणा गांव के प्रगतिशील किसान <strong>नीरज चौधरी</strong> का कहना है कि सरसों और गेहूं की खड़ी फसल पर इतनी अधिक बारिश पड़ने से पैदावार में कम से कम 20 फीसदी का नुकसान होगा। किसानों के लिए यह बारिश आफत बनकर आई है।</p>
<p>किसानों का कहना है कि फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत में असामान्य गर्मी ने पहले ही फसलों को प्रभावित किया था, और अब बेमौसम बारिश ने उनकी मुसीबत बढ़ा दी है। विभिन्न राज्यों में किसानों ने सरकार से नुकसान का त्वरित सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग की है।</p>
<p>अखिल भारतीय किसान सभा ने केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधते हुए किसानों के नुकसान की जानबूझकर कम रिपोर्टिंग और राहत उपायों को जारी करने में संवेदनहीनता का आरोप लगाया। किसान सभा ने केंद्र सरकार से सभी प्रभावित किसानों के लिए एक व्यापक राहत पैकेज घोषित करने और तत्काल मुआवजा जारी करने की मांग की है।</p>
<p><strong>शिवराज सिंह चौहान ने की समीक्षा बैठक</strong></p>
<p>असमय बारिश और ओलावृष्टि से कई राज्यों में फसलों को हुए नुकसान की समीक्षा के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने फसल नुकसान का तुरंत सर्वेक्षण कराने और आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। राज्यों से तुरंत संपर्क कर नुकसान का आकलन कराया जा रहा है। कृषि मंत्री ने बताया कि SDRF के तहत राज्य सरकारें राहत दे रही हैं, वहीं फसल बीमा योजना के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कर किसानों को राहत उपलब्ध कराई जाए।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69bd227d9a944.jpg" alt="" /></p>
<p>कृषि मंत्री ने कहा, हमने आगामी खरीफ सीजन की तैयारी के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों में रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का निर्णय लिया है, ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुसार खरीफ फसल के लिए बेहतर रणनीति बनाई जा सके। इसके लिए देश को पांच ज़ोन (उत्तर, दक्षिण, पश्चिम, पूर्व और नॉर्थ-ईस्ट/हिली स्टेट्स) में बांटकर रीजनल कॉन्फ्रेंस की जाएगी, ताकि खरीफ फसल के लिए बेहतर रणनीति बनाई जा सके।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने बैठक में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुचारु खरीद सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि रबी फसल का उत्पादन इस वर्ष बंपर हुआ है। गेहूं और धान की खरीदी शीघ्र प्रारंभ होगी, साथ ही तुअर, मसूर और उड़द की भी पूरी खरीदी की जाएगी। किसान जितनी उपज बेचना चाहेंगे, हम खरीदेंगे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69bd2223e8234.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कई राज्यों में रबी की तैयार फसलों पर बारिश-आंधी व ओलावृष्टि का कहर, शिवराज ने की समीक्षा बैठक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69bd2223e8234.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत ने स्वदेशी पशु प्रजनन में हासिल की बड़ी उपलब्धि, बड़े पैमाने पर भ्रूण ट्रांसफर कार्यक्रम सफल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-indigenous-cattle-embryo-transfer-breakthrough-bl-agro.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 20 Mar 2026 12:44:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-indigenous-cattle-embryo-transfer-breakthrough-bl-agro.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत के डेयरी और पशुपालन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, बीएल एग्रो समूह की सहायक कंपनी लीड्स जेनेटिक्स ने बरेली में देश का पहला, बड़े पैमाने का स्वदेशी गाय भ्रूण ट्रांसफर कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने का दावा किया है। &lsquo;सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर कैटल ब्रीडिंग एंड डेयरी टेक्नोलॉजी&rsquo; में की गई यह पहल, भारत की पशु आनुवंशिकी और दुग्ध उत्पादकता को बेहतर बनाने के लिए प्रजनन तकनीकों के उपयोग में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।</p>
<p>दिसंबर 2025 में संचालित पहले चरण में, कंपनी ने 116 गायों पर इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) किया, जिसमें लगभग 70% सफलता दर हासिल हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तर पर यह सफलता दर काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके आधार पर दूसरे चरण में भ्रूण (एम्ब्रियो) ट्रांसफर प्रक्रियाओं का विस्तार 160 गायों तक किया गया, जिसमें गिर और साहीवाल जैसी स्वदेशी नस्लों के साथ-साथ होल्सटीन फ्रीजियन (HF) क्रॉसब्रीड गायें भी शामिल थीं।</p>
<p>यह कार्यक्रम उन्नत IVF, जीनोमिक्स और पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं से सुसज्जित एक आधुनिक सुविधा में संचालित किया जा रहा है, जो वैज्ञानिक पशुपालन प्रबंधन की दिशा में बढ़ते प्रयासों को दर्शाता है। यह पहल ब्राजील की एम्ब्रापा और फजेंडा फ्लोरेस्टा के साथ त्रिपक्षीय सहयोग के तहत भी संचालित हो रही है। यह एम्ब्रापा की किसी निजी भारतीय संस्था के साथ पहली साझेदारी है।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाले पशुओं की तेजी से संख्या बढ़ाने में सक्षम है, जिससे प्रति पशु दुग्ध उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार यह तकनीक पारंपरिक प्रजनन विधियों की तुलना में दूध उत्पादन क्षमता को तीन गुना तक बढ़ा सकती है, हालांकि इसके परिणाम खेत स्तर पर अपनाने और समग्र पारिस्थितिकी तंत्र के समर्थन पर निर्भर करेंगे।</p>
<p>बीएल एग्रो के प्रबंध निदेशक आशीष खंडेलवाल ने कहा, इस सफलता का पैमाना भारतीय डेयरी क्षेत्र के लिए एक निर्णायक क्षण है। उन्नत प्रजनन तकनीक प्रति गाय उत्पादकता बढ़ाने और पशुधन की आनुवंशिक गुणवत्ता को मजबूत करने के भारत के लक्ष्य को तेज कर सकती हैं।</p>
<p>भारत पहले ही दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है, लेकिन प्रति पशु उत्पादन के मामले में अब भी पीछे है। ऐसे में इस तरह की पहल किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। यदि इन्हें प्रभावी ढंग से बड़े स्तर पर लागू किया जाता है, तो यह देश की डेयरी वैल्यू चेन को आधुनिक बनाने के साथ-साथ स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन में भी अहम भूमिका निभा सकती हैं।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत ने स्वदेशी पशु प्रजनन में हासिल की बड़ी उपलब्धि, बड़े पैमाने पर भ्रूण ट्रांसफर कार्यक्रम सफल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी के 14% से घटकर 7.9% पर आई: फिक्की&amp;#45;ग्रांट थॉर्नटन रिपोर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-indigenous-cold-chain-technology-logistics-report-ficci.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 20 Mar 2026 11:43:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-indigenous-cold-chain-technology-logistics-report-ficci.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत को अपने लॉजिस्टिक्स के भविष्य को सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए स्वदेशी कोल्ड चेन तकनीक विकसित करनी होगी। गुरुवार को जारी इंडस्ट्री चैंबर फिक्की (FICCI) और ग्रांट थॉर्नटन भारत (Grant Thornton Bharat) की संयुक्त रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के निष्कर्ष फिक्की गतिशक्ति सम्मेलन के तीसरे संस्करण में प्रस्तुत किए गए। इसमें बताया गया है कि भारत में लॉजिस्टिक्स की लागत घटकर जीडीपी का 7.9 प्रतिशत रह गई है।</p>
<p>यह रिपोर्ट &lsquo;भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम में बदलाव: वेयरहाउसिंग, कोल्ड चेन और टेक्नोलॉजी की भूमिका&rsquo; शीर्षक से जारी की गई है। इसमें बताया गया है कि भारत में लॉजिस्टिक्स लागत घटकर जीडीपी के 7.9 प्रतिशत तक आ गई है, जो पहले 13-14 प्रतिशत के बीच थी। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार अब प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए स्वदेशी तकनीक विकास अगला बड़ा कदम होगा।</p>
<p>रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि कोल्ड चेन ऑटोमेशन के लिए एक राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास (R&amp;D) केंद्र स्थापित किया जाना चाहिए, जिससे केवल क्षमता बढ़ाने के बजाय सिस्टम की दक्षता पर ध्यान दिया जा सके। इसमें रोबोटिक्स, सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उपकरणों को भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।</p>
<p>भारत में वर्तमान में 8,815 कोल्ड स्टोरेज इकाइयां हैं, जिनकी कुल क्षमता 402.18 लाख मीट्रिक टन है। इसके बावजूद फल और सब्जियों में फसल कटाई-तुड़ाई के बाद नुकसान 6 से 15 प्रतिशत तक बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार इसका कारण केवल बुनियादी ढांचे की कमी नहीं, बल्कि ऑटोमेशन की कमी, आपूर्ति श्रृंखला की कमजोर योजना और स्मार्ट सिस्टम का सीमित उपयोग है।</p>
<p><strong>नीतिगत समर्थन और उद्योग की भूमिका</strong></p>
<p>सम्मेलन में नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी स्वदेशी नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया। वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी की चेयरपर्सन अनीता प्रवीण ने इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद प्रणाली को आसान और प्रभावी समाधान बताते हुए कहा कि इससे किसानों को अपनी उपज गिरवी रखकर वित्तीय सहायता मिल सकती है और उन्हें मजबूरी में फसल बेचने से बचाया जा सकता है।</p>
<p><strong>तेजी से बढ़ता लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर</strong></p>
<p>फिक्की लॉजिस्टिक्स समिति के को-चेयर अंशुमन सिंह ने बताया कि भारत में इस समय 50 करोड़ वर्ग फीट लॉजिस्टिक्स पार्क हैं, जो अगले पांच वर्षों में बढ़कर 100 करोड़ वर्ग फीट से अधिक हो सकते हैं। यह वृद्धि पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti), राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति और मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क योजनाओं के कारण संभव होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की 33,660 करोड़ रुपये की भव्य योजना (100 प्लग-एंड-प्ले लॉजिस्टिक्स पार्क बनाने के लिए) पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए लॉजिस्टिक्स पार्क के विकास में तेजी लाएगी।&nbsp;</p>
<p>उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के संयुक्त सचिव पंकज कुमार ने कहा कि लागत में कमी महत्वपूर्ण है, लेकिन स्थिरता, लचीलापन और बेहतर परिणाम भी उतने ही जरूरी हैं। उन्होंने पीएम गति शक्ति पोर्टल के बेहतर उपयोग पर जोर दिया, ताकि विभिन्न परियोजनाओं का समन्वित विकास हो सके।</p>
<p>फिक्की लॉजिस्टिक्स कमेटी के को-चेयर और ताबी मोबिलिटी के सीईओ पाली त्रिपाठी ने कहा कि लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती लास्ट-माइल डिलीवरी है। उन्होंने डेटा के बेहतर उपयोग और एकीकृत निर्णय प्रणाली को भविष्य की दिशा बताया। नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के एमडी एवं सीईओ रजत कुमार सैनी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के साथ-साथ कौशल विकास, नियामकीय सुधार और वर्कफोर्स के फॉर्मलाइजेशन पर भी ध्यान देना जरूरी है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, स्वदेशी कोल्ड चेन ऑटोमेशन भारत के लिए न केवल लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने और जलवायु-संवेदनशील, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी लॉजिस्टिक्स प्रणाली बनाने के लिए भी अनिवार्य है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी के 14% से घटकर 7.9% पर आई: फिक्की-ग्रांट थॉर्नटन रिपोर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यातकों के लिए सरकार ने लांच की 497 करोड़ रुपये की ‘रिलीफ’ योजना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-launches-rs-497-crores-relief-scheme-to-support-exporters-amid-west-asia-logistics-crisis.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Mar 2026 16:04:13 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-launches-rs-497-crores-relief-scheme-to-support-exporters-amid-west-asia-logistics-crisis.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात और खाड़ी क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स पर उसके प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने निर्यातकों की मदद के लिए एक विशेष &lsquo;रिलीफ&rsquo; (Resilience &amp; Logistics Intervention for Export Facilitation) योजना शुरू की है। यह समयबद्ध और लक्षित योजना एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (EPM) के तहत लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य खाड़ी और व्यापक पश्चिम एशिया समुद्री मार्ग में बाधाओं के कारण बढ़े मालभाड़े, महंगे बीमा प्रीमियम और युद्ध से जुड़े जोखिमों से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को राहत देना है।</p>
<p>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, हाल के घटनाक्रम, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ी सुरक्षा चिंताओं के कारण जहाजों के मार्ग बदलने, लंबी दूरी तय करने, ट्रांसशिपमेंट हब पर भीड़ और आपातकालीन सरचार्ज जैसी स्थितियां उत्पन्न हुई हैं। इससे लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ी है और निर्यात गतिविधियों में अनिश्चितता पैदा हुई है।</p>
<p><strong>ECGC होगी नोडल एजेंसी</strong></p>
<p>इस योजना के तहत ईसीजीसी को नोडल और कार्यान्वयन एजेंसी बनाया गया है। यह एजेंसी दावों की जांच, भुगतान, वितरण और निगरानी का जिम्मा संभालेगी। निर्यात ऋण जोखिम कवर देने में ईसीजीसी के अनुभव से समय पर और विश्वसनीय सहायता सुनिश्चित होने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>RELIEF योजना के तीन प्रमुख घटक</strong></p>
<p>रिलीफ योजना में तीन प्रमुख घटक शामिल हैं, जो संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, इजराइल, कतर, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान और यमन जैसे देशों के लिए भेजे जाने वाले निर्यात पर लागू होंगे।</p>
<p>पहला, जिन निर्यातकों ने पहले से ECGC बीमा लिया हुआ है, उन्हें 14 फरवरी से 15 मार्च 2026 के बीच भेजे गए माल पर अतिरिक्त 100% जोखिम कवर मिलेगा, जिससे उन्हें बिना अतिरिक्त खर्च के सुरक्षा मिलेगी।</p>
<p>दूसरा, 16 मार्च से 15 जून 2026 तक प्रस्तावित निर्यात के लिए सरकार के समर्थन से 95% तक अतिरिक्त जोखिम कवर दिया जाएगा, जिससे अनिश्चितता के बीच निर्यात जारी रखने में मदद मिलेगी।</p>
<p>तीसरा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) निर्यातकों के लिए, जिन्होंने बीमा नहीं लिया था, लेकिन बढ़े हुए फ्रेट और बीमा लागत का सामना कर रहे हैं, उनके लिए 50% तक आंशिक प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। यह सहायता अधिकतम 50 लाख रुपये प्रति निर्यातक तक सीमित होगी और निर्धारित शर्तों के तहत दी जाएगी।</p>
<p><strong>497 करोड़ रुपये का प्रावधान</strong></p>
<p>इस योजना के लिए कुल 497 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। ईसीजीसी एक डैशबोर्ड आधारित निगरानी प्रणाली के जरिए दावों और फंड उपयोग की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेगी। एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन संचालन समिति समय-समय पर योजना की समीक्षा करेगी और जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव कर सकती है।</p>
<p>सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से लॉजिस्टिक्स बाधाओं के तात्कालिक प्रभाव को कम करना, निर्यातकों का विश्वास बनाए रखना, ऑर्डर रद्द होने से रोकना और निर्यात आधारित क्षेत्रों में रोजगार की रक्षा करना है।</p>
<p><strong>अंतर-मंत्रालयी समूह की निगरानी</strong></p>
<p>ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध की स्थिति से निपटने के लिए 2 मार्च 2026 को सप्लाई चेन रेजिलिएंस पर एक अंतर-मंत्रालयी समूह (IMG) का गठन किया गया था, जिसने 3 मार्च से दैनिक समीक्षा शुरू की। इस समूह में विभिन्न मंत्रालयों, वित्तीय संस्थानों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और निर्यातक संगठनों को शामिल किया गया है।</p>
<p>समूह की सिफारिशों के आधार पर फंसे हुए माल की आवाजाही में ढील, बंदरगाहों पर बेहतर समन्वय, स्टोरेज शुल्क में छूट, शिपिंग कीमतों में पारदर्शिता और बीमा जोखिम की निगरानी जैसे कई कदम उठाए गए। इन प्रयासों ने जमीनी चुनौतियों का आकलन करने और लक्षित वित्तीय सहायता योजना तैयार करने में मदद की।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यातकों के लिए सरकार ने लांच की 497 करोड़ रुपये की ‘रिलीफ’ योजना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए एआईसी की ‘कृषि सखी’ पहल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/aic-launche-krishi-sakhi-initiative-to-empower-women-farmers-in-international-year-2026.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Mar 2026 13:18:51 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/aic-launche-krishi-sakhi-initiative-to-empower-women-farmers-in-international-year-2026.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (AIC) ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा वर्ष 2026 को 'अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष' के रूप में मान्यता देने के क्रम में 'कृषि सखी' पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य महिला किसानों को सशक्त बनाना और समावेशी विकास की दिशा में कार्य करना है। इसके लिए एआईसी के मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालयों में हर माह गतिविधियां आयोजित की जाएंगी जिनके माध्यम से निरंतर जागरूकता पैदा करने, कृषि और फसल बीमा में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने तथा भारत में कृषि क्षेत्र को मजबूत करने जैसे कदम उठाए जाएंगे।</p>
<p>जनवरी 2026 में इस पहल के बारे में प्रारंभिक जागरूकता पैदा करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक परिचयात्मक वीडियो जारी किया गया। फरवरी में, मुख्यालय में एआईसी के सभी कर्मचारियों के साथ एक छोटा वॉकाथॉन आयोजित किया गया, जिसमें #AICforHer का प्रतीक वाला कार्डबोर्ड प्रदर्शित किया गया। वह कृषि में महिलाओं के लिए एकता, लचीलापन और सामूहिक समर्थन का प्रतीक था। मार्च माह में महिला किसानों के लिए फसल बीमा योजनाओं और उनके लाभों पर केंद्रित ग्राउंड-लेवल कार्यशालाएँ और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>इस पहल के तहत वर्ष के शेष महीनों के लिए संबंधित लेखों और साक्षात्कारों का प्रकाशन, ग्रामीण क्षेत्रों (विशेष रूप से महिला किसानों और ग्रामीण परिवारों को लक्षित) में स्वच्छता और स्वास्थ्य पर जागरूकता अभियान जैसी कई अन्य गतिविधियाँ निर्धारित की गई हैं, ताकि देश भर में महिला किसानों को मान्यता दी जाए, सशक्त बनाया जाए और उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाए।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69bbaa1ae2f21.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए एआईसी की ‘कृषि सखी’ पहल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कैबिनेट ने कपास किसानों के लिए सीसीआई को 1,718.56 करोड़ की एमएसपी सहायता को मंजूरी दी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-clears-1718.56-crore-msp-support-to-cci-for-direct-support-to-cotton-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Mar 2026 16:54:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-clears-1718.56-crore-msp-support-to-cci-for-direct-support-to-cotton-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने कपास सीजन 2023-24 के लिए भारतीय कपास निगम (CCI) को 1,718.56 करोड़ रुपये की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सहायता को मंजूरी दी है। इस फंडिंग का उद्देश्य देश के कपास किसानों को प्रत्यक्ष मूल्य समर्थन प्रदान करना है।</p>
<p>एमएसपी का उद्देश्य विशेष रूप से उस समय कपास किसानों के हितों की रक्षा करना है, जब बाजार भाव एमएसपी से नीचे चले जाते हैं। ये हस्तक्षेप कपास की कीमतों को स्थिर रखने, किसानों को औने-पौने दाम पर बिक्री से बचाने और उन्हें लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।&nbsp;</p>
<p>कपास भारत की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसलों में से एक है, जिससे लगभग 60 लाख किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है, जबकि प्रसंस्करण, व्यापार और वस्त्र क्षेत्र सहित सहायक गतिविधियों में 40-50 करोड़ लोग इस पर निर्भर हैं।</p>
<p>सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 2023-24 कपास सीजन के दौरान कुल बुवाई क्षेत्र 114.47 लाख हेक्टेयर आंका गया, जबकि उत्पादन 325.22 लाख गांठ रहा। यह वैश्विक कपास उत्पादन का लगभग 25% है। भारत सरकार कपास का एमएसपी कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर तय करती है।</p>
<p>सरकार ने कपास किसानों को एमएसपी दिलाने के लिए सीसीआई को केंद्रीय नोडल एजेंसी नामित किया है। जब भी बाजार मूल्य एमएसपी से नीचे आता है, तब सीसीआई किसानों से बिना किसी मात्रात्मक सीमा के फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) कपास की खरीद करती है, जिससे किसानों को एक सुनिश्चित सुरक्षा कवच मिलता है।</p>
<p>सीसीआई ने देश के सभी 11 प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में मजबूत खरीद नेटवर्क स्थापित किया है। इसके तहत 152 जिलों में 508 से अधिक खरीद केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिससे किसानों को आसान और सुगम खरीद व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।</p>
<p>इसके अलावा, एमएसपी संचालन की दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सीसीआई ने कई तकनीक-आधारित और किसान-केंद्रित पहल शुरू की हैं। इनमें एमएसपी से जुड़ी जानकारी का प्रसार, बेल आइडेंटिफिकेशन एंड ट्रेसबिलिटी सिस्टम (BITS) का कार्यान्वयन और &ldquo;कॉट-एली&rdquo; मोबाइल ऐप का लॉन्च शामिल है।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_695782bc19899.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कैबिनेट ने कपास किसानों के लिए सीसीआई को 1,718.56 करोड़ की एमएसपी सहायता को मंजूरी दी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[20 मार्च तक बारिश&amp;#45;आंधी और ओलावृष्टि की संभावना; बदले मौसम से तैयार फसलों को नुकसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rain-thunderstorms-and-scattered-hailstorms-expected-until-march-20th-changing-weather-could-damage-standing-crops.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Mar 2026 15:35:28 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rain-thunderstorms-and-scattered-hailstorms-expected-until-march-20th-changing-weather-could-damage-standing-crops.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="210" data-end="532">उत्तर भारत में मौसम के बदले मिजाज से बढ़ती गर्मी से राहत मिली है, लेकिन खेतों में खड़ी रबी की तैयार फसलों को बारिश, आंधी और ओलावृष्टि से नुकसान पहुंचा है। पश्चिमी विक्षोभ के चलते जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो रही है, जबकि मैदानी इलाकों में भी तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।</p>
<p data-start="534" data-end="871">अगले दो-तीन दिनों के दौरान सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर उत्तर भारत के मौसम पर बना रहेगा। 19 और 20 मार्च को दिल्ली-एनसीआर, चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है। वहीं, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी की संभावना है।</p>
<p data-start="873" data-end="1153">दिसंबर-जनवरी के दौरान बर्फबारी का सूखा झेलने वाले उत्तर भारत के पर्वतीय इलाकों में अब बर्फबारी हो रही है, जो मौसम के बदले मिजाज का संकेत है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण अगले एक सप्ताह तक दिन का तापमान सामान्य से कम रहने की संभावना है और फिलहाल हीट वेव के आसार भी नहीं है।</p>
<p data-start="1155" data-end="1321">आज भारत के मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान 12.5&deg;C पंजाब के फरीदकोट में दर्ज किया गया, जबकि कल उत्तर प्रदेश के बांदा में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 39.8&deg;C रिकॉर्ड किया गया था।</p>
<p data-start="1323" data-end="1606">मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में 20 मार्च तक छिटपुट गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 19 और 20 मार्च को छिटपुट भारी वर्षा या बर्फबारी हो सकती है।</p>
<h3 data-section-id="mch84s" data-start="1608" data-end="1642"><strong data-start="1612" data-end="1642">आंधी और ओलावृष्टि की संभावना</strong></h3>
<p data-start="1644" data-end="1730">अगले दो-तीन दिनों में देश के कई हिस्सों में आंधी और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।</p>
<p data-start="1732" data-end="1939">जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में 18-19 मार्च को, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में 19-20 मार्च को, पश्चिमी राजस्थान में 19 मार्च को और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 20 मार्च को छिटपुट ओलावृष्टि की संभावना है।&nbsp;</p>
<p data-start="1941" data-end="2276">वहीं, मध्य और पूर्वी भारत में 22 मार्च तक गरज-चमक के साथ तूफानी गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है। इस दौरान विदर्भ (18 मार्च), छत्तीसगढ़ (18-19 मार्च), पूर्वी मध्य प्रदेश (19-20 मार्च), ओडिशा (19-21 मार्च), झारखंड और पश्चिमी मध्य प्रदेश (20 मार्च), तथा पश्चिम बंगाल और सिक्किम (20-21 मार्च) में कई स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना है।</p>
<h3 data-section-id="mrbldu" data-start="64" data-end="87"><strong data-start="68" data-end="87">फसलों को नुकसान</strong></h3>
<p data-start="89" data-end="465">अचानक मौसम के बदले मिजाज से जहां गर्मी से राहत मिली है, वहीं आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने रबी की तैयार फसलों को नुकसान पहुंचाया है। फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत में जहां अत्यधिक गर्मी थी, वहीं अब आंधी-बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं और सरसों जैसी फसलों के खराब होने की खबरें सामने आ रही हैं। खासतौर पर हरियाणा और पंजाब में कटाई के लिए तैयार सरसों की फसल को नुकसान हुआ है।</p>
<p data-start="89" data-end="465"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ 20 मार्च तक बारिश-आंधी और ओलावृष्टि की संभावना; बदले मौसम से तैयार फसलों को नुकसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रबी मार्केटिंग सीजन 2026&amp;#45;27 से गेहूं&amp;#45;धान खरीद पर आढ़तियों और सहकारी समितियों का कमीशन बढ़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centre-hikes-commission-for-arthiyas-cooperatives-on-wheat-paddy-procurement-from-rms-2026-27.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Mar 2026 13:42:14 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centre-hikes-commission-for-arthiyas-cooperatives-on-wheat-paddy-procurement-from-rms-2026-27.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने अपनी ओर से गेहूं और धान की खरीद में लगे आढ़तियों और सहकारी समितियों के लिए कमीशन दरों में संशोधन को मंजूरी दे दी है। यह संशोधन रबी विपणन सत्र (RMS) 2026-27 से लागू होगा।</p>
<p>खरीद प्रणाली के तहत आढ़तिया, सहकारी समितियां, सोसायटी और सब-एजेंट सरकार की ओर से खरीद प्रक्रिया में एग्रीगेशन और इंटरमीडियरी सेवाएं प्रदान करते हैं। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा है कि विभिन्न राज्य सरकारों से कमीशन दरों में संशोधन के अनुरोध मिलने के बाद, भारतीय खाद्य निगम (FCI), राज्य सरकारों और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के प्रतिनिधियों की एक उप-समिति गठित की गई थी। इस समिति ने मौजूदा दरों की समीक्षा कर संशोधन की सिफारिश की।</p>
<p>संशोधित दरों के अनुसार, पंजाब और हरियाणा में गेहूं की खरीद पर आढ़तियों का कमीशन 46 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 50.75 रुपये कर दिया गया है, जबकि राजस्थान में यह 41.40 रुपये से बढ़ाकर 45.67 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। धान की खरीद पर कमीशन 45.88 रुपये से बढ़ाकर 50.61 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है।</p>
<p>इसी तरह, सहकारी समितियों के लिए भी कमीशन दरों में वृद्धि की गई है। गेहूं की खरीद पर कमीशन 27 रुपये से बढ़ाकर 29.79 रुपये प्रति क्विंटल और धान पर 32 रुपये से बढ़ाकर 35.30 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। आधुनिक साइलो में की जाने वाली खरीद के लिए कमीशन दरें मंडी दरों के 50 प्रतिशत के बराबर रहेंगी, जो मौजूदा नीति के अनुरूप है।</p>
<p>सरकार का कहना है कि कमीशन दरों में यह संशोधन खरीद प्रणाली की दक्षता बनाए रखने और सरकारी खरीद कार्यों में लगे एजेंसियों को मदद देने के उद्देश्य से किया गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 से गेहूं-धान खरीद पर आढ़तियों और सहकारी समितियों का कमीशन बढ़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एमपी, छत्तीसगढ़ समेत पांच राज्यों के ग्रामीण निकायों को केंद्र ने 1,789 करोड़ रुपये के 15वें वित्त आयोग अनुदान जारी किए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centre-releases-rs-1789-crore-xv-finance-commission-grants-to-strengthen-rural-local-bodies-in-five-states.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 17 Mar 2026 16:07:36 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centre-releases-rs-1789-crore-xv-finance-commission-grants-to-strengthen-rural-local-bodies-in-five-states.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पांच राज्यों के पंचायती राज संस्थानों और ग्रामीण स्थानीय निकायों को 1,789 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की है। जिन पांच राज्यों को यह राशि दी गई है, उनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, तेलंगाना और मध्य प्रदेश शामिल हैं।</p>
<p>इस राशि में अनटाइड (असंबद्ध) ग्रांट और पहले रोकी गई किस्तें शामिल हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण स्थानीय निकायों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को आगे बढ़ाने और सेवा सुधार करने में सक्षम बनाना है।</p>
<p>राज्यों में मध्य प्रदेश को सबसे अधिक 630 करोड़ रुपये की पहली किस्त मिली है, साथ ही अतिरिक्त रोकी गई राशि भी जारी की गई है। गुजरात को 509 करोड़, तेलंगाना को 256 करोड़, छत्तीसगढ़ को 232 करोड़ और महाराष्ट्र को 151 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई है।</p>
<p>इस राशि से जिला पंचायतों, ब्लॉक पंचायतों और ग्राम पंचायतों को लाभ मिलेगा, जिससे वे विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य कर सकेंगे। ये अनुदान 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर जारी किए गए हैं। इसे वित्त मंत्रालय वितरित करता है, जिसमें पंचायती राज मंत्रालय और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।</p>
<p>अनटाइड (असंबद्ध) ग्रांट से स्थानीय निकायों को अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार खर्च करने की स्वतंत्रता मिलती है, हालांकि इनका उपयोग वेतन या प्रशासनिक खर्चों के लिए नहीं किया जा सकता। वहीं टाइड ग्रांट्स का उपयोग स्वच्छता, ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) स्थिति बनाए रखने, कचरा प्रबंधन और पेयजल आपूर्ति जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए किया जाता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b92e7bb74cd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एमपी, छत्तीसगढ़ समेत पांच राज्यों के ग्रामीण निकायों को केंद्र ने 1,789 करोड़ रुपये के 15वें वित्त आयोग अनुदान जारी किए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b92e7bb74cd.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जल्द सिमटा पेराई सत्र, महाराष्ट्र की 94 फीसदी चीनी मिलों में क्रशिंग बंद, यूपी में घटी गन्ना आपूर्ति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/crushing-season-ends-early-94-percent-sugar-mills-shut-in-maharashtra-cane-supply-declines-in-uttar-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 17 Mar 2026 15:47:45 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/crushing-season-ends-early-94-percent-sugar-mills-shut-in-maharashtra-cane-supply-declines-in-uttar-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="245" data-end="621">चालू चीनी सीजन (2025-26) के दौरान चीनी मिलों में पेराई कार्य जल्द समाप्ति की ओर है। मार्च के मध्य तक महाराष्ट्र की 90 फीसदी से अधिक चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है, जबकि उत्तर प्रदेश की अधिकांश चीनी मिलें कम क्षमता पर चल रही हैं। गन्ने की फसल पर मौसम और रोग की मार के चलते पैदावार में गिरावट आई है, जिसका असर चीनी उत्पादन पर पड़ा है। हालांकि, स्थिति पिछले साल से बेहतर है।</p>
<p data-start="623" data-end="1018">चीनी उद्योग के संगठन <strong>इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA)</strong> के अनुसार, 15 मार्च तक देश भर की 536 चीनी मिलों में से 379 मिलों में पेराई बंद हो चुकी है, जबकि 157 मिलें चल रही हैं। पिछले साल इसी समय तक 352 मिलें बंद हुई थीं और 182 मिलों में पेराई चल रही थी। देश का नेट चीनी उत्पादन (एथेनॉल डायवर्जन को छोड़कर) 262 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल 15 मार्च तक 237 लाख टन था।</p>
<p data-start="1020" data-end="1426">इस तरह, पिछले साल के मुकाबले चीनी उत्पादन लगभग 10 फीसदी अधिक है। गौरतलब है कि पिछला सीजन गन्ने की फसल और चीनी उत्पादन के लिहाज से काफी खराब रहा था। रोग और मौसम की मार के चलते गत वर्ष देश का नेट चीनी उत्पादन करीब 18 फीसदी घटकर 261 लाख टन रह गया था। इस साल यह 290 लाख टन के आसपास रहने का अनुमान है। यानी चीनी उत्पादन के मामले में स्थिति पिछले साल से बेहतर है, लेकिन इंडस्ट्री के शुरुआती अनुमान से काफी कम है।</p>
<p data-start="1428" data-end="1664">4 नवंबर 2025 को जारी चालू चीनी सत्र 2025-26 के पहले अग्रिम अनुमान में इस्मा ने देश में कुल 343.5 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया था। इसमें 34 लाख टन चीनी के एथेनॉल में डायवर्जन के बाद नेट चीनी उत्पादन 309.5 लाख टन रहने की उम्मीद थी। लेकिन बाद में गन्ने की फसल और पैदावार को देखते हुए चीनी उत्पादन के अनुमानों का घटा दिया था।&nbsp;</p>
<p data-start="1666" data-end="1855">25 फरवरी 2026 को जारी तीसरे अग्रिम अनुमान में इस्मा ने कुल चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर 324 लाख टन कर दिया। इसमें 31 लाख टन चीनी के डायवर्जन के बाद नेट उत्पादन 293 लाख टन रहने का अनुमान है।</p>
<p data-start="1857" data-end="2060">15 मार्च तक देश में नेट चीनी उत्पादन 262 लाख टन तक पहुंच चुका है, जबकि 157 चीनी मिलों में पेराई जारी है। ऐसे में उम्मीद है कि सीजन की शेष अवधि में देश का नेट चीनी उत्पादन 290 लाख टन के आसपास पहुंच जाएगा।</p>
<p data-start="2062" data-end="2251">देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य <strong>उत्तर प्रदेश</strong> में 120 चीनी मिलों में से 42 मिलों में पेराई बंद हो चुकी है, जबकि बाकी मिलें गन्ने की पर्याप्त आपूर्ति न होने के कारण कम क्षमता पर चल रही हैं।</p>
<p data-start="2253" data-end="2503"><strong>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF)</strong>&nbsp;के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों में 15 मार्च तक 803 लाख टन गन्ने की पेराई हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक यह आंकड़ा 843 लाख टन था। इस प्रकार यूपी की मिलों को लगभग 40 लाख टन कम गन्ना मिला है।</p>
<p data-start="2505" data-end="2669">यूपी में गन्ने की कम आपूर्ति के पीछे फसल में रोग, नई किस्मों का पर्याप्त प्रसार न होना और गुड़ व खांडसारी उद्योग में बेहतर दाम मिलना प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align: center;"></p>
<table width="105%" style="margin-left: auto; margin-right: auto; height: 484px; width: 105%;">
<tbody>
<tr style="height: 52px;">
<td width="14%" style="height: 52px; text-align: center; width: 14%;">
<p><strong>YTD</strong></p>
</td>
<td colspan="4" width="42%" style="height: 52px; text-align: center; width: 41%;">
<p><strong>15<sup>th</sup> March&rsquo;2026</strong></p>
</td>
<td colspan="4" width="42%" style="height: 52px; text-align: center; width: 41%;">
<p><strong>15<sup>th</sup> March&rsquo;2025</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td width="14%" style="height: 48px; text-align: center; width: 14%;">
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
</td>
<td colspan="3" width="29%" style="height: 48px; text-align: center; width: 28%;">
<p><strong>Number of Factories</strong></p>
</td>
<td rowspan="2" width="13%" style="height: 96px; text-align: center; width: 13%;">
<p><strong>Sugar Production (Lac Tons)</strong></p>
</td>
<td colspan="3" width="29%" style="height: 48px; text-align: center; width: 28%;">
<p><strong>Number of Factories</strong></p>
</td>
<td rowspan="2" width="13%" style="height: 96px; text-align: center; width: 13%;">
<p><strong>Sugar Production (Lac Tons)</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td width="14%" style="height: 48px; text-align: center; width: 14%;">
<p><strong>ZONE</strong></p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p><strong>Started</strong></p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p><strong>Closed</strong></p>
</td>
<td width="12%" style="height: 48px; text-align: center; width: 12%;">
<p><strong>Operating</strong></p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p><strong>Started</strong></p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p><strong>Closed</strong></p>
</td>
<td width="12%" style="height: 48px; text-align: center; width: 12%;">
<p><strong>Operating</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td width="14%" style="height: 48px; text-align: center; width: 14%;">
<p>U.P.</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>120</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>42</p>
</td>
<td width="12%" style="height: 48px; text-align: center; width: 12%;">
<p>78</p>
</td>
<td width="13%" style="height: 48px; text-align: center; width: 13%;">
<p>81.30</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>122</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>39</p>
</td>
<td width="12%" style="height: 48px; text-align: center; width: 12%;">
<p>83</p>
</td>
<td width="13%" style="height: 48px; text-align: center; width: 13%;">
<p>81.20</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td width="14%" style="height: 48px; text-align: center; width: 14%;">
<p>Maharashtra</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>210</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>197</p>
</td>
<td width="12%" style="height: 48px; text-align: center; width: 12%;">
<p>13</p>
</td>
<td width="13%" style="height: 48px; text-align: center; width: 13%;">
<p>98.46</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>200</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>179</p>
</td>
<td width="12%" style="height: 48px; text-align: center; width: 12%;">
<p>21</p>
</td>
<td width="13%" style="height: 48px; text-align: center; width: 13%;">
<p>78.70</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td width="14%" style="height: 48px; text-align: center; width: 14%;">
<p>Karnataka</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>81</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>68</p>
</td>
<td width="12%" style="height: 48px; text-align: center; width: 12%;">
<p>13</p>
</td>
<td width="13%" style="height: 48px; text-align: center; width: 13%;">
<p>46.04</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>80</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>74</p>
</td>
<td width="12%" style="height: 48px; text-align: center; width: 12%;">
<p>6</p>
</td>
<td width="13%" style="height: 48px; text-align: center; width: 13%;">
<p>39.15</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td width="14%" style="height: 48px; text-align: center; width: 14%;">
<p>Gujarat</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>14</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>9</p>
</td>
<td width="12%" style="height: 48px; text-align: center; width: 12%;">
<p>5</p>
</td>
<td width="13%" style="height: 48px; text-align: center; width: 13%;">
<p>6.85</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>15</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>6</p>
</td>
<td width="12%" style="height: 48px; text-align: center; width: 12%;">
<p>9</p>
</td>
<td width="13%" style="height: 48px; text-align: center; width: 13%;">
<p>7.78</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td width="14%" style="height: 48px; text-align: center; width: 14%;">
<p>Tamil Nadu</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>30</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>5</p>
</td>
<td width="12%" style="height: 48px; text-align: center; width: 12%;">
<p>25</p>
</td>
<td width="13%" style="height: 48px; text-align: center; width: 13%;">
<p>4.72</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>30</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>1</p>
</td>
<td width="12%" style="height: 48px; text-align: center; width: 12%;">
<p>29</p>
</td>
<td width="13%" style="height: 48px; text-align: center; width: 13%;">
<p>3.69</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td width="14%" style="height: 48px; text-align: center; width: 14%;">
<p>Others</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>81</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>58</p>
</td>
<td width="12%" style="height: 48px; text-align: center; width: 12%;">
<p>23</p>
</td>
<td width="13%" style="height: 48px; text-align: center; width: 13%;">
<p>24.77</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>87</p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p>53</p>
</td>
<td width="12%" style="height: 48px; text-align: center; width: 12%;">
<p>34</p>
</td>
<td width="13%" style="height: 48px; text-align: center; width: 13%;">
<p>26.72</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td width="14%" style="height: 48px; text-align: center; width: 14%;">
<p><strong>ALL INDIA</strong></p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p><strong>536</strong></p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p><strong>379</strong></p>
</td>
<td width="12%" style="height: 48px; text-align: center; width: 12%;">
<p><strong>157</strong></p>
</td>
<td width="13%" style="height: 48px; text-align: center; width: 13%;">
<p><strong>262.14</strong></p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p><strong>534</strong></p>
</td>
<td width="8%" style="height: 48px; text-align: center; width: 8%;">
<p><strong>352</strong></p>
</td>
<td width="12%" style="height: 48px; text-align: center; width: 12%;">
<p><strong>182</strong></p>
</td>
<td width="13%" style="height: 48px; text-align: center; width: 13%;">
<p><strong>237.24</strong></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align: center;"><em>&nbsp;(Source: ISMA, sugar production figures are after diversion of sugar into ethanol)</em></p>
<p data-start="2671" data-end="2710"><strong data-start="2671" data-end="2710">यूपी में रिकवरी बढ़ी, उत्पादन स्थिर</strong></p>
<p data-start="2712" data-end="2958">इस साल यूपी में गन्ने की रिकवरी गत वर्ष के 9.60 फीसदी से बढ़कर 10.15 फीसदी दर्ज की गई है। बढ़ी हुई रिकवरी के बावजूद कम गन्ना पेराई के चलते 15 मार्च तक यूपी का चीनी उत्पादन लगभग 81 लाख टन रहा, जो पिछले सीजन (2024-25) की समान अवधि के लगभग बराबर है।</p>
<p data-start="2960" data-end="3200">शुरुआती अनुमानों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कम से कम 110 लाख टन चीनी उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन अब यह 90 लाख टन के आसपास रहने के आसार हैं। राज्य की 120 में से 42 मिलें पेराई बंद कर चुकी हैं, जबकि कई मिलें मार्च के आखिर तक बंद हो सकती हैं।</p>
<p data-start="3202" data-end="3234"><strong data-start="3202" data-end="3234">महाराष्ट्र-कर्नाटक का योगदान</strong></p>
<p data-start="3236" data-end="3468">महाराष्ट्र में 15 मार्च तक 98.46 लाख टन चीनी का नेट उत्पादन हुआ है, जो पिछले सीजन के 78.70 लाख टन से 25 फीसदी अधिक है। राज्य की 210 में से 197 चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है और नेट उत्पादन 100 लाख टन के आसपास रहने की उम्मीद है।</p>
<p data-start="3470" data-end="3661">पिछले साल महाराष्ट्र में गन्ने की फसल बड़े पैमाने पर रोग और बारिश से प्रभावित हुई थी। इस साल राज्य में 1036 लाख टन गन्ने की पेराई हुई है, जो पिछले सीजन के 831 लाख टन से लगभग 25 फीसदी अधिक है।</p>
<p data-start="3663" data-end="3895">कर्नाटक में भी चीनी उत्पादन में 17 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है और यह 46 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी अवधि तक 39 लाख टन था। राज्य में पिछले साल 460 लाख टन गन्ने की पेराई हुई थी, जबकि इस साल यह बढ़कर 530 लाख टन हो गई है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b929620ab18.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जल्द सिमटा पेराई सत्र, महाराष्ट्र की 94 फीसदी चीनी मिलों में क्रशिंग बंद, यूपी में घटी गन्ना आपूर्ति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फरवरी में ग्रामीण बेरोजगारी 4.2% पर स्थिर, ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी बढ़ी: पीएलएफएस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rural-womens-workforce-participation-rises-rural-unemployment-steady-at-4.2-percent-in-feb-plfs.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 16 Mar 2026 18:10:14 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rural-womens-workforce-participation-rises-rural-unemployment-steady-at-4.2-percent-in-feb-plfs.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत के ग्रामीण श्रम बाजार में फरवरी 2026 के दौरान स्थिरता देखने को मिली है। गांवों में कामकाजी गतिविधियों में भागीदारी मजबूत बनी रही और महिलाओं की श्रम भागीदारी में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की तरफ से जारी पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के नवीनतम मासिक बुलेटिन में दी गई है।</p>
<p>सर्वे के अनुसार 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों के लिए श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) फरवरी 2026 में 55.9% पर स्थिर रही, जो जनवरी के समान है। हालांकि ग्रामीण भारत में यह दर 58.7% रही, जो शहरी क्षेत्रों की 50.4% दर से काफी अधिक है। यह दर्शाता है कि गांवों में कृषि और उससे जुड़े कार्य आज भी आजीविका का प्रमुख आधार बने हुए हैं।</p>
<p>महिलाओं की श्रम भागीदारी में भी हल्की वृद्धि दर्ज की गई। महिला LFPR जनवरी के 35.1% से बढ़कर फरवरी में 35.3% हो गया। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी अधिक मजबूत रही, जहां ग्रामीण महिला श्रम बल भागीदारी दर 39.7% से बढ़कर 40% हो गई। इससे संकेत मिलता है कि गांवों में अधिक महिलाएं कृषि और गैर-कृषि कार्यों में शामिल हो रही हैं।</p>
<p>रोजगार का स्तर भी लगभग स्थिर रहा। वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR), जो काम करने वाले लोगों का अनुपात दर्शाता है, राष्ट्रीय स्तर पर 53.2% रहा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 56.3% दर्ज किया गया, जो यह बताता है कि ग्रामीण आर्थिक गतिविधियां रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभा रही हैं।</p>
<p>सर्वे में ग्रामीण बेरोजगारी की स्थिति भी स्थिर पाई गई। फरवरी में ग्रामीण बेरोजगारी दर 4.2% पर बनी रही, जबकि शहरी बेरोजगारी दर जनवरी के 7.0% से घटकर 6.6% हो गई। इससे राष्ट्रीय स्तर पर कुल बेरोजगारी दर हल्की गिरावट के साथ 4.9% पर आ गई। महिलाओं बेरोजगारी दर में भी कमी दर्ज की गई। कुल महिला बेरोजगारी दर 5.6% से घटकर 5.1% रह गई, जबकि ग्रामीण महिलाओं में बेरोजगारी दर 4.3% से घटकर 4.0% पर आ गई।</p>
<p>यह निष्कर्ष 3.74 लाख से अधिक व्यक्तियों से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं, जिनमें से 2.13 लाख से अधिक लोग ग्रामीण क्षेत्रों से शामिल थे। उल्लेखनीय है कि रोजगार और बेरोजगारी के रुझानों पर अधिक नियमित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए पीएलएफएस का मासिक बुलेटिन 2025 से जारी किया जा रहा है।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_660548e909e8e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ फरवरी में ग्रामीण बेरोजगारी 4.2% पर स्थिर, ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी बढ़ी: पीएलएफएस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वैश्विक कीमतों के दबाव से भारत का चीनी निर्यात सुस्त, 20 लाख टन कोटा के मुकाबले फरवरी तक केवल 3.15 लाख टन निर्यात]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-exports-only-3.15-lakh-tonnes-of-sugar-till-february-against-20-lakh-tonnes-quota-as-global-prices-weigh-on-shipments.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 16 Mar 2026 15:33:38 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-exports-only-3.15-lakh-tonnes-of-sugar-till-february-against-20-lakh-tonnes-quota-as-global-prices-weigh-on-shipments.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वर्ष 2025-26 चीनी सीजन (अक्टूबर-सितंबर) के लिए सरकार द्वारा स्वीकृत निर्यात कोटे की तुलना में भारत का चीनी निर्यात काफी पीछे चल रहा है। फरवरी 2026 के अंत तक केवल 3,15,517 टन चीनी का निर्यात हुआ है, जबकि सरकार ने पूरे सीजन में 20 लाख टन निर्यात की अनुमति दी हुई है। दिलचस्प बात यह है कि चीनी उद्योग ने ही सरकार से इस सीजन में 20 लाख टन निर्यात की अनुमति देने का अनुरोध किया था। शिपमेंट की रफ्तार धीमी रहने का मुख्य कारण यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतें भारतीय निर्यात कीमतों से कम हैं, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धी नहीं रह गया है।</p>
<p>नवंबर 2025 में सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए 15 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी थी। इसके तहत मिल-वार कोटा आवंटित किया गया और सुचारू निर्यात सुनिश्चित करने के लिए संचालन संबंधी दिशानिर्देश भी जारी किए गए थे। इसके बाद फरवरी 2026 में सरकार ने अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी, जिससे कुल निर्यात अनुमति की मात्रा बढ़कर 20 लाख टन हो गई। इसके मुकाबले 2024-25 सीजन के लिए निर्यात कोटा 10 लाख टन निर्धारित किया गया था।</p>
<p>अखिल भारतीय चीनी व्यापार संघ (AISTA) के आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 तक भारत से सफेद चीनी का निर्यात 2,57,971 टन रहा। इसके अलावा रिफाइंड चीनी का निर्यात 53,664 टन और कच्ची चीनी का निर्यात 1,620 टन दर्ज किया गया। वहीं लगभग 2,322 टन चीनी वर्तमान में लोडिंग प्रक्रिया में है या लोडिंग के लिए प्रतीक्षा में है।</p>
<p>निर्यात गंतव्यों के आंकड़े बताते हैं कि इस सीजन में भारत से होने वाले चीनी निर्यात का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया और पड़ोसी क्षेत्रों में गया है। कुल निर्यात में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की हिस्सेदारी 25.4% रही, इसके बाद अफगानिस्तान 22.9% के साथ दूसरे स्थान पर रहा। अन्य प्रमुख गंतव्यों में जिबूती (14.6%), तंजानिया (6.8%) और श्रीलंका (6.5%) शामिल हैं।</p>
<p><strong>चीनी उत्पादन का अनुमान कमजोर पड़ा</strong></p>
<p>इस बीच, वर्ष 2025-26 के पेराई सत्र में भारत का चीनी उत्पादन पहले के उद्योग अनुमानों से काफी कम रहने की आशंका है। इसका मुख्य कारण उत्तर प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता में गिरावट और महाराष्ट्र में गन्ने में समय से पहले फूल आना बताया जा रहा है।</p>
<p>उद्योग के ताजा अनुमानों के अनुसार अब कुल चीनी उत्पादन लगभग 290 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पहले के अनुमान से करीब 26 लाख टन कम है। सीजन की शुरुआत में इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने कुल उत्पादन 349 लाख टन रहने का अनुमान लगाया था। इसमें से 34 लाख टन चीनी को एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट किए जाने की संभावना जताई गई थी, जिसके बाद शुद्ध चीनी उत्पादन लगभग 316 लाख टन रहने का अनुमान था।</p>
<p>हालांकि, देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों से मिल रही हालिया रिपोर्ट संकेत दे रही हैं कि उत्पादन इन अनुमानों से कम रह सकता है। देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक कमी देखने को मिल सकती है। राज्य में इस सीजन चीनी उत्पादन अब करीब 95 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 92.7 लाख टन से थोड़ा अधिक है, लेकिन शुरुआती उद्योग अनुमान 110 लाख टन से काफी कम है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_6638eaf056ec9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ वैश्विक कीमतों के दबाव से भारत का चीनी निर्यात सुस्त, 20 लाख टन कोटा के मुकाबले फरवरी तक केवल 3.15 लाख टन निर्यात ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_6638eaf056ec9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार ने जारी किए बागवानी के अनुमान, उत्पादन 3708 लाख टन को पार करने की उम्मीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/horticulture-output-to-top-370.8-million-tonnes-says-government-estimate.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 16 Mar 2026 12:43:36 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/horticulture-output-to-top-370.8-million-tonnes-says-government-estimate.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2025-26 के लिए बागवानी के पहले अग्रिम अनुमान और पिछले वर्षों के अंतिम अनुमान जारी किए हैं। इसके मुताबिक देश में कुल बागवानी फसलों का क्षेत्रफल वर्ष 2023-24 (अंतिम) के 290.86 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 (अंतिम अनुमान) में 301.36 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसमें 10.50 लाख हेक्टेयर यानी 3.61 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कुल बागवानी उत्पादन भी इसी अवधि में 3547.44 लाख टन से बढ़कर 3707.38 लाख टन पहुंच गया है। वर्ष 2025-26 के प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुसार, बागवानी फसलों का क्षेत्रफल लगभग 301.31 लाख हेक्टेयर और उत्पादन लगभग 3708.46 लाख टन होने की उम्मीद है, जो 2024-25 (अंतिम अनुमान) से 1.09 लाख टन अधिक है। कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंजूरी के बाद सोमवार को ये आंकड़े जारी किए गए।</p>
<p><strong>2025-26 में फलों का उत्पादन 1186.80 लाख टन होने की उम्मीद</strong></p>
<p>वर्ष 2024-25 में फलों का उत्पादन 2023-24 के 1129.78 लाख टन की तुलना में 4.13 प्रतिशत (46.71 लाख टन) बढ़कर 1176.49 लाख टन रहा है। यह वृद्धि मुख्य रूप से केला, आम, मंदारिन, पपीता, अमरूद, तरबूज और कटहल के उत्पादन में तेज़ी के कारण दर्ज की गई है। सब्ज़ियों का उत्पादन 2023-24 के 2072.08 लाख टन से 5.11 प्रतिशत (105.89 लाख टन) बढ़कर 2024-25 में 2177.97 लाख टन होने का अनुमान है। प्याज, आलू, हरी मिर्च, फूलगोभी, पत्ता गोभी, बैंगन, भिंडी, मटर, कद्दू/सीताफल, लौकी, करेला, खीरा, टैपिओका, शकरकंद, मूली तथा शिमला मिर्च के उत्पादन में वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2025-26 में फलों का उत्पादन 1176.49 लाख टन से 10.31 लाख टन (0.88 प्रतिशत) बढ़कर 1186.80 लाख टन होने की उम्मीद है, जबकि सब्ज़ियों का उत्पादन लगभग 2161.60 लाख टन अनुमानित है। इस वर्ष टमाटर, मटर, टैपिओका, हरी मिर्च तथा कद्दू/सीताफल के उत्पादन में वृद्धि का रुझान दिखाई दे रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>टमाटर उत्पादन 227.02 लाख टन पहुंचने की संभावना</strong></p>
<p>प्याज का रकबा वर्ष 2023-24 के 15.41 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 19.68 लाख हेक्टेयर हो गया है, यानी 4.27 लाख हेक्टेयर (27.74 प्रतिशत) की वृद्धि दर्ज की गई है। प्याज का उत्पादन वर्ष 2024-25 में 307.67 लाख टन अनुमानित है, जो 2023-24 के 242.67 लाख टन की तुलना में 65 लाख टन (26.79 प्रतिशत) अधिक है। वर्ष 2024-25 में आलू का उत्पादन 570.53 लाख टन से 15.18 लाख टन (2.66 प्रतिशत) बढ़कर 585.71 लाख टन होने का अनुमान है। वर्ष 2025-26 में आलू का उत्पादन लगभग 584.47 लाख टन रहने की संभावना है। टमाटर का उत्पादन वर्ष 2023-24 के 213.23 लाख टन की तुलना में 2024-25 में 205.99 लाख टन अनुमानित है, जबकि 2025-26 में टमाटर का उत्पादन तेजी से बढ़कर लगभग 227.02 लाख टन पहुँचने की संभावना है।&nbsp;</p>
<p><strong>फूल उत्पादन 41.65 लाख टन होने के आसार</strong></p>
<p>सुगंधित एवं औषधीय पौधों के क्षेत्रफल में वर्ष 2023-24 की तुलना में 6.13 प्रतिशत (0.57 लाख हेक्टेयर) की वृद्धि अनुमानित है, यानी यह 9.26 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 9.83 लाख हेक्टेयर हो गया है। इन पौधों का उत्पादन 2023-24 के 7.26 लाख टन की तुलना में 2024-25 में लगभग 9.01 लाख टन अनुमानित है, जबकि 2025-26 में यह बढ़कर 9.03 लाख टन होने की संभावना है। फूलों का क्षेत्रफल 2023-24 के 3.17 लाख हेक्टेयर से 25.24 प्रतिशत (0.80 लाख हेक्टेयर) की तेज़ वृद्धि के साथ 2024-25 में 3.97 लाख हेक्टेयर हो गया है और फूलों के उत्पादन में 20.65 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अनुमान है कि 2024-25 में फूलों का उत्पादन 35.35 लाख टन से बढ़कर 42.65 लाख टन तक पहुँचा है, जबकि 2025-26 में फूलों का उत्पादन लगभग 41.65 लाख टन होने की संभावना है।&nbsp;</p>
<p><strong>मसाला उत्पादन 128 लाख टन को पार करने की उम्मीद</strong></p>
<p>मसालों की खेती का क्षेत्रफल 2023-24 के 50.24 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 50.93 लाख हेक्टेयर (1.38 प्रतिशत या 0.69 लाख हेक्टेयर वृद्धि) अनुमानित है और मसालों का उत्पादन 124.84 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 129.93 लाख टन (4.08 प्रतिशत वृद्धि) तक पहुँच गया है। वर्ष 2025-26 में मसालों का कुल उत्पादन लगभग 128.18 लाख टन होने की उम्मीद है। जीरा, अदरक, लहसुन और हल्दी के क्षेत्रफल और उत्पादन दोनों में ही उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, वहीं 2025-26 में लहसुन, हल्दी और इलायची के उत्पादन में भी बढ़ोतरी का अनुमान है।&nbsp;</p>
<p>रोपण फसलों का उत्पादन 2023-24 में 176.66 लाख टन था, जो 2024-25 के दौरान 169.81 लाख टन होने का अनुमान है। वर्ष 2025-26 में रोपण फसलों का क्षेत्रफल और उत्पादन वर्ष 2024-25 की तुलना में क्रमशः 1.61 प्रतिशत और 5.82 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुसार 2025-26 में रोपण फसलों का क्षेत्रफल लगभग 46.59 लाख हेक्टेयर तथा उत्पादन लगभग 179.68 लाख टन होने की संभावना है।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बागवानी क्षेत्र आज किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और कृषि निर्यात को आगे बढ़ाने का एक मज़बूत आधार बन रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि देश के हर क्षेत्र के किसान फलों, सब्ज़ियों, मसालों, फूलों व औषधीय फसलों के जरिए बेहतर और स्थायी आमदनी प्राप्त कर सकें।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b7ad3198452.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार ने जारी किए बागवानी के अनुमान, उत्पादन 3708 लाख टन को पार करने की उम्मीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b7ad3198452.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ईरान युद्ध से अटका भारत का कृषि निर्यात, माल भेजने के वैकल्पिक रूट तलाश रहा एपीडा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/apeda-seeks-alternate-routes-for-indias-agri-exports-amid-west-asia-conflict.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 14 Mar 2026 18:30:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/apeda-seeks-alternate-routes-for-indias-agri-exports-amid-west-asia-conflict.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्भाध के बीच भारत से होने वाले कृषि उत्पादों के निर्यात संकट को हल करने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि अभी बहुत सीमित राहत मिलने का ही रास्ता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक एपीडा जल्दी खराब होने वाले (पेरिशेबल) उत्पादों के निर्यात को प्राथमिकता दे रहा है, जिसमें फल और सब्जियां शामिल हैं। इसके लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की लॉजिस्टिक्स कंपनी डीपी वर्ल्ड के साथ मिलकर देश में अटके इन उत्पादों को यूएई और सऊदी अरब भेजा जाएगा। पहली कोशिश नामक्कल से अंडों के निर्यात की है। इस योजना के तहत यूएई स्थित खोरफक्कन बंदरगाह के जरिये निर्यात करने की संभावनाएं देखी जा रही हैं। वहां पहुंचने वाले उत्पादों को सड़क के रास्ते जब्बाली और सऊदी अरब भेजा जाएगा।</p>
<p>इसके साथ ही एपीडा ने पोर्ट पर पहुंचे माल पर डेमरेज शुल्क कम कराने के लिए भी पोर्ट अथारिटीज से बात की है ताकि निर्यातकों को राहत मिल सके। वहीं कुछ निर्यातकों ने पोर्ट से अपना माल वापस मंगाकर घरेलू बाजार में बेचने का फैसला किया है। इसे कंटेनर रिटर्न करना का कहा जाता है। इस प्रक्रिया में औसतन पांच दिन का समय लगता है लेकिन एपीडा ने संबंधित विभागों के साथ तालमेल कर इसे घटाकर दो दिन कराने में निर्यातकों की मदद की है।</p>
<p>सूत्रों ने बताया कि कुछ कंपनियों के निर्यात के यूएई पहुंचने के बाद भी जहाज को बंदरगाह पर नहीं लगने दिया गया। इसमें एक कंपनी के 450 कंटेनर हैं। इसके लिए भारत सरकार वहां की सरकार से बातचीत कर मामले को सुलझाने की कोशिश कर रही है क्योंकि इस जहाज को वहां पहुंचे हुए एक सप्ताह से अधिक हो गया है।&nbsp;</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक चावल के कंटेनर भी फंसे हुए हैं। निर्यातकों को शिपिंग कंपनियों द्वारा लगाया गया 2500 से 4000 डॉलर प्रति कंटेनर इमर्जेंसी कॉन्फलिक्ट चार्ज भी देना पड़ रहा है। इस संकट में सरकार जो कोशिश कर रही है उसमें खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात का करीब 30 फीसदी माल पहुंचाने का रास्ता निकालने की कोशिश हो रही है। लेकिन अभी यह बातचीत के स्तर पर ही है और अभी माल जाना शुरू नहीं हो सका है।</p>
<p><strong>अंडों की बड़ी खेप समुद्र में फंसी</strong></p>
<p>भारत के सबसे बड़े अंडा उत्पादन केंद्र नमक्कल से निर्यात किए गए लगभग 3.5 करोड़ अंडे पिछले 10 दिनों से अधिक समय से समुद्र में फंसे हुए हैं। करीब 70 कंटेनरों को लेकर रवाना हुआ एक जहाज युद्ध के कारण मध्य-पूर्व के बंदरगाहों तक नहीं पहुंच सका। बताया जाता है कि प्रत्येक कंटेनर में लगभग पांच लाख अंडे हैं, जिन्हें 28 फरवरी को भेजा गया था। निर्यातकों का अनुमान है कि भारत से भेजे गए करीब छह करोड़ अंडे अभी तक अपने गंतव्य बाजारों तक नहीं पहुंच पाए हैं। कुछ कंटेनर समुद्र में लंगर डाले हुए हैं, जबकि अन्य इस समय मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर फंसे हुए हैं।&nbsp;पोल्ट्री किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि इन खेपों को नमक्कल वापस लौटाना पड़ा तो यहां भी स्थिति बिगड़ेगी, क्योंकि पहले से ही मांग कमजोर है और आपूर्ति अधिक है।&nbsp;</p>
<p>हाल के वर्षों में भारत से अंडों और मुर्गियों का निर्यात तेजी से बढ़ा है। एपीडा के आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में यह निर्यात 6.30 करोड़ डॉलर का था, जो 2023-24 में बढ़कर 11.35 करोड़ डॉलर हो गया। इसके बाद 2024-25 में यह थोड़ा घटकर 9.69 करोड़ डॉलर रह गया। इस व्यापार में मध्य-पूर्व का दबदबा है, जहां ओमान 46.66% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा बाजार है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (20.09%), मालदीव (17.82%), कतर (6.08%) और बहरीन (1.66%) का स्थान है।</p>
<p><strong>फल निर्यातक तलाश रहे वैकल्पिक बाजार</strong></p>
<p>पश्चिम एशिया में अनिश्चितता का असर फल निर्यातकों पर भी पड़ रहा है। कर्नाटक के आम उत्पादक, जो परंपरागत रूप से खाड़ी देशों के बाजारों पर काफी निर्भर रहे हैं, अब नई फसल का समय नजदीक आते ही वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर रहे हैं।</p>
<p>धारवाड़ और बेलगावी जैसे जिलों के उत्पादक आम तौर पर अबू धाबी, ईरान, कुवैत और यूएई जैसे देशों को आम निर्यात करते रहे हैं। हालांकि, निर्यातकों का कहना है कि जो व्यापारी आम तौर पर महीनों पहले बागानों की बुकिंग कर लेते थे, उन्होंने इस वर्ष अभी तक खरीद की पुष्टि नहीं की है।</p>
<p>एपीडा के अनुसार भारत से ताजे आम का निर्यात 2022-23 में 4.85 करोड़ डॉलर था, जो 2023-24 में बढ़कर 6.01 करोड़ डॉलर हो गया और 2024-25 में घटकर 5.65 करोड़ डॉलर रह गया। संयुक्त अरब अमीरात 35.01% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। इसके बाद अमेरिका (20.39%), यूनाइटेड किंगडम (16.06%), कुवैत (5.23%) और कतर (4.21%) का स्थान है।</p>
<p>खाड़ी क्षेत्र में अनिश्चितता को देखते हुए उत्पादक संगठनों ने निर्यात को विविध बाजारों में फैलाने की कोशिश शुरू कर दी है। इसके तहत अमेरिका, इंग्लैंड और सिंगापुर जैसे बाजारों में निर्यात बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। निर्यातकों का कहना है कि विश्वभर में लोकप्रिय अल्फांसो किस्म अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अब भी सबसे अधिक मांग वाली बनी हुई है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ईरान युद्ध से अटका भारत का कृषि निर्यात, माल भेजने के वैकल्पिक रूट तलाश रहा एपीडा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ सीजन से पहले उर्वरक स्टॉक 163 लाख टन पहुंचा, पिछले साल से 26 प्रतिशत ज्यादाः निर्मला सीतारमण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-fertilizer-stock-hits-record-163-lmt-up-26-percent-ahead-of-kharif-season-nirmala-sitharaman.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 14 Mar 2026 14:30:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-fertilizer-stock-hits-record-163-lmt-up-26-percent-ahead-of-kharif-season-nirmala-sitharaman.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को लोकसभा में बताया कि अप्रैल महीने के लिए देश के पास 163 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध है। यह पिछले वर्ष के 128.54 लाख टन की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने दावा किया कि खरीफ मौसम के लिए पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और सरकार आगामी रबी मौसम के लिए उर्वरक विभाग की प्रभावी तैयारी सुनिश्चित करने के लिए अनुपूरक मांगों के माध्यम से पहले से ही प्रावधान कर रही है।</p>
<p>बजट 2025-26 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों पर चर्चा के दौरान सदन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि सरकार दूसरी अनुपूरक मांगों में उर्वरक सब्सिडी के लिए मूल बजट अनुमान से लगभग 19,000 करोड़ रुपए अधिक खर्च कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार का ध्यान आवश्यक आयात के साथ-साथ देश में उर्वरक उत्पादन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित है। घरेलू यूरिया उत्पादन में लगातार वृद्धि देखी गई है, जो 2014-15 के 225 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 306.67 लाख मीट्रिक टन हो गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता को और बढ़ावा देने के लिए पहले ही छह नई उत्पादन इकाइयां चालू कर दी हैं। इन इकाइयों में से प्रत्येक की औसत वार्षिक क्षमता 12.7 लाख मीट्रिक टन है और इन्होंने सामूहिक रूप से देश की यूरिया उत्पादन क्षमता में 76.2 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि की है। इसके अतिरिक्त, 2015 की नई यूरिया नीति के तहत ओडिशा और असम में दो नए संयंत्रों पर काम चल रहा है, जिनके चालू होने के बाद यूरिया उत्पादन में प्रतिवर्ष 25.4 लाख मीट्रिक टन और वृद्धि होने की उम्मीद है। नए संयंत्रों के अलावा, सरकार कृषि मांगों को पूरा करने के लिए मौजूदा संयंत्रों की क्षमता का भी विस्तार कर रही है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ सीजन से पहले उर्वरक स्टॉक 163 लाख टन पहुंचा, पिछले साल से 26 प्रतिशत ज्यादाः निर्मला सीतारमण ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खाद्य महंगाई बढ़ने से फरवरी में भारत की खुदरा महंगाई 3.2% पर पहुंची]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/food-inflation-pushes-india-retail-inflation-to-3.2-percent-in-february-2026.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Mar 2026 12:45:42 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/food-inflation-pushes-india-retail-inflation-to-3.2-percent-in-february-2026.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>फरवरी में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 3.2% हो गई। यह नई सीरीज (आधार वर्ष 2024) के तहत जनवरी के संशोधित आंकड़े 2.74% के मुकाबले अधिक है। यह वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी के कारण हुई, हालांकि कुल महंगाई अब भी भारतीय रिजर्व बैंक के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य के भीतर है। वर्तमान वित्त वर्ष (अप्रैल-फरवरी) के दौरान अब तक खुदरा महंगाई का औसत 1.9% रहा है।</p>
<p>सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य महंगाई फरवरी में बढ़कर 3.47% हो गई, जो जनवरी में 2.13% थी। यह वृद्धि मुख्य रूप से सब्जियों, फलों और मेवों, तेल एवं वसा तथा तैयार खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई। खाद्य श्रेणी के भीतर कुछ वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई। टमाटर की महंगाई 45.3% रही, हालांकि यह जनवरी के 64.5% से कुछ कम है।</p>
<p>कोर महंगाई, जिसमें खाद्य और ईंधन को शामिल नहीं किया जाता, फरवरी में लगभग स्थिर रहकर 3.4% रही। यदि बहुमूल्य धातुओं को भी हटा दिया जाए तो कोर महंगाई 1.9% रही, जो यह संकेत देती है कि अर्थव्यवस्था में अंतर्निहित मांग अभी सीमित है।</p>
<p>ताजा आंकड़े उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की नई श्रृंखला के तहत आए हैं। इसमें आधार वर्ष 2012 से बदलकर 2024 कर दिया गया है और उपभोग बास्केट में शामिल वस्तुओं की संख्या 299 से बढ़ाकर 358 कर दी गई है। साथ ही CPI बास्केट में खाद्य वस्तुओं का भार लगभग 45% से घटाकर 40% से कम कर दिया गया है, जिससे खाद्य कीमतों का महंगाई पर प्रभाव कुछ कम हो सकता है।</p>
<p>हालांकि सूचकांक पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ रहा है। यह फरवरी में 104.57 पर पहुंच गया, जो जनवरी में 104.46 था। इस प्रकार मूल्य सूचकांक में लगातार चौथे महीने वृद्धि दर्ज की गई।</p>
<p>खाद्य के अलावा अन्य श्रेणियों में भी कुछ मध्यम स्तर की कीमत बढ़ोतरी दर्ज की गई। पान और तंबाकू की महंगाई 1.96% से बढ़कर 3.64% हो गई, जबकि आवास से जुड़े रखरखाव और मरम्मत खर्च 3.26% तक बढ़ गए। शिक्षा क्षेत्र में महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रही, जिसमें माध्यमिक शिक्षा की महंगाई 4.09% और उच्च शिक्षा की 3.59% रही।</p>
<p>परिवहन से जुड़े खर्चों में मिश्रित रुझान देखा गया। माल परिवहन सेवाओं की महंगाई 7.49% पर ऊंची बनी रही, जबकि यात्री परिवहन सेवाओं की महंगाई 2.17% से घटकर 1.75% हो गई। वहीं टिकाऊ वस्तुओं की कीमतों में नरमी बनी रही, और वाहनों की कीमतों में 4.65% की गिरावट दर्ज की गई, जो कमजोर मांग और कीमतों में प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है। कुछ विशेष उपभोग श्रेणियों में तेज वृद्धि देखी गई। अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं की महंगाई 60.8% तक पहुंच गई, जबकि चांदी की महंगाई 160% रही।</p>
<p>अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि महंगाई धीरे-धीरे बढ़ सकती है। वित्त वर्ष 2026-27 में CPI 4.3% के आसपास रह सकती है, बशर्ते मानसून सामान्य रहे और खाद्य कीमतें स्थिर बनी रहें। हालांकि वैश्विक परिस्थितियां महंगाई के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। मध्य पूर्व संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे ईंधन और परिवहन महंगाई बढ़ने का खतरा है। इन दोनों श्रेणियों का CPI बास्केट में 14.2% हिस्सा है।</p>
<p>हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की देशव्यापी बढ़ोतरी भी मार्च से ईंधन श्रेणी की महंगाई को बढ़ा सकती है। वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी से पेट्रोल, डीजल, कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) और हवाई किराए पर भी असर पड़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के जुलाई 2025 बुलेटिन के अनुसार वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 10% की वृद्धि महंगाई को लगभग 20 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ा सकती है।</p>
<p>अर्थशास्त्री मौसम से जुड़े जोखिमों पर भी नजर बनाए हुए हैं। आगामी गर्मियों में संभावित हीट वेव और 2026 के दूसरे हिस्से में अल नीनो की आशंका कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती है और खाद्य कीमतों पर असर डाल सकती है।</p>
<p>आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का अनुमान है कि मार्च 2026 में खुदरा महंगाई 3.3% से 3.5% के बीच रह सकती है, क्योंकि एलपीजी कीमतों में बढ़ोतरी और बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में मजबूती महंगाई के आंकड़ों में दिखने लगेगी।</p>
<p>क्रिसिल लिमिटेड की प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट दीप्ति देशपांडे का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में खुदरा महंगाई 4.3% तक पहुंच सकती है। उनके अनुसार यदि मानसून सामान्य रहता है तो खाद्य कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रहने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि वित्त वर्ष 2027 में कच्चे तेल की कीमतें औसतन 75-80 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद है, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष में इनकी औसत कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल रही है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खाद्य महंगाई बढ़ने से फरवरी में भारत की खुदरा महंगाई 3.2% पर पहुंची ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दुग्ध उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य, FSSAI ने जारी की एडवाइजरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/fssai-mandates-registration-for-independent-milk-producers-and-vendors-orders-strict-enforcement-across-states.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 12 Mar 2026 16:27:24 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/fssai-mandates-registration-for-independent-milk-producers-and-vendors-orders-strict-enforcement-across-states.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देशभर के लिए एक एडवाइजरी जारी करते हुए सभी दुग्ध उत्पादकों और दूध विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे अपने खाद्य व्यवसाय संचालन शुरू करने या जारी रखने से पहले अनिवार्य रूप से एफएसएसएआई में पंजीकरण या लाइसेंस प्राप्त करें। यह निर्देश डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य पर लागू नहीं होगा।&nbsp;</p>
<p>एडवाइजरी के अनुसार, अधिकारियों ने पाया है कि कई स्वतंत्र दुग्ध उत्पादक और दूध विक्रेता बिना उचित पंजीकरण या लाइसेंस के काम कर रहे हैं, जबकि खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत यह अनिवार्य है। नियामक ने स्पष्ट किया है कि जो दुग्ध उत्पादक डेयरी सहकारी समितियों के पंजीकृत सदस्य हैं और अपना पूरा दूध उत्पादन उसी सहकारी संस्था को आपूर्ति करते हैं, उन्हें इस अनिवार्यता से छूट दी गई है। हालांकि, अन्य सभी उत्पादकों और विक्रेताओं को कानूनी रूप से व्यवसाय करने के लिए एफएसएसएआई में पंजीकरण कराना आवश्यक होगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69b29b7e4401e.jpg" alt="" /></p>
<p>हाल के महीनों में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दूध में मिलावट की आशंका से जुड़े मामलों की पृष्ठभूमि में यह परामर्श जारी किया गया है। इन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने केंद्र और राज्यों के प्रवर्तन प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि पंजीकरण और लाइसेंस से संबंधित नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।</p>
<p>हाल ही आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिला में कथित रूप से मिलावटी दूध पीने से 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 अन्य लोग अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। यह मामला 22 फरवरी को सामने आया, जब कई बुजुर्गों ने उल्टी, पेट दर्द और गंभीर गुर्दा संबंधी समस्या की शिकायत की, जिसके कारण उन्हें डायलिसिस की आवश्यकता पड़ी। इसके बाद सभी को इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया।</p>
<p><strong>प्रमाणपत्र और लाइसेंस की जांच के निर्देश</strong></p>
<p>नामित अधिकारियों, केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरणों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को यह सत्यापित करने के निर्देश दिए गए हैं कि दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के पास वैध एफएसएसएआई पंजीकरण प्रमाणपत्र या लाइसेंस उपलब्ध है या नहीं। नियामक ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि वे उत्पादकों और विक्रेताओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले मिल्क चिलर का समय-समय पर निरीक्षण करें, ताकि उचित भंडारण तापमान और रखरखाव मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। सही भंडारण व्यवस्था सुनिश्चित करना दूध के खराब होने से बचाने और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।</p>
<p>FSSAI ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में विशेष पंजीकरण अभियान चलाएं, ताकि सभी पात्र दूध उत्पादकों और विक्रेताओं को आवश्यक पंजीकरण या लाइसेंस प्राप्त हो सके।<br />इसके अलावा, प्राधिकरण ने पहले ही अधिकारियों को दूध और दुग्ध उत्पादों के लिए नियमित प्रवर्तन अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। राज्यों को इस संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रत्येक पखवाड़े नियामक को भेजनी होगी, विशेष रूप से हर महीने की 15 तारीख और महीने के अंतिम दिन तक।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दुग्ध उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य, FSSAI ने जारी की एडवाइजरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि क्षेत्र में महिलाओं को नीति निर्माण, निर्णय प्रकिया और नेतृत्व के पदों में अधिक भूमिका मिलनी चाहिए: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/women-in-agri-sector-should-get-greater-role-in-policy-formulation-and-leadership-positions-president-murmu.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 12 Mar 2026 15:49:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/women-in-agri-sector-should-get-greater-role-in-policy-formulation-and-leadership-positions-president-murmu.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को नई दिल्ली में कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन (GCWAS-2026) के उद्घाटन सत्र में शिरकत की और सत्र को संबोधित किया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि बुवाई, कटाई, प्रसंस्करण और फसलों को बाजार तक पहुंचाने सहित कृषि संबंधी सभी गतिविधियों में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, पशुपालन, वन उत्पादों के समुचित इस्&zwj;तेमाल और कृषि आधारित उद्यमों के संचालन सहित कई क्षेत्रों में अथक परिश्रम करती हैं। कृषि अर्थव्यवस्था में महिलाओं का अमूल्य योगदान है।</p>
<p>राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों में कुल छात्रों में 50 प्रतिशत से अधिक लड़कियां हैं और कई विश्वविद्यालयों में यह संख्या 60 प्रतिशत से अधिक है। ये लड़कियां शैक्षणिक दृष्टि से भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं। सरकार, समाज और कृषि क्षेत्र के सभी हितधारकों का यह दायित्व है कि वे इन होनहार लड़कियों को कृषि तथा अनाज उत्पादन के क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान करने के लिए हर संभव सहायता और प्रोत्साहन दें। उन्होंने कहा कि नेतृत्व मातृत्व का अंतर्निहित गुण है। हालांकि, मातृत्व को अक्सर घर की चारदीवारी तक ही सीमित माना जाता है। हमें इस मानसिकता को दूर करना होगा और महिला किसानों को नेतृत्व प्रदान करने के लिए सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69b29245e6a04.jpg" alt="" /></p>
<p><em><span style="font-weight: 400;">GCWAS-2026 में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का स्वागत केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया।</span></em></p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2026 को 'अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष' घोषित किया है। इस घोषणा में कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं में महिला-पुरुष आधारित असमानताओं को दूर करने और महिलाओं के लिए नेतृत्व की भूमिकाओं को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया गया है।</p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि कृषि, विशेषकर कृषि-खाद्य प्रणालियों में कार्यरत महिलाओं के नेतृत्व को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के विचार के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नीति निर्माण, निर्णय लेने और नेतृत्व पदों में महिलाओं की भूमिका अधिक होनी चाहिए। इस क्षेत्र में सभी स्तरों पर महिलाओं की अधिक भागीदारी महिला-पुरुष समानता को बढ़ावा देने वाली कृषि वृद्धि को प्रोत्साहित करेगी।</p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि महिला किसानों को भूमि के औपचारिक स्वामित्व, तकनीकी ज्ञान, वित्तीय संसाधन और अन्य सहायता प्रणालियों से संबंधित मामलों में मदद मिलनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि पिछले एक दशक में भारत ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देने वाली पहलों ने कृषि में महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69b29244851fc.jpg" alt="" /></p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि लोग, पृथ्&zwj;वी, समृद्धि, शांति और साझेदारी को समान महत्व देने पर वैश्विक सहमति है। उन्होंने सभी हितधारकों से आग्रह किया कि जन आयाम पर विचार और कार्य में महिला-पुरुष समानता को विशेष प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि कृषि सहित हर क्षेत्र में महिलाओं और पुरुषों के प्रभावी समावेशन से हम न केवल सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे बल्कि धरती को कहीं अधिक संवेदनशील और सामंजस्यपूर्ण स्थान बनाएंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वैश्विक सम्मेलन के प्रतिभागी प्रगति को गति देने और नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के मार्ग प्रशस्&zwj;त करेंगे।</p>
<p>जीसीडब्ल्यूएस-2026 का आयोजन कृषि विज्ञान संवर्धन ट्रस्ट (टीएएएस), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान सलाहकार समूह (सीजीआईएआर) और पादप किस्मों और किसानों के अधिकारों के संरक्षण प्राधिकरण (पीपीवी एंड एफआरए) द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य महिला-पुरुष भागीदारी को मुख्यधारा में लाने के लिए नीतिगत ढांचों और इकोसिस्&zwj;टम को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करना और टिकाऊ एवं समावेशी कृषि-खाद्य प्रणालियों के निर्माण में महिलाओं की अपरिहार्य भूमिका को उजागर करना है।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b292470e7f4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि क्षेत्र में महिलाओं को नीति निर्माण, निर्णय प्रकिया और नेतृत्व के पदों में अधिक भूमिका मिलनी चाहिए: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि&amp;#45;खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन कल से, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी उद्घाटन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/president-droupadi-murmu-to-inaugurate-global-conference-on-women-in-agri-food-systems-tomorrow.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Mar 2026 18:59:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/president-droupadi-murmu-to-inaugurate-global-conference-on-women-in-agri-food-systems-tomorrow.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि में महिलाओं की भूमिका को मान्यता देने तथा उन्हें मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए &lsquo;कृषि-खाद्य श्रृंखला में महिलाओं की भागीदारी पर वैश्विक सम्मेलन (जीसीडब्ल्यूएएस&ndash;2026)&rsquo; का तीन दिवसीय कार्यक्रम 12&ndash;14 मार्च, 2026 को आयोजित किया जा रहा है। भारतरत्न सी. सुब्रमण्यम हॉल, आईसीएआर सम्मेलन केन्द्र में होने वाले इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू करेंगी।</p>
<p>उद्घाटन सत्र में केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। समापन सत्र में केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी मुख्य अतिथि रहेंगी।</p>
<p>यह खास कार्यक्रम, कृषि विज्ञान के विकास के लिए न्यास (TAAS), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान हेतु परामर्शदात्री समूह (CGIAR) और पादप किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&amp;FRA) ने मिलकर आयोजित किया है।&nbsp;</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 'महिला किसानों हेतु अंतर्राष्ट्रीय वर्ष' 2026 के दौरान होने वाले इस सम्मेलन का विषय "प्रगति को आगे बढ़ाते हुए, नई ऊंचाइयां प्राप्त करना," है। यह महिला किसानों के लिए वैश्विक दृष्टिकोण के मुताबिक है। इस कार्यक्रम में भारत तथा दुनिया भर से वैज्ञानिक, नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रमुख लोग, उद्यमी, प्रगतिशील पेशेवर, महिला किसान, नव-उद्यम तथा विद्यार्थियों समेत अलग-अलग क्षेत्र से करीब 700 लोगों के इकट्ठा होने की उम्मीद है। इसका मुख्य मकसद लैंगिक भागीदारी को मुख्यधारा में लाने के लिए नीतिगत कार्य योजना, इसके पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करना तथा टिकाऊ एवं समावेशी कृषि-खाद्य प्रणाली बनाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करना है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69b16dfc09d38.jpg" alt="" /></p>
<p>यह सम्मेलन मुख्य संरक्षक, डॉ. राज एस. परोदा, चेयरमैन, टीएएएस, संरक्षक डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (आईसीएआर); डॉ. इस्माहने एलौती, कार्यकारी प्रबंध निदेशक, सीजीआईएआर; डॉ. टी. महापात्रा, चेयरपर्सन, पीपीवी एंड एफआरए के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन की अध्यक्ष, डॉ. रेणु स्वरूप, कृषि सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार, तथा सह-अध्यक्ष, डॉ. राजबीर सिंह, उप-महानिदेशक (कृषि विस्तार), आईसीएआर, होंगे।&nbsp;</p>
<p>राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ इस सम्मेलन को संबोधित करेंगे। जाने-माने वक्ताओं में, डॉ. एग्नेस कालीबाटा, संस्थापक एवं चेयर, कनेक्ट4इंपेक्ट (Connect4Impact), सलाहकार संगठन; डॉ. ब्रैम गोवार्ट्स, महानिदेशक, सिमिट; डॉ. सौम्या स्वामीनाथन, चेयरपर्सन, एमएसएसआरएफ; डॉ. शकुंतला एच. थिल्स्टेड, विश्व खाद्य पुरस्कार विजेता, डॉ. नित्या राव, निदेशक, एनआईएसडी, नॉर्विच, यूनाइटेड किंगडम, डॉ. निकोलिन डी हान, लैंगिक समानता एवं युवा प्रेरक मंच के निदेशक, आईएलआरआई, केन्या, के साथ-साथ कई अन्य वक्ता शामिल हैं।</p>
<p>तीन दिवसीय कार्यक्रम में कई तकनीकी सत्र होंगे। एक सत्र महिला लीडर तथा वैज्ञानिकों द्वारा प्रेरणादायक सफलता की कहानियों को साझा करने के लिए है। इसी तरह, एक सत्र खेती की नीतियों एवं संस्थाओं में लैंगिक संवेदनशील तरीकों को शामिल करने पर फोकस होगा। मूल्य श्रृंखला में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए उद्यमिता, वित्तीय मॉडल और बाजार संपर्क की जांच करने पर भी एक सत्र का आयोजन होगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b16dfcec6ab.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन कल से, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी उद्घाटन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कैबिनेट ने जल जीवन मिशन के लिए अतिरिक्त 1.51 लाख करोड़ रुपये की मंजूरी दी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-additional-rs-1.51-lakh-crore-for-jal-jeevan-mission.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Mar 2026 14:59:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-additional-rs-1.51-lakh-crore-for-jal-jeevan-mission.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को जल शक्ति मंत्रालय के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी जिसमें जल जीवन मिशन (JJM) के कार्यान्वयन को पुनर्गठित करने और इसे सर्विस डिलीवरी की ओर मोड़ने की बात कही गई है। कैबिनेट मिशन के पुनर्गठन के लिए कुल परिव्यय को बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी है, जिसमें कुल केंद्रीय सहायता 3.59 लाख करोड़ रुपये है। 2019-20 में स्वीकृत राशि 2.08 लाख करोड़ रुपये थी। यानी 1.51 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त केंद्रीय हिस्से को मंजूरी दी गई है।</p>
<p>इस मिशन के तहत एक समान राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा &ldquo;सुजलम भारत&rdquo; स्थापित किया जाएगा, जिसके तहत प्रत्येक गांव को एक विशिष्ट सुजल गांव/सेवा क्षेत्र आईडी आवंटित की जाएगी। यह स्रोत से नल तक संपूर्ण पेयजल आपूर्ति प्रणाली का डिजिटल मानचित्रण करेगी। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए, &ldquo;जल अर्पण&rdquo; के माध्यम से योजनाओं के शुभारंभ और औपचारिक हस्तांतरण में ग्राम पंचायतों और पशु एवं जल आपूर्ति समितियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।</p>
<p>जल शक्ति मंत्रालय की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि ग्राम पंचायत राज्य सरकार द्वारा पर्याप्त संचालन एवं रखरखाव तंत्र स्थापित किए जाने की पुष्टि होने पर ही कार्यों के पूर्ण होने का प्रमाण पत्र जारी करेगी और स्वयं को &ldquo;हर घर जल&rdquo; घोषित करेगी।&nbsp;</p>
<p>विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि वर्ष 2019 में नल-जल कनेक्शन वाले 3.23 करोड़ (17 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों की स्थिति से, अब तक जल जीवन मिशन (JJM) योजना के तहत 12.56 करोड़ से अधिक अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को नल-जल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। वर्तमान में देश में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा चिन्हित 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से, लगभग 15.80 करोड़ (81.61 प्रतिशत) परिवारों के पास नल-जल कनेक्शन उपलब्ध हैं।</p>
<p>इसमें बताया गया है कि जेजेएम 2.0 देश भर के सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों को दिसंबर 2028 तक नल-जल कनेक्शन उपलब्ध कराकर सभी ग्राम पंचायतों को 'हर घर जल' के प्रमाणन में सहयोग देगा। साथ ही, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ अलग-अलग समझौता ज्ञापनों के माध्यम से समय-सीमा का पालन, योजना की निरंतरता और नागरिक-केंद्रित जल सेवाओं का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। जेजेएम 2.0 संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से अवसंरचना-केंद्रित दृष्टिकोण से नागरिक-केंद्रित उपयोगिता-आधारित सेवा वितरण दृष्टिकोण की ओर बढ़ते हुए, 24&times;7 सुनिश्चित ग्रामीण पेयजल आपूर्ति के साथ विकसित भारत @2047 &nbsp;के विजन को भी बढ़ावा देता है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कैबिनेट ने जल जीवन मिशन के लिए अतिरिक्त 1.51 लाख करोड़ रुपये की मंजूरी दी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एपीडा ने आहार 2026 में भारत की कृषि&amp;#45;खाद्य निर्यात क्षमता प्रदर्शित की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/apeda-showcases-indias-agri-food-export-strength-at-aahar-2026.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Mar 2026 14:31:23 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/apeda-showcases-indias-agri-food-export-strength-at-aahar-2026.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एपीडा (APEDA) ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित आहार 2026 के 40वें संस्करण में भारत की कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की निर्यात क्षमता का प्रदर्शन किया। यह आयोजन 10-14 मार्च तक हो रहा है। एपीडा के पवेलियन में निर्यातकों, राज्य सरकारों, उत्पादक संगठनों, इनोवेशन आधारित उद्यमों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को एक मंच पर लाया गया। इसका उद्देश्य भारत की विविध कृषि-निर्यात श्रृंखला को प्रदर्शित करना और देसी-विदेशी खरीदारों के साथ व्यावसायिक संपर्क को बढ़ावा देना था।</p>
<p>इसका उद्घाटन केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने किया जिसमें इटली ने सहभागी देश के रूप में भाग लिया। अपने मुख्य भाषण में गोयल ने कहा कि भारत का खाद्य और कृषि क्षेत्र वैश्विक अवसरों के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने बताया कि देश के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात अब सालाना 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जिससे भारत दुनिया के प्रमुख कृषि-खाद्य निर्यातकों में शामिल हो गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, फलों, दालों और सब्जियों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो देश के किसानों, मछुआरों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की क्षमताओं को दर्शाती है। मंत्री ने निर्यात के अवसरों के विस्तार में व्यापार समझौतों की भूमिका को भी रेखांकित किया। भारत ने हाल ही संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया और स्विट्जरलैंड के साथ और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के अन्य सदस्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। इसके अलावा भारत जापान, दक्षिण कोरिया, इंग्लैंड, ओमान और मॉरीशस जैसे देशों के साथ सहयोग को मजबूत कर रहा है, जबकि कनाडा के साथ व्यापार वार्ता जारी हैं।</p>
<p>मंत्री के अनुसार, इन समझौतों के माध्यम से भारतीय उत्पादों को वैश्विक व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से तक वरीयता प्राप्त बाजार पहुंच मिल रही है। इससे किसानों, एमएसएमई और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए उच्च मूल्य वाले बाजारों तक पहुंचने के नए अवसर खुल रहे हैं।</p>
<p>एपीडा (APEDA) पवेलियन का उद्घाटन वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव नितिन कुमार यादव ने एपीडा के चेयरमैन अभिषेक देव और आईटीपीओ के प्रबंध निदेशक नीरज खरवाल के साथ किया।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान एपीडा ने खीरा, काजू, अनानास और अनार पर तैयार शोध रिपोर्ट भी जारी कीं, जिन्हें इक्रियर (Indian Council for Research on International Economic Relations) के सहयोग से तैयार किया गया है। इन रिपोर्टों में आपूर्ति श्रृंखलाओं, निर्यात संभावनाओं और वैश्विक बाजारों में भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने की रणनीतियों का विश्लेषण किया गया है।</p>
<p>एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा के तहत, क्षेत्र-विशेष कृषि उत्पादों के लिए पैकेजिंग डिजाइन समाधान और तकनीकी मानकों की शुरुआत की गई, जिन्हें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग के सहयोग से विकसित किया गया है। यह पहल विशेष रूप से जीआई-टैग और ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए पैकेजिंग, शेल्फ लाइफ और निर्यात बाजारों में उत्पाद की प्रस्तुति को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। इस पहल के अंतर्गत शामिल उत्पादों में असम का कार्बी आंगलोंग अदरक, महाराष्ट्र की जी-4 मिर्च और जलगांव केला, असम का काजी नेमु तथा उत्तर प्रदेश का प्रयागराज सुरखा अमरूद शामिल हैं।</p>
<p>AAHAR 2026 दक्षिण एशिया में खाद्य और आतिथ्य उद्योग के लिए सबसे बड़े बी2बी मंचों में से एक है, जो कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला में नेटवर्किंग, उत्पाद प्रचार और ज्ञान आदान-प्रदान के अवसर प्रदान करता है। इसमें अपनी भागीदारी के माध्यम से APEDA ने उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादन, वैल्यू एडिशन और निर्यात-उन्मुख आपूर्ति शृंखलाओं में भारत की बढ़ती क्षमताओं को प्रदर्शित किया, साथ ही वैश्विक कृषि-खाद्य बाजारों में देश की उपस्थिति को और विस्तार देने के अवसरों को भी रेखांकित किया।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b12eea47247.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एपीडा ने आहार 2026 में भारत की कृषि-खाद्य निर्यात क्षमता प्रदर्शित की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b12eea47247.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डीएसआर से पानी की 35% तक बचत, लागत भी कम, एफएसआईआई का इसे व्यापक रूप से अपनाने का आह्वान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/dsr-can-reduce-water-use-by-up-to-35-percent-and-cut-cultivation-costs-by-rs-14000-per-ha-fsii-calls-for-wider-adoption.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Mar 2026 12:15:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/dsr-can-reduce-water-use-by-up-to-35-percent-and-cut-cultivation-costs-by-rs-14000-per-ha-fsii-calls-for-wider-adoption.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत में जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव, बढ़ती श्रम लागत और कृषि के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की आवश्यकता के बीच, फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (FSII) ने डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) पर आयोजित एक सम्मेलन में अधिक संसाधन-कुशल खेती पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। विशेषज्ञों ने कहा कि डीएसआर एक क्लाइमेट-स्मार्ट और संसाधन-कुशल विकल्प के रूप में उभर रहा है, जो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने में सक्षम है।</p>
<p>FSII ने 10 मार्च 2026 को नई दिल्ली के NASC कॉम्प्लेक्स में &ldquo;सस्टेनेबल एवं मुनाफे वाले चावल उत्पादन के लिए डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR)&rdquo; विषय पर अपने सम्मेलन के दूसरे संस्करण का आयोजन किया। इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और कृषि विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में भारत के धान उत्पादक क्षेत्रों में डीएसआर को बड़े पैमाने पर अपनाने से जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा की गई और इसके तेजी से प्रसार के लिए एक रणनीतिक रोडमैप तैयार करने पर विचार-विमर्श हुआ।</p>
<p>भारत में धान की खेती पर अस्थिर भूजल दोहन के कारण लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है, खासकर उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में। फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (FSII) के अध्यक्ष तथा सवाना सीड्स के सीईओ और प्रबंध निदेशक अजय राणा ने कहा, &ldquo;पंजाब में भूजल दोहन वार्षिक रीचार्ज का लगभग 156% तक पहुंच चुका है, जबकि हरियाणा में यह लगभग 137% है, जो भूजल भंडारों पर गंभीर दबाव को दर्शाता है। धान सबसे अधिक पानी लेने वाली फसलों में शामिल है। एक किलोग्राम चावल उत्पादन के लिए 3,000 से 5,000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। वहीं, भारत में कुल मीठे पानी का लगभग 80% हिस्सा कृषि क्षेत्र में जाता है। ऐसे में अधिक जल-कुशल धान उत्पादन प्रणालियों की ओर तेजी से बढ़ना बेहद आवश्यक हो गया है।&rdquo;</p>
<p>राणा ने कहा कि बीज उद्योग तकनीकी नवाचारों के माध्यम से डीएसार को अपनाने में सक्षम बनाने के लिए अनुसंधान संस्थानों और किसानों के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, &ldquo;DSR के सामने खरपतवार प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। इसे ध्यान में रखते हुए बीज उद्योग ने सार्वजनिक अनुसंधान प्रणाली के सहयोग से सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों द्वारा विकसित हर्बिसाइड टॉलरेंस तकनीकों को पेश किया है, जिससे किसान हर्बिसाइड का उपयोग कर खरपतवार का अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रण कर सकते हैं। पिछले खरीफ सीजन के दौरान लगभग एक लाख एकड़ क्षेत्र में ड्रिल आधारित बुवाई के माध्यम से हर्बिसाइड टॉलरेंट धान की खेती की गई, जिसमें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक अपनाने की रिपोर्ट मिली,&rdquo; उन्होंने कहा।</p>
<p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के आयुक्त डॉ. पी. के. सिंह ने कहा कि नई डीएसआर तकनीकों को अपनाने से कई राज्यों में उत्साहजनक परिणाम सामने आने लगे हैं। सिंह ने कहा कि नई बीज तकनीक और फसल सुरक्षा से जुड़े नवाचार भारतीय कृषि को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा, &ldquo;हम नए बायोलॉजिकल उत्पादों, उन्नत फसल सुरक्षा रसायन और अगली पीढ़ी की बीज तकनीक, जिसमें हाइब्रिड और जीन-एडिटेड किस्में शामिल हैं, पर काम कर रहे हैं। जब इन तकनीकों को बेहतर कृषि प्रबंधन पद्धतियों के साथ जोड़ा जाएगा, तो ये भारतीय कृषि के लिए वास्तविक गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं।&rdquo;</p>
<p>प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैरायटीज एंड फार्मर्स राइट्स अथॉरिटटी (PPVFRA) के चेयरपर्सन, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के पूर्व सचिव, और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने कहा, &ldquo;डायरेक्ट सीडेड राइस में धान की खेती की दक्षता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने और किसानों की लागत घटाने की बड़ी क्षमता है। बीज प्रौद्योगिकी, कृषि विज्ञान (एग्रोनॉमी) और मशीनीकरण, डीएसआर में निरंतर नवाचार को अपनाने से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने तथा किसानों को इसके पूर्ण लाभ दिलाने के लिए आवश्यक होंगे।&rdquo;</p>
<p>उन्होंने कहा, &ldquo;हमारा अनुमान है कि कृषि-पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर भारत के 20&ndash;60% धान क्षेत्र को संभावित रूप से डीएसार पद्धति में बदला जा सकता है। भारत में लगभग 4.4 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती है, ऐसे में यदि इसको आंशिक रूप से भी अपनाया जाता है तो भूजल, पंपिंग सिंचाई में उपयोग होने वाली ऊर्जा और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में बड़े पैमाने पर बचत संभव है।&rdquo;</p>
<p>भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. ए. के. सिंह ने कहा, &ldquo;भारत की खाद्य सुरक्षा में धान की भूमिका केंद्रीय बनी रहेगी, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए उत्पादन प्रणालियों में बदलाव जरूरी है। डायरेक्ट सीडेड राइस धान उत्पादन प्रणालियों में सस्टेनेबल इंटेंसिफिकेशन का एक महत्वपूर्ण मार्ग प्रदान करता है, जिसे मजबूत अनुसंधान, बेहतर बीज किस्मों और प्रभावी विस्तार सेवाओं का समर्थन मिलना चाहिए।&rdquo;</p>
<p>सम्मेलन में मध्य प्रदेश के प्रगतिशील किसान मेहत लाल बिसेन ने डायरेक्ट सीडेड राइस अपनाने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि इस पद्धति से उन्हें श्रम लागत और पानी की खपत कम करने में मदद मिली है, साथ ही धान की खेती की समग्र दक्षता भी बढ़ी है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ डीएसआर से पानी की 35% तक बचत, लागत भी कम, एफएसआईआई का इसे व्यापक रूप से अपनाने का आह्वान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि मंत्रालय ने जारी किया 2025&amp;#45;26 का दूसरा अग्रिम अनुमान; चावल, गेहूं और मक्का के रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-releases-2nd-advance-estimates-for-2025-26-rice-wheat-and-maize-production-at-record-levels.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 10 Mar 2026 18:12:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-releases-2nd-advance-estimates-for-2025-26-rice-wheat-and-maize-production-at-record-levels.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्&zwj;याण मंत्रालय ने वर्ष 2025-26 के लिए मुख्&zwj;य फसलों (खरीफ एवं रबी) के उत्&zwj;पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान जारी कर दिए गए हैं। इसके मुताबिक चावल और गेहूं के अलावा मक्का और मूंगफली का &nbsp;उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर रहने की उम्मीद है। खरीफ में खाद्यान्न उत्पादन 1741.44 लाख मीट्रिक टन और रबी में 1745.13 लाख मीट्रिक टन अनुमानित है। यह पिछले वर्ष के खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 1694.60 लाख मीट्रिक टन और रबी खाद्यान्न &nbsp;उत्पादन 1691.66 लाख टन की तुलना में क्रमशः लगभग 46 लाख टन (2.8%) एवं 53 लाख टन (3.2%) अधिक है।</p>
<p>खरीफ चावल का उत्पादन रिकॉर्ड 1239.28 लाख टन होने का अनुमान है जो 2024-25 के 1227.72 लाख टन की तुलना में 11.56 लाख टन अधिक है। रबी चावल का उत्पादन 167.20 लाख टन अनुमानित है। गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 1202.10 लाख टन अनुमानित है, जो पिछले वर्ष के 1179.45 लाख टन की तुलना में 22.65 लाख टन अधिक है।</p>
<p>श्री अन्न में खरीफ का उत्पादन 123.43 लाख टन और रबी का 30.98 लाख टन अनुमानित है। खरीफ मक्का का उत्पादन रिकॉर्ड 302.47 लाख टन और रबी मक्का का रिकॉर्ड 159.03 लाख टन अनुमानित है। पोषक/मोटे अनाज (खरीफ) का उत्पादन 425.89 लाख टन और इनका रबी का उत्पादन 213.41 लाख टन होने का अनुमान है।</p>
<p>तूर एवं चने का उत्पादन &nbsp;क्रमश: 34.55 लाख टन एवं 117.92 लाख टन होने का अनुमान है। मसूर का उत्पादन 17.33 लाख टन अनुमानित है।</p>
<p>खरीफ एवं रबी में मूंगफली का उत्पादन क्रमश: 112.94 लाख टन एवं 7.97 लाख टन अनुमानित है। खरीफ मूंगफली का उत्पादन पिछले वर्ष के 104.12 लाख टन की तुलना में 8.82 लाख मीट्रिक टन अधिक है। सोयाबीन का उत्पादन 127.20 लाख टन एवं रेपसीड और सरसों का 133.31 लाख टन होने का अनुमान है। कपास का उत्पादन 290.91 लाख गांठ (प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम) और गन्ने का उत्पादन 5001.97 लाख टन होने का अनुमान है।</p>
<p>कृषि मंत्रालय के अनुसार, खरीफ फसलों के उत्पादन अनुमान तैयार करते समय फसल कटाई प्रयोग (सीसीई) आधारित उपज पर विचार किया गया है। इसके अलावा, कुछ फसलों जैसे तूर, गन्ना, अरंडी आदि की सीसीई अभी जारी है। रबी फसलों का उत्पादन औसत उपज पर आधारित है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि मंत्रालय ने जारी किया 2025-26 का दूसरा अग्रिम अनुमान; चावल, गेहूं और मक्का के रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार ने प्राकृतिक गैस आपूर्ति को रेगुलेट किया, CNG, PNG और उर्वरक क्षेत्र को प्राथमिकता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-regulates-natural-gas-supply-amid-west-asia-crisis-prioritises-cng-png-and-fertiliser-sectors.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 10 Mar 2026 16:31:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-regulates-natural-gas-supply-amid-west-asia-crisis-prioritises-cng-png-and-fertiliser-sectors.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बीच भारत सरकार ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 जारी किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत यह आदेश जारी किया है। इसका उद्देश्य पाइपलाइन के माध्यम से घरेलू रसोई गैस (PNG), वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी (CNG) और उर्वरक उत्पादन के लिए गैस की आपूर्ति स्थिर बनाए रखना है।&nbsp;</p>
<p>अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने घरेलू उत्पादन वाली प्राकृतिक गैस के आवंटन की प्राथमिकता सूची में बदलाव किया है। इसके तहत घरों में पाइप से मिलने वाली गैस (PNG), परिवहन क्षेत्र के लिए CNG और एलपीजी उत्पादन को सबसे ऊपर रखा गया है। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत गैस खपत के आधार पर 100 प्रतिशत आपूर्ति दी जाएगी, ताकि घरेलू रसोई गैस और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर किसी तरह का बड़ा असर न पड़े।</p>
<p>प्राथमिकता क्रम में उर्वरक क्षेत्र को दूसरे स्थान पर रखा गया है। उर्वरक संयंत्रों को पिछले छह महीनों की औसत गैस खपत का कम से कम 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी, जो परिचालन उपलब्धता पर निर्भर करेगी। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आवंटित गैस का उपयोग केवल उर्वरक उत्पादन के लिए किया जाएगा और इसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं मोड़ा जा सकेगा।</p>
<p>चाय की प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग और राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जुड़े अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को प्राथमिकता सूची में तीसरे स्थान पर रखा गया है। उपलब्धता के आधार पर इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत गैस खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस दी जाएगी। औद्योगिक और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को गैस उपलब्ध कराने वाले सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क को प्राथमिकता सूची में चौथे स्थान पर रखा गया है। इन नेटवर्क के माध्यम से आपूर्ति भी पिछले छह महीनों की औसत खपत के लगभग 80 प्रतिशत तक सीमित रहेगी।</p>
<p><strong>गैर-प्राथमिकता क्षेत्रों से गैस आपूर्ति में कटौती</strong></p>
<p>प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को पर्याप्त गैस उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने घरेलू उत्पादन वाली प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को पुनर्व्यवस्थित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत पेट्रोकेमिकल संयंत्रों, बिजली घरों और अधिक गैस खपत करने वाले औद्योगिक उपभोक्ताओं को दी जाने वाली गैस आपूर्ति में कटौती की जाएगी।</p>
<p>वर्तमान में भारत में प्राकृतिक गैस की खपत लगभग 191 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (एमएमएससीएमडी) है। इसमें से लगभग आधी मांग घरेलू उत्पादन से पूरी होती है, जबकि शेष जरूरत एलएनजी आयात के माध्यम से पूरी की जाती है।</p>
<p>नई आवंटन व्यवस्था के तहत ओएनजीसी पेट्रो एडिशंस लिमिटेड, गेल के पाता पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स और रिलायंस के पेट्रोकेमिकल संयंत्रों को दी जाने वाली गैस आपूर्ति में आंशिक कटौती की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर बिजली संयंत्रों को मिलने वाली गैस आपूर्ति भी घटाई जा सकती है। इसके अलावा तेल रिफाइनिंग कंपनियों से भी कहा गया है कि वे पिछले छह महीनों की औसत खपत के लगभग 65 प्रतिशत तक गैस उपयोग सीमित कर आपूर्ति में आई कमी का कुछ बोझ खुद वहन करें। संशोधित आवंटन व्यवस्था को लागू करने और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों तक पर्याप्त गैस पहुंचाने की जिम्मेदारी सरकारी गैस कंपनी गेल (GAIL) को सौंपी गई है।</p>
<p><strong>होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता</strong></p>
<p>पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण क्षेत्र में समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है, जिसके बाद सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच हमलों के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही में तेज गिरावट आई है। समुद्री मार्ग से होने वाले लगभग 20 प्रतिशत तेल परिवहन और करीब एक-तिहाई एलएनजी व्यापार इस संकरे समुद्री मार्ग से गुजरता है।</p>
<p>इस संघर्ष के कारण टैंकरों के बीमा प्रीमियम में तेज बढ़ोतरी हुई है और एलएनजी आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। कई आपूर्तिकर्ताओं ने शिपमेंट में व्यवधान का हवाला देते हुए फोर्स मेजर (Force Majeure) क्लॉज लागू करने की बात कही है।</p>
<p>भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर काफी निर्भर है और एलएनजी तथा एलपीजी का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। टैंकरों की आवाजाही धीमी होने के कारण सरकार ने घरेलू गैस आवंटन में बदलाव करते हुए घरेलू रसोई गैस और सार्वजनिक परिवहन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।</p>
<p><strong>कमर्शियल एलपीजी की कमी से होटल-रेस्तरां क्षेत्र प्रभावित</strong></p>
<p>हालांकि गैस आवंटन की नई व्यवस्था का उद्देश्य जरूरी क्षेत्रों को सुरक्षित रखना है, लेकिन हॉस्पिटैलिटी उद्योग ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी की शिकायतें शुरू कर दी हैं। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार पिछले एक सप्ताह में आपूर्ति बाधित होने की समस्या और गंभीर हो गई है। उनका कहना है कि कई क्षेत्रों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी काफी धीमी हो गई है या लगभग पूरी तरह रुक गई है।</p>
<p>फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष प्रदीप शेट्टी ने कहा कि मुंबई, पुणे, औरंगाबाद और नागपुर जैसे शहरों में होटल और रेस्तरां गंभीर आपूर्ति संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सप्लायर और डिस्ट्रीब्यूटरों के बीच पैदा हुई भ्रम की स्थिति ने समस्या को और बढ़ा दिया है। कई डिस्ट्रीब्यूटरों ने होटल और फूड सर्विस प्रतिष्ठानों को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी है। कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से भी इसी तरह की कमी की खबरें आ रही हैं, जिससे हॉस्पिटैलिटी उद्योग में चिंता बढ़ गई है।</p>
<p>शेट्टी ने चेतावनी दी, &ldquo;अगर अगले दो दिनों में स्थिति नहीं सुधरी, तो मुंबई में लगभग 50 प्रतिशत होटल और रेस्तरां को अस्थायी रूप से संचालन बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।&rdquo;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार ने प्राकृतिक गैस आपूर्ति को रेगुलेट किया, CNG, PNG और उर्वरक क्षेत्र को प्राथमिकता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फिर शुरू हुई किसान कर्ज माफी, महाराष्ट्र की 35,000 करोड़ रुपये की घोषणा से क्रेडिट अनुशासन पर बहस तेज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farm-loan-waivers-return-maharashtra-rs-35000-crore-scheme-revives-debate-on-credit-discipline.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 10 Mar 2026 15:41:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farm-loan-waivers-return-maharashtra-rs-35000-crore-scheme-revives-debate-on-credit-discipline.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि कर्ज माफी एक बार फिर शुरू हो गई है। पिछले सप्ताह महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ी कर्ज माफी योजना की घोषणा की, जिससे राज्य के लगभग 35,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस योजना से करीब 50 लाख किसानों को लाभ मिल सकता है। हालांकि इस कदम ने फिर से इस बहस को तेज कर दिया है कि क्या ऐसी योजनाएं वास्तव में किसानों की मदद करती हैं या देश की कृषि ऋण व्यवस्था को कमजोर करती हैं।</p>
<p>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आगामी खरीफ सीजन से पहले &lsquo;पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर शेतकरी कर्जमाफी योजना&rsquo; की घोषणा की। यह योजना 2024 के विधानसभा चुनावों के दौरान सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन द्वारा किए गए वादे के अनुरूप है। इस योजना के तहत किसानों के 2 लाख रुपये तक के फसल ऋण को माफ किया जाएगा, बशर्ते यह ऋण 30 सितंबर 2025 तक बकाया रहा हो।</p>
<p>राज्य सरकार के अनुसार, 28 से 30 लाख किसान जिन्होंने फसल ऋण का भुगतान नहीं किया है, इस कर्ज माफी से सीधे लाभान्वित होंगे। इसके अलावा, लगभग 20 लाख ऐसे किसान, जिन्होंने समय पर अपने ऋण का भुगतान किया है, उन्हें 50,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकार का अनुमान है कि केवल डिफॉल्टर किसानों की कर्जमाफी पर लगभग 20,000 करोड़ का खर्च आएगा, जबकि नियमित रूप से ऋण चुकाने वाले किसानों को दिए जाने वाले प्रोत्साहन पर करीब 15,000 करोड़ खर्च होंगे। इस प्रकार कुल मिलाकर योजना का वित्तीय बोझ लगभग 35,000 करोड़ रुपये होगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य किसानों को कर्ज के बोझ से मुक्त करना है, ताकि वे अगले कृषि चक्र के लिए नया फसल ऋण लेने के पात्र बन सकें। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि किसानों की पहचान आधार से जुड़े डिजिटल सिस्टम के जरिए सत्यापित की जाएगी, ताकि खरीफ बुवाई से पहले वास्तविक लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचाया जा सके।</p>
<p>हालांकि स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के संस्थापक राजू शेट्टी ने फडणवीस सरकार की घोषणा की कड़ी आलोचना करते हुए इस कर्ज माफी को &ldquo;ढोंग&rdquo; करार दिया। उन्होंने कहा कि पिछले साल अक्टूबर में किसान आंदोलन के बाद बैठक में मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि किसानों का पूरा फसल ऋण माफ किया जाएगा। शेट्टी ने कहा कि अधिकांश किसानों पर 3.5 से 4 लाख रुपये का फसल ऋण बकाया है। मौजूदा योजना के तहत केवल 2 लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया जा रहा है। ऐसे में किसानों को योजना का लाभ लेने के लिए शेष राशि पहले चुकानी होगी। महाराष्ट्र में किसानों ने पिछले वर्ष अक्टूबर में कर्ज माफी की मांग को लेकर आंदोलन किया था। एनसीपी के संस्थापक शरद पवार ने भी किसानों के कर्ज माफ करने की मांग की थी।&nbsp;</p>
<p>कर्नाटक में भी किसान फसल ऋण माफी की मांग कर रहे हैं। गुजरात में कांग्रेस पार्टी किसान कर्ज माफी की मांग कर रही है। राज्य कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने नवंबर 2025 में कहा था कि बेमौसम बारिश से फसल नुकसान के कारण राज्य में कुछ किसानों ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने सरकार से किसानों को उनकी खेती की पूरी लागत का मुआवजा देने और उनके कर्ज माफ करने की मांग की थी।</p>
<p><strong>कर्ज माफी का लंबा इतिहास</strong><br />भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 35 वर्षों में केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारें मिलकर कृषि ऋण माफी योजनाओं पर 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुकी हैं। देश में पहली बड़ी राष्ट्रव्यापी कृषि ऋण माफी 1990 में एग्रीकल्चर एंड रूरल डेट रिलीफ स्कीम (ARDRS) के तहत लागू की गई थी। इस योजना में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से लिए गए अल्पकालिक ऋण तथा टर्म लोन की बकाया किस्तों को शामिल किया गया था। उस समय इस योजना पर लगभग 10,000 करोड़ रुपये का खर्च आया था, जो मौजूदा कीमतों के हिसाब से 50,000 करोड़ रुपये से अधिक है।</p>
<p>इसके बाद 2008 में एग्रीकल्चरल डेट वेवर एंड डेट रिलीफ स्कीम (ADWDRS) लागू की गई, जो कहीं अधिक बड़ी योजना थी और जिस पर लगभग 52,500 करोड़ रुपये खर्च हुए। इस योजना में वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी संस्थाओं और लोकल एरिया बैंकों से लिए गए ऋण शामिल थे। इसमें छोटे और सीमांत किसानों को अधिक राहत देने का प्रावधान किया गया था।</p>
<p><strong>राज्यों की बढ़ती भूमिका</strong><br />हाल के वर्षों में कृषि ऋण माफी की घोषणाएं केंद्र सरकार के बजाय राज्य सरकारों द्वारा अधिक की जाने लगी हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार 2014-15 के बाद से अब तक कम से कम दस राज्यों ने लगभग 2.4 लाख करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफी की घोषणा की है। वर्ष 2017 से 2019 के बीच कई राज्यों ने बड़े पैमाने पर ऐसी योजनाएं लागू कीं। राजस्थान ने लगभग 18,000 करोड़ रुपये की ऋण माफी की घोषणा की, मध्य प्रदेश ने 36,500 करोड़ रुपये की योजना शुरू की, जबकि छत्तीसगढ़ ने 6,100 करोड़ रुपये का ऋण माफी कार्यक्रम लागू किया।&nbsp;</p>
<p>इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों के कर्ज का बोझ कम करना और ग्रामीण मांग को बढ़ावा देना था, लेकिन इनके दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर अर्थशास्त्रियों और नीति निर्माताओं के बीच मतभेद बने हुए हैं। कृषि ऋण माफी योजनाएं राज्य सरकारों पर भारी वित्तीय बोझ डाल सकती हैं। आमतौर पर इसका प्रभाव तीन से पांच वर्षों तक पड़ता है, क्योंकि या तो योजनाएं चरणबद्ध तरीके से लागू की जाती हैं या फिर बैंकों का भुगतान कई बजटीय वर्षों में किया जाता है।</p>
<p>विभिन्न राज्यों में इसका वित्तीय प्रभाव काफी अलग-अलग रहा है। कुछ मामलों में ऋण माफी की लागत सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 0.1 प्रतिशत से लेकर लगभग 2 प्रतिशत तक रही है। विश्लेषकों का कहना है कि इससे सरकारों की कृषि अवसंरचना पर खर्च करने की क्षमता सीमित हो सकती है।</p>
<p>महाराष्ट्र के मामले में राज्य सरकार का कहना है कि उसकी वित्तीय स्थिति इतनी मजबूत है कि वह इस योजना का खर्च वहन कर सकती है। हालांकि आलोचकों का तर्क है कि इस तरह का बड़ा खर्च कृषि क्षेत्र में उत्पादक निवेश को प्रभावित कर सकता है।</p>
<p><strong>क्रेडिट अनुशासन पर चिंता</strong><br />भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आगाह किया है कि बार-बार कर्ज माफी की घोषणाएं बैंकिंग व्यवस्था में क्रेडिट अनुशासन को कमजोर करती हैं और वित्तीय तंत्र में नैतिक जोखिम पैदा करती हैं। आरबीआई के अनुसार, जब उधार लेने वालों लगता है कि भविष्य में उनका कर्ज माफ हो सकता है, तो कुछ लोग इस उम्मीद में कर्ज की अदायगी टाल देते हैं या भुगतान करना बंद कर देते हैं। इस तरह का व्यवहार ऋण चुकाने की संस्कृति को कमजोर करता है और बैंकों की वित्तीय सेहत पर भी नकारात्मक असर डालता है। विश्लेषकों का कहना है कि इसका असर विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर अधिक पड़ता है, क्योंकि निजी बैंकों की तुलना में उनका कृषि ऋण में जोखिम ज्यादा होता है।</p>
<p>मैक्वेरी ग्रुप के विश्लेषक सुरेश गणपति ने एक नोट में कहा, &ldquo;कृषि क्षेत्र में कर्जमाफी अंततः गैर-निष्पादित ऋण (NPL) बढ़ाने का कारण बनती है, क्योंकि इससे क्रेडिट संस्कृति कमजोर होती है।&rdquo; उन्होंने कहा कि इसका असर सरकारी बैंकों पर ज्यादा पड़ सकता है, क्योंकि उनके कृषि ऋण पोर्टफोलियो में अपेक्षाकृत अधिक संख्या में जोखिम वाले उधार होते हैं। हालांकि सभी बैंकों को प्राथमिकता क्षेत्र ऋण लक्ष्य, जिसमें कृषि भी शामिल है, पूरा करना होता है, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ग्रामीण और कृषि ऋण में हिस्सेदारी आम तौर पर अधिक होती है।</p>
<p><strong>ऋण माफी की जगह प्रत्यक्ष सहायता?</strong><br />फार्म लोन माफी को लेकर एक और आलोचना यह है कि इसका लाभ हमेशा सबसे कमजोर किसानों तक नहीं पहुंच पाता। बड़ी संख्या में छोटे और सीमांत किसान अपनी जरूरतों के लिए साहूकारों जैसे अनौपचारिक स्रोतों से कर्ज लेते हैं, इसलिए बैंक ऋण माफी योजनाओं का उन्हें सीधा लाभ नहीं मिल पाता।</p>
<p>अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि बड़ी घोषणाओं के बावजूद पात्र किसानों में से केवल एक हिस्से को ही वास्तव में राहत मिलती है। एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, 2014 के बाद से 3.7 करोड़ पात्र किसानों में से मार्च 2022 तक केवल लगभग आधे किसानों को ही ऋण माफी का लाभ मिल पाया था। इसी कारण अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऋण माफी के बजाय प्रत्यक्ष आय सहायता कार्यक्रम अधिक प्रभावी हो सकते हैं। ऐसे कार्यक्रम अपेक्षाकृत कम वित्तीय बोझ में अधिक व्यापक किसान वर्ग को सहायता प्रदान कर सकते हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ फिर शुरू हुई किसान कर्ज माफी, महाराष्ट्र की 35,000 करोड़ रुपये की घोषणा से क्रेडिट अनुशासन पर बहस तेज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[13 मार्च को जारी होगी पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त, 9.32 करोड़ किसानों को मिलेगा लाभ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/the-22nd-installment-of-the-pm-kisan-yojana-will-be-released-on-march-13-benefiting-millions-of-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 10 Mar 2026 13:13:05 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/the-22nd-installment-of-the-pm-kisan-yojana-will-be-released-on-march-13-benefiting-millions-of-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Yojana) के तहत मिलने वाली 22वीं किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार 13 मार्च को योजना की 22वीं किस्त जारी करने जा रही है। इस किस्त के तहत देशभर के करोड़ों किसानों के बैंक खातों में सीधे 2000 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे।</p>
<p>सरकार की ओर से इस तारीख की आधिकारिक पुष्टि कर दी गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पीएम किसान के आधिकारिक अकाउंट से जारी पोस्ट में बताया गया है कि योजना की 22वीं किस्त 13 मार्च को किसानों के खातों में भेजी जाएगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम के गुवाहाटी से देश के 9.32 करोड़ से ज्यादा किसानों के खातों में पीएम-किसान योजना की 22वीं किस्त ट्रांसफर करेंगे।</p>
<h3>क्या है पीएम किसान योजना</h3>
<p>प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना केंद्र सरकार की प्रमुख किसान कल्याण योजनाओं में से एक है। इस योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से की गई थी।</p>
<p>इसके तहत पात्र किसानों को हर साल 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है। हर चार महीने में 2000 रुपये की एक किस्त जारी की जाती है।</p>
<h3>करोड़ों किसानों को मिलेगा लाभ</h3>
<p>सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस योजना का लाभ देश के 9 करोड़ से अधिक किसानों को मिल रहा है। केंद्र सरकार अब तक किसानों के खातों में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर कर चुकी है।</p>
<p>22वीं किस्त जारी होने के बाद भी बड़ी संख्या में किसानों को आर्थिक सहायता मिलेगी, जिससे उन्हें खेती से जुड़े खर्चों जैसे बीज, खाद और अन्य कृषि कार्यों में मदद मिलेगी।</p>
<h3>किस्त पाने के लिए जरूरी है ई-केवाईसी</h3>
<p>सरकार ने योजना के लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) को अनिवार्य कर दिया है। जिन किसानों ने अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराया है, उन्हें किस्त मिलने में परेशानी हो सकती है। किसान पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ओटीपी आधारित ई-केवाईसी पूरी कर सकते हैं।</p>
<p>इसके अलावा बैंक खाते का आधार से लिंक होना भी जरूरी है। कई मामलों में आधार सीडिंग या बैंक खाते की जानकारी गलत होने के कारण भी किस्त अटक जाती है।</p>
<h3>ऐसे चेक कर सकते हैं किस्त का स्टेटस</h3>
<p>किसान पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी किस्त का स्टेटस भी चेक कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें &lsquo;Beneficiary Status&rsquo; सेक्शन में जाकर अपना आधार नंबर, मोबाइल नंबर या रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करना होगा।</p>
<p>इससे किसानों को यह जानकारी मिल जाएगी कि उनकी किस्त जारी हुई है या नहीं और अगर कोई समस्या है तो उसे समय रहते ठीक कराया जा सकता है।&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr">Honoring our <a href="https://twitter.com/hashtag/Annadata?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Annadata</a>, 22nd Instalment of <a href="https://twitter.com/hashtag/PMKISAN?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#PMKISAN</a> will be released on 13th March 2026.<a href="https://twitter.com/hashtag/PMKISAN?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#PMKISAN</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/22ndinstalment?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#22ndinstalment</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/PMKisansammannidhi?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#PMKisansammannidhi</a><a href="https://twitter.com/OfficeofSSC?ref_src=twsrc%5Etfw">@OfficeofSSC</a> <a href="https://twitter.com/AgriGoI?ref_src=twsrc%5Etfw">@AgriGoI</a> <a href="https://twitter.com/mygovindia?ref_src=twsrc%5Etfw">@mygovindia</a> <a href="https://twitter.com/icarindia?ref_src=twsrc%5Etfw">@icarindia</a> <a href="https://twitter.com/DDKisanChannel?ref_src=twsrc%5Etfw">@DDKisanChannel</a> <a href="https://twitter.com/MoRD_GoI?ref_src=twsrc%5Etfw">@MoRD_GoI</a> <a href="https://twitter.com/RNK_Thakur?ref_src=twsrc%5Etfw">@RNK_Thakur</a> <a href="https://twitter.com/PMOIndia?ref_src=twsrc%5Etfw">@PMOIndia</a> <a href="https://twitter.com/PIB_India?ref_src=twsrc%5Etfw">@PIB_India</a> <a href="https://t.co/aTYBdlyGKF">pic.twitter.com/aTYBdlyGKF</a></p>
&mdash; PM Kisan Samman Nidhi (@pmkisanofficial) <a href="https://twitter.com/pmkisanofficial/status/2031008486247875036?ref_src=twsrc%5Etfw">March 9, 2026</a></blockquote>
<p>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69afcb711144b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ 13 मार्च को जारी होगी पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त, 9.32 करोड़ किसानों को मिलेगा लाभ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69afcb711144b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[Iran War: गैस की कमी से सिर्फ 60% क्षमता पर चल रहे अधिकांश यूरिया प्लांट, कीमत भी 600 डॉलर प्रति टन हुई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/most-of-the-urea-plants-running-at-60-percent-of-capacity-due-to-iran-war-price-also-reach-600-dollars.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 10 Mar 2026 06:10:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/most-of-the-urea-plants-running-at-60-percent-of-capacity-due-to-iran-war-price-also-reach-600-dollars.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के युद्ध (Iran-US war) ने भारत में यूरिया उत्पादन (urea production) को धीमा कर दिया है। गैस की आपूर्ति घटने के चलते देश के अधिकांश यूरिया संयंत्र क्षमता का 60 फीसदी ही उत्पादन कर पा रहे हैं। केवल दक्षिण के प्लांट पूरी क्षमता से उत्पादन कर रहे हैं। इस स्थिति के चलते आने वाले समय में यूरिया की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका तो है ही, इसकी उत्पादन लागत भी बढ़ रही है। पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत 25 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 600 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई है। हालांकि अभी देश में यूरिया समेत अधिकांश उर्वरकों का स्टॉक पिछले साल से बेहतर है।</p>
<p>उद्योग सूत्रों के मुताबिक जिस स्तर पर गैस की आपूर्ति हो रही है, अधिकांश संयंत्र उसी अनुपात में उत्पादन कर पा रहे हैं। इसके साथ ही कुछ संयंत्र अप्रैल में होने वाले सालाना शटडाउन को कुछ पहले करने की तैयारी कर रहे हैं ताकि गैस की कमी से पैदा हो रही स्थिति से निपटने में आसानी हो सके। लेकिन शटडाउन शेड्यूल को एक सप्ताह या अधिकतम दस दिन पहले ही लाया जा सकता है। अभी दो या तीन संयंत्र ही शटडाउन में हैं जो मार्च के तय शटडाउन शेड्यूल के मुताबिक ही बंद हैं।</p>
<p>ईरान के हमलों को देखते हुए कतर, यूएई, कुवैत, बहरीन और सऊदी अरब ने तेल और गैस संयंत्रों में उत्पादित होने वाली गैस का आयात बंद हो गया है। इन देशों ने अपने कई संयंत्रों को बंद भी कर दिया है। साथ ही, होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही बंद होने के चलते इन देशों से तेल और गैस की आपूर्ति भी बंद हो गयी है। इस कारण वैश्विक बाजार में गैस की कीमतें 20 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू को पार कर गई हैं, जबकि गेल के जरिये भारतीय उर्वरक संयंत्रों के लिए गैस की पूल्ड कीमत 13.63 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू है। यह कीमत प्लांट पर डिलीवरी की कीमत है। भारत अपनी गैस की जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत आयात से पूरा करता है।</p>
<p><strong>यूरिया की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी</strong><br />वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतों (urea price) में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक दाम 600 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गये हैं। फरवरी की शुरुआत में इसकी कीमत 475 डॉलर प्रति टन के आसपास थी। इस तरह एक महीने में ही दाम 25 प्रतिशत से अधिक बढ़ गए हैं।&nbsp;</p>
<p>भारत सालाना करीब 100 लाख टन यूरिया का आयात करता है। उक्त सूत्र का कहना है कि अगर युद्ध मार्च के अंत तक खिंचता है तो उर्वरक उद्योग और देश के किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। वैसे भी सऊदी अरब, यूएई, कुवैत व बहरीन समेत अन्य खाड़ी देशों में बंद गैस संयंत्रों को दोबारा उत्पादन की स्थिति में लाने में कम से एक माह का समय लगेगा। भारत में अधिकांश गैस की आपूर्ति खाड़ी देशों से ही होती है, इसलिए स्थिति काफी गंभीर हो सकती है।</p>
<p>हालांकि भारत के लिए ओमान से यूरिया आयात करने का विकल्प है। वहां भारतीय सहकारी संस्थाओँ इफको और कृभको का ओमान के साथ यूरिया उत्पादन का एक संयुक्त उद्यम है। इसके अलावा वहां एक और यूरिया संयंत्र है। हालांकि केवल वहां से आयात की जरूरत पूरी नहीं होगी।</p>
<p>दूसरे सबसे अधिक आयात होने वाले उर्वरक डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) के तैयार उर्वरक और कच्चे माल में आयात पर भारत की निर्भरता लगभग शतप्रतिशत है। इसकी देश में सालाना करीब 100 लाख टन की खपत होती है। फिलहाल रूस को छोड़कर कहीं से भी डीएपी आयात की संभावना नहीं बन रही है। डीएपी की कीमत युद्ध के पहले ही करीब 65 डॉलर प्रति टन बढ़कर 740 डॉलर प्रति टन पर चली गई थी।</p>
<p>असल में इस युद्ध के लंबा खिंचने से भारत के सामने एलएनजी, अमोनिया, सल्फर और फॉस्फेटिक उर्वरकों की आपूर्ति का संकट पैदा होने की आशंका है। अमोनिया की जरूरत यूरिया उत्पादन में होती है। देश में सालाना करीब 400 लाख टन यूरिया की खपत होती है। अगर अधिक अवधि तक संयंत्र उत्पादन क्षमता से कम स्तर पर चलेंगे तो आयात पर निर्भरता और बढ़ जाएगी।</p>
<p><strong>फिलहाल स्टॉक पिछले साल से अधिक</strong><br />हालांकि अभी देश में उर्वरकों का स्टॉक पिछले साल से बेहतर है, लेकिन संकट लंबा खिंचा तो उपलब्धता की समस्या पैदा हो सकती है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक फरवरी, 2026 के अंत में देश में यूरिया का स्टॉक 55 लाख टन रहा है। जबकि पिछले साल इसी समय इसका स्टॉक 49 लाख टन था। वहीं डीएपी केऔ मामले में स्थिति&nbsp;र बेहतर है। चालू साल में फरवरी के अंत में डीएपी का स्टॉक 25 लाख टन रहा जो इसके पहले साल इसी समय 13 लाख टन रहा था। म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) का स्टॉक फरवरी, 2026 में पिछले साल से कम रहा है। यह 12.92 लाख टन रहा जो पिछले साल इसी समय 15 लाख टन था।&nbsp;</p>
<p>कॉम्प्लेक्स उर्वरकों में एनपीके के मामले में स्थिति बेहतर है। फरवरी, 2026 के अंत में एनपीके का स्टॉक 54 लाख टन रहा जो पिछले साल इसी समय 32 लाख टन पर था। फरवरी के अंत में सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) का स्टॉक 32 लाख टन रहा जो पिछले साल इसी समय 22 लाख टन था।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ Iran War: गैस की कमी से सिर्फ 60% क्षमता पर चल रहे अधिकांश यूरिया प्लांट, कीमत भी 600 डॉलर प्रति टन हुई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66c709b3c7ad1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[युद्ध से वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल&amp;#45;पुथल, ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर के करीब लेकिन आपात भंडार जारी करने की चर्चा से दाम नीचे आए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/war-jolts-energy-markets-brent-reaches-120-dollars-but-retreats-as-g7-considers-emergency-release.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 09 Mar 2026 13:21:28 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/war-jolts-energy-markets-brent-reaches-120-dollars-but-retreats-as-g7-considers-emergency-release.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य-पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के चलते सोमवार को ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। हालांकि बाद में कीमतों में नरमी आई क्योंकि ऐसी खबरें आईं कि जी-7 देशों के वित्त मंत्री रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से आपातकालीन क्रूड रिलीज पर विचार कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने तेल आपूर्ति और शिपिंग मार्गों को प्रभावित किया है। इसी बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को संसद को बताया कि पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति के बीच भारत शांति और कूटनीति के प्रति प्रतिबद्ध है।</p>
<p>फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार जी-7 के अधिकारी और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फतीह बिरोल (Fatih Birol) न्यूयॉर्क में सोमवार एक आपातकालीन कॉल करने वाले हैं। इस बैठक में तेल बाजारों में आई भारी अस्थिरता को शांत करने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से कच्चा तेल रिलीज की संभावना पर चर्चा होगी।</p>
<p>रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका समेत कम से कम तीन G7 देश इस कदम के समर्थन में हैं। अमेरिकी अधिकारी कथित तौर पर 30-40 करोड़ बैरल कच्चा तेल जारी करने पर विचार कर रहे हैं, जो IEA प्रणाली के 1.2 अरब बैरल के आपात भंडार का लगभग 25-30 प्रतिशत हो सकता है। इन भंडारों का निर्माण मूल रूप से 1973-74 के तेल संकट के बाद गंभीर आपूर्ति बाधाओं के दौरान वैश्विक बाजारों को स्थिर रखने के लिए किया गया था।</p>
<p>आईईए के सदस्य देशों के पास सामूहिक रूप से 1.24 अरब बैरल से अधिक सरकारी भंडार मौजूद हैं। इसके अलावा उद्योग के पास लगभग 60 करोड़ बैरल अतिरिक्त भंडार भी है जिन्हें आपात स्थिति में उपयोग किया जा सकता है। IEA की स्थापना के बाद से रणनीतिक भंडारों का सामूहिक उपयोग केवल पांच बार किया गया है, जिनमें सबसे हालिया 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद हुआ था।</p>
<p>कीमतों में आंशिक गिरावट के बावजूद कच्चे तेल में तेजी बरकरार है। यह 2020 के बाद सबसे बड़ी एक-दिवसीय बढ़त मानी जा रही है। ब्रेंट क्रूड दिन में 15.65 प्रतिशत की बढ़त के साथ 107.20 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। अमेरिकी बेंचमार्क WTI कच्चा तेल 103.18 डॉलर पर था, जो 14.26 प्रतिशत ऊपर है।</p>
<p><strong>1970 के दशक के संकट की याद</strong><br />मौजूदा स्थिति ने 1970 के दशक के तेल संकट की याद ताजा कर दी है, जब ओपेक (OPEC) के अरब सदस्य देशों ने 1973 के अरब-इजरायल युद्ध के दौरान तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतें लगभग 300 प्रतिशत तक उछल गई थीं। उस समय वैश्विक तेल कीमतें लगभग 3 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 12 डॉलर तक पहुंच गई थीं क्योंकि अचानक वैश्विक आपूर्ति का लगभग 7-9 प्रतिशत बाजार से गायब हो गया था।</p>
<p>मौजूदा स्थिति ने भी उत्पादन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इराक के दक्षिणी तेल क्षेत्रों से उत्पादन लगभग 70 प्रतिशत गिर गया है और दैनिक उत्पादन युद्ध से पहले के करीब 43 लाख बैरल से घटकर 13 लाख बैरल रह गया है। इराक का तेल निर्यात भी 33.3 लाख बैरल प्रतिदिन से गिरकर केवल 800,000 बैरल रह गया है।</p>
<p>इराक पहला बड़ा तेल उत्पादक देश है जिसने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में टैंकर यातायात बाधित होने के कारण उत्पादन घटाया। इसके बाद कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात ने भी उत्पादन में कटौती की घोषणा की क्योंकि इस जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात लगभग ठप हो गया है।</p>
<p>पिछले सप्ताह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या नाटकीय रूप से घट गई। सामान्यतः प्रतिदिन 138 जहाज गुजरते थे, लेकिन 24 घंटे की अवधि में यह संख्या घटकर केवल दो रह गई, जिनमें से कोई भी तेल टैंकर नहीं था।&nbsp;</p>
<p><strong>ऊर्जा झटके का असर भारतीय मुद्रा पर</strong><br />ऊर्जा बाजारों में आए इस झटके का असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर दिखने लगा है। बढ़ती तेल कीमतों के कारण सोमवार को भारतीय रुपया गिरकर 92.347 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। रिजर्व बैंक ने रुपये में गिरावट को रोकने के लिए हस्तक्षेप किया, फिर भी इसमें इतनी गिरावट आई।</p>
<p>भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है। इसलिए वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल के प्रति उसकी अर्थव्यवस्था काफी संवेदनशील हो जाती है। इससे चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और महंगाई पर दबाव भी बढ़ सकता है।</p>
<p>कार्तिक गणेसन, फैलो और डायरेक्ट - स्टैटेजिक पार्टनरशिप, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW), ने कहा, "कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति की बाधाओं ने एक बार फिर आयातित कच्चे तेल के साथ भारत के नाजुक संबंध को सामने ला दिया है। निश्चित तौर पर यह हमें आयातित तेल पर अपनी निर्भरता घटाने वाले उपायों को खोजने के लिए प्रेरित करने वाला होना चाहिए। निजी वाहनों से जुड़ी तेल उत्पादों की मांग को उचित मूल्य निर्धारण के जरिए कम करना और शहरों में कुकिंग के लिए एलपीजी (LPG) की जगह पर इलेक्ट्रिक कुकिंग की दिशा में एक धीमी गति के बदलाव को प्रोत्साहित करना, अल्प से मध्यम अवधि में स्थितियों को सुधारने में मदद कर सकता है।"</p>
<p><strong>संसद में विदेश मंत्री का बयान</strong><br />इस बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को संसद में कहा कि पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति के बीच भारत शांति और कूटनीति के प्रति प्रतिबद्ध है। संसद के दोनों सदनों में स्वतः बयान देते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रम &ldquo;गंभीर चिंता का विषय&rdquo; हैं। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि संवाद, तनाव कम करने, संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के माध्यम से ही इस संकट का समाधान संभव है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69ae7b9d9072e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ युद्ध से वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल, ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर के करीब लेकिन आपात भंडार जारी करने की चर्चा से दाम नीचे आए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69ae7b9d9072e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार ने ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मीथेनॉल के मानक नोटिफाई किए, उर्वरक तथा अन्य इंडस्ट्री में कार्बन उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-notifies-standards-for-green-ammonia-and-green-methanol-aims-to-decarbonise-fertilizer-and-industrial-sectors.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 08 Mar 2026 17:14:05 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-notifies-standards-for-green-ammonia-and-green-methanol-aims-to-decarbonise-fertilizer-and-industrial-sectors.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मीथेनॉल के मानकों को अधिसूचित किया है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की ओर से जारी इन मानकों में उत्सर्जन सीमा और योग्यता शर्तों का जिक्र किया गया है। इनका पालन करने पर ही अमोनिया और मीथेनॉल को ग्रीन स्रोतों से प्राप्त ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल से उत्पादन का दर्जा मिल सकेगा। शनिवार को मंत्रालय की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यह अधिसूचना 27 फरवरी, 2026 को जारी की गई है। ये मानक उर्वरक तथा अन्य उद्योग क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन कम करने की प्रक्रिया को सुगम बनाएंगे।</p>
<p>ग्रीन अमोनिया मानक के अनुसार ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, अमोनिया संश्लेषण, परिशोधन, संपीड़न और उत्पादन स्थल पर भंडारण से पैदा कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 0.38 किलोग्राम कार्बन डायऑक्साइड समतुल्य प्रति किलोग्राम अमोनिया (kg CO2 eq/kg NH3) होगा जिसका गणन पूर्ववर्ती 12 महीनों की अवधि के औसत के रूप में किया जाएगा।</p>
<p>ग्रीन मीथेनॉल मानक के अनुसार ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, मीथेनॉल &nbsp;संश्लेषण, परिशोधन, संपीड़न और उत्पादन स्थल पर भंडारण से पैदा कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 0.44 किलोग्राम &nbsp;कार्बन डायऑक्साइड समतुल्य प्रति किलोग्राम मीथेनॉल (kg CO₂ eq/kg CH₃OH) होगा जिसका गणन पूर्ववर्ती 12 महीनों की अवधि के औसत के रूप में किया जाएगा।</p>
<p>अधिसूचना में आगे यह प्रावधान है कि ग्रीन मीथेनॉल उत्पादन के लिए कार्बन डाइऑक्साइड को बायोजेनिक स्रोतों या मौजूदा औद्योगिक स्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है। मंत्रालय समय-समय पर कार्बन डाइऑक्साइड के उपयुक्त स्रोतों में संशोधन कर सकता है। ऐसे संशोधन भविष्य की परियोजनाओं पर लागू होंगे और साथ ही इसमें पुराने नियमों के तहत छूट या विशेष रियायत दी जा सकेगी।</p>
<p>ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मीथेनॉल उत्पादन की प्रक्रिया में, अक्षय ऊर्जा में वह बिजली भी शामिल है जो नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न की गई है और जिसे लागू नियमों के अनुसार ऊर्जा भंडारण प्रणाली &nbsp;में जमा किया गया है या ग्रिड के साथ जोड़ा गया है। अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मीथेनॉल के मापन, रिपोर्टिंग, निगरानी, उत्पादन स्थल पर सत्यापन और प्रमाणन के लिए विस्तृत कार्यप्रणाली नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा अलग से जारी की जाएगी।</p>
<p>विज्ञप्ति के अनुसार, ये मानक उर्वरक, शिपिंग, बिजली और भारी उद्योगों जैसे क्षेत्रों के कार्बन उत्सर्जन को कम करने की प्रक्रिया को सुगम बनाएंगे। साथ ही ग्रीन ईंधन के एक विश्वसनीय उत्पादक और निर्यातक के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करेंगे।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार ने ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मीथेनॉल के मानक नोटिफाई किए, उर्वरक तथा अन्य इंडस्ट्री में कार्बन उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ईरान युद्ध से भारत के 11.8 अरब डॉलर के कृषि निर्यात पर खतरा, जानिए किस राज्य के लिए कितना जोखिम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/west-asia-conflict-puts-11.8-billion-of-india-agricultural-exports-at-risk.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 08 Mar 2026 13:22:47 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/west-asia-conflict-puts-11.8-billion-of-india-agricultural-exports-at-risk.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत का कृषि निर्यात पश्चिम एशियाई बाजारों पर काफी हद तक निर्भर हैं। वर्ष 2025 में इस क्षेत्र को कृषि और खाद्य उत्पादों का निर्यात लगभग 11.8 अरब डॉलर का रहा, जो देश के कुल कृषि निर्यात का 21.8 प्रतिशत है। इस व्यापार में अनाज, फल, सब्जियां और मसाले प्रमुख हैं, जबकि केला, चावल, मसाले और मांस जैसे उत्पादों की खाड़ी देशों पर विशेष रूप से अधिक निर्भरता है। ऐसे में यदि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो इसका असर भारत के किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और कृषि निर्यातकों पर हो सकता है।</p>
<p>थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भौगोलिक निकटता और खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के कारण यह क्षेत्र लंबे समय से भारत के खाद्य निर्यात के लिए एक स्वाभाविक बाजार रहा है। हालांकि, क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण शिपिंग मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, बीमा लागत बढ़ रही है और लॉजिस्टिक्स को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।&nbsp;</p>
<p><strong>प्रभावित होने वाले उत्पाद</strong></p>
<p><strong>फल, सब्जियां और चावल</strong></p>
<p>वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को अनाज, फल, सब्जियां और मसालों का लगभग 7.48 अरब डॉलर का निर्यात किया। इस श्रेणी में भारत के कुल वैश्विक निर्यात का 29.2% हिस्सा पश्चिम एशिया को जाता है। प्रमुख निर्यातित उत्पादों में चावल, केले, प्याज, अन्य सब्जियां, दालें, मेवे, कॉफी, चाय और विभिन्न प्रकार के मसाले शामिल हैं।</p>
<p>सबसे अधिक संभावित प्रभाव चावल पर हो सकता है। भारत ने 2025 में पश्चिम एशिया को 4.43 अरब डॉलर का चावल निर्यात किया, जो भारत के कुल वैश्विक चावल निर्यात का 36.7% है। इस कारण पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के चावल उत्पादकों के लिए खाड़ी देश बेहद महत्वपूर्ण बाजार हैं।</p>
<p>केला निर्यात 39.65 करोड़ डॉलर का रहा, जिसमें से 79.6% केला पश्चिम एशिया को गया। इससे तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात के केला उत्पादक किसान इस बाजार पर काफी निर्भर हो गए हैं। प्याज और लहसुन का निर्यात 11.1 करोड़ डॉलर का रहा, जबकि अन्य सब्जियों का निर्यात 9.15 करोड़ डॉलर का था। इन उत्पादों के भारत के कुल निर्यात में से क्रमशः 26.9% और 50.8% हिस्सा पश्चिम एशिया को गया।</p>
<p>मसाले और बागान फसलें भी क्षेत्रीय मांग से गहराई से जुड़ी हुई हैं। जायफल, जावित्री और इलायची का निर्यात 29.55 करोड़ डॉलर का रहा, जिसमें से 70.5% पश्चिम एशिया को भेजा गया।</p>
<p>जीरा और धनिया जैसे मसालों बीजों का निर्यात 16.3 करोड़ डॉलर का रहा, जबकि अदरक और हल्दी का निर्यात 17.3 करोड़ डॉलर का था। इन उत्पादों के भारत के कुल निर्यात का लगभग 23% पश्चिम एशिया को जाता है। इन फसलों से मुख्य रूप से केरल, कर्नाटक, राजस्थान और गुजरात के किसानों को आय प्राप्त होती है।</p>
<p>भारत ने पश्चिम एशिया को 24.07 करोड़ डॉलर की कॉफी और 41.01 करोड़ डॉलर की चाय का निर्यात किया। यह भारत के कुल कॉफी और चाय निर्यात का क्रमशः 17.7% और 44.1% है, जिससे कर्नाटक, केरल, असम और पश्चिम बंगाल के उत्पादकों को महत्वपूर्ण समर्थन मिलता है।</p>
<p><strong>प्रोसेस्ड फूड और चीनी</strong></p>
<p>वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को लगभग 135 करोड़ डॉलर के प्रोसेस्ड फूड, चीनी और कोको से बने उत्पादों का निर्यात किया। इस श्रेणी में मुख्य रूप से चीनी, ब्रेड और बिस्किट जैसे बेकरी उत्पाद, प्रोसेस्ड फल और मेवे तथा अन्य पैकेज्ड खाद्य उत्पाद शामिल हैं।</p>
<p>2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को 34.9 करोड़ डॉलर की चीनी, 12.18 करोड़ के बेकरी उत्पाद और 10.74 करोड़ डॉलर के प्रोसेस्ड फल और मेवों का निर्यात किया। ये निर्यात इन उत्पादों के भारत के कुल निर्यात का करीब 16 से 28 प्रतिशत हिस्सा हैं। इससे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं।</p>
<p><strong>मांस और समुद्री उत्पाद</strong></p>
<p>वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को मछली, मांस तथा जमे और प्रसंस्कृत उत्पादों का कुल 1.81 अरब डॉलर का निर्यात किया। इस श्रेणी में प्रमुख निर्यातित उत्पादों में ताजा या ठंडा बीफ, फ्रोजन बीफ, भेड़ और बकरी का मांस, तथा झींगा और प्रॉन जैसे समुद्री उत्पाद शामिल हैं।</p>
<p>पश्चिम एशिया को ताजा या ठंडे बीफ का निर्यात 2025 में 13.9 करोड़ डॉलर का रहा, जो इस उत्पाद के भारत के कुल निर्यात का 97.4 प्रतिशत है। वहीं फ्रोजन बीफ का निर्यात 1.27 अरब डॉलर रहा, जो भारत के वैश्विक निर्यात का 28.9 प्रतिशत है।</p>
<p>भेड़ और बकरी के मांस का निर्यात 9.52 करोड़ डॉलर का रहा, जिसमें से 98.9 प्रतिशत निर्यात पश्चिम एशिया को गया। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र के बाजारों में किसी भी प्रकार की बाधा का भारत के पशुधन निर्यातकों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में, जहां अधिकांश प्रसंस्करण इकाइयां स्थित हैं।</p>
<p>समुद्री उत्पादों का निर्यात भी इस क्षेत्र पर काफी निर्भर है। वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को झींगा और प्रॉन जैसे क्रस्टेशियन समुद्री उत्पादों का 22 करोड़ डॉलर का निर्यात किया। आंध्र प्रदेश, गुजरात और केरल के निर्यातकों की आजीविका भी इस बाजार से जुड़ी हुई है।</p>
<p><strong>डेयरी उत्पाद</strong></p>
<p>वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को 28.11 करोड़ डॉलर के डेयरी उत्पादों का निर्यात किया, जो देश के कुल डेयरी निर्यात का 28.9 प्रतिशत है। इस श्रेणी में प्रमुख निर्यातित उत्पादों में मक्खन व डेयरी फैट तथा चीज और दही शामिल हैं।</p>
<p>पश्चिम एशिया को मक्खन और डेयरी फैट का निर्यात 20.3 करोड़ डॉलर का रहा, जो इन उत्पादों के भारत के कुल निर्यात का 58.1 प्रतिशत है। वहीं चीज और दही का निर्यात 3.14 करोड़ डॉलर का रहा, जिसमें से 47.8 प्रतिशत निर्यात इसी क्षेत्र को गया। खाड़ी देशों की मांग गुजरात, पंजाब और राजस्थान के डेयरी प्रोसेसिंग उद्योग को सहारा देती है।&nbsp;</p>
<p><strong>पेय पदार्थ और अल्कोहल</strong></p>
<p>वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को 19.75 करोड़ डॉलर के मादक और गैर-मादक पेय पदार्थों का निर्यात किया। यह इस श्रेणी में भारत के कुल निर्यात का 43.3 प्रतिशत है। प्रमुख निर्यातित उत्पादों में सॉफ्ट ड्रिंक्स और अन्य गैर-मादक पेय पदार्थ तथा बीयर शामिल हैं।</p>
<p>पश्चिम एशिया को सॉफ्ट ड्रिंक्स और अन्य गैर-मादक पेय पदार्थों का निर्यात 5.15 करोड़ डॉलर का रहा, जो इन उत्पादों के कुल भारतीय निर्यात का 55.6 प्रतिशत है। वहीं बीयर का निर्यात 3.42 मिलियन डॉलर का रहा और 81 प्रतिशत निर्यात इसी क्षेत्र को गया। यह दर्शाता है कि भारतीय पेय उद्योग के निर्यातक खाड़ी बाजारों पर काफी हद तक निर्भर हैं।</p>
<p><strong>तंबाकू और संबंधित उत्पाद</strong></p>
<p>वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को 23.8 करोड़ डॉलर का कच्चा तंबाकू, 5.46 करोड़ डॉलर की सिगरेट और सिगार तथा 21.58 करोड़ डॉलर के तैयार तंबाकू उत्पादों का निर्यात किया। ये निर्यात इन उत्पादों के भारत के कुल निर्यात का 16.9 से 50.9 प्रतिशत हिस्सा हैं। ऐसे में पश्चिम एशिया के बाजार में किसी भी व्यवधान का प्रभाव आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात के तंबाकू उत्पादकों और प्रसंस्करण उद्योग पर पड़ सकता है।</p>
<p><strong>उत्पाद-वार निर्यात जोखिम</strong></p>
<p>पश्चिम एशिया भारत के कई कृषि उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार है, लेकिन विभिन्न उत्पादों में इस क्षेत्र पर निर्भरता अलग-अलग स्तर की है। जोखिम का आकलन इस आधार पर किया गया है कि भारत के कुल निर्यात का कितना हिस्सा पश्चिम एशिया को जाता है। जितना अधिक हिस्सा इस क्षेत्र में जाता है, उतना ही किसानों, प्रोसेसरों और निर्यातकों के लिए खाड़ी क्षेत्र में व्यापार बाधित होने का जोखिम बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>अत्यधिक जोखिम वाले उत्पाद:</strong><br />वे उत्पाद जिनके 70 प्रतिशत से अधिक निर्यात पश्चिम एशिया को होते हैं, सबसे अधिक जोखिम वाले हैं। इनमें भेड़ और बकरी का मांस (98.9%), ताजा या चिल्ड बीफ (97.4%), कोप्रा या सूखा नारियल गिरी (83.9%), बीयर (81.0%), केला (79.6%), तथा जायफल, जावित्री और इलायची (70.5%) शामिल हैं। इनकी खाड़ी बाजारों पर निर्भरता अत्यधिक है, क्योंकि इनके कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया को जाता है।</p>
<p><strong>उच्च जोखिम वाले उत्पाद:</strong><br />वे उत्पाद जिनके निर्यात का लगभग 40-60 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया के बाजार पर निर्भर है। उनमें मक्खन और डेयरी फैट (58.1%), सॉफ्ट ड्रिंक और गैर-मादक पेय (55.6%), नारियल और पाम कर्नेल तेल (52.5%), तैयार तंबाकू उत्पाद (50.9%), अन्य ताजी सब्जियां (50.8%), चीज और दही (47.8%), अन्य ताजे फल (44.8%), चाय (44.1%), सूरजमुखी या बिनौला का तेल (42.2%) तथा सिगरेट, सिगार और सिगारिलोस (40.0%) शामिल हैं।</p>
<p><strong>मध्यम जोखिम वाले उत्पाद:</strong><br />वे उत्पाद जिनके निर्यात का लगभग एक-चौथाई से एक-तिहाई हिस्सा पश्चिम एशिया को जाता है, उनमें चावल (36.7%), नारियल और काजू (35.8%), फ्रोजन बीफ (28.9%), प्रोसेस्ड फल और मेवे (27.6%), प्याज, लहसुन और कुछ सब्जियां (26.9%), जीरा और धनिया जैसे मसाला बीज (23.4%), अदरक और हल्दी (23.0%) तथा दालें (21.9%) शामिल हैं।</p>
<p><strong>कम जोखिम वाले उत्पाद:</strong><br />वे उत्पाद जिनकी पश्चिम एशिया पर निर्भरता अपेक्षाकृत कम है, उनमें कॉफी (17.7%), ब्रेड, बिस्कुट और बेकरी उत्पाद (17.7%), कच्चा तंबाकू (16.9%), अन्य फूड प्रिपरेशन (16.9%), चीनी (16.4%) तथा क्रस्टेशियंस जैसे झींगा और प्रॉन (4.3%) शामिल हैं।</p>
<p>जीटीआरआई (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि पिछले एक दशक में भारत के कृषि निर्यात की पश्चिम एशियाई बाजारों पर गहरी निर्भरता बन गई है, विशेषकर चावल, केले, मसाले, मांस और डेयरी उत्पादों जैसे सामान के लिए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में भारत ने अपने कृषि निर्यात का पांचवां हिस्सा इस क्षेत्र को भेजा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भौगोलिक निकटता और खाड़ी देशों में बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी के कारण यह क्षेत्र लंबे समय से भारतीय खाद्य उत्पादों के लिए एक स्वाभाविक बाजार रहा है। हालांकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, समुद्री शिपिंग मार्गों में व्यवधान और बीमा लागत में बढ़ोतरी के कारण अब निर्यातकों के सामने अनिश्चितता बढ़ रही है। इसका सीधा असर कई भारतीय राज्यों के किसानों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पर पड़ सकता है।</p>
<p>विभिन्न उत्पादों के लिए जोखिम का स्तर अलग है। भेड़ और बकरी का मांस, ताजा बीफ, केले, खोपरा (सूखा नारियल) और कुछ मसालों का 70 प्रतिशत से अधिक निर्यात पश्चिम एशिया को होता हैं। ऐसे में यदि व्यापार प्रवाह बाधित होता है तो ये क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा डेयरी उत्पाद, पेय पदार्थ, चाय और कई खाद्य तेल भी खाड़ी देशों की मांग पर काफी हद तक निर्भर हैं। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अस्थिरता बनी रहती है तो इसका असर भारत की कृषि अर्थव्यवस्था पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ईरान युद्ध से भारत के 11.8 अरब डॉलर के कृषि निर्यात पर खतरा, जानिए किस राज्य के लिए कितना जोखिम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमित शाह ने इफको की पारादीप इकाई में 700 करोड़ का सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट राष्ट्र को समर्पित किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/amit-shah-dedicates-iffco’s-₹700-crore-sulphuric-acid-plant-at-paradeep-to-boost-fertiliser-production-capacity.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 07 Mar 2026 14:58:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/amit-shah-dedicates-iffco’s-₹700-crore-sulphuric-acid-plant-at-paradeep-to-boost-fertiliser-production-capacity.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ओडिशा के पारादीप स्थित इफको (इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइज़र कोऑपरेटिव लिमिटेड- IFFCO) इकाई में नये सल्फ्यूरिक एसिड संयंत्र-3 को राष्ट्र के नाम समर्पित किया। यह संयंत्र देश में उर्वरक उत्पादन को मजबूत करने और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।<br />&nbsp;<br />यह नया संयंत्र लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है और इसकी उत्पादन क्षमता करीब 2000 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। इसके शुरू होने से पारादीप स्थित इफको इकाई की उत्पादन क्षमता और कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। यह इकाई देश की प्रमुख फॉस्फेटिक उर्वरक उत्पादन इकाइयों में से एक है।<br />&nbsp;<br />केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय और ओडिशा सरकार दोनों मिलकर ओडिशा के ग्रामीण जनजीवन को समृद्ध करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि आज इफ्को की पारादीप इकाई में सल्फ्यूरिक एसिड संयंत्र की तीसरी स्ट्रीम का लोकार्पण किया गया है। उन्होंने कहा कि 2005 में इफ्को ने इस प्लांट को 2577 करोड़ रुपए में खरीदा था और उस वक्त इसकी क्षमता 7.5 लाख मीट्रिक टन थी। आज यह क्षमता बढ़कर 22 लाख मीट्रिक टन तक पहुँच गई है। इसमें ब्लेंडेड उर्वरक का उत्पादन लगभग 15% है और स्वदेशी डीएपी का उत्पादन 40% है।<br />&nbsp;<br />अमित शाह ने कहा कि देश में फर्टिलाइजर बनाने वाले हर कारखाने और केमिकल उद्योग में जहां भी सल्फ्यूरिक एसिड की जरूरत हो, उसका उत्पादन इफ्को की पारादीप यूनिट में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इफ्को अब नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और PM-PRANAM (PM Programme for Restoration, Awareness Generation, Nourishment and Amelioration of Mother Earth) योजना के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग में कमी लाने का आंदोलन चला रहा है, जिससे हमारी भूमि का संरक्षण होगा। उन्होंने कहा कि इफ्को इस क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी कोऑपरेटिव यूनिट बन गई है।<br />&nbsp;<br />केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि इफ्को जो भी कमाती है, उसका फायदा देश के 5 करोड़ किसानों तक पहुंचता है और यही इफ्को की सबसे बड़ी ताकत है। इफ्को का 41,000 करोड़ रुपए से अधिक का टर्नओवर, 3800 करोड़ रुपए से अधिक का मुनाफा और 28,000 करोड़ रुपए से अधिक की नेटवर्थ का मालिकाना हक हमारे 5 करोड़ किसानों का है और यही कोऑपरेटिव का चमत्कार है।<br />&nbsp;<br />अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार और ओडिशा सरकार आगामी दिनों में कोऑपरेटिव क्षेत्र के माध्यम से ओडिशा के गरीब किसानों, ग्रामीण जनजीवन और विशेषकर माताओं-बहनों को आत्मनिर्भर बनाने का काम करेंगी।<br />&nbsp;<br />अमित शाह ने कहा कि सहकारिता आंदोलन भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला है। उन्होंने कहा कि इफको जैसी सहकारी संस्थाएं देश के करोड़ों किसानों को सशक्त बनाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरकार सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है, ताकि किसान आर्थिक रूप से मजबूत बनें और कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भर बने। उन्होंने यह भी कहा कि उर्वरक उत्पादन से जुड़ी आधुनिक परियोजनाएं किसानों को समय पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने में मदद करेंगी।<br />&nbsp;<br />इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी, इफको के प्रबंध निदेशक के.जे. पटेल, कई सांसद, विधायक, राज्य सरकार के मंत्री तथा केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।</p>
<p>मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि पारादीप में स्थापित यह नया संयंत्र ओडिशा के औद्योगिक विकास को नई गति देगा। उन्होंने कहा कि ओडिशा तेजी से औद्योगिक प्रगति कर रहा है और ऐसे बड़े प्रोजेक्ट राज्य में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने में सहायक होंगे।<br />&nbsp;<br />केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इफको की यह परियोजना देश की उर्वरक उत्पादन क्षमता को और मजबूत बनाएगी। इससे किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।<br />&nbsp;<br />इफको अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने कहा कि इफको हमेशा से किसानों की सेवा और सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए काम करता रहा है। उन्होंने कहा कि पारादीप में सल्फ्यूरिक एसिड संयंत्र-3 की स्थापना इफको की किसानों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस संयंत्र के शुरू होने से उर्वरक उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ेगी और उत्पादन प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी। उन्होंने कहा कि इफको का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाना है।<br />&nbsp;<br />इफको के प्रबंध निदेशक के.जे. पटेल ने संयंत्र के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह आधुनिक तकनीक से तैयार किया गया है। इससे पारादीप इकाई की उत्पादन क्षमता और दक्षता बढ़ेगी और उर्वरक उत्पादन की आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत होगी।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69abef4e799ff.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमित शाह ने इफको की पारादीप इकाई में 700 करोड़ का सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट राष्ट्र को समर्पित किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[निर्यातकों को संकट से उबरने में मदद करेगी सरकार, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/the-government-will-help-exporters-overcome-the-crisis-says-union-minister-piyush-goyal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Mar 2026 17:02:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/the-government-will-help-exporters-overcome-the-crisis-says-union-minister-piyush-goyal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारतीय निर्यातकों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार सभी उपलब्ध नीतिगत उपायों का उपयोग करेगी। यह बात वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में <strong>भारतीय विदेश व्यापार संस्थान</strong> (आईआईएफटी) द्वारा आयोजित वाइस चांसलर्स कॉन्क्लेव के दौरान कही।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री <strong>पीयूष गोयल</strong> ने बताया कि स्थिति पर लगातार समीक्षा की जा रही है और एक्सपोर्टर्स को सपोर्ट करने के लिए सरकार हर पॉलिसी टूल और एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन का इस्तेमाल करेगी। इसके लिए एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन भी किया है।</p>
<p>ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद भारतीय निर्यातकों को पश्चिम एशिया और खाड़ी के देशों में माल भेजने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। जंग के हालत से सप्लाई चेन बाधित हुई हैं और माल ढुलाई व बीमा की लागत बढ़ गई है।</p>
<p>गोयल ने कहा कि सरकार बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय तथा शिपिंग कंपनियों के साथ लगातार बातचीत कर रही है ताकि निर्यातकों पर बढ़ते दबाव को कम करने के उपाय खोजे जा सकें। उन्होंने दावा किया कि अपने एक्सपोर्टर्स को सपोर्ट करने में हम पीछे नहीं रहेंगे। सरकार ऐसे उपायों पर काम कर रही है जिनसे निर्यातकों को राहत मिल सके। उम्मीद है कि अगले दो दिनों में कुछ कदम अंतिम रूप ले लेंगे।</p>
<p>आईआईएफटी द्वारा भारत मंडपम में आयोजित वाइस चांसलर्स कॉन्क्लेव 2026 में &ldquo;विकसित भारत 2047 के लिए उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की नई कल्पना&rdquo; विषय पर मंथन हुआ। इस कार्यक्रम में 75 से अधिक कुलपति, शिक्षाविद और नीति-निर्माता शामिल हुए।</p>
<p>कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाली भारतीय शिक्षा को वैश्विक मंच तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है और इस दिशा में आईआईएफटी की पहल सराहनीय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विकसित देशों के साथ नौ मुक्त व्यापार समझौते अंतिम रूप दिए हैं, जिससे व्यापार, सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग के नए अवसर खुले हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69aaba8cb226e.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>आईआईएफटी के कुलपति <strong>प्रो. राकेश मोहन जोशी</strong> ने कहा कि इस कॉन्क्लेव ने शैक्षणिक जगत को एक साझा मंच प्रदान किया, जहां भारतीय संस्थानों के वैश्विक विस्तार और विकसित भारत 2047 के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य में उनकी भूमिका पर विचार किया गया। उन्होंने कहा, &ldquo;भारत के पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की अपार क्षमता है। वाइस चांसलर्स कॉन्क्लेव जैसी पहलों के माध्यम से आईआईएफटी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और संवाद को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है, जिससे भारतीय उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को मजबूती मिलेगी।&rdquo;</p>
<p>कॉन्क्लेव में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों, छात्र गतिशीलता, नियामकीय ढांचे और भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की रणनीतियों पर विषयगत चर्चाएं और विशेषज्ञ संवाद आयोजित किए गए। इस दौरान उच्च शिक्षा के उभरते वैश्विक रुझानों और वैश्विक शिक्षा सेवा बाजार में भारत की उपस्थिति मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा हुई।</p>
<p>सम्मेलन में कई प्रमुख शिक्षाविद शामिल हुए, जिनमें द नॉर्थकैप यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर प्रो. प्रेम व्रत, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संतिश्री धुलीपुडी पंडित, भारतीय विज्ञान संस्थान के प्रो. टी. जी. सीताराम और राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की कार्यकारी समिति के अध्यक्ष प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे शामिल थे। इसके अलावा वरिष्ठ नीति-निर्माता, शिक्षा क्षेत्र के नेता और वैश्विक शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि भी विचार-विमर्श में शामिल हुए।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ निर्यातकों को संकट से उबरने में मदद करेगी सरकार, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सब्जियों और दालों के दाम घटने से फरवरी में शाकाहारी थाली की कीमत स्थिर, लेकिन मांसाहारी थाली सस्ती: क्रिसिल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/home-cooked-veg-thali-cost-stable-non-veg-thali-cheaper-in-february-as-vegetable-and-pulse-prices-fall-crisil.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Mar 2026 15:35:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/home-cooked-veg-thali-cost-stable-non-veg-thali-cheaper-in-february-as-vegetable-and-pulse-prices-fall-crisil.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>फरवरी में घर पर तैयार की जाने वाली शाकाहारी थाली की कीमत सालाना आधार पर स्थिर रही, जबकि मांसाहारी थाली की लागत में 3% की गिरावट दर्ज की गई। यह जानकारी रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की तरफ से जारी &ldquo;रोटी राइस रेट&rdquo; इंडेक्स रिपोर्ट में दी गई है।&nbsp;</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार शाकाहारी थाली की कीमत स्थिर रहने के पीछे अलग-अलग खाद्य पदार्थों की कीमतों में हुए उतार-चढ़ाव का असर रहा। प्याज, आलू और दालों की कीमतों में गिरावट ने टमाटर की कीमतों में तेज वृद्धि के प्रभाव को संतुलित कर दिया।&nbsp;</p>
<p>टमाटर की कीमत फरवरी 2026 में सालाना आधार पर 43% बढ़कर लगभग 33 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि एक वर्ष पहले फरवरी 2025 में यह लगभग 23 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इस वृद्धि का मुख्य कारण नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच मंडियों में आवक में कमी रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि देरी से रोपाई होने के कारण फसल उत्पादन प्रभावित हुआ, जिससे इस अवधि में मंडियों में आवक लगभग 32% घट गई और आपूर्ति सीमित हो गई।&nbsp;</p>
<p>इसके विपरीत, प्याज की कीमतों में सालाना आधार पर 24% की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट बाजार में देर से आई खरीफ फसल के कारण आपूर्ति बढ़ने से हुई। प्याज की सीमित भंडारण अवधि और निर्यात की कमजोर मांग के कारण किसानों और व्यापारियों को तुरंत बाजार में बिक्री करनी पड़ी।&nbsp;</p>
<p>आलू की कीमतों में भी सालाना आधार पर 13% की कमी आई, क्योंकि फसल अपने चरम हारवेस्टिंग चरण में प्रवेश कर चुकी है। साथ ही पिछले रबी सीजन के कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू भी लगातार बाजार में निकाले जा रहे हैं, जिससे आपूर्ति बढ़ी और कीमतों पर दबाव पड़ा।&nbsp;</p>
<p>दालों की कीमतों में भी सालाना आधार पर 9% की गिरावट आई, जिसका कारण चालू वित्त वर्ष में शुरुआती भंडार अधिक होना है। जुलाई-जून मार्केटिंग वर्ष के लिए तूर दाल का भंडार लगभग 20% अधिक आंका गया है, जबकि जनवरी-दिसंबर मार्केटिंग वर्ष के लिए चना का भंडार इस सीजन में लगभग 10% अधिक है। इन अधिक भंडारों ने कीमतों को नीचे रखने में भूमिका निभाई।&nbsp;</p>
<p>हालांकि इस दौरान कुछ लागतों में वृद्धि भी दर्ज की गई। वैश्विक बाजार में सोयाबीन तेल की आपूर्ति कम होने के कारण वनस्पति तेल की कीमतों में सालाना आधार पर 4% की वृद्धि हुई, जिससे घरेलू बाजार में भी तेल महंगा हुआ। इसके अलावा एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में भी सालाना आधार पर 6% की वृद्धि हुई, जिससे घर पर भोजन तैयार करने की कुल लागत में गिरावट सीमित रही।&nbsp;</p>
<p>मांसाहारी थाली की लागत में गिरावट का मुख्य कारण ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में सालाना आधार पर लगभग 7% की कमी रहा। ब्रॉयलर चिकन इस थाली की कुल लागत का लगभग आधा हिस्सा होता है, हालांकि टमाटर की ऊंची कीमतों ने इस गिरावट को कुछ हद तक सीमित किया।&nbsp;</p>
<p>मासिक आधार पर भी फरवरी में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों थालियों की लागत में कमी आई। बेहतर आवक के कारण टमाटर, आलू और प्याज की कीमतों में गिरावट से शाकाहारी थाली की लागत 5% और मांसाहारी थाली की लागत 1% कम हुई।&nbsp;</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में शाकाहारी थाली तैयार करने की औसत लागत लगभग 27.1 रुपये रही, जबकि मांसाहारी थाली की लागत लगभग 55.6 रुपये रही।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सब्जियों और दालों के दाम घटने से फरवरी में शाकाहारी थाली की कीमत स्थिर, लेकिन मांसाहारी थाली सस्ती: क्रिसिल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तापमान बढ़ने के बावजूद गेहूं की फसल फिलहाल सुरक्षित, रात का तापमान बढ़ा तो हो सकता है नुकसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/despite-the-rising-temperatures-the-wheat-crop-is-currently-safe-if-the-night-temperature-rises-it-could-cause-damage.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Mar 2026 14:33:10 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/despite-the-rising-temperatures-the-wheat-crop-is-currently-safe-if-the-night-temperature-rises-it-could-cause-damage.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले दो हफ्ते में मौसम काफी तेजी से गर्म हुआ है। देश के उत्तरी, पश्चिमी और मध्य क्षेत्र के राज्यों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। हालांकि रात का तापमान अब भी कम है। इसलिए रबी की मुख्य फसल गेहूं के लिए फिलहाल कोई संकट नहीं है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दिन के साथ रात का तापमान भी तेजी से बढ़ा तो फसल को नुकसान हो सकता है।</p>
<p>मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। मध्य भारत में भी यह सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री तक पहुंच गया है। उत्तर और पूर्वी भारत के मैदानी क्षेत्रों में तापमान 30 से 34 डिग्री तक गया है।&nbsp;</p>
<p>हरियाणा के करनाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ व्हीट एंड बार्ले रिसर्च (IIWBR) के पूर्व डायरेक्टर डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने रूरल वॉयस को बताया कि इस समय दिन का तापमान तो 34-35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, लेकिन रात में तापमान 15 डिग्री से कम रहता है। इस कारण फसल में हीट स्ट्रेस की स्थिति नहीं बन रही है। रबी सीजन 2025-26 में रिकॉर्ड 334.1 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई है।&nbsp;</p>
<p>गेहूं की फसल में अभी बालियों में दूध बना हुआ है। यह धीरे-धीरे कठोर होकर गेहूं की शक्ल लेगा। शुरुआती वैरायटी में भी 5 से 7 प्रतिशत फसल में ही अभी दाने बनने की स्थिति है। डॉ. सिंह के अनुसार, अगले 10 से 15 दिन फसल के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस दौरान अगर तापमान अधिक बढ़ा तो गेहूं के दाने सिकुड़ सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>गौरतलब है कि वर्ष 2022 में अचानक तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल को काफी नुकसान हुआ था। दाने सिकुड़ने के कारण अलग-अलग इलाकों में पैदावार 20 प्रतिशत तक घट गई थी।</p>
<p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट (2024-25) के अनुसार, वर्ष 2021-22 में भारत में गेहूं उत्पादन घट कर 1077.42 लाख टन रह गया था। उससे पहले 2020-21 में उत्पादन 1095.9 लाख टन था। वर्ष 2022-23 में यह 1105.54 लाख टन और 2023-24 में 1132.92 लाख टन रहा। वर्ष 2024-25 में 1174.94 लाख टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ।</p>
<p>हालांकि मौसम विभाग का अनुमान है कि पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 7 से 10 मार्च के दौरान एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ देखने को मिलेगा। इसके प्रभाव से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में हल्की वर्षा और बर्फबारी हो सकती है। तब तापमान में भी कुछ राहत मिल सकती है।</p>
<p>बढ़ते तापमान को देखते हुए डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने किसानों को पौधों में पानी लगाने में सावधानी बरतने की सलाह दी है। हालांकि उनका कहना है कि पानी देने से पहले किसानों को हवा की दिशा और गति का ध्यान रखना चाहिए। अगर हवा की गति ज्यादा है तो पानी न लगाएं, वर्ना पौधे गिर सकते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार सुबह 11.30 बजे सफदरजंग में हवा की गति 14.8 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। शुक्रवार की सुबह यह गति 11 किमी प्रतिघंटा से कुछ अधिक थी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ तापमान बढ़ने के बावजूद गेहूं की फसल फिलहाल सुरक्षित, रात का तापमान बढ़ा तो हो सकता है नुकसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने पोस्ट&amp;#45;बजट वेबिनार में निर्यातोन्मुख कृषि और तकनीक अपनाने पर जोर दिया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-modi-urges-export-oriented-agriculture-and-technology-adoption-at-post-budget-webinar-on-rural-transformation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Mar 2026 14:32:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-modi-urges-export-oriented-agriculture-and-technology-adoption-at-post-budget-webinar-on-rural-transformation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को &ldquo;कृषि और ग्रामीण परिवर्तन&rdquo; विषय पर आयोजित तीसरे पोस्ट-बजट वेबिनार को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसे तकनीक, निर्यात तथा फसल विविधीकरण के माध्यम से और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि देश के दीर्घकालिक विकास की एक रणनीतिक आधारशिला है और यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि केंद्रीय बजट के प्रावधानों का लाभ तेजी से जमीनी स्तर तक पहुंचे।&nbsp;</p>
<p>कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने किसानों की आय बढ़ाने और जोखिम कम करने के उद्देश्य से लागू की गई कई प्रमुख योजनाओं का जिक्र किया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 10 करोड़ से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है। इसके अलावा पीएम फसल बीमा योजना के तहत लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के बीमा दावों का भुगतान किया गया है, जबकि किसानों के लिए संस्थागत ऋण कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत में खाद्यान्न और दलहन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, लेकिन 21वीं सदी के दूसरे क्वार्टर में प्रवेश करते समय कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मांग में बदलाव को देखते हुए भारतीय कृषि को निर्यातोन्मुख बनाना जरूरी है ताकि किसानों की आय बढ़ सके।</p>
<p>इस दिशा में सरकार ने क्षेत्र विशेष के अनुसार नारियल, कोको, काजू और चंदन जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा है। बजट में पूर्वोत्तर राज्यों में अगरवुड और हिमालयी राज्यों में टेम्परेट नट फसलों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है। उन्होंने कहा, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में नारियल के पेड़ इतने पुराने हो चुके हैं कि उनमें वह क्षमता नहीं रही है। इसलिए इस बार बजट में नारियल पर विशेष बल दिया गया है, जिसका फायदा आने वाले दिनों में हमारे इन किसानों को मिलेगा। इन पहलों से मूल्य संवर्धन, ग्रामीण रोजगार और वैश्विक कृषि बाजारों में भारत की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने मत्स्य क्षेत्र की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है। वर्तमान में जलाशयों और तालाबों से लगभग 4 लाख टन मछली का उत्पादन हो रहा है, जबकि इसमें 20 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन की संभावना है, जो निर्यात और ग्रामीण आजीविका के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। उन्होंने ब्लू इकोनॉमी की संभावनाओं को साकार करने के लिए हैचरी, फीड और लॉजिस्टिक्स में नए कारोबारी मॉडल विकसित करने की आवश्यकता बताई।</p>
<p>पशुपालन क्षेत्र का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और अंडा उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर नस्ल, रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक प्रबंधन पर ध्यान दिया जा रहा है। पशुओं को खुरपका-मुंहपका रोग से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया गया है। सवा सौ करोड़ से अधिक डोज पशुओं को लगाई जा चुकी है।&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री ने एकल फसल पर निर्भरता कम करने के लिए फसल विविधीकरण पर भी जोर दिया। साथ ही उन्होंने कृषि में डिजिटल तकनीक के विस्तार और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को महत्वपूर्ण बताया। ई-नाम, किसान आईडी और डिजिटल भूमि सर्वेक्षण जैसी पहलों को कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।</p>
<p>उन्होंने ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं जैसे पीएम आवास योजना और पीएम ग्राम सड़क योजना का भी उल्लेख किया तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, अभी तक गांव की 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में हम सफल हो चुके हैं। अब 2029 तक और 3 करोड़ और लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने विशेषज्ञों, उद्यमियों और राज्य सरकारों से कृषि आपूर्ति श्रृंखला, एग्री-फिनटेक और भंडारण ढांचे को मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया ताकि ग्रामीण परिवर्तन की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्रधानमंत्री मोदी ने पोस्ट-बजट वेबिनार में निर्यातोन्मुख कृषि और तकनीक अपनाने पर जोर दिया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69aa97b3f2ac8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ईरान संकट से चावल निर्यात प्रभावित, मालभाड़ा और बीमा लागत बढ़ने के बीच निर्यातकों ने सरकार से की तत्काल राहत की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/iran-crisis-disrupts-rice-exports-exporters-seek-urgent-government-relief-amid-freight-surge-and-shipping-delays.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Mar 2026 17:26:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/iran-crisis-disrupts-rice-exports-exporters-seek-urgent-government-relief-amid-freight-surge-and-shipping-delays.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ईरान संकट के कारण भारत के चावल निर्यात कारोबार पर असर पड़ना शुरू हो गया है, जिसके चलते निर्यातकों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (आईआरईएफ) ने एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें प्रमुख समुद्री मार्गों पर अस्थिरता के कारण शिपिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात संचालन में गंभीर व्यवधान की जानकारी दी गई है।&nbsp;</p>
<p>निर्यातकों का कहना है कि इस संकट ने कई परिचालन समस्याएं पैदा कर दी हैं, जिनमें शिपिंग कंटेनरों की कमी, मध्य पूर्व के लिए जहाजों की आवाजाही रद्द होना और मालभाड़ा, ईंधन तथा बीमा लागत में तेज वृद्धि शामिल है। इन व्यवधानों के कारण माल की ढुलाई, डिलीवरी शेड्यूल और निर्यातकों के अनुबंधित भुगतान पर असर पड़ रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>शिपिंग में व्यवधान और बढ़ती लागत</strong><br />फेडरेशन के अनुसार इस संकट ने वैश्विक शिपिंग लॉजिस्टिक्स को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। सबसे बड़ी समस्या मध्य पूर्व के लिए कंटेनरों की उपलब्धता का न होना है, जिसका असर अन्य बाजारों के लिए होने वाली शिपमेंट पर भी पड़ रहा है। व्यवधान के कारण खाली कंटेनरों की आवाजाही और पुनः तैनाती प्रभावित हुई है, जिससे निर्यातकों को माल भेजने के लिए कंटेनर उपलब्ध कराने में कठिनाई हो रही है।&nbsp;</p>
<p>मालभाड़ा लागत में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। अंतरराष्ट्रीय थोक मालभाड़ा दरों में लगभग 15&ndash;20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि कंटेनर मालभाड़ा दरों में इससे भी अधिक तेजी आई है। एशिया से मध्य पूर्व के लिए कंटेनर दरें संकट से पहले 1,200-1,800 डॉलर प्रति एफईयू से बढ़कर वर्तमान में 3,500-4,500 डॉलर प्रति एफईयू तक पहुंच गई हैं, जो 80-150 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्शाती हैं।&nbsp;</p>
<p>इसके अलावा जहाजों में उपयोग होने वाले समुद्री ईंधन की कीमतों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। बंकर फ्यूल की कीमत लगभग 520 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से बढ़कर लगभग 700 डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे शिपिंग लागत और बढ़ गई है। निर्यातकों का कहना है कि इन अचानक बढ़ी लागतों के कारण मौजूदा निर्यात अनुबंधों और लाभ मार्जिन को बनाए रखना कठिन हो गया है।</p>
<p><strong>बीमा और जोखिम शुल्क में वृद्धि</strong><br />खाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाजों की लागत युद्ध जोखिम बीमा और अन्य अधिभारों के कारण भी बढ़ गई है। युद्ध जोखिम बीमा प्रीमियम, जो पहले जहाज के मूल्य का लगभग 0.10&ndash;0.125 प्रतिशत था, अब बढ़कर लगभग 1 प्रतिशत तक पहुंच गया है, यानी इसमें लगभग दस गुना वृद्धि हुई है। इसी प्रकार खाड़ी क्षेत्र से गुजरने के लिए बीमा प्रीमियम भी 0.125&ndash;0.20 प्रतिशत से बढ़कर 0.20&ndash;1 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो जोखिम के आकलन पर निर्भर करता है।&nbsp;</p>
<p>शिपिंग कंपनियों ने अतिरिक्त युद्ध जोखिम अधिभार भी लागू कर दिया है। कुछ मामलों में निर्यातकों ने प्रति कंटेनर लगभग 1,500 डॉलर तक का अतिरिक्त शुल्क लगने की सूचना दी है। इन अतिरिक्त लागतों के कारण निर्यातकों पर भारी वित्तीय दबाव पड़ रहा है, विशेष रूप से तब जब जहाज रद्द होने के कारण शिपमेंट में देरी हो रही है।</p>
<p><strong>बासमती की कीमतों में गिरावट</strong><br />इस संकट का असर घरेलू चावल बाजार पर भी पड़ने लगा है। निर्यातकों के अनुसार संकट शुरू होने के बाद पिछले 72 घंटों में भारत में बासमती चावल की कीमतों में लगभग 7-10 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। इससे निर्यातकों की कार्यशील पूंजी और लाभप्रदता पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।&nbsp;</p>
<p>उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि कीमतों में गिरावट, मालभाड़ा लागत में वृद्धि और शिपमेंट में देरी का संयुक्त प्रभाव निर्यातकों के नकदी प्रवाह पर गंभीर दबाव पैदा कर रहा है।</p>
<p><strong>विभिन्न चरणों पर फंसा माल</strong><br />निर्यातकों का कहना है कि इस समय निर्यात श्रृंखला के अलग-अलग चरणों में माल फंसा हुआ है। कुछ शिपमेंट जहाजों के रद्द होने के कारण लोडिंग पोर्ट पर ही अटके हुए हैं, जिससे भंडारण, डिमरेज और ग्राउंड रेंट जैसे शुल्क बढ़ते जा रहे हैं। कुछ माल रास्ते में ही फंसा हुआ है क्योंकि शिपिंग कंपनियों ने मार्ग बदल दिए हैं या देरी हो रही है। कुछ मामलों में माल गंतव्य बंदरगाह तक पहुंच चुका है, लेकिन बंदरगाहों पर भीड़ और लॉजिस्टिक अनिश्चितता के कारण डिलीवरी में देरी हो रही है।&nbsp;</p>
<p>परिवहन का समय भी काफी बढ़ गया है। पहले जो शिपमेंट स्वेज मार्ग से 25-30 दिन में पहुंचते थे, वे अब कुछ मामलों में 35-45 दिन ले रहे हैं, क्योंकि जहाजों को जोखिम वाले क्षेत्रों से बचने के लिए लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>सरकार से तत्काल राहत की मांग</strong><br />इन परिस्थितियों को देखते हुए इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन ने सरकार और एपीडा से कई राहत उपायों की मांग की है। मुख्य मांगों में से एक यह है कि जहाजों के रद्द होने या संकट से जुड़े अन्य कारणों के चलते रुके हुए माल पर लगने वाले भंडारण, डिमरेज और अन्य बंदरगाह शुल्कों को माफ किया जाए।&nbsp;</p>
<p>निर्यातकों ने यह भी अनुरोध किया है कि रास्ते में फंसे माल को वापस लाने या वैकल्पिक बाजारों में मोड़ने की अनुमति दी जाए। इसके लिए सीमा शुल्क विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक के साथ समन्वय कर दस्तावेजी और भुगतान से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने की आवश्यकता होगी।&nbsp;</p>
<p>एक अन्य प्रमुख मांग यह है कि सरकार इस व्यवधान को फोर्स मेज्योर जैसी असाधारण स्थिति के रूप में मान्यता देने वाला आधिकारिक परामर्श जारी करे। निर्यातकों का कहना है कि इससे उन्हें खरीदारों द्वारा लगाए जाने वाले अनुचित जुर्माने, कीमतों में कटौती या अनुबंध रद्द करने जैसी स्थितियों से बचने में मदद मिलेगी।&nbsp;</p>
<p><strong>बैंकिंग और कार्यशील पूंजी सहायता की मांग</strong><br />फेडरेशन ने बैंकों से भी प्रभावित निर्यातकों को अस्थायी कार्यशील पूंजी सहायता देने की मांग की है। निर्यातकों ने सुझाव दिया है कि कोविड-19 के दौरान दी गई राहत की तरह अतिरिक्त क्रेडिट सीमा और अस्थायी वित्तीय छूट प्रदान की जाए। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि इस तरह का समर्थन निर्यात गतिविधियों को जारी रखने और भारत की निर्यात प्रतिबद्धताओं को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।</p>
<p><strong>व्यापार पर पड़ सकता है असर</strong><br />निर्यातकों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है या और बढ़ता है, तो स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है। मालभाड़ा बढ़ने, माल की आवाजाही में अनिश्चितता और बीमा जोखिम बढ़ने के कारण भारत की चावल निर्यात आपूर्ति श्रृंखला लंबे समय तक प्रभावित रह सकती है।</p>
<p>फेडरेशन ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर संबंधित मंत्रालयों और शिपिंग प्राधिकरणों के साथ उठाए, ताकि लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को स्थिर किया जा सके और निर्यातकों को बढ़ते नुकसान से बचाया जा सके।&nbsp;</p>
<p>उद्योग जगत का कहना है कि समय पर हस्तक्षेप नहीं किया गया तो यह संकट न केवल निर्यातकों की वित्तीय स्थिति को प्रभावित करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की चावल आपूर्ति प्रतिबद्धताओं को पूरा करना भी मुश्किल हो सकता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ईरान संकट से चावल निर्यात प्रभावित, मालभाड़ा और बीमा लागत बढ़ने के बीच निर्यातकों ने सरकार से की तत्काल राहत की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उर्वरक स्टॉक पिछले साल से बेहतर, युद्ध सप्ताह भर और खिंचा तो बढ़ेगा संकट, कंपनियों ने घटाया यूरिया उत्पादन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/fertilizer-stocks-higher-than-last-year-but-prolonged-war-could-trigger-supply-crisis.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Mar 2026 15:20:46 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/fertilizer-stocks-higher-than-last-year-but-prolonged-war-could-trigger-supply-crisis.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध का देश में उर्वरक उत्पादन पर असर पड़ना शुरू हो गया है, लेकिन फिलहाल यूरिया और डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) सहित अधिकांश उर्वरकों का स्टॉक पिछले साल से बेहतर है। अगर युद्ध एक सप्ताह और खिंचता है तो देश में उर्वरकों का संकट पैदा हो सकता है। उर्वरकों और गैस, पोटाश तथा फॉस्फेट जैसे उसके कच्चे माल के मामले में देश की सबसे अधिक निर्भरता खाड़ी के देशों पर है। फिलहाल वहां से इनका आयात बंद हो गया है। गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से यूरिया का उत्पादन भी गिरा है, लेकिन यह कमी सात से आठ फीसदी के आसपास ही है।</p>
<p>उद्योग सूत्रों ने रूरल वॉयस को बताया कि फिलहाल कोई संकट नहीं है और इसकी वजह फरवरी, 2026 के अंत में उर्वरकों का स्टॉक फरवरी, 2025 से अधिक होना है। हालांकि चालू साल में पिछले साल के मुकाबले अधिकांश उर्वरकों की खपत भी बढ़ी है, लेकिन उसके बावजूद फरवरी के अंत में स्टॉक अधिक है। उक्त सूत्र के मुताबिक युद्ध के चलते गैस की आपूर्ति में 10 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। इसके चलते कुछ यूरिया उत्पादन संयंत्रों ने उत्पादन में सात से आठ फीसदी तक की कटौती की है। लेकिन अगर युद्ध एक सप्ताह और खिंचता है तो देश में उर्वरकों की उपलब्धता के मोर्चे मुश्किल बढ़ सकती है।</p>
<p>उद्योग सूत्रों के मुताबिक फरवरी, 2026 के अंत में देश में यूरिया का स्टॉक 55 लाख रहा है। जबकि पिछले साल इसी समय इसका स्टॉक 49 लाख टन था। वहीं डीएपी के मामले में स्थिति और बेहतर है। चालू साल में फरवरी के अंत में डीएपी का स्टॉक 25 लाख रहा जो इसके पहले साल इसी समय 13 लाख टन रहा था। म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) का स्टॉक फरवरी, 2026 में पिछले साल से कम रहा है। यह 12.92 लाख टन रहा जो पिछले साल इसी समय 15 लाख टन था।&nbsp;</p>
<p>कॉम्प्लेक्स उर्वरकों में एनपीके के मामले में स्थिति बेहतर है। फरवरी, 2026 के अंत में एनपीके का स्टॉक 54 लाख टन रहा जो पिछले साल इसी समय 32 लाख टन पर था। वहीं इस साल फरवरी के अंत में सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) का स्टॉक 32 लाख टन रहा जो पिछले साल इसी समय 22 लाख टन था।</p>
<p>उक्त सूत्र का कहना है कि यह स्थिति तब है जब चालू साल में यूरिया की बिक्री में नौ फीसदी, डीएपी की बिक्री में 21 फीसदी और एनपीके की बिक्री में पिछले साल के मुकाबले 11.9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।</p>
<p>पिछले कुछ दिनों में ही वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमत बढ़ने लगी थी और युद्ध शुरू होने के पहले 740 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई थी। भारत उर्वरकों, कच्चे माल और गैस का आयात सऊदी अरब, मोरक्को, जॉर्डन और ओमान समेत कई पश्चिम एशियाई देशों से करता है। वहीं डीएपी के एक बड़े निर्यातक चीन ने डीएपी का निर्यात पहले ही बंद कर रखा है। भारत ने सऊदी अरब की उर्वरक कंपनी मादेन के साथ डीएपी की दीर्घकालिक आपूर्ति का करार किया है लेकिन मौजूदा परिस्थिति में यह आयात संभव नहीं है। रूस के साथ भी दीर्घकालिक करार हुआ है लेकिन वहां से भी आपूर्ति अप्रैल के मध्य में होगी। इसके साथ यह भी तय है कि इस युद्ध के चलते उर्वरकों की कीमतों में तेजी आना तय है। इसके चलते अगर किसानों को कीमत वृद्धि से बचाकर रखना है तो सरकार को अधिक उर्वरक सब्सिडी देनी होगी।&nbsp;</p>
<p>देश में उर्वरकों की करीब 650 लाख टन की सालाना खपत होती है। इसमें चालू साल में यूरिया की खपत 400 लाख टन के आसपास रहेगी। डीएपी की खपत करीब 100 लाख टन रहती है। बाकी मात्रा अन्य कॉम्पलेक्स व उर्वरकों की है।</p>
<p>उर्वरक उद्योग इस परिस्थिति पर नजर लगाए हुए है और सूत्रों का कहना है कि अगले एक सप्ताह से 10 दिन काफी अहम साबित होंगे। उसके बाद ही स्थिति साफ होगी। करीब चार साल पहले फरवरी में ही रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने के बाद उर्वरकों की कीमतो में भारी तेजी आई थी। जिसके चलते सरकार को उर्वरक सब्सिडी में बढ़ोतरी करनी पड़ी थी। लेकिन इस बार केवल कीमतों की बात नहीं है। अगर यह युद्ध जारी रहता है तो समय पर आयात को लेकर एक बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उर्वरक स्टॉक पिछले साल से बेहतर, युद्ध सप्ताह भर और खिंचा तो बढ़ेगा संकट, कंपनियों ने घटाया यूरिया उत्पादन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[US&amp;#45;Iran War: युद्ध से खाद्य तेल आयात प्रभावित होने की आशंका, पाम आयात के साथ इसके दाम भी बढ़ेंगे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/us-iran-war-edible-oil-imports-are-expected-to-be-affected-by-the-war-with-palm-oil-imports-also-increasing-in-price.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 03 Mar 2026 13:01:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/us-iran-war-edible-oil-imports-are-expected-to-be-affected-by-the-war-with-palm-oil-imports-also-increasing-in-price.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का युद्ध मंगलवार को चौथे दिन में प्रवेश कर गया। यह युद्ध गंभीर रूप लेते हुए पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल गया है। ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर इन चीफ के वरिष्ठ सलाहकार इब्राहिम जबारी ने एक बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया है। अगर कोई जहाज इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करेगा है तो रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के जवान और ईरानी नौसेना उसमें आग लगा देगी।&nbsp;</p>
<p>जिस जगह पर यह जलडमरूमध्य सबसे संकरा है, वहां इसकी चौड़ाई लगभग 33 किलोमीटर है। यह सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के जवाब में ईरान रिहायशी इमारतों, होटलों और सैनिक ठिकानों के साथ-साथ बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर भी हमले कर रहा है।</p>
<p>होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते दुनिया का 20% कच्चा तेल व्यापार होता है। भारत का लगभग आधा कच्चा तेल आयात इसी मार्ग से आता है। दूसरी अनेक वस्तुओं के आयात-निर्यात के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञ इस युद्ध के कारण भारत के खाद्य तेल आयात पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जता रहे हैं। उनका कहना है कि इससे घरेलू बाजार में इनके दाम भी बढ़ सकते हैं। हालांकि सरसों किसानों को आने वाले समय में अच्छे दाम मिलने की भी संभावना है।&nbsp;</p>
<p><strong>50 प्रतिशत आयात सोया और सनफ्लावर ऑयल का</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">श्री रेणुका शुगर्स के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन और सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के पूर्व अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने रूरल वॉयस को बताया कि भारत के खाद्य तेल आयात में अभी लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा पाम ऑयल का होता है। बाकी 50 प्रतिशत आयात सोया और सनफ्लावर ऑयल रहता है। उन्होंने बताया कि इस समय पाम ऑयल की कीमत 1140 डॉलर प्रति टन (सीएंडएफ) के आसपास है। सनफ्लावर की कीमत 1400-1425 डॉलर और सोया ऑयल की 1250 डॉलर प्रति टन के करीब चल रही है।&nbsp;</span></p>
<p>भारत खाद्य तेल की लगभग 60 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी करता है। हर साल लगभग 1.6 करोड़ टन खाद्य तेल का आयात होता है, जिसमें सनफ्लावर ऑयल की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है। पाम तेल मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से आयात होता है, जबकि सोयाबीन तेल अर्जेंटीना, ब्राजील और अमेरिका से तथा सूरजमुखी तेल रूस और यूक्रेन से आता है। इनका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य और स्वेज नहर से होकर गुजरता है। यदि जहाजों को रेड सी मार्ग से हटकर वैकल्पिक रास्तों से जाना पड़े, तो आपूर्ति में देरी हो सकती है। चतुर्वेदी के अनुसार, रूट बदलकर आयात करने पर सोया और सनफ्लावर ऑयल की लागत लगभग 50 डॉलर प्रति टन बढ़ जाएगी।</p>
<p>चतुर्वेदी के मुताबिक सोया और सनफ्लावर ऑयल की सप्लाई का संकट होने पर पाम ऑयल की मांग बढ़ेगी। पाम की आयात मांग बढ़ने पर इसके दाम भी बढ़ने के आसार हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी भारत में सरसों की फसल आने वाली है। मांग बढ़ने की वजह से इसके किसानों को अच्छा दाम मिल सकता है।</p>
<p><strong>घरेलू बाजार में कीमतों पर होगा असर</strong></p>
<p>भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संघ (IVPA) ने एक बयान में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी का सीधा असर भारत के कच्चे तेल और खाद्य तेल बाजार पर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से जहां लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ती है, वहीं खाद्य तेल और वैश्विक बायोफ्यूल बाजार के आपसी संबंध के कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर महंगाई का दबाव बनता है। साथ ही, जहाजों के बीमा जोखिम भी बढ़ सकते हैं। संघ के मुताबिक भारत खाद्य तेलों के आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में वैश्विक सप्लाई चेन में किसी भी तरह का व्यवधान घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकता है।&nbsp;</p>
<p>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) के आंकड़ों के अनुसार, तेल वर्ष 2025-26 (नवंबर-अक्टूबर) की नवंबर-जनवरी अवधि में भारत ने 38.78 लाख टन खाद्य तेल का आयात किया, जो पिछले तेल वर्ष की समान अवधि के 39.21 लाख टन से थोड़ा कम है। इसमें सूरजमुखी तेल की हिस्सेदारी 7.62 लाख टन रही।</p>
<p><strong>ऑयलमील का निर्यात भी प्रभावित</strong></p>
<p>भारत अपने कुल ऑयलमील निर्यात का लगभग 65 प्रतिशत ऑयलमील दक्षिण-पूर्व एशिया, 20 प्रतिशत पश्चिम एशिया और 15 प्रतिशत यूरोप को भेजता है। युद्ध के कारण यह निर्यात भी प्रभावित होगा। अप्रैल-जनवरी 2025-26 के दौरान भारत ने कुल 32.35 लाख टन ऑयलमील का निर्यात किया, जबकि 2024-25 की समान अवधि में यह 43.42 लाख टन था। अप्रैल-जनवरी 2025-26 के दौरान पश्चिम एशियाई बाजारों को भारत का निर्यात 4.43 लाख टन रहा।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68f3a3c705e5e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ US-Iran War: युद्ध से खाद्य तेल आयात प्रभावित होने की आशंका, पाम आयात के साथ इसके दाम भी बढ़ेंगे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ईरान युद्ध का असर, भारत का बासमती निर्यात ठप पड़ने की आशंका, मध्यपूर्व की है 70 फीसदी हिस्सेदारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/iran-war-impacts-70-of-basmati-exports-to-the-middle-east-likely-to-be-halted.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 02 Mar 2026 15:59:37 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/iran-war-impacts-70-of-basmati-exports-to-the-middle-east-likely-to-be-halted.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध के कारण भारत से बासमती चावल का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बासमती का सबसे अधिक निर्यात मध्य-पूर्व के देशों को ही होता है। इसका असर जल्दी ही भारत में बासमती चावल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है और इसके दाम गिर सकते हैं। निर्यात का रूट बाधित होने के कारण अफ्रीकी देशों को गैर-बासमती चावल का निर्यात भी प्रभावित होने की आशंका बनने लगी है।</p>
<p>भारत हर साल करीब 60 लाख टन बासमती चावल का निर्यात करता है। इसमें से लगभग 70 प्रतिशत निर्यात मध्य-पूर्व के देशों को होता है। मात्रा के लिहाज से यह 40 से 42 लाख टन बैठता है। इसमें से छह से सात लाख टन बासमती चावल का निर्यात हर साल ईरान को होता रहा है। ईरान को बासमती निर्यात का रिकॉर्ड 14 लाख टन का है। युद्ध के कारण ईरान समेत पूरे मध्य-पूर्व को होने वाला निर्यात लगभग ठप पड़ने की आशंका है।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/latest-news/iran-war-halts-exports-to-gulf-and-western-countries-with-shipping-companies-imposing-emergency-conflict-charges-of-up-to-4000-dollars.html"><span style="text-decoration: underline;"><strong>यह भी पढ़ें - भारत से खाड़ी और पश्चिमी देशों को निर्यात रुका, शिपिंग कंपनियों ने लगाया 4000 डॉलर तक इमर्जेंसी चार्ज</strong></span></a></p>
<p>वैसे तो लंबे समय से चले आ रहे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान के साथ भारत का कुल व्यापार अधिक नहीं है। प्रतिबंधों का असर बैंकिंग चैनल, शिपिंग और ऊर्जा व्यापार पर अधिक हुआ है। भारत से ईरान को जो निर्यात होता है, उसमें 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा चावल का है। कैलेंडर वर्ष 2025 में भारत ने ईरान को कुल करीब 124 करोड़ डॉलर का निर्यात किया। इसमें 74.7 करोड़ डॉलर का चावल निर्यात हुआ।&nbsp;</p>
<p>ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत से कुल 60.65 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया गया। रुपये में इसकी वैल्यू 50,312 करोड़ रुपये और डॉलर में 5.94 अरब डॉलर थी। भारत में 2024-25 में कुल 15.01 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था। बासमती चावल का उत्पादन 70 से 75 लाख टन का था।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69a55b6f2856d.jpg" alt="" /></p>
<p>निर्यात पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2024-25 में भारत ने 6.07 प्रतिशत चावल का निर्यात ईरान को किया। भारत के 12.47 अरब डॉलर के कुल चावल निर्यात में सऊदी अरब का हिस्सा सबसे अधिक 10.61 प्रतिशत का था। उसके बाद 8.26 प्रतिशत निर्यात बेनिन को और 6.94 &nbsp;प्रतिशत निर्यात इराक को किया गया। प्रमुख खाड़ी देश संयुक्त अरब अमीरात को 4.06 प्रतिशत चावल का निर्यात हुआ।&nbsp;</p>
<p>जहां तक ईरान से आयात का सवाल है, तो भारत ने 40.86 करोड़ डॉलर की वस्तुओं की खरीद की। इसमें 13.57 करोड़ डॉलर का पेट्रोलियम कोक, 7.15 करोड़ डॉलर के सेब और 3.33 करोड़ डॉलर के खजूर का आयात हुआ।</p>
<p>अचानक निर्यात रुकने से भारत के विभिन्न बंदरगाहों पर 1.5 से दो लाख टन बासमती चावल अटक गया है। लगभग इतनी ही मात्रा ट्रांजिट में है। निर्यात के लिहाज से यह समय भी महत्वपूर्ण है। रमजान के कारण खाड़ी क्षेत्र में इन दिनों सबसे अधिक निर्यात होता है।&nbsp;</p>
<p>इस युद्ध का भारत पर तात्कालिक असर यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में आवागमन बाधित होने से उस रास्ते जहाजों की आवाजाही रुक गई है। कच्चे तेल और एलएनजी आयात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है। इसके बाधित होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी और जहाजों का बीमा प्रीमियम बढ़ेगा। कच्चा तेल महंगा होने पर महंगाई बढ़ने की भी आशंका है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_6968bd01b2bee.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ईरान युद्ध का असर, भारत का बासमती निर्यात ठप पड़ने की आशंका, मध्यपूर्व की है 70 फीसदी हिस्सेदारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_6968bd01b2bee.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गन्ना उपज में गिरावट से चीनी उद्योग की मुश्किलें बढ़ीं, उन्नत किस्म को जल्द मंजूरी दिलवाने में जुटा इस्मा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/declining-sugarcane-yields-exacerbated-the-sugar-industry-difficulties-isma-working-to-expedite-approval-for-an-improved-variety-co-20016.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 02 Mar 2026 14:41:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/declining-sugarcane-yields-exacerbated-the-sugar-industry-difficulties-isma-working-to-expedite-approval-for-an-improved-variety-co-20016.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="276" data-end="770">देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल पर रोग और मौसम की मार के चलते चीनी मिलों के सामने गन्ना उपलब्धता की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है, जबकि किसानों को उपज में गिरावट के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। चीनी उद्योग के सामने उत्पन्न इस संकट से उबरने के लिए गन्ने की उन्नत किस्मों का किसानों तक पहुंचना बेहद जरूरी हो गया है। इसके लिए निजी चीनी मिलों के संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने भी प्रयास तेज कर दिए हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया में सरकारी औपचारिकताओं की बाधाएं सामने आ रही हैं।</p>
<p data-start="772" data-end="1250">गन्ने की बेहद सफल रही किस्म Co-0238 के रोगग्रस्त होने के बाद किसान इसका विकल्प तलाश रहे हैं। इस दिशा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के शोध संस्थानों के प्रयास जारी हैं। आईसीएआर के कोयंबटूर स्थित शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट ने गन्ने की किस्म Co-20016 विकसित की है, जिसने कई स्थानों पर परीक्षणों में अच्छे परिणाम दिए हैं। इस किस्म को Co-0238 का संभावित विकल्प और मौजूदा किस्मों की तुलना में बेहतर माना जा रहा है। इसलिए इस्मा भी इसे जल्द मंजूरी दिलाने के लिए प्रयासरत है।</p>
<p data-start="1252" data-end="1527">सूत्रों के के मुताबिक इस सिलसिले में इस्मा ने आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम एल जाट को पत्र लिखकर Co-20016 को शीघ्र मंजूरी दिलाने के लिए किस्म पहचान समिति (VIC) की विशेष बैठक जल्द बुलाने की मांग की है, ताकि 2026-27 के बुवाई सीजन की शुरुआत से पहले व्यावसायिक खेती के लिए इसकी अधिसूचना जारी की जा सके।</p>
<p data-start="1529" data-end="1988">ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट (AICRP) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, दो मुख्य फसलों (plant crops) और एक पेड़ी फसल (ratoon crop) के संपूर्ण परिणाम अप्रैल 2026 तक उपलब्ध होने की उम्मीद है। लेकिन आईसीएआर की मौजूदा व्यवस्था के तहत गन्ने के लिए किस्म पहचान समिति (VIC) की बैठक सामान्यतः अक्टूबर-नवंबर में आयोजित की जाती है। ऐसे में Co-20016 को मंजूरी के लिए नवंबर 2026 तक इंतजार करना पड़ सकता है। इससे अधिसूचना और व्यावसायिक उपलब्धता में लगभग एक वर्ष की देरी होगी।</p>
<p data-start="1990" data-end="2324">इस्मा ने आईसीएआर से अनुरोध किया है कि गन्ने के मौजूदा संकट को देखते हुए जून या जुलाई 2026 में विशेष रूप से Co-20016 पर विचार करने के लिए VIC की बैठक बुलाई जाए, ताकि 2026-27 के बुवाई सीजन से पहले इसकी अधिसूचना जारी की जा सके। इससे किस्म जारी होने और किसानों तक पहुंचने में लगभग एक वर्ष की बचत होगी तथा उत्पादकता सुधार में मदद मिलेगी।&nbsp;</p>
<p data-start="2326" data-end="2470">उद्योग सूत्रों के मुताबिक गन्ने की बेहतर किस्मों की पहचान के संबंध में पिछले महीने 9 फरवरी को संयुक्त सचिव (चीनी) के साथ इस्मा की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी।</p>
<p data-start="2472" data-end="3049">गौरतलब है कि गन्ना बेल्ट, खासकर उत्तर प्रदेश में, किस्मों के पुराने पड़ने, नई किस्मों के प्रतिस्थापन में देरी, बीज गुणन प्रणाली की खामियों और रोग के बढ़ते प्रकोप के कारण गन्ने की पैदावार और उत्पादन प्रभावित हुआ है। पर्याप्त गन्ना न मिल पाने और कोल्हू व खांडसारी इकाइयों से प्रतिस्पर्धा के चलते फरवरी में ही उत्तर प्रदेश की 120 में से 18 चीनी मिलें पेराई बंद कर चुकी हैं। राज्य में 28 फरवरी तक गन्ने की कुल पेराई 737 लाख टन रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह 766 लाख टन थी। गन्ने की कमी के कारण प्रदेश की अधिकांश चीनी मिलें मार्च के अंत तक बंद होने के कगार पर पहुंच सकती हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गन्ना उपज में गिरावट से चीनी उद्योग की मुश्किलें बढ़ीं, उन्नत किस्म को जल्द मंजूरी दिलवाने में जुटा इस्मा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मजबूत जीडीपी के बावजूद कृषि क्षेत्र में धीमी ग्रोथ, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुस्ती का संकेत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/despite-strong-gdp-slow-growth-in-agriculture-sector-indicates-slowdown-in-rural-economy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 27 Feb 2026 17:53:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/despite-strong-gdp-slow-growth-in-agriculture-sector-indicates-slowdown-in-rural-economy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.6 प्रतिशत की मजबूत दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि पुरानी सीरीज के आंकड़ों के अनुसार यह वृद्धि 7.4 फीसदी थी। जीडीपी के दूसरे अग्रिम अनुमानों से स्पष्ट है कि यह वृद्धि संतुलित नहीं है। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में तेजी आई है लेकिन कृषि क्षेत्र पिछड़ रहा है। ये आंकड़े अर्थव्यवस्था में एक असंतुलन की ओर इशारा करते हैं। जीडीपी वृद्धि मजबूत हो रही है, लेकिन कृषि अर्थव्यवस्था और उसके साथ जुड़ी ग्रामीण मांग धीमी गति से बढ़ रही है।</p>
<p>राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में कृषि, पशुपालन, वानिकी और मत्स्य क्षेत्र की वास्तविक वृद्धि दर केवल 2.4 प्रतिशत रही। यह कुल जीडीपी वृद्धि दर का लगभग एक-तिहाई है और विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र में दर्ज वृद्धि से काफी कम है।</p>
<p>अक्टूबर&ndash;दिसंबर तिमाही, जो आमतौर पर खपत के लिहाज से सबसे अहम मानी जाती है, में यह अंतर और स्पष्ट दिखा। जहां कुल जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, वहीं कृषि क्षेत्र की वृद्धि घटकर लगभग 1.4 प्रतिशत रह गई। इसका सीधा असर त्योहारी सीजन की ग्रामीण मांग पर पड़ा।</p>
<p>यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जीडीपी में हिस्सेदारी घटने के बावजूद कृषि अब भी देश के 40 प्रतिशत से अधिक कार्यबल को रोजगार देती है। कृषि क्षेत्र में 2 प्रतिशत से कम तिमाही वृद्धि का अर्थ है कि ग्रामीण परिवारों की वास्तविक आय में बहुत मामूली बढ़ोतरी हुई। इसका सीधा असर बड़े पैमाने पर बिकने वाले उपभोक्ता उत्पादों और सेवाओं की मांग पर पड़ता है।</p>
<p><strong>ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुस्ती </strong></p>
<p>वित्त वर्ष 2025-26 में कृषि क्षेत्र की 2.4 प्रतिशत वृद्धि केवल ग्रामीण अर्थव्यवसथा में लगातार बनी हुई सुस्ती को दर्शाती है। तुलना करें तो विनिर्माण क्षेत्र में 11.5 प्रतिशत, सेवा क्षेत्र में 9.0 प्रतिशत और कुल सकल मूल्य वर्धन (GVA) में 7.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है</p>
<p>संशोधित जीडीपी श्रृंखला के तहत लगातार दूसरे वर्ष कृषि और बाकी अर्थव्यवस्था के बीच का अंतर बढ़ा है। मौसम की अनिश्चितता और फसल चक्र के प्रभाव को समायोजित करने के बाद भी अर्थशास्त्रियों का कहना है कि कृषि उत्पादन वृद्धि जनसंख्या वृद्धि से थोड़ा-बहुत ही अधिक है, जिससे प्रति व्यक्ति कृषि आय लगभग स्थिर बनी हुई है।</p>
<p>हालांकि अधिकारियों ने संकेत दिया है कि रबी उत्पादन के अंतिम अनुमान आने के बाद आंकड़ों में ऊपर की ओर संशोधन संभव है, लेकिन व्यापक रुझान यह बताता है कि तेज वृद्धि के दौर में कृषि अब स्थिरता प्रदान करने वाली ताकत नहीं रह गई है।</p>
<p><strong>खपत बढ़ी, </strong><strong>लेकिन कृषि से नहीं</strong></p>
<p>वित्त वर्ष 2025-26 में निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो घरेलू खर्च में सुधार का संकेत है। हालांकि इस उपभोग की संरचना अब अधिक शहरी केंद्रित दिखाई देती है।</p>
<p>नई जीडीपी श्रृंखला के तहत उपभोग अब जीडीपी का 56.7 प्रतिशत है, जो पूर्व आधार वर्षों की तुलना में कम है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कृषि और असंगठित क्षेत्र में कमजोर आय वृद्धि को दर्शाता है, जबकि वेतनभोगी शहरी परिवार सेवा क्षेत्र की वृद्धि और आसान ऋण उपलब्धता से लाभान्वित हो रहे हैं।</p>
<p>परिणामस्वरूप, कुल मिलाकर उपभोग में सुधार दिखता है, लेकिन यह ग्रामीण भारत तक गहराई से नहीं पहुंच पा रहा, जिससे व्यापक मांग वृद्धि को स्थायी आधार नहीं मिल रहा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x_69a2cca325215.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p></p>
<p><strong>नई जीडीपी श्रृंखला से अंतर स्पष्ट </strong></p>
<p>जीडीपी का आधार वर्ष 2022&ndash;23 करने से यह अंतर और स्पष्ट हो गया है। संशोधित ढांचे के तहत सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) जीडीपी का 31.7 प्रतिशत हो गया है, जो निवेश-आधारित वृद्धि के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।</p>
<p>उच्च निवेश दीर्घकालीन क्षमता निर्माण के लिए सकारात्मक है, लेकिन आंकड़े संकेत देते हैं कि पूंजी निर्माण कृषि आय वृद्धि से कहीं आगे निकल रहा है। इतिहास बताता है कि जब निवेश वृद्धि ग्रामीण आय वृद्धि के साथ संतुलित नहीं होती, तो सुधार असमान और अस्थिर हो सकता है।</p>
<p><strong>विनिर्माण और सेवाएं </strong></p>
<p>कृषि से इतर, वित्त वर्ष 2025-26 के अनुमान वृद्धि के प्रमुख स्रोतों में बदलाव का संकेत देते हैं।&nbsp;विनिर्माण 11.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सबसे मजबूत क्षेत्र बनकर उभरा, और वर्ष के अधिकांश समय दोहरे अंकों में बढ़ता रहा। इसके विपरीत निर्माण क्षेत्र की वृद्धि 7.1 प्रतिशत पर धीमी रही, जो किफायती आवास और श्रम-प्रधान गतिविधियों में सुस्ती को दर्शाती है। इसका सीधा असर ग्रामीण और प्रवासी रोजगार पर पड़ता है।</p>
<p>सेवा क्षेत्र 9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ स्थिरता प्रदान करता रहा, जिसमें व्यापार, परिवहन, वित्त और रियल एस्टेट प्रमुख रहे। हालांकि सार्वजनिक प्रशासन और रक्षा क्षेत्र में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि दर्ज की गई, जो संभवतः राज्यों के स्तर पर सीमित खर्च को दर्शाती है। यह खर्च परंपरागत रूप से ग्रामीण मांग को समर्थन देता रहा है।</p>
<p><strong>कृषि वृद्धि क्यों अहम&nbsp;</strong></p>
<p>हालांकि जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी घटी है, लेकिन उसका व्यापक आर्थिक महत्व अब भी बड़ा है। कमजोर कृषि वृद्धि ग्रामीण उपभोग को सीमित करती है। जिससे शुरुआती स्तर के विनिर्मित उत्पादों की मांग घटाती है तथा क्षेत्रीय और आय असमानता को बढ़ाती है।</p>
<p>वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि ऊंची जीडीपी वृद्धि के साथ ग्रामीण ठहराव सह-अस्तित्व में रह सकता है, लेकिन यह स्थिति लंबे समय में अस्थिर हो सकती है।</p>
<p><strong>भावी संकेत</strong></p>
<p>अधिकांश अनुमान वित्त वर्ष 2026-27 में 7 से 7.5 प्रतिशत वृद्धि दर का संकेत देते हैं। लेकिन इस वृद्धि का टिकाऊपन काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या कृषि क्षेत्र में सार्थक सुधार होता है।</p>
<p>यदि कृषि वृद्धि में 1 से 1.5 प्रतिशत अंकों की तेजी आती है, तो इसका ग्रामीण आय और उपभोग पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। इसके विपरीत, यदि कृषि वृद्धि 3 प्रतिशत से नीचे ही बनी रहती है, तो मांग सीमित रहेगी और वृद्धि मुख्य रूप से विनिर्माण और सेवाओं पर निर्भर रहेगी।</p>
<p>दूसरे अग्रिम अनुमान यह पुष्टि करते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत गति से बढ़ रही है, लेकिन यह वृद्धि संतुलित नहीं है। कृषि अब भी विकास श्रृंखला की सबसे कमजोर कड़ी बनी हुई है, जो ग्रोथ की पहुंच और स्थायित्व दोनों को सीमित करती है।</p>
<p>वित्त वर्ष 2027 में प्रवेश करते समय चुनौती केवल तेज वृद्धि की नहीं, बल्कि संतुलित और समावेशी वृद्धि सुनिश्चित करने की है। यदि कृषि आय और ग्रामीण मांग में ग्रोथ नहीं आती, तो ऊंची जीडीपी वृद्धि शहर केंद्रित, पूंजी-प्रधान और आधार स्तर पर कमजोर बनी रह सकती है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मजबूत जीडीपी के बावजूद कृषि क्षेत्र में धीमी ग्रोथ, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुस्ती का संकेत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डीएपी महंगा: अंतरराष्ट्रीय बाजार में 730 डॉलर पर पहुंचे दाम, खरीफ से पहले बढ़ी चिंता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/dap-expensive-price-reaches-730-dollar-in-the-international-market-increasing-concern-before-kharif.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 26 Feb 2026 12:22:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/dap-expensive-price-reaches-730-dollar-in-the-international-market-increasing-concern-before-kharif.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="118" data-end="700">यूरिया के बाद देश में दूसरे सबसे अधिक खपत वाले उर्वरक डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की वैश्विक कीमतों में पिछले दो सप्ताह में 50 डॉलर प्रति टन से अधिक की तेजी आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीएपी की कीमतें 720 से 730 डॉलर प्रति टन के बीच चल रही हैं। वहीं, ब्राजील द्वारा 740 डॉलर प्रति टन पर किए गए सौदों के चलते कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। देश में सालाना करीब 100 लाख टन डीएपी की खपत होती है और उसका अधिकांश हिस्सा आयात होता है। आयात में करीब 40 फीसदी हिस्सेदारी कच्चे माल की है, जिसके जरिये यहां उत्पादन होता है, जबकि लगभग 60 फीसदी डीएपी तैयार उर्वरक के रूप में आता है।</p>
<p data-start="702" data-end="1093">उर्वरक उद्योग सूत्रों के मुताबिक, करीब 15 दिन पहले डीएपी की वैश्विक कीमतें 665 से 670 डॉलर प्रति टन थीं। लेकिन अब भारत की संभावित मांग के चलते कीमतों में तेजी आ रही है। वहीं ब्राजील बड़ी मात्रा में डीएपी की खरीद कर रहा है। उसने सऊदी अरब की कंपनी मादेन से 740 डॉलर प्रति टन तक के सौदे किए हैं। इसके अलावा, एक बड़े डीएपी निर्यातक चीन द्वारा निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का भी कीमतों पर असर पड़ रहा है।</p>
<p data-start="1095" data-end="1552">भारत ने डीएपी की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए रूस और सऊदी अरब की कंपनी मादेन के साथ समझौता किया है। लेकिन फिलहाल मादेन भारत की बजाय ब्राजील को प्राथमिकता दे रहा है। रूस के साथ छह लाख टन डीएपी की आपूर्ति का दीर्घकालिक समझौता किया गया है। हालांकि, उद्योग सूत्रों का कहना है कि रूस ने फरवरी में आपूर्ति नहीं की और अब वह अप्रैल के मध्य में आपूर्ति करना चाहता है। खरीफ सीजन के लिए अप्रैल में आयात का मतलब है कि समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मुश्किलें आ सकती हैं।</p>
<p data-start="1554" data-end="2010">इस स्थिति के चलते आयातक असमंजस में हैं। इसकी एक बड़ी वजह सरकार द्वारा विनियंत्रित उर्वरकों को न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत दी जाने वाली सब्सिडी की नीति भी है। इसके तहत सरकार नाइट्रोजन (एन), फॉस्फेट (पी), पोटाश (के) और सल्फर (एस) न्यूट्रिएंट के लिए प्रति किलो सब्सिडी की दर तय करती है। आयात लागत, उत्पादन लागत और सरकार द्वारा तय सब्सिडी दरों के आधार पर कंपनियों को विनियंत्रित उर्वरकों का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तय करने का अधिकार है।</p>
<p data-start="2012" data-end="2703">सरकार रबी और खरीफ सीजन के लिए एनबीएस की दरें तय करती है। इन दरों के आधार पर कंपनियां यह आकलन करती हैं कि आयात या उत्पादन करना कितना व्यावहारिक होगा और एमआरपी क्या तय की जानी चाहिए। सरकार ने यूरिया के अलावा अन्य उर्वरकों को मूल्य नियंत्रण से मुक्त रखा है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि डीएपी जैसे विनियंत्रित उर्वरकों की अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) पर सरकार का परोक्ष नियंत्रण है। डीएपी की एमआरपी पिछले तीन वर्षों से 1350 रुपये प्रति बैग (50 किलो) पर स्थिर है। इस कीमत और आयात व उत्पादन लागत के बीच के अंतर की भरपाई सरकार सब्सिडी के माध्यम से करती है। सब्सिडी का बड़ा हिस्सा एनबीएस योजना के तहत दिया जाता है, जबकि अतिरिक्त घाटे की भरपाई विशेष प्रोत्साहन (स्पेशल इंसेंटिव) के रूप में की जाती है।</p>
<p data-start="2705" data-end="2920">फिलहाल सरकार ने उद्योग को आश्वस्त किया है कि वह आयात लागत और एमआरपी के बीच के अंतर की भरपाई करेगी। इसके बावजूद अधिकांश आयातक अप्रैल 2026 से खरीफ सीजन के लिए लागू होने वाली एनबीएस सब्सिडी दरों का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p data-start="2922" data-end="3298">उद्योग सूत्रों ने <em><strong>रूरल वॉयस</strong></em> को बताया कि सब्सिडी की मौजूदा नीति समय पर उर्वरक उपलब्धता में बाधा बनती है। बेहतर होगा कि सरकार सब्सिडी की दीर्घकालिक नीति लाए, जैसा कि यूरिया के मामले में है। यूरिया एक नियंत्रित उर्वरक है और उसकी कीमत, आयात तथा वितरण समेत सभी स्तरों पर सरकार का नियंत्रण है। कंपनियों को एमआरपी और लागत के बीच का पूरा अंतर सब्सिडी के रूप में भुगतान किया जाता है।</p>
<p data-start="3300" data-end="3585">फिलहाल वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी का डीएपी की किसानों के लिए तय कीमत पर सीधा असर पड़ने की संभावना कम है। हालांकि डीएपी के अलावा अन्य कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की कीमतों में पिछले कुछ वर्षों में बढ़ोतरी हुई है। डीएपी की उपलब्धता में कमी के चलते अन्य कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की खपत भी बढ़ी है।</p>
<p data-start="3587" data-end="3850">सरकार के लिए चुनौती यह भी है कि उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए यूरिया की खपत कम की जाए। लेकिन पिछले वर्ष के आंकड़ों के मुताबिक एन, पी और के न्यूट्रिएंट के उपयोग का अनुपात काफी बिगड़ चुका है और यूरिया की खपत आदर्श अनुपात से दोगुने से भी अधिक है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ डीएपी महंगा: अंतरराष्ट्रीय बाजार में 730 डॉलर पर पहुंचे दाम, खरीफ से पहले बढ़ी चिंता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एमएसपी पर खरीद एक महीने में पूरी होनी चाहिएः शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-singh-chouhan-says-procurement-at-msp-should-be-completed-within-a-month.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Feb 2026 17:36:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-singh-chouhan-says-procurement-at-msp-should-be-completed-within-a-month.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div class="ii gt" jslog="20277; u014N:xr6bB; 1:WyIjdGhyZWFkLWY6MTg1ODA4MzYzMzE3MjA4MTk2MiJd; 4:WyIjbXNnLWY6MTg1ODA4MzYzMzE3MjA4MTk2MiIsbnVsbCxudWxsLG51bGwsMSwwLFsxMzEsMCwwXSwxMzA3LDcwMzMsbnVsbCxudWxsLG51bGwsbnVsbCxudWxsLDEsbnVsbCxudWxsLFswXSxudWxsLG51bGwsbnVsbCxudWxsLG51bGwsbnVsbCwwLDAsbnVsbCxudWxsLG51bGwsbnVsbCxbMCwxMzFdXQ.." id=":u7">
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<div>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि एमएसपी पर&nbsp; फसलों की खरीदी के लिए तीन महीने की मौजूदा समय-सीमा व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि किसान के पास फसल उतने लंबे समय तक रोककर रखने की क्षमता नहीं होती। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यों के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि अधिकतम एक महीने के भीतर एमएसपी पर खरीद पूरी हो जाए, ताकि किसान को तुरंत उचित दाम मिल सके और बाद में अन्य लोग खरीद कर एमएसपी के नाम पर अनुचित लाभ न उठा सकें।&nbsp;उन्होंने कहा कि अब किसान का पैसा रोककर रखने की पुरानी व्यवस्था नहीं चलेगी, एमएसपी खरीदी से लेकर केसीसी लोन, पेस्टिसाइड लाइसेंस और केवीके की भूमिका तक, हर स्तर पर पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही तय की जाएगी।<br />बुधवार को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा में आयोजित तीन दिवसीय पूसा कृषि विज्ञान मेले का उद्घाटन करते हुए उन्होंने यह बातें कहीं। इस अवसर पर भारत सरकार के कृषि सचिव श्री देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एम. एल. जाट और आईएआरआई के निदेशक डॉ. सी. एच. श्रीनिवास राव सहित बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।<br /><br />चौहान ने कहा कि जो भी एजेंसी या राज्य सरकार किसानों का पैसा रोकेगी, उसे उस राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज देना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसान को देर से भुगतान और सरकारी खातों में पैसा &ldquo;पार्क&rdquo; रखकर लाभ कमाने की प्रवृत्ति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार अपनी ओर से देरी नहीं करेगी और यदि किसी योजना में राज्यों की ओर से भुगतान में विलंब होता है तो भी केंद्र का हिस्सा सीधे किसान के खाते में भेजने के विकल्प पर काम किया जा रहा है।<br /><br />कृषि यंत्रीकरण, ड्रिप, स्प्रिंकलर, पाली हाउस और ग्रीन हाउस जैसी तकनीकों के लिए दी जा रही सहायता का ज़िक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को 18 से अधिक योजनाओं के तहत संसाधन उपलब्ध करा रही है, लेकिन केवल पैसा भेज देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि एक जिले में 700 किसानों की सूची में नाम होने के बावजूद 158 किसानों को मशीनें मिली ही नहीं। उन्होंने कहा कि जब केंद्र पैसा देता है तो यह भी देखना उसकी जिम्मेदारी है कि लाभ असली किसान तक पहुँचा या नहीं, और इसके लिए मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम एक जरूरी रिफॉर्म है।<br /><br />कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका पर जोर देते हुए मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि केवीके को जिले की एक सशक्त इकाई के रूप में विकसित किया जाएगा, जो अनुसंधान और एक्सटेंशन के बीच सेतु का काम करे। उन्होंने केवीके को राज्यों के साथ बेहतर तालमेल कर नई किस्में, नई कृषि पद्धतियाँ और सफल मॉडल गाँव&ndash;गाँव तक पहुँचाने का दायित्व सौंपा और केवीके की संरचनात्मक मजबूती को भी एक अहम सुधार बताया।<br /><br />उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगभग 75 प्रतिशत छोटे किसानों को केसीसी लोन का लाभ मिल रहा है और प्रभावी 4 प्रतिशत ब्याज दर पर सस्ता ऋण उपलब्ध है, लेकिन इसमें भी देरी अस्वीकार्य है। उन्होंने वित्तीय संस्थाओं और बैंकों से अपेक्षा जताई कि किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़े ऋण समय पर और बिना अनावश्यक कागजी देरी के जारी किए जाएँ, ताकि किसान साहूकारों पर निर्भर न रहें।<br /><br />कीटनाशकों की गुणवत्ता और लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर बोलते हुए शिवराज सिंह ने माना कि मौजूदा लाइसेंस प्रणाली लंबी और जटिल है, जिसके कारण ईमानदार कंपनियाँ भी अनावश्यक चक्कर काटती हैं और किसान तक अच्छी गुणवत्ता के उत्पाद पहुँचने में देरी होती है। उन्होंने संकेत दिया कि पेस्टिसाइड लाइसेंस प्रक्रिया को सरल, लेयर कम, समयसीमा तय और पूरी तरह पारदर्शी बनाने की दिशा में काम किया जाएगा, ताकि गुणवत्तापूर्ण उत्पाद जल्दी बाजार में आए और घटिया व नकली उत्पादों पर सख्त रोक लग सके।<br /><br />एमएसपी पर खरीदी की बात करते हुए चौहान ने कहा कि तीन महीने की मौजूदा समय-सीमा व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि किसान के पास फसल उतने लंबे समय तक रोककर रखने की क्षमता नहीं होती। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यों के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि अधिकतम एक महीने के भीतर एमएसपी पर खरीद पूरी हो जाए, ताकि किसान को तुरंत उचित दाम मिल सके और बाद में अन्य लोग खरीद कर एमएसपी के नाम पर अनुचित लाभ न उठा सकें।<br /><br />शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार खाद पर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दे रही है, ताकि किसान को 2400 रुपये की वास्तविक लागत वाली यूरिया की बोरी सिर्फ लगभग 265&ndash;270 रुपये में मिल सके। उन्होंने कहा कि इस बात पर विचार होना चाहिए कि इतनी बड़ी सब्सिडी यदि सीधे किसानों के खातों में डीबीटी के रूप में दी जाए तो किसान स्वयं तय कर सकेगा कि कौन&ndash;सा उर्वरक कितनी मात्रा में खरीदना है, और यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि सब्सिडी का वास्तविक लाभार्थी वही अन्नदाता हो जो खेत में खाद डाल रहा है।<br /><br />आगे की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने &ldquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rdquo; का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत वैज्ञानिकों की टीमें गांव&ndash;गांव जाकर किसानों को नई शोध उपलब्धियों, रोग&ndash;कीट प्रबंधन, इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल और एक्सपोर्ट क्वालिटी वैरायटीज़ के बारे में प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से जागरूक करेंगी। उन्होंने कहा कि इस अभियान को खरीफ से पहले अप्रैल से समयबद्ध रूप से चलाया जाएगा, जिससे किसान समय रहते वैज्ञानिक सलाह और बेहतर बीज&ndash;तकनीक का लाभ उठा सकें।</div>
</div>
<div class="adL"></div>
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</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एमएसपी पर खरीद एक महीने में पूरी होनी चाहिएः शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार ने 25 लाख टन गेहूं निर्यात की अनुमति दी, लेकिन निर्यात पर प्रतिबंध की नीति जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/the-government-approved-the-export-of-25-lakh-tonnes-of-wheat-but-the-policy-of-ban-on-export-will-continue.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Feb 2026 05:59:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/the-government-approved-the-export-of-25-lakh-tonnes-of-wheat-but-the-policy-of-ban-on-export-will-continue.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने मंगलवार को 25 लाख टन गेहूं निर्यात की अधिसूचना जारी कर दी है। हालांकि, गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध की नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।&nbsp;</p>
<p>महानिदेशालय विदेशी व्यापार (DGFT) ने स्पष्ट किया है कि गेहूं की निर्यात नीति अभी भी "प्रतिबंधित" श्रेणी में रहेगी, वहीं 25 लाख टन गेहूं निर्यात की विशेष अनुमति दी गई है। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।</p>
<p>सरकार ने गेहूं के आटे और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को भी यथावत रखा है, लेकिन अतिरिक्त 5 लाख टन आटा और संबंधित उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दी है।</p>
<p><span>अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उनकी सरकारों के अनुरोध पर भारत सरकार द्वारा दी जाने वाली विशेष अनुमति के आधार पर होने वाला निर्यात पहले की तरह जारी रहेगा। यह अनुमति 25 लाख टन की सीमा के अतिरिक्त होगी।&nbsp;</span></p>
<div dir="auto">गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने गेहूं निर्यात पर लगभग चार साल के प्रतिबंध के बाद 13 फरवरी को 25 लाख टन गेहूं के निर्यात की घोषणा की थी। खाद्य मंत्रालय के अनुसार, यह फैसला मौजूदा उपलब्धता और कीमतों की स्थिति को देखते हुए लिया गया।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">मई 2022 में, केंद्र सरकार ने गेहूं उत्पादन में गिरावट के कारण बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके साथ ही गेहूं भंडारण पर भी समय-समय पर स्टॉक लिमिट लागू की गई। हाल ही में गेहूं पर स्टॉक लिमिट को भी समाप्त किया गया है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं के दाम कम होने के कारण भारत से फिलहाल गेहूं निर्यात की बहुत अधिक संभावना नहीं है। फिर भी 25 लाख गेहूं के निर्यात की अनुमति मिलने से घरेलू बाजार में कीमतों को कुछ सहारा मिलने की उम्मीद है जो नए सीजन से पहले किसानों के लिए अच्छा संकेत है।&nbsp;</div>
<p><strong>पर्याप्त गेहूं भंडार&nbsp;</strong></p>
<p>खाद्य मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2025&ndash;26 के दौरान निजी कंपनियों के पास लगभग 75 लाख टन गेहूं का भंडार उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 32 लाख टन अधिक है।&nbsp;</p>
<p>इसके अलावा 1 अप्रैल 2026 तक भारतीय खाद्य निगम के केंद्रीय पूल में कुल गेहूं उपलब्धता लगभग 182 लाख टन रहने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि निर्यात की यह अनुमति घरेलू खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को प्रभावित नहीं करेगी।&nbsp;</p>
<p>अब देश में गेहूं के पर्याप्त भंडार, बंपर उत्पादन और घरेलू बाजार में गेहूं की गिरती कीमतों को देखते हुए सरकार ने आंशिक रूप से निर्यात खोलने का फैसला लिया है। लेकिन गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध की नीति को जारी रखा है। यानी गेहूं निर्यात को लेकर सरकार फूंक फूंककर कदम बढ़ा रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>बढ़ा&nbsp;गेहूं&nbsp;रकबा</strong></p>
<p>रबी 2026 सीजन में गेहूं का रकबा बढ़कर लगभग 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष 328.04 लाख हेक्टेयर था। न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद व्यवस्था के कारण किसानों का विश्वास मजबूत हुआ है और इस वर्ष भी बंपर उत्पादन की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p><strong>निर्यात के आसार कम</strong></p>
<p>आगामी रबी मार्केटिंग सीजन के लिए गेहूं का एमएसपी 2585 रुपये प्रति क्विटंल तय किया गया है। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं का भाव 250 डॉलर प्रति टन से कम होने के कारण 25 लाख टन निर्यात की अनुमति मिलने के बावजूद फिलहाल भारत से गेहूं निर्यात के आसार बहुत कम हैं। फिर भी गेहूं के निर्यात पर लगी रोक का आंशिक रूप से हटना आगामी रबी सीजन की कटाई से पहले एक महत्वपूर्ण कदम है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x_699e47cb84b87.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x500_699e45b299aed.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार ने 25 लाख टन गेहूं निर्यात की अनुमति दी, लेकिन निर्यात पर प्रतिबंध की नीति जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कॉटन में कैसे आएगी आत्मनिर्भरता: 16 माह में 21 हजार करोड़ रुपये की 76 लाख गांठों का आयात]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/how-to-achieve-self-reliance-in-cotton-import-of-76-lakh-bales-worth-rs-21-thousand-crore-in-16-months.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Feb 2026 17:14:28 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/how-to-achieve-self-reliance-in-cotton-import-of-76-lakh-bales-worth-rs-21-thousand-crore-in-16-months.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="189" data-end="556">पिछले 16 महीनों में कपास के मोर्चे पर देश ने दो बड़े घटनाक्रम देखे। पहला, पिछले साल (2025-26) के बजट में कॉटन मिशन लॉन्च किया गया, ताकि देश में कपास का उत्पादन बढ़ाया जा सके, जिसमें पिछले दस वर्षों में करीब 25 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं अक्टूबर 2024 से जनवरी 2026 के दौरान देश में 21 हजार करोड़ रुपये मूल्य की 76 लाख गांठ (170 किलो प्रति गांठ) कॉटन का आयात किया गया।</p>
<p data-start="558" data-end="755">इसमें 43 लाख गांठ कॉटन का आयात पिछले कॉटन वर्ष (अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025) में हुआ, जबकि 33 लाख गांठ कॉटन का आयात चालू कॉटन वर्ष के पहले चार महीनों (अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026) में ही हो चुका है।</p>
<p data-start="757" data-end="1148">ये आंकड़े चिंताजनक इसलिए हैं क्योंकि सरकार द्वारा 19 अगस्त 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच आयात शुल्क समाप्त करने के बाद आयात में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। सरकार के पहले नोटिफिकेशन में 19 अगस्त से 30 सितंबर 2025 तक शुल्क मुक्त कॉटन आयात की अनुमति दी गई थी। लेकिन इसके दस दिन बाद ही शुल्क मुक्त आयात की अवधि 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दी गई। इसका नतीजा यह हुआ कि जरूरत से कहीं अधिक कॉटन का आयात हुआ।</p>
<p data-start="1150" data-end="1430">वहीं 2 फरवरी को घोषित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (ट्रेड डील) और उसके बाद जारी अंतरिम फ्रेमवर्क के मुताबिक अमेरिका से कॉटन आयात पर शुल्क में रियायत की बड़ी संभावना है, और यह शुल्क मुक्त भी हो सकता है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बयानों में भी इसके स्पष्ट संकेत मिले हैं।</p>
<p data-start="1432" data-end="1818">उद्योग सूत्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 16 माह में हुए 76 लाख गांठ कॉटन आयात में 18,350 करोड़ रुपये की 12,03,500 टन मीडियम और स्मॉल लिंट कॉटन शामिल है, जिसका उत्पादन भारत में होता है। वहीं 2,650 करोड़ रुपये की 88,500 टन एक्स्ट्रा लॉन्ग लिंट कॉटन है, जिसका देश में उत्पादन नहीं होता और जिसकी आवश्यकता आयात से ही पूरी होती है। एक्स्ट्रा लॉन्ग लिंट कॉटन का आयात अभी भी शुल्क मुक्त है।</p>
<p data-start="1820" data-end="2272">जहां तक देश में कॉटन के उत्पादन और खपत की बात है, वर्ष 2025-26 में 292 लाख गांठ उत्पादन का सरकारी अनुमान जारी किया गया है। उद्योग के मुताबिक देश में कॉटन की खपत 315 से 330 लाख गांठ के बीच रहती है। कॉटन एसोसिएशन के अनुसार, 2013-14 में देश में कॉटन का उत्पादन 398 लाख गांठ तक पहुंच गया था। उसके बाद से प्रति हेक्टेयर उत्पादकता घटने से उत्पादन में गिरावट आई है। साथ ही 2025-26 में कपास का रकबा भी घटा है, जिसकी वजह फसल में बीमारी और कीमतों में गिरावट रही।</p>
<p data-start="2274" data-end="2782">देश के किसानों की मुश्किल केवल प्रस्तावित ट्रेड डील के तहत अमेरिका से सस्ते कॉटन आयात की नहीं है। बांग्लादेश के साथ करीब चार अरब डॉलर के निर्यात कारोबार पर भी संकट मंडरा रहा है। भारत बांग्लादेश को करीब तीन अरब डॉलर का यार्न और एक अरब डॉलर की कॉटन निर्यात करता है। लेकिन बांग्लादेश और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते के बाद संभावना है कि अमेरिका वहां कॉटन निर्यात बढ़ाएगा और बांग्लादेश के टेक्सटाइल उत्पादों को अमेरिका में शुल्क रियायत मिलेगी, जो शून्य भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में भारत को झटका लगना तय है।</p>
<p data-start="2784" data-end="2933">इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए व्यापार समझौते में वहां से तीन लाख गांठ उच्च गुणवत्ता वाली लॉन्ग स्टेपल कॉटन का शुल्क मुक्त आयात करने का प्रावधान है।</p>
<p data-start="2935" data-end="3370">किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करने के लिए सरकार की अधिकृत एजेंसी कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) कपास की खरीद करती है। पिछले साल के एमएसपी के आधार पर कॉटन की लागत 59,700 रुपये प्रति कैंडी बैठी थी। पिछले सीजन के स्टॉक की करीब 94 लाख कैंडी कॉटन की बिक्री सीसीआई लगभग पूरी कर चुका है। आयात शुल्क समाप्त होने के बाद कीमतें घटकर 52 से 53 हजार रुपये प्रति कैंडी रह गईं, जो इससे पहले करीब 60 हजार रुपये प्रति कैंडी थीं।</p>
<p data-start="3372" data-end="3861">चालू सीजन के एमएसपी के आधार पर सीसीआई के लिए कॉटन की लागत 61,900 रुपये प्रति कैंडी आ रही है। सीसीआई किसानों से कपास (बिनौला सहित) खरीदती है, जिसमें जिनिंग के बाद 33.9 फीसदी आउटटर्न और करीब 2,300 रुपये प्रति कैंडी का खर्च आता है। ऐसे में 2025-26 सीजन के लिए तय एमएसपी के आधार पर कॉटन की लागत 61,900 रुपये प्रति कैंडी बैठती है, जबकि बाजार में भाव 52 से 54 हजार रुपये प्रति कैंडी के आसपास हैं। इससे स्पष्ट है कि पिछले साल नुकसान झेल चुकी सीसीआई को इस वर्ष भी घाटे में बिक्री करनी पड़ सकती है।</p>
<p data-start="3863" data-end="4146">भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा के बाद अमेरिकी कॉटन के दाम में 1,500 से 1,800 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी हो चुकी है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि भारत को अमेरिकी कॉटन के शुल्क मुक्त निर्यात की संभावनाओं के चलते यह तेजी आई है। फिलहाल अफ्रीका से आयातित कॉटन की कीमत करीब 61 हजार रुपये प्रति कैंडी है, जबकि अमेरिका से शुल्क मुक्त आयात की स्थिति में यह लागत लगभग 57 हजार रुपये प्रति कैंडी होगी।</p>
<p data-start="4148" data-end="4510">कॉटन ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका से आयात की स्थिति में भारतीय सूत एवं कपड़ा उद्योग को अमेरिकी कॉटन का कीमत निर्धारण सीसीआई की बिक्री कीमत और अफ्रीका एवं ब्राजील से आयातित कॉटन की शुल्क युक्त कीमत के आसपास ही करना होगा। इसका सीधा लाभ अमेरिकी बहुराष्ट्रीय निर्यातक कंपनियों को मिलेगा और संभव है कि इसका केवल एक छोटा हिस्सा ही अमेरिकी किसानों तक पहुंचे।</p>
<p data-start="4512" data-end="4673">अमेरिका से कॉटन निर्यात करने वाली प्रमुख कंपनियों में एडीएम, बुंगे, कारगिल और लुई ड्राइफस शामिल हैं, जिन्हें कमोडिटी ट्रेडिंग की एबीसीडी कंपनियां भी कहा जाता है।</p>
<p data-start="4675" data-end="4978">यह जरूरी नहीं कि अमेरिका से शुल्क मुक्त आयात का बहुत बड़ा लाभ भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को मिले। लेकिन सस्ता आयात देश के कपास किसानों के लिए गंभीर चुनौती जरूर खड़ी करेगा। जिस तरह चालू सीजन में बड़ी संख्या में किसानों को एमएसपी से कम कीमत पर अपनी फसल बेचनी पड़ी, वह आने वाले कठिन दिनों का संकेत है।</p>
<p data-start="4675" data-end="4978"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कॉटन में कैसे आएगी आत्मनिर्भरता: 16 माह में 21 हजार करोड़ रुपये की 76 लाख गांठों का आयात ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x500_6996f7931a1e3.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने लांच किया AI बेस्ड &amp;quot;भारत‑VISTAAR&amp;quot;]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/union-agriculture-minister-shivraj-singh-chouhan-launched-ai-based-bharat-vistaar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 17 Feb 2026 20:23:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/union-agriculture-minister-shivraj-singh-chouhan-launched-ai-based-bharat-vistaar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जयपुर में मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने "भारत‑VISTAAR" के पहले चरण को लांच किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों के साथ ही राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, राजस्थान सरकार के कृषि मंत्री श्री किशोरी लाल मीणा, जयपुर सांसद और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ ही भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट व राज्य सरकार के अधिकारी उपस्थित थे। केंद्रीय एवं राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति और देशभर के ICAR संस्थानों तथा KVKs के प्रतिनिधि वर्चुअल रूप से कार्यक्रम से जुड़े।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने &ldquo;भारत‑VISTAAR" को पूछो और सीधे जवाब पाओ&rdquo; वाला प्लेटफॉर्म बताते हुए कहा कि अब किसान को न दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे, न जटिल ऐप्लिकेशन से जूझना पड़ेगा, सिर्फ मोबाइल उठाकर 155261 नंबर डायल करना होगा। उन्होंने समझाया कि फसल में रोग लगे, बोनी का सही समय जानना हो, अगले दिन बारिश होगी या नहीं, या अलग‑अलग मंडियों के भाव चाहिए हों &ndash; किसान सिर्फ फोन पर सवाल पूछेगा और तुरंत जवाब मिलेगा कि कौन‑सी दवा डालें, कब बोनी करें व जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, दिल्ली या मुंबई की मंडियों में क्या भाव चल रहे हैं।</p>
<p><strong>11</strong><strong> भारतीय भाषाओं</strong><strong>, </strong><strong>योजनाओं और शिकायत निवारण तक पूरे एग्री सिस्टम को जोड़ने की घोषणा</strong></p>
<p>उन्होंने बताया कि भारत‑VISTAAR अभी हिंदी और अंग्रेज़ी में शुरू हो रहा है, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से 11 भारतीय भाषाओं &ndash; जैसे गुजराती, तमिल, बंगला, असमिया, कन्नड़ आदि &ndash; में विस्तारित किया जाएगा, ताकि देश के हर प्रांत का किसान अपनी भाषा में सही सलाह ले सके। उन्होंने कहा कि इस प्लेटफॉर्म पर पीएम‑किसान, फसल बीमा, सॉइल हेल्थ कार्ड, संशोधित ब्याज अनुदान, कृषि यंत्रीकरण, पर ड्रॉप‑मोर क्रॉप, पीएम कृषि सिंचाई योजना, पीएम अन्नदाता आय संरक्षण अभियान, कृषि अवसंरचना कोष और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं की जानकारी, पात्रता, आवेदन की स्थिति और शिकायत निवारण तक की सुविधा उपलब्ध रहेगी और आगे &ldquo;फार्मर आईडी&rdquo; के जरिए खेत, मिट्टी और फसल से जुड़ा पूरा प्रोफाइल भी एक ही जगह पर जुड़ जाएगा</p>
<p>अपने संबोधन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि एक नेता हैं, जो &ldquo;पार्ट‑टाइम पॉलिटिशियन और फुल‑टाइम ड्रामेबाज़&rdquo; हैं, जिन्हें न ट्रेड की समझ है, न ट्रेडिशन की और न ही गांव‑खेत की असली जिंदगी का अनुभव है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने किसानों के बीच खड़े होकर पूछा कि राहुल गांधी यह बताएं कि जब स्वामीनाथन कमेटी ने लागत पर 50% मुनाफा जोड़कर MSP तय करने की सिफारिश की थी, तब कांग्रेस‑नीत यूपीए सरकार ने कोर्ट में हलफनामा देकर इसे मानने से इनकार क्यों किया। उन्होंने कहा कि जिस बात को कांग्रेस &ldquo;बाज़ार विकृति&rdquo; का नाम देकर ठुकराती रही, उसी को 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने किसानों के हित में धरातल पर उतारते हुए लागत पर 50% लाभ जोड़कर MSP तय करने का फैसला लागू किया।</p>
<p><strong>सेब</strong><strong>, </strong><strong>दाल</strong><strong>, </strong><strong>सोयाबीन</strong><strong>, </strong><strong>मक्का और डेयरी पर स्पष्ट लाइन</strong></p>
<p>सेब के मुद्दे पर उठाए जा रहे सवालों का उत्तर देते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि भारत को हर साल लगभग 5.5 लाख टन सेब की जरूरत होती है, जो अभी तुर्किये और ईरान जैसे देशों से भी आता है। उन्होंने कहा कि यदि इसमें से मात्र 1 लाख मीट्रिक टन सेब अमेरिका से लिया जाए और उस पर आयात मूल्य ₹80 प्रति किलो के ऊपर ₹25 शुल्क जोड़कर कोटा तय किया जाए, तो यह भारत के सेब उत्पादकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा, बल्कि &ldquo;तुर्किये से लेने के बजाय कहीं और से लेने&rdquo; का मामूली बदलाव मात्र है। सोयाबीन और मक्का पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इन पर कोई रियायत नहीं दी गई और यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस शासन में भी 20 अरब डॉलर के कृषि उत्पादों का आयात होता था, जिसमें डेयरी उत्पाद भी शामिल थे। चौहान ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने साफ निर्देश दिया है कि दूध, घी, दही, पनीर सहित कोई भी डेयरी उत्पाद भारत की धरती पर किसी भी कीमत पर आयात नहीं होने दिया जाएगा, ताकि देश के दूध उत्पादक किसानों को नुकसान न हो।</p>
<p>कपास के मामले में मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि घरेलू उत्पादन के मुकाबले उद्योगों की जरूरत अधिक होने से उद्योगों को कुछ कपास आयात करना पड़ता है, जिससे कपड़ा उद्योग चल सके, रोजगार बने और तैयार वस्त्रों का निर्यात बढ़े। उन्होंने बताया कि भारत का टेक्सटाइल निर्यात विभिन्न उत्पादों को मिलाकर लगभग 4 लाख करोड़ रुपये है, जिसे 45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने की क्षमता है और इसके फलस्वरूप अंततः लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ही मिलेगा।&nbsp;</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने अपने राजनीतिक संदेश को आगे बढ़ाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्र के सामने दो वादे किए थे &ndash; &ldquo;भारत को कभी झुकने नहीं दूंगा&rdquo; और &ldquo;किसानों के हितों को सर्वोपरि रखूंगा, उन पर आंच नहीं आने दूंगा&rdquo; &ndash; और दोनों पर सरकार मजबूती से खड़ी है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर, एयरस्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया गया, वैसे ही कृषि और किसानों के हितों पर भी कोई समझौता नहीं होगा और हर वैश्विक समझौता &ldquo;किसान‑प्रथम दृष्टिकोण&rdquo; से ही देखा जाएगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने लांच किया AI बेस्ड "भारत‑VISTAAR" ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फरवरी मध्य में ही बंद हुईं 78 चीनी मिलें, गन्ना आपूर्ति बनी बड़ी समस्या]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/78-sugar-mills-closed-in-mid-february-sugarcane-supply-became-a-major-problem.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 17 Feb 2026 18:33:14 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/78-sugar-mills-closed-in-mid-february-sugarcane-supply-became-a-major-problem.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="142" data-end="483">चालू पेराई सत्र (2025-26) में फरवरी से ही चीनी मिलों का संचालन बंद होना शुरू हो गया है। चीनी उद्योग संगठन इस्मा के अनुसार, 15 फरवरी तक देश की 78 चीनी मिलों ने पेराई कार्य बंद कर दिया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 72 मिलें बंद हुई थीं। पिछला सत्र भी उत्पादन के लिहाज से बहुत बेहतर नहीं रहा था और इस बार हालात और चुनौतीपूर्ण नजर आ रहे हैं।</p>
<p data-start="485" data-end="825">चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति में दिक्कतों के साथ-साथ कोल्हू और खांडसारी इकाइयों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश में 15 फरवरी तक 9 चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं, जबकि दो मिलें इस सत्र में शुरू ही नहीं हो सकीं। कई मिलों में फरवरी के अंत तक पेराई बंद होने के आसार हैं, क्योंकि पर्याप्त गन्ना उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।</p>
<p data-start="827" data-end="1156">उत्तर प्रदेश में गन्ने की पैदावार में गिरावट और महाराष्ट्र में समय से पहले फ्लावरिंग का असर चीनी उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। हालांकि 15 फरवरी तक देश में 225 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि तक हुए 197 लाख टन से अधिक है। पिछले वर्ष महाराष्ट्र में चुनाव के कारण पेराई देर से शुरू हुई थी।</p>
<p data-start="1158" data-end="1476">चालू पेराई सीजन के लिए चीनी उत्पादन के आरंभिक अनुमान में इस्मा ने वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 349 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान जताया था। लेकिन उद्योग सूत्रों के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए नेट उत्पादन लगभग 290 लाख टन रहने की संभावना है। इसके अतिरिक्त 34 लाख टन चीनी के एथेनॉल में डायवर्जन के बाद चीनी उत्पादन लगभग 325 लाख टन रह सकता है।</p>
<p data-start="1478" data-end="1706">देश के प्रमुख उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में 15 फरवरी तक करीब 66 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 64 लाख टन से थोड़ा अधिक है। हालांकि गन्ने से चीनी की रिकवरी दर पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर रही है।</p>
<p data-start="1708" data-end="2005">नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, 14 फरवरी तक उत्तर प्रदेश की मिलों ने 662 लाख टन गन्ने की पेराई की, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 680 लाख टन पेराई हुई थी। यानी इस वर्ष करीब 18 लाख टन कम गन्ने की पेराई हुई है, जबकि मिलें अधिक से अधिक गन्ना जुटाने की कोशिश कर रही हैं।</p>
<p data-start="2007" data-end="2276">पिछले कुछ वर्षों से उत्तर प्रदेश के किसान गन्ने की फसल में रोग और पैदावार में गिरावट की समस्या से जूझ रहे हैं, जिससे मिलों में आपूर्ति प्रभावित हो रही है। दूसरी ओर, गुड़ और खांडसारी इकाइयां किसानों को अधिक कीमत दे रही हैं, जिससे गन्ना खरीद को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।</p>
<p data-start="2278" data-end="2606">उत्तर प्रदेश में बिजनौर जिले के नांगलसौती गांव के कोल्हू संचालक मंजीत सिंह ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि चालू सीजन में कोल्हू 430 से 440 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव दे रहे हैं। हमें गुड़ का भाव 45 से 50 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है और चीनी की तुलना में गुड़ की रिकवरी भी अधिक है। नकद भुगतान और बेहतर दर के कारण कई किसान चीनी मिलों के बजाय कोल्हू और खांडसारी इकाइयों को गन्ना बेच रहे हैं।</p>
<p data-start="2608" data-end="2790" data-is-last-node="" data-is-only-node="">मौजूदा हालात को देखते हुए आशंका है कि मार्च के अंत तक उत्तर प्रदेश की अधिकांश चीनी मिलों में पेराई बंद हो सकती है। सामान्य परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश में मई तक पेराई जारी रहती है।</p>
<p data-start="2608" data-end="2790" data-is-last-node="" data-is-only-node=""></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x500_6994695ddaf31.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ फरवरी मध्य में ही बंद हुईं 78 चीनी मिलें, गन्ना आपूर्ति बनी बड़ी समस्या ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जयपुर से शुरू होगी एआई किसान क्रांति: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान लांच करेंगे “भारत‑VISTAAR”]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/union-minister-shivraj-singh-chouhan-to-launch-bharat-vistaar-in-jaipur.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 17 Feb 2026 08:53:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/union-minister-shivraj-singh-chouhan-to-launch-bharat-vistaar-in-jaipur.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong></strong> केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान 17 फरवरी को जयपुर में देशभर के किसानों के लिए नया डिजिटल साथी &ldquo;भारत‑VISTAAR&rdquo; लांच करने जा रहे हैं। भारतीय कृषि और किसानों को स्मार्ट बनाने के लिए यह एआई आधारित प्लेटफॉर्म किसानों को फोन कॉल, चैटबॉट और आगे चलकर ऐप के ज़रिए मौसम, मंडीभाव, कीट‑रोग, मिट्टी, फसल सलाह और सरकारी योजनाओं की जानकारी एक ही जगह पर देगा। फेज‑1 में यह सुविधा हिंदी व अंग्रेज़ी में शुरू होगी और महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात सहित कई राज्यों के लाखों किसानों तक पहुंचेगी। लांच कार्यक्रम में राज्यों के कृषि मंत्री, आईसीएआर, केवीके, कृषि विश्वविद्यालयों और अन्य कृषि संस्थानों के नेटवर्क के माध्यम से देशभर के लाखों किसान वर्चुअली जुड़ेंगे।</p>
<p><strong>राजस्थान के मुख्यमंत्री भी होंगे शामिल</strong></p>
<p>जयपुर में 17 फरवरी को सुबह 10 बजे होने वाले लांच समारोह में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बड़ी संख्या में किसान भाई-बहनों के अलावा मुख्य रूप से राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, रामनाथ ठाकुर, राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट,केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव डा. देवेश चतुर्वेदी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी, राजस्थान के मुख्य सचिव और कृषि विभाग के आला अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।</p>
<p><strong>&ldquo;</strong><strong>एआई फॉर एग्रीकल्चर रोडमैप</strong><strong>&rdquo;</strong><strong>, </strong><strong>&ldquo;</strong><strong>एआई हैकथॉन</strong><strong>&rdquo;</strong><strong> व </strong><strong>&ldquo;</strong><strong>एग्रीकोष</strong><strong>&rdquo;</strong></p>
<p>इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री द्वारा &ldquo;एआई फॉर एग्रीकल्चर रोडमैप&rdquo; भी लांच किया जाएगा, वहीं &ldquo;एआई हैकथॉन&rdquo; एवं &ldquo;एग्रीकोष&rdquo; की घोषणा भी उनके द्वारा होगी।</p>
<p><strong>भारत</strong><strong>‑</strong><strong>VISTAAR</strong><strong>: डिजिटल क्रांति</strong></p>
<p>भारत‑VISTAAR भारत सरकार का किसान‑केंद्रित, एआई‑संचालित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है, जो अलग‑अलग सरकारी और वैज्ञानिक स्रोतों को जोड़कर किसानों तक भरोसेमंद जानकारी पहुंचाएगा। इस प्लेटफॉर्म पर किसान मौसम, मंडीभाव, कीट और बीमारी, मृदा स्वास्थ्य, फसल प्रबंधन और कम से कम 10 प्रमुख केंद्र सरकार योजनाओं से जुड़ी जानकारी और स्थिति देख सकेंगे।</p>
<p><strong>वॉयस</strong><strong>‑</strong><strong>फर्स्ट एआई: साधारण फोन से भी सुविधा</strong></p>
<p>भारत‑VISTAAR को वॉयस‑फर्स्ट एआई के रूप में तैयार किया गया है, ताकि साधारण फीचर फोन वाला किसान भी सिर्फ कॉल करके इसका लाभ ले सके। इसके लिए टेलीफोनी हेल्पलाइन 155261 को प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, साथ ही वॉयस इनपुट‑आउटपुट, वेबसाइट और मोबाइल साइट चैटबॉट जैसी सुविधाएं भी तैयार हैं, वहीं एंड्रॉयड ऐप भी जारी किया जाएगा।</p>
<p><strong>मौसम</strong><strong>, </strong><strong>मंडीभाव</strong><strong>, </strong><strong>कीट</strong><strong>‑</strong><strong>रोग और योजनाओं का एकीकृत समाधान</strong></p>
<p>फेज‑1 लांच के लिए भारत‑VISTAAR में IMD से मौसम की जानकारी, AgMarkNet से मंडीभाव, NPSS के ज़रिए कीट और बीमारी प्रबंधन, एग्री‑स्टैक डेटा और 10 केंद्र सरकार योजनाओं की जानकारी को जोड़ा गया है। इसके साथ ही योजना की डिटेल, आवेदन की स्थिति, लाभ की ट्रैकिंग और शिकायत दर्ज कर समाधान की स्थिति देखने की सुविधा भी इंटीग्रेट की गई है, ताकि किसान को बार‑बार दफ्तर या अलग‑अलग पोर्टल न घूमने पड़ें।</p>
<p><strong>डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में भारत</strong><strong>‑</strong><strong>VISTAAR</strong></p>
<p>भारत‑VISTAAR को कृषि क्षेत्र के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए किसान‑केंद्रित, एआई‑संचालित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के रूप में डिजाइन किया गया है, जो &ldquo;प्लग‑एंड‑प्ले&rdquo; मॉडल पर काम करेगा ताकि अलग‑अलग सरकारी, वैज्ञानिक और बाज़ार संबंधी प्रणालियों को आसानी से जोड़ा जा सके। यह प्लेटफॉर्म सत्यापित एवं सुरक्षित जानकारी पर आधारित है, मल्टीमॉडल और बहुभाषी पहुंच देता है और ऐसा ढांचा प्रदान करता है, जिसे विभिन्न राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर अपनाकर बड़े स्तर पर प्रभाव पैदा कर सकती हैं।</p>
<p><strong>वॉयस</strong><strong>‑</strong><strong>फर्स्ट एआई</strong><strong>, </strong><strong>फीचर फोन और राज्यों से जुड़ाव</strong></p>
<p>भारत‑VISTAAR को भारत सरकार द्वारा निर्मित एआई‑संचालित कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें वॉयस‑फर्स्ट एआई के ज़रिए देश के किसानों तक सेवा पहुंचाने पर विशेष जोर है, ताकि फीचर फोन उपयोगकर्ता भी टेलीफोनी के माध्यम से इस सुविधा का लाभ ले सकें। फेज‑1 में महाराष्ट्र, बिहार और गुजरात जैसे राज्यों को प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है और आगे चलकर इसे अन्य राज्यों और अधिक भारतीय भाषाओं तक विस्तार दिया जाएगा, जिससे यह राष्ट्रीय स्तर का कृषि डिजिटल नेटवर्क बन जाएगा व किसानों के लिए लाभकारी होगा।</p>
<p><strong>ICAR, KVK </strong><strong>व वैज्ञानिक सलाह से जुड़ा मजबूत नेटवर्क</strong></p>
<p>भारत‑VISTAAR में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज, फसल प्रबंधन और सॉइल हेल्थ कार्ड आधारित मृदा सलाह को शामिल किया गया है, जिससे किसान को वैज्ञानिक और क्षेत्र‑विशेष सलाह मिल सके। इससे यह प्लेटफॉर्म सिर्फ सूचना देने वाला नहीं, बल्कि एक तरह से &ldquo;डिजिटल कृषि सलाहकार&rdquo; बन जाता है, जो फसल और खेत के बेहतर निर्णय में मदद करेगा। यह ऐतिहासिक लांच कार्यक्रम स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर मैनेजमेंट, दुर्गापुरा, जयपुर में आयोजित होगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_696a0222bab67.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जयपुर से शुरू होगी एआई किसान क्रांति: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान लांच करेंगे “भारत‑VISTAAR” ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में गैर&amp;#45;सब्सिडी उर्वरकों की बिक्री पर प्रतिबंध, बढ़ी उद्योग की मुश्किलें]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/up-government-banned-sale-of-non-subsidised-fertilisers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 16 Feb 2026 06:03:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/up-government-banned-sale-of-non-subsidised-fertilisers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>लगभग पूरी तरह नियंत्रित उर्वरक उद्योग उत्तर प्रदेश सरकार के एक फैसले से सकते में है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 9 जनवरी, 2026 को एक शासनादेश जारी कर राज्य में 1 जनवरी, 2026 से सब्सिडी वाले उर्वरक बेचने वाली कंपनियों और वितरकों पर गैर-सब्सिडी वाले उर्वरक बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।&nbsp;</p>
<p>राज्य के कृषि निदेशालय के उर्वरक अनुभाग द्वारा जारी शासनादेश में कहा गया है कि राज्य में समस्त उर्वरक विनिर्माता एवं प्रदायकर्ता संस्थाओं को अनुदानित (सब्सिडाइज्ड) उर्वरकों की आपूर्ति एवं बिक्री के लिए दी गई अनुमति को छोड़कर, उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र में अंकित सभी गैर-अनुदानित उर्वरकों की आपूर्ति और बिक्री पर 1 जनवरी, 2026 से उत्तर प्रदेश में पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p>उर्वरक उत्पादकों और विपणन करने वाली कंपनियों को इस आशय का पत्र 13 जनवरी को भेजा गया। इस पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि गैर-अनुदानित उर्वरकों की आपूर्ति एवं बिक्री पर 1 जनवरी, 2026 से उत्तर प्रदेश में पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है। रूरल वॉयस के पास इस पत्र की प्रति उपलब्ध है।</p>
<p>यह पत्र सहकारी उर्वरक कंपनियों इफको और कृभको के अलावा इंडियन पोटाश लिमिटेड, हिंदुस्तान उर्वरक एंड रसायन लिमिटेड, एनएफएल, यारा फर्टिलाइजर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड, कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड, मेटिक्स फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स, राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स, गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स, गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स, श्रीराम फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स और नर्मदा बॉयो-केम लिमिटेड को भेजा गया है।</p>
<p>पत्र में कहा गया है कि किसानों को सब्सिडाइज्ड उर्वरकों के साथ अन्य उर्वरकों की टैगिंग की शिकायतें मिल रही थीं। इस संबंध में उद्योग के साथ हुई बैठकों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतें जारी रहने के बाद यह कदम उठाया गया, जिसे आदेश जारी करने की प्रमुख वजह बताया गया है।</p>
<p>उद्योग सूत्रों ने रूरल वॉयस को बताया कि उर्वरक उद्योग सबसे अधिक नियंत्रित क्षेत्रों में से एक है। यूरिया की बिक्री और मूल्य पूरी तरह नियंत्रित हैं। नवंबर 2012 से यूरिया की बिक्री कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है और 45 किलो के बैग के लिए 266.5 रुपये की अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) तय है। वहीं न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत आने वाले विनियंत्रित उर्वरकों में सर्वाधिक बिकने वाले डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) का एमआरपी 2022 से 50 किलो के बैग के लिए 1350 रुपये पर स्थिर है। सरकार इस एमआरपी को बरकरार रखने के लिए सब्सिडी निर्धारित करती है।</p>
<p>डीएपी के अलावा एनपीके सहित 30 से अधिक कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की कीमत तय करने का अधिकार उत्पादकों और विपणन कंपनियों के पास है। हालांकि, डीएपी की तरह इन उर्वरकों के दाम भी परोक्ष रूप से सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी से प्रभावित होते हैं। सब्सिडी के साथ कई शर्तें भी लागू होती हैं।</p>
<p>देश में करीब 670 लाख टन उर्वरकों की बिक्री होती है। इनमें अकेले यूरिया की बिक्री लगभग 400 लाख टन और डीएपी की करीब 100 लाख टन है। सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री के लिए सरकार कृषि मंत्रालय की मांग के आधार पर कंपनियों को फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर के तहत इंडेंट जारी करती है और उनके मूवमेंट व बिक्री की पूरी जानकारी रखती है। आयातित और घरेलू रूप से उत्पादित सब्सिडी वाले उर्वरकों के डिस्पैच तथा राज्य व जिला-वार आवंटन पर भी सरकार का नियंत्रण रहता है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले से सब्सिडी वाले उर्वरकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन गैर-सब्सिडी वाले स्पेशियलिटी उर्वरकों की बिक्री प्रभावित होगी। उद्योग सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री लगभग 13 हजार करोड़ रुपये की है, जबकि गैर-सब्सिडी उर्वरकों का बाजार 1000 करोड़ रुपये से थोड़ा अधिक है। राज्य सरकार के इस फैसले से कंपनियों के इस कारोबार को झटका लगेगा।</p>
<p>एक उर्वरक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने रूरल वॉयस को बताया कि इस तरह का प्रतिबंध किसानों के लिए भी हितकर नहीं है। सरकार और कंपनियां रासायनिक उर्वरकों के विकल्पों पर ध्यान दे रही हैं, ताकि मृदा स्वास्थ्य के लिए संतुलित उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके और गैर-रासायनिक उर्वरकों की खपत बढ़ाई जा सके। लेकिन इस निर्णय से विशिष्ट जरूरतों वाले नए उर्वरकों में कंपनियों के निवेश को भी झटका लगेगा।</p>
<p>कुछ कंपनियों का कहना है कि फसलों की विशेष आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए स्पेशियलिटी उर्वरक जरूरी होते हैं, लेकिन यह फैसला किसानों को इनसे वंचित कर सकता है। देशभर में इन उर्वरकों का बाजार करीब चार लाख टन का है, जिसमें सॉल्यूबल और माइक्रो न्यूट्रिएंट उर्वरक शामिल हैं।</p>
<p>उर्वरक उद्योग का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला नियंत्रण को और सख्त करने वाला कदम है, जो किसानों के भी हित में नहीं है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_6900fdf832ccc.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में गैर-सब्सिडी उर्वरकों की बिक्री पर प्रतिबंध, बढ़ी उद्योग की मुश्किलें ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी उत्पादन अनुमान से करीब 26 लाख टन घटकर 290 लाख टन रहने की संभावना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sugar-production-to-remain-26-lakh-ton-below-the-target-at-290-lakh-ton.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 14 Feb 2026 14:48:42 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sugar-production-to-remain-26-lakh-ton-below-the-target-at-290-lakh-ton.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू पेराई सीजन (2025-26) में उत्तर प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता में भारी गिरावट और महाराष्ट्र में सीजन के पहले फ्लावरिंग की स्थिति बनने से चीनी उत्पादन अनुमान से करीब 26 लाख टन कम रहने की संभावना है। चीनी उद्योग के संगठनों ने चालू सीजन में करीब 349 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया था जिसमें से 34 लाख टन चीनी का एथेनॉल में डायवर्सन के बाद 316 लाख टन चीनी उत्पादन रहने का अनुमान लगाया गया था। निजी चीनी उद्योग के संगठन इंडियन शुगर एंड बॉयोइनर्जी मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने&nbsp; चालू सीजन में 349.01 लाख टन चीनी उत्पादन का &nbsp;शुरुआती अनुमान लगाया था।</p>
<p>सबसे बड़े गन्ना और चीनी उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से आ रही खबरों के मुताबिक दोनों राज्यों में अनुमान से कम उत्पादन होगा। चीनी उद्योग सूत्रों ने <em><strong>रूरल वॉयस</strong> </em>को बताया कि अनुमान के मुकाबले सबसे अधिक कमी उत्तर प्रदेश में रहेगी और वहां चालू सीजन में चीनी उत्पादन करीब 95 लाख टन पर अटक सकता है जो पिछले साल के 92.76 लाख टन उत्पादन से मामूली ही अधिक है। जबकि उत्तर प्रदेश में 110 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। वहीं महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन करीब 102 लाख टन रहने की संभावना है जो पिछले साल के मुकाबले करीब 12 लाख टन अधिक है और वहां इस साल 110 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया गया था।&nbsp; पिछले साल महाराष्ट्र में 80.96 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।</p>
<p>इस्मा ने दिसंबर में चीनी उत्पादन के अनुमान को 349.01 लाख टन से घटाकर 343.5 लाख टन टन कर दिया था। जिसमें एथेनॉल के लिए डायवर्जन भी शामिल था।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में एक बड़ी चीनी मिल समूह के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रूरल वॉयस को बताया कि राज्य में गन्ना उत्पादकता पिछले साल के करीब 15 से 20 फीसदी तक कम है जबकि पिछले साल भी राज्य में गन्ने की फसल कमजोर थी। पिछले कुछ साल में उत्तर प्रदेश के किसान गन्ना में बीमारी और कम उत्पादकता के संकट से जूझ रहे हैं। इस स्थिति के चलते चीनी मिलों में गन्ने की आपूर्ति घट रही है और मिलों में अगले इस माह के अंत तक पेराई बंद होने लगेंगी। जबकि मार्च में ही राज्य में सभी मिलों में पेराई बंद होने की संभावना है। जबकि बेहतर फसल की स्थिति में उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों में मई तक पेराई होती रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में <em><strong>रूरल वॉयस</strong></em>&nbsp; की किसानों के साथ हुई बातचीत में उत्पादकता में भारी गिरावट की सूचना आती रही है।</p>
<p>महाराष्ट्र के किसान नेता पूर्व सांसद और स्वाभिमानी शेतकरी संघठना के अध्यक्ष राजू शेट्टी ने <em><strong>रूरल वॉयस</strong></em> को बताया कि पश्चिमी महाराष्ट्र में गन्ने की फसल में अर्ली फ्लावरिंग हो रही है जिसके चलते उत्पादन प्रभावित हुआ है। राज्य की चीनी मिलों के सूत्रो के मुताबिक महाराष्ट्र में चीनी मिलों ने पेराई क्षमता बढ़ाई है और उसके चलते भी पेराई में तेजी आई है। पेराई में तेजी से अगले कुछ दिनो में ही वहां कई चीनी मिलो में पेराई बंद हो जाएगी। इसकी एक बड़ी वजह गन्ने की मैकेनिकल हार्वेस्टिंग भी है इसके जरिये तेजी से गन्ने की कटाई हुई है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक चालू सीजन में महाराष्ट्र में गन्ने की करीब 25 फीसदी कटाई मशीन से होगी।</p>
<p>वहीं तीसरे बड़े चीनी उत्पादक राज्य कर्नाटक में इस सीजन में करीब 42 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। कर्नाटक में 50 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान उद्योग ने लगाया है।</p>
<p>वहीं 29 जनवरी, 2026 को ऑल इंडिया शुगर ट्रेडर्स एसोसिएशन (आइस्ता) ने चालू सीजन में चीनी उत्पादन का अनुमान जारी किया था। जिसके मुताबिक चालू सीजन में 296 लाख टन चीनी उत्पादन रहने की संभावना जताई गई थी।&nbsp;</p>
<p>उद्योग के लिए एक अच्छी खबर जरूर है। केंद्र सरकार ने 13 फरवरी को पांच लाख टन अतिरिक्त चीनी निर्यात की अनुमति देने की घोषणा की थी। इसका असर यह हुआ कि चीनी की एक्स-फैक्टरी कीमत में 14 फरवरी को ही 50 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हो गई। महाराष्ट्र में चीनी की एक्स फैक्टरी कीमत 3750 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है जबकि उत्तर प्रदेश में यह 3950 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। चीनी मिलों का कहना&nbsp; है कि दाम&nbsp; में सुधार के चलते मिलें गन्ना किसानों को भुगतान में तेजी ला सकती हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी उत्पादन अनुमान से करीब 26 लाख टन घटकर 290 लाख टन रहने की संभावना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिल्ली में प्रदूषण के लिए केवल किसान दोषी नहीं, पराली का योगदान 5 फीसदी से अधिक नहीं: केंद्रीय कृषि मंत्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wrong-to-blame-only-farmers-for-delhi-ncr-pollution-stubble-burning-contributes-no-more-than-5-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Feb 2026 20:43:24 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wrong-to-blame-only-farmers-for-delhi-ncr-pollution-stubble-burning-contributes-no-more-than-5-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के लिए अक्सर किसानों को दोषी ठहराया जाता है। लेकिन अब इस मामले में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो इस धारणा को गलत साबित करते हैं।</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को राज्यसभा में सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि दिल्ली&ndash;एनसीआर में प्रदूषण का कारण केवल पराली और किसान नहीं हैं। जब भी दिल्ली में धुआं बढ़ता है, किसानों को दोषी ठहरा दिया जाता है। लेकिन अब वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है कि शीतकाल में भी दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण में पराली का योगदान 5 फीसदी से ज्यादा नहीं है।</p>
<p>चौहान ने सदन को बताया कि प्रदूषण औद्योगिक इकाइयों और वाहनों से निकालने वाले धुएं से होता हैं, लेकिन कई बार केवल किसानों को बदनाम किया जाता है। जबकि किसान एकमात्र कारण नहीं है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x_69900ff631904.jpg" alt="" /></p>
<p><strong><a href="https://x.com/i/status/2022251489708708324">वीडियो लिंक</a></strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि पराली जलाने से मित्र कीट, न्यूट्रिएंट्स, ऑर्गेनिक कार्बन नष्ट होते हैं, मिट्टी की उर्वरता घटती है और प्रदूषण भी बढ़ता है, इसलिए सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना के तहत किसानों को पराली प्रबंधन मशीनों पर 50 फीसदी से 80 फीसदी तक सब्सिडी दी है।</p>
<p>इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में निरंतर गिरावट आ रही है। सरकार अब पराली को 'बोझ' के बजाय 'वरदान' बनाने की दिशा में काम कर रही है, जिसके तहत परली का उपयोग बायो-सीएनजी, पेलेट्स और थर्मल पावर प्लांट में ईंधन के रूप में किया जा रहा है।</p>
<p><strong>पंजाब में पराली की आग में कमी&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>कृषि मंत्री ने बताया की पराली जलाने की घटनाएं अब निरंतर कम होती चली जा रही हैं। पंजाब में उल्लेखनीय कमी आई है, लगभग केवल 5,000 पराली जलाने की घटनाएं पिछले साल हुई हैं। हरियाणा सरकार के अपने अलग प्रयास हैं, वहां भी पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है।</p>
<p>पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 3.5 लाख से अधिक मशीनें वितरित की गई हैं। मेरठ, शामली, हापुड़, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, गाजियाबाद, बागपत और गौतमबुद्ध नगर में 11 पैलेटिंग विनिर्माण संयंत्र तथा 32.63 हजार टन भंडारण क्षमता विकसित कर पराली को संसाधन में बदला जा रहा है।</p>
<p><strong>हरियाणा मॉडल की सराहना </strong></p>
<p>हरियाणा मॉडल की सराहना करते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार&nbsp;इन-सीटू&nbsp;और&nbsp;एक्स-सीटू&nbsp;प्रबंधन के लिए प्रति एकड़&nbsp;1,000 रुपये, &lsquo;मेरा पानी&ndash;मेरी विरासत&rsquo; के तहत धान के स्थान पर अन्य फसलों के लिए प्रति एकड़&nbsp;7,000 रुपये, DSR&nbsp;के लिए प्रति एकड़&nbsp;4,000 रुपये,&nbsp;पराली न जलाने पर रेड ज़ोन पंचायतों को&nbsp;एक लाख रुपये,&nbsp;येलो ज़ोन पंचायतों को&nbsp;50 हजार रुपये&nbsp;और गौशालाओं तक पराली पहुंचाने के लिए प्रति ट्रांसपोर्ट&nbsp;500 (अधिकतम&nbsp;15 हजार रुपये)&nbsp;तक सहायता दे रही है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66f106a1950d6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिल्ली में प्रदूषण के लिए केवल किसान दोषी नहीं, पराली का योगदान 5 फीसदी से अधिक नहीं: केंद्रीय कृषि मंत्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हर एफटीए और समझौता राष्ट्रहित में, किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित: शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/every-fta-and-agreement-is-in-the-national-interest-farmers-interests-are-completely-safe-shivraj-singh-chouhan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Feb 2026 19:49:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/every-fta-and-agreement-is-in-the-national-interest-farmers-interests-are-completely-safe-shivraj-singh-chouhan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारत द्वारा किए गए सभी मुक्त व्यापार समझौते और अंतरराष्ट्रीय ट्रेड डील पूरी तरह राष्ट्रहित में हैं और इनमें किसानों के हितों की सर्वोच्च रक्षा की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी समझौते में खेत या किसान के हितों से समझौता नहीं किया गया है।</p>
<p>भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के 64वें दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि चाहे समझौते यूरोपियन यूनियन के साथ हों, अमेरिका के साथ हों या अन्य देशों के साथ, सभी निर्णय व्यापक आकलन के बाद लिए गए हैं और किसानों की सुरक्षा सर्वोपरि रही है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि अमेरिका के साथ हुए समझौते में भी भारत के राष्ट्रीय हित और कृषि क्षेत्र पूरी तरह संरक्षित हैं।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग किसानों के नाम पर भय और अफवाह फैलाकर राजनीति कर रहे हैं। ऐसे लोग &ldquo;देश बिक गया&rdquo; जैसे नारों के जरिए झूठ का वातावरण बनाते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं।</p>
<p><strong>प्रमुख</strong> <strong>फसलें</strong> <strong>और</strong> <strong>डेयरी</strong> <strong>पूरी</strong> <strong>तरह</strong> <strong>संरक्षित</strong></p>
<p>मंत्री ने स्पष्ट किया कि गेहूं, मक्का, चावल, सोया और मोटे अनाज जैसी प्रमुख फसलों के लिए किसी भी प्रकार से आयात के द्वार नहीं खोले गए हैं। डेयरी और पोल्ट्री उत्पाद भी पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि जिन वस्तुओं का आयात किया गया है, वे देश की आवश्यकता के अनुरूप हैं और किसानों के हितों पर कोई आंच नहीं आने दी गई है।</p>
<p><strong>आईएआरआई</strong> <strong>को</strong> <strong>बताया</strong> <strong>कृषि</strong> <strong>प्रगति</strong> <strong>का</strong> <strong>प्राण</strong> <strong>केंद्र</strong></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने आईएआरआई को देश की कृषि प्रगति का केंद्र बताते हुए कहा कि हरित क्रांति की ऐतिहासिक शुरुआत यहीं से हुई थी। उन्होंने &ldquo;विकसित भारत 2047&rdquo; के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित कृषि और समृद्ध किसान इस संकल्प की आधारशिला हैं।</p>
<p>उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि भविष्य के कृषि-नेता हैं। कृषि में 5 प्रतिशत वृद्धि दर बनाए रखने, विज्ञान आधारित और टिकाऊ कृषि मॉडल अपनाने तथा जलवायु परिवर्तन, मृदा क्षरण और जल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>
<p><strong>&lsquo;Lab to Land&rsquo; </strong><strong>और</strong> <strong>स्टार्टअप</strong> <strong>पर</strong> <strong>जोर</strong></p>
<p>मंत्री ने कहा कि &ldquo;लैब टू लैंड&rdquo; केवल नारा नहीं, बल्कि हर वैज्ञानिक की जिम्मेदारी है कि शोध प्रयोगशालाओं की तकनीक खेत तक पहुंचे। उन्होंने प्राकृतिक खेती, माइक्रो-इरिगेशन, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।</p>
<p>युवाओं को &ldquo;Job Seeker&rdquo; के बजाय &ldquo;Job Creator&rdquo; बनने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने एग्री-स्टार्टअप, एग्री-प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के माध्यम से किसानों को बाजार से जोड़ने का आह्वान किया।</p>
<p>समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और रामनाथ ठाकुर, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट तथा आईएआरआई के निदेशक डॉ. सी.एच. श्रीनिवास राव सहित बड़ी संख्या में वैज्ञानिक और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। इस वर्ष कुल 470 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 290 एमएससी और एमटेक तथा 180 पीएचडी छात्र शामिल हैं।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x500_698f32a3f2909.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हर एफटीए और समझौता राष्ट्रहित में, किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित: शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x500_698f32a3f2909.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमेरिका से ट्रेड डील के खिलाफ कई राज्यों में विरोध&amp;#45;प्रदर्शन, संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/bharat-bandh-has-mixed-impact-in-many-states-opposition-protests-in-parliament-premises.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 12 Feb 2026 19:30:04 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/bharat-bandh-has-mixed-impact-in-many-states-opposition-protests-in-parliament-premises.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="128" data-end="459">केंद्र सरकार की श्रम और आर्थिक नीतियों के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर गुरुवार को भारत बंद का देश के कई हिस्सों में मिला-जुला असर देखने को मिला। हालांकि, अधिकांश राज्यों में जनजीवन खास प्रभावित नहीं हुआ। कई राज्यों में किसान संगठनों ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते का विरोध करते हुए हड़ताल का समर्थन किया।</p>
<p data-start="461" data-end="1033">हड़ताल का अधिक असर केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और ओडिशा में देखने को मिला, जबकि पंजाब, हरियाणा, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में कई जगह विरोध-प्रदर्शन हुए। नई दिल्ली में जंतर-मंतर और एनसीआर में नोएडा व फरीदाबाद में ट्रेड यूनियनों ने श्रम कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन किया।&nbsp;</p>
<p data-start="461" data-end="1033">ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में केंद्र के श्रम सुधारों और आर्थिक नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने हड़ताल का समर्थन किया। किसान संगठनों ने मनरेगा को समाप्त कर &lsquo;विकसित भारत&ndash;रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)&rsquo; योजना शुरू करने के प्रस्ताव का भी विरोध किया। पंजाब के पटियाला और लुधियाना में व्यापार समझौते के खिलाफ किसानों और ट्रेड यूनियनों ने प्रदर्शन किए।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x_698ddc91edb8c.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="1035" data-end="1224">संयुक्त किसान मोर्चा ने देशभर में श्रम संहिताओं के खिलाफ आम हड़ताल के समर्थन में विरोध-प्रदर्शनों में अभूतपूर्व भागीदारी का दावा करते हुए इसे अब तक की सबसे बड़ी आम हड़तालों में से एक बताया।</p>
<p data-start="1226" data-end="1474">मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई संगठनों ने नए श्रम कानूनों के खिलाफ हड़ताल का विरोध करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया। उनका कहना है कि प्रदर्शन में शामिल ट्रेड यूनियनें अपने राजनीतिक आकाओं के इशारों पर मजदूरों के कंधों पर बंदूक रखकर चला रही हैं।</p>
<p data-start="1476" data-end="1837">ओडिशा में 12 घंटे के बंद के कारण जनजीवन प्रभावित रहा। भुवनेश्वर, कटक, बालासोर, बेरहामपुर और संबलपुर सहित कई शहरों में सड़क जाम और सार्वजनिक परिवहन बाधित रहा। झारखंड में बैंकिंग, बीमा और कोयला क्षेत्र प्रभावित हुए। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए, हालांकि परिवहन सेवाएं सामान्य रहीं और भिलाई इस्पात संयंत्र में कामकाज जारी रहा।</p>
<p data-start="1839" data-end="2106">तमिलनाडु के तूतीकोरिन और चेन्नई बंदरगाहों पर परिचालन प्रभावित हुआ। श्रीपेरंबदूर औद्योगिक क्षेत्र में कई इकाइयों के कर्मचारियों ने गेट मीटिंग और प्रदर्शन किए। केरल में 24 घंटे की हड़ताल के चलते केएसआरटीसी और निजी बस सेवाएं ठप रहीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हुई।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x_698ddcc6d985e.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="2108" data-end="2416">पटना में सीपीआई-एमएल के प्रदर्शन के दौरान पार्टी महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार पर श्रम सुधारों और व्यापार नीति के जरिए मजदूरों के अधिकारों और किसानों के हितों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने मनरेगा की जगह वीबी-ग्रामजी योजना लाने और अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते की भी आलोचना की।</p>
<h3 data-start="2418" data-end="2455"><strong>संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन</strong></h3>
<p data-start="2457" data-end="2772">इस बीच, अमेरिका&ndash;भारत व्यापार समझौते को लेकर विपक्षी दलों ने संसद परिसर में विरोध-प्रदर्शन किया। मल्लिकार्जुन खड़गे, के. सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, टी. आर. बालू और जया बच्चन सहित कई सांसदों ने &lsquo;ट्रैप डील&rsquo; लिखे बैनर और पोस्टर लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह समझौता भारतीय हितों के साथ समझौता है।</p>
<p data-start="2774" data-end="3016">केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बुलाए गए भारत बंद के समर्थन में विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि सरकार बिना व्यापक चर्चा के ऐसे फैसले ले रही है, जिनका सीधा असर खेती, रोजगार और घरेलू बाजार पर पड़ सकता है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x_698ddcd7c4a88.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<h3 data-start="3547" data-end="3585"><strong>मैं किसानों के लिए लडूंगा: राहुल गांधी&nbsp;</strong></h3>
<p data-start="3018" data-end="3321">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े वैश्विक संकट के दौर से गुजर रही है। सरकार ने इन वैश्विक परिस्थितियों को स्वीकार करने के बावजूद ऐसा समझौता किया है, जिससे भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने सरकार पर किसानों और मजदूरों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी कर कहा कि जो भी ट्रेड डील किसानों की रोज़ी-रोटी छीने या देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे, वह किसान-विरोधी है।&nbsp;अन्नदाताओं के हितों से किसान-विरोधी मोदी सरकार को समझौता नहीं करने देंगे।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560">
<p lang="hi" dir="ltr">FIR हो,<br />मुकदमा दर्ज हो या <br />Privilege प्रस्ताव लाएं - मैं किसानों के लिए लड़ूंगा।<br /><br />जो भी ट्रेड डील किसानों की रोज़ी-रोटी छीने या देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे, वह किसान-विरोधी है।<br /><br />अन्नदाताओं के हितों से किसान-विरोधी मोदी सरकार को समझौता नहीं करने देंगे। <a href="https://t.co/gNVMEYFp3i">pic.twitter.com/gNVMEYFp3i</a></p>
&mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) <a href="https://twitter.com/RahulGandhi/status/2021939474666860974?ref_src=twsrc%5Etfw">February 12, 2026</a></blockquote>
<p data-start="3018" data-end="3321">
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</p>
<h3 data-start="3547" data-end="3585"><strong>थरूर बोले &ndash; &ldquo;सिर्फ एक और केरल बंद&rdquo;</strong></h3>
<p data-start="3587" data-end="3897">कांग्रेस ने जहां देशव्यापी हड़ताल का समर्थन किया, वहीं तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, &ldquo;यह दुखद है कि आज का &lsquo;भारत बंद&rsquo; असल में सिर्फ एक और &lsquo;केरल बंद&rsquo; बनकर रह गया है। जहां बाकी भारत ऐसे जबरन विरोध से आगे बढ़ चुका है, वहीं केरल आज भी इस संगठित बंद संस्कृति का बंधक बना हुआ है।&rdquo;</p>
<p data-start="3899" data-end="4151">उन्होंने कहा, &ldquo;जब से मैं राजनीति में आया हूं, मेरा रुख स्पष्ट रहा है। मैं विरोध करने के अधिकार का समर्थन करता हूं, लेकिन अवरोध पैदा करने के अधिकार का नहीं। किसी भी भारतीय को दूसरे के स्वतंत्र रूप से आने-जाने में बाधा डालने का संवैधानिक अधिकार नहीं है।&rdquo;</p>
<p data-start="3899" data-end="4151"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमेरिका से ट्रेड डील के खिलाफ कई राज्यों में विरोध-प्रदर्शन, संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत&amp;#45;अमेरिका ट्रेड डील पर किसान संगठनों ने उठाए सवाल, 12 फरवरी को विरोध&amp;#45;प्रदर्शन की तैयारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmer-organizations-raise-questions-on-the-india-us-trade-agreement-announce-nationwide-protests-on-february-12.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 09 Feb 2026 13:26:09 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmer-organizations-raise-questions-on-the-india-us-trade-agreement-announce-nationwide-protests-on-february-12.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर देश के प्रमुख किसान संगठनों में विरोध जताया है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), एसकेएम (गैर-राजनीतिक) और ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) समेत कई संगठनों ने इस समझौते की कड़ी आलोचना करते हुए 12 फरवरी को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और आम हड़ताल के समर्थन का ऐलान किया है।</p>
<p><strong>संयुक्त किसान मोर्चा (SKM)</strong> ने आरोप लगाया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौता मोदी सरकार द्वारा अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामने पूरी तरह &ldquo;सरेंडर&rdquo; करने जैसा है। अंतरिम समझौते से वाणिज्य मंत्री का यह दावा पूरी तरह खारिज होता है कि कृषि क्षेत्र को मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से बाहर रखा गया है और सरकार किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी। एसकेएम ने वाणिज्य मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। साथ ही प्रधानमंत्री से इस समझौते पर हस्ताक्षर न करने की मांग करता है।</p>
<p>एसकेएम ने कहा कि अमेरिका द्वारा 18% शुल्क और भारत द्वारा शून्य शुल्क मुक्त व्यापार नहीं है। भारतीय वस्तुओं पर शुल्क वास्तव में 2023-24 में शून्य से बढ़कर 3% और फिर 18% हो गया है<span>, </span>जबकि अमेरिकी कृषि उत्पादों पर हमारे शुल्क<span>, </span>जो 30% से 150% तक थे<span>, </span>अब शून्य कर दिए गए हैं। इससे भारतीय कृषि अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के फंदे में फंस जाएगी। अंतरिम समझौते के अनुसार गैर-शुल्क बाधाओं को भी कम किया जाएगा<span>, </span>जिससे अमेरिका से दूध का आयात आसान होगा।</p>
<p>भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता <strong>राकेश टिकैत</strong> ने कहा कि गांवों में लोग पूछ रहे हैं कि यह समझौता उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को कैसे प्रभावित करेगा। टिकैत ने कहा कि यह डील देश की 70% आबादी पर कड़ा प्रहार है पहले से बाजार की अस्थिरता कर्ज का बोझ झेल रहा ग्रामीण वर्ग अब बर्बाद हो जाएगा सोने की चिड़िया कहे जाने वाले देश पर अब कॉरपोरेट का कब्जा होगा सरकार तत्काल प्रभाव से इस समझौते को रद्द करें।</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेता <strong>जगजीत सिंह डल्लेवाल</strong> ने कहा कि जहां मंत्री सोशल मीडिया पर कृषि और डेयरी को सुरक्षित बताने का दावा कर रहे हैं, वहीं संयुक्त बयान में गैर-शुल्क बाधाओं को हटाने पर सहमति की बात कही गई है। यह समझौता किसानों की बर्बादी का समझौता है।</p>
<p><strong>सेब उत्पादकों की चिंता</strong></p>
<p>अमेरिका से आने वाले सेब पर आयात शुल्क 50 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी किए जाने से <strong>हिमाचल प्रदेश</strong> के सेब उत्पादकों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, सरकार ने न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) 50 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलो कर दिया है। नए ढांचे के तहत अमेरिकी सेब करीब 100 रुपये प्रति किलो की कीमत पर भारत पहुंचेंगे, जिससे प्रतिस्पर्धा और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।</p>
<p><strong>संयुक्त किसान मंच</strong> (SKM) के संयोजक <strong>हरीश चौहान</strong> का कहना है कि मुक्त व्यापार के नाम पर देश के किसानों की बर्बादी के समझौते किए जा रहे हैं। बाजार में सस्ते आयातित सेब की हिस्सेदारी बढ़ेगी, जिससे घरेलू सेब की कीमत और बिक्री प्रभावित होगी।&nbsp;उन्होंने सरकार के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि पहले अमेरिकी सेब 75 रुपये प्रति किलो की दर से भारत पहुंच रहे थे। चौहान ने पूछा कि यदि ऐसा था, तो खुदरा बाजार में ये सेब 200 से 250 रुपये प्रति किलो क्यों बिकते रहे। उन्होंने आशंका जताई कि यदि अमेरिकी सेब 100 रुपये प्रति किलो पर भारत पहुंचेंगे, तो कोल्ड एटमॉस्फियर (CA) स्टोरेज में प्रीमियम सेब रखना घाटे का सौदा बन जाएगा।</p>
<p>गौरतलब है कि जनवरी से नवंबर 2025 के बीच अमेरिका से भारत में कृषि आयात सालाना आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर लगभग 2.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया। प्रमुख आयातों में कपास, सोयाबीन तेल, एथेनॉल और बादाम जैसे ड्राई फ्रूट शामिल हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर किसान संगठनों ने उठाए सवाल, 12 फरवरी को विरोध-प्रदर्शन की तैयारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आपूर्ति में सुधार के बाद केंद्र ने गेहूं पर स्टॉक लिमिट का आदेश वापस लिया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centre-withdraws-wheat-stock-limit-order-as-supplies-improve.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Feb 2026 14:47:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centre-withdraws-wheat-stock-limit-order-as-supplies-improve.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गेहूं की उपलब्धता में सुधार और घरेलू आपूर्ति की संतोषजनक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने मई 2025 में जारी गेहूं भंडारण सीमा आदेश को वापस ले लिया है। यह फैसला देशभर में गेहूं की सुचारु उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कीमतों और भंडार स्तर की लगातार निगरानी के बाद लिया गया है। भंडारण सीमा के आदेश की वापसी निर्दिष्ट खाद्य पदार्थों पर लाइसेंसिंग आवश्यकताओं, भंडारण सीमाओं और आवागमन प्रतिबंधों को हटाने संबंधी (संशोधन) आदेश, 2025 से संबंधित है, जिसे 27 मई 2025 को जारी किया गया था और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू था।</p>
<p>भले ही भंडारण सीमा हटा दी गई हो, सरकार ने गेहूं का भंडारण करने वाली सभी इकाइयों के लिए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर हर शुक्रवार अपने भंडार की स्थिति घोषित करना अनिवार्य कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम से पारदर्शिता बनी रहेगी और बाजार की स्थिति पर करीबी निगरानी संभव हो सकेगी।</p>
<p>2025&ndash;26 के विपणन वर्ष के लिए निजी इकाइयों की तरफ से दाखिल घोषणाओं के अनुसार, निजी क्षेत्र में गेहूं की उपलब्धता पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। वर्तमान में कुल घोषित भंडार लगभग 81 लाख मीट्रिक टन है, जो साल-दर-साल आधार पर करीब 30 लाख टन अधिक है। इससे घरेलू बाजार में मजबूत आपूर्ति का पता चलता है।</p>
<p>उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य के आंकड़े भी गेहूं की कीमतों में गिरावट का रुझान दिखाते हैं, खासकर थोक बाजार में। थोक कीमतें पिछले वर्ष 2,970.10 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर वर्तमान में लगभग 2,852.30 रुपये प्रति क्विंटल रह गई हैं, जो कमजोर मांग और अधिशेष आपूर्ति की स्थिति को दर्शाती हैं।</p>
<p>चालू रबी सीजन के दौरान गेहूं का रकबा भी सामान्य अपेक्षा से अधिक बढ़ा है। बुवाई का क्षेत्र 334.17 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष 328.04 लाख हेक्टेयर था। यह गेहूं की खेती के प्रति किसानों की लगातार बढ़ती प्राथमिकता को दर्शाता है। अधिकारियों का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद और अनुकूल बाजार संकेतों के कारण यह रुझान बना हुआ है, जिससे एक और मजबूत उत्पादन की उम्मीद बढ़ गई है।</p>
<p>सरकार ने कहा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), अन्य कल्याणकारी योजनाओं और आवश्यकता पड़ने पर किसी भी संभावित बाजार हस्तक्षेप की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त गेहूं का भंडार उपलब्ध है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग गेहूं की कीमतों और भंडार की स्थिति पर कड़ी निगरानी जारी रखेगा, ताकि स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और किसी भी प्रकार की कृत्रिम कमी या मूल्य अस्थिरता को रोका जा सके।</p>
<p>स्टॉक सीमा हटाने के इस कदम से व्यापारियों और आटा मिलों के लिए मार्केट ऑपरेशन आसान होने की उम्मीद है। साथ ही त्योहारी मांग के मौसम से पहले देश की खाद्य सुरक्षा स्थिति को लेकर भरोसा भी मजबूत होगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आपूर्ति में सुधार के बाद केंद्र ने गेहूं पर स्टॉक लिमिट का आदेश वापस लिया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत–अमेरिका ट्रेड डील पर किसान संगठनों का कड़ा विरोध, आंदोलन की चेतावनी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmer-organizations-strongly-oppose-india-us-trade-deal-threaten-agitation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Feb 2026 19:03:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmer-organizations-strongly-oppose-india-us-trade-deal-threaten-agitation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत&ndash;अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किसान संगठनों ने कड़ा विरोध किया है।<span>&nbsp;</span><strong>संयुक्त किसान मोर्चा (SKM)</strong><span>&nbsp;</span>ने वाणिज्य मंत्री<span>&nbsp;</span><strong>पीयूष गोयल</strong><span>&nbsp;</span>के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है कि &ldquo;कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से बाहर रखा गया है।&rdquo; एसकेएम ने चेतावनी दी है कि यदि इस समझौते में किसी भी कृषि या डेयरी उत्पाद को शामिल किया गया, तो एक बार फिर 2020&ndash;21 जैसा किसान आंदोलन किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>एसकेएम 4 से 11 फरवरी तक व्यापार समझते के खिलाफ अभियान चलाने, नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प के पुतले जलाने तथा 12 फरवरी को देशव्यापी आम हड़ताल का ऐलान किया है। मोर्चा ने अमेरिकी दबाव के आगे आत्मसमर्पण की निंदा करते हुए कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता भारतीय किसानों को तबाह कर देगा।</p>
<p>एसकेएम ने वाणिज्य मंत्री के बयान को अमेरिकी कृषि सचिव ब्रुक रोलिन्स के दावे से पूरी तरह विरोधाभासी बताया। रोलिन्स के अनुसार, इस समझौते के तहत अमेरिका &ldquo;भारत के विशाल बाजार में अधिक अमेरिकी कृषि उत्पादों का निर्यात करेगा, जिससे कीमतें बढ़ेंगी और ग्रामीण अमेरिका में नकदी का प्रवाह होगा।" एसकेएम का आरोप है कि इन दावों पर भारत सरकार की ओर से न तो खंडन किया गया और न ही कोई आपत्ति जताई गई, जिससे किसानों को गुमराह किया जा रहा है।</p>
<p>मोर्चा ने कपास का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले की प्राचीर से किसानों के हितों की रक्षा की बात कही थे, लेकिन मात्र तीन दिन बाद ही कपास पर लगने वाले 11% आयात शुल्क को हटाने की अनुमति दे दी। एसकेएम के अनुसार, आयात बढ़ने से घरेलू कीमतों पर दबाव पड़ा और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम दामों पर फसल बेचने को मजबूर होना पड़ा।</p>
<p><strong>अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS)</strong> ने भारत&ndash;अमेरिका व्यापार समझौते को &ldquo;राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए खतरा&rdquo; बताते हुए कहा कि यह समझौता अमेरिकी दबाव में किया जा रहा आत्मसमर्पण है। संगठन का आरोप है कि शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को हटाने से भारतीय बाजार अमेरिकी वस्तुओं से पट जाएगा, जिससे कृषि, उद्योग और रोजगार पर विनाशकारी असर पड़ेगा।</p>
<p>AIKS की मांग है कि केंद्र सरकार भारत&ndash;अमेरिका व्यापार समझौते, भारत&ndash;यूके FTA तथा भारत&ndash;यूरोपीय संघ FTA का पूरा पाठ संसद के समक्ष रखे और राज्यों के साथ व्यापक चर्चा सुनिश्चित करे। इस सरकार द्वारा किए गए सभी मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी और जन-विरोधी मुक्त व्यापार समझौतों तथा व्यापार समझौतों को रद्द किया जाए।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत–अमेरिका ट्रेड डील पर किसान संगठनों का कड़ा विरोध, आंदोलन की चेतावनी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि और डेयरी पर कोई समझौता नहीं, किसान हित पूरी तरह सुरक्षित – शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indo-us-trade-deal-no-compromise-on-agriculture-and-dairy-farmers-interests-completely-safe-shivraj-singh-chouhan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Feb 2026 14:51:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indo-us-trade-deal-no-compromise-on-agriculture-and-dairy-farmers-interests-completely-safe-shivraj-singh-chouhan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="299" data-end="743">भारत-यूएस ट्रेड डील को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के बीच केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि इस समझौते में भारतीय कृषि, विशेषकर खेती और डेयरी सेक्टर के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह डील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में डिप्लोमेसी, डेवलपमेंट और डिग्निटी का नया उदाहरण है।&nbsp;</p>
<p data-start="745" data-end="1041">नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश के मुख्य अनाज, फल, प्रमुख फसलें, मिलेट्स और डेयरी उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं और भारतीय कृषि या डेयरी सेक्टर पर किसी तरह का खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से उलटे भारत के किसानों को नए अवसर मिलेंगे।</p>
<p data-start="1043" data-end="1296">विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, &ldquo;आप आरोप लगाइए और जवाब देने नहीं दीजिए, यह कौन-सी लोकतांत्रिक परंपरा है?&rdquo; उन्होंने दोहराया कि डील की सभी जानकारियां समय पर सार्वजनिक की जाएंगी, लेकिन इसका मूल संदेश स्पष्ट है&mdash;किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं।</p>
<h3 data-start="1298" data-end="1356">आशंकाओं को किया खारिज&nbsp;</h3>
<p data-start="1358" data-end="1687">भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से छोटे किसानों पर असर पड़ने की आशंकाओं पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कोई भी &ldquo;बड़ी चीज&rdquo; भारत के बाजार में अचानक नहीं आने वाली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी मुख्य फसलें, अनाज, फल और डेयरी उत्पाद सुरक्षित हैं और किसी भी ऐसे क्षेत्र के लिए बाजार नहीं खोला गया है, जिससे भारतीय किसानों को नुकसान हो।</p>
<p data-start="1689" data-end="2087">यूएस ट्रेजरी सेक्रेटरी के उस ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें अधिक अमेरिकी कृषि उत्पादों के भारतीय बाजार में पहुंचने की बात कही गई थी, चौहान ने कहा कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल संसद में सभी तथ्य स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी दोहरा रहे हैं कि छोटे और बड़े, सभी भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं और मुख्य कृषि उत्पादों के लिए बाजार इस तरह नहीं खोला गया है कि किसानों पर दबाव बने।</p>
<h3 data-start="2089" data-end="2135">चावल, मसाले और टेक्सटाइल निर्यात बढ़ेगा</h3>
<p data-start="2137" data-end="2318">केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि भारत पहले से ही अमेरिका सहित कई देशों को चावल का बड़ा निर्यातक है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 63,000 करोड़ रुपये के चावल का निर्यात किया गया है।&nbsp;उन्होंने कहा कि टैरिफ में कमी से चावल, मसालों और टेक्सटाइल के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। टेक्सटाइल निर्यात बढ़ने से कपास उगाने वाले किसानों को सीधा लाभ होगा।&nbsp;</p>
<h3 data-start="2656" data-end="2681">विपक्ष पर तीखा प्रहार</h3>
<p data-start="2683" data-end="2980">राहुल गांधी और विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष कुंठित और हताश-निराश हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी हार ने उन्हें अंधे विरोध की मानसिकता में धकेल दिया है और अब वे किसानों के नाम पर झूठ और अफवाहों का सहारा ले रहे हैं।</p>
<p data-start="2982" data-end="3159">कृषि मंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष &ldquo;झूठ की मशीन&rdquo; और &ldquo;अफवाहों का बाजार&rdquo; बन चुका है, जो अफवाहें फैलाकर अराजकता का माहौल बनाना चाहता है, जबकि वास्तविक तथ्य किसानों के हित में हैं।</p>
<p data-start="2982" data-end="3159">केंद्रीय मंत्री ने संसद में विपक्ष के रवैये पर गहरी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने ऐसा व्यवहार कम ही देखा है। उन्होंने कहा कि संसद की सीढ़ियों पर बैठकर &ldquo;छिछोरे कमेंट्स&rdquo; करना, किसी मंत्री को &ldquo;गद्दार&rdquo; कहना और &ldquo;सरेंडर&rdquo; जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना लोकतंत्र और संसदीय मर्यादाओं का खुला अपमान है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x500_698461ea5ad37.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि और डेयरी पर कोई समझौता नहीं, किसान हित पूरी तरह सुरक्षित – शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत&amp;#45;अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि और डेयरी के हित पूरी तरह सुरक्षित: पीयूष गोयल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-and-dairy-interests-fully-protected-in-india-us-trade-deal-piyush-goyal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 04 Feb 2026 18:30:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-and-dairy-interests-fully-protected-in-india-us-trade-deal-piyush-goyal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="169" data-end="390">केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद को आश्वस्त किया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देश के खाद्य और कृषि क्षेत्र से जुड़े हितों की पूरी तरह रक्षा की गई है और यह समझौता अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात के लिए नए अवसर खोलेगा।</p>
<p data-start="392" data-end="723">वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस मुद्दे पर पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में बयान दिया। विपक्षी सांसदों द्वारा स्पष्टीकरण की मांग किए जाने के कारण सदन में हंगामे की स्थिति बनी रही। गोयल ने कहा कि <span>खाद्य और कृषि क्षेत्र में भारत की प्रमुख संवेदनशीलता का पूर्णतः ध्यान रखा गया है।</span></p>
<p data-start="725" data-end="924">विपक्षी दलों ने सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप द्वारा व्यापार समझौते की घोषणा संसद में सरकार से औपचारिक बयान देने की मांग की थी।</p>
<p data-start="926" data-end="1250">पीयूष गोयल ने सदन को बताया कि भारत ने अमेरिका के साथ अंतिम चरण में चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में अपने संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों के हितों की पूरी तरह सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर पैदा करेगा। गोयल के अनुसार, विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ किया गया यह समझौता भारत की जनता और राष्ट्र के व्यापक हित में है। यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत दोनों को सशक्त बनाता है।</p>
<p data-start="1432" data-end="1799">केंद्रीय मंत्री ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की है, जो अमेरिका द्वारा कई देशों पर लगाए गए टैरिफ से कम है। इससे अमेरिकी बाजार में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों द्वारा शीघ्र ही एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा, जिसमें समझौते के विस्तृत प्रावधानों का उल्लेख होगा।</p>
<p data-start="1801" data-end="2142">गोयल के अनुसार, भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमत हो चुके हैं और आने वाले दिनों में इसके औपचारिक दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएंगे।&nbsp;</p>
<p data-start="2144" data-end="2430">राज्यसभा में बयान देने के बाद गोयल ने एक वीडियो जारी कर कहा कि आज लोकसभा में उन्हें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बयान देना था, लेकिन जब सरकार तथ्यों के साथ स्पष्टीकरण देने और चर्चा के लिए आई तो विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके चलते वह अपना बयान वीडियो के माध्यम से साझा कर रहे हैं।</p>
<p data-start="2432" data-end="2810">उधर, राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने दावा किया है कि इस व्यापार समझौते में किसानों और डेयरी क्षेत्र के हितों से समझौता किया गया है। इन दावों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए पीयूष गोयल ने कहा, &ldquo;प्रधानमंत्री ने कभी किसानों के हितों से समझौता नहीं किया है। यह बात देश जानता है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते में कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूर्ण संरक्षण दिया गया है।&rdquo;</p>
<p data-start="2432" data-end="2810"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि और डेयरी के हित पूरी तरह सुरक्षित: पीयूष गोयल ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, भारतीय किसानों के हितों पर हमला बताया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/congress-raises-questions-on-trade-deal-with-america-calling-it-an-attack-on-the-interests-of-indian-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 03 Feb 2026 20:56:55 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/congress-raises-questions-on-trade-deal-with-america-calling-it-an-attack-on-the-interests-of-indian-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="261" data-end="557">भारत और अमेरिका के बीच घोषित व्यापार समझौते को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे देश और किसानों के हितों पर हमला करार दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए &ldquo;पूरी तरह सरेंडर&rdquo; कर दिया है। कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने इस मुद्दे पर संसद में हंगामा किया।</p>
<p data-start="559" data-end="849">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष <strong>राहुल गांधी</strong> ने कहा कि इस व्यापार समझौते में भारत के किसानों की मेहनत, खून-पसीने और देश के हितों को प्रधानमंत्री ने बेच दिया है। इसलिए उन्हें संसद में बोलने से रोका जा रहा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी पर भयंकर दबाव है।</p>
<p data-start="851" data-end="1152">जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि प्रधानमंत्री पर किस तरह का दबाव है, तो उन्होंने कहा कि अडानी केस और एपस्टीन फाइल्स के संभावित खुलासों के दबाव में आकर प्रधानमंत्री ने यह ट्रेड डील की है। एपस्टीन फाइल्स से जुड़ी कई बातें अभी सामने आनी बाकी हैं, जिन्हें अमेरिका ने अब तक जारी नहीं किया है।</p>
<p data-start="1154" data-end="1537">कांग्रेस महासचिव <strong>जयराम रमेश</strong> ने कहा कि सीजफायर की तरह ट्रेड डील की घोषणा भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई। अब भारत को अपनी ही सरकार के फैसलों की जानकारी राष्ट्रपति ट्रंप या उनके नियुक्त प्रतिनिधियों से मिलती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा दी गई जानकारी से साफ है कि प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया है, जिससे भारत की स्थिति कमजोर हुई है।</p>
<p data-start="1539" data-end="1921"><strong>कांग्रेस</strong> ने यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों की पूरी जानकारी संसद के दोनों सदनों में रखने और इस पर चर्चा कराने की मांग की है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि ट्रेड डील में किन बिंदुओं पर बातचीत हुई और क्या तय हुआ, यह देश को जानने का अधिकार है। यदि कृषि क्षेत्र को अमेरिका के लिए खोला जा रहा है तो आखिर सौदा क्या हुआ है? हमारे किसानों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी?</p>
<p data-start="1923" data-end="2156">दो फरवरी को जारी बयान में राष्ट्रपति <strong>डोनाल्ड ट्रंप</strong> ने कहा था कि भारत अमेरिका पर लगाए गए टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर को शून्य प्रतिशत तक घटाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा और अमेरिका तथा वेनेजुएला से तेल की खरीद बढ़ाएगा।&nbsp;</p>
<p data-start="2158" data-end="2330">कांग्रेस ने सवाल उठाया कि अगर अमेरिका के लिए पूरा बाजार खोल दिया गया तो भारतीय उद्योग और &lsquo;मेक इन इंडिया&rsquo; का क्या होगा? क्या मोदी सरकार रूस का साथ छोड़ने पर सहमत हो गई है?</p>
<p data-start="2332" data-end="2648">अमेरिका की कृषि मंत्री <strong>ब्रुक रोलिन्स</strong> ने बयान जारी कर कहा है कि अब अमेरिका के किसानों के उत्पाद भारत के बाजार में बिकेंगे, जिससे अमेरिका के ग्रामीण इलाकों में धन आएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के किसानों के लिए भारत का बाजार बेहद महत्वपूर्ण है और इस डील से ट्रंप ने अमेरिकी किसानों को फायदा पहुंचाया है।&nbsp;अमेरिकी कृषि मंत्री के इस बयान के बाद व्यापार समझौते में भारतीय किसानों के हितों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।&nbsp;</p>
<p data-start="2650" data-end="3055"><strong>कृषि और डेयरी हितों की होगी रक्षा: पीयूष गोयल&nbsp;</strong></p>
<p data-start="2650" data-end="3055">वहीं इस मुद्दे पर एक प्रेस कांफ्रेंस में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री <strong>पीयूष गोयल</strong> ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष इस डील के माध्यम से भारत को मिलने वाले आर्थिक मौकों के रास्ते में बाधक बनना चाहता है। संसद में विपक्ष के व्यवहार की उन्होंने आलोचना की। इसके साथ ही दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा कृषि और डेयरी सेक्टर का ध्यान रखा है। इस समझौते में भी इनके हितों की रक्षा की जाएगी। हालांकि समझौते के तमाम फायदे गिनाने के बावजूद उन्होंने इस ट्रेड डील के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की।&nbsp;</p>
<p data-start="2650" data-end="3055"><strong>समझौते के ब्यौरे का इंतजार</strong></p>
<p data-start="172" data-end="435">भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील की विस्तृत जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। समझौते का पूरा विवरण सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हालांकि, तथ्य यह है कि इस समझौते से पहले ही अमेरिका से भारत को होने वाले निर्यात में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।</p>
<p data-start="437" data-end="833">चालू वर्ष में जनवरी से नवंबर 2025 के बीच अमेरिका से भारत का कृषि आयात 34.1 प्रतिशत बढ़कर 2.85 अरब डॉलर पहुंच गया। जबकि इसी अवधि में भारत से अमेरिका को होने वाला कृषि निर्यात मात्र 5.1 प्रतिशत बढ़कर 5.62 अरब डॉलर रहा। वर्ष 2024 में अमेरिका से पिस्ता और बादाम जैसे ड्राई फ्रूट का 1.1 अरब डॉलर का आयात हुआ था, जो इस वर्ष 34 प्रतिशत की वृद्धि के साथ जनवरी से नवंबर के बीच 1.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया।</p>
<p data-start="437" data-end="833"><strong>किसानों के हितों को लेकर चिंता</strong></p>
<p data-start="1133" data-end="1621">भारतीय किसानों पर इसके प्रतिकूल प्रभाव की आशंका के चलते सरकार इन उत्पादों के सस्ते आयात की अनुमति देने से बचती रही है। इसी कारण समझौते में देरी हुई। लेकिन 2 फरवरी को जिस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका समझौते की घोषणा की, उसके तुरंत बाद अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रुक रोलिंस ने इसे अमेरिकी किसानों के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की बड़ी सौगात बताया और उनका धन्यवाद किया। इससे यह संकेत मिलता है कि इस समझौते में कृषि उत्पादों के आयात को सुगम बनाया गया है।</p>
<p data-start="1623" data-end="1818">इधर, सत्ताधारी एनडीए के सांसदों ने इस समझौते के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए उनका अभिनंदन किया है।फिर भी यह समझौता देश के किसानों और नीतिगत मामलों पर नजर रखने वाले लोगों के लिए अब तक एक रहस्य बना हुआ है, क्योंकि सरकार ने इसके प्रावधानों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, भारतीय किसानों के हितों पर हमला बताया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बजट 2026 को किसान संगठनों ने बताया निराशाजनक, कृषि व किसानों की अनदेखी पर तीखी प्रतिक्रियाएं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmer-leaders-described-the-2026-budget-disappointing-strong-reactions-to-the-neglect-of-agriculture-and-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 02 Feb 2026 17:38:04 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmer-leaders-described-the-2026-budget-disappointing-strong-reactions-to-the-neglect-of-agriculture-and-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर किसान संगठनों और किसान नेताओं ने नाराजगी जताई है। किसान यूनियनों का आरोप है कि यह बजट कृषि संकट, बढ़ती महंगाई, कर्ज बोझ और गिरती आय जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान करने में पूरी तरह विफल रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी देने, किसान सम्मान निधि बढ़ाने और कृषि बजट में ठोस वृद्धि जैसी प्रमुख मांगों को नजरअंदाज किए जाने को किसान संगठनों ने निराशाजनक बताया।</p>
<p><strong>राकेश टिकैत: किसानों की उम्मीदें टूटीं</strong></p>
<p>भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बजट पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों को इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुईं। यह बजट किसान, मजदूर, आदिवासी और ग्रामीण भारत की मूल समस्याओं का समाधान करने में असफल रहा है। बढ़ती महंगाई और खेती की लागत, कर्ज़ के बोझ और गिरती आय से जूझ रहे किसानों के लिए बजट में न तो कोई ठोस पहल की गई और न ही एमएसपी की कानूनी गारंटी देने का प्रावधान किया गया। टिकैत ने यह भी कहा कि किसान सम्मान निधि को बढ़ाकर 12,000 रुपये किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन इस दिशा में कोई घोषणा नहीं हुई।</p>
<p><strong>राजू शेट्टी: किसानों को नारियल पकड़ा दिया</strong></p>
<p>महाराष्ट्र के किसान नेता पूर्व सांसद और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी ने <em><strong>रूरल वॉयस</strong> </em>को बताया कि बजट बहुत निराशाजनक है और इसमें किसानों व कृषि क्षेत्र की अनदेखी की गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों की आय बढ़ाने का कोई कदम बजट में नहीं उठाया है। उनको केवल नारियल दे दिया। दालों और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की जरूरत है उसके लिए अधिक दाम का इंसेंटिव दिया जाना चाहिए था। बजट में रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने का कोई कदम नहीं उठाया गया है।</p>
<p>शेट्टी का कहना है कि किसान सम्मान निधि का भी कोई फायदा अधिकांश किसानों को नहीं हो रहा है बेहतर होता कि सरकार किसानों को जरूरी फसलों के उत्पादन के लिए सीधे इंसेंटिव देती। खासतौर से दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को एमएसपी के अलावा सीधे प्रति क्विंटल प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए था।&nbsp;</p>
<p><strong>सरवन सिंह पंधेर: कॉर्पोरेट हितों के लिए बजट</strong></p>
<p>किसान मजदूर मोर्चो के नेता सरवन सिंह पंधेर ने बजट को आम जनता और किसानों के खिलाफ बताते हुए आरोप लगाया कि यह बजट कॉर्पोरेट वर्ग को ध्यान में रखकर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि देश पर कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ा है। पंधेर के अनुसार खेती के लिए इस बार केवल 1 लाख 62 हजार 671 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो जरूरतों के मुकाबले बेहद कम है। उन्होंने कहा कि एक समय कृषि बजट का हिस्सा 14 प्रतिशत हुआ करता था, जो अब घटकर केवल 3 प्रतिशत रह गया है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार की प्राथमिकताओं में किसान और ग्रामीण भारत पीछे छूट गए हैं।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>ASHA-</strong><strong>किसान स्वराज: किसानों को हाशिये पर धकेला </strong></p>
<p>अलायंस फॉर सस्टेनेबल एंड होलिस्टिक एग्रीकल्चर (ASHA&ndash;Kisan Swaraj) ने बजट 2026-27 को किसानों के प्रति उपेक्षापूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार ने किसानों को &lsquo;विकसित भारत&rsquo; का इंजन बनाने के बजाय उन्हें सबसे हाशिये पर पड़े वर्गों में शामिल कर दिया है।</p>
<p>संगठन ने कहा कि कुल बजट में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का आवंटन घटाकर केवल 3.04 प्रतिशत रह गया है, जो 2019-20 में 5.44 प्रतिशत था। कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए बजट आवंटन 9,000 करोड़ रुपये घटाकर 1.72 लाख करोड़ रुपये से 1.63 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।</p>
<p>कई योजनाओं के आवंटन में कमी आई है। हैरानी की बात है कि पिछले साल बड़े ज़ोर-शोर से अनाउंस की गई कुछ स्कीमों को संशोधित बजट 2025-26 में ज़ीरो एलोकेशन मिला, जिससे स्कीम लागू नहीं हो पाई, और वही स्कीमें इस साल के बजट में शामिल नहीं हैं।</p>
<p><strong>भाकियू (अराजनैतिक): किसान को राम भरोसे छोड़ा</strong></p>
<p>भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि वित्त मंत्री ने बजट पेश करते समय &nbsp;किसानों और कृषि क्षेत्र को पूरी तरह भुलाकर राम भरोसे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि यह बजट निराशाजनक ही नहीं बल्कि खेती-किसानी की अनदेखी करने वाला साबित होगा।</p>
<p>मलिक ने आरोप लगाया कि आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि को लेकर जो चिंताएं जताई गई थीं, उनके समाधान का कोई रास्ता बजट में नहीं दिखता। पिछले वर्षों की घोषणाओं का कोई लेखा-जोखा भी प्रस्तुत नहीं किया गया।</p>
<p><strong>AIKS: </strong><strong>कृषि अनुसंधान और उत्पादन की अनदेखी</strong></p>
<p>ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) ने कहा कि बजट 2026-27 कृषि संकट दूर करने के प्रति कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखाता। वित्त मंत्री के भाषण में में खेती-बाड़ी का कोई जिक्र नहीं, कर्ज माफी का कोई प्रस्ताव नहीं, फर्टिलाइजर सब्सिडी में 15679 करोड़ रुपये की कटौती!</p>
<p>AIKS ने कहा कि उर्वरक सब्सिडी और खाद्य सब्सिडी दोनों में कटौती किसानों के लिए अतिरिक्त संकट पैदा करेगी। कपास मिशन, दलहन मिशन, हाइब्रिड बीज और मखाना बोर्ड जैसे पुराने मिशनों का बजट में कोई उल्लेख नहीं है। एआईकेएस ने किसानों से 3 फरवरी को पूरे देश में किसान-विरोधी बजट की कॉपियां जलाने की अपील की है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>योगेंद्र यादव: किसान सरकार की शब्दावली से बाहर </strong></p>
<p>सामाजिक कार्यकर्ता और जय किसान आंदोलन के संस्थापक योगेंद्र यादव ने कहा कि 2026 का बजट एक साफ संदेश देता है कि गांव, किसान और खेती अब सरकार की प्राथमिकताओं से बाहर हैं। पहली बार ऐसा बजट, जिसमें किसान का नाम तक नहीं&mdash;न सिंचाई, न खाद, न खेतिहर मज़दूर। यह चूक नहीं, राजनीतिक घोषणा है। यह बजट किसान को स्पष्ट संदेश देता है कि अब न दिल में जगह है और न जुबान पर नाम।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बजट 2026 को किसान संगठनों ने बताया निराशाजनक, कृषि व किसानों की अनदेखी पर तीखी प्रतिक्रियाएं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख बजट घोषणाएं: जानिए बजट में किसानों को क्या मिला?]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/key-budget-announcements-related-to-agriculture-sector-know-what-farmers-got-in-the-budget.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 01 Feb 2026 15:13:37 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/key-budget-announcements-related-to-agriculture-sector-know-what-farmers-got-in-the-budget.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को केंद्रीय बजट 2026&ndash;27 पेश करते हुए &ldquo;सबका साथ, सबका विकास&rdquo; के तहत किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने को सरकार के कर्तव्यों में शुमार किया। हालांकि, पिछले वर्षों की तुलना में इस बार के बजट में कृषि और किसानों को अपेक्षाकृत कम महत्व दिया गया है।</p>
<p>वित्त मंत्री ने बजट भाषण में उच्च मूल्य वाली फसलों, मत्स्य पालन एवं पशुपालन, AI तथा सहकारी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कुछ घोषणाएं जरूर की हैं, लेकिन कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए कोई व्यापक रणनीति या स्पष्ट रोडमैप बजट में नजर नहीं आता।</p>
<p><strong>पशुपालन में उद्यमिता पर जोर</strong><strong>&nbsp;</strong></p>
<p>पशुपालन क्षेत्र किसानों की आय में लगभग 16 प्रतिशत का योगदान करता है। इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए <strong>क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना</strong> शुरू की जाएगी। इससे देश में 20 हजार से अधिक वेटनरी प्रोफेशनल्स की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। निजी क्षेत्र में पशु चिकित्सा और पैरा-वेट कॉलेज, अस्पताल, डायग्नोस्टिक लैब और प्रजनन केंद्र स्थापित करने के लिए <strong>ऋण आधारित पूंजी सब्सिडी</strong> दी जाएगी। भारतीय और विदेशी संस्थानों के बीच भागीदारी को भी प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<p>पशुधन क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन, डेयरी और पोल्ट्री आधारित उद्यमों तथा मूल्य श्रृंखलाओं का आधुनिकीकरण और विस्तार किया जाएगा। पशुपालक किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।</p>
<p><strong>मत्स्य पालन को महत्व</strong></p>
<p>मत्स्य पालन के लिए बजट में <strong>500 </strong><strong>जलाशयों और अमृत सरोवरों के विकास</strong> की घोषणा की गई है। तटीय क्षेत्रों में मत्स्य मूल्य श्रृंखला को स्टार्टअप, महिला समूहों और फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (एफपीओ) के माध्यम से बाजार से जोड़ा जाएगा।</p>
<p><strong>भारतीय जहाजों</strong> द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और खुले समुद्र में पकड़ी गई मछली को शुल्क मुक्त किया जाएगा। विदेशी बंदरगाहों पर उतारी गई इन मछलियों को निर्यात माना जाएगा, जिससे भारतीय मछुआरों को नए अवसर मिलेंगे।</p>
<p><strong>उच्च मूल्य कृषि उपजों पर जोर</strong></p>
<p>कृषि उत्पादन में विविधता लाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए तटीय क्षेत्रों में <strong>नारियल</strong><strong>, </strong><strong>चंदन</strong><strong>, </strong><strong>कोको और काजू </strong>जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। पूर्वोत्तर क्षेत्र में अगर (Agar) वृक्षों तथा पहाड़ी क्षेत्रों में <strong>बादाम</strong><strong>, </strong><strong>अखरोट</strong> और <strong>पाइन नट</strong> को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p><strong>नारियल संवर्धन योजना</strong> शुरू की जाएगी, जिसके तहत पुराने और कम उत्पादक पेड़ों को नई उच्च उत्पादक किस्मों से बदला जाएगा। इससे लगभग लगभग एक करोड़ किसानों को लाभ पहुंचेगा।</p>
<p><strong>काजू और कोको</strong> के लिए अलग कार्यक्रम लाया जाएगा ताकि भारत इनके उत्पादन में आत्मनिर्भर बने और 2030 तक भारतीय काजू और कोको को वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित किया जा सके।</p>
<p><strong>चंदन</strong> के प्लांटेशन और प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर भारतीय चंदन के गौरव को फिर से स्थापित करने काम करेगी।</p>
<p><strong>अखरोट</strong><strong>, </strong><strong>बादाम और चिलगोजा</strong> के पुराने, कम उत्पादक बागानों के जीर्णोद्धार तथा सघन खेती के विस्तार के लिए एक समर्पित कार्यक्रम चलाया जाएगा।</p>
<p><strong>कृषि में </strong><strong>AI: </strong><strong>भारत-विस्तार</strong></p>
<p>बजट में एक अहम डिजिटल पहल <strong>भारत-विस्तार (</strong><strong>Virtually Integrated System to Access Agricultural Resources)</strong> की घोषणा की गई है। यह एक बहुभाषी एआई टूल होगा, जो एग्रीस्टैक पोर्टल और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के कृषि पैकेज को कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली से जोड़ेगा।</p>
<p>भारत-विस्तार के जरिए किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार कृषि सलाह मिलेगी। इससे किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी और उत्पादकता को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p><strong>ग्रामीण महिला उद्यमों के लिए </strong><strong>SHE-</strong><strong>मार्ट</strong></p>
<p>लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाते हुए वित्त मंत्री ने <strong>सेल्फ हेल्प एंटरप्रेन्योर (</strong><strong>SHE) </strong><strong>मार्ट</strong> शुरू करने की घोषणा की है। ये सामुदायिक स्वामित्व वाले रिटेल आउटलेट होंगे, जो ग्रामीण महिलाओं को उद्यम की मालिक बनने की दिशा में आगे बढ़ाएंगे।</p>
<p><strong>महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल</strong></p>
<p>खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को सशक्त बनाने के लिए बजट में <strong>महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल</strong> शुरू करने की घोषणा की गई है। इससे वैश्विक बाजार से जुड़ाव और ब्रांडिंग को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल बुनकरों, ग्राम उद्योगों, <strong>एक जिला</strong><strong>&ndash;</strong><strong>एक उत्पाद (</strong><strong>ODOP)</strong> योजना और ग्रामीण युवाओं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है।</p>
<p><strong>सहकारी क्षेत्र को टैक्स रियायतें</strong></p>
<p>बजट में सहकारी क्षेत्र के लिए टैक्स रियायतों का ऐलान किया गया है। अब पशु आहार और कपास बीज की आपूर्ति करने वाली प्राथमिक सहकारी समितियों को भी कटौती का लाभ मिलेगा, बशर्ते यह आपूर्ति सरकारी संगठन या फेडरल कोऑपरेटिव को की जाए।</p>
<p>नई कर व्यवस्था के तहत&nbsp;<strong>अंतर-सहकारी समिति लाभांश आय</strong>&nbsp;(Inter-Cooperative Society Dividend Income) यानी एक सहकारी समिति से अन्य सहकारी समिति को दिए जाने वाले लाभांश को भी कटौती के रूप में मान्य किया जाएगा, बशर्ते इसे आगे सदस्यों में वितरित किया जाए।</p>
<p>अधिसूचित&nbsp;<strong>राष्ट्रीय सहकारी महासंघ</strong>&nbsp;(National Cooperative Federation) को किसी कंपनी में किए गए निवेश से प्राप्त लाभांश आय पर तीन वर्षों के लिए टैक्स छूट दी जाएगी। यह छूट 31 जनवरी 2026 तक किए गये निवेश पर मिलेगी और सहकारी समितियों में वितरित किए गए लाभांश पर ही मान्य होगी।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख बजट घोषणाएं: जानिए बजट में किसानों को क्या मिला? ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आर्थिक सर्वेक्षण में एथेनॉल नीति पर किया आगाह, मक्का को प्रोत्साहन से घट रही दलहन&amp;#45;तिलहन की खेती]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/economic-survey-warning-on-ethanol-policy-incentives-for-maize-are-reducing-cultivation-of-pulses-and-oilseeds.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 30 Jan 2026 19:11:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/economic-survey-warning-on-ethanol-policy-incentives-for-maize-are-reducing-cultivation-of-pulses-and-oilseeds.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भारत सरकार के एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया है, लेकिन किसानों का रुझान दलहन व तिलहन फसलों की बजाय मक्का की ओर बढ़ने को लेकर आगाह भी किया है। एथेनॉल कीमतों में अंतर की नीति और केवल कुछ फसलों को प्रोत्साहन से देश की फसल विविधता और खाद्य सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा हो सकता है। &nbsp;</p>
<p>सर्वेक्षण के मुताबिक, देश में मक्का की पैदावार वर्ष 2016 में 2.56 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2025 में 3.78 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई। जबकि इस दौरान सोयाबीन, सूरजमुखी, सरसों, मूंगफली और मोटे अनाजों की पैदावार घट गई या फिर स्थिर रही है। किसानों का रुझान दलहन और मोटे अनाजों की बजाय मक्का की ओर बढ़ा है।</p>
<p>सरकार की एथेनॉल मूल्य निर्धारण की नीति ने मक्का की ओर इस रुझान को बढ़ावा दिया है। मक्का आधारित एथेनॉल का दाम चावल और शीरे से बने एथेनॉल के मुकाबले अधिक रहता है। आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, वर्ष 2022 से 2025 के बीच मक्का आधारित एथेनॉल का दाम सालाना 11.7 फीसदी की दर से बढ़ा, जो चावल या शीरे से बने एथेनॉल की अपेक्षा अधिक है। इससे मक्का की खेती को बढ़ावा मिला। उम्मीद की जा रही थी किसान धान छोड़कर मक्का उगाना शुरू करेंगे। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>मक्का को मिले नीतिगत प्रोत्साहन के चलते वर्ष 2022 से 2025 के बीच मक्का का उत्पादन सालाना 8.77 फीसदी और क्षेत्र 6.68 फीसदी की दर से बढ़ा है। जबकि इस दौरान दलहन के उत्पादन और क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई। तिलहन की बुवाई का क्षेत्र चार साल में केवल 1.7 प्रतिशत की दर से बढ़ा जबकि मक्का को छोड़कर बाकी अनाजों के क्षेत्र में 2.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। फसलों के पैटर्न में यह बदलाव महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में साफ दिख रहा है। दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और कपास की बजाय किसानों का रुझान मक्का की ओर बढ़ा है। हालांकि, मक्का को प्रोत्साहन के बावजूद धान का क्षेत्र कम नहीं हुआ है।</p>
<p>दलहन और तिलहन फसलें देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। फिर भी किसानों द्वारा इन्हें प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि यह असंतुलन खाद्य तेल आयात पर भारत की निर्भरता बढ़ाने और घरेलू खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव के जोखिम को बढ़ा सकता है।</p>
<p>आर्थिक सर्वेक्षण 2026 ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता और खाद्य आत्मनिर्भरता के बीच एक बढ़ते तनाव को उजागर करते हुए इन रुझानों को "प्रारंभिक चेतावनी" का संकेत करार दिया है। साथ ही उस नीतिगत चुनौती को भी रेखांकित किया है जिसके तहत कुछ खास फसलों को प्रोत्साहन दिया जाता है।</p>
<p>आर्थिक सर्वेक्षण में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को देश की ऊर्जा सुरक्षा का अहम स्तंभ माना है। अगस्त 2025 तक, एथेनॉल मिश्रण से भारत को विदेशी मुद्रा में 1.44 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा की बचत हुई और लगभग 245 लाख टन कच्चे तेल की जगह एथेनॉल का इस्तेमाल हुआ। 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल करने के लिए शुगर आधारित एथेनॉल के अलावा चावल और मक्का आधारित एथेनॉल को बढ़ावा दिया गया।</p>
<p>इससे 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिली, लेकिन फसल विविधता और खाद्य सुरक्षा के लिए चुनौतिपूर्ण स्थितियां पैदा हो सकती हैं। आर्थिक सर्वेक्षण में ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा को लेकर समग्र दृष्टिकोण अपनाने और एक व्यापक रोडमैप तैयार करने का सुझाव दिया गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आर्थिक सर्वेक्षण में एथेनॉल नीति पर किया आगाह, मक्का को प्रोत्साहन से घट रही दलहन-तिलहन की खेती ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आर्थिक सर्वे में कृषि सुधारों की वकालत, उर्वरक असंतुलन पर चिंता, यूरिया के दाम बढ़ाने का सुझाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/economic-survey-2026-advocacy-for-agricultural-reforms-concern-over-fertilizer-imbalance-suggestion-to-increase-urea-prices.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 29 Jan 2026 17:41:47 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/economic-survey-2026-advocacy-for-agricultural-reforms-concern-over-fertilizer-imbalance-suggestion-to-increase-urea-prices.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025&ndash;26 में कृषि सुधारों की वकालत की गई है। सर्वे में कहा गया है कि उर्वरक असंतुलन को कम करने और मृदा स्वास्थ्य सुधारने के लिए यूरिया की कीमतों में बढ़ोतरी तथा किसानों को वित्तीय प्रोत्साहन के माध्यम से संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है।</p>
<p>भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए सर्वे में कहा गया है कि कृषि क्षेत्र ने अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान की है, लेकिन इसकी वृद्धि दर अभी अपेक्षाकृत कम है। कृषि एवं सहयोगी क्षेत्रों में जो वृद्धि दर्ज की गई है, उसका बड़ा हिस्सा गैर-कृषि उत्पादन से आया है। भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विविधता बढ़ रही है और गैर-कृषि क्षेत्र आमदनी में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, स्किल गैप और प्रोडक्टिविटी में कमी जैसी चुनौतियां हैं। &nbsp;</p>
<p>सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि कृषि क्षेत्र में पूंजी निवेश काफी कम है और इसमें बढ़ोतरी आवश्यक है। इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा कानून के तहत राशन प्रणाली में फूड वाउचर शुरू करने की सिफारिश भी की गई है।</p>
<p><strong>उर्वरक असंतुलन बड़ी चिंता</strong></p>
<p>उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को सर्वेक्षण में गंभीर चिंता का विषय बताते हुए यूरिया की कीमतों में बढ़ोतरी की वकालत की है। साथ ही इनपुट सब्सिडी के बजाय प्रति एकड़ इनकम सपोर्ट देने का सुझाव दिया गया है। मृदा स्वास्थ्य और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया है।</p>
<p>सर्वेक्षण में उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को चिंताजनक बताया गया है। नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश (एनपीके) का आदर्श अनुपात 4:2:1 माना जाता है, जबकि वर्ष 2023&ndash;24 में यह बिगड़कर 10.9:4.1:1 हो गया। वर्ष 2009&ndash;10 में यह अनुपात 4:3.2:1 था। मृदा स्वास्थ्य के लिए इस असंतुलन को दूर करना जरूरी है। किसानों को दी जाने वाली सहायता के तरीके में भी सुधार करना होगा।</p>
<p>पीओएस मशीनों पर आधार आधारित प्रमाणीकरण लागू होने के बाद इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) के माध्यम से सरकार के पास विस्तृत डेटा उपलब्ध है। सर्वे में कहा गया है कि इसी डेटा का उपयोग कर सुधार लागू किए जाने चाहिए।</p>
<p><strong>ग्रामीण आय के लिए उत्पादकता बढ़ाना जरूरी </strong></p>
<p>कृषि फसलों की उत्पादकता उस अनुपात में नहीं बढ़ रही है, जितनी किसानों की आय बढ़ाने के लिए आवश्यक है। इसलिए इस क्षेत्र में व्यापक सुधार की जरूरत बताई गई है। सर्वेक्षण में जोर दिया गया है कि ग्रामीण आय बढ़ाने के लिए प्राइस सपोर्ट की बजाय कृषि उत्पादकता को बढ़ाना होगा। साथ ही न्यूनत समर्थन मूल्य (<span>एमएसपी</span>) <span>पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर भी आगाह किया है। </span></p>
<p>सर्वे में कहा गया कि मैन्युफैक्चरिंग पर आधारित एक्सपोर्ट ग्रोथ, ग्रामीण इलाकों में लंबे समय तक खुशहाली के लिए ज़रूरी है, क्योंकि सिर्फ़ खेती भारत के बढ़ते वर्कफ़ोर्स को नहीं संभाल सकती।</p>
<p><strong>निर्यात में संभावनाएं </strong></p>
<p>सर्वेक्षण में यह स्वीकार किया गया है कि देश के बढ़ते कार्यबल को सिर्फ खेती से रोजगार नहीं मिल सकता है, ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि के लिए मैन्युफैक्चरिंग पर आधारित एक्सपोर्ट ग्रोथ भी आवश्यक है।</p>
<p>हाल में हुए मुफ्त व्यापार समझौतों से श्रम-आधारित एग्रो और फूड प्रोसेसिंग आधारित निर्यात की मांग बढ़ा सकते हैं, बशर्ते भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में खरा उतरने वाले उत्पाद तैयार करे।&nbsp;</p>
<p><strong>जलवायु परिवर्तन की चुनौती </strong></p>
<p>सर्वेक्षण में जलवायु परिवर्तन को कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती माना गया है। लगातार बेहतर मानसून से कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है, जिससे खाद्य सुरक्षा मजबूत हुई है और महंगाई दर को नियंत्रित रखने में मदद मिली है। देश की खाद्य सुरक्षा के लिए जलवायु अनुकूल किस्मों के विकास, सटीक खेती और जल उपयोग में दक्षता पर जोर दिया गया है। &nbsp;</p>
<p><strong>कृषि विकास और निवेश&nbsp;</strong></p>
<p>कृषि के विकास और किसानों की आय सुनिश्चित करने के लिए सरकार की लगभग दो दर्जन योजनाओं का उल्लेख सर्वे में किया गया है। इसमें बताया गया है कि कृषि एवं सहयोगी क्षेत्रों की औसत वार्षिक वृद्धि दर (AAGR) का वैश्विक औसत 2.9 प्रतिशत से अधिक रहा है जबकि पिछले पांच वर्षों में भारत के मामले में यह औसत 4.4 प्रतिशत रहा है। चालू वित्त वर्ष मेंं कृषि और सहयोगी क्षेत्र की विकास दर का सर्वे में 3.1 फीसदी रहने का अनुमाना लगाया गया है।</p>
<p>हालांकि चालू वर्ष में कृषि एवं सहयोगी क्षेत्रों की वृद्धि दर मुख्य रूप से गैर-फसली क्षेत्रों की अधिक वृद्धि के कारण रही है। फसल उत्पादकता के मामले में देश में क्षेत्रीय असमानता बनी हुई है, जिसे प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के माध्यम से दूर करने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p>कृषि में पूंजी निवेश की कमी को आंकड़े भी दर्शाते हैं। वर्तमान में देश के कुल सकल फसल क्षेत्र का केवल 55.8 प्रतिशत हिस्सा ही सिंचित है। इसमें भी तिलहन और दालों का क्षेत्रफल कम है, जबकि चावल, गेहूं और गन्ना जैसी फसलों में सिंचाई सुविधाएं अपेक्षाकृत अधिक हैं।</p>
<p><strong>कृषि ऋण की स्थिति</strong></p>
<p>सर्वे के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में सरकार के 27.5 लाख करोड़ रुपये के कृषि ऋण लक्ष्य के मुकाबले &nbsp;ग्राउंड लेवल क्रेडिट डिस्बर्समेंट 28.69 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें 15.39 लाख करोड़ रुपये अल्पकालिक ऋण (फसली ऋण) और 12.77 लाख करोड़ रुपये टर्म लोन शामिल हैं।</p>
<p>देश में वर्ष 1950 में कृषि ऋण का 90 प्रतिशत हिस्सा गैर-संस्थागत स्रोतों यानी साहूकारों से आता था, जो 2021&ndash;22 में घटकर 23.4 प्रतिशत रह गया है। हालांकि मौजूदा कृषि अर्थव्यवस्था के आकार को देखते हुए यह अनुपात अब भी चिंता का विषय है। इसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में किसान आज भी साहूकारों से ऋण ले रहे हैं, जिन पर अक्सर 30 से 50 प्रतिशत तक ब्याज देना पड़ता है।</p>
<p><strong>अनिश्चित माहौल में कृषि पर दारोमदार </strong></p>
<p>वैश्विक माहौल में उथल-पुथल के बीच अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए कृषि पर दारोमदार रहेगा। हालांकि, अनिश्चित माहौल में खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आय और कृषि को वैश्विक झटकों और जलवायु जोखिम से बचाए रखना चुनौतीपूर्ण है। &nbsp;</p>
<p>टिकाऊ ग्रामीण ग्रोथ के लिए सरकारी सहायता और खरीद की बजाय उत्पादकता, विविधता और फूड सिस्टम को टिकाऊ बनाने की तरफ जाना होगा। इसके लिए केंद्र, राज्यों और निजी क्षेत्र को मिलकर काम करना होगा।</p>
<p>कुल मिलाकर, आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि क्षेत्र की समस्याओं के बावजूद यह कहा गया है कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में कृषि की केंद्रीय भूमिका रहेगी। कृषि क्षेत्र ने अब तक उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन आगे की चुनौतियों और किसानों की आय में टिकाऊ वृद्धि के लिए बड़े स्तर पर संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आर्थिक सर्वे में कृषि सुधारों की वकालत, उर्वरक असंतुलन पर चिंता, यूरिया के दाम बढ़ाने का सुझाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पश्चिमी विक्षोभ से बदला उत्तर भारत का मौसम, बारिश&amp;#45;बर्फबारी के साथ शीतलहर की चेतावनी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/western-disturbance-changes-weather-in-north-india-cold-wave-warning-after-rain-and-snowfall.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 27 Jan 2026 13:52:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/western-disturbance-changes-weather-in-north-india-cold-wave-warning-after-rain-and-snowfall.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="280" data-end="649">उत्तर-पश्चिम और उत्तर भारत का मौसम पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से फिर एक बदल गया है। मौसम विभाग (IMD) ने 27 और 28 जनवरी के लिए उत्तर भारत के हिमालयी राज्यों में बारिश और बर्फबारी के साथ-साथ मैदानों में तेज हवाओं एवं ओलावृष्टि की संभावना जताई है। इसके बाद 28 जनवरी से कई राज्यों में शीतलहर की चेतावनी दी गई है। बारिश से जहां रबी की फसलों को फायदा मिल सकता है लेकिन कई जगह ओलावृष्टि से रबी की खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी सेब जैसे फलों के बागवानी के अनुकूल मानी जा रही है। <span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">दिल्ली और आसपास के इलाकों में हल्की </span><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-b88u0q">बारिश</span><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"> से ठंड बढ़ गई है।&nbsp;</span><span class="" data-state="closed"></span></p>
<p data-start="280" data-end="649"><strong data-start="655" data-end="715">हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी&nbsp;</strong></p>
<p data-start="716" data-end="1013">पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 27 और 28 जनवरी को बारिश और बर्फबारी की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश/भारी बर्फबारी भी हो सकती है। इन इलाकों में तेज हवाओं के साथ मौसम और कठिन रहने का अनुमान है। <span class="" data-state="closed"></span></p>
<p data-start="1015" data-end="1355">हिमाचल प्रदेश में भारी बर्फबारी और बारिश से पहाड़ी मार्गों पर परिवहन बाधित हुआ है, जिससे 1,250 से अधिक सड़कें बंद रहने की खबर सामने आई है, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित है। कई जिलों में तेज हवाएं और गरज के साथ तूफानी मौसम से जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है। <span class="" data-state="closed"></span></p>
<h3 data-start="1357" data-end="1405"><strong data-start="1361" data-end="1405">मैदानी इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि</strong></h3>
<p data-start="1406" data-end="1684"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><span>हरियाणा और राजस्थान में कई स्थानों पर तेज बारिश के साथ ओले पड़े, जिससे किसानों की फसलों को नुकसान होने की आशंका है। आज पूर्वी राजस्थान के कई स्थानों पर बारिश और ओलावृष्टि की खबर है।&nbsp;</span></span></p>
<p data-start="1406" data-end="1684">पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर में 27 जनवरी को हल्की से मध्यम बारिश, गरज और 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं का अलर्ट है। दिल्ली में हल्की बारिश के साथ गरज और 30&ndash;40 किमी/घंटा की हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। <span class="" data-state="closed"></span></p>
<p data-start="1686" data-end="2001">पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में 27 और 28 जनवरी को बिजली चमकने, ओलावृष्टि और तेज हवाओं की चेतावनी है। मौसम विभाग का कहना है कि 13 राज्यों में भी तूफानी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे जनजीवन और यात्रा प्रभावित हो सकता है। <span class="" data-state="closed"></span></p>
<h3 data-start="2003" data-end="2051"><strong data-start="2007" data-end="2051">शीतलहर की वापसी&nbsp;</strong></h3>
<p data-start="2052" data-end="2351">मौसम विभाग के ताज़ा अनुमान के अनुसार, 28 जनवरी से तापमान फिर गिरने लगेगा और 28&ndash;31 जनवरी तक पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ तथा 29&ndash;31 जनवरी के बीच हिमाचल प्रदेश समेत कई इलाकों में कड़ाके की शीतलहर की स्थिति बनी रह सकती है।&nbsp;<span class="" data-state="closed"></span></p>
<p data-start="2353" data-end="2507">दिल्ली में 26 जनवरी को रिकॉर्ड कम तापमान दर्ज किया गया था, जिससे यह पिछले पांच वर्षों का सबसे ठंडा गणतंत्र दिवस रहा। <span class="" data-state="closed"></span></p>
<h3 data-start="2509" data-end="2544"><strong data-start="2513" data-end="2544">घना कोहरा की चेतावनी</strong></h3>
<p data-start="2545" data-end="2814">शीतलहर के साथ उत्तर भारत के राज्यों में घना कोहरा भी रहेगा। उत्तराखंड में 27 जनवरी तक और उत्तर प्रदेश में 27, 29 और 30 जनवरी को सुबह और रात के समय घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में 28 से 31 जनवरी, राजस्थान में 28 से 30 जनवरी और बिहार में 29 से 31 जनवरी तक घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है।&nbsp;<span class="" data-state="closed"></span></p>
<p data-start="2842" data-end="3069">मौसम विभाग ने लोगों को यात्रा के दौरान अत्यधिक सावधानी बरतने, पहाड़ी मार्गों पर जाने से पहले ताज़ा मौसम जानकारी लेने और ओलावृष्टि/तेज़ हवाओं के समय जोखिम भरे इलाकों से बचने की सलाह दी है।</p>
<p data-start="2842" data-end="3069"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_6978753a056a6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पश्चिमी विक्षोभ से बदला उत्तर भारत का मौसम, बारिश-बर्फबारी के साथ शीतलहर की चेतावनी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_6978753a056a6.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[TREESCAPES 2026:  टिकाऊ विकास के लिए एग्रो&amp;#45;फॉरेस्ट्री पर दक्षिण एशिया की पहली कांग्रेस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/treescapes-2026-to-host-south-asia’s-first-congress-dedicated-to-agroforestry-and-trees-outside-forests.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 26 Jan 2026 12:18:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/treescapes-2026-to-host-south-asia’s-first-congress-dedicated-to-agroforestry-and-trees-outside-forests.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एग्रोफॉरेस्ट्री को व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए सेंटर फॉर इंटरनेशनल फॉरेस्ट्री रिसर्च &ndash; इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च इन एग्रोफॉरेस्ट्री (CIFOR-ICRAF), इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) के साथ मिलकर TREESCAPES 2026 का आयोजन करेगा। यह 5 से 7 फरवरी तक नई दिल्ली स्थित नेशनल एग्रीकल्चरल साइंस कॉम्प्लेक्स (NASC) के पूसा कैंपस में होगा। यह दक्षिण एशिया का पहला ऐसा विशेष सम्मेलन है जो पूरी तरह से कृषि-वानिकी और 'वनों के बाहर पेड़ों' (Trees Outside Forests) पर आधारित है।</p>
<p>इस तीन दिवसीय सम्मेलन का लक्ष्य कृषि-वानिकी और 'वनों के बाहर पेड़ों' (TOF) को पूरे दक्षिण एशिया में जलवायु-अनुकूल परिदृश्य, टिकाऊ आजीविका और आर्थिक विकास के लिए बड़े पैमाने पर अपनाए जाने वाले समाधान के रूप में स्थापित करना है। इस आयोजन में नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और सिविल सोयायटी के प्रतिनिधियों, किसानों और युवाओं के भाग लेने की उम्मीद है।</p>
<p>यह कार्यक्रम कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा। इनमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, नेपाल के कृषि और पशुधन विकास मंत्री मदन प्रसाद परियार, मालदीव के कृषि और पशु कल्याण राज्य मंत्री अहमद हसन दीदी और हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री राव नरबीर सिंह शामिल हैं।</p>
<p>कृषि-वानिकी के विस्तार की तात्कालिकता पर प्रकाश डालते हुए भारत में CIFOR-ICRAF के कंट्री डायरेक्टर मनोज डबास ने कहा कि वृक्ष-आधारित प्रणालियां पहले से ही भारत के कार्बन स्टॉक का लगभग 19.3% हिस्सा हैं। ये वर्ष 2030 तक 200 करोड़ टन से अधिक कार्बन डाइ ऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन कम करने में मदद कर सकती हैं।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि 86% से अधिक भारतीय किसान सीमांत श्रेणी में आते हैं, इसलिए कार्बन फाइनेंस, नीतिगत ढांचे और स्थानीय रूप से अनुकूल कृषि-वानिकी प्रथाओं का समन्वय करना महत्वपूर्ण है। लकड़ी के आयात पर भारत की बढ़ती निर्भरता (सालाना 7 अरब डॉलर से अधिक) भी घरेलू वृक्ष-आधारित उत्पादन प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता को बताती है।</p>
<p>TREESCAPES 2026 में डिजिटल टूल, सुरक्षित जल वाले क्षेत्र, किसानों की अगुवाई वाले नवाचार, फाइनेंसिंग, सर्टिफिकेशन, वैल्यू चेन, कार्बन बाजार, बीज प्रणाली, बायोइकोनॉमी के अवसर और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं पर आधारित विषयगत सत्रों के माध्यम से नीतिगत, रेगुलेटरी और संस्थागत खामियों को दूर करने पर विचार किया जाएगा।</p>
<p>FAO की 'स्टेट ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर 2025' रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्तर पर लगभग 170 करोड़ लोग उन क्षेत्रों में रहते हैं जो भूमि क्षरण के कारण घटती फसल पैदावार से प्रभावित हैं। शोध बताते हैं कि वनों की कटाई और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में कृषि-वानिकी की बड़ी भूमिका है। ICAR के शोध भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि कृषि-वानिकी खाद्य उत्पादन से समझौता किए बिना बड़ी मात्रा में कार्बन सोखने में सक्षम है।</p>
<p>CIFOR-ICRAF और ICAR द्वारा CAFRI, नाबार्ड (NABARD) और IIFM जैसे भागीदारों के सहयोग से आयोजित TREESCAPES 2026, भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं और 2070 तक 'नेट-जीरो' लक्ष्यों को पाने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ TREESCAPES 2026:  टिकाऊ विकास के लिए एग्रो-फॉरेस्ट्री पर दक्षिण एशिया की पहली कांग्रेस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पद्म पुरस्कार 2026: चार किसानों और पांच कृषि वैज्ञानिकों को मिला राष्ट्रीय सम्मान, विशेष योगदान को मिली पहचान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/padma-awards-2026-farmers-and-agricultural-scientists-receive-national-honours-recognition-for-their-contributions.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 26 Jan 2026 12:07:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/padma-awards-2026-farmers-and-agricultural-scientists-receive-national-honours-recognition-for-their-contributions.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कार 2026 की सूची जारी कर दी है। इस वर्ष कुल 131 लोगों को पद्म सम्मानों से नवाजा जाएगा, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। सूची में 19 महिलाएं और 16 मरणोपरांत सम्मान पाने वाले नाम भी शामिल हैं। कृषि क्षेत्र से जुड़े अनुसंधान एवं विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पांच वरिष्ठ वैज्ञानिकों को पद्म श्री सम्मान के लिए चुना गया है।</p>
<p><strong>डॉ. अशोक कुमार सिंह (पूर्व निदेशक, आईएआरआई पूसा)</strong><br />डॉ. अशोक कुमार सिंह देश के प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं, जिन्होंने धान विशेषकर बासमती किस्मों के विकास और सुधार में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके नेतृत्व में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा ने उच्च उपज देने वाली, रोग-रोधी और बेहतर गुणवत्ता वाली बासमती किस्में विकसित कीं, जिससे भारत की बासमती चावल की वैश्विक प्रतिष्ठा मजबूत हुई। उनके शोध कार्यों से किसानों की आय बढ़ी और निर्यात क्षमता को भी नई दिशा मिली।</p>
<p><strong>डॉ. पी. एल. गौतम (पूर्व अध्यक्ष, NBA व PPVFRA)</strong><br />डॉ. पी. एल. गौतम ने भारत में जैव विविधता संरक्षण और पौध किस्मों के अधिकार (Plant Variety Protection) को संस्थागत रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) और पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPVFRA) के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने किसानों के बीज अधिकारों की रक्षा, पारंपरिक किस्मों के पंजीकरण और जैव संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा दिया। उनके प्रयासों से किसानों और वैज्ञानिकों के बीच विश्वास आधारित ढांचा मजबूत हुआ।</p>
<p><strong>डॉ. के. रामास्वामी (पूर्व कुलपति, TNAU)</strong><br />डॉ. के. रामास्वामी ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार सेवाओं को एकीकृत करने में अहम भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय ने जलवायु अनुकूल खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों पर कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शुरू कीं। उन्होंने किसानों तक वैज्ञानिक तकनीक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों और किसान-वैज्ञानिक संवाद को सशक्त बनाया।</p>
<p><strong>डॉ. जी. एल. त्रिवेदी (पूर्व कुलपति, RPCAU)</strong><br />डॉ. जी. एल. त्रिवेदी ने पूर्वी भारत में कृषि अनुसंधान और उच्च शिक्षा को मजबूती देने में योगदान दिया। राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में उन्होंने फसल विविधीकरण, टिकाऊ कृषि प्रणाली और ग्रामीण युवाओं को कृषि शिक्षा से जोड़ने की दिशा में कार्य किया। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने क्षेत्रीय कृषि समस्याओं पर केंद्रित शोध को प्राथमिकता दी, जिससे स्थानीय किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिला।</p>
<p><strong>डॉ. एन. पुन्नियमूर्ति (पूर्व डीन, TANVASU)</strong><br />डॉ. एन. पुन्नियमूर्ति ने पशुपालन और पशु चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। तमिलनाडु पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (TANVASU) में डीन रहते हुए उन्होंने पशु स्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादन और आधुनिक पशु प्रबंधन तकनीकों को बढ़ावा दिया। उनके कार्यों से पशुपालकों की उत्पादकता बढ़ी और डेयरी व पशुधन आधारित आजीविका को वैज्ञानिक आधार मिला।</p>
<h3><strong>इन किसानों को पद्म सम्मान</strong></h3>
<p>कृषि और पशुपालन क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए चार किसानों को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।&nbsp;</p>
<div aria-hidden="true" data-edge="true" class="pointer-events-none h-px w-px absolute top-0">
<p><strong>रघुपत सिंह (उत्तर प्रदेश)</strong><br />मुरादाबाद जिले के बिलारी क्षेत्र के प्रगतिशील किसान रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। उन्होंने विलुप्त हो चुकी सब्जियों की 55 से अधिक किस्मों को संरक्षित कर दोबारा किसानों तक पहुंचाया और लगभग 100 नई किस्में विकसित कीं। बीज संरक्षण और नवाचार के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें पहले भी कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके थे।</p>
<p><strong>जोगेश देउरी (असम)</strong><br />मूंगा रेशम (Muga Silk) के संरक्षण और संवर्धन में अहम भूमिका निभाने वाले जोगेश देउरी को पद्मश्री सम्मान मिलेगा। उनके प्रयासों से हजारों ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ी और मूंगा रेशम को वैश्विक पहचान मिली। यह रेशम असम की सांस्कृतिक पहचान और जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।</p>
<p><strong>श्रीरंग देवाबा लाड (महाराष्ट्र)</strong><br />कृषि नवाचार के लिए प्रसिद्ध श्रीरंग देवाबा लाड को कपास उत्पादन बढ़ाने वाली &ldquo;दादा लाड तकनीक&rdquo; विकसित करने के लिए पद्म सम्मान दिया गया है। उनकी तकनीक से कपास की पैदावार में लगभग 300 प्रतिशत तक वृद्धि हुई और हजारों किसानों की आय में 40 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ।</p>
<p><strong>राम रेड्डी मामिडी (तेलंगाना)</strong><br />पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में सहकारी मॉडल को मजबूत करने वाले राम रेड्डी मामिडी को मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। उन्होंने किसानों को पशुपालन, दुग्ध प्रबंधन और वित्तीय प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया तथा महिला नेतृत्व वाली सहकारी समितियों को बढ़ावा दिया।</p>
<h3>पर्यावरण संरक्षण को भी मिली पहचान</h3>
<p>केरल की <strong>कोल्लक्कायिल देवकी अम्मा</strong> को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म सम्मान दिया जाएगा। एक सड़क दुर्घटना के बाद चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद उन्होंने अपने घर के पीछे पेड़ लगाकर निजी वन विकसित किया, जो आज पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है और जैव विविधता संरक्षण का उदाहरण बन चुका है।</p>
<h3></h3>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पद्म पुरस्कार 2026: चार किसानों और पांच कृषि वैज्ञानिकों को मिला राष्ट्रीय सम्मान, विशेष योगदान को मिली पहचान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बासमती की किस्में डेवलप करने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए.के. सिंह को पद्मश्री सम्मान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/renowned-basmati-rice-breeder-dr-a.k.-singh-selected-for-padma-shri.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 25 Jan 2026 22:12:29 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/renowned-basmati-rice-breeder-dr-a.k.-singh-selected-for-padma-shri.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जाने-माने कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह को इस वर्ष पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। डॉ. सिंह प्लांट जेनेटिक्स, खास तौर पर बासमती चावल की उन्नत किस्में विकसित करने के लिए जाने जाते हैं। डॉ. सिंह पिछले 30 सालों से नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) में बासमती चावल की 25 किस्मों के विकास से जुड़े रहे हैं। ये किस्में अभी 20 लाख हेक्टेयर इलाके में उगाई जाती हैं और लाखों किसानों के लिए खुशहाली लेकर आई हैं। इनसे देश को हर साल लगभग 50,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित होती है।</p>
<p>आईएआरआई के पूर्व निदेशक डॉ. सिंह को कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रूरल वॉयस ने दिसंबर, 2025 में प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक अवार्ड से सम्मानित किया था। वे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुके हैं। कुछ प्रमुख अवॉर्ड हैं- रफी अहमद किदवई अवॉर्ड, भारत रत्न डॉ. सी. सुब्रमण्यम और नाना जी देशमुख इंटरडिसिप्लिनरी टीम अवॉर्ड, बोरलॉग अवॉर्ड, IARI का बेस्ट टीचर अवॉर्ड, IARI का डॉ. बी.पी. पाल अवॉर्ड, वासविक अवॉर्ड, ओमप्रकाश भसीन अवॉर्ड और डी.एस. बराड़ अवॉर्ड।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_6939554a0c856.jpg" alt="" /></p>
<p><em>डॉ. ए.के. सिंह को दिसंबर 2025 में रूरल वॉयस ने प्रतिष्ठित वैज्ञानिक अवार्ड से सम्मानित किया था।</em></p>
<p>डॉ. सिंह ने दो महत्वपूर्ण किताबें लिखी हैं और वे INSA, NASI और NAAS के फेलो हैं। दुनिया की जानी-मानी पत्र-पत्रिकाओं में उनके 250 से ज्यादा रिसर्च पेपर पब्लिश हुए हैं।&nbsp;</p>
<p>डॉ. सिंह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के पूर्व छात्र हैं, जहां से उन्होंने कृषि विज्ञान में ग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट की पढ़ाई प्लांट जेनेटिक्स और ब्रीडिंग में विशेषज्ञता के साथ पूरी की। इसके बाद धान प्रजनन पर किए गए शोध के लिए नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान से उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त हुई।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_6976461b1e280.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बासमती की किस्में डेवलप करने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए.के. सिंह को पद्मश्री सम्मान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रूस से तेल खरीद घटने के कारण भारत के खिलाफ 25% टैरिफ हटा सकता है अमेरिका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/us-signals-possible-rollback-of-25-percent-tariff-on-india-as-russian-oil-purchases-decline.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 24 Jan 2026 15:35:06 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/us-signals-possible-rollback-of-25-percent-tariff-on-india-as-russian-oil-purchases-decline.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर लगाए गए 25% दंडात्मक टैरिफ को हटाया जा सकता है, क्योंकि भारत की रूस से तेल खरीद अब काफी गिर चुकी है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति अपने उद्देश्य में काफी हद तक सफल रही है।</p>
<p>दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान बेसेंट ने बताया कि भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद में आई भारी गिरावट बड़ी सफलता है। फिलहाल ये टैरिफ लागू हैं, लेकिन यदि भारत अपने ऊर्जा स्रोत का विविधीकरण जारी रखता है तो इन्हें हटाया जा सकता है।</p>
<p>ट्रंप प्रशासन ने यह अतिरिक्त टैरिफ 2025 में लगाया था। उससे पहले ट्रंप प्रशासन ने 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था। इस तरह भारतीय वस्तुओं पर कुल शुल्क 50% तक पहुंच गया।</p>
<p>बेसेंट का बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी कांग्रेस में एक प्रस्तावित कानून पर बहस चल रही है, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाए जाने की बात कही जा रही है। इसका उद्देश्य रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों को दबाव में लाना है। भारत ने बार-बार कहा है कि उसकी ऊर्जा नीति का प्राथमिक लक्ष्य अपनी जनता के लिए &ldquo;सस्ती ऊर्जा&rdquo; की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।</p>
<p>रूस से तेल आयात में कमी डेटा में भी साफ दिख रही है। भारतीय रिफाइनर वैकल्पिक आपूर्ति के लिए मध्य पूर्व, पश्चिमी अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की ओर जा रहे हैं। बेसेंट ने यूरोपीय देशों की आलोचना भी की, जो भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूस के कच्चे तेल से बने रिफाइंड प्रोडक्ट उत्पाद खरीद रहे हैं, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से रूस को पैसा मिल रहा है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_693d5d8501a0c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रूस से तेल खरीद घटने के कारण भारत के खिलाफ 25% टैरिफ हटा सकता है अमेरिका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_693d5d8501a0c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बर्फ के सूखे के बाद पहाड़ों पर सीजन की पहली बर्फबारी, मैदानों में बारिश से ठंड बढ़ी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/after-a-snow-drought-mountains-received-the-season-first-snowfall-while-rain-in-the-plains-intensified-the-cold.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 23 Jan 2026 18:15:37 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/after-a-snow-drought-mountains-received-the-season-first-snowfall-while-rain-in-the-plains-intensified-the-cold.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर भारत के हिमालयी राज्यों में बर्फ और बारिश के सूखे के बाद आखिरकार मौसम ने करवट बदली। <strong>बसंत पंचमी</strong> के दिन उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज की गई, जबकि मैदानी क्षेत्रों में बारिश हुई। इस बदलाव से न सिर्फ ठंड बढ़ी है, बल्कि पर्यटन, कृषि और जल स्रोतों के लिहाज से भी इसे राहत के रूप में देखा जा रहा है। खासतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों में सेब के लिए बर्फ बेहद जरूरी है।&nbsp;</p>
<p><strong>उत्तराखंड में बदला मौसम का मिजाज</strong></p>
<p>उत्तराखंड में शुक्रवार सुबह से ही रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी है। दोपहर तक बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के साथ हर्षिल, चकराता, मसूरी और धनौल्टी जैसे इलाकों में बर्फबारी शुरू हो गई। मैदानी क्षेत्रों, खासकर देहरादून और आसपास के इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। यह इस सर्दी के मौसम की पहली व्यापक बारिश मानी जा रही है, जिसका लंबे समय से इंतजार था।</p>
<p>देहरादून मौसम केंद्र के निदेशक <strong>सीएम तोमर</strong> के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से ऊंचाई वाले स्थानों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो रही है। मौसम का यह मिजाज 24 जनवरी दोपहर बाद तक जारी रहेगा। इसके बाद उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ही कहीं कहीं हल्की बारिश और बर्फबारी होगी। तोमर ने बताया कि एक और पश्चिमी विक्षोभ के आने से 27 और 28 जनवरी को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले इलाकों में हल्की बारिश के आसार हैं। मौसम में इस बदलाव से पर्यटकों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों में उत्साह है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x_69736b811fc82.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>शिमला-मनाली बर्फ की चादर में लिपटे</strong></p>
<p>हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला और पर्यटन नगरी मनाली में शुक्रवार को इस मौसम की पहली बर्फबारी हुई। शिमला शहर, कुफरी और नारकंडा समेत आसपास के इलाकों में हल्की बर्फबारी जारी रही, जिससे पूरा इलाका सफेद चादर में ढक गया। मौसम विभाग के अनुसार, लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चंबा, कुल्लू और मंडी जिलों के ऊंचाई वाले इलाकों में भी बर्फबारी हुई है।</p>
<p>धौलाधार पर्वत श्रृंखलाओं पर ताजा बर्फ जमी है, जबकि कल्पा और केलांग में भारी बर्फबारी दर्ज की गई। निचले इलाकों धर्मशाला, पालमपुर, सोलन, नाहन और ऊना में बारिश से तापमान में गिरावट आई है। लंबे समय से सूखे की मार झेल रहे किसानों और बागवानों के लिए यह बारिश-बर्फबारी राहत लेकर आई है। हालांकि भारी बर्फ के चलते भारत-तिब्बत रोड समेत कई मार्गों पर यातायात रोकना पड़ा है और किन्नौर व शिमला जिले के कुछ इलाके अस्थायी रूप से कट गए हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x_69736babedc82.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>जम्मू-कश्मीर में गुलमर्ग से वैष्णो देवी तक बर्फ</strong></p>
<p>जम्मू-कश्मीर में भी एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बर्फबारी और बारिश दर्ज की गई। उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के प्रसिद्ध स्की रिसॉर्ट गुलमर्ग में कई इंच ताजा बर्फ जम गई है। कुपवाड़ा, शोपियां और अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में भी हिमपात हुआ है। श्रीनगर समेत घाटी के मैदानी क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई, जिससे कई स्थानों पर पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं और एहतियातन बिजली आपूर्ति बाधित करनी पड़ी।</p>
<p>जम्मू क्षेत्र के ऊंचाई वाले इलाकों में मध्यम से भारी बर्फबारी के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग सहित कई प्रमुख सड़कें बंद कर दी गईं। त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर क्षेत्र में भी इस मौसम की पहली बर्फबारी हुई, जिसके चलते यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित करनी पड़ी। प्रतिकूल मौसम को देखते हुए पहाड़ी जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं और प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।</p>
<p>लंबे इंतजार के बाद हुई यह बारिश और बर्फबारी जल स्रोतों, पर्यटन और कृषि के लिए फायदेमंद है, लेकिन साथ ही बदलते जलवायु पैटर्न की ओर भी इशारा करती है। आज हुई बारिश रबी की गेहूं, सरसों जैसी फसलों के लिए भी अच्छी है हालांकि, <span>कुछ जगह ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचा है। </span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_69736d6ccccc3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बर्फ के सूखे के बाद पहाड़ों पर सीजन की पहली बर्फबारी, मैदानों में बारिश से ठंड बढ़ी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उर्वरक आत्मनिर्भरता पर बजट में हो सकता है विशेष मिशन का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/a-special-mission-on-fertilizer-self-sufficiency-may-be-announced-in-the-budget.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 23 Jan 2026 09:34:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/a-special-mission-on-fertilizer-self-sufficiency-may-be-announced-in-the-budget.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उर्वरकों के आयात पर बढ़ती निर्भरता को कम करने और मृदा स्वास्थ्य को बचाने की दिशा में केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। सरकार चरणबद्ध तरीके से उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने, उर्वरकों पर होने वाले व्यय को घटाने और रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग पर अंकुश लगाने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार कर रही है। इसके तहत आगामी <strong>आम बजट </strong><strong>2026-27</strong> में <strong>'</strong><strong>उर्वरक आत्मनिर्भरता मिशन'</strong> की घोषणा की जा सकती है।</p>
<p><strong>2030 </strong><strong>तक 20 फीसदी मांग घटाने का लक्ष्य</strong></p>
<p>उर्वरक आत्मनिर्भता मिशन का उद्देश्य एक कारगर और समग्र रणनीति के माध्यम से साल 2030 तक उर्वरकों की मांग में 20 फीसदी तक की कमी लाना है। चरणबद्ध योजना के तहत हर पांच साल के लिए लक्ष्य तय किए जाएंगे कि किस प्रकार रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम किया जाए। इसके लिए बजट में मिशन के लिए पर्याप्त धनराशि का प्रावधान किया जाएगा।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>उर्वरक आयात पर बढ़ती निर्भरता </strong></p>
<p>देश में रासायनिक उर्वरकों की खपत बढ़ रही है जिसे पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में उर्वरकों का आयात करना पड़ता है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का उर्वरक आयात पिछले साल के मुकाबले लगभग 76 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 18 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इस साल अप्रैल से नवंबर के बीच यूरिया के आयात में <strong>120 </strong><strong>फीसदी</strong> और डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) के आयात में करीब <strong>56 </strong><strong>फीसदी</strong> की भारी बढ़ोतरी &nbsp;दर्ज की गई है। आयात पर बढ़ती निर्भरता न केवल किसानों को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने में चुनौती पैदा करती है, बल्कि देश की उर्वरक सब्सिडी का बोझ भी बढ़ाती है। साथ ही कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम भी बढ़ता है। &nbsp;</p>
<ul>
<li><strong>उर्वरकों की बढ़ती खपत: </strong>चालू साल में यूरिया की खपत 400 लाख टन को पार कर जाएगी, वहीं डीएपी की खपत भी करीब 100 लाख टन तक पहुंच जाएगी। कॉम्पलेक्स उर्वरकों का उपयोग भी बढ़ रहा है। रासायनिक उर्वरकों का उपयोग और आयात जिस गति से बढ़ रहा है वह मृदा स्वास्थ, पर्यावरण और राजकोषीय मोर्चे पर मुश्किलें खड़ी कर रहा है।</li>
<li><strong>सब्सिडी का बोझ:</strong> चालू वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में सरकार ने 1,67,887 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी का प्रावधान किया था। संशोधित अनुमानों के अनुसार, यह आंकड़ा बजट प्रावधान से काफी ऊपर जाने की संभावना है। इससे पिछले साल उर्वरक सब्सिडी 1,71,299 करोड़ रुपये रही थी।</li>
<li><strong>उत्पादकता में गिरावट:</strong> वैज्ञानिकों का मानना है कि रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग के कारण 'पोषक तत्व उपयोग दक्षता' (Nutrient Use Efficiency) कम हो गई है। यानी, अब प्रति किलो उर्वरक इस्तेमाल से उत्पादन में होने वाली बढ़ोतरी पहले की तुलना में काफी कम हो गई है।</li>
</ul>
<p></p>
<p><strong>उर्वरक आत्मनिर्भरता मिशन</strong></p>
<p>उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार उर्वरकों के आयात पर निर्भरता घटाने और मृदा स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों को हल करने के लिए एक दीर्घकालिक मिशन शुरू करने जा रही है। इसके तहत घरेलू स्तर पर उपलब्ध खनिज विकल्पों का उपयोग कर उर्वरक आत्मनिर्भरता को बढ़ाया जाएगा। साथ ही प्रचलित रासायनिक उर्वरकों की जगह लेने वाले अन्य पोषक तत्वों (न्यूट्रिएंट) को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही उर्वरकों पर नए शोध के जरिए वैकल्पिक उर्वरकों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। इस तरह उर्वरक आत्मनिर्भरता पर केंद्रित यह एक समग्र मिशन होगा।&nbsp;</p>
<ul>
<li><strong>घरेलू खनिज संसाधनों का उपयोग: </strong>उर्वरक आत्मनिर्भरता के लिए देश में उपलब्ध खनिजों का उपयोग कर नए उर्वरक 'मॉलिक्यूल' तैयार करने पर शोध किया जाएगा। इसका उद्देश्य विशेष रूप से पोटाश और फास्फोरस के आयात को कम करना है।</li>
<li><strong>वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ावा:</strong> मृदा स्वास्थ्य सुधारने के लिए रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक उर्वरकों, वैकल्पिक उर्वरकों और सूक्ष्म पोषक तत्वों को बढ़ावा दिया जाएगा।</li>
<li><strong>फसल विविधीकरण:</strong> ऐसी फसलों का क्षेत्र बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा जिनमें रासायनिक उर्वरकों की खपत कम होती है। उदाहरण के लिए, दालों का क्षेत्रफल बढ़ने से न केवल उर्वरक की जरूरत कम होगी, बल्कि दालों का आयात भी घटेगा।</li>
<li><strong>न्यूट्रिएंट एफिशिएंसी शोध:</strong> ऐसी किस्मों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जो नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का बेहतर उपयोग कर सकें। नई किस्मों के विकास में न्यूट्रिएंट एफिशिएंसी पर फोकस किया जाएगा।</li>
</ul>
<p></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उर्वरक आत्मनिर्भरता पर बजट में हो सकता है विशेष मिशन का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[Budget 2026: एग्री&amp;#45;फाइनेंस, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्र की मजबूती पर विशेष जोर देने का सुझाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/union-budget-2026-expected-to-strengthen-agri-finance-food-security-and-rural-resilience-ey-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 20 Jan 2026 10:41:40 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/union-budget-2026-expected-to-strengthen-agri-finance-food-security-and-rural-resilience-ey-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कंसल्टेंसी फर्म ईवाई इंडिया ने कहा है कि आगामी बजट 2026-27 में कृषि क्षेत्र के लिए वित्तीय सशक्तीकरण, खाद्य पदार्थों में आत्मनिर्भर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की उम्मीद है। इसके विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को किसानों के लिए ऋण तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने, उत्पादन में विविधता लाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए व्यापक उपाय करने चाहिए।</p>
<p>EY के अनुसार, भारत की खाद्य सुरक्षा नीति ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (2013), PM गरीब कल्याण अन्न योजना, PM पोषण योजना और अंत्योदय अन्न योजना जैसे कार्यक्रमों के चलते मजबूती हासिल की है। लेकिन जलवायु के जोखिम, खाद्य तेलों और दालों की आयात पर निर्भरता तथा बच्चों में कुपोषण जैसी चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए कृषि क्षेत्र को संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि तिलहन और दालों में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देनी चाहिए। राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स - ऑयलसीड्स और आत्मनिर्भरता इन पल्सेज मिशन जैसे कार्यक्रमों को बजट के जरिए और मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि घरेलू उत्पादन बढ़े और आयात पर निर्भरता कम हो। भारत खाद्य तेल की लगभग 60% आवश्यकता आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए घरेलू क्षमता को बढ़ाना आवश्यक है।</p>
<p>कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना भी जरूरी है। रिपोर्ट के अनुसार, आटा और चावल की जगह पोषण मूल्य वाले फसलों जैसे मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन, प्रसंस्करण इकाइयों और मार्केटिंग नेटवर्क की स्थापना की आवश्यकता है, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फसल कटाई के बाद प्रबंधन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए कोल्ड स्टोरेज, आधुनिक गोदाम और डिजिटल आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन जैसे बुनियादी ढांचे में निवेश को बढ़ावा देना चाहिए। फल और सब्जियों में बड़े स्तर पर बर्बादी होती है और पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम (PDS) में भी कई चुनौतियां हैं, जिनका समाधान आवश्यक है।</p>
<p>जलवायु के अनुसार कृषि और कृषि-तकनीक को बढ़ावा देना भी रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं में शामिल है। माइक्रो सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य कार्यक्रम, सूखा सहने वाले बीज और डिजिटल कृषि उपायों को बढ़ावा देना किसानों की उत्पादकता और लचीलेपन को बढ़ाने में मदद कर सकता है।</p>
<p>EY India का मानना है कि बजट 2026-27 में पारंपरिक खाद्य वितरण मॉडल से आगे बढ़कर ऐसे समग्र सुधारों और निवेश पर ध्यान देना चाहिए जो उपलब्धता, पहुंच, सस्ती उपलब्धता और पोषण जैसे स्तम्भों पर आधारित हों। इससे भारत न केवल खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि कृषि क्षेत्र को एक उन्नत, लचीला और समावेशी प्रणाली में बदल सकता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ Budget 2026: एग्री-फाइनेंस, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्र की मजबूती पर विशेष जोर देने का सुझाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर केंद्रित हो बजट 2026, उद्योग जगत ने दिए सुझाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/budget-2026-industry-urge-focus-on-farm-resilience-higher-incomes-and-sustainable-rural-prosperity.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 18 Jan 2026 10:02:36 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/budget-2026-industry-urge-focus-on-farm-resilience-higher-incomes-and-sustainable-rural-prosperity.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जैसे-जैसे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट की तैयारी जोर पकड़ रही है, यह अपेक्षा बढ़ती जा रही है कि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में मामूली कदमों से आगे बढ़ते हुए बड़े संरचनात्मक सुधारों पर जोर दिया जाएगा। एग्रीटेक, जैवईंधन, पोषण और डेयरी क्षेत्रों के उद्योग विशेषज्ञों का सुझाव है कि हालिया उपलब्धियों को आधार बनाते हुए केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर मूल्य सृजन, रेजिलिएंस और समावेशी विकास पर ध्यान दिया जाए।</p>
<p>आर्या.एजी (Arya.ag) के सह-संस्थापक और कार्यकारी निदेशक आनंद चंद्रा के अनुसार, प्राथमिकता सीधे खेत के स्तर पर होनी चाहिए। उन्होंने माइक्रो-वेयरहाउसिंग और वैज्ञानिक भंडारण जैसी विकेंद्रीकृत अवसंरचना के बढ़ते प्रभाव की जरूरत बताई जो किसानों को मजबूरी में फसल बेचने से बचाने और बाजार का सही समय चुनने में मदद करती है। वे कहते हैं, &ldquo;खेत स्तर पर समय पर और आसान ऋण उपलब्ध होने से अधिक किसान, विशेषकर महिलाएं और युवा, अपनी उपज को रोककर बेहतर बाजारों तक पहुंच बना पा रहे हैं।&rdquo;</p>
<p>चंद्रा को उम्मीद है कि बजट में इन कारगर उपायों को आगे भी समर्थन मिलता रहेगा। उनके अनुसार, विकेंद्रीकृत बुनियादी ढांचा, समावेशी वित्त और मजबूत किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और जहां इसकी सबसे अधिक जरूरत है वहां जलवायु सहनशीलता बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी हैं। वह ड्रोन, एआई आधारित गुणवत्ता ग्रेडिंग और जलवायु परामर्श जैसी तकनीक को अपनाने वाले एग्रीटेक स्टार्टअप्स की भूमिका को भी रेखांकित करते हैं। उन्होंने कहा, &ldquo;ये उपकरण छोटे किसानों के लिए उपयोगी होने चाहिए। ये सरल, किफायती और सीमित संसाधनों वाले परिवेश में प्रभावी हों। सही समर्थन मिलने पर ऐसे नवाचार उत्पादकता बढ़ा सकते हैं, नुकसान घटा सकते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर पैदा कर सकते हैं।&rdquo;</p>
<p><strong>एथेनॉल की अतिरिक्त क्षमता से निपटने की जरूरत</strong><br />खाद्यान्न उत्पादन से आगे बढ़ते हुए नीति-निर्माताओं से ऊर्जा और औद्योगिक परिवर्तन में कृषि की बढ़ती भूमिका पर भी ध्यान देने का आग्रह किया गया है। गोदावरी बायोरिफाइनरीज लिमिटेड की कार्यकारी निदेशक डॉ. संगीता श्रीवास्तव के अनुसार, भारत का तय समय से पहले ई-20 एथेनॉल मिश्रण लक्ष्य हासिल कर लेना अब एक नई चुनौती - अतिरिक्त उत्पादन क्षमता - को जन्म दे रहा है। उनका मानना है कि बजट 2026 में मांग बढ़ाने के उपायों पर जोर दिया जाना चाहिए। जैसे ई-100 के लिए तैयार बुनियादी ढांचे को प्रोत्साहन देना और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) के अनिवार्य उपयोग को बढ़ाना।</p>
<p>श्रीवास्तव के अनुसार, इससे अतिरिक्त एथेनॉल की खपत में मदद मिलेगी। उनका कहना है, &ldquo;इस बजट को ईंधन में मिश्रण से आगे बढ़कर सस्टेनेबल रासायनिक अर्थव्यवस्था में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में जाने के लिए आवश्यक ढांचा प्रदान करना चाहिए।&rdquo; इस दृष्टि से बायोफ्यूल्स को औद्योगिक विकास के एक प्रमुख साधन के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p><strong>पोषण-केंद्रित कृषि बढ़ाने की मांग</strong><br />पोषण एक और ऐसा क्षेत्र है जहां विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब केवल उत्पादन (यील्ड) से आगे बढ़ना होगा। बेटर न्यूट्रिशन (Better Nutrition) के सह-संस्थापक और सीईओ प्रतीक रस्तोगी का कहना है कि पिछले वर्ष के बजट में कृषि को सही मायनों में भारत के पहले विकास इंजन के रूप में स्थापित किया गया था, लेकिन अगला कदम नतीजों पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा, &ldquo;हम भोजन की कमी से नहीं जूझ रहे हैं, बल्कि हमारे भोजन में पोषक तत्वों की कमी है।&rdquo;</p>
<p>रस्तोगी ने राष्ट्रीय नीति के तहत बायोफोर्टिफाइड (पोषक तत्वों से समृद्ध) बीजों और पोषण-केंद्रित कृषि को मुख्यधारा में लाने की जरूरत पर जोर दिया। उनका तर्क है कि बीज और फसल स्तर पर आयरन, जिंक और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर कर भारत सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है, साथ ही किसानों के लिए उच्च मूल्य वाले बाजार भी तैयार कर सकता है। पोषक तत्वों से भरपूर फसलों की खेती और प्रसंस्करण करने वाले स्टार्टअप्स तथा किसान नेटवर्क को समर्थन देने से बेहतर मूल्य मिलेगा और सुनिश्चित मांग बनेगी, जिससे कृषि आय सीधे बेहतर पोषण से जुड़ सकेगी।</p>
<p>बजट में सिंचाई, कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे और ग्रामीण लॉजिस्टिक्स के लिए पूंजीगत आवंटन बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, दक्षता और मूल्य निर्धारण में सुधार के लिए ई-नाम (eNAM), डेटा-आधारित परामर्श सेवाओं और रिमोट सेंसिंग के विस्तार की संभावना जताई जा रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के नीति के केंद्र में बने रहने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>डेयरी में मात्रा नहीं, मूल्य पर जोर देने की जरूरत</strong><br />ग्रामीण आजीविका की रीढ़ माने जाने वाले डेयरी क्षेत्र पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। भारत में दूध उत्पादन पिछले एक दशक में लगभग 14.6 करोड़ टन से बढ़कर 2023-24 में 23.9 करोड़ टन से अधिक हो गया। प्रति व्यक्ति उपलब्धता वैश्विक औसत से काफी ज्यादा है। हालांकि, अब नीति-निर्माताओं से मात्रा के बजाय मूल्य सृजन को प्राथमिकता देने की उम्मीद की जा रही है।</p>
<p>हेरिटेज फूड्स लिमिटेड की कार्यकारी निदेशक ब्राह्मणी नारा का कहना है कि हालिया जीएसटी संशोधन से संगठित डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा मिला है और उपभोक्ता मांग अधिक प्रोटीन व स्वास्थ्य केंद्रित उत्पादों की ओर शिफ्ट हुई है। बजट 2026 के लिए उन्होंने तीन प्राथमिकताएं गिनाईं - गुणवत्तापूर्ण पशु आहार और क्रोमोसोम-सॉर्टेड सीमेन तक पहुंच, पशु चिकित्सा शिक्षा क्षमता का विस्तार, और विशेषकर महिला उद्यमियों के लिए मिनी-डेयरी इकाइयों पर अधिक पूंजी सब्सिडी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर केंद्रित हो बजट 2026, उद्योग जगत ने दिए सुझाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत ने गेहूं आटा निर्यात का रास्ता खोला, 5 लाख टन निर्यात की अनुमति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-opens-wheat-flour-exports-allows-export-of-5-lakh-tonnes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 17 Jan 2026 18:39:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-opens-wheat-flour-exports-allows-export-of-5-lakh-tonnes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत में गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमान और भरपूर भंडार को देखते हुए केंद्र सरकार ने <strong>गेहूं आटा और उससे जुड़े उत्पादों के सीमित निर्यात</strong> की अनुमति दे दी है। सरकार ने <strong>5 लाख टन</strong> गेहूं आटा और संबंधित उत्पादों के निर्यात की मंजूरी दी है।&nbsp;</p>
<p><span>शुक्रवार को डीजीएफटी द्वारा इस छूट की अधिसूचना जारी की गई, जिसके बाद पात्रता, आवेदन और आवंटन की प्रक्रिया को निर्धारित करते हुए एक विस्तृत सूचना जारी की गई।&nbsp;</span></p>
<p>केंद्र सरकार ने मई 2022 में भीषण गर्मी के कारण उत्पादन घटने और घरेलू कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। <span>हालांकि, अब भी गेहूं और उससे जुड़े उत्पाद &ldquo;प्रतिबंधित&rdquo; श्रेणी में ही रहेंगे, लेकिन <strong>कड़ी निगरानी और नियंत्रित तंत्र</strong> के तहत गेहूं उत्पादों के सीमित निर्यात की अनुमति दी गई है।</span></p>
<p>हालिया निर्णय के तहत गेहूं या मेस्लिन आटा, जिसमें <strong>आटा, मैदा, सूजी/रवा, होलमील आटा और उससे बने उत्पाद</strong> शामिल हैं, का कुल 5 लाख टन तक निर्यात किया जा सकेगा। यह निर्यात विदेश व्यापार महानिदेशक<strong>&nbsp;(DGFT)</strong> द्वारा विशेष अनुमति के माध्यम से होगा। डीजीएफटी ने स्पष्ट किया है कि यह अनुमति मौजूदा नीति शर्तों से अलग होगी और पूरे निर्यात पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।</p>
<p>डीजीएफटी की अधिसूचना के अनुसार, निर्यात अनुमति के लिए आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। <strong>पहली आवेदन अवधि 21 जनवरी से 31 जनवरी 2026</strong> तक खुलेगी। इसके बाद हर महीने के अंतिम 10 दिनों में आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे, जब तक कि स्वीकृत निर्यात मात्रा पूरी नहीं हो जाती।</p>
<p>निर्यात कोटा आवंटन का फैसला <strong>विशेष निर्यात सुविधा समिति</strong> करेगी जो निर्यातकों के ट्रैक रिकॉर्ड, प्रसंस्करण क्षमता और वैध निर्यात अनुबंधों जैसे पहलुओं को ध्यान में रखेगी।&nbsp;</p>
<p><strong>उत्पादन घटने के बाद लगा था प्रतिबंध</strong><br />गौरतलब है कि सरकार ने अगस्त 2022 में गेहूं उत्पादन में गिरावट के बाद <strong>मैदा, सूजी और आटा</strong> के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इन उत्पादों की मांग उन देशों में अधिक है जहां बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी रहती है, जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन, खाड़ी देश, अफ्रीका के कुछ हिस्से और दक्षिण-पूर्व एशिया शामिल हैं। अब सीमित निर्यात की अनुमति से आटा मिलों और निर्यातकों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।</p>
<p></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x_696b8904c57d9.jpg" alt="" /></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_696b8b122b0ca.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत ने गेहूं आटा निर्यात का रास्ता खोला, 5 लाख टन निर्यात की अनुमति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_696b8b122b0ca.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार ने कीटनाशक विधेयक का मसौदा जारी किया, जनता से मांगे सुझाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/the-government-released-draft-pesticide-management-bill-2025-sought-suggestions-from-public.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 08 Jan 2026 20:56:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/the-government-released-draft-pesticide-management-bill-2025-sought-suggestions-from-public.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="111" data-end="307">केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 का <a href="https://agriwelfare.gov.in/Documents/HomeWhatsNew/Inviting_Comments_on_the_draft_Pesticides_Management_Bill_2025_0.pdf">मसौदा</a> जारी करते हुए इस पर जनता से प्रतिक्रिया मांगी है। यह विधेयक 57 साल पुराने कीटनाशक अधिनियम, 1968 और कीटनाशक नियम, 1971 की जगह लेगा।</p>
<p data-start="309" data-end="659">कृषि मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, विधेयक का उद्देश्य किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण कीटनाशकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना है, जिससे जीवन सुगमता और व्यापार सुगमता को बढ़ावा मिल सके। संसद में पेश किए जाने से पहले विधेयक के मसौदे पर 4 फरवरी, 2026 तक सभी हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं।</p>
<p data-start="661" data-end="1114">सरकारी बयान के अनुसार, नए विधेयक में नकली और अमानक कीटनाशकों पर नियंत्रण के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित कानून को किसान-केंद्रित बताते हुए मंत्रालय ने कहा है कि इसमें पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके अलावा, कीटनाशकों के बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण और प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए भी संशोधन किए गए हैं। कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 का मसौदा मंत्रालय की वेबसाइट <a data-start="1072" data-end="1098" rel="noopener" target="_new" class="decorated-link" href="https://agriwelfare.gov.in">https://agriwelfare.gov.in </a>पर उपलब्ध है।</p>
<p data-start="1116" data-end="1517">विधेयक में परीक्षण प्रयोगशालाओं के अनिवार्य प्रत्यायन का भी प्रावधान किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक उपलब्ध हों। विधेयक का मुख्य उद्देश्य तकनीक और डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से नकली और घटिया कीटनाशकों पर सख्त नियंत्रण करना है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले कृषि इनपुट उपलब्ध होंगे और उनकी आजीविका पर पड़ने वाले जोखिम कम होंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार ने कीटनाशक विधेयक का मसौदा जारी किया, जनता से मांगे सुझाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जीडीपी ग्रोथ 7.4 फीसदी रहने का अनुमान, लेकिन कृषि में 3.1 फीसदी की कमजोर वृद्धि]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/gdp-growth-is-expected-to-be-7.4-pc-but-agriculture-will-grow-at-a-sluggish-3.1-pc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 07 Jan 2026 19:07:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/gdp-growth-is-expected-to-be-7.4-pc-but-agriculture-will-grow-at-a-sluggish-3.1-pc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.4% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2024&ndash;25 में दर्ज 6.5% की वृद्धि से बेहतर है। हालांकि, ताजा आधिकारिक आंकड़े एक बड़े असंतुलन को उजागर करते हैं। देश की लगभग आधी आबादी को रोजगार देने वाले कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की वृद्धि दर जीडीपी की वृद्धि दर से आधी से भी कम रहने का अनुमान लगाया गया है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा बुधवार 7 जनवरी को जारी अर्थव्यवस्था के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) के पहले<strong> अग्रिम अनुमानों (First Advance Estimates)</strong> के अनुसार, वित्त वर्ष 2025&ndash;26 में कृषि और संबद्ध गतिविधियों की वास्तविक वृद्धि दर 3.1% रहने का अनुमान है। जबकि समग्र जीडीपी का जीवीए की वृद्धि दर 7.3 फीसदी रहेगी। कृषि को छोड़कर अर्थव्यवस्था के सर्विस और मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्रों की ऊंची दर के चलते अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर ऊंची रहेगी।&nbsp;</p>
<p>साल (2011&ndash;12) के स्थिर मूल्यों पर, वित्त वर्ष 2025&ndash;26 में वास्तविक जीडीपी 201.90 लाख करोड़ रुपए आंकी गई है, जो पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में 187.97 लाख करोड़ रुपए थी।&nbsp;</p>
<h3>कृषि व सहयोगी क्षेत्र की कमजोर वृद्धि दर</h3>
<p>हालांकि समग्र स्तर पर आर्थिक वृद्धि मजबूत दिखती है, लेकिन क्षेत्रवार आंकड़े एक बड़े अंतर की ओर इशारा करते हैं। कृषि, पशुपालन, वानिकी और मत्स्य पालन क्षेत्रों में 3.1 फीसदी की कमजोर वृद्धि दर का अनुमान है जो जनसंख्या वृद्धि से थोड़ा ही अधिक है और ग्रामीण आय में ठोस सुधार के लिए पर्याप्त नहीं है।</p>
<p>&nbsp;सीएसओ के अनुमानों के मुताबिक बिजली और जल आपूर्ति जैसी उपयोगिता वाली सेवाओं में केवल 2.1 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है, जबकि खनन क्षेत्र में हल्की गिरावट की संभावना जताई गई है।</p>
<p>इसके विपरीत, वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाएं, साथ ही लोक प्रशासन और रक्षा से जुड़ी सेवाओं के 9.9 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है। व्यापार, होटल, परिवहन और संचार से जुड़ी सेवाओं में 7.5 फीसदी की वृद्धि अनुमानित है।&nbsp;</p>
<p>कृषि से बाहर रोजगार सृजन के लिए अहम विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र, दोनों में सात फीसदी की वास्तविक वृद्धि अनुमानित है। हालांकि इससे गैर-कृषि रोजगार को कुछ सहारा मिलेगा, लेकिन यह कृषि क्षेत्र की सुस्ती की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है।</p>
<h3>ग्रामीण मांग पर चिंता बरकरार</h3>
<p>अर्थशास्त्रियों का कहना है कि कृषि की कमजोर वृद्धि दर इस बात का उजागर करती है&nbsp; कि ग्रामीण खपत शहरी मांग के बराबर क्यों नहीं बढ़ पा रही है। निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE), जो जीडीपी का आधे से अधिक हिस्सा है, वित्त वर्ष 2025&ndash;26 में सात फीसदी&nbsp; की वास्तविक वृद्धि दर्ज करेगा हालांकि यह समग्र वृद्धि के अनुरूप है, लेकिन इसमें ग्रामीण&ndash;शहरी अंतर स्पष्ट रूप से छिपा हुआ है।</p>
<p>वित्त वर्ष 2025&ndash;26 में प्रति व्यक्ति वास्तविक जीडीपी Rs 1,42,119 आंकी गई है, जो पिछले साल की तुलना में 6.5 फीसदी अधिक है। वहीं प्रति व्यक्ति वास्तविक उपभोग में केवल 6 फीसदी से थोड़ा अधिक की वृद्धि का अनुमान है। विश्लेषकों का कहना है कि ये लाभ समान रूप से वितरित नहीं हैं और कृषि परिवारों की आय में बढ़ोतरी शहरी सेवा क्षेत्र के कर्मचारियों की तुलना में कहीं कम है।</p>
<h3>बजट 2026&ndash;27 के लिए निहितार्थ</h3>
<p>जीडीपी के ये अनुमान केंद्रीय बजट 2026&ndash;27 की तैयारियों पर गहरा असर डाल सकते हैं, खासकर कृषि और ग्रामीण व्यय को लेकर। जब कृषि की वृद्धि दर समग्र अर्थव्यवस्था की आधी से भी कम है, तब न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), उर्वरक सब्सिडी और ग्रामीण रोजगार योजनाओं के माध्यम से समर्थन बनाए रखने का दबाव बना रहने की संभावना है।</p>
<p>नई दिल्ली स्थित एक नीति संस्थान के एक अर्थशास्त्री ने कहा,&ldquo;अगले बजट के लिए यह आंकड़े एक स्पष्ट दुविधा पैदा करते है। ग्रामीण और कृषि क्षेत्र का दबाव बना हुआ है, लेकिन पूंजीगत व्यय में कटौती करने से विकास कमजोर पड़ सकता है, जबकि सब्सिडी बढ़ाने से राजकोषीय घाटे के लक्ष्य प्रभावित होंगे।&rdquo;</p>
<h3>बाहरी और मूल्य जोखिम</h3>
<p>यह अनुमान कृषि से जुड़े खर्चों के लिए संभावित जोखिमों की ओर भी इशारा करते हैं। वित्त वर्ष 2025&ndash;26 में आयात के 14.4 फीसदी&nbsp; की वास्तविक दर से बढ़ने का अनुमान है, जो निर्यात में 6.4 फीसदी की वृद्धि से कहीं अधिक है। यदि वैश्विक जिंस कीमतों में उछाल आता है, तो इससे चालू खाता संतुलन पर दबाव बढ़ सकता है।</p>
<p>हालांकि महंगाई में कमी आई है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि खाद्य और ऊर्जा कीमतें अब भी मौसम संबंधी झटकों और वैश्विक बाजारों की अस्थिरता के प्रति संवेदनशील बनी हुई हैं, जिससे सब्सिडी का दबाव दोबारा बढ़ सकता है।</p>
<p>NSO ने कहा है कि प्रथम अग्रिम अनुमान नवंबर 2025 तक उपलब्ध आंशिक आंकड़ों पर आधारित हैं और जैसे-जैसे अधिक जानकारी उपलब्ध होगी, इनमें संशोधन किया जाएगा। <strong>द्वितीय अग्रिम अनुमान</strong>, साथ ही 2022&ndash;23 को नया आधार वर्ष मानते हुए संशोधित ऐतिहासिक जीडीपी आंकड़े, 27 फरवरी 2026 को जारी किए जाएंगे।</p>
<p>फिलहाल, वित्त वर्ष 2025&ndash;26 के ये आंकड़े एक जानी-पहचानी नीतिगत चुनौती को फिर से सामने लाते हैं: तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था, जिसकी सबसे कमजोर कड़ी अब भी कृषि बनी हुई है। इससे ग्रामीण मांग कमजोर बनी रहती है और भारत के अगले बजट चक्र में राजकोषीय फैसलों को और जटिल बना देती है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जीडीपी ग्रोथ 7.4 फीसदी रहने का अनुमान, लेकिन कृषि में 3.1 फीसदी की कमजोर वृद्धि ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर भारत में अगले दो–तीन दिन शीतलहर का असर, पहाड़ों में कई जगह बर्फबारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cold-wave-to-continue-in-north-india-for-next-two-three-days-snowfall-in-many-parts-of-the-mountains-increases-the-cold.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 07 Jan 2026 17:29:06 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cold-wave-to-continue-in-north-india-for-next-two-three-days-snowfall-in-many-parts-of-the-mountains-increases-the-cold.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का असर और तेज हो गया है। भारत मौसम विभाग (IMD) के ताज़ा अनुमान के अनुसार, अगले दो&ndash;तीन दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत में शीतलहर की स्थिति बनी रहने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई इलाकों में सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज की गई है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है और मैदानी क्षेत्रों में भी ठंड बढ़ गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी शीतलहर की स्थिति बनी हुई है।</p>
<p>ठंड बढ़ने के साथ पंजाब के अमृतसर और लुधियाना, हरियाणा के अंबाला तथा राजस्थान के गंगानगर और जयपुर में दिन का अधिकतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की और गिरावट का अनुमान जताया है। यूपी का इटावा प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा जहाँ न्यूनतम तापमान 2.6&deg;C&nbsp;दर्ज किया गया।</p>
<p>आज पूरे उत्तर-पश्चिम भारत में कोहरे की चादर छाई रही। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। कुछ शहरी इलाकों में दोपहर के समय हल्की धूप निकलने की संभावना है, लेकिन ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण इसका असर सीमित रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 5 से 7 दिनों तक उत्तर-पश्चिम, मध्य और उत्तर-पूर्व भारत में सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की आशंका है।</p>
<p>मौसम विभाग ने 8 और 9 जनवरी को हिमाचल प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के कुछ हिस्सों में; 8 से 10 जनवरी के दौरान पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में; तथा 9 से 12 जनवरी 2026 के दौरान राजस्थान में शीतलहर की चेतावनी जारी की है। इस अवधि में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश में घने से बहुत घने कोहरे की संभावना जताई गई है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और उत्तर-पूर्वी भारत के कई हिस्सों में भी घना कोहरा छाए रहने की आशंका है।</p>
<p>घने कोहरे के कारण देश के कई हिस्सों में रेल सेवाएं प्रभावित हुई हैं। उत्तरी रेलवे के अनुसार, सुबह कम दृश्यता के चलते दिल्ली आने-जाने वाली 50 से अधिक ट्रेनें देरी से चल रही हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया, जबकि उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों में यह 0 से 5 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा।</p>
<p>गुलमर्ग और पहलगाम जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी हो रही है। घाटी में तापमान शून्य से नीचे बना हुआ है। &nbsp;शिमला, मनाली और बद्रीनाथ जैसे क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बर्फबारी का अनुमान है। उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में 'ग्राउंड फ्रॉस्ट' (पाला) की चेतावनी दी गई है, जो फसलों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।</p>
<p>मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के दौरान ठंड और कोहरे को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। आने वाले दिनों में पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में शीतलहर व कोहरे की स्थिति बने रहने की संभावना है, ऐसे में लोगों को ठंड से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर भारत में अगले दो–तीन दिन शीतलहर का असर, पहाड़ों में कई जगह बर्फबारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उर्वरक आयात पर बढ़ती भारत की निर्भरता: यूरिया आयात में 120 प्रतिशत उछाल, डीएपी 54 प्रतिशत बढ़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indias-rising-fertilizer-import-dependence-urea-imports-jump-120-pc-dap-up-54-pc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 05 Jan 2026 19:58:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indias-rising-fertilizer-import-dependence-urea-imports-jump-120-pc-dap-up-54-pc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>उर्वरकों के मामले में भारत की निर्भरता आयात पर बढ़ती जा रही है। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) की ओर से जारी आंकड़ों से यह उजागर हुआ है।&nbsp;</strong></p>
<p><strong></strong>अप्रैल&ndash;नवंबर 2025 के दौरान यूरिया की बिक्री 2.3 प्रतिशत बढ़कर 2.54 करोड़ टन हो गई। जबकि घरेलू यूरिया उत्पादन में 3.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 1.97 करोड़ टन रह गया। इस अंतर को पाटने के लिए दोगुना से अधिक यूरिया आयात करना पड़ा जो 120 फीसदी की वृद्धि के साथ 71.7 लाख टन तक पहुंच गया। यूरिया आयात पिछले वर्ष की समान अवधि में 32.6 लाख टन था। यूरिया की करीब 27 फीसदी खपत आयात से पूरी की जा रही है।</p>
<p>गत नवंबर महीने में यूरिया की बिक्री 37.5 लाख टन रही, जो पिछले साल के मुकाबले 4.8 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान आयात 68.4 फीसदी बढ़कर 13.1 लाख टन हो गया। इस तरह खरीफ और रबी सीजन के दौरान यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आयात पर निर्भरता बढ़ी है।&nbsp;</p>
<p><strong>डीएपी उत्पादन में गिरावट, आयात में वृद्धि</strong></p>
<p>एफएआई के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल&ndash;नवंबर 2025 के दौरान प्रमुख उर्वरक<span>&nbsp;</span><b>डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP)</b><span>&nbsp;</span>की बिक्री 71.2 लाख टन रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1 प्रतिशत कम है। इस दौरान घरेलू डीएपी उत्पादन 5.2 प्रतिशत घटकर 26.8 लाख टन रह गया, जबकि आयात 54.4 प्रतिशत बढ़कर 55.4 लाख टन हो गया। नतीजतन, डीएपी की कुल उपलब्धता में आयात की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 67 प्रतिशत हो गई, जो एक साल पहले 56 प्रतिशत थी।&nbsp;</p>
<p>ये आंकड़े दर्शाते हैं कि यूरिया और डीएपी के घरेलू उत्पादन में कमी के कारण भारत की निर्भरता आयातित उर्वरकों पर बढ़ गई है। खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिहाज से यह अच्छी स्थिति नहीं है। डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट को देखते हुए यह और भी चिंताजनक है। साथ ही, उन नीतियों पर भी सवाल खड़े करती है जिनके जरिए उर्वरकों की खपत घटाने और आयात कम करने के दावे किए जाते रहे हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>कॉम्प्लेक्स उर्वरकों का उत्पादन बढ़ा</strong></p>
<p>अप्रैल&ndash;नवंबर 2025 के दौरान एनपी और एनपीके कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की बिक्री 103.8 लाख टन रही और इसमें 0.1 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई। इन संतुलित उर्वरकों का उत्पादन 13.8 प्रतिशत बढ़कर 81.5 लाख टन हो गया, जबकि आयात लगभग दोगुना होकर 98.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 27.2 लाख टन तक पहुंच गया।&nbsp;</p>
<p><strong>एमओपी और एसएसपी की बिक्री बढ़ी</strong></p>
<p><b>म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP)<span>&nbsp;</span></b>की बिक्री इस अवधि में 8.6 प्रतिशत बढ़कर 15.5 लाख टन हो गई, जो आयात में गिरावट के बावजूद स्थिर मांग को दर्शाती है।</p>
<p>फॉस्फेटिक उर्वरक<b><span>&nbsp;</span>सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP</b>) का उत्पादन 9.5 प्रतिशत बढ़कर 39.7 लाख टन हो गया, जबकि बिक्री में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ यह 41.6 लाख टन तक पहुंच गई।&nbsp;</p>
<p>माना जा रहा है कि डीएपी की उपलब्धता को लेकर समस्याओं के कारण&nbsp;&nbsp;सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) की बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।&nbsp;</p>
<p>FAI ने कहा कि अप्रैल&ndash;नवंबर 2025 के आंकड़े एक परिपक्व आपूर्ति शृंखला को दर्शाते हैं, जहां घरेलू उत्पादन और आयात एक-दूसरे के पूरक हैं। इस दौरान <strong>यूरिया आयात</strong> में 120 प्रतिशत से अधिक, <strong>डीएपी आयात</strong> में 54 प्रतिशत और <strong>कॉम्प्लेक्स उर्वरकों</strong> के आयात में करीब 99 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि भारत के उर्वरक क्षेत्र ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को अपनी मूल योजना का हिस्सा बना लिया है।</p>
<p>FAI के चेयरमैन <strong>एस</strong>. <strong>शंकरसुब्रमण्यम</strong> ने कहा कि समन्वित योजना के जरिए बिक्री में वृद्धि हासिल की गई है। खासकर यूरिया और डीएपी के मामले में आयात पर काफी निर्भरता यह रेखांकित करती है कि किसानों के लिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आपूर्ति शृंखला प्रबंधन और दूरदर्शी आयात नीति कितनी महत्वपूर्ण है।</p>
<p>FAI के महानिदेशक <strong>डॉ. सुरेश कुमार चौधरी</strong> ने कहा, &ldquo;इन आंकड़ों में दो बातें खास तौर पर सामने आती हैं। पहली, नाइट्रोजन और फॉस्फेट पोषक तत्वों के लिए आयात-आधारित आपूर्ति प्रबंधन की ओर संरचनात्मक बदलाव। दूसरी, एसएसपी जैसे स्वदेशी फॉस्फेटिक उर्वरकों का मजबूत प्रदर्शन, जिनकी बिक्री में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह एक संतुलित दृष्टिकोण का संकेत है, जहां हम योजनाबद्ध आयात के जरिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व सुनिश्चित कर रहे हैं और साथ ही घरेलू फॉस्फेटिक उत्पादन को भी मजबूत कर रहे हैं।&rdquo;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उर्वरक आयात पर बढ़ती भारत की निर्भरता: यूरिया आयात में 120 प्रतिशत उछाल, डीएपी 54 प्रतिशत बढ़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अरावली की 100 मीटर की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, नई विशेषज्ञ समिति बनाने का प्रस्ताव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/supreme-court-stays-100-meter-definition-of-aravalli-proposes-formation-of-new-expert-committee.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 29 Dec 2025 18:25:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/supreme-court-stays-100-meter-definition-of-aravalli-proposes-formation-of-new-expert-committee.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने 20 नवंबर के उस आदेश को स्थगित (abeyance) कर दिया है, जिसमें केंद्र सरकार की सिफारिशों के बाद अरावली पहाड़ियों की 100 मीटर की एकसमान परिभाषा को स्वीकार किया गया था।</p>
<p>चीफ जस्टिस <strong>सूर्यकांत</strong> तथा जस्टिस <strong>जे.के. माहेश्वरी</strong> और <strong>ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह</strong> की अवकाशकालीन पीठ ने अरावली की परिभाषा से जुड़ी "अहम उलझनों" को दूर करने तथा इस मुद्दे की व्यापक समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव दिया है।</p>
<p>अरावली मामले पर सुनवाई करते हुए तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि नई समिति की सिफारिशें आने तक 20 नवंबर, 2025 के फैसले में दिए गए निर्देश प्रभावी नहीं रहेंगे। अरावली की इकोलॉजिकल इंटीग्रिटी को कमजोर करने वाले किसी भी रेगुलेटरी गैप को रोकने के लिए "आगे जांच की बहुत जरूरत है"। अगले आदेश तक अरावली पहाड़ियों में खनन के लिए कोई अनुमति नहीं दी जाएगी।</p>
<p>अरावली की परिभाषा को लेकर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने खुद से संज्ञान लेते हुए सोमवार को इस मामले पर सुनवाई की। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी, 2026 को होगी।</p>
<p><strong>100 मीटर की परिभाषा पर सवाल</strong></p>
<p>केंद्र सराकर की '100 मीटर' या इससे अधिक ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली मानने वाली परिभाषा को सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद अरावली के भविष्य को लेकर चिंताएं जताई जा रही थीं।&nbsp;</p>
<p>100 मीटर की परिभाषा को लेकर पर्यावरणविदों ने गंभीर आपत्तियां जताई थीं और यह मुद्दा एक जन अभियान का रूप ले चुका था। नई परिभाषा से अरावली क्षेत्र का बड़ा हिस्सा संरक्षण के दायरे से बाहर हो सकता है और इससे खनन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने का खतरा है।</p>
<p>सोमवार को अदालत ने अपने ही पूर्व आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि नए विशेषज्ञ पैनल द्वारा सभी &ldquo;महत्वपूर्ण अस्पष्टताओं&rdquo; को दूर किया जाएगा।</p>
<p><strong>नई विशेषज्ञ समिति में पर्यावरण विशेषज्ञों की मांग</strong></p>
<p>पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अरावली में खनन का मौजूदा स्वरूप प्रशासनिक और शासन स्तर की विफलता को दर्शाता है। नई समिति में केवल नौकरशाह ही नहीं, बल्कि स्वतंत्र पर्यावरण विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाना चाहिए। अरावली बचाओ अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि अरावली के संरक्षण के लिए उनकी कोशिशें जारी रहेंगी।&nbsp;</p>
<p><strong>भूपेंद्र यादव ने किया स्वागत, रमेश ने कसा तंज </strong></p>
<p>केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री <strong>भूपेंद्र यादव</strong> ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। यादव ने X पर एक पोस्ट में कहा, "मैं अरावली रेंज से जुड़े अपने आदेश पर रोक लगाने और मुद्दों की स्टडी के लिए एक नई कमेटी बनाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्वागत करता हूं। हम अरावली रेंज के संरक्षण में MOEFCC से मांगी गई हरसंभव मदद देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।"</p>
<p>भूपेंद्र यादव के इस पोस्ट पर कमेंट करते हुए कांग्रेस के महासचिव <strong>जयराम रमेश</strong> ने लिखा, &ldquo;हिपोक्रेसी की कोई सीमा नहीं है।&rdquo;</p>
<p>गौरतलब है कि अभी तक केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव अरावली की नई परिभाषा को लेकर केंद्र सरकार के रुख का बचाव रहे थे और इससे अरावली पर संकट की आशंकाओं को खारिज कर रहे थे। जबकि अरावली की 100 मीटर की परिभाषा को लेकर कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन हो रहे थे।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली की केवल ऊंची पहाड़ियां ही नहीं बल्कि छोटी-छोटी पहाड़ियां और झाड़ियां भी पर्यावरण के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए समूची अरावली पहाड़ियों का संरक्षण आवश्यक है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अरावली की 100 मीटर की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, नई विशेषज्ञ समिति बनाने का प्रस्ताव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एथेनॉल को टिकाऊ समुद्री ईंधन के रूप में बढ़ावा देने के लिए IFGE और ग्लोबल एथेनॉल एसोसिएशन के बीच समझौता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/ifge-signs-mou-with-global-ethanol-association-to-advance-ethanol-as-a-sustainable-marine-fuel.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 28 Dec 2025 12:14:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/ifge-signs-mou-with-global-ethanol-association-to-advance-ethanol-as-a-sustainable-marine-fuel.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी (IFGE) ने ग्लोबल एथेनॉल एसोसिएशन (GEA) के साथ एथेनॉल को एक सतत हरित ईंधन के रूप में बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का मुख्य फोकस समुद्री क्षेत्र पर है। साथ ही ऑटोमोबाइल और नागरिक उड्डयन में इसके उपयोग को भी शामिल किया गया है।</p>
<p>इस MoU पर औपचारिक रूप से IFGE के महानिदेशक संजय गंजू और GEA के महासचिव मॉर्टन जैकब्सन ने हस्ताक्षर किए। यह जैव-ऊर्जा और हरित ईंधन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p>इस रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से IFGE और GEA का उद्देश्य एथेनॉल को एक व्यवहार्य समुद्री ईंधन के रूप में तेजी से अपनाने को बढ़ावा देना है, जिससे शिपिंग क्षेत्र में वैश्विक डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों को समर्थन मिले, साथ ही नवाचार, पॉलिसी एडवोकेसी और बाजार विकास को भी प्रोत्साहन मिले। यह सहयोग सड़क परिवहन और विमानन क्षेत्र में भी एथेनॉल के प्रयोग को बढ़ावा देगा, ताकि कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जा सके और हरित तथा जैव-ऊर्जा अपनाने को आगे बढ़ाया जा सके।</p>
<p>समझौते के तहत, जीईए (GEA) एथनॉल और समुद्री ईंधन के रूप में उसके उपयोग से जुड़ी अपनी वैश्विक विशेषज्ञता साझा करेगा। इसके अंतर्गत शोध प्रकाशनों, तकनीकी रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं तक पहुंच शामिल होगी। इस साझेदारी के तहत आईएफजीई, जीईए के साथ सक्रिय रूप से जुड़कर भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एथनॉल आधारित हरित ऊर्जा समाधानों के बाजार विकास की संभावनाओं और व्यवहार्यता का आकलन करेगा।</p>
<p>एमओयू पर टिप्पणी करते हुए, आईएफजीई की बायोएनर्जी समिति के अध्यक्ष और प्राज इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष अतुल मुले ने कहा कि यह सहयोग एथनॉल के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार संपर्क विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, विशेष रूप से समुद्री ईंधन जैसे उभरते उपयोग क्षेत्रों में। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी आईएफजीई के सदस्यों और एथनॉल वैल्यू चेन में कार्यरत भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसरों और वैश्विक बाजारों के द्वार खोलेगी।</p>
<p>जीईए के महासचिव मॉर्टन जैकबसेन ने कहा कि यह साझेदारी वैश्विक डीकार्बोनाइजेशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक क्षण है। जैकबसेन ने कहा कि यह सहयोग न केवल अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को मजबूत करेगा, बल्कि समुद्री परिवहन, नागरिक उड्डयन और सड़क परिवहन में दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा समाधानों की ओर संक्रमण को भी तेज करेगा।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एथेनॉल को टिकाऊ समुद्री ईंधन के रूप में बढ़ावा देने के लिए IFGE और ग्लोबल एथेनॉल एसोसिएशन के बीच समझौता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[VB&amp;#45;G RAM G बनाम MGNREGA: शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया, कांग्रेस का देशव्यापी ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान शुरू करने का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/vb-g-ram-g-vs-mgnrega-shivraj-rejects-opposition-charges-as-congress-launches-nationwide-mgnrega-bachao-campaign.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 27 Dec 2025 22:49:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/vb-g-ram-g-vs-mgnrega-shivraj-rejects-opposition-charges-as-congress-launches-nationwide-mgnrega-bachao-campaign.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ग्रामीण रोजगार को लेकर राजनीतिक टकराव शनिवार को और तेज हो गया, जब केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नए विकसित भारत&ndash;गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) अधिनियम पर कांग्रेस की आलोचनाओं का कड़ा जवाब दिया। वहीं, कांग्रेस ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को &ldquo;बचाने&rdquo; के लिए देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की।</p>
<p>चौहान ने कांग्रेस पर ग्रामीण रोजगार, ग्राम पंचायतों की भूमिका और श्रमिकों के अधिकारों को लेकर &ldquo;भ्रम और गलत सूचना&rdquo; फैलाने का आरोप लगाया। कांग्रेस द्वारा 5 जनवरी से पूरे देश में अभियान शुरू करने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष का विरोध मजदूरों की चिंता से नहीं, बल्कि राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने मांग-आधारित रोजगार को कमजोर नहीं किया है, बल्कि नए कानून के माध्यम से श्रमिकों के अधिकारों को और मजबूत किया है।</p>
<p>चौहान के अनुसार, VB-G RAM G अधिनियम पहले से कहीं अधिक मजबूत कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, जिसमें 125 दिनों की रोजगार गारंटी, समय पर काम न मिलने की स्थिति में अनिवार्य बेरोजगारी भत्ता और मजदूरी भुगतान में देरी होने पर मुआवजे का प्रावधान शामिल है। उन्होंने कहा कि ये प्रावधान पहले की व्यवस्था की तुलना में अधिक पारदर्शी और सशक्त हैं। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा भ्रष्टाचार से ग्रस्त था और महात्मा गांधी का नाम योजना से केवल राजनीतिक लाभ के लिए जोड़ा गया।</p>
<p>ग्राम सभाओं और ग्राम पंचायतों के अधिकार सीमित किए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए चौहान ने कहा कि उनकी भूमिका वास्तव में और मजबूत की गई है। उन्होंने बताया कि स्थानीय निकाय पहले की तरह कार्यों की पहचान और प्राथमिकता तय करेंगे, गुणवत्ता की निगरानी करेंगे, सामाजिक लेखा-परीक्षा करेंगे और जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे। महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और समुदाय की भागीदारी को विशेष रूप से बढ़ाया गया है। साथ ही, शिकायत निवारण व्यवस्था को सशक्त किया गया है और डिजिटल निगरानी शुरू की गई है, लेकिन स्थानीय निर्णय प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई है।</p>
<p><strong>कांग्रेस का 5 जनवरी से देशव्यापी अभियान</strong><br />दूसरी ओर, कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने 5 जनवरी से &ldquo;मनरेगा बचाओ अभियान&rdquo; शुरू करने की घोषणा की। खड़गे ने कहा कि मनरेगा को खत्म करना संविधान द्वारा दिए गए &ldquo;काम के अधिकार&rdquo; को छीनने जैसा है और पार्टी लोकतांत्रिक तरीकों से इसका विरोध करेगी, गांव-गांव तक अपनी आवाज पहुंचाएगी।</p>
<p>राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर &ldquo;एकतरफा तरीके से&rdquo; मनरेगा को खत्म करने का आरोप लगाया और इसकी तुलना नोटबंदी से की। उन्होंने इसे राज्यों, गरीबों और भारत के संघीय ढांचे पर हमला बताया। गांधी ने दावा किया कि मनरेगा खत्म होने से ग्रामीण बुनियादी ढांचा कमजोर होगा, राज्यों की शक्तियां छीनी जाएंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचेगा, जिसका सबसे ज्यादा असर आदिवासियों, दलितों, ओबीसी, अल्पसंख्यकों और अन्य कमजोर वर्गों पर पड़ेगा। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि इस बदलाव का उद्देश्य गरीबों से संसाधन छीनकर उन्हें दूसरे वर्गों की ओर मोड़ना है।</p>
<p>कांग्रेस नेतृत्व ने कहा कि पार्टी ग्रामीण मजदूरों की गरिमा, रोजगार सुरक्षा और समय पर मजदूरी भुगतान के लिए सामूहिक रूप से संघर्ष करेगी और ग्राम सभाओं की शक्तियों तथा मांग-आधारित रोजगार व्यवस्था की रक्षा करेगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ VB-G RAM G बनाम MGNREGA: शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया, कांग्रेस का देशव्यापी ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान शुरू करने का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इफको ने बेंगलुरु में चौथे नैनो उर्वरक संयंत्र का उद्घाटन किया, दक्षिण भारत में बढ़ सकेगी आपूर्ति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/iffco-inaugurates-fourth-nano-fertiliser-plant-in-bengaluru-boosts-supply-for-south-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 27 Dec 2025 14:39:41 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/iffco-inaugurates-fourth-nano-fertiliser-plant-in-bengaluru-boosts-supply-for-south-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइज़र कोऑपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) ने बेंगलुरु में अपने चौथे नैनो उर्वरक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का उद्घाटन किया। यह आत्मनिर्भर और सतत कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में भारत के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।</p>
<p>इस अत्याधुनिक संयंत्र का उद्घाटन इफको के चेयरमैन दिलीप संघानी ने किया। इस अवसर पर वाइस चेयरमैन बलवीर सिंह, इफको के प्रबंध निदेशक कीर्तिकुमार जे. पटेल, निदेशक मंडल के सदस्य, संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारी तथा इफको के कर्नाटक राज्य मार्केटिंग ऑफिस के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।</p>
<p>इफको चेयरमैन दिलीप संघानी ने कहा, &ldquo;बेंगलुरु के देवनहल्ली में नैनो उर्वरक संयंत्र का यह उद्घाटन किसान कल्याण, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में इफको का एक ऐतिहासिक कदम है।&rdquo;</p>
<p>इफको के प्रबंध निदेशक कीर्तिकुमार जे. पटेल ने कहा कि यह संयंत्र स्वदेशी नवाचार के माध्यम से जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के सहकारी संगठन के संकल्प को दर्शाता है। नैनो-आधारित उर्वरकों के घरेलू उत्पादन का विस्तार करके इफको आयातित इनपुट पर निर्भरता कम करने और &lsquo;आत्मनिर्भर भारत&rsquo; तथा &lsquo;आत्मनिर्भर कृषि&rsquo; के राष्ट्रीय विजन को समर्थन देने का लक्ष्य रखता है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_694fa203b763a.jpg" alt="" /></p>
<p>प्रतिदिन 2 लाख बोतलों की उत्पादन क्षमता के साथ बेंगलुरु स्थित यह संयंत्र दक्षिण भारत में नैनो उर्वरकों की समय पर और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यह नई इकाई कृषि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगी और किसानों को ऐसे इनोवेटिव इनपुट तक पहुंच दिलाएगी, जो पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए दक्षता में सुधार करते हैं।</p>
<p>पटेल ने एक बयान में कहा, &ldquo;यह संयंत्र केवल एक औद्योगिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के सहकारी आंदोलन की स्थायी शक्ति और भावना का प्रतीक है। सामूहिक विकास, विश्वास और साझा समृद्धि के दर्शन पर आधारित यह पहल बताती है कि इफको किस प्रकार सहयोग के मूल्यों को लाखों किसानों के लिए ठोस प्रगति में बदल रहा है। यह उपलब्धि &lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; के मार्ग पर इफको &nbsp;अटूट प्रतिबद्धता को दोहराती है, जहां सहकारी शक्ति राष्ट्रीय विकास और किसानों की समृद्धि की नींव बनती है,&rdquo;&nbsp;</p>
<p>इफको &nbsp;नैनो उर्वरक कार्यक्रम भारतीय कृषि में एक परिवर्तनकारी कदम के रूप में माना गया है, जो पोषक तत्वों की सटीक आपूर्ति, कम मात्रा में उपयोग और किसानों के लिए इनपुट लागत में कमी सुनिश्चित करता है, साथ ही दीर्घकालिक रूप से मिट्टी और पर्यावरण के स्वास्थ्य को भी बढ़ाता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_694fa2040231d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इफको ने बेंगलुरु में चौथे नैनो उर्वरक संयंत्र का उद्घाटन किया, दक्षिण भारत में बढ़ सकेगी आपूर्ति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ICRA ने ट्रैक्टर उद्योग का अनुमान बढ़ाया, चालू वित्त वर्ष में थोक बिक्री 15–17% बढ़ने की उम्मीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/icra-revises-tractor-industry-outlook-sees-wholesale-volumes-rising-15–17-percent-this-fiscal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 27 Dec 2025 13:28:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/icra-revises-tractor-industry-outlook-sees-wholesale-volumes-rising-15–17-percent-this-fiscal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रेटिंग एजेंसी ICRA ने घरेलू ट्रैक्टर उद्योग के लिए अपने विकास अनुमान में उल्लेखनीय सुधार करते हुए कहा है कि चालू वित्त वर्ष में ट्रैक्टरों की थोक बिक्री 15&ndash;17 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। इससे पहले एजेंसी ने इसमें 8&ndash;10 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया था। हाल के महीनों में उद्योग के मजबूत प्रदर्शन, अनुकूल नीतिगत कदमों और बेहतर कृषि परिस्थितियों को देखते हुए यह संशोधन किया गया है।</p>
<p>ICRA के अनुसार, हालिया बिक्री आंकड़े ट्रैक्टर उद्योग में तेजी की पुष्टि करते हैं। नवंबर महीने में ट्रैक्टरों की थोक बिक्री में सालाना आधार पर 30.1 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, अप्रैल से नवंबर की अवधि के दौरान कुल थोक बिक्री में 19.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसके चलते एजेंसी ने अपने पूर्वानुमान पर पुनर्विचार करते हुए उसमें संशोधन किया है।</p>
<p>एजेंसी ने बेहतर आउटलुक का श्रेय आर्थिक, नीतिगत और सेक्टर-विशेष कारकों को दिया है। इनमें सबसे प्रमुख कारण ट्रैक्टरों पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) की दर को घटाकर 5 प्रतिशत किया जाना है। इस नीतिगत बदलाव से किसानों की क्रय क्षमता में सीधे तौर पर सुधार हुआ है। कम जीएसटी दर के कारण ट्रैक्टरों की कीमतों में कमी आई है, जिससे विभिन्न हॉर्सपावर श्रेणियों में किसानों को 40,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक की बचत हो रही है। इससे नए ट्रैक्टरों की खरीद पहले की तुलना में अधिक सुलभ हुई है।</p>
<p>इसके अलावा, इस वर्ष पर्याप्त और समय पर हुई बारिश ने भी ग्रामीण मांग को मजबूती दी है। बेहतर मानसून के कारण बुवाई कार्य सुचारू रहा है, फसल उत्पादन की संभावनाएं बेहतर हुई हैं और किसानों की आय तथा नकदी प्रवाह में सुधार आया है। इन सभी कारकों ने ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक माहौल बनाया है और मेकैनाइजेशन जैसे पूंजीगत निवेश के लिए किसानों का भरोसा बढ़ाया है।</p>
<p>ICRA ने आगे कहा कि आने वाले महीनों में कुछ नियामकीय बदलाव भी ट्रैक्टर बिक्री को प्रभावित कर सकते हैं। 1 अप्रैल से सख्त ट्रैक्टर उत्सर्जन मानकों के लागू होने से पहले प्री-बाइंग की संभावना है। नए नियमों के लागू होने से पहले किसान और डीलर मौजूदा उत्सर्जन मानकों के तहत ट्रैक्टर खरीदना पसंद कर सकते हैं, जिससे निकट भविष्य में थोक बिक्री को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।</p>
<p>कुल मिलाकर, संशोधित अनुमान ट्रैक्टर उद्योग में मजबूत पुनरुद्धार और विस्तार के चरण की ओर संकेत करता है, जिसे ठोस नीतिगत समर्थन, अनुकूल कृषि परिणाम और आगामी नियामकीय बदलावों से जुड़ी बाजार गतिशीलताएं आगे बढ़ा रही हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6662f2c59169a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ICRA ने ट्रैक्टर उद्योग का अनुमान बढ़ाया, चालू वित्त वर्ष में थोक बिक्री 15–17% बढ़ने की उम्मीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6662f2c59169a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कौन&amp;#45;से उत्पाद कहलाएंगे ‘चाय’, FSSAI ने जारी किया स्पष्टीकरण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/fssai-issues-clarification-on-which-products-will-be-called-tea.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 26 Dec 2025 17:53:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/fssai-issues-clarification-on-which-products-will-be-called-tea.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="52" data-end="552">भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने विभिन्न उत्पादों को &lsquo;चाय&rsquo; के रूप में ब्रांडिंग या बिक्री किए जाने को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है। खाद्य नियामक ने कहा है कि देश में केवल <em data-start="241" data-end="261">कैमेलिया साइनेंसिस</em> (Camellia sinensis) पौधे से प्राप्त उत्पादों को ही &ldquo;चाय&rdquo; के रूप में लेबल किया और बेचा जा सकता है। <em data-start="360" data-end="379">Camellia sinensis</em> से इतर किसी भी अन्य प्लांट-आधारित या हर्बल इन्फ्यूजन अथवा ब्लेंड के लिए &ldquo;चाय&rdquo; शब्द का इस्तेमाल भ्रामक है और यह खाद्य सुरक्षा कानून के तहत मिसब्रांडिंग की श्रेणी में आता है।</p>
<p data-start="554" data-end="997">24 दिसंबर 2025 को जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण में FSSAI ने कहा कि उसके संज्ञान में आया है कि कई खाद्य व्यवसाय संचालक (FBOs) &ldquo;हर्बल टी&rdquo;, &ldquo;फ्लावर टी&rdquo; और &ldquo;रूइबोस टी&rdquo; जैसे उत्पाद बेच रहे हैं, जबकि ये <em data-start="747" data-end="767">कैमेलिया साइनेंसिस</em> से प्राप्त नहीं होते। नियामक के अनुसार, इस तरह का उपयोग भ्रामक है और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत मिसब्रांडिंग माना जाएगा। <em data-start="906" data-end="926">कैमेलिया साइनेंसिस</em> से इतर किसी भी उत्पाद के लिए &ldquo;चाय&rdquo; शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।</p>
<p data-start="999" data-end="1395">FSSAI ने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य उत्पाद मानक और खाद्य योज्य) विनियम, 2011 के तहत &ldquo;चाय&rdquo; शब्द, जिसमें ग्रीन टी, कांगड़ा टी और ठोस रूप में इंस्टेंट टी भी शामिल हैं, विशेष रूप से <em data-start="1195" data-end="1215">कैमेलिया साइनेंसिस</em> से बने उत्पादों के लिए आरक्षित है। इसके अलावा, लेबलिंग नियमों के अनुसार प्रत्येक पैकेट पर खाद्य पदार्थ की वास्तविक प्रकृति को स्पष्ट रूप से दर्शाने वाले नाम का उल्लेख अनिवार्य है।</p>
<p data-start="1397" data-end="1733">प्राधिकरण ने जोर देकर कहा कि <em data-start="1426" data-end="1446">कैमेलिया साइनेंसिस</em> से इतर किसी भी पौधे से बनी हर्बल या प्लांट-आधारित इन्फ्यूजन और ब्लेंड को &ldquo;चाय&rdquo; नहीं कहा जा सकता। उनकी संरचना के आधार पर ऐसे उत्पाद या तो प्रोप्राइटरी फूड की श्रेणी में आ सकते हैं या गैर-निर्दिष्ट खाद्य एवं खाद्य अवयवों के लिए स्वीकृति संबंधी नियमों के तहत मंजूरी की आवश्यकता हो सकती है।</p>
<p data-start="1735" data-end="2096" data-is-last-node="" data-is-only-node="">FSSAI ने सभी FBOs, जिनमें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं, को निर्देश दिया है कि वे नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और <em data-start="1862" data-end="1882">कैमेलिया साइनेंसिस</em> से इतर किसी भी उत्पाद के लिए &ldquo;चाय&rdquo; शब्द का उपयोग न करें। राज्य खाद्य सुरक्षा आयुक्तों और क्षेत्रीय निदेशकों को अनुपालन की कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, तथा उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_694e7d11e74e7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कौन-से उत्पाद कहलाएंगे ‘चाय’, FSSAI ने जारी किया स्पष्टीकरण ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान ट्रस्ट द्वारा ‘चौधरी चरण सिंह अवार्ड्स 2025’ का आयोजन, हरवीर सिंह को ‘कलम रत्न’ पुरस्कार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/kisan-trust-presents-chaudhary-charan-singh-award-rural-voice-editor-in-chief-harveer-singh-receives-kalam-ratna-award.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 20 Dec 2025 21:09:55 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/kisan-trust-presents-chaudhary-charan-singh-award-rural-voice-editor-in-chief-harveer-singh-receives-kalam-ratna-award.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसान ट्रस्ट द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की स्मृति में "चौधरी चरण सिंह अवाईस 2025 (द्वितीय संस्करण) का आयोजन शनिवार को नई दिल्ली में किया गया। इस अवसर पर कृषि, सेवा, पत्रकारिता एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विशिष्ट शख्सियतों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं विशिष्ट अतिथि केन्द्रीय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयन्त सिंह रहे।&nbsp;</p>
<p>किसान ट्रस्ट की तरफ से इस वर्ष के कलम रत्न पुरस्कार से वरिष्ठ पत्रकार और रूरल वॉयस के एडिटर-इन-चीफ हरवीर सिंह को सम्मानित किया गया। किसान पुरस्कार सत्यवान सहरावत को प्रदान किया गया। डॉ. डी.के. यादव को कृषि उत्थान पुरस्कार, फ्रूवटेक ऑर्गनाइजेशन (Fruvetech Organisation) को कृषि उद्यमी पुरस्कार और प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन को सेवा रत्न पुरस्कार से नवाजा गया। 'कृषि उद्यमी पुरस्कार' श्रेणी की शुरुआत इसी साल की गई।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_6946c2ccc694f.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><em>समारोह को संबोधित करते केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान।</em></p>
<p>अवार्ड समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, &ldquo;मेरे साथी जयन्त चौधरी में मुझे आदरणीय चौधरी चरण सिंह जी जैसी सादगी दिखाई देती है। चौधरी साहब को गांव-गरीब-किसान अपनी उम्मीद के रूप में देखते थे। चौधरी साहब ने भी गांव-गरीब-किसान के उत्थान में कोई कसर नहीं छोड़ी।&rdquo;</p>
<p>चौधरी साहब की राजनीतिक जीवटता को याद करते हुए कृषि मंत्री जी ने कहा, &ldquo;जिस समय पंडित जवाहर लाल नेहरू के खिलाफ बोलने का कोई साहस नहीं करते थे, तब चौधरी साहब ने उनके सहकारी खेती के विदेशी सिद्धांत का जमकर विरोध किया। गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित चौधरी साहब ने हिंडन नदी के किनारे जाकर नमक कानून तोड़ा, जमींदारी प्रथा का उन्मूलन करके किसान को जमीन का मालिक बनाया। किसानों के हित में वे किसी के दबाव में नहीं झुके।&rdquo;</p>
<p>समारोह को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि केंद्रीय मंत्री जयन्त चौधरी ने ज्यूरी के सदस्यों का धन्यवाद एवं सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा, " अक्सर जब किसान दिल्ली आते हैं, तो दिल्ली हिलाने आते हैं। मगर आज का दिन इस मायने में अलग है कि आज किसान चौधरी साहब की स्मृति में पुरस्कार देने दिल्ली आए हैं। यह सभी पुरस्कार विजेताओं के लिए गौरवशाली पल है और चौधरी साहब की विरासत का हिस्सा बनने की बड़ी एक जिम्मेदारी भी है।"</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_6946d4e4b5f26.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>कलम रत्न पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार हरवीर सिंह ने कहा कि चौधरी साहब के नाम से पुरस्कार मिलना उनके लिए गौरव एवं भावुकता भरा पल है। चौधरी साहब की विचारधारा से प्रभावित होकर उन्होंने पत्रकारिता के जरिए हमेशा गांव, किसान के मुद्दों को उठाने का प्रयास किया। अब रूरल वॉयस के जरिए कृषि और ग्रामीण भारत की आवाज़ उठाने के मिशन में जुटे हैं।&nbsp;</p>
<p>किसान पुरस्कार के विजेता प्रगतिशील किसान सत्यवान सहरावत ने कहा कि चौधरी चरण सिंह जी के पदचिन्हों पर चलकर किसानों को समृद्ध और सशक्त बनाकर ही विकसित भारत 2047 का सपना साकार हो सकता है। यह पुरस्कार उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है।&nbsp;</p>
<p>कृषि उत्थान पुरस्कार के विजेता कृषि वैज्ञानिक और ICAR के उप महानिदेशक डॉ. देवेंद्र यादव ने कहा कि इस पुरस्कार के रूप में मेरे नाम के साथ किसानों के मसीहा भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी का नाम जुड़ना उनके लिए गर्व का विषय है। वे विज्ञान और नीतियों के माध्यम से किसानों के जीवन में बदलाव लाने की कोशिश में जुटे हैं।&nbsp;</p>
<p>Fruvetech की तरफ से कृषि उद्यमी पुरस्कार हासिल करते हुए डॉ. जगदीश गुप्ता ने कहा कि ये पुरस्कार हासिल करके संस्थान गर्व महसूस करता है और संस्थान चौधरी चरण सिंह जी के सपनों को पूरा करने के दृढ़ संकल्पित है।</p>
<p>प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन की तरफ से सेवा रत्न पुरस्कार हासिल करते हुए रुक्मिणी बनर्जी ने कहा कि कृषि क्षेत्र से न होते हुए भी शिक्षा के क्षेत्र में हमारे योगदान के लिए संस्थान को भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी के नाम से पुरस्कार मिलना न केवल गौरव का विषय है बल्कि हमारे प्रयासों को इससे प्रेरणा भी मिलेगी।&nbsp;</p>
<p>कार्यक्रम की अध्यक्षता किसान ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. यशवीर सिंह जी ने की। उन्होंने अपने स्वागत संबोधन में सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी ने किसानों को हकदार बनाया, दलितों-पिछड़ों को जमीन का मालिक बनाया और स्वाभिमान से जीवन जीने का हक दिया। इसलिए चौधरी साहब के न रहने का सबसे बड़ा नुकसान किसानों को हुआ। इस अवसर पर किसान ट्रस्ट की ट्रस्टी चारु चौधरी, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ एके सिंह तथा तमाम गणमान्य लोग मौजूद रहे।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_6946c1f80ab41.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_6946c1f68fc28.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान ट्रस्ट द्वारा ‘चौधरी चरण सिंह अवार्ड्स 2025’ का आयोजन, हरवीर सिंह को ‘कलम रत्न’ पुरस्कार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_6946c1f68fc28.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मशरूम का गणित बिगाड़ रहा प्रदूषण, दिल्ली&amp;#45;NCR में खेती से लेकर बाजार तक की चुनौतियां]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rising-pollution-clouds-mushroom-farming-prospects-in-delhi-ncr-despite-market-growth.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 20 Dec 2025 15:01:41 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rising-pollution-clouds-mushroom-farming-prospects-in-delhi-ncr-despite-market-growth.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कभी फंगस कहा जाने वाला मशरूम अब दिल्ली एनसीआर में थाली की शान समझा जाने लगा है. संभवत: यही वजह है कि दिल्ली-NCR में महज एक कमरे में कुल 15&ndash;16 टन कंपोस्ट डालकर केवल 45&ndash;60 दिनों में 3 हजार से 3.5 हजार टन तक मशरूम उगाया जा रहा है. यह प्रॉडक्शन किसी फैक्ट्री में मशीनों के जरिए होने वाला उत्पादन नहीं, बल्कि आधुनिक कृषि उद्यम का उत्साहजनक उदाहरण है. पारंपरिक खेती जहां एक एकड़ में सीमित पैदावार देती है, वहीं मशरूम की खेती सीमित जगह और सीमित समय में बेहतरीन फसल देती है, बशर्ते कि कुछ परिस्थतियां अनूकुल रहें. राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में मशरूम फॉर्मिंग का बूम जारी है. मगर, उत्तर भारत के मशरूम फॉर्मिंग से जुड़े किसान अलग तरह की दिक्कतों का सामना कर रहे हैं जिनमें प्रदूषण की मार का साल दर साल बढ़ते जाना भी शामिल है.&nbsp;</p>
<p>मार्केट रिसर्च कंपनी IMARC ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में भारत के मशरूम बाजार का आकार लगभग 27.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर आंका गया था. साल 2025 से 2033 के बीच यह बाजार लगभग 6.5 फीसदी की सालाना औसत वृद्धि दर से बढ़कर 2033 तक करीब 48.7 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है. 2024 में भारत के मशरूम बाजार में सबसे बड़ा, 39.8 हिस्सा उत्तर भारत का था. रिपोर्ट कहती है कि इसकी बड़ी वजह अनुकूल मौसम, सरकार का सहयोग और पहले से ही मौजूद बेहतर ढांचा भी है. हिमाचल प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में तापमान और नमी मशरूम की खेती के लिए बेहद अनुकूल माने जाते हैं. सरकारी योजनाएं भी ऐसी हैं कि किसानों को प्रशिक्षण और सब्सिडी मिलती है, जबकि रिसर्च इंस्टीट्यूट खेती की तकनीक को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. लेकिन इस रिपोर्ट से इतर, व्यावहारिक स्तर पर भविष्य के इन आंकड़ों को छूने में प्रदूषण जैसे कारक बाधक बन रहे हैं.</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_69466aa575184.jpg" alt="" /></p>
<p><em>शिवम शर्मा के फॉर्म के भीतर मशरूम की खेती के लिए रखा कंपोस्ट।</em></p>
<p>बाहरी दिल्ली के कराला इलाके में एआरएस मशरूम फॉर्म्स के नाम से खेती कर रहे शिवम गोपाल शर्मा दो साल से इस 'कारोबार' में हैं. मशरूम फॉर्मिंग को वह खेती कम, मॉडर्न एग्रीकल्चर बिजनेस अधिक बताते हैं. वह कहते हैं, "भारत में अब भले ही मशरूम की विभिन्न किस्मों की खपत बढ़ी है लेकिन ऐसा मानने वाले लोगों की कमी अब भी नहीं जो इसे फंगस या मांसाहार समझकर परहेज करते हैं." वह बताते हैं, "इधर प्रदूषण से फसल पर बुरा असर पड़ने लगा है. अगर हवा में हानिकारक तत्व (प्रदूषण) हैं तो यह हवा फसल को नुकसान पहुंचाती है... इसे झेलना पड़ रहा है... हम भगवान भरोसे हैं... क्योंकि प्रदूषण हर साल बढ़ता ही जा रहा है. जब मशरूम की फसल लगभग तैयार हो चुकी होती है उस समय इसे ऑक्सीजन की अच्छी मात्रा की जरूरत होती है, लेकिन चूंकि हवा खराब है तो प्रदूषण के हानिकारक कण मशरूम की खेती को नुकसान पहुंचाते हैं. प्रदूषण के चलते मशरूम की पिन (छोटी कोंपले) अच्छे से उठ नहीं पाती हैं." यानी, आम तरीके से समझें तो मशरूम पनपकर खिल नहीं पाते हैं.</p>
<p>शिवम दो साल से मशरूम की खेती कर रहे हैं. उनके पास फिलहाल एक कमरा है जहां 16 टन की कंपोस्ट में मशरूम की पैदावार होती है. वह बताते हैं कि प्रति क्रॉप सर्कल इसमें 3-3.5 हजार टन के बीच यील्ड हो जाती है. मशरूम की खेती का एक पूरा सर्कल आमतौर पर 45 से 50 दिन का होता है. &nbsp;</p>
<p><strong>मशरूम की खेती के दो मॉडल, दोनों पर किसानों का दांव</strong><br />मशरूम की खेती दो तरह से की जाती है, एसीयू यानी एसी यूनिट लगाकर जहां तापमान को जरूरत के अनुसार मैंटेन किया जाता है। दूसरा झुग्गी मॉडल जो सर्दियों के मौसम में ही मौसमी खेती की तरह पैदावार देता है. यूं तो राजधानी और आसपास के इलाकों में दोनों तरह से खेती की जा रही है लेकिन उत्साही युवा जन खेती के मॉडर्न तरीके की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं. इसकी वजह संभवतः सरकारी केंद्रों (पूसा, केवीके, हैक) में ट्रेनिंग की उपलब्धता भी है.</p>
<p>पवन कुमार ने उजुआ में कृषि विज्ञान केंद्र से साल 2016 में ट्रेनिंग लेकर अपना फॉर्म स्थापित किया. केवीके की ओर से सेट-अप लगाने में मदद मिली. उन्होंने इसके बाद मुरथल में मौजूद हैक (HAIC-Haryana Agro Industries Corporation Ltd) ट्रेनिंग सेंटर और इसके बाद डायरक्टरेट ऑफ मशरूम रिसर्च सेंटर से भी इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग हासिल की. पवन कुमार कभी पारंपरिक खेती करते थे लेकिन बाद में एक कमरे से शुरुआत करके आज एक बिल्डिंग में मशरूम की खेती चलाते हैं. तीसरी ट्रेनिंग से पूर्व ही एक कमरे में 6 टन खाद के साथ सेटअप कर लिया था। तब 1200 किलो मशरूम पैदा हुआ. आज वह 70 टन कंपोस्ट के साथ खेती कर रहे हैं. साथ ही, कई युवाओं को प्रशिक्षण भी दे रहे हैं.</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_69466aa485a37.jpg" alt="" /></p>
<p><em>एआरएस फॉर्म में कटाई के लिए तैयार मशरूम।</em></p>
<p>बाहरी दिल्ली के नजफगढ़ के हसनपुर गांव में रहने वाले पवन कुमार मशरूम की खेती में पिछले 10 सालों से लगे हुए हैं. वह कहते हैं कि यदि किसान के पास एसीयू है तो उसके लिए तापमान मुद्दा नहीं है और झुग्गी मॉडल के मुकाबले इसमें काफी हद तक प्रदूषण को भी मैनेज किया जा सकता है. पवन कुमार अपने एसीयू में 12 महीने मशरूम उगाते हैं. यही एसी यूनिट की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें मौसम पर निर्भरता नहीं रहती.</p>
<p><strong>सबसे अधिक खपत बटन मशरूम की</strong><br />कई वैरायटी की उपलब्धता के बीच दिल्ली एनसीआर में फिलहाल सबसे अधिक खपत बटन मशरूम की है. इसके अलावा शीटेक और पोर्टोबेलो की मांग भी है लेकिन मंहगा होने के कारण यह कम खरीदा और इसलिए कम पैदा किया जाता है. चूंकि बटन मशरूम सर्वाधिक खरीदे जाते हैं और इसलिए सर्वाधिक पैदावार इसी की है. आम मार्केट में आकार में बड़े पोर्टोबेलो मशरूम जैसी वैरायटी बहुत बिकती नहीं है.</p>
<p>हालात की दोहरी मार से अपने बलबूते जूझ रहे दिल्ली के किसान- पवन कुमार बताते हैं, "हमें कंपोस्ट खाद बनाने की सरकार से परमिशन नहीं मिली. गांव अरबन एरिया में घोषित है, भले ही कृषि योग्य भूमि हमारे पास है... दिल्ली में इससे जुड़ी खाद बनाने की समस्या आती है. प्लांट के लिए खाद हरियाणा से मंगवानी होती है."</p>
<p><strong>झुग्गी सिस्टम की चुनौतियां</strong><br />वे किसान जो इस सिस्टम के जरिए मशरूम उत्पादन कर रहे हैं, उनके लिए सर्दी का सीजन ही कारगर होता है. अक्टूबर से फरवरी के बीच ही इस सिस्टम के तहत खेती की जा सकती है. झुग्गी सिस्टम के तहत नवंबर-दिसंबर में टेंपरेचर की समस्या से निपटने के लिए शिवम कहते हैं कि बुआई की गणना कुछ इस तरह से करनी चाहिए कि फसल का आखिरी फेज जनवरी में आकर लगे. ऐसे में यदि ये महीने प्रदूषण से त्रस्त रहेंगे और तापमान में अपेक्षित कमी नहीं होगी तो पैदावार बुरी तरह से प्रभावित होगी.&nbsp;</p>
<p><strong>तापमान का टेढ़ा गणित, बैच एक तापमान अनेक</strong><br />मशरूम की खेती में विभिन्न स्तरों पर टेंपरेचर अलग अलग रखा जाता है. बुआई के दौरान तापमान 22&ndash;25 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए. 15 से 18 दिनों के बीच केसिंग की जाती है जिसमें तापमान 22 से 24 के बीच होना चाहिए। बाद में जब 18 से 24 दिनों के भीतर खेती का कूलिंग पीरियड होता है तो तापमान 14 से 18 के बीच चाहिए.</p>
<p>मशरूम उगाने का अगला अहम पढ़ाव है जब पिन आने लगती है. उस समय तक बुआई को लगभग 30 दिन हो चुके होते हैं. इस दौरान तापमान 12 से 16 के बीच होना चाहिए. 50-60 दिनों के भीतर फसल कटने लायक हो जाती है और उस समय प्लांट का तापमान 14 से 18 के बीच ही होना चाहिए. तापमान में गड़बड़ से भी मेहनत और लागत पर पानी फिर सकता है क्योंकि या तो पिनिंग नहीं होगी या छोटी होगी या फिर सड़ांध हो सकती है. ऑक्सीजन और कार्बनडाइऑक्साइड की उपलब्धता भी विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग मात्रा में चाहिए. &nbsp;</p>
<p><strong>आम किसान को कंपोस्ट में मिल सकता है धोखा</strong><br />मशरूम की खेती का अहम कंपोनेंट है सही कंपोस्ट. तापमान के अतिरिक्त मशरूम की खेती में सबसे जरूरी है अच्छी खाद का मिल पाना और इसका सही ढंग से इस्तेमाल. पवन बताते हैं- आप जो खाद खरीद रहे हैं, वह ऊपरी तौर पर हो सकता है ठीक लगे लेकिन हो सकता है इसके भीतर अमोनिया गैस रह गई हो या फिर इसका पॉश्चुराइजेशन सही से न हुआ हो. यदि ये दिक्कतें हुईं तो आखिर में मशरूम बनेंगे ही नहीं. वह कहते हैं- किसान वैज्ञानिक रूप से इतना सक्षम नहीं होता कि वह कंपोस्ट की टेस्टिंग स्वयं कर सके, वह बस अनुभव के आधार पर उचित खाद प्राप्त करता है.</p>
<p><strong>बीजों की उपलब्धता</strong><br />मशरूम स्पॉन यानी बीज पूसा के विभिन्न सेंटर, हैक (सोनीपत) आदि सरकारी सेंटरों से आसानी से पाए जा सकते हैं. मगर बीज में एक्स्ट्रा मशरूम फंगस तो नहीं, यह जांचना जरूरी है. देखना यह भी होगा कि बीज ज्यादा पुराना यानी कई महीनों से स्टोरेज में रखा तो नहीं है. पवन कुमार ने बीजों की उपलब्धता को लेकर बताया कि बटन मशरूम के बीज आपको हाथोंहाथ सेंटरों पर मिल सकते हैं. बीज के अन्य प्रकार और खाद के लिए एडवांस में ऑर्डर देना पड़ता है.</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_69466aa640bf7.jpg" alt="" /></p>
<p><em>एआरएस फॉर्म में तैयार मशरूम के पैकेट।</em></p>
<p><strong>रखरखाव में सावधानी और सप्लाई तक का सफर</strong><br />कई बार होता यह है कि लोग बाजार से मशरूम के हल्का गुलाबी हो जाने पर नहीं खरीदते या फिर हल्की टूट-फूट को खरीदते नहीं. इसलिए, सावधानी से पैकिंग और सप्लाई की जाती है. गलत हैंडलिंग के चलते कई बार मशरूम दब या पिचक सकते हैं जिन्हें कंज्यूम नहीं किया जाना चाहिए. जब किसान अपने स्तर पर पैकिंग करके भेजते हैं तो इस तरह की घटनाएं कम होती हैं. लेकिन फिर भी यह चुनौती बनी रहती है कि शुरू से आखिर तक रखरखाव संबंधी बेहद सावधानी बरती जाए.&nbsp;</p>
<p>खाद कहीं बीच में खराब हो गई या प्रोसेंसिंग में कोई छोटी गड़बड़ हो गई तो फसल आखिर में बिगड़ सकती है. समय से मार्केट में नहीं भेजी तो भी मशरूम का रंग बदलने या गाढ़ा हो जाने से बाजार में किसान को उचित दाम नहीं मिलते. पवन बताते हैं, मशरूम की खेती अन्य सब्जियों से अलग इस प्रकार से भी है कि जिस दिन यह पूरी तरह से तैयार हो गए, उसी दिन इसे काटकर, साफ करके पैक करके मार्केट में बिक्री के लिए पहुंचा दिया जाना होता है. प्रतिदिन यह फसल कटनी और एंड-कस्टमर तक पहुंच जानी चाहिए.</p>
<p><strong>डिमांड और सप्लाई का नियम यहां भी</strong><br />मशरूम के रेट मांग और आपूर्ति के नियम पर चलते हैं. किसान हर व्यक्ति या रेस्त्रां के पास जाकर सीधे तो नहीं बेच सकता. उसे मंडियों व आढतियों के मार्फत ही फसल बाजार में पहुंचानी होगी. कई बार आढ़तियों के चलते दिक्कतें आती हैं. कई बार किसान भी आढ़तियों से एडवांस ले चुके होते हैं जिसके बाद सही दाम मिलने में उन पर दबाव आता है. सर्दियों में कई बार मांग से अधिक सप्लाई हो जाती है जिसके बाद किसान को उचित दाम नहीं मिलते. मशरूम ऐसी फसल नहीं है जिसका किसान स्टॉक कर सके.</p>
<p>नब्बे के दशक में भारत में मशरूम आया और आज 2025 में मशरूम की खेती तेजी से युवाओं की पसंद बन रही है. ऐसे में जरूरी है कि सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर उन चुनौतियों से निपटने के लिए सही रणनीति बनाई जाए जिनसे तेजी से उभरता यह सेक्टर फिलहाल जूझ रहा है.</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_69466aa6bc723.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मशरूम का गणित बिगाड़ रहा प्रदूषण, दिल्ली-NCR में खेती से लेकर बाजार तक की चुनौतियां ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_69466aa6bc723.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी मिलों पर बढ़ सकता है बकाया भुगतान का बोझ, चीनी के दाम 36 रुपये तक गिरे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indian-sugar-mills-may-face-increased-burden-of-outstanding-payments-sugar-prices-fall-by-up-to-rs-36.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 18 Dec 2025 16:35:01 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indian-sugar-mills-may-face-increased-burden-of-outstanding-payments-sugar-prices-fall-by-up-to-rs-36.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="110" data-end="774">खपत से अधिक चीनी उत्पादन, एथेनॉल में कम हिस्सेदारी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात के प्रतिकूल माहौल के चलते देश का चीनी उद्योग बड़े गन्ना बकाया की स्थिति की ओर बढ़ रहा है। चालू पेराई सीजन (2025-26) में करीब 343 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है, जबकि घरेलू खपत लगभग 290 लाख टन रहने की संभावना है। सरकार ने निर्यात की अनुमति तो दे रखी है, लेकिन मौजूदा समय में निर्यात लाभदायक सौदा नहीं है। इसी स्थिति के चलते महाराष्ट्र में चीनी की एक्स-फैक्टरी कीमत 36 रुपये प्रति किलो तक गिर गई है, जो कई जगह अभी 36.50 रुपये प्रति किलो या उसके आसपास बनी हुई है। उद्योग सूत्रों ने <em>रूरल वॉयस</em> को बताया कि मौजूदा हालात गन्ना किसानों के बड़े बकाया भुगतान की ओर ले जा सकते हैं।</p>
<p data-start="776" data-end="1252">सूत्रों के अनुसार, सरकार चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) 37 रुपये प्रति किलो तय करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। वहीं उद्योग का कहना है कि एमएसपी कम से कम 41 रुपये प्रति किलो होना चाहिए और इसे गन्ने के फेयर एंड रेम्यूनरेटिव प्राइस (एफआरपी) से जोड़ दिया जाना चाहिए। गौरतलब है कि वर्ष 2019 के बाद से चीनी के एमएसपी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है और यह अभी भी 31 रुपये प्रति किलो है। उद्योग का कहना है कि चीनी की उत्पादन लागत 41.72 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है।</p>
<p data-start="1254" data-end="1762">उद्योग की मांग को देखते हुए सरकार ने चालू सीजन में 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति भी दी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के मौजूदा भाव निर्यात को घाटे का सौदा बना रहे हैं। एथेनॉल को लेकर भी उद्योग की मांग है कि बी-हैवी शीरे और गन्ने के सीरप से बनने वाले एथेनॉल के दाम खाद्यान्न-आधारित एथेनॉल के बराबर किए जाएं। साथ ही उद्योग का कहना है कि चालू एथेनॉल आपूर्ति सीजन के लिए पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा जारी टेंडर में चीनी उद्योग की हिस्सेदारी केवल 27.5 फीसदी रखी गई है, जो क्षमता के अनुरूप नहीं है।</p>
<p data-start="1764" data-end="2042">सरकार की एथेनॉल नीति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं, जिससे पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग को वर्तमान 20 फीसदी लक्ष्य (E20) से बढ़ाकर 24 फीसदी या उससे अधिक करने की संभावना कमजोर पड़ती दिख रही है। हालांकि अक्टूबर 2025 में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण दर 19.97 फीसदी तक पहुंच गई थी।</p>
<p data-start="2044" data-end="2480">चालू पेराई सीजन के अनुमानों के अनुसार गन्ना किसानों को करीब एक लाख 30 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है। ऐसे में, यदि चीनी कीमतों में सुधार नहीं हुआ तो उद्योग का संकेत है कि बड़े पैमाने पर बकाया खड़ा हो सकता है। उद्योग सूत्रों का यह भी कहना है कि जब तक किसानों को समय पर भुगतान मिलता रहता है, तब तक सरकार चिंतित नहीं होती, लेकिन यदि बकाया बढ़ा तो सरकार किसानों की नाराजगी से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर मजबूर हो सकती है।</p>
<p data-start="2044" data-end="2480"></p>
<p data-start="2044" data-end="2480"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी मिलों पर बढ़ सकता है बकाया भुगतान का बोझ, चीनी के दाम 36 रुपये तक गिरे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अब ग्रामीण परिवारों को मिलेगी 125 दिनों की रोजगार गारंटी: शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/the-bill-guarantees-125-days-of-wage-employment-to-rural-families-shivraj-singh-chouhan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 16 Dec 2025 16:54:13 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/the-bill-guarantees-125-days-of-wage-employment-to-rural-families-shivraj-singh-chouhan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज लोक सभा में विकसित भारत&ndash; जी राम जी (Viksit Bharat&ndash;Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin): VB&ndash;G RAM G विधेयक- 2025 पेश किया। इसके तहत हर वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी। संसद में शिवराज सिंह ने कहा कि हमारा संकल्प है गरीबों का कल्याण और इसमें उसी संकल्प को पूरा करने का हमने प्रयत्न किया है। न केवल गरीबों का कल्याण बल्कि उसके साथ गांवों का संपूर्ण विकास, जो महात्मा गांधी भी कहते थे- एक संपूर्ण गांव, एक स्वावलंबी गांव, एक विकसित गांव का निर्माण। इसका प्रावधान इसमें किया गया है और केवल प्रावधान ही नहीं, केंद्र सरकार इस पर 95 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि अभी खर्च करने का काम करेगी, यह हमने तय किया है। कृषि मंत्री के कार्यालय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में यह बातें कही गई हैं।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि इसके पहले रोजगार की कई योजनाएं आई। एक योजना का नाम था- जवाहर रोजगार योजना। बाद में कांग्रेस ने ही जवाहर रोजगार योजना का नाम बदल दिया तो क्या पंडित जवाहरलाल नेहरू जी का अपमान हो गया? शिवराज सिंह ने कहा कि गरीबों के कल्याण के लिए कई बार बजट का असमान वितरण होता है, कई पंचायतें विकास में पीछे रह जाती है, इसलिए इसमें पंचायत का ग्रेडेशन करके, जो अविकसित पंचायत है, कम विकसित पंचायत है, उन्हें ज्यादा काम देने का प्रावधान भी किया है।</p>
<p>शिवराज सिंह बोले- महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं और महात्मा गांधी जी का, पंडित दीनदयाल जी का ये संकल्प था कि जो सबसे पीछे हैं, जो सबसे नीचे हैं, उनका कल्याण सबसे पहले किया जाए और हम महात्मा गांधी जी की भी मानते हैं और उन्हीं के विचारों पर आधारित, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों पर आधारित गरीब कल्याण की कई योजनाएं ये सरकार प्रधानमंत्री&nbsp; मोदी जी के नेतृत्व में चला रही है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जहां तक मनरेगा का सवाल है कांग्रेस और यूपीए तो केवल मनरेगा लेकर आई थी, 2 लाख 13 हजार 220 करोड़ रुपये यूपीए सरकार ने मनरेगा पर खर्च किए थे, जबकि हमने 8 लाख 53 हजार 810 करोड़ रु. गरीब कल्याण पर खर्च किए और इस योजना को और मजबूत करने की कोशिश की है। हम 100 दिन की गारंटी की बजाय हम 125 दिन की गारंटी दे रहे हैं, ये गारंटी कोरी नहीं है, बल्कि उसके लिए 1 लाख 51 हजार 282 करोड़ से ज्यादा रुपये की राशि का प्रावधान दिया गया है।</p>
<p>शिवराज सिंह ने कहा कि नया बिल गांवों का संपूर्ण विकास करेगा। उन्होंने कहा कि शरद पवार जब केंद्रीय कृषि मंत्री थे, तब उन्होंने ही कहा था कि कृषि कार्यों के लिए मज़दूर नहीं मिलते। हमने तो उनकी उस चिंता का भी समाधान करने का प्रयास किया है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि हर गरीब को भरपूर रोजगार मिले, उसकी गरिमा का सम्मान हो, दिव्यांग, बुज़ुर्ग और महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति, उनको और प्रोटेक्शन दिया जाए, इसके लिए यह बिल लेकर आए हैं। गांव का संपूर्ण विकास करेंगे और कृषि व मजदूरी दोनों में संतुलन स्थापित करने का काम करेंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अब ग्रामीण परिवारों को मिलेगी 125 दिनों की रोजगार गारंटी: शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मनरेगा की जगह नया कानून लाने की तैयारी, जानिए नाम के अलावा और क्या बदलेगा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/new-scheme-to-replace-mnrega-what-will-change-other-than-the-name.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 16 Dec 2025 12:26:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/new-scheme-to-replace-mnrega-what-will-change-other-than-the-name.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना <em><strong>महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा)</strong></em> में व्यापक बदलाव के लिए नया कानून लाने जा रही है, जिससे यह योजना पूरी तरह बदल जाएगी।&nbsp;</p>
<p>कैबिनेट की मंजूरी के बाद <em><strong>'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक 2025' (VB-G RAM G बिल)</strong></em> संसद में पेश किया जाएगा, जिसे आम बोलचाल में <strong>'जी राम जी'</strong> योजना कहा जा रहा है। नए विधेयक में ग्रामीण परिवारों को सालाना 100 की जगह <strong>125 दिनों</strong> की रोजगार गारंटी देने का प्रावधान है। लेकिन मुख्य कृषि सीजन यानी कटाई-बुवाई के चरम दिनों में 60 दिनों का 'पॉज' रहेगा, जिससे खेतों में मजदूरों की कमी न हो।</p>
<p>योजना में सबसे अहम बदलाव यह है कि इसे केंद्र और राज्यों के बीच खर्च की हिस्सेदारी से जोड़ दिया गया है और अब केवल केंद्र द्वारा पूरा खर्च नहीं उठाया जाएगा। यह प्रावधान प्रस्तावित कानून की सबसे कमजोर कड़ी साबित हो सकता है।</p>
<p>मनरेगा से <strong>महात्मा गांधी</strong> का नाम हटाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए कहा मनरेगा से गांधीजी का नाम हटाना अनावश्यक और योजना को कमजोर करने की साजिश है। विपक्षी दल योजना को मांग की बजाय आपूर्ति आधारित बनाने को गरीब व मजदूर विरोध कदम बता रहे हैं।</p>
<p>आलोचकों का आरोप है कि नया बिल मांग आधारित सिद्धांत को खत्म कर देगा, यानी अब मजदूरों को मांग करने पर काम नहीं मिलेगा, बल्कि सरकार तय करेगी कि कब और कितना काम उपलब्ध कराना है। यह ग्रामीणों के लिए रोजगार का <strong>कानूनी अधिकार</strong> खत्म करने जैसा है।</p>
<p><strong>राज्यों पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ</strong></p>
<p>नई योजना के फंडिंग पैटर्न (60:40) से राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा, जबकि केंद्र सरकार की जिम्मेदारी कम होगी। राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ने से नई योजना का क्रियान्वयन प्रभावित हो सकता है। अभी तक मनरेगा की मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी और ग्रामीण रोजगार एक गारंटी के तौर पर लागू किया जा रहा था। अब यह केंद्रीय योजना के तौर पर लागू होगा, जिसका 40 फीसदी खर्च राज्यों को उठाना पड़ेगा। हालांकि, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों की हिस्सेदारी 10 फीसदी होगी।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>संसद में पेश होने की संभावना</strong></p>
<p>विधेयक की कॉपी लोकसभा सदस्यों में वितरित की जा चुकी है और चालू सत्र में इसे संसद में पेश किया जा सकता है। सरकार का दावा है कि यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा और विकसित भारत के विजन को साकार करेगा। कहा जा रहा है कि यह विधेयक मनरेगा की कमियों को दूर करेगा और इसे केवल एक <strong>'राहत योजना'</strong> की बजाय&nbsp;<strong>'</strong><strong>विकास मिशन</strong><strong>'</strong> के रूप में स्थापित करेगा।</p>
<p><strong>आजीविका पर जोर </strong></p>
<p>नए कानून को ग्रामीण परिवारों की आजीविका तथा 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा गया है। जिसमें चार प्रमुख क्षेत्रों&mdash;जल संरक्षण, सड़कें, ग्रामीण आवास और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस रहेगा। सरकार का तर्क है कि मनरेगा 2005 की परिस्थितियों के लिए बनी थी और तब से अब तक ग्रामीण भारत काफी बदल चुका है।</p>
<p>नई योजना में कृषि-आधारित कार्यों, आजीविका के स्थायी स्रोतों और ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास शामिल करने का प्रस्ताव है। नए विधेयक में यह भी बताया गया है कि योजना को केवल 'काम देने' तक सीमित न रख कर ग्रामीण समुदाय की आजीविका सुरक्षा और विकास से जोड़ा जाएगा।</p>
<p>मनरेगा देश की प्रमुख कल्याणकारी योजना रही है, जिसने कोविड-19 जैसे संकट के समय करोड़ों परिवारों को संकट के समय सहारा दिया। वित्त वर्ष 2025-26 में मनरेगा के लिए 86 हजार करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।</p>
<p>सरकार का दावा है कि मनरेगा गरीबी को कम करने के मकसद से चलाई गई थी लेकिन ताजा आंकड़ों में राज्यों मेंं गरीबी का स्तर काफी घट गया है। इसलिए अब इस योजना को नये उद्देश्य के साथ चलाया जाएगा। मनरेगा के जरिये ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक बड़ी राशि जाती थी जिसकी नये कानून में संभावना कम रह जाएगी।</p>
<p>वहीं केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय हिस्सेदारी से चलने वाली योजनाओं की सफलता को लेकर भी सवाल खड़े होते रहे हैं। ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का जो फायदा देश के गरीब लोगों और पिछड़े व आदिवासी इलाकों में पहुंचा, उसका ही असर है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्र में गरीबी में कमी आने के आंकड़े पेश करने की स्थिति में है।&nbsp;</p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मनरेगा की जगह नया कानून लाने की तैयारी, जानिए नाम के अलावा और क्या बदलेगा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों पर ICAR सख्त, राज्यों को शीघ्र भर्ती के निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/icar-strict-on-vacant-posts-in-agricultural-universities-directs-states-to-fill-them-quickly.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 15 Dec 2025 12:09:13 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/icar-strict-on-vacant-posts-in-agricultural-universities-directs-states-to-fill-them-quickly.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="95" data-end="396">भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों में खाली पड़े पदों को भरवाने के प्रयासों में जुट गई है। इसके तहत आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट राज्यों के मुख्य सचिवों, कृषि विभाग और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ बैठक कर भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की कोशिश कर रहे हैं।</p>
<p data-start="398" data-end="868">इसी क्रम में शुक्रवार, 12 दिसंबर को डॉ. एम. एल. जाट ने राजस्थान के मुख्य सचिव, कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और राज्य के सभी कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की। बैठक में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े नियमों तथा आईसीएआर और कार्मिक विभाग द्वारा समय-समय पर जारी सर्कुलरों के पालन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव और महानिदेशक ने सभी विश्वविद्यालयों में कुल पदों, रिक्त पदों, भर्ती विज्ञापनों और वर्तमान स्थिति की समीक्षा की।</p>
<p data-start="870" data-end="1319">गौरतलब है कि राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों में कई स्थानों पर 80 प्रतिशत तक पद खाली पड़े हैं। शिक्षकों की कमी के कारण कृषि अनुसंधान, शिक्षण और प्रसार से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। आईसीएआर के महानिदेशक के रूप में जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही डॉ. एम.एल. जाट रिक्त पदों को भरने और कृषि शिक्षा के स्तर में सुधार पर जोर दे रहे हैं। जल्द ही अन्य राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों के साथ भी बैठक कर भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के प्रयास किए जाएंगे।</p>
<p data-start="1321" data-end="1825">राजस्थान के कृषि विश्वविद्यालयों के साथ हुई बैठक में प्रदेश के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सभी विश्वविद्यालयों में खाली पड़े पदों पर शीघ्र ही नियमानुसार भर्ती करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में कृषि शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता वृद्धि में कृषि विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए विश्वविद्यालयों में टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता आवश्यक है। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों के लिए कॉमन पात्रता मानदंड, सिलेबस और परीक्षा के बिंदुओं पर भी विचार करने के निर्देश दिए।</p>
<p data-start="1827" data-end="1960">बैठक में राजस्थान कृषि विभाग की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल, कृषि आयुक्त चिन्मय गोपाल और उद्यानिकी आयुक्त शुभम चौधरी भी उपस्थित रहे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों पर ICAR सख्त, राज्यों को शीघ्र भर्ती के निर्देश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वर्ष 2025 का इफको साहित्य सम्मान मैत्रेयी पुष्पा को, इफको युवा साहित्य सम्मान अंकिता जैन को]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/maitreyi-pushpa-received-the-iffco-literature-award-for-the-year-2025-and-ankita-jain-received-the-iffco-youth-literature-award.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Dec 2025 17:06:42 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/maitreyi-pushpa-received-the-iffco-literature-award-for-the-year-2025-and-ankita-jain-received-the-iffco-youth-literature-award.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उर्वरक क्षेत्र की अग्रणी सहकारी संस्था इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) द्वारा वर्ष 2025 के &lsquo;इफको साहित्य सम्मान&rsquo; के लिए कथाकार मैत्रेयी पुष्पा एवं &lsquo;ओह रे! किसान पुस्तक के लिए &lsquo;इफको युवा साहित्य सम्मान 2025&rsquo; हेतु अंकिता जैन के नाम की घोषणा की गई है। रचनाकारों का चयन वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती चंद्रकांता की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने किया है। इस वर्ष की सम्&zwj;मान चयन समिति में नासिरा शर्मा, अनंत विजय, यतीन्&zwj;द्र मिश्र, उत्&zwj;कर्ष शुक्&zwj;ल एवं डॉ. नलिन विकास शामिल थे।&nbsp;</p>
<p>मैत्रेयी पुष्पा का जन्म 30 नवम्बर, 1944 को अलीगढ़ जि&zwj;ले के सिकुर्रा गाँव में हुआ। आरम्भिक जीवन ज़ि&zwj;ला झाँसी के खिल्ली गाँव में बीता। आपने बुन्देलखंड कॉलेज, झाँसी से एम.ए. (हिन्दी साहित्य) की शिक्षा ली।</p>
<p>आपकी प्रमुख कृतियाँ हैं &lsquo;चिन्हार&rsquo;, &lsquo;गोमा हँसती है&rsquo;, &lsquo;ललमनियाँ तथा अन्य कहानियाँ&rsquo;, &lsquo;गोमा हँसती है&rsquo;, &lsquo;छांह&rsquo; &lsquo;पियरी का सपना&rsquo;, &lsquo;10 प्रतिनिधि कहानियाँ&rsquo;, &lsquo;समग्र कहानियाँ&rsquo; (कहानी-संग्रह); &lsquo;स्मृतिदंश&rsquo;, &lsquo;बेतवा बहती रही&rsquo;, &lsquo;इदन्नमम&rsquo;, &lsquo;चाक&rsquo;, &lsquo;झूला नट&rsquo;, &lsquo;अल्मा कबूतरी&rsquo;, &lsquo;अगनपाखी&rsquo;, &lsquo;विजन&rsquo;, &lsquo;कही ईसुरी फाग&rsquo;, &lsquo;त्रिया हठ&rsquo;, &lsquo;गुनाह-बेगुनाह&rsquo;, &lsquo;फ़रिश्ते निकले&rsquo; (उपन्यास); &lsquo;कस्तूरी कुंडल बसै&rsquo;, &lsquo;गुड़िया भीतर गुड़िया&rsquo; (आत्मकथा); &lsquo;खुली खिड़कियाँ&rsquo;, &lsquo;सुनो मालिक सुनो&rsquo;, &lsquo;चर्चा हमारा&rsquo;, &lsquo;आवाज़&rsquo;, &lsquo;तब्दील निगाहें&rsquo; (स्त्री-विमर्श); &lsquo;मंद्राकांता&rsquo; (नाटक); &lsquo;लकीरें&rsquo; (काव्य संग्रह); &lsquo;वह सफर था कि मुकाम था&rsquo; (संस्मरण); &lsquo;फ़ाइटर की डायरी&rsquo; (रिपोर्ताज)।</p>
<p>&lsquo;फ़ैसला&rsquo; कहानी पर टेलीफ़ि&zwj;ल्म 'वसुमती की चिट्ठी&rsquo; और &lsquo;इदन्नमम&rsquo; पर 'मंदा हर युग में&rsquo; धारावाहिक का प्रसारण हुआ है। आप &lsquo;सार्क लिट्रेरी अवार्ड&rsquo;, 'द हंगर प्रोजेक्ट&rsquo; (पंचायती राज) का &lsquo;सरोजिनी नायडू पुरस्कार&rsquo;, &lsquo;मंगला प्रसाद पारितोषिक&rsquo;, &lsquo;प्रेमचन्द सम्मान&rsquo;, हिन्दी अकादमी का &lsquo;साहित्यकार सम्मान&rsquo;, मध्य प्रदेश साहित्य परिषद का &lsquo;वीरसिंह जूदेव पुरस्कार&rsquo;, &lsquo;कथाक्रम सम्मान&rsquo;, &lsquo;शाश्वती सम्मान&rsquo; एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का &lsquo;महात्मा गांधी सम्मान&rsquo; आदि से सम्मानित हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_693d4f08aa48e.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>अंकिता जैन को इफको युवा साहित्य सम्मान&nbsp;</strong></p>
<p>श्रीमती अंकिता एक रिसर्च एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफ़ेसर से लेखक बनीं। जिनकी पहली किताब "ऐसी वैसी औरत" जागरण-नीलसन बेस्ट सेलर रह चुकी है। उनकी अन्य पुस्तकें "मैं से मां तक", "बहेलिए", एवं "ओ रे! किसान", उपन्यास 'मुहल्ला सलीमबाग़' एवं बाल उपन्यास "आतंकी मोर" को भी सराहा गया है।</p>
<p>अंकिता ने प्रभात खबर और द लल्लनटॉप में लोकप्रिय कॉलम "मा-इन-मेकिंग" लिखा है। एनबीटीगोल्ड, इंडिया टुडे, अहा जिंदगी, आईचौक में लेख लिखने के अलावा और पत्रिका-अख़बार &nbsp;में संपादकीय लिख चुकी हैं। उनकी कहानियाँ बिग एफएम के शो "यादों का इडियट बॉक्स" और "यूपी की कहानी" में दो वर्षों तक प्रसारित हुईं।</p>
<p>अंकिता एग्रो मैन्युफैक्चरिंग फर्म "वैदिक वाटिका" की डायरेक्टर हैं एवं "जय जंगल फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी" की फाउंडिंग मेम्बर एवं डायरेक्टर हैं। जहाँ वे आदिवासी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ वनोपज पर काम कर रही हैं। लेखन एवं खेती के साथ-साथ अंकिता रशियन स्कल्पचर पेंटिंग की प्रोफेशनल आर्टिस्ट एवं टीचर हैं, जो अब 'आर्ट एंड अंकिता' नाम से अपना आर्ट बिज़निस कर रही हैं। वे पेंटिंग्स कमर्शियल ऑर्डर पर तैयार करती हैं एवं अलग-अलग शहरों में स्कल्पचर पेंटिंग की वर्कशॉप लेती हैं।</p>
<p>वर्ष 2011 में इफको द्वारा शुरू किया गया यह सम्मान प्रत्येक वर्ष ऐसे हिन्दी लेखक को दिया जाता है जिसकी रचनाओं में मुख्यतः ग्रामीण व कृषि जीवन का चित्रण किया गया हो। इससे पहले यह सम्मान विद्यासागर नौटियाल, शेखर जोशी, संजीव, मिथिलेश्वर, अष्टभुजा शुक्ल, कमलाकांत त्रिपाठी, रामदेव धुरंधर, रामधारी सिंह दिवाकर, महेश कटारे, रणेंद्र, शिवमूर्ति, जयनंदन, मधु कांकरिया और चंद्रकिशोर जायसवाल को प्रदान किया गया है। इस पुरस्कार के अन्तर्गत सम्मानित साहित्यकार को एक प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र तथा ग्यारह लाख रुपये की राशि का चैक प्रदान किया जाता है।</p>
<p>&lsquo;इफको युवा साहित्य सम्मान&rsquo; के अंतर्गत सम्मानित साहित्यकार को एक प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति-पत्र और ढाई लाख रुपये का चैक प्रदान किया जाएगा। मैत्रेयी पुष्पा एवं अंकिता जैन को यह सम्मान 30 दिसंबर, 2025 को नई दिल्&zwj;ली में आयोजित कार्यक्रम में प्रदान किया जाएगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ वर्ष 2025 का इफको साहित्य सम्मान मैत्रेयी पुष्पा को, इफको युवा साहित्य सम्मान अंकिता जैन को ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कैबिनेट ने 2026 सीजन के लिए कोपरा के MSP को मंजूरी दी, पिछले साल से 445 रुपये प्रति क्विंटल तक ज्यादा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-msp-for-copra-for-2026-season-increases-it-by-rs-445-per-quintal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Dec 2025 16:48:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-msp-for-copra-for-2026-season-increases-it-by-rs-445-per-quintal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमण्&zwj;डलीय समिति (सीसीईए) ने 2026 सीजन के लिए कोपरा के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को मंजूरी दे दी है। वर्ष 2026 सीजन के लिए मिलिंग खोपरा के उचित औसत गुणवत्ता (फेयर एवरेज क्वालिटी) का एमएसपी 12,027 रुपये प्रति क्विंटल और बॉल खोपरा का एमएसपी 12,500 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।</p>
<p>वर्ष 2026 सीजन के लिए एमएसपी पिछले सीजन की तुलना में मिलिंग कोपरा के लिए 445 रुपये प्रति क्विंटल और बॉल कोपरा के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। सरकार ने मिलिंग कोपरा और बॉल कोपरा का एमएसपी विपणन सीजन 2026 के लिए क्रमशः 12,027 रुपये प्रति क्विंटल और 12,500 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है।</p>
<p>अपेक्षाकृत अधिक एमएसपी न सिर्फ नारियल किसानों को बेहतर मुनाफा दिलाएगा, बल्कि किसानों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नारियल के उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कोपरा का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित भी करेगा।</p>
<p>नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नाफेड) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (एनसीसीएफ) मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत कोपरा की खरीद के लिए केन्द्रीय नोडल एजेंसियों (सीएनए) के तौर पर काम करते रहेंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कैबिनेट ने 2026 सीजन के लिए कोपरा के MSP को मंजूरी दी, पिछले साल से 445 रुपये प्रति क्विंटल तक ज्यादा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[11 महीनों में ट्रैक्टर की बिक्री और उत्पादन 10 लाख के पार, क्यों उफान पर है ट्रैक्टर बाजार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/tractor-production-and-sales-cross-one-million-in-11-months-know-why.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Dec 2025 14:06:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/tractor-production-and-sales-cross-one-million-in-11-months-know-why.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के इतिहास में पहली बार ट्रैक्टर उद्योग ने एक सीमित समय में उत्पादन और बिक्री का ऐसा रिकॉर्ड बनाया है. वर्ष पूरा होने में दिसंबर का महीना अभी बाकी है और इधर जनवरी से नवंबर के बीच महज 11 महीनों में ट्रैक्टरों का प्रॉडक्शन और सेल 10 लाख यूनिट का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर चुका है. &nbsp;</p>
<p>जनवरी-नवंबर 2025 के दौरान ट्रैक्टरों की कुल घरेलू बिक्री 10.2 लाख यूनिट रही जबकि साल 2024 में यह इसी समय अवधि में 9.1 लाख यूनिट थी. वहीं, इस दौरान कुल ट्रैक्टर उत्पादन भी 10 लाख को पार करते हुए 10.7 लाख यूनिट हो गया. इस साल इन 11 महीने में ट्रैक्टर बाजार में कुल 12 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. मार्केट में बिक्री का रिकॉर्ड इस बार भी महिंद्रा एंड महिंद्रा के नाम रहा जिसने अपनी घरेलू ट्रैक्टर बिक्री में 19 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की. इस दौरान महिंद्रा की लगभग 4.4 लाख यूनिट बिकीं.</p>
<p>ट्रैक्टर और मैकेनाइजेशन एसोसिएशन (TMA) द्वारा जारी किए आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2025 में ट्रैक्टर का कुल उत्पादन 92648 यूनिट रहा जबकि कुल बिक्री, घरेलू और निर्यात दोनों के मिलाकर, 69770 यूनिट रही. उत्पादन और बिक्री का यह स्तर जून 2025 में क्रमश: 104329 यूनिट और 121613 यूनिट हो गया. वहीं, सितंबर तक आते-आते कुल उत्पादन 114500 यूनिट और कुल बिक्री 154417 पार कर चुकी थी. नवंबर में उत्पादन और बिक्री का आंकड़ा क्रमश: 102915 और 102011 यूनिट हो गया. इसी के साथ दिसंबर शुरू होने से पूर्व ही सेल और प्रॉडक्शन दोनों ने रिकॉर्ड बना दिया.</p>
<p>टीएमए के मुताबिक, जनवरी&ndash;नवंबर 2025 के बीच घरेलू ट्रैक्टर बिक्री 10.2 लाख यूनिट तक पहुंची जो 2024 की समान अवधि में 9.10 लाख यूनिट के मुकाबले अधिक है. क्रिसिल रेटिंग्स ने इन आंकड़ों को लेकर उत्साह जताया है और इसकी डायरेक्टर पूना उपाध्याय ने एक अखबार को दिए साक्षात्कार में नवंबर तक 10 लाख यूनिट का स्तर पार करने को एक बड़ा संकेत बताया. साथ ही कहा कि इस स्पीड को देखते हुए 2025 का कैलेंडर ईयर बिक्री के लिहाज से रिकॉर्ड हाई पर बंद हो सकता है.</p>
<p><strong>ट्रैक्टर बाजार की गर्मी में तेजी के कारण और कारक</strong></p>
<p>उद्योग विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी का साफ संकेत है. ट्रैक्टरों की डिमांड में तेजी के चलते प्रॉडक्शन में तेजी आई. दरअसल, देश में कृषि के लिहाज से इस साल खरीफ सीजन अच्छा रहा. साथ ही, मॉनसून अच्छा होने के कारण जलाशयों में पानी भी भरपूर रहा. यही वजह है कि किसानों के हाथ में इस बार पैसा भी पहले के मुकाबले अच्छा आया. इसके अलावा फसल खरीद के रेट बढ़े और एमएसपी भी ऊपर गया जिससे किसानों के हाथ में अधिक कमाई आई.</p>
<p>एक अन्य कारक रहा, इस साल 22 सितंबर 2025 को मोदी सरकार का GST 2.0 लागू करना. इसके बाद 1800 सीसी से कम वाले ट्रैक्टरों पर टैक्स 12 फीसदी से घटकर 5 फीसदी हो गया, जोकि खरीद के लिहाज से उत्साहवर्धक कहा जाना चाहिए. ट्रैक्टर के कई पार्ट्स और कंपोनेंट्स पर भी जीएसटी कम हो गया. इससे मिड-सेगमेंट और एंट्री-लेवल ट्रैक्टर सस्ते हुए. जाहिर है, खरीद के लिए ग्रामीण ग्राहक और किसानों को यह मुफीद समय लगा और इसके बाद के समय में मांग में तेज आई.</p>
<p>खेती-किसानी के अतिरिक्त एक और कोण भी है. कंस्ट्रक्शन सेक्टर की रिकवरी से भी ट्रैक्टर उद्योग की ग्रोथ की रफ्तार मिली. ट्रैक्टर की मांग का 30&ndash;35 फीसदी हिस्सा निर्माण कार्यों से आता है. 2025 की चौथी तिमाही में निर्माण गतिविधियों में भी तेजी रही जिसके कारण ट्रैक्टरों की मांग में इजाफा हुआ.</p>
<p>अब देखना यह है कि दिसंबर का महीना और अगला साल 2026 ट्रैक्टर बिक्री को किस दिशा में ले जाता है. अप्रैल में क्रिसिल के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि &lsquo;TREM V&rsquo; उत्सर्जन मानक 1 अप्रैल 2026 से लागू होने की उम्मीद है. इसके चलते वित्त वर्ष के अंत में प्री-बायिंग (यानी नए नियम लागू होने से पहले की अग्रिम खरीद) बढ़ सकती है.</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ 11 महीनों में ट्रैक्टर की बिक्री और उत्पादन 10 लाख के पार, क्यों उफान पर है ट्रैक्टर बाजार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छोटी जोत वाले किसानों के हिसाब से नीतियों और रिसर्च की जरूरतः डॉ.आर.एस. परोदा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-needs-a-unified-farm-policy-and-research-focused-on-small-farmers-says-dr-rs-paroda.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 12 Dec 2025 14:54:05 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-needs-a-unified-farm-policy-and-research-focused-on-small-farmers-says-dr-rs-paroda.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p dir="ltr"><span>ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (TAAS) के चेयरमैन डॉ.आर.एस. परोदा ने छोटी जोत वाले किसानों के हिसाब से नीतियों और रिसर्च की जरूरत बताई है।&nbsp;</span><span>मीडिया प्लेटफॉर्म 'रूरल वॉयस' के पांच वर्ष पूरे होने पर नई दिल्ली में आयोजित 'रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव एंड अवार्ड्स 2025' को संबोधित करते हुए&nbsp;</span><span>कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के पूर्व सचिव एवं ICAR के पूर्व डायरेक्टर जनरल पद्म भूषण डॉ. परोदा ने कहा कि आत्मनिर्भरता के लिए किसानों को भी विकल्प तलाशना पड़ेगा। डॉ. परोदा इस वर्ष रूरल वॉयस अवार्ड्स के लिए बनी जूरी के भी चेयरमैन थे।</span></p>
<p dir="ltr"><span>उन्होंने कहा कि कृषि से जुड़े मंत्रालयों की संख्या सात हो गई है, लेकिन उनमें आपस में मिलकर काम करने का अभाव है। भारत की कृषि और किसान कल्याण के लिए एक नीति होनी चाहिए। उन्होंने सब्सिडी की जगह इन्सेंटिव की व्यवस्था लाने और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को मजबूत करने का सुझाव दिया। साथ ही, एक्सटेंशन सिस्टम को मजबूत बनाने की भी जरूरत बताई।&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>डॉ. परोदा के अनुसार, किसानों की बात सुनने का भी एक माध्यम होना चाहिए। जरूरी नहीं कि जब किसान सड़क पर आएं तभी उनकी बात सुनी जाए। कृषि राज्य के अधिकार में भी आता है, इसलिए ऐसे मामलों में आपसी समन्वय की जरूरत है। उन्होंने जीएसटी काउंसिल की तर्ज पर कृषि के लिए भी एक काउंसिल गठित करने का सुझाव दिया।&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>कॉन्क्लेव को भारतीय कृषि जगत से जुड़ी कई शख्सीयतों ने संबोधित किया। नीति आयोग के सदस्य और कृषि अर्थशास्त्री प्रो. रमेश चंद ने किसानों से बिना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) वाली फसलों की ओर जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एमएसपी वाली फसलों की ग्रोथ रेट पिछले एक दशक में 1.8 प्रतिशत रही जबकि बिना एमएसपी वाली फसलों की ग्रोथ 4 प्रतिशत के आसपास है।</span></p>
<p dir="ltr"><span>उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र के विकास में सरकार की भूमिका अवश्य है, लेकिन क्या किसान अपने स्तर पर कुछ ऐसे कदम उठा सकते हैं जिनके लिए अभी उन्हें सरकार पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसा करने पर ही किसान आत्मनिर्भर हो सकेंगे।&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>प्रो. रमेश चंद ने कहा कि एक दशक में कृषि विकास दर 4.6 प्रतिशत रही, लेकिन घरेलू मांग दो फीसदी के आसपास बढ़ रही है। ऐसे में सरप्लस उत्पादन का क्या किया जाए। देश में एक संपन्न वर्ग बढ़ रहा है, जिसकी क्रय क्षमता अच्छी है। उनकी मांग के हिसाब से फसल उपजाने पर किसानों को कई गुना कीमत मिल सकती है। इसके लिए पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की जरूरत है।</span></p>
<p dir="ltr"><span>कृषि योजना में समग्र खाद्य प्रणाली को महत्व देने की बात कहते हुए&nbsp;</span><span>उन्होंने कहा कि आज दुनिया में कृषि योजना का आधार फूड सिस्टम की ओर बढ़ रहा है। इसमें बीज से लेकर मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन समेत पूरी वैल्यू चेन को शामिल किया जाता है। वैल्यू चेन से जुड़ने पर आमदनी भी बढ़ती है।</span></p>
<p dir="ltr"><span>कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और आईसीएआर (ICAR) के डायरेक्टर जनरल डॉ.एम.एल. जाट ने कहा कि विकसित भारत की कल्पना में आत्मनिर्भर किसान अहम हैं। उन्होंने इनोवेशन, स्पेशलाइज्ड फार्मिंग, स्किल डेवलपमेंट, मार्केट लिंकेज, सब्सिडी की जगह इन्सेंटिव और टेक्नोलॉजी तथा मार्केट ड्रिवन कृषि को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इनोवेशन किसान की उत्पादकता बढ़ाने और खर्च घटाने में मदद करेगा।&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>डॉ. जाट ने सब्सिडी की जगह इन्सेंटिव की व्यवस्था अपनाने की जरूरत बताई, क्योंकि सब्सिडी से किसानों की फसल चुनने की क्षमता कम होती है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की आय बढ़ रही है, वे डाइवर्सिफिकेशन कर रहे हैं या मार्केट से जुड़े हैं। हमें मार्केट ड्रिवन कृषि की ओर जाने की जरूरत है। स्पेशलाइज्ड फार्मिंग जोन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि फसल और क्षेत्र के हिसाब से जोन विकसित किए जाएं, वहीं फैक्ट्रियां और रिसर्च संस्थान हों तो किसानों को उनकी उपज की अच्छी कीमत मिलेगी। तब उन्हें एमएसपी की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।</span></p>
<p dir="ltr"><span>आईसीएआर प्रमुख ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए जैव-उर्वरकों को अपनाने के साथ मिट्टी, जैव-विविधता, पर्यावरण को संजोने की बात भी कही। टेक्नोलॉजी तो है लेकिन किसान तक नहीं पहुंच रहा है। इसलिए टेक्नोलॉजी टार्गेटिंग और स्किल डेवलपमेंट अहम है।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ छोटी जोत वाले किसानों के हिसाब से नीतियों और रिसर्च की जरूरतः डॉ.आर.एस. परोदा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि विज्ञान, इनोवेशन और सस्टेनेबल खेती में योगदान करने वाली शख्सियतें  &amp;apos;रूरल वॉयस एग्रीकल्चर अवार्ड&amp;apos; से सम्मानित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rural-voice-agriculture-awards-honor-individuals-who-have-contributed-to-agricultural-science-innovation-and-sustainable-farming.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 10 Dec 2025 16:44:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rural-voice-agriculture-awards-honor-individuals-who-have-contributed-to-agricultural-science-innovation-and-sustainable-farming.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>&lsquo;रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव और अवार्ड्स 2025&rsquo; में, भारतीय खेती में योगदान देने वाले तीन खास लोगों को कृषि विज्ञान, इंडस्ट्री और खेती में उनके अहम कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। ये अवॉर्ड TAAS के चेयरमैन, पूर्व DARE सचिव और पूर्व DG ICAR पद्मभूषण डॉ. आर.एस. परोदा; भारत सरकार के पूर्व कृषि और खाद्य सचिव टी. नंदकुमार; और DARE सचिव तथा DG ICAR डॉ. एम.एल. जाट ने दिए।</span><br /><br /><span>जाने-माने कृषि विज्ञानी डॉ. ए.के. सिंह को बेहतर पैदावार वाली बासमती चावल की किस्में डेवलप करने के लिए सममानित किया गया, जिनसे किसानों की आय बढ़ी। म्हाइको प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन डॉ. राजेंद्र बरवाले को देश में बीज बिजनेस को बढ़ावा देने, कपास की खेती में क्रांति लाने वाली Bt टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने के सेाथ टिकाऊ खेती के लिए को बढ़ावा देने के लिए एग्री-कॉर्पोरेट अवॉर्ड मिला। प्रोग्रेसिव फ़ार्मर अवॉर्ड निक्की पिलानिया चौधरी को दिया गया, जो एक युवा एग्रीप्रेन्योर हैं और सस्टेनेबल डेयरी, पॉपलर और क्लाइमेट-स्मार्ट खेती की तकनीकों को बढ़ावा दे रही हैं।</span><br /><br /><strong>कैटेगरी - एमिनेंट एग्रीकल्चर साइंटिस्ट</strong><br /><strong>डॉ. ए.के. सिंह, पूर्व डायरेक्टर, IARI, पूसा, नई दिल्ली</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_6939554a0c856.jpg" alt="" /></p>
<p><br /><span>डॉ. ए.के. सिंह एक जाने-माने rice breeder हैं, जो पिछले 30 सालों से IARI, नई दिल्ली में बासमती चावल की 25 किस्मों के डेवलपमेंट से जुड़े रहे हैं। ये किस्में अभी 20 लाख हेक्टेयर इलाके में उगाई जाती हैं। ये किस्में लाखों बासमती किसानों के लिए खुशहाली लेकर आई है और इनसे देश को हर साल 50,000/- करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की आय होती है। दुनिया के जाने-माने जर्नल्स में उनके 250 से ज्यादा रिसर्च पेपर पब्लिश हुए हैं। उन्होंने दो किताबें भी लिखी हैं। वे INSA, NASI और NAAS के फेलो हैं। उन्हें कई प्रतिष्ठित अवॉर्ड मिल चुके हैं। कुछ प्रमुख अवॉर्ड हैं- रफी अहमद किदवई अवॉर्ड, भारत रत्न डॉ. सी. सुब्रमण्यम और नाना जी देशमुख इंटरडिसिप्लिनरी टीम अवॉर्ड, बोरलॉग अवॉर्ड, IARI का बेस्ट टीचर अवॉर्ड, IARI का डॉ. बी.पी. पाल अवॉर्ड, वासविक अवॉर्ड, ओमप्रकाश भसीन अवॉर्ड और डी.एस. बराड़ अवॉर्ड।</span><br /><br /><strong>कैटेगरी - एग्री-कॉरपोरेट</strong><br /><strong>डॉ. राजेंद्र बरवाले, चेयरमैन, म्हाइको प्राइवेट लिमिटेड</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_6939555f87749.jpg" alt="" /></p>
<p><br /><span>GB पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, पंत नगर, उत्तराखंड से एग्रीकल्चर ग्रेजुएट और हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल के एल्युम्नाई, श्री बरवाले को भारत में Bt Cotton टेक्नोलॉजी लाने के लिए जाना जाता है। इस टेक्नोलॉजी ने देश में कॉटन सेक्टर को बदल दिया। उन्होंने हाल के सालों में मलावी, केन्या और नाइजीरिया में Bt Cotton टेक्नोलॉजी और 2013 में बांग्लादेश में Bt बैंगन टेक्नोलॉजी शुरू की। मॉडर्न साइंस का इस्तेमाल करके छोटे किसानों की ज़िंदगी को बेहतर बनाने में उनके योगदान के लिए उन्हें कई फोरम पर पहचान मिली है। वे फेडरेशन ऑफ़ सीड इंडस्ट्री ऑफ़ इंडिया, इंटरनेशनल सीड फेडरेशन, स्विट्जरलैंड और कई दूसरे ऑर्गनाइज़ेशन के बोर्ड का हिस्सा हैं। वे एक जाने-माने समाजसेवी भी हैं जो समय-समय पर कई सामाजिक कामों में मदद करते हैं।</span><br /><br /><strong>कैटेगरी - प्रोग्रेसिव किसान</strong><br /><strong>निक्की पिलानिया चौधरी</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_6939556feb525.jpg" alt="" /></p>
<p><br /><span>दिल्ली यूनिवर्सिटी के मैत्रेयी कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएट, निक्की ने UK की सरे यूनिवर्सिटी से बिज़नेस इकोनॉमिक्स और फाइनेंस में मास्टर्स किया है। 2022 से, अपने पति गौरव के साथ, वह भारत में डेयरी के माहौल को बदलने में जुटी हैं। निक्की को एक युवा डेयरी किसान/एग्रीप्रेन्योर के तौर पर भारत में डेयरी फार्मिंग सेक्टर के बारे में अपने विचार साझा करने के लिए तीन बार संयुक्त राष्ट्र क फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइज़ेशन (FAO), रोम में बुलाया गया है। वे पॉपलर फार्मिंग के लिए भी जानी जाती हैं। निक्की का रिसर्च पेपर, जिसका टाइटल था, &ldquo;Poplar Culture on Farmland: Farmer&rsquo;s Experience from Uttar Pradesh&rdquo; फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून ने प्रकाशित किया था। निक्की ने खेती में कई ऐसी पहल की हैं जो आर्थिक रूप से फायदेमंद और पर्यावरण के लिए टिकाऊ हैं। वे किसानों के बीच गेहूं में ज़ीरो टिलेज और धान में डायरेक्ट सीडिंग जैसे कंजर्वेशन खेती के तरीकों को बढ़ावा देती हैं।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_6939558600f01.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि विज्ञान, इनोवेशन और सस्टेनेबल खेती में योगदान करने वाली शख्सियतें  'रूरल वॉयस एग्रीकल्चर अवार्ड' से सम्मानित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि में आत्मनिर्भरता के लिए रिसर्च पर खर्च बढ़ाना जरूरी &amp;#45; रूरल वॉयस कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों की राय]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/self-reliance-in-agriculture-can-only-be-achieved-by-increasing-r-and-d-spending-said-experts-at-the-rural-voices-conclave.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 10 Dec 2025 14:10:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/self-reliance-in-agriculture-can-only-be-achieved-by-increasing-r-and-d-spending-said-experts-at-the-rural-voices-conclave.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p dir="ltr"><span>किसानों को शोध और टेक्नोलॉजी का लाभ उपलब्ध कराने के लिए अधिक निवेश की जरूरत है। बिना रिसर्च के टेक्नोलॉजी का विकास नहीं होगा और भारतीय कृषि दूसरे देशों के आगे टिक नहीं पाएगी। श्रमिकों की समस्या को देखते हुए भी हमें ऐसी टेक्नोलॉजी की जरूरत है जिससे किसान उत्पादकता बढ़ा सकें। मीडिया प्लेटफॉर्म <strong><em>रूरल वॉयस</em> </strong>के सालाना समारोह <em>&lsquo;<strong>रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव एंड अवार्ड्स 2025&rsquo;</strong></em> में कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों ने परिचर्चा में अपनी यह राय दी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार जटिल होता है तथा कृषि निर्यात में अनिश्चितता और बढ़ जाती है। जो सबसे सस्ता पैदा करेगा, वही सर्वाइव करेगा। इसलिए निर्यात-आयात को गौरव से जोड़ने का नजरिया ठीक नहीं है।&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span><em><strong>रूरल वॉयस</strong></em> के इस कॉन्क्लेव की थीम <em><strong>&lsquo;आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर किसान&rsquo;</strong> </em>थी। कॉन्क्लेव में तीन तकनीकी सत्र थे। पहला सत्र <em><strong>&lsquo;समृद्ध किसान: इनोवेशन एवं तकनीक की भूमिका&rsquo;</strong></em> विषय पर था। सत्र के मॉडरेटर रूरल वॉयस के एडिटर-इन-चीफ हरवीर सिंह ने पैनलिस्ट्स से सवाल किया, बार-बार कहा जा रहा है कि कृषि में आरएंडडी का बजट कृषि जीडीपी का एक प्रतिशत करने की जरूरत है। इसमें बाधा क्या है? उन्होंने विशेषज्ञों से यह भी पूछा कि क्या सरकारी संस्थान पहले से उपलब्ध क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर पा रहे हैं।</span></p>
<p dir="ltr"><strong>54 हजार करोड़ की जगह सिर्फ 20 हजार करोड़ रुपये खर्चः ए.के. सिंह</strong></p>
<p dir="ltr"><span>ICAR-IARI के पूर्व निदेशक<strong> डॉ. ए. के. सिंह ने</strong> कहा कि अभी भारत की जीडीपी 300 लाख करोड़ रुपये है जिसमें 18 प्रतिशत के हिसाब से कृषि का योगदान लगभग 54 लाख करोड़ रुपये है। इसका एक प्रतिशत 54 हजार करोड़ रुपये आरएंडडी पर खर्च होना चाहिए, जबकि अभी सिर्फ 20 हजार करोड़ रुपये शोध और शिक्षा पर खर्च हो रहे हैं। यह अपर्याप्त है। किसानों को शोध और टेक्नोलॉजी का लाभ मिले, इसके लिए अधिक निवेश की जरूरत है।</span></p>
<p dir="ltr"><span>उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में कुल खाद्यान्न उत्पादन 35.8 करोड़ टन रहा। हर साल 54 हजार करोड़ रुपये का बासमती चावल निर्यात होता है। कुल 52 अरब डॉलर के कृषि निर्यात में 10-12 अरब डॉलर बासमती चावल है। बासमती पर एमएसपी नहीं है, फिर भी किसानों को अच्छी कीमत नहीं मिलती है। छत्तीसगढ़ में तो मोटे धान की खरीद बासमती से अधिक कीमत पर हुई।</span></p>
<p dir="ltr"><span>देश में सॉयल टेस्टिंग तो हो रही है लेकिन किसानों को उनकी जमीन की जरूरत के अनुसार कस्टमाइज्ड नहीं मिलता, इस सवाल पर डॉ. सिंह ने कहा कि हमें बायो फर्टिलाइजर और केमिकल फर्टिलाइजर के प्रति समन्वित दृष्टिकोण अपनाना होगा। भारत में 60 वर्षों से बायो फर्टिलाइजर पर काम चल रहा है, लेकिन इसका प्रयोग उतना नहीं बढ़ सका। उन्होंने कहा कि उत्पादन, प्रसंस्करण और वितरण जिनके हाथों में है वे उतने सक्षम नहीं है। अगर केमिकल फर्टिलाइजर बनाने वाली कंपनियों को बायो फर्टिलाइजर बनाने और वितरण की जिम्मेदारी दी जाए तो इससे क्वालिटी बायो फर्टिलाइजर की उपलब्धता बढ़ेगी।</span></p>
<p dir="ltr"><strong>आरएंडडी पर 10-12 प्रतिशत खर्च निजी क्षेत्र काः राजेन्द्र बरवाले</strong></p>
<p dir="ltr"><span>म्हाइको प्राइवेट लिमिटेड के चेयमरैन <strong>डॉ. राजेन्द्र बरवाले</strong> ने कहा, सरकार जब खर्च करती है तो उसका दृष्टिकोण अलग होता है, लेकिन निजी क्षेत्र को बैंकों को नफा-नुकसान के बारे में बताना पड़ता है। उन्हें अपना खर्च निकालने का मौका मिलना चाहिए, जिसमें आज की व्यवस्था कमजोर है। आज आरएंडडी पर 10-12 प्रतिशत खर्च निजी क्षेत्र कर रहा है। उन्होंने बाजार-आधारित प्राइसिंग व्यवस्था और शोध करने वालों को अधिकार का मुद्दा भी उठाया।&nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_693932f2cd2c1.jpg" alt="" /></p>
<p dir="ltr"><span>उन्होंने कहा कि अनुसंधान के अभाव में टेक्नोलॉजी का विकास नहीं होगा। तब भारतीय कृषि दूसरे देशों के आगे टिक नहीं पाएगी। उत्पादन लागत दूसरे देशों के बराबर लाने के लिए टेक्नोलॉजी का विकास जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि टेक्नोलॉजी को सिर्फ अच्छा कहने से काम नहीं चलेगा। आज किसान उसका प्रदर्शन देखना चाहता है। टेक्नोलॉजी को प्रयोगशाला से खेत तक ले जाने की जरूरत है, तभी किसान उसको अपनाएगा।</span></p>
<p dir="ltr"><strong>श्रमिकों की कमी की समस्या दूर करने वाली टेक्नोलॉजी चाहिएः मृण्मय चौधरी</strong></p>
<p dir="ltr"><span>सवाना सीड्स के निदेशक (मार्केटिंग)<strong> मृण्मय चौधरी</strong> ने कहा कि धान में रोपाई और खरपतवार मैनेजमेंट के दौरान श्रमिकों की उपलब्धता की समस्या गंभीर होती जा रही है। श्रमिक नहीं मिलेंगे तो किसान कैसे काम करेंगे। हमें ऐसी टेक्नोलॉजी की जरूरत है जिससे किसान उत्पादकता बढ़ा सकें। इस दिशा में काम हो रहा है, लेकिन बहुत कुछ करने की जरूरत है।</span></p>
<p dir="ltr"><span>परिचर्चा के दौरान एक किसान श्रोता ने ड्रोन की व्यावहारिकता का मसला उठाया। उन्होंने कहा कि जिस कीटनाशक दवा को 100 या 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कना होता है, ड्रोन में उसे सिर्फ 10 या 20 लीटर पानी में मिलाना पड़ता है। इस समस्या से सहमति जताते हुए कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए.के. सिंह ने कहा कि अभी ड्रोन स्पेसिफिक दवा नहीं आई है। इसके फॉर्मूलेशन पर अनुसंधान चल रहा है।</span></p>
<p dir="ltr"><strong>दूसरा सत्र &lsquo;अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं आत्मनिर्भरता&rsquo; विषय पर&nbsp;</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_693930c6e8988.jpg" alt="" /></p>
<p><span>कॉन्क्लेव का दूसरा सत्र <strong>&lsquo;अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं आत्मनिर्भरता&rsquo;</strong> विषय पर था, जिसके मॉडरेटर नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर<strong> बिराज पटनायक</strong> थे। परिचर्चा की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक कृषि निर्यात में भारत का हिस्सा 2.5 प्रतिशत है। अभी कृषि निर्यात 52 अरब डॉलर है। इसे 2030 तक 100 अरब डॉलर ले जाने का लक्ष्य है। उन्होंने पैनलिस्ट्स से जानना चाहा कि ऐसे समय जब पिछले एक साल में, खास कर डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रेड की स्थिति बदली है। ऐसे में भारत को क्या करने की जरूरत है।</span></p>
<p dir="ltr"><strong>निर्यात-आयात को गौरव से जोड़ने का नजरिया ठीक नहींः सिराज चौधरी</strong></p>
<p dir="ltr"><span>Agvaya LLP के पार्टनर <strong>सिराज ए. चौधरी</strong> ने कहा कि भारत अनेक फसलों में आत्मनिर्भर है। निर्यात में बासमती, बफेलो मीट और कॉटन प्रमुख हैं। दलहन-तिलहन में हम अभी आयात पर काफी हद तक निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि दलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करनी है तो किसानों को हमें दूसरी फसलों से ज्यादा दाम देने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि हमने निर्यात-आयात को गौरव से जोड़ रखा है, यह नजरिया ठीक नहीं। अनेक बड़े देश अनेक चीजों का आयात करते हैं और अपनी सरप्लस फसल का निर्यात करते हैं। चौधरी ने निर्यात के लिए ब्रांड बिल्डिंग को भी जरूरी बताया, लेकिन कहा कि इसके लिए निजी और सरकारी क्षेत्र को मिल कर काम करना पड़ेगा।&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><strong>फसलों की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की जरूरतः संजय गाखर</strong></p>
<p dir="ltr"><span>MCX लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट (बिजनेस डेवलपमेंट) <strong>संजय गाखर</strong> ने कहा कि जो सबसे सस्ता पैदा करेगा, वही सर्वाइव करेगा। उन्होंने कहा कि जिन फसलों में हमारी प्रोडक्टिविटी कम है, उसे बढ़ाने की जरूरत है। यह पूछने पर कि जब-तब निर्यात पर अंकुश लगाने से निजी क्षेत्र को किस तरह की अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ता है, गाखर ने कहा कि निजी और कोऑपरेटिव दोनों साथ चलेंगे।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_693933f05a11a.jpg" alt="" /></p>
<p dir="ltr"><span></span></p>
<p dir="ltr"><strong>कृषि निर्यात में क्वालिटी की समस्याः डी.एन. ठाकुर</strong></p>
<p dir="ltr"><span>सहकार भारती के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. डी.एन. ठाकुर ने कहा, बासमती, मरीन प्रोडक्ट और बागवानी में हम भरोसेमंद निर्यातक बन गए हैं, लेकिन बाकी में ऐसा नहीं है। भारत के कृषि निर्यात में क्वालिटी की समस्या प्रमुख है। इसके लिए कृषि क्षेत्र में सिस्टम अप्रोच अपनाने की जरूरत है। अमेरिका के साथ एफटीए पर बातचीत में भारत के पास क्या विकल्प हैं, इस सवाल पर ठाकुर ने कहा कि पहले घर बचाना जरूरी है। समझौते में अपने किसानों का हित पहले देखना होगा।&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><strong>जल्दी फैसले लेने की व्यवस्था होः डी.के. सिंह</strong></p>
<p dir="ltr"><span>कोऑपरेटिव इलेक्शन अथॉरिटी (सीईए) के चेयरपर्सन और पूर्व एपीडा चेयरमैन देवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार जटिल होता है, उसमें अनिश्चितता होती है। कृषि निर्यात में अनिश्चितता और बढ़ जाती है। किसान की भागीदारी होने के कारण उसमें राजनीति भी जुड़ जाती है। ऐसा सिर्फ भारत में नहीं, दूसरे देशों में भी होता है।&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>उन्होंने कहा कि भारत में किसी नतीजे पर पहुंचने का तरीका काफी जटिल है, जिसे दूसरे देश पसंद नहीं करते। सरकार फल-सब्जी निर्यात पर जोर दे रही है। इनका उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर का अभाव है। कोल्ड चेन की कमी है। खेत से पोर्ट तक इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारने की जरूरत है। जो देश आयात कर रहा है वहां की परिस्थितियों को भी ध्यान रखने की जरूरत है।</span></p>
<p dir="ltr"><strong>&lsquo;सक्षम नीति एवं प्रभावी क्रियान्वयन&rsquo; पर तीसरा सत्र</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_6939308187b11.jpg" alt="" /></p>
<p dir="ltr"><span>तीसरे सत्र का विषय <strong>&lsquo;सक्षम नीति एवं प्रभावी क्रियान्वयन&rsquo;</strong> था जिसे मॉडरेट किया पूर्व कृषि एवं खाद्य सचिव टी. नंदकुमार ने। उन्होंने कहा कि किसान को ज्यादा विकल्प और आजादी मिलनी चाहिए। किसानों को मोलभाव की स्किल सीखने के साथ मार्केट के बारे में जानकारी हासिल करनी पड़ेगी। उन्होंने पैनलिस्ट्स से सवाल किया कि नीतियों को जमीन पर कैसे उतारा जा सकता है और किसी नीति के अमल के मामले में सरकारी क्षेत्र, निजी क्षेत्र से क्या सीख सकता है।</span></p>
<p dir="ltr"><strong>नीतियों पर अमल के लिए इंटरमीडियरी संस्थाएं जरूरीः हर्ष भनवाला</strong></p>
<p dir="ltr"><span>एमसीएक्स (MCX) के चेयरमैन और नाबार्ड (NABARD) के पूर्व चेयरमैन <strong>डॉ. हर्ष भनवाला</strong> ने कहा कि भारत में कृषि बहुत डाइवर्सिफाइड है। तापमान और बारिश का अंतर अलग-अलग क्षेत्रों में बहुत है। इसलिए कृषि एक जैसी नहीं हो सकती। यही कारण है कि संविधान में कृषि को राज्यों का विषय रखा गया है। लेकिन बाजार और फाइनेंस के मामले केंद्र सरकार तय करती है, तो कृषि से जुड़ी नीति राज्य सरकारें तय करती हैं।&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>उन्होंने कहा कि किसान तक नीतियों को पहुंचाने के लिए इंटरमीडियरी संस्थाएं चाहिए। ये कॉरपोरेट या प्राइवेट हो सकते हैं। क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग जरूरी है। आज कई संस्थाएं एक ही नीति को लागू करने में जुटी हैं। क्या बहु-एजेंसी व्यवस्था सहायक है? क्रियान्वयन में लोगों कि भागीदारी जरूरी है। इसमें कोऑपरेटिव की अहम भूमिका है। अलग क्षेत्रों की जरूरतें अलग हैं, इसलिए नीतियां अलग होनी चाहिए। नीतियों में लचीलापन जरूरी है। भनवाला ने किसान आयोग के गठन का सुझाव दिया, भले ही वे सरकार से अलग राय दें।</span></p>
<p dir="ltr"><strong>जीएसटी की तर्ज पर कृषि परिषद का गठन होः रोशन लाल टामक</strong></p>
<p dir="ltr"><span>डीसीएम श्रीराम लिमिटेड के सीईओ एवं कार्यकारी निदेशक (शुगर डिवीजन) रोशन लाल टामक ने जीएसटी की तर्ज पर राज्यों को साथ मिलाकर कृषि परिषद के गठन का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में एफिसिएंसी है क्योंकि जवाबदेही तय है। फैसले भी तेज लिए जाते हैं। सरकारी क्षेत्र में ऐसा नहीं होता। इसके लिए डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया जा सकता है। किसानों तक डिजिटल लिटरेसी पहुंचाने से जवाबदेही तय होगी और काम भी तेज होगा।</span></p>
<p dir="ltr"><span>टामक ने कहा कि हमारी ज्यादातर नीति उत्पादन आधारित हैं। आज हम कई उपज में सरप्लस की स्थिति में हैं। हमारी नीति ऐसी हो कि हम खपत भी सुनिश्चित कर सकें। तभी किसान को पूरा लाभ मिलेगा, सही कीमत मिलेगी। उन्होंने सरकारी नीतियों के अमल में निजी क्षेत्र को भी नोडल एजेंसी बनाने का सुझाव दिया, क्योंकि निजी कंपनियां अपने क्षेत्र में किसानों से सीधी जुड़ी होती हैं।</span></p>
<p dir="ltr"><strong>कृषि प्रधान देश होने के बावजूद कृषि नीति का अभावः संतोष शुक्ला</strong></p>
<p dir="ltr"><span>इफ्को-एमसी के सीओओ संतोष कुमार शुक्ला ने सहकारिता की जरूरत बताई। उन्होंने कहा, आज 45 प्रतिशत रोजगार कृषि में है, लेकिन जीडीपी में योगदान 18 प्रतिशत है। कृषि से जुड़े सभी पक्षों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की जरूरत है। शुक्ला ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है, लेकिन यहां कृषि नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि पुराने कानूनों को ओवरहॉल करने की जरूरत है और किसान से लेकर रिसर्च संस्थानों तक, सबको इसमें शामिल किया जाना चाहिए।&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>उन्होंने कहा कि देश में 30 करोड़ लोग सहकारिता से जुड़े हैं। तीन-चार साल में सहकारिता का विकास तेजी से बढ़ा है। तीन साल में करीब 60 स्कीम बनी हैं। कंप्यूटराइजेशन और मॉडल लॉ इनमें अहम हैं। उन्होंने कहा कि कृषि और सहकारिता दोनों राज्यों के विषय हैं। लेकिन एकरूपता नहीं होने के कारण किसी संस्था को हर राज्य में अलग-अलग रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत पड़ती है। इसके समाधान के लिए उन्होंने जीएसटी काउंसिल की तर्ज पर एक अथॉरिटी गठित करने का सुझाव दिया।</span></p>
<p dir="ltr"><strong>गवर्नेंस सुधारने के लिए किसान नेताओं को भी बदलना पड़ेगाः अजय जाखड़</strong></p>
<p dir="ltr"><span>भारत कृषक समाज के चेयरमैन अजय वीर जाखड़ ने कहा कि किसानों की हालत सुधारने के लिए नीति पहली जरूरत है। लेकिन देश या किसी राज्य में कृषि नीति नहीं है। ज्यादातर राज्यों में उच्च कृषि शिक्षा को रेगुलेट करने का कोई कानून नहीं है। किसानों से जुड़े बिल तैयार करते वक्त किसानों की राय को शामिल नहीं किया जाता है।</span></p>
<p dir="ltr"><span>जाखड़ ने कहा कि गवर्नेंस सुधारने के लिए किसान संस्थाओं के नेताओं को भी बदलना पड़ेगा। उन्हें सोचने का तरीका और अपनी मांगें बदलनी पड़ेंगी। अगर किसी मुद्दे पर सरकार किसान संगठनों और प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए बुलाती है तो उस बातचीत के रिकार्ड पर जोर देने की जरूरत है और बैठक में उठे मुद्दों को सरकार को किसान संगठनों और विभाग को भेजने की शर्त तय करनी होगी। किसान संस्थाओं को आरबीआई जैसी संस्थाओं से मिलना चाहिए ताकि नीति बनाने में उनकी बात सुनी जाए।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_69392fdeba9c0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि में आत्मनिर्भरता के लिए रिसर्च पर खर्च बढ़ाना जरूरी - रूरल वॉयस कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों की राय ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आत्मनिर्भर बनने के लिए किसानों को बिना एमएसपी वाली फसलों को अपनाने की जरूरतः प्रो. रमेश चंद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmers-need-to-adopt-crops-without-msp-to-become-self-reliant-prof-ramesh-chand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 09 Dec 2025 17:22:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmers-need-to-adopt-crops-without-msp-to-become-self-reliant-prof-ramesh-chand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नीति आयोग के सदस्य और कृषि अर्थशास्त्री प्रो. रमेश चंद ने किसानों से बिना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) वाली फसलों की ओर जाने और कृषि योजना में समग्र खाद्य प्रणाली को महत्व देने का आह्वान किया है। आत्मनिर्भर भारत में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह जरूरी है। प्रो. चंद मीडिया प्लेटफॉर्म 'रूरल वॉयस' के पांच वर्ष पूरे होने पर मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित 'रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव एंड अवार्ड्स 2025' को संबोधित कर रहे थे। कॉन्क्लेव को भारतीय कृषि जगत से जुड़ी कई शख्सीयतों ने संबोधित किया।</p>
<p>प्रो. रमेश चंद, सदस्य ने कहा, कृषि क्षेत्र के विकास में सरकार की भूमिका अवश्य है, लेकिन क्या किसान अपने स्तर पर कुछ ऐसे कदम उठा सकते हैं जिनके लिए अभी उन्हें सरकार पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसा करने पर ही किसान आत्मनिर्भर हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि एमएसपी वाली फसलों की ग्रोथ रेट पिछले एक दशक में 1.8 प्रतिशत रही जबकि बिना एमएसपी वाली फसलों की ग्रोथ 4 प्रतिशत के आसपास है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एक दशक में कृषि विकास दर 4.6 प्रतिशत रही, लेकिन घरेलू मांग दो फीसदी के आसपास बढ़ रही है। ऐसे में सरप्लस उत्पादन का क्या किया जाए। देश में एक संपन्न वर्ग बढ़ रहा है, जिसकी क्रय क्षमता अच्छी है। उनकी मांग के हिसाब से फसल उपजाने पर किसानों को कई गुना कीमत मिल सकती है। इसके लिए पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की जरूरत है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_69380c40dc221.jpg" alt="" /></p>
<p><em>कॉन्क्लेव के दौरान रूरल वर्ल्ड पत्रिका के नए संस्करण का अनावरण करते गणमान्य अतिथि।&nbsp;</em></p>
<p>उन्होंने कहा कि आज दुनिया में कृषि योजना का आधार फूड सिस्टम की ओर बढ़ रहा है। इसमें बीज से लेकर मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन समेत पूरी वैल्यू चेन को शामिल किया जाता है। वैल्यू चेन से जुड़ने पर आमदनी भी बढ़ती है।</p>
<p>रूरल वॉयस के एडिटर-इन-चीफ हरवीर सिंह ने रूरल वॉयस के पांच वर्षों के सफर के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि रूरल वॉयस को शुरू करने का मकसद सूचनाओं के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाना था। यह कॉन्क्लेव इसी मकसद से आयोजित किया गया। अगर देश को आत्मनिर्भर बनाना है तो किसानों को सशक्त बनाना होगा। इसके लिए इनोवेशन, टेक्नोलॉजी, पॉलिसी की जरूरत है। साथ ही, किसानों को नीति निर्माण के केंद्र में लाना होगा।&nbsp;</p>
<p>कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और आईसीएआर (ICAR) के डायरेक्टर जनरल डॉ.एम.एल. जाट ने कहा कि विकसित भारत की कल्पना में आत्मनिर्भर किसान अहम हैं। उन्होंने इनोवेशन, स्पेशलाइज्ड फार्मिंग, स्किल डेवलपमेंट, मार्केट लिंकेज, सब्सिडी की जगह इन्सेंटिव और टेक्नोलॉजी तथा मार्केट ड्रिवन कृषि को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इनोवेशन किसान की उत्पादकता बढ़ाने और खर्च घटाने में मदद करेगा।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_69380c3ea87d1.jpg" alt="" /></p>
<p><em>कार्यक्रम को संबोधित करते डॉ. एम.एल. जाट।</em></p>
<p>डॉ. जाट ने सब्सिडी की जगह इन्सेंटिव की व्यवस्था अपनाने की जरूरत बताई, क्योंकि सब्सिडी से किसानों की फसल चुनने की क्षमता कम होती है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की आय बढ़ रही है, वे डाइवर्सिफिकेशन कर रहे हैं या मार्केट से जुड़े हैं। हमें मार्केट ड्रिवन कृषि की ओर जाने की जरूरत है। स्पेशलाइज्ड फार्मिंग जोन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि फसल और क्षेत्र के हिसाब से जोन विकसित किए जाएं, वहीं फैक्ट्रियां और रिसर्च संस्थान हों तो किसानों को उनकी उपज की अच्छी कीमत मिलेगी। तब उन्हें एमएसपी की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।</p>
<p>आईसीएआर प्रमुख ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए जैव-उर्वरकों को अपनाने के साथ मिट्टी, जैव-विविधता, पर्यावरण को संजोने की बात भी कही। टेक्नोलॉजी तो है लेकिन किसान तक नहीं पहुंच रहा है। इसलिए टेक्नोलॉजी टार्गेटिंग और स्किल डेवलपमेंट अहम है।</p>
<p>ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (TAAS) के चेयरमैन, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के पूर्व सचिव एवं ICAR के पूर्व डायरेक्टर जनरल पद्मश्री डॉ.आर.एस. परोदा ने छोटी जोत वाले किसानों के हिसाब से नीतियां और रिसर्च की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता के लिए किसानों को भी विकल्प तलाशना पड़ेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हमारा एक्सटेंशन सिस्टम कमजोर है। कृषि से जुड़े मंत्रालयों की संख्या सात हो गई है। उनमें आपस में मिलकर काम करने का अभाव है। डॉ. परोदा के अनुसार, भारत की कृषि और किसान कल्याण के लिए एक नीति होनी चाहिए। किसानों की बात सुनने का भी एक माध्यम होना चाहिए। जरूरी नहीं कि जब किसान सड़क पर आएं तभी उनकी बात सुनी जाए। कृषि राज्य के अधिकार में भी आता है, इसलिए ऐसे मामलों में आपसी समन्वय की जरूरत है। उन्होंने जीएसटी काउंसिल की तर्ज पर कृषि के लिए भी एक काउंसिल गठित करने का सुझाव दिया। उन्होंने भी सब्सिडी की जगह इन्सेंटिव की व्यवस्था लाने और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को मजबूत करने का सुझाव दिया।</p>
<p>पूर्व केंद्रीय कृषि एवं खाद्य सचिव टी. नंदकुमार ने कृषि क्षेत्र में समग्र फूड सिस्टम अपनाने को जरूरी बताते हुए कई अहम सवाल उठाए। उन्होंने कहा, वर्ष 2047 में विकसित भारत की कल्पना में मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और सर्विसेज की बात तो बहुत की जा रही है। लेकिन इसमें कृषि और किसानों की क्या भूमिका होगी यह सवाल उठना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि देश की जीडीपी में कृषि का हिस्सा 16 प्रतिशत है और करीब 45 प्रतिशत लोग कृषि पर निर्भर हैं। क्या इसे जीडीपी की तुलना में घटाकर 12 प्रतिशत पर ला सकते हैं और क्या 45 प्रतिशत लोग उस पर निर्भर रह सकेंगे। उन्होंने एक और अहम सवाल उठाते हुए कहा कि ज्यादातर किसानों की कुल आय का आधा भी फसल से नहीं आता है। उनकी आय बढ़ाने के लिए दूसरे विकल्प तलाशने की जरूरत है, वह कैसे होगा। उन्होंने जलवायु परिवर्तन का मुद्दा भी उठाया।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_69380c3fd5137.jpg" alt="" /></p>
<p><em>गणमान्य अतिथियों से अवार्ड प्राप्त करने के बाद तीनों अवार्ड विजेता।&nbsp;</em></p>
<p>कृभको (KRIBHCO) के वाइस चेयरमैन और इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस (ICA) एशिया&ndash;प्रशांत के प्रेसिडेंट डॉ. चंद्रपाल सिंह ने कृषि में कोऑपरेटिव की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि आज पैक्स के माध्यम से किसानों को सही कीमत पर बीज और खाद उपलब्ध हो रहा है, सस्ता कर्ज मिल रहा है। किसानों की फसल खरीदने में भी पैक्स की भूमिका होती है। इफको, कृभको, नाफेड जैसे कोऑपरेटिव बहुराष्ट्रीय कंपनियों से मुकाबला करने सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकारी योजनाओं के अमल के लिए भी कोऑपरेटिव को माध्यम बनाना चाहिए।</p>
<p>इस अवसर पर रूरल वॉयस अवार्ड्स का भी वितरण किया गया। एमिनेंट एग्री साइंटिस्ट कैटेगरी में IARI के पूर्व डायरेक्टर डॉ. अशोक कुमार सिंह, एग्री-कॉरपोरेट कैटेगरी में माहिको प्रा.लि. के चेयरमैन डॉ. राजेंद्र बरवाले और प्रोग्रेसिव किसान कैटेगरी में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले की निक्की पिलानिया चौधरी को सम्मानित किया गया।</p>
<p>इस अवसर पर रूरल वर्ल्ड पत्रिका के पहले द्वैमासिक अंक का विमोचन भी हुआ। अब तक हर तीन माह में प्रकाशित होने वाली यह पत्रिका अब हर दो माह में प्रकाशित होगी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आत्मनिर्भर बनने के लिए किसानों को बिना एमएसपी वाली फसलों को अपनाने की जरूरतः प्रो. रमेश चंद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड्स 2025 का आयोजन आज, थोड़ी ही देर में शुरू होगा कार्यक्रम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rural-voice-agriculture-conclave-and-awards-2025-today-nitin-gadkari-to-attend-as-chief-guest.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 09 Dec 2025 10:02:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rural-voice-agriculture-conclave-and-awards-2025-today-nitin-gadkari-to-attend-as-chief-guest.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि और ग्रामीण भारत को समर्पित मीडिया प्लेटफॉर्म रूरल वॉयस अपने पांच वर्ष पूरे करने जा रहा है। इस अवसर पर आयोजित &lsquo;रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड्स 2025&rsquo; थोड़ी ही देर में शुरू होने जा रहा है। इस कॉन्क्लेव की थीम &lsquo;आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर किसान&rsquo; है, जो किसान सशक्तीकरण, तकनीकी इनोवेशन और कृषि क्षेत्र की मजबूती पर केंद्रित है।</p>
<p>इस कॉन्क्लेव के मुख्य अतिथि केंद्र सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी हैं। रूरल वॉयस की अवॉर्ड जूरी ने जिन व्यक्तियों को इस वर्ष के पुरस्कार के लिए चुना है, गडकरी उन्हें सम्मानित भी करेंगे। कॉन्क्लेव में किसान, नीति-निर्माता, कॉरपोरेट जगत, कृषि अनुसंधान और विज्ञान से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तित्व शामिल हो रहे हैं।</p>
<p>कॉन्क्लेव में मौजूद रहने वाले प्रमुख शख्सीयतों में नीति आयोग के सदस्य और जाने-माने कृषि अर्थशास्त्री प्रो. रमेश चंद, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के डायरेक्टर जनरल डॉ. एम.एल. जाट, तास (TAAS) चेयरमैन और पूर्व DARE सचिव तथा आईसीएआर के पूर्व डायरेक्टर जनरल डॉ आर.एस. परोदा, पूर्व कृषि एवं खाद्य सचिव टी. नंदकुमार, कृभको के वाइस चेयरमैन और आईसीए एशिया-पैसिफिक के प्रेसिडेंट डॉ. चंद्रपाल सिंह, इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर के.जे. पटेल और माहिको प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन डॉ. राजेंद्र बरवाले शामिल हैं।</p>
<p>दिनभर चलने वाले इस कॉन्क्लेव में तीन थीमैटिक सत्र होंगे। पहला सत्र &ldquo;समृद्ध किसान: नवाचार और तकनीक की भूमिका&rdquo; आधुनिक तकनीक, डिजिटल समाधान और वैज्ञानिक प्रगति से किसान आय में वृद्धि पर केंद्रित होगा। दूसरे सत्र &ldquo;अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आत्मनिर्भरता&rdquo; वैमें श्विक बाजारों, कृषि निर्यात और भारत की रणनीतिक तैयारी पर चर्चा होगी। तीसरा और अंतिम सत्र &ldquo;सक्षम नीतियां और प्रभावी क्रियान्वयन&rdquo; शासन, योजनाओं और संस्थागत ढांचे की भूमिका को रेखांकित करेगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड्स 2025 का आयोजन आज, थोड़ी ही देर में शुरू होगा कार्यक्रम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[संसदीय समिति ने पीएम कुसुम और पीएम सूर्य घर योजना के अमल पर उठाए सवाल, कहा&amp;#45; किसानों को नहीं मिल रहा पूरा लाभ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/parliamentary-committee-says-solar-schemes-are-bypassing-farmers-warns-of-systemic-failures.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 08 Dec 2025 07:17:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/parliamentary-committee-says-solar-schemes-are-bypassing-farmers-warns-of-systemic-failures.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पश्चिमी मध्य प्रदेश के सीमांत किसान रमेश चौधरी लगभग दो वर्षों से आवेदन पत्रों का पुलिंदा लेकर चल रहे हैं। इसमें बैंक फॉर्म, पहचान पत्र, पैनल में शामिल विक्रेताओं के कोटेशन आदि रहते हैं। वे इस उम्मीद में हैं कि PM-KUSUM योजना से उनकी पुरानी डीजल पंप को सौर पंप से बदलने का सपना पूरा होगा।&nbsp;</p>
<p>वे बताते हैं, &ldquo;उन्होंने कहा था तीन महीने लगेंगे, लेकिन लगभग दो साल हो गए।&rdquo; उनकी यह निराशा मराठवाड़ा से सौराष्ट्र तक सूखा प्रभावित जिलों के हजारों किसानों की कहानी को दोहराती है। ये किसान कभी सोलर पंप को सिंचाई का भरोसेमंद साधन मान रहे थे, लेकिन अब वे लंबी कतारों, वित्तीय मदद में देरी और खराब विक्रेता सेवाओं में फंसे हुए हैं।</p>
<p>एक संसदीय समिति ने पिछले हफ्ते संसद में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में इन चिंताओं को दोहराया और चेतावनी दी कि किसानों के लिए बनाई गई भारत की प्रमुख सौर योजनाएँ&mdash;PM-KUSUM और पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना&mdash;अपने लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचने में संघर्ष कर रही हैं। समिति ने कहा कि भले ही लक्ष्य में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, लेकिन जमीनी प्रगति उम्मीद से काफी कम है, जिसके कारण किसान प्रक्रियागत अड़चनों में उलझे हुए हैं।</p>
<p>2019 में लॉन्च हुई PM-KUSUM योजना का उद्देश्य डीजल और अनियमित ग्रिड बिजली पर निर्भरता को कम करना और किसानों को स्वतंत्र ऊर्जा उपलब्ध कराना था। इसके लिए स्टैंडअलोन सोलर पंप, ग्रिड-कनेक्टेड पंपों को सौर ऊर्जा से चलाना और किसानों की भूमि पर छोटे सौर संयंत्र स्थापित किए जाने थे। लेकिन प्रगति कई स्तरों पर रुक गई है।&nbsp;</p>
<p>जुलाई 2025 तक 12.7 लाख स्वीकृत स्टैंडअलोन पंपों में से सिर्फ 8.5 लाख ही स्थापित हो सके। ग्रिड-कनेक्टेड पंप भी 36 लाख के आवंटन के मुकाबले केवल 6.5 लाख पर रुका है। किसानों की जमीन पर 500 किलोवाट से 2 मेगावाट तक के सौर संयंत्र लगाना 10,000 मेगावाट के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 641 मेगावाट तक पहुंचा है। ये आंकड़े बताते हैं कि योजना कागजों पर आगे बढ़ रही है, खेतों में नहीं।</p>
<p>समिति ने वित्तपोषण को मुख्य बाधा बताया है। कृषि अवसंरचना फंड के तहत सभी घटकों को लाने के बावजूद, बैंकों ने आवश्यकतानुसार ऋण स्वीकृत नहीं किए। फरवरी 2025 तक बैंकों को 1,254 आवेदन मिले, जिनमें से 922 स्वीकृत हुए पर सिर्फ 891 में ऋण का वितरण हुआ। बाकी आवेदन या तो फंस गए या अस्वीकृत हुए। बैंक अक्सर अतिरिक्त दस्तावेज या गारंटी मांगते हैं, जो योजना में अनिवार्य नहीं है। किसानों ने कई बार बताया कि विक्रेता इंस्टॉलेशन से पहले एडवांस भुगतान मांगते हैं, जिससे उनका बोझ और बढ़ जाता है।</p>
<p>विक्रेताओं की आफ्टर-सेल्स सर्विस भी बड़ी चिंता है। कई राज्यों ने स्वीकार किया कि विक्रेता जिला स्तर पर आवश्यक सेवा केंद्र स्थापित नहीं कर पाए और न ही निरंतर आफ्टर-सेल्स सपोर्ट दिया। अनिश्चित वर्षा वाले क्षेत्रों में पंप का हफ्तों तक बंद रहना फसल नुकसान का कारण बन सकता है। रिपोर्ट में लिखा है, &ldquo;बीजाई के मौसम में न चलने वाला सोलर पंप, पंप न होने से भी खराब है।&rdquo;&nbsp;</p>
<p>राज्यों के बीच असमान कार्यान्वयन भी बड़ी चुनौती है। महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में अधिक स्थापना हुई है, जबकि बिहार, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल काफी पीछे हैं। फीडर-स्तरीय सौर वितरण कंपनियों के लिए अधिक लाभकारी है, लेकिन किसानों को सीधा फायदा कम मिलता है, जबकि व्यक्तिगत पंप को सौर ऊर्जा से चलाना उन्हें अतिरिक्त बिजली बेचकर आय अर्जित करने का अवसर देता है।</p>
<p>कंपोनेंट-A, जिसका उद्देश्य किसानों को अपनी जमीन पर सौर संयंत्र स्थापित कर अतिरिक्त आय देना था, लगभग ठप है। समिति ने इसका कारण भूमि सत्यापन में देरी, इक्विटी जुटाने में मुश्किलें और डिस्कॉम द्वारा पावर परचेज एग्रीमेंट समय पर न करना बताया है।</p>
<p>नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने मौजूदा इंस्टॉलेशन से 34 करोड़ लीटर डीजल की बचत और कार्बन डाई ऑक्साइड में चार करोड़ टन वार्षिक कटौती का दावा किया है। लेकिन समिति का कहना है कि यदि संरचनात्मक समस्याएं दूर हों, तो प्रभाव इससे कहीं अधिक हो सकता है।&nbsp;</p>
<p>रमेश चौधरी कहते हैं, &ldquo;डीजल महंगा है, बिजली अविश्वसनीय। मैंने सोचा था सोलर मुझे इन सबसे मुक्त कर देगा, &nbsp;लेकिन अब मैं बैंकों, विक्रेताओं और कागजों के बीच फंस गया हूँ।&rdquo; समिति का कहना है, किसान मात्र लाभार्थी नहीं, बल्कि भागीदार भी हैं। जब तक वित्तपोषण सरल नहीं होता, विक्रेता जवाबदेह नहीं बनते और पिछड़े राज्य गति नहीं पकड़ते, भारत का सौर ऊर्जा की ओर बदलवा उन्हीं किसानों को पीछे छोड़ देगा, जिनके लिए यह बनाया गया था।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ संसदीय समिति ने पीएम कुसुम और पीएम सूर्य घर योजना के अमल पर उठाए सवाल, कहा- किसानों को नहीं मिल रहा पूरा लाभ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड्स 2025 का आयोजन मंगलवार को, नितिन गडकरी होंगे मुख्य अतिथि]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rural-voice-agriculture-conclave-and-awards-2025-on-december-9-nitin-gadkari-to-attend-as-chief-guest.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 08 Dec 2025 00:01:20 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rural-voice-agriculture-conclave-and-awards-2025-on-december-9-nitin-gadkari-to-attend-as-chief-guest.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि और ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने के उद्देश्य को समर्पित मीडिया प्लेटफॉर्म रूरल वॉयस अपने पांच वर्ष पूरे करने जा रहा है। इस अवसर पर हर साल की तरह कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष के <strong>&lsquo;रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड्स 2025&rsquo;</strong> का आयोजन मंगलवार, 9 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में किया जाएगा। इस वर्ष की थीम &lsquo;आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर किसान&rsquo; है, जो किसान सशक्तीकरण, तकनीकी इनोवेशन और कृषि क्षेत्र की मजबूती पर केंद्रित है।</p>
<p>इस कॉन्क्लेव के मुख्य अतिथि केंद्र सरकार में <strong>सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी</strong> होंगे। रूरल वॉयस की अवॉर्ड जूरी ने जिन व्यक्तियों को इस वर्ष के पुरस्कार के लिए चुना है, गडकरी उन्हें सम्मानित भी करेंगे। कॉन्क्लेव में किसान, नीति-निर्माता, कॉरपोरेट जगत, कृषि अनुसंधान और विज्ञान से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तित्व शामिल होंगे।</p>
<p>कॉन्क्लेव में मौजूद रहने वाले प्रमुख शख्सीयतों में नीति आयोग के सदस्य और जाने-माने कृषि अर्थशास्त्री प्रो. रमेश चंद, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के डायरेक्टर जनरल डॉ. एम.एल. जाट, तास (TAAS) चेयरमैन और पूर्व DARE सचिव तथा आईसीएआर के पूर्व डायरेक्टर जनरल डॉ आर.एस. परोदा, पूर्व कृषि एवं खाद्य सचिव टी. नंदकुमार, कृभको के वाइस चेयरमैन और आईसीए एशिया-पैसिफिक के प्रेसिडेंट डॉ. चंद्रपाल सिंह, इफको के मैनेजिंग डायरेक्टर के.जे. पटेल और माहिको प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन डॉ. राजेंद्र बरवाले शामिल हैं।</p>
<p>दिनभर चलने वाले इस कॉन्क्लेव में तीन थीमैटिक सत्र होंगे। पहला सत्र <strong>&ldquo;समृद्ध किसान: नवाचार और तकनीक की भूमिका&rdquo;</strong> आधुनिक तकनीक, डिजिटल समाधान और वैज्ञानिक प्रगति से किसान आय में वृद्धि पर केंद्रित होगा। दूसरे सत्र <strong>&ldquo;अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आत्मनिर्भरता&rdquo;</strong> वैमें श्विक बाजारों, कृषि निर्यात और भारत की रणनीतिक तैयारी पर चर्चा होगी। तीसरा और अंतिम सत्र <strong>&ldquo;सक्षम नीतियां और प्रभावी क्रियान्वयन&rdquo;</strong> शासन, योजनाओं और संस्थागत ढांचे की भूमिका को रेखांकित करेगा।</p>
<p>इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य है - गहन संवाद को आगे बढ़ाना, उत्कृष्ट योगदानों को सम्मान देना और एक आत्मनिर्भर एवं समृद्ध कृषि भविष्य के लिए साझा दृष्टि तैयार करना।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड्स 2025 का आयोजन मंगलवार को, नितिन गडकरी होंगे मुख्य अतिथि ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएसयू और कोऑपरेटिव यूरिया यूनिट्स के लिए 2,300 रुपये/टन फिक्स्ड कॉस्ट फिर से लागू करने पर विचार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centre-examining-proposal-to-reinstate-rs-2300-per-ton-fixed-cost-for-psu-and-cooperative-urea-units.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 06 Dec 2025 14:08:44 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centre-examining-proposal-to-reinstate-rs-2300-per-ton-fixed-cost-for-psu-and-cooperative-urea-units.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार यूरिया बनाने वाली कुछ खास पब्लिक सेक्टर और कोऑपरेटिव यूनिट्स के लिए 2,300 रुपये प्रति टन की मिनिमम फिक्स्ड कॉस्ट को फिर से लागू करने पर विचार कर रही है। इसके लिए वित्त मंत्रालय में चीफ एडवाइजर (कॉस्ट) की रिपोर्ट का रिव्यू किया जा रहा है। उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में इसकी जानकारी दी।</p>
<p>अनुप्रिया पटेल भाजपा सांसद पुरुषोत्तमभाई रूपाला के एक सवाल का जवाब दे रही थीं, जिसमें मॉडिफाइड न्यू प्राइसिंग स्कीम-III (NPS-III) के तहत लंबे समय से पेंडिंग फिक्स्ड-कॉस्ट मुद्दे को हल करने की टाइमलाइन के बारे में पूछा गया था। उन्होंने कहा कि एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी (EFC) के कुछ चिंताएं उठाने के बाद उर्वरक विभाग ने व्यय विभाग से संपर्क किया था।</p>
<p>EFC ने सलाह दी थी कि कॉस्टिंग से जुड़े सभी मामलों को डिटेल में जांच और सुझावों के लिए चीफ एडवाइजर (कॉस्ट) को भेजा जाए। इसके बाद फर्टिलाइजर डिपार्टमेंट ने 2 अप्रैल, 2014 से 2,300 रुपये प्रति मीट्रिक टन की फिक्स्ड कॉस्ट को फिर से लागू करने के प्रपोजल की जांच करने की मांग की।</p>
<p>पटेल ने अपने लिखित जवाब में कहा, &ldquo;चीफ एडवाइजर (कॉस्ट) की रिपोर्ट डिपार्टमेंट को मिल गई है और अभी उसकी जांच चल रही है।&rdquo;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66d1a53a9190c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएसयू और कोऑपरेटिव यूरिया यूनिट्स के लिए 2,300 रुपये/टन फिक्स्ड कॉस्ट फिर से लागू करने पर विचार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत के लिए रूस को कृषि निर्यात में हैं काफी संभावनाएं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/lot-of-potential-for-india-in-agricultural-exports-to-russia.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 05 Dec 2025 19:17:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/lot-of-potential-for-india-in-agricultural-exports-to-russia.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे पर रूस ने द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जाने की बात दोहराई है। लेकिन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को अपना निर्यात बढ़ाना पड़ेगा। अभी दोनों देशों के बीच करीब 70 अरब डॉलर का व्यापार होता है, जिसमें भारत का निर्यात 5 अरब डॉलर से भी कम है। आयात में कच्चे तेल का दबदबा है।&nbsp;</p>
<p>वर्ष 2023-24 में रूस ने दूसरे देशों से 202.6 अरब डॉलर का सामान इंपोर्ट किया, लेकिन भारत से सिर्फ 4.84 अरब डॉलर का सामान खरीदा। इस तरह रूस के आयात में भारत को सिर्फ 2.4% हिस्सा मिला। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने रूस को सिर्फ 4.9 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि आयात 63.8 अरब डॉलर का रहा। इससे भारत का व्यापार घाटा 58.9 अरब डॉलर का हो गया। रूस से भारत के कुल इम्पोर्ट में क्रूड ऑयल 50.3 अरब डॉलर का था।&nbsp;</p>
<p>थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि व्यापार घाटे को कम करना उन उत्पादों की पहचान करने और उनका निर्यात बढ़ाने पर निर्भर करेगा जिनमें भारत वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी है। ऐसे प्रोडक्ट की पहचानने के लिए GTRI ने उन प्रोडक्ट ग्रुप्स को मैप किया है जिनमें रूस एक बड़ा आयातक और भारत बड़ा निर्यातक है, लेकिन रूस के इंपोर्ट मार्केट में भारत का हिस्सा 5% से कम है। इसमें उन कैटेगरी पर फोकस किया गया है जिनमें रूस का ग्लोबल इंपोर्ट 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा है और भारत का वैश्विक निर्यात भी 500 अरब डॉलर से ज्यादा है।</p>
<p>भारत के लिए कृषि और खाद्य पदार्थों के मामले में काफी संभावनाएं हैं। रूस इनके आयात पर बहुत निर्भर है, लेकिन भारत की पहुंच अभी बहुत कम है। रूस ने 2023-24 में 4.34 अरब डॉलर के फल और मेवे, 1.62 अरब डॉलर के तिलहन, 1.21 अरब डॉलर के खाद्य तेल, 1.15 अरब डॉलर की सब्ज़ियां और रूट, 88.9 करोड़ डॉलर का मीट और 51.8 करोड़ डॉलर का डेयरी और अंडा आयात किया।&nbsp;</p>
<p>लेकिन इनमें भारत का हिस्सा बहुत कम था। भारत ने सिर्फ 3.88 करोड़ डॉलर के फल, 7.9 करोड़ डॉलर के तिलहन, 3.86 करोड़ डॉलर के खाद्य तेल, 3.6 करोड़ डॉलर की सब्ज़ियां, 3.65 करोड़ डॉलर का मीट और सिर्फ 70 लाख डॉलर की डेयरी सप्लाई की। यहां तक ​​कि जिन प्रोडक्ट्स का भारत बड़ा ग्लोबल एक्सपोर्टर है - जैसे मीट ( वैश्विक निर्यात 3.95 अरब डॉलर), तिलहन (2.17 अरब डॉलर) और फल (1.67 अरब डॉलर) - उनमें भी रूस के आयात बास्केट में भारत का हिस्सा 5% से कम है।</p>
<p>प्रोसेस्ड फूड में तो और भी बड़ा अंतर दिखता है। रूस ने अनाज, आटा और स्टार्च से बनी चीजों के आयात पर 68.9 करोड़ डॉलर और प्रोसेस्ड फल-सब्ज़ियों पर 1.15 अरब डॉलर खर्च किए। भारत ने अनाज से बने खाद्य पदार्थों का सिर्फ 6 लाख डॉलर का और प्रोसेस्ड उत्पादों का 4.27 करोड़ डॉलर का निर्यात किया। भारत का वैश्विक फ़ूड प्रिपरेशन निर्यात लगभग 2 अरब डॉलर का है। अखाद्य कृषि पदार्थों की बात करें तो रूस ने 96.6 करोड़ डॉलर के तंबाकू का आयात किया, जबकि भारत ने सिर्फ 3.75 करोड़ डॉलर की सप्लाई। भारत का कुल तंबाकू निर्या 1.84 अरब डॉलर का था, लेकिन रूस के आयात में हिस्सा सिर्फ 3.9% था।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_6932e25405357.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत के लिए रूस को कृषि निर्यात में हैं काफी संभावनाएं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बागवानी उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने की रणनीति बनाएंः शिवराज सिंह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/make-a-strategy-to-increase-the-shelf-life-of-horticultural-products-says-shivraj-singh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 04 Dec 2025 19:12:39 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/make-a-strategy-to-increase-the-shelf-life-of-horticultural-products-says-shivraj-singh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong></strong> केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बागवानी उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए रणनीति बननी चाहिए ताकि किसानों को अधिक आय हो सके और उनका नुकसान कम हो सके। नई दिल्ली में गुरुवार को&nbsp; राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के निदेशक मंडल की 33वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने यह बातें कही।&nbsp;</p>
<p>बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने बागवानी बोर्ड की योजनाओं की समीक्षा की। विशेष रूप से वाणिज्यिक बागवानी विकास योजनाएं, कोल्ड-चेन अवसंरचना परियोजनाएं, क्लस्टर विकास कार्यक्रम,&nbsp; क्षेत्र-विशिष्ट बागवानी क्लस्टरों के माध्यम से उत्पादकता और बाजार जुड़ाव को बढ़ाने की नई पहल, क्लीन प्लांट कार्यक्रम-उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए रोग-मुक्त पौध सामग्री उपलब्ध कराने के बारे में चर्चा हुई।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने निर्देश दिया कि योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध, पारदर्शी और किसान-केंद्रित हो तथा किसानों को सब्सिडी भी समय पर दी जाएं, इस संबंध में कोई शिकायत नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं से, समान रूप से सभी राज्यों में हमारे छोटे किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुंचना चाहिए, उनकी आय बढ़ना चाहिए, विशेषकर पूर्वोत्तर के राज्यों के किसानों को भी फायदा मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि किसानों के हित में, जल्दी खराब होने वाले बागवानी उत्पादों के संबंध में विशेष रणनीति बनानी चाहिए ताकि इनकी सेल्फ लाइफ बढ़े, किसानों को नुकसान नहीं हो और नुकसान से बचने के लिए अवेयरनेस प्रोग्राम भी चलाए जाएं।</p>
<p>बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री चौहान ने बागवानी क्षेत्र की उत्पादकता, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने हेतु कई रणनीतिक सुझाव दिए। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, फसलोत्तर प्रबंधन, उत्पादकता वृद्धि पर विशेष ध्यान देने को कहा। शिवराज सिंह ने कहा कि पूरे समन्वय के साथ किसानों को बाजार, कोल्ड-चेन नेटवर्क और मूल्य संवर्धन के अवसरों से जोड़ने वाली व्यवस्था को सुदृढ़ करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसानों के फायदे के लिए एनएचबी राज्यवार, क्षेत्रवार रोडमैप बनाकर पूरी ताकत से श्रेष्ठ कार्य करें।</p>
<p>इस मौके पर उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा तैयार गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस, जैविक खेती मॉडल और उन्नत बागवानी तकनीकों पर आधारित तकनीकी प्रकाशनों का विमोचन किया। ये संसाधन किसानों, उद्यमियों व कृषि विशेषज्ञों के लिए एक उपयोगी संदर्भ सामग्री सिद्ध होंगे। बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट सहित कृषि, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, बागवानी उद्योग से जुड़े गैर-आधिकारिक सदस्य उपस्थित रहे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बागवानी उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने की रणनीति बनाएंः शिवराज सिंह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब&amp;#45;हरियाणा में आधे हुए पराली जलाने के मामले, यूपी&amp;#45;एमपी में बढ़े]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/stubble-burning-cases-halved-in-punjab-and-haryana-increased-in-up-and-mp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 01 Dec 2025 19:28:23 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/stubble-burning-cases-halved-in-punjab-and-haryana-increased-in-up-and-mp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>इस वर्ष पंजाब व हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।</strong> इसके बावजूद दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक बना हुआ है। &nbsp;</p>
<p>भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) द्वारा की जा रही मॉनिटरिंग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल 15 सितंबर से 30 नंवबर के बीच पंजाब में पराली जलाने की 5114 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि पिछले साल यह संख्या <strong>10,909</strong> थी। वर्ष 2020 में पंजाब में पराली की आग के 83,002 मामले सामने आए थे। इस तरह पंजाब में पराली जलाने के मामलों में 90 फीसदी से ज्यादा कमी आए है।</p>
<p>हरियाणा में इस सीजन पराली की आग के <strong>केवल </strong><strong>662</strong> मामले दर्ज किए आए, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे कम हैं। पिछले वर्ष हरियाणा में 1,406 और 2021 में 6,987 मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों में कमी के पीछे पराली जलाने वाले किसानों की धरपकड़ और जुर्माने जैसी सख्त कार्रवाई के अलावा पराली प्रबंधन और वैकल्पिक उपयोग को प्रोत्साहन को वजह माना जा रहा है। &nbsp;</p>
<p>हरियाणा-पंजाब से इतर एमपी और यूपी में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इस सीजन मध्य प्रदेश से पराली जलाने के 17,067 मामले सामने आए, जबकि बीते साल यह आंकड़ा 16,360 था। यूपी में पराली की आग के मामले बढ़कर 7,290 हो गए, जो पिछले सीजन में 6,142 थे।</p>
<p>हरियाणा-पंजाब में पराली जलाने को दिल्ली में प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता था। लेकिन इस साल इन राज्यों में पराली जलाने के मामलों में भारी कमी के बावजूद दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना मुश्किल है। जबकि आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली के प्रदूषण में पराली की आग का योगदान कम हुआ है। पूरे सीजन में केवल <strong>8 </strong><strong>दिन</strong> ऐसे रहे जब दिल्ली के प्रदूषण में पराली के धुएं का हिस्सा 10% से अधिक रहा। यानी दिल्ली के प्रदूषण के लिए सिर्फ पराली की आग ही नहीं बल्कि अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं। इनमें कंस्ट्रक्शन की धूल और वाहनों का धुआं प्रमुख है।&nbsp;</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि सैटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों में अंडर रिपोर्टिंग की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि पहले की तुलना में हरियाणा-पंजाब में पराली जलाने के मामलों में कमी आई है। फिर भी दिल्ली में प्रदूषण का खतरनाक स्तर कई सवाल खड़े करता है।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब-हरियाणा में आधे हुए पराली जलाने के मामले, यूपी-एमपी में बढ़े ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान सभा ने ड्राफ्ट सीड बिल 2025 और ITPGRFA प्रस्ताव को किया खारिज, 10 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी विरोध का आह्वान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/aiks-calls-nationwide-protests-on-december-10-rejects-seed-bill-2025-and-itpgrfa-compromise-proposal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 30 Nov 2025 14:55:13 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/aiks-calls-nationwide-protests-on-december-10-rejects-seed-bill-2025-and-itpgrfa-compromise-proposal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने 10 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान करते हुए केंद्र सरकार पर भारत की बीज संप्रभुता और किसान अधिकारों पर &ldquo;त्रिस्तरीय हमला&rdquo; करने का आरोप लगाया है। संगठन ने देशभर के जिलों, प्रखंडों और गांवों में किसानों से अपील की है कि वे ड्राफ्ट सीड बिल 2025 और अंतरराष्ट्रीय खाद्य एवं कृषि पादप आनुवंशिक संसाधन संधि (ITPGRFA) के GB11 बैठक में तैयार समझौता प्रस्ताव की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज करें।</p>
<p>एआईकेएस ने एक बयान में कहा कि केंद्र सरकार ऐसी नीतियां आगे बढ़ा रही है जो किसानों की आजीविका को खतरे में डालती हैं और भारत के बीज क्षेत्र को बहुराष्ट्रीय कृषि कंपनियों के नियंत्रण में सौंपने का मार्ग प्रशस्त करती हैं। संगठन का कहना है कि सीड बिल 2025, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और लीमा में हुई GB11 बैठक - ये तीनों मिलकर राष्ट्रीय हित के विरुद्ध एक समन्वित नीतिगत बदलाव दर्शाते हैं।</p>
<p>एआईकेएस ने आरोप लगाया कि GB11 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने &ldquo;किसानों के साथ विश्वासघात&rdquo; किया है, क्योंकि उसने ऐसे प्रस्ताव का विरोध नहीं किया जो बिना उचित लाभ-साझेदारी के भारत की जैव-संपदा पर कॉर्पोरेट की पहुंच बढ़ाता है। संगठन का कहना है कि भारत की यह चुप्पी वैश्विक बीज निगमों के हितों को बढ़ावा देने की मंशा दिखाती है, जबकि भारतीय किसान पीढ़ियों से जैव विविधता की रक्षा करते आए हैं।</p>
<p>एआईकेएस ने GB11 के घटनाक्रम को भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं से भी जोड़ा। इसका कहना है कि ये वार्ताएं भारत के पेटेंट कानूनों को कमजोर कर सकती हैं, विदेशी बीज एकाधिकारों का रास्ता खोल सकती हैं और आनुवंशिक रूप से परिवर्तित तथा सब्सिडी वाले विदेशी उत्पादन को निर्बाध प्रवेश दे सकती हैं। संगठन के अनुसार, ऐसे समझौते किसानों की आय को नुकसान पहुंचाएंगे और भारत की खाद्य संप्रभुता को कमजोर करेंगे।</p>
<p>हाल ही केंद्र द्वारा जारी ड्राफ्ट सीड बिल 2025 पर एआईकेएस का कहना है कि यह विधेयक किसानों के बीज बचाने, आपस में बांटने और बेचने के पारंपरिक अधिकार को सीमित करता है। पंजीकृत और कॉर्पोरेट-स्वामित्व वाले बीजों पर जोर देने से पारंपरिक प्रथाओं को अपराध माना जाने लगेगा जिससे कृषि पर कॉर्पोरेट नियंत्रण और गहरा होगा।</p>
<p>एआईकेएस ने इस &ldquo;समन्वित आत्मसमर्पण&rdquo; वाली नीतिगत दिशा को तुरंत बदलने की मांग करते हुए सीड बिल 2025 की वापसी, ITPGRFA समझौता प्रस्ताव को अस्वीकार करने तथा किसान हितों को कमजोर करने वाली व्यापार वार्ताओं को रोकने की मांग की।</p>
<p>एआईकेएस ने 10 दिसंबर को, जो स्वतंत्रता सेनानी बाबू गनु की स्मृति में मनाया जाता है, राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस के रूप में चुना है। संगठन ने कहा कि किसान &ldquo;सरकार को देश की संप्रभुता और अन्न उत्पादकों के अधिकारों को गिरवी नहीं रखने देंगे।&rdquo;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6915d4f16fe88.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान सभा ने ड्राफ्ट सीड बिल 2025 और ITPGRFA प्रस्ताव को किया खारिज, 10 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी विरोध का आह्वान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत के दूध, मांस और अंडा उत्पादन में निरंतर वृद्धि, अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा पशुधन क्षेत्र]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indias-milk-meat-and-egg-production-on-the-rise-livestock-sector-boosts-the-economy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 27 Nov 2025 18:56:13 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indias-milk-meat-and-egg-production-on-the-rise-livestock-sector-boosts-the-economy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय पशुपालन और डेयरी विभाग द्वारा जारी <strong>बेसिक एनिमल हसबैंड्री स्टैटिस्टिक्स (</strong><strong>BAHS) 2025</strong> के अनुसार,<span> भारत के पशुधन उत्पादन में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है</span>, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। ये आंकड़े मार्च 2024 से फरवरी 2025 के बीच कराए गये इंटीग्रेटेड सैंपल सर्वे के परिणामों पर आधारित हैं।&nbsp;</p>
<p>भारत वैश्विक स्तर पर दूध उत्पादन में पहला स्थान बनाए हुए है, जबकि अंडा उत्पादन में दूसरा और मांस उत्पादन में चौथे स्थान पर है। यह वृद्धि पशुधन क्षेत्र को कृषि आय का एक प्रमुख स्तंभ बना रही है, जिसने 2023-24 में कुल कृषि &nbsp;GVA में 31 <span>फीसदी का</span> योगदान दिया।</p>
<p>राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल द्वारा <strong>बेसिक एनिमल हसबैंड्री स्टैटिस्टिक्स (</strong><strong>BAHS) 2025</strong> को जारी किया गया। इस अवसर पर राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार भी उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align: center;"><strong>प्रमुख पशुधन उत्पाद</strong></p>
<div>
<div class="css-175oi2r r-xoduu5 r-1ifxtd0 r-lltvgl r-bnwqim r-13qz1uu">
<table style="margin-left: auto; margin-right: auto; height: 282px;" width="637">
<tbody>
<tr style="height: 20px;">
<th style="height: 20px; width: 330.938px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">वस्तु</span></span></div>
</th>
<th style="height: 20px; width: 97.1007px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">2023-24</span></span></div>
</th>
<th style="height: 20px; width: 97.1007px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">2024-25</span></span></div>
</th>
<th style="height: 20px; width: 98.3854px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">वृद्धि (%)</span></span></div>
</th>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 330.938px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><strong>दूध उत्पादन</strong> (करोड़ टन)</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 97.1007px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">23.93</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 97.1007px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">24.79</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 98.3854px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">3.58</span></span></div>
</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 330.938px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><strong>प्रति व्यक्ति दूध</strong> (ग्राम/दिन)</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 97.1007px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">471</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 97.1007px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">485</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 98.3854px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">2.97</span></span></div>
</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 330.938px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><strong>अंडा उत्पादन</strong> (अरब संख्या में)</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 97.1007px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">142.77</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 97.1007px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">149.11</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 98.3854px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">4.44</span></span></div>
</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 330.938px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><strong>प्रति व्यक्ति अंडा</strong> (प्रतिवर्ष संख्या)</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 97.1007px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">103</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 97.1007px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">106</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 98.3854px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">2.91</span></span></div>
</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 330.938px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><strong>मांस उत्पादन</strong> (करोड़ टन)</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 97.1007px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">1.02</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 97.1007px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">1.05</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 98.3854px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">2.46</span></span></div>
</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 330.938px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><strong>प्रति व्यक्ति मांस</strong> (किलो/वर्ष)</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 97.1007px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">7.39</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 97.1007px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">7.51</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 98.3854px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">1.62</span></span></div>
</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 330.938px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"><strong>ऊन उत्पादन</strong> (करोड़ किलोग्राम)</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 97.1007px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">3.36</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 97.1007px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">3.45</span></span></div>
</td>
<td style="height: 20px; width: 98.3854px; text-align: center;">
<div class="css-175oi2r r-1adg3ll r-11f147o r-faml9v"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-1x3r274"><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">2.63</span></span></div>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
</div>
<p></p>
<p><strong>दूध उत्पादन</strong></p>
<p>वर्ष 2024-25 में देश में दूध उत्पादन बढ़कर 24.78 <span>करोड़ टन</span> हो गया, जो 2023-24 के 23.93 <span>करोड़ टन की तुलना में</span> 3.58% की वृद्धि है।<br />प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता बढ़कर 485 ग्राम/दिन हो गई है, जो 2014-15 के 319 ग्राम/दिन से निरंतर सुधार दर्शाती है।</p>
<p>शीर्ष पाँच दूध उत्पादक राज्यों का योगदान इस प्रकार है:</p>
<ul>
<li>उत्तर प्रदेश &ndash; 15.66%</li>
<li>राजस्थान &ndash; 14.82%</li>
<li>मध्य प्रदेश &ndash; 9.12%</li>
<li>गुजरात &ndash; 7.78%</li>
<li>महाराष्ट्र &ndash; 6.71%</li>
</ul>
<p>विदेशी/क्रॉसब्रेड पशुओं से दूध उत्पादन में 4.97%, देशी नस्ल की गायों में 3.51% और भैंसों में 2.45% की वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई।</p>
<p><strong>अंडा उत्पादन</strong></p>
<p>वर्ष 2024-25 के दौरान देश में कुल अंडा उत्पादन 14.91 <span>करोड़ रहने का अनुमान है</span>, जो 2023-24 की तुलना में 4.44 <span>फीसदी</span> अधिक है। प्रति व्यक्ति अंडा उपलब्धता 2014-15 के 62 अंडे प्रति वर्ष से बढ़कर 2024-25 में 106 अंडे प्रति वर्ष हो गई है।</p>
<p>मुख्य अंडा उत्पादक राज्य:</p>
<ul>
<li>आंध्र प्रदेश &ndash; 18.37%</li>
<li>तमिलनाडु &ndash; 15.63%</li>
<li>तेलंगाना &ndash; 12.98%</li>
<li>पश्चिम बंगाल &ndash; 10.72%</li>
<li>कर्नाटक &ndash; 6.67%</li>
</ul>
<p>कुल उत्पादन में कमर्शियल पोल्ट्री का योगदान 12.59 <span>करोड (</span>84.49%) रहा, जबकि बैकयार्ड पोल्ट्री का योगदान 2.31 <span>करोड़ (</span>15.51%) रहा।</p>
<p><strong>मांस उत्पादन</strong></p>
<p>देश में कुल मांस उत्पादन वर्ष 2024-25 के दौरान 105 <span>लाख टन</span> रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.46% वृद्धि है। पोल्ट्री से 51.8 लाख टन मांस उत्पादन हुआ, जो कुल उत्पादन का लगभग आधा है।</p>
<p>शीर्ष मांस उत्पादक राज्य:</p>
<ul>
<li>पश्चिम बंगाल &ndash; 12.46%</li>
<li>उत्तर प्रदेश &ndash; 12.20%</li>
<li>महाराष्ट्र &ndash; 11.57%</li>
<li>आंध्र प्रदेश &ndash; 10.84%</li>
<li>तेलंगाना &ndash; 10.49%</li>
</ul>
<p>ये पांच राज्य मिलकर देश के कुल मांस उत्पादन का 57.55% योगदान देते हैं।</p>
<p><strong>ऊन उत्पादन</strong></p>
<p>2024-25 में देश का ऊन उत्पादन 3.45 <span>करोड़ किलोग्राम</span> रहा, जिसमें 2.63% की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें राजस्थान 47.85% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा उत्पादक बना हुआ है। अन्य प्रमुख राज्य:</p>
<ul>
<li>जम्मू-कश्मीर &ndash; 22.88%</li>
<li>गुजरात &ndash; 6.22%</li>
<li>महाराष्ट्र &ndash; 4.75%</li>
<li>हिमाचल प्रदेश &ndash; 4.30%</li>
</ul>
<p>ये पांच राज्य मिलकर ऊन उत्पादन का 85.98% योगदान करते हैं।</p>
<p><strong>अर्थव्यवस्था में पशुधन क्षेत्र का योगदान</strong></p>
<p>पशुधन क्षेत्र देश के सकल मूल्यवर्धन (GVA) में 5.5% योगदान देकर अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहा है। 2024-25 में पशुधन उत्पादों का कुल निर्यात बढ़कर 66,249 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें मुख्य भूमिका मांस उद्योग विशेषकर बॉवाइन मीट की रही।</p>
<p>कृषि, वानिकी और मत्स्य क्षेत्र ने 2023-24 में राष्ट्रीय GVA में 17.8% योगदान दिया, जिसमें पशुधन क्षेत्र लगभग एक-तिहाई का योगदान करता है।<br />2014-15 से 2023-24 के बीच पशुधन क्षेत्र का GVA लगभग 195% तक बढ़ा है जो फसल उत्पादन की तुलना में कहीं अधिक तेज वृद्धि है।</p>
<p><strong>महत्वपूर्ण दस्तावेज</strong>&nbsp;</p>
<p>बेसिक एनिमल हसबैंड्री स्टैटिस्टिक्स (BAHS) जारी करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने कहा कि विश्वसनीय डेटा एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो पशुधन और डेयरी क्षेत्र की प्रवृत्तियों पर व्यापक आंकड़े प्रस्तुत करता है। <span>प्रो. बघेल</span><strong><span>&nbsp;</span></strong><span>ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह 485 ग्राम प्रतिदिन तक पहुंच गई है, जो वैश्विक औसत 329 ग्राम प्रतिदिन से कहीं अधिक है। </span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_69284b255af80.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत के दूध, मांस और अंडा उत्पादन में निरंतर वृद्धि, अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा पशुधन क्षेत्र ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रबी फसलों की बुवाई में तेजी, कुल रकबा 306 लाख हेक्टेयर के पार पहुंचा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rabi-crop-sowing-picks-up-pace-total-area-crosses-306-lakh-hectares.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 25 Nov 2025 14:58:34 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rabi-crop-sowing-picks-up-pace-total-area-crosses-306-lakh-hectares.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देशभर में रबी फसलों की बुवाई जोर पकड़ती दिख रही है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 21 नवंबर 2025 तक रबी फसलों का कुल बोया गया रकबा 306.31 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 272.78 लाख हेक्टेयर की तुलना में 33.53 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्शाता है। यह बढ़त इस बात का संकेत है कि किसानों ने अनुकूल मौसम और नमी की पर्याप्त उपलब्धता का अधिकतम लाभ उठाया है।</p>
<p>रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं का रकबा बढ़कर 128.37 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21.27 लाख हेक्टेयर अधिक है। उत्तर भारत में समय पर ठंड की शुरुआत और पर्याप्त मिट्टी की नमी को इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारणों के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>रबी धान की बुवाई 8.26 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.67 लाख हेक्टेयर अधिक है।</p>
<p>सबसे उत्साहजनक वृद्धि दालों में दर्ज की गई है, जिनका कुल रकबा बढ़कर 73.36 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसमें पिछले वर्ष के मुकाबले 5.21 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है।</p>
<ul>
<li>चना: 53.71 लाख हेक्टेयर</li>
<li>मसूर: 9.01 लाख हेक्टेयर</li>
<li>मटर: 5.58 लाख हेक्टेयर</li>
</ul>
<p>श्री अन्ना एवं मोटे अनाज की बुवाई का क्षेत्र 19.69 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष से 2.44 लाख हेक्टेयर अधिक है। मकई, जौ, ज्वार और छोटे मिलेट्स&mdash;इन सभी में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।</p>
<p>तिलहन की बुवाई में भी अच्छा प्रदर्शन रहा है। कुल बुवाई क्षेत्र 76.64 लाख हेक्टेयर हो चुका है जो 3.94 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्शाता है।</p>
<p>मुख्यतः सरसों (73.80 लाख हेक्टेयर) की बुवाई में उल्लेखनीय बढ़त हुई है। सरसों के बेहतर दाम और न्यूनतम समर्थन मूल्य में हाल के वर्षों में हुई बढ़ोतरी ने किसानों को इसकी खेती की ओर अधिक आकर्षित किया है।</p>
<p>उत्तर-पश्चिम भारत में इस वर्ष समय पर हुई बारिश और मिट्टी में पर्याप्त नमी रहने से रबी बुवाई को बढ़ावा मिला है। अधिकतर राज्यों में अभी भी बुवाई जारी है, ऐसे में आने वाले हफ्तों में रकबे में और बढ़ोतरी संभावित है। यदि यह बढ़त बरकरार रही तो 2025&ndash;26 रबी सीजन उत्पादन के लिहाज़ से एक मजबूत वर्ष साबित हो सकता है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_692576bba1e88.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रबी फसलों की बुवाई में तेजी, कुल रकबा 306 लाख हेक्टेयर के पार पहुंचा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_692576bba1e88.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पोषणयुक्त खाद्यान्न की उपलब्धता के साथ किसानों की आजीविका सुरक्षित करना भी आवश्यक: शिवराज सिंह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/along-with-the-availability-of-nutritious-food-grains-it-is-also-necessary-to-secure-the-livelihood-of-farmers-says-shivraj-singh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 24 Nov 2025 17:11:48 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/along-with-the-availability-of-nutritious-food-grains-it-is-also-necessary-to-secure-the-livelihood-of-farmers-says-shivraj-singh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कृषि वैज्ञानिकों से कहा कि वे ऐसा अनुसंधान करें<span>, </span>जिससे आम किसानों को उसका लाभ मिलें। पोषणयुक्त खाद्यान्न की उपलब्धता के साथ किसानों की आजीविका सुरक्षित करने की आवश्यकता बताते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि आज प्राकृतिक खेती को बढ़ाना आवश्यक है<span>, </span>हम सबको चिंता करना जरूरी है कि ये धरती कैसी सुरक्षित रहें। कृषि में विज्ञान के माध्यम से हमने खाद्यान्न उत्पादन में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं<span>, </span>परंतु छोटी जोत के किसानों की आजीविका सुनिश्चित करने हेतु चिंतन करने की आवश्यकता है। सोमवार को नई दिल्ली के<span>&nbsp;</span>पूसा परिसर में शुरू हुई तीन दिवसीय&nbsp; छठी अंतर्राष्ट्रीय सस्य विज्ञान कांग्रेस में कृषि मंत्री ने मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए यह बातें कही।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि खराब बीज व मिलावटी इनपुट किसानों को बहुत नुकसान करते हैं<span>, </span>साथ ही मौसम की मार से उत्पाद की गुणवत्ता खराब हो जाती है। बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुसार समाधान देने की आवश्यकता है। साथ ही<span>, </span>दलहन और तिलहन उत्पादक बढ़ाने का समाधान देने की आवश्यकता है<span>, </span>अनुसंधान को सदृढ़ करने पर विचार करने की आवश्यकता है। दलहनों में वायरस अटैक से नुकसान होता है<span>, </span>उस पर भी कृषि वैज्ञानिक विचार करें।</p>
<p>शिवराज सिंह ने कहा कि जैविक कार्बन<span>, </span>सूक्ष्म पोषक तत्व की मृदा में निरंतर कमी हो रही है। डायरेक्ट सीडेड राइस में समस्याएं आ रही है<span>, </span>उसमें मैकेनाइजेशन की आवश्यकता है। कार्बन क्रेडिट का लाभ किसानों को मिले<span>, </span>इसको कैसे सुनिश्चित करें<span>, </span>यह भी वैज्ञानिक देखें। कम पानी में खेती<span>, </span>ड्रोन का उपयोग<span>, </span>स्मार्ट कृषि<span>, AI, </span>मशीन लर्निंग में छोटा और सीमांत किसान कैसे लाभ ले सकता है<span>, </span>इस पर सरकार और वैज्ञानिकों को साथ मिलकर काम करना है। शिवराज सिंह ने कहा कि पेपर लिखने पर रिसर्च करने से आगे बढ़कर किसान के लिए भी काम करना है। कृषि उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने की भी जरुरत है। विकसित कृषि संकल्प अभियान में किसानों की जिन समस्याओं का पता लगा<span>, </span>उनका मिलकर समाधान ढूंढना है।</p>
<p>शिवराज सिंह ने कहा कि एग्रोनॉमी केवल मनुष्य मात्र की चिंता के लिए न होकर सभी जीवों<span>, </span>एवं प्रकृति के लिए अध्ययन करने की आवश्यकता है। समाधान ही समस्या न बन जाए<span>, </span>इसके लिए किसान और वैज्ञानिकों को मिलकर काम करने की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश में <span>46 फीसदी</span>&nbsp;आबादी खेती पर निर्भर है<span>, </span>उनकी आय बढ़ाने के लिए देश प्रतिबद्ध है।</p>
<p>शिवराज सिंह ने चिंता भरे स्वर में कहा कि केमिकल फर्टिलाइजर का ऐसा ही प्रयोग होता रहा तो आने वाली पीढ़ियों का क्या होगा। भविष्य की पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण और धरती को सुरक्षित रखने की तरफ ध्यान देना होगा। शिवराज सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सभी जीवों में समान चेतनाएं मानी गई है<span>, </span>वृक्ष और नदियां भी पूजनीय हैं<span>, </span>इनके बिना हमारा अस्तित्व नहीं है<span>, </span>हमें सभी जीवों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिक किसानों की समस्याओं का व्यवहारिक समाधान निकालते हुए इंटीग्रेटेड फार्मिंग को प्रोत्साहन दें। छोटे और सीमांत किसानों को नई टेक्नोलॉजी का सही अर्थों में लाभ मिलना सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि छठी सस्य विज्ञान कांग्रेस की जो भी रिकमेंडेशन आएगी<span>, </span>उनको देश के नीति निर्धारण में शामिल करने पर कार्य किया जाएगा।</p>
<p>सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में जलवायु<span>&ndash;</span>सहिष्णुता से लेकर डिजिटल कृषि तक व्यापक चर्चा होगी। <span>10</span> थीमैटिक सिम्पोज़िया में जिन विषयों पर वैज्ञानिक प्रस्तुतियाँ होंगी<span>, </span>वे हैंः</p>
<ul>
<li><span> </span>जलवायु<span>&ndash;</span>सहिष्णु कृषि एवं कार्बन<span>&ndash;</span>न्यूट्रल फार्मिंग</li>
<li><span> </span>प्रकृति<span>&ndash;</span>आधारित समाधान और वन<span>&ndash;</span>हेल्थ</li>
<li><span> </span>सटीक इनपुट प्रबंधन और संसाधन दक्षता</li>
<li><span> </span>आनुवंशिक क्षमता का दोहन</li>
<li><span> </span>ऊर्जा-कुशल मशीनरी<span>, </span>डिजिटल समाधान और पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन</li>
<li><span> </span>पोषण-संवेदनशील कृषि और इको<span>&ndash;</span>न्यूट्रिशन</li>
<li><span> </span>लैंगिक सशक्तिकरण और आजीविका विविधीकरण</li>
<li><span> </span>कृषि <span>5.0, </span>नेक्स्ट<span>&ndash;</span>जेन शिक्षा और विकसित भारत <span>2047, </span>साथ ही युवा वैज्ञानिक-छात्र सत्र भी आयोजित किए गए हैं।</li>
</ul>
<p>इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी<span>, </span>केंद्रीय कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी<span>, ICAR </span>के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट<span>, </span>भारतीय सस्य विज्ञान सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. शांति कुमार शर्मा भी उपस्थित थे। भारतीय सस्य विज्ञान सोसाइटी (<span>ISA) </span>द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (<span>ICAR), </span>भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (<span>IARI), </span>राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (<span>NAAS) </span>एवं ट्रस्ट फॉर ऐड्वैन्समेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (<span>TAAS) </span>के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में विश्वभर से <span>1,000</span> से अधिक प्रतिभागियों ने की सहभागिता की है। इनमें वैज्ञानिक<span>, </span>नीति<span>&ndash;</span>निर्माता<span>, </span>कृषि के विद्यार्थी<span>, </span>विकास साझेदार तथा उद्योग विशेषज्ञ भी शामिल हैं। फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेसन (<span>FAO), </span>अंतर्राष्ट्रीय मक्का एवं गेहूं विकास संस्थान (<span>CIMMYT), </span>अर्द्ध-शुष्क कटिबंधीय क्षेत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (<span>ICRISAT), </span>अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (<span>IRRI), </span>अंतरराष्ट्रीय शुष्क क्षेत्रों के लिए कृषि अनुसंधान केंद्र (<span>ICARDA), </span>अंतरराष्ट्रीय उर्वरक विकास केंद्र (<span>IFDC) </span>सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6924451da89fd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पोषणयुक्त खाद्यान्न की उपलब्धता के साथ किसानों की आजीविका सुरक्षित करना भी आवश्यक: शिवराज सिंह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[IAC 2025: छठा अंतर्राष्ट्रीय एग्रोनॉमी कांग्रेस 24 से 26 नवंबर तक नई दिल्ली में]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sixth-international-agronomy-congress-to-be-held-in-new-delhi-from-november-24-to-26.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 23 Nov 2025 15:15:05 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sixth-international-agronomy-congress-to-be-held-in-new-delhi-from-november-24-to-26.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दुनियाभर के कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, नीति&ndash;निर्माताओं और विकास साझेदारों का सबसे बड़ा वैश्विक सम्मेलन - छठा अंतर्राष्ट्रीय एग्रोनॉमी कांग्रेस (IAC&ndash;2025) - 24 नवंबर से 26 नवंबर तक नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (NPL), पूसा, नई दिल्ली में आयोजित होगा। भारतीय एग्रोनॉमी सोसाइटी (ISA) द्वारा आयोजित यह तीन दिवसीय कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS)तथा ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज़ (TAAS) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।</p>
<p><strong>इस कांफ्रेंस से पहले शनिवार को एक बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के डायरेक्टर जनरल डॉ. एम.एल. जाट ने बताया कि वर्ष 2020 की तुलना में फसल अवशेष का जलाना 95 प्रतिशत कम हो गया है। ऐसा बेहतर एग्रोनॉमिक प्रैक्टिस के कारण संभव हुआ है। उन्होंने सस्टेनेबल एग्रोनॉमी के लिए वैश्विक सहयोग और इनोवेशन को जरूरी बताया।</strong></p>
<p>इस कांग्रेस का मुख्य विषय &ldquo;स्मार्ट कृषि&ndash;खाद्य प्रणालियों और पर्यावरण संरक्षण के लिए एग्रोनॉमी का पुनः-अवलोकन&rdquo; है। यह भविष्य के लिए उत्पादक, जलवायु-सहिष्णु, पर्यावरण&ndash;अनुकूल और पोषण&ndash;सुरक्षित कृषि तंत्र की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है।</p>
<p>1000 से अधिक वैश्विक प्रतिभागियों की उपस्थिति इस कांग्रेस को विश्वस्तरीय वैज्ञानिक मंथन का अनूठा मंच बनाती है। कांग्रेस के दौरान प्लेनरी सेशन, थीमैटिक सिम्पोज़िया, लीड लेक्चर, पोस्टर प्रस्तुति, प्रदर्शनी तथा युवा वैज्ञानिक एवं छात्र सम्मेलन के आयोजन की भी व्यवस्था रहेगी।</p>
<p>कांग्रेस में सरकार के विभिन्न प्रमुख कार्यक्रमों से जुड़ी उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा, जिसमें शामिल हैं- राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY), मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, पीएम&ndash;प्रणाम (Mother Earth कार्यक्रम), ​डिजिटल कृषि मिशन (DAM, प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन और पीएम-किसान।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x_6921b919dd4f1.jpg" alt="" /></p>
<p><em><strong>कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए आईसीएआर के डायरेक्टर जनरल डॉ. एम.एल. जाट।</strong></em></p>
<p>इस मौके पर कार्बन&ndash;न्यूट्रल कृषि, इको&ndash;न्यूट्रिशन, पुनर्योजी (रीजेनरेटिव) कृषि, डिजिटल कृषि प्रणाली, किसान&ndash;नेतृत्व वाली नवाचार श्रृंखला, कृषि शिक्षा कार्यक्रम आदि विषयों पर भी चर्चा होगी।</p>
<p>कांग्रेस का उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। इस अवसर पर राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी, ​TAAS चेयरमैन एवं पूर्व सचिव डीएआरई एवं महानिदेशक आईसीएआर डॉ. आर.एस. परोदा, पूर्व सचिव डीएआरई एवं महानिदेशक आईसीएआर डॉ. पंजाब सिंह, &nbsp;कृषि सचिव (कृषि) देवेश चतुर्वेदी, सचिव डीएआरई एवं महानिदेशक आईसीएआर डॉ. एम.एल. जाट, आईसीएआर&ndash;आईएआरआई निदेशक डॉ.सी.एच. श्रीनिवास राव भी उपस्थित रहेंगे।</p>
<p>कार्यक्रम में FAO, CIMMYT, ICRISAT, ICARDA, IRRI, IFDC सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञ, कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, आईसीएआर के उप महानिदेशक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और अग्रणी एग्री&ndash;बिजनेस नवप्रवर्तनकर्ता भी भाग लेंगे।</p>
<p>1955 में स्थापित भारतीय एग्रोनॉमी सोसाइटी देश की सबसे पुरानी और अग्रणी वैज्ञानिक संस्थाओं में से एक है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। यह Indian Journal of Agronomy प्रकाशित करती है और राष्ट्रीय&ndash;अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन कर एग्रोनॉमी, अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार को बढ़ावा देती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6921b91ad4fd8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ IAC 2025: छठा अंतर्राष्ट्रीय एग्रोनॉमी कांग्रेस 24 से 26 नवंबर तक नई दिल्ली में ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6921b91ad4fd8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सिविल सोसायटी की अंतरराष्ट्रीय पौध संधि को खारिज करने की अपील, कहा&amp;#45; इससे भारत की जैव&amp;#45;संपदा को खतरा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/civil-society-groups-warn-government-against-treaty-amendments-that-could-internationalise-indias-agricultural-genetic-resources.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 22 Nov 2025 18:40:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/civil-society-groups-warn-government-against-treaty-amendments-that-could-internationalise-indias-agricultural-genetic-resources.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एलायंस फॉर सस्टेनेबल एंड होलिस्टिक एग्रीकल्चर (ASHA) और कई सिविल सोसायटी संगठनों ने केंद्र सरकार से अंतरराष्ट्रीय पौध संधि (ITPGRFA) में प्रस्तावित संशोधनों को तुरंत खारिज करने की अपील की है। 15 नवंबर 2025 को केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री और पर्यावरण मंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि ये संशोधन भारत की कृषि जैव-संपदा पर गंभीर खतरा पैदा करते हैं।&nbsp;</p>
<p>सबसे चिंताजनक प्रस्ताव है मल्टीलेटरल सिस्टम (MLS) का विस्तार, जिसके तहत लगभग सभी प्लांट जेनेटिक संसाधनों को विकसित देशों की बीज कंपनियों के लिए खुला कर दिया जाएगा। संगठन कहते हैं कि इससे भारत अपने बीजों पर नियंत्रण खो देगा और निर्णय लेने की क्षमता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चली जाएगी।&nbsp;</p>
<p>इस विषय पर आयोजित परामर्श बैठक में यह दावा किया गया था कि भारत अपनी इच्छा से यह तय कर सकेगा कि वह कौन-सी फसलें साझा करेगा। लेकिन संगठनों ने अनुच्छेद 11, 12 और 30 का हवाला देते हुए कहा कि इस संधि में शामिल होने पर कोई आरक्षण स्वीकार नहीं किया जाएगा। यानी सभी PGRFA साझा करना अनिवार्य हो जाता है। यह भारत के जैव विविधता अधिनियम 2002 और पीपीवीएफआर अधिनियम 2001 के विपरीत है।</p>
<p>पत्र में जर्मप्लाज्म एक्सचेंज (NBPGR) के प्रभारी अफसर डॉ. सुनील आर्चक की कई बातों पर भी आपत्ति जताई गई है, जिनमें यह दावा भी शामिल है कि भारत अपने किसानों की किस्मों को MLS में साझा नहीं करता है। जबकि ITPGRFA वेबसाइट के अनुसार भारत अब तक 4 लाख से अधिक बीज के नमूने, जिनमें किसानों की किस्में भी शामिल हैं, साझा कर चुका है।&nbsp;</p>
<p>संगठनों ने यह भी कहा कि सोयाबीन, टमाटर, पाम ऑयल और मूंगफली जैसी चार फसलों की आनुवंशिक सामग्री पाने के लिए भारत को अपनी संप्रभुता नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि इन फसलों में भारत खुद समृद्ध विविधता रखता है और MLS के अतिरिक्त अन्य मार्ग भी उपलब्ध हैं। MLS की पारदर्शिता और ट्रैकिंग की कमी को &ldquo;गंभीर विफलता&rdquo; बताते हुए संगठनों ने चेतावनी दी कि इससे डिजिटल बायोपायरेसी और अनियंत्रित डेटा-निकासी को बढ़ावा मिलेगा।&nbsp;</p>
<p>पत्र में सरकार से मांग की गई है कि वह इन संशोधनों को खारिज करे, MLS से जुड़े सभी उपयोगकर्ताओं की सूची सार्वजनिक कराए, गोपनीयता प्रावधानों का विरोध करे, DSI/जीनोमिक डेटा की निगरानी सुनिश्चित करे और GB11 में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक अनुभवी वार्ताकार की नियुक्ति करे। पत्र के अंत में कहा गया है कि किसानों द्वारा पीढ़ियों से संरक्षित भारत की जैव-संपदा को किसी भी स्थिति में बिना सुरक्षा उपायों के अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में नहीं जाने देना चाहिए।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68e79fc8c5033.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सिविल सोसायटी की अंतरराष्ट्रीय पौध संधि को खारिज करने की अपील, कहा- इससे भारत की जैव-संपदा को खतरा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68e79fc8c5033.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड ने भारत में तीसरी पीढ़ी के राइड&amp;#45;ऑन राइस ट्रांसप्लांटर पेश किए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/escorts-kubota-limited-introduces-third-generation-ride-on-rice-transplanters-in-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 22 Nov 2025 18:06:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/escorts-kubota-limited-introduces-third-generation-ride-on-rice-transplanters-in-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि और कंस्ट्रक्शन उपकरण के क्षेत्र में भारत के प्रमुख इंजीनियरिंग समूहों में से एक, एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड (EKL) ने कुबोटा ब्रांड के तहत अपने थर्ड-जेनरेशन राइड-ऑन राइस ट्रांसप्लांटर्स - KA6 और KA8 को लांच किया है। नए मॉडल एडवांस टेक्नोलॉजी को खेत की व्यावहारिकता के साथ जोड़ते हैं ताकि ज्यादा उत्पादकता, ऑपरेटर में आराम और सटीक प्लांटिंग मिल सके। ये मॉडल्स 7 राज्यों - तमिलनाडु, पंजाब, ओडिशा, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना में पेश किए गए हैं, जहां धान के लिए मैकेनाइज्ड सॉल्यूशन की डिमांड बढ़ रही है।</p>
<p>KA6 और KA8 ट्रांसप्लांटर कुबोटा के कम ईंधन खपत वाले इंजन से चलते हैं। ये 21 और 24 हॉर्सपावर की ताकत देते हैं, जिससे मुश्किल परिस्थितियों में भी भरोसेमंद परफॉर्मेंस मिलती है। दोनों मॉडल में बेहतर हैंडलिंग के लिए स्मार्ट टर्निंग सिस्टम और ऑटोमैटिक लिफ्ट फंक्शन है। रीडिजाइन किए गए प्लांटिंग क्लॉज से पौधे लगाने में चूक काफी कम हो जाती है, और यह पक्का होता है कि पौधे एक जैसे लगें।&nbsp;</p>
<p>ऑपरेटर के काम को भी इसमें बेहतर बनाया गया है। मशीनों में आसान मूवमेंट के लिए चौड़ा प्लेटफॉर्म, थकान कम करने के लिए एर्गोनोमिक लेआउट और एलईड लाइट हैं जो सूरज डूबने के बाद भी खेती को आसान बनाते हैं। हल्का प्लांटिंग सेक्शन और लंबा व्हीलबेस, बेहतर संतुलन बनाता है। ट्रांसप्लांटर गहरे गीले खेतों में भी लंबे समय तक काम करने के लिए सही हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x_6921ae033c8ce.jpg" alt="" /></p>
<p>इस मौके पर एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर और पूर्णकालिक डायरेक्टर भरत मदान ने कहा, &ldquo;अक्सर मुश्किल हालात में कड़ी मेहनत करके भारत के किसानों ने लंबे समय से देश को खाना खिलाने की जिम्मेदारी निभाई है। एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड में हम मशीनीकरण को किसानों को मजबूत बनाने, उनकी इज्जत बढ़ाने और खेती को ज्यादा कुशल और टिकाऊ बनाने के लिए एक राष्ट्रीय मिशन के तौर पर देखते हैं। नए KA सीरीज राइस ट्रांसप्लांटर इस सफर में एक अहम पड़ाव हैं। ग्लोबल टेक्नोलॉजी को लोकल जानकारी के साथ मिलाकर, हम भारत में मशीनीकरण के आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। साथ ही, देश के किसानों के लिए खुशहाली बढ़ा रहे हैं।&rdquo;</p>
<p>एग्री सॉल्यूशंस बिजनेस डिवीजन के चीफ ऑफसर राजन चुघ ने कहा, &ldquo;KA6 और KA8 ट्रांसप्लांटर इनोवेशन और किसान-केंद्रित डिजाइन के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दिखाते हैं। इन्हें धान के खेतों में असली चुनौतियों, जैसे मजदूरों की कमी से लेकर लंबे काम के घंटों तक, और हर सीजन में एक जैसी परफॉर्मेंस देने के लिए इंजीनियर किया गया है। ज्यादा हॉर्सपावर, स्मार्ट टर्निंग क्षमता और एर्गोनॉमिक लेआउट के साथ ये मशीनें धान की ट्रांसप्लांटिंग को किसान के लिए फायदेमंद बनाती हैं।&rdquo;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6921ae0257b24.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड ने भारत में तीसरी पीढ़ी के राइड-ऑन राइस ट्रांसप्लांटर पेश किए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6921ae0257b24.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश में अब तक का सबसे ज्यादा खाद्यान्न उत्पादन, चावल और गेहूं प्रोडक्शन में नए रिकॉर्ड बने]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-achieves-highest-ever-foodgrain-output-sets-new-records-in-rice-and-wheat-production.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 22 Nov 2025 14:07:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-achieves-highest-ever-foodgrain-output-sets-new-records-in-rice-and-wheat-production.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह ने 2024-25 के फसल उत्पादन के अंतिम अनुमान जारी किए हैं। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश के खाद्यान्न उत्पादन में पिछले 10 वर्षों में अब-तक की सबसे बड़ी वृद्धि हुई है। वर्ष 2015-16 में जहां उत्पादन 2515.4 लाख टन था, वह अब 1060 लाख टन बढ़कर 3577.32 लाख टन हो गया है। पिछले साल (2023-24) उत्पादन 3322.98 लाख टन रहा था।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि चावल उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर बढ़कर 1501.84 लाख टन हो गया है। यह पिछले वर्ष के 1378.25 लाख टन से 123.59 लाख टन अधिक है। गेहूं में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़कर 1179.45 लाख टन हो गया है, जो पिछले वर्ष के 1132.92 लाख टन से 46.53 लाख टन अधिक है।&nbsp;</p>
<p>मूंग उत्पादन बढ़कर 42.44 लाख टन, सोयाबीन उत्पादन 152.68 लाख टन, मूंगफली उत्पादन 119.42 लाख टन तक पहुंच गया ई है। मक्का और श्रीअन्न का उत्पादन क्रमशः 434.09 लाख टन और 185.92 लाख टन अनुमानित है, जो पिछले वर्ष क्रमशः 376.65 लाख टन और 175.72 लाख टन था।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने दलहन-तिलहन के उत्पादन में भी आशाजनक वृद्धि पर प्रसन्नता जताई और बताया कि वर्ष 2024-25 के दौरान कुल तिलहन उत्&zwj;पादन रिकॉर्ड 429.89 लाख टन अनुमानित है, जो वर्ष 2023-24 के 396.69 लाख टन से 33.20 लाख टन अधिक है। तिलहन उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई क्योंकि मूंगफली और सोयाबीन का अनुमानित उत्पादन क्रमशः 119.42 लाख टन और 152.68 लाख टन रहा, जो पिछले वर्ष के क्रमशः 101.80 लाख टन और 130.62 लाख टन की तुलना में क्रमशः 17.62 लाख टन और 22.06 लाख टन अधिक है। रेपसीड और सरसों का उत्पादन 126.67 लाख टन अनुमानित है।<br />&nbsp;<br />केंद्रीय मंत्री ने फसलवार विवरण भी प्रस्तुत किया, जो निम्न है:<br />&nbsp;<br />चावल &ndash; 1501.84 लाख टन (रिकॉर्ड)<br />गेहूं &ndash; 1179.45 लाख टन (रिकॉर्ड)<br />पोषक/मोटे अनाज &ndash; 639.21 लाख टन<br />मक्&zwj;का - 434.09 लाख टन<br />कुल दलहन - 256.83 लाख टन<br />श्री अन्न - 185.92 लाख टन<br />चना - 111.14 लाख टन<br />मूंग - 42.44 लाख टन<br />तूर - 36.24 लाख टन<br />कुल तिलहन &ndash; 429.89 लाख टन<br />सोयाबीन &ndash; 152.68 लाख टन (रिकॉर्ड)<br />मूंगफली &ndash; 119.42 लाख टन (रिकॉर्ड)<br />रेपसीड एवं सरसों &ndash; 126.67 लाख टन<br />गन्&zwj;ना &ndash; 4546.11 लाख टन<br />कपास &ndash; 297.24 लाख गांठें (प्रति 170 कि. ग्रा.)<br />पटसन एवं मेस्ता &ndash; 88.02 लाख गांठें (प्रति 180 कि. ग्रा.)<br />&nbsp;<br />केंद्रीय मंत्री ने तूर, उड़द, चना और मूंग की एमएसपी खरीद की गारंटी का भी जिक्र किया और कहा कि सरकार के इस महत्वपूर्ण कदम से बड़ी संख्या में किसान लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि और किसान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सरकार निरंतर कारगर प्रयास करती रहेगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_64be5da05be4b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश में अब तक का सबसे ज्यादा खाद्यान्न उत्पादन, चावल और गेहूं प्रोडक्शन में नए रिकॉर्ड बने ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नागपुर में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और नितिन गडकरी ने एग्रो विजन का उद्घाटन किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/union-ministers-shri-shivraj-singh-chouhan-and-nitin-gadkari-inaugurated-agro-vision-in-nagpur.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 21 Nov 2025 20:07:38 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/union-ministers-shri-shivraj-singh-chouhan-and-nitin-gadkari-inaugurated-agro-vision-in-nagpur.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को नागपुर में एग्रो विज़न का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मंत्रियों, क्षेत्रीय विधायकों, कुलपतियों, कृषि विशेषज्ञों, शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों, उद्यमियों और बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।</p>
<p>उद्घाटन समारोह में शिवराज सिंह चौहान ने संतरा उत्पादकता बढ़ाने के लिए <em>क्लीन प्लांट तकनीक</em> की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने घोषणा की कि नागपुर में 70 करोड़ रुपये की लागत से क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि खराब या वायरस-ग्रस्त पौधों के कारण किसान भारी नुकसान झेलते हैं। इसलिए अच्छी नर्सरी को चिन्हित कर बड़ी नर्सरी को 4 करोड़ रुपये और मध्यम व छोटी नर्सरी को 2 करोड़ रुपये तक की सहायता सरकार द्वारा दी जाएगी।</p>
<p><span>कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि</span><span>&nbsp;महाराष्ट्र के किसान कई दिन से कह रहे थे कि पानी ज्यादा गिरा पानी</span><span>,&nbsp;</span><span>उसमें फसल खराब हो गई।</span><span>&nbsp;</span><span>जलभराव से फसल खराब होने पर नुकसान का मुआवजा देने का प्रावधान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में नहीं था।</span><span>&nbsp;जंगली जानवर उनकी फसल को नुकसान पहुंचा जाएं तो उसकी भरपाई नहीं होती थी। अब जलभराव के कारण फसल खराब होगी तो उसकी भरपाई की जाएगी</span><span>,&nbsp;</span><span>इसका प्रावधान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल कर लिया गया है</span><span>,&nbsp;</span><span>वहीं जंगली जानवरों से भी फसलों को जो नुकसान होगा</span><span>,&nbsp;</span><span>उसकी भरपाई भी फसल बीमा योजना में की जाएगी।</span></p>
<p><span>केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि आलू,&nbsp;प्याज,&nbsp;टमाटर जैसी फसल उगाने व स्थानीय स्तर पर ठीक दाम नहीं मिलने पर बड़े शहरों में ले जाने के लिए ट्रांसपोर्टेशन का भाड़ा बहुत ज्यादा लगने की किसानों की दिक्कत दूर करने के लिए केंद्र ने योजना बनाई है कि इन उपज का परिवहन का सारा खर्चा केंद्रीय कृषि विभाग उठाएगा।</span></p>
<p><span>कार्यक्रम में</span><span>,</span><span>&nbsp;राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड द्वारा नागपुर में&nbsp;</span><span>2027&nbsp;</span><span>से प्रारंभ किए जाने वाले&nbsp;</span><span>65&nbsp;</span><span>करोड़ रु. की लागत के प्लांट का शिलान्यास केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह व नितिन गडकरी ने बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. मिनेश शाह की उपस्थिति में किया। एग्रो विजन के दौरान विभिन्न कृषि उत्पादों</span><span>,&nbsp;</span><span>उपकरणों</span><span>,&nbsp;</span><span>तकनीकी नवाचारों की प्रदर्शनी लगाई गई है</span><span>,&nbsp;</span><span>वहीं पहले दिन विशेषज्ञों ने जल संरक्षण</span><span>,&nbsp;</span><span>फसल विविधीकरण व आधुनिक कृषि विपणन पर विचार साझा किए।</span></p>
<p><span></span></p>
<p><span></span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नागपुर में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और नितिन गडकरी ने एग्रो विजन का उद्घाटन किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम&amp;#45;किसान की 21वीं किस्त जारी, 9 करोड़ किसानों के खातों में पहुंची 18 हजार करोड़ की धनराशि]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/21st-installment-of-pm-kisan-released-rs-18000-crore-assistance-transferred-to-the-accounts-of-9-crore-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 19 Nov 2025 19:32:10 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/21st-installment-of-pm-kisan-released-rs-18000-crore-assistance-transferred-to-the-accounts-of-9-crore-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को तमिलनाडु के कोयंबटूर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की 21वीं किस्त जारी की। इस किस्त के माध्यम से देशभर के लगभग 9 करोड़ किसानों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए कुल 18,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।&nbsp;</p>
<p>फरवरी 2019 में शुरू हुई PM-KISAN योजना के तहत प्रत्येक पात्र किसान परिवार को सालाना 6,000 रुपये की सहायता दो-दो हजार रुपये की तीन समान किस्तों में सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खातों में भेजी जाती है। योजना के तहत अब तक 11 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को कुल 3.70 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है, जिससे यह दुनिया की सबसे बड़ी DBT योजनाओं में शामिल हो गई है। कुल लाभार्थियों में एक-तिहाई से अधिक महिलाएं किसान हैं।</p>
<p>योजना में डिजिटल इकोसिस्टम ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आधार-आधारित e-KYC, भूमि अभिलेखों का डिजिटल सत्यापन और PM-KISAN पोर्टल के माध्यम से लाभार्थियों की पहचान संभव हो पाई है। किसान स्वयं ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं और बैंक खातों में आसानी से भुगतान होता है।&nbsp;</p>
<p>PM-KISAN मोबाइल ऐप किसानों को घर बैठे e-KYC पूरी करने और भुगतान की स्थिति जांचने की सुविधा देता है। 11 भाषाओं में उपलब्ध Kisan-eMitra AI चैटबॉट अब तक 95 लाख से अधिक प्रश्नों का समाधान कर चुका है।</p>
<p>देश के 85% से अधिक छोटे और सीमांत किसानों (जिनके पास दो हेक्टेयर से कम भूमि है) के लिए PM-KISAN एक अहम आय-समर्थन व्यवस्था के रूप में उभरी है। बीजाई और कटाई के समय बढ़ने वाले खर्चों में यह योजना महत्वपूर्ण राहत देती है और किसानों की अनौपचारिक ऋण स्रोतों पर निर्भरता कम करती है।</p>
<p>योजना का कार्यान्वयन केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से मॉनिटर करती हैं। गांव स्तर पर लाभार्थी सूची प्रदर्शित की जाती है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से अपात्र लाभार्थियों से राशि वसूलने की भी जिम्मेदारी दी गई है। अगस्त 2025 तक 416 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_691dcfbca4755.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम-किसान की 21वीं किस्त जारी, 9 करोड़ किसानों के खातों में पहुंची 18 हजार करोड़ की धनराशि ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र ने आंध्र प्रदेश व राजस्थान में कई उपजों की खरीद को दी मंजूरी, 9700 करोड़ से अधिक की खरीद पर मुहर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/the-centre-has-approved-the-procurement-of-several-crops-in-andhra-pradesh-and-rajasthan-approving-purchases-worth-over-rs-9700-crore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 19 Nov 2025 14:36:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/the-centre-has-approved-the-procurement-of-several-crops-in-andhra-pradesh-and-rajasthan-approving-purchases-worth-over-rs-9700-crore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने खरीफ 2025-26 के लिए आंध्र प्रदेश और राजस्थान से प्राप्त मूल्य समर्थन योजना (PSS) और बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। स्वीकृत खरीद का कुल मूल्य 9,700 करोड़ रुपये से अधिक है।</p>
<p>वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस बैठक में दोनों राज्यों के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।</p>
<p><strong>आंध्र प्रदेश</strong> के लिए केंद्र ने मूंगफली और प्याज की खरीद को मंजूरी दी है। राज्य में मूंगफली की स्वीकृत पात्र मात्रा 37,273 मीट्रिक टन तय की गई है, जबकि अनुमानित उत्पादन 1,49,090 मीट्रिक टन है। इस खरीद का MSP मूल्य 270.71 करोड़ रुपये है।</p>
<p>इसके अलावा, 97,887 मीट्रिक टन प्याज की खरीद को एमआईएस के तहत मंजूरी दी गई है, जिसका मूल्य 24.47 करोड़ रुपये है। बैठक में बताया गया कि राज्य ने रायतु सेवा केंद्रों पर L1 आधार-बायोमेट्रिक प्रणाली लागू कर दी है, जिससे किसानों को उपज बिक्री में पारदर्शिता और भरोसा मिलेगा।</p>
<p><strong>राजस्थान</strong> के लिए केंद्र ने मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीन की रिकॉर्ड खरीद को स्वीकृति दी है। यह देश में सबसे बड़ी खरीद पहलों में से एक है। स्वीकृत पात्र मात्रा में मूंग 3,05,750 मीट्रिक टन, उड़द 1,68,000 मीट्रिक टन (100%), मूंगफली 5,54,750 मीट्रिक टन और सोयाबीन 2,65,750 मीट्रिक टन शामिल हैं। इनका कुल MSP मूल्य लगभग 9,436 करोड़ रुपये है। राज्य ने POS आधारित आधार प्रमाणीकरण व्यवस्था के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने राज्यों से खरीद व्यवस्था को मजबूत और पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए, ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो और MSP का पूरा लाभ किसानों तक पहुंचे।&nbsp;</p>
<p><span>कृषि मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि खरीद केंद्रों पर आधार-सक्षम डिवाइस उपलब्ध हों, साथ ही किसान पंजीकरण एवं भुगतान&nbsp;</span><span>DBT&nbsp;</span><span>के माध्यम से हो, साथ ही&nbsp;</span><span>FPO/FPC&nbsp;</span><span>को अधिक भूमिका देकर किसानों को संगठित बाजार उपलब्ध कराएं।&nbsp;</span></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_691d8fc31d6a5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र ने आंध्र प्रदेश व राजस्थान में कई उपजों की खरीद को दी मंजूरी, 9700 करोड़ से अधिक की खरीद पर मुहर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जंगली जानवरों द्वारा नुकसान फसल बीमा योजना में शामिल, अगले साल खरीफ सीजन से होगा लागू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/crop-losses-due-to-wild-animal-attacks-to-be-covered-under-fasal-bima-yojana-from-2026-kharif-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 18 Nov 2025 19:56:26 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/crop-losses-due-to-wild-animal-attacks-to-be-covered-under-fasal-bima-yojana-from-2026-kharif-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत किसानों को बड़ी सौगात दी है। मंत्रालय ने जंगली जानवरों द्वारा फसलों के नुकसान और धान जलभराव को कवर करने के लिए नई प्रक्रियाओं को औपचारिक रूप से मान्यता दे दी है।</p>
<p>संशोधित प्रावधानों के अनुसार, जंगली जानवरों द्वारा फसल नुकसान को स्थानीयकृत जोखिम श्रेणी के पाँचवें &lsquo;ऐड-ऑन कवर&rsquo; के रूप में मान्यता दी गई है। राज्य सरकारें जंगली जानवरों की सूची अधिसूचित करेंगी तथा ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर अत्यधिक प्रभावित जिलों/बीमा इकाइयों की पहचान करेंगी। किसान को फसल नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर फसल बीमा ऐप पर जियो-टैग्ड फोटो के साथ दर्ज करनी होगी।</p>
<p>मंत्रालय की तरफ से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, यह निर्णय विभिन्न राज्यों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के अनुरूप है और किसानों को अचानक, स्थानीयकृत और गंभीर फसल क्षति से सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये प्रक्रियाएँ PMFBY परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार वैज्ञानिक, पारदर्शी और व्यवहारिक बनाई गई हैं, और खरीफ 2026 से पूरे देश में लागू की जाएँगी।</p>
<p>देशभर में किसान लंबे समय से हाथी, जंगली सूअर, नीलगाय, हिरण और बंदरों जैसे जंगली जानवरों के हमलों के कारण बढ़ते फसल नुकसान का सामना कर रहे हैं। यह समस्या मुख्यतः वन क्षेत्रों, वन गलियारों और पहाड़ी इलाकों के निकट बसे किसानों में अधिक देखी जाती है। अब तक ऐसे नुकसान फसल बीमा योजना के दायरे में नहीं आते थे, जिसके कारण किसानों को भारी आर्थिक हानि उठानी पड़ती थी। दूसरी ओर, तटीय एवं बाढ़ संभावित क्षेत्रों में धान की खेती करने वाले किसानों को वर्षा और नदी-नालों के उफान से होने वाले जलभराव के कारण समान रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ता रहा है। वर्ष 2018 में इस जोखिम को स्थानीयकृत आपदा श्रेणी से हटाए जाने से किसानों के लिए एक बड़ा संरक्षण अंतर उत्पन्न हो गया था।</p>
<p>इन उभरती चुनौतियों को देखते हुए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने एक विशेषज्ञ समिति गठित की। समिति की रिपोर्ट को माननीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इस महत्वपूर्ण निर्णय के साथ अब स्थानीय स्तर पर फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को PMFBY के तहत समयबद्ध और तकनीक-आधारित दावा निपटान का लाभ मिलेगा।</p>
<p>इस प्रावधान का सबसे अधिक लाभ ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, उत्तराखंड तथा हिमालयी और उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, सिक्किम और हिमाचल प्रदेश के किसानों को होगा, जहाँ जंगली जानवरों द्वारा फसल क्षति एक प्रमुख चुनौती है।</p>
<p>धान जलभराव को स्थानीयकृत आपदा श्रेणी में पुनः शामिल किए जाने से तटीय और बाढ़ संभावित राज्यों जैसे ओडिशा, असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक,महाराष्ट्र और उत्तराखंड &nbsp;के किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जहाँ जलभराव से धान की फसल का नुकसान हर वर्ष दोहराया जाता है।</p>
<p>जंगली जानवरों द्वारा फसल नुकसान और धान जलभराव दोनों को शामिल किए जाने से PMFBY और अधिक समावेशी, उत्तरदायी और किसान हितैषी बन गया है, जो भारत की फसल बीमा प्रणाली को और अधिक मजबूत एवं लचीला बनाने में सहायक सिद्ध होगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_691d7d1809a0a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जंगली जानवरों द्वारा नुकसान फसल बीमा योजना में शामिल, अगले साल खरीफ सीजन से होगा लागू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_691d7d1809a0a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पहली छमाही में कृषि निर्यात में 8.8 फीसदी की बढ़ोतरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agricultural-exports-increased-by-8.8-percent-in-the-first-half.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 18 Nov 2025 06:26:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agricultural-exports-increased-by-8.8-percent-in-the-first-half.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल&ndash;सितंबर 2025) के दौरान कृषि उत्पादों का निर्यात देश के कुल वस्तुओं के निर्यात की तुलना में काफी बेहतर रहा है। इस अवधि में कृषि निर्यात में 8.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कुल वस्तु निर्यात में केवल 2.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान गैर-बासमती चावल का निर्यात सर्वाधिक रहा, जबकि समुद्री उत्पाद और बफेलो मीट का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। वहीं बासमती चावल के निर्यात में 3.71 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। बासमती, श्रिम्प और मसालों का अमेरिका को निर्यात &lsquo;ट्रम्प टैरिफ&rsquo; के चलते प्रभावित हुआ है।</p>
<p>वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल&ndash;सितंबर 2025 के बीच कृषि निर्यात 25.9 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 23.8 अरब डॉलर की तुलना में 8.8 फीसदी अधिक है। हालांकि, अगली छमाही में यह वृद्धि दर बनी रहेगी या नहीं, यह देखना अभी बाकी है।</p>
<p>चालू साल की पहली छमाही में कुल गुड्स निर्यात 213.7 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.9 फीसदी अधिक है। पिछले वर्ष (2024&ndash;25) में भी कृषि निर्यात का प्रदर्शन बेहतर रहा था, जिसकी वृद्धि दर 6.4 फीसदी रही और कुल कृषि निर्यात 52 अरब डॉलर तक पहुंचा था। वहीं कुल मर्चेंडाइज निर्यात मात्र 0.1 फीसदी बढ़कर 437.7 अरब डॉलर रहा था।</p>
<p>गैर-बासमती चावल के निर्यात में पहली छमाही में 27.53 फीसदी की सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। यह निर्यात पिछले वर्ष के 2.25 अरब डॉलर से बढ़कर 2.87 अरब डॉलर पर पहुंच गया। जबकि बासमती चावल का निर्यात 2.86 अरब डॉलर से घटकर 2.76 अरब डॉलर रह गया। बफेलो मीट का निर्यात भी 21.09 फीसदी बढ़कर 1.80 अरब डॉलर से 2.18 अरब डॉलर पर पहुंच गया।</p>
<p>&lsquo;ट्रम्प टैरिफ&rsquo; के बावजूद मरीन उत्पाद सबसे ज्यादा निर्यात श्रेणी में रहे। इनमें पिछले वर्ष की तुलना में पहली छमाही में 17.40 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। चालू वर्ष में मरीन उत्पादों का निर्यात 3.38 अरब डॉलर से बढ़कर 3.97 अरब डॉलर हो गया।</p>
<p>इनके अलावा फल और सब्जियों तथा कॉफी के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई&mdash;फल और सब्जियों में 11.79 फीसदी, कॉफी में 12.47 फीसदी, जबकि प्रसंस्कृत फल व सब्जियों में 7.69 फीसदी की वृद्धि हुई। हालांकि ऑयलमील और कैस्टर ऑयल के निर्यात में कमी देखी गई। मसालों का निर्यात 2.67 फीसदी बढ़कर 2.14 अरब डॉलर रहा। अमेरिका को बासमती, मसालों और मरीन उत्पादों के निर्यात में गिरावट &lsquo;ट्रम्प टैरिफ&rsquo; के सीधे प्रभाव को दर्शाती है। हालांकि, हाल ही में अमेरिका द्वारा कुछ खाद्य उत्पादों पर टैरिफ में कटौती से मसालों और सब्जियों के निर्यात को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>देश में खाद्य उत्पादों का आयात भी तेजी से बढ़ रहा है। पहली छमाही में खाद्य आयात में 5.9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। फल और सूखे मेवे का बड़ा हिस्सा अमेरिका से आयात हो रहा है। खाद्य तेलों का आयात चालू साल की पहली तिमाही में 13.5 फीसदी बढ़ा है। खाद्य तेल ही खाद्य आयात का सबसे बड़ा हिस्सा बनाते हैं और इस साल इनका आयात 20 अरब डॉलर तक जा सकता है।</p>
<p>सरकार द्वारा चीनी निर्यात की अनुमति देने से कृषि निर्यात में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। फिलहाल चालू चीनी सत्र के लिए 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी गई है। पिछले वर्ष 10 लाख टन की अनुमति के बावजूद, घरेलू और वैश्विक बाजार के अंतर के कारण निर्यात 8 लाख टन से कम रहा था। वैश्विक बाजार में खाद्य उत्पादों की कीमतों में गिरावट का रुझान जारी है। ऐसे में यह कहना कठिन है कि चालू वर्ष की दूसरी छमाही में कृषि निर्यात की ऊंची दर बनी रह पाएगी। पिछले वर्ष कृषि निर्यात 52 अरब डॉलर रहा था, जबकि 2022&ndash;23 में 53.2 अरब डॉलर के साथ अब तक का सबसे ऊंचा स्तर दर्ज किया गया था।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_691b38a60370c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पहली छमाही में कृषि निर्यात में 8.8 फीसदी की बढ़ोतरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार&amp;#45;2025 की घोषणा, विजेताओं को 26 नवंबर को मिलेगा सम्मान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/national-gopal-ratna-awards-2025-announced-winners-to-be-honoured-on-november-26.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 17 Nov 2025 19:06:51 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/national-gopal-ratna-awards-2025-announced-winners-to-be-honoured-on-november-26.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने <strong>राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार (एनजीआरए) </strong><strong>2025</strong> <span>के विजेताओं की घोषणा कर दी है। वर्ष </span>2021 <span>से राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार प्रतिवर्ष उन किसानों</span>, <span>डेयरी संस्थाओं और तकनीशियनों को दिया जा रहा है जिन्होंने दुग्ध उत्पादन और पशुधन सुधार में उल्लेखनीय कार्य किया है। इसे इस क्षेत्र का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान माना जाता है।</span>&nbsp;</p>
<p>पुरस्कार 26 <span>नवंबर को <strong>राष्ट्रीय दुग्ध दिवस समारोह</strong> के दौरान केंद्रीय मंत्री <strong>राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह</strong> द्वारा प्रदान किए जाएंगे। इस वर्ष कुल </span><strong>2,081 <span>आवेदनों</span></strong><span> में से 15 विजेताओं का चयन किया गया है।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान </strong>(देशी गाय/भैंस)</p>
<p><strong>गैर-पूर्वोत्तर क्षेत्र</strong></p>
<ul>
<li>प्रथम: <strong>अरविन्द यशवन्त पाटिल</strong>, <span>कोल्हापुर</span>, <span>महाराष्ट्र</span></li>
<li>द्वितीय: <strong>डॉ. कंकनाला कृष्ण रेड्डी</strong>, <span>हैदराबाद</span>, <span>तेलंगाना</span></li>
<li>तृतीय: <strong>हर्षित झूरिया</strong>, <span>सीकर</span>, <span>राजस्थान</span></li>
<li>तृतीय: <strong>कुमारी श्रद्धा सत्यवान धवन</strong>, <span>अहमदनगर</span>, <span>महाराष्ट्र</span></li>
</ul>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>पूर्वोत्तर/हिमालयी क्षेत्र</strong></p>
<ul>
<li><strong>विजय लता</strong>, <span>हमीरपुर</span>, <span>हिमाचल प्रदेश</span></li>
<li><strong>प्रदीप पंगरिया</strong>, <span>चंपावत</span>, <span>उत्तराखंड</span></li>
</ul>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी समिति/ दूध उत्पादक कंपनी/ डेयरी एफपीओ</strong></p>
<p><strong>गैर-पूर्वोत्तर क्षेत्र</strong></p>
<ul>
<li>प्रथम: <strong>मीनन गाडी क्षीरोलपदका सहकारण संघम लिमिटेड</strong>, <span>वायनाड</span>, <span>केरल</span></li>
<li>द्वितीय: <strong>कुन्नमकट्टुपति क्षीरोलपादक सहकारण संघम</strong>, <span>पलक्कड़</span>, <span>केरल</span></li>
<li>द्वितीय: <strong>घिनोई दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति</strong>, <span>जयपुर</span>, <span>राजस्थान</span></li>
<li>तृतीय: <strong>टीवाईएसपीएल </strong><strong>37 <span>सेंदुरई मिल्क प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड</span></strong>, <span>अरियालुर</span>, <span>तमिलनाडु</span></li>
</ul>
<p><strong>पूर्वोत्तर/हिमालयी क्षेत्र</strong></p>
<ul>
<li><strong>कुल्हा दूध उत्पादक सहकारी समिति</strong>, <span>उधम सिंह नगर</span>, <span>उत्तराखंड</span></li>
</ul>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (एआईटी)</strong></p>
<p><strong>गैर-पूर्वोत्तर क्षेत्र</strong></p>
<ul>
<li>प्रथम: <strong>दिलीप कुमार प्रधान</strong>, <span>अनुगुल</span>, <span>ओडिशा</span></li>
<li>द्वितीय: <strong>विकास कुमार</strong>, <span>हनुमानगढ़</span>, <span>राजस्थान</span></li>
<li>तृतीय: <strong>अनुराधा चकली</strong>, <span>नंद्याल</span>, <span>आंध्र प्रदेश</span></li>
</ul>
<p><strong>एनईआर/हिमालयी क्षेत्र</strong></p>
<ul>
<li><strong>डेलुवर हसन</strong>, <span>बारपेटा</span>, <span>असम</span></li>
</ul>
<p><strong>पुरस्कार राशि</strong></p>
<p>राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार-2025 <span>के तहत सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान और सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी/दूध उत्पादक कंपनी/डेयरी किसान उत्पादक में योग्यता प्रमाण पत्र</span>, <span>एक स्मृति चिन्ह और मौद्रिक पुरस्कार शामिल होंगे:</span></p>
<ul>
<li>रु. 5,00,000/- (केवल पांच लाख रुपये) - प्रथम स्थान</li>
<li>रु. 3,00,000/- (केवल तीन लाख रुपये) - द्वितीय स्थान</li>
<li>रु. 2,00,000/- (केवल दो लाख रुपये) - तृतीय स्थान</li>
<li>रु.2,00,000/- (केवल दो लाख रुपये) - पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर)/हिमालयी राज्यों के लिए विशेष पुरस्कार</li>
</ul>
<p>सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (एआईटी) श्रेणी के मामले में, <span>राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार-</span>2025 <span>में केवल योग्यता प्रमाण पत्र और एक स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाएगा। कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (एआईटी) श्रेणी में कोई नकद पुरस्कार नहीं दिया जाएगा।</span></p>
<p><span></span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_691b24cf9c448.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार-2025 की घोषणा, विजेताओं को 26 नवंबर को मिलेगा सम्मान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_691b24cf9c448.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मसाला उद्योग ने नेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस 2025 में सुरक्षित और सस्टेनेबेल भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत की﻿]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indias-spice-industry-charts-a-safer-sustainable-and-scalable-future-at-national-spice-conference-2025.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 17 Nov 2025 07:06:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indias-spice-industry-charts-a-safer-sustainable-and-scalable-future-at-national-spice-conference-2025.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वर्ल्ड स्पाइस ऑर्गनाइजेशन (WSO) और ऑल इंडिया स्पाइसेज एक्सपोर्टर्स फोरम (AISEF) की साझेदारी में चौथी राष्ट्रीय स्पाइस कॉन्फ्रेंस 2025 आंध्र प्रदेश के गुन्टूर &nbsp;में हुआ। &lsquo;स्पाइस रूट अहेड &ndash; सेफ, सस्टेनेबल एंड स्केलेबल&rsquo; विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में किसानों, एग्रीटेक कंपनियों, निर्यातकों, नियामकों और वैश्विक मसाला कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना, सस्टेनेबिलिटी बढ़ाना और इनोवेशन को बढ़ावा देना रहा, ताकि भारत अपनी वैश्विक नेतृत्व भूमिका को सुदृढ़ कर सके।</p>
<p>डब्ल्यूएसओ के चेयरमैन रामकुमार मेनन ने कहा कि यह भारत के मसाला क्षेत्र के लिए एक निर्णायक समय है। उन्होंने बताया कि वैश्विक मांग बढ़ रही है, पर भविष्य की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उद्योग सुरक्षा और सस्टेनेबिलिटी को कितने प्रभावी तरीके से अपनाता है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करना और उद्योग की क्षमता बढ़ाना भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा की कुंजी होगी।</p>
<p>एफएसएसएआई की वैज्ञानिक समिति (कीटनाशक अवशेष) के अध्यक्ष डॉ. परेश शाह ने आपूर्ति श्रृंखला की अखंडता को मसाला उद्योग की बुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि &lsquo;फार्म से फोर्क&rsquo; तक हर कदम पर खाद्य सुरक्षा मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए ताकि उपभोक्ताओं का भरोसा और पारदर्शिता बनी रहे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x_6919705b877b6.jpg" alt="" /></p>
<p>स्पाइसेज बोर्ड की निदेशक डॉ. ए. बी. रमाश्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी के उचित प्रयोग से किसानों की आजीविका में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने आग्रह किया कि तकनीकी प्रयोग केवल अवधारणा तक न सीमित रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर लागू हो ताकि किसान मूल्य निर्माण की प्रक्रिया में पूरी तरह भागीदार बन सकें।</p>
<p>सम्मेलन में खाद्य सुरक्षा प्रबंधन, एग्रीटेक आधारित नवाचारों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से समावेशी विकास पर सत्र आयोजित किए गए। उत्पादकों, प्रोसेसर्स और निर्यातकों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए एक विशेष &lsquo;बायर&ndash;सेलर इंटरफ़ेस&rsquo; भी शुरू किया गया।</p>
<p>वर्ल्ड स्पाइस ऑर्गनाइजेशन, जिसकी स्थापना 2011 में हुई थी, मसाला क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा, स्थिरता और मूल्य श्रृंखला की उत्कृष्टता को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसकी पहल गुणवत्ता सुधारने, किसानों को सशक्त बनाने और वैश्विक मसाला व्यापार में भारत की प्रतिष्ठा को मजबूत करने की दिशा में निरंतर योगदान दे रही हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6919705aa203b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मसाला उद्योग ने नेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस 2025 में सुरक्षित और सस्टेनेबेल भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत की﻿ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6919705aa203b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि उत्पादों को अमेरिका में रेसिप्रोकल टैरिफ से छूट का भारत को सीमित लाभ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-may-gain-small-edge-as-us-exempts-agricultural-products-from-reciprocal-tariffs.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 16 Nov 2025 16:44:46 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-may-gain-small-edge-as-us-exempts-agricultural-products-from-reciprocal-tariffs.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अमेरिका ने इस वित्त वर्ष की शुरुआत में लागू किए गए रेसिप्रोकल टैरिफ से कुछ कृषि उत्पादों को हटा दिया है। इसका अर्थ है कि अब इन वस्तुओं पर केवल मानक MFN शुल्क ही लागू होंगे। 12 नवंबर को जारी व्हाइट हाउस के एक कार्यकारी आदेश में कॉफी, चाय, उष्णकटिबंधीय फल, फलों के रस, कोको, मसाले, केले, संतरे, टमाटर, गोमांस और कुछ उर्वरकों को 2 अप्रैल की पारस्परिक शुल्क व्यवस्था से बाहर रखा गया है। ये छूट 13 नवंबर से प्रभावी हो गई हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भारतीय निर्यात 25% रेसिप्रोकल टैरिफ से मुक्त होंगे या पूरे 50% शुल्क से।</p>
<p>थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की एक रिपोर्ट कहती है कि इन वस्तुओं का या तो अमेरिका में घरेलू स्तर पर पर्याप्त मात्रा में उत्पादन नहीं होता है या ये ऐसी जलवायु परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं जिन्हें अमेरिका दोहरा नहीं सकता।</p>
<p>आदेश में चिन्हित टैरिफ-मुक्त उत्पादों का अमेरिका 50.6 अरब डॉलर का आयात करता है। भारत इसमें से केवल 54.8 करोड़ डॉलर की आपूर्ति करता है। अर्थात टैरिफ में छूट का भारत को सीमित लाभ ही मिल सकेगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x_69197eedd0f21.jpg" alt="" /></p>
<p>इन वस्तुओं की अमेरिका में मांग मुख्यतः विभिन्न श्रेणियों में केंद्रित है। 2024 में अमेरिका के वैश्विक आयात इस प्रकार हैं: कॉफी (9.0 अरब डॉलर), उष्णकटिबंधीय फल और एवोकाडो (6.1 अरब डॉलर), ताजे फल (6.3 अरब डॉलर), टमाटर (3.8 अरब डॉलर), केले (3.2 अरब डॉलर) और फलों के रस (4.3 अरब डॉलर)।</p>
<p>भारत का अमेरिका को निर्यात कुछ उच्च-मूल्य वाले मसालों और विशिष्ट उत्पादों तक सीमित है: काली मिर्च और शिमला मिर्च से बनी चीजें (18.1 करोड़ डॉलर), अदरक-हल्दी-करी मसाले (8.4 अरब डॉलर), सौंफ और जीरा श्रेणियां (8.5 अरब डॉलर), इलायची और जायफल (1.5 अरब डॉलर), चाय (6.8 अरब डॉलर) और नारियल, कोको बीन्स, दालचीनी, लौंग और फलों के उत्पादों की मामूली मात्रा। सबसे बड़ी छूट प्राप्त कई श्रेणियों - टमाटर, खट्टे फल, खरबूजे, केले, अधिकांश ताजे फल और फलों के रस में भारत की लगभग कोई उपस्थिति नहीं है।&nbsp;</p>
<p>अमेरिकी शुल्क नीति में बदलाव मसालों और विशिष्ट बागवानी के क्षेत्र में भारत की प्रतिस्पर्धी स्थिति को थोड़ा मजबूत कर सकता है, लेकिन व्यापक लाभ मुख्य रूप से प्रमुख लैटिन अमेरिकी, अफ्रीकी और आसियान कृषि निर्यातकों को ही मिलेगा। भारत को कृषि निर्यात का व्यापक लाभ उठाने के लिए स्केल का विस्तार और कोल्ड-चेन क्षमता के निर्माण के साथ कृषि निर्यात बास्केट में विविधता लाने की जरूरत है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_69197e7fb2ba1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि उत्पादों को अमेरिका में रेसिप्रोकल टैरिफ से छूट का भारत को सीमित लाभ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_69197e7fb2ba1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कॉर्टेवा एग्रीसाइंस ने लॉन्च किया पिक्सारो— गेहूं की फसलों में खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए नया समाधान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/corteva-agriscience-launches-pixxaro-—-new-generation-broadleaf-weed-control-for-wheat.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 16 Nov 2025 11:28:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/corteva-agriscience-launches-pixxaro-—-new-generation-broadleaf-weed-control-for-wheat.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कॉर्टेवा एग्रोसाइंस ने गेहूं के लिए चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार (BLW) नियंत्रण के लिए एक नए समाधान, पिक्सारो (Pixxaro&reg;) के लॉन्च की घोषणा की। एरिलिक्स एक्टिव और फ्लुरोक्सीपायर का यह पोस्ट-इमर्जेंट प्री-मिक्स, चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों पर विश्वसनीय नियंत्रण के साथ असाधारण फसल सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। इससे गेहूं किसानों को उपज की क्षमता और गुणवत्ता की रक्षा करने में मदद मिलती है।</p>
<p>गेहूं में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार को यदि नियंत्रण में न रखा जाए, तो वे पोषक तत्वों, नमी और प्रकाश का शोषण करते हैं। इससे गेहूं की उपज घटती है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) द्वारा प्रकाशित एक शोध पत्र सहित कई अध्ययनों से पता चलता है कि अनियंत्रित चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार गेहूं की उपज को 36% तक घटा सकते हैं। इसके बावजूद, चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण को अक्सर संकरी पत्ती वाले खरपतवारों जैसे फलेरिस माइनर की तुलना में किसान कम प्राथमिकता देते हैं। इसके परिणामस्वरूप वे दोबारा उग जाते हैं, बार-बार छिड़काव की आवश्यकता होती है। मौजूदा समाधानों से फसल पर प्रतिकूल प्रभाव दिखाई देते हैं।</p>
<p>पिक्सारो का केवल एक छिड़काव चेनोपोडियम एलबम, रूमेक्स डेंटेटस और मेडिकैगो डेंटिक्यूलेट जैसे जिद्दी खरपतवारों पर व्यापक और प्रभावी नियंत्रण प्रदान करता है। इसका उन्नत फॉर्मूला कोहरे जैसी कठिन परिस्थितियों में भी लगातार असर दिखाता है। इससे हर तरह की जमीन पर भरोसेमंद परिणाम मिलते हैं।</p>
<p>पिक्सारो के लिए प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में विस्तृत अनुसंधान और किसानों के साथ फील्ड डेमो आयोजित किए गए। उनमें उत्कृष्ट फसल सुरक्षा प्रोफाइल की पुष्टि हुई। साथ ही चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों पर मजबूत नियंत्रण और उनके दोबारा उगने में उल्लेखनीय कमी देखी गई। पिक्सारो एक ही छिड़काव में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों की व्यापक श्रेणी पर प्रभावी नियंत्रण प्रदान करता है, और उन जिद्दी प्रजातियों को भी नियंत्रित करता है जिनके लिए आम तौर पर कई समाधानों की आवश्यकता होती है।</p>
<p>कॉर्टेवा कंपनी किसानों के बीच जिम्मेदारी के साथ उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण, जागरूकता अभियानों और सर्वोत्तम कृषि तकनीक के माध्यम से सुरक्षित उपयोग, नियामकीय अनुपालन और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करता है। पिक्सारो कोर्टेवा एग्रीसाइंस की विज्ञान-आधारित फसल सुरक्षा समाधानों के प्रति प्रतिबद्धता को और आगे बढ़ाता है, जो फसल के स्वास्थ्य और किसानों की लाभप्रदता दोनों की रक्षा करते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_691967d1bc98f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कॉर्टेवा एग्रीसाइंस ने लॉन्च किया पिक्सारो— गेहूं की फसलों में खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए नया समाधान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_691967d1bc98f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र सरकार ने 15 लाख टन चीनी निर्यात कोटा का आदेश जारी किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-allocates-15-lakh-tonnes-sugar-export-quota-for-2025–26-issues-modalities-for-mills.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 15 Nov 2025 17:00:44 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-allocates-15-lakh-tonnes-sugar-export-quota-for-2025–26-issues-modalities-for-mills.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सरकार ने 2025-26 के चीनी सत्र के लिए 15 लाख टन चीनी निर्यात को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही सुचारू और नियमित शिपमेंट सुनिश्चित करने के लिए मिल के हिसाब से कोटा और परिचालन दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। आदेश के मुताबिक निर्धारित मात्रा तक चीनी मिल/रिफाइनरी/निर्यातक सभी ग्रेड की चीनी का निर्यात कर सकेंगे।</p>
<p>खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने 14 नवंबर, 2025 को कोटा आवंटन का आदेश जारी किया। इसे घरेलू बाजार में चीनी उपलब्धता और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अवसरों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p><strong>उत्पादन के आधार पर आनुपातिक आवंटन</strong><br />पिछले तीन चीनी सत्रों (2022-23, 2023-24 और 2024-25) के दौरान चीनी के औसत उत्पादन को ध्यान में रखते हुए, चीनी मिलों के बीच आनुपातिक आधार पर 15 लाख मीट्रिक टन का निर्यात कोटा आवंटित किया गया है। सभी चालू चीनी मिलों को उनके तीन वर्षों के औसत उत्पादन का 5.286% निर्यात कोटा आवंटित किया गया है। इस आवंटन में 16 चीनी उत्पादक राज्यों की 583 चीनी मिलें शामिल हैं। इनमें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक बड़े उत्पादन आधार के कारण प्रमुख लाभार्थी के रूप में उभरे हैं।</p>
<p><strong>निर्यात व्यवस्था में लचीलापन</strong><br />सरकार ने निर्यात संचालन को सुचारू बनाने के लिए कई लचीली व्यवस्थाएं शुरू की हैं। चीनी मिलें 30 सितंबर, 2026 तक सीधे या व्यापारी निर्यातकों/रिफाइनरियों के माध्यम से निर्यात कर सकती हैं। अंतिम बिल ऑफ लैडिंग (बीएल) की तारीख उस तारीख को या उससे पहले निर्धारित की जाएगी।</p>
<p>निर्यात न करने की इच्छुक मिलें 31 मार्च, 2026 तक अपना कोटा सरेंडर कर सकती हैं। विभाग ऐसे अप्रयुक्त कोटे को बेहतर निर्यात प्रदर्शन वाली मिलों या इच्छुक मिलों को पुनः आवंटित कर सकता है।</p>
<p>मिलें 31 मार्च, 2026 तक अपने निर्यात कोटे का (आंशिक या पूर्ण रूप से) अन्य मिलों के घरेलू कोटे के साथ विनिमय कर सकती हैं। इस प्रावधान का उद्देश्य परिवहन लागत को कम करना है, विशेष रूप से बंदरगाहों से दूर स्थित मिलों को लाभ पहुंचाना।</p>
<p>उदाहरण के लिए, पंजाब या उत्तर प्रदेश के अंदरूनी इलाकों में स्थित कोई मिल अपने निर्यात कोटे का आदान-प्रदान बंदरगाहों के नजदीक स्थित किसी मिल की मासिक घरेलू रिलीज़ मात्रा के साथ कर सकती है। इससे ऊंची परिवहन लागत से बचा जा सकता है।</p>
<p>कोटा अदला-बदली का विकल्प चुनने वाली मिलों को विभाग के साथ संयुक्त समझौता साझा करना होगा। इनमें समायोजन 30 सितंबर, 2026 तक पूरा किया जाना है। अदला-बदली किया गया घरेलू कोटा पांच मासिक किस्तों में जारी किया जाएगा।</p>
<p><strong>मॉनिटरिंग और जुर्माना</strong><br />जिन मिलों ने पिछले मासिक स्टॉकहोल्डिंग सीमा आदेशों (28 मार्च, 2025 के आदेश के अनुसार) का उल्लंघन किया है, उन्हें इस सीजन में कोई निर्यात कोटा नहीं मिलेगा। जिन मिलों पर 2024-25 तक निर्यात-स्वैपिंग समायोजन लंबित हैं, उन्हें समाधान होने तक आगे स्वैपिंग करने से रोक दिया गया है। मिलों से एसईजेड-आधारित रिफाइनरियों को की जाने वाली आपूर्ति को निर्यात माना जाएगा। एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (एएएस) के तहत निर्यात मौजूदा नियमों के अनुसार जारी रहेगा।</p>
<p>सभी मिलों को विभाग के एनएसडब्ल्यूएस (NSWS) पोर्टल पर फॉर्म पी-II के माध्यम से मासिक निर्यात विवरण अपलोड करना होगा। निर्यात दिशानिर्देशों का कोई भी उल्लंघन, कोटा का दुरुपयोग या गैर-अनुपालन होने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और विदेशी व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1992 के तहत कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>चीनी निर्यात का यह आवंटन ऐसे समय में हुआ है जब भारत घरेलू चीनी उपलब्धता और अंतर्राष्ट्रीय बाजार के अवसरों के बीच संतुलन बना रहा है। 2025-26 के सीजन में विशेष रूप से महाराष्ट्र और कर्नाटक में, चीनी उत्पादन में वृद्धि होने का अनुमान है। निर्यात के लिए 15 लाख मीट्रिक टन का कोटा उद्योग को पर्याप्त घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए वैश्विक बाजारों में प्रवेश करने का अवसर प्रदान करता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र सरकार ने 15 लाख टन चीनी निर्यात कोटा का आदेश जारी किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम&amp;#45;किसान की 21वीं किस्त 19 नवंबर को जारी होगी; अब तक किसानों के खातों में पहुंचे 3.70 लाख करोड़ रुपये]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-to-release-21st-pm-kisan-instalment-on-november-19-direct-transfers-cross-rs-3.70-lakh-crore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 14 Nov 2025 19:33:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-to-release-21st-pm-kisan-instalment-on-november-19-direct-transfers-cross-rs-3.70-lakh-crore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी </span>19 <span>नवंबर को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (</span>PM-KISAN) <span>की </span>21<span>वीं किस्त जारी करेंगे। इसके साथ ही प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (</span>DBT) <span>की इस योजना के तहत किसानों को दी गई कुल सहायता </span>3.70 <span>लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी। योजना से अब तक </span>11 <span>करोड़ से अधिक किसान परिवार लाभान्वित हुए हैं। योजना की 20वीं किस्त 2 अगस्त को जारी की गई थी।</span>&nbsp;</p>
<p>2019 <span>में शुरू की गई इस केंद्रीय योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर वर्ष </span>6,000 <span>रुपये तीन समान किस्तों में दिए जाते हैं। आधार आधारित सत्यापन</span>, <span>ई-केवाईसी और सीधे बैंक हस्तांतरण के जरिए योजना की पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जाती है। इस योजना के लाभार्थियों में </span>25% <span>से अधिक महिलाएं शामिल हैं।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने बढ़ाई पहुंच</strong></p>
<p>सरकार ने PM-KISAN <span>को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल सिस्टम को लगातार मजबूत किया है। किसान अब </span>OTP <span>आधारित</span>, <span>बायोमेट्रिक और फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए ई-केवाईसी अपने घर से ही कर सकते हैं। </span>PM-KISAN <span>मोबाइल ऐप पर ई-केवाईसी अपडेट</span>, <span>लाभार्थी स्थिति की जानकारी और पंजीकरण जैसी सेवाएँ उपलब्ध हैं।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>पोर्टल pmkisan.gov.in</strong> <span>के "फार्मर्स कॉर्नर" सेक्शन में किसान &ldquo;</span>Know Your Status&rdquo; <span>फीचर के जरिए अपनी किस्त की स्थिति आसानी से देख सकते हैं। पंजीकरण ऑनलाइन</span>, <span>कॉमन सर्विस सेंटर (</span>CSC) <span>या इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक द्वारा डोरस्टेप आधार आधारित बैंक खाता खोलकर भी किया जा सकता है।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>शिकायत निवारण के लिए </strong><strong>AI <span>चैटबॉट</span></strong></p>
<p>सरकार ने <em>किसान-ईमित्रा</em> नाम का एआई संचालित चैटबॉट भी लॉन्च किया है, <span>जो </span>11 <span>भाषाओं में </span>24&times;7 <span>सहायता उपलब्ध कराता है। यह सिस्टम ऑटोमेटिक लैंग्वेज और स्कीम डिटेक्शन</span>, <span>वॉयस-बेस्ड इंटरैक्शन और टच-फ्री फीचर्स से लैस है</span>, <span>जिससे किसान भुगतान स्थिति</span>, <span>शिकायत दर्ज कराने और जानकारी प्राप्त करने जैसे काम आसानी से कर सकते हैं।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>किसान रजिस्ट्री से मिलेगी मदद </strong></p>
<p>कृषि मंत्रालय ने देशभर में किसान रजिस्ट्री की शुरुआत की है। जिसके माध्यम से किसानों को सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ तेजी और सुगमता से मिल सकेगा। इससे बार-बार दस्तावेज़ सत्यापन की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और अंतिम छोर तक डिलीवरी और मजबूत होगी।&nbsp;</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय खाद्य एवं नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI) <span>के अध्ययन में पाया गया है कि पीएम-किसान ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है</span>, <span>किसानों की जोखिम उठाने की क्षमता बढ़ाई है और कृषि निवेश में बढ़ोतरी को प्रोत्साहित किया है। यह सहायता शिक्षा</span>, <span>स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक खर्चों में भी किसानों की मदद कर रही है।</span></p>
<p><span></span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम-किसान की 21वीं किस्त 19 नवंबर को जारी होगी; अब तक किसानों के खातों में पहुंचे 3.70 लाख करोड़ रुपये ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बीज विधेयक 2025 का ड्राफ्ट जारी, 30 लाख के जुर्माने और 3 साल तक सजा का प्रावधान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/draft-seeds-bill-2025-proposes-fine-up-to-rs-30-lakh-jail-term-for-violations-aims-to-ensure-seed-quality-and-farmer-protection.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 13 Nov 2025 18:24:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/draft-seeds-bill-2025-proposes-fine-up-to-rs-30-lakh-jail-term-for-violations-aims-to-ensure-seed-quality-and-farmer-protection.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने गुरुवार को बीज विधेयक 2025 (Seeds Bill 2025) का ड्राफ्ट जारी कर दिया। इसमें बाजार में उपलब्ध बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, किसानों को किफायती दरों पर अच्छे बीज उपलब्ध कराने, नकली और घटिया बीजों की बिक्री पर अंकुश लगाने, इनोवेशन को बढ़ावा देने, अच्छे इंपोर्टेड बीज किसानों को उपलप्ध कराने के लिए बीज आयात को उदार बनाने का प्रावधान है। सभी हितधारकों से ड्राफ्ट के प्रावधानों पर 11 दिसंबर 2025 तक सुझाव मांगे गए हैं। यह मौजूदा बीज अधिनियम, 1966 और बीज (नियंत्रण) आदेश, 1983 का स्थान लेगा।&nbsp;</p>
<p>ड्राफ्ट के अनुसार नीति और नियामक संबंधी मामलों में सलाह-मशविरा देने के लिए राष्ट्रीय बीज समिति का गठन किया जाएगा। अनुवांशिक रूप से संशोधित (जीएम) बीजों के मामले में पर्यावरण और जैव सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक होगा। किसानों के जुड़े बीज विवादों के लिए शीघ्र समाधान की व्यवस्था की जाएगी।</p>
<p>बीज विधेयक 2025 के ड्राफ्ट में क्वालिटी संबंधी कई प्रावधान किए गए हैं। सभी प्रकार के बीजों का पहले रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। बीज वितरक और विक्रेता बिना लाइसेंस के व्यापार नहीं कर सकेंगे। किसानों को अपनी उपजाई गई फसल से बीज रखने और उनका इस्तेमाल करने की छूट होगी। उन्हें इसके लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराना होगा। अगर बीज का प्रदर्शन कंपनी के विवरण के अनुसार नहीं होता है तो किसानों को उसके बदले मुआवजा पाने का अधिकार होगा।</p>
<p>बीज उत्पादकों को बीजों की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करनी होगी। मानदंडों के पालन के लिए अधिकृत एजेंसियां सर्टिफिकेशन उपलब्ध कराएंगी। बीजों की उचित लेबलिंग अनिवार्य की गई है। इसमें वैरायटी, स्रोत, गुणवत्ता और अंकुरण दर आदि बताना होगा। गलत विवरण देने या निम्न गुणवत्ता वाले बीजों की बिक्री पर कानूनी कार्रवाई एवं दंड का प्रविधान है। बीज परीक्षण प्रयोगशालाएं भी स्थापित की जाएंगी। निर्धारित नियमों के अनुसार बीजों के आयात की अनुमति दी गई है ताकि खराब क्वालिटी के बीजों का आयात न हो सके।</p>
<p>ड्राफ्ट के अध्याय 9 में दंड से संबंधित प्रावधान बताए गए हैं। &lsquo;नगण्य&rsquo; श्रेणी के अपराधों को डि-क्रिमिनलाइज किया जाना प्रस्तावित है, ताकि व्यापार सुगमता को बढ़ावा मिले और अनुपालन का बोझ कम हो। हालांकि गंभीर उल्लंघन पर कड़े दंड प्रावधान रखे गए हैं।&nbsp;</p>
<p>दंड के लिए तीन कैटेगरी निर्धारित की गई हैं- माइनर, मॉडरेट और मेजर। पहली बार माइनर अपराध करने पर लिखित नोटिस दिया जाएगा, ताकि व्यक्ति खुद को सुधार सके। तीन साल के भीतर दोबारा अपराध करने पर 50,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। मॉडरेट यानी मध्यम श्रेणी में पहली बार अपराध करने वाले पर एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। तीन साल के भीतर दोबारा अपराध करने पर दो लाख रुपये जुर्माना लगेगा।</p>
<p>बड़े अपराध करने पर पहली बार 10 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। पांच साल के भीतर दोबारा अपराध करने पर जुर्माना 20 लाख रुपये होगा। उसके पांच साल में अगर फिर अपराध किया तो 30 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। ऐसे डीलरों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। जुर्माने के साथ/अथवा तीन साल तक कैद की सजा का भी प्रावधान किया गया है।</p>
<p>सक्षम न्यायालय की अनुमति से निर्धारित अधिकतम जुर्माने का दोगुना भुगतान करके अपराध को कंपाउंड किया जा सकता है। केंद्र सरकार के पास दंड बढ़ाने का भी प्रावधान होगा। किसी कंपनी के दोषी पाए जाने पर कंपनी के भीतर के जिम्मेदार व्यक्ति भी उत्तरदायी माने जाएंगे। हालांकि उल्लंघन की जानकारी न होने या उचित सावधानी बरतने का प्रमाण देकर वे दंड से बच सकते हैं। सरकार खराब क्वालिटी के बीज को जब्त कर सकेगी। दंड के मामलों में आरोपी को सुनवाई का अवसर देने के बाद ही दंड का निर्णय लिया जाएगा। नामित बीज निरीक्षक की शिकायत के अलावा कोई भी न्यायालय किसी अपराध का संज्ञान नहीं ले सकेगा।&nbsp;</p>
<p>सार्वजनिक हित में केंद्र सरकार के पास कुछ बीजों को नियंत्रित अथवा प्रतिबंधित करने का अधिकार होगा। बीज इंस्पेक्टर संदिग्ध बीजों की जांच के लिए नमूने ले सकेंगे या जब्त कर सकेंगे। नई बीज वैरायटी के लिए बौद्धिक संपदा सुरक्षा (IPR) की गारंटी सुनिश्चित की गई है। ड्राफ्ट में बीज कंपनियों के लिए पारदर्शी रिकॉर्ड रखना और नियमित ऑडिटिंग को अनिवार्य किया गया है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बीज विधेयक 2025 का ड्राफ्ट जारी, 30 लाख के जुर्माने और 3 साल तक सजा का प्रावधान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत के किसान चुका रहे हैं महंगाई में गिरावट की कीमत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-farmers-are-bearing-the-brunt-of-record-low-inflation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 13 Nov 2025 08:54:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-farmers-are-bearing-the-brunt-of-record-low-inflation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची खुदरा महंगाई दर (CPI) भले ही उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आई हो, लेकिन किसानों के लिए यह संकट का कारण बन गई है। अक्टूबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मात्र 0.25 प्रतिशत बढ़ा जो 2012 के बाद से सबसे धीमी वृद्धि है। देशभर की मंडियों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे किसानों की आमदनी घट गई है, भले ही फसल उत्पादन अच्छा रहा हो।</p>
<p>सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अनुसार, खाद्य महंगाई दर अक्टूबर में घटकर माइनस 5.02 प्रतिशत पर आ गई, जो सितंबर में माइनस 2.33 प्रतिशत थी। यह गिरावट एक दशक से भी अधिक समय में सबसे तीव्र है। सब्ज़ियों, अनाज, दालों, फलों और खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट की वजह अधिक पैदावार, बेहतर आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक दामों में नरमी को बताया गया है। सरल शब्दों में कहें तो किसानों की सफलता ही अब उनके खिलाफ काम कर रही है।</p>
<p>ग्रामीण महंगाई दर भी माइनस 0.25 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 0.88 प्रतिशत रही। सितंबर में ग्रामीण महंगाई 1.07 प्रतिशत थी। यह अंतर दर्शाता है कि जहां शहरी उपभोक्ता सस्ते खाद्य पदार्थों का लाभ उठा रहे हैं, वहीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था मंदी जैसी स्थिति से गुजर रही है। बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कीमतों में औसतन दो प्रतिशत तक की गिरावट आई है।</p>
<p>मंडियों में टमाटर, प्याज़ और आलू लागत मूल्य से नीचे बिक रहे हैं। खाद्य तेलों के दाम एक साल पहले की तुलना में करीब 25 प्रतिशत कम हैं। कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकार किया, &ldquo;किसानों को उत्पादन लागत से कम दाम मिल रहे हैं। सब्ज़ियों के दाम 20 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुके हैं, जबकि दालों और अनाज पर भी दबाव है। यह स्थिति स्वस्थ नहीं कही जा सकती।&rdquo;</p>
<p>छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह समय बेहद कठिन है। डीजल और उर्वरक जैसी इनपुट लागतें ऊंची बनी हुई हैं, जबकि ग्रामीण मजदूरी ठहरी हुई है। परिणामस्वरूप कई किसान अच्छी पैदावार के बावजूद कर्ज़ में डूब रहे हैं। अर्थशास्त्री इसे भारतीय कृषि की &ldquo;पुरानी विडंबना&rdquo; बताते हैं &mdash; हर बार बंपर फसल आने पर कीमतें गिर जाती हैं।</p>
<p>दिल्ली स्थित एक कृषि विशेषज्ञ ने कहा, &ldquo;यह दक्षता की कहानी नहीं, बल्कि छिपे हुए संकट की कहानी है। जब किसान ज़्यादा उत्पादन करते हैं, तो उन्हें कम दाम मिलते हैं। हमारे पास पर्याप्त भंडारण, प्रसंस्करण और मूल्य समर्थन की व्यवस्था नहीं है।&rdquo;</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य कीमतों में लंबी अवधि तक गिरावट रहने से ग्रामीण मांग पर असर पड़ सकता है, जो भारत की आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख इंजन है। महंगाई में यह कमी जहां नीति-निर्माताओं के लिए राहत है और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को दिसंबर में दरों में कटौती की गुंजाइश दे सकती है, वहीं यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमजोर स्थिति को भी उजागर करती है।</p>
<p>बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार, कई इलाकों में मंडी भाव अनाज और दालों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चले गए हैं। उन्होंने कहा, &ldquo;सांख्यिकीय आंकड़े अच्छे दिख रहे हैं, लेकिन इसके पीछे ग्रामीण संकट बढ़ रहा है।&rdquo; उनका अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में औसत महंगाई लगभग 2.5 प्रतिशत रहेगी और मार्च 2026 तक यह 4 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।</p>
<p>अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मौजूदा स्थिति की विडंबना यह है कि महंगाई नियंत्रण में आने का कारण नीति-सफलता नहीं, बल्कि किसानों की घटी हुई आय है। जब तक खरीद व्यवस्था मज़बूत नहीं होती और किसानों को उचित मूल्य नहीं मिलता, तब तक यह मंदी का दौर ग्रामीण संकट को और गहरा कर सकता है &mdash; भले ही उपभोक्ता थालियों में सस्ता भोजन देखकर संतुष्ट हों।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_689b48c2b3132.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत के किसान चुका रहे हैं महंगाई में गिरावट की कीमत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_689b48c2b3132.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार का 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देने का फैसला, शीरा निर्यात पर 50% शुल्क भी हटाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centre-decided-to-allow-export-of-15-lakh-tonnes-sugar-remove-50-percent-duty-on-molasses.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 09 Nov 2025 09:27:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centre-decided-to-allow-export-of-15-lakh-tonnes-sugar-remove-50-percent-duty-on-molasses.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने चालू 2025-26 सीजन के लिए 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य मिलों की आय में सुधार और गन्ना किसानों को तेजी से भुगतान सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही, शीरे पर 50 प्रतिशत निर्यात शुल्क हटा दिया गया है जिससे मिलों को और मदद मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>गन्ना किसानों के आंदोलन के दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को हाल ही लिखे एक पत्र में केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने यह बात कही। उन्होंने लिखा कि चालू चीनी सीजन के लिए केंद्र सरकार ने 15 लाख मीट्रिक टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने का फैसला किया है और शीरे पर 50 प्रतिशत निर्यात शुल्क भी हटा दिया गया है।</p>
<p>चीनी उद्योग के सूत्रों ने बताया कि खाद्य मंत्रालय ने सैद्धांतिक रूप से फैसला ले लिया है, लेकिन आधिकारिक अधिसूचना का अभी इंतजार है।</p>
<p>जोशी ने अपने पत्र में चीनी निर्यात का कोई टाइमलाइन भी नहीं बताया है। उद्योग के हितधारकों का मानना ​​है कि निर्यात स्वीकृतियों और शुल्कों को युक्तिसंगत बनाने से मिलों की तरलता में सुधार होगा और गन्ना बकाया जल्दी चुकाने में मदद मिलेगी।</p>
<p>यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब चीनी मिलों के संगठन इस्मा ने नए चीनी सत्र में शुद्ध चीनी उत्पादन 18.5% की वृद्धि के साथ 309.5 लाख टन होने का अनुमान लगाया है। इसमें इथेनॉल उत्पादन के लिए लगभग 34 लाख टन चीनी का उपयोग शामिल है।</p>
<p>चीनी उद्योग 2025-26 सत्र के लिए 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देने की मांग कर रहा था। निर्यात की अनुमति से चीनी की कीमतों में स्थिरता आने और इस वर्ष अच्छे उत्पादन की उम्मीद है। 2024-25 सीजन के लिए केंद्र ने 10 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी।</p>
<p>घरेलू इथेनॉल मिश्रण को प्राथमिकता देने और मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए जनवरी 2024 में शीरे पर 50 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाया गया था। इसे समाप्त करने का निर्णय एक उल्लेखनीय नीतिगत बदलाव का प्रतीक है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार का 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देने का फैसला, शीरा निर्यात पर 50% शुल्क भी हटाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विश्व बैंक का अनुमान: 2026 में कमोडिटी की कीमतों में गिरावट और बढ़ेगी; महंगाई से राहत लेकिन किसानों के लिए जोखिम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/world-bank-sees-commodity-slide-deepening-in-2026-relief-for-indias-inflation-risks-for-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 08 Nov 2025 19:52:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/world-bank-sees-commodity-slide-deepening-in-2026-relief-for-indias-inflation-risks-for-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वैश्विक कमोडिटी बाजार गिरावट के एक और साल की ओर बढ़ रहे हैं। विश्व बैंक ने 2025 और 2026, दोनों में कीमतों में 7% की गिरावट का अनुमान लगाया है क्योंकि कमजोर मांग के साथ आपूर्ति पर्याप्त बनी हुई है। यह पूर्वानुमान भारतीय उपभोक्ताओं के लिए तो राहत की बात है, लेकिन वैश्विक खाद्य और उर्वरक कीमतों में गिरावट के बीच कृषि आय को लेकर चिंता भी है।</p>
<p>इस सप्ताह जारी विश्व बैंक के कमोडिटी प्राइस आउटलुक के अनुसार यह गिरावट ऊर्जा से लेकर कृषि तक लगभग सभी श्रेणियों में फैली हुई है। तेल और धातुओं के साथ-साथ अधिकांश खाद्य वस्तुओं के दाम 2026 तक नरम रहने की उम्मीद है, जबकि सुरक्षित निवेश की मांग के कारण सोना और चांदी में अलग रुख रह सकता है।</p>
<p>विश्व बैंक ने कहा कि प्रमुख उत्पादक देशों में विशेष रूप से अनाज, तेल और अन्य खाद्य पदार्थों में मजबूत आपूर्ति की स्थिति कीमतों को नियंत्रित रखेगी। खाद्य पदार्थों की कीमतों में मामूली उतार-चढ़ाव की उम्मीद है। अनाज, खाद्य तेल और अन्य कृषि उपज 2024 के स्तर के आसपास स्थिर होंगे।</p>
<p>अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव का केंद्र रहे सोयाबीन के स्थिर रहने का अनुमान है। कॉफी और कोको जैसे पेय पदार्थों की कीमतें अगले साल मौसम की स्थिति में सुधार के साथ 7% गिर सकती हैं। हालांकि उर्वरकों की कीमतें - जो इस साल 21% बढ़ी हैं - 2026 में 5% की मामूली गिरावट के बावजूद ऊंची बनी रह सकती हैं।</p>
<p><strong>वैश्विक खाद्य कीमतों में नरमी</strong><br />विश्व बैंक के विश्लेषण के अनुसार कम मांग, अच्छी फसल और ऊर्जा लागत में कमी से दुनिया भर में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दक्षिण अमेरिका में बंपर फसल और एशिया में बेहतर पैदावार के कारण स्टॉक आरामदायक बना हुआ है।</p>
<p>विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में खुदरा व्यापार के रुझानों में यह पहले ही दिखाई देने लगा है। भारत में पिछली तिमाही में सब्ज़ियों और दालों की कीमतों में भारी गिरावट आई है। क्रिसिल की नवीनतम रोटी-चावल दर रिपोर्ट में प्याज, आलू और दालों के सस्ते होने से घर में बनी शाकाहारी थाली की कीमत में 10% की गिरावट देखी गई है।</p>
<p>बैंक ऑफ बड़ौदा का आवश्यक वस्तु सूचकांक - जो घरेलू कीमतों के रुझानों का एक बैरोमीटर है - लगातार छह महीनों से गिर रहा है। यह इसकी शुरुआत से अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। टमाटर, प्याज और आलू की कीमतें भारी अपस्फीति (deflation) के दौर में पहुंच गई हैं।</p>
<p><strong>किसानों के लिए बुरी खबर</strong><br />भारत के लिए अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अक्टूबर में खुदरा मुद्रास्फीति 1% से नीचे आ जाएगी। वैश्विक स्तर पर वस्तुओं की कम कीमतें आयात बिल को कम करने के साथ भारतीय रिजर्व बैंक को अपनी मौजूदा ब्याज दर नीति को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।</p>
<p>हालांकि, ग्रामीण इलाकों में इसका दूसरा पहलू भी सामने आ रहा है। अनाज, तिलहन और दलहन की गिरती कीमतों से कृषि आय में कमी आने का खतरा है। ठीक उसी तरह जैसे उर्वरक और डीजल की बढ़ती कीमतें मुनाफे को कम करती हैं। एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के कृषि नीति विश्लेषक ने कहा, "हम एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं जहां उपभोक्ताओं को मुद्रास्फीति से राहत मिलने से किसानों की आय पर असर पड़ सकता है।"</p>
<p><strong>ऊर्जा और उर्वरक के रुझानों पर नजर</strong><br />विश्व बैंक को उम्मीद है कि चीन और बेलारूस द्वारा निर्यात प्रतिबंधों के साथ-साथ रूसी उत्पादों पर यूरोपीय यूनियन के नए टैरिफ के कारण उर्वरक की कीमतें 2015-19 के औसत से ऊपर रहेंगी। ऊर्जा बाजार अस्थिर बने हुए हैं। ब्रेंट क्रूड का दाम 2025 में औसतन 68 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है। इलेक्ट्रिक वाहनों और रिन्यूएबल ऊर्जा के कारण 2026 में मांग में कमी आने से यह और गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।</p>
<p><strong>भारत के लिए नाज़ुक संतुलन</strong><br />भारत के नीति निर्माताओं के लिए वैश्विक बाजार में नरमी एक अवसर और चेतावनी दोनों लाती है। सस्ता आयात और कम खाद्य मुद्रास्फीति राजकोषीय घाटे को कम रखने और उपभोक्ताओं का तनाव कम करने में मदद कर सकती है। लेकिन कृषि-वस्तुओं की कीमतों में लगातार कमजोरी से ग्रामीण क्षेत्र की मांग कम हो सकती है, जो व्यापक अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण विकास इंजन है।</p>
<p>विश्लेषकों का कहना है कि दालों और खाद्य तेल जैसे क्षेत्रों में संकट को रोकने के लिए सरकार को खरीद बढ़ाने या निर्यात बाजारों का विस्तार करने की आवश्यकता हो सकती है। ग्रामीण मुद्रास्फीति के रुझानों पर नजर रखने वाले एक अर्थशास्त्री ने कहा, "यह बफर स्टॉक के पुनर्निर्माण का एक अवसर है, आराम करने का नहीं।"</p>
<p>जैसे-जैसे 2026 नजदीक आ रहा है, यह स्पष्ट हो रहा है कि दुनिया को वस्तुओं की कीमतों में गिरावट का एक और साल झेलना पड़ेगा। यह वैश्विक आर्थिक सुस्ती और प्रचुर आपूर्ति का संकेत है। भारत के लिए इसका मतलब मुद्रास्फीति से राहत है, लेकिन एक बड़ा सवाल है कि उपभोक्ता राहत और कृषि आजीविका के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ विश्व बैंक का अनुमान: 2026 में कमोडिटी की कीमतों में गिरावट और बढ़ेगी; महंगाई से राहत लेकिन किसानों के लिए जोखिम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अनुकूल मौसम व चीन की मांग से भारत में सरसों की बुवाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/mustard-sowing-in-india-is-expected-to-reach-record-levels-due-to-favourable-weather-and-demand-from-china.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 06 Nov 2025 14:45:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/mustard-sowing-in-india-is-expected-to-reach-record-levels-due-to-favourable-weather-and-demand-from-china.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत में इस साल सरसों और राई की बुवाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की संभावना है। इसके पीछे चीन की ओर से सरसों खली की रिकॉर्ड खरीद और अधिक बारिश को वजह माना जा रहा है। सरसों का उत्पादन बढ़ने से खाद्य तेलों से आयात पर देश की निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।</p>
<p>इस साल सरसों और राई की कुल बुवाई का रकबा 7% से 8% तक बढ़ने की उम्मीद है।</p>
<ul>
<li><strong>वर्तमान बुवाई:</strong> किसानों ने अब तक 41.7 लाख हेक्टेयर में बुवाई की है, जो पिछले साल इसी समय की तुलना में 13.5% अधिक है।</li>
<li><strong>पिछले साल का आंकड़ा:</strong> पिछले साल देश में 89.3 लाख हेक्टेयर में सरसों की बुवाई हुई थी, जो पांच साल के औसत (79 लाख हेक्टेयर) से अधिक थी।</li>
</ul>
<p></p>
<p><strong>चीन से बढ़ी मांग </strong></p>
<p>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के कार्यकारी निदेशक बी.वी. मेहता के अनुसार, इस वर्ष घरेलू स्तर पर सरसों के तेल की मांग अच्छी रही है, जबकि चीन से सरसों की खली के लिए मजबूत निर्यात मांग आई है। गत मार्च में चीन द्वारा कनाडा से सरसों की खली और तेल के आयात पर 100% जवाबी टैरिफ लगाने के बाद चीन ने भारत से सरसों की खली खरीदना शुरू कर दिया।</p>
<p>चालू वित्तीय वर्ष के पहले छह महीनों में, चीन ने भारत से रिकॉर्ड 4.88 <span>लाख टन सरसों की खली</span> का आयात किया, जबकि पिछले पूरे वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा केवल 60,759 टन था। इस साल चीन से सरसों खली की डिमांड अधिक रही है।</p>
<p><strong>बेहतर भाव का असर </strong></p>
<p>मजबूत मांग के चलते पिछले सीजन में रेपसीड का बाजार भाव एमएसपी 5,950 <span>रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर बना रहा। नए सीजन के लिए सरकार ने एमएसपी बढ़ाकर </span>6,200 <span>रुपये कर दिया है। किसानों को सरसों का अच्छा भाव मिलने से भी वे अधिक बुवाई के लिए प्रेरित हुए हैं। </span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63e50812ec866.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अनुकूल मौसम व चीन की मांग से भारत में सरसों की बुवाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूरिया की बढ़ सकती है किल्लत, इस साल खपत 400 लाख टन पार पहुंचने की संभावना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/urea-shortage-may-increase-consumption-likely-to-cross-40-million-tonnes-this-year.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 03 Nov 2025 08:55:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/urea-shortage-may-increase-consumption-likely-to-cross-40-million-tonnes-this-year.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जिस तेजी से देश में यूरिया की खपत तेजी से बढ़ रही है वह सरकार के लिए एक चुनौती बन सकता है। हर साल यूरिया की खपत में एक नये यूरिया संयंत्र की क्षमता से ज्यादा की बढ़ोतरी हो रही है। चालू वित्त वर्ष (2025-26) में देश में यूरिया की खपत 400 लाख टन को पार कर जाने की संभावना है जो घरेलू उत्पादन से करीब 100 लाख टन अधिक होगी। लगातार बेहतर मानसून और यूरिया की कीमत का बाकी सभी उर्वरकों से आधे से भी कम कीमत पर उपलब्ध होना इसकी बड़ी वजह है। इस साल सामान्य से बेहतर मानसून के चलते रबी का रकबा बढ़ने के साथ ही अधिक यूरिया खपत वाली फसलों का बढ़ता संभावित क्षेत्रफल इसकी मांग में इजाफा करेगा। वही चालू रबी सीजन की शुरुआत पिछले साल से करीब 26 लाख टन कम यूरिया स्टॉक से हुई है। पिछले साल 1 अक्तूबर, 2024 के देश में यूरिया के 63 लाख स्टॉक के मुकाबले इस साल 1 अक्तूबर 2025 को यूरिया का स्टॉक 37 लाख टन रहा।</p>
<p>चालू सील में खरीफ सीजन में भी देश के विभिन्न हिस्सों से यूरिया की किल्लत की खबरें लगातार आती रही हैं। ऐसे में रबी सीजन के शुरू में स्टॉक कम रहने का असर रबी सीजन में भी उपलब्धता पर पड़ सकता है। हालांकि पिछले कुछ साल में देश में उर्वरक उत्पादन के नये संयंत्र स्थापित हुए हैं इनमें सरकारी क्षेत्र की भारत उर्रवरक एवं रसायन से अलावा निजी क्षेत्र के संयंत्र भी शामिल हैं। इसके बावजूद देश में यूरिया का उत्पादन खपत से पिछड़ रहा है। निजी क्षेत्र के दो उर्वरक संयंत्रों में यूरिया का उत्पादन बंद भी हुआ है।</p>
<p>चालू साल के पहले छह माह में यूरिया की खपत 2.1 फीसदी बढ़ी है। वहीं पिछले साल 2024-25 में यूरिया की खपत 388 लाख टन रही थी जो अभी तक का सर्वोच्च स्तर था। ऐसे में चालू साल में रबी के बेहतर रकबे और यूरिया की अधिक खपत वाली फसलों के चलते इसकी खपत 400 लाख टन पार कर जाएगी।</p>
<p>सरकार ने यूरिया की खपत को कम करने के मकसद से और इसके गैर कृषि क्षेत्र में डायवर्जन को रोकने के लिए पूरे यूरिया उत्पादन को नीम कोटेट करने के साथ ही यूरिया के बैग की मात्रा को 50 किलो से घटार 45 किलो भी किया था। लेकिन इसका कोई असर यूरिया की खपत पर पड़ता नहीं दिखा है।</p>
<p>सरकार ने यूरिया की अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) को जनरवरी, 2015 से 5628 रुपये प्रति टन पर रखा हुआ है। यूरिया का दाम सरकार के नियंत्रण में है और उसे मौजूदा स्तर पर रखने के लिए सरकार सब्सिडी देती है। वहीं विनियंत्रित उर्वरकों के मामले में सरकार न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी स्कीम (एनबीएस) के तहत सब्सिडी देती है। उत्पादक और आयात कंपनियों को विनियंत्रित उर्वरकों को दाम तय करने की छूट है क्योंकि सरकार न्यूट्रियंट के आधार पर सब्सिडी देती है। हालांकि सरकार ने परोक्ष रूप से विनियंत्रित उर्वरकों और खासतौर से डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की कीमतों को तय करने की व्यवस्था जारी रखी है। डीएपी की कीमत 27000 रुपये प्रति टन और यह देश में यूरिया के बाद दूसरा सबसे अधिक खपत वाला उर्वरक है। खास बात यह है कि न्यूट्रिएंट के मामले में डीएपी भी उर्वरको से अधिक क्षमता वाला उर्वरक है। लेकिन ज्यादातर&nbsp; कॉम्पलेक्स और फॉस्फेटिक उर्वरक डीएपी से महंगे हैं। डीएपी की किल्लत के चलते इन उर्वरकों की खपत में बढ़ोतरी भी हुई है। उद्योग सूत्रों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में यूरिया की खपत होने की कोई संभावना नहीं दिखती है और कुछ साल में ही यह 450 लाख टन तक पहुंच सकती है। इसके पीछे जहां यूरिया की कम कीमत है वहीं राजनीतिक रूप से भी यूरिया की कीमत बहुत संवेदनशील मामला है।</p>
<p>जहां तक घरेलू उत्पादन की बात है तो देश में 2023-24 में यूरिया की उत्पादन 314 लाख टन रहा था लेकिन 2024-25 में यह घटकर 306 लाख टन रह गया वहीं चालू साल में अप्रैल से सितंबर, 2025 के दौरान देश में यूरिया उत्पादन पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 5.6 फीसदी घट गया। जबकि 2019 से 2022 के बीच देश में छह नये यूरिया उत्पादक संयंत्र लगे जिनकी सालाना क्षमता 13 लाख टन है। इनमें चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल की गडेपान (तीन) इकाई राजस्थान में, रामागुंडम फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल की रामागुंडम इकाई तेलंगाना में, पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में मैटिक्स फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल का संयंत्र और हिंदुस्तान उर्वरक एंड रसायन की उत्तर प्रदेश में गोरखपुर, झारखंड में सिंदरी और बिहार में बरौनी में स्थापित उर्वरक संयंत्रों से उत्पादन शुरू होने से देश यूरिया की उत्पादन क्षमता 219-20 की 24.5 लाख टन से बढ़कर 2023-24 में 314 ला टन हो गई।</p>
<p>लेकिन इसके साथ ही आंध्र प्रदेश के काकीनाडा स्थित नागार्जुन फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स और कानपुर के पनकी स्थित कानपुर फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्त में उत्पादन होने से उत्पादन क्षमता करीब 19 लाख टन घट गई।</p>
<p>जहां तक आपूर्ति की बात तो देश में अब यूरिया की उत्पादन क्षमता 300 से 310 लाख टन के बीच है। ऐसे बढ़ते आयात और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव से बचने के लिए देश में यूरिया की उत्पादन क्षमता में इजाफा करना होगा। अब यह सरकार को देखना है कि वह आयात पर निर्भरता बनाये रखती है या यूरिया उत्पादन कि घरेलू क्षमता बढ़ाती है।</p>
<p><strong>&nbsp;</strong></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूरिया की बढ़ सकती है किल्लत, इस साल खपत 400 लाख टन पार पहुंचने की संभावना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सैटेलाइट के माध्यम से मिट्टी में नाइट्रोजन का पता लगाने की विधि के लिए बेंगलुरु की कंपनी सत्युक्त को मिला पेटेंट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/satyukt-analytics-secures-patent-for-satellite-based-soil-nitrogen-estimation-method.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 01 Nov 2025 14:15:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/satyukt-analytics-secures-patent-for-satellite-based-soil-nitrogen-estimation-method.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">बेंगलुरु स्थित एग्री-टेक फर्म सत्युक्त एनालिटिक्स को सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग का इस्तेमाल करके मिट्टी में नाइट्रोजन का अनुमान लगाने के अपने नए तरीके के लिए पेटेंट (नंबर 571754) मिला है। मिट्टी में नाइट्रोजन का पता लगाने का यह तरीका टेक्नोलॉजी और डेटा-ड्रिवन जानकारी के जरिए प्रिसिजन खेती को आगे बढ़ाने के कंपनी के मिशन में एक अहम पड़ाव है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पहले मिट्टी के पोषक तत्व विश्लेषण में मेहनत और फील्ड सैंपलिंग के तरीकों पर भरोसा किया जाता था, जिसमें समय लगता था। इसके अक्सर अलग-अलग नतीजे मिलते थे। सत्युक्त की नई पेटेंट टेक्नोलॉजी सैटेलाइट डेटा से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा का सही अनुमान लगाकर इन चुनौतियों को दूर करती है, जिससे बड़े पैमाने पर जमीन से सैंपलिंग की जरूरत काफी कम हो जाती है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस इनोवेशन का मकसद किसानों के लिए उर्वरकों का इस्तेमाल बेहतर बनाने, फसल की पैदावार बढ़ाने और खेती के ज्यादा टिकाऊ तरीके अपनाने में मदद करना है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस कामयाबी पर टिप्पणी करते हुए, सत्युक्त एनालिटिक्स के सह-संस्थापक और CEO, डॉ. सत कुमार तोमर ने कहा, &ldquo;सत्युक्त में हमारा मिशन हमेशा इनोवेशन और विज्ञान के जरिए खेती को बदलना रहा है। यह पेटेंट ऐसी टेक्नोलॉजी डेवलप करने की हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। यह टेक्नोलॉजी न सिर्फ किसानों को एक्शन लेने लायक जानकारी देती है, बल्कि बड़े पैमाने पर सस्टेनेबल रिसोर्स मैनेजमेंट में भी मदद करती है।&rdquo;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">बेंगलुरु की सत्युक्त एनालिटिक्स अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म और API के जरिए मिट्टी की सेहत, फसल की हालत और मौसम के पैटर्न पर रियल-टाइम जानकारी देने के लिए रिमोट सेंसिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग का इस्तेमाल करती है। इस पेटेंट के साथ, कंपनी ने इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी पोर्टफोलियो और सैटेलाइट से चलने वाली एग्रीकल्चरल इंटेलिजेंस में अपनी लीडरशिप को और मजबूत किया है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6905c882dee33.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सैटेलाइट के माध्यम से मिट्टी में नाइट्रोजन का पता लगाने की विधि के लिए बेंगलुरु की कंपनी सत्युक्त को मिला पेटेंट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6905c882dee33.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीली मटर के आयात पर सरकार ने 30% शुल्क लगाया, सस्ते आयात से किसानों को भारी नुकसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/the-government-imposed-a-30-duty-on-the-import-of-yellow-peas-causing-huge-losses-to-farmers-due-to-cheap-imports.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 30 Oct 2025 09:50:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/the-government-imposed-a-30-duty-on-the-import-of-yellow-peas-causing-huge-losses-to-farmers-due-to-cheap-imports.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने <strong>पीली मटर (Yellow Peas)</strong> के आयात पर <strong>30 प्रतिशत शुल्क</strong> लगाने की घोषणा की है। वित्त मंत्रालय द्वारा बुधवार देर शाम जारी अधिसूचना के अनुसार यह निर्णय <strong>1 नवम्बर 2025</strong> से प्रभावी होगा। हालांकि, <strong>31 अक्टूबर 2025</strong> या उससे पहले बिल ऑफ लैडिंग (Bill of Lading) वाले जहाज़ों की खेपें इस शुल्क से मुक्त रहेंगी।</p>
<p>सरकार ने यह निर्णय उस समय लिया है जब उसे दालों के सस्ते आयात को लेकर राजनीतिक आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था। इससे पहले भारत सरकार ने <strong>पीली मटर के ड्यूटी-फ्री आयात</strong> को <strong>31 मार्च 2026</strong> तक अनुमति दी थी। परंतु लगातार बढ़ते आयात और घरेलू दामों पर दबाव के कारण किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा।</p>
<p>नए शुल्क में <strong>10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी</strong> और <strong>20 प्रतिशत कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC)</strong> शामिल हैं। यह कदम लंबे समय से जारी ड्यूटी-फ्री व्यवस्था की समाप्ति को दर्शाता है। सरकार ने <strong>दिसंबर 2023</strong> में पीली मटर के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी, जिसे पहले <strong>अक्टूबर 2024</strong> तक और फिर <strong>मार्च 2026</strong> तक बढ़ाया गया।</p>
<p><strong>कांग्रेस नेता जयराम रमेश</strong> ने इस नीति की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि विदेशी पीली मटर के ड्यूटी फ्री आयात से घरेलू दलहन उत्पादक किसानों को भारी नुकसान पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयातित मटर की कीमत 3,500 रुपये प्रति क्विंटल है, जो घरेलू दालों के 7,000-8,000 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी का लगभग आधा है।&nbsp;</p>
<p><strong>2024&ndash;25</strong> में भारत ने कुल <strong>67 लाख टन दालों का आयात</strong> किया, जिनमें से करीब <strong>30 लाख टन पीली मटर</strong> थी। हाल के महीनों में <strong>कनाडा और रूस</strong> जैसे देशों से सस्ती पीली मटर के आयात में तेज़ी आई थी, जिससे घरेलू बाज़ार पर दबाव बढ़ा। उम्मीद है कि पीली मटर के आयात पर 30 फीसदी शुल्क लगने से किसानों को सस्ते आयात की मार से कुछ राहत मिलेगी।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीली मटर के आयात पर सरकार ने 30% शुल्क लगाया, सस्ते आयात से किसानों को भारी नुकसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कैबिनेट ने रबी 2025&amp;#45;26 के लिए 37,952 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी को मंजूरी दी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-fertiliser-subsidy-of-rs-37952-crore-for-rabi-2025-26.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 28 Oct 2025 22:53:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-fertiliser-subsidy-of-rs-37952-crore-for-rabi-2025-26.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में रबी सीजन 2025-26 के लिए फॉस्फेटिक और पोटाशिक (पी एंड के) उर्वरकों पर पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरों को मंजूरी दी गई। इस निर्णय से किसानों को डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और एनपीकेएस (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर) ग्रेड सहित अन्य उर्वरक सस्ती दरों पर उपलब्ध होंगे।</p>
<p>सरकार के अनुसार, रबी 2025-26 के लिए फर्टिलाइजर सब्सिडी के लिए लगभग ₹37,952.29 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है, जो खरीफ 2025 की तुलना में करीब ₹736 करोड़ अधिक है। इस कदम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के बीच किसानों को राहत देना और उनकी उत्पादन लागत को संतुलित रखना है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय उर्वरकों की समय पर और सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, जिससे किसानों को बुवाई के दौरान किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। सरकार ने बताया कि हाल के महीनों में यूरिया, डीएपी, एमओपी और सल्फर जैसे उर्वरकों की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए सब्सिडी दरों को युक्तिसंगत बनाया गया है।</p>
<p>देशभर में किसानों को वर्तमान में 28 ग्रेड के फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरक, जिसमें डीएपी शामिल है, सब्सिडीयुक्त दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2010 से लागू पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत संचालित है।</p>
<p>सरकार ने कहा कि किसान हितैषी दृष्टिकोण के तहत वह पी एंड के उर्वरकों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। अनुमोदित एनबीएस दरों के अनुसार उर्वरक कंपनियों को सब्सिडी प्रदान की जाएगी ताकि यह लाभ सीधे किसानों तक पहुंच सके।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कैबिनेट ने रबी 2025-26 के लिए 37,952 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी को मंजूरी दी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि विश्वविद्यालयों में 85% तक फैकल्टी पद खाली, कृषि मंत्री ने संस्थानों की ग्रेडिंग व खाली पद भरने के निर्देश दिए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/up-to-85-percent-of-posts-in-agricultural-universities-are-vacant-the-agriculture-minister-has-given-instructions-to-fill-the-vacant-posts-soon.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 27 Oct 2025 22:09:14 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/up-to-85-percent-of-posts-in-agricultural-universities-are-vacant-the-agriculture-minister-has-given-instructions-to-fill-the-vacant-posts-soon.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div dir="auto">केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश में कृषि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और कृषि विश्वविद्यालय में खाली पदों को शीघ्र भरने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को उन्होंने पूसा, दिल्ली में 'राष्ट्रीय कृषि छात्र सम्मेलन' को संबोधित करते हुए आधुनिक शोध, नवाचार और तकनीक के माध्यम से कृषि शिक्षा का स्तर बढ़ाने पर जोर दिया। सम्मेलन में देशभर से 600 से अधिक यूनिवर्सिटी और कालेजों के कृषि छात्र-छात्राएं व फैकल्टी सदस्य शामिल हुए, जिनमें सम्मेलन स्थल पर मौजूद छात्रों के अलावा बाकी विद्यार्थी वर्चुअल जुड़े थे।&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में इस बात पर चिंता जताई कि कृषि शिक्षा से जुड़े कई पद खाली पड़े हैं। उन्होंने ICAR के महानिदेशक को सभी खाली पद शीघ्र भरने के निर्देश दिए हैं। कृषि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने तथा राज्यों में विश्वविद्यालयों व कॉलेजों के खाली पद शीघ्र भरने के लिए वे सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भी भेजेंगे और वहां के कृषि मंत्रियों से भी चर्चा करेंगे।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि कृषि के छात्र-छात्राओं के भविष्य से किसी भी कीमत पर खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। उन्होंने कमियों को दूर करने के लिए कृषि विद्यार्थियों की एक टीम बनाकर ICAR को रचनात्मक सुझाव लेने को कहा है।&nbsp;</div>
<div dir="auto">
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68ffa31a4bcfa.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
</div>
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</div>
<div dir="auto"><strong>कृषि विश्वविद्यालयों की ग्रेडिंग</strong></div>
<div dir="auto">केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय व कॉलेजों की ग्रेडिंग के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होना चाहिए। दुनिया में हो रहे बेहतर प्रयोगों का अध्ययन कर अपने देश में भी लागू करने के उपाय ICAR करें। उन्होंने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत, खेती के विकास के बिना नहीं हो सकता। कृषि का पूरा परिदृश्य बदलना है, जिसमें कृषि के छात्र-छात्राएं भी अपना योगदान दें।&nbsp;</div>
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<div dir="auto"><strong>कृषि शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाएंगे: डॉ एमएल जाट</strong></div>
<div dir="auto">ICAR के महानिदेशक एवं सचिव डेयर डॉ एमएल जाट ने कहा कि कृषि शिक्षा को भावी चुनौतियों के लिए तैयार किया जाएगा। इसमें AI और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीक का समावेश होगा। कृषि विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को फिलहाल ICAR द्वारा एक्रीडेशन दिया जाता है। लेकिन अब संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने और गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। जो संस्थान पर्याप्त फैकल्टी तथा सुविधाओं के बिना संचालित हो रहे हैं, उन कमियों को भी दूर किया जाएगा।&nbsp;</div>
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<div dir="auto">फिलहाल देश के कृषि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के 15 फीसदी से लेकर 85 फीसदी तक पद खाली हैं। इनमें बड़ी तादाद राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों की है। कृषि शिक्षा के क्षेत्र में आए निजी विश्वविद्यालयों को लेकर भी कई प्रकार की समस्याएं हैं।&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">डॉ एमएल जाट ने बताया कि नई शिक्षा नीति के पांच थिमेटिक एरिया हैं जिनमें उच्च शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट कृषि शिक्षा से संबंधित हैं।&nbsp;हमारा उद्देश्य गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा तो है ही साथ ही ऐसी शिक्षा है जो आंत्रप्रेन्योर भी तैयार करे। ताकि युवा स्टार्ट स्थापित कर सकें। वहीं इसके तहत हमें टेक्नोलॉजी और बिजनेस के मेगा ट्रेंड के तहत ग्लोबल स्तर पर इवोल्व हो रहे ट्रेंड भी कैप्चर करना है। ताकि हमारे युवा विश्व स्तर की शिक्षा हासिल कर आगे बढ़ सकेंगे।</div>
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<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><strong>कृषि छात्रों से संवाद</strong></div>
<div dir="auto">कृषि शिक्षा प्रभाग और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) द्वारा आयोजित &lsquo;राष्ट्रीय कृषि छात्र सम्मेलन&rsquo; में कृषि छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए और केंद्रीय कृषि मंत्री से सीधा संवाद किया। विद्यार्थियों ने कृषि क्षेत्र में आ रहे बदलावों, नई तकनीकों व सरकार की नीतियों से जुड़कर आगे बढ़ने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, साथ ही अपनी समस्याएं भी बताई। केंद्रीय कृषि मंत्री ने छात्र- छात्राओं की समस्याओं का समुचित समाधान करने की बात कही<span style="font-family: helvetica neue, helvetica, arial, sans-serif;"><span style="font-family: helvetica neue, helvetica, arial, sans-serif;">।&nbsp;</span></span></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">सम्मेलन में कृषि वैज्ञानिक, प्राध्यापक और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) तथा कृषि विश्वविद्यालयों के पदाधिकारी भी शामिल हुए और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी वर्चुअल शामिल हुए।</div>
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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि विश्वविद्यालयों में 85% तक फैकल्टी पद खाली, कृषि मंत्री ने संस्थानों की ग्रेडिंग व खाली पद भरने के निर्देश दिए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अक्टूबर के अंत में BIRC 2025 का आयोजन, 25,000 करोड़ रुपये का चावल निर्यात समझौता करने का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/birc-2025-targets-rs-25000-crore-in-rice-export-mous-set-to-strengthen-india-global-agri-footprint.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 25 Oct 2025 14:34:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/birc-2025-targets-rs-25000-crore-in-rice-export-mous-set-to-strengthen-india-global-agri-footprint.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस माह के अंत में, 30-31 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BIRC) 2025 का आयोजन किया जा रहा है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार इस सम्मेलन का मकसद 25,000 करोड़ रुपये के चावल निर्यात के MoU साइन करना और लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये के नए चावल बाजार की संभावनाएं तलाश करना है। मंत्रालय का कहना है कि इससे वैश्विक चावल ट्रेड में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।</p>
<p>BIRC 2025 चावल क्षेत्र में पारदर्शिता, मजबूती और सस्टेनेबिलिटी बढ़ाने के लिए किसानों, निर्यातकों, आयातकों, नीति निर्माताओं, फाइनेंसर, शोधकर्ताओं और लॉजिस्टिक उपलब्ध कराने वालों को साथ लाने के लिए एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करेगा। शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में APEDA के चेयरमैन अभिषेक देव ने बताया कि फिलीपींस, घाना, नामीबिया और गाम्बिया के विदेश मंत्री दो दिन की कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेंगे।</p>
<p>वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 172 देशों को चावल का निर्यात किया। यह दुनिया के सबसे बड़े चावल उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है। बीते वर्ष भारत ने 12.95 अरब डॉलर का 201 लाख मीट्रिक टन चावल एक्सपोर्ट किया, जो दुनिया का लगभग 28% है। घरेलू उत्पादन 15 करोड़ टन तक पहुंच गया और पैदावार 2014&ndash;15 के 2.72 टन से बढ़कर 3.2 टन प्रति हेक्टेयर हो गई।</p>
<p>यह कार्यक्रम इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) और APEDA द्वारा वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, उपभोक्ता मामले मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय, सहकारिता मंत्रालय और कृषि मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसमें भाग लेने वाली राज्य सरकारों में ओडिशा, तेलंगाना, मेघालय, असम और मणिपुर शामिल हैं, जबकि NCEL, NCOL, BBSSL और कृभको जैसे कोऑपरेटिव भी हिस्सा लेंगे। इसमें 3,000 से ज्यादा किसानों और एफपीओ, 80 से ज्यादा देशों के 1,000 विदेशी खरीदारों और 2,500 निर्यातकों तथा मिलर्स के आने की उम्मीद है।</p>
<p>आठ से ज्यादा टेक्निकल सेशन में पॉलिसी बनाने वालों, ट्रेड बॉडी, रिसर्च ऑर्गनाइजेशन और इंडस्ट्री के विशेषज्ञों के साथ चर्चा होगी। वाणिज्य विभाग, APEDA, IREF, ICAR और इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (IRRI) मिलकर अंतिम विजन डॉक्यूमेंट को अगले छह महीनों में अंतिम रूप देंगे।</p>
<p><strong>चावल है खाद्य सुरक्षा का आधार</strong><br />दुनिया भर में चावल खाद्य सरक्षा की रीढ़ बना हुआ है। चार अरब से अधिक लोग चावल खाते हैं। इससे &nbsp;100 देशों में लगभग 15 करोड़ छोटे किसानों को गुजारा करने में मदद मिलती है। दुनिया भर में चावल का उत्पादन वर्ष 1961 के 21.6 करोड़ टन से बढ़कर 77.6 करोड़ टन हो गया है। इसकी मार्केट वैल्यू लगभग 330 अरब डॉलर है। चावल की खेती में दुनिया के 16.7 करोड़ हेक्टेयर में सिंचाई के पानी का 24&ndash;30% इस्तेमाल होता है। पर्यावरण की चुनौतियों को पहचानते हुए कॉन्फ्रेंस में चावल की खेती को सस्टेनेबल बनाने के लिए क्लाइमेट-स्मार्ट खेती, अच्छी सिंचाई, सर्टिफिकेशन और ट्रेसेबिलिटी पर फोकस किया जाएगा।</p>
<p><strong>टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की खास बातें</strong><br />BIRC 2025 का एक बड़ा आकर्षण भारत की पहली AI-पावर्ड चावल सॉर्टिंग और ग्रेडिंग टेक्नोलॉजी होगी, जिसे एग्रीटेक पैवेलियन में लाइव लॉन्च किया जाएगा। बिग डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से चलने वाला यह सिस्टम अनाज के रंग, आकार और बनावट का एक साथ विश्लेषण करता है, जिससे ज्यादा प्रिसिजन के साथ लागत कम होती है।</p>
<p>एक और खास बात महिला आंत्रप्रेन्योर, स्टार्टअप और MSME पैवेलियन हैं, जिसमें जलवायु सहिष्णु कृषि, कटाई के बाद की टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन का इस्तेमाल करके ट्रेसेबिलिटी सॉल्यूशन और डिजिटल मार्केटप्लेस टूल जैसे इनोवेशन दिखाए जाएंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>राज्यों की सहभागिता</strong><br />जम्मू-कश्मीर, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, ओडिशा, मेघालय, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के पवेलियन GI-टैग्ड चावल की किस्में, सस्टेनेबल खेती के मॉडल और निवेश के मौकों को दिखाएंगे। मेघालय पारंपरिक किस्मों जैसे पनाह इओंग, म्यनरी, मांगसांग, मिनिल और खॉ बिरिउन का प्रदर्शन करेगा। इनकी खेती बारिश के पानी से की जाती है।&nbsp;</p>
<p>नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) के तहत भारत ऑर्गेनिक्स इस कार्यक्रम में अपनी ऑर्गेनिक चावल रेंज और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर प्लेटफॉर्म लॉन्च करेगा। पारंपरिक वैरायटी जैसे काला नमक, इंद्रायणी, गोबिंदभोग, ब्लैक राइस और रेड मट्टा को भी प्रमोट किया जाएगा ताकि सर्टिफाइड-ऑर्गेनिक चावल को बढ़ावा दिया जा सके।</p>
<p>DGFT के ट्रेड कनेक्ट पोर्टल को भी निर्यातकों के लिए एक यूनिफाइड डिजिटल गेटवे के तौर पर प्रमोट किया जाएगा। ICAR और IRRI द्वारा खेती के अच्छे तरीकों और पानी बचाने वाले तरीकों पर ट्रेनिंग सेशन में सस्टेनेबिलिटी पर फोकस रहेगा।</p>
<p>मंत्रालय के अनुसार आगे BIRC का आयोजन हर साल किया जाएगा। यह चावल के व्यापार, पॉलिसी पर चर्चा और टेक्नोलॉजिकल सहयोग के लिए एक फ्लैगशिप ग्लोबल प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करेगा। वर्ष 2025 के आयोजन के पार्टनर देशों में फिलीपींस, म्यांमार, नाइजर, कोमोरोस, जॉर्डन, लाइबेरिया, गाम्बिया और सोमालिया शामिल हैं, जबकि IRRI-SARC, E&amp;Y और S&amp;P ग्लोबल नॉलेज पार्टनर के तौर पर काम करेंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अक्टूबर के अंत में BIRC 2025 का आयोजन, 25,000 करोड़ रुपये का चावल निर्यात समझौता करने का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमेरिका से जीएम मक्का और सोयामील आयात की आशंका, किसानों के साथ घरेलू उद्योग भी चिंतित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/threat-of-gm-corn-and-soymeal-imports-from-the-us-has-raised-concerns-about-farmers-as-well-as-domestic-industry.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 24 Oct 2025 18:03:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/threat-of-gm-corn-and-soymeal-imports-from-the-us-has-raised-concerns-about-farmers-as-well-as-domestic-industry.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर चल रही वार्ताओं के बीच जीएम मक्का और सोयामील के आयात की आशंका बढ़ गई है। इससे चिंतित सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) ने वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल को पत्र लिखकर अमेरिका से आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) सोयामील के आयात की अनुमति न देने का आग्रह किया है। एसोसिएशन ने यह भी कहा कि भारत के पास घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त सोयामील स्टॉक है और आयात की आवश्यकता नहीं है।</p>
<p>गौरतलब है कि सोयाबीन के साथ-साथ मक्का के दाम भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे चल रहे हैं जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में मक्का और सोयामील के आयात का रास्ता खुलता है तो इससे किसानों को बड़ा झटका लगेगा और घरेलू उद्योग भी इससे अधूता नहीं रहेगा।</p>
<p>सोपा ने सरकार को लिखे पत्र में कहा, "द्विपक्षीय व्यापार समझौते या आयात अनुमति के अंतर्गत जीएम सोयामील को शामिल करने से बचें और भारत की गैर-जीएमओ सोयाबीन की खेती, प्रसंस्करण और निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करें।"</p>
<p>सोपा के अध्यक्ष देविश जैन का कहना है कि इस समय जीएम सोयामील के आयात की अनुमति देने से भारत के कृषि क्षेत्र के लिए विनाशकारी परिणाम होंगे। इससे सोयाबीन की कीमतें, जो पहले से ही न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे हैं, और कम हो सकती हैं। किसानों और सोयाबीन प्रोसेसिंग उद्योग पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।</p>
<p>मक्का आयात को लेकर भी कमोबेश यही स्थिति है। एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की सफलता के दावों के बावजूद इस साल मक्का के दाम कई मंडियों में 2400 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी के मुकाबले 1000-500 रुपये तक गिर चुके हैं। मध्यप्रदेश की कई मंडियों में तो किसानों को मक्का महज 1200-1300 रुपये के भाव पर मक्का बेचना पड़ रहा है। भारतीय किसान संघ समेत कई किसान संगठन सरकार से जीएम मक्का के आयात की अनुमति न देने का आग्रह कर चुके हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>अमेरिका से मक्का और सोयामील के आयात से आत्मनिर्भरता के दावों को भी झटका लगेगा। एक ओर जहां सरकार खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता लाने की कोशिशों में जुटी है, <span>वहीं प्रमुख तिलहन फसल सोयाबीन की कीमतों में गिरावट किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। मध्यप्रदेश में सोयाबीन किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार भावांतर योजना लेकर आई है। लेकिन उससे भी किसानों के पूरे नुकसान की भरपाई होना मुश्किल है।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमेरिका से जीएम मक्का और सोयामील आयात की आशंका, किसानों के साथ घरेलू उद्योग भी चिंतित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विकसित कृषि संकल्प अभियान से कृषि प्रसार को नया विस्तार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/vikasit-krishi-sankalp-abhiyan-a-milestone-in-agricultural-extension.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 21 Oct 2025 06:45:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/vikasit-krishi-sankalp-abhiyan-a-milestone-in-agricultural-extension.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत में कृषि से जुड़े ज्ञान-विज्ञान के प्रचार-प्रसार का बड़ा पुराना और मजबूत तंत्र रहा है। लेकिन बदलते दौर के साथ नई चुनौतियां, नई तकनीक और नए लक्ष्य सामने हैं। जलवायु परिवर्तन जैसे संकट के बीच खेती को किसानों के लिए फायदे का सौदा बनाना है। आधुनिक तकनीक, उभरते बाजार और किसानों के बीच की दूरी को मिटाना है।&nbsp;<br />विज्ञान और किसान के बीच की दूरी पाटने यानी &lsquo;लैब टू लैंड&rsquo; की अवधारणा को धरातल पर उतारने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 29 मई से 12 जून 2025 तक खरीफ सीजन के लिए देशव्यापी &lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo; चलाया गया। इसके तहत किसानों को खेती की उन्नत बीज, तकनीक और पद्धतियों की जानकारी दी गई, ताकि खेती की लागत घटाने और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सके।</p>
<p>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 113 संस्थानों, 731 कृषि विज्ञान केंद्रों और वैज्ञानिकों की 2170 टीमों ने गांव-गांव तक पहुंचकर ज्ञान-विज्ञान का अभूतपूर्व प्रसार किया। देश भर में 1.42 लाख गांवों के 1.35 करोड़ से अधिक किसानों की भागीदारी ने इस महाभियान को कृषि प्रसार की ऐतिहासिक मुहिम बना दिया।</p>
<p>केंद्रीय कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव तथा आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट बताते हैं कि किसानों का जीवन बदलना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। &lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo; में हमारे सभी संस्थान, वैज्ञानिक और देशभर के किसान &lsquo;एक राष्ट्र-एक कृषि-एक टीम&rsquo; के रूप में एकजुट हुए। सबके सहयोग से यह अभूतपूर्व अभियान साबित हुआ। किसानों से सीधा संवाद हुआ तो कई बातें पता चलीं। सबसे बड़ी सीख यह है कि रिसर्च के मुद्दे सिर्फ दिल्ली में बैठकर तय नहीं होंगे। शोध की दिशा अब किसानों की आवश्यकता के आधार पर तय की जाएगी।</p>
<p>मेरठ के दबथुवा गांव में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चारपाई पर बैठकर किसानों से चर्चा की तो गन्ना किसानों की दिक्कतें सामने आईं। मध्यप्रदेश में सोयाबीन के किसानों ने हर्बिसाइड से बर्बाद हुई फसल के बारे में बताया। किसानों ने घटिया खाद-बीज और कीटनाशकों की समस्या सामने रखी। इस तरह किसानों के मुद्दों और समस्याओं के बारे में पता चला, जिनके समाधान के प्रयास किए गये।&nbsp;</p>
<p>आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. देवेंद्र कुमार यादव ने बताया कि यह अभियान किसानों को उन्नत तकनीकों से जोड़ने और कृषि को समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। 15 दिनों तक चले इस अभियान के तहत वैज्ञानिकों ने किसानों के बीच पहुंचकर उनसे सीधा संवाद किया। उस क्षेत्र की जलवायु, पानी, मिट्टी व अन्य बातों का ध्यान रखते हुए कौन-सी फसल बोनी चाहिए, कौन-सी किस्म होनी चाहिए और खाद का कितना संतुलित उपयोग करना चाहिए, ये सब जानकारियां दी गईं। प्राकृतिक खेती के संबंध में भी किसानों से चर्चा की गई।&nbsp;</p>
<p><strong>महिलाओं की भागीदारी</strong><br />&lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo; के तहत देश भर के 60 हजार से अधिक गांवों में किसानों से संवाद हुआ। अभियान की एक प्रमुख उपलब्धि महिला किसानों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। अभियान में शामिल 1.35 करोड़ से अधिक किसानों में 95.7 लाख पुरुष और 39.7 लाख (यानी 29 फीसदी) महिलाएं थीं। विशेषकर असम, ओडिशा, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में महिलाओं ने अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पूर्वोत्तर राज्यों की महिलाओं ने अनुपातिक दृष्टि से अभियान में असाधारण भागीदारी निभाई।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68ea3bb691286.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>आदिवासी जिलों में आयोजन</strong><br />विकसित कृषि संकल्प अभियान का आयोजन देश के 176 आदिवासी जिलों में भी किया गया। यहां 504 टीमों ने 31,048 गांवों में कुल 15,445 कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें 25.5 लाख से अधिक किसानों ने भाग लिया। इनमें ओडिशा सबसे आगे रहा, जहां 5,093 गांवों में 948 कार्यक्रमों के माध्यम से 5.83 लाख आदिवासी किसानों तक पहुंचा गया। इसके बाद मध्य प्रदेश और झारखंड में आदिवासी किसानों ने भाग लिया।</p>
<p><strong>आकांक्षी जिले</strong><br />यह अभियान देश के 112 आकांक्षी जिलों में पहुंचकर अपनी सार्थकता साबित करने में कामयाब रहा। आकांक्षी जिलों के लगभग 23 हजार गांवों में 20 लाख से अधिक किसानों से संपर्क हुआ। आकांक्षी जिलों में किसानों तक पहुंच के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा जहां 2,936 गांवों में 818 कार्यक्रमों के माध्यम से 2.93 लाख किसानों तक पहुंचा गया। इसके बाद ओडिशा में 3.08 लाख, झारखंड में 2.35 लाख और बिहार में 2.18 लाख किसानों ने भाग लिया।<br />इस तरह यह अभियान ना सिर्फ अपनी भौगोलिक पहुंच के लिहाज से, बल्कि महिला किसानों, आदिवासी इलाकों और आकांक्षी जिलों तक पहुंच बनाने की दृष्टि से मील का पत्थर साबित हुआ है।&nbsp;</p>
<p><strong>फोलोअप प्लान</strong><br />विकसित कृषि संकल्प अभियान के बाद आगे की राह के बारे में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि अब यह अभियान थमेगा नहीं, बल्कि अलग-अलग फसलों के लिए भी जारी रहेगा। उनका कहना है कि ज्ञान, अनुसंधान व क्षमताओं का जो गैप है, उसे पाटने की कोशिश करेंगे। फसलवार और क्षेत्रवार सम्मेलन आयोजित कर रोडमैप तैयार किया जाएगा।&nbsp;<br />कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को हर जिले के लिए नोडल एजेंसी बनाया जाएगा, जो किसानों के हित में कोऑर्डिनेट करेगी। केवीके के वैज्ञानिक अनिवार्य रूप से सप्ताह में तीन दिन खेतों में किसानों के बीच जाएंगे। राज्यवार कृषि के लिए आईसीएआर की तरफ से एक नोडल अफसर तय किया जाएगा जो उस राज्य में सारे वैज्ञानिक प्रयोगों और समस्याओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखकर सलाह और सुझाव देगा।</p>
<p><strong>घटिया खाद-बीज पर शिकंजा</strong><br />&lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo; ने किसानों की कई व्यावहारिक समस्याओं को उजागर किया। खासतौर पर घटिया खाद-बीज और कीटनाशकों की शिकायतें सामने आई हैं। इस मसले पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सख्त रुख अपनाने हुए अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मध्य प्रदेश में हर्बिसाइड से सोयाबीन की फसल को हुए नुकसान और बायोस्टीमुलेंट्स के मामले में कृषि मंत्री ने सख्ती दिखाई है। जिन कंपनियों के उत्पाद से फसल को नुकसान हुआ है, उनके लाइसेंस रद्द किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>किसानों के नवाचार</strong><br />अभियान के दौरान किसानों के कई नवाचार भी सामने आए, जिन्हें देखकर वैज्ञानिक भी हैरान थे। किसानों ने स्थानीय परिस्थितियों और जरूरत के हिसाब से नए प्रयोग किए हैं। इन नवाचारों को वैज्ञानिक मान्यता दिलाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।<br />किसानों ने ऐसा उपकरण विकसित करने की जरूरत बताई जिससे नकली खाद और कीटनाशक का पता लगाया जा सके। डॉ.एम.एल. जाट ने बताया कि अभियान के दौरान शोध के लिए लगभग 500 नए विषय उभरकर सामने आए हैं, जो अब शोध की दिशा तय करेंगे। दलहन-तिलहन की उत्पादकता बढ़ाने और छोटे किसानों के लिए कृषि यंत्र विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।&nbsp;</p>
<p><strong>रबी सीजन के लिए अभियान</strong><br />रबी की फसल के लिए &lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo; फिर से चल रहा है। इसके लिए दो दिवसीय सम्मेलन नई दिल्ली में 15 और 16 सितंबर को आयोजित किया गया। अभियान की शुरुआत 3 अक्टूबर, 2025 को विजय पर्व के साथ हुई और यह 18 अक्टूबर, धनतेरस तक चलेगा।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ विकसित कृषि संकल्प अभियान से कृषि प्रसार को नया विस्तार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान हाई कोर्ट ने सेफ्टी नियम बनने तक जीएम फ़ूड की बिक्री पर रोक लगाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rajasthan-hc-halts-sale-of-gm-foods-until-safety-regulations-are-established.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 20 Oct 2025 08:34:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rajasthan-hc-halts-sale-of-gm-foods-until-safety-regulations-are-established.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जीएम-मुक्त भारत गठबंधन (The Coalition for a GM-Free India) ने राजस्थान उच्च न्यायालय के उस आदेश का स्वागत किया है जिसमें कहा गया है कि किसी भी खाद्य पदार्थ/पैकेज्ड खाद्य पदार्थ के आयात की अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक कि उन्हें निर्यातक देश द्वारा जीएम-मुक्त प्रमाणित और लेबल न किया गया हो। साथ ही, इसने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 की धारा 22 के तहत वैधानिक नियम बनाए बिना भारत में किसी भी जीएम खाद्य पदार्थ की बिक्री, निर्माण, वितरण या आयात की अनुमति देने पर रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश में कहा कि उनकी टिप्पणियां और निष्कर्ष जनहित याचिकाओं के एक समूह पर सर्वोच्च न्यायालय के जुलाई 2024 के फैसले के अनुरूप हैं। उच्च न्यायालय ने एफएसएसएआई के साथ-साथ केंद्र सरकार से छह महीने के भीतर जीएम खाद्य पदार्थों पर नियम बनाने और अधिसूचित करने को भी कहा।&nbsp;</p>
<p>जीएम-मुक्त भारत गठबंधन का कहना है कि उसने पहले ही जुलाई 2024 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले में एक गंभीर विसंगति की ओर इशारा किया है, जिसमें खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 की धारा 23 (लेबलिंग के संबंध में) को लागू करने का आदेश दिया गया था, जबकि पहले धारा 22 को लागू करने का आदेश नहीं दिया गया था। उसका कहना है कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी नियामक ढांचे के बिना, धारा 22 के नियमों के माध्यम से लेबलिंग नियमों को लागू करना अर्थहीन है और खाद्य सुरक्षा कानून का मजाक उड़ाना है। उच्च न्यायालय के आदेश में "एफएसएसएआई के साथ-साथ भारत सरकार को 2006 के अधिनियम की धारा 22 को उसके सही अर्थों में लागू करने और आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों के संबंध में समयबद्ध तरीके से मानक और सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाने का निर्देश दिया गया है।"&nbsp;</p>
<p>राजस्थान उच्च न्यायालय का यह फैसला ऐसे महत्वपूर्ण समय में आया है जब अमेरिका अपने जीएम उत्पादों को भारत में लाने के लिए घरेलू कानूनों, नियमों और नीतियों से समझौता करते हुए पुरजोर कोशिश कर रहा है। यह फैसला यह भी सुनिश्चित करता है कि स्व-प्रमाणन (सेल्फ सर्टिफिकेशन) लागू न हो। केवल निर्यातक देश की एक अधिकृत एजेंसी ही भारत को निर्यात किए जा रहे सभी खाद्य पदार्थों की जीएम-मुक्त स्थिति को प्रमाणित कर सकती है। अमेरिकी सरकार ने पहले भी प्रस्तावित विनियमन पर आपत्तियां उठाकर भारत में आने वाले प्रसंस्कृत जीएम खाद्य से निपटने के एफएसएसएआई के प्रयास को कमजोर किया है।</p>
<p>उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ के आदेश में कहा गया है कि "किसी भी जीएम खाद्य पदार्थ, चाहे वह घरेलू रूप से उगाया गया हो या आयातित, जिसमें खाद्य तेल भी शामिल हैं, को व्यापक कानूनी जांच के बिना भारतीय रसोई तक पहुंचने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जैसा कि संसदीय समितियों द्वारा पहले ही आगाह किया जा चुका है।"&nbsp;</p>
<p>अतीत में, जब सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने भारत में अवैध जीएम खाद्य पदार्थों की मौजूदगी का खुलासा किया था, तब एफएसएसएआई ने कुछ खाद्य उत्पादों में जीएम अवयवों की मौजूदगी से इनकार किया था। एफएसएसएआई का यह इनकार चौंकाने वाला है, क्योंकि कुछ खाद्य कंपनियों ने खुद अपने लेबल पर जीएम की मौजूदगी का ज़िक्र किया था!&nbsp;</p>
<p>जीएम-मुक्त भारत गठबंधन की कविता कुरुगंती ने कहा, "जीईएसी और एफएसएसएआई जैव सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और भारतीयों की सुरक्षा करने के अपने वैधानिक कर्तव्य को निभाने में लगातार विफल रहे हैं। राजस्थान उच्च न्यायालय का आदेश इन वैधानिक नियामक संस्थाओं के लिए एक सही रिमाइंडर है कि वे अपने दायित्वों को ज़िम्मेदारी और जवाबदेही के साथ पूरा करें। उच्च न्यायालय का आदेश यह सुनिश्चित करता है कि भारत सरकार पर अमेरिकी दबाव के कारण आम भारतीयों की बलि न चढ़ाई जाए।"&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान हाई कोर्ट ने सेफ्टी नियम बनने तक जीएम फ़ूड की बिक्री पर रोक लगाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[World Food Day: कृषि सचिव ने पोषण के प्रति संवेदनशील कृषि का आह्वान किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/world-food-day-2025-agriculture-secretary-emphasized-the-need-for-nutrition-sensitive-agriculture.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 18 Oct 2025 13:15:29 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/world-food-day-2025-agriculture-secretary-emphasized-the-need-for-nutrition-sensitive-agriculture.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>विश्व खाद्य दिवस 2025 के अवसर पर भारत और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने 80 वर्षों की साझेदारी का जश्न मनाया। इस अवसर पर कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने भारत की खाद्य-संकट से वैश्विक कृषि शक्ति बनने की यात्रा को सराहा और FAO की भूमिका को सराहा, जिसने भारत की अनाज आत्मनिर्भरता, फसल विविधीकरण और सतत कृषि में योगदान दिया। उन्होंने पोषण-संवेदनशील कृषि, जलवायु अनुकूलन और डिजिटल नवाचार पर जोर दिया ताकि सभी के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और सस्ती आहार उपलब्ध हो।</p>
<p>अपने संबोधन में सचिव ने खाद्यान्नों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने तथा नवाचार और बेहतर कार्यप्रणाली के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में एफएओ की तकनीकी विशेषज्ञता और मंत्रालय के साथ स्थायी साझेदारी की सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य में पोषण-सुग्राही (संवेदनशील) कृषि पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, जिससे सभी के लिए स्वस्थ, विविध, सुरक्षित और किफायती आहार सुनिश्चित हो सके।</p>
<p>डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि स्वतंत्रता के समय खाद्यान्न की कमी से जूझने वाला भारत अब खाद्यान्न आधिक्य वाले राष्ट्र में तब्दील हो गया है, जो 1.4 अरब लोगों को भोजन उपलब्ध कराता है और वैश्विक खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन दूरदर्शी नीतियों, वैज्ञानिक नवाचार और एफएओ के साथ नजदीकी साझेदारी में मंत्रालय के नेतृत्व में मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग से प्रेरित है।</p>
<p>1945 से एफएओ के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि जब उत्पादन सिस्टम, वितरण व्यवस्था और नीति नवाचार सामंजस्य के साथ मिलकर काम करते हैं, तो किस प्रकार भूख और कुपोषण को बड़े पैमाने पर कम किया जा सकता है।</p>
<p>सचिव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि दुनिया की कृषि भूमि और ताजे पानी के संसाधनों का चार प्रतिशत से भी कम हिस्से पर कब्जा होने के बावजूद भारत ने राष्ट्रीय खाद्य आत्मनिर्भरता हासिल की है और सार्वजनिक भंडारण और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से मूल्य स्थिरता बनाए रखी है। ये व्यवस्थाएं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 800 मिलियन (80 करोड़) से अधिक लोगों के लिए किफायती भोजन तक पहुंच सुनिश्चित करती हैं, जो खाद्य सुरक्षा के प्रति भारत के अधिकार-आधारित दृष्टिकोण को दर्शाती है। उन्होंने आगे रेखांकित किया कि भारत की कृषि प्रगति इसकी 146 मिलियन छोटी और सीमांत जोतों में निहित है, जो ग्रामीण आजीविका की रीढ़ हैं। मौसम की मार झेलने वाले बीज, रियायती ऋण, फसल बीमा और जलवायु-स्मार्ट व्यवस्थाओं में लक्षित पहल ने उत्पादकता, आत्मनिर्भरता और आय में वृद्धि की है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68f328b6a2841.jpg" alt="" /></p>
<p>स्थिरता और जलवायु अनुकूलन के लिए भारत की प्रतिबद्धता जताते हुए सचिव ने देश भर में सूक्ष्म सिंचाई, एकीकृत और प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि एवं एग्रीस्टैक जैसे डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर की गई पहल पर प्रकाश डाला, जो किसानों को प्रौद्योगिकी और वास्तविक समय के डेटा के साथ सशक्त बनाते हैं।</p>
<p>इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एफएओ की कॉफी टेबल बुक, 'सोइंग होप, हार्वेस्टिंग सक्सेस' का विमोचन था, जो एफएओ की आठ दशक लंबी यात्रा और भारत के साथ कृषि व संबद्ध क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धियों का वर्णन करती है।</p>
<p>इस कार्यक्रम में भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर श्री शोम्बी शार्प और भारत में एफएओ के प्रतिनिधि श्री ताकायुकी हागिवारा भी उपस्थित थे। श्री शार्प ने कहा कि भारत में एफएओ की कहानी, वैश्विक कृषि लीडर के रूप में भारत के उदय की कहानी भी है, जबकि श्री हागिवारा ने 2047 तक भारत के विकसित भारत के दृष्टिकोण का समर्थन करने के लिए एफएओ की प्रतिबद्धता जताई।</p>
<p>इस वर्ष के विश्व खाद्य दिवस की थीम 'बेहतर भोजन और बेहतर भविष्य के लिए हाथ मिलाना' के अनुरूप इस समारोह में भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, संयुक्त राष्ट्र और रोम स्थित एजेंसियों के प्रतिनिधि, विकास में भागीदार और देश भर के किसान एक साथ आए।</p>
<p>अंत में डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि वैश्विक खाद्य चुनौतियों से निपटने के लिए स्थानीय वास्तविकताओं में निहित वैश्विक समाधान की आवश्यकता है। उन्होंने सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने के लिए गहन अंतरराष्ट्रीय सहयोग, खुले ज्ञान-साझाकरण और सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्व खाद्य दिवस पर हार्दिक बधाई दी और सभी को खुशहाल एवं समृद्ध दिवाली की शुभकामनाएं भी दीं।</p>
<p><strong>वर्ल्ड फूड फोरम 2025 में एकजुटता, विज्ञान और निवेश के माध्यम से कृषि-खाद्य प्रणालियों में वैश्विक बदलाव का संकल्प</strong></p>
<p>संयुक्त राष्ट्र के रोम स्थित खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) मुख्यालय में आयोजित विश्व खाद्य मंच (World Food Forum) 2025 में विश्व समुदाय ने एकजुटता, विज्ञान और निवेश के माध्यम से कृषि-खाद्य प्रणालियों के रूपांतरण के प्रति नया वैश्विक संकल्प व्यक्त किया। इस वर्ष का फोरम FAO की 80वीं वर्षगांठ और विश्व खाद्य दिवस 2025 के ऐतिहासिक उत्सव के रूप में भी मनाया गया।</p>
<p>&ldquo;हैंड इन हैंड फॉर बेटर फूड्स एंड ए बेटर फ्यूचर&rdquo; विषय पर आयोजित इस मंच में 300 से अधिक कार्यक्रम हुए, जिनमें 16,500 प्रत्यक्ष प्रतिभागी और 60,000 से अधिक ऑनलाइन प्रतिभागी शामिल हुए। सोशल मीडिया के माध्यम से यह आयोजन 1.5 अरब लोगों तक पहुंचा। हैंड-इन-हैंड निवेश मंच ने 17.2 अरब डॉलर मूल्य के अवसर प्रदर्शित किए, जिनमें 31 देशों और 6 क्षेत्रीय पहलों ने ऐसी योजनाओं को साझा किया, जिनसे 16 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन में परिवर्तन लाया जा सकेगा।</p>
<p>FAO के महानिदेशक क्यू डोंग्यू (QU Dongyu) ने समापन सत्र में कहा कि विश्व खाद्य मंच एक परिवर्तनकारी आंदोलन बन चुका है, जो उद्देश्य, एकजुटता और नवाचार से प्रेरित है। उन्होंने प्रतिभागियों से कहा, &ldquo;रोम से मिली प्रेरणा को आगे ले जाएं और इसे प्रगति में बदलें।&rdquo;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68f328b6e8111.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ World Food Day: कृषि सचिव ने पोषण के प्रति संवेदनशील कृषि का आह्वान किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शिवराज सिंह चौहान ने ‘दालों में आत्मनिर्भरता मिशन’ और ‘प्रधानमंत्री धन&amp;#45;धान्य कृषि योजना’ के समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-singh-chouhan-directs-timely-rollout-of-self-reliance-in-pulses-mission-and-pradhan-mantri-dhan-dhaanya-krishi-yojana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 18 Oct 2025 11:01:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-singh-chouhan-directs-timely-rollout-of-self-reliance-in-pulses-mission-and-pradhan-mantri-dhan-dhaanya-krishi-yojana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने &lsquo;दलहन आत्मनिर्भरता मिशन&rsquo; और &lsquo;प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना&rsquo; से संबंधित एक उच्चस्तरीय बैठक मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ की। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने इन योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए शिवराज सिंह 11 मंत्रालयों के मंत्रियों के साथ जल्द ही बैठक करेंगे।</p>
<p>बैठक में बताया गया कि जिलेवार क्लस्टर बनाकर दलहन आत्मनिर्भरता मिशन पर काम किया जाएगा। इस संबंध में राज्यों से क्लस्टर निर्माण के लिए सहयोग लिया जा रहा है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को जमीनी स्तर पर बेहतर तरीके से लागू करने के लिए भी शिवराज ने अधिकारियों को निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि दलहन आत्मनिर्भरता मिशन और प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन जल्द शुरू होने से किसानों को फायदा होगा।</p>
<p>प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को देश के 100 आकांक्षी जिलों में कृषि उत्थान के लिए 11 मंत्रालयों की 36 उप-योजनाओं को समन्वित करते हुए लॉन्च किया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए शिवराज सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल्द ही इन 11 मंत्रालयों के मंत्रियों और सचिवों सहित नीति आयोग के अधिकारियों के साथ एक बैठक आयोजित की जाए, जिससे योजना का अधिकतम लाभ देश के किसानों को मिल सके।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए इस मिशन से संबंधित राज्यों से जुड़े नोडल अधिकारियों के साथ भी एक बैठक आयोजित करने का निर्देश अधिकारियों को दिया। गत 11 अक्टूबर को पूसा, दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का शुभारंभ किया था।</p>
<p>इससे पहले 16 जुलाई 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंजूरी दी थी। वित्त वर्ष 2025-26 से ये योजनाएं छह वर्ष की अवधि के लिए चलाई जाएगी। इसका वार्षिक खर्च 24,000 करोड़ रुपये है। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन छह वर्षों की अवधि में 11,440 करोड़ रुपये के खर्च के साथ क्रियान्वित किया जाएगा। इस मिशन से 2030-31 तक दलहन क्षेत्रफल को 275 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 310 लाख हेक्टेयर तक ले जाने, उत्पादन 242 लाख टन से 350 लाख टन तक बढ़ाने और उत्पादकता को 1130 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक बढ़ाने की उम्मीद है। उत्पादकता में वृद्धि के साथ-साथ यह मिशन बड़ी संख्या में रोजगार सृजन भी करेगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ शिवराज सिंह चौहान ने ‘दालों में आत्मनिर्भरता मिशन’ और ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ के समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एमएसपी से 1500 रुपये नीचे तक बिक रही कपास, ड्यूटी फ्री आयात से किसानों को झटका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cotton-selling-up-to-rs-1500-below-msp-duty-free-imports-shock-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 17 Oct 2025 13:07:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cotton-selling-up-to-rs-1500-below-msp-duty-free-imports-shock-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="201" data-end="916">देश के कपास किसानों को शुल्क-मुक्त कॉटन आयात का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। देश के अधिकांश हिस्सों में 8,110 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मुकाबले किसानों को 6,500 से 7,000 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत पर कपास बेचनी पड़ रही है। वहीं, एमएसपी पर कपास खरीदने के लिए अधिकृत सरकारी एजेंसी कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) अभी खरीदारी की पूरी तैयारी नहीं कर पाई है, क्योंकि जिनिंग इकाइयों के साथ उसके अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) नहीं हुए हैं। नतीजतन, किसानों को निजी व्यापारियों को अपनी कपास एमएसपी से नीचे भाव पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। चालू विपणन सीजन (2025-26) के लिए केंद्र सरकार ने मीडियम स्टेपल कपास का एमएसपी 7,710 रुपये और लॉन्ग स्टेपल के लिए 8,110 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।</p>
<p data-start="918" data-end="1483">सूत्रों के अनुसार, सीसीआई के पास पिछले सीजन (2024-25) की बची हुई कॉटन है। केंद्र सरकार द्वारा सितंबर में कॉटन के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने और बाद में इसे 30 सितंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 तक करने के कारण कॉटन की कीमतों में गिरावट आई है। इसके चलते सीसीआई को अपने पुराने स्टॉक की बिक्री के लिए बार-बार कीमतें घटानी पड़ी हैं। चालू सीजन के लिए तय एमएसपी के आधार पर सीसीआई की कॉटन खरीद लागत लगभग 61 हजार रुपये प्रति गांठ आ रही है, जबकि बाजार में कीमतें 51,000 से 52,000 रुपये प्रति गांठ के आसपास हैं। वहीं, देश में आयातित कॉटन की लागत भी इसी दायरे में आ रही है।</p>
<p data-start="1485" data-end="1919"><em><strong>रूरल वॉयस</strong></em> को मिली जानकारी के अनुसार, सीसीआई के पास करीब 23 लाख गांठ कॉटन ऐसी है, जिसकी बिक्री हो चुकी है लेकिन उठान नहीं हुआ है। इसमें से लगभग दो-तिहाई मात्रा ट्रेडर्स द्वारा खरीदी गई कॉटन की है। इसके अलावा, सीसीआई के पास करीब 13 लाख गांठ कॉटन का बिना बिका स्टॉक भी है। ऐसे में, उसे यह कॉटन मौजूदा बाजार दर यानी 51 से 52 हजार रुपये प्रति गांठ पर ही बेचनी पड़ेगी। नई फसल की खरीद के लिए सीसीआई को अपना पुराना स्टॉक खाली करना होगा।</p>
<p data-start="1921" data-end="2542">ऐसी भी चर्चाएं हैं कि जिनिंग मिलों ने गठजोड़ (कार्टेल) बनाकर जिनिंग रेट बढ़ा दिए हैं, जिसके चलते सीसीआई के साथ अनुबंध होने में देरी हो रही है। लेकिन इस स्थिति का नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और गुजरात में नई फसल की आवक शुरू हो चुकी है। रोजाना मंडियों में 80 से 90 हजार गांठ कपास की आवक हो रही है। राजस्थान, पंजाब और हरियाणा की मंडियों में कपास की कीमत 6,500 से 7,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रही है, जबकि चालू सीजन के लिए केंद्र सरकार ने लॉन्ग स्टेपल किस्म का एमएसपी 8,110 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। देश में कपास का अधिकांश उत्पादन इसी किस्म का होता है।</p>
<p data-start="2544" data-end="3000">महत्वपूर्ण बात यह है कि देश में कपास का उत्पादन लगातार घट रहा है। इस वर्ष कपास का रकबा करीब दस लाख हेक्टेयर कम हो गया है, क्योंकि एक ओर बीमारियों से किसानों को नुकसान हुआ है, वहीं उन्हें कपास की उचित कीमत भी नहीं मिल रही। देश में 2013-14 में कपास का उत्पादन 398 लाख गांठ रहा, जो इस साल घटकर लगभग 306 लाख गांठ रह गया है। दिलचस्प रूप से, कपास आयात के लिए दबाव बनाने वाला कॉटन उद्योग पहले उत्पादन घटा हुआ बता रहा था, लेकिन अब वही इसमें बढ़ोतरी का दावा कर रहा है।</p>
<p data-start="3002" data-end="3457">सूत्रों के अनुसार, आशंका है कि सस्ते में खरीदी गई कपास को एमएसपी पर सीसीआई को दोबारा बेचने (रीसायकल) की कोशिश की जा सकती है। इसके साथ ही पिछले साल के बकाया करीब 25 लाख गांठ के स्टॉक के भी रिसायकल होने की आशंका को नकारा नहीं जा सकता है। साथ ही शुल्क-मुक्त आयात के चलते सीसीआई को पुराने स्टॉक को नुकसान में बेचना पड़ा है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक करीब 40 लाख गांठ का शुल्क मुक्त आयात हो चुका है जो 50 लाख गांठ तक पहुंच सकता है। अब नई फसल के साथ उसकी खरीद लागत लगभग 61 हजार रुपये प्रति गांठ आने के कारण व्यापारी इसका फायदा उठाएंगे, जिससे सरकार को भी नुकसान उठाना पड़ेगा। कुल मिलाकर, शुल्क-मुक्त कॉटन आयात का फैसला किसानों और सरकार दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है।</p>
<p data-start="3002" data-end="3457"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एमएसपी से 1500 रुपये नीचे तक बिक रही कपास, ड्यूटी फ्री आयात से किसानों को झटका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मक्का किसानों को धक्का, कई मंडियों में एमएसपी से आधे रेट पर बिक रही उपज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/maize-farmers-suffer-setback-crop-sold-at-half-the-msp-in-many-agri-markets.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 16 Oct 2025 19:10:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/maize-farmers-suffer-setback-crop-sold-at-half-the-msp-in-many-agri-markets.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="274" data-end="563">एक ओर जहां किसानों का रुझान मक्का की ओर बढ़ रहा है, वहीं इस बार मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिलना भी मुश्किल हो गया है। अधिकांश मंडियों में मक्का की कीमतें एमएसपी से काफी नीचे चल रही हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में किसानों को सरकारी खरीद का इंतजार है।</p>
<p data-start="565" data-end="901"><strong>एथेनॉल मिश्रण</strong> कार्यक्रम को बढ़ावा मिलने से हाल के वर्षों में किसानों को मक्का का बेहतर दाम मिलने लगा था। यही वजह है कि किसानों ने इस साल सोयाबीन और कपास की बजाय मक्का को तरजीह दी। चालू खरीफ सीजन 2024-25 में मक्का का रकबा करीब 12 फीसदी बढ़कर 95 लाख हेक्टेयर से अधिक पहुंच गया है। लेकिन इस बार मक्का की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। इसके पीछे एथेनॉल उत्पादन में चावल अधिक इस्तेमाल और मक्का उत्पादन में बढ़ोतरी को वजह माना जा रहा है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p data-start="903" data-end="1273">कृषि मंत्रालय के <strong>Agmarknet</strong> पोर्टल के अनुसार, <strong>मध्यप्रदेश</strong> के देवास, हरदा, खंडवा, खरगोन, सीहोर, शिवपुरी, बड़वानी और होशंगाबाद जिलों की कई मंडियों में मक्का 1200 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल के मॉडल भाव पर खरीदी जा रही है, जबकि सरकार ने मक्का का एमएसपी 2400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। किसान अपनी उपज व्यापारियों को औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं।</p>
<p data-start="1275" data-end="1625"><strong>15 अक्टूबर</strong> को देवास जिले की खातेगांव मंडी में मक्का का मॉडल भाव 1200 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि हरदा जिले की मंडियों में यह 1250 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज हुआ। खंडवा मंडी में मक्का की खरीद 1200 रुपये के मॉडल भाव पर हुई, वहीं विदिशा मंडी में भाव 1400 रुपये प्रति क्विंटल रहा। शिवपुरी जिले की कोलारस मंडी में मक्का का मॉडल भाव 1140 रुपये तक गिर गया।&nbsp;</p>
<p data-start="1627" data-end="1963"><strong>राजस्थान</strong> की मंडियों में मक्का 1500 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल के मॉडल भाव पर बिक रही है, जबकि उत्तर प्रदेश की अधिकांश मंडियों में भी मक्का का मॉडल भाव एमएसपी 2400 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे आ गया है। इस तरह किसानों को प्रति क्विंटल 1000 से 1200 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।</p>
<p data-start="1965" data-end="2281">मध्यप्रदेश कांग्रेस किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष <strong>केदार सिरोही</strong> का कहना है कि किसानों ने अच्छे भाव की उम्मीद में मक्का उगाया था। केंद्र सरकार भी मक्का की खेती पर जोर दे रही है, लेकिन अब भाव गिर गए हैं तो सरकार को कोई परवाह नहीं है। राज्य में मक्का की सरकारी खरीद तो दूर, भावांतर योजना का ऐलान भी नहीं हुआ।&nbsp;</p>
<p data-start="2283" data-end="2558">इस वर्ष <strong>अतिवृष्टि</strong> के कारण किसानों की सोयाबीन और मक्का की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। अब एमएसपी न मिलने से किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि बहुप्रचारित एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के बावजूद किसानों को मक्का का सही मूल्य क्यों नहीं मिल पा रहा है। क्या एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से जितना लाभ मिलना था, वह मिल चुका है।&nbsp;</p>
<p data-start="2560" data-end="2796">मक्का का एमएसपी न मिलने से नाराज मध्यप्रदेश के किसानों ने <strong>विरोध-प्रदर्शन</strong> शुरू कर दिए हैं। आरोप है कि व्यापारी नमी बताकर दाम 1000 से 1100 रुपये तक घटा रहे हैं। इससे गुस्साए किसानों ने बुधवार को खंडवा में इंदौर रोड पर चक्का जाम कर दिया।</p>
<p data-start="2798" data-end="3011">मक्का की फसल फीड और बायोफ्यूल उद्योग की प्रमुख आवश्यकता बन चुकी है। अगर किसानों को उचित दाम नहीं मिला, तो अगले सीजन में वे मक्का की जगह दूसरी फसलों की ओर रुख करेंगे, जिससे उद्योग भी प्रभावित होंगे।&nbsp;</p>
<p data-start="2798" data-end="3011"></p>
<p data-start="2798" data-end="3011"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मक्का किसानों को धक्का, कई मंडियों में एमएसपी से आधे रेट पर बिक रही उपज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खेतों में उतर वैज्ञानिकों ने शुरू की नई कृषि क्रांति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/when-scientists-came-to-the-fields-a-quiet-revolution-in-agriculture.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 16 Oct 2025 12:08:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/when-scientists-came-to-the-fields-a-quiet-revolution-in-agriculture.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बात जून की शुरुआत की है। ओडिशा के एक छोटे से गांव की तपती दोपहरी में 65 वर्षीय किसान धनंजय साहू आम के पेड़ के नीचे बैठे थे। उनके चारों ओर साथी किसान और युवा वैज्ञानिकों की एक टीम थी। वे भाषण देने वाले नहीं, बल्कि श्रोता, अपने काम का प्रदर्शन करने वाले, समस्याओं का समाधान देने वाले लोग थे। उनके पास मृदा परीक्षण किट, उन्नत किस्मों के बीज और सबसे महत्वपूर्ण, उनमें विनम्रता थी।</p>
<p>धनंजय के लिए यह कोई साधारण सरकारी कार्यक्रम नहीं था। उन्होंने कहा, "ऐसा लगा जैसे कोई हमें सिखाने नहीं, बल्कि हमारे साथ खड़ा होने आया है।" यह भावना 1.4 लाख से ज्यादा गांवों में विकसित कृषि संकल्प अभियान 2025 के तहत गूंज रही है। एक शांत, दृढ़ क्रांति जो भारतीय कृषि को नई परिभाषा दे सकती है।</p>
<p><strong>मिट्टी से जुड़ा अभियान</strong><br />29 मई 2025 को शुरू हुए इस 15-दिवसीय अभियान में 2,100 से अधिक टीमें और लगभग 16,000 कृषि विशेषज्ञ शामिल हुए। ये 728 जिलों के 1.35 करोड़ से ज्यादा किसानों तक पहुंचे। हरियाणा के कपास के खेतों से लेकर छत्तीसगढ़ की आदिवासी बस्तियों तक, आईसीएआर संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के वैज्ञानिक खेतों में गए, किसानों के साथ बैठे और उनकी बातें सुनीं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि मृदा स्वास्थ्य कार्डों का प्रभावी उपयोग कैसे किया जा सकता है, खरीफ फसलों के लिए बीज उपचार विधियों की व्याख्या की और कम लागत वाले कीट प्रबंधन उपायों पर चर्चा की। लेकिन जानकारी से ज्यादा, वे एकजुटता का संदेश लेकर आए- आप इस सफर में अकेले नहीं हैं। विज्ञान आपके साथ है। यह एकतरफा प्रसारण नहीं था। किसानों ने इनपुट की घटिया गुणवत्ता, महंगे कीट प्रबंधन, अप्रत्याशित बाजार और जलवायु परिवर्तन की समस्याओं के बारे में कठिन सवाल पूछे। विशेषज्ञों के पास सभी के जवाब नहीं थे, लेकिन उन्होंने सवालों को गंभीरता से लिया।</p>
<p><strong>व्यापक परिदृश्य: कृषि में आत्मनिर्भरता</strong><br />विकसित कृषि संकल्प अभियान केवल फसल उत्पादकता के बारे में नहीं है। यह भारतीय कृषि को आत्मनिर्भर बनाने की गहन राष्ट्रीय आकांक्षा का हिस्सा है। दशकों से भारत के किसान देश का पेट भरते आए हैं। लेकिन विडंबना यह है कि भारत अब भी अपने 60% से अधिक खाद्य तेल के लिए आयात पर निर्भर है, दालों की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए संघर्ष करता है, और बार-बार इनपुट की गुणवत्ता संबंधी समस्याओं का सामना करता है। यह अभियान किसानों को ज्ञान से सशक्त बनाकर, इनपुट प्रणालियों में सुधार करके और सार्वजनिक विस्तार सेवाओं में विश्वास का पुनर्निर्माण करके इस प्रवृत्ति को उलटने का प्रयास करता है।</p>
<p>कृषि केवल आजीविका के लिए नहीं है, बल्कि गौरव, उद्यम और संप्रभुता का स्रोत भी है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के शब्दों में, "यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है। यह एक जन-आंदोलन है। आत्मनिर्भर भारत के लिए जन आंदोलन।"</p>
<p><strong>अभियान से मिशन तक: कृषि विस्तार का उदय</strong><br />इस अभियान की असली ताकत आगे आने वाली बातों में निहित है। विकसित कृषि संकल्प अभियान (वीकेएसए) &lsquo;कृषि विस्तार&rsquo; का लॉन्च पैड है। एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय मिशन जो भारत द्वारा अपने किसानों को सहायता प्रदान करने के तरीके को नए सिरे से परिभाषित करेगा।</p>
<p>कृषि विस्तार कोई साधारण योजना नहीं है। यह एक व्यवस्थित बदलाव है। यह बदलाव ऊपर से नीचे की ओर सलाह देने से लेकर नीचे से ऊपर की ओर सह-निर्माण तक है। यह एक तरफ टुकड़ों में पहुंच से पूर्ण कवरेज तक जाता है, तो दूसरी तरफ आउटपुट मेट्रिक्स से लेकर परिणाम-उन्मुख प्रभाव तक बढ़ता है।</p>
<p><strong>कुछ प्रमुख स्तंभ</strong><br />&bull; दलहन, तिलहन, बाजरा, कपास और गन्ने पर केंद्रित फसल-विशिष्ट अभियान (जिन्हें "क्रॉप वॉर" कहा जाता है)।<br />&bull; डिजिटल उपकरणों का उपयोग - एआई-आधारित सलाह, रियल-टाइम पेस्ट अलर्ट, जलवायु डैशबोर्ड और दूर-दराज के खेतों तक पहुंचने के लिए मोबाइल ऐप।<br />&bull; आईसीएआर, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (एसएयू), गैर-सरकारी संगठनों, कृषि-स्टार्टअप और स्थानीय किसान समूहों को एक समन्वित रणनीति के तहत एक साथ लाना।<br />वीकेएसए ने भविष्य की एक झलक दिखाई है। किसानों को न केवल सूचित किया गया, बल्कि उन्हें इसमें शामिल भी किया गया। कई कार्यक्रमों का आयोजन एफपीओ के साथ मिलकर किया गया। युवा वॉलंटियर ने कृषि सखियों और कृषि मित्रों के रूप में काम किया। महिला किसानों ने कंपोस्ट खाद बनाने के तरीके और बाजरा से बने व्यंजनों का प्रदर्शन किया। यह विकेन्द्रीकृत और विविध था।</p>
<p><strong>ऐसी कहानियां जो हमारे साथ रहेंगी</strong><br />सीतापुर में सीमांत किसानों के एक समूह ने कटाई-तुड़ाई के बाद मूल्य संवर्धन का प्रशिक्षण मांगा ताकि वे मिर्च से अधिक कमाई कर सकें। अनंतपुर में एक बुज़ुर्ग महिला किसान ने शर्माते हुए पूछा कि क्या कोई उसकी जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने में मदद कर सकता है। लातूर में, नौकरी पाने की नाकाम कोशिश के बाद शहर से लौटे एक युवक ने कहा, "अगर खेती-बाड़ी व्यावहारिक हो गई, तो मैं फिर कभी शहर नहीं जाऊंगा।" लद्दाख में एक महिला ने पूछा, "क्या मेरी खुबानी को सुखाकर अच्छा बाजार मिल सकता है?" पंजाब में एक बुज़ुर्ग किसान ने मशीनीकृत ट्रांसप्लांटर के बारे में पूछताछ की। अरुणाचल प्रदेश में एक युवा किसान ने पूछा, "क्या मैं अपनी अदरक और अनानास दिल्ली में बेच सकता हूं?"</p>
<p>ये कहानियां नीतिगत टिप्पणियां नहीं हैं। ये वो जीती-जागती हकीकत हैं जिन्हें कृषि संकल्प अभियान ने उजागर किया है, और जिन्हें अब कृषि विस्तार बड़े पैमाने पर संबोधित करना चाहता है।</p>
<p><strong>यह आज क्यों मायने रखता है</strong><br />आज कृषि केवल भोजन के बारे में नहीं है। यह जलवायु सुरक्षा, रोजगार, निर्यात प्रतिस्पर्धा और ग्रामीण सम्मान के बारे में है।&nbsp;<br />&bull; भारत के 86% से ज्यादा किसान छोटे और सीमांत हैं। उन्हें सटीक सलाह की जरूरत है, सबके लिए एक जैसी सलाह की नहीं।<br />&bull; पानी की कमी और मिट्टी के क्षरण के साथ बाजार में अस्थिरता बढ़ती जा रही है। टेक्नोलॉजी मदद कर सकती है, लेकिन तभी जब वह सही हाथों में पहुंचे।<br />जन-प्रथम दृष्टिकोण न केवल संभव है, बल्कि यह शक्तिशाली भी है।</p>
<p><strong>अलग तरह की हरित क्रांति</strong><br />अगर पहली हरित क्रांति उत्पादन के बारे में थी, तो यह सहभागिता के बारे में है। अगर अतीत इनपुट से प्रेरित था, तो भविष्य संस्थाओं, समावेशिता और नवाचार से आकार लेगा।</p>
<p>जैसे-जैसे वीकेएसए 2025 का सूर्यास्त हो रहा है, क्षितिज पर एक नया सूर्योदय दिखाई देने लगा है। एक ऐसा सूर्योदय जहां भारत के किसान मदद का इंतजार नहीं कर रहे, बल्कि अपना भाग्य खुद गढ़ रहे हैं। कृषि विस्तार को मार्गदर्शक प्रकाश और आत्मनिर्भरता की भावना को ईंधन बनाकर, भारतीय कृषि जल्द ही न केवल सुधार, बल्कि एक शांत, सम्मानजनक क्रांति का भी गवाह बन सकती है। और इसकी शुरुआत तब हुई जब वैज्ञानिक खेतों में <em>गए और किसानों की बातें सुनने का फैसला किया।&nbsp;</em></p>
<p><em>(लेखक आईसीएआर&nbsp; के उप महानिदेशक, कृषि विस्तार हैं। लेख में व्यक्त विचार निजी हैं)</em></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खेतों में उतर वैज्ञानिकों ने शुरू की नई कृषि क्रांति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोयाबीन उत्पादन में 16 फीसदी गिरावट, फिर भी एमएसपी को तरसते किसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/soybean-production-drops-16-pc-yet-farmers-struggle-to-get-msp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 14 Oct 2025 10:34:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/soybean-production-drops-16-pc-yet-farmers-struggle-to-get-msp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में इस साल सोयाबीन उत्पादन में करीब 16 प्रतिशत की भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के अनुसार, चालू खरीफ सीजन 2025-26 में उत्पादन लगभग 20.5 लाख टन घटकर 105.36 लाख टन रहने का अनुमान है।</p>
<p>उत्पादन में गिरावट के बावजूद, सोयाबीन की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,328 रुपये प्रति क्विंटल से काफी नीचे हैं। किसानों को मजबूरन 3,500 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल तक के भाव पर अपनी उपज बेचनी पड़ रही है।</p>
<p>सोपा ने रकबे में कमी, उत्पादकता में गिरावट और प्रतिकूल मौसम को उत्पादन में गिरावट के मुख्य कारण बताया है। सोपा के आंकड़ों के अनुसार, चालू खरीफ सीजन (2025) में देश में सोयाबीन की बुवाई 114.56 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई और औसत उत्पादकता 920 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रही। जबकि पिछले साल (2024) सोयाबीन 118.32 लाख हेक्टेयर में बोई गई थी और उत्पादन 125.82 लाख टन के साथ औसत उत्पादकता 1,063 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी।&nbsp;</p>
<p>इस बार मौसम की मार से सोयाबीन की फसल को भारी नुकसान हुआ है। राजस्थान और मध्यप्रदेश में भारी बारिश के कारण उत्पादन पर असर पड़ा है, जबकि पीला मोज़ेक वायरस ने भी कई इलाकों में फसल को प्रभावित किया।</p>
<p>केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए सोयाबीन का एमएसपी 5,328 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 436 रुपये अधिक है। लेकिन बाजार में कीमतें इससे काफी नीचे होने के कारण किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।</p>
<p>देश के प्रमुख उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में कई जिलों में भारी बारिश से फसल बर्बाद हुई है। ऊपर से किसानों को उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। राज्य सरकार ने भावांतर भुगतान योजना शुरू की है, लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि इससे वास्तविक नुकसान की भरपाई नहीं होगी।</p>
<p>मध्य प्रदेश के किसान नेता राम इनानिया ने कहा, &ldquo;सरकार सिर्फ मंडियों के मॉडल प्राइस और एमएसपी के अंतर की भरपाई कर रही है। इससे किसानों को वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।&rdquo; कई जिलों में किसान संगठन एमएसपी पर खरीद की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।</p>
<p>भारत में खाद्य तेलों का उत्पादन मांग के मुकाबले अब भी काफी कम है, फिर भी किसानों को सोयाबीन जैसी तिलहन फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे मुख्य कारण सस्ते खाद्य तेलों का आयात है।</p>
<p>पिछले साल भी किसानों को सोयाबीन का सही दाम नहीं मिला था। यही वजह है कि किसानों का सोयाबीन से रुझान कम हो रहा है और वे मक्का&nbsp;की ओर रुख कर रहे हैं। इस साल बोआई क्षेत्र में आई कमी इसी प्रवृत्ति का संकेत है।</p>
<p>भारत अपनी कुल खाद्य तेल आवश्यकता का 60% से अधिक आयात करता है, जिस पर हर साल लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा खर्च होती है। खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए देश में सोयाबीन उत्पादन बढ़ाना जरूरी है और यह तभी संभव होगा जब किसानों को उनकी उपज का सहीदाम मिलेगा।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोयाबीन उत्पादन में 16 फीसदी गिरावट, फिर भी एमएसपी को तरसते किसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ बुवाई में 6.51 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी, कुल रकबा 1121.46 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/kharif-sowing-increased-by-6.51-lakh-hectares-total-area-reached-1121-lakh-hectares.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 13 Oct 2025 16:17:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/kharif-sowing-increased-by-6.51-lakh-hectares-total-area-reached-1121-lakh-hectares.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस वर्ष खरीफ फसलों के अंतर्गत बुवाई का क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में 6.51 लाख हेक्टेयर अधिक है। कुल बुवाई क्षेत्र 1121.46 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है जो गत वर्ष 1114.95 लाख हेक्टेयर था। गेहूं, धान, मक्का, गन्ना और दलहन की बुवाई भी वर्ष 2024-25 की तुलना में अधिक हुई है। उड़द के क्षेत्रफल में 1.50 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। लेकिन सोयाबीन, <span>सूरजमुखी और मूंगफली समेत तिलहन का रकबा घटा है। कपास की बुवाई के क्षेत्र में भी कमी दर्ज की गई है। &nbsp;</span></p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में कृषि क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में देशभर में खरीफ फसल की स्थिति, रबी फसल की बुवाई, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसलों की स्थिति, मूल्य स्थिति, उर्वरक उपलब्धता, जलाशयों की स्थिति सहित विभिन्न विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई।</p>
<p>बैठक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को लेकर भी केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ और अतिवृष्टि के कारण कुछ प्रदेशों में फसलें प्रभावित हैं, लेकिन यह भी बताया कि अन्य प्रदेशों में अच्छे मानसून के कारण फसल काफी अच्छी है, जिसका प्रभाव रबी बुवाई और उत्पादन में वृद्धि के रूप में देखने को मिलेगा।</p>
<p><strong>आलू</strong><strong>, <span>प्याज और टमाटर की बुवाई बढ़ी </span></strong></p>
<p>बैठक में बताया गया कि टमाटर और प्याज की बुवाई सुचारू रूप से चल&nbsp; रही है। वर्ष 2024-25 की तुलना में प्याज का बुवाई क्षेत्रफल 3.62 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.91 लाख हेक्टेयर हो गया है, वहीं आलू का क्षेत्रफल 0.35 लाख हेक्टेयर की तुलना में 0.43 लाख हेक्टेयर हो गया है। टमाटर का बुवाई क्षेत्रफल पिछले वर्ष समान अवधि में 1.86 लाख हेक्टेयर था, जो इस वर्ष बढ़कर 2.37 लाख हेक्टेयर हो गया है।अधिकारियों ने बताया कि आलू, प्याज, टमाटर में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप अच्छी वृद्धि हुई है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश </strong></p>
<p>बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने उर्वरक उपलब्धता की वर्तमान स्थिति की जानकारी लेने के साथ ही आगामी दिनों में सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने को लेकर दिशा-निर्देश दिए। केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों से इस संबंध में उर्वरक मंत्रालय से सतत संपर्क में रहने और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि आगामी सीजन में उर्वरकों की आवश्यकता को लेकर राज्यों के साथ समन्वय किया जा रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ बुवाई में 6.51 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी, कुल रकबा 1121.46 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जैविक प्रमाणन में गड़बड़ियों पर एपीडा सख्त, कई एजेंसियों के लाइसेंस सस्पेंड, जुर्माना भी लगाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/apeda-cracks-down-on-organic-certification-irregularities-suspends-licenses-of-several-agencies-imposes-fines.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 12 Oct 2025 16:44:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/apeda-cracks-down-on-organic-certification-irregularities-suspends-licenses-of-several-agencies-imposes-fines.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जैविक उत्पादों के निरीक्षण और प्रमाणन में अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली संस्था, <strong>कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा)</strong> ने कड़ा रुख अख्तियार किया है।&nbsp;</p>
<p>जैविक उत्पादों को प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए <strong>राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (</strong><strong>NPOP)</strong> के तहत मानक और प्रक्रियाएं तय की गई हैं।&nbsp;एनपीओपी के दिशा-निर्देशों का पालन न करने पर छह प्रमाणन एजेंसियों और एक निर्यातक के खिलाफ हाल ही में जुर्माना और प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है। इनमें उत्तराखंड और बिहार राज्य जैविक प्रमाणन एजेंसियों के अलावा चार निजी एजेंसियां भी शामिल हैं।</p>
<p>एपीडा द्वारा जारी सरकुलर के अनुसार, <strong>एक्सेंट्रिक ऑर्गेनिक प्राइवेट लिमिटेड</strong> की मान्यता समाप्त कर दी गई है, साथ ही इसके निदेशकों को तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया है। <strong>ग्लोबल सर्टिफिकेशन सोसाइटी (</strong><strong>GCS)</strong>, <strong>नेचुरल ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी (</strong><strong>NOCA)</strong> और <strong>कृषि सर्टिफिकेशन प्राइवेट लिमिटेड</strong> की मान्यता एक वर्ष के लिए निलंबित करते हुए प्रत्येक पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।</p>
<p>जैविक प्रमाणन में अनियमितताओं को लेकर बिहार और उत्तराखंड की सरकारी एजेंसियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। <strong>बिहार राज्य बीज एवं जैविक प्रमाणन एजेंसी (</strong><strong>BSSOCA)</strong> की मान्यता का दायरा केवल बिहार राज्य तक सीमित कर दिया गया है और उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।<br />वहीं, <strong>उत्तराखंड राज्य जैविक प्रमाणन एजेंसी (</strong><strong>USOCA)</strong> पर दस लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए उसकी मान्यता का दायरा केवल उत्तराखंड राज्य तक सीमित कर दिया गया है।&nbsp;</p>
<p>निर्यातक <strong>मेसर्स एड्रोइट इंडल्जेंस प्राइवेट लिमिटेड</strong> का एनपीओपी के तहत प्रमाणन, मामले की सुनवाई और अंतिम निर्णय आने तक निलंबित कर दिया गया है।</p>
<p>एपीडा के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम के तहत निर्धारित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करवाया जाएगा। कुछ प्रमाणन एजेंसियों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है।</p>
<p>एनपीओपी के तहत गठित <strong>राष्ट्रीय प्रत्यायन निकाय (</strong><strong>NAB)</strong> की उपसमिति ने पिछले महीने हुई बैठक में इन कार्रवाइयों की संस्तुति की थी। इससे पहले <strong>मार्च </strong><strong>2025</strong> में भी 12 प्रमाणन एजेंसियों के खिलाफ जुर्माने आदि की कार्रवाई की गई थी, जिनमें मध्य प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तराखंड की राज्य एजेंसियां शामिल थीं।</p>
<p>देश में जैविक उत्पादों के बाजार और निर्यात की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिसके साथ उनका प्रमाणन एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। मानकों पर खरे न उतरने के कारण विदेशों में कई भारतीय जैविक उत्पादों को रिजेक्शन का सामना करना पड़ता है। खरीदारों का भरोसा बनाए रखने और वैश्विक मानकों पर खरा उतरने के लिए एपीडा प्रमाणन प्रक्रिया के सख्त अनुपालन पर जोर दे रहा है। हालिया कार्रवाई इसी दिशा में एक कड़ा संदेश मानी जा रही है।</p>
<p>हैरानी की बात है कि राज्य सरकार की एजेंसियों द्वारा भी जैविक प्रमाणन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई जा रही हैं, जिसके चलते एपीडा को उनके खिलाफ भी जुर्माने और प्रतिबंध की कार्रवाई करनी पड़ी है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जैविक प्रमाणन में गड़बड़ियों पर एपीडा सख्त, कई एजेंसियों के लाइसेंस सस्पेंड, जुर्माना भी लगाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भरता और किसानों की समृद्धि के लिए 35,440 करोड़ रुपये की दो योजनाओं का शुभारंभ किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-modi-unveils-rs-35440-crore-agriculture-push-with-two-flagship-schemes-for-self-reliant-prosperous-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 11 Oct 2025 18:14:51 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-modi-unveils-rs-35440-crore-agriculture-push-with-two-flagship-schemes-for-self-reliant-prosperous-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><!--StartFragment --></p>
<p><span class="cf0">प्रधानमंत्री</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">नरेंद्र</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">मोदी</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">ने</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">शनिवार</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">को</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कृषि</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">क्षेत्र</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">में</span><span class="cf0"> 35,440 </span><span class="cf0">करोड़</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">रुपये</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">परिव्यय</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">वाली</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">दो</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">प्रमुख</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">योजनाओं</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">का</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">शुभारंभ</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">किया</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">इसमें</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">एक</span><span class="cf0"> 24,000 </span><span class="cf0">करोड़</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">रुपये</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">की</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">धन-धान्य</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कृषि</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">योजना</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">दूसरा</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">है</span><span class="cf0"> 11,440 </span><span class="cf0">करोड़</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">रुपये</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">का</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">दलहन</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">आत्मनिर्भरता</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">मिशन</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">धन-धान्य</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कृषि</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">योजना</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">के</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">तहत</span><span class="cf0"> 36 </span><span class="cf0">विभिन्न</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">सरकारी</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">योजनाओं</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">को</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">एकीकृत</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">किया</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">गया</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">प्रधानमंत्री</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">ने</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कृषि</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">पशुपालन</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">मत्स्य</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">पालन</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">और</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">खाद्य</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">प्रसंस्करण</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">क्षेत्रों</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">में</span><span class="cf0"> 5,450 </span><span class="cf0">करोड़</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">रुपये</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">से</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">अधिक</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">मूल्य</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">की</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">परियोजनाओं</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">का</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">उद्घाटन</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">करते</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">हुए</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">उन्हें</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">राष्ट्र</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">को</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">समर्पित</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">किया</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">साथ</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">ही</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">लगभग</span><span class="cf0"> 815 </span><span class="cf0">करोड़</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">रुपये</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">की</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">अतिरिक्त</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">परियोजनाओं</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">की</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">आधारशिला</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">भी</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">रखी</span><span class="cf0">।</span></p>
<p><span class="cf0">भारतीय</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कृषि</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">अनुसंधान</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">संस्थान</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">नई</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">दिल्ली</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">में</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">एक</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">विशेष</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कृषि</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कार्यक्रम</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">में</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">भाग</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">लेते</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">हुए</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">उन्होंने</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कहा</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कि</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">धन-धान्य</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कृषि</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">योजना</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">और</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">दलहन</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">आत्मनिर्भरता</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">मिशन</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">आत्मनिर्भरता</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">ग्रामीण</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">सशक्तीकरण</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">और</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कृषि</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">नवाचार</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">के</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">एक</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">नए</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">युग</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">की</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">शुरुआत</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">करने</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">के</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">लिए</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">डिजाइन</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">किए</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">गए</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">इनसे</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">देश</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">के</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">करोड़ों</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">किसानों</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">को</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">सीधे</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">लाभ</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">होगा</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">मोदी</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">ने</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कहा</span><span class="cf0">, "</span><span class="cf0">सरकार</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">इन</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">पहलों</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">में</span><span class="cf0"> 35,000 </span><span class="cf0">करोड़</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">रुपये</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">से</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">अधिक</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">का</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">निवेश</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">करेगी</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">जो</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">किसानों</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">की</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">आय</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">दोगुनी</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">करने</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">और</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">देश</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">के</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">लिए</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">खाद्य</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">एवं</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">पोषण</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">सुरक्षा</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">हासिल</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">करने</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">के</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">प्रति</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">उसकी</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">अटूट</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">प्रतिबद्धता</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">को</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">दर्शाता</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">है</span><span class="cf0">।"</span></p>
<p><span class="cf0">प्रधानमंत्री</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">ने</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">भारत</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">की</span><span class="cf0"> विकास यात्रा में कृषि और खेती की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे 21वीं सदी के भारत को एक मजबूत और बेहतर कृषि प्रणाली की आवश्यकता है, और यह बदलाव 2014 के बाद उनकी सरकार के कार्यकाल में शुरू हुआ। मोदी ने कहा, "हमने अतीत की उदासीनता को तोड़ा। बीज से लेकर बाजार तक, हमने अपने किसानों के हित में व्यापक सुधार किए। ये सुधार सिर्फ नीतिगत बदलाव नहीं थे। ये संरचनात्मक हस्तक्षेप थे जिनका उद्देश्य भारतीय कृषि को आधुनिक, टिकाऊ और लचीला बनाना था।"</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68ea485ed017b.jpg" alt="" /></p>
<p><strong><span class="cf0">11 वर्षों में कृषि निर्यात दोगुना हुआ</span></strong></p>
<p><span class="cf0">प्रधानमंत्री ने कहा </span><span class="cf0">कि</span><span class="cf0"> पिछले ग्यारह वर्षों में भारत का कृषि निर्यात लगभग दोगुना हो गया है। खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 9 करोड़ टन की वृद्धि हुई है। फल और सब्जियों के उत्पादन में 6.4 करोड़ टन से अधिक की वृद्धि हुई है। भारत आज दूध उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर है और वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक है। 2014 की तुलना में शहद उत्पादन दोगुना हो गया है और इसी अवधि में अंडा उत्पादन भी दोगुना हो गया है।</span></p>
<p><span class="cf0">उन्होंने आगे बताया कि इस दौरान देश में छह प्रमुख उर्वरक संयंत्र स्थापित किए गए हैं। किसानों को 25 करोड़ से अधिक </span><span class="cf0">मृदा</span><span class="cf0"> स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए। </span><span class="cf0">सूक्ष्म</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">सिंचाई</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">सुविधाएं</span><span class="cf0"> 100 </span><span class="cf0">लाख</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">हेक्टेयर</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कृषि</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">भूमि</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">तक</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">पहुंच</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">गई</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">प्रधानमंत्री</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">फसल</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">बीमा</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">योजना</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">के</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">तहत</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">किसानों</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">को</span><span class="cf0"> 2 </span><span class="cf0">लाख</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">करोड़</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">रुपये</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">के</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">बीमा</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">दावे</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">वितरित</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">किए</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">गए</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">पिछले</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">ग्यारह</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">वर्षों</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">में</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">किसानों</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">के</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">सहयोग</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">और</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">बाजार</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">पहुंच</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">को</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">बढ़ाने</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">के</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">लिए</span><span class="cf0"> 10,000 </span><span class="cf0">से</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">अधिक</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">किसान</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">उत्पादक</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">संगठन</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf1">FPO) </span><span class="cf0">बनाए गए हैं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">विकसित</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">भारत</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">के</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">लिए</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">प्रधानमंत्री</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">धन-धान्य</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कृषि</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">योजना</span></strong></p>
<p><span class="cf0">उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर भारत को एक विकसित देश बनना है, तो हर क्षेत्र में निरंतर सुधार और प्रगति जरूरी है। इसी दृष्टिकोण के साथ प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना शुरू की गई है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की प्रेरणा सीधे तौर पर आकांक्षी जिला </span><span class="cf0">मॉडल</span><span class="cf0"> की सफलता से आई है।</span></p>
<p><span class="cf0">उन्होंने</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कहा</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कि</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">प्रधानमंत्री</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">धन-धान्य</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">कृषि</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">योजना</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">के</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">तहत</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">हम</span><span class="cf0"> 36 </span><span class="cf0">विभिन्न</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">सरकारी</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">योजनाओं</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">को</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">एकीकृत</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">और</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">समन्वित</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">तरीके</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">से</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">एक</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">साथ</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">ला</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">रहे</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">चाहे</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">वह</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">राष्ट्रीय</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">प्राकृतिक</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">खेती</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">मिशन</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">हो</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">कुशल</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">सिंचाई</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">के</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">लिए</span><span class="cf0"> '</span><span class="cf0">पर</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">ड्रॉप</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">मोर</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">क्रॉप</span><span class="cf0">' </span><span class="cf0">अभियान</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">हो</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">या</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">तिलहन</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">उत्पादन</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">को</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">बढ़ावा</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">देने</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">के</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">लिए</span><span class="cf0"> </span><span class="cf0">तिलहन</span><span class="cf0"> मिशन हो। </span><span class="cf0">पशुधन</span><span class="cf0"> विकास पर विशेष ध्यान देने सहित ऐसी कई </span><span class="cf0">पहलों</span><span class="cf0"> को एक छतरी के नीचे एकीकृत किया जा रहा है। </span></p>
<p><strong><span class="cf0">दलहन आत्मनिर्भरता मिशन से दाल उत्पादन में वृद्धि</span></strong></p>
<p><span class="cf0">मोदी ने कहा कि दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का उद्देश्य न केवल दलहन उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि देश की भावी पीढ़ियों को सशक्त बनाना भी है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत के किसानों ने हाल ही में गेहूं और चावल जैसे खाद्यान्नों का </span><span class="cf0">रिकॉर्ड</span><span class="cf0"> उत्पादन किया है, जिससे भारत दुनिया के शीर्ष उत्पादकों में शामिल हो गया है।</span></p>
<p><span class="cf0">मोदी ने कहा, "हालांकि, पोषण के लिए केवल आटे और चावल से आगे देखने की आवश्यकता है। ये खाद्यान्न भूख मिटा सकते हैं, लेकिन उचित पोषण के लिए अधिक विविध आहार की आवश्यकता होती है। प्रोटीन, विशेष रूप से भारत की अधिकांश शाकाहारी आबादी के लिए, शारीरिक और मानसिक विकास दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दालें पौधा-आधारित प्रोटीन का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत बनी हुई हैं।"</span></p>
<p><span class="cf0">उन्होंने कहा, "दलहन आत्मनिर्भरता मिशन घरेलू दलहन उत्पादन को बढ़ावा देकर इस चुनौती का समाधान करने का प्रयास करता है, जिससे पोषण सुरक्षा और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। 11,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाला यह मिशन किसानों को पर्याप्त सहायता प्रदान करेगा।"</span></p>
<p><span class="cf0">मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि दलहन की खेती का रकबा 35 लाख </span><span class="cf0">हेक्टेयर</span><span class="cf0"> तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इस मिशन के तहत अरहर, उड़द और </span><span class="cf0">मसूर</span><span class="cf0"> दालों का उत्पादन बढ़ाया जाएगा और दालों की खरीद की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इससे देश भर के लगभग दो करोड़ दलहन उत्पादक किसानों को सीधा लाभ होगा।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">पारंपरिक कृषि से परे</span></strong></p>
<p><span class="cf0">मोदी ने कहा कि पशुपालन, </span><span class="cf0">मत्स्य</span><span class="cf0"> पालन और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि विशेष रूप से छोटे और </span><span class="cf0">भूमिहीन</span><span class="cf0"> किसानों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत उपलब्ध कराए जा सकें। शहद उत्पादन को एक सफलता की </span><span class="cf0">कहानी</span><span class="cf0"> बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में भारत का शहद उत्पादन लगभग दोगुना हो गया है। छह-सात साल पहले जहां शहद का निर्यात लगभग 450 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 1,500 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। </span></p>
<p><span class="cf0">उन्होंने कहा कि निर्यात में यह नाटकीय वृद्धि किसानों को सीधे तीन गुना अधिक आय प्रदान करती है, जो कृषि विविधीकरण और </span><span class="cf0">मूल्यवर्धन</span><span class="cf0"> के ठोस लाभों को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने </span><span class="cf0">नवाचार</span><span class="cf0">, निवेश और बाजार पहुंच के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने पर सरकार के </span><span class="cf0">फोकस</span><span class="cf0"> को दोहराया, जिससे वे आत्मनिर्भर और विकसित भारत के प्रमुख वाहक बन सकें।</span></p>
<p><!--EndFragment --></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68ea485f2afb2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भरता और किसानों की समृद्धि के लिए 35,440 करोड़ रुपये की दो योजनाओं का शुभारंभ किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[‘एफपीओ कॉन्क्लेव 2025’ में तैयार हुआ टिकाऊ और फ्यूचर&amp;#45;रेडी कृषक उत्पादक संगठनों का रोडमैप]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/fpo-conclave-2025-charts-roadmap-for-sustainable-future-ready-farmer-institutions.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 11 Oct 2025 15:42:42 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/fpo-conclave-2025-charts-roadmap-for-sustainable-future-ready-farmer-institutions.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नाबार्ड और समुन्नति द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित पांचवें किसान उत्पादक संगठन (FPO) सम्मेलन 2025 में किसान समूहों को मजबूत बनाने और उन्हें उद्यम के लिए तैयार, सुदृढ़ संस्थानों में बदलने के उद्देश्य से कई ऐतिहासिक पहलों का अनावरण किया गया। हाल ही नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में 2,500 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें 1,000 से अधिक एफपीओ प्रतिनिधि, नीति निर्माता, कृषि-तकनीक इनोवेटर और वित्तीय संस्थान शामिल थे।&nbsp;</p>
<p>सम्मेलन में भारत के विकसित होते कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को प्रदर्शित किया गया, जहां सहयोग, नवाचार और समावेशिता का संगम राष्ट्रीय विकास में उद्यमियों और प्रमुख हितधारकों के रूप में किसानों की भूमिका को पुनर्परिभाषित करने के लिए हो रहा है।</p>
<p><strong>सामूहिक दृष्टिकोण के लिए एक मंच</strong><br />सम्मेलन की शुरुआत समुन्नति के संस्थापक और सीईओ अनिल कुमार एसजी ने की, जिन्होंने भारतीय कृषि की खरबों डॉलर की क्षमता को उजागर करने के लिए मजबूत बहु-हितधारक साझेदारी का आह्वान किया। एक वीडियो संदेश में, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एफपीओ को "ग्रामीण समृद्धि के इंजन" के रूप में सशक्त बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।</p>
<p>कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने किसान उत्पादक संगठनों को सक्षम बनाकर भारतीय कृषि में बदलाव लाने के रणनीतिक दृष्टिकोण को रेखांकित किया। उन्होंने ग्रामीण बाजारों के उभरते परिदृश्य, जलवायु-अनुकूल खेती की आवश्यकता और नीतिगत ढांचों में किसान समूहों के महत्व पर प्रकाश डाला।</p>
<p>समुन्नति फाउंडेशन के चेयरमैन प्रवेश शर्मा ने एफपीओ पारिस्थितिकी तंत्र की शक्तिशाली गति पर जोर दिया। उन्होंने प्रतिनिधियों को एक ऐसे भविष्य की कल्पना करने के लिए आमंत्रित किया जहां सामूहिक उद्यम, नवाचार और बाजार संपर्क देश के लाखों छोटे किसानों का उत्थान करें। नाबार्ड के उप प्रबंध निदेशक ए.के. सूद ने एफपीओ को टिकाऊ बनाने के लिए नीति-समर्थित वित्तीय साधनों और डिजिटल गवर्नेंस के महत्व पर प्रकाश डाला।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68ea2c223c3c7.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>सम्मेलन में जारी की गई गई रिपोर्ट</strong><br />इस आयोजन का एक बड़ा आकर्षण NAFPO द्वारा "स्टेट ऑफ द सेक्टर रिपोर्ट - FPOs 2025" का विमोचन था, जिसमें देश भर में 44,000 से अधिक पंजीकृत किसान उत्पादक कंपनियों (FPCs) का चित्रण किया गया। इस रिपोर्ट में FPOs के लिए पहला ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (EODBF) सूचकांक प्रस्तुत किया गया, जो विभिन्न राज्यों की तुलनात्मक जानकारी प्रदान करता है।</p>
<p>"भारतीय FPOs के लिए एक सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण" पर एक रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया। यह समुन्नति और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (BMGF) की पहल है। इस रिपोर्ट ने प्रदर्शित किया कि कैसे वित्त, बाजार, तकनीक और सलाहकार सेवाओं तक एकीकृत पहुंच FPOs को लचीली, निवेशक-तैयार संस्थाओं में बदल सकती है। यह प्रभावी रूप से भारतीय कृषि में एक नए परिसंपत्ति वर्ग का निर्माण कर सकती है।</p>
<p>समुन्नति ने एफपीओ स्केलएक्स की भी घोषणा की, जो 300 एफपीओ को 100 करोड़ के उद्यमों में विकसित करने का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है। ऐसे संस्थानों को "यूनिकॉर्न एफपीओ" नाम दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य एफपीओ को कृषि मूल्य श्रृंखला में पैमाने, स्थिरता और बाजार नेतृत्व के आधार के रूप में स्थापित करना है।</p>
<p><strong>किसानों के लिए वित्तीय सुरक्षा और समावेशन</strong><br />सम्मेलन के एक सत्र में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) को किसानों तक विस्तारित करने पर चर्चा की गई। एनपीएस ट्रस्ट की सीईओ सुपर्णा टंडन ने पेंशन को "दूसरी फसल" बताया, जो ग्रामीण परिवारों के लिए दीर्घकालिक आय स्थिरता और सम्मान सुनिश्चित करती है। नाबार्ड, भारतीय स्टेट बैंक और मध्य भारत एफपीओ कंसोर्टियम के विशेषज्ञों ने एफपीओ नेटवर्क के माध्यम से नामांकन को सरल बनाने और पेंशन साक्षरता बढ़ाने की रणनीतियों को साझा किया, जिससे एनपीएस को वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा जाल के रूप में स्थापित किया जा सके।</p>
<p><strong>महिला किसानों के नेतृत्व पर विशेष सत्र</strong><br />"द फ्यूचर शी ग्रोज" सत्र में महिला नेतृत्व केंद्र में रहा, जिसमें जलवायु-अनुकूल कृषि और स्थानीय खाद्य प्रणाली में इनोवेशन को आगे बढ़ाने वाली महिलाओं के प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किए गए। एनएएफपीओ (NAFPO), फ्रंटियर मार्केट्स (Frontier Markets) और सीआईएनआई (CInI) के वक्ताओं ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ज्ञान, वित्त और डिजिटल उपकरणों तक पहुंच के साथ महिलाओं को सशक्त बनाना कैसे सामुदायिक लचीलापन को मजबूत करता है।</p>
<p>कॉर्टेवा एग्रीसाइंस और समुन्नति फाउंडेशन द्वारा दो नए ग्रामीण ब्रांड&mdash;नारी और ट्राइबो&mdash;का शुभारंभ एक प्रमुख आकर्षण रहा। नारी महिला किसानों की उद्यमिता को उजागर करता है, जबकि ट्राइबो सांस्कृतिक विरासत और सतत आजीविका के प्रतीक के तहत महुआ लड्डू जैसी आदिवासी उपज को बढ़ावा देता है।</p>
<p></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68ea2c22b37a0.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>जलवायु-अनुकूल और डिजिटल इनोवेशन को बढ़ावा</strong><br />सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में कृषि के आधुनिकीकरण में प्रौद्योगिकी की केंद्रीयता को रेखांकित किया गया। टेरी के एग्रीवोल्टेक्स सत्र में सौर ऊर्जा उत्पादन को खेती के साथ जोड़कर एक दोहरे उपयोग वाला मॉडल प्रस्तुत किया गया, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा को एक &ldquo;तीसरी फसल&rdquo; के रूप में स्थापित किया गया जो आय और संसाधन दक्षता को बढ़ाती है।</p>
<p>इसी तरह डिजिटल ग्रीन, ग्रामीण फाउंडेशन और रे वन कंसल्टिंग द्वारा आयोजित चर्चाओं में एआई-संचालित प्रिसीजन खेती, उपग्रह से निगरानी और मौसम-आधारित सलाह को प्रदर्शित किया गया, जो उत्पादकता बढ़ाते हुए इनपुट लागत को कम करते हैं।</p>
<p>आरती इंडस्ट्रीज द्वारा समुन्नति के सहयोग से विकसित यूनिफाइड कृषि इंटरफेस (यूकेआई) की शुरुआत एक और तकनीकी उपलब्धि थी। ओपन डिजिटल आर्किटेक्चर पर आधारित यूकेआई किसानों को एक ही इंटरऑपरेबल प्लेटफॉर्म पर कई कृषि सेवाओं&mdash;इनपुट, ऋण, सलाह और लॉजिस्टिक्स की सुविधा देता है।</p>
<p><strong>बीमा, वित्त और वैल्यू चेन इनोवेशन</strong><br />जोखिम प्रबंधन एक अन्य प्रमुख फोकस क्षेत्र था। एसबीआई जनरल और ईटी इनसाइट्स द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित पैरामीट्रिक बीमा पर सत्र में मौसम या बाजार के झटकों से प्रभावित किसानों को त्वरित और पारदर्शी भुगतान प्रदान करने वाले स्केलेबल मॉडल प्रदर्शित किए गए। इसके उदाहरणों में नगालैंड का मानसून बीमा और महिला किसानों के लिए सेवा (SEWA) का हीट कवर शामिल था, जो दर्शाता है कि कैसे सूचकांक-आधारित बीमा आजीविका की रक्षा कर सकता है।</p>
<p>बागवानी फाइनेंस, लचीली मूल्य श्रृंखला और जैव विविधता संरक्षण पर पैनल ने समावेशिता और स्केल सुनिश्चित करने के लिए मिश्रित पूंजी, डिजिटल एकीकरण और पारिस्थितिकी तंत्र साझेदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। कोरोमंडल इंटरनेशनल, आईटीसी और श्रीनिवास फार्म्स जैसे उद्योग जगत के दिग्गजों ने बताया कि कैसे एफपीओ के साथ सहयोग कृषि-मूल्य श्रृंखलाओं में दक्षता, स्थिरता और नवाचार को बढ़ावा दे रहा है।</p>
<p>मध्य भारत कंसोर्टियम के योगेश द्विवेदी और नॉर्दर्न फार्मर मेगा एफपीओ के पुनीत सिंह थिंड जैसे नेताओं की जमीनी स्तर की सफलता की कहानियों ने दर्शाया कि कैसे मजबूत शासन, बाजार संपर्क और डिजिटल तकनीक अपनाने से छोटे किसान सशक्त हो रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>कंबोडियाई प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति और गेट्स फाउंडेशन की अंतर्दृष्टि ने एक वैश्विक परिप्रेक्ष्य प्रदान किया, जिसने विकासशील देशों में सामूहिक, टिकाऊ कृषि के एक मॉडल के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया गया।</p>
<p>कार्यक्रम का समापन करते हुए समुन्नति और नाबार्ड ने निरंतर इनोवेशन, क्षमता निर्माण और नीतिगत चर्चा के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार एफपीओ पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। विभिन्न राज्यों के उत्पादों और इनोवेशन को प्रदर्शित करने वाले एफपीओ मंडप ने किसान उद्यमिता की जीवंतता और ग्रामीण भारत को आगे बढ़ाने वाली सहयोग की भावना को प्रतिबिंबित किया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ‘एफपीओ कॉन्क्लेव 2025’ में तैयार हुआ टिकाऊ और फ्यूचर-रेडी कृषक उत्पादक संगठनों का रोडमैप ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आजीविका को बढ़ावा दे रहे 91% माइक्रोफाइनेंस कर्जः सा&amp;#45;धन भारत माइक्रोफाइनेंस रिपोर्ट 2025]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/91-percent-of-microfinance-loans-driving-livelihood-growth-says-sa-dhan-bharat-microfinance-report-2025.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 11 Oct 2025 14:11:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/91-percent-of-microfinance-loans-driving-livelihood-growth-says-sa-dhan-bharat-microfinance-report-2025.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र का कुल सक्रिय ग्राहक आधार वित्त वर्ष 2024-25 के अंत में 8.28 करोड़ था। इन ग्राहकों पर माइक्रोफाइनेंस कंपनियों का 3,81,225 करोड़ रुपये का ऋण बकाया था। ग्राहक आधार और कर्ज में क्रमशः 13% और 14% की कमी आई है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी भारत माइक्रोफाइनेंस रिपोर्ट 2025 में दी गई है। इसमें बैंकों, लघु वित्त बैंकों (एसएफबी), गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी), एनबीएफसी-माइक्रो-फाइनेंस संस्थानों (एमएफआई) और अन्य संस्थानों के आंकड़े शामिल हैं। स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) बैंक लिंकेज में सकारात्मक वृद्धि हुई। इनमें 84.94 लाख एसएचजी के लिए कुल कर्ज 3.04 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। एसएचजी बैंक लिंकेज कार्यक्रम के तहत लगभग 143.3 लाख एसएचजी थे, जिनमें 17.1 करोड़ परिवार जुड़े थे।</p>
<p>सीआरआईएफ हाईमार्क के अनुसार 31 मार्च 2025 तक 13.99 करोड़ लोन एकाउंट थे। बकाया ऋण में विभिन्न संस्थानों की हिस्सेदारी इस प्रकार है- एनबीएफसी-एमएफआई: 1,48,419 करोड़ रुपये (39%), बैंक: 1,24,431 करोड़ रुपये (32%), एसएफबी: 59,817 करोड़ रुपये (16%), एनबीएफसी: 45,042 करोड़ रुपये (12%) और अन्य: 3,516 करोड़ रुपये (1%)। विभिन्न संस्थानों के लोन एकाउंट की हिस्सेदारी इस प्रकार है। एनबीएफसी-एमएफआई: 539 लाख (39%), बैंक: 466 लाख (33%), एसएफबी: 216 लाख (15%), एनबीएफसी: 163 लाख (12%) और अन्य: 15 लाख (1%)।</p>
<p>यह भारत माइक्रोफाइनेंस रिपोर्ट 2025 नाबार्ड के साथ साझेदारी में सा-धन ने तैयार किया है। रिपोर्ट में शामिल आंकड़े क्रेडिट सूचना कंपनियों के साथ-साथ 203 माइक्रो लेंडिंग संस्थानों (MLI) से सीधे लिए गए हैं, जो देश में 98% से अधिक माइक्रो लेंडिंग व्यवसाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। रिपोर्ट में भौगोलिक कवरेज, ग्राहक पहुंच, माइक्रो लेंडिंग संस्थानों की आय, व्यय और लाभप्रदता, उनके वित्तीय अनुपात, ऋण से परे की गतिविधियां शामिल हैं। रिपोर्ट में एसएचजी बैंक लिंकेज, माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र की क्रेडिट प्लस गतिविधियों और वित्तपोषण के बीसी (बिजनेस कॉरस्पोंडेंट) मॉडल का भी विवरण दिया गया है।</p>
<p>माइक्रो लेंडिंग संस्थान 6.27 करोड़ से अधिक सक्रिय ग्राहकों को सेवा प्रदान कर रहे हैं, जिनका कुल बकाया ऋण 2,38,198 करोड़ रुपये है। इसमें 72,930 करोड़ रुपये का प्रबंधित पोर्टफोलियो भी शामिल है। प्रबंधित पोर्टफोलियो में सबसे अधिक योगदान 53,287 करोड़ रुपये के साथ बिजनेस कॉरस्पोंडेंट का है। माइक्रो लेंडिंग संस्थानों का प्रति उधारकर्ता पर औसतन 38,005 रुपये बकाया है। ऋण के उपयोग से संकेत मिलता है कि लगभग 91% ऋण का उपयोग आय सृजन के उद्देश्यों के लिए किया गया था।</p>
<p>वित्त वर्ष 2024-25 के अंत तक माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र 37,380 शाखाओं में कार्यरत 3.29 लाख कर्मचारियों के साथ 'फुट ऑन स्ट्रीट' मॉडल बना रहा। इनमें से 64% कर्मचारी फील्ड में थे। माइक्रो लेंडिंग संस्थानों के कर्मचारियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 9% थी। प्रति क्रेडिट अधिकारी सक्रिय उधारकर्ताओं की औसत संख्या में गिरावट देखी गई है और यह 299 रह गई है। ग्राहकों की संख्या में कमी से माइक्रो लेंडिंग संस्थानों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने में मदद मिलेगी, हालांकि इससे परिचालन लागत बढ़ जाती है।</p>
<p>एनबीएफसी और एनबीएफसी-एमएफआई ने मिलकर माइक्रो लेंडिंग संस्थानों के कुल ग्राहक आधार का 86% और बकाया पोर्टफोलियो का 84% योगदान दिया। 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के पोर्टफोलियो आकार वाले माइक्रो लेंडिंग संस्थानों का ग्राहक आधार में 81% और ऋण पोर्टफोलियो में 85% योगदान रहा। सूक्ष्म-वित्तपोषण के लिए शीर्ष पांच राज्य बिहार, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक बने रहे।</p>
<p>रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए, नाबार्ड के अध्यक्ष, शाजी केवी ने कहा, "माइक्रोफाइनेंस भारत के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की आधारशिला बनकर उभरा है, जिसने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है। इसने महिलाओं, छोटे और सीमांत किसानों, कारीगरों और अन्य कमजोर समुदायों को सशक्त बनाया है। लाखों लोगों को समय पर और बिना किसी गिरवी के ऋण प्राप्त हुआ है, जिससे वे स्थायी आजीविका और उद्यम स्थापित करने में सक्षम हुए हैं। भारत माइक्रोफाइनेंस रिपोर्ट माइक्रोफाइनेंस के बारे में हमारी सामूहिक समझ को गहरा करती है और विकसित भारत के हमारे साझा राष्ट्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में उत्प्रेरक के रूप में इसकी भूमिका को उजागर करती है।"</p>
<p>सा-धन के कार्यकारी निदेशक और सीईओ जिजी मैमन ने कहा, "तनाव बढ़ाने वाला सबसे चर्चित मुद्दा ऋण का अत्यधिक उपयोग है, जो उधार लेने वालों के बढ़ते जोखिम और ऋणदाताओं की बढ़ती संख्या के कारण है। इसे भांपते हुए उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और स्व-नियामक संगठनों ने अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए हैं। इसका पहला सेट जुलाई 2024 में और दूसरा अप्रैल 2025 में जारी किया गया। इनसे ऋण देने पर अंकुश लगा है। इन उपायों के साथ ही एमएफआई को ऋण देने पर लगाए गए अंकुश भी इस क्षेत्र में नकारात्मक वृद्धि का कारण थे। चालू वित्त वर्ष में स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है, क्योंकि 91% ऋणों का उपयोग आय सृजन के उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।"</p>
<p>यह रिपोर्ट 10 अक्टूबर 2025 को मुंबई में जारी की गई। इस समारोह में बैंक ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक पी.आर. राजगोपाल, एचएसबीसी की समावेशी बैंकिंग प्रमुख सोनाली शाहपुरवाला, एचडीएफसी बैंक के कार्यकारी उपाध्यक्ष कृष्णन वेंकटेश, भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य महाप्रबंधक गोविंद नारायण गोयल, क्रिसिल के वरिष्ठ निदेशक अजीत वेलोनी और नाबार्ड के अध्यक्ष शाजी केवी सहित उद्योग जगत के कई दिग्गज शामिल हुए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आजीविका को बढ़ावा दे रहे 91% माइक्रोफाइनेंस कर्जः सा-धन भारत माइक्रोफाइनेंस रिपोर्ट 2025 ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वर्ष 2030&amp;#45;31 तक दलहन उत्पादन 40 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य: शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/target-to-increase-pulses-area-to-310-lakh-hectares-by-the-year-2030-31-shivraj-singh-chouhan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 10 Oct 2025 12:34:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/target-to-increase-pulses-area-to-310-lakh-hectares-by-the-year-2030-31-shivraj-singh-chouhan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने वर्ष 2030-31 तक देश में दलहन उत्पादन को 40 प्रतिशत बढ़ाकर 350 लाख टन करने का लक्ष्य रखा है, जो वर्तमान में 250 लाख टन के आसपास है।&nbsp;केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अक्टूबर 2025 को &ldquo;पीएम धन-धान्य कृषि योजना&rdquo; और &ldquo;दलहन आत्मनिर्भरता मिशन&rdquo; का शुभारंभ करेंगे।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र ने उल्लेखनीय प्रगति की है और भारत जल्द ही विश्व का &ldquo;फूड बास्केट&rdquo; बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने बताया कि 2014 से अब तक देश में खाद्यान्न उत्पादन में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। गेहूं, चावल, मक्का, मूंगफली और सोयाबीन जैसी फसलों में रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, लेकिन दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अभी शेष है।</p>
<p>उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत अधिकतम खरीद और किसानों व उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने का आह्वान भी किया।</p>
<h3><strong>दलहन आत्मनिर्भरता मिशन पर दारोमदार</strong></h3>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उत्पादक और उपभोक्ता है, फिर भी देश को हर वर्ष बड़ी मात्रा में आयात करना पड़ता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए &ldquo;दलहन आत्मनिर्भरता मिशन&rdquo; शुरू किया जा रहा है।</p>
<p><span>केंद्रीय मंत्री ने &lsquo;दलहन मिशन&rsquo; के तहत बुवाई क्षेत्रफल में बढ़ोतरी, उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य 2030-31 तक दालों के बुवाई क्षेत्रफल में बढ़ोतरी करना है। वर्तमान में बुवाई क्षेत्रफल 275 लाख हेक्टेयर है जिसे बढ़ाकर 310 लाख हेक्टेयर किया जाएगा। दालों का उत्पादन बढ़ाकर 350 लाख टन किया जाएगा। साथ ही प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 880 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है जिसे बढ़ाकर 1,130 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करने का प्रयास होगा।&nbsp;</span></p>
<p><strong>उन्नत किस्मों के विकास पर जोर</strong></p>
<p>कृषि मंत्री ने बताया कि उच्च उत्पादकता वाली, कीट एवं जलवायु प्रतिरोधी किस्मों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। किसानों को 126 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज और 88 लाख नि:शुल्क मिनी किट्स वितरित किए जाएंगे। वहीं, दलहन उत्पादक क्षेत्रों में 1,000 प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की जाएगी, जिन पर सरकार 25 लाख रुपये की सब्सिडी देगी।</p>
<h3><strong>100 जिला में पीएम धन-धान्य कृषि योजना&nbsp;</strong></h3>
<p>प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना के तहत देश के 100 कम उत्पादकता वाले जिलों की पहचान की गई है। इन जिलों में सिंचाई, भंडारण, फसल विविधिकरण और ऋण सुविधाओं का विस्तार कर उत्पादकता बढ़ाने के विशेष प्रयास किए जाएंगे। नीति आयोग डैशबोर्ड के माध्यम से योजना की निगरानी करेगा।</p>
<h3><strong>11 अक्टूबर को होगा शुभारंभ</strong></h3>
<p>11 अक्टूबर को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, पूसा से दोनों योजनाओं का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर ₹42,000 करोड़ रुपये से अधिक की 1,100 कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया जाएगा।</p>
<p>प्रधानमंत्री इस अवसर पर उत्कृष्ट किसानों, एफपीओ, सहकारी समितियों और नवाचारकर्ताओं को सम्मानित करेंगे। साथ ही, देशभर में 10,000 एफपीओ, 1 लाख से अधिक जैविक प्रमाणित किसान, और 10,000 नई ई&ndash;PACS समितियों जैसी प्रमुख उपलब्धियों को भी रेखांकित किया जाएगा।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन 40 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य: शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68e8afd74a68f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण में गड़बड़ी! उत्तराखंड की एजेंसी पर एपीडा ने लगाया 10 लाख का जुर्माना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/apeda-imposes-10-lakh-fine-on-uttarakhand-agency-for-irregularities-in-certification-of-organic-products.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 09 Oct 2025 17:15:41 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/apeda-imposes-10-lakh-fine-on-uttarakhand-agency-for-irregularities-in-certification-of-organic-products.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण पर तमाम सवाल उठ रहे हैं। सवालों के घेरे में खुद सरकारी एजेंसियां हैं। <strong>उत्तराखंड राज्य जैविक प्रमाणन एजेंसी </strong><strong>(USOCA)</strong> फिर से विवादों में है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के&nbsp;<strong>कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण </strong><strong>(</strong><strong>एपीडा</strong><strong>)</strong> ने उत्तराखंड राज्य जैविक प्रमाणन एजेंसी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही एजेंसी के उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों में जैविक उत्पादों के प्रमाणन पर प्रतिबंध लगा दिया है।&nbsp;</p>
<p>उत्तराखंड राज्य जैविक प्रमाणन एजेंसी पर यह कार्रवाई राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) <span>के तहत नेशनल एक्रीडीटेशन बॉडी </span>(NAB) की उप समिति ने की है। इस संबंध में एपीडा की ओर से एक सरकुलर जारी किया गया है।</p>
<p><strong>उच्च पदस्थ सूत्रों</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि उत्तराखंड की एजेंसी के प्रमाणीकरण में मानकों के उल्लंघन और गड़बड़ी की शिकायतों को देखते हुए एपीडा ने एजेंसी से जुड़े कई उत्पादक समूहों का ऑडिट कराया था। इस ऑडिट में कई खामियां सामने आई थीं, <span>जिसके बाद एजेंसी पर </span>10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।</p>
<p>ऑडिट में सामने आया कि उत्तराखंड राज्य जैविक प्रमाणन एजेंसी ने बिना किसी जांच-पड़ताल के कई समूहों को उनके उत्पादों के लिए प्रमाण-पत्र जारी कर दिए। जबकि कुछ समूह जैविक खाद की बजाय रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कर रहे थे।&nbsp;कई उत्पादक समूहों में किसान सदस्य फर्जी थे। इस तरह की कई गड़बड़ियां एजेंसी के प्रमाणीकरण में मिली।</p>
<p>उत्तराखंड राज्य जैविक प्रमाणन एजेंसी वर्ष 2001 में स्थापित उत्तराखंड राज्य बीज एवं जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण एजेंसी की एक स्वतंत्र विंग है जो जैविक उत्पादों का थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन करती है। यह सरकारी स्तर पर गठित देश की पहली जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण एजेंसी थी जो आज खुद ही विवादों में है।&nbsp;</p>
<p>उत्तराखंड के अलावा यह एजेंसी देश के लगभग 22 राज्यों में जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण का कार्य करती थी। लेकिन अब यह केवल उत्तराखंड में ही सर्टिफिकेशन कर पाएगी। लेकिन&nbsp;एपीडा के कड़े रुख के बाद भी एजेंसी की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ।</p>
<p><strong>पहले भी विवादों में रही एजेंसी&nbsp;</strong></p>
<p>वर्ष 2023 में उत्तराखंड राज्य जैविक प्रमाणन एजेंसी तब विवादों में आई जब एपीडा की ओर से कराए गये ऑडिट में कई खामियां सामने आई थीं। इस पर एपीडा ने एजेंसी को नोटिस जारी किया था और इस साल अप्रैल में पांच लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया था। एजेंसी द्वारा कपास के प्रमाणीकरण में भी अनियमितताएं पाई गई थीं।&nbsp;</p>
<p><strong>जैविक उत्पाद प्रमाणन पर उठे सवाल </strong></p>
<p>कृषि विशेषज्ञ <strong>डॉ. राजेंद्र प्रसाद कुकसाल</strong> का कहना है कि उत्तराखंड की जैविक उत्पाद प्रमाणन संस्था पर केंद्र सरकार द्वारा जुर्माना और प्रतिबंध लगाना उत्तराखंड में कृषि और शासन व्यवस्था की हालत को उजागर करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन एजेंसी को अन्य राज्यों में प्रमाणीकरण हेतु प्रतिबंधित किया है, <span>उत्तराखंड में उन्हीं एजेंसियों से जैविक प्रमाणीकरण का कार्य करवाया जा रहा है। इस तरह तो फर्जी प्रमाणीकरण जारी रहेगा। </span></p>
<p>कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता <strong>पंकज सिंह क्षेत्री</strong> ने उत्तराखंड की जैविक प्रमाणीकरण एजेंसी पर हुई कार्रवाई के लिए राज्य सरकार और कृषि विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में जैविक प्रमाणीकरण में फर्जीवाड़ा व गड़बड़ी की लगातार शिकायतों के बाद भी राज्य सरकार आंख मूंदे बैठी है। राज्य की एजेंसी पर जुर्माना लगने से उत्तराखंड को जैविक प्रदेश बनाने के दावों की पोल खुल गई है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68e7a0561ce29.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण में गड़बड़ी! उत्तराखंड की एजेंसी पर एपीडा ने लगाया 10 लाख का जुर्माना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[15 सहकारी चीनी मिलों को सीबीजी और पोटाश प्लांट लगाने में मदद करेगी केंद्र सरकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/the-central-government-will-help-15-cooperative-sugar-mills-to-set-up-cbg-and-potash-plants.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 07 Oct 2025 12:47:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/the-central-government-will-help-15-cooperative-sugar-mills-to-set-up-cbg-and-potash-plants.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार 15 सहकारी चीनी मिलों को <strong>कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट</strong> और <strong>पोटाश ग्रैन्यूल</strong> निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए <strong>राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC)</strong> के जरिए सहायता प्रदान करेगी। रविवार को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के कोपरगाव में देश के पहले सहकारी मल्टी-फीड कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री <strong>अमित शाह</strong> ने यह ऐलान किया।</p>
<p>कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि भारत के सहकारी चीनी मिलों के इतिहास में कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट और पोटाश ग्रैन्यूल निर्माण इकाई की शुरुआत पहली बार <strong>सहकार महर्षि शंकरराव कोल्हे सहकारी साखर कारखाने</strong> में हो रही है। <span>यह नई शुरुआत आने वाले दिनों में देशभर के चीनी मिलों के लिए एक नया मार्ग प्रशस्त करेगी। </span>देश की <strong>15 </strong>चुनिंदा सहकारी चीनी मिलों को केंद्र सरकार एनसीडीसी के माध्यम से सीबीजी और पोटाश निर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए हरसंभव प्रोत्साहन देगी। ये प्रयास देश के किसान को &ldquo;अन्नदाता से ऊर्जादाता&rdquo; बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>सहकार महर्षि शंकरराव कोल्हे</strong> द्वारा 1960 में गोदावरी नदी के पास स्थापित संजीवनी सहकारी चीनी मिल ने सहकारिता के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा है। अब यह मिल गन्ने से सीबीजी उत्पादन के साथ-साथ पोटाश खाद का निर्माण भी करेगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन होने की उम्मीद है। भारत का पहला गन्ना-आधारित इथेनॉल संयंत्र भी यहीं स्थापित किया गया था।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68e4bddf48335.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><span>सहकारी नेतृत्व वाली औद्योगिक इकाई संजीवनी ग्रुप एवं शंकरराव कोल्हे सहकारी साखर कारखाना द्वारा इस परियोजना पर </span>लगभग <strong>55 करोड़</strong> रुपये का निवेश किया गया है। यह सीबीजी संयंत्र प्रतिदिन <strong>12 टन सीबीजी</strong> और <strong>75 टन पोटाश</strong> का उत्पादन करेगा। इससे लगभग 1 लाख 10 हजार लीटर पेट्रोल की बचत का अनुमान है। अमित शाह ने कहा कि ये दोनों उत्पाद भारत विदेशों से आयात करता है। इस शुरुआत से हम स्वदेशी की ओर बढ़कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा सकेंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>चक्रीय अर्थव्यवस्था का उदाहरण </strong></p>
<p>संजीवनी मिल के युवा अध्यक्ष <strong>विवेक कोल्हे</strong> की पहल की सराहना की करते हुए अमित शाह ने कहा कि मिल ने चक्रीय अर्थव्यवस्था का एक सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है। गन्ना से अब चीनी, इथेनॉल, अल्कोहोल, बिजली के साथ सीबीजी और पोटॅश जैसे बाय प्रॉडक्ट के उत्पादन से किसानों लाभ हो रहा है। मिल ने सीबीजी की बिक्री के लिए गेल, इंडियन ऑयल, बीपीसीएल, इफको, कृफको और राष्ट्रीय केमिकल फर्टिलाइज़र के साथ अनुबंध किए हैं।</p>
<p>शाह ने कहा कि सहकारी चीनी कारखानों की शुरुआत महाराष्ट्र से हुई थी, <span>और चीनी कारखानों में चक्रीय अर्थव्यवस्था को लागू करने की शुरुआत भी यहीं से हो रही है। यह सहकारी और प्राइवेट सभी चीनी मिलों के लिए एक मिसाल बनना चाहिए। महाराष्ट्र सरकार को इसमें सहयोग करना चाहिए और भारत सरकार भी एनसीडीसी के माध्यम से मदद करेगी। शाह ने इथेनॉल संयंत्रों को बहुआयामी बनाने और फलों की प्रोसेसिंग करने पर भी जोर दिया। </span></p>
<p><strong>केंद्र सरकार किसानों के साथ: अमित शाह </strong></p>
<p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शिरडी दौरे में किसानों और फसलों को अतिवृष्टि से हुई क्षति का जायजा भी लिया। उन्होंने राज्य सरकार को नुकसान का पूरा ब्यौरा केंद्र सरकार को भेजने को कहा है ताकि जल्द से जल्द सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इस बार महाराष्ट्र में किसानों की 60 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि और फसल भारी वर्षा से बरबाद हो गई है। शाह ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के साथ खड़ी है और राज्य सरकार से पूरा ब्यौरा मिलते ही हरसंभव सहायता की जाएगी।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68e4be571f969.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>अमित शाह ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में <span>डॉ. विट्ठलराव विखे पाटिल सहकारी चीनी कारखाने की विस्तारित क्षमता का लोकार्पण किया।</span> इस अवसर पर उन्होंने पद्मश्री डॉ. विठ्ठलराव विखे पाटिल व पद्मभूषण बालासाहेब विखे पाटिल की प्रतिमाओं का अनावरण भी किया। <span>डॉ. विट्ठलराव विखे पाटिल ने साढ़े सात दशक पूर्व 500 टन गन्ना प्रतिदिन की क्षमता के साथ जिस चीनी कारखाने की स्थापना की थी, आज वह 7200 TCD तक पहुंच गया है।</span></p>
<p><span>कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री <strong>देवेंद्र फडणवीस</strong>, केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री <strong>मुरलीधर मोहोल</strong>, उपमुख्यमंत्री <strong>एकनाथ शिंदे</strong> और <strong>अजित पवार</strong> भी उपस्थित रहे। फडणवीस ने कहा कि संजीवनी सहकारी चीनी मिल का मल्टीफीड सीबीजी प्लांट देश भर की चीनी मिलों के लिए एक मॉडल है जिसे अन्य चीनी मिलों को भी अपनाना चाहिए।</span></p>
<p><span></span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ 15 सहकारी चीनी मिलों को सीबीजी और पोटाश प्लांट लगाने में मदद करेगी केंद्र सरकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जीएसटी की अनिश्चितता के बीच ईसबगोल इंडस्ट्री ने कल से खरीद बंद करने की दी चेतावनी, निर्यात की चिंता भी गहराई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/isabgol-industry-warns-of-procurement-halt-from-october-6-amid-gst-uncertainty-export-concerns-deepen.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 05 Oct 2025 13:34:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/isabgol-industry-warns-of-procurement-halt-from-october-6-amid-gst-uncertainty-export-concerns-deepen.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत का ईसबगोल (साइलियम) उद्योग संकट की ओर बढ़ रहा है। इसकी प्रोसेसिंग करने वालों ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़ी जटिलताओं के कारण 6 अक्टूबर से बीज की खरीद रोकने की धमकी दी है। अखिल भारतीय इसबगोल प्रसंस्करणकर्ता संघ (आईपीए) ने कहा है कि जीएसटी नियमों में अस्पष्टता के कारण यह क्षेत्र गंभीर वित्तीय संकट में है। इसके परिणामस्वरूप एक वर्ष से अधिक समय से उनकी पूंजी अटकी हुई है। उद्योग ने सरकार से नकदी दबाव कम करने के लिए ईसबगोल के बीज पर जीएसटी समाप्त करने का आग्रह किया है।</p>
<p>भारत सालाना 3,500 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य की ईसबगोल भूसी का निर्यात करता है, जिसमें से लगभग 60-70% निर्यात अमेरिका को होता है। निर्यातकों का कहना है कि मौजूदा जीएसटी समस्याओं, वैश्विक ऑर्डरों में मंदी और ट्रम्प प्रशासन के दौरान लागू टैरिफ बाधाओं के कारण इसके बाजार को काफी प्रभावित किया है।</p>
<p>वर्ष 2017 में मूल्य वर्धित कर (वैट) की जगह जीएसटी व्यवस्था लागू होने से पहले ईसबगोल पर टैक्स नहीं लगता था। वर्तमान व्यवस्था के तहत ताजे ईसबगोल पर कर नहीं लगता, जबकि सूखे बीजों पर 5% जीएसटी लगता है। हालांकि "ताजा" शब्द की स्पष्ट परिभाषा न होने के कारण प्रोसेसर विवादों से बचने के लिए ज्यादातर खरीद पर जीएसटी चुकाते हैं। नियम के मुताबिक इसका रिफंड मिलता तो है, लेकिन उसमें काफी वक्त लगता है। इससे उनकी कार्यशील पूंजी फंस जाती है।</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स में उद्योग प्रतिनिधियों के हवाले से कहा गया है कि बीज खरीद रुकने से किसानों से लेकर अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर पूरा करने वाले निर्यातकों तकपूरी आपूर्ति श्रृंखला पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। राजस्थान भारत के लगभग 70% ईसबगोल का उत्पादन करता है। गुजरात के विशेष रूप से ऊंझा क्षेत्र में इसकी प्रोसेसिंग होती है। वही इसका प्रमुख व्यापार केंद्र है। अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख बाजारों से मांग धीमी हो गई है, खरीदार ऑर्डर में देरी कर रहे हैं या उन्हें रद्द कर रहे हैं। इससे भी इस क्षेत्र की समस्या बढ़ रही है।</p>
<p>ईसबगोल से प्राप्त भूसी का व्यापक रूप से प्राकृतिक रेचक, खाद्य सामग्री को गाढ़ा बनाने और फाइबर सप्लीमेंट के तौर पर उपयोग किया जाता है। पौध-आधारित और प्राकृतिक स्वास्थ्य उत्पादों में बढ़ती वैश्विक रुचि के साथ ईसबगोल की मांग बढ़ रही है। आईपीए ने सरकार से जीएसटी संबंधी अस्पष्टता को तत्काल दूर करने का आह्वान किया है और आगाह किया है कि निष्क्रियता प्रसंस्करण कार्यों को बाधित कर सकती है, निर्यात को नुकसान पहुंचा सकती है और हजारों किसानों के सामने गंभीर वित्तीय संकट खड़ा कर सकती है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जीएसटी की अनिश्चितता के बीच ईसबगोल इंडस्ट्री ने कल से खरीद बंद करने की दी चेतावनी, निर्यात की चिंता भी गहराई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गर्मी व रोग प्रतिरोधी गेहूं की 4 उच्च उपज किस्में, जानिए आपके क्षेत्र के लिए कौन&amp;#45;सी किस्म बेहतर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/from-lab-to-field-four-high-yielding-wheat-varieties-with-superior-heat-and-disease-resistance.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 04 Oct 2025 17:44:28 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/from-lab-to-field-four-high-yielding-wheat-varieties-with-superior-heat-and-disease-resistance.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गेहूं की <strong>एचडी 3385</strong> किस्म को अधिक उपज देने वाली, ताप-सहिष्णु और रतुआ-रोधी (rust-resistant) किस्म के रूप में विकसित किया गया है। इसे विशेष रूप से उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्र, उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्र और मध्य क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह किस्म पूर्णतः स्वदेशी प्रयासों से विकसित की गई है, जिसके जनक (पेरेंट किस्म) एचडी2967/एचडी2887//एचडी2946/एचडी2733 हैं।</p>
<p>यह पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम (PPVFRA) के तहत पंजीकृत है। एचडी 3385 ने पिछले वर्ष भारत के लगभग सभी हिस्से में अपनी अधिक उपज क्षमता का प्रदर्शन किया और कई स्थानों पर 7 टन/हेक्टेयर से अधिक उपज प्राप्त की। परीक्षण के दौरान इसने एचडी 2967 (15%), एचडी 3086 (10%), डीबीडब्ल्यू 222 (6.9%) और डीबीडब्ल्यू 187 (6.7%) से अधिक उपज प्राप्त की।</p>
<p>98 सेमी की ऊंचाई वाले पौधे के साथ यह अधिक झुकने की सहनशीलता प्रदर्शित करता है। एचडी 3385 की एक प्रमुख विशेषता इसकी गर्मी को मात देने की क्षमता है, जो इसे अधिक हीट स्ट्रेस के प्रति लचीला बनाती है। बदलती जलवायु परिस्थितियों में गेहूं के उत्पादन को बनाए रखने के लिए यह गुण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त यह किस्म पीले, भूरे और काले रतुआ (rust) के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है। इस तरह यह व्यापक रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदर्शित करती है और कवकनाशी रसायनों पर निर्भरता कम होती है।</p>
<p>इस किस्म में उत्कृष्ट टिलरिंग क्षमता भी है, जो इसकी उत्पादकता में योगदान करती है। पहले बुवाई और संरक्षण कृषि पद्धतियों के प्रति एचडी 3385 की अनुकूलता इसे सिंचित क्षेत्रों के किसानों के लिए एक आदर्श विकल्प बनाती है। जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और बेहतर लाभप्रदता सुनिश्चित होती है। यह जलवायु-प्रतिरोधी गेहूं किस्मों के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है जो गर्मी और रोग के दबाव की दोहरी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं। इस किस्म ने पूरे भारत में, विशेष रूप से मध्य प्रदेश, गुजरात और यहां तक कि महाराष्ट्र सहित मध्य भारत में अच्छा प्रदर्शन किया है।</p>
<p><strong>एचडी 3410</strong><br />एचडी 3410 (पूसा जवाहर गेहूं 3410) मध्य क्षेत्र के लिए विकसित एक अधिक उपज देने वाली देसी किस्म है। इसे मध्य प्रदेश में शीघ्र बुवाई की स्थिति और दिल्ली के आसपास उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के लिए भी जारी किया गया है। इसकी औसत उपज 65.91 क्विंटल/हेक्टेयर है। इसने मध्य प्रदेश में BMZ, अधिक उपज प्रदर्शन परीक्षणों (HYPT) और बहु-स्थान परीक्षणों (MLT) में HD 3086 से 24.04%, DBW 187 से 6.83%, WH 1270 से 23.06% और DBW 303 से 24.19% बेहतर प्रदर्शन किया है। इसकी यील्ड इसे मध्य क्षेत्र के लिए एक बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली किस्म बनाती है।</p>
<p>एचडी 3410 में 12.6% हाई प्रोटीन के साथ पोषण संबंधी गुण हैं। इसका कठोरता सूचकांक (80.8) भी ऊंचा है, जो बेहतर मिलिंग गुणवत्ता और प्रसंस्करण दक्षता सुनिश्चित करता है। इसके अतिरिक्त यह तीनों रस्ट - धारीदार रस्ट, पत्ती रस्ट और तना रस्ट - का प्रतिरोधी है। इसके अलावा इसमें उच्च करनाल बंट प्रतिरोध (3.3%) है, जो डीबीडब्ल्यू 187 (7.8%), डब्ल्यूएच 1270 (8.2%) और डीबीडब्ल्यू 303 (10.7%) की तुलना में काफी कम है। अधिक उपज, उत्कृष्ट रोग प्रतिरोधक क्षमता, बेहतर पोषण सामग्री और उत्कृष्ट मिलिंग गुणों के साथ एचडी 3410 (पूसा जवाहर गेहूं 3410) मध्य क्षेत्र के किसानों के लिए एक बेहतरीन गेहूं किस्म है।&nbsp;</p>
<p><strong>एचडी 3388 (पूसा यशोधरा)</strong><br />एचडी 3388 (पूसा यशोधरा) अधिक उपज देने वाली और उत्कृष्ट पोषण गुणवत्ता वाली किस्म है जिसे उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्र की समय पर बुवाई वाली सिंचित परिस्थितियों के लिए विकसित किया गया है। इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल (पर्वतीय इलाकों को छोड़कर), ओडिशा, असम और उत्तर-पूर्वी भारत के मैदानी क्षेत्र शामिल हैं। इसने 52.0 क्विंटल/हेक्टेयर की औसत उपज (68.8 क्विंटल/हेक्टेयर की आनुवंशिक उपज क्षमता) प्रदर्शित की है, जो इसे इस क्षेत्र की सबसे अधिक उपज देने वाली किस्मों में से एक बनाती है। तुलनात्मक परीक्षणों से पता चला है कि एचडी 3388 अन्य प्रमुख किस्मों से बेहतर प्रदर्शन करती है- HD 3086 से 11.6% अधिक, HD 2967 से 10.3% अधिक, DBW 222 से 8.2% अधिक, PBW 826 से 5.3% अधिक, DBW 187 से 4.7% अधिक और HD 3249 से 4.3% अधिक।</p>
<p>अनाज की पोषण गुणवत्ता के संदर्भ में देखें तो HD 3388 में प्रोटीन 11.47% पाया जाता है। इसकी चपाती बनाने की गुणवत्ता उत्कृष्ट है, जिसकी रेटिंग 8.0 है। इससे उपभोक्ताओं को नरम और उच्च गुणवत्ता वाली रोटियां मिलती हैं। इसके अतिरिक्त यह धारीदार रस्ट, लीफ रस्ट और स्टेम रस्ट सहित प्रमुख गेहूं रोगों के प्रति बेहतर प्रतिरोध प्रदर्शित करती है। इसमें करनाल बंट प्रतिरोध (5.05%) भी अन्य व्यावसायिक किस्मों की तुलना में काफी कम है।</p>
<p>HD 3388 में ग्लूटेन की मात्रा भी उत्कृष्ट है, जिसमें गीला ग्लूटेन 25.8% और सूखा ग्लूटेन 8.8% है, जो आटे की मजबूती और बेकिंग क्वालिटी को बेहतर बनाता है। इसके अलावा इसने 0.89 HSI के साथ बेहतर हीट-स्ट्रेस सहनशीलता का प्रदर्शन किया है, जिससे बढ़ते तापमान की परिस्थितियों में इसकी अनुकूलनशीलता सुनिश्चित होती है।&nbsp;</p>
<p>असाधारण उपज क्षमता, उत्कृष्ट पोषण गुणवत्ता, प्रबल रोग प्रतिरोधक क्षमता और अनुकूलनशीलता के साथ HD 3388 (पूसा यशोधरा) उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्र के गेहूं किसानों के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प है, जो उच्च आर्थिक लाभ और बेहतर खाद्य सुरक्षा दोनों का वादा करता है।</p>
<p><strong>एचडी 3390</strong><br />एचडी 3390 दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में समय पर सिंचित परिस्थितियों में बुवाई के लिए विकसित उच्च उपज देने वाली गेहूं की किस्म है। इसकी औसत यील्ड 62.36 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसने अन्य किस्मों की तुलना में महत्वपूर्ण प्रदर्शन किया है। इसने कई परीक्षणों में एचडी 3086 से 10.18% अधिक, एचडी 2967 से 15.98% अधिक, डीबीडब्ल्यू 187 से 3.65% अधिक, डीबीडब्ल्यू 222 से 0.62% अधिक और एचडी 3226 से 6.85% अधिक उपज दी है।</p>
<p>एचडी 3390 किस्म 144 दिनों में पक जाती है और इसके पौधे की ऊंचाई 102 सेमी होती है। इसमें पौष्टिकता अधिक है, इसमें प्रोटीन की मात्रा (12%) अच्छी है, तथा इसका हेक्टोलिटर वेट 78.2 किग्रा/एचएल है। इसके दाने का एपियरेंस स्कोर 6.4 है, जो इसे चपाती बनाने के लिए अत्यधिक उपयुक्त बनाता है।</p>
<p>यह किस्म गेहूं के प्रमुख रोगों के लिए प्रतिरोधी है, और इसमें धारीदार रस्ट प्रतिरोधक जीन Yr10 पाया जाता है, जो भारत में धारीदार रस्ट के सभी विषाणुजनित रोगों से प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है। इसने तीनों रतुओं के प्रति उच्च स्तर की प्रतिरोधक क्षमता प्रदर्शित की है। धारीदार रस्ट के लिए ACI (औसत संक्रमण गुणांक) मान 0 (प्राकृतिक) और 0.2 (कृत्रिम), लीफ रस्ट के लिए 0 (प्राकृतिक) और 4.2 (कृत्रिम), तथा स्टेम रस्ट के लिए 8 (कृत्रिम) है। इसके अलावा HD 3390 में चूर्णिल फफूंदी (रेटिंग 3) के प्रति उच्च स्तर की प्रतिरोधक क्षमता है।</p>
<p>उच्च उपज क्षमता, उत्कृष्ट पोषण और प्रसंस्करण गुणों, प्रबल रोग प्रतिरोधक क्षमता और अनुकूलनशीलता के साथ, HD 3390 दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र के किसानों के लिए एक आदर्श गेहूं किस्म है, जो उच्च उत्पादकता, बेहतर अनाज गुणवत्ता और बेहतर आर्थिक लाभ प्रदान करती है।</p>
<p>(लेखक आईएआरआई में प्रधान वैज्ञानिक हैं। वे 1992 में आईसीएआर से जुड़े और उन्होंने सरसों और गेहूं की कई किस्में विकसित कीं। उनकी कुछ लोकप्रिय किस्मों में एनआरसीडीआर 02, एचडी2932, एचडी2967, एचडी3171, एचडी3226, एचडी3298, एचडीसीएसडब्ल्यू 18 शामिल हैं। उनकी हाल ही में जारी की गई कुछ किस्में एचडी3385, एचडी3388, एचडी3390 और एचडी3410 हैं।)</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गर्मी व रोग प्रतिरोधी गेहूं की 4 उच्च उपज किस्में, जानिए आपके क्षेत्र के लिए कौन-सी किस्म बेहतर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि छात्रों के लिए पात्रता के मापदंड और विषय समूहों को एक समान किया: शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/changes-in-undergraduate-admission-criteria-students-with-agriculture-subject-group-in-12th-will-get-admission-says-shivraj.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 03 Oct 2025 17:42:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/changes-in-undergraduate-admission-criteria-students-with-agriculture-subject-group-in-12th-will-get-admission-says-shivraj.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश में कृषि शिक्षा से संबंधित एक गंभीर विषय को हल&nbsp;करते हुए कृषि के छात्र-छात्राओं को बड़ी राहत दी है। देशभर के छात्रों के लिए पात्रता मानदंड एवं विषय समूह को एक समान कर दिया गया है, जिससे 12वीं में बायोलॉजी, रसायन, भौतिकी, गणित या कृषि विषय समूह लेने वाले विद्यार्थी बराबर पात्रता के साथ राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा (CUET-ICAR) के जरिये दाखिला ले सकेंगे।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने दिल्ली में मीडिया से चर्चा में बताया कि बीएससी एग्रीकल्चर में प्रवेश में कुछ वर्षों से एक बड़ी समस्या आ रही थी। अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग नियमों और पात्रता के कारण कृषि से इंटर करने वाले छात्र-छात्राएं पिछड़ जाते थे। इस बारे में पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया के माध्यम से विद्यार्थियों ने समस्या बताई थी। जिस पर उन्होंने तुरंत संज्ञान लिया और आईसीएआर के महानिदेशक डा. मांगी लाल जाट को निर्देशित किया कि वे राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों व उनके कुलपतियों के साथ बातचीत कर इसका त्वरित हल निकालें।</p>
<p>शिवराज सिंह ने बताया कि बीएससी (कृषि) में आईसीएआर सीटें प्रदान करने वाले 50 कृषि विश्वविद्यालयों में से 42 ने ABC (एग्रीकल्चर, बायोलॉजी, केमिस्ट्री) विषय संयोजन को पात्रता मानदंड के रूप में स्वीकार कर लिया है, जिसे आमतौर पर इंटर कृषि के छात्र पढ़ते हैं। इसके अलावा, 3 विश्वविद्यालयों ने PCA (फिजिक्स, केमिस्ट्री, एग्रीकल्चर) संयोजन को भी स्वीकार कर लिया है।&nbsp;</p>
<p>इस प्रयास के तहत 2025-26 में बीएससी (कृषि) में ICAR कोटे के अंतर्गत उपलब्ध 3121 सीटों में से करीब 2700 सीटें (लगभग 85%) इंटर-कृषि विषय वाले छात्र-छात्राओं के लिए उपलब्ध होगी। वहीं, शेष 5 विश्वविद्यालयों, जिन्हें अपने बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की स्वीकृति की आवश्यकता है, ने आश्वासन दिया कि वे आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 12वीं में कृषि विषय को प्रवेश पात्रता में शामिल करेंगे। इन कुलपतियों से चर्चा जारी है।&nbsp;</p>
<p>शिवराज सिंह ने इस समस्या का समाधान निकालने की दिशा में तत्परता से कार्य करने के लिए आईसीएआर के डीजी और उनकी टीम को बधाई देने के साथ ही कृषि विश्वविद्यालयों-कुलपतियों के सहयोग हेतु उन्हें भी धन्यवाद दिया। इससे अब देश भर के छात्र-छात्राओं के लिए प्रवेश के अवसर सुगम तथा एक समान हो गए हैं। इस व्यवस्था से शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से बीएससी में प्रवेश संबंधित जटिलताएं दूर होकर लगभग तीन हजार विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68dfda56a5a9a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि छात्रों के लिए पात्रता के मापदंड और विषय समूहों को एक समान किया: शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68dfda56a5a9a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ को मंजूरी, 6 साल के लिए 11,440 करोड़ का बजट  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-rs-11440-crore-mission-for-aatmanirbharta-in-pulses-for-6-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 01 Oct 2025 19:42:04 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-rs-11440-crore-mission-for-aatmanirbharta-in-pulses-for-6-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="179" data-end="606">दालों के उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने &lsquo;दलहन आत्मनिर्भरता मिशन&rsquo; को मंजूरी दी। मिशन का उद्देश्य दालों के उत्पादन को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता घटाना और किसानों की आय बढ़ाना है। यह मिशन 2025-26 से 2030-31 तक छह वर्षों की अवधि में 11,440 करोड़ रुपये के बजट के साथ लागू किया जाएगा।</p>
<p data-start="608" data-end="1065">भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उत्पादक और उपभोक्ता है। बढ़ती आय और जीवन स्तर के साथ दालों की खपत भी बढ़ी है, लेकिन घरेलू उत्पादन मांग के अनुरूप नहीं रहा है। परिणामस्वरूप दालों के आयात में 15&ndash;20% तक वृद्धि हुई है। आयात निर्भरता घटाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में इस 6-वर्षीय "दलहन आत्मनिर्भरता मिशन" की घोषणा की गई थी। यह मिशन अनुसंधान, बीज प्रणाली, क्षेत्र विस्तार, खरीद और मूल्य स्थिरता को शामिल करते हुए एक व्यापक रणनीति अपनाएगा।</p>
<p data-start="1067" data-end="1358">मिशन के तहत उच्च उत्पादकता वाली, कीट-प्रतिरोधी और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल दालों की उन्नत किस्मों के विकास और प्रसार पर जोर दिया जाएगा। किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। अंतर-फसलीय खेती और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 88 लाख बीज किट निःशुल्क वितरित की जाएँगी।</p>
<p data-start="1360" data-end="1604">मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन क्षेत्रफल को 310 लाख हेक्टेयर तक विस्तृत करना, उत्पादन को 350 लाख टन तक बढ़ाना और औसत उपज को 1,130 किलोग्राम/हेक्टेयर तक पहुँचाना है। उत्पादकता में वृद्धि के साथ यह मिशन बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी करेगा।</p>
<p data-start="1606" data-end="2032"><strong data-start="1606" data-end="1634">क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण</strong><br data-start="1634" data-end="1637" />मिशन प्रत्येक क्लस्टर की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार कार्यक्रम तैयार करेगा। इससे संसाधनों का प्रभावी उपयोग होगा, उत्पादकता बढ़ेगी और दलहन उत्पादन का भौगोलिक विविधीकरण होगा। इसके तहत 416 जिलों में विशेष उत्पादन एवं वृद्धि कार्यक्रम लागू होंगे। इसमें चावल के परती क्षेत्र, उच्च गुणवत्ता वाले बीज (प्रजनक/आधार/प्रमाणित), इंटरक्रॉपिंग, सिंचाई, बाज़ार संपर्क और तकनीकी सहायता को शामिल किया गया है।</p>
<p data-start="2034" data-end="2249"><strong data-start="2034" data-end="2051">दालों की खरीद</strong><br data-start="2051" data-end="2054" />पीएम-आशा की मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत अरहर, उड़द और मसूर की अधिकतम खरीद सुनिश्चित की जाएगी। NAFED और NCCF अगले चार वर्षों तक भाग लेने वाले राज्यों में पंजीकृत किसानों से 100% खरीद करेंगे।</p>
<p data-start="2251" data-end="2296"><strong data-start="2251" data-end="2294">दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के प्रमुख लक्ष्य</strong></p>
<ul data-start="2297" data-end="2716">
<li data-start="2297" data-end="2351">
<p data-start="2299" data-end="2351">वर्ष 2030-31 तक दाल उत्पादन 350 लाख टन तक पहुँचाना</p>
</li>
<li data-start="2352" data-end="2419">
<p data-start="2354" data-end="2419">11,440 करोड़ रुपये की लागत से दालों में आत्मनिर्भरता हासिल करना</p>
</li>
<li data-start="2420" data-end="2469">
<p data-start="2422" data-end="2469">किसानों को 88 लाख मुफ़्त बीज किट उपलब्ध कराना</p>
</li>
<li data-start="2470" data-end="2534">
<p data-start="2472" data-end="2534">फसल कटाई के बाद भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं को बढ़ावा देना</p>
</li>
<li data-start="2535" data-end="2625">
<p data-start="2537" data-end="2625">NAFED और NCCF द्वारा पंजीकृत किसानों से तुअर, उड़द और मसूर की 100% खरीद सुनिश्चित करना</p>
</li>
<li data-start="2626" data-end="2716">
<p data-start="2628" data-end="2716">फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने हेतु 1,000 प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित करना</p>
</li>
</ul> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68dd35dce78d5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ को मंजूरी, 6 साल के लिए 11,440 करोड़ का बजट   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68dd35dce78d5.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गन्ना पर राष्ट्रीय परामर्श में आए नई वैरायटी और छोटे मशीन विकसित करने के सुझाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/national-consultation-on-sugarcane-suggests-developing-new-varieties-and-machines-for-small-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 01 Oct 2025 12:53:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/national-consultation-on-sugarcane-suggests-developing-new-varieties-and-machines-for-small-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश की गन्ना अर्थव्यवस्था पर मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय परामर्श में कई अहम मुद्दे उभर कर सामने आए। किसानों ने फसल में कीड़े लगने और उत्पादकता घटने का मुद्दा उठाया। खेती में मेकैनाइजेशन पर किसानों का कहना था कि मशीनों को छोटी जोत के किसानों के हिसाब से तैयार किया जाना चाहिए। परामर्श में शामिल विशेषज्ञों ने किसानों को इसके कई समाधान बताए। उन्होंने गन्ने की वैरायटी 0238 के कुछ विकल्प भी बताए। इस सेमिनार का मकसद किसानों के इनपुट और विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर एक प्रस्ताव तैयार करना था, जिससे एक मजबूत राष्ट्रीय गन्ना नीति बनाई जा सके।</p>
<p>यह परामर्श चार सत्र में विभाजित था। पहले सत्र को कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संबोधित किया। डेयर सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम एल जाट ने किसानों को कुछ सुझाव दिए। उनके अलावा विशेषज्ञों ने भी अपनी राय दी। दूसरा तकनीकी सत्र 'किस्म विकास और सतत तीव्रता/विविधीकरण' विषय पर, तीसरा तकनीकी सत्र 'प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, यांत्रिकीकरण, सूक्ष्म सिंचाई, एआई और भविष्य की तकनीक' विषय पर और चौथा एवं अंतिम सत्र 'गन्ना नीति और मूल्य निर्धारण' विषय पर था।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dcd5a2d2ae9.jpg" alt="" /></p>
<p><em>आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट तथा अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।</em></p>
<p>यह आयोजन कृषि और ग्रामीण क्षेत्र को समर्पित मीडिया प्लेटफॉर्म<strong> रूरल वॉयस</strong> और<strong> नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF</strong>) ने <strong>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)</strong> के सहयोग से किया।&nbsp;</p>
<p>कार्यक्रम का संचालन करते हुए <strong>रूरल वॉयस के एडिटर-इन-चीफ हरवीर सिंह</strong> ने कहा, गन्ने की अर्थव्यवस्था अपने आप में बहुत बड़ी है। पिछले दिनों इसे लेकर कई तरह की चिंताएं जताई गईं। गन्ने का रकबा और पैदावार में गिरावट आई है। गन्ने की कई प्रजातियों से अब किसानों को नुकसान हो रहा है। इसका रास्ता निकालने के लिए इस राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन किया गया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dcd77c1d03e.jpg" alt="" /></p>
<p><em>कार्यक्रम का संचालन करते रूरल वॉयस के एडिटर-इन-चीफ हरवीर सिंह।</em></p>
<p>उन्होंने कहा कि गन्ना अब सिर्फ चीनी देने वाली फसल नहीं है। यह हरित ईंधन (एथेनॉल), हरित ऊर्जा, (बिजली और सीबीजी) तथा सहउत्पाद जैसे डिस्टिलरी राख से प्राप्त पोटाश (PDM) और फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM) के लिए भी महत्वपूर्ण है। शीरा (molasses), जिसे पहले देशी शराब और पोटेबल अल्कोहल बनाने के लिए उपयोग किया जाता था, अब एथेनॉल और कई रसायन-आधारित उत्पादों के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है।</p>
<p><strong>सबसे पहले किसानों ने रखी अपनी बात</strong><br />उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के उधरनपुर गांव के किसान अनुराग शुक्ल ने कहा कि गन्ने की 0238 वैरायटी का लाभ निश्चित रूप से मिला है, ऐसी और वैरायटी विकसित की जाए। महाराष्ट्र की तरह मशीनीकरण के लिए अनुदान मिले। पैसा सीधे बटाईदार किसानों के खाते में आए। पंजाब के किसान अवतार सिंह ने बीज तथा अन्य उत्पादन लागत कम करने की जरूरत बताई। उन्होंने भी कहा कि 0238 वैरायटी के बाद कोई अच्छी वैरायटी अभी तक नहीं मिली है। वैसी और वैरायटी विकसित की जानी चाहिए। ट्रेंच विधि से गन्ने की खेती करने वाले उत्तर प्रदेश के मेरठ के किसान विनोद सैनी ने इंटरक्रॉपिंग के महत्व के बारे में बताया। सैनी इंटरक्रॉपिंग में गन्ने के साथ मूंगफली की खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि इससे गन्ने के उत्पादन में भी 10-12 प्रतिशत की वृद्धि हुई। गन्ने में कीट लगने की संभावना कम होती है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के शामली जिले के गांव भैंसवाल के उमेश कुमार ने कहा कि 0238 के बाद कोई वैरायटी उत्पादन बढ़ाने में सक्षम नहीं हुई। महंगाई के कारण गन्ने से किसानों का मोहभंग हो रहा है। इसलिए रकबा भी घटा है। कम लागत, कम मेहनत और अधिक उत्पादन से ही किसान को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में उर्वरकों के दाम दोगुने से ज्यादा हो गए, लेकिन गन्ने की कीमत उस हिसाब से नहीं बढ़ी। गन्ना किसानों की आय मनरेगा से भी कम रह गई है। उन्होंने खेती को ज्यादा से ज्यादा मेकैनाइज करने और छोटे हारवेस्टर पर फोकस करने का आग्रह किया।</p>
<p><strong>पहला सत्रः विशेषज्ञों ने दिया नई वैरायटी किसानों तक जल्द पहुंचाने का सुझाव</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dcd8ee2544f.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>गन्ना बुवाई-कटाई के लिए मेकैनाइजेशन की जरूरतः केतन कुमार पटेल</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dcdadc0fdd9.jpg" alt="" /></p>
<p>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोआपरिटेव शुगर फैक्टरीज लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट केतन कुमार पटेल ने कहा, किसानों के लिए गन्ना कल्प वृक्ष जैसा है। चीनी के अलावा अन्य कई सह-उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात में बटाईदार किसान का रजिस्ट्रेशन होता है और उसे ही गन्ने का भुगतान किया जाता है। उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों में भी ऐसा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गन्ना बुवाई-कटाई के लिए मेकैनाइजेशन की जरूरत है। लेकिन भारत में खेत छोटे हैं, इसलिए छोटे मशीन चलाना मुश्किल है। आसपास के खेत वाले किसान मिल कर खेती करें तो मेकैनाइजेशन आसान होगा।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय गन्ना विकास बोर्ड की स्थापना होः दीपक बल्लानी</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dcdb9593fa8.jpg" alt="" /></p>
<p>इंडियन शुगर एवं बॉयो-इनर्जी मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि पैदावार बढ़ाने के लिए नई वैरायटी जल्दी से जल्दी किसानों तक पहुंचाने की जरूरत है। अभी 10-12 साल लगते हैं, इसे 6-7 साल तक लाने की जरूरत है। बीमारी प्रतिरोधी वैरायटी विकसित करने के साथ यह देखना होगा कि कैसे बीज किसानों तक जल्दी पहुंचे। इसमें टिश्यू कल्चर फैसिलिटी को विकसित करने की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश में किसानों को ड्रिप इरिगेशन को बढ़ाना चाहिए। राज्य में कुछ जगहों पर एआई का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पैदावार 30-40 प्रतिशत बढ़ने के आसार हैं। उन्होंने कहा कि एफआरपी बढ़ाने की जरूरत है, लेकिन साथ ही चीनी के दाम को भी बढ़ने दिया जाए। एसबीआई कोयंबटूर ने जीन एडिटिंग पर काम शुरू किया है। उसका विस्तार किया जाना चाहिए। छोटे हारवेस्टर का विस्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय गन्ना विकास बोर्ड की स्थापना का भी सुझाव दिया।&nbsp;</p>
<p><strong>दूसरा सत्रः किस्म विकास और सतत तीव्रता/विविधीकरण</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dcdd31e1ad4.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>वैरायटी 0238 से मोनेक्रॉपिंग को बढ़ावाः डॉ. देवेंद्र कुमार यादव&nbsp;</strong><br />आईसीएआर में क्रॉप साइंस के उप महानिदेशक डॉ. देवेंद्र कुमार यादव ने कहा कि शुरू में किसानों को गन्ने की वैरायटी 0238 बहुत पसंद आई, लेकिन उससे मोनोक्रॉपिंग को बढ़ावा मिला। ऐसा नहीं कि इस वैरायटी का विकल्प नहीं है। कई वैरायटी आई &nbsp;हैं, लेकिन नई वैरायटी आने में समय लगता है। उन्होंने बताया कि हर वैरायटी की तीन साल टेस्टिंग होती है। इस दौरान बीमारी या कीड़े की समस्या को भी देखा जाता है। फसल की यील्ड भी देखी जाती है। यील्ड गैप का अध्ययन ज्यादातर फसलों में जरूरी है। डॉ. यादव ने कहा कि इस सेमिनार में आए सुझावों पर गौर किया जाएगा और देखा जाएगा कि उससे किसानों की समस्याओं का कैसे समाधान किया जा सकता है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dcdf3b9c25f.jpg" alt="" /></p>
<p>डॉ. यादव ने इससे पूर्व के सत्र को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि किसानों की शिकायत है कि लागत के हिसाब से गन्ने के दाम नहीं बढ़ रहे हैं। इसे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इन-ऑर्गेनिक खेती करने वालों को कई तरह की सब्सिडी का लाभ मिलता है। ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसान उन सब्सिडी का इस्तेमाल नहीं करते हैं। यह देखा जाना चाहिए कि उसका फायदा किसानों को कैसे मिले। खेती में मशीनीकरण एक महत्वपूर्ण अवयव है, लेकिन छोटे खेतों में मशीनीकरण को कैसे सफल बनाएं।&nbsp;</p>
<p><strong>मेकैनाइजेशन से कम होगी किसान की लागतः शक्ति सिंह</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dcde05258a1.jpg" alt="" /></p>
<p>हरियाणा कोआपरेटिव शुगर फेडरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर शक्ति सिंह ने कहा कि जिस वैरायटी में चीनी ज्यादा होती है, उसमें रोग भी ज्यादा लगते हैं। जिस वैरायटी में चीनी कम मिलेगी, वह किसानों के लिए कम फायदेमंद होगी। उन्होंने गन्ना किसानों की लागत कम करने और उन्हें अधिक दाम दिलाने के उपाय तलाशने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गन्ने की फसल की कीमत का 15 प्रतिशत कटाई और छिलाई में ही लग जाता है। इसलिए आईसीएआर को एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में भी ध्यान देना चाहिए। मेकैनिकल हारवेस्टिंग इसका एक समाधान हो सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी। इसके साथ बाकी मेकैनाइजेशन पर भी जोर दिया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>किसानों की सहूलियत के लिए छोटा हारवेस्टर डेवलप होः रोशन लाल टामक</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dcde6298a03.jpg" alt="" /></p>
<p>डीसीएम श्रीराम लिमिटेड के सीईओ एवं ईडी तथा यूपी-इस्मा के पूर्व अध्यक्ष रोशन लाल टामक ने वैज्ञानिक की बताई परफॉर्मेंस और फील्ड परफॉर्मेंस में अंतर पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अभी यह अंतर बहुत ज्यादा है, यह कम होना चाहिए। आईसीएआर को देखना चाहिए कि वैरायटी रिलीज करने की प्रक्रिया को जल्दी और आसान कैसे किया जाए। देश में वैरायटी विकसित करने पर बहुत काम हो रहा है। लेकिन ये काम साइलो में, अलग-अलग हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रायरिटी तय करने में किसान और इंडस्ट्री की सहभागिता जरूरी है। मेकैनाइजेशन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि छोटा हारवेस्टर डेवलप करना जरूरी है ताकि किसानों को सहूलियत हो। बीज के लिए टिश्यू कल्चर को प्रमोट करने की आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन के कारण बदलाव तेजी से हो रहे हैं। इसलिए टिश्यू कल्चर को स्पेशल प्रोजेक्ट की तरह डेवलप किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>तीसरा सत्रः प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, यांत्रिकीकरण, सूक्ष्म सिंचाई, एआई और भविष्य की तकनीकें&nbsp;</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dce30d84929.jpg" alt="" /></p>
<p><em>तीसरे सत्र को संबोधित करते आईसीएआर में उप महानिदेशक (कृषि प्रसार) डॉ. राजबीर सिंह।</em></p>
<p><strong>मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद गन्ने में मेकैनाइजेशन कमः डॉ.सी.आर. मेहता&nbsp;</strong><br />आईसीएआर-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल के निदेशक डॉ.सी.आर. मेहता ने बताया कि देश में गन्ना हारवेस्टिंग में क्या काम हुआ है। उन्होंने &nbsp;सीडबेड की तैयारी, प्लांटिंग, ट्रांसप्लांटिंग, रटूनिंग में लगने वाली मशीनों के बारे में बताया। उन्होंने ट्रैक्टर से ऑपरेट होने वाली मशीनों के बारे में भी जानकारी दी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dce0c357288.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने कहा कि अभी हारवेस्टिंग की बड़ी मशीनें हैं, छोटी जोत वाले किसानों के लिए इनका प्रयोग करना मुश्किल होगा। कुछ राज्यों में चीनी मिलों की मदद से इनका प्रयोग शुरू किया गया है। होल केन हारवेस्टर में सारे ऑपरेशन एक साथ होते हैं। अभी यह लाइसेंसिंग की प्रक्रिया में है। इसकी लागत पांच से छह लाख रुपये है। उन्होंने यह भी कहा कि मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद गन्ने में मेकैनाइजेशन कम है।</p>
<p><strong>गन्ने के साथ दलहन-तिलहन की इंटरक्रॉपिंग की गुंजाइशः डॉ. सुनील कुमार</strong><br />आईसीएआर-भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIFSR) मोदीपुरम, मेरठ के निदेशक डॉ. सुनील कुमार ने गन्ने में इंटरक्रॉपिंग के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि तिलहन और दलहन की इंटरक्रॉपिंग से देश में इनका आयात भी कम होगा। उन्होंने बताया कि खास कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इंटरक्रॉपिंग कम होती है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dce14209549.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने कहा कि सिर्फ एक फसल लगाने पर पानी की अधिक खपत, कीट एवं रोग प्रबंधन की समस्या, छोटी जोत, मृदा स्वास्थ्य में गिरावट, सह-उत्पादों का कॉमर्शियलाइजेशन जैसी समस्याएं हैं। गन्ने की सीओ-0238 किस्म के अलावा सीओ-0118 और 15023 में भी रोगों और कीटों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। लागत भी बढ़ रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इंटरक्रॉपिंग में यूपी में मूंग, उड़द, चना, सरसों, आलू प्याज, लहसुन, पत्ता गोभी, फूलगोभी राजमा, कद्दू की खेती होती है। इंटरक्रॉपिंग से नाइट्रोजन फिक्सिंग होती है। पानी की आवश्यकता कम होती है। कम अवधि वाली फसलें इस्तेमाल होती हैं। इसके लिए अलग से पानी या पोषक तत्व देने की आवश्यकता नहीं होती है। इसके लिए उन्होंने कई उदाहरण प्रस्तुत किए।</p>
<p><strong>एआई के प्रयोग से बढ़ा गन्ने का उत्पादनः डॉ. विवेक भोइटे</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dce19d290d8.jpg" alt="" /></p>
<p><br />केवीके बारामती, पुणे के वैज्ञानिक डॉ. विवेक भोइटे ने गन्ने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के प्रयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रिसर्च को अपनाने में एआई मदद करता है। बारामती में गन्ने पर इसका प्रयोग किया गया है। इसके लिए हब एंड स्पोक मॉडल अपनाया गया। हर किसान के खेत में मिट्टी में नमी की जानकारी देने के लिए यंत्र लगाया। सैटेलाइट से रोजाना इमेज (मैपिंग) लिए जाते हैं। इन सब जानकारी के आधार पर तैयार अल्गोरिद्म का प्रयोग खेतों में किया गया। महाराष्ट्र में सभी सहकारी, गैर-सहकारी सभी मिलों से जुड़े किसानों को इसकी जानकारी दी जा रही है। पांच हजार किसानों के यहां ये यंत्र लगाए गए हैं। इससे प्रति एकड़ 100 टन से ज्यादा उत्पादन हासिल करने में सफलता मिली है। लेकिन इन सबके लिए किसानों को टेक्नोलॉजी को समझना पड़ेगा। हॉर्टीकल्चर और फ्लोरीकल्चर में भी एआई का प्रयोग कर रहे हैं। एआई बीमारी के बारे में पहले अनुमान लगा लेता है। उन्होंने कहा कि एआई की मदद से 40 प्रतिशत ज्यादा यील्ड हुई और श्रम 20-40 प्रतिशत कम लगता है।</p>
<p>एनएफसीएसएफ के मुख्य सलाहकार (गन्ना) डॉ. आर एस. डाउले ने कहा कि आने वाले समय में पॉलिसी एआई पर निर्भर करेगी। मोबाइल एप पर सारी जानकारियां मिलेंगी। किसान एआई और ड्रिप का इस्तेमाल करके पानी की बचत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इनपुट लागत बढ़ रही है। इसलिए अब खेत में मैनेजमेंट करने की जरूरत है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dce21d4dec9.jpg" alt="" /></p>
<p>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कृषि अभियांत्रिकी विभाग के सहायक महानिदेशक (एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग)&nbsp; डॉ. के.पी. सिंह ने कहा कि एआई के उपयोग से इनपुट की लागत कम की जा सकती है। पानी का इस्तेमाल भी आधा किया जा सकता है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dce42140971.jpg" alt="" /></p>
<p>डॉ. के.पी. सिंह ने कहा कि भारत में सबसे ज्यादा पीने के पानी का इस्तेमाल 700-800 अरब घन मीटर सिंचाई में करते हैं। इसलिए किसानों को सोचना चाहिए कि मेकैनाइजेशन के साथ एआई की इस्तेमाल कैसे करना है। इस सत्र को जैन ग्लोबल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और चीफ एग्रोनॉमिस्ट डॉ. पी. सोमन ने भी संबोधित किया।&nbsp;</p>
<p><strong>चौथा सत्रः नीति और मूल्य निर्धारण</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dce4703b742.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>गन्ना भुगतान का सबसे ज्यादा बकाया यूपी मेंः प्रकाश नाइकनवरे</strong><br />एनएफसीएसएफ के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे ने बताया कि गन्ना तथा अन्य फसलों के दाम कैसे तय होते हैं। उन्होंने बताया कि हर विषय की एक पैरेंट मिनिस्ट्री होती है। गन्ने के लिए यह कृषि और खाद्य मंत्रालय है। पॉलिसी की शुरुआत पैरेंट मिनिस्ट्री से होती है। वह नोट जारी करती है। उसे सचिवों की समिति के पास भेजा जाता है जिसमें 12 सचिव होते हैं। उनके सुझाव के बाद प्रस्ताव अंतर मंत्रालयी समिति के पास जाता है। उसके बाद यह मंत्री समूह को भेजा जाता है। अभी इसके प्रमुख सहकारिता मंत्री अमित शाह हैं। उनके अलावा इस समिति में कृषि मंत्री, वाणिज्य मंत्री, खाद्य मंत्री और वित्त मंत्री हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dce4decc677.jpg" alt="" /></p>
<p>नाइकनवरे ने बताया कि हाल ही सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को भी शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि पैरंट मिनिस्ट्री नोट बनाने से पहले नेशनल शुगर फेडरेशन और इस्मा के प्रतिनिधियों को बुलाया जाता है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस साल गन्ने का करीब साढ़े छह हजार करोड़ रुपये का बकाया है। इसमें सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश का है।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड समेत कुछ राज्यों में गन्ने का दाम राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) होता है और यह राज्य सरकारें तय करती हैं और उसके निर्धारण में काफी कुछ राजनीतिक मकसद होता है। जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात समेत दक्षिण के राज्यों में केंद्र सरकार द्वारा तय फेयर एंड रिम्यूनेरेटिव प्राइस (एफआरपी) के आधार पर गन्ना मूल्य का भुगतान होता है।&nbsp;</p>
<p><strong>इथेनॉल बनाना अब फायदेमंद नहीं, दाम बढ़ाने की जरूरतः अतुल चतुर्वेदी</strong><br />श्री रेणुका शुगर्स लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि &nbsp;किसान की सेहत अच्छी है तभी फैक्ट्री की सेहत अच्छी रहेगी और फैक्ट्री की सेहत अच्छी है तो किसान की स्थिति भी अच्छी रहेगी। वर्ष 2025 शुगर के लिए बहुत खराब रहा है। यूपी में चीनी मिलें 150 दिन बाद ही बंद हो गईं जो 200 दिन चला करती थीं। यही स्थिति दूसरे राज्यों में भी है। उन्होंने कहा कि तीन साल से इथेनॉल की कीमत में इजाफा नहीं हुआ, जबकि गन्ने की कीमतें बढ़ी हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dce5353e6a0.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने एक और मुद्दा उठाया। कहा कि मक्के का इथेनॉल तेल कंपनियां महंगा खरीद रही हैं जबकि गन्ने के इथेनॉल के दाम 5-7 रुपये कम देती हैं। नीति आयोग ने कहा था कि इथेनॉल 55 प्रतिशत शुगर से आना चाहिए और बाकी अनाज से। आज शुगर से सिर्फ 35% इथेनॉल आता है बाकी 65% अनाज से आता है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि गन्ने से चीनी बनाने की लागत 40-41 रुपये प्रति किलो आती है। एथनॉल बनाना अब फायदेमंद नहीं रह गया है। इसके दाम बढ़ाए जाने चाहिए।&nbsp;</p>
<p><strong>जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर नीति बनेः यू.एस. तेवतिया</strong><br />इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) के सीजीएम डॉ. यू.एस. तेवतिया ने नीति बनाने में जमीनी परिस्थितियों का ध्यान रखने पर जोर दिया और उत्तर प्रदेश में गन्ना कटाई के लिए हारवेस्टर चलाने में आ रही समस्याओं का जिक्र किया।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68dce58e60c44.jpg" alt="" /></p>
<p>तेवतिया ने किसानों से कहा कि जब कोई मशीन के बारे में बताए, तो उसे खेत पर चला कर देखना चाहिए कि वह कामयाब है या नहीं। चाहे वह वैरायटी का डेवलपमेंट हो या मशीन का, तब तक वह सफल नहीं होगा जब तक वह खेतों में काम नहीं करेगा। उन्होंने सवाल किया कि शोध पत्रिकाओं में अनक रिसर्च प्रकाशित हुए, लेकिन उनमें से कितने ऐसे हैं जिनसे किसानों को फायदा हुआ। ऐसा इसलिए कि उस रिसर्च में किसानों को भागीदार नहीं बनाया गया।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68dd3f5c64401.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गन्ना पर राष्ट्रीय परामर्श में आए नई वैरायटी और छोटे मशीन विकसित करने के सुझाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68dd3f5c64401.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गन्ने पर रिसर्च के लिए ICAR में अलग टीम बनाई जाएगीः शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/a-separate-team-will-be-formed-in-icar-for-research-on-sugarcane-shivraj.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 30 Sep 2025 12:34:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/a-separate-team-will-be-formed-in-icar-for-research-on-sugarcane-shivraj.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने कहा कि देश में गन्ने पर रिसर्च के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) में अलग टीम बनाई जाएगी। यह टीम गन्ने की खेती से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर फोकस करेगी। केंद्रीय मंत्री "<strong>गन्ना अर्थव्यवस्था पर राष्ट्रीय परामर्श"</strong> को संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन मंगलवार को नई दिल्ली के पूसा परिसर में मीडिया प्लेटफॉर्म <strong>रूरल वॉयस</strong> और <strong>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) </strong>द्वारा <strong>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)</strong> के सहयोग से किया गया।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, हितधारकों से परामर्श के बाद ही राज्यों और देश की कृषि नीति में जरूरत के मुताबिक संशोधन करेंगे। इसमें किसान, इंडस्ट्री और वैज्ञानिक सबके साथ चर्चा होगी। 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मेरठ में किसानों ने बताया कि गन्ने की 238 वैरायटी में चीनी की मात्रा अच्छी है, लेकिन इसमें रेड रॉट की समस्या आ गई है। हमें सोचना पड़ेगा कि एक वैरायटी कितने साल चलेगी। हमें साथ-साथ दूसरी वैरायटी पर भी काम करना पड़ेगा। ताकि एक वैरायटी में समस्या हो तो दूसरी तैयार रहे।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा&nbsp;कि&nbsp;समस्याओं से हम परिचित हैं। हमें उत्पादन बढ़ाना है,&nbsp;मैकेनाइजेशन की जरूरत है। यह भी देखना है कि लागत कैसे घटाएं,&nbsp;चीनी की रिकवरी ज्यादा कैसे हो। पानी के इस्तेमाल का भी सवाल है। पानी की आवश्यकता को हम कैसे कम कर सकते हैं। इसके लिए &lsquo;पर ड्रॉप मोर क्रॉप&rsquo; सोच का आधार होना चाहिए। इसके साथ यह भी देखना है कि किसान उतना खर्च करेगा कैसे,&nbsp;क्योंकि ड्रिप बिछाने के लिए पैसे चाहिए।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कौन से अन्य प्रोडक्ट बन सकते हैं जिनसे किसानों का लाभ बढ़े। यह भी देखा जाना चाहिए कि क्या प्राकृतिक खेती फर्टिलाइजर की समस्या में सहायक हो सकती है।&nbsp;चीनी मिलों की अपनी समस्याएं हो सकती हैं लेकिन किसानों को गन्ने के भुगतान में देरी होती है। मजदूरी की भी समस्या है। आजकल श्रमिक आसानी से नहीं मिलते है। यह देखना चाहिए कि क्या हम ट्रेनिंग देकर कैपेसिटी बिल्डिंग का काम कर सकते हैं। मैकेनाइजेशन डिवीजन भी इस पर सोचे कि कम मेहनत से कैसे गन्ने की कटाई की जा सकती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मोनो क्रॉपिंग की समस्या अनेक रोगों को नियंत्रण देती है। इससे नाइट्रोजन फिक्सेशन की समस्या भी उपजती है। लगातार एक ही फसल पोषक तत्वों को कम कर देती है। यह देखा जाना चाहिए कि मोनोक्रेपिंग की जगह इंटरक्रॉपिंग कितनी व्यावहारिक है।&nbsp;</p>
<p>कृषि मंत्री ने कहा कि आईसीएआर को मैं कहना चाहता हूं कि गन्ना रिसर्च के लिए अलग टीम बनाएं। यह टीम व्यावहारिक समस्याओं पर गौर करे। किसान और इंडस्ट्री की मांगों के अनुरूप की रिसर्च होनी चाहिए। जिस रिसर्च का किसान को फायदा नहीं,&nbsp;उसका कोई मतलब नहीं। <span>हमने तय किया था कि गन्ने के लिए हमें ब्रेनस्टॉर्मिंग करनी है। आज जो परामर्श कर रहे हैं वो गन्ने की फसल के लिए हमारे रोडमैप का बेस साबित हो सकता है। </span>कृषि विभाग अगले 5 साल के लिए योजना बनाने वाला है।&nbsp;</p>
<p><strong>आईसीएआर प्रमुख ने बताए रिसर्च के चार प्रमुख फोकस</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x_68db80d6e4fae.jpg" alt="" /></p>
<p>राष्ट्रीय परामर्श को संबोधित करते हुए आईसीएआर के महानिदेशक और सचिव, डेयर,&nbsp; <strong>डॉ. एम.एल. जाट</strong> ने रिसर्च के लिए चार प्रमुख फोकस बताए- पहला, क्या रिसर्च में क्या फोकस करना है। दूसरा, रिसर्च आगे ले जाने के लिए क्या डेवलपमेंटल मुद्दे हैं। तीसरा, इंडस्ट्री से संबंधित क्या मुद्दे हैं और चौथा, पॉलिसी से संबंधित क्या कदम उठाए जाने चाहिए।&nbsp;</p>
<p>डॉ. जाट ने कहा कि गन्ने में पानी का काफी उपयोग होता है और फर्टिलाइजर का भी काफी इस्तेमाल होता है। मोनोक्रॉपिंग की वजह से कीट और बीमारियों की समस्या है। इंडस्ट्री और मार्केट से संबंधित समस्या है। पानी की समस्या दूर करने के लिए कई अनुसंधान हुए हैं। गन्ने में माइक्रो इरिगेशन से पानी की बचत होगी। जिस तरीके से फर्टिलाइजर का इस्तेमाल होता है वह ठीक नहीं है। उर्वरकों की एफिशिएंसी बढ़ाना जरूरी है।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि मोनोक्रॉपिंग की बजाय विविधीकरण की आवश्यकता है। गन्ने के साथ इंटरक्रॉपिंग में दलहन और तिलहन का प्रयोग किया जा सकता है। देश में दलहन और तिलहन की पैदावार बढ़ाने की कोशिश भी चल रही है। इंटरक्रॉपिंग से किसानों की आमदनी बढ़ेगी और सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x_68db80d5ba711.jpg" alt="" /></p>
<p><em>गन्ने पर आयोजित राष्ट्रीय परामर्श में उपस्थित प्रतिभागी।</em></p>
<p><strong>किसानों और चीनी उद्योग ने उठाए अपने मुद्दे&nbsp;</strong></p>
<p>परिचर्चा में कई राज्यों से आए <strong>प्रगतिशील गन्ना किसानों</strong> ने अपनी समस्याओं और मुद्दों से अवगत कराया। सबसे ज्यादा चिंता गन्ने की रोगग्रस्त प्रजाति 0238 का विकल्प न मिल पाने को लेकर सामने आई। साथ ही गन्ने के दाम में बढ़ोतरी और श्रमिक न मिलने की समस्या को लेकर भी किसानों ने अपनी बात रखी।&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर आईसीएआर के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने गन्ने की उन्नत किस्में विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। <strong>आईसीएआर</strong> के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) <strong>डॉ. देवेंद्र कुमार यादव</strong>, उप महानिदेशक (कृषि प्रसार) <strong>डॉ. राजबीर सिंह</strong>, गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर के निदेशक <strong>डॉ. पी. गोविंदराज</strong>, भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के निदेशक <strong>डॉ. दिनेश सिंह</strong> सहित वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने गन्ने की खेती से जुड़े तकनीकी और वैज्ञानिक पहलुओं के बारे में बताया।&nbsp;</p>
<p><strong>इस्मा</strong> के महानिदेशक<strong> दीपक बल्लानी</strong>, डीसीएम श्रीराम लिमिटेड के सीईओ एवं ईडी (शुगर बिजनेस) <strong>रोशन लाल टामक</strong> तथा रेणुका शुगर्स लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन <strong>अतुल चतुर्वेदी</strong> ने चीनी व एथनॉल उत्पादन से जुड़ी चिंताओं को साझा किया।&nbsp;</p>
<p><strong>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF)</strong> के उपाध्यक्ष <strong>केतन कुमार पटेल</strong> तथा महानिदेशक <strong>प्रकाश नाइकनवरे</strong> ने सहकारी चीनी मिलों की भूमिका और उनने जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।&nbsp;&nbsp;&nbsp; &nbsp; &nbsp;</p>
<p>कार्यक्रम का संचालन करते हुए रूरल वॉयस के प्रधान संपादक <strong>हरवीर सिंह</strong> ने देश में गन्ना की अर्थव्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के हल और किसानों की बेहतर आय के लिए संवाद और समन्वित प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68dd1b7b4f911.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गन्ने पर रिसर्च के लिए ICAR में अलग टीम बनाई जाएगीः शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68dd1b7b4f911.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गन्ना अर्थव्यवस्था की चुनौतियों पर राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/national-consultation-on-the-sustainable-sugarcane-economy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 30 Sep 2025 07:54:45 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/national-consultation-on-the-sustainable-sugarcane-economy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत की गन्ना अर्थव्यवस्था पर आज नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन कृषि और ग्रामीण क्षेत्र को समर्पित मीडिया प्लेटफॉर्म रूरल वॉयस और नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ (NFCSF) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सहयोग से कर रहे हैं। इसे केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी संबोधित करेंगे। वे इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे।</p>
<p>भारत की गन्ना अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इससे 500 से अधिक चीनी मिलें और लगभग पांच करोड़ गन्ना किसान परिवार जुड़े हुए हैं। गन्ना अब केवल चीनी उत्पादन की फसल न रहकर यह हरित ईंधन (एथेनॉल), हरित ऊर्जा, (बिजली और सीबीजी) तथा सहउत्पाद जैसे डिस्टिलरी राख से प्राप्त पोटाश (PDM) और फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM) के लिए भी महत्वपूर्ण है। शीरा (molasses), जिसे पहले देशी शराब और पोटेबल अल्कोहल बनाने के लिए उपयोग किया जाता था, अब एथेनॉल और कई रसायन-आधारित उत्पादों के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है।</p>
<p>हालांकि, इस विकास के साथ गंभीर चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। गन्ना क्षेत्र को घटती उत्पादकता, कम चीनी रिकवरी, प्रमुख कीट एवं रोग प्रकोप जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे किसानों की आय और उद्योग की आमदनी प्रभावित हो रही है। इसके अलावा तकनीकी और नीतिगत मुद्दे भी हैं जिनका त्वरित समाधान आवश्यक है। इन सभी गंभीर मुद्दों पर विचार-विमर्श कर दीर्घकालिक समाधान खोजने के लिए सभी हितधारकों का एक साथ आना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से टिकाऊ गन्ना पारिस्थितिकी तंत्र (Sustainable Sugarcane Economy) के निर्माण हेतु यह राष्ट्रीय परामर्श आयोजित किया जा रहा है।</p>
<p>विकसित कृषि संकल्प अभियान &nbsp;के दौरान गन्ना किसानों ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को अपनी दिक्कतों से अवगत कराया था। तदोपरांत प्रमुख फसलों पर फसल-वार परामर्श कराने का निर्णय लिया गया था, जिसमें गन्ना भी शामिल है। यह परामर्श उसी दिशा में प्रस्तावित है जैसा कि माननीय कृषि मंत्री ने सुझाव दिया था।</p>
<p>राष्ट्रीय परामर्श में चर्चा के लिए प्रमुख विषय हैं - उच्च उत्पादकता, रोग प्रतिरोधी और बेहतर चीनी रिकवरी वाली नई गन्ना किस्मों का विकास, सभी हितधारकों के लिए &nbsp;व्यवहारिक गन्ना और चीनी मूल्य निर्धारण नीतियाँ, विभिन्न मंत्रालयों और प्राधिकरणों के बीच बेहतर समन्वय, केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर दोहरा विनियमन और अधिकार क्षेत्रों पर चर्चा और गन्ना उत्पादन और फसल कटाई में नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने की आवश्यकता।</p>
<p>इस परामर्श में गन्ना किसान, उद्योग प्रतिनिधि, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सहकारी महासंघ, कृषि वैज्ञानिक (ICAR) और संबद्ध संस्थान, नीति निर्माता, विशेषज्ञ तथा कृषि मंत्रालय एवं खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय के अधिकारी शामिल होंगे। इसमें वर्तमान चुनौतियों एवं टिकाऊ गन्ना अर्थव्यवस्था (Sustainable Sugarcane Economy) की दिशा पर विस्तृत चर्चा होगी। विचार-विमर्श के आधार पर गन्ना क्षेत्र के लिए भविष्य की कार्ययोजना और रोडमैप तैयार किया जाएगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68db5b232236b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गन्ना अर्थव्यवस्था की चुनौतियों पर राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68db5b232236b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ईज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस सुधार से बीज उद्योग में सालाना 800 करोड़ रुपये की वृद्धि संभव: FSII]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/regulatory-reforms-need-of-hour-to-boost-indias-domestic-seed-market-and-export-growth.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 28 Sep 2025 23:35:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/regulatory-reforms-need-of-hour-to-boost-indias-domestic-seed-market-and-export-growth.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अगर नीति और नियमों में व्यापक सुधार किया जाए, तो भारत के 30,000 करोड़ रुपये के बीज उद्योग से सालाना 800 करोड़ रुपये से ज्यादा अतिरिक्त आर्थिक मूल्य पैदा किया जा सकता है। इससे किसानों तक बेहतर किस्में जल्दी पहुंचेंगी और भारत का वैश्विक बीज व्यापार में हिस्सा लगभग 1% से बढ़कर 2035 तक 10% तक पहुंच सकता है। फेडरेशन ऑफ़ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (FSII) की एक नई रिपोर्ट में यह बताया गया है।</p>
<p>&ldquo;भारतीय बीज उद्योग में व्यापार करने में आसानी: समग्र नीतिगत सुधारों के माध्यम से विकास को गति देना&rdquo; नामक इस रिपोर्ट को FSII की 9वीं वार्षिक आम बैठक और सम्मेलन के दौरान लॉन्च किया गया। रिपोर्ट बताती है कि अगर नियमों को आसान बनाया जाए तो भारत की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और इसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। इन सुधारों से एक औसत बीज कंपनी हर साल 3&ndash;5 नई किस्में पेश कर सकती है, अनुसंधान और विकास में ज्यादा निवेश कर सकती है और किसानों तक नई तकनीक जल्दी पहुंचा सकती है।</p>
<p>तमिलनाडु के प्रगतिशील किसान रविचंद्रन वांचिनाथन ने किसानों की नज़र से इस मुद्दे की अहमियत बताई। उन्होंने कहा, &ldquo;किसान जीएम फसलों और दूसरी नई तकनीकों की माँग कर रहे हैं, जो हमें जलवायु परिवर्तन, कीट-पतंगों और बीमारियों से लड़ने में मदद कर सकें। हम ऐसी नीतियाँ चाहते हैं जो हमें वैज्ञानिक प्रगति का फायदा लेने दें, हमें पीछे न छोड़ें। अगर बाज़ार में ज़्यादा प्रतिस्पर्धा और विकल्प होंगे तो हमें अच्छे क्वालिटी के बीज समय पर मिलेंगे। पीछे मुड़कर देखें तो हरित क्रांति की सफलता इसलिए संभव हुई क्योंकि उस समय भ्रामक प्रचार नहीं था।&rdquo;</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बीज उद्योग को हर साल करीब 300 करोड़ रुपये का नुकसान नियमों में बाधाओं के कारण होता है, खासकर लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन में देरी के कारण। इसके अलावा, अनावश्यक किस्म परीक्षण, राज्यों और केंद्र के नियमों में असंगति और जटिल प्रक्रियाएं विशेषकर MSMEs को प्रभावित करती हैं।</p>
<p>पीपीवीएफआरए (PPVFRA) के चेयरपर्सन डॉ. त्रिलोचन मोहापात्रा ने कहा कि बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) की सुरक्षा इन बाधाओं को दूर करने की कुंजी है। उन्होंने कहा, &ldquo;भारत ने इस क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है और आगे बढ़ने के लिए एक मज़बूत IP ढांचा बेहद ज़रूरी है। ब्रीडर्स और किसानों के अधिकारों की रक्षा न सिर्फ़ रिसर्च में निवेश को बढ़ावा देती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि नई तकनीक बिना देर किए किसानों तक पहुँचे। IP सुरक्षा के साथ-साथ, आवेदनों की समय पर मंजूरी भी उतनी ही अहम है और यही हमारी अथॉरिटी की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।&rdquo;</p>
<p>रिपोर्ट में तत्काल सुधार की सिफारिश की गई है, नियमों का डिजिटलीकरण, &ldquo;वन नेशन, वन लाइसेंस&rdquo; की शुरुआत, और राज्यों में असंगत नियमों और किस्म परीक्षण को समान बनाना। FSII का अनुमान है कि इससे उद्योग को सालाना 382&ndash;708 करोड़ की बचत होगी, R&amp;D में 13&ndash;15% की वृद्धि होगी और नई किस्में जल्दी आएंगी।</p>
<p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव (बीज) अजीत के. साहू ने कहा, &ldquo;सरकार बीज क्षेत्र की वृद्धि के लिए सभी चुनौतियों को दूर करने की दिशा में काम कर रही है। SATHI जैसी पहल बीजों की ट्रेसबिलिटी को और मज़बूत बनाएगी और किसानों तक अच्छी क्वालिटी के बीज समय पर पहुँचाएगी। मैं बीज उद्योग का स्वागत करता हूँ कि वह वैल्यू चेन अप्रोच अपनाए और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप फॉर एग्रीकल्चर वैल्यू चेन डेवलपमेंट (PPPAVCD) जैसे कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग ले।&rdquo;</p>
<p>नियमों और कानूनों के तालमेल पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार अलग-अलग कानूनों जैसे 1966 का सीड एक्ट और PPVFRA एक्ट को मिलाकर एक व्यापक ढांचा बनाने पर विचार कर रही है। उन्होंने बताया, &ldquo;ड्राफ्ट सीड बिल पर काम चल रहा है और इसे जल्द ही लाया जाएगा।&rdquo;</p>
<p>वैज्ञानिक और नियामक दृष्टिकोण जोड़ते हुए, आईसीएआर (ICAR) के सहायक महानिदेशक (बीज) डॉ. डी.के. यादव ने मज़बूत पब्लिक&ndash;प्राइवेट सहयोग की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, &ldquo;भारत का निजी क्षेत्र अहम योगदान दे रहा है और पब्लिक सेक्टर को अच्छी तरह से पूरक कर रहा है। सरकार सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है और ज़रूरत है कि पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर मिलकर काम करें, ताकि बौद्धिक संपदा जैसी चुनौतियों का समाधान किया जा सके।&rdquo;</p>
<p>अजय राणा, FSII के अध्यक्ष और सवाना सीड्स के CEO &amp; MD ने कहा, &ldquo;हमारे सर्वे से पता चलता है कि नियमों की बाधाओं के कारण हर साल 800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होता है। भारत की 54% से अधिक बीज कंपनियां MSMEs हैं, जिनके लिए अनुपालन लागत सालाना लगभग 64 लाख रुपये है। अगर हम लाइसेंसिंग को एकीकृत करें और प्रक्रियाओं को डिजिटाइज करें, तो 382&ndash;708 करोड़ रुपये की बचत होगी, R&amp;D में 15% तक वृद्धि होगी और भारत वैश्विक बीज बाजार में 10% हिस्सेदारी हासिल कर सकता है। इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि इस क्षेत्र में हजारों नई नौकरियां भी पैदा होंगी।&rdquo;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ईज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस सुधार से बीज उद्योग में सालाना 800 करोड़ रुपये की वृद्धि संभव: FSII ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमत घटकर 470 डॉलर प्रति टन पर, चीन से आयात बढ़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/urea-price-in-global-market-decreased-to-470-doller-per-tonne-inport-from-china-has-gone-up.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 26 Sep 2025 15:16:20 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/urea-price-in-global-market-decreased-to-470-doller-per-tonne-inport-from-china-has-gone-up.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में खरीफ सीजन में यूरिया की किल्लत झेल रहे किसानों के लिए राहत की खबर है और उन्हें रबी सीजन में यूरिया की किल्लत से नहीं जूझना पड़ेगा। इसकी वजह जहां वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतों में करीब 60 डॉलर प्रति टन की गिरावट है, वही चीन से भारत में यूरिया का आयात बढ़ रहा है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमत 530 डॉलर प्रति टन से घटकर 470 डॉलर प्रति टन पर आ गई है। वहीं चीन द्वारा यूरिया निर्यात बढ़ाने का फायदा भारत को हुआ है।&nbsp; वहां से पांच लाख टन यूरिया का आयात हो चुका है और नये टेंडर के तहत वहां से 10 लाख टन यूरिया का आयात होगा। हालांकि पांच लाख टन यूरिया का आयात 530 डॉलर प्रति टन की कीमत पर हुआ लेकिन अब नया आयात 470 डॉलर प्रति टन की कीमत पर होगा।</p>
<p>उद्योग सूत्रों ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि फिलहाल यूरिया की खपत के लिए दो माह लीन सीजन है। सितंबर और अक्तूबर में यूरिया की खपत कम होती है। वहीं घरेलू उत्पादन बढ़ने और अधिक आयात होने के चलते रबी सीजन में यूरिया की आपूर्ति बेहतर रहेगी। जिसका किसानों को फायदा होगा। सालाना देश में करीब 400 लाख टन यूरिया की खपत होती है।</p>
<p>चालू खरीफ सीजन में किसानों को यूरिया की उपलब्धता का संकट देश के कई हिस्सों में झेलना पड़ा है। कई हिस्सों में जहां यूरिया के लिए किसानों को लंबी कतारों में लगना पड़ा वहीं इसकी कालाबाजारी की खबरें आती रही हैं।&nbsp;</p>
<p>जहां तक यूरिया के बाद सबसे अधिक खपत वाले उर्वरक डाई अमोनियम फॉस्फेट का सवाल है तो वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमत औसतन 800 डॉलर प्रति टन है। इसके आयात सौदे 810 से 790 डॉलर प्रति टन के&nbsp; बीच हुए हैं। उक्त सूत्र के मुताबिक रबी सीजन मेें डीएपी की उपलब्धता भी सामान्य रहेगी क्योंकि आयात बढ़ा है। देश में सालाना करीब 100 लाख टन डीएपी की खपत होती है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_646b1e8a4e9a8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमत घटकर 470 डॉलर प्रति टन पर, चीन से आयात बढ़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी का एमएसपी बढ़ने की संभावना, सहकारी चीनी मिल फेडरेशन ने खाद्य मंत्रालय को लिखा पत्र]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/industry-estimate-350-lakh-tonnes-sugar-production-in-new-sugar-season-expacts-sugar-msp-increase.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 23 Sep 2025 14:12:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/industry-estimate-350-lakh-tonnes-sugar-production-in-new-sugar-season-expacts-sugar-msp-increase.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="157" data-end="411">आगामी चीनी उत्पादन वर्ष (2025-26) में चीनी उद्योग को <strong data-start="210" data-end="232">350 लाख टन उत्पादन</strong> का अनुमान है। नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रियां (एनएफसीएसएफ) का मानना है कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में बेहतर मानसून के चलते उत्पादन बढ़कर 350 लाख टन तक पहुंच सकता है।</p>
<p data-start="413" data-end="714">फेडरेशन के प्रबंध निदेशक प्रकाश नायकनवरे ने <em data-start="457" data-end="468">रूरल वॉयस</em> से बातचीत में बताया कि देशभर में चीनी उत्पादन की संभावना बेहतर है, विशेषकर महाराष्ट्र और कर्नाटक में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसके साथ ही फेडरेशन ने 45 लाख टन चीनी के एथेनॉल उत्पादन हेतु डायवर्जन और 20 लाख टन निर्यात की संभावना जताई है।</p>
<p data-start="716" data-end="1143">फेडरेशन ने चीनी की एक्स-फैक्टरी कीमतें 3,860 से 4,070 रुपये प्रति क्विंटल रहने के आधार पर, केंद्रीय खाद्य मंत्रालय से न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) को 3,100 रुपये से बढ़ाकर <strong data-start="893" data-end="922">3,900 रुपये प्रति क्विंटल</strong> करने की मांग की है। मंत्रालय को लिखे पत्र में फेडरेशन ने कहा है कि इस स्तर पर एमएसपी बढ़ाने से महंगाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जबकि सहकारी चीनी मिलों को बड़ी मात्रा में वित्तीय तरलता मिलेगी और कीमतों में स्थायित्व आएगा।</p>
<p data-start="1145" data-end="1682">चालू पेराई सीजन में चीनी उत्पादन का अनुमान <strong data-start="1188" data-end="1205">261.10 लाख टन</strong> है। स्पेशल सीजन में तमिलनाडु और कर्नाटक की 18 चीनी मिलों में सितंबर तक पेराई जारी रही। 15 सितंबर तक उत्पादन 259.35 लाख टन रहा और औसत रिकवरी 9.26% (एथेनॉल डायवर्जन के बाद) दर्ज की गई। इस सीजन में 34 लाख टन चीनी का एथेनॉल हेतु डायवर्जन हुआ। वहीं सरकार द्वारा तय 10 लाख टन निर्यात कोटे में से 15 सितंबर तक <strong data-start="1509" data-end="1523">7.7 लाख टन</strong> चीनी का निर्यात हो चुका है। भारत से चीनी के बड़े आयातक देशों में जिबूती, श्रीलंका, अफगानिस्तान, सोमालिया, बांग्लादेश और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं।</p>
<p data-start="1684" data-end="1872">नए सीजन (2025-26) में 350 लाख टन उत्पादन के आधार पर, 285 लाख टन घरेलू खपत, 20 लाख टन निर्यात और 45 लाख टन एथेनॉल डायवर्जन के बाद, क्लोज़िंग स्टॉक का अनुमान <strong data-start="1840" data-end="1856">53.33 लाख टन</strong> लगाया गया है।</p>
<p data-start="1874" data-end="2533">एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (ईबीपी) के तहत चालू एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) में 31 अगस्त तक <strong data-start="1966" data-end="1986">1,133 करोड़ लीटर</strong> एथेनॉल की आपूर्ति का आवंटन किया गया, जिसमें 31% हिस्सा चीनी आधारित और 69% हिस्सा अनाज आधारित एथेनॉल का रहा। अब तक <strong data-start="2101" data-end="2129">840 करोड़ लीटर ब्लेंडिंग</strong> के साथ एथेनॉल ब्लेंडिंग का स्तर <strong data-start="2162" data-end="2172">19.12%</strong> तक पहुंचा है, जिसमें से 295 करोड़ लीटर की आपूर्ति चीनी उद्योग से की गई। आगामी सीजन (2025-26) में बेहतर चीनी उत्पादन की संभावना को देखते हुए सरकार ने गन्ने के रस, सिरप, बी-हैवी और सी-हैवी शीरे से एथेनॉल उत्पादन की अनुमति चीनी मिलों को दे दी है। उद्योग को उम्मीद है कि अगले साल एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (2025-26) में <strong data-start="2483" data-end="2503">1,200 करोड़ लीटर</strong> एथेनॉल का आवंटन किया जाएगा।</p>
<p data-start="2535" data-end="2942">नायकनवरे ने <em data-start="2547" data-end="2558">रूरल वॉयस</em> को बताया कि मंत्रालय को एमएसपी बढ़ाने के लिए लिखे पत्र पर हमें सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है। उन्होंने कहा, &ldquo;हमने 3,900 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी मांगी है, जो मौजूदा एक्स-फैक्टरी कीमतों के आधार पर है। इससे सहकारी चीनी मिलों को अधिक ऋण उपलब्ध हो सकेगा, क्योंकि फिलहाल सहकारी बैंक स्टॉक का मूल्यांकन 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की मौजूदा एमएसपी पर करते हैं, जो व्यावहारिक नहीं है।&rdquo;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी का एमएसपी बढ़ने की संभावना, सहकारी चीनी मिल फेडरेशन ने खाद्य मंत्रालय को लिखा पत्र ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गुजरात के किसानों की हाईफार्म पाठशाला के साथ आलू खेती में नई पहल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/gujarat-farmers-graduate-into-a-new-era-of-potato-farming-with-hyfarm-paathshala.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 22 Sep 2025 10:16:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/gujarat-farmers-graduate-into-a-new-era-of-potato-farming-with-hyfarm-paathshala.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गुजरात में इस सप्ताह एक ऐतिहासिक पड़ाव हासिल हुआ, जब हाईफार्म (हाईफन फूड्स की एग्री-बिज़नेस यूनिट) ने पहला &ldquo;हाईफार्म पाठशाला दीक्षांत समारोह&rdquo; आयोजित किया। यह सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि एक आंदोलन का उत्सव था&mdash;जहाँ हाईफार्म के किसान बदलाव के अग्रणी बनकर एकजुट हुए। यह वह क्षण था जब परंपरागत ज्ञान ने आधुनिक तकनीकों से मेल खाकर खेती को नई दिशा दी। यह &ldquo;बैक-टू-स्कूल&rdquo; मॉडल एक उच्च गुणवत्ता वाली, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी आलू व्यवस्था का निर्माण कर रहा है, जो अतीत का सम्मान करते हुए भविष्य को गले लगाता है।</p>
<p><strong>पाठशाला मॉडल</strong><br />हाईफार्म पाठशाला एक अनोखा फार्म स्कूल बनकर उभरा है, जिसका उद्देश्य ज्ञान को कक्षा से निकालकर सीधे खेतों में पहुँचाना है। पिछले सीजन में, 17 माइक्रो पॉकेट्स में फैले 30+ प्रदर्शन खेतों के माध्यम से 7,000 से अधिक किसानों ने इस गहन, व्यवहारिक शिक्षण में भाग लिया।<br />बीज रोपण से पहले मिट्टी परीक्षण और बीज उपचार से लेकर, फसल चक्र के दौरान संतुलित पोषण और सटीक सिंचाई तक, तथा अंत में कटाई की ऐसी पद्धतियों तक, जो गुणवत्ता बढ़ाएँ और नुकसान घटाएँ&mdash;हर तकनीक को विशेषज्ञों ने किसानों के साथ मिलकर समझाया, प्रदर्शित किया और अपनाया।</p>
<p><strong>किसानों पर प्रभाव</strong><br />परिणाम परिवर्तनकारी रहे। पाठशाला किसानों ने ज्ञान को व्यवहार में बदलते हुए ड्रिप सिंचाई का बेहतर उपयोग किया और पानी की खपत में 40% तक की बचत की। लागत में 12&ndash;15% की कमी आई और अनुकूल रोपण तकनीकों से बीज की खपत प्रति एकड़ कम हुई। इन फायदों ने लाभप्रदता को बढ़ाया और गुणवत्ता में सुधार लाया&mdash;मजबूत कंद, अधिक ठोस सामग्री और कम आकारहीन या हरे आलू।<br />मेहसाणा के किसान राकेश पटेल के लिए यह अनुभव जीवन बदलने वाला रहा। उन्होंने कहा, &ldquo;पानी की बचत ही हमारे लिए बड़ी राहत है। प्रति एकड़ सात बोरी बीज की बचत सीधे मेरे लाभ में जुड़ती है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण था मेरी फसल की गुणवत्ता। इस साल मैंने पाठशाला की रीजेनरेटिव प्रैक्टिस केवल थोड़ी ज़मीन पर आजमाई थी, और नतीजे चौंकाने वाले थे। अगले साल मैं इस सीख को अपने पूरे खेत पर लागू करूँगा।&rdquo;<br />हाईफार्म पाठशाला दीक्षांत समारोह गर्व का क्षण था। किसान सिर ऊँचा करके, कंधों पर दुपट्टा और हाथों में प्रमाणपत्र लिए मंच पर चले। परिवारों, साथियों और कृषि उद्योग के नेताओं ने उनका उत्साह बढ़ाया। यह केवल शिक्षण की मान्यता नहीं थी, बल्कि यह घोषणा थी कि ये किसान अपने समुदायों के ज्ञान-प्रतीक और प्रेरणास्रोत बन चुके हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x_68d021e0e9c50.jpg" alt="" /></p>
<p><em>हाईफार्म पाठशाला में भाग लेने वाले किसान।</em></p>
<p>हाईफन फूड्स के प्रबंध निदेशक एवं समूह सीईओ हरेश करमचंदानी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, &ldquo;हाईफार्म का मिशन स्पष्ट है&mdash;हमारे साझेदार किसानों के जीवन की गुणवत्ता को उनकी आर्थिक स्थिति मज़बूत करके ऊपर उठाना। पाठशाला सिर्फ प्रशिक्षण नहीं है; यह सशक्तिकरण, आत्मविश्वास और समुदाय-निर्माण है। पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक को मिलाकर गुजरात के किसान बदलाव के चैंपियन बन चुके हैं, जो भारत की आलू कहानी को हमारी मिट्टी से वैश्विक बाज़ार तक ले जा रहे हैं। जब किसान उठते हैं, तो देश उठता है।&rdquo;<br />गुजरात के किसानों के लिए हाईफार्म पाठशाला एक प्रशिक्षण कार्यक्रम से कहीं अधिक है&mdash;यह उनकी यात्रा का विश्वसनीय साथी है, जो सुनिश्चित करता है कि हर बूँद पानी, हर बीज और हर रुपया अधिक मूल्य पैदा करे। अब ये स्नातक किसान अपने गाँव लौटकर आधुनिक खेती के राजदूत बनेंगे और दिखाएँगे कि छोटे-छोटे बदलाव भी बड़े परिवर्तन ला सकते हैं।<br />हाईफार्म के सीईओ एस. सौंदरराजन ने गर्व के साथ कहा, &ldquo;इस साल ने हमें छोटे कदमों की ताकत दिखाई है। मिट्टी परीक्षण, सटीक सिंचाई, उचित दूरी&mdash;छोटी से छोटी प्रैक्टिस भी मिलकर बड़ा असर करती है। ये न सिर्फ लागत घटाते हैं, बल्कि पैदावार और गुणवत्ता दोनों बढ़ाते हैं। किसान की सालभर की मेहनत अंत में क़्वालिटी से आँकी जाती है, और इसी वजह से हम हर कदम पर अपने किसानों के साथ चलते हैं। जब क़्वालिटी बढ़ती है, तो हमारे किसान भी आगे बढ़ते हैं। यही पाठशाला की असली भावना है&mdash;ऐसा ज्ञान जो सीधे परिणाम में बदलता है।&rdquo;<br />हाईफार्म ने 2028&ndash;29 तक 30,000 किसानों से सहयोग और 10 लाख टन आलू की खरीद का साहसिक लक्ष्य रखा है। पाठशाला की सफलता साबित करती है कि प्रगति की शुरुआत किसान के खेत से होती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68d021dfbe937.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गुजरात के किसानों की हाईफार्म पाठशाला के साथ आलू खेती में नई पहल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68d021dfbe937.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्रोफॉरेस्ट्री में किसानों की भूमिका जलवायु और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण, विशेषज्ञों ने किया प्रयास बढ़ाने का आह्वान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmers-role-in-agroforestry-vital-for-climate-economyexperts-call-for-scaling-efforts.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 21 Sep 2025 15:49:24 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmers-role-in-agroforestry-vital-for-climate-economyexperts-call-for-scaling-efforts.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि वानिकी (एग्रोफॉरेस्ट्री) जलवायु परिवर्तन को रोकने, पारिस्थितिकी को सुधारने और ग्रामीण आजीविका के स्रोत के रूप में उभर रही है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में इसकी पूरी क्षमता का अभी तक दोहन नहीं हुआ है। नई दिल्ली में कृषि वानिकी के विस्तार पर आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में कृषि वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं ने इसे अपनाने को बढ़ावा देने के लिए मजबूत संस्थागत, वित्तीय और नीतिगत ढांचों का सुझाव दिया।</p>
<p>ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (TAAS) के चेयरमैन डॉ. आर.एस. परोदा ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा, "कृषि वानिकी अपनाने वाले किसान एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय सेवा प्रदान कर रहे हैं। उन्हें उनके इस योगदान के लिए उचित पुरस्कार मिलना चाहिए।"</p>
<p>आईसीएआर के उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. राजबीर सिंह ने चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जहां 86% भारतीय किसान छोटे और सीमांत हैं, वहीं 2.8 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से केवल 8-10% ही कृषि वानिकी के अंतर्गत है। उन्होंने क्षमता निर्माण को मजबूत करने, क्षेत्र-विशिष्ट प्रौद्योगिकी मॉडल विकसित करने और विकास को गति देने के लिए संस्थागत कन्वर्जेंस सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।</p>
<p>तास, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), आईसीएआर-केंद्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान, झांसी और विश्व कृषि वानिकी केंद्र (आईसीआरएएफ) के भारत कार्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस सम्मेलन में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ मौजूद थे। इसमें आईसीएआर के उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. ए. के. नायक, तास के सचिव डॉ. भाग मल, आईसीआरएएफ के पूर्व उप महानिदेशक डॉ. रवि प्रभु और सीआईएफओआर-आईसीआरएएफ, भारत के कंट्री डायरेक्टर डॉ. मनोज डबास शामिल थे। सीआईएफओआर-आईसीआरएएफ की सीईओ और आईसीआरएएफ, नैरोबी की महानिदेशक डॉ. एलियाने उबालिजोरो ने भी इस कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। दो दिवसीय परामर्श 19 सितंबर को संपन्न हुआ।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x_68cf90b72f4b7.jpg" alt="" /></p>
<p><em>डॉ. आर.एस. परोदा, चेयरमैन, तास</em></p>
<p><strong>कृषि वानिकी की बढ़ती प्रासंगिकता</strong><br />कृषि वानिकी में वृक्ष को कृषि प्रणाली में इंटीग्रेट किया जाता है। जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और शमन के लिए कृषि वानिकी को वैश्विक समाधान के रूप में पहचाना गया है। प्राकृतिक वनों पर दबाव के बीच यह धरती पर हरियाली का विस्तार करने, बंजर भूमि के पुनर्वास और भोजन, चारा, ईंधन, इमारती लकड़ी और जैव विविधता का एक व्यवहार्य मार्ग प्रदान करती है।</p>
<p>विश्व स्तर पर लगभग 1.2 अरब लोग एक अरब हेक्टेयर में कृषि वानिकी करते हैं, जो कुल कृषि भूमि का 10% है। भारत में कृषि वानिकी औद्योगिक लकड़ी की आपूर्ति को बढ़ावा देने में सहायक रही है। यह औद्योगिक लकड़ी की लगभग 90% मांग को पूरा करती है, जबकि सरकारी वन 4% से भी कम योगदान देते हैं। 2015 से 2019 के बीच वनों के बाहर वृक्ष आवरण में 1.8% की वृद्धि हुई, जिसमें से 86% कृषि वानिकी के कारण हुई।</p>
<p><strong>नीतिगत समर्थन और निवेश</strong><br />कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति (NAP) ने कृषि वानिकी उप-मिशन के अंतर्गत 14.63 करोड़ डॉलर के आवंटन सहित महत्वपूर्ण प्रोत्साहन प्रदान किया है। इस नीति ने 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 650 प्रजातियों की खेती, कटाई और परिवहन संबंधी बाधाओं को दूर किया है। कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत 3.5 अरब डॉलर के निवेश ने भी बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण पहलों को समर्थन दिया है।</p>
<p>वर्ष 2023 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के अंतर्गत एक कृषि वानिकी घटक की शुरुआत की, जिसका प्रस्तावित बजट 5.4 करोड़ डॉलर है। यह राज्यों के साथ साझेदारी में गुणवत्तापूर्ण सामग्री के उत्पादन पर केंद्रित है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x_68cf90b6c7fa5.jpg" alt="" /></p>
<p><em>डॉ. राजबीर सिंह, आईसीएआर के उप महानिदेशक (कृषि विस्तार)&nbsp;</em></p>
<p><strong>व्यापक रूप से अपनाने में चुनौतियां</strong><br />नीतिगत प्रगति के बावजूद कई बाधाएं बनी हुई हैं। कुछ राज्यों में कृषि वानिकी प्रजातियों की कटाई और परिवहन पर नियामक प्रतिबंध किसानों को हतोत्साहित करते हैं। कई मंत्रालयों और राज्य सरकारों के विभागों को शामिल करने वाला प्रशासनिक ढांचा अक्सर विसंगतियां पैदा करता है।</p>
<p>इसके अलावा, भारत की कृषि की रीढ़ कहे जाने वाले छोटे और सीमांत किसान सीमित आर्थिक क्षमता, मूल्य संबंधी जानकारी के अभाव और कमजोर बाजार ढांचे के कारण कृषि वानिकी को अपनाने में कठिनाई का सामना करते हैं। हालांकि यह दीर्घकालिक रूप से लाभदायक है, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव और अपर्याप्त संस्थागत समर्थन से होने वाले जोखिम अभी गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं।</p>
<p><strong>विस्तार के अवसर</strong><br />सम्मेलन में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के जलवायु और विकास लक्ष्यों के लिए कृषि वानिकी में अपार संभावनाएं हैं। यह कार्बन अवशोषण में योगदान देता है, जैव विविधता को बढ़ावा देता है और मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। भोजन और चारे से लेकर इमारती लकड़ी और गैर-इमारती वन उत्पादों तक, विविध आजीविका विकल्प प्रदान करने की अपनी क्षमता के साथ कृषि वानिकी ग्रामीण आय को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकती है।</p>
<p>भारत में पारंपरिक कृषि वानिकी प्रणालियों, जैसे कृषि वन - कृषि और वन - पशुपालन का एक मजबूत आधार भी है। इन्हें पुनर्जीवित करते हुए आधुनिक बनाया जा सकता है। विशिष्ट जर्मप्लाज्म, विभिन्न किस्मों के विकास और क्षेत्र-विशिष्ट कृषि वानिकी मॉडलों पर शोध उत्पादकता को और बढ़ा सकते हैं।</p>
<p>सम्मेलन का समापन अनुसंधान को मजबूत करने, अंतर-मंत्रालयी समन्वय सुनिश्चित करने और किसान-हितैषी नीतियों को व्यापक बनाने के आह्वान के साथ हुआ। विशेषज्ञों ने बाजार निर्माण, वित्त तक बेहतर पहुंच और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्रदान करने वाले किसानों को प्रोत्साहन देने का सुझाव किया। उनका कहना था कि कृषि वानिकी पहले से ही भारत की औद्योगिक लकड़ी की जरूरतों को पूरा करने और जलवायु परिवर्तन में योगदान देने में अपनी उपयोगिता साबित कर रही है। ऐसे में इसे अपनाने से न केवल पर्यावरण बल्कि लाखों किसानों की आर्थिक क्षमता में भी बदलाव आ सकता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68cf90b596cda.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्रोफॉरेस्ट्री में किसानों की भूमिका जलवायु और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण, विशेषज्ञों ने किया प्रयास बढ़ाने का आह्वान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि यंत्र निर्माता व डीलर जीएसटी सुधारों का लाभ तुरंत किसानों को दें: शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-directs-agri-machinery-industry-dealers-to-ensure-gst-benefits-reach-farmers-holds-meeting-with-representatives.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 19 Sep 2025 16:25:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-directs-agri-machinery-industry-dealers-to-ensure-gst-benefits-reach-farmers-holds-meeting-with-representatives.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि तथा ग्रामीण विकास मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> की अध्यक्षता में शुक्रवार को नई दिल्ली में कृषि यंत्र निर्माताओं के संगठनों की एक अहम बैठक हुई। इसमें ट्रैक्टर एवं कृषि यंत्रीकरण संघ (TMA), कृषि मशीनरी निर्माता संघ (AMMA), अखिल भारतीय कम्बाइन हार्वेस्टर निर्माता संघ (AICMA) तथा पावर टिलर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (PTAI) समेत अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</p>
<p>बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि यंत्रों पर जीएसटी की दरें जो पहले 18 प्रतिशत और 12 प्रतिशत थी, जो घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई हैं। यह घटी हुई दरें 22 सितंबर से लागू हो जाएंगी। इसका लाभ किसानों को मिलेगा।&nbsp;</p>
<p>जीएसटी दरों में कटौती का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने के लिए यह बैठक बुलाई गई थी। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि मशीनों के निर्माता और डीलर जीएसटी सुधारों का लाभ अविलंब रूप से किसानों को दें। उन्होंने सभी प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि <span>बिचौलियों की भूमिका को निष्क्रिय करते हुए जीएसटी की घटी दरों का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचाने की हरसंभव कोशिश करें।</span></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जीएसटी दरों में सुधार एक बड़ा कदम है। इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा। ट्रैक्टर 35 एचपी अब 41,000 रुपये सस्ता हो गया है। ट्रैक्टर 45 एसपी पर अब 45,000 रुपये सस्ता मिलेगा। वहीं ट्रैक्टर 50 एचपी पर 53,000 रुपये और ट्रैक्टर 75 एचपी पर 63,000 रुपये की बचत होगी। बागवानी व निराई-गुड़ाई करने वाले छोटे ट्रैक्टर पर भी बचत होगी। छोटे से लेकर बड़े ट्रैक्टर्स पर जीएसटी दरों में कमी के बाद कीमत कम हो गई है। धान रोपण यंत्र पर 15,400 रुपये कम हो गए हैं। 4 टन प्रति घंटा क्षमता वाले बहुफसली थ्रेसर अब 14,000 रुपये सस्ता हो गया है।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों तक जीएसटी दरों में सुधारों की जानकारी पहुंचाने के लिए विभिन्न संचार माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कस्टम हायरिंग सेंटर को भी मशीनें सस्ती मिलेंगी, इसलिए किराए की दर भी कम होनी चाहिए। इसके लिए भी प्रय़ास किया जाएगा। आगामी 3 अक्टूबर से रबी फसल के लिए शुरू होने जा रहे <strong>&lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo;</strong> के दूसरे चरण के दौरान भी जीएसटी सुधारों के लाभ की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गये हैं।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भविष्य में कृषि यंत्रीकरण को और मजबूत करने के लिए विशेष रूप से कदम उठाए जाएंगे। कृषि यंत्र निर्माता संघों के प्रतिनिधियों ने सरकार के जीएसटी सुधार के निर्णय का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया। इस बैठक में कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>नई GST </strong><strong>दरों से कृषि यंत्रों पर बचत </strong></p>
<p>▶️ ट्रैक्टर पर बचत ₹41,000 से ₹63,000 तक</p>
<p>▶️ पावर टिलर पर बचत ₹11,875 तक&nbsp;</p>
<p>▶️ सीड ड्रिल पर बचत ₹3,220 से ₹4,375 तक&nbsp;</p>
<p>▶️ मल्टीक्रॉप थ्रेशर पर बचत ₹14,000 तक&nbsp;</p>
<p>▶️ हार्वेस्टर पर बचत ₹1,87,500 तक&nbsp;</p>
<p>▶️ स्ट्रॉ रीपर पर बचत ₹21,875 तक&nbsp;</p>
<p>▶️ बेलर पर बचत ₹93,750 तक&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68cd346cd1433.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि यंत्र निर्माता व डीलर जीएसटी सुधारों का लाभ तुरंत किसानों को दें: शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68cd346cd1433.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कपास की फसल पर मौसम व कीटों की मार, किसानों को खरीद मानकों में राहत की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cotton-crop-hit-by-weather-and-insect-infestations-demand-for-relaxation-in-purchase-quality-standards-for-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 18 Sep 2025 17:42:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cotton-crop-hit-by-weather-and-insect-infestations-demand-for-relaxation-in-purchase-quality-standards-for-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारी बारिश, बाढ़ और कीट व रोगों के हमलों से कपास की फसल काफी प्रभावित हुई है। कॉटन पर जीरो आयात शुल्क के चलते घरेलू किसानों पर पहले ही औने-पौने दामों में कपास बेचने का संकट मंडरा रहा है। ऐसे में अगर नए सीजन की कपास भारतीय कपास निगम (CCI) द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मानकों (FAQ) पर खरी न उतरी, तो किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा। क्योंकि उनकी उपज एमएसपी पर नहीं बिक पाएगी। इसलिए किसानों को कपास खरीद के गुणवत्ता मानकों से छूट देने की मांग की जा रही है।</p>
<p>जोधपुर स्थित <strong>साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC)</strong> ने केंद्रीय वस्त्र मंत्री <strong>गिरिराज सिंह</strong> को पत्र लिखकर भारतीय कपास निगम (CCI) द्वारा कपास खरीद के लिए निर्धारित गुणवत्ता मानकों (FAQ) में तत्काल राहत प्रदान करने का अनुरोध किया है। इस पत्र की प्रतिलिपि देवेश चतुर्वेदी, सचिव (DA&amp;FW), डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (DARE) तथा डॉ. आर.एस. परोदा, अध्यक्ष (TAAS) को भी भेजी गई है।</p>
<p>वस्त्र मंत्रालय ने 2025-26 सीजन के लिए कपास का एमएसपी मध्यम रेशा कपास के लिए 7,710 रुपये प्रति क्विंटल और लंबे रेशे वाली कपास के लिए 8,110 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। आदेश के अनुसार, कपास की खरीद फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) मानकों पर आधारित होगी। इसका अर्थ है कि कपास में निर्धारित रेशा लंबाई, ताकत, माइक्रोनेयर वैल्यू और नमी की सीमा को पूरा करना अनिवार्य होगा। यदि उपज इन मानकों से कमतर पाई जाती है, तो कटौती की जाएगी।&nbsp;</p>
<p></p>
<p><strong>कपास पर संकट</strong></p>
<ul>
<li><strong>अत्यधिक नमी:</strong> लगातार वर्षा व जलभराव से कपास की नमी 12% से अधिक हो सकती है</li>
<li><strong>गुणवत्ता में गिरावट:</strong> रंग (discolouration), मजबूती (strength), ग्रेड और बीज गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर</li>
<li><strong>रेशा परिपक्वता:</strong> जलभराव से रेशों का परिपक्वन बाधित, जिससे माइक्रोनेयर वैल्यू पर असर</li>
<li><strong>संदूषण:</strong> अधखुले टिंडे (locules) के कारण चुगाई कठिन और संदूषण की संभावना अधिक</li>
</ul>
<p></p>
<p><strong>किसानों पर संभावित असर</strong><br />साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर के संस्थापक निदेशक <strong>डॉ. भागीरथ चौधरी</strong> ने कहा, &ldquo;भारत सरकार द्वारा कच्चे कपास (raw cotton) पर आयात शुल्क हटाने से अंतरराष्ट्रीय कपास भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर उपलब्ध होगा। इससे घरेलू किसानों की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाएगी क्योंकि उन्हें अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। यदि चालू सीजन में CCI द्वारा FAQ मानकों में आवश्यक छूट नहीं दी गई, तो छोटे और सीमांत किसान गंभीर नुकसान झेलेंगे और उनकी आय व आजीविका पर गहरा संकट खड़ा हो जाएगा।&rdquo;</p>
<p>भारत सरकार के पूर्व कृषि आयुक्त और SABC के अध्यक्ष <strong>डॉ. सी.डी. मायी</strong> ने कहा, &ldquo;जलवायु परिवर्तन के कारण कपास में कीट व रोग की स्थिति लगातार बदल रही है। रस चूसक कीट, बॉल रॉट और पिंक बॉलवर्म जैसी गंभीर समस्याएं न केवल उत्पादन घटा रही हैं, बल्कि रेशों और बीज की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर डाल रही हैं। ऐसे हालात में अनधिकृत HtBt कपास संकर बीजों का तेजी से प्रसार हो रहा है। आयातित कपास के सामने देशी कपास टिक नहीं पा रहा है, जिसके कारण किसान कपास उत्पादन से पीछे हट रहे हैं। इसका सीधा असर है कि देश कपास उत्पादन में पिछड़ रहा है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए नीति-निर्माताओं को त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है।&rdquo;</p>
<p></p>
<p><strong>किसानों को राहत के उपाय</strong><br />SABC ने वस्त्र मंत्रालय और कृषि मंत्रालय से आग्रह किया है कि किसानों की राहत हेतु CCI को FAQ मानकों में छूट के आधार पर कपास खरीद के निर्देश दिए जाएं।</p>
<ul>
<li>CCI किसानों की कपास एमएसपी पर खरीदे, चाहे गुणवत्ता में गिरावट हो</li>
<li>नमी की स्वीकार्य सीमा 8% से बढ़ाकर 15% की जाए</li>
<li>रंग और contamination आधारित ग्रेडिंग में ढील दी जाए</li>
<li>फाइबर स्ट्रेंथ, माइक्रोनेयर वैल्यू और बीज गुणवत्ता जैसे तकनीकी मानकों में व्यावहारिक छूट दी जाए</li>
<li>किसानों को अपनी पूरी उपज CCI को बेचने की अनुमति दी जाए और मात्रा पर कोई प्रतिबंध न हो</li>
</ul>
<p></p>
<p><strong>खरीफ </strong><strong>2025-26 </strong><strong>में कपास की स्थिति</strong></p>
<p>मध्य कपास क्षेत्र (विशेषकर महाराष्ट्र के नांदेड़ और वाशीम तथा गुजरात के तटीय इलाकों को छोड़कर) की स्थिति सामान्य से थोड़ी बेहतर है।</p>
<p>उत्तर भारत (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान) और दक्षिण भारत (विशेषकर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना) में असामान्य एवं निरंतर वर्षा से व्यापक स्तर पर जलभराव की स्थिति बनी।</p>
<p>कपास की गुणवत्ता (रंग, ग्रेड, फाइबर स्ट्रेंथ) प्रभावित हुई।</p>
<p>बॉल रॉट, रूट रॉट और पिंक बॉलवर्म के आक्रमण ने उत्पादन और गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर डाला।</p>
<p>FAQ मानकों के अनुरूप कपास का उत्पादन किसानों के लिए कठिन हो गया है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कपास की फसल पर मौसम व कीटों की मार, किसानों को खरीद मानकों में राहत की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68cbf2a47f98c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकारी गोदामों में चावल का रिकॉर्ड भंडार, गेहूं चार साल के उच्च स्तर पर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/record-rice-stocks-in-government-warehouses-wheat-stocks-at-their-highest-level-in-four-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 18 Sep 2025 12:27:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/record-rice-stocks-in-government-warehouses-wheat-stocks-at-their-highest-level-in-four-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सरकारी आंकड़ों के अनुसार, <span>सरकारी गोदामों में चावल और गेहूं का भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। चावल का स्टॉक पिछले वर्ष की तुलना में </span>14% <span>से अधिक बढ़कर अब तक के सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गया है</span>, <span>जबकि गेहूं का भंडार चार साल के उच्च स्तर पर है।</span>&nbsp;</p>
<p>अगले महीने से खरीफ सीजन की धान की फसल मंडियों में आनी शुरू होगी। पहले से सरकारी गोदामों में रिकॉर्ड स्टॉक से सरकारी एजेंसियों के सामने भंडारण की चुनौती खड़ी हो सकती है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>चावल का भंडार</strong><br />1 <span>सितंबर को सरकारी भंडार में चावल का कुल भंडार </span>4.82 <span>करोड़ टन रहा</span>, <span>जो सरकार के </span>1 <span>जुलाई के लक्ष्य </span>1.35 <span>करोड़ टन से कई गुना अधिक है। चावल की यह प्रचुर उपलब्धता न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करेगी बल्कि निर्यात को भी बढ़ावा देगी। भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है। चालू वर्ष में भारत का चावल निर्यात करीब </span>25% <span>बढ़कर रिकॉर्ड </span>2.25 <span>करोड़ टन तक पहुंच सकता है।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>धान की बुवाई </strong></p>
<p>सरकारी गोदामों में चावल के रिकॉर्ड भंडार के अलावा इस साल खरीफ सीजन में धान की बुवाई का रकबा 12 <span>सितंबर तक लगभग 2 फीसदी बढ़कर 438 लाख हेक्टेयर से ऊपर पहुंच गया है। यह धान बुवाई के सामान्य क्षेत्र 403 लाख हेक्टेयर से करीब </span>35 लाख हेक्टेयर अधिक है। हालांकि, पंजाब समेत कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ से धान की फसल को नुकसान पहुंचा है।&nbsp;</p>
<p><strong>गेहूं का भंडार</strong><br /><span>वहीं गेहूं का सरकारी स्टॉक </span>3.33 <span>करोड़ टन तक पहुंचा गया है</span>, <span>जो सरकार के </span>2.76 <span>करोड़ टन के लक्ष्य से काफी अधिक है। पर्याप्त गेहूं भंडार से सरकार त्योहारों के मौसम में कीमतों पर काबू पाने के लिए खुले बाजार में अनाज जारी कर सकेगी। गेहूं की पर्याप्त उपलब्धता के चलते महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। </span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68cbad4e1fe89.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकारी गोदामों में चावल का रिकॉर्ड भंडार, गेहूं चार साल के उच्च स्तर पर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68cbad4e1fe89.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन – रबी अभियान 2025’ नई दिल्ली में शुरू हुआ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/two-day-national-agriculture-conference-on-rabi-abhiyan-begins-in-new-delhi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 15 Sep 2025 12:38:51 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/two-day-national-agriculture-conference-on-rabi-abhiyan-begins-in-new-delhi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="77" data-end="480">केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा आज नई दिल्ली के पूसा परिसर स्थित भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार में <em data-start="215" data-end="257">राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन &ndash; रबी अभियान 2025</em> का शुभारंभ किया गया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हो रहे इस दो दिवसीय सम्मेलन में रबी बुवाई सीजन 2025&ndash;26 की तैयारियों, उत्पादन लक्ष्यों और रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।</p>
<p data-start="482" data-end="726">पहली बार केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> के निर्देश पर रबी सम्मेलन दो दिनों तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें देशभर से राज्य कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और नीति-निर्माता एक मंच पर जुटे हैं ताकि रबी सीजन को अधिक उत्पादक और टिकाऊ बनाया जा सके।</p>
<p data-start="728" data-end="1062">सम्मेलन के उद्घाटन दिवस पर केंद्र और राज्य स्तर के अधिकारियों के बीच रबी फसलों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो रही है। कल, 16 सितंबर को, केंद्रीय कृषि मंत्री, सभी राज्यों के कृषि मंत्री और केंद्रीय राज्य मंत्री विस्तृत विचार-विमर्श करेंगे। इस दौरान किसानों तक समय पर नवीनतम तकनीक और उन्नत बीज पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।</p>
<p data-start="1064" data-end="1262">विशेष रूप से, इस बार पहली बार कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के वैज्ञानिकों को भी आमंत्रित किया गया है ताकि वे अपने क्षेत्रीय अनुभव और जमीनी चुनौतियों को साझा कर नीतिगत योजना को और मजबूत बना सकें।</p>
<p data-start="1264" data-end="1508">सम्मेलन में विभिन्न राज्यों की सफलताओं और श्रेष्ठ प्रथाओं को भी साझा किया जाएगा, ताकि उन्हें पूरे देश में अपनाया जा सके। विशेषज्ञ मौसम पूर्वानुमान, उर्वरक प्रबंधन, फसल विविधीकरण, कृषि अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।</p>
<p data-start="1510" data-end="1740">अधिकारियों का कहना है कि यह सम्मेलन रबी सीजन 2025&ndash;26 के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करेगा और किसानों की आय बढ़ाने, कृषि प्रणाली को अधिक लचीला बनाने तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68c7bb1dc7401.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन – रबी अभियान 2025’ नई दिल्ली में शुरू हुआ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आईएमडी का पूर्वानुमान: कई राज्यों में भारी बारिश, 15 सितंबर से राजस्थान से मानसून वापसी के आसार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/imd-forecasts-heavy-rainfall-in-several-states-monsoon-withdrawal-likely-from-rajasthan-from-sept-15.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Sep 2025 18:06:39 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
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        <description><![CDATA[ <p>भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण देश के कई हिस्सों में व्यापक वर्षा गतिविधि का पूर्वानुमान जारी किया है। 13 से 17 सितंबर 2025 के बीच ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। तेलंगाना में 13 सितंबर को अत्यधिक भारी वर्षा हो सकती है, जबकि महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में 14 और 15 सितंबर को मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी गई है।</p>
<p>आईएमडी ने कहा कि 15 सितंबर से पश्चिम राजस्थान के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की स्थिति अनुकूल हो रही है। पिछले 24 घंटों में उत्तराखंड में अत्यधिक भारी बारिश (&ge;21 सेमी) दर्ज की गई, वहीं असम, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और मराठवाड़ा में भी बहुत भारी बारिश रिकॉर्ड हुई।</p>
<p>आगामी दिनों में पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में मध्यम से भारी बारिश के साथ कहीं-कहीं बहुत भारी वर्षा हो सकती है। वहीं बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, विदर्भ और छत्तीसगढ़ सहित पूर्वी और मध्य भारत में भी भारी बारिश के दौर जारी रहने की संभावना है।</p>
<p>आईएमडी ने मछुआरों को चेतावनी दी है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में 18 सितंबर तक तेज हवाओं और ऊंची लहरों के चलते समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आईएमडी का पूर्वानुमान: कई राज्यों में भारी बारिश, 15 सितंबर से राजस्थान से मानसून वापसी के आसार ]]></media:description>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रबी सम्मेलन को अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास, राज्यों के साथ होगा दो दिवसीय मंथन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/efforts-to-make-rabi-conference-more-effective-two-day-brainstorming-to-be-held-with-states.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Sep 2025 17:50:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/efforts-to-make-rabi-conference-more-effective-two-day-brainstorming-to-be-held-with-states.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>&lsquo;</strong><span><strong>विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo;</strong> के पहले चरण की सफलता के बाद केंद्रीय कृषि तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत होने जा रही है। रबी फसल के लिए </span>16 <span>दिवसीय अभियान </span><strong>3 <span>अक्टूबर</span></strong><span> से </span><strong>18 <span>अक्टूबर</span></strong><span> तक चलेगा। इस दौरान देशभर के कृषि वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर किसानों से मिलेंगे</span>, <span>उन्हें उपयोगी जानकारी देंगे। अभियान की शुरुआत से पहले </span><strong>15-16 <span>सितंबर</span></strong><span> को दिल्ली में दो दिवसीय <strong>राष्ट्रीय रबी सम्मेलन </strong>आयोजित होगा।</span></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> के निर्देश पर पहली बार दो दिवसीय रबी सम्मेलन कराया जा रहा है, <span>जिसमें राज्यों के कृषि मंत्री</span>,<span> वरिष्ठ कृषि अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक रबी सीजन की तैयारियों पर विचार-मंथन करेंगे। सम्मेलन में देशभर के कृषि विशेषज्ञ</span>, <span>वैज्ञानिक</span>, <span>नीति-निर्धारक और राज्य सरकारों के वरिष्ठ प्रतिनिधि रबी फसलों की बुवाई से संबंधित तैयारियों</span>, <span>उत्पादन लक्ष्यों और रणनीतियों पर गहन चर्चा करेंगे। इस दौरान किसानों को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से विभिन्न विषयों पर विमर्श होगा। केंद्रीय कृषि मंत्री ने शुक्रवार को रबी कॉन्फ्रेंस की तैयारियों के संबंध में वीसी के माध्यम से बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने राज्य के कृषि मंत्रियों से कहा कि वह रबी फसल के लिए विभिन्न विषयों सहित खाद की आवश्यकता का आंकलन भी इकट्ठा कर लें और आगामी कॉन्फ्रेंस में इस पर गंभीर विचार-विमर्श के लिए तैयार रहें।</span></p>
<p><strong>रबी सम्मेलन </strong>के पहले दिन केंद्र एवं राज्यों के अधिकारियों के बीच रबी सीजन से महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। अगले दिन, 16 <span>सितंबर को</span>, <span>सभी राज्यों के कृषि मंत्री केंद्रीय कृषि मंत्री और राज्य मंत्री के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे। नवीनतम तकनीक और उन्नत बीज किसानों तक किस प्रकार पहुंचाए जाएं</span>, <span>इसके लिए गहन चिंतन एवं समीक्षा की जाएगी। सभी राज्यों के मंत्री अपनी टीम के साथ इसमें भाग लेंगे। पहली बार इसमें <strong>कृषि विज्ञान केंद्रों (</strong></span><strong>KVKs) </strong><span>के वैज्ञानिकों को भी आमंत्रित किया गया है</span>, <span>जो क्षेत्रीय अनुभव और चुनौतियों को साझा करेंगे। </span></p>
<p><strong>कृषि मंत्रालय</strong> के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बार रबी सम्मेलन को एक नया स्वरूप दिया गया है। यह सम्मेलन न केवल रबी 2025-26 <span>सीजन की कार्ययोजना और उत्पादन रणनीति को दिशा देगा</span>, <span>बल्कि किसानों की आय वृद्धि</span>, <span>टिकाऊ कृषि प्रणाली और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वे रबी फसल के लिए खाद समेत अन्य आवश्यकताओं का आंकलन कर लें और आगामी सम्मेलन में गंभीर विचार-विमर्श के लिए तैयार रहें।</span></p>
<p><strong>विषयवार तकनीकी सत्र</strong></p>
<p>रबी सम्मेलन के अंतर्गत पहली बार विभिन्न विषयों पर समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित होंगे। इनमें विशेषज्ञों, <span>वैज्ञानिकों और राज्यों के प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी तथा खुली चर्चा का अवसर भी मिलेगा। जिन विषयों पर विशेष रूप से विचार-विमर्श होगा</span>, <span>उनमें जलवायु सहनशीलता</span>, <span>गुणवत्तापूर्ण बीज</span>, <span>उर्वरक और कीटनाशक की उपलब्धता</span>, <span>दलहन एवं तिलहन पर विशेष जोर देते हुए फसल विविधिकरण</span>, <span>बागवानी का विविधीकरण</span>, <span>प्रभावी प्रसार सेवाएं एवं कृषि विज्ञान केंद्रों (</span>KVKs) <span>की भूमिका तथा केंद्र प्रायोजित योजनाओं का प्रभावी समन्वय शामिल है। </span></p>
<p>सम्मेलन में <strong>राज्यों की</strong> <strong>सफलताओं </strong>और <strong>बेस्ट प्रैक्टिस</strong> को भी साझा किया जाएगा, <span>ताकि उन्हें अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सके। साथ ही</span>, <span>मौसम पूर्वानुमान</span>, <span>उर्वरक प्रबंधन</span>, <span>कृषि अनुसंधान और तकनीकी हस्तक्षेप से जुड़े विषयों पर भी विशेषज्ञ अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।</span></p>
<p><strong>&lsquo;<span>विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo; का अगला चरण</span></strong></p>
<p>प्रधानमंत्री के &lsquo;लैब टू लैंड&rsquo; विजन को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ फसल के लिए &lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo; की शुरुआत की थी। 29 <span>मई से </span>12 <span>जून </span>2025 <span>तक चले इस अभियान के दौरान उन्होंने विभिन्न राज्यों का दौरा किया और किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं के समाधान का प्रयास किया। पहले चरण में वैज्ञानिकों की </span>2,170 <span>टीमें गांव-गांव पहुंचीं और देशभर के करीब डेढ़ करोड़ किसानों से सीधे संवाद हुआ।&nbsp;</span>आगामी रबी सीजन के लिए 3 <span>अक्टूबर से वैज्ञानिक फिर किसानों के खेतों में जाएंगे और उन्हें नई तकनीकों व उन्नत खेती की जानकारी देंगे। यह अभियान </span>18 <span>अक्टूबर तक चलेगा।&nbsp;</span><span></span><span></span></p>
<p><span></span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रबी सम्मेलन को अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास, राज्यों के साथ होगा दो दिवसीय मंथन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि मंत्रालय का एआई&amp;#45;आधारित मौसम पूर्वानुमान 3.8 करोड़ किसानों तक पहुंचा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-launches-ai-based-weather-forecasting-program-reaching-3.8-crore-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Sep 2025 17:49:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-launches-ai-based-weather-forecasting-program-reaching-3.8-crore-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (MoAFW) ने पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके किसानों को अग्रिम मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराया है। इस वर्ष 13 राज्यों के लगभग 3.8 करोड़ किसानों को एम-किसान प्लेटफॉर्म के माध्यम से एआई-आधारित मानसून पूर्वानुमान एसएमएस द्वारा भेजे गए, जिससे वे खरीफ फसलों की बेहतर योजना बना सकें।</p>
<p>मंत्रालय की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि ये पूर्वानुमान चार सप्ताह पहले तक उपलब्ध कराए गए, जिससे किसानों को बारिश में उतार-चढ़ाव और जोखिम से निपटने की तैयारी करने में मदद मिली। खासतौर पर इस वर्ष मानसून की 20 दिन की रुकावट का एआई-आधारित मॉडल ने सही अनुमान लगाया, जिसके आधार पर मंत्रालय ने लगातार साप्ताहिक अपडेट भेजे।</p>
<p>कृषि मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. प्रमोद कुमार मेहेरदा ने कहा कि यह कार्यक्रम किसानों को आत्मविश्वास देता है कि वे जोखिम प्रबंधन कर सकें। संयुक्त सचिव &nbsp;संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि जलवायु परिवर्तन से बढ़ती अनिश्चितता के दौर में ऐसे पूर्वानुमान किसानों के लिए बेहद उपयोगी होंगे।</p>
<p>गूगल के Neural GCM और ECMWF के AIFS मॉडल पर आधारित ये पूर्वानुमान पारंपरिक मॉडलों से अधिक सटीक साबित हुए। नोबेल पुरस्कार विजेता माइकल क्रेमर ने इस पहल को &ldquo;एआई के युग में किसानों को प्राथमिकता देने वाला वैश्विक मॉडल&rdquo; बताया।</p>
<p>नीति आयोग, डेवलपमेंट इनोवेशन लैब-इंडिया और प्रिसीजन डेवलपमेंट की भागीदारी से यह सुनिश्चित किया गया कि किसानों को सरल और उपयोगी भाषा में जानकारी दी जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्यक्रम भारत में एआई-सक्षम कृषि का नया दौर शुरू कर सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और किसानों की आजीविका मजबूत होगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि मंत्रालय का एआई-आधारित मौसम पूर्वानुमान 3.8 करोड़ किसानों तक पहुंचा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चारा बीजों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए रासी सीड्स का आईसीएआर&amp;#45;आईजीएफआरआई के साथ समझौता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rasi-seeds-signs-mou-with-icar-igfri-to-boost-forage-seed-availability-for-dairy-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Sep 2025 16:41:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rasi-seeds-signs-mou-with-icar-igfri-to-boost-forage-seed-availability-for-dairy-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश की अग्रणी बीज कंपनियों में से एक, रासी सीड्स ने भारत के डेयरी क्षेत्र के लिए गुणवत्तापूर्ण हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके लिए इसने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद - भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (ICAR-IGFRI), झांसी के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।</p>
<p>इस समझौता ज्ञापन पर रासी सीड्स के प्रबंध निदेशक आर राजेंद्रन और सिरा सीड्स के व्यवसाय प्रमुख एन सरवनन ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर, ICAR-IGFRI के निदेशक पंकज कौशल और चारा फसलों एवं उपयोग पर AICRP के परियोजना समन्वयक विजय कुमार यादव भी उपस्थित थे। इस साझेदारी से रासी सीड्स को बरसीम और जई की दो उच्च-गुणवत्ता वाली किस्मों तक पहुंच प्राप्त होगी, जिनका व्यावसायीकरण इसके ब्रांड, सिरा सीड्स के तहत किया जाएगा।</p>
<p>भारत में 25 लाख हेक्टेयर से ज़्यादा भूमि पर बरसीम और जई की खेती होती है, ऐसे में यह पहल हरे चारे की मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पाटने की दिशा में एक अहम कदम है। सर्दियों के लिए बेहतर चारे के बीजों की समय पर उपलब्धता से डेयरी किसानों को पशुधन पोषण और उत्पादकता में वृद्धि के जरिए काफी फायदा होने की उम्मीद है।</p>
<p>राजेंद्रन ने कहा, इस समझौता ज्ञापन के जरिए हमारा लक्ष्य वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, उच्च प्रदर्शन वाली चारा किस्में कृषक समुदाय तक पहुंचाना है। उन्होंने आगे कहा, "सिरा ब्रांड के जरिए हमारे प्रयास देश में गुणवत्तापूर्ण चारा बीजों की कमी दूर करने पर केंद्रित रहेंगे।"</p>
<p>यह सहयोग श्वेत क्रांति 2.0 लाने के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य टिकाऊ और विज्ञान-समर्थित कृषि इनपुट के माध्यम से डेयरी मूल्य श्रृंखला में सुधार लाना है। पौष्टिक हरे चारे की उपलब्धता में सुधार करके, इस साझेदारी से भारत के लाखों डेयरी किसानों के लिए दूध की पैदावार में वृद्धि, चारे की लागत में कमी और बेहतर आजीविका सुनिश्चित होने की उम्मीद है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68c54fef540b2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चारा बीजों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए रासी सीड्स का आईसीएआर-आईजीएफआरआई के साथ समझौता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68c54fef540b2.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत में आलू प्रोसेसर्स एसोसिएशन की आवश्यकता क्यों]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/why-india-needs-potato-processors-association.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Sep 2025 15:48:05 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/why-india-needs-potato-processors-association.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आज किसी भी सुपरमार्केट में चले जाएं, अनेक कहानियां आपके सामने तैरने लगेंगी। चमकदार पैकेटों में हॉट चिप्स से लेकर ठंडे आइल में रखे फ्रोजन फ्राइज तक, आलू अब सिर्फ किसानों का मुख्य भोजन नहीं रह गया है - यह भारत में सबसे तेजी से बढ़ते स्नैक और फ्रोजन फूड क्रांति की रीढ़ है।</p>
<p>भारत हर साल 6 करोड़ टन से ज्यादा आलू का उत्पादन करता है, जो चीन के बाद दूसरे नंबर पर है। फिर भी प्रसंस्करण के मामले में - खासकर दो प्रमुख उत्पादों, क्रिस्प्स (स्नैक चिप्स) और फ्रेंच फ्राइज (फ्रोजन आलू) - भारत अब भी अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन कर रहा है। गुजरात, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में आलू प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित हो रहे हैं, लेकिन इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण तत्व का अभाव है: एकजुट आवाज।</p>
<p>यूरोप में एक यूरोपीय आलू प्रसंस्करणकर्ता एसोसिएशन (EUPPA) है। वर्ष 1968 से इसने पूरे महाद्वीप में गुणवत्ता, सुरक्षा, सस्टेनेबिलिटी और निर्यात के मानक स्थापित किए हैं। अमेरिका में आलू एसोसिएशन (PAA) है, जो प्रसंस्करणकर्ताओं को सार्वजनिक अनुसंधान संस्थानों से जोड़ता है। दूसरी ओर, भारत में प्रसंस्करणकर्ताओं, किसानों और नीति निर्माताओं के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए ऐसा कोई निकाय नहीं है। अब भारतीय आलू प्रसंस्करणकर्ता एसोसिएशन (PPAI) गठित करने का समय आ गया है।</p>
<p><strong>एक भारतीय एसोसिएशन की परिकल्पना</strong><br /><strong></strong></p>
<p><strong>1. नीतिगत शक्ति</strong><br />भारत के आलू प्रसंस्करणकर्ता राज्य-स्तरीय नियमों के चक्रव्यूह में काम करते हैं। इनमें खरीद प्रतिबंधों और असमान बायबैक मॉडल से लेकर भंडारण और कोल्ड चेन से जुड़े असंगत मानदंड तक शामिल हैं। इस स्थिति के कारण प्रसंस्करणकर्ताओं के लिए असमान स्थिति उत्पन्न होती है, जबकि किसानों को कीमतों और बाजार पहुंच को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है।<br />एक राष्ट्रीय एसोसिएशन प्रसंस्करणकर्ताओं को पॉलिसी कॉरीडोर में एक विश्वसनीय आवाज प्रदान करेगी। यह निम्न कार्य कर सकती है:<br />&bull; किसान-प्रसंस्करणकर्ता बायबैक व्यवस्था के लिए एक समान ढांचे की वकालत करना, यह सुनिश्चित करना कि किसान और प्रसंस्करणकर्ता दोनों सुरक्षित रहें।<br />&bull; प्रसंस्करण-अनुकूल प्रोत्साहनों पर जोर देना, जिसमें कोल्ड स्टोरेज के लिए सब्सिडी और निर्यातोन्मुख संयंत्रों के लिए कर लाभ शामिल हैं।<br />&bull; यह सुनिश्चित करना कि आलू प्रसंस्करण को डेयरी, चावल और अन्य रणनीतिक खाद्य क्षेत्रों के साथ सरकार की प्राथमिकता सूची में शामिल किया जाए।<br />स्पष्ट, निष्पक्ष और स्थिर नीतियों के साथ भारत अपने विशाल आलू उत्पादन को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र में बदल सकता है।</p>
<p><strong>2. प्रमाणित बीज और GAP मानक</strong><br />विश्वस्तरीय फ्राइज और क्रिस्प का रास्ता मिट्टी से शुरू होता है। आज प्रसंस्करणकर्ता असंगत बीज गुणवत्ता और वैरिएबल कृषि पद्धतियों से जूझ रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप आलू के कंद असमान होते हैं, निर्यात की खेपें अस्वीकृत होती हैं और फ्राई सुनहरे की जगह जले-से दिखने लगते हैं।</p>
<p>एक PPAI निम्न कार्य कर सकता है:<br />&bull; राष्ट्रीय बीज प्रमाणन प्रणाली को बढ़ावा देना, जो रोग-मुक्त, वैराइटी-विशिष्ट बीजों (फ्राइज के लिए सैन्टाना और इनोवेटर, क्रिस्प के लिए लेडी रोसेटा, और अन्य उच्च-प्रदर्शन वाले क्लोन) तक पहुंच सुनिश्चित करे।<br />&bull; सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य, कीटनाशक अवशेषों की सीमा और फसल प्रबंधन को शामिल करते हुए अच्छी कृषि पद्धतियों (GAP) को लागू करना।<br />&bull; GAP-अनुपालक खेतों का एक समूह बनाए, जो प्रमाणित और ऑडिट के लिए तैयार हों, और घरेलू संयंत्रों तथा निर्यात श्रृंखलाओं दोनों को पोषण प्रदान करें।<br />बीज और खेत स्तर पर मानक निर्धारित करके भारत एकरूपता, ट्रेसेबिलिटी और विश्वसनीयता प्रदान करेगा - जो वैश्विक खरीदारों की मांग के अनुरूप होगा।</p>
<p><strong>3. गुणवत्ता सर्वोपरि</strong><br />सभी आलू एक जैसे नहीं होते। फ्राइज को सुनहरे और कुरकुरेपन के लिए लंबे, उच्च-शुष्क पदार्थ वाले कंदों की आवश्यकता होती है। कुरकुरे के लिए कम चीनी वाले कंद चाहिए। थोड़ा सा भी असंतुलन जलने के निशान जैसे धब्बे या एक्रिलामाइड का जोखिम पैदा कर सकता है।<br />अभी मानकों के अभाव के कारण प्रसंस्करणकर्ताओं को असमान आपूर्ति का सामना करना पड़ता है। निर्यातकों के सामने भी कंसाइनमेंट अस्वीकृत किए जाने का जोखिम रहता है।&nbsp;</p>
<p>एक PPAI यह कर सकता है:<br />&bull; प्रोसेसिंग-ग्रेन आलू के लिए देशव्यापी मानक स्थापित करे।<br />&bull; शुष्क पदार्थ, शर्करा का स्तर और अवशेषों की जांच के लिए मान्यताप्राप्त प्रयोगशालाएं स्थापित करे।<br />&bull; घरेलू और वैश्विक बाजारों के लिए विश्वास के प्रतीक के रूप में &lsquo;भारत के प्रसंस्कृत आलू&rsquo; की मुहर लगाए।<br />प्रसंस्करण में गुणवत्ता वैकल्पिक नहीं - यह अस्तित्व का मसला है।</p>
<p><strong>4. अनुसंधान और नवाचार</strong><br />हर उत्तम फ्राई या चिप्स के पीछे वर्षों का विज्ञान छिपा होता है। गर्मी सहन करने वाली किस्मों के प्रजनन से लेकर तेल बचाने वाले फ्रायर तक, इनोवेशन वस्तुओं को विश्वस्तरीय उत्पादों से अलग करता है। लेकिन भारत में अनुसंधान अब भी बिखरा हुआ है।</p>
<p>इसके लिए वैश्विक मॉडल देखे जा सकते हैं। अमेरिका में पोटैटो एसोसिएशन (PAA) दर्शाती है कि कैसे प्रसंस्करणकर्ता सीधे सार्वजनिक अनुसंधान का समर्थन कर सकते हैं। प्रसंस्करणकर्ता वैरायटी संबंधी कार्यक्रमों का सह-वित्तपोषण करते हैं, व्यावसायिक परिस्थितियों में क्लोन का सत्यापन करते हैं, और प्रयोगशाला से बाजार तक स्थानांतरण में तेजी लाते हैं। भारत भी इसे दोहरा सकता है।&nbsp;</p>
<p>PPAI के माध्यम से प्रसंस्करणकर्ता ये कार्य कर सकते हैंः<br />&bull; भविष्य के लिए तैयार किस्म के विकास के लिए सह-वित्तपोषण हेतु केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) और उसके क्षेत्रीय केंद्रों के साथ साझेदारी कर सकते हैं।<br />&bull; संयुक्त परीक्षण प्लेटफॉर्म बनाएं जहां प्रसंस्करण परिस्थितियों में CPRI किस्मों का सत्यापन किया जा सके।<br />&bull; भंडारण, खाद्य प्रौद्योगिकी और कृषि विज्ञान में उद्योग फेलोशिप और अनुसंधान पीठों की शुरुआत करें।<br />&bull; विज्ञान को प्रसंस्करणकर्ताओं से सीधे जोड़ने के लिए गुजरात, पंजाब और उत्तर प्रदेश में नवाचार केंद्र स्थापित करें।<br />सीपीआरआई की वैज्ञानिक क्षमता को उद्योग की बाजारोन्मुखता के साथ जोड़कर, भारत यह सुनिश्चित कर सकता है कि अनुसंधान प्रतिस्पर्धी वैश्विक उत्पादों में तब्दील हो।</p>
<p><strong>5. कोल्ड चेन और मशीनीकरण</strong><br />भारत अपनी आलू की फसल का 20% तक हार्वेस्टिंग के बाद खो देता है। इससे लाभप्रदता कम हो जाती है। प्रसंस्करणकर्ताओं के लिए इसका अर्थ है अस्थिर आपूर्ति, अधिक लागत और निर्यात की संभावनाओं का चूकना।</p>
<p>एक पीपीएआई निम्न कार्य कर सकता है:<br />&bull; फ्राई और क्रिस्प किस्मों के लिए सटीक नियंत्रण वाले प्रसंस्करण-ग्रेड कोल्ड स्टोर की वकालत करना।<br />&bull; आधुनिक हार्वेस्टर, स्लाइसर और ग्रेडर के साथ साझा मशीनीकरण क्लस्टर को बढ़ावा देना।<br />&bull; फ्राई लाइन और कोल्ड स्टोर के लिए कुशल तकनीशियनों के दल को प्रशिक्षित करना।<br />&bull; लागत और उत्सर्जन में कटौती के लिए नवीकरणीय ऊर्जा-चालित भंडारण पर ज़ोर देना।</p>
<p>क्षेत्रीय स्तर पर पश्चिम और उत्तर में गुजरात, पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश आज इस उद्योग के केंद्र हैं। पश्चिम बंगाल, बिहार और असम जैसे पूर्वी राज्य आपूर्ति केंद्र के रूप में उभर सकते हैं, जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु, विशेष रूप से क्रिस्पिंग के लिए, ऑफ-सीजन उत्पादन प्रदान करते हैं। ये सभी क्षेत्र मिलकर भारत को पूरे साल आपूर्ति करते हैं। यह बुनियादी ढांचा उद्योग के लिए एक वरदान साबित होगा।</p>
<p><strong>6. निर्यात प्रतिस्पर्धा</strong><br />दुनिया को फ्राइज और क्रिस्प बहुत पसंद हैं, और भारत में इन्हें बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराया जा सकता है। फिर भी इसका निर्यात यूरोप या उत्तरी अमेरिका के निर्यात का एक अंश मात्र है।</p>
<p>एक पीपीएआई निम्नलिखित कार्य कर सकता है:<br />&bull; "भारत के प्रसंस्कृत आलू" ब्रांड लॉन्च करना, जो विश्वास और ट्रेसेबिलिटी का संकेत देता हो।<br />&bull; गल्फूड, एसआईएएल, अनुगा और पोटैटो यूरोप में भारत की उपस्थिति के लिए कोऑर्डिनेशन करना।<br />&bull; बाजार पहुंच सुनिश्चित करने और वैश्विक खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप कार्य करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करना।<br />&bull; मांग और सैनिटरी-फाइटोसैनिटरी (एसपीएस) आवश्यकताओं पर नजर रखने के लिए निर्यात इंटेलिजेंस हब की स्थापना करना।<br />&bull; जीएपी-कंप्लायंट, बीज-प्रमाणित आपूर्ति श्रृंखलाओं को भारत की यूएसपी के रूप में स्थापित करना।</p>
<p>इस तरह के एक मंच के साथ भारत का फ्राई और क्रिस्प निर्यात 2030 तक दोगुने से भी अधिक हो सकता है, जिससे देश एक मूल्यवर्धित केंद्र में बदल जाएगा।</p>
<p>इसमें प्रत्येक हितधारक के लिए क्या हैः<br />&bull; किसान - सुनिश्चित मांग, प्रमाणित बीज और GAP अनुपालन के लिए प्रीमियम, अस्वीकृति का कम जोखिम।<br />&bull; शोधकर्ता (CPRI और विश्वविद्यालय) - वित्तपोषण, बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय आंकड़ों तक पहुंच, विभिन्न वैरायटी को तेजी से जारी करना, मजबूत इनोवेशन के पाइपलाइन।<br />&bull; उद्योग - आपूर्ति मं स्थिरता, गुणवत्ता पर कम लागत, निर्यात पहुंच, मजबूत सौदेबाजी की शक्ति।<br />&bull; भारत - अधिक निर्यात, ग्रामीण रोजगार, कम बर्बादी, और प्रसंस्करण महाशक्ति के रूप में वैश्विक प्रतिष्ठा।</p>
<p><strong>यूरोप और अमेरिका से सबक</strong><br />EUPPA के सदस्य सालाना लगभग 70 लाख टन फ्राइज और अन्य आलू उत्पाद तैयार करते हैं, 25 हजार से ज़्यादा लोगों को रोजगार देते हैं और यूरोपीय यूनियन की व्यापार नीति को प्रभावित करते हैं। उनकी ताकत एकता और मानकों में निहित है। पोटैटो एसोसिएशन ऑफ अमेरिका (PAA) दिखाता है कि कैसे प्रसंस्करणकर्ता सार्वजनिक अनुसंधान संस्थानों को मजबूत बना सकते हैं, वैज्ञानिक उपलब्धियां किसानों और कारखानों तक तेजी से पहुंचा सकते हैं। विशाल किसान आधार, क्षेत्रीय विविधता और वैश्विक महत्वाकांक्षा के अनुसार भारत दोनों मॉडलों को अपना सकता है।</p>
<p><strong>फ्राई-एंड-क्रिस्प क्रांति का इंतजार</strong><br />भारत के पास आलू है, पौधे हैं, बाजार हैं। बस कमी है तो प्लेटफॉर्म की। भारतीय आलू प्रसंस्करणकर्ता एसोसिएशन बिखरे हुए विकास को समन्वित सफलता में बदल सकता है। वह किसानों को दुबई के सुपरमार्केट, नैरोबी के स्नैक्स गलियारों और टोक्यो के फ्रीजर कैबिनेट से जोड़ सकता है। सीपीआरआई और अन्य साझेदारों के साथ खेत से प्रयोगशाला और बाजार तक के एकीकरण को सक्षम बनाकर, भारत यह सुनिश्चित कर सकता है कि उसके फ्राइज और क्रिस्प न केवल घर पर परिवारों का पेट भरें, बल्कि दुनिया भर में गर्व से प्रतिस्पर्धा भी करें।<br /><em>(एस. सौंदरारादजाने आलू प्रसंस्करण और फ्रोजन फूड उद्योग में भारत की अग्रणी कंपनी हाइफार्म के सीईओ हैं)</em></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68c543ebd5949.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत में आलू प्रोसेसर्स एसोसिएशन की आवश्यकता क्यों ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68c543ebd5949.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बाढ़ के बावजूद इस्मा ने 349 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान बरकरार रखा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/despite-floods-isma-maintains-sugar-production-forecast-of-349-lakh-tonnes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 11 Sep 2025 18:50:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/despite-floods-isma-maintains-sugar-production-forecast-of-349-lakh-tonnes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के कई राज्य भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति से जूझ रहे है। इसके बावजूद प्राइवेट चीनी मिलों की शीर्ष संस्था <strong>इंडियन&nbsp;शुगर&nbsp;एंड&nbsp;बायो एनर्जी&nbsp;मैन्युफैक्चर्स&nbsp;एसोसिएशन&nbsp;(इस्मा)</strong> ने शुगर सीजन 2025-26 के लिए देश में <strong>349 लाख टन</strong> सकल चीनी उत्पादन के अपने अनुमान को बरकरार रखा है। यह आकलन ताजा सैटेलाइट इमेजरी और जमीनी रिपोर्ट के आधार पर किया गया है। इस्मा ने 31 जुलाई को जारी अपने प्रारंभिक अनुमान में भी 349 लाख टन चीनी उत्पादन की संभावना जताई थी।&nbsp;</p>
<p>गौरतलब है कि<strong> पंजाब</strong> में आई भीषण बाढ़ के अलावा <strong>हरियाणा, उत्तराखंड</strong> और <strong>पश्चिमी यूपी</strong> में भी भारी बारिश से गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है। जलभराव से कीटों व रोगों के प्रकोप का खतरा बढ़ गया है। इसके बावजूद इस्मा इस सीजन में 349 लाख टन चीनी उत्पादन के अपने अनुमान पर कायम है।</p>
<p>इस्मा ने <strong>महाराष्ट्र</strong> और <strong>कर्नाटक</strong> के लिए सितंबर के पहले सप्ताह में प्राप्त अतिरिक्त सैटेलाइट डेटा, दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति, जलाशयों के स्तर और प्रमुख राज्यों की फसल स्थिति की समीक्षा के बाद अनुमान को दोहराया है। इस्मा के अनुसार, अगस्त में हुई काफी वर्षा से महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की फसल की बढ़वार अच्छी रही है। जलाशयों में पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर जलभराव और मानसून के आगे भी जारी रहने की उम्मीद से इन राज्यों की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।</p>
<p><strong> उत्तर प्रदेश</strong> में भी फसल की हालत पिछले वर्ष से कहीं बेहतर बताई गई है। गन्ना विकास कार्यक्रमों, समय पर उन्नत किस्मों के वितरण और रोग के कम प्रकोप से उत्पादन और रिकवरी रेट में सुधार की संभावना है।</p>
<p><strong>तमिलनाडु</strong> में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहे हैं, जहां उपज और चीनी की रिकवरी पहले के अनुमानों से बेहतर रहने का अनुमान है। हालांकि, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड जैसे उत्तरी राज्यों में बाढ़ जैसी स्थिति से गन्ने की पैदावार पर कुछ असर पड़ा है। बावजूद इसके, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु से अपेक्षित बेहतर उत्पादन इन नुकसानों की भरपाई कर देगा।</p>
<p>इस्मा के अनुसार, प्रमुख उत्पादक राज्यों में गन्ने की गुणवत्ता में सुधार से उत्पादन में हल्की बढ़ोतरी की संभावना है, लेकिन बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में मामूली गिरावट से यह संतुलित हो रही है। इस कारण 2025-26 सीजन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अनुमान 349 लाख टन पर स्थिर है। अक्टूबर 2025 में फसल की दोबारा समीक्षा की जाएगी और अक्टूबर-नवंबर में पहला अग्रिम अनुमान जारी किया जाएगा, जिसमें वर्षा, जल उपलब्धता और कटाई की प्रगति को शामिल किया जाएगा।</p>
<p></p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68c2c8f2b8509.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बाढ़ के बावजूद इस्मा ने 349 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान बरकरार रखा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68c2c8f2b8509.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ बुवाई पिछले साल से 2.5% अधिक, लेकिन बाढ़ से लाखों हेक्टेयर में फसलें बर्बाद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/kharif-sowing-is-2.5-more-than-last-year-but-crops-are-destroyed-in-many-states-due-to-floods.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 09 Sep 2025 13:48:01 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/kharif-sowing-is-2.5-more-than-last-year-but-crops-are-destroyed-in-many-states-due-to-floods.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="181" data-end="627">देश में खरीफ फसलों का रकबा गत 5 वर्षों के औसत 1096 लाख हेक्टेयर को पार कर 1105 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 2.50 फीसदी अधिक है। पिछले साल 5 सितंबर तक देश में 1078 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी। इस साल खरीफ बुवाई में बढ़ोतरी के बावजूद कई राज्यों में बाढ़ से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसका असर धान, खासतौर पर बासमती चावल, बाजरा, ज्वार, उड़द, कपास और सोयाबीन सहित कई फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा।</p>
<p data-start="629" data-end="1143">भारी बारिश और बाढ़ ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचाया है। लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है और किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। सतलुज, ब्यास, रावी, यमुना और घग्गर जैसी नदियां किनारों को तोड़कर मैदानी इलाकों में घुस आईं, जिससे बाढ़ का प्रकोप फैल गया। धान, कपास, उड़द, बाजरा, गन्ना और सब्जियों की फसलों को गंभीर क्षति हुई है। हिमालयी राज्यों में भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं से खेती और बागवानी को भी नुकसान हुआ है।</p>
<p data-start="1145" data-end="1492">5 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में धान की बुवाई का क्षेत्र बढ़कर 438 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल से 4.69 फीसदी अधिक है। दलहन की बुवाई लगभग दो फीसदी बढ़कर 116 लाख हेक्टेयर हो गई है। हालांकि, अरहर की बुवाई के क्षेत्र में 1.14 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। मोटे अनाजों का रकबा 6.73 फीसदी बढ़कर 191 लाख हेक्टेयर से ऊपर पहुंच गया है।</p>
<p data-start="1494" data-end="1764">इस साल किसानों का रुझान मक्का की ओर बढ़ा है। मक्का की बुवाई 94 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है, जो पिछले साल से 12.25 फीसदी अधिक है। धान और सोयाबीन की बजाय किसान मक्का को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके पीछे इथेनॉल के लिए मक्का की बढ़ती मांग और बेहतर दाम की उम्मीद है।</p>
<p data-start="1766" data-end="2161">तिलहन फसलों की बुवाई के क्षेत्र में 2.72 फीसदी की गिरावट आई है। सोयाबीन का रकबा 4.54 फीसदी और सूरजमुखी का रकबा 9.13 फीसदी घट गया है। तिलहन फसलों से किसानों के मोहभंग के कारण खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की कोशिशों को झटका लगेगा। इस साल कपास की बुवाई में भी 2.64 फीसदी की कमी आई है और यह घटकर 109 लाख हेक्टेयर रह गया है। कपास उत्पादन में गिरावट के चलते कॉटन का ड्यूटी-फ्री आयात करना पड़ रहा है।</p>
<p data-start="2163" data-end="2369">प्रमुख नकदी फसल गन्ने का रकबा लगभग 3 फीसदी बढ़कर 57.31 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। लेकिन भारी बारिश और बाढ़ से गन्ने की फसल को भी नुकसान हुआ है। गन्ने में कीट और रोगों के प्रकोप की खबरें भी मिल रही हैं।</p>
<p data-start="2371" data-end="2641" style="text-align: left;">कृषि मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारी बारिश और बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। गृह मंत्रालय की ओर से राज्यों में केंद्रीय टीमें भेजी गई हैं, जो नुकसान का आकलन कर रही हैं। इन टीमों में विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारी शामिल हैं।</p>
<p data-start="2371" data-end="2641" style="text-align: center;"></p>
<table width="504" style="margin-left: auto; margin-right: auto;">
<tbody>
<tr>
<td colspan="6" style="text-align: center; width: 500.185px;"><strong>Ministry of Agriculture &amp; Farmers Welfare</strong></td>
</tr>
<tr>
<td colspan="6" style="text-align: center; width: 500.185px;">Department of Agriculture &amp; Farmers Welfare (DA&amp;FW)</td>
</tr>
<tr>
<td colspan="6" style="text-align: center; width: 500.185px;"><strong>All India: Progressive Crop Area Sown Report - Kharif Weekly area coverage as on 2025-09-05</strong></td>
</tr>
<tr>
<td colspan="6" style="text-align: right; width: 500.185px;">Source: CWWG</td>
</tr>
<tr>
<td colspan="6" style="text-align: right; width: 500.185px;">Area in Lakh Ha</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;"><strong>&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 73.8636px;"><strong>Normal (DA&amp;FW)</strong></td>
<td colspan="2" style="width: 179.73px;"><strong>Area Sown</strong></td>
<td style="width: 75.2699px;"><strong>Difference In Area Coverage Over</strong></td>
<td style="width: 83.821px;"><strong>% of Increase (+)/Decrease (-) Over&nbsp;</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;"><strong>Crop</strong></td>
<td style="width: 73.8636px;"><strong>&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 88.3381px;"><strong>2025-26</strong></td>
<td style="width: 88.4943px;"><strong>2024-25</strong></td>
<td style="width: 75.2699px;"><strong>2024-25</strong></td>
<td style="width: 83.821px;"><strong>2024-25</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Rice</td>
<td style="width: 73.8636px;">403.09</td>
<td style="width: 88.3381px;">438.28</td>
<td style="width: 88.4943px;">418.66</td>
<td style="width: 75.2699px;">19.63</td>
<td style="width: 83.821px;">4.69</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;"><strong>Total Pulses</strong></td>
<td style="width: 73.8636px;"><strong>129.61</strong></td>
<td style="width: 88.3381px;"><strong>116.40</strong></td>
<td style="width: 88.4943px;"><strong>114.46</strong></td>
<td style="width: 75.2699px;"><strong>1.94</strong></td>
<td style="width: 83.821px;"><strong>1.70</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Tur</td>
<td style="width: 73.8636px;">44.71</td>
<td style="width: 88.3381px;">45.19</td>
<td style="width: 88.4943px;">45.71</td>
<td style="width: 75.2699px;">-0.52</td>
<td style="width: 83.821px;">-1.14</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Kulthi</td>
<td style="width: 73.8636px;">1.72</td>
<td style="width: 88.3381px;">0.38</td>
<td style="width: 88.4943px;">0.31</td>
<td style="width: 75.2699px;">0.06</td>
<td style="width: 83.821px;">20.34</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Urad</td>
<td style="width: 73.8636px;">32.64</td>
<td style="width: 88.3381px;">23.35</td>
<td style="width: 88.4943px;">21.33</td>
<td style="width: 75.2699px;">2.01</td>
<td style="width: 83.821px;">9.44</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Moong</td>
<td style="width: 73.8636px;">35.69</td>
<td style="width: 88.3381px;">34.22</td>
<td style="width: 88.4943px;">34.09</td>
<td style="width: 75.2699px;">0.13</td>
<td style="width: 83.821px;">0.38</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Other Pulses</td>
<td style="width: 73.8636px;">5.15</td>
<td style="width: 88.3381px;">4.08</td>
<td style="width: 88.4943px;">3.89</td>
<td style="width: 75.2699px;">0.19</td>
<td style="width: 83.821px;">4.93</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Moth Bean</td>
<td style="width: 73.8636px;">9.70</td>
<td style="width: 88.3381px;">9.19</td>
<td style="width: 88.4943px;">9.12</td>
<td style="width: 75.2699px;">0.07</td>
<td style="width: 83.821px;">0.75</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;"><strong>Total Coarse Cereals</strong></td>
<td style="width: 73.8636px;"><strong>180.71</strong></td>
<td style="width: 88.3381px;"><strong>191.71</strong></td>
<td style="width: 88.4943px;"><strong>179.62</strong></td>
<td style="width: 75.2699px;"><strong>12.09</strong></td>
<td style="width: 83.821px;"><strong>6.73</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Jowar</td>
<td style="width: 73.8636px;">15.07</td>
<td style="width: 88.3381px;">14.05</td>
<td style="width: 88.4943px;">14.01</td>
<td style="width: 75.2699px;">0.04</td>
<td style="width: 83.821px;">0.26</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Bajra</td>
<td style="width: 73.8636px;">70.69</td>
<td style="width: 88.3381px;">67.89</td>
<td style="width: 88.4943px;">67.96</td>
<td style="width: 75.2699px;">-0.07</td>
<td style="width: 83.821px;">-0.10</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Ragi</td>
<td style="width: 73.8636px;">11.52</td>
<td style="width: 88.3381px;">9.84</td>
<td style="width: 88.4943px;">8.93</td>
<td style="width: 75.2699px;">0.91</td>
<td style="width: 83.821px;">10.20</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Maize</td>
<td style="width: 73.8636px;">78.95</td>
<td style="width: 88.3381px;">94.62</td>
<td style="width: 88.4943px;">84.30</td>
<td style="width: 75.2699px;">10.32</td>
<td style="width: 83.821px;">12.25</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Other Small Millets</td>
<td style="width: 73.8636px;">4.48</td>
<td style="width: 88.3381px;">5.31</td>
<td style="width: 88.4943px;">4.42</td>
<td style="width: 75.2699px;">0.89</td>
<td style="width: 83.821px;">20.23</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;"><strong>Total Oilseeds</strong></td>
<td style="width: 73.8636px;"><strong>194.63</strong></td>
<td style="width: 88.3381px;"><strong>186.98</strong></td>
<td style="width: 88.4943px;"><strong>192.21</strong></td>
<td style="width: 75.2699px;"><strong>-5.23</strong></td>
<td style="width: 83.821px;"><strong>-2.72</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Groundnut</td>
<td style="width: 73.8636px;">45.10</td>
<td style="width: 88.3381px;">47.53</td>
<td style="width: 88.4943px;">47.49</td>
<td style="width: 75.2699px;">0.04</td>
<td style="width: 83.821px;">0.09</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Sesamum</td>
<td style="width: 73.8636px;">10.32</td>
<td style="width: 88.3381px;">10.14</td>
<td style="width: 88.4943px;">10.62</td>
<td style="width: 75.2699px;">-0.48</td>
<td style="width: 83.821px;">-4.54</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Sunflower</td>
<td style="width: 73.8636px;">1.29</td>
<td style="width: 88.3381px;">0.64</td>
<td style="width: 88.4943px;">0.71</td>
<td style="width: 75.2699px;">-0.06</td>
<td style="width: 83.821px;">-9.13</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Soybean</td>
<td style="width: 73.8636px;">127.19</td>
<td style="width: 88.3381px;">120.32</td>
<td style="width: 88.4943px;">126.04</td>
<td style="width: 75.2699px;">-5.72</td>
<td style="width: 83.821px;">-4.54</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Nigerseed</td>
<td style="width: 73.8636px;">1.08</td>
<td style="width: 88.3381px;">0.66</td>
<td style="width: 88.4943px;">0.60</td>
<td style="width: 75.2699px;">0.06</td>
<td style="width: 83.821px;">9.70</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Castorseed</td>
<td style="width: 73.8636px;">9.65</td>
<td style="width: 88.3381px;">7.64</td>
<td style="width: 88.4943px;">6.69</td>
<td style="width: 75.2699px;">0.95</td>
<td style="width: 83.821px;">14.25</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Other Oilseeds</td>
<td style="width: 73.8636px;">&nbsp;</td>
<td style="width: 88.3381px;">0.06</td>
<td style="width: 88.4943px;">0.07</td>
<td style="width: 75.2699px;">-0.01</td>
<td style="width: 83.821px;">-18.03</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Sugarcane</td>
<td style="width: 73.8636px;">52.51</td>
<td style="width: 88.3381px;">57.31</td>
<td style="width: 88.4943px;">55.68</td>
<td style="width: 75.2699px;">1.64</td>
<td style="width: 83.821px;">2.94</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Total Jute and Mesta</td>
<td style="width: 73.8636px;">6.60</td>
<td style="width: 88.3381px;">5.56</td>
<td style="width: 88.4943px;">5.74</td>
<td style="width: 75.2699px;">-0.18</td>
<td style="width: 83.821px;">-3.15</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Jute</td>
<td style="width: 73.8636px;">6.19</td>
<td style="width: 88.3381px;">5.35</td>
<td style="width: 88.4943px;">5.51</td>
<td style="width: 75.2699px;">-0.16</td>
<td style="width: 83.821px;">-2.83</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Mesta</td>
<td style="width: 73.8636px;">0.40</td>
<td style="width: 88.3381px;">0.20</td>
<td style="width: 88.4943px;">0.23</td>
<td style="width: 75.2699px;">-0.02</td>
<td style="width: 83.821px;">-10.70</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;">Cotton</td>
<td style="width: 73.8636px;">129.50</td>
<td style="width: 88.3381px;">109.17</td>
<td style="width: 88.4943px;">112.13</td>
<td style="width: 75.2699px;">-2.96</td>
<td style="width: 83.821px;">-2.64</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 75.9091px;"><strong>Grand Total</strong></td>
<td style="width: 73.8636px;"><strong>1096.65</strong></td>
<td style="width: 88.3381px;"><strong>1105.42</strong></td>
<td style="width: 88.4943px;"><strong>1078.49</strong></td>
<td style="width: 75.2699px;"><strong>26.93</strong></td>
<td style="width: 83.821px;"><strong>2.50</strong></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p data-start="2371" data-end="2641" style="text-align: center;"></p>
<p data-start="2371" data-end="2641" style="text-align: center;"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68bfe886ac0f0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ बुवाई पिछले साल से 2.5% अधिक, लेकिन बाढ़ से लाखों हेक्टेयर में फसलें बर्बाद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68bfe886ac0f0.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डिब्बाबंद खाद्य सामग्री और उर्वरकों के परीक्षण के लिए गाजियाबाद में नई लैब स्थापित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/new-food-packaging-materials-and-fertilizers-lab-in-ghaziabad-union-food-minister-pralhad-joshi-to-inaugurate.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 07 Sep 2025 17:21:55 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/new-food-packaging-materials-and-fertilizers-lab-in-ghaziabad-union-food-minister-pralhad-joshi-to-inaugurate.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी 10 सितंबर, 2025 को राष्ट्रीय परीक्षण शाला (एनटीएच), गाजियाबाद में नवनिर्मित अत्याधुनिक रासायनिक प्रयोगशाला का उद्घाटन करेंगे।</p>
<p>प्रयोगशाला में पैक किया हुए पेयजल और प्राकृतिक खनिज जल, डिब्&zwj;बाबंद खाद्य सामग्री, एल्युमीनियम और तांबे से बने एनामेल्ड और इंसुलेटेड तार, कोयला, पेट्रोलियम कोक, बिटुमेन, एनामेल पेंट, एंटी-स्किड उत्पाद, रेत और बजरी जैसे निस्पंदन माध्यम, साथ ही सफेद और रंगीन चाक का परीक्षण किया जाएगा।</p>
<p>रासायनिक प्रयोगशाला भवन निर्माण सामग्री, सीमेंट, जल, धातु, मिश्रधातु, कागज़, प्लास्टिक, जैविक उत्पाद और उर्वरकों सहित विभिन्न प्रकार की सामग्रियों के परीक्षण में केंद्रीय भूमिका निभाएगी। प्रयोगशाला को आईएसओ/आईईसी 17025:2017 के अंतर्गत एनएबीएल द्वारा मान्यता प्राप्त है और इसे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) बाह्य प्रयोगशाला योजना, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई), और उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के अंतर्गत अनुमोदन प्राप्त है।</p>
<p>प्रयोगशाला अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित है, जिनमें परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोमीटर (एएएस), इंडक्टिवली कपल्ड प्लाज़्मा-परमाणु उत्सर्जन स्पेक्ट्रोस्कोपी (आईसीपी-एईएस), ऑप्टिकल एमिशन स्पेक्ट्रोमीटर (ओईएस), गैस क्रोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री (जीसी-एमएस), उच्च-प्रदर्शन द्रव क्रोमैटोग्राफी (एचपीएलसी), और आयन क्रोमैटोग्राफ शामिल हैं। ये उन्नत सुविधाएं प्रयोगशाला को विविध क्षेत्रों में परिष्कृत और अत्यधिक सटीक विश्लेषण करने में सक्षम बनाती हैं। प्रयोगशाला विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और उद्योगों को प्रशिक्षण, अनुसंधान और परीक्षण सहायता भी प्रदान करती है, जिससे वैज्ञानिक और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होता है।</p>
<p>इसके अलावा, प्रयोगशाला अपने परीक्षण के दायरे का और विस्तार करना चाहती है। कुछ प्रमुख योजनाओं में फोर्टिफाइड खाद्य उत्पादों, जैसे फोर्टिफाइड गेहूं का आटा, मैदा, मेवे, खाद्य तेल और विटामिन ए व डी से भरपूर नमक के परीक्षण की सुविधाएं शामिल हैं, ताकि उद्योग के साथ-साथ आम जनता को भी सेवा मिल सके। प्रयोगशाला विभिन्न मसालों का परीक्षण शुरू करने और खाद्य उत्पादों में सूक्ष्म पोषक तत्वों का विश्लेषण करने की भी योजना बना रही है, जिससे जन स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता आश्वासन में इसका योगदान और व्यापक होगा।</p>
<p>1977 में स्थापित राष्ट्रीय परीक्षण शाला (एनटीएच), गाजियाबाद विभिन्न इंजीनियरिंग क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली परीक्षण और अंशांकन सेवाओं के लिए एक विश्वसनीय संस्थान रहा है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68bd71c0c23a4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ डिब्बाबंद खाद्य सामग्री और उर्वरकों के परीक्षण के लिए गाजियाबाद में नई लैब स्थापित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68bd71c0c23a4.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डेयरी उत्पादों पर जीएसटी में कटौती से होगी सालाना 11,400 करोड़ रुपये की बचत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/slashing-gst-on-dairy-products-to-save-rs-11400-crore-annually.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 07 Sep 2025 10:35:29 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/slashing-gst-on-dairy-products-to-save-rs-11400-crore-annually.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत के डेयरी उद्योग के प्रमुखों ने डेयरी उत्पादों पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कटौती के फैसले का स्वागत किया है और इसे एक ऐतिहासिक सुधार बताया है। उनका कहना है कि इससे करोड़ों किसानों और उपभोक्ताओं को लाभ होगा और इससे सालाना 11,400 करोड़ रुपये की बचत होगी। पनीर जैसे प्रमुख खाद्य पदार्थों पर जीएसटी दर शून्य प्रतिशत और घी, मक्खन, पनीर और आइसक्रीम पर जीएसटी दर घटाकर 5% कर दिए जाने के बाद, अमूल, मदर डेयरी और हेरिटेज फूड्स जैसी कंपनियों ने कहा है कि इस कदम से उपभोक्ता कीमतें कम होंगी, किसानों की आय बढ़ेगी और संगठित डेयरी क्षेत्र को बल मिलेगा।</p>
<p>अमूल (Amul) के प्रबंध निदेशक जयेन मेहता ने कहा, "हम निश्चित रूप से उपभोक्ता से मिलने वाले राजस्व में उत्पादकों की हिस्सेदारी को और बढ़ाएंगे। इससे उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ होगा।" उन्होंने कहा कि इस कटौती के बाद अमूल का आधा कारोबार शून्य प्रतिशत जीएसटी श्रेणी में आएगा, जबकि शेष पर 5% कर लगेगा। मेहता के अनुसार जीएसटी संरचना में बदलाव से किसानों की आय में सुधार होगा और साथ ही मांग में भी वृद्धि होगी।</p>
<p>इंडियन डेयरी एसोसिएशन (IDA) के प्रेसिडेंट और अमूल के पूर्व प्रबंध निदेशक आर. एस. सोढ़ी ने सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा, "हम सभी प्रमुख डेयरी उत्पादों पर जीएसटी कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री और जीएसटी परिषद के आभारी हैं। इस बदलाव से लगभग 8 करोड़ किसानों और 145 करोड़ उपभोक्ताओं को लाभ होगा। इससे सालाना 11,400 करोड़ रुपये की बचत होगी।"</p>
<p>पनीर, चीज, घी, मक्खन, यूएचटी दूध, दूध आधारित पेय पदार्थ और आइसक्रीम सहित डेयरी उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर जीएसटी दरों को कम करने के काउंसिल के फैसले की सराहना करते हुए मदर डेयरी (Mother Dairy) के प्रबंध निदेशक मनीष बंदलिश ने कहा, "यह प्रगतिशील कदम देश भर के उपभोक्ताओं के लिए मूल्यवर्धित डेयरी उत्पादों की पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा। भारतीय घरों में तेजी से लोकप्रिय हो रही पैकेज्ड श्रेणी के लिए यह विशेष रूप से बढ़ावा है। आगे चलकर इनकी मांग में और तेजी आएगी। देश के अग्रणी डेयरी संगठनों में से एक होने के नाते, हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि इस सुधार के लाभ हमारे उपभोक्ताओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचें।"</p>
<p>उन्होंने दावा किया, "जीएसटी दरें कम करने से पैकेज्ड, मूल्यवर्धित डेयरी उत्पादों को व्यापक रूप से अपनाने को बढ़ावा मिलेगा, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं की पसंद बढ़ेगी, और ज़्यादा परिवारों को बेहतर मूल्य पर पौष्टिक डेयरी उत्पादों का आनंद लेने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह किसानों के लिए बेहतर बाजार अवसर पैदा करेगा और समग्र रूप से डेयरी उद्योग को और ऊर्जा प्रदान करेगा।"</p>
<p>हेरिटेज फ़ूड्स (Heritage Foods) की वाइस चेयरपर्सन और प्रबंध निदेशक भुवनेश्वरी नारा ने इसे एक समय पर उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा, "पनीर जैसी रोजमर्रा की जरूरतों को 0% स्लैब में और घी, मक्खन और पनीर को 12% से 5% स्लैब में लाने का व्यापक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि ये श्रेणियां लगभग 100% भारतीय घरों को प्रभावित करती हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हेरिटेज फूड्स में हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि हम इन सुधारों का पूरा लाभ अपने उपभोक्ताओं तक पहुंचाएंगे, जिससे हमारे बाजारों में त्योहारी माहौल को बढ़ावा मिलेगा। हम इस बदलाव को सुचारू रूप से लागू करने के लिए अपने साझेदारों और वितरकों के साथ भी काम कर रहे हैं।"</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68bc4ee964ed6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ डेयरी उत्पादों पर जीएसटी में कटौती से होगी सालाना 11,400 करोड़ रुपये की बचत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68bc4ee964ed6.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[GST घटने से कृषि उपकरणों के दाम 1.87 लाख रुपये तक घटेंगे, जानिए किस पर होगी कितनी बचत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/gst-cut-to-reduce-prices-of-farm-equipment-by-up-to-rs-1-87-lakh-check-savings-across-categories.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 06 Sep 2025 23:20:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/gst-cut-to-reduce-prices-of-farm-equipment-by-up-to-rs-1-87-lakh-check-savings-across-categories.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जीएसटी काउंसिल ने खेती में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों पर टैक्स की दरों में कटौती का जो फैसला किया है, उससे किसानों को 1.87 लाख रुपये तक की बचत होगी। इन उपकरणों पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की गई है। नई दरें 22 सितंबर से लागू होंगी।</p>
<p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कृषि उपकरणों पर पुरानी और नई जीएसटी दरों के हिसाब से कीमतों और बचत का अनुमानित विवरण जारी किया। इसमें ट्रैक्टर, पावर टिलर, धान ट्रांसप्लांटर, थ्रेशर, पावर वीडर, ट्रेलर, बीज-खाद देने वाले ड्रिल, हार्वेस्टर कंबाइन, सुपर सीडर, हैपी सीडर, रोटोवेटर आदि शामिल हैं।</p>
<p><strong>कंबाइन और ट्रैक्टरों पर बचत</strong><br />अभी 12 फुट कटर बार वाले हार्वेस्टर कंबाइन की कीमत 12 प्रतिशत जीएसटी के साथ 30 लाख रुपये है। जीएसटी दर 5 प्रतिशत होने के बाद इसकी कीमत 28.12 लाख रुपये रह जाएगी। इस पर 1.87 लाख रुपये की बचत होगी। 35 एचपी ट्रैक्टर की कीमत 12 प्रतिशत जीएसटी के साथ 6.50 लाख रुपये है। इसकी कीमत 5 प्रतिशत जीएसटी के साथ 6.09 लाख रुपये हो जाएगी, जिससे 41 हजार रुपये की बचत होगी। इसी तरह 45 एचपी ट्रैक्टर के दाम 45 हजार, 50 एचपी ट्रैक्टर के 53 हजार और 75 एचपी ट्रैक्टर के 63 हजार रुपये कम हो जाएंगे।</p>
<p><strong>टिलर, ट्रांसप्लांटर, थ्रेशर, पावर वीडर</strong><br />मंत्रालय के आकलन के मुताबिक 13 एचपी क्षमता वाले पावर टिलर के दाम नई व्यवस्था में 1,78,125 रुपये हो जाएंगे जो मौजूदा के मुकाबले 11,875 रुपये कम होंगे। चार रो वाले धान ट्रांसप्लांटर के दाम 2.46 लाख से घटकर 2.31 लाख, थ्रेशर के 2.24 लाख से घटकर 2.31 लाख और 7.5 एचपी वाले पावर वीडर के दाम 87,920 रुपये से घटकर 82,425 रुपये हो जाएंगे। इन पर 5,495 रुपये से लेकर 15,400 रुपये तक की बचत होगी।</p>
<p><strong>ट्रेलर, सीड ड्रिल, रीपर, सीडर, रोटावेटर</strong><br />5 टन क्षमता वाले ट्रेलर की कीमत 1.68 लाख रुपये की जगह 1.57 लाख, बीज-उर्वरक ड्रिल की 70,000 की जगह 65,625 रुपये, 8 फुट वाले स्ट्रॉ रीपर की 2.70 लाख रुपये की जगह 2.53 लाख रुपये, हैप्पी सीडर की 1.70 लाख की जगह 1,59,375 लाख रुपये, 6 फुट वाले रोटावेटर की 1.25 लाख की जगह 1.17 लाख रुपये, 8 फुट वाले मल्चर की 1.85 लाख की जगह 1.73 लाख रुपये, न्यूमेटिक प्लांटर की 5.25 लाख रुपये की जगह 4.92 लाख रुपये और स्प्रेयर ट्रैक्टर माउंटेड की 1.50 लाख की जगह 1.40 लाख रुपये रह जाएगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68bc725a40536.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ GST घटने से कृषि उपकरणों के दाम 1.87 लाख रुपये तक घटेंगे, जानिए किस पर होगी कितनी बचत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68bc725a40536.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जीएसटी में बदलाव से डेयरी सेक्टर को लाभ, लेकिन कूलिंग और दूध दुहने की मशीनों पर अधिक टैक्स से चिंता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/gst-overhaul-to-boost-dairy-sector-but-higher-tax-on-key-technologies-raises-concerns.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 06 Sep 2025 17:36:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/gst-overhaul-to-boost-dairy-sector-but-higher-tax-on-key-technologies-raises-concerns.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में दूध और डेयरी उत्पादों पर कर कटौती की घोषणा की गई है। इससे करोड़ों ग्रामीण किसान परिवारों और उपभोक्ताओं को लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि बल्क मिल्क कूलर और दूध दुहने वाली मशीन जैसी आवश्यक डेयरी टेक्नोलॉजी पर 18% जीएसटी बनाए रखना इस क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को कमजोर करता है।</p>
<p>परिषद ने 3 सितंबर 2025 को दूध और दूध उत्पादों पर जीएसटी दरों में बदलाव किया जो 22 सितंबर से लागू होगा। अधिकांश डेयरी वस्तुओं पर कर शून्य या 5% कर दिया गया है। नई दरों के तहत, अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर (UHT) दूध और पैक्ड पनीर को जीएसटी से छूट दी गई है। वहीं मक्खन, घी, डेयरी स्प्रेड, चीज़, कंडेंस्ड मिल्क, दूध से बने पेय और आइसक्रीम पर अब केवल 5% कर लगाया जाएगा। दूध के कैन, जो भंडारण और परिवहन के लिए आवश्यक हैं, पर जीएसटी भी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है।</p>
<p>जानकारों का कहना है कि यह बदलाव सीधे तौर पर 8 करोड़ से अधिक ग्रामीण किसान परिवारों - विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों - को लाभान्वित करेगा। उपभोक्ताओं को भी कम खुदरा कीमतों और बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों का फायदा होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि कम कर से परिचालन लागत घटेगी और भारतीय डेयरी उत्पाद घरेलू तथा वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।</p>
<p>भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है। वर्ष 2023&ndash;24 में यहां 23.9 करोड़ टन दूध का उत्पादन हुआ, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 24% है। यह सेक्टर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 5.5% का योगदान करता है और 2024 में इसकी वैल्यू लगभग 18.98 लाख करोड़ रुपये आंकी गई थी। यह देश की सबसे बड़ी कृषि कमोडिटी है।</p>
<p><strong>टेक्नोलॉजी पर अधिक टैक्स बनेगी बाधक</strong><br />विशेषज्ञों ने जीएसटी दरों में बदलावों का व्यापक स्वागत किया है, लेकिन आवश्यक डेयरी तकनीक, जैसे दूध दुहने की मशीनें और बल्क मिल्क कूलर पर 18% जीएसटी बनाए रखने का निर्णय चिंता का विषय बना हुआ है। इन वस्तुओं को 2022 में 12% से बढ़ाकर 18% कर श्रेणी में डाला गया था और उद्योग की अपील के बावजूद इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया।</p>
<p>आधुनिक दुहाई मशीनें स्वच्छ और निर्यात-योग्य दूध उत्पादन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। यूरोप और भारत के अध्ययनों से पता चला है कि यांत्रिक तरीके से दूध दुहने से माइक्रोबियल संक्रमण कम होता है, क्योंकि इसमें सीधा मानव संपर्क कम रहता है। थनों की समान रूप से सफाई भी सुनिश्चित होती है। उचित रखरखाव के साथ यह प्रणाली मवेशी के थनों के स्वास्थ्य में सुधार करती हैं और सोमैटिक सेल की संख्या कम करती हैं। इससे उपभोक्ताओं के लिए दूध अधिक सुरक्षित रहता है।</p>
<p>उतना ही महत्वपूर्ण है दूध की जल्दी कूलिंग। दूध को दुहे जाने के कुछ घंटों के भीतर 3&ndash;4 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा करना विश्व स्तर पर स्वच्छ दूध उत्पादन का मानक माना जाता है। शोध से साबित हुआ है कि शीघ्र कूलिंग न केवल जीवाणु वृद्धि रोकती है बल्कि भंडारण और परिवहन के दौरान दूध की पौष्टिकता भी बनी रहती है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जीएसटी में बदलाव से डेयरी सेक्टर को लाभ, लेकिन कूलिंग और दूध दुहने की मशीनों पर अधिक टैक्स से चिंता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जीएसटी  बदलाव से 10 करोड़ से अधिक डेयरी किसानों को होगा लाभ: सहकारिता मंत्रालय]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/more-than-10-crore-dairy-farmers-to-benefit-from-gst-reforms-claims-ministry-of-cooperation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 06 Sep 2025 16:17:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/more-than-10-crore-dairy-farmers-to-benefit-from-gst-reforms-claims-ministry-of-cooperation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) में कमी का स्वागत किया है। इसने कहा है कि इससे सहकारी संस्थाओं, किसानों और ग्रामीण उद्यमों सहित 10 करोड़ से अधिक डेयरी किसानों को सीधा लाभ होगा। ये सुधार सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाएंगे, उनके उत्पादों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएंगे, उनके उत्पादों की मांग और उनकी आय बढ़ाएंगे। यह ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देगा, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सहकारिताओं को प्रोत्साहित करेगा और लाखों परिवारों के लिए आवश्यक वस्तुएं किफायती रूप से उपलब्ध कराएगा। जीएसटी दर में कटौती खेती और पशुपालन में लगी सहकारिताओं को लाभ पहुंचाएगी, टिकाऊ खेती की प्रथाओं को बढ़ावा देगी और छोटे किसानों तथा किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सीधा लाभ देगी।&nbsp;</p>
<p><strong>जीएसटी दरों में कमी</strong><br />एक बयान में मंत्रालय ने कहा है कि दुग्ध क्षेत्र में किसानों और उपभोक्ताओं को वस्तु सेवा कर में सीधे राहत दी गई है। दूध और पनीर, चाहे ब्रांडेड हों या बिना ब्रांड के, को जीएसटी से मुक्त किया गया है। मक्खन, घी और ऐसे ही अन्य उत्पादों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। लोहे, स्टील और एल्युमिनियम से बने दूध के कनस्तरों पर भी जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है।</p>
<p>इन उपायों से दुग्ध उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे, दुग्ध किसानों को सीधी राहत मिलेगी और विशेषकर दूध प्रसंस्करण में लगी महिला-नेतृत्व वाली ग्रामीण उद्यमशीलता तथा स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को मजबूती मिलेगी। किफायती दुग्ध उत्पाद घर-घर में आवश्यक प्रोटीन और वसा स्रोत उपलब्ध कराएंगे और दुग्ध सहकारिताओं की आय बढ़ाएँगे।</p>
<p><strong>खाद्य प्रसंस्करण पर दरें घटीं</strong><br />खाद्य प्रसंस्करण और घरेलू वस्तुओं में बड़ी राहत दी गई है। चीज़, नमकीन, मक्खन और पास्ता पर जीएसटी 12% या 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। जैम, जेली, खमीर, भुजिया और फलों का गूदा/जूस आधारित पेय पदार्थ अब 5% जीएसटी पर आएंगे। चॉकलेट, कॉर्न फ्लेक्स, आइसक्रीम, पेस्ट्री, केक, बिस्किट और कॉफी पर भी जीएसटी 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है।</p>
<p>मंत्रालय का कहना है कि कम जीएसटी से खाद्य पदार्थों पर घरेलू खर्च घटेगा, अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बढ़ेगी और खाद्य प्रसंस्करण एवं दुग्ध सहकारिताओं की वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। इससे खाद्य प्रसंस्करण और दुग्ध प्रसंस्करण सहकारिताएँ तथा निजी डेयरियाँ मजबूत होंगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। इसके साथ ही पैकिंग पेपर, डिब्बे और पेटियों (crates) पर जीएसटी घटाकर 5% कर दिया गया है, जिससे सहकारिताओं और खाद्य उत्पादकों के लिए लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग लागत कम होगी।</p>
<p>कृषि उपकरण क्षेत्र में, 1800 सीसी से कम क्षमता वाले ट्रैक्टरों पर जीएसटी घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे ट्रैक्टर अधिक किफायती होंगे और इसका लाभ केवल फसल उत्पादक किसानों को ही नहीं बल्कि पशुपालन और मिश्रित खेती करने वालों को भी मिलेगा, क्योंकि इनका उपयोग चारे की खेती, चारे के परिवहन और कृषि उत्पाद प्रबंधन में किया जा सकता है। ट्रैक्टर के टायर, ट्यूब, हाइड्रोलिक पंप और अन्य अनेक पुर्जों पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% किया गया है, जिससे लागत और घटेगी और सहकारिताओं को सीधा लाभ होगा।</p>
<p><strong>उर्वरकों, बायो-पेस्टीसाइड पर जीएसटी</strong><br />उर्वरक क्षेत्र में, अमोनिया, सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल जैसे प्रमुख कच्चे माल पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे उल्टा कर ढांचा सुधरेगा, उर्वरक कंपनियों की इनपुट लागत घटेगी, किसानों के लिए कीमतें बढ़ने से रुकेंगी और बुवाई के समय पर किफायती उर्वरक उपलब्ध होंगे। इसका सीधा लाभ सहकारिताओं को होगा।</p>
<p>इसी प्रकार, बारह बायो-पेस्टीसाइड और अनेक सूक्ष्म पोषक तत्वों (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे जैव-आधारित कृषि इनपुट अधिक किफायती होंगे, किसान रासायनिक कीटनाशकों से हटकर बायो-पेस्टीसाइड की ओर बढ़ेंगे, मिट्टी की सेहत और फसलों की गुणवत्ता बेहतर होगी, और छोटे जैविक किसानों तथा एफपीओ (Farmer Produce Organisation) को सीधा लाभ मिलेगा। यह कदम सरकार के प्राकृतिक खेती मिशन के अनुरूप है और सहकारिताओं को भी लाभान्वित करेगा।</p>
<p>वाणिज्यिक वाहनों में, ट्रक और डिलीवरी वैन जैसे मालवाहक वाहनों पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है। ट्रक भारत की आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ हैं और लगभग 65&ndash;70% माल यातायात का वहन करते हैं। इससे ट्रकों की पूंजीगत लागत घटेगी, प्रति टन-किलोमीटर भाड़ा कम होगा और इसका प्रभाव कृषि उत्पादों की ढुलाई को सस्ता बनाने, लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में दिखाई देगा। साथ ही मालवाहक वाहनों के थर्ड-पार्टी बीमा पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुविधा भी दी गई है, जिससे इन प्रयासों को और बल मिलेगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जीएसटी  बदलाव से 10 करोड़ से अधिक डेयरी किसानों को होगा लाभ: सहकारिता मंत्रालय ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आईएआरआई फिर बना देश का नंबर वन कृषि संस्थान, टॉप 20 में एमिटी और लवली यूनिवर्सिटी भी शामिल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/nirf-ranking-2025-iari-top-agricultural-institutions-in-india-amity-and-lovely-university-in-top-20.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 05 Sep 2025 15:07:14 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/nirf-ranking-2025-iari-top-agricultural-institutions-in-india-amity-and-lovely-university-in-top-20.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="154" data-end="571">शिक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित <strong data-start="183" data-end="235">राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) 2025</strong> में <a href="https://www.nirfindia.org/Rankings/2025/AgricultureRanking.html"><strong>कृषि और संबद्ध क्षेत्रों</strong></a> की सूची भी जारी की गई है। इस बार भी <strong data-start="301" data-end="351">भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली</strong> ने अपनी श्रेष्ठता कायम रखते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है। दूसरे स्थान पर <strong data-start="426" data-end="487">आईसीएआर का राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI), करनाल</strong> रहा है, जबकि <strong data-start="501" data-end="545">पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना</strong> तीसरे स्थान पर कायम है।&nbsp;</p>
<p data-start="573" data-end="1093">NIRF में वर्ष 2023 से कृषि व संबद्ध क्षेत्रों के संस्थानों की अलग से रैंकिंग शुरू की गई थी। पिछले तीन वर्षों से IARI, NDRI और PAU लगातार शीर्ष तीन स्थानों पर बने हुए हैं। <strong data-start="744" data-end="779">बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU)</strong> देश के कृषि विश्वविद्यालयों के बीच चौथा स्थान प्राप्त करने में सफल रहा है। इस साल दो निजी संस्थान &mdash; <strong data-start="880" data-end="931">एमिटी यूनिवर्सिटी, गौतम बुद्ध नगर (15वां स्थान)</strong> और <strong data-start="935" data-end="988">लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, फगवाड़ा (17वां स्थान)</strong> भी टॉप-20 में जगह बनाने में कामयाब रहे। यह कृषि शिक्षा में निजी संस्थानों की बढ़ती भूमिका का संकेत है।</p>
<p data-start="1095" data-end="1653">ओवरऑल देश के टॉप 100 संस्थानों में <strong>भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान</strong> ने 24वां स्थान प्राप्त किया है। लगातार तीसरे वर्ष IARI का कृषि संस्थानों में शीर्ष पर रहना, कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में संस्थान की मजबूती का परिणाम है। पूसा संस्थान के तौर पर विख्यात IARI की शुरुआत 1905 में बिहार के पूसा से एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट (ARI) के रूप में हुई थी। बाद में इसका नाम बदलकर इंपीरियल एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट किया गया। 1934 में यह संस्थान दिल्ली में स्थापित हुआ और आज़ादी के बाद इसे इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट नाम मिला। हरित क्रांति में अहम भूमिका निभाने वाले IARI का नेतृत्व डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन जैसे दिग्गज कृषि वैज्ञानिक कर चुके हैं।</p>
<p data-start="1655" data-end="2105">शीर्ष 10 कृषि संस्थानों में <strong>इंडियन वेटरिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IVRI)</strong>, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU), शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कश्मीर (SKUAST), सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज एजुकेशन, मुंबई, जी.बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर और चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार शामिल हैं। ये संस्थान उच्च स्तर की शैक्षणिक और शोध गतिविधियों के चलते अग्रणी बने हुए हैं।</p>
<p data-start="1655" data-end="2105">स्वतंत्रता के बाद स्थापित देश के पहले कृषि विश्वविद्यालय, उत्तराखंड के पंतनगर स्थित <strong>जी.बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, </strong>के प्रदर्शन में हाल के वर्षों में गिरावट आई है। इस साल पंतनगर विश्वविद्यालय 8वें स्थान से गिरकर 9वें स्थान पर आ गया है, जबकि अपनी रैंकिंग में सुधार करते हुए शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कश्मीर 7वें स्थान पर पहुंच गया है। पंतनगर विश्वविद्यालय ओवरऑल 100 संस्थानों की फेहरिस्त से भी बाहर हो गया है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p data-start="2107" data-end="2474">कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के कुल 40 संस्थानों को एनआईआरएफ रैंकिंग 2025 में शामिल किया गया है। इनमें से केवल चार कृषि विश्वविद्यालय &mdash; आईएआरआई, पीएयू, टीएनएयू और एसकेयूएएसटी &mdash; ही ओवरऑल टॉप-100 संस्थानों की सूची में जगह बना पाए हैं। संस्थानों का मूल्यांकन शिक्षण, शोध और शैक्षणिक प्रदर्शन सहित विभिन्न मानकों के आधार पर किया गया।</p>
<p data-start="2107" data-end="2474"></p>
<p data-start="2107" data-end="2474"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68baaf426cbea.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आईएआरआई फिर बना देश का नंबर वन कृषि संस्थान, टॉप 20 में एमिटी और लवली यूनिवर्सिटी भी शामिल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि व संबद्ध क्षेत्रों को जीएसटी कटौती का बूस्टर; ट्रैक्टर, सिंचाई उपकरण और इनपुट्स पर टैक्स घटाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/gst-booster-for-agriculture-sector-from-tractor-to-bio-fertilizer-will-become-cheaper.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 04 Sep 2025 00:48:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/gst-booster-for-agriculture-sector-from-tractor-to-bio-fertilizer-will-become-cheaper.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="259" data-end="1103">सरकार ने कृषि और सहयोगी क्षेत्र के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कटौती कर किसानों को बड़ी राहत दी है। जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में नई दरों को दी गई मंजूरी के तहत ट्रैक्टर और उसके कंपोनेंट, उर्वरकों का कच्चा माल, बायो पेस्टीसाइड्स, माइक्रो न्यूट्रिएंट, सोलर पंप, स्प्रिंकलर इरीगेशन, तमाम कृषि उपकरण, स्टोरेज, डेयरी उत्पाद, प्रोसेस्ड सब्जियां और समुद्री उत्पादों से लेकर शहद और तेंदू पत्ता समेत वनोपजों पर जीएसटी दरों में बड़ी कटौती की गई है। इसके चलते कृषि उपकरणों, उनके कंपोनेंट, फसल इनपुट्स और ढांचागत सुविधाओं के लिए जरूरी उत्पादों के दाम कम होने का फायदा किसानों को मिलेगा। इससे जहां किसानों के लिए इनपुट लागत कम होगी, वहीं कृषि उत्पादों के सस्ते होने से उनकी मांग में इजाफा होगा। इसका लाभ किसानों, सहकारी क्षेत्र और कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को मिलेगा। जीएसटी की नई दरें और प्रावधान 22 सितंबर, 2025 से लागू होंगे।</p>
<p data-start="1105" data-end="1308">कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि जीएसटी में हुए बदलावों से जहां घरेलू उत्पाद आयातित उत्पादों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे, वहीं कृषि क्षेत्र के लिए यह एक बूस्टर साबित होगा।</p>
<p data-start="1310" data-end="1782">कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण को बढ़ावा देने के तहत 1800 सीसी से कम के ट्रैक्टरों पर जीएसटी दर को घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है। इसके चलते ट्रैक्टरों की कीमतों में कमी आएगी। इसका सबसे अधिक फायदा लघु और सीमांत किसानों को होगा, जिन्हें छोटे ट्रैक्टरों की आवश्यकता होती है। देश में करीब 86 फीसदी किसान लघु और सीमांत श्रेणी में आते हैं। मंत्रालय का मानना है कि जिस दर से कृषि में श्रमिकों की लागत बढ़ रही है, उसे देखते हुए ट्रैक्टरों की कीमत घटने से मशीनीकरण को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p data-start="1784" data-end="2327">इसी के साथ ट्रैक्टरों के कंपोनेंट जैसे टायर, ट्यूब, हाइड्रोलिक पंप और अन्य पार्ट्स पर जीएसटी की दर 18 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दी गई है। वहीं स्प्रिंकलर और ड्रिप इरीगेशन, फसल कटाई मशीनरी (हार्वेस्टिंग मशीनरी) व ट्रैक्टर पार्ट्स पर जीएसटी को 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है। इन कदमों से जहां सिंचाई के लिए कम पानी खपत वाली विधियों को बढ़ावा मिलेगा, वहीं ट्रैक्टर पर किसानों का खर्च भी घटेगा। सोलर पावर की मशीनरी पर जीएसटी की दर को भी 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है, जिससे सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p data-start="2329" data-end="2717">उर्वरक उद्योग सरकार से मांग कर रहा था कि उसके इनपुट पर जीएसटी की दर को 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी किया जाए, ताकि उर्वरक पर लगने वाले जीएसटी और इनपुट पर लगने वाले जीएसटी में समानता आ सके। नये प्रावधानों के तहत उर्वरकों के इनपुट अमोनिया, सल्फ्यूरिक एसिड और नाइट्रिक एसिड पर जीएसटी की दर 18 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दी गई है। इससे उद्योग को इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में राहत मिलेगी।</p>
<p data-start="2719" data-end="3145">नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए बायो पेस्टीसाइड्स और कई माइक्रो न्यूट्रिएंट्स पर जीएसटी दर 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दी गई है। इससे ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और सरकार द्वारा चलाए जा रहे नेचुरल फार्मिंग मिशन को बढ़ावा मिलेगा। फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985 के सीरियल 1(जी) शेड्यूल 1 पार्ट ए के तहत आने वाले माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पर भी जीएसटी की दर 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दी गई है।</p>
<p data-start="3147" data-end="3489">फ्रूट, वेजिटेबल और फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र के लिए जीएसटी की दरों को 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी किया गया है। इसके चलते इन उत्पादों में वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इससे कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में निवेश बढ़ेगा और जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों का नुकसान कम होगा। वहीं कृषि उत्पादों के निर्यात में भी वृद्धि होगी।</p>
<p data-start="3491" data-end="3857">डेयरी क्षेत्र की लंबे समय से मांग थी कि दूध से बने उत्पादों पर जीएसटी में कमी लाई जाए। नये प्रावधानों के तहत पनीर और दूध पर जीएसटी समाप्त कर दिया गया है, जबकि बटर और घी पर जीएसटी को 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है। डेयरी प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के मकसद से स्टील और एल्युमीनियम की मिल्क केन पर भी जीएसटी को 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है।</p>
<p data-start="3859" data-end="4200">अक्वाकल्चर सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए तैयार और प्रिज़र्व्ड फिश पर जीएसटी को 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है। मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहन देने के लिए शहद पर भी जीएसटी की दर घटाई गई है। साथ ही तेंदू पत्ता पर जीएसटी की दर 18 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दी गई है। इसका फायदा ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसानों को मिलेगा।</p>
<p data-start="4202" data-end="4337">ट्रांसपोर्टेशन को सस्ता करने के लिए कमर्शियल वाहनों पर भी जीएसटी दरों में कमी की गई है। इससे कृषि उत्पादों के परिवहन की लागत में कमी आएगी।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68b8ac904dc86.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि व संबद्ध क्षेत्रों को जीएसटी कटौती का बूस्टर; ट्रैक्टर, सिंचाई उपकरण और इनपुट्स पर टैक्स घटाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68b8ac904dc86.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में भीषण बाढ़ के पीछे जलवायु परिवर्तन और पश्चिमी विक्षोभ प्रमुख कारण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/climate-change-and-western-disturbance-created-horrific-flood-situation-in-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 01 Sep 2025 16:23:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/climate-change-and-western-disturbance-created-horrific-flood-situation-in-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="223" data-end="907">पंजाब कई दशकों की भीषण बाढ़ का सामना कर रहा है। राज्य के नौ जिलों और एक हजार से अधिक गांवों में बाढ़ की तबाही रावी और ब्यास नदी के कैचमेंट एरिया में अप्रत्याशित और भारी बारिश के चलते आई है। मानसून सीजन में सामान्य रूप से चार पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आते हैं, लेकिन इस बार इनकी संख्या 15 तक पहुंच गई है। इसके चलते हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में सामान्य से 70 फीसदी अधिक बारिश हुई है। यही नहीं, बारिश अभी थमी नहीं है, जिसके चलते रावी और ब्यास नदियों में पानी का बढ़ा हुआ स्तर जारी है। इस वजह से इन दोनों नदियों के आसपास का पंजाब का इलाका बाढ़ में डूब गया है। पंजाब के 22 में से 9 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं, जिनमें तरनतारन, अमृतसर, फाजिल्का, फिरोजपुर और संगरूर शामिल हैं।</p>
<p data-start="909" data-end="1402">नेशनल रेनफेड अथॉरिटी के पूर्व चेयरमैन और चंडीगढ़ स्थित सेंटर फॉर रिसर्च इन रूरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट (CRRID) के एडवाइजर, <strong>डॉ. जे. एस. सामरा</strong> ने <i>रूरल वॉयस&nbsp;</i>को बताया कि इस समय पंजाब की करीब तीन लाख एकड़ फसल पानी में डूबी हुई है। इसमें अधिकांश धान की फसल है, जबकि कुछ हिस्सों में कपास और चारे की फसलें हैं। इस बाढ़ से लगभग एक हजार करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है। वहीं, यमुना के कैचमेंट एरिया में भी भारी बारिश के चलते हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। <span>दिल्ली में यमुना नदी पहले से खतरे के निशान से ऊपर बह रही।</span></p>
<p data-start="1404" data-end="2168">डॉ. सामरा ने बताया कि सामान्य से तापमान में एक डिग्री की वृद्धि होने पर हवा में नमी का स्तर लगभग 7 फीसदी बढ़ जाता है। इस समय तापमान सामान्य से दो डिग्री अधिक है, जिससे हवा में नमी का स्तर करीब 15 फीसदी तक बढ़ गया है। इसका नतीजा यह हुआ कि बारिश की बूंदों का आकार सामान्य 2 मिमी से बढ़कर 4 मिमी तक हो गया है। बूंदें भारी होने के कारण जब बादल आगे बढ़ते हैं तो हिमालय उन्हें रोकता है और पानी तेजी से बरसता है। सामान्य रूप से बारिश की तीव्रता 5 सेंटीमीटर प्रति घंटे होती है, लेकिन इस बार यह 10 सेंटीमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई है। यह स्थिति क्लाउडबर्स्ट जैसी है और फ्लैश फ्लड के रूप में सामने आ रही है। अधिक काइनेटिक एनर्जी से गिरता पानी पहले से गीली और नरम हो चुकी मिट्टी व चट्टानों को मडस्लाइड में बदल रहा है। यह सारी स्थिति जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को दर्शाती है।</p>
<p data-start="2170" data-end="2818">डॉ. सामरा के अनुसार, दोनों नदियों पर बने बांधों में ओवरफ्लो होने के कारण अधिक पानी छोड़ा जा रहा है। सामान्य तौर पर रेड लाइन तक पानी आने पर ही बांध से पानी छोड़ा जाता है, लेकिन इस बार अचानक बहुत अधिक पानी आने से बांधों से एक साथ ज्यादा पानी छोड़ना पड़ा, जिसका नतीजा भयानक बाढ़ के रूप में सामने आया है। वह बताते हैं कि दो साल पहले 2023 में सतलुज में अधिक पानी आने से मानसून की शुरुआत में ही बाढ़ की स्थिति बनी थी। हालांकि, उस साल जल्दी पानी उतर जाने से किसानों को दोबारा फसल बोने का मौका मिल गया था। लेकिन इस साल स्थिति अलग है क्योंकि फसल को दोबारा बोने का अवसर नहीं है। कई जगह धान की फसल पर पांच फीट तक पानी खड़ा है, जिससे भारी नुकसान की आशंका है।</p>
<p data-start="2820" data-end="3118">डॉ. सामरा का कहना है कि आने वाले दिनों में इस तरह की असामान्य घटनाएं और बढ़ सकती हैं। साथ ही, बारिश का भौगोलिक पैटर्न भी बदल रहा है। इसी कारण लद्दाख और राजस्थान जैसे ठंडे या शुष्क रेगिस्तानी इलाकों में बाढ़ आई है, जबकि केरल और पूर्वोत्तर जैसे अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में इस साल कम बारिश हुई है।</p>
<p data-start="2820" data-end="3118"></p>
<p data-start="2820" data-end="3118"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68b57d6a20ef4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में भीषण बाढ़ के पीछे जलवायु परिवर्तन और पश्चिमी विक्षोभ प्रमुख कारण ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत की कृषि वृद्धि दर में बागवानी बना इंजन, लेकिन चुनौतियां बरकरारः आरबीआई बुलेटिन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/horticultural-diversification-powers-india-farm-growth-but-challenges-persist.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 31 Aug 2025 13:29:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/horticultural-diversification-powers-india-farm-growth-but-challenges-persist.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले तीन दशकों में भारत की कृषि वृद्धि दर में मुख्य रूप से पैदावार (उपज) में सुधार, उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर विविधीकरण और फसल गहनता (क्रॉपिंग इंटेंसिटी) बढ़ने के कारण इजाफा हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक के अगस्त 2025 के बुलेटिन में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है कि खासकर बागवानी&mdash;फलों और सब्जियों&mdash;ने कृषि क्षेत्र की मजबूती में केंद्रीय भूमिका निभाई है। हालांकि, पैदावार में उतार-चढ़ाव, भंडारण इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी और मूल्य अस्थिरता अब भी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।</p>
<p>यह अध्ययन आरबीआई के आर्थिक नीति और अनुसंधान विभाग के शिवम ने किया है। इसमें कृषि विकास को चार हिस्सों&mdash;क्षेत्र विस्तार, पैदावार में सुधार, मूल्य प्रभाव और विविधीकरण&mdash;में विभाजित कर विश्लेषण किया गया। अध्ययन आठ प्रमुख फसलों&mdash;धान, गेहूं, दालें, मोटे अनाज, फल और सब्जियां, तिलहन, गन्ना और तंबाकू&mdash;पर केंद्रित रहा, जो सकल फसल क्षेत्र का 80 प्रतिशत और सकल उत्पादन मूल्य का 75 प्रतिशत हिस्सा बनाती हैं।</p>
<p><strong>यील्ड और विविधीकरण रहे सबसे बड़े कारक</strong><br />1992-93 से 2022-23 के बीच कृषि विकास में सबसे अधिक योगदान यील्ड सुधार (1.67 प्रतिशत) का रहा। इसके बाद विविधीकरण (0.68 प्रतिशत) और क्षेत्रफल विस्तार (0.54 प्रतिशत) रहे। इस दौरान मूल्य प्रभाव नकारात्मक (-0.11 प्रतिशत) रहा।</p>
<p>यह विश्लेषण दशकवार किया गया है। इसमें 1990 के दशक में उपज वृद्धि और विविधीकरण मुख्य कारक रहे। 2002-03 से 2011-12 के बीच विविधीकरण और क्षेत्रफल वृद्धि का असर ज्यादा दिखा। वहीं 2012-13 से 2022-23 तक चारों घटक&mdash;क्षेत्र, मूल्य, उपज और विविधीकरण&mdash;ने सकारात्मक योगदान दिया। इस दौरान फसल गहनता 139.15 प्रतिशत से बढ़कर 155.4 प्रतिशत हो गई।</p>
<p><strong>फल और सब्जियां बने वृद्धि का आधार</strong><br />अध्ययन में पाया गया कि फल और सब्जियां लगातार पारंपरिक खाद्यान्नों से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। 2022-23 में सकल फसल क्षेत्र में केवल 5.77 प्रतिशत हिस्सेदारी के बावजूद उन्होंने सकल उत्पादन मूल्य में 28.19 प्रतिशत योगदान दिया।</p>
<p>तीनों दशकों में फलों और सब्जियों की वार्षिक वृद्धि दर सबसे अधिक रही&mdash; 1992-2002 के बीच 5.86 प्रतिशत, 2002-2012 में 4.33 प्रतिशत और 2012-2023 में 3.84 प्रतिशत। इनके बिना कुल कृषि वृद्धि दर काफी धीमी होती।</p>
<p>घरेलू उपभोग के आंकड़े भी इसी प्रवृत्ति को दर्शाते हैं। 2004-05 में परिवारों के खान-पान के कुल खर्च में फलों का हिस्सा 2 प्रतिशत था, जो 2023-24 में बढ़कर 3.9 प्रतिशत हो गया। वहीं अनाज पर खर्च का हिस्सा लगातार घटा है।</p>
<p><strong>छोटे किसान बने अगुवा</strong><br />कृषि जनगणना के अनुसार, छोटे किसानों ने बागवानी की ओर सबसे अधिक रुझान दिखाया है। 2015-16 में छोटे किसानों ने अपने सकल फसल क्षेत्र का 6.08 प्रतिशत बागवानी में लगाया, जबकि मध्यम आकार के किसानों ने 5.32 प्रतिशत और बड़े किसानों ने 5.04 प्रतिशत।</p>
<p>सब्जियां छोटे किसानों की पहली पसंद रही हैं क्योंकि वे श्रम-प्रधान होती हैं, जल्दी उत्पादन देती हैं और कम पूंजी मांगती हैं। इसके विपरीत बड़े किसान फलों और मसालों की खेती को प्राथमिकता देते हैं, जिनमें अधिक निवेश और लंबा समय लगता है।</p>
<p><strong>चुनौतियां: उपज, भंडारण और मूल्य</strong><br />यील्ड में उतार-चढ़ाव अब भी एक बड़ी चुनौती है, खासकर आम, अंगूर और सपोटा जैसी फसलों में जहां उत्पादकता में गिरावट देखी गई। सब्जियों में सामान्य तौर पर वृद्धि हुई है लेकिन मटर और कसावा जैसी फसलों में अस्थिरता बनी रही। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर और 2021 में शुरू किए गए हॉर्टिकल्चर क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम जैसे कार्यक्रम लागू किए हैं।</p>
<p>कटाई के बाद भंडारण की कमी एक और बड़ी बाधा है। अनुमान है कि हर साल करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होता है। 2022 तक भारत की कोल्ड स्टोरेज क्षमता 382 लाख टन थी, लेकिन इसका 71 प्रतिशत हिस्सा केवल चार राज्यों&mdash;उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात और पंजाब&mdash;में केंद्रित है और 75 प्रतिशत क्षमता सिर्फ आलू के लिए उपयोग होती है। हाल के वर्षों में कृषि अवसंरचना निधि (AIF) और मेगा फूड पार्क जैसी योजनाएं इस समस्या को कम करने के प्रयास में हैं।</p>
<p>मूल्य अस्थिरता तीसरी बड़ी चुनौती है। 2012-13 के बाद फलों की कीमतों में स्थिरता आई है, लेकिन सब्जियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है, खासकर प्याज, आलू और टमाटर में। इसके विपरीत धान और गेहूं जैसी अनाज फसलों की कीमतें स्थिर और बढ़ती रही हैं क्योंकि भारतीय खाद्य निगम (FCI) इनकी बड़े पैमाने पर खरीद करता है। इस असंतुलन को देखते हुए सरकार ने 2018-19 में ऑपरेशन ग्रीन्स की शुरुआत की, जिसे बाद में सभी फल और सब्जियों (TOTAL scheme) तक विस्तारित किया गया।</p>
<p><strong>आगे की राह</strong><br />अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया है कि कृषि की स्थायी वृद्धि के लिए यील्ड सुधार और बागवानी का विविधीकरण ही सबसे मजबूत आधार हैं। किसानों को निर्यात बाजारों और शहरी उपभोक्ताओं से जोड़ना, अंतरफसली खेती को बढ़ावा देना और एग्रो-प्रोसेसिंग उद्योगों का विस्तार भविष्य की प्राथमिकताएं होनी चाहिए।</p>
<p>साथ ही, जलवायु परिवर्तन और कीट प्रबंधन जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि अनुसंधान को और मजबूत करना आवश्यक है। इससे किसानों की आय में स्थिरता आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत की कृषि वृद्धि दर में बागवानी बना इंजन, लेकिन चुनौतियां बरकरारः आरबीआई बुलेटिन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारतीय किसान संघ ने कपास आयात पर सरकार को चेताया, शुल्क छूट आगे न बढ़ाने की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/bharatiya-kisan-sangh-warned-government-on-cotton-import-demanded-not-to-extend-the-duty-exemption.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 29 Aug 2025 20:34:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/bharatiya-kisan-sangh-warned-government-on-cotton-import-demanded-not-to-extend-the-duty-exemption.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कपास पर आयात शुल्क छूट की समय-सीमा 30 सितंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2025 <span>करने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर किसान संगठनों ने विरोध जताना शुरू कर दिया है। भारतीय किसान संघ (</span>BKS) ने केंद्र सरकार को आगाह करते हुए इस निर्णय को वापस लेने की मांग की है।&nbsp;</p>
<p>भारतीय किसान संघ के महामंत्री <strong>मोहन मोहन मिश्र</strong> ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र में कहा है कि नई फसल बाजार में आने से पहले लिया गया यह फैसला किसानों के हितों के प्रतिकूल साबित हो सकता है। भारतीय किसान संघ की मांग है कि सरकार इस निर्णय पर अधिसूचना जारी न करते हुए, इस निर्णय को वापस ले। ऐसा नहीं करेंगे तो कपास क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर से परावलंबन की ओर कदम बढ़ाएगा।&nbsp;</p>
<p>पत्र के अनुसार, सरकार की आयात नीति के कारण बाहर से यदि 51 हजार रुपये प्रति गांठ के रेट पर कपास का आयात किया जाता है तो हमारे यहां 61 हजार रुपये प्रति गांठ का कपास कौन खरीदेगा? यदि सरकार कपास आयात के इस निर्णय को वापस नहीं लेती है तो भारत कपास के क्षेत्र में आत्मनिर्भर की बजाय आयात पर निर्भर बन जाएगा।&nbsp;आयात शुल्क हटाने के निर्णय के पश्चात बाजार में कपास के भाव 1100 रुपये प्रति गांठ गिर चुका है। यदि शून्य आयात शुल्क के साथ कपास आयात को 31 दिसंबर तक बढ़ाया गया तो यह मूल्य और गिरने की संभावना है।&nbsp;</p>
<p>भारत सरकार ने कपास उत्पादन की कमी को देखते हुए वस्त्र उद्योग की सहायता के लिए 19 अगस्त से 30 सितंबर 2025 तक कपास पर आयात शुल्क में छूट दी थी। अब सरकार ने इस छूट की अवधि को 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।&nbsp;28 अगस्त को वित्त मंत्रालय की ओर से कपास आयात शुल्क छूट की समय सीमा बढ़ाने की विज्ञप्ति जारी हुई है। पहले देश में कपास आयात पर 11 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया जाता था, जिसे समाप्त कर सरकार ने घरेलू वस्त्र उद्योग के लिए कपास की उपलब्धता बढ़ाने का निर्णय लिया।&nbsp;</p>
<p>हाल के वर्षों में कपास की खेती संकट में आ गई है। देश में कपास की खेती का क्षेत्र और उत्पादन घटता जा रहा है। कृषि मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक,<span> इस साल कपास की खेती के क्षेत्र में </span>करीब 2.62 फीसदी की गिरावट आई है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारतीय किसान संघ ने कपास आयात पर सरकार को चेताया, शुल्क छूट आगे न बढ़ाने की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कपास का ड्यूटी फ्री आयात 31 दिसंबर तक बढ़ाया, दांव पर किसान हित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/interests-of-cotton-farmers-sacrificed-for-the-textile-industry-duty-free-import-of-cotton-extended-till-31-december.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 28 Aug 2025 13:08:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/interests-of-cotton-farmers-sacrificed-for-the-textile-industry-duty-free-import-of-cotton-extended-till-31-december.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="204" data-end="823">अमेरिका द्वारा भारत से होने वाले आयात पर 50 फीसदी शुल्क (टैरिफ) लगाने का फैसला लागू होने के अगले ही दिन भारत सरकार ने टेक्सटाइल निर्यातकों की मदद करने के लिए कॉटन के शुल्क-मुक्त आयात को 31 दिसंबर, 2025 तक बढ़ाने की घोषणा कर दी। यह कदम टेक्सटाइल उद्योग को सस्ते कॉटन की आपूर्ति बढ़ाने के मकसद से उठाया गया है, लेकिन सरकार के इस फैसले का खामियाजा देश के कपास किसानों को भुगतना पड़ सकता है। सरकार ने इससे पहले 30 सितंबर, 2025 तक ही कॉटन के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी। इसके पीछे तर्क था कि कॉटन का नया मार्केटिंग सीजन अक्तूबर में शुरू होगा और किसानों के उत्पाद के बाजार में आने पर उनके हितों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।</p>
<p data-start="825" data-end="1231">18 अगस्त तक कॉटन के आयात पर 11 फीसदी शुल्क लगता था, जिसमें 10 फीसदी आयात शुल्क और उस पर 10 फीसदी एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर सेस शामिल था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 18 अगस्त को जारी पहली अधिसूचना के दस दिन के भीतर ही सरकार ने उसी तर्क को नजरअंदाज कर दिया। सरकार के शुल्क-मुक्त कॉटन आयात के फैसले के दो दिन बाद ही कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने कॉटन की कीमत में 1100 रुपये प्रति कैंडी की कटौती कर दी थी।</p>
<p data-start="1233" data-end="1747">उद्योग सूत्रों के मुताबिक, कॉटन पर आयात शुल्क समाप्त करने के फैसले से पहले सीसीआई 56,000 से 57,000 रुपये प्रति कैंडी की दर से कॉटन बेच रही थी, जिसे दो दिन में घटाकर 1100 रुपये प्रति कैंडी कम कर दिया गया। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर कॉटन का आयात मूल्य करीब 51,000 रुपये प्रति कैंडी आ रहा है। जाहिर है कि जो आयातक 40 दिन की शुल्क-मुक्त आयात विंडो के चलते आयात का फैसला लेने में हिचक रहे थे, अब वे 31 दिसंबर, 2025 तक बड़ी मात्रा में कॉटन का आयात कर सकेंगे। इसका सीधा असर घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों पर पड़ेगा।</p>
<p data-start="1749" data-end="2443">इस कदम का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ेगा क्योंकि करीब 300 लाख गांठ कपास उत्पादन में से सीसीआई केवल 100 लाख गांठ की ही खरीद करती है। सीसीआई किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद करती है। बाकी 200 लाख गांठ के लिए किसानों को बाजार पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में या तो सीसीआई किसानों से पूरी 300 लाख गांठ एमएसपी पर खरीदे, नहीं तो किसानों के लिए एमएसपी मिलना मुश्किल हो जाएगा। नए मार्केटिंग सीजन के लिए तय एमएसपी के आधार पर सीसीआई को 61,000 रुपये प्रति कैंडी की दर से कॉटन की खरीद करनी होगी, जबकि आयातित कॉटन की लागत करीब 51,000 रुपये प्रति कैंडी है। ऐसे में बाजार भाव एमएसपी से कम ही रहेगा। यदि कुल खरीद के आधार पर 10,000 रुपये प्रति कैंडी का अंतर रहता है तो सीसीआई और किसानों को लगभग 15,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।</p>
<p data-start="2445" data-end="3320">&lsquo;ट्रम्प टैरिफ&rsquo; के बाद भारत से अमेरिका को होने वाला करीब 8 अरब डॉलर का टेक्सटाइल निर्यात प्रभावित होने की आशंका है। कॉटन इंडस्ट्री के एक विशेषज्ञ ने <em data-start="2593" data-end="2604">रूरल वॉयस</em> को बताया कि सरकार ने टेक्सटाइल निर्यातकों के हित में कॉटन के शुल्क-मुक्त आयात को 31 दिसंबर तक जारी रखने की जो रणनीति अपनाई है, वह उचित नहीं है। बेहतर होता कि सरकार टेक्सटाइल उद्योग और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाने का कदम उठाती। निर्यातकों को सीधे निर्यात प्रोत्साहन देकर मदद करना अधिक प्रभावी विकल्प था। टेक्सटाइल निर्यातकों को कॉटन आयात की सुविधा मिलने से उनके ऊपर करीब 3 फीसदी का ही शुल्क पड़ता था। वहीं घरेलू कॉटन के बाजार में आने के सबसे अहम समय में शुल्क-मुक्त आयात का फैसला किसानों के लिए भारी साबित होगा। सूत्र का कहना है कि समस्या टेक्सटाइल निर्यातकों की है, लेकिन इसका फायदा घरेलू टेक्सटाइल उद्योग भी उठाएगा। एक तरह से यह किसानों के हितों की कीमत पर घरेलू उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाने वाला कदम होगा।</p>
<p data-start="3322" data-end="3656">दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका के साथ भारत की द्विपक्षीय वार्ता घरेलू कृषि उत्पादों के बाजार को खोलने के मुद्दे पर ही अटकी है। भारत ने साफ किया था कि वह किसानों, डेयरी सेक्टर और मछुआरों के हितों की कीमत पर कोई समझौता नहीं करेगा। लेकिन सरकार का शुल्क-मुक्त कॉटन आयात 31 दिसंबर, 2025 तक बढ़ाने का फैसला किसानों के लिए मुश्किलें बढ़ाएगा।</p>
<p data-start="3658" data-end="4352">पिछले कई साल से देश में कपास उत्पादन घट रहा है, जो 399 लाख गांठ से घटकर करीब 300 लाख गांठ रह गया है। घरेलू टेक्सटाइल क्षेत्र की खपत करीब 315 लाख गांठ है। अधिक उत्पादन के चलते भारत एक बड़े कॉटन निर्यातक देश के रूप में उभरा था, लेकिन अब हम शुद्ध आयातक हो गए हैं। चालू खरीफ सीजन में कपास का क्षेत्रफल करीब 3 लाख हेक्टेयर घट गया है। बेहतर बीज की कमी और कीट हमलों के चलते किसान कपास का रकबा कम कर रहे हैं। ऐसे में अगर उन्हें वाजिब कीमत नहीं मिली तो आने वाले दिनों में किसान दूसरी फसलों की ओर रुख करेंगे, जिससे देश के कॉटन उद्योग के लिए और मुश्किलें खड़ी होंगी। प्रधानमंत्री स्वदेशी को बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं, ऐसे में शुल्क-मुक्त कॉटन आयात का यह फैसला किसानों के लिए सकारात्मक संदेश नहीं है।</p>
<p data-start="4354" data-end="4730">सरकार को इस फैसले के चलते किसानों के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है। देश के बड़े किसान संगठनों ने पहले ही सरकार को चेताया था कि वे कॉटन के शुल्क-मुक्त आयात का विरोध करते हैं और जरूरत पड़ने पर आंदोलन करेंगे। यह बयान तब आया था जब सरकार ने 30 सितंबर, 2025 तक शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी। लेकिन अब जब इसे 31 दिसंबर, 2025 तक बढ़ा दिया गया है, तो विरोध और तेज हो सकता है।</p>
<p data-start="4354" data-end="4730"></p>
<p data-start="4354" data-end="4730"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कपास का ड्यूटी फ्री आयात 31 दिसंबर तक बढ़ाया, दांव पर किसान हित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं और जौ की उत्पादकता वैश्विक औसत के बराबर लानी होगी: शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/the-production-of-wheat-and-barley-will-have-to-be-brought-at-par-with-the-global-average-shivraj-singh-chouhan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 27 Aug 2025 15:07:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/the-production-of-wheat-and-barley-will-have-to-be-brought-at-par-with-the-global-average-shivraj-singh-chouhan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय (RVSKVV) <span>में आयोजित </span>64<span>वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता गोष्ठी में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के कृषि वैज्ञानिकों</span>,<span> विशेषज्ञों के साथ गेहूं और जौ का उत्पादन बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद किया। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित हुए </span>&ldquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rdquo; <span>के बाद अब फसलवार और क्षेत्रवार गोष्ठियां की जा रही हैं। </span></p>
<p>ग्वालियर में आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारत आज गेहूं और चावल के उत्पादन में आत्मनिर्भर है। लेकिन उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत घटाना भी उतना ही जरूरी है,<span> ताकि खेती लाभकारी बन सके। उन्होंने गोष्ठी की शुरुआत में प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन के शताब्दी वर्ष का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और देश की खाद्यान्न आत्मनिर्भरता में उनके योगदान का स्मरण किया। </span></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि बीते 10-11 <span>वर्षों में गेहूं का उत्पादन </span>86.5 <span>मिलियन टन से बढ़कर </span>117.5 <span>मिलियन टन हो गया है</span>, <span>जो लगभग </span>44 <span>प्रतिशत की वृद्धि है। यह उपलब्धि उल्लेखनीय है</span>, <span>लेकिन अभी भी हमें प्रति हेक्टेयर उत्पादन को वैश्विक औसत के बराबर लाने की दिशा में काम करना होगा। साथ ही दलहन और तिलहन की उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि आयात पर निर्भरता घटे। उन्होंने कहा कि जौ जैसे परंपरागत अनाज का औषधीय महत्व है और इसके प्रोत्साहन पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_68aed1e159659.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे बायोफोर्टिफाइड गेहूं विकसित करें और असंतुलित खादों के उपयोग से मृदा की गुणवत्ता पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को रोकने की दिशा में कार्य करें। पराली प्रबंधन और किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए शिक्षित करना भी जरूरी है।</p>
<p><strong>लैब से लैंड का लक्ष्य </strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन केवल औपचारिकता नहीं है, <span>बल्कि यहां से निकले सुझावों और निष्कर्षों पर ठोस रोडमैप तैयार कर उसे लागू किया जाएगा। उन्होंने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे अपने शोध को किसानों तक पहुंचाएं ताकि </span>'<span>लैब से लैंड</span>' <span>का लक्ष्य पूरा हो सके।</span></p>
<p><strong>नकली खाद</strong><strong>, <span>बीज कड़ी कार्रवाई </span></strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को नकली खाद और कीटनाशकों से बचाने के लिए सख्त कदम उठा रही है। जिन कंपनियों के उत्पाद से फसल को नुकसान हुआ है, <span>उनके लाइसेंस रद्द किए जा रहे हैं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।</span></p>
<p><strong>एकीकृत खेती पर जोर </strong></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए एकीकृत खेती ही लाभकारी रास्ता है, <span>जिसमें खेती के साथ पशुपालन</span>, <span>मधुमक्खी पालन</span>, <span>मत्स्य पालन और बागवानी को जोड़ना होगा। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे दैनिक जीवन में स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करें और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सहयोग दें। </span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_68aed1cc30edf.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं और जौ की उत्पादकता वैश्विक औसत के बराबर लानी होगी: शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जंतर&amp;#45;मंतर पर किसान महापंचायत, MSP की कानूनी गारंटी और व्यापार समझौते से कृषि क्षेत्र को बाहर रखने की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmers-mahapanchayat-at-jantar-mantar-demand-for-legal-guarantee-of-msp-and-keeping-agriculture-sector-out-of-trade-agreement.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 25 Aug 2025 18:51:45 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmers-mahapanchayat-at-jantar-mantar-demand-for-legal-guarantee-of-msp-and-keeping-agriculture-sector-out-of-trade-agreement.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="283" data-end="662">देश के विभिन्न हिस्सों से किसान आज नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर <strong>संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक)</strong> के बैनर तले &lsquo;किसान महापंचायत&rsquo; में शामिल हुए। महापंचायत में किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और मत्स्य पालन क्षेत्र को बाहर रखने तथा किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग उठाई।</p>
<p data-start="664" data-end="960">महापंचायत को संबोधित करते हुए किसान नेता <strong data-start="705" data-end="728">जगजीत सिंह डल्लेवाल</strong> ने कहा कि सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी मिलनी चाहिए। यह मांग केवल हरियाणा और पंजाब के किसानों के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के किसानों के लिए है। देशभर के किसान अपनी मांगें रखने के लिए यहां आए हैं।</p>
<p data-start="962" data-end="1224">भारी बारिश के बावजूद जंतर-मंतर पर आयोजित महापंचायत में किसानों ने जबरदस्त उत्साह दिखाया। जगह-जगह पुलिस चेकिंग और सड़कों पर लंबे जाम के बावजूद किसान महापंचायत में पहुंचे। इस दौरान संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) की ओर से कृषि मंत्री के नाम मांगपत्र सौंपा गया।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_68ac639ca7ceb.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="1226" data-end="1449">किसान महापंचायत से पहले, कल देर रात भारत सरकार के कृषि मंत्रालय की तरफ से संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) को एक चिट्ठी भेजी गई, जिसमें अति शीघ्र किसानों के प्रतिनिधिमंडल से बैठक करने के लिए तिथि तय करने की बात कही गई।</p>
<p data-start="1451" data-end="1869">किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितता के बीच एमएसपी की कानूनी गारंटी जरूरी है, वरना किसान आर्थिक संकट में फंस जाएंगे। उन्होंने आशंका जताई कि यदि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों को शामिल किया गया तो किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी। किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज पुलिस केस को वापस लेने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है।</p>
<p data-start="1871" data-end="2316">किसान महापंचायत में पी. आर. पांड्यन, अनिल तालान, राजवीर सिंह, बलदेव सिंह सिरसा, सतनाम सिंह बेहरु, काका सिंह कोटड़ा, अभिमन्यु कोहाड़, जरनैल सिंह, गुरदास सिंह, जगमीत सिंह बराड़, मनिंदर सिंह मान, सुरेश पाटिल, लीलाधर सिंह राजपूत, इंदरजीत सिंह पन्नीवाला, जयवीर यादव, नितिन बालियान, मनप्रीत सिंह बाथ, सुखपाल डफर, रघुवीर पंघाला, जितेंद्र शर्मा, सोनवीर सिंह, ए. एस. बाबू आदि मौजूद रहे।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_68ac633c7b727.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_68ac651f5f8eb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जंतर-मंतर पर किसान महापंचायत, MSP की कानूनी गारंटी और व्यापार समझौते से कृषि क्षेत्र को बाहर रखने की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_68ac651f5f8eb.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इस साल कॉटन आयात रिकॉर्ड 40 लाख गांठ तक पहुंचने के आसार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cotton-imports-likely-to-touch-record-40-lakh-bales-this-year.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 25 Aug 2025 07:30:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cotton-imports-likely-to-touch-record-40-lakh-bales-this-year.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दस साल पहले देश में कपास का उत्पादन 390 लाख गांठ तक पहुंच गया था और भारत एक बड़े कॉटन निर्यातक देश के रूप में स्थापित हो गया था। लेकिन अब कहानी उलट गई है और चालू कॉटन सीजन में करीब 40 लाख गांठ आयात होने का अनुमान है। जुलाई तक 32 लाख गांठ कपास का आयात हो चुका है। इसके अलावा अगस्त में किये गये सौदे जो ट्रांजिट में हैं, उनके आयात और सरकार द्वारा 19 अगस्त से 30 सितंबर, 2025 तक कॉटन आयात पर शुल्क समाप्त करने के फैसले के चलते करीब आठ से 10 लाख गांठ और आयात होने की संभावना है।</p>
<p>यह आंकड़े पिछले दस साल में देश में कपास उत्पादन में तेजी से गिरावट के चलते भारत को एक बड़े कॉटन आयातक देश के रूप में बदलने का सुबूत हैं। उद्योग सूत्रों के मुताबिक जुलाई तक हुए 32 लाख गांठ आयात के अलावा 21 अगस्त तक हुए सौदों को जोड़कर आयात 34 लाख गांठ हो जाता है। वहीं शुल्क मुक्त आयात की अवधि में छह से आठ लाख गांठ और आयात हो सकता है।</p>
<p>खास बात यह है कि सरकार ने कॉटन पर आयात शुल्क कॉटन मिलों को राहत देने के मकसद समाप्त किया है। लेकिन उद्योग का कहना है कि इसका फायदा मिलों को सीमित स्तर पर ही मिलेगा क्योंकि मिलों को नए सौदों में यह भरोसा नहीं मिल रहा है कि आयात 30 सितंबर, 2025 तक की शुल्क मुक्त अवधि में पूरा हो जाएगा। ऐसे में सरकार के इस फैसले का फायदा या तो बड़े घरेलू मर्चेंट ट्रेडर उठायेंगे या फिर बड़ी बहुराष्ट्रीय कमोडिटी कंपनियां उठाएंगी।&nbsp;</p>
<p>उनका जो आयात इस अवधि में होगा, जरूरी नहीं कि वह आयातित कॉटन को 30 सितंबर के पहले ही कॉटन मिलों को बेच दें। कॉटन कारोबार के लोगों का कहना है कि शुल्क मुक्त आयात सितंबर के मध्य या उसके बाद ही संभव होगा। ऐसे में ट्रेडर कॉटन की बिक्री 30 सितंबर के बाद ही करेंगे क्योंकि शुल्क मुक्त आयात की अवधि समाप्त होने के बाद 11 फीसदी का आयात शुल्क लागू हो जाएगा और यह कॉटन 11 फीसदी महंगी हो जाएगी।&nbsp;</p>
<p>इस पूरे मसले में बड़ा ट्विस्ट यही है कि मर्चेंट इंपोर्टर ही सबसे बड़े फायदे में रहेंगे। मसलन वह शुल्क मुक्त कॉटन का आयात करीब 51000 रुपये प्रति कैंडी पर करेंगे और इसे कुछ दिन स्टोर करने के बाद अक्तूबर में जब बेचेंगे तो मोटा मुनाफा कमाएंगे। अक्तूबर से कॉटन कॉरपोरेशन &nbsp;ऑफ इंडिया (सीसीआई) &nbsp;न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर जो कॉटन खरीदेगी उसकी लागत 61000 रुपये प्रति कैंडी आएगी। जिसके चलते आयातकों को सीधे फायदा होगा। यह फायदा आयातित कॉटन की संभावित मात्रा के आधार पर 250 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।</p>
<p>दूसरी ओर, कॉटन पर आयात शुल्क समाप्त होने के बाद कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने 1100 रुपये प्रति कैंडी कीमत कम कर दी। उससे उसे यह नुकसान उठाना पड़ेगा। आयात शुल्क समाप्त होने के पहले सीसीआई 56000 रुपये से 57000 रुपये प्रति कैंडी पर कॉटन बेच रही थी। वहीं शुल्क मुक्त कॉटन का आयात मूल्य करीब 51000 रुपये प्रति कैंडी रहने की संभावना है। ऐसे में सीसीआई की महंगी कॉटन की बिक्री कम हो सकती है। इसके चलते ही सीसीआई ने दाम घटाये। लेकिन पहले दो दिन दाम घटाने के बाद और कमी नहीं की गई है।&nbsp;</p>
<p>जहां तक देश में कपास उत्पादन की बात है, तो एक समय यह 390 लाख गांठ तक तक पहुंच गया था जो पिछले साल घटकर 290 लाख गांठ तक आ गया। वहीं अगर आयात को देखें तो अगर वह 40 लाख गांठ तक पहुंचता है तो यह घरेलू उत्पादन के करीब 12 फीसदी तक पहुंच जाएगा। जिस तरह से यह आयात बढ़ा और घरेलू उत्पादन गिरा, वह यह साबित करता है कि हमारी कपास उत्पादन को लेकर नीति और कदम कारगर नहीं हैं।</p>
<p>हालांकि सरकार ने चालू साल के बजट में कॉटन मिशन घोषित किया है ताकि उत्पादन में गिरावट के रुख को बदला जा सके, लेकिन चालू खरीफ सीजन में कपास का रकबा तीन लाख हैक्टेयर से अधिक घट गया है। यह बेहतरी का संकेत तो नहीं है।</p>
<p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार मौजूदा खरीफ सीजन में अब तक 107.87 लाख हेक्टेयर में कपास की खेती हो रही है। यह पिछले साल के 111.11 लाख हेक्टेयर से 3.24 लाख हेक्टेयर यानी 2.91% कम है। कपास का पांच साल का औसत रकबा 129.50 लाख हेक्टेयर का है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इस साल कॉटन आयात रिकॉर्ड 40 लाख गांठ तक पहुंचने के आसार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_68a5ba48cab10.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कॉटन पर आयात शुल्क खत्म करने के फैसले पर किसान संगठनों ने उठाए सवाल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmer-organizations-will-start-agitation-against-abolition-of-import-duty-on-cotton.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 23 Aug 2025 14:33:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmer-organizations-will-start-agitation-against-abolition-of-import-duty-on-cotton.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार द्वारा 19 अगस्त से कॉटन पर 11 फीसदी आयात शुल्क समाप्त करने के फैसले का किसान संगठनों ने विरोध किया है। इस निर्णय को किसान हितों के खिलाफ बताते हुए संगठनों ने सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है।&nbsp;<span><strong>अखिल भारतीय किसान सभा</strong> </span>ने एक बयान जारी कर कहा है कि यह कदम किसानों के हितों के खिलाफ है। वहीं <strong>संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम)</strong> इस मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनाने के लिए 25&nbsp; अगस्त को नई दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस कर आगे की रणनीति का खुलासा करेगा।</p>
<p><strong>स्वाभिमानी शेतकरी संगठन</strong> के अध्यक्ष और पूर्व लोक सभा सदस्य <strong>राजू शेट्टी</strong> ने <em><strong>रूरल वॉयस</strong></em> के साथ बातचीत में कहा कि यह फैसला कपास उत्पादक किसानों के हितों के प्रतिकूल है। इस मसले पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आयात शुल्क हटाने के सरकार के इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। शेट्टी का कहना है कि सरकार द्वारा आयात शुल्क समाप्त करने के बाद से कॉटन का दाम 1100 रुपये प्रति कैंडी गिर गया है। जबकि&nbsp;प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से देश के किसानों के हितों की रक्षा की बात कही थी। लेकिन 18 अगस्त को कॉटन पर आयात शुल्क समाप्त करने की अधिसूचना सरकार ने जारी कर दी।&nbsp;</p>
<p><span><strong>अखिल भारतीय किसान सभा</strong> का कहना है कि इस निर्णय का तात्कालिक प्रभाव बहुत गंभीर होगा क्योंकि देश के अधिकांश कपास उत्पादक क्षेत्रों में किसान दो महीने पहले बुवाई कर चुके हैं। उन्हें अपनी उपज के उचित मूल्य की उम्मीद में भारी लागत लगानी पड़ी है। सरकार का यह निर्णय उस समय आया है जब किसान फसल की कटाई की तैयारी कर रहे हैं। भारत के कपास उत्पादक क्षेत्र पहले से ही कृषि संकट और किसान आत्महत्याओं के लिए बदनाम हैं। यह निर्णय किसानों को और अधिक कर्ज में डुबो देगा तथा उनकी आर्थिक स्थिति को और बदतर बना देगा।</span></p>
<p>किसान नेता और शेतकारी संघटना के पूर्व अध्यक्ष <strong>अनिल घनवत</strong> ने भी&nbsp;<em><strong>रूरल वॉयस</strong></em> के साथ बातचीत में माना कि सरकार का यह फैसला किसानों के हित के विपरीत है। उनका कहना है कि ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट मीडियम और शॉर्ट स्टेपल कॉटन का भी होगा। ऐसे में कपास के दाम गिरने की आशंका है। इसलिए सरकार को यह निर्णय वापस लेना चाहिए और 30 सितंबर के बाद इसे बिल्कुल आगे नहीं बढ़ाना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>किसान संगठनों का कहना कि 40 दिनों की इस अवधि में जो आयात होगा उसके चलते देश में कॉटन की कीमतों में गिरावट की स्थिति बन जाएगी और उसका आगामी फसल पर असर पड़ेगा। इसलिए उन्होंने सरकार से कहा है कि उसे पूरी फसल को एमएसपी पर खरीदने व्यवस्था करनी चाहिए। वहीं उद्योग सूत्रों के मुताबिक, इस आयात शुल्क समाप्त करने के फैसले के बाद से कॉटन की कीमत गिरना शुरू हो गई है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार ने 18 अगस्त को एक अधिसूचना जारी कर कॉटन आयात पर 10 फीसदी आयात शुल्क और उसके ऊपर लगने वाले 10 फीसदी एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को समाप्त कर दिया था। प्रभावी आयात शुल्क 11 फीसदी था। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, कॉटन के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति 19 अगस्त से 30 सितंबर 2025 के लिए दी गई है।</p>
<p>देश का <strong>टेक्सटाइल सेक्टर</strong> ट्रम्प टैरिफ के बाद सरकार से राहत की मांग कर रहा था। क्योंकि ट्रम्प द्वारा भारतीय निर्यात पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की मार टेक्सटाइल सेक्टर पर पड़ेगी।&nbsp;उद्योग का कहना है कि इस टैरिफ के बाद उनके उत्पाद प्रतिस्पर्धी नहीं रह पाएंगे।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/04/image_750x500_625824f5612bd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कॉटन पर आयात शुल्क खत्म करने के फैसले पर किसान संगठनों ने उठाए सवाल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/04/image_750x500_625824f5612bd.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूरिया का आयात मूल्य 530 डॉलर पर पहुंचा, घरेलू स्टॉक  पिछले साल से 49 लाख टन  कम होने से बढ़ी किल्लत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/urea-import-price-reached-530-dollar-availability-crisis-due-to-reduction-of-domestic-stock-by-49-lakh-tonnes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 21 Aug 2025 01:52:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/urea-import-price-reached-530-dollar-availability-crisis-due-to-reduction-of-domestic-stock-by-49-lakh-tonnes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में यूरिया के स्टॉक में पिछले साल के मुकाबले भारी गिरावट आई है। इसके चलते कई राज्यों में किसान यूरिया की उपलब्धता के संकट से जूझ रहे हैं। उधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतें बढ़ने से देश में आयातित यूरिया की लागत 530 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई है जो मई में 400 डॉलर के आसपास थी।&nbsp;</p>
<p><strong>डाईअमोनियम फॉस्फेट (डीएपी)</strong> की किल्लत का सामना कर रहे किसानों के सामने <strong>यूरिया</strong> की कमी ने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अगस्त 2025 को देश में यूरिया का क्लोजिंग स्टॉक 37.19 लाख टन था जो पिछले साल के मुकाबले 49.24 लाख टन कम है। एक अगस्त, 2024 को देश में यूरिया का क्लोजिंग स्टॉक 86.43 लाख टन था। इस तरह यूरिया का स्टॉक पिछले साल के मुकाबले आधे से भी कम है। पिछले दिनों राज्यों के कृषि मंत्रियों ने यूरिया की कमी का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से अतिरिक्त यूरिया की मांग की थी।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>इस साल देश में <strong>बेहतर मानसून</strong> के चलते रिकॉर्ड क्षेत्रफल में खरीफ की बुआई हुई है। बुवाई क्षेत्र में सबसे अधिक बढ़ोतरी धान और मक्का में हुई है और इन दोनों फसलों में यूरिया की अधिक खपत होती है। जबकि कम यूरिया की जरूरत वाली फसलों जैसे तिलहन और कुछ दालों का क्षेत्रफल कम हुआ है। इस स्थिति ने यूरिया की मांग को बढ़ा दिया है जबकि देश में उपलब्ध स्टॉक पिछले साल का आधा भी नहीं है। इसी के चलते कई राज्यों किसान यूरिया के लिए लंबी लाइनों में दिख रहे हैं। क्योंकि उनके लिए इस समय यूरिया की उपलब्धता अहम हैं।</p>
<p><strong>यूरिया</strong> की कमी के पीछे जहां वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी बड़ी वजह है वहीं चीन द्वारा भारत को यूरिया का निर्यात नहीं करना भी एक कारण है। हालांकि, इस तरह की खबरें आ रही हैं कि चीन भारत को उर्वरक निर्यात पर प्रतिबंध हटा रहा है। लेकिन अब अगर भारत चीन के साथ आयात सौदे भी करता है तो वहां से आयातित यूरिया को किसानों तक पहुंचने में एक से डेढ़ माह लगेगा।&nbsp;</p>
<p>दूसरी ओर यूरिया का घरेलू उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, रामागुंडम फर्टिलाइजर और तालचेर उर्वरक संयंत्र में भी उत्पादन प्रभाावित हुआ है। वहीं काकीनाडा स्थित नागार्जुन फर्टिलाइजर ने यूरिया उत्पादन की बजाय ग्रीन अमोनिया बनाकर उसके निर्यात को प्राथमिकता दी है।&nbsp;</p>
<p>अन्य उर्वरकों में एक अगस्त, 2025 को <strong>डीएपी</strong> का स्टॉक 13.90 लाख टन था जो पिछले साल इसी समय के 15.82 लाख टन के मुकाबले थोड़ा कम है। वहीं <strong>कॉम्प्लेक्स उर्वरकों</strong> का स्टॉक एक अगस्त, 2025 को 34.97 लाख टन रहा जो पिछले साल इसी तिथि को 46.99 लाख टन था। <strong>एमओपी</strong> का स्टॉक पिछले साल के आठ लाख टन के मुकाबले इस साल एक अगस्त, 2025 को 6.27 लाख टन रहा। हालांकि, <strong>एसएसपी</strong> का स्टॉक पिछले साल के 20.06 लाख टन के मुकाबले इस साल एक अगस्त, 2025 को 20.73 लाख टन रहा।&nbsp;</p>
<p><strong>कॉप्लेक्स उर्वरकों</strong> के लिए सरकार न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनबीएस) के तहत सब्सिडी देती है और उनकी कीमतों को नियंत्रित नहीं किया जाता है। लेकिन यूरिया की कीमत सरकार के नियंत्रण में है और उसके उपर बिक्री मूल्य के अतिरिक्त आने वाली लागत की पूरी भरपाई सरकार सब्सिडी के जरिये करती है। इसके बावजूद यूरिया की किल्लत पैदा होना असामान्य है क्योंकि डीएपी और दूसरे कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की किल्लत की खबरे तो पहले आती ही हैं लेकिन यूरिया को लेकर इस तरह की दिक्कत का सामना किसानों को बहुत कम करना पड़ा है। यूरिया की किल्लत का असर खरीफ सीजन के उत्पादन पर पड़ सकता है।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूरिया का आयात मूल्य 530 डॉलर पर पहुंचा, घरेलू स्टॉक  पिछले साल से 49 लाख टन  कम होने से बढ़ी किल्लत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी खत्म, नई फसल से पहले किसानों को बड़ा झटका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/import-duty-on-cotton-abolished-shock-for-farmers-government-will-also-suffer-loss.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 19 Aug 2025 11:00:39 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/import-duty-on-cotton-abolished-shock-for-farmers-government-will-also-suffer-loss.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने कपास की नई फसल बाजार में आने से एक माह पहले इसके आयात पर शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) को समाप्त कर दिया है। वित्त मंत्रालय की तरफ से 18 अगस्त की देर शाम जारी अधिसूचना के मुताबिक 19 अगस्त से कपास का आयात बिना इंपोर्ट ड्यूटी के किया जा सकता है। कॉटन पर 10 फीसदी सीमा शुल्क लगता है और इसके ऊपर 10 फीसदी का एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर सेस मिलाकर प्रभावी ड्यूटी 11 फीसदी बैठती है, जो आज से समाप्त हो गई है।&nbsp;</p>
<p>सरकार के इस फैसले से आने वाले मार्केट सीजन में किसानों को कपास की बेहतर कीमत मिलने में मुश्किल खड़ी होने की आशंका बन गई है। वहीं कॉटन कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी गई कपास की कीमतों में भी इस फैसले के चलते गिरावट आएगी। इस समय बाजार में सीसीआई 56000 से 57000 रुपये प्रति कैंडी (355.6 किलो) &nbsp;के दाम पर कॉटन बेच रहा है। वहीं आयातित कॉटन की कीमत 50 हजार रुपये से 51 हजार रुपये प्रति कैंडी रहने का अनुमान है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_68a4111863584.jpg" alt="" /></p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, करीब सप्ताह भर पहले तक टेक्सटाइल मंत्रालय के कुछ अधिकारी आयात शुल्क समाप्त करने के पक्ष मेंं नहीं थे। लेकिन हफ्ते भर में फैसला बदल गया और 18 अगस्त को वित्त मंत्रालय ने आयात शुल्क समाप्त करने की अधिसूचना जारी कर दी। चौंकाने वाली बात यह है कि जो सीसीआई सरकार के लिए एमएसपी पर कपास की खरीद करता है और उसे बाजार में बेचता है, उसने भी कॉटन आयात पर शुल्क समाप्त करने पर सहमति जताई है।&nbsp;</p>
<p>अधिसूचना के मुताबिक, 19 अगस्त से लेकर 30 सितंबर, 2025 की अवधि के लिए आयात शुल्क समाप्त किया गया है। इस तरह 40 दिन की अवधि आयातकों को दी गई है। उद्योग सूत्रों का कहना है कि इस छोटी अवधि में केवल वही कॉटन आयात हो सकेगा जो या तो ट्रांजिट में है या फिर उन आयातकों को होगा जिनका माल कस्टम क्लीयरेंस के लिए गोदामों में रखा हुआ है । अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऐसे कॉटन की मात्रा करीब छह लाख गांठ (एक लाख टन) है। इस आयात की स्थिति में सरकार को करीब 170 करोड़ रुपये के आयात शुल्क का घाटा होगा। वहीं सीसीआई के पास बकाया स्टॉक को देखते हुए कीमतों में करीब पांच हजार रुपये की गिरावट के चलते उसका घाटा 700 करोड़ रुपये तक हो सकता है, क्योंकि आयातित कॉटन की कीमत करीब 51 हजार रुपये कैंडी रहने का अनुमान है।</p>
<p>वहीं कीमतों में इस गिरावट का असर आने वाले सीजन के दाम पर भी पड़ेगा, क्योंकि बाजार की शुरुआत कम दाम पर होगी। आगामी मार्केटिंग सीजन के लिए सरकार द्वारा तय एमएसपी पर खरीदी गई कॉटन की लागत सीसीआई के लिए करीब 61 हजार रुपये प्रति कैंडी पड़ेगी। वहीं जिन घरेलू ट्रेडर्स के पास माल बकाया है उनको भी कीमत में कमी का नुकसान उठाना पड़ेगा। यह नुकसान करीब 100 करोड़ रुपये तक हो सकता है। इस स्थिति में कॉटन पर सीमा शुल्क समाप्त करने का फायदा टेक्सटाइल इंडस्ट्री के साथ उन बहुराष्ट्रीय कंपनियों को होने वाला है जो भारत को कॉटन का निर्यात करेंगी।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी खत्म, नई फसल से पहले किसानों को बड़ा झटका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उर्वरक और पेस्टीसाइड के नकली या घटिया  मिलने पर सील करें फैक्ट्रियां व दुकानेंः शिवराज सिंह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/seal-factories-and-shops-in-case-of-fake-or-substandard-fertilizers-and-pesticides-shivraj-singh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 18 Aug 2025 14:20:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/seal-factories-and-shops-in-case-of-fake-or-substandard-fertilizers-and-pesticides-shivraj-singh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong></strong> नकली खाद-बीज और कीटनाशकों की बिक्री के मामले में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कड़ा रूख अपनाते हुए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक लेकर नकली खाद-बीज व कीटनाशक बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। शिवराज सिंह ने कहा कि उर्वरकों, बीज या पेस्टीसाइड के घटिया या नकली मिलने की स्थिति में फैक्टरी और दुकानों को सील किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों की फसलें खराब होने को सभी अधिकारी अत्यंत गंभीरता से अधिकारी लें, ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सकें। शिवराज सिंह ने व्यापक पैमाने पर छापेमारी और खेतों में जाकर जांच करने के निर्देश भी दिए हैं।</p>
<p>बैठक में कृषि मंत्री ने कहा कि नकली खाद-बीज और कीटनाशकों के कारण कोई एक नहीं, बल्कि विभिन्न जिलों में सैकड़ों किसान परेशान हो रहे हैं। कई जगह से ऐसी शिकायतें आती है, किसान बोलते हैं कि खेत में दवाई डाल रहे हैं पर इसका असर नहीं हो रहा है, मैं तो बहुत चिंतित हूं। इन किसानों की पीड़ा को गंभीरता से समझा जाना चाहिए। शिवराज सिंह ने कहा कि मैंने कल खुद किसान के खेत में जाकर देखा, एक दवाई किसान ने डाली जिसके कारण सोयाबीन की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई। कल जब मैंने खेत में देखा तो सैकड़ों किसान वहां मौजूद थे। इन सबने मुझे शिकायतें की, परेशानी बताईं। शिवराज सिंह ने कहा कि ऐसी घटिया या नकली दवाई, खाद-बीज बेचने वालों को बिल्कुल बख्शा नहीं जाना चाहिए, इनके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएं। केंद्रीय मंत्री ने कृषि अधिकारियों से इस संबंध में अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी लेते हुए कहा कि नकली खाद, बीज और कीटनाशक किसानों के लिए अभिशाप है। शिवराज सिंह ने कहा कि हम हमारे किसानों को लूटते हुए नहीं देख सकते।</p>
<p>शिवराज सिंह ने निर्देश दिए कि कृषि विभाग का अमला राज्य सरकारों के साथ किसानों के खेतों में जाकर जांच करें और अभियान चलाकर व्यापक पैमाने पर आकस्मिक छापेमारी कर कड़ी कार्रवाई करें। सैंपल लिए जाएं व फेल होने पर कार्रवाई करें।&nbsp; उन्होंने कहा कि जो कंपनी या निर्माता गड़बड़ियां कर रहे हैं, उनके खिलाफ हम सख्त कार्रवाई करेंगे तो गड़बड़ करने वाले लोगों में भय पैदा होगा और किसानों को राहत मिलेगी। गड़बड़ी मिलने पर फैक्ट्रियां व दुकानें सील की जाएं।</p>
<p>शिवराज सिंह ने इस संबंध में किसानों की शिकायतों को भी सुनने के साथ उनका पूरा समाधान जल्द से जल्द करने के निर्देश दिए, साथ ही कहा कि प्राप्त शिकायतों की वे स्वयं नियमित समीक्षा करेंगे। उन्होंने इस संबंध में राज्य सरकारों के साथ बात करके किसानों के मामले में पूरी संवेदना के साथ प्रभावी कार्रवाई करने को कहा। शिवराज सिंह ने इस संबंध में किसानों के बीच जागरूकता का प्रसार भी व्यापक रूप से करने के दिशा-निर्देश दिए, ताकि किसान परेशान होने से बच सकें।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान भी किसानों के बीच प्रचार-प्रसार किया जाएं, ताकि किसान नुकसान और परेशानी से बच सकें। शिवराज सिंह ने एक अन्य विषय में पॉली हाउस, ग्रीन हाउस, मैकेनाइजेशन के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी सहायता का कृषि विभाग की टीमों के द्वारा सत्यापन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह चेक किया जाना चाहिए कि पॉली हाउस, ग्रीन हाउस, मैकेनाइजेशन के लिए केंद्र से दी जा रही सब्सिडी का लाभ किसानों को वास्तविक रूप से कितना मिल रहा है। केंद्र से सब्सिडी की योजनाओं का लाभ समय से मिलना चाहिए। शिवराज सिंह ने कहा कि हमारी योजनाओं का सही उपयोग हो, यह समय-समय पर सत्यापन करना चाहिए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उर्वरक और पेस्टीसाइड के नकली या घटिया  मिलने पर सील करें फैक्ट्रियां व दुकानेंः शिवराज सिंह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जुलाई में खाद्य तेल आयात 16% घटा, रिफाइंड पाम ऑयल के आयात में बड़ी गिरावट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indias-edible-oil-imports-drop-16-percent-in-july-amid-higher-duties-and-lower-palm-oil-shipments.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 16 Aug 2025 18:36:40 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indias-edible-oil-imports-drop-16-percent-in-july-amid-higher-duties-and-lower-palm-oil-shipments.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जुलाई 2025 में भारत के खाद्य तेल आयात में 16% की गिरावट आई है। इसका मुख्य कारण पाम तेल के आयात में भारी कमी है। इंडस्ट्री बॉडी सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अनुसार, &nbsp;देश में पिछले महीने 15.48 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया गया, जबकि जुलाई 2024 में 18.40 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया गया था।</p>
<p>31 मई 2025 को क्रूड पाम तेल और रिफाइंड पाम तेल के बीच आयात शुल्क अंतर को सरकार ने 8.25% से बढ़ाकर 19.25% कर दिया था। इस फैसले ने रिफाइंड तेल के आयात को हतोत्साहित किया। इसका नतीजा यह हुआ कि जुलाई में रिफाइंड पाम तेल का आयात घटकर मात्र 5,000 टन रह गया, जबकि जून 2025 में यह 1.63 लाख टन और एक साल पहले 1.36 लाख टन था।</p>
<p>क्रूड पाम तेल का आयात भी पिछले साल के 9.37 लाख टन से घटकर 8.51 लाख टन रह गया। भारत मुख्य रूप से मलेशिया और इंडोनेशिया से पाम तेल खरीदता है। इसी तरह क्रूड सूरजमुखी तेल का आयात भी घटकर 2 लाख टन रह गया, जो जुलाई 2024 में 3.67 लाख टन था।</p>
<p>अखाद्य तेलों का आयात भी घटकर 31,000 टन रह गया, जो जुलाई 2024 में 55,014 टन था। कुल मिलाकर, वनस्पति तेल का कुल आयात (खाद्य और अखाद्य दोनों मिलाकर) 17% घटकर 15.79 लाख टन रह गया, जबकि पिछले साल यह 18.95 लाख टन था।</p>
<p>इस बीच इस खरीफ सीजन में भारत में सोयाबीन की खेती भी कम हुई है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के अनुसार, बुवाई का रकबा 115 लाख हेक्टेयर है, जो 2024 में 118.32 लाख हेक्टेयर था। राज्यवार देखें तो मध्य प्रदेश में 48.64 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में48.20 लाख हेक्टेयर, राजस्थान में 9 लाख हेक्टेयर), कर्नाटक में4.22 लाख हेक्टेयर और गुजरात में 2.53 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती हुई है।</p>
<p>फिलहाल सोयाबीन की फसल सामान्य मानी जा रही है, लेकिन उत्पादन अगले दो महीनों में मौसम की स्थिति पर काफी हद तक निर्भर करेगा। सरकार ने इस सीजन के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹5,328 प्रति क्विंटल तय किया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_6455f8c01cf58.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जुलाई में खाद्य तेल आयात 16% घटा, रिफाइंड पाम ऑयल के आयात में बड़ी गिरावट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिल्ली अर्बन एक्सटेंशन रोड&amp;#45;2 पर भारी&amp;#45;भरकम टोल टैक्स का विरोध, 17 अगस्त को होगा उद्घाटन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/delhi-congress-slams-exorbitant-toll-rates-on-uer-2-pm-to-inaugurate-tomorrow.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 16 Aug 2025 13:56:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/delhi-congress-slams-exorbitant-toll-rates-on-uer-2-pm-to-inaugurate-tomorrow.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं भारत सरकार, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रोड सेफ़्टी एडवाइजरी काउंसिल के पूर्व सदस्य डॉ. नरेश कुमार ने केंद्र सरकार के उस फैसले की कड़ी आलोचना की है, जिसके तहत नई बनी अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-2) पर अत्यधिक टोल टैक्स वसूला जाएगा। इस सड़क का उद्घाटन 17 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। इसे दिल्ली का तीसरा रिंग रोड भी कहा जा रहा है।</p>
<p>डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि दिल्ली में पहली बार इस तरह का ऊँचा टोल टैक्स लगाया जा रहा है, जो पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तुलना में कहीं अधिक है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए किसानों की ज़मीन ली गई, लेकिन बदले में उन्हें बेहद कम मुआवज़ा दिया गया, जो पड़ोसी राज्यों से भी बहुत कम है। सरकार अब तक उन्हें वैकल्पिक (अल्टरनेटिव) प्लॉट देने की प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाई है। किसान न्याय पाने के लिए कोर्ट में केस लड़ रहे हैं और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_68a0403c8d233.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने बताया कि&nbsp; आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार टोल टैक्स की दरें इस प्रकार हैं:<br />&nbsp;&bull; क्लास 1 (कार/जीप/वैन): ₹235 (एकतरफ़ा), ₹350 (वापसी)<br />&nbsp;&bull; क्लास 2 (हल्का वाणिज्यिक वाहन/छोटा ट्रक/मिनी ट्रक): ₹375 (एकतरफ़ा), ₹565 (वापसी)<br />&nbsp;&bull; क्लास 3 (बस/ट्रक &ndash; 2 एक्सल): ₹860 (एकतरफ़ा), ₹1290 (वापसी)<br />&nbsp;&bull; क्लास 4 (भारी वाहन &ndash; 3 एक्सल/मल्टी एक्सल): ₹1235 (एकतरफ़ा), ₹1855 (वापसी)<br />&nbsp;&bull; क्लास 5 (ट्रेलर &ndash; 4/5/6 एक्सल): ₹1505 (एकतरफ़ा), ₹2260 (वापसी)</p>
<p>डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि ये दरें अत्यधिक ऊँची और अस्वीकार्य हैं। उन्होंने टोल टैक्स की दरों में तुरंत कम से कम 50% की कटौती की मांग की है। इसके अलावा उनकी मांगों में प्रभावित गाँवों के ग्रामीणों को पूर्ण छूट देना, किसानों को उनकी अधिग्रहीत भूमि का उचित मुआवज़ा देना और वैकल्पिक प्लॉट शीघ्र उपलब्ध कराना शामिल हैं।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार इस सड़क को बड़ी उपलब्धि बता रही है, लेकिन हकीकत यह है कि साधारण नागरिक और किसान इस अनुचित टोल दरों और अन्यायपूर्ण मुआवज़ा नीति से भारी बोझ तले दब गए हैं। इस मुद्दे पर उन्होंने एक मेमोरेंडम केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को भेजा है, जिसकी प्रति प्रधानमंत्री मोदी और दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना को भी भेजी गई है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_68a0403d67120.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिल्ली अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 पर भारी-भरकम टोल टैक्स का विरोध, 17 अगस्त को होगा उद्घाटन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_68a0403d67120.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उरुग्वे से ड्यूटी फ्री मिल्क पाउडर के आयात की कोशिश में चीन, भारत के लिए भी अवसर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/china-is-in-talks-to-import-uruguayan-whole-milk-powder-does-india-has-an-opportunity.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 16 Aug 2025 12:16:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/china-is-in-talks-to-import-uruguayan-whole-milk-powder-does-india-has-an-opportunity.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चीन उरुग्वे से होल मिल्क पाउडर (Whole Milk Powder-WMP) आयात करने की संभावनाएं तलाश रहा है और इसके लिए शून्य-शुल्क (Zero-Tariff) समझौते पर बातचीत जारी है। दरअसल, चीन अपने यहां विश्वसनीय डेयरी आपूर्ति को सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल दुग्ध उत्पादों के ग्लोबल कारोबार में भारत की हिस्सेदारी बहुत कम है। सवाल है कि चीन की यह जरूरत क्या भारत के लिए अवसर बन सकती है।</p>
<p>उरुग्वे की सबसे बड़ी डेयरी सहकारी संस्था कोनाप्रोल (Conaprole) के प्रमुख ने चीन से चल रही बातचीत की पुष्टि करते हुए मीडिया से कहा कि दोनों सरकारों के बीच शून्य-शुल्क व्यवस्था इस सौदे को अंतिम रूप देने के लिए अहम होगी। उरुग्वे इस संभावित समझौते को वैश्विक डेयरी व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के अवसर के रूप में देख रहा है। उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद और एक भरोसेमंद निर्यातक की छवि इस दक्षिण अमेरिकी देश की प्रमुख ताकत हैं। हालांकि, चीन से इसकी भौगोलिक दूरी एक बड़ी चुनौती भी मानी जा रही है।</p>
<p><strong>भारत का डेयरी निर्यात विरोधाभास</strong><br />भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है और वैश्विक उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 25% है। पिछले दशक में भारत का दूध उत्पादन 63% से अधिक बढ़कर 2023-24 में 239.2 मिलियन टन तक पहुंच गया है। प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता भी 471 ग्राम प्रतिदिन तक पहुंच गई है, जो वैश्विक औसत 322 ग्राम से काफी अधिक है।</p>
<p>इसके बावजूद भारत वैश्विक डेयरी व्यापार में एक मामूली खिलाड़ी है। 2023-24 में भारत ने केवल 27.26 करोड़ डॉलर के डेयरी उत्पादों का निर्यात किया, जो 101 अरब डॉलर के वैश्विक डेयरी व्यापार का सिर्फ 0.25% है। भारतीय निर्यात में घी और मक्खन की हिस्सेदारी सबसे अधिक (लगभग 60%) है, इसके बाद दूध पाउडर (27%) और पनीर (11%) आते हैं। भारत के प्रमुख निर्यात बाजारों में यूएई, बांग्लादेश, अमेरिका, सऊदी अरब और भूटान शामिल हैं।</p>
<p><strong>चीन की मांग भारत के लिए अवसर</strong><br />भारत के लिए चीन की बढ़ती डेयरी मांग एक रणनीतिक अवसर हो सकती है। यदि भारत चीन जैसे बड़े उपभोक्ता देश से डेयरी व्यापार जोड़ता है, तो न केवल उसके निर्यात बास्केट में विविधता आएगी बल्कि द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने की दिशा में भी सकारात्मक कदम हो सकता है।</p>
<p>हालांकि, भारत को प्रतिस्पर्धी बनने से पहले कई ढांचागत चुनौतियों का सामना करना होगा। इनमें गुणवत्ता मानकों में सुधार, आपूर्ति श्रृंखला की बाधाएं, सीमित कोल्ड स्टोरेज क्षमता आदि शामिल हैं। इसके अलावा, न्यूज़ीलैंड, यूरोपीय संघ और दक्षिण अमेरिकी देशों जैसे उरुग्वे और अर्जेंटीना से कड़ी प्रतिस्पर्धा भी सामने है।</p>
<p>भारत सरकार प्रजनन कार्यक्रमों और पशुधन विस्तार के जरिए दूध उत्पादन बढ़ाने को प्रोत्साहित कर रही है। लेकिन निर्यात के लिए जरूरी है कि नीतियां अतिरिक्त उत्पादन, प्रसंस्करण सुविधाओं के उन्नयन, और प्रमुख आयातक देशों के साथ अनुकूल व्यापार समझौते की दिशा में केंद्रित हों।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उरुग्वे से ड्यूटी फ्री मिल्क पाउडर के आयात की कोशिश में चीन, भारत के लिए भी अवसर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[लाल किले से पीएम मोदी का ऐलान: दिवाली से पहले जीएसटी में बड़ा बदलाव, आम लोगों को मिलेगी राहत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-modis-announcement-from-red-fort-big-change-in-gst-before-diwali-common-people-will-get-relief.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 15 Aug 2025 10:15:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-modis-announcement-from-red-fort-big-change-in-gst-before-diwali-common-people-will-get-relief.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश आज अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस बड़े उत्साह के साथ मना रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर तिरंगा फहराया। प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से अपना 12वां स्वतंत्रता दिवस भाषण दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज मैं लाल किले से लघु भारत देख रहा हूं दूरदराज गांवों के पंचायत सदस्य, &lsquo;ड्रोन दीदी&rsquo;, &lsquo;लखपति दीदी&rsquo;, खेल जगत के प्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों में देश को योगदान देने वाले लोग यहां मौजूद हैं। तकनीक के जरिए आज लाल किला पूरे भारत से जुड़ा है।&rdquo;</p>
<p><span>लाल किले पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने राजधानी दिल्ली स्थित राजघाट पर जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस की थीम &lsquo;नया भारत&rsquo; रखी गई है, जो 2047 तक &lsquo;विकसित भारत&rsquo; के लक्ष्य को दर्शाती है।</span></p>
<p><strong>डबल दिवाली का वादा</strong></p>
<p>लाल किले से अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शासन, टैक्स प्रणाली और पब्लिक सर्विस डिलीवरी में सुधार लाने के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य सभी तरह के सुधार लागू करने का है। त्योहार के माहौल में पीएम मोदी ने इस साल देशवासियों को &ldquo;डबल दिवाली&rdquo; का वादा किया। उन्होंने संकेत दिया कि इस बार दिवाली पर बड़ा आर्थिक तोहफा मिलेगा। आम घरेलू सामान पर जीएसटी में बड़ी कटौती की जाएगी। पीएम मोदी ने कहा, &ldquo;इस दिवाली मैं आपके लिए डबल दिवाली मनाने वाला हूं। देशवासियों को एक बड़ा तोहफा मिलेगा, आम घरों में इस्तेमाल होने वाली चीजों पर जीएसटी में भारी कटौती होगी।&rdquo;</p>
<p>प्रधानमंत्री ने जीएसटी दरों की समीक्षा को &ldquo;समय की मांग&rdquo; बताया और कहा कि सरकार एक नई पीढ़ी की जीएसटी सुधार योजना पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों पर टैक्स का बोझ कम करना है। उन्होंने साफ कहा, &ldquo;जीएसटी दरों में भारी कटौती होगी। आम लोगों के लिए टैक्स कम किया जाएगा।&rdquo; यह घोषणा ऐसे समय पर हुई है जब जीएसटी को लागू हुए आठ साल पूरे हो रहे हैं। 2017 में लॉन्च के बाद जीएसटी ने देश की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को एकीकृत किया और खासकर छोटे और मझोले व्यवसायों के लिए कारोबार करना आसान बनाया।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना</strong></p>
<p>आज 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से देश को संबोधित करते हुए 1 लाख करोड़ रुपये की &lsquo;प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना&rsquo; की शुरुआत की घोषणा की। यह राष्ट्रीय स्तर की योजना युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने और निजी क्षेत्र को नौकरी देने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बनाई गई है। पीएम मोदी ने कहा, &ldquo;देश के युवाओं के लिए बड़ी खबर है। आज के दिन हम 1 लाख करोड़ रुपये की योजना शुरू कर रहे हैं।&rdquo; यह योजना 15 अगस्त से लागू हो गई है और इसके तहत पहली बार नौकरी पाने वाले युवाओं और उन्हें भर्ती करने वाले नियोक्ताओं दोनों को प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ लाल किले से पीएम मोदी का ऐलान: दिवाली से पहले जीएसटी में बड़ा बदलाव, आम लोगों को मिलेगी राहत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[3 अक्टूबर से रबी फसल के लिए विकसित कृषि संकल्प अभियान, खाद की कालाबाजारी रोकने के निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/krishi-sankalp-abhiyan-developed-for-rabi-crop-from-october-3-instructions-to-stop-black-marketing-of-fertilizers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 14 Aug 2025 19:23:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/krishi-sankalp-abhiyan-developed-for-rabi-crop-from-october-3-instructions-to-stop-black-marketing-of-fertilizers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div>केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में राज्यों के कृषि मंत्री, कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक एवं सचिव डेयर डॉ. एम. एल. जाट सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक उपस्थित रहे।</div>
<div></div>
<div>बैठक में खाद और यूरिया की कमी, बायोस्टुमिलेंट (जैव उत्तेजकों) की प्रमाणिकता, आगामी रबी फसल के लिए &lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo; की तैयारियों, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने, बाढ़ और आपदा प्रभावित इलाकों में फसल बीमा योजना के क्लेम और किसानों की समस्याओं के निवारण सहित विभिन्न विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई।</div>
<div data-smartmail="gmail_signature">
<div dir="ltr">
<p>कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि रबी फसल के लिए &lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo; की दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस नई दिल्ली में 15 और 16 सितंबर को आयोजित होगी और अभियान की औपचारिक शुरुआत 3 अक्टूबर, 2025 विजय पर्व के साथ होगी। अभियान 3 अक्टूबर से 18 अक्टूबर धनतेरस के दिन तक चलेगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वह राज्य के मुख्यमंत्रियों को भी औपचारिक रूप से पत्र लिखेंगे और यह सुनिश्चित करने के लिए कहेंगे कि इस कॉन्फ्रेंस में राज्यों के कृषि मंत्रियों सहित कृषि विभाग के उच्च वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्य के कृषि मंत्रियों से कहा कि वह रबी फसल के लिए विभिन्न विषयों सहित खाद की आवश्यकता का आंकलन भी इकट्ठा कर लें और आगामी कॉन्फ्रेंस में इस पर गंभीर विचार-विमर्श और मंथन के लिए तैयार रहें।</p>
<p>बैठक में 23 अगस्त को प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए जा रहे राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन की तैयारियों को लेकर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत 100 जिलों में मिशन की प्रगति को लेकर भी समीक्षा की।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने दलहन-तिलहन के उत्पादन को लेकर भी विचार-विमर्श किया। साथ ही राज्य के कृषि मंत्रियों से आग्रह किया कि वह अपने राज्यों में इन उपयोगी मिशन, योजनाओं और अभियानों का स्वयं प्रतिनिधितत्व करते हुए इसे आगे बढ़ाएं।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_689debae080ad.jpg" alt="" /></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने नकली खाद और उर्वरक की कालाबाजारी को लेकर राज्य सरकारों से सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि अब तक मात्र 600 बायोस्टुमिलेंट प्रमाणित पाए गए हैं। इसलिए अधिकारी सुनिश्चित करें कि यह प्रमाणित बायोस्टुमिलेंट ही किसानों तक पहुंचे। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि यदि कोई खाद के साथ कुछ और दवाई जबर्दस्ती बेचता है, तो यह भी गलत है। जिसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने राज्यों से भी इस संबंध में कठोर कदम उठाने के लिए कहा।&nbsp;</p>
<p><strong>राज्य की तरफ से अतिरिक्त यूरिया की मांग</strong></p>
<p>बैठक में कृषि मंत्रियों ने जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं के बारे में केंद्रीय मंत्री को जानकारी दी। राजस्थान के कृषि मंत्री&nbsp;भजन लाल, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री&nbsp;सूर्य प्रताप शाही, मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री&nbsp;ऐंदल सिंह कंषाना, बिहार के उप मुख्यमंत्री&nbsp;सम्राट चौधरी, कर्नाटक के कृषि मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी, उत्तराखंड के कृषि मंत्री&nbsp;गणेश जोशी, छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम, गुजरात के कृषि मंत्री&nbsp;राघवजीभाई&nbsp;पटेल और पंजाब के कृषि&nbsp;मंत्री&nbsp;गुरमीत सिंह खुड्डियां&nbsp;के प्रतिनिधियों की तरफ से अतिरिक्त यूरिया की मांग की गई।</p>
<p>उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्रियों ने केंद्रीय मंत्री को यूरिया की कमी के साथ-साथ प्राकृतिक आपदा के कारण नुकसान की भी जानकारी दी साथ ही अतिरिक्त सहायता राशि की आवश्यकता जताई।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_689debdf2ea69.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>यूरिया के सही उपयोग पर जोर</strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यूरिया की अतिरिक्त मांग की मुख्य दो वजह हो सकती हैं, पहला &ndash; अच्छी बारिश के कारण चावल और मक्के सहित बुआई में बढ़ोतरी और दूसरा कारण हो सकता है यूरिया का गैर खेती के कामों में अनुचित इस्तेमाल। उन्होंने कहा कि यदि खेती की आवश्यकता के लिए यूरिया की मांग है तो निश्चित रूप से यूरिया उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने राज्य के कृषि मंत्रियों से भी आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करें कि यूरिया का सही इस्तेमाल ही हो। इस संबंध में निगरानी समितियों का गठन करते हुए तंत्र मजबूत करें।&nbsp;</p>
<p><strong>5 साल की कृषि कार्य योजना</strong>&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों से प्रगतिशील किसानों, विशेषज्ञों एवं अन्य उपयोगी सुझावों को जोड़ते हुए अगले 5 साल की कृषि कार्य योजना की रूपरेखा तय करने का भी निर्देश दिया। साथ ही जनकल्याण समस्याओं के लिए मंत्रालय के ट्रोल फी नंबर को अधिक से अधिक प्रसारित करने के भी निर्देश दिए।</p>
<p></p>
<p></p>
</div>
</div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_689deb9193769.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ 3 अक्टूबर से रबी फसल के लिए विकसित कृषि संकल्प अभियान, खाद की कालाबाजारी रोकने के निर्देश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 10 लाख से अधिक किसानों का नामांकन, मिलेगा प्रति एकड़ 4000 रुपये का प्रोत्साहन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/more-than-10-lakh-farmers-enrolled-under-national-natural-farming-mission-will-get-incentive-of-rs-4000-annually.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 14 Aug 2025 17:41:05 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/more-than-10-lakh-farmers-enrolled-under-national-natural-farming-mission-will-get-incentive-of-rs-4000-annually.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रासायनिक-मुक्त और इको-सिस्टम आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किए गए <strong>राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) </strong>के तहत जुलाई 2025 तक 10 लाख से अधिक किसानों का नामांकन किया जा चुका है। केंद्र प्रायोजित इस योजना की शुरुआत 25 नवंबर 2024 में की गई थी, जिसका मकसद मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, किसानों की इनपुट लागत में कमी के साथ पर्यावरण अनुकूल प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मिशन के तहत <strong>2,481 करोड़</strong> रुपये के कुल खर्च से <strong>15,000 समूहों</strong> के माध्यम से <strong>7.5 लाख हेक्टेयर</strong> में खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य है। एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए <strong>10,000 जैव-इनपुट संसाधन केंद्र</strong> स्थापित करने का लक्ष्य है। 70 हजार से अधिक प्रशिक्षित कृषि सखियां इनपुट वितरण और किसानों के मार्गदर्शन का कार्य कर रही हैं। मिशन के तहत अब तक <strong>1,100 मॉडल फार्म</strong> विकसित हो चुके हैं और 806 प्रशिक्षण संस्थान सक्रिय हैं।&nbsp;</p>
<p>राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को 2,481 करोड़ रुपये के प्रस्तावित खर्च के साथ शुरू किया गया है जिसमें केंद्र का हिस्सा 1,584 करोड़ रुपये और राज्यों की हिस्सा 897 करोड़ रुपये रहेगा। यह भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (बीपीकेपी) का संशोधित रूप है, जिसे 2020-21 से 2022-23 तक <strong>परम्परागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई)</strong> के तहत लागू किया गया था।&nbsp;</p>
<p><strong>प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और प्रमाणन</strong></p>
<p>प्राकृतिक&nbsp;खेती&nbsp;के&nbsp;तरीके&nbsp;अपनाने&nbsp;को&nbsp;प्रोत्साहित&nbsp;करने&nbsp;के&nbsp;लिए&nbsp;दो&nbsp;साल&nbsp;के&nbsp;लिए&nbsp;प्रति&nbsp;एकड़&nbsp;प्रति&nbsp;वर्ष&nbsp;<strong>4,000&nbsp;रुपये</strong>&nbsp;का&nbsp;प्रोत्साहन&nbsp;प्रदान&nbsp;किया&nbsp;जा&nbsp;रहा&nbsp;है।&nbsp;अब तक 3,900 से अधिक वैज्ञानिकों, मास्टर ट्रेनर्स और अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, साथ ही 28,000 सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों (सीआरपी) की पहचान की गई है। आईसीएआर ने&nbsp;केवीके&nbsp;के माध्यम से&nbsp;<strong>3.6&nbsp;लाख</strong>&nbsp;से&nbsp;अधिक&nbsp;किसानों&nbsp;को प्राकृतिक खेती का&nbsp;प्रशिक्षित&nbsp;दिया&nbsp;है।&nbsp;</p>
<p>योजना के तहत 15,000 प्राकृतिक खेती समूहों का गठन किया जाएगा, जहां प्रत्येक क्लस्टर लगभग 50 हेक्टेयर का होगा और लगभग 125 किसान शामिल होंगे। किसानों के प्रशिक्षण के लिए 1,100 प्राकृतिक खेती मॉडल फार्म विकसित किए गए हैं।&nbsp;मिशन की प्रगति की रीयल-टाइम निगरानी के लिए <strong>https://naturalfarming.dac.gov.in</strong> पोर्टल विकसित किया गया है। भागीदारी गारंटी प्रणाली (पीजीएस)-भारत के तहत प्राकृतिक खेती का प्रमाणन भी किया जा रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या है प्राकृतिक खेती?</strong></p>
<p>प्राकृतिक खेती का मकसद स्थान-विशिष्ट कृषि-पारिस्थितिक पद्धतियों को बढ़ावा देना है जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और प्राकृतिक इको-सिस्टम मजबूत होते हैं। इसके तहत बहु-फसल प्रणालियों, बायोमास मल्चिंग आदि के माध्यम से मृदा में कार्बनिक पदार्थों के उत्पादन को प्रोत्साहित कर मृदा स्वास्थ्य और नमी की मात्रा में सुधार पर भी जोर दिया जाता है। प्राकृतिक खेती लाभकारी कीटों, पक्षियों और सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति को बढ़ावा देकर जैव-विविधता को भी बढ़ाती है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>कई राज्य पहले से ही प्राकृतिक खेती को अपना रहे हैं और सफल मॉडल विकसित कर चुके हैं। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश और केरल अग्रणी राज्यों में से हैं। प्राकृतिक खेती फसल प्रणाली पद्धतियों के पैकेज (पीओपी) को विकसित करने और वैधता प्रदान करने के लिए 20 संस्थानों के नेटवर्क के माध्यम से अनुसंधान शुरू किया गया है। गाजियाबाद स्थित राष्ट्रीय&nbsp;जैविक&nbsp;खेती&nbsp;केंद्र&nbsp;को&nbsp;राष्ट्रीय&nbsp;जैविक&nbsp;और&nbsp;प्राकृतिक&nbsp;खेती&nbsp;केंद्र&nbsp;(एनसीओएफ)&nbsp;के&nbsp;रूप&nbsp;में&nbsp;पुनर्गठित&nbsp;किया&nbsp;गया&nbsp;है जो प्रमाणन&nbsp;के&nbsp;लिए&nbsp;मानक&nbsp;तैयार&nbsp;कर&nbsp;रहा&nbsp;है।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 10 लाख से अधिक किसानों का नामांकन, मिलेगा प्रति एकड़ 4000 रुपये का प्रोत्साहन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_689dd2fc8c981.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमेरिकी दबाव के सामने न झुकने के लिए किसान संगठनों ने प्रधानमंत्री का आभार जताया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmer-organizations-thanked-the-prime-minister-for-not-bowing-to-american-pressure.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 13 Aug 2025 14:21:09 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmer-organizations-thanked-the-prime-minister-for-not-bowing-to-american-pressure.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को पूसा परिसर, नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर अमेरिका के दबाव में न झुकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत कदम का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक व सचिव डेयर डॉ. एम. एल. जाट और कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी सहित विभिन्न राज्यों के किसान संगठनों के नेता उपस्थित रहे।</p>
<p>अपने संबोधन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वदेशी का आह्वान करते हुए कहा, &ldquo;मेरे घर और दिल के दरवाजे अपने किसान साथियों के लिए हमेशा खुले हैं। हमारे किसान आत्मनिर्भर भारत की नींव हैं। स्वदेशी का संकल्प इन्हीं की समृद्धि और भारत की प्रगति का संकल्प है। आइए, स्वदेशी अपनाएं, अपने देश का मान बढ़ाएं और किसानों के परिश्रम को प्रणाम करें।&rdquo; कृषि मंत्री ने नकली बीज बेचने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और किसान हितैषी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया।&nbsp;</p>
<p>संवाद के दौरान भारतीय किसान चौधरी चरण सिंह संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मेंन्द्र चौधरी ने कहा, &ldquo;प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हित में अटल संकल्प वाला बयान दिया है। भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों के साथ समझौता नहीं करेगा। ये घोषणा न केवल करोड़ों अन्नदाताओं को राहत देने वाली है, बल्कि कृषि व ग्रामीण भारत को मजबूती प्रदान करती है।&rdquo;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_689c51f568ae8.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>छत्तीसगढ़ युवा प्रगतिशील किसान संघ के किसान वीरेंद्र लोहान ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अमेरिकी कंपनियों को कृषि और डेयरी सेक्टर में प्रवेश नहीं देने का जो साहसिक निर्णय लिया है, वह हर खेत, हर गांव और हर गौशाला में गूंज रहा है। आपने अमेरिकी कंपनियों को प्रवेश न देकर ये सिद्ध कर दिया है कि, भारत का किसान केवल अन्नदाता नहीं बल्कि इस राष्ट्र की आत्मा है और इस आत्मा पर कभी कोई विदेशी कब्जा नहीं कर सकता।&rdquo;</p>
<p>किसान नेता धर्मेंद्र मलिक ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि&nbsp;हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कृषि मंत्री को बहुत-बहुत धन्यवाद देते हैं। आपसे एक अपील भी करना चाहते हैं कि&nbsp;आपने जो स्टैंड लिया है,&nbsp;उस पर आप अडिग रहें&nbsp;और मुक्त व्यापार को लेकर हमारी नीतियों में कोई बदलाव ना लाए।</p>
<p>किसान किरपा सिंह नत्थूवाला ने कहा, &ldquo;हम बहुत चिंतित थे कि अमेरिका समझौते का दबाव डाल रहा है। अगर समझौता होता तो किसान बर्बाद हो जाते, लेकिन प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री ने किसानों के हित में कठोर फैसला लिया, इससे किसानों की छाती चौड़ी हो गई है।&rdquo;</p>
<p>कार्यक्रम में किसान नेता हरपाल सिंह डागर, कुलदीप सिंह बाजिदपुर, बाबा राजेंद्र सिंह मलिक, तरूणेश शर्मा, केपी सिंह ठैनुआ, आचार्य रामगोपाल वालिया, विनोद आनंद, राजकुमार बालियान, विनोद आनंद, अशोक बालियान, विपिचंद्र आर. पटेल, रामपाल जाट, कृष्णवीर चौधरी, भूपेंद्र सिंह मान, के. साई रेड्डी ने संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री के निर्णय के प्रति आभार व्यक्त किया।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_689c51e3760ef.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमेरिकी दबाव के सामने न झुकने के लिए किसान संगठनों ने प्रधानमंत्री का आभार जताया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ की करीब 91% बुवाई पूरी: धान का क्षेत्र 12 फीसदी बढ़ा, लेकिन तिलहन के रकबे में 3.74 फीसदी की गिरावट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/91-pc-of-kharif-sowing-completed-paddy-area-increased-by-12-pc-oilseed-area-declined-by-3.74-pc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 11 Aug 2025 20:08:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/91-pc-of-kharif-sowing-completed-paddy-area-increased-by-12-pc-oilseed-area-declined-by-3.74-pc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल मानसून की अच्छी बारिश के चलते देश में खरीफ फसलों की लगभग 91 फीसदी बुवाई पूरी हो चुकी है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 8 अगस्त तक कुल <strong>9</strong><strong>95</strong><strong>.</strong><strong>6</strong><strong>3 </strong><strong>लाख</strong> <strong>हेक्टेयर</strong> क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस अवधि तक 957.15 लाख हेक्टेयर में खरीफ की बुवाई हुई थी। इस प्रकार करीब 38.48 लाख हेक्टेयर यानी लगभग 4 प्रतिशत अधिक क्षेत्र में खरीफ की बुवाई हुई है।</p>
<p><strong>धान</strong> <strong>और</strong> <strong>मक्का</strong> <strong>में</strong> <strong>बढ़त</strong><strong>, </strong><strong>दालों</strong> <strong>में</strong> <strong>कमी</strong><br />खरीफ की प्रमुख फसल <strong>धान</strong> की बुवाई 364.80 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के 325.36 लाख हेक्टेयर की तुलना में करीब 12 फीसदी अधिक है। दालों की बुवाई लगभग पिछले साल के स्तर पर है। <strong>दलहन</strong> फसलों का कुल क्षेत्र 106.68 लाख हेक्टेयर है, जबकि पिछले साल समान अवधि में यह 106.52 लाख हेक्टेयर था।</p>
<p>दलहन में सबसे अधिक गिरावट <strong>अरहर</strong><strong> (</strong><strong>तूर</strong><strong>)</strong> की बुवाई में दर्ज की गई है, जो पिछले साल के 42.87 लाख हेक्टेयर से 4.70 फीसदी घटकर 40.86 लाख हेक्टेयर रह गई है। हालांकि, मूंग और उड़द की बुवाई क्रमश: 2.72 और 1.19 फीसदी बढ़ी है।</p>
<p><strong>मक्का</strong> <strong>की</strong> <strong>बुवाई</strong> <strong>11.74% </strong><strong>अधिक</strong><br />मोटे अनाजों की बुवाई में 4.54 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले साल इस समय तक 170.96 लाख हेक्टेयर थी। इस साल यह बढ़कर 178.73 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। हालांकि, ज्वार और बाजरा की बुवाई में थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन मक्का की बुवाई में 10.51 फीसदी की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मक्का बुवाई का रकबा पिछले साल 8 अगस्त तक 83.15 लाख हेक्टेयर था, जो इस साल बढ़कर 91.89 लाख हेक्टेयर हो गया है। स्पष्ट है कि किसानों का रुझान दलहन और तिलहन फसलों की तुलना में मक्का की ओर बढ़ा है। इथेनॉल उत्पादन में मक्का एक प्रमुख फीडस्टॉक बन चुका है। इसलिए मक्का की मांग भी बढ़ रही है।</p>
<p><strong>तिलहन</strong> <strong>का</strong> <strong>रकबा</strong> <strong>करीब</strong> <strong>3.74</strong><strong>% </strong><strong>घटा</strong><br />सरकार की खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की कोशिशों के बावजूद किसानों का रुझान तिलहन फसलों की तरफ कम रहा है। खरीफ सीजन में तिलहन फसलों का कुल रकबा 182.43 लाख हेक्टेयर से घटकर 175.61 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो 3.74 प्रतिशत की गिरावट है। मूंगफली की बुवाई में करीब 4%, सूरजमुखी में 10.42% और सोयाबीन में 3.81% की कमी आई है। सोयाबीन का क्षेत्र 124.24 लाख हेक्टेयर से घटकर 119.51 लाख हेक्टेयर रह गया है। पिछली बार भाव में गिरावट के कारण सोयाबीन में किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था।&nbsp;</p>
<p><strong>गन्ना क्षेत्र बढ़ा</strong><strong>, </strong><strong>कपास</strong> <strong>में</strong> <strong>गिरावट</strong><br />देश के चीनी और इथेनॉल उत्पादन के लिए राहत की खबर है कि गन्ने की बुवाई का क्षेत्र 2.94 प्रतिशत बढ़कर 57.31 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 55.68 लाख हेक्टेयर था।&nbsp;</p>
<p>वहीं, कपास की बुवाई में 3.20 प्रतिशत की गिरावट आई है और इसका क्षेत्र घटकर 106.96 लाख हेक्टेयर रह गया है।&nbsp;कपास की बुवाई के औसत क्षेत्र 129.50 लाख हेक्टेयर की तुलना में इस साल बुवाई का क्षेत्र लगभग 18 फीसदी कम है।</p>
<p></p>
<table width="580">
<tbody>
<tr>
<td colspan="6" style="text-align: center; width: 576.4px;">Ministry of Agriculture &amp; Farmers Welfare</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td colspan="6" style="width: 576.4px;">Department of Agriculture &amp; Farmers Welfare (DA&amp;FW)</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td colspan="6" style="width: 576.4px;">
<p><strong>All India: Progressive Crop Area Sown Report -&nbsp;</strong><strong>Kharif Weekly area coverage </strong></p>
<p><strong>as on 2025-08-08</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td colspan="6" style="width: 576.4px; text-align: right;">Source: CWWG (via API) Area in Lakh Ha</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;"><strong>Normal (DA&amp;FW)</strong></td>
<td colspan="2" style="width: 187.1px;"><strong>Area Sown</strong></td>
<td style="width: 126.125px;"><strong>Difference In Area Coverage Over</strong></td>
<td style="width: 96.825px;"><strong>% of Increase (+)/Decrease (-) Over&nbsp;</strong></td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Crop</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;"><strong>&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 92.15px;"><strong>2025-26</strong></td>
<td style="width: 92.15px;"><strong>2024-25</strong></td>
<td style="width: 126.125px;"><strong>2024-25</strong></td>
<td style="width: 96.825px;"><strong>2024-25</strong></td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Rice</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">403.09</td>
<td style="width: 92.15px;">364.80</td>
<td style="width: 92.15px;">325.36</td>
<td style="width: 126.125px;">39.45</td>
<td style="width: 96.825px;">12.12</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Total Pulses</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;"><strong>129.62</strong></td>
<td style="width: 92.15px;"><strong>106.68</strong></td>
<td style="width: 92.15px;"><strong>106.52</strong></td>
<td style="width: 126.125px;"><strong>0.16</strong></td>
<td style="width: 96.825px;"><strong>0.15</strong></td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Tur</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">44.71</td>
<td style="width: 92.15px;">40.86</td>
<td style="width: 92.15px;">42.87</td>
<td style="width: 126.125px;">-2.02</td>
<td style="width: 96.825px;">-4.70</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Kulthi</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">1.72</td>
<td style="width: 92.15px;">0.17</td>
<td style="width: 92.15px;">0.16</td>
<td style="width: 126.125px;">0.00</td>
<td style="width: 96.825px;">1.48</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Urad</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">32.64</td>
<td style="width: 92.15px;">20.15</td>
<td style="width: 92.15px;">19.91</td>
<td style="width: 126.125px;">0.24</td>
<td style="width: 96.825px;">1.19</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Moong</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">35.69</td>
<td style="width: 92.15px;">33.21</td>
<td style="width: 92.15px;">32.33</td>
<td style="width: 126.125px;">0.88</td>
<td style="width: 96.825px;">2.72</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Other Pulses</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">5.15</td>
<td style="width: 92.15px;">3.24</td>
<td style="width: 92.15px;">3.21</td>
<td style="width: 126.125px;">0.03</td>
<td style="width: 96.825px;">1.02</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Moth Bean</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">9.70</td>
<td style="width: 92.15px;">9.06</td>
<td style="width: 92.15px;">8.04</td>
<td style="width: 126.125px;">1.02</td>
<td style="width: 96.825px;">12.75</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Total Coarse Cereals</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;"><strong>180.71</strong></td>
<td style="width: 92.15px;"><strong>178.73</strong></td>
<td style="width: 92.15px;"><strong>170.96</strong></td>
<td style="width: 126.125px;"><strong>7.77</strong></td>
<td style="width: 96.825px;"><strong>4.54</strong></td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Jowar</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">15.07</td>
<td style="width: 92.15px;">13.69</td>
<td style="width: 92.15px;">13.96</td>
<td style="width: 126.125px;">-0.27</td>
<td style="width: 96.825px;">-1.95</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Bajra</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">70.69</td>
<td style="width: 92.15px;">64.86</td>
<td style="width: 92.15px;">65.76</td>
<td style="width: 126.125px;">-0.90</td>
<td style="width: 96.825px;">-1.37</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Ragi</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">11.52</td>
<td style="width: 92.15px;">4.41</td>
<td style="width: 92.15px;">4.15</td>
<td style="width: 126.125px;">0.26</td>
<td style="width: 96.825px;">6.23</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Maize</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">78.95</td>
<td style="width: 92.15px;">91.89</td>
<td style="width: 92.15px;">83.15</td>
<td style="width: 126.125px;">8.74</td>
<td style="width: 96.825px;">10.51</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Other Small Millets</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">4.48</td>
<td style="width: 92.15px;">3.88</td>
<td style="width: 92.15px;">3.93</td>
<td style="width: 126.125px;">-0.06</td>
<td style="width: 96.825px;">-1.41</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Total Oilseeds</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;"><strong>194.63</strong></td>
<td style="width: 92.15px;"><strong>175.61</strong></td>
<td style="width: 92.15px;"><strong>182.43</strong></td>
<td style="width: 126.125px;"><strong>-6.82</strong></td>
<td style="width: 96.825px;"><strong>-3.74</strong></td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Groundnut</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">45.10</td>
<td style="width: 92.15px;">43.23</td>
<td style="width: 92.15px;">45.06</td>
<td style="width: 126.125px;">-1.84</td>
<td style="width: 96.825px;">-4.08</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Sesamum</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">10.32</td>
<td style="width: 92.15px;">8.89</td>
<td style="width: 92.15px;">9.81</td>
<td style="width: 126.125px;">-0.92</td>
<td style="width: 96.825px;">-9.33</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Sunflower</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">1.29</td>
<td style="width: 92.15px;">0.61</td>
<td style="width: 92.15px;">0.68</td>
<td style="width: 126.125px;">-0.07</td>
<td style="width: 96.825px;">-10.42</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Soybean</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">127.19</td>
<td style="width: 92.15px;">119.51</td>
<td style="width: 92.15px;">124.24</td>
<td style="width: 126.125px;">-4.73</td>
<td style="width: 96.825px;">-3.81</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Nigerseed</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">1.08</td>
<td style="width: 92.15px;">0.14</td>
<td style="width: 92.15px;">0.26</td>
<td style="width: 126.125px;">-0.12</td>
<td style="width: 96.825px;">-47.85</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Castorseed</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">9.65</td>
<td style="width: 92.15px;">3.19</td>
<td style="width: 92.15px;">2.32</td>
<td style="width: 126.125px;">0.87</td>
<td style="width: 96.825px;">37.64</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Other Oilseeds</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">&nbsp;</td>
<td style="width: 92.15px;">0.05</td>
<td style="width: 92.15px;">0.06</td>
<td style="width: 126.125px;">-0.01</td>
<td style="width: 96.825px;">-17.30</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Sugarcane</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;"><strong>52.51</strong></td>
<td style="width: 92.15px;"><strong>57.31</strong></td>
<td style="width: 92.15px;"><strong>55.68</strong></td>
<td style="width: 126.125px;"><strong>1.64</strong></td>
<td style="width: 96.825px;"><strong>2.94</strong></td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Total Jute and Mesta</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">6.60</td>
<td style="width: 92.15px;">5.54</td>
<td style="width: 92.15px;">5.71</td>
<td style="width: 126.125px;">-0.18</td>
<td style="width: 96.825px;">-3.11</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Jute</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">6.19</td>
<td style="width: 92.15px;">5.33</td>
<td style="width: 92.15px;">5.50</td>
<td style="width: 126.125px;">-0.16</td>
<td style="width: 96.825px;">-2.99</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Mesta</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">0.40</td>
<td style="width: 92.15px;">0.20</td>
<td style="width: 92.15px;">0.22</td>
<td style="width: 126.125px;">-0.01</td>
<td style="width: 96.825px;">-6.03</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Cotton</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;">129.50</td>
<td style="width: 92.15px;">106.96</td>
<td style="width: 92.15px;">110.49</td>
<td style="width: 126.125px;">-3.53</td>
<td style="width: 96.825px;">-3.20</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 78.4625px;"><strong>Grand Total</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;"><strong>1096.65</strong></td>
<td style="width: 92.15px;"><strong>995.63</strong></td>
<td style="width: 92.15px;"><strong>957.15</strong></td>
<td style="width: 126.125px;"><strong>38.48</strong></td>
<td style="width: 96.825px;"><strong>4.02</strong></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align: center;"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_6899ff327a8f7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ की करीब 91% बुवाई पूरी: धान का क्षेत्र 12 फीसदी बढ़ा, लेकिन तिलहन के रकबे में 3.74 फीसदी की गिरावट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_6899ff327a8f7.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[Godavari Biorefineries: बायो केमिकल सेगमेंट का मजबूत प्रदर्शन, रेवेन्यू में वृद्धि लेकिन मुनाफा घटा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/godavari-biorefineries-reports-resilient-q1-fy26-performance-revenue-increases-but-profit-declines.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 10 Aug 2025 20:56:04 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/godavari-biorefineries-reports-resilient-q1-fy26-performance-revenue-increases-but-profit-declines.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत के इथेनॉल उत्पादकों में से एक और बायो-आधारित केमिकल के क्षेत्र में प्रमुख कंपनी, गोदावरी बायोरिफाइनरीज लिमिटेड (GBL) ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। इस तिमाही के दौरान कुछ क्षेत्रों में मौसमी चुनौतियों का सामना करते हुए कंपनी ने 534 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया, जो वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में 522.5 करोड़ रुपये था।&nbsp;</p>
<p>इस तिमाही में कंपनी का EBITDA 6.5 करोड़ रुपये रहा। बायो-आधारित केमिकल क्षेत्र में साल-दर-साल 43% की मज़बूत EBITDA वृद्धि दर्ज की गई और यह 12.53 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, कर-पश्चात लाभ (PAT) पिछले वर्ष की इसी अवधि के 26.1 करोड़ से घटकर 16 करोड़ रुपये रह गया।</p>
<p>इस तिमाही के दौरान इथेनॉल उत्पादन 26,057 किलोलीटर तक पहुंच गया। इसमें इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (ईबीपी) के तहत बी-हैवी मोलेसेज आधारित इथेनॉल उत्पादन की बहाली से सहायता मिली। कंपनी ने अनाज-आधारित इथेनॉल क्षमता में प्रगति की भी घोषणा की है, जिससे ग्रोथ को नया बल मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>नवाचार के मोर्चे पर, जीबीएल ने दवा खोज में उल्लेखनीय प्रगति की है। एक नए कैंसर-रोधी मॉलिक्यूल के लिए इसके यूरोपीय पेटेंट को स्पेन, यूके और यूरोपीय संघ के कई सदस्य देशों में एकात्मक पेटेंट (Unitary Patent) के रूप में मान्य किया गया है। इसके सेफ्टी ट्रायल विषाक्तता के बिना संपन्न हुए।&nbsp;</p>
<p>इसके अतिरिक्त, कंपनी ने एक अन्य कैंसर-रोधी कंपाउंड हाइड्रॉक्सी-1,4-नेफ्थैलेनडायोन (HYDROXY-1,4-NAPHTHALENEDIONE) के लिए चीनी पेटेंट हासिल किया। इसने स्तन, प्रोस्टेट और अन्य कैंसर के खिलाफ मजबूत इन-विट्रो प्रभाव दिखाया है।</p>
<p>जीबीएल के सीएमडी समीर सोमैया ने बताया कि जीबीएल का रणनीतिक ध्यान डीबॉटलनेकिंग के माध्यम से अपने बायो-आधारित केमिकल पोर्टफोलियो को मजबूत करने, विशेष रसायनों के विकास, मल्टी-फीडस्टॉक इथेनॉल क्षमताओं का विस्तार करने और सस्टेनेबल, दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने के लिए अनुसंधान एवं विकास में निवेश करने पर है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ Godavari Biorefineries: बायो केमिकल सेगमेंट का मजबूत प्रदर्शन, रेवेन्यू में वृद्धि लेकिन मुनाफा घटा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कैबिनेट ने पीएम उज्ज्वला योजना के लिए 2025&amp;#45;26 तक 12,000 करोड़ रुपए की लक्षित सब्सिडी जारी रखने को मंजूरी दी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-continuation-of-targeted-subsidy-for-pm-ujjwala-yojana-consumers-for-2025-26-at-rs-12000-crore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 09 Aug 2025 13:54:47 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-continuation-of-targeted-subsidy-for-pm-ujjwala-yojana-consumers-for-2025-26-at-rs-12000-crore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PM Ujjwala Yojana) के लाभार्थियों को प्रति वर्ष 9 रिफिल (5 किलोग्राम सिलेंडर वालों के लिए आनुपातिक) के लिए 14.2 किलोग्राम सिलेंडर पर 300 रुपए की लक्षित सब्सिडी को मंजूरी दी है। इसमें 12,000 करोड़ रुपए की लागत आएगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) मई 2016 में देश भर के गरीब परिवारों की वयस्क महिलाओं को बिना जमा राशि के एलपीजी कनेक्शन प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। 1 जुलाई 2025 तक देश भर में लगभग 10.33 करोड़ पीएमयूवाई कनेक्शन उपलब्ध कराए गए थे।</p>
<p>सभी पीएमयूवाई लाभार्थियों को बिना किसी जमा राशि के एलपीजी कनेक्शन मिलता है जिसमें सिलेंडर की सुरक्षा जमा राशि, प्रेशर रेगुलेटर, सुरक्षा नली, घरेलू गैस उपभोक्ता कार्ड (डीजीसीसी) पुस्तिका और इंस्टॉलेशन चार्ज शामिल हैं। उज्ज्वला 2.0 की मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, सभी लाभार्थियों को पहला रिफिल और चूल्हा भी निःशुल्क प्रदान किया जाता है।</p>
<p>भारत अपनी एलपीजी आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है। एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के प्रभाव से पीएमयूवाई लाभार्थियों को बचाने और पीएमयूवाई उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी को अधिक किफायती बनाने के लिए सरकार ने मई 2022 में पीएमयूवाई उपभोक्ताओं को प्रति वर्ष 12 रिफिल (5 किलोग्राम सिलेंडर वालों के लिए आनुपातिक रूप से) के लिए 200 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की लक्षित सब्सिडी शुरू की थी। अक्टूबर 2023 में, सरकार ने प्रति वर्ष 12 रिफिल (5 किलोग्राम सिलेंडर वालों के लिए आनुपातिक रूप से) के लिए लक्षित सब्सिडी को बढ़ाकर 300 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर कर दिया।</p>
<p>पीएमयूवाई उपभोक्ताओं की औसत प्रति व्यक्ति खपत 2019-20 में केवल 3 रिफिल और 2022-23 में 3.68 रिफिल थी, जो वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान बढ़कर लगभग 4.47 हो गई है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कैबिनेट ने पीएम उज्ज्वला योजना के लिए 2025-26 तक 12,000 करोड़ रुपए की लक्षित सब्सिडी जारी रखने को मंजूरी दी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार का दावा, बारिश के कारण दिल्ली में टमाटर की कीमतों में अस्थायी उछाल लेकिन अखिल भारतीय औसत कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-says-tomato-price-spike-temporarily-in-delhi-due-to-rains-all-india-average-remains-low.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 09 Aug 2025 13:10:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-says-tomato-price-spike-temporarily-in-delhi-due-to-rains-all-india-average-remains-low.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उपभोक्&zwj;ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने दावा किया है कि चालू कैलेंडर वर्ष के दौरान खाद्य वस्तुओं की कीमतें काफी हद तक स्थिर और नियंत्रित रही हैं। हालांकि दिल्ली में टमाटर की खुदरा कीमतें (tomato prices) बढ़ी हैं, लेकिन देश के विभिन्न केंद्रों पर टमाटर की कीमतें मांग-आपूर्ति असंतुलन या उत्पादन में कमी के बजाय अस्थायी रूप से स्थानीय कारकों से प्रभावित हैं।</p>
<p>मंत्रालय के अनुसार, दिल्ली में टमाटर का वर्तमान औसत खुदरा मूल्य 73 रुपये प्रति किलोग्राम है। इस महंगाई की वजह मुख्य रूप से जुलाई के अंतिम सप्ताह से देश के उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में हुई भारी बारिश है। इस मौसम संबंधी व्यवधान के कारण जुलाई के अंत तक कीमतें 85 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थीं। हालांकि पिछले सप्ताह आजादपुर मंडी में दैनिक आवक में सुधार और स्थिरता के साथ मंडी और खुदरा कीमतों में गिरावट शुरू हो गई है।</p>
<p>भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (NCCF) 4 अगस्त 2025 से आज़ादपुर मंडी से टमाटर खरीदकर उपभोक्ताओं को न्यूनतम मार्जिन पर बेच रहा है। एनसीसीएफ ने पिछले वर्षों में भी इसी तरह की पहल की थी। अब तक एनसीसीएफ ने खरीद लागत के आधार पर 47 रुपये से 60 रुपये प्रति किलोग्राम के खुदरा मूल्यों पर 27,307 किलोग्राम टमाटर बेचे हैं। टमाटर की खुदरा बिक्री एनसीसीएफ के नेहरू प्लेस, उद्योग भवन, पटेल चौक और राजीव चौक स्थित आउटलेट्स के साथ-साथ शहर में विभिन्न स्थानों पर संचालित 6-7 मोबाइल वैन के माध्यम से की जा रही है।</p>
<p>दिल्ली के विपरीत चेन्नई और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों में, जहां हाल के हफ़्तों में असामान्य मौसम की स्थिति नहीं देखी गई है, कीमतों में ऐसी कोई वृद्धि नहीं देखी गई है। चेन्नई और मुंबई में टमाटर की वर्तमान औसत खुदरा कीमतें क्रमशः 50 रुपये प्रति किलोग्राम और 58 रुपये प्रति किलोग्राम हैं जो दिल्ली में टमाटर की मौजूदा कीमत से काफी कम है। अभी टमाटर की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 52 रुपये प्रति किलोग्राम है, जो पिछले वर्ष के 54 रुपये प्रति किलोग्राम और 2023 के 136 रुपये प्रति किलोग्राम से कम है।</p>
<p>पिछले वर्षों के विपरीत, इस मानसून सीजन में आलू, प्याज और टमाटर जैसी प्रमुख सब्जियों की कीमतें नियंत्रण में हैं। 2024-25 में पिछले वर्ष की तुलना में आलू और प्याज के अधिक उत्पादन से इसकी पर्याप्त आपूर्ति और पिछले वर्ष की तुलना में काफी कीमत सुनिश्चित हुई है। इस वर्ष, सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण बफर के लिए 3 लाख टन प्याज खरीदा है। बफर स्टॉक से प्याज का संतुलित और लक्षित वितरण सितंबर 2025 से शुरू होने की उम्मीद है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6688e3e28702b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार का दावा, बारिश के कारण दिल्ली में टमाटर की कीमतों में अस्थायी उछाल लेकिन अखिल भारतीय औसत कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एमएसपी समिति की अब तक 45 बैठकें, लेकिन अंतिम रिपोर्ट के लिए कोई समय&amp;#45;सीमा तय नहीं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/msp-committee-holds-45-meetings-so-far-but-no-timeline-for-the-final-report.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 09 Aug 2025 12:34:41 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/msp-committee-holds-45-meetings-so-far-but-no-timeline-for-the-final-report.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पूर्व कृषि सचिव संजय अग्रवाल की अध्यक्षता वाली न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) समिति ने एमएसपी से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए अब तक 45 बैठकें की हैं। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में यह बताया। हालांकि चौहान ने समिति की अंतिम रिपोर्ट आने की कोई समय-सीमा नहीं बताई, लेकिन कहा कि इसकी सिफ़ारिशें किसानों की आय सुरक्षा के लिए भविष्य की नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।</p>
<p>ऊपरी सदन में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए चौहान ने कहा कि समिति एमएसपी को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श कर रही है। मंत्री ने बताया कि समिति की चर्चाओं में किसान समूहों, कृषि विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श शामिल रहा है।</p>
<p>सरकार ने जुलाई 2022 में इस समिति का गठन किया था। इसमें किसानों, केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, कृषि अर्थशास्त्रियों और वैज्ञानिकों के प्रतिनिधि शामिल थे। वर्ष 2020 में तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेते समय इस समिति के गठन का वादा किया गया था।</p>
<p>गठन के बाद से समिति इन प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श करने और कार्यान्वयन के लायक सुझाव तैयार करने के लिए नियमित बैठकें कर रही है। अब तक इसकी छह मुख्य बैठकें और 39 उप-समितियों की बैठकें हो चुकी हैं। समिति के कार्यक्षेत्र में एमएसपी को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए उपाय सुझाना, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और देश की उभरती जरूरतों के अनुरूप फसल पैटर्न में बदलाव की सिफारिश करना शामिल हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_684841339cab3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एमएसपी समिति की अब तक 45 बैठकें, लेकिन अंतिम रिपोर्ट के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_684841339cab3.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ की 85% बुवाई पूरी: तिलहन का क्षेत्र घटा, मक्का की ओर बढ़ा किसानों का रुझान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/about-85-pc-sowing-of-kharif-completed-oilseeds-acreage-decreased-farmers-inclination-towards-maize-increased.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 05 Aug 2025 14:00:13 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/about-85-pc-sowing-of-kharif-completed-oilseeds-acreage-decreased-farmers-inclination-towards-maize-increased.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="292" data-end="660">इस साल मानसून की अच्छी बारिश के चलते देश में खरीफ फसलों की लगभग 85 फीसदी बुवाई पूरी हो चुकी है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार, 1 अगस्त तक कुल <strong>932.93 लाख हेक्टेयर</strong> क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 887.97 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार करीब 44.96 लाख हेक्टेयर यानी लगभग 5 प्रतिशत अधिक क्षेत्र में बुवाई हुई है।</p>
<p data-start="662" data-end="1007"><strong data-start="662" data-end="702">धान और मक्का में बढ़त, दालों में कमी</strong><br data-start="702" data-end="705" />खरीफ की प्रमुख फसल<strong> धान</strong> की बुवाई 319.40 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के 273.72 लाख हेक्टेयर की तुलना में 16.69 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, दालों की बुवाई में मामूली गिरावट देखी गई है। <strong>दलहन</strong> फसलों का कुल क्षेत्र 101.22 लाख हेक्टेयर है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 101.54 लाख हेक्टेयर था।</p>
<p data-start="1009" data-end="1199">दलहन में सबसे अधिक गिरावट <strong>अरहर (तुर)</strong> की बुवाई में दर्ज की गई है, जो पिछले साल के 41.06 लाख हेक्टेयर से 6.68 प्रतिशत घटकर 38.32 लाख हेक्टेयर रह गई है। <strong>उड़द</strong> की बुवाई भी 2.43 प्रतिशत कम हुई है।</p>
<p data-start="1201" data-end="1710"><strong data-start="1201" data-end="1240">मक्का की बुवाई 11.74% अधिक</strong><br data-start="1240" data-end="1243" />मोटे अनाजों की बुवाई में 4.74 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो 164.76 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 172.57 लाख हेक्टेयर हो गई है। हालांकि, ज्वार और बाजरा की बुवाई में थोड़ी गिरावट है, लेकिन मक्का की बुवाई में 11.74 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मक्का का रकबा पिछले साल 81.99 लाख हेक्टेयर था, जो इस साल बढ़कर 91.62 लाख हेक्टेयर हो गया है। किसानों का रुझान दलहन और तिलहन फसलों की तुलना में मक्का की ओर बढ़ा है। इथेनॉल उत्पादन में मक्का एक प्रमुख फीडस्टॉक बन चुका है। इसलिए मक्का की मांग भी बढ़ रही है। यही वजह है कि किसानों को रुझान भी मक्का की ओर बढ़ा है।&nbsp;</p>
<p data-start="1712" data-end="2203"><strong data-start="1712" data-end="1743">तिलहन का रकबा करीब 4% कम</strong><br data-start="1743" data-end="1746" />सरकार की खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की कोशिशों के बावजूद किसानों का रुझान तिलहन फसलों की तरफ कम रहा है। खरीफ सीजन में तिलहन फसलों का कुल रकबा 178.14 लाख हेक्टेयर से घटकर 171.03 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो करीब 4 प्रतिशत की गिरावट है। मूंगफली की बुवाई में 4.33%, सूरजमुखी में 11.97% और सोयाबीन में 3.98% की कमी आई है। सोयाबीन का क्षेत्र 123.45 लाख हेक्टेयर से घटकर 118.54 लाख हेक्टेयर रह गया है। पिछली बार भाव में गिरावट के कारण सोयाबीन में किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था।&nbsp;</p>
<p data-start="2205" data-end="2509"><strong data-start="2205" data-end="2251">गन्ने की बुवाई बढ़ी, कपास में गिरावट</strong><br data-start="2251" data-end="2254" />देश के चीनी और इथेनॉल उत्पादन के लिए राहत की खबर है कि गन्ने की बुवाई का क्षेत्र 2.94 प्रतिशत बढ़कर 57.31 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 55.68 लाख हेक्टेयर था। वहीं, कपास की बुवाई में 2.36 प्रतिशत की गिरावट आई है और इसका क्षेत्र घटकर 105.87 लाख हेक्टेयर रह गया है।&nbsp;</p>
<p data-start="2205" data-end="2509"></p>
<table width="504">
<tbody>
<tr>
<td colspan="6" style="text-align: center; width: 500px;">Ministry of Agriculture &amp; Farmers Welfare</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td colspan="6" style="width: 500px;">Department of Agriculture &amp; Farmers Welfare (DA&amp;FW)</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td colspan="6" style="width: 500px;"><strong>All India: Progressive Crop Area Sown Report - Kharif Weekly area coverage as on 2025-08-01</strong></td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td colspan="6" style="text-align: right; width: 500px;"><em>Area in Lakh Ha | Source: CWWG</em>&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;"><strong>&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 74.875px;"><strong>Normal (DA&amp;FW)</strong></td>
<td colspan="2" style="width: 171.875px;"><strong>Area Sown</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;"><strong>Difference In Area Coverage Over</strong></td>
<td style="width: 86.5781px;"><strong>% of Increase (+)/Decrease (-) Over&nbsp;</strong></td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;"><strong>Crop</strong></td>
<td style="width: 74.875px;"><strong>&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>2025-26</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>2024-25</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;"><strong>2024-25</strong></td>
<td style="width: 86.5781px;"><strong>2024-25</strong></td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Rice</td>
<td style="width: 74.875px;">403.09</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>319.40</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">273.72</td>
<td style="width: 76.6875px;">45.68</td>
<td style="width: 86.5781px;">16.69</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Total Pulses</td>
<td style="width: 74.875px;">129.61</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>101.22</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">101.54</td>
<td style="width: 76.6875px;">-0.32</td>
<td style="width: 86.5781px;">-0.31</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Tur</td>
<td style="width: 74.875px;">44.71</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>38.32</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">41.06</td>
<td style="width: 76.6875px;">-2.74</td>
<td style="width: 86.5781px;">-6.68</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Kulthi</td>
<td style="width: 74.875px;">1.72</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>0.15</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">0.16</td>
<td style="width: 76.6875px;">-0.01</td>
<td style="width: 86.5781px;">-4.79</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Urad</td>
<td style="width: 74.875px;">32.64</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>18.62</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">19.09</td>
<td style="width: 76.6875px;">-0.46</td>
<td style="width: 86.5781px;">-2.43</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Moong</td>
<td style="width: 74.875px;">35.69</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>32.18</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">31.13</td>
<td style="width: 76.6875px;">1.06</td>
<td style="width: 86.5781px;">3.39</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Other Pulses</td>
<td style="width: 74.875px;">5.15</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>2.99</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">2.94</td>
<td style="width: 76.6875px;">0.05</td>
<td style="width: 86.5781px;">1.63</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Moth Bean</td>
<td style="width: 74.875px;">9.70</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>8.95</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">7.16</td>
<td style="width: 76.6875px;">1.80</td>
<td style="width: 86.5781px;">25.07</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Total Coarse Cereals</td>
<td style="width: 74.875px;">180.71</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>172.57</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">164.76</td>
<td style="width: 76.6875px;">7.81</td>
<td style="width: 86.5781px;">4.74</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Jowar</td>
<td style="width: 74.875px;">15.07</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>13.17</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">13.53</td>
<td style="width: 76.6875px;">-0.36</td>
<td style="width: 86.5781px;">-2.64</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Bajra</td>
<td style="width: 74.875px;">70.69</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>61.58</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">62.36</td>
<td style="width: 76.6875px;">-0.79</td>
<td style="width: 86.5781px;">-1.26</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Ragi</td>
<td style="width: 74.875px;">11.52</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>2.80</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">3.18</td>
<td style="width: 76.6875px;">-0.38</td>
<td style="width: 86.5781px;">-11.84</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Maize</td>
<td style="width: 74.875px;">78.95</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>91.62</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">81.99</td>
<td style="width: 76.6875px;">9.63</td>
<td style="width: 86.5781px;">11.74</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Other Small Millets</td>
<td style="width: 74.875px;">4.48</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>3.40</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">3.69</td>
<td style="width: 76.6875px;">-0.29</td>
<td style="width: 86.5781px;">-7.94</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Total Oilseeds</td>
<td style="width: 74.875px;">194.63</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>171.03</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">178.14</td>
<td style="width: 76.6875px;">-7.11</td>
<td style="width: 86.5781px;">-3.99</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Groundnut</td>
<td style="width: 74.875px;">45.10</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>41.56</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">43.45</td>
<td style="width: 76.6875px;">-1.88</td>
<td style="width: 86.5781px;">-4.33</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Sesamum</td>
<td style="width: 74.875px;">10.32</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>8.38</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">9.00</td>
<td style="width: 76.6875px;">-0.61</td>
<td style="width: 86.5781px;">-6.81</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Sunflower</td>
<td style="width: 74.875px;">1.29</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>0.58</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">0.66</td>
<td style="width: 76.6875px;">-0.08</td>
<td style="width: 86.5781px;">-11.97</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Soybean</td>
<td style="width: 74.875px;">127.19</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>118.54</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">123.45</td>
<td style="width: 76.6875px;">-4.91</td>
<td style="width: 86.5781px;">-3.98</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Nigerseed</td>
<td style="width: 74.875px;">1.08</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>0.12</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">0.24</td>
<td style="width: 76.6875px;">-0.12</td>
<td style="width: 86.5781px;">-49.66</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Castorseed</td>
<td style="width: 74.875px;">9.65</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>1.79</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">1.29</td>
<td style="width: 76.6875px;">0.50</td>
<td style="width: 86.5781px;">39.21</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Other Oilseeds</td>
<td style="width: 74.875px;">&nbsp;</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>0.05</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">0.06</td>
<td style="width: 76.6875px;">-0.01</td>
<td style="width: 86.5781px;">-17.45</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Sugarcane</td>
<td style="width: 74.875px;">52.51</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>57.31</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">55.68</td>
<td style="width: 76.6875px;">1.64</td>
<td style="width: 86.5781px;">2.94</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Total Jute and Mesta</td>
<td style="width: 74.875px;">6.60</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>5.54</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">5.71</td>
<td style="width: 76.6875px;">-0.18</td>
<td style="width: 86.5781px;">-3.07</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Jute</td>
<td style="width: 74.875px;">6.19</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>5.33</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">5.50</td>
<td style="width: 76.6875px;">-0.16</td>
<td style="width: 86.5781px;">-2.99</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Mesta</td>
<td style="width: 74.875px;">0.40</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>0.20</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">0.22</td>
<td style="width: 76.6875px;">-0.01</td>
<td style="width: 86.5781px;">-5.23</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;">Cotton</td>
<td style="width: 74.875px;">129.50</td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>105.87</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;">108.43</td>
<td style="width: 76.6875px;">-2.56</td>
<td style="width: 86.5781px;">-2.36</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td style="width: 77.9844px;"><strong>Grand Total</strong></td>
<td style="width: 74.875px;"><strong>1096.65</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>932.93</strong></td>
<td style="width: 84.4375px;"><strong>887.97</strong></td>
<td style="width: 76.6875px;"><strong>44.96</strong></td>
<td style="width: 86.5781px;"><strong>5.06</strong></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p data-start="2205" data-end="2509" style="text-align: center;"><br /><br /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_6891c1f087536.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ की 85% बुवाई पूरी: तिलहन का क्षेत्र घटा, मक्का की ओर बढ़ा किसानों का रुझान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_6891c1f087536.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सिविल सोसायटी की चेतावनी&amp;#45; India UK CETA से निर्यात लाभ मामूली, कमजोर होगा विकास का एजेंडा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-uk-ceta-a-costly-trade-off-that-sacrifices-policy-sovereignty-for-illusory-gains.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 03 Aug 2025 11:23:41 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-uk-ceta-a-costly-trade-off-that-sacrifices-policy-sovereignty-for-illusory-gains.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>India-UK Agreement:</strong> भारत और यूनाइटेड किंगडम ने 24 जुलाई 2025 को व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) पर हस्ताक्षर किए। दोनों सरकारों ने इस समझौते को द्विपक्षीय व्यापार के लिए मील का पत्थर बताया। हालांकि फोरम फॉर ट्रेड जस्टिस के तहत 100 से ज़्यादा सिविल सोसायटी संगठनों और व्यापार शोधकर्ताओं ने इस समझौते के निहितार्थों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। आलोचकों का कहना है कि एक संतुलित व्यापार समझौता होने के बजाय, CETA भारत की पिछली मुक्त व्यापार प्रतिबद्धताओं में एक बड़ा बदलाव है। यह समझौता जन कल्याण, राष्ट्रीय डेटा संप्रभुता और समावेशी आर्थिक विकास की रक्षा करने की देश की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।</p>
<p>व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे परेशान करने वाले पहलुओं में से एक यह है कि CETA कैसे WTO के TRIPS समझौते के तहत हासिल लचीलेपन को कमज़ोर करता है। यह समझौता दवाओं के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग की तुलना में स्वैच्छिक लाइसेंसिंग को प्राथमिकता देता है। यह कदम 2001 के दोहा घोषणापत्र को कमजोर करता है, जिसमें कॉरपोरेट पेटेंट अधिकारों की तुलना में जन स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई थी। पेटेंट पारदर्शिता को कम करने और विकसित देशों के पेटेंट मानदंडों के साथ सामंजस्य को प्रोत्साहित करने के कारण इस समझौते से भारत के लिए सस्ती दवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना कठिन होगा। इससे लाखों लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। यह नागरिकों के स्वास्थ्य के संवैधानिक अधिकार का भी उल्लंघन होगा।</p>
<p><strong>चौंकाने वाले आत्मसमर्पण</strong><br />जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व प्रोफेसर बिस्वजीत धर ने कहा, "यह समझौता बहुपक्षीय मंचों पर हमारी स्थिति और उन सिद्धांतों को कमज़ोर करता है जिनका भारत कभी वैश्विक मंचों पर समर्थन करता था।" उन्होंने बताया कि CETA में स्वैच्छिक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की बात कही गई है। यह विश्व व्यापार संगठन और संयुक्त राष्ट्र जलवायु मंचों पर अनिवार्य टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के भारत के आह्वान को भी कमज़ोर करता है।</p>
<p>सीईटीए भारत की डिजिटल आर्थिक नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ भी प्रस्तुत करता है। इसमें प्रावधान है कि भारत आयातित सॉफ़्टवेयर के सोर्स कोड के एक्सेस की मांग नहीं कर सकता। यह कोड साइबर रेगुलेशन, कानून के प्रवर्तन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है। इससे वंचित रहना भारत के नियामक अधिकार को सीमित करता है। आईटी फॉर चेंज की साधना संजय ने कहा, "यह डिजिटल संप्रभुता का एक चौंकाने वाला आत्मसमर्पण है।" उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह क्लॉज केवल बड़े पैमाने पर बाजार में उपलब्ध सॉफ़्टवेयर पर लागू नहीं होता, बल्कि सभी डिजिटल आयात को कवर करता है। इससे अनियंत्रित एआई विकास और डेटा दुरुपयोग पर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं।</p>
<p>भारत ने सरकारी संस्थानों के पास रखे डेटा तक 'इच्छुक हितधारकों' के लिए पहुंच खोलने पर सहमति व्यक्त की है। इसमें उस डेटा के रिप्रोडक्शन या व्यावसायिक उपयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं है। डिजिटल सोसायटी के शोधकर्ता परमिंदर जीत सिंह ने कहा, "यह हमारी डेटा संप्रभुता का एक असाधारण समर्पण है। डेटा केवल एक संसाधन नहीं, यह राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।"&nbsp;</p>
<p><strong>सरकारी खरीद में यूके की भागीदारी</strong><br />भारत की सरकारी खरीद नीतियों के लिए भी यह समझौता चिंताजनक है। स्वतंत्र व्यापार विशेषज्ञ प्रो. अभिजीत दास ने कहा, "केंद्र सरकार का खरीद बाजार एमएसएमई की मदद करने का एक प्रमुख माध्यम है। यह अब यूके की भागीदारी के लिए खुला है।" मेक इन इंडिया के तहत भी, ब्रिटिश आपूर्तिकर्ताओं को अब घरेलू श्रेणी 2 आपूर्तिकर्ताओं के समान सुविधाएं मिलेंगी। यह भारत की आत्मनिर्भरता पहल को कमज़ोर करता है और साथ ही पारस्परिक पहुंच भी कम प्रदान करता है। क्योंकि इंग्लैंड की विदेशी खरीद ऐतिहासिक रूप से सालाना 10 अरब पौंड से कम रही है।</p>
<p><strong>ब्रिटेन की अनसुलझी गैर-टैरिफ बाधाएं</strong><br />भारत ने कुछ महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्रों की रक्षा की है, लेकिन ऑटोमोबाइल और व्हिस्की जैसे उद्योगों में टैरिफ में उल्लेखनीय कटौती से घरेलू निर्माताओं को नुकसान होने की आशंका है। उदाहरण के लिए, पहले वर्ष में कार टैरिफ 110% से घटकर 30% हो जाएगा तथा समय के साथ और कम होगा। व्हिस्की पर टैरिफ शुरुआत में 150% से घटकर 75% और एक दशक के भीतर 40% हो जाएगा। इससे दोनों सेक्टर में नौकरियों और विकास को खतरा है। इंग्लैंड में टैरिफ खत्म होने से निर्यात वृद्धि के अनुमानों के बावजूद, रंजा सेनगुप्ता जैसे व्यापार विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि ब्रिटिश भौगोलिक संकेतक (GI) और कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट (CBA) टैक्स जैसी अनसुलझी गैर-टैरिफ बाधाओं से भारत के लाभ कम होंगे।</p>
<p>भारत ने सेवा क्षेत्र में भी भारी रियायतें दी हैं। हालांकि वित्तीय सेवाओं का उदारीकरण वर्तमान स्तरों पर ही अटका हुआ है। इसका अर्थ है कि भारत भविष्य में, राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बावजूद, कड़े नियम लागू नहीं कर सकता। इसके अतिरिक्त, बहुप्रचारित दोहरा अंशदान संधि (Double Contributions Convention), जिससे ब्रिटेन में भारतीय कामगारों को लाभ होने की उम्मीद थी, अब भी बातचीत के दौर में है। इसके लाभ को लेकर केवल अटकलें ही हैं।</p>
<p><strong>समझौते से किसे ज़्यादा फायदा</strong><br />शायद CETA का सबसे बड़ा दोष इसकी विषमता है। ब्रिटेन के व्यवसाय और व्यापार विभाग के अनुसार, भारत को 2040 तक वार्षिक निर्यात में मामूली 3.7 अरब पौंड की वृद्धि का अनुमान है, जो उसके वर्तमान निर्यात का केवल 0.44% है। जबकि ब्रिटेन को लगभग 1.5 गुना अधिक लाभ होने की उम्मीद है। इंस्टीट्यूट फॉर स्टडीज इन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के पूर्व प्रोफेसर दिनेश अबरोल ने कहा, "इन मामूली लाभों के लिए, भारत ने अपनी नीतियों गुंजाइश से बहुत अधिक समझौता कर लिया है।"</p>
<p>बातचीत प्रक्रिया में पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श का भी अभाव है। ब्रिटिश संसद तो अपने सीआरएजी अधिनियम (CRaG Act) के तहत इस समझौते की जांच करेगी, लेकिन भारत की ओर से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है। स्वतंत्र कानूनी विशेषज्ञ शालिनी भूटानी ने कहा, "एक संसदीय लोकतंत्र में, इतने बड़े व्यापार समझौतों पर बहस होनी ही चाहिए।"</p>
<p>फोरम फॉर ट्रेड जस्टिस ने चेतावनी दी है कि सीईटीए भारत की भविष्य की व्यापार वार्ताओं के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता है। यूरोपीय संघ पहले से ही इसी तरह की रियायतों पर नजर गड़ाए हुए है। विश्लेषकों को यह भी चिंता है कि यह समझौता अमेरिका के साथ वार्ता में भारत की स्थिति को कमज़ोर कर सकता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सिविल सोसायटी की चेतावनी- India UK CETA से निर्यात लाभ मामूली, कमजोर होगा विकास का एजेंडा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_6889b4a1ba4d4.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[PM Kisan: 9.7 करोड़ किसानों के खाते में ट्रांसफर की गई 20,500 करोड़ की राशि]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-kisan-rs-20500-cr-transferred-to-970-lakh-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 02 Aug 2025 18:25:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-kisan-rs-20500-cr-transferred-to-970-lakh-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से पीएम-किसान योजना की 20वीं किस्त जारी की। इसके तहत लगभग 20,500 करोड़ रुपये की राशि सीधे 9.7 करोड़ किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। इससे पहले 24 फरवरी 2025 को पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 19वीं किस्त जारी की थी। तब 10 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 23,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई थी। अब तक इस योजना के तहत किसानों के खातों में 3,77,000 करोड़ से अधिक की राशि सीधे ट्रांसफर की जा चुकी है।</p>
<p>पीएम-किसान केंद्र सरकार की योजना है। इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र लाभार्थी को सालाना 6,000 रुपये की सहायता दी जाती है। यह राशि 2,000 रुपये की तीन समान किस्तों में हर चार महीने में सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है।</p>
<p>इस मौके पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पटना में किसानों को संबोधित किया। चौहान ने प्रति हेक्टेयर कृषि उत्पादकता बढ़ाने, विशेष रूप से कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों में, प्रधानमंत्री धन धान्य योजना जैसे प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने बिहार में मखाना उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान और कृषि विज्ञान को खेतों से जोड़ने की निरंतर कोशिशों को रेखांकित किया। मंत्री ने किसानों को उचित मात्रा में खाद और कीटनाशकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया, साथ ही फसल खराब होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_6754188be5d6e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ PM Kisan: 9.7 करोड़ किसानों के खाते में ट्रांसफर की गई 20,500 करोड़ की राशि ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_6754188be5d6e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[National Mustard Day 2025: ग्रामीण समृद्धि का वाहक बना हाइब्रिड सरसों]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/national-mustard-day-2025-hybrid-mustard-emerges-as-a-catalyst-for-rural-prosperity.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 02 Aug 2025 13:41:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/national-mustard-day-2025-hybrid-mustard-emerges-as-a-catalyst-for-rural-prosperity.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हर वर्ष 2 अगस्त को राष्ट्रीय सरसों दिवस (National Mustard Day) मनाया जाता है। यह भारत में एक ऐसी महत्वपूर्ण फसल को सम्मानित करने का अवसर है, जो न केवल थालियों को पोषण देती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करती है। इस वर्ष का फोकस है हाइब्रिड सरसों - एक क्रांतिकारी तिलहन फसल जो राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में किसानों के जीवन में ठोस बदलाव लेकर आई है।</p>
<p>हाइब्रिड सरसों पारंपरिक किस्मों की तुलना में 16&ndash;20% अधिक उपज और 2&ndash;2.5% अधिक तेल देती है। इससे किसानों को प्रति एकड़ 6,000&ndash;8,000 रुपये तक अतिरिक्त शुद्ध आय होती है। इस तरह यह मूल्य अस्थिरता और फसलों को होने वाले नुकसान जैसी चुनौतियों के बीच एक स्थिर विकल्प प्रदान करती है। देश के अनेक तिलहन उत्पादक क्षेत्रों में ये समस्याएं देखने को मिली हैं।</p>
<p>आम तौर पर यह फसल 10 से 25 अक्टूबर के बीच बोई जाती है, जब खेतों में नमी और तापमान उपयुक्त रहते हैं। इस अवधि में बोने वाले किसान और जो उचित कृषि तकनीक अपनाते हैं, उन्हें अधिक उपज और बेहतर बाजार मूल्य मिल रहा है, विशेषकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा में।</p>
<p>हाइब्रिड सरसों की उपयोगिता केवल उत्पादकता तक सीमित नहीं है। यह स्थानीय कृषि रिटेल चैनल, मंडी नेटवर्क और ग्रामीण रोजगार को भी मजबूत कर रही है। उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में सरसों केवल एक फसल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान है। हाइब्रिड किस्मों ने इस संबंध को और गहरा किया है, जिससे यह स्थानीय गौरव और प्रगति का प्रतीक बन चुकी है।</p>
<p>भारत जहां एक ओर खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता और जलवायु अनुकूल खेती की दिशा में कार्य कर रहा है, वहीं हाइब्रिड सरसों एक ऐसा समाधान प्रदान कर रही है जो वैज्ञानिक इनोवेशन, क्षेत्र-विशेष एडवाइजरी और किसान-केंद्रित नीतियों के मेल से उभर रही है।</p>
<p>राष्ट्रीय सरसों दिवस (National Mustard Day) न केवल उत्सव है, बल्कि एक आह्वान भी है - कि हम गुणवत्तापूर्ण बीजों, श्रेष्ठ कृषि विधियों और किसानों के लिए सक्षम प्रणाली में निवेश करें, जिससे अधिक किसान इन उच्च उत्पादक किस्मों को अपनाएं। भारत के हृदयस्थल में सरसों की यह सफलता एक सतत और आत्मनिर्भर कृषि भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ National Mustard Day 2025: ग्रामीण समृद्धि का वाहक बना हाइब्रिड सरसों ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर संसद में लगी सवालों की झड़ी, सरकार ने माना चीन से घटा डीएपी आयात]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/a-flurry-of-questions-raised-in-parliament-on-availability-of-fertilizers-government-admitted-dap-imports-from-china-decreased.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 02 Aug 2025 08:47:14 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/a-flurry-of-questions-raised-in-parliament-on-availability-of-fertilizers-government-admitted-dap-imports-from-china-decreased.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसानों को डीएपी और यूरिया जैसे उर्वरक खरीदने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। देश के कई राज्यों से उर्वरकों की किल्लत की खबरें आ रही हैं। इस बीच, संसद के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा गूंज रहा है। देश के 20 से अधिक सांसदों ने उर्वरकों की उपलब्धता के बारे में संसद में सवाल उठाए हैं। कई सांसदों ने उनके राज्य और जिले में उर्वरकों की उपलब्धता और आपूर्ति की जानकारी मांगी है।</p>
<p>भारत में यूरिया के बाद दूसरे सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाले उर्वरक डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP<em>)</em> का चीन से आयात तेजी से घटा है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि वर्ष 2023-24 में चीन से 22.28 लाख टन डीएपी का आयात हुआ था, जो 2024-25 में घटकर लगभग 8.47 लाख टन रह गया। जुलाई 2025 में चीन से मात्र 97 हजार टन डीएपी का आयात हुआ है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>चीन ने अक्टूबर 2021 में उर्वरकों के निर्यात से पहले अनिवार्य अतिरिक्त निरीक्षण की शर्त लगा दी थी, जिसके चलते डीएपी सहित अन्य उर्वरकों की निर्यात प्रक्रिया जटिल हो गई और आपूर्ति बाधित हुई है।</p>
<p>पिछले एक साल के दौरान डीएपी का आयात मूल्य (कॉस्ट एंड फ्रेट प्राइस) में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह से भी उर्वरक कंपनियों के लिए डीएपी का आयात करना मुश्किल हो गया है।</p>
<p><strong>डीएपी की आयात लागत बढ़ी</strong></p>
<p>केंद्रीय मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, डीएपी का कॉस्ट एंड फ्रेट प्राइस अप्रैल, 2024 में 542 अमेरिकी डॉलर प्रति टन से बढ़कर जुलाई, 2025 में लगभग 800 डॉलर प्रति टन हो गया।</p>
<p>सरकार ने स्पष्ट किया कि फॉस्फेटिक और पोटैशिक (P&amp;K) उर्वरक जैसे डीएपी ओपन जनरल लाइसेंस (OGL) के तहत आते हैं। उर्वरक कंपनियां इनका आयात या निर्माण करने के लिए स्वतंत्र हैं। उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार की ओर से कई कदम उठाए जाने की बात कही गई है।</p>
<p><strong>डीएपी उत्पादन में गिरावट &nbsp;</strong></p>
<p>लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने पिछले पांच वर्ष के दौरान देश में प्रमुख उर्वरकों के उत्पादन के आंकड़े रखे। इन आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन साल के दौरान देश में डीएपी का उत्पादन घटा है। वर्ष 2022-23 में 43.47 लाख टन डीएपी का उत्पादन हुआ था जो 2023-24 में घटकर 42.93 लाख टन रह गया। 2024-25 में भी डीएपी उत्पादन में गिरावट आई और यह 37.69 लाख टन पर आ गया, जो पांच साल पहले हुए डीएपी उत्पादन के स्तर पर है। &nbsp;</p>
<p>&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर संसद में लगी सवालों की झड़ी, सरकार ने माना चीन से घटा डीएपी आयात ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गलत साबित हुआ इस्मा का अनुमान, चालू सीजन के चीनी उत्पादन में 45 लाख टन की गिरावट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/isma-estimate-proved-wrong-45-lakh-tonne-drop-in-sugar-production-in-current-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 01 Aug 2025 10:27:47 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/isma-estimate-proved-wrong-45-lakh-tonne-drop-in-sugar-production-in-current-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सेटेलाइट, रिमोट सेंसिंग और एआई जैसी आधुनिक तकनीक के बावजूद फसल उत्पादन का सटीक अनुमान लगाना चुनौती बना हुआ है। यहां तक कि चीनी उद्योग का प्रमुख संगठन&nbsp;<strong>इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन&nbsp;(इस्मा)</strong> भी देश में चीनी उत्पादन का सही अनुमान लगाने में नाकाम साबित हुआ है।&nbsp;</p>
<p>पिछले साल जुलाई के आखिर में इस्मा ने चीनी सीजन 2024-25 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए <strong>333.10 लाख टन</strong> के सकल चीनी उत्पादन (इथेनॉल के लिए डाइवर्जन से पहले) का प्रारंभिक अनुमान दिया था। लेकिन यह अनुमान वास्तविकता से काफी दूर था। क्योंकि चीनी सीजन 2024-25 के दौरान देश में <strong>295 लाख टन</strong> चीनी का सकल उत्पादन होने जा रहा है। यह इस्मा के प्रारंभिक अनुमान के मुकाबले 38 लाख टन (11.41%) और 2023-24 के<strong> 340 लाख टन</strong>&nbsp;सकल चीनी उत्पादन से 45 लाख टन (13.2%) कम है।&nbsp;</p>
<p>इथेनॉल के लिए 34 लाख टन चीनी डायवर्जन के बाद चालू सीजन 2024-25 में कुल चीनी उत्पादन <strong>261 लाख टन</strong> रहेगा, जो पिछले सीजन के <strong>319 लाख टन</strong> कुल चीन उत्पादन से करीब 18 फीसदी कम है। शुरुआती अनुमानों के मुकाबले वास्तविक उत्पादन में इतनी बड़ी गिरवाट, समूचे चीनी उद्योग के लिए चिंताजनक है। क्योंकि उद्योग ही नहीं बल्कि सरकार की नीतियां और फैसले भी उत्पादन अनुमानों पर निर्भर करते हैं। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_688bbac3eeebd.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></strong></p>
<p style="text-align: center;"><em>30 जुलाई 2024 को इस्मा की ओर से जारी 2024-25 का पहला प्रारंभिक अनुमान&nbsp;</em></p>
<p>इस्मा के अध्यक्ष <strong>गौतम गोयल</strong> का कहना है कि पिछले साल उत्तर प्रदेश में <strong>रेड रॉट</strong> के प्रकोप और महाराष्ट्र व कर्नाटक में <strong>मौसम</strong> की वजह से गन्ने की फसल अप्रत्याशित रूप से प्रभावित हुई। जिसका असर चीनी उत्पादन पर पड़ा है। उनका मानना है कि इस साल मानसून में अच्छी बारिश और फसल की बेहतर स्थिति को देखते हुए आगामी सीजन में चीनी उत्पादन काफी बेहतर रहेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>उत्पादन अनुमानों</strong> के सटीक न होने की समस्या सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं है। देश में फसल उत्पादन के अनुमानों पर भी सवाल उठते रहे हैं। खासतौर पर गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमानों के बावजूद सरकार को गेहूं के निर्यात पर रोक और स्टॉक लिमिट की पाबंदियों जैसे कदम उठाने पड़े। गेहूं की महंगाई रोकना सरकार के लिए चुनौती बना रहा।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>रूरल वॉयस</strong> ने पिछले साल नवंबर में ही चीनी उत्पादन में गिरावट की आशंका संबंधी <a href="https://www.ruralvoice.in/agribusiness/sugar-production-is-estimated-to-decline-by-39-lakh-tonnes-in-the-current-season.html">खबर</a> प्रकाशित कर दी थी। गन्ने की&nbsp;<span>फसल में रोग, मौसम की मार और कम चीनी रिकवरी को देखते हुए लग रहा था कि चीनी उत्पादन में काफी गिरावट आएगी। लेकिन सवाल है कि सरकार, उद्योग जगत और शोध संस्थान चीनी उत्पादन में इस गिरावट को भांपने में क्यों नाकाम रहे?&nbsp; &nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_688c366f41cc7.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>अगले सीजन में 349 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान</strong></p>
<p>गुरुवार को इस्मा ने आगामी चीनी सीजन <strong>2025-26</strong> के लिए प्रारंभिक अनुमान जारी करते हुए, सकल चीनी उत्पादन 18 प्रतिशत बढ़कर <strong>349 लाख टन</strong> तक पहुंचने की संभावना जताई है। उत्पादन में बढ़ोतरी को देखते हुए इस्मा ने सरकार से &ldquo;समय&rdquo; रहते <strong>20 लाख टन</strong> चीनी के निर्यात और इथेनॉल के लिए <strong>50 लाख टन</strong> चीनी के आवंटन का आग्रह किया है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_688c2ee433ab7.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>31 जुलाई 2025 को&nbsp;आगामी सीजन 2025-26 के लिए जारी इस्मा का पहला प्रारंभिक अनुमान&nbsp;</em></p>
<p>इस्मा के महानिदेशक <strong>दीपक बल्लानी</strong> ने बताया कि चालू सीजन के अंत तक<strong> 52 लाख टन</strong> चीनी का क्लोजिंग स्टॉक रहेगा। इस तरह अगले सीजन में 284 लाख टन चीनी की घरेलू खपत आराम से पूरी हो जाएगी। उनका कहना है कि अगर सरकार ने समय रहते चीनी के निर्यात और इथेनॉल की कीमतों में वृद्धि पर निर्णय नहीं लिया तो चीनी उद्योग की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। इस्मा ने सरकार से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने की मांग भी दोहराई है।&nbsp;</p>
<p>इस्मा के अध्यक्ष <strong>गौतम गोयल</strong> ने प्रारंभिक अनुमान जारी करते हुए बताया कि<strong> महाराष्ट्र</strong> में गन्ने की बुवाई का क्षेत्र लगभग 8 फीसदी बढ़कर 14.93 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। मई में अच्छी बारिश, सामान्य मानसून और फसल की बेहतर स्थिति को देखते हुए महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन 42 फीसदी बढ़कर 132.68 लाख रहने का अनुमान है। <strong>कर्नाटक</strong> में गन्ने का क्षेत्र लगभग 6 फीसदी बढ़ा है और चीनी उत्पादन 23 फीसदी बढ़कर 66.19 लाख टन तक पहुंच सकता है।</p>
<p><strong>यूपी में गन्ना क्षेत्र 3 फीसदी घटा&nbsp;</strong></p>
<p>देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य<strong> उत्तर प्रदेश</strong> में गन्ने की बुवाई का क्षेत्र 3 फीसदी घटकर 22.57 लाख हेक्टेयर रह गया है। इस्मा का अनुमान है कि इस साल यूपी में गन्ने की फसल पिछले साल से काफी बेहतर है और रोगों का प्रकोप भी नहीं है। इसलिए राज्य में चीनी उत्पादन पिछले साल के 100.74 लाख टन से बढ़कर 102.53 लाख टन तक पहुंच सकता है।&nbsp;</p>
<p>इस्मा का कहना है कि फसल अभी भी अपने प्रारंभिक चरण में है, और कई कारक इसकी अंतिम गुणवत्ता और उपज को प्रभावित करेंगे। फिर भी, वर्तमान स्थिति के आधार पर पहला प्रारंभिक अनुमान जारी किया है। अगला अनुमान सितंबर में जारी किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_688c379011b5d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गलत साबित हुआ इस्मा का अनुमान, चालू सीजन के चीनी उत्पादन में 45 लाख टन की गिरावट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_688c379011b5d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जून के औद्योगिक उत्पादन में 10 महीने की सबसे कम 1.5% वृद्धि, जानिए क्या है गिरावट की वजह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/industrial-production-growth-in-june-at-1.5-pc-lowest-in-10-months-know-the-reason.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 29 Jul 2025 12:20:48 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/industrial-production-growth-in-june-at-1.5-pc-lowest-in-10-months-know-the-reason.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="185" data-end="581">जून 2025 में भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि घटकर 1.5% रह गई, जो पिछले 10 महीनों में सबसे निचला स्तर है। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, खनन, बिजली, शीतल पेय और रसायन&nbsp;क्षेत्रों के कमजोर प्रदर्शन के चलते यह गिरावट दर्ज की गई। औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि को औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आधार पर आंका जाता है।</p>
<p data-start="583" data-end="743">जून 2024 में औद्योगिक उत्पादन में 4.9% की वृद्धि हुई थी, जबकि मई 2025 के आंकड़ों को संशोधित कर 1.9% कर दिया गया है, जो पहले 1.2% बताई गई थी। देश के औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर में गिरावट अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है।&nbsp;</p>
<p data-start="745" data-end="1179">खनन क्षेत्र का उत्पादन जून में साल-दर-साल 8.7% घटा, जबकि बिजली उत्पादन में 2.6% की गिरावट दर्ज की गई। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जून में देशभर में हुई अत्यधिक बारिश ने कई क्षेत्रों के प्रदर्शन को प्रभावित किया।</p>
<p data-start="745" data-end="1179">शीतल पेय के उत्पादन में 6.5% की कमी आई है, जिसे मानसून के शीघ्र आगमन और अच्छी बारिश से जोड़ा जा रहा है। अप्रैल-जून 2025 के दौरान शीतल पेय उत्पादन में 4% की गिरावट दर्ज की गई। खाद्य वस्तुओं के उत्पादन में जून में कोई वृद्धि हुई है, जबकि पहली तिमाही के दौरान 0.9 फीसदी की मामूली वृद्धि दर्ज की गई है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_68886d93198b1.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="1186" data-end="1232"><strong>पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि 2%</strong></p>
<p data-start="1234" data-end="1694">वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर सिर्फ 2.0% रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 5.4% थी। यह पिछली 11 तिमाहियों में औद्योगिक उत्पादन में सबसे धीमी वृद्धि है। अत्यधिक वर्षा ने जहां बिजली और खनन को प्रभावित किया, वहीं विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर भी सुस्त रही। हालांकि, सीमेंट उत्पादन और तैयार स्टील की खपत जैसे निर्माण क्षेत्र से जुड़े संकेतकों में धीमी लेकिन स्थिर वृद्धि दर्ज की गई।</p>
<p data-start="1696" data-end="1905">इन परिस्थितियों को देखते हुए वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में औद्योगिक सकल मूल्य वर्धन (GVA) की वृद्धि दर, जनवरी-मार्च 2025 की 6.5% वृद्धि की तुलना में कम रह सकती है।&nbsp;</p>
<p data-start="1696" data-end="1905"></p>
<p data-start="1696" data-end="1905"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_68886e33e20da.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जून के औद्योगिक उत्पादन में 10 महीने की सबसे कम 1.5% वृद्धि, जानिए क्या है गिरावट की वजह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_68886e33e20da.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान, कृषि और फूड प्रोसेसिंग के लिए कितना फायदेमंद है भारत&amp;#45;ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/how-beneficial-is-the-india-uk-free-trade-agreement-for-farmers-agriculture-and-food-processing.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 27 Jul 2025 23:26:36 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/how-beneficial-is-the-india-uk-free-trade-agreement-for-farmers-agriculture-and-food-processing.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले सप्ताह भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) खास तौर से कृषि क्षेत्र के लिए व्यापक रूप से फायदेमंद माना जा रहा है। कृषि के साथ प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस ऐतिहासिक समझौते से भारतीय किसानों, खाद्य प्रसंस्करणकर्ताओं और समुद्री उत्पाद निर्यातकों के लिए अभूतपूर्व अवसर खुलेंगे।</p>
<p>भारतीय किसानों को अब ब्रिटेन के विशाल 37.5 अरब डॉलर के कृषि बाजार में प्राथमिकता प्राप्त होगी। CETA के तहत 95% कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों पर अब कोई शुल्क नहीं लगेगा। पहले इन पर कुछ मामलों में 70% तक शुल्क लगता था। यह बदलाव ब्रिटेन में भारतीय उत्पादों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा।</p>
<p><strong>शून्य शुल्क वाले प्रमुख कृषि उत्पादों में शामिल हैं:</strong><br />फल और सब्ज़ियां: इससे महाराष्ट्र (अंगूर, प्याज) और केरल (मसाले) जैसे राज्यों के किसानों को लाभ होगा, क्योंकि ताजे और प्रसंस्कृत भारतीय फल और सब्जियां ब्रिटेन में अधिक सुलभ होंगी।<br />अनाज: पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से बासमती सहित विभिन्न प्रकार के भारतीय चावल की ब्रिटेन में आसान पहुंच सुनिश्चित होगी।<br />मसाले: तमिलनाडु और केरल से हल्दी, काली मिर्च और इलायची अब ब्रिटेन बाज़ार में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगी। ब्रिटेन पहले से ही भारतीय मसालों का बड़ा आयातक है, जो अब और बढ़ेगा।<br />चाय और कॉफी: भारतीय चाय और कॉफी, जैसे दार्जिलिंग चाय और आंध्र प्रदेश की अराकू कॉफी को शून्य शुल्क का लाभ मिलेगा जिससे इनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी।</p>
<p>इस व्यापक बाजार पहुंच से अगले तीन वर्षों में भारत के कृषि निर्यात में 20% से अधिक की वृद्धि का अनुमान है। यह 2030 तक 100 अरब डॉलर के कृषि निर्यात लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगी।</p>
<p><strong>प्रोसेस्ड फूड सेक्टर को मिलेगा बड़ा लाभ</strong><br />प्रोसेस्ड फूड क्षेत्र इस समझौते का सबसे बड़ा लाभार्थी होगा, जिसमें 99.7% टैरिफ लाइन पर शुल्क 70% से घटाकर शून्य कर दिया गया है। इसमें तैयार खाद्य पदार्थ, आम का पल्प और अचार, दालें और पैक किए गए खाद्य उत्पाद शामिल हैं। इससे भारत में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में वृद्धि होगी, रोजगार सृजन होगा और ग्रामीण समुदायों को वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ा जा सकेगा।</p>
<p><strong>भारत के डेयरी क्षेत्र की पूरी सुरक्षा</strong><br />महत्वपूर्ण बात यह है कि CETA को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि वह भारत के संवेदनशील कृषि क्षेत्रों जैसे कि डेयरी उत्पाद, सेब, खाद्य तेल और जई को पूरी तरह सुरक्षा प्रदान करता है। इन श्रेणियों पर भारत ने कोई शुल्क रियायत नहीं दी है, जिससे देश के किसानों और उत्पादकों के हित सुरक्षित रहेंगे।</p>
<p><strong>समुद्री उत्पादों को मिलेगा नया विस्तार</strong><br />भारत के समुद्री उत्पाद निर्यातकों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। पहले समुद्री उत्पादों पर ब्रिटेन में अधिकतम 20% शुल्क लगता था (झींगा और टूना पर 4.2% से 8.5%), जो अब शून्य हो जाएगा। इससे भारत के समुद्री खाद्य उद्योग को ब्रिटेन के 5.4 अरब डॉलर के बाजार में बड़ी पहुंच मिलेगी। इसका सीधा लाभ आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल और तमिलनाडु जैसे तटीय राज्यों के मछुआरों को मिलेगा।</p>
<p><strong>व्यापक लाभ और किसानों की समृद्धि</strong><br />विशेषज्ञों ने भी इस समझौते के व्यापक प्रभावों की बात कही है। डेलॉय इंडिया के पार्टनर अनिल तलरेजा ने इसे &ldquo;ऐतिहासिक क्षण&rdquo; बताया, जो व्यापार को मजबूत करेगा, निवेश को बढ़ावा देगा और उभरते क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाएगा। CMS INDUSLAW के पार्टनर शशि मैथ्यूज ने कहा कि शुल्कों में तेज़ी से कटौती से दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का मार्ग प्रशस्त होगा।</p>
<p>व्यापार संवर्धन परिषद (TPCI) ने FTA को ऐतिहासिक आर्थिक उपलब्धि बताया। परिषद के अध्यक्ष मोहित सिंघला ने कहा, &ldquo;यह समझौता ब्रिटेन के बाज़ार में भारतीय वस्तुओं को 99% तक शुल्क-मुक्त पहुंच देता है, जिससे निर्यात क्षमता बढ़ेगी। इसमें एक ऐतिहासिक प्रावधान भी शामिल है कि पहली बार किसी व्यापार समझौते में ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को पहले तीन वर्षों के लिए कर में छूट मिलेगी।&rdquo; उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता भारत को वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करने और निर्यात को दोगुना करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो ग्रामीण समृद्धि को भी आगे बढ़ाएगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान, कृषि और फूड प्रोसेसिंग के लिए कितना फायदेमंद है भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत और मालदीव के बीच मछली पालन और एक्वाकल्चर क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-and-maldives-sign-mou-to-boost-sustainable-fisheries-and-aquaculture-cooperation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 27 Jul 2025 23:04:17 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-and-maldives-sign-mou-to-boost-sustainable-fisheries-and-aquaculture-cooperation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>समुद्री क्षेत्र में सहयोग को मजबूती देने की दिशा में भारत और मालदीव ने एक अहम समझौता किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा के दौरान दोनों देशों ने मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है। यह समझौता 25 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच हुए 6 महत्वपूर्ण समझौतों में से एक है।</p>
<p>इस साझेदारी का मकसद ट्यूना और गहरे समुद्र में मत्स्य पालन को बढ़ावा देना, एक्वाकल्चर और सतत संसाधन प्रबंधन को मजबूत करना, मत्स्य पालन पर आधारित ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देना और दोनों देशों के बीच नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है।</p>
<p>इस समझौते में सहयोग के जिन प्रमुख क्षेत्रों का ज़िक्र किया गया है, उनमें वैल्यू चेन का विकास, समुद्री कृषि की उन्नति, व्यापार में सुगमता और मत्स्यपालन क्षेत्र में क्षमता निर्माण शामिल हैं। इस पहल के तहत मालदीव कोल्ड स्टोरेज से जुड़ी ढांचागत व्यवस्था में निवेश करके और हैचरी विकास, बेहतर उत्पादन क्षमता और संवर्धित प्रजातियों के विविधीकरण के ज़रिए, एक्वाकल्चर क्षेत्र को मज़बूत करते हुए अपनी क्षमताओं का विस्तार करेगा।</p>
<p>यह समझौता ज्ञापन प्रशिक्षण और ज्ञान आदान-प्रदान कार्यक्रमों को भी आसान बनाएगा, जिसमें जलीय पशु स्वास्थ्य, जैव सुरक्षा जांच, जलीय कृषि फार्म प्रबंधन और रेफ्रीजरेशन, मेकैनिकल इंजीनियरिंग और मरीन इंजीनियरिंग जैसे खास तकनीकी क्षेत्रों में क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि इस क्षेत्र में दीर्घकालिक कौशल विकास को बढ़ावा दिया जा सके।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_68851163901be.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत और मालदीव के बीच मछली पालन और एक्वाकल्चर क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[India&amp;#45;UK FTA: ब्रिटेन में आयात पर शुल्क खत्म होने से भारत के सीफूड निर्यात में 70% वृद्धि का अनुमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-seafood-industry-poised-to-ride-ceta-wave-with-estimated-70-percent-export-growth-to-uk.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Jul 2025 22:15:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-seafood-industry-poised-to-ride-ceta-wave-with-estimated-70-percent-export-growth-to-uk.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) भारत के सीफूड सेक्टर के लिए काफी लाभदायक हो सकता है। सीईटीए के तहत भारतीय झींगा, स्क्विड, लॉबस्टर आदि पर ब्रिटेन में कोई आयात शुल्क नहीं लगेगा। यह समझौता 24 जुलाई 2025 को हुआ था। इसमें भारत से 99% टैरिफ लाइन के आयात पर ब्रिटेन कोई शुल्क नहीं लगाएगा।</p>
<p>इस समझौते में समुद्री खाद्य उत्पादों की एक बड़ी श्रृंखला पर आयात शुल्क हटाया गया है, जिससे ब्रिटेन के बाजार में भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। इससे विशेष रूप से झींगा, फ्रोजन मछली और मूल्यवर्धित समुद्री उत्पादों का निर्यात बढ़ने की उम्मीद है। भारत से ब्रिटेन को किए जाने वाले प्रमुख समुद्री खाद्य निर्यातों में वन्नामेई झींगा (लिटोपेनियस वन्नामेई), फ्रोजन स्क्विड, झींगा मछली, फ्रोजन पॉम्फ्रेट और ब्लैक टाइगर झींगा शामिल हैं। सीईटीए के कारण इन सबकी बाजार हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>समझौते में शामिल सीफूड एचएस कोड के हिसाब से इस प्रकार हैंः</strong><br />एचएस कोड 03: मछली, क्रस्टेशियन, मोलस्क और अन्य जलीय अकशेरुकी (जैसे, झींगा, ट्यूना, मैकेरल, सार्डिन, स्क्विड, केकड़ा, कटलफिश, फ्रोजन पॉम्फ्रेट, लॉबस्टर)<br />एचएस कोड 05: मूंगा, कौड़ी, आर्टेमिया, आदि<br />एचएस कोड 15: मछली के तेल और समुद्री वसा<br />एचएस कोड 1603/1604/1605: तैयार या संरक्षित समुद्री भोजन, कैवियार, अर्क और रस<br />एचएस कोड 23: मछली का भोजन, मछली और झींगा का चारा, और पशु चारे में प्रयुक्त अवशेष<br />एचएस कोड 95: मछली पकड़ने का सामान (छड़, हुक, रील, आदि)</p>
<p>इन उत्पादों पर अब तक 0% से 21.5% तक का शुल्क लगता था, जो अब हटा दिया गया है। हालांकि, एचएस 1601 (सॉसेज और इसी तरह की वस्तुएं) के तहत आने वाले उत्पाद इस छूट में शामिल नहीं किए गए हैं।</p>
<p><strong>भारत से सीफूड का निर्यात</strong><br />2024-25 में भारत का कुल समुद्री खाद्य निर्यात 7.38 अरब डॉलर (60,523 करोड़ रुपए) तक पहुंच गया, जो 17.8 लाख मीट्रिक टन के बराबर था। 4.88 अरब डॉलर की आय और 66% हिस्सेदारी के साथ फ्रोजन झींगा सबसे बड़ा निर्यात प्रोडक्ट रहा। ब्रिटेन को समुद्री निर्यात 10.4 करोड़ डॉलर (879 करोड़ रुपए) का था, जिसमें अकेले फ्रोजन झींगा का योगदान 8 करोड़ डॉलर (77%) था। हालांकि ब्रिटेन के 5.4 अरब डॉलर के समुद्री खाद्य आयात में भारत की हिस्सेदारी महज़ 2.25% है। अब सीईटीए लागू होने के साथ, उद्योग जगत का अनुमान है कि आने वाले सालों में ब्रिटेन को समुद्री निर्यात में 70% की वृद्धि होगी।</p>
<p>मत्स्य पालन क्षेत्र करीब 2.8 करोड़ भारतीयों की आजीविका में मददगार साबित हो रहा है और वैश्विक मछली उत्पादन में लगभग 8% का योगदान देता है। 2014-15 और 2024-25 के बीच, भारत का समुद्री खाद्य निर्यात, 10.51 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 16.85 लाख मीट्रिक टन (60% वृद्धि) हो गया, जबकि इसका मूल्य 33,441.61 करोड़ रुपए से बढ़कर 62,408 करोड़ रुपए हो गया (88% वृद्धि)। निर्यात गंतव्यों की संख्या भी 100 से बढ़कर 130 देशों तक हो गई। मूल्य वर्धित उत्पादों का निर्यात तिगुना बढ़कर 7,666.38 करोड़ रुपए हो गया।</p>
<p>मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार आंध्र प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात जैसे तटीय राज्य, जो पहले से ही समुद्री खाद्य निर्यात में बड़े खिलाड़ी हैं, सीईटीए का लाभ उठा सकते हैं। ब्रिटेन के स्वच्छता और फाइटोसैनिटरी (एसपीएस) मानकों को पूरा करने के लिए लक्षित प्रयासों के साथ, ये राज्य अपने निर्यात का दायरा और अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों के अनुपालन को बढ़ा सकते हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ India-UK FTA: ब्रिटेन में आयात पर शुल्क खत्म होने से भारत के सीफूड निर्यात में 70% वृद्धि का अनुमान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चावल के FCI स्टॉक में टूटे चावल की मात्रा कम होगी, इथेनॉल के लिए 100% टूटे चावल की सप्लाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/broken-rice-to-be-separated-from-fci-stock-for-ethanol-market-use.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Jul 2025 19:31:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/broken-rice-to-be-separated-from-fci-stock-for-ethanol-market-use.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार एफसीआई (FCI) के चावल स्टॉक की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास करने जा रही है। इसके तहत 50 लाख टन चावल में से टूटे हुए दानों को अलग किया जाएगा, जिससे चावल की गुणवत्ता और बाजार कीमत दोनों बढ़ेगी।</p>
<p>पिछले वर्ष एफसीआई ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पंजाब, हरियाणा, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ चावल मिलों के लिए एक नई व्यवस्था शुरू की थी। उसमें 10,000 टन चावल में से 15% टूटे चावल को अलग किया गया। इसका मकसद यह था कि केंद्र सरकार के लिए खरीदे गए चावल में टूटे दानों की मात्रा 25% से घटाकर 10% तक लाई जाए।</p>
<p>इस साल सरकार ने 52 लाख टन चावल इथेनॉल बनाने के लिए निर्धारित किया है, जिसमें ज्यादातर 100% टूटे हुए चावल ही इस्तेमाल किए जाएंगे। नए मॉडल के तहत चावल मिलें पहले चावल से 15% टूटे दाने अलग करेंगी। इससे बचा हुआ चावल सिर्फ 10% टूटे दानों वाला रहेगा। कम टूटे चावल की खुले बाजार में अच्छी कीमत भी मिल सकेगी।</p>
<p>अगर किसी चावल मिल को 100 क्विंटल चावल देना है, तो अब वह 85 क्विंटल अच्छा चावल (10% टूटे दानों के साथ) और 15 क्विंटल पूरी तरह टूटे चावल अलग-अलग देगी। इससे न सिर्फ एफसीआई के स्टॉक की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि इथेनॉल के लिए अलग से टूटे चावल की आपूर्ति भी सुनिश्चित हो पाएगी।</p>
<p>भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संघ (IVPA) के एक सम्मेलन में खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने बताया कि 10% टूटे दानों वाला चावल खुले बाजार में नीलाम किया जाएगा। वहीं, पूरी तरह टूटे चावल सीधे मिलों से इथेनॉल बनाने वाली डिस्टिलरियों को बेचे जाएंगे, जिससे सरकार को भंडारण, परिवहन और फोर्टिफिकेशन की लागत में बचत होगी।</p>
<p>फिलहाल एफसीआई के पास जरूरत से ज्यादा चावल का भंडार है, जिसे खुले बाजार में बेचना मुश्किल हो रहा है क्योंकि उसकी मांग कम है। सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम जैसी योजनाओं के तहत चावल वितरित कर रही है, फिर भी बड़ी मात्रा में स्टॉक बचा हुआ है।</p>
<p>इस समय 10% टूटे वाला चावल निजी खरीदारों को बेचा जा रहा है, और आने वाले समय में सरकार इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में देने पर भी विचार कर सकती है। हालांकि खाद्य सचिव ने साफ किया कि फिलहाल यह कदम कुछ क्षेत्रों में ही संभव हो पाएगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_6884df4bb0da9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चावल के FCI स्टॉक में टूटे चावल की मात्रा कम होगी, इथेनॉल के लिए 100% टूटे चावल की सप्लाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नकली कीटनाशकों पर शिकंजा कसने की तैयारी, कृषि मंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/ready-to-crack-down-on-fake-pesticides-agriculture-minister-gave-instructions-to-officials.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 25 Jul 2025 13:02:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/ready-to-crack-down-on-fake-pesticides-agriculture-minister-gave-instructions-to-officials.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह ने नकली कीटनाशकों के मुद्दा पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए गुरुवार को इस मामले पर एक उच्चस्तरीय बैठक की और अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्यों में प्रवास के दौरान किसानों से शिकायत मिलती है कि कई बार नकली कीटनाशकों के कारण उनकी फसल खराब हो जाती है। इनका समुचित निवारण करते हुए किसानों के हित में नकली या अमानक कीटनाशकों को बाजार में आने से पूरी तरह रोकना होगा।</p>
<p>शिवराज सिंह स्पष्ट रूप से कहा कि नकली व अमानक कीटनाशक किसी भी हालत में बिकने नहीं पाएं। साथ ही, उन्होंने निर्देश दिए कि कीटनाशकों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पारदर्शी होना चाहिए।&nbsp; अधिकारियों से कहा कि वे राज्य सरकारों के साथ मिलकर पूरे सिस्टम को मजबूत बनाएं।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि कीटनाशकों के पंजीयन की प्रक्रिया ऐसी होना चाहिए कि जिससे किसी को भी कृषि विभाग के चक्कर नहीं लगाना पड़े। ना ही कोई गड़बड़ी होने पाएं। प्रक्रिया के दौरान ट्रेकिंग की व्यवस्था भी हो। कोई बेईमानी करता है, नकली या घटिया कीटनाशक बेचता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में हमें विभिन्न स्तरों पर काम करना होगा। उनकी फसल नकली कीटनाशकों के कारण खराब नहीं होना चाहिए।</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वरिष्ठ अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि खेतों में फसलों में क्या-क्या परिवर्तन आ रहा है, यह नियमित रूप से देखते हुए किसानों को समुचित सलाह प्रभावी तरीके से तत्काल दी जाना चाहिए। कृषि प्रसार व कृषि विज्ञान केंद्रों का अमला राज्यों के कृषि अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ मिलकर इस बारे में किसानों को जागरूक और शिक्षित करें, ताकि वे नुकसान से बचें।</p>
<p>बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक एवं सचिव डेयर डॉ मांगी लाल जाट सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जिन्होंने अपने सुझाव दिए।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_6883328016058.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नकली कीटनाशकों पर शिकंजा कसने की तैयारी, कृषि मंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डीएपी संकट की असली वजह: अप्रैल&amp;#45;जून में आयात 12.9% घटा, बिक्री में आई 19.4% की गिरावट  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/real-reason-behind-the-dap-fertilizer-crisis-imports-fell-12-in-april-june-sales-fell-by-19-pc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 24 Jul 2025 18:10:10 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/real-reason-behind-the-dap-fertilizer-crisis-imports-fell-12-in-april-june-sales-fell-by-19-pc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खरीफ सीजन की बुवाई के दौरान देश के कई राज्यों में किसानों को डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) जैसे अहम उर्वरक मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उर्वरकों को लेकर पैदा इन स्थितियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों और आयात से जोड़कर देखा जा रहा है। क्योंकि उर्वरकों के मामले में देश की आयात पर अत्यधिक निर्भरता है।</p>
<p>रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि अप्रैल में 2.89 लाख टन, मई में 2.36 लाख टन और जून में 4.49 लाख टन डीएपी &nbsp;का आयात किया गया।</p>
<p>इस तरह चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कुल <strong>9.74 </strong><strong>लाख</strong> टन डीएपी का आयात किया गया, जो पिछले साल इन तीन महीनों में हुए <strong>11.18 लाख टन</strong> डीएपी आयात से 12.9 फीसदी कम है। इन तीन महीनों के दौरान देश में कुल 15.53 लाख टन डीएपी की बिक्री हुई जो पिछले साल इसी अवधि के मुकाबले 19.4 फीसदी कम है। यानी डीएपी के आयात में जितनी कमी आई, बिक्री में उससे भी अधिक गिरावट दर्ज की गई है।</p>
<p>राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि इस साल 1 अप्रैल को देश में डीएपी का ओपनिंग स्टॉक 9.15 लाख टन था। जबकि पिछले साल 1 अप्रैल, 2024 <span>को डीएपी का ओपनिंग स्टॉक 17.75 लाख टन था। यानी अप्रैल से ही डीएपी का स्टॉक पिछले साल के मुकाबले काफी कम था।&nbsp;</span></p>
<p>केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के अनुसार, &ldquo;2025 के खरीफ सीजन के दौरान रासायनिक उर्वरकों की जरूरत पिछले साल की तुलना में थोड़ी ज़्यादा है, क्योंकि बुआई का दायरा बढ़ा है और मानसून अनुकूल है।"&nbsp;</p>
<p>भारत में डीएपी की सालाना खपत लगभग 111 लाख टन है, जिसमें से आधे से अधिक हिस्से की पूर्ति आयात से की जाती है। अंतराष्ट्रीय बाजार में डीएपी की ऊंची कीमतों, भूराजनीतिक परिस्थितियों और व्यापारिक बाधाओं के चलते हाल के वर्षों में डीएपी का आयात प्रभावित हुआ है।&nbsp;</p>
<p><strong>पांच साल से उत्पादन स्थिर</strong><strong>, <span>आयात घटा </span></strong></p>
<p>सरकारी आंकड़ों के अनुसार, <span>वर्ष 2020</span>-21 <span>के दौरान देश में 48.82 लाख टन डीएपी का आयात हुआ था</span>, <span>जबकि डीएपी का उत्पादन 37.74 लाख टन था। इसके बाद </span>2022-23 <span>में डीएपी आयात बढ़कर 65.83 लाख टन और उत्पादन 43.51 लाख टन तक पहुंच गया था। लेकिन 2024-25 में डीएपी का आयात घटकर 45.69 लाख टन रह गया और घरेलू उत्पादन गिरकर 37.72 लाख टन पर आ गई। डीएपी को लेकर आ रही दिक्कतों को आयात और उत्पादन में आई कमी से समझा जा सकता है।</span></p>
<p>भारत डीएपी के आयात के लिए चीन, मोरक्को, सऊदी अरब और रूस जैसे देशों पर निर्भर रहा है। हालांकि, चीन से आपूर्ति में गिरावट के चलते भारत ने बीते दो वर्षों में चीन पर निर्भरता घटाई है। वर्ष 2023-24 में भारत का लगभग 40 फीसदी डीएपी आयात चीन से हुआ था, जो 2025 में घटकर 19 फीसदी रह गया है।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>डीएपी भंडार की स्थिति </strong></p>
<p>इस साल 1 जून 2025 तक देश में डीएपी का कुल भंडार 12.4 लाख टन था, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 21.6 लाख टन और 2023 के 33.2 लाख टन के मुकाबले काफी कम है। इससे खरीफ फसलों के दौरान संभावित आपूर्ति संकट की चिंता भी जताई जा रही है। इन आंकड़ों का सीधा मतलब है कि उर्वरक कंपनियां डीएपी और उसके कच्चे माल फॉस्फोरिक एसिड और रॉक फॉस्फोरस का कम आयात कर रही हैं।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>ऊंची आयात कीमतों का असर </strong></p>
<p>देश में यूरिया के बाद सबसे अधिक खपत वाले उर्वरक डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की आयात कीमतें 810 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई हैं। जिससे चलते उर्वरक कंपनियों ने पिछले साल के मुकाबले कम डीएपी आयात किया है। इससे किसानों को डीएपी की उपलब्धता में समस्या का सामना करना पड़ रहा है और कालाबाजारी भी बढ़ रही है।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ डीएपी संकट की असली वजह: अप्रैल-जून में आयात 12.9% घटा, बिक्री में आई 19.4% की गिरावट   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सेहत या सियासत? 21 जून की वे घटनाएं जिनसे जुड़े हैं धनखड़ के इस्तीफे के तार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/health-or-politics-the-events-of-june-21-that-are-linked-to-jagdeep-dhankhar-resignation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 22 Jul 2025 15:07:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/health-or-politics-the-events-of-june-21-that-are-linked-to-jagdeep-dhankhar-resignation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कल रात अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है। इस खबर ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है।</p>
<p>हालांकि, यह बात सही है कि जगदीप धनखड़ का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। लेकिन कल दिन भर उनकी सक्रियता को देखते हुए, उनका अचानक इस्तीफा गले नहीं उतर रहा है। उनके इस कदम के सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>कांग्रेस के वरिष्ठ नेता <strong>जयराम रमेश</strong> ने कहा कि जितना दिख रहा है, मामला उससे कहीं अधिक है। इसके पीछे कुछ और गहरे कारण हैं। हालांकि, भाजपा अध्यक्ष <strong>जे.पी. नड्डा</strong> ने इसे निजी निर्णय करार देते हुए कहा कि इसका राजनीतिकरण करना अनुचित है।&nbsp;</p>
<p>आइये, सिलसिलेवार ढंग से जानते हैं कि आखिर <strong>21 जुलाई</strong> के दिन ऐसा क्या हुआ कि रात होते-होते उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा देने का फैसला कर लिया।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>सुबह 11 बजे </strong><strong>&ndash;</strong> <strong>मॉनसून सत्र का उद्घाटन</strong></p>
<p>राज्यसभा के सभापति के तौर पर जगदीप धनखड़ ने मानसून सत्र का शुभांरभ किया और नए सदस्यों को शपथ दिलाई।</p>
<p><strong>खड़गे और नड्डा की बहस&nbsp;</strong> &nbsp;</p>
<p>ऑपरेशन सिंदूर पर जब नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर तीखे प्रहार किए तो सभापति ने उन्हें बोलने का मौका दिया। साथ ही विपक्ष को ऑपरेशन सिंदूर पर पूरी बहस का भरोसा दिलाया।</p>
<p>इस दौरान जेपी नड्डा और खड़गे के बीच बहस हुई तो नड्डा ने कहा कि <strong>&ldquo;कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं जाएगा, मैं जो बोलूंगा वो ही रिकॉर्ड में जाएगा। आपको ये पता होना चाहिए।&rdquo;&nbsp;</strong>नड्डा के इस बयान पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। क्योंकि ऐसा कहने का अधिकार सभापति का होता है। यह बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>दोपहर 12.30 बजे: कार्य मंत्रणा समिति की बैठक</strong></p>
<p>जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति की अध्यक्षता की। इस बैठक में सदन के नेता जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू समेत ज़्यादातर सदस्य मौजूद थे। थोड़ी देर की चर्चा के बाद तय हुआ कि समिति की अगली बैठक शाम 4:30 बजे फिर से होगी।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>दोपहर बाद 3:53 बजे</strong><strong>:</strong> उपराष्ट्रपति कार्यालय की ओर से 23 जुलाई को उनके जयपुर में कार्यक्रम की सूचना जारी की गई। यानी शाम चार बजे तक इस्तीफे की कोई बात नहीं थी।</p>
<p><strong>शाम 4.05 बजे:&nbsp;</strong><strong>जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव&nbsp;</strong></p>
<p><span>विपक्ष ने<strong> जस्टिस यशवंत वर्मा</strong> पर महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया।&nbsp;</span>सभापति जगदीश धनखड़ ने महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस प्राप्त होने की घोषणा करते हुए कहा कि यह 50 <span>से अधिक सदस्यों के हस्ताक्षर की शर्त पूरी करता है। इस संबंध में उन्होंने राज्यसभा के महासचिव को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिये।&nbsp;</span></p>
<p><span>जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी 145 सांसदों ने एक ज्ञापन सौंपा था</span><span>। ऐसे&nbsp;</span>महाभियोग के लिए कम से कम 50 राज्यसभा सांसदों या 100 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>शाम 4.30 बजे: कार्य मंत्रणा समिति की फिर बैठक</strong></p>
<p>धनखड़ की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति के सदस्य दोबारा बैठक के लिए इकट्ठा हुए। सभी नड्डा और रिजिजू का इंतजार करते रहे, लेकिन वे नहीं आए। समिति की अगली बैठक आज दोपहर 1 बजे के लिए टाल दी। कहा जा रहा है कि धनखड़ मीटिंग में नेता सदन जेपी नड्डा और संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू की गैरमौजूदगी से नाखुश थे। कुछ सांसदों ने भी नड्डा और रिजिजू के न आने पर सवाल उठाए।</p>
<p><strong>जयराम रमेश</strong> ने अंदेशा जताया है कि 21 जुलाई को दोपहर 1 बजे से शाम 4.30 बजे के बीच जरूर कुछ गंभीर बात हुई, जिसकी वजह से जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू ने शाम की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने आज दोपहर 1 बजे बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक बुलाई थी और न्यायपालिका से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण घोषणा करने वाले थे।&nbsp;</p>
<p><strong>शाम 5.30 बजे:</strong> विपक्षी सांसद धनखड़ से मिलने पहुंचे। लगभग 6 बजे खबर आई कि महाभियोग प्रस्ताव पर 50 नहीं 49 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। एक सांसद ने दो बार हस्ताक्षर किए हैं। यह बात काफी हैरान करने वाली थी। क्योंकि पहले भी इस तरह का मामला सामने आ चुका है जिसकी पड़ताल जारी है। पिछले साल सदन में 500 के नोट मिलने के मामले की जांच को लेकर भी धनखड़ ने नाराजगी जाहिर की थी।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>शाम 7-8 बजे:&nbsp;</strong> जगदीप धनखड़ ने शीर्ष केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक की। इसके लगभग डेढ़ घंटे बाद उपराष्ट्रपति का इस्तीफा हो गया।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सेहत या सियासत? 21 जून की वे घटनाएं जिनसे जुड़े हैं धनखड़ के इस्तीफे के तार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान, खाद्य सुरक्षा और द्विपक्षीय व्यापार पर गतिरोध, क्या भारत ट्रंप को ना कह सकता है?]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/can-india-say-no-to-trump-farmers-food-security-and-the-high-stakes-trade-stand-off.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 20 Jul 2025 23:27:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/can-india-say-no-to-trump-farmers-food-security-and-the-high-stakes-trade-stand-off.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>1 अगस्त की समयसीमा नजदीक आ रही है और भारत-अमेरिका एक सीमित व्यापार समझौते के लिए अंतिम दौर की बातचीत कर रहे हैं। इस विवादास्पद वार्ता के केंद्र में भारत के विशाल कृषि और डेयरी क्षेत्र का भविष्य है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां एक ओर जल्द समझौता होने की बात कर रहे हैं, वहीं भारत अपने करोड़ों किसानों को आर्थिक रूप से नुकसानदायक रियायतों से बचाने के लिए दृढ़ लग रहा है।</p>
<p>माना जा रहा है कि अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर प्रस्तावित टैरिफ को 20% से कम करने की पेशकश की है। ट्रंप ने शुरू में 26% टैरिफ लगाया था। इससे भारत को कुछ प्रतिद्वंद्वियों पर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है, लेकिन मुख्य अड़चन भारत के अत्यधिक संवेदनशील कृषि बाजारों तक पहुंच की अमेरिकी मांग है।</p>
<p><strong>भारत के डेयरी किसान संकट में</strong><br />इन वार्ताओं में भारत की मुख्य "रेड लाइन" उसका डेयरी क्षेत्र है। अमेरिका टैरिफ में कमी और गैर-टैरिफ बाधाओं, विशेष रूप से पशु आहार से संबंधित प्रमाणन आवश्यकताओं को कम करने के लिए पुरजोर प्रयास कर रहा है। भारत ने आर्थिक, सांस्कृतिक व धार्मिक संवेदनशीलताओं का हवाला देते हुए कड़ा रुख अपनाया है।</p>
<p>भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का अनुमान है कि डेयरी क्षेत्र को अमेरिकी आयात के लिए खोलने से भारतीय डेयरी किसानों को लगभग 12.3 अरब डॉलर (1.03 लाख करोड़ रुपये) का वार्षिक नुकसान हो सकता है। यह क्षेत्र करीब 8 करोड़ लोगों, जिनमें से अधिकांश छोटे और सीमांत किसान हैं, को सीधे रोजगार देता है। यह भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। एसबीआई के अनुमान के अनुसार घरेलू बाजार में दूध की कीमतों में 15% गिरावट इनके लिए काफी नुकसानदायक होगा।</p>
<p>आर्थिक प्रभाव के अलावा भारत की यह भी आपत्ति है कि आयातित दूध उत्पाद उन गायों से आते हैं जिन्हें पशु-आधारित उत्पाद (जैसे मांस या रक्त) खिलाए जाते। यह सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है।</p>
<p><strong>जीएम फसलों पर भारत का रुख</strong><br />कृषि क्षेत्र में यह लड़ाई आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) फसलों से जुड़ी है। अमेरिका, जीएम खाद्य पदार्थों पर भारत के नियमों को अस्पष्ट और अवैज्ञानिक मानता है, जिससे अमेरिकी निर्यात में बाधा आ रही है। भारत ने इस पर भी सतर्क रुख अपना रखा है। भारत 24 तरह के उत्पादों के लिए गैर-जीएम और जीएम-मुक्त प्रमाणपत्रों पर जोर देता है, ताकि पता लगाने की क्षमता सुनिश्चित हो सके और उपभोक्ता का विश्वास बना रहे।<br />ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अजय श्रीवास्तव जैसे विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अमेरिकी कृषि उत्पादों पर स्थायी टैरिफ कटौती भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। चावल, डेयरी और जीएम सोया सहित भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि निर्यात "भारतीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं और कीमतों को विकृत कर सकते हैं," जिससे भारत के 70 करोड़ से ज़्यादा किसानों की आजीविका तबाह हो सकती है</p>
<p>श्रीवास्तव जोर देकर कहते हैं, "भारत को खाद्य भंडार का प्रबंधन करने, ग्रामीण आय को सहारा देने और वैश्विक झटकों का सामना करने के लिए नीतिगत गुंजाइश बनाए रखनी चाहिए।" वे इस बात पर जोर देते हैं कि आज की भू-राजनीतिक रूप से अस्थिर दुनिया में खाद्य सुरक्षा संप्रभु बनी रहनी चाहिए।</p>
<p>इन कृषि-केंद्रित वार्ताओं की पृष्ठभूमि राष्ट्रपति ट्रंप की आक्रामक और अक्सर एकतरफा बातचीत की रणनीति है। श्रीवास्तव इंडोनेशिया और वियतनाम के साथ हाल के समझौतों की ओर इशारा करते हैं, जहां ट्रंप ने उन देशों के नेताओं के साथ फोन कॉल के बाद व्यापक रियायतों की घोषणा की। हालांकि उनकी घोषणा और आधिकारिक वार्ताकारों द्वारा तय टैरिफ में अंतर दिखा है। उदाहरण के लिए, ट्रंप ने वियतनाम को लेकर दावा किया कि अमेरिका को उसके निर्यात पर 20% टैरिफ लगेगा। वियतनामी अधिकारियों ने तुरंत इसे गलत ठहराते हुए कहा कि समझौता 11% पर हुआ है।</p>
<p>इससे यह चिंता पैदा होती है कि भारत के वार्ताकार जिन शर्तों पर राजी होते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे बातचीत के बाद ट्रंप अमेरिका के लिए कहीं अधिक लाभकारी शर्तों की घोषणा कर सकते हैं। इसलिए भारत को लिखित और संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित समझौते पर जोर देना चाहिए।</p>
<p>अभी कृषि और डेयरी पर गहन ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। यह अंतरिम समझौता व्यापक अमेरिका-भारत पहल की दिशा में एक कदम भी है, जिसका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। भारत अपने स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो निर्यात पर रियायतों के लिए भी दबाव बना रहा है, जबकि अमेरिका अखरोट और बादाम जैसे उत्पादों पर कम टैरिफ चाहता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान, खाद्य सुरक्षा और द्विपक्षीय व्यापार पर गतिरोध, क्या भारत ट्रंप को ना कह सकता है? ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_687d2d87bb85d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[धान पर फिजी वायरस का हमला, अब क्या करें किसान? टॉप कृषि वैज्ञानिक ने बताए उपाय]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/fiji-virus-attacks-paddy-what-should-farmers-do-now-top-agricultural-scientist-suggests-solutions.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 19 Jul 2025 18:44:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/fiji-virus-attacks-paddy-what-should-farmers-do-now-top-agricultural-scientist-suggests-solutions.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>धान की फसल पर एक वायरस के हमले ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों पंजाब और हरियाणा के कई जिलों में <strong>Southern Rice Black</strong><strong>‑</strong><strong>streaked Dwarf Virus (SRBSDV) </strong>या <strong>फिजी वायरस</strong> का प्रकोप देखा जा रहा है। यह वायरस सफेद पीठ वाली टिड्डी <strong>व्हाइटबैक्ड प्लांटहॉपर (</strong><strong>WBPH</strong><strong>)</strong> के जरिए फैलता है। इसके प्रकोप से पौधों की बढ़त रुक जाती है और ऊंचाई कम रह जाती है। पौधों की पत्तियां गहरी हरी होती हैं लेकिन कल्लों की वृद्धि रुक जाती है। जड़े काली पड़ जाती हैं और आसानी उखड़ जाती हैं। जड़ों से पर्याप्त पोषक पौधे को नहीं मिल पाता है।</p>
<p><strong>धान अनुसंधान केंद्र</strong><strong>,</strong> कौल (कैथल) को अंबाला, यमुनानगर, करनाल और कैथल जिलों में किसानों द्वारा धान की फसल में पौधों के बौनेपन की सूचना मिली है। जींद जिले के किसान <strong>अशोक दनौदा</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि धान में बौना रोग के कारण किसानों को खड़े खेत जोतकर दोबारा बुवाई करनी पड़ रही है। इससे किसानों को बहुत नुकसान हो रहा है। वह बताते हैं कि 2022 में भी इस तरह की बीमारी आई थी। इसका पता बुवाई से लगभग एक महीना बाद चलता है जब पौधों की बढ़त रुक जाती है।&nbsp;</p>
<p><strong>जल्दी बुवाई वाले धान में ज्यादा प्रकोप&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p><strong>भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा)</strong><strong>, </strong><strong>नई दिल्ली</strong> के पूर्व निदेशक <strong>डॉ. अशोक कुमार सिंह</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि हरियाणा और पंजाब के कई जिलों में फिजी वायरस के प्रकोप की जानकारी किसानों से मिली है। उन्होंने बताया कि पंजाब के फरीदकोट, पटियाला, मानसा, बरनाला, लुधियाना, रोपड़, मोगा, संगरूर और पठानकोट जिलों में इस बीमारी के प्रकोप की जानकारी मिली है। इसके साथ ही हरियाणा के पेहवा, कुरूक्षेत्र और कुछ अन्य जिलो में इस बीमारी का प्रभाव है। खासतौर पर जहां धान की रोपाई जून के पहले सप्ताह या उससे पहले हुई है, वहां इस रोग का प्रकोप अधिक देखा जा रहा है।&nbsp;</p>
<p>इस साल पंजाब सरकार ने 15 जून से पहले ही धान रोपाई की अनुमति दी थी। धान में लगे रोग को पंजाब सरकार के इस फैसले से जोड़कर भी देखा जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रोग के प्रभाव और प्रसार का पता लगाने के लिए <strong>आईसीएआर</strong> ने वैज्ञानिकों की पांच टीमें गठित की हैं जो ग्राउंड पर जाकर स्थिति का पता लगाएंगी।</p>
<p><strong>किन किस्मों में अधिक प्रकोप </strong></p>
<p>डॉ. अशोक कुमार सिंह का कहना है कि फिजी वायरस का प्रकोप मुख्यत: पीआर 131, पीआर 126 और पूसा 44 जैसी गैर-बासमती किस्मों में देखा जा रहा है, लेकिन कुछ जगह जल्द रोपाई वाली बासमती किस्मों में भी यह रोग देखा गया है।</p>
<p>डॉ. सिंह ने बताया कि अगर खेत में केवल 5 फीसदी पौधों में वायरस का प्रकोप है तो बहुत अधिक नुकसान की आशंका नहीं है। ऐसे में दोबारा बुवाई करने की जरूरत नहीं है। लेकिन अधिक नुकसान होने पर किसान <strong>पूसा बासमती 1847</strong> की गीले खेते में सीधी बुवाई कर सकते हैं। इसका बीज पूसा संस्थान नई दिल्ली में उपलब्ध है।</p>
<p><strong>कैसे करें रोकथाम </strong></p>
<p>डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि किसान धान के खेतों की लगातार निगरानी करें। बौने पौधे, रोगवाहक कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर कुछ कीटनाशकों के प्रयोग की सलाह दी जाती है।</p>
<p><strong>निम्नलिखित कीटनाशकों का उपयोग करें:</strong></p>
<p><strong>डायनोटीफ्यूरान</strong> 20% एस जी (ओशीन या टोकन) 80 ग्राम/एकड़ या <strong>पाइमेट्रोजिन</strong> 50% डब्लू जी (चैस) 120 ग्राम/एकड़ को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर <span>पौधों की जड़ की तरफ </span>छिड़काव करें। आवश्यकता होने पर पुनः एक या दो बार कीटनाशी का छिड़काव करें, विशेषकर यदि हॉपर्स की संख्या अधिक हो।</p>
<p><span>इन दवाइयों को 100 लीटर पानी में घोलकर पौधों की जड़ की तरफ फ्लैट-फैन या खोखली शंकु नोजल से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।</span></p>
<p><strong>संक्रमित पौधों को उखाड़कर नष्ट करें:</strong></p>
<ul>
<li>रोगग्रस्त पौधों को पहचान कर तुरंत उखाड़ें, गहरे गड्ढों में दबाएं या जला दें ताकि रोग का प्रसार न हो।</li>
<li>नालियों और मेढ़ों की सफाई करें। खरपतवार एवं अनावश्यक पौधों को हटाकर नष्ट करें, क्योंकि यह कीटों के आश्रय बन सकते हैं।</li>
<li>खेत में जलभराव न होने दें, उपयुक्त जल निकासी की व्यवस्था करें जिससे पौधे स्वस्थ रहें और वायरस का प्रभाव कम हो।</li>
<li>खेतों में सफेद पीठ वाला तेला (हॉपर्स) के नियंत्रण के लिए लाइट ट्रैप का प्रयोग करें जिससे हॉपर प्रकाश की तरफ आकर्षित होकर मर जाते हैं।</li>
</ul>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ धान पर फिजी वायरस का हमला, अब क्या करें किसान? टॉप कृषि वैज्ञानिक ने बताए उपाय ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_687b991abc37c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पहली तिमाही में कृषि निर्यात 7% बढ़कर 5.9 अरब डॉलर पहुंचा, चावल निर्यात में 3.5% वृद्धि]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indias-agri-exports-off-to-a-flying-start-in-fy26-driven-by-soaring-rice-and-meat-shipments.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 19 Jul 2025 14:04:20 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indias-agri-exports-off-to-a-flying-start-in-fy26-driven-by-soaring-rice-and-meat-shipments.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में गति पकड़ी है। अप्रैल और जून 2025 के बीच 7% की वृद्धि के साथ निर्यात 5.96 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह उछाल चावल, बफेलो मीट और ताजे फल-सब्जियों की मजबूत विदेशी मांग के कारण आया है।</p>
<p>अप्रैल-जून की अवधि में, बासमती और गैर-बासमती दोनों किस्मों सहित चावल की खेप 2.9 अरब डॉलर से अधिक की रही। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में इसमें 3.5% की वृद्धि हुई है। पूरे वित्त वर्ष 2024-25 में चावल का निर्यात रिकॉर्ड 12.47 अरब डॉलर तक पहुंच चुका था। वित्त वर्ष 2023-24 की तुलना में इसमें 20% की वृद्धि हुई।</p>
<p>उद्योग के जानकार इसे वैश्विक चावल बाजार में भारत के प्रभुत्व की पुष्टि के रूप में देखते हैं। म्यांमार और पाकिस्तान जैसे अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं के स्टॉक में कमी के कारण वैश्विक खरीदार भारत की ओर रुख कर रहे हैं। भारत अब वैश्विक चावल व्यापार के 40% से ज्यादा हिस्से को नियंत्रित करता है।&nbsp;</p>
<p>पिछले सितंबर में हुए एक बड़े नीतिगत बदलाव ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है। सरकार ने बंपर फसल और बेहतर स्टॉक की उम्मीद में, एक साल पहले लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों को वापस लेना शुरू कर दिया था। अब न्यूनतम निर्यात मूल्य सहित सभी प्रतिबंध हट जाने के बाद चावल की निर्यात मांग फिर से बढ़ रही है।</p>
<p>चावल के अलावा, अन्य कृषि-वस्तुओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। बफेलो मीट, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में 17% से ज़्यादा बढ़कर 1.18 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसी तरह, फलों और सब्जियों का निर्यात भी इसी अवधि में 13% बढ़कर 95 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया।</p>
<p>विशेष रूप से बफेलो मीट वैश्विक बाज़ारों में लगातार लोकप्रिय हो रहा है। कम वसा वाली गुणवत्ता और पोषण मूल्य वाला यह मांस वियतनाम, मलेशिया, मिस्र, इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में लोकप्रिय हो रहा है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_6800df2835e93.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पहली तिमाही में कृषि निर्यात 7% बढ़कर 5.9 अरब डॉलर पहुंचा, चावल निर्यात में 3.5% वृद्धि ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान टोल फ्री नंबर पर दें नकली खाद&amp;#45;बीज की सूचना, बेईमानों को छोडूंगा नहीं: शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/fake-fertilizers-and-seeds-farmers-inform-on-toll-free-number-shivraj-singh-chouhan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 17 Jul 2025 13:03:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/fake-fertilizers-and-seeds-farmers-inform-on-toll-free-number-shivraj-singh-chouhan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने किसानों से आह्वान किया है कि जहां कहीं भी नकली खाद-बीज की आशंका है, तुरंत <strong>टोल फ्री नंबर</strong> (18001801551) पर खबर करो, बेईमानों को मैं छोडूंगा नहीं। अगर किसी ने घटिया या नकली बीज, खाद और कीटनाशक बेचा तो उस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी किसान को गैर-उपयोगी उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। <span>किसी भी कीमत पर किसान के साथ लूट नहीं होने देंगे।&nbsp;</span></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान बुधवार को नई दिल्ली में <strong>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)</strong> के 97वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। कृषि क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए देश के कृषि वैज्ञानिकों और आईसीएआर की टीम को बधाई देते हुए उन्होंने भावी चुनौतियों से निपटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अब वैज्ञानिक शोध की दिशा किसानों की जरूरत के हिसाब से तय की जाएगी। इसके लिए वन टीम, वन टास्क होगा। रिसर्च डिमांड ड्रिवन होगी।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_6878a8d98b733.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>कृषि क्षेत्र में देश की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कभी खाद्यान्न उत्पादन में हमारी निर्भरता दूसरे देशों पर होती थी। हम पीएल - 480 गेहूं खाते थे। लेकिन आज देश के अन्न के भंडार भरे हैं। रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है। <strong>हरित क्रांति</strong> के दौरान वर्ष 1966 से 1979 तक खाद्यान्न उत्पादन प्रति वर्ष 2.7 मिलियन टन बढ़ा था। जबकि पिछले 11 सालों में खाद्यान्न उत्पादन ढाई से तीन गुना तक बढ़ा है। इसी तरह फल-सब्जी, दूध उत्पादन, पशुपालन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी बड़ी कामयाबी मिली। जलवायु परिवर्तन, घटती कृषि भूमि और शहरीकरण जैसी चुनौतियों के बावजूद हमारा कृषि उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। इसके लिए देश के वैज्ञानिकों और किसान बधाई के पात्र हैं।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि उपलब्धियां के साथ ही हमारे सामने कई चुनौतियां भी हैं। एक तरफ खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, तो दूसरी तरफ धरती के स्वास्थ्य को भी बचाकर रखना है। ऐसे में रसायन और उर्वरक कम से कम इस्तेमाल कर, उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए इस पर हमें गंभीरता से काम करना होगा।&nbsp;</p>
<p><strong>दलहन-तिलहन</strong> उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि मंत्री ने वैज्ञानिकों से गंभीर प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कपास की इतनी किस्में जारी की गईं, लेकिन उत्पादन घट गया। गन्ने में रेड रॉट रोग लग गया। इसलिए जहां फसल प्रभावित हो रही हैं, वहां रिसर्च की जरूरत है। किसानों को ऐसी मशीन चाहिए जिससे असली या नकली खाद का तुरंत पता चल सके। किसानों की मांग है कि छोटी मशीनें बनाई जाएं। टमाटर की शेल्फ लाइफ बढ़ाई जाए। ये जायज मांग हैं। इस पर शोध होना चाहिए।</p>
<p><strong>&lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo;</strong> के जरिए शोध के लिए ऐसे 500 विषय सामने आए हैं, जिन पर काम किया जाएगा। <span>फसलवार और राज्यवार बैठकें कर समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं। सोयाबीन और कपास के बाद अब गन्ने व मक्के पर भी बैठक आयोजित की जाएंगी।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_6878a9331a6eb.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>बायोस्टिम्यूलेन्ट</strong> को लेकर कृषि मंत्री ने कहा कि देश में 30 हजार बायोस्टिम्यूलेन्ट मनमाने ढंग से बेचे जा रहे थे। न कोई SOP, न कोई प्रमाण। फिर व्यवस्था बनी कि इसको ICAR की किसी संस्था से प्रमाणित करवाना पड़ेगा। अब घटकर 650 बायोस्टिम्यूलेन्ट उत्पाद रह गये हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियां बंद हो जाएं तो हो जाएं, पर किसान को बर्बाद नहीं होने देंगे। वही उत्पाद बिकेंगे जो किसानों के लिए उपयोगी हों। <span>दुकान पर किसान को DAP के साथ जबरदस्ती दूसरी चीजों को भी खरीदने पर मजबूर किया जाता है। उन्होंने इस संबंध में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है।&nbsp;</span></p>
<p>कार्यक्रम के दौरान आईसीएआर की तकनीक के कमर्शियल इस्तेमाल के लिए कई कंपनियों के साथ <strong>एमओयू</strong> किए गये। इस बारे में कृषि मंत्री ने कहा MoU करते समय ध्यान रखें कि किसानों को किस दाम पर बीज बेचा जा रहा है। MRP क्या हो, उसे तय करने का कोई साइंटिफिक तरीका होना चाहिए। जन औषधि केंद्रों की तर्ज पर सस्ते उर्वरकों के लिए भी दुकान खोलने पर विचार किया जा सकता है।</p>
<p>इस अवसर पर आईसीएआर के महानिदेशक एवं सचिव (डेयर) <strong>डॉ. एम.एल. जाट</strong> ने आईसीएआर की 10 उपलब्धियों, 10 पहलों और प्रतिबद्धताओं की जानकारी देते विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में कृषि क्षेत्र की भूमिका पर जोर दिया। इसके लिए आईसीएआर के विभिन्न संस्थान<strong> विजन टू एक्शन</strong> प्लान तैयार करेंगे। उन्होंने आईसीएआर द्वारा स्पीड ब्रीडिंग, 40 फसलों में जीनोम एडिटिंग, फसलों की 600 से अधिक प्रजातियों, 45 से अधिक नए उत्पाद व तकनीकों, 125 नए पेटेंट, 120 नए डिजाइन और 307 कॉपीराइट सहित विभिन्न उपलब्धियों और पहलों की जानकारी दी। विकसित कृषि और किसानों की समृद्धि पर जोर देते हुए डॉ. जाट ने कहा कि आईसीएआर की वैश्विक भूमिका को आगे बढ़ाते हुए <strong>&ldquo;आईसीएआर ग्लोबल&rdquo;</strong> की शुरुआत की जाएगी।</p>
<p>समारोह में विभिन्न कृषि&nbsp; वैज्ञानिकों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही उत्पाद लांच किए एवं प्रकाशनों का विमोचन किया। कार्यक्रम को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने भी संबोधित किया।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान टोल फ्री नंबर पर दें नकली खाद-बीज की सूचना, बेईमानों को छोडूंगा नहीं: शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत ने 5 साल पहले हासिल किया 50% स्वच्छ ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-achieved-the-target-of-50-pc-clean-energy-capacity-5-years-ago.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 16 Jul 2025 13:39:39 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-achieved-the-target-of-50-pc-clean-energy-capacity-5-years-ago.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत ने स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का 50 <span>फीसदी</span> गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त कर लिया है। यह कामयाबी पेरिस जलवायु समझौते के तहत निर्धारित 2030 के लक्ष्य से पांच साल पहले ही प्राप्त हुई है।</p>
<p>केंद्र सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, 30 जून 2025 तक भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता 484.82 गीगावॉट (GW) थी, जिसमें से 242.78 GW यानी 50.08 प्रतिशत बिजली गैर-जीवाश्म स्रोतों से पैदा की जा रही है। इसमें 184.62 GW यानी 38% नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन आदि), 49.38 GW (10%) जलविद्युत और 8.78 GW (1.8%) परमाणु ऊर्जा शामिल हैं।&nbsp;</p>
<p>इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए केंद्रीय ऊर्जा मंत्री <strong>प्रल्हाद जोशी</strong> ने इसे भारत की "हरित ऊर्जा क्रांति" करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, &ldquo;वर्ष 2030 के लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता प्राप्त करना प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नेतृत्व भारत के हरित परिवर्तन को गति दे रहा है&mdash;एक आत्मनिर्भर और सतत भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।&rdquo;</p>
<p>भारत ने यह उपलब्धि कई राष्ट्रीय योजनाओं और पहलों के जरिये हासिल की है। इनमें पीएम-कुसुम योजना, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, सौर पार्क विकास कार्यक्रम, राष्ट्रीय पवन-सौर हाइब्रिड नीति, और जैव ऊर्जा में निवेश जैसी योजनाएं शामिल हैं। इन प्रयासों ने न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा पहुंच को सुलभ बनाया है, बल्कि किसानों और आम उपभोक्ताओं को भी नवीकरणीय ऊर्जा से जोड़ने में मदद की है।</p>
<p>हालांकि क्षमता के स्तर पर यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है, लेकिन वास्तविक बिजली उत्पादन के आंकड़े अभी भी कोयला आधारित ऊर्जा की अधिकता को दर्शाते हैं। वर्ष 2024 में भारत में कुल 2,030 टेरावाट-घंटा बिजली का उत्पादन हुआ, जिसमें से 1,517.9 TWh (लगभग 75%) बिजली अब भी कोयले से ही उत्पन्न हुई। वहीं, नवीकरणीय स्रोतों से केवल 240.5 TWh बिजली का उत्पादन हुआ। यह अंतर दर्शाता है कि उत्पादन स्तर पर हरित ऊर्जा को और अधिक मजबूती देने की आवश्यकता है।</p>
<p>सरकार ने 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता और 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस दिशा में बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन और रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश को और अधिक बढ़ाया जाएगा। हालाँकि यह भी उल्लेखनीय है कि आने वाले वर्षों में भारत लगभग 80 GW नई कोयला आधारित बिजली क्षमता जोड़ने की भी योजना बना रहा है, जिससे ऊर्जा मांग को पूरा किया जा सके।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत ने 5 साल पहले हासिल किया 50% स्वच्छ ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उर्वरक संकट के लिए किसान सभा ने मोदी सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया, विरोध&amp;#45;प्रदर्शन की तैयारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/kisan-sabha-blames-modi-governments-policies-for-fertilizer-crisis-prepares-for-protest.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 15 Jul 2025 14:01:17 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/kisan-sabha-blames-modi-governments-policies-for-fertilizer-crisis-prepares-for-protest.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>अखिल भारतीय किसान सभा</strong> ने उर्वरक संकट के लिए केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। किसान सभा की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, खरीफ की बुवाई का मौसम शुरू होते ही किसानों को विभिन्न उर्वरकों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर किसानों ने उर्वरकों की जमाखोरी व कालाबाजारी के आरोप लगाए हैं। किसान सभा का कहना है कि इस संकट के लिए मोदी सरकार की उर्वरक सब्सिडी में कटौती और मूल्य नियंत्रण-मुक्ति की नीतियां जिम्मेदार हैं।&nbsp;</p>
<p>किसान सभा के अध्यक्ष <strong>अशोक ढ़वले</strong> और महासचिव <strong>विजू कृष्णन</strong> की ओर से जारी बयान के अनुसार, भारत अपनी उर्वरक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आयात निर्भर होता जा रहा है। उर्वरकों की कुल आपूर्ति में आयात का हिस्सा डीएपी के लिए 60% से लेकर एमओपी के लिए 100% तक है। इसने भारत के कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों और भू-राजनीतिक स्थितियों की अनिश्चितताओं पर निर्भर बना दिया है।&nbsp;</p>
<p>अखिल भारतीय किसान सभा ने अपनी सभी इकाइयों से आह्वान किया है कि वे गांव/तहसील केंद्रों पर विरोध-प्रदर्शन कर जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपे और उर्वरक संकट के तत्काल समाधान की मांग करें।</p>
<p>किसान सभा ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने पिछले तीन वर्षों के दौरान उर्वरक सब्सिडी में लगातार कटौती की है। उर्वरक सब्सिडी 2022-23 में 2.51 लाख करोड़ रुपये से घटकर 2023-24 में 1.88 लाख करोड़ रुपये और फिर 2024-25 में इससे भी ज्यादा घटकर 1.64 लाख करोड़ रुपये रह गई।&nbsp;<span lang="HI">आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के बजाय</span><span>,&nbsp;</span><span lang="HI">मोदी सरकार उर्वरक की कमी की समस्या के समाधान के रूप में नैनो यूरिया और शून्य बजट खेती जैसी अप्रमाणित तकनीकों को बढ़ावा दे रही है।<span>&nbsp;</span></span></p>
<p>किसान सभा का कहना है कि पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना (एनबीएससी) को 2010 में नव-उदारवादी नीति के रूप में पेश कर बाजार को अनियंत्रित किया गया और कंपनियों को लाभ-अधिकतम मूल्य निर्धारित करने की अनुमति दे दी गई। तब से यूरिया के अलावा अन्य उर्वरकों की कीमतें कई गुना बढ़ गईं। इससे किसानों की लागत बढ़ गई है। म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) की कीमत 2009-10 में 4455 रुपये प्रति टन से बढ़कर 2023 (अगस्त) में 34,644 रुपये प्रति टन हो गई। डीएपी की कीमत 2009-10 में 15085 रुपये से बढ़कर 2023 में 27000 रुपये हो गई।</p>
<p>किसान सभा ने केंद्र सरकार से किसानों को उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने और उर्वरकों की जमाखोरी व कालाबाजारी पर कड़ी निगरानी रखने की मांग की है। साथ ही विनियमित मूल्य व्यवस्था को पूरी तरह से बहाल करने और सार्वजनिक क्षेत्र के उर्वरक उत्पादन में पूंजी निवेश को तुरंत बढ़ाने की मांग भी उठाई है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_68760ffd0193b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उर्वरक संकट के लिए किसान सभा ने मोदी सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया, विरोध-प्रदर्शन की तैयारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नकली व घटिया खाद का मुद्दा गरमाया, कृषि मंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखी चिट्ठी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/issue-of-fake-and-substandard-fertilizers-heated-up-agriculture-minister-wrote-a-letter-to-the-cm-of-states.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 14 Jul 2025 14:17:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/issue-of-fake-and-substandard-fertilizers-heated-up-agriculture-minister-wrote-a-letter-to-the-cm-of-states.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="288" data-end="489">देश में नकली और घटिया खाद का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर जहां किसानों को उर्वरकों की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है, वहीं नकली खाद और कालाबाजारी ने उनकी परेशानियां बढ़ा दी हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा सहित कई राज्यों में नकली और घटिया खाद बनाकर किसानों को ठगने के मामले सामने आ रहे हैं। खरीफ की बुवाई के दौरान उर्वरक संकट ने केंद्र सरकार की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है।</p>
<p data-start="707" data-end="1077">केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर नकली और निम्न गुणवत्ता वाले उर्वरकों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सख्त कार्रवाई करने<span> के निर्देश दिए हैं।&nbsp;</span>उन्होंने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक समय पर और सुलभ दरों पर उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।</p>
<p data-start="1079" data-end="1266">कृषि मंत्रालय के अनुसार, यह पत्र देशभर में नकली उर्वरकों की बिक्री, सब्सिडी वाले उर्वरकों की कालाबाजारी और जबरन टैगिंग जैसी अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से जारी किया गया है।</p>
<p data-start="1268" data-end="1681">पत्र में शिवराज सिंह चौहान ने लिखा है कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना राज्यों की जिम्मेदारी है। इसलिए राज्य सरकारें कालाबाजारी, ओवरप्राइसिंग और सब्सिडी वाले उर्वरकों के डायवर्जन जैसी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखें और त्वरित कार्रवाई करें। साथ ही, उर्वरकों के उत्पादन और बिक्री की नियमित निगरानी और सैंपलिंग के माध्यम से नकली व घटिया उत्पादों पर सख्त नियंत्रण किया जाए।<span></span></p>
<p data-start="1268" data-end="1681"><strong>नैनो उर्वरकों की जबरन टैगिंग रोकने के निर्देश&nbsp;</strong></p>
<p data-start="1683" data-end="1952">मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में केंद्रीय कृषि मंत्री ने पारंपरिक उर्वरकों के साथ कुछ उर्वरकों अथवा बायो-स्टिमुलेंट उत्पादों की जबरन टैगिंग को अविलंब रोकने के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण, प्राथमिकी पंजीकरण समेत सख्त कानूनी कार्रवाई करने को कहा है।&nbsp;</p>
<p data-start="1683" data-end="1952"><strong>राज्यों में चलाएं अभियान&nbsp;</strong></p>
<p data-start="1954" data-end="2266"><span>केंद्रीय कृषि मंत्री ने सभी राज्यों से अनुरोध किया है कि एक राज्यव्यापी अभियान शुरू किया जाए ताकि नकली व घटिया कृषि इनपुट्स की समस्या को जड़ से समाप्त किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि यदि राज्य स्तर पर इस कार्य की नियमित निगरानी की जाएगी तो यह किसानों के हित में एक प्रभावी और स्थायी समाधान सिद्ध होगा। उन्होंने </span>राज्यों को फीडबैक व सूचना तंत्र विकसित करने, किसानों को निगरानी प्रक्रिया में शामिल करने तथा किसानों को असली व नकली उत्पादों की पहचान हेतु जागरूक करने के निर्देश भी दिए हैं।</p>
<p data-start="2268" data-end="2681"><strong>&lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo;</strong> के दौरान शिवराज सिंह चौहान की किसानों से बातचीत में नकली खाद-बीज, उर्वरकों की कालाबाजारी और टैगिंग जैसे मुद्दे सामने आए थे। इस बीच, कई राज्यों से नकली और घटिया खाद पर छापेमारी की खबरें भी आ रही हैं। बुवाई के मौसम में किसान उर्वरकों की कालाबाजारी और धोखाधड़ी से परेशान हैं। कृषि मंत्री नकली खाद और बीज की रोकथाम के लिए सख्त कानून लाने की बात कह चुके हैं।</p>
<p data-start="2268" data-end="2681"></p>
<p data-start="2268" data-end="2681"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_6874c40b2b8c7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नकली व घटिया खाद का मुद्दा गरमाया, कृषि मंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखी चिट्ठी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_6874c40b2b8c7.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खुले बाजार में गेहूं व चावल की बिक्री का निर्णय, प्राइवेट मिलों के जरिए भारत आटा, चावल बंद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sale-of-wheat-rice-omss-india-brand-flour-rice-stopped-through-private-millers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 12 Jul 2025 20:03:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sale-of-wheat-rice-omss-india-brand-flour-rice-stopped-through-private-millers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत सरकारी भंडार से गेहूं, चावल और मोटे अनाज बेचने का निर्णय लिया है। वर्ष 2025-26 के दौरान खुले बाजार में बिक्री के लिए गेहूं का आरक्षित मूल्य 2,550 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,425 रुपये प्रति क्विंटल है। गेहूं के रिजर्व प्राइस में परिवहन खर्च शामिल नहीं है। पिछले साल खुले बाजार में गेहूं 2300-2325 रुपये प्रति क्विंटल के रिजर्व प्राइस पर बेचा गया था।</p>
<p>खाद्य मंत्रालय की ओर से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को भेजे गए पत्र के अनुसार, ओएमएसएस के तहत प्राइवेट ट्रेडर्स के अलावा नेफेड, एनसीसीएफ, केंद्रीय भंडार जैसी सहकारी संस्थाओं और सामुदायिक रसोइयों को भी गेहूं बेचा जाएगा। नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार इस गेहूं का उपयोग अपने स्टोर या मोबाइल वैन के माध्यम से &ldquo;भारत&rdquo; ब्रांड आटा बेचने के लिए करेंगे।</p>
<p>खाद्य मंत्रालय के मुताबिक, खुले बाजार में बिक्री के लिए गेहूं की मात्रा और समय का निर्धारण एफसीआई द्वारा उपलब्ध स्टॉक, बफर नॉर्म्स और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय से परामर्श के बाद किया जाएगा। अनुमान है कि सरकार ओएमएसएस के तहत लगभग 40-50 लाख टन गेहूं बेच सकती है। संभवतः यह बिक्री अगस्त से शुरू होगी जो चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।&nbsp;</p>
<p>इस वर्ष देश में रिकॉर्ड 11.75 करोड़ टन गेहूं उत्पादन के चलते सरकार के पास पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। 1 जुलाई के लिए निर्धारित 275.8 लाख टन के बफर नॉर्म्स के मुकाबले, वर्तमान में एफसीआई के पास लगभग 352 लाख टन गेहूं का स्टॉक है। रबी विपणन सीजन 2025-26 के दौरान सरकारी एजेंसियों ने लगभग 300 लाख टन गेहूं की खरीद की है, जो पिछले चार वर्षों में सर्वाधिक है।</p>
<p><strong>इथेनॉल के लिए </strong><strong>52 </strong><strong>लाख टन चावल आवंटित</strong></p>
<p>इथेनॉल उत्पादन के लिए वर्ष 2025-26 में ओएमएसएस के तहत 52 लाख टन चावल बेचा जाएगा, जो पिछले वर्ष के समान है। इथेनॉल डिस्टलरियों को चावल की बिक्री 31 अक्टूबर तक 2,250 रुपये प्रति क्विंटल और 1 नवंबर से 2,320 रुपये प्रति क्विंटल के रिजर्व प्राइस पर होगी। जबकि धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,389 रुपये प्रति क्विंटल है। इस तरह इथेनॉल कंपनियों को धान के एमएसपी से भी कम रेट पर चावल दिलाने का इंतजाम किया जा रहा है। इथेनॉल उत्पादन के लिए यथासंभव पुराने अथवा टूटे हुए चावल का उपयोग किया जाएगा।</p>
<p>केंद्रीय सहकारी संस्थाओं जैसे नेफेड, एनसीसीएफ, केंद्रीय भंडार को भारत ब्रांड चावल की बिक्री के लिए 1 नवंबर से 2480 रुपये प्रति क्विंटर का रिजर्व प्राइस तय किया गया है। राज्य सरकारों, राज्यों के निगमों और सामुदायिक रसोइयों के लिए चावल का रिजर्व प्राइस 2320 रुपये प्रति क्विंटल रहेगा। एक नवंबर से इसकी मात्रा 36 से घटाकर 32 लाख टन की गई है।</p>
<p>10 टूटे चावल के लिए 3090 रुपये तथा 25 फीसदी टूटे चावल के लिए 2829 रुपये प्रति क्विंटल का रिजर्व प्राइस रखा गया है। इस बार सरकार ने राइस मिलिंग स्कीम के टूटे चावल की बिक्री को भी ओएमएसएस में शामिल किया है। इसका रिजर्व प्राइस 1 नवंबर से 2320 रुपये प्रति क्विंटल रहेगा। &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>प्राइवेट मिलर्स नहीं बेच पाएंगे भारत आटा व चावल</strong></p>
<p>मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि प्राइवेट मिलर्स को 'भारत' ब्रांड आटा एवं चावल बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी। केवल नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार जैसी केंद्रीय सहकारी संस्थाएं ही भारत ब्रांड आटा और चावल बेच सकेंगी। हालांकि, 1 जुलाई से सरकार ने इन सहकारी संस्थाओं को मूल्य स्थिरता कोष से दी जाने वाली 200 रुपये प्रति क्विंटल की सहायता राशि बंद कर दी है।</p>
<p>खुले बाजार में गेहूं व चावल की बिक्री से सरकार को त्योहारी सीजन के दौरान कीमतों को काबू में रखने और पर्याप्त अनाज भंडार के प्रबंधन में मदद मिलेगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_68726d752b7ce.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_68727727d851b.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_68726eb911849.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खुले बाजार में गेहूं व चावल की बिक्री का निर्णय, प्राइवेट मिलों के जरिए भारत आटा, चावल बंद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बायर ने धान में शीथ ब्लाइट के प्रकोप से बचाने के लिए ‘फेलुजिट’ फंगीसाइड लांच किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/bayer-launches-felujit-for-sheath-blight-control-in-paddy-cultivation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 12 Jul 2025 15:56:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/bayer-launches-felujit-for-sheath-blight-control-in-paddy-cultivation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वैश्विक कंपनी बायर ने फेलुजिट फंगीसाइड लांच करने की घोषणा की है। इसे धान की खेती में शीथ ब्लाइट से पौधों के सभी हिस्से को सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह उत्पाद जुलाई से देश के प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में उपलब्ध कराया जा रहा है। यह 320 मिली लीटर और 1 लीटर के आकारों में उपलब्ध है।</p>
<p>फेलुजिट फंगीसाइड को पेनफ्लुफेन और टेबुकोनाज़ोल के संयोजन से बनाया गया है। धान की फसल में लगने वाले शीथ ब्लाइट फंगस मिट्टी से ही उत्पन्न होते हैं। यह पौधे के पूरे हिस्से में अपने दोहरे असर के कारण शीथ ब्लाइट के विकास को प्रभावी ढंग से रोकता है। इससे किसानों को एक विश्वसनीय समाधान मिलता है जो फसल की पैदावार और गुणवत्ता को बढ़ाता है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_6872378a23986.jpg" alt="" /></p>
<p>फेलुजिट का एक ही छिड़काव बेहतरीन प्रभाव प्रदान करता है। इसका असर वर्तमान बाजार मानकों से दोगुने से भी अधिक समय तक रहता है। इसके प्रयोग से किसानों को बार-बार छिड़काव नहीं करना पड़ेगा। इससे उनके समय और श्रम लागत दोनों की बचत होती है।</p>
<p>भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में बायर के फसल विज्ञान प्रभाग के क्लस्टर वाणिज्यिक प्रमुख मोहन बाबू ने कहा, &ldquo;फेलुजिट किसानों के लिए एक अत्यधिक प्रभावी समाधान है, जो शीथ ब्लाइट पर उत्कृष्ट नियंत्रण प्रदान करते हुए उनकी कृषि पद्धतियों को सुव्यवस्थित करता है। वैश्विक खाद्य सुरक्षा में धान की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए, हमारा नवाचार किसानों को कम प्रयोग के साथ प्रभावी ढंग से रोग प्रबंधन करने, अपने संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और बढ़ती कृषि चुनौतियों के बीच लाभप्रदता बढ़ाने में सक्षम बनाता है।&rdquo;</p>
<p>फेलुजिट का अनूठापन इसके डुअल-एक्शन फॉर्मूलेशन में है, जो शीथ ब्लाइट पैदा करने वाले मुख्य जीव, राइजोक्टोनिया से निपटने के लिए दो अवयवों की शक्तियों को जोड़ता है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_6872378812675.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बायर ने धान में शीथ ब्लाइट के प्रकोप से बचाने के लिए ‘फेलुजिट’ फंगीसाइड लांच किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एमिटी के डॉ. अशोक कुमार चौहान ‘एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड 2025’ से सम्मानित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/dr-ashok-kumar-chauhan-of-amity-honored-with-the-agriculture-leadership-award-2025.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 12 Jul 2025 14:21:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/dr-ashok-kumar-chauhan-of-amity-honored-with-the-agriculture-leadership-award-2025.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डॅा अशोक कुमार चौहान को केन्द्रीय वाणिज्य एव उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में आयोजित एग्रीकल्चर लीडरशिप कॉनक्लेव में &lsquo;एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड 2025&rsquo; से सम्मानित किया।</p>
<p>भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पी. सदाशिवम की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय समिति ने कृषि नवाचार को आगे बढ़ाने, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और कृषि में स्थिरता को बढ़ावा देने में योगदान के लिए डॉ. चौहान को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना। डॉ. चौहान के नेतृत्व में एमिटी शिक्षण समूह में कृषि एक प्रमुख फोकस क्षेत्र है।&nbsp;</p>
<p>कॉनक्लेव को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के &nbsp;नेतृत्व में कृषि क्षेत्र ने अभूतपूर्व प्रगति की है और यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। प्रधानमंत्री के लोकल से ग्लोबल मिशन को पूरा करके किसान भारत को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। कृषि क्षेत्र 2047 तक भारत को विकसित बनाने के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>
<p>डॉ. चौहान ने कहा कि कृषि दुनिया भर में लाखों लोगों को रोज़गार के अवसर प्रदान करती है और देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है। यह पुरस्कार कृषि क्षेत्र में सार्थक प्रभाव डालने के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शिक्षा को एकीकृत करने के हमारे मिशन का प्रमाण है।।&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, ओडिशा के माननीय उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव और भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एवं जूरी अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति पी. सदाशिवम सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एमिटी के डॉ. अशोक कुमार चौहान ‘एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड 2025’ से सम्मानित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_687221a15af3b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए “टीम कॉटन” का गठन होगा, 2030 तक कॉटन इंपोर्ट बंद करने का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/team-cotton-formed-to-increase-cotton-production-target-to-stop-cotton-import-by-2030.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 11 Jul 2025 21:48:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/team-cotton-formed-to-increase-cotton-production-target-to-stop-cotton-import-by-2030.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>तमिलनाडु के कोयम्बटूर में आज कपास का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने को लेकर अहम बैठक का आयोजन किया गया। बैठक से पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खेतों में जाकर कपास उत्पादक किसानों से बातचीत की और उनकी समस्याओं के बारे में भी जाना।&nbsp;</p>
<p>कोयम्बटूर स्थित आईसीएआर के शगुरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट में आयोजित बैठक में केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे, विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर, आईसीएआर के महानिदेशक और सचिव डेयर डॉ. एम. एल. जाट, विभिन्न कृषि वैज्ञानिक और किसान उपस्थित रहे। जिन्होंने कपास के विकास के लिए मिलकर रोडमैप बनाने के लिए गहन विचार-विमर्श किया।&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब समय है कि हम कपास उत्पादन में आत्मनिर्भर बनें। हमारा संकल्प है कि 2030 से पहले ही हम कपास का आयात बंद करेंगे और निर्यात के रास्ते खोलेंगे। उद्योग जगत को जिस प्रकार के लॉन्ग स्टेपल, गुणवत्तापूर्ण कॉटन की जरूरत है, उसी गुणवत्ता के कॉटन का उत्पादन हो सके। इसके लिए <strong>टीम कॉटन</strong> का गठन किया जाएगा, जिसमें कपड़ा व कृषि मंत्रालय, राज्यों के प्रतिनिधि, कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर और प्रगतिशील किसान शामिल होंगे। साथ ही साथ कॉटन इंडस्ट्री से जुड़े लोग मिलकर इस दिशा में काम करेंगे। यह टीम मिशन मोड में काम करेगी।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_68713a1f07761.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कपास उत्पादन में कुछ समस्याएं आ रही हैं। बीटी कॉटन किस्म में वायरस अटैक के कारण कई तरह की दिक्कतें पैदा हो गई हैं। <span>उत्पादन बढ़ने की बजाय घट रहा है।</span> देश में कपास उत्पादन बढ़ाने को लेकर हरसंभव कदम उठाने होंगे। आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर लक्ष्यबद्ध होकर आगे बढ़ना होगा। वायरस प्रतिरोधी उन्नत बीज बनाने होंगे और निश्चित समय सीमा में किसानों तक इन उन्नत किस्म के बीज की पहुंच भी सुनिश्चित करनी होगी।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि वर्तमान में कपड़ा उद्योग जगत द्वारा विदेशों से कपास आयात के लिए आयात शुल्क खत्म करने की मांग की जाती है। जबकि किसानों का कहना है कि अगर बाहर से कपास सस्ता आएगा तो देश में हमारे कपास की कीमत कम हो जाएगी। इसलिए हमें किसान और उद्योग जगत दोनों का ध्यान रखना है। उन्होंंने कहा कि हाईडेंसिटी कॉटन के अच्छे परिणाम मिले हैं, उसकी ओर ज्यादा तेजी से बढ़ेंगे। आईसीएआर वही रिसर्च करेगी, जो किसानों की जरूरत है। इंडस्ट्री को जिस तरह के कॉटन की जरूरत है, उसके लिए रिसर्च किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_687145294f272.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" width="731" height="487" /></p>
<p></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विभिन्न राज्यों से आए किसानों की समस्याओं और सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। भारत में कपास बाहर से क्यों मंगवाना पड़े! देश की जरूरत के अनुसार अच्छी गुणवत्ता वाला कपास पैदा करने की चुनौती और लक्ष्य हमारे सामने है, जिसके लिए एकजुट होकर प्रयास करेंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>&lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo;</strong> को आगे बढ़ाते हुए फसलवार और राज्यवार बैठकें करने की घोषणा की गई थी। इस क्रम में सबसे पहले मध्य प्रदेश के इंदौर में सोयाबीन को लेकर बैठक हुई। इसके बाद आज कोयम्बटूर में कपास उत्पाद की चुनौतियां और उत्पादकता बढ़ाने के लिए भावी रणनीतियों को लेकर विचार-विमर्श किया गया।&nbsp;इस बैठक के लिए तमिलनाडु सरकार के कृषि मंत्री को भी आमंत्रित किया था, लेकिन वह शामिल नहीं हुए।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_68713a0c6d2bd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए “टीम कॉटन” का गठन होगा, 2030 तक कॉटन इंपोर्ट बंद करने का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_68713a0c6d2bd.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कपास संकट पर कल कोयंबटूर में बैठक, कृषि मंत्री ने किसानों से मांगे सुझाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/meeting-in-coimbatore-tomorrow-on-cotton-production-agriculture-minister-sought-suggestions-from-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 10 Jul 2025 12:34:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/meeting-in-coimbatore-tomorrow-on-cotton-production-agriculture-minister-sought-suggestions-from-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="281" data-end="679">कपास की घटती उत्पादकता और किसानों की बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने कपास उत्पादन को लेकर एक बड़ी पहल की है। &ldquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rdquo; के तहत फसलवार बैठकों की शुरुआत करते हुए उन्होंने 11 जुलाई को तमिलनाडु के कोयंबटूर में कपास पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाने की घोषणा की है। इसके साथ ही, उन्होंने देशभर के किसानों से सुझाव भी आमंत्रित किए हैं।</p>
<p data-start="681" data-end="956">अपने वीडियो संदेश में शिवराज सिंह चौहान ने कहा, &ldquo;हमारे देश में कपास की उत्पादकता अभी काफी कम है। बीटी कॉटन पर TSV वायरस के प्रभाव के कारण कपास की उत्पादकता में गिरावट आई है। हमारा संकल्प है कि हम उत्पादन बढ़ाएं, लागत घटाएं और किसानों को वायरस-रोधी, जलवायु-अनुकूल बीज उपलब्ध कराएं।&rdquo;</p>
<p data-start="958" data-end="1205">11 जुलाई को कोयंबटूर में सुबह 10 बजे होने वाली इस बैठक में कपास उत्पादक किसान, ICAR के वरिष्ठ वैज्ञानिक, कपास उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री, राज्य सरकारों के अधिकारी, कृषि विश्वविद्यालयों तथा कपास उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि शामिल होंगे।&nbsp;</p>
<p data-start="1207" data-end="1527">केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों से अपील करते हुए कहा, &ldquo;कपास की उत्पादकता और गुणवत्ता कैसे बढ़े&mdash;इस विषय पर हम गंभीरता से विचार कर रहे हैं। यदि इस संबंध में आपके पास कोई सुझाव हों, तो <strong>टोल फ्री नंबर 18001801551</strong> पर अवश्य भेजें। मैं आपके सुझावों को अत्यंत गंभीरता से लूंगा और हम मिलकर कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए एक रोडमैप तैयार करेंगे।&rdquo;</p>
<h3 data-start="1534" data-end="1569">कपास उत्पादन में गिरावट&nbsp;</h3>
<p data-start="1571" data-end="1865">भारत, चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है, लेकिन उत्पादकता के मामले में वह अब भी पीछे है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्य प्रमुख कपास उत्पादक हैं, लेकिन कीट संक्रमण, मौसम की मार और गुणवत्तायुक्त बीजों की कमी के चलते उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।</p>
<p data-start="1867" data-end="2152">पिछले एक दशक में भारत का कपास उत्पादन लगातार घटा है। वर्ष 2013-14 में कपास उत्पादन 398 लाख गांठ के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया। वर्ष 2024-25 में कपास उत्पादन घटकर <span>306.92&nbsp;</span>लाख गांठ रहने का अनुमान है, जबकि देश में कपास की मांग लगभग 315 लाख गांठ के आसपास है।</p>
<p data-start="2154" data-end="2315">घरेलू मांग पूरी करने के लिए इस वर्ष भारत को कपास का पिछले साल से करीब दोगुना आयात करना पड़ेगा। भारत आमतौर पर ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और मिस्र जैसे देशों से कपास का आयात करता है।</p>
<p data-start="2154" data-end="2315"></p>
<p data-start="2154" data-end="2315"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_686f642ea35cc.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कपास संकट पर कल कोयंबटूर में बैठक, कृषि मंत्री ने किसानों से मांगे सुझाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_686f642ea35cc.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वनस्पति तेलों के नए रेगुलेशन ऑर्डर का ड्राफ्ट जारी, 11 जुलाई तक मांगे सुझाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/draft-of-new-regulation-order-for-vegetable-oils-released-suggestions-sought-by-july-11.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 08 Jul 2025 17:48:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/draft-of-new-regulation-order-for-vegetable-oils-released-suggestions-sought-by-july-11.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="165" data-end="420">भारत सरकार वनस्पति तेलों से जुड़े नियम-कायदों में व्यापक बदलाव लाने जा रही है। इसके लिए&nbsp;<strong><a href="https://dfpd.gov.in/WriteReadData/Notices/c4f3664d-5e38-4d00-985b-49de2a6bfb2d_Draft%20VOPPA%20with%20forwarding%2001.07.2025.pdf">&lsquo;वेजिटेबल ऑयल प्रोडक्ट्स, प्रोडक्शन एंड अवेलेबिलिटी (रेगुलेशन) ऑर्डर, 2025</a></strong>&rsquo; का ड्राफ्ट जारी किया गया है और संबंधित पक्षों से 11 जुलाई तक सुझाव मांगे गए हैं।&nbsp;इस नए रेगुलेशन ऑर्डर के जरिए सरकार देश में वनस्पति तेलों के उत्पादन, उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था में जरूरी सुधार लाना चाहती है।</p>
<p data-start="556" data-end="732">यह मसौदा 2011 में लागू हुए मौजूदा रेगुलेशन ऑर्डर का स्थान लेगा। इसे खाद्य तेलों के उत्पादन, गुणवत्ता और आपूर्ति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।&nbsp;मंत्रालय का मानना है कि तेल उद्योग में तकनीकी प्रगति और अन्य बदलावों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा नियमों में व्यापक संशोधन की आवश्यकता है।</p>
<p data-start="882" data-end="1052">हालांकि, उद्योग से जुड़े कुछ सूत्रों का मानना है कि नए रेगुलेशन ऑर्डर से खाद्य तेल उद्योग पर सरकारी निगरानी बढ़ेगी और इससे 'इंस्पेक्टर राज' को बढ़ावा मिलने की आशंका है।</p>
<p data-start="1054" data-end="1409">वहीं, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कहना है कि वनस्पति तेल क्षेत्र में पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से VOPPA रेगुलेशन, 2025 का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। मंत्रालय ने इस पर उद्योग से सुझाव आमंत्रित किए हैं, और उनसे प्राप्त फीडबैक के आधार पर अंतिम मसौदे को अगले महीने तक लागू किया जा सकता है।</p>
<p data-start="1411" data-end="1659">गौरतलब है कि भारत में खाद्य तेलों की मांग लगातार बढ़ रही है और वर्तमान में देश अपनी ज़रूरत का लगभग 55&ndash;60 प्रतिशत खाद्य तेल आयात करता है। इस स्थिति को बदलने के लिए सरकार ने हाल के वर्षों में राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन जैसी योजनाएं शुरू की हैं।</p>
<p data-start="1411" data-end="1659"></p>
<p data-start="1411" data-end="1659"></p>
<p data-start="1411" data-end="1659"></p>
<p data-start="1411" data-end="1659"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ वनस्पति तेलों के नए रेगुलेशन ऑर्डर का ड्राफ्ट जारी, 11 जुलाई तक मांगे सुझाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि के लिए राज्य व फसलवार कार्ययोजना बनेगी, फसल औषधि केंद्र खोलने पर होगा विचार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/state-wise-and-crop-wise-action-plan-will-be-made-for-agriculture-considering-opening-crop-medicine-centre.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 07 Jul 2025 20:20:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/state-wise-and-crop-wise-action-plan-will-be-made-for-agriculture-considering-opening-crop-medicine-centre.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की 96वीं वार्षिक आम बैठक की अध्यक्षता की।</p>
<p>बैठक में आईसीएआर के महानिदेशक एवं सचिव (डेयर) <strong>डॉ. एम. एल. जाट</strong> ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वार्षिक प्रतिवेदन&nbsp;2024-2025&nbsp;का प्रस्तुतीकरण एवं अंगीकृत करने हेतु संकल्प पढ़ा। बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की वार्षिक रिपोर्ट&nbsp;2024-25&nbsp;जारी की गई। साथ ही कृषि एवं प्रौद्योगिकी संबंधित चार पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।&nbsp;</p>
<p></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_686bdf8135926.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p></p>
<p>इस अवसर पर&nbsp;केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योजनाओं का लाभ किसानों को पहुंचाने पर जोर दिया। साथ ही जन औषधि केंद्र के समान <strong>'फसल औषधि केंद्र'</strong> खोलने के विचार को आगे बढ़ाने की बात कही।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि राज्य का विषय है,&nbsp;राज्य सरकारों के सहयोग के बिना कृषि की उन्नति के प्रयास अधूरे हैं। केंद्र और राज्यों को मिलकर कृषि क्षेत्र के लिए कार्य करना होगा। कृषि क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए सभी वैज्ञानिकों और आईसीएआर टीम को बधाई देते हुए, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अभी कुछ चुनौतियाँ हैं जिन पर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि&nbsp;मात्र कागजी औपचारिकता के लिए अनुसंधान नहीं बल्कि किसानों की उपयोगिता को देखते हुए अनुसंधान किए जाने चाहिए।</p>
<h3><strong>फसलवार कार्ययोजना, गुणवत्तापूर्ण बीजों पर जोर</strong></h3>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सोयाबीन, दलहन और तिलहन में अभी और अधिक शोध व काम की जरूरत है। उन्होंने गेहूं, चावल और मक्के के साथ-साथ दलहन, तिलहन व अन्य फसलों के उत्पादन में तेजी लाने के प्रयासों पर जोर दिया। इसके लिए राज्यवार एवं फसलवार कार्ययोजनाएं बनाई जाएंगी।</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने अपने हाल के मध्य प्रदेश दौरे का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने वहां सोयाबीन की खेती का निरीक्षण किया, जहां उन्हें खराब बीज की गंभीर समस्या देखने को मिली। इसके कारण अंकुरण ही नहीं हो पाया था। उन्होंने इस मामले में त्वरित जाँच के आदेश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमानक बीज, खाद और उर्वरक एक गंभीर विषय है, जिस पर सरकार जल्द ही कड़ा कानूनी प्रावधान लाएगी। उर्वरकों के एमआरपी (MRP) पर भी काम करने की आवश्यकता है ताकि उनकी सही कीमत तय हो सके।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_686be0d9cabd5.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<h3><strong>फसलवार बैठकों का क्रम शुरू</strong></h3>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि फसलवार बैठकों का क्रम शुरू हो चुका है। सोयाबीन पर मध्य प्रदेश के इंदौर में एक बड़ी बैठक की गई है। अब आगे कपास, गन्ने व अन्य फसलों को लेकर भी विशेष बैठकें की जाएंगी। उन्होंने घोषणा की कि आगामी 11 जुलाई को कोयम्बटूर में कपास को लेकर एक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। प्रत्येक फसल पर राज्य की ज़रूरतों, जलवायु अनुकूलता और किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप विस्तारपूर्वक चर्चा की जाएगी, ताकि उचित समाधान के साथ उत्पादन वृद्धि पर काम हो सके।</p>
<h3><strong>किसानों की मांग के अनुरूप शोध&nbsp;</strong></h3>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे किसानों की मांग के अनुरूप और आधुनिक खेती के उपकरण बनाने की दिशा में प्रयास करें। उन्होंने एक किसान के अनुभव का उल्लेख किया, जिसने ऐसे उपकरण की मांग की थी जो उर्वरक की गुणवत्ता और उपयोगिता को निर्धारित मापदंडों के अनुसार बता सके। उन्होंने कहा कि किसानों से चर्चा के दौरान ऐसे कई विचार सामने आते हैं, जिन्हें आधार बनाकर शोध की दिशा तय की जा सकती है।</p>
<h3><strong>'विकसित कृषि संकल्प अभियान' का अगला चरण</strong></h3>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि रबी की फसल से पहले राज्यों के साथ मिलकर फिर से <strong>'विकसित कृषि संकल्प अभियान'</strong> के ज़रिए विज्ञान को किसानों तक ले जाने की कोशिश होगी। रबी सम्मेलन दो दिनों का होगा। पहले दिन रूपरेखा तय की जाएगी, और दूसरे दिन राज्यों के कृषि मंत्री तय रूपरेखा को अनुमोदित करते हुए अंतिम कार्ययोजना को रूप देंगे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_686be0f1f3bc4.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>इस बैठक में 18 से अधिक केंद्र व राज्यों के मंत्री शामिल हुए, जिन्होंने एकस्वर में भविष्य में खेती और किसान समृद्धि की दिशा में एकजुट होकर सार्थक प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई।</p>
<p>इस अवसर पर&nbsp;कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी,&nbsp;विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह,&nbsp;मत्स्य पालन,&nbsp;पशुपालन व डेयरी राज्य मंत्री एस. पी. बघेल,&nbsp;मत्स्य पालन,&nbsp;पशुपालन व डेयरी राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन,&nbsp;अरुणाचल के कृषि,&nbsp;मत्स्य पालन,&nbsp;पशुपालन,&nbsp;बागवानी मंत्री ग्रेबियल डी. वांगसू,&nbsp;बिहार के उप मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, बिहार की पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री रेनू देवी,&nbsp;मध्य प्रदेश के बागवानी,&nbsp;खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा,&nbsp;मिजोरम के कृषि मंत्री पी. सी. वनलालरुआता,&nbsp;हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण व पशुपालन,&nbsp;डेयरी और मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा,&nbsp;उत्तर प्रदेश के पशुपालन व डेयरी विकास मंत्री धर्मपाल सिंह,&nbsp;कर्नाटक के कृषि मंत्री एन. चेलुवरिया स्वामी,&nbsp;उत्तर प्रदेश के कृषि,&nbsp;शिक्षा,&nbsp;कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्यप्रताप शाही,&nbsp;ओडिशा के मत्स्य,&nbsp;व पशु संसाधन विकास विभाग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)&nbsp; गोकुलानंद मलिक,&nbsp;मध्य प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री अदल सिंह कंसाना,&nbsp;महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिराव कोकाटे एवं कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी उपस्थित थे।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि के लिए राज्य व फसलवार कार्ययोजना बनेगी, फसल औषधि केंद्र खोलने पर होगा विचार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान संगठनों के विरोध के बाद नीति आयोग ने विवादित वर्किंग पेपर वेबसाइट से हटाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/after-objections-from-farmers-unions-niti-aayog-removed-controversial-working-paper-from-the-website.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 03 Jul 2025 17:44:06 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/after-objections-from-farmers-unions-niti-aayog-removed-controversial-working-paper-from-the-website.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत सरकार के थिंक टैंक <strong>नीति आयोग</strong> ने भारत-अमेरिका कृषि व्यापार पर जारी <strong>वर्किंग पेपर</strong> को अपनी वेबसाइट से हटा दिया है। 30 मई को प्रकाशित इस वर्किंग पेपर में अमेरिकी जीएम सोयाबीन और जीएम मक्का के लिए भारतीय बाजार खोलने और कई अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाने का सुझाव दिया गया था, जिस पर किसान संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई।&nbsp;</p>
<p><strong>भारतीय किसान संघ</strong> की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, किसान संघ और अन्य किसान संगठनों के विरोध के बाद भारत-अमेरिका कृषि व्यापार पर कार्य पत्र को नीति आयोग की वेबसाइट से हटा लिया गया है। किसान संघ ने 14 जून को नीति आयोग के इस पेपर पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बयान जारी किया था।</p>
<p>भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री <strong>मोहिनी मोहन मिश्र</strong> ने कहा कि अमेरिकी दबाव में भारतीय कृषि को जीएम उत्पादों के लिए खोलने से कृषि पर निर्भर लगभग 70 करोड़ भारतीय लोगों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है। अमेरिका जैसे देशों में किसानों को भारी सब्सिडी दी जाती है और उत्पादन लागत कम है। ऐसे में भारत के किसान उनसे प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते। किसान संघ ने नीति आयोग के पेपर को वापस लेने के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे किसानों की बड़ी जीत बताया।</p>
<p>हालांकि, नीति आयोग ने वर्किंग पेपर वापस लेने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन अब यह पेपर नीति आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है। किसान संघ के अलावा कई अन्य किसान संगठनों और किसान नेताओं ने भी नीति आयोग के विवादित पेपर को वापस लेने की मांग की थी।&nbsp;</p>
<p><strong>कांग्रेस ने उठाए सवाल&nbsp;</strong></p>
<p>कांग्रेस नेता <strong>जयराम रमेश</strong> ने सोशल मीडिया पर लिखा कि नीति आयोग के एक पेपर में अमेरिका से जीएम मक्का और सोयाबीन के शुल्क मुक्त आयात की सिफारिश की गई है। मोदी सरकार के लिए बिहार के मक्का किसानों और मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र व राजस्थान के सोयाबीन उत्पादकों की तुलना में अमेरिकी मिडवेस्ट के किसानों और बड़ी बहुराष्ट्रीय ट्रेडिंग कंपनियों के हित ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इस पेपर को जारी करने की अनुमति किसने दी? और क्या यह भारत-अमेरिका आगामी व्यापार समझौते की झलक है?&nbsp;</p>
<p><strong>क्या थे प्रमुख सुझाव?</strong></p>
<p>नीति आयोग के वर्किंग पेपर में कहा गया था कि भारत विश्व में खाद्य तेल का सबसे बड़ा आयातक है और अमेरिका के पास सोयाबीन, जो कि जीएम है, का बहुत बड़ा निर्यात सरप्लस है। भारत अमेरिका को सोयाबीन के आयात में कुछ रियायत दे सकता है, ताकि घरेलू उत्पादन को नुकसान पहुंचाए बिना व्यापार असंतुलन कम हो सके।</p>
<p>वर्किंग पेपर में यह भी सुझाव दिया गया था कि भारत को झींगा, मछली, मसाले, चावल, चाय, कॉफी और रबर जैसे उत्पादों की अमेरिकी बाजार में पहुंच बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। भारत अमेरिका को सालाना लगभग 5.75 बिलियन डॉलर का कृषि-निर्यात करता है। इसे बढ़ाना व्यापार वार्ता का हिस्सा होना चाहिए।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>कृषि को लेकर फंसा पेंच </strong></p>
<p>भारत और अमेरिका जल्द एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं। भारत के वाणिज्य मंत्रालय में विशेष सचिव राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय वार्ता दल वाशिंगटन में इस समझौते को अंतिम रूप देने में जुटा है।</p>
<p>अमेरिका चाहता है कि उसे भारत में कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मिले, <span>लेकिन भारत के लिए यह विषय देश के छोटे किसानों की आजीविका से जुड़ा है</span>, <span>इसलिए यह बेहद संवेदनशील मुद्दा है।&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_6866738cb2ebd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान संगठनों के विरोध के बाद नीति आयोग ने विवादित वर्किंग पेपर वेबसाइट से हटाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_6866738cb2ebd.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[2030 तक एपीडा उत्पादों का निर्यात 55 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्यः अभिषेक देव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/apeda-aims-for-55-billion-dollar-exports-by-2030-says-abhishek-dev.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 03 Jul 2025 09:33:48 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/apeda-aims-for-55-billion-dollar-exports-by-2030-says-abhishek-dev.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत ने 100 अरब डॉलर के कृषि निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। अभी निर्यात इसका लगभग आधा है। अगले पांच वर्षों में कृषि निर्यात दोगुना करने के लिए कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने क्या रणनीति बनाई है? <strong>एपीडा चेयरमैन अभिषेक देव</strong> ने रूरल वर्ल्ड के <strong>एडिटर-इन-चीफ हरवीर सिंह</strong> और <strong>एक्&zwj;जिक्यूटिव एडिटर अजीत सिंह</strong> के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में इस बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निर्यात में तेज वृद्धि के लिए उन बाजारों और उत्पादों पर फोकस किया जा रहा है जो अधिक मूल्य दिला सकते हैं। बातचीत के मुख्य अंश-</p>
<p><strong>सवाल: भारत ने कृषि निर्यात में 100 अरब डॉलर का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एपीडा क्या रणनीति अपना रहा है?</strong></p>
<p><strong>अभिषेक देव:</strong> कृषि निर्यात में 100 अरब डॉलर के व्यापक लक्ष्य के मद्देनजर और कृषि निर्यात बास्केट में एपीडा की हिस्सेदारी को ध्यान में रखते हुए, हमने 2030 तक अपने अनुसूचित उत्पादों का 55 अरब डॉलर से अधिक निर्यात का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एपीडा कई रणनीतिक पहलुओं पर कार्य कर रहा है। प्रमुख और अधिक संभावना वाले उत्पादों पर केंद्रित निर्यात संवर्धन पर जोर दिया जा रहा है। यूरोपीय संघ, अमेरिका, ब्रिटेन, ओशेनिया, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े लेकिन कम निर्यात वाले बाजारों में विविधीकरण और गहरी पैठ बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।&nbsp;</p>
<p>इस लक्ष्य की दिशा में एपीडा ने इक्रियर को नॉलेज पार्टनर के रूप में जोड़ा है, जो 20 प्रमुख और अधिक संभावना वाले उत्पादों की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला का विश्लेषण कर रहा है। क्षेत्र एवं देश के हिसाब से निर्यात योजनाएं तैयार की जा रही हैं। एपीडा उत्पादों की ब्रांडिंग और पैकेजिंग को बेहतर बनाने पर भी कार्य कर रहा है ताकि उनकी मांग और निर्यात मूल्य में वृद्धि हो सके। जल्दी नष्ट होने वाले उत्पादों के किफायती और सस्टेनेबल समुद्री परिवहन के लिए प्रोटोकॉल विकसित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, एपीडा में एक मार्केट इंटेलिजेंस सेल की स्थापना की गई है, जिसमें क्रिसिल को नॉलेज पार्टनर के रूप में जोड़ा गया है। यह सेल कृषि क्षेत्र को प्रभावित करने वाले वैश्विक और घरेलू घटनाक्रमों पर नियमित जानकारी और विश्लेषण प्रदान करता है, जिससे सभी हितधारकों को लाभ हो सके।</p>
<p><strong>सवाल: आने वाले समय में किस सेक्टर या प्रोडक्ट में संभावना है जहां निर्यात अधिक बढ़ेगा?</strong></p>
<p><strong>अभिषेक देव:</strong>&nbsp;एपीडा ने विभिन्न क्षेत्रों में अधिक संभावना वाले उत्पाद श्रेणियों की पहचान की है, जो कृषि निर्यात के अगले चरण को गति दे सकते हैं। हमारे प्रमुख फोकस क्षेत्रों में चावल (बासमती और गैर-बासमती), केला, आम, अनार, अंगूर, अनानास जैसे ताजे फल शामिल हैं। इनकी वैश्विक बाजारों में उल्लेखनीय मांग रही है। सब्जियों में आलू, हरी मिर्च, अदरक और भिंडी को प्रमुख उत्पादों के रूप में चिन्हित किया गया है। एपीडा प्रसंस्कृत और मूल्यवर्धित खाद्य पदार्थों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को भी देख रहा है। इनमें मूंगफली, मखाना, सॉस, जूस, पापड़, पास्ता, बिस्किट, मादक पेय और मिठाइयां जैसे उत्पाद अधिक संभावनाओं वाले माने जा रहे हैं। प्राकृतिक शहद, दुग्ध उत्पाद (घी, पनीर) और अंडे जैसे उत्पादों से भी और उम्मीदें हैं। इन फोकस उत्पादों का कुल निर्यात वर्ष 2030 तक 40 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।</p>
<p><strong>सवाल: आप 100 अरब डॉलर निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने में कौन सी प्रमुख चुनौतियाँ देखते हैं?</strong></p>
<p><strong>अभिषेक देव:</strong> कुछ प्रमुख चुनौतियां हैं - कोल्डचेन नेटवर्क में इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी, खेत स्तर पर प्रसंस्करण की कमी, आपूर्ति श्रृंखला की कमी। इन वजहों से उपज नष्ट होते हैं और निर्यात गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। रेड सी संकट और मध्य पूर्व संघर्ष के कारण हवाई और समुद्री मार्गों से परिवहन लागत में वृद्धि हुई है। उत्तर-पूर्वी राज्यों से बंदरगाहों तक परिवहन लागत भी अधिक आती है। एक और चुनौती किसानों में अच्छी कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी का अभाव है, जिससे उत्पादों में कीटनाशकों के अवशेष पाए जाते हैं और गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है।</p>
<p><strong>सवाल: भारत का 2024-25 में कृषि निर्यात प्रदर्शन कैसा रहा? प्रमुख उपलब्धियां क्या रहीं?</strong></p>
<p><strong>अभिषेक देव:</strong> वर्ष 2024&ndash;25 में भारत का कृषि निर्यात प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। एपीडा के अनुसूचित उत्पादों का निर्यात अब तक के सर्वोच्च स्तर, 27.90 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसमें प्रमुख योगदान गैर-बासमती चावल (6.5 अरब डॉलर), बासमती चावल (5.9 अरब डॉलर), बफेलो मीट (4 अरब डॉलर), ताजे फल और सब्जियां (2.06 अरब डॉलर) जैसे उत्पादों का रहा। इसके अलावा अनाज-आधारित प्रसंस्कृत उत्पाद, दालें, दुग्ध उत्पाद, प्रसंस्कृत सब्जियां, फलों के प्रसंस्कृत रस, कोको उत्पाद आदि के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यह प्रदर्शन भारत के प्रसंस्कृत और अधिक मूल्य वाले कृषि उत्पादों की वैश्विक मांग में वृद्धि को दर्शाता है। इसके अलावा जैविक उत्पादों का निर्यात इस वर्ष 35% बढ़ा है। इसमें अनाज, चाय, प्रसंस्कृत उत्पाद, एसेंशियल ऑयल, आयुर्वेदिक और औषधीय उत्पाद जैसी सभी प्रमुख श्रेणियों में अच्छी वृद्धि देखी गई।</p>
<p><strong>सवाल: एपीडा पारंपरिक जगहों से अलग कृषि निर्यात बाजारों में कैसे विविधता ला रहा है?</strong></p>
<p><strong>अभिषेक देव:</strong> भारत का कृषि निर्यात पारंपरिक रूप से मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र तक सीमित रहा है। लेकिन यूरोप, इंग्लैंड, जापान, कोरिया, चीन जैसे बाजारों में अब भी अपार संभावनाएं मौजूद हैं। एपीडा भारतीय दूतावासों के माध्यम से इन बाजारों से प्रतिक्रिया प्राप्त करके और निर्यातकों के साथ रणनीति पर चर्चा कर इन बाजारों में प्रवेश की योजना बना रहा है। भारत के कृषि उत्पादों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के मकसद से एपीडा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भाग ले रहा है। जैसे गल्फूड (दुबई), बायोफैक (जर्मनी), सियाल (पेरिस), एनूगा (जर्मनी), नैचरल प्रोडक्ट एक्सपो वेस्ट (अमेरिका), वर्ल्ड फूड इंडिया, इंडस फूड और आहार। इसके अतिरिक्त, एपीडा व्यापार प्रतिनिधिमंडलों के आवागमन को प्रोत्साहित करता है और प्रमुख राज्यों और पूर्वोत्तर में नियमित रूप से बायर-सेलर मीट का आयोजन करता है, ताकि भारतीय निर्यातकों को वैश्विक आयातकों से जोड़ा जा सके।</p>
<p><strong>सवाल: कुछ बाजारों में उत्पादों की गुणवत्ता प्रमुख मुद्दा है। अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, सर्टिफिकेशन और ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए एपीडा किसानों और निर्यातकों को किस प्रकार सहायता कर रहा है?</strong></p>
<p><strong>अभिषेक देव:</strong> एपीडा खेत स्तर पर गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज (जीएपी) को अपनाने और उनके सर्टिफिकेशन को प्रोत्साहित कर रहा है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि उत्पाद आयातक देशों की सैनिटरी और फाइटो-सैनिटरी आवश्यकताओं के अनुरूप हो। एपीडा किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को ग्लोबल जीएपी सर्टिफिकेट प्राप्त करने में भी सहयोग करता है, जिससे इन उत्पादों की यूरोपीय संघ जैसे विकसित देशों के बाजारों में मार्केटिंग क्षमता बढ़ती है।&nbsp;</p>
<p>खाद्य प्रसंस्करण करने वालों और निर्यातकों को वैश्विक बाजार में बेहतर स्वीकृति दिलाने के मकसद से एपीडा खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली सर्टिफिकेशन में भी उनकी मदद कर रहा है। एपीडा ने अंगूर, मूंगफली, ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए ट्रेसेबिलिटी सिस्टम को विकसित और लागू किया है, जिसे आयातक देशों ने सराहा भी है। निर्यात वाले उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एपीडा ने देश में 117 प्रयोगशालाओं को मान्यता दी है। उन्हें एनएबीएल की तरफ से आईएसओ-17025 मान्यता प्राप्त है। ये प्रयोगशालाएं चावल जैसे एपीडा द्वारा अनुसूचित उत्पादों के लिए परीक्षण और विश्लेषण सेवाएं देती हैं।</p>
<p><strong>सवाल: क्या वैश्विक बाजारों में जैविक और जीआई टैग वाले उत्पादों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है?</strong></p>
<p><strong>अभिषेक देव:</strong> एपीडा वैश्विक स्तर पर भारत के कृषि निर्यात को विस्तार देने की रणनीति के तहत जैविक और जीआई-टैग वाले उत्पादों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर देता है। जैविक उत्पादों के निर्यात इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) को हितधारकों से मिले सुझावों के आधार पर संशोधित किया गया है। ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, जापान और न्यूजीलैंड के साथ इस सिलसिले में समझौते पर कार्य जारी है। जैविक निर्यात प्रमोशन के लिए एक समर्पित पोर्टल लांच किया गया है। जर्मनी के बायोफैक, अमेरिका के नेचुरल प्रोडक्ट एक्सपो वेस्ट और दुबई के ऑर्गेनिक एंड नेचुरल प्रोडक्ट एक्सपो जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी बढ़ाई गई है। एपीडा ने &lsquo;ब्रांड इंडिया&rsquo; अभियान के अंतर्गत भारतीय जैविक उत्पादों की वैश्विक पहचान को सशक्त करने के लिए इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (आईबीईएफ) के साथ सहयोग भी किया है।</p>
<p>अब तक कुल 242 जीआई उत्पाद पंजीकृत हो चुके हैं, जो भारत की विविध कृषि और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। प्रमुख जीआई निर्यात उत्पादों में बासमती चावल, जीआई किस्मों के आम, केले, अनानास, प्याज, सांगली अंगूर/किशमिश, पूर्वोत्तर के उत्पादों में असम का जोहा चावल, काला चावल (चक-हाओ), नगा मिर्च, मिथिला का मखाना एवं इनसे बने प्रसंस्कृत उत्पाद शामिल हैं। इनका निर्यात अमेरिका, ब्रिटेन, यूएई, ईरान, इराक, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान आदि प्रमुख आयातक देशों को किया गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>सवाल: वैश्विक व्यापार में तनाव की स्थिति और अमेरिकी टैरिफ के संदर्भ में भारतीय कृषि निर्यात के लिए क्या चुनौतियां और अवसर हैं?</strong><br /><strong>अभिषेक देव:</strong> वैश्विक व्यापारिक तनाव और उभरते हालातों के बावजूद अपनी विशिष्ट और अलग स्वाद प्रोफाइल के कारण भारतीय कृषि निर्यात मजबूत बना रहेगा।</p>
<p><strong>सवाल: निर्यात में तेजी लाने के लिए नीति, इन्फ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय प्रोत्साहन के मोर्चे पर सरकार की तरफ से किन कदमों की आवश्यकता है?</strong><br /><strong>अभिषेक देव:</strong> भारतीय कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई प्रमुख क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है।</p>
<p>प्रमुख उत्पादों पर जैसे केले, बासमती चावल, गैर-बासमती चावल, बफेलो मीट, काजू, जैविक उत्पाद जैसे 20 से अधिक उत्पादों की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला पर केंद्रित एक्सपोर्ट प्रमोशन।&nbsp;</p>
<p>ब्रांडिंग को बढ़ावा: प्रमुख बाजारों में ब्रांडिंग और प्रचार। बासमती चावल, गैर-बासमती चावल, ताजे फल, जैविक उत्पाद के लिए प्रचार की शुरुआत।</p>
<p>लॉजिस्टिक्स की बाधाएं दूर करना: जल्दी नष्ट होने वाले उत्पादों के लिए समुद्री परिवहन प्रोटोकॉल का कार्यान्वयन और उन्हें मुख्यधारा में लाना।</p>
<p>उत्पाद गुणवत्ता में सुधार: वैश्विक जीएपी सर्टिफिकेशन, उत्पादों की ट्रेसेबिलिटी</p>
<p>कोल्डचेन नेटवर्क और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती: विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों के साथ समन्वय।</p>
<p>सैनिटरी और फाइटो-सैनिटरी अवरोधों को दूर करना और उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना</p>
<p><strong>सवाल: बेहतर बाजार पहुंच के लिए एपीडा भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के साथ अपने प्रयासों को कैसे जोड़ कर रहा है?</strong></p>
<p>एपीडा यह काम सक्रिय रूप से कर रहा है ताकि कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए बाजार पहुंच को बढ़ाया जा सके। ट्रेड वार्ताकारों के साथ मिलकर उन उत्पादों और टैरिफ लाइन की पहचान की जा रही जिनमें एफटीए से अधिक लाभ हो सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>सवाल: एपीडा निर्यात वृद्धि को सस्टेनेबिलिटी से संबंधित चिंताओं जैसे कीटनाशकों का उपयोग, कार्बन उत्सर्जन और जैव विविधता के साथ कैसे संतुलित करता है?</strong></p>
<p><strong>अभिषेक देव:</strong> निर्यात वृद्धि को सस्टेनेबिलिटी के साथ संतुलित करने के लिए एपीडा कृषि निर्यात मूल्य श्रृंखला में पर्यावरण हितैषी प्रथाओं को बढ़ावा दे रहा है। कीटनाशक अवशेषों से संबंधित मुद्दों के समाधान के लिए खेत स्तर पर जीएपी को अपनाने और प्रमाणित करने को प्रोत्साहित किया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि उत्पाद आयातक देशों की सैनिटरी और फाइटो-सैनिटरी आवश्यकताओं का पालन करें।</p>
<p><strong>सवाल: एपीडा एग्री-स्टार्टअप्स, एफपीओ/एफपीसी और सहकारी संस्थाओं को निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में किस प्रकार मदद कर रहा है?</strong></p>
<p><strong>अभिषेक देव:</strong> इसके लिए कई कदम उठाए जा रहे हैंः<br />क्लस्टर-आधारित निर्यात संवर्धन: एपीडा ने अधिक संभावना वाले कृषि खाद्य क्लस्टरों की पहचान की है। यह उत्पादकता, गुणवत्ता और बाजार बहुंच बढ़ाने के लिए लक्षित हस्तक्षेप करता है।<br />टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशनः ट्रेसेबिलिटी, इनोवेटिव पैकेजिंग और कोल्डचेन लॉजिस्टिक्स जैसी उन्नत तकनीक को अपनाने में सहयोग।<br />विभागों के साथ सहयोग: नाबार्ड, एसएफएसी और नाफेड के साथ एमओयू के माध्यम से एफपीओ/सहकारी संस्थाओं के लिए कौशल विकास और बाजार पहुंच को मजबूत करना।<br />क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण: 2024&ndash;25 में 879 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 78,264 हितधारकों को निर्यात प्रक्रिया, सर्टिफिकेशन और श्रेष्ठ प्रथाओं के लिए प्रशिक्षित किया गया।<br />स्टार्टअप और निर्यात समर्थनः 500 स्टार्टअप का मूल्यांकन किया जाएगा, इनमें से बेहतरीन 25 स्टार्टअप को निर्यात और निवेश के लिए तैयार करने के मकसद से सहायता दी जाएगी।<br />वित्तीय सहायता योजना: इसमें तीन तरह से मदद- निर्यात इन्फ्रास्ट्रक्चर (पैकहाउस, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण इकाइयां), क्वालिटी डेवलपमेंट (सर्टिफिकेशन, फूड सेफ्टी, ट्रेसेबिलिटी) और मार्केट डेवलपमेंट (व्यापार मेले, बायर-सेलर मीट, प्रमोशन)।<br />इन पहलों का उद्देश्य किसान समूहों और स्टार्टअप को निर्यात में सफलता हासिल के लिए सशक्त बनाना है।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_68569ef59569f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ 2030 तक एपीडा उत्पादों का निर्यात 55 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्यः अभिषेक देव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि भूमि से पेड़ काटने के मॉडल नियम जारी, किसानों पर पड़ सकता है लाइसेंस राज का बोझ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/model-rules-for-felling-of-trees-in-agricultural-land-interference-of-verifying-agencies-may-increase-corruption-and-problems.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 30 Jun 2025 20:38:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/model-rules-for-felling-of-trees-in-agricultural-land-interference-of-verifying-agencies-may-increase-corruption-and-problems.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने कृषि भूमि पर पेड़ों की कटाई के लिए मॉडल नियम जारी किए हैं। इसके पीछे सरकार का मकसद एग्रो-फॉरेस्ट्री यानी कृषि-वानिकी को बढ़ावा देकर किसानों की आय और वृक्ष आवरण को बढ़ाना बताया जा रहा है। लेकिन इसमें कई प्रावधान ऐसे हैं जो किसानों पर प्रक्रियाओं और लाइसेंस राज का बोझ बढ़ा सकते हैं। साथ ही भ्रष्टाचार के नए रास्ते खोल सकते हैं। अगर ये नियम लागू होते हैं तो वृक्षारोपण से लेकर पेड़ काटने तक हर कदम पर किसानों को सरकारी निगरानी का सामना करना पड़ेगा।</p>
<p>केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से <a href="https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2025/jun/doc2025629578501.pdf"><strong>&ldquo;कृषि भूमि पर पेड़ों की कटाई के लिए मॉडल नियम&rdquo;</strong> </a>जारी किए गये हैं। मंत्रालय का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य कृषि वानिकी भूमि के पंजीकरण और पेड़ों की कटाई व परिवहन संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। ताकि किसानों को कृषि वानिकी के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। सरकार एग्रो-फॉरेस्ट्री के माध्यम से टिंबर उत्पादन बढ़ाना चाहती है, जिससे टिंबर आयात पर निर्भरता कम हो। पर्यावरण की दृष्टि से भी एग्रो-फॉरेस्ट्री फायदेमंद है।&nbsp;</p>
<p>केंद्र की ओर से जारी मॉडल नियमों को लागू करने का निर्णय अंतत: राज्य सरकारों को लेना है। केंद्रीय वन मंत्रालय ने राज्य सरकारों से मॉडल नियमों पर विचार कर इन्हें लागू करने का आग्रह किया है।</p>
<p><strong>राज्य स्तरीय समिति करेगी निगरानी </strong></p>
<p>मॉडल नियमों के अनुसार, वुड-बेस्ड इंडस्ट्रीज (स्थापना और विनियमन) दिशानिर्देश, 2016 के तहत गठित राज्य स्तरीय समिति (SLC) ही इन नियमों को लागू करने के लिए जिम्मेदार होगी। अब इस समिति में राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारी भी शामिल होंगे। जिस तरह की नियामक व्यवस्था वुड-बेस्ड इंडस्ट्रीज के लिए लागू है, <span>वही एग्रो-फॉरेस्ट्री करने वाले किसानों पर भी लागू होगी। इससे किसानों पर रेगुलेशन का झंझट बढ़ सकता है। </span></p>
<p><strong>प्लांटेशन का कराना होगा रजिस्ट्रेशन</strong></p>
<p>मॉडल नियमों के अनुसार,<span> किसानों को अपने प्लांटेशन का रजिस्ट्रेशन <strong>नेशनल टिंबर मैनेजमेंट सिस्टम (</strong></span><strong>NTMS)</strong> पोर्टल पर कराना आवश्यक होगा। इसमें भूमि के स्वामित्व और जमीन की लोकेशन आदि जानकारियां देनी होंगी।</p>
<p>अभी तक एग्रो-फॉरेस्ट्री के लिए इस प्रकार के किसी रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है। ग्राम स्तर पर पटवारी, <span>लेखपाल और कृषि विभाग के अधिकारी फसल और भूमि-उपयोग का ब्यौरा जुटाते हैं। लेकिन नए नियमों के बाद एग्रो-फॉरेस्ट्री का न सिर्फ रजिस्ट्रेशन कराना होगा, बल्कि यह वन विभाग के अधिकारियों की निगरानी में आ जाएगी। </span></p>
<p><strong>किसानों को देनी होंगी ये जानकारी </strong></p>
<p>मॉडल नियमों के अनुसार, किसानों को प्लांटेशन का पूरा ब्यौरा नेशनल टिंबर मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल पर दर्ज करना होगा। इसमें भूमि स्वामित्व की जानकारी, <span>खेत की लोकेशन</span>, <span>पेड़ों की </span>प्रजाति, पेड़ों की संख्या, वृक्षारोपण की तिथि और पौध की औसत ऊंचाई की जानकारी शामिल है। समय-समय पर प्लांटेशन की जानकारी भी अपडेट करनी होगी।</p>
<p>इतना ही नहीं, <span>किसानों को हरके पेड़ की फोटो जियो टैगिंग के साथ </span>KML फाइल फॉर्मेट में उपलब्ध करानी होगी, <span>ताकी ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित की जा सके। प्लांटेशन के ब्यौरे की निगरानी कृषि विभाग और पंचायत राज विभाग के अलावा वन विभाग के अधिकारियों द्वारा भी की जाएगी। देश में छोटे किसानों की बड़ी तादाद और डिजिटल डिवाइड को देखते हुए, इस तरह के प्रावधानों पर सवाल खड़े हो सकते हैं।&nbsp;</span>&nbsp; &nbsp;</p>
<p><strong>सत्यापन एजेंसियों की नियुक्ति</strong></p>
<p><span>कृषि</span><span>&nbsp;</span><span>भूमि</span><span>&nbsp;</span><span>से</span><span>&nbsp;</span><span>पेड़ों</span><span>&nbsp;</span><span>की</span><span>&nbsp;</span><span>कटाई</span><span>&nbsp;</span><span>के</span><span>&nbsp;</span><span>आवेदनों</span><span> की जांच के लिए सत्यापन </span><span>एजेंसियों</span><span>&nbsp;</span><span>को</span><span> एम्पैनल किया जाएगा। पेड़ काटने का परमिट जारी करने में&nbsp;</span>इनकी अहम भूमिका होगी। इन एजेंसियों के पास वन प्रबंधन और एग्रो-फॉरेस्ट्री की विशेषज्ञता होनी चाहिए। फिलहाल स्पष्ट नहीं है कि ये एजेंसियां सरकारी होगी या प्राइवेट? लेकिन एग्रो-फॉरेस्ट्री में सत्यापन एजेंसियों के दखल से किसानों का झंझट और भ्रष्टाचार बढ़ सकता है। &nbsp;</p>
<p><strong>कैसे जारी होगा पेड़ काटने का परमिट</strong></p>
<p>पंजीकृत प्लांटेशन से पेड़ों की कटाई के लिए किसानों को नेशनल टिंबर मैनेजमेंट सिस्टम (NTMS) पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके बाद सत्यापन एजेंसियां खेत का निरीक्षण करेंगी और उनकी रिपोर्ट के आधार पर, पेड़ काटने&nbsp;के&nbsp;परमिट&nbsp;जारी&nbsp;किए&nbsp;जाएंगे। इन एजेंसियों के कामकाज की निगरानी संबंधित डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) करेंगे।&nbsp;</p>
<p>10 से कम पेड़ वाली कृषि भूमि से पेड़ काटने के लिए किसानों को पेड़ की फोटो एनटीएमएस पोर्टल पर अपलोड करनी होगी और पेड़ कटाई की तिथि बतानी होगी। ऐसे मामलों में पेड़ काटने के लिए एनओसी पोर्टल के जरिए जारी की जाएगी। पेड़ों की कटाई के बाद ठूंठ की तस्वीरें भी पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी।&nbsp;</p>
<p><strong>आशंकाएं</strong></p>
<p>नए नियमों से भले ही कृषि वानिकी को बढ़ावा देने और पेड़ों की कटाई की प्रक्रिया को आसान बनाने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन ये नियम किसानों के लिए नई मुश्किलें पैदा कर सकते हैं और भ्रष्टाचार के नए रास्ते खोल सकते हैं। किसान पहले से ही तहसील और पटवारी स्तर के भ्रष्टाचार से परेशान हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>एग्रो-फॉरेस्ट्री पर वन विभाग और सत्यापन एजेंसियों की निगरानी एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि ये नियम एग्रो-फॉरेस्ट्री से जुड़ी बड़ी कंपनियों को ध्यान में रखकर तैयार किए गये हैं। तीन विवादित कृषि कानूनों की तरह इन नियमों को तैयार करने में भी किसानों के साथ व्यापक विचार-विमर्श का कमी दिखाई पड़ती है।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_6862a87aba1a9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि भूमि से पेड़ काटने के मॉडल नियम जारी, किसानों पर पड़ सकता है लाइसेंस राज का बोझ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मानसून 9 दिन पहले देश भर में पहुंचा, जून में सामान्य से 8 फीसदी अधिक बारिश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-reached-the-entire-country-9-days-earlier-june-saw-8-more-rain-than-normal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 30 Jun 2025 11:06:23 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-reached-the-entire-country-9-days-earlier-june-saw-8-more-rain-than-normal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दक्षिण-पश्चिम मानसून 29 जून को देश भर <strong>में</strong> <strong>पहुंच चुका है</strong><strong>। </strong>भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि मानसून ने सामान्य तिथि 8 जुलाई से 9 दिन पहले पूरे भारत को कवर कर लिया है। यह 2020 के बाद मानसून का सबसे तेज देशव्यापी कवरेज है, तब मानसून 26 जून तक पूरे देश में पहुंच गया था।</p>
<p>रविवार को पश्चिमी यूपी, <span>पश्चिमी मध्य प्रदेश</span>, <span>झारखंड</span>, <span>उत्तराखंड</span>, <span>हरियाणा</span>, <span>पंजाब और दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में काफी बारिश हुई। इससे भीषण गर्मी से राहत मिली है लेकिन उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश से कई जगह भूस्खलन के चलते जान-माल को नुकसान पहुंचा है। </span></p>
<p>&nbsp;IMD के अनुसार, अगले 7 <span>दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम</span>, <span>मध्य</span>, <span>पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी वर्षा की गतिविधि जारी रहने की संभावना है</span>।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_686223d00412a.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>उत्तराखंड, हिमाचल और झारखंड में भारी बारिश का अलर्ट</strong></p>
<p>मौसम विभाग ने 30 जून को उत्तराखंड और झारखंड के लिए अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। जबकि हिमाचल, <span>पंजाब</span>, <span>हरियाणा</span>, <span>यूपी</span>, <span>बिहार</span>, <span>पूर्वी एमपी</span>, <span>छत्तीसगढ़</span>,<span> ओडिशा और मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ में भारी बारिश की ओरेंज वार्निंग जारी की गई है। </span></p>
<p><strong>बारिश व भूस्खलन से कई हादसे</strong></p>
<p>पिछले 24 घंटों में उत्तराखंड और हिमाचल में भारी बारिश और भूस्खलन से कई हादसों की खबर है। चार धाम यात्रा एक दिन के रोक दी गई। आदि कैलाश मार्ग भी अवरुद्ध हो गया है। उत्तरकाशी के यमुनोत्री हाईवे पर सिलाई बैंड के पास भारी मलबा आने के बाद 7 मजदूर लापता हैं जबकि 2 मजदूरों के शव बरामद किए गये। उत्तरकाशी जनपद के मोरी क्षेत्र में एक वाहन अनियंत्रित होकर सीधे रुपिन नदी में जा गिरा। यमुना घाटी मेमें बादल फटने से कई जगह ताबाही मची है।</p>
<p>हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। भूस्खलन के कारण राज्य भर में 39 लोगों की मौत हो गई जबकि 4 लापता हैं।&nbsp;मौसम विभाग ने 5 जुलाई तक राज्य में भारी बारिश का अनुमान जताया है। अगले 24 घंटों में 10 जिलों में अचानक बाढ़ आने की चेतावनी दी गई है।</p>
<p><strong>जून में सामान्य से 8 फीसदी अधिक बारिश </strong></p>
<p>IMD ने इस साल मानसून में दीर्घकालिक औसत (LPA) से 106% बारिश की संभावना जताई है, जो कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है। इस मानसून सीजन में 1 जून से 29 जून तक देश में सामान्य से 8 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है। इस दौरान उत्तर-पश्चिमी भारत में सामान्य से 37 फीसदी और मध्य भारत में 24 फीसदी अधिक बारिश हुई। हालांकि, <span>पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 17 फीसदी और दक्षिण भारत में सामान्य से 2 भी कम बारिश हुई। देश के 36 मौसम संभागों में से 26 में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज की गई है जो देश के कुल भूभाग का 76 फीसदी हैं।</span></p>
<p><span></span></p>
<p><span></span></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_686221d163f0a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मानसून 9 दिन पहले देश भर में पहुंचा, जून में सामान्य से 8 फीसदी अधिक बारिश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_686221d163f0a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डीएपी की आयात कीमत 810 डॉलर प्रति टन पर पहुंची, ओपनिंग स्टॉक पिछले साल से 42% कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/dap-import-price-reached-810-dollar-per-tonne-opening-stock-9-lakh-tonnes-less-than-last-year.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 30 Jun 2025 05:52:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/dap-import-price-reached-810-dollar-per-tonne-opening-stock-9-lakh-tonnes-less-than-last-year.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में यूरिया के बाद सबसे अधिक खपत वाले उर्वरक डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की आयात कीमतें 810 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई हैं। बढ़ती कीमतों और घटते आयात का असर यह है कि 1 जून, 2025 को डीएपी का ओपनिंग स्टॉक पिछले साल से करीब नौ लाख टन यानी करीब 42% कम था।&nbsp; इसकी वजह से जहां देश में कई जगहों पर किसानों को डीएपी की उपलब्धता का सामना करना पड़ रहा है, वहीं डीएपी की कालाबाजारी भी बढ़ रही है।</p>
<p>इस बारे में बात करने पर देश की सबसे बड़ी उर्वरक कंपनियों में एक के वरिष्ठ अधिकारी ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि हमें कम डीएपी के साथ काम चलाना सीख लेना चाहिए। कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी बड़ी वजह चीन द्वारा डीएपी का निर्यात बंद करना है और उसकी वजह से दुनिया भर में डीएपी की कीमतें बढ़ रही हैं।</p>
<p>चालू खरीफ सीजन में एक जून, 2025 को देश में डीएपी का स्टॉक 12.4 लाख टन था जबकि पिछले साल 1 जून 2024 को डीएपी का स्टॉक 21.6 लाख टन था और उसके एक साल पहले जून 2023 में डीएपी का स्टॉक 33.2 लाख टन था। इन आंकड़ों का सीधा मतलब है कि उर्वरक कंपनियां डीएपी और उसके कच्चे माल फॉस्फोरिक एसिड और रॉक फॉस्फोरस का कम आयात कर रही हैं। डीएपी की मामले में भारत की आयात निर्भरता लगभग शतप्रतिशत है। देश में खपत का आधे से अधिक तैयार डीएपी आता है और बाकी का उत्पादन कच्चे माल का आयात कर उसका उत्पादन देश में होता है।</p>
<p>किसान डीएपी का अधिकांश उपयोग फसल की बुवाई या रोपाई के समय करते हैं क्योंकि पौधों की जड़ों को मजबूत करने&nbsp; &nbsp;और शुरुआती विकास में यह उर्वरक अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि सीजन के शुरू में इसकी उपलब्धता किसानों के लिए काफी अहम हैं। हालांकि सरकार ने कहा है कि वह महंगे आयात की लागत की कंपनियों को भरपाई करेगी लेकिन उर्वरक कंपनियां पुराने बकाया के चलते इस मामले में गो स्लो की रणनीति अपना रही हैं। हालांकि डीएपी विनियंत्रित (डि-कंट्रोल) उर्वरकों में शुमार होता और सरकार इन उर्वरकों की कीमतें यूरिया की तरह नियंत्रित नहीं करती है। लेकिन परोक्ष रूप से सरकार के मुताबिक ही उर्वरक कंपनियो ने डीएपी के एक बैग (50 किलो) की कीमत 1350 रूपये प्रति बैग तय कर रखी है।</p>
<p>उर्वरक उद्योग सूत्रों का कहना है कि किल्लत के चलते किसानों को कई जगह इसके लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। यह कीमत 1700 रुपये से 1800 रुपये तक है। उक्त सूत्रों का कहना है कि हालांकि सरकार उर्वरक कंपनियों को कालाबाजारी को लेकर आगाह करती रही है लेकिन कंपनियों का कहना है कि तरह की घटनाएं स्थानीय स्तर पर ही होती हैं और उसके लिए वितरकों पर शिकंजा कसना जरूरी है।</p>
<p>देश में सालाना 100 लाख टन से अधिक डीएपी की खपत होती है जो पिछले साल के 359 लाख टन यूरिया की खपत के बाद दूसरी सबसे अधिक खपत वाला उर्वरक है। चीन दुनिया का एक बड़ा डीएपी निर्यातक देश है। साल 2023-24 में भारत ने चीन से 22.9 लाख टन डीएपी का आयात किया था जबकि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह घटकर 8.4 लाख टन रह गया और चालू साल में वहां से डीएपी का कोई आयात नहीं हुआ है।</p>
<p>ऐसे&nbsp; भारत का डीएपी आयात सउदी अरब, मोरक्को, जॉर्डन और रूस से अधिक हो रहा है। इनमें से कई देशों के साथ भारत का डीएपी आयात का दीर्घकालिक समझौता है लेकिन उर्वरक उद्योग सूत्रों ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि यह समझौता मात्रा को लेकरहै और कीमतों के मामले में बाजार में चल रही कीमतें लागू होती हैं।&nbsp;</p>
<p>चीन से डीएपी के निर्यात पर रोक की एक बड़ी वजह जहां घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता देना है वहीं इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (ईवी) के लिए बैटरी बनाने में फॉस्फेट का इस्तेमाल वहां बढ़ गया है और चीनी कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहनों के दुनिया के बड़े बाजार पर काबिज होती जा रही हैं। पिछले साल फॉस्फेट के ईवी&nbsp; वाहनों की बैटरी में बढ़ते इस्तेमाल को लेकर <strong>रूरल वॉयस</strong> ने खबर की थी। जिसमें डीएपी की उपलब्धता में कमी की परिस्थिति पैदा होने के कारकों को विस्तार से बताया गया था।</p>
<p>जून में जॉर्डन के साथ भारतीय कंपनियों ने डीएपी का आयात सौदा 781.5 डॉलर प्रति टन (कीमत और समुद्री भाड़ा सहित) पर किया है। जबकि कुछ माह पहले कीमतें 515 से 525 डॉलर प्रति टन के बीच थी। वहीं अब सउदी अरब की कंपनी साबिक ने 810 डॉलर प्रति टन की कीमत पर निर्यात सौदे करने की बोली लगाई है।</p>
<p>उद्योग सूत्रों का कहना है कि इस साल 2022 जैसी ही स्थिति बन रही है जब रूस और यूक्रेन युद्ध शुरू होने पर डीएपी की कीमतें 900 से 1000 डॉलर प्रति टन तक चली गई थी। वहीं डीएपी के कच्चे माल फॉस्फोरिक एसिड की कीमतें भी जनवरी से मार्च, 2025 की तिमाही की 1055 डॉलर प्रति टन से बढ़कर जुलाई से सितंबर तिमाही के लिए 1258 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई हैं।</p>
<p>आयात की कमी के चलते डीएपी की खपत भी घट रही है और 2024-25 में यह 92.8 लाख टन रही जबकि 2023-24 में देश में 108.1 लाख टन डीएपी की खपत हुई थी। वहीं दूसरे कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की खपत बढ़ रही है। डीएपी में फॉस्फेट और नाइट्रोजन होता जबकि कई कॉम्प्लेक्स उर्वरकों में फॉस्फेट के साथ सल्फर भी होता है। डीएपी की कमी में कंपनियों को कम फॉस्फेट स्तर वाले कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की बढ़ी बिक्री का फायदा मिला है। खास बात यह है कि अधिकांश कॉम्प्लेक्स उर्वरकों के दाम डीएपी से अधिक हैं।</p>
<p>डीएपी की बढ़ती कीमतों का नतीजा बढ़ती उर्वरक सब्सिडी के रूप में सामने तो आएगा ही वहीं कम आयात के चलते किसानों को किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इस बारे में उद्योग सूत्रों का कहना है कि हमें कम डीएपी उपलब्धता की आदत डालनी ही होगी। हालांकि किसान यह बात समझेगा या नहीं यह कहना अभी मुश्किल है लेकिन सरकार भी इस बारे में अपनी स्थिति साफ नहीं कर रही है।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ डीएपी की आयात कीमत 810 डॉलर प्रति टन पर पहुंची, ओपनिंग स्टॉक पिछले साल से 42% कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमेरिकी सेब पर आयात शुल्क घटाने के विरोध में आए सेब उत्पादक, मुख्यमंत्रियों से की पीएम से मिलने की अपील]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/affi-urges-joint-cm-delegation-to-pm-modi-against-us-apple-import-duty-cut.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 28 Jun 2025 14:32:37 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/affi-urges-joint-cm-delegation-to-pm-modi-against-us-apple-import-duty-cut.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अमेरिकी सेब पर आयात शुल्क में किसी भी कटौती का विरोध करते हुए सेब उत्पादकों के संगठन एप्पल फार्मर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFFI) ने मांग की है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चल रही बातचीत में इस पर कोई मोलभाव नहीं होना चाहिए। इस सिलसिले में संगठन ने जम्मू-कश्मीर (J&amp;K) और हिमाचल प्रदेश (HP) की सरकारों से अपील की है कि वे अपने मुख्यमंत्रियों को एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने भेजें।</p>
<p>AFFI के संयोजक और विधायक एम.वाई. तारिगामी तथा सह-संयोजक और पूर्व विधायक राकेश सिंघा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने शिमला में हिमाचल प्रदेश के बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी से मुलाकात की। नेगी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से बात करेंगे। बता दें कि AFFI जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के सेब उत्पादकों का साझा मंच है।</p>
<p>तारिगामी ने इसी मुद्दे पर श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के कृषि/बागवानी मंत्री और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर असलम वानी से भी मुलाकात की। इन प्रतिनिधियों ने भी आयात शुल्क में कटौती का विरोध करने में समर्थन व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने बताया कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आगामी जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान उनसे यह आग्रह किया जाएगा कि वे अमेरिकी सेब के मुकाबले देसी सेब उत्पादकों के हितों की रक्षा करें।</p>
<p>दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त मुख्यमंत्री प्रतिनिधिमंडल भेजने के सुझाव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि 2023-24 में 5 लाख मीट्रिक टन सेब का आयात हुआ था, जबकि 2024-25 में यह 6 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। यह तब है जब शुल्क में कोई कटौती नहीं हुई है।</p>
<p>2001 में जहां आयात मात्र 0.2 लाख टन था, वह अब बढ़कर 6 लाख टन हो गया है। यह घरेलू उत्पादन के 1.7% से बढ़कर अब 22.5% हो गया है। संगठन का कहना है कि अमेरिका और अन्य देशों से आ रहे सेब हमारे देसी फलों को बाजार में पीछे छोड़ रहे हैं, जिससे 8 लाख से अधिक सेब उत्पादक परिवारों की आजीविका संकट में पड़ गई है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685faf7077f50.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमेरिकी सेब पर आयात शुल्क घटाने के विरोध में आए सेब उत्पादक, मुख्यमंत्रियों से की पीएम से मिलने की अपील ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि निर्यात के लिए किसानों को जागरूक करने की आवश्यकता, उत्पादकता और गुणवत्ता पर जोर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/need-to-make-farmers-aware-for-agricultural-export-emphasis-on-world-class-quality.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 26 Jun 2025 20:52:13 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/need-to-make-farmers-aware-for-agricultural-export-emphasis-on-world-class-quality.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कृषि निर्यात लगभग 51.9 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। 2030 तक 100 अरब डॉलर कृषि निर्यात के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए नीतिगत सुधार,&nbsp;मूल्य संवर्धन, मजबूत बुनियादी ढांचे और वैश्विक बाजार पहुंच की आवश्यकता है। इसके लिए देश के किसानों को भी जागरूक और सक्षम बनाना होगा, <span>ताकि वे विश्वस्तरीय गुणवत्ता वाला उत्पादन कर सकें। </span></p>
<p>भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) द्वारा रूरल वॉयस मीडिया के सहयोग से बुधवार को नई दिल्ली स्थित आईआईएफटी परिसर में कृषि निर्यात पर राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। सम्मेलन के दूसरे सत्र में 100 <span>अरब डॉलर लक्ष्य की दिशा में अगला कदम विषय पर विचार-विमर्श किया गया।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_685d71464d8dc.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय कृषि सचिव <strong>सिराज हुसैन</strong> ने देश के कृषि निर्यात में चावल की बड़ी हिस्सेदारी को देखते हुए अगले 15-20 वर्षों में भारतीय कृषि निर्यात के भविष्य के बारे में सोचने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा में जल संकट के कारण धान की बजाय अन्य फसलें अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में अगर भविष्य में चावल, <span>खासतौर से गैर-बासमती चावल</span>, <span>का निर्यात घटता है तो उसकी भरपाई कैसे होगी। देश को गैर-बासमती चावल के निर्यात में कमी के लिए तैयार रहना चाहिए। </span><span>ताजे फल-सब्जियों के निर्यात की बेहतर संभावना है। विशेष रूप से मध्य एशिया और मध्य पूर्व एशिया में भारत से इनके निर्यात की बेहतर संभावनाएं है। विकसित देशों में भी संभावना है</span>,<span> बशर्ते हम सेनेटरी और फाइटोसेनेटरी मानकों को पूरा करें।&nbsp;</span><span>उन्होंने कृषि निर्यात को 50 अरब डॉलर से 100 अरब डॉलर तक ले जाने लिए </span><span>कुछ बड़े वॉल्यूम वाले उत्पादों की जरूरत बताई, जिसमें गेहूं या दूसरे कुछ उत्पाद हो सकते हैं।&nbsp;</span></p>
<p>नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक <strong>अनुपम कौशिक</strong> ने कहा कि सबसे पहले तो हमें कृषि उत्पादकता में बढ़ोतरी कर निर्यात के लिए सरप्लस पैदा करना होगा। तभी हम निर्यात बढ़ा सकेंगे। देश में 14 करोड़ से अधिक किसान हैं और 14 करोड़ हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि है, लेकिन पैदावार और किसानों की आय बहुत कम है। चीन हमसे 40 फीसदी कम जमीन में तीन गुना अधिक कृषि उत्पादन करता है। हमें उत्पादकता को बढ़ाने पर सबसे अधिक काम करने की जरूरत है। लेकिन कई जगह यह उल्टा हो रहा है। कपास में हमारा उत्पादन बढ़ने की बजाय घट गया है। जिससे हम निर्यात की बजाय कपास से आयातक बन गये हैं। कौशिक का मानना है कि कृषि निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है तो कृषि उत्पादन की वैल्यू को एक ट्रिलियन डॉलर तक ले होगा। साथ ही देश की पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना भी बड़ा मुद्दा है। हमें कंपलीट न्यूट्रिशियन सुरक्षा की ओर जाना होगा। हमें इसके साथ निर्यात के लिए एक बड़ा सरप्लस खड़ा करना होगा तभी हम 100 अरब डॉलर निर्यात की बात सोच सकते हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_685d710522a5c.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) <strong>डॉ. राजबीर सिंह</strong> ने कहा कि 100 अरब डॉलर के कृषि निर्यात लक्ष्य के साथ हमें खाद्य आयात को कम करने के बारे में भी सोचना होगा। अभी देश के कृषि निर्यात में चावल की बड़ी हिस्सेदारी है। लेकिन पानी की खपत को देखते हुए सस्टेनेबिलिटी एक बड़ा सवाल है। हमें इन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए एक रोडमैप तैयार करने की जरूरत है। पिछले दस साल में कपास का उत्पादन 100 लाख गांठ उत्पादन गिर गया है। इसलिए निर्यात के लिए कृषि उत्पादों को अलग करके देखने की जरूरत है और उसी के अनुरूप रोडमैप तैयार करना होगा जो सस्टेनेबल हो। डॉ. सिंह ने कहा कि हमें दालों और तिहलन के मामले में क्षेत्रफल बढ़ाने की जरूरत है। हमें विचार करना चाहिए कि क्या चावल का क्षेत्रफल 50 लाख हेक्टेयर घटाकर अधिक उत्पादकता के जरिये उत्पादन बढ़ाया जाए और इसके स्थान पर दालों और तिलहन का क्षेत्र बढ़ाया जाए। देश में अधिकांश किसानों को निर्यात के बारे में मालूम ही नहीं है। किसानों को निर्यात और गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है।</p>
<p>कृषि अर्थशास्त्री और आईसीएआर में प्रधान वैज्ञानिक <strong>डॉ. स्मिता सिरोही</strong> ने कहा कि जब हम वैल्यू चेन की बात करते हैं तो उसकी शुरुआत गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज से होती है। लेकिन किसानों को निर्यात के बारे में पता ही नहीं है। फूड सेफ्टी और ट्रेसेबिलिटी जैसी बातें न तो किसानों को बताई जाती हैं और न ही कृषि शिक्षा के पाठ्यक्रमों का हिस्सा हैं। क्लोरोफिल फॉस्फेट जैसा केमिकल बहुत सारे देशों में प्रतिबंधित है लेकिन भारत में कुछ फसलों के लिए इसके उपयोग की अनुमति है। इसके चलते भारत के निर्यात कंसाइनमेंट रिजेक्ट होते रहे हैं। इससे निर्यात को नुकसान पहुंचता है। हमें समझना होगा कि ट्रेसेबिलिटी के बिना ट्रेड संभव नहीं है। हमारे पास 700 से अधिक कृषि विज्ञान केंद्र हैं, जिनके जरिये हम किसानों को गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिस में कुशल बना सकते हैं। उनको जानकारी दे सकते हैं कि क्या प्रतिबंधित है और क्या नहीं। फूड सेफ्टी, फूड स्टैंडर्ड, उपज की शेल्फ लाइफ बढ़ाना यह सब कृषि शिक्षा का हिस्सा होना चाहिए।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_685d712393a8f.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>डॉ. सिरोही</strong> का मानना है कि कृषि निर्यात को 100 अरब डॉलर तक ले जाना महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। लेकिन यह संभव है। इसके लिए बेहतर संस्थानों के बीच तालमेल और एक रोडमैप बनाने की जरूरत है। कृषि मंत्रालय, <span>खाद्य मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए। कृषि निर्यात के लिए एक समर्पित सेल बनाने की जरूरत है जिसमें सभी संबंधित विभागों और दक्षता के सदस्य हों। आर्गेनिक सर्टिफिकेशन एक बड़ा मुद्दा है। ईयू ने देश की पांच आर्गेनिक सर्टिफिकिटेशन एजेंसियों को प्रतिबंधित कर दिया था। व्यापार समझौतों को लेकर डॉ. सिरोही का मानना है कि इसमें <em>गिव एंड टेक</em> से ही काम चलेगा। ऐसा नहीं हो सकता है कि हम सिर्फ निर्यात करेंगे और आयात नहीं करेंगे। व्यापार समझौतों में दोनों पक्ष अपना फायदा चाहते हैं</span>, <span>इस तथ्य को हमें स्वीकार करना चाहिए।</span><span></span></p>
<p>सम्मेलन का समापन करते हुए आईआईएफटी के कुलपति <strong>प्रो. राकेश मोहन जोशी</strong> ने कहा कि कृषि उत्पादों के मामले में मार्केट इंटेलीजेंस और प्रमोशन का उपयोग दूसरे देश हमारे बाजार में अपने उत्पादों की खपत बढ़ाने के लिए कर रहें। अमेरिका के बादाम, पिस्ता, अखरोट और वाशिंगटन एप्पल इसका उदाहरण हैं। कैलिफोर्निया वालनट कमीशन और वाशिंगटन एप्पल कमीशन भारतीय बाजार में अपने उत्पादों को जगह दिलाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। हमें भी देश के बाहर अपने उत्पादों के लिए इसी प्रकार के प्रयास करने की जरूरत है। सम्मेलन का संचालन आईआईएफटी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अरुणिमा राणा ने किया।</p>
<p>रूरल वॉयस के प्रधान संपादक<strong> हरवीर सिंह</strong> ने कृषि निर्यात जैसे अहम मुद्दे पर सार्थक संवाद के लिए आईआईएफटी, सभी पैनलिस्ट, कृषि वैज्ञानिकों, उद्योग जगत व किसान प्रतिनिधियों को धन्यवाद दिया। इस अवसर पर आईआईएफटी की विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा लखनपाल और सहयोगी उपस्थित रहे। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685d6fe89486b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि निर्यात के लिए किसानों को जागरूक करने की आवश्यकता, उत्पादकता और गुणवत्ता पर जोर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685d6fe89486b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[100 अरब डॉलर का कृषि निर्यात संभव, लेकिन नीति से खेती तक व्यापक प्रयास जरूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/it-is-possible-to-increase-agricultural-exports-to-100-billion-but-extensive-changes-are-needed.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 26 Jun 2025 17:40:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/it-is-possible-to-increase-agricultural-exports-to-100-billion-but-extensive-changes-are-needed.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) द्वारा रूरल वॉयस मीडिया के सहयोग से बुधवार को नई दिल्ली स्थित आईआईएफटी परिसर में कृषि निर्यात पर एक राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, विदेश व्यापार और कृषि विशेषज्ञों ने <strong>"100 </strong><strong>अरब डॉलर के कृषि निर्यात लक्ष्य"</strong> को हासिल करने के विषय में मंथन किया।&nbsp;</p>
<p data-start="644" data-end="1231">सम्मेलन के स्वागत संबोधन में आईआईएफटी के कुलपति <strong>प्रो. राकेश मोहन जोशी</strong> ने कहा कि वैश्विक निर्यात बाजार से जुड़ना एक दिन का काम नहीं है। इसके लिए सतत प्रयासों की जरूरत है और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनना होगा। प्रो. जोशी ने कहा कि भारत ने कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है। अब इस सफलता को कृषि निर्यात में दोहराने की जरूरत है। लेकिन आज हम सेब, काजू, बादाम और कई फल-सब्जियों का भी बड़ी मात्रा में आयात कर रहे हैं। कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ उत्पादों की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा। साथ ही, निर्यात से जुड़ी नीतियों में स्थायित्व होना जरूरी है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_685d4f2c60689.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p></p>
<p data-start="1233" data-end="2021">सम्मेलन का पहला सत्र <strong>"कृषि निर्यात की चुनौतियां और अवसर"</strong> विषय पर केंद्रित था। इस सत्र में एपीडा के सचिव <strong>डॉ. सुधांशु</strong> ने कहा कि निर्यात बढ़ाने के लिए सभी हितधारकों को एक वैल्यू चेन के रूप में संगठित होना होगा। उत्पादन के स्तर पर कई चुनौतियां हैं। हमें <em data-start="1485" data-end="1514">गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज</em> (GAP) को अपनाना होगा। इसके लिए किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे निर्यात की मांग और गुणवत्ता के अनुरूप उत्पादन कर सकें। डॉ. सुधांशु ने उदाहरण देते हुए बताया कि लीची की शेल्फ लाइफ 12-15 दिन तक बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। बनारस को एग्री एक्सपोर्ट हब के तौर पर विकसित किया गया है। निर्यात सुविधाओं के साथ-साथ निर्यातकों को एफपीओ से जोड़ा गया है। अब बनारस से लगभग 1000 टन फल और सब्जियों का निर्यात हो रहा है। इसी तरह अन्य लैंड लॉक्ड क्षेत्रों को भी निर्यात हब के रूप में विकसित किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_685d4f71e8d30.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="2023" data-end="2641">एग्री बिजनेस एक्सपर्ट और एगवाया के पार्टनर <strong>सिराज ए. चौधरी</strong> ने कहा कि हम अक्सर आयातकों की जरूरत के बजाय अपने सरप्लस के आधार पर निर्यात करते हैं। इसलिए केवल कुछ ही उत्पादों का नियमित निर्यात कर पाते हैं। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि किन उत्पादों में हमारा प्रतिस्पर्धात्मक लाभ है। हमें विशेष रूप से हाई वैल्यू उत्पादों पर फोकस करना होगा। सिराज चौधरी ने कहा कि बीज निर्यात हमारे लिए एक बड़ी संभावना हो सकता है। 100 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य हासिल करने के लिए उन्होंने उत्पाद आधारित लक्ष्य तय करने का भी सुझाव दिया। साथ ही, अलग-अलग क्षेत्रों और उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए रणनीति बनाने की आवश्यकता बताई।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_685d46cd377a0.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="2643" data-end="3199">भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष <strong>डॉ. पी.के. स्वैन</strong> ने कहा कि बेहतर उत्पादकता के लिए किसानों को बेहतर बीज, उन्नत तकनीक और वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने होंगे। साथ ही, निर्यात के लिए उत्पादों का चयन करना होगा। भारत में फल और सब्जियों की अधिकांश टेबल वैरायटी हैं, क्योंकि हमें ताजे उत्पाद पसंद हैं। निर्यात के लिए इंटीग्रेटेड कोल्ड चेन की जरूरत है। डेयरी क्षेत्र में भी हमारे पास अच्छी संभावनाएं हैं, लेकिन ढांचागत सुविधाओं की कमी एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, नॉन-टैरिफ बैरियर्स भी हमारे कृषि निर्यात के सामने बड़ी अड़चन हैं।</p>
<p data-start="3201" data-end="3729">सम्मेलन के पहले सत्र का संचालन करते हुए रूरल वॉयस के प्रधान संपादक <strong>हरवीर सिंह</strong> ने किसानों की आमदनी बढ़ाने में कृषि निर्यात को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यह भी कहा कि निर्यात से जुड़े अवसरों का लाभ किसानों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। इस अवसर पर रूरल वॉयस के प्रकाशन <strong><em data-start="3451" data-end="3466">'रूरल वर्ल्ड'</em> </strong>के कृषि निर्यात विशेषांक का विमोचन भी किया गया। पैनल में शामिल सभी वक्ताओं और सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद देते हुए हरवीर सिंह ने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े अहम मुद्दों पर सार्थक संवाद का सिलसिला लगातार जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_685d4d3a68205.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="3201" data-end="3729"></p>
<p data-start="3201" data-end="3729"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685d5111d007d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ 100 अरब डॉलर का कृषि निर्यात संभव, लेकिन नीति से खेती तक व्यापक प्रयास जरूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685d5111d007d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की राह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/the-chequered-path-to-achieving-100-billion-dollar-in-agricultural-exports.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Jun 2025 16:42:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/the-chequered-path-to-achieving-100-billion-dollar-in-agricultural-exports.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत का कृषि और सहयोगी क्षेत्र का निर्यात 50 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया है। अब अगला चरण 100 अरब डॉलर के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करना है। भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि की एक ट्रिलियन डॉलर की हिस्सेदारी और किसानों की आमदनी बढ़ाने जैसे लक्ष्य भी निर्यात में बढ़ोतरी के जरिये हासिल किये जा सकते हैं।</p>
<p>मौजूदा निर्यात में ऐसे चार उत्पाद हैं जो चार अरब डॉलर या उससे अधिक की हिस्सेदारी रखते हैं। इनके साथ कई अन्य उत्पादों को चार अरब डॉलर वाले समूह में शामिल कर 100 अरब डॉलर निर्यात के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।</p>
<p>इस चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को हासिल करने के लिए निर्यात नीतियों में स्पष्टता व स्थिरता और नियम-कायदों व प्रक्रियाओं को सरल बनाने की आवश्यकता है। कृषि उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ एक्सपोर्ट मार्केट तक पहुंच बढ़ाने के लिए फार्म से पोर्ट तक ढांचागत सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर देना होगा। बेहतर कृषि उत्पादन प्रक्रिया (गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज यानी जीएपी) जैसे कई मोर्चे हैं जहां व्यापक सुधार की दरकार है। &nbsp;</p>
<p>अहम बात यह है कि ऐसे दौर में जब पूरी दुनिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ के फैसलों और बयानों के चलते उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है, भारत के कृषि निर्यात ने बेहतर प्रदर्शन किया है। भारत से कृषि एवं संबद्ध उत्पादों का निर्यात वर्ष 2024-25 के दौरान 6.47 फीसदी बढ़कर 51.91 अरब डॉलर हो गया। इसमें सबसे महत्वपूर्ण योगदान चावल निर्यात का है जो 12.5 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसमें बासमती निर्यात की हिस्सेदारी करीब 6 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। &nbsp;</p>
<p>चावल के बाद सबसे ज्यादा 7.4 अरब डॉलर का निर्यात मरीन उत्पादों का होता है। मसालों का निर्यात 4.84 फीसदी बढ़कर 4.45 अरब डॉलर हो गया है। बफैलो मीट के निर्यात में 8.57 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 4 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया है। प्रोसेस्ड फूड का निर्यात करीब 2 फीसदी की वृद्धि के साथ 1.68 अरब डॉलर रहा है जबकि ताजे फलों का निर्यात भी करीब 2 फीसदी बढ़कर 1.17 अरब डॉलर हो गया है।</p>
<p>प्रोसेस्ड फ्रूट्स व जूस का निर्यात करीब 6 फीसदी बढ़कर 1 अरब डॉलर से अधिक रहा है। तंबाकू निर्यात में इस साल 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और यह 1.5 अरब के आसपास है। ऑर्गेनिक उत्पादों के निर्यात में 35 फीसदी और डेयरी प्रोडक्ट्स में 54 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। &nbsp;</p>
<p>देश में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत स्थापित कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के दायरे में आने वाली प्रमुख वस्तुओं का निर्यात वर्ष 2024-25 में 11 फीसदी बढ़कर 27.90 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश के कृषि निर्यात में दर्ज की गई बढ़ोतरी से वर्ष 2030 तक कृषि निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की संभावनाओं को बल मिला है। हालांकि, यह राह इतनी आसान नहीं है।</p>
<p>कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के चेयरमैन अभिषेक देव ने रूरल वॉयस को बताया कि कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार से लेकर, निर्यात सुविधाएं बढ़ाने और किसानों को निर्यात बाजारों से जुड़े जैसे कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में बनारस एक सक्सेस स्टोरी है। &nbsp;</p>
<p>अभिषेक देव बताते हैं कि कुछ साल पहले तक बनारस से कोई कृषि निर्यात नहीं होता था। लेकिन चार साल के भीतर बनारस से हजारों टन फल व सब्जियों का कई देशों को निर्यात होने लगा है। चंदौली का काला चावल, बनारसी लंगड़ा आम और आसपास के जिलों से फल-सब्जियों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बनारस को एग्री एक्सपोर्ट हब के तौर पर विकसित किया गया है। इसके लिए बनारस एयरपोर्ट पर कस्टम, एयर कार्गो और अन्य निर्यात सुविधाएं तैयार की गईं। अभिषेक देव ने बताया कि अब बनारस की तर्ज पर अमृतसर एयरपोर्ट को आरए3 स्&zwj;टेंडर्ड सर्टिफिकेशन का दर्जा देकर निर्यात से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। अमृतसर से एयर कार्गो के जरिए कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसका लाभ निर्यातकों और किसानों को भी मिलेगा।</p>
<p>फल-सब्जियों और कई कृषि उपजों के जल्द खराब होने के कारण अभी ये उत्पाद देश के भीतर भी दूर तक नहीं पहुंच पाते हैं। वर्ष 2024-25 के आम बजट में एयर कार्गो वेयरहाउसिंग की सुविधा बढ़ाने की घोषणा की गई है। इससे निर्यात और घरेलू व्यापार में वृद्धि होगी। कार्गो स्क्रीनिंग और कस्टम प्रोटोकॉल को सुव्यवस्थित करने से निर्यात की राह आसन हो सकती है।&nbsp;</p>
<p><strong>एक लाख करोड़ का चावल निर्यात&nbsp;</strong><br />कृषि उपजों का निर्यात किसानों की आमदनी बढ़ने का अहम जरिया है क्योंकि वैश्विक बाजार मिलने से उपज का बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है जिसका लाभ किसानों तक भी पहुंचता है। लेकिन इसके लिए उपज की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा उतरना जरूरी है।&nbsp;</p>
<p>कई भारतीय उत्पाद जैसे बासमती चावल अपनी विशेष खूबियों के चलते विश्व बाजार में पैठ बना चुके हैं। कृषि निर्यात में चावल एक बेहतरीन उदाहरण है। वर्ष 2024-25 में भारत से चावल निर्यात पिछले साल के 163.58 लाख टन से 23.48 फीसदी बढ़कर 202 लाख टन तक पहुंच गया है जिसका मूल्य 12.47 अरब डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये से अधिक है। देश के कुल कृषि निर्यात में करीब 25 फीसदी हिस्सेदारी अकेले चावल की है। अकेले बासमती चावल का निर्यात 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का होता है।&nbsp;</p>
<p>इससे अन्य उपजों के निर्यात की संभावनाओं का अंदाजा लगा सकते हैं। अगर एक कृषि उपज का निर्यात 12 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच सकता है तो देश की सभी कृषि वस्तुओं का निर्यात 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना कोई असंभव काम नहीं है।</p>
<p><strong>क्वालिटी और फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड</strong><br />कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए क्वालिटी और फूड सेफ्टी से जुड़े मानकों पर खरा उतरना जरूरी है। खेत में बीज से लेकर फसल कटाई, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग, हर लेवल पर अंतरराष्ट्रीय मानकों और सरकारी प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। अमेरिका में निर्यात के लिए यूएस एफडीए और यूरोप के लिए ईयू के स्टैंडर्ड हैं। इसके अलावा अलग-अलग देशों और आयातकों के अपने मानक भी होते हैं।&nbsp;</p>
<p>उत्पादों की गुणवत्ता के अलावा सेनेटरी व फाइटोसेनेटरी स्टेंडर्ड, पेस्टिसाइड रेसिड्यू और ट्रेसेबिलिटी जैसे मुद्दे काफी अहम हो जाते हैं। इसके लिए किसानों को खेत में बीज से लेकर उर्वरक, फसल सुरक्षा और उत्पादन की प्रक्रिया पर ध्यान देने की जरूरत है। इसके बाद प्रोसेसिंग से लेकर पैकेजिंग में भी ग्लोबल स्टैंडर्ड का ध्यान रखना पड़ता है। इन मसलों पर किसानों और निर्यातकों को जागरूक करना एक क्रिटिकल कंपोनेंट है। थोड़ी-सी चूक भी ग्लोबल मार्केट में हमें बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। &nbsp;अमेरिका को निर्यात हुए आम के कंसाइनमेंट रिजेक्ट होने का मामला एक ताजा उदाहरण है।</p>
<p>पिछले दिनों अमेरिका में भारतीय आम की 12 खेप रिजेक्ट होने की खबर आई। इसके पीछे डॉक्यूमेंटेशन में गड़बड़ी और प्रक्रियागत खामियों को वजह बताया गया, जिससे निर्यातकों को 4 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। निर्यातकों का कहना है कि उन्हें इरिडिएशन प्लांट की गलती का खामियाज उठाना पड़ा क्योंकि नवी मुंबई स्थित इरिडिएशन सेंटर पर डेटा दर्ज करने में गलती हुई थी। बहरहाल, मामले की जांच-पड़ताल जारी है।</p>
<p>इस तरह के मामले कृषि निर्यात से जुड़ी पेंचिदगियों और चुनौतियों को उजागर करते हैं। खासतौर पर खाद्य वस्तुओं के निर्यात से पहले उन्हें सघन जांच, कस्टम क्लियरेंस &nbsp;और इरिडिएशन जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। जिन देशों को निर्यात करना है, उनके नियम-कायदों और मानकों का पालन करना होता है।&nbsp;</p>
<p>निर्यात की इन चुनौतियों के कारण ही दुनिया का लगभग 43 फीसदी आम उत्पादन करने वाला भारत सालाना आम उत्पादन का एक फीसदी आम भी निर्यात नहीं कर पाता है। जबकि देश में आम की 14 किस्मों को विशेष भौगोलिक पहचान (GI) प्राप्त है और भारत के आम दुनिया भर में पसंद किए जाते हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में भारत से आम और मैंगो पल्प का निर्यात बढ़ा है। वर्ष 2024 में भारत से 32 हजार टन आम और 60 हजार टन मैंगो पल्प का निर्यात हुआ था। यूपी जैसे प्रमुख आम उत्पादक राज्य से आम निर्यात को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p>उत्पादों की गुणवत्ता, निर्यात सुविधाओं के विस्तार और मानकों पर खरा उतरने को लेकर उठाये जा रहे कदमों पर एपीडा चेयरमैन का कहना है कि हम भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) पूसा के वैज्ञानिकों, एफएसएसएआई और निर्यातकों के साथ मिलकर इस मोर्चे पर काम कर रहे हैं। राज्यों की भी यहां अहम भूमिका है। बासमती के मामले में राज्य सरकारों ने कई पेस्टिसाइड प्रतिबंधित किये। लेकिन निर्यातकों को भी सजग रहने की आवश्यकता है।</p>
<p><strong>मूल्यवर्धित उत्पादों की हिस्सेदारी</strong><br />निर्यात में बढ़ोतरी के लिए हमें मूल्यवर्धन को प्राथमिकता देनी है। इसमें खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) के सचिव सुब्रत गुप्ता का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप बुनियादी ढांचे, स्वच्छता और फाइटोसैनिटरी मानकों को विकसित करने और केंद्र सरकार, राज्य सरकार, विभिन्न विभागों और उद्योग के बीच अधिक तालमेल की आवश्यकता है।</p>
<p>फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (फियो) के महानिदेशक डॉ. अजय सहाय बताते हैं कि भारत के कुल कृषि निर्यात में कच्चे माल की हिस्सेदारी लगभग 50 फीसदी है जबकि प्रोसेस्ड फूड की हिस्सेदारी 30 फीसदी के आसपास है। कृषि निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए वैल्यू एडिशन और प्रोसेसिंग पर जोर देने की आवश्यकता है। निर्यात में प्रोसेस्ड फूड की हिस्सेदारी बढ़ानी होगी। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरुप गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करने होंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>कई मंत्रालयों, विभागों की भूमिका</strong><br />दरअसल, कृषि निर्यात का मामला कई मंत्रालयों, विभागों और संस्थाओं से जुड़ा है। कृषि उत्पादन कृषि मंत्रालय के दायरे में आता है जबकि कृषि निर्यात में वाणिज्य मंत्रालय की भूमिका अहम है। खाद्यान्न और कृषि उपज की सरकारी खरीद, उपलब्धता और भंडारण की नीतियों में खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय का दखल रहता है, जबकि फूड प्रोसेसिंग से जुड़ी अहम योजनाएं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के जरिए चलाई जाती हैं। इसी तरह डेयरी और मीट प्रोडक्ट्स के मामले में पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय की अहम भूमिका है। जबकि कस्टम से जुडे़ मामले वित्त मंत्रालय के अधीन आते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>जीआई उत्पादों से निर्यात संवर्धन</strong><br />भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिलने से विभिन्न कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने और निर्यात को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत सरकार ने जीआई टैग वाली चावल किस्मों के लिए अलग से एचएस (Harmonised System) कोड शुरू किया है। भारत में चावल की 29 किस्मों को जीआई टैग मिला है जिनमें कालानमक, गोबिंदभोग, नवारा, पोक्कली, वायनाड जीरकासला, वायनाड गंधकसाला, कटारनी और चोकुवा चावल की किस्में शामिल हैं।</p>
<p>अलग एचएस कोड से जीआई-टैग वाले चावल के निर्यात में मदद मिलेगी। खासकर जब चावल की सामान्य किस्मों के निर्यात पर प्रतिबंध लग जाता है, तब भी इनका निर्यात संभव होगा। साथ ही ट्रेसेबिलिटी और डेटा प्राप्त करने में भी आसानी होगी।</p>
<p>जीआई टैग वाले उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के दिशा में कदम बढ़ाते हुए एपीडा ने सिक्किम से डल्ले मिर्च के निर्यात की शुरुआत करायी है। इसी तरह उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से बांग्लादेश को 30 टन गुड़ के निर्यात किया गया। किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से पश्चिमी उत्तर प्रदेश से गुड़ निर्यात की शुरुआत की गई है। पश्चिमी यूपी का गुड़ विशिष्टि भौगोलिक पहचान (जीआई) वाला उत्पाद है। एपीडा बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन के जरिए मुजफ्फरनगर क्षेत्र से गुड़ निर्यात को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है। निर्यात का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए एफपीओ को माध्यम बनाया जा रहा है। &nbsp;</p>
<p>एपीडा के सचिव डॉ. सुधांशु ने बताया कि पश्चिमी यूपी के कई एफपीओ गुड़, गुड़ उत्पादों, बासमती चावल और दालों के निर्यात में जुटे हैं। उन्हें एपीडा की ओर से प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है, ताकि किसानों के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में जगह बना सकें। 2023 और 2024 में पश्चिमी यूपी से एफपीओ के जरिए लेबनान ओर ओमान को बासमती चावल का निर्यात हुआ था।</p>
<p><strong>इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात सुविधाएं</strong><br />कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए पैक हाउस, पेरिशेबल कार्गो, ऑक्शन सेंटर, एक्सपोर्ट फैसिलिटी सेंटर, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, इरेडिएशन सेंटर आदि बुनियादी ढांचे और निर्यात सुविधाओं को विकसित करना जरूरी है। एपीडा कई योजनाओं के माध्यम से इन बुनियादी सुविधाओं के विकास को प्रोत्साहन दे रहा है।</p>
<p>कृषि से संबंधित बुनियादी ढांचे जैसे बिजली आपूर्ति, सिंचाई प्रणाली और परिवहन नेटवर्क में पर्याप्त निवेश उत्पादकता में वृद्धि के साथ-साथ बाजार पहुंच को बढ़ा सकता है। उत्पादकता में सुधार के साथ ही फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना भी जरूरी है। इसमें नई तकनीक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।</p>
<p>इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग के पूर्व निदेशक डॉ. एन.सी साहा बताते हैं कि खाद्य वस्तुओं की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पैकेजिंग टेक्नोलॉजी बहुत कारगर साबित हो रही है। पैकेजिंग टेक्नोलॉजी की मदद से लीची की सेल्फ लाइफ 12 से 15 दिन तक बढ़ाने में मदद मिली है। अब ऐसे तकनीक भी विकसित हो चुकी हैं जिनसे लीची जैसे फलों की सेल्फ लाइफ 60 दिनों तक बढ़ाई जा सकती है। निर्यातक पैकेजिंग तकनीक की मदद से निर्यात की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं। इसके लिए सरकार की ओर से भी पैकेजिंग तकनीक अपनाने को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>किसान हित और निर्यात नीतियां</strong><br />सरकार को महंगाई काबू में रखने और देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ निर्यात बढ़ाने के बीच संतुलन कायम करना होता है। ऐसे में कई बार जब किसानों को निर्यात बाजार के लाभ से वंचित रहना पड़ता है। वर्ष 2023 में प्याज और गैर-बासमती चावल के निर्यात पर लगी पाबंदियों का खामियाजा देश के कृष निर्यात और किसानों को उठाना पड़ा था। यही स्थिति गेहूं के मामले में देखने को मिल रही है।</p>
<p>पिछले दो साल से कृषि मंत्रालय की तरफ से देश में गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन के दावे किए जा रहे हैं। कृषि मंत्रालय का अनुमान है कि 2024-25 में गेहूं उत्पादन रिकॉर्ड 11.54 करोड़ टन होगा। इस साल गेहूं की सरकारी खरीद पिछले साल से करीब 11 फीसदी अधिक रही है। फिर भी गेहूं के निर्यात पर लगी रोक जारी है।</p>
<p>गौरतलब है कि उत्पादन में गिरावट को देखते हुए भारत सरकार ने मई 2022 में गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और महंगाई काबू में रखने के लिए यह कदम उठाया गया। प्याज के मामले में भी ऐसा ही हुआ था जब 2023 में सरकार ने प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था जो 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र में बड़ा मुद्दा बन गया था। &nbsp;</p>
<p>ऐसे में कृषि उत्पादन के आंकड़ों पर भी सवाल उठते हैं। क्योंकि पिछले साल 11.32 करोड़ टन गेहूं के बंपर उत्पादन के बावजूद सरकारी खरीद 266 लाख टन रही थी और निर्यात पर रोक के बाद भी घरेलू बाजार में गेहूं के दाम कम नहीं हुए।</p>
<p>वास्तव में, कृषि निर्यात को बढ़ाने के लिए कृषि उत्पादन को बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसके अलावा विभिन्न कारणों से निर्यात पर पाबंदियां लगाकर किसानों को बेहतर दाम से वंचित रखने की नीति पर भी विचार करने की जरूरत है। किसानों को उपज का बेहतर दाम दिलाने में कृषि निर्यात अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए खाद्य सुरक्षा और कृषि व्यापार के बीच सामंजस्य बनाए रखने की आवश्यकता है। उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाने, उपज की बर्बादी कम करने, आपूर्ति श्रृंखला दक्षता में सुधार करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर यह यह सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है।</p>
<p><strong>उत्पादकता और दक्षता बढ़ाने की दरकार</strong><br />कृषि उत्पादन के मामले में भारत अभी विकसित देशों के साथ ही चीन से भी काफी पीछे हैं। ऐसे में उत्पादकता नहीं बढ़ने से हमारे उत्पादों का प्रतिस्पर्धी होने की भी चुनौती बनी रहती है। हालांकि फलों के मामले में हमने अंगूर, केला और अनार जैसे उत्पादों के मामले में बहुत तेजी से तरक्की की है। लेकिन इसे दूसरे उत्पादों में भी हासिल करना है जो 100 अरब डॉलर के कृषि निर्यात के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने की अहम कड़ी है।</p>
<p>निर्यात के लिए सरकार ने 2018 में नई निर्यात नीति के समय ही इस लक्ष्य की बढ़ने का कदम उठाया था, लेकिन अभी हम इस लक्ष्य से काफी दूर है। हालांकि 50 अरब डॉलर का स्तर एक टिकाऊ स्तर बन गया है। ऐसे में अब कदम इसे दोगुना करने की ओर बढ़ चले हैं और देश के किसानों की बेहतर आय के साथ खेती को अधिक आकर्षक कारोबार बनाने के लिए भी यह अनिवार्य शर्त है कि कृषि उत्पादों से किसानों को अधिक आय हो जिसमें निर्यात की भूमिका बड़ी है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685693f29a8fc.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की राह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685693f29a8fc.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आईआईएफटी और रूरल वॉयस द्वारा 100 अरब डॉलर के कृषि निर्यात लक्ष्य पर राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/iift-and-rural-voice-to-organise-a-conference-on-100-billion-agricultural-export-target.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Jun 2025 05:49:40 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/iift-and-rural-voice-to-organise-a-conference-on-100-billion-agricultural-export-target.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी)</strong> <span>द्वारा <strong>रूरल वॉयस</strong> मीडिया प्लेटफॉर्म के सहयोग से</span>&nbsp;आज नई दिल्ली स्थित आईआईएफटी परिसर में कृषि निर्यात पर एक <strong>राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस</strong> का आयोजन किया जा रहा है।&nbsp;<strong>"100 अरब डॉलर के कृषि निर्यात लक्ष्य की प्राप्ति"</strong> विषय पर केंद्रित इस सम्मेलन में वर्ष 2030 तक भारत के कृषि निर्यात को दोगुना करने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन में नीति-निर्माता, <span>उद्योग जगत के प्रतिनिधि</span>, <span>विदेश व्यापार और कृषि क्षेत्र के के विशेषज्ञ शामिल होंगे। </span></p>
<p>वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कृषि निर्यात लगभग 51.9 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। 2030 तक 100 अरब डॉलर कृषि निर्यात के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए नीतिगत सुधार, <span>मूल्य संवर्धन</span>, मजबूत बुनियादी ढांचे और वैश्विक बाजार पहुंच की आवश्यकता है। सम्मेलन में भारतीय कृषि निर्यात से जुड़ी चुनौतियों और नीतिगत कमियों को दूर करने, वैश्विक बाजार के अवसरों की पहचान करने और कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप तैयार पर मंथन किया जाएगा।</p>
<p>सम्मेलन में दो विशेषज्ञ पैनल शामिल होंगे:</p>
<p><strong>पैनल </strong><strong>1: </strong><strong>कृषि निर्यात की चुनौतियां और अवसर</strong></p>
<p>इस सत्र में बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और नीतिगत बाधाओं पर गहन चर्चा की जाएगी जो वर्तमान में कृषि-निर्यात की वृद्धि में बाधक बन रहे हैं। इसके साथ ही यह कृषि निर्यात से जुड़े नए रुझान,<span> अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की स्थिति और मूल्य संवर्धित एवं उच्च क्षमता वाले कृषि उत्पादों के लिए नए अवसरों पर केंद्रित होगा। </span></p>
<p><strong>पैनल </strong><strong>1 </strong><strong>के प्रमुख वक्ता:</strong></p>
<ul>
<li>प्रो. राकेश मोहन जोशी, कुलपति, आईआईएफटी</li>
<li>डॉ. सुधांशु, सचिव, एपीडा</li>
<li>श्री सिराज ए. चौधरी, पार्टनर, एगवाया एलएलपी</li>
<li>डॉ.&nbsp;<span>प्रशांत कुमार स्वैन</span>, <span>राष्ट्रीय उपाध्यक्ष</span>, <span>भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ)</span> &nbsp;</li>
</ul>
<p><strong>पैनल </strong><strong>2: 100 </strong><strong>अरब डॉलर लक्ष्य की दिशा में अगला कदम</strong></p>
<p>यह सत्र कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नीतिगत हस्तक्षेप, <span>संस्थागत ढांचे</span>, <span>निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने</span>, <span>बाज़ार पहुंच को सुदृढ़ करने जैसे उपायों पर केंद्रित होगा। इसमें 100 अरब डॉलर के कृषि निर्यात लक्ष्य हो प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी</span>, <span>नवाचार और वित्तपोषण के तरीकों पर विचार-विमर्श किया जएगा। </span></p>
<p><strong>पैनल </strong><strong>2 </strong><strong>के प्रमुख वक्ता:</strong></p>
<ul>
<li>श्री सिराज हुसैन, पूर्व कृषि सचिव, भारत सरकार</li>
<li>डॉ. राजबीर सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार), आईसीएआर</li>
<li>श्री अनुपम कौशिक, प्रबंध निदेशक, नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड</li>
<li>डॉ. स्मिता सिरोही, कृषि अर्थशास्त्री, प्रधान वैज्ञानिक, आईसीएआर</li>
<li>श्री हरवीर सिंह, प्रधान संपादक, रूरल वॉयस&nbsp;</li>
</ul>
<p>सम्मेलन के दौरान रूरल वॉयस के प्रकाशन <em>रूरल वर्ल्ड</em> पत्रिका के विशेषांक का विमोचन भी किया जाएगा,<span> जो देश के कृषि निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के विषय पर ही केंद्रित है।</span></p>
<p><span></span></p>
<p><span></span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685ab24da3989.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आईआईएफटी और रूरल वॉयस द्वारा 100 अरब डॉलर के कृषि निर्यात लक्ष्य पर राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने दी मूंग और उड़द खरीदी की मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-minister-shivraj-singh-chauhan-approved-procurement-of-urad-and-moong-under-pss.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 24 Jun 2025 19:31:37 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-minister-shivraj-singh-chauhan-approved-procurement-of-urad-and-moong-under-pss.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली में बैठक कर मध्य प्रदेश में मूंग और उड़द तथा उत्तर प्रदेश में उड़द को मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत खरीदने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। साथ ही खरीद से संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर राज्य के कृषि मंत्रियों के साथ संवाद भी किया और नेफेड, एन.सी.सी.एफ. व राज्य के संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।</p>
<p>मध्य प्रदेश के लिए राज्य सरकार से प्राप्त प्रस्ताव पर मंत्रालय द्वारा विचार करने तथा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह द्वारा राज्य सरकार तथा अन्य हितधारकों के साथ बैठक के उपरांत मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत राज्य में ग्रीष्मकालीन मूंग तथा ग्रीष्मकालीन उड़द खरीद करने की मंजूरी प्रदान की गई है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत राज्य में ग्रीष्मकालीन उड़द खरीद करने की मंजूरी प्रदान की गई है।</p>
<p>कृषि मंत्री ने बैठक में कहा कि मूंग और उड़द की खरीद के फैसले से केंद्र सरकार को बड़ा वित्तीय भार वहन करना पड़ेगा, लेकिन बावजूद इसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में किसान हित में सरकार किसानों तक लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह बहुत जरूरी है कि खरीद सही तरीके से हो। किसानों से सीधे खरीद से ही बिचौलियों की सक्रियता कम होगी और लाभ सही मायनों में किसान तक पहुंच पाएगा। अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिकतम व कारगर प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के साथ किसानों के पंजीकरण की उचित व्यवस्थाएं की जाएं। आवश्यकता हो तो खरीद केंद्रों की संख्या में भी इजाफा करें व उचित और पारदर्शी व्यवस्था के साथ खरीद सुनिश्चित करें।&nbsp;</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने भंडारण को लेकर मिल रही अनियमितताओं की शिकायत को लेकर भी चिंता व्यक्त की और अधिकारियों व कृषि मंत्रियों को इस दिशा में ठोस कदम उठाने के प्रयास करने की बात कही। शिवराज सिंह ने उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री से कहा कि केंद्र सरकार किसानों के हित में हरसंभव काम करेगी।</p>
<p>बैठक में मध्य प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही, केंद्रीय कृषि सचिव श्री देवेश चतुर्वेदी व अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685a9962238da.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने दी मूंग और उड़द खरीदी की मंजूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685a9962238da.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त का इंतजार: क्या है नवीनतम अपडेट?]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/waiting-for-the-20th-installment-of-pm-kisan-samman-nidhi-what-is-the-latest-update.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 23 Jun 2025 19:43:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/waiting-for-the-20th-installment-of-pm-kisan-samman-nidhi-what-is-the-latest-update.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के करोड़ों किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 20<span>वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। योजना के तहत सरकार हर साल पात्र किसानों को </span>6,000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन बराबर किस्तों में देती है। यह धनराशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) <span>के माध्यम से पहुंचाई जाती है।&nbsp;</span></p>
<p>पीएम-किसान की अगली यानी 20वीं किस्त जून के आखिरी तक या जुलाई की शुरुआत में किसानों के खातों में ट्रांसफर होने की संभावना है। योजना की 19<span>वीं किस्त </span>24 <span>फरवरी </span>2025 <span>को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के भागलपुर से जारी की थी</span>, <span>जिसमें लगभग </span>9.8 <span>करोड़ किसानों को </span>22,000 <span>करोड़ रुपये का लाभ मिला था।</span></p>
<p><strong>जरूरी प्रक्रियाएं </strong></p>
<p>पीएम-किसान योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इनमें शामिल हैं:</p>
<ul>
<li><strong>ई-केवाईसी (</strong><strong>e-KYC):</strong> <span>सभी पंजीकृत किसानों के लिए ई-केवाईसी करवाना अनिवार्य है। यह प्रक्रिया ऑनलाइन </span>PM Kisan <span>की आधिकारिक वेबसाइट (</span>pmkisan.gov.in) <span>पर आधार नंबर और </span>OTP <span>के माध्यम से या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (</span>CSC) <span>पर बायोमेट्रिक </span>KYC <span>के जरिए पूरी की जा सकती है। जिन किसानों ने अभी तक </span>e-KYC <span>नहीं करवाया है</span>, <span>उनकी किश्त अटक सकती है।</span></li>
</ul>
<ul>
<li><strong>आधार लिंकिंग</strong><strong>:</strong> <span>किसानों के बैंक खातों का आधार कार्ड से लिंक होना जरूरी है। यदि आधार लिंकिंग नहीं हुई है</span>, <span>तो नजदीकी बैंक शाखा में जाकर यह प्रक्रिया पूरी करें।</span></li>
</ul>
<ul>
<li><strong>भूमि सत्यापन</strong><strong>:</strong> योजना का लाभ केवल उन किसानों को मिलेगा जिनके पास खेती योग्य जमीन है और उनके भूमि दस्तावेज सत्यापित हैं। अगर भूमि रिकॉर्ड में कोई त्रुटि है, <span>तो इसे तुरंत ठीक करवाएं।</span></li>
</ul>
<ul>
<li><strong>लाभार्थी सूची में नाम</strong><strong>:</strong> <span>किसानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका नाम </span>PM Kisan <span>की लाभार्थी सूची में शामिल है। इसे </span>pmkisan.gov.in <span>पर "</span>Farmers Corner" <span>में जाकर "</span>Beneficiary Status" <span>या "</span>Beneficiary List" <span>विकल्प के माध्यम से चेक किया जा सकता है। इसके लिए उन्हें अपना राज्य</span>, <span>जिला</span>, <span>उप-जिला</span>, <span>ब्लॉक और गांव का चयन करना होगा।</span><strong>&nbsp;</strong></li>
</ul>
<p><strong>ई-केवाईसी है अनिवार्य</strong><strong>, <span>वरना अटक जाएगी किस्त</span></strong></p>
<p>पीएम-किसान योजना में पारदर्शिता बनाए रखने और अपात्र लाभार्थियों को बाहर करने के लिए सरकार ने ई-केवाईसी (e-KYC) <span>को अनिवार्य कर दिया है। जिन किसानों ने अभी तक अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की है</span>, <span>उन्हें सलाह दी जाती है कि वे इसे जल्द से जल्द पूरा कर लें। अन्यथा</span>, <span>उनकी </span>20<span>वीं किस्त अटक सकती है। पहले भी कई बार देखा गया है कि जिन किसानों ने समय पर केवाईसी नहीं कराई</span>, <span>उन्हें किस्त मिलने में देरी या रुकावट का सामना करना पड़ा।</span></p>
<p><strong>कैसे करें ई-केवाईसी</strong><strong>?</strong></p>
<p>किसान घर बैठे आसानी से अपनी ई-केवाईसी पूरी कर सकते हैं:</p>
<ol>
<li>सबसे पहले पीएम किसान योजना की आधिकारिक वेबसाइट <strong>pmkisan.gov.in</strong> <span>पर जाएं।</span></li>
<li>होमपेज पर '<span>फार्मर्स कॉर्नर</span>' (Farmers Corner) <span>में जाकर </span>'<span>ई-केवाईसी</span>' (e-KYC) <span>विकल्प का चयन करें।</span></li>
<li>यहां अपना आधार नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें और '<span>ओटीपी भेजें</span>' <span>पर क्लिक करें।</span></li>
<li>प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और '<span>सबमिट</span>' <span>करें।</span></li>
<li>प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्क्रीन पर ई-केवाईसी सफल होने का मैसेज मिलेगा।</li>
</ol>
<p>ई-केवाईसी के लिए आधार कार्ड, <span>रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और आधार से लिंक बैंक खाता होना आवश्यक है।</span></p>
<p><strong>हेल्पलाइन नंबर</strong></p>
<p>अगर पीएम-किसान योजना से जुड़ी कोई समस्या है तो कृषि विभाग के नजदीकी कार्यालय से संपर्क करना चाहिए। किसान सहायता के लिए इन हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:</p>
<ul>
<li>155261</li>
<li>1800115526 (<span>टोल-फ्री)</span></li>
<li>011-23381092</li>
<li>ईमेल: pmkisan-ict@gov.in</li>
</ul>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685960a9c9f14.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त का इंतजार: क्या है नवीनतम अपडेट? ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685960a9c9f14.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बड़ी संख्या में डिफंक्ट हो रही हैं फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियां, एसएफएसी कर रहा है इनकी ग्रेडिंग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sfac-begins-grading-as-many-farmer-producer-companies-turn-defunct.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 22 Jun 2025 18:21:48 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sfac-begins-grading-as-many-farmer-producer-companies-turn-defunct.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सरकार ने किसानों को कृषि उत्पादों के कारोबार के जरिये अधिक कमाई और लागत कम करने के मकसद से देश में दस हजार कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन का निर्णय लिया था। सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने के करीब पहुंच चुकी है। लेकिन किसानों के कलेक्टिव्स की धारणा के तहत गठित किये गये इन संगठनों में से बड़ी तादाद को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें एक बड़ी संख्या उन एफपीओ की है जिनका गठन कंपनी कानून के तहत हुआ है। इन्हें फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीसी) कहा जाता है। कृषि मंत्रालय के तहत स्माल फार्मर्स एग्रीबिजनेस कंसोर्सियम (एसएफएसी) के जरिये एफपीसी का गठन होता है। सूत्रों के मुताबिक, बड़ी संख्या में एफपीसी डिफंक्ट कंपनियों में तब्दील हो गये हैं।&nbsp;</p>
<p>एसएफएसी सूत्रों ने बताया कि उसके तहत आने वाले 3700 एफपीसी को तय मानकों के आधार पर ग्रेडिंग दी जा रही है। इसके लिए तय अंकों के आधार पर ए, बी, सी, डी और ई ग्रेडिंग की जा रही है। अभी तक की रिपोर्ट के अनुसार ए श्रेणी के तहत करीब 500 एफपीसी हैं। जबकि बी श्रेणी के तहत 450 एफपीसी और सी श्रेणी के तरत 550 एफपीसी हैं। एसएफएसी ने तय मानकों के आधार पर श्रेणीबद्ध किये गये एफपीसी और उनसे संबंधित बाकी जानकारी कृषि मंत्रालय को भेजी है। इस रिपोर्ट पर कृषि सचिव को फैसला लेना है।&nbsp;</p>
<p>बड़ी संख्या में ऐसे एफपीसी हैं जिन्होंने कंपनी मामले मंत्रालय की बेबसाइट पर रिटर्न भी नहीं भरी है। श्रेणी तय करने के लिए जो मानक हैं उनमें इनकी वित्तीय स्थिति, जमीनी स्तर पर कामकाज, इनपुट लाइसेंस, प्रोसेसिंग और एक्सपेंशन जैसे मानकों के अंक तय हैं। उदाहरण के तौर पर इनमें इनपुट लाइसेंस के पांच अंक हैं, वहीं प्रोसेसिंग के लिए 10 अंक रखे गये हैं। 60 या उससे अधिक अंक पाने वाले एफपीसी को ए श्रेणी में रखा गया है जबकि 50 से 60 अंक वाले एफपीसी को बी श्रेणी में रखा गया है। इससे कम अंक वाले एफपीसी को अंकों के आधार पर सी, डी और ई श्रेणी में रखा गया है।</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार,&nbsp;कुछ राज्य एफपीसी को दस लाख रुपये तक की वित्तीय मदद देना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें एफपीसी की श्रेणी आधारित रिपोर्ट की जरूरत है। पूर्वोत्तर के एक राज्य के मुख्यमंत्री इसके लिए अधिक उत्सुक हैं। उक्त सूत्र का कहना है कि ए और बी श्रेणी के एफपीसी इस मदद के पात्र हो सकते हैं।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_6856aa8c17741.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बड़ी संख्या में डिफंक्ट हो रही हैं फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियां, एसएफएसी कर रहा है इनकी ग्रेडिंग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_6856aa8c17741.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ सीजन से पहले ग्रामीण महंगाई में गिरावट, नीति निर्धारकों पर कम हो सकता है दबाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/lower-rural-inflation-may-ease-pressure-on-policymakers-ahead-of-kharif-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 21 Jun 2025 13:26:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/lower-rural-inflation-may-ease-pressure-on-policymakers-ahead-of-kharif-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>मई 2025</strong> के दौरान ग्रामीण भारत में महंगाई के दबाव में नरमी देखी गई। कृषि श्रमिकों (CPI-AL) और ग्रामीण श्रमिकों (CPI-RL) के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, मई में कृषि श्रमिकों की महंगाई का सूचकांक दो अंक गिरकर 1305 पर आ गया, ग्रामीण श्रमिकों की महंगाई एक अंक की गिरावट के साथ 1319 पर आ गई। दोनों सूचकांक 1986-87 (=100) के आधार वर्ष पर आधारित हैं।</p>
<p>मई 2025 में वर्ष-दर-वर्ष महंगाई दर कृषि श्रमिकों के लिए 2.84% और ग्रामीण श्रमिकों के लिए 2.97% रही। यह मई 2024 की तुलना में बड़ी गिरावट है, जब यह दरें क्रमशः 7.00% और 7.02% थीं। अप्रैल 2025 में CPI-AL 3.48% और CPI-RL 3.53% था, जिससे स्पष्ट है कि ग्रामीण महंगाई में गिरावट का रुझान बना हुआ है।</p>
<p>वस्तुओं के समूह के हिसाब से सूचकांकों पर नजर डालें तो कुछ महत्वपूर्ण बदलाव सामने आते हैं:</p>
<p><strong>खाद्य वस्तुएं:</strong> खाद्य सूचकांक कृषि श्रमिक और ग्रामीण श्रमिक महंगाई दोनों का एक प्रमुख घटक है। इसमें गिरावट आई है। कृषि श्रमिकों के लिए यह अप्रैल के 1233 से घटकर मई में 1228 हो गया, जबकि ग्रामीण श्रमिकों के लिए यह 1240 से घटकर 1234 हो गया। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों के दामों में कुछ राहत मिलने के संकेत मिलते हैं।</p>
<p><strong>पान, सुपारी आदि:</strong> इस श्रेणी में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। कृषि श्रमिकों के लिए सूचकांक अप्रैल के 2143 से बढ़कर 2146 हो गया और ग्रामीण श्रमिकों के लिए यह 2152 से बढ़कर 2156 हुआ है।</p>
<p><strong>ईंधन और लाइट:</strong> दोनों श्रेणियों में हल्की वृद्धि देखी गई। कृषि श्रमिकों के लिए सूचकांक 1404 से बढ़कर 1408 हुआ, जबकि ग्रामीण श्रमिकों के लिए यह 1393 से बढ़कर 1397 हो गया।</p>
<p><strong>कपड़े, बिस्तर और जूते:</strong> इस समूह में भी हल्की बढ़त दर्ज की गई। कृषि श्रमिकों के लिए सूचकांक 1344 से बढ़कर 1351 हो गया। ग्रामीण श्रमिकों के लिए यह 1412 से बढ़कर 1418 हुआ है।</p>
<p><strong>विविध:</strong> इस श्रेणी में भी दोनों समूहों के लिए वृद्धि दर्ज की गई। इसका इंडेक्स 1405 से बढ़कर 1415 हो गया। इससे यह संकेत मिलता है कि अन्य विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की लागत में भी वृद्धि हुई है।</p>
<p>मई 2025 के आंकड़े ग्रामीण भारत में नियंत्रित महंगाई का संकेत देते हैं, जो कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए एक सकारात्मक है। वे आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। वर्ष-दर-वर्ष महंगाई दर में भारी गिरावट एक बेहतर आर्थिक माहौल की ओर इशारा करती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685664943eeab.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ सीजन से पहले ग्रामीण महंगाई में गिरावट, नीति निर्धारकों पर कम हो सकता है दबाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685664943eeab.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान केंद्रित शोध को देंगे प्राथमिकताः डॉ. मांगी लाल जाट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/focus-will-be-on-farmer-centric-research-dr-ml-jat.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Jun 2025 07:26:17 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/focus-will-be-on-farmer-centric-research-dr-ml-jat.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) अपने शोध के तरीके में बदलाव कर किसानों की जरूरत को अपने शोध का आधार बनाने जा रही है। इसके साथ ही कृषि शोध के लिए काम करने वाले सभी संस्थान और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की कामकाज की प्रणाली में भी बदलाव होने जा रहा है वहीं कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका को भी नये सिरे से परिभाषित किया जाएगा ताकि एग्रीकल्चर एक्सटेंशन में उनकी भूमिका अधिक प्रभावी बन सके। एक तरह से वन आईसीएआर की धारणा को आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही शोध और कार्यप्रणाली के केंद्र में समग्र एग्री फूड सिस्टम एप्रोच पर जोर दिया जाएगा। &nbsp;भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के नए महानिदेशक और सचिव डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर एजुकेशन (डेयर) के सचिव <strong>डॉ. मांगी लाल जाट</strong> ने देश के कृषि क्षेत्र, शोध और नीतिगत मसलों पर रूरल वर्ल्ड के एडिटर-इन-चीफ <strong>हरवीर सिंह</strong> के साथ एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में यह बातें कहीं। पेश है डॉ. जाट के साथ इस इंटरव्यू के मुख्य अंशः</p>
<p><strong>कृषि देश की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ग्रामीण परिवेश से आने के साथ ही आप कृषि शोध क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय संस्थानों में लंबा अनुभव रखते हैं। अब आपको दुनिया के सबसे बड़े कृषि रिसर्च सिस्टम में शुमार होने वाली संस्था आईसीएआर और भारत सरकार के सचिव डेयर की जिम्मेदारी मिली है। आईसीएआईर और कृषि शोध को लेकर आपका क्या विजन क्या है?</strong><br />कृषि हमारे देश की रीढ़ है। 2047 तक विकसित भारत का सपना बिना विकसित कृषि के साकार नहीं हो सकता। कृषि में अनेक विविधताएं हैं- जमीन की, पानी की, जलवायु की, किसान की। हमें कृषि में शोध और इनोवेशन उसी हिसाब से करने पड़ेंगे। जरूरी नहीं कि एक शोध या इनोवेशन हर जगह काम कर जाए। इसलिए कहा जाता है कि कृषि में सही या गलत कुछ नहीं होता। इसका मंत्र है- मांग के मुताबिक और प्रासंगिक शोध।<br />एक समय हमारे पास खाना नहीं था। इसलिए हरित क्रांति में हमारा फोकस था उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना। उस समय जो रिसर्च डिजाइन हुईं, उनमें उत्पादन पर फोकस था। लेकिन आज की स्थिति अलग है। आज प्रोडक्शन समस्या नहीं, बल्कि ओवर-प्रोडक्शन समस्या है। सरकार के सामने भी समस्या रहती है कि कैसे उसको डिस्पोज करें। किसान को भी औने-पौने दाम पर फसलें बेचनी पड़ती है। हमें इस पर ध्यान देना पड़ेगा। पिछले दिनों एक मीटिंग में इस बात पर चर्चा हुई कि धान ज्यादा पैदा करके उसे बेचने की समस्या है, दूसरी तरफ दलहन और तिलहन हमें आयात करना पड़ रहा है। हम उस दिशा में क्यों जाए?<br />हमें रिसर्च या टेक्नोलॉजी टार्गेटिंग की जरूरत है। टार्गेटिंग का मतलब है कि कौन सी चीज कहां जाए जिससे किसान के लिए इकोनॉमिक सेंस बने। वह आर्थिक रूप से कम खर्चीला हो और पर्यावरण के लिए सस्टेनेबल भी। ऐसा न हो कि धान पैदा करने के लिए 10 साल पानी निकाला और फिर पानी खत्म। हमें शोध की परिस्थिति के हिसाब से डिजाइनिंग करनी पड़ेगी।<br />परिस्थितियां काफी बदली हैं। इसे हम मेगा ट्रेंड्स बोलते हैं- जलवायु परिवर्तन, भूमि का क्षरण, जैव-विविधता का नुकसान। इन चुनौतियों के समाधान के लिए हमें रिसर्च डिजाइनिंग थोड़ी बदलनी पड़ेगी। लेकिन हम रह गए उत्पादन में, जबकि कृषि उत्पादन अपने आप में समग्र नहीं है। कृषि उत्पादन से पहले और उसके बाद को भी जोड़ना होगा। इसके लिए आजकल समग्र एग्री फूड सिस्टम एप्रोच की बात की जाने लगी है। जब तक एग्री फूड सिस्टम नहीं लाएंगे, तब तक किसान का मार्केट लिंकेज नहीं होगा, टेक्नोलॉजी टार्गेटिंग नहीं होगी, उसके बिजनेस मॉडल नहीं होंगे।</p>
<p><strong>रिसर्च सिस्टम में किस तरह के बदलाव की जरूरत है?</strong><br />जब उत्पादन पर फोकस था, तब हमारे वैज्ञानिक उसी स्किल के थे। अब हमें समग्र एग्री फूड सिस्टम डिजाइन करना है, तो इनके लिए थोड़ी अलग स्किल की जरूरत है। अर्थात हमें सिस्टम में नई स्किल लाने की जरूरत है। उदाहरण के लिए एफपीओ की बात करते हैं। केवीके में एफपीओ की ट्रेनिंग दे सकते हैं, लेकिन उसका बिजनेस प्लान बनने वाला तो एक्सपर्ट ही चाहिए। ये सब नई चीजें लाने की बात है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_6852627492dad.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>आपके कहने का मतलब है कि एग्रो इकोनॉमी, रिसर्च, हमारे प्राकृतिक संसाधन और जलवायु परिवर्तन यह सब एक कंप्लीट पैकेज के रूप में आना चाहिए।</strong><br />बिल्कुल। यह कमोडिटी केंद्रित न हो क्योंकि इसमें समस्या है। मान लीजिए धान की कोई वैरायटी 150 दिन की है, उसे आपने 155 दिन रहने दिया। उससे धान का उत्पादन तो आपने आधा टन बढ़ा लिया, लेकिन ऐसा तो नहीं कि उससे अगली फसल में जो देरी हुई, उसमें एक टन का नुकसान तो नहीं कर रहे? हमें देखना होगा कि कौन सी चीज कहां फिट होती है। मान लीजिए किसान के पास 70 दिन की अपॉर्चुनिटी है। तो 70 दिन के विंडो में क्या फिट कर सकते हैं? 70 दिन वाले विंडो में आप 100 दिन वाली फसल ले आएंगे तो वह फिट नहीं होगा। इसलिए हमें रीडिजाइनिंग पर जाना पड़ेगा।</p>
<p><strong>कृषि शोध, शिक्षा और एक्सटेंशन में आईसीएआर कैसे काम कर रहा है?</strong><br />ऐतिहासिक रूप से देखें तो भारत का एग्रीकल्चर रिसर्च, एजुकेशन एंड एक्सटेंशन सिस्टम बहुत विकसित है, ऊपर से लेकर नीचे तक। लेकिन जैसे-जैसे हम थोड़े आत्मनिर्भर होते जाते हैं तो साइलो में काम करने लगते हैं। हम इसे अफोर्ड नहीं कर सकते। हमें हर इंस्टीट्यूट में, हर जगह, हर तरह की विशेषज्ञता न तो चाहिए, न हम उसे अफोर्ड कर सकते हैं। मान लीजिए आपके पास कोई खास विशेषज्ञता वाला व्यक्ति है और पड़ोस के संस्थान में दूसरी विशेषज्ञता वाला व्यक्ति। दोनों एक-दूसरे के यहां काम कर दें तो उनका पूरा इस्तेमाल हो जाएगा। पूरे सिस्टम की विशेषज्ञता को हमें एक जगह लाना पड़ेगा।<br />कृषि स्टेट सब्जेक्ट है। वहां के कृषि विश्वविद्यालयों में कोऑर्डिनेटेड प्रोग्राम चल रहे हैं। फसलों की किस्में राज्यों में विकसित होती हैं। रिकमेंडेशन राज्यों को जाती हैं। राज्य उन पर अमल करते हैं। हमें राज्य कृषि विश्वविद्यालयों को करीब लाने की जरूरत है। केवीके अलग-अलग बॉडी के अधीन काम कर रहे हैं। कोई स्टेट एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के अधीन, कोई एनजीओ के अधीन तो कोई आईसीएआर के अधीन। राज्यों के एक्सटेंशन विभाग भी आइसोलेशन में काम कर रहे हैं।<br />हम चाहते हैं कि नीचे से लेकर ऊपर तक का सिस्टम कड़ी-बद्ध जुड़ा हो। सूचना एकतरफा न जाए, वह दो-तरफा हो ताकि जमीनी स्तर की डिमांड रिसर्च में इंटीग्रेट हो और रिसर्च भी एक्सटेंशन के जरिए किसान तक पहुंचे। इसके लिए हमें एक मजबूत नेशनल एग्रीकल्चर रिसर्च एक्सटेंशन एजुकेशन सिस्टम तैयार करना पड़ेगा।</p>
<p><strong>रिसर्च में दो चीजें आती हैं- साइंस और उसका इकोनॉमिक्स। रिसर्च आम तौर पर संस्थानों के आदर्श फार्म में होती हैं। लेकिन जब वह रिसर्च व्यावहारिक रूप से किसानों के खेत तक जाती है, तो वहां इकोनॉमिक्स अलग होता है। उसको कैसे पारदर्शी बनाया जाए?</strong><br />इसका एक सिस्टम है। पहले टेक्नोलॉजी डेवलप होती है, फिर मल्टी लोकेशन टेस्टिंग होती है, उसके बाद वह एडाप्टिव ट्रायल्स में जाता है। एडाप्टिव ट्रायल किसानों के यहां भी होती है। वैसे, आप देखें तो एक खेत से दूसरे खेत में थोड़ा बहुत अंतर आता ही है। मिट्टी अलग होती है, मैनेजमेंट में अंतर होता है। मान लीजिए दो भाइयों की जमीन अगल-बगल है। दोनों को एक ही वैरायटी दे दी जाए, तो भी उनकी पैदावार में फर्क आएगा। यह मैनेजमेंट में अंतर के कारण होता है।<br />इसीलिए हमें आज जितनी जरूरत बायोफिजिकल रिसर्च की है - वैरायटी, वाटर मैनेजमेंट, न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट - उतनी ही जरूरत सामाजिक-आर्थिक रिसर्च की है। हम कहते हैं कि किसान रिसर्च को अपना रहा है या नहीं अपना रहा है। लेकिन वह क्यों अपना रहा है और क्यों नहीं अपना रहा है? उसका जवाब भी तो देना पड़ेगा। इसके लिए व्यवहार और विज्ञान को गहराई से समझना पड़ेगा। यह व्यवहार की समस्या है। कृषि में बहुत सारी चीजें सीधी-सपाट नहीं होती हैं।</p>
<p><strong>इसके लिए क्या आईसीएआर सिस्टम में सोशियोलॉजी, ह्यूमैनिटीज या लिबरल साइंस जैसे विषयों पर फोकस बढ़ाया जाएगा?</strong><br />बिल्कुल बढ़ाएंगे। लेकिन यह रातों-रात नहीं होगा। सोशल साइंस को मजबूत करने पर हमारा फोकस है। बायोफिजिकल साइंटिस्ट जो करते हैं, उसका दायरा बहुत बड़ा होता है। उसमें बाकी चीजें भी आती हैं। अभी हम टेक्नोलॉजी को अपनाने की बात कर रहे थे। हमने देखा कि औसत उत्पादकता और किसान के खेत में उत्पादकता में बहुत अंतर है। इसका मतलब है कि हमारे पास टेक्नोलॉजी तो है, लेकिन उसको अपनाने में दिक्कतें हैं। वे दिक्कतें क्या हैं। हमें उत्पादकता गैप के कारणों का पता लगाना पड़ेगा। उन कारणों में 50% से ज्यादा तो नॉलेज गैप है। इसका मतलब है कि नॉलेज पहुंचाना है। कृषि विज्ञान केंद्र नॉलेज गैप को दूर करने का माध्यम हैं।</p>
<p>नई टेक्नोलॉजी में एक जीएम टेक्नोलॉजी भी है। जीएम की हमारे पास काफी रिसर्च हैं। आईसीएआर सिस्टम में भी और प्राइवेट सेक्टर में भी। इसे किस तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा?<br />हमारा फोकस विज्ञान आधारित कृषि बदलाव पर है। साइंस के बिना आगे नहीं बढ़ सकते। आगे की चुनौतियों का समाधान करने के लिए नए विज्ञान की जरूरत है। कुछ खास टेक्नोलॉजी हैं, उनकी एक प्रक्रिया है, सरकार का रेगुलेटरी मेकैनिज्म है। खास तौर से आप जिस जीएम टेक्नोलॉजी की बात कर रहे हैं, तो वह मामला अभी कोर्ट में है। मैं उस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि विज्ञान को आगे रखा जाना चाहिए। विज्ञान की अगुवाई में ही बदलाव पर फोकस होना चाहिए।</p>
<p>इन दिनों इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर फोकस बढ़ रहा है। कृषि में भी। कहा जा रहा है कि इससे क्रांति आएगी, बड़ा बदलाव होगा। आईसीएआर में भी इस पर कई प्रोजेक्ट हैं। इसे आप किस तरह से देख रहे हैं?<br />देखिए, हमें टेक्नोलॉजी में प्रगति के साथ चलना होगा, नहीं तो पीछे रह जाएंगे। लेकिन यह सिर्फ फैंसी वर्ड नहीं होना चाहिए। उस टेक्नोलॉजी का धरातल पर भी इस्तेमाल हो। अभी हम एआई या आईओटी की जो बात कर रहे हैं, उसके पीछे डाटा है। जब तक क्वालिटी डाटा, ऑर्गेनाइज्ड डाटा और इंटर ऑपरेबल डाटा दुरुस्त नहीं होगा तब तक खास सफलता नहीं मिलेगी। एआई उसी डाटा पर आधारित होता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में नेचुरल इंटेलिजेंस का समावेश ठीक नहीं होगा। सिर्फ एआई से भी काम नहीं चलेगा। एक बेहतर सम्मिश्रण की जरूरत है। उसके लिए हमें एक मजबूत डाटा इकोसिस्टम डेवलप करना है।<br />हमारे पास पचासों साल का डाटा है। अभी मिनिस्ट्री डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बना रही है। हर खेत को जोड़ना, उसकी मैपिंग करना। कृषि ऐसा सेक्टर है जिसमें डाटा 7-8 मंत्रालयों पर निर्भर करता है। अगर हमें फर्टिलाइजर या पानी का डाटा नहीं मिलेगा तो इसे कैसे कर सकते हैं? जब वह सारा डाटा इकोसिस्टम डेवलप होगा तभी दुरुस्त एआई बनेगा। छोटे काम भले ही हो जाएं, लेकिन आप जिस बड़ी तस्वीर की बात करते हैं उसके लिए क्वालिटी डाटा चाहिए।</p>
<p><strong>एक्सटेंशन बहुत महत्वपूर्ण पहलू है, लेकिन माना जाता है कि हमारा एक्सटेंशन बेहतर स्थिति में नहीं है। &nbsp;आपने यील्ड गैप या व्यवहार की बात कही, उसमें भी एक्सटेंशन का इस्तेमाल हो सकता है। इसको आप किस तरह देखते हैं?</strong><br />एक्सटेंशन बहुत जरूरी है। पुराने एक्सटेंशन सिस्टम को देखें से तुलना करें अब का एक्सटेंशन का काम बहुत कठिन हो गया है। अब डिजिटल एक्सटेंशन की बात होती है, उसके लिए स्किल चाहिए। स्किल नहीं होगी तो व्यक्ति डिलीवर नहीं कर पाएगा। इसलिए हम साइंस ऑफ डिलीवरी की बात करते हैं। हमें साइंस ऑफ डिस्कवरी को साइंस ऑफ डिलीवरी से जोड़ना पड़ेगा। दोनों अलग काम करेंगे तो समस्या होगी।<br />एक्सटेंशन सिर्फ एक्सटेंशन नहीं है। यह एक विज्ञान है। यह साइंस ऑफ डिलीवरी है और इसके लिए बहुत सारी चीजें चाहिए। जैसे टेक्नोलॉजी आधारित बिजनेस मॉडल, वह कैसे काम करेगा। अगर टेक्नोलॉजी से बिजनेस बढ़ता है तो डिलीवरी होगी, अगर बिजनेस नहीं बढ़ा तो डिलीवरी नहीं होगी। हम 70 साल से एक लीनियर एक्सटेंशन सिस्टम पर चल रहे हैं। हमें लीनियर और नॉन लीनियर एक्सटेंशन सिस्टम का मिश्रण चाहिए। इसलिए एक्सटेंशन में एक नया इकोसिस्टम डेवलप हो रहा है। प्राइवेट सेक्टर का भी एक एक्सटेंशन नेटवर्क है। हम यह सोच रहे हैं कि वह सरकारी और निजी दोनों एक्सटेंशन सिस्टम में कन्वर्जेंस लाना पड़ेगा। अगर दोनों अलग दिशा में चलेंगे तो किसानों को नुकसान होगा। इस कन्वर्जेंस के लिए हम लोग जुटे हुए हैं।</p>
<p><strong>कृषि निर्यात में हम 50 अरब डॉलर तक पहुंच गए हैं। निर्यातोन्मुखी उत्पाद, उनकी क्वालिटी, उनके स्टैंडर्ड को लेकर आईसीएआर का क्या फोकस रहेगा?</strong><br />हमारा निर्यात क्वालिटी के कारण ही हो रहा है। चाहे बासमती लें या दूसरी फसलें। लेकिन हमें यह भी देखना पड़ेगा कि देश क्या निर्यात करना अफोर्ड कर सकता है और क्या नहीं। जैसे, हम कम पानी वाले इलाके में धान पैदा करके निर्यात करें और बाद में दलहन और तिलहन आयात करें, तो वह ठीक नहीं होगा। हम उस पर भी काम कर रहे हैं। हमें सस्टेनेबिलिटी को ध्यान में रखना होगा। भारत और भारत का किसान, जो चीजें इनकी मदद करेंगी हम उसी दिशा में काम करेंगे।</p>
<p><strong>युवाओं को कृषि में वापस लाना है। इसमें फार्म मैकेनाइजेशन की क्या भूमिका हो सकती है?</strong><br />हम हमेशा एफिशिएंसी की बात करते हैं, पानी की एफिशिएंसी, न्यूट्रिएंट की एफिशिएंसी, अन्य चीजों की एफिशिएंसी। लेकिन हम टाइम एफिशिएंसी को भूल जाते हैं। खेती में यह सबसे महत्वपूर्ण है। खासकर ऐसे समय में जब हम जलवायु परिवर्तन की अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। बिना मैकेनाइजेशन के हम टाइम एफिशिएंसी को सुनिश्चित नहीं कर सकते हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान केंद्रित शोध को देंगे प्राथमिकताः डॉ. मांगी लाल जाट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[&amp;apos;विकसित कृषि संकल्प अभियान&amp;apos; नहीं थमेगा, केवीके बनेंगे जिले की नोडल एजेंसी: शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/vikasit-krshi-sankalp-abhiyaan-will-not-stop-kvk-will-become-the-nodal-agency-of-the-district-shivraj-singh-chauhan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Jun 2025 18:21:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/vikasit-krshi-sankalp-abhiyaan-will-not-stop-kvk-will-become-the-nodal-agency-of-the-district-shivraj-singh-chauhan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-sourcepos="7:1-7:40">केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि देशभर में 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' बहुत सफल रहा है। यह अभियान अब थमेगा नहीं, लगातार किसानों के बीच जाकर खेती को उन्नत और किसानों को समृद्ध बनाने का प्रयत्न करते रहेंगे।</p>
<p data-sourcepos="7:1-7:40">अभियान के अंतर्गत कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं एक्सपर्ट की 2170 टीमों ने देशभर के 1.42 लाख से अधिक गांवों में पहुंचकर 1.34 करोड़ से ज्यादा किसानों से सीधा संवाद किया। कई राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मंत्री, सांसद, विधायक सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि अभियान में शामिल हुए।</p>
<p data-sourcepos="9:1-9:43">केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को पूसा परिसर, नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में 29 मई से 12 जून तक चले &lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo; की सफलता और महत्वपूर्ण उपलब्धियों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) को एक टीम के रूप में हर जिले में नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। केवीके के वैज्ञानिक अनिवार्य रूप से सप्ताह में तीन दिन खेतों में किसानों के बीच जाएंगे। कृषि मंत्री के रूप में वह स्वयं भी सप्ताह में दो दिन खेतों में किसानों के बीच जाएंगे।</p>
<p data-sourcepos="13:1-13:16">'लैब टू लैंड' की सोच के साथ चलाए गए 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' के सफल आयोजन के लिए कृषि मंत्री ने कृषि विभाग, विशेषकर आईसीएआर, कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कृषकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अनेक उपयोगी सुझाव किसानों की तरफ से आए हैं। योजनाएं और नीतियां बनाते समय उन सुझावों को ध्यान में रखा जाएगा।</p>
<p data-sourcepos="9:1-9:43">पत्रकार वार्ता में केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक एवं सचिव, डेयर डॉ. एम.एल. जाट , आईसीएआर के उपमहानिदेशक (एक्सटेंशन) डॉ. राजबीर सिंह के अलावा आईसीएआर के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_6852bbdb60a9b.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-sourcepos="17:1-17:38"><strong>राज्यवार आईसीएआर से नोडल अफसर</strong></p>
<p data-sourcepos="19:1-19:97">केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि विकसित खेती और समृद्ध किसान के लिए काम करने वाली जितनी भी संस्थाएं हैं, उनका एक दिशा में चलना अनिवार्य है। इसलिए राज्यवार कृषि के लिए आईसीएआर की तरफ से एक नोडल अफसर तय किया जाएगा जो उस राज्य में सारे वैज्ञानिक प्रयोगों और समस्याओं को, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखकर सुझाव देगा।</p>
<p data-sourcepos="21:1-21:31"><strong>किसान चौपाल से सार्थक चर्चा</strong></p>
<p data-sourcepos="23:1-23:41">कृषि मंत्री ने कहा कि अभियान की सबसे बड़ी सफलता किसान चौपाल रही, जहा किसानों से सार्थक चर्चा हुई। वैज्ञानिकों ने उस क्षेत्र की एग्रोक्लाइमेट कंडीशन देखते हुए कौन-से बीज, कौन-सी किस्म उपयुक्त रहेगी, इसकी जानकारी दी। मिट्टी के पोषक तत्वों व कीट प्रकोप के बारे में भी चर्चा की।</p>
<p data-sourcepos="25:1-25:38"><strong>रिसर्च केवल दिल्ली से तय नहीं होगी</strong></p>
<p data-sourcepos="27:1-27:3">शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के साथ संवाद से दो चीजें उभरकर सामने आईं। पहली, कई बार रिसर्च के मुद्दे दिल्ली में बैठकर तय करते हैं, लेकिन जमीन पर किसानों ने जिस तरह की समस्याएं बताई हैं, उन पर भी रिसर्च की जरूरत है। आईसीएआर को दिशा मिली कि रिसर्च केवल दिल्ली से ही तय नहीं होगी। दूसरी चीज यह सामने आई कि किसान बड़े वैज्ञानिक हैं।&nbsp;कई किसानों ने इतने इनोवेशन किए हैं कि वैज्ञानिक भी हैरान थे। साथ ही किसानों के मुद्दों और समस्याओं का भी पता चला। ये तीनों चीजें मार्गदर्शक का काम करेंगी। इन्हें ध्यान में रखकर रिसर्च करेंगे। अगर योजनाओं के स्वरूप में कोई परिवर्तन करना है, तो वो किए जाएंगे।</p>
<p data-sourcepos="29:1-29:4"><strong>सीड एक्ट को कड़ा बनाया जाएगा</strong></p>
<p data-sourcepos="31:1-31:91">अमानक बीज और पेस्टीसाइड के संबंध में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सीड एक्ट को और कड़ा बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। ताकि गुणवत्तायुक्त बीज किसानों तक पहुंचें। किसानों को खराब बीज और कीटनाशक बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।&nbsp;</p>
<p data-sourcepos="33:1-33:33"><strong>रबी सीजन में फिर चलेगा अभियान</strong></p>
<p data-sourcepos="35:1-35:17">सोयाबीन के लिए एक फॉलोअप प्लान बनाया गया है। सोयाबीन संबंधी समस्या के समाधान के लिए 26 जून को इंदौर में किसान, वैज्ञानिक व संबद्ध पक्षों के साथ मिलकर विचार करेंगे। उसके बाद कपास, फिर गन्ने, दलहन और तिलहन मिशन पर मंथन किया जाएगा। इस तरह अभियान अलग-अलग फसलों के लिए भी जारी रहेगा।</p>
<p data-sourcepos="37:1-37:9">24 जून को पूसा संस्थान में सारे वैज्ञानिक व कृषि अधिकारी, राज्यों के कृषि मंत्री आदि सभी हाइब्रिड मोड में जुड़ेंगे। अभियान के नोडल अफसर राज्यवार कृषि की स्थिति पर रिपोर्ट पेश करेंगे, जिसके आधार पर राज्यों के साथ मिलकर केंद्र को क्या-क्या करना चाहिए, उसकी रूपरेखा तय की जाएगी।</p>
<p data-sourcepos="41:1-41:23"><strong>11 साल में अद्भुत काम हुआ</strong></p>
<p data-sourcepos="43:1-43:289">कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 11 साल में कृषि क्षेत्र में अद्भुत काम हुआ है। अगर मोटे तौर पर हम खाद्यान्न उत्पादन देखें तो वह 40% बढ़ा है। फिर भी और काम करने की अनंत संभावनाए हैं। हमारे सामने लक्ष्य भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और पोषणयुक्त अनाज, फल-सब्जियां पर्याप्त मात्रा में लोगों के लिए उपलब्ध कराना है। किसानों की आजीविका ठीक ढंग से चले, खेती फायदे का धंधा बने, इसकी कोशिश करना है, और धरती को आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उत्पादन देने वाली बनाए रखना है, साथ ही भारत को दुनिया का फूड बास्केट बनाना है।</p>
<p data-sourcepos="45:1-45:32"><strong>एक राष्ट्र-एक कृषि-एक टीम&nbsp;</strong></p>
<p data-sourcepos="47:1-47:70">शिवराज सिंह ने कहा कि विकसित खेती और समृद्ध किसान के लिए तमाम संस्थाएं, विभाग और वैज्ञानिक अलग-अलग काम कर रहे हैं। तभी मन में विचार आया है कि एक राष्ट्र-एक कृषि-एक टीम बनाई जाए ताकि सभी मिलकर एक दिशा में काम करें। इसमें किसान भी शामिल हों। इस समग्र विचार को लेकर हमने विकसित कृषि संकल्प अभियान की रूपरेखा बनाई और इसे चलाया।</p>
<p data-sourcepos="49:1-49:21"><strong>ट्राइबल डिस्ट्रिक्ट्स पर विशेष ध्यान</strong></p>
<p data-sourcepos="51:1-51:79">कृषि मंत्री ने बताया कि देश के 177 ट्राइबल डिस्ट्रिक्ट्स (जनजातीय जिलों) के 1024 विकास खंडों में अभियान के तहत साढ़े 8 हजार से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित हुए और लगभग 18 लाख किसानों तक हम पहुंचे। इसी तरह 112 आकांक्षी जिलों में 802 ब्लॉक्स में टीमें लगभग 6800 गांवों में पहुंची और 15 लाख किसानों से वैज्ञानिकों का संवाद हुआ। लगभग 100 जिलों में वाइब्रेंट विलेज पर भी फोकस किया। सुदूर के गांवों में भी हमारे वैज्ञानिक पहुंचे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' नहीं थमेगा, केवीके बनेंगे जिले की नोडल एजेंसी: शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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        <title><![CDATA[खरीफ बुवाई ने रफ्तार पकड़ी, धान, दलहन व तिलहन की अच्छी शुरुआत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/kharif-sowing-picks-up-pace-paddy-pulses-and-oilseeds-sowing-grow.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Jun 2025 11:18:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/kharif-sowing-picks-up-pace-paddy-pulses-and-oilseeds-sowing-grow.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में खरीफ फसलों की बुवाई ने अच्छी रफ्तार पकड़ ली है। 13 जून तक कुल 89.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले साल की इसी अवधि से 1.48 लाख हेक्टेयर अधिक है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार,<span> इस वृद्धि का श्रेय मानसून के आगमन में जल्दी से धान</span>, दालों व तिलहनों की बुवाई में बढ़ती बुवाई को जाता है।</p>
<p>खरीफ सीजन की सबसे अहम फसल धान की बुवाई इस बार 4.53 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है, जो पिछले साल इस समय की तुलना में 13% अधिक है। दालों की बुवाई में 18% की बढ़त के साथ 3.07 लाख हेक्टेयर और तिलहनों की बुवाई 36.6% की बढ़त के साथ 2.05 लाख हेक्टेयर तक पहुंची है।</p>
<p>दालों में मूंग और उड़द के क्षेत्रफल में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है, जबकि अरहर की बुवाई में गिरावट देखी गई है। तिलहन की बुवाई में सबसे ज्यादा सोयाबीन की हिस्सेदारी है। हालांकि, <span>मूंगफली की बुवाई पिछड़ रही है। मोटे अनाजों का रकबा लगभग स्थिर है। मगर मक्का की बुवाई अभी कम हुई है।&nbsp;</span></p>
<p>खरीफ सीजन के दौरान गन्ने की बुवाई का क्षेत्र 55.07 हेक्टेयर तक पहुंच गया है जो पिछले साल इस समय 54.87 लाख हेक्टेयर था। कपास की बुवाई मामूली गिरावट के साथ 13.19 लाख हेक्टेयर तक पहुंची है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>खरीफ सीजन मई के अंतिम सप्ताह से सितंबर तक चलता है। इस दौरान बोई जाने वाली फसलें &ndash; जैसे धान, मक्का, सोयाबीन, अरहर और कपास &ndash; मानसूनी वर्षा पर काफी निर्भर करती हैं। खरीफ उत्पादन भारत के कुल खाद्यान्न उत्पादन का लगभग 60% होता है।</p>
<p>सीजन की शुरुआत में ही बढ़ते रकबे ने इस साल खरीफ के बेहतर उत्पादन का संकेत दिया है। हालांकि, <span>जून में मानसून में आए ब्रेक का असर आने वाले दिनों में बुवाई की प्रगति पर दिख सकता है। </span></p>
<p>सामान्य से बेहतर मानसून की उम्मीद को देखते हुए &nbsp;सरकार ने इस वर्ष (2025-26) 35.46 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान लगाया है, जो पिछले साल (2024-25) के 34.15 करोड़ टन से 3.8% अधिक है।</p>
<p>खरीफ बुवाई के शुरुआती आंकड़े संकेत देते हैं कि मानसून सामान्य रहा तो देश इस बार खाद्यान्न उत्पादन में नया रिकॉर्ड बना सकता है। साथ ही, दलहन और तिलहन उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना भी जगी है। जैसे-जैसे मानसून आगे बढ़ेगा, बारिश के वितरण पर बुवाई की प्रगति निर्भर करेगी।</p>
<p style="text-align: center;"></p>
<p style="text-align: center;"><strong>13 जून 2024 तक खरीफ फसलों की बुवाई का&nbsp;क्षेत्रफल ( लाख हेक्टेयर में)</strong></p>
<div class="table-responsive" style="text-align: center;">
<table align="center" border="1" bordercolor="#ccc" cellpadding="5" cellspacing="0" class="Table" style="height: 1316px;">
<tbody>
<tr style="height: 47px;">
<td rowspan="2" style="height: 94px; width: 35.5729px;">
<p><span><strong>क्र</strong><strong>.&nbsp;</strong><strong>सं</strong><strong>.</strong></span></p>
</td>
<td rowspan="2" style="height: 94px; width: 118.542px;">
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>फसल</strong></p>
</td>
<td rowspan="2" style="height: 94px; width: 198.976px;">
<p><span><strong>सामान्य क्षेत्र</strong><strong>&nbsp;</strong></span></p>
<p><span><strong>( 2019-20 से 2023-24)</strong></span></p>
</td>
<td colspan="2" style="height: 47px; width: 81.1806px;">
<p><span><strong>बोया गया</strong><strong>&nbsp;क्षेत्र</strong></span></p>
</td>
<td rowspan="2" style="height: 94px; width: 149.549px;">
<p><span><strong>वृद्धि (+)/ कमी (-)</strong></span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span><strong>2025</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span><strong>2024</strong></span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span><strong>1</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>धान</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>403.09</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>4.53</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>4.00</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.53</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span><strong>2</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>दालें</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>129.61</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>3.07</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>2.60</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.47</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>ए</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>अरहर</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>44.71</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.30</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.41</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>-0.11</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>बी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>उड़द दाल</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>32.64</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.43</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.18</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.24</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>सी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>मूंग दाल</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>35.69</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>1.56</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>1.38</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.17</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>डी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>कुल्थी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>1.72</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.06</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.04</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.02</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>ई</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>मोठ बीन</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>9.70</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.00</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.00</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.00</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>एफ</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>अन्य दालें</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>5.15</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.73</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.59</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.15</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span><strong>3</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>श्रीअन्न सह मोटे अनाज</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>180.71</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>5.89</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>5.90</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>-0.02</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>ए</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>ज्वार</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>15.07</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>1.01</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.75</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.26</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>बी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>बाजरा</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>70.69</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.86</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.03</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.83</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>सी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>रागी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>11.52</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.02</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.31</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>-0.29</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>डी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>छोटा बाजरा</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>4.48</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.40</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.55</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>-0.14</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>ई</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>मक्का</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>78.95</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>3.60</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>4.28</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>-0.68</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span><strong>4</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>तिलहन</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>194.63</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>2.05</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>1.50</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.55</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>ए</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>मूंगफली</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>45.10</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.58</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.71</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>-0.13</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>बी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>सोयाबीन</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>127.19</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>1.07</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.40</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.66</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>सी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>सूरजमुखी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>1.29</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.22</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.22</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.00</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>डी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>तिल</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>10.32</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.15</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.13</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.02</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>ई</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>नाइजर</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>1.08</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.00</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.00</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.00</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>एफ</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>अरंडी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>9.65</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.01</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.00</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.00</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span>जी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>अन्य तिलहन</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>0.00</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.03</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>0.03</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.00</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span><strong>5</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>गन्ना</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>52.51</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>55.07</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>54.88</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>0.20</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span><strong>6</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>जूट और मेस्टा</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>6.59</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>5.48</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>5.65</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>-0.17</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 35.5729px;">
<p><span><strong>7</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 118.542px;">
<p><span>कपास</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span>129.50</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>13.19</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span>13.28</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span>-0.09</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td colspan="2" style="height: 47px; width: 165.226px;">
<p><span><strong>कुल</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 198.976px;">
<p><span><strong>1096.64</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span><strong>89.29</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 35.0347px;">
<p><span><strong>87.81</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 149.549px;">
<p><span><strong>1.48</strong></span></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
<p style="text-align: center;"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685251b6c4f09.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ बुवाई ने रफ्तार पकड़ी, धान, दलहन व तिलहन की अच्छी शुरुआत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारतीय कृषि निर्यात को चाहिए नया दृष्टिकोण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/reimagining-india-agricultural-exports-from-plough-to-port.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Jun 2025 07:23:37 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/reimagining-india-agricultural-exports-from-plough-to-port.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हमारे देश की 40% से अधिक आबादी की आजीविका कृषि पर निर्भर है। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इसका हिस्सा 18% से अधिक है। पिछले तीन वर्षों में हमारा कृषि और संबद्ध उत्पादों का निर्यात लगभग 50 अरब डॉलर रहा है। वैश्विक कृषि निर्यात में हमारी हिस्सेदारी 3% से भी कम है। चीन, जिसके पास भारत के मुकाबले कम उपजाऊ भूमि है, लगभग 100 अरब डॉलर मूल्य के कृषि उत्पादों का निर्यात करता है। यह अंतर उस कुशलता और मूल्यवर्धन की कमी को दर्शाता है जिसे भरने की आवश्यकता है।</p>
<p>हम जिन शीर्ष 5 देशों को कृषि उत्पादों का निर्यात करते हैं, उनमें अमेरिका, चीन, यूएई, वियतनाम और बांग्लादेश शामिल हैं। इनके बाद सऊदी अरब, मलेशिया, इराक आदि आते हैं। हमारे प्रमुख निर्यात में समुद्री उत्पाद, चावल (बासमती और अन्य), मसाले, भैंस का मांस, चीनी आदि शामिल हैं। हाल के वर्षों में समुद्री उत्पादों का निर्यात 7 से 8 अरब अमेरिकी डॉलर रहा है। कपास का निर्यात लगभग 6.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। चावल (बासमती और अन्य) अब भी एक प्रमुख निर्यात कमोडिटी है। इसका हालिया निर्यात आंकड़ा 10 अरब डॉलर के आसपास है। भैंस के मांस का निर्यात अपेक्षाकृत स्थिर रहा है, जो 3.17 से 3.74 अरब डॉलर के बीच है। ताजे फल मुश्किल से शीर्ष 10 में जगह बना पाते हैं।</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि कृषि उत्पादों के निर्यात में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी 2014-15 में 13.7% से बढ़कर 2023-24 में 23.4% हो गई है। प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात 2018-19 के लगभग 6 अरब डॉलर से बढ़कर 2023-24 में 10.9 अरब डॉलर हो गया है।</p>
<p>हालांकि, जलवायु परिवर्तन के दबाव, घटते भूजल स्तर और वैश्विक बाजार में बदलावों को देखते हुए भारत के लिए अपनी कृषि निर्यात रणनीति को नए सिरे से परिभाषित करना आवश्यक है। वर्तमान निर्यात धान जैसी जल-प्रधान फसलों पर आधारित है। इसे धीरे-धीरे पोषण से भरपूर, आर्थिक रूप से लाभकारी और पर्यावरणीय दृष्टि से टिकाऊ विकल्पों की ओर मोड़ना होगा।</p>
<p>कृषि निर्यात में सतत विकास के लिए वस्तुओं का मिश्रण कैसे बदलना चाहिए?</p>
<p><strong>धान का मामला</strong><br />चावल दशकों से भारत का मुख्य कृषि निर्यात उत्पाद रहा है। हालांकि धान की खेती की पारिस्थितिक लागत की स्क्रूटनी अब बढ़ रही है। एक किलो धान के लिए 4,000&ndash;5,000 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है। इस तरह यह पानी की कमी वाले राज्यों के लिए सस्टेनेबल नहीं रह जाता है। लगातार एक ही फसल उगाने से मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और उत्पादकता में गिरावट आती है। इसके अलावा, धान के खेत मीथेन गैस का एक प्रमुख स्रोत हैं।</p>
<p>जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि संबंधी स्ट्रेस बढ़ने के चलते धान निर्यात पर निर्भर रहना अब दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं है। अब नीति और बाजार स्तर पर कम निवेश और अधिक उत्पादन देने वाली फसलों की ओर जाने पर आम सहमति बन रही है।</p>
<p><strong>मिलेट: सुपरफूड क्रांति</strong><br />मोटे अनाज (मिलेट्स) सस्टेनेबल खेती के प्रतीक बनकर उभरे हैं। 2023-24 में भारत ने 1.46 लाख टन मोटे अनाज का निर्यात किया, जिसकी कीमत 7.1 करोड़ डॉलर थी। इनमें ज्वार, रागी, बाजरा और प्रोसेस्ड मिलेट स्नैक्स प्रमुख थे (स्रोत: एपीडा)। मिलेट्स के लिए धान की तुलना में 70% कम पानी की जरूरत पड़ती है। ये कीट-प्रतिरोधी होते हैं और शुष्क मिट्टी में भी पनपते हैं। साथ ही ये ग्लूटन-मुक्त, फाइबर, मिनरल्स और प्रोटीन से भरपूर होते हैं- जो स्वास्थ्य के प्रति जागरूक वैश्विक उपभोक्ताओं के लिए आदर्श हैं।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष घोषित करने से यूरोप, उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी एशिया जैसे नए बाजार खुले हैं। इस गति को अब ब्रांडिंग, जीआई टैगिंग और ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन के माध्यम से संस्थागत रूप देना जरूरी है।</p>
<p><strong>मक्का: विविध मांग वाला उत्पाद</strong><br />मक्का अब खाद्य, चारा, स्टार्च और बायोफ्यूल जैसे क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में प्रयोग किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने 14.4 लाख टन मक्का निर्यात किया, जिसकी कीमत 44 करोड़ डॉलर थी। बांग्लादेश, वियतनाम और नेपाल से इसकी बहुत मांग देखी गई। इस फसल के लिए भी कम पानी की आवश्यकता होती है और यह विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में आसानी से अनुकूलित हो जाती है। कटाई के बाद सुखाने की व्यवस्था, बेहतर कृषि तकनीक और अनुबंध खेती को बढ़ावा देकर भारत की स्थिति को और सुदृढ़ किया जा सकता है।</p>
<p><strong>कपास: मूल्य संवर्धन आगे बढ़ने का रास्ता</strong><br />पिछले 7-8 वर्षों में भारत से कपास का निर्यात 5 से 10 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच रहा है। हमारे किसान वैश्विक मूल्य अस्थिरता के साथ ब्राजील व अमेरिका से प्रतिस्पर्धा का भी सामना करते हैं। प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ाने के लिए भारत को कच्चे कपास के निर्यात से हटकर ऑर्गेनिक कपास, यार्न और टेक्निकल टेक्सटाइल जैसे मूल्य-संवर्धित क्षेत्रों की ओर बढ़ना होगा। &lsquo;सस्टेनेबल इंडियन कॉटन&rsquo; ब्रांडिंग पहल से बेहतर मूल्य पाने में मदद मिल सकती है।</p>
<p><strong>भैंस का मांस और पशु उत्पाद</strong><br />भारत भैंस मांस का विश्व में सबसे बड़ा निर्यातक है। वित्त वर्ष 2023-24 में इसका 3.74 अरब डॉलर का निर्यात हुआ। इसके प्रमुख बाजारों में वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया शामिल हैं। भारत का मांस ओआईई (OIE) और कोडेक्स (Codex) मानकों का पालन करता है, जो इसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाता है। एशिया में विशेष रूप से बढ़ती प्रोटीन मांग को देखते हुए, बेहतर ट्रेसेबिलिटी और लॉजिस्टिक्स के साथ भारत मांस निर्यात बढ़ा सकता है। साथ ही पशु झिल्लियों, खाल और डेयरी उत्पादों (जैसे पनीर, घी) जैसी श्रेणियां भी उभर रही हैं, जिनमें प्रीमियम उत्पादों की संभावना है।</p>
<p><strong>प्रसंस्कृत खाद्य की ओर बढ़ता रुझान</strong><br />वित्त वर्ष 2023-24 में प्रोसेस्ड फूड्स का भारत के कुल कृषि-निर्यात में 23% से अधिक हिस्सा था। इनका करीब 10 अरब डॉलर का निर्यात किया गया। वैश्विक बाजारों में पैकेज्ड और ब्रांडेड खाद्य पदार्थों की ओर बढ़ता रुझान अब नहीं बदलने वाला है। भारत की विविध खाद्य परंपरा, कम लागत वाली मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और बढ़ता ऑर्गेनिक सेगमेंट एक विशिष्ट बढ़त प्रदान करता है। अमेरिका जैसे बाजारों में लगभग 50% खाद्य निर्यात प्रोसेस्ड ही होते हैं। भारत में प्रोसेस्ड निर्यात की हिस्सेदारी को 40% तक बढ़ाने की संभावनाएं हैं। प्रोसेस्ड और रेडी-टू-ईट उत्पादों के रूप में केवल झींगा (श्रिम्प) निर्यात लगभग 10 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।</p>
<p><strong>हमें किन बातों पर ध्यान देना होगा</strong><br /><strong>ग्राहक सहभागिता</strong><br />हमें दुनिया के शीर्ष खाद्य आयातक देशों का विश्लेषण करना होगा, उनकी स्थानीय खरीद आवश्यकताओं तथा भारतीय उत्पादों की ताकत को ध्यान में रखते हुए दोनों के बीच कमी की पहचान करनी होगी। हमें अपने वर्तमान ग्राहक आधार से आगे जाकर यूरोप, ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े और लाभकारी बाजारों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करानी होगी।</p>
<p>कुछ प्रमुख देशों को लक्षित करने के बाद हमें वहां के ग्राहकों के साथ गहराई से जुड़ने में निवेश करना चाहिए। इसके लिए एपीडा जैसी सरकारी संस्था की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति की आवश्यकता हो सकती है। भारत सरकार और उद्योग (निर्यात संगठनों, कृषि व्यापारियों, नाबार्ड जैसी संस्थाओं आदि) को मिलकर उन आयातक देशों के साथ काम करना होगा, उनकी आवश्यकताओं को समझना होगा और फिर किसानों के इकोसिस्टम को उसी के मुताबिक ढालना होगा। उदाहरण के लिए, हमें यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे देशों में निर्यात के लिए सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी मानकों के अनुपालन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।</p>
<p><strong>उत्पाद विकास</strong><br />एक बार हम आयातक की आवश्यकताओं को समझ लें, तो हमें किसान के पारिस्थितिकी तंत्र के साथ उसी के अनुरूप काम करना होगा। ये नए उत्पाद (जैसे एवोकाडो), नए क्लस्टर (जैसे उत्तर-पूर्व भारत) या मौजूदा क्लस्टर में नया प्रोत्साहन (जैसे अंगूर/नासिक) हो सकते हैं। यदि हम भारत के कृषि-जलवायु क्षेत्रों की विविधता देखें, तो हम कई ऐसे उत्पाद उगाते हैं जो भारत में बहुत लोकप्रिय नहीं हैं &ndash; जैसे कि रामबूटन, ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो आदि। यदि हमें इन उत्पादों के लिए सही बाजार से जुड़ाव मिल जाए, तो हम बड़े पैमाने पर इनका उत्पादन बढ़ा सकते हैं। उत्पाद मिश्रण ऐसा होना चाहिए कि ट्रेंड का प्रति इकाई मूल्य वर्तमान स्तर से बढ़ सके।</p>
<p><strong>सप्लाई चेन की क्षमता</strong><br />उत्पादन प्रक्रिया सुव्यवस्थित होने बाद अगला कदम यह सुनिश्चित करना होगा कि पूरी सप्लाई चेन में इन्फ्रास्ट्रक्चर में कहीं कमी न हो। इसमें खेत स्तर पर सौर ऊर्जा चालित कोल्ड स्टोरेज यूनिट से लेकर, कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं, पैक-हाउस, रेफ्रिजेरेटेड ट्रक, उन्नत पैकेजिंग और प्रोसेसिंग यूनिट का निर्माण आवश्यक है।</p>
<p>प्रसंस्कृत खाद्य वस्तुओं की ग्राहक आवश्यकताओं को देखते हुए हमें बड़े पैमाने पर प्रोसेसिंग फैक्टरियों में निवेश करना होगा। भारत की जो कृषि उत्पादन क्षमता है, उसे देखते हुए निर्यातोन्मुख प्रसंस्करण के लिए आसानी से दस मेगा फूड पार्क स्थापित किए जा सकते है। इनमें गोदाम से लेकर गुणवत्ता परीक्षण और निर्यात डॉक्यूमेंटेशन तक की एकीकृत सुविधाएं शामिल होनी चाहिए। हमें पर्याप्त परीक्षण सुविधाओं (जैसे वैश्विक मान्यताप्राप्त प्रमाणपत्रों &ndash; GAP, HACCP, ऑर्गेनिक आदि के लिए) की भी आवश्यकता है। ट्रीटमेंट फैसिलिटी (जैसे भाप उपचार) भी स्थापित की जानी चाहिए ताकि उत्पाद वैश्विक फाइटोसैनेटरी मानकों को पूरा कर सकें।</p>
<p>कृषि निर्यातकों की एक आम समस्या है हवाई अड्डों या समुद्री बंदरगाहों तक कनेक्टिविटी की कमी। सभी बंदरगाह कृषि निर्यात को संभालने में सक्षम नहीं हैं। सप्लाई चेन को देखते हुए खेत से लेकर ग्राहक के पास उत्पाद पहुंचने तक की हर कड़ी का गंभीर विश्लेषण जरूरी है। नए बुनियादी ढांचे में निवेश की आवश्यकता हो सकती है। परिवहन लागत पर प्रोत्साहन और सब्सिडी देकर इसे सुदृढ़ करना होगा। &nbsp;सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) में निवेश प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। किसान उत्पादक संगठनों को अपनी यूनिट स्थापित करने के लिए सॉफ्ट लोन और अनुदान देना एक और तरीका है। निर्यात क्रेडिट गारंटी निगम (ईसीजीसी) की योजना का विस्तार किया जाना चाहिए, जिसमें कृषि निर्यात पर विशेष ध्यान हो। सरकार को वायबिलिटी गैप फंडिंग का उपयोग करके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में निवेश को और आकर्षक बनाना चाहिए।</p>
<p>विमान की जगह समुद्री मार्ग से माल ढुलाई से लागत कम होती है और प्रदूषण भी कम होता है। समुद्री मार्ग बड़ी मात्रा में सामान को लंबी दूरी तक ले जाने के लिए किफायती विकल्प है। इससे प्रति इकाई शिपिंग लागत में कमी आती है। इसके अतिरिक्त इसमें कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है। यह वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने और सस्टेनेबल सप्लाई चेन को बढ़ावा देने के प्रयासों के अनुरूप है। इसके लिए खेत से लेकर पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स तक उचित प्रक्रियाएं विकसित करनी होंगी।</p>
<p>देश के प्रमुख कृषि उत्पादन क्षेत्रों में 50 एकीकृत निर्यात लॉजिस्टिक्स हब का विकास निर्यात को एक बड़ा प्रोत्साहन दे सकता है। इन केंद्रों में संग्रह करने, छंटाई, पैकेजिंग, प्री-कूलिंग &nbsp;और कस्टम क्लियरेंस जैसी एंड-टू-एंड सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए।</p>
<p>यदि इन कार्यों के लिए सरकार की ओर से किसी तकनीकी निवेश की आवश्यकता हो तो उसमें तेजी लाई जानी चाहिए। इसमें उपग्रह डेटा और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) सेंसर का उपयोग कर समय पर और सटीक कृषि परामर्श सुनिश्चित करना भी शामिल है। साथ ही एक केंद्रीय वॉर रूम की जरूरत होगी जो वैश्विक घटनाक्रम, मौसम के पैटर्न में बदलाव और खेतों में नए प्रोडक्शन ट्रेंड की रियल-टाइम जानकारी प्रदान कर सके।</p>
<p><strong>जनशक्ति का विकास</strong><br />हम जो भी दिशा अपनाएं, हमें पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में सचेत रूप से निवेश करना होगा। नौकरशाहों को वैश्विक स्तर पर श्रेष्ठ तरीकों, खाद्य/एफएमसीजी क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के संचालन के तरीकों और अन्य सरकारों (जैसे चीन) द्वारा अपनाए गए तरीकों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। एक्सटेंशन कर्मियों और कृषि विज्ञान केंद्र के कर्मचारियों को वैश्विक मानकों, नए तरीकों और नई विधियों को अपनाते समय मौसम की अनिश्चितता से कैसे निपटना है, इस पर प्रशिक्षण देना आवश्यक है।</p>
<p>स्वाभाविक रूप से, यदि ग्राहकों की तरफ से कोई नई मांग आती है, या प्रक्रियाओं या गुणवत्ता मानकों का पालन करना आवश्यक होता है, तो सबसे अधिक प्रशिक्षण किसान को देना होगा। इन सभी विभिन्न हितधारकों को नई तकनीकी संभावनाओं के बारे में भी प्रशिक्षण देने की जरूरत पड़ेगी।</p>
<p><strong>निष्कर्ष: मात्रा से मूल्य की ओर</strong><br />भारत की कृषि निर्यात नीति को मात्रा-आधारित से मूल्य-आधारित दृष्टिकोण की ओर लेकर जाने की जरूरत है। चावल या चीनी जैसे पारंपरिक निर्यात में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की बजाय, हमें टिकाऊ, जलवायु-सहिष्णु और अधिक ग्रोथ वाली कमोडिटी- जैसे मोटे अनाज, मक्का, भैंस का मांस, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, कपास वैल्यू चेन और बागवानी- में निवेश करना चाहिए। निर्यात को दोगुना करना किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य में सीधे योगदान देगा। इसके अतिरिक्त देश का खाद्य प्रसंस्करण उद्योग भी विकसित होगा।</p>
<p>100 अरब डॉलर के कृषि निर्यात लक्ष्य तक पहुंचना कोई दूर का सपना नहीं है। समन्वित सुधार, रणनीतिक निवेश और केवल इरादों के बजाय क्रियान्वयन पर निरंतर ध्यान केंद्रित करके हम इस सपने को वास्तविकता में बदल सकते हैं।&nbsp;</p>
<p><em>(सिराज ए. चौधरी अगवाया एलएलपी में पार्टनर हैं। एम. रामाकृष्&zwj;णन प्राइमस पार्टनर्सके मैनेजिंग डायरेक्टर हैं)</em></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685178d7d26f4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारतीय कृषि निर्यात को चाहिए नया दृष्टिकोण ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685178d7d26f4.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अगली जनगणना 2027 में होगी, साथ ही जाति गणना, केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/next-census-will-be-held-in-2027-along-with-caste-enumeration-central-government-issued-a-notification.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 17 Jun 2025 11:17:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/next-census-will-be-held-in-2027-along-with-caste-enumeration-central-government-issued-a-notification.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="109" data-end="173">भारत में अगली जनगणना 2027 में कराई जाएगी।&nbsp;केंद्र सरकार ने आगामी जनगणना के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। देश के अधिकतर हिस्सों में जनगणना के लिए 1 मार्च, 2027 को आधार माना जाएगा, जबकि बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर, 2026&nbsp;तय की गई है। जनगणना के साथ ही जातिगत गणना भी कराई जाएगी।&nbsp;&nbsp;</p>
<p data-start="420" data-end="706">गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 3 के तहत यह प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके साथ ही वर्ष 2018 की पुरानी अधिसूचना को निरस्त कर दिया गया है। गौरतलब है कि देश में 16 साल बाद जनगणना होने जा रही है। पिछली बार जनगणना 2011 में हुई थी। लेकिन वर्ष 2021 में महामारी के कारण जनगणना स्थगित कर दी गई थी।</p>
<p data-start="952" data-end="993"><strong>गृह मंत्री ने की तैयारियों की समीक्षा</strong></p>
<p data-start="995" data-end="1209">केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक में जनगणना की तैयारियों की समीक्षा की। इस बैठक में गृह सचिव, भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त (RG&amp;CCI) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।</p>
<p data-start="995" data-end="1209">केंद्र शासित लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के अलावा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हिमपात प्रभावित क्षेत्रों के लिए जनगणना की संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 होगी, जबकि शेष भारत में यह 1 मार्च 2027 रहेगी। यह भारत की अब तक की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी।</p>
<p data-start="995" data-end="1209"><strong>जाति गणना भी होगी शामिल</strong></p>
<p data-start="1211" data-end="1473">गृह मंत्री अमित शाह ने&nbsp;<em data-start="1218" data-end="1224">एक्स&nbsp;</em>पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस जनगणना में पहली बार जातिगत गणना भी की जाएगी। इस कार्य में 34 लाख गणनाकर्मी और पर्यवेक्षक तथा लगभग 1.3 लाख कर्मचारी शामिल होंगे, जो अत्याधुनिक मोबाइल डिजिटल उपकरणों का उपयोग करेंगे।</p>
<p data-start="1504" data-end="1751">इस बार जनगणना में हर व्यक्ति को अपनी जाति बताने का विकल्प दिया जाएगा। 1931 के बाद यह पहली बार होगा जब जातिगत गणना को आधिकारिक जनगणना का हिस्सा बनाया गया है। विपक्षी दल जाति आधारित जनगणना की मांग कर रहे थे। यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा था, जिसे देखते हुए अप्रैल में केंद्र सरकार ने जातिगत गणना कराने की घोषणा की थी।</p>
<p data-start="1753" data-end="1781"><strong>दो चरणों में होगी जनगणना</strong></p>
<ol data-start="1783" data-end="2009">
<li data-start="1783" data-end="1894">
<p data-start="1786" data-end="1894" style="text-align: left;">हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO): इसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएं और अन्य भौतिक जानकारियाँ एकत्र की जाएंगी।</p>
</li>
<li data-start="1895" data-end="2009">
<p data-start="1898" data-end="2009" style="text-align: left;">जनसंख्या गणना (PE): प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय जानकारी एकत्र की जाएगी।</p>
</li>
</ol>
<p data-start="2011" data-end="2059"><strong>डिजिटल जनगणना और डेटा सुरक्षा&nbsp;</strong></p>
<p data-start="2061" data-end="2318">इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी, जिसमें मोबाइल ऐप का उपयोग होगा। नागरिकों को स्वयं गणना (Self-enumeration) की सुविधा भी दी जाएगी। डेटा के संग्रहण, प्रसारण और भंडारण के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कठोर उपाय किए जाएंगे।&nbsp;यह भारत की अब तक की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी।</p>
<p data-start="2402" data-end="2436"><strong>परिसीमन और महिला आरक्षण&nbsp;</strong></p>
<p data-start="2438" data-end="2625"><span>आगामी जनगणना नए परिसीमन के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण होने जा रही है।&nbsp;</span>जनगणना के आंकड़ों के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों के नए परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होगी। उसके बाद संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान लागू किया जाएगा।</p>
<p data-start="2627" data-end="2833">हालांकि, दक्षिण भारत के राज्यों में आबादी के आधार पर परिसीमन को लेकर आवाजें उठ रही हैं। क्योंकि वहां जनसंख्या वृद्धि उत्तर भारत की तुलना में धीमी रही है। नए परिसीमन से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक विवाद बढ़ सकता है।&nbsp;</p>
<p data-start="2835" data-end="2861"><strong>क्यों जरूरी है जनगणना?</strong></p>
<p>देश में कितनी जनसंख्या है, लोगों की आर्थिक-सामाजिक स्थिति कैसी है, <span>शिक्षा</span>, स्वास्थ्य,&nbsp;<span>रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का क्या स्तर है</span>, <span>इन जानकारियों के लिए जनगणना कराना जरूरी है। जनगणना में आबादी के आंकड़े के अलावा आयु, लिंग, भाषा, धर्म, व्यवसाय और निवास आदि से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाई जाती है।</span><span> ये आंकड़े देश में नीति निर्धारण, कल्याणकारी योजनाओं और शासन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। </span></p>
<p data-start="3142" data-end="3166"><strong>कौन करता है जनगणना?</strong></p>
<p data-start="3168" data-end="3456">केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आने वाला रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर, भारत (RGCCI) देश में जनगणना करवाता है। भारत में जनगणना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के तहत जनगणना कराई जाती है। देश में 1872 से जनगणना हो रही है।</p>
<p data-start="3168" data-end="3456"></p>
<p data-start="3168" data-end="3456"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685100ffdbeb6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अगली जनगणना 2027 में होगी, साथ ही जाति गणना, केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[थोक महंगाई 14 माह के निचले स्तर पर, खाद्य वस्तुएं सस्ती होने से किसानों पर मार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wholesale-inflation-at-a-14-month-low-farmers-are-affected-due-to-cheaper-food-items.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 16 Jun 2025 20:20:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wholesale-inflation-at-a-14-month-low-farmers-are-affected-due-to-cheaper-food-items.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="214" data-end="537">भारत में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई दर मई में घटकर 0.39 फीसदी रह गई, जो पिछले 14 महीनों का सबसे निचला स्तर है। अप्रैल में यह दर 0.85% थी। यह गिरावट मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं, ईंधन और प्राथमिक उत्पादों की कीमतों में कमी के कारण आई है। मई में खुदरा महंगाई (CPI) भी घटकर 75 महीनों के न्यूनतम स्तर 2.82% पर आ गई।</p>
<p data-start="539" data-end="753">जहां उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत मिली है, वहीं इसका सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ा है। महंगाई में कमी की मुख्य वजह खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट है, जिसके चलते किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। कई कृषि उपजों के दाम एमएसपी से नीचे चल रहे हैं।&nbsp;</p>
<p data-start="755" data-end="795"><strong data-start="755" data-end="795">खाद्य महंगाई 19 माह के निचले स्तर पर</strong></p>
<p data-start="797" data-end="935">सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई में खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई दर घटकर 1.72% रही, जो अप्रैल में 2.55% थी। यह पिछले 19 महीनों में सबसे कम है।</p>
<p data-start="937" data-end="1250">सब्जियों की कीमतों में गिरावट जारी है। मई में सब्जियों (-21.6%), दालों (-10.4%), आलू (-29.4%) और प्याज (-14.4%) की थोक कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसी अवधि में अंडा, मांस और मछली की कीमतों में लगातार दूसरे महीने (-1.01%) गिरावट दर्ज की गई। इन वस्तुओं की कीमतों में गिरावट ने कुल खाद्य महंगाई को कम किया है।</p>
<p data-start="1252" data-end="1517">हालांकि, फलों की थोक महंगाई दर अप्रैल के 8.38% से बढ़कर मई में 10.17% हो गई। दूध की महंगाई दर भी बढ़कर 2.66% पहुंच गई, जो अप्रैल में मात्र 0.59% थी। तिलहन पर 2.79% महंगाई दर्ज की गई, जबकि अनाज (2.56%), धान (0.96%) और गेहूं (5.75%) पर महंगाई की रफ्तार कुछ कम हुई है।</p>
<p data-start="1519" data-end="1758">थोक महंगाई के आंकड़े दर्शाते हैं कि किसानों द्वारा पैदा की जाने वाली अधिकांश खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट जारी है। किसानों को पिछले साल की तुलना में अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ी है। कई खाद्य वस्तुओं में यह गिरावट 10% से भी अधिक है।</p>
<p data-start="1760" data-end="1794"><strong data-start="1760" data-end="1794">वनस्पति तेलों पर 26.49% महंगाई</strong></p>
<p data-start="1796" data-end="2023">एक ओर जहां खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई में गिरावट दर्ज की गई, वहीं वनस्पति तेल और वसा की थोक महंगाई 26.49% रही, जो चिंता का विषय है। तैयार खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई दर 8.45% रही, जबकि पेय पदार्थों पर 1.80% की थोक महंगाई दर्ज की गई।</p>
<p data-start="2025" data-end="2067"><strong data-start="2025" data-end="2067">ईंधन और ऊर्जा की थोक महंगाई में गिरावट</strong></p>
<p data-start="2069" data-end="2342">मई में ईंधन और ऊर्जा वर्ग की महंगाई दर (-)2.27% रही, जो अप्रैल में (-)2.18% थी। पेट्रोल की थोक महंगाई दर -8.49% और डीजल की -5.61% रही। खनिज तेलों की कीमतों में गिरावट इसकी प्रमुख वजह रही। फैक्ट्री में बने उत्पादों पर महंगाई दर मई में घटकर 2.04% रही, जो अप्रैल में 2.62% थी।</p>
<p data-start="2200" data-end="2238"><strong data-start="2200" data-end="2238">मानसून पर नजर</strong></p>
<p data-start="2240" data-end="2553">खाद्य महंगाई की दिशा काफी हद तक कृषि उत्पादन और मानसून की स्थिति पर निर्भर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने सामान्य से बेहतर मानसून की भविष्यवाणी की है लेकिन अब तक मानसून की बारिश में 31% की कमी देखी गई है। मानसून की शुरुआत भले जल्दी हुई हो, लेकिन जून के पहले सप्ताह में इसकी प्रगति धीमी रही है। इससे फसल उत्पादन और खाद्य महंगाई पर असर पड़ सकता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ थोक महंगाई 14 माह के निचले स्तर पर, खाद्य वस्तुएं सस्ती होने से किसानों पर मार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नीति आयोग की अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात को बढ़ावा देने की सिफारिशों पर किसान संगठनों ने जताया ऐतराज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmer-unions-opposed-the-suggestion-of-niti-aayog-to-reduce-tariffs-on-us-agricultural-imports.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 15 Jun 2025 15:35:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmer-unions-opposed-the-suggestion-of-niti-aayog-to-reduce-tariffs-on-us-agricultural-imports.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हाल में नीति आयोग ने भारत और अमेरिका के बीच कृषि व्यापार बढ़ाने के विषय में एक वर्किंग पेपर जारी कर जीएम सोयाबीन और मक्का समेत कई अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात को बढ़ावा देने की सिफारिश की है। नीति आयोग के इन सुझावों पर किसान संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है।</p>
<p>नीति आयोग ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत चावल, <span>काली मिर्च</span>, <span>सोयाबीन तेल</span>, सेब, बादाम, पिस्ता और जीएम सोया-मक्का जैसे उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने की सिफारिश की है। भारतीय किसान संघ ने कहा है कि ऐसा करना कृषि पर निर्भर 70 करोड़ भारतीयों के लिए जोखिम भरा कदम साबित हो सकता है।</p>
<p>भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री <strong>मोहिनी मोहन मिश्र</strong> ने सवाल उठाया कि अमेरिका के साथ टैरिफ लड़ाई में नीति आयोग क्यों घुटने टेक रहा है? जीएम (सोया व मक्का) के आयात के पक्ष में सुझाव देने का तर्क समझ से परे है। देश में जब खाद्य संबंधी आयातित सामग्री के साथ नॉन जी.एम. सोर्स एवं नॉन जी.एम. सर्टिफिकेट जरूरी है, तब नीति आयोग के ये सुझाव कई गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।&nbsp;</p>
<p>मिश्र ने देश व किसान हित की नीति के खिलाफ नीति आयोग के सुझावों पर ऐतराज जताते हुए कहा कि नीति आयोग के सलाहकार अपनी सिफारिशों पर पुनर्विचार करें। दलहन-तिलहन में सरकार की नीति साथ दें तो भारत को स्वावलंबी बनाने के लिए देश का किसान तैयार है। ऐसी स्थिति में किसी के दबाव में नीति आयोग का झुकना भारत के लिए अच्छा नहीं है। यदि नीति आयोग को देश के सामर्थ्य पर भरोसा नहीं है तो सरकार को नीति आयोग की कार्य प्रणाली पर गंभीर चिंतन मनन करना चाहिए।</p>
<p>भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष<strong>&nbsp;नरेश सिरोही</strong> ने कहा कि नीति आयोग ने भारत को &ldquo;<span>विदेशी कृषि उत्पादों का बा</span>जार&rdquo; <span>बनाने का अनैतिक सुझाव </span>दिया है। नीति आयोग के हालिया वर्किंग पेपर में अमेरिकी जीएम फसलों और कृषि उत्पादों के आयात को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है। यह प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को धता बताते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था, <span>कृषि</span>, <span>किसानों की आजीविका और जैव विविधता को नष्ट करने वाला</span>, <span>किसान विरोधी नीतियों पर आधारित दस्तावेज है</span>। सिरोही का कहना है कि नीति आयोग की ये अनैतिक सिफारिशें राष्ट्रीय स्तर पर किसानों के बीच चर्चा का विषय बन चुकी हैं।</p>
<p>भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता<strong> धर्मेंद्र मलिक</strong> ने कहा कि अमेरिका में जीएम सोया और मक्का को पशु फीड के रूप में उपयोग किया जाता है और कुछ मात्रा में इससे ईथेनॉल बनाया जाता है। ऐसे में इस उपज को भारत में आयात करने का सुझाव क्यों दिया है? देश के किसानों द्वारा पैदा मक्का व गन्ने को छोड़कर अमेरिकी जीएम मक्का को आयात करने का सुझाव किसान हितों के साथ टकराव दिखाता है। नीति आयोग के ऐसे अनीतिपूर्ण सुझावों में तुरंत सुधार होना चाहिये।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_684e9c0e70de3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नीति आयोग की अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात को बढ़ावा देने की सिफारिशों पर किसान संगठनों ने जताया ऐतराज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डिजिटल कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 6,000 करोड़ रुपये का बूस्ट, चार राज्यों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rs-6000-crore-boost-for-digital-agri-infrastructure-mous-signed-with-four-states.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 14 Jun 2025 17:23:10 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rs-6000-crore-boost-for-digital-agri-infrastructure-mous-signed-with-four-states.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने कहा है कि राज्यों द्वारा अपडेटेड अधिकारों के रिकॉर्ड (आरओआर) के साथ अपनी किसान रजिस्ट्री को तेजी से जोड़ने और योजना वितरण तथा व्यक्तिगत कृषि सेवाओं के लिए डिजिटल डेटासेट का सक्रिय रूप से उपयोग करने की तत्काल जरूरत है। वे कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से आयोजित "एग्री स्टैक पर राष्ट्रीय सम्मेलन: डेटा की डिलीवरी में तब्दीली" में बोल रहे थे। इस मौके पर राज्यों की मदद के लिए 6,000 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की गई।</p>
<p>कृषि सचिव ने पारदर्शी, किसान-केंद्रित गवर्नेंस के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। इसके अलावा, उन्होंने सटीक पहचान के लिए डिजिटल भूमि रिकॉर्ड और आधार सीडिंग की बुनियादी भूमिका पर बल दिया। अपने संबोधन में उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि के मूल्य और आय में गिरावट की चुनौतियों का भी जिक्र किया।</p>
<p>कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (डिजिटल) प्रमोद कुमार मेहरदा ने एग्री स्टैक के बारे में व्यापक रूप से बताया जिसमें पीएम-किसान, पीएमएफबीवाई, केसीसी जैसी प्रमुख योजनाओं के साथ किसान आईडी का एकीकरण शामिल है। उन्होंने जियोरेफरेंसिंग, डेटा क्वालिटी और एकीकृत किसान सेवा इंटरफेस (यूएफएसआई) मानकों के पालन के महत्व पर बल दिया। इस सम्मेलन में किसान ऑथराइजेशन सिस्टम और डिजिटल रूप से सत्यापन योग्य प्रमाण पत्र (डीवीसी) जैसी सेवाओं की शुरुआत भी हुई।</p>
<p>इस मौके पर महाराष्ट्र, केरल, बिहार और ओडिशा राज्यों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर भी हुए। यह गठजोड़ किसान रजिस्ट्री से जुड़े प्रमाणीकरण के जरिए ऋण सेवाओं तक डिजिटल पहुंच को सक्षम करेगा, कागजी कार्रवाई को कम करेगा। देश भर के छोटे और सीमांत किसानों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।&nbsp;</p>
<p><strong>राज्यों को 6,000 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा</strong><br />इस मौके पर राज्यों की मदद के लिए कुल 6,000 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की गई। इनमें किसान रजिस्ट्री (कानूनी उत्तराधिकारी प्रणाली सहित) के लिए 4,000 करोड़ रुपये और पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर डिजिटल फसल सर्वेक्षण के लिए 2,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए।</p>
<p>चीफ नॉलेज ऑफिसर और सलाहकार (CKO&amp;A) के नेतृत्व में हुए तकनीकी सत्रों में राज्य स्तरीय डिजिटल बुनियादी ढांचे को बढ़ाने, डेटा की गुणवत्ता में फर्क को दूर करने और डीसीएस मानकों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। सटीकता और दक्षता को बेहतर करने के लिए रिमोट सेंसिंग, एआई/एमएल टूल और स्वचालित डेटा सत्यापन तंत्र का उपयोग करने पर जोर दिया गया। एग्री स्टैक के उपयोग पर एक सत्र में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_684d628880001.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ डिजिटल कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 6,000 करोड़ रुपये का बूस्ट, चार राज्यों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_684d628880001.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जलवायु और रोग प्रतिरोधी गन्ने की किस्मों में निवेश की जरूरत: इस्मा प्रेसिडेंट गौतम गोयल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/need-to-invest-in-climate-and-disease-resilient-varieties-of-sugarcane-isma-president-goel.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 14 Jun 2025 14:15:40 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/need-to-invest-in-climate-and-disease-resilient-varieties-of-sugarcane-isma-president-goel.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत के गन्ना क्षेत्र में परिवर्तन लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए, इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) और कृषि मंत्रालय के सहयोग से "भारत में सतत गन्ना उत्पादन को बढ़ावा देने" के विषय पर एक उच्चस्तरीय विचार सत्र का आयोजन किया। चर्चा का केंद्र बिंदु था गिरती गन्ना उत्पादकता, कीट प्रकोप में वृद्धि, जलवायु अस्थिरता और घटते खेती क्षेत्र, जो किसानों की आजीविका और उद्योग को संकट में डाल रहे हैं।</p>
<p>सत्र की शुरुआत में इस्मा प्रेसिडेंट गौतम गोयल ने मौजूदा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने छह सूत्रीय योजना प्रस्तुत की, जिसमें किस्मों का विविधीकरण, जीनोम इनोवेशन, विकेंद्रीकृत बीज प्रणाली, जलवायु-अनुकूल खेती, नीतिगत सुधार और राष्ट्रीय गन्ना मिशन की स्थापना शामिल हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, "इस मौसम की चुनौतियां संकेत देती हैं कि अब गन्ना उत्पादन के हमारे दृष्टिकोण को फिर से परिभाषित करने की आवश्यकता है। हमें जलवायु और रोग प्रतिरोधी किस्मों में निवेश करना होगा और स्थानीय स्तर पर बीज प्रणालियों को मजबूत बनाना होगा। यदि हम समन्वित प्रयास करें, तो किसानों को बेहतर लाभ दिलाने के साथ एक मजबूत और टिकाऊ गन्ना क्षेत्र विकसित कर सकते हैं।"</p>
<p>खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के संयुक्त सचिव अश्वनी श्रीवास्तव ने ग्रामीण भारत में गन्ना क्षेत्र की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह 5.5 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है और हर वर्ष एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करता है। उन्होंने ISMA और ICAR-शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट के बीच सहयोग की सराहना की और इसे अनुसंधान और व्यावहारिक कार्यान्वयन के एक आदर्श उदाहरण के रूप में बताया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "गन्ना क्षेत्र पर विभिन्न दबाव हैं, लेकिन उपयुक्त साझेदारी और नीतियों के जरिए हम इन चुनौतियों से पार पा सकते हैं। क्षेत्र के अनुकूल और जलवायु-प्रतिरोधी किस्में और मजबूत बीज प्रणाली, उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने की कुंजी हैं।"</p>
<p>इस्मा की कृषि उप-समिति के चेयरपर्सन रोशन लाल टमक ने सत्र का संचालन किया। सत्र में बेहतर मशीनीकरण, डिजिटल उपकरण, नीति सुधार और किसान को प्रशिक्षण जैसे व्यावहारिक उपायों पर चर्चा की गई। सत्र का समापन करते हुए इस्मा उपाध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा, "अब विचारों को ठोस परिणामों में बदलने का समय है। राष्ट्रीय गन्ना मिशन एक आशाजनक शुरुआत है, लेकिन समयबद्ध कार्रवाई और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है।"&nbsp;</p>
<p>इस्मा के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने इनोवेशन की निरंतरता और नियमित रूप से ज्ञान साझा किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि खेती में तकनीक को तेजी से अपनाया जा सके। उन्होंने कहा, "प्रिसीजन सिंचाई से लेकर रोग पूर्वानुमान तक, इन तकनीकों को हर किसान तक पहुंचाना आवश्यक है। ISMA संवाद और सामूहिक कार्रवाई के लिए ऐसे मंच प्रदान करता रहेगा।"&nbsp;</p>
<p>इस सत्र में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियां और नीति विशेषज्ञ एकत्र हुए। सत्र का समापन इस आम सहमति के साथ हुआ कि गन्ना क्षेत्र को अब लक्ष्य-आधारित मिशन दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_684d5fb92aa25.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जलवायु और रोग प्रतिरोधी गन्ने की किस्मों में निवेश की जरूरत: इस्मा प्रेसिडेंट गौतम गोयल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_684d5fb92aa25.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नीति आयोग का अमेरिकी  कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाने और जीएम सोयाबीन, मक्का के लिए बाजार खोलने का सुझाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/niti-aayog-suggests-reducing-tariffs-on-us-products-and-opening-markets-for-gm-soybean-corn.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 12 Jun 2025 15:10:26 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/niti-aayog-suggests-reducing-tariffs-on-us-products-and-opening-markets-for-gm-soybean-corn.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="301" data-end="645">भारत सरकार के थिंक टैंक <strong>नीति आयोग</strong> ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार बढ़ाने के उद्देश्य से चुनिंदा अमेरिकी कृषि उत्पादों पर ऊंचे टैरिफ (आयात शुल्क) घटाने और जीएम सोयाबीन व जीएम मक्का जैसे उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने की सिफारिश की है। खासतौर पर खाद्य तेल और सूखे मेवों बादाम, अखरोट और पिस्ता जैसे उन उत्पादों के आयात पर रियायत देने का सुझाव दिया गया है, जिनकी घरेलू खपत का अधिकांश आयात होता है। इसके साथ ही चावल और काली मिर्च जैसे उत्पादों पर भी रियायत की सिफारिश है जिनके मामले में भारत बहुत बेहतर स्थिति में है।</p>
<p data-start="647" data-end="784">आयोग के वर्किंग पेपर में कहा गया है कि कृषि उत्पादों के ट्रेड से जुड़े आंकड़ों और दूसरी सूचनाओं के मामले में हमारी स्थिति बहुत संतोषजनक नहीं है। वैश्विक बाजार में मांग-आपूर्ति और कीमतों में उतार-चढ़ाव पर नजर रखने के लिए <strong>&lsquo;एग्री ट्रेड इंटेलिजेंस सेल</strong>&rsquo; के गठन का सुझाव दिया गया है।&nbsp;</p>
<p data-start="647" data-end="784">यह वर्किंग पेपर नीति आयोग के सदस्य <strong>रमेश चंद</strong> और वरिष्ठ सलाहकार <strong>राका सक्सेना</strong> द्वारा लिखा गया है। संयोग से यह पेपर ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच <strong>द्विपक्षीय व्यापार समझौते (एफटीए)</strong> को लेकर बातचीत चल रही है और 4 से 10 जून के बीच अमेरिकी वार्ताकारों की टीम नई दिल्ली में मौजूद थी।</p>
<p data-start="786" data-end="1164">नीति आयोग की ओर से हाल ही में जारी इस <strong><a href="https://www.niti.gov.in/sites/default/files/2025-05/Promoting-India-US-Agricultural-Trade-under-the-new-US-Trade-Regime.pdf">वर्किंग पेपर</a></strong> में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा &lsquo;रिसिप्रोकल टैरिफ&rsquo; की घोषणा के बाद बनी परिस्थितियों के मद्देनजर भारत-अमेरिका व्यापार बढ़ाने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। आयोग ने विशेष रूप से भारतीय कृषि क्षेत्र, खासकर डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र, के हितों की रक्षा तथा ढांचागत व बाजार सुधारों के जरिए कृषि निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाने पर बल दिया है।</p>
<h3 data-start="1426" data-end="1461">जीएम सोयाबीन के आयात का सुझाव</h3>
<p>वर्किंग पेपर के मुताबिक, भारत खाद्य तेल का दुनिया में सबसे बड़ा आयातक है जबकि अमेरिका के पास सोयाबीन का बड़ा उत्पादन है जो अनुवांशिक रूप से संवर्धित (जीएम) है। भारत, घरेलू उत्पादन को नुकसान पहुंचाए बिना, सोयाबीन तेल के आयात में अमेरिका को कुछ रियायत देकर व्यापार असंतुलन से जुड़ी उसकी चिंताओं को संबोधित कर सकता है।</p>
<p>नीति आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि सोयाबीन का आयात कर तटीय क्षेत्रों में तेल निकालने के विकल्प पर भी विचार करना चाहिए। इस तेल को घरेलू बाजार में बेचा जाए और सोयामील (बाय-प्रोडक्ट) का निर्यात कर भारतीय बाजार में जीएम फीड से बचा जा सकता है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>इसी तरह, इथेनॉल के लिए अमेरिका में उत्पादित <strong>जीएम मक्का</strong> के आयात की सिफारिश की गई है। मक्का के बाय-प्रोडक्ट (डीडीजीएस) को पूरी तरह निर्यात कर देश में जीएम फीड का लाने से बचा जा सकेगा। चूंकि अमेरिकी मक्का सस्ता है, इसका उपयोग स्थानीय फूड और फीड मार्केट को बाधित किए बिना, भारत के जैव ईंधन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है।&nbsp;</p>
<h3 data-start="2338" data-end="2367">टैरिफ घटाने का सुझाव</h3>
<p data-start="2368" data-end="2799">नीति आयोग के वर्किंग पेपर के अनुसार, भारत उन कृषि उत्पादों पर कम टैरिफ लगाने पर विचार कर सकता है, जिनका घरेलू उत्पादन कम है या जो गुणवत्ता और मौसम के कारण स्थानीय उत्पादों से प्रतिस्पर्धा नहीं करते। उदाहरण के लिए, अमेरिकी सेब अपनी अलग गुणवत्ता, लंबी शेल्फ लाइफ और ऑफ-सीजन उपलब्धता के कारण भारतीय बाजारों में प्रीमियम कीमत पर बिकते हैं। नीति आयोग का मानना है कि ऐसे उत्पादों पर टैरिफ को मामूली रूप से समायोजित करने से घरेलू किसानों को नुकसान नहीं होगा।</p>
<p data-start="2801" data-end="2914">इसी तरह, भारत बादाम, अखरोट और पिस्ता की अधिकांश मांग आयात से पूरी करता है, इसलिए इन पर भी कुछ रियायतें दी जा सकती हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<h3 data-start="2916" data-end="2952">संवेदनशील क्षेत्रों का बचाव</h3>
<p data-start="2953" data-end="3207">नीति आयोग ने डेयरी और पोल्ट्री जैसे संवेदनशील उत्पादों को द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में संरक्षित करने की सिफारिश की है। अमेरिका में पोल्ट्री को अक्सर बीमारियों (जैसे एवियन फ्लू) खतरा रहता है। आयोग ने भारत के गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पादों के अमेरिकी बाजार में निर्यात की संभावनाओं को भी रेखांकित किया है।&nbsp;&nbsp;</p>
<h3 data-start="3209" data-end="3250">भारतीय निर्यातों के लिए बाजार पहुंच</h3>
<p data-start="3251" data-end="3595">वर्किंग पेपर में सुझाव दिया गया है कि भारत को अच्छा प्रदर्शन वाले कृषि निर्यातों जैसे झींगा, मछली, मसाले, चावल, चाय, कॉफी और रबर के लिए अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच के लिए प्रयास करना चाहिए। भारत सालाना लगभग 5.75 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद अमेरिका को निर्यात करता है। टैरिफ रियायत या &lsquo;टैरिफ रेट कोटा&rsquo; (TRQ) के माध्यम से इसे और बढ़ाया जा सकता है।&nbsp;</p>
<h3 data-start="3597" data-end="3637">मार्केटिंग सुधार और निर्यात सुविधा</h3>
<p data-start="3638" data-end="3931">भारतीय कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग ने मार्केटिंग सुधारों और निर्यात सुविधाओं के विकास पर जोर दिया है। इसमें फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे, कोल्ड चेन, वेयरहाउसिंग और ग्रामीण लॉजिस्टिक्स में निवेश की आवश्यकता बताई गई है, जिससे बर्बादी कम हो और किसान निर्यात बाजारों का लाभ उठा सकें। साथ ही कहा है कि भारत में कई कृषि उत्पादों की उत्पादकता बहुत कम है उनको बढ़ाने की बहुत गुंजाइश है।&nbsp;</p>
<p data-start="3638" data-end="3931">नीति आयोग ने भारत के कृषि निर्यात को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए <strong>मध्यम अवधि के ढांचागत सुधारों</strong> को आवश्यक बताया है। इसमें उपयुक्त तकनीक को अपनाकर उत्पादकता बढ़ाना, बाजार सुधार, निजी क्षेत्र की भागीदारी, लॉजिस्टिक्स में सुधार और प्रतिस्पर्धी मूल्य श्रृंखला का विकास शामिल है।</p>
<h3 data-start="3933" data-end="3967">प्राइस हेजिंग स्कीम&nbsp;</h3>
<p data-start="3968" data-end="4208">वर्किंग पेपर में किसानों को वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए प्राइस हेजिंग स्कीम शुरू करने की सिफारिश की गई है। अंतरराष्ट्रीय मांग-आपूर्ति में असंतुलन या टैरिफ में अचानक बदलाव के कारण किसानों पर अक्सर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।</p>
<p data-start="4250" data-end="4537"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66977939ad220.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नीति आयोग का अमेरिकी  कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाने और जीएम सोयाबीन, मक्का के लिए बाजार खोलने का सुझाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं खरीद 300 लाख टन तक पहुंची, चार साल में सर्वाधिक खरीद, फिर भी स्टॉक लिमिट लागू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wheat-procurement-reaches-300-lakh-tonnes-highest-procurement-in-four-years-yet-stock-limit-is-applicable.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 09 Jun 2025 19:21:36 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wheat-procurement-reaches-300-lakh-tonnes-highest-procurement-in-four-years-yet-stock-limit-is-applicable.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span class="im">रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 के दौरान देश में गेहूं की सरकारी खरीद 300 लाख टन तक पहुंच गई है जो पिछले चार वर्षों की सर्वाधिक खरीद है। लेकिन देश में रिकॉर्ड 11.75 करोड़ गेहूं उत्पादन के अनुमानों और 13 फीसदी अधिक सरकारी खरीद के बावजूद गेहूं पर स्टॉक लिमिट और निर्यात पर रोक जैसी पाबंदियां लागू हैं। महंगाई रोकने के इन उपायों के कारण </span><span class="im"> किसानों को गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।&nbsp;</span></p>
<p>हालांकि, अधिकांश राज्यों में गेहूं का भाव 2425 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य के आसपास चल रहा है। लेकिन पाबंदियां न होती तो किसानों को और बेहतर दाम मिल सकता था। खुदरा बाजार में गेहूं का दाम 28-30 रुपये किलो है।&nbsp;</p>
<p><span class="im">इस साल गेहूं की सबसे ज्यादा 119.3 लाख टन खरीद <strong>पंजाब</strong> से हुई है जो कुल खरीद का करीब 40 फीसदी है। इस तरह देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में पंजाब अपनी अहम भूमिका बनाए हुए है।&nbsp;</span><span class="im">गेहूं खरीद पर एमएसपी के अलावा 175 रुपये का बोनस देने वाले <strong>मध्य प्रदेश</strong> में करीब 78 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है जबकि <strong>हरियाणा</strong> में 72 लाख टन से अधिक गेहूं खरीदा गया है।&nbsp;<br /><br /></span><span><strong>राजस्थान</strong> में गेहूं खरीद का 20 लाख टन से ऊपर पहुंचना राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि है। राजस्थान सरकार ने गेहूं पर एमएसपी के अलावा 150 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया था, जिससे किसानों का रुझान सरकारी खरीद की तरफ बढ़ाने में मदद मिली।</span><span class="im"><br /><br />लेकिन देश के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्य <strong>उत्तर प्रदेश</strong> में एक बार फिर खरीद अपेक्षा से कम रही। यूपी में अब तक 10.26 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है, जो 30 लाख टन के लक्ष्य से काफी कम है।</span></p>
<p><span class="im">वर्ष 2021-22 में गेहूं की रिकॉर्ड<strong> 433 लाख टन</strong> खरीद हुई थी, लेकिन उत्पादन में गिरावट के चलते 2022-23 में यह घटकर 187 लाख टन रह गई। पिछले तीन वर्षों में बंपर उत्पादन के साथ सरकारी खरीद भी लगातार बढ़ रही है।&nbsp;<br /><br />अधिक खरीद के चलते केंद्रीय पूल में <strong>गेहूं का स्टॉक</strong> बफर स्टॉक सीमा से काफी अधिक है। वर्तमान में भारतीय खाद्य निगम के पास लगभग 360 लाख टन गेहूं का स्टॉक है जो कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की 184 लाख टन वार्षिक आवश्यकता से कहीं अधिक है। </span><span>इसके बावजूद केंद्र सरकार को गेहूं खरीद सीजन के दौरान ही स्टॉक लिमिट लगानी पड़ी। </span></p>
<p><span>मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में सरकार ने गेहूं की खरीद को 30 जून तक बढ़ा दिया था। जिस तरह मई के अंतिम दिनों में ही स्टॉक लिमिट लागू कर दी गई, उसे देखते हुए सरकार का गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध हटाने का फिलहाल कोई इरादा नहीं दिखता है। ये नीतिगत फैसले देश में बंपर गेहूं उत्पादन के दावों पर भी <strong>सवाल</strong> खड़े करते हैं।</span><br /><br /><span>गेहूं की खरीद करने वाली एक निजी कंपनी के अधिकारी ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि सरकार द्वारा <strong>स्टॉक लिमिट</strong> लागू करने के चलते थोक व खुदरा व्यापारियों को गेहूं का स्टॉक निर्धारित स्टॉक लिमिट के भीतर लाना पड़ेगा। कई सहकारी संस्थाओं ने भी प्राइवेट ट्रेडर्स के जरिए गेहूं खरीदा है, उन्हें भी तय सीमा के भीतर भंडारण घटाना होगा। इसका </span><span>सर कीमतों में नरमी के रूप में सामने आ सकता है। यह उन किसानों के लिए नुकसानदेह होगा जिन्होंने बेहतर कीमत की उम्मीद में गेहूं का स्टॉक रखा हुआ है।</span></p>
<p><span>मध्य प्रदेश और राजस्थान में बोनस दिए जाने के कारण इन राज्यों सहित अन्य राज्यों में भी किसानों को गेहूं का दाम 2425 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी से अधिक दाम मिला है। वहीं उत्तर प्रदेश और पंजाब में निजी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर खरीद की। </span><span> ऐसे में रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद स्टॉक लिमिट लागू करने का फैसला किसानों के लिए प्रतिकूल साबित होगा।</span><span></span><span>&nbsp;</span></p>
<p><span></span></p>
<p><span></span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_6846e59faae77.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं खरीद 300 लाख टन तक पहुंची, चार साल में सर्वाधिक खरीद, फिर भी स्टॉक लिमिट लागू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डीएपी की कीमतें 750 डॉलर पर पहुंचीं, चीन से निर्यात बंद होने का असर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/dap-prices-reach-750-dollars-as-china-restricts-export-subsidy-burden-likely-to-rise.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 07 Jun 2025 17:33:20 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/dap-prices-reach-750-dollars-as-china-restricts-export-subsidy-burden-likely-to-rise.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वैश्विक बाजार में डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की कीमतें 750 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई हैं। डीएपी की कीमतों में बढ़ोतरी का यह रुख जारी रहने की संभावना है। इसका सीधा असर उर्वरक सब्सिडी में बढ़ोतरी के रूप में पड़ने वाला है। उर्वरक उद्योग के सूत्रों के मुताबिक वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमतों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह चीन से निर्यात का बंद होना है। भारत बड़ी मात्रा में चीन से डीएपी का आयात करता रहा है।</p>
<p>करीब माह भर पहले डीएपी की कीमतें 720 डॉलर प्रति टन से आसपास थीं। एक बड़ी उर्वरक कंपनी के पदाधिकारी ने रूरल वॉयस को बताया कि कीमतों में तेजी का रुख रहेगा और इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि कीमतें 2022 की तरह 900 डॉलर प्रति टन तक पहुंच जाए।</p>
<p>कीमतों में वृद्धि की मुख्य वजह चीन का डीएपी निर्यात बंद करना है। भारत चीन से यूरिया का भी आयात करता रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस बार यूरिया आयात के टेंडर में चीन को शामिल नहीं किया गया है। इसके चलते चीन ने भारत को डीएपी का निर्यात बंद कर दिया है।</p>
<p>देश में सालाना करीब 100 लाख टन डीएपी की खपत होती है। डीएपी के मामले में भारत लगभग पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। हालांकि करीब 45 लाख टन डीएपी का देश में उत्पादन होता है, लेकिन इसके लिए रॉक फॉस्फेट और फॉस्फोरिक एसिड का आयात किया जाता है। बाकी मात्रा का तैयार उर्वरक के रूप में आयात किया जाता है।&nbsp;</p>
<p>भारत ने डीएपी के लिए मोरक्को और सऊदी अरब की उर्वरक कंपनियों के साथ दीर्घकालिक आयात समझौते किए हैं। लेकिन यह डीएपी की उपलब्धता के लिए हैं और कीमत के लिए समझौते नहीं हैं। कीमत के मामले में बाजार में प्रचलित कीमत पर ही डीएपी की बिक्री यह कपंनियां भारतीय कंपनियों को करेंगी। कीमतों में बढ़ोतरी एक वजह भारत का बड़ा आयात भी है।</p>
<p>सरकार डीएपी पर न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत सब्सिडी देती है। जिसमें नाइट्रोजन (एन), फॉस्फोरस (पी), पोटाश (के) और सल्फर (एस) के लिए प्रति किलो सब्सिडी दर होती है। एनबीएस के तहत विनियंत्रित कॉम्प्लेक्स उर्वरकों पर सब्सिडी मिलती है। हालांकि इन उर्वरकों की कीमतें तय करने के लिए उर्वरक कंपनियां स्वतंत्र हैं, लेकिन परोक्ष रूप से सरकार ने डीएपी का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) 1350 रुपये प्रति बैग (50 किलो) तय कर रखा है। कंपनियों को आयात लागत और इस कीमत के बीच के अंतर की भरपाई सब्सिडी के जरिये की जाती है।&nbsp;</p>
<p>सरकार ने चालू खरीफ सीजन (अप्रैल, 2025 से सितंबर, 2025) के लिए डीएपी पर सब्सिडी को बढ़ाकर 27,799 रुपये प्रति टन कर दिया है। इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी के बाद 28 मार्च, 2025 को नोटिफिकेशन जारी किया गया था। &nbsp;कंपनियों को सब्सिडी और एमआरपी से होने वाली आय के आधार पर एक टन डीएपी पर 54,799 रुपये की कमाई होती है। लेकिन मौजूदा वैश्विक कीमतों पर डीएपी का आयात कपंनियों के लिए घाटे का सौदा है।&nbsp;</p>
<p>750 &nbsp;डॉलर प्रति टन की कीमत पर आयातित डीएपी की लागत करीब 68000 रुपये प्रति टन बैठती है। इसमें आयात के साथ ही पोर्ट हैंडलिंग, सीमा शुल्क और बैगिंग और दूसरी लागतें शामिल हैं। हालांकि उद्योग सूत्रों मुताबिक सरकार ने कैबिनेट में सहमति दी है कि वह एमआरपी और आयात कीमत के अंतर की भरपाई करेगी। इस स्थिति में उर्वरक कंपनियों को नुकसान तो नहीं होगा लेकिन सरकार की उर्वरक सब्सिडी बढ़ जाएगी।</p>
<p>इसके पहले रबी सीजन में सरकार ने एनबीएस तहत तय सब्सिडी के अलावा 3500 रुपये प्रति टन का स्पेशल इंसेटिव का प्रावधान किया था। हालांकि उद्योग सूत्रों का कहना है कि पिछले साल महंगा आयात किया गया था और अभी भी कंपनियों का पैसा सरकार पर बकाया है। हालांकि उपलब्धता के मामले में उद्योग का कहना है कि यह सामान्य बनी रहेगी। यह बात अलग है कि देश के कई हिस्सों में डीएपी के ब्लैक में बिकने की खबरें आती रही हैं। उद्योग सूत्रों का कहना कि कॉम्प्लेक्स उर्वरकों में अभी डीएपी सबसे सस्ता है और बाकी उर्वरक महंगे हैं लेकिन डीएपी काफी प्रभावी उर्वरक है और उसका फायदा ट्रेडर उठाते हैं। इस तरह के मामले सरकार के संज्ञान में आने की बात भी उद्योग सूत्र करते हैं। &nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_682347b815da6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ डीएपी की कीमतें 750 डॉलर पर पहुंचीं, चीन से निर्यात बंद होने का असर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शैलेश मेहता फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन चुने गए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sailesh-c.-mehta-elected-chairman-of-fertiliser-association-of-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 07 Jun 2025 16:56:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sailesh-c.-mehta-elected-chairman-of-fertiliser-association-of-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश की सार्वजनिक, निजी और संयुक्त क्षेत्र की उर्वरक कंपनियों के शीर्ष संगठन फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Fertiliser Association of India) ने शैलेश मेहता (Sailesh Mehta) को नया चेयरमैन चुना है। मेहता अभी दीपक फर्टिलाइजर्स एंड पेट्रोकेमिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड तथा महाधन एग्रीटेक लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।</p>
<p>मेहता के पास उर्वरक उद्योग में 40 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे इससे पूर्व FAI के पश्चिमी क्षेत्र के चेयरमैन के रूप में पांच वर्षों से अधिक सेवाएं दे चुके हैं। उनके नेतृत्व में दीपक फर्टिलाइजर्स भारत के एग्री-इनपुट क्षेत्र में एक प्रमुख कंपनी बनकर उभरी है, जो नवाचार और किसान-केंद्रित समाधान पर विशेष जोर देती है।</p>
<p>इस अवसर पर मेहता ने कहा, "भारत का खाद्य संकट से वैश्विक कृषि निर्यातक बनने का सफर असाधारण रहा है, और इस सफलता में उर्वरक उद्योग एक मजबूत आधार बना है।" उन्होंने यह भी कहा कि अब आवश्यकता है कि हम संतुलित और पोषक तत्व-सक्षम उर्वरकों की ओर बढ़ें जो टिकाऊ कृषि विकास को बढ़ावा दें।</p>
<p>FAI के अनुसार पिछले दो दशकों में उर्वरक उद्योग ने कृषि उत्पादन में 60% और बागवानी उत्पादन में 40% वृद्धि में योगदान दिया है। वैश्विक मानकों पर आधारित परिचालन दक्षता के साथ यह क्षेत्र भारत के करोड़ों किसानों तक सब्सिडी वाले उर्वरकों की समयबद्ध और प्रभावी आपूर्ति सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रहा है।</p>
<p>मेहता ने कहा, "मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता हूं कि मुझे सरकार, उद्योग और हमारे किसानों के बीच एक सेतु की भूमिका निभाने का अवसर मिला है, ताकि हम मिलकर भारतीय कृषि उत्पादकता को ऊंचा उठा सकें।"</p>
<p>उनकी यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब उर्वरक उद्योग सतत विकास, नवाचार और डिजिटल पहुंच पर केंद्रित होकर भारत के बदलते कृषि परिदृश्य का सक्रिय समर्थन कर रहा है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_684421b41573f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ शैलेश मेहता फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन चुने गए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_684421b41573f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी ने हरवीर सिंह और प्रभुदत्त मिश्रा को सम्मानित किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/national-academy-of-agricultural-sciences-felicitates-harvir-singh-and-prabhudatta-mishra-for-excellence-in-agricultural-journalism.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Jun 2025 14:12:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/national-academy-of-agricultural-sciences-felicitates-harvir-singh-and-prabhudatta-mishra-for-excellence-in-agricultural-journalism.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में कृषि वैज्ञानिकों की प्रमुख संस्था, <strong>राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी</strong> (NAAS) <span>ने अपने स्थापना दिवस के अवसर पर गुरुवार को पद्म पुरस्कार विजेताओं</span>, NAAS <span>फेलो</span>, <span>किसानों</span>, <span>कृषि-उद्यमियों और मीडिया हस्तियों को उनके संबंधित क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया। </span></p>
<p>नई दिल्ली में आयोजित समारोह में कृषि पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान और उपलब्धियों के लिए <em>रूरल वॉयस</em> के एडिटर-इन-चीफ <strong>हरवीर सिंह </strong>और <em>द हिंदू बिजनेस लाइन</em> के डिप्टी एडिटर <strong>प्रभुदत्त मिश्रा</strong> को सम्मानित किया गया।&nbsp;</p>
<p>आउटलुक (हिंदी) <span>के पूर्व संपादक <strong>हरवीर सिंह</strong> अमर उजाला</span>, <span>दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान जैसे मीडिया समूहों में शीर्ष संपादकीय पदों पर रह चुके हैं। उन्हें कृषि</span>, ग्रामीण विकास और आर्थिक मुद्दों की गहरी समझ रखने वाले पत्रकार के रूप में जाना जाता है। कृषि पत्रकारिता में उनके विशेष योगदान के लिए 2001 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO)<span> ने <strong><em>वर्ल्ड फूड डे अवार्ड</em></strong> तथा 2002 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (</span>ICAR) ने <strong><em>चौधरी चरण सिंह पुरस्कार</em></strong> से सम्मानित किया था। हरवीर सिंह गांव-किसान से जुड़े नीतिगत मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।</p>
<p></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_6842b5268bbad.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong></strong></p>
<p><strong>प्रभुदत्त मिश्रा</strong> समाचार एजेंसी पीटीआई समेत देश के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों में कृषि से जुड़े विषयों को कवर करते रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब तीन दशक का अनुभव रखने वाले प्रभुदत्त मिश्रा कृषि व्यापार, <span>खाद्य सुरक्षा और नीतिगत मुद्दों पर सटीक रिर्पोटिंग और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। वे उन चुनिंदा पत्रकारों में शुमार हैं जिन्होंने कृषि से जुड़े मुद्दों को अंग्रेजी मीडिया में जगह दिलाने में अहम भूमिका निभाई।&nbsp; </span></p>
<p>एनएएएस के सचिव <strong>डॉ. डब्ल्यू.एस. लाकरा</strong> ने कहा कि यह राष्ट्रीय मीडिया में कृषि क्षेत्र को कवर करने के लिए लंबे समय से किए जा रहे हरवीर सिंह और प्रभुदत्त मिश्रा के प्रयासों का सम्मान है। वर्ष 1990<span> में स्थापित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (</span>NAAS) <span>ने इस साल अपनी स्थापना के </span>35<span> वर्ष पूरे कर लिए हैं। गत 4-</span>5<span> जून को दिल्ली में अकादमी की </span>32<span>वीं वार्षिक आम सभा और स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया।&nbsp;</span></p>
<p>इस अवसर पर एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (MSSRF) की चेयरपर्सन <strong>डॉ. सौम्या स्वामीनाथन</strong> ने <em>&ldquo;वन हेल्थ: गाइडिंग अवर फ्यूचर&rdquo;</em> विषय पर फाउंडेशन डे लेक्चर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष <strong>डॉ. हिमांशु पाठक</strong> ने की। इस मौक पर&nbsp;डॉ. पी.के. जोशी (उपाध्यक्ष, एनएएएस),&nbsp;डॉ. अशोक के. सिंह (सचिव, एनएएएस) समेत&nbsp;देश के कई जाने-माने कृषि वैज्ञानिक उपस्थित थे। NAAS की ओर से वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों को भी सम्मानित किया। साथ ही युवा कृषि वैज्ञानिक पुरस्कार भी प्रदान किए गये।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_6842a92e2afc1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी ने हरवीर सिंह और प्रभुदत्त मिश्रा को सम्मानित किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में किसानों से मिले शिवराज सिंह चौहान, कृषि यंत्र कारखाने का दौरा किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-singh-chauhan-met-farmers-of-punjab-visited-the-agricultural-machinery-factory.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Jun 2025 23:57:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-singh-chauhan-met-farmers-of-punjab-visited-the-agricultural-machinery-factory.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>&lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo; अपने आधे पड़ाव पर पहुँच चुका है। अभियान के आठवें दिन केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब<span> के पटियाला में किसानों के साथ बैठकर चर्चा की।</span>&nbsp;उन्होंने <span>खेतों में जाकर फसल और उत्पादन का जायजा लिया। साथ ही पटियाला के </span>अमरगढ़ में कृषि यंत्र कारखाने का दौरा भी किया।&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि <span>लैब से लैंड और किसान को विज्ञान से जोड़ने के लिए विकसित कृषि संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। </span><span>इस अभियान के जरिए खेत की जरूरत के अनुसार शोध की दिशा तय की जाएगी। खेती की हर समस्या का समाधान किसान भाइयों-बहनों से बातचीत के बाद किया जाएगा। </span></p>
<p><span>इस अवसर पर पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक एवं सचिव (डेयर) डॉ. एम. एल. जाट, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. सतबीर सिंह गोसाल, पंजाब कृषि विभाग के सचिव डॉ. बसंत गर्ग सहित वैज्ञानिक और अधिकारी कार्यक्रम में शामिल हुए।</span></p>
<p><strong>खेत में ट्रैक्टर चलाया&nbsp;</strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने पंजाब में ट्रैक्टर चलाया और <span>धान की डायरेक्ट सीडिंग को समझा। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री ट्रैक्टर नहीं चलाए तो किसान के दर्द को थोड़ी समझ सकता है। किसानों को क्या जरूरत है, कौन सी योजनाएं उपयोगी हैं, इन सब को समझना जरूरी है। अब कृषि की नीति किसानों की वास्तविक जरूरतों और अनुभवों को ध्यान में रखकर बनेंगी।&nbsp; &nbsp; &nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_6841e7eab0979.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>हरित क्रांति में पंजाब के योगदान को सराहा</strong></p>
<p><span>शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैं पंजाब की धरती को बारंबार नमन करता हूं। देश के अन्न भंडार भरने में पंजाब के किसानों का बहुत योगदान है। एक समय था जब हम अमेरिका का निम्न गुणवत्ता वाला गेहूं खाने को मजबूर थे। लेकिन आज स्थिति में ऐसा सुधार आया है कि हम अच्छे गुणवत्ता वाले गेहूं-चावल का उत्पादन भी कर रहे हैं और विदेशों में भी इसका निर्यात कर रहे हैं। भारत के बासमती चावल की विदेशों में अत्यधिक मांग है। लेकिन हमें और आगे बढ़ना है, इसलिए हमारा लक्ष्य है समृद्ध किसान और विकसित खेती।</span><span></span></p>
<p><strong>धान की सीधी बुवाई के फायदे समझाए&nbsp;</strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि <span>धान की रोपाई की पारंपरिक पद्धति में पानी के साथ-साथ श्रम और लागत भी बहुत ज्यादा लगती थी</span>, लेकिन अब आधुनिक तकनीक से सीधे बीज की बुवाई (डायरेक्ट सीडिंग) संभव हो गई है। गेहूँ की तरह अब धान की बुवाई भी मशीनों द्वारा की जा सकती है। <span>पंजाब के किसानों ने उन्हें बताया कि नई पद्धति से उत्पादन के स्तर में भी कोई बदलाव नहीं आता है और इससे श्रम और लागत में काफी बचत होती है।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_6841e832211d9.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>कृषि यंत्रों के निर्यात पर ज़ोर</strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने <span>कहा कि हमें दुनिया को कृषि यंत्र निर्यात करने की दिशा में भी काम करना चाहिए। इसके लिए राज्य सरकारों को भी मिलकर काम करना होगा। हमें विदेशों की आवश्यकता के अनुसार निर्यात के लिए कृषि यंत्र बनाने चाहिए। साथ ही अपने देश के छोटी जोत वाले किसानों के लिए भी कृषि यंत्र बनाने पर जोर देना होगा।&nbsp;</span><span>हम ऐसी मशीनें भी बनाएं जो छोटे खेतों में भी काम आएं। फिर उनकी लागत भी ऐसी रखनी पड़ेगी कि छोटे किसान उसे वहन कर सकें। </span>&nbsp;</p>
<p><strong>पंजाब में बागवानी की खूब संभावनाएं</strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि <span>पंजाब की धरती पर हर किस्म की खेती की जा सकती है। बागवानी के लिए भी व्यापक संभावनाएं हैं। निर्यात गुणवत्ता वाले फल और सब्जियों के उत्पादन के लिए भी प्रयास करने होंगे।&nbsp;</span></p>
<p>उन्होंने कहा <span>उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने जैसे दो काम हमें एक साथ लक्ष्यबद्ध होकर करने होंगे। </span> भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों को बदलती जलवायु के अनुसार अधिक तापमान सहनशीलता वाले बीज विकसित करने का निर्देश दिया है। साथ ही शोध आधारित जलवायु अनुकूल खेती की दिशा में आगे बढ़ना होगा।<span> साइंटिफिक तरीके से जलवायु अनुकूल खेती कैसे करें, इसमें ICAR की भूमिका महत्वपूर्ण है।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_6841e89a6e720.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>कृषि के लिए छह प्रमुख लक्ष्य</strong></p>
<p><span>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि </span><span>कृषि के लिए हमारे छह प्रमुख उद्देश्य हैं: उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, उचित मूल्य सुनिश्चित करना, फसल नुकसान की भरपाई, कृषि विविधिकरण, और धरती को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना।</span></p>
<p><strong>सिंधु जल समझौते पर क्या कहा?</strong></p>
<p><span>सिंधु जल समझौते का जिक्र करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यह अन्यायपूर्ण जल समझौता रद्द करने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कदम स्वागत योग्य है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के किसान इस समझौते से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। लेकिन अब भारत का पानी भारत के किसानों के काम आएगा।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_6841e76a3b909.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में किसानों से मिले शिवराज सिंह चौहान, कृषि यंत्र कारखाने का दौरा किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_6841e76a3b909.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान को दाम का न्यूनतम भरोसा मिलना ही चाहिए &amp;#45; शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmers-must-get-assurance-of-price-shivraj-singh-chouhan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 04 Jun 2025 19:59:46 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmers-must-get-assurance-of-price-shivraj-singh-chouhan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>29 मई से 12 जून तक चलने वाले "विकसित कृषि संकल्प अभियान" के तहत वैज्ञानिकों की दो हज़ार टीमें गाँव-गाँव जाकर किसानों से सीधा संवाद करेंगी। इस दौरान देश के 1.5 करोड़ से अधिक किसानों तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद 20 राज्यों में प्रवास करेंगे, ताकि किसानों से सीधा संवाद कर विकसित भारत के लिए विकसित कृषि की रूपरेखा तैयार की जा सके। 2 जून को बिहार के पूर्वी चंपारण ज़िले के पीपराकोठी कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में पहुँचे केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने रूरल वॉयस के एडिटर-इन-चीफ, <strong>हरवीर सिंह</strong> के साथ ख़ास बातचीत की। प्रस्तुत हैं मुख्य अंश:</p>
<p><strong><em>सवाल:</em></strong> <strong><em>देशभर में करोड़ों किसानों</em></strong><strong><em>, </em></strong><strong><em>सरकार और वैज्ञानिकों के बीच इतने व्यापक स्तर पर संवाद का यह अनूठा अभियान है। इस अभियान को शुरू करने के पीछे आपकी क्या सोच रही है</em></strong><strong><em>?</em></strong></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान: हमारे पास एक विरासत है। बुद्धिमान वैज्ञानिक हैं, टैलेंट है और वे रिसर्च भी कर रहे हैं। दूसरी तरफ़ मेहनती किसान हैं। लेकिन एक गैप मुझे लगा कि जो शोध प्रयोगशालाओं में हो रहा है वह खेत तक नहीं पहुँच रहा है। जब तक मंत्री, वैज्ञानिक और कृषि विभाग खेत में नहीं जाएँगे और किसान से नहीं मिलेंगे, कृषि भवन में बैठे-बैठे बस मीटिंग करते रहेंगे तो सही समस्याओं से वाकिफ नहीं हो सकते। उत्पादन बढ़ाना है, लागत घटानी है, ठीक दाम देना है, देश का पेट भी भरना है। खेती को किसानों के लिए फ़ायदे का धंधा भी बनाना है। मुझे यह लगा कि मैं तो निकलूं ही लेकिन पूरी टीम निकले।</p>
<p>यह केवल तकनीकी जानकारी देने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि किसानों से सीधे जुड़ने और उन्हें नई तकनीकों से सशक्त बनाने की पहल है। राज्य सरकारें इस मिशन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।</p>
<p><strong><em>सवाल:</em></strong> <strong><em>इस अभियान के तहत आप देश भर में जा रहे हैं। इसका क्या इंपैक्ट देख रहे हैं</em></strong><strong><em>?</em></strong></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान: वैज्ञानिक अगर किसान के खेत तक जाएँ तो सही जानकारी वो देंगे और इनपुट भी मिलेगा। जैसे मैं कल उत्तर प्रदेश के मेरठ गया। वहाँ एक गन्ना किसान ने बताया कि गन्ने की एक क़िस्म जिसका उन्हें बहुत फ़ायदा हुआ था, अब उसमें बहुत रोग लग गया है। यह क़िस्म सीओ 0238 है। इसमें रेड रोट की बीमारी है, इससे किसानों को बहुत नुक़सान हो रहा है। किसान बिना समझे अधिक पेस्टीसाइड डाल रहे हैं, उसका फ़ायदा नहीं हो रहा है। वैज्ञानिकों ने उन्हें बताया कि क्या पेस्टीसाइड इस्तेमाल करना है और कैसे करना है।&nbsp;</p>
<p><strong><em>सवाल:</em></strong> <strong><em>एक बात एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) को लेकर भी है कि एमएसपी बढ़ना चाहिए और एमएसपी मिलना चाहिए</em></strong><strong><em>, </em></strong><strong><em>इस बारे में क्या मानना है</em></strong><strong><em>?</em></strong></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान: दोनों चीजें हैं। एक न्यूनतम एश्योरेंस भी हमें किसान को देना पड़ेगा, लेकिन वही समाधान नहीं है। कृषि विविधीकरण, उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना और इंटर क्रॉपिंग पर ध्यान देने की ज़रूरत है। इंटर क्रॉपिंग करके आप कई चीजें उगा सकते हैं। जैसे हरियाणा के एक किसान ने बताया कि वह एक एकड़ में तीन लाख रुपया शुद्ध कमा रहा है। सात एकड़ में वो छह महीने में इक्कीस लाख कमा चुका, इसलिए कि वो एक फसल नहीं लगा रहा है, 17 फसलें लगा रहा है। इस तरह की चीजें करनी चाहिए।</p>
<p>मैं ऐसे प्रगतिशील किसानों की कहानियाँ भी सुना रहा हूँ। उनकी समस्याएँ भी समझ रहा हूँ, ताकि बाक़ी किसान प्रेरणा भी लें और जो दिक़्क़तें हैं उनको दूर भी करने के प्रयास किए जाएँ।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_6840565cb82f0.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong><em>सवाल:</em></strong> <strong><em>किसानों की जोत छोटी होती जा रही है। लेकिन हमें उत्पादन भी बढ़ाना है। इस चुनौती से कैसे निपटेंगे</em></strong><strong><em>?</em></strong></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान: हम सब मिलकर प्रयास करेंगे, तो समाधान निकलेंगे। अभी हमने मोदी जी के नेतृत्व में खाद्यान्न उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है। निश्चित तौर पर उत्पादन बढ़ेगा और आय भी बढ़ेगी। यहाँ बिहार में लीची किसानों की समस्या है। यह 48 घंटे में ख़राब हो जाती है। हमें लीची की शेल्फ़ लाइफ़ बढ़ाने की ज़रूरत है। इसके लिए मैंने वैज्ञानिकों को कहा कि शोध करें जिससे लीची की शेल्फ़ लाइफ़ बढ़ जाए। मैंने कहा कि एक टीम बना लो - एक देश, एक टीम - जिसमें आईसीएआर के वैज्ञानिक हों, राज्य कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक हों, केवीके, केंद्र और राज्य के कृषि विभाग और कृषि मंत्री शामिल हों।&nbsp;</p>
<p><strong><em>सवाल:</em></strong> <strong><em>हमने खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है। हमारा कृषि निर्यात भी बढ़ा है। पिछले साल भारत ने </em></strong><strong><em>12 </em></strong><strong><em>बिलियन डॉलर से अधिक का चावल निर्यात किया। लेकिन हम दालों और तिलहन का बड़ा आयात कर रहे हैं। इसमें कैसे संतुलन बनेगा</em></strong><strong><em>?</em></strong></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान: अभी हमने कोशिश की है। एक तरफ़ा मामला हो गया जैसे धान या जिन इलाक़ों में गन्ना करते हैं, वहाँ किसान गन्ना नहीं छोड़ना चाहते हैं। उनको लगता है कि गन्ना ही ठीक फसल है। इसी तरह बिहार में मक्का का क्षेत्रफल आप देखेंगे कैसे बढ़ रहा है, लेकिन हमें संतुलन स्थापित करना होगा। इसके लिए हम कोशिश कर रहे हैं। दलहन और तिलहन मिशन बनाया है। कोशिश है कि इनका उत्पादन बढ़े।</p>
<p><strong><em>सवाल:</em></strong> <strong><em>हमने अधिक उत्पादकता धान</em></strong><strong><em>, </em></strong><strong><em>गेहूँ</em></strong><strong><em>, </em></strong><strong><em>कपास और गन्ना में तो कर लीं</em></strong><strong><em>, </em></strong><strong><em>लेकिन यह काम हम दलहन-तिलहन में नहीं कर सके। आपको नहीं लगता है कि कई फसलों के मामले में</em></strong> <strong><em>टेक्नोलॉजी गैप</em></strong> <strong><em>है</em></strong><strong><em>?</em></strong></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान: मैंने आईसीएआर को निर्देश दिए हैं कि दलहन और तिलहन में प्रति हेक्टेयर उत्पादन कैसे बढ़े, उस पर काम करें। इसमें सोयाबीन भी शामिल है। लेकिन हमारी कुछ सीमाएँ हैं, जैसे जीएम सीड्स अभी इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, केवल कपास में कर रहे हैं। लेकिन हमने जीनोम एडिटिंग पद्धति से धान की दो क़िस्में तैयार की हैं। अब मैंने वैज्ञानिकों से कहा है कि दालों में इसका उपयोग करें, खाद्य तेलों में भी करें।</p>
<p>&nbsp;<strong>सवाल: बतौर कृषि मंत्री अपने एक साल के कार्यकाल को कैसे देखते हैं?</strong></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान: मैं पूरी तरह से कृषि पर फोकस कर रहा हूँ। खेती के अलावा मुझे और कुछ अच्छा नहीं लगता! बस खेती और ग्रामीण विकास। मुझे अगर कोई काम पार्टी कहती भी है कि इस चुनाव में चले जाओ, तो उसके मुक़ाबले मुझे लगता है कि मुझे इसी में मज़ा आ रहा है, क्योंकि मैं इसमें घुसकर काम करूँगा तो नतीजे आएँगे।</p>
<p><strong><em>सवाल:</em></strong> <strong><em>विकसित कृषि संकल्प अभियान पूरा होने के बाद क्या कोई</em></strong> <strong><em>ब्लूप्रिंट/कार्ययोजना</em></strong> <strong><em>देश के सामने रखेंगे</em></strong><strong><em>?</em></strong></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान: हर राज्य के लिए एक नोडल अफ़सर है। नोडल अफ़सर वैज्ञानिकों के साथ मिलकर रिपोर्ट बनाएँगे। हर प्रांत और वहाँ के हर एग्रो क्लाइमेट ज़ोन की अलग रिपोर्ट बनेगी। वह रिपोर्ट हमारे पास आएगी। उस रिपोर्ट पर हम विशेषज्ञों के साथ चर्चा करेंगे और चर्चा करके खेती की दिशा नए सिरे से तय करेंगे।</p>
<p>यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के &lsquo;आत्मनिर्भर भारत&rsquo; के विज़न के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों को किसानों तक पहुँचाकर उत्पादन और आय बढ़ाना है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_6840567508817.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong><em>सवाल:</em></strong> <strong><em>भारत का कृषि निर्यात</em></strong> <strong><em>50 </em></strong><strong><em>बिलियन डॉलर</em></strong> <strong><em>पर स्थिर हो गया है। पिछले वित्त वर्ष (</em></strong><strong><em>2024-25) </em></strong><strong><em>में</em></strong> <strong><em>51.9 </em></strong><strong><em>अरब डॉलर</em></strong> <strong><em>का कृषि निर्यात किया। अब</em></strong> <strong><em>100 </em></strong><strong><em>बिलियन डॉलर</em></strong> <strong><em>कृषि निर्यात का टारगेट है। इस लेकर क्या रणनीति है</em></strong><strong><em>?</em></strong></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान: कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए हम तीन तरह की चीजें कर रहे हैं। एक, नए शोध। किसान अगर पैदा करेगा तो वो उसका लाभ भी देखेगा। पैसा उसको किस चीज़ में ज़्यादा मिल रहा है और स्वाभाविक रूप से उसकी पहली प्राथमिकता वही रहेगी। वह उसी चीज़ की तरफ़ जाएगा जहाँ लाभ होगा। और लाभ होगा दो तरह से - शोध और रिसर्च और उसके बाद प्रोसेसिंग से। तो हमको वो तरीक़े भी अपनाने पड़ेंगे।</p>
<p>दूसरा, राज्य सरकार को भी देखना है। खेती राज्यों का विषय है। अकेला मैं दिल्ली से यह नहीं कर सकता। तो मैंने दूसरा काम यह किया है कि मैं राज्य सरकारों के साथ चर्चा करूँ। बिहार के साथ हम बैठे, महाराष्ट्र गया तो वहाँ की सरकार के साथ बैठे। हम राज्य सरकार के साथ कोऑर्डिनेशन कर वहाँ की जलवायु, वहाँ की परिस्थिति, वहाँ के मार्केट और वहाँ के किसानों की सोच, उसको ध्यान में रखते हुए योजनाएँ बनाने में सहयोग करेंगे।</p>
<p><strong><em>सवाल:</em></strong> <strong><em>कृषि में निवेश बढ़ाने की चुनौती रहती है। इसके लिए किस तरह के क़दम उठाएँगे</em></strong><strong><em>?</em></strong></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान: हम हर चीज़ ठीक से देखेंगे और जो भी आवश्यकता पड़ेगी उसकी कमी नहीं पड़ने देंगे। प्रधानमंत्री भी शोध और रिसर्च के पक्ष में हैं। संसाधनों की कोई भी कमी नहीं होने दी जाएगी। अभी हमारे 113 संस्थान काम कर रहे हैं। वहाँ फोकस करके कहाँ क्या करना है उसके हिसाब से करेंगे।</p>
<p><strong><em>सवाल:</em></strong> <strong><em>कृषि मंत्रालय ने नेशनल एग्रीकल्चरल मार्केटिंग फ़्रेमवर्क तैयार किया है</em></strong><strong><em>, </em></strong><strong><em>उस पर कैसे अमल होगा</em></strong><strong><em>?</em></strong></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान: मार्केटिंग फ़्रेमवर्क बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस अभियान के बाद उस पर काम शुरू होगा। राज्यों के साथ मिलकर फोकस करेंगे।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान को दाम का न्यूनतम भरोसा मिलना ही चाहिए - शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_684057ecc12f8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में कार्रवाई को लेकर इफको का बयान, कहा &amp;#45; फैलाई जा रही हैं भ्रामक अफवाहें]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/iffco-statement-after-raids-on-fertilizer-factories-in-rajasthan-said-misleading-rumours-are-being-spread.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 04 Jun 2025 14:53:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/iffco-statement-after-raids-on-fertilizer-factories-in-rajasthan-said-misleading-rumours-are-being-spread.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान के किशनगढ़ क्षेत्र में खाद फैक्ट्रियों पर हुई छापेमारी के बाद देश की प्रमुख सहकारी संस्था <strong>इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड</strong> (IFFCO) ने एक बयान जारी किया है।</p>
<p><strong>इफको</strong> की ओर से जारी बयान में कहा गया है, &ldquo;पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया, समाचार पत्रों एवं विभिन्न चैनलों के माध्यम से किशनगढ़, राजस्थान में हुई कार्यवाही के उपरांत किसानों की सहकारी संस्था इफको के उत्पादों को लेकर <strong>&lsquo;भ्रामक अफवाहें&rsquo;</strong> फैलाई जा रही हैं, जो बिलकुल गलत हैं।&rdquo;</p>
<p>इफको ने स्पष्ट किया है कि बताये गये स्थानों पर इफको का कोई भी उर्वरक प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए इफको की उत्पाद गुणवत्ता एवं अन्य मानकों पर फैलाई जा रही अफवाहों से बचें और इफको पर विश्वास बनाये रखें।&nbsp;</p>
<p><strong>विज्ञप्ति</strong> में कहा गया है कि उक्त कार्रवाई में कुछ स्थानों पर इफको के संयुक्त उपक्रम <strong>एक्वाग्री</strong> (Aquagri) द्वारा निर्मित &lsquo;सागरिका दानेदार बायोस्टीम्युलेंट&rsquo; पाया गया है।&nbsp; सागरिका दानेदार किसानों के बीच बहुत लोकप्रिय है और यह केंद्रीय शोध संस्थान <strong>CSIR-CSMCRI</strong> के द्वारा प्रदान तकनीक और भारत सरकार के नियमों के आधार पर बनाया जा रहा है, जिसमें किसी भी तरह की कोई अनियमितता नहीं है। इन स्थानों पर जो Dolomite, Gypsum, Seaweed powder, bentonite आदि पाये&nbsp; गये हैं, इनका प्रयोग <strong>&lsquo;सागरिका दानेदार&rsquo;</strong> को बनाने में किया जाता है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।</p>
<p>इफको ने किसानों से &lsquo;भ्रामक दुष्प्रचार&rsquo; से बचने और इफको के गुणवत्ता वाले उर्वरकों और बायोस्टीम्युलेंट&rsquo; का प्रयोग करने का आग्रह किया है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>गौरतलब है कि पिछले दिनों राजस्थान के कृषि मंत्री <strong>डॉ. किरोड़ी लाल मीणा</strong> ने अजमेर जिले के किशनगढ़ क्षेत्र में कई खाद फैक्ट्रियों में छापेमारी की थी। आरोप है कि कई फैक्ट्रियों में नकली खाद बनाया जा रहा था। राजस्थान में नकली खाद-बीज और कीटनाशकों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align: center;"><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_684010f06601f.jpg" alt="" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में कार्रवाई को लेकर इफको का बयान, कहा - फैलाई जा रही हैं भ्रामक अफवाहें ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विकसित कृषि संकल्प अभियान: बिहार के किसानों से मिले कृषि मंत्री, निर्यात संभावनाओं पर जोर दिया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/vikasit-krshi-sankalp-abhiyaan-agriculture-minister-met-the-farmers-of-bihar-emphasized-on-export-possibilities.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 02 Jun 2025 17:39:37 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/vikasit-krshi-sankalp-abhiyaan-agriculture-minister-met-the-farmers-of-bihar-emphasized-on-export-possibilities.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>पूर्वी चम्पारण, बिहार</strong></em> &mdash; &lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo; के तहत देशभर में किसानों से हो रहे संवाद कार्यक्रमों की श्रृंखला में केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को बिहार के पूर्वी चम्पारण के पीपराकोठी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र पहुंचे। यहां उन्होंने किसानों से संवाद किया और राज्य में कृषि विकास की अपार संभावनाओं को लेकर आश्वस्त किया।&nbsp;</p>
<p>अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने कहा, <em>"किसानों की सेवा करना मेरे लिए भगवान की पूजा करने जैसा है। कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा। 'विकसित भारत' का सपना, 'विकसित कृषि' और 'समृद्ध किसान' से ही पूरा हो सकता है।"</em></p>
<p>उन्होंने कहा कि पूर्वी चंपारण की यह पवित्र भूमि है, जहां से महात्मा गांधी ने सत्याग्रह की शुरुआत की थी। आज उसी भूमि पर कृषि के क्षेत्र में नवाचार और प्रगति हो रही है। बिहार का चिउड़ा कैसे विदेशों में निर्यात हो इसके लिए भी योजना बनाई जाएगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_683d9ea3dab6d.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<h3>लीची किसानों की समस्या पर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन</h3>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के लीची उत्पादक किसानों से भी संवाद किया। उन्होंने कहा कि लीची के किसानों ने मुझसे समस्या साझा की है। लीची के जल्दी खराब होने के कारण पैदावार को 48 घंटों के भीतर बेचना होता है, जिस कारण कभी&mdash;कभी कम दाम मिलते है। इसके समाधान के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) को विशेष शोध करने और तकनीक विकसित करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कोल्ड स्टोरेज की संख्या बढ़ाने की भी बात कही ताकि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके।&nbsp;</p>
<h3>मक्का से बढ़ी किसानों की आय&nbsp;</h3>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की कारगर नीतियों के फलस्वरुप बिहार में मक्के की खेती में तेजी से इजाफा हो रहा है। मक्के का प्रयोग अब इथेनॉल में भी होने लगा है। पहले मक्का 1200 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिकता था। इथेनॉल के कारण मक्के के दाम में वृद्धि हुई है। पहले प्रति हेक्टेयर उत्पादन 23-24 क्विंटल था, जो अब 50-60 क्विंटल तक पहुंच गया है। इससे किसानों की आमदनी में भी इजाफा हुआ।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_683d9ed736e43.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<h3>चावल की नई किस्मों से बढ़ेगा उत्पादन&nbsp;</h3>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बिहार में किसानों के पास छोटे-छोटे खेत है लेकिन इसके बावजूद बिहार के किसान धरती से सोना उगा रहे हैं। कृषि मंत्री ने हाल ही में चावल की दो नई किस्मों को विकसित किए जाने की जानकारी दी, जिसमें पानी 20 प्रतिशत कम लगेगा और उत्पादन 30 प्रतिशत बढ़ जाएगा। उन्होंने अन्न के साथ-साथ फल-फूल, सब्जियां का उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया।&nbsp;</p>
<h3>नकली कीटनाशकों पर सख्ती</h3>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि नकली कीटनाशक बनाने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएं जा रहे हैं। नकली कीटनाशक बनाने वालों के प्रति सख्त कार्रवाई की जाएगी, किसी को छोड़ा नहीं जाएगा।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_683d9ef429a27.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<h3>&lsquo;लैब से लैंड&rsquo; तक पहुंच रहे वैज्ञानिक</h3>
<p>&lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo; के तहत 16,000 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं से निकलकर गांव-गांव जाकर किसानों से संवाद कर रहे हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि &lsquo;लैंब को लैंड&rsquo; से जोड़ने के लिए ही &lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo; बनाया गया है। उन्होंने&nbsp;सभी से एक राष्ट्र-एक कृषि-एक टीम के मंत्र को लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।&nbsp;</p>
<h3>किसानों की समृद्धि ही राष्ट्र की समृद्धि</h3>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने कहा, <em>&ldquo;अन्नदाता सुखी भव:&rdquo;</em> यही मंत्र है। अन्नदाता सुखी, तो देश भी सुखी होगा। किसानों की समृद्धि के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री व पूर्वी चम्पारण के सांसद राधा मोहन सिंह, स्थानीय विधायक, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ विकसित कृषि संकल्प अभियान: बिहार के किसानों से मिले कृषि मंत्री, निर्यात संभावनाओं पर जोर दिया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ऑपरेटिव किसान क्रेडिट कार्ड की संख्या 2.7 प्रतिशत घटी, फिर भी KCC पर कर्ज में 4.5 प्रतिशत वृद्धि]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/number-of-operative-kisan-credit-cards-down-by-2.7-percent-yet-4.5-percent-increase-in-loans-on-kcc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 01 Jun 2025 12:42:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/number-of-operative-kisan-credit-cards-down-by-2.7-percent-yet-4.5-percent-increase-in-loans-on-kcc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त वर्ष 2024-25 में ऑपरेटिव किसान क्रेडिट कार्ड की संख्या 2.7 प्रतिशत घट गई, इसके बावजूद केसीसी पर लिए गए कर्ज में 4.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिजर्व बैंक ने 2024-25 की सालाना रिपोर्ट में ये आंकड़े दिए हैं।</p>
<p>आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार ऑपरेटिव किसान क्रेडिट कार्ड 2023-24 में 298.1 लाख थे जो 2024-25 में घटकर 290.2 लाख रह गए। फिर भी इन पर बकाया फसल ऋण बढ़ा है। यह रकम 4,93,362 करोड़ रुपये से बढ़कर 5,07,821 करोड़ रुपये हो गई है। बकाया टर्म लोन 46,332 करोड़ से बढ़कर 55,047 करोड़ रुपये हुआ है। पशुपालन और फिशरीज के लिए कर्ज 35,279 करोड़ से बढ़कर 38,107 करोड़ रुपये रुपये हो गया। किसान क्रेडिट कार्ड पर कुल कर्ज 5,74,974 करोड़ से बढ़कर 6,00,975 करोड़ रुपये हो गया।</p>
<p>आरबीआई की रिपोर्ट बताती है कि कृषि और संबद्ध क्षेत्र को बैंकों से मिलने वाले कर्ज में वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष में कम हुई है। वर्ष 2023-24 में कृषि और संबद्ध क्षेत्र को बैंक कर्ज &nbsp;20 प्रतिशत बढ़ा था। अप्रैल 2024 में इसकी वृद्धि दर 19.8 प्रतिशत और मई 2024 में 21.6 प्रतिशत थी। लेकिन उसके बाद 2024-25 के बाकी महीनों में यह दर घटती चली गई। मार्च 2025 में कृषि और संबद्ध क्षेत्र को बैंक कर्ज में सिर्फ 10.4 प्रतिशत वृद्धि हुई। पूरे साल का औसत 15.69 प्रतिशत है।</p>
<p>रिपोर्ट में 2024-25 के दौरान कृषि क्षेत्र के लिए की गई प्रमुख नीतिगत पहल के बारे में भी बताया गया है। कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए लिए जाने वाले अल्प अवधि के कर्ज में ब्याज सब्सिडी वाली मॉडिफाइड इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम (MISS) को 2024-25 में जारी रखने का फैसला 6 अगस्त 2024 को लिया गया।</p>
<p>महंगाई और कृषि इनपुट लागत में वृद्धि को देखते हुए 6 दिसंबर 2024 को कोलैटरल मुक्त कृषि कर्ज की सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इसे 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये प्रति किसान किया गया। नई सीमा 1 जनवरी 2025 से लागू हुई। 2025-26 के बजट में MISS के तहत KCC पर कर्ज की लिमिट भी 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की गई है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ऑपरेटिव किसान क्रेडिट कार्ड की संख्या 2.7 प्रतिशत घटी, फिर भी KCC पर कर्ज में 4.5 प्रतिशत वृद्धि ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सीबीजी पर समीक्षा बैठक में IFGE ने मूल्य वृद्धि को अपर्याप्त बताया, एमडीए और जीएसटी से जुड़ी चिंताएं उठाईं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/ifge-flags-pricing-mda-and-gst-concerns-govt-to-hold-quarterly-reviews-for-cbg-sector.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 31 May 2025 15:32:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/ifge-flags-pricing-mda-and-gst-concerns-govt-to-hold-quarterly-reviews-for-cbg-sector.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी - सीबीजी प्रोड्यूसर फोरम (IFGE CBGPF) ने कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) की हाल की मूल्यवृद्धि को अपर्याप्त बताया है। इसने मूल्य निर्धारण की नियमित समीक्षा प्रणाली लागू करने की सिफारिश की है। यह महत्वपूर्ण मुद्दा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उठाया गया, जिसका उद्देश्य सीबीजी क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा करना था।</p>
<p>बैठक में उपस्थित प्रतिनिधिमंडल ने एफओएम (Fermentable Organic Matter) और एलएफओएम (Liquid Fermentable Organic Matter) के लिए मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस (MDA) के वितरण में देरी पर भी चिंता जताई। केंद्रीय मंत्री ने बाइ-प्रोडक्ट की महत्ता को स्वीकार किया और आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री और उर्वरक मंत्री के समक्ष उठाएंगे ताकि समाधान निकाला जा सके।</p>
<p>कर से जुड़ी चिंताओं के संबंध में पेट्रोलियम मंत्री ने आश्वस्त किया कि वित्त मंत्रालय को एक आधिकारिक पत्र भेजा जाएगा जिसमें जीएसटी से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए IFGE CBGPF की सिफारिशें शामिल होंगी। बुनियादी ढांचे के संदर्भ में पाइपलाइन इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास (DPI) योजना की समीक्षा की जाएगी ताकि इसे सीबीजी उत्पादकों के लिए अधिक अनुकूल बनाया जा सके और गैस नेटवर्क तक तेज और सुगम पहुंच सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p>यह बैठक पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) में आयोजित की गई, जिसमें प्रमुख सरकारी अधिकारियों - पंकज जैन (सचिव), प्रवीण मल खनूजा (अतिरिक्त सचिव), आशीष जोशी (संयुक्त सचिव, जीपी डिवीजन) के साथ गेल और आईओसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।</p>
<p>उद्योग जगत की तरफ से इस बैठक में IFGE के वाइस प्रेसिडेंट आशीष कुमार, महानिदेशक संजय गंजू और IAVL, IGX, कार्बन मास्टर्स, TruAlt Bioenergy, रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत कई प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।</p>
<p>मंत्री पुरी ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए सीबीजी की रणनीतिक महत्ता को दोहराया और तिमाही आधार पर नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने इस सेक्टर की दीर्घकालिक स्थिरता और विकास सुनिश्चित करने में सरकार के समर्थन को भी दोहराया।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67ec069b5cdc6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सीबीजी पर समीक्षा बैठक में IFGE ने मूल्य वृद्धि को अपर्याप्त बताया, एमडीए और जीएसटी से जुड़ी चिंताएं उठाईं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार ने  क्रूड खाद्य तेलों पर आयात शुल्क घटाकर 10% किया, घरेलू रिफाइनिंग को मिलेगा बढ़ावा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-cuts-import-duty-on-crude-edible-oils-to-10-percent-to-ease-prices-boost-local-refining-industry.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 31 May 2025 13:57:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-cuts-import-duty-on-crude-edible-oils-to-10-percent-to-ease-prices-boost-local-refining-industry.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">एक महत्वपूर्ण कदम में सरकार ने क्रूड खाद्य तेलों (edible oil) पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को घटाकर 10% कर दिया है। रिफाइंड तेलों पर 35.75% शुल्क यथावत है। इस कदम से घरेलू रिफाइनिंग उद्योग को तो प्रोत्साहन मिलेगा ही, महंगाई कम करने में भी मदद मिलेगी। लेकिन तिलहन किसानों को इससे बेहतर मूल्य मिलने में दिक्कत आ सकती है। यह कदम खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने की नीति के भी खिलाफ है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस निर्णय के तहत क्रूड पाम ऑयल, क्रूड सोया ऑयल और क्रूड सनफ्लावर ऑयल पर आयात शुल्क 20% से घटाकर 10% किया गया है। एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस तथा सोशल वेलफेयर चार्ज लगने के बाद अब क्रूड खाद्य तेलों पर प्रभावी आयात शुल्क 16.5% रह गया है, जो पहले 27.5% था। क्रूड और रिफाइंड तेलों के आयात शुल्क के बीच अंतर बढ़कर 19.25% हो गया है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) के प्रेसिडेंट सुधाकर देसाई ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने इसे ऐतिहासिक और साहसिक कदम बताया जो &lsquo;मेक इन इंडिया&rsquo; विजन के अनुरूप है। उन्होंने कहा, &ldquo;IVPA सरकार के इस फैसले का स्वागत करता है। क्रूड खाद्य तेल पर आयात शुल्क को 20% से घटाकर 10% किया गया है, जबकि रिफाइंड तेलों पर शुल्क 35.25% ही रखा गया है। सरकार द्वारा ड्यूटी डिफरेंशियल को 19.25% तक बढ़ाने का फैसला IVPA की सिफारिश के अनुसार हुआ है।&rdquo;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उन्होंने कहा, &ldquo;यह न केवल घरेलू रिफाइनिंग को मजबूती देगा, बल्कि तिलहन किसानों और उपभोक्ताओं के लिए भी उचित मूल्य सुनिश्चित करेगा। यह कदम SAFTA के तहत सस्ते रिफाइंड तेलों के आयात से हो रही बाजार की विकृति को संतुलित करने की दिशा में निर्णायक है।&rdquo;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">IVPA के अनुसार, जून-सितंबर 2024 के दौरान रिफाइंड पाम ऑयल का आयात 4.58 लाख मीट्रिक टन था, जो अक्टूबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच बढ़कर 8.24 लाख मीट्रिक टन हो गया। यह कुल पाम ऑयल आयात का लगभग 30% है। SAFTA के तहत शून्य शुल्क का लाभ उठाकर पड़ोसी देशों से रिफाइंड तेल भारत में बड़ी मात्रा में आ रहा था, जिससे घरेलू रिफाइनिंग उद्योग को नुकसान हो रहा था।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">हालांकि क्रूड खाद्य तेल पर आयात शुल्क घटाना आत्मनिर्भरता हासिल करने की नीति के अनुरूप नहीं है। शुल्क घटाने से किसानों को उचित मूल्य मिलने में दिक्कत आ सकती है। सरकार ने दो दिन पहले ही खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी किया है। इसमें बाकी फसलों के साथ तिलहन में मूंगफली का एमएसपी 480 रुपये बढ़ाकर 7263 रुपये और सूरजमुखी का 441 रुपये बढ़ाकर 7721 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। सोयाबीन का समर्थन मूल्य 436 रुपये बढ़ाकर 5328 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भारत विश्व का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक देश है और अपनी 70% से अधिक जरूरत आयात से पूरी करता है। पाम ऑयल मुख्य रूप से इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से, जबकि सोया और सनफ्लावर ऑयल अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस, और यूक्रेन से खरीदा जाता है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_66ff7ea52c14e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार ने  क्रूड खाद्य तेलों पर आयात शुल्क घटाकर 10% किया, घरेलू रिफाइनिंग को मिलेगा बढ़ावा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_66ff7ea52c14e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[&amp;apos;विकसित कृषि संकल्प अभियान&amp;apos; का पुरी से शुभारंभ, विज्ञान को किसान से जोड़ने की पहल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/viksit-krishi-sankalp-abhiyan-launched-from-puri-scientists-will-reach-1.5-crore-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 30 May 2025 14:43:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/viksit-krishi-sankalp-abhiyan-launched-from-puri-scientists-will-reach-1.5-crore-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को <span>कृषि विज्ञान केंद्र, पुरी</span> (ओडिशा) में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव के साथ <strong>'विकसित कृषि संकल्प अभियान' (VKSA)</strong> का शुभारंभ किया। यह 15 दिवसीय अभियान 29 मई से 12 जून तक चलेगा, जिसके तहत वैज्ञानिकों की 2,170 टीमें गांव-गांव जाकर किसानों से सीधा संवाद करेंगी।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री भुवनेश्वर स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद&ndash;केंद्रीय मीठाजल मत्स्य पालन संस्थान (ICAR-CIFA), काउसल्यागंगा में <span>'विकसित कृषि संकल्प अभियान' के </span>कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के <strong>&lsquo;आत्मनिर्भर भारत&rsquo;</strong> के विजन के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाकर उत्पादन और आय बढ़ाना है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे वैज्ञानिकों से संवाद कर नई तकनीकों को अपनाएं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_68397f97a5b19.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>1.5 करोड़ किसानों तक पहुंचेंगे वैज्ञानिक</strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने<span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"> ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (OUAT) में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने</span> सेंटर हॉर्टिकल्चर एक्सपेरिमेंट स्टेशन में आयोजित क्षेत्रीय आम विविधता प्रदर्शनी&nbsp;में शामिल होकर किसानों से संवाद भी किया।&nbsp;</p>
<p>अभियान के तहत देश के 1.5 करोड़ से अधिक किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यह केवल तकनीकी जानकारी देने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि किसानों से सीधे जुड़ने और उन्हें नई तकनीकों से सशक्त बनाने की पहल है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें इस मिशन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_68397ca824f0d.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<h3><strong>वैज्ञानिक जाएंगे खेतों तक</strong></h3>
<p>लगभग 16 हजार वैज्ञानिकों की 2,170 टीमें प्रतिदिन दो-दो गांवों का दौरा करेंगी।क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, पानी आदि को ध्यान में रखते हुए किसानों को उन्नत कृषि सलाह दी जाएगी। किसानों को यह बताया जाएगा कि कौन-सी फसलें उगानी चाहिए, किस प्रकार की किस्मों का चयन करें&nbsp;और उर्वरकों का उपयोग कैसे करना है। साथ ही प्राकृतिक खेती, दलहन एवं तिलहन की खेती से संबंधित जानकारियां भी दी जाएंगी। किसानों की खेती से जुड़ी समस्याओं का समाधान भी किया जाएगा।</p>
<h3><strong>दुनिया का 'फूड बास्केट' बनेगा भारत: शिवराज सिंह</strong></h3>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 2024-25 में देश का खाद्यान्न उत्पादन 3,539.59 लाख टन तक पहुंच है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 216.61 लाख टन अधिक है। उन्होंने कहा, &ldquo;हमें भारत को दुनिया का <strong>&lsquo;फूड बास्केट&rsquo;</strong> बनाना है और इसके लिए सबसे आवश्यक हैं&mdash;अच्छे बीज।&rdquo;</p>
<p>उन्होंने ICAR के वैज्ञानिकों को बधाई दी कि वे प्रयोगशालाओं में लगातार अनुसंधान कर नई बीज किस्में विकसित कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p style="text-align: center;"><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_68397c9354a09.jpg" alt="" /></p>
<h3><strong>शोध को किसानों से जोड़ने की पहल</strong></h3>
<p>'विकसित कृषि संकल्प अभियान' के शुभारंभ के अवसर पर <span>सचिव (DARE) एवं महानिदेशक (ICAR)</span> डॉ. एम. एल. जाट, उपमहानिदेशक (मत्स्य विज्ञान) डॉ. जे. के. जेना, उपमहानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. राजबीर सिंह और ICAR-ATARI कोलकाता के निदेशक डॉ. प्रदीप डे उपस्थित थे।</p>
<p><span><strong>डॉ. एम. एल. जाट</strong> ने</span> विकसित कृषि संकल्प अभियान को एक &ldquo;परिवर्तनकारी अभियान&rdquo; करार देते हुए कहा कि यह पहल वैज्ञानिक शोध को किसानों की जमीनी जरूरतों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है।<span>&nbsp;उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत अनुसंधान को किसानों से जोड़कर कृषि क्षेत्र को अधिक उन्नत, सतत और लाभकारी बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_68397cca605e5.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<h3><strong>पुरी में तिरंगा यात्रा</strong></h3>
<p>मुख्यमंत्री मोहन माझी ने कहा कि 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' किसानों में आधुनिक तकनीकों और नई बीज किस्मों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भारत सरकार की एक अभूतपूर्व पहल है। इस अवसर पर पुरी में तिरंगा यात्रा आयोजित की गई और केवीके, पुरी में पौधारोपण कर हरित संकल्प को बल दिया गया।</p>
<h3><strong>मछली टीका का लोकार्पण</strong></h3>
<p>कार्यक्रम के दौरान ICAR-CIFA द्वारा विकसित मछली रोग से बचाव के लिए टीका <strong>&ldquo;CIFA Argu VAX&ndash;I&rdquo;</strong> का भी लोकार्पण किया गया। यह नवाचार परजीवी संक्रमण को रोकने में सहायक होगा और मत्स्यपालकों को आर्थिक हानि से बचाएगा।</p>
<h3><strong>किसान संवाद और प्रदर्शनी&nbsp;</strong></h3>
<p>ICAR-CIFA&nbsp; काउसल्यागंगा में आयोजित कार्यक्रम में 600 से अधिक किसानों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने भाग लिया। उन्होंने वैज्ञानिकों से प्रत्यक्ष संवाद कर कृषि और मत्स्य पालन की उन्नत तकनीकों, प्राकृतिक खेती, तिलहन&ndash;दलहन उत्पादन, जलवायु-अनुकूल खेती और उर्वरक प्रबंधन पर जानकारी प्राप्त की।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्रालय और आईसीएआर इस अभियान को राज्य सरकारों के सहयोग से संचालित कर रहे हैं, जिसमें देशभर के सभी 731 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) और कृषि विश्वविद्यालय सम्मिलित हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_68397cde235f7.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_68397fc07da24.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' का पुरी से शुभारंभ, विज्ञान को किसान से जोड़ने की पहल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि उत्पादन के तीसरे अग्रिम अनुमान जारी, खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि, कपास उत्पादन गिरा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/third-advance-estimate-of-agricultural-production-released-record-food-grain-production-cotton-production-falls.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 28 May 2025 23:56:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/third-advance-estimate-of-agricultural-production-released-record-food-grain-production-cotton-production-falls.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div id=":1lw" class="Am aiL Al editable LW-avf tS-tW tS-tY" hidefocus="true" aria-label="Message Body" writingsuggestions="false" g_editable="true" role="textbox" aria-multiline="true" contenteditable="true" itacorner="6,7:1,1,0,0" spellcheck="true" jsaction="utQure:.CLIENT;tkRwsc:.CLIENT;input:.CLIENT;uLRpAf:.CLIENT;yGfh2c:.CLIENT" aria-owns=":1oj" aria-controls=":1oj" aria-expanded="false" tabindex="1">
<p>केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने वर्ष 2024-25 के लिए कृषि उत्पादन के तृतीय अग्रिम अनुमान जारी कर दिए हैं। देश में धान, गेहूं, मक्का, मूंगफली और सोयाबीन के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान है।</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री <b>शिवराज सिंह चौहान</b> ने ये अनुमान जारी करते हुए बताया कि देश के <strong>खाद्यान्न उत्पादन</strong> में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है, जो 6.5 प्रतिशत बढ़कर <strong>3539.59</strong> लाख टन तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि किसानों की अथक मेहनत, कृषि वैज्ञानिकों की कुशलता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की किसान हितैषी नीतियों-योजनाओं तथा राज्य सरकारों के सहयोग से संभव हो सकी है।</p>
<p>अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में <b>चावल</b> उत्पादन 1490.74 लाख टन (रिकॉर्ड), <b>गेहूं </b>उत्पादन 1175.07 लाख टन (रिकॉर्ड), <b>मक्का</b> उत्पादन 422.81 लाख टन (रिकॉर्ड) और <b>श्रीअन्न</b> (मोटे अनाज) उत्पादन 180.15 लाख टन होने का अनुमान है।<b>&nbsp;</b><span><b>पोषक/मोटे अनाजों</b> का उत्पादन 621.40 लाख टन अनुमानित है, जो पिछले साल से 52.04 लाख टन अधिक है।</span></p>
<p><b>दलहनों</b> में अरहर (तूर) उत्पादन 35.61 लाख टन, चना 113.37 लाख टन और मूंग 38.19 लाख टन रहने का अनुमान है। हालांकि उड़द उत्पादन में गिरावट आई है और यह पिछले वर्ष के 23.19 लाख टन से घटकर 21.06 लाख टन रह गया है। देश में कुल दलहन उत्पादन करीब 10 लाख टन बढ़कर 252.38 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है।</p>
<p><b>तिलहनों</b> का कुल उत्पादन 426.09 लाख टन अनुमानित है, जो गत वर्ष के 396.69 लाख टन की तुलना में 29.40 लाख टन अधिक है। सोयाबीन उत्पादन रिकॉर्ड 151.80 लाख टन और मूंगफली का उत्पादन रिकॉर्ड 118.96 लाख टन रहने का अनुमान है, जो क्रमशः पिछले वर्ष की तुलना में 21.18 लाख टन और 17.16 लाख टन अधिक है। हालांकि रेपसीड-सरसों का उत्पादन 132.59 लाख टन से घटकर 126.06 लाख टन रह गया है।</p>
<p>वर्ष 2024-25 में <b>गन्ना</b> उत्पादन में मामूली कमी दर्ज की गई है, और यह 4501.16 लाख टन रहा है। हालांकि इस वर्ष कई राज्यों में गन्ना उत्पादन प्रभावित होने से देश के चीनी उत्पादन में लगभग 18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में कृषि मंत्रालय के गन्ना उत्पादन के आंकड़ों पर सवाल उठ सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>देश में <b>कपास</b> उत्पादन को भी झटका लगा है और यह पिछले वर्ष के 325.22 लाख गांठ से घटकर 306.92 लाख गांठ (प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम) रह गया है। कपास उत्पादन में लगातार दूसरे साल गिरावट दर्ज की गई है।&nbsp;</p>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि उत्पादन के तीसरे अग्रिम अनुमान जारी, खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि, कपास उत्पादन गिरा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मानसून अपडेट: सामान्य से अधिक बारिश की संभावना, जून में मिलेगी गर्मी से राहत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/latest-monsoon-update-more-than-normal-rainfall-expected-relief-from-heat-in-june.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 28 May 2025 15:02:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/latest-monsoon-update-more-than-normal-rainfall-expected-relief-from-heat-in-june.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span class="relative -mx-px my-[-0.2rem] rounded px-px py-[0.2rem] transition-colors duration-100 ease-in-out">भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2025 मानसून के लिए ताजा पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें देशभर में सामान्य से अधिक वर्षा की संभावना जताई गई है। मानसून सीजन (</span>जून-सितंबर) <span class="relative -mx-px my-[-0.2rem] rounded px-px py-[0.2rem] transition-colors duration-100 ease-in-out">के दौरान देश में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के 106% तक रहने की संभावना है, जिसमें &plusmn;4% की त्रुटि सीमा है।</span>&nbsp;ताजा आंकड़ा अप्रैल में जारी किए गए पहले पूर्वानुमान (105%) <span>से अधिक है। भारत में मानसून की बारिश का दीर्घ </span>अवधि औसत (LPA) 870 मिमी है।</p>
<p>आईएमडी के महानिदेशक <strong>डॉ. मृत्युंजय महापात्र</strong>&nbsp;ने बताया कि मानसून के लिए अनुकूल जलवायु परिस्थितियाँ मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में, प्रशांत महासागर में न तो अल नीनो और न ही ला नीना की स्थिति है। इसके अलावा, हिंद महासागर डायपोल (IOD) भी तटस्थ अवस्था में है, जो मानसून के लिए सकारात्मक संकेत है। जनवरी-मार्च 2025 के दौरान उत्तरी गोलार्ध और यूरेशिया में कम हिमपात भी मानसून की अच्छी वर्षा का संकेत देता है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>मुख्य बिंदु:</strong></p>
<ul>
<li><strong>क्षेत्रीय वर्षा का अनुमान:</strong> मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश (&gt;106% LPA) <span>की संभावना है। उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य बारिश (</span>92-108% LPA) <span>की उम्मीद है। </span>हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों, लद्दाख, पूर्वोत्तर राज्यों और तमिलनाडु में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है।&nbsp;</li>
<li><strong>मानसून कोर जोन</strong> (एमसीजेड), जिसमें भारत की वर्षा आधारित कृषि भूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शामिल है, में सामान्य से अधिक वर्षा होने की उम्मीद है। यह खरीफ सीजन के लिए अनुकूल है।</li>
</ul>
<ul>
<li><strong>जून में अच्छी बारिश</strong><strong>, </strong><strong>लू से राहत:</strong> मौसम विभाग ने विशेष रूप से जून महीने के लिए सामान्य से अधिक वर्षा की भविष्यवाणी की है। अनुमान है कि जून में भीषण गर्मी और लू (हीटवेव) वाले दिनों की संख्या सामान्य से कम रहेगी, जिससे लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी। जून 2025 के लिए औसत से 8% अधिक बारिश का अनुमान है। जून में देश के अधिकांश भागों में अधिकतम तापमान सामान्य से कम रहने की संभावना है।&nbsp;</li>
<li><strong>केरल में तय समय से पहले दस्तक:</strong> दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पहले ही 24 मई 2025 को केरल में दस्तक दे दी है, जो सामान्य आगमन की तारीख (1 जून) से लगभग 8 दिन पहले है। यह पिछले 16 वर्षों में मानसून का सबसे जल्द आगमन है।</li>
<li><strong>कोई अल नीनो प्रभाव नहीं:</strong> आईएमडी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इस वर्ष अल नीनो की स्थिति विकसित होने की संभावना नहीं है, जो आमतौर पर भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम वर्षा से जुड़ी होती है। यह भी एक सकारात्मक कारक है जो बेहतर मानसून की उम्मीदों को बल देता है।</li>
<li><strong>सतर्कता और तैयारी:</strong> हालांकि अच्छे मानसून का पूर्वानुमान है, लेकिन मौसम विभाग ने वर्षा के साथ आने वाले संभावित जोखिमों जैसे बाढ़, भूस्खलन और यातायात बाधाओं से निपटने के लिए आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। नागरिकों को मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखने के लिए कहा गया है।</li>
</ul>
<p>डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि जून माह की शुरुआत तेज बारिश के साथ होने की संभावना है। यह पूर्वानुमान देशभर में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने और सूखे की चिंताओं को कम करने में सहायक होगा।</p>
<p>अच्छा मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की लगभग 50% खेती वर्षा पर निर्भर है। हालांकि, IMD ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा का वितरण असमान हो सकता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में बाढ़ और अन्य में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।&nbsp;मानसून का सामान्य से बेहतर रहना जल प्रबंधन, ऊर्जा उत्पादन और आम जनजीवन के लिए भी सकारात्मक संकेत है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मानसून अपडेट: सामान्य से अधिक बारिश की संभावना, जून में मिलेगी गर्मी से राहत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि मंत्री ओडिशा से करेंगे &amp;apos;विकसित कृषि संकल्प अभियान&amp;apos; की शुरुआत, 15 दिन में 20 राज्यों का दौरा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-singh-chauhan-will-launch-developed-agriculture-resolution-campaign-from-odisha-on-may-29.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 27 May 2025 21:42:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-singh-chauhan-will-launch-developed-agriculture-resolution-campaign-from-odisha-on-may-29.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="157" data-end="568">केंद्रीय कृषि तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर शुरू हो रहे &lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo; की तैयारियां पूरी हो गई है। 29 मई को पुरी (ओडिशा) से इस अभियान की शुरूआत की जाएगी, जहां केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह भी शामिल होंगे। 15 दिनों तक चलने वाले इस वृहद अभियान के दौरान वे लगभग 20 राज्यों में प्रवास करेंगे और किसानों व वैज्ञानिकों के साथ सीधा संवाद करेंगे।</p>
<p data-start="157" data-end="568">यह अभियान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा राज्य सरकारों के सहयोग से 29 मई से 12 जून तक 700 से अधिक जिलों में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान वैज्ञानिकों की टीम गांवों में जाकर किसानों से संवाद करेगी। अभियान में देशभर के सभी 731 कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), आईसीएआर के सभी 113 संस्थानों, राज्यस्तरीय विभागों एवं कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ ही प्रगतिशील किसान व कृषि से जुड़े अन्य लोग शामिल होंगे।</p>
<p data-start="157" data-end="568">केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह का कहना है- यह अभियान, विकसित कृषि के साथ-साथ प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।अभियान का लक्ष्य विभिन्न राज्यों में लगभग डेढ़ करोड़ किसानों तक प्रत्यक्ष रूप से पहुंचना व सीधे संवाद करना है, साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के &ldquo;लैब टू लैंड&rdquo; के विजन को धरातल पर उतारना है।&nbsp;</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान 29 मई को ओडिशा के बाद 12 जून तक के अभियान के दौरान जम्मू, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, असम, मेघालय, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़ में किसानों व वैज्ञानिक टीमों के साथ संवाद में सहभागिता करेंगे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_6835e4ce49d30.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि मंत्री ओडिशा से करेंगे 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' की शुरुआत, 15 दिन में 20 राज्यों का दौरा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_6835e4ce49d30.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत का कृषि निर्यात 6.47 फीसदी बढ़ा, चावल निर्यात एक लाख करोड़ के पार पहुंचा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indias-agricultural-exports-increased-by-6.47-percent-rice-exports-exceeded-rs-1-lakh-crore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 26 May 2025 18:10:44 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indias-agricultural-exports-increased-by-6.47-percent-rice-exports-exceeded-rs-1-lakh-crore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="294" data-end="577">वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का निर्यात 6.47 फीसदी बढ़कर <strong>51.91 अरब डॉलर</strong> तक पहुंच गया है। यह वृद्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस अवधि में देश का कुल वस्तु निर्यात लगभग पिछले वर्ष के स्तर पर ही रहा और इसमें मात्र 0.1 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी दर्ज हुई है।&nbsp;कृषि निर्यात में वृद्धि हुई है, लेकिन यह अब भी वर्ष 2022-23 के 53.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से कम है। वर्ष 2023-24 में कृषि निर्यात 48.8 अरब डॉलर रहा था।&nbsp;</p>
<p data-start="737" data-end="1198"><strong>केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय</strong> द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत से बासमती और गैर-बासमती चावल का कुल निर्यात बढ़कर 12.5 अरब डॉलर &mdash; यानी एक लाख करोड़ रुपये &mdash; से अधिक हो गया है। बासमती चावल का निर्यात लगभग 2 फीसदी बढ़कर 5.9 अरब डॉलर (करीब 50 हजार करोड़ रुपये) रहा, जबकि गैर-बासमती चावल का निर्यात 43 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 6.5 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया। चावल देश का सर्वाधिक निर्यात होने वाला कृषि उत्पाद है, जिसकी कुल कृषि निर्यात में लगभग 24 फीसदी हिस्सेदारी है।</p>
<p data-start="737" data-end="1198"><strong>कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा)</strong> के अंतर्गत आने वाली प्रमुख वस्तुओं का निर्यात वर्ष 2024-25 में <strong>11 फीसदी</strong> बढ़कर <strong>27.90</strong> अरब डॉलर तक पहुंच गया। एपीडा के चेयरमैन <strong>अभिषेक देव</strong> ने <strong><em data-start="2195" data-end="2206">रूरल वॉयस</em> </strong>को बताया कि <strong>ऑर्गेनिक उत्पादों</strong> के निर्यात में 35 फीसदी और <strong>डेयरी उत्पादों</strong> के निर्यात में 54 फीसदी की वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2030 तक कृषि निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए प्रयास जारी हैं।</p>
<p data-start="1200" data-end="1492"><strong>मरीन उत्पादों</strong> का निर्यात 0.52 फीसदी की मामूली वृद्धि के साथ 7.4 अरब डॉलर रहा है। मसालों का निर्यात 4.84 फीसदी बढ़कर 4.45 अरब डॉलर हो गया। बफेलो मीट के निर्यात में 8.57 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई और यह 4 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया। प्रोसेस्ड फूड का निर्यात लगभग 2 फीसदी बढ़कर 1.68 अरब डॉलर रहा है।</p>
<p data-start="1494" data-end="1823"><strong>तंबाकू</strong> निर्यात में 40 फीसदी की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई और इसका निर्यात 1.47 अरब डॉलर रहा। ऑयल मील के निर्यात में 21 फीसदी की गिरावट आई है और यह घटकर 1.32 अरब डॉलर रह गया है। <strong>ताजे फलों</strong> का निर्यात लगभग 2 फीसदी बढ़कर 1.17 अरब डॉलर हो गया, जबकि <strong>प्रोसेस्ड फ्रूट्स व जूस</strong> का निर्यात करीब 6 फीसदी बढ़कर 1 अरब डॉलर से अधिक हो गया है।</p>
<p data-start="1825" data-end="1991">भारत से चाय और कॉफी का निर्यात भी बढ़ा है। <strong>कॉफी</strong> निर्यात 40 फीसदी की वृद्धि के साथ 1.8 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया, जबकि <strong>चाय</strong> निर्यात 12 फीसदी बढ़कर 92 करोड़ डॉलर हो गया। विश्व स्तर पर काफी उत्पादन में गिरावट का फायदा भारत को मिला है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p data-start="1825" data-end="1991"><strong>कृषि आयात भी बढ़ा&nbsp;</strong></p>
<p>कृषि निर्यात के साथ देश का कृषि आयात भी बढ़ा है। वर्ष 2024-25 में कृषि निर्यात 17.2 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 38.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। पिछले एक दशक में कृषि निर्यात और आयात के बीच अंतर घटकर आधा रह गया है। &nbsp;</p>
<p data-start="2422" data-end="2460"><strong data-start="2422" data-end="2460">गेहूं और चीनी पर प्रतिबंधों का असर</strong></p>
<p data-start="2462" data-end="2779">कई कृषि वस्तुओं पर लगी निर्यात पाबंदियों का असर भी पड़ा है। घरेलू बाजार में कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने गेहूं के निर्यात पर रोक लगा रखी है, जिसके चलते वर्ष 2024-25 में <strong>गेहूं निर्यात</strong> 96 फीसदी घटकर केवल 20 लाख डॉलर रह गया, जबकि 2021-22 में यह 2.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।</p>
<p data-start="2781" data-end="3037">इसी तरह, <strong>चीनी निर्यात</strong> वर्ष 2024-25 में इसका निर्यात 23.5 फीसदी घटकर 2.1 अरब डॉलर रह गया, जबकि वर्ष 2022-23 में यह 5.8 अरब डॉलर था। घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 2023 में कई कृषि उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए थे। चीनी, प्याज और गैर-बासमती चावल के निर्यात पर लगी रोक बाद में हाट दी थी।&nbsp;</p>
<p data-start="3039" data-end="3070"><strong data-start="3039" data-end="3070">कॉटन एक्सपोर्ट को बड़ा झटका</strong></p>
<p data-start="3072" data-end="3312">देश में कपास उत्पादन में गिरावट के कारण कॉटन एक्सपोर्ट को बड़ा झटका लगा है। भारत का कॉटन निर्यात 27 फीसदी घटकर करीब 80 करोड़ डॉलर रह गया है, जबकि 2011-12 में यह 4.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। वर्तमान में भारत को कपास आयात करना पड़ रहा है।&nbsp;</p>
<p data-start="3314" data-end="3350"><strong data-start="3314" data-end="3350">अमेरिका, यूएई को सर्वाधिक कृषि निर्यात&nbsp;</strong></p>
<p data-start="3352" data-end="3735">भारत से जिन देशों को सर्वाधिक कृषि निर्यात हुआ है, उनमें अमेरिका शीर्ष पर है। वर्ष 2024-25 में अमेरिका को 5.8 अरब डॉलर का कृषि निर्यात किया गया। इसके बाद यूएई को 3.4 अरब डॉलर, चीन को 3.2 अरब डॉलर, बांग्लादेश को 2.4 अरब डॉलर और सऊदी अरब को 2.3 अरब डॉलर का कृषि निर्यात हुआ। वियतनाम, इराक, मलेशिया, इंडोनेशिया, ईरान और नीदरलैंड भी भारत के कृषि निर्यात के प्रमुख गंतव्यों में शामिल हैं।&nbsp;</p>
<p data-start="3352" data-end="3735"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_6834606377efb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत का कृषि निर्यात 6.47 फीसदी बढ़ा, चावल निर्यात एक लाख करोड़ के पार पहुंचा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ओडिशा ने रचा इतिहास, इंग्लैंड और दुबई को एक ही दिन में तीन आमों की खेप का निर्यात]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/odisha-makes-history-with-triple-mango-export-to-england-and-dubai-in-a-single-day.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 25 May 2025 16:13:48 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/odisha-makes-history-with-triple-mango-export-to-england-and-dubai-in-a-single-day.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ओडिशा ने अपने कृषि निर्यात में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य ने एक ही दिन में तीन अंतरराष्ट्रीय खेपों को लंदन, बर्मिंघम और दुबई के लिए रवाना किया। यह एक अभूतपूर्व उपलब्धि है, जो राज्य की किसान उत्पादक कंपनियों (FPCs) की बढ़ती क्षमताओं और बाजार सुविधा देने वाली कंपनी Palladium की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करती है।</p>
<p><strong>बलांगीर से पहली बार आमों का निर्यात</strong><br />बलांगीर जिले से पहली बार 2 मीट्रिक टन आमों का निर्यात लंदन के लिए किया गया। यह मील का पत्थर पैलेडियम द्वारा इस माह की शुरुआत में पाटनगढ़ में आयोजित प्रशिक्षण सत्र के माध्यम से संभव हो सका, जिसमें किसानों और एफपीओ को अंतरराष्ट्रीय बाजार की तैयारियों, गुणवत्ता पालन और निर्यात प्रक्रियाओं से संबंधित आवश्यक कौशल प्रदान किए गए।</p>
<p><strong>संभलपुर में आम महोत्सव के दौरान दोहरी खेप रवाना</strong><br />संभलपुर में आयोजित आम महोत्सव के दौरान 3.5 मीट्रिक टन प्रीमियम आमों की खेप को इंग्लैंड और दुबई के लिए केंद्रीय शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रवाना किया। इस अवसर पर NABARD, उद्यान विभाग, जिला प्रशासन और Palladium इंडिया के अधिकारी उपस्थित थे।</p>
<p>श्री प्रधान ने कहा, &ldquo;यह केवल आमों का निर्यात नहीं है, बल्कि हमारे किसानों की मेहनत, समर्पण और सपनों का निर्यात है। ओडिशा तेजी से उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों का एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बनता जा रहा है, जो विशेष रूप से महिलाओं सहित हमारे किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ रहा है और सतत समृद्धि की राह खोल रहा है।&rdquo;</p>
<p><strong>निर्यात तैयारियों पर पैलेडियम और नाबार्ड की वर्कशॉप</strong><br />निर्यात के बाद नाबार्ड और पैलेडियम इंडिया की तरफ से संभलपुर के उद्यान प्रशिक्षण संस्थान में वर्कशॉप आयोजित की गई। इस कार्यशाला का उद्देश्य स्थानीय FPOs को वैश्विक व्यापार के लिए तैयार करना था। इसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं, कटाई के बाद प्रबंधन, और निर्यात सर्टिफिकेशन मानकों पर तकनीकी सत्र शामिल थे।</p>
<p>APEDA के पूर्वी क्षेत्र के निदेशक ने FPOs के माध्यम से प्रत्यक्ष निर्यात को बढ़ावा देने के लक्ष्य पर जोर दिया और किसानों के व्यापक प्रशिक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया। NABARD के मुख्य महाप्रबंधक ने ओडिशा को आम निर्यात के मामले में अग्रणी राज्यों के बराबर लाने की आवश्यकता पर बल दिया और किसानों को सीधे जानकारी पहुंचाने के लिए जिला स्तर पर इस पहल की सराहना की।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ओडिशा ने रचा इतिहास, इंग्लैंड और दुबई को एक ही दिन में तीन आमों की खेप का निर्यात ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केरल पहुंचा मानसून, 2009 के बाद सबसे जल्दी आगमन: मौसम विभाग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-reaches-kerala-earliest-onset-since-2009-imd.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 24 May 2025 13:14:42 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-reaches-kerala-earliest-onset-since-2009-imd.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="187" data-end="504">दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में दस्तक दे दी है। इस बार मानसून 8 दिन पहले ही केरल पहुंच गया। मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, यह 2009 के बाद भारत में मानसून का सबसे जल्द आगमन है, जब यह 23 मई को केरल पहुंचा था। आमतौर पर मानसून 1 जून तक केरल पहुंचता है और 8 जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेता है।</p>
<p data-start="506" data-end="833">हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के जल्द या देर से केरल पहुंचने का पूरे मानसून सीजन के दौरान कुल वर्षा से कोई सीधा संबंध नहीं होता है। मानसून का आगे बढ़ना कई वैश्विक, क्षेत्रीय और स्थानीय कारकों पर निर्भर करती है। केरल में मानसून के जल्दी पहुंचने का मतलब यह नहीं कि बाकी हिस्सों में भी ऐसा ही होगा।</p>
<p data-start="835" data-end="1012">आईएमडी के रिकॉर्ड के अनुसार, अब तक मौसम विभाग के इतिहास में मानसून सबसे पहले वर्ष 1918 में 11 मई को केरल पहुंचा था। वहीं, 1972 में मानसून सबसे देरी से, 18 जून को केरल पहुंचा था।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_68318342c96a7.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="1014" data-end="1356">मौसम विभाग ने अप्रैल में जारी अपने पूर्वानुमान में बताया था कि 2025 के मानसून सीजन के दौरान सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है। इस साल अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना नहीं है, जो आमतौर पर भारत में कम बारिश से जुड़ी होती है। इसके विपरीत, ला नीना स्थितियों&mdash;जो अधिक बारिश के लिए अनुकूल मानी जाती हैं&mdash;के विकसित होने की संभावना जताई गई है।</p>
<p data-start="1358" data-end="1635">मानसून के समय से पहले आगमन से खरीफ फसलों की बुआई समय पर शुरू होने की उम्मीद है। भारत की कृषि व्यवस्था, जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 18% का योगदान देती है और देश की आधी से अधिक आबादी को रोजगार देती है, जून से सितंबर तक चलने वाली मानसूनी वर्षा पर काफी हद तक निर्भर करती है।</p>
<p data-start="1637" data-end="1771">राज्य सरकारें और कृषि विभाग मानसून की प्रगति पर करीबी नजर रखे हुए हैं ताकि जल प्रबंधन और फसल योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_683178a0ca95e.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_683178b525317.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केरल पहुंचा मानसून, 2009 के बाद सबसे जल्दी आगमन: मौसम विभाग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_683178b525317.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत में गहराया वनों के विनाश का संकट, 2024 में 18,200 हेक्टेयर प्राथमिक वन खत्म: GFW रिपोर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/forest-loss-crisis-continues-in-india-18200-hectares-of-primary-forest-to-be-destroyed-by-2024.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 22 May 2025 11:18:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/forest-loss-crisis-continues-in-india-18200-hectares-of-primary-forest-to-be-destroyed-by-2024.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="104" data-end="417">भारत में वनों के विनाश का संकट 2024 में और गहरा हो गया है। <a href="https://www.globalforestwatch.org/"><strong>ग्लोबल फॉरेस्ट वॉच (GFW)</strong></a> के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश ने 2024 में 18,200 हेक्टेयर प्राथमिक (प्राइमरी) वनों को खो दिया, जो 2023 में हुए 17,700 हेक्टेयर वनों के नुकसान से अधिक है। यह आंकड़ा देश महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों के संकट को दर्शाता है।</p>
<p data-start="419" data-end="646">2001 से 2024 तक, भारत ने लगभग 23.1 लाख हेक्टेयर ट्री कवर खो दिया है, जो 2000 से अब तक कुल फॉरेस्ट कवर में 7.1% की कमी के बराबर है। इसके कारण लगभग 1.29 गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य (CO₂e) उत्सर्जन हुआ है।</p>
<p data-start="648" data-end="869">2002 से 2024 के बीच, भारत में 3.48 लाख हेक्टेयर आर्द्र प्राथमिक वन (ह्यूमिड प्राइमरी फॉरेस्ट) खत्म हुए, जो इस अवधि में कुल ट्री कवर को हुए नुकसान का 15% है। इस दौरान देश के आर्द्र प्राथमिक वन क्षेत्र में 5.4% की गिरावट दर्ज की गई। 2024 में भारत के कुल ट्री कवर लॉस का 93% नुकसान प्राकृतिक वनों में हुआ, जिसमें कुल 6.02 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र नष्ट हुआ। इससे अनुमानित 273 मिलियन टन CO₂ समतुल्य उत्सर्जन हुआ।</p>
<p data-start="1037" data-end="1220">हालांकि, 2000 से 2020 के बीच भारत ने 17.8 लाख हेक्टेयर ट्री कवर जोड़ा भी गया, जो वैश्विक वृक्ष कवर वृद्धि का लगभग 1.4% है। इसी अवधि में देश ने कुल 8.74 लाख हेक्टेयर (1.3%) नेट गेन दर्ज किया।</p>
<p data-start="1222" data-end="1364">संयुक्त राष्ट्र के<strong> खाद्य और कृषि संगठन (FAO)</strong> के अनुसार, 2015 से 2020 के बीच भारत में वनों की कटाई की दर लगभग 6.68 लाख हेक्टेयर प्रति वर्ष रही है।</p>
<p data-start="1366" data-end="1698">भारत में वनों की कटाई के प्रमुख कारणों में कृषि विस्तार, बस्तियों और बुनियादी ढांचे का विकास, तथा अवैध लकड़ी कटाई शामिल हैं। 2001 से 2024 के बीच, स्थायी कृषि के कारण 6.2 लाख हेक्टेयर, लकड़ी कटाई के कारण 1.82 लाख हेक्टेयर, प्राकृतिक कारणों से 35,100 हेक्टेयर, और बस्तियों व इन्फ्रास्ट्रक्चर के कारण 30,600 हेक्टेयर ट्री कवर नष्ट हुआ।</p>
<p data-start="1700" data-end="2154" data-is-last-node="" data-is-only-node="">इस दौरान सिर्फ चार राज्यों में देश के कुल ट्री कवर लॉस का 52% हिस्सा दर्ज हुआ, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर संकट की गंभीरता स्पष्ट होती है। सबसे ज्यादा नुकसान असम में हुआ, जहां 3.4 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र नष्ट हुआ। इसके बाद मिजोरम (3.34 लाख हेक्टेयर), नागालैंड (2.68 लाख हेक्टेयर), और मणिपुर (2.55 लाख हेक्टेयर) का स्थान रहा। मेघालय ने भी 2.43 लाख हेक्टेयर नुकसान के साथ पांचवां स्थान प्राप्त किया, जिससे पूर्वोत्तर भारत में व्यापक वन क्षरण की पुष्टि होती है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत में गहराया वनों के विनाश का संकट, 2024 में 18,200 हेक्टेयर प्राथमिक वन खत्म: GFW रिपोर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_682eba9621abf.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि विकास दर 5 प्रतिशत बनाए रखना हमारा लक्ष्य: शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/target-is-to-maintain-agricultural-growth-rate-at-5-percent-agriculture-minister-shivraj-singh-chouhan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 20 May 2025 21:53:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/target-is-to-maintain-agricultural-growth-rate-at-5-percent-agriculture-minister-shivraj-singh-chouhan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="80" data-end="425">केंद्रीय कृषि तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि <span>अगर 2047&nbsp;तक विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करना है तो&nbsp;5&nbsp;प्रतिशत की कृषि विकास दर (एलाइड सेक्टर) को लगातार बनाए रखना होगा।</span><span> इस लक्ष्य को अर्जित किया जा सकता है। </span>वह पूसा परिसर, दिल्ली में आयोजित कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और आईसीएआर संस्थानों के निदेशकों के वार्षिक सम्मेलन के अवसर पर प्रेस से बातचीत कर रहे थे।</p>
<p data-start="80" data-end="425">सम्मेलन में यह निष्कर्ष सामने आया कि 5% कृषि विकास दर का लक्ष्य संभव है, हालांकि दलहन और तिलहन जैसे क्षेत्रों में विकास दर अभी भी मात्र 1.5% है। कृषि मंत्री ने राज्यों में उत्पादकता की असमानता को भी रेखांकित किया और कहा कि उत्पादन के अंतर को पाटने की दिशा में रणनीति बनाई जा रही है।&nbsp;</p>
<p data-start="427" data-end="681">उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार खेती की रीढ़ हैं। इन क्षेत्रों में सुधार के बिना उत्पादन बढ़ाना और लागत घटाना संभव नहीं। उन्होंने सभी कृषि संस्थानों से एकजुट होकर "एक राष्ट्र&ndash;एक कृषि&ndash;एक टीम" की भावना से कार्य करने का आह्वान किया।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_682cafb8c1b8c.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="1241" data-end="1487">शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है तो 1 ट्रिलियन डॉलर की कृषि अर्थव्यवस्था आवश्यक होगी। इसके लिए कृषि निर्यात को 6% से बढ़ाकर 20% तक ले जाने और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाने पर बल दिया जा रहा है।</p>
<p data-start="1489" data-end="1808">उन्होंने कहा कि शोध खर्च को वर्तमान 0.4% से बढ़ाने पर विचार हो रहा है और यह जरूरी है कि शोध की दिशा खेत की जरूरतों के अनुरूप हो। साथ ही, मधुमक्खी पालन, पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी जैसे सहायक क्षेत्रों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा क्योंकि 2047 तक औसत भूमि जोत 0.6 हेक्टेयर तक सिमटने का अनुमान है।</p>
<p data-start="1489" data-end="1808"><span>कृषि मंत्री ने कहा कि शोध पत्रों और पुस्तकों का लाभ आम किसान को होना चाहिए। यूनिवर्सिटी से निकले कितने बच्चे एग्रो बिजनेस से जुड़े हैं</span><span>,&nbsp;</span><span>इसका आकलन किया जाएं। किसी ने स्टार्टअप शुरू किया है</span><span>,&nbsp;</span><span>किसी ने खेती शुरू की है कि नहीं</span><span>,&nbsp;</span><span>इसका अध्ययन करें। </span><span>उन्होंने कहा कि आधुनिक ज्ञान और परंपरागत ज्ञान का संगम कैसे हो</span><span>,&nbsp;</span><span>ये सोचें। हर वीसी दो-तीन बेस्ट प्रैक्टिस साझा करें। सभी विश्विद्यालय के बीच सार्थक प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए।&nbsp;</span></p>
<p data-start="1810" data-end="2080">कृषि मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताते हुए कहा कि इस वर्ष के बजट में एक नया जीन बैंक बनाने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि जीनोम एडिटिंग तकनीक से धान की दो नई किस्में विकसित की गई हैं और अब सोयाबीन, चना, तूअर जैसी फसलों पर भी काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि कम पानी में अधिक उत्पादन और क्षेत्रीय कृषि उत्पादकता को संतुलित करने के लिए लघु और दीर्घकालिक योजनाओं पर काम तेज़ी से चल रहा है और एक वर्ष की समयसीमा में प्राथमिक लक्ष्य तय किए जा रहे हैं।</p>
<p data-start="1810" data-end="2080"><span>इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी</span><span>,&nbsp;</span><span>आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट एवं सभी उप महानिदेशक</span><span>,&nbsp;</span><span>सहायक महानिदेशक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।</span></p>
<p data-start="1810" data-end="2080"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि विकास दर 5 प्रतिशत बनाए रखना हमारा लक्ष्य: शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों से की विकसित कृषि संकल्प अभियान पर  चर्चा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-singh-chauhan-discussed-viksit-krishi-sankalp-campaign-with-the-agriculture-ministers-of-the-states.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 19 May 2025 15:25:04 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
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        <description><![CDATA[ <p style="font-weight: 400;">केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याणऔर ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली के कृषि भवन से वर्चुअल माध्यम से राज्यों के कृषि मंत्रियों से बातचीत की और आगामी<span>&nbsp;</span>&lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo;को सफल बनाने का आह्वान किया। बैठक में कृषि मंत्रालय के सचिव श्री देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।&nbsp;</p>
<p style="font-weight: 400;">कृषि मंत्री ने राज्यों के कृषि मंत्रियों को 29 मई से 12 जून तक चलने वाले इस देशव्यापी अभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाने और अधिक से अधिक किसानों तक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से काम करने की बात कही। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए<span>&nbsp;</span>&lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo;<span>&nbsp;</span>एक बहुत बड़ा प्रयास है। यह देश अपना है, माटी अपनी है, किसान अपने हैं, हमारा उद्देश्य किसानों की खेती को फायदे में बदलना, खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाना, देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, अनाज, दालें, फल, सब्जियों उनके भंडार भरना और पोषणयुक्त आहार देश की जनता को उपलब्ध कराना है। मुझे खुशी है कि इस दिशा में केंद्र और राज्य सरकारें बेहतर काम कर रही हैं।</p>
<p style="font-weight: 400;">उन्होंने कहा कि इस साल रिकॉर्ड स्तर पर उत्पादन हुआ है। चाहे चावल हो, धान हो, मक्का हो यहां तक कि दाल-दलहन, तिलहन में भी हमने उत्पादन बढ़ाकर नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। केंद्र और राज्य सरकारों के कृषि मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली सभी संस्थान, विभाग, विश्वविद्यालय व अन्य संसाधनों के आपसे तालमेल से काम करने से सफलता की नई ऊंचाइयां अर्जित की जा सकती है। साझा समन्वय के साथ एक दिशा में काम करने से खेती में चमत्कार हो सकता है।</p>
<p style="font-weight: 400;">चौहान ने कहा कि<span>&nbsp;</span>&lsquo;विकसित कृषि संकल्प अभियान&rsquo;<span>&nbsp;</span>कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के सम्मिलित प्रयास से होगा। इस अभियान के अंतर्गत वैज्ञानिकों की टीम देशव्यापी स्तर पर गांव-गांव जाकर किसानों को प्रशिक्षित करने का काम करेंगी। इसके लिए 2,170 वैज्ञानिकों की टीमों का गठन किया गया है। इस अभियान में दो तरफा संवाद होगा, एक ओर वैज्ञानिक किसानों को शोध और तकनीक की जानकारी देंगे, वहीं दूसरी ओर किसानों से खेती में आ रही समस्याओं की जानकारी भी लेंगे व समाधान के रास्ते भी बताएंगे। आगे की शोध की दिशा भी तय करेंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों से की विकसित कृषि संकल्प अभियान पर  चर्चा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं की सरकारी खरीद 294.59 लाख टन के पार, 332 लाख टन का लक्ष्य पाना संभव नहीं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-wheat-procurement-crosses-294.59-lakh-tonnes-achieving-332-lakh-tonne-target-seems-unlikely.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 18 May 2025 10:42:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-wheat-procurement-crosses-294.59-lakh-tonnes-achieving-332-lakh-tonne-target-seems-unlikely.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू रबी मार्केटिंग सीजन (2025-26) में गेहूं की सरकारी खरीद लक्ष्य से कम रहने की संभावना है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के आंकड़ों के मुताबिक 15 मई, 2025 तक गेहूं की सरकारी खरीद 294.59 लाख टन रही है। हालांकि कुछ राज्यों में 30 जून तक खरीद जारी रहेगी, लेकिन सरकारी खरीद के लिए अहम दो राज्यों हरियाणा और पंजाब में खरीद 15 मई तक ही होनी थी। ऐसे में केवल मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में खरीद की अवधि 30 जून तक होने के कोई खास मायने नहीं है। इसके चलते चालू सीजन में 332 लाख टन की सरकारी खरीद का लक्ष्य हासिल होना संभव नहीं है, क्योंकि अधिकांश राज्यों में बाजार में गेहूं की कीमतें चालू सीजन के लिए तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2425 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक चल रहे हैं।</p>
<p>सबसे अधिक 119.32 लाख टन गेहूं की खरीद पंजाब से हुई है। हालांकि यह 124 लाख टन के लक्ष्य से कम है और वहां सरकारी खरीद 15 तक ही होनी थी। दूसरे नंबर पर 77.75 लाख टन की सरकारी खरीद मध्य प्रदेश से हुई है। वहां के लिए 80 लाख टन का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि मध्य प्रदेश में सरकारी खरीद की अवधि को बढ़ाकर 30 जून, 2025 तक कर दिया गया है, लेकिन वहां अब खरीद धीमी पड़ गई है। तीसरे नंबर पर हरियाणा से 70.81 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई है। वहां के लिए 75 लाख टन का लक्ष्य सरकार ने रखा था। हरियाणा में भी 15 मई तक ही खरीद होनी थी।&nbsp;</p>
<p>सबसे अधिक गेहूं पैदा करने वाले राज्य उत्तर प्रदेश में 15 मई तक गेहूं की सरकारी खरीद 9.99 लाख टन रही। प्रदेश के लिए केंद्र सरकार ने 30 लाख टन का लक्ष्य रखा है। राज्य सरकार ने भी 60 लाख टन खरीद का लक्ष्य रखा है। लेकिन यहां खरीद 10 लाख टन से कुछ अधिक रहने की संभावना है। राज्य में खरीद की अवधि 30 जून, 2025 तक रखी गई है।&nbsp;</p>
<p>राजस्थान में 16.46 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई है। राज्य के लिए 20 लाख टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है। यहां भी खरीद के लिए 30 जून, 2025 तक की अवधि तय की गई है। बाकी राज्यों में गेहूं की बहुत मामूली खरीद हुई है। तय राज्यों में दिल्ली, जम्मू एवं कश्मीर और महाराष्ट्र में कोई खरीद नहीं हुई है।</p>
<p>इस साल देश के अधिकांश गेहूं उत्पादक राज्यों में अनुकूल मौसम के चलते बेहतर उत्पादन हुआ है। मध्य प्रदेश ने गेहूं की खरीद पर 175 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया। राजस्थान ने भी 150 रुपये प्रति क्विटंल का बोनस सरकारी खरीद पर दिया है। ऐसे में उत्तर प्रदेश और पंजाब से निजी कारोबारियों और कंपनियों ने काफी खरीद की है। अधिकांश राज्यों में इस समय गेहूं के बाजार भाव एमएसपी से ऊपर चल रहे हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं की सरकारी खरीद 294.59 लाख टन के पार, 332 लाख टन का लक्ष्य पाना संभव नहीं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हेरिटेज फूड्स का रेवेन्यू 9% बढ़कर 4134 करोड़ हुआ, प्रॉफिट में 77% की बढ़ोतरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/revenue-of-heritage-foods-soars-by-9-percent-to-4134-crore-profit-soars-by-77-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 17 May 2025 14:10:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/revenue-of-heritage-foods-soars-by-9-percent-to-4134-crore-profit-soars-by-77-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत की अग्रणी डेयरी कंपनियों में एक, हेरिटेज फूड्स लिमिटेड (Heritage Foods Limited) ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अपने ऑडिटेड वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं, जिसमें कंपनी ने अब तक की सबसे अधिक वार्षिक और तिमाही रेवेन्यू की सूचना दी है। कंपनी के राजस्व में साल-दर-साल आधार पर 9% की वृद्धि हुई और यह 4134.6 करोड़ रुपये हो गई। कर बाद लाभ (PAT) में 77% की बढ़ोतरी हुई और यह 188.3 करोड़ रुपये हो गया।</p>
<p>कंपनी ने इस प्रदर्शन का श्रेय दही और पनीर जैसे प्रमुख सेगमेंट में बढ़ी हुई बाजार हिस्सेदारी, नेटवर्क का विस्तार और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पोर्टफोलियो में वृद्धि को दिया है। घी और मक्खन जैसे अधिक मार्जिन वाले VAP सेगमेंट का रेवेन्यू 19% की सालाना वृद्धि के साथ 419.8 करोड़ तक पहुंच गया और अब कंपनी की कुल आय में 40.6% का योगदान करता है।</p>
<p>कंपनी ने अपनी संचालन क्षमता में भी सुधार किया है। इसका EBITDA 58% की सालाना वृद्धि के साथ 331 करोड़ रुपये और मार्जिन बढ़कर 8% हो गया। ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन 2023-24 के 20.7% से बढ़कर 2024-25 में 25% हो गया, जो कि बेहतर उत्पाद मिश्रण और लागत पर नियंत्रण का परिणाम है।</p>
<p>दूध की खरीद में भी 10.4% की वृद्धि दर्ज की गई, जो अब औसतन 17.2 लाख लीटर प्रतिदिन (MLPD) तक पहुंच गई है। दूध की बिक्री 4.5% की सालाना वृद्धि के साथ 11.6 लाख लीटर प्रतिदिन हो गई है, और औसत बिक्री मूल्य ₹55.6 प्रति लीटर रहा।</p>
<p>एक रणनीतिक कदम के तहत कंपनी ने हेरिटेज नोवांडी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड (HNFPL) में बहुमत हिस्सेदारी 8.5 करोड़ रुपये में अधिग्रहीत की है।&nbsp;</p>
<p>कार्यकारी निदेशक ब्रह्माणी नारा ने नतीजों पर टिप्पणी करते हुए कहा, &ldquo;हमें गर्व है कि हमने अब तक का सबसे मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दिया है। वैल्यू-एडेड उत्पादों, सोर्सिंग की कुशल रणनीति और ब्रांड की मजबूती ने हमें सतत विकास की दिशा में अग्रसर किया है। हम पारंपरिक और तेजी से बढ़ते क्यू-कॉमर्स चैनल, दोनों में अपनी उपस्थिति को लगातार मजबूत कर रहे हैं।&rdquo;</p>
<p>हेरिटेज न्यूट्रिवेट लिमिटेड, जो कि कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली पशु चारा इकाई है, ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। इसका राजस्व सालाना आधार पर 15.5% बढ़कर 184.9 करोड़ रुपये हो गया और कर बाद लाभ 137% बढ़कर 12.4 करोड़ तक पहुंच गया। कंपनी 19 मई 2025 को एक अर्निंग्स कॉल आयोजित करेगी, जिसमें विस्तृत वित्तीय परिणामों पर चर्चा की जाएगी।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_68284b40b245f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हेरिटेज फूड्स का रेवेन्यू 9% बढ़कर 4134 करोड़ हुआ, प्रॉफिट में 77% की बढ़ोतरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[IIT बॉम्बे की TIH फाउंडेशन ने एयरबॉट्स एयरोस्पेस में निवेश किया, भारत में स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलॉजी को मिलेगा बढ़ावा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/tih-foundation-of-iit-bombay-invests-in-airbots-aerospace-to-advance-indigenous-drone-innovation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 17 May 2025 13:29:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/tih-foundation-of-iit-bombay-invests-in-airbots-aerospace-to-advance-indigenous-drone-innovation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत की अग्रणी एग्री-ड्रोन स्टार्टअप एयरबॉट्स एयरोस्पेस (Airbots Aerospace) को IIT बॉम्बे की टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब फाउंडेशन (Technology Innovation Hub Foundation) से महत्वपूर्ण निवेश प्राप्त हुआ है। यह रणनीतिक फंडिंग भारत में स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित स्मार्ट ड्रोन के विकास को गति देगी।</p>
<p>कृषि ड्रोन, ड्रोन-एज-ए-सर्विस (DaaS) और स्मार्ट मिशन सॉफ्टवेयर में अग्रणी एयरबॉट्स एयरोस्पेस अब IIT बॉम्बे के अनुसंधान सहयोग से डिफेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि के लिए एडवांस्ड ड्रोन प्लेटफॉर्म तैयार करेगी।</p>
<p>एयरबॉट्स के सह-संस्थापक और एमडी दानिश घोरी ने कहा, &ldquo;TIH फाउंडेशन का यह निवेश हमें भारतीय ड्रोन इकोसिस्टम में मौजूद कमियों को स्थानीय इनोवेशन के जरिए भरने में मदद करेगा। हमारा फोकस प्रिसीजन फार्मिंग, पब्लिक सेफ्टी और अन्य क्षेत्रों पर है।&rdquo;</p>
<p>सीईओ विशाल कपाड़िया ने कहा, &ldquo;IIT बॉम्बे की रिसर्च और TIH फाउंडेशन के सहयोग से हम वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और पूरी तरह भारतीय ड्रोन सॉल्यूशंस को स्केल करने के लिए तैयार हैं।&rdquo;</p>
<p>एयरबॉट्स एयरोस्पेस को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से टाइप सर्टिफिकेशन मिल चुका है। इसके पास चार पेटेंट हैं और यह हजारों एकड़ में सूर्य शक्ति 15 एल स्मार्ट किसान ड्रोन (Surya Shakti 15L Smart Kisan Drone) का सफल परीक्षण कर चुकी है। इसके 75% से अधिक कंपोनेंट स्थानीय रूप से सोर्स किए जाते हैं। नया निवेश AI-इनेबल्ड एग्री-ड्रोन, मल्टी-सेंसर डेटा प्लेटफॉर्म और स्मार्ट मिशन सॉफ्टवेयर के विकास को तेज करेगा।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_68284148c65ca.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ IIT बॉम्बे की TIH फाउंडेशन ने एयरबॉट्स एयरोस्पेस में निवेश किया, भारत में स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलॉजी को मिलेगा बढ़ावा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कंप्रेस्ड बायोगैस सेक्टर को प्रोत्साहन, सरकार ने सीबीजी का खरीद मूल्य बढ़ाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cbg-sector-gets-major-boost-as-govt-revises-procurement-price.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 16 May 2025 21:27:55 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cbg-sector-gets-major-boost-as-govt-revises-procurement-price.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-sourcepos="1:1-1:380">कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) सेक्टर के हित में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने सीबीजी के खरीद मूल्य को 1380 रुपये/MMBTU से बढ़ाकर 1478 रुपये/MMBTU (जीएसटी अतिरिक्त) करने की घोषणा की है। यह नया मूल्य 1 जून से 31 अक्टूबर 2025 तक प्रभावी रहेगा। कंप्रेस्शन चार्ज 8 रुपये/किलोग्राम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।</p>
<p data-sourcepos="3:1-3:352">इस संशोधन के तहत वजन आधारित <strong>सीबीजी खरीद मूल्य</strong> को लगभग 72.8 रुपये/किलोग्राम से बढ़ाकर<strong> 77.4</strong> रुपये/किलोग्राम (50 किमी तक डिलीवरी, कंप्रेस्शन चार्ज सहित, जीएसटी को छोड़कर, 95% मीथेन कंटेट पर) किया गया है। साथ ही मंत्रालय ने 50-75 किमी की दूरी के लिए 1.5 रुपये/किलोग्राम और 75 किमी से अधिक की दूरी के लिए 2.5 रुपये/किलोग्राम की अतिरिक्त परिवहन सहायता की भी घोषणा की है।</p>
<p data-sourcepos="5:1-5:322"><strong>कंप्रेस्ड बायोगैस</strong> उत्पादकों की ओर से काफी समय से सीबीजी के खरीद मूल्य में बढ़ोतरी की मांग की जा रही थी। <strong>इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी</strong> (IFGE) सीबीजी प्रोड्यूसर फोरम ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे परियोजना की व्यवहार्यता, कैश फ्लो संबंधी चिंताओं को दूर करने और निवेशकों का भरोसा बनाए रखने में मदद मिलेगी।</p>
<p data-sourcepos="7:1-7:409">आईएफजीई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और सीबीजी प्रोड्यूसर फोरम के अध्यक्ष <strong>वाई. बी. रामकृष्ण</strong> ने कहा, &ldquo;यह मूल्य संशोधन क्षेत्र की चुनौतियों को स्वीकार करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हम मंत्रालय और ऑयल एंड गैस मार्केटिंग कंपनियों का आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने उद्योग की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए विश्वास बहाल किया है। FOM/LFOM MDA और ग्रीन गैस प्रमाणन नीति में संशोधन से यह उद्योग और अधिक टिकाऊ बनेगा।&rdquo;</p>
<p data-sourcepos="9:1-9:327"><strong>आशीष कुमार,</strong> उपाध्यक्ष, आईएफजीई एवं उपाध्यक्ष, CBG प्रोड्यूसर फोरम ने मूल्य स्थिरता पर बल देते हुए कहा, &ldquo;फ्लोर प्राइस की समीक्षा और संशोधन की एक व्यवस्थित प्रक्रिया को संस्थागत बनाना निवेश के दृष्टिकोण से CBG क्षेत्र को मजबूती देगा। CGD कंपनियों सहित सभी प्राकृतिक गैस हितधारकों की मजबूत भागीदारी से इस क्षेत्र का आकर्षण और बढ़ेगा।&rdquo;</p>
<p data-sourcepos="11:1-11:204">आईएफजीई के महानिदेशक <strong>संजय गंजू</strong> ने कहा कि यह निर्णय सरकार की स्वच्छ ऊर्जा और सर्कुलर इकोनॉमी के लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हम निरंतर इस सेक्टर के विकास में मददगार नीतियों की आशा करते हैं।</p>
<p data-sourcepos="13:1-13:162">आईएफजीई सीबीजी प्रोड्यूसर फोरम ने भारत को हरित गैस उत्पादन और ऊर्जा संक्रमण में अग्रणी बनाने के लिए सभी हितधारकों के साथ मिलकर प्रयास करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_6827605d988bd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कंप्रेस्ड बायोगैस सेक्टर को प्रोत्साहन, सरकार ने सीबीजी का खरीद मूल्य बढ़ाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_6827605d988bd.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने चना, मसूर, उड़द और अरहर की खरीद के संबंध में दिए दिशा&amp;#45;निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-singh-gave-instructions-regarding-the-purchase-of-gram-lentil-urad-and-arhar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 12 May 2025 15:34:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-singh-gave-instructions-regarding-the-purchase-of-gram-lentil-urad-and-arhar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>&nbsp;केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि भवन, नई दिल्ली में समीक्षा बैठक की और वरिष्ठ अधिकारियों को किसानों से चना, मसूर, उड़द एवं अरहर की खरीद के संबंध में निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था की जानr चाहिए जिससे किसानों को उनकी उपज खरीद का भुगतान होने में देरी नहीं हो।&nbsp;</p>
<p>समीक्षा बैठक में, केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि चावल-गेहूं का वास्तविक स्टॉक, बफर मानक के मुकाबले ज़्यादा है।उन्होंने चना, मसूर, उड़द व अरहर की खरीद के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए इस संबंध में राज्यों को विशेष जोर देने को कहा, ताकि किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। एमएसपी पर खरीद व किसानों को होने वाले भुगतान के बीच के समय अंतराल को और कम करने के लिए निर्देशित किया ताकि उपज खरीद के बाद किसानों को जल्द से जल्द भुगतान हो सके, इसके लिए ओर सुद्ढ़ व्यवस्था होना चाहिए।</p>
<p>बैठक में मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि धान, दलहन, श्री अन्न-मोटे अनाज व तिलहन की उपज में प्रगति हुई है। ग्रीष्मकालीन बुआई के मौसम में 2 मई तक धान की बुआई में पिछले वर्ष की तुलना में 3.44 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। धान की बुआई वर्ष 2023-24 के 28.57 लाख हेक्टेयर से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 32.02 लाख हेक्टेयर हो गई है, वहीं दलहन की बुआई में भी 2.20 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। दलहन की बुआई वर्ष 2023-24 के 18.47 लाख हेक्टेयर की तुलना में वर्ष 2024-25 में 20.67 हो गई है। मूंग व उड़द के रकबे में भी 2 मई 2025 तक क्रमशः 1.70 लाख हेक्टेयर और 0.50 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है।</p>
<p>बैठक में बताया गया कि देश में मौसम तथा जलाशयों की स्थिति बेहतर है। पिछले वर्ष की तुलना में कुल जल संग्रहण की स्थिति अच्छी है। 161 जलाशयों में उपलब्ध संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि के संग्रहण का 117% और पिछले दस वर्षों के औसत संग्रहण का 114% है।</p>
<p>बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण सचिव देवेश चतुर्वेदी, अतिरिक्त सचिव मनिंदर कौर द्विवेदी तथा केंद्रीय कृषि आयुक्त&nbsp; पी.के. सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने चना, मसूर, उड़द और अरहर की खरीद के संबंध में दिए दिशा-निर्देश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मानसून 2025: समय से पहले दस्तक, सामान्य से अधिक बारिश की उम्मीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-2025-in-india-early-arrival-above-normal-rainfall-expected.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 12 May 2025 08:58:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-2025-in-india-early-arrival-above-normal-rainfall-expected.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून 2025 को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया है। विभाग के अनुसार, इस साल मानसून केरल तट पर सामान्य तिथि 1 जून से पांच दिन पहले, यानी 27 मई को दस्तक दे सकता है। यह 16 साल में पहला अवसर होगा, जब मानसून इतनी जल्दी केरल पहुंचेगा। इससे पहले 2009 में मानसून 23 मई को केरल में प्रवेश किया था।&nbsp;</p>
<p>मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, इस साल जून से सितंबर तक चार महीने के मानसून सीजन में देश में औसत से 105% अधिक बारिश होने की संभावना है। औसतन 87 सेंटीमीटर बारिश की तुलना में इस बार लगभग 91 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है।&nbsp;</p>
<p>मानसून केरल में प्रवेश करने के बाद तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में जून के पहले हफ्ते तक पहुंचेगा। जून के दूसरे और तीसरे हफ्ते में यह बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में फैल जाएगा। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में मानसून 25-30 जून के आसपास पहुंचने की संभावना है। जुलाई के पहले हफ्ते तक मानसून पूरे देश को कवर कर लेगा।</p>
<p>हालांकि, बारिश का वितरण पूरे देश में एकसमान नहीं होगा। लद्दाख, पूर्वोत्तर भारत और तमिलनाडु में सामान्य से कम बारिश की संभावना है, जबकि देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा होने का अनुमान है। हालांकि, जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसमें कम समय में भारी बारिश और बाढ़ की घटनाएं बढ़ सकती हैं</p>
<p><strong>अनुकूल मौसमी परिस्थितियां</strong></p>
<p>मौसम विभाग के प्रमुख मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि इस साल एल-नीनो की स्थिति विकसित होने की संभावना नहीं है, जो आम तौर पर कम बारिश का कारण बनती है। इसके विपरीत, ला-नीना की वापसी और इंडियन ओशियन डाइपोल (IOD) की सामान्य स्थिति मानसून को मजबूती प्रदान कर सकती है। इसके अलावा, यूरेशिया और हिमालयी क्षेत्रों में कम बर्फबारी भी अधिक बारिश का संकेत देती है।</p>
<p><strong>कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर</strong></p>
<p>अच्छा मानसून खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, अरहर और सोयाबीन की पैदावार को बढ़ावा देगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र में सुधार होगा। इससे खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। साथ ही, जलाशयों का स्तर बढ़ने से पेयजल और सिंचाई की उपलब्धता में वृद्धि होगी, जो जल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।</p>
<p><strong>गर्मी और अन्य मौसमी चेतावनियां</strong></p>
<p>मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि मई और जून में उत्तर-पश्चिम भारत, विशेष रूप से राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब में सामान्य से अधिक गर्मी और लू की स्थिति रह सकती है। पूर्वी भारत में 14 मई तक उष्ण लहर की संभावना है।&nbsp;</p>
<p>समय से पहले मानसून का आगमन और सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान न केवल कृषि क्षेत्र को मजबूती देगा, बल्कि अर्थव्यवस्था और जल संसाधनों को भी लाभ पहुंचाएगा। हालांकि, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए क्षेत्रीय असमानताओं और भारी बारिश की घटनाओं के लिए तैयार रहना जरूरी है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मानसून 2025: समय से पहले दस्तक, सामान्य से अधिक बारिश की उम्मीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि मंत्री शिवराज ने की समीक्षा बैठक, सीमावर्ती जिलों के किसानों के लिए समुचित व्यवस्था के दिए निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-minister-shivraj-singh-takes-stock-of-situation-asks-officials-to-help-farmers-near-border.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 10 May 2025 19:16:26 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-minister-shivraj-singh-takes-stock-of-situation-asks-officials-to-help-farmers-near-border.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुजरात, राजस्थान, पंजाब और जम्मू-कश्मीर राज्यों के सीमावर्ती जिलों के किसानों की खेती एवं उनके लिए उपलब्ध खाद-बीज और अन्य संसाधनों के संबंध में समीक्षा बैठक की। बैठक में केंद्रीय मंत्री ने इन जिलों के किसानों के कृषि संबंधी कार्यों की समुचित व्यवस्थाओं के संबंध में आवश्यक दिशानिर्देश दिए।</p>
<p>शिवराज ने कहा कि सीमा पर अभी जो परिस्थितियां हैं, उसमें कई किसान भाइयों को सुरक्षा कारणों से उनके खेतों से थोड़ा दूर रखा गया है ताकि उनकी जिंदगी सुरक्षित रहे। लेकिन अब ये जरूरी है कि सीमावर्ती क्षेत्र के हर राज्य के किसान चाहे वो पंजाब के हों, राजस्थान के हों, जम्मू-कश्मीर के हों, या अन्य प्रांतों के हों, उनकी खेती हम कैसे सुरक्षित रख पाएं, ये हमारी जिम्मेदारी है।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने आला अधिकारियों को दिशानिर्देश देते हुए कहा कि अभी सीमावर्ती किसान अगर खेती नहीं कर पा रहे हैं तो कल उन्हें किस तरह के सीड्स की जरूरत होगी, विशेषकर खरीफ की फसल के लिए, प्लांटिंग मैटेरियल आदि क्या चाहिए इनकी आवश्यकता का एक बार हम आकलन कर लें। उसके बाद हम इन सभी चीजों को उपलब्ध कराएं ताकि वो खरीफ की बोवनी ठीक कर सकें।&nbsp;</p>
<p>शिवराज ने कहा कि यूरिया, डीएपी, एनपीके जैसे पेट्रोकेमिकल आधारित इनपुट्स और डीजल की आपूर्ति की समीक्षा की जाएगी, हालांकि देश में इनकी अभी कोई कमी नहीं है। आवश्यक वस्तुओं की बफर स्टॉक की उपलब्धता और अन्य उठाए गए मुद्दों की भी समीक्षा की जाएगी। संबंधित मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों से बात करके यह जाना जाएगा कि उन्हें कृषि या ग्रामीण विकास विभाग से किस प्रकार का सहयोग चाहिए।</p>
<p>उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि सीमा के 10-15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों की पहचान करें और वहां कितनी खेती योग्य जमीन है, इसका आकलन किया जाए। इन गांवों में खरीफ की कौन-कौन सी फसलें बोई जाती हैं, इसका डेटा पंजाब, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश के लिए जुटाएं और &nbsp;जिन किसानों की खेतों तक पहुंच नहीं है, उनकी मदद कैसे की जाए, इसका प्लान राज्य सरकारों के साथ मिलकर बनाएं। खरीफ की बोनी प्रभावित न हो, इसके लिए किसानों से संपर्क कर उनकी सहायता की जाएगी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि मंत्री शिवराज ने की समीक्षा बैठक, सीमावर्ती जिलों के किसानों के लिए समुचित व्यवस्था के दिए निर्देश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में गन्ने का 44% रकबा रोगग्रस्त किस्म का, देश का चीनी उत्पादन 20% गिरा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/44-pc-of-sugarcane-area-in-up-is-of-diseased-variety-sugar-production-falls-by-20-pc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 09 May 2025 17:51:36 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/44-pc-of-sugarcane-area-in-up-is-of-diseased-variety-sugar-production-falls-by-20-pc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू पेराई सीजन 2024-25 (अक्तूबर से सितंबर) में देश का चीनी उत्पादन पिछले साल के मुकाबले लगभग 60 लाख टन यानी करीब 20 फीसदी गिर गया है। पिछले साल देश में 320 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था, जबकि चालू सीजन में चीनी उत्पादन 260 लाख टन से आसपास रहने के आसार हैं। देश में इक्का-दुक्का चीनी मिलों को छोड़कर 533 मिलों में से अधिकांश मिलों में पेराई बंद हो चुकी है।</p>
<p><strong>30 अप्रैल</strong> तक के आंकड़ों के अनुसार, देश का चीनी उत्पादन <strong>25</strong><strong>6.90</strong><strong> लाख</strong> टन तक ही पहुंचा है। सरकार द्वारा चीनी निर्यात की अनुमति देने और उत्पादन में गिरावट के चलते घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ी हैं। लेकिन इसके बावजूद देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य <strong>उत्तर प्रदेश</strong> के गन्ना किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। यह चीनी उद्योग के लिए भी एक संकट की आहट है।&nbsp;</p>
<p>इसकी दो वजहें हैं। पहला, यूपी के करीब आधे गन्ना क्षेत्र में अब भी रोगग्रस्त हो चुकी किस्म <strong>सीओ-0238</strong> उगाई जा रही है, जिसके चलते कई जिलों में 20 फीसदी तक उत्पादन गिरा है। दूसरा, राज्य सरकार द्वारा गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) को पिछले साल 2023-24 के स्तर पर फ्रीज रखा गया है। इस तरह गन्ना किसानों पर दोहरी मार पड़ी। एक तरफ पैदावार घटी, दूसरी तरफ भाव नहीं बढ़ा। &nbsp;</p>
<p>देश के दूसरे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य <strong>महाराष्ट्र</strong> में भी गन्ने की फसल के जनवरी में ही फ्लावरिंग स्टेज में चले जाने के कारण उत्पादन में गिरावट आई और वहां चीनी मिलें 90 दिन भी पेराई नहीं कर सकी। ऐसी ही स्थिति तीसरे बड़े चीनी उत्पादक राज्य <strong>कर्नाटक</strong> की है।</p>
<p>उद्योग संगठनों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन पिछले साल से करीब 12 लाख टन घटकर करीब 91 लाख टन रहने के आसार हैं। वहीं महाराष्ट्र में यह पिछले साल से करीब 30 लाख टन घटकर 80.70 लाख टन रहने का अनुमान है। कर्नाटक में उत्पादन 12 लाख टन घटकर 42 लाख टन रहने का अनुमान है।</p>
<p>चीनी उत्पादन में गिरावट के बीच यूपी की स्थिति खासतौर पर चिंताजनक है। जहां किसानों के लिए अन्य फसलों के मुकाबले गन्ने की फसल बहुत फायदेमंद नहीं रह गई हैं, वहीं गन्ने की कमी के चलते चीनी मिलों के जल्द बंद होने से उनकी बिजनेस व्यवहार्यता पर संकट खड़ा हो सकता है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में एक दशक पहले गन्ना प्रजाति <strong>सीओ-0238</strong> ने किसानों और चीनी मिलों के लिए एक क्रांति ला दी थी। इससे गन्ने की पैदावार 30 फीसदी तक बढ़ी और किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। साथ ही, चीनी रिकवरी का स्तर कुछ चीनी मिलों में 13 फीसदी को पार कर गया था। सीओ-0238 किस्म की कामयाबी से यूपी में गन्ना इकोनॉमी और चीनी उद्योग को खूब लाभ हुआ। &nbsp;इसी के चलते 2020-21 में यूपी के कुल गन्ना क्षेत्रफल 27.40 लाख हेक्टेयर में से 86.70 फीसदी क्षेत्र सीओ-0238 प्रजाति के तहत आ गया था। जो इसका उच्चतम स्तर था।</p>
<p><strong>कृषि वैज्ञानिकों</strong> का कहना है कि यह स्थिति किसी भी फसल के लिए आदर्श नहीं है क्योंकि किसी फसल का अधिकांश रकबा एक ही प्रजाति के तहत आना नुकसानदेह साबित होता है। यूपी में यही हुआ। कुछ साल पहले गन्ने की सीओ-0238 प्रजाति रोगग्रस्त होने लगी। लेकिन इसका कोई विकल्प किसानों के पास बड़े पैमाने पर नहीं था। किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों और चीनी मिलों द्वारा मना किए जाने के बावजूद सीओ-0238 किस्म को उगाना जारी रखा। क्योंकि ऐसी कोई दूसरी किस्म विकसित नहीं की गई जो सीओ-0238 की तरह परिणाम दे सके। सीओ-0238 किस्म में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के प्रकोप के चलते किसानों का कीटनाशकों पर खर्च बढ़ा और पैदावार में भारी गिरावट आई।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के <strong>चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग</strong> के आंकड़ों के अनुसार,&nbsp;वर्ष 2024-25 में भी राज्य के कुल गन्ना क्षेत्र 28.25 हेक्टेयर में से 44.45 फीसदी क्षेत्र सीओ-0238 प्रजाति का था। दूसरे नंबर पर सीओ-0118 किस्म है जिसका रकबा 22.14 फीसदी है। राज्य में इनके अलावा 9 अन्य गन्ना प्रजातियां उगाई जा रही हैं जिनका रकबा 0.05 फीसदी से 9.37 फीसदी के बीच है। कुल गन्ना क्षेत्र में दो-तिहाई हिस्सा दो प्रमुख किस्मों का है जबकि बाकी किस्मों का अधिक प्रसार नहीं हुआ है। &nbsp;यह केंद्र और राज्य सरकारों के गन्ना शोध से जुड़े संस्थानों की भी नाकामी है कि कई वर्षों से रोगग्रस्त होने के बावजूद गन्ना किसानों को सीओ-0238 का कारगर विकल्प नहीं मिल पाया।</p>
<p>संभवत: यही वजह है कि यूपी में गन्ने की बुवाई के क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई है। राज्य में वर्ष में 2024-25 में गन्ने का रकबा करीब 50 हजार हेक्टेयर घटा है। साल 2023-24 में यूपी का कुल गन्ना क्षेत्र 28.74 लाख हेक्टेयर था जो 2024-25 में घटकर 28.25 लाख हेक्टेयर रह गया।</p>
<p>गन्ने की बीमारी, बढ़ती लागत, पैदावार में गिरावट और दाम न बढ़ने से यूपी के किसानों को गन्ने से मोहभंग हुआ है और वे दूसरी फसलों या एग्रो-फॉरेस्ट्री का रुख कर रहे हैं। यह चीनी उद्योग के लिए परेशान का सबब है।</p>
<p>&nbsp;उत्तर प्रदेश के एक बड़ी चीनी मिल समूह के <strong>वरिष्ठ अधिकारी</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि अगर यही स्थिति रही तो चीनी उद्योग में किया निवेश मुश्किल में पड़ सकता है। चीनी और इथेनॉल उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए चीनी उद्योग ने क्षमता विस्तार पर काफी निवेश किया है। &nbsp;इसलिए अब चीनी उद्योग को गन्ना उत्पादन की चिंता हो रही है। इसके लिए किसानों को गन्ने का बेहतर दाम देना और उन्नत किस्में मुहैया कराने की जरूरी हो गया है। राज्य सरकार भी गन्ने की समस्या को लेकर चिंतित है। क्योंकि कुछ जिलों में सीओ-0238 किस्म का क्षेत्र 70 फीसदी तक है।</p>
<p>देश में लगातार दूसरे साल चीनी उत्पादन में गिरावट आई है। गन्ना उत्पादन में कमी के चलते गन्ना जूस और बी-हैवी मोलेसेज से इथेनॉल उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। पेराई सीजन शुरू होने के दो महीने बाद ही कई चीनी मिलों ने गन्ना जूस और बी-हैवी मोलासेस से इथेनॉल बनाना बंद कर दिया था। क्योंकि चीनी के दाम बेहतर मिल रहे थे। वर्ष 2024-25 में 50 लाख टन चीनी के इथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट होने का अनुमान था, जिसमें से अभी तक केवल <strong>29 लाख</strong> टन के बराबर चीनी का डार्यवर्जन हुआ जो सीजन के आखिर तक 32 लाख टन तक पहुंचेगा।</p>
<p>इस तरह अगर गन्ना उत्पादन में गिरावट जारी रहती है तो चीनी ही नहीं बल्कि इथेनॉल उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम तेल कंपनियों की ओर से इथेनॉल के लिए जारी मौजूदा टेंडर में केवल सी-हैवी मोलेसेज और खाद्यान्न से बनने वाले इथेनॉल को ही शामिल किया गया है।</p>
<p>चीनी मिलों के लिए गन्ने के रस और बी-हैवी मोलासेस से इथेनॉल बनाने की बजाय चीनी बनाना अधिक लाभदायक हो रहा है। गत दिसंबर में 10 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति मिलने और चीनी उत्पादन में गिरावट को देखते हुए घरेलू बाजार में चीनी के दाम बढ़ने लगे। उत्तर प्रदेश में चीनी का एक्स फैक्टरी भाव 4200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था। मतलब, चीनी मिलों के पास कमाई के मौके हैं लेकिन पर्याप्त गन्ना नहीं मिल पा रहा है।&nbsp;</p>
<p>ऐसे में चीनी उद्योग को अगले सीजन की चिंता सता रही है। गेहूं की बेहतर कीमतों के चलते गेहूं व धान चक्र किसानों के लिए फायदेमंद बन गया है। क्रॉप इनकम पैरिटी में गन्ना पिछड़ रहा है। इसलिए किसानों को गन्ने का बेहतर दाम दिलाना और गन्ने की उन्नत किस्मों का प्रसार जरूरी है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में गन्ने का 44% रकबा रोगग्रस्त किस्म का, देश का चीनी उत्पादन 20% गिरा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_681df11960069.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत ने पाकिस्तान के ड्रोन व मिसाइल हमलों को नाकाम किया, लाहौर में एयर डिफेंस सिस्टम किया ध्वस्त]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-foiled-pakistans-drone-and-missile-attacks-air-defence-system-destroyed-in-lahore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 08 May 2025 18:17:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-foiled-pakistans-drone-and-missile-attacks-air-defence-system-destroyed-in-lahore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में कई आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। इस कार्रवाई से पाकिस्तान बौखला गया है। भारत सरकार का आधिकारिक बयान आया है कि पाकिस्तान ने भारत के 15 शहरों पर ड्रोन व मिसाइल हमलों का प्रयास किया, जिसे नाकाम कर दिया गया। इसके बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें लाहौर का एयर डिफेंस सिस्टम तबाह हो गया है।</p>
<p>पाकिस्तान ने 7-8 <span>मई की रात को भारत के </span><span>जिन सैन्य ठिकानों पर हमला करने का प्रयास किया उनमें अवंतीपुरा</span>, <span>श्रीनगर</span>, <span>जम्मू</span>, <span>पठानकोट</span>, <span>अमृतसर</span>, <span>कपूरथला</span>, <span>जालंधर</span>, <span>लुधियाना</span>, <span>आदमपुर</span>, <span>भटिंडा</span>, <span>चंडीगढ़</span>, <span>नल</span>, <span>फलोदी</span>, <span>उत्तरलाई और भुज सहित उत्तर और पश्चिमी भारत के कई शहर शामिल हैं। </span></p>
<p><strong>रक्षा मंत्रालय</strong> की ओर से जारी बयान के अनुसार, <span>भारत ने पाकिस्तान के हमलों को इंटीग्रेटेड काउंटर </span>UAS<span> ग्रिड और एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा नाकाम कर दिया। इन हमलों के मलबे कई स्थानों से बरामद किए जा रहे हैं</span>, <span>जो पाकिस्तानी हमलों की पुष्टि करते हैं।</span></p>
<p>रक्षा मंत्रालय ने बताया कि आज सुबह भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान में कई जगहों पर वायु रक्षा रडार और प्रणालियों को निशाना बनाया। भारत का जवाब उसी क्षेत्र और तीव्रता में था जैसा पाकिस्तान का हमला था। पक्की जानकारी है कि लाहौर में एक एयर डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त कर दिया गया है।</p>
<p><strong>एस-</strong><strong>400 (<span>सुदर्शन चक्र) ने नाकाम किया पाकिस्तानी हमला </span></strong></p>
<p>भारतीय वायुसेना के 'सुदर्शन चक्र' एस-400<span> एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम ने पाकिस्तान के हमलों को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई। इसे भारत की हवाई सुरक्षा का कवच माना जाता है। सूत्रों के अनुसार</span>,&nbsp;<span>ऑपरेशन सिंदूर जारी है और अब तक </span>100 <span>से अधिक आतंकी भारतीय सेना की कार्रवाई में मारे गए हैं।</span></p>
<p><strong>एलओसी पर पाक की गोलीबारी में 16 लोगों की जान गई </strong></p>
<p>पाकिस्तान नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भारी गोलाबारी कर रहा है। उसने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा, <span>बारामुल्ला</span>, <span>उरी</span>, <span>पुंछ</span>, <span>मेंढर और राजौरी सेक्टरों में मोर्टार और भारी तोपों का इस्तेमाल करते हुए नियंत्रण रेखा के पार गोलीबारी बढ़ा दी है। पाकिस्तान की गोलीबारी में 16 निर्दोष लोगों की जान चली गई</span>, <span>जिनमें तीन महिलाएं और पांच बच्चे शामिल हैं। वहां भी भारत ने पाकिस्तान की ओर से मोर्टार और आर्टिलरी फायर का उचित जवाब दिया।&nbsp;</span></p>
<p><strong>तनाव न बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई</strong><strong>&nbsp;</strong></p>
<p>रक्षा मंत्रालय के अनुसार, <span>भारतीय सेना तनाव न बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराती है</span>, <span>लेकिन यह तभी संभव है जब पाकिस्तान की सेना भी इसका पालन करे।&nbsp;</span></p>
<p>22 मई को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने 7 मई को &ldquo;ऑपरेशन सिंदूर&rdquo; के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी। भारत ने इसे सधी हुई, <span>संयत और गैर-भड़काऊ प्रतिक्रिया करार देते हुए कहा कि पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना नहीं बनाया गया। साथ ही यह भी दोहराया कि अगर भारत के सैन्य ठिकानों पर हमला किया जाता है</span>, <span>तो उसका उचित जवाब दिया जाएगा।</span></p>
<p><strong>सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक </strong></p>
<p>गुरुवार को केंद्र सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी देने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई।&nbsp;बैठक में राहुल गांधी, <span>मल्लिकार्जुन खड़गे</span>, <span>एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी सहित कई दलों के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया। सभी दलों ने सेना की कार्रवाई की सराहना करते हुए आतंकवाद से निपटने में सरकार के प्रयासों को पूरा समर्थन दिया। कांग्रेस अध्यक्ष <strong>मल्लिकार्जुन खड़गे</strong> ने कहा</span>, "<span>इस संकट की घड़ी में हम सब सरकार के साथ हैं </span><span>और देशहित में सरकार के साथ रहेंगे।"</span></p>
<p><span></span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत ने पाकिस्तान के ड्रोन व मिसाइल हमलों को नाकाम किया, लाहौर में एयर डिफेंस सिस्टम किया ध्वस्त ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौते के भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि के लिए क्या मायने?]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/what-does-the-trade-agreement-with-britain-mean-for-the-indian-economy-and-agriculture.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 07 May 2025 19:12:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/what-does-the-trade-agreement-with-britain-mean-for-the-indian-economy-and-agriculture.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>विश्व व्यापार में अनिश्चितता के बीच भारत और ब्रिटेन मंगलवार को एक व्यापक और ऐतिहासिक <strong>मुक्त व्यापार समझौते</strong> (एफटीए) पर सहमत हुए। करीब तीन साल चली बातचीत के बाद दोनों देशों ने इस समझौते को अंतिम रूप दिया। 2020 में ब्रेक्सिट के बाद इसे ब्रिटेन का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक कदम माना जा रहा है।</p>
<p>भारत के प्रधानमंत्री <strong>नरेंद्र मोदी</strong> और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री<strong> किएर स्मार्टर</strong> द्वारा 6 मई को घोषित मुक्त व्यापार समझौते से विश्व की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। भारत और ब्रिटेन के बीच करीब 60 अरब डॉलर का व्यापार होता है। इस समझौते से वर्ष 2040 तक इसमें 34 अरब डॉलर का इजाफा होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महत्वाकांक्षी और आपसी लाभकारी व्यापार समझौते को 'ऐतिहासिक मील का पत्थर' बताया है।</p>
<p>समझौते के मुताबिक, भारत ब्रिटेन के 90% उत्पादों पर टैरिफ कम करेगा। इनमें व्हिस्की, मेडिकल उपकरण और ऑटोमोबाइल प्रमुख हैं। ब्रिटेन के 85% उत्पाद एक दशक के भीतर टैरिफ-मुक्त हो जाएंगे। ब्रिटेन में बनी व्हिस्की और जिन पर टैरिफ 150% से आधा होकर 75% होगा और 10 साल में घटकर 40% रह जाएगा। कारों पर टैरिफ 100% से घटकर 10% होगा। ब्रिटेन के जिन अन्य सामानों पर टैरिफ घटेगा, उनमें सौंदर्य प्रसाधन, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रिकल्स, भेड़ का मांस, शीतल पेय, चॉकलेट और बिस्कुट शामिल हैं। इस प्रकार ब्रिटेन के विभिन्न उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में अवसर बढ़ने जा रहे हैं, जिसका लाभ ब्रिटेन की कंपनियों और निर्यातकों को मिलेगा। &nbsp;</p>
<p>ब्रिटेन के व्यापार सचिव&nbsp;<strong>जोनाथन रेनॉल्ड्स</strong> ने कहा कि भारत के साथ यह समझौता यू.के. द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा व्यापार सौदा है। इससे हमारी अर्थव्यवस्था व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>सवाल है कि इसके बदले में भारत को क्या मिलेगा? समझौते के तहत ब्रिटेन भी भारतीय उत्पादों पर टैरिफ कम करेगा। भारत 99% उत्पाद ब्रिटेन में टैरिफ मुक्त यानी ड्यूटी-फ्री होंगे। इससे सबसे ज्यादा फायदा भारत के टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।</p>
<p>इसके अलावा भारत के मरीन प्रोडक्ट्स, लेदर, फुटवियर, खेल के सामान, खिलौने, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग वस्तुएं और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों के लिए भी ब्रिटेन में निर्यात के अवसर बढ़ेंगे। टैरिफ मुक्त होने का फायदा भारत के&nbsp;अंगूर, आम और प्रोसेस्ड फूड सहित कृषि निर्यात को मिल सकता है। बशर्ते भारतीय उत्पाद गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरें और गैर-टैरिफ बाधाओं को पार कर ड्यूटी-फ्री पहुंच का लाभ उठा सकें।</p>
<p>वाणिज्य और उद्योग मंत्री <strong>पीयूष गोयल</strong> ने कहा कि यह दूरदर्शी समझौता हमारे किसानों, मछुआरों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स, निर्यातकों को लाभान्वित करता है और भारत के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है।</p>
<p>मुक्त व्यापार समझौते के साथ ही भारत और ब्रिटेन के बीच <em>डबल कंट्रीब्यूशन कॉन्वेंशन </em>को लेकर भी सहमति बनी गई है। इससे ब्रिटेन में अस्थायी रूप से रह रहे भारतीय कामगारों और उनके नियोक्ताओं को सामाजिक सुरक्षा अंशदान का भुगतान करने से तीन साल की छूट मिलेगी। इसका फायदा ब्रिटेन में कार्यरत भारतीयों को मिलेगा। साथ ही भारतीय पेशेवरों की आवाजाही को भी आसान बनाया जाएगा। भारत सरकार का कहना है इस समझौते से योग्य और कुशल भारतीय युवाओं के लिए ब्रिटेन में तमाम अवसर खुलेंगे।</p>
<p>भारत ने अपने डेयरी क्षेत्र को अभी तक यूरोप के डेयरी उत्पादों की प्रतिस्पर्धा से बचाकर रखा है। माना जा रहा है कि भारत डेयरी किसानों के हितों को इस व्यापार समझौते में भी सुरक्षित रखेगा। हालांकि, अभी इस बारे में बहुत स्पष्टता नहीं है।</p>
<p>फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के अध्यक्ष <strong>एससी रल्हन</strong> ने भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि इससे भारत के बहुत-से उत्पादों पर टैरिफ खत्म होंगे या काफी कम हो जाएंगे। हमारे निर्यातकों को दुनिया के एक प्रमुख बाजार में तरजीह मिलेगी।</p>
<p>रल्हन के मुताबिक, टैरिफ हटाने से बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले टेक्सटाइल और अपैरल एक्सपोर्ट में भारत की प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ेगी। भारत के लेदर और फुटवियर उत्पादों की पहुंचे ब्रिटेन के खुदरा बाजारों तक बढ़ेगी और रत्न व आभूषण निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य वस्तुएं जैसे चाय, मसाले,&nbsp;और रेडी-टू-ईट सेगमेंट सहित मूल्यवर्धित उत्पादों को बाजार मिलेगा। फियो के अध्यक्ष का मानना ​​है कि भारत-यूके एफटीए गेम चेंजर है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए दरवाजे खुलेंगे और वैश्विक अर्थव्यवस्था में हमारी भूमिका बढ़ेगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौते के भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि के लिए क्या मायने? ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हाइब्रिड धान के मुद्दे पर केंद्र सरकार सक्रिय, सीड एक्ट के जरिए पंजाब सरकार का आदेश पलटने की तैयारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centre-may-override-punjab-govt-hybrid-rice-ban-using-seed-act.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 06 May 2025 19:46:34 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centre-may-override-punjab-govt-hybrid-rice-ban-using-seed-act.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हाइब्रिड धान की खेती पर प्रतिबंध लगाने के पंजाब सरकार के आदेश को निष्प्रभावी करने के लिए केंद्र सरकार सीड एक्ट, 1966 <span>के प्रावधानों का इस्तेमाल कर सकती है। पंजाब सरकार ने 7 अप्रैल को धान की हाइब्रिड किस्मों के बीजों की बिक्री और बुवाई पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। फिलहाल यह मामला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में विचाराधीन है।&nbsp;</span></p>
<p>इसी बीच, <span>खबर है कि केंद्र सरकार सीड एक्ट</span>,<span> 1966 के प्रावधानों का इस्तेमाल कर पंजाब सरकार के आदेश को रोकने की कवायद में जुट गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार</span>, <span>केंद्र सरकार का तर्क है कि सीड एक्ट के तहत नोटिफाइड किस्मों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में 5 मई को हुई सुनवाई के दौरान भी केंद्र सरकार ने यह दलील पेश की थी। मामले में अगली सुनवाई 13 मई को होगी। </span></p>
<p>उधर, <span>सीड इंडस्ट्री का तर्क है कि धान की बुवाई का सीजन निकला जा रहा है। अगर समय रहते फैसला नहीं हुआ तो इस साल पंजाब के किसानों को हाइब्रिड बीज न मिलने से 12 से 15 हजार रुपये प्रति एकड़ का नुकसान उठाना पड़ेगा।&nbsp;</span>वर्ष 2019 में भी पंजाब सरकार ने धान की हाइब्रिड किस्मों पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन तब मामला किसी तरह सुलझ गया था। लेकिन इस साल फिर से पंजाब के कृषि विभाग ने एक आदेश जारी कर हाइब्रिड धान के बीजों की बिक्री और बुवाई पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके पीछे मिलिंग में टूटने अधिक होने को वजह बताया जा रहा है।</p>
<p>हाइब्रिड धान पर रोक के खिलाफ पंजाब के कुछ किसान और बीज विक्रेता हाई कोर्ट पहुंच गये। इस मामले पर पहली सुनवाई 25 अप्रैल को हुई थी। उसके बाद 2 मई औ 5 मई को भी सुनवाई हुई। सुनवाई में पंजाब सरकार ने तर्क दिया था कि हाइब्रिड किस्मों पर यह रोक स्टेट सीड एक्ट,<span> 1949 के तहत मिले अधिकारों के तहत लगाई गई है। जबकि याचिका दायर करने वाले किसानों और बीज बिक्रेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार का सीड एक्ट</span>, <span>1966 राज्य सरकारों की ओर से जारी 1949 के सीड अंतरिम आदेशों को ओवरवराइड करता है। यानी राज्य सरकार के पास अधिकार नहीं है कि वह केंद्र सरकार द्वारा नोटिफाइड किस्मों पर प्रतिबंध लगा सके। &nbsp;</span></p>
<p>5 मई की सुनवाई में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए असिस्टेंट सॉलिसीटर जनरल (एएसजी) सत्य पाल जैन ने कहा कि पंजाब सरकार को इस प्रकार का आदेश जारी करने का कोई अधिकार नहीं है। हाइब्रिड किस्मों की अधिसूचना जारी करने से पहले भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा उत्पादन, <span>मिलिंग रिकवरी और एग्रो-क्लाइमेट जोन के हिसाब से अनुकूलता का मूल्यांकन किया जाता है। केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचित हाइब्रिड किस्मों पर रोक लगाने का पंजाब सरकार के पास कोई अधिकार नहीं है।</span></p>
<p>याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय से पंजाब सरकार के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस कुलदीप तिवारी ने केंद्र से उसका पक्ष रिकार्ड पर रखने के लिए लिखित में जवाब मांगा। जिसके लिए केंद्र सरकार की ओर पेश हुए एएसजी ने दो सप्ताह का समय मांगा। हालांकि,<span> किसानों और बीज डीलर्स के वकीलों ने कहा कि अगर दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी तो चालू खरीफ सीजन में बुवाई का समय निकल जाएगा। इसके बाद न्यायालय ने मामले की सुनवाई 13 मई के लिए तय की है।</span></p>
<p>उधर,<span>&nbsp;सूत्रों का मानना है कि केंद्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप कर सकती है। केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव </span>(सीड)<span> सीड कंट्रोलर होने के नाते पंजाब सरकार के आदेश पर रोक लगा सकते हैं।&nbsp;</span></p>
<p>पंजाब में करीब 5 लाख एकड़ में हाइब्रिड धान की खेती होती है। सवाना सीड कंपनी की हाइब्रिड किस्म सवा 7501 की उत्पादकता 85 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। साथ ही ये किस्में 125 दिन में तैयार हो जाती हैं। इस तरह हाइब्रिड धान से किसानों को प्रति एकड़ 12 से 15 हजार रुपये तक का फायदा होता है। अगर पंजाब के किसानों को ये किस्में नहीं उगाने को मिलती हैं तो उनको यह नुकसान उठाना पड़ेगा।</p>
<p>हाइब्रिड किस्मों की अधिक उपज और कम अवधि के कारण ही हरियाणा में हाइब्रिड धान का रकबा पंजाब से अधिक हो गया है। हरियाणा में करीब छह लाख एकड़ में हाइब्रिड धान उगाया जा रहा है। पिछले साल हरियाणा में धान की हाइब्रिड किस्मों के बीज खरीदने के लिए किसानों की लंबी लाइनें लगी थीं।</p>
<p>पंजाब में हाइब्रिड किस्मों पर प्रतिबंध के बावजूद बहुत-से किसान अधिक उपज देने वाली हाइब्रिड धान का बीज खरीदना चाहते हैं। केंद्र सरकार का कृषि मंत्रालय भी इस मामले को लेकर सक्रिय है। हालांकि,<span> एएसजी द्वारा केंद्र सरकार के लिखित जवाब के लिए दो सप्ताह का समय मांगने के चलते मामला लटक गया है। </span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हाइब्रिड धान के मुद्दे पर केंद्र सरकार सक्रिय, सीड एक्ट के जरिए पंजाब सरकार का आदेश पलटने की तैयारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोयाबीन तेल की तुलना में दाम कम होने के कारण भारत ने पाम तेल का आयात बढ़ाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-ramps-up-palm-oil-imports-as-prices-drop-below-soybean-oil.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 04 May 2025 15:26:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-ramps-up-palm-oil-imports-as-prices-drop-below-soybean-oil.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हाल के दिनों में भारत ने पाम ऑयल का आयात बढ़ा दिया है। सोयाबीन ऑयल की तुलना में पाम ऑयल के दाम कम होने के कारण इसके आयात में बढ़ोतरी हुई है। डेयरी न्यूज टुडे ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। इसके मुताबिक बाजार में आए इस बदलाव से मलेशियाई पाम तेल वायदा को समर्थन मिला है, जो 2025 की शुरुआत की तुलना में लगभग 10% गिर गया था।&nbsp;</p>
<p>खबर के मुताबिक सनविन ग्रुप के सीईओ संदीप बजोरिया ने कहा, &ldquo;पहले भारतीय रिफाइनर्स ने पाम तेल का दाम अधिक होने के कारण आयात रोक दिया था। अब जब पाम तेल, सोयाबीन तेल से सस्ता हो गया है तो नए ऑर्डर दिए जा रहे हैं।&rdquo;</p>
<p>भारत के लिए मई डिलीवरी के लिए क्रूड पाम ऑयल (सीपीओ) की कीमत लगभग 1,050 डॉलर प्रति टन (लागत, बीमा और माल भाड़ा सहित) है, जबकि क्रूड सोयाबीन ऑयल की कीमत करीब 1,100 डॉलर प्रति टन के आसपास है।</p>
<p>पाम और सोयाबीन तेल के बीच मूल्य का अंतर 100 डॉलर प्रति टन से अधिक हो जाने के बाद दिसंबर 2024 से भारत का पाम तेल आयात बहुत कम हो गया था। दिसंबर से मार्च के बीच भारत ने 15.7 लाख टन पाम तेल आयात किया, जो औसतन लगभग 3.85 लाख टन प्रति माह रहा। अप्रैल में 3.5 लाख टन की एक और खेप आनी थी। अप्रैल के आधिकारिक आंकड़े मई के मध्य तक जारी किए जाएंगे।</p>
<p>इसके विपरीत, भारतीय साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन के अनुसार अक्टूबर 2024 में समाप्त हुए पिछले मार्केटिंग वर्ष में भारत का औसत मासिक पाम तेल आयात 7.5 लाख टन से अधिक था।&nbsp;</p>
<p>घरेलू भंडार कम होने के कारण अब पाम तेल आयात में तेजी से वृद्धि की संभावना है। उम्मीद है कि मई में 5 लाख टन से अधिक, जून में 6 लाख टन और जुलाई से सितंबर के बीच हर महीने 7 लाख टन से अधिक का आयात होगा।</p>
<p>रिपोर्ट में ट्रेडिंग फर्म जीजीएन रिसर्च के मैनेजिंग पार्टनर राजेश पटेल के हवाले से कहा गया है कि पिछले कुछ महीनों के सीमित आयात के कारण रिफाइनरों पर घटते स्टॉक को फिर से भरने का दबाव है।</p>
<p>भारत आमतौर पर पाम तेल का आयात इंडोनेशिया और मलेशिया से करता है, जबकि सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का आयात अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन से किया जाता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/08/image_750x500_61128c8a5721d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोयाबीन तेल की तुलना में दाम कम होने के कारण भारत ने पाम तेल का आयात बढ़ाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/08/image_750x500_61128c8a5721d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत ने विकसित की विश्व की पहली जीनोम&amp;#45;संपादित धान की किस्में]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-developed-the-worlds-first-genome-edited-rice-varieties.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 04 May 2025 13:33:48 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-developed-the-worlds-first-genome-edited-rice-varieties.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)&nbsp;<span>ने धान की दो जीनोम-संपादित किस्में विकसित की हैं। आईसीएआर के संस्थानों द्वारा विकसित इन किस्मों में <strong>डीआरआर धान </strong></span><strong>100 (<span>कमला) </span></strong><span>और <strong>पूसा डीएसटी राइस </strong></span><strong>1</strong> शामिल हैं<span>। इनमें कमला अधिक उपज और कम समय में तैयार होने वाली किस्म है</span>,<span> जबकि पूसा डीएसटी राइस </span>1 <span>सूखे और अधिक लवणता का सामना करने में सक्षम हैं।</span>&nbsp;<span>कृषि मंत्रालय के मुताबिक</span>, <span>भारत विश्व का पहला देश है जिसने जीनोम-संपादित धान की किस्में विकसित की हैं। </span></p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने रविवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स में दोनों जीनोम-संपादित किस्में राष्ट्र को समर्पित की। इस मौके पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज का दिन देश के कृषि इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा जाएगा। धान की नई किस्में किसानों की आय बढ़ाने, <span>लागत घटाने</span>, <span>पानी की बचत और ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने में मददगार होंगी। </span></p>
<p>नई किस्मों के विकास के लिए कृषि वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि ये किस्में किसानों के लिए वरदान साबित होंगी और दूसरी हरित क्रांति का मार्ग प्रशस्त करेंगी। उन्होंने कहा कि धान की ये किस्में 30% अधिक उत्पादन देने में सक्षम हैं और 20 दिन पहले तैयार हो जाती हैं। इनसे न केवल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि भारतीय कृषि को सतत विकास की ओर अग्रसर करने और किसानों को समृद्ध बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होंगी।</p>
<p>इस अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए भारत को विश्व का फूड बास्केट बनाने के ध्येय से काम करना होगा। उन्होंने दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_6817667e5d39d.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>आईसीआर के महानिदेशक और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव <strong>डॉ. एमएल जाट</strong> ने बताया कि दोनों जीन एडिटेड किस्मों के ऑल इंडिया कॉर्डिनेटेड ट्रायल हो चुके हैं और जल्द ही इनके ब्रीडर सीड, <span>फाउंडेशन सीड और सर्टिफाइड सीड का चरण पूरा कर ये किस्में</span> <span>किसानों को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इन किस्मों को विकसित कर भारत ने जीनोम एडिटेड किस्मों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।</span>&nbsp;</p>
<p>वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक और आईएआरआई के पूर्व निदेशक <strong>डॉ. एके सिंह</strong> ने बताया कि नई किस्मों को जीनोम संपादन की (क्रिस्पर-कैस) तकनीक से विकसित किया गया है, <span>जिससे पौधों के मूल जीन में सूक्ष्म बदलाव किए जाते हैं</span>, <span>लेकिन कोई बाहरी जीन नहीं जोड़ा जाता है। जीनोम एडिटिंग की दो विधियों <strong>एसडीएन</strong></span><strong>1</strong> <span>और <strong>एसडीएन</strong></span><strong>2</strong> <span>से विकसित सामान्य फसलों को भारत सरकार के जैव सुरक्षा नियमों से मुक्त रखा गया है।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>डीआरआर धान </strong><strong>100 (<span>कमला)</span></strong></p>
<p>आईसीएआर के हैदराबाद स्थित <strong>भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान (</strong><strong>IIRR) </strong>ने धान की <strong>'<span>सांबा महसूरी</span>'</strong> <span>किस्म में जीनोम एडिटिंग कर नई किस्म <strong>डीआरआर धान </strong></span><strong>100 (<span>कमला)</span></strong><span> तैयार की है। इसमें साइट डायरेक्टेड न्यूक्लीज </span>1 (SDN1) <span>प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया है जिससे बाली में दानों की संख्या में वृद्धि हुई और उपज लगभग </span>19 <span>फीसदी बढ़ गई। यह </span>लगभग 20 <span>दिन पहले </span>(<span>130 दिन</span>)<span> में पककर तैयार हो जाती है </span>और अनुकूल परिस्थितियों में 9 टन/हेक्टेयर तक उपज की क्षमता रखती है। कम अवधि के कारण पानी और लागत की बचत होती है। यह किस्म चावल की गुणवत्ता में मूल किस्म यानी सांबा महसूरी जैसी है।&nbsp;</p>
<p><strong>पूसा डीएसटी राइस </strong><strong>1</strong></p>
<p><strong>भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान</strong>, <span>नई दिल्ली (</span>IARI) <span>ने धान की </span><strong>'<span>एमटीयू</span>1010'</strong> <span>किस्म में जीनोम एडिटिंग कर <strong>पूसा डीएसटी राइस </strong></span><strong>1 </strong><span>नाम से एक नई किस्म विकसित की है। यह सूखे का सामना करने और लवणीय व क्षारीय मिट्टी में भी बेहतर उपज देने में सक्षम है। यह सूखा प्रभावित व क्षारीय मिट्टी वाले इलाकों के लिए उपयुक्त है।</span>&nbsp;</p>
<p>कृषि मंत्रालय का अनुमान है कि इन किस्मों की खेती से देश के लगभग 5 <span>लाख हेक्टेयर क्षेत्र में </span>45 <span>लाख टन धान के अतिरिक्त उत्पादन</span>, <span>ग्रीन हाउस गैसों में </span>20 <span>फीसदी की कमी और </span>20 <span>दिन पहले तैयार होने के कारण </span>750 <span>करोड़ घन मीटर सिंचाई जल की बचत हो सकती है। </span>&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>जीनोम-संपादित फसलों </strong>को लेकर छिड़ी लंबी बहस के बाद भारत सरकार ने SDN1 <span>और </span>SDN2 <span>प्रक्रिया से जीन एडिटेड फसलों को सुरक्षित मानते हुए इन्हें बॉयोसेफ्टी गाइडलाइन से छूट दी थी। इस संबंध में </span>30 <span>मार्च</span>, 2022 <span>को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की थी।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>बॉयोसेफ्टी गाइडलाइन</strong> से छूट मिलने से ही जीनोम-संपादित नई किस्मों को विकसित करने का रास्ता खुला है। यह तकनीक देश की खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आईसीएआर द्वारा खाद्यान्न, <span>तिलहन व दलहनों सहित कई फसलों में जीनोम एडिटिंग अनुसंधान आरंभ किए जा चुके हैं।&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p>इस अवसर पर जीनोम-संपादित किस्मों के अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री <strong>भगीरथ चौधरी</strong> ने वर्चुअल जुड़कर विचार व्यक्त करते हुए वैज्ञानिकों को बधाई दी। कार्यक्रम को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव देवेश चतुर्वेदी, <span>आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. देवेन्द्र कुमार यादव</span>, <span>आईसीएआर के उपमहानिदेशक (एक्सटेंशन) डॉ. राजबीर सिंह</span>, <span>भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान</span>, <span>हैदराबाद के निदेशक डॉ. आर.एम. सुंदरम</span>, <span>आईएआरआई के निदेशक डॉ. सीएच. श्रीनिवास राव ने भी संबोधित किया।</span>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत ने विकसित की विश्व की पहली जीनोम-संपादित धान की किस्में ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सीएससी कॉन्क्लेव में टेक्नोलॉजी और सीएसआर के सहयोग से ग्रामीण परिवर्तन का आह्वान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/csc-csr-conclave-2025-champions-rural-transformation-through-technology-and-csr-collaboration.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 03 May 2025 13:45:37 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/csc-csr-conclave-2025-champions-rural-transformation-through-technology-and-csr-collaboration.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के सचिव अतुल कुमार तिवारी ने कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से भारत के शहरी-ग्रामीण विभाजन को पाटने का आह्वान किया है। तिवारी सीएससी सीएसआर कॉन्क्लेव 2025 के उद्घाटन के मौके पर बोल रहे थे। उन्होंने ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने में तकनीक और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) की भूमिका को रेखांकित किया। इस कॉन्क्लेव का आयोजन सीएससी अकाडमी और इंडियन ईएसजी नेटवर्क द्वारा संयुक्त रूप से किया गया, जिसका उद्देश्य था सीएसआर को डिजिटल समावेशन, पर्यावरणीय स्थिरता और समावेशी विकास के एक रणनीतिक साधन के रूप में सामने लाना।</p>
<p>सीएससी को एक क्रांतिकारी विचार बताते हुए तिवारी ने इनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये भारत की सामाजिक पूंजी को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं, और यह प्रधानमंत्री के डिजिटल ग्रामीण सशक्तीकरण के दृष्टिकोण के अनुरूप है। उन्होंने विशेष रूप से सीएससी अकादमी की भूमिका की सराहना की जो व्यावसायिक प्रशिक्षण और डिजिटल साक्षरता के जरिए ग्रामीण भारत में सीएसआर पहल को आगे बढ़ा रही है।&nbsp;</p>
<p>इस कॉन्क्लेव में सरकार, कॉर्पोरेट और अन्य क्षेत्रों से आए लोगों ने सीएसआर को ग्रामीण भारत में पर्यावरणीय स्थिरता, सामुदायिक विकास और परिवर्तनकारी बदलाव का एक सशक्त उपकरण बनाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया।</p>
<p>अपने मुख्य भाषण में सीएससी अकाडमी के अध्यक्ष और सचिव संजय कुमार राकेश ने देशभर में सीएससी के प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सीएससी केवल डिजिटल पहुंच केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे परिवर्तन के उत्प्रेरक हैं, जिन्हें ग्राम स्तरीय उद्यमियों द्वारा संचालित किया जाता है। उन्होंने कहा, "सीएसआर केवल एक कानूनी अनिवार्यता नहीं, बल्कि समावेशी प्रगति का रणनीतिक साधन है।"</p>
<p>सीबीएसई के प्रशिक्षण और कौशल शिक्षा निदेशक डॉ. बिस्वजीत साहा ने भी सीएससी अकादमी की भूमिका को रेखांकित किया जो अगली पीढ़ी को विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों के लिए तैयार कर रही है। कार्यक्रम में CSR, पर्यावरणीय स्थिरता और सामुदायिक विकास के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा भी हुई। चर्चा के मुख्य विषयों में शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता, वित्तीय समावेशन, महिला सशक्तीकरण और स्वास्थ्य सेवा शामिल रहे।</p>
<p>कॉन्क्लेव के प्रमुख वक्ताओं में शामिल थे- UNICEF के प्रोग्राम स्पेशलिस्ट अभिषेक गुप्ता जिन्होंने "पासपोर्ट टू अर्निंग" पहल पर प्रकाश डाला, VISA में गवर्मेंट एंगेजमेंट मैनेजर पर्नाल वत्स जिन्होंने डिजिटल विलेज कार्यक्रम पर बात की, Kyndryl की सीएसआर मैनेजर गीतांजली गौर और Graposs Connect के सीईओ राजीव मलिक जिन्होंने सीएससी ओलंपियाड पहल पर चर्चा की।</p>
<p>कॉन्क्लेव में विषयगत पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। शिक्षा, कौशल और रोजगार पर आधारित पैनल की अध्यक्षता वाधवानी फाउंडेशन के सुनील दहिया ने की, जिसमें राजकुमार श्रीवास्तव (IFS, कर्नाटक) और पल्लव तिवारी (UNICEF) ने भाग लिया। महिला और बाल स्वास्थ्य पर आधारित पैनल की अध्यक्षता डॉ. वशीमा सुभा (Ernst &amp; Young) ने की, जिसमें वेलकम क्योर के पुनीत देसाई और बायोसेंस के डॉ. योगेश पाटिल जैसे विशेषज्ञ शामिल थे।</p>
<p>कॉन्क्लेव का समापन सीएसआर के माध्यम से ग्रामीण परिवर्तन को गति देने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ। सीएससी अकाडमी ने डिजिटल समावेशन, कौशल-आधारित शिक्षा और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने के अपने मिशन को दोहराया। इस आयोजन ने सभी क्षेत्रों के सहयोग से एक सतत और समावेशी भविष्य के निर्माण की आवश्यकता को रेखांकित किया।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_6815d0821fc5c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सीएससी कॉन्क्लेव में टेक्नोलॉजी और सीएसआर के सहयोग से ग्रामीण परिवर्तन का आह्वान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_6815d0821fc5c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं की सरकारी खरीद 263 लाख टन तक पहुंची, कम दाम के चलते यूपी बना प्राइवेट खरीद का केंद्र]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wheat-procurement-reaches-263-lakh-tonnes-uttar-pradesh-becomes-the-centre-of-private-procurement.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 02 May 2025 18:22:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wheat-procurement-reaches-263-lakh-tonnes-uttar-pradesh-becomes-the-centre-of-private-procurement.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू <strong>रबी मार्केटिंग सीजन (2025-26)</strong> के दौरान देश भर में <strong>263 लाख टन</strong> से अधिक गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है। इस साल गेहूं की बंपर पैदावार को देखते हुए उम्मीद है कि सरकारी खरीद 300 लाख टन से ऊपर पहुंच जाएगी। केंद्र सरकार 332.7 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य हा रखा है जबकि पिछले साल 266 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी।&nbsp;</p>
<p><strong>भारतीय खाद्य निगम</strong> (एफसीआई) के एक मई, 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, 263.19 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है। चालू सीजन की खास बात यह है कि निजी क्षेत्र की खरीद के लिए इस बार उत्तर प्रदेश मुख्य केंद्र के रूप में उभरा है। क्योंकि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 175 रुपये का बोनस देने से वहां गेहूं का प्रभावी खरीद मूल्य 2600 रुपये प्रति क्विटंल है, जबकि चालू सीजन के लिए केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2425 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।</p>
<p>ताजा आंकड़ों के मुताबिक, कुल 263.19 लाख टन गेहूं खरीद में सबसे अधिक 106.83 लाख टन की खरीद पंजाब में हुई है। मध्य प्रदेश में 69.24 लाख टन और हरियाणा में 67.45 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। वहीं, राजस्थान में 11.65 लाख टन, हिमाचल प्रदेश में 2058 टन, उत्तराखंड में 142 टन, बिहार में 14291 टन और गुजरात में 2787 टन गेहूं खरीद हुई है।&nbsp;</p>
<p>उद्योग सूत्रों के मुताबिक, देश की गेहूं उत्पाद बेचने वाली बड़ी कंपनियां और आटा मिलें उत्तर प्रदेश से गेहूं की खरीद कर रही हैं क्योंकि यहां गेहूं की कीमत 2375 रुपये से 2450 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास हैं।</p>
<p><strong>यूपी से 8 लाख टन गेहूं की खरीद&nbsp;</strong></p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश</strong> सरकारी आंकड़ों में गेहूं का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है जहां करीब 357 लाख टन गेहूं उत्पादन का अनुमान है जबकि देश भर में 11.54 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का अनुमान केंद्र सरकार ने लगाया है। उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं रसद विभाग के अनुसार, 2 मई तक राज्य में करीब 8 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई है। जबकि केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश से 30 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा है। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने 60 लाख टन गेहूं खरीद की तैयारी की थी।</p>
<p><strong>बेहतर भाव से वंचित यूपी के किसान&nbsp;</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार पर गेहूं खरीद बढ़ाने का भरसक प्रयास कर रही है। परोक्ष रूप से निजी व्यापारियों द्वारा खरीद को हतोत्साहित भी किया जा रहा है। राज्य से निजी कंपनियों को रेलवे रैक मिलने पर परोक्ष रूप से लगभग पाबंदी होने के चलते प्राइवेट ट्रेडर्स को ट्रकों के जरिये ढुलाई करनी पड़ रही है जिससे लागत बढ़ जाती है। अगर इस तरह की पाबंदियां न होती तो यूपी में किसानों को गेहूं का बेहतर दाम मिलने की संभावना थी।&nbsp;</p>
<p>ऐसे में सवाल यह कि जब यूपी के किसानों को गेहूं का दाम एमएसपी से अधिक दाम मिलने की संभावना है तो उनसे यह मौका छीना क्यों जा रहा है। जबकि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में सरकार गेहूं पर 175 रुपये और राजस्थान में 150 रुपये प्रति क्विंटन का बोनस दे रही हैं। जबकि वहां भी यूपी की तरह भाजपा की ही सरकारें हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में किसानों को न तो बोनस मिला और न ही प्राइवेट ट्रेडर्स से खरीद का पूरा लाभ मिल पा रहा है। ऐसी स्थिति में बेहतर दाम का मौका गंवाने वाला उत्तर प्रदेश का किसान खुद को ठगा महसूस करेगा।</p>
<p>इस साल उत्तर प्रदेश में किसानों को गेहूं का दाम एमएसपी से अधिक मिलने की संभावना थी क्योंकि जो कंपनियां और आटा मिलें मध्य प्रदेश से गेहूं खरीदती थी, वो इस साल एमपी में बोनस के कारण ऊंचे दाम के चलते यूपी का रुख कर रही हैं।&nbsp;देश की अधिकांश बड़ी कंपनियां यूपी से खरीद कर रही हैं। निर्यात की संभावना देख रहे कारोबारी और दक्षिणी भारत की आटा मिलें मालिक भी उत्तर प्रदेश से गेहूं खरीदने में जुटे हैं।</p>
<p><strong>रूरल वॉयस</strong> की <strong>उद्योग सूत्रों</strong> से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि पिछले साल सरकार ने खुले बाजार में कम गेहूं बेचा और कीमतें ऊंची बनी रही थीं। इसलिए इस बार कोई कंपनी जोखिम नहीं लेना चाहती है और सीजन की शुरुआत में ही गेहूं खरीद कर रहे हैं। दक्षिण की मिलों और बड़ी कंपनियों ने स्थानीय कारोबारियों के जरिये खरीद का रास्ता अपनाया है। पहले शाहजहांपुर और हरदोई जैसे इलाकों में ज्यादा निजी खरीद होती थी, इस बार गोंडा, बदायूं और इलाहबाद के आसपास के क्षेत्रों में अधिक खरीद हो रही है।</p>
<p>चालू सीजन में पंजाब से 124 लाख टन, हरियाणा से 75 लाख टन और मध्य प्रदेश से 80 लाख टन की सरकारी खरीद का लक्ष्य रखा गया है। बिहार के लिए दो लाख टन, गुजरात के लिए एक लाख टन और और उत्तराखंड के लिए 50 हजार टन गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य रखा गया है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य हासिल किये जाने की संभावना है, जबकि बाकी राज्यों में खरीद लक्ष्य पूरा होने की संभावना काफी कम है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं की सरकारी खरीद 263 लाख टन तक पहुंची, कम दाम के चलते यूपी बना प्राइवेट खरीद का केंद्र ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र सरकार ने आगामी जनगणना में जाति&amp;#45;गणना को शामिल करने का निर्णय लिया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/central-government-decided-to-include-caste-wise-enumeration-in-the-upcoming-census.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 30 Apr 2025 20:02:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/central-government-decided-to-include-caste-wise-enumeration-in-the-upcoming-census.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने आगामी जनगणना में जातिवार गणना को भी शामिल करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की राजनीतिक मामलों की समिति ने यह निर्णय लिया।&nbsp;&nbsp;<span></span></p>
<p>नई दिल्ली में मंत्रिमंडल के निर्णयों की जानकारी देते हुए केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री <strong>अश्विनी वैष्णव</strong> ने कहा कि जनगणना केंद्र का विषय है। हालांकि, <span>कुछ राज्यों ने जातिवार गणना के लिए सर्वेक्षण किए हैं</span>,&nbsp;<span>पर इनमें पारदर्शिता और उद्देश्य अलग-अलग रहे हैं। कुछ सर्वेक्षण पूरी तरह राजनीति के दृष्टिगत किए गए हैं</span>,&nbsp;<span>जिससे समाज में दुविधा उत्पन्न हुई है। इन सभी स्थितियों को ध्यान में रखते हुए तथा सामाजिक ताने-बाने को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखने के लिए अलग-अलग सर्वेक्षणों की बजाय मुख्य जनगणना में ही जातिवार जनगणना कराने का निर्णय लिया गया है। उन्&zwj;होंने कहा कि इससे देश सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत होगा तथा प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ेगा।&nbsp;</span><span></span></p>
<p>वैष्णव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने जाति जनगणना को केवल राजनीतिक टूल के रूप में इस्तेमाल किया है। वर्ष 2010 <span>में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने लोकसभा को आश्वस्त किया था कि जातिवार जनगणना के मुद्दे पर कैबिनेट में विचार किया जाएगा। इस विषय पर विचार-विमर्श के लिए मंत्रियों का एक समूह भी बनाया गया था। अधिकांश राजनीतिक दलों ने जातिवार जनगणना की सिफारिश की थी। इसके बावजूद पिछली सरकार ने जातिगत जनगणना की बजाय सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (एसईसीसी) का विकल्प चुना। </span></p>
<p><strong>कांग्रेस ने राहुल गांधी को दिया श्रेय </strong></p>
<p>कांग्रेस ने आगामी जनगणना में जाति गणना को शामिल करने के सरकार के फैसले को "देर आए दुरुस्त आए" बताया। कांग्रेस अध्यक्ष <strong>मल्लिकार्जुन खड़गे</strong> ने कहा कि कांग्रेस ने लगातार जातिगत जनगणना की मांग उठाई, <span>जिसके सबसे मुखर पक्षधर राहुल गांधी रहे। </span>INDIA <span>गठबंधन के नेताओं ने भी जातिगत जनगणना की मांग की और लोकसभा चुनाव में ये अहम मुद्दा बना। ये सही कदम है जिसकी हम पहले दिन से मांग कर रहे थे।</span></p>
<p>खड़गे ने कहा कि बार-बार प्रधानमंत्री मोदी सामाजिक न्याय की इस नीति को लागू करने से बचते रहे और विपक्ष पर समाज को बांटने का झूठा आरोप लगाते रहे। जातिगत जनगणना के अभाव में, <span>सार्थक सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण कार्यक्रमों का क्रियान्वयन अधूरा है</span>, <span>इसीलिए ये सभी वर्गों के लिए जरूरी है। </span></p>
<p><strong>जल्द जनगणना कराने की मांग </strong></p>
<p>कांग्रेस ने मोदी सरकार जल्द से जल्द, <span>बजट का प्रावधान कर</span>, <span>जनगणना और जातिगत गणना का काम पूरी पारदर्शिता के साथ शुरू करने की मांग की है। गौरतलब है कि कांग्रेस सहित विपक्षी दल देश भर में जाति जनगणना की मांग कर रहे हैं और इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना रहे हैं और बिहार</span>, <span>तेलंगाना और कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों ने अपने राज्यों में इस तरह के सर्वेक्षण किए हैं।</span>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_6812338e5e506.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र सरकार ने आगामी जनगणना में जाति-गणना को शामिल करने का निर्णय लिया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_6812338e5e506.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र सरकार ने गन्ने का FRP 15 रुपये बढ़ाया, नए सीजन के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल होगा दाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centre-hikes-sugarcane-frp-by-rs-15-new-rate-set-at-rs-355-per-quintal-for-2025-26.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 30 Apr 2025 17:20:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centre-hikes-sugarcane-frp-by-rs-15-new-rate-set-at-rs-355-per-quintal-for-2025-26.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) में 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी का निर्णय लिया है। इस प्रकार अब गन्ने का एफआरपी 355 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में <strong>आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति</strong> (CCEA) <span>ने </span>2025-26 <span>पेराई सीजन के लिए गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (</span>FRP) <span>में </span>15 <span>रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि को मंजूरी दी है। इस निर्णय के साथ</span>, <span>गन्ने का </span>FRP <span>अब </span>340 <span>रुपये से बढ़कर </span>355 <span>रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। नया दाम </span>1 <span>अक्टूबर </span>2025 <span>से शुरू होने वाली गन्ना खरीद पर लागू होगा।</span></p>
<p><strong>केंद्र सरकार</strong> ने गन्ने का 355 रुपये प्रति क्विंटल एफआरपी 10.25% <span>चीनी रिकवरी दर के आधार पर तय किया है। इससे अधिक रिकवरी में प्रत्येक 0.1% की वृद्धि के लिए 3.46 रुपये/क्विंटल का प्रीमियम दिया जाएगा जबकि रिकवरी में प्रत्येक 0.1% की कमी के लिए एफआरपी में 3.46 रुपये/क्विंटल की कटौती होगी। जिन चीनी मिलों की रिकवरी 9.5% से कम है</span>, <span>वहां और अधिक कटौती नहीं होगी और किसानों को गन्ने का एफआरपी 329.05 रुपये/क्विंटल मिलेगा।</span></p>
<p>देश भर के गन्ना किसान लंबे समय से बढ़ती लागत के कारण गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे। हालांकि,<span> उत्तर प्रदेश</span>, <span>हरियाणा और पंजाब जैसे कई राज्य अपने स्तर पर <strong>राज्य परामर्श मूल्य </strong></span>(SAP) तय करते हैं जो FRP से अधिक होता है। यूपी में इस साल गन्ने के एसएपी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी। अब केंद्र सरकार द्वारा एफआरपी बढ़ाने से यूपी जैसे राज्यों पर भी गन्ने के एसएपी में बढ़ोतरी का दबाव बढ़ेगा। किसानों की ओर से गन्ने का भाव 450 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की जा रही है। फिलहाल यूपी में अगैती प्रजाति के गन्ने का एसएपी 370 रुपये प्रति क्विंटल है।</p>
<p>चीनी सीजन 2025-26 के लिए केंद्र सरकार ने गन्ने की<strong> उत्पादन लागत</strong> (A2+FL) 173 रुपये प्रति क्विंटल मानी है। इस आधार पर सरकार का दावा है कि 355 रुपये प्रति क्विंटल का एफआरपी उत्पादन लागत से 105.2% यानी दोगुने से अधिक है। चीनी सीजन 2025-26 के लिए एफआरपी मौजूदा चीनी सीजन 2024-25 के मुकाबले 4.41% अधिक है।</p>
<p>इससे पहले, <span>फरवरी </span>2024 <span>में <strong>लोकसभा चुनाव</strong> से पहले केंद्र सरकार ने </span>2024-25 <span>सीजन के लिए गन्ने के एफआरपी को </span>315 <span>रुपये से बढ़ाकर </span>340 <span>रुपये प्रति क्विंटल किया था। देश में लगभग 5 करोड़ करोड़ किसान और उनके परिजन गन्ने की खेती पर निर्भर हैं। इसके अलावा लगभग 5 लाख लोग शुगर फैक्ट्री और इंडस्ट्री से जुड़े हैं। उत्तर प्रदेश</span>, <span>महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे देश के बड़े राज्यों की राजनीति में गन्ना किसान अहमियत रखते हैं। </span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र सरकार ने गन्ने का FRP 15 रुपये बढ़ाया, नए सीजन के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल होगा दाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कॉटन पर आयात शुल्क हटाने की तैयारी, कीमतों में गिरावट से किसानों को हो सकता है नुकसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/possibility-of-removal-of-import-duty-on-cotton-farmers-may-suffer-losses-due-to-fall-in-prices.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 29 Apr 2025 07:35:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/possibility-of-removal-of-import-duty-on-cotton-farmers-may-suffer-losses-due-to-fall-in-prices.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत सरकार कॉटन पर लागू 10 <span>फीसदी आयात शुल्क और उस पर </span>10 <span>फीसदी सेस को समाप्त कर सकती है। वजह है कॉटन इंडस्ट्री का दबाव</span>! कॉटन इंडस्ट्री देश में कपास की कमी को देखते हुए टेक्सटाइल निर्यात बढ़ाने के मकसद से कॉटन पर आयात शुल्क खत्म करवाने की कोशिश कर रही है। लेकिन इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।&nbsp;</p>
<p>अगर कॉटन पर आयात शुल्क समाप्त होता है तो विदेशों से सस्ते आयात के कारण घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में गिरावट आ सकती है। इसका नुकसान किसानों के अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कॉटन खरीद के लिए अधिकृत सरकारी एजेंसी <strong>कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई)</strong> को भी उठाना पड़ सकता है। क्योंकि सीसीआई द्वारा एमएसपी पर खरीदी गई करीब 100 <span>लाख गांठ में से करीब तीन चौथाई का स्टॉक अभी उसके पास मौजूद है।</span>&nbsp;</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, <strong><span>वस्त्र मंत्रालय </span></strong><span>कॉटन पर आयात शुल्क समाप्त किये जाने के पक्ष में है और इस मसले पर सीसीआई की तरफ से भी सहमति दिये जाने के आसार हैं। कॉटन पर आयात शुल्क हटाने को लेकर यार्न और फैब्रिक इंडस्ट्री द्वारा काफी पैरवी की जा रही है। फिलहाल कॉटन पर </span>10 <span>फीसदी का आयात शुल्क लागू है और उसके ऊपर </span>10 <span>फीसदी सेस (उपकर) लगता है जिसके चलते प्रभावी आयात शुल्क </span>11 <span>फीसदी हो जाता है।</span></p>
<p>कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के सीएमडी<strong> ललित कुमार गुप्ता </strong>ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि भारत में खास गुणवत्ता की कॉटन का सालाना 10 से 15 लाख गांठ का आयात होता है और यह आयात सीमा शुल्क से प्रभावित नहीं होता है। क्योंकि इस तरह का कपास का देश में उत्पादन नहीं होता है और इसका आयात करना ही पड़ता है। केंद्र सरकार ने कॉटन आयात के मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए पिछले दिनों <strong>कमेटी ऑन कॉटन प्रॉडक्शन एंड कंजप्शन (सीओसीपीसी) </strong>की बैठक बुलाई थी,<span> जिसमें शामिल अधिकांश लोगों की राय कॉटन पर आयात शुल्क समाप्त करने के पक्ष में थी। बैठक में शामिल कुछ लोगों ने शुल्क हटाने की स्थिति में किसानों के पास बकाया कपास की कीमतें गिरने की बात भी कही थी।&nbsp;</span>&nbsp;</p>
<p>कॉटन पर सीमा शुल्क हटाने को लेकर सीसीआई की राय पूछने पर <strong>ललित कुमार गुप्ता </strong>ने कहा कि सरकार जो भी फैसला लेगी,<span> हम उसके साथ हैं। जहां तक किसानों की बात है तो उनके हित एमएसपी से सुरक्षित हैं। हम किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार एजेंसी हैं। हालांकि</span>,<span> कीमतों में गिरावट से नुकसान के बारे में उनका कहना है कि हम पूरे साल मार्केट में कॉटन बेचते हैं। कई बार साल के अंत में ऊंची कीमत भी मिलती है क्योंकि बाजार में कॉटन की कमी की स्थिति में जीनिंग कंपनियां माल रोक लेती हैं उसके बाद भी दाम बढ़ा देती हैं। फिर भी अगर सीसीआई को कोई नुकसान होता है तो उसकी भरपाई सरकार करती है।</span>&nbsp;</p>
<p>सीसीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर का कहना है कि<strong> यार्न एंड फैब्रिक इंडस्ट्री</strong> की राय है कि सरकार का हस्तक्षेप कम होना चाहिए। वहीं,<span> अगर भारत सीमा शुल्क समाप्त करता है तो उसके चलते भारतीय बाजार के आयात के लिए खुलने से वैश्विक बाजार में कपास की कीमतें एक से दो फीसदी तक बढ़ जाती हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि भारत के अलावा किसी देश में कॉटन पर सीमा शुल्क नहीं है। हमारे यहां 2022 से कॉटन पर आयात शुल्क लागू है। उन्होंने बताया कि सीसीआई </span>55 <span>हजार से </span>56 <span>हजार रुपये प्रति कैंडी (लगभग </span>356 <span>किलो) की कीमत पर कॉटन की बिक्री कर रही है। चालू सीजन </span>2024-25 <span>में सीसीआई ने </span>100 <span>लाख गांठ कॉटन&nbsp; (</span>170 <span>किलो प्रति गांठ) की खरीद की है और उसमें से करीब </span>25 <span>फीसदी की बाजार में बिक्री हो चुकी है।</span>&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>सीसीआई</strong> द्वारा एमएसपी पर कॉटन खरीदने का सीजन भी समाप्त हो चुका है। ऐसे में करीब दो-तिहाई फसल ऐसी है जो या तो किसानों के पास है या फिर किसानों ने व्यापारियों को बेची है। उद्योग सूत्रों का कहना है कि किसानों के पास 60 <span>से </span>65 <span>लाख गांठ कॉटन है। अगर सरकार कॉटन से आयात शुल्क हटा देती है तो उसका आयात करीब 48 से </span>50 <span>हजार रुपये प्रति कैंडी के आसपास पड़ेगा। उस स्थिति में सीसीआई द्वारा </span>55 से 56 <span>हजार रुपये प्रति कैंडी बेची जा रही घरेलू कॉटन की कीमतों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।</span>&nbsp;<span>इससे किसानों को तो नुकसान होगा ही</span>, अगर दाम गिरते हैं तो <span>सीसीआई को भी बकाया स्टॉक पर </span>2000 <span>करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की आशंका उद्योग सूत्र जता रहे हैं।</span>&nbsp;</p>
<p>कॉटन सीजन 2024-25 <span>के लिए <strong>कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) </strong>ने देश में </span>302.25 <span>लाख गांठ कॉटन उत्पादन का अनुमान लगाया था जिसे मार्च</span>, 2025 <span>में घटाकर </span>295.30 <span>लाख गांठ कर दिया गया। सीएआई के मुताबिक</span>,<span> चालू साल में खपत का अनुमान </span>313 <span>लाख गांठ का है। वहीं सरकार द्वारा </span>11 <span>मार्च</span>, 2025 <span>को जारी कृषि उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान में कॉटन उत्पादन को घटाकर </span>294.25 <span>लाख गांठ कर दिया गया है। कृषि मंत्रालय ने नवंबर</span>, 2024 <span>में जारी पहले अग्रिम अनुमान में कॉटन उत्पादन </span>299.26 <span>लाख गांठ रहने का अनुमान जारी किया था।</span>&nbsp;</p>
<p>भारत में कॉटन उत्पादन की लागत <strong>ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया</strong> से करीब डेढ़ गुना आती है। ऐसे में ये देश भारत में कम कीमतों पर निर्यात करने की स्थिति में रहते हैं। यार्न व फैब्रिक इंडस्ट्री का तर्क है कि महंगी कॉटन के कारण भारत से टेक्सटाइल निर्यात प्रतिस्पर्धी नहीं रह जाता है। हालांकि,<span> उद्योग को एडवांस लाइसेंस के तहत शुल्क मुक्त कॉटन के आयात की सुविधा है। ऐसे में उद्योग का यह तर्क बहुत मायने नहीं रखता है।</span></p>
<p>अगर सरकार कपास पर आयात शुल्क समाप्त करती है तो नई फसल की बुवाई के समय किसान हतोत्साहित होंगे क्योंकि कपास की बुवाई का सीजन शुरू हो रहा है। सरकार ने इस साल के बजट <strong>कॉटन मिशन</strong> की घोषणा की थी, <span>जिसका मकसद देश में कपास उत्पादन को बढ़ावा देना है। अगर देश में कपास का सस्ता आयात होगा तो किसानों के साथ सरकार के उद्देश्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसके साथ ही यह मुद्दा राजनीतिक रंग भी ले सकता है और किसान संगठन सरकार के इस कदम का विरोध कर सकते हैं। खास बात यह है कि देश में करीब 220 लोक सभा सीटें ऐसी हैं जहां कपास का उत्पादन होता है। ऐसे में यह मामला राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील भी है।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कॉटन पर आयात शुल्क हटाने की तैयारी, कीमतों में गिरावट से किसानों को हो सकता है नुकसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इनोवेशन और बेहतर प्रबंधन से धान की पैदावार बढ़ाएं: डॉ. आर.एस. परोदा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/boost-rice-yields-with-innovation-and-better-management-says-dr.-paroda.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 28 Apr 2025 06:55:39 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/boost-rice-yields-with-innovation-and-better-management-says-dr.-paroda.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक <strong>डॉ. आर.एस. परोदा</strong> ने भारत के कृषि क्षेत्र के लिए एक गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि चीन औसतन 6 टन प्रति हेक्टेयर धान उत्पादन करता है, जबकि भारत में यह केवल 3.5 टन है। उन्होंने इस अंतर को कम करने के लिए उन्नत किस्मों और बेहतर प्रबंधन तकनीक के विकास पर जोर दिया। वे हैदराबाद स्थित आईसीएआर-भारतीय धान अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIRR) द्वारा आयोजित अखिल भारतीय समन्वित चावल अनुसंधान परियोजना (AICRPR) के तहत शोधकर्ताओं की वार्षिक बैठक के डायमंड जुबली समारोह में बोल रहे थे।&nbsp;</p>
<p>प्रमुख चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. परोदा ने बताया कि पंजाब के किसान अब हाइब्रिड चावल की खेती छोड़ चुके हैं क्योंकि मिल मालिक इनकी कम खरीद कर रहे थे। उन्होंने ब्रीडर्स से अपील की कि वे चावल की यील्ड सुधारने पर अनुसंधान केंद्रित करें, ताकि किसानों का विश्वास पुनः स्थापित किया जा सके और उत्पादन बढ़ाया जा सके।</p>
<p>कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और ICAR के महानिदेशक<strong> डॉ. एम.एल. जाट</strong> ने कहा कि उपभोग के पैटर्न, जलवायु परिवर्तन और भूमि क्षरण को गंभीरता से लेना होगा। चावल की किस्मों का विकास, तकनीक, बाजार नीति और सामाजिक-आर्थिक पहलुओं पर गहन शोध की आवश्यकता है। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से भारत के कृषि-खाद्य तंत्र पर क्षेत्रीय स्तर पर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि देश में धान का क्षेत्रफल 50 लाख हेक्टेयर कम करना होगा, लेकिन साथ ही उत्पादन एक करोड़ टन बढ़ाना भी आवश्यक है।&nbsp;</p>
<p><strong>एआईसीआरपीआर</strong>&nbsp;देश में चावल को समर्पित सबसे बड़ा अनुसंधान नेटवर्क है, जिसमें देशभर के सभी धान उत्पादक राज्यों में 500 से अधिक वैज्ञानिक जुड़े हुए हैं। डायमंड जुबली बैठक का उद्देश्य वर्ष 2024 के दौरान किए गए चावल अनुसंधान की प्रगति पर चर्चा करना, अनुसंधान में नवीनतम विकास पर विमर्श करना और वर्ष 2025 के लिए तकनीकी कार्यक्रम तैयार करना है। यह बैठक 26 से 28 अप्रैल तक आयोजित की जा रही है।</p>
<p>ICAR-IIRR के निदेशक <strong>डॉ. आर.एम. सुंदरम</strong> ने 2024 के लिए अनुसंधान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और 2025 के लिए भविष्य की अनुसंधान योजना बताई। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि ICAR-IIRR भारत का पहला संस्थान है जिसने सांबा महसुरी पृष्ठभूमि पर आधारित जीन संपादित चावल विकसित किया है। इसमें 19% अधिक पैदावार की क्षमता है, जिससे किसानों के उत्पादन, उत्पादकता और लाभ में वृद्धि होगी।</p>
<p>पी.जे.टी.ए.यू. (PJTAU) के कुलपति <strong>डॉ. अलदास जनैयाह</strong> ने बताया कि तेलंगाना में संगठित चावल अनुसंधान की शुरुआत 1928 में निजाम शासन के दौरान हुई थी। हिमायतसागर बांध के निर्माण ने किसानों को धान की खेती के लिए प्रोत्साहित किया। आज तेलंगाना देश में चावल अधिशेष उत्पादन वाला राज्य बन चुका है।</p>
<p>आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) <strong>डॉ. डी.के. यादव</strong> ने कहा कि चावल अनुसंधान में प्रोत्साहन और जीन संपादन नए आयाम हैं। 1996 में बीज कानून लागू होने के बाद से भारत ने 1500 चावल किस्में जारी की हैं। कृषि निर्यात में 20% योगदान चावल का है, जिससे भारत को 48,000 करोड़ रुपये का विदेशी मुद्रा मिलती है। उन्होंने देश में हाइब्रिड चावल का रकबा बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इनोवेशन और बेहतर प्रबंधन से धान की पैदावार बढ़ाएं: डॉ. आर.एस. परोदा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फल और सब्जियों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एयर कार्गो नियमों में दी ढील]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-eases-air-cargo-rules-to-boost-indian-fruit-and-vegetable-exports.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 27 Apr 2025 09:13:36 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-eases-air-cargo-rules-to-boost-indian-fruit-and-vegetable-exports.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>आर. सूर्यमूर्ति</strong><br />भारत से फल, सब्जियां और अन्य पेरिशेबल (जल्दी नष्ट होने वाली) वस्तुओं का निर्यात अब पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने एयर कार्गो की आवाजाही सरल बनाने और लालफीताशाही कम करने के लिए कई सुधारों की घोषणा की है, जिससे किसान, निर्यातक और लॉजिस्टिक्स कंपनियां सभी लाभान्वित हो सकती हैं।</p>
<p>ये बदलाव विशेष रूप से अंगूर, आम, प्याज और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ जैसे अधिक मूल्य और जल्दी नष्ट होने वाले उत्पादों की त्वरित और किफायती ढुलाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किए गए हैं। इस कदम को 2025-26 के केंद्रीय बजट में सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण और कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के वादे के अनुरूप कहा जा सकता है।</p>
<p>नए कदमों के तहत सीबीआईसी ने 24 अप्रैल 2025 से ट्रांसशिपमेंट परमिट शुल्क समाप्त कर दिया है। यह बदलाव अधिसूचना संख्या 30/2025-कस्टम्स (एन.टी.) के माध्यम से लागू किया गया है। इससे टर्मिनलों के बीच माल की आवाजाही से संबंधित प्रक्रियागत विलंब और लागत में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों, विशेष रूप से बड़े कार्गो वॉल्यूम को संभालने वालों के लिए यह समय और लागत में बड़ी बचत करेगा।</p>
<p>अब तक बंदरगाहों या सीमा शुल्क स्टेशनों के बीच माल की आवाजाही के लिए एक विशेष परमिट की आवश्यकता थी जिसके लिए शुल्क लगता था। अब यह शुल्क समाप्त कर दिया गया है, जिससे कंपनियां अधिक स्वतंत्रता के साथ माल भेज सकेंगी। यह परिवर्तन छोटा लेकिन बड़े प्रभाव डालने वाला है।</p>
<p>एयर कार्गो क्षेत्र से जुड़ी पुरानी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सीबीआईसी ने अब यूनिट लोड डिवाइसेस (ULDs) के कस्टम क्षेत्र के बाहर अस्थायी आयात के लिए एकीकृत प्रक्रिया लागू की है। यह प्रक्रिया मरीन कंटेनरों के मौजूदा प्रोटोकॉल के समान है। यह एयरलाइन या कंसोल एजेंटों को कंटेनरों के री-एक्सपोर्ट की जिम्मेदारी निभाने की अनुमति देती है। पहले यह जिम्मेदारी केवल आयातकों पर होती थी। इस बदलाव को सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को वैश्विक लॉजिस्टिक्स मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p>एयर कार्गो आमतौर पर यूनिट लोड डिवाइसेस (ULDs) नामक कंटेनर में पैक किया जाता है। पहले इन कंटेनरों को हवाई अड्डे के कस्टम क्षेत्र से बाहर ले जाने के लिए जटिल प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता था। नई प्रणाली के तहत एयरलाइन या लॉजिस्टिक्स एजेंटों को इन कंटेनरों की जिम्मेदारी लेने की अनुमति दी गई है, जिससे प्रक्रिया अधिक तेज और सरल हो गई है।</p>
<p>इसके असावा, 2022 से चालू ऑल-इंडिया नेशनल ट्रांसशिपमेंट बांड प्रणाली को अब व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस सुविधा से एयरलाइंस के लिए विभिन्न सीमा शुल्क लोकेशन पर अलग-अलग बांड जमा करने की आवश्यकता समाप्त हो गई है। पहले एयरलाइंस को विभिन्न स्थानों पर माल के आवागमन के लिए अलग-अलग बांड भरने पड़ते थे। अब एक ही ऑल इंडिया ट्रांसशिपमेंट बांड का देशभर में उपयोग किया जा सकता है, जिससे कागजी कार्रवाई कम हो गई है और पूरी प्रक्रिया अधिक कुशल बन गई है।</p>
<p>सीबीआईसी ने ट्रांसशिपमेंट आवेदन प्रक्रिया को भी डिजिटाइज कर दिया है। अब निर्यातक और लॉजिस्टिक्स एजेंट ICEGATE (भारतीय सीमा शुल्क ईडीआई पोर्टल) के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इससे सेवा केंद्रों में भौतिक उपस्थिति की आवश्यकता समाप्त हो गई है। यह पेपरलेस सीमा शुल्क व्यवस्था की दिशा में एक और बड़ा कदम है।</p>
<p>गौरतलब है कि भारत का फल और सब्जी निर्यात लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 के पहले 11 महीनों में ताजे उत्पादों का निर्यात 5% से अधिक बढ़कर 3.39 अरब डॉलर हो गया। भारत ने पिछले वर्ष 11.2 करोड़ टन फल और 20.4 करोड़ टन सब्जियों का उत्पादन किया। इस लिहाज से भारत में वैश्विक खाद्य निर्यात में महाशक्ति बनने की क्षमता है।&nbsp;</p>
<p>भारत केला, आम, पपीता, प्याज और भिंडी का सबसे बड़ा उत्पादक है। भारत के प्रमुख निर्यात गंतव्यों में बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड्स, ब्रिटेन और सऊदी अरब शामिल हैं। हालांकि भारत का वैश्विक व्यापार में हिस्सा अभी केवल 1% है, लेकिन कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग और गुणवत्ता नियंत्रण में सुधार के चलते भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है। सार्वजनिक और निजी निवेश से इन्फ्रास्ट्रक्चर भी लगातार मजबूत हो रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ फल और सब्जियों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एयर कार्गो नियमों में दी ढील ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पोल्ट्री सेमिनार में इंडस्ट्री की बढ़ती फीड लागत एवं बाजार में अस्थिरता पर चर्चा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/clfma-hosts-strategic-seminar-on-the-future-of-poultry-in-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Apr 2025 18:57:06 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/clfma-hosts-strategic-seminar-on-the-future-of-poultry-in-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कम्पाउंड लाइवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (CLFMA) ऑफ इंडिया ने यूएस ग्रेन्स काउंसिल के सहयोग तथा बिहार पोल्ट्री फार्मर्स एसोसिएशन (BPFA) के समर्थन से पटना में "भारत में पोल्ट्री: वर्तमान चुनौतियां एवं आगे की राह" विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया। इस सेमिनार में 60 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें फीड निर्माता, पोल्ट्री किसान, पोषण विशेषज्ञ, अनाज सप्लायर तथा शैक्षणिक शोधकर्ता शामिल थे।</p>
<p>कार्यक्रम का शुभारंभ यूएस ग्रेन्स काउंसिल की मार्केटिंग स्पेशलिस्ट नयनतारा आनंदनी पांडे के स्वागत भाषण से हुआ। इसके बाद CLFMA के चेयरमैन दिव्य कुमार गुलाटी ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पोल्ट्री उद्योग में व्याप्त चुनौतियों, विशेषकर बढ़ती फीड लागत एवं बाजार अस्थिरता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने उद्योग की मजबूती के लिए सामूहिक कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। गुलाटी ने क्रिसिल रेटिंग्स की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि मुख्य फीड सामग्री मक्का एवं सोयाबीन की कीमतों में वृद्धि के कारण वित्त वर्ष 2025-26 में उद्योग की लाभप्रदता में गिरावट आने की आशंका है, हालांकि मजबूत मांग और खपत के चलते राजस्व में 8-10 प्रतिशत तक की वृद्धि का भी अनुमान है। फीड की लागत में 90% हिस्सा मक्का और सोयाबीन का होता है।</p>
<p>बिहार सरकार के पशुपालन विभाग की अपर मुख्य सचिव एन. विजय लक्ष्मी ने भी सेमिनार को संबोधित किया और राज्य सरकार की तरफ से पोल्ट्री उद्योग में सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।</p>
<p>सेमिनार के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों ने नए समाधान एवं फीड विकल्पों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। यूएस ग्रेन्स काउंसिल के क्षेत्रीय सलाहकार अमित सचदेव ने भारत में फीडस्टॉक की स्थिति और इसके वैश्विक प्रभाव का विश्लेषण प्रस्तुत किया। काउंसिल के निदेशक रीसे एच. कैनैडी ने अमेरिकी ज्वार को परंपरागत अनाज विकल्प के रूप में प्रस्तुत करते हुए इसके संभावित लाभों पर प्रकाश डाला। वहीं, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. पंकज कुमार सिंह ने पोल्ट्री एवं पशुपालन आहार में डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्यूबल्स (DDGS) के उपयोग संबंधी नया अनुसंधान साझा किया। इससे लागत में कमी आ सकती है।</p>
<p>सेमिनार के दौरान "भारतीय पोल्ट्री क्षेत्र में नया सामान्य" विषय पर पैनल चर्चा भी आयोजित की गई, जिसका संचालन अनमोल फीड्स के प्रबंध निदेशक अमित सरावगी ने किया। पैनल में बी.एम. साहनी (प्रबंध निदेशक, पटलिपुत्र फीड्स), पवन कुमार (अध्यक्ष, BPFA), अमित सचदेव और CLFMA के चेयरमैन गुलाटी शामिल रहे। चर्चा में टिकाऊ फीड विकल्पों, नीतिगत स्पष्टता तथा आपूर्ति श्रृंखला को दीर्घकालिक रूप से सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया गया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पोल्ट्री सेमिनार में इंडस्ट्री की बढ़ती फीड लागत एवं बाजार में अस्थिरता पर चर्चा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विश्व बौद्धिक संपदा दिवस: बढ़ते उपभोक्ता बाजार में जियोग्राफिकल इंडिकेशन का महत्व]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/world-intellectual-property-day-why-geographical-indications-matter-in-todays-ip-ecosystem.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Apr 2025 15:44:38 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/world-intellectual-property-day-why-geographical-indications-matter-in-todays-ip-ecosystem.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भौगोलिक संकेत या जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) उस स्थान को दर्शाता है जहां से कोई उत्पाद उत्पन्न होता है और वह स्थान की विशिष्ट गुणवत्ता, विशेषता या प्रतिष्ठा से जुड़ा होता है। भारत में जीआई ढांचे को 1999 में जियोग्राफिकल इंडिकेशंस ऑफ गुड्स (रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन) एक्ट के माध्यम से लागू किया गया था। आज देश में कृषि और प्राकृतिक उत्पादों, मैन्युफैक्चरिंग वाली वस्तुओं, खाद्य पदार्थों और हस्तशिल्प समेत 650 से अधिक उत्पादों को जीआई मान्यता प्राप्त है। इस तरह जीआई विशिष्ट क्षेत्रों से जुड़े उत्पादों की अनूठी पहचान को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण उपकरण बन गया है।</p>
<p>बौद्धिक संपदा (IP) के बदलते परिदृश्य में जीआई यूनीक हैं, क्योंकि ये सामुदायिक अधिकारों को संरक्षण प्रदान करते हैं। पेटेंट, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट जैसे अन्य बौद्धिक संपदा अधिकारों की तरह ये व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा नहीं करते। जीआई अधिकृत यूजर के रूप में वास्तविक उत्पादकों का पंजीकरण कर उन्हें जीआई टैग के उपयोग और उल्लंघन के मामलों में कानूनी कार्रवाई का विशेष अधिकार प्रदान करता है।&nbsp;</p>
<p>जीआई स्थानीय स्तर पर तैयार वस्तुओं की प्रतिष्ठा की रक्षा करता है और सदियों पुरानी पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखता है। महाराष्ट्र का अल्फांसो आम, तमिलनाडु की कांजीवरम साड़ी और अरुणाचल प्रदेश के अपातानी बुनाई जैसे उत्पादों के जीआई टैग इनकी नकल को रोकते हैं और मूल गुणवत्ता तथा विशिष्टता को बनाए रखते हैं।</p>
<p>जीआई का एक प्रमुख लाभ है कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाता है। जब उपभोक्ता उत्पादों की प्रामाणिकता और उत्पत्ति के प्रति जागरूक होते हैं, तो जीआई पंजीकृत उत्पाद प्रीमियम मूल्य पर बिक सकते हैं। इसका लाभ छोटे उत्पादकों को होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जीआई रोजगार बढ़ाते हैं और सतत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करते हैं। उदाहरण के लिए एक समय विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी निज़ामाबाद की काली मिट्टी की कारीगरी ने 2015 में जीआई पंजीकरण के बाद जबरदस्त तरक्की देखी है। इससे अब 10,000 से अधिक कारीगरों को आजीविका मिल रही है।</p>
<p>देश के प्रमुख क्लस्टर का अध्ययन बताता है कि किसी विशिष्ट स्थानीय उत्पाद ने कैसे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया- जिसमें उत्पादक, विक्रेता, व्यापारी, बिचौलिये, फाइनेंसर, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचा शामिल हैं। प्राचीन सभ्यताओं में बंदरगाह व्यापार और उत्पादन के प्रमुख केंद्र हुआ करते थे। आज ग्रामीण-शहरी विभाजन को कम करने और विकेन्द्रीकृत विकास की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है। इस दिशा में बड़े शहरों से दूर वाले क्षेत्रों को उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करना, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन करना और आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण करना विकास योजनाओं के कई संकटों को हल कर सकता है। जीआई टैग ऐसे उत्पादों की पहचान और मान्यता प्रदान करते हैं जो क्षेत्र के विकास में मदद करते हैं।</p>
<p>नकली उत्पाद उपभोक्ताओं और उत्पादकों दोनों के लिए एक बड़ा खतरा हैं। जीआई संरक्षण ऐसे मामलों में कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे नकली और अनुचित विक्रेताओं को क्षेत्रीय ब्रांड नामों के दुरुपयोग से रोका जा सकता है। विश्व व्यापार संगठन (WTO) का बौद्धिक संपदा अधिकारों पर व्यापार संबंधी समझौता (TRIPS) और भारत का जीआई अधिनियम, 1999 यह सुनिश्चित करते हैं कि उत्पादकों के अधिकार सुरक्षित रहें और उनके उत्पादों की विशिष्टता बरकरार रहे।</p>
<p>जीआई उपभोक्ताओं में यह विश्वास उत्पन्न करता है कि वे जो उत्पाद खरीद रहे हैं, वे पारंपरिक तरीकों से निर्मित, उच्च गुणवत्ता वाले और प्रामाणिक हैं। यह भरोसा ऐसे उत्पादों को अधिक आकर्षक बनाता है, विशेषकर उन उपभोक्ताओं के लिए जो विरासत और प्रामाणिकता को महत्व देते हैं। व्यवसायों के लिए जीआई मान्यता उनके ब्रांड की प्रतिष्ठा को बढ़ाती है। जीआई की विश्वसनीयता उपभोक्ताओं की पसंद को प्रभावित करती है, जिससे बिक्री बढ़ती है और ग्राहक निष्ठा मजबूत होती है।</p>
<p>जीआई पारंपरिक उत्पादन तरीकों का उपयोग करते हैं, जो अक्सर पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही तकनीकों पर आधारित होते हैं। ये विधियां स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर प्राकृतिक और सतत प्रक्रियाएं अपनाती हैं, जो पर्यावरण संरक्षण के अनुरूप होती हैं।</p>
<p>सीमाई राज्यों में जीआई टैगिंग और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रत्येक उत्पाद को राजनीतिक नक्शे पर किसी जिले या क्षेत्र से जोड़ा जाता है। यह वैश्विक स्तर पर उस क्षेत्र में देश की ऐतिहासिक उपस्थिति का एक प्रमाण बन जाता है। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर विवाद की स्थिति में ऐसे नक्शे महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में काम कर सकते हैं।</p>
<p>भारत सरकार ने 2030 तक 10,000 जीआई टैग का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में नाबार्ड (NABARD) सहित कई सरकारी संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। नाबार्ड ने जीआई पंजीकरण को प्रोत्साहित करने में प्रारंभिक चरणों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आंध्र प्रदेश के पोचमपल्ली इकत को देश का तीसरा जीआई टैग दिलाने में सहायता इसका उदाहरण है।&nbsp;</p>
<p>नाबार्ड ने 2019 में GI पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए एक समग्र नीति शुरू की, जो न केवल जीआई पंजीकरण को समर्थन देती है बल्कि अधिकृत उपयोगकर्ताओं का पंजीकरण, मार्केटिंग में सहायता, उत्पादकों के कौशल विकास, दस्तावेजीकरण, क्षमता निर्माण और जागरूकता अभियानों के माध्यम से भी सहायता प्रदान करती है। अब तक नाबार्ड के समर्थन से 139 उत्पादों को GI प्रमाणपत्र मिल चुका है।</p>
<p>आज के उन्नत उपभोक्ता बाजार में जीआई लेबल एक विशिष्ट उत्पाद का संकेत है जो उत्पादकों को प्रीमियम मूल्य दिला सकता है। लेकिन जीआई केवल लेबल नहीं हैं - वे विरासत को सुरक्षित रखने, स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने, उपभोक्ता विश्वास बनाने और नकली उत्पादों पर रोक लगाने के सशक्त साधन हैं। जैसे-जैसे वैश्विक व्यापार का विस्तार हो रहा है और उपभोक्ता प्रामाणिकता की तलाश कर रहे हैं, जीआई का महत्व लगातार बढ़ रहा है। जीआई विरासत का सम्मान करने के साथ नवाचार को प्रोत्साहित करते हैं, और इस तरह आधुनिक बाजारों में सतत विकास का आधार बनते हैं।</p>
<p><em><strong>(लेखक, नाबार्ड के चीफ जनरल मैनेजर हैं।)</strong></em></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ विश्व बौद्धिक संपदा दिवस: बढ़ते उपभोक्ता बाजार में जियोग्राफिकल इंडिकेशन का महत्व ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं खरीद 142 लाख टन के पार पहुंची, सबसे ज्यादा खरीद हरियाणा से हुई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wheat-procurement-crossed-142-lakh-tonnes-maximum-procurement-was-done-from-haryana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 22 Apr 2025 18:40:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wheat-procurement-crossed-142-lakh-tonnes-maximum-procurement-was-done-from-haryana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>तीन साल पहले रबी मार्केटिंग सीजन 2022-23 में कमजोर उत्पादन और कम सरकारी खरीद के चलते गेहूं खरीद के मोर्चे पर पैदा हुई मुश्किल अब तीसरे साल खत्म होने जा रही है। भारतीय खाद्य निगम के 21 अप्रैल, 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 में गेहूं की सरकारी खरीद 142.13 लाख टन को पार कर गई है जो पिछले साल इसी समय 87.76 लाख टन थी। पिछले साल कुल खरीद 266 लाख टन रही थी जिसके चालू सीजन में गेहूं खरीद 300 लाख टन को पार कर जाने की संभावना बन रही है। पिछले तीन साल में गेहूं की कीमतों के मोर्चे पर दबाव झेल रही सरकार के लिए यह राहत भरी खबर है।</p>
<p>चालू सीजन में गेहूं के बंपर उत्पादन के पीछे मौसम का सामान्य रहना और गेहूं का रकबा बढ़ना प्रमुख वजह है। वहीं, गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़कर 2425 रुपये प्रति क्विटंल तक पहुंचने और खुले बाजार में बेहतर कीमतों के चलते भी किसानों का रुख गेहूं की तरह बढ़ा है। मध्यप्रदेश और राजस्थान सरकार गेहूं पर बोनस भी दे रही हैं।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>चालू सीजन में अभी तक सबसे अधिक 50.36 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हरियाणा में हुई है पिछले सीजन में 21 अप्रैल, 2024 तक हरियाणा में गेहूं की सरकारी खरीद 43.53 लाख टन रही थी। वहीं हरियाणा के बाद मध्य प्रदेश में 49.55 लाख टन की खरीद के साथ मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर है। वहां पिछले साल इसी समय तक 26.74 लाख टन गेहूं की सरकारी खऱीद हुई थी। तीसरे नंबर पर अभी पंजाब है और वहां 21 अप्रैल तक 29.93 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई है जबकि पिछले पंजाब में इस तिथि तक केवल 12.37 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई थी।</p>
<p>राजस्थान में अभी तक 7.30 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई है जबकि पिछले साल वहां इस समय तक केवल 1.72 लाख टन गेहूं की सरकारी खऱीद हुई थी। देश में सबसे अधिक गेहूं के रकबे वाला उत्तर प्रदेश सरकारी खऱीद में अभी पांचवे नंबर पर है और वहां 21 अप्रैल तक 4.85 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई है जो पिछले साल इसी तिथि तक 3.33 लाख टन रही थी।&nbsp;अन्य राज्यों में बिहार में अभी तक 8928 टन, गुजरात में 2456 टन और हिमाचल प्रदेश में 449 टन गेहूं की सरकारी खऱीद हुई है। वहीं दिल्ली, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और जम्मू एवं कश्मीर में गेहूं की कोई सरकारी खऱीद अभी तक नहीं हुई है।</p>
<p>1 अप्रैल, 2025 को केंद्रीय पूल में गेहूं की स्टॉक 117.94 लाख टन था जबकि पिछले साल इसी तिथि को केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक 75.02 लाख टन पर आ गया था और 1 अप्रैल, 2023 को केंद्रीय पूल में गेहूं का सरकारी स्टॉक 83.45 लाख टन रहा था। पिछले दो साल में अप्रैल के शुरू में केंद्रीय पूल में गेहूं स्टॉक 2017 के बाद से सबसे कम रहा था।</p>
<p>फरवरी और मार्च, 2022 में तापमान में अचानक बढ़ोतरी से गेहूं की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ा था और उसके चलते सरकार को गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही घरेलू बाजार में भी स्टॉक लिमिट को लागू करना पड़ा था। रबी मार्केटिंग सीजन 2022-23 में गेहूं की सरकारी खरीद गिरकर 187 लाख टन पर अटक गई थी। इस साल अभी भी सरकार ने निजी खरीदारों के लिए हर सप्ताह गेहूं के स्टॉक को उपभोक्ता मामले मंत्रालय की वेबसाइट पर अपडेट करने का आदेश दे रखा है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67fe2a3146b88.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं खरीद 142 लाख टन के पार पहुंची, सबसे ज्यादा खरीद हरियाणा से हुई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हीटवेव के चलते चार राज्यों में गेहूं की फसल प्रभावित, उत्पादन पर पड़ेगा असर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/heatwave-affects-wheat-crop-in-four-states-production-may-be-affected.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 18 Apr 2025 16:31:42 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/heatwave-affects-wheat-crop-in-four-states-production-may-be-affected.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि मंत्रालय ने चालू रबी सीजन (2024-25) के दौरान देश में 11.54 करोड़ टन गेहूं के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान लगाया है। लेकिन समय से पहले हीटवेव और भीषण गर्मी के चलते गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमानों को झटका लग सकता है। देश के चार प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में अधिक तापमान के कारण गेहूं की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ा है। दक्षिणी हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार में असामान्य तापमान के चलते गेहूं की पैदावार प्रभावित हो सकती है।</p>
<p><strong>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)</strong> के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने<em><strong> रूरल वॉयस </strong></em>को बताया कि गेहूं की फसल को वर्ष 2021-22 में भी समय से पहले अत्यधिक गर्मी के कारण नुकसान हुआ था। इस बार उतना नुकसान तो नहीं है लेकिन मार्च के महीने में ही कई राज्यों में हीटवेव और अधिक गर्मी के कारण गेहूं की फसल प्रभावित हुई है।</p>
<p>गौरतलब है कि वर्ष 2021-22 में देश का गेहूं उत्पादन घटकर 10.77 करोड़ टन रह गया था। उस साल फरवरी के अंत में और मार्च के शुरू में अधिक तापमान के कारण गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ था। इस साल मौसम विभाग ने भीषण गर्मी का पूर्वानुमान लगाते हुए उत्तर-पश्चिमी और मध्य भारत में हीटेवेव वाले दिनों की संख्या अधिक रहने की संभावना जताई है। मार्च के आखिर में ही देश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री को पार करने लगा था और अप्रैल के पहले सप्ताह से ही हीटवेव चलने लगीं।&nbsp;</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक,<span> इस साल मध्य भारत में गेहूं की फसल अच्छी हुई है और पिछले साल के मुकाबले करीब 10-15 फीसदी पैदावार बढ़ सकती है। इस साल मध्यप्रदेश में गेहूं की अगैती किस्म एचडी-3385 का रकबा बढ़ा है। यह किस्म भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) पूसा ने विकसित की है। इसकी खासियत यह है कि इसे सामान्य किस्मों से पहले बोया जाता है और फरवरी-मार्च में यह तैयार होने के आखिरी चरण में आ जाती है। ऐसे में अगर मार्च के मध्य के बाद अगर तापमान बढ़ता है तो इस किस्म के गेहूं की उत्पादकता प्रभावित नहीं होती है।</span></p>
<p><span>मध्य भारत कंसोर्सियम ऑफ एफपीओ के सीईओ <strong>योगेश द्विवेदी</strong> ने <em><strong>रूरल वॉयस</strong></em> को बताया कि इस बार मध्य प्रदेश में गेहूं की बढ़िया फसल है। लेकिन हीटवेट के कारण सतना, पन्ना, रीवा क्षेत्र में देरी से बुवाई वाले गेहूं को नुकसान पहुंचा है। इन इलाकों में गेहूं की पैदावार 15 फीसदी तक घटी है। जो गेहूं दिसंबर में बोया गया था, गर्मी के कारण उसके दाने पतले पड़ गये हैं। द्विवेदी ने उम्मीद जताई कि इस बार मध्यप्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद पिछले साल से अधिक रहेगी।&nbsp;</span></p>
<p><span>इस तरह </span>मध्य भारत में गेहूं की फसल जो फायदा हुआ,<span>&nbsp;</span><span>भीषण गर्मी के कारण कई राज्यों में हुए नुकसान ने उसे बराबर कर दिया है। इसके चलते देश में गेहूं का उत्पादन पिछले साल के स्तर पर ही रह सकता है। पिछले साल वर्ष 2023-24 में देश में 11.33 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हुआ था।&nbsp;</span></p>
<p>उत्तर भारत के राज्यों में जहां धान के बाद गेहूं की बुवाई हुई,<span>&nbsp;वहां फसल बेहतर है। लेकिन देरी से बोई गई गेहूं की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ा है। इस तरह का प्रभाव हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में अधिक दिख रहा है।</span></p>
<p>इस साल अधिकांश राज्यों में उत्पादकता का स्तर 50 से 52 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आ रहा है। कुछ राज्यों में जरूर 54-55 क्विंटल और कहीं-कहीं 55 से 60 क्विंटल प्रति हैक्टेयर की उत्पादकता का स्तर भी आ रहा है लेकिन यह बहुत सीमित क्षेत्र में है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हीटवेव के चलते चार राज्यों में गेहूं की फसल प्रभावित, उत्पादन पर पड़ेगा असर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डॉ. मांगी लाल जाट सेक्रेटरी डेअर और आईसीएआर के महानिदेशक नियुक्त, अधिसूचना जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/dr-mangi-lal-jat-appointed-secretary-dare-and-director-general-icar-by-appointment-committee-of-cabinet.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 18 Apr 2025 09:13:06 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/dr-mangi-lal-jat-appointed-secretary-dare-and-director-general-icar-by-appointment-committee-of-cabinet.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और मौजूदा समय में इक्रीसेट में डीडीजी (रिसर्च) <strong>डॉ. मांगी लाल जाट</strong> को केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च एंड एजुकेशन (डेअर) का सेक्रेटरी और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) का महानिदेशक नियुक्त किया गया है। नियुक्ति संबंधी मामलों की कैबिनेट समिति (एसीसी) ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी है।</p>
<p>इस संबंध में 17 अप्रैल को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि इंटरनेशनल क्रॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी एरिड ट्रापिक्स (इक्रीसेट) हैदराबाद के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (रिसर्च) और डायरेक्टर, ग्लोबल रिसर्च प्रोग्राम डॉ. मांगी लाल जाट को सेक्रेटरी डेयर और आईसीएआर का महानिदेशक नियुक्त किया गया है। एसीसी के मुताबिक, उनकी नियुक्ति पदभार ग्रहण करने के समय से तीन साल की अवधि के लिए की गई है।</p>
<p>डॉ. जाट का चयन कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बनी देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों की एक समिति ने किया है जिसमें आईसीएआर के दो पूर्व महानिदेशक, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलोर के डायरेक्टर और अन्य एक्सपर्ट शामिल थे। <strong>रूरल वॉयस</strong> सूत्रों के मुताबिक डॉ. जाट 21 अप्रैल को अपना पदभार ग्रहण कर सकते हैं।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, इस पद पर नियुक्ति के लिए गठित समिति ने 7 मार्च को उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया था जिसमें शॉर्टलिस्ट किये गये पांच वैज्ञानिकों ने भाग लिया था। इसी समिति की सिफारिशों के बाद एसीसी ने डॉ. मांगी लाल जाट की नियुक्ति को मंजूरी दी और 17 अप्रैल को इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई।</p>
<p><strong>डॉ. एम. एल. जाट</strong> का कृषि वैज्ञानिक के रूप में एक लंबा अनुभव होने के साथ ही उनकी विशेषज्ञता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके शोध व नेतृत्व को मिली पहचान को उनकी नियुक्ति की मुख्य वजह माना जा रहा है। वह आईसीएआर में करीब डेढ़ दशक रहे हैं। इसके बाद उन्होंने इंटरनेशनल सेंटर फॉर मेज एंड व्हीट इंप्रूवमेंट सेंटर&nbsp; (सिमिट) में करीब एक दशक तक काम किया। आईसीएआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक के इक्रीसेट के महानिदेशक बनने के पहले डॉ. एम. एल. जाट इक्रीसेट में डीडीजी थे और उन्हें नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट में ग्लोबल लीडर के रूप में पहचान बनाई है।</p>
<p>एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने उनके बारे में बात करते हुए <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि डॉ. जाट रिसोर्स कंजर्वेशन एग्रीकल्चर में एक्सपर्ट हैं और इस समय भारत में ऐसे एक्सपर्ट नेतृत्व की जरूरत है जो देश के ड्राइ लैंड एरिया को ग्रीन में तब्दील करने के लिए काम कर सके। इसमें जीरो टिलेज और कार्बन सिक्वेंसिंग जैसी प्रक्रियाएं अहम हैं।</p>
<p>लंबे समय में आईसीएआर में एक मजबूत साइंटिफिक लीडरशिप की जरूरत महसूस की जा रही थी। उम्मीद है कि डॉ. एम. एल. जाट के आईसीएआर के महानिदेशक बनने से यह कमी पूरी हो सकेगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x_6801d6e232abc.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ डॉ. मांगी लाल जाट सेक्रेटरी डेअर और आईसीएआर के महानिदेशक नियुक्त, अधिसूचना जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वैश्विक अनिश्चतता के बीच भारत का कृषि निर्यात 12.69 फीसदी बढ़ा, चावल निर्यात में 19.73 फीसदी की बढ़ोतरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indias-agricultural-exports-increased-by-12.69-percent-rice-exports-increased-by-19.73-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 17 Apr 2025 16:33:14 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indias-agricultural-exports-increased-by-12.69-percent-rice-exports-increased-by-19.73-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>विश्व व्यापार को लेकर जारी अनिश्चतताओं के बीच वित्त वर्ष 2024-25 में भारत के कृषि निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादन निर्यात विकास प्रधिकरण (एपीडा) के तहत आने वाले कृषि उत्पादों का निर्यात 12.69 फीसदी बढ़कर 25.14 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। देश से कृषि उत्पादों के कुल निर्यात में एपीडा के तहत आने वाले उत्पादों के निर्यात की हिस्सेदारी लगभग 51 फीसदी है। इस प्रकार देश का कुल कृषि निर्यात 50 अरब डॉलर के पार पहुंच जाएगा।&nbsp;</p>
<p><strong>वाणिज्य मंत्रालय</strong> की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत का चावल निर्यात 19.73 फीसदी बढ़कर 12.47 <span>अरब </span>डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। जबकि मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात 12.57 <span>फीसदी ​​बढ़कर </span>5.09 अरब डॉलर हो गया। देश से फल-सब्जियों के निर्यात में 5.67 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 3.86 अरब डॉलर तक पहुंच गया है जबकि अनाज उत्पाद और अन्य प्रोसेस्ड वस्तुओं का निर्यात 8.71 फीसदी की वृद्धि के साथ 3.86 अरब डॉलर रहा है। चावल निर्यात पर पाबंदियों के हटने से चावल निर्यात में इजाफा हुआ है, जिसमें आधी से ज्यादा हिस्सेदारी बासमती चावल की है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p><strong>वित्त वर्ष 2024-25</strong> में समुद्री उत्पादों के निर्यात में कोई विशेष वृद्धि नहीं हुई है और 0.45 फीसदी बढ़कर 7.40 अरब डॉलर रहा है। इसके अलावा, जैविक खाद्य उत्पादों के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। वर्ष 2024-25 में ऑर्गेनिक खाद्य उत्पादों का निर्यात 34.6% बढ़कर 66.59 करोड़ डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष 49.48 करोड़ डॉलर था। मात्रात्मक रूप से ऑर्गेनिक खाद्य उत्पादों का निर्यात 41 फीसदी बढ़कर 3.7 लाख टन हो गया है। &nbsp;विशेष रूप से, ऑर्गेनिक दालों का निर्यात 52.5 लाख डॉलर से बढ़कर 178.9 लाख डॉलर तक पहुंच गया।</p>
<p>एपीडा एक अधिकारी ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि यह वृद्धि विकसित देशों में भारत के ऑर्गेनिक उत्पादों की बढ़ती मांग को दर्शाती है। जैविक खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार और एपीडा की ओर से कई कदम उठाए जा रहे हैं। देश के चावल निर्यात में बढ़ोतरी के पीछे विश्व बाजार में बासमती चावल की मजबूत मांग बड़ी वजह है। माना जा रहा है कि अमेरिका के रैसिप्रोकल टैरिफ का असर बासमती जैसे खास इलाके में पैदा होने वाले जीआई उत्पादों पर अधिक नहीं पड़ेगा।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>चाय, काफी और तंबाकू निर्यात बढ़ा</strong>&nbsp;</p>
<p>सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कृषि उपज के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिनमें चाय, कॉफी और तंबाकू निर्यात भी शामिल हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत से 92.38 करोड़ डॉलर का चाय निर्यात हुआ जो पिछले साल के मुकाबले 11.84 फीसदी अधिक है। कॉफी का निर्यात 40.37 फीसदी बढ़कर 1.80 अरब डॉलर हो गया जबकि तंबाकू के निर्यात में 36.53 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई और यह 1.97 अरब डॉलर तक पहुंच गया।&nbsp;</p>
<p><strong>ऑयल मील और काजू निर्यात में गिरावट </strong></p>
<p>वित्त वर्ष 2024-25 में भारत से तिलहन का निर्यात 6.45 फीसदी और ऑयल मील का निर्यात 21.56 फीसदी घटकर 1.34 अरब डॉलर रहा है। &nbsp;</p>
<p>मार्च महीने में भारत के काजू निर्यात को बड़ा झटका लगा है और यह 12.58 फीसदी घटकर 253.1 लाख रह गया। पूरे वित्त वर्ष के दौरान काजू निर्यात में 0.30 फीसदी की गिरावट आई और यह 33.8 करोड़ टन रहा है। विश्व में प्रमुख काजू निर्यातक वियतनाम पर अमेरिका द्वारा 46 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद भारत से काजू निर्यात बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन वियतनाम और यूरोपीय संघ के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से वियतनाम के काजू निर्यात को फायदा पहुंचा है। &nbsp;</p>
<p><strong>मार्च में मसालों का निर्यात गिरा </strong>&nbsp;</p>
<p>मार्च के महीने में भारत से मसालों के निर्यात में 9.46 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है हालांकि, पूरे वित्त वर्ष के दौरान देश से मसालों का निर्यात 4.78 फीसदी बढ़कर 4.45 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ वैश्विक अनिश्चतता के बीच भारत का कृषि निर्यात 12.69 फीसदी बढ़ा, चावल निर्यात में 19.73 फीसदी की बढ़ोतरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं खरीद की जोरदार शुरुआत, सरकारी एजेंसियों और प्राइवेट ट्रेडर्स के बीच छिड़ी होड़]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wheat-procurement-started-with-full-vigor-competition-between-government-agencies-and-private-traders-for-purchase.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 15 Apr 2025 15:13:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wheat-procurement-started-with-full-vigor-competition-between-government-agencies-and-private-traders-for-purchase.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 के लिए देश में गेहूं की सरकारी खरीद की जोर पकड़ रही है। केंद्र सरकार ने इस सीजन के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,425 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जो पिछले सीजन के मुकाबले 150 रुपये अधिक है। इसके ऊपर मध्य प्रदेश सरकार 175 रुपये और राजस्थान सरकार 150 रुपये प्रति क्विंटल बतौर बोनस दे रही है। ऐसे में प्राइवेट ट्रेडर्स को गेहूं खरीदने के लिए एमएसपी से ऊपर भाव देना पड़ रहा है।&nbsp;</p>
<p>प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य मध्यप्रदेश और राजस्थान में गेहूं का भाव अधिक होने के कारण हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में गेहूं खरीदने के लिए सरकारी एजेंसियों और प्राइवेट ट्रेडर्स के बीच प्रतिस्पर्धा छिड़ गई है, जिसका असर इन राज्यों में सरकारी खरीद पर पड़ सकता है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अब तक देश में कुल 33.47 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। हालांकि, कई राज्यों के आंकड़े 10 अप्रैल के बाद अपडेट नहीं हुए हैं। वास्तविक खरीद लगभग 60 लाख टन के आसपास होने का अनुमान है।</p>
<p>13 अप्रैल तक मध्यप्रदेश में सर्वाधिक 29.55 लाख टन गेहूं की खरीद मध्यप्रदेश से हुई है जबकि राजस्थान में दो लाख टन से अधिक गेहूं सरकारी एजेंसियों ने खरीदा है। दोनों राज्यों में गेहूं की कटाई जल्द शुरू हो जाती है। उत्तर प्रदेश में शनिवार तक दो लाख टन से अधिक गेहूं की खरीद हो चुकी थी। पंजाब में गेहूं खरीद अभी शुरू ही हुई है। <span>आमतौर पर पंजाब में गेहूं की खरीद बैसाखी के बाद जोर पकड़ती है।&nbsp;</span>पंजाब में 13 अप्रैल तक करीब 24 हजार टन गेहूं की खरीद हुई है। पंजाब मंडी बोर्ड के एक अधिकारी के मुताबिक, प्राइवेट ट्रेडर्स द्वारा किसानों को एमएसपी से बेहतर भाव दिए जाने के कारण वे सरकारी खरीद की बजाय प्राइवेट ट्रेडर्स का रुख कर रहे हैं।</p>
<p>हरियाणा में विभिन्न एजेंसियों ने 9 अप्रैल तक 3.53 लाख टन गेहूं खरीदा है जो पिछले साल इसी तारीख तक एक लाख टन से कम था।&nbsp;पिछले दिनों हुई बारिश के कारण गेहूं खरीद प्रभावित हुई थी। लेकिन इस सप्ताह खरीद में तेजी आएगी। पिछले दो-तीन दिनों में हरियाणा-पंजाब की अनाज मंडियों में लाखों टन अनाज पहुंच चुका है। कई मंडियों में अनाज की आवक के मुकाबले खरीद व उठान न हो पाने की समस्या आ रही है।</p>
<p>हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चेतावनी दी है कि अगर किसी अनाज मंडी में किसान का सरसों या गेहूं भीगता है तो हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (मार्केटिंग बोर्ड) के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार गेहूं की खरीद व उठान में तेजी लाने का प्रयास कर रही है।&nbsp;</p>
<p>गेहूं खरीद में किसानों को परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए राज्य सरकारें और मंडी बोर्ड अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। प्राइवेट ट्रेडर्स से प्रतिस्पर्धा को देखते हुए भी राज्य सरकार खरीद नियमों में ढील दे रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने पंजीकृत किसानों को सत्यापन के बिना 100 क्विंटल तक गेहूं बेचने की छूट दे दी है। सत्यापन के बाद किसान उत्पादन क्षमता का तीन गुना तक गेहूं बेच सकते हैं।</p>
<p>खुले बाजार में गेहूं के दाम अधिक होने के कारण यूपी में भी किसान सरकारी खरीद केंद्रों का कम रुख कर रहे हैं। राजस्थान और मध्यप्रदेश में गेहूं के अधिक भाव के कारण प्राइवेट ट्रेडर्स यूपी, हरियाणा और पंजाब से गेहूं खरीदने की कोशिशों में जुटे हैं। &nbsp;</p>
<p>कृषि मंत्रालय ने रबी सीजन 2024-25 में रिकॉर्ड 11.54 <span>करोड़ टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया है। </span><span>केंद्र सरकार ने इस साल </span>310 <span>लाख टन </span>गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है। पिछले साल भी&nbsp;<span>सरकार ने रिकॉर्ड 11.32 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का दावा किया गया था लेकिन गेहूं की सरकारी खरीद 266 लाख टन ही पहुंच पाई थी। पूरे साल गेहूं के दाम अधिक रहे</span>, <span>जिससे उत्पादन के आंकड़ों पर भी सवाल उठे। </span></p>
<p><span>इससे पहले रबी मार्केटिंग सीजन </span>2021-22 <span>के दौरान 424 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी जबकि उस साल गेहूं उत्पादन 11 करोड़ टन से कुछ कम रहा था।&nbsp;</span><span>अब देखना है कि क्या इस साल गेहूं की सरकारी खरीद गेहूं उत्पादन के अनुमानों पर खरीद उतरती है या नहीं!</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं खरीद की जोरदार शुरुआत, सरकारी एजेंसियों और प्राइवेट ट्रेडर्स के बीच छिड़ी होड़ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67fe2a3146b88.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नाबार्ड की पहल: राजस्थान की महिला किसानों ने नासिक में ली कृषि प्रसंस्करण और निर्यात की जानकारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/nabard-initiative-women-farmers-from-rajasthan-gain-insights-on-agri-processing-and-export-in-nashik.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 13 Apr 2025 10:51:29 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/nabard-initiative-women-farmers-from-rajasthan-gain-insights-on-agri-processing-and-export-in-nashik.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नाबार्ड कृषि निर्यात सुविधा केंद्र (AEFC) की तरफ से जोधपुर-नासिक कृषि निर्यात प्रोत्साहन पहल का आयोजन 6&ndash;9 अप्रैल 2025 को महाराष्ट्र के नासिक में हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान की महिला किसानों एवं एफपीओ को वैश्विक कृषि व्यापार के लिए सशक्त बनाना है। इस चार दिवसीय अध्ययन यात्रा में पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, नागौर, बाड़मेर, बालोतरा, फलोदी और पाली जिलों से 20 महिला एफपीओ प्रतिनिधियों, एग्रीप्रेन्योर्स एवं महिला जैविक किसानों ने भाग लिया। इस दौरान महिला किसानों एवं किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को कृषि प्रसंस्करण और निर्यात के बारे में व्यावहारिक ज्ञान देने के साथ वैश्विक कृषि बाज़ारों से जोड़ने तथा निर्यात के क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने के बारे में बताया गया।</p>
<p>इस अवसर पर सह्याद्रि एफपीओ के सफलता की कहानी इसके प्रबंध निदेशक विलास शिंदे ने दी। उन्होंने एपीडा द्वारा कृषि एवं खाद्य उत्पादों के निर्यात की प्रक्रिया और अवसरों के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी। सह्याद्री फार्म्स पर आधारित डॉक्युमेंट्री का भी प्रदर्शन किया गया। राजस्थान की महिला एफपीओ ने सैम एग्री की अनार प्रोसेसिंग यूनिट, निर्यात के लिए अनार दाना निकालने की तकनीक और अनार से बनने वाले अन्य उत्पादों तथा अनार और अंगूर किसानों से अनुभव साझा किया।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x_67fb497179076.jpg" alt="" /></p>
<p>इस कार्यक्रम का आयोजन नाबार्ड कृषि निर्यात सुविधा केंद्र, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA), नासिक की सह्याद्रि किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड तथा जोधपुर के साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। महिला एफपीओ प्रतिनिधिमंडल ने सह्याद्रि एफपीओ, सह्याद्रि टाटा स्ट्राइव स्किल डेवलपमेंट सेंटर, सैम एग्री, राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास फाउंडेशन (NHRDF), भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) द्वारा स्थापित कृषि उत्पादन संरक्षण केंद्र (KRUSHAK), ओम गायत्री नर्सरी, ओम गायत्री एग्री मॉल और सेवन स्टार फ्रूट्स प्राइवेट लिमिटेड का दौरा किया। इस दौरान राजस्थान की महिला किसानों को महाराष्ट्र के शेतकारी संघठन के अध्यक्ष ललित दादा बहाले और विलास तथोद से मिलने का मौका मिला।</p>
<p>तकनीकी सत्र के आयोजन में मुख्य अथिति सह्याद्रि एफपीओ के प्रबंध निदेशक विलास शिंदे, एपीडा के प्रशांत वाघमारे, नाबार्ड AEFC एवं SABC के डॉ. &nbsp;भागीरथ चौधरी, सुश्री सपना बोहरा, सुश्री श्रेया मिश्रा एवं केएस भारद्वाज और सह्याद्रि एफपीओ के प्रीतीश काले की उपस्थिति रही। प्रशिक्षण व संस्थागत भ्रमण के क्रम में महिला किसानो ने राष्ट्रीय बागवनी अनुसंधान एवं विकास फाउंडेशन (NHRDF) का दौरा किया, जहां प्याज की उन्नत किस्मों, बीज उत्पादन तकनीक, गुणवत्ता परीक्षण एवं भंडारण तकनीकों पर डॉ. सुजय पांडे, डॉ. आर.सी. गुप्ता, डॉ. श्रिवर्षा, डॉ. नितीश शर्मा एवं डॉ. अशोक टेलर ने व्याख्यान दिया।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x_67fb496e783bf.jpg" alt="" /></p>
<p>महिला किसानों ने ओम गायत्री नर्सरी प्राइवेट लिमिटेड का भ्रमण किया, जहां सब्जियों और फलों के बीज अंकुरण कक्ष, बुवाई इकाई, 200 एकड़ का शेड नेट हाउस तथा अंगूर ग्राफ्टिंग यूनिट की जानकारी प्राप्त की। किसानों ने एक ही स्थान पर अच्छी क्वालिटी के उपलब्ध सभी कृषि इनपुट की सराहना की। भाभा अणु संशोधन केंद्र ने कृषि उत्पाद संरक्षण केंद्र में डॉ. दिलीप पोटे एवं हिंदुस्तान एग्रो टीम ने फूड इरैडिएशन केंद्र की पूरी तकनीकी जानकारी दी और कृषि निर्यात में इसके महत्व को समझाया।</p>
<p>आखिर में महिला प्रतिनिधियों ने सेवन स्टार फ्रूट्स प्रा. लि. की निर्यात करने वाली फल प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग यूनिट का दौरा किया, जिसमें ग्रेडिंग, सॉर्टिंग, लेबलिंग, प्री-कूलिंग, कोल्ड स्टोरेज, डिस्पैच यूनिट एवं क्वारंटाइन प्रयोगशाला का गहन अवलोकन किया गया। सेवन स्टार फ्रूट्स के मनोज पाटनी और उनकी टीम ने अंगूर और अनार के निर्यात के अवसरों और चुनौतियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x_67fb49708e007.jpg" alt="" /></p>
<p><br />&nbsp;&nbsp;<br />चार दिवसीय इस विशेष कार्यक्रम के दौरान महिला किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) ने कृषि प्रसंस्करण, निर्यात, प्रमाणन, लॉजिस्टिक्स और मूल्यवर्धन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक एवं तकनीकी ज्ञान अर्जित किया। यह पहल राजस्थान की महिला किसानों के लिए न केवल एक ठोस प्रशिक्षण मंच साबित हुई, बल्कि अनुभव-आधारित शिक्षा, ज्ञान साझा करने और नेटवर्किंग को प्रोत्साहन देने वाली एक प्रेरणास्पद मिसाल बनकर उभरी।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67fb496f49ea4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नाबार्ड की पहल: राजस्थान की महिला किसानों ने नासिक में ली कृषि प्रसंस्करण और निर्यात की जानकारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67fb496f49ea4.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमेरिका में भारत के श्रिंप पर 18.26% शुल्क, टैरिफ कम होने के बावजूद बाजार में अनिश्चितता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/us-tariff-relief-offers-lifeline-to-indian-shrimp-exports-amid-market-turmoil.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 12 Apr 2025 16:12:41 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/us-tariff-relief-offers-lifeline-to-indian-shrimp-exports-amid-market-turmoil.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से अचानक की गई टैरिफ में कटौती से भारतीय झींगा (श्रिंप) निर्यातकों पर दबाव कम हुआ है। इस कटौती के बाद अमेरिका में भारत से श्रिंप आयात पर शुल्क 26% से घटकर 18.26% हो गया है। ट्रंप ने रेसिप्रोकल पर अचानक 90 दिनों की रोक लगाने की घोषणा करते हुए सभी देशों से आयात पर 10 प्रतिशत बेसलाइन टैरिफ लगा दिया। इस निर्णय से इक्वाडोर की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त कम हो गई है। हालांकि वैश्विक झींगा बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। S&amp;P ग्लोबल ने अपनी ताजा कमोडिटी इनसाइट्स रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।</p>
<p>बाजार स्रोतों और विश्लेषकों से बातचीत के आधार पर यह रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में लागू किए गए रेसिप्रोकल टैरिफ पर 90 दिनों की रोक ने झींगा बाजारों में बदलाव के साथ अनिश्चितता पैदा कर दी है। ट्रंप ने यह टैरिफ 2 अप्रैल को लागू किया था, लेकिन महज एक हफ्ते बाद 9 अप्रैल को उसे रोक दिया। हालांकि, सभी देशों पर 10% का सामान्य टैरिफ लागू रहेगा, जबकि चीन पर 145% का भारी शुल्क बना रहेगा।&nbsp;</p>
<p>अमेरिका को झींगे का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता भारत इस फैसले से राहत में रहा, क्योंकि कई विश्लेषकों का मानना था कि पहले के 26% टैरिफ के साथ भारत इस क्षेत्र में आर्थिक रूप से टिक नहीं पाएगा। यूएस सेंसस ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में अमेरिका के कुल झींगा आयात में 40% आपूर्ति भारत ने की थी। भारतीय निर्यातक अब नए सिरे से अपनी रणनीतियों पर विचार कर रहे हैं।</p>
<p>भारत का झींगा निर्यात डिलीवरी ड्यूटी-पेड (Delivery Duty-Paid) आधार पर किया जाता है, जिसमें निर्यातक को सभी करों और शुल्कों का भार उठाना पड़ता है। ऐसे में वे शिपमेंट्स जो पहले से अनुबंधित हैं लेकिन अभी तक डिलीवर नहीं हुए हैं, उन पर अतिरिक्त लागत का बोझ निर्यातकों पर पड़ेगा।</p>
<p>90 दिनों की इस रोक से भारतीय निर्यातकों को बिना अतिरिक्त शुल्क के इन ऑर्डरों की आपूर्ति करने का अवसर मिला है। एक आयातक ने कहा, "ट्रंप का यह कदम मौजूदा अनुबंधों को राहत देता है। लेकिन पैकर्स के पास कंटेनर भेजने के लिए केवल 45 दिन का समय है, क्योंकि भारत से अमेरिका का ट्रांजिट समय करीब 45 दिनों का है।</p>
<p>S&amp;P ग्लोबल कमोडिटी इनसाइट्स के समुद्री खाद्य और एक्वाकल्चर विश्लेषक मैक्स बौराटोग्लू के अनुसार मौजूदा काउंटरवेलिंग और एंटी-डंपिंग शुल्कों को ध्यान में रखते हुए, भारत को अब श्रिंप पर 18.26% आयात शुल्क का सामना करना पड़ रहा है। यह दर अब भी चुनौतियां पेश करता है।</p>
<p>भारत अमेरिका को मूल्य संवर्धित झींगा (value-added shrimp) आपूर्ति करने वाला एक प्रमुख देश है। वर्ष 2024 में अमेरिका के मूल्य संवर्धित (peeled and deveined) झींगा आयात का 60% हिस्सा भारत से आया। भारत का प्रसंस्कृत झींगा पर केंद्रित रहना अन्य देशों के लिए अमेरिका के बाजार में उसकी जगह लेना मुश्किल बना देता है।</p>
<p>इक्वाडोर अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा झींगा आपूर्तिकर्ता है। उसकी मूल्य संवर्धित झींगा उत्पादन क्षमता सीमित है। टैरिफ में हुए बदलाव ने भारत के मुकाबले इक्वाडोर की बढ़त को कम कर दिया है। टैरिफ बढ़ने के साथ इक्वाडोर में विक्रेताओं ने अमेरिकी खरीदारों के लिए कीमतों में तुरंत 10% की वृद्धि कर दी। अधिकांश आयातकों ने यह वृद्धि स्वीकार भी कर ली, क्योंकि उन्हें डर था कि कीमतें और बढ़ सकती हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67fa437f2175b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमेरिका में भारत के श्रिंप पर 18.26% शुल्क, टैरिफ कम होने के बावजूद बाजार में अनिश्चितता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[स्काईमेट ने जारी किया &amp;apos;सामान्य&amp;apos; मानसून का पूर्वानुमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/skymet-weather-forecasts-normal-monsoon-2025.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 09 Apr 2025 14:11:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/skymet-weather-forecasts-normal-monsoon-2025.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div class="card border-0 bg-transparent">
<p class="innerTextPara mt-3 mb-0 hindi-text"><span>मौसम पूर्वानुमान कंपनी <strong>स्काईमेट वेदर</strong> ने 2025 के लिए मानसून पूर्वानुमान जारी किया है। स्काईमेट को उम्मीद है कि मानसून 2025 सामान्य रहेगा। जून से सितंबर तक चार महीनों में औसतन बारिश दीर्घावधि औसत (एलपीए) 868.6 मिमी. का </span><span><strong>103%</strong> होने की संभावना है, जिसमे &plusmn;5% की त्रुटि संभव है। दीर्घावधि औसत के 96-104% तक बारिश को 'सामान्य' </span><span>माना जाता है।</span></p>
<p><strong>La Nina और El Nino का असर कम</strong></p>
<p>स्काईमेट के मैनेजिंग डायरेक्टर <strong>जतिन सिंह</strong> के अनुसार, &ldquo;इस साल ला-नीना ( La Nina) कमजोर रहा है और अब इसका असर खत्म हो रहा है। वहीं, अल-नीनो (El Nino) की आशंका नहीं है, जो आमतौर पर मानसून को प्रभावित करता है। ENSO-neutral (एक सामान्य स्थिति) इस बार सबसे ज्यादा प्रभावनी स्थिति होगी। इसके साथ-साथ हिंद महासागर द्विध्रुव Indian Ocean Dipole (IOD) भी सकारात्मक रहने की संभावना है, जो मानसून के लिए अच्छा संकेत है। पिछले रिकॉर्ड्स बताते है कि जब ENSO न्यूट्रल (neutral) होता है और साथ ही Indian Ocean Dipole (IOD) पॉजिटिव होता है, तो भारत में मानसून अच्छा रहता है। ऐसे में स्काईमेट का मानना है कि इस बार मानसून का दूसरा हिस्सा यानी जुलाई के बाद का समय पहले हिस्से की तुलना में बेहतर और ज्यादा बारिश वाला हो सकता है।</p>
<p><strong>अन्य मौसमी कारक और क्षेत्रवार पूर्वानुमान</strong></p>
<p>इस समय Indian Ocean Dipole (IOD) यानी हिंद महासागर में तापमान का फर्क "न्यूट्रल" स्थिति में है। लेकिन इसकी संभावना है कि मानसून शुरू होने से पहले यह "पॉजिटिव" हो सकता है, यानी ऐसा जो मानसून के लिए फायदेमंद होता है।</p>
<p>ENSO और IOD दोनों एक साथ अच्छे संकेत दे रहे हैं। जब ये दोनों साथ में सकारात्मक होते हैं, तो ये मानसून को सुरक्षित और संतुलित दिशा में ले जाते हैं। हालांकि, शुरुआत में मानसून थोड़ा धीमा रह सकता है, यानी जून में बारिश थोड़ी कम हो सकती है। लेकिन, जैसे-जैसे सीजन आगे बढ़ेगा जुलाई और अगस्त में मानसून रफ्तार पकड़ लेगा और अच्छी बारिश होने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>कहां होगी ज्यादा और कहां कम बारिश?</strong></p>
<p>क्षेत्रों के हिसाब से स्काईमेट को मानसून 2025 में पश्चिम और दक्षिण भारत में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे कोर मानसून क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश होगी। पश्चिमी घाट, जैसे केरल, तटीय कर्नाटक और गोवा में पर्याप्त बारिश (Excess Rainfall) हो सकती है। वहीं, दूसरी ओर पूर्वोत्तर भारत और उत्तर भारत के पहाड़ी राज्य जैसे मेघालय, सिक्किम उत्तराखंड, और हिमाचल में सामान्य से कम बारिश देखने को मिल सकती है।</p>
</div>
<div class="card border-0 bg-transparent">
<p class="innerTextPara mt-3 mb-0 hindi-text"><strong>मानसून की संभावना</strong></p>
</div>
<div class="card border-0 bg-transparent">
<ul>
<li class="innerTextPara mt-3 mb-0 hindi-text"><span>अधिकता की 10% संभावना (मौसमी वर्षा जो एलपीए के 110% से अधिक है)</span></li>
</ul>
</div>
<div class="card border-0 bg-transparent">
<ul>
<li class="innerTextPara mt-3 mb-0 hindi-text"><span>सामान्य से अधिक बारिश की 30% संभावना (मौसमी वर्षा जो एलपीए के 105% से 110% के बीच है)</span></li>
</ul>
</div>
<div class="card border-0 bg-transparent">
<ul>
<li class="innerTextPara mt-3 mb-0 hindi-text"><span>सामान्य बारिश की 40% संभावना (मौसमी वर्षा जो एलपीए के 96 से 104% के बीच है)</span></li>
</ul>
</div>
<div class="card border-0 bg-transparent">
<ul>
<li class="innerTextPara mt-3 mb-0 hindi-text"><span>सामान्य से कम बारिश होने की 15% संभावना (मौसमी वर्षा जो एलपीए के 90 से 95% के बीच है)</span></li>
</ul>
</div>
<div class="card border-0 bg-transparent">
<ul>
<li class="innerTextPara mt-3 mb-0 hindi-text"><span>सूखे की 5% संभावना (मौसमी वर्षा जो एलपीए के 90% से कम है)</span></li>
</ul>
<p class="innerTextPara mt-3 mb-0 hindi-text"><span><strong>भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD)</strong> आने वाले दिनों में मानसून सीजन के लिए पहला आधिकारिक पूर्वानुमान जारी करने वाला है। भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए मानसून बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि 50% से अधिक कृषि भूमि वर्षा पर निर्भर है और लगभग आधी आबादी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है। इस साल मानसून के मुख्य महीनों-जुलाई और अगस्त-में पर्याप्त वर्षा होने की उम्मीद है, जिससे महत्वपूर्ण खरीफ फसल की बुवाई में मदद मिलेगी।</span></p>
</div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_666d901a03233.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ स्काईमेट ने जारी किया 'सामान्य' मानसून का पूर्वानुमान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रेपो रेट में 0.25% कटौती, लोन हो सकते हैं सस्ते, आरबीआई ने विकास दर अनुमान घटाकर 6.5% किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rbi-slashes-repo-rate-by-0.25-pc-loans-may-become-cheaper-growth-projection-down-to-6.5-pc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 09 Apr 2025 12:18:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rbi-slashes-repo-rate-by-0.25-pc-loans-may-become-cheaper-growth-projection-down-to-6.5-pc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वैश्विक अनिश्चितताओं, खासकर 'ट्रंप टैरिफ' के खतरे के बीच भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बुधवार को रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की कटौती की है। अब रेपो रेट 6.25% से घटकर 6% हो गया है। तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद &nbsp;इस निर्णय की घोषणा आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। इस कटौती से कर्ज लेने वालों, खासकर होम लोन ग्राहकों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि ब्याज दरें एक बार फिर 8% से नीचे आ सकती हैं। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर (GDP ग्रोथ) का अनुमान भी 0.20% घटाकर 6.5% कर दिया है।&nbsp;</p>
<p>यह गवर्नर मल्होत्रा के कार्यकाल में लगातार दूसरी बार रेपो रेट में कटौती है। इस बार आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी 'न्यूट्रल' से बदलकर 'एकोमोडेटिव' (उदार) कर लिया है, जो आर्थिक विकास को समर्थन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। गवर्नर मल्होत्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "इस वित्त वर्ष के लिए विकास अनुमान में 20 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है, जो वैश्विक व्यापार और नीति संबंधी अनिश्चितताओं को दर्शाता है।" वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अब GDP ग्रोथ अनुमान 6.5% है, जबकि पहले यह 6.7% था। तिमाही अनुमान इस प्रकार हैं: पहली तिमाही में 6.5%, दूसरी में 6.7%, तीसरी में 6.6% और चौथी में 6.3%।</p>
<p>आरबीआई के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रॉपर्टी कंसल्टेंट ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, "आरबीआई की ओर से 25 बेसिस प्वाइंट की यह दूसरी रेपो रेट कटौती अपेक्षित थी। हालांकि, होम लोन लेने वालों को तुरंत राहत मिलना मुश्किल है क्योंकि बैंक अब तक पिछली कटौतियों का लाभ ट्रांसफर नहीं कर पाए हैं। यदि बैंक यह लाभ ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, तो किफायती (अफोर्डेबल) घर खरीदने वालों को इससे बड़ा फायदा हो सकता है।"</p>
<p>इस साल की शुरुआत से अब तक आरबीआई कुल 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुका है। फरवरी में 5 साल में पहली बार रेपो रेट में कटौती की गई थी। इसके बाद आरबीआई ने बॉन्ड खरीद, फॉरेक्स स्वैप और VRR ऑक्शन जैसे माध्यमों से लगभग ₹7 लाख करोड़ की लिक्विडिटी सिस्टम में डाली है। गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि &ldquo;₹6.9 लाख करोड़ की तरलता से सिस्टम में जनवरी तक जो लिक्विडिटी की कमी थी, वह अब ₹1.5 लाख करोड़ के अधिशेष (सरप्लस) में बदल गई है।&rdquo;</p>
<p>आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई का अनुमान 4% कर दिया है, जो फरवरी के 4.2% अनुमान से कम है। तिमाही आधार पर यह अनुमान इस प्रकार है: पहली तिमाही में 3.6%, दूसरी में 3.9%, तीसरी में 3.8% और चौथी तिमही में 4.4%। खाद्य और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी इसके पीछे प्रमुख कारण मानी गई है।</p>
<p>नियामकीय मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए मल्होत्रा ने कहा, &ldquo;सोने के गहनों के बदले दिए जाने वाले लोन के लिए शीघ्र ही समग्र दिशानिर्देश जारी करेंगे, ताकि विभिन्न संस्थाओं के लिए नियमों का एकरूपता सुनिश्चित की जा सके।&rdquo;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67f6180b697ce.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रेपो रेट में 0.25% कटौती, लोन हो सकते हैं सस्ते, आरबीआई ने विकास दर अनुमान घटाकर 6.5% किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67f6180b697ce.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पिंक बालवार्म बीमारी से बचाव वाली जीएम कॉटन की चार नई इवेंट विकसित, ट्रायल के लिए जीईएसी की मंजूरी का इंतजार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/seed-companies-have-developed-new-genetically-modified-hybrids-resistant-to-pink-bollworm-insect-pest.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 07 Apr 2025 08:08:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/seed-companies-have-developed-new-genetically-modified-hybrids-resistant-to-pink-bollworm-insect-pest.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले करीब एक दशक में देश में कपास की फसल को सबसे अधिक नुकसान पिंक बालवार्म (पीबीडब्लू) से हो रहा है और उसके चलते देश में कपास का उत्पादन उसके उच्चतम स्तर 2013-14 के 398 गांठ (170 किलो प्रति गांठ) से करीब एक चौथाई घटकर 2024-25 में 294 लाख गांठ पर आ गया है। कपास की फसल के लिए घातक हो चुकी पिंक बॉलवार्म बीमारी से निपटने के लिए देश की निजी बीज कंपनियों ने जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम) टेक्नोलॉजी का उपयोग कर जीएम कॉटन के चार इवेंट विकसित कर लिये हैं जो पिंक बालवार्म से कपास की फसल को सुरक्षित कर सकते हैं।&nbsp; उद्योग सूत्रों के मुताबिक टेक्नीकल और कंट्रोल्ड ट्रायल की विभिन्न स्टेज पर पहुंच चुकी यह इवेंट तभी नई जीएम कॉटन किस्मों के कमर्शियल उत्पादन की स्टेज में पहुंचेगी जब जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रैजल कमेटी (जीईएसी) की मंजूरी से इन इवेंट्स के ट्रायल समय से हो सके।</p>
<p>जहां भारत से 2013-14 में कपास का निर्यात 117 लाख गांठ तक पहुंच गया था। वहीं अब पिंक बालवार्म से कपास की फसल को नुकसान के चलते लेकिन अब 30 लाख गांठ आयात और 17 लाख गांठ निर्यात के साथ भारत कपास का शुद्ध आयातक देश बन गया है।</p>
<p>देश के सभी कपास उत्पादक क्षेत्रों तक अपनी जड़ जमा चुकी पिंक बालवार्म (पीबीडब्लू) की बीमारी का हल अब मोनसेंटों द्वारा अमेरिकन बालवार्म के लिए विकसित जीएम किस्मों में अब नहीं है। पिंक बालवार्म का लारवा कपास के पौधे पर लगने वाली बॉल (फल) को नुकसान पहुंचाता और उसी को खाकर जिंदा रहता है। इसी बॉल से कपास तैयार होती है। लेकिन पीबीडब्लू का लारवा पहले ही उसे नुकसान पहुंचा देता है और कपास का उत्पादन घट जाता है। बीटी जीन्स क्राईवनएसी और क्राईटूएबी जीन वाली बीटी कॉटन जीएम किस्मों का पिंक बालवार्म बीमारी रोकने का असर खत्म हो गया है। 2006 के बाद सरकार ने जीएम कॉटन की किसी किस्म को मंजूरी नहीं दी है। जबकि इस बीच पिंक बालवार्म कपास की फसल को नुकसान पहुंचाने वाली सबसे बड़ी बीमारी बन गया है।</p>
<p>हाल ही में साइंटिफिक जर्नल नेचर के अंक के एक लेख (<a href="https://www.nature.com/articles/s41598-025-89575-z">https://www.nature.com/articles/s41598-025-89575-z</a>) में बताया गया है कि किस तरह से पिंक बालवार्म में क्राईवनएसी और क्राईटूएबी टॉक्सिन के लिए प्रतिरोधक क्षमता विकसित हुई है। यह स्थिति बीटी कॉटन के लांच होने के 12 साल बाद 2014 में आई। साल 2014 में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में पिंक बालवार्म में यह प्रतिरोधक क्षमता पैदा हुई। उसके बाद 2017 में तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु में यह स्थिति बनी और 2021 में उत्तर भारतीय राज्यों हरियाणा, पंजाब व राजस्थान के कपास उत्पादक क्षेत्रों में पिंक बालवार्म में क्राईवनएसी और क्राईटूएबी टॉक्सिन के लिए प्रतिरोधक क्षमता पैदा हुई।</p>
<p>इस संकट का हल करीब दिख रहा है। देश की निजी बीज कंपनियों ने जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम) टेक्नोलॉजी का उपयोग कर चार इवेंट विकसित कर लिये हैं जो पिंक बालवार्म से कपास की फसल को सुरक्षित कर सकती हैं। टेक्नीकल और कंट्रोल्ड ट्रायल की विभिन्न स्टेज पर पहुंच चुकी यह इवेंट तभी नई जीएम कॉटन किस्मों के कमर्शियल उत्पादन की स्टेज में पहुंचेगी जब जेनेटिकली इंजीनियर्स अप्रैजल कमेटी (जीईएसी) की मंजूरी से इन इवेंट्स के ट्रायल समय हो सके।</p>
<p>पिंक बालवार्म बीमारी पर रोक लगाने के लिए कंपनियों ने जीएम कॉटन की नई हाइब्रिड में नये बीटी जीन्स डाले हैं। इन कंपनियों में एक इवेंट डीसीएम श्रीराम समूह की हैदराबाद स्थित डिविजन बॉयोसीड रिसर्च इंडिया ने तैयार किया है। इसमें बीटी के क्राई8ईए1 (&lsquo;cry8Ea1&rsquo;) जीन को लेकर बॉयोकोटएक्स24ए1 (&lsquo;BioCotX24A1&rsquo; इवेंट को ट्रांसजिनक टेक्नोलॉजी से विकसित किया गया है। पर्यावरण मंत्रालय के तहत आने वाली जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रैजल कमेटी (जीईएसी) ने पिछले साल जुलाई, 2024 में बॉयोसीड को बॉयोसेफ्टी रिसर्च लेवल-1 (बीआरएल-1) के लिए मध्य प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में छह लोकेशन पर ट्रायल की मंजूरी दी थी। इस ट्रायल के लिए फार्म का साइज एक एकड़ तक होता है। इसके तहत फूड, फीड टॉक्सिसिटी और पर्यावरण सुरक्षा का डाटा जेनरेट किया जाता है। बॉयोसीड ने जीईएसी से खरीफ 2025 में बीआरएल-1 के दूसरे साल के ट्रायल करने के लिए अनुमति मांगी है और उसमें दक्षिण, मध्य और उत्तरी जोन को शामिल किया है।</p>
<p>दूसरा इवेंट कोयंबतूर स्थित रासी सीड्स प्राइवेट लिमिटेड का है जिसके बीआरएल-1 के पहले साल के आगामी खरीफ सीजन में ट्रायल के लिए कंपनी ने जीईएसी के पास आवेदन किया है। पीबीडब्लू प्रतिरोधी जीएम कॉटन की इस हाइब्रिड में ट्रांसजनिक इवेंट में बीटी से मिलने वाले क्राई1सी सिंथेटिक जीन का उपयोग किया गया है।</p>
<p>तीसरा इवेंट नागपुर की कंपनी अंकुर सीड्स का है जो पीबीडब्लू प्रतिरोधी हाइब्रिड जीएम कॉटन किस्म विकसित कर रही है। अंकुर सीड ने नेशनल बॉटेनिकल रिसर्स इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) लखनऊ के साथ टेक्नोलॉजी के लिए समझौता किया है। इसमें बीटी जीन के प्रोटीन का इस्तेमाल किया गया है। अंकुर सीड्स जल्दी ही डिपार्टमेंट ऑफ बॉयोटेक्नोलॉजी की जेनेटिक मैनीपुलेशन पर रिव्यू कमेटी के पास एनबीआरआई की इवेंट 519 के बीआरएल-1 ट्रायल की मंजूरी के लिए आवेदन करने जा रही है। इस समिति की सिफारिशों के आधार पर जीईएसी ट्रायल के लिए मंजूरी दे सकती है।</p>
<p>इसके अलावा पिछले साल 29 जुलाई की बैठक में जीईएसी ने महाराष्ट्र की कंपनी अजित सीड्स प्राइवेट लिमिटेड को उसकी पांच जीएम कॉटन लाइंस के शुरुआती इवेंट सलेक्शन ट्रायल को मंजूरी दी थी। पीबीडब्लू के प्रतिरोध के लिए इस कंपनी ने बीटी के क्राई2एए (&lsquo;cry2Aa&rsquo; ) जीन का उपयोग किया है।</p>
<p>जटिल मंजूरी प्रक्रिया के तहत शुरुआती लैब रिसर्च के बाद बीआरएल-1 ट्रायल दो साल होते हैं और बीआरएल-2 ट्रायल एक साल ढाई एकड़ के प्लाट में होते हैं।</p>
<p>अब सवाल यह उठता है कि मोनसेंटो की जीएम बीटी कॉटन किस्म बॉलगार्ड -2 की 2006 में दी गई मंजूरी के बाद देश में कमर्शियल खेती के लिए किसी भी की जीएम किस्म को मंजूरी नहीं मिली है।&nbsp; हालांकि बीज उद्योग को उम्मीद है कि जिस तरह से पिंक बालवार्म से देश में कपास के उत्पादन में भारी गिरावट के बाद कपास की फसल पर बड़ा संकट आया है उसके चलते सरकार कपास की नई जीएम किस्मों को मंजूरी दे सकती है क्योंकि यह सरसों और बैंगन की तरह खाद्य फसल नहीं है। देश में कपास के गिरते उत्पादन के चलते ही सरकार ने चालू साल (2025-26) के बजट में कॉटन मिशन शुरू करने की घोषणा की है। लेकिन यह भी सच है कि जीएम फसलों का मामला सुप्रीम कोर्ट में है और पर्यावरणविदों का जीएम फसलों को लेकर जो विरोध है उसके चलते राह बहुत आसान नहीं है। यही नहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी पिछले दिनों सार्वजनिक रूप से जीएम फसलों को लेकर प्रतिकूल टिप्पणी की थी। हालांकि कपास की फसल को लेकर जो प्रतिकूल स्थिति पैदा हो गई है उसे सुधारने का दबाव भी सरकार पर है।</p>
<p>&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a3642a2cfe9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पिंक बालवार्म बीमारी से बचाव वाली जीएम कॉटन की चार नई इवेंट विकसित, ट्रायल के लिए जीईएसी की मंजूरी का इंतजार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने 133वें दिन अनशन तोड़ा, लेकिन एमएसपी की लड़ाई तेज करने का संकल्प]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmer-leader-jagjit-singh-dallewal-ends-hunger-strike-after-133-days-of-protest.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 06 Apr 2025 19:17:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmer-leader-jagjit-singh-dallewal-ends-hunger-strike-after-133-days-of-protest.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने अपने आमरण अनशन के 133वें दिन अनशन समाप्त करने का ऐलान किया है। श्री फतेहगढ़ साहिब में आयोजित किसान महापंचायत में उन्होंने इसकी घोषणा की। डल्लेवाल ने कहा कि मैं निजी तौर पर अनशन समाप्त करने के हक में नहीं हूं। लेकिन पिछले चार दिनों में मैं चार महापंचायतों में गया, देश-विदेश से मुझे हजारों किसानों के सन्देश मिले हैं और सभी ने अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। किसान समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए आज मैं आमरण अनशन समाप्त करता हूं। एक दिन पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी ट्वीट करके डल्लेवाल से अनशन खत्म करने का आग्रह किया था।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x_67f2856a729af.jpg" alt="" /></p>
<p>डल्लेवाल ने कहा, मैं यह संकल्प लेता हूं कि देश के कोने-कोने में जाकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) गारंटी कानून पर चल रहे आंदोलन को तेज करने का कार्य करूंगा और आखिरी सांस तक किसानों के हक व अधिकारों की लड़ाई जारी रखूंगा। 70 वर्षीय किसान नेता कैंसर से भी जूझ रहे हैं, इसके बावजूद उन्होंने अपनी मांगों के लिए लंबा संघर्ष जारी रखा है।</p>
<p>उनकी इस घोषणा के बाद महापंचायत में डल्लेवाल के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अरदास की गई ताकि वे जल्दी से जल्दी स्वस्थ हो कर आंदोलन को मजबूत करें। इसके बाद डल्लेवाल ने गुरुद्वारा बाबा जोरावर सिंह जी - बाबा फतेह सिंह जी के मुख्य ग्रन्थी के हाथ से पवित्र जल और प्रसाद ग्रहण किया।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x_67f285657e408.jpg" alt="" /></p>
<p>एमएसपी गारंटी कानून समेत 12 मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने 13 फरवरी 2024 से आंदोलन शुरू किया था। शुरुआती दिनों में हरियाणा पुलिस की कार्रवाई में एक युवा किसान शुभकरण सिंह की सिर में गोली लगने से मौत हो गई थी। इसके अलावा 5 किसानों की आंखों की रोशनी चली गयी और 434 किसान घायल हुए थे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x_67f28564ca145.jpg" alt="" /></p>
<p>18 फरवरी 2024 के बाद 9 महीने तक किसानों से केंद्र सरकार ने कोई बात नहीं की। तब 26 नवम्बर को जगजीत सिंह डल्लेवाल ने आमरण अनशन शुरू किया। उसके 54 दिन बाद केंद्र सरकार ने बातचीत का न्योता भेजा। फिर इस साल 14 फरवरी, 22 फरवरी और 19 मार्च को केंद्र सरकार के साथ मीटिंग हुई। लेकिन 19 मार्च को मीटिंग से वापस आते समय किसानों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पंजाब में &nbsp;3 अप्रैल से किसान महापंचायतों का दौर जारी है और मई में हरियाणा व राजस्थान में किसान महापंचायत आयोजित की जाएंगी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने 133वें दिन अनशन तोड़ा, लेकिन एमएसपी की लड़ाई तेज करने का संकल्प ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डब्ल्यूटीओ को खत्म करने का समय, ट्रंप टैरिफ इसके नियमों के खिलाफः स्वदेशी जागरण मंच]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/its-time-to-dump-wto-as-trump-tariffs-are-against-its-rules-says-swadeshi-jagran-manch.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 06 Apr 2025 14:12:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/its-time-to-dump-wto-as-trump-tariffs-are-against-its-rules-says-swadeshi-jagran-manch.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अमेरिका के रेसिप्रोकल टैरिफ को डब्ल्यूटीओ नियमों का उल्लंघन बताते हुए स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है कि अब डब्ल्यूटीओ को खत्म करने का समय आ गया है। मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ अश्वनी महाजन ने एक बयान में कहा कि अमेरिका ने पहले भी डब्ल्यूटीओ नियमों का उल्लंघन किया है, लेकिन इस बार उल्लंघन का पैमाना बहुत बड़ा है, क्योंकि ट्रंप ने सभी पर उच्च पारस्परिक (रेसिप्रोकल) टैरिफ लगाए हैं। गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 को इस टैरिफ की घोषणा की। राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिसका अर्थ है कि भारत से अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले सामान पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगेगा।</p>
<p>महाजन ने कहा, अब तक भारत सहित विभिन्न देश डबल्यूटीओ में अपनी प्रतिबद्धताओं के आधार पर आयात शुल्क लगाते रहे हैं। WTO के जन्म के साथ ही हर देश द्वारा लगाए जा सकने वाले आयात शुल्क, जिन्हें 'बाउंड टैरिफ' कहा जाता है, समझौते के अनुसार निर्धारित किए गए थे। भारत का बाउंड टैरिफ औसतन 50.8 प्रतिशत है। हालांकि भारत वास्तव में लगभग 6 प्रतिशत का औसत भारित आयात शुल्क (एप्लाइड टैरिफ) लगा रहा है, जो &lsquo;बाउंड टैरिफ&rsquo; से बहुत कम है।</p>
<p>महाजन के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप की यह शिकायत वैध नहीं है कि भारत अमेरिका से आने वाले माल पर अधिक शुल्क लगाता है, क्योंकि सभी देश डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुसार अपने बाध्य टैरिफ की सीमा के भीतर आयात शुल्क लगाते हैं। अमेरिका ने पहले के जनरल एग्रीमेंट ऑन टैरिफ्स एंड ट्रेड (गैट) समझौतों में अन्य देशों द्वारा उच्च आयात शुल्क लगाए जाने को क्यों स्वीकार किया?</p>
<p>डब्ल्यूटीओ के जन्म से पहले, विभिन्न देश अपने उद्योगों की सुरक्षा के लिए आयात शुल्क के अतिरिक्त &lsquo;मात्रात्मक प्रतिबंध&rsquo; ​​(क्यूआर) भी लगाते थे। विदेशी पूंजी पर भी कई प्रकार के प्रतिबंध थे। अमेरिका और अन्य विकसित देश चाहते थे कि भारत और अन्य विकासशील देश आयात शुल्क कम करें और &lsquo;क्यूआर&rsquo; का उपयोग बंद करें ताकि उनके माल को उन देशों को बिना किसी बाधा के निर्यात किया जा सके। वे यह भी चाहते थे कि विकासशील देश विकसित देशों की पूंजी को अपने देशों में प्रवेश करने दें, अपने बौद्धिक संपदा कानूनों में बदलाव करें, कृषि पर समझौता करें और सेवाओं को व्यापार वार्ता का हिस्सा बनने दें।&nbsp;</p>
<p>विकासशील देश इस सबके लिए तैयार नहीं थे। ऐसे में विकसित देश विकासशील देशों के उच्च आयात शुल्क लगाने पर सहमत हुए। यह कोई दान नहीं बल्कि एक सौदा था। ऐसे में अगर अमेरिकी प्रशासन अब यह कहता है कि भारत अमेरिका से अधिक शुल्क लगा रहा है, तो उनका तर्क जायज नहीं है।</p>
<p>महाजन के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप विश्व व्यापार संगठन के अस्तित्व को ही नकार रहे हैं। अमेरिका का एकतरफा टैरिफ लगाना विश्व व्यापार संगठन के नियमों और भावना, दोनों के खिलाफ है। डब्ल्यूटीओ एक शक्तिशाली संगठन रहा है और इसमें किए गए समझौते कानूनी रूप से बाध्यकारी होते हैं। ऐसे में अमेरिका द्वारा एकतरफा टैरिफ की घोषणा डब्ल्यूटीओ के खत्म होने का संकेत है।</p>
<p>महाजन का कहना है कि अब टैरिफ और व्यापार पर सामान्य समझौते (गैट) में &lsquo;ट्रिप्स&rsquo;, &lsquo;ट्रिम्स&rsquo;, सेवाओं और कृषि पर समझौतों के बारे में नए सिरे से सोचने का समय आ गया है। यह ध्यान देने योग्य है कि ट्रिप्स पर समझौते ने रॉयल्टी व्यय के मामले में हमें भारी नुकसान पहुंचाया &nbsp;और इसका सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। भारत द्वारा रॉयल्टी व्यय, जो 1990 के दशक में एक बिलियन अमेरिकी डॉलर से भी कम था, अब सालाना 17 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है। डब्ल्यूटीओ और इसकी तथाकथित नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रणाली के कारण भारत, चीन द्वारा डंपिंग और चीनी सरकार द्वारा अनुचित सब्सिडी और चीन जैसी गैर-बाजार अर्थव्यवस्था को भी एमएफएन का दर्जा देने की बाध्यता जैसी अनुचित व्यापार प्रथाओं का शिकार रहा है।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे विकसित देशों से सब्सिडी वाले कृषि उत्पादों से अनुचित प्रतिस्पर्धा, भारत सहित विकासशील देशों द्वारा भारी रॉयल्टी व्यय, कुछ उदाहरण हैं कि भारत और अन्य विकासशील देश डब्ल्यूटीओ के तहत कैसे नुकसान में हैं। यह साबित हो चुका है कि डब्ल्यूटीओ जैसे बहुपक्षीय समझौते भारत जैसे विकासशील देशों के लिए अच्छे नहीं हैं, और द्विपक्षीय समझौते सबसे उपयुक्त हैं, क्योंकि उन्हें हमारे व्यापारिक भागीदारों के साथ आपसी सहमति से राष्ट्र के हितों को ध्यान में रखते हुए हस्ताक्षरित किया जा सकता है। अब समय आ गया है कि जब अमेरिका डब्ल्यूटीओ की अवहेलना कर रहा है, तो हमें डब्ल्यूटीओ में ट्रिप्स सहित अन्य शोषणकारी समझौतों से बाहर आने की रणनीति के बारे में सोचना चाहिए। साथ ही, डब्ल्यूटीओ के विघटन के बाद अब मात्रात्मक नियंत्रण यानि &lsquo;क्यूआर&rsquo; लगाना संभव होगा। ऐसे में हम अपने लघु एवं कुटीर उद्योगों की रक्षा करने तथा देश में रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद करने के लिए एक बार फिर उत्पादों के लघु उद्योगों के लिए आरक्षण की नीति को शुरू करके विकेंद्रीकरण और रोजगार सृजन की दिशा में बड़ा प्रयास कर सकते हैं।</p>
<p>अब जबकि राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया भर में वस्तुओं पर टैरिफ लगा दिया है, हमें इस स्थिति का लाभ उठाने के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय व्यापार की रणनीति बनानी होगी। ऐसे कई क्षेत्र हैं जिन्हें लाभ हो सकता है, क्योंकि हमारे निर्यात को अमेरिका में नए बाजार मिल सकते हैं, जबकि चीन के निर्यात को ट्रंहमें ट्रंप के टैरिफ के बाद विदेशी बाजारों को हासिल करने में अपने उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए और उनका समर्थन करना चाहिए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ डब्ल्यूटीओ को खत्म करने का समय, ट्रंप टैरिफ इसके नियमों के खिलाफः स्वदेशी जागरण मंच ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अप्रैल की शुरुआत में ही हीटवेव का अलर्ट, भुज में 44.5 डिग्री पहुंचा तापमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/heatwave-hit-in-early-april-temperature-reached-44.5-degrees-in-bhuj.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 05 Apr 2025 14:20:28 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/heatwave-hit-in-early-april-temperature-reached-44.5-degrees-in-bhuj.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अप्रैल की शुरुआत में ही देश के कई हिस्सों, <span>विशेषकर उत्तर-पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में</span>, <span>गर्मी ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार</span>, <span>अगले </span>6 <span>से 10 अप्रैल के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में हीटवेव चलने की संभावना है। जबकि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में अगले तीन दिनों के दौरान बारिश हो सकती है। </span></p>
<p>शुक्रवार को गुजरात के भुज में अधिकतम तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सौराष्ट्र और कच्छ में कहीं-कहीं तो तापमान सामान्य से 5.1 फीसदी अधिक रहा है और हीटवेव का असर रहा। हरियाणा, <span>दिल्ली</span>, <span>पंजाब</span>, <span>हिमाचल और उत्तराखंड में भी अधिकतम तापमान सामान्य से 3.1 से 5 डिग्री तक अधिक था। हालांकि</span>, <span>अगले सप्ताह उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है क्योंकि 8 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। </span></p>
<p>मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 5-6 दिनों के दौरान सौराष्ट्र व कच्छ, <span>दक्षिण हरियाणा</span>, <span>दिल्ली</span>, <span>पश्चिमी यूपी</span>, <span>हिमाचल प्रदेश</span>, <span>पंजाब</span>, <span>राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर हीटवेव चलने की आशंका है। इस दौरान राजधानी दिल्ली में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।</span></p>
<p>मौसम विभाग के अनुसार, <span>अगले 5-6 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिमी और मध्य भारत के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है। अगले एक सप्ताह में महाराष्ट्र में अधिकतम तापमान 3-4 डिग्री तक बढ़ने का अनुमान है।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x_67f0eda1cf1bc.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>यह साल गर्मी के मामले में पिछले रिकॉर्ड तोड़ सकता है। पिछले दिनों मौसम विभाग ने कहा था कि अप्रैल से जून तक देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहने के आसार हैं, <span>जिसके चलते हीटवेव की स्थिति और गंभीर हो सकती है। खासकर उत्तर-पश्चिमी</span>, <span>मध्य और पूर्वी भारत में हीटवेव के दिनों की संख्या में वृद्धि की संभावना जताई गई है।</span></p>
<p>उत्तर-पश्चिम भारत में जहां आमतौर पर 5-6 <span>दिन लू चलती है</span>, <span>वहां </span>10-11 <span>दिन तक गर्मी का प्रकोप रह सकता है। इसके पीछे जलवायु परिवर्तन और अल नीनो प्रभाव को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। बढ़ती गर्मी के साथ बिजली की मांग में भी </span>9-10% <span>की वृद्धि होने की संभावना है</span>, <span>जिससे ग्रिड पर दबाव बढ़ेगा।</span></p>
<p>पिछला साल, 2024<span> भारत में </span>1901 <span>के बाद का सबसे गर्म साल रहा था। इस साल भी मार्च से ही कई राज्यों में तापमान </span>40 <span>डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है। कुल मिलाकर इस साल देश को और अधिक भीषण गर्मी के लिए तैयार रहना होगा। &nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x_67f0f4c4c0f67.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67f0ed8e14083.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अप्रैल की शुरुआत में ही हीटवेव का अलर्ट, भुज में 44.5 डिग्री पहुंचा तापमान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67f0ed8e14083.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमेरिका के साथ ट्रेड एग्रीमेंट के विरोध में किसान संगठनों की लामबंदी की तैयारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmer-organisations-are-planning-nationwide-agitation-against-proposed-indo-us-trade-deal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 04 Apr 2025 13:31:51 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmer-organisations-are-planning-nationwide-agitation-against-proposed-indo-us-trade-deal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वर्ष 2020 में तीन विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन छेड़ने वाले किसान संगठन एक बार फिर एकजुट होने की तैयारी कर रहे हैं। इस बार वजह है प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के जरिए भारत के कृषि बाजार को अमेरिका के लिए खोलने का दबाव। इन किसान संगठनों को आशंका है कि केंद्र सरकार अमेरिका को खुश करने के लिए देश के किसानों के हितों से समझौता कर सकती है। इसलिए इस मुद्दे पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा करने की जरूरत है। <strong>संयुक्त किसान मोर्चा</strong> की तर्ज पर बनाये जाने वाले इस मोर्चे का स्वरूप जल्दी ही सामने आ सकता है।</p>
<p>इस पहल में शामिल महाराष्ट्र के पूर्व सांसद और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता <strong>राजू शेट्टी</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि गत 31 मार्च को नई दिल्ली में किसान संगठनों की बैठक हुई। एक विपक्षी सांसद के निवास पर हुई इस बैठक में अमेरिका के साथ भारत के व्यापार समझौते में देश के किसानों और कृषि व सहयोगी क्षेत्र के हितों की अनदेखी को लेकर एक देशव्यापी आंदोलन शुरू करने पर सहमति बनी है। इस बैठक में संयुक्त किसान नेता <strong>बलबीर सिंह राजेवाल,&nbsp; राजू शेट्टी, सरदार वीएम सिंह, योगेंद्र यादव, सुनीलम,</strong> वामपंथी किसान संगठनों के प्रतिनिधि और सीपीआई (माले) के दो सांसदों समेत करीद डेढ़ दर्जन नेता शामिल थे। &nbsp;</p>
<p>राजू शेट्टी का कहना है कि जिस तरह से 2017 में <strong>ऑल इंडिया किसान संघर्ष कॉर्डिनेशन कमेटी </strong><strong>(AIKSCC)</strong> बनाकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सहित किसानों के मुद्दों पर देश भर में यात्राएं निकाली गई थीं,<span> उसी तरह अब अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते से किसानों के हितों को नुकसान के मुद्दे पर किसानों को जागरूक किया जाएगा।</span></p>
<p>गौरतलब है कि 2020 के किसान आंदोलन के दौरान विभिन्न किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले एकजुट हुए थे। इसी एकजुटता का नतीजा था कि साल भर चले ऐतिहासिक किसान आंदोलन के बाद केंद्र सरकार को तीनों विवादित कृषि कानून वापस लेने पड़े थे। लेकिन आंदोलन के बाद चुनाव लड़ने के मुद्दे पर किसान संगठनों में खींचतान बढ़ी और संयुक्त किसान मोर्चा विभिन्न खेमों में बंट गया। इससे किसानों की अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की ताकत कमजोर हुई।</p>
<p>एमएसपी की कानूनी गारंटी सहित कई मांगों को लेकर हरियाणा-पंजाब के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसान मोर्चों को जिस तरह कड़ी कार्रवाई कर हटाया गया, <span>तब भी किसानों की एकजुटता बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई। </span>असल में किसान संगठनों को समझ आ गया है कि अलग-अलग बंटकर आंदोलन करने से सरकार पर दबाव नहीं बनाया जा सकता है। 31 मार्च की बैठक में पंजाब और हरियाणा बॉर्डर पर 13 महीने चले आंदोलन पर भी चर्चा हुई।</p>
<p>अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में किसानों के हितों की अनदेखी के खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा के लिए जल्दी ही अगली बैठक होगी। उस बैठक में आंदोलन का स्वरूप और भावी रणनीति तय की जाएगी। इसके अलावा इसमें कौन से मुद्दे शामिल होंगे, <span>यह भी तय होगा। शुरुआती चर्चा के आधार पर अमेरिका के साथ व्यापार समझौते और एमएसपी की गारंटी के मुद्दों को शामिल करने पर सहमति बनी है। </span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67ef91e06d7ef.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमेरिका के साथ ट्रेड एग्रीमेंट के विरोध में किसान संगठनों की लामबंदी की तैयारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67ef91e06d7ef.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अखिल भारतीय किसान सभा ने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को असमान बताया, सरकार से वार्ता से हटने की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/aiks-calls-for-withdrawal-from-unequal-trade-negotiations-with-usa.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 30 Mar 2025 13:06:04 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/aiks-calls-for-withdrawal-from-unequal-trade-negotiations-with-usa.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने एक बयान जारी कर केंद्र सरकार से अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं से हटने और कृषि, डेयरी और मत्स्य पालन क्षेत्रों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाले किसी भी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में प्रवेश न करने की मांग की है। किसान सभा ने नरेंद्र मोदी सरकार पर अमेरिकी मांगों के आगे झुकने का आरोप लगाया है, विशेष रूप से उन मांगों को लेकर जो अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए टैरिफ और नॉन-टैरिफ घटाने से संबंधित हैं।​</p>
<p>किसान सभा के अध्यक्ष अशोक धावले और महासचिव विजू कृष्णन ने एक बयान में ऑस्ट्रेलिया के साथ विशेष मात्रा के लिए मसूर और मटर के आयात पर शून्य शुल्क जैसे ढांचे की संभावनाओं पर चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि अमेरिकी किसानों को दी जाने वाली भारी सब्सिडी को देखते हुए ऐसे उपाय भारतीय किसानों के लिए अत्यंत असमान व्यापार समझौते साबित होंगे।​</p>
<p>संगठन ने चेतावनी दी है कि प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता भारतीय डेयरी किसानों के लिए विनाशकारी हो सकता है। यदि शुल्क और बाजार प्रतिबंध हटाए जाते हैं तो अमेरिकी डेयरी उत्पादों का बड़ा आयात होगा। इसके अलावा उन्होंने गेहूं, मक्का, सोयाबीन, बादाम और विभिन्न बागवानी उत्पादों के भारतीय बाजार में अमेरिकी निर्यात बढ़ाने की मंशा पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि आयात बढ़ने से घरेलू उत्पादन कमजोर हो सकता है और यह भारतीय किसानों की आजीविका को खतरे में डाल सकता है।​</p>
<p>AIKS ने भारतीय कपास किसानों के संकट की ओर भी ध्यान दिलाया है। इसका कहना है कि कपास उत्पादन में लगातार गिरावट आ रही है और किसान आत्महत्याओं में वृद्धि हुई है। इसने सरकार द्वारा बोलगार्ड-2 कपास बीजों की अधिकतम खुदरा मूल्य में वृद्धि की आलोचना की है और कहा है कि इससे बड़े कृषि व्यवसायों को लाभ होगा और सस्ते अमेरिकी कपास को भारतीय बाजार में प्रवेश करने का मार्ग प्रशस्त होगा।</p>
<p>इसके अलावा, AIKS ने सरकार के 'मिशन 500' पर भी चिंता व्यक्त की है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक अमेरिका के साथ कुल व्यापार को 500 बिलियन तक करना है। किसान सभा का कहना है कि ऐसी वार्ताएं पारदर्शिता या संसदीय निरीक्षण के बिना की जा रही हैं। इसने चीन, कनाडा और मैक्सिको जैसे देशों का जिक्र किया है जिन्होंने अमेरिकी व्यापार दबावों का विरोध किया है, और सवाल उठाया है कि भारत अमेरिकी मांगों के आगे क्यों झुक रहा है।​</p>
<p>अप्रैल में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि की आगामी भारत यात्रा के मद्देनजर, किसान सभा ने राष्ट्रव्यापी विरोध का आह्वान किया है। दोनों पदाधिकारियों ने सभी भारतीयों से राजनीतिक संबद्धता की परवाह किए बिना 'वेंस गो बैक! इंडिया इज नॉट फॉर सेल!' के नारे के तहत एकजुट होने का आग्रह किया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अखिल भारतीय किसान सभा ने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को असमान बताया, सरकार से वार्ता से हटने की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मनरेगा मजदूरी में मामूली संशोधन की खेत मजदूर यूनियन ने की आलोचना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/aiawu-condemns-insufficient-wage-revision-under-mnrega-for-2025-26.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 29 Mar 2025 16:23:29 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/aiawu-condemns-insufficient-wage-revision-under-mnrega-for-2025-26.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन (AIAWU) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत मजदूरी में नाममात्र संशोधन की निंदा की है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दरों को संशोधित करने की अधिसूचना जारी की है, लेकिन यह वृद्धि औसतन 2% से 7% तक है। यूनियन ने कहा है कि यह वृद्धि न केवल ग्रामीण मजदूरों का अपमान है, बल्कि बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट के बीच उनकी आजीविका पर गंभीर चिंता भी उठाती है।</p>
<p>यूनियन के अध्यक्ष ए. विजयराघवन और महासचिव बी. वेंकट ने एक बयान में कहा कि मजदूरी में बड़ी वृद्धि करने से लगातार इनकार करना मनरेगा पर व्यापक हमले का हिस्सा है। कम मजदूरी मजदूरों को इस योजना में भाग लेने से हतोत्साहित करती है। इससे ग्रामीण रोजगार प्रदान करने के योजना का मुख्य उद्देश्य कमजोर होता है। ग्रामीण विकास और पंचायती राज पर स्थायी समिति ने भी बताया है कि अपर्याप्त मजदूरी मजदूरों की घटती भागीदारी का मुख्य कारण हैं।</p>
<p>वर्तमान में मनरेगा की मजदूरी वेतन कृषि मजदूरों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-AL) के आधार पर संशोधित की जाती है, जिसमें 2009-10 को आधार वर्ष के रूप में उपयोग किया जाता है। हालांकि संसदीय स्थायी समिति ने इस पुरानी पद्धति की कड़ी आलोचना की है, और कहा है कि 2009-10 को आधार वर्ष के रूप में उपयोग करना गलत है। महेंद्र देव समिति ने भी आधार वर्ष को 2014 में स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी। स्थायी समिति ने सुझाव दिया था कि आधार वर्ष को संशोधित करना और वेतन गणना पद्धति को समायोजित करना कम वेतन की समस्या को हल करने के लिए आवश्यक है। बयान के अनुसार, इन सिफारिशों के बावजूद, केंद्र सरकार ने जानबूझकर अपनी ही स्थायी समिति के निष्कर्षों की अनदेखी की है।</p>
<p>सबसे कम वृद्धि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में देखी गई, जो केवल 2.33% है। इन दोनों राज्यों में मजदूरी की दर में केवल 7 रुपये की वृद्धि हुई है। वहां एक दिन के काम के लिए कुल मजदूरी अब 307 रुपये है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के 2023-24 के घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण के अनुसार, एक ग्रामीण परिवार का मासिक प्रति व्यक्ति व्यय (MPCE) 4,122 रुपये है, जो अब और बढ़ गया होगा।</p>
<p>यूनियन का कहना है कि पहले से ही बजट में मनरेगा के लिए आवंटन पिछले वर्ष की तुलना में कम था, यहां तक कि संसदीय समिति की मनरेगा के बजटीय आवंटन को बढ़ाने की सिफारिश को भी स्वीकार नहीं किया गया। इस वर्ष के बजट की तरह, भाजपा ने ग्रामीण गरीबों और कृषि मजदूरों की कीमत पर अपने प्रो-कॉर्पोरेट एजेंडे का विस्तार जारी रखा है।</p>
<p>यूनियन का दावा है कि पहले मनरेगा मजदूरों को गर्मियों के दौरान सामना की जाने वाली कठिनाइयों की भरपाई के लिए विशेष भत्ते मिलते थे। सरकार ने हाल के वर्षों में ऐसे सभी भत्तों को समाप्त कर दिया है। यह स्पष्ट रूप से मनरेगा की भावना को बनाए रखने की प्रतिबद्धता की कमी को दर्शाता है। मनरेगा का लगातार विघटन भारत के लोगों द्वारा अर्जित काम के अधिकार पर एक प्रणालीगत हमला है। यूनियन ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए अपनी इकाइयों से केंद्र सरकार के निर्णय के खिलाफ विरोध करने का आह्वान किया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मनरेगा मजदूरी में मामूली संशोधन की खेत मजदूर यूनियन ने की आलोचना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र सरकार ने चना, मसूर और सरसों की एमएसपी पर खरीद को मंजूरी दी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indian-government-has-approved-the-purchase-of-gram-lentil-and-mustard-in-rabi-season-2025.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 27 Mar 2025 16:45:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indian-government-has-approved-the-purchase-of-gram-lentil-and-mustard-in-rabi-season-2025.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत किसानों से <strong>चना, सरसों</strong> और <strong>मसूर</strong> की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद को मंजूरी दी है।&nbsp;रबी विपणन सीजन 2025 के दौरान 10 राज्यों में चना, 7 राज्यों में सरसों और 4 राज्यों में मसूर की खरीद की जाएगी।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने गुरुवार को नई दिल्ली के कृषि भवन में प्रेस वार्ता में बताया कि रबी मार्केटिंग सीजन 2025 के लिए 27.99 लाख टन चना, 9.40 लाख टन मसूर और 28.28 लाख टन सरसों की एमएसपी पर खरीद को मंजूरी दी गई है। साथ तमिलनाडु में कोपरा की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। सरकार ने नेफेड और एनसीसीएफ के पोर्टल के जरिए किसानों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाया है।</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि <strong>अरहर, मसूर, उड़द</strong> किसान जितना भी उत्पादन करेगा, उसे एमएसपी पर खरीदा जाएगा। इसके लिए नेफेड और एनसीसीएफ के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। उन्होंने राज्य सरकारों से सुनिश्चित करने को कहा कि एमएसपी से नीचे कोई खरीद नहीं हो। किसानों को अरहर, मसूर और उड़द के उचित दाम मिल सकें, इसके लिए राज्य प्रभावी और पारदर्शी खरीद की व्यवस्था करें।</p>
<p>केंद्र सरकार ने खरीफ 2024-25 सीजन के दौरान मूल्य समर्थन योजना के तहत 9 राज्यों - आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश राज्यों में 13.22 लाख टन <strong>अरहर</strong> की खरीद को मंजूरी दी है। साथ ही कर्नाटक में खरीद अवधि को 30 दिन बढ़ाकर 01 मई तक करने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p>कृषि मंत्री के मुताबिक, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना में नेफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से एमएसपी पर खरीद जारी है। 25 मार्च 2025 तक इन राज्यों में कुल 2.46 लाख टन अरहर की खरीद की गई, जिससे लगभग 1.72 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में अरहर की कीमत वर्तमान में एमएसपी से ऊपर चल रही है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67e53355857f0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र सरकार ने चना, मसूर और सरसों की एमएसपी पर खरीद को मंजूरी दी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं पर 1 अप्रैल से हटेगी स्टॉक लिमिट, लेकिन हर सप्ताह घोषित करना होगा स्टॉक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/stock-limit-on-wheat-will-be-removed-from-april-1-but-stock-will-have-to-be-declared-every-week.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 26 Mar 2025 15:47:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/stock-limit-on-wheat-will-be-removed-from-april-1-but-stock-will-have-to-be-declared-every-week.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गेहूं पर लागू स्टॉक लिमिट 31 मार्च 2025 को समाप्त होने जा रही है लेकिन उसके बाद भी हर सप्ताह गेहूं के स्टॉक की स्थिति केंद्र सरकार के पोर्टल पर घोषित करनी पड़ेगी। देश में गेहूं के पर्याप्त भंडार और इस साल रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमान के बावजूद केंद्र सरकार ने स्टॉक घोषित करने की पाबंदी को जारी रखने का फैसला किया है। सरकार के इस फैसले का असर रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 में निजी व्यापारियों द्वारा गेहूं की खरीद पर पड़ सकता है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्&zwj;ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, खाद्य सुरक्षा के प्रबंधन और अटकलों पर अंकुश लगाने के लिए भारत सरकार ने निर्णय लिया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में व्यापारियों/थोक विक्रेताओं,&nbsp;खुदरा विक्रेताओं,&nbsp;बड़ी श्रृंखला के खुदरा विक्रेताओं और प्रसंस्करणकर्ताओं को&nbsp;एक अप्रैल से अपने गेहूं स्टॉक की स्थिति प्रत्येक शुक्रवार को पोर्टल <strong>(https://evegoils.nic.in/wsp/login)</strong> पर&nbsp;घोषित करनी होगी। केंद्र सरकार ने सभी व्यापारियों को नियमित और सही ढंग से पोर्टल पर स्टॉक घोषित करने को कहा है। &nbsp;</p>
<p>सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में गेहूं की स्टॉक सीमा 31 मार्च 2025 को समाप्त हो रही है। इसके बाद, व्यापारियों को पोर्टल पर गेहूं के स्टॉक का खुलासा करना होगा। कोई भी संस्था जो पोर्टल पर पंजीकृत नहीं है, वह स्वयं को पंजीकृत कर सकती है और प्रत्येक शुक्रवार को गेहूं के स्टॉक का खुलासा करना शुरू कर सकती है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग का कहना है कि सट्टेबाजी को रोकने, कीमतों को नियंत्रित करने और देश में आसान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए गेहूं के स्टॉक की स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।</p>
<p>गौरतलब है कि वर्ष 2024-25 में कृषि मंत्रालय ने देश में रिकॉर्ड 1154.30 लाख टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया है जबकि केंद्रीय पूल में 1 अप्रैल को लगभग 120 लाख टन गेहूं होगा जो बफर नॉमर्स से अधिक है। ऐसे में स्टॉक घोषित करने की पाबंदी जारी रहने से निजी व्यापारियों द्वारा गेहूं की खरीद पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है जिससे किसानों को एमएसपी से बेहतर दाम मिलने की संभावना कमजोर होगी।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67e3d324b601a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं पर 1 अप्रैल से हटेगी स्टॉक लिमिट, लेकिन हर सप्ताह घोषित करना होगा स्टॉक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत के कृषि कार्यबल में महिलाओं की 64% हिस्सेदारी, लेकिन एग्री कंपनियों के शीर्ष पदों पर नाममात्र उपस्थिति: रिपोर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/women-dominate-india-agricultural-workforce-but-lag-in-top-positions-report.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 23 Mar 2025 11:49:51 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/women-dominate-india-agricultural-workforce-but-lag-in-top-positions-report.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई रिपोर्ट ने भारत के कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका और शीर्ष पदों पर उनकी कम उपस्थिति के बीच गहरी खाई को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार कृषि कार्यबल में 64.4% महिलाएं हैं, लेकिन सिर्फ 6-10% महिलाएं कृषि और इससे संबंधित शीर्ष कंपनियों में नेतृत्वकारी पदों पर हैं।</p>
<p>&ldquo;एग्रीबिजनेस में महिलाएं - अवसर और चुनौतियां&rdquo; शीर्षक से यह रिपोर्ट गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड ने भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद (IIMA) और गोदरेज DEI लैब के साथ मिलकर तैयार की है। इसे दूसरे &lsquo;वुमेन इन एग्रीकल्चर&rsquo; समिट में जारी किया गया।</p>
<p>समिट में बोलते हुए गोदरेज एग्रोवेट के प्रबंध निदेशक बलराम सिंह यादव ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "हम मानते हैं कि कृषि व्यवसाय का भविष्य महिलाओं को शिक्षा, कार्यस्थलों में समावेश बढ़ाकर और नेतृत्व विकास के माध्यम से सशक्त बनाने में निहित है।" उन्होंने यह भी बताया कि गोदरेज एग्रोवेट ने कृषि मूल्य श्रृंखला में एक लाख महिलाओं की मदद करने का संकल्प लिया था। इस दिशा में एक वर्ष के भीतर ही 20,000 महिलाओं को मदद की गई है।</p>
<p>रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि कृषि शिक्षा कार्यक्रमों में महिलाओं का 30-40% नामांकन होता है, लेकिन इनमें से बहुत कम महिलाएं औपचारिक कृषि क्षेत्र में रोजगार पाती हैं।</p>
<p>आईआईएम अहमदाबाद की फैकल्टी सदस्य विद्या वेमिरेड्डी ने इसे एक "विरोधाभास" बताया। उन्होंने कहा, "कृषि क्षेत्र में महिलाओं की मजबूत भागीदारी और उच्च शैक्षणिक उपस्थिति के बावजूद, औपचारिक रोजगार में उनकी भागीदारी नगण्य है।"</p>
<p><strong>लैंगिक असमानता दूर करने का खाका</strong><br />रिपोर्ट ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई रणनीतियां सुझाई हैं, जिनमें शामिल हैं: महिलाओं को संसाधनों तक समान पहुंच सुनिश्चित करना, महिलाओं के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू करना और समावेशी कार्यस्थलों को बढ़ावा देकर महिलाओं को नेतृत्व के लिए प्रेरित करना।</p>
<p>समिट के दौरान, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड की एक्जीक्यूटिव चेयरपर्सन निसाबा गोडरेज और बलराम सिंह यादव ने &lsquo;गोदरेज एग्रोवेट वुमेन इन एग्रीकल्चर&rsquo; स्कॉलरशिप की शुरुआत की घोषणा की। यह छात्रवृत्ति कृषि अध्ययन में पांच छात्राओं को दी जाएगी।</p>
<p>गोडरेज एग्रोवेट की मानव संसाधन प्रमुख, मल्लिका मुतरेजा ने बताया कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2024-25 में महिलाओं की भागीदारी को 8% से बढ़ाकर 12% तक पहुंचा दिया है और 2027-28 तक इसे 32% तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।</p>
<p>समिट में दो प्रमुख विषयों पर पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं: &ldquo;कृषि में महिलाओं के लिए बाधाएं तोड़ना&rdquo; और &ldquo;बोर्डरूम से बदलाव तक: नेतृत्व में महिलाएं&rdquo;। इन चर्चाओं में उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने भाग लिया और कृषि क्षेत्र को अधिक समावेशी और समान अवसर प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत के कृषि कार्यबल में महिलाओं की 64% हिस्सेदारी, लेकिन एग्री कंपनियों के शीर्ष पदों पर नाममात्र उपस्थिति: रिपोर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारतीय किसान संघ ने ग्लाइफोसेट की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/bharatiya-kisan-sangh-demanded-immediate-ban-on-the-sale-of-glyphosate.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 21 Mar 2025 14:07:47 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/bharatiya-kisan-sangh-demanded-immediate-ban-on-the-sale-of-glyphosate.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय किसान संघ ने देश में ग्लाइफोसेट की बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है। किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र की ओर से जारी एक बयान में कहा है कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने स्वास्थ्य व सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण ग्लाइफोसेट पर 21 अक्टूबर, 2022 को अधिसूचना जारी कर प्रतिबंध लगा दिया था। कृषि क्षेत्र में ग्लाइफोसेट पर प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से इसका उपयोग जारी है जो मानव स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है। मिश्र ने सवाल उठाया कि किस की कृपा से ग्लाइफोसेट जहर से बने उत्पादों को देश के किसानों को उपयोग के लिए परोसा जा रहा है, इसकी जांच होनी चाहिए।&nbsp;</p>
<p>जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने बकायदा पत्र लिखकर मध्यप्रदेश सरकार को ग्लाइफोसेट के दुष्प्रभावों से अवगत कराया है। ग्लाइफोसेट जैव विविधता के लिए खतरा है और यह जल, मिट्टी व हवा को जहरीला बनाता है।&nbsp;</p>
<p>भारतीय किसान संघ पहले भी कई बार ग्लाइफोसेट के सभी प्रकार से उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर चुका है। मिश्र का कहना है कि ग्लाइफोसेट से बने उत्पादों की भारत में बिक्री होना चिंताजनक है और देश के नागरिकों के स्वास्थ्य व पर्यावरण के साथ खिलवाड़ है। इस पर तत्काल रोक लगाने की आवश्यकता है। <span>ग्लाइफोसेट</span><span>&nbsp;</span><span>की</span><span>&nbsp;</span><span>बिक्री</span><span>&nbsp;</span><span>मुफ्त</span><span>&nbsp;</span><span>में</span><span>&nbsp;</span><span>कैंसर</span><span>&nbsp;</span><span>परोसने के समान</span><span>&nbsp;</span><span>है।</span>&nbsp;</p>
<p>किसान संघ का कहना है कि ग्लाइफोसेट के बने उत्पादों का कृषि क्षेत्र में सभी फसलों पर उपयोग का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। ऐसे अनाज की गुणवत्ता व उपयोग करने वाले मनुष्यों के लिए तो गंभीर खतरा है ही, इसके साथ यह भारतीय किसान, खेती और कृषि क्षेत्र के इको-सिस्टम को भी बिगाड़ रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>&nbsp;35</strong><strong> देशों में ग्लाइफोसेट पर प्रतिबंध</strong>&nbsp;</p>
<p>ग्लाइफोसेट की वजह से लोगों में कैंसर, प्रजनन और विकास संबंधी विषाक्तता से लेकर न्यूरोटॉक्सिसिटी और इम्यूनोटॉक्सिसिटी तक खतरा है।&nbsp;करीब 35 देशों ने ग्लाइफोसेट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है इनमें श्रीलंका, नीदरलैंड, फ्रांस, कोलंबिया, कनाडा, इजरायल और अर्जेंटीना शामिल हैं। भारत में ग्लाइफोसेट को केवल चाय के बागानों और चाय की फसल के साथ लगे गैर-बागान क्षेत्रों में ही इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है। इस पदार्थ का कहीं और इस्तेमाल करना गैरकानूनी है। ग्लाइफोसेट के कारण लोगों में कैंसर, प्रजनन और विकास संबंधी बीमारियों, न्यूरोटॉक्सिसिटी और इम्यूनोटॉक्सिसिटी तक हो सकते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67dd252c57192.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारतीय किसान संघ ने ग्लाइफोसेट की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67dd252c57192.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[लंपी वैक्सीन: कैसे आईसीएआर ने तैयार की दुनिया की पहली DIVA लंपी स्किन डिजीज वैक्सीन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/vaccine-development-how-india-got-worlds-first-lumpy-skin-disease-vaccine.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 16 Mar 2025 09:03:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/vaccine-development-how-india-got-worlds-first-lumpy-skin-disease-vaccine.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वर्ष 2019 में भारत को दो प्रमुख पशु रोगों का प्रकोप झेलना पड़ा- मवेशियों में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) और सूअरों में अफ्रीकी स्वाइन फीवर (एएसएफ)। उसी समय कोरोना वायरस महामारी भी उभर रही थी जो जल्द ही पूरी दुनिया में फैल गई। ऐतिहासिक रूप से एलएसडी और स्वाइन फीवर अफ्रीका तक सीमित होते थे, लेकिन 1990 के दशक की शुरुआत में ये इजराइल, मिस्र, मध्य पूर्व, पूर्वी यूरोप होते हुए 2019 में भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुंच गए। हमने अपने स्नातक की पढ़ाई के दौरान इन रोगों के बारे में केवल विभेदीय निदान (Differential Diagnosis) के संदर्भ में पढ़ा था, कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि हम इन्हें अपने जीवनकाल में भारतीय भूमि पर देखेंगे। दिसंबर 2019 में इनके भारत में मौजूद होने की पुष्टि हुई। उसके बाद विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (डब्लूओएएच, पूर्व में ओआईई) को इसकी आधिकारिक रूप से जानकारी दी गई।</p>
<p>वैक्सीन बनाने की इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्वाइन (एनआरसीई) / नेशनल सेंटर फॉर वेटरनरी टाइप कल्चर्स (एनसीवीटीसी), हिसार में हमारे वायरस रिपॉजिटरी को एक नए वायरस से समृद्ध करने के सामान्य उद्देश्य के साथ हुई। विभिन्न पूर्वी राज्यों में मेरी कई टेलीफोनिक चर्चाओं के बाद हमें झारखंड के रांची और आसपास के पशु फार्मों में लंपी स्किन डिजीज जैसे लक्षणों वाले मामले मिले। इसकी रिपोर्ट बिहार कृषि विश्वविद्यालय, रांची, झारखंड के पशु चिकित्सा संकाय के डीन प्रोफेसर एम.के. गुप्ता ने दी। मैं (बीएन) उस समय आईसीएआर-एनआरसीई, हिसार का निदेशक था। मैंने ठान लिया था कि हमारी वायरस रिपॉजिटरी को नए वायरस आइसोलेट्स से समृद्ध करूंगा।</p>
<p>मैंने (बीएन) डॉ. नवीन कुमार (सह-लेखक) के नेतृत्व में विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की एक टीम रांची भेजी। 23 दिसंबर 2019 को टीम वहां पहुंची और प्रभावित मवेशियों की जांच की। उन्होंने लंपी स्किन डिजीज से मिलते-जुलते लक्षणों की पहचान की और विश्लेषण के लिए जैविक नमूने एकत्र किए।</p>
<p>पीसीआर परीक्षण से एलएसडी वायरस की पुष्टि हुई, जो एक महत्वपूर्ण सफलता थी। अगली चुनौती वायरस को आइसोलेट (अलग) करना था जो एक जटिल कार्य था और इसके लिए सावधानीपूर्वक इन-विट्रो कल्टीवेशन की आवश्यकता थी। रांची में प्रकोप के 10 दिनों के भीतर बकरी की किडनी कोशिकाओं में एलएसडी वायरस को सफलतापूर्वक अलग करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। संपूर्ण जीनोम सीक्वेंसिंग से पता चला कि भारतीय एलएसडी वायरस स्ट्रेन, केन्याई प्रकार के काफी करीब था। एलएसडी वायरस के सफल आइसोलेशन ने भारत की विदेशी टीकों पर निर्भरता को समाप्त कर दिया और घरेलू वैक्सीन विकसित करने की नींव रखी। यह एलएसडी के खिलाफ देश की लड़ाई में एक नए अध्याय की शुरुआत थी।</p>
<p><strong>लंपी-प्रोवैकइंड: एक ऐतिहासिक वैक्सीन</strong><br />मैंने (बीएन) डॉ. नवीन को फिर से फोन किया ताकि वैश्विक स्तर पर उपलब्ध विभिन्न वैक्सीन विकल्पों पर चर्चा की जा सके और एक महत्वपूर्ण सवाल पूछा: "क्या हम अपने यहां वैसा कुछ विकसित कर सकते हैं?" अगले ही दिन उन्होंने वैक्सीन विकल्पों की विस्तृत जानकारी दी, जिसमें लाइव एटेन्&zwj;यूएटेड (कमजोर किए गए) वैक्सीन भी शामिल थे, जो पॉक्सवायरल बीमारियों के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। हमने वायरस को एटेन्&zwj;यूएट (कमजोर) करने का निर्णय लिया। हम अपनी प्रयोगशाला और पशु गृह सुविधाओं की सीमाओं से वाकिफ थे, फिर भी हमने आगे बढ़ने का संकल्प लिया।&nbsp;</p>
<p>इसी बीच, मुझे डिप्टी डायरेक्टर जनरल (एनिमल साइंस) नियुक्त किया गया और मेरा ट्रांसफर दिल्ली हो गया। मुझे लगा कि यह ट्रांसफर हमारे प्रयासों में बाधा डाल सकता है, लेकिन वह वास्तव में हमारे लिए वरदान साबित हुआ। इससे वैक्सीन तैयार करने और उसके व्यवसायीकरण में मदद मिली। कोविड-19 महामारी फैली तो दुनियाभर की प्रयोगशालाएं बंद हो गईं। फिर भी डॉ. नवीन भारत में लंपी बीमारी के संकट का समाधान खोजने में लगे रहे। जब पूरी दुनिया कोविड के कारण ठहर गई थी, एलएसडी बिना रोक-टोक के फैलता रहा और यह धीरे-धीरे पूरे देश में पहुंच गया।</p>
<p>एक वेटरिनरी पैथोलॉजिस्ट के रूप में मैंने लंपी स्किन डिजीज के भारत के पशुधन और अर्थव्यवस्था पर होने वाले विनाशकारी प्रभाव को पहले ही भांप लिया था। बाहरी बीमारियों के प्रति भारत की संवेदनशीलता को देखते हुए मुझे एहसास हुआ कि हमें स्वदेशी वैक्सीन की आवश्यकता है। हमने वायरस को एटेन्&zwj;यूएट करने का निर्णय लिया। डॉ. नवीन और उनकी टीम ने कोविड-19 महामारी के दौरान भी अपने प्रयास जारी रखे। 14 महीने में वीरो कोशिकाओं में 50 बार वायरस को गुजारने के बाद, जीनोम सीक्वेंसिंग से पता चला कि वायरस में एटेन्&zwj;यूएशन से जुड़े म्यूटेशन हो चुके थे। इससे वायरस के एटेन्&zwj;यूएशन और वैक्सीन के रूप में इसकी क्षमता की पुष्टि हुई। वर्ष 2021 के मध्य तक हमारे पास एक एटेन्&zwj;यूएटेड एलएसडी वायरस था, जो एक संभावित वैक्सीन बन सकता था।</p>
<p>डिप्टी डायरेक्टर जनरल (एनिमल साइंसेज) के रूप में मेरी प्राथमिक जिम्मेदारी लंपी बीमारी से लड़ने के लिए एक प्रभावी वैक्सीन बनाने के काम को तेजी से आगे बढ़ाने की था। मैंने आईवीआरआई, एनआरसीई और एनआईएचएसएडी के निदेशकों की बैठक बुलाई ताकि प्रगति का आकलन किया जा सके। मूल्यांकन के बाद डॉ. नवीन की टीम की वैक्सीन को आईवीआरआई के मुक्तेश्वर कैंपस में परीक्षण के लिए चुना गया। नियंत्रित वातावरण में इस वैक्सीन ने सुरक्षा के साथ प्रभावशीलता दिखाई। इसमें वायरस के पुनः सक्रिय होने या शारीरिक स्राव के माध्यम से संचरण का कोई जोखिम नहीं था।</p>
<p>26,000 से अधिक गायों और भैंसों पर किए गए फील्ड ट्रायल ने भी इस वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावशीलता की पुष्टि की, जिसमें गर्भवती और दूध उत्पादन करने वाले पशु भी शामिल थे। अन्य नीथलिंग-आधारित वैक्सीन के विपरीत, जो अक्सर बुखार या दूध उत्पादन में कमी जैसे प्रतिकूल प्रभाव डालती थीं, लंपी-प्रोवैकइंड में ऐसे दुष्प्रभाव नहीं पाए गए। इससे यह एलएसडी के लिए उपलब्ध सबसे सुरक्षित वैक्सीन बनी।</p>
<p>आईसीएआर महानिदेशक की स्वीकृति के बाद 10 अगस्त 2022 को भारत सरकार के कृषि, मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्री द्वारा इस वैक्सीन को आधिकारिक रूप से जारी किया गया। इस वैक्सीन को व्यापक सराहना मिली जिससे देशभर में इसकी मांग बढ़ गई। हालांकि, दो वर्षों के भीतर एक लाइव एटेन्&zwj;यूएटेड वैक्सीन के तेज विकास ने कुछ सवाल खड़े किए, लेकिन हमने प्रभावशीलता और सुरक्षा को लेकर उठी चिंताओं का समाधान किया और अपने अनुसंधान में तेजी लाई। इससे कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुईं, जैसे कि वैक्सीन और फील्ड स्ट्रेन को अलग पहचानने के लिए पीसीआर टेस्ट, एक डीआईवीए टेस्ट और प्रतिरक्षा तंत्र एवं इम्यून बायोमार्कर्स पर गहरी समझ।</p>
<p><strong>एलएसडी निगरानी में प्रगति</strong><br />लंपी स्किन डिजीज के लिए डीआईवीए-समर्थ वैक्सीन का विकास एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस बीमारी से लड़ने के लिए व्यापक टीकाकरण आवश्यक है, लेकिन अन्य मौजूदा वैक्सीन संक्रमित और टीकाकृत पशुओं के बीच अंतर नहीं कर पाती हैं, जिससे प्रभावी रोग प्रबंधन बाधित होता है। भारत की एलएसडी वैक्सीन में एक अनूठा जेनेटिक डिलीशन है, जिससे यह प्राकृतिक स्ट्रेन से अलग पहचानी जा सकती है। हमने रिकॉम्बिनेंट ओआरएफ-154 का उपयोग करके एक एलिसा (ELISA) टेस्ट विकसित किया है, जो सीरोलॉजिकल आधार पर संक्रमित और टीकाकृत पशुओं में अंतर कर सकता है। यह डीआईवीए-समर्थ वैक्सीन पशु चिकित्सा विज्ञान में एक क्रांतिकारी उपलब्धि है।</p>
<p><strong>एनआरसीई हिसार में अग्रणी अनुसंधान</strong><br />डॉ. नवीन और उनकी टीम ने के खिलाफ अनुसंधान में क्रांतिकारी योगदान किया है। एनआरसीई हिसार में डॉ. नवीन के नेतृत्व वाली टीम ने एलएसडी के प्रारंभिक निदान के लिए नए बायोमार्कर भी पहचाने हैं और वैक्सीन इंड्यूस्ड सुरक्षा के संबंधों को परिभाषित किया है। इन निष्कर्षों ने टीके के अनुकूलन और प्रभावशीलता मूल्यांकन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिससे भारत और वैश्विक स्तर पर मवेशियों में एलएसडी नियंत्रण के प्रयासों को मजबूती मिली है। भारत में लंपी स्किन डिजीज गंभीर चिंता का विषय बन गया है, जो मवेशियों के स्वास्थ्य और डेयरी उद्योग को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। 2022 के प्रकोप में कई राज्यों में रोगग्रस्त होने की दर (मॉर्बिडिटी रेट) 80% और मामले घातक होने की दर (फैटेलिटी रेट) 67% तक पहुंच गई थी। इससे 18,337.76 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और दूध उत्पादन में 25% तक की गिरावट आई। एलएसडी डेयरी उत्पादकता के लिए एक बड़ा खतरा है, जिससे लाखों छोटे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।</p>
<p>सरकार ने आपातकालीन उपाय के रूप में मवेशियों को एलएसडी से बचाने के लिए गोटपॉक्स वैक्सीन के टीकाकरण को मंजूरी दी थी, जो अब भी जारी है। फील्ड डेटा बताते हैं कि गोटपॉक्स वैक्सीन केवल आंशिक सुरक्षा प्रदान करती है। अब समय आ गया है कि सरकार जल्द से जल्द सीडीएससीओ द्वारा अनुमोदित लाइव एटेन्&zwj;यूएटेड एलएसडी वैक्सीन को अपनाने का निर्णय ले, ताकि मवेशियों में नए प्रकोप को रोका जा सके। एलएसडी वैक्सीन पहले ही चार कंपनियों को व्यावसायिक रूप से प्रदान की जा चुकी है। बायोवेट प्राइवेट लिमिटेड को इस वैक्सीन के निर्माण का लाइसेंस भी मिल चुका है।&nbsp;</p>
<p><em>(डॉ. बी.एन. त्रिपाठी कुलपति, शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी जम्मू, पूर्व उप महानिदेशक (पशु विज्ञान), आईसीएआर एवं पूर्व निदेशक, आईसीएआर-एनआरसीई, हिसार हैं। डॉ. नवीन कुमार निदेशक, आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे, पूर्व प्रमुख, नेशनल सेंटर फॉर वेटरनरी टाइप कल्चर्स, आईसीएआर-एनआरसीई, हिसार हैं)</em></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ लंपी वैक्सीन: कैसे आईसीएआर ने तैयार की दुनिया की पहली DIVA लंपी स्किन डिजीज वैक्सीन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इस्मा ने चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर 264 लाख टन किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/isma-lowered-sugar-production-estimate-to-264-lakh-tonnes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 13 Mar 2025 16:35:47 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/isma-lowered-sugar-production-estimate-to-264-lakh-tonnes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>निजी चीनी मिलों के संगठन इस्मा ने चालू पेराई सीजन (2024-25) में चीनी का उत्पादन घटाकर 264 लाख टन कर दिया है। इसके पहले 31 जनवरी, 2025 को इस्मा ने 272.69 लाख टन चीनी उत्पादन होने का अनुमान जारी किया था। इस्मा के मुताबिक 10 मार्च तक देश में 233.09 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है और अभी देश भर में 228 चीनी मिलें पेराई कर रही हैं। चालू साल में एथेनॉल के लिए 35 लाख टन चीनी का डायवर्जन करने की बात इस्मा ने अपनी प्रेस रिलीज में कही है। चालू सीजन में देश भर में 532 चीनी मिंलों में पेराई शुरू हुई थी जिनमें से 304 चीनी मिलें बंद हो चुकी है।</p>
<p>इस्मा का कहना है कि उत्तर प्रदेश में गन्ने की नई फसल में चीनी की रिकवरी में सुधार है हालांकि पूर्वी और मध्य प्रदेश में अधिकांश चीनी मिलों में मार्च के अंत में ही पेराई समाप्त हो जाएगी।</p>
<p>महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने का उत्पादन घटने से उसकी उपलब्धता कम रही है हालांकि कर्नाटक कुछ चीनी मिलें जून-जुलाई, 2025 में स्पेशल सीजन में पेराई कर सकती हैं। मौजूदा परिस्थितियों में 35 लाख टन चीनी के एथेनॉल के लिए डायवर्जन होने के बाद चीनी का उत्पादन 264 लाख टन रह सकता है। इस्मा के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 10 मार्च तक 78.80 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ है और उसके 92.5 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। महाराष्ट्र में अभी तक 78.10 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ है और वहां 81 लाख टन चीनी उत्पादन होने का अनुमान है। वहीं कर्नाटक में 38.94 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ है और उसके 41.5 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान&nbsp; है। बाकी राज्यों में अभी तक 37.25 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ है और इसके 49 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। इस तरह से चालू पेराई सीजन में कुल चीनी उत्पादन 264 लाख टन रहने का अनुमान है।</p>
<p>चालू सीजन के शुरू में 1 अक्तूबर, 2024 को चीनी का 80 लाख टन का स्टॉक बकाया था। चालू सीजन में 264 लाख टन चीनी उत्पादन होने से इस साल चीनी की कुल उपलब्धता 344 लाख टन रहेगी। 280 लाख टन की घरेलू खपत और 10 लाख टन चीनी निर्यात के बाद सीजन के अंत में 54 लाख टन का बकाया स्टॉक होगा।</p>
<p>इस्मा ने चीनी उत्पादन का अनुमान दो बार घटा दिया है। वहीं चीनी ट्रेड की संस्था ने उत्पादन के 258.5 लाख टन पर रहने और बकाया स्टॉक के 38 लाख टन पर आ जाने का अनुमान जारी किया है। मौजूदा स्थिति में अगर उत्पादन 260 लाख टन के आसपास रहता है तो चीनी की उपलब्धता का संकट पैदा हो सकता है क्योंकि जहां बकाया स्टॉक में 275 लाख टन चीनी की उपयोग के लायक उद्योग सूत्र बता रहे हैं वहीं इस साल दशहरा और दीवाली दोनों त्यौहार अक्तूबर में हैं और नए सीजन की चीनी नवंबर के पहले बाजार में उपलब्ध होना संभव नहीं है। इसलिए चीनी कीमतों में तेजी को जो रूख आया है वह बरकार रहता है तो कीमतों पर नियंत्रण की चुनौती का सामना सरकार को करना पड़ेगा।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इस्मा ने चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर 264 लाख टन किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत में सरसों उत्पादन घटकर 115.2 लाख टन रहने का अनुमान, सरकारी अनुमान से 10% कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-mustard-production-estimated-at-115-lakh-tonnes-10-pc-below-government-projection.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 12 Mar 2025 19:08:05 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-mustard-production-estimated-at-115-lakh-tonnes-10-pc-below-government-projection.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय खाद्य तेल उद्योग संगठन, <strong>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA)</strong> <span>ने चालू रबी </span>2024-25 <span>सीजन में&nbsp;<strong>रेपसीड-सरसों</strong> उत्पादन </span>115.16 <span>लाख टन होने का अनुमान लगाया है। यह कृषि मंत्रालय की ओर से जारी दूसरे अग्रिम अनुमान </span>128.73 <span>लाख टन से लगभग </span>10 फीसदी <span>और पिछले वर्ष के </span>132.59 <span>लाख टन के उत्पादन से </span>13 फीसदी <span>कम है। </span>एसईए&nbsp;<span>का अनुमान फील्ड सर्वे और सैटेलाइट आधारित प्रेडिक्टिव एनालिसिस पर आधारित हैं</span>, <span>जिसे </span>SatSure <span>द्वारा किया गया है।</span></p>
<p>एसईए के अनुसार, <span>रबी सीजन </span>2024-25 <span>के दौरान भारत में रेपसीड-सरसों की बुवाई </span>92.15 <span>लाख हेक्टेयर क्षेत्र में होने का अनुमान है जो सरकार के </span>89.30 <span>लाख हेक्टेयर के अनुमान से अधिक है</span>, <span>लेकिन पिछले वर्ष के </span>93.73 <span>लाख हेक्टेयर से </span>1.68% <span>कम है। सरसों उत्पादन में गिरावट से खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता लाने की कोशिशों को झटका लगेगा। </span></p>
<p>खाद्य तेलों के आयात पर भारत की भारी निर्भरता को रेखांकित करते हुए, <span>एसईए के अध्यक्ष <strong>संजीव अस्थाना</strong> ने घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि एसईए ने </span>2020-21 <span>से "मॉडल मस्टर्ड फार्म प्रोजेक्ट" जैसे कार्यक्रम लागू किए हैं</span>, <span>जिनका लक्ष्य </span>2029-30 <span>तक रेपसीड-सरसों उत्पादन को </span>200 <span>लाख टन तक पहुंचाना है।</span></p>
<p>एसईए के कार्यकारी निदेशक<strong> डॉ. बी.वी. मेहता</strong> ने कहा, "<span>सरसों का वर्तमान न्यूनतम समर्थन मूल्य (</span>MSP) 5,950 <span>रुपये प्रति क्विंटल है। सरसों की कीमत पहले ही एमएसपी तक पहुंच चुकी हैं और आवक बढ़ने के साथ इसके गिरने की संभावना है। सरकार को नेफेड और अन्य एजेंसियों को सक्रिय करना चाहिए ताकि किसानों के हितों की रक्षा के लिए एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित की जा सके।"</span></p>
<p>सर्वे के मुताबिक, <span><strong>राजस्थान</strong> अभी भी सबसे बड़ा सरसों उत्पादक राज्य बना हुआ है</span>, <span>जहां </span>34.74 <span>लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती की गई है और </span>52.45 <span>लाख टन उत्पादन का अनुमान है। इसके बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश क्रमशः </span>14.86 <span>लाख हेक्टेयर और </span>14.23 <span>लाख हेक्टेयर के साथ प्रमुख सरसों उत्पादक राज्यों में शामिल हैं। हरियाणा में </span>7.14 <span>लाख हेक्टेयर में सरसों की खेती की गई है</span>, <span>जहां उत्पादन अनुमान </span>12.58 <span>लाख टन है।</span></p>
<p>निष्कर्षों में सामने आया कि सरसों की फसल मुख्य उत्पादक क्षेत्रों में अच्छी स्थिति में है। NDVI <span>मानकों और फसल विकास आकलन से पुष्टि हुई कि खासकर पुष्पन (इन्फ्लोरेसेंस एमर्जेंस) और फूल आने की अवस्थाओं में फसल की स्थिति संतोषजनक रही है। हालांकि</span>, <span>सरकार द्वारा </span>MSP <span>बढ़ाने के बावजूद</span>, <span>उत्पादन लागत में वृद्धि किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।</span></p>
<p><span>एसईए द्वारा करवाए गए इस सर्वेक्षण के लिए 8 प्रमुख सरसों उत्पादक राज्यों&mdash;राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, असम, गुजरात, झारखंड और पश्चिम बंगाल&mdash;में सैटेलाइट आधारित विश्लेषण और किसानों से विस्तृत बातचीत की गई। एसईए द्वारा अप्रैल-मई में तीसरा और अंतिम फील्ड सर्वेक्षण करेगा, जिससे और अधिक सटीक उपज और उत्पादन अनुमान लगाया जा सके।</span></p>
<p></p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत में सरसों उत्पादन घटकर 115.2 लाख टन रहने का अनुमान, सरकारी अनुमान से 10% कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ट्रंप के निशाने पर भारतीय कृषि बाजार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/trump-targets-indian-agricultural-market-through-reciprocal-tariff.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 11 Mar 2025 10:51:24 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/trump-targets-indian-agricultural-market-through-reciprocal-tariff.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने से कुछ घंटे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति ने विदेश व्यापार पर &lsquo;फेयर एंड रेसिप्रोकल प्लान&rsquo; (उचित और पारस्परिक प्लान) की घोषणा की। इसमें उन्होंने पहली बार स्पष्ट रूप से भारत को निशाना बनाया। इससे पहले भारत परोक्ष रूप से तब निशाना बना जब राष्ट्रपति ट्रंप ने सभी देशों से स्टील और एल्युमीनियम आयात पर 25% शुल्क लगाने की घोषणा की। ये दोनों ऐसे उत्पाद हैं जिनमें अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। लेकिन यह पहली बार था जब रेसिप्रोकल प्लान में भारत की पहचान विशेष रूप से एक ऐसे देश के रूप में की गई जो अमेरिका के हितों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहा है। इस प्लान का घोषित उद्देश्य &lsquo;अमेरिका के व्यापारिक संबंधों में निष्पक्षता बहाल करना&rsquo; और &lsquo;नॉन-रेसिप्रोकल व्यापार व्यवस्था&rsquo; का मुकाबला करना है।</p>
<p>इसे शुरू करने के पीछे का तर्क समझाते हुए राष्ट्रपति ज्ञापन (प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम) में कहा गया कि अमेरिका दुनिया की सबसे खुली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जहां आयात शुल्क दुनिया में सबसे कम है। अमेरिका अन्य प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में आयात पर कम बाधाएं लगाता है, लेकिन इसके साझीदार देश अमेरिका से होने वाले आयात पर अधिक शुल्क लगाते हैं। इसके अलावा अमेरिकी उत्पादों को अनुचित और भेदभावपूर्ण बाधाओं या वैट जैसे करों का सामना करना पड़ता है, जो व्यापारिक साझीदार देश वास्तव में अमेरिका की कंपनियों, श्रमिकों और उपभोक्ताओं पर लगाते हैं। दूसरे शब्दों में अमेरिका के व्यापारिक साझीदार अपने बाजारों को अमेरिकी निर्यात के लिए बंद रखते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार उन देशों का ऐसा करना अनुचित है और इसके कारण अमेरिका का सालाना व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। इसे रेसिप्रोकल टैरिफ (पारस्परिक शुल्क) का उपयोग करके सुधारा जा सकता है।</p>
<p>भारत का जिक्र करते हुए फेयर एंड रिसिप्रोकल प्लान कहता है कि भारत में कृषि उत्पादों पर औसत टैरिफ 39% है, जबकि उन्हीं उत्पादों पर अमेरिका का औसत आयात टैरिफ केवल 5% है। इसमें यह भी कहा गया है कि भारत मोटरसाइकिलों पर 100% आयात शुल्क लगाता है, जबकि भारतीय मोटरसाइकिलों पर अमेरिका का आयात शुल्क केवल 2.4% है। इन उदाहरणों के जरिए ट्रंप प्रशासन ने भारत और अमेरिका के बीच रेसिप्रोकल टैरिफ के महत्व को स्थापित करने का प्रयास किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि रेसिप्रोकल टैरिफ लागू किए जाएं।</p>
<p><strong>अमेरिकी कदम का असर</strong><br />भारत को कृषि क्षेत्र में रेसिप्रोकल ट्रेड स्वीकार करने के लिए बाध्य करने का मतलब है कि या तो भारत को कृषि उत्पादों पर अपना टैरिफ अमेरिकी स्तर के बराबर लाना होगा, या फिर भारत से आयात करने वाले कृषि उत्पादों पर अमेरिका ऊंचे टैरिफ लगाएगा। दोनों में से कोई भी कदम अनुचित व्यापार व्यवहार कहलाएगा, क्योंकि ऐसा करके अमेरिका विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) के बहुपक्षीय व्यापार नियमों का उल्लंघन करेगा। इस संगठन के सदस्य देश तीन दशक पहले की गई अपनी प्रतिबद्धताओं के अनुरूप टैरिफ लगाते हैं। वे देश न तो अपने टैरिफ को एकतरफा बदल सकते हैं और न ही अन्य डब्लूटीओ सदस्य देशों को ऐसा करने के लिए मजबूर कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डब्लूटीओ नियमों के तहत, विकासशील देशों को &lsquo;विशेष और अलग व्यवहार&rsquo; का लाभ मिलता है। यह इन देशों को विकसित देशों की तुलना में आयात पर अधिक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है। दूसरे शब्दों में, विकासशील देश डब्लूटीओ नियमों के तहत ही गैर-पारस्परिकता (नॉन-रेसिप्रोसिटी) के लाभ प्राप्त करते हैं।</p>
<p>ट्रंप प्रशासन की साझीदार देशों पर अपनी शर्तें एकतरफा थोपने की प्रवृत्ति निश्चित रूप से प्रस्तावित द्विपक्षीय समझौता वार्ताओं के दौरान भारत को नुकसान में डाल देगी। अब तक हुई सभी द्विपक्षीय मुक्त व्यापार वार्ताओं में भारत अपने साझीदार देशों से प्रमुख कृषि उत्पादों को बाहर रखने में सफल रहा ताकि छोटे किसानों को उचित सुरक्षा मिल सके और उन्हें पश्चिमी जगत की विशाल एग्री-बिजनेस कंपनियों से अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना न करना पड़े। हालांकि अतीत के विपरीत इस बार भारत के लिए अनाज जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों को द्विपक्षीय ट्रेड वार्ताओं के दायरे से बाहर रखना मुश्किल होगा। क्योंकि दोनों देशों के नेताओं के संयुक्त बयान में यह उल्लेख किया गया है कि दोनों देश कृषि वस्तुओं का व्यापार बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे।</p>
<p>रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया जाना भारत के लिए चिंता की बात है, क्योंकि इसका कृषि क्षेत्र निशाने पर है। इस नीति के जरिए राष्ट्रपति ट्रंप भारत के कृषि बाजारों को अमेरिकी एग्री-बिजनेस कंपनियों के लिए खोलने का इरादा रखते हैं। ये कंपनियां खासकर अमेरिकी सरकार द्वारा दी जाने वाली लगातार बढ़ती सब्सिडी के कारण वैश्विक कृषि बाजार पर हावी रही हैं। यह बात सब जानते हैं कि कृषि क्षेत्र में अमेरिकी सरकार की भारी सब्सिडी से बाजार विकृत होते हैं, जिससे विकासशील देशों के लिए वैश्विक बाजार में प्रवेश करना या अपने घरेलू बाजारों की रक्षा करना असंभव हो जाता है। खासकर आईएमएफ और विश्व बैंक के 1990 के दशक में अधिकांश देशों को अपनी अर्थव्यवस्थाओं को उदार बनाने के लिए मजबूर करने के बाद। डब्लूटीओ के गठन से पहले हुई बहुपक्षीय व्यापार वार्ताओं में यह अपेक्षा की गई थी कि कृषि सब्सिडी को नियंत्रित किया जाएगा। हालांकि इसके विपरीत अमेरिका की कृषि सब्सिडी 1995 के 61 अरब डॉलर से बढ़कर 2022 में 217 अरब डॉलर हो गई। इसके अलावा, जहां भारत में कृषि सब्सिडी का उद्देश्य घरेलू खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को सुनिश्चित करना है, वहीं अमेरिका में कृषि सब्सिडी का लाभ वैश्विक स्तर पर बिजनेस करने वाली कंपनियों को मिलता है।</p>
<p>ट्रंप प्रशासन की तरफ से रेसिप्रोकल टैरिफ का उपयोग करके भारत के घरेलू कृषि बाजार को खोलने का दबाव यहां के छोटे किसानों और बड़ी अमेरिकी एग्री-बिजनेस कंपनियों के बीच अनुचित प्रतिस्पर्धा को जन्म देगा। यह पहले से ही संकटग्रस्त भारतीय कृषि के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा और इसके परिणामस्वरूप ग्रामीण भारत में बड़े पैमाने पर आजीविका के नुकसान के कारण आर्थिक अस्थिरता उत्पन्न होगी।&nbsp;</p>
<p>भारत जैसे बड़े देश के लिए यह कतई उचित नहीं होगा कि वह खाद्यान्न उत्पादन में कड़ी मेहनत से अर्जित आत्मनिर्भरता को छोड़ दे। इसने न केवल अमेरिका से गेहूं के आयात पर निर्भरता समाप्त करने में सहायता की, बल्कि भारत की घरेलू नीतियों में अमेरिका के अनुचित हस्तक्षेप से भी बचाया। 1960 के दशक के मध्य से भारत में प्रत्येक सरकार ने देश की कृषि और कृषि पर निर्भर विशाल कार्यबल की दृढ़ता से रक्षा की है, और मोदी सरकार को इस स्थिति को बनाए रखना सुनिश्चित करना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो इसके आर्थिक और राजनीतिक परिणाम अत्यधिक गंभीर हो सकते हैं।</p>
<p><strong><em>(लेखक जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर और काउंसिल फॉर सोशल डेवलपमेंट में प्रतिष्ठित प्रोफेसर हैं)</em></strong></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67cd87b5ea250.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ट्रंप के निशाने पर भारतीय कृषि बाजार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67cd87b5ea250.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान, कपास, गन्ना और सरसों उत्पादन में गिरावट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/record-food-grain-production-estimated-in-the-country-decline-in-cotton-and-mustard-production.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 10 Mar 2025 19:13:36 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/record-food-grain-production-estimated-in-the-country-decline-in-cotton-and-mustard-production.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: left;">केंद्र सरकार ने वर्ष 2024-25 में प्रमुख कृषि फसलों के उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान जारी किये हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी इन अनुमानों के मुताबिक, इस साल देश में गेहूं, चावल, मक्का, मूंगफली और सोयाबीन के रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद है। खरीफ सीजन 2024-25 में कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 16.64 करोड़ टन और रबी सीजन में कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 16.45 करोड़ टन तक पहुंचने की संभावना है। इस साल अच्छे मानूसन और बुवाई का रकबा बढ़ने से खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी देखी जा रही है।</p>
<p style="text-align: left;">दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2024-25 के खरीफ सीजन में <strong>चावल</strong> का उत्पादन रिकॉर्ड 12.07 करोड़ टन तक पहुंच सकता है जो 2023-24 खरीफ सीजन में हुए 11.33 करोड़ टन चावल उत्पादन के मुकाबले करीब 74 लाख टन अधिक है।</p>
<p style="text-align: left;">इस साल <strong>गेहूं</strong> के रिकॉर्ड 11.54 करोड़ टन उत्पादन की संभावना है जो पिछले साल के 11.33 करोड़ टन गेहूं से करीब 21 लाख टन यानी लगभग 2 फीसदी अधिक है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p style="text-align: left;">खरीफ सीजन में मक्का उत्पादन रिकॉर्ड 248.11 लाख टन तक पहुंच सकता है जो पिछले साल 222.45 लाख टन था। रबी सीजन में मक्का उत्पादन रिकॉर्ड 124.38&nbsp;लाख टन होने का अनुमान है जो पिछले साल 120.28 लाख टन था। &nbsp;&nbsp;</p>
<p style="text-align: left;">खरीफ सीजन 2024-25 में <strong>श्री अन्न</strong> का उत्पादन 137.52&nbsp;लाख टन तक पहुंचने की उम्मीद है जबकि रबी सीजन में श्री अन्न उत्पादन 30.81 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है। खरीफ सीजन में <strong>मोटे अनाजों</strong> का उत्पादन 385.63&nbsp;लाख टन रहेगा जबकि रबी सीजन में मोटे अनाजों का उत्पादन 174.65 लाख टन तक पहुंच सकता है।</p>
<p style="text-align: left;">दालों में <strong>अरहर </strong><strong>(</strong><strong>तूर</strong><strong>)</strong> का उत्पादन 35.11 लाख टन, <strong>चने</strong> का उत्पादन 115.35 लाख टन और <strong>मसूर दाल</strong> का उत्पादन 18.17 तक पहुंच सकता है।</p>
<p style="text-align: left;">तिलहन में खरीफ <strong>मूंगफली </strong>के रिकॉर्ड 104.26 लाख टन तथा रबी मूंगफली के 8.87 लाख टन उत्पादन का अनुमान है।<strong> सोयाबीन</strong> का उत्पादन रिकॉर्ड 151.32&nbsp;लाख टन उत्पादन तक पहुंचने की संभावना है जो गत वर्ष के मुकाबले करीब 20 लाख टन अधिक है।</p>
<p style="text-align: left;"><strong>सरसों</strong> का उत्पादन पिछले साल के 132.62 लाख टन से घटकर इस साल 128.73&nbsp;लाख टन रह सकता है। खरीफ सीजन में <strong>कुल तिलहन</strong> उत्पादन 276.38 लाख टन और रबी सीजन में कुल तिलहन उत्पादन 140.31 होने की संभावना है। रबी तिलहन उत्पादन में करीब दो लाख टन की गिरावट आ सकती है। &nbsp;</p>
<p style="text-align: left;"><strong>कपास और गन्ना उत्पादन में गिरावट</strong></p>
<p style="text-align: left;">कपास उत्पादन में काफी गिरावट आई है और यह पिछले साल के 325.22 लाख बेल्स से घटकर 294.25 लाख बेल्स रहने का अनुमान है।</p>
<p style="text-align: left;">गन्ना उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले 181 लाख टन की गिरावट आने का अनुमान है। इस साल गन्ना उत्पादन 4350.79 लाख टन रहेगा जो पिछले साल 4531.58 लाख टन था। गन्ने के उत्पादन में गिरावट का असर देश के चीनी उत्पादन भी पड़ेगा।&nbsp;</p>
<p style="text-align: left;"></p>
<p style="text-align: left;"><strong>सरकार के प्रयासों के बढ़ा कृषि उत्पादन: शिवराज सिंह चौहान&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align: left;">केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार कृषि के विकास के लिए निरंतर काम कर रही है। कृषि मंत्रालय विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को सहायता प्रदान कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप कृषि फसलों के उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है।</p>
<p style="text-align: left;"><strong>कृषि मंत्रालय</strong> का कहना है कि ये अनुमान मुख्य रूप से राज्यों से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किए गए हैं। दूसरे अग्रिम अनुमान में खरीफ और रबी सीजन शामिल हैं, तीसरे अग्रिम अनुमान में ग्रीष्मकालीन सीजन को शामिल किया जाएगा।</p>
<p style="text-align: left;">खरीफ फसल उत्पादन अनुमान तैयार करते समय फसल कटाई प्रयोग (सीसीई) आधारित उपज पर विचार किया गया है। इसके अलावा, तुअर, गन्ना, अरंडी आदि कुछ फसलों के सीसीई अभी भी जारी हैं। रबी फसल उत्पादन औसत उपज पर आधारित है और सीसीई पर आधारित बेहतर उपज अनुमान प्राप्त होने पर क्रमिक अनुमानों में बदलाव किया जाएगा है।</p>
<p style="text-align: left;"></p>
<table width="800" style="height: 2388.68px; margin-left: auto; margin-right: auto;">
<tbody>
<tr style="height: 0px;">
<td colspan="8" rowspan="2" style="height: 28.679px; width: 796.193px; text-align: center;"><strong>All India: Crop-wise Production</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 28.679px;"></tr>
<tr style="height: 20px;">
<td colspan="8" style="height: 20px; width: 796.193px; text-align: right;"><em>Production in Lakh Tonnes</em></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td colspan="8" style="height: 20px; width: 796.193px;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 40px;">
<td style="height: 40px; width: 79.0199px; text-align: center;"><strong>Crop</strong></td>
<td style="height: 40px; width: 75.3977px; text-align: center;"><strong>Season</strong></td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;"><strong>2020-21</strong></td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;"><strong>2021-22</strong></td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;"><strong>2022-23</strong></td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;"><strong>2023-24</strong></td>
<td style="height: 40px; width: 118.651px; text-align: center;">
<p><strong>2024-25</strong></p>
<p><strong> (1st ad. Est.)</strong></p>
</td>
<td style="height: 40px; width: 124.886px; text-align: center;">
<p><strong>2024-25 </strong></p>
<p><strong>(2nd Ad. Est.)</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Rice</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1052.08</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1110.01</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1105.12</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1132.59</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">1199.34</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">1206.79</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">191.60</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">184.71</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">150.04</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">146.01</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Summer</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">102.40</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">99.65</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1243.68</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1294.71</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1357.55</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1378.25</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">1199.34</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;"></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Wheat</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1095.86</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1077.42</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1105.54</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1132.92</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">1154.30</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1095.86</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1077.42</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1105.54</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1132.92</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">1154.30</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Maize</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">215.55</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">226.81</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">236.74</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">222.45</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">245.41</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">248.11</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">100.92</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">110.49</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">116.90</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">120.28</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">124.38</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Summer</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">27.21</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">33.92</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">316.47</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">337.30</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">380.85</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">376.65</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">245.41</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Barley</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.56</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">13.71</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">19.13</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.99</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.56</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">13.71</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">19.13</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.99</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Jowar</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">19.86</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">15.98</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">14.80</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">15.09</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">21.96</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;"></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">28.26</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">25.52</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">23.22</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">31.89</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Summer</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.13</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.40</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">48.12</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">41.51</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">38.14</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">47.37</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">21.96</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;"></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Bajra</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">108.63</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">97.81</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">103.49</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">96.63</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">93.75</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Summer</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">10.82</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">10.53</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">108.63</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">97.81</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">114.31</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">107.16</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">93.75</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Ragi</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">19.98</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">17.01</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.91</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.70</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">13.90</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">19.98</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">17.01</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.91</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.70</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">13.90</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Small Millets</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3.47</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3.67</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3.84</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4.49</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">3.15</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3.47</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3.67</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3.84</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4.49</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">3.15</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 60px;">
<td style="height: 60px; width: 79.0199px; text-align: center;">Shree Anna /Nutri Cereals</td>
<td style="height: 60px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 60px; width: 94.4886px; text-align: center;">151.95</td>
<td style="height: 60px; width: 94.4886px; text-align: center;">134.47</td>
<td style="height: 60px; width: 94.4886px; text-align: center;">139.04</td>
<td style="height: 60px; width: 94.4886px; text-align: center;">132.90</td>
<td style="height: 60px; width: 118.651px; text-align: center;">132.77</td>
<td style="height: 60px; width: 124.886px; text-align: center;">137.52</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">28.26</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">25.52</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">23.22</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">31.89</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">30.81</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Summer</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">10.95</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">10.93</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">180.21</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">160.00</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">173.21</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">175.72</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">132.77</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 40px;">
<td style="height: 40px; width: 79.0199px; text-align: center;">Nutri/Coarse Cereals</td>
<td style="height: 40px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">367.50</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">361.28</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">375.78</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">355.35</td>
<td style="height: 40px; width: 118.651px; text-align: center;">378.18</td>
<td style="height: 40px; width: 124.886px; text-align: center;">385.63</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">145.74</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">149.73</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">159.25</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">169.16</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">174.65</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Summer</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">38.17</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">44.85</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">513.24</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">511.01</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">573.19</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">569.36</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">378.18</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;"></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Cereals</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1419.58</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1471.29</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1480.90</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1487.94</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">1577.52</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;"></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1433.21</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1411.85</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1414.82</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1448.09</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Summer</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">140.56</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">144.50</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">2852.79</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">2883.14</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3036.28</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3080.52</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">1577.52</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;"></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Tur</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">43.16</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">42.20</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">33.12</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">34.17</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">35.02</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">35.11</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">43.16</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">42.20</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">33.12</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">34.17</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">35.02</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">35.11</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Gram</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">119.11</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">135.44</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">122.67</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">110.39</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">115.35</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">119.11</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">135.44</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">122.67</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">110.39</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">115.35</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Urad</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">15.07</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">18.65</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">17.68</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.04</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">12.09</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">7.23</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">9.11</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">6.33</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4.87</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Summer</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">2.30</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">2.28</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">22.30</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">27.76</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">26.31</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">23.19</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">12.09</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Moong</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">19.96</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">14.80</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">17.18</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">11.54</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">13.83</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">10.89</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.86</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1.10</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1.01</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Summer</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">18.48</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">18.47</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">30.85</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">31.66</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">36.76</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">31.03</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">13.83</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Lentil</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">14.94</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">12.69</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">15.59</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">17.91</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">18.17</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">14.94</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">12.69</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">15.59</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">17.91</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">18.17</td>
</tr>
<tr style="height: 40px;">
<td style="height: 40px; width: 79.0199px; text-align: center;">Other Pulses</td>
<td style="height: 40px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">7.99</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">6.69</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">8.24</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">7.99</td>
<td style="height: 40px; width: 118.651px; text-align: center;">8.60</td>
<td style="height: 40px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.28</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.58</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">17.90</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">17.78</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">24.27</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">23.27</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">26.14</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">25.77</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">8.60</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Total Pulses</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">86.18</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">82.35</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">76.21</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">69.74</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">69.54</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">168.45</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">190.67</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">163.58</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">151.97</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Summer</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">20.79</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">20.75</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">254.63</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">273.02</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">260.58</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">242.46</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">69.54</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 40px;">
<td style="height: 40px; width: 79.0199px; text-align: center;">Total Food Grains</td>
<td style="height: 40px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">1505.76</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">1553.64</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">1557.11</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">1557.68</td>
<td style="height: 40px; width: 118.651px; text-align: center;">1647.05</td>
<td style="height: 40px; width: 124.886px; text-align: center;">1663.91</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1601.65</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1602.52</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1578.41</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1600.06</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">1645.27</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Summer</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">161.35</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">165.24</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3107.42</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3156.16</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3296.87</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3322.98</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">1647.05</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Groundnut</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">85.28</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">84.34</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">85.62</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">86.60</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">103.60</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">104.26</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">17.16</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">17.01</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">11.03</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">7.55</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">8.87</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Summer</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">6.32</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">7.65</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">102.44</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">101.35</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">102.97</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">101.80</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">103.60</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Castorseed</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.47</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.19</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">19.80</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">19.59</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">15.53</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.47</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.19</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">19.80</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">19.59</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">15.53</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Sesamum</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">8.17</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">7.89</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3.92</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3.95</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">3.98</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.31</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.28</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Summer</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3.79</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4.24</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">8.17</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">7.89</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">8.02</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">8.47</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">3.98</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Nigerseed</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.42</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.33</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.29</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.27</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">0.14</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.42</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.33</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.29</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.27</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">0.14</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Soybean</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">126.10</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">129.87</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">149.85</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">130.62</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">133.60</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">151.32</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">126.10</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">129.87</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">149.85</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">130.62</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">133.60</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">151.32</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Sunflower</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.78</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1.11</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">2.04</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.60</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">0.60</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1.51</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1.39</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1.17</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.74</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Summer</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.43</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.39</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">2.28</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">2.50</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3.63</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1.73</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">0.60</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 40px;">
<td style="height: 40px; width: 79.0199px; text-align: center;">Rapeseed &amp; Mustard</td>
<td style="height: 40px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">102.10</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">119.63</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">126.43</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">132.59</td>
<td style="height: 40px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 40px; width: 124.886px; text-align: center;">128.73</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">102.10</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">119.63</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">126.43</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">132.59</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Linseed</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1.11</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1.26</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1.67</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1.13</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1.11</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1.26</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1.67</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">1.13</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Safflower</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.36</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.61</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.90</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.50</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.36</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.61</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.90</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.50</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 40px;">
<td style="height: 40px; width: 79.0199px; text-align: center;">Total Oil Seeds</td>
<td style="height: 40px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">237.23</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">239.72</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">261.50</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">241.62</td>
<td style="height: 40px; width: 118.651px; text-align: center;">257.45</td>
<td style="height: 40px; width: 124.886px; text-align: center;">276.38</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Rabi</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">122.24</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">139.91</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">141.51</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">142.78</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">140.31</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Summer</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">10.54</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">12.29</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">359.46</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">379.63</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">413.55</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">396.69</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">257.45</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">257.45</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Sugarcane</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4053.99</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4394.25</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4905.33</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4531.58</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">4399.30</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">4350.79</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4053.99</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4394.25</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4905.33</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4531.58</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">4399.30</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">4350.79</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Cotton</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">352.48</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">311.18</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">336.60</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">325.22</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">299.26</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">294.25</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">352.48</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">311.18</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">336.60</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">325.22</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">299.26</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">294.25</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Jute</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">89.53</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">97.62</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">89.89</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">92.52</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">80.65</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">89.53</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">97.62</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">89.89</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">92.52</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">80.65</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Mesta</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4.02</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3.87</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4.03</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4.41</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">3.90</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4.02</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">3.87</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4.03</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">4.41</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">3.90</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 40px;">
<td style="height: 40px; width: 79.0199px; text-align: center;">Jute &amp; Mesta</td>
<td style="height: 40px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">93.54</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">101.49</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">93.92</td>
<td style="height: 40px; width: 94.4886px; text-align: center;">96.92</td>
<td style="height: 40px; width: 118.651px; text-align: center;">84.56</td>
<td style="height: 40px; width: 124.886px; text-align: center;">83.08</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">93.54</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">101.49</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">93.92</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">96.92</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">84.56</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">83.08</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Tobacco</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">8.18</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">7.70</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">8.66</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">8.18</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">7.70</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">8.66</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Sannhemp</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.51</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.46</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.40</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.51</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.46</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">0.40</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">Guarseed</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Kharif</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">11.83</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">17.87</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.65</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 79.0199px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 75.3977px; text-align: center;">Total</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">11.83</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">17.87</td>
<td style="height: 20px; width: 94.4886px; text-align: center;">16.65</td>
<td style="height: 20px; width: 118.651px; text-align: center;">&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 124.886px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td colspan="8" style="height: 20px; width: 796.193px;"># Cotton Production in Bales, 1Bale=170 Kg</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td colspan="8" style="height: 20px; width: 796.193px;">## Jute, Sannhemp &amp; Mesta Production in Bales, 1Bale=180 Kg</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align: center;">&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67cee8f0517b2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान, कपास, गन्ना और सरसों उत्पादन में गिरावट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67cee8f0517b2.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विकल्प महंगे होने के कारण बंद नहीं हुआ पराली जलाना, बायोएनर्जी में संभावनाएं: आईएफजीई सर्वे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/stubble-burning-persists-as-farmers-cite-costs-lack-of-alternatives-bioenergy-potential-remains-untapped.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 10 Mar 2025 09:34:17 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/stubble-burning-persists-as-farmers-cite-costs-lack-of-alternatives-bioenergy-potential-remains-untapped.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रदूषण और पर्यावरण के खतरों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बावजूद अनेक भारतीय किसान आर्थिक और अन्य बाधाओं के कारण पराली जलाने को मजबूर हैं। हाल ही में भारतीय ग्रीन एनर्जी फेडरेशन (IFGE) द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ। सर्वेक्षण में छोटी जोत वाले खेत, महंगे कृषि यंत्र और सस्ते विकल्पों की अनुपलब्धता पराली जलाए जाने के प्रमुख कारणों के रूप में सामने आए।</p>
<p>हालांकि किसान पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को स्वीकार करते हैं, इसके बावजूद उनका कहना है कि उनके पास कोई किफायती विकल्प नहीं है। फसल की कटाई और अगली बुवाई के बीच का समय बहुत कम होने के कारण किसान पराली जलाने के लिए मजबूर होते हैं, क्योंकि मैन्युअल सफाई या अन्य तरीके बहुत महंगे या अनुपलब्ध हैं।</p>
<p>कुछ किसानों ने कहा कि पिछले एक दशक से पराली जलाना आम प्रथा बन गई है, क्योंकि अगली फसल की बुवाई के लिए समय बहुत कम मिलता है। अन्य किसानों ने बताया कि फसल कटाई के बाद बायोमास एकत्र करना महंगा है। ईंट भट्टों को छोड़कर अन्य खरीदारों की संख्या बहुत कम है।</p>
<p>सर्वेक्षण में बायोएनर्जी को आय के स्रोत के रूप में अपनाने को लेकर मिले-जुले विचार सामने आए। कुछ किसानों को फसल अवशेष बेचने में संभावनाएं नजर आईं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि बायोमास की खरीद प्रक्रिया असंगठित और श्रम-प्रधान है। साथ ही, बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव के कारण यह आर्थिक रूप से व्यवहार्य भी नहीं होता है।</p>
<p>कुछ किसानों ने बायोगैस संयंत्र या बायोमास गैसीफायर जैसी बायोएनर्जी तकनीक को अपनाने में रुचि दिखाई, लेकिन उन्होंने बताया कि उन्हें स्थापित करने की लागत अधिक है और सरकारी समर्थन की कमी के कारण यह व्यावहारिक नहीं है। अन्य किसानों को बायोएनर्जी के लाभों की जानकारी ही नहीं थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र में बेहतर जागरूकता अभियानों की आवश्यकता है। हालांकि कुछ किसानों का मानना है कि सरकार बायोएनर्जी को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही है, लेकिन अधिकांश उत्तरदाताओं ने स्वीकार किया कि वे मौजूदा सरकारी योजनाओं या सब्सिडी के बारे में अनजान हैं।</p>
<p>सर्वेक्षण में किसानों की एक प्रमुख मांग यह सामने आई कि सरकार दीर्घकालिक मूल्य समझौते और खरीदारों के साथ साझेदारी सुनिश्चित करे। क्योंकि मूल्य निर्धारण अनिश्चित होने के कारण किसान बायोएनर्जी की ओर रुख करने से हिचकिचाते हैं। कुछ किसानों ने मशीनरी पर सब्सिडी और सरकारी समर्थन प्राप्त खरीद केंद्रों की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि बायोमास आपूर्ति को व्यावहारिक बनाया जा सके।</p>
<p>एक किसान ने सुझाव दिया कि यदि प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाए, तो अधिक किसान पराली जलाने के बजाय अन्य विकल्प अपनाएंगे। एक अन्य किसान ने बताया कि बायो-कंपोस्टिंग को बढ़ावा देना पराली जलाने के बजाय एक बेहतर पारंपरिक कृषि समाधान हो सकता है।</p>
<p>सर्वेक्षण के परिणामों से पता चलता है कि बायोएनर्जी के बारे में जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन आर्थिक बाधा तथा सस्ते विकल्प न होना इसे व्यापक रूप से अपनाने में रोड़ा बनी हुई हैं। किसान फसल अवशेष जलाने के बजाय बेचने के लिए तैयार हैं, बशर्ते उन्हें निश्चित लाभ, बेहतर बुनियादी ढांचा और सरकारी प्रोत्साहन मिले।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67ce6c55f381c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ विकल्प महंगे होने के कारण बंद नहीं हुआ पराली जलाना, बायोएनर्जी में संभावनाएं: आईएफजीई सर्वे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67ce6c55f381c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमेरिका का भारत पर कृषि क्षेत्र खोलने का दबाव, भारत का ड्राई फ्रूट पर शुल्क घटाने का विचार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/us-pressures-india-to-open-agriculture-sector-as-trade-talks-advance.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 10 Mar 2025 07:01:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/us-pressures-india-to-open-agriculture-sector-as-trade-talks-advance.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के तहत अमेरिका भारत पर कृषि क्षेत्र को अधिक आयात के लिए खोलने का दबाव बनाने लगा है। अमेरिका के वाणिज्य मंत्री <span>हावर्ड लटनिक</span>&nbsp;ने भारत से अपने कृषि क्षेत्र को खोलने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यह बंद नहीं रह सकता। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब वाशिंगटन अमेरिकी मेवे, फल और पोल्ट्री के लिए भारतीय बाजार में अधिक पहुंच की मांग कर रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ताएं भी जारी हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><span>हावर्ड लटनिक&nbsp;</span>ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में कहा, भारतीय कृषि बाजार को खुलना होगा। आप इसे कैसे करते हैं और किस पैमाने पर करते हैं, हो सकता है कोटा के माध्यम से, हो सकता है सीमाएं तय करके&hellip;। आप इसे अधिक स्मार्ट तरीके से कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>द्विपक्षीय व्यापार समझौते की वकालत करते हुए<span>&nbsp;लटनिक </span>ने इस बात पर जोर दिया कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी उपभोक्ता अर्थव्यवस्था (अमेरिका) के साथ गठबंधन करके बड़े लाभ प्राप्त कर सकता है। उन्होंने एक "भव्य सौदे" का प्रस्ताव दिया, जिसके तहत भारत अमेरिका से आयात पर शुल्क कम करेगा और बदले में अमेरिका के साथ गहरा आर्थिक सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क कम करे, और अमेरिका भारत को एक असाधारण अवसर प्रदान करेगा।</p>
<p>गौरतलब है कि अमेरिका 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। इसे देखते हुए भारत कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर शुल्क में कटौती करने पर विचार कर रहा है ताकि तनाव कम किया जा सके और व्यापार वार्ता को सुगम बनाया जा सके। खबरों के मुताबिक अमेरिका से अखरोट, बादाम, सेब और क्रैनबेरी पर आयात शुल्क कम या समाप्त करने के लिए वार्ताएं चल रही हैं।&nbsp;</p>
<p>फिलहाल भारत बादाम पर 42-120%, सेब पर 50% और अखरोट पर 100-120% के बीच टैरिफ लगाता है। भारत अमेरिकी चेरी और क्रैनबेरी पर भी शुल्क में कटौती करने पर विचार कर रहा है, जिन पर वर्तमान में 30% आयात शुल्क है। भारत ने वित्त वर्ष 2025 के अप्रैल-नवंबर में अमेरिका से 61.45 करोड़ डॉलर के बादाम, 2.25 करोड़ के सेब और 66.8 लाख डॉलर के क्रैनबेरी का आयात किया।&nbsp;</p>
<p><span>लटनिक</span>&nbsp;ने ब्रिक्स गठबंधन में भारत की भूमिका पर भी चर्चा की, जिसमें ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। उन्होंने बीजिंग द्वारा प्रस्तावित एक साझा ब्रिक्स मुद्रा की ओर इशारा किया, जिसे ट्रंप अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को कमजोर करने के प्रयास के रूप में देखते हैं।<span>&nbsp;लटनिक</span>&nbsp;ने कहा, "ये चीजें भारत के प्रति हमारे संबंधों को कमजोर करती हैं। हम चाहते हैं कि ये चीजें समाप्त हों व्यापार अधिक निष्पक्ष हो। हम भारत के साथ अविश्वसनीय और मजबूत संबंध बनाना चाहते हैं।"&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमेरिका का भारत पर कृषि क्षेत्र खोलने का दबाव, भारत का ड्राई फ्रूट पर शुल्क घटाने का विचार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महिला दिवस विशेषः दो साल में आर्य.एजी में महिला नेतृत्व वाले एफपीओ की संख्या 128% बढ़ी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/womens-day-special-women-led-fpos-expand-by-128-percent-at-arya.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 08 Mar 2025 13:24:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/womens-day-special-women-led-fpos-expand-by-128-percent-at-arya.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाएं एक परिवर्तन की अगुआई कर रही हैं। पिछले दो वर्षों में आर्य.एजी (Arya.ag) में महिला-नेतृत्व वाले किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की संख्या 128% बढ़ी है। आज 50,000 से अधिक महिलाएं इन एफपीओ में सीधे तौर पर जुड़ी हैं, जो सामूहिक प्रयासों के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं। उनका यह प्रयास आर्थिक आजादी, बाजार तक पहुंच और कृषि व्यवसाय में नेतृत्व के लिए नए अवसर उत्पन्न कर रहा है।</p>
<p>इन एफपीओ में महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है। इन संगठनों में नौ में से दस शेयरधारक महिलाएं हैं, जो समावेशी और समान व्यवसाय मॉडल की ओर एक बदलाव को दर्शाता है। इन एफपीओ में से लगभग 44% महाराष्ट्र में स्थित हैं। इसके बाद बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड हैं। कर्नाटक, असम, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी इनकी उपस्थिति बढ़ रही है।</p>
<p>इन एफपीओ के व्यापार मॉडल विकसित हो रहे हैं। 70% से अधिक महिला-नेतृत्व वाले एफपीओ परामर्श, बाजार सेवाओं और सलाहकार भूमिकाओं पर केंद्रित हैं, जबकि बाकी सीधे कृषि उत्पादन में हैं। यह विविधता दिखाती है कि महिलाएं कृषि के निर्णय लेने में खेती के अलावा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।</p>
<p>आर्य.एजी के सीईओ प्रसन्ना राव ने कहा, &ldquo;महिला किसान अब केवल कृषि में योगदानकर्ता नहीं हैं। वे वित्तीय निर्णय लेने वाली, व्यापार रणनीतिकार और आपूर्ति श्रृंखलाओं में प्रमुख खिलाड़ी बन चुकी हैं। वित्त, भंडारण और विश्वसनीय बाजार कनेक्शन तक पहुंच प्रदान करके, हम महिला-नेतृत्व वाले कृषि व्यवसायों के उदय का समर्थन कर रहे हैं।&rdquo;</p>
<p>इसका प्रभाव केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है। इन महिला-नेतृत्व वाले एफपीओ ने मूल्य निर्धारण में सुधार और फसल हानि को कम करके छोटे किसानों की आय बढ़ाने में मदद की है। बिहार के देहायत एफपीओ की रेशमा कुमारी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, "हमारा एफपीओ निष्क्रिय हो गया था, लेकिन आर्य.एजी &nbsp;के समर्थन से हम एक आत्मनिर्भर मॉडल में परिवर्तित हो गए हैं। किसानों की आय चार गुना बढ़ गई है, और अब हमारी पहुंच बेहतर बाजारों तक है।"</p>
<p>महिलाओं का योगदान कृषि तक सीमित नहीं है। वे एग्रीटेक, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और ग्रामीण उद्यमिता में भी नेतृत्व कर रही हैं। महिलाएं पेशेवर कृषि नवाचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। डिजिटल वित्तीय समाधान विकसित करने से लेकर बड़े पैमाने पर कृषि व्यवसाय संचालन तक उनकी भूमिका है। मानव संसाधन, प्रौद्योगिकी और नीति-निर्माण में उनकी विशेषज्ञता एक अधिक समावेशी और मजबूत कृषि क्षेत्र को आकार दे रही है।</p>
<p>नवी उमेद एफपीसी लिमिटेड की चेयरपर्सन सुनीता वाघमरे ने बताया कि उनकी किसान उत्पादक कंपनी की यात्रा 3,500 महिलाओं के साथ शुरू हुई थी और अब इसका टर्नओवर 6.5 करोड़ रुपये है। वह बताती हैं कि कैसे उन्होंने हल्दी और सोयाबीन के व्यापार से शुरुआत की, जबकि उनके पास बाजार में अनुभव बहुत कम था।&nbsp;</p>
<p>अपने कृषि उद्यमों पर अधिक नियंत्रण प्राप्त करके, महिलाएं मूल्य निर्धारण में सुधार कर रही हैं, जोखिमों को कम कर रही हैं और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत कर रही हैं। इस महिला दिवस पर महिला-नेतृत्व वाले एफपीओ की तेज वृद्धि भारतीय कृषि में एक मौलिक बदलाव को रेखांकित करती है। जैसे-जैसे अधिक महिलाएं नेतृत्व की भूमिकाओं में कदम रख रही हैं, वे ग्रामीण आर्थिक विकास को फिर से परिभाषित कर रही हैं और कृषि व्यवसाय के भविष्य को आकार दे रही हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महिला दिवस विशेषः दो साल में आर्य.एजी में महिला नेतृत्व वाले एफपीओ की संख्या 128% बढ़ी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महिला दिवस विशेषः नवाचार से खेती में बदलाव लाने वाली चार महिलाओं की कहानी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/womens-day-special-story-of-four-women-who-brought-changes-by-innovation-in-agriculture.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 08 Mar 2025 12:56:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/womens-day-special-story-of-four-women-who-brought-changes-by-innovation-in-agriculture.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सामाजिक बदलाव लाने और सफलता की कहानियां लिखने में ग्रामीण महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। महिला दिवस विशेष पर यहां बात कुछ ऐसी ग्रामीण महिलाओं की जो अपने बलबूते बदलाव लाने में कामयाब रही हैं। मध्य प्रदेश के बालाघाट की त्रिवेणी खैरवार ने इनोवेशन से बंजर जमीन को खेती के लायक जमीन में बदल दिया तो पश्चिम बंगाल की गीता ने जैविक खेती से कमाई बढ़ाई। झारखंड की निर्मला बागवानी में नाम कर रही हैं तो ओडिशा की रामा ने आलू की खेती में नाम कमाया है। इन महिलाओं की तरक्की में प्रदान (प्रोफेशनल असिस्टेंस फॉर डेवलपमेंट एक्शन) का बड़ा योगदान रहा है।</p>
<p><strong>मध्य प्रदेश की त्रिवेणी खेती में लेकर आईं नवाचार</strong><br />त्रिवेणी खैरवार, 30 वर्षीय किसान, जो बालाघाट के मौरिया गाँव से हैं, परिवर्तन की एक मिसाल हैं। महिला आर्थिक सशक्तीकरण (WEE) प्रोजेक्ट और उनकी स्वयं सहायता समूह (SHG) के समर्थन से उन्होंने 'खेती नेट हाउस मॉडल' अपनाया, जो एक सस्ते कृषि नवाचार के रूप में फसलों की रक्षा करता है और उपज बढ़ाता है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67cbf07d4f94e.jpg" alt="" /></p>
<p>जैविक इनपुट्स, ड्रिप सिंचाई और कंपोस्टिंग जैसे पुनर्योजी कृषि विधियों को अपनाकर, त्रिवेणी ने 6 डिसमल बंजर ज़मीन को एक फलती-फूलती खेती में बदल दिया, जहां उन्होंने 5 क्विंटल बैगन और 60 किलो मिर्च की उपज ली। उनकी आय में 23% की वृद्धि हुई, जो 86,000 रुपये से 1,06,100 रुपये तक पहुंच गई, और उनकी सफलता ने उनकी समुदाय में कई अन्य लोगों को भी प्रेरित किया। त्रिवेणी की यात्रा यह दर्शाती है कि जब महिलाओं को सशक्त किया जाता है, तो वे ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं में कृषि नवाचार और लचीलापन ला सकती हैं।</p>
<p><strong>पश्चिम बंगाल में एफपीसी के माध्यम से गीता का परिवर्तन</strong><br />झारग्राम जिले के गांवों में गीता का जीवन उस समय बदल गया जब उन्होंने आमोन महिला किसान उत्पादक कंपनी (FPC) का समर्थन प्राप्त किया। जैविक खेती करने वाली गीता ने देखा कि उनके खेतों में मिट्टी की सेहत में सुधार हुआ, और वहां कीटनाशकों के स्थान पर स्थानीय जीव-जंतु और धरती के कीड़े वापस लौट आए। FPC और PRADAN के समर्थन से गीता ने जैविक करेले की खेती की और 0.1 एकड़ ज़मीन से 26,000 रुपये कमाए, जबकि 31,000 रुपये उन्होंने स्वदेशी चावल बेचकर कमाए।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67cbf0e05a38f.jpg" alt="" /></p>
<p>FPC ने 5,550 महिला किसानों को सशक्त किया, जिन्होंने जैविक खेती की ओर रुख किया और उच्च मूल्य वाली फसलों जैसे स्वदेशी काले चावल उगाकर अपनी आय बढ़ाई। महिलाओं द्वारा संचालित चावल और हल्दी प्रसंस्करण इकाइयों ने उनकी कमाई को और विविधतापूर्ण किया (गीता इनमें से एक हैं), यह दर्शाता है कि सहकारी कृषि मॉडल महिलाओं के लिए ग्रामीण इलाकों में दीर्घकालिक, स्थायी आय के अवसर पैदा कर सकता है।</p>
<p><strong>झारखंड के तोरपा में निर्मला की सफलता की कहानी</strong><br />दोरमा गाँव, तोरपा ब्लॉक की निर्मला बेंगरा ने तब एक परिवर्तनकारी कदम उठाया जब वह एक किसान उत्पादक कंपनी (FPC) से जुड़ीं। उत्पादन तकनीकों और गुणवत्तापूर्ण इनपुट्स में सहायता के साथ, निर्मला ने विभिन्न फसलों की खेती शुरू की। पिछले वर्ष, उन्होंने 1 एकड़ ज़मीन से 9 टन तरबूज की फसल ली और 50,000 रुपये कमाए। इसके अलावा, उन्होंने 1 एकड़ ज़मीन पर एक फलते-फूलते आम के बग़ीचे की शुरुआत की। निर्मला की सफलता की कहानी समुदाय समर्थन, सतत कृषि और नई तकनीकों को अपनाने की ताकत का प्रतीक है, जो उत्पादकता और आय में सुधार करती है।</p>
<p><strong>ओडिशा की रामा ने आलू की खेती में कमाया नाम</strong><br />कोरापुट जिले के नीलोडोरापुट गाँव में रामा गुंथा को एक चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ा, जहाँ किसान खुले बाजार से अपने उत्पादों के लिए समय पर भुगतान प्राप्त नहीं कर पाते थे। यह सब तब बदल गया जब रामा और अन्य किसानों ने कोरापुट नारी शक्ति किसान उत्पादक कंपनी (FPC) से जुड़कर उच्च गुणवत्ता वाले इनपुट्स और समय पर नकद भुगतान प्राप्त किया। 2023 में, उन्होंने 3 एकड़ ज़मीन से 60 क्विंटल आलू की फसल ली और 30 क्विंटल से 45,000 रुपये कमाए, जबकि बाकी का हिस्सा एक सामाजिक समारोह में श्रद्धालुओं को खिलाने के लिए दान कर दिया। आलू में उनकी विशेषज्ञता को पहचान मिली और अब वह क्षेत्र के अन्य किसानों को प्रशिक्षण देती हैं। उनके प्रयासों से 10,000 एकड़ आलू की खेती योजना शुरू हुई है, और बागवानी विभाग ने किसानों को सब्सिडी पर आलू के बीज दिए हैं। PRADAN और FPC की मदद से अब विक्रेता नियमित रूप से भुगतान करते हैं, जो गाँव में व्यापार के तरीके में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महिला दिवस विशेषः नवाचार से खेती में बदलाव लाने वाली चार महिलाओं की कहानी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छोटी कंपनियों के कीटनाशकों के नकली होने का अनुपात अधिक, जैविक कीटनाशकों में मिले केमिकल के अंश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/proportion-of-spurious-pesticides-is-higher-among-small-companies-traces-of-chemicals-have-also-been-found-in-some-organic-pesticides.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 06 Mar 2025 10:09:44 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/proportion-of-spurious-pesticides-is-higher-among-small-companies-traces-of-chemicals-have-also-been-found-in-some-organic-pesticides.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में नकली कीटनाशकों की बिक्री किसानों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। सरकार समय-समय पर विभिन्न कंपनियों के कीटनाशकों के सैंपल की जांच तो करती है, लेकिन छोटी कंपनियों का सैंपलिंग अनुपात कम होता है। जबकि जांच में ज्यादातर छोटी कंपनियों के सैंपल ही नकली पाए जाते हैं। इसके अलावा, जांच में कई राज्यों में जैविक कीटनाशक के नाम पर बेचे जाने वाले प्रोडक्ट में रासायनिक कीटनाशकों के अंश भी मिले हैं।&nbsp;</p>
<p>सैंपल जांच के नतीजों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि बड़ी कंपनियों के औसतन 90 फीसदी से अधिक सैंपल सही पाए गए हैं, जबकि छोटी कंपनियों के 20 फीसदी से अधिक सैंपल जांच में फेल हो जाते हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में बड़ी कंपनियों के 7,369 सैंपल की जांच की गई जिनमें से 7,024 सही पाए गए और 293 फेल हो गए। दूसरी तरफ 159 छोटी कंपनियों के एक-एक सैंपल की ही जांच की गई और इनमें से 124 सैंपल सही निकले जबकि 38, यानी करीब 24% फेल हो गए। जानकारों का कहना है कि नकली कीटनाशकों पर लगाम लगाने के लिए छोटी कंपनियों के प्रोडक्ट की बड़े पैमाने पर जांच होनी चाहिए। ये आंकड़े सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत राज्यों की तरफ से उपलब्ध कराई गई जानकारी से मिले हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेशः छोटी कंपनियों के 22% सैंपल नकली</strong><br />कुल मात्रा के लिहाज से देश में कीटनाशकों की सबसे ज्यादा खपत उत्तर प्रदेश में होती है। आरटीआई में दी जानकारी के अनुसार राज्य में 2020-21 से 2022-23 के दौरान 634 कंपनियां ऑपरेट कर रही थीं। इनमें से 11 बड़ी कंपनियों के 500 से ज्यादा सैंपल जांच की खातिर लिए गए, जबकि 159 छोटी कंपनियों के सिर्फ एक-एक सैंपल लिए गए। कुल 21,235 सैंपल में से 11 बड़ी कंपनियों के 7,369 सैंपल की जांच की गई जिनमें से 7,024 सही पाए गए और 293 फेल हो गए। उनके बाद की श्रेणी की 32 कंपनियों के 7,633 सैंपल की जांच की गई जिनमें से 7,033 पास और 381 फेल हुए। इस श्रेणी की कंपनियों के 100 से 500 सैंपल की जांच की गई। 31 कंपनियां ऐसी थीं जिनके 51 से 100 सैंपल लिए गए। उनके कुल 2,115 सैंपल की जांच हुई जिनमें से 1,990 सही पाए गए। सिर्फ एक सैंपल वाली 159 कंपनियों के 124 सैंपल ही सही निकले जबकि 38 सैंपल, यानी 78% फेल हो गए। यहां गौर करने वाली एक और बात यह है कि 71% सैंपल पहली दो कैटेगरी की कंपनियों के थे। जिन कंपनियों के सिर्फ एक सैंपल की जांच की गई, कुल सैंपल में उनका अनुपात सिर्फ एक प्रतिशत था।&nbsp;</p>
<p>राज्य में कीटनाशक बेचने वाली प्रमुख कंपनियों में इंसेक्टिसाइड इंडिया लिमिटेड, धानुका एग्रीटेक लिमिटेड, ट्रॉपिकल एग्रो सिस्टम्स इंडिया प्रा.लि, सुमितोमो केमिकल्स इंडिया लिमिटेड, बायर क्रॉप साइंस लिमिटेड, यूपीएल लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन सबके 500 से ज्यादा सैंपल लिए गए थे।</p>
<p><strong>राजस्थानः छोटी कंपनियों के 13% सैंपल जांच में फेल&nbsp;</strong><br />राजस्थान ने कंपनियों को ए, बी, सी आदि कैटेगरी में रखा है। अच्छी क्वालिटी के ट्रैक रिकॉर्ड वाली कंपनियों को ए कैटेगरी और संतोषजनक ट्रैक रिकॉर्ड वाली कंपनियों को बी कैटेगरी में रखा गया है। जिन कंपनियों को आगे सुधार की जरूरत है उन्हें सी कैटेगरी में, नई कंपनियों को एन कैटेगरी में और इनमें से किसी श्रेणी में नहीं आने वाली कंपनियों को नॉन डिस्क्रिप्टिव यानी एनडी कैटेगरी में रखा गया है।</p>
<p>राज्य में वर्ष 2019-20 से 2023-24 तक 390 कंपनियों के सैंपल की जांच की गई। इनमें ए कैटेगरी की 33, बी कैटेगरी की 43, सी कैटेगरी की 197 और एनडी कैटेगरी की 80 कंपनियां हैं। यहां भी सबसे ज्यादा ए कैटेगरी की कंपनियों के 8,044 सैंपल जांच की खातिर लिए गए। बी कैटेगरी की कंपनियों के 2,525, सी कैटेगरी की कंपनियों के 1,315 और एनडी कैटेगरी की कंपनियों के 1114 सैंपल का विश्लेषण किया गया। एन कैटेगरी की 37 कंपनियों के सैंपल नहीं लिए गए।</p>
<p>ए, बी, और सी कैटेगरी की कंपनियों के 99% सैंपल जांच में सही पाए गए जबकि एनडी कैटेगरी के 87% सैंपल ही सही निकले। दूसरे शब्दों में कहें तो पहली तीन कैटेगरी के सिर्फ एक प्रतिशत सैंपल जांच में फेल हुए जबकि एनडी कैटेगरी के 13% सैंपल पास नहीं हो सके।</p>
<p>राज्य में कीटनाशक बेचने वाली ए कैटेगरी कंपनियों में एडवांस एग्रो लाइफ प्राइवेट लिमिटेड, एग्रोकिंग पेस्टिसाइड्स प्राइवेट लिमिटेड, एशियन एग्रो इंडस्ट्रीज, बायर क्रॉप साइंस लिमिटेड, क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड, धानुका एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड, इफको क्रॉप साइंस प्राइवेट लिमिटेड, रैलिस इंडिया लिमिटेड, सरस्वती एग्रो केमिकल जैसी कंपनियां शामिल हैं।</p>
<p><strong>तेलंगानाः बड़ी कंपनियों के 99%, छोटी कंपनियों के 85% सैंपल सही</strong><br />तेलंगाना में 2017-18 से 2021-22 के दौरान कीटनाशक बेचने वाली कंपनियों को 6 कैटेगरी में रखा गया। ए कैटेगरी में 8, बी में 29, सी में 17, डी में 59, ई में 79 और एफ कैटेगरी में 48 कंपनियां थीं। एफ कैटेगरी की कंपनियों के एक-एक सैंपल ही जांच की खातिर लिए गए, जबकि ए कैटेगरी की कंपनियों में हर एक के 500 से ज्यादा सैंपल की जांच हुई। राज्य में लिए गए कुल 19,280 सैंपल में से 9,430 ए कैटेगरी और 6,572 बी कैटेगरी की कंपनियों के थे। इन दोनों कैटेगरी की कंपनियों के 99% से ज्यादा सैंपल सही पाए गए। सी कैटेगरी की कंपनियों के भी लगभग 99% सैंपल सही निकले। डी कैटेगरी की कंपनियों के 97%, ई कैटेगरी की कंपनियों के 87.39% और एफ कैटेगरी की कंपनियों के 85.42% सैंपल सही पाए गए। कुल सैंपल में पहली दो कैटेगरी की कंपनियों का हिस्सा 83% था।</p>
<p><strong>ओडिशाः ए कैटेगरी की कंपनियों के 70.59% सैंपल सही&nbsp;</strong><br />ओडिशा में 2017-18 से 2022-23 के दौरान कैटेगरी ए और बी की 3-3, कैटेगरी सी की दो और कैटेगरी डी की 128 कंपनियां ऑपरेट कर रही थीं। लेकिन आश्चर्यजनक बात यह है कि कैटेगरी डी की किसी भी कंपनी का सैंपल जांच के लिए नहीं लिया गया। कैटेगरी सी की दोनों कंपनियों के एक-एक सैंपल की जांच की गई। राज्य में कुल 136 कंपनियों के सिर्फ 43 सैंपल की जांच की गई, जिनमें से 34 सैंपल ए कैटेगरी की कंपनियों के थे। ए कैटेगरी की कंपनियों के 70.59% सैंपल ही सही पाए गए। बी कैटेगरी की कंपनियों के भी सात में से पांच सैंपल सही निकले। सी कैटेगरी की कंपनियों के दोनों सैंपल सही पाए गए।</p>
<p><strong>तमिलनाडुः जांच के लिए 71% से ज्यादा सैंपल बड़ी कंपनियों के</strong><br />तमिलनाडु में 2017-18 से 2021-22 के दौरान 93 कंपनियां कीटनाशक बनाकर बेच रही थीं। इनमें से कैटेगरी ए में सिर्फ एक कंपनी जय कृष्णा पेस्टिसाइड्स लिमिटेड है। उसके अलावा बी कैटेगरी में 11, सी कैटेगरी में 6, डी कैटेगरी में 22, ई कैटेगरी में 38 और एफ कैटेगरी में 15 कंपनियां हैं। जय कृष्णा पेस्टिसाइड्स के 558 सैंपल लिए गए और उनमें से 544 की जांच की गई। उनमें से 535 सैंपल सही पाए गए। कुल 4088 सैंपल में से बी कैटेगरी की कंपनियों के 2362, सी कैटेगरी के 450, डी कैटेगरी के 530, ई कैटेगरी के 173 और एफ कैटेगरी की कंपनियों के 15 सैंपल थे। कुल सैंपल में 71% से ज्यादा कैटेगरी ए और कैटेगरी बी कंपनियों के थे।</p>
<p><strong>कर्नाटकः 250 बायो कीटनाशक सैंपल में रसायन की मौजूदगी</strong><br />आरटीआई के अनुसार, कर्नाटक में बायो कीटनाशक होने का दावा करने वाले 250 सैंपल का विश्लेषण किया गया। लेकिन प्रत्येक में रासायनिक कीटनाशक की मौजूदगी पाई गई। तथाकथित बायो प्रोडक्ट में इमामेक्टिन और अबामेक्टिन जैसे केमिकल पाए गए जिनका चीन से अवैध रूप से आयात होता है। आश्चर्यजनक बात यह है कि करीब 30 सैंपल में निटेनपाइरैम कीटनाशक पाया गया जो भारत में रजिस्टर्ड तक नहीं है।</p>
<p>डीएओ बेंगलुरु ने 17 फरवरी 2020 को सभी ज्वाइंट डायरेक्टर को पत्र लिखा। इसके साथ 100 सैंपल की जांच के नतीजे भी थे। डीएओ ने ज्वाइंट डायरेक्टरों को उन कीटनाशक निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा क्योंकि उन्होंने न सिर्फ किसानों के साथ धोखा किया, बल्कि किसानों और आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ भी किया। इससे सरकार को जीएसटी तथा अन्य टैक्स का नुकसान भी हुआ। कृषि सचिव ने 5 मई 2020 को सभी ज्वाइंट डायरेक्टरों को पत्र लिखा और निर्देश दिया कि जिन इंस्पेक्टरों ने निर्देश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की, उनके खिलाफ कदम उठाए जाएं। तब जाकर इंस्पेक्टरों ने कार्रवाई शुरू की।</p>
<p>कर्नाटक सरकार को बायो के नाम पर रासायनिक कीटनाशक बेचने वाली दोषी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी थी, लेकिन राज्य सरकार ने उनके खिलाफ कीटनाशक कानून 1968 के तहत मामला दर्ज किया जिसमें किसी सख्त सजा का प्रावधान नहीं है। यही नहीं, तथाकथित बायो कीटनाशक प्रयोग करने वाले किसानों को निर्यात में रिजेक्शन का सामना करना पड़ता है।</p>
<p>कीटनाशकों के अवैध आयात के दो तरीके हैं। एक है गलत प्रोडक्ट बताना (मिस-डिक्लेरेशन), जिसमें 100-200 डॉलर प्रति किलो वाले कीटनाशक की जगह 0.5 डॉलर प्रति किलो वाला अमीनो एसिड बताया जाता है। महंगे कीटनाशकों को सोडियम बाइकार्बोनेट, थायोनिल क्लोराइड आदि बताकर भी आयात होता है। दूसरा तरीका फर्जी निर्यात और आयात का है। इसमें कम कीमत वाला कोई प्रोडक्ट निर्यात किया जाता है। फिर उसे &lsquo;रिजेक्ट हो गया&rsquo; बताकर उसका आयात किया जाता है, जबकि वास्तव में वह आयात महंगे कीटनाशकों का होता है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ छोटी कंपनियों के कीटनाशकों के नकली होने का अनुपात अधिक, जैविक कीटनाशकों में मिले केमिकल के अंश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जन औषधि की तर्ज पर पशु औषधि योजना शुरू होगी, मिली कैबिनेट की मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pashu-aushadhi-scheme-will-be-started-like-jan-aushadhi-cabinet-approval.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 05 Mar 2025 21:37:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pashu-aushadhi-scheme-will-be-started-like-jan-aushadhi-cabinet-approval.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने <strong>पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी)</strong> में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसके तहत जन औषधि की तर्ज पर <strong>पशु औषधि</strong> योजना शुरू की जाएगी। इसके लिए 75 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान किया गया है।</p>
<p>कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री <strong>अश्विनी वैष्णव</strong> ने बताया कि पशु औषधि जन औषधि योजना के समान होगी। इसके तहत अच्छी गुणवत्ता की जेनेरिक पशु चिकित्सा दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। वैष्णव ने कहा कि पशुओं की देखभाल के पारंपरिक ज्ञान पर भी ध्यान दिया जाएगा।</p>
<p>पशुओं को चार प्रमुख बीमारियों से बचाने के लिए किसानों को घर-घर जाकर सहायता दी जाएगी। इसके लिए मोबाइल वेटनरी वैन की सुविधा को बढ़ाया जाएगा। खासतौर पर खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) और ब्रुसेलोसिस की रोकथाम के लिए टीकाकरण केंद्रित अभियान चलाए जाएंगे।</p>
<p>अश्विनी वैष्णव ने कहा कि टीकाकरण अभियान से पशुधन स्वास्थ्य में सुधार आया है। देश के 9 राज्य <strong>एफएमडी मुक्त क्षेत्र</strong> घोषित होने के लिए तैयार हैं। इनमें पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और महाराष्ट्र राज्य शामिल हैं।</p>
<p><strong>क्या है योजना </strong></p>
<p>कैबिनेट ने दो वर्षों (2024-25 और 2025-26) के लिए 3,880 करोड़ रुपये के पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी) को मंजूरी दी है। पशु औषधि इस योजना में जोड़ा गया नया घटक है। पशु औषधि योजना के तहत अच्छी गुणवतता की सस्ती जेनेरिक पशु चिकित्सा दवाओं की बिक्री को बढ़ावा दिया जाएगा। <span>पशु औषधि को पीएम किसान समृद्धि केंद्र और सहकारी समितियों के माध्यम से पशुपालकों तक पहुंचाया जाएगा।</span></p>
<p><strong>पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी)</strong> के तीन घटक हैं - राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनएडीसीपी), पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण (एलएच एंड डीसी) और पशु औषधि। पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम टीकाकरण के माध्यम से खुरपका और मुंहपका रोग (एफएमडी), ब्रुसेलोसिस, पेस्ट डेस पेटिट्स रुमिनेंट्स (पीपीआर), सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (सीएसएफ), लम्पी स्किन डिजीज आदि जैसी बीमारियों की रोकथाम पर केंद्रित है। मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (ईएसवीएचडी-एमवीयू) के माध्यम से पशुओं के इलाज की डोर-स्टेप डिलीवरी को भी बढ़ावा दिया जाएगा।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जन औषधि की तर्ज पर पशु औषधि योजना शुरू होगी, मिली कैबिनेट की मंजूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अगर केंद्र नहीं तो राज्य सरकार दें एमएसपी की कानूनी गारंटी: MSP गारंटी मोर्चा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/if-not-the-centre-then-the-state-government-should-give-legal-guarantee-of-msp-msp-guarantee-morcha.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 04 Mar 2025 20:18:38 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/if-not-the-centre-then-the-state-government-should-give-legal-guarantee-of-msp-msp-guarantee-morcha.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एमएसपी गारंटी किसान मोर्चा ने अनाज, <span>फल-सब्जियों और दूध सहित सभी कृषि उत्पादों पर </span>MSP गारंटी की मांग उठाई है। साथ ही यह भी कहा कि अगर केंद्र सरकार इस मामले को लटकाना चाहती है कि तो राज्य सरकारों को अपनी तरफ से एमएसपी की कानूनी गारंटी देनी चाहिए। मंगलवार को एमएसपी गारंटी किसान मोर्चा के राज्यों कॉर्डिनेटरों नई दिल्ली में की बैठक हुई, जिसमें विभिन्न राज्यों से किसान नेता शामिल हुए।&nbsp;</p>
<p>एमएसपी गारंटी किसान मोर्चा ने मांग की है कि अगर केंद्र सरकार एमएसपी के मुद्दे को लटकाना चाहती है तो राज्य सरकारों को एमएसपी गारंटी देने का अधिकार दे। क्योंकि कुछ राज्य सरकारों द्वारा एमएसपी पर दाना-दाना खरीदने का प्रचार किया जा रहा है, ऐसे में अगर विपक्ष की राज्य सरकारें एमएसपी की गारंटी देती हैं तो अन्य सरकारें भी यह मांग पूरी करने को मजबूर होंगी। मोर्चा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एमएसपी को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है कि इस पर बहुत खर्च आएगा,<span>&nbsp;यह सरासर गलत है।</span></p>
<p>मीडिया से बात करते हुए राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक <strong>सरदार </strong><strong>वीएम सिंह</strong> ने कहा कि MSP के मुद्दे को लेकर पूरनपुर, पीलीभीत (उत्तर प्रदेश) से 20 अक्टूबर 2000 को आंदोलन शुरू हुआ था। तब से एमएसपी के मुद्दे पर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी गई। इसी का नतीजा था कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार पूरे यूपी में धान खरीद की मॉनिटरिंग शुरू हुई। कोर्ट के माध्यम से खरीद के मापदंड बनाए गए। लेकिन कोरोना में उनके बीमार पड़ने के कारण कोर्ट में मजबूती से पैरवी नहीं हो पायी।</p>
<p>वीएम सिंह ने बताया कि किसान आंदोलन के ऐलान के बाद 30 सितंबर, 2020 को सरकार के बुलावे पर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के 5 सदस्य प्रतिनिधिमंडल ने तत्कालीन कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर तथा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से वार्ता की थी। इस बैठक में उन्होंने राजू शेट्टी द्वारा संसद में पेश किए प्राइवेट मेंबर बिल की कॉपी मंत्रियों को देते हुए इसे या इसमें संशोधन कर लागू करने की मांग की थी। क्योंकि इससे तीनों कृषि कानून निष्प्रभावी हो जाते। लेकिन तब उनकी इसी बात के लिए आलोचना हुई कि वे एमएसपी की बात करते हैं, लेकिन आज हर किसान नेता एमएसपी की बात कर रहा है।</p>
<p>पंजाब में एमएसपी की कानूनी गारंटी को लेकर चल रहे आंदोलन के बारे में वीएम सिंह ने कहा कि जगजीत सिंह डल्लेवाल के अनशन के बाद 12 जनवरी को चंडीगढ़ में आंदोलनकारी किसान नेताओं की MSP गारंटी किसान मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात हुई थी। हमने उनसे कहा कि हमारे सभी किसान संगठन आपको बिना शर्त समर्थन को तैयार हैं, लेकिन मुद्दा सिर्फ एक हो - MSP गारंटी कानून!</p>
<p>एमएसपी गारंटी किसान मोर्चा ने मांग की है कि आंदोलकारी किसानों और केंद्र सरकार के बीच 19 मार्च की होने वाली मीटिंग कैमरे के सामने (In-Camera) कराई जाए।&nbsp;<span>ताकि देश के किसानों को सरकार की नीयत पर भरोसा हो सके। </span></p>
<p>स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता और पूर्व सांसद <strong>राजू शेट्टी </strong>ने कहा कि सरकार किसानों को MSP की गारंटी क्यों नहीं दे रही है,<span> जबकि यही सरकार उद्योगपतियों को गारंटी दे चुकी है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी का भाव </span>2400- 2500 रुपये प्रति कुंतल था,<span> तब उद्योगपतियों को न्यूनतम बिक्री मूल्य </span>(MSP) इसी सरकार ने दिया था।</p>
<p>बैठक में उत्तर प्रदेश से बलराज भाटी व रोहित जाखड़, केरल से पीवी राजगोपाल, <span>तमिलनाडु से श्री गुरुस्वामी</span>, बिहार से छोटेलाल श्रीवास्तव, उत्तराखंड से भोपाल चौधरी, हिमाचल प्रदेश से संजय सिंह, हरियाणा से जगबीर सिंह, पंजाब से जसकरण सिंह, मध्यप्रदेश से केदार सिरोही, शिलांग से कमांडर शांगपलियांग, जम्मू कश्मीर से यावर मीर, छत्तीसगढ़ से राजाराम त्रिपाठी आदि किसान नेता शामिल हुए। देश भर से कई नेता वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से प्रेस से जुड़े।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अगर केंद्र नहीं तो राज्य सरकार दें एमएसपी की कानूनी गारंटी: MSP गारंटी मोर्चा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी उत्पादन के अनुमानों पर संशय, दाम बढ़े तो आ सकती है आयात की नौबत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sugar-production-number-is-going-bad-to-worse-from-exporter-india-may-become-importer.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 04 Mar 2025 10:43:29 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sugar-production-number-is-going-bad-to-worse-from-exporter-india-may-become-importer.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चीनी उद्योग की जबरदस्त लॉबिंग के चलते केंद्र सरकार ने चालू सीजन (2024-25) में 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी। लेकिन जिस तरह से चीनी उत्पादन में गिरावट के आंकड़े आ रहे हैं, उसके चलते इस निर्णय पर सवाल उठ सकते हैं। निर्यात में तेजी और उत्पादन में गिरावट के चलते घरेलू बाजार में चीनी की एक्स फैक्टरी कीमतें 4100 रुपये प्रति क्विंटल को पार कर गई हैं। वहीं रिटेल कीमतें 45 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई&nbsp; हैं। ऐसे में अब लगातार चीनी उत्पादन और इसकी कीमतों की समीक्षा हो रही है। अगर उत्पादन में गिरावट बढ़ती है तो चीनी की कीमतों में तेजी आएगी। साथ ही सीजन के अंत में बकाया स्टॉक घटकर 50 लाख टन से नीचे रह सकता है उस स्थिति में देश में चीनी के आयात की स्थिति पैदा हो सकती है।&nbsp;</p>
<p>चीनी उत्पादन में कमी की मुख्य वजह उत्तर प्रदेश में रोगों के चलते गन्ना उत्पादन में गिरावट आना है। वहीं महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और अन्य राज्यों में गन्ने से चीनी की रिकवरी में भी एक फीसदी तक की गिरावट आई है। गन्ने की कमी के चलते देश की करीब एक तिहाई (186) चीनी मिलें&nbsp; फरवरी में ही बंद हो चुकी हैं।</p>
<p>उद्योग सूत्रों का कहना है कि चीनी उत्पादन के ताजा अनुमान चिंताजनक हैं और अब देश में चीनी उत्पादन 260 से 265 लाख टन के आसपास रहने की संभावना है जो पिछले साल के 319 लाख टन चीनी उत्पादन के मुकाबले 55 से 60 लाख टन कम रहेगा। देश की घरेलू चीनी खपत लगभग 285 लाख टन सालाना है। यानी उत्पादन खपत से करीब 25 लाख टन तक कम रह सकता है। पिछले सीजन के अंत में देश में चीनी का करीब 80 लाख टन का बकाया स्टॉक था। 10 लाख टन निर्यात होने और उत्पादन में गिरावट के चलते चालू चीनी सीजन के अंत में स्टॉक 50 लाख टन से नीचे आ सकता है।</p>
<p>उद्योग जगत के कुछ जानकर तो इस सीजन के आखिर में चीनी स्टॉक 40 लाख टन के आसपास रहने की आशंका जता रहे हैं। तय मानकों के मुताबिक तीन माह की खपत के बराबर स्टॉक होना चाहिए जो करीब 70 लाख टन बैठता है। उत्पादन में कमी का अहसास होने के चलते मार्च के लिए खुले बाजार में चीनी की कोटा भी पिछले साल से कम जारी किया गया है।</p>
<p>वहीं, चीनी की बेहतर कीमतों के चलते अधिकांश चीनी मिलों ने गन्ने के जूस से सीधे एथेनॉल उत्पादन को बंद कर दिया है। साथ ही बी-हैवी मोलेसेज से एथेनॉल उत्पादन को भी अधिकांश चीनी मिलों ने बहुत कम कर दिया है। इसके पीछे चीनी मिलें इन दोनों श्रेणियों के एथेनॉल की कीमतों को सरकार द्वारा नहीं बढ़ाने को वजह बता रही हैं।</p>
<p>इस साल दिवाली अक्टूबर में है और चीनी मिलों में नए सीजन का उत्पादन नवंबर में शुरू होता है। ऐसे में त्यौहारी सीजन में चीनी की आपूर्ति और खपत के बीच संतुलन बिगड़ सकता है। अगर कीमतें अधिक बढ़ती हैं तो त्यौहारी सीजन में चीनी के आयात की नौबत आ सकती है। यह स्थिति घरेलू उत्पादन में गिरावट के बावजूद निर्यात की अनुमति के फैसले पर सवाल खड़ा करेगी।</p>
<p>सूत्रों का कहना है कि चीनी निर्यात की अनुमति हासिल करने के लिए देश में चीनी उत्पादन के अनुमानों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है। उद्योग के साथ ही राजनीतिक दबाव का भी सहारा लिया गया। एक राजनीतिक दल के अध्यक्ष ने 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देने के लिए दो बार खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी को चिट्ठी लिखी। उद्योग लगातार 20 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति मांग रहा था हालांकि, सरकार ने 10 लाख टन निर्यात की ही अनुमति दी है।</p>
<p>चीनी उत्पादन में गिरावट और बढ़ती कीमतों के बावजूद इस साल प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार ने गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। इसे पिछले साल के स्तर पर रखने का फैसला भी फरवरी में लिया गया, जब पेराई सीजन का अधिकांश हिस्सा बीत गया था।</p>
<p>28 फरवरी को उत्तर प्रदेश में चीनी (एम ग्रेड) की एक्स फैक्टरी कीमत (जीएसटी समेत) 3960 रुपये से 4130 रुपये प्रति क्विंटल रही। वहीं महाराष्ट्र में एस ग्रेड की एक्स फैक्टरी कीमत 3770 रुपये से 3830 रुपये प्रति क्विंटल, कर्नाटक में एस ग्रेड की कीमत 3800 रुपये से 3830 रुपये प्रति क्विटंल, गुजरात में एम ग्रेड की कीमत 3920 रुपये से 3950 रुपये प्रति क्विंटल और तमिलनाडु में एस ग्रेड कीमत &nbsp;3980 से 4050 रुपये प्रति क्विंटल रही। उस दिन चीनी की खुदरा कीमत 45.10 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई। निर्यात के लिए लंदन (एफओबी) कीमत 540 डॉलर प्रति टन, यानी करीब 4365 रुपये प्रति क्विंटल रही। आने वाले दिनों में उत्पादन में गिरावट की तस्वीर साफ होने पर उसका असर कीमतों पर दिखेगा।&nbsp;</p>
<p>उत्पादन में कमी की आशंका के चलते ही सरकार ने चालू माह के लिए खुले बाजार के चीनी कोटे में कमी की है। इसे पिछले साल से कम जारी किया गया है। मौजूदा स्थिति सरकार के लिए तो चुनौतीपूर्ण है ही, चीनी उद्योग की जवाबदेही बढ़ा सकती है। कम उत्पादन और बढ़ती कीमतों के कारण अगर चीनी का आयात करना पड़ा तो वह भी महंगा पड़ेगा। क्योंकि वैश्विक बाजार में इस साल चीनी का उत्पादन मांग से करीब 50 लाख टन कम है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी उत्पादन के अनुमानों पर संशय, दाम बढ़े तो आ सकती है आयात की नौबत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि अनुसंधान का अहम पद अतिरिक्त प्रभार के भरोसे, IAS देवेश चतुर्वेदी को एडिशनल चार्ज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/ias-devesh-chaturvedi-given-additional-charge-of-post-of-secretary-of-department-of-agricultural-research.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 03 Mar 2025 20:56:29 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/ias-devesh-chaturvedi-given-additional-charge-of-post-of-secretary-of-department-of-agricultural-research.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत <strong>कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (DARE)</strong> के सचिव का अतिरिक्त प्रभार यूपी कैडर के 1989 बैच के आईएएस अधिकारी <strong>देवेश चतुर्वेदी</strong> को दिया गया है, जो पहले से ही कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव हैं।</p>
<p><strong>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)</strong> भी कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (DARE) के तहत आता है। अब तक आईसीएआर के महानिदेशक और सचिव (DARE) रहे वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक <strong>डॉ. हिमांशु पाठक</strong> के इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT) का नया महानिदेशक नियुक्त होने से सचिव (DARE) और महानिदेशक (ICAR) का पद खाली हो गया था। लेकिन समय रहते इन पदों पर किसी कृषि वैज्ञानिक का चयन का न होने से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी देवेश चतुर्वेदी को ही सचिव (DARE) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।</p>
<p>इस प्रकार देश में कृषि अनुसंधान और शिक्षा की सर्वोच्च संस्था आईसीएआर के महानिदेशक का पद फिलहाल खाली रहेगा, जबकि सचिव (DARE) का दायित्व कामचलाऊ व्यवस्थाओं के भरोसे रहेगा। आईसीएआर से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इसके पीछे चयन प्रक्रिया में देरी और आईसीएआर का महानिदेशक बनने में बहुत-से अनुभवी कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दिलचस्पी न दिखाने को भी वजह माना जा रहा है।&nbsp;</p>
<p>ऐसे समय जब केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था के विकास में कृषि के योगदान को बेहद महत्वपूर्ण मान रही है, कृषि अनुसंधान से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर चयन में देरी और अतिरिक्त प्रभार कई सवाल खड़े करता है। गौरतलब है कि आईसीएआर की कार्यप्रणाली को लेकर पहले ही सवाल उठ रहे हैं। कृषि उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने के लिए केंद्र सरकार कृषि अनुसंधान की व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाने की मंशा जाहिर कर चुकी है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67c5cc810a954.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67c5ca1e1e478.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि अनुसंधान का अहम पद अतिरिक्त प्रभार के भरोसे, IAS देवेश चतुर्वेदी को एडिशनल चार्ज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67c5ca1e1e478.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार ने कंप्रेस्ड बायो गैस प्लांट के ‘ऑर्गेनिक कार्बन एनहांसर’ को उर्वरक के रूप में मान्यता दी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-recognises-cbg-manure-as-fertilizer-decision-will-support-organic-farming-initiatives.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 01 Mar 2025 16:15:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-recognises-cbg-manure-as-fertilizer-decision-will-support-organic-farming-initiatives.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सस्टेनेबल कृषि को बढ़ावा देने के लिए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने 1985 के उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) (नियंत्रण) आदेश में संशोधन किया है। इसके तहत अब कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) संयंत्रों से निकलने वाले &lsquo;ऑर्गेनिक कार्बन एनहांसर&rsquo; को उर्वरकों की मान्यता प्राप्त श्रेणी में शामिल किया गया है। उम्मीद है कि यह संशोधन ऑर्गेनिक उर्वरकों के व्यापक उपयोग को प्रोत्साहित करेगा तथा भारत के कृषि क्षेत्र में सस्टेनेबल विकास को बढ़ावा देगा।</p>
<p>यह संशोधन 17 फरवरी 2025 को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत एस.ओ. 897(ई) के माध्यम से अधिसूचित किया गया। इसमें नैनो उर्वरकों और सीबीजी संयंत्रों से प्राप्त ऑर्गेनिक कार्बन एनहांसर को आधिकारिक रूप से उर्वरकों की कानूनी परिभाषा में शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने ऑर्गेनिक तरीके से मिट्टी की सेहत बढ़ाने के लिए विशिष्ट नियमों और वर्गीकरण को स्पष्ट करने के मकसद से मौजूदा आदेश में अनुसूची VIII जोड़ी है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67c2e47cef587.jpg" alt="" /></p>
<p>भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार, कंप्रेस्ड बायो गैस संयंत्रों से प्राप्त ऑर्गेनिक कार्बन एनहांसर से मतलब उन सभी जैविक सामग्री से है जो किण्वन (फर्मेंटेशन) प्रक्रिया के माध्यम से मुख्य उत्पाद या बाई-प्रोडक्ट के रूप में प्राप्त होती हैं। ये ऑर्गेनिक उर्वरक मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करते हैं और ऑर्गेनिक कार्बन के स्तर को बनाए रखते या बढ़ाते हैं।</p>
<p>भारतीय ग्रीन एनर्जी महासंघ (IFGE) ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा, &ldquo;फर्मेंटेड ऑर्गेनिक खाद (FOM) और लिक्विड फर्मेंटेड ऑर्गेनिक खाद (LFOM) के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देकर, यह पहल जैविक कार्बन स्तर को पुनर्स्थापित कर मिट्टी के स्वास्थ्य को पुनर्जीवित करेगी, उसकी जल धारण क्षमता बढ़ाएगी, फसल उत्पादन में सुधार करेगी और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करेगी। यह कदम किसानों को दीर्घकालिक कृषि स्थिरता सुनिश्चित करने के साथ-साथ सीबीजी क्षेत्र की वृद्धि को भी गति देगा।&rdquo;</p>
<p>IFGE के महानिदेशक संजय गंजू ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा, &ldquo;आईएफजीई सीबीजी प्रोड्यूसर फोरम सरकार के साथ इस महत्वपूर्ण संशोधन को करवाने में सक्रिय रूप से शामिल रहा है। हमें इस सफलता पर खुशी है। यह निर्णय किसानों को सशक्त बनाएगा, सस्टेनेबल मिट्टी प्रबंधन को बढ़ावा देगा और सीबीजी उद्योग को व्यवहार्य बनाएगा।&rdquo;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार ने कंप्रेस्ड बायो गैस प्लांट के ‘ऑर्गेनिक कार्बन एनहांसर’ को उर्वरक के रूप में मान्यता दी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिसंबर तिमाही में 5.6% रही कृषि विकास दर, पूरे साल में जीडीपी ग्रोथ 6.5% रहने का अनुमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-grows-by-5.6-percent-in-december-quarter-annual-gdp-growth-revised-to-6.5-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 01 Mar 2025 11:22:24 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-grows-by-5.6-percent-in-december-quarter-annual-gdp-growth-revised-to-6.5-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मौजूदा वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कृषि क्षेत्र ने 5.6 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की है। यह वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही के बाद सबसे अधिक है। पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में कृषि क्षेत्र की विकास दर 5.7 प्रतिशत रही थी। तुलनात्मक रूप से देखें तो पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कृषि विकास दर 1.5 प्रतिशत और मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के दौरान 4.1% रही थी।</p>
<p>सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की तरफ से शुक्रवार को मौजूदा वित्त वर्ष के लिए जारी दूसरे अग्रिम अनुमानों में यह आंकड़े दिए गए हैं। कृषि विकास दर 5% से अधिक रहने के बावजूद दिसंबर तिमाही में जीडीपी विकास दर 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वर्ष 2023-24 की दिसंबर तिमाही में विकास दर 9.5 प्रतिशत थी।</p>
<p><span style="font-weight: 400;">जीडीपी के आकार के लिहाज से देखें तो स्थिर मूल्य पर मौजूदा वित्त वर्ष में जीडीपी 187.95 लाख करोड़ रुपए रहने की उम्मीद है, जो पिछले वित्त वर्ष 176.51 लाख करोड़ रुपए थी। मौजूदा मूल्यों पर जीडीपी का आकार 331 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है जो बीते वर्ष 301.23 लाख करोड़ रुपए था।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मौजूदा वित्त वर्ष में कृषि एवं संबंध सेक्टर के अलावा बाकी सभी सेक्टर की विकास दर पिछले साल की तुलना में कम रहने का अंदेशा जताया गया है। कृषि की विकास दर 2023-24 के अंतिम अनुमान 2.7 प्रतिशत के मुकाबले 4.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है। मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ 12.3 प्रतिशत की तुलना में सिर्फ 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। खनन क्षेत्र की ग्रोथ रेट 3.2 प्रतिशत की तुलना में 2.8 प्रतिशत, बिजली, गैस जलापूर्ति जैसी सेवाओं की वृद्धि दर 8.6 प्रतिशत की तुलना में सिर्फ 6 प्रतिशत, कंस्ट्रक्शन की 10.4 प्रतिशत की तुलना में 8.6 प्रतिशत, ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट, संचार सेवाओं की वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत की तुलना में 6.4 प्रतिशत, फाइनेंशियल, रियल एस्टेट सेवाओं की वृद्धि दर 10.3 की तुलना में 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जन प्रशासन और रक्षा सेवाओं की वृद्धि दर पिछले साल के बराबर 8.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">ग्रॉस वैल्यू एडिशन (जीवीए) में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों का हिस्सा 18 प्रतिशत है। यह फाइनेंशियल और रियल एस्टेट के 23 प्रतिशत के बाद सबसे अधिक है। जीवीए में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी सिर्फ 14 प्रतिशत है।</span></p>
<p>पूरे वित्त वर्ष में विकास दर 6.5% रहने का अनुमान जताया गया है। इससे पहले 7 जनवरी को जारी पहले अग्रिम अनुमानों में मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 6.4 प्रतिशत विकास दर का अनुमान जताया गया था। इस वर्ष नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 9.9% रहने का अनुमान है। पहले अग्रिम अनुमान में इसके 9.7% रहने की उम्मीद जताई गई थी।&nbsp;</p>
<p>पिछले वित्त वर्ष की विकास दर को एक प्रतिशत संशोधित करते हुए 9.2% किया गया है। पिछले अनुमानों में 2023-24 के लिए जीडीपी विकास दर 8.2% बताई गई थी। कोविड के बाद के साल 2021-22 को छोड़कर वित्त वर्ष 2023-24 की आर्थिक विकास दर पिछले 12 वर्षों में सबसे अधिक है। बीते वर्ष मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और वित्तीय सेवा जैसे सेक्टर में दहाई अंकों में वृद्धि हुई। मैन्युफैक्चरिंग की वृद्धि दर 12.3 प्रतिशत, कंस्ट्रक्शन की 10.4 प्रतिशत और वित्तीय सेवा एवं रियल एस्टेट की 10.3 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2022-23 के अंतिम अनुमान भी जारी किए गए हैं इसमें विकास दर को 7% के पिछले अनुमानों से बढ़ाकर 7.6% किया गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिसंबर तिमाही में 5.6% रही कृषि विकास दर, पूरे साल में जीडीपी ग्रोथ 6.5% रहने का अनुमान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत से 5 लाख टन चीनी निर्यात के सौदे, मिलों को 44 हजार रुपये/टन तक मिल रही कीमतें]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/five-lakh-tonnes-of-sugar-contracted-for-export-and-mills-are-getting-price-of-rs-44-thousand-per-tonne.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 26 Feb 2025 14:38:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/five-lakh-tonnes-of-sugar-contracted-for-export-and-mills-are-getting-price-of-rs-44-thousand-per-tonne.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार द्वारा चालू पेराई सीजन (2024-25) के दौरान 10 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देने के करीब एक महीने के भीतर 5 लाख टन चीनी के निर्यात सौदे हो चुके है। इसमें से 2 लाख चीनी का निर्यात हो चुका है। चीनी निर्यात का फैसला मिलों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है। निर्यात के लिए चीनी की एक्स-फैक्ट्री कीमत 44000 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है।</p>
<p>चीनी उद्योग सूत्रों के मुताबिक, निर्यात के लिए चीनी के सौदे 44 हजार रुपये प्रति टन तक हो रहे हैं। अधिकांश निर्यात महाराष्ट्र की मिलों से हो रहा है। अफ्रीकी देशों, अफगानिस्तान और श्रीलंका समेत करीब दर्जन भर देशों को चीनी भेजी जा रही है। अब तक 2 लाख चीनी का निर्यात हो चुका है और 3 लाख टन निर्यात के सौदे हो चुके हैं। चीनी मिलों द्वारा निर्यात के लिए चीनी की कीमत को लेकर काफी मोलभाव किया जा रहा है। इसी वजह से कीमत 44 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है। ऐसे में महाराष्ट्र की कई चीनी मिलों द्वारा चालू पेराई सीजन में किसानों को गन्ने के लिए <strong>फेयर एंड रिम्यूनेरेटिव प्राइस (एफआरपी)</strong> से अधिक कीमत का भुगतान किये जाने की संभावना बन रही है।</p>
<p><strong>चीनी की कीमतें बढ़ी&nbsp;</strong></p>
<p>चालू सीजन में चीनी के उत्पादन में गिरावट के चलते कीमतों में तेजी आई है। घरेलू बाजार में भी चीनी की कीमतें बढ़ गई हैं। महाराष्ट्र में चीनी की एक्स फैक्टरी कीमत 3800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रही है जबकि उत्तर प्रदेश में चीनी की एक्स फैक्टरी कीमत 4000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है। हालांकि, सरकार ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) 3100 रुपये प्रति क्विंटल तय कर रखा है जबकि चीनी मिलें इसे बढ़ाकर 3900 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रही हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>उत्पादन में गिरावट&nbsp;</strong></p>
<p>चालू सीजन 2024-25 में चीनी उद्योग ने 270 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया है जो पिछले साल के मुकाबले करीब 50 लाख टन कम है। पिछले सीजन (2023-24) में 319 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। चीनी के बड़े उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने कि कमजोर फसल के चलते उत्पादन कम रहा है। उद्योग सूत्रों ने आशंका जताई है कि चीनी उत्पादन 270 लाख टन से भी नीचे जा सकता है।</p>
<p>सरकार ने चालू पेराई सीजन में गन्ना जूस और बी-हैवी मोलेसेज के जरिये 37.5 लाख टन चीनी का डायवर्जन एथेनॉल उत्पादन के लिए करने की अनुमति दी है। लेकिन सरकार ने इन दोनों श्रेणियों के लिए एथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है। ऐसे में चीनी की बेहतर कीमतों को देखते हुए चीनी मिलें एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का कम उपयोग कर सकती हैं। उस स्थिति में चीनी का कुल उत्पादन बढ़ सकता है।</p>
<p><strong>निर्यात की संभावनाएं</strong>&nbsp;</p>
<p>उद्योग सूत्रों का कहना है कि हमारे पास 10 लाख टन निर्यात करने के लिए सितंबर, 2025 तक का समय है। इस साल बेहतर कीमत मिलने के चलते अगले साल अधिक निर्यात की संभावना है और यह 40 से 50 लाख टन तक पहुंच सकता है क्योंकि अगले दो साल गन्ने का अधिक उत्पादन होने का अनुमान है।</p>
<p>भारत ने सर्वाधिक 112 लाख टन चीनी का निर्यात वर्ष 2021-22 में किया था और उसी साल देश में रिकॉर्ड 360 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ था। साल 2022-23 में 63 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया था। सरकार ने अक्तूबर, 2023 में चीनी निर्यात को रेस्ट्रिक्टेट लिस्ट में डाल दिया था और 2023-24 में चीनी निर्यात कोटा जारी नहीं किया था। इस साल सरकार ने 20 जनवरी को चीनी निर्यात पर प्रतिबंध हटाते हुए चालू सीजन में 10 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_6543697e057f4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत से 5 लाख टन चीनी निर्यात के सौदे, मिलों को 44 हजार रुपये/टन तक मिल रही कीमतें ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_6543697e057f4.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष बने के. साई रेड्डी, मोहिनी मोहन मिश्र दूसरी बार महामंत्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/k-sai-reddy-elected-president-of-kisan-sangh-mohini-mohan-mishra-reappointed-as-general-secretary.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 24 Feb 2025 20:03:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/k-sai-reddy-elected-president-of-kisan-sangh-mohini-mohan-mishra-reappointed-as-general-secretary.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित भारतीय किसान संघ के 14वें अखिल भारतीय अधिवेशन में संगठन के अखिल भारतीय अध्यक्ष व महामंत्री का निर्वाचन किया गया। देश भर से आए प्रतिनिधियों ने निर्वाचन अधिकारी अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी की उपस्थिति में तेलंगाना <strong>के. साई रेड्डी</strong> तेलंगाना को अखिल भारतीय अध्यक्ष तथा उड़ीसा के <strong>मोहिनी मोहन मिश्रा</strong> को अखिल भारतीय महामंत्री घोषित किया गया।</p>
<p>अध्यक्ष व महामंत्री द्वारा घोषित कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष टी पेरूमल, राम भरोस वासोतिया, विशाल चंद्राकर, सुशीला विशनोई को चुना गया। अखिल भारतीय मंत्री बाबू भाई पटेल, डॉ सोमदेव शर्मा, भानु थापा, वीणा सतीश कोषाध्यक्ष युगलकिशोर मिश्र, संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी, सह संगठन मंत्री गजेंद्र सिंह, जैविक प्रमुख नाना आखरे, महिला संयोजिका मंजू दीक्षित, कार्यालय प्रमुख चंद्रशेखर जी, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेंद्र सिंह पटैल को घोषित किया गया।</p>
<p>कार्यकारिणी सदस्य के रूप में बद्रीनारायण चौधरी, आई एन बसवेगौड़ा, हुकुमचंद पाटीदार, धर्मपाल सिंह ठाकुर, ई नारायण कुट्टी, रतन लाल डागा, प्रमोद चौधरी, कुमार स्वामी, मणिलाल लबाना, भगतराम पटियाल, भवन विक्रम डबराल, कुरूसार तिमुंग, इंदूभूषण जी, हरपाल सिंह डागर, डॉ मकरंद करकरे, सर्वजीत सिंह, कैलाश गिंदौलिया, पूरनचंद, प्रशांत खाखा, केदार मिश्र, कल्याण कुमार मंडल, श्रीधर रेड्डी, सुरेश चंद्रवंशी, दादा लाड, तकाली तामुल, कपिला मुठे, चंद्रकला चौहान, चंद्रकात गौर, खेलन सहारे, प्रकाशनारायण तिवारी नियुक्त किये गये।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x_67bc840dddb16.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>रविवार को तीन दिवसीय अधिवेशन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय संगठन मंत्री <strong>दिनेश कुलकर्णी</strong> ने कहा कि 2047 की विकसित भारत की संकल्पना को पूर्ण करने के लिये गौ कृषि वाणिज्यम् के साथ कृषि अनुकूल तकनीकी को अपनाकर आगे बढ़ने की जरूरत है। समग्र विकसित भारत के निर्माण में कृषि व किसान पर बड़ा उत्तरदायित्व है।</p>
<p>इस अवसर पर <strong>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ</strong> के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख <strong>रामलाल जी</strong> ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे लिए देश हित की चौखट पर किसान हित है। अगले तीन वर्ष का रोडमैप तैयार कर किसान संघ को काम करना होगा।</p>
<p><strong>60</strong><strong> हजार गांवों में 42</strong><strong> लाख सदस्य</strong></p>
<p>भारतीय किसान संघ के अधिवेशन में प्रस्तुत सदस्यता वृत्त के अनुसार 60 हजार गांवों में किसान संघ की सक्रिय ग्राम समिति बनी है। इन ग्राम समितियों के माध्यम से 42 लाख किसानों को देश भर में भारतीय किसान संघ ने सदस्य बनाया है।</p>
<p><strong>अधिवेशन में पारित प्रस्ताव&nbsp; </strong></p>
<p>किसान संघ के अधिवेशन में देश भर के सभी किसानों से जैविक खेती अपनाने का आह्वान किया गया। दूसरे प्रस्ताव में नीतियों में सुधार व बदलाव करते हुये कृषि उत्पादन, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, भंडारण, विपणन वाणिज्य, लघु कुटीर, ग्राम उद्योग, हस्तकला के आयामों, ग्राम स्वावलंबन के विचार को मजबूत करने की बात कही गई है।</p>
<p>अधिवेशन के दूसरे दिन विभिन्न राज्यों से आए किसान संघ के पदाधिकारियों ने गौ-आधारित प्राकृतिक खेती का संदेश देते हुए ट्रैक्टर ट्रालियों में शोभा यात्रा निकाली। अधिवेशन में बड़ी संख्या में महिला किसानों की भागीदारी रही। शोभा यात्रा का नेतृत्व भी महिला किसानों द्वारा स्वयं ट्रैक्टर चलाकर किया गया।&nbsp;</p>
<p>अधिवेशन में शामिल हुए किसानों को सरदार कृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय, पालनपुर के वैज्ञानिकों ने उन्नत कृषि तकनीकियों व प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67bc82ca2e41f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष बने के. साई रेड्डी, मोहिनी मोहन मिश्र दूसरी बार महामंत्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67bc82ca2e41f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों के खाते में पहुंची पीएम&amp;#45;किसान की 19वीं किस्त, अब तक 3.67 लाख करोड़ वितरित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/19th-installment-of-pm-kisan-transferred-today-rs-3.67-lakh-crore-disbursed-so-far.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 24 Feb 2025 14:04:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/19th-installment-of-pm-kisan-transferred-today-rs-3.67-lakh-crore-disbursed-so-far.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी</strong> सोमवार को बिहार के भागलपुर से रिमोट का बटन दबाकर <strong>पीएम किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान)</strong> योजना की 19वीं किस्त जारी की। इसके तहत डीबीटी के माध्यम से 9.80 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में 22 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई।</p>
<p>पीएम मोदी ने भागलपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि एनडीए<span>&nbsp;सरकार ना होती, तो बिहार सहित देशभर के मेरे किसान भाई-बहनों को पीएम किसान सम्मान निधि ना मिलती। बीते 6 साल में इसका एक-एक पैसा सीधे हमारे अन्नदाताओं के खाते में पहुंचा है। मखाना विकास बोर्ड की स्थापना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह मखाना की खेती में जुटे बिहार के किसानों के लिए बेहद फायदेमंद होने वाला है। इससे मखाना के उत्पादन, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग में बहुत मदद मिलेगी।&nbsp;</span></p>
<p>इससे पहले&nbsp;पीएम-किसान योजना के 6 वर्ष पूरे होने पर किसानों को बधाई देते हुए पीएम मोदी ने ट्वीट किया कि अब तक करीब साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये किसानों के खाते में पहुंच चुके हैं। हमारा यह प्रयास अन्नदाताओं को सम्मान, समृद्धि और नई ताकत दे रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 10 वर्षों में हमारे प्रयासों से देश में कृषि क्षेत्र का तेजी से विकास हुआ है।&nbsp;</p>
<p>वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले शुरू की गई पीएम-किसान योजना के तहत अब तक 11 करोड़ से ज्यादा किसानों के खातों में 3.67 लाख करोड़ से अधिक की राशि पहुंच चुकी है। इसके तहत किसानों को दो-दो हजार रुपये की तीन किस्तों में सालाना छह हजार रुपये की धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचाई जाती है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x_67bc7b0d4bfdc.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>10,000 एफपीओ बनाने का लक्ष्य पूरा&nbsp;</strong></p>
<p>आज मोदी सरकार का 10 हजार एफपीओ बनाने का लक्ष्य भी पूरा हो गया। पीएम मोदी ने कहा कि बिहार की भूमि 10 हजारवें FPO के निर्माण की साक्षी बन रही है। मक्का, केला और धान पर काम करने वाला ये FPO जिला खगड़िया में रजिस्टर हुआ है। देश के छोटे व सीमांत किसानों को सशक्त बनाने के लिए कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) को एक आंदोलन के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है।</p>
<p><strong>मखाना किसानों से मिले कृषि मंत्री</strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री<strong> शिवराज सिंह चौहान</strong> रविवार को ही बिहार पहुंच चुके थे। बजट में घोषित <strong>मखाना बोर्ड</strong> की स्थापना को लेकर वह दरभंगा के मखाना अनुसंधान केंद्र पहुंचे। वहां उन्होंने तालाब में उतरकर मखाना की रोपाई की और मखाना उत्पादक किसानों से संवाद किया। कृषि मंत्री ने कहा कि <span>बिहार में मखाना बोर्ड किसान भाइयों की सलाह के आधार पर बनेगा।</span>&nbsp;हम&nbsp;<span>किसानों के बीच जाकर, उनके सुझावों और परेशानियों को ध्यान में रखते हुए मखाना बोर्ड की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x_67bc355585a75.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>पप्पू यादव ने किया बंद का आह्वान </strong></p>
<p>इस बीच, बिहार के सीमांचल-कोसी क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए, निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ ​​पप्पू यादव ने पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र और कुछ आसपास के इलाकों में सोमवार को 'बंद' का आह्वान किया। पप्पू यादव, पूर्णिया में मखाना बोर्ड की स्थापना की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी, तो हम दिल्ली और पूर्णिया और कटिहार के बीच रेल यातायात रोक देंगे।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67bc4880cc187.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों के खाते में पहुंची पीएम-किसान की 19वीं किस्त, अब तक 3.67 लाख करोड़ वितरित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तीन केंद्रीय मंत्रियों की किसान नेताओं से वार्ता, 19 मार्च को अगली बैठक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-minister-shivraj-singh-chauhan-arrived-in-chandigarh-to-meet-farmer-leaders.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 22 Feb 2025 21:14:09 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-minister-shivraj-singh-chauhan-arrived-in-chandigarh-to-meet-farmer-leaders.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी समेत कई मांगों को लेकर साल भर से आंदोलन कर रहे किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच शनिवार को छठे दौर की वार्ता हुई।</p>
<p>इस बार बातचीत में शामिल होने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong>&nbsp;चंडीगढ़ पहुंचे। उनके साथ केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री <strong>पीयूष गोयल</strong> तथा खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री&nbsp;<strong>प्रल्हाद जोशी</strong> भी मौजूद थे। तीन केंद्रीय मंत्रियों की आंदोलनकारी किसान नेताओं से वार्ता को काफी अहम माना जा रहा है।&nbsp;</p>
<p>बैठक के बाद कृषि मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने कहा कि दोनों किसान संगठनों से बहुत सद्भावपूर्ण वातावरण में चर्चा हुई है। किसान कल्याण के सभी कामों को हमने सामने रखा। किसान नेताओं की बातें भी सुनीं। बहुत अच्छी चर्चा हुई है। अगली बैठक <strong>19 मार्च</strong> को चंडीगढ़ में होगी।</p>
<p>किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच आज हुई बैठक करीब ढाई घंटे चली। इसमें भी कोई नहीं समाधान नहीं निकला। लेकिन आगे बातचीत के रास्ते खुले हैं। बैठक शुरू होने से पहले कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान नेता <strong>जगजीत सिंह डल्लेवाल</strong> के पास जाकर मुलाकात की और उनकी सेहत के बारे में पूछा।&nbsp;</p>
<p>तीनों केंद्रीय मंत्रियों ने जगजीत सिंह डल्लेवाल से अनशन खत्म करने की अपील की है। पिछले तीन महीनों से खनौरी बॉर्डर पर अनशन कर रहे डल्लेवाल को एंबुलेंस से चंडीगढ़ लाया गया था।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x_67ba107d4d644.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p></p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा (गैर- राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा की ओर से 28 सदस्य प्रतिनिधिमंडल केंद्र सरकार के साथ बैठक में शामिल हुआ। आंदोलनकारी किसान एमएसपी गारंटी कानून की मांग पर अडिग हैं। जगजीत सिंह डल्लेवाल ने साफ कह दिया कि जब तक एमएसपी की गारंटी नहीं मिलती, आंदोलन जारी रहेगा।&nbsp;</p>
<p>किसान नेता <strong>सरवन सिंह पंधेर</strong> ने कहा कि हमने फिर से अपनी मांगें केंद्र सरकार के सामने रखी। अभी तक केंद्र की तरफ से कोई पुख्ता आश्वासन नहीं मिला है। अगली बैठक 19 मार्च को बुलाई गई है।</p>
<p>बैठक में पंजाब सरकार की तरफ से वित्त मंत्री <strong>हरपाल सिंह चीमा</strong> कृषि मंत्री <strong>गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong> और खाद्य मंत्री <strong>लालचंद कटारूचक</strong> मौजूद थे। हरपाल सिंह चीमा ने पत्रकारों को बताया कि बैठक में एमएसपी की कानूनी गारंटी पर ध्यान केंद्रित करते हुए अच्छी चर्चा हुई।&nbsp;</p>
<p>हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसान संगठनों ने इस बैठक के पहले कहा था कि अगर केंद्र सरकार के साथ वार्ता बेनतीजा रहती है कि 25 फरवरी को 101 किसानों का जत्था दिल्ली कूच करेगा। पिछले एक साल के दौरान आंदोलनकारी किसान कई बार दिल्ली कूच का प्रयास कर चुके हैं, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x_67ba10996846a.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67b9f081062ff.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ तीन केंद्रीय मंत्रियों की किसान नेताओं से वार्ता, 19 मार्च को अगली बैठक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार ने गेहूं की स्टॉक सीमा घटाई, कीमतों पर अंकुश लगाने का प्रयास]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-again-reduces-wheat-stock-limit-attempts-to-control-prices.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 21 Feb 2025 14:00:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-again-reduces-wheat-stock-limit-attempts-to-control-prices.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में गेहूं की कीमतों को स्थिर करने के प्रयास में, केंद्र सरकार ने गेहूं का स्टॉक रखने की सीमा को और सख्त कर दिया है। सरकारी भंडार से ओपन मार्केट सेल स्कीम के माध्यम से खुले बाजार में गेहूं उतारने और पहले से लागू स्टॉक लिमिट के बावजूद गेहूं की कीमतें उच्च स्तर पर बनी हुई हैं।</p>
<p>संशोधित स्टॉक लिमिट के अनुसार, व्यापारी और थोक विक्रेता अब अधिकतम 250 टन गेहूं ही अपने पास रख सकेंगे, यह सीमा पहले 1,000 टन थी। इसी तरह, खुदरा विक्रेता और रिटेल आउटलेट प्रत्येक दुकान में 4 टन तक गेहूं स्टॉक कर सकते हैं, जो पहले 5 टन था। प्रोसेसर्स के लिए गेहूं स्टॉक की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है।</p>
<p>खाद्य मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और जमाखोरी व अनुचित सट्टेबाजी को रोकने के लिए भारत सरकार ने गेहूं पर स्टॉक सीमा लागू की है, खाद्य मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया।</p>
<p>सरकारी आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए, सभी गेहूं स्टॉक रखने वाले ट्रेडर्स को गेहूं स्टॉक लिमिट पोर्टल <strong>(<a href="https://evegoils.nic.in/wsp/login">https://evegoils.nic.in/wsp/login</a>)</strong> पर पंजीकरण कराना होगा और हर शुक्रवार को अपने स्टॉक की स्थिति अपडेट करनी होगी। इन सीमाओं के उल्लंघन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। जिन इकाइयों के पास निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक है, उन्हें अधिसूचना जारी होने के 15 दिनों के भीतर इसे अनुमेय सीमा के भीतर लाना होगा।</p>
<p>सरकार ने कहा है कि इन उपायों का उद्देश्य देश के उपभोक्ताओं के लिए मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना है। गौरतलब है कि 2024 रबी सीजन के दौरान देश में 1,132 लाख टन (LMT) गेहूं उत्पादन दर्ज किया गया है, और खाद्य मंत्रालय का कहना है कि देश में गेहूं की पर्याप्त उपलब्धता है। रिकॉर्ड उत्पादन के दावों के बावजूद गेहूं की कीमतों का अधिक रहना और स्टॉक लिमिट लगाया जाना सरकारी आंकड़ों पर सवाल खड़ा करता है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67b838f2e291e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार ने गेहूं की स्टॉक सीमा घटाई, कीमतों पर अंकुश लगाने का प्रयास ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डीएपी आयात से किनारा कर रही हैं उर्वरक कंपनियां]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/fertilizer-companies-are-avoiding-dap-imports.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 21 Feb 2025 07:54:28 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/fertilizer-companies-are-avoiding-dap-imports.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वैश्विक बाजार में डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की कीमतों के करीब 640 डॉलर प्रति टन पर पहुंचने और डॉलर के मुकाबले रूपये में आई गिरावट ने उर्वरक कंपनियों के लिए डीएपी के आयात को घाटे का सौदा बना दिया है। इसके चलते सरकार के निर्देशों के बावजूद कंपनियां डीएपी आयात के अधिक सौदे नहीं कर रही हैं। निजी क्षेत्र की कई उर्वरक कंपनियों ने डीएपी के आयात से किनारा कर रखा है। वहीं सहकारी क्षेत्र के आयातक भी फायदे-नुकसान का आकलन करने के बाद ही कोई फैसला लेने की रणनीति अपना रहे हैं। अगर अगले दो माह में आयात में तेजी नहीं आती है तो आगामी खरीफ सीजन में डीएपी की किल्लत पैदा हो सकती है। &nbsp;</p>
<p>उद्योग सूत्रों के मुताबिक अधिकांश उर्वरक कंपनियां आयात के मामले में धीरे चलो (गो स्लो) की रणनीति अपना रही हैं। उर्वरक कंपनियों ने डीएपी का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) 1350 रुपये प्रति बैग (50 किलो) तय कर रखा है। सरकार चाहती है कि यह कीमत बरकरार रहे, हालांकि विनियंत्रित उर्वरकों के मामले में दाम का फैसला कंपनियों का है लेकिन वास्तव में इसकी कीमत परोक्ष रूप से नियंत्रित है। सरकार न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत चालू रबी सीजन के लिए 1 अक्तूबर, 2024 से 31 मार्च, 2025 तक के लिए डीएपी पर 21911 रुपये प्रति टन की सब्सिडी दे रही है। इसके अलावा उर्वरक कंपनियों को 3500 रुपये प्रति टन का स्पेशल इंसेंटिव भी दिया जा रहा है। डीएपी की बिक्री से कंपनियों को 27000 रुपये प्रति टन की आय होती है। ऐसे में सब्सिडी और स्पेशल इंसेंटिव समेत कंपनियों को डीएपी पर कुल आय 52400 रुपये प्रति टन की आय हो रही है।</p>
<p>वहीं वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमत करीब 640 डॉलर प्रति टन चल रही है। 87 रुपये प्रति डॉलर की विनियम दर पर डीएपी की आयात कीमत 55680 रुपये प्रति टन पड़ रही है। इसके अलावा इस पर सीमा शुल्क, पोर्ट हैंडलिंग, बैगिंग डीलर मार्जिन मिलाकर लागत 65000 रुपये प्रति टन से अधिक बैठ रही है। ऐसे में मौजूदा सब्सिडी, स्पेशल इंसेंटिव और डीएपी की खुदरा कीमत पर बिक्री को मिलाकर उर्वरक कंपनियों को होने वाली आय और आयात लागत पर कंपनियों को करीब 12600 रुपये प्रति टन का घाटा हो रहा है।</p>
<p>उर्वरक उद्योग सूत्रों के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष में भी आयातक कंपनियों को घाटा हुआ था। मौजूदा समय में यह अंतर और बढ़ गया है। ऐसे में आयात के सौदे कम हो रहे हैं और कुछ निजी कंपनियों ने आयात सौदे नहीं किये हैं। देश में जो कंपनियां डीएपी का उत्पादन करती हैं वह उत्पादन जरूर जारी रखे हुए हैं क्योंकि इन कंपनियों ने कच्चे माल रॉक फॉस्फेट और फॉस्फोरिसिक एसिड के लिए निर्यातक देशों की कंपनियों के साथ लॉन्ग टर्म कांट्रैक्ट कर रखे हैं।</p>
<p>देश में डीएपी की खपत का अधिकांश हिस्सा आयात ही होता है। वहीं पिछले साल एक निजी कंपनी को डीएपी आयात में घाटे के चलते उसके शीर्ष प्रबंधन को मैनेजिंग बोर्ड के सख्त सवालों का सामना करना पड़ा था और अंततः वहां मैनेजमेंट में ही बदलाव हो गया था।</p>
<p>उर्वरक उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष (2024-25) में अप्रैल, 2024 से जनवरी, 2025 तक डीएपी के आयात में 16.2 फीसदी और बिक्री में 14.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं डीएपी के घरेलू उत्पादन में 9.1 फीसदी की गिरावट आई है। अप्रैल,2024 से जनवरी, 2025 के बीच देश में 43.09 लाख टन डीएपी का आयात किया गया जबकि इसके पहले साल इसी अवधि में 51.44 लाख टन डीएपी का आयात किया गया था। वहीं उत्पादन पिछले साल के 37.67 लाख टन से घटकर 34.25 लाख टन रह गया। इसी तरह अप्रैल, 2024 से जनवरी, 2025 के बीच डीएपी की बिक्री 87.12 लाख टन रही जबकि इसके पहले साल इसी अवधि में देश में 101.46 लाख टन डीएपी की बिक्री हुई थी। बिक्री में गिरावट की मुख्य वजह डीएपी की उपलब्धता का कम होना रहा है जो आयात और उत्पादन के आंकड़ों से स्पष्ट होता है।</p>
<p>रबी सीजन में डीएपी की किल्लत के चलते किसानों को बड़े पैमाने पर एमएसपी से अधिक कीमत पर इसकी खरीद करनी पड़ी थी। उद्योग सूत्रों के मुताबिक यह बात सरकार और उद्योग दोनों के संज्ञान में आने पर भी इसे रोकने के लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया।</p>
<p>अगर आने वाले दिनों में डीएपी की वैश्विक कीमतें नहीं घटती हैं या सरकार सब्सिडी में बढ़ोतरी नहीं करती है तो किसानों के सामने खरीफ सीजन में डीएपी की उपलब्धता का संकट पैदा हो सकता है। ऐसे में एक विकल्प राज्य सरकारों द्वारा डीएपी उपलब्ध कराने के लिए आयातकों को अतिरिक्त सब्सिडी देने का भी है लेकिन उद्योग का कहना है कि ऐसा करना संभव तो है लेकिन यह बहुत व्यवहारिक विकल्प नहीं है क्योंकि इसे लागू करने में दिक्कतें पैदा होंगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_6777efce49c40.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ डीएपी आयात से किनारा कर रही हैं उर्वरक कंपनियां ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[22 फरवरी से दिल्ली में पूसा कृषि विज्ञान मेला, मिलेगी नई तकनीक और उन्नत किस्मों की जानकारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pusa-krishi-vigyan-mela-in-delhi-from-february-22-showcasing-new-technology-and-advanced-varieties.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 18 Feb 2025 19:59:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pusa-krishi-vigyan-mela-in-delhi-from-february-22-showcasing-new-technology-and-advanced-varieties.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (<span>आईसीएआर</span>) <span>के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान </span>(<span>आईएआरआई</span>) <span>द्वारा आयोजित होने वाला पूसा कृषि विज्ञान मेला आगामी 22 से 24 फरवरी तक चलेगा। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान <strong>पूसा कृषि विज्ञान मेला</strong></span><strong>-<span>2025 </span></strong><span>का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर देश भर से आने वाले किसानों</span>, <span>कृषि उद्यमियों</span>, <span>छात्रों और अन्य लोगों को खेती से जुड़ी नई तकनीक और उन्नत किस्मों की जानकारी दी जाएगी। यह मेला किसानों के लिए आईएआरआई में विकसित नई किस्मों और तकनीकी जानकारी प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर होता है। </span></p>
<p>आईएआरआई के निदेशक <strong>डॉ. सी.एच. श्रीनिवास राव</strong> ने बताया कि इस बार पूसा कृषि विज्ञान मेल की थीम <strong>उन्नत कृषि-विकसित भारत</strong> है। तीन दिवसीय मेले में देश भर से आने वाले किसानों सहित लगभग 1 लाख लोगों के भाग लेने की संभावना है। इसके लिए पर्याप्त इंतजाम किए गये हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि होंगे, <span>जबकि कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर विशिष्ट अतिथि होंगे। कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी 24 फरवरी को समापन सत्र के मुख्य अतिथि होंगे। </span></p>
<p>मेले का मुख्य आकर्षण आईएआरआई द्वारा विकसित नई किस्मों और तकनीकों का जीवंत प्रदर्शन होगा। मेले में आईएआरआई के अलावा आईसीएआर संस्थानों, <span>कृषि विश्वविद्यालयों</span>, <span>केवीके (कृषि विज्ञान केंद्र)</span>, <span>एफपीओ</span>, <span>उद्यमियों</span>, <span>स्टार्टअप्स</span>, <span>सार्वजनिक और निजी कंपनियों द्वारा नवीन तकनीकों</span>, <span>उत्पादों और सेवाओं को प्रदर्शित किया जाएगा।&nbsp;</span></p>
<p>तकनीकी सत्र और किसान-वैज्ञानिक संवाद के दौरान जलवायु अनुकूल कृषि, <span>फसल विविधीकरण</span>, <span>डिजिटल कृषि</span>, <span>उद्यमिता विकास</span>, <span>कृषि विपणन और किसानों के नवाचारों पर बातचीत होगी।&nbsp;</span>इस अवसर पर आईएआरआई द्वारा विकसित फसलों की जलवायु अनुकूल और उन्नत किस्मों के बीजों की बिक्री भी की जाएगी। साथ ही कृषि वैज्ञानिक किसानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान और मार्गदर्शन का प्रयास करेंगे। &nbsp;</p>
<p>कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक हिमांशु पाठक उद्घाटन और समापन सत्रों की अध्यक्षता करेंगे। जलवायु संकट और पोषण के बढ़ते महत्व को समझते हुए आईएआरआई ने उच्च उपज के साथ-साथ बेहतर पोषण तथा जलवायु-अनुकूल किस्मों को विकसित करने पर जोर दिया है।</p>
<p></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x_67b49946776eb.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67b4988853080.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ 22 फरवरी से दिल्ली में पूसा कृषि विज्ञान मेला, मिलेगी नई तकनीक और उन्नत किस्मों की जानकारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67b4988853080.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फरवरी मध्य में ही 77 चीनी मिलें बंद, गन्ना न मिलने से उद्योग के सामने संकट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/77-sugar-mills-closed-in-mid-february-industry-facing-crisis-due-to-sugarcane-shortage.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 15 Feb 2025 22:58:49 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/77-sugar-mills-closed-in-mid-february-industry-facing-crisis-due-to-sugarcane-shortage.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में चीनी उद्योग के सामने बड़ा संकट पैदा हो गया है। गन्ने की पर्याप्त आपूर्ति न होने के कारण फरवरी के मध्य में ही 77 चीनी मिलों ने संचालन बंद कर दिया है और कई चीनी मिलें सत्र समाप्ति का नोटिस दे चुकी हैं। गन्ना न मिलने के कारण फरवरी के आखिर तक बड़ी तादाद में चीनी मिलें बंद हो जाएंगी।&nbsp;</p>
<p>आम तौर पर चीनी मिलें मार्च-अप्रैल तक चलती हैं। लेकिन इस साल गन्ने की फसल पर मौसम और रोगों की मार के कारण गन्ना उत्पादन को तगड़ा झटका लगा है। चीनी मिलों को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल पा रहा है जिसका असर देश के चीनी उत्पादन पर भी पड़ रहा है। इस साल का देश का चीनी उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 15 फीसदी घटकर 270 लाख टन के आसपास रह सकता है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ)</strong> द्वारा 15 फरवरी को जारी रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सत्र 2024-25 में अब तक 77 चीनी मिलें पेराई बंद कर चुकी हैं, जबकि पिछले साल इस अवधि तक 28 चीनी मिलें बंद हुई थीं। सबसे ज्यादा कर्नाटक में 34 चीनी मिलों ने पेराई बंद कर दी है जबकि महाराष्ट्र में 30 चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं। तमिलनाडु में 4, <span>उत्तर प्रदेश में </span>2, <span>तेलंगाना में </span>2, उत्तराखंड में 2 <span>और हरियाणा में </span>1 मिल में पेराई बंद हो चुकी है।</p>
<p>एनएफसीएसएफ के अनुसार, 15 फरवरी तक देश में कुल 531 चीनी मिलों में से 454 चीनी मिलों में पेराई जारी है। चालू पेराई सीजन में अब तक कुल 197.65 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है जो पिछले साल की इस अवधि की तुलना में करीब 12 फीसदी कम है। पिछले सीजन में इस अवधि तक 505 चीनी मिलें चालू थीं और 224.75 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ था।&nbsp;</p>
<p><strong>फरवरी में बंद हो जाएंगी कई मिलें&nbsp;</strong></p>
<p>यूपी के बरेली जिले में गन्ना न मिल पाने के कारण चार चीनी मिलों ने फरवरी में ही सत्र समाप्ति का नोटिस दे दिया है। 20 फरवरी तक बहेड़ी, फरीदपुर, नवाबगंज और सेमीखेड़ा की चीनी मिलें बंद हो सकती हैं। रामपुर जिले में बिलासपुर स्थित सहकारी चीनी मिल भी पेराई बंद करने की तैयारी कर चुकी है।&nbsp;गन्ना जुटाने के लिए चीनी मिलों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।&nbsp; पश्चिमी यूपी की कई चीनी मिलें फरवरी के आखिर तक संचालन बंद कर सकती है।&nbsp;</p>
<p><strong>रिकवरी भी घटी</strong></p>
<p>गन्ने की फसल खराब होने के कारण चीनी की रिकवरी भी घटी है। पिछले सीजन में इस अवधि तक देश में चीनी की औसत रिकवरी दर 9.87 फीसदी थी जो इस सीजन में घटकर 9.09 फीसदी रह गई है। सबसे ज्यादा कर्नाटक में गन्ने से चीनी की रिकवरी दर में गिरावट आई है और यह 9.75 फीसदी से घटकर 8.50 फीसदी रह गई है। यूपी में रिकवरी दर पिछले साल&nbsp; 10.20 फीसदी थी जो अब 9.30 फीसदी पर है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>मौसम और रोग की मार</strong></p>
<p>प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल में लाल सड़न (<span>रेड रॉट</span>)<span> और </span>चोटी बेधक (<span>टॉप बोरर</span>) रोग के कारण बड़े पैमाने पर फसल खराब हुई है। कुछ जिलों में अधिक बारिश और बाढ़ से भी गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है। इसका असर गन्ने की पैदावार और रिकवरी पर पड़ा है। राज्य की चीनी मिलें पर्याप्त गन्ना आपूर्ति के लिए जूझ रही है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x_67b0d1a5a5959.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ फरवरी मध्य में ही 77 चीनी मिलें बंद, गन्ना न मिलने से उद्योग के सामने संकट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दालों के ड्यूटी फ्री आयात पर लगेगी रोक, पीली मटर से होगी शुरुआत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/duty-free-import-of-pulses-may-stop-will-start-with-yellow-peas.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 13 Feb 2025 21:16:55 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/duty-free-import-of-pulses-may-stop-will-start-with-yellow-peas.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में पीली मटर का ड्यूटी फ्री आयात फरवरी के बाद जारी नहीं रहेगा। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा है कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात को फरवरी से आगे नहीं बढ़ाएगी। हालांकि, इस मामले में अंतिम निर्णय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में मंत्रिमंडल समूह (जीओएम) द्वारा लिया जाएगा।</p>
<p>गुरुवार को<strong> दलहन सम्मेलन 2025</strong> के अवसर पर <strong>प्रल्हाद जोशी</strong> ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हम पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात पर रोक लगा रहे हैं। इस मसले पर खाद्य मंत्रालय ने अपनी राय दे दी है।</p>
<p>गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने देश में दालों के उत्पादन और महंगाई की स्थिति को देखते हुए दिसंबर, 2023 में पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी थी, जिसकी अवधि कई बार बढ़ाते हुए आखिर में 28 फरवरी, 2025 तक तय की गई थी।</p>
<p>दहलन सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि सरकार दलहन उत्पादन का आकलन करने के बाद दालों के शुल्क मुक्त आयात की नीति की समीक्षा करेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि वर्ष 2027 तक भारत दलहन के मामले में आत्मनिर्भर होगा। इसके लिए दालों की पैदावार बढ़ाने पर ध्यान देने की जरूरत है।&nbsp;</p>
<p><strong>10-15 फीसदी आयात शुल्क के आसार&nbsp;</strong></p>
<p><strong>इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन एसोसिएशन (आईपीजीए)</strong> के अध्यक्ष बिमल कोठारी ने उम्मीद जताई कि पीली मटर का शुल्क मुक्त आयात आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। साथ ही, सरकार पीली मटर के आयात पर कुछ प्रतिबंध भी लगा सकती है। आईपीजीए ने सरकार से दालों के लिए एक संतुलित आयात नीति बनाने की मांग की है, ताकि आयातित दालों की लागत न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम न हो। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार पीली मटर का ड्यूटी फ्री आयात बंद कर इस पर 10-15 फीसदी का आयात शुल्क लगा सकती है।&nbsp;</p>
<p>उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में देश में दालों के कुल आयात में 40 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी पीली मटर की है। जीरो ड्यूटी के कारण पिछले साल 30 लाख टन से अधिक पीली मटर का आयात हुआ। इस साल दलहन की बुवाई का क्षेत्र बढ़ने से दलहन उत्पादन में वृद्धि और दालों के आयात में कमी आने का अनुमान है।</p>
<p><strong>तंजानिया की दाल आयात समझौते को आगे बढ़ाने की मांग</strong></p>
<p>दलहन सम्मेलन में भाग लेते हुए तंजानिया के उप प्रधानमंत्री <strong>डोटो माशाका बिटको</strong> ने भारत से अरहर के ड्यूटी फ्री आयात के समझौते को आगे बढ़ाने और मूंग पर लगाए प्रतिबंधों को हटाने की मांग की है। जीरो ड्यूटी पर 2 लाख टन अरहर की दाल की आपूर्ति के लिए तंजानिया के साथ भारत का मौजूदा समझौता इस साल मार्च में समाप्त हो रहा है। तंजानिया ने समझौते को 2027 तक बढ़ाने का अनुरोध किया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दालों के ड्यूटी फ्री आयात पर लगेगी रोक, पीली मटर से होगी शुरुआत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पहले स्वदेशी लंपी वैक्सीन को मिली मंजूरी, वेटरनरी क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/first-indigenous-lsd-vaccine-gets-approval-big-achievement-in-veterinary-field.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 10 Feb 2025 21:33:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/first-indigenous-lsd-vaccine-gets-approval-big-achievement-in-veterinary-field.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गौवंश के लिए जानलेवा <strong>लंपी स्किन बीमारी (एलएसडी)</strong> से बचाव के लिए विकसित पहला स्वदेशी वैक्सीन जल्द ही बाजार में उपलब्ध होगा। भारत बायोटेक समूह की कंपनी <strong>बायोवेट</strong> को एलएसडी वैक्सीन के लिए <strong>सेंट्रल ड्रग स्टेंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ)</strong> से मंजूरी मिल गई है। यह विश्व में लंपी बीमारी की पहली मार्कर वैक्सीन है जिसे<strong> बायोलंपीवैक्सीन</strong> <strong>(</strong><strong>BIOLUMPIVAXIN)</strong> नाम से जल्द ही बाजार में उतारा जाएगा। कंपनी द्वारा सोमवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई।</p>
<p>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा 2022 में विकसित <strong>लंपी-प्रोवैक</strong> वैक्सीन के कमर्शियल उत्पादन के लिए बायोवेट ने टेक्नोलॉजी लाइसेंस प्राप्त किया था। तब से बायावेट को वैक्सीन के लिए सीडीएससीओ की मंजूरी का इंतजार था। लम्पी-प्रोवैक को आईसीएआर के <strong>राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र </strong>(आईसीएआर-एनआरसीई<strong>)</strong>, हिसार और <strong>भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान</strong> (आईवीआरआई), इज्जतनगर के सहयोग से विकसित किया था।</p>
<p>वैक्सीन विकसित करने वाली वैज्ञानिकों की टीम का नेतृत्व करने वाले आईसीएआर के तत्कालीन उपमहानिदेशक (एनिमल साइंस) और वर्तमान में जम्मू स्थित शेर-ए-कश्मीर&nbsp;कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर <strong>डॉ</strong><strong>. </strong><strong>बीएन त्रिपाठी</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि यह वैक्सीन गौवंश को लंपी स्किन बीमारी से पूर्ण सुरक्षा देता है। यह दुनिया में इस तरह की पहली वैक्सीन है जिसका पशुओं पर कोई लोकल इन्फेक्शन नहीं होता है।&nbsp;</p>
<p>वैक्सीन कि खासियत यह है कि यह <strong>डिफरेंशियेटिंग इंफेक्टिड फ्राम वैक्सीनेटेड एनिमल (DIVA)</strong> वैक्सीन है जो लंपी स्कीन रोग की रोकथाम में गेमचेंजर साबित हो सकती है। डॉ. त्रिपाठी बताते हैं कि इस वैक्सीन का उपयोग गर्भधारण कर चुके पशुओं पर किये जाने पर भी किसी तरह का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता और न ही दूध उत्पादन पर असर पड़ता है। इस वैक्सीन से पशुओं को बुखार जैसी दिक्कत भी नहीं आती हैं। देश में लाखों गौवंश को लंपी बीमारी से बचाने के साथ ही वेटरनरी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p>गौरतलब है कि लंपी रोग से देश में करीब दो लाख गौवंश की मौत हुई थी। लाखों पशुओं की दुधारू क्षमता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ। इनमें सबसे अधिक मौत राजस्थान, गुजरात, पंजाब और महाराष्ट्र में हुई थी।</p>
<p><strong>मंजूरी मिलने में लगा लंबा समय </strong></p>
<p>आईसीएआर ने 2022 में ही लंपी रोग की वैक्सीन लंपी-प्रोवैक&nbsp;विकसित कर ली थी। इस पर 2019 से रिसर्च चल रहा था। तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>नरेंद्र सिंह तोमर</strong> और पशुपालन एवं डेयरी मंत्री <strong>परषोत्तम रूपाला</strong> ने 10 अगस्त, 2022 को लंपी-प्रोवैक&nbsp;वैक्सीन विकसित होने का ऐलान किया था। लेकिन इसके कमर्शियल उत्पादन के लिए मंजूरी मिलने में काफी समय लगा।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि अगर 2022 में ही वैक्सीन के कमर्शियल उत्पादन की मंजूरी मिल जाती तो बड़ी संख्या में गौवंश को मौत से बचाया जा सकता था। उस समय सरकार ने गौवंश में <strong>गोट पोक्स</strong> वैक्सीन का उपयोग किया था जो पूरी तरह कारगर नहीं था, क्योंकि वह वैक्सीन गोवंश (कैटल) के लिए नहीं बनाया गया था।</p>
<p>आईसीएआर द्वारा विकसित लंपी-प्रोवैक वैक्सीन के कमर्शियलाइजेशन के लिए कृषि मंत्रालय के तहत काम करने वाली कंपनी <strong>एग्री इन्नोवेट</strong> से बायोवेट, इंडियन इम्यूनोलॉजिकल लिमिटेड, हस्टर बॉयोसाइंस और महाराष्ट्र सरकार ने लाइसेंस लिया था। इन्हें वैक्सीन बनाने की तकनीक और जरूरी मैटीरियल दिया गया था। उस समय उम्मीद थी कि वैक्सीन को बाजार में उतारने के लिए चार से पांच माह में सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी, लेकिन बड़े पैमाने पर टेस्ट की प्रक्रिया के चलते अब करीब ढाई साल बाद एलएसडी का पहला वैक्सीन बाजार में उपलब्ध होगा।</p>
<p><strong>कैसी बनी वैक्सीन </strong></p>
<p>भारत में लंपी वैक्सीन को विकसित करने की कहानी काफी दिलचस्प है। वर्ष 2019 में उड़ीसा में लंपी बीमारी सामने आने के बाद वैक्सीन पर काम शुरू हुआ था।&nbsp;डॉ. त्रिपाठी बताते हैं कि वैक्सीन पर 2019 के अंत में काम शुरू हुआ और जुलाई, 2022 में इसका पशुओं पर ट्रायल किया गया जो पूरी तरह से खरा उतरा। वैक्सीन की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभाव को लेकर एनआरसीई, हिसाब और आईवीआरआई, इज्जतनगर में व्यापक और विश्व स्तरीय परीक्षण किए गये। यह वैक्सीन यह लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और इसे फ्रीजिंग कंडीशन में रखने की जरूरत भी नहीं है। इसे रेफ्रीजरेटर टेंपरेचर (4-80 डिग्री सेल्सियस) पर रखना होता है, जो इसके उपयोग को आसान करेगा। ऐसा वैक्सीन में लाइव वायरस होने की वजह से संभव हो पाया है।&nbsp;</p>
<p>कोरोना के दौर में भी आईसीएआर के वैज्ञानिकों ने लंपी वैक्सीन पर शोध जारी रखा। इसके लिए रांची से वायरस लाया गया था। वैक्सीन को एनआरसीई के वायरोलॉजिस्ट और प्रिंसिपल साइंटिस्ट <strong>डॉ. नवीन कुमार</strong> के नेतृत्व में विकसित किया गया। डॉ. नवीन कुमार इस समय पुणे स्थित एनआईवी के डायरेक्टर हैं। लंपी स्किन रोग के वायरस का सैंपल लेने के बाद एनआरसीई हिसार में इसे आईसोलेट करने के साथ ही इसकी जीन सीक्वेंसिंग की गई। इसके बाद इसे कल्चर किया गया और इसकी 50 जनरेशन तक कल्चरिंग की गई। इसके बाद प्रयोगशाला में चूहों और खरगोशों पर वैक्सीन का परीक्षण किया गया। यह प्रक्रिया आईवीआरआई के मुक्तेश्वर केंद्र पर चली।</p>
<p>वैक्सीन केंडिडेट वायरस का आईवीआरआई में अप्रैल, 2022 में रेगुलेटेड पशुओं पर परीक्षण किया गया और जिसमें दस बछड़ों को वैक्सीन दी गई और पांच को उनके साथ बिना वैक्सीन के रखा गया। वैक्सीन लगाने के बाद पूरी इम्युनिटी विकसित होने में करीब एक माह का समय लगता है। एक माह के बाद इन सभी पशुओं में वायरस इंजेक्ट किया गया। इसके नतीजे में वैक्सीन वाले सभी दस पशु बीमारी से पूरी तरह से सुरक्षित रहे। जबकि दूसरे पांच में लंपी स्किन रोग के लक्षण पाये गये।</p>
<p>इसके बाद जुलाई, 2022 में वैक्सीन का फील्ड ट्रायल किया गया। इसका राजस्थान में बांसवाड़ा, जोधपुर, उदयपुर और अलवर, उत्तर प्रदेश में मथुरा और हरियाणा में हांसी व हिसार में ट्रायल किया गया। वैक्सीन वाले सभी पशु पूरी तरह से सुरक्षित रहे जबकि इन जगहों पर अन्य पशु लंपी स्किन रोक से प्रभावित थे। इस प्रकार विश्व में अपनी तरह के पहले एलएसडी वैक्सीन का मार्ग प्रशस्त हुआ।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67aa2225829a0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पहले स्वदेशी लंपी वैक्सीन को मिली मंजूरी, वेटरनरी क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[टमाटर बिक रहा कौड़ियों के दाम, किसानों को 2&amp;#45;5 रुपये का रेट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/tomatoes-are-being-sold-for-a-pittance-farmers-get-a-rate-of-rs-2-to-5.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 10 Feb 2025 16:02:14 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/tomatoes-are-being-sold-for-a-pittance-farmers-get-a-rate-of-rs-2-to-5.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कुछ दिनों पहले तक उपभोक्ता की जेब पर भारी पड़ रहा टमाटर अब किसानों के लिए घाटे का सबब बन गया है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, तेलंगाना और ओडिशा के टमाटर उत्पादक इलाकों में किसानों को टमाटर की गिरती कीमतों के कारण लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। टमाटर की उपज का भाव 2-5 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर गया है जबकि खुदरा बाजार में टमाटर 15-20 रुपये किलो के रेट पर बिक रहा हैं।</p>
<p><strong>उपभोक्ता मामले विभाग</strong> के अनुसार, पिछले एक महीने में देश में टमाटर की औसत थोक कीमतों में 39.47&nbsp; फीसदी और औसत खुदरा कीमतों में 36.06 फीसदी की गिरावट आई है। यह राष्ट्रीय औसत है जबकि टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में खेत के स्तर पर टमाटर की कीमतों में और भी अधिक गिरावट आई है।</p>
<p>हालात ये है कि सही दाम नहीं मिलने के कारण किसान टमाटर की उपज को मंडी ले जाने की बजाय खेत में ही उखाड़कर फेंक रहे हैं क्योंकि मंडी ले जाने का खर्च टमाटर के दाम से अधिक है। पिछले दिनों <strong>मध्यप्रदेश</strong> के सिहोर से किसानों का ऐसा वीडियो सामने आया था। राज्य के शहडोल, सतना, सिहोर सहित कई इलाकों के किसान इस संकट से जूझ रहे हैं। ओडिशा के गंजम जिले में भी टमाटर किसानों को 3 से 5 रुपये प्रति किलोग्राम का भाव मिल पा रहा है। हालात यह है कि इतने कम भाव को देखकर किसान कटाई पर खर्च करने से भी कतरा रहे हैं।</p>
<p>मध्य प्रदेश के सिहोर जिले के किसान श्यामदेव सिंह बताते हैं कि इस साल टमाटर की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। एक एकड़ पर टमाटर की खेती करने में लगभग 30-40 हजार रुपये का खर्च आता है। जबकि मंडियों में टमाटर के रेट 2-3 रुपये किलो तक गिर गये है। इतने में मजदूरी और भाड़ा भी नहीं निकलता है। इसलिए कई किसान खेत में ही फसल छोड़ रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>टमाटर की इस स्थिति के पीछे बंपर उत्पादन प्रमुख वजह है। <strong>कृषि मंत्रालय</strong> की ओर से जारी 2024-25 के बागवानी उत्पादन के अग्रिम अनुमानों के अनुसार, टमाटर का उत्पादन पिछले वर्ष के लगभग 213.23 लाख टन की तुलना में लगभग 215.49 लाख टन होने की उम्मीद है। टमाटर का बंपर उत्पादन सरकार और उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है लेकिन किसानों के लिए यह मुसीबत बन गया है।&nbsp;</p>
<p>दो साल पहले भी टमाटर उगाने वाले किसानों के सामने ऐसे ही स्थिति पैदा हुई थी, जब उन्होंंने फरवरी-मार्च में टमाटर खेतों में छोड़ दिया था या फिर निराश होकर सड़कों पर टमाटर फेंक दिया था लेकिन मई-जून आते-आते टमाटर का रेट 100 रुपये किलो तक पहुंच गया था। कहीं ऐसा तो नहीं कि किसानों द्वारा फसल खेत में छोड़ देने से दो साल पहले की स्थिति दोबारा पैदा हो जाएगी। टमाटर जल्दी खराब होने वाली फसल है और उसके भंडारण की सुविधाएं बहुत कम हैं।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>जब टमाटर के दाम खुदरा बाजार में 80 रुपये किलो तक पहुंच गये थे तो केंद्र सरकार ने तुरंत सहकारी संस्थाओं के जरिए रियायती दरों पर टमाटर की बिक्री शुरू कर दी थी। लेकिन अब टमाटर कौड़ियों के दाम बिक रहा है तो किसानों को घाटे से बचाने वाला कोई नहीं है। किसानों को कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए शुरू की गई योजनाएं भी बहुत कारगर साबित नहीं हो पा रही हैं।&nbsp;</p>
<p>टमाटर किसानों का संकट केंद्र सरकार की <strong>ऑपरेशन ग्रीन्स (टॉप स्कीम)</strong> की नाकामी को भी दर्शाता है। आलू, प्याज और टमाटर के किसानों को कीमतों में उतार-चढ़ाव की मार से बचाने के लिए 2018 में टॉप स्कीम शुरू गई थी।&nbsp;इसके तहत कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग, छंटाई, ग्रेडिंग और प्रोसेसिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और वैल्यू चेन को विकसित करना था। 2021-22 में योजना में 22 जल्द खराब होने वाली फसलों को शामिल करते हुए टॉप टू टोटल करार दिया गया था। लेकिन आलू, प्याज और टमाटर के किसानों का इस योजना से कितना भला हुआ, इस पर सवालिया निशान है।&nbsp;</p>
<p>हालांकि, आगामी वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में केंद्र सरकार ने फल और सब्जियों के लिए 500 करोड़ रुपये का<strong> मिशन फॉर वेजिटेबल्स एंड फ्रूट्स</strong> घोषित किया है। लेकिन पुराने अनुभवों से लगता है कि इस तरह के मिशन और योजनाएं किसानों को गिरती कीमतों से संरक्षण की बजाय उपभोक्ताओं को ऊंची कीमतों से बचाने के मकसद से ही बनाई जाती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67a9d6251afc1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ टमाटर बिक रहा कौड़ियों के दाम, किसानों को 2-5 रुपये का रेट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67a9d6251afc1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भाजपा विधायकों के असंतोष ने मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को इस्तीफा देने पर मजबूर किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/discontent-of-bjp-mlas-force-manipur-cm-n.-biren-singh-to-resign.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 09 Feb 2025 19:40:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/discontent-of-bjp-mlas-force-manipur-cm-n.-biren-singh-to-resign.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने भाजपा के भीतर बढ़ते असंतोष और विधायकों की नेतृत्व परिवर्तन की मांग के बीच इस्तीफा दिया है। उनके इस कदम से राज्य में जारी राजनीतिक संकट और गहरा गया है। उन्होंने इस्तीफा ऐसे समय दिया जब विधानसभा सत्र शुरू होने में सिर्फ एक दिन बचा है। बीरेन सिंह ने दिल्ली से इंफाल लौटते ही इस्तीफा दिया। दिल्ली में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की थी। इस बैठक में भाजपा के पूर्वोत्तर को कोऑर्डिनेटर संबित पात्रा भी शामिल थे।&nbsp;</p>
<p>राज्य सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने के आसार हैं। यह मणिपुर में 3 मई 2023 को भड़की जातीय हिंसा के बाद भाजपा सरकार के खिलाफ लाया जाने वाला पहला अविश्वास प्रस्ताव होगा। &nbsp;प्रदेश में जारी हिंसा ने भाजपा के भीतर मतभेदों को उजागर कर दिया है। कई विधायकों ने खुलकर बीरेन सिंह के नेतृत्व को चुनौती दी है और केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की।</p>
<p><strong>भाजपा के भीतर बढ़ता असंतोष</strong><br />बीरेन सिंह 2017 से मणिपुर के मुख्यमंत्री थे। उन्हें अपने पहले कार्यकाल में भी विरोध का सामना करना पड़ा था। लेकिन उन्होंने न सिफ अपनी स्थिति बनाए रखी बल्कि 2019 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने में भी कामयाब रहे। हालांकि दूसरे कार्यकाल के दौरान पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता गया, खासकर 2023 में जातीय हिंसा भड़कने के बाद।</p>
<p>संकट तब और गहरा गया जब दस कुकी विधायकों ने बीरेन सिंह को हटाने की मांग की। इसके बाद भाजपा के कई अन्य विधायकों और सहयोगी दलों ने भी नेतृत्व परिवर्तन की जरूरत पर जोर दिया। कई मंत्रियों और विधायकों ने कानून व्यवस्था की स्थिति को संभालने में मुख्यमंत्री की विफलता पर खुलकर नाराजगी जताई, और उन्हें हिंसा प्रभावित राज्य में शांति बहाल करने में नाकाम बताया।</p>
<p>हाल ही नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) ने बीरेन सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया, जिससे उनकी स्थिति और कमजोर हो गई। अब सभी की निगाहें भाजपा नेतृत्व पर टिकी हैं कि वह इस संकट से निपटने के लिए आगे क्या कदम उठाएगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67a8b7388ef67.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भाजपा विधायकों के असंतोष ने मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को इस्तीफा देने पर मजबूर किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दो साल से जारी हिंसा के बीच मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने इस्तीफा दिया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/amid-violence-of-two-years-manipur-cm-n-biren-singh-resigns.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 09 Feb 2025 19:02:49 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/amid-violence-of-two-years-manipur-cm-n-biren-singh-resigns.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने रविवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को इंफाल में राजभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंपा। बीरेन सिंह ने इस्तीफा ऐसे समय दिया है जब राज्य में लंबे समय से हिंसा जारी है। इस्तीफा देने से पहले उन्होंने दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय गृहमंत्री से मिलने के बाद वे राज्यपाल से मिलने गए और उन्हें इस्तीफा सौंपा। बीरेन सिंह के साथ बीजेपी और एनपीएफ के 14 विधायक, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ए. शारदा और पार्टी के वरिष्ठ नेता संबित पात्रा भी थे। अपने इस्तीफे में उन्होंने केंद्र सरकार का धन्यवाद दिया है कि उसने समय पर राज्य में कदम उठाए, विकास के कार्य किए तथा मणिपुर के लोगों के हित में विभिन्न प्रोजेक्ट शुरू किए।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x_67a8ae61e80b2.jpg" alt="" /></p>
<p>राज्य में मई 2023 में हिंसा शुरू हुई थी, जो अब तक बंद नहीं हुई है। इसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई है। यह हिंसा मैतेयी समुदाय और कुकी समुदाय के लोगों के बीच चल रही है। मैतेयी समुदाय के लोग मुख्य रूप से घाटी के इलाकों में और कुकी पर्वतीय इलाकों में रहते हैं।&nbsp;</p>
<p>करीब दो साल की हिंसा में अब तक ढाई सौ से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 60000 से अधिक विस्थापित हुए हैं। इस हिंसा में कई मंत्रियों और विधायकों के घर जला दिए गए।&nbsp;</p>
<p>प्रदेश में वर्ष 2022 में 28 फरवरी से 5 मार्च तक दो चरणों में राज्य विधानसभा के लिए मतदान हुआ था। प्रदेश विधानसभा में 60 सीटें हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दो साल से जारी हिंसा के बीच मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने इस्तीफा दिया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिल्ली चुनावः मोदी बोले यह विकास और सुशासन की जीत, केजरीवाल ने कहा जनता का फैसला स्वीकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/delhi-elections-modi-hails-victory-as-triumph-of-development-and-good-governance-kejriwal-respects-peoples-mandate.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 08 Feb 2025 22:56:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/delhi-elections-modi-hails-victory-as-triumph-of-development-and-good-governance-kejriwal-respects-peoples-mandate.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत मिलने पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने प्रदेश की जनता को धन्यवाद दिया है। वहीं आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने भी भाजपा को बधाई देते हुए उम्मीद जताई है कि वह जनता की उम्मीदों पर खरा उतरेगी।&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा, &ldquo;जनशक्ति सर्वोपरि! विकास जीता, सुशासन जीता। दिल्ली के अपने सभी भाई-बहनों को @BJP4India को ऐतिहासिक जीत दिलाने के लिए मेरा वंदन और अभिनंदन! आपने जो भरपूर आशीर्वाद और स्नेह दिया है, उसके लिए आप सभी का हृदय से बहुत-बहुत आभार। दिल्ली के चौतरफा विकास और यहां के लोगों का जीवन उत्तम बनाने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे, यह हमारी गारंटी है। इसके साथ ही हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि विकसित भारत के निर्माण में दिल्ली की अहम भूमिका हो। मुझे @BJP4India के अपने सभी कार्यकर्ताओं पर बहुत गर्व है, जिन्होंने इस प्रचंड जनादेश के लिए दिन-रात एक कर दिया। अब हम और भी अधिक मजबूती से अपने दिल्लीवासियों की सेवा में समर्पित रहेंगे।&rdquo;</p>
<p>गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा, &ldquo;दिल्ली के दिल में मोदी&hellip;। दिल्ली की जनता ने झूठ, धोखे और भ्रष्टाचार के &lsquo;शीशमहल&rsquo; को नेस्तनाबूत कर दिल्ली को &lsquo;आप-दा&rsquo; मुक्त करने का काम किया है। दिल्ली ने वादाखिलाफी करने वालों को ऐसा सबक सिखाया है, जो देशभर में जनता के साथ झूठे वादे करने वालों के लिए मिसाल बनेगा। यह दिल्ली में विकास और विश्वास के एक नए युग का आरंभ है।</p>
<p>केजरीवाल ने एक बयान में कहा, &ldquo;जनता का फैसला हम पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करते हैं।&rdquo; भाजपा को धन्यवाद देते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि, &ldquo;वह सभी उम्मीदों और आशाओं पर पूरा उतरेंगे। हमें पिछले 10 साल में जनता ने जो मौका दिया&hellip;, हमने बहुत सारे काम किए, शिक्षा के क्षेत्र में, स्वास्थ्य के क्षेत्र में, पानी के क्षेत्र में, बिजली के क्षेत्र में और भी अलग-अलग तरीके से लोगों को राहत पहुंचाने की कोशिश की। उनकी जिंदगी में और दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी हमने सुधारने की कोशिश की।&rdquo;&nbsp;</p>
<p>हार को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, &ldquo;हम न केवल एक कंस्ट्रक्टिव अपोजिशन का रोल निभाएंगे बल्कि हम समाज सेवा करेंगे, जनता के सुख-दुख में काम आएंगे&hellip; क्योंकि हम राजनीति में सत्ता के लिए नहीं आए। हम राजनीति को एक जरिया मानते हैं जिससे जनता की सेवा की जा सके, जिसके जरिए लोगों के सुख-दुख में काम आया जा सके।&rdquo;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिल्ली चुनावः मोदी बोले यह विकास और सुशासन की जीत, केजरीवाल ने कहा जनता का फैसला स्वीकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिल्ली में खत्म हुआ केजरी&amp;apos;काल&amp;apos;,  दो&amp;#45;तिहाई बहुमत के साथ 27 साल बाद भाजपा की वापसी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/bjp-to-form-government-in-delhi-after-27-years-pravesh-verma-defeats-arvind-kejriwal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 08 Feb 2025 13:24:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/bjp-to-form-government-in-delhi-after-27-years-pravesh-verma-defeats-arvind-kejriwal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 48 सीटों पर जीत दर्ज कर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के हिस्से सिर्फ 22 सीटें आई हैं। राज्य में कुल 70 विधानसभा सीटें हैं। तीसरी प्रमुख पार्टी कांग्रेस का इस बार भी खाता नहीं खुल पाया। राज्य में करीब 27 साल बाद भाजपा की सरकार बनेगी।</p>
<p>सबसे बड़ा उलट फिर नई दिल्ली सीट पर हुआ है जहां पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल भारतीय जनता पार्टी के प्रवेश वर्मा से करीब 4 हजार वोटों से हार गए हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री आतिशी कालकाजी से जीत गई हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के रमेश विधूड़ी को हराया।</p>
<p>चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, प्रवेश वर्मा को <span>30088</span> और अरविंद केजरीवाल को <span>25999</span> वोट मिले। कांग्रेस के संदीप दीक्षित को <span>4568</span> वोट प्राप्त हुए। प्रवेश वर्मा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं। 48 साल के वर्मा ने आरके पुरम स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल और किरोड़ीमल कॉलेज से पढ़ाई की है। उन्होंने फोर स्कूल आफ मैनेजमेंट से एमबीए की डिग्री भी ली। वर्ष 2013 में उन्होंने महरौली विधानसभा सीट पर पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी। इसके बाद वह दो बाद पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद भी रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसौदिया को जंगपुरा से कांटे की टक्कर में 675 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। आप के सोमनाथ भारती, सत्येंद्र जैन और सौरभ भारद्वाज जैसे प्रमुख नेता चुनाव हार गये हैं।&nbsp;अन्य चर्चित चेहतों में पटपड़गंज सीट पर आम आदमी पार्टी के अवध ओझा भी हार गए। अपनी हार स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि यह मेरी व्यक्तिगत हार है। मैं लोगों से जुड़ नहीं सका। मैं आगे उनसे मिलूंगा और अगली बार यहीं से चुनाव लड़ूंगा।</p>
<p>हालांकि भाजपा और आम आदमी पार्टी के वोट प्रतिशत में ज्यादा अंतर नहीं है। भाजपा को 45.56 प्रतिशत और आप को 43.57 प्रतिशत वोट मिले हैं। कांग्रेस 6.34 प्रतिशत वोटों के साथ तीसरे स्थान पर है।</p>
<p>आम लोगों को मुफ्त सुविधा देने का विरोध करने वाली भाजपा ने दिल्ली चुनाव में मुफ्त बस सेवा जैसी कई स्कीमें बंद नहीं करने का वादा किया। साथ ही प्रदूषण तथा गवर्नेंस जैसे मध्य वर्ग के मुद्दों की भी बात की। दूसरी ओर अप्रैल 2024 में अरविंद केजरीवाल के जेल जाने का आम आदमी पार्टी की चुनावी तैयारियों पर बुरा असर हुआ। भाजपा ने केजरीवाल के घर में महंगे रेनोवेशन, पानी की आपूर्ति की समस्याओं तथा रुके प्रोजेक्ट के मुद्दे भी उठाए।</p>
<p>आम आदमी पार्टी ने पहली बार 2015 में 70 में से 67 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। 2020 के चुनाव में भी उसे 62 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार उसका आधा मिलना भी मुश्किल लग रहा है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67a723b73e317.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिल्ली में खत्म हुआ केजरी'काल',  दो-तिहाई बहुमत के साथ 27 साल बाद भाजपा की वापसी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कोयला&amp;#45;आधारित संयंत्रों के प्रदूषण से भारत में गेहूं और चावल की पैदावार को नुकसान: अध्ययन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pollution-from-coal-fired-plants-reduces-wheat-and-rice-yields-in-india-study.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 05 Feb 2025 20:08:51 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pollution-from-coal-fired-plants-reduces-wheat-and-rice-yields-in-india-study.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एक नए अध्ययन से पता चला है कि कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों से होने वाला वायु प्रदूषण भारत में &nbsp;गेहूं और चावल की उपज को काफी नुकसान पहुंचा रहा है। इससे सालाना 80 करोड़ डॉलर से अधिक के आर्थिक नुकसान का अनुमान है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के डोएर स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी की रिसर्च के अनुसार, कोयला-आधारित विद्युत संयंत्रों से निकलने वाले नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) के प्रदूषण के कारण भारत के कई इलाको में गेहूं और चावल की पैदावार में 10% या उससे ज्यादा कमी आई है। ये दोनों अनाज देश की खाद्य सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p>कोयला-आधारित विद्युत संयंत्र भारत में 70% से अधिक बिजली आपूर्ति करते हैं। लेकिन ये वायु प्रदूषण का भी बड़ा कारण हैं। हालांकि, मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के प्रतिकूल प्रभावों का काफी अध्ययन किया गया है, लेकिन फसलों की पैदावार पर वायु प्रदूषण के प्रभाव का उतना सटीक आकलन नहीं किया गया था।</p>
<p><strong><a href="https://www.pnas.org/doi/10.1073/pnas.2421679122">प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज</a></strong> में प्रकाशित यह शोध भारत में गेहूं और चावल की पैदावार पर कोयला संयंत्रों से निकलने वाले नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) के प्रदूषण का आकलन करता है।</p>
<p>अपने अध्ययन में शोधकर्ताओं ने एक सांख्यिकीय मॉडल का उपयोग किया, जिसमें भारत के 144 बिजली संयंत्रों के उत्पादन और वायु की दिशा के आंकड़ों को उपग्रह से प्राप्त कृषि भूमि पर नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के स्तर और फसल उत्पादन के साथ जोड़कर देखा गया। अध्ययन में पाया गया कि कोयला-आधारित विद्युत संयंत्रों से होने वाला प्रदूषण 100 किमी दूर तक फसलों की पैदावार को प्रभावित करता है।</p>
<p>अध्ययन के अनुसार, यदि 100 किलोमीटर के दायरे में कृषि भूमि से कोयला संयंत्रों के प्रदूषण को घटाया जाए तो भारत में चावल उत्पादन सालाना लगभग 42 करोड़ डॉलर और गेहूं उत्पादन 40 करोड़ डॉलर तक बढ़ सकता है।</p>
<p>स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पीएचडी शोधार्थी कीरत सिंह कहते हैं, "हम यह समझना चाहते थे कि भारत में कोयला-आधारित बिजली उत्पादन से होने वाले प्रदूषण का कृषि पर क्या प्रभाव पड़ता है। कोयला-आधारित उत्पादन के जरिए बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।"</p>
<p>अध्ययन बताता है कि पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में कोयला संयंत्रों के प्रदूषण से फसलों की पैदावार में 10% से अधिक की गिरावट देखी गई है&mdash;जो कि 2011 से 2020 के बीच भारत में चावल और गेहूं की छह वर्षों की पैदावार वृद्धि के बराबर है।</p>
<p>अध्ययन इस बात पर जोर देता है कि भारत में कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के उत्सर्जन को नियंत्रित में स्वास्थ्य प्रभावों के साथ-साथ फसल नुकसान को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67a37798380a8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कोयला-आधारित संयंत्रों के प्रदूषण से भारत में गेहूं और चावल की पैदावार को नुकसान: अध्ययन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67a37798380a8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रबी बुवाई पिछले साल और 5 साल के औसत से अधिक, लेकिन तिलहन का क्षेत्र घटा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rabi-crop-sowing-exceeds-5-year-average-oilseeds-area-decreased.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 04 Feb 2025 20:51:46 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rabi-crop-sowing-exceeds-5-year-average-oilseeds-area-decreased.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में रबी फसलों की बुवाई 661.03 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। यह पिछले सीजन के 651.42 लाख हेक्टेयर और पांच साल के औसत यानी सामान्य क्षेत्र 635.30 लाख हेक्टेयर से अधिक है। रबी बुवाई का बढ़ना देश के कृषि उत्पादन के लिए अच्छा संकेत है।&nbsp;</p>
<p>कृषि मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, रबी की प्रमुख फसल <strong>गेहूं</strong> की बुवाई 324.88 लाख हेक्टेयर में हुई है जो पिछले सीजन के 318.33 लाख हेक्टेयर की तुलना में अधिक है। इस बार गेहूं की बुवाई सामान्य क्षेत्र 312.35 लाख हेक्टेयर से भी अधिक है।</p>
<p><strong>दलहन</strong> की खेती की ओर किसानों को रुझान बढ़ा है। चालू रबी सीजन में 140.89 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन फसलों की बुवाई हुई है। जबकि पिछले सीजन में यह आंकड़ा 137.80 लाख हेक्टेयर था। दालों की बुवाई का क्षेत्र भी पांच साल के औसत से अधिक है। चना, मटर, उड़द और मूंग का क्षेत्र गत वर्ष से अधिक है जबकि मसूर की बुवाई पिछले सीजन के बराबर हुई है।</p>
<p><strong>मोटे अनाजों की बुवाई में मामूली कमी</strong></p>
<p>श्री अन्न और मोटे अनाजों की बुवाई पिछले साल के 55.46 लाख हेक्टेयर से मामूली घटकर 55.25 लाख हेक्टेयर रही है। मोटे अनाजों में सबसे ज्यादा कमी <strong>ज्वार</strong> की बुवाई में आई है। ज्वार का क्षेत्र पिछले साल के 27.36 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस बार 24.35 लाख हेक्टेयर है।</p>
<p><strong>बाजरा</strong> की बुवाई भी पिछले साल से कम रही है जबकि <strong>मक्का</strong> का क्षेत्र पांच साल के औसत 22.11 लाख हेक्टेयर को पार कर 23.67 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। पशु आहार और एथेनॉल के लिए मक्का की मांग के चलते किसानों का रुझान मक्का की तरह बढ़ रहा है। जौ का रकबा भी गत वर्ष और सामान्य क्षेत्र दोनों से अधिक है।</p>
<p><strong>तिलहन के क्षेत्र में कमी </strong></p>
<p>रबी फसलों का क्षेत्र बढ़ने के बावजूद तिलहन फसलों की बुवाई में कमी आई है। गत वर्ष रबी सीजन में तिलहन फसलों की बुवाई 99.23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई थी, जबकि चालू रबी सीजन में तिलहन फसलों का क्षेत्र 97.47 लाख हेक्टेयर है।</p>
<p>तिलहन फसलों में सबसे ज्यादा कमी <strong>सरसों</strong> <strong>व रेपसीड</strong> की बुवाई में आई है। सरसों का क्षेत्र पिछले साल 91.83 लाख हेक्टेयर था जो इस बार घटकर 89.30 लाख हेक्टेयर रह गया है। हालांकि, <strong>मूंगफली</strong> का 3.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पिछले साल के मुकाबले अधिक है लेकिन यह सामान्य क्षेत्र से कम है। तिलहन की बुवाई घटने से खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की चुनौतियां बढ़ेंगी।&nbsp;</p>
<p></p>
<p style="text-align: center;"><strong>रबी फसलों के अंतर्गत&nbsp;बुवाई क्षेत्र कवरेज की प्रगति </strong></p>
<p style="text-align: center;"><span>(4 फरवरी 2025 तक, </span><span>क्षेत्रफल<strong>:&nbsp;</strong>लाख<strong>&nbsp;</strong>हेक्टेयर<strong>&nbsp;</strong>में)&nbsp;</span></p>
<table align="center" border="1" bordercolor="#ccc" cellpadding="5" cellspacing="0" class="TableNormal1" style="height: 1985px; margin-left: auto; margin-right: auto;">
<tbody>
<tr style="height: 69px;">
<td rowspan="2" style="height: 138px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span><strong>क्रम</strong></span></p>
<p><span><strong>सख्या</strong></span></p>
</td>
<td rowspan="2" style="height: 138px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p>&nbsp;</p>
<p><span><strong>फसलें</strong></span></p>
</td>
<td rowspan="2" style="height: 138px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span><strong></strong></span></p>
<p><span><strong>सामान्य क्षेत्र&nbsp;</strong>(<strong>डीईएस</strong>)</span></p>
<p>(2018-19 - 2022-23)</p>
</td>
<td colspan="2" style="height: 69px; width: 247.727px; text-align: center;">
<p><span><strong>बोया गया क्षेत्र</strong></span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 69px;">
<td style="height: 69px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span><strong>वर्तमान वर्ष</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>2024-25</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 69px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span><strong>पिछला वर्ष</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>2023-24</strong></span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 81px;">
<td style="height: 81px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span><strong>1</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span><strong>गेहूँ</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span><strong>312.35</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span><strong>324.88</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span><strong>318.33</strong></span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 81px;">
<td style="height: 81px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span><strong>2</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span><strong></strong></span></p>
<p><span><strong>चावल</strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span><strong>42.02</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span><strong>42.54</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span><strong>40.59</strong></span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 81px;">
<td style="height: 81px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span><strong>3</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span><strong></strong></span></p>
<p><span><strong>दालें</strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span><strong>140.44</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span><strong>140.89</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span><strong>137.80</strong></span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 81px;">
<td style="height: 81px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>क</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span></span></p>
<p><span>चना</span></p>
<p>&nbsp;</p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>100.99</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>98.55</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>95.87</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 81px;">
<td style="height: 81px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>ख</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span></span></p>
<p><span>मसूर</span></p>
<p>&nbsp;</p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>15.13</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>17.43</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>17.43</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 81px;">
<td style="height: 81px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>ग</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span></span></p>
<p><span>मटर</span></p>
<p>&nbsp;</p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>6.50</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>7.94</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>7.90</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>घ</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span>कुल्थी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>1.98</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>2.00</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>1.98</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 81px;">
<td style="height: 81px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>ङ</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span></span></p>
<p><span>उड़द</span></p>
<p>&nbsp;</p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>6.15</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>6.12</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>5.89</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 81px;">
<td style="height: 81px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>च</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p></p>
<p>मूंग&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>1.44</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>1.40</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>1.38</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 81px;">
<td style="height: 81px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>छ</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span>लैथिरस/ लतरी</span></p>
<p>&nbsp;</p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>2.79</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>2.80</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>2.75</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>ज</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span>अन्य दालें</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>5.46</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>4.65</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>4.60</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>4</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span><strong>श्री अन्न एवं मोटे अनाज</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span><strong>53.46</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span><strong>55.25</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span><strong>55.46</strong></span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 115px;">
<td style="height: 115px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>क</span></p>
</td>
<td style="height: 115px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span></span></p>
<p><span>ज्वार</span></p>
<p>&nbsp;</p>
</td>
<td style="height: 115px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>24.37</span></p>
</td>
<td style="height: 115px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>24.35</span></p>
</td>
<td style="height: 115px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>27.36</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>ख</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span>बाजरा</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>0.37</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>0.14</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>0.17</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 115px;">
<td style="height: 115px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>ग</span></p>
</td>
<td style="height: 115px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span></span></p>
<p><span>रागी</span></p>
<p></p>
</td>
<td style="height: 115px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>0.74</span></p>
</td>
<td style="height: 115px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>0.73</span></p>
</td>
<td style="height: 115px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>0.68</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>घ</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p>गौण मोटे अनाज</p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>0.15</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>0.16</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>0.00</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 115px;">
<td style="height: 115px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>ङ</span></p>
</td>
<td style="height: 115px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span>मक्का</span></p>
</td>
<td style="height: 115px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>22.11</span></p>
</td>
<td style="height: 115px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>23.67</span></p>
</td>
<td style="height: 115px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>21.75</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 81px;">
<td style="height: 81px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>च</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span></span></p>
<p><span>जौ</span></p>
<p>&nbsp;</p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>5.72</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>6.20</span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>5.51</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 81px;">
<td style="height: 81px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><strong>5</strong></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><strong>तिलहन</strong></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span><strong>87.02</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span><strong>97.47</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 81px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span><strong>99.23</strong></span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>क</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span>&nbsp;सरसों और रेपसीड</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>79.16</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>89.30</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>91.83</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>ख</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span>मूंगफली</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>3.82</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>3.65</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>3.42</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>ग</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span>कुसुम</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>0.72</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>0.72</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>0.65</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>घ</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span>सूरजमुखी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>0.81</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>0.74</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>0.53</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>ङ</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span>तिल</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>0.58</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>0.42</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>0.49</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>च</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span>अलसी</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>1.93</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>2.26</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>1.92</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td style="height: 47px; width: 34.1193px; text-align: center;">
<p><span>छ</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 156.605px; text-align: center;">
<p><span>अन्य तिलहन</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span>0.00</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span>0.39</span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span>0.39</span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 47px;">
<td colspan="2" style="height: 47px; width: 201.634px; text-align: center;">
<p><span><strong>कुल</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 124.361px; text-align: center;">
<p><span><strong>635.30</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 119.389px; text-align: center;">
<p><span><strong>661.03</strong></span></p>
</td>
<td style="height: 47px; width: 117.429px; text-align: center;">
<p><span><strong>651.42</strong></span></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align: center;">&nbsp;</p>
<p style="text-align: center;">&nbsp;</p>
<p style="text-align: center;">&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67a22f36b38fa.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रबी बुवाई पिछले साल और 5 साल के औसत से अधिक, लेकिन तिलहन का क्षेत्र घटा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67a22f36b38fa.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्राकृतिक खेती पर खूब जोर, लेकिन बजट कम और वास्तविक खर्च उससे भी कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/emphasis-on-natural-farming-grows-but-budget-and-spending-remain-low.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 03 Feb 2025 18:41:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/emphasis-on-natural-farming-grows-but-budget-and-spending-remain-low.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले कुछ वर्षों से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की खूब बातें हो रही हैं। केंद्र सरकार प्राकृतिक खेती पर काफी जोर दे रही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों के बजट के आंकड़े देश में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के मामले में खास उत्साहजनक नजर नहीं आते।&nbsp;<br />&nbsp;<br />सुभाष पालेकर की जीरो बजट नैचुरल फार्मिंग (ZBNF) से प्रेरणा लेते हुए वर्ष 2019-20 के बजट में वित्त मंत्री ने जीरो बजट खेती को अपनाने पर जोर दिया था। तब <strong>परंपरागत कृषि विकास योजना</strong> के तहत एक सब-स्कीम भारतीय <strong>प्राकृतिक कृषि पद्धति</strong> (BPKP) के जरिए किसानों को रासायनिक खेती की बजाय प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया। हालांकि, परंपरागत कृषि विकास योजना के लिए वर्ष 2019-20 में मात्र 325 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था, जिसमें से 284 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाये।&nbsp;</p>
<table width="411" style="border-collapse: collapse; width: 100%; height: 220px; border-style: solid; margin-left: auto; margin-right: auto;">
<tbody>
<tr style="height: 20px;">
<td colspan="4" style="width: 100%; height: 20px; text-align: center;"><strong>प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की योजना का बजट</strong><em> (करोड़ रु. में)</em></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 17.9866%; height: 20px; text-align: center;"><strong>वर्ष&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 25.6376%; height: 20px; text-align: center;"><strong>बजट अनुमान&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 29.7987%; height: 20px; text-align: center;"><strong>संशोधित अनुमान</strong></td>
<td style="width: 26.5772%; height: 20px; text-align: center;"><strong>वास्तविक खर्च&nbsp;</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 17.9866%; height: 20px; text-align: center;">2019-20</td>
<td style="width: 25.6376%; height: 20px; text-align: center;">325</td>
<td style="width: 29.7987%; height: 20px; text-align: center;">299</td>
<td style="width: 26.5772%; height: 20px; text-align: center;">284</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 17.9866%; height: 20px; text-align: center;">2020-21</td>
<td style="width: 25.6376%; height: 20px; text-align: center;">500</td>
<td style="width: 29.7987%; height: 20px; text-align: center;">350</td>
<td style="width: 26.5772%; height: 20px; text-align: center;">381</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 17.9866%; height: 20px; text-align: center;">2021-22</td>
<td style="width: 25.6376%; height: 20px; text-align: center;">450</td>
<td style="width: 29.7987%; height: 20px; text-align: center;">100</td>
<td style="width: 26.5772%; height: 20px; text-align: center;">89</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 17.9866%; height: 20px; text-align: center;">2022-23</td>
<td style="width: 25.6376%; height: 20px; text-align: center;">0</td>
<td style="width: 29.7987%; height: 20px; text-align: center;">0</td>
<td style="width: 26.5772%; height: 20px; text-align: center;">0</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 17.9866%; height: 20px; text-align: center;">2023-24</td>
<td style="width: 25.6376%; height: 20px; text-align: center;">459</td>
<td style="width: 29.7987%; height: 20px; text-align: center;">100</td>
<td style="width: 26.5772%; height: 20px; text-align: center;">30</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 17.9866%; height: 20px; text-align: center;">2024-25</td>
<td style="width: 25.6376%; height: 20px; text-align: center;">366</td>
<td style="width: 29.7987%; height: 20px; text-align: center;">100</td>
<td style="width: 26.5772%; height: 20px; text-align: center;"></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 17.9866%; height: 20px; text-align: center;">2025-26</td>
<td style="width: 25.6376%; height: 20px; text-align: center;">616</td>
<td style="width: 29.7987%; height: 20px; text-align: center;"></td>
<td style="width: 26.5772%; height: 20px; text-align: center;"></td>
</tr>
<tr style="height: 40px;">
<td colspan="4" style="width: 100%; height: 40px; text-align: center;"><em><strong>नोट:</strong> 2019 से 23 तक परंपरांगत कृषि विकास योजना, 2023 से राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, <strong>स्रोत:</strong> केंद्रीय बजट, भारत सरकार</em></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>अगले वर्ष 2020-21 में भी कमोबेश यही स्थिति थी। तब परंपरागत कृषि विकास योजना के लिए 500 करोड़ रुपये के बजट का ऐलान हुआ था जिसमें से वास्तविक खर्च 381 करोड़ रुपये ही हो पाया। वर्ष 2021-22 में परंपरागत कृषि विकास योजना का बजट घटाकर 450 करोड़ रुपये कर दिया गया, लेकिन इतने कम बजट में भी वास्तविक खर्च मात्र 89 करोड़ रुपये हुआ था। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस योजना को ही बंद कर दिया था। ऐसी कई योजनाओं को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में समाहित कर दिया गया था।&nbsp;</p>
<p>वर्ष 2022-23 के बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गंगा नदी के किनारे 5 किलोमीटर चौड़े क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की घोषणा की थी। वर्ष 2023-24 के बजट में ऐलान किया गया कि अगले तीन वर्षों में एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने में सहयोग किया जाएगा। इसके लिए 10 हजार बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर बनने थे। इतने बड़े लक्ष्य के बावजूद राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के लिए 2023-24 के बजट में मात्र 459 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान किया गया, जिसे संशोधित अनुमानों में घटाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया गया। लेकिन वास्तविक खर्च केवल 30 करोड़ रुपये हुआ।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x_67a0c60080317.jpg" alt="" width="537" height="303" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><br />वर्ष 2024-25 के बजट में किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने के मिशन का बजट घटाकर 365 करोड़ रुपये कर दिया गया। 2024-25 संशोधित बजट में इसे और भी घटाकर मात्र 100 करोड़ रुपये कर दिया।</p>
<p>अब 2025-26 के बजट में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के लिए 616 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कहने को यह पिछले साल के बजट से अधिक है लेकिन गत वर्षों के प्रदर्शन को देखते हुए यह खर्च होने की संभावना कम है।&nbsp; वास्तविक खर्च बजट अनुमानों से काफी कम रह सकता है।&nbsp;</p>
<p>साल-दर-साल बजट आवंटन के मुकाबले कम खर्च, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की योजना की चुनौतियों को रेखांकित करता है। जबकि केंद्र सरकार ने मिशन मोड में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन शुरू किया है। अगले दो वर्षों में, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से 1 करोड़ किसानों को जोड़ना और करीब 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती करवाना एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67a0c725aa70e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्राकृतिक खेती पर खूब जोर, लेकिन बजट कम और वास्तविक खर्च उससे भी कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67a0c725aa70e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बजट 2025&amp;#45;26: धन धान्य योजना, केसीसी ऋण सीमा बढ़ाने का स्वागत, इंडस्ट्री ने कहा इससे आत्मनिर्भरता में मदद मिलेगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/union-budget-2025-receives-strong-backing-from-agriculture-and-industry-leaders.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 02 Feb 2025 17:56:46 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/union-budget-2025-receives-strong-backing-from-agriculture-and-industry-leaders.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उद्योग जगत ने आम बजट 2025-26 में कृषि क्षेत्र के लिए घोषित कई प्रस्तावों की सराहना की है। इसका कहना है कि कम उत्पादकता वाले देश के 100 जिलों में 1.7 करोड़ किसानों के लिए धन धान्य कृषि योजना ग्रामीण समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। खाद्य तेल मिशन का स्वागत करते हुए इंडस्ट्री लीडर्स ने किसानों को NAFED और NCCF जैसी एजेंसियों के साथ खरीद समझौते करने के कदम को बेहतर बताया। उन्होंने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से वित्तीय सहायता बढ़ाने से कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। बाजरा उत्पादन, सतत कृषि और ड्रोन जैसी तकनीकी प्रगति पर बजट का जोर भारत की दीर्घकालिक कृषि रणनीति के अनुरूप है।</p>
<p>धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के चेयरमैन एमेरिटस <strong>डॉ. आर.जी. अग्रवाल</strong> ने एक बयान में कहा, &ldquo;हम भारत को दुनिया का खाद्यान्न भंडार बनाने की सरकार की पहल की बहुत सराहना करते हैं। 100 कम उत्पादकता वाले जिलों में 1.7 करोड़ किसानों के लिए धन धान्य कृषि योजना ग्रामीण समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। खाद्य तेल मिशन, किसानों को NAFED और NCCF जैसी एजेंसियों के साथ खरीद समझौते करने में सक्षम बनाता है, मूल्य सुरक्षा प्रदान करेगा, घरेलू तेल के बीजों का उत्पादन को बढ़ाएगा और भारत की निर्यात शक्ति को बढ़ाएगा। बढ़ती खपत से मेल खाने के लिए सब्जी उत्पादन बढ़ाने का सरकार का कदम भी सराहनीय है।</p>
<p>उन्होंने कहा, यह बजट किसानों की भावना को बढ़ावा देने वाले मेक इन इंडिया कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उच्च उपज वाले बीजों पर राष्ट्रीय मिशन, उत्पादन के बाद भंडारण की सुविधा, 7.7 करोड़ किसानों के लिए केसीसी ऋण ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख करना और बिहार में मखाना बोर्ड का निर्माण सराहनीय पहल हैं, ये कृषि उत्पादकता में सुधार और किसानों को समर्थन देने के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं। साथ ही, दालों में 'आत्मनिर्भरता' के लिए 6 वर्षीय मिशन की घोषणा, जिसमें तूर, उड़द और मसूर के लिए खरीद समझौते शामिल हैं, कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों को समृद्ध बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।</p>
<p>इस्मा (ISMA) ने बजट को कृषि क्षेत्र के लिए फायदेमंद बताया। एसोसिएशन के महानिदेशक <strong>दीपक बल्लानी</strong> ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से वित्तीय सहायता बढ़ाने और ऋण सीमा बढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि इससे कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की भी सराहना की। इस्मा ने ने धन-धान्य कृषि योजना का भी समर्थन किया, जो कम उत्पादकता वाले जिलों में कृषि सुधार के साथ-साथ किसानों को उचित लाभ सुनिश्चित करने के लिए है।</p>
<p>सॉल्यूबल फर्टिलाइजर इंडस्ट्री एसोसिएशन के सलाहकार <strong>डॉ. सुहास बुद्धे</strong> ने बजट में MSME और कृषि-इनपुट क्षेत्र को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने क्रेडिट गारंटी के विस्तार और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के सरकार के फैसले को सराहा, और कहा कि इससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा तथा आयात पर निर्भरता कम होगी। इसके अलावा, बाजरा उत्पादन, सतत कृषि और ड्रोन जैसी तकनीकी प्रगति पर बजट का जोर भारत की दीर्घकालिक कृषि रणनीति के अनुरूप है।</p>
<p>हालांकि डॉ. बुद्धे ने कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों का भी जिक्र किया, विशेष रूप से उन्नत कृषि इनपुट के आयात के विकल्प के उपायों की कमी और MSME कृषि-इनपुट निर्माताओं के लिए GST रिफंड में असमानता। उन्होंने बताया कि 13% जीएसटी का अंतर कार्यशील पूंजी को प्रभावित कर रहा है, जिससे निर्माताओं को कर दायित्वों को पूरा करने के लिए ऋण लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने चाइनीज आयात के खिलाफ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक जीएसटी रिफंड तंत्र की मांग की। इसके अलावा, उन्होंने कृषि स्कूलों के लिए विशेष बजटीय प्रावधानों की जरूरत बताई जो किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक का प्रशिक्षण देने में मदद कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>क्रॉपलाइफ इंडिया के चेयरमैन और क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक <strong>अंकुर अग्रवाल</strong> ने बजट के उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों से माइग्रेशन रोकने और महिलाओं व युवाओं को प्राथमिकता देने वाली योजनाओं को एक स्वागत योग्य कदम बताया। उन्होंने कहा कि बजट प्रस्तावों से ड्रोन और प्रिसीजन एग्रीकल्चर जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने में वृद्धि होगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_679f4745a8447.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बजट 2025-26: धन धान्य योजना, केसीसी ऋण सीमा बढ़ाने का स्वागत, इंडस्ट्री ने कहा इससे आत्मनिर्भरता में मदद मिलेगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_679f4745a8447.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उद्योग जगत ने बजट 2025&amp;#45;26 का स्वागत किया, कहा यह जिम्मेदारीपूर्ण और संतुलित बजट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/industry-welcomes-budget-2025-26-calls-it-responsible-and-balanced.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 02 Feb 2025 15:52:55 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/industry-welcomes-budget-2025-26-calls-it-responsible-and-balanced.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उद्योग जगत ने केंद्रीय बजट 2025-26 का यह कह कर स्वागत किया है कि यह संतुलित और दूरदृष्टि वाला वित्तीय खाका है, जिसमें कृषि और ग्रामीण विकास पर विशेष जोर दिया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पीएम धन-धान्य कृषि योजना और उच्च उत्पादकता वाले बीजों के लिए राष्ट्रीय मिशन जैसे बजट प्रस्तावों से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, सिंचाई में सुधार करने और उन्नत तकनीक तक पहुंच बेहतर करने के लक्ष्य हासिल होंगे। डीसीएम श्रीराम लिमिटेड के अजय श्रीराम और बायर के साइमन वीबुश सहित उद्योग जगत के लीडर्स ने बजट में सतत कृषि, अनुसंधान और बुनियादी ढांचे पर फोकस का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को बदलने और दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता रखता है।</p>
<p>डीसीएम श्रीराम लिमिटेड के चेयरमैन और सीनियर एमडी <strong>अजय श्रीराम</strong> ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने एक जिम्मेदार और संतुलित बजट प्रस्तुत किया है। इसमें कर रियायतों की मांग को पूरा करते हुए दीर्घकालिक लाभ के लिए व्यय को भी बनाए रखा गया है। उन्होंने अनावश्यक खर्चों से बचते हुए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को बेहतर किया है। यह बजट निर्यात, ग्रामीण समृद्धि, कृषि और खपत को प्रोत्साहित करने जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखता है। यह अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक वृद्धि के लिए सकारात्मक संकेत है। &nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x_679f47497a749.jpg" alt="" /></p>
<p>अजय श्रीराम के अनुसार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कृषि को विकास का पहला इंजन कहा है। इस क्षेत्र में जिन महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान दिया गया है, उनमें फसल विविधीकरण, पैदावार में सुधार, दलहन उत्पादन में वृद्धि और सिंचाई के विस्तार जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। अधिक उपज वाले बीजों के लिए राष्ट्रीय मिशन और कपास उत्पादकता मिशन को दी गई प्राथमिकता भी अच्छे कदम हैं। यह सब जानते हैं कि कृषि अनुसंधान निवेश पर अत्यधिक लाभ देता है। इस पहल का पूर्ण लाभ तभी मिलेगा जब सार्वजनिक अनुसंधान और निजी क्षेत्र के अनुसंधान के बीच अधिक सहयोग होगा, राज्यों में एकसमान नीतियों को अपनाया जाएगा और नए बीजों को समयबद्ध रूप से मंजूरी दी जाएगी। यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि भारत उन्नत तकनीक की दौड़ में पीछे न रहे।</p>
<p>बायर में क्रॉप साइंस डिविजन के कंट्री डिविजनल हेड (भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका) <strong>साइमन वीबुश</strong> ने कहा कि केंद्रीय बजट कृषि उत्पादकता और स्थिरता को बढ़ाने के लिए एक व्यापक रणनीति प्रस्तुत करता है। यह विकसित भारत के विजन के अनुरूप है। धन-धान्य कृषि योजना, जिसमें 100 जिलों में 1.7 करोड़ किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है, विशेष रूप से सराहनीय है।</p>
<p>इसके तहत फसल कटाई के बाद भंडारण, सिंचाई और ऋण उपलब्धता में सुधार पर जोर दिया गया है। इससे किसानों को सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की उम्मीद है। इसके अलावा, सब्जी उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर क्लस्टर स्थापित करने और एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) व स्टार्टअप्स को सब्जी आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा देने में सहायता देने की योजना है। इससे न केवल ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा और बागवानी क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि देश की पोषण आवश्यकताओं को भी पूरा किया जा सकेगा।</p>
<p>जलवायु-सहिष्णु फसलों पर ध्यान केंद्रित करने, अधिक उपज वाले बीजों के विकास और वितरण के लिए समर्पित मिशन और गारंटी वाली खरीद प्रणाली से खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को और बढ़ावा मिलेगा, खासकर तिलहन और दालों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में। नई तकनीकों तक पहुंच और कपास उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष समर्थन से यह क्षेत्र और मजबूत होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा, &ldquo;बायर में हम इन प्रस्तावों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह सतत कृषि को आगे बढ़ाने के हमारे मिशन के अनुरूप है। हम सरकार और अन्य भागीदारों के साथ मिलकर इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए तत्पर हैं।&rdquo;</p>
<p>पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर (एग्रीकल्चर एंड फूड) <strong>शशि कांत सिंह</strong> ने कहा, "कृषि क्षेत्र के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपये के आवंटन के साथ इस वर्ष का बजट कृषि क्षेत्र के दीर्घकालिक विजन को और मजबूत करता है। 100 जिलों के लिए धन-धान्य कृषि योजना इस क्षेत्र को नया प्रोत्साहन दे सकती है। फसल उत्पादकता बढ़ाने और फसल विविधीकरण के लिए विशिष्ट पहल के साथ-साथ अधिक उपज वाले बीजों (HYS) को बढ़ावा देने की रणनीति एक स्वागत योग्य कदम है। सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सशक्त बनाने के लिए निरंतर समर्थन और मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए पहल कृषि क्षेत्र के समावेशी और सतत विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।"</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_679f474634c4d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उद्योग जगत ने बजट 2025-26 का स्वागत किया, कहा यह जिम्मेदारीपूर्ण और संतुलित बजट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_679f474634c4d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केसीसी की लिमिट 5 लाख, धन&amp;#45;धान्य योजना सहित कृषि से जुड़ी 10 बड़ी घोषणाएं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/10-big-announcements-for-village-farmers-including-kcc-limit-of-5-lakh-pm-dhan-dhanya-yojana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 01 Feb 2025 16:54:46 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/10-big-announcements-for-village-farmers-including-kcc-limit-of-5-lakh-pm-dhan-dhanya-yojana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त वर्ष 2025-26 का आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने GYAN<span> यानी गरीब</span>, <span>युवा</span>, <span>अन्नदाता और नारी </span>को ध्यान में रखकर 10 व्यापक क्षेत्रों में बजट उपायों का ऐलान किया। इनमें कृषि के विकास और ग्रामीण समृद्धि को खास तरजीह दी गई है। वित्त मंत्री ने कृषि को भारत की विकास यात्रा का प्रथम ईंजन करार देते हुए कई घोषणाएं कीं।</p>
<p>वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि राज्यों की भागीदारी के साथ <strong>&lsquo;</strong><strong>प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना</strong><strong>&rsquo;</strong> शुरू की जाएगी। इसके अंतर्गत कम उत्पादकता वाले 100 जिलों को शामिल किया गया है। इन जिलों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, <span>फसल विविधता और सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने</span>, पंचायत व ब्लॉक स्तर पर भंडारण, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और ऋणों की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम से 1.7 करोड़ किसानों को मदद मिलने की संभावना है।</p>
<p><strong>किसान क्रेडिट कार्ड </strong><strong>(</strong><strong>केसीसी</strong><strong>)</strong> के माध्यम से मिलने वाले कर्ज की सीमा को 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा की गई है। यह किसानों के लिए बजट की बड़ी घोषणा है। इसका लाभ केसीसी के दायरे में आने वाले लगभग 7.7 करोड़ किसानों, मछुआरों और डेयरी किसानों मिलेगा। किसान क्रेडिट कार्ड पर 7 फीसदी की ब्याज दर पर कर्ज़ मिलता है। समय पर कर्ज़ चुकाने वालों को सरकार 3 फीसदी की ब्याज छूट भी देती है।&nbsp;</p>
<p><strong>ग्रामीण समृद्धि</strong> के लिए एक व्यापक बहु-क्षेत्रीय &lsquo;ग्रामीण समृद्धि और अनुकूलन&rsquo; कार्यक्रम प्रारम्भ किया जाएगा। इससे कौशल, निवेश और तकनीक के माध्यम से रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा, <span>साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। पहले चरण में </span>100 विकासशील कृषि जिलों को शामिल किया गया है। यह कार्यक्रम खासतौर पर ग्रामीण महिलाओं, युवाओं, &nbsp;सीमांत व छोटे किसानों और भूमिहीन परिवारों पर केंद्रित होगा।</p>
<p>इस बार भी वित्त मंत्री ने खाद्य तेलों और दलहन में आत्मनिर्भरता लाने पर जोर दिया है। सरकार अरहर, उड़द और मसूर पर विशेष ध्यान देते हुए 6-वर्षीय <strong>&ldquo;<span>दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन</span>&rdquo;</strong> शुरू करने जा रही है। केंद्रीय एजेंसियां (नेफेड और एनसीसीएफ) अगले चार वर्षों के दौरान किसानों से तीन दलहनों की अधिकतम खरीद करेंगी।</p>
<p><strong>सब्जियों और फलों के लिए व्यापक कार्यक्रम</strong> की घोषणा भी बजट में की गई है। सब्जियों व फलों के उत्पादन, आपूर्ति,&nbsp; <span>प्रसंस्करण और किसानों के लिए लाभकारी मूल्य को बढ़ावा देने के लिए</span> राज्यों की भागीदारी से यह कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसमें किसान उत्पादक संगठनों और सहकारी समितियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।</p>
<p><strong>&lsquo;<span>कपास उत्पादकता मिशन</span>&rsquo;</strong> की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि पंच-वर्षीय मिशन से कपास की उत्पादकता और लंबे रेशे वाली किस्मों को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों की आमदनी बढ़ाने और परंपरागत वस्त्र क्षेत्र के लिए गुणवत्तापूर्ण कपास की आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। &nbsp;</p>
<p>किसानों को गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने के लिए <strong>राष्ट्रीय उच्च पैदावार बीज मिशन</strong> लागू किया जाएगा। इससे अनुसंधान इकोसिस्टम को मजबूत किया जाएगा। कार्यक्रम के जरिए जुलाई 2024 से जारी किए गए बीजों की 100 से अधिक किस्मों को वाणिज्यिक स्तर पर उपलब्ध कराया जाएगा। &nbsp;</p>
<p>मखानों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन में सुधार के लिए <strong>बिहार में मखाना बोर्ड</strong> स्थापित किया जाएगा। बोर्ड मखाना किसानों को मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने का प्रयास करेगा।</p>
<p><strong>यूरिया उत्पादन</strong> बढ़ाने के लिए सरकार असम के नामरूप में 12.7 लाख मीट्रिक टन की वार्षिक उत्पादन क्षमता वाला एक संयंत्र स्थापित करेगी। इस संयंत्र के साथ-साथ पूर्वी क्षेत्र में निष्क्रिय पड़े तीन यूरिया संयंत्रों में उत्पादन को पुनः प्रारंभ करने से यूरिया आपूर्ति बढ़ाने में सहायता मिलेगी।</p>
<p>सरकार 1.5 लाख ग्रामीण डाकघरों और 2.4 लाख डाक सेवकों के विशाल नेटवर्क वाले <strong>भारतीय डाक</strong> को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने के लिए तैयार किया जाएगा। भारतीय डाक को विशाल सार्वजनिक लॉजिस्टिक संगठन के रूप में बदला जाएगा।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_679e047081bcf.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केसीसी की लिमिट 5 लाख, धन-धान्य योजना सहित कृषि से जुड़ी 10 बड़ी घोषणाएं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अर्थव्यवस्था के पहले इंजन में ईंधन की कंजूसी, कृषि के लिए बातें ज्यादा संसाधन कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/low-fuel-in-the-first-engine-of-economy-no-major-boost-to-agriculture-allocation-in-budget-2025-25.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 01 Feb 2025 16:17:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/low-fuel-in-the-first-engine-of-economy-no-major-boost-to-agriculture-allocation-in-budget-2025-25.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नये वित्त वर्ष 2025-26 का बजट पेश करते हुए विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए कृषि पर जोर देने का दावा किया और कहा कि यह अर्थव्यवस्था का यह पहला इंजन है लेकिन जब इस इंजन में संसाधनों के आवंटन का ईंधन डालने की बात आई तो वह कंजूसी कर गईं। कृषि मंत्रालय का कुल बजट प्रावधान पिछले साल के मुकाबले कम है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के लिए वर्ष 2025-26 में 137756 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान है जो चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान 141351 करोड़ रुपये से करीब 3595 करोड़ रुपये कम है।&nbsp;अधिकांश योजनाओं में आवंटन लगभग पिछले साल के बराबर ही रखा गया है। कुछ योजनाओं में जरूर आवंटन अधिक किया गया है लेकिन यह बहुत बड़ा आवंटन नहीं है।</p>
<p>प्रधानमंत्री धनधान्य कृषि योजना से लेकर कॉटन मिशन, दालों में आत्मनिर्भरता और 100 जिलों को राज्यों का साथ मिलकर उत्पादकता और आय में बढ़ोतरी की योजनाएं लागू करने की घोषणा &nbsp;की गई है, लेकिन कृषि शोध और विकास के लिए कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं है। पीएम किसान सम्मान निधि चालू साल के स्तर पर ही है। यही नहीं किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा को बढ़ाकर पांच लाख किया गया है लेकिन उसके लिए ब्याज छूट का प्रावधान पिछले बजट के स्तर पर ही रखा गया है।</p>
<p>किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ने का फायदा जरूर कुछ किसानों को मिलेगा, लेकिन यह बात भी एक तथ्य है कि देश में 88 फीसदी किसान लघु और सीमांत किसान हैं और उनकी जोत का औसत एक हैक्टेयर से कम है। ऐसे में इस सीमा के बढ़ने का फायदा कुछ किसानों को ही मिलेगा क्योंकि बैंक द्वारा फाइनेंशिलय वैल्यू के आधार पर ही क्रेडिट की सीमा तय की जाती है।</p>
<p>पीएम फसल बीमा के लिए चालू साल के संशोधित अनुमान 15864 करोड़ रुपये के मुकाबले नये साल के लिए 12242 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। केसीसी पर ब्याज छूट के लिए 22600 करोड़ के चालू साल के बराबर ही प्रावधान किया गया है। वहीं पीएम किसान सम्मान योजना के लिए 63500 करोड़ रुपये के प्रावधान को ही बरकरार रखा गया है। पीएमआशा के लिए 6945.36 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया जो पिछले बजट में 6437 करोड़ रुपये था। किसानों को पेंशन देने वाली पीएम मानधन योजना के लिए केवल 120 करोड़ रुपये का प्रावधान है जो पिछले बजट में 100 करोड़ रुपये था। दस हजार एफपीओ बनाने की योजना के लिए 584.60 करोड़ रुपये का प्रवाधान है जो पिछले साल के लगभग बराबर है। एग्री इंफ्रा फंड के लिए ब्याज छूट देने के लिए प्रावधान को 750 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 900 करोड़ रुपये किया गया है। मधुमक्खी पालन के लिए 75 करोड़ और एग्री स्टार्ट-अप के लिए 71.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।</p>
<p>ड्रोन दीदी के लिए बजट को 250 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 676.85 करोड़ रुपये किया गया है। कॉटन मिशन के लिए 500 करोड़ रुपये और मिशन पल्सेज के लिए 1000 करोड़ रुपये दिये गये हैं। मिशन आन वेजिटेबल और फ्रूट के लिए 500 करोड़ रुपये और नेशनल मिशन आन हाइब्रिड के लिए 100 करोड़ और मखाना बोर्ड के लिए भी 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।&nbsp;</p>
<p>डिपार्टमेंट ऑन एग्रीकल्चर एंड रिसर्च (डेअर) के लिए 10466.39 करोड़ रुपये का प्रावधान है जो पिछले साल के बजट प्रावधान 10156.35 करोड़ रुपये से केवल 310.04 करोड़ रुपये अधिक है। फिशरीज और पशुपालन के बजट में जरूर बढ़ोतरी की गई है। मत्स्त्य संपदा योजना के लिए आवंटन &nbsp;1500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2465 करोड़ रुपये किया गया है वहीं पशुपालन एवं डेयरी विभाग का बजट 3839.25 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 4840.40 करोड़ रुपये कर दिया है।&nbsp;</p>
<p>खाद्य प्रसंस्करण के बजट में बढ़ोतरी कर वहां पीएलआई के लिए आवंटन 700 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1200 करोड़ रुपये किया गया है। इसी तरह पीएम किसान संपदा योजना के लिए बजट 630 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 903.38 करोड़ रूपये किया गया है।&nbsp;</p>
<p>उर्वरकों पर सब्सिडी की नीति में कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। अगले साल में यूरिया के लिए 100839.50 करोड़ रुपये और एनबीएस के तहत एनपीके उर्वरकों पर मिलने वाली सब्सिडी 49 हजार करोड़ रुपये रखा गया है जो चालू साल के संशोधित अनुमानों से थोड़ा कम है।</p>
<p>इस तरह से देखा जाए तो वित्त मंत्री ने कृषि को विकास की गाड़ी में सबसे पहला इंजन तो बनाया है लेकिन कोई बड़ी योजना या बड़ा वित्तीय प्रावधान नहीं किया जो उनकी इस बात का समर्थन करता हो। हालांकि आर्गेनिक उर्वरकों के लिए सब्सिडी को 45 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 150 करोड़ रुपये किया गया है वहीं एग्रोकेमिकल बनाने वाली कंपनियों को पीएलआई के तहत लाया गया है। साथ ही निजी क्षेत्र को कृषि शोध में प्रोत्साहन के लिए रिसर्च पर किये गये खर्च के 200 फीसदी के बराबर डिडक्शन को फिर से लागू कर दिया है। अच्छी बात यह है कि वित्त मंत्री ने किसानों की आय दो गुना करने और नेचुरल फार्मिंग व जीरो बजट फार्मिंग जैसी पुरानी बातों को दोहराने से परहेज रखा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अर्थव्यवस्था के पहले इंजन में ईंधन की कंजूसी, कृषि के लिए बातें ज्यादा संसाधन कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नई कर व्यवस्था में 12 लाख तक की आय पर टैक्स नहीं, कृषि संबंधी कई योजनाओं पर खर्च में कटौती]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/no-tax-for-income-up-to-12-lakh-in-new-tax-regime-expenditure-under-many-schemes-reduced.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 01 Feb 2025 16:15:04 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/no-tax-for-income-up-to-12-lakh-in-new-tax-regime-expenditure-under-many-schemes-reduced.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 50.65 लाख करोड़ रुपये के बजट में मध्य वर्ग, खास कर नौकरीपेशा लोगों को टैक्स में बड़ी राहत देने की घोषणा की है। इनकम टैक्स की नई व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की सालाना आय वालों को अब कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। हालांकि पुरानी टैक्स व्यवस्था में 5 लाख रुपये की पुरानी सीमा को ही बरकरार रखा गया है। बजट में कृषि क्षेत्र के लिए कई घोषणाएं हैं- कम उत्पादकता वाले 100 जिलों के लिए धन धान्य कृषि योजना, खाद्य तेल और बीज के लिए राष्ट्रीय मिशन, दालों में आत्मनिर्भरता के लिए छह साल का मिशन। किसान क्रेडिट कार्ड के तहत कर्ज की सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की गई है।</p>
<p>मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार ने अपने खर्चों में कटौती की है। इसे 48.20 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान के मुकाबले संशोधित कर 47.16 लाख करोड़ किया गया है। इसका असर प्रमुख योजनाओं के प्रावधानों में दिखता है। कृषि बजट 1.52 लाख करोड़ के बजट अनुमान के मुकाबले 1.41 लाख करोड़ रह गया। ग्रामीण विकास के बजट में तो इस साल 28 प्रतिशत की कटौती की गई है। हालांकि मनरेगा और पीएम गरीब कल्याण योजना समेत कुछ योजनाओं के बजट को या तो बरकार रखा गया है या मामूली कटौती की गई है।</p>
<p><strong>इनकम टैक्स</strong></p>
<p>मध्य वर्ग को बड़ी राहत देते हुए आम बजट 2025-26 में 12 लाख रुपये तक की सालाना आय वालों को कर से छूट देने की घोषणा की गई है। नौकरीपेशा लोगों को 75 हजार रुपये स्टैंडर्ड डिडक्शन का भी लाभ मिलता है। इस तरह उनके लिए यह सीमा 12.75 लाख रुपये हो जाएगी। लेकिन अगर सालाना आय इससे अधिक है तो नई या पुरानी कर व्यवस्था के तहत ही टैक्स लगेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि 6व्यक्ति ने साल की शुरुआत में कौन सी टैक्स व्यवस्था को चुना है। पुरानी कर व्यवस्था में 5 लाख रुपये तक की आय पर अभी टैक्स नहीं देना पड़ता है। नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स स्लैब में भी बदलाव किए गए हैं। यह इस&nbsp;प्रकार है-&nbsp;</p>
<p>सालाना आय - टैक्स दर</p>
<p>4 से 8 लाख - 5%</p>
<p>8 से 12 लाख - 10%</p>
<p>12 से 16 लाख - 15%</p>
<p>16 से 20 लाख - 20%</p>
<p>20 से 24 लाख - 25%</p>
<p>24 लाख से अधिक - 30%</p>
<p><strong>बजट का आकार&nbsp;</strong></p>
<p>वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बजट का आकार 50.65 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जो मौजूदा 2023-24 के संशोधित अनुमान से 7.4 प्रतिशत अधिक है। मौजूदा वित्त वर्ष के लिए बजट के आकार में कटौती की गई है। इस वर्ष का बजट अनुमान 48.20 लाख करोड़ रुपये था, जबकि संशोधित अनुमान 47.16 लाख करोड़ है। इस वर्ष केंद्र सरकार के कर राजस्व को भी 25.83 लाख करोड़ के बजट अनुमान से संशोधित कर 25.56 लाख करोड़ रुपये किया गया है। अगले साल इस मद में 28.37 लाख करोड़ रुपये प्राप्त होने का अनुमान है। राजकोषीय घाटा मौजूदा वित्त वर्ष में जीडीपी के 4.9 प्रतिशत के बजट अनुमान की तुलना में 4.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। 2025-26 के लिए 4.4 प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया है।</p>
<p><strong>कर राजस्व</strong></p>
<p>कर राजस्व में कंपनियों से मिलने वाला कॉरपोरेट टैक्स संग्रह मौजूदा वर्ष में बजट उम्मीदों से लगभग 40,000 करोड़ रुपये कम रहने का अनुमान है, जबकि व्यक्तिगत इनकम टैक्स संग्रह बढ़ा है। कॉरपोरेट टैक्स 10.20 लाख करोड़ के बजट अनुमान के मुकाबले 9.80 लाख करोड़ है। इनकम टैक्स 11.87 लाख करोड़ की तुलना में 12.57 लाख करोड़ रुपये है। अगले वित्त वर्ष के लिए कॉरपोरेट टैक्स का अनुमान 10.82 लाख करोड़ और इनकम टैक्स का 14.38 लाख करोड़ रुपये का है। जीएसटी संग्रह इस साल तो 10.61 लाख करोड़ के बजट अनुमान के बराबर ही रहने के आसार हैं, अगले साल के लिए 11.78 लाख करोड़ की उम्मीद जताई गई है। वर्ष 2025-26 में पहली बार कर राजस्व जीडीपी के 12 प्रतिशत के बराबर होगा। इसमें 7.1 प्रतिशत डायरेक्ट टैक्स और 4.9 प्रतिशत इनडायरेक्ट टैक्स होगा। मौजूदा वित्त वर्ष में कर राजस्व जीडीपी का 11.9 प्रतिशत है।</p>
<p><strong>कृषि एवं ग्रामीण विकास</strong></p>
<p>वित्त वर्ष 2025-26 में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र के लिए 1,71,437 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह इस वर्ष के संशोधित अनुमान से 21.70 प्रतिशत अधिक है, लेकिन मौजूदा वर्ष के अनुमान में कटौती की गई है। इस वर्ष का बजट अनुमान 1,51,851 करोड़ का था, जबकि संशोधित अनुमान में इसे घटाकर 1,40,859 करोड़ कर दिया गया है।</p>
<p>मौजूदा वित्त वर्ष में इससे भी ज्यादा कटौती ग्रामीण विकास के बजट में की गई है। बजट अनुमान में इस मद में 2,65,808 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जिसे संशोधित अनुमान में 1,90,675 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस तरह इसमें 28 प्रतिशत की कटौती की गई है। वर्ष 2025-26 के लिए 2.67 लाख करोड़ का प्रावधान है।</p>
<p>मनरेगा के लिए 86,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मौजूदा वित्त वर्ष के बजट और संशोधित अनुमानों में भी यह इतना ही था। किसान सम्मान निधि के लिए बजट में 63,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह मौजूदा वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान में भी इतना ही है, जबकि बजट अनुमान 60,000 करोड़ का था।&nbsp;</p>
<p>पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के लिए 2025-26 के बजट में 2.03 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। मौजूदा वित्त वर्ष में इसके लिए बजट प्रावधान 2,05,250 करोड़ का था, जबकि संशोधित अनुमान 1.97 लाख करोड़ का है। इस साल शिक्षा और समाज कल्याण के बजट में भी कटौती की गई है। शिक्षा का बजट 1,25,638 करोड़ के बजट अनुमान की तुलना में 1,14,054 करोड़ रह गया है। वर्ष 2025-26 के लिए 1,28,650 करोड़ का प्रावधान है। समाज कल्याण का बजट इस साल के 56,501 करोड़ को संशोधित कर 46,482 करोड़ रुपये किया गया है। अगले साल इस मद में 60 हजार करोड़ रुपये रखे गए हैं।&nbsp;</p>
<p>प्रमुख योजनाओं पर गौर करें तो मौजूदा वित्त वर्ष में राष्ट्रीय कृषि योजना के लिए निर्धारित 7,553 करोड़ के मुकाबले 6,000 करोड़ ही खर्च हो पाए। कृषोन्नति योजना में भी 7,447 करोड़ के बजट को संशोधित कर 7,106 करोड़ कर दिया गया है। वर्ष 2025-26 में इन दोनों योजनाओं के लिए क्रमशः 8,500 करोड़ और 8,000 करोड़ का प्रावधान है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 2,465 करोड़ रुपये का प्रावधान है। लेकिन इसमें भी मौजूदा वित्त वर्ष के 2,352 करोड़ के बजट प्रावधान को घटाकर 1,500 करोड़ कर दिया गया है।</p>
<p>इस साल पीएम कृषि सिंचाई योजना के बजट को भी 8,250 करोड़ से घटाकर 6,621 करोड़ किया गया है। अगले साल के लिए 8,260 करोड़ का प्रावधान है। पीएम ग्राम सड़क योजना के तहत इस साल 19,000 करोड़ की तुलना में 14,500 करोड़ ही खर्च होंगे। अगले साल के लिए फिर से 19,000 करड़ का बजट प्रावधान किया गया है। दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण जीविका मिशन के लिए इस साल का प्रावधान 15,047 करोड़ पर स्थिर है, अगले साल के लिए 19,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।</p>
<p>एक और बड़ी कटौती जल जीवन मिशन में की गई है। वर्ष 2024-25 के लिए 70,163 करोड़ के बजट प्रावधान को संशोधित अनुमान में घटाकर 22,694 करोड़ कर दिया गया है। 2025-26 के लिए 67,000 करोड़ का प्रावधान है। किसान ऊर्जा सुरक्षा योजना- कुसुम के लिए बजट में 2,600 करोड़ का प्रावधान है। मौजूदा वित्त वर्ष में 1,996 करोड़ के बजट प्रावधान को संशोधित कर 2,525 करोड़ किया गया है।&nbsp;</p>
<p>फसल बीमा योजना के लिए 2025-26 में 12,242 करोड़ का प्रावधान किया गया है। मौजूदा वित्त वर्ष में इस मद में बजट प्रावधान 14,600 करोड़ रुपये था जबकि संशोधित अनुमान में इसे बढ़ाकर 15,864 करोड़ किया गया है। पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण के लिए अगले साल और इस साल का संशोधित अनुमान 1980 करोड़ का है। इस साल का बजट प्रावधान 2,465 करोड़ का था। डेयरी विकास के लिए 1,000 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस मद में इस साल का बजट प्रावधान 371 करोड़ और संशोधित अनुमान 450 करोड़ का है।</p>
<p><strong>सब्सिडी</strong></p>
<p>उर्वरक सब्सिडी के लिए 1,67,887 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसमें यूरिया सब्सिडी 1,18,900 करोड़ और न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी 49,000 करोड़ रुपये है। उर्वरक सब्सिडी मौजूदा वित्त वर्ष में 1.64 लाख के बजट अनुमान की तुलना में संशोधित अनुमान 1,71,299 करोड़ रुपये है। इसमें यूरिया सब्सिडी 1.19 लाख करोड़ और न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी 52,310 करोड़ है। यूरिया सब्सिडी तो बजट अनुमान के बराबर है, लेकिन न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी के लिए बजट प्रावधान 45,000 करोड़ रुपये का था।</p>
<p>खाद्य सब्सिडी बजट अनुमान से कम रही है। मौजूदा वर्ष का बजट अनुमान 2,05,250 करोड़ रुपये था जबकि संशोधित अनुमान 1,97,420 करोड़ का है। अगले वित्त वर्ष के लिए खाद्य सब्सिडी 2,03,420 करोड़ रुपये और पेट्रोलियम सब्सिडी 12,100 करोड़ रुपये तय की गई है।</p>
<p><strong>इन्फ्रास्ट्रक्चर</strong></p>
<p>इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 2025-26 में 11.2 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि मौजूदा वित्त वर्ष में 11.11 लाख करोड़ की तुलना में सिर्फ 10.2 लाख करोड़ रुपये खर्च हो सका। ग्रांट को भी शामिल करें तो कुल पूंजीगत व्यय मौजूदा वित्त वर्ष में 13.2 लाख करोड़ और अगले वित्त वर्ष 15.5 लाख करोड़ रुपये होगा। इस वर्ष यह जीडीपी के 4.1 प्रतिशत और अगले वर्ष 4.3 प्रतिशत के बराबर होगा।</p>
<p>पीएम आवास योजना- शहरी के लिए मौजूदा वित्त वर्ष में 30,171 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया था, लेकिन इसका आधा भी खर्च हो पाया। संशोधित अनुमान में इसे घटाकर 13,670 करोड़ कर दिया गया है। अगले साल के लिए 19,794 करोड़ रुपये रखे गए हैं। योजना के दूसरे चरण (2.0) के लिए 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान है। पीएम आवास योजना- ग्रामीण के लिए भी इस साल के बजट में कटौती की गई है। इसे 54,500 करोड़ के बजट अनुमान से घटाकर 32,426 करोड़ किया गया। अगले साल के लिए 54,832 करोड़ का प्रावधान किया गया है।</p>
<p>नई रोजगार सृजन योजना के तहत 2025-26 के लिए 20,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। मौजूदा वित्त वर्ष में इसके लिए 10,000 करोड़ का प्रावधान किया गया था, लेकिन इसमें से 6,799 करोड़ ही खर्च हो पाने की उम्मीद है। इंडिया एआई मिशन के तहत मौजूदा वित्त वर्ष में 552 करोड़ के बजट में से 173 करोड़ ही खर्च होने का अनुमान है। अगले साल के लिए 2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। देश में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम डेवलप करने के लिए 7,000 करोड़ का प्रावधान अगले साल के लिए किया गया है। इसमें भी मौजूदा साल में 6,903 करोड़ के बजट में से 3,816 करोड़ ही खर्च होने की उम्मीद है। इन्फ्रास्ट्रक्चर में एनएचएआई को 1.70 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं। यह मौजूदा वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान 1.69 लाख करोड़ से थोड़ा ज्यादा है।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_679e07a6c691f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नई कर व्यवस्था में 12 लाख तक की आय पर टैक्स नहीं, कृषि संबंधी कई योजनाओं पर खर्च में कटौती ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_679e07a6c691f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने पर जोर, कृषि आय 5.23% सालाना बढ़ने का दावा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/economic-survey-emphasises-enhancing-productivity-claims-5-percent-agriculture-income-growth.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 31 Jan 2025 15:01:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/economic-survey-emphasises-enhancing-productivity-claims-5-percent-agriculture-income-growth.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 में 6.3-6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। मौजूदा वित्त वर्ष में इसमें 6.4 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से शुक्रवार को संसद में रखे गए आर्थिक सर्वेक्षण का अनुमान दर्शाता है कि अगले वर्ष भी आर्थिक स्थितियां सुस्त रहेंगी। गौरतलब है कि भारत की आर्थिक विकास दर वित्त वर्ष 2023-24 में 8.2 प्रतिशत रही थी। सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि पिछले एक दशक में कृषि आय सालाना 5.23 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। इस दौरान गैर-कृषि आय में हर साल 6.24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।&nbsp;</p>
<p>सर्वेक्षण में इस बात पर जोर दिया गया है कि कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने और अर्थव्यवस्था में सरकारी हस्तक्षेप कम करने की जरूरत है। इसमें कहा गया है कि भारत दुनिया का प्रमुख अनाज उत्पादक देश है और विश्व उत्पादन में 11.6 प्रतिशत योगदान करता है। लेकिन फसलों की उत्पादकता अनेक देशों की तुलना में बहुत कम है। वर्ष 2012-13 से 2021-22 के दौरान फसल क्षेत्र में सालाना 2.1 प्रतिशत की ही वृद्धि हुई है। वह भी मुख्य रूप से फल, सब्जियों और दालों के कारण। खाद्य तेलों में आयात पर निर्भरता होने के बावजूद इसकी वृद्धि दर सिर्फ 1.9 प्रतिशत है जो चिंता की बात है।&nbsp;</p>
<p>बागवानी, मवेशी और मछली पालन जैसे हाई वैल्यू सेक्टर में ज्यादा ग्रोथ रही है। वर्ष 2014-15 से 2022-23 के दौरान (मौजूदा मूल्यों पर) फिशरीज में सालाना औसतन 13.67 प्रतिशत और मवेशी क्षेत्र में 12.99 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p><strong>कृषि क्षेत्र में वृद्धि</strong><br />सर्वेक्षण के अनुसार मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि स्थिर रही। दूसरी तिमाही में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले चार तिमाहियों से अधिक थी। अच्छे खरीफ उत्पादन, सामान्य से अधिक मानसून और पर्याप्त जलाशय स्तर से इस सेक्टर को मदद मिली। &nbsp;</p>
<p>पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार इस वर्ष कुल खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 1647.05 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है, जो 2023-24 की तुलना में 5.7 प्रतिशत और पिछले पांच वर्षों के औसत खाद्यान्न उत्पादन की तुलना में 8.2 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि मुख्य रूप से चावल, मक्का, मोटे अनाज और तिलहन के उत्पादन में वृद्धि के कारण हुई है। &nbsp;</p>
<p>बेहतर दक्षिण-पश्चिम मानसून के चलते जलाशयों में जलस्तर में सुधार हुआ है, जिससे रबी फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सका है। 10 जनवरी 2025 तक गेहूं और चने की रबी बुवाई क्रमशः 1.4 प्रतिशत और 0.8 प्रतिशत अधिक थी। बेहतर कृषि संभावनाएं खाद्य मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने में भी सहायक हो सकती हैं। &nbsp;</p>
<p><strong>फसलों में विविधता</strong><br />सर्वेक्षण में बताया गया है कि 2011-12 से 2020-21 के बीच विभिन्न राज्यों में फसलों में विविधता भी देखी गई। आंध्र प्रदेश कृषि और संबंधित क्षेत्र (वानिकी और लकड़ी कटाई को छोड़कर) में 8.8 प्रतिशत सालाना की वृद्धि के साथ सबसे आगे रहा। मध्य प्रदेश 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ दूसरे और तमिलनाडु 4.8 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा। इन राज्यों ने उन फसलों की ओर विविधीकरण किया जिनमें उत्पादकता अधिक है। उदाहरण के लिए आंध्र प्रदेश ने ज्वार, मध्य प्रदेश ने मूंग और तमिलनाडु ने मक्का की ओर विविधीकरण किया। इसके बावजूद वैश्विक औसत की तुलना में उत्पादकता बढ़ाने और उपज के अंतर को कम करने की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। &nbsp;</p>
<p>भविष्य को देखते हुए यह समझना महत्वपूर्ण है कि लोगों की बढ़ती आय के कारण खान-पान की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। यह कृषि क्षेत्र के विकास प्रभावित करेंगी। बागवानी उत्पादों के साथ पशुधन और फिशरीज प्रोडक्ट की खपत बढ़ेगी। इनके उच्च मूल्य वाले उत्पाद नष्ट भी जल्दी होते हैं। इसलिए मजबूत फसल प्रबंधन और मार्केटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की आवश्यक होगी। इस प्रयास में किसान उत्पादक संगठन (FPOs), सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा छोटे किसानों को सहयोग देने के लिए निजी क्षेत्र से पर्याप्त निवेश भी आवश्यक होगा।</p>
<p>जैसा बोओगे, वैसा काटोगे- यह कहावत बीज की गुणवत्ता और किसानों के लिए उसकी उचित मात्रा में उपलब्धता के महत्व को दर्शाती है। सर्वेक्षण में बताया गया है कि 2023-24 सीजन में आईसीएआर (ICAR) ने 81 फसलों की 1,798 किस्मों के 1.06 लाख क्विंटल ब्रीडर बीज का उत्पादन किया। मौसम कृषि उत्पादन को प्रभावित करता है, इसलिए जलवायु-प्रतिरोधी बीजों पर अनुसंधान को प्राथमिकता दी जा रही है। 2014 से अब तक जारी की गई 2,593 नई किस्मों में से 2,177 जलवायु प्रतिरोधी ही हैं। ये किस्में आसानी से उपलब्ध कराने के लिए बीज बैंक स्थापित किए गए हैं। उत्तर-पश्चिमी भारत में गर्मी को झेलने वाली गेहूं किस्मों को व्यापक रूप से अपनाया गया है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने पर जोर, कृषि आय 5.23% सालाना बढ़ने का दावा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारतीय बीज सहकारी समिति की बड़ी तैयारी, 7 साल में 18 हजार करोड़ के कारोबार का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/bharatiya-beej-sahakari-samiti-big-plan-target-of-turnover-of-18000-crores-in-7-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 29 Jan 2025 16:14:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/bharatiya-beej-sahakari-samiti-big-plan-target-of-turnover-of-18000-crores-in-7-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में राष्ट्रीय स्तर पर तीन बहु-राज्य सहकारी समितियां स्थापित की गई हैं जो निर्यात, <span>जैविक उत्पाद और गुणवत्ता वाले बीजों के उत्पादन को बढ़ावा देंगी। इनमें भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड</span>&nbsp;(बीबीएसएसएल) की स्थापना सहकारी समितियों के माध्यम से एकल ब्रांड के अंतर्गत गुणवत्ता वाले बीजों के उत्पादन और वितरण के लिए की गई है, ताकि फसलों की पैदावार में सुधार हो और स्वदेशी बीजों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रणाली विकसित की जा सके।&nbsp;</p>
<p>रूरल वॉयस के साथ खास बातचीत में <strong>भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड</strong>&nbsp;के मैनेजिंग डायरेक्टर <strong>चेतन जोशी </strong>ने बताया कि बीबीएसएसएल साल 2024-25 <span>में करीब </span>50 <span>करोड़ रुपये का कारोबार करेगी। संस्था के लिए यह जीरो वर्ष है। पहले कारोबारी वर्ष यानी </span>2025-26 <span>में </span>270 <span>करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य रखा गया है। संस्था ने अगले सात वर्षों में </span>19 <span>लाख टन बीजों की बिक्री के साथ </span>18 <span>हजार करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य रखा है। </span></p>
<p>चेतन जोशी ने बताया कि बीबीएसएसएल की स्थापना का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र में ऐसी बीज कंपनी स्थापित करना है जो देश में किसानों को बेहतर गुणवत्ता के बीज किफायती दाम पर उपलब्ध कराए। साथ ही, <span>इसका उद्देश्य देश में प्रसंस्कृत और गुणवत्ता वाले बीज से वंचित </span>53 <span>फीसदी क्षेत्र को उस </span>47 <span>फीसदी क्षेत्र के साथ बराबरी पर लाना है जहां बेहतर किस्मों के गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध हैं। संस्था वैश्विक मानकों के अनुरूप गुणवत्ता वाले बीजों के उत्पादन को बढ़ावा देगी</span>, <span>जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आय बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। </span>&nbsp;</p>
<p>बीबीएसएसएल के पास &ldquo;<span>सहकार से समृद्धि</span>&rdquo;<span> के नारे के अनुरूप किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने का मौका है। भारत में उन्नत बीजों का उत्पादन बढ़ने से </span>&ldquo;मेक इन इंडिया&rdquo;&nbsp;को भी बढ़ावा मिलेगा और &nbsp;आयातित बीजों पर निर्भरता कम होगी। <strong>&ldquo;भारत बीज&rdquo;</strong><span> ब्रांड के तहत बीजों का उत्पादन और वितरण सहकारी संस्थाओं के माध्यम से करेगी। </span></p>
<p>बीबीएसएसएल की चीफ प्रमोटर<strong> कृभको</strong> है। वहीं इसके पांच क्लास वन स्टेकहोल्डर्स में <strong>इफको</strong><strong>, <span>नेफेड</span>, <span>एनडीडीबी</span></strong> और <strong>एनसीडीसी</strong> शामिल हैं। समिति की आरंभिक चुकता पूंजी 250 करोड़ रुपये है, जिसमें पांचों प्रवर्तकों द्वारा 50-50 करोड़ रुपये का योगदान है और अधिकृत शेयर पूंजी 500 करोड़ रुपये है।</p>
<p><strong>ग्यारह राज्यों में बीज लाइसेंस </strong></p>
<p>चेतन जोशी ने बताया कि बीबीएसएसएल 11 राज्यों में बीज लाइसेंस हासिल कर चुकी है और पांच राज्यों में इसकी प्रक्रिया चल रही है। बीबीएसएसएल ने ब्रीडर सीड, <span>फाउंडेशन सीड और सर्टिफाइड सीड सभी स्तर पर काम शुरू कर दिया है। वर्ष </span>2024-25 <span>में मूंगफली</span>, <span>गेहूं</span>, <span>जई और बरसीम के बीज की बिक्री से शुरूआत की गई है।</span></p>
<p><strong>किसानों के जरिए बीज उत्पादन </strong></p>
<p>जोशी ने बताया कि प्राथमिक सहकारी समितियों (पैक्स) के जरिये सदस्य किसानों को ही बीज उत्पादन के लिए पंजीकृत किया जा रहा है, <span>ताकि बीज उत्पादन का फायदा उन्हें बेहतर दाम के रूप में मिले। बीज उत्पादकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के ऊपर </span>10 <span>फीसदी दाम मिलेगा। बीज निगम और मंडी में बीज की कीमत को भी आधार बनाया जाएगा। इन तीनों में से जो भी दाम अधिक होगा</span>, <span>उसका भुगतान उत्पादक किसानों को किया जाएगा। पैक्स को बीज प्रसंस्करण</span>, <span>ग्रेडिंग और पैकेजिंग के लिए एक से तीन</span>&nbsp; <span>फीसदी तक अतिरिक्त इसेंटिव दिया जाएगा। बीज के लिए ट्रेसेबिलिटी को अनिवार्य बनाया गया है यानी कोई भी बीज किस किसान ने और कहां पैदा किया है उसकी जानकारी तक पहुंच रहेगी। इसके जरिये बीज की प्रमाणिकता और गुणवत्ता पर नियंत्रण रहेगा।</span></p>
<p><strong>सदस्यता और लाभांश </strong></p>
<p>बीबीएसएसएल की सदस्यता के लिए अब तक देश भर की सहकारी समितियों से कुल 20,<span>961 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से </span>17425 <span>को शेयर सर्टिफिकेट जारी किए जा चुके थे।</span>&nbsp;<span>बीबीएसएसएल की सदस्यता के लिए नेशनल लेवल</span>, <span>स्टेट लेवल</span>, <span>डिस्ट्रिक्ट यूनियन और पैक्स की सदस्यता का अभियान चलया जा रहा है। इनके लिए न्यूनतम शेयर खरीदने की सीमा तय की गई है। वहीं नॉमिनल मेंबर भी बनाये जाएंगे जो एक लाख रुपये का शेयर खरीदकर सदस्यता हासिल कर सकते हैं। उनको मताधिकार नहीं होगा</span>,<span> लेकिन वह बीबीएसएसएल के डिस्ट्रीब्यूटर बनकर कारोबार कर सकते हैं।</span> &nbsp;</p>
<p>चेतन जोशी ने बताया कि बीबीएसएसएल के मुनाफे में से सदस्यों को उनकी शेयर पूंजी के आधार पर 20 <span>फीसदी तक का लाभांश दिया जाएगा। इस तरह सहकारी समिति के सदस्य किसानों को बीज के उत्पादन से बेहतर दाम के अलावा लाभांश का भी फायदा होगा।</span></p>
<p><strong>बीज उत्पादन लक्ष्य &nbsp;</strong></p>
<p>बीबीएसएसएल ने 2024-25 में अब तक अनाज, <span>तिलहन और चारा फसलों के 52</span>,<span>906 क्विंटल बीज बेचे या वितरित किए हैं। 138 खुदरा विक्रेताओं/वितरकों के माध्यम से अब तक बेचे गए बीज का कुल मूल्य लगभग 46.19 करोड़ है। संस्था को 11 राज्यों में बीजों की बिक्री के लिए लाइसेंस प्राप्त हो चुका है और अन्य पांच राज्यों में यह प्रक्रियाधीन है। बीबीएसएसएल ने अब तक 577 हेक्टेयर कृषि भूमि पर 15</span>,<span>395 क्विंटल बीज (9 फसलें</span>, <span>23 किस्म) का उत्पादन किया है।</span></p>
<p>रबी सीजन 2024-25 <span>में बीबीएसएसएल द्वारा गेहूं</span>, <span>चना</span>, <span>सरसों और मटर के </span>6.34 <span>लाख क्विंटल सर्टिफाइड बीज उत्पादन का अनुमान है। संस्था द्वारा रबी सीजन </span>2023-24 <span>में </span>13,697 <span>क्विंटल फाउंडेशन बीज का उत्पादन हुआ था। इस दौरान लाभार्थी किसानों की संख्या </span>16,850 <span>से बढ़कर </span>20.96 <span>लाख हो गई है। लाभार्थी समितियों की संख्या भी </span>1790 <span>तक पहुंच गई है। वर्ष </span>2025-26 <span>में </span>21 <span>लाख किसानों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है जबकि बीज की बिक्री </span>1790 <span>सोसायटी के माध्यम से की जाएगी। &nbsp;</span></p>
<p>खरीफ 2025 <span>सीजन में सात फसलों- धान</span>, <span>चना</span>, <span>सोयाबीन</span>, <span>मूंगफली</span>, <span>ज्वार</span>, <span>मक्का और बीन्स की </span>22 <span>वैरायटी के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। इनका </span>1.6 <span>लाख क्विंटल सर्टिफाइड बीज उत्पादन का अनुमान है जिससे </span>56.47 <span>लाख किसान लाभान्वित होंगे। </span></p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारतीय बीज सहकारी समिति की बड़ी तैयारी, 7 साल में 18 हजार करोड़ के कारोबार का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दालों के शुल्क मुक्त आयात पर जोर, किसानों को कैसे मिलेंगे सही दाम?]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/prices-of-pulses-will-fall-below-msp-yet-emphasis-on-duty-free-import.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 27 Jan 2025 20:34:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/prices-of-pulses-will-fall-below-msp-yet-emphasis-on-duty-free-import.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दालों की महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने अरहर के शुल्क मुक्त आयात की अवधि को एक साल के लिए बढ़ाकर 31 मार्च, 2026 तक निर्धारित कर दिया है। यह फैसला देश में दलहन उत्पादक किसानों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। साथ ही दालों के मामले में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य से भी मेल नहीं खाता है।</p>
<p>इस बीच, मसूर और चना जैसी दालों की नई फसल बाजार में आने के पहले ही उनकी कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे चली गई हैं। खास बात यह है कि चना और मसूर मध्य प्रदेश की प्रमुख दलहन फसलें हैं और केंद्र में कृषि मंत्री मध्य प्रदेश से ही आते हैं। दालों का शुल्क मुक्त आयात किसानों के हितों का संरक्षण करने के सरकार के दावों पर सवाल खड़ा करता है।</p>
<p>भारत में दालों का आयात म्यांमार, आस्ट्रेलिया, अफ्रीका और कनाडा से होता है। अरहर और उड़द का अधिकांश आयात अफ्रीकी देशों और म्यांमार से होता है। चना, मटर और मसूर का आयात आस्ट्रेलिया, रूस और कनाडा से होता है। भारत में मूंग के अलावा सभी प्रमुख दालों जैसे अरहर, उड़द, मसूर, चना और पीली मटर का शुल्क मुक्त आयात हो रहा है।</p>
<p>चालू सीजन के लिए सरकार के चना का एमएसपी 5650 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि बाजार कीमतें इसके नीचे आ गई हैं। अगले माह से चना की नई फसल आएगी, जिसके बाद कीमतों में और अधिक गिरावट आने की आशंका है। आस्ट्रेलिया से देश में करीब 10 लाख टन चना आयात होने का अनुमान है। अरहर के आयात में 3.5 लाख टन का आयात म्यांमार और सात लाख टन का आयात अफ्रीका से होगा। पिछले लगभग एक साल के दौरान करीब 28 लाख टन पीली मटर का आयात भी भारत में हो चुका है। पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की अवधि 28 फरवरी, 2025 तक निर्धारित है जिसे आगे बढ़ाए जाने की संभावना है।</p>
<p>सरकार ने मसूर का एमएसपी 6700 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि इस समय बाजार में इसकी कीमतें 5700 से 5800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रही है। मसूर का भारत में ऑस्ट्रेलिया से शुल्क मुक्त आयात हो रहा है यानी मार्च में जब हमारी घरेलू फसल आएगी तो कीमतों में और अधिक गिरावट आ सकती है। सरकार ने उड़द, चना और मसूर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति 31 मार्च, 2025 तक दे रखी है। खास बात यह है कि आस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों के लिए भारत मसूर के निर्यात का प्रमुख बाजार है।</p>
<p>हालांकि सरकार ने पिछले दिनों कहा था कि वह अरहर, उड़द और मसूर की शत-प्रतिशत खरीद एमएसपी पर करेगी। लेकिन बड़े पैमाने पर दालों के आयात के चलते किसानों को उपज का सही कीमत कैसे मिलेगा, इस पर बड़ा सवालिया निशान है। <span>दालों के शुल्क-मुक्त आयात के कारण घरेलू फसल आने के साथ ही दलहन फसलों की कीमतें एमएसपी से नीचे आ सकती हैं। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा। साथ ही दालों के मामले में आत्मनिर्भरता लाने की कोशिशों को भी झटका लगेगा।&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_6797a05b89476.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ दालों के शुल्क मुक्त आयात पर जोर, किसानों को कैसे मिलेंगे सही दाम? ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_6797a05b89476.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में गन्ना कम होने से मार्च में ही बंद हो जाएंगी अधिकांश चीनी मिलें]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/uttar-pradesh-and-maharashtra-mills-ceasing-crushing-by-end-march-for-want-of-cane.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 27 Jan 2025 00:05:20 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/uttar-pradesh-and-maharashtra-mills-ceasing-crushing-by-end-march-for-want-of-cane.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू पेराई सीजन (2024-25) में देश के दोनों सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में गन्ने की कमी के चलते अधिकांश चीनी मिलें मार्च में ही बंद जाएंगी। उत्तर प्रदेश में कई चीनी मिलों को अभी से गन्ने की आपूर्ति कम पड़ने लगी है। साथ ही राज्य की उत्तराखंड से लगी कुछ चीनी मिलें परोक्ष रूप से गन्ने की खरीद 400 रुपये प्रति क्विंटल पर करने लगी हैं।&nbsp; गुड़ और&nbsp; खांडसारी उद्योग में भी गन्ने कीमत 400 रुपये प्रति क्विंटल पर जाने की स्थिति बन रही है। इसकी वजह राज्य में गन्ने में टॉप शूट बोरर और रेड रॉट की बीमारी के चलते उत्पादकता में 15 से 20 फीसदी तक की गिरावट आना है। यह स्थिति वाले दिनों में उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों के बीच गन्ने के लिए प्राइस वार की स्थिति बना सकती है। हालांकि राज्य सरकार ने अभी तक चालू पेराई सीजन के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) तय नहीं किया है। राज्य में चीनी मिलें अभी पिछले सीजन का 370 रुपये प्रति क्विंवटल का एसएपी ही किसानों को दे रही हैं।</p>
<p>वहीं महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की फसल की ग्रोथ रुक गई है और वहां फ्लावरिंग की स्टेज आ गयी है जिसके चलते गन्ने की उत्पादकता और उसमें चीनी की रिकवरी दोनों पर असर पड़ रहा है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के शामली जिले में <strong>हंस हेरिटेज जैगरी एंड फार्म प्रॉड्यूस</strong>&nbsp;के नाम से गुड़ यूनिट चलाने वाले <strong>के पी सिंह</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि इस साल गन्ने की उपज पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 15 से 20 फीसदी कम है। साथ ही रिकवरी में भी करीब एक फीसदी तक की कमी आई है। के पी सिंह कहते हैं कि बरेली से लेकर शामली तक गन्ने की फसल की यही स्थिति है। के पी सिंह बलरामपुर चीनी ग्रुप के टेक्नीकल हेड रहे हैं और अभी शामली जिले में ऊन के पास ऑटोमैटेट और एडवांस टेक्नोलॉजी पर आधारित गुड़ संयंत्र चला रहे हैं। वह कहते हैं कि आने वाले दिनों में हमें भी गन्ने के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल तक की कीमत देनी पड़ सकती है। पिछले साल उनकी गुड़ की रिकवरी 15 फीसदी से अधिक थी लेकिन इस साल यह अब 14 फीसदी पर पहुंची है। वह अबी गुड़ की बिक्री 33 रुपये किलो पर कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>वहीं शामली जिले के भैंसवाल गांव के प्रगतिशील किसान और जिला पंचायत सदस्य उमेश पंवार का कहना है कि इस साल बीमारी के चलते गन्ने की उत्पादकता 20 फीसदी तक कम है और शामली स्थित चीनी मिल को छोड़कर जिले की बाकी चीनी मिलें मार्च में ही बंद हो जाएंगी क्योंकि गन्ना कम है। शामली मिल देरी से चली थी इसलिए वह अप्रैल के मध्य तक चल सकती है।</p>
<p>वहीं महाराष्ट्र के किसान संगठन <strong>स्वाभिमानी शेतकरी संघटना</strong> के प्रमुख और पूर्व सांसद <strong>राजू शेट्टी</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि महाराष्ट्र में इस साल गन्ने की फसल कमजोर है और अधिकांश चीनी मिलों में मध्य मार्च तक पेराई बंद हो जाएगी। शेट्टी महाराष्ट्र में लंबे समय से गन्ना किसानों के आंदोलन का नेतृत्व करते रहे हैं।</p>
<p>महाराष्ट्र के चीनी उद्योग के एक पदाधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की फसल समयपूर्व फ्लवरिंग स्टेज मे चली गई है। इस स्थिति में जहां फसल की ग्रोथ बंद हो जाती है वहीं उसमें सूक्रोज की मात्रा भी कम हो जाती है और गन्ने का वजन कम हो जाता है। वहीं महाराष्ट्र की एक सहकारी चीनी मिल के पदाधिकारी का कहना है कि अर्ली फ्लावरिंग की स्थिति कई जगह दिसंबर में ही आ गई थी। साथ ही इस साल महाराष्ट्र में चीनी मिलें देरी से चली क्योंकि मिलों में पेराई राज्य विधान सभा चुनाव के बाद ही शुरू हुई है। गन्ने की फसल की कमजोर स्थिति के चलते देरी के बावजूद कुछ चीनी मिलें फरवरी में ही बंद हो जाएंगी।</p>
<p>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोआपरेटिव शुगर फैक्टरीज लिमिटेड ने चालू पेराई सीजन (2024-25) के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर 270 लाख टन कर दिया है। पिछले साल चीनी का उत्पादन 319 लाख टन रहा था। पिछले सीजन के अंत में 80 लाख टन चीनी का बकाया स्टॉक था। जबकि चालू साल में चीनी की खपत 295 लाख टन रहने का अनुमान है। सरकार ने हाल ही में 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी है। ऐसे में चालू सीजन के अंत में देश में चीनी का करीब 45 लाख टन का बकाया स्टॉक होगा।</p>
<p>फेडरेशन के मुताबिक चालू सीजन में महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन पिछवे साल से 110.20 लाख टन से घटकर 86 लाख टन रहने का अनुमान है। वहीं उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन पिछले सला के 103.65 लाख टन से घटकर 93 लाख टन रहने का अनुमान है। कर्नाटक में चीनी उत्पादन पिछले सीजन के 53 लाख टन से घटकर 41 लाख टन रहने का अनुमान है। एक माह पहले फेडरेशन ने चीनी उत्पादन के 280 लाख टन पर रहने का अनुमान लगाया गया था उस समय उत्तर प्रदेश में 98 लाख टन और महाराष्ट्र में 87 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया गया था।</p>
<p>महाराष्ट्र में फसल के जल्दी फ्लावरिंग स्टेज में जाने की वजह 2023-24 में लंबे समय तक सूखे की स्थिति और उसके बाद अक्तूबर में अधिक बारिश को माना जा रहा है। यानी मौसम में बदलाव का असर गन्ने की फसल पर पड़ा है। वहीं उत्तर प्रदेश सबसे अधिक प्रचलित गन्ना किस्म सीओ-0238 में रेड रॉट और टॉप शूट बोरर की बीमारी उत्पादकता में गिरावट की बड़ी वजह है। कई साल तक राज्य में किसानों और चीनी उद्योग के लिए बेहतर परिणाम देने वाली इस किस्म में रोग आने की प्रवृति काफी अधिक हो गयी है जबकि इसकी जगह लेने वाली किस्में सीओ-0118, सीओ-14201, सीओ-15023 और सीओएस-13235 किसानों के बीच अभी तक लोकप्रिय नहीं सकी हैं क्योंकि इनमें कुछ में रिकवरी बेहतर हो तो उत्पादकता कम है। सीओ-0238 की जगह अभी तक राज्य के गन्ना शोध संस्थान और आईसीएआर के संस्थान कोई बेहतर किस्म किसानों को नहीं दे सके हैं और अगर यही स्थिति रहती है तो गन्ने में कपास जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है जहां उत्पादन में भारत पहले स्थान पर पहुंच कर अब आयातक की स्थिति में आ गया है।</p>
<p>दूसरी अहम बात यह है कि चालू पेराई सीजन (2024-25) के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी तक राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) तय नहीं किया जबकि पेराई सीजन का अधिकांश हिस्सा पार हो गया है और नवंबर, 2024 से पेराई शुरू करने वाले राज्य की चीनी मिलों में मार्च में ही पेराई समाप्त होने लगेगी। राज्य में पिछले सीजन (2023-24) के लिए जल्दी पकने वाली (अर्ली मेच्योर) गन्ने की किस्म के लिए 370 रुपये प्रति क्विंटल का एसएपी तय किया गया था। लेकिन इस साल अभी तक एसएपी तय नहीं किया है ऐसे में चीनी मिलें पिछले सीजन के एसएपी का ही भुगतान किसानों को कर रही हैं। वहीं देश में सबसे अधिक 401 रुपये प्रति क्विंटल का एएसएपी पंजाब में है और पड़ोसी राज्य हरियाणा में चालू सीजन के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल का एसएपी है। हालांकि जिस तरह की स्थिति बन रही है उसमें सरकार भले ही किसानों को अधिक एसएपी देने की घोषणा न करे लेकिन चीनी मिलों के बीच गन्ने की उपलब्धता की होड़ और गुड़ व खांडसारी उद्योग से मिलने वाली प्रतिस्पर्धा के चलते गन्ना किसानों को मौजूदा एसएपी से अधिक दाम पेराई सीजन के अंतिम दिनों में मिल सकता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में गन्ना कम होने से मार्च में ही बंद हो जाएंगी अधिकांश चीनी मिलें ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[2030 तक 100 अरब डॉलर का कृषि निर्यात संभव, ठोस नीति और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार जरूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/100-billion-dollar-agri-export-by-2030-achievable-but-needs-bold-policies-and-infrastructure-say-experts.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 22 Jan 2025 17:43:37 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/100-billion-dollar-agri-export-by-2030-achievable-but-needs-bold-policies-and-infrastructure-say-experts.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अगर सही नीतिगत कदम उठाए जाएं और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए तो वर्ष 2030 तक भारत का कृषि निर्यात 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।कृषि वस्तुओं का दुनिया का 8वां सबसे बड़ा निर्यातक होने के बावजूद, भारत को बुनियादी ढांचे और बाजार पहुंच में कमी के कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भारत कई कृषि वस्तुओं के निर्यात में अग्रणी है, लेकिन इसकी उत्पादकता वैश्विक मानकों से बहुत कम है। इस अंतर को पाटने और सप्लाई चेन लिंकेज बढ़ाने से किसानों की आय और देश की निर्यात क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।&nbsp;</p>
<p>इन्फ्राविजन फाउंडेशन के सेंटर फॉर एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर रिसर्च एंड एक्शन (CAIRA) द्वारा नई दिल्ली में आयोजित राउंडटेबल में "इन्फ्रास्ट्रक्चर के कायाकल्प से भारत के कृषि निर्यात को बढ़ावा" देने के विषय में कई सुझाव आए। इस अवसर पर CAIRA का पहला बैकग्राउंड पेपर की जारी किया गया, जिसमें बुनियादी ढांचे में बदलाव की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया गया है। कृषि निर्यात को बढ़ाने के लिए सभी मंत्रालयों के बीच समन्वित दृष्टिकोण, स्थिर निर्यात नीति वातावरण, कोल्ड चेन, भंडारण और लॉजिस्टिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार होना चाहिए। &nbsp;</p>
<p>कई प्रमुख नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों ने परिचर्चा में अपने विचार रखे। उनमें खाद्य प्रसंस्करण सचिव सुब्रत गुप्ता, विदेश व्यापार महानिदेशक संतोष सारंगी, अध्यक्ष, एपीडा अभिषेक देव, पूर्व केंद्रीय कृषि सचिव सिराज हुसैन, विश्व बैंक के एंड्रयू गुडलैंड और आईटीसी के ग्रुप हेड (कृषि और आईटी) एस. शिवकुमार शामिल थे।&nbsp;</p>
<p>उद्योग जगत से जुड़े कई विशेषज्ञों ने भी कृषि व्यापार बढ़ाने के उपायों के बारे में अपने सुझाव दिए। इनमें सिराज चौधरी, कंट्री चेयरमैन, एसएटीएस इंडिया, चॉइस ग्रुप के निदेशक थॉमस जोस; टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमित पंत; सह्याद्रि फार्म्स में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रमुख अज़हर तंबूवाला; अतुल छुरा, चीफ बिजनेस ऑफिसर, एग्रीबाजार; ग्राम उन्नति के सीईओ और एमडी अनीश जैन और रूरल वॉयस के एडिटर-इन-चीफ हरवीर सिंह शामिल थे।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_6790e3ea0332e.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>वक्ताओं ने सुझाव दिया कि टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बड़े पैमाने पर अपनाने और वैश्विक बाजार की बदलती आवश्यकताओं के साथ भारत के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा कृषि बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्यकता है। उत्पादन-केंद्रित दृष्टिकोण की बजाय उपभोक्ता-केंद्रित दृष्टिकोण को अपनाना जरूरी है।&nbsp;</p>
<p>राउंडटेबल में विशेषज्ञों ने सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका पर जोर दिया, लेकिन इसके अतिरेक के प्रति आगाह भी किया। निजी चुनौतियों के लिए सार्वजनिक समाधानों में सरकारी हस्तक्षेप का संयमित और सटीक उपयोग करना चाहिए। कृषि निर्यात में बढ़ोतरी के लिए माइंड सेट में बदलाव की ओर भी ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। खासतौर पर पॉलिसी क्लस्टरिंग को अपनाना जिससे सरकारी और उद्योग हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिल सके।&nbsp;</p>
<p>कृषि निर्यात को बढ़ाने के लिए विशेषज्ञों ने ट्रेसेबिलिटी, नीतिगत स्पष्टता और व्यापार के बारे में मार्केट इंटेलीजेंस को भी महत्वपूर्ण बताया। साथ ही स्थानीय कीमतों में अस्थिरता को कम करने की आवश्यकता है, जिससे निर्यात-आयात प्रभावित होता है। वैश्विक मानकों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए घरेलू स्तर पर भी गुणवत्ता के स्तर में सुधार लाना होगा, इसलिए निर्यात में सुधार के लिए घरेलू बाजारों को गौण नहीं माना जाना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>CAIRA इन्फ्राविज़न फाउंडेशन की एक पहल है जिसे शोध, नीतियों और कारगर उपायों के माध्यम से भारत के कृषि-निर्यात परिदृश्य के कायाकल्प के लिए स्थापित किया गया है। CAIRA कृषि बुनियादी ढांचे में सुधार, सहयोग को बढ़ाने और नीति सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए काम करेगा।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ 2030 तक 100 अरब डॉलर का कृषि निर्यात संभव, ठोस नीति और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार जरूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार और किसानों के बीच 14 फरवरी को चंडीगढ़ में बैठक, इलाज कराने पर राजी हुए डल्लेवाल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-and-farmers-will-meet-on-february-14-in-chandigarh-as-dallewal-agrees-to-receive-medical-treatment.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 19 Jan 2025 09:01:28 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
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        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल अपना इलाज करने पर राजी हो गए हैं। डल्लेवाल करीब 2 महीने से पंजाब हरियाणा के खनोरी बॉर्डर पर आमरण अनशन पर हैं। शनिवार देर शाम सरकार किसानों के साथ बातचीत पर राजी हुई, उसके बाद ही डल्लेवाल इलाज कराने पर राजी हुए। सरकार और किसान नेताओं के बीच 14 फरवरी को चंडीगढ़ में बैठक होगी। दिल्ली विधानसभा चुनाव की आचार संहिता को ध्यान में रखते हुए यह तारीख तय की गई है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">70 साल के डल्लेवाल 26 नवंबर से अनशन पर हैं। वह कैंसर के मरीज भी हैं। डल्लेवाल इलाज करने पर भले ही राजी हुए हों, लेकिन उन्होंने कहा है कि जब तक सरकार किसानों की मांगे नहीं मानती तब तक वह अनशन खत्म नहीं करेंगे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव प्रिय रंजन ने सरकार की तरफ से बैठक की चिट्ठी पढ़कर सुनाई और बैठक का आमंत्रण किसानों को दिया। उन्होंने कहा कि हमारा प्रतिनिधिमंडल केंद्र सरकार की तरफ से प्रस्ताव लेकर आया था और हमें किसान नेताओं के साथ अलग-अलग फोरम पर बैठक करने की हिदायत दी गई है। इस बैठक में प्रियरंजन के अलावा पंजाब सरकार के प्रतिनिधि और किसान नेता शामिल थे। पहली बार शाम 7:00 बैठक सकारात्मक होने के संकेत मिले। डल्लेवाल के इलाज करने पर राजी होने की घोषणा रात 10:00 बजे के बाद की गई।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">डल्लेवाल ने 4 जनवरी को खनौरी में ही किसान महापंचायत को संबोधित किया था। उस दिन वहां ठंड बहुत थी। उसके बाद से उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। उनकी सेहत पर नजर रखने वाले डॉक्टरों ने हिदायत दी थी कि डल्लेवाल के अनशन खत्म करने के बाद भी वह पूरी तरह स्वस्थ शायद ना हो पाएं।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_67890f79a811b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार और किसानों के बीच 14 फरवरी को चंडीगढ़ में बैठक, इलाज कराने पर राजी हुए डल्लेवाल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र ने एथेनॉल उत्पादकों के लिए एफसीआई चावल का रेट घटाकर 2,250 रुपये किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centre-reduces-fci-rice-rate-for-ethanol-distilleries-to-rs-2250.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 18 Jan 2025 00:38:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centre-reduces-fci-rice-rate-for-ethanol-distilleries-to-rs-2250.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने राज्यों और एथेनॉल उत्पादकों के लिए एफसीआई के चावल का आरक्षित मूल्य 550 <span>रुपये घटाकर </span>2,250 <span>रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह रेट वर्ष </span>2024-25 <span>के लिए सरकार द्वारा निर्धारित कॉमन ग्रेड धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य </span>(<span>एमएसपी</span>) 2300 <span>रुपये प्रति क्विंटल से भी कम है।&nbsp;</span></p>
<p>सरकार के इस कदम को अनाज से एथेनॉल बनाने वाली डिस्टलरी के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है!<span> इससे देश में एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा मिलने की संभावना है। </span>ओएमएसएस की यह नीति 30 <span>जून</span>, 2025 <span>तक लागू रहेगी।</span></p>
<p>खाद्य मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, <span>खुले बाजार की बिक्री योजना-घरेलू (ओएमएसएस-डी) के तहत राज्य सरकारें और राज्य सरकारों के निगम एफसीआई से </span>12 <span>लाख टन तक चावल की खरीद </span>2250 <span>रुपये की आरक्षित दरों पर करेंगे। इसके लिए ई-नीलामी में भाग लेने की आवश्यकता नहीं होगी। जबकि एथेनॉल डिस्टिलरी </span>24 <span>लाख टन तक चावल की खरीद 2250 रुपये की आरक्षित दरों पर कर सकेंगी। इससे पहले ओएमएसएस के तहत एथेनॉल उत्पादकों के लिए चावल का आरक्षित मूल्य 2800 रुपये प्रति</span><span>&nbsp;क्विंटल था।</span></p>
<p>मंत्रालय के मुताबिक,<span> एथेनॉल आपूर्ति वर्ष </span>2024-25 <span>के दौरान लगभग </span>110 <span>करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति के लिए तीसरे चक्र की निविदा में एफसीआई चावल का उपयोग किया जाएगा। जिसमें यथा संभव पुराने चावल के स्टॉक को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। </span><span>निजी व्यापारी और सहकारी समितियां एफसीआई से</span> 2,800 <span>रुपये प्रति क्विंटल के रेट से चावल प्राप्त करते रहेंगे।</span></p>
<p><span>नैफेड</span>, <span>एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार जैसी केंद्रीय सहकारी संस्थाओं को </span>'<span>भारत</span>' <span>ब्रांड के तहत बिक्री के लिए </span>2,400 <span>रुपये प्रति क्विंटल की दर से चावल खरीदना होगा। निजी मिल मालिकों को </span>'<span>भारत</span>' <span>ब्रांड चावल की बिक्री की अनुमति नहीं है</span>, <span>लेकिन छात्रावासों</span>, <span>धार्मिक संस्थानों</span>, <span>अस्पतालों और धर्मार्थ संगठनों को इसकी अनुमति दी गई है।&nbsp;</span></p>
<p>केंद्र सरकार ने 2023 <span>में एथेनॉल डिस्टलरी को चावल की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था जिसे अगस्त</span>, 2024 <span>में हटाया गया। तब सरकार ने केंद्रीय पूल से </span>23 <span>लाख टन चावल खरीद की अनुमति दी थी। लेकिन ऊंची कीमतों के कारण एथेनॉल निर्माताओं से ओएमएसएस के तहत चावल की खरीद में दिलचस्पी नहीं दिखाई। केंद्रीय पूल में चावल के अधिक भंडार और ओएमएसएस के तहत कम बिक्री को देखते हुए केंद्र सरकार ने नीति में संशोधन किया है। </span></p>
<p>केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 <span>तक पेट्रोल में </span>20 <span>फीसदी एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है। गत दिसंबर में एथेनॉल मिश्रण </span>18.2 <span>प्रतिशत तक पहुंच गया जो अब तक का सर्वाधिक है। मंत्रालय का कहना है कि ओएमएसएस नीति का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा को बढ़ाना</span>, <span>राज्यों को उनके दायित्वों को पूरा करने और एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करना है।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_678b2140624fa.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_678aa84db8c4d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र ने एथेनॉल उत्पादकों के लिए एफसीआई चावल का रेट घटाकर 2,250 रुपये किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_678aa84db8c4d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश को बासमती के भौगोलिक क्षेत्र में शामिल करने की कोशिशें फिर तेज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/efforts-to-include-madhya-pradesh-in-basmati-region-intensify-already-dispute-with-pakistan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 17 Jan 2025 15:28:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/efforts-to-include-madhya-pradesh-in-basmati-region-intensify-already-dispute-with-pakistan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ज्योग्राफिक इंडिकेशन (<span>जीआई</span>) <span>के लिए </span>बासमती धान के भौगोलिक क्षेत्र में मध्य प्रदेश को शामिल करने की मुहिम ठंडी नहीं पड़ी है। बल्कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के केंद्रीय कृषि मंत्री बनने के बाद ये कोशिशें जोर पकड़ रही हैं। करीब छह माह पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश सरकार के आग्रह पर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) को इस मुद्दे पर अपनी राय देने के लिए कहा था। उसके बाद से दो बार कृषि मंत्रालय में इस मुद्दे पर बैठक हो चुकी हैं। यह स्थिति तब है जबकि मध्य प्रदेश को बासमती क्षेत्र में शामिल करने का प्रयास कर रहा संगठन और राज्य सरकार इस मुद्दे पर बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड (आईपीएबी) और मद्रास हाई कोर्ट में सफलता नहीं मिली थी।&nbsp;</p>
<p>अहम बात यह है कि पिछली सरकार में कृषि मंत्री रहे नरेंद्र सिंह तोमर के समय भी मध्य प्रदेश को बासमती उत्पादक क्षेत्र में शामिल करने की कोशिश की गई थी लेकिन बात नहीं बनी। मौजूदा सरकार में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मध्य प्रदेश से हैं। यह मामला उनके पास भी पहुंचा और करीब छह माह पहले उन्होंने इसे आईसीएआर के माध्यम से आईएआरआई के पास भेज दिया था।</p>
<p>लेकिन दिलचस्प बात यह है कि एक ओर जहां भारत में बासमती के भौगोलिक क्षेत्र में मध्य प्रदेश को शामिल करने की कोशिशें जारी हैं वहीं, दूसरी तरफ यूरोपीय यूनियन में बासमती के ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) मामले में पाकिस्तान के आवेदन पर भारत ने आपत्ति दर्ज करते हुए भारत के उन्हीं सात राज्यों को उत्पादन क्षेत्र बताया है जो जीआई मेें शामिल हैं। आईसीएआर एक एक वरिष्ठ वैज्ञानिक का कहना है कि भारत द्वारा पाकिस्तान में नये क्षेत्रों को शामिल करने के पुरजोर विरोध के बाद देश में नये क्षेत्र शामिल करना लगभग असंभव है।&nbsp;</p>
<p><strong>बासमती पर भारत-पाक विवाद </strong></p>
<p>बासमती को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कई वर्षों से विवाद चल रहा है। पाकिस्तान ने 2022 में यूरोपीय यूनियन (ईयू) में बासमती के जीआई के लिए आवेदन किया था। तब पाकिस्तान के आवेदन पर आपत्ति जताते हुए भारत ने इसे रद्द करने की मांग की। पाकिस्तान ने अपने आवेदन में 44 जिलों में बासमती उगाने का दावा किया है। जिनमें बलूचिस्तान जैसे इलाके भी शामिल हैं जहां सामान्य चावल पैदा करना भी मुश्किल है। पाकिस्तान ने इस सूची में पाक अधिकृत कश्मीर के चार जिलों को भी शामिल किया था।</p>
<p>इससे पहले साल 2008 में बासमती के जीआई के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान की एक संयुक्त बैठक में एक ग्रुप बनाया गया था। इसमें दोनों देशों के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी शामिल थे। तब तय किया गया था कि बासमती के लिए पाकिस्तान के 14 जिलों को उत्पादन क्षेत्र के रूप में स्वीकार किया जाएगा, वहीं भारत के सात राज्यों पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और जम्मू एवं कश्मीर को बासमती उत्पादक क्षेत्र माना जाएगा। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में तय किया गया था कि दोनों देश संयुक्त रूप से बासमती के जीआई टैग के लिए आवेदन करेंगे। लेकिन दोनों देशों के बीच आपसी संबंध बिगड़ने के चलते यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।</p>
<p>इस बीच, भारत ने 2018 में बासमती के जीआई टैग के लिए ईयू में आवेदन किया। लेकिन ईयू ने भारत के आवेदन को ठंडे बस्ते में डाल दिया। जबकि पाकिस्तान ने 2022 में आवेदन किया तो ईयू ने उसे फास्ट ट्रैक से आगे बढ़ाया। भौगोलिक संकेत (जीई) के तहत आवेदन की शर्त है कि मूल देश में उत्पाद को जीआई टैग के लिए अधिसूचित होना चाहिए। भारत में जीआई के लिए कानून 1999 में बन गया था। लेकिन पाकिस्तान में इसके लिए कानून ही 2022 में बना। तब जाकर पाकिस्तान ने बासमती को जीआई टैग दिया। साथ ही पाकिस्तान ने बासमती के उत्पादक जिलों की संख्या 14 से बढ़ाकर 44 कर दी।</p>
<p>इसके अलावा पाक अधिकृत कश्मीर के चार जिले भी जोड़ दिये गये और जिलों की संख्या 48 हो गई। पाकिस्तान में जीआई टैग के लिए आवेदन को पब्लिक करने का प्रावधान नहीं है इसलिए भारत को पाकिस्तान के इस कदम की पूरी जानकारी नहीं मिल पाई। लेकिन ईयू में आवेदन के बाद जब पाकिस्तान के आवेदन को आपत्तियों के लिए सार्वजनिक किया गया तो भारत को बासमती पर पाकिस्तान की चाल का पता लगा।</p>
<p><strong>एमपी को बासमती क्षेत्र में शामिल करने की कवायद&nbsp;</strong></p>
<p>एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि पाकिस्तान के आवेदन पर भारत आधिकारिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज करा चुका है। उसमें भारत में बासमती उत्पादन के पारंपरिक क्षेत्र की बात भी कही गई है। इस मामले में भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के खिलाफ जो रुख अपनाया गया है उसके चलते मध्य प्रदेश को बासमती उत्पादन क्षेत्र में शामिल करने का कोई तर्क नहीं रह जाता है। अगर अब भारत बासमती क्षेत्र में मध्य प्रदेश को शामिल करता है तो इससे पाकिस्तान के खिलाफ दलील कमजोर होगी। भौगोलिक संकेत (<span>जीआई</span>) <span>की अवधारणा के हिसाब से भी मध्य प्रदेश को बासमती उत्पादक क्षेत्र घोषित करने का कोई पुख्ता आधार नहीं है। </span></p>
<p>जब मध्य प्रदेश का मामला बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड में पहुंचा तो मध्य प्रदेश की ओर से कई पैरोकार थे। लेकिन भारत सरकार इसके विरोध में थी और उसके साथ ही पाकिस्तान भी इसमें पक्षकार था। आईपीएबी में प्रतिकूल फैसले के बाद मध्य प्रदेश की ओर से मद्रास हाई कोर्ट में मामला दायर किया लेकिन वहां भी सफलता नहीं मिली। उसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा आया। सुप्रीम कोर्ट में इस बात पर भी बहस हुई कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पूरे राज्य में बासमती पैदा नहीं होता है लेकिन बासमती उत्पादक क्षेत्र के तौर पर पूरे राज्यों को चिन्हित किया गया है। इस मुद्दे पर विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मामले को वापस मद्रास हाई कोर्ट भेज दिया और अभी मामला उसी स्तर पर है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश को बासमती के भौगोलिक क्षेत्र में शामिल करने की कोशिशें फिर तेज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिसंबर में एथेनॉल मिश्रण 18% के पार पहुंचा, पेट्रोलियम आयात पर घटेगी निर्भरता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/ethanol-blending-exceeds-18-pc-in-december-dependence-on-petroleum-imports-to-decrease.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 16 Jan 2025 17:52:39 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/ethanol-blending-exceeds-18-pc-in-december-dependence-on-petroleum-imports-to-decrease.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सरकार को कामयाबी मिलती दिख रही है। चालू एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (2024-25) के दौरान दिसंबर में एथेनॉल मिश्रण 18.2 प्रतिशत तक पहुंच गया जो अब तक का सर्वाधिक है। नवंबर से शुरू हुए एथेनॉल आपूर्ति वर्ष में दिसंबर तक कुल एथेनॉल मिश्रण 16.4 प्रतिशत रहा है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि भारत अगले दो महीनों में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लेगा। गडकरी ने एक कार्यक्रम में कहा कि टाटा मोटर्स, महिंद्रा, मारुति सुजुकी और हुंडई मोटर्स ने 100 प्रतिशत बायो-एथेनॉल पर चलने वाले वाहनों का निर्माण शुरू कर दिया है। गडकरी ने कहा कि देश में प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण से वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) के अनुसार, दिसंबर 2024 में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (ईबीपी) के तहत मिश्रित एथेनॉल की मात्रा 76.6 करोड़ लीटर थी, जो नवंबर से दिसंबर के दौरान कुल 140.8 करोड़ लीटर थी। पेट्रोल में मिश्रण के लिए एथेनॉल की आपूर्ति वर्ष 2021-22 में 433.6 करोड़ लीटर थी जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 707.4 करोड़ लीटर तक पहुंच गई। इससे एथेनॉल मिश्रण 14.6 फीसदी हो गया था। चालू एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2024-25 में अब तक कुल 930 करोड़ लीटर एथेनॉल आपूर्ति के लिए आवंटन हो चुका है।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_6788fa05de375.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><span style="font-weight: 400;">केंद्र सरकार ने एथेनॉल वर्ष 2025-26 तक 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगभग 1,016 करोड़ लीटर एथेनॉल की आवश्यकता होगी। अन्य उपयोगों को ध्यान में रखते हुए कुल 1,350 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादन की जरूरत है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की शुरुआत वर्ष 2001 में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई थी। तब से ग्रीन ईंधन के तौर पर एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाने और पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने में उल्लेखनीय सफलता मिली है। पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य भारत ने निर्धारित समय से पहले ही जून 2022 में हासिल कर लिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल लॉन्च किया था। पहले चरण में 15 शहरों को शामिल किया गया था। गन्ने के साथ-साथ टूटे चावल और मक्का से भी एथेनॉल उत्पादन किया जा रहा है।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिसंबर में एथेनॉल मिश्रण 18% के पार पहुंचा, पेट्रोलियम आयात पर घटेगी निर्भरता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी उत्पादन में 20 लाख टन की गिरावट, शुगर रिकवरी भी घटी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sugar-production-fell-by-20-lakh-tonnes-recovery-also-decreased.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 15 Jan 2025 16:22:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sugar-production-fell-by-20-lakh-tonnes-recovery-also-decreased.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गन्ने की फसल पर रोगों और मौसम की मार के चलते इस साल चीनी उत्पादन को झटका लगा है। चालू पेराई सीजन में 15 जनवरी तक देश के चीनी उत्पादन में 20.65 लाख टन यानी 14% की गिरावट दर्ज की गई है। सीजन के आखिर तक चीनी उत्पादन में करीब 50 लाख टन की गिरावट आ सकती है।</p>
<p>सहकारी चीनी मिलों के संगठन<strong> नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ)</strong> के आंकड़ों के अनुसार, 15 जनवरी तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देश में चीनी उत्पादन 130.55 लाख टन रहा है जो पिछले साल इस अवधि तक 151.20 लाख टन था। चालू सीजन में कुल चीनी उत्पादन 270 लाख टन टन होने का अनुमान है जबकि पिछले सीजन में 319 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। यह एथेनॉल उत्पादन के लिए शुगर डायवर्जन के अलावा है।</p>
<p>इस सीजन में अब तक 507 चीनी मिलें चालू हैं, जबकि पिछले साल 524 मिलें चल रही थीं। इस बार गन्ने की फसल पर रेड रॉट व अन्य रोगों का प्रकोप रहा है। पहले भीषण गर्मी और फिर सर्दियां देर से शुरू होने के कारण चीनी मिलों का संचालन देर से शुरू हुआ। चीनी उत्पादन में गिरावट के पीछे ये कारण रहे हैं। &nbsp;</p>
<p>देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में 15 जनवरी तक चीनी उत्पादन पिछले साल के 46.10 लाख टन से घटकर 42.85 लाख टन रह गया है। महाराष्ट्र में 43.05 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ है जबकि पिछले सीजन में इस अवधि तक महाराष्ट्र का चीनी उत्पादन 52.80 लाख टन था। कर्नाटक में पिछले साल के 31 लाख टन की तुलना में अब तक 27.10 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ है।</p>
<p>चीनी उत्पादन के साथ-साथ गन्ने से चीनी की रिकवरी में कमी आई है। 15 जनवरी तक देश में औसत चीनी रिकवरी 8.81 फीसदी रही जबकि पिछले साल इस अवधि तक रिकवरी 9.37 फीसदी थी। यूपी में चीनी रिकवरी 9.90 फीसदी से घटकर 9.05 फीसदी रह गई है जबकि महाराष्ट्र में यह 8.95 फीसदी से घटकर 8.80 फीसदी रही है।</p>
<p>चीनी रिकवरी को सबसे बड़ा झटका कर्नाटक में लगा है जहां पिछले साल इस अवधि तक 9.60 फीसदी रिकवरी थी जो इस बार 8.50 फीसदी है। कर्नाटक में अधिक बारिश के कारण भी गन्ने की फसल प्रभावित हुई। चीनी उत्पादन और रिकवरी में गिरावट शुगर इंडस्ट्री के लिए चिंता का सबब है। उद्योग की ओर से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) और एथेनॉल का दाम बढ़ाने की मांग की जा रही है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_678793c9274f5.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी उत्पादन में 20 लाख टन की गिरावट, शुगर रिकवरी भी घटी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[20 जनवरी तक उत्तर भारत में बारिश&amp;#45;ओले की संभावना, कल से नए पश्चिमी विक्षोभ की दस्तक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rain-and-hail-likely-in-north-india-till-january-20-as-new-western-disturbance-approaches-january-14.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 13 Jan 2025 17:39:39 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rain-and-hail-likely-in-north-india-till-january-20-as-new-western-disturbance-approaches-january-14.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और कई इलाकों में बारिश से उत्तर भारत में ठंड और शीत लहर जारी है। पिछले 24 घंटों के दौरान हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में कुछ स्थानों पर शीत लहर का असर रहा जबकि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और मध्य महाराष्ट्र में कई स्थानों पर घना कोहरा छाया रहा। अमृतसर, हिसार, जैसलमेर, गंगानगर, हरदोई और प्रयागराज में जीरो विजबिलिटी दर्ज की गई।</p>
<p>मौसम विभाग के मुताबिक, 14 जनवरी की रात से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है। इसके प्रभाव में 16 से 19 जनवरी के दौरान जम्मू-कश्मीर, लद्दाख हिमाचल प्रदेश में कहीं-कहीं बारिश/बर्फबारी की संभावना है। 15 से 19 जनवरी के बीच उत्तराखंड में कहीं-कहीं बारिश या बर्फबारी हो सकती है। 15-16 जनवरी को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान और 15 जनवरी को पश्चिमी राजस्थान में छिटपुट बारिश की संभावना है। 20 या 21 जनवरी के बाद फिर सशक्त पश्चिमी विक्षोभ उत्तर के मैदानी और पहाड़ी क्षैत्रो को प्रभावित करेगा।</p>
<div class="x11i5rnm xat24cr x1mh8g0r x1vvkbs xtlvy1s x126k92a">
<div dir="auto">पिछले 24 घंटे के दौरान जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान 0&deg;C से नीचे; हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में 2-5&deg;C; उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में 6-12&deg;C; पूर्व और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में 12-18&deg;C रहा था। देश के मैदानी इलाकों में अमृतसर (पंजाब) में सबसे कम न्यूनतम तापमान 4.7&deg;C दर्ज किया गया। पूर्वी राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे (-1&deg;C से -3&deg;C) रहा है। हरियाणा के करनाल में न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि चंडीगढ़ में न्यूनतम तापमान 8.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री अधिक है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">नई दिल्ली में सोमवार को न्यूनतम तापमान 9.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया, जो सामान्य से 2.2 डिग्री अधिक है। दिन में अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने की संभावना है। आईएमडी ने राष्ट्रीय राजधानी में घने कोहरे के लिए पीली चेतावनी जारी की है।</div>
</div>
<p><strong>ओलावृष्टि के आसार </strong></p>
<p>मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के कारण 15 जनवरी को पंजाब और हरियाणा में कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि तथा मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। 13 जनवरी को पूर्वोत्तर राज्यों में छिटपुट स्थानों पर गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश और बिजली गिरने की आशंका है। अगले 48 घंटों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं होगा तथा उसके बाद 2-4&deg;C की क्रमिक वृद्धि होगी।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>शीतलहर और कोहरे की संभावना&nbsp;</strong></p>
<p>मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 13 और 14 जनवरी को हरियाणा व चंडीगढ़, 13 जनवरी को राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ स्थानों पर शीत दिवस की स्थिति रह सकती है। 13 और 14 जनवरी को हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ स्थानों पर पाला सकता है।&nbsp;</p>
<p>13 जनवरी को पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़ के कई हिस्सों में तथा 14 व 15 जनवरी को उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में रात/सुबह के समय घना से बहुत घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। 18 जनवरी तक राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में, 14 जनवरी तक बिहार में; 15 जनवरी तक उत्तराखंड में और 16 से 20 जनवरी तक पंजाब, हरियाणा चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर रात्रि/सुबह के समय घना कोहरा छा सकता है। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ 20 जनवरी तक उत्तर भारत में बारिश-ओले की संभावना, कल से नए पश्चिमी विक्षोभ की दस्तक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[संयुक्त किसान मोर्चा ने एमएसपी और खरीद प्रणाली पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग उठाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/skm-demands-release-of-white-paper-on-msp-and-procurement-system.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 09 Jan 2025 15:33:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/skm-demands-release-of-white-paper-on-msp-and-procurement-system.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने केंद्र सरकार से फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और खरीद प्रणाली पर एक श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। एसकेएम ने आरोप लगाया कि वर्तमान एमएसपी के आधार पर पूरे देश में करीब 90%<span> फसलों की खरीद नहीं की गई। </span></p>
<p>एसकेएम ने एक बयान जारी कर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से लोगों को गुमराह न करने और श्वेत पत्र के माध्यम से A2+FL<span>+</span>50%<span> और </span>C2+50% <span>एमएसपी के बीच अंतर को उजागर करने की मांग की। एसकेएम ने कहा कि धान की वर्तमान एमएसपी </span>₹2,300<span> प्रति क्विंटल सी</span>2+50%<span> के आधार पर दर से </span>30%<span> कम है</span>, <span>जो </span>₹3,012<span> प्रति क्विंटल होनी चाहिए। इस तरह धान के किसानों को प्रति क्विंटल </span>712 <span>रुपये का नुकसान हो रहा है। </span></p>
<p>एमएसपी की गणना के A2+FL <span>फॉर्मूले में खेती पर किसान की लागत और परिवार के श्रम का मूल्य शामिल होता है। जबकि</span> C2<span> फॉर्मूला अधिक व्यापक है</span>, <span>जिसमें </span>A2+FL <span>लागत के साथ-साथ स्वामित्व वाली भूमि का अनुमानित किराया मूल्य (या पट्टे पर ली गई भूमि का किराया) और निश्चित पूंजी पर ब्याज शामिल है।</span></p>
<p>एसकेएम ने कहा कि भारत में धान की औसत उत्पादकता 2,390<span> किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मानी जाती है</span>, <span>इसलिए एक हेक्टेयर भूमि वाले किसान को एक फसल पर </span>17,016 <span>रुपये का नुकसान हो रहा है जिससे आय में कमी और कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। लेकिन एनडीए</span>3<span> सरकार डॉ. एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय किसान आयोग की </span>C2+50%<span> की दर से एमएसपी की सिफारिश को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। एसकेएम ने 14 फसलों के लिए </span>A2+FL<span>+</span>50%<span> और </span>C2+50% <span>के आधार पर एमएसपी में अंतर को दर्शाया है</span>, <span>जिसके कारण पूरे देश में किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।</span></p>
<p>एसकेएम ने 4 <span>जनवरी को राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री के दावे कि &ldquo;जो भी गेहूं और चावल आता है</span>, <span>उसे एमएसपी पर खरीदने की व्यवस्था की जाती है</span>,&rdquo; <span>को तथ्यात्मक रूप से गलत करार दिया। एसकेएम ने कहा</span>, "<span>वास्तव में</span>, <span>फिलहाल </span>10% <span>से भी कम फसलों की खरीद की जाती है</span>, <span>और किसानों को अपनी शेष </span>90% <span>उपज को सरकार द्वारा घोषित एमएसपी से कम रेट पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।" </span></p>
<p>एसकेएम ने कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी की अध्यक्षता वाली कृषि, <span>पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण (</span>2024-25) <span>पर संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट में की गई सिफारिश को खारिज करते हुए कहा कि इसमें </span>C2<span>+50% की सिफारिश नहीं की गई है। इस प्रकार</span>, <span>संसदीय समिति ने किसानों को धोखा दिया है। गौरतलब है कि इस संसदीय समिति ने कानूनी रूप से बाध्यकारी एमएसपी को लागू करने की सिफारिश की थी। &nbsp;</span></p>
<p>संसदीय समिति ने किसानों के बढ़ते कर्ज और कृषि संकट से जुड़ी आत्महत्याओं के मद्देनजर किसानों और खेत मजदूरों के कर्ज माफ करने की योजना शुरू करने और खेत मजदूरों के लिए न्यूनतम जीवनयापन मजदूरी के लिए एक राष्ट्रीय आयोग बनाने की सिफारिश भी की थी,<span> जिसका एसकेएम ने स्वागत किया है। </span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_677f9ec234d0f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ संयुक्त किसान मोर्चा ने एमएसपी और खरीद प्रणाली पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग उठाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_677f9ec234d0f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[समावेशी विकास और किसानों की आय बढ़ाने में हाइब्रिड तकनीक महत्वपूर्ण: पीके मिश्रा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/hybrid-technology-is-important-for-inclusive-growth-and-increasing-farmers-income-pk-mishra.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 08 Jan 2025 20:00:17 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/hybrid-technology-is-important-for-inclusive-growth-and-increasing-farmers-income-pk-mishra.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने कहा है कि देश में खेती की छोटी जोत और कृषि पर निर्भर किसानों की बड़ी तादाद को देखते हुए हाईब्रिड तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित बनाने के लिए न सिर्फ ऊंची आर्थिक वृद्धि जरूरी है बल्कि आर्थिक विकास का समावेशी, न्यायपूर्ण और टिकाऊ होना भी आवश्यक है। इसमें कृषि क्षेत्र की अहम भूमिका रहेगी।</p>
<p>ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (तास) की ओर से &ldquo;फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए हाइब्रिड तकनीक&rdquo; <span>विषय पर नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय </span>संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पीके मिश्रा ने कहा कि जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी 1977 में 42 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 18 प्रतिशत होने के बावजूद देश के कार्यबल का 46 प्रतिशत अभी भी खेती पर निर्भर है, जबकि 1977 में यह 70 प्रतिशत था। कृषि क्षेत्र में 2016-17 से 2022-23 के दौरान 5 फीसदी की अभूतपूर्व ग्रोथ रही है। लेकिन 88 फीसदी छोटे किसान हैं। औसत जोत एक हेक्टेयर से कम हो गई है। कृषि की इन बुनियादी समस्याओं का सामना करने में हाइब्रिड तकनीक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_677e7f9c57775.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>पीके मिश्रा ने कृषि की उत्पादकता व पोषण बढ़ाने तथा जलवायु जोखिम का मुकाबला करने में हाइब्रिड तकनीक की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मक्का व कपास जैसी फसलों में हाइब्रिड तकनीक की मदद से पैदावार बढ़ाने में मदद मिली है। हालांकि, उत्पादकता बढ़ाने और प्रतिकूल जलवायु का सामना करने में हाईब्रिड किस्मों की क्षमताओं के बावजूद मक्का, बाजरा और कपास के अलावा अन्य फसलों में हाईब्रिड किस्मों का बहुत विस्तार नहीं हो सका है। जबकि सब्जियों व कई बागवानी फसलों की पैदावार बढ़ाने में हाईब्रिड किस्मों ने उल्लेखनीय परिणाम दिये हैं।</p>
<p>पीके मिश्रा के मुताबिक, यह समझने की जरूरत है कि किसान कुछ हाइब्रिड किस्मों को क्यों नहीं अपना पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए हाइब्रिड तकनीक को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से ऐसे हाइब्रिड बीज विकसित करने का सुझाव दिया जिन्हें सुरक्षित रखकर फिर से उपयोग किया जा सकता है। ताकि बीज की लागत में बचत हो।</p>
<p>कृषि क्षेत्र के विकास के लिए पीके मिश्राा ने बागवानी, पशुधन और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने, तकनीक के उपयोग, छोटे किसानों पर ध्यान देने, फसल विविधीकरण और फसल उत्पादकता में वृद्धि के साथ समग्र रणनीति अपनाने पर जोर दिया।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ समावेशी विकास और किसानों की आय बढ़ाने में हाइब्रिड तकनीक महत्वपूर्ण: पीके मिश्रा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जीएम पर स्पष्ट नीति की जरूरत, हाइब्रिड टेक्नोलॉजी में बड़ी संभवनाएं: डॉ. आर एस परोदा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/dr-paroda-called-for-clear-policy-on-genetically-modified-crops-and-tax-incentive-for-seed-industry.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 08 Jan 2025 19:42:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/dr-paroda-called-for-clear-policy-on-genetically-modified-crops-and-tax-incentive-for-seed-industry.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट इन एग्रीकल्चरल साइसेंस (तास) के चेयरमैन और आईसीएआर के पूर्व महानिदेशक <strong>डॉ. आर एस परोदा</strong> ने कहा है कि देश में जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम) टेक्नोलॉजी पर एक स्पष्ट राष्ट्रीय नीति की जरूरत है। हमें इस तकनीक पर आगे बढ़ना है या नहीं इसे साफ करने की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अधिक उत्पादकता वाली प्रजातियां विकसित करने के लिए हाइब्रिड टेक्नोलॉजी में बड़ी संभवनाएं हैं। देश में कई फसलों में हाइब्रिड बीज का उपयोग कर अधिक उत्पादन के परिणाम हमने हासिल किये हैं यह मक्का, कपास, सब्जियों और मोटे अनाज के मामले में इसकी कामयाबी के उदाहरण मौजूद हैं। इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि आईसीएआर के बजट में बढ़ोतरी करने के साथ बीज उद्योग को टैक्स छूट जैसे प्रोत्साहन देने और सार्वजनिक निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की जरूरत है। दिल्ली में बुधवार को शुरू हुए फसल उत्पादकता को बढ़ाने के लिए हाइब्रिड टेक्नोलॉजी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी से उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए अपने अध्यक्षीय यह बातें कहीं। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा इस सत्र में मुख्य अतिथि थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत ने हाइब्रिड टेक्नोलॉजी में बड़ी सफलता हासिल की है। इनमें बाजरा, कैस्टर और कपास बड़े उदाहरण है। इसके साथ ही मक्का में भारत ने उत्पादकता बढ़ाने में सफलता हासिल की है। एक समय में हमारे देश में मक्का की उत्पादकता एक टन प्रति हैक्टेयर थी जबकि अमेरिका में यह दस टन प्रति हैक्टेयर थी। निजी क्षेत्र को आश्वासन मिलने के बाद कंपनियों ने सिंगल क्रास हाइब्रिड बीज किस्में बाजार में उतारी। अभी देश में मक्का की औसत उत्पादकता 3.5 टन हो गई है। जबकि बिहार में मक्का की विंटर क्राप की उत्पादकता सात टन से उपर पहुंच गई है।&nbsp; भारत चावल की हाइब्रिड किस्मों को विकसित करने में काफी आगे रहा है। चीन में चावल का 50 फीसदी क्षेत्रफल हाइब्रिड राइस के तहत आ गया है। जबकि भारत में अभी हम काफी पीछे हैं। उत्पादकता बढ़ाने के लिए हाइब्रिड अहम टेक्नोलॉजी है और यह विवादित भी नहीं है।</p>
<p>उन्होंने बीटी कपास का जिक्र करते हुए कहा कि जीएम कॉटन की मंजूरी के चलते उत्पादन बढ़ाने से हम दुनिया के सबसे बड़ी कपास उत्पादक बन गए थे लेकिन पिछले एक दशक से कोई भी नई इवेंट मंजूर नहीं होने से हमारा उत्पादन घट गया है और चीन हमसे आगे चला गया है। जीएम किस्मों के बारे में सरकार को एक स्पष्ट नीति लानी चाहिए ताकि यह साफ हो सके कि इस पर आगे बढ़ना है या नहीं। जीएम फसलों के इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी मामला चल रहा है। जबकि सरकार डॉ दीपक पेंटल द्वारा विकसित सरसों की जीएम किस्म को मंजूरी दे चुकी है। ऐसे में स्पष्ट नीति नहीं होने से भ्रम पैदा होता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बीज उद्योग में भारतीय कंपनियों ने काफी काम किया है और अब देश में निजी क्षेत्र में कई बड़ी बीज कंपनियां हैं। सरकार उर्वरकों पर सब्सिडी देती है ऐसे में बीज क्षेत्र को भी प्रोत्साहन मिलना चाहिए। निवेश को प्रोत्साहित करने लिए टैक्स प्रोत्साहन मिलना जरूरी है। वहीं उन्होंने कहा कि आईसीएआर का बजट पिछले कई साल से लगभग स्थिर है। सरकार को इसमें बढ़ोतरी करनी चाहिए। प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वेरायटी एंड फार्मर्स राइट अथारिटी बनने से बौद्धिक संपदा को संरक्षण मिला है और उससे निजी क्षेत्र द्वारा कृषि शोध में निवेश बढ़ा है। डॉ. परोदा ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में कृषि में शोध और टेक्नोलॉजी पर काफी काम हुआ है हम कृषि उत्पादन में आगे बढ़े हैं। इसके साथ ही सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच भागीदारी को बढ़ावा देने की जरूरत है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_677e91152ac02.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>इस मौके पर फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एफएसआईआई) के चेयरमैन और सवाना सीड्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर <strong>अजय राणा</strong> ने कहा कि देश में हाइब्रिड टेक्नोलॉजी समेत जीएम टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने की जरूरत है। किसानों की आय बढ़ाने का एक बड़ा उपाय टेक्नोलॉजी का उपयोग कर फसलों की उत्पादकता को बढ़ावा देना है। देश में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तमाम उदाहरण है जहां हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के जरिये उत्पादकता बढ़ी है। बिहार में रबी मक्का की ऊंची उत्पादकता इसका उदाहरण है। हम गुजरात में भी इस सफलता को दोहराने के लिए काम कर रहे हैं। इसी तरह ट्रांसजनिक टेक्नोलॉजी से भी उत्पादकता बढ़ी है।</p>
<p>अजय राणा ने कहा कि जीएम कॉटन के जरिये भारत में कपास का उत्पादन 400 लाख गांठ तक चला गया था लेकिन अब यह करीब 300 लाख गांठ रह गया है। हमारी कपास की जरूरत करीब 450 लाख गांठ की है। हाइब्रिड सरसों भी एक कामयाबी का उदाहरण है जहां इसकी किस्मों की उत्पादकता ढाई टन प्रति हैक्टेयर तक पहुंच गई है। हाइब्रिड चावल में हम कई राज्यों में उत्पादकता का लक्ष्य हासिल कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी का उपयोग कर देश की अर्थव्यवस्था में कृषि की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए हमें चीन का उदाहर देखना चाहिए जहां हमसे कम फसल क्षेत्रफल में कृषि की हिस्सेदारी हमसे करीब तीन गुना है। कृषि में एक रुपये का निवेश 13 रुपये का रिटर्न देता है। भारत में सीड इंडस्ट्री करीब 40 हजार करोड़ रुपये है हमें बीज उद्योग में शोध पर निवेश बढ़ाने की जरूरत है। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जीएम पर स्पष्ट नीति की जरूरत, हाइब्रिड टेक्नोलॉजी में बड़ी संभवनाएं: डॉ. आर एस परोदा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विशेष सब्सिडी के बाद भी डीएपी आयात घाटे का सौदा, ऊंचे दाम और कमजोर रुपये ने बिगाड़ा गणित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/loss-in-dap-import-even-after-special-subsidy-weak-rupee-spoils-calculation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 04 Jan 2025 00:06:10 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/loss-in-dap-import-even-after-special-subsidy-weak-rupee-spoils-calculation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई नये साल की पहली कैबिनेट बैठक में डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) पर 3500 रुपये प्रति टन की विशेष सब्सिडी जारी रखने का फैसला लिया गया। सरकार के इस फैसले से उम्मीद जगी कि डीएपी उर्वरक का दाम नहीं बढ़ेगा और किसानों को यह 1350 रुपये प्रति बैग (50 <span>किलो</span>) के हिसाब से मिलता रहेगा। लेकिन विशेष सब्सिडी के बावजूद उर्वरक कंपनियों को डीएपी का दाम 1350 रुपये प्रति बैग रखने पर करीब 3500 रुपये प्रति टन का घाटा उठाना पड़ सकता है।</p>
<p>उच्च पदस्थ सूत्रों ने <strong>रूरल वॉयस </strong>को बताया कि इस संबंध में ब्रहस्पतिवार को उर्वरक मंत्रालय ने उर्वरक कंपनियों की बैठक बुलाई गई थी जिसमें डीएपी का दाम 1350 रुपये प्रति बैग पर बरकरार रखने को कहा गया। इस तरह उर्वरक कंपनियों में डीएपी का दाम नहीं बढ़ाने का दबाव है। जबकि दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीएपी की बढ़ती कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी को देखते हुए विशेष सब्सिडी के बाद भी डीएपी आयात उर्वरक कंपनियों के लिए घाटे का सौदा बन सकता है।</p>
<p>सरकार ने न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत दी जाने वाली सब्सिडी के अलावा 3500 रुपये प्रति टन की दर से विशेष सब्सिडी जारी रखने की घोषणा की है। सरकार ने पहले यह स्पेशल इंसेंटिव अप्रैल, 2024 से 31 दिसंबर, 2024 के लिए दिया था। बुधवार की कैबिनेट बैठक में इसे 31 दिसंबर, 2025 तक जारी रखने का फैसला लिया है। लेकिन हर तिमाही पर इसकी समीक्षा की जाएगी और उसके आधार पर फैसले में बदलाव किया जा सकता है।</p>
<p>उद्योग सूत्रों के मुताबिक, इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीएपी की कीमत 630 डॉलर प्रति टन के आसपास है। वहीं, सरकार ने स्पेशल सब्सिडी तय करने के लिए वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमत 559.71 डॉलर प्रति टन को आधार बनाया है और डॉलर की दर को 83.23 रुपये प्रति डॉलर माना है। जबकि डीएपी की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति टन बढ़ चुकी है। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया 3 जनवरी को &nbsp;85.78 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया। इन दो कारकों के चलते डीएपी की आयात लागत करीब साढ़े 7 हजार रुपये प्रति टन बढ़ गई है। जिससे उर्वरक कंपनियों को 3500 रुपये प्रति टन की विशेष सब्सिडी के बावजूद घाटा उठाना पड़ेगा।</p>
<p>सरकार एनबीएस के तहत डीएपी पर 21,911 रुपये की सब्सिडी देती है। इसके आलावा 3,500 रुपये प्रति टन का स्पेशल इंसेंटिव है। डीएपी बिक्री की मौजूदा कीमत 27,000 रुपये प्रति टन है। यह सब मिलाकर 52,411 रुपये प्रति टन बैठता है। लेकिन वैश्विक बाजार में डीएपी की मौजूदा कीमत 630 डॉलर प्रति टन और डॉलर के मुकाबले रुपया 85.78 के स्तर पर होने के चलते एक टन डीएपी का आयात मूल्य ही 54,041 रुपये प्रति टन बैठता है। इसके ऊपर पांच फीसदी सीमा शुल्क, पोर्ट हैंडलिंग और बैगिंग खर्च व डीलर मार्जिन का अतिरिक्त खर्च आता है।</p>
<p>उद्योग सूत्रों ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि मौजूदा स्थिति में एनबीएस सब्सिडी और स्पेशल इंसेंटिव के बाद भी एक टन डीएपी पर उर्वरक कंपनियों को करीब 3500 रुपये प्रति टन का नुकसान होगा।&nbsp;इसका असर उर्वरक कंपनियों द्वारा किये जाने वाले डीएपी आयात पर पड़ सकता है। इसलिए डीएपी पर विशेष सब्सिडी जारी रखने के बावजूद देश में डीएपी का कितना आयात हो पाएगा, फिलहाल कहना मुश्किल है।</p>
<p>डीएपी का सबसे ज्यादा उपयोग बेसल डोज के रूप में होता है यानी बुवाई के समय ही इसका अधिक उपयोग किया जाता है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 15 दिसंबर, 2024 तक देश में डीएपी का स्टॉक 9.2 लाख टन था जबकि पिछले साल इसी समय तक देश में 13 लाख टन डीएपी का स्टॉक था। देश में डीएपी की सालाना करीब 100 लाख टन है और यूरिया के बाद यह सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला उर्वरक है। डीएपी और इसके देश में होने वाले उत्पादन के लिए कच्चे माल समेत करीब 90 फीसदी आयात पर निर्भरता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ विशेष सब्सिडी के बाद भी डीएपी आयात घाटे का सौदा, ऊंचे दाम और कमजोर रुपये ने बिगाड़ा गणित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फसल बीमा योजनाओं को सुधारों के साथ मंजूरी, तकनीक व नवाचार के लिए ₹824.77 करोड़ का कोष]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/approval-of-modifications-in-crop-insurance-schemes-fund-of-rs-824-crore-for-technology-and-innovation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 01 Jan 2025 18:10:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/approval-of-modifications-in-crop-insurance-schemes-fund-of-rs-824-crore-for-technology-and-innovation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को 2025-26 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए 2021-22 से 2025-26 तक 69,515.71 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय तय किया गया है। इस निर्णय से 2025-26 तक देश भर के किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से फसलों के जोखिम कवरेज में मदद मिलेगी।&nbsp;</p>
<p>पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए, मंत्रिमंडल ने नवाचार और प्रौद्योगिकी (FIAT) के लिए ₹824.77 करोड़ के कोष के निर्माण को भी मंजूरी दी। यह कोष प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए उपज अनुमान प्रणाली (YES-TECH) और मौसम सूचना और नेटवर्क डेटा सिस्टम (WINDS) जैसी तकनीकी पहलों का समर्थन करेगा।</p>
<p><strong>फसल बीमा में तकनीकी का प्रयोग&nbsp;</strong></p>
<p><strong>YES-TECH:</strong> उपज अनुमान के लिए रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग करता है, जिसमें प्रौद्योगिकी-आधारित आकलन के लिए न्यूनतम 30% वेटेज शामिल है। इसे वर्तमान में नौ प्रमुख राज्यों में लागू किया गया है, जिसमें मध्य प्रदेश भी शामिल है, जिसने 100% प्रौद्योगिकी-आधारित उपज अनुमान को अपनाया है।</p>
<p><strong>WINDS:</strong> ब्लॉक स्तर पर स्वचालित मौसम स्टेशन (AWS) और पंचायत स्तर पर स्वचालित वर्षा गेज (ARG) स्थापित करने की योजना है, जिससे मौसम डेटा घनत्व पाँच गुना बढ़ जाएगा। यह पहल 2024-25 में शुरू होगी, जिसमें केरल, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों को सहायता देने के लिए 90:10 केंद्र-राज्य वित्त पोषण अनुपात होगा।</p>
<p><strong>पूर्वोत्तर के राज्यों पर ध्यान</strong></p>
<p>सरकार का लक्ष्य पूर्वोत्तर राज्यों में किसानों को प्राथमिकता देना है, फसल बीमा के लिए 90% प्रीमियम सब्सिडी की पेशकश करना। इन क्षेत्रों में कम फसल वाले क्षेत्रों और स्वैच्छिक भागीदारी के कारण अप्रयुक्त निधियों को अन्य विकास परियोजनाओं में पुनः आवंटित करने के लिए लचीलापन पेश किया गया है।&nbsp;ये पहल मजबूत बीमा तंत्र और उन्नत प्रौद्योगिकी के साथ किसानों को सशक्त बनाने तथा जलवायु संबंधी जोखिमों के प्रति लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।</p>
<p><strong>नए साल का पहला फैसला किसानों को समर्पित: पीएम मोदी&nbsp;</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नए साल में सरकार का पहला फैसला किसानों को समर्पित है। उनकी अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फसल बीमा योजना के लिए आवंटन बढ़ाया और एक प्रमुख उर्वरक पर सब्सिडी बढ़ा दी। उन्होंने एक्स पर कहा, "(सरकार का) नए साल का पहला फैसला हमारे देश के करोड़ों किसान भाइयों और बहनों को समर्पित है। हमने फसल बीमा योजना के लिए आवंटन बढ़ाने को मंजूरी दी है। इससे किसानों की फसलों को अधिक सुरक्षा मिलेगी और किसी भी नुकसान के बारे में उनकी चिंता भी कम होगी।" उन्होंने कहा कि डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) पर एकमुश्त विशेष पैकेज का विस्तार करने के कैबिनेट के फैसले से किसानों को सस्ती कीमतों पर उर्वरक सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ फसल बीमा योजनाओं को सुधारों के साथ मंजूरी, तकनीक व नवाचार के लिए ₹824.77 करोड़ का कोष ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बिना फार्मर रजिस्ट्री नहीं मिलेगी सम्मान निधि, जानिए कैसे बनवाएं फार्मर आईडी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-kisan-samman-nidhi-will-not-be-given-without-farmer-registry-know-how-to-get-farmer-id.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 30 Dec 2024 14:08:46 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-kisan-samman-nidhi-will-not-be-given-without-farmer-registry-know-how-to-get-farmer-id.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि के डिजिटाइजेशन के लिए केंद्र सरकार की ओर से <strong>डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर एग्रीकल्चर (एग्रीस्टैक)</strong> स्कीम लागू की जा रही है। इसके तहत राज्य सरकारों के माध्यम से <strong>किसान रजिस्ट्री</strong>&nbsp;तथा&nbsp;<strong>फार्मर आईडी</strong> बनाने का अभियान चल रहा है। आने वाले समय में किसानों को पीएम-किसान, फसल बीमा व अन्य योजनाओं का लाभ फार्मर आईडी के आधार पर ही दिया जाएगा। इस प्रकार किसानों के लिए फार्मर आईडी बनवाना आवश्यक है।</p>
<p>फार्मर आईडी के बिना किसानों को कृषि से जुड़ी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा। <strong>31 दिसंबर, 2024</strong>&nbsp;के बाद पीएम किसान सम्मान निधि (<span>पीएम-किसान</span>) योजना की किस्त प्राप्त करने के लिए फार्मर रजिस्ट्री आवश्यक है।</p>
<p>यहां सवाल यह भी उठता है कि जब आधार कार्ड बन चुका है और इसे कई योजनाओं से जोड़ा जा चुका है तो किसानों के लिए अलग से कार्ड क्यों बनवाया जा रहा है। सरकार के विभिन्न विभागों व योजनाओं के लिए अलग-अलग कार्ड और आईडी बन रहे हैं जो आधार की प्रासंगिकता पर सवालिया निशान लगाते हैं।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री तैयार करने के लिए<strong> 31 जनवरी, 2025</strong> तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का दावा है कि फार्मर रजिस्ट्री के जरिए किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में आसानी होगी, साथ ही किसानों से जुटे सटीक आंकड़े उपलब्ध होने से नीति-निर्माण में मदद मिलेगी। फार्मर आईडी बनने से किसानों को बार-बार केवाईसी करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।</p>
<p>हालांकि, फार्मर रजिस्ट्री के बारे में अभी किसानों तक पूरी जानकारी नहीं पहुंची है। यही वजह है कि अधिकांश किसानों के फार्मर आईडी नहीं बन पाये हैं। इसके लिए सरकार को प्रयासों में तेजी लानी पड़ेगी। इस बीच, रजिस्ट्री पोर्टल में कुछ दिक्कतें आने से भी फार्मर आईडी बनवाने का काम प्रभावित हुआ।</p>
<p>बिजनौर के जिला कृषि अधिकारी <strong>जसवीर सिंह तेवतिया</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि लेखपाल या जन सेवा केंद्र अथवा मोबाइल एप के माध्यम से किसान अपने फार्मर आईडी बनवा सकते हैं। इस बारे में विशेष अभियान चलाकर किसानों को जागरुक किया जा रहा है।&nbsp;</p>
<p></p>
<p><strong>क्या है किसान रजिस्ट्री?</strong></p>
<p>कृषि से जुड़ी महत्वपूर्ण डिजिटल पहल के रूप में <strong>किसान रजिस्ट्री</strong> की शुरुआत की गई है। इस प्रणाली के तहत, प्रत्येक किसान के लिए एक विशिष्ट किसान आईडी (फार्मर आईडी) बनाई जाएगी। जिसका इस्तेमाल किसान विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए करेंगे।</p>
<p></p>
<p><strong>कैसे बनवाये फार्मर आईडी?</strong></p>
<ul>
<li><strong>ग्राम पंचायत स्तर</strong> पर किसान कृषि विभाग के कर्मचारी, राजस्व लेखपाल, पंचायत सहायक, रोजगार सेवक द्वारा आयोजित किए जा रहे फार्मर रजिस्ट्री कैंप में जाकर अपनी फार्मर आईडी बनवा सकते हैं।</li>
<li><strong>मोबाइल ऐप (</strong><strong>Farmer Registry UP) </strong>के माध्यम से किसान खुद भी अपनी फार्मर रजिस्ट्री कर सकते है।</li>
<li><strong>पोर्टल (</strong><strong>upfr.agristack.gov.in) </strong>एग्री स्टैक के स्टेटे पोर्टल&nbsp;पर जाकर भी किसान फार्मर रजिस्ट्री कर सकते हैं। यहां विवरण भरना होगा। मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा। उसे भरेंगे तो फार्मर रजिस्ट्री नंबर मिल जाएगा।</li>
<li><strong>जन सेवा केंद्र </strong>सेल्फ मोड के साथ-साथ किसान जन सेवा केन्द्र (CSC) के जरिए निर्धारित शुल्क देकर फार्मर आईडी बनवा सकते है।</li>
</ul>
<p><strong></strong></p>
<p><strong>फार्मर रजिस्ट्री के लिये आवश्यक दस्तावेज</strong></p>
<ol>
<li>आधार कार्ड</li>
<li>आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नम्बर</li>
<li>भूमि रिकार्ड (खसरा खतौनी की प्रति)</li>
</ol>
<p>फार्मर रजिस्ट्री के लिए किसान का स्वयं मौजूद रहना आवश्यक है। &nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_67725c0d4d2c4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बिना फार्मर रजिस्ट्री नहीं मिलेगी सम्मान निधि, जानिए कैसे बनवाएं फार्मर आईडी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जनवरी से डीएपी के दाम 200 रुपये तक बढ़ना तय, जानिए क्या हैं कारण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/dap-price-set-to-increase-by-rs-200-from-january-know-why-such-situation-has-arisen.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 28 Dec 2024 11:15:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/dap-price-set-to-increase-by-rs-200-from-january-know-why-such-situation-has-arisen.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में यूरिया के बाद सबसे अधिक खपत वाले उर्वरक डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की कीमतें जनवरी में बढ़ना लगभग तय है। यह कीमतें 200 रुपये प्रति बैग (50 किलो) तक बढ़ सकती हैं। कीमत बढ़ने की स्थिति में डीएपी के एक बैग की कीमत मौजूदा 1350 रुपये से बढ़कर 1550 रुपये प्रति बैग तक हो सकती है। कीमतों में बढ़ोतरी की दो मुख्य वजह हैं, <strong>पहली,</strong> सरकार द्वारा डीएपी के आयात पर दिये जा रहे स्पेशल इंसेंटिव की अवधि का 31 दिसंबर को समाप्त होना और <strong>दूसरी,</strong> डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से आयात लागत का बढ़ना।</p>
<p><strong>उद्योग सूत्रों</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि सरकार द्वारा आयातित डीएपी पर 3500 रुपये प्रति टन का जो स्पेशल इंसेंटिव दिया जा रहा है उसकी अवधि 31 दिसंबर, 2024 को समाप्त हो जाएगी। इसका मतलब यह बोझ उद्योग को उठाना पड़ेगा। वहीं, पिछले कुछ समय में डॉलर के मुकाबले रुपया 83.50 रुपये प्रति डॉलर से गिरकर 85.50 रुपये प्रति डॉलर तक गिर गया है। वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमत 630 डॉलर प्रति टन के आधार पर रुपये के कमजोर होने से ही आयात लागत करीब 1200 रुपये प्रति टन बढ़ गई है। इन दो कारकों का सीधा असर करीब 4700 रुपये प्रति टन की बढ़ी लागत के रूप में सामने आ रहा है। ऐसे में प्रति बैग करीब 235 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।</p>
<p>सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में सरकारी को ओर से फिलहाल कोई निर्देश नहीं है क्योंकि गैर-यूरिया उर्वरक विनियंत्रित हैं और इनकी कीमत का फैसला उद्योग खुद ले सकता है क्योंकि सब्सिडी का स्तर फिक्स है। ऐसे में उद्योग के पास दाम बढ़ाने का ही विकल्प बचता है।</p>
<p>इसके पहले दो साल पहले डीएपी की कीमत में 150 रुपये प्रति बैग की बढ़ोतरी हुई थी जिसके चलते इसकी कीमत 1350 रुपये पहुंच गई। हालांकि सरकार विनियंत्रित उर्वरकों पर न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनबीएस) स्कीम के तहत एन, पी, के और एस के आधार पर प्रति किलो के हिसाब से सब्सिडी देती है। लेकिन परोक्ष रूप से सरकार सब्सिडी का स्तर बढ़ाकर कीमतों को 1350 रूपये प्रति बैग के स्तर पर बनाये हुए है।</p>
<p><strong>डीएपी का संकट</strong>&nbsp;</p>
<p>चालू रबी सीजन में डीएपी का उपलब्धता का संकट बना रहा है। वैश्विक बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी के चलते उद्योग को मौजूदा दाम पर घाटा हो रहा था जिसके चलते आयात में गिरावट आई और देश में डीएपी का संकट पैदा हुआ। बाद में सरकार ने स्पेशल इंसेटिव दिया तो आयात में तेजी आई। डीएपी आयात में कमी के पीछे चीन से आयात घटने, भू-राजनीतिक तनाव और लाल सागर के रास्ते परिवहन में दिक्कतों जैसे कारण हैं। इसके अलावा ग्लोबल मार्केट में डीएपी उत्पादन की सीमित क्षमताओं और कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण भी आयात प्रभावित हुआ।</p>
<p><strong>आयात पर निर्भरता</strong></p>
<p>भारत फॉस्फेटिक उर्वरकों की करीब 90 फीसदी खपत को आयात के जरिए पूरा करता है। देश में हर साल करीब 100 लाख टन डीएपी की खपत होती है जिसमें से लगभग 60 लाख टन डीएपी का आयात होता है। देश में जो उत्पादन होता है उसका अधिकांश कच्चा माल रॉक फॉस्फेट या फॉस्फोरिक एसिड आयात किया जाता है।</p>
<p><strong>दाम वृद्धि के आसार&nbsp;</strong></p>
<p>मौजूदा समय में कोई ऐसी महत्वपूर्ण फसल नहीं है जिसके लिए डीएपी की अधिक मांग हो। मार्च में गन्ने की बुआई के समय ही अधिक मांग निकलेगी और उसके बाद खरीफ सीजन में ही इसकी मांग बढ़ेगी। ऐसे में डीएपी की कीमत में बढ़ोतरी कोई बड़ा राजनीतिक जोखिम नहीं है। क्योंकि आने वाले महीनों में दिल्ली को छोड़कर किसी बड़े राज्य में चुनाव भी नहीं है।&nbsp;अक्सर डीएपी की कीमत और उसकी उपलब्धता राजनीतिक मुद्दा बनता रहा है और सरकार इससे बचने की कोशिश करती रही है। देश में सालाना करीब 100 लाख टन डीएपी की खपत होती है और यह यूरिया के बाद सबसे अधिक उपयोग होने वाले उर्वरक है।&nbsp;</p>
<p><strong>डीएपी के अधिक दाम की मांग &nbsp;</strong></p>
<p>उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए फर्टिलाइजर इंडस्ट्री ने उर्वरकों के दाम पोषण के आधार पर तय करने की मांग की है। इस हिसाब से गैर-यूरिया उर्वरकों में डीएपी की कीमतें सबसे ज्यादा होनी चाहिए क्योंकि इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू सबसे ज्यादा है। इसके बाद अन्य उर्वरकों के दाम होने चाहिए।</p>
<p><strong>डीएपी के उत्पादन</strong><strong>,&nbsp;</strong><strong>आयात और बिक्री में कमी</strong></p>
<p>फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अप्रैल से अक्टूबर के बीच देश के डीएपी उत्पादन में 7.4 फीसदी की गिरावट आई जबकि डीएपी का आयात पिछले साल के मुकाबले 29.8 फीसदी कम हुआ। इस दौरान डीएपी की बिक्री में 25.4 फीसदी की गिरावट आई जबकि एमओपी की बिक्री 24.7 फीसदी तथा एनपीके की बिक्री 23.5 फीसदी बढ़ गई है।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_676f8f8f59172.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जनवरी से डीएपी के दाम 200 रुपये तक बढ़ना तय, जानिए क्या हैं कारण ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दलहन, तिलहन की बजाय गेहूं की तरफ बढ़ा किसानों का रुझान, रकबा बढ़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indian-farmers-interest-in-wheat-increased-instead-of-pulses-and-oilseeds-acreage-increased.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 27 Dec 2024 18:15:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indian-farmers-interest-in-wheat-increased-instead-of-pulses-and-oilseeds-acreage-increased.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की तरफ किसानों का रुझान बढ़ रहा है जबकि दलहन व तिलहन की बुवाई पिछले साल के मुकाबले पिछड़ गई है। 20 दिसंबर तक देश में रबी सीजन की बुवाई के सामान्य रकबे का 93 प्रतिशत कवर हो चुका है। नवंबर में ठंड कम पड़ने के कारण रबी की बुवाई देर से शुरू हुई थी। सर्दियां देर से शुरू होने के कारण रबी बुवाई सीजन लंबा चलेगा। हाल के दिनों में हुई बारिश और तापमान में आई गिरावट गेहूं के लिए फायदेमंद है। &nbsp;</p>
<p>कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 20 <span>दिसंबर तक देश में कुल 590.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई हो चुकी है जो पिछले साल के 590.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से मामूली कम है। गेहूं का रकबा </span>2.46<span> प्रतिशत बढ़कर </span>312.28<span> लाख हेक्टेयर हो गया जबकि दलहन की बुवाई में 1.25 लाख हेक्टेयर और तिलहन की बुवाई में 5.67 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। दलहन व तिलहन फसलों के सही दाम न मिलने और गेहूं की ऊंची कीमतों के कारण किसानों का रुझान गेहूं की तरफ बढ़ा है। &nbsp;</span></p>
<p>केंद्र सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2024-25 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (<span>एमएसपी</span>) 2425 <span>रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि बाजार में गेहूं का भाव 3000</span>-<span>3200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में राज्य सरकारों ने पिछले सीजन में गेहूं खरीद पर एमएसपी के अलावा बोनस भी दिया था। दूसरी तरफ</span>, <span>प्रमुख तिलहन फसलों सरसों और सोयाबीन के दाम एमएसपी से भी नीचे गिर गये। कमोबेश यही स्थिति कई दलहन फसलों की है जिनका किसानों को सही भाव नहीं मिल पा रहा है। खासतौर से मूंग की कीमतें एमएसपी से कम रही और किसानों को सरकारी खरीद में मूंग बेचने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ा था। यही वजह है कि किसानों को दलहन व तिलहन </span>फसलों से मोहभंग होने लगा है।</p>
<p>तिलहन और दलहन की खरीद धान व गेहूं की तरह सुनिश्चित न होने के कारण भी किसानों को रुझान दलहन व तिलहन फसलों की तरफ से घटा है। इससे दालों और खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भरता के प्रयासों को झटका लगेगा।</p>
<p><strong>तिलहन का क्षेत्र 5.62 फीसदी घटा </strong></p>
<p>20 दिसंबर तक देश में 95.22 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी तिलहन फसलों की बुवाई हुई जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 5.62 फीसदी कम है। सबसे ज्यादा 5.58<span> फीसदी की गिरावट सरसों की बुवाई में आई है जबकि मूंगफली का रकबा पिछले साल से 7.38 फीसदी घटा है। सरसों का रकबा 93.73 लाख हेक्टेयर से घटकर 88.50 लाख हेक्टेयर रह गया जबकि मूंगफली का रकबा 3.12 लाख हेक्टेयर से घटकर 2.89 लाख हेक्टेयर रह गया। यह स्थिति तब है जब घरेलू खपत की करीब 60 फीसदी जरूरत खाद्य तेलों के आयात के पूरी हो रही है।</span></p>
<p><strong>दलहन की बुवाई एक फीसदी कम </strong></p>
<p>रबी दलहन की बुवाई का क्षेत्र पिछले साल के 126.89 लाख हेक्टेयर से करीब एक फीसदी घटकर 125.64 लाख हेक्टेयर रह गया है जबकि देश में रबी दलहन का औसत क्षेत्र 140.44 लाख हेक्टेयर है। दालों के सस्ते आयात के कारण किसानों को सही भाव नहीं मिल पा रहा है और कई दालों के भाव एमएसपी से नीचे चल रहे हैं।</p>
<p>दलहन फसलों में सिर्फ चने का रकबा पिछले साल से अधिक है। पिछले सीजन में चना की कीमतें एमएसपी से ऊपर रही थी। रबी मूंग की बुवाई क्षेत्र 1.52 लाख हेक्टेयर से घटकर 52 हजार हेक्टेयर और उड़द का क्षेत्र 4.28 लाख हेक्टेयर से घटकर 3.58 लाख हेक्टेयर रह गया है। चने का रकबा करीब दो फीसदी बढ़कर 86 <span>लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया</span>, <span>लेकिन मसूर का रकबा </span>4 <span>प्रतिशत घटकर </span>17.06 <span>लाख हेक्टेयर रह गया है। &nbsp;</span></p>
<p><strong>मोटे अनाजों का क्षेत्र 2.5 फीसदी कम </strong></p>
<p>रबी सीजन में श्रीअन्न एवं मोटे अनाजों की बुवाई का क्षेत्र पिछले साल के 46.01 लाख हेक्टेयर से घटकर 44.84 लाख हेक्टेयर रह गया है। एथेनॉल उत्पादन के लिए काफी मांग के बावजूद मक्का की बुवाई के क्षेत्र में 4.1<span> प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि जौ का रकबा 17.4</span>2<span> प्रतिशत घटकर 6.62 लाख हेक्टेयर रह गया है। हालांकि</span>, <span>ज्वार का रकबा करीब 4 फीसदी बढ़ाकर 21.43 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गय है।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_676ebed46b4d7.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_676ea14258da7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ दलहन, तिलहन की बजाय गेहूं की तरफ बढ़ा किसानों का रुझान, रकबा बढ़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने की आईसीएआर के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बजट चर्चा, अगले 5 वर्षों के रोडमैप पर भी हुई बात]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-minister-shivraj-singh-held-budget-discussions-with-senior-icar-officials-also-deliberated-on-the-roadmap-for-the-next-5-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Dec 2024 22:47:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-minister-shivraj-singh-held-budget-discussions-with-senior-icar-officials-also-deliberated-on-the-roadmap-for-the-next-5-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE)-भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक ली।&nbsp;</p>
<p>इस बैठक में वर्ष 2025-26 के लिए विभाग के बजट पर चर्चा हुई। साथ ही कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। केंद्रीय मंत्री ने ICAR में विभिन्न अनुसंधान और योजनाओं के तहत चल रहे कार्यों तथा उनके बजट आवंटन पर चर्चा के दौरान आवश्यक दिशानिर्देश भी दिए।&nbsp;</p>
<p>बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की पिछले सालों में अर्जित की गई मुख्य उपलब्धियां तथा आगामी 5 वर्षों के लक्ष्य और रोड मैप पर विस्तृत चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने अनुसंधान के नए आयाम खोजने पर जोर दिया। फसलों की उत्पादकता को प्रति हेक्टेयर कैसे बढ़ाया जाए, इस पर भी विस्तृत चर्चा की। बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक, वित्तीय सलाहकार, उप &nbsp;महानिदेशक और सहायक महानिदेशक के साथ अन्य उच्च अधिकारी भी उपस्थित थे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_676c3dc0302d9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने की आईसीएआर के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बजट चर्चा, अगले 5 वर्षों के रोडमैप पर भी हुई बात ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तास अवार्ड 2024: सुरेश प्रभु और सौम्या स्वामीनाथन का किसान&amp;#45;केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/taas-award-ceremony-2024-highlights-sustainable-agriculture-and-farmer-welfare.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 22 Dec 2024 23:33:41 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/taas-award-ceremony-2024-highlights-sustainable-agriculture-and-farmer-welfare.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रतिष्ठित तास (TAAS) पुरस्कार समारोह 2024 का आयोजन 20 दिसंबर को नई दिल्ली स्थित प्रसिद्ध पूसा संस्थान परिसर में किया गया। इस कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। एमएसएसआरएफ चेन्नई की अध्यक्ष डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने समारोह की अध्यक्षता की। तास के चेयरमैन और पूर्व डेयर (DARE) सचिव तथा डीजी, आईसीएआर डॉ. राज एस. परोदा ने स्वागत भाषण दिया। इस आयोजन में लगभग 100 प्रमुख कृषि विशेषज्ञ शामिल हुए।</p>
<p>अपने भाषण में सुरेश प्रभु ने खाद्य, पोषण और पर्यावरण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इनोवेशन और गहन अनुसंधान की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने किसान-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने की वकालत की। उनके वक्तव्य में सस्टेनेबल कृषि के लिए रणनीति प्रस्तुत की गईं, जिसे श्रोताओं ने व्यापक रूप से सराहा। डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने किसानों की समस्याओं को हल करने, उन्हें बाजार से जोड़ने, समय पर इनपुट प्रदान करने और मानव पोषण और स्वास्थ्य से संबंधित चिंताओं को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_6767cfb828eb5.jpg" alt="" /></p>
<p><em>डॉ. कमल बावा, एफआरएस, उत्कृष्ट प्रोफेसर एमेरिटस, बायोलॉजी, यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स, यूएसए को डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन अवार्ड फॉर लीडरशिप इन एग्रीकल्चर (2023) प्रदान करते हुए एमएसएसआरएफ चेयरपर्सन डॉ. सौम्या स्वामीनाथन और तास चेयरमैन डॉ. राज एस. परोदा।</em></p>
<p>इस कार्यक्रम में 'डॉ. एमएस स्वामीनाथन अवार्ड फॉर लीडरशिप इन एग्रीकल्चर' भी दिया गया। तास (ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज) ने 2004 में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने के लिए इस अवार्ड की शुरुआत की थी। हर साल दिए जाने वाले इस पुरस्कार में एक ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और एक लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की जाती है।</p>
<p>शुरुआत से लेकर अब तक 15 प्रमुख शख्सीयतों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इनमें नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. नॉर्मन ई. बोरलॉग, वर्ल्ड फूड प्राइज विजेता डॉ. गुरदेव खुष और डॉ. एस.के. वासल, और अन्य प्रतिष्ठित नाम जैसे प्रो. रतन लाल, डॉ. संजय राजाराम, डॉ. एमसी सक्सेना, डॉ. विलियम डार, डॉ. थॉमस लंपकिन, डॉ. उमा लेले, डॉ. जॉन डिक्सन, डॉ. शेंग्गेन फैन, डॉ. एडेल बेल्टगी, डॉ. सूरी सहगल, डॉ. कमल बावा और डॉ. बीएम प्रसन्ना शामिल हैं। यह पुरस्कार राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों द्वारा प्रदान किए गए हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_6767cfb8e4c91.jpg" alt="" /></p>
<p><em>डॉ. बीएम प्रसन्ना, निदेशक, ग्लोबल मेज प्रोग्राम, सीआईएमएमवाईटी, नैरोबी, केन्या एमएसएसआरएफ चेयरपर्सन से डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन अवार्ड फॉर लीडरशिप इन एग्रीकल्चर (2024) ग्रहण करते हुए।</em></p>
<p>2024 में तास ने दो नए पुरस्कारों की शुरुआत की- डॉ. नॉर्मन ई. बोरलॉग इनोवेटिव फार्मर अवार्ड और डॉ. एसके वासल अवार्ड फॉर एक्सीलेंस इन हाइब्रिड क्रॉप रिसर्च। कृषि विज्ञान और सस्टेनेबिलिटी में उत्कृष्ट योगदान के लिए अशोका ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. कमल बावा को 2023 का और सीआईएमएमवाईटी के डॉ. बीएम प्रसन्ना को 2024 का डॉ. एमएस स्वामीनाथन पुरस्कार दिया गया।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_676702f483a53.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ तास अवार्ड 2024: सुरेश प्रभु और सौम्या स्वामीनाथन का किसान-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_676702f483a53.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत में ग्रीन कवर 25.17% हुआ, लेकिन  बड़ा हिस्सा खुले वन, बांस और एग्रो&amp;#45;फॉरेस्ट्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/green-cover-in-india-increase-to-25-pc-majority-is-open-forest-bamboo-and-plntation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 22 Dec 2024 22:11:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/green-cover-in-india-increase-to-25-pc-majority-is-open-forest-bamboo-and-plntation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा हर दो साल में प्रकाशित होने वाली &ldquo;भारत वन स्थिति रिपोर्ट&rdquo;&nbsp;इस बार साल भर की देरी से जारी हुई है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में वन और वृक्ष आवरण (ग्रीन कवर)<span> 1445 वर्ग किमी बढ़कर 8.27 लाख वर्ग किमी हो गया है जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का 25.17 फीसदी है। देश में ग्रीन कवर बढ़ना अच्छा संकेत है लेकिन इसमें बड़ा हिस्सा खुले वनों, बांस</span>, <span>एग्रो-फॉरेस्ट्री&nbsp;</span><span>और जंगलों के बाहर पेड़ों का है। कई संवेदनशील क्षेत्रों में वनों को नुकसान पहुंचा है।&nbsp;</span><span>रिपोर्ट बताती है कि 2011 से 2021 के बीच 40,709 वर्ग किमी क्षेत्र में घने जंगल बर्बाद होकर खुले वनों में तब्दील हो गये।&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p>शनिवार को केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री <strong>भूपेंद्र यादव</strong> ने देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान में <a href="https://fsi.nic.in/uploads/isfr2023/isfr_book_eng-vol-1_2023.pdf"><strong>&ldquo;</strong><strong>भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023</strong><strong>&rdquo;</strong></a> का विमोचन किया। रिपोर्ट के अनुसार, <span>भारत में वन आवरण लगभग 7</span>.15 लाख वर्ग किमी (21.76 प्रतिशत) और वृक्ष आवरण 1.12 लाख वर्ग किमी (3.41 प्रतिशत) है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस बात पर प्रसन्नता जताई है कि 2021 की तुलना में देश के कुल वन और वृक्ष आवरण में 1445 वर्ग किलोमीटर की वृ&zwnj;द्धि हुई है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>एक तिहाई से ज्यादा खुले वन&nbsp;</strong></p>
<p>देश के कुल 8.27 लाख वर्ग किमी ग्रीन कवर में एक तिहाई से अधिक लगभग 3.05 लाख वर्ग क्षेत्र खुले वनों का है जिनका घनत्व 40 फीसदी से कम होता है। साल 2021 से 2023 के बीच भारत के वन आवरण में केवल 156 वर्ग किमी की वृद्धि हुई, जबकि वृक्ष आवरण 1,289 वर्ग किमी बढ़ा है। इस दौरान करीब 3656 वर्ग किमी क्षेत्र में घने जंगल खत्म हो गये। हालांकि, <span>करीब 895 वर्ग किमी गैर-वन क्षेत्र घने जंगलों में तब्दील हुआ जिसमें अधिकतर वृक्षारोपण और एग्रो-फॉरेस्ट्री शामिल है।&nbsp;</span></p>
<p><strong>सर्वाधिक वृद्धि व कमी वाले राज्य</strong></p>
<p>वन एवं वृक्ष आवरण में सबसे अधिक बढ़ोतरी छत्तीसगढ़ (684 वर्ग किमी), उत्तर प्रदेश (559 वर्ग किमी), ओडिशा (559 वर्ग किमी) तथा राजस्थान (394 वर्ग किमी) में दर्ज की गई है। जबकि वन और वृक्ष आवरण में सबसे अधिक कमी मध्य प्रदेश (612 वर्ग किमी), <span>कर्नाटक (459 वर्ग किमी)</span>, <span>लद्दाख (159 वर्ग किमी) और नागालैंड (125 वर्ग किमी) में आई है। देश में सर्वाधिक वन एवं वृक्ष आवरण वाले शीर्ष तीन राज्य - मध्य प्रदेश (85</span>,724 वर्ग किमी), अरुणाचल प्रदेश (67,083 वर्ग किमी) और महाराष्ट्र (65,383 वर्ग किमी) हैं।</p>
<p><strong>पश्चिमी घाट व मैंग्रोव को नुकसान </strong></p>
<p>पिछले एक दशक में पश्चिमी घाट के इको-सेंसटिव वन आवरण में 58.22 वर्ग किमी की कमी है। नीलगिरी में 123 वर्ग किमी की गिरावट दर्ज की गई। 2021 से 2023 के बीच देश का मैंग्रोव क्षेत्र 7.43 वर्ग किलोमीटर घटा है, <span>जिसमें गुजरात में सबसे अधिक 36.39 वर्ग किमी की कमी दर्ज की गई है जबकि आंध्र प्रदेश (13 वर्ग किमी) और महाराष्ट्र (12 वर्ग किमी) में मैंग्रोव क्षेत्र बढ़ा है।&nbsp;</span>पूर्वोत्तर भारत के वन आवरण में 327 वर्ग किमी की कमी दर्ज की गई है जबकि देश के पर्वतीय जिलों में वन आवरण 234 वर्ग किमी बढ़ा है।</p>
<p><strong>वन क्षेत्रों के बाहर बढ़ा हरित आवरण&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>देश के कुल वन एवं वृक्ष आवरण में करीब 37 फीसदी हिस्सा जंगलों के बाहर पेड़ों का है। सबसे ज्यादा वृक्ष आवरण महाराष्ट्र, <span>राजस्थान और उत्तर प्रदेश में है जो इन राज्यों में बढ़ती एग्रो-फॉरेस्ट्री का प्रमाण है। वन आवरण में अधिकांश वृद्धि (</span>149 वर्ग किमी) वन क्षेत्रों के बाहर हुई है जबकि वन क्षेत्रों के अंदर केवल 7.28 वर्ग किमी वन आवरण बढ़ा है। &nbsp;</p>
<p>भारतीय वन सर्वेक्षण ने वन और वृक्ष आवरण में बांस को भी शामिल किया है। देश में बांस क्षेत्र का विस्तार 5,227 वर्ग किमी की वृद्धि के साथ 1.54 लाख वर्ग किमी क्षेत्र तक हो गया है जो देश के कुल हरित आवरण का 18 फीसदी से अधिक है। एग्रो-फॉरेस्ट्री के अंतर्गत कुल वृक्ष आवरण 2023 में 1.27 लाख वर्ग किमी होने का अनुमान है, जो 2013 की तुलना में 21,286 वर्ग किमी (20.02%) अधिक है।</p>
<p><strong>वनों में आग</strong></p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार,<span> वर्ष 2023-24 में देश में जंगलों की आग के 2.03 लाख हॉटस्पॉट थे</span>, जो 2021-22 में 2.23 लाख थे। नवंबर '23 और जून '24 के बीच, जंगलों में आग की सर्वाधिक घटनाएं उत्तराखंड (21,033), ओडिशा (20,973) और छत्तीसगढ़ (18,950) में हुईं। राष्ट्रीय स्तर पर जंगल में आग की घटनाएं कम होने के बावजूद उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में वनाग्नि की काफी घटनाएं बढ़ी हैं।</p>
<p>भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट 2023 राष्ट्रीय स्तर पर वन एवं वृक्ष आवरण में वृद्धि को दर्शाती है, लेकिन इको-सिस्टम के लिहाज से संवेदनशील प्राकृतिक वनों को नुकसान पहुंचा है। यह वन संरक्षण के मौजूदा प्रयासों और नीतियों के बारे में चिंताएं पैदा करता है।</p>
<p><strong>कार्बन स्टॉक </strong></p>
<p>देश के वनों में कुल कार्बन स्टॉक 7,28.55 करोड़ टन अनुमानित है। पिछले आकलन की तुलना में देश के कार्बन स्टॉक में 8.15 करोड़ टन की वृद्धि हुई है। भारत का कार्बन स्टॉक 30.43 अरब टन CO₂ के समतुल्य तक पहुंच गया है, जो दर्शाता है कि 2005 के आधार वर्ष की तुलना में, भारत पहले ही 2.29 अरब टन अतिरिक्त कार्बन सिंक को प्राप्त कर चुका है जबकि 2030 तक 2.5 से 3.0 अरब टन का लक्ष्य रखा गया है। जलवायु लक्ष्यों की दिशा में यह महत्वपूर्ण प्रगति है।</p>
<p><strong>वन आवरण और वृक्ष आवरण</strong></p>
<p>भारतीय वन सर्वेक्षण के अनुसार, वन आवरण का मतलब एक हेक्टेयर से अधिक ऐसे क्षेत्र से है जहां वृक्ष छत्र घनत्व 10 प्रतिशत से अधिक है, <span>चाहे स्वामित्व</span>, <span>लैंड यूज या कानूनी स्थिति कुछ भी हो। इसमें प्राकृतिक वनों के साथ-साथ बाग-बगीचे</span>, <span>बांस और एग्रो-फॉरेस्ट्री भी शामिल है।&nbsp;</span>वन क्षेत्र के बाहर एक हेक्टेयर से कम क्षेत्र में फैले पेड़ों को वृक्ष आवरण में गिना जाता है। भारतीय वन सर्वेक्षण ने बांस को भी वन एवं वृक्ष आवरण में शामिल किया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत में ग्रीन कवर 25.17% हुआ, लेकिन  बड़ा हिस्सा खुले वन, बांस और एग्रो-फॉरेस्ट्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मौसम के झटकों और वैश्विक आपूर्ति बाधाओं ने बढ़ाई महंगाई: क्रिसिल रिपोर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/weather-shocks-global-supply-issues-push-india-food-inflation-to-new-highs-in-recent-years-crisil-report.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 22 Dec 2024 18:41:37 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/weather-shocks-global-supply-issues-push-india-food-inflation-to-new-highs-in-recent-years-crisil-report.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत में खाद्य महंगाई एक स्थायी चुनौती बन गई है। प्रमुख फसलों में यह 2021 से 2024 के बीच तेजी से बढ़ी है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की नई रिपोर्ट इस प्रवृत्ति के पीछे कई कारणों को उजागर करती है और दीर्घकालिक सस्टेनेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए मजबूत संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता पर जोर देती है। इसका कहना है कि 2021 से 2024 के दौरान औसत खाद्य मुद्रास्फीति 2017 से 2020 की तुलना में दोगुनी रही। इसी दौरान खाद्य उत्पादन वृद्धि की दर भी कम हुई है। मौसम के झटकों, वैश्विक आपूर्ति बाधाओं और बढ़ती घरेलू मांग ने मिलकर इस समस्या को बढ़ा दिया है।</p>
<p>हाल के वर्षों में खाद्य मुद्रास्फीति का समग्र उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में योगदान काफी बढ़ गया है। वर्ष 2022 में महंगाई में इसका योगदान 27% था, जो वर्ष 2023 में 55% और वर्तमान वर्ष में 67% हो गया है। खाद्य कीमतों में वृद्धि व्यापक रही है। विशेष रूप से सब्जियों की मुद्रास्फीति रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जो अक्टूबर 2024 में औसतन 42.2% दर्ज की गई। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में सब्जियों की महंगाई में काफी अस्थिरता देखी गई। पिछले 12 महीनों में से सात में इसमें दहाई अंकों की वृद्धि हुई।</p>
<p>गेहूं, दालों और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों की उत्पादन वृद्धि में गिरावट आई, जिससे आपूर्ति श्रृंखला और बाधित हुई। यहां तक कि गन्ना और चावल, जिनके उत्पादन आंकड़े तुलनात्मक रूप से बेहतर थे, वे भी ऊंची वैश्विक कीमतों और घरेलू मांग के प्रभाव से बच नहीं सके।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_6767a1f5d2feb.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>बढ़ती मुद्रास्फीति के कारण</strong><br />क्रिसिल के अनुसार, भारत के खाद्यान्न उत्पादन की वृद्धि वर्ष 2021-2024 के दौरान औसतन 2.8% तक धीमी हो गई, जो वर्ष 2017-2020 के दौरान 4.3% थी। बागवानी उत्पादन में वृद्धि ने थोड़ी बेहतर प्रगति दिखाई, फिर भी पिछले दशक की तुलना में धीमी रही।&nbsp;</p>
<p>उत्पादन वृद्धि में गिरावट का मुख्य कारण फसल उत्पादकता में कमी है, जिसे जलवायु परिवर्तन ने नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। उदाहरण के लिए, गेहूं की पैदावार हीटवेव के कारण प्रभावित हुई है। गेहूं की उत्पादकता में 2022 के दौरान 15-25% की कमी आई। सीमित सिंचाई कवरेज के कारण विशेष रूप से दालों और सब्जियों पर भी प्रभाव पड़ा है।</p>
<p>वैश्विक आपूर्ति बाधा भी एक प्रमुख कारण है। वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक वित्तीय वर्ष 2021 और 2024 के बीच 9.5% बढ़ा, जबकि वित्तीय वर्ष 2017 से 2020 में यह मात्र 0.7% बढ़ा था। रूस-यूक्रेन संघर्ष, प्रतिकूल मौसम की घटनाओं और शिपिंग में देरी जैसी चुनौतियों ने वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया। चावल, मक्का और तिलहन जैसी प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि हुई। दक्षिण-पूर्व एशिया में श्रमिकों की कमी और मौसम से संबंधित व्यवधानों के कारण वैश्विक तिलहन की कीमतों में वृद्धि हुई।</p>
<p>मांग-आपूर्ति का अंतर भी एक बड़ा कारण रहा है। जनसंख्या वृद्धि और बदलते खपत पैटर्न के कारण घरेलू मांग में वृद्धि हुई तो आपूर्ति की कमजोरियां और उजागर हुईं। इथेनॉल की मांग, जो गन्ना, चावल और मक्का पर बहुत अधिक निर्भर है, ने भी आपूर्ति की स्थितियों को प्रभावित किया।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_6767a1f6b2133.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>जलवायु परिवर्तन की भूमिका</strong><br />जलवायु परिवर्तन भारत की कृषि चुनौतियों के पीछे एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में उभरा है। असमान मानसून पैटर्न, बढ़ते तापमान और चरम मौसम की घटनाओं ने फसल की पैदावार और उत्पादन चक्र को बाधित किया है। उदाहरण के लिए, 2023 में मानसून के मौसम में काफी भिन्नता देखी गई। अगस्त में भारी कमी के बाद सितंबर में अधिक बारिश हुई। इस प्रकार की भिन्नताएं न केवल पैदावार को कम करती हैं, बल्कि फसलों की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती हैं।</p>
<p>कुछ फसलें जलवायु परिवर्तन के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं। जैसे, दालों के लिए केवल 5% कृषि क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा है। यह वर्षा में उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। इसके विपरीत गन्ना, जिसके लगभग 99% क्षेत्र में सिंचाई की व्यवस्था उपलब्ध है, बेहतर स्थिति में है। हालांकि चरम मौसम की घटनाओं की बढ़ती फ्रीक्वेंसी सभी फसलों के लिए जोखिम पैदा कर रही है।</p>
<p>सरकार ने खाद्य पदार्थों की कीमतों में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय लागू किए हैं। इनमें खुले बाजार की बिक्री के माध्यम से खाद्य स्टॉक जारी करना, निर्यात पर प्रतिबंध लगाना और जमाखोरी को रोकने के लिए स्टॉक सीमाएं शामिल हैं।</p>
<p>सरकार ने जलवायु-सहिष्णु बीजों को बढ़ावा देना शुरू किया दिया है, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर अपनाने की आवश्यकता है। किसानों को पानी और उर्वरकों का कुशल उपयोग सिखाने की आवश्यकता है। उन्हें मौसम से संबंधित जोखिमों को बेहतर तरीके से निपटने के लिए सटीक पूर्वानुमान उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, नुकसान को कम करने के लिए लॉजिस्टिक्स और परिवहन अवसंरचना में निवेश जरूरी है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_6767a1f7d0272.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>इथेनॉल उत्पादन से सबक</strong><br />इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने के दबाव से गन्ना, चावल और मक्के की मांग बढ़ी है। किसानों ने भी इनका रकबा बढ़ाया है। लेकिन इथेनॉल उत्पादन की बढ़ती मांग ने भूमि और जल संसाधनों पर दबाव डाला है। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए इथेनॉल उत्पादन को संतुलित करना महत्वपूर्ण है। इथेनॉल की बढ़ती मांग नई चुनौतियां पेश कर रही है। 2025 तक 20% ब्लेंडिंग लक्ष्य को पूरा करने के लिए उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की आवश्यकता होगी, जिससे भूमि और जल संसाधनों पर और अधिक दबाव पड़ सकता है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य मुद्रास्फीति, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों से निपटने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है। क्रिसिल का मानना है कि सही नीतिगत सुधारों और तकनीकी हस्तक्षेपों से भारत खाद्य मुद्रास्फीति को कम करने और सस्टेनेबल कृषि तंत्र बनाने की दिशा में अग्रसर हो सकता है। क्रिसिल की रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत घरेलू अक्षमताओं और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करके न केवल खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित कर सकता है, बल्कि दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता भी सुनिश्चित कर सकता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_658173c5b9715.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मौसम के झटकों और वैश्विक आपूर्ति बाधाओं ने बढ़ाई महंगाई: क्रिसिल रिपोर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों के लिए संस्था निर्माण पर केंद्रित होगा “रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव 2024”]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/the-fourth-rural-voice-agri-conclave-2024-will-focus-on-building-institutions-for-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 21 Dec 2024 19:49:55 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/the-fourth-rural-voice-agri-conclave-2024-will-focus-on-building-institutions-for-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसानों और ग्रामीण भारत की समृद्धि को समर्पित मीडिया प्लेटफार्म रूरल वॉयस अपनी स्थापना के पांचवें साल में प्रवेश करने जा रहा है। इस अवसर पर आगामी 23 दिसंबर को किसान दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थिति इंडिया हैबिटेट सेंटर में चौथे <strong>रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव एंड नैकॉफ अवॉर्ड्स 2024</strong> का आयोजन किया जाएगा। इस साल के समारोह की थीम <strong>&ldquo;किसानों के लिए संस्था निर्माण&rdquo;</strong> है।&nbsp;</p>
<p>कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि सचिव <strong>देवेश चतुर्वेदी</strong>, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री <strong>धन सिंह रावत</strong>, केंद्रीय पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्यपालन विभाग की सचिव अलका उपाध्याय, इफको के प्रबंध निदेश डॉ. यूएस अवस्थी, कृभको के चेयरमैन डॉ. चंद्रपाल सिंह, इंडियन डेयरी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. आरएस सोढ़ी, पूर्व सांसद एवं बिहार के मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार केसी त्यागी के अलावा देश भर से किसान शामिल होंगे।&nbsp;</p>
<p><a href="https://www.youtube.com/shorts/23vXHzvzKiw"><span style="text-decoration: underline;"><strong>कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी के लिए क्लिक करें</strong></span></a></p>
<p><strong>रूरल वॉयस</strong> के एडिटर-इन-चीफ <strong>हरवीर सिंह</strong> ने बताया कि देश के किसानों और ग्रामीण भारत पर केंद्रित मीडिया प्लेटफॉर्म के तौर पांचवे वर्ष में प्रवेश करना रूरल वॉयस के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है। चार साल पहले कृषि नीतियों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, नई तकनीक, नवाचार और किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के लिए रूरल वॉयस मीडिया प्लेटफॉर्म की शुरुआत की गई थी। तब से प्रति वर्ष 23 दिसंबर को रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड्स का आयोजन किया जाता है। सम्मेलन में विभिन्न कृषि विशेषज्ञ, नीति निर्माता, बिजनेस लीडर और किसान प्रतिनिधि <strong>&ldquo;किसानों के लिए संस्था निर्माण&rdquo;</strong> विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखेंगे।</p>
<p>इस अवसर पर कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले किसान, सहकारी संस्था, निजी क्षेत्र की संस्था और सार्वजनिक संस्थान को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। साथ ही <strong>रूरल वर्ल्ड</strong> पत्रिका की वेबसाइट और नवीनतम अंक का विमोचन भी होगा। &nbsp;</p>
<p>रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव का <strong>पहला सत्र</strong> &ldquo;अगली पीढ़ी की कृषि के लिए, अगली पीढ़ी की सहकारी संस्थाओं&rdquo; पर केंद्रित होगा। इसमें कृभको के चेयरमैन डॉ. चंद्रपाल सिंह, कोऑपरेटिव इलेक्शन अथॉरिटी के चेयरमैन देवेंद्र कुमार सिंह, अमूल के प्रबंध निदेशक जयेन मेहता, नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाईकनवरे और एनसीईएल के प्रबंध निदेशक अनुपम कौशिक परिचर्चा में शामिल होंगे।&nbsp;</p>
<p>सम्मेलन के<strong> दूसरे सत्र</strong> में &ldquo;निजी क्षेत्र: किसानों की भागीदारी&rdquo; पर चर्चा होगी। इस सत्र में सवन्ना सीड प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ व एमडी अजय राणा, एग्रोकॉर्प इंडिया ट्रेड सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेउ के सीओओ राजीव यादव, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एमएसीएक्स) के वाइस प्रेसिडेंड (बिजनेस डेवलपमेंट) संजय गाखर शामिल होंगे। &nbsp;</p>
<p>सम्मेलन के <strong>तीसरा सत्र</strong> में पूर्व कृषि सचिव सिराज हुसैन, पूर्व आईएएस संदीप कुमार नायक, भारत कृषक समाज के चेयरमैन अजयवीर जाखड़ और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के पूर्व निदेशक डॉ. ए.के. सिंह &ldquo;किसानों के लिए सार्वजनिक संस्थानों&rdquo; के विषय में अपने अनुभव साझा करेंगे।</p>
<p>सम्मेलन का <strong>चौथा</strong> <strong>सत्र</strong> &ldquo;किसानों के लिए संस्थाओं के विकास में सहायक नीतिगत वातावरण&rdquo; पर केंद्रित रहेगा। इसमें केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, पूर्व कृषि एवं खाद्य सचिव टी. नंद कुमार, इंडियन डेयरी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. आरएस सोढ़ी और सहकार भारतीय के चीफ पेट्रर्न डॉ. डीएन ठाकुर अपने विचार व्यक्त करेंगे।</p>
<p>आयोजन के समापन सत्र को उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री <strong>धन सिंह रावत</strong> के अलावा केंद्रीय पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्यपालन विभाग की सचिव अलका उपाध्याय, इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. यूएस अवस्थी, पूर्व सांसद व बिहार के मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार केसी त्यागी संबोधित करेंगे।&nbsp;सम्मेलन में किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें बाजार मुहैया कराने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में सहायक संस्थाओं के निर्माण और उन्हें सशक्त बनाने पर मंथन होगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों के लिए संस्था निर्माण पर केंद्रित होगा “रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव 2024” ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_6766cc83cc315.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी की कीमतों में गिरावट से परेशान उद्योग ने निर्यात की अनुमति मांगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sugar-mills-seek-export-permission-as-prices-crash.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Dec 2024 23:15:23 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sugar-mills-seek-export-permission-as-prices-crash.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमतों में काफी गिरावट दर्ज की गई है जिसने चीनी उद्योग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कीमतों में गिरावट का असर गन्ना मूल्य भुगतान पर भी पड़ सकता है। महाराष्ट्र में चीनी की एक्स फ्रैक्टरी कीमतें गिरकर 33 से 34 रुपये किलो तक आ गई हैं जबकि उत्तर प्रदेश में यह कीमतें 36 से 37 रुपये किलो तक आ गई हैं। इस मुश्किल से निकलने के लिए चीनी उद्योग ने चालू पेराई सीजन (2024-25) सरकार से 20 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दने की मांग की है।</p>
<p>पिछले इन दिनों महाराष्ट्र में चीनी की एक्स फैक्टरी कीमत 36 रुपये से अधिक थी जबकि उत्तर प्रदेश में यह 38 रुपये से अधिक थी। इंडियन शुगर एंव बॉयो इनर्जी मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) की नई दिल्ली में आयोजित हुई सालाना आम बैठक (एजीएम) में निर्यात की अनुमति की मांग की गई। इस्मा के उपाध्यक्ष गौतम गोयल ने कहबा कि चीनी की कीमतों में गिरावट के चलते किसानों को समय से गन्ना मूल्य भुगतान का संकट पैदा हो सकता है।</p>
<p>पिछले साल उत्पादन घटने के बावजूद उद्योग का कहना है कि देश में चीनी का अधिक स्टॉक है और उसके चलते कीमतों में गिरावट आ रही है। चालू सीजन की शुरुआत 1 अक्तूबर 2024 को देश में करीब 80 लाख टन चीनी का बकाया स्टॉक था। वहीं इस साल करीब 325 से 330 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। इसमें से करीब 40 लाख टन चीनी का उपयोग एथेनॉल के उत्पादन के लिए किया जाएगा। वहीं देश में चीनी की सालाना खपत करीब 285 लाख टन है। इसके बावजूद चालू साल के अंत में जो स्टॉक बचेगा वह जरूरी मात्रा से अधिक होगा। ऐसे में उद्ओग तुरंत 20 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने की मांग कर रहा है। सरकार ने दो साल से चीनी के निर्यात को रेस्ट्रिक्टेड सूची में रखा हुआ है और चीनी निर्यात का कोई कोटा जारी नहीं किया है।</p>
<p>वहीं इस मौके पर इस्मा के अध्यक्ष एम प्रभाकर राव ने कहा कि देश में चीनी के उत्पादन की सही स्थिति जनवरी के मध्य में साफ हो जाएगी। उम्मीद है कि सरकार जनवरी में 10 लाख टन चीनी के निर्यात की इजाजत देगी। उसके बाद भी निर्यात की इतनी ही मात्रा की अनुमति दी जा सकती है। हमारे लिए यह निर्यात करने का बेहतर मौका है क्योंकि ब्राजील की चीनी मिलों में अप्रैल में उत्पादन शुरू होगा। ऐसे अब से लेकर अप्रैल तक भारतीय निर्यातकों को चीनी का अच्छा दाम मिल सकता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी की कीमतों में गिरावट से परेशान उद्योग ने निर्यात की अनुमति मांगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सेबी ने 7 कृषि जिंसों में वायदा व्यापार पर प्रतिबंध 31 जनवरी तक बढ़ाया, रोक हटने का संकेत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sebi-extends-ban-on-futures-trading-in-7-agricultural-commodities-till-january-31-hints-at-lifting-of-ban.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Dec 2024 11:45:05 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sebi-extends-ban-on-futures-trading-in-7-agricultural-commodities-till-january-31-hints-at-lifting-of-ban.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मार्केट रेगुलेटर सेबी ने सात कृषि जिंसों में डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग (वायदा व्यापार)<span> पर प्रतिबंध को 31 जनवरी, 2025 तक बढ़ा दिया है। यह प्रतिबंध 19 दिसंबर</span>, 2021 में एक साल के लिए लगाया गया था और तब से दो बार एक-एक साल के लिए इसे बढ़ाया गया। लेकिन तीसरी बार यह प्रतिबंध सिर्फ एक महीने के लिए बढ़ाया गया है। इसे संकेत माना जा रहा है कि संभवत: अगले साल की शुरुआत में निलंबित कृषि जिंसों में वायदा कारोबार की अनुमति मिल सकती है।&nbsp;<span>नेशनल कमोडिटी और डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स</span>) की ओर से लगातार इस प्रतिबंध को हटाने की मांग की जा रही है।&nbsp;</p>
<p>जिन कृषि जिंसों के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध बढ़ाया गया है उनमें धान (गैर-बासमती), गेहूं, चना, सरसों व इसके उत्पाद, सोयाबीन व इसके उत्पाद, क्रूड पाम तेल और मूंग शामिल हैं। सेबी की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, सात कृषि जिंसों में वायदा व्यापार के निलंबन को 31 जनवरी, 2025 तक बढ़ाया गया है।&nbsp;</p>
<p>कई कृषि जिंसों में वायदा व्यापार पर प्रतिबंध के पीछे महंगाई व सट्टेबाजी रोकने और कमोडिटी बाजार में स्थिरता लाने की कोशिशों को वजह बताया जाता है। हालांकि, <span>डेरिवेटिव ट्रेडिंग के बिना भी खाद्य वस्तुओं कीमतें अधिक रही हैं और खाद्य महंगाई रोकना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। रिकॉर्ड उत्पादन के दावे के बावजूद गेहूं के दाम 3200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गये। दलहन व खाद्य तेलों के दाम भी उपभोक्ताओं को अधिक चुकाने पड़ रहे हैं।</span></p>
<p>कई अध्ययनों में सामने आया है कि कृषि उपजों के खुदरा मूल्य में उनके वायदा कारोबार के निलंबन के बाद गिरावट नहीं आई। इसके विपरीत, कई वस्तुओं में अस्थिरता काफी बढ़ गई, जो दर्शाता है कि खुदरा कीमतें वायदा कारोबार की तुलना में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग-आपूर्ति से अधिक प्रभावित होती हैं। वायदा अनुबंधों के पक्ष में यह भी तर्क दिया जाता है कि इससे कृषि वस्तुओं की कीमतों का पता लगाने और बाजार के उतार-चढ़ाव से बचने में मदद मिल सकती है।</p>
<p>भारतीय वनस्पति तेल उद्योग की ओर से भी वायदा कारोबार पर प्रतिबंध हटाने की मांग की जा रही है, ताकि खाद्य तेलों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का संकेत मिल सके और आयातकों को अपने जोखिम से बचाव करने में मदद मिले।&nbsp;</p>
<p></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_6763bb6b2d416.jpg" alt="" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_6763b9dc562ee.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सेबी ने 7 कृषि जिंसों में वायदा व्यापार पर प्रतिबंध 31 जनवरी तक बढ़ाया, रोक हटने का संकेत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[संसदीय समिति ने एमएसपी की कानूनी गारंटी और किसान कर्जमाफी की सिफारिश की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/parliamentary-committee-recommended-legal-guarantee-of-msp-and-farm-loan-waiver.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Dec 2024 08:13:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/parliamentary-committee-recommended-legal-guarantee-of-msp-and-farm-loan-waiver.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि मामलों पर संसदीय स्थायी समिति ने सरकार से सरकार से फसलों के कानूनी रूप से बाध्यकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) <span>लागू</span> करने के साथ ही किसानों की कर्जमाफी की सिफारिश की। संसदीय समिति की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर किसान आंदोलन कई महीनों से आंदोलन कर रहे हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ने भी किसानों की स्थिति सुधारने के लिए एमएसपी गारंटी कानून बनाने पर विचार करने का सुझाव दिया था। &nbsp;</p>
<p>पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी की अध्यक्षता वाली कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण संबंधी स्थायी समिति की ओर से संसद में पेश की गई रिपोर्ट में एमएसपी की कानूनी गारंटी से होने वाले संभावित फायदों के बारे में बताया गया है। समिति ने तर्क दिया है कि इस तरह के उपाय से किसानों की आत्महत्या में काफी कमी आ सकती है।&nbsp; 30 सदस्यों वाली इस समिति में भाजपा के 13 सदस्य हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>एमएसपी की कानूनी गारंटी के फायदे बताए&nbsp;</strong></p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है, "समिति दृढ़ता से अनुशंसा करती है कि कृषि और किसान कल्याण विभाग जल्द से जल्द कानूनी गारंटी के रूप में एमएसपी को लागू करने के लिए एक रोडमैप घोषित करे। कानूनी रूप से बाध्यकारी एमएसपी न केवल किसानों की आजीविका बल्कि ग्रामीण आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगा।&ldquo;</p>
<p>फिलहाल सरकार कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों पर 23 कृषि उपजों के लिए एमएसपी तय करती है। लेकिन इनमें से खरीद गेहूं, <span>धान व कुछ गिनी-चुनी फसलों की ही होती है। कई फसलों के दाम एमएसपी से नीचे चले जाते हैं और किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है क्योंकि एमएसपी पर खरीद करना कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। इसलिए किसान एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं। </span></p>
<p>2020-21 में किसान आंदोलन के चलते तीन विवादित कृषि कानूनों को निरस्त करते हुए केंद्र सरकार ने एमएसपी के मुद्दे पर विचार करने का वादा किया था। लेकिन इस मामले पर बनी समिति की रिपोर्ट आज तक नहीं आई है। एमएसपी गारंटी कानून की मांग को लेकर इस साल 13 फरवरी से किसान हरियाणा-पंजाब के शंभू व खनौरी बॉर्डर पर बैठे हैं और कई बार दिल्ली कूच का प्रयास कर चुके हैं।</p>
<p><strong>समिति की अहम सिफारिशें</strong>&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p>संसदीय समिति ने किसानों की आत्महत्याएं रोकने के लिए एक मजबूत एमएसपी प्रणाली को लागू करने, फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए किसानों को मुआवजा प्रदान देने, खेत मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी के लिए राष्ट्रीय आयोग गठित करने, <span>किसानों</span> और खेत मजदूरों के लिए ऋण माफी और कृषि मंत्रालय का नाम बदलकर इसमें खेत मजदूरों को शामिल करने सहित कई सिफारिशें की हैं। इनमें पीएम-किसान की धनराशि को सालाना 6 हजार रुपये से बढ़ाकर 12 हजार रुपये करने का सुझाव भी शामिल है।&nbsp;</p>
<p>समिति ने इस बात पर जोर दिया कि एमएसपी के माध्यम से सुनिश्चित आय किसानों को कृषि में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करेगी, जिससे उत्पादकता में वृद्धि होगी। चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा है कि रिपोर्ट को सर्वसम्मति से और पार्टी लाइन से ऊपर उठकर सदस्यों की सहमति से स्वीकार किया गया। एमएसपी की कानूनी गारंटी किसानों की आत्महत्याओं को काफी हद तक कम कर सकती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_676237943accd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ संसदीय समिति ने एमएसपी की कानूनी गारंटी और किसान कर्जमाफी की सिफारिश की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रबी सीजन में बढ़ी गेहूं की बुवाई, लेकिन दालों व तिलहन की बुवाई को झटका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wheat-sowing-rises-in-rabi-season-but-pulses-and-oilseeds-face-setback-in-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 17 Dec 2024 14:26:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wheat-sowing-rises-in-rabi-season-but-pulses-and-oilseeds-face-setback-in-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: left;">रबी सीजन की बुवाई पूरी होने की तरफ बढ़ रही है। अब तक प्राप्त सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गेहूं की बुवाई का क्षेत्र पिछले साल के मुकाबले 3.15 फीसदी बढ़कर 293.11 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। गेहूं की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक होने के कारण किसानों का रुझान गेहूं की तरफ बढ़ा है जबकि सरसों व मूंगफली जैसी तिलहन फसलों का क्षेत्र घटा है। इसके पीछे तिलहन की कीमतों में उतार-चढ़ाव को वजह माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align: left;">गेहूं का क्षेत्र बढ़ने से अच्छी फसल की उम्मीद है। इससे सरकार को गेहूं व आटे की कीमतों को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, मौसम के मिजाज पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। गेहूं अलावा रबी की कई दलहन व तिलहन फसलों का रकबा पिछले साल के मुकाबले घटा है। इससे दालों व खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता लाने की कोशिशों को झटका लग सकता है।</p>
<p style="text-align: left;">कृषि मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 13 दिसंबर तक, रबी फसलों की बुवाई सामान्य क्षेत्र (पिछले पांच वर्षों के औसत) 635.6 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 558.8 लाख हेक्टेयर यानी लगभग 88 प्रतिशत क्षेत्र में पूरी हो चुकी थी। एक साल पहले इसी अवधि तक 556.67 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बुवाई हुई थी।</p>
<p style="text-align: left;"><strong>तिलहन का क्षेत्र 5.5 फीसदी घटा&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align: left;">आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल नवंबर में कम ठंड पड़ने और बुवाई में देरी के बाद रबी फसलों की बुवाई जोर पकड़ चुकी है। लेकिन तिलहन फसलों की बुवाई को झटका लगा है। रबी की तिलहन फसलों का कुल रकबा पिछले साल 96.96 लाख हेक्टेयर था जो इस बार 5.53 प्रतिशत घटकर 91.60 लाख हेक्टेयर रह गया। सरसों का क्षेत्र पिछले साल के 90.40 लाख हेक्टेयर से 5.35 प्रतिशत घटकर 85.56 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि मूंगफली का रकबा 2.81 लाख हेक्टेयर से 6.76 प्रतिशत घटकर 2.62 लाख हेक्टेयर है।</p>
<p style="text-align: left;">सरसों के रकबे में गिरावट का मुख्य कारण नवंबर में ठंड कम पड़ना और गेहूं को मिला रहा बेहतर दाम है। इस कारण प्रमुख सरसों उत्पादक राज्य राजस्थान में किसानों का रुझान गेहूं की तरफ बढ़ा है। राजस्थान में गेहूं के एमएसपी 2425 रुपये प्रति क्विंटल के अलावा 125 रुपये प्रति क्विंटल के बोनस के चलते भी किसान सरसों की बजाय गेहूं की बुवाई कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align: left;"><strong>दलहन के क्षेत्र में मामूली गिरावट </strong></p>
<p style="text-align: left;">रबी सीजन में दलहन की बुवाई का कुल क्षेत्र पिछले साल के 123.71 लाख हेक्टेयर से थोड़ा कम 123.27 लाख हेक्टयर रहा है। चने की बुवाई का क्षेत्र करीब दो फीसदी बढ़कर 86 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। लेकिन उड़द का रकबा 17.36 फीसदी घटकर 3.19 लाख टन रह गया। रबी मूंग की बुवाई का क्षेत्र पिछले साल के मुकाबले घटकर आधे से भी कम 44 हजार हेक्टेयर रह गया है। दालों का बेहतर भाव न मिलने से किसानों का रुझान दलहन की तरफ घटा है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p style="text-align: left;"><strong>मोटे अनाजों की बुवाई भी पिछड़ी </strong></p>
<p style="text-align: left;">रबी सीजन में श्री अन्न और मोटे अनाजों की बुवाई का क्षेत्र पिछले साल के मुकाबले 4.20 फीसदी घटकर 38.75 लाख हेक्टेयर रहा है। इनमें सबसे ज्यादा 20 फीसदी से अधिक की गिरावट बाजारा और जौ की बुवाई में दर्ज की गई है। हालांकि, मक्का की बुवाई का क्षेत्र 12.04 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 12.10 लाख हेक्टेयर हो गया है। &nbsp;&nbsp;</p>
<table width="560" style="margin-left: auto; margin-right: auto; height: 725.361px;">
<tbody>
<tr style="height: 0px;">
<td colspan="7" rowspan="2" style="height: 99.3608px; width: 556.193px; text-align: center;">
<p><strong>&nbsp;Progress of area coverage under Rabi crops as on 16th&nbsp;December 2024 </strong></p>
<p style="text-align: right;"><em>(Area in lakh hectare)</em></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 99.3608px;"></tr>
<tr style="height: 20px;">
<td rowspan="2" style="height: 40px; width: 60.4119px; text-align: center;"><strong>S.No.</strong></td>
<td rowspan="2" style="height: 40px; width: 93.6506px; text-align: center;"><strong>Crops</strong></td>
<td rowspan="2" style="height: 40px; width: 83.5653px; text-align: center;"><strong>Normal Rabi Area (DES)</strong></td>
<td colspan="2" style="height: 20px; width: 125.767px; text-align: center;"><strong>Area Sown</strong></td>
<td rowspan="2" style="height: 40px; width: 87.5852px; text-align: center;"><strong>Difference</strong></td>
<td rowspan="2" style="height: 40px; width: 90.7244px; text-align: center;"><strong>Difference (%)</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 61.4347px; text-align: center;"><strong>2024-25</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px; text-align: center;"><strong>2023-24</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">1</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Wheat</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">312.35</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">293.11</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">284.17</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">8.94</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">3.15</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">2</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Rice</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">42.02</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">12.07</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">11.39</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">0.68</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">5.97</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;"><strong>3</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;"><strong>Pulses</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;"><strong>140.44</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;"><strong>123.27</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;"><strong>123.71</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;"><strong>-0.44</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;"><strong>-0.36</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">a</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Gram</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">100.99</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">86</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">84.42</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">1.58</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">1.87</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">b</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Lentil</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">15.13</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">16.03</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">16.29</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">-0.26</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">-1.60</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">c</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Fieldpea</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">6.5</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">8.5</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">8.64</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">-0.14</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">-1.62</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">d</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Kulthi</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">1.98</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">2.65</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">3.29</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">-0.64</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">-19.45</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">e</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Urdbean</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">6.15</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">3.19</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">3.86</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">-0.67</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">-17.36</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">f</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Moongbean</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">1.44</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">0.44</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">1.18</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">-0.74</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">-62.71</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">g</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Lathyrus</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">2.79</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">2.82</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">3.07</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">-0.25</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">-8.14</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">h</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Other Pulses</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">5.46</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">3.63</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">2.97</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">0.66</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">22.22</td>
</tr>
<tr style="height: 60px; text-align: center;">
<td style="height: 46px; width: 60.4119px;"><strong>4</strong></td>
<td style="height: 46px; width: 93.6506px;"><strong>Shri Anna &amp; Coarse cereals</strong></td>
<td style="height: 46px; width: 83.5653px;"><strong>53.82</strong></td>
<td style="height: 46px; width: 61.4347px;"><strong>38.75</strong></td>
<td style="height: 46px; width: 61.4347px;"><strong>40.45</strong></td>
<td style="height: 46px; width: 87.5852px;"><strong>-1.7</strong></td>
<td style="height: 46px; width: 90.7244px;"><strong>-4.20</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">a</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Jowar</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">24.37</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">19.75</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">19.98</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">-0.23</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">-1.15</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">b</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Bajra</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">0.92</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">0.11</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">0.14</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">-0.03</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">-21.43</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">c</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Ragi</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">0.68</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">0.46</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">0.49</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">-0.03</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">-6.12</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">d</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Small Millets</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">0.11</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">0.14</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">0</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">0.14</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">e</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Maize</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">22.11</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">12.1</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">12.04</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">0.06</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">0.50</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">f</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Barley</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">5.63</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">6.19</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">7.81</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">-1.62</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">-20.74</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;"><strong>5</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;"><strong>Oilseeds</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;"><strong>86.97</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;"><strong>91.6</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;"><strong>96.96</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;"><strong>-5.36</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;"><strong>-5.53</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 40px; text-align: center;">
<td style="height: 40px; width: 60.4119px;">a</td>
<td style="height: 40px; width: 93.6506px;">Rapeseed &amp; Mustard</td>
<td style="height: 40px; width: 83.5653px;">79.16</td>
<td style="height: 40px; width: 61.4347px;">85.56</td>
<td style="height: 40px; width: 61.4347px;">90.4</td>
<td style="height: 40px; width: 87.5852px;">-4.84</td>
<td style="height: 40px; width: 90.7244px;">-5.35</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">b</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Groundnut</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">3.82</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">2.62</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">2.81</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">-0.19</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">-6.76</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">c</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Safflower</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">0.72</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">0.57</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">0.57</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">0</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">0.00</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">d</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Sunflower</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">0.76</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">0.32</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">0.3</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">0.02</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">6.67</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">e</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Sesamum</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">0.58</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">0.08</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">0.16</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">-0.08</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">-50.00</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">f</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Linseed</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">1.93</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">2.26</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">2.52</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">-0.26</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">-10.32</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;">g</td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;">Other Oilseeds</td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;">0</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">0.2</td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;">0.21</td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;">-0.01</td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;">-4.76</td>
</tr>
<tr style="height: 20px; text-align: center;">
<td style="height: 20px; width: 60.4119px;"><strong>&nbsp;</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 93.6506px;"><strong>Total Crops</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 83.5653px;"><strong>635.6</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;"><strong>558.8</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 61.4347px;"><strong>556.67</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 87.5852px;"><strong>2.13</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 90.7244px;"><strong>0.38</strong></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align: center;">&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_67613bc84dca8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रबी सीजन में बढ़ी गेहूं की बुवाई, लेकिन दालों व तिलहन की बुवाई को झटका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_67613bc84dca8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि मंत्री ने बजट से पहले विभिन्न हितधारकों से लिए सुझाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/union-agriculture-minister-held-pre-budget-consultations-with-stakeholders.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 16 Dec 2024 23:02:09 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/union-agriculture-minister-held-pre-budget-consultations-with-stakeholders.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने सोमवार को किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों के साथ आगामी बजट को लेकर विचार-विमर्श किया। नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में हुई बजट-पूर्व बैठक में <span>किसान संगठनों, कृषि उद्यमियों</span><span>, उद्योग प्रतिनिधियों </span><span>तथा अन्य हितधारकों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए।</span></p>
<p>केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सभी सुझावों का हम गंभीरता से अध्ययन कर वित्त मंत्री को अवगत कराएंगे। साथ ही, कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों से लगातार संवाद करते रहेंगे। चौहान ने बैठक में शामिल प्रतिनिधियों से कहा कि कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय बजट प्रस्ताव तैयार करने के लिए आंतरिक रूप से भी गहन अध्ययन कर रहा है। किसानों के हित में और क्या-क्या कार्य किए जा सकते है, इस पर अध्ययन-मनन किया जा रहा है।</p>
<p>कृषि मंत्री के साथ बैठक में शामिल हुए&nbsp;<strong>भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक)</strong> <span>के राष्ट्रीय प्रवक्ता <strong>धर्मेंद्र मलिक</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि उन्होंने एक समग्र पंचवर्षीय किसान नीति बनाने का सुझाव दिया है जो केवल उत्पादन आधारित न होकर कृषि व किसानों के कल्याण पर आधारित हो। उन्होंने अपने 15 सूत्री सुझाव पत्र में एमएसपी को लागत सी</span>2 का डेढ़ गुना तय करने, <span>इसमें फसल कटाई के बाद के खर्च व जोखिम को शामिल करने</span>, <span>किसानों को 1</span>% ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने, <span>किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाकर 6 लाख रुपये करने</span>,<span>&nbsp;फसल बीमा योजना में किसान को इकाई मानने</span>,<span> छोटे किसानों के लिए प्रीमियम राशि शून्य करने व कंपनियों की जवाबदेही तय करने जैसे कई सुझाव दिए।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_676060ead1e90.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><span>धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि एमएसपी से कम दाम पर कृषि उत्पादों का आयात नहीं होना चाहिए और कृषि निर्यात पर प्रतिबंध आपात स्थिति में ही लगाने चाहिए। साथ ही कृषि उपकरणों तथा खेती में प्रयुक्त होने वाले वस्तुओं पर जीएसटी समाप्त करना चाहिए।&nbsp;</span></p>
<p>बैठक में कृषि क्षेत्र में वैल्यू एडिशन, कृषि उपज के निर्यातकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने, कृषि अनुसंधान का विस्तार करने, कृषि आदानों की कीमत पर नियंत्रण एवं गुणवत्ता तथा किसानों को नुकसान से बचाने आदि के संबध में सुझाव प्राप्त हुए। इस अवसर पर कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, <span>मंत्रालय व आईसीएआर के वरिष्ठ अधिकारी</span>, <span>नाबार्ड</span>, सीआईआई, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स, एसोचैम, भारतीय स्टेट बैंक और सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_6760606f32d98.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि मंत्री ने बजट से पहले विभिन्न हितधारकों से लिए सुझाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_6760606f32d98.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चालू पेराई सीजन के चीनी उत्पादन में 12 फीसदी गिरावट का अनुमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sugar-production-is-estimated-to-drop-by-39-lakh-tons-in-the-current-crushing-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 16 Dec 2024 19:12:10 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sugar-production-is-estimated-to-drop-by-39-lakh-tons-in-the-current-crushing-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गन्ने की कमजोर फसल और चीनी रिकवरी में गिरावट के चलते चालू पेराई सीजन (2024-25) में चीनी उत्पादन पिछले साल से 39 लाख टन यानी 12.23 फीसदी कम रहने का अनुमान है। पिछले साल के 319 लाख टन चीनी उत्पादन के मुकाबले चालू सीजन में चीनी उत्पादन 280 लाख टन रह सकता है।</p>
<p><strong>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोआपरेटिव शुगर फैक्टरीज (एनएफसीएसएफ)</strong> द्वारा जारी अनुमानों के मुताबिक, 15 दिसंबर तक देश में चीनी का उत्पादन पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 13.50 लाख टन कम रहा है जो करीब 18 फीसदी की गिरावट दर्शाता है।&nbsp;</p>
<p>नेशनल फेडरेशन के अध्यक्ष <strong>हर्षवर्धन पाटिल</strong> ने कहा है कि 15 दिसंबर, 2024 तक देश भर की 472 चीनी मिलों ने कुल 720 लाख टन गन्ने की पेराई शुरू की है। जिससे 60.85 लाख टन से अधिक चीनी उत्पादन हुआ है जबकि पिछले साल इस अवधि तक 74.20 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ था।</p>
<p>इस साल गन्ने में चीनी की रिकवरी का स्तर 8.46 फीसदी रहा है जो पिछले साल शुगर रिकवरी 8.72 फीसदी थी। पिछले साल इस समय तक देश में 501 चीनी मिलें पेराई कर रही थीं जबकि इस साल अभी तक 472 चीनी मिलों ने पेराई शुरू की है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए देश में चालू सीजन के दौरान कुल 280 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है जबकि पिछले साल चीनी का कुल उत्पादन 319 लाख टन रहा था।</p>
<p>इस प्रकार चालू सीजन में पिछले साल के मुकाबले 39 लाख टन कम चीनी उत्पादन के आसार हैं। चीनी के 280 लाख टन उत्पादन के अलावा करीब 40 लाख टन चीनी का उपयोग एथेनॉल उत्पादन के लिए किया जाएगा।</p>
<p><strong>पाटिल</strong> ने कहा है कि चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) और एथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी न होना ऐसे मुद्दे हैं जिन पर तुरंत फैसले की जरूरत है। हम इन मुद्दों को सरकार के सामने उठा रहे हैं। उम्मीद है कि अगले दो-तीन सप्ताह में इन पर सरकार फैसले लेगी। इसके साथ ही जनवरी, 2025 में चीनी उत्पादन के आकलन के बाद सरकार चीनी के निर्यात को लेकर कई फैसला ले सकती है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_676033aeaf106.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668534db9b9c0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चालू पेराई सीजन के चीनी उत्पादन में 12 फीसदी गिरावट का अनुमान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668534db9b9c0.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आशा&amp;#45;किसान स्वराज ने एग्री मार्केटिंग पॉलिसी के ड्राफ्ट पर जताई आपत्ति, बैक डोर से कृषि कानूनों की वापसी बताया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/asha-opposes-draft-agri-marketing-policy-framework-calls-it-attempt-to-revive-repealed-farm-laws.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 16 Dec 2024 18:20:55 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/asha-opposes-draft-agri-marketing-policy-framework-calls-it-attempt-to-revive-repealed-farm-laws.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार की ओर से लाए जा रहे एग्रीकल्चर मार्केटिंग के नेशनल पॉलिसी फ्रेमवर्क को लेकर किसान संगठन <strong>एलायंस फॉर सस्टेनेबल एंड हॉलिस्टिक एग्रीकल्चर (आशा-किसान स्वराज)</strong> ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। संगठन ने केंद्र सरकार को लिखे पत्र में ड्राफ्ट को बैक डोर से निरस्त कृषि कानूनों की वापसी की कोशिश करार दिया है।&nbsp;</p>
<p>कृषि मंत्रालय ने 25 नवंबर को <strong>एग्रीकल्चर मार्केटिंग के लिए नेशनल पॉलिसी फ्रेमवर्क</strong> का ड्राफ्ट सार्वजनिक करते हुए 15 दिन के अंदर पब्लिक के सुझाव मांगे थे। देश के करोड़ किसानों की आजीविका से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे के लिए सिर्फ 15 दिन का कम समय दिया गया, जिसे किसान संगठन ने नाकाफी बताया है। आशा-किसान स्वराज का कहना है कि ड्राफ्ट को एक नजर देखने से ही पता चलता है कि यह केंद्र सरकार द्वारा कृषि बाजारों को डि-रेगुलेट करने तथा किसानों को कॉरपोरेट के रहमोकरम पर छोड़ने के एजेंडे को फिर से लागू करने का प्रयास है। &nbsp;</p>
<p>आशा-किसान स्वराज के <strong>डॉ. राजिंदर चौधरी</strong> और <strong>कविता कुरुगंटी</strong> की ओर से लिखे गये पत्र में कहा गया है कि नेशनल पॉलिसी फ्रेमवर्क को राज्य सरकारों के साथ व्यापक विचार-विमर्श कर तैयार करना चाहिए था। न्यूनतम समर्थन मूल्य (<span>एमएसपी</span>) की कानूनी गारंटी किसानों की प्रमुख लंबित मांग है लेकिन ड्राफ्ट में इसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। एक बड़ी खामी यह है कि इसमें अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों और प्रतिबद्धताओं का कोई जिक्र नहीं है।</p>
<p>आशा-किसान स्वराज का कहना है कि बिना सरकारी निगरानी के मार्केटिंग के कई चैनल खोलने से शोषण और धोखाधड़ी का खतरा बढ़ सकता है। ड्राफ्ट पॉलिसी फ्रेमवर्क में कृषि बाजारों के रेगुलेशन का कोई जिक्र नहीं है। न ही अनरेगुलेटेड थोक बाजार और प्राइवेट थोक बाजारों से जुड़ी समस्याओं को हल करने का प्रस्ताव है। लेकिन निजी बाजारों या अनियमित बाजारों को अतार्किक ढंग से बढ़ावा दिया गया है।</p>
<p>ड्राफ्ट में कृषि कानूनों में सुधार की पहल को आशा-किसान स्वराज ने कृषि कानूनों के प्रमुख प्रावधानों को फिर से लागू करने का प्रयास बताया, <span>जिन्हें किसानों के विरोध के कारण निरस्त करना पड़ा था। संगठन का कहना है कि </span>"कृषि-व्यापार में आसानी" किसानों के हितों की कीमत पर नहीं की जा सकती है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने से निरस्त हुए कृषि कानून की बू आ रही है।&nbsp;संगठन ने सवाल उठाया कि ड्राफ्ट में उन्हीं तथाकथित सुधारों पर जोर क्यों दिया जा रहा है जो किसानों की बाजार संबंधी दिक्कतों को हल कर पाने नाकाम रहे हैं।</p>
<p>आशा-किसान स्वराज ने सुझाव दिया है कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को इस ड्राफ्ट पॉलिसी फ्रेमवर्क को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। क्योंकि यह खारिज हो चुके कृषि-बाजार सुधारों को फिर से लागू करने का एक प्रयास है, जो तीन कुख्यात कृषि कानूनों में निहित थे।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आशा-किसान स्वराज ने एग्री मार्केटिंग पॉलिसी के ड्राफ्ट पर जताई आपत्ति, बैक डोर से कृषि कानूनों की वापसी बताया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राकेश टिकैत खनौरी बॉर्डर पर जगजीत सिंह डल्लेवाल से मिले, एकजुटता की बात कही]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rakesh-tikait-met-jagjit-singh-dallewal-at-khanauri-border-stressed-on-unity.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Dec 2024 20:58:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rakesh-tikait-met-jagjit-singh-dallewal-at-khanauri-border-stressed-on-unity.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एमएसपी गारंटी कानून समेत 13 मांगों को लेकर खनौरी बॉर्डर पर पिछले 18 दिनों से आमरण अनशन कर रहे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की तबीयत काफी नाजुक है। गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने खनौरी बॉर्डर पहुंचकर जगजीत सिंह डल्लेवाल से मुलाकात की और डॉक्टरों की टीम से उनकी सेहत के बारे में जानकारी ली। इस मौके पर राकेश टिकैत ने किसानों की एकजुटता पर जोर दिया।&nbsp;</p>
<p>टिकैत के साथ किसान नेता हरिंदर सिंह लाखोवाल, रतन मान, जंगवीर सिंह चौहान, मनजीत सिंह धनेर, बिंदर सिंह गोलेवाल, बलविंदर सिंह मल्हीनंगल, सुखगिल मोगा, बूटा सिंह शादीपुर, किरपा सिंह नत्थू वाला, कुलदीप सिंह बाजीदपुर सहित कई जत्थेबंदियों के किसान नेता मौजूद रहे। इसी के साथ किसान यूनियनों के बीच एकजुटता की सुगबुगाहट तेज हो गई है। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 2020-21 में दिल्ली बॉर्डर पर हुए किसान आंदोलन के बाद संयुक्त किसान मोर्चा बिखर गया था।&nbsp;</p>
<p><strong>एकजुटता पर जोर</strong></p>
<p>राकेश टिकैत ने किसान संगठनों से एकजुट होने का आह्वान किया है। मीडिया से बात करते हुए टिकैत ने कहा कि डल्लेवाल हमारे बड़े नेता हैं और हम उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। पूरे देश के किसान चिंतित हैं। सरकार को किसानों की मांगों का संज्ञान लेना चाहिए। यह पूछे जाने पर कि क्या किसान संगठन एकजुट होंगे, टिकैत ने कह कि हमने एक समिति बनाई है जो अलग-अलग किसान नेताओं से बात करेगी।</p>
<p>टिकैत ने कहा कि किसानों को ताकत दिखानी होगी और केएमपी (कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे) से राष्ट्रीय राजधानी को घेरा जाएगा। इस बार आंदोलन केएमपी पर होगा। यह कब और कैसे होगा, हम देखेंगे। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि किसान संगठनों को एक साथ आना चाहिए और अगले कदम के बारे में रणनीति बनानी चाहिए।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट का निर्देश&nbsp;</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि प्रदर्शनकारी किसानों को गांधीवादी तरीका अपनाना चाहिए। कोर्ट ने किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल को तत्काल चिकित्सा सहायता देने का आदेश दिया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने केंद्र और पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों को डल्लेवाल से तुरंत मिलने और चिकित्सा सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया।&nbsp;</p>
<p><strong>कल फिर दिल्ली कूच</strong></p>
<p>इस बीच, किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने शंभू बॉर्डर पर संवाददाताओं को बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले 101 किसानों का एक समूह 14 दिसंबर को दोपहर में शंभू बॉर्डर से दिल्ली तक पैदल मार्च करने का एक और प्रयास करेगा। इससे पहले 6 और 8 दिसंबर को आंदोलनकारी किसानों ने दिल्ली कूच का प्रयास किया था।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_675c51c33622e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राकेश टिकैत खनौरी बॉर्डर पर जगजीत सिंह डल्लेवाल से मिले, एकजुटता की बात कही ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कैसी आत्मनिर्भरता? नवंबर में खाद्य तेलों का आयात 39 फीसदी बढ़ा, किसानों को घाटा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/what-about-self-reliance-import-of-edible-oils-increased-by-39-pc-in-november-farmers-suffer-losses.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Dec 2024 10:44:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/what-about-self-reliance-import-of-edible-oils-increased-by-39-pc-in-november-farmers-suffer-losses.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एक तरफ देश में सोयाबीन और सरसों जैसी तिलहन फसलों के किसान सही भाव को तरस रहे हैं वहीं देश के खाद्य तेल आयात में काफी उछाल आया है। नवंबर महीने में भारत का खाद्य तेल आयात 38.5 प्रतिशत बढ़कर 15.90 लाख टन तक पहुंच गया। खासतौर पर कच्चे सूरजमुखी और सोयाबीन तेल के आयात में बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p>गुरुवार को खाद्य तेल उद्योग के संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, <span>ऑयल ईयर </span>2024-25 के पहले महीने नवंबर के दौरान वनस्पति तेलों का आयात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 40 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 16.27 लाख टन तक पहुंच गया। खाद्य तेलों का वर्ष नवंबर से अक्टूबर तक होता है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_675bc1b25fb40.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>सूरजमुखी व सोयाबीन ऑयल का आयात बढ़ा&nbsp;</strong>&nbsp;</p>
<p>नवंबर में हुए वनस्पति तेलों के कुल आयात में 15.90 लाख टन खाद्य तेलों का आयात हुआ जो पिछले साल नवंबर में 11.48 लाख टन था। नवंबर 2024 में कुल 2.84 लाख टन आरबीडी पामोलिन का आयात हुआ जो पिछले साल नवंबर में 1.71 लाख टन था। हालांकि, <span>क्रूड पाम ऑयल का आयात घटकर 5.47 लाख टन रह गया जो पिछले साल नवंबर में 6.92 लाख टन था। लेकिन क्रूड सोयाबीन ऑयल का आयात 1.49 लाख टन से बढ़कर 4.07 लाख टन हो गया। इसी तरह कच्चे सूरजमुखी तेल का आयात 3.40 लाख टन तक पहुंच गया जो पिछले साल नवंबर में 1.28 लाख टन था। &nbsp;</span></p>
<p><strong>आयात में सॉफ्ट ऑयल की हिस्सेदारी बढ़ी </strong>&nbsp;&nbsp;</p>
<p>नवंबर में वनस्पति तेलों के कुल आयात में पाम ऑयल (क्रूड और रिफाइंड सहित) की हिस्सेदारी घटकर 53 फीसदी रह गई है जो पिछले साल नवंबर में 76 फीसदी थी। जबकि सॉफ्ट ऑयल की हिस्सेदारी 24 फीसदी से बढ़कर 47 फीसदी हो गई। नवंबर में आयात हुए कुल 15.90 लाख टन खाद्य तेलों में लगभग आधा हिस्सा क्रूड सोयाबीन और सनफ्लोवर ऑयल जैसे सॉफ्ट तेलों का है।</p>
<p>कुल खाद्य तेल आयात में रिफाइंड तेल (आरबीडी पामोलिन) की कुल हिस्सेदारी नवंबर 2023 में 15 प्रतिशत से बढ़कर नवंबर 2024 में 18 प्रतिशत हो गई।</p>
<p><strong>किसानों और घरेलू उद्योग को नुकसान </strong></p>
<p>सोयाबीन ऑयल के अत्यधिक आयात के कारण सोयाबीन की घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। देश में सोयाबीन के दाम 4250-4300 <span>रुपये प्रति क्विंटल के आसपास हैं जबकि सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य </span>(एमएसपी) 4892 <span>रुपये प्रति क्विंटल है। इससे सोयाबीन उगाने वाले किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही यह सोयाबीन प्रोसेसर्स और घरेलू खाद्य तेल उद्योग के लिए भी चिंताजनक है। </span></p>
<p>इस स्थिति को देखते हुए सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने केंद्र सरकार से क्रूड पाम ऑयल, <span>सरसों तेल</span>, <span>सोयाबीन और सोयाबीन ऑयल के वायदा व्यापार पर लगी रोक हटाने की मांग की है। </span></p>
<p><strong>इन देशों से होता है आयात</strong></p>
<p>इंडोनेशिया और मलेशिया भारत को आरबीडी पामोलिन और क्रूड पाम ऑयल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। सोयाबीन ऑयल मुख्य रूप से अर्जेंटीना, ब्राजील और रूस से आयात किया जाता है जबकि सूरजमुखी तेल रूस, यूक्रेन और अर्जेंटीना से आयात किया जाता है।</p>
<p>नवंबर 2024 के दौरान इंडोनेशिया ने भारत को 2.42 लाख टन क्रूड पाम ऑयल और 2.40 लाख टन आरबीडी पामोलिन का निर्यात किया। मलेशिया ने इस अवधि के दौरान 2.61 लाख टन क्रूड पाम ऑयल और 44,402 टन आरबीडी पामोलिन का निर्यात किया। भारत ने अर्जेंटीना से 3.37 लाख टन, ब्राजील से 22,298 टन और रूस से 23,643 टन क्रूड सोयाबीन ऑयल का आयात किया। रूस ने इस अवधि के दौरान भारत को 2.03 लाख टन, यूक्रेन ने 1.15 लाख टन और अर्जेंटीना ने 22,200 टन क्रूड सनफ्लोवर ऑयल का निर्यात किया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कैसी आत्मनिर्भरता? नवंबर में खाद्य तेलों का आयात 39 फीसदी बढ़ा, किसानों को घाटा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम&amp;#45;किसान की धनराशि बढ़ाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/there-is-currently-no-proposal-to-increase-the-amount-of-pm-kisan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Dec 2024 17:45:37 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/there-is-currently-no-proposal-to-increase-the-amount-of-pm-kisan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (</span>पीएम-किसान) योजना के तहत किसानों को मिलनी वाली सालाना 6 हजार रुपये की धनराशि को बढ़ाने का केंद्र सरकार का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।</p>
<p>कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में कहा, "फिलहाल पीएम-किसान के तहत लाभ राशि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।" उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक 18 किस्तों में 3.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया है।</p>
<p>2019 के लोकसभा चुनावों से पहले शुरू की गई पीएम-किसान योजना के तहत लाभार्थी किसानों के बैंक खाते में 2,000 रुपये की तीन किस्तों में सालाना 6,000 रुपये की धनराशि सीधे पहुंचाई जाती है। इस योजना का मकसद किसानों को सीधे तौर पर वित्तीय लाभ पहुंचाना है ताकि उन्हें कृषि कार्यों को करने में मदद मिल सके।</p>
<p>बजट से पहले अक्सर पीएम-किसान की धनराशि बढ़ाने की अटकलें लगाई जाती हैं। कुछ राज्यों जैसे राजस्थान और महाराष्ट्र में पीएम-किसान के तहत सालाना 6 हजार रुपये के अलावा राज्य सरकार की ओर से भी किसानों को प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण की योजनाएं चलाई जा रही है।</p>
<p>राजस्थान में पीएम-किसान के 6 हजार रुपये और राज्य सरकार की ओर से 2 हजार रुपये मिलाकर सालाना 8 हजार रुपये किसानों को मिलते हैं। महाराष्ट्र में पीएम-किसान के अलावा नमो शेतकरी महासम्मान योजना के तहत भी किसानों को सालाना 6 हजार रुपये मिलते हैं। इस प्रकार महाराष्ट्र में लाभार्थी किसानों को सालाना 12 हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_6759825905925.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम-किसान की धनराशि बढ़ाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मदर डेयरी के टर्नओवर में बढ़ोतरी, एनसीआर से बाहर बिजनेस बढ़ाने पर फोकस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/mother-dairy-reports-healthy-turnover-growth-focuses-on-expanding-business-beyond-delhi-ncr.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Dec 2024 14:06:55 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/mother-dairy-reports-healthy-turnover-growth-focuses-on-expanding-business-beyond-delhi-ncr.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) की सब्सिडियरी मदर डेयरी फ्रूट एंड वेजिटेबल्स प्राइवेट लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष में नवंबर के अंत तक पिछले साल के मुकाबले अपने टर्नओवर में बेहतर बढ़ोतरी हासिल की है। कंपनी दिल्ली-एनसीआर के बाहर के मार्केट्स पर फोकस बढ़ा रही है और इसके साथ ही अपने उत्पाद पोर्टफोलियो को भी बड़ा कर रही है। जहां इसका डेयरी उत्पादों में वैल्यू एडेड उत्पादों की श्रृंखला बढ़ाने पर जोर है, वहीं यह फल और सब्जियों की प्रोसेसिंग के लिए सफल के दो नये संयंत्र भी स्थापित कर रही है। इनमें से एक गुजरात में और आम उत्पादक दक्षिणी राज्य में होगा। मदर डेयरी के मैनेजिंग डायरेक्टर <strong>मनीष बंदलिश</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> के साथ एक विशेष बातचीत में यह जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि गुजरात में आणंद के करीब इटाला में स्थापित होने वाले सफल के संयंत्र में फूड प्रोसेसिंग के प्लांट में आलू की फ्रेंच फ्राइज और फ्लेक्स जैसे उत्पाद बनाये जाएंगे। वहीं सफल का दूसरा नया संयंत्र आम की प्रोसेसिंग के लिए होगा और यह दक्षिणी राज्यों आंध्र प्रदेश या कर्नाटक की आम उत्पादन वाली बेल्ट में होगा। इसके साथ ही मदर डेयरी बटर के विभिन्न वेरियंट का गुजरात में उत्पादन शुरू करेगी। जूनागढ़ स्थित इस संयंत्र में दिसंबर में ही उत्पादन शुरू होने की संभावना है।</p>
<p>उनके मुताबिक डेयरी&nbsp; की दूध की बिक्री करीब 47 से 48 लाख प्रति लीटर प्रतिदिन है जिसमें 36 से 37 लाख लीटर की बिक्री दिल्ली व एनसीआर मार्केट में होती है। मदर डेयरी ने दिल्ली एनसीआर से बाहर राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में बाजार बढ़ाने पर जोर दिया है। वहीं वैल्यू एडेड उत्पादों की हिस्सेदारी 22 से 23 फीसदी के स्तर से बढ़कर 28 से 30 फीसदी तक पहुंच गई है। वैल्यू ए़डेड उत्पादो में पनीर की बिक्री में करीब 40 फीसदी की ग्रोथ है वहीं प्रो बायोटिक कैटेगरी के चलते तड़का छाछ की बिक्री में करीब 30 फीसदी ग्रोथ चल रही है।</p>
<p>एस सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि आइसक्रीम की बिक्री भी लगातार बढ़ रही है, हालांकि कोको पाउडर की कीमत बढ़ने से चॉकलेट फ्लेववर वाले आइसक्रीम उत्पादों की लागत बढ़ी है। आइसक्रीम की बिक्री में चॉकलेट फ्लेवर की हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी तक है। मदर डेयरी के प्रो बॉयोटिक उत्पादों की बिक्री भी तेजी से बढ़ रही है।</p>
<p>मनीष बताते हैं कि मदर डेयरी द्वारा खरीदे जाने वाले कुल दूध में से करीब 97 फीसदी दूध सीधे किसानों से या किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के जरिये ही खरीदते हैं। करीब 15 लाख लीटर दूध उत्तर प्रदेश और करीब 12-15 लाख लाख लीटर दूध राजस्थान से खरीदा जाता है। दूध की खरीद कीमत पर उन्होंने कहा कि कीमतों में स्थिरता है और बहुत उतार-चढ़ाव की स्थिति इस साल नहीं रही है।</p>
<p>पैकेज्ड दूध की बिक्री के बढ़ते ट्रेंड पर उनका कहना है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में खुले दूध से पैकेज्ड दूध खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या में 25 फीसदी की दर से बढ़ोतरी हो रही है। बाजार में दूध की आवक पर उनका कहना है कि इस साल फ्लश सीजन लेट है और अगले 15 दिनों में स्थिति साफ होगी कि यह फ्लश सीजन कैसा रहेगा।&nbsp;</p>
<p>एनडीडीबी द्वारा देश के कई राज्यों की मिल्क कोआपरेटिव फेडरेशन के बिजनेस को पटरी पर लाने का जिम्मा मिला है। इनमें झारखंड, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश शामिल हैं। इस बारे में मनीष बताते हैं कि इन राज्यों में वहां की फेडरेशन के ब्रांड को ही बढ़ावा देने की रणनीति पर काम होता है और इसमें कामयाबी भी मिल रही है। इसके साथ ही मदर डेयरी लगातार महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, गुजरात और दूसरे राज्यों में अपने बिजनेस दायरे को बढ़ा रही है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_67595295b91e4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मदर डेयरी के टर्नओवर में बढ़ोतरी, एनसीआर से बाहर बिजनेस बढ़ाने पर फोकस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_67595295b91e4.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रबी सीजन की 77 फीसदी बुवाई पूरी, गेहूं का क्षेत्र बढ़ा, सरसों की बुवाई पिछड़ी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/77-percent-rabi-sowing-complete-wheat-area-expands-mustard-trails-behind.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 10 Dec 2024 12:21:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/77-percent-rabi-sowing-complete-wheat-area-expands-mustard-trails-behind.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में रबी सीजन की लगभग 77 फीसदी से अधिक बुवाई पूरी हो चुकी है। धीमी शुरुआत के बाद रबी बुवाई ने जोर पकड़ा है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, 6 दिसंबर तक 493.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई हो चुकी है जो पिछले साल की समान अवधि से 1.51 फीसदी अधिक है। गेहूं की बुवाई का रकबा 2.28 प्रतिशत बढ़कर 239.49 लाख हेक्टेयर पहुंच गया, जबकि सरसों का रकबा 4.29 प्रतिशत घटकर 81.07 लाख हेक्टेयर रहा है।</p>
<p>गेहूं के दाम एमएसपी से अधिक होने के कारण किसानों का रुझान गेहूं की तरफ बढ़ता दिख रहा है जबकि तिलहन की तरफ रुझान घटा है। देश में रबी बुवाई का सामान्य क्षेत्र 635.6 लाख हेक्टेयर है। सर्दियों में बढ़ती ठंड के साथ ही रबी सीजन की बाकी बची बुवाई भी आने वाले दो-तीन सप्ताह में पूरी होने की उम्मीद है। फिलहाल रबी बुवाई की स्थिति संतोषजनक मानी जा सकती है।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>दलहन का रकबा 4.28 फीसदी बढ़ा </strong></p>
<p>इस रबी सीजन में 6 दिसंबर तक दलहन का रकबा 4.28 फीसदी बढ़कर 120.65 लाख हेक्टेयर हो गया। इसमें सबसे ज्यादा 86.09 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में चने की बुवाई हुई है जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 7.14 फीसदी अधिक है। मसूर का रकबा 1.72 फीसदी बढ़कर 14.75 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है।&nbsp;रबी की दलहन फसलों में मूंग की बुवाई में 50 फीसदी और उड़द की बुवाई में 14.66 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।</p>
<p><strong>तिलहन फसलों बुवाई 4.34 फीसदी पिछड़ी </strong></p>
<p>रबी सीजन में 6 दिसंबर तक तिलहन फसलों की बुवाई का क्षेत्र पिछले की साल इसी अवधि के मुकाबले 4.34 फीसदी घटकर 86.52 लाख हेक्टेयर रह गया। सरसों के क्षेत्र में 4.29 फीसदी की गिरावट आई जबकि मूंगफली का रकबा 7.97 फीसदी घटकर 2.31 लाख हेक्टेयर है। तिल की बुवाई करीब 45 फीसदी घटकर 6 हजार हेक्टेयर रह गई है जबकि अलसी का क्षेत्र करीब 7 फीसदी घटकर 2.11 लाख हेक्टेयर रह गया है।&nbsp;</p>
<p>तिलहन फसलों का क्षेत्र घटने से खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भरता की कोशिशों को झटका लग सकता है। सोयाबीन और सरसों जैसी तिलहन फसलों के दाम गिरने से किसान अन्य फसलों का रुख कर रहे हैं। हालांकि, बुवाई में अभी समय बचा है और आने वाले दिनों में बुवाई के आंकड़े सुधर सकते हैं। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>मोटे अनाजों की बुवाई मामूली बढ़ी </strong></p>
<p>श्री अन्न व मोटे अनाजों की बुवाई का क्षेत्र 1.97 फीसदी बढ़कर 35.77 लाख हेक्टेयर रहा है जिसमें सबसे ज्यादा 5.79 फीसदी की बढ़ोतरी ज्वार की बुवाई के क्षेत्र में हुई है। ज्वार का रकबा 19.38 लाख हेक्टेयर है। मक्का की बुवाई पिछले साल से मामूली अधिक 10.07 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई जबकि जौ की बुवाई के क्षेत्र में 7.98 फीसदी की कमी आई है। <span>बाजरे का रकबा भी करीब 9 फीसदी कम है।</span></p>
<p>जलवायु संकट के बीच रबी फसलों की बुवाई का क्षेत्र बढ़ना अच्छा संकेत है। लेकिन तिलहन की बुवाई पिछड़ना चिंताजनक है। जिस तरह रबी सीजन की शुरुआत में कम ठंड पड़ी, उसका असर फसलों की पैदावार पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में मौसम के मिजाज पर भी काफी कुछ निर्भर करेगा।&nbsp;</p>
<p style="text-align: center;"></p>
<table width="586" style="margin-left: auto; margin-right: auto;">
<tbody>
<tr>
<td colspan="7" style="width: 582.188px; text-align: center;">
<p style="text-align: center;"><strong>Progress of sowing area coverage under Rabi crops till 6 Dec. 2024 </strong></p>
<p style="text-align: right;"><em>(Area in lakh hectares)</em></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td rowspan="2" style="width: 60.071px; text-align: center;"><strong>S. No.</strong></td>
<td rowspan="2" style="width: 139.318px; text-align: center;"><strong>Crops</strong></td>
<td rowspan="2" style="width: 62.2443px; text-align: center;"><strong>Normal Rabi Area (DES)</strong></td>
<td colspan="2" style="width: 126.96px; text-align: center;"><strong>Area Sown</strong></td>
<td rowspan="2" style="width: 83.9062px; text-align: center;">
<p><strong>Difference </strong></p>
<p><strong>(in lakh ha)</strong></p>
</td>
<td rowspan="2" style="width: 95.1989px; text-align: center;"><strong>Difference&nbsp; (%)</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;"><strong>2024-25</strong></td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;"><strong>2023-24</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">1</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Wheat</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">312.35</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">239.49</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">234.15</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">5.34</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">2.28</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">2</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Rice</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">42.02</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">11.19</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">10.93</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">0.26</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">2.38</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">3</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Pulses</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">140.44</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">120.65</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">115.7</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">4.95</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">4.28</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">a</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Gram</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">100.99</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">86.09</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">80.35</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">5.74</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">7.14</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">b</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Lentil</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">15.13</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">14.75</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">14.5</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">0.25</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">1.72</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">c</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Fieldpea</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">6.5</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">8.09</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">8.14</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">-0.05</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">-0.61</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">d</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Kulthi</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">1.98</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">2.42</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">3.06</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">-0.64</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">-20.92</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">e</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Urdbean</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">6.15</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">2.91</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">3.41</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">-0.5</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">-14.66</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">f</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Moongbean</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">1.44</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">0.36</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">0.72</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">-0.36</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">-50.00</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">g</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Lathyrus</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">2.79</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">2.65</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">2.9</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">-0.25</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">-8.62</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">h</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Other Pulses</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">5.46</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">3.36</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">2.62</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">0.74</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">28.24</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">4</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Shri Anna &amp; Coarse cereals</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">53.82</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">35.77</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">35.08</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">0.69</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">1.97</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">a</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Jowar</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">24.37</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">19.38</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">18.32</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">1.06</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">5.79</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">b</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Bajra</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">0.92</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">0.1</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">0.11</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">-0.01</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">-9.09</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">c</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Ragi</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">0.68</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">0.45</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">0.45</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">0</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">0.00</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">d</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Small Millets</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">0.11</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">0.13</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">0</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">0.13</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">&nbsp;</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">e</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Maize</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">22.11</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">10.07</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">10.05</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">0.02</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">0.20</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">f</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Barley</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">5.63</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">5.65</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">6.14</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">-0.49</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">-7.98</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">5</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Oilseeds</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">86.97</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">86.52</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">90.45</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">-3.93</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">-4.34</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">a</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Rapeseed &amp; Mustard</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">79.16</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">81.07</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">84.7</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">-3.63</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">-4.29</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">b</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Groundnut</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">3.82</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">2.31</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">2.51</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">-0.2</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">-7.97</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">c</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Safflower</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">0.72</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">0.52</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">0.49</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">0.03</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">6.12</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">d</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Sunflower</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">0.76</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">0.27</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">0.21</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">0.06</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">28.57</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">e</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Sesamum</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">0.58</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">0.06</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">0.11</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">-0.05</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">-45.45</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">f</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Linseed</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">1.93</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">2.11</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">2.27</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">-0.16</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">-7.05</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;">g</td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;">Other Oilseeds</td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;">0</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">0.17</td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;">0.16</td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;">0.01</td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;">6.25</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 60.071px; text-align: center;"><strong>&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 139.318px; text-align: center;"><strong>Total Crops</strong></td>
<td style="width: 62.2443px; text-align: center;"><strong>635.6</strong></td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;"><strong>493.62</strong></td>
<td style="width: 62.0312px; text-align: center;"><strong>486.3</strong></td>
<td style="width: 83.9062px; text-align: center;"><strong>7.32</strong></td>
<td style="width: 95.1989px; text-align: center;"><strong>1.51</strong></td>
</tr>
</tbody>
</table> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_6757e44fb4a2b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रबी सीजन की 77 फीसदी बुवाई पूरी, गेहूं का क्षेत्र बढ़ा, सरसों की बुवाई पिछड़ी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_6757e44fb4a2b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बजट पूर्व चर्चा में किसानों को सस्ते कर्ज, जीएसटी हटाने और पीएम&amp;#45;किसान की धनराशि बढ़ाने के सुझाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pre-budget-meeting-demands-of-cheaper-farm-loans-gst-removal-and-pm-kisan-amount-hike.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 07 Dec 2024 19:51:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pre-budget-meeting-demands-of-cheaper-farm-loans-gst-removal-and-pm-kisan-amount-hike.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को बजट पूर्व चर्चा के लिए किसान संगठनों और कृषि क्षेत्र के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई। इस दौरान किसानों को सस्ता कर्ज मुहैया कराने, कृषि इनपुट व उपकरणों से जीएसटी हटाने तथा पीएम-किसान की धनराशि बढ़ाने जैसे कई सुझाव दिए गये।</p>
<p>वित्त मंत्रालय में लगभग दो घंटे चली बैठक में किसान संगठनों के अलावा कृषि अर्थशास्त्री और पेस्टिसाइड व एग्रीबिजनेस इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया था। बैठक में <strong>भारत कृषक समाज</strong> के चेयरमैन <strong>अजय वीर जाखड़</strong> ने जीएसटी की तर्ज पर देश भर की कृषि मंडियों में एकसमान टैक्स का सुझाव दिया। उन्होंने बागवानी उत्पादों पर मंडी शुल्क व चार्ज घटाने के लिए राज्यों को वित्तीय क्षतिपूर्ति तथा अगले 8 वर्षों में तीन फसलों - दलहन में चना, तिलहन में सोयाबीन (खरीफ) और सरसों (रबी) की पैदावार बढ़ने पर सालाना 1,000 करोड़ रुपये खर्च करने का सुझाव भी दिया।</p>
<p><strong>भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक)</strong> के राष्ट्रीय प्रवक्ता<strong> धर्मेंद्र मलिक</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि उन्होंने वित्त मंत्री से खेती में इस्तेमाल होने वाले खाद-बीज, कीटनाशकों और उपकरणों से जीएसटी हटाने की मांग की। वित्त मंत्री ने पूरी तरह से कृषि कार्यों में प्रयोग होने वाले उपकरणों व खाद-बीज आदि को जीएसटी से मुक्त करने पर विचार करने का आश्वासन दिया है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_675454a85d657.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि उन्होंने वित्त मंत्री को 15 सूत्री सुझाव दिए हैं। इनमें सी2 लागत के आधार पर डेढ़ गुना एमएसपी तय करने, एमएसपी से कम दाम पर कृषि आयात न करने, पीएम-किसान की राशि सालाना 6 हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये करने, किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने और ब्याज दर घटाने के सुझाव शामिल हैं। फल-सब्जियों, दूध व शहद सहित सभी प्रमुख फसलों को एमएसपी के दायरे में लाने, एमएसपी प्रणाली में सुधार और फसल कटाई के बाद के खर्चों व जोखिम को एमएसपी की गणना में शामिल करने की मांग भी उठाई गई।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p>बजट पूर्व चर्चा में <strong>भारतीय किसान संघ</strong> के अध्यक्ष <strong>बद्री नारायण चौधरी</strong> ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि बढ़ाने की मांग रखी। उन्होंने कृषि यंत्रों व इनपुट पर जीएसटी को शून्य करने की मांग भी उठाई। साथ ही प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि के साथ-साथ खाद कंपनियों को दी जाने वाली सब्सिडी डीबीटी के जरिए सीधे किसान के खाते में देने का सुझाव दिया है।&nbsp;</p>
<p>भारतीय किसान संघ ने कहा कि आईसीएआर विदेशी व्यापारिक संस्थाओं से शोध के लिए समझौता करने का बहाना न बनाएं बल्कि भारत सरकार कृषि शोध, विकास व विस्तार के लिए इन्हें पर्याप्त बजट राशि का आवंटन करे। किसान संघ के प्रतिनिधियों ने कृषि सिंचाई परियोजनाओं के विकास के लिए बजट में अधिक राशि का प्रावधान करने पर जोर दिया। साथ ही ग्रामीण हाट बाजारों को प्रभावी बनाने, केवीके को बीज उत्पादन के लिए पर्याप्त बजट व केसीसी की लिमिट बढ़ाने की मांग भी रखी।&nbsp;</p>
<p>बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार और छोटे किसानों को शून्य-प्रीमियम पर फसल बीमा की मांग भी उठाई गई। <strong>पीएचडी चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री</strong> की एग्री-बिजनेस कमेटी के अध्यक्ष <strong>आरजी अग्रवाल</strong> ने कीटनाशकों पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने का सुझाव दिया। साथ ही नकली कीटनाशकों की बिक्री पर अंकुश लगाने पर जोर दिया।</p>
<p>बैठक में किसान संगठनों और कृषि उद्योग से जुड़े लगभग 19 लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर &nbsp;वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, वित्त और कृषि मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल मौजूद रहे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बजट पूर्व चर्चा में किसानों को सस्ते कर्ज, जीएसटी हटाने और पीएम-किसान की धनराशि बढ़ाने के सुझाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बिना कोलैटरल वाले कृषि कर्ज की सीमा 1.6 लाख से बढ़ कर 2 लाख रुपये हुई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rbi-increases-limit-of-non-collateral-agriculture-loan-from-1.6-lakh-to-2-lakh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 07 Dec 2024 15:13:13 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rbi-increases-limit-of-non-collateral-agriculture-loan-from-1.6-lakh-to-2-lakh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">भारतीय रिजर्व बैंक ने नॉन-कोलैटरल यानी बिना रेहन वाले कृषि कर्ज की सीमा 1.6 लाख रुपये से बढ़ा कर दो लाख रुपये करने का निर्णय लिया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान यह जानकारी दी। कृषि कर्ज की यह सीमा प्रति किसान होती है। केंद्रीय बैंक जल्द ही इस घोषणा पर अमल के लिए एक सर्कुलर जारी करेगा।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">किसानों के लिए नॉन-कोलैटरल कृषि कर्ज की सीमा वर्ष 2010 में एक लाख रुपये निर्धारित की गई थी। उसके बाद इसे वर्ष 2019 में संशोधित कर 1.6 लाख रुपये किया गया। अब, पांच साल बाद फिर इसमें संशोधन कर प्रति किसान दो लाख रुपये किया गया है। आरबीआई के अनुसार कृषि की सहयोगी गतिविधियों के लिए भी इस नॉन-कोलैटरल कर्ज की सीमा बढ़ाई गई है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई गवर्नर ने कहा, &ldquo;कृषि क्षेत्र में विकास को खरीफ फसलों के बेहतर उत्पादन, जलाशयों का उच्च जल स्तर और रबी की अच्छी बुवाई का समर्थन हासिल है। बिना जमानत वाले कृषि कर्ज की सीमा को आखिरी बार 2019 में संशोधित किया गया था। कृषि की लागत और महंगाई में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए बिना कोलैटरल वाले कृषि ऋण की सीमा को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। यह फैसला छोटे और सीमांत किसानों के लिए कर्ज की उपलब्धता बढ़ाएगा।&rdquo;&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आरबीआई गवर्नर के अनुसार यह कदम छोटे और सीमांत किसानों को औपचारिक ऋण प्रणाली के तहत लाने की दिशा में भी मदद करेगा। गौरतलब है कि मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात जैसे क्षेत्रों का प्रदर्शन कमजोर रहा है। पहली तिमाही के 2 प्रतिशत की तुलना में कृषि में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष की दूसरी तिमाही में कृषि विकास दर 1.7 प्रतिशत थी। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले छह महीने में कृषि क्षेत्र की विकास दर 2.7 प्रतिशत रही है।</span></p>
<p><br /><br /></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बिना कोलैटरल वाले कृषि कर्ज की सीमा 1.6 लाख से बढ़ कर 2 लाख रुपये हुई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मौसम के बदले मिजाज ने बिगाड़ी गुड़ की मिठास, रिकवरी घटी, गन्ने का रेट भी कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/weather-woes-reduced-sweetness-of-jaggery-lower-recovery-and-falling-sugarcane-prices.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Dec 2024 20:22:44 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/weather-woes-reduced-sweetness-of-jaggery-lower-recovery-and-falling-sugarcane-prices.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल गन्ने की फसल पर रोगों की मार और कम ठंड के कारण गुड़ व चीनी की रिकवरी पर असर पड़ा है। पश्चिमी यूपी की शुगर बेल्ट में आमतौर पर नवंबर से गुड़ बनना शुरू हो जाता है लेकिन इस बार ठंड कम पड़ने के कारण गन्ने में मिठास नहीं बन पायी। इस कारण गुड़ बनाने का जो काम नवंबर में जोर पकड़ लेता था वो इस साल दिसंबर में शुरू हो पा रहा है। &nbsp;</p>
<p>पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर स्थित ऊन में आधुनिक शुगर क्रशर यूनिट स्थापित करने वाले <strong>केपी सिंह</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि इस साल नवंबर में तापमान अधिक रहा है। गन्ने में सुक्रोज बनने के लिए ठंड आवश्यक है लेकिन अभी तक गन्ने में पानी की मात्रा अधिक है। इसलिए गुड़ बन ही नहीं पा रहा था। एक महीने देरी से गुड़ बनना शुरू हुआ है। अभी भी गन्ने से गुड़ की रिकवरी 8 फीसदी से कम है।</p>
<p>केपी सिंह बताते हैं कि इस साल गुड़ का रेट भी पिछले साल से कम है। फिलहाल गुड़ का थोक रेट 30-33 रुपये किलो चल रहा है जो पिछले साल 37 रुपये के आसपास था। इस कारण किसानों को क्रशर और कोल्हू पर गन्ने का भाव 300-325 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास मिल ही मिल पा रहा है जबकि पिछले साल गुड़ व खांडसारी उद्योग ने गन्ना का भाव 400 रुपये से अधिक तक दिया था। के पी सिंह असम में भी एक क्रशर चलाते हैं। वे बताते हैं कि असम में गुड़ का दाम 5 रुपये अधिक रहता था। लेकिन इस साल वहां भी दाम कम है।&nbsp;</p>
<p>गुड़ की कीमतों में कमी की एक बड़ी वजह पिछले साल का बकाया गुड़ स्टॉक भी है। कारोबारियों ने अधिक दाम की उम्मीद में गुड़ का स्टॉक किया था लेकिन सीजन के अंत में दाम 40 रुपये प्रति किलो के उच्च स्तर से गिरकर 37 रुपये तक आ गये थे।</p>
<p>इस साल उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल पर कीटों के प्रकोप और रोगग्रस्त होने के कारण बड़े पैमाने पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऊपर से मौसम की मार भी पड़ी है। गन्ना किस्म CO-0238 में लाल सड़न (रेड रॉट) रोग और चोटी बेधक (टॉप बोरर) कीट का सर्वाधिक प्रकोप देखा जा रहा है। गन्ने की यह किस्म कई साल से रोगग्रस्त है लेकिन किसानों को इसका विकल्प नहीं मिल पाया है। इस साल अत्यधिक गर्मी के कारण बुवाई के बाद गन्ने की फसल प्रभावित हुई थी और अब फसल तैयार होने के समय ठंड कम पड़ी है।</p>
<p>गन्ने की फसल पर रोग और मौसम की दोहरी मार का असर अब गुड़ और चीनी उत्पादन पर भी दिखने लगा है। क्योंकि गन्ने के उत्पादन और गन्ने से चीनी या गुड़ की रिकवरी दोनों पर असर पड़ा है। पश्चिमी यूपी में गन्ना किसानों का मानना है कि रोग और मौसम की वजह से इस साल गन्ने की पैदावार 15-20 फीसदी तक प्रभावित हो सकती है। सहकारी चीनी मिलों के संगठन एनएफसीएसएफ के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर से शुरू हुए गन्ना पेराई सीजन 2024-25 में 15 नवंबर तक यूपी की मिलों में गन्ने से चीनी की रिकवरी 7.85 फीसदी रही जो गत वर्ष इस अवधि तक 8.60 फीसदी थी।</p>
<p>एक ओर जहां गन्ने कटाई जोर पकड़ रही है वहीं, चीनी के दाम पिछले डेढ़ साल में सबसे कम 3400 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे चल रहे हैं। चीनी उद्योग काफी दिनों से नीचे न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने की मांग कर रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मौसम के बदले मिजाज ने बिगाड़ी गुड़ की मिठास, रिकवरी घटी, गन्ने का रेट भी कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने याद दिलाया किसानों से किया वादा, स्पीच वायरल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/vice-president-jagdeep-dhankhar-reminded-the-promises-made-to-the-farmers-speech-went-viral.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 04 Dec 2024 14:23:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/vice-president-jagdeep-dhankhar-reminded-the-promises-made-to-the-farmers-speech-went-viral.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का किसानों के बारे में दिया भाषण खूब चर्चाओं में है। मुंबई स्थित केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरसीओटी) के शताब्दी दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रति धनखड़ ने किसानों के मुद्दे पर खरी-खरी सुनाते हुए किसानों से किए वादे की तरफ सरकार का ध्यान दिलाया। अहम बात है कि उस समय केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मंच पर मौजूद थे।</p>
<p>उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि कृषि मंत्री जी<span>, </span>एक-एक पल आपका भारी है। मेरा आप से आग्रह है कि कृपया कर बताइये<span>, </span>क्या किसान से वादा किया गया था<span>? </span>किया गया वादा क्यों नहीं निभाया गया<span>? </span>वादा निभाने के लिए हम क्या कर रहे हैं<span>? </span>गत वर्ष भी आंदोलन था<span>, </span>इस वर्ष भी आंदोलन है। कालचक्र घूम रहा है<span>, </span>हम कुछ कर नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई भी सरकार वादा करती है और वह वादा किसान से जुड़ा हुआ है तब हमें कभी कोई कसर नहीं रखनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का दुनिया को संदेश है, जटिल समस्याओं का निराकरण वार्ता से होता है। किसान से वार्ता अविलंब होनी चाहिए और हमें जानकारी होनी चाहिए, क्या किसान से कोई वादा किया गया था? माननीय कृषि मंत्री जी, आपसे पहले जो कृषि मंत्री जी थे, क्या उन्होंने लिखित में कोई वादा किया था? यदि वादा किया था तो उसका क्या हुआ?</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_675017e677243.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>एमएसपी गारंटी के मुद्दे पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसान को एमएसपी गारंटी कानून चाहिए। खुले मन से देखो खुले मन से सोचो<span>, </span>आंकलन करो। देने के क्या फायदे हैं<span>, </span>नहीं देने का क्या नुकसान हैं। आप तुरंत पाओगे इसमें नुकसान ही नुकसान है। किसान यदि आज के दिन आंदोलित हैं, उस आंदोलन का आकलन सीमित रूप से करना बहुत बड़ी गलतफहमी और भूल होगी। जो किसान सड़क पर नहीं है, वह भी आज के दिन चिंतित हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम अपनों से नहीं लड़ सकते। हम यह विचारधारा नहीं रख सकते कि उनका पड़ाव सीमित रहेगा, अपने आप थक जाएंगे। अरे भारत की आत्मा को परेशान थोड़ी ना करना है। <span>विकसित भारत का रास्ता किसान के दिल से निकलता है, यह हमें कभी नहीं भूलना चाहिए।</span></p>
<p>आईसीएआर और इससे जुड़े शोध संस्थानों के बारे में धनखड़ ने कहा कि इस देश में 75 साल के बाद इतनी बड़ी-बड़ी संस्थाएं हमने खड़ी कर दी हैं और किसान आज भी अपने उत्पाद की कीमत के लिए तरस रहा है। कृषि उत्पादों का कितना बड़ा व्यापार है। आपकी संस्थाओं ने किसान को उसमें जोड़ने के लिए क्या किया। किसान को मार्केटिंग से जोड़ते, एक बदलाव आता, क्यों ऐसा नहीं हुआ। सोचने का प्रश्न है। हम उसको देने में भी कंजूसी कर रहे हैं, जो वादा किया गया है।<span> यदि संस्थाएं जीवंत होती, योगदान करती तो यह हालात कभी नहीं आते।&nbsp;</span></p>
<p></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">किसान से वार्ता अविलंब होनी चाहिए और हमें जानकारी होने चाहिए, क्या किसान से कोई वादा किया गया था?<br /><br />प्रधानमंत्री जी का दुनिया को संदेश है, जटिल समस्याओं का निराकरण वार्ता से होता है। <br /><br />माननीय कृषि मंत्री जी, आपसे पहले जो कृषि मंत्री जी थे, क्या उन्होंने लिखित में कोई वादा किया&hellip; <a href="https://t.co/4CWaZlf7lh">pic.twitter.com/4CWaZlf7lh</a></p>
&mdash; Vice-President of India (@VPIndia) <a href="https://twitter.com/VPIndia/status/1863933441668153399?ref_src=twsrc%5Etfw">December 3, 2024</a></blockquote>
<p>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_6750178882662.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने याद दिलाया किसानों से किया वादा, स्पीच वायरल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_6750178882662.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्री मार्केटिंग पर बनी समिति ने किसानों की आय सुनिश्चित करने के लिए दिया मूल्य बीमा योजना का सुझाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/drafting-committee-on-agri-marketing-suggests-rolling-out-price-insurance-scheme-to-insure-the-farmers-income.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 01 Dec 2024 11:30:49 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/drafting-committee-on-agri-marketing-suggests-rolling-out-price-insurance-scheme-to-insure-the-farmers-income.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रीय कृषि मार्केटिंग नीति फ्रेमवर्क के लिए गठित मसौदा समिति ने एक सशक्त कृषि मार्केटिंग इकोसिस्टम विकसित करने के लिए कई सुझाव दिए हैं। एक मुख्य सुझाव है 'मूल्य बीमा योजना' शुरू करना, ताकि किसानों की आय &nbsp;बुवाई के समय ही सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, उपज बेचने के दिन ही ऑनलाइन या अधिकतम अगले दिन किसानों को भुगतान करने का सुझाव दिया गया है। अन्य महत्वपूर्ण सुझावों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल में खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाना, ई-नाम को एपीएमसी बाजारों से बाहर विस्तार देना, जीएसटी काउंसिल की तर्ज पर राज्य कृषि मंत्रियों की एक एंपावर्ड समिति का गठन करना, सभी किसानों को किसी न किसी किसान संगठन के तहत लाना और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के माध्यम से बाजार लिंकेज और फ्यूचर-ऑप्शन व्यापार पर फोकस करना शामिल हैं। &nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण विभाग ने 25 जून 2024 को मार्केटिंग के अतिरिक्त सचिव फैज़ अहमद किदवई की अध्यक्षता में एक मसौदा समिति का गठन किया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट- नेशनल पॉलिसी फ्रेमवर्क ऑन एग्रीकल्चर मार्केटिंग- सौंप दी है, जिस पर विभाग ने संबंधित पक्षों से 15 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं। इस समिति का उद्देश्य ऐसे उपाय सुझाना है जिनसे किसान अपनी पसंद के बाजार तक पहुंच सकें और अपनी उपज का सर्वोत्तम मूल्य प्राप्त कर सकें, मार्केटिंग के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सके, पारदर्शिता आए, आधुनिक डिजिटल तकनीक और कृषि मूल्य श्रृंखला आधारित मार्केटिंग को अपनाया जा सके।</p>
<p>ड्राफ्ट में कहा गया है कि पिछले 10 वर्षों में कृषि आय सालाना 5.23% की दर से बढ़ी है, जबकि गैर-कृषि क्षेत्र में यह दर 6.24% और समग्र अर्थव्यवस्था में 5.80% रही है। इस प्रकार कृषि और गैर-कृषि क्षेत्र की आय वृद्धि दर में अंतर मामूली है। पिछले दो दशकों में कृषि में तेज वृद्धि का कारण बागवानी फसलों, पशुधन और मत्स्य पालन की ओर विविधीकरण रहा है। मत्स्य पालन के उत्पादन मूल्य में 9.08% की सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई, इसके बाद पशुधन क्षेत्र में 5.76% और फसल क्षेत्र में 2.34% वार्षिक वृद्धि हुई। &nbsp;</p>
<p>मसौदा में यह स्वीकार किया गया है कि विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसान कृषि क्षेत्र में इस विकास का लाभ उठाने में असमर्थ हैं। ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच एक बड़ा अंतर अब भी देखा जा सकता है और किसानों का एक बड़ा वर्ग अब भी अपनी आय बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहा है। प्रमुख कारणों में अत्यधिक छोटी होती जोत, उत्पादन की ऊंची लागत, मांग आधारित उत्पादन न करना, बाजारों तक पहुंच की कमी और उपज का उपयुक्त मूल्य प्राप्त करने में कठिनाई शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि ब्लॉकचेन तकनीक जैसे डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का उपयोग, इनोवेशन, उचित कौशल विकास और पारदर्शिता किसानों की आय बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।</p>
<p><strong>कृषि उपज के थोक बाजार</strong><br />देश में 31 मार्च 2024 तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एपीएमसी अधिनियमों के तहत 7057 रेगुलेटेड थोक बाजार थे। इन बाजारों का घनत्व राज्यवार भिन्न है और एक रेगुलेटेड बाजार औसतन 407 वर्ग किमी क्षेत्र में सेवा देता है, जबकि मानदंड 80 वर्ग किमी का है। इससे भी बदतर यह है कि 1100 से अधिक बाजार काम नहीं कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में 500 से अधिक अनियमित थोक बाजार हैं और इनमें से अधिकांश बाजारों में बुनियादी ढांचे / सुविधाओं की स्थिति बहुत खराब है। ये अनियमित थोक बाजार उन राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में हैं जहां या तो एपीएमसी अधिनियम अस्तित्व में नहीं हैं या वे काम नहीं करते (केरल, बिहार, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और पूर्वोत्तर राज्य)।&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में लगभग 125 निजी थोक बाजार हैं। इन बाजारों को किसान-बाजार लिंकेज में सुधार और प्रतिस्पर्धा के उद्देश्य से प्रोत्साहित किया गया है। इन बाजारों की कार्यक्षमता, उनसे प्राप्त लाभ और उनके प्रबंधन और संचालन में निजी मालिकों की चुनौतियों के बारे में कोई स्वतंत्र अध्ययन उपलब्ध नहीं है। देश में लगभग 700 किसान-उपभोक्ता बाजार हैं, जहां किसान अपने उत्पादों को, मुख्य रूप से जल्दी खराब होने वाले उत्पादों को, उपभोक्ताओं को सीधे खुदरा में बेचते हैं।</p>
<p>ड्राफ्ट में कहा गया है कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राज्यों के साथ मिलकर भौगोलिक क्षेत्र, उत्पादन पैटर्न, मार्केटिंग योग्य अधिशेष, परिवहन सुविधा और अन्य लॉजिस्टिक्स को ध्यान में रखते हुए बाजार घनत्व की आवश्यकता को राज्यवार फिर से परिभाषित करेगा। किसानों और बाजार के बीच बेहतर संबंध बनाने और किसानों की पहुंच बढ़ाने के लिए, राज्यों को बड़ी संख्या में गोदामों/कोल्ड स्टोरेज को उप-बाजार यार्ड घोषित करना चाहिए। यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रारंभ में प्रत्येक राजस्व मंडल में कम से कम एक निजी बाजार हो, जिसे बाद में प्रत्येक जिले में बढ़ाया जाना चाहिए। &nbsp;</p>
<p><strong>कृषि मूल्य श्रृंखला और मार्केटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर&nbsp;</strong><br />ड्राफ्ट में कहा गया है कि बदलते मार्केटिंग परिदृश्य में शुरू से अंत तक मूल्य श्रृंखला केंद्रित इन्फ्रास्ट्रक्चर (VCCI) और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जाए। मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर को केवल उन्नत करने या इसे अलग-थलग विकसित करने की बजाय आवश्यकता आधारित VCCI का निर्माण करना आवश्यक है, ताकि प्रभावी और पारदर्शी मार्केटिंग का लाभ किसानों को मिल सके। मूल्य श्रृंखला केंद्रित इन्फ्रास्ट्रक्चर आपूर्ति श्रृंखलाओं के एकीकरण और लेनदेन लागत को कम करने में सहायक होगा। &nbsp;</p>
<p>फसल कटाई के बाद का इन्फ्रास्ट्रक्चर वर्तमान में अपर्याप्त है और यह मार्केटिंग अक्षमताओं का कारण बनता है। इसे सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। गांव/ग्राम पंचायत स्तर पर या छोटे शहरों में, फसल कटाई के बाद मार्केटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे संग्रह केंद्र, खरीद केंद्र, प्राथमिक और सेकंडरी मूल्य संवर्धन सुविधाएं, सुखाने की सुविधाएं, पैकेजिंग सुविधाएं, गुणवत्ता परीक्षण केंद्र, छोटे भंडारण केंद्र आदि विकसित किए जाने चाहिए। &nbsp;</p>
<p>जिला या क्षेत्रीय स्तर पर, प्रसंस्करण और निर्यातोन्मुख प्रिसीजन इन्फ्रास्ट्रक्चर/सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए। अधिकांश एपीएमसी बाजारों में इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं अपर्याप्त हैं। राज्यों को निजी क्षेत्र की भागीदारी और अधिमानतः पीपीपी मोड में इस अंतर को पाटने पर विचार करना चाहिए। ब्लॉकचेन तकनीक, एआई/एमएल आदि का उपयोग करके खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला प्रक्रियाओं को खेत से भंडारण और खाद्य प्रसंस्करण केंद्रों तक डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण इसमें मददगार हो सकता है। &nbsp;</p>
<p><strong>एपीएमसी से बाहर भी ई-नाम का विस्तार &nbsp;</strong><br />मसौदा रिपोर्ट के अनुसार एपीएमसी बाजारों से परे सार्वजनिक और निजी संग्रह/खरीद केंद्रों, असेंबली बाजारों, गोदामों/कोल्ड स्टोरेज आदि को उप-बाजार यार्ड घोषित करके ई-नाम को विस्तार दिया जा सकता है। इसके लिए ई-नाम का एक उन्नत संस्करण विकसित करने की आवश्यकता होगी। मार्च 2000 से लागू मार्केट इंफॉर्मेशन सिस्टम (MIS) को उन्नत किया जाना चाहिए। यह उन्नत पोर्टल मार्केट-स्टैक का हिस्सा हो सकता है, जो वास्तविक समय में बुवाई और मूल्य संबंधी जानकारी प्रदान करेगा। &nbsp;</p>
<p>राज्य किसानों की जनसांख्यिकी, उत्पादन पैटर्न आदि के आधार पर जिला या किसी अन्य इकाई स्तर पर भौतिक उत्पादन और वैल्यू चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर में कमी पर विचार कर सकते हैं। इसके लिए राज्य जिला कलेक्टर/मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में इन्फ्रास्ट्रक्चर गैप विश्लेषण समिति (IGAC) का गठन कर सकते हैं।</p>
<p><strong>एपीएमसी को अधिक पेशेवर बनाना&nbsp;</strong><br />2023-24 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत के संगठित मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक है। यह संगठित क्षेत्र में कुल रोजगार का 12 प्रतिशत देता है। 2022-23 में प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात सहित कृषि-खाद्य निर्यात का मूल्य भारत के कुल निर्यात का लगभग 11.7 प्रतिशत था। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए एपीएमसी को मार्केट यार्ड में खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहिए और इसे पीपीपी मोड में लागू करना चाहिए। इसके लिए एपीएमसी में स्थान आरक्षित किया जा सकता है और मिलेट जैसे उत्पादों की मूल्य श्रृंखला आधारित मार्केटिंग के लिए सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। &nbsp;</p>
<p><strong>जैविक खेती के उत्पादों की मार्केटिंग&nbsp;</strong><br />रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशी बाजार में भी पर्याप्त संभावनाएं हैं। हालांकि, जैविक और प्राकृतिक खेती के किसानों को जैविक उत्पाद या प्राकृतिक खेती के उत्पाद के प्रमाणन की समस्या के साथ उत्पादों के मार्केटिंग की समस्या से भी जूझना पड़ता है। उपभोक्ता क्वालिटी उत्पाद खरीदने के इच्छुक हैं, लेकिन उनकी उपलब्धता और जैविक होने की विश्वसनीयता इसमें बाधक है। इसलिए जैविक और प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए बाजार विकसित करने और उसे बढ़ावा देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। एपीएमसी समर्पित बाजार और इन्फ्रास्ट्रक्चर/सुविधाएं प्रदान करके इसमें भूमिका निभा सकते हैं। राज्यों को जैविक और प्राकृतिक खेती के उत्पादों की मार्केटिंग के लिए संभावित एपीएमसी बाजारों में विशेष समर्पित स्थान निर्धारित करने का प्रयास करना चाहिए।</p>
<p><strong>एपीएमसी में सुधारों के सुझाव &nbsp;</strong><br />एपीएमसी सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल में गुणवत्ता जांच, सफाई, छंटाई, ग्रेडिंग, मूल्य संवर्धन/प्रसंस्करण जैसी सेवाएं प्रदान करने के लिए मार्केट यार्ड में बुनियादी ढांचा विकसित करने का प्रयास कर सकते हैं। राज्य कुछ ऐसे एपीएमसी की पहचान कर सकते हैं, जिनमें निर्यात बाजार बनने की क्षमता हो। वहां उत्पाद को निर्यात योग्य बनाने के लिए आवश्यक सभी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए।</p>
<p><strong>प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और कुशल मार्केटिंग तंत्र</strong><br />रिपोर्ट में एक ऐसे इकोसिस्टम की बात कही गई है जिसमें किसानों को अपने उत्पाद किसी भी मार्केटिंग चैनल के माध्यम से और सबसे अधिक कीमत देने वाले खरीदार को बेचने की स्वतंत्रता हो। कृषि मार्केटिंग में डिजिटल तकनीक का उपयोग पारदर्शिता बढ़ाने और मूल्य निर्धारण में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है। &nbsp;</p>
<p>हाल ही में कृषि और किसान कल्याण विभाग ने राज्यों के साथ मिलकर सुधार के 12 क्षेत्रों की पहचान की है। इनमें निजी थोक बाजार स्थापित करने की अनुमति देना; प्रोसेसर, निर्यातकों, संगठित खुदरा विक्रेताओं, थोक खरीदारों को खेत से सीधा खरीदने की अनुमति देना; गोदामों/साइलो/कोल्ड स्टोरेज को डीम्ड मार्केट यार्ड के रूप में घोषित करना; निजी ई-ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म स्थापित करने और संचालित करने की अनुमति देना, राज्यभर में एक बार बाजार शुल्क लगाना, पूरे राज्य में मान्य एकल व्यापार लाइसेंस, बाजार शुल्क और कमीशन शुल्क का पुनर्गठन; अन्य राज्यों के व्यापार लाइसेंस को मान्यता देना और प्रसंस्करण इकाइयों में किसानों/एफपीओ द्वारा सीधी बिक्री पर बाजार शुल्क से छूट जैसे प्रावधान शामिल हैं। &nbsp;</p>
<p>जीएसटी पर राज्यों के वित्त मंत्रियों की समिति की तर्ज पर केंद्रीय कृषि मंत्रालय और राज्य सरकारें मिलकर राज्य कृषि मंत्रियों की एक अधिकार प्राप्त समिति का गठन कर सकती हैं। इसका उद्देश्य राज्यों को एपीएमसी अधिनियम में सुधार को अपनाने, नियमों को अधिसूचित करने और एकल लाइसेंसिंग/पंजीकरण प्रणाली और एकल शुल्क के माध्यम से कृषि उत्पादों के लिए एकीकृत राष्ट्रीय बाजार की ओर बढ़ने के लिए उनके बीच सहमति बनाना होगा।</p>
<p><strong>लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन का डिजिटलीकरण &nbsp;</strong><br />ड्राफ्ट में कहा गया है कि डिजिटलीकरण से न केवल लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन जारी करने की प्रक्रिया को आसान और समय बचाने वाला बनाया जा सकता है, बल्कि यह पारदर्शी भी होगा। निजी बाजारों की स्थापना, ई-ट्रेडिंग प्लेटफार्म, व्यापारियों, कमीशन एजेंटों और बाजार से जुड़े अन्य के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण और ऑटोमेशन किया जाना चाहिए। मार्केट-स्टैक या यूनिफाइड नेशनल मार्केट पोर्टल (UNMP) के नाम से एक केंद्रीय मॉडल पर डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) विकसित करने का प्रयास किया जाएगा, जो एग्री-स्टैक की तरह होगा।&nbsp;</p>
<p><strong>जोखिम कम करने के उपाय</strong><br />जमीन की जोत बहुत छोटी होने, बाजार की अनुपलब्धता और कीमतों में अनिश्चितता को देखते हुए किसानों को सहकारी समिति, एफपीओ या स्वयं सहायता समूह जैसे किसी न किसी किसान संगठन के तहत लाया जाएगा। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में कांट्रैक्ट फार्मिंग रजिस्ट्री विकसित करने का प्रयास किया जाएगा, जो मार्केट स्टैक का हिस्सा हो सकता है। कांट्रैक्ट फार्मिंग रजिस्ट्री, कांट्रैक्ट फार्मिंग में शामिल होने के इच्छुक सभी एफपीओ, कृषि उद्योगों और उत्पादन क्लस्टर से संबंधित जानकारी का एक संग्रह होगा। राज्यों को कांट्रैक्ट खेती के उत्पादों की खरीद मंडी यार्ड के बाहर करने की अनुमति देनी चाहिए, और यदि उपज को प्रसंस्करण और निर्यात के उद्देश्य से खरीदा जाए तो बाजार शुल्क माफ कर दें। इससे इन क्षेत्रों को प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<p><strong>एफपीओ के माध्यम से बाजार लिंकेज</strong><br />किसानों को सुनिश्चित बाजार और मूल्य दिलाने में एफपीओ (कृषि उत्पादक संगठन) भी एक माध्यम हो सकते हैं। देश में 50,000 से अधिक एफपीओ हैं, जो विभिन्न संगठनों द्वारा प्रोत्साहित किए गए हैं। हालांकि इनमें ऐसे एफपीओ भी हैं जो निष्क्रिय हो चुके हैं। एफपीओ की राष्ट्रीय नीति के प्रावधान के अनुसार, राज्य सीएसीएमपी (कॉमन एग्रीबिजनेस सेंटर कम मार्केट प्लेस) या अन्य नाम से एफपीओ के परिसर को किसान-सदस्यों के उत्पादन की खरीद-फरोख्त के लिए उप-बाजार यार्ड घोषित करने पर विचार कर सकते हैं। फ्यूचर्स और ऑप्शन ट्रेडिंग को मूल्य निर्धारण और जोखिम कम करने के उपकरण के रूप में समझा जाता है। चूंकि एफपीओ किसान-सदस्यों की ओर से एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर नए ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए भाग ले सकते हैं, इसलिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय और राज्य सेबी तथा कमोडिटी एक्सचेंजों के साथ इस ट्रेड को एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर बढ़ावा देने के लिए चर्चा कर सकते हैं।</p>
<p><strong>कृषि व्यापार को सरल बनाना</strong><br />केंद्र और राज्य मिलकर कृषि व्यापार में आसानी को एक सूचकांक के रूप में विकसित कर सकते हैं। केंद्र इसे हर तीन महीने में प्रकाशित कर सकता है। इसका उद्देश्य राज्यों के बीच कृषि व्यापार को सरल बनाने की दिशा में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करना है। इस सूचकांक में विभिन्न पैरामीटर शामिल होंगे जो राज्य और देश में कृषि व्यापार करने की आसानी को परिभाषित करेंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्री मार्केटिंग पर बनी समिति ने किसानों की आय सुनिश्चित करने के लिए दिया मूल्य बीमा योजना का सुझाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विकास पर भारी महंगाई, निजी खपत बढ़ने की दर हुई धीमी, सालाना ग्रोथ घटने का भी अंदेशा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/inflation-weighs-heavily-on-growth-private-consumption-growth-slows-down-annual-growth-also-at-risk.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 30 Nov 2024 11:52:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/inflation-weighs-heavily-on-growth-private-consumption-growth-slows-down-annual-growth-also-at-risk.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>शेयर बाजार की चकाचौंध के पीछे भारत की इकोनॉमी में सबकुछ अच्छा नहीं चल रहा है। अर्थव्यवस्था उम्मीद से कहीं अधिक तेज गति से ठंडी हो रही है। खाद्य महंगाई लगातार अधिक बने रहने के कारण खास कर शहरी वर्ग गैर-जरूरी खर्चे घटा रहा है, जिसका असर डिमांड पर दिखने लगा है। मैन्युफैक्चरिंग समेत पूरे सेकंडरी सेक्टर की चाल सुस्त पड़ गई है। इसलिए हो सकता है कि अगरी मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई विकास दर के अनुमान में भी कटौती करे। विशेषज्ञ अब 2024-25 में 6.5% विकास दर का ही अनुमान लगा रहे हैं।</p>
<p>हालांकि सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन का कहना है कि 6.5% विकास दर कोई खतरे का संकेत नहीं है। दूसरी तिमाही में 5.4 प्रतिशत विकास दर पर उन्होंने कहा कि यह निराशाजनक है, लेकिन चिंताजनक नहीं।&nbsp;</p>
<p>अर्थव्यवस्था में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले सेकंडरी सेक्टर में ग्रोथ पिछले साल की दूसरी तिमाही और इस साल की पहली तिमाही, दोनों की तुलना में गिरी है। वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में सेकंडरी सेक्टर सिर्फ 3.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि पिछले साल इसी दौरान इसमें 13.7 प्रतिशत और इस साल की पहली तिमाही में 8.4 प्रतिशत की ग्रोथ रही थी।</p>
<p><strong>खपत और निवेश में पहली तिमाही से गिरावट</strong><br />जीडीपी में 56 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी निजी खपत (PFCE) की है और इसमें 6 प्रतिशत वृद्धि हुई है। यह पिछले साल की दूसरी तिमाही के 2.6 प्रतिशत से तो अधिक है, लेकिन इस वर्ष की पहली तिमाही के 7.4 प्रतिशत के मुकाबले घट गई है। यह कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों से भी पता चलता है। ज्यादातर कंपनियों, खास कर एफएमसीजी कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ कम हुई है। सरकारी खपत (GFCE) में पिछले साल की दूसरी तिमाही में 14 प्रतिशत वृद्धि हुई थी, जो इस बार 4.4 प्रतिशत रह गई है। इस वर्ष की पहली तिमाही में इसमें निगेटिव ग्रोथ रही थी।&nbsp;</p>
<p>अर्थव्यवस्था की गति धीमी पड़ने का सबसे ज्यादा असर उद्योगों पर पड़ रहा है। पूंजी निवेश (GFCF) की वृद्धि दर पिछले साल की दूसरी तिमाही में 11.6 प्रतिशत और इस साल की पहली तिमाही में 7.5 प्रतिशत थी। यह पिछली तिमाही में सिर्फ 5.4 प्रतिशत दर्ज हुई है। पहली छमाही में निवेश वृद्धि दर पिछले साल के 10.1 प्रतिशत की तुलना में सिर्फ 6.4 प्रतिशत रही है। मांग वृद्धि में सुस्ती के कारण उद्योग निवेश करने से हिचकिचा रहा है। नए निवेश के लिए संभव है कि कंपनियां अभी डिमांड ट्रेंड सुधरने का इंतजार करें।&nbsp;</p>
<p>इस बार त्योहारों का सीजन भी बहुत उत्साहजनक नहीं रहा है। निर्यात के मोर्चे पर भी स्थिति कमजोर है। पहली तिमाही में निर्यात 8.7 प्रतिशत बढ़ने के बाद दूसरी तिमाही में इसकी ग्रोथ घट कर सिर्फ 2.8 प्रतिशत रह गई है। इसलिए पूरे वित्त वर्ष की बात करें तो विशेषज्ञ मान रहे हैं कि विकास दर सरकार के पूंजी निवेश पर अधिक निर्भर करेगा।</p>
<p>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार अक्तूबर में आठ कोर सेक्टर की विकास दर 3.1 प्रतिशत रही है। यह सितंबर के 2.4 प्रतिशत और अगस्त के (-)1.6 प्रतिशत को छोड़ दें तो पिछले एक साल में सबसे कम ग्रोथ है। कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाले स्टील का उत्पादन 4.2 प्रतिशत और सीमेंट का 3.3 प्रतिशत बढ़ा है।&nbsp;</p>
<p>धीमी विकास दर और ऊंची महंगाई दर ने आरबीआई के लिए ब्याज दरें घटाने का काम और जटिल बना दिया है। महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने फरवरी 2023 से रेपो रेट नहीं बदला है। हालांकि इसके बावजूद खुदरा महंगाई 4 प्रतिशत की निर्धारित सीमा से बार-बार बाहर जा रही है। अक्टूबर में यह 6.2 प्रतिशत थी जो 14 महीने का सबसे ऊंचा स्तर था।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ विकास पर भारी महंगाई, निजी खपत बढ़ने की दर हुई धीमी, सालाना ग्रोथ घटने का भी अंदेशा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि के सहारे 5% के पार गई विकास दर, मैन्युफैक्चरिंग&amp;#45;खनन के खराब प्रदर्शन से जीडीपी ग्रोथ 7 तिमाही में सबसे कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/gdp-growth-surpasses-5-percent-driven-by-agriculture-manufacturing-and-mining-drag-it-to-the-slowest-in-7-quarters.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 30 Nov 2024 10:18:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/gdp-growth-surpasses-5-percent-driven-by-agriculture-manufacturing-and-mining-drag-it-to-the-slowest-in-7-quarters.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मौजूदा वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर घट कर 5.4 प्रतिशत रह गई है। यह पिछली सात तिमाही में सबसे कम विकास दर है। इससे पहले अक्टूबर-दिसंबर 2022 की तिमाही में विकास दर इससे कम, 4.3 प्रतिशत थी।&nbsp;वित्त वर्ष 2023-24 की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 8.1 प्रतिशत थी। विकास दर में यह गिरावट मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग और खनन क्षेत्र के कारण है। मैन्युफैक्चरिंग में पिछली तिमाही सिर्फ 2.2 प्रतिशत वृद्धि हुई जबकि खनन में 0.1 प्रतिशत की गिरावट आई है। विकास दर को 5 प्रतिशत से ऊपर ले जाने में कृषि का बड़ा योगदान है, जिसमें पहली तिमाही के 2 प्रतिशत की तुलना में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले छह महीने में कृषि क्षेत्र की विकास दर 2.7 प्रतिशत रही है।</p>
<p>सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार दूसरी तिमाही में स्थिर मूल्यों पर कृषि क्षेत्र का ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) 4.56 लाख करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल की दूसरी तिमाही के 4.40 लाख करोड़ से तो अधिक है, लेकिन इसी वर्ष की पहली तिमाही के 5.32 लाख करोड़ रुपये से कम है। वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में कृषि विकास दर 3.7 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 1.7 प्रतिशत थी। पिछली तिमाही में सभी क्षेत्रों का जीवीए 40.57 लाख करोड़ रुपये था जिसमें कृषि का हिस्सा 11.24 प्रतिशत है। चावल उत्पादन में पिछले साल की दूसरी तिमाही में 0.04 प्रतिशत की गिरावट आई थी, इस बार 0.9 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। कृषि और खनन मिलाकर पूरे प्राइमरी सेक्टर की ग्रोथ 2.9 प्रतिशत की तुलना में 3 प्रतिशत दर्ज की गई है।</p>
<p>इकोनॉमी के दूसरे सेक्टर की तुलना करें तो पूरे सेकंडरी सेक्टर की ग्रोथ 13.7 प्रतिशत से घट कर 3.9 प्रतिशत पर आ गई है। 2023-24 की दूसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग में 14.3 प्रतिशत ग्रोथ थी, जो इस बार घट कर 2.2 प्रतिशत पर आ गई। इसी तरह बिजली-गैस उत्पादन में वृद्धि 10.5 प्रतिशत से कम हो कर 3.3 प्रतिशत रह गई। कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ग्रोथ भी 13.6 प्रतिशत के मुकाबले 7.7 प्रतिशत है।&nbsp;</p>
<p>टर्शियरी सेक्टर ने जरूर थोड़ा बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसमें पिछले साल के 6 प्रतिशत की तुलना में इस वर्ष 7.1 प्रतिशत वृद्धि हुई है। इसमें ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट जैसे सेगमेंट की विकास दर 4.5 प्रतिशत की तुलना में 6 प्रतिशत रही है। फाइनेंशियल और रियल एस्टेट की वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत की तुलना में 6.7 प्रतिशत और रक्षा तथा जन प्रशासन के सेगमेंट में 7.7 प्रतिशत के मुकाबले 9.2 प्रतिशत रही है।&nbsp;</p>
<p>छमाही आधार पर यानी अप्रैल-सितंबर के दौरान जीवीए इस वर्ष 6.2 प्रतिशत और जीडीपी 6 बढ़ी है। जीवीए में टैक्स को जोड़ने पर जीडीपी बनता है। स्थिर मूल्यों पर जीडीपी 2023-24 की पहली छमाही में 82.77 लाख करोड़ रुपये थी, जिसके इस वर्ष 87.74 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। पहली छमाही में जीवीए 81.30 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो 2023-24 की पहली छमाही में यह 76.54 लाख करोड़ रुपये था।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_674a98ef88039.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि के सहारे 5% के पार गई विकास दर, मैन्युफैक्चरिंग-खनन के खराब प्रदर्शन से जीडीपी ग्रोथ 7 तिमाही में सबसे कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार एमएसपी से कम रेट पर खुले बाजार में गेहूं बेचने को तैयार, महंगाई रोकने की कवायद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/central-government-ready-to-sell-wheat-in-open-market-at-lower-rate-than-msp-efforts-to-stop-inflation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 29 Nov 2024 17:43:09 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/central-government-ready-to-sell-wheat-in-open-market-at-lower-rate-than-msp-efforts-to-stop-inflation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने गेहूं की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के स्टॉक से 25 लाख टन गेहूं खुले बाजार में उतारने का निर्णय लिया है जो एमएसपी से कम भाव पर बेचा जाएगा। सरकार ओपन मार्केट सेल स्कीम (ओएमएसएस) के तहत थोक खरीदारों जैसे आटा मिल, प्रोसेसर्स और बिस्कुट बनाने वालों को 31 मार्च, 2025 तक 25 लाख टन गेहूं ई-ऑक्शन के जरिए बेचेगी।&nbsp;</p>
<p>इस समय बाजार में गेहूं की कीमतें 3200 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रही हैं। खुले बाजार में गेहूं की बिक्री के लिए सरकार ने अच्छे और औसत क्वालिटी के गेहूं का आरक्षित मूल्य 2325 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जबकि गेहूं का एमएसपी रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 के लिए 2425 रुपये प्रति क्विंटल है। रबी मार्केटिंग सीजन 2024-25 में गेहूं का एमएसपी 2275 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी सरकार आगामी सीजन के लिए तय गेहूं के एमएसपी से कम रेट पर गेहूं बेचने को तैयार है। सरकार के इस कदम से गेहूं की कीमतों के गिरावट का अनुमान है। क्योंकि थोक खरीदारों को बाजार भाव से काफी कम कीमतों पर गेहूं मिल जाएगा।&nbsp;</p>
<p>ऐसे समय जब किसान एमएसपी की कानूनी गारंटी मांग रहे हैं, तब सरकार महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर एमएसपी से कम भाव पर गेहूं की नीलामी करने जा रही है। पिछले साल (2023-24) में केंद्र सरकार ने महंगाई रोकने के लिए करीब 100 लाख टन गेहूं एफसीआई के स्टॉक से खुले बाजार में उतारा था। &nbsp; &nbsp;</p>
<p>लगातार दो साल से देश में गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन के सरकारी आंकड़ों के बावजूद गेहूं की बढ़ती कीमतें सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। इसलिए सरकार को खुले बाजार में 25 लाख टन गेहूं बेचने का निर्णय लेना पड़ा। यह स्थिति तब है जबकि साल 2023-24 में गेहूं के रिकॉर्ड 11.32 करोड़ टन उत्पादन के आंकड़े सरकार ने जारी किए हैं। इसके बावजूद देश में गेहूं की महंगाई बेकाबू क्यों है, यह बड़ा सवाल है। क्योंकि देश से गेहूं का निर्यात बंद है और स्टॉक लिमिट भी लागू है।&nbsp;</p>
<p>थोक खरीदार गेहूं की ऊंची कीमतों को देखते हुए सरकार से खुले बाजार में गेहूं उतारने की मांग कर रहे थे। बाजार में अतिरिक्त गेहूं आने से गेहूं की कीमतों को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, गेहूं उत्पादन के आंकड़ों और वास्तविक उत्पादन में अंतर के चलते आने वाले महीनों में गेहूं आयात की नौबत भी आ सकती है।&nbsp;</p>
<p>रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन के आंकड़ों पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि रबी मार्केटिंग सीजन 2024-25 में 266 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई जो इससे पिछले सीजन में हुई 262 लाख टन की खरीद से थोड़ी ही अधिक है। इस साल मौसम नवंबर में कम ठंड पड़ी है जिसका असर गेहूं की बुवाई और उत्पादन पर पड़ सकता है। इस स्थिति को देखते हुए भी सरकार को गेहूं आयात के विकल्प पर विचार करना पड़ सकता है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार एमएसपी से कम रेट पर खुले बाजार में गेहूं बेचने को तैयार, महंगाई रोकने की कवायद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को कैबिनेट की मंजूरी, जानिए किसानों तक कैसे पहुंचेगी योजना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/national-natural-farming-mission-approved-know-how-the-scheme-will-reach-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 26 Nov 2024 09:53:06 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/national-natural-farming-mission-approved-know-how-the-scheme-will-reach-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) शुरू करने को मंजूरी दे दी है। इसके जरिए देश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।</p>
<p>राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के लिए 15वें वित्त आयोग (2025-26) तक कुल 2481 करोड़ रुपये (भारत सरकार का हिस्सा- 1584 करोड़ रुपये; राज्य का हिस्सा- 897 करोड़ रुपये) का खर्च प्रस्तावित है। अगले दो वर्षों में, प्राकृतिक खेती मिशन को ग्राम पंचायतों के 15,000 कलस्टर में लागू किया जाएगा तथा एक करोड़ किसानों तक पहुंचाया जाएगा। करीब 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती शुरू करने की योजना है। इसके लिए 10 हजार जैव-इनपुट संसाधन केंद्र (बीआरसी) स्थापित किए जाएंगे।</p>
<p>प्राकृतिक खेती से किसानों को खेती की लागत कम करने और बाहर से खरीदे जाने वाले इनुट पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही मिट्टी की उर्वरता को फिर से जीवंत करने तथा जलवायु जोखिमों से संभलने का सामर्थ्य पैदा करने में मदद मिलेगी।</p>
<p><strong>प्राकृतिक खेती से कैसे जुड़ेंगे किसान</strong><strong>?</strong></p>
<p>राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत, कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके), कृषि विश्वविद्यालयों (एयू) और किसानों के खेतों में लगभग 2000 प्राकृतिक खेती मॉडल प्रदर्शन फार्म स्थापित किए जाएंगे। इच्छुक किसानों को उनके गांवों के पास केवीके, कृषि विश्वविद्यालयों और प्राकृतिक खेती मॉडल प्रदर्शन फार्म में प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षित किसान अपने पशुओं का उपयोग करके या बीआरसी से खरीद कर जीवामृत, बीजामृत आदि जैसे कृषि संबंधी संसाधन तैयार करेंगे। प्राकृतिक खेती को लेकर जागरूकता पैदा करने और इच्छुक किसानों की मदद करने के लिए 30 हजार कृषि सखियों/सीआरपी को तैनात किया जाएगा।</p>
<p>किसानों को एक आसान सरल प्रमाणन प्रणाली और समर्पित सामान्य ब्रांडिंग प्रदान की जाएगी ताकि उन्हें अपने प्राकृतिक कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंच प्रदान की जा सके। एनएमएनएफ कार्यान्वयन की वास्तविक समय की जियो-टैग और संदर्भित निगरानी एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जाएगी।</p>
<p><strong>प्राकृतिक खेती की खूबियां&nbsp;</strong></p>
<p>पारंपरिक ज्ञान पर आधारित, रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती (एनएफ) में स्थानीय पशुधन एकीकृत खेती के तरीके और विविध फसल प्रणाली शामिल हैं। प्राकृतिक खेती स्थानीय ज्ञान, स्थान विशिष्ट प्रौद्योगिकियों पर आधारित स्थानीय कृषि-पारिस्थितिकी सिद्धांतों का पालन करती है और स्थानीय कृषि-पारिस्थितिकी के अनुसार विकसित होती है।</p>
<p>प्राकृतिक खेती स्वस्थ मृदा इकोसिस्टम का निर्माण और रखरखाव करेगी, जैव विविधता को बढ़ावा देगी। प्राकृतिक खेती के माध्यम से मिट्टी में कार्बन की मात्रा और जल उपयोग दक्षता में सुधार के माध्यम से, मिट्टी के सूक्ष्मजीवों और एनएफ में जैव विविधता में वृद्धि होती है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को कैबिनेट की मंजूरी, जानिए किसानों तक कैसे पहुंचेगी योजना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वित्त वर्ष 2024&amp;#45;25 की दूसरी तिमाही में कृषि जीवीए वृद्धि 3.5 फीसदी रहने का अनुमान: इक्रा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agricultural-gva-growth-estimated-at-3.5-percent-in-second-quarter-of-current-fiscal-says-icra-report.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 20 Nov 2024 13:22:24 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agricultural-gva-growth-estimated-at-3.5-percent-in-second-quarter-of-current-fiscal-says-icra-report.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि और सहयोगी क्षेत्र के लिए चालू वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में ग्रास वैल्यू एडेड (जीवीए) की वृद्धि दर 3.5 फीसदी रहने का अनुमान है। पहली तिमाही में यह दो फीसदी रही थी। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) की रिपोर्ट के अनुसार जीवीए की वृद्धि दर में यह सुधार खरीफ बुवाई में अनुकूल रुझानों और खरीफ खाद्यान्न उत्पादन में अनुमानित 5.7 फीसदी की वृद्धि के कारण होगा। हालांकि, कृषि क्षेत्र के इस प्रदर्शन में सुधार के बावजूद, भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है जो इसकी पहली तिमाही में 6.7 फीसदी रही थी। वहीं दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था की जीवीए वृद्धि दर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान जो पहली तिमाही में 6.8 फीसदी रही थी।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, जीडीपी और जीवीए वृद्धि दर में यह गिरावट मुख्य रूप से कमजोर औद्योगिक प्रदर्शन के कारण देखने को मिलेगी। औद्योगिक जीवीए वृद्धि दर वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में पहली तिमाही के 8.3 प्रतिशत से घटकर 5.5 फीसदी पर रहने का अनुमान है। इसके विपरीत, सर्विस सेक्टर में मांग में सुधार के कारण जीवीए वृद्धि पहली तिमाही के 7.2 फीसदी से बढ़कर 7.8 प्रतिशत पर रहने की संभावना है।</p>
<p>इक्रा की चीफ इकोनॉमिस्ट, हेड-रिसर्च एंड आउटरीच, अदिति नायर ने कहा, &ldquo;वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में संसदीय चुनावों के बाद पूंजीगत व्यय में वृद्धि और प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई में सकारात्मक रुझान देखे गए। हालांकि, भारी बारिश के कारण कई क्षेत्रों को कठिनाई का सामना करना पड़ा, जिससे खनन गतिविधि, बिजली की मांग, खुदरा बिक्री प्रभावित हुई और निर्यात में कमी आई। इसके अलावा, इस तिमाही में विभिन्न क्षेत्रों में कंपनियों के मार्जिन में कमी आई है। नतीजतन, वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में भारत के जीवीए और जीडीपी वृद्धि में मामूली गिरावट का अनुमान है, जो क्रमशः 6.6 प्रतिशत और 6.5 फीसदी रह सकती है।&rdquo;</p>
<p>नायर ने कहा, "अच्छे मानसून का फायदा आगे भी मिलेगा, और खरीफ उत्पादन में वृद्धि और जलाशयों में पानी के बेहतर स्तर से ग्रामीण अर्थव्यवस्था के माहौल में सुधार होने की संभावना है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में कृषि जीवीए वृद्धि 3.5 फीसदी रहने का अनुमान: इक्रा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[झारखंड में पिछले चुनाव से अधिक मतदान, महाराष्ट्र में 58.22 फीसदी हुई वोटिंग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/voting-for-assembly-elections-in-maharashtra-jharkhand-and-by-elections-in-kerala-punjab-up-and-uttarakhand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 20 Nov 2024 11:15:47 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/voting-for-assembly-elections-in-maharashtra-jharkhand-and-by-elections-in-kerala-punjab-up-and-uttarakhand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए बुधवार शाम 6 बजे मतदान खत्य हो गया। चुनाव आयोग के अनुसार, महाराष्ट्र में 288 विधानसभा सीटों पर शाम 5 बजे तक 58.52 फीसदी वोटिंग हुई। 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां <span>61.74 फीसदी मतदान हुआ था। </span>झारखंड चुनाव का यह दूसरा चरण था, जिसमें शाम 5 बजे तक 67.70 फीसदी मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया।&nbsp;इसके साथ ही केरल, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की 15 विधानसभा सीटों और महाराष्ट्र की एक लोकसभा सीट पर उपचुनाव के भी बुधवार को वोटिंग हुई। सभी राज्यों में हुए चुनावों के नतीजे 23 नवंबर को एक साथ घोषित किए जाएंगे।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>झारखंड में दूसरे चरणों में हुई वोटिंग&nbsp; &nbsp;</strong></p>
<p>झारखंड में कुल 81 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 38 सीटों पर बुधवार को मतदान हुआ। पहले चरण में 43 विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को वोटिंग हुई थी, जिसमें 66 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ था जबकि दूसरे और अंतिम चरण में यहां 67.70 फीसदी मतदान हुआ। 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां 67.04 फीसदी मतदान हुआ था।&nbsp;</p>
<p><strong>5 राज्यों की 15 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव&nbsp;</strong></p>
<p>महाराष्ट्र और झारखंड में हो रहे विधानसभा चुनाव के अलावा, विभिन्न राज्यों की 15 विधानसभा सीटों और एक लोकसभा सीट के लिए भी बुधवार को वोटिंग हुई। चुनाव आयोग के अनुसार, महाराष्ट्र की नांदेड़ लोकसभा सीट पर 53.78 फीसदी मतदान हुआ। केरल की पलक्कड़ विधानसभा सीट पर 62.25 फीसदी, उत्तराखंड की केदारनाथ विधानसभा सीट पर 57.64 फीसदी, पंजाब की डेरा बाबा नानक सीट पर 59.80 फीसदी, चब्बेवाल सीट पर 48.01 फीसदी, गिद्दड़बाहा सीट पर 78.10 फीसदी और बरनाला विधानसभा सीट पर 52.70 फीसदी मतदान हुआ।</p>
<p>उत्तर प्रदेश की मीरापुर विधानसभा सीट पर 57.20 फीसदी, कुंदरकी सीट पर 57.32 फीसदी, गाज़ियाबाद सीट पर 33.30 फीसदी, खैर सीट पर 46.35 फीसदी, करहल सीट पर 53.92 फीसदी, सीसामऊ सीट पर 49.03 फीसदी, फूलपुर सीट पर 43.43 फीसदी, कटेहरी सीटन 56.69 फीसदी और मझवां विधानसभा सीट पर 50.41 फीसदी वोटिंग हुई।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_673d77791217b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ झारखंड में पिछले चुनाव से अधिक मतदान, महाराष्ट्र में 58.22 फीसदी हुई वोटिंग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने पर जोर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/emphasis-on-increasing-soil-fertility-to-tackle-food-security-and-climate-change.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 19 Nov 2024 17:09:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/emphasis-on-increasing-soil-fertility-to-tackle-food-security-and-climate-change.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के बीच मिट्टी के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से मंगलवार को दिल्ली में ग्लोबल सॉयल कॉन्फ्रेंस 2024 का शुभारंभ हुआ। 19 से 22 नवंबर तक होने वाले इन सम्मेलन में मिट्टी के स्वास्थ्य और सतत विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा करने के लिए दुनिया भर से आए 2 हजार वैज्ञानिक, नीति निर्माता, किसान, पर्यावरण विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षक और छात्र भाग ले रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>यह सम्मेलन इंडियन सोसाइटी ऑफ सॉयल साइंस, नई दिल्ली द्वारा इंटरनेशनल सॉयल&nbsp;साइंस यूनियन और अन्य राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, जलवायु परिवर्तन से निपटने, भूमि क्षरण रोकने और जैव विविधता संरक्षण जैसे मुद्दों पर चर्चा करना है। साथ ही, यह खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ संसाधन प्रबंधन में नई तकनीकों के विकास को भी प्रोत्साहित करेगा।</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि मृदा स्वास्थ्य आज एक गंभीर चिंता का विषय है। कैमिकल फर्टिलाइजर का बढ़ता उपयोग व बढ़ती निर्भरता, प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन और अस्थिर मौसम ने मिट्टी पर दबाव डाला है। आज भारत की मिट्टी बड़े स्वास्थ्य संकट का सामना कर रही है।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कई अध्ययनों के अनुसार देश की 30 प्रतिशत माटी खराब हो चुकी है। मिट्टी में जैविक कार्बन की कमी ने उसकी उर्वरकता को कमजोर किया है। यह चुनौतियां न केवल उत्पादन को प्रभावित करती हैं बल्कि आने वाले समय में किसानों की आजीविका और खाद्य संकट भी पैदा करेंगी, इसलिए यह जरूरी है कि इस पर गंभीरता से इस पर विचार किया जाए।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x_673c86f598e24.jpg" alt="" width="684" height="435" /></p>
<p>नीति आयोग के सदस्य डॉ. रमेश चंद ने मिट्टी की खराब होती गुणवत्ता से निपटने के लिए नवाचार, शोध और सहयोगात्मक नीतियां अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए उत्पादकता और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। &nbsp;</p>
<p>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि मिट्टी की सेहत को बनाए रखने के लिए हितधारकों की क्षमता बढ़ाने, जन जागरूकता फैलाने और ऐसी समावेशी नीतियों को बढ़ावा देने की जरूरत है जो मिट्टी को सतत विकास का आधार बनाएं। &nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_673c942f0f64b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने पर जोर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_673c942f0f64b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अक्टूबर में चावल का निर्यात 85 फीसदी बढ़कर 1.05 अरब डॉलर रहा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rice-exports-increased-by-85-percent-to-1.05-billion-dollar-in-october.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 19 Nov 2024 14:07:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rice-exports-increased-by-85-percent-to-1.05-billion-dollar-in-october.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार द्वारा चावल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाए जाने के बाद अक्टूबर में चावल का निर्यात 85.79 फीसदी बढ़ गया। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2024 में देश से 1.05 अरब डॉलर का चावल निर्यात हुआ जबकि पिछले साल इसी महीने में चावल निर्यात 0.56 अरब डॉलर रहा था। एपीडा के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के पहले 7 महीनों (अप्रैल से अक्टूबर) के दौरान चावल निर्यात 5.2 फीसदी बढ़कर 6.17 अरब डॉलर तक पहुंच गया जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में चावल का निर्यात 5.86 अरब डॉलर रहा था।</p>
<p>राइस एक्सपोर्टर्स की मानें तो केंद्र सरकार द्वारा चावल के निर्यात पर लगी सभी पाबंदियों के हटाए जाने के बाद चावल निर्यात तेजी से बढ़ा है। राइस एक्सपोर्टर्स को उम्मीद है की आने वाले महीनों में चावल निर्यात में और तेजी देखने को मिलेगा।&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार ने सितंबर और अक्टूबर में चावल निर्यात पर लगी सभी पाबंदियां हटा ली थी। सबसे पहले सरकार ने सितंबर में बासमती चावल के निर्यात पर लागू न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) को समाप्त किया। इसके बाद गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर लगी रोक हटाकर 490 डॉलर प्रति टन का एमईपी लागू किया, जिसे अक्टूबर में पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया। साथ ही, सरकार ने सेला चावल और ब्राउन राइस पर निर्यात शुल्क भी खत्म कर दिया। पहले 27 सितंबर को सरकार ने निर्यात शुल्क 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया था, लेकिन अक्टूबर में धान की कीमतों में गिरावट को देखते हुए सरकार ने इसे भी पूरी तरह समाप्त कर दिया। &nbsp;</p>
<p><span>हरियाणा</span>&nbsp;राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष <strong>सुशील गोयल</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> बताया कि जब तक चावल निर्यात पर केंद्र सरकार की पाबंदियां लागू थी तब तक निर्यात पर असर पड़ रहा था लेकिन पाबंदियां हटते ही चावल निर्यात में तेजी आई है। उन्होंने कहा कि चावल निर्यात में बासमती चावल का एक बड़ा हिस्सा है। भले ही चावल निर्यात में इजाफा हुआ हो लेकिन बासमती चावल की डिमांड अभी भी पिछले साल के मुकाबले कम है। विदेशी व्यापारियों के पास अभी भी पिछले साल का स्टॉक बचा हुआ है, जिस वजह से डिमांड कम है। हालांकि, आने वाले महीनों में डिमांड बढ़ने की उम्मीद है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अक्टूबर में चावल का निर्यात 85 फीसदी बढ़कर 1.05 अरब डॉलर रहा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राष्ट्रीय जीएम नीति बनाने में किसान की राय को किया जाए शामिलः भारतीय किसान संघ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/include-farmers-opinions-in-formulating-the-national-gm-policy-says-bharatiya-kisan-sangh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 17 Nov 2024 15:46:44 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/include-farmers-opinions-in-formulating-the-national-gm-policy-says-bharatiya-kisan-sangh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा है कि जीएम फसलों के मामले में सरकार ने अभी तक किसान संगठनों से कोई संपर्क नहीं किया है। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में आदेश दिया था कि केंद्र सरकार सभी हितधारकों से बात करते हुए राष्ट्रीय जीएम नीति बनाए और इस कार्य को चार माह में पूर्ण करने की सीमा भी निर्धारित की थी। लेकिन अभी तक केंद्र सरकार या फिर इसके लिए बनी समिति ने किसान या किसान संगठनों से अभिमत लेने कोई संपर्क नहीं किया है, ऐसे में समिति की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में हैं। मिश्र ने कहा कि किसान मुख्य हितधारक हैं इसलिए उनकी राय को राष्ट्रीय जीएम नीति निर्माण में प्रमुख रूप से शामिल किया जाए।</p>
<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ राष्ट्रीय जीएम नीति को लेकर देशव्यापी जनजागरण आंदोलन के तहत देश के सभी सांसदों, लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के सभापति के नाम 600 से अधिक जिलों में ज्ञापन सौंप रहा है।</p>
<p>किसान संघ की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि भारत में जीएम फसलों की आवश्यकता नहीं है। रासायनिक खेती व जहरीला जीएम कृषि, किसान व पर्यावरण के लिए असुरक्षित हैं। जीएम फसलें जैव विविधता को नष्ट करती हैं और ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाती हैं। बीटी कपास इसका उदाहरण हैं जिसके फेल होने से किसानों को हुए भारी नुकसान के कारण उन्हें आत्महत्या तक करनी पड़ी थी। भारत को कम यंत्रीकरण, रोजगार सृजन क्षमता वाली कृषि चाहिए, न कि जीएम खेती। अनेक देशों में इस पर प्रतिबंध हैं।&nbsp;</p>
<p>लगभग बीस साल से चल रही सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने 23 जुलाई 2024 को अपने आदेश में कहा कि केंद्र सरकार सभी हितधारक जैसे किसान, कृषि, कृषि वैज्ञानिकों, राज्य सरकारों, किसान संगठन, उपभोक्ता संगठन आदि सभी की सलाह लेते हुए जीएम फसलों पर राष्ट्रीय जीएम नीति बनाए।&nbsp;</p>
<p>मिश्र ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तीन माह बीत जाने के बावजूद सरकार द्वारा बनाई समिति ने किसी भी हितधारक से कोई सलाह नहीं ली है। इससे हितधारक चिंतित हैं कि कहीं न कहीं पीछे के रास्ते से चोरी छिपे जीएम फसलों को अनुमति देने की तैयारी की जा रही है। हितधारकों का आरोप है कि सरकार बिना किसी सलाह व प्रभावों का अध्ययन किए बिना खाद्य व पोषण सुरक्षा के नाम पर भारत में जीएम फसलों की अनुमति देना चाहती हैं।&nbsp;</p>
<p>भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र सिंह पटेल ने बताया कि जीएम तकनीक के नफा नुकसान को लेकर देश में विस्तृत चर्चा हो, राष्ट्रीय जीएम नीति बनाने में हितधारकों की राय को शामिल किया जाए।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राष्ट्रीय जीएम नीति बनाने में किसान की राय को किया जाए शामिलः भारतीय किसान संघ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र सरकार ने सोयाबीन खरीद के लिए 15 फीसदी तक नमी की छूट दी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/the-central-government-has-approved-the-purchase-of-soybean-with-up-to-15-percent-moisture.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 16 Nov 2024 15:08:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/the-central-government-has-approved-the-purchase-of-soybean-with-up-to-15-percent-moisture.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने सोयाबीन खरीद में नमी की मात्रा के मापदंड के बदलाव किया है। सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन (2024-25) के दौरान प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत 15 फीसदी तक नमी वाले सोयाबीन की खरीद को मंजूरी दे दी है। इससे पहले केंद्र सरकार ने सोयाबीन खरीद के लिए 12 फीसदी तक नमी का मानक तय किया था, जिसे अब बढ़कर 15 फीसदी कर दिया है। <span>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि सोयाबीन में नमी की मात्रा 15 प्रतिशत होने पर भी उसकी खरीद की जाएगी।&nbsp;</span></p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी किया है। डिप्टी कमिश्नर (एमपीएस) बिनोद गिरी द्वारा जारी इस आदेश में कहा गया है कि विभाग को 15 फीसदी तक नमी की मात्रा वाले सोयाबीन की खरीद करने में कोई आपत्ति नहीं है। केंद्र सरकार सिर्फ 12 फीसदी तक नमी वाले सोयाबीन के लिए किसानों को भुगतान करेगी। सामान्य नमी सीमा से अधिक सोयाबीन की खरीद से जुड़े खर्च और नुकसान राज्य सरकारें खुद वहन करेंगी। यह छूट सिर्फ खरीफ सीजन 2024-25 के लिए दी गई है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x_6738684c9333e.jpg" alt="" width="611" height="751" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>बता दें कि महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव के बीच सोयाबीन की धीमी खरीद और नमी की मात्र के मापदंड के चलते किसानों में काफी नाराजगी है। किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद केंद्रों पर नमी की मात्रा अधिक बताकर उनसे खरीद नहीं की जा रही, जिससे उन्हें निजी व्यापारियों को 300 से 400 रुपये कम दाम पर अपनी फसल बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। <span>महाराष्ट्र की मंडियों में किसानों को सोयाबीन का औसत दाम 3800 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है जबिक केंद्र सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2024-25 के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4892 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।&nbsp;</span></p>
<p>किसानों की इस नाराजगी का असर राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव पर न पड़े इसके लिए केंद्र सरकार ने नमी की मात्र के मापदंड में बदलाव किया है। महाराष्ट्र में सोयाबीन की धीमी खरीद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में 15 अक्टूबर से सोयाबीन की सरकारी खरीद शुरू हुई थी लेकिन अब तक सिर्फ 3,887.93 टन सोयाबीन की खरीद हो पाई है जबकि राज्य सरकार ने 13.08 लाख टन सोयाबीन खरीद का लक्ष्य तय किया है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र सरकार ने सोयाबीन खरीद के लिए 15 फीसदी तक नमी की छूट दी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66e292b09fac9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तेल वर्ष 2023&amp;#45;24 में वनस्पति तेलों का आयात 3 फीसदी घटकर 162.3 लाख टन रहा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/import-of-vegetable-oils-declined-by-3-per-cent-to-162.3-lakh-tonnes-in-the-oil-year-2023-24.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 13 Nov 2024 16:53:47 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/import-of-vegetable-oils-declined-by-3-per-cent-to-162.3-lakh-tonnes-in-the-oil-year-2023-24.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>तेल वर्ष 2023-24 में वनस्पति तेलों का आयात 3 फीसदी घटकर 162.3 लाख टन रहा जो इसके पिछले तेल वर्ष 2022-23 में 167.1 लाख टन रहा था। तेल वर्ष 2023-24 में वनस्पति तेलों का आयात 4.8 लाख टन कम रहा। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x_67348c2397858.jpg" alt="" width="670" height="92" /></p>
<p>एसईए के अनुसार, तेल वर्ष 2023-24 के दौरान खाद्य तेलों के आयात में 5 लाख टन की कमी आई है। खाद्य तेलों का आयात घटकर 159.6 लाख टन रह गया, जो पिछले तेल वर्ष 2022-23 में 164.7 लाख टन था। तेल वर्ष 2023-24 में कुल 1,31,976 करोड़ रुपये का खाद्य तेल देश में आयात हुआ। खाद्य तेलों में आरबीडी पामोलीन का आयात 19.3 लाख टन रहा, क्रूड पाम ऑयल का आयत 69.70 लाख टन, क्रूड पाम कर्नेल ऑयल का आयात 1.1 लाख टन, सोयाबीन ऑयल का आयात 34.41 लाख टन और सनसीड ऑयल का आयात 35 लाख टन रहा।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x_67349ac1e83c4.jpg" alt="" width="621" height="145" /></p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="99b929ce-9e83-44b7-9587-5941b2834cfd" dir="auto" class="min-h-8 text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5" data-message-model-slug="gpt-4o">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>एसईए के अनुसार, वर्ष 2024-25 में सामान्य मानसून की वजह से तिलहन का उत्पादन 35 लाख टन तक बढ़ सकता है। बंपर फसल से घरेलू उपलब्धता बढ़ने और वर्ष 2024-25 में आयात मांग को 10 लाख टन कम करने में मदद मिलने की संभावना है। तेल वर्ष 2024-25 (नवंबर-अक्टूबर) में कुल आयात लगभग 150 लाख टन रहने का अनुमान है। हर साल देश को अपनी घरेलू मांग पूरी करने के लिए लगभग 10 लाख टन खाद्य तेल की जरूरत होती है।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p>केंद्र सरकार ने देश में तिलहन फसलों की गिरती कीमतों के मुद्देनजर सितंबर में खाद्य तेलों के आयात पर सीमा शुल्क में 20 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी थी। सरकार ने सीमा शुल्क शून्य से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया था। इस बढ़ोतरी को सितंबर और अक्टूबर में आयात में कमी की मुख्य वजह माना जा सकता है। वहीं, पिछले दो महीने में घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार,&nbsp;पिछले दो महीने में पैक्ड सोयाबीन तेल का औसत खुदरा मुल्य<span>&nbsp;</span><span>118.69 रुपये से बढ़कर</span><span> 141.18 </span>रुपये प्रति लीटर, पैक्ड सूरजमुखी तेल का औसत खुदरा मुल्य<span>&nbsp;</span><span>120.33 रुपये से बढ़कर</span> <span>147.86 </span><span>रुपये प्रति लीटर और पैक्ड पाम तेल का औसत खुदरा मुल्य 100.19 रुपसे से बढ़कर 128.94 रुपये प्रति लीटर हो गया है।&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ तेल वर्ष 2023-24 में वनस्पति तेलों का आयात 3 फीसदी घटकर 162.3 लाख टन रहा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एक किलो आलू&amp;#45;प्याज&amp;#45;टमाटर का खर्च 220 रुपये तक, लेकिन किसानों से ज्यादा ट्रेडर्स को फायदा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cost-of-one-kg-of-potato-onion-tomato-up-to-rs-220-but-traders-benefit-more-than-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 13 Nov 2024 15:37:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cost-of-one-kg-of-potato-onion-tomato-up-to-rs-220-but-traders-benefit-more-than-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय रसोई की तीन सबसे प्रमुख सब्जियों आलू, प्याज और टमाटर की महंगाई ने आम जनता का बजट बिगाड़ दिया है। सब्जियों की महंगाई के कारण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित <strong>खुदरा महंगाई दर</strong> अक्टूबर में 14 महीने के उच्चतम स्तर 6.21 फीसदी पर पहुंच गई। देश के कई इलाकों में एक किलो आलू, प्याज और टमाटर खरीदने के लिए 220 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। लेकिन इनके बढ़े दाम का फायदा किसानों से ज्यादा ट्रेडर्स की जेब में जा रहा है।</p>
<p>आलू, प्याज और टमाटर की कीमतों में उतार-चढ़ाव से किसानों और उपभोक्ताओं को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने टमैटो-्अनियन एंड पोटैटो (<strong>TOP) स्कीम</strong> शुरू की थी। लेकिन यह सरकारी कवायद न तो किसानों को कीमतों में गिरावट से बचाने में कारगर रही और न ही उपभोक्ताओं को महंगाई की मार से बचा पा रही है। आरबीआई के एक हालिया वर्किंग पेपर के अनुसार, आलू, टमाटर और प्याज की खुदरा कीमतों का लगभग एक-तिहाई ही किसानों को मिल पाता है। बड़ा हिस्सा ट्रेडर्स की जेब में जाता है।&nbsp;</p>
<p><strong>प्याज</strong> के दाम देश के कई इलाकों में 80 से 100 रुपये किलो तक पहुंच गये हैं जो पिछले पांच वर्षों में सर्वाधिक है। दिल्ली-एनसीआर में प्याज 70-80 रुपये किलो बिक रहा है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय की प्राइस मॉनिटरिंग के अनुसार, देश में प्याज का अधिकतम खुदरा भाव 100 रुपये किलो और मॉडल भाव 60 रुपये किलो है।</p>
<p>प्याज की महंगाई पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार सहकारी संस्थाओं नेफेड और एनसीसीएफ के जरिए 35 रुपये के रियायती रेट पर प्याज की बिक्री करवा रही है। लेकिन इन कोशिशों का प्याज की कीमतों पर सीमित असर है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी एक बयान में कहा गया कि प्याज की कीमतों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। कीमतों को स्थिर रखने के लिए खुदरा बाजारों में बफर स्टॉक से अधिक मात्रा में प्याज उतारने का फैसला किया गया है। सरकार ने उत्तर भारत के राज्यों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सोनीपत के कोल्ड स्टोरेज में रखे प्याज को उतारने का भी निर्णय लिया है।</p>
<p>महाराष्ट्र राज्य कांदा उत्पादक संगठन के अध्यक्ष <strong>भारत दिघोले</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि अब रबी सीजन का बहुत कम प्याज किसानों के पास बचा है। लासलगांव मंडी में किसानों को नए सीजन के प्याज (लाल प्याज) का भाव औसतन 4600 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। जबकि रबी सीजन के प्याज का औसत भाव 5700 रुपये प्रति क्विंटल है। दिघोले का मानना है कि प्याज के दाम बढ़ना किसानों के हित में है और विपक्षी दलों को इसे मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। सरकार की गलत नीतियों के चलते प्याज उत्पादक किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।&nbsp;</p>
<p>रबी प्याज की आवक लगभग समाप्त होने और अक्टूबर में बारिश से खरीफ प्याज की आवक में देरी के कारण प्याज के दाम बढ़े हैं। अगले कुछ सप्ताह में खरीफ प्याज की आवक बढ़ने के साथ प्याज की कीमतें सामान्य हो सकती हैं। इस साल खरीफ प्याज की बुवाई का क्षेत्र पिछले साल के 2.85 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.82 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इससे आने वाले दिनों में प्याज की आपूर्ति सुधरने की उम्मीद लगाई जा रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>टमाटर</strong> की बुवाई के क्षेत्र में कमी और सितंबर में हुई भारी बारिश के कारण टमाटर के रेट कई शहरों में 80-90 रुपये किलो तक पहुंच गये हैं। जबकि आलू 40-50 रुपये किलो तक बिक रहा है। <strong>क्रिसिल</strong> की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर में सब्जियों की महंगाई के कारण शाकाहारी थाली 20 फीसदी महंगी हुई। टमाटर की कीमतें पिछले साल के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा हो गई हैं, प्याज की कीमतों में 46 फीसदी और आलू की कीमतों में में 51 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर को 14 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचाने में सबसे ज्यादा योगदार सब्जियों की महंगाई का रहा है। अक्टूबर में सब्जियों की महंगाई सालाना आधार पर 42.18 फीसदी बढ़ी है। &nbsp;</p>
<p>कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में भारी बारिश से टमाटर की आवक प्रभावित हुई है। साथ ही कई इलाकों में फसल पर कीटों का प्रकोप है जिससे उत्पादन पर असर पड़ा है।&nbsp;मंडियों में कम आवक के चलते <strong>आलू</strong> के दाम भी 40-50 रुपये किलो के आसपास हैं। तीन प्रमुख सब्जियों आलू, प्याज और टमाटर की कीमतों में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार ने 2018 में TOP स्कीम शुरू की थी। बाद में इसका दायरा सभी फल व सब्जियों तक बढ़ा दिया। लेकिन आलू, प्याज और टमाटर की कीमतों में स्थिरता लाने में सफलता नहीं मिली। ऐसे में सरकार का पूरा दारोमदार सहकारी संस्थाओं के जरिए रियायती दरों पर प्याज और टमाटर की बिक्री पर है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_67347b9f5a392.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एक किलो आलू-प्याज-टमाटर का खर्च 220 रुपये तक, लेकिन किसानों से ज्यादा ट्रेडर्स को फायदा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_67347b9f5a392.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खुदरा महंगाई दर 14 महीने के उच्चतम स्तर पर, अक्टूबर में 6.21 फीसदी पर पहुंची]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/retail-inflation-reached-a-14-month-high-of-6.21-percent-in-october.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 12 Nov 2024 17:32:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/retail-inflation-reached-a-14-month-high-of-6.21-percent-in-october.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अक्टूबर माह में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित सालाना मुद्रास्फीति यानी खुदरा महंगाई दर 14 महीने के उच्चतम स्तर 6.21 फीसदी तक पहुंच गई। मंगलवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मुख्य रूप से खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण खुदरा महंगाई दर सितंबर के 5.49 प्रतिशत से बढ़कर अक्टूबर में 6.21 प्रतिशत हो गई। एक साल पहले अक्टूबर, 2023 में खुदरा महंगाई दर 4.87 फीसदी थी। अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर 14 महीनों में पहली बार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की 6 प्रतिशत की टॉलरेंस बैंड को पार कर गई।</p>
<p>राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं की खुदरा महंगाई दर (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) अक्टूबर में बढ़कर 10.87 फीसदी हो गई, जो सितंबर में 9.24 फीसदी और एक साल पहले अक्टूबर में 6.61 फीसदी थी।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x_67334b7039283.jpg" alt="" width="633" height="298" /></p>
<p><strong>ग्रामीण इलाकों में शहरों से ज्यादा महंगाई&nbsp;</strong></p>
<p>अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर ग्रामीण इलाकों में 6.68 फीसदी रही जबकि शहरी क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर 5.62 फीसदी थी। इस तरह खुदरा महंगाई की मार शहरों से ज्यादा ग्रामीण आबादी पर पड़ रही है।</p>
<p><strong>सब्जियों की महंगाई सबसे अधिक</strong></p>
<p>अक्टूबर में सबसे ज्यादा खुदरा महंगाई सब्जियों पर बढ़ी। सब्जियों की खुदरा महंगाई दर अक्टूबर में 42.18 रही जबकि सितंबर में यह 35.99 प्रतिशत थी। सालाना आधार पर अक्टूबर में खाद्य तेलों (ऑयल एंड फैट्स) की महंगाई 9.51 फीसदी, फलों की महंगाई 8.43 और दालों की महंगाई 7.43 फीसदी बढ़ी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खुदरा महंगाई दर 14 महीने के उच्चतम स्तर पर, अक्टूबर में 6.21 फीसदी पर पहुंची ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद गेहूं के दाम 3200 रुपये तक पहुंचे, आ सकती है आयात की नौबत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/amid-record-wheat-production-wheat-prices-reached-at-rs-3200-per-quintal-high-possibility-of-import.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 11 Nov 2024 14:41:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/amid-record-wheat-production-wheat-prices-reached-at-rs-3200-per-quintal-high-possibility-of-import.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले दो साल से देश में गेहूं के रिकॉर्ड 11.33 करोड़ टन उत्पादन के दावे के बावजूद गेहूं की कीमतें बढ़ती जा रही हैं और आटे भी महंगा हुआ है। बाजार में गेहूं की कीमतें 3200 रुपये प्रति क्विटंल तक पहुंच गई हैं। कीमतों के लगातार दबाव के चलते सरकार पर गेहूं की खुले बाजार में बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत बिक्री का दबाव बढ़ रहा है। वहीं केंद्रीय पूल में स्टॉक की स्थिति के चलते सरकारी हस्तक्षेप सीमित रहने के आसार हैं, इस स्थिति में गेहूं के आयात की स्थिति बन रही है।&nbsp;गेहूं और आटे की बढ़ती कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार को रियायती दरों पर भारत आटा की बिक्री शुरू करवानी पड़ी। लेकिन महंगाई के असर से भारत आटा भी नहीं बच पाया। सरकार को भारत आटे का दाम 27.50 रुपये किलो से बढ़ाकर 30 रुपये किलो करना पड़ा।</p>
<p>कृषि मंत्रालय के एगमार्केट पोर्टल के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की नजफगढ़ मंडी में गेहूं का भाव 3100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश की अनाज मंडियों में गेहूं 2800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बिक रहा है। जबकि मध्य प्रदेश की मंडियों में गेहूं का भाव 3000 रुपये के आसपास चल रहा है। पिछले एक महीने में ही गेहूं के दाम लगभग 80 से 100 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गये हैं। उपभोक्ता मामले विभाग की प्राइस मॉनिटरिंग के मुताबिक, 10 नवंबर को देश में गेहूं का औसत खुदरा भाव 31.98 रुपये किलो और आटे का औसत खुदरा भाव 37.1 रुपये किलो था। पिछले एक महीने में ही आटा करीब तीन फीसदी महंगा हो गया है।&nbsp;</p>
<p>हाल के दिनों में गेहूं की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को मंडियों में गेहूं की घटी आवक से जोड़कर देखा जा रहा है। इस महीने अब तक देश की अनाज मंडियों में कुल 2.52 लाख टन गेहूं की आवक हुई जबकि पिछले साल इसी अवधि में 3.51 लाख टन गेहूं देश भर की अनाज मंडियों में आया था। आवक में यह कमी गेहूं और आटे की कीमतों में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह बन रही है। साथ ही इससे देश में गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन के आंकड़ों पर भी संदेह पैदा होता है।</p>
<p>इस साल रबी मार्केटिंग सीजन 2024-25 में देश में कुल 266 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई थी जो पिछले साल हुई 262 लाख टन की खरीद से तो अधिक है लेकिन 300-320 लाख टन खरीद के अनुमानों से काफी कम थी। जबकि 2021-22 में गेहूं की सरकारी खरीद 433 टन तक पहुंच गई थी। सर्वाधिक 124 लाख टन गेहूं की खरीद पंजाब से हुई थी जबकि मध्य प्रदेश से करीब 48 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी।</p>
<p>मध्य प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद में कमी के पीछे वजह यह मानी जा रही है कि किसानों ने ऊंचे भाव के कारण सरकारी खरीद के बजाय प्राइवेट ट्रेडर्स को उपज बेची। कुछ असर अधिक गर्मी और गेहूं उत्पादन पर पड़ी मौसम की मार का भी है। यही वजह है कि 2020-21 में 125 लाख टन गेहूं खरीद के साथ पंजाब को पीछे छोड़ने वाले मध्य प्रदेश में गेहूं की खरीद घटकर 48 लाख टन रह गई थी। जबकि मध्य प्रदेश सरकार गेहूं के एमएसपी 2275 रुपये प्रति क्विंटल पर 125 रुपये का बोनस भी दे रही थी। &nbsp;</p>
<p>मंडियों में गेहूं की घटती आवक और महंगाई को देखते हुए सरकार पर भंडार से खुले बाजार में गेहूं उतारने का दबाव बढ़ रहा है। साथ ही इस साल गेहूं आयात की स्थिति भी आ सकती है। &nbsp;हालांकि, सरकारी खरीद में बढ़ोतरी न होने के कारण खुले बाजार में गेहूं बिक्री (ओएमएसएस) के लिए भी सरकार के पास बहुत ज्यादा गुंजाइश नहीं है। लेकिन रबी की नई फसल आने में अभी पांच महीने हैं और अभी से गेहूं की कीमतें बढ़ना महंगाई के मोर्चे पर सरकार की चिंता जरूर बढ़ाएगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद गेहूं के दाम 3200 रुपये तक पहुंचे, आ सकती है आयात की नौबत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अक्टूबर में कम बारिश के बावजूद प्रमुख जलाशयों में जल स्तर बेहतर, लेकिन उत्तरी राज्यों के जलाशयों में पिछले साल से कम पानी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/despite-low-rainfall-in-october-major-reservoirs-show-improved-water-levels-but-northern-states-reservoirs-hold-less-water-than-last-year.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 09 Nov 2024 11:53:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/despite-low-rainfall-in-october-major-reservoirs-show-improved-water-levels-but-northern-states-reservoirs-hold-less-water-than-last-year.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अक्टूबर में 7 फीसदी कम बारिश के बावजूद देश के प्रमुख जलाशयों में जल स्तर की स्थिति बेहतर बनी हुई है। जल स्तर में हफ्ते भर में भले ही एक अरब घन मीटर (बीसीएम) की कमी दर्ज की गई है, लेकिन पिछले साल की तुलना में स्थिति काफी बेहतर है, जिससे रबी फसलों के लिए अच्छी संभावना बन गई है। देश के कई हिस्सों में जलाशयों का पानी खेती में इस्तेमाल होता है। इस वर्ष अच्छी बारिश के चलते जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा हुआ है, जिससे रबी सीजन में फसलों की सिंचाई के लिए पानी की कमी होने की संभावना नहीं है।</p>
<p>केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के मुताबिक, 7 सितंबर तक देश के 150 प्रमुख जलाशयों में 154.981 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी दर्ज किया गया, जो उनकी कुल क्षमता का 86 फीसदी है। पिछले साल इसी समय जलाशयों में 123.761 बीसीएम पानी था, जबकि सामान्य रूप से इनमें 133.574 बीसीएम पानी होता है। इस साल जल स्तर पिछले साल के मुकाबले 25.22 फीसदी और सामान्य जल संग्रह के मुकाबले 16.02 फीसदी अधिक है।</p>
<p>देश के उत्तरी क्षेत्र में स्थित जलाशयों में कुल क्षमता का 62 फीसदी पानी भरा हुआ है, जिसमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के जलाशय शामिल हैं। सीडब्ल्यूसी की निगरानी में यहां 11 जलाशय हैं, जिनकी कुल क्षमता 19.836 बीसीएम है। 7 सितंबर तक इन जलाशयों में 12.356 बीसीएम पानी था, जो कुल क्षमता का 62 फीसदी है। पिछले साल इसी समय जल स्तर 76 फीसदी था और सामान्य स्तर भी 76 फीसदी है। इस साल का जल स्तर पिछले साल और सामान्य स्तर दोनों से कम है।</p>
<p>पूर्वी क्षेत्र में असम, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, नगालैंड और बिहार के 25 जलाशय सीडब्ल्यूसी की निगरानी में आते हैं। इनकी कुल संग्रहण क्षमता 20.798 बीसीएम है। 7 सितंबर तक इन जलाशयों में 15.602 बीसीएम पानी था, जो कुल क्षमता का 75 फीसदी है। पिछले साल इसी समय जल स्तर 72 फीसदी था, जबकि सामान्य तौर पर यह 73 फीसदी रहता है। इस साल का जल स्तर पिछले साल और सामान्य स्तर से बेहतर है।</p>
<p>पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा के जलाशय शामिल हैं। सीडब्ल्यूसी की निगरानी में यहां 50 जलाशय हैं, जिनकी कुल संग्रहण क्षमता 37.357 बीसीएम है। 7 सितंबर तक इन जलाशयों में 35.999 बीसीएम पानी था, जो कुल क्षमता का 96 फीसदी है। पिछले साल इसी समय जल स्तर 86 फीसदी था और सामान्य स्तर 78 फीसदी रहता है। इस साल का जल स्तर पिछले साल और सामान्य स्तर दोनों से बेहतर है।</p>
<p>मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के जलाशय आते हैं। सीडब्ल्यूसी की निगरानी में यहां 26 जलाशय हैं, जिनकी कुल संग्रहण क्षमता 48.227 बीसीएम है। 7 सितंबर 2024 तक इन जलाशयों में 42.391 बीसीएम पानी था, जो कुल क्षमता का 88 फीसदी है। पिछले साल इसी समय जल स्तर 78 फीसदी था और सामान्य स्तर भी 78 फीसदी है। इस साल का जल स्तर पिछले साल और सामान्य स्तर दोनों से बेहतर है।</p>
<p>दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के 43 जलाशय सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं, जिनकी कुल संग्रहण क्षमता 54.634 बीसीएम है। 7 सितंबर तक इन जलाशयों में 48.633 बीसीएम पानी था, जो कुल क्षमता का 89 फीसदी है। पिछले साल इसी समय जल स्तर 44 फीसदी था और सामान्य स्तर 67 फीसदी है। इस साल का जल स्तर पिछले साल और सामान्य स्तर दोनों से बेहतर है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अक्टूबर में कम बारिश के बावजूद प्रमुख जलाशयों में जल स्तर बेहतर, लेकिन उत्तरी राज्यों के जलाशयों में पिछले साल से कम पानी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी ट्रेडर्स, डीलर्स, होलसेलर्स और बिग चेन रिटेलर्स को अब हर सप्ताह नहीं देनी होगी स्टॉक की जानकारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/no-more-weekly-stock-updates-for-sugar-traders-and-retailers-says-government.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 08 Nov 2024 16:41:05 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/no-more-weekly-stock-updates-for-sugar-traders-and-retailers-says-government.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, बड़ी चेन के रिटेलरों और डीलर्स को अब हर हफ्ते चीनी के स्टॉक की जानकारी नहीं देनी होगी। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। राज्य सरकारों को लिखे पत्र में मंत्रालय ने कहा है कि देश में चीनी की उपलब्धता और कीमतों की समीक्षा करने के बाद यह पाया गया है कि पूरे साल घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में चीनी का स्टॉक उपलब्ध है। जिसके आधार पर यह निर्णय लिया गया है कि अब व्यापारियों को साप्ताहिक आधार पर चीनी के स्टॉक की जानकारी देने की आवश्यकता नहीं है।&nbsp;</p>
<p>सितंबर में ऑल इंडिया शुगर ट्रेडर एसोसिएशन (एआईएसटीए) ने उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय को पत्र लिखकर चीनी के स्टॉक की जानकारी आनिवार्य रूप से देने के आदेश को वासस लेने की मांग की थी।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x_672df1a8e5569.jpg" alt="" width="549" height="802" /></p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="2b4f260f-379c-447d-9312-bd4642ab9846" dir="auto" class="min-h-8 text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5" data-message-model-slug="gpt-4o-mini">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>पिछले साल सितंबर में केंद्र सरकार ने व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, बड़े चेन रिटेलरों और डीलरों के लिए चीनी के स्टॉक की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया था। इसके पीछे सरकार ने तर्क दिया था चीनी बाजार में जमाखोरी से निपटने और बेईमान सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। कारोबारियों को हर सोमवार को खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल (<strong><a href="https://esugar.nic.in/">https://esugar.nic.in</a></strong>) पर अपना चीनी का स्टॉक अपडेट करने के लिए कहा गया था।</p>
<p>चीनी उद्योग के मुताबिक, देश में इस साल कुल चीनी उत्पादन 325 लाख टन होने का अनुमान है जो <span>पिछले साल के 343 लाख टन के मुकाबले 18 लाख टन कम है।&nbsp;</span>मार्केट में उपलब्ध चीनी यानी नेट शुगर प्रोडक्शन 285 लाख टन रहेगा, जो पिछले साल 319 लाख टन था। पिछले साल 57.23 लाख टन के बकाया स्टॉक के साथ कुल चीनी उपलब्धता 376.23 लाख टन थी। वहीं, चालू सीजन की शुरूआत में 80.23 लाख टन के बकाया स्टॉक के चलते चीनी की कुल उपलब्धता 365.23 लाख टन रहेगी। सालाना 295 लाख टन की खपत के चलते साल के अंत में 55.23 लाख टन का बकाया स्टॉक रहने का अनुमान है।&nbsp;</p>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी ट्रेडर्स, डीलर्स, होलसेलर्स और बिग चेन रिटेलर्स को अब हर सप्ताह नहीं देनी होगी स्टॉक की जानकारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668534db9b9c0.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश में ब्राजील से उड़द का आयात 5 गुना बढ़ा, अक्टूबर तक 22 हजार टन हुआ आयात]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/import-of-urad-from-brazil-in-the-country-increased-5-times-22-thousand-tonnes-were-imported-till-october.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 08 Nov 2024 15:24:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/import-of-urad-from-brazil-in-the-country-increased-5-times-22-thousand-tonnes-were-imported-till-october.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में ब्राजील से उड़द के आयात में 5 गुना वृद्धि हुई है। अक्टूबर 2024 तक ब्राजील से 22 हजार टन उड़द का आयात हो चुका है जबकि पिछले साल (वर्ष 2023) ब्राजील से 4,102 टन उड़द का आयात हुआ था। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हाल के वर्षों में ब्राजील उड़द आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है और इसमें भारत के उड़द और तुअर आयात का एक प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता है।&nbsp;</p>
<p>ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ दालों का कारोबार भारत के लिए विशेष रूप से फायदेमंद रहा है क्योंकि भारत के मुकाबले वहां फसल के मौसम में अंतर है, जिससे इन देशों को भारत की फसल संभावना के आधार पर अपने फसल पैटर्न की योजना बनाने में मदद मिलती है।</p>
<p>चने के मामले में जब भारत ने वर्ष 2024 में कम रबी उत्पादन के बाद मई, 2024 में चने के शुल्क मुक्त आयात को अधिसूचित किया था तो ऑस्ट्रेलिया ने बुवाई के क्षेत्र में भारी वृद्धि की थी। वर्ष 2023 में 4.9 लाख टन चना उत्पादन के मुकाबले चालू वर्ष में ऑस्ट्रेलिया में चना का लगभग 13.3 लाख टन पैदावार होने का अनुमान है, जिसे मुख्य रूप से भारत को निर्यात किया जाएगा। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से ऑस्ट्रेलिया से चने की नई फसल की आवक ने घरेलू उपलब्धता को बढ़ाया है और प्राथमिक बाजारों में कीमतों को कम करने में मदद की है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_672ddcbf8d6f2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश में ब्राजील से उड़द का आयात 5 गुना बढ़ा, अक्टूबर तक 22 हजार टन हुआ आयात ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ऑल इंडिया किसान सभा ने डीएपी की किल्लत के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/all-india-kisan-sabha-held-the-central-government-responsible-for-the-shortage-of-dap.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 07 Nov 2024 18:51:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/all-india-kisan-sabha-held-the-central-government-responsible-for-the-shortage-of-dap.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रबी सीजन के दौरान किसानों को डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) ने देश भर में डीएपी की किल्लत के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। किसान सभा का कहना है कि डीएपी की कमी के बावजूद सरकार ने इसके लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई, जिस वजह से देश भर के किसान भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>किसान सभा के अनुसार, किसानों को डीएपी लेने के लिए पूरा दिन लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त मात्रा में डीएपी नहीं मिल रहा है। डीएपी की किल्लत इतनी बढ़ गई है कि अब राज्य सरकारों को डीएपी के वितरण के लिए पुलिस लगानी पड़ रही है।&nbsp;</p>
<p>किसान सभा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच डीएपी का आयात घटकर 19.7 लाख टन रह गया जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 34.5 लाख टन था। 1 अक्टूबर तक सरकार के पास डीएपी का केवल 15-16 लाख टन स्टॉक था जबकि अनुशंसित स्टॉक 27-30 लाख टन होना चाहिए। इस वजह से किसानों को डीएपी के लिए सरकारी कीमत से 250 रुपये से 400 रुपये अधिक चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। डीएपी के 50 किलोग्राम बैग की कीमत 1,350 रुपये प्रति बैग है।</p>
<p>किसान सभा ने नैनो-यूरिया जैसे विकल्पों को उनकी प्रभावशीलता के स्पष्ट प्रमाणों के बिना बढ़ावा देने के लिए भी सरकार की आलोचना की है। साथ ही घरेलू उर्वरक उत्पादन बढ़ाने तथा दीर्घकालिक आयात सौदों का आह्वान किया है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/09/image_750x500_6131b5479e1a2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ऑल इंडिया किसान सभा ने डीएपी की किल्लत के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/09/image_750x500_6131b5479e1a2.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र सरकार ने पराली जलाने पर जुर्माना बढ़ाकर 30 हजार रुपये किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/central-government-increased-the-fine-for-burning-stubble-to-30-thousand-rupees.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 07 Nov 2024 15:10:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/central-government-increased-the-fine-for-burning-stubble-to-30-thousand-rupees.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में बिगड़ती वायु गुणवत्ता के मद्देनजर, केंद्र सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जुर्माना बढ़ा दिया है। सरकार ने जुर्माना बढ़ाकर अधिकतम 30 हजार रुपये कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली-एनसीआर में बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर सख्त रुख अपनाने के बाद, केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया है।</p>
<p>केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 6 नवंबर को जारी अधिसूचना के अनुसार, पांच एकड़ से अधिक कृषि भूमि वाले किसानों पर पराली जलाने के लिए 30 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। दो एकड़ से कम भूमि वाले किसानों के लिए जुर्माना बढ़ाकर 5 हजार रुपये कर दिया गया है, जो पहले 2,500 रुपये था। वहीं, दो से पांच एकड़ की कृषि भूमि वाले किसानों पर जुर्माना 10 हजार रुपये कर दिया गया है।</p>
<p>प्रतिकूल मौसम, पराली जलाने, वाहनों के धुएं, दिवाली पर पटाखे फड़ने से होने वाले प्रदुषण और अन्य स्थानीय प्रदूषण स्रोतों के कारण सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक पहुंच जाती है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के अनुसार, पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं के कारण 1 से 15 नवंबर तक दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण अपने चरम पर होता है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x_672c8cb339e1a.jpg" alt="" width="626" height="626" /></p>
<p>पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाली संस्था <strong>क्लाइमेट ट्रेंड्स</strong> की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2023 के बीच हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं कम हुई हैं। हरियाणा में 2019 में आग की घटनाएं 14,122 थीं, जो 2023 में घटकर 7,959 रह गईं। इसी तरह, पंजाब में 2020 में 95,048 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जो 2023 में घटकर 52,722 हो गईं। रिपोर्ट कहती है कि पंजाब और हरियाणा में आग की घटनाओं में कमी के बावजूद, सितंबर से दिसंबर के बीच इनका असर अब भी दिल्ली की हवा पर पड़ता है।</p>
<p>क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिसर्च लीड, <strong>डॉ. पलक बालियान</strong> के अनुसार, दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए केवल पराली जलाना ही कारण नहीं है, बल्कि यह प्रदूषण के कई कारणों में से एक है। धान की कटाई के बाद, ठंड बढ़ने के साथ पराली जलाने से दिल्ली का वायु प्रदूषण बढ़ जाता है। हाल के वर्षों में हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है, जिससे पता चलता है कि किसान पराली प्रबंधन को लेकर जागरूक हुए हैं। डॉ. पलक बालियान का कहना है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या को हल करने के लिए अन्य कारणों, जैसे वाहनों से निकलने वाला धुआं और निर्माण की धूल को भी नियंत्रित करने की आवश्यकता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र सरकार ने पराली जलाने पर जुर्माना बढ़ाकर 30 हजार रुपये किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अक्टूबर में 20 फीसदी महंगी हुई शाकाहारी थाली, प्याज, टमाटर व दालों की महंगाई का असर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/vegetarian-thali-becomes-20-percent-expensive-in-october-due-to-rising-prices-of-onions-tomatoes-and-pulses.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 07 Nov 2024 12:13:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/vegetarian-thali-becomes-20-percent-expensive-in-october-due-to-rising-prices-of-onions-tomatoes-and-pulses.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अक्टूबर 2024 में सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल के चलते शाकाहारी थाली (वेज) की लागत में इजाफा हुआ है। <strong>क्रिसिल की &lsquo;राइस रोटी रेट&rsquo; रिपोर्ट</strong> के अनुसार, अक्टूबर में वेज थाली की लागत 20 फीसदी बढ़कर 33.3 रुपये प्रति थाली हो गई जबकि पिछले साल इसी महीने में यह लागत 27.7 रुपये प्रति थाली थी। इसके अलावा, महीने के आधार पर भी वेज थाली की लागत में 6.3 फीसदी का इजाफा हुआ है। सितंबर 2024 में वेज थाली की लागत 31.3 रुपये प्रति थाली थी।&nbsp;</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, सब्जियों की कीमतों में वृद्धि के कारण वेज थाली की कीमत में वृद्धि हुई है, जिसकी हिस्सेदारी थाली की लागत में करीब 40 फीसदी होती है। सितंबर में लगातार बारिश के कारण प्याज और आलू की आपूर्ति में कमी आई, जिसके परिणामस्वरूप अक्टूबर में प्याज की कीमत में 46 फीसदी और आलू की कीमत में 51 फीसदी तक की वृद्धि देखी गई। इसके साथ ही, महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश के चलते प्याज की कटाई में देरी हुई, जिससे प्याज की कीमतें और बढ़ गईं। रबी सीजन के आलू की आवक में कमी और कोल्ड स्टोरेज स्टॉक घटने से भी आलू की कीमतों में उछाल देखा गया। दिसंबर-जनवरी में नए आलू के बाजार में आने के बाद कीमतों में थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।&nbsp;</p>
<p>अक्टूबर में टमाटर की कीमतें भी लगभग दोगुनी हो गईं। पिछले साल अक्टूबर में टमाटर की कीमत 29 रुपये प्रति किलो थी, जो इस साल बढ़कर 64 रुपये प्रति किलो हो गई। सितंबर में हुई बारिश से टमाटर की फसल को काफी नुकसान हुआ, जिससे अक्टूबर में कीमतों में उछाल देखा गया। त्योहारी सीजन के दौरान मांग में वृद्धि और महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से आपूर्ति में कमी भी इस वृद्धि का कारण बनी। हालांकि, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश से आपूर्ति बढ़ने से नवंबर में कीमतों में स्थिरता आने की संभावना है।</p>
<p>दालों की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। त्योहारी मांग और शुरुआती स्टॉक में कमी के कारण अक्टूबर में दालों की कीमतें 11 फीसदी बढ़ गईं। दालों का हिस्सा वेज थाली में करीब 9 फीसदी होता है। दिसंबर से नई फसल की आवक शुरू होने पर दालों की कीमतों में गिरावट की उम्मीद है। इसके विपरीत, ईंधन की कीमत में 11 फीसदी की गिरावट ने वेज थाली की लागत में अधिक बढ़ोतरी को रोकने में मदद की।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x_672c6c7fb81bb.jpg" alt="" width="645" height="691" /></p>
<p>मांसाहारी थाली (नॉन-वेज थाली) की लागत में भी अक्टूबर में सालाना आधार पर 5.11 फीसदी की वृद्धि हुई, जो 61.6 रुपये प्रति थाली हो गई जबकि पिछले साल अक्टूबर में यह लागत 58.6 रुपये प्रति थाली थी। महीने के आधार पर नॉन-वेज थाली की लागत में 3.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, सितंबर में इसकी लागत 59.3 रुपये प्रति थाली थी। ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में 9 फीसदी की गिरावट होने के कारण नॉन-वेज थाली की लागत में और अधिक बढ़ोतरी नहीं हुई, क्योंकि नॉन-वेज थाली में ब्रॉयलर चिकन का हिस्सा करीब 50 फीसदी होता है। टमाटर और प्याज की कीमतों में उछाल ने नॉन-वेज थाली की लागत पर भी असर डाला।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अक्टूबर में 20 फीसदी महंगी हुई शाकाहारी थाली, प्याज, टमाटर व दालों की महंगाई का असर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्रीय कैबिनेट ने एफसीआई में 10,700 करोड़ रुपये की इक्विटी डालने को मंजूरी दी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-rs-10700-crore-equity-infusion-in-food-corporation-of-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Nov 2024 18:33:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-rs-10700-crore-equity-infusion-in-food-corporation-of-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) में वित्तीय वर्ष 2024-25 में कार्यशील पूंजी के लिए 10,700 करोड़ रुपये की इक्विटी डालने को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देना और देश भर के किसानों का कल्याण सुनिश्चित करना है। यह रणनीतिक कदम किसानों को समर्थन देने और भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया।&nbsp;</p>
<p>उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह राशि एफसीआई के मौजूदा वेस एंड मीन्स एडवांस को इक्विटी में बदलकर दी जाएगी। इस कदम से एफसीआई अपनी वित्तीय जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेगा, जिससे अल्पकालिक उधारी की निर्भरता कम होगी और ब्याज की लागत घटेगी, जिससे सरकार की सब्सिडी पर दबाव कम होगा।</p>
<p>एफसीआई की शुरुआत 1964 में 100 करोड़ रुपये की अधिकृत पूंजी और 4 करोड़ रुपये की इक्विटी से हुई थी। अब इसकी अधिकृत पूंजी फरवरी 2024 में 21,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2019-20 में एफसीआई की इक्विटी 4,496 करोड़ रुपये थी, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़कर 10,157 करोड़ रुपये हो गई। अब, भारत सरकार ने एफसीआई के लिए 10,700 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण इक्विटी को मंजूरी दी है, जो इसे वित्तीय रूप से मजबूत करेगी और इसके परिवर्तन के लिए की गई पहलों को एक बड़ा बढ़ावा देगी।</p>
<p>एफसीआई न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खाद्यान्नों की खरीद, रणनीतिक खाद्यान्न भंडार के रखरखाव, कल्याणकारी उपायों के लिए खाद्यान्नों के वितरण और बाजार में खाद्यान्नों की कीमतों के स्थिरीकरण के माध्यम से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्रीय कैबिनेट ने एफसीआई में 10,700 करोड़ रुपये की इक्विटी डालने को मंजूरी दी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत आटा और चावल की कीमतों में बढ़ोतरी, दूसरे चरण की शुरुआत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/bharat-atta-and-bharat-rice-phase-two-launched-with-increased-prices.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 05 Nov 2024 15:33:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/bharat-atta-and-bharat-rice-phase-two-launched-with-increased-prices.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने भारत आटा और भारत चावल की&nbsp;कीमतों में बढ़ोतरी के साथ इसके दूसरे चरण की शुरुआत कर दी है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर में एनसीसीएफ, नेफेड और केंद्रीय भंडार की मोबाइल वैन को हरी झंडी दिखाकर भारत आटा और भारत चावल की खुदरा बिक्री के दूसरे चरण का शुभारंभ किया।</p>
<p>दूसरे चरण में भारत आटा 30 रुपये प्रति किलो और भारत चावल 34 रुपये प्रति किलो की कीमत पर उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराया जाएगा। आम जनता को महंगाई की मार से बचाने के लिए केंद्र&nbsp;सरकार ने पिछले साल नवंबर में भारत आटा और इस साल फरवरी में भारत चावल की बिक्री शुरू की थी। उस समय भारत आटा का रेट 27.50 रुपये और भारत चावल का रेट 29 रुपये प्रति किलो था, जिसे अब बढ़ा दिया गया है।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि यह पहल सरकार की ओर से रियायती कीमतों पर जरूरी खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि भारत ब्रांड के अंतर्गत चावल, आटा, और दाल जैसे जरूरी खाद्य पदार्थों की खुदरा बिक्री ने कीमतों में स्थिरता बनाए रखने में मदद की है।</p>
<p>दूसरे चरण में शुरुआती तौर पर 3.69 लाख टन गेहूं और 2.91 लाख टन चावल खुदरा बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया है। पहले चरण में लगभग 15.20 लाख टन भारत आटा और 14.58 लाख टन भारत चावल रियायती दरों पर उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराया गया था।</p>
<p>भारत आटा और भारत चावल अब केन्द्रीय भंडार, नैफेड और एनसीसीएफ के स्टोर और मोबाइल वैन पर, साथ ही ई-कॉमर्स और बड़ी खुदरा श्रृंखलाओं में उपलब्ध होंगे। इस चरण में &lsquo;भारत&rsquo; ब्रांड आटा और चावल 5 किलो और 10 किलो के पैक में बेचे जाएंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत आटा और चावल की कीमतों में बढ़ोतरी, दूसरे चरण की शुरुआत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चुनाव आयोग ने पंजाब, केरल और उत्तर प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव की तारीख बदली]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/election-commission-changed-the-date-of-assembly-by-elections-in-punjab-kerala-and-uttar-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 04 Nov 2024 15:29:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/election-commission-changed-the-date-of-assembly-by-elections-in-punjab-kerala-and-uttar-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चुनाव आयोग ने केरल, पंजाब, और उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा उपचुनाव की तारीख में बदलाव की घोषणा की है। इन राज्यों की 14 विधानसभा सीटों पर अब मतदान 20 नवंबर को होगा। पहले मतदान की तिथि 13 नवंबर तय की गई थी। चुनाव आयोग ने आगामी त्योहारों के चलते उपचुनावों की तारीखों में बदलाव का निर्णय लिया है।</p>
<p>चुनाव आयोग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कांग्रेस, भाजपा, बसपा, आरएलडी जैसे कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने चुनाव आयोग से उपचुनाव की तारीख में बदलाव का अनुरोध किया था, ताकि त्योहारों के दौरान मतदाताओं को परेशानी न हो। इन दलों ने 13 नवंबर को महत्वपूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक, और धार्मिक कार्यक्रमों के चलते मतदाता भागीदारी में कमी की संभावना जताई थी।&nbsp;</p>
<p>चुनाव आयोग के नए शेड्यूल के अनुसार, केरल की पलक्कड़ विधानसभा सीट, पंजाब की डेरा बाबा नानक, चब्बेवाल (एससी), गिद्दड़बाहा और बरनाला विधानसभा सीट, उत्तर प्रदेश की मीरापुर, कुंदरकी, गाज़ियाबाद, खैर, करहल, सीसामऊ, फूलपुर, कटेहरी और मझवां विधानसभा सीट पर उपचुनाव अब 20 नवंबर को होगा।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x_67289c4874b6f.jpg" alt="" width="559" height="360" /></p>
<p>मतगणना और चुनाव की समाप्ति की तारीख में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सभी राज्यों में मतगणना 23 नवंबर (शनिवार) को होगी।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_661002882c3bd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चुनाव आयोग ने पंजाब, केरल और उत्तर प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव की तारीख बदली ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_661002882c3bd.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं और सरसों के साथ सब्जियों की बुवाई के लिए आईएआरआई ने जारी की एडवाइजरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/iari-advisory-for-sowing-of-wheat-mustard-and-vegetables.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 02 Nov 2024 16:33:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/iari-advisory-for-sowing-of-wheat-mustard-and-vegetables.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के कई राज्यों में रबी फसलों की बुवाई शुरू हो गई है। रबी की दो मुख्य फसलों, गेहूं और सरसों की बुवाई के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) ने एडवाइजरी जारी की है। किसानों को सलाह दी गई है की वे अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों की बुवाई करें। एडवाइजरी में दीमक की समस्या से निपटने के उपाय और उर्वरकों के सही इस्तेमाल की जानकारी भी दी गई है, ताकि उत्पादन बढ़ सके।</p>
<p><strong>गेहूं की बुवाई के लिए सलाह<br /></strong></p>
<p>गेहूं की बुवाई के लिए किसानों को अच्छी गुणवत्ता के बीजों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। बीज की दर 100 किलो प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए। आईएआरआई के वैज्ञानिकों ने कुछ विशेष किस्में सुझाई हैं, जैसे एच.डी. 3385, एच.डी. 3386, एच.डी. 3298, एच.डी. 2967, एच.डी. 3086, एच.डी. सी.एस.डब्लू. 18, डी.बी.डब्लू. 370, डी.बी.डब्लू. 371, डी.बी.डब्लू. 372, और डी.बी.डब्लू. 327। &nbsp;</p>
<p>जिन खेतों में दीमक की समस्या है, वहां बुवाई से पहले क्लोरपाइरीफॉस (20 ई.सी.) का 5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। नाइट्रोजन, फास्फोरस, और पोटेशियम (एन.पी.के) के लिए अनुशंसित उर्वरक की मात्रा क्रमशः 120 किलो, 50 किलो और 40 किलो प्रति हेक्टेयर रखें।</p>
<p><strong>सप्ताह भर में पूरी करें सरसों की बुवाई&nbsp;</strong></p>
<p>किसानों को अगले सप्ताह तक सरसों की बुवाई पूरी करने की सलाह दी गई है। इसमें कहा गया है कि बुवाई से पहले सल्फर के लिए मिट्टी की जांच करें और कमी वाले क्षेत्रों में 20 किलो सल्फर प्रति हेक्टेयर डालें। बीज की दर 1.5-2 किलो प्रति एकड़ होनी चाहिए। कृषि वैज्ञानिकों ने पूसा विजय, पूसा सरसों-29, पूसा सरसों-30, पूसा सरसों-31, और पूसा सरसों-32 की बुवाई करने की सलाह दी है। बुवाई से पहले बीजों को 2-2.5 ग्राम केप्टान कीटनाशक से उपचारित करना भी आवश्यक है।</p>
<p><strong>सब्जियों के लिए भी एडवाइजरी जारी </strong></p>
<p>मटर की खेती करने वाले किसानों को सलाह दी गई है कि मौसम को देखते हुए बुवाई में देरी न करें, क्योंकि इससे उपज कम हो सकती है और फसल पर कीटों का असर बढ़ सकता है। बेहतर अंकुरण के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। मटर के लिए पूसा प्रगति और आर्केल किस्मों की बुवाई की सलाह दी गई है, जिन्हें बुवाई से पहले केप्टान और राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना चाहिए।</p>
<p>गाजर की बुवाई के लिए क्यारी में पूसा रुधिरा किस्म का उपयोग करने की सलाह दी गई है। बुवाई से पहले मिट्टी में नमी बनाए रखें और गोबर की खाद, पोटाश और फास्फोरस का प्रयोग करें। मशीन से गाजर की बुवाई करने से बीज की बचत होती है और उपज बढ़ती है।</p>
<p>सरसों साग, बथुआ, मूली, पालक, मेथी, धनिया और शलजम जैसी हरी पत्तेदार फसलों की बुवाई के लिए यह समय उपयुक्त है। फूलगोभी, पत्तागोभी, ब्रोकली और टमाटर के पौधों की रोपाई भी क्यारियों में की जा सकती है।</p>
<p>वर्तमान मौसम में मिर्च और टमाटर में रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर मिट्टी में दबा दें, और यदि संक्रमण अधिक हो, तो रोग नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करें। गुलाब की प्रूनिंग और कटाई के बाद कटे हुए हिस्सों पर बाविस्टीन का लेप लगाकर पौधों को फफूंद रोगों से बचाएं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_6725f76ce4182.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं और सरसों के साथ सब्जियों की बुवाई के लिए आईएआरआई ने जारी की एडवाइजरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_6725f76ce4182.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार ने ‘ड्रोन दीदी’ योजना के परिचालन दिशा&amp;#45;निर्देश जारी किए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-releases-operational-guidelines-for-namo-drone-didi-yojana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 01 Nov 2024 15:31:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-releases-operational-guidelines-for-namo-drone-didi-yojana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने 'नमो ड्रोन दीदी' योजना के लिए परिचालन दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस योजना का उद्देश्य 1,261 करोड़ रुपये के बजट के साथ महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ड्रोन प्रदान करना है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सभी हितधारकों से अनुरोध किया गया है कि वे 'नमो ड्रोन दीदी' योजना के शीघ्र कार्यान्वयन और लागू करने के लिए इन दिशा-निर्देशों का सही तरीके से पालन करें। इस योजना के तहत 2024-25 से 2025-26 के दौरान 14,500 चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन प्रदान किए जाएंगे, ताकि वे कृषि से संबंधित कार्यों के लिए किसानों को अपनी सेवाएं दे सकें।</p>
<p><strong>योजना के परिचालन दिशा-निर्देश&nbsp;</strong></p>
<ul>
<li>यह योजना केंद्रीय स्तर पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, उर्वरक विभाग, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिवों की एक समिति द्वारा संचालित की जाएगी। &nbsp;</li>
<li>कार्यान्वयन एवं निगरानी समिति, जो ग्रामीण विकास विभाग के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में होगी और जिसमें सभी हितधारकों का प्रतिनिधित्व होगा, योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी के लिए जिम्मेदार होगी। &nbsp;</li>
<li>इस योजना के तहत, महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन और संबंधित उपकरणों की खरीद के लिए लागत का 80 फीसदी (अधिकतम 8 लाख रुपये तक) केंद्रीय वित्तीय सहायता के रूप में दिया जाएगा।&nbsp; &nbsp;</li>
<li>स्वयं सहायता समूहों के क्लस्टर स्तरीय संघ (सीएलएफ) शेष राशि (खरीद की कुल लागत में से अनुदान घटाकर) को राष्ट्रीय कृषि अवसंरचना वित्तपोषण सुविधा (एआईएफ) के तहत एक ऋण के रूप में जुटा सकते हैं। एआईएफ ऋण पर 3 फीसदी की ब्याज सहायता दी जाएगी। &nbsp;</li>
<li>सीएलएफ/एसएचजी अन्य सरकारी योजनाओं से भी ऋण प्राप्त कर सकते हैं। &nbsp;</li>
<li>इस योजना के तहत ड्रोन के साथ एक पैकेज प्रदान किया जाएगा, जिसमें तरल उर्वरकों और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन, बैटरी सेट, कैमरा, चार्जर, और अन्य उपकरण शामिल होंगे। &nbsp;</li>
<li>पैकेज में अतिरिक्त बैटरी सेट, प्रोपेलर सेट, और प्रशिक्षण भी शामिल होगा। एक सदस्य को 15 दिन का ड्रोन पायलट प्रशिक्षण दिया जाएगा। &nbsp;</li>
<li>राज्यों में प्रमुख उर्वरक कंपनियां योजना का कार्यान्वयन करेंगी और आवश्यक समन्वय स्थापित करेंगी। ड्रोन खरीदे जाएंगे और इनका स्वामित्व स्वयं सहायता समूहों के पास रहेगा। &nbsp;</li>
<li>योजना का सफल कार्यान्वयन सही क्षेत्रों के चयन पर निर्भर करेगा। राज्यों को इस योजना की बारीकी से निगरानी करनी होगी और महिलाओं को सहायता प्रदान करनी होगी। &nbsp;</li>
<li>योजना की निगरानी एक आईटी आधारित प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) 'ड्रोन पोर्टल' के माध्यम से की जाएगी। &nbsp;</li>
<li>इस योजना से महिलाओं के समूहों को स्थायी व्यवसाय और आजीविका सहायता मिलेगी, जिससे वे अपनी आय बढ़ा सकेंगी।</li>
</ul> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार ने ‘ड्रोन दीदी’ योजना के परिचालन दिशा-निर्देश जारी किए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इस्मा ने चीनी का एमएसपी बढ़ाकर 39.14 रुपये करने की मांग की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/isma-demand-for-formula-based-increase-in-msp-of-sugar-proposes-rate-of-rs-39.14-per-kg.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 30 Oct 2024 10:43:17 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/isma-demand-for-formula-based-increase-in-msp-of-sugar-proposes-rate-of-rs-39.14-per-kg.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंडियन शुगर एंड बायोएनर्जी मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने केंद्र सरकार से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाने की मांग की है। चीनी का एमएसपी फरवरी 2019 से 31 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर है। इस्मा ने 2024-25 चीनी सीजन के लिए इस मूल्य को बढ़ाकर 39.14 रुपये प्रति किलोग्राम करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा, एसोसिएशन ने एथेनॉल खरीद मूल्य में वृद्धि और चीनी निर्यात के लिए स्थायी नीति की मांग भी की है।</p>
<p>इस्मा की ओर से जारी बयान के अनुसार, एसोसिएशन के अध्यक्ष <strong>एम. प्रभाकर राव</strong> ने कहा कि एमएसपी में वृद्धि से चीनी मिलों को न्यूनतम कीमत प्राप्त करने में मदद मिलेगी, विशेषकर पेराई सीजन में जब चीनी की कीमत उत्पादन लागत से नीचे चली जाती है। कीमत कम रहने से किसानों के भुगतान में देरी और देनदारी की समस्या पैदा होती है। इस्मा ने सरकार से पुरानी गणना के आधार पर एमएसपी को बढ़ाने की अपील की है।</p>
<p>इस्मा के महानिदेशक <strong>दीपक बल्लानी</strong> ने कहा कि बढ़ती उत्पादन लागत, स्थिर एथेनॉल कीमतों और अनुमानित अधिशेष को देखते हुए एमएसपी में वृद्धि आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उद्योग की मांग है कि चीनी के एमएससपी को बढ़ाया जाना चाहिए, जो 2019 से गन्ने की कीमतों में वृद्धि के बावजूद नहीं बढ़ा है। बढ़ती लागत को कवर करने और किसानों को समय पर भुगतान में करने के लिए एमएसपी में बदलाव जरूरी है। उन्होंने एथेनॉल खरीद मूल्य में संशोधन की भी मांग की ताकि 2025-26 तक 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण के सरकारी लक्ष्य को पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही दीर्घकालिक निर्यात नीति से अधिशेष चीनी का प्रबंधन बेहतर तरीके से हो सकेगा, जिससे भारत घरेलू संतुलन बनाए रखते हुए वैश्विक चीनी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा।&nbsp;</p>
<p>इस्मा ने गन्ने के रस से बनने वाले एथेनॉल के लिए 73.14 रुपये प्रति लीटर, बी-हैवी मोलेसेस से बनने वाले एथेनॉल के लिए 67.70 रुपये प्रति लीटर, और सी-हैवी मोलेसेस से बनने वाले एथेनॉल के लिए 61.20 रुपये प्रति लीटर का प्रस्ताव दिया है। साथ ही, इस सीजन में 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति और दीर्घकालिक निर्यात नीति की मांग की है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इस्मा ने चीनी का एमएसपी बढ़ाकर 39.14 रुपये करने की मांग की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[19 फीसदी महंगा हुआ खाद्य तेल, लेकिन तिलहन फसलों के दाम एमएसपी से नीचे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/edible-oil-prices-increased-by-19-per-cent-after-import-duty-hike-but-the-prices-of-oilseed-crops-are-less-than-msp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 29 Oct 2024 16:50:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/edible-oil-prices-increased-by-19-per-cent-after-import-duty-hike-but-the-prices-of-oilseed-crops-are-less-than-msp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार द्वारा खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने के बाद खाद्य तेलों की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। पिछले एक महीने में खाद्य तेलों की कीमतों में लभगभ 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसकी तुलना में तिलहन फसलों का भाव ज्यादा नहीं बढ़ा है। देश की अनाज मंडियों में अधिकतर तिलहन फसलों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बने हुए हैं, जिससे किसानों को अपनी फसल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने 13 सितंबर को खाद्य तेलों पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) शून्य से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का फैसला लिया था। जिसके बाद खाद्य तेलों की कीमतों में तेज उछाल आया है। <strong>केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग की रिपोर्ट के अनुसार,</strong> 13 सितंबर को जब आयात शुल्क बढ़ा, तब पैक्ड सोयाबीन रिफाइंड तेल का औसत खुदरा दाम 118.81 रुपये प्रति लीटर था, जो 29 अक्टूबर को बढ़कर 138.58 रुपये हो गया है। इस दौरान सोयाबीन तेल की कीमतों में 16.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है लेकिन अनाज मंडियों में सोयाबीन का भाव अभी भी एमएसपी से कम है। मध्य प्रदेश सोयाबीन का प्रमुख उत्पादक राज्य है। यहां की मंडियों में सोयाबीन का औसत भाव 4200 से 4600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है, जबकि केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2024-25 के लिए इसका एमएसपी 4892 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।&nbsp;</p>
<p>सोयाबीन की कीमतें कम होने के कारण मध्य प्रदेश में इस साल सरकारी खरीद की जा रही है। हालांकि, किसान मौजूदा एमएसपी से भी संतुष्ट नहीं हैं और सोयाबीन के लिए 6000 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं। किसानों को कहना है कि मौजूदा एमएसपी से उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है।</p>
<p>मूंगफली के तेल की बात करें तो पिछले एक महीने में इसकी कीमतों में 6.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 13 सितंबर को पैक्ड मूंगफली रिफाइंड तेल का औसत खुदरा दाम 118.8 रुपये प्रति लीटर था, जो 29 अक्टूबर को बढ़कर 194.85 रुपये हो गया। गुजरात और राजस्थान मूंगफली के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। <strong>केंद्रीय कृष&zwj;ि व क&zwj;िसान कल्याण मंत्रालय के एगमार्कनेट पोर्टल के अनुसार,</strong> इन राज्यों की मंडियों में मूंगफली का औसत दाम 5000 से 6000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है, जबकि केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2024-25 के लिए इसका एमएसपी 6783 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यानी मंडियों में मिल रही कीमतें एमएसपी से कम हैं।</p>
<p>सूरजमुखी रिफाइंड तेल की कीमतें पिछले एक महीने में 19.13 फीसदी बढ़ी हैं। 13 सितंबर को इसका औसत खुदरा दाम 120.16 रुपये प्रति लीटर था, जो 29 अक्टूबर को बढ़कर 143.15 रुपये हो गया है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश सूरजमुखी के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। एगमार्कनेट पोर्टल के अनुसार, यहां की मंडियों में सूरजमुखी के बीजों की औसत भाव 5000 से 6000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच हैं जबकि सरकार ने सूरजमुखी का एमएसपी 7280 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। अनाज मंडियों में मिल रहा दाम मौजूदा एमएसपी से काफी कम है।&nbsp;</p>
<p>सरसों तेल की कीमतों में पिछले एक महीने में 16.90 फीसदी का उछाल आया है। 13 सितंबर को सरसों तेल का औसत खुदरा दाम 141.76 रुपये प्रति लीटर था, जो 29 अक्टूबर को बढ़कर 165.35 रुपये हो गया है। एगमार्कनेट पोर्टल के अनुसार, देश की अनाज मंडियों में सरसों का औसत भाव 5000 से 6000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है। केंद्र सरकार ने आगामी रबी सीजन के लिए सरसों का एमएसपी 5950 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यानी सरसों का अधिकतम भाव एमएसपी से थोड़ा ही ऊपर है।&nbsp;</p>
<p>किसान उत्पादक संगठनों से जुड़े<strong> मध्य भारत कंसोर्टियम ऑफ एफपीओ के सीईओ योगेश द्विवेदी</strong> ने <strong>रूरल वॉयल</strong> को बताया कि केंद्र सरकार द्वारा खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने के बाद खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई जबकि इसकी तुलना में किसानों की फसलों की मिलने वाला दाम अभी भी कम हैं। इस फैसले का असर दिखने में अभी कुछ महीनों का समय लग सकता है, लेकिन सरकार के इस फैसले से बाजार में स्थिरता जरूर आई है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में सोयाबीन के दाम डेढ़ महीने पहले 10 साल के निचले स्तर पर गिर गए थे, लेकिन अब कीमतों में सुधार हो रहा है। सरकार ने हाल ही में एमएसपी बढ़ाने की घोषणा की है, जिससे किसानों को लाभ होगा, लेकिन इससे उद्योग को मुश्किलें हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि अगर घरेलू बाजार में तिलहन फसलों की कीमतें ज्यादा होंगी, तो उद्योग आयात पर निर्भर हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिससे किसानों और उद्योग दोनों को लाभ हो।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ 19 फीसदी महंगा हुआ खाद्य तेल, लेकिन तिलहन फसलों के दाम एमएसपी से नीचे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी मिलों को 20% जूट की बोरियां इस्तेमाल करने के निर्देश, नहीं तो होगी कार्रवाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-clear-instructions-to-sugar-mills-pack-20-percent-of-production-in-jute-bags-otherwise-action-will-be-taken.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 29 Oct 2024 11:29:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-clear-instructions-to-sugar-mills-pack-20-percent-of-production-in-jute-bags-otherwise-action-will-be-taken.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने देश की सभी चीनों मिलों को 2024-25 चीनी सत्र (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान अपने उत्पादन का 20 फीसदी हिस्सा जूट की बोरियों में पैक करने का निर्देश जारी किया है। साथ ही ऐसा न करने वाली चीनों मिलों पर सख्त कार्रवाई की बात कही है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने इस संबंध में सभी चीनों मिलों को पत्र भेजा है, जिसमें कपड़ा मंत्रालय के आदेश का जिक्र किया गया है। हालांकि, पत्र में यह नहीं बताया गया है कि चीनी मिलों पर किस तरह की कार्रवाई होगी।</p>
<p>चीनों मिलों को भेजे पत्र में कहा गया है कि 1 अक्टूबर को कपड़ा मंत्रालय ने चीनी मिलों को 20 फीसदी जूट पैकेजिंग का आदेश जारी किया। इस फैसले को लेकर कर्नाटक उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने पहले 28 जून को रोक लगाई थी, लेकिन बाद में 26 सितंबर को खंडपीठ ने इस रोक को खारिज कर दिया था। जिसके बाद यह आदेश पुनः प्रभावी हुआ। खाद्य मंत्रालय ने साफ किया है कि इस निर्देश का उल्लंघन करने पर चीनी (नियंत्रण) आदेश, 1966 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_672079daa30fa.jpg" alt="" /></p>
<p>इसके अलावा, सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर 2024 से मासिक रिटर्न (पी-2 शीट) में जूट बैग से पैकेजिंग की जानकारी अनिवार्य रूप से देने का निर्देश भी दिया है।&nbsp;</p>
<p>गौरतलब है कि इस वर्ष कच्चे जूट (जूट और मेस्टा) का रकबा 6.67 लाख हेक्टेयर से घटकर 5.74 लाख हेक्टेयर रह गया है, जिसके कारण उत्पादन में कमी की संभावना जताई जा रही है। प्रमुख जूट उत्पादक राज्य पश्चिम बंगाल में भी जूट के क्षेत्र में गिरावट आई है, जिससे जूट की उपलब्धता कम हो सकती है। इसी कारण सभी चीनी मिलों को 20 फीसदी पैकेजिंग के लिए जूट बैग का उपयोग अनिवार्य किया गया है। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य जूट उद्योग को बढ़ावा देना और पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग को प्रोत्साहित करना है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_6720779cc0dc9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी मिलों को 20% जूट की बोरियां इस्तेमाल करने के निर्देश, नहीं तो होगी कार्रवाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_6720779cc0dc9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान सभा ने टायर निर्माताओं पर लगाया रबर की कीमतें कंट्रोल करने का आरोप]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/tyre-manufacturers-manipulating-rubber-prices-farmers-suffering-losses-all-india-kisan-sabha.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 28 Oct 2024 18:27:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/tyre-manufacturers-manipulating-rubber-prices-farmers-suffering-losses-all-india-kisan-sabha.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) ने टायर निर्माताओं पर प्राकृतिक रबर की कीमतों को नियंत्रित करने का आरोप लगाया है। किसान सभा का कहना है कि इससे लाखों रबर किसानों, श्रमिकों और छोटे व्यापारियों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ रहा है।</p>
<p>किसान सभा के अनुसार, प्रमुख रबर उत्पादक राज्य केरल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां रबर किसान अस्तित्व के संकट का सामना कर रहे हैं। वहीं, त्रिपुरा में भी हालात खराब हैं, जहां आदिवासी किसानों के लिए रबर आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।</p>
<p>किसान सभा का कहना है कि हाल ही में प्राकृतिक रबर की कीमतों में भारी गिरावट आई है। केरल की कोट्टायम रबर मंडी में 9 अगस्त को प्राकृतिक रबर की कीमत 247 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो 24 अक्टूबर को गिरकर 184 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। कोट्टायम मंडी को देश भर में प्राकृतिक रबर के लिए जाना जाता है। यहां मिल रही कीमतों के आधार पर ही देशभर में रबर की कीमतें तय होती हैं। &nbsp;</p>
<p>किसान सभा का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक रबर की कीमत (बैंकॉक, थाईलैंड) घरेलू बाजार से लगभग 30 रुपये प्रति किलोग्राम अधिक है। जब घरेलू बाजार में रबर की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों से अधिक होती हैं, तो टायर निर्माता सरकार पर रबर के ड्यूटी-मुक्त आयात का दबाव बनाते हैं, जिससे टायर उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद मिलती है।</p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="81d5fb3e-db29-4084-875a-bb3c19d2e5d1" dir="auto" class="min-h-8 text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5" data-message-model-slug="gpt-4o-mini">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>किसान सभा के अनुसार, कुछ महीनों पहले जब रबर की घरेलू कीमतें थोड़ी ज्यादा थीं, तब टायर निर्माताओं ने यही तरीका अपनाया था। अप्रैल से सितंबर के बीच, आयात में 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो पिछले साल के 2.54 लाख टन से बढ़कर इस साल 3.10 लाख टन हो गया। किसान सभा का कहना है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में रबर की कीमतें घरेलू बाजार से ज्यादा होती हैं, तो सरकार किसानों को अच्छी कीमत दिलाने के लिए रबर के निर्यात के लिए कोई कदम नहीं उठाता। किसान सभा ने केंद्र सरकार से तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि रबर के लिए उचित मूल्य तंत्र लागू किया जाना चाहिए, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल सकें।</p>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान सभा ने टायर निर्माताओं पर लगाया रबर की कीमतें कंट्रोल करने का आरोप ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_671f8883d468d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा से ज्यादा यूपी और एमपी में पराली जलाने की घटनाएं, पंजाब में भी घटी खेतों की आग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/incidents-of-stubble-burning-are-more-in-up-and-mp-than-in-haryana-lesser-farm-fires-in-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Oct 2024 16:38:14 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/incidents-of-stubble-burning-are-more-in-up-and-mp-than-in-haryana-lesser-farm-fires-in-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल धान कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने की घटनाएं हरियाणा से ज्यादा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में हो रही हैं। खेतों में आग की सेटेलाइट से निगरानी में यह तथ्य सामने आया है।</p>
<p><strong>भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई)</strong> द्वारा सेटेलाइट रिमोट सेंसिंग निगरानी से प्राप्त <a href="https://creams.iari.res.in/"><strong>आंकड़ों</strong> </a>के अनुसार, इस साल 15 सितंबर से 25 अक्टूबर के बीच उत्तर प्रदेश में पराली की आग की 849 और मध्य प्रदेश में 869 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि हरियाणा में इस दौरान 689 घटनाएं हुई हैं। इस दौरान पंजाब में खेतों की आग के सबसे ज्यादा 1749 मामले सामने आए हैं। जबकि राजस्थान में 442 और दिल्ली में 11 घटनाएं हुईं।&nbsp;</p>
<table width="367" style="height: 160px;">
<tbody>
<tr style="height: 20px;">
<td colspan="6" style="text-align: center; height: 20px; width: 363.4px;"><strong>15 सितंबर से 25 अक्टूबर के बीच पराली की आग के मामले&nbsp;</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 90.9625px; text-align: center;"><strong>राज्य&nbsp;</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;"><strong>2024</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;"><strong>2023</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;"><strong>2022</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;"><strong>2021</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 61.2875px; text-align: center;"><strong>2020</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 90.9625px; text-align: center;">पंजाब</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">1749</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">2704</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">5798</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">6134</td>
<td style="height: 20px; width: 61.2875px; text-align: center;">16221</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 90.9625px; text-align: center;">हरियाणा&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">689</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">871</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">1372</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">1835</td>
<td style="height: 20px; width: 61.2875px; text-align: center;">1772</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 90.9625px; text-align: center;">उत्तर प्रदेश</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">849</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">628</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">561</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">671</td>
<td style="height: 20px; width: 61.2875px; text-align: center;">783</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 90.9625px; text-align: center;">मध्यप्रदेश&nbsp;</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">869</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">1261</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">210</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">291</td>
<td style="height: 20px; width: 61.2875px; text-align: center;">1323</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 90.9625px; text-align: center;">राजस्थान</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">442</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">557</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">102</td>
<td style="height: 20px; width: 49.2875px; text-align: center;">58</td>
<td style="height: 20px; width: 61.2875px; text-align: center;">452</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td colspan="6" style="height: 20px; width: 363.4px; text-align: center;"><em>स्रोत: https://creams.iari.res.in&nbsp;</em></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><strong>पराली क्यों जलाते हैं किसान?</strong></p>
<p>रबी सीजन में गेहूं की बुवाई से पहले किसान खेत साफ करने के लिए धान की पराली को आग लगा देते हैं। किसानों को अगली फसल के लिए केवल 15 दिन का समय मिलता है। साथ ही धान की पराई को आसानी से मिट्टी में मिलना संभव नहीं होता। इसलिए किसान पराली जलाकर खेत खाली करने पर जोर देते हैं। लेकिन इससे होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने पर काफी सख्ती की जा रही है। पराली जलाने वाले किसानों पर केस दर्ज हो रहे हैं और सरकारी रिकॉर्ड में रेड एंट्री की जा रही है। हरियाणा में पराली जलाने के आरोप में कई किसानों की गिरफ्तारी हुई।&nbsp;</p>
<p><strong>यूपी और एमपी में बढ़ी पराली जलाने की घटनाएं</strong></p>
<p>सर्दियों की शुरुआत में दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के लिए अक्सर हरियाणा और पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराया जाता है। पराली की आग को लेकर पूरा फोकस हरियाणा और पंजाब के किसानों पर रहता है। जबकि आईएआरआई के आंकड़े बताते हैं कि खेतों में आग के मामले उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में काफी बढ़े हैं। दो साल पहले वर्ष 2022 में 15 सितंबर से 25 अक्टूबर तक उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में पराली जलाने के 561 और 210 मामले सामने आए थे, जो इस साल&nbsp; क्रमश: 849 और 869 तक पहुंच गये हैं। जबकि पिछले दो वर्षों में हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं 1372 से घटकर 689 रह गई हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>हरियाणा-पंजाब में घटे खेतों की आग के मामले</strong></p>
<p>गत वर्षों में पंजाब में भी पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है, हालांकि अब भी पराली की आग के सबसे ज्यादा मामले पंजाब में हैं। साल 2022 में 15 सितंबर से 25 अक्टूबर तक पंजाब में पराली जलाने की 5,798 घटनाएं दर्ज की गई थीं जो 2023 में घटकर 2,704 और 2024 में 1,749 रह गईं।</p>
<p>पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाली संस्था <strong>क्लाइमेट ट्रेंड्स</strong> की <strong><a href="https://climatetrends.in/publications/air-quality-66c34fa68f4fb">रिपोर्ट</a></strong> के मुताबिक, वर्ष 2019 से 2023 के बीच हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है। हरियाणा पूरे साल में आग की घटनाओं की संख्या 2019 में 14,122 से घटकर 2023 में 7,959 रह गईं। इसी तरह, पंजाब में आग की घटनाएं 2020 में 95,048 तक पहुंच गई थीं जो 2023 में घटकर 52,722 रही थीं। रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब और हरियाणा में खेतों की आग में कमी आने के बावजूद दिल्ली की हवा पर इनका असर अब भी पड़ रहा है, क्योंकि ऐसी अधिकांश घटनाएं सितंबर से दिसंबर के बीच होती हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_671ce35406c14.jpg" alt="" /></p>
<p><em>स्रोत: https://climatetrends.in</em></p>
<p>क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिसर्च लीड <strong>डॉ. पलक बालियान</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए सिर्फ पराली की आग ही एकमात्र कारण नहीं है। यह वायु प्रदूषण के कई कारणों में से एक है। लेकिन धान की कटाई के बाद, तापमान घटने के साथ पराली की आग के चलते दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है। हाल के वर्षों में हरियाणा और पंजाब में पराली की आग के मामलों में कमी आई है, जो दर्शाता है कि किसान पराली प्रबंधन को लेकर जागरूक हुए हैं। डॉ. पलक बालियान का मानना है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए अन्य कारकों जैसे वाहनों का प्रदूषण और कंस्ट्रक्शन की धूल आदि की रोकथाम पर भी ध्यान देने की जरूरत है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>एकीकृत प्रयास जरूरी</strong></p>
<p>फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर शनिवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चार राज्यों हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश व दिल्ली के कृषि मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की।</p>
<p>पंजाब के कृषि मंत्री <strong>गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong> का कहना है कि पराली जलाने की घटनाओं में कमी पंजाब सरकार और किसानों के ठोस प्रयासों का प्रमाण है। हरियाणा के कृषि मंत्री <strong>श्याम सिंह राणा</strong> ने पराली जलाने की घटनाओं में कमी का श्रेय किसानों को जागरूक करने, पराली प्रबंधन हेतु प्रोत्साहन और सब्सिडी पर कृषि यंत्र उपलब्ध करवाने जैसे प्रयासों को दिया।&nbsp;</p>
<p>भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के एक वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि पराली प्रबंधन के बारे में किसानों की जागरूकता और सहभागिता बढ़ रही है। पराली को मिट्टी में मिलाने के लिए उपयुक्त कृषि मशीनरी, पराली प्रबंधन और वैकल्पिक उपयोग बढ़ने के साथ पराली जलाने की घटनाओं में कमी आ रही है। इस मामले में समन्वित प्रयास और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_671cdc04a431e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा से ज्यादा यूपी और एमपी में पराली जलाने की घटनाएं, पंजाब में भी घटी खेतों की आग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_671cdc04a431e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पोल्ट्री उद्योग का राजस्व इस वर्ष 10 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान: केयर रिपोर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/poultry-industry-revenue-expected-to-increase-by-10-percent-in-fy-2025-says-care-edge-ratings-report.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Oct 2024 13:01:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/poultry-industry-revenue-expected-to-increase-by-10-percent-in-fy-2025-says-care-edge-ratings-report.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय पोल्ट्री उद्योग के राजस्व में मौजूदा वित्त वर्ष में 8-10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। रेटिंग एजेंसी केयर एज की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में घरेलू पोल्ट्री उद्योग के ऑपरेटिंग प्रॉफिट (परिचालन लाभ) मार्जिन में 180-220 आधार अंक यानी 1.8 से 2.2 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। एजेंसी का अनुमान है कि अगला साल भी पोल्ट्री उद्योग के लिए अच्छा रहेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>उत्पादन और मांग में तेजी</strong></p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, 2024 तक भारत ने अंडे और ब्रॉयलर मीट के उत्पादन में महत्वपूर्ण प्रगति की है। हर साल 140 अरब से अधिक अंडे और करीब 45 लाख टन चिकन मीट का उत्पादन हो रहा है। शहरीकरण और बढ़ती आय के कारण अंडे और चिकन की मांग तेजी से बढ़ी है, जिससे यह उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है। उद्योग को इनपुट लागत में स्थिरता, बेहतर फ़ीड प्रबंधन और सरकारी सहायता से भी मजबूती मिल रही है। इसके अलावा, त्योहारों और सर्दी के मौसम में मांस और अंडों की मांग बढ़ने से भी उद्योग को फायदा होगा।&nbsp;</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले एक दशक में भारत में अंडे और मीट का उत्पादन लगातार बढ़ा है और देश की प्रोटीन जरूरतें पूरी करने में यह उद्योग अहम भूमिका निभा रहा है। खाद्य क्षेत्र में मांस, मछली और समुद्री भोजन की अच्छी मांग रहती है। ये कुल प्रोटीन की मांग का करीब 31-34 फीसदी पूरा करते हैं। आने वाले वर्षों में अंडे के उत्पादन में 7-8 फीसदी और मीट उत्पादन में 5-6 फीसदी वृद्धि का अनुमान है।</p>
<p>कोविड-19 के दौरान वर्ष 2020 में पोल्ट्री उद्योग को भारी नुकसान हुआ था, जिससे आय और राजस्व घट गया था। इसके बाद 2022 में प्रमुख पोल्ट्री कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी हुई, लेकिन 2023 और 2024 में मक्का और सोयाबीन की कीमतें बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ गई। मक्का और सोयाबीन पोल्ट्री फीड के मुख्य घटक हैं, और आपूर्ति में समस्याओं की वजह से इनकी कीमतें बढ़ी थीं। हालांकि, 2024 में बेहतर फसल और सरकारी मदद से इनकी कीमतें अब स्थिर हैं।</p>
<p><strong>उद्योग की प्रमुख चुनौतियां&nbsp;</strong></p>
<p><strong>इनपुट लागत में उतार-चढ़ाव:</strong> पोल्ट्री उद्योग फीड के लिए मक्का और सोयाबीन पर निर्भर करता है, जो कुल फीड लागत का लगभग 65-70 फीसदी होता है। वित्त वर्ष 2024 में फीड की कीमतें स्थिर होने से उद्योग के मुनाफे में सुधार हुआ। बड़ी कंपनियां बेहतर ब्रीड और फीड कन्वर्जन रेशियो (एफसीआर) पर ध्यान देकर इस चुनौती से निपटने का प्रयास कर रही हैं।</p>
<p><strong>बीमारियों का असर:</strong> विशेषकर एवियन इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारियां उद्योग के मुनाफे को प्रभावित करती हैं। बीमारियों से बिक्री घटती है और सुरक्षा उपायों पर खर्च बढ़ता है। उद्योग की प्रमुख कंपनियां वैक्सीन और रोग प्रतिरोधी ब्रीड विकसित करने की कोशिश कर रही हैं।</p>
<p><strong>फीड कन्वर्जन रेशियो (एफसीआर):</strong> FCR पोल्ट्री उद्योग में मुनाफे के लिए अहम है। बेहतर ब्रीड और फीड गुणवत्ता में सुधार से एफसीआर को बेहतर किया जा सकता है, जिससे अधिक मुनाफा हासिल होता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_658bd11da4043.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पोल्ट्री उद्योग का राजस्व इस वर्ष 10 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान: केयर रिपोर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_658bd11da4043.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज उत्पादक राज्यों में भारी बारिश से फसल को नुकसान, कटाई में देरी से कीमतों में उछाल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/heavy-rains-in-onion-producing-states-cause-crop-damage-delay-in-harvesting-leads-to-rise-in-prices.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 24 Oct 2024 13:26:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/heavy-rains-in-onion-producing-states-cause-crop-damage-delay-in-harvesting-leads-to-rise-in-prices.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दिवाली से पहले प्याज की कीमतों में उछाल देखने को मिला है। महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के प्याज उत्पादक राज्यों में भारी बारिश के कारण प्याज की फसल को नुकसान पहुंचा है। इससे देश के खुदरा बाजारों में प्याज की कीमतें 10 से 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गई हैं। पिछले हफ्ते तक 50 से 60 रुपये प्रति किलो बिकने वाला प्याज अब 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।</p>
<p>महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के प्याज उत्पादक क्षेत्रों में खरीफ प्याज की जल्दी में बोई गई अगेती फसल को अधिक नुकसान पहुंचा है। साथ ही प्याज की गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है। बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया है, जिससे खरीफ प्याज की कटाई में 10 से 15 दिन की देरी हो सकती है। ऐसे में अगले हफ्ते दिवाली तक प्याज की कीमतें ऊपर बनी रहेंगी। हालांकि, प्याज व्यापारियों का कहना है कि नवंबर के दूसरे हफ्ते तक मंडियों में प्याज की आवक तेज हो जाएगी, जिससे कीमतों में कुछ राहत मिलने के आसार हैं।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग के अनुसार, देश भर में प्याज की औसत खुदरा कीमत 54.64 रुपये प्रति किलो बनी हुई है जबकि प्याज का अधिकतम भाव 90 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं, नासिक की लासलगांव मंडी में प्याज का थोक मूल्य पिछले लगभग एक महीने से 45 से 50 रुपये प्रति किलो पर स्थिर बना हुआ है।</p>
<p>भारतीय सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष और महाराष्ट्र की नासिक मंडी के बड़े व्यापारी <strong>श्रीराम <span>गावंडे&nbsp;</span></strong>ने रूरल वॉयस को बताया कि भारी बारिश के कारण महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कई क्षेत्रों में प्याज की फसल को नुकसान हुआ है। कई जगह प्याज की अगेती फसल की कटाई चल रही है, लेकिन बारिश के कारण इसमें थोड़ी देरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि नवंबर के दूसरे हफ्ते तक महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज की आवक बढ़ जाएगी, जिससे कीमतों में नरमी आ सकती है। &nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष <strong>भारत दिघोले</strong> ने रूरल वॉयस को बताया कि फिलहाल किसानों के लिए प्याज की कीमतें ठीक बनी हुई हैं और किसानों को 45 से 50 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बीते हफ्ते हुई बारिश के चलते महाराष्ट्र के मुकाबले, दक्षिण भारत के राज्यों में प्याज की फसल को अधिक नुकसान हुआ है, क्योंकि वहां कटाई शुरू हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि इस सीजन प्याज की अच्छी बुवाई हुई है, जिससे अच्छे उत्पादन की उम्मीद है।&nbsp;</p>
<p>वहीं, प्याज की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार इन दिनों देश में रियायती दरों पर प्याज की बिक्री करवा रही है। उपभोक्ताओं को सरकारी एजेंसियों भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नेफेड) के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलो की दर पर प्याज उपलब्ध कराया जा रहा है। शुरुआत में सिर्फ दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में रियायती दर पर प्याज की बिक्री शुरू हुई थी, लेकिन अब सरकार ने अन्य राज्यों में भी कम दाम वाले प्याज की बिक्री शुरू कर दी है।&nbsp;</p>
<p>सरकार ने एनसीसीएफ और नेफेड के जरिए मूल्य स्थिरीकरण बफर के लिए रबी सीजन में 4.7 लाख टन प्याज खरीदा था। सरकार ने 5 सितंबर, 2024 से बफर से प्याज की बिक्री शुरू की थी, और अब तक 1.15 लाख टन प्याज बेचा जा चुका है। एनसीसीएफ 21 राज्यों में 77 केंद्रों पर और नेफेड 16 राज्यों में 43 केंद्रों पर रियायती दर वाले प्याज की बिक्री कर रहा है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_6719f6ff15a11.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज उत्पादक राज्यों में भारी बारिश से फसल को नुकसान, कटाई में देरी से कीमतों में उछाल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_6719f6ff15a11.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बजरंग पूनिया ने किसान कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष का पदभार संभाला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/bajrang-punia-took-over-as-the-working-president-of-kisan-congress.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 23 Oct 2024 11:54:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/bajrang-punia-took-over-as-the-working-president-of-kisan-congress.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पहलवान बजरंग पूनिया ने मंगलवार को किसान कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर अपना पदभार ग्रहण किया। नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में उनके पदभार ग्रहण करने के अवसर पर किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखपाल सिंह खैरा, कांग्रेस महासचिव कुमारी सैलजा, पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह, विधायक विनेश फोगाट और किसान कांग्रेस के उपाध्यक्ष अखिलेश शुक्ला व अनंत दहिया मौजूद रहे। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा कार्यक्रम में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा की गैर-मौजूदगी की हो रही है। क्योंकि पहलवानों के आंदोलन को समर्थन देने से लेकर विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया को कांग्रेस ज्वाइन कराने में हुड्डा परिवार की अहम भूमिका रही। &nbsp;</p>
<p>कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बजरंग पूनिया ने कहा कि वह किसानों के मुद्दों को जोर-शोर से उठाएंगे और किसानों के साथ गलत नहीं होने देंगे। किसान आंदोलन और अग्निवीर आंदोलन में उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है। हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले सितंबर में बजरंग पूनिया को किसान कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन उसके बाद वह विधानसभा चुनाव में व्यस्त हो गये थे। हुड्डा परिवार की गैर-मौजूदगी के सवाल पर उन्होंने कहा कि हुड्डा हमारे सीनियर नेता हैं और हम उनके साथ मिलकर काम करते करेंगे।</p>
<p>बजरंग पूनिया को बधाई देते हुए कांग्रेस महासचिव कुमारी सैलजा ने कहा कि अब बजरंग पुनिया कांग्रेस पार्टी में नई भूमिका अदा करेंगे और देश के किसान और खेत मजदूरों की आवाज को बुलंद करेंगे। सैलजा ने भाजपा सरकार पर किसानों और खेतिहर मजदूरों की अनदेखी और उनके हितों के प्रति उदासीन होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हरियाणा और पंजाब में अनाज मंडियों में अव्यवस्था है, किसान परेशान हैं और फसलें नहीं बिक रही हैं, वहीं किसान खाद के लिए संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<p>इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि आज देश में राजनीतिक तौर पर किसानों की लड़ाई लड़ने की जरूरत है। इसके लिए किसानों को कांग्रेस के झंडे के नीचे इकट्ठा करना होगा। अनेक यूनियनों में बंटे किसान एक साथ आकर राजनीतिक तौर पर लड़ाई लड़ेंगे, तब ही किसानों को देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था में हिस्सा मिल पाएगा।&nbsp;</p>
<p>किसान कांग्रेस के अध्यक्ष सुखपाल सिंह खैरा ने बजरंग पूनिया को पदभार संभालने पर बधाई देते हुए कहा कि पूनिया हरियाणा के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों में किसान और खेत मजदूर के मुद्दे उठाकर पार्टी के आधार को मजबूत करेंगे।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_67188f55e5123.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बजरंग पूनिया ने किसान कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष का पदभार संभाला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कपास उत्पादन 7 फीसदी घटकर 302 लाख गांठ रहने का अनुमानः सीएआई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cotton-production-is-estimated-to-fall-by-7-percent-to-302-lakh-bales-due-decline-in-acreage.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 22 Oct 2024 19:05:09 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cotton-production-is-estimated-to-fall-by-7-percent-to-302-lakh-bales-due-decline-in-acreage.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कपास उत्पादक क्षेत्रों में अधिक बारिश और कपास के रकबे के गिरावट के चलते चालू कपास सीजन (2024-25) में उत्पादन करीब 23.04 लाख गांठ (एक गांठ में 170 किलो) घटने का अनुमान है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के ताजा अनुमान के मुताबिक, अधिकांश क्षेत्रों में कम पैदावार के कारण 2024-25 (अक्टूबर-सितंबर) सीजन में कपास का उत्पादन 7.08 फीसदी घटकर 302.25 लाख गांठ रहने का अनुमान है। 2022-23 सीजन में कुल कपास उत्पादन 325.29 लाख गांठ रहा था। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, खरीफ सीजन 2024-25 में कपास की बुवाई 112.76 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई, जबकि पिछले साल कपास का क्षेत्र 123.71 लाख हेक्टेयर था।&nbsp;</p>
<p>सीएआई के मुताबिक, देश के विभिन्न संघों और व्यापार स्रोतों द्वारा प्रस्तुत फसल रिपोर्ट में बताया गया है कि कई कपास उत्पादक राज्यों में ज्यादा बारिश के कारण फसल को नुकसान हुआ है। साथ ही केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने कपास के तहत रकबे में पिछले वर्ष की तुलना में 10 फीसदी की कमी की सूचना दी है।&nbsp;कुल मिलाकर, सीएआई ने चालू सीजन के लिए 170 किलोग्राम प्रत्येक की 23.04 लाख गांठों की कमी का अनुमान लगाया है। इसमें उत्तरी क्षेत्र में 9.62 लाख गांठ, मध्य क्षेत्र में 11.05 लाख गांठ और दक्षिण क्षेत्र में 1.85 लाख गांठ घटने का अनुमान है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_6717b1f5271b7.jpg" alt="" width="643" height="654" /></p>
<p>सीएआई ने अनुमान लगाया है कि कपास सीजन 2024-25 के अंत तक (30 सितंबर, 2025 तक) कुल कपास आपूर्ति 345 लाख गांठ रहेगी, जबकि पिछले साल यह 371.69 लाख गांठ थी। सीएआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 1 अक्टूबर, 2024 को कपास सीजन 30.19 लाख गांठ के शुरुआती स्टॉक से शुरू हुआ, जो पिछले साल 28.90 लाख गांठ था।&nbsp;</p>
<p>कपास सीजन 2024-25 के अंत तक 25 लाख गांठ आयात होने की उम्मीद है, जो पिछले साल के 17.50 लाख गांठ से ज्यादा है। यानी इस बार 7.50 लाख गांठ ज्यादा आयात हो सकता है। वहीं, चालू सीजन में कपास का निर्यात 18 लाख गांठ होने की संभावना है, जो कपास सीजन 2023-24 में 28.50 लाख गांठ था। सीजन के अंत तक क्लोजिंग स्टॉक 26.44 लाख गांठ रहने का अनुमान है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कपास उत्पादन 7 फीसदी घटकर 302 लाख गांठ रहने का अनुमानः सीएआई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[धान खरीद में दिक्कतों के लिए एसकेएम ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/skm-blamed-the-central-government-for-problems-in-paddy-procurement.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 22 Oct 2024 18:34:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/skm-blamed-the-central-government-for-problems-in-paddy-procurement.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब और हरियाणा में धान की धीमी खरीद और उठान में देरी के कारण किसानों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने पंजाब और हरियाणा में धान खरीद में आई कमी के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार और उसकी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही हरियाणा और पंजाब की राज्य सरकारों पर भी समय रहते केंद्र पर दबाव बनाने में विफल रहने का आरोप लगाया।</p>
<p>एसकेएम का आरोप है कि धान खरीद का संकट कॉरपोरेट समर्थक केंद्रीय बजट से उपजा है। जिसका उद्देश्य एक ही झटके में पीडीएस और एमएसपी को खत्म करना है। एसकेएम ने एक बयान जारी कर पिछले सीजन का धान गोदामों और चावल मिलों से उठाने में एफसीआई की नाकामी का मुद्दा उठाया। इसके चलते पंजाब और हरियाणा में धान खरीद की भयावह स्थिति पैदा हुई।</p>
<p>एसकेएम ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2022-23 और 2023-24 में खाद्य और उर्वरक सब्सिडी में कटौती की है और 2024-25 में भी इसे जारी रखा है, जिससे खाद्य सब्सिडी में 67552 करोड़ रुपये और उर्वरक सब्सिडी में 87339 करोड़ रुपये की भारी कटौती हो गई है।</p>
<p>एसकेएम का कहना है कि भाजपा शासित राज्य खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के नियमों में बदलाव कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) की योजना से जोड़ रहे हैं, जिसके तहत सुनियोजित रूप से लाभार्थियों को अनाज देने के बजाए उनके बैंक खातों में नकद हस्तांतरण की योजना को लागू किया जा रहा है। महाराष्ट्र में राज्य सरकार ने 32 लाख राशन कार्डों को नकद हस्तांतरण में बदल दिया है और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से चावल और अनाज उठाना बंद कर दिया है।&nbsp;</p>
<p>एसकेएम ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) को खत्म कर दिया है, जिसके कारण सार्वजनिक क्षेत्र में भंडारण सुविधाओं में बड़े पैमाने पर कमी आई है। एफसीआई ने भी अपनी भंडारण सुविधाओं को बड़ी कंपनियों को किराए पर दे दिया है। इन कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के कारण एफसीआई ने चालू सीजन में धान खरीद के लिए आवश्यक क्षमता का प्रबंधन नहीं किया।&nbsp;</p>
<p>एसकेएम ने पंजाब की भगवंत मान सरकार और हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार की भी आलोचना करते हुए कहा कि वे गोदामों और चावल मिलों से धान का स्टॉक समय पर उठाने, वर्तमान संकट से बचने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने में विफल रहे हैं।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ धान खरीद में दिक्कतों के लिए एसकेएम ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इस साल क्यों हुई डीएपी की किल्लत?  पूरे रबी सीजन संकट बने रहने के आसार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/why-was-there-a-shortage-of-dap-this-year-challenge-of-rabi-sowing-increased.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 22 Oct 2024 16:14:38 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/why-was-there-a-shortage-of-dap-this-year-challenge-of-rabi-sowing-increased.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रबी सीजन की बुवाई शुरू होने के साथ ही प्रमुख उर्वरक <strong>डाईअमोनियम फास्फेट (डीएपी)</strong> की किल्लत ने किसानों की नींद उठा दी है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब और यूपी समेत कई राज्यों में डीएपी के लिए किसान लाइनों में लगने को मजबूर हैं, फिर भी जरूरत के मुताबिक डीएपी नहीं मिल पा रहा है। रबी सीजन में गेहूं, सरसों, चना और आलू की बुवाई के लिए किसानों को डीएपी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। कई जगह तो डीएपी के लिए मारामारी की स्थिति पैदा हो गई है और किसान धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।</p>
<p>उर्वरक के रूप में यूरिया के बाद देश में सबसे अधिक खपत डीएपी की होती है। डीएपी का प्रयोग मुख्यत: फसल की बुवाई के समय किया जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल सितंबर में डीएपी की <strong>बिक्री</strong> पिछले साल के 15.7 लाख टन के मुकाबले 51 फीसदी घटकर 7.76 लाख टन रह गई है। जबकि इस साल अच्छे मानसून के कारण उर्वरकों की मांग बढ़ी है। इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीएपी के बढ़ते दाम, उर्वरक सब्सिडी को लेकर अनिश्चितता और डीएपी के आयात में आई कमी मुख्य वजह हैं।</p>
<p>असल में डीएपी का मौजूदा संकट खरीफ सीजन के दौरान ही शुरू हो गया था जो अब सामने दिख रहा है। इस साल खरीफ सीजन में अनुमानित आवश्यकता के मुकाबले डीएपी की बिक्री में काफी गिरावट दर्ज की गई थी।&nbsp;</p>
<p><strong>क्रॉप वेदर वाच रिपोर्ट</strong> के अनुसार, खरीफ सीजन (अप्रैल-सितंबर) 2024 में डीएपी की कुल अनुमानित आवश्यकता 59.87 लाख टन आंकी गई थी। लेकिन 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक देश में 46.12 लाख टन डीएपी की बिक्री हुई जो खरीफ सीजन 2023 में हुई 63.95 लाख टन डीएपी बिक्री के मुकाबले करीब 28 फीसदी कम है। जबकि इस सीजन में खरीफ की बुवाई लगभग दो फीसदी बढ़ी है। बुवाई का रकबा बढ़ने के बावजूद डीएपी की बिक्री में आई गिरावट खरीफ सीजन में डीएपी की कमी को दर्शाता है। जबकि इस दौरान यूरिया, एनपीके और एमओपी उर्वरकों की बिक्री बढ़ी है।</p>
<p>खरीफ सीजन से आगे बढ़ते हुए अब रबी सीजन में डीएपी संकट गंभीर रूप ले रहा है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अप्रैल में डीएपी की <strong>कीमत</strong> 430 डॉलर प्रति टन के आसपास थी जो सितंबर में बढ़कर 630-640 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई। वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते उर्वरक कंपनियों ने डीएपी का कम आयात किया।</p>
<p>इस साल अप्रैल से अगस्त 2024 तक भारत में 15.9 लाख टन डीएपी का <strong>आयात</strong> हुआ, जो पिछले साल इसी अवधि में हुए 32.5 लाख टन डीएपी आयात से 51 फीसदी कम है। पिछले दिनों चीन की सरकार ने डीएपी के निर्यात पर सितंबर के अंत तक रोक लगा दी थी। इन कारण भी डीएपी की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी हुई। भारत चीन से हर साल लगभग 15 से 20 लाख टन डीएपी का आयात करता है। भारत में सालाना करीब 110 लाख टन डीएपी की खपत होती है जिसमें से लगभग 70 लाख टन का आयात होता है। &nbsp;</p>
<p>डीएपी का आयात घटने के पीछे उर्वरक <strong>सब्सिडी</strong> में हुई कम बढ़ोतरी भी एक बड़ी वजह है। सरकार द्वारा किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए उर्वरक कंपनियों को सब्सिडी दी जाती है। लेकिन न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत सरकार द्वारा तय दरों पर डीएपी का आयात उर्वरक कंपनियों के लिए घाटे का सौदा बन गया है।</p>
<p>इस साल रबी सीजन के लिए केंद्र सरकार ने 18 सितंबर को डीएपी और अन्य कॉम्पलेक्स उर्वरकों (पी एंड के) पर 24,475 करोड़ रुपये की सब्सिडी को मंजूरी दी थी। लेकिन पिछले खरीफ सीजन के मुकाबले सरकार ने डीएपी पर सब्सिडी में कोई खास बढ़ोतरी नहीं है, जिससे उर्वरक कंपनियों डीएपी आयात को लेकर हतोत्साहित हो रही हैं।&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार की ओर से 20 सितंबर को जारी <strong>अधिसूचना</strong> के अनुसार, चालू रबी सीजन के लिए 21,911 रुपये प्रति टन तय की गई है। यह दर 1 अक्तूबर, 2024 से 31 मार्च, 2025 तक के लिए हैं। इस सब्सिडी के बावजूद उर्वरक कंपनियों को डीएपी की बिक्री पर प्रति टन करीब सात हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, खरीफ सीजन (1 अप्रैल, 2024 से 30 सितंबर, 2024) में डीएपी पर सब्सिडी की दर 21,676 रुपये प्रति टन थी। उद्योग सूत्रों का कहना है कि हमें उम्मीद थी कि सरकार सब्सिडी में अधिक बढ़ोतरी करेगी, लेकिन सरकार ने मामूली ही बढ़ोतरी की है।&nbsp;</p>
<p>उद्योग सूत्रों का कहना है कि कंपनियों और सरकार की कोशिश है कि फिलहाल लिक्विड और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की खपत बढ़ाकर डीएपी पर निर्भरता कम की जाए। इसके लिए किसानों को डीएपी की बजाय वैकल्पिक उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। क्योंकि रबी सीजन में डीएपी की किल्लत बनी रहने की आशंका है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इस साल क्यों हुई डीएपी की किल्लत?  पूरे रबी सीजन संकट बने रहने के आसार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इजरायल&amp;#45;हमास युद्ध  के चलते ईरान को भारतीय बासमती निर्यात में गिरावट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/israel-hamas-conflict-is-affecting-indian-basmati-export-to-iran.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 22 Oct 2024 15:05:41 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/israel-hamas-conflict-is-affecting-indian-basmati-export-to-iran.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य पूर्व में इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध का भारतीय बासमती निर्यात पर असर पड़ने लगा है। वहीं इजरायल और ईरान के बीच बढ़ रहे तनाव के कारण भारतीय बासमती एक्सपोर्ट पर अधिक असर पड़ा है। सउदी अरब के बाद ईरान भारतीय बासमती चावल का दूसरा बड़ा आयातक है। भारत से निर्यात होने वाले बासमती चावल का लगभग 25 फीसदी हिस्सा हर साल ईरान को होता है, लेकिन मौजूदा संघर्ष की वजह से इस निर्यात में बड़ी कमी आई है।</p>
<p>कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल भारत से ईरान को 9.98 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया गया था जबकि इस साल अप्रैल से अगस्त तक 3.98 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया गया है।&nbsp;</p>
<p>इस स्थिति के चलते बासमती निर्यातकों और राइस मिलर्स ने बासमती धान की खरीद कम कर दी है जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है।&nbsp;हरियाणा और पंजाब की मंडियों में बासमती धान की 1509 किस्म की कीमतें 2800 से 3200 रुपये प्रति क्विटंल के बीच हैं, जबकि पिछले साल इस समय तक इसका दाम 3500 से 3800 रुपये प्रति क्विंटल था। अंतराष्ट्रीय बाजार में भी बासमती चावल की कीमतों में कमी आई है। निर्यातकों के मुताबिक 1509 बासमती चावल की कीमत लगभग 880 डॉलर प्रति टन है, जो पिछले साल से लगभग 15 फीसदी कम है। पिछले साल इस समय तक अंतराष्ट्रीय बाजार में 1509 बासमती चावल का भाव 1000 डॉलर प्रति टन से ऊपर था। बासमती निर्यातकों का तर्क है कि ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते बासमती एक्सपोर्ट पर असर पड़ रहा है, जिससे इसकी कीमतों में गिरावट आई है।&nbsp;</p>
<p>बासमती चावल निर्यातकों का कहना है कि ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण बीमा कंपनियों ने ईरान को निर्यात पर बीमा देना भी बंद कर दिया है, जिससे व्यापार में और रुकावट आ रही है। बीमा सुरक्षा के बिना निर्यातकों के लिए जोखिम बढ़ गया है, और वे निर्यात करने से हिचक रहे हैं।</p>
<p>ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील गोयल ने<strong> रूरल वॉयस</strong> को बताया कि ईरान-इजरायल संघर्ष से निर्यात पर असर तो पड़ा है,&nbsp;लेकिन केंद्र सरकार पिछले महीने न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) हटाए जाने के बाद बासमती धान की कीमतों में सुधार भी हुआ है। 1509 धान की कीमतें 500 से 700 रुपये तक बढ़ी हैं, जिससे किसानों को थोड़ी राहत मिली है। <span>उन्होंने कहा कि इजारयल और ईरान के बीच चल रहे तनाव के चलते मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में भी बासमती चावल की डिमांड पर असर पड़ सकता है, लेकिन उद्योग को उम्मीद है कि कुल मिलाकर आगे भी डिमांड बनी रहेगी।</span></p>
<p><span>हरियाणा राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील जैन ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण भारतीय बासमती चावल के निर्यात पर सीधा असर पड़ा है। इसके चलते बीमा कंपनियों ने ईरान को निर्यात पर बीमा देना बंद कर दिया है। जिससे बासमती के निर्यात में दिक्क्तें आ रही हैं।&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इजरायल-हमास युद्ध  के चलते ईरान को भारतीय बासमती निर्यात में गिरावट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिल्ली के अलावा इन राज्यों में भी 35 रुपये के रेट पर प्याज की बिक्री शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/onion-sale-started-in-up-bihar-jharkhand-west-bengal-at-the-rate-of-rs-35.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 21 Oct 2024 13:28:17 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/onion-sale-started-in-up-bihar-jharkhand-west-bengal-at-the-rate-of-rs-35.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के बाजारों में प्याज का औसत खुदरा भाव 50 से 60 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है, जिससे लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ गया है। प्याज की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार इन दिनों देश में रियायती दरों पर प्याज की बिक्री करवा रही है। उपभोक्ताओं को सरकारी एजेंसियों भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नेफेड) के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलो की दर पर प्याज उपलब्ध कराया जा रहा है। शुरुआत में सिर्फ दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में रियायती दर पर प्याज की बिक्री शुरू हुई थी, लेकिन अब सरकार ने यूपी, बिहार, झारखंड, बंगाल समेत देश के अन्य राज्यों में भी कम दाम वाले प्याज की बिक्री शुरू कर दी है।&nbsp;</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश में यहां हो रही प्याज की बिक्री&nbsp;</strong></p>
<p><strong>वाराणसी:</strong> शिवपुर, सिटी रेलवे स्टेशन, मलदहिया सिगरा, कचहरी बाजार।<br /><strong>लखनऊ:</strong> एनसीसीएफ कार्यालय, गोमती नगर, नवीन सब्जी मंडी स्थल, आशियाना, सरोजनी नगर, चारबाग, अलीगंज, विकास नगर, इंदिरा नगर। &nbsp;<br /><strong>प्रयागराज:</strong> ट्रांसपोर्ट नगर, झुसी, सिविल लाइन्स। &nbsp;<br /><strong>सीतापुर:</strong> सिधौली, महमूदाबाद। &nbsp;<br /><strong>रायबरेली:</strong> डिग्री कॉलेज, त्रिपुला, श्यामनाथ मंदिर। &nbsp;<br /><strong>अयोध्या:</strong> मिल्कपुर मोड़, कोशा बाजार। &nbsp;<br /><strong>बहराइच:</strong> कलक्ट्रेट, घंटा घर, लखनऊ बाईपास। &nbsp;</p>
<p><strong>बिहार में इन स्थानों पर मिलेगा प्याज&nbsp;</strong></p>
<p><strong>पटना:</strong> मीठापुर, बुद्ध मूर्ति, राजेंद्र नगर, कुमरार, आयकर, लाला रोड। &nbsp;<br /><strong>दरभंगा:</strong> नारी, महुआर दरभंगा, दिलाही।&nbsp;<br /><strong>मुजफ्फरपुर:</strong> कांटी, रामपुर हरि, एनएच 28 किसुनगर। &nbsp;<br /><strong>भोजपुर:</strong> डीएम कार्यालय, संस्कृति भवन, महिला कॉलेज।&nbsp;<br /><strong>बक्सर:</strong> बक्सर बस स्टैंड, ज्योति चौक, बक्सर गोलंबर।&nbsp;</p>
<p><strong>झारखंड और पश्चिम बंगाल में प्याज बिक्री के केंद्र&nbsp;</strong></p>
<p><strong>झारखंड (रांची):</strong> गांधीनगर क्लब, मोरहाबादी, बिरसा चौक, हटिया रेलवे कॉलोनी।<br /><strong>पश्चिम बंगाल (कोलकाता):</strong> अंदुल, शकरैल, दमदम, टॉलीगंज, मकुर।</p>
<p>सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य बाजार में प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना और स्थानीय आपूर्ति में सुधार करना है। फिलहाल, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्याज की कीमतें 60 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक पहुंच गई हैं। एनसीसीएफ ने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के किसानों से सीधे प्याज खरीदकर उसका बफर स्टॉक तैयार किया है। इसी बफर स्टॉक के जरिए देशभर में प्याज की आपूर्ति की जा रही है।&nbsp;</p>
<p>सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने और बिचौलियों द्वारा की जाने वाली अधिक कीमतों से राहत दिलाने के लिए प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है। इस पहल से न सिर्फ कीमतों पर लगाम लगेगी, बल्कि किसानों से सीधे खरीदी करके उपभोक्ताओं तक रियायती दर पर प्याज पहुंचाने में मदद मिलेगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66d9424eb36f5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिल्ली के अलावा इन राज्यों में भी 35 रुपये के रेट पर प्याज की बिक्री शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पेट्रोलियम कंपनियां 2024&amp;#45;25 में चीनी उद्योग से 391 करोड़ लीटर एथेनाल खरीदेंगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/petroleum-companies-to-procure-391-crore-liters-of-ethanol-from-sugar-industry-in-2024-25.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 20 Oct 2024 11:40:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/petroleum-companies-to-procure-391-crore-liters-of-ethanol-from-sugar-industry-in-2024-25.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पेट्रोल में एथेनॉल ब्लैंडिंग प्रोग्राम (ईबीपी) के लिए पेट्रोलियम कंपनियां एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (2024-25) में 971 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद करेंगी। इसमें से 391 करोड़ लीटर की खरीद चीनी उद्योग से की जाएगी, जिसमें गन्ने के जूस से सीधे बनने वाला एथेनॉल और बी हैवी मोलेसेज तथा सी हैवी मोलेसेज से बनने वाला एथेनॉल शामिल है। बाकी 574 करोड़ लीटर की आपूर्ति खाद्यान्न से बनने वाले एथेनॉल से होगी।</p>
<p>उद्योग सूत्रों के मुताबिक गन्ने के जूस बनने वाले एथेनॉल की मात्रा 233 करोड़ लीटर है। इसके अलावा बी हैवी मोलेसेज से बनने वाले एथेनॉल की मात्रा 147 करोड़ लीटर और सी-हैवी मोलेसेज से बनने वाले एथेनॉल की मात्रा 11 करोड़ लीटर तय की गई है।&nbsp;</p>
<p>सबसे अधिक एथेनॉल की आपूर्ति मक्का से बनने वाले एथेनॉल के लिए तय की गई है। इसके लिए 474 करोड़ लीटर की मात्रा तय की गई है। यह चीनी उद्योग द्वारा आपूर्ति किये जाने वाले एथेनॉल से अधिक है। वहीं डेमेज ग्रेन जिसमें मुख्य रूप से चावल होता है, उससे बनने वाले एथेनॉल की मात्रा 100 करोड़ लीटर तय की गई है। इस तरह से खाद्यान्न से बनने वाले एथेनॉल की कुल मात्रा 574 करोड़ लीटर रखी गई है।&nbsp;</p>
<p>उद्योग सूत्रों के मुताबिक सरकार चालू गन्ना पेराई सीजन (2024-25) में 40 से 45 लाख टन चीनी का उपयोग एथेनॉल के उत्पादन में करने की अनुमति दे सकती है।&nbsp;</p>
<p>मक्का के लिए जो लक्ष्य रखा गया है वह बहुत व्यावहारिक नहीं है। मक्का उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा पोल्ट्री फीड और पशुचारा में इस्तेमाल होता है। ऐसे में मक्का से अगर एथेनॉल के लिए तय लक्ष्य को पूरा किया जाता है तो मक्का आयात की स्थिति पैदा हो सकती है। पिछले साल, 2023-24 में देश में कुल 376.65 लाख टन मक्के का उत्पादन हुआ था। वहीं 2022-23 में उत्पादन 380.85 लाख टन और उसके पहले साल 2021-22 में 337.30 लाख टन रहा था।</p>
<p>पिछले दो साल में मक्का की कीमतों में सुधार हुआ है। इस साल अधिकांश समय मक्का की कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक रही और एथेनॉल उत्पादकों से मांग बढ़ने के चलते कीमतें 2800 रुपये प्रति क्विटंल तक पहुंच गईं। मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2023-24 में 2090 रुपये प्रति क्विंटल था। वर्ष 2024-25 के लिए इसे 135 रुपये बढ़ा कर 2225 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।</p>
<p>कीमतों में बढ़ोतरी के चलते पोल्ट्री उद्योग की मांग पर पशुपालन मंत्रालय की सचिव अल्का उपाध्याय ने 30 लाख टन मक्का आयात की सिफारिश कर दी थी। हालांकि यह आयात नहीं हुआ, लेकिन आने वाले दिनों में इस तरह की मांग दोबारा उठ सकती है। वैसे उद्योग सूत्रों का कहना है कि मक्का के लिए तय लक्ष्य व्यावहारिक नहीं है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पेट्रोलियम कंपनियां 2024-25 में चीनी उद्योग से 391 करोड़ लीटर एथेनाल खरीदेंगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वित्त वर्ष 2024&amp;#45;25 में 34.15 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य, पिछले वर्ष से 92 लाख टन ज्यादा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-sets-target-of-food-grain-production-of-3415-lakh-tonnes-in-the-financial-year-2024-25.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 19 Oct 2024 19:43:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-sets-target-of-food-grain-production-of-3415-lakh-tonnes-in-the-financial-year-2024-25.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 में 34.15 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि पिछले वर्ष खाद्यान्न उत्पादन 33.22 करोड़ टन रहा था। 2024-25 का लक्ष्य पिछले साल की तुलना में 92.6 लाख टन अधिक है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ने इंटर क्रॉपिंग के माध्यम से कृषि क्षेत्र का विस्तार करने और कम उपज वाले क्षेत्रों में उच्च उपज देने वाली फसलों को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। कृषि विभाग का फोकस उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने पर होगा।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में 'राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन- रबी अभियान 2024' का शुभारंभ करते हुए यह जानकारी दी। इस सम्मेलन में छह राज्यों के कृषि मंत्रियों और 31 राज्यों के कृषि से संबंधित प्रमुख अधिकारियों ने भाग लिया, जहां खाद्यान्न उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करने और कृषि से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।</p>
<p>कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताएं उत्पादन बढ़ाना, उत्पादन की लागत को कम करना, और उचित मूल्य प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि हम देश के खाद्यान्न भंडार भरें और आवश्यकता पड़ने पर भारत को पूरी दुनिया का फूड बास्केट बनाएं।</p>
<p>खाद्यान्न उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए रबी की फसलों जैसे सरसों, चना, मूंगफली, उड़द, मूंग, मसूर, मक्का और ज्वार के उत्पादन पर विशेष जोर दिया जाएगा। हाल ही में सरकार ने किसानों को 109 नई फसल किस्में प्रदान की हैं और इसके लिए बीज उत्पादन पर व्यापक कार्यक्रम तैयार किया गया है।</p>
<p>सरकार ने दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य तय किया है और किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की मिनी किट देने का कार्य प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा कि वे विभिन्न किसान संगठनों के साथ संवाद कर रहे हैं और बीज नीति को भी सुधारने के प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही, सरकार ने क्लीन प्लांट प्रोग्राम, नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम, इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट स्ट्रेटेजी, डिजिटल एग्रीकल्चर, कृषि उन्नति योजना समेत कई योजनाओं पर चर्चा की है, जिससे राज्यों को अधिकतम लाभ मिल सके।&nbsp;</p>
<p>सम्मेलन में महत्वपूर्ण विषयों पर इंटरैक्टिव सत्रों का आयोजन हुआ, जिसमें कृषि से जुड़े विभिन्न मुद्दों और योजनाओं पर चर्चा हुई। सम्मेलन में विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और एक व्यापक संवाद स्थापित किया, जो आगामी रबी सत्र के लिए रणनीतियों की दिशा में मार्गदर्शन करेगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ वित्त वर्ष 2024-25 में 34.15 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य, पिछले वर्ष से 92 लाख टन ज्यादा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आर्थिक स्वतंत्रता इंडेक्स में भारत 84वें स्थान पर, पिछले साल से तीन पायदान ऊपर चढ़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-rises-to-84th-position-in-economic-freedom-index-improves-by-three-spots.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 19 Oct 2024 16:56:40 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-rises-to-84th-position-in-economic-freedom-index-improves-by-three-spots.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत के अग्रणी नीति थिंक टैंक सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी (CCS) ने विश्व आर्थिक स्वतंत्रता (EFW) रिपोर्ट, 2024 जारी की है। फ्रेजर इंस्टीट्यूट की तरफ से प्रति वर्ष जारी की जाने वाली इस रिपोर्ट में भारत को 165 देशों में 84वें स्थान पर रखा गया है, जो पिछले वर्ष के 87वें स्थान से सुधार दर्शाता है। रैंकिंग में यह सुधार आर्थिक स्वतंत्रता को आगे बढ़ाने के लिए भारत के चल रहे प्रयासों को रेखांकित करता है और भविष्य के विकास के लिए गति पैदा करता है।</p>
<p>विभिन्न देशों की नीतियों और संस्थानों को पाँच प्रमुख क्षेत्रों के 45 डेटा बिंदुओं के आधार पर मूल्यांकन करके इस ईएफडब्लू सूचकांक को बनाया गया है। इस मूल्यांकन में लैंगिक कानूनी समानता के अधिकार को भी शामिल किया गया है, जो पुरुषों और महिलाओं के बीच आर्थिक स्वतंत्रता में समानता के स्तर को दर्शाता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के रेगुलेशन और सुदृढ़ मुद्रा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। सरकार के आकार में भी कुछ सुधार हुआ है, लेकिन इस वर्ष भारत के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार करने की स्वतंत्रता में गिरावट आयी है।&nbsp;</p>
<p>सीसीएस के सीईओ डॉ. अमित चंद्रा ने कहा, &ldquo;जब दुनिया मैन्युफैक्चरिंग, उत्पादन और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चीन को छोड़कर अन्य देशों की तरफ अपना ध्यान केंद्रित कर रही है, तो भारत को खुद को अग्रणी विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहिए जिससे हम वैश्विक व्यवसाय के केंद्र के रूप में स्थापित हो सके। इस महत्वपूर्ण समय पर भारत को अपनी आर्थिक स्वतंत्रता के स्तर को मजबूत करके विदेशी निवेश को आकर्षित करना चाहिए। इसके लिए भारत को अपनी प्रतिस्पर्धा और बाजार से संबंधित नीतियों को और उदार बनाना होगा ताकि इस अवसर का लाभ उठाया जा सके।&rdquo;</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि भारत ने सरकार के आकार में सुधार करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, फिर भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्वतंत्रता और कानूनी अधिनियम जैसे क्षेत्रों में कुछ कमियां हैं जिन्हें तत्काल सही करने की आवश्यकता है। सीसीएस ने लेबर कोड, कृषि सुधार, संपत्ति के अधिकारों की रक्षा जैसे बाजार को मजबूत करने वाले और संस्थागत जवाबदेही को प्रोत्साहित करने वाले अन्य महत्वपूर्ण कानूनों की वकालत की है। इन सुधारों के माध्यम से भारत की सरकारी दक्षता में सुधार होगा। इसके साथ ही भारत की प्राथमिकता में देश की सुदृढ़ मौद्रिक नीतियों को बनाए रखने और मुक्त व्यापार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाले कारोबारी माहौल को बनाने के लिए कानूनी अधिनियमों को व्यवस्थित करना शामिल होना चाहिए। इन निर्णायक कदमों के बिना, भारत अपनी आर्थिक क्षमता के अनुरूप लाभ उठाने में सक्षम नहीं हो पाएगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आर्थिक स्वतंत्रता इंडेक्स में भारत 84वें स्थान पर, पिछले साल से तीन पायदान ऊपर चढ़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत से बासमती का निर्यात 12 फीसदी बढ़ा, अप्रैल से अगस्त तक 20,546 करोड़ रुपये का हुआ निर्यात]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/basmati-exports-up-12-percent-from-april-to-august-at-rs-20546-crore-due-to-strong-demand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 19 Oct 2024 16:55:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/basmati-exports-up-12-percent-from-april-to-august-at-rs-20546-crore-due-to-strong-demand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय बासमती चावल की मांग में तेज उछाल देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2024-25 के पहले पांच महीनों (अप्रैल-अगस्त) के दौरान बासमती चावल के निर्यात में 12 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान भारत ने 20,546.04 करोड़ रुपये मूल्य के बासमती चावल का निर्यात किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 18,310.13 करोड़ रुपये के बासमती का निर्यात हुआ था। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक,&nbsp;<span>एक साल पहले बासमती चावल का निर्यात 20.10 लाख टन था, जो इस साल अप्रैल से अगस्त (2024-25) में 15.5 फीसदी बढ़कर 23.23 लाख टन हो गया।&nbsp;</span></p>
<p><span>आल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष <strong>सतीश गोयल</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी डिमांड के चलते बासमती के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने भी हाल ही बासमती चावल के निर्यात पर लगी पाबंदियों का हटाया है, जिसके बाद निर्यात में सुधार देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इजारयल और ईरान के बीच चल रहे तनाव के चलते मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में बासमती चावल की डिमांड पर असर पड़ सकता है, लेकिन उद्योग को उम्मीद है कि कुल मिलाकर आगे भी डिमांड बनी रहेगी।</span></p>
<p>अप्रैल से अगस्त के दौरान सऊदी अरब ने भारत से सबसे ज्यादा बासमती चावल खरीदा है। इस अवधि में सऊदी अरब ने भारत से 4,67,620 टन बासमती चावल का आयात किया, जो पिछले साल 3,89,806 टन था। मूल्य के हिसाब से भी अगस्त तक सऊदी अरब ने 4,284.78 करोड़ रुपये का बासमती चावल भारत से खरीदा, जबकि पिछले साल 3,742.76 करोड़ रुपये का खरीदा था।</p>
<p>इसी तरह, <span>दूसरे सबसे बड़े खरीदार ईरान ने अप्रैल से अगस्त तक 3,98,452 टन बासमती चावल का आयात किया, जो पिछले साल के 3,38,725 टन से अधिक है। मूल्य के हिसाब से ईरान ने 3,260.93 करोड़ रुपये का बासमती चावल खरीदा, जो पिछले साल 2,802.57 करोड़ रुपये था।</span></p>
<p>इराक <span>भारतीय बासमती का</span> तीसरा सबसे बड़ा <span>खरीदार </span>रहा। अगस्त तक इराक ने 3,51,060 टन बासमती चावल का आयात किया, जबकि पिछले साल यह 2,96,816 टन था। मूल्य के हिसाब से इराक ने 2,962.82 करोड़ रुपये का बासमती चावल खरीदा, जो पिछले साल 2,611.19 करोड़ रुपये था।</p>
<p>इसके बाद यमन ने अप्रैल से अगस्त तक 1,03,959 टन बासमती चावल खरीदा, जबकि पिछले साल यह 92,851 टन था। अमेरिका ने 1,13,298 टन बासमती चावल का आयात किया, जो पिछले साल 88,107 टन था। कुवैत ने 79,594 टन बासमती चावल खरीदा, जबकि पिछले साल यह 80,435 टन था। यूएई ने 1,12,496 टन बासमती चावल का आयात किया, जो पिछले साल के 96,445 टन से अधिक है। ओमान ने 52,791 टन बासमती चावल खरीदा, जो पिछले साल 61,598 टन था। यूनाइटेड किंगडम ने 69,198 टन बासमती चावल का आयात किया, जबकि पिछले साल आयात 75,207 टन रहा था।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत से बासमती का निर्यात 12 फीसदी बढ़ा, अप्रैल से अगस्त तक 20,546 करोड़ रुपये का हुआ निर्यात ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[संयुक्त किसान मोर्चा का 26 नवंबर को 500 जिलों में चेतावनी रैली निकालने का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/samyukta-kisan-morcha-announces-to-hold-warning-rallies-in-500-districts-on-november-26.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 17 Oct 2024 20:02:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/samyukta-kisan-morcha-announces-to-hold-warning-rallies-in-500-districts-on-november-26.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने 26 नवंबर को देश के 500 जिलों में चेतावनी रैली निकालने का ऐलान किया है। यह विरोध-प्रदर्शन तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 2020 में हुए दिल्ली मार्च की चौथी वर्षगांठ के अवसर पर किया जाएगा। बुधवार को नई दिल्ली के सुरजीत भवन में आयोजित एसकेएम की आम सभा की बैठक में सभी फसलों की गारंटीड खरीद, सी-2+50% के आधार पर एमएसपी तय करने और किसानों की कर्ज माफी समेत कई मांगें उठाते हुए खेती पर कॉरपोरेट कब्जे की नीतियों का विरोध किया।</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में डिजिटल कृषि मिशन (डीएएम) के जरिए कृषि को कॉरपोरेट को सौंपने का आरोप लगाते हुए एनडीए-3 सरकार की निंदा की गई। एसकेएम ने आरोप लगाया है कि डिजिटल कृषि मिशन खेती के कॉरपोरेटकरण की दिशा में काम करेगा और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के वर्चस्व को स्थापित करेगा।</p>
<p>एसकेएम आमसभा के प्रेसीडियम में जगमोहन सिंह, हन्नान मोल्ला, राजन क्षीरसागर, पद्मा पश्याम, जोगिंदर सिंह नैन, सिदगौड़ा मोदागी और डॉ. सुनीलम शामिल थे। डॉ. दर्शन पाल ने रिपोर्ट रखी और पी कृष्णप्रसाद ने समापन टिप्पणी की। एसकेएम ने महाराष्ट्र और झारखंड के आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ किसानों के बीच अभियान चलाने का निर्णय लिया है।</p>
<p>एसकेएम ने पूरे देश के किसानों से 26 नवंबर को जिला मुख्यालयों पर होने वाली चेतावनी रैली में शामिल होने का आह्वान किया। यह रैली ट्रेड यूनियनों और खेत मजदूर संगठनों के साथ मिलकर आयोजित की जाएगी। इसके जरिए किसानों की मांगों के अलावा मजदूरों, खेत मजदूरों और बंटाईदार किसानों की मांगों को भी उठाया जाएगा।</p>
<p>एसकेएम आम सभा की बैठक में एनडीए-3 सरकार को तीन महीने का अल्टीमेटम देने का संकल्प लिया गया। यदि इस समय के भीतर मांगों को लागू नहीं किया गया, तो एसकेएम को बड़े पैमाने पर संघर्ष करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। एसकेएम ने देश भर के किसानों से अपनी मांगों के समर्थन में मुद्दा आधारित अधिकतम एकता बनाने का आह्वान किया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_671121556ae4f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ संयुक्त किसान मोर्चा का 26 नवंबर को 500 जिलों में चेतावनी रैली निकालने का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब के कृषक परिवारों की आय देश में सबसे अधिक, बिहार में सबसे कम, प्रति दिन 300 रुपये से भी कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/income-of-agricultural-families-in-punjab-is-the-highest-in-the-country-lowest-in-bihar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 16 Oct 2024 11:31:47 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/income-of-agricultural-families-in-punjab-is-the-highest-in-the-country-lowest-in-bihar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब के कृषक परिवारों की औसत मासिक आय देश में सबसे अधिक है। यहां के कृषक परिवारों की औसत मासिक आय 31,433 रुपये है, जो रोजाना 1,000 रुपये से ऊपर बैठती है। बिहार के कृषक परिवारों की औसत मासिक आय देश में सबसे कम है। यहां के कृषक परिवारों की औसत मासिक आय 9,252 रुपये है, जो प्रति दिन 300 रुपये ( प्रति दिन लगभग 298.45 रुपये) से भी कम है। ये तथ्य हाल ही में <strong>नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड)</strong> द्वारा जारी <strong>अखिल भारतीय ग्रामीण वित्तीय समावेशन सर्वेक्षण (एनएएफआईएस) 2021-22</strong> की रिपोर्ट में सामने आए हैं।&nbsp;</p>
<p>नाबार्ड की रिपोर्ट के अनुसार, देश के जिन राज्यों में कृषक परिवारों की औसत मासिक आय सबसे अधिक है उममें पंजाब के बाद हरियाणा में औसत मासिक आय 25,655 रुपये, केरल में 22,757 रुपये, जम्मू-कश्मीर में 18,343 रुपये, महाराष्ट्र में 17,208 रुपये और गुजरात में 16,759 रुपये है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_670e4990d546e.jpg" alt="" width="670" height="404" /></p>
<p>सबसे कम औसत मासिक आय वाले राज्यों में बिहार पहले नंबर है। इसके बाद ओडिशा के कृषक परिवारों की औसत मासिक आय 9,290 रुपये, झारखंड में 9,787 रुपये, त्रिपुरा में 9,643 रुपये और झारखंड में 9,787 रुपये है।&nbsp;</p>
<p><strong>कृषक परिवारों की औसत आय गैर-कृषक परिवारों से अधिक&nbsp;</strong></p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कृषक परिवारों की औसत मासिक आय, सभी परिवारों और गैर-कृषक परिवारों की औसत मासिक आय से अधिक है। देश में सभी परिवारों की औसत मासिक आय 12,698 रुपये है, जबकि कृषक परिवारों की औसत मासिक आय 13,661 रुपये और गैर-कृषक परिवारों की औसत मासिक आय 11,438 रुपये है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_670e49c0bd114.jpg" alt="" width="671" height="297" /></p>
<p><strong>कृषक परिवारों और गैर-कृषक परिवारों के आय के स्रोत</strong></p>
<p>कृषक परिवारों के लिए, खेती सबसे बड़ा आय का स्रोत है, जो कुल मासिक आय का लगभग एक-तिहाई 33 फीसदी है। इसके बाद सरकारी या निजी सेवाओं का 23 फीसदी, मजदूरी का 16 फीसदी, और अन्य उद्यमों का 15 फीसदी योगदान है। दूसरी ओर, गैर-कृषक परिवारों की आय में सरकारी या निजी नौकरियों का सबसे बड़ा हिस्सा 57 फीसदी है, जबकि मजदूरी से गैर-कृषक परिवारों को 26 फीसदी आय होती है।</p>
<p>रिपोर्ट में बताया गया कि जिन परिवारों के पास 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि है, उनकी औसत आय छोटे जोत वाले किसानों की तुलना में लगभग दोगुनी होती है। इसके विपरीत, जिनके पास 0.01 हेक्टेयर से कम भूमि है, उनकी आय का अधिकांश हिस्सा सरकारी या निजी नौकरियों से 31 फीसदी, मजदूरी से 29 फीसदी, और पशुपालन से 25 फीसदी आता है। ऐसे छोटे किसानों की कुल आय में खेती का योगदान केवल 2 फीसदी है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_670e4a0b43ce1.jpg" alt="" width="665" height="407" /></p>
<p>जिन किसानों के पास 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि है, उनकी खेती से होने वाली आय 0.01 हेक्टेयर से कम भूमि वाले किसानों की तुलना में 57 गुना अधिक है। बड़े किसान अपनी आय का 61 फीसदी खेती से कमाते हैं, जबकि छोटे किसान अपनी आय के लिए विविध स्रोतों पर निर्भर होते हैं, जैसे मजदूरी, सरकारी या निजी नौकरियां, और पशुपालन। छोटे किसानों के लिए आय के स्रोतों में विविधता आर्थिक स्थिरता लाने में मदद करती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_670e48ebc932a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब के कृषक परिवारों की आय देश में सबसे अधिक, बिहार में सबसे कम, प्रति दिन 300 रुपये से भी कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_670e48ebc932a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान संगठनों ने ठुकराया सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से मीटिंग का न्यौता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmer-organizations-rejected-the-invitation-for-meeting-with-the-supreme-court-committee.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 15 Oct 2024 20:02:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmer-organizations-rejected-the-invitation-for-meeting-with-the-supreme-court-committee.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा-पंजाब के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर पिछले आठ महीनों से आंदोलन कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित कमेटी से मिलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। कमेटी ने दोनों फोरम को मीटिंग के लिए न्यौता भेजा था। लेकिन किसान नेताओं ने यह कहते हुए कमेटी के साथ बात करने से इंकार कर दिया है कि उन्होंने कभी कोई कमेटी गठित करने की मांग नहीं की थी। ना ही वह कोर्ट में चल रहे केस में पार्टी हैं। रास्ता तो गैर-कानूनी रूप से हरियाणा सरकार ने बंद किया हुआ है।&nbsp;</p>
<p>एसकेएम (गैर-राजनीतिक) और केएमएम ने एक पत्र लिखकर कमेटी से मीटिंग के न्यौते को ठुकरा दिया। साथ ही कमेटी के गठन को लेकर भी सवाल खड़े किये। किसान संगठनों ने सात बिंदुओं में अपना पक्ष रखा है जिसमें विस्तार से बताया कि वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी से क्यों बात नहीं करना चाहते हैं। किसान संगठनों ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश किसानों पर सरकारी आरोपों की चर्चा करता है लेकिन किसानों पर हुए सरकारी अत्याचारों की कोई चर्चा नहीं की।&nbsp;</p>
<p>एमएसपी गारंटी कानून के मुद्दे पर किसान संगठनों का कहना है कि 2011 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने एमएसपी गारंटी कानून का सुझाव द&zwj;िया था। केंद्र सरकार ने 2004 में डॉ. एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन क&zwj;िया था, जिसने किसानों को C2+50% फॉर्मूले के अनुसार फसलों का एमएसपी देने की सिफारिश की थी। यह सब साब&zwj;ित करता है क&zwj;ि किसानों की मांगें न्यायपूर्ण, व्यवहारिक और सब के हित में हैं।&nbsp;</p>
<p>किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित कमेटी के कार्यक्षेत्र और सिफारिशों को लागू कराने के अधिकारों को लेकर स्पष्टता की कमी का मुद्दा भी उठाया। पंजाब या हरियाणा सरकार द्वारा चयनित किसी अन्य जगह पर आंदोलन करने को लेकर किसानों का कहना है कि 6 फरवरी को उन्होंने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर जंतर-मंतर या रामलीला मैदान पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी थी, जिस पर आज तक कोई जवाब नहीं मिला है। किसान संगठनों ने उनकी मांगों को व्यवाहरिक न मानने और राजनीति से दूरी बनाने की हिदायत को लेकर असहमति व्यक्त की है।&nbsp;</p>
<p>आंदोलनकारी किसानों के साथ विवाद के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति में नवाब सिंह, देवेंद्र शर्मा, रंजीत घुम्मन, डॉ. सुखपाल, बीएस संधू और बीआर कंबोज शाम&zwj;िल हैं। कमेटी के पत्र के जबाव में किसान संगठन की ओर से भेजे गये पत्र पर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल, स्वर्ण सिंह पंधेर, सुखजीत सिंह हरदोझंडे, जसविंद्र सिंह लोंगोवाल, इंद्रजीत सिंह कोटबुढा, अमरजीत सिंह मोहड़ी, लखविंद्र सिंह औलख, मंजीत सिंह राय और अभिमन्यु कोहाड़ के हस्ताक्षर हैं।&nbsp;</p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_670e7efd17526.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान संगठनों ने ठुकराया सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से मीटिंग का न्यौता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_670e7efd17526.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को, झारखंड में दो चरणों में मतदान, 23 नवंबर को नतीजे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/assembly-elections-in-maharashtra-on-20th-november-voting-in-two-phases-in-jharkhand-results-on-23rd-november.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 15 Oct 2024 17:49:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/assembly-elections-in-maharashtra-on-20th-november-voting-in-two-phases-in-jharkhand-results-on-23rd-november.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के लिए 20 नवंबर को वोटिंग होगी। वहीं, झारखंड में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होंगे। जिसके लिए पहले चरण का मतदान 13 नवंबर को होगा और दूसरे चरण के लिए 20 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। दोनों ही राज्यों के चुनाव के नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों राज्यों में चुनावी कार्यक्रम की घोषणा की। महाराष्ट्र में चुनाव एक ही चरण में होगा, जबकि झारखंड में दो चरणों में वोटिंग होगी।&nbsp;</p>
<p><strong>महाराष्ट्र में 20 नवंबर को मतदान, 23 नवंबर को नतीजे</strong></p>
<p>महाराष्ट्र में 288 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होगा। यहां नामांकन 22 अक्टूबर से शुरू होगा, जिसकी प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक चलेगी। 30 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी और 4 नवंबर तक नाम वापसी की जा सकेगी। 20 नवंबर को राज्य में मतदान होंगे और 23 नवंबर को नतीजे आएंगे।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_670e5f1ebd5e5.jpg" alt="" /><br /><em>महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का शेड्यूल (सोर्स: चुनाव आयोग)</em></p>
<p><strong>झारखंड में दो चरणों में होगा विधानसभा चुनाव&nbsp;</strong></p>
<p>झारखंड में 81 विधानसभा सीटों के लिए वोटिंग होगी। पहले चरण में 43 सीटों और दूसरे चरण में 38 सीटों पर चुनाव होंगे। पहले चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया 18 अक्टूबर से शुरू होगी और 25 अक्टूबर तक चलेगी। 28 अक्टूबर को स्क्रूटनी होगी और 30 अक्टूबर तक नाम वापस लिया जा सकेगा। 13 नवंबर को राज्य में पहले चरण के मतदान होंगे और 23 नवंबर को मतगणना होगी। दूसरे चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया 22 अक्टूबर से शुरू होगी और 29 अक्टूबर तक चलेगी। 30 अक्टूबर को स्क्रूटनी होगी और 1 नवंबर तक नाम वापसी की जा सकेगी। 20 नवंबर को दूसरे चरण के लिए मतदान होंगे और 23 नवंबर को नतीजे आएंगे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_670e6436d240b.jpg" alt="" /><br /><em>झारखंड में विधानसभा चुनाव का शेड्यूल (सोर्स: चुनाव आयोग)</em></p>
<p><strong>48 विधानसभा सीटों और दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव</strong></p>
<p>चुनाव आयोग ने 14 राज्यों की 48 विधानसभा सीटों और दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान भी किया। विभिन्न राज्यों की 47 विधानसभा सीटों और केरल की वायनाड लोकसभा सीट पर 13 नवंबर को वोटिंग होगी। वहीं, उत्तराखंड की केदारनाथ विधानसभा सीट और महाराष्ट्र की नांदेड़ लोकसभा सीट पर 20 नवंबर को मतदान होगा। सभी के नतीजे 23 नवंबर को ही आएंगे।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_670e62461daf4.jpg" alt="" /></p>
<p><em>लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव का शेड्यूल (सोर्स: चुनाव आयोग)</em></p>
<p>असम की 5 विधानसभा सीटों धोलाई, सिडली, बोंगाईगांव, बेहाली और सामागुरी पर चुनाव होंगे। पंजाब में 4 विधानसभा सीटों गिद्दड़बाहा, डेरा बाबा नानक, बरनाला और चब्बेवाल पर चुनाव होंगे। बिहार की 4 सीटों विधानसभा रामगढ़, तरारी, इमामगंज और बेलागंज पर भी चुनाव होंगे। छत्तीसगढ़ में रायपुर शहर दक्षिण सीट और गुजरात में वाव विधानसभा सीट पर वोटिंग होगी। कर्नाटक में शिगगांव, संदुर और चन्नापटना की 3 विधानसभा सीटों पर भी चुनाव होंगे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_670e623d1bc54.jpg" alt="" /><br /><em>विभिन्न राज्यों की 48 विधानसभा सीटों और 2 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव (सोर्स: चुनाव आयोग)&nbsp;</em></p>
<p>केरल में पलक्कड़ और चेलक्कारा की दो विधानसभा सीटों और वायनाड लोकसभा सीट पर चुनाव होंगे। मध्य प्रदेश में बुधनी और विजयपुर विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। महाराष्ट्र में नांदेड़ लोकसभा सीट पर चुनाव होगा। मेघालय में गमबेग्रे विधानसभा सीट पर और राजस्थान में 7 विधानसभा सीटों चोरसी, खींवसर, दौस, झुंझुनू, देवली, उनियारा, सलूम्बर और रामगढ़ पर चुनाव होंगे। सिक्किम में सोरेंग-चाकुंग और नामची-सिंघीथांग विधानसभा सीटों पर चुनाव होंगे। उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों मीरापुर, कुंदरकी, गाजियाबाद, खैर, करहल, फूलपुर, कटेहरी, मझावन और शीशामऊ पर वोटिंग होगी। उत्तराखंड की केदारनाथ सीट और पश्चिम बंगाल की 6 विधानसभा सीटों तालडांगरा, सिताई, नैहाटी, हरोआ, मेदिनीपुर और मदारीहाट पर भी चुनाव होंगे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_670e5a336c6da.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को, झारखंड में दो चरणों में मतदान, 23 नवंबर को नतीजे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_670e5a336c6da.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वर्ष 2024 में सोयाबीन उत्पादन 5.96 फीसदी बढ़कर 125.81 लाख टन रहने का अनुमान: सोपा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/soybean-production-is-estimated-to-increase-by-5.96-percent-to-125.817-lakh-tonnes-in-the-year-2024-25.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 15 Oct 2024 10:59:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/soybean-production-is-estimated-to-increase-by-5.96-percent-to-125.817-lakh-tonnes-in-the-year-2024-25.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू खरीफ सीजन 2024 में देश में सोय़ाबीन का उत्पादन 125.817 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 118.744 लाख टन की तुलना में 5.96 फीसदी अधिक है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) द्वारा जारी किए गए सोयाबीन उत्पादन के अनुमान में यह जानकारी दी गई है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>सोपा के अनुसार, पिछले वर्ष (2023-24) की तुलना में इस वर्ष उत्पादन में 7.073 लाख टन की वृद्धि होने का अनुमान है। वर्ष 2024 में औसत उपज 1063 किलोग्राम/हेक्टेयर रहने का अनुमान है, जो वर्ष 2023 में 1002 किलोग्राम/हेक्टेयर थी।</p>
<p>सोपा के मुताबिक, चालू सीजन में सोयाबीन का कुल बुवाई क्षेत्रफल 118.318 लाख हेक्टेयर है, जबकि सरकारी अनुमान 127.138 लाख हेक्टेयर है। यह अंतर 8.820 लाख हेक्टेयर का है, जिसका मुख्य कारण महाराष्ट्र में अंतर-फसल और मध्य प्रदेश में मक्का की खेती में बदलाव बताया गया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_670dfb7649540.jpg" alt="" /></p>
<p>सोपा के अनुसार, इस साल मध्य प्रदेश में सोयाबीन का उत्पादन 52.46 लाख टन से बढ़कर 55.39 लाख टन होने का अनुमान है, हालांकि क्षेत्रफल में मामूली गिरावट आई है। महाराष्ट्र में सोयाबीन उत्पादन बढ़कर 50.16 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह 46.91 लाख टन था। हालांकि यहां क्षेत्रफल घटकर 45 लाख हेक्टेयर हो गया है जो पिछले साल 45.64 लाख हेक्टेयर था।&nbsp;</p>
<p>राजस्थान में सोयाबीन उत्पादन बढ़कर 10.52 लाख टन होने का अनुमान है, जो पिछले साल 10.12 लाख टन था। यहां क्षेत्रफल बढ़कर 11.12 लाख हेक्टेयर होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह 10.94 लाख हेक्टेयर था। वहीं, कर्नाटक में क्षेत्रफल बढ़ने के कारण उत्पादन बढ़कर 4.26 लाख टन होने का अनुमान है, जो पिछले साल 3.87 लाख टन था। तेलंगाना में उत्पादन घटकर 1.49 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल उत्पादन 1.67 लाख टन हुआ था। गुजरात में अधिक क्षेत्रफल के साथ उत्पादन 2.94 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल 2.48 लाख टन था।</p>
<p>सोपा द्वारा 2024 के लिए सोयाबीन उत्पादन का यह सर्वेक्षण 2 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2024 के बीच किया गया था, जिसमें उनकी दो टीमें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान के 51 प्रमुख सोयाबीन उत्पादक जिलों में गईं। इन जिलों में 5021 किलोमीटर की दूरी तय करके फसल का क्षेत्र और उत्पादन का अनुमान लगाया गया। मध्य प्रदेश के 25 जिलों, महाराष्ट्र के 20 जिलों और राजस्थान के 6 जिलों में यह सर्वेक्षण किया गया।&nbsp;इस साल उत्पादन में बढ़ोतरी का मुख्य कारण अनुकूल मौसम और कृषि पद्धतियों में सुधार बताया गया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66e292b09fac9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ वर्ष 2024 में सोयाबीन उत्पादन 5.96 फीसदी बढ़कर 125.81 लाख टन रहने का अनुमान: सोपा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66e292b09fac9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[टमाटर की कीमतें 66 फीसदी तक बढ़कर 100 रुपये के पार पहुंची]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/tomato-prices-crossed-rs-100-per-kg-66-percent-increase-in-a-month.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 14 Oct 2024 17:59:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/tomato-prices-crossed-rs-100-per-kg-66-percent-increase-in-a-month.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई शहरों में टमाटर के दाम 100 रुपये प्रति किलो को पार कर गये हैं। एक महीने के भीतर टमाटर की कीमतों में 66 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहां बाजार में टमाटर 80 से 100 रुपये किलो के दाम पर मिल हैं वहीं ऑनलाइन रिटेल स्टोर्स जियो मार्ट, इंस्टामार्ट और ब्लिंकिट पर टमाटर 96 रुपये से 109 रुपये किलो तक बिक रहा है।&nbsp;हालांकि, टमाटर की बढ़ी कीमतों का लाभ किसानों तक नहीं पहुंच रहा है और उन्हें इस कीमत का करीब 40 फीसदी दाम ही मिल रहा है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग की प्राइस मॉनिटरिंग डिवीजन के मुताबिक, देश में टमाटर की औसत खुदरा कीमत 67.5 रुपये किलो है, जबकि एक महीने पहले यह 42.99 रुपये किलो थी। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक भी टमाटर की खुदरा कीमतें 59 फीसदी तक बढ़ी हैं। जबकि बाजार में एक महीने पहले तक 50 से 60 रुपये प्रति किलो में बिकने वाला टमाटर अब 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।</p>
<p>टमाटर की कीमतें बढ़ने के पीछे बारिश बड़ी वजह है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख टमाटर उत्पादक राज्यों में भारी बारिश के चलते टमाटर की फसल को नुकसान पहुंचा है, जिससे उत्पादन में कमी आई है। वहीं, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश में टमाटर का सीजन अब खत्म हो गया है, जिससे इन राज्यों से सप्लाई में कमी आई है।</p>
<p><strong>भारतीय सब्जी उत्पादक संघ</strong> के अध्यक्ष और महाराष्ट्र की नासिक मंडी के बड़े कारोबारी <strong>श्रीराम गाढवे</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि बारिश के चलते कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में टमाटर की फसल को नुकसान पहुंचा है, जिससे कीमतों में इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि इससे उत्तर भारत में टमाटर की सप्लाई प्रभावित हुई है और वहां कीमतें महाराष्ट्र और दक्षिण भारत की तुलना में ज्यादा हैं। वहां टमाटर 100 रुपये किलो तक बिक रहा है। उन्होंने कहा कि अगले दो से तीन महीनों तक स्थिति ऐसी ही बनी रहेगी। जनवरी-फरवरी में नई फसल आने के बाद कीमतों में गिरावट की उम्मीद है।</p>
<p>बाजार में भले ही टमाटर की कीमतें 80 से 100 रुपये तक पहुंच गई हों, लेकिन किसानों को इसका आधा ही दाम मिल रहा है।&nbsp;हिमाचल प्रदेश की सोलन मंडी में टमाटर के थोक दाम 1000 से 1500 रुपये प्रति क्रेट (करीब 25 किलो) तक पहुंच गए हैं। सोलन मंडी के आढ़ती <strong>सतीश कौशल</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> बताया कि टमाटर की कीमतों में एक बार फिर तेजी आई है। मंडी में हाइब्रिड टमाटर 1000 से 1200 रुपये प्रति क्रेट और हिमसोना व देसी टमाटर 1500 रुपये प्रति क्रेट तक बिक रहे हैं। हालांकि, किसानों का कहना है कि कीमतें तो हर साल बढ़ती हैं, लेकिन बिचौलियों की वजह से उन्हें कीमतें बढ़ने का पूरा फायदा नहीं हो पाता। कीमतें बढ़ने से उन्हें थोड़ी राहत जरूर मिलती है, लेकिन यह केवल कुछ ही महीनों के लिए होता है।</p>
<p>उधर, टमाटर की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए के केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से&nbsp;रियायती दरों पर टमाटर की बिक्री करवा रही है।&nbsp;भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) दिल्ली समेत एनसीआर के अन्य शहरों में 65 रुपये प्रति किलो की दर से टमाटर बेच रहा है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मंडियों में लगातार अच्छी मात्रा में आवक के बावजूद हाल के हफ्तों में टमाटर की खुदरा कीमत में अनुचित वृद्धि हुई है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में भारी बारिश और उच्च आर्द्रता के कारण टमाटर फसल को नुकसान पहुंचा है। साथ ही गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है। सप्लाई बाधित होने से टमाटर की कीमतों में तेज उछाल आया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ टमाटर की कीमतें 66 फीसदी तक बढ़कर 100 रुपये के पार पहुंची ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दालों के थोक दाम 8 फीसदी तक कम हुए लेकिन बड़ी रिटेल चेन में कीमतों मेंं कमी नहीं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wholesale-prices-of-pulses-drop-by-8-percent-big-retail-chain-still-selling-at-higher-prices.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 14 Oct 2024 14:38:48 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wholesale-prices-of-pulses-drop-by-8-percent-big-retail-chain-still-selling-at-higher-prices.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले तीन महीनों में दालों की थोक कीमतों में 8 फीसदी तक गिरावट आई है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी रिटेल कंपनियों ने इस अनुपात में कीमतों मेंं कटौती नहीं की है। रिटेल कंपनियों के आउटलेट्स और ऑनलाइन स्टोर्स पर दालों की कीमतें खुदरा बाजारों से कहीं अधिक हैं। <strong>रूरल वॉयस</strong> ने जब <strong>रिलायंस रिटेल, विशाल मार्ट और डी मार्ट</strong> जैसी बड़ी रिटेल कंपनियों के ऑनलाइन स्टोर्स पर दाम चेक किए तो कीमतें बाजार से कहीं अधिक मिलीं। हालांकि, केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय ने हाल ही में रिटेल इंडस्ट्री से दालों की कीमतें कम रखने में सरकार का सहयोग करने को कहा था।</p>
<p><strong>केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय</strong> के आंकड़ों के अनुसार, चना दाल को छोड़कर अन्य सभी दालों की थोक और खुदरा कीमतों में गिरावट आई है। पिछले तीन महीनों में तूर दाल की औसत थोक कीमत 15,629.85 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 15,279.41 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। उड़द दाल की थोक कीमत 11,680.07 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 11,512.05 रुपये प्रति क्विंटल और मूंग दाल की कीमत 10,829.23 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 10,640.56 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। मसूर दाल की कीमत 8,425.64 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 8,162.52 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। हालांकि चना दाल की औसत थोक कीमत पिछले तीन माह में 8,067.19 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 8,739.26 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है।</p>
<p>मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दालों की खुदरा कीमतें भी पिछले तीन महीनों में कम हुई हैं। तूर दाल की औसत खुदरा कीमत तीन महीने पहले 168.59 रुपये प्रति किलो थी, जो अब 162.73 रुपये प्रति किलो हो गई है। उड़द दाल की औसत खुदरा कीमत 127.66 रुपये प्रति किलो से घटकर 124.55 रुपये प्रति किलो, मूंग दाल की 118.74 रुपये प्रति किलो से घटकर 116.04 रुपये प्रति किलो और मसूर दाल की 93.57 रुपये प्रति किलो से घटकर 89.88 रुपये प्रति किलो हो गई है। चना दाल की कीमत 89.1 रुपये से बढ़कर 94.06 रुपये प्रति किलो हो गई है।</p>
<p>बड़ी रिटेल कंपनियों के आउटलेट्स और ऑनलाइन स्टोर्स पर चना दाल की औसत खुदरा कीमत 121 रुपये से 134 रुपये प्रति किलो, तूर दाल की 205 रुपये से 229 रुपये प्रति किलो, उड़द दाल की 142 रुपये से 169 रुपये प्रति किलो, मूंग दाल की 148 रुपये से 169 रुपये प्रति किलो और मसूर दाल की 106 रुपये से 112 रुपये प्रति किलो के बीच है। इन आंकड़ों से साफ है कि दालों की थोक और खुदरा कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन बड़ी रिटेल कंपनियों ने कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ नहीं मिल रहा है।</p>
<p>दालों की महंगाई रोकने के लिए 9 अक्टूबर को केंद्रीय उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने रिटेल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। बैठक में उन्होंने कहा कि प्रमुख मंडियों में अरहर और उड़द की थोक कीमतों में 10 फीसदी की कमी आई है, लेकिन खुदरा बाजार में कीमतें अभी भी बढ़ रही हैं। खरे ने दालों की खुदरा और थोक कीमतों में बढ़ते अंतर और अनुचित मार्जिन को लेकर रिटेल कंपनियों को आगाह करते हुए कहा था कि इस पर नजर रखी जा रही है। अगर यह अंतर बढ़ता है तो सरकार को आवश्यक कदम उठाने पड़ेंगे।</p>
<p>उपभोक्ता मामलों की सचिव ने रिटेल इंडस्ट्री से दालों की कीमतें कम रखने में सरकार का सहयोग करने को भी कहा था। खासकर भारत दाल के वितरण में एनसीसीएफ और नेफेड के साथ काम करने का सुझाव दिया था। बैठक में रिलायंस रिटेल, विशाल मार्ट, डी मार्ट, स्पेंसर और मोर रिटेल जैसी बड़ी रिटेल कंपनियों के प्रतिनिधी मौजूद थे।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दालों के थोक दाम 8 फीसदी तक कम हुए लेकिन बड़ी रिटेल चेन में कीमतों मेंं कमी नहीं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मनरेगा के असर का आकलन करेगा नीति आयोग, सलाहकार चयन के लिए निविदा बुलाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/niti-aayog-to-evaluate-mgnrega-scheme-to-assess-its-impact.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 13 Oct 2024 23:44:51 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/niti-aayog-to-evaluate-mgnrega-scheme-to-assess-its-impact.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) का मूल्यांकन करने जा रही है। इसका मकसद इसके जमीनी प्रभाव का आकलन करना है। नीति आयोग के अंतर्गत आने वाले विकास, निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) ने 2005 में शुरू हुई इस योजना के मूल्यांकन के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं। इस मूल्यांकन के लिए अनुबंध 10 दिसंबर 2024 तक दिये जाने की संभावना है।</p>
<p>इस परियोजना के लिए सलाहकार का चयन दो-स्तरीय प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। इसमें तकनीकी और वित्तीय निविदाएं अलग-अलग प्रस्तुत की जाएंगी। मूल्यांकन की प्रक्रिया अनुबंध पर हस्ताक्षर की तारीख से छह महीने में पूरी करनी पड़ेगी।</p>
<p>डीएमईओ के अनुसार सलाहकार सेकंडरी डेटा और मौजूदा तथ्यों का गहन विश्लेषण करेगा। साथ ही वह 14 राज्यों में कम से कम 20,065 घरों का फील्ड सर्वेक्षण करेगा। इसके लिए कंप्यूटर सहायता प्राप्त व्यक्तिगत साक्षात्कार (CAPI) का उपयोग किया जाएगा। इस अध्ययन में गुणात्मक साक्षात्कार भी शामिल होंगे। यह सर्वेक्षण पिछले पांच वित्तीय वर्षों (वित्तीय वर्ष 2019-20 से वित्तीय वर्ष 2023-24) का डेटा कवर करेगा।&nbsp;</p>
<p>पहले चरण में आवेदकों का तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके बाद शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों का वित्तीय मूल्यांकन होगा। अंतिम रैंकिंग तकनीकी और वित्तीय दोनों अंकों के आधार पर निर्धारित की जाएगी।</p>
<p>निविदा दस्तावेज के अनुसार सलाहकार इस कार्य के लिए एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम बनाएगा। इस टीम में एक टीम लीडर, निगरानी और मूल्यांकन विशेषज्ञ, ग्रामीण विकास विशेषज्ञ, श्रम विशेषज्ञ, इन्फ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ, सांख्यिकीविद, डेटा प्रबंधन और विश्लेषण विशेषज्ञ और कंटेंट राइटर शामिल होंगे। कंटेंट एडिटर को छोड़कर सभी प्रमुख कर्मी मूल्यांकन अध्ययन की पूरी अवधि के लिए रखे जाएंगे।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मनरेगा के असर का आकलन करेगा नीति आयोग, सलाहकार चयन के लिए निविदा बुलाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत में रिकॉर्ड क्षेत्र में धान की बुवाई से चावल का भी रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमानः अमेरिकी कृषि विभाग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/record-area-leads-to-record-rice-production-in-india-says-usda.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 13 Oct 2024 14:37:45 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/record-area-leads-to-record-rice-production-in-india-says-usda.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत में 2024-25 के मार्केटिंग वर्ष में 14.2 करोड़ टन चावल का रिकॉर्ड उत्पादन हो सकता है। अमेरिका के कृषि विभाग (USDA) ने अपने नवीनतम अनुमानों में यह जानकारी दी है। यह आंकड़ा पिछले महीने के पूर्वानुमान से 2 प्रतिशत और पिछले साल की तुलना में 3 प्रतिशत अधिक है। उत्पादन में यह वृद्धि मुख्य रूप से 4.9 करोड़ हेक्टेयर के रिकॉर्ड क्षेत्र में खेती पर आधारित है। यह रकबा भी 2023 की तुलना में 2 प्रतिशत और पिछले पांच वर्षों के औसत से 6 प्रतिशत अधिक है। अनुमानित उत्पादकता 4.35 टन प्रति हेक्टेयर है, जो पिछले साल की तुलना में एक प्रतिशत से थोड़ा कम और पांच साल के औसत से 4 प्रतिशत अधिक है।</p>
<p>USDA ने इस रिकॉर्ड उत्पादन का श्रेय रकबा वृद्धि के अलावा मौसम की अनुकूल परिस्थितियों को दिया है। अधिक संख्या में किसानों ने कपास की जगह चावल की खेती की ओर रुख किया है, क्योंकि चावल में उपज की संभावना अधिक होती है और कपास की तुलना में जोखिम भी कम होता है। 20 सितंबर 2024 तक भारत के कृषि मंत्रालय ने 4.13 करोड़ हेक्टेयर में धान की बुवाई दर्ज की थी। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 2 प्रतिशत अधिक और पिछले पांच साल के औसत से लगभग 3 प्रतिशत अधिक है।</p>
<p>उपग्रह डेटा, विशेष रूप से नॉर्मलाइज्ड डिफरेंस वेजिटेशन इंडेक्स (NDVI) से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित गंगा के मैदानी इलाकों में फसल की अच्छी वृद्धि का संकेत मिलता है। इन इलाकों में धान की 30 प्रतिशत खेती होती है। अधिकांश किसानों ने जुलाई की अवधि के बाद धान की बुवाई की। USDA की वर्ल्ड एग्रीकल्चरल प्रोडक्शन रिपोर्ट के अनुसार देर से बोए गए धान को दक्षिण-पश्चिम मानसून की देर से वापसी और अगस्त और सितंबर के दौरान हुई अधिक वर्षा का लाभ मिला है।</p>
<p>भारत में चावल का उत्पादन तीन मौसमों में होता है- खरीफ, रबी और छोटी ग्रीष्मकालीन फसल। खरीफ की फसल का देश के कुल उत्पादन में 83 प्रतिशत हिस्सा रहता है। नवंबर की शुरुआत तक इसकी कटाई हो जाने की उम्मीद है। रबी की चावल का हिस्सा 10 प्रतिशत होता है। इसे नवंबर से जनवरी तक बोया जाएगा और अप्रैल के अंत में काटा जाएगा।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668f81db54b03.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत में रिकॉर्ड क्षेत्र में धान की बुवाई से चावल का भी रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमानः अमेरिकी कृषि विभाग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668f81db54b03.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत में कृषि क्षेत्र के लिए सार्वजनिक&amp;#45;निजी भागीदारी की तत्काल आवश्यकता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indian-agriculture-urgently-needs-public-private-partnerships.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 13 Oct 2024 09:58:29 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indian-agriculture-urgently-needs-public-private-partnerships.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>लंबे समय से देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाने वाला कृषि क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। पैदावार में ठहराव, प्राकृतिक संसाधनों की कमी और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे ने भारतीय किसानों पर बड़ा प्रभाव डाला है। यह स्थिति न केवल किसानों की आय, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर रही है। जैसे-जैसे देश की जनसंख्या बढ़ रही है और तरह-तरह के उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों की मांग में इजाफा हो रहा है, भारत की कृषि प्रणाली को लोगों की जरूरतें पूरी करने के लिए एक बदलाव की आवश्यकता महसूस हो रही है। इन चुनौतियों के मद्देनजर कृषि में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह भागीदारी एक रास्ता पेश करती है, इनोवेशन को बढ़ावा देने, कृषि निर्यात बढ़ाने और लाखों किसानों की आजीविका बेहतर करने की एक रूपरेखा प्रदान करती हैं।</p>
<p>हाल ही ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (TAAS) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में इस मुद्दे पर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम के नतीजों को तास ने एक पॉलिसी ब्रीफ के रूप में जारी किया। &ldquo;कृषि में सार्वजनिक-निजी भागीदारी: आगे का रास्ता&rdquo; ब्रीफ में कहा गया है कि भारत का कृषि क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 17% का योगदान देता है और एक बड़ी आबादी को रोजगार प्रदान करता है। अगर कृषि को 2025 तक 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देना है, तो इस क्षेत्र में सालाना 4% से 5% वृद्धि दर को बनाए रखना होगा। इसे हासिल करने के लिए कई प्रमुख बाधाओं को पार करना भी आवश्यक होगा। इस पॉलिसी ब्रीफ का संपादन तास चेयरमैन डॉ. आर.एस. परोदा तथा अन्य ने किया है।&nbsp;</p>
<p>पॉलिसी ब्रीफ में इन बाधाओं के बारे में बताते हुए कहा गया है कि तकनीकी प्रगति के बावजूद प्रमुख फसलों की पैदावार स्थिर हो गई है। इससे आपूर्ति और मांग के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। यह ठहराव न केवल खाद्य सुरक्षा बल्कि किसानों की आय के लिए भी खतरा बन गया है। इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनों का क्षरण भी एक बड़ी समस्या है। पानी के अत्यधिक दोहन, उर्वरकों के अधिक प्रयोग से मिट्टी का क्षरण और जैव विविधता का नुकसान भारतीय कृषि के आधार को गंभीर रूप से कमजोर कर रहा है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_670a877000c30.jpg" alt="" /></p>
<p>जलवायु परिवर्तन एक प्रमुख समस्या है। बाढ़, सूखा और अनिश्चित मानसून जैसी चरम मौसम घटनाएं सामान्य हो गई हैं। इससे किसानों के लिए उत्पादन बनाए रखना कठिन होता जा रहा है। कृषि आय में गिरावट भी एक बड़ी चिंता है। बढ़ती लागत, अस्थिर बाजार और छोटी होती जोतों की वजह से किसानों की आय में कमी आ रही है। इस स्थिति ने ग्रामीण संकट को व्यापक बना दिया है और कृषि को आजीविका के रूप में अनिश्चित बना दिया है।</p>
<p>इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए भारतीय कृषि को नई तकनीक और इनोवेशन को अपनाना होगा जो उत्पादकता बढ़ा सकें, संसाधनों का अधिक कुशलता से उपयोग कर सकें और जलवायु परिवर्तन के प्रति रोधी क्षमता मजबूत कर सकें। मार्कर-असिस्टेड सेलेक्शन (MAS), आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) फसलों और जीन संपादन जैसी तकनीकें फसल उत्पादन में वृद्धि कर सकती हैं और कीटों, बीमारियों और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकती हैं।</p>
<p>डिजिटल उपकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मौसम, मिट्टी की स्थिति और फसल स्वास्थ्य पर वास्तविक समय में डेटा प्रदान कर सकते हैं। इससे किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी और उनकी खेती की पद्धतियों को बेहतर किया जा सकेगा। जैव प्रौद्योगिकी से भी जलवायु-सहिष्णु और बायोफोर्टिफाइड फसलों का विकास किया जा सकता है, जो बदलते मौसम के कारण खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p>पॉलिसी ब्रीफ में कहा गया है कि इन तकनीकों की पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिए भारत को कृषि अनुसंधान और इनोवेशन में निवेश बढ़ाना होगा। वर्तमान में, भारत अपनी कृषि जीडीपी का केवल 0.61% अनुसंधान पर खर्च करता है, जो वैश्विक औसत से काफी कम है। आईसीएआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी रिसर्च (NIAP) के हाल के अध्ययन से पता चलता है कि कृषि अनुसंधान में निवेश किए गए हर एक रुपये पर 13.85 रुपये का रिटर्न मिलता है। यह तथ्य इस क्षेत्र में निवेश की आवश्यकता को दर्शाता है।</p>
<p>सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) भारतीय कृषि में इनोवेशन और ट्रांसफॉर्मेशन के लिए एक शक्तिशाली साधन के रूप में उभरा है। जहां सार्वजनिक क्षेत्र की उत्कृष्टता अनुसंधान, बुनियादी ढांचे और जर्मप्लाज्म विकास में है, वहीं निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता &nbsp;बीज उत्पादन, मार्केटिंग और वितरण में है। किसान हित में इन दोनों क्षेत्रों को मिलाकर नई तकनीक का विकास और प्रसार तेज किया जा सकता है।</p>
<p>हालांकि, पीपीपी की सफलता के लिए कुछ प्रमुख चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक है। सार्वजनिक क्षेत्र समाज कल्याण को प्राथमिकता देता है, जबकि निजी क्षेत्र लाभ पर ध्यान केंद्रित करता है। इन अलग-अलग उद्देश्यों को साथ लाना बड़ी चुनौती हो सकती है। सार्वजनिक और निजी संस्थाओं के बीच अक्सर अविश्वास की स्थिति रहती है। सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र को लाभ केंद्रित और किसान कल्याण के प्रति कम चिंतित मानता है, जबकि निजी क्षेत्र सार्वजनिक क्षेत्र को अक्षम और नौकरशाही से ग्रस्त समझता है।</p>
<p>दोनों क्षेत्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), लाइसेंसिंग और अनुसंधान सुविधाओं तक पहुंच से संबंधित नीतियों को व्यवस्थित करने की जरूरत है। भारतीय कृषि में सफल पीपीपी के उदाहरण कम ही हैं। इसलिए उन्हें अपनाना कठिन है। जब सफलता प्राप्त होती है, तब भी परिणामों को मान्य बनाने के लिए अक्सर पर्याप्त डेटा का अभाव होता है।</p>
<p>इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय कृषि में सार्वजनिक-निजी सहयोग के लिए अनेक अवसर हैं। सार्वजनिक संस्थान और निजी कंपनियां मिलकर जलवायु-सहिष्णु, अधिक उपज देने वाली और बायोफोर्टिफाइड फसलों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं। इस तरह की पहल से नाइट्रोजन और पानी के उपयोग में सुधार और खरपतवार के प्रति सहिष्णु किस्मों का विकास जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का भी समाधान हो सकता है।&nbsp;</p>
<p>सार्वजनिक अनुसंधान संस्थान अपने इनोवेशन के व्यावसायीकरण का लाइसेंस निजी कंपनियों को दे सकते हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसानों को बेहतर बीज और तकनीक प्राप्त हो। सार्वजनिक-निजी भागीदारी किसानों को धान की डायरेक्ट सीडिंग (DSR) और अधिक घनत्व वाली पौधारोपण प्रणाली (HDPS) जैसी नई कृषि पद्धतियों के लिए प्रशिक्षित कर सकती है। इससे संसाधनों का संरक्षण करते हुए उत्पादकता में वृद्धि की जा सकती है।</p>
<p>पॉलिसी ब्रीफ में सरकार को कृषि में पीपीपी की पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिए एक अनुकूल नीति बनाने की सलाह दी गई है। बौद्धिक संपदा अधिकार, अनुसंधान सुविधाओं तक पहुंच और डेटा शेयरिंग से संबंधित नीतियों को अधिक पारदर्शी और पूर्वानुमान योग्य बनाने की आवश्यकता है। इसके अलावा करों में राहत या सब्सिडी जैसी प्रोत्साहन योजनाएं निजी क्षेत्र को कृषि अनुसंधान में निवेश के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं।</p>
<p>भारत अन्य देशों की सफलताओं से भी सीख सकता है। उदाहरण के लिए, ब्राजील के EMBRAPA और मलेशियन एग्रीकल्चरल रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यू (MARDI) ने दिखाया है कि कैसे सार्वजनिक-निजी सहयोग कृषि में इनोवेशन को बढ़ावा दे सकता है, और किसानों को सस्ती, उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों तक पहुंच सुनिश्चित कर सकता है। भारत के कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए पॉलिसी ब्रीफ में जो सिफारिशें दी गई हैं, उनमें बड़े पैमाने पर अनुसंधान संस्थानों, जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाओं और जीएम फसलों के परीक्षण शामिल हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_670a87709af61.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत में कृषि क्षेत्र के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी की तत्काल आवश्यकता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र में कृषक परिवारों के पास सबसे अधिक जमीन, लीज पर जमीन लेने में मेघालय आगे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/maharashtra-has-the-most-land-with-agricultural-households-meghalaya-leads-in-farming-on-lease.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 12 Oct 2024 15:00:01 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/maharashtra-has-the-most-land-with-agricultural-households-meghalaya-leads-in-farming-on-lease.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में महाराष्ट्र के कृषक परिवारों के पास औसतन सबसे अधिक जमीन है। महाराष्ट्र के कृषक परिवारों के पास औसतन 1.34 हेक्टेयर जमीन है। वहीं, लद्दाख के कृषक परिवारों के पास सबसे कम औसतन 0.22 हेक्टेयर जमीन है। वहीं, अगर लीज पर जमीन लेकर खेती करने की बात करें, तो मेघालय पहले नंबर पर है, जहां 31 फीसदी कृषिक परिवार लीज पर जमीन लेकर खेती करते हैं। दूसरी तरफ, हरियाणा में सबसे अधिक 9.3 फीसदी कृषक परिवार जमीन लीज पर देते हैं। ये तथ्य हाल ही में <strong>नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड)</strong> द्वारा जारी <strong>अखिल भारतीय ग्रामीण वित्तीय समावेशन सर्वेक्षण (एनएएफआईएस) 2021-22</strong> की रिपोर्ट में सामने आए हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>नाबार्ड की रिपोर्ट के अनुसार, जिन राज्यों में कृषक परिवारों के पास अधिक जमीन है उनमें महाराष्ट्र के बाद राजस्थान में 1.32 हेक्टेयर, नागालैंड में 1.27 हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 1.21 हेक्टेयर और गोवा में 1.20 हेक्टेयर जमीन है। वहीं, आंध्र प्रदेश और पंजाब में 0.97 हेक्टेयर, कर्नाटक में 0.94 हेक्टेयर, ओडिशा में 0.51 हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश में 0.37 हेक्टेयर जमीन कृषक परिवारों के पास है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>&nbsp; &nbsp;<img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_670a46f98d516.jpg" alt="" width="608" height="205" /></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_670a5284c6e6f.jpg" alt="" width="611" height="621" /></p>
<p>सबसे कम भूमि वाले कृषक परिवारों के मामले में लद्दाख पहले स्थान पर है। इसके बाद बिहार में कृषक परिवारों के पास 0.29 हेक्टेयर, उत्तराखंड मे 0.33 हेक्टेयर, पश्चिम बंगाल में 0.35 हेक्टेयर, हिमाचल प्रदेश में 0.39 हेक्टेयर, केरल में 0.43 हेक्टेयर और हरियाणा 0.55 हेक्टेयर जमीन है।&nbsp;</p>
<p><strong>कृषिक परिवारों के पास 12 गुना अधिक जमीन</strong></p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कृषक परिवारों के पास गैर-कृषक परिवारों की तुलना में 12 गुना अधिक जमीन है। देश में कृषक परिवारों के पास जहां औसतन 0.70 हेक्टेयर जमीन है, वहीं गैर-कृषक परिवारों के पास जमीन का स्वामित्व सिर्फ 0.06 हेक्टेयर है।</p>
<p>वहीं, सभी परिवारों में औसत भूमि स्वामित्व की बात करें तो नागालैंड सबसे ऊपर है। जहां परिवारों के पास 0.95 हेक्टेयर जमीन है। इसके बाद राजस्थान में 0.88 हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 0.80 हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 0.79 हेक्टेयर, गुजरात में 0.57 हेक्टेयर और कर्नाटक में 0.56 हेक्टेयर जमीन परिवारों के पास है।&nbsp;</p>
<p><strong>लीज पर खेती में मेघालय सबसे आगे&nbsp;</strong></p>
<p>लीज पर जमीन लेकर खेती करने में मेघालय सबसे आगे है। उसके बाद बिहार में 25 फीसदी, मणिपुर में 18 फीसदी, महाराष्ट्र में 16 फीसदी और ओडिशा में 15 फीसदी कृषक परिवार लीज पर जमीन लेकर खेती करते हैं। जमीन लीज पर देने के मामले में हरियाणा के बाद अरुणाचल प्रदेश में 4 फीसदी, तमिलनाडु में 4.2 फीसदी, केरल में 3.9 फीसदी और बिहार में 3 फीसदी परिवार जमीन लीज पर देते हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में 7.9 फीसदी कृषक परिवारों ने जमीन लीज पर लेने की जानकारी दी, जबकि केवल 2 फीसदी परिवारों ने अपनी जमीन लीज पर देने की बात कही।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_670a5627931e4.jpg" alt="" width="604" height="501" /></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_670a5632b7211.jpg" alt="" width="607" height="298" /></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र में कृषक परिवारों के पास सबसे अधिक जमीन, लीज पर जमीन लेने में मेघालय आगे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सितंबर में वनस्पति तेल का आयात छह माह के निचले स्तर पर पहुंचा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/vegetable-oil-import-drop-to-six-month-low-in-september.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 11 Oct 2024 14:27:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/vegetable-oil-import-drop-to-six-month-low-in-september.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सितंबर माह में वनस्पति तेलों का आयात छह माह के निचले स्तर पर पहुंच गया है। सितंबर में कुल 10.87 लाख टन वनस्पति तेलों का आयात हुआ, जो पिछले साल सितंबर 2023 में 15.52 लाख टन रहा था। सरकार ने सितंबर में खाद्य तेलों के आयात पर सीमा शुल्क में 20 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी थी। इस बढ़ोतरी को आयात में कमी की मुख्य वजह माना जा सकता है। वहीं पिछले कुछ दिनों में घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।&nbsp;</p>
<p>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक&nbsp;तेल वर्ष 2023-24 में वनस्पति तेलों का आयात पांच लाख टन कम रह सकता है। इसके मुताबिक तेल वर्ष 2023-24&nbsp; में 160 लाख टन वनस्पति तेल आयात होने का अनुमान है जबकि पिछले&nbsp; तेल वर्ष में 165 लाख टन तेल का आयात हुआ था। चालू तेल वर्ष 2023-24 में नवंबर से सितंबर तक के पहले 11 महीनों में वनस्पति तेलों के आयात में 6 फीसदी की कमी आई है।</p>
<p>एसोसिएशन के मुताबिक, जुलाई और अगस्त में अधिक शिपमेंट के कारण स्टॉक में वृद्धि हुई, लेकिन मांग कम रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल की कीमतें सोयाबीन और सूरजमुखी तेल से अधिक होने के कारण घरेलू व्यापारियों ने पाम ऑयल की खरीद कम कर दी है। इसके अलावा, शुल्क बढ़ने और शिपमेंट में देरी के कारण भी आयात में कमी आई है।</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। पिछले एक महीने में पैक्ड सोयाबीन तेल का औसत खुदरा मुल्य <span>118.69 रुपये से बढ़कर</span> 135.41 रुपये प्रति लीटर, पैक्ड सूरजमुखी तेल का औसत खुदरा मुल्य <span>120.33 रुपये से बढ़कर</span>&nbsp;<span>138.96 रुपये प्रति लीटर और पैक्ड पाम तेल का औसत खुदरा मुल्य 100.19 रुपसे से बढ़कर 120.09 रुपये प्रति लीटर हो गया है।&nbsp; &nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_6708e70becded.jpg" alt="" width="696" height="296" /></p>
<p>इस साल सितंबर में खाद्य तेल का आयात 10.64 लाख टन और गैर खाद्य वनस्पति तेल का आयात 22,100 टन रहा, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में खाद्य तेल का आयात 14.94 लाख टन और गैर खाद्य वनस्पति तेल का आयात 57,940 टन था।</p>
<p>चालू तेल वर्ष के पहले 11 महीनों में पाम ऑयल का आयात 10 फीसदी घटकर 81.69 लाख टन रह गया, जो पिछले वर्ष 90.80 लाख टन था। इस दौरान रिफाइंड ऑयल के आयात में 17 फीसदी और क्रूड ऑयल के आयात में 4 फीसदी की गिरावट आई है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_6708e718e952b.jpg" alt="" width="680" height="341" /></p>
<p>एसोसिएशन के अनुसार, तेल वर्ष 2023-24 के पहले 11 महीनों के दौरान&nbsp;देश में सोयाबीन तेल का आयात 30.98 लाख टन रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 35.41 लाख टन था। वहीं, सूरजमुखी तेल का आयात बढ़कर 32.67 लाख टन हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 28.46 लाख टन था।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_6708f4a3e2d30.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सितंबर में वनस्पति तेल का आयात छह माह के निचले स्तर पर पहुंचा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_6708f4a3e2d30.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ी लेकिन घट रही है भूमि की जोत: नाबार्ड सर्वे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rural-incomes-rise-but-average-land-holdings-decline-nabard-survey.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 10 Oct 2024 11:40:34 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rural-incomes-rise-but-average-land-holdings-decline-nabard-survey.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की औसत मासिक आय में 57.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। ग्रामीण परिवारों की औसत आय 2016-17 में 8,059 रुपये थी, जो 2021-22 में बढ़कर 12,698 रुपये हो गई। हालांकि, आय में इस वृद्धि के बावजूद, ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि की औसत जोत का आकार 1.08 हेक्टेयर से घटकर 0.74 हेक्टेयर रह गया है। यह कृषि की स्थिरता और ग्रामीण परिवारों की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिति के लिए चिंता का विषय है। यह जानकारी नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) द्वारा किए गए अखिल भारतीय ग्रामीण वित्तीय समावेशन सर्वेक्षण (एनएएफआईएस) 2021-22 से सामने आई है। यह नाबार्ड का दूसरा ऐसा सर्वे है, इससे पहले 2016-17 में पहला सर्वे हुआ था।&nbsp;</p>
<p>सर्वेक्षण के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की आय में वृद्धि के साथ-साथ उनकी मासिक खर्च में भी वृद्धि हुई है। 2016-17 में औसत मासिक खर्च 6,646 रुपये था, जो 2021-22 में बढ़कर 11,262 रुपये हो गया। वहीं, घरेलू खर्च में भोजन का हिस्सा 51 प्रतिशत से घटकर 47 प्रतिशत रह गया, जो खर्च की विविधता को दर्शाता है। वित्तीय बचत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 9,104 रुपये से बढ़कर 13,209 रुपये हो गई। सर्वेक्षण में कहा गया है कि करीब 66 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों ने 2021-22 में बचत की, जबकि 2016-17 में यह आंकड़ा 50.6 प्रतिशत था।</p>
<p>सर्वेक्षण से यह भी पता चला है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण लेने वाले परिवारों की संख्या 47.4 प्रतिशत से बढ़कर 52 प्रतिशत हो गई है, जो वित्तीय दबाव का संकेत है। ऋण के लिए संस्थागत स्रोतों पर निर्भरता भी 60.5 प्रतिशत से बढ़कर 75.5 प्रतिशत हो गई, जबकि गैर-संस्थागत ऋणों पर निर्भरता 30.3 प्रतिशत से घटकर 23.4 प्रतिशत हो गई। यह दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में औपचारिक वित्तीय सेवाओं की ओर रुझान बढ़ा है। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) का उपयोग भी पिछले पांच वर्षों में काफी बढ़ा है, और बीमा कवरेज में भी सुधार देखा गया है। 80.3 प्रतिशत परिवारों के पास अब कम से कम एक बीमाधारक है, जबकि 2016-17 में यह आंकड़ा 25.5 प्रतिशत था।</p>
<p>पेंशन तक पहुंच में भी सुधार हुआ है, जहां 23.5 प्रतिशत परिवारों में कम से कम एक सदस्य पेंशन प्राप्त कर रहा है, जो पहले 18.9 प्रतिशत था। वित्तीय साक्षरता और वित्तीय व्यवहार में भी सुधार हुआ है। 51.3 प्रतिशत परिवारों ने बेहतर वित्तीय जानकारी की सूचना दी, जबकि पहले यह आंकड़ा 33.9 प्रतिशत था। साथ ही, 72.8 प्रतिशत परिवारों ने पैसे का बेहतर प्रबंधन और समय पर बिलों का भुगतान किया, जो पहले 56.4 प्रतिशत था।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_670772df366b3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ी लेकिन घट रही है भूमि की जोत: नाबार्ड सर्वे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_670772df366b3.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2028 तक फोर्टिफाइड  चावल की आपूर्ति को मंजूरी दी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centre-approves-continuation-of-supply-of-fortified-rice-till-2028-under-pm-garib-kalyan-anna-yojana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 09 Oct 2024 17:08:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centre-approves-continuation-of-supply-of-fortified-rice-till-2028-under-pm-garib-kalyan-anna-yojana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>एनीमिया और पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत मुफ्त फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति दिसंबर 2028 तक जारी रखने का निर्णय लिया है। जुलाई 2024 से दिसंबर 2028 तक इस योजना पर </span>17,082 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। चावल फोर्टिफिकेशन की यह योजना सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित है। इसके तहत एक मजबूत संस्थागत व्यवस्था बनाई गई है ताकि खाद्य सब्सिडी सही तरीके से लागू हो सके।</p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="0564f69a-530a-49e0-af3a-b3a7d7d2ef04" dir="auto" class="min-h-8 text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5" data-message-model-slug="gpt-4o-mini">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री ने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर देश में पोषण सुरक्षा पर जोर दिया था। इसके तहत एनीमिया और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली, बाल विकास सेवा और पीएम पोषण (पहले मिड-डे मील) के जरिए फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति की जा रही है। अप्रैल 2022 में सरकार ने फैसला किया था कि मार्च 2024 तक पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति शुरू की जाएगी, और यह लक्ष्य पूरा कर लिया गया है।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p>राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2019-2021) के अनुसार, एनीमिया भारत में एक बड़ी समस्या है, जो सभी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करता है। विटामिन बी12 और फोलिक एसिड की कमी भी व्यापक है, जो स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालती है।&nbsp;</p>
<p>फोर्टिफिकेशन एक प्रभावी तरीका है जिससे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर किया जा सकता है। भारत की 65 फीसदी आबादी चावल खाती है, इसलिए चावल का फोर्टिफिकेशन पोषण सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें चावल में लौह, फोलिक एसिड और विटामिन बी12 जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाए जाते हैं, ताकि पोषण बेहतर हो सके।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_670664c1de384.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2028 तक फोर्टिफाइड  चावल की आपूर्ति को मंजूरी दी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_670664c1de384.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आरबीआई ने रेपो रेट को बरकरार रखा, पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 6.7 फीसदी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/reserve-bank-keeps-repo-rate-at-6.5-percent-inflation-rate-expected-to-rise.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 09 Oct 2024 13:50:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/reserve-bank-keeps-repo-rate-at-6.5-percent-inflation-rate-expected-to-rise.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लगातार 10वीं बार प्रमुख ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखने का निर्णय लिया है। हालांकि, आरबीआई ने अपने रुख में बदलाव करते हुए आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती का संकेत दिया है। फरवरी 2023 में रेपो रेट को 6.25 फीसदी से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया गया था, तब से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। चालू वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को भी आरबीआई ने 7.2 फीसदी पर बरकरार रखा है, हालांकि पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 6.7 फीसदी रही है।</p>
<p>बुधवार को आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने एमपीसी के निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा कि आने वाले महीनों में खाद्य मुद्रास्फीति में कमी आ सकती है जबकि कोर मुद्रास्फीति अपने निचले स्तर पर है। मानसून, खरीफ की बुवाई और आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए उन्होंने चालू वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति 4.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।</p>
<p>आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत के आर्थिक विकास का परिदृश्य बरकरार रहा है और निजी खपत और निवेश में वृद्धि हुई है। मौद्रिक नीति समिति ने रुख बदला है लेकिन विकास को समर्थन देते हुए मुद्रास्फीति को लक्ष्य के अनुरूप बनाए रखने पर स्पष्ट रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा।</p>
<p>एमपीसी के रुख में बदलाव दिसंबर में होने वाली बैठक में ब्याज दर में कटौती का संकेत देता है। सितंबर में लगातार दूसरे महीने वार्षिक खुदरा मुद्रास्फीति आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे रही है। आरबीआई की उम्मीद के मुताबिक, इस महीने फिर से इसमें उछाल आएगा, जिसका मुख्य कारण आधार प्रभाव है।</p>
<p>गौरतलब है कि पिछले महीने अमेरिका के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में 50 बेसिस प्वाइंट की कमी की थी जिसके बाद भारत में भी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन आरबीआई ने ब्याज दरों में कमी की बजाय खुदरा महंगाई को काबू करने पर फोकस बनाए रखा है। अगर खुदरा महंगाई काबू में रहती है तो दिसंबर में ब्याज दरों में कटौती का फैसला लिया जा सकता है।</p>
<p>आरबीआई ने वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की जीडीपी ग्रोथ के 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ को अनुमान 7.2 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया है। तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.3 फीसदी से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत किया है जबकि चौथी तिमाही का जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.2 फीसदी से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत किया गया है।</p>
<p>2024-25 की पहली तिमाही में जीडीपी में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि आरबीआई का अनुमान 7.1 फीसदी था। आरबीआई गवर्नर का कहना है कि भारत के आर्थिक विकास के दो प्रमुख चालक &ndash; खपत और निवेश जोर पकड़ रहे हैं। कृषि क्षेत्र में बेहतर परिदृश्य और ग्रामीण मांग के कारण निजी उपभोग की संभावनाएं उज्ज्वल दिख रही हैं। सेवाओं में निरंतर उछाल से शहरी मांग को भी बढ़ावा मिलेगा। केंद्र और राज्यों के सरकारी व्यय में बजट अनुमानों के अनुरूप तेजी आने की उम्मीद है। मानसून की सामान्य से अधिक वर्षा और बेहतर खरीफ बुवाई से एग्रीकल्चर ग्रोथ को मदद मिली है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आरबीआई ने रेपो रेट को बरकरार रखा, पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 6.7 फीसदी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र सरकार ने प्रमुख रिटेल कंपनियों से दालों की महंगाई रोकने को कहा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wholesale-prices-of-pulses-dropped-10-percent-but-consumers-are-not-getting-the-benefit.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 09 Oct 2024 10:54:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wholesale-prices-of-pulses-dropped-10-percent-but-consumers-are-not-getting-the-benefit.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले तीन महीनों में अरहर और उड़द की थोक कीमतों में लगभग 10 फीसदी की गिरावट आई है, लेकिन इसका असर खुदरा कीमतों पर नहीं पड़ा है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिल पा रही है। इसे देखते हुए केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय की सचिव निधि खरे ने मंगलवार को रिटेल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर त्योहारी सीजन में दालों की महंगाई रोकने के उपायों पर चर्चा की।</p>
<p>बैठक में केंद्रीय उपभोक्ता मामलों की सचिव <strong>निधि खरे</strong> ने कहा कि प्रमुख मंडियों में अरहर और उड़द की थोक कीमतों में पिछले तीन महीनों में 10 फीसदी की कमी आई है, लेकिन खुदरा बाजार में इसके दाम अब भी बढ़ रहे हैं। खरे ने दालों की खुदरा और थोक कीमतों में बढ़ते अंतर और अनुचित मार्जिन को लेकर रिटेल कंपनियों को आगाह करते हुए कहा कि इस पर नजर रखी जा रही है। अगर यह अंतर बढ़ता है तो सरकार को आवश्यक कदम उठाने पड़ेंगे।</p>
<p>दालों की उपलब्धता और थोक कीमतों में कमी के मद्देनजर उपभोक्ता मामलों की सचिव ने रिटेल इंडस्ट्री से दालों की कीमत कम रखने में सरकार का सहयोग करने को कहा है। खासतौर पर भारत दाल के वितरण में एनसीसीएफ और नेफेड के साथ मिलकर काम करने का सुझाव दिया है। बैठक में आरएआई के अधिकारियों के अलावा रिलायंस रिटेल लिमिटेड, विशाल मार्ट, डी मार्ट, स्पेंसर और मोर रिटेल के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</p>
<p>सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार,&nbsp;इस साल खरीफ सीजन में दालों की बुवाई का क्षेत्र पिछले साल से करीब 7 फीसदी अधिक है और फसल भी अच्छी हो रही है। खरीफ उड़द और मूंग की आवक बाजारों में शुरू हो गई है, जबकि घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए पूर्वी अफ्रीकी देशों और म्यांमार से तुअर और उड़द का आयात लगातार हो रहा है। उपभोक्ता मामलों की सचिव का कहना है कि देश में दालों की पर्याप्त उपलब्धता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6696864578422.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र सरकार ने प्रमुख रिटेल कंपनियों से दालों की महंगाई रोकने को कहा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा चुनाव में 61.32 % मतदान, पिछली बार से 7% घटा, कई जगह भाजपा&amp;#45;कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में झड़प]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/voting-percentage-in-haryana-election-2024-clashes-between-bjp-and-congress-workers-at-many-places.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 05 Oct 2024 19:11:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/voting-percentage-in-haryana-election-2024-clashes-between-bjp-and-congress-workers-at-many-places.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में विधानसभा की 90 सीटों पर शाम 6 बजे मतदान खत्म हो गया। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 61.32 फीसदी वोटिंग हुई। सबसे ज्यादा वोटिंग यमुनानगर जिले में 67.93 फीसदी, जबकि सबसे कम वोटिंग 49.97 फीसदी गुरुग्राम में हुई। इसके अलावा, अंबाला में 62.26 फीसदी, भिवानी में 63.06 फीसदी, चरखी दादरी में 58.10 फीसदी, फरीदाबाद में 51.28 फीसदी, फतेहाबाद में 67.05 फीसदी, हिसार में 64.16 फीसदी, झज्जर में 60.52 फीसदी, जींद में 66.02 फीसदी, कैथल में 62.53 फीसदी, करनाल में 60.42 फीसदी, कुरुक्षेत्र में 65.55 फीसदी, महेंद्रगढ़ में 65.76 फीसदी, मेवात में 68.28 फीसदी, पलवल में 67.69 फीसदी, पंचकुला में 54.71 फीसदी, पानीपत में 60.52 फीसदी, रेवाड़ी में 60.91 फीसदी, रोहतक में 60.56 फीसदी, सिरसा में 65.37 फीसदी, सोनीपत में 56.69 फीसदी और यमुनानगर में 67.93 फीसदी वोटिंग हुई है। इन आंकड़ों में देर शाम तक बदलाव हो सकता है। चुनाव के नतीजे 8 अक्टूबर को आएंगे।&nbsp;</p>
<p>वोटिंग के दौरान कई मतदान केंद्रों से हंगामे की खबरें भी आईं। नूंह में वोटिंग के दौरान 3 जगह बवाल हुआ, जहां कांग्रेस, इनेलो-बसपा और निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थकों के बीच पथराव हुआ। इस पथराव में 2 लोग घायल हो गए। जींद के जुलाना से कांग्रेस उम्मीदवार विनेश फोगाट पर भाजपा प्रत्याशी ने बूथ कैप्चरिंग का आरोप लगाया, जिसे फोगाट ने गलत बताया और कहा कि जुलाना में ईमानदारी से मतदान हुआ है। पंचकूला में भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में झड़प हुई। फतेहाबाद में मतदान केंद्र पर हंगामा हुआ। सोनीपत में कवरिंग एजेंट बदलने पर विवाद हुआ, जिसमें 2 लोग घायल हो गए।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_670133ca472e2.jpg" alt="" /></p>
<p><em>मतदान के बाद परिवार के साथ मनु भाकर।</em></p>
<p>हिसार में पूर्व वित्त मंत्री और नारनौंद से भाजपा उम्मीदवार कैप्टन अभिमन्यु और कांग्रेस उम्मीदवार जस्सी पेटवाड़ के समर्थक भिड़ गए, दोनों पक्षों के बीच लात-घूंसे चले और एक-दूसरे पर फर्जी वोटिंग का आरोप लगाया गया। महेंद्रगढ़ जिले के नांगल चौधरी के धोखेरा गांव में भी मतदान के दौरान कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं में झगड़ा हुआ। रोहतक के महम से हरियाणा जनसेवक पार्टी के उम्मीदवार बलराज कुंडू ने कांग्रेस उम्मीदवार बलराम दांगी के पिता पर हमले का आरोप लगाया, जिससे उनके कपड़े फट गए।</p>
<p>इसके अलावा, यमुनानगर में फर्जी वोट डालने के मामले में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया, जिसके बाद पुलिस ने 2 लोगों को हिरासत में लिया। पानीपत में वोटिंग के दौरान हिंसा हुई, जहां इसराना विधानसभा के गांव नोहरा में वोटिंग को लेकर दो पक्षों में झगड़ा हो गया और एक युवक को चाकू मारा गया। करनाल के इंद्री में 4-5 युवकों के साथ मारपीट हुई, उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को वोट न देने के लिए उन्हें पीटा गया।&nbsp;</p>
<p>हरियाणा विधानसभा की 90 सीटों के लिए कुल 1031 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें 101 महिलाएं और 464 निर्दलीय हैं। 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां 68.2 फीसदी मतदान हुआ था। उस समय फतेहाबाद, कैथल, जगाधरी और हथिन में 70 फीसदी से अधिक वोट पड़े थे जबकि गुरुग्राम, बडखल और तैगांव सबसे कम मतदान वाले क्षेत्र थे। यहां 50 फीसदी से कुछ अधिक वोट डाले गए थे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_6701332ea452e.jpg" alt="" /></p>
<p>इस चुनाव में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, और दीपेंद्र हुड्डा ने जोरदार प्रचार किया, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश की। इससे कांग्रेस को बहुत मदद मिली है। हालांकि, पार्टी में गुटबाजी और कुमारी सैलजा की नाराजगी का मुद्दा चुनाव भर चर्चा में रहा। चुनाव प्रचार के आखिरी दिन कुमारी सैलजा की सोनिया गांधी से मुलाकात ने हलचल मचा दी। उधर, कांग्रेस ने अशोक तंवर को पार्टी में शामिल कर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की।</p>
<p>वहीं, भाजपा का चुनाव अभियान सीएम नायब सिंह सैनी और पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर केंद्रित रहा। पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर चुनाव प्रचार में सक्रिय रूप से नजर नहीं आए, जबकि पिछले साढ़े नौ साल से हरियाणा सरकार की कमान उन्हीं के पास थी। इस चुनाव में पीएम मोदी ने भी ज्यादा रैलियां नहीं कीं, और पिछले दो दिनों में हरियाणा में उनकी कोई रैली नहीं हुई। हालांकि, गुरुवार को उन्होंने ट्वीट कर कांग्रेस पर निशाना साधा।&nbsp;</p>
<p>हरियाणा चुनाव में इनेलो-बसपा और जेजेपी-आसपा गठबंधन समेत कई निर्दलीय उम्मीदवार भी हैं। इनेलो और जेजेपी अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश कर रही हैं। इनेलो बसपा के साथ मिलकर कुछ सीटों पर प्रतिस्पर्धा कर रही है, जबकि जेजेपी को किसान आंदोलन में भाजपा के साथ रहने पर सवालों का सामना करना पड़ रहा है। दुष्यंत चौटाला खुद उचाना कलां में अपनी सीट पर कड़े मुकाबले में हैं। कुछ सीटों को छोड़कर, मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_670144b2215b6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा चुनाव में 61.32 % मतदान, पिछली बार से 7% घटा, कई जगह भाजपा-कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में झड़प ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम किसान योजना की 18वीं किस्त जारी,  9 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में पहुंची धनराशि]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/18th-installment-of-pm-kisan-yojana-released-money-reached-the-accounts-of-more-than-9.4-crore-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 05 Oct 2024 13:31:23 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/18th-installment-of-pm-kisan-yojana-released-money-reached-the-accounts-of-more-than-9.4-crore-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 18वीं किस्त जारी हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को महाराष्ट्र के वाशिम में किसान सम्मेलन के दौरान 9 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि ट्रांसफर की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने वाशिम में विभिन्न विकास योजनाओं का शुभारंभ और लोकार्पण भी किया।&nbsp;उन्होंने कृषि और पशुपालन से जुड़ी 23,300 करोड़ रुपये की योजनाओं की शुरुआत की। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) के तहत 7,500 से अधिक परियोजनाओं का समर्पण, 9,200 किसान उत्पादक संगठन, महाराष्ट्र भर में 19 मेगावाट की कुल क्षमता वाले पांच सौर पार्क, मवेशियों के लिए एकीकृत जीनोमिक चिप और स्वदेशी सेक्स-सॉर्टेड वीर्य तकनीक का भी शुभारंभ किया।&nbsp;18वीं किस्त जारी होने के साथ ही इस योजना के तहत कुल निधि 3.45 लाख करोड़ से अधिक हो गई है। इससे 11 करोड़ से अधिक किसानों को सहायता मिल चुकी है।&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के किसानों को पीएम-किसान के साथ-साथ नमो शेतकरी महासम्मान निधि की 5वीं किस्त भी जारी की। इस योजना के तहत महाराष्ट्र के किसानों को पीएम-किसान के 6 हजार रुपये के अलावा हर साल 6 हजार रुपये अतिरिक्त मिलते हैं। इस तरह महाराष्ट्र के किसानों को हर साल 12 हजार रुपये की मदद मिलती है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560">
<p lang="hi" dir="ltr">माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वाशिम, महाराष्ट्र में आयोजित किसान सम्मान सम्मेलन के दौरान पीएम किसान योजना की 18वीं किस्त के अंतर्गत 9.4 करोड़ से अधिक किसानों को ₹20 हजार करोड़ से अधिक की धनराशि का हस्तांतरण किया। इस महत्वपूर्ण पहल का उद्देश्य किसानों को आर्थिक रूप&hellip; <a href="https://t.co/MwFUHhyHHt">pic.twitter.com/MwFUHhyHHt</a></p>
&mdash; Agriculture INDIA (@AgriGoI) <a href="https://twitter.com/AgriGoI/status/1842479558714335667?ref_src=twsrc%5Etfw">October 5, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पीएम-किसान सम्मान निधि के तहत करीब 9.5 करोड़ किसानों को 20 हजार करोड़ रुपये की धनराशि वितरित की गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का हर फैसला और हर नीति पूरे भारत की तरक्की के लिए है और किसान इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। भारत के किसानों को मजबूत बनाने के लिए उठाए गए प्रमुख कदमों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कृषि उत्पादों के भंडारण, प्रसंस्करण और प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 9,200 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और कई प्रमुख कृषि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। &nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार की शून्य बिजली बिल योजना की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे महाराष्ट्र के किसानों को ज्यादा फायदा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक महाराष्ट्र में महागठबंधन सरकार सत्ता में थी, तब तक उसने केवल दो एजेंडे के साथ काम किया, किसानों से जुड़ी परियोजनाओं को रोकना और इन परियोजनाओं के पैसे में भ्रष्टाचार करना। लेकिन, जब से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आई है तब से महाराष्ट्र में विकास की रफ्तार बढ़ी है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री ने नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना का जिक्र करते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार अपने किसानों को दोहरा लाभ प्रदान करने का प्रयास कर रही है। जिसके तहत महाराष्ट्र के लगभग 90 लाख किसानों को लगभग 1900 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान दी गई है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में देश की आर्थिक प्रगति का नेतृत्व करने की अपार क्षमता है और कहा कि यह तभी साकार हो सकता है जब गरीबों, किसानों, मजदूरों, दलितों और वंचितों के सशक्तिकरण का अभियान मजबूती से जारी रहे।&nbsp;</p>
<p>जिन किसानों के खातों में पीएम-किसान की किस्त नहीं आई है, वे हेल्पलाइन नंबर 155261 या 011-24300606 पर संपर्क कर सकते हैं। पीएम-किसान की किस्त पाने के लिए सभी किसानों को ई-केवाईसी, जमीन का सत्यापन और आधार लिंक करवाना जरूरी है। पंजीकृत किसान <strong><a href="https://pmkisan.gov.in/">https://pmkisan.gov.in</a></strong> वेबसाइट या कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर अपनी ई-केवाईसी कर सकते हैं। इसके अलावा, पीएम किसान सम्मान निधि योजना ऐप से फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए घर बैठे ई-केवाईसी की जा सकती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_6700f041ae630.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम किसान योजना की 18वीं किस्त जारी,  9 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में पहुंची धनराशि ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_6700f041ae630.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खाद्य तेल मिशन के तहत 21 राज्यों में खेती, किसानों को निशुल्क बीज, 100 प्रतिशत होगी खरीद: कृषि मंत्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/oilseeds-to-be-cultivated-in-21-states-free-seeds-and-100-percent-purchase-guaranteed-said-shivraj-singh-chouhan-on-national-edible-oil-mission.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 04 Oct 2024 16:03:17 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/oilseeds-to-be-cultivated-in-21-states-free-seeds-and-100-percent-purchase-guaranteed-said-shivraj-singh-chouhan-on-national-edible-oil-mission.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खाद्य तेलों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनने और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन के तहत देश के तिलहन उत्पादन वाले राज्यों में तिलहन की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) किसानों के लिए उन्नत किस्मों के बीज विकसित करेगा, जो किसानों को निशुल्क दिए जाएंगे। यह बात केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक प्रेस वार्ता के दौरान कही। कृषि मंत्री राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन की जानकारी दे रहे थे, जिसे गुरुवार को <span>केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। </span></p>
<p>राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन 10,103 करोड़ रुपये के बजट के साथ 2024-25 से 2030-31 तक सात साल की अवधि में लागू किया जाएगा। मिशन का उद्देश्य रेपसीड-सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और तिल जैसी मुख्य तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाना है। इसके साथ ही कपास के बीज, चावल की भूसी और पेड़ों से मिलने वाले तेलों का सही उपयोग और संग्रह करना भी शामिल है। <span>मिशन का लक्ष्य तिलहन उत्पादन को 2022-23 के 39 मिलियन टन से बढ़ाकर 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन करना है।</span></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि देश में 2022-23 में खाद्य तेलों की आवश्यकता 29.2 मिलियन टन थी, लेकिन देश में तिलहन से जो उत्पादन होता है वह 12.7 मिलियन टन ही है। जिस वजह से मांग को पूरा करने के लिए हमें विदेशों पर या आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। इसे देखते हुए कल एक बड़ा फैसला लिया गया है की अब आयात पर निर्भरता खत्म कर देश को तिलहन उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। इसके लिए सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन की शुरुआत की है। जिस पर 10,103 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560">
<p lang="hi" dir="ltr">आदरणीय प्रधानमंत्री श्री <a href="https://twitter.com/narendramodi?ref_src=twsrc%5Etfw">@narendramodi</a> जी के नेतृत्व में कल कैबिनेट की बैठक में ₹10,103 करोड़ की लागत के राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (एनएमईओ-तिलहन) को मंजूरी दी गई है। <br /><br />देश में तिलहन उत्पादन को बढ़ाने और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण&hellip; <a href="https://t.co/fXIsJWoGNf">pic.twitter.com/fXIsJWoGNf</a></p>
&mdash; Office of Shivraj (@OfficeofSSC) <a href="https://twitter.com/OfficeofSSC/status/1842124449610637442?ref_src=twsrc%5Etfw">October 4, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि देश में ऑयल सीड्स (तिलहन) का उत्पादन काफी कम होता है। इसे देखते हुए यह फैसला लिया गया है कि आईसीएआर सर्टिफाइड बीज बनाकर किसानों को निशुल्क उपलब्ध कराएगा। उन्होंने कहा कि मिशन के तहत 600 क्लस्टर पूरे देश में बनाए जाएंगे। 21 राज्यों के 347 जिलों में जहां भी ऑयल सीड्स का उत्पादन होता है, ऐसे क्षेत्रों को इन मिशन के तहत विषेश रूप से शामिल किया गया है। किसानों को इन क्लस्टरों में फ्री में ट्रेनिंग और नई तकनीकों की जानकारी भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी उत्पादन होगा उसकी 100 प्रतिशत खरीद की जाएगी और किसानों को कई तरह की सुविधाएं इस मिशन के तहत दी जाएंगे।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि देश में हर साल 10 लाख हेक्टेयर में तिलहन फसलों की खेती की जाएगी। किसानों को बीज उपलब्ध कराने के लिए 35 नए बीच केंद्र बनाए जाएंगे। इससे देश में बीच केंद्रों की संख्या 100 हो जाएगी। अभी देश में 35 बीज केंद्र सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि जो भी बीज बनेंगे उन्हें सुरक्षित रखने के लिए 50 बीज भंडार इकाइयां भी बनाई जाएंगी। साथ ही उत्पादन के लिए कई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खाद्य तेल मिशन के तहत 21 राज्यों में खेती, किसानों को निशुल्क बीज, 100 प्रतिशत होगी खरीद: कृषि मंत्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्रधानमंत्री आज जारी करेंगे पीएम&amp;#45;किसान योजना की 18वीं किस्त, 9.4 करोड़ से अधिक किसानों को मिलेगा लाभ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/prime-minister-will-release-the-18th-installment-of-pm-kisan-yojana-on-5-october-9.4-crore-farmers-will-get-benefit.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 04 Oct 2024 15:01:34 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/prime-minister-will-release-the-18th-installment-of-pm-kisan-yojana-on-5-october-9.4-crore-farmers-will-get-benefit.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 18वीं किस्त आज (5 अक्टूबर) जारी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र के वाशिम में 9.4 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर करेंगे। इस कार्यक्रम में 732 कृषि विज्ञान केंद्र, 1 लाख प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां और 5 लाख सामान्य सेवा केंद्रों से लगभग 2.5 करोड़ किसान वीडियो कांफ्रेंसिंग-वेबकास्ट के माध्यम से जुड़ेंगे। इस दिन को पीएम-किसान उत्सव दिवस के रूप में मनाया जाएगा, जिसके लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p>पीएम-किसान योजना की शुरुआत 24 फरवरी 2019 को हुई थी। इस योजना के तहत किसानों को सालाना 6 हजार रुपये दिए जाते हैं। केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 18वीं किस्त जारी होने के साथ ही इस योजना के तहत कुल संवितरण निधि 3.45 लाख करोड़ से अधिक हो जाएगी। इससे 11 करोड़ से अधिक किसानों को सहायता मिलेगी।&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र में अब तक 17 किस्तों में लगभग 1.20 करोड़ किसानों को 32,000 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। 18वीं किस्त में राज्स के लगभग 91.51 लाख किसानों को 1,900 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा।</p>
<p>प्रधानमंत्री नमो शेतकारी महासम्मान निधि योजना के तहत महाराष्ट्र के किसानों को 2,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ भी दिया जाएगा। इसके साथ ही कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) के तहत कई परियोजनाओं का उद्घाटन भी होगा, जो कृषि अवसंरचना को मजबूत करेगा।</p>
<p>भारत सरकार ने 10 हजार एफपीओ के गठन और प्रोत्साहन के लिए भी योजना शुरू की है। इस योजना के तहत अब तक लगभग 9,200 एफपीओ बनाए गए हैं, जिससे 24 लाख किसानों को फायदा हुआ है। इनमें 8.3 लाख महिलाएं और 5.77 लाख एसटी और एससी के लाभार्थी शामिल हैं। इन एफपीओ का कुल सालाना कारोबार 1,300 करोड़ रुपये से अधिक है।</p>
<p>इस कार्यक्रम में एक नई तकनीक 'गौ चिप' और 'महिष चिप' का भी शुभारंभ भी होगा, जिससे किसानों को पशुओं का बेहतर चयन करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री इस अवसर पर लगभग 3,000 मेगावाट के लिए पुरस्कार पत्रों और ग्राम पंचायतों के लिए सामाजिक विकास अनुदान का ई-वितरण करेंगे। इस कार्यक्रम में कई अन्य नेता भी शामिल होंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्रधानमंत्री आज जारी करेंगे पीएम-किसान योजना की 18वीं किस्त, 9.4 करोड़ से अधिक किसानों को मिलेगा लाभ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम&amp;#45;आरकेवीवाई और कृषोन्नति योजना को कैबिनेट की मंजूरी, एक लाख करोड़ से अधिक बजट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/union-cabinet-approves-pm-rkvy-and-krishonnati-yojana-budget-of-more-than-one-lakh-crore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 04 Oct 2024 12:23:38 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/union-cabinet-approves-pm-rkvy-and-krishonnati-yojana-budget-of-more-than-one-lakh-crore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की सभी केंद्र प्रायोजित योजनाओं को दो प्रमुख योजनाओं&mdash;प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) और कृषोन्नति योजना (केवाई) के तहत युक्तिकरण कर संचालित करने का फैसला किया है। गुरुवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। इस कदम का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में समग्र और टिकाऊ विकास को प्रोत्साहित करना है। पीएम-आरकेवीवाई जहां टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देगा, वहीं केवाई खाद्य सुरक्षा एवं कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को पूरा करेगा।&nbsp;</p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
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<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को फैसला किया है कि कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की सभी केंद्र प्रायोजित योजनाओं को मिलाकर दो मुख्य योजनाएं बनाई जाएंगी: प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) और कृषोन्नति योजना (केवाई)। इस कदम का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में समग्र और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है। पीएम-आरकेवीवाई टिकाऊ कृषि को समर्थन देगा, जबकि केवाई खाद्य सुरक्षा और कृषि में आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करेगा।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p>प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) और कृषोन्नति योजना (केवाई) को कुल 1,01,321.61 करोड़ रुपये के प्रस्तावित व्यय (बजट) के साथ लागू किया जाएगा। ये योजनाएं राज्य सरकारों के माध्यम से कार्यान्वित की जाती हैं।</p>
<p>इन योजनाओं के युक्तिकरण से राज्यों को अपने कृषि क्षेत्र के लिए एक व्यापक योजना बनाने का मौका मिलेगा। यह योजना फसलों के उत्पादन और उनकी गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ जलवायु के अनुकूल कृषि और कृषि उत्पादों की मूल्य श्रृंखला से जुड़ी नई समस्याओं का समाधान भी करेगी। इन योजनाओं का उद्देश्य एक स्पष्ट रणनीति बनाना है, जो विभिन्न लक्ष्यों और कार्यक्रमों को समझाने में मदद करे।</p>
<p>इन योजनाओं के युक्तिकरण का कार्य इसलिए किया गया है ताकि दोहराव से बचा जा सके और राज्यों में सामंजस्य सुनिश्चित किया जा सके। यह कदम कृषि की उभरती चुनौतियों जैसे पोषण सुरक्षा, स्थिरता, जलवायु के अनुकूल विकास, मूल्य श्रृंखला का निर्माण, और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उठाया गया है। इसके साथ ही, इस युक्तिकरण से राज्य सरकारों को अपने कृषि क्षेत्र के लिए अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप एक व्यापक रणनीतिक योजना बनाने की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, राज्यों की वार्षिक कार्य योजना को अब अलग-अलग योजना के लिए मंजूरी देने के बजाय एक बार में मंजूर किया जा सकेगा, जिससे प्रक्रिया में तेजी आएगी और कार्यान्वयन में सुधार होगा।</p>
<p>कुल 1,01,321.61 करोड़ रुपये के प्रस्तावित व्यय में से कृषि और किसान कल्याण विभाग का केंद्रीय हिस्सा 69,088.98 करोड़ रुपये और राज्यों का हिस्सा 32,232.63 करोड़ रुपये होगा। इसमें आरकेवीवाई के लिए 57,074.72 करोड़ रुपये और केवाई के लिए 44,246.89 करोड़ रुपये शामिल हैं।</p>
<p><strong>पीएम-आरकेवीवाई में शामिल योजनाएं</strong></p>
<ul>
<li>मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन</li>
<li>वर्षा आधारित क्षेत्र विकास</li>
<li>कृषि वानिकी</li>
<li>परम्परागत कृषि विकास योजना</li>
<li>फसल अवशेष प्रबंधन सहित कृषि यंत्रीकरण</li>
<li>प्रति बूंद अधिक फसल</li>
<li>फसल विविधीकरण कार्यक्रम</li>
<li>आरकेवीवाई डीपीआर घटक</li>
<li>कृषि स्टार्टअप के लिए त्वरक निधि</li>
</ul> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम-आरकेवीवाई और कृषोन्नति योजना को कैबिनेट की मंजूरी, एक लाख करोड़ से अधिक बजट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन को मंजूरी दी, 7 वर्षों में तिलहन आत्मनिर्भरता का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/central-government-approves-national-edible-oil-mission-target-of-oilseed-self-sufficiency-in-7-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 04 Oct 2024 10:40:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/central-government-approves-national-edible-oil-mission-target-of-oilseed-self-sufficiency-in-7-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>तिलहन उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (एनएमईओ -तिलहन) को मंजूरी दी है। मिशन को 10,103 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय (बजट) के साथ 2024-25 से 2030-31 तक की सात साल की अवधि में लागू किया जाएगा। इसका मकसद रेपसीड-सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और तिल जैसी मुख्य तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाना है, साथ ही कपास के बीज, चावल की भूसी और पेड़ों से मिलने वाले तेलों का सही उपयोग और संग्रह करना है। मिशन का लक्ष्य तिलहन उत्पादन को 2022-23 के 39 मिलियन टन से बढ़ाकर 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन करना है।</p>
<p>एनएमईओ-ओपी (ऑयल पाम) के साथ, मिशन का लक्ष्य 2030-31 तक घरेलू खाद्य तेल उत्पादन में 25.45 मिलियन टन तक की वृद्धि करना है, जिससे हमारी अनुमानित घरेलू आवश्यकता का लगभग 72 प्रतिशत पूरा हो जाएगा। इसे उच्च उपज देने वाली व उच्च तेल सामग्री वाली बीज किस्मों को अपनाने, चावल की परती भूमि में खेती का विस्तार करने और अंतर-फसल को बढ़ावा देने के द्वारा हासिल किया जाएगा। मिशन जीनोम एडिटिंग जैसी अत्याधुनिक वैश्विक तकनीकों का उपयोग करके उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के वर्तमान में जारी विकास का उपयोग करेगा।</p>
<p>गुणवत्तापूर्ण बीजों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, मिशन &lsquo;बीज प्रमाणीकरण, पता लगाने की क्षमता और समग्र सूची (साथी)&rsquo; पोर्टल के माध्यम से एक ऑनलाइन 5-वर्षीय बीज योजना शुरू करेगा, जिसके जरिये राज्यों को सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और सरकारी या निजी बीज निगमों सहित बीज उत्पादक एजेंसियों के साथ अग्रिम गठजोड़ स्थापित करने में मदद मिलेगी। बीज उत्पादन अवसंरचना में सुधार के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में 65 नए बीज केंद्र और 50 बीज भंडारण इकाइयां स्थापित की जाएँगी।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, 347 विशिष्ट जिलों में 600 से अधिक मूल्य श्रृंखला क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, जो सालाना 10 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को कवर करेंगे। इन क्लस्टरों का प्रबंधन एफपीओ, सहकारी समितियों और सार्वजनिक या निजी संस्थाओं जैसे मूल्य श्रृंखला भागीदारों द्वारा किया जाएगा। इन क्लस्टरों में किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, अच्छी कृषि पद्धतियों (जीएपी) पर प्रशिक्षण तथा मौसम और कीट प्रबंधन पर सलाहकार सेवाएं प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी।</p>
<p>मिशन का उद्देश्य तिलहन की खेती के रकबे में अतिरिक्त 40 लाख हेक्टेयर तक की वृद्धि करना है, जिसके लिए चावल और आलू की परती भूमि को लक्षित किया जाएगा, अंतर-फसल को बढ़ावा दिया जाएगा और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन दिया जाएगा।</p>
<p>एफपीओ, सहकारी समितियों और उद्योग जगत को फसल कटाई के बाद की इकाइयों की स्थापना या उन्नयन के लिए सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे कपास के बीज, चावल की भूसी, मकई का तेल और वृक्ष-जनित तेल (टीबीओ) जैसे स्रोतों से आपूर्ति बढ़ेगी।</p>
<p>इसके अलावा, मिशन सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) अभियान के माध्यम से खाद्य तेलों के लिए अनुशंसित आहार संबंधी दिशा-निर्देशों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देगा। मिशन का उद्देश्य घरेलू तिलहन उत्पादन को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाना तथा खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करना है, जिससे आयात निर्भरता कम होगी, किसानों की आय में वृद्धि होगी और मूल्यवान विदेशी मुद्रा का संरक्षण होगा। यह मिशन कम पानी के उपयोग, मिट्टी के बेहतर स्वास्थ्य और फसल के परती क्षेत्रों के उत्पादक उपयोग के रूप में महत्वपूर्ण पर्यावरणीय लाभ भी अर्जित करेगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन को मंजूरी दी, 7 वर्षों में तिलहन आत्मनिर्भरता का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के चार साल का ब्याज 2889  करोड़ रुपए से अधिक बकाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/interest-dues-on-sugar-mills-for-delayed-payment-of-sugarcane-for-four-years-is-more-than-2889-crore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 03 Oct 2024 15:04:20 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/interest-dues-on-sugar-mills-for-delayed-payment-of-sugarcane-for-four-years-is-more-than-2889-crore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों द्वारा गन्ना किसानों को देरी से भुगतान पर ब्याज देने की स्थिति साफ होती जा रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने चार पेराई सीजन में 2889.64 करोड़ रुपये के ब्याज भुगतान का आकलन किया है। भुगतान की प्रक्रिया के लिए उसने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से एक सप्ताह का समय मांगा है। उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के समक्ष एक अक्तूबर को हुई सुनवाई में राज्य सरकार के शुगरकेन डेवलपमेंट सचिव और गन्ना आयुक्त की ओर से प्रस्तुत एफिडेविट में चीनी मिलों पर किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान में देरी के चलते मिलों पर बकाया ब्याज की राशि का आकलन पेश किया गया है।</p>
<p>उच्च न्यायालय में किसानों की ओर से याचिका दायर करने वाले किसान मजदूर संगठन के समन्वयक वी एम सिंह ने रूरल वॉयस को बताया कि कुल ब्याज की राशि 15 हजार करोड़ रुपये को पार कर जाएगी। अभी इसका आकलन किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय में दिये गये एफिडेविट में दी गई राशि के आधार पर 2015-16, 2018-19, 2019-20 और 2020-21 पेराई सीजन की राशि 2889.68 करोड़ रुपये बन रही है। एफिडेविट में 2015-16 से 2023-24 तक के पेराई सीजन में गन्ना मूल्य भुगतान में देरी के चलते बनने वाले ब्याज की देनदारी का ब्यौरा देते हुए कहा गया है कि 2015-16, 2018-19, 2019-20 और 2020-21 की ब्याज देनदारी की राशि लगभग अंतिम है। बाकी के वर्षों में भुगतान की प्रक्रिया के चलते एफिडेविट में दी गई राशि सांकेतिक है और उसके सही आकलन का काम चल रहा है।</p>
<p>वीएम सिंह का कहना है कि कुल ब्याज देनदारी 15 हजार करोड़ रुपये के करीब पहुंच जाएगी। जिन चार साल की ब्याज देनदारी का आकलन लगभग अंतिम है उनके भुगतान पर राज्य सरकार ने जवाब देने के लिए उच्च न्यायालय से समय मांगा है।</p>
<p>असल में चीनी मिलों द्वारा उत्तर प्रदेश में गन्ना भुगतान में देरी होना सामान्य बात रही है। अभी भी कुछ चीनी मिलें ऐसी हैं जिन्होंने दो साल पहले का भुगतान भी पूरा नहीं किया है। चीनी की बेहतर कीमतों और एथेनॉल उत्पादन से होने वाली कमाई के चलते पिछले दो साल में समय पर भुगतान करने वाली चीनी मिलों की संख्या काफी अधिक रही है।</p>
<p>उच्च न्यायालय में गन्ना मूल्य भुगतान में देरी पर ब्याज के मामलों के आगे बढ़ने के चलते चीनी मिलों पर किसानों को समय से भुगतान देने का दबाव बढ़ेगा। राज्य में केवल निजी चीनी मिलें ही देरी से भुगतान नहीं कर रही हैं, बल्कि सरकारी और सहकारी चीनी मिलों द्वारा भी गन्ना आपूर्ति के 14 दिन की तय अवधि के दौरान किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान करने की बजाय देरी से भुगतान करना सामान्य बात रही है। इस मामले में 2006 से जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_66fea5cddd9ba.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के चार साल का ब्याज 2889  करोड़ रुपए से अधिक बकाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_66fea5cddd9ba.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गैर&amp;#45;बासमती व्हाइट राइस निर्यात पर रोक हटी, लेकिन 490 डॉलर प्रति टन न्यूनतम निर्यात मूल्य की शर्त]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/ban-on-non-basmati-white-rice-exports-lifted-but-490-dollars-per-ton-minimum-export-price-condition-applied.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 28 Sep 2024 16:44:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/ban-on-non-basmati-white-rice-exports-lifted-but-490-dollars-per-ton-minimum-export-price-condition-applied.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सरकार ने गैर-बासमती व्हाइट राइस के निर्यात पर लगी पाबंदी हटा ली है। विदेश व्यापार महानिदेशालय की तरफ से शनिवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक यह आदेश तत्काल प्रभावी हो गया है। हालांकि निर्यात के लिए 490 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) की शर्त रखी गई है। इसी महीने 13 तारीख को सरकार ने बासमती चावल के निर्यात पर लागू 950 डॉलर प्रति टन एमईपी को समाप्त कर दिया था।</p>
<p>दो दिनों में चावल निर्यात से जुड़े दो बड़े फैसले देश में चावल उत्पादन में अग्रणी राज्य हरियाणा में विधान सभा चुनाव के कुछ दिन पहले ही आए हैं। हरियाणा में विधान सभा के लिए 5 अक्तूबर को वोट डाले जाएंगे।</p>
<p>इस फैसले से महज एक दिन पूर्व, शुक्रवार को सरकार ने गैर-बासमती &nbsp;पारवॉयल्ड राइस (सेला चावल) पर निर्यात शुल्क को 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया था। साथ ही, बाकी गैर-बासमती व्हाइट राइस पर भी निर्यात शुल्क को समाप्त कर दिया था। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने 27 सितंबर को इसकी अधिसूचना जारी की थी। वह फैसला भी तत्काल प्रभावी हो गया। केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चावल की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से पिछले साल सेला चावल पर निर्यात शुल्क लगा दिया था।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66f7e4e9de33c.jpg" alt="" width="676" height="855" /></p>
<p>देश में चालू खरीफ सीजन में धान की रिकॉर्ड बुआई के चलते चावल उत्पादन की अच्छी संभावना बनी है। इस साल मानसून भी बहुत अच्छा है। कई दिन पहले ही सरकार ने पिछले साल (2023-24) के लिए रिकॉर्ड 13.78 करोड़ टन चावल उत्पादन का अनुमान जारी किया।</p>
<p>पिछले साल देश से करीब 170 लाख टन चावल का निर्यात हुआ था। वहीं इसके पहले साल, 2022-23 में करीब 210 लाख टन चावल निर्यात के साथ भारत सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश बन गया था और उस वर्ष वैश्विक चावल बाजार में भारत की हिस्सेदारी 40 फीसदी पर पहुंच गई थी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गैर-बासमती व्हाइट राइस निर्यात पर रोक हटी, लेकिन 490 डॉलर प्रति टन न्यूनतम निर्यात मूल्य की शर्त ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 18वीं किस्त 5 अक्टूबर को होगी जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-kisan-samman-nidhi-yojana-18th-instalment-will-be-released-on-october-5.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 27 Sep 2024 19:47:39 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-kisan-samman-nidhi-yojana-18th-instalment-will-be-released-on-october-5.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 18वीं किस्त 5 अक्टूबर को जारी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अक्टूबर को अपने महाराष्ट्र दौरे के दौरान वाशिम से&nbsp;<br />किसानों के खाते में 18वीं किस्ता का पैसा ट्रांसफर करेंगे। इससे पहले 18 जून, 2024 को पीएम किसान की 17वीं किस्त जारी की गई थी। 2 हजार रुपये की 18वीं किस्त प्राप्त करने के लिए किसानों को ई-केवाईसी कराना अनिवार्य है। किसान ओटीपी आधारित ई-केवाईसी की प्रक्रिया पीएम किसान के पोर्टल पर जाकर या आसपास के सीएससी सेंटर पर जाकर कर सकते हैं।</p>
<p><strong>9.5 करोड़ किसानों को मिलेंगे 20 हजार करोड़ रुपये&nbsp;</strong></p>
<p>पीएम किसान योजना की अब तक 17 किस्तों जारी हो चुकी हैं। जिसके तहत 20 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे ट्रांसफर की गई है। वहीं, अब 5 अक्टूबर को लगभग 9.5 करोड़ किसानों को 20 हजार करोड़ रुपये वितरित किए जाएंगे।</p>
<p><strong>किसानों को सालाना 6 हजार रुपये की मदद</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। यह योजना 24 फरवरी, 2019 को शुरू हुई थी और इसके तहत प्रत्येक किसान को सालाना 6 हजार रुपये की मदद मिलती है, जो तीन किस्तों में उनके बैंक खातों में भेजी जाती है।योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए किसान आधिकारिक वेबसाइट<strong><a href="https://pmkisan.gov.in/">&nbsp;https://pmkisan.gov.in/</a></strong> पर विजिट कर सकते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66f6bc09b63b8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 18वीं किस्त 5 अक्टूबर को होगी जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं और चावल के रिकॉर्ड उत्पादन से 2023&amp;#45;24 में खाद्यान्न 26.11 लाख टन बढ़ा, उत्पादन के अंतिम आंकड़े जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/food-grains-increased-by-26.11-lakh-tonnes-in-2023-24-due-to-record-production-of-wheat-and-rice.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Sep 2024 16:18:38 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/food-grains-increased-by-26.11-lakh-tonnes-in-2023-24-due-to-record-production-of-wheat-and-rice.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने वर्ष 2023-24 के लिए मुख्य फसलों के उत्पादन का अंतिम अनुमान जारी कर दिया है। इस अनुमान के अनुसार, इस वर्ष देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन 3322.98 लाख टन रहा। यह पिछले वर्ष 2022-23 में प्राप्त 3296.87 लाख टन के मुकाबले 26.11 लाख टन अधिक है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि का मुख्य कारण चावल, गेहूं और मोटे अनाज का अच्छा उत्पादन है।&nbsp;</p>
<p>कृषि विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 के दौरान चावल का उत्&zwj;पादन 1378.25 लाख टन&nbsp; रहा। यह पिछले वर्ष के 1357.55 लाख टन चावल उत्पादन से 20.70 लाख टन अधिक है। वर्ष 2023-24 के दौरान गेहूं का उत्&zwj;पादन रिकॉर्ड 1132.92 लाख टन रहा। यह इसके पहले साल (2022-23) के 1105.54 लाख टन गेहूं उत्पादन से 27.38 लाख टन अधिक है। मोटे अनाजों का उत्पादन 2022-23 के 173.21 लाख टन उत्&zwj;पादन की तुलना में 175.72 लाख टन रहा है। वहीं 2023-24 में दालों का उत्पादन&nbsp; 242.46 लाख टन और तिलहन का उत्पादन 396.69 लाख टन रहा।&nbsp;</p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="60231de3-fd84-46b8-9496-ebef69bf8f12" dir="auto" class="min-h-8 text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>तूर का उत्पादन 34.17 लाख टन, चना का उत्पादन 110.39 लाख टन, मूंगफली का उत्पादन 101.80 लाख टन, सोयाबीन का&nbsp; उत्पादन 130.62 लाख टन, रेपसीड एवं सरसों का उत्पादन 132.59 लाख टन, गन्ने का उत्पादन 4531.58 लाख टन और कपास का उत्पादन 325.22 लाख गांठें रहा। इसके अलावा मक्का का उत्पादन 376.65 लाख टन रहा।</p>
<p>कृषि मंत्रालय के मुताबिक 2023-24 के दौरान महाराष्ट्र समेत दक्षिणी राज्यों में सूखे जैसे हालात बने रहे। विशेष रूप से अगस्त में राजस्थान में लंबे समय तक बारिश नहीं हुई, जिससे रबी सीजन पर नकारात्मक असर पड़ा। इस सूखे के कारण दालों, मोटे अनाज, सोयाबीन और कपास के उत्पादन पर प्रभाव पड़ा। यह अनुमान मुख्य रूप से राज्य और संघ राज्यों से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।</p>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं और चावल के रिकॉर्ड उत्पादन से 2023-24 में खाद्यान्न 26.11 लाख टन बढ़ा, उत्पादन के अंतिम आंकड़े जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बासमती धान की 1509 किस्म का दाम पिछले साल से 500&amp;#45;700 रुपये कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/price-of-1509-basmati-rice-500-to-700-rupees-lower-than-last-year.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Sep 2024 01:40:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/price-of-1509-basmati-rice-500-to-700-rupees-lower-than-last-year.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बासमती धान पर न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) की पाबंदी हटने के बाद बासमती धान की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। लेकिन हरियाणा की मंडियों में बासमती धान की 1509 किस्म का दाम अब भी पिछले साल के मुकाबले 500 से 700 रुपये कम है। एक महीने पहले 1509 धान का भाव पिछले साल के मुकाबले गिरकर 2400 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल रह गया था। एमईपी की पाबंदी हटते ही कीमतों में सुधार तो हुआ, लेकिन दाम अभी भी पिछले साल से कम है। पिछले साल इस समय 1509 धान का दाम लगभग 3600 से 3700 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि अब मंडियों में इसका भाव 2800 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। हरियाणा की मंडियों में 1509 धान की आवक फिलहाल शुरू हो गई है लेकिन शुरुआती आवक से कीमतों की स्थिति अभी साफ नहीं है। जैसे-जैसे धान की आवक बढ़ेगी, कीमतों की स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी।</p>
<p>एक महीने पहले तक बासमती धान की कीमतें गिरकर सामान्य धान से थोड़ी ही ऊपर थीं, जिससे किसान काफी निराश थे। बासमती चावल पर 950 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) की पाबंदी के कारण व्यापारियों को बासमती निर्यात में मुश्किलें आ रही थीं। यही कारण के है बासमती निर्यात कम होने से देश में बासमती धान के दाम गिर गये थे। अब हालांकि केंद्र सरकार ने बासमती पर एमईपी की पाबंदी हटा ली है और इससे बासमती धान की कीमतों में सुधार आया है लेकिन 1509 धान की कीमतें अब भी पिछले साल से कम हैं।&nbsp;</p>
<p>हरियाणा राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष <strong>सुशील जैन</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> बताया हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब समेत बासमती धान वाले मुख्य उत्पादक राज्यों में 60 फीसदी उत्पादन 1509 धान का होता है। यह जल्द पकने वाला धान है और जल्द मंडियों में पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि बासमती की खपत भारत के मुकाबले बाहरी देशों में अधिक है। इस वजह से इसका एक्सपोर्ट ज्यादा होता है। लेकिन एक्सपोर्टर्स और ट्रेडर्स के पास अभी भी पिछले साल का स्टॉक बचा हुआ है। जिस वजह से एक्सपोर्टर्स अभी किसानों से 1509 धान खरीदने में असमर्थ दिख रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>बासमती निर्यातक और ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष<strong> विजय सेतिया</strong> ने बताया कि बासमती धान का व्यापार सरकार की गलत नीतियों के चलते प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले तो सरकार ने एमईपी की पाबंदी लागू की, जिससे भारतीय बासमती ट्रेड पर असर पड़ा और पाकिस्तान को इसका फायदा हुआ। वहीं अब सरकार ने पाबंदी हटा तो दी लेकिन अंतराष्ट्रीय बाजार में भारत को अपनी मार्केट बनाने में समय लेगागा। उन्होंने कहा कि एक्सपोर्टर्स पहले पुराना स्टॉक क्लियर कर रहे हैं। जैसे-जैसे डिमांड बढ़ेगी, कीमतों में सुधार होनी की उम्मीद है।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66f29133962f8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बासमती धान की 1509 किस्म का दाम पिछले साल से 500-700 रुपये कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रबी की बुवाई से पहले ही डीएपी के लिए होने लगी मारामारी, किल्लत से जूझ रहे किसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/crisis-for-dap-started-even-before-rabi-sowing-shortage-in-many-states-farmers-struggling-with-shortage.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 24 Sep 2024 18:51:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/crisis-for-dap-started-even-before-rabi-sowing-shortage-in-many-states-farmers-struggling-with-shortage.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मानसून की विदाई के साथ ही किसान रबी सीजन की बुवाई की तैयारियों में जुट गये हैं। लेकिन कई राज्यों में अभी से डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) उर्वरक की किल्लत होने लगी है। डीएपी की कमी को देखते हुए राज्यों के कृषि विभाग किसानों को डीएपी की बजाय एनपीके या एसएसपी उर्वरकों के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं। वहीं, <span>कई जगह पुलिस की मदद से डीएपी बंटवाने की नौबत आ गई है। सहकारी समितियों और निजी दुकानों पर डीएपी की कमी नजर आ रही है। </span></p>
<p><strong>राजस्थान</strong> के डीग जिले के किसान राहुल जाट ने बताया कि किसानों के सामने डीएपी का संकट खड़ा हो रहा है। जैसे ही खाद आने की सूचना मिलती है किसानों की भीड़ उमड़ पड़ती है और उर्वरक बिक्री केंद्रों के बाहर लंबी लाइनें लग जाती हैं। सोमवार को ब्रज नगर तहसील में खाद का ट्रक पहुंचा तो किसानों की भीड़ लग गई। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को खाद वितरित करवाना पड़ा।&nbsp;</p>
<p>राजस्थान में कृषि विभाग द्वारा किसानों को डीएपी के स्थान पर सिंगल सुपर फास्फेट और एनपीके का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। पिछले दिनों राजस्थान की कृषि आयुक्त चिन्मयी गोपाल ने विभागीय अधिकारियों को डीएपी के स्थान पर सिंगल सुपर फॉस्फेट और एनपीके के उपयोग का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p><strong>हरियाणा</strong> के फतेहाबाद जिले के किसान सतबीर सिंह का कहना है कि सरसों की बुवाई का समय नजदीक आ रहा है लेकिन डीएपी मिलने में अभी से दिक्कत आ रही है। खाद विक्रेता 15 दिन बाद डीएपी आने की बात कह रहे हैं। सहकारी केंद्रों के अलावा निजी दुकानों पर भी डीएपी खाद नहीं मिल पा रही है। हरियाणा में फतेहाबाद, <span>रोहतक</span>, <span>झज्जर</span>,<span> महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी सहित कई इलाकों से डीएपी की किल्लत की खबरें आ रही हैं।&nbsp;</span>&nbsp;</p>
<p><strong>पंजाब</strong> में डीएपी की कमी के मद्देनजर कृषि विभाग ने केंद्र को चिट्ठी लिखकर उर्वरक की आपूर्ति बढ़ाने का अनुरोध किया है। पंजाब को सालाना लगभग 5.50 लाख टन डीएपी की आवश्यकता होती है, <span>जिसमें से लगभग 4.5 लाख टन डीएपी की आवश्यकता रबी सीजन के दौरान </span><span>होती है। लेकिन केंद्र ने पंजाब को अभी तक लगभग डेढ़ लाख टन डीएपी ही उपलब्ध कराई है। पंजाब सरकार केंद्र से लगातार डीएपी की सप्लाई बढ़ाने की मांग कर रही है। इस बारे में पंजाब के मुख्यमंत्री और आला अधिकारी भी केंद्रीय उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा से बात कर चुके हैं।&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p>डीएपी की कमी के कारण पंजाब के कई जिलों में उर्वरक संकट गहराता जा रहा है। किसान नेता <strong>सरवन सिंह पंधेर</strong> ने सरकार से डीएपी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। इस बीच, <span>डीएपी में मिलावट और कालाबाजारी भी बढ़ गई है। पिछले दिनों पंजाब के मोगा जिले में कृषि विभाग ने नकली डीएपी के 110 बैग जब्त किए</span>&nbsp;<span>हैं। नकली डीएपी खाद को एक प्रतिष्ठित ब्रांड के असली दिखने वाले बैग में पैक किया गया था। जब्त स्टॉक के नमूनों की प्रयोगशाला जांच से पता चला कि उसमें नाइट्रोजन और फास्फोरस नहीं था।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश</strong> के कई जिलों से डीएपी की कमी की खबरें आ रही हैं। किसानों को गेहूं से पहले सरसों, <span>आलू व सब्जियों की बुवाई करनी है। लेकिन डीएपी के लिए खाद केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। <strong>समाजवादी पार्टी</strong> ने डीएपी आपूर्ति को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया कि यूपी में फिर खाद का संकट पैदा हो गया है। किसानों को डीएपी नहीं मिल रही है। </span></p>
<p>यूपी के पीलीभीत में <strong>भारतीय किसान यूनियन (टिकैत)</strong> <span>के पदाधिकारियों ने एसडीएम को ज्ञापन देकर सहकारी समितियों में डीएपी जल्द उपलब्ध कराने की मांग की है। आगरा में भाकियू ने खाद की कालाबाजारी के विरोध में कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। भाकियू के जिलाध्यक्ष राजवीर लवानियां ने कहा कि बारिश से सब्जी</span>, <span>फसल चौपट हो गई हैं। डीएपी की कालाबाजारी हो रही है।&nbsp;</span></p>
<p><strong>डीएपी का कम आयात&nbsp;</strong></p>
<p>वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते उर्वरक कंपनियों ने डीएपी का आयात कम किया है। इस साल अप्रैल से जून तक डीएपी का आयात पिछले साल के मुकाबले करीब 46 <span>फीसदी घटा है। ऐसे में अगर अगले एक माह के भीतर आयात में बढ़ोतरी नहीं होती है तो गेहूं और दूसरी रबी फसलों के लिए किसानों को डीएपी की उपलब्धता को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।</span></p>
<p>उर्वरक उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार,&nbsp;वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमत 640 <span>डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई हैं। इसके चलते न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत सरकार द्वारा तय दरों पर डीएपी का आयात उर्वरक कंपनियों के लिए घाटे का सौदा बन गया था। यही वजह है कि इस साल डीएपी का आयात कम हुआ और रबी सीजन के लिए उपलब्धता को लेकर आशंकाएं पैदा हो रही हैं।&nbsp;</span></p>
<p></p>
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<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66f2bfc2908ea.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रबी की बुवाई से पहले ही डीएपी के लिए होने लगी मारामारी, किल्लत से जूझ रहे किसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66f2bfc2908ea.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मानसून की वापसी शुरू, इस सीजन में 5 फीसदी अधिक बारिश हुई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-withdrawal-started-in-the-country-know-the-latest-weather-update.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 24 Sep 2024 18:37:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-withdrawal-started-in-the-country-know-the-latest-weather-update.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में इस साल हुई अच्छी बारिश के बाद मानसून की वापसी शुरू हो गई है। सोमवार को पश्चिमी राजस्थान और गुजरात के कच्छ क्षेत्र से दक्षिण-पश्चिम मानसून लौटने लगा, हालांकि इसमें पांच दिन की देरी हुई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, मानसून की वापसी 17 सितंबर से शुरू होनी थी, लेकिन इसका रिट्रिवल 23 सितंबर से शुरू हुआ। अगले 24 घंटों में पश्चिमी राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और गुजरात के कुछ हिस्सों से भी मानसून की विदाई हो जाएगी। वहीं बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने के चलते देश के कई राज्यों में अभी बारिश का दौरा जारी रहेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>देश में 5 फीसदी अधिक बारिश&nbsp;</strong></p>
<p>आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब तक मानसून की बारिश सामान्य से 5 फीसदी अधिक हुई है। मानसून सीजन में 24 सितंबर तक 886.9 मिमी बारिश दर्ज की गई जो सामान्य वर्षा 843.2 मिमी से अधिक है। देश के 49 फीसदी क्षेत्र में मानसून की बारिश सामान्य रही है जबकि 25 फीसदी क्षेत्र में सामान्य से अधिक और 9 फीसदी क्षेत्र में अत्यधिक बारिश दर्ज की गई है। देश का 17 फीसदी क्षेत्र अब भी बारिश से कमी से झूझ रहा है।&nbsp;</p>
<p>इस साल सबसे ज्यादा बारिश मध्य भारत में हुई, जो सामान्य से 16 फीसदी अधिक है। पश्चिमी भारत में सामान्य से 15 फीसदी अधिक और उत्तर पश्चिम भारत में सामान्य से 5 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। हालांकि, पूर्व और उत्तर पूर्व में बारिश अभी भी सामान्य से 17 फीसदी कम है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66f2c7cfba83b.jpg" alt="" width="560" height="530" /></p>
<p><strong>इन राज्यों में होगी बारिश</strong></p>
<p>दक्षिणी राज्यों जैसे केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, और कर्नाटक में 25 सितंबर को भारी बारिश का अनुमान है। वहीं, कोंकण और गोवा में 24 और 26 सितंबर, मध्य महाराष्ट्र में 25 से 26 सितंबर, मराठवाड़ा में 25 सितंबर, और गुजरात में 25 से 26 सितंबर के बीच बारिश हो सकती है। सौराष्ट्र और कच्छ में 26 से 28 सितंबर के बीच भारी बारिश की संभावना है।&nbsp;</p>
<p>मध्य भारत में 25 से 27 सितंबर के दौरान विदर्भ, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा, ओडिशा में 23 से 26 सितंबर, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, बिहार और झारखंड में 25 से 27 सितंबर और पूर्वोत्तर राज्यों में 24 से 29 सितंबर तक भारी बारिश की संभावना है। उत्तराखंड में 25 से 26 सितंबर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 26 से 27 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66f2b7f1da151.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मानसून की वापसी शुरू, इस सीजन में 5 फीसदी अधिक बारिश हुई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इमका अवार्ड्स 2024: अनूप पांडेय को जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर और शगुन कपिल को कृषि पत्रकारिता का पुरस्कार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/iimcaa-awards-2024-anoop-pandey-awarded-as-journalist-of-the-year-and-shagun-kapil-awarded-for-agricultural-journalism.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 24 Sep 2024 12:40:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/iimcaa-awards-2024-anoop-pandey-awarded-as-journalist-of-the-year-and-shagun-kapil-awarded-for-agricultural-journalism.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (</span><span>आईआईएमसी) &nbsp;एलुमनाई एसोसिएशन ने रविवार को इमका अवार्ड्स 2024 के विजेताओं के नाम का ऐलान और सम्मान किया। दिल्ली में आयोजित पुरस्कार समारोह में <strong>अनूप पांडेय</strong> को <strong>जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर</strong> का पुरस्कार मिला जिसके तहत उन्हें ट्रॉफी और प्रमाण पत्र के अलावा डेढ़ लाख रुपये की नकद ईनाम राशि भी दी गई। <strong>कृषि पत्रकारिता</strong> का अवार्ड <strong>शगुन कपिल</strong> को प्रदान किया गया जिन्हें एक लाख रुपये का पुरस्कार मिला। बाकी विजेताओं को ट्रॉफी और प्रमाण पत्र के अलावा 50-50 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया।</span><br /><br /><span>पब्लिशिंग रिपोर्टिंग कैटेगरी में रजत मिश्रा, ब्रॉडकास्ट रिपोर्टिंग में अभिनव गोयल, प्रोड्यूसर में सुरभि सिंह, भारतीय भाषाओं की पब्लिशिंग रिपोर्टिंग में मोहम्मद साबिथ यू एम, भारतीय भाषाओं की ब्रॉडकास्ट रिपोर्टिंग में सतरूपा सामांतरे, विज्ञापन में सारांश जैन, पीआर में शिल्पी सिंह, एड एजेंसी में ओफैक्टर और पीआर एजेंसी में काइजन को विजेता का पुरस्कार मिला।</span><br /><br /><span>इनके अलावा बहुत बारीक अंतर से विजेता बनने से चूके आवेदकों को जूरी स्पेशल मेंशन अवार्ड के तहत प्रमाण पत्र और ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। जूरी स्पेशल अवार्ड की जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर कैटेगरी में अभिषेक अंगद, ऋत्विका मित्रा, आशुतोष मिश्रा, मनीष मिश्रा और निधि तिवारी, कृषि पत्रकारिता में दिवाश गहटराज, ब्रॉडकास्ट रिपोर्टिंग में परिमल कुमार और विष्णुकांत तिवारी, प्रोड्यूसर में रोहन कथपालिया, पीआर में सुप्रिया सुंद्रियाल और निखिल स्वामी को पुरस्कार मिला।</span><br /><br /><span>समारोह में पीआईबी के पूर्व प्रमुख महानिदेशक कुलदीप सिंह धतवालिया, एडीजी राज कुमार, दिल्ली सरकार के विशेष आयुक्त सुशील सिंह, भारत अमेरिका व्यापार परिषद के एमडी राहुल शर्मा, पत्रकार प्रो. गोविंद सिंह, नीलेश मिसरा, रुपा झा, अपर्णा द्विवेदी, लोला नायर, ज्ञानेश्वर, नितिन प्रधान, राजेश प्रियदर्शी, प्रभाष झा, आलोक कुमार, प्रियदर्शन, अनुपम श्रीवास्तव, सुमित अवस्थी, मनोज मलयानिल, प्रमोद चौहान, मिहिर रंजन, प्रसाद सान्याल, मनोज रूरकीवाल, हरवीर सिंह, एसपी सिंह, शिशिर सिन्हा, ओमप्रकाश, पीआर विशेषज्ञ समीर कपूर, हर्षेंद्र वर्धन, मार्केटिंग विशेषज्ञ श्रुति जैन, कल्याण रंजन, रोहित दुबे, सोनिया सरीन समेत अन्य लोग मौजूद रहे। इनमें ज्यादातर विजेता चुनने वाली जूरी का हिस्सा थे।</span><br /><br /><span>समरोह की अध्यक्षता इमका अध्यक्ष सिमरत गुलाटी ने की जबकि संचालन कार्यकारी अध्यक्ष गायत्री श्रीवास्तव ने किया। अवार्ड के ऑडिटर उन्नी राजन शंकर, संयोजक विनीत हांडा, समन्वयिका पूजा मिश्रा और महासचिव दीक्षा सक्सेना ने समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर स्मारिका का भी विमोचन किया गया।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इमका अवार्ड्स 2024: अनूप पांडेय को जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर और शगुन कपिल को कृषि पत्रकारिता का पुरस्कार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[निर्यात पाबंदियों में ढील के बाद प्याज महंगाई रोकने की चुनौती, बफर स्टॉक से बिक्री बढ़ाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/after-relaxation-in-export-restrictions-challenge-to-control-onion-inflation-sales-increased-from-buffer-stock.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 23 Sep 2024 20:25:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/after-relaxation-in-export-restrictions-challenge-to-control-onion-inflation-sales-increased-from-buffer-stock.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हाल ही में प्याज पर 550 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) की पाबंदी हटाने और निर्यात शुल्क को 40 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी किए जाने के बाद अब सरकार के सामने प्याज की महंगाई रोकने की चुनौती है। इसके लिए केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक से बिक्री बढ़ाकर प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इस खरीफ सीजन में प्याज की बुवाई का क्षेत्र बढ़ने और मानसून में अच्छी बारिश के चलते देश में प्याज का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है जिससे कीमतों पर काबू पाने में मदद मिलेगी।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामलों की सचिव <strong>निधि खरे</strong> ने सोमवार को कहा कि केंद्र सरकार ने दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों के थोक बाजारों में बफर स्टॉक से प्याज उतारना शुरू कर दिया है। साथ ही देश भर में रियायती दर पर प्याज की खुदरा बिक्री बढ़ाने की योजना है।</p>
<p><strong>केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग</strong> के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को राजधानी दिल्ली में प्याज का खुदरा भाव 58 रुपये किलो था जो एक साल पहले 38 रुपये किलो था। हालांकि, दिल्ली-एनसीआर के कई खुदरा बाजारों में प्याज के दाम 70-80 रुपये किलो तक पहुंच गये हैं।&nbsp;</p>
<p>निर्यात पाबंदियों में ढील के बाद प्याज की कीमतों में 20-25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। आगामी त्योहारी सीजन और प्याज की कीमतों में वृद्धि की आशंका को देखते हुए सरकार का दारोमदार 4.70 लाख टन के बफर स्टॉक और नए सीजन के प्याज की आपूर्ति पर है। प्याज की महंगाई पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने गत 5 सितंबर से दिल्ली समेत कई शहरों में 35 रुपये किलो के रेट पर प्याज की बिक्री शुरू कर दी थी। अब सरकार का फोकस उन शहरों पर है जहां प्याज की कीमतें राष्ट्रीय औसत से अधिक हैं। जल्द ही इन शहरों में भी रियायती दर पर प्याज की खुदरा बिक्री शुरू की जाएगी।</p>
<p>इस साल केंद्र सरकार ने <strong>बफर स्टॉक</strong> के लिए 4.70 लाख टन प्याज की खरीद की है जो पिछले साल बफर स्टॉक के लिए हुई 3.05 लाख टन प्याज खरीद से काफी अधिक है। इसलिए सरकार इस साल अधिक शहरों में रियायती दरों पर प्याज की खुदरा बिक्री करवाने की स्थिति में है। इस खरीफ सीजन में प्याज की बुवाई का क्षेत्र भी बढ़ा है जिससे उत्पादन बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। ये दोनों फैक्टर प्याज की कीमतों पर नियंत्रण में मददगार होंगे।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र के किसान नेता <strong>अनिल घनवट </strong>ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि प्याज के निर्यात पर एमईपी हटने और निर्यात शुल्क घटने के बाद किसानों को बेहतर भाव मिल रहा है। महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज का भाव 5000-5500 रुपये क्विंटल तक पहुंच गया है जो 10 दिन पहले तक 3500-4000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास था। इसलिए खुदरा बाजारों में प्याज 70-75 रुपये किलो के आसपास मिल रहा है। घनवट का कहना है कि प्याज के ये खुदरा दाम नवंबर तक ऐसे ही रहेंगे।</p>
<p>प्याज के मामले में सरकार की उम्मीद अगले महीने शुरू होने वाले नए सीजन के प्याज की आवक पर टिकी है। इस खरीफ सीजन के दौरान देश में प्याज की बुवाई का क्षेत्र बढ़ा है। <strong>कृषि मंत्रालय</strong> के अनुसार, 26 अगस्त तक खरीफ प्याज की बुवाई का क्षेत्र 2.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र तक पहुंच गया था जो पिछले वर्ष इसी अवधि तक 1.94 लाख हेक्टेयर था। इसके अलावा, लगभग 38 लाख टन प्याज अभी भी किसानों और व्यापारियों के पास भंडारण में होने का अनुमान है। मानसून सीजन में अच्छी बारिश के कारण प्याज की बढ़िया पैदावार की उम्मीद की जा रही है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ निर्यात पाबंदियों में ढील के बाद प्याज महंगाई रोकने की चुनौती, बफर स्टॉक से बिक्री बढ़ाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ बुवाई सामान्य क्षेत्र से अधिक, धान की बंपर बुवाई, दलहन का क्षेत्र बढ़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/kharif-sowing-is-more-than-normal-area-bumper-sowing-of-paddy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 23 Sep 2024 19:38:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/kharif-sowing-is-more-than-normal-area-bumper-sowing-of-paddy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में इस साल अच्छे मानसून के चलते खरीफ फसलों की बुवाई पिछले पांच सालों के औसत सामान्य क्षेत्र से आगे बढ़ गई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार,<strong> 23 सितंबर</strong> तक देश के 1104.63 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है, जो खरीफ फसलों के सामान्य क्षेत्र (पांच साल का औसत) 1096.00 लाख हेक्टेयर से अधिक है। वहीं पिछले साल इस समय तक खरीफ फसलों का क्षेत्र 1088.26 लाख हेक्टेयर था।</p>
<p><strong>धान</strong> की बुवाई इस सीजन में सामान्य क्षेत्र से करीब तीन फीसदी से अधिक हुई है। अब तक 413.50 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हो चुकी है, जबकि धान का सामान्य क्षेत्र 401.55 लाख हेक्टेयर है। वहीं, पिछले साल इस समय तक धान का क्षेत्र 404.50 लाख हेक्टेयर था। मोटे आनाजों का क्षेत्र भी सामान्य क्षेत्र 181.03 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 192.55 लाख हेक्टेयर हो गया है। <strong>तिलहन</strong>&nbsp;की बुवाई 193.84 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो सामान्य क्षेत्र 190.18 लाख लाख हेक्टेयर से अधिक है। हालांकि, <strong>दलहन</strong> का रकबा सामान्य क्षेत्र से कम है लेकिन 128.28 लाख हेक्टेयर में हुई दलहन की बुवाई पिछले साल इस अवधि तक दलहन के 119.28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से अधिक है। महत्वपूर्ण नकदी फसल कपास के क्षेत्र में पिछले साल के मुकाबले 8.85 फीसदी की गिरावट आई है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66f1773003656.jpg" alt="" width="576" height="591" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>दलहन का रकबा 7.7 फीसदी बढ़ा</strong></p>
<p>दालों में अरहर की बुवाई का क्षेत्र 46.50 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल इस अवधि तक 40.74 लाख हेक्टेयर था। मूंग की बुवाई 35.46 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल इस समय तक 31.49 हेक्टेयर में मूंग की बुवाई हुई थी। उड़द की बुवाई पिछले साल से कम क्षेत्र में हुई है। इस सीजन में कुल 30.73 लाख हेक्टेयर में उड़द की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक उड़द का रकबा 32.60 लाख हेक्टेयर था। उड़द की बुवाई का सामान्य क्षेत्र 36.76 लाख हेक्टेयर है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>बाजरा की बुवाई पिछड़ी&nbsp;</strong></p>
<p>मोटे अनाज की बुवाई पिछले साल के मुकाबले 3.48 फीसदी बढ़ी है। अब तक 192.55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मोटे अनाज की बुवाई हुई है, जो पिछले साल इस समय तक 186.07 लाख हेक्टेयर थी। मोटे अनाज में ज्वार की बुवाई 16.13 लाख हेक्टेयर, रागी की बुवाई 12.46 लाख हेक्टेयर, मक्के की बुवाई 88.06 लाख और बाजरा की बुवाई 69.91 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। मोटे अनाज में बाजरा की बुवाई पिछले साल से कम है जबकि मक्का का क्षेत्र पांच साल के औसत क्षेत्र को पार कर गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>तिलहन की बुवाई में मामूली वृद्धि</strong></p>
<p>तिलहन की बुवाई में 1.52 फीसदी की हुई है। अब तक 193.84 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले साल इसी अवधि के दौरान 190.92 लाख थी। इसमें मूंगफली की बुवाई 47.85 लाख हेक्टेयर, सोयाबीन की बुवाई 125.11 लाख हेक्टेयर, सूरजमुखी की बुवाई 0.76 लाख हेक्टेयर और तिल की बुवाई 11.31 लाख हेक्टेयर में हुई है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p><strong>कपास का क्षेत्र 8.8 फीसदी घटा&nbsp;</strong></p>
<p>गन्ने की बुवाई में वृद्धि हुई है, जिससे गन्ने का क्षेत्र 57.68 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है जो पिछले साल के क्षेत्र और पांच साल के औसत क्षेत्र से अधिक है। वहीं कपास की बुवाई में 8.8 फीसदी की गिरावट आई है। कपास का क्षेत्र पिछले साल के 123.71 लाख हेक्टेयर से घटकर 112.76 लाख हेक्टेयर रह गया है। जबकि कपास का औसत क्षेत्र 129.34 लाख हेक्टेयर है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ बुवाई सामान्य क्षेत्र से अधिक, धान की बंपर बुवाई, दलहन का क्षेत्र बढ़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66f192ae246b9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी उद्योग ‘शुगर कंट्रोल आर्डर 2024’ में चीनी उत्पादक और चीनी की परिभाषा से असहमत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/the-sugar-industry-disagrees-with-the-definition-of-sugar-producer-and-sugar-in-the-sugar-control-order-2024.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 22 Sep 2024 09:30:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/the-sugar-industry-disagrees-with-the-definition-of-sugar-producer-and-sugar-in-the-sugar-control-order-2024.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार का ड्राफ्ट शुगर (कंट्रोल) आर्डर 2024 चीनी उद्योग के गले नहीं उतर रहा है। उद्योग का कहना है कि शुगर (कंट्रोल) आर्डर 1966 और शुगर प्राइस (कंट्रोल) आर्डर 2018 की जगह नया आर्डर लाने की कोई जरूरत ही नहीं थी और न उद्योग ने इसकी कोई मांग की। दूसरे, इस आर्डर में कई ऐसे प्रावधान हैं जो चीनी उद्योग के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। उद्योग का कहना है कि चीनी की परिभाषा समेत कई दूसरे प्रावधानों को बदलने की जरूरत है।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने 24 अगस्त को एक ड्राफ्ट शुगर कंट्रोल आर्डर जारी किया है, जिस पर संबंधित पक्षों को 23 सितंबर तक राय देनी है। इस आदेश पर राय बनाने के लिए 14 सितंबर को पुणे में चीनी उद्योग के विभिन्न संगठनों, चीनी कारोबारियों व निजी चीनी मिलों के करीब 50 प्रतिनिधियों की बैठक में यह बातें सामने आई हैं। सूत्रों के मुताबिक उद्योग अपने सुझाव जल्दी ही केंद्र सरकार को सौंप देगा।&nbsp;</p>
<p><strong>रूरल वॉयस</strong> को प्राप्त जानकारी के मुताबिक चीनी मिलों को सबसे बड़ी आपत्ति चीनी की परिभाषा पर है। ड्राफ्ट शुगर कंट्रोल आर्डर में बीआईएस की परिभाषा ली गई है। चीनी उद्योग का कहना है कि वैधानिक संस्था और नियामक फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथारिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की पहले से ही परिभाषा है और खाद्य नियामक होने के नाते उद्योग को उसका पालन करना ही है। ऐसे में दूसरी परिभाषा की कोई जरूरत नहीं है।</p>
<p>चीनी उत्पादक की परिभाषा को लेकर भी उद्योग को आपत्ति है। परिभाषा में चीनी और उसके सह-उत्पाद (बाई प्रोडक्ट्स) बनाने वाली इकाइयों को शुगर प्रोड्यूसर माना गया है। उद्योग का कहना है कि चीनी का उत्पादन करने वाली मिलें तो सह-उत्पाद बनाती ही हैं क्योंकि चीनी उत्पादन में सह-उत्पाद निकलते ही हैं। इसलिए चीनी उत्पादक की परिभाषा में अलग से बाई प्रोडक्ट जोड़ने की जरूरत नहीं है।</p>
<p>आर्डर में चीनी की पैकेजिंग को भी शामिल किया गया है। उसमें चीनी की पैकेजिंग जूट बैग में करने का प्रावधान किया गया है। उद्योग का कहना है कि यह प्रावधान हमें स्वीकार्य नहीं है। पहले से ही उद्योग जूट कंट्रोल आर्डर के तहत आता है। ऐसे में एक ही उत्पाद के लिए दो-दो आर्डर का कोई औचित्य नहीं है।&nbsp;</p>
<p>नये प्रस्तावित आर्डर में चीनी की कीमतों को भी शामिल किया जाएगा। सरकार फिलहाल चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत (एमएसपी) को शुगर प्राइस कंट्रोल आर्डर, 2018 के तहत निर्धारित करती है। उद्योग का कहना है कि चीनी की न्यूनतम कीमत का ही प्रावधान आर्डर में होना चाहिए। उम्मीद है कि उद्योग जल्दी ही ड्राफ्ट शुगर कंट्रोल आर्डर, 2024 पर अपनी राय सरकार को सौंप देगा। अब यह देखना है कि सरकार चीनी उद्योग के सुझावों को कितना समायोजित करती है।</p>
<p>शुगर कंट्रोल आर्डर में पहली बार खांडसारी उद्योग को भी शामिल किया गया है। इसके लिए चीनी की परिभाषा के तहत ओपन पैन की प्रक्रिया के जरिये बनने वाली खांडसारी शुगर, बूरा और सल्फर खांडसारी को भी शामिल किया गया है। ड्राफ्ट आर्डर में 500 टन प्रतिदिन या उससे अधिक गन्ना पेराई क्षमता (टीसीडी) वाली खांडसारी इकाइयों को इसके तहत लाने का प्रस्ताव है। इससे सरकार के पास अधिकार होगा कि जो नियंत्रण चीनी मिलों पर लागू हैं वह इन इकाइयों पर भी लागू किए जा सकें। इसमें खांडसारी का भंडारण, परिवहन, बिक्री और मूल्य निर्धारण शामिल हो सकता है। खांडसारी इकाइयों के संगठनों ने रूरल वॉयस के साथ बातचीत में कहा कि वह इसके पक्ष में नहीं है और वह भी इस बारे में अपना पक्ष सरकार के सामने रखने वाले हैं।&nbsp;</p>
<p>दरअसल, शुगर (कंट्रोल) ऑर्डर 2024 के जरिए केंद्र सरकार चीनी उद्योग पर नियंत्रण और रेगुलेशन का दायरा बढ़ाने का प्रयास कर रही है। यह आदेश चीनी के अलावा इसके सह-उत्पादों जैसे शीरा, एथेनॉल और बायोगैस आदि के उत्पादन के साथ इनकी बिक्री, भंडारण, पैकेजिंग और परिवहन पर भी लागू होगा। इसे लेकर चीनी उद्योग की भी अपनी चिंताएं हैं। ड्राफ्ट में कहा गया है कि कोई भी उत्पादक या डीलर केंद्र के लिखित निर्देश के बिना चीनी और इसके सह-उत्पादों की बिक्री या डिलीवरी नहीं कर सकेगा। किसी को भी परमिट के बिना चीनी और इसके सह-उत्पादों के ट्रांसपोर्ट की अनुमति नहीं होगी।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/agribusiness/preparations-to-control-sugar-industry-control-will-increase-with-sugar-control-order-2024.html"><span style="text-decoration: underline;"><strong>पढ़ें... खांडसारी उद्योग पर कंट्रोल की तैयारी, शुगर कंट्रोल ऑर्डर 2024 से बढ़ेगा नियंत्रण</strong></span></a></p>
<p><strong>उदारीकरण से यू-टर्न&nbsp;</strong><br />करीब तीन दशक तक उदारीकरण की नीति पर चलने के बाद अब लग रहा है कि केंद्र सरकार चीनी उद्योग पर नियंत्रण बढ़ाने की तरफ जा रही है। दूसरी तरफ सरकार स्वरोजगार को बढ़ावा देने और इज ऑफ डूइंग बिजनेस का दावा करती है। ऐसे में शुगर (कंट्रोल) ऑर्डर 2024 एक विरोधाभासी कदम साबित हो सकता है। प्रस्तावित आदेश एक दशक पहले रंगराजन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर शुरू हुए चीनी उद्योग को नियंत्रण मुक्त करने के सिलसिले के भी खिलाफ है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65dd702d79ff6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी उद्योग ‘शुगर कंट्रोल आर्डर 2024’ में चीनी उत्पादक और चीनी की परिभाषा से असहमत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65dd702d79ff6.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अतिशी बनीं दिल्ली की नई मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल में मुकेश अहलावत नया चेहरा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/atishi-took-oath-as-the-new-chief-minister-of-delhi-promised-continuity-and-progress-in-policies.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 21 Sep 2024 19:42:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/atishi-took-oath-as-the-new-chief-minister-of-delhi-promised-continuity-and-progress-in-policies.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आम आदमी पार्टी (AAP) की नेता अतिशी ने शनिवार को दिल्ली की नई मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्सेना ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। अतिशी के साथ ही पुराने मंत्रिमंडल के सदस्य गोपाल राय, कैलाश गहलोत, सौरभ भारद्वाज, इमरान हुसैन और नए मंत्री मुकेश अहलावत ने भी शपथ ली। आप के विधायकों ने मंगलवार को हुई पार्टी बैठक में सर्वसम्मति से अतिशी को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना था।</p>
<p>यह परिवर्तन अरविंद केजरीवाल के अप्रत्याशित इस्तीफे के बाद हुआ। दिल्ली शराब नीति से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उन्होंने इस्तीफे की घोषणा की थी। केजरीवाल ने अपने इस्तीफे की घोषणा के समय संकेत दिया था कि वे तभी मुख्यमंत्री के पद पर वापस आएंगे जब उन्हें आगामी विधानसभा चुनावों में दिल्ली के मतदाताओं से "ईमानदारी का सर्टिफिकेट" प्राप्त होगा।</p>
<p>अब अतिशी के सामने चुनौती है कि वह मौजूदा सरकार का कार्यकाल पूरा करें, जो फरवरी 2025 तक चलेगा, साथ ही आप की चुनावी तैयारी को भी मजबूती दें। भले ही उनका कार्यकाल छोटा हो, लेकिन यह बेहद अहम है क्योंकि कई महत्वपूर्ण योजनाओं जैसे मुख्&zwj;यमंत्री महिला सम्&zwj;मान योजना, इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2.0 और विभिन्न सेवाओं की घर-घर डिलीवरी को तेजी से लागू करने की आवश्यकता होगी।</p>
<p>शपथ ग्रहण के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को अपने संबोधन में अतिशी ने अरविंद केजरीवाल को धन्यवाद देते हुए कहा, "अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा इसलिए दिया है क्योंकि वह दिल्ली के लोगों से ईमानदारी का प्रमाण पत्र चाहते हैं। मुझे नहीं लगता कि दुनिया में किसी और नेता ने ऐसा किया है। हमें उन्हें फरवरी में फिर से मुख्यमंत्री बनाना है।" उन्होंने आगामी चुनावों में निर्णायक जनादेश की अपील की।</p>
<p>अतिशी ने बीजेपी पर भी निशाना साधा और चेतावनी दी कि अगर वह सत्ता में आती है तो आप की प्रमुख योजनाओं जैसे मुफ्त बिजली, पानी और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा को समाप्त कर सकती है। उन्होंने इन योजनाओं को जारी रखने की बात कहते हुए इन्हें जनता के कल्याण से भी जोड़ा।</p>
<p>ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ी और रोड्स स्कॉलर अतिशी का दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने तक का सफर काफी तेजी से आगे बढ़ा है। उन्होंने 2015 में अपना राजनीतिक कैरियर शुरू किया था और 2020 में विधायक बनीं। शिक्षा के क्षेत्र में सुधारात्मक कार्यों के लिए वह विशेष रूप से जानी जाती हैं, जो उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के साथ मिलकर किए थे।</p>
<p>सुषमा स्वराज और शीला दीक्षित के बाद दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री बनने वाली अतिशी के कार्यकाल से राजनीतिक जगत को कई उम्मीदें हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वह राजनीतिक चुनौतियों का कैसे सामना करती हैं और कैसे आम आदमी पार्टी को 2025 में एक और जीत दिलाने के लिए तैयार करती हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अतिशी बनीं दिल्ली की नई मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल में मुकेश अहलावत नया चेहरा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज पर न्यूनतम निर्यात मूल्य खत्म होने के बाद कीमतों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/onion-price-increased-by-20-percent-after-removal-of-mep.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 20 Sep 2024 17:55:55 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/onion-price-increased-by-20-percent-after-removal-of-mep.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार द्वारा प्याज पर 550 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) हटाने और निर्यात शुल्क 40 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी करने का असर प्याज की कीमतों पर दिखने लगा है। प्याज से जुड़े इन फैसलों के बाद से प्याज की सबसे बड़ी थोक मार्केट नासिक की लासलगांव मंडी में प्याज की कीमतों में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 20 सितंबर को देश में प्याज का औसत खुदरा मूल्य 52.52 रुपये प्रति किलो और औसत थोक मूल्य 44.45 रुपये प्रति किलो था।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज का औसत थोक भाव हफ्ते भर पहले 3000 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल था जो अब बढ़कर 4000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गया है। कीमतों में इस वृद्धि से प्याज उत्पादक किसानों को कुछ राहत मिली है। निर्यात पाबंदियों के चलते महाराष्ट्र के किसानों को इस साल काफी नुकसान उठाना पड़ा। इसके चलते प्याज किसानों की नाराजगी लोकसभा चुनाव के दौरान महाराष्ट्र की प्याज बेल्ट में दिखाई दी थी। महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने प्याज पर एमईपी हटाने और निर्यात शुल्क घटाने का निर्णय लेकर किसानों की नाराजगी को कम करने का प्रयास किया है।</p>
<p>महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष<strong> भारत दिघोले</strong> ने <strong>रूरल वॉयस </strong>को बताया कि जैसे ही प्याज पर एमईपी हटाई गई और निर्यात शुल्क कम हुआ, प्याज की कीमतों में तेज देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि प्याज की मांग बढ़ गई है, जिससे कीमतों में सुधार हुआ है। महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में शुक्रवार को प्याज का औसत भाव 4650 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि एक महीने पहले यह 3600 रुपये प्रति क्विंटल के करीब था। उन्होंने कहा कि कीमतों में अभी और सुधार होने की उम्मीद है।&nbsp;</p>
<p>शेतकरी संघटना के नेता और एमएसपी पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के सदस्य <strong>अनिल घनवट</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि किसानों को अब प्याज के बेहतर दाम मिल रहे हैं। सरकार के फैसले के बाद प्याज की कीमतें बढ़कर 4000 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं। यह बढ़ोतरी अगले महीने तक जारी रह सकती है। हालांकि, अक्टूबर के अंत में जैसे ही प्याज की नई फसल मंडियों में आएगी, कीमतों में गिरावट देखने को मिलेगी।</p>
<p>प्याज की थोक कीमतों में बढ़ोतरी का असर खुदरा बाजार में भी दिखाई दे रहा है। पिछले एक सप्ताह में प्याज की खुदरा कीमतें 50 रुपये किलो से बढ़कर 65-70 रुपये किलो तक पहुंच गई हैं। यही वजह है कि केंद्र सरकार सहकारी संस्था नेफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से रियायती दरों पर प्याज की बिक्री करवा रही है। दिल्ली, मुंबई समेत कई शहरों में 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज बेचा जा रहा है।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज पर न्यूनतम निर्यात मूल्य खत्म होने के बाद कीमतों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डिजिटल एग्रीकल्चर से आधुनिक किसान चौपाल तक, 100 दिन में कृषि मंत्रालय की 10 प्रमुख पहल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/from-digital-agriculture-to-modern-kisan-chaupal-10-major-initiatives-of-agriculture-ministry-in-100-days.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 20 Sep 2024 14:14:40 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/from-digital-agriculture-to-modern-kisan-chaupal-10-major-initiatives-of-agriculture-ministry-in-100-days.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वैज्ञानिक अनुसंधान को लैब से किसानों के खेत तक पहुंचाने के लिए कृषि मंत्रालय अक्टूबर से आधुनिक किसान चौपाल शुरू करने जा रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के 100 दिनों की उपलब्धियों के बारे में एक प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। &nbsp;</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि <strong>आधुनिक किसान चौपाल</strong> - लैब टू लैंड को अक्टूबर में प्रारंभ करने वाले हैं। इसमें वैज्ञानिक किसानों तक सीधे जानकारियां पहुंचाएंगे। इस कार्यक्रम से किसानों और नवीनतम कृषि अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के बीच की दूरी को मिटाने में मदद मिलेगी। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के 100 दिनों की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री ने 65 फसलों की 109 किस्में किसानों को समर्पित की थीं जो जलवायु अनुकूल, कीट प्रतिरोधी और अधिक उपज वाली हैं। उन्होंने कहा कि इन 100 दिनों में डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन की शुरुआत को स्वीकृति दी गई है। नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और किसानों ने इसका उपयोग करना भी प्रारंभ कर दिया है। सरकार परंपरागत फसलों के साथ-साथ बागवानी उत्पादन बढ़ाने के लिए भी प्रयास कर रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>9.51 करोड़ पीएम-किसान लाभार्थी </strong></p>
<p>केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा तीसरी बार प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद प्रधानमंत्री ने अपने पहले महत्वपूर्ण निर्णय में 9.26 करोड़ से अधिक किसानों को पीएम-किसान योजना के तहत रुपये 21000 करोड़ की धनराशि जारी की। सैचुरेशन अभियान चलाकर 25 लाख से अधिक नए किसानों को पीएम-किसान योजना से जोड़ा गया। अब पीएम-किसान के तहत कुल लाभार्थियों की संख्या 9.51 करोड़ से अधिक हो गई है। मंत्रालय ने किसानों को उनकी अपनी भाषा में पीएम-किसान से संबंधित प्रश्नों में सहायता करने के लिए एआई-चैटबॉट "किसान-ईमित्र" का उपयोग शुरू किया।</p>
<p><strong>डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन </strong></p>
<p>कृषि क्षेत्र में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने 2817 करोड़ रुपये के डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन को मंजूरी दी है। इसके तहत कृषि के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) विकसित किया जाएगा। इसमें एग्री स्टैक, कृषि निर्णय सहायता प्रणाली और डिजिटल फसल सर्वेक्षण जैसी पहल की जाएंगी। एग्रीस्टैक के तहत किसानों को आधार की तर्ज पर डिजिटल पहचान (किसान आईडी) दी जाएगी। देश में 11 करोड़ किसानों के लिए डिजिटल पहचान बनाने का लक्ष्य रखा गया है। डीपीआई की मदद से फसल उत्पादन के सटीक अनुमान, सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने, पारदर्शिता बढ़ाने, कृषि सलाह, उपज के मूल्य निर्धारण और सरकारी नीतियों के निर्धारण में मदद मिलेगी।&nbsp;</p>
<p><strong>नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम</strong></p>
<p>फसलों में कीटों की निगरानी के लिए नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम (एनपीएसएस) की शुरुआत की गई है। यह डिजिटल पहल है जिसमें एक मोबाइल ऐप और एक वेब पोर्टल शामिल है। एनपीएसएस में&nbsp;61&nbsp;फसलों के लिए पेस्ट पहचान मॉड्यूल और&nbsp;15&nbsp;फसलों के लिए समय पर उपचार एडवाइजरी जारी करने हेतु मॉड्यूल शामिल है।</p>
<p><strong>आयात-निर्यात से जुड़े अहम फैसले </strong></p>
<p>केंद्र सरकार ने कृषि आयात-निर्यात की सुगमता के लिए हाल ही में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।</p>
<p><strong>प्याज</strong></p>
<p>सरकार ने प्याज पर लागू 550 डॉलर प्रति मीट्रिक टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (<span>एमईपी</span>) समाप्त करने और निर्यात शुल्क को 40 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी करने का फैसला लिया है।</p>
<p><strong>बासमती चावल </strong></p>
<p>बासमती चावल पर लागू 950 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (<span>एमईपी</span>) <span>पूरी तरह हटाने का निर्णय लिया है। इस पाबंदी के हटने से देश से बासमती चावल का निर्यात बढ़ने और किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है। </span></p>
<p><strong>खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाया </strong></p>
<p>केंद्र सरकार ने कच्चे तेल (पाम, सोया और सूरजमुखी) पर प्रभावी आयात शुल्क 5.5 फीसदी से बढ़ाकर 27.5 फीसदी और रिफाइंड तेल (पाम, सोया और सूरजमुखी) पर 13.75 फीसदी से बढ़ाकर 35.75 फीसदी कर दिया है। इससे तिलहन किसानों और घरेलू खाद्य तेल उद्योग को सस्ते आयात की मार से बचाने में मदद मिलेगी।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान</strong><strong> (<span>पीएम-आशा</span>)</strong></p>
<p>हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा)&nbsp;<span>की एकीकृत योजना</span>&nbsp;<span>को</span>&nbsp;15<span>वें वित्त आयोग चक्र के दौरान</span>&nbsp;2025-26&nbsp;<span>तक बढ़ाने को मंजूरी दी है। इसके लिए कुल </span>35,000&nbsp;<span>करोड़ रुपये का बजट निर्धारित है। इससे किसानों को उपज का लाभकारी मूल्य</span>&nbsp;<span>दिलाने और उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव</span>&nbsp;<span>से बचाने में मदद मिलेगी। सरकार ने मूल्य समर्थन योजना</span>&nbsp;(PSS)&nbsp;और मूल्य स्थिरीकरण कोष&nbsp;(PSF)&nbsp;योजना को पीएम-आशा में शामिल कर दिया है।</p>
<p>सरकार ने अधिसूचित&nbsp;<span>दलहन</span>,&nbsp;<span>तिलहन और नारियल</span>&nbsp;<span>की खरीद के लिए मौजूदा सरकारी</span>&nbsp;<span>गारंटी को बढ़ाकर</span> 45,000&nbsp;<span>करोड़ रुपये कर दिया है। जब बाजार में</span>&nbsp;<span>कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी</span>)&nbsp;<span>से नीचे गिरेंगी</span>, <span>तब किसानों से</span>&nbsp;<span>अधिक दालें</span>,&nbsp;<span>तेल बीज और नारियल खरीदे जा सकेंगे।&nbsp;</span>किसानों को तूर,&nbsp;<span>उड़द और मसूर की अधिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहित</span>&nbsp;<span>करने के लिए</span> 2024-25&nbsp;<span>वर्ष के लिए इन दालों की </span>25 <span>फीसदी खरीद की सीमा</span>&nbsp;<span>हटा दी गई</span>&nbsp;<span>है।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>कृषि सखी</strong></p>
<p>ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालयों ने कृषि सखियों को &ldquo;कृषि पैरा-एक्सटेंशन वर्कर के रूप में प्रशिक्षित और प्रमाणित किया जाएगा।&nbsp;कृषि सखियों को वर्तमान में प्राकृतिक खेती और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कृषि सखी गांव स्तर पर कृषि सेवाएं प्रदान कर प्रति वर्ष 50,000 रुपये से अधिक कमा सकेंगी।</p>
<p><strong>कृषि अवसंरचना निधि का विस्तार</strong></p>
<p>केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि अवसंरचना निधि (एआईएफ) के विस्तार को मंजूरी दी है। एआईएफ के तहत 76,400 परियोजनाओं के लिए 48,500 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इनमें 18,606 कस्टम हायरिंग केंद्र, 16,<span>276 प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयां</span>, 13,724 गोदाम, 3,102 छंटाई और ग्रेडिंग इकाइयां, 1,909 कोल्ड स्टोर परियोजनाएं और लगभग 21,394 अन्य प्रकार की फसल कटाई के बाद प्रबंधन परियोजनाएं और सामुदायिक कृषि संपत्तियां शामिल हैं।</p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ डिजिटल एग्रीकल्चर से आधुनिक किसान चौपाल तक, 100 दिन में कृषि मंत्रालय की 10 प्रमुख पहल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम&amp;#45;आशा योजना जारी रखने को मंजूरी,  पीएसएस और पीएसएफ भी इसमें शामिल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/approval-to-continue-pm-asha-scheme-pss-and-psf-also-included-in-it.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Sep 2024 17:11:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/approval-to-continue-pm-asha-scheme-pss-and-psf-also-included-in-it.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="33ee3ee7-04dc-4643-88c2-7046de2c1ecd" dir="auto" class="min-h-[20px] text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p><span>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) जारी रखने की मंजूरी दी है। इस योजना के जरिए सरकार किसानों को लाभकारी मूल्य प्रदान करने और उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने का प्रयास करती है। इस पर 15वें वित्त आयोग के दौरान वर्ष 2025-26 तक 35,000 करोड़ रुपये का वित्तीय व्यय होगा।</span></p>
<p><span>सरकार ने मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) और मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) योजनाओं को पीएम आशा में मिला दिया है। पीएम-आशा की एकीकृत योजना से किसानों को उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने और उपभोक्ताओं को किफायती मूल्&zwj;यों पर आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। पीएम-आशा में अब मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस), मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ), मूल्य घाटा भुगतान योजना (पीओपीएस) और बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) के घटक शामिल होंगे।</span><span></span></p>
<p><span><strong>मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस)</strong> के तहत दलहन, तिलहन और खोपरा की खरीद 2024-25 से इन फसलों के राष्ट्रीय उत्पादन का 25 प्रतिशत होगी। इससे राज्यों को किसानों से एमएसपी पर इन फसलों की खरीद करने में मदद मिलेगी। हालांकि, 2024-25 के लिए तुअर, उड़द और मसूर के मामले में यह सीमा लागू नहीं होगी क्योंकि 2024-25 के दौरान तुअर, उड़द और मसूर की 100 प्रतिशत&nbsp;खरीद होगी।&nbsp;</span><span>सरकार ने एमएसपी पर दलहन, तिलहन और खोपरा की खरीद के लिए किसानों से मौजूदा सरकारी गारंटी का नवीनीकरण करते हुए उसे बढ़ाकर 45,000 करोड़ रुपये कर दिया है।&nbsp;इससे कृषि मंत्रालय को किसानों से एमएसपी पर दलहन, तिलहन और खोपरा की अधिक खरीद करने में मदद मिलेगी। </span></p>
<p><span><strong>मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ)</strong> योजना के विस्तार से दालों और प्याज के रणनीतिक भंडार को बनाए रखने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को कृषि-बागवानी वस्तुओं की कीमतों में अत्यधिक अस्थिरता से बचाने में मदद मिलेगी। जब भी बाजार में कीमतें एमएसपी से ऊपर होंगी, तो बाजार मूल्य पर दालों की खरीद उपभोक्ता कार्य विभाग (डीओसीए) द्वारा की जाएगी, जिसमें नैफेड के ई-समृद्धि पोर्टल और एनसीसीएफ के ई-संयुक्ति पोर्टल पर पूर्व-पंजीकृत किसान भी शामिल होंगे। सुरक्षित भंडार के रखरखाव के अलावा, पीएसएफ योजना के तहत हस्तक्षेप टमाटर जैसी अन्य फसलों और भारत दाल, भारत आटा और भारत चावल की सब्सिडी वाली खुदरा बिक्री में किया गया है।</span></p>
<p><span><strong>बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस)</strong> के जरिए बागवानी फसलों को उगाने वाले किसानों को लाभकारी मूल्य प्रदान करने में मदद मिलेगी। सरकार ने योजना के कवरेज को उपज के 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत&nbsp;कर दिया है साथ ही एमआईएस के तहत उपज की खरीद के बजाय किसानों के खाते में सीधे अंतर का भुगतान करने का एक नया विकल्प जोड़ा है।&nbsp;&nbsp;</span></p>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम-आशा योजना जारी रखने को मंजूरी,  पीएसएस और पीएसएफ भी इसमें शामिल ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बासमती धान की कीमतों में उछाल, एमईपी हटते ही 23 फीसदी तक बढ़े दाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/basmati-paddy-prices-rise-prices-increased-by-23-percent-after-mep-was-removed.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Sep 2024 11:49:24 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/basmati-paddy-prices-rise-prices-increased-by-23-percent-after-mep-was-removed.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बासमती धान पर लगी न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) के हटते ही हरियाणा की मंडियों में बासमती धान की कीमतों में उछाल देखने को मिला है। पिछले पांच दिनों के अंदर धान की कीमतें 23.07 फीसदी तक बढ़ गई हैं। सरकार ने 13 सितंबर को बासमती के निर्यात पर एमईपी हटाने का फैसला लिया था। हरियाणा की मंडियों में जहां एक हफ्ते पहले तक बासमती धान की कीमतें 2500 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल थीं, वहीं अब यह 3000 से 3200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुकी हैं। बासमती धान की कीमतों में आई इस तेजी ने किसानों को और बेहतर दाम मिलने की उम्मीद जगा दी है।&nbsp;&nbsp;</p>
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<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="d280859e-97d6-4b00-90cf-1a3e4bdc5cff" dir="auto" class="min-h-[20px] text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5">
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<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>हरियाणा की कैथल मंडी में मंगलवार को बासमती धान की 1509 किस्म 3200 रुपये प्रति क्विंटल में बिकी। कैथल मंडी के आढ़ती <strong>संदीप</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> बताया कि एमईपी की पाबंदी हटने के बाद बासमती धान की कीमतों में तेजी आई है। पिछले पांच दिनों में प्रति क्विंटल 300 से 350 रुपये का उछाल देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि कैथल मंडी में 1509 बासमती धान की आवक बढ़ गई है, जिसे फिलहाल 3000 से 3200 रुपये प्रति क्विंटल का दाम मिल रहा है।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p>कीमतों में यह उछाल भले ही किसानों के लिए राहत की बात हो, लेकिन यह फिर भी पिछले साल की तुलना में कम हैं। संदीप ने बताया कि पिछले साल इसी समय बासमती धान का दाम 3200 से 3800 रुपये प्रति क्विंटल था। किसानों को उम्मीद है कि आगे कीमतों में और सुधार हो सकता है।</p>
<p>सरकार ने आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन (2024-25) के लिए सामान्य धान का एमएसपी 2300 रुपये और ग्रेड-ए धान का एमएसपी 2320 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। एमईपी की पाबंदी के चलते व्यापारियों के लिए बासमती चावल का निर्यात करना मुश्किल हो रहा था, जिससे कीमतें काफी कम हो गईं थी। एक महीने पहले बासमती धान की कीमतें सामान्य धान की कीमतों से लगभग थोड़ा ही ऊपर थीं, जिससे किसान निराश थे। लेकिन अब कीमतों में उछाल से उनकी उम्मीदें बढ़ी हैं। बासमती चावल उत्पादन का अधिकांश हिस्सा निर्यात होता है और घरेलू बाजार में भी बासमती चावल की कीमतें सामान्य चावल से काफी अधिक रहती हैं। &nbsp;</p>
<p>हरियाणा राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष <strong>सुशील जैन</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> बताया कि एमईपी हटते ही बासमती धान की मांग में वृद्धि हुई है, जिससे कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते तक 2600 रुपये प्रति क्विंटल में बिकने वाला बासमती धान अब 3200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। रोजाना हरियाणा की मंडियों में लाखों बोरियां धान पहुंच रहा हैं, और यह उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक-दो हफ्तों में कीमतों में और तेजी देखी जा सकती है। बासमती धान की कीमतों में इस उछाल से किसानों में संतोष है, लेकिन वे अभी भी बेहतर कीमतों की उम्मीद कर रहे हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66ea758d0006a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बासमती धान की कीमतों में उछाल, एमईपी हटते ही 23 फीसदी तक बढ़े दाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ बुवाई 5 साल के औसत के पार पहुंची, धान और तिलहन के रकबे में बढ़ोतरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/kharif-sowing-exceeds-5-year-average-increase-in-area-under-paddy-and-coarse-cereals.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 17 Sep 2024 20:42:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/kharif-sowing-exceeds-5-year-average-increase-in-area-under-paddy-and-coarse-cereals.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू खरीफ सीजन में फसलों की बुवाई पांच साल के औसत यानी सामान्य क्षेत्र को पार कर चुकी है। <strong>कृषि मंत्रालय</strong> की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 17 सितंबर तक देश में 1096.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है जो गत वर्ष के 1072.74 लाख हेक्टेयर से करीब दो फीसदी अधिक है। खरीफ फसलों का रकबा पांच साल के औसत क्षेत्र 1096 लाख हेक्टेयर से भी ज्यादा हो गया है। &nbsp;</p>
<p>मानसून सीजन के दौरान देश के अधिकांश इलाकों में अच्छी बारिश के चलते खरीफ की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है।<strong> धान</strong> का रकबा 410 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है जबकि गत वर्ष इस अवधि तक 393.57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई हुई थी। इस सीजन में धान की बुवाई पांच साल के औसत क्षेत्र 401.55 लाख हेक्टेयर से भी अधिक है।</p>
<p><strong>दलहन के क्षेत्र में बढ़ोतरी </strong></p>
<p>चालू खरीफ सीजन में 127.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन फसलों की बुवाई हुई है जबकि गत वर्ष इस अवधि तक 118.43 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन फसलों की बुवाई हुई थी। हालांकि, दलहन की बुवाई पांच साल के औसत क्षेत्र 136.02 लाख हेक्टेयर से कम है। इस सीजन में अरहर का रकबा बढ़ा है लेकिन उड़द की बुवाई पिछले साल से कम हुई है।</p>
<p><strong>मोटे अनाजों की तरफ बढ़ता रुझान </strong></p>
<p>मोटे अनाजों की बुवाई पांच साल के औसत क्षेत्र को पार करते हुए 189.67 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। पिछले साल इसी अवधि तक 183.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मोटे अनाजों की बुवाई हुई थी। मक्का की बुवाई का क्षेत्र गत वर्ष के 83.67 लाख हेक्टेयर को पार कर 87.50 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है।</p>
<p><strong>तिलहन की बुवाई भी बढ़ी </strong></p>
<p>तिलहन फसलों की बुवाई 193.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है जबकि पिछले साल इस अवधि तक 190.37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तिलहन फसलों की बुवाई हुई थी। तिलहन फसलों की बुवाई का क्षेत्र भी पांच साल के औसत क्षेत्र से अधिक है। तिलहन में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी मूंगफली और सोयाबीन की बुवाई में हुई है।</p>
<p>देश में <strong>गन्ने</strong> का रकबा भी पिछले साल और पांच साल के औसत से अधिक है। चालू खरीफ सीजन में 57.68 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की बुवाई हो चुकी है। जबकि <strong>कपास</strong> का रकबा घटा है। पिछले साल 123.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई थी लेकिन इस साल कपास का रकबा 112.48 लाख हेक्टेयर है।</p>
<p></p>
<p style="text-align: center;"><span><strong>17 सितम्बर 2024 तक खरीफ फसलों की बुवाई</strong>&nbsp;<em>(</em></span><em>क्षेत्रफल&nbsp;लाख<strong>&nbsp;</strong>हेक्टेयर<strong>&nbsp;</strong>में)</em></p>
<table border="1" bordercolor="#ccc" cellpadding="5" cellspacing="0" class="Table" style="margin-left: auto; margin-right: auto;">
<tbody>
<tr>
<td rowspan="2" style="text-align: center;">
<p><strong>क्रम</strong></p>
<p><strong>सख्या</strong></p>
</td>
<td rowspan="2" style="text-align: center;">
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>फसलें</strong></p>
</td>
<td rowspan="2" style="text-align: center;">
<p><strong>सामान्य क्षेत्र&nbsp;(डीईएस) (2018-19 -</strong></p>
<p><strong>2022-23)</strong></p>
</td>
<td colspan="2" style="text-align: center;">
<p><strong>बोया गया क्षेत्र</strong></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p><strong>वर्तमान वर्ष&nbsp;2024</strong></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><strong>पिछला वर्ष&nbsp;2023</strong></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>1</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>चावल</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>401.55</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>410.00</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>393.57</strong></span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>2</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>दाल</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>136.02</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>127.77</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>118.43</strong></span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>अरहर</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>45.55</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>46.50</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>40.74</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>उड़द&nbsp;दाल</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>36.76</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>30.44</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>32.25</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>मूंगदाल</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>36.99</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>35.28</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>31.31</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>कुल्थी</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>1.90</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>0.44</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>0.35</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>मोठ दाल</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>10.32</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>10.53</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>9.42</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>अन्य दालें</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>4.49</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>4.59</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>4.36</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>3</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>श्रीअन्न व मोटे अनाज</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>181.03</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>189.67</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>183.11</strong></span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>ज्वार</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>16.01</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>15.54</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>14.22</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>बाजरा</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>72.63</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>69.88</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>70.89</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>रागी</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>10.96</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>10.94</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>8.85</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>छोटा बाजरा</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>4.47</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>5.81</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>5.48</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>मक्का</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>76.96</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>87.50</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>83.67</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>4</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>तिलहन</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>190.18</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>193.32</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>190.37</strong></span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>मूंगफली</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>45.28</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>47.85</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>43.75</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>सोयाबीन</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>122.95</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>125.11</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>123.85</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>सूरजमुखी</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>1.40</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>0.75</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>0.73</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>तिल</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>10.26</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>11.19</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>12.06</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>रामतिल</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>1.22</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>0.67</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>0.70</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>अरंड़ी</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>9.07</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>7.67</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>9.23</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>अन्य तिलहन</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>0.00</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>0.08</span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span>0.05</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>5</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><strong>गन्ना</strong></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>51.15</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>57.68</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>57.11</strong></span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p>6</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>जूट और मेस्टा</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>6.74</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>5.73</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>6.66</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p>7</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>कपास</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>129.34</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>112.48</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>123.69</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td colspan="2" style="text-align: center;">
<p><span><strong>कुल</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>1096.00</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>1096.65</strong></span></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><span><strong>1072.94</strong></span></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align: center;">&nbsp;<em>स्रोत: कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कृषि मंत्रालय, भारत सरकार&nbsp;</em></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66e99b27375b5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ बुवाई 5 साल के औसत के पार पहुंची, धान और तिलहन के रकबे में बढ़ोतरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66e99b27375b5.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इलेक्ट्रिक कारें कैसे पैदा करेंगी डीएपी का संकट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/how-the-electric-vehicles-will-create-a-crisis-for-dap.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 15 Sep 2024 19:48:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/how-the-electric-vehicles-will-create-a-crisis-for-dap.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>फसलों की बुवाई के समय उपयोग होने वाले सबसे अहम उर्वरक, डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) के कच्चे माल फॉस्फोरिक एसिड का एक नया दावेदार खड़ा हो गया है। इससे डीएपी के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस नये दावेदार को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार सब्सिडी भी दे रही है। वह दावेदार है इलेक्ट्रिक वाहन यानी ईवी।&nbsp;</p>
<p>दुनिया की बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी टेस्ला से लेकर चीन की बड़ी ईवी कंपनियों ने कार बैटरी के लिए फॉस्फोरिक एसिड का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। पिछले एक साल में चीनी कंपनियों द्वारा ईवी में इस्तेमाल की गई दो-तिहाई बैटरी लिथियम ऑयन फॉस्फेट (एलएफपी) बैटरी थीं। इनमें पी के लिए फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया गया है। साल 2023 में इलेक्ट्रिव व्हीकल्स की वैश्विक कैपेसिटी की 40 फीसदी बैटरियों की आपूर्ति एलएफपी बैटरियों की हुई, जबकि 2020 में यह संख्या मात्र छह फीसदी थी। निकल आधारित एनएमसी और एनसीए बैटरियों के लिए जरूरी निकल और कोबाल्ट जैसे महंगे और कम उपलब्धता वाले कच्चे माल के मुकाबले फॉस्फोरस की कीमत कम होने के चलते आने वाले दिनों में बैटरी उत्पादन में इसका उपयोग बढ़ेगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66e58cf26b8c8.jpg" alt="" /></p>
<p>भारत के लिए चिंता की बात यह है कि उर्वरक के तौर पर यूरिया के बाद देश में सबसे अधिक खपत डीएपी की ही होती है। पौधों की जड़ों को मजबूती देने के लिए फसल की बुवाई के समय ही डीएपी का उपयोग किया जाता है। डीएपी में 46 फीसदी फॉस्फोरस होता है। रॉक फॉस्फेट और सफ्यूरिक एसिड से फॉस्फोरिक एसिड तैयार किया जाता है। इससे तैयार फॉस्फोरिक एसिड को अमोनिया के साथ रिएक्ट कर डीएपी तैयार होता है। डीएपी के अलावा बाकी फॉस्फोरिक कॉम्पलेक्स उर्वरकों के लिए फॉस्फोरस इसी से लिया जाता है।</p>
<p>एलएफपी, एनएमसी और एनसीए तीनों लिथियम ऑयन बैटरी होती हैं। एलएफपी में कैथोड के लिए आयरन फॉस्फेट का इस्तेमाल होता है जबकि बाकी दोनों में निकेल, मैग्नीज, कोबाल्ट और अल्यूमिनियम ऑक्साइड का इस्तेमाल कैथोड यानी पॉजिटिव इलेक्ट्रोड के लिए किया जाता है। निकल आधारित बैटरियों की जगह निकल आयरन फॉस्फेट आधारित बैटरियों की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है।</p>
<p>ईवी के बढ़ते बाजार और इसमें फॉस्फोरस आधारित बैटरियों के बढ़ते उपयोग का भारत पर क्या असर होगा, इसे समझने के लिए कुछ आंकड़ों पर ध्यान देने की जरूरत है। भारत में डीएपी की सालाना खपत 105 से 110 लाख टन है। इसमें आधा से अधिक डीएपी चीन, सऊदी अरब, मोरक्को, रूस और कुछ दूसरे देशों से आयात किया जाता है। डीएपी के कच्चे माल फॉस्फोरिक एसिड का आयात जॉर्डन, मोरक्को, ट्यूनिशिया और सेनेगल से होता है। वहीं रॉक फॉस्फेट का आयात मोरक्को, टोगो, अल्जीरिया, मिश्र, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से होता है।</p>
<p>साल 2022-23 में भारत ने 5.56 अरब डॉलर का 67 लाख टन डीएपी, 3.62 अरब डॉलर का 27 लाख टन फॉस्फोरिक एसिड और 89.13 करोड़ डॉलर का 39 लाख टन रॉक फॉस्फेट आयात किया था। इस तरह डीएपी और उसके कच्चे माल के आयात पर भारत ने करीब दस अरब डॉलर खर्च किये थे। मर्चेंट ग्रेड पी में 52 से 54 फीसदी पी होता है, लेकिन बैटरियों में इस्तेमाल करने के लिए इसकी शुद्धथा काफी अधिक होती है।</p>
<p>चीन में जिस तरह से इसका उपयोग बैटरियों के लिए बढ़ा है और साल 2023 में दो-तिहाई बैटरी फॉस्फोरस आधारित थीं, उसके चलते यह संभावना बन रही है कि चीन लंबे समय तक डीएपी का बड़ा निर्यातक नहीं रहेगा। अभी वहां से हर साल 50 लाख टन डीएपी का निर्यात होता है। साल 2023 में भारत ने 17 लाख टन डीएपी का आयात चीन से किया था जो मोरक्को और रूस के बाद सबसे अधिक है।</p>
<p>अमेरिका और यूरोप में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में एलएफपी बैटरियों की हिस्सेदारी अभी 10 फीसदी से कम है। एनएमसी और एनसीए बैटरी में उपयोग होने वाले क्रिटिकल मिनरल कोबाल्ट का दुनिया भर में रिजर्व करीब 1.1 करोड़ टन है, उसमें से 60 लाख टन रिजर्व डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगों में है। कोबाल्ट इन बैटरियों की अधिक लागत का बड़ा कारण है। आने वाले दिनों में अमेरिका और यूरोप में भी एलएफपी बैटरियों की हिस्सेदारी बढ़ेगी क्योंकि दुनिया में रॉक फॉस्फेट का रिजर्व 74 अरब टन और आयरन का 190 अरब टन है। कीमत के अलावा एलएफपी बैटरियों की लाइफ ज्यादा है और यह अधिक सुरक्षित भी मानी जाती हैं। ऐसे में अगर ईवी कंपनियां एलएफपी की तरफ जाती हैं तो भारत के लिए डीएपी की उपलब्धता का संकट पैदा हो सकता है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66e58cfa14d79.jpg" alt="" /></p>
<p>चालू साल में अप्रैल से अगस्त 2024 के बीच भारत में 15.9 लाख टन डीएपी का आयात हुआ, जो इसी अवधि के पिछले साल के 32.5 लाख टन डीएपी आयात से 51 फीसदी कम है। इसकी बड़ी वजह चीन द्वारा निर्यात पर रोक लगाना और कीमतों का बढ़ना रहा है।</p>
<p>फिलहाल चीन एलएफपी बैटरियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहा है। वहीं मोरक्को में एलएफपी कैथोड मैटीरियल बनाने और ईवी बैटरी उत्पादन इकाइयों के लिए निवेशकों का रुझान बढ़ गया है। मोरक्को में 50 अरब टन रॉक फॉस्फेट रिजर्व है जो दुनिया के रॉक फॉस्फेट रिजर्व का करीब 68 फीसदी है। भारत में केवल 310 लाख टन फॉस्फेट रिजर्व है और हम सालाना 15 लाख टन का उत्पादन करते हैं। ऐसे में डीएपी जैसे अहम फसल न्यूट्रिएंट के लिए हम मोरक्को के ओसीपी ग्रुप, रूस के फॉसएग्रो और सऊदी अरब के साबिक व मादेन पर निर्भर हैं।</p>
<p>आने वाले समय के लिए लगभग पूरी तरह डीएपी आयात पर निर्भर भारत जैसे देश को डीएपी की उपलब्धता बनाये रखने के लिए रणनीति बनानी होगी। जिन देशों में रॉक फॉस्फेट के रिजर्व हैं उनके साथ आपूर्ति के दीर्घकालिक समझौते किये जाएं तो संभावित मुश्किल को कम किया जा सकेगा। ऐसे देशों में मोरक्को, ट्यूनिशिया, जॉर्डन और सेनेगल शामिल हैं।</p>
<p><strong>रबी सीजन में कम हो सकती है डीएपी की उपलब्धता</strong><br />किसानों को रबी सीजन में डीएपी की उपलब्धता को लेकर कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। अक्तूबर से आलू, सरसों और चना के लिए डीएपी की मांग शुरू होगी। उसके बाद नवंबर- दिसंबर में गेहूं के लिए डीएपी की मांग आयेगी। अगर आयात नहीं बढ़ता तो कुछ मुश्किल होगी। चालू खरीफ सीजन में डीएपी की बिक्री में 20.5 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है जबकि मानसून बेहतर था। अप्रैल से अगस्त 2024 के दौरान 38.4 लाख टन डीएपी का बिक्री हुई जबकि पिछले साल इसी अवधि में 48.3 लाख टन डीएपी की बिक्री हुई थी। हालांकि इस दौरान डीएपी की जगह एनपीके के कंबिनेशन वाले दूसरे कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की बिक्री अधिक हुई है।</p>
<p>डीएपी के आयात में कमी की बड़ी वजह इसकी आयात लागत बढ़ना है। वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमत 620 डॉलर प्रति टन को पार कर गई है। घरेलू बाजार में इसकी अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) 27000 रुपये प्रति टन है। सरकार डीएपी पर 21676 रुपये प्रति टन की सब्सिडी देती है। इसके साथ ही 1700 रुपये औसत रेल ढुलाई खर्च का भुगतान किया जाता है। वहीं 20 अगस्त को 3500 रुपये प्रति टन की अतिरिक्त सब्सिडी देने की सूचना कंपनियों को दी गई है। हालांकि उद्योग सूत्रों का कहना है कि उर्वरक मंत्रालय द्वारा इस संबंध में अभी तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है।&nbsp;</p>
<p>कुल मिलाकर कंपनियों को डीएपी पर 53876 रुपये प्रति टन की आय होती है। वहीं 620 डॉलर प्रति टन की आयातित कीमत के साथ इस पर पांच फीसदी सीमा शुल्क, बैगिंग, ढुलाई, बीमा और डीलर मार्जिन समेत सारे खर्च मिलाकर कुल 61000 रुपये प्रति टन की लागत आती है। ऐसे में कंपनियों की एक टन डीएपी की बिक्री पर लागत के मुकाबले 7100 रुपये का घाटा हो रहा है। उद्योग सूत्रों का कहना है कि कंपनियों और सरकार की कोशिश है कि कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की खपत बढ़ाकर डीएपी पर निर्भरता कम की जाए। पिछले दिनों राजस्थान के अधिकारियों ने किसानों को बाकयदा इसके लिए एडवाइजरी भी जारी की थी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इलेक्ट्रिक कारें कैसे पैदा करेंगी डीएपी का संकट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ में 200 एकड़ में अत्याधुनिक बीज पार्क स्थापित करेगी, इंडस्ट्री से निवेश का आग्रह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/up-govt-to-establish-state-of-the-art-seed-park-in-lucknow-asks-industry-for-investments.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 14 Sep 2024 16:32:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/up-govt-to-establish-state-of-the-art-seed-park-in-lucknow-asks-industry-for-investments.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>बीज और कृषि</strong> विशेषज्ञों ने कृषि अनुसंधान में परिणाम-उन्मुख सहयोग बढ़ाने, तिलहन, कपास और मक्का में आत्मनिर्भरता हासिल करने और अनुसंधान एवं विकास में निवेश को बढ़ावा देने के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने एक गतिशील और भविष्य के लिए तैयार कृषि क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए प्रगतिशील व्यापार नीतियों की जरूरत भी बताई। भारत के बीज उद्योग के शीर्ष संगठन, <strong>फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (FSII)</strong> की तरफ से शुक्रवार को आयोजित सम्मेलन उन्होंने अपने ये विचार रखे। यह सम्मेलन फेडरेशन की 8वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) का हिस्सा था।&nbsp;</p>
<p>इस मौके पर उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री <strong>सूर्य प्रताप शाही</strong> ने प्रगतिशील व्यापार नीतियों और आधुनिक कृषि तकनीक के माध्यम से कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, &ldquo;तकनीक का हस्तक्षेप हमारे किसानों के लिए समृद्धि लाने की कुंजी है। उत्तर प्रदेश देश के गेहूं उत्पादन में एक तिहाई योगदान देता है, इसलिए हम बीज उद्योग में राज्य की विशाल संभावनाओं को पहचानते हैं। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार उत्तर प्रदेश में एक बीज पार्क और उन्नत शोध के लिए एक कॉमन रिसोर्स सेंटर स्थापित करने की योजना बना रही है। इसमें निजी बीज उद्योग का सहयोग अपेक्षित है।&rdquo;</p>
<p>शाही ने उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए बीज उद्योग को आमंत्रित करते हुए कहा, &ldquo;हम लखनऊ में 200 एकड़ में अत्याधुनिक बीज पार्क की स्थापना करने जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य किसानों को उच्च गुणवत्ता, अधिक उपज और जलवायु के प्रति सहनशील बीज किस्में प्रदान करना है, जो उत्पादकता और समृद्धि को बढ़ावा देगा। हम सभी हितधारकों के दृष्टिकोण और सहयोग का स्वागत करते हैं और बीज उद्योग को सार्वजनिक-निजी भागीदारी के लिए आमंत्रित करते हैं। हम मिलकर भारत को उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएंगे और एक मजबूत और समृद्ध कृषि भविष्य में योगदान देंगे।&rdquo;</p>
<p>भारत कृषक समाज के चेयरमैन <strong>अजय वीर जाखड़</strong> ने भारतीय कृषि की चुनौतियों का समाधान करने के लिए आधुनिक विज्ञान और तकनीक के उपयोग की वकालत की। उन्होंने कहा, &ldquo;कृषि अनुसंधान और विकास में निवेश सुनिश्चित करना और राज्य तथा केंद्र सरकारों के बीच समन्वय स्थापित करना आवश्यक है ताकि किसानों के लाभ के लिए नई टेक्नोलॉजी का प्रभावी उपयोग किया जा सके। इसके अलावा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए एक्सटेंशन सिस्टम को मजबूत करना जरूरी है जिससे अच्छे कृषि तरीकों को बढ़ावा मिले। सतत विकास के लिए जलवायु सहनशील फसलें विकसित करना भी महत्वपूर्ण है।&rdquo;</p>
<p>भारत सरकार के कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) के अध्यक्ष<strong> प्रो. विजय पाल शर्मा</strong> ने कहा, &ldquo;कृषि को जीवन-यापन मॉडल से एक व्यावसायिक और उद्योग-उन्मुख मॉडल में बदलना चाहिए। हमें दालों और खाद्य तेलों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने, अनुसंधान में निवेश करने और जलवायु-सहनीय फसल किस्में विकसित करने की आवश्यकता है। हमारी रणनीति में तकनीक का उपयोग, संस्थागत तंत्र, बुनियादी ढांचे का विकास और किसानों को लाभकारी कीमतें सुनिश्चित करना शामिल हैं। निजी क्षेत्र को बाजार के विकास में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए, जिससे किसानों और उपभोक्ताओं के लिए बेहतर कीमतें सुनिश्चित हों।&rdquo;</p>
<p>एफएसआईआई के चेयरमैन और सवाना सीड्स के प्रबंध निदेशक तथा सीईओ, <strong>अजय राणा</strong> ने कहा, &ldquo;एक सक्षम वातावरण बनाने के लिए उपयुक्त नीतियों और संस्थानों का विकास, प्रोत्साहित करने वाला नियामक वातावरण और कृषि व्यवसाय में पर्याप्त सार्वजनिक और निजी निवेश आवश्यक हैं। बौद्धिक संपदा अधिकारों की व्यवस्था मजबूत करना इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।&rdquo;</p>
<p>एफएसआईआई के वाइस चेयरमैन और बायर क्रॉपसाइंस लिमिटेड के कृषि मामले एवं नीति निदेशक - आईबीएसएल और&nbsp; ट्रेट्स लाइसेंसिंग बिजनेस के प्रमुख <strong>राजवीर राठी</strong> ने कहा, "उत्तर प्रदेश में एक बीज पार्क की स्थापना भारतीय कृषि के लिए एक गेम-चेंजर है। उन्नत बीज प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाकर और मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देकर, हम भारत की विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप उच्च प्रदर्शन वाले, जलवायु-लचीले बीजों के विकास की गति को तेज कर सकते हैं। यह पहल न केवल हमारे बीज उद्योग को मजबूत करती है, बल्कि भारत के लाखों छोटे किसानों की आजीविका में सुधार लाने पर ध्यान देने के साथ देश के कृषि आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक स्थिरता के लक्ष्य के साथ भी संरेखित होती है। भारत के पास अपने कृषि जलवायु क्षेत्र विविधता का अनूठा लाभ है और इसे दुनिया के लिए बीज उत्पादन और आपूर्तिकर्ता के वैश्विक केंद्र के रूप में सेवा करने के लिए अपनी क्षमता का दोहन करना चाहिए।"</p>
<p>इस मौके पर एक्सपर्ट्स ने सुझाव दिया कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और भारत की कृषि को उसके अनुकूल ढालने के लिए कृषि अनुसंधान को मजबूत करना और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) को अपनाना आवश्यक है। उन्नत अनुसंधान में निवेश करने से बेहतर सूखा को सहन करने, बाढ़ प्रतिरोध और बेहतर पोषक दक्षता वाली फसल किस्में विकसित होंगी, जिससे उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी। साथ ही, प्रभावी पीपीपी, संसाधनों और विशेषज्ञता को एक साथ लाते हैं, नवाचार को बढ़ावा देते हैं और कृषि उन्नति के लिए एक सहायक वातावरण बनाते हैं। यह सहयोग अनुसंधान के बीच की दूरी को पाटता है, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सुव्यवस्थित करता है और क्षमता का निर्माण करता है, जिससे भारत के महत्वाकांक्षी कृषि लक्ष्यों को प्राप्त करने और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों ने मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) की आवश्यकता व्यक्त की। सरकारी एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों और निजी क्षेत्र के हितधारकों के बीच सहयोगात्मक प्रयास नवीन कृषि प्रौद्योगिकियों के विकास और अनुप्रयोग में तेजी लाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत के अमृत काल के दौरान एक वैश्विक कृषि महाशक्ति बनने की दिशा में अपना रास्ता बना सकता है। विशेषज्ञों ने कृषि मूल्य श्रृंखला में सभी हितधारकों द्वारा ठोस प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ में 200 एकड़ में अत्याधुनिक बीज पार्क स्थापित करेगी, इंडस्ट्री से निवेश का आग्रह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र सरकार ने सोयाबीन, सूरजमुखी और पाम ऑयल पर सीमा शुल्क बढ़ाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-of-india-hikes-customs-duty-on-crude-refined-sunflower-soybean-oil.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 14 Sep 2024 10:13:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-of-india-hikes-customs-duty-on-crude-refined-sunflower-soybean-oil.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने क्रूड और रिफाइंड खाद्य तेलों पर सीमा शुल्क बढ़ा दिया है। सस्ते आयात की मार से बचने के लिए भारतीय खाद्य तेल उद्योग की ओर से काफी दिनों से यह मांग की जा रही थी।&nbsp;</p>
<p>वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, क्रूड पाम, क्रूड सोयाबीन और क्रूड सूरजमुखी तेल पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) शून्य से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया है। इसी के साथ रिफाइंड पाम, रिफाइंड सोयाबीन और रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर मूल सीमा शुल्क 12.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 32.5 प्रतिशत किया गया है।</p>
<p>मूल सीमा शुल्क में संशोधन से इन कच्चे तेलों और रिफाइंड तेलों पर प्रभावी शुल्क क्रमश: 5.5 प्रतिशत से बढ़कर 27.5 प्रतिशत और 13.75 प्रतिशत से बढ़कर 35.75 प्रतिशत हो जाएगा। अधिसूचना में कहा गया है कि शुल्क में बदलाव शनिवार से प्रभावी होंगे।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि सरकार के निर्णयों से जहां एक ओर बासमती चावल और प्याज के निर्यात में वृद्धि हो तो दूसरी ओर खाद्य तेलों का आयात घटेगा। मोदी सरकार में लिए गए इन फैसलों से हमारे अन्नदाताओं के उत्पादन और बिक्री में बढ़ोतरी होगी तथा उपभोक्ताओं को भी इसका भरपूर लाभ सुनिश्चित होगा।</p>
<p>गौरतलब है कि खाद्य तेलों के सस्ते आयात के कारण देश में सोयाबीन जैसी तिलहन फसलों के दाम गिरकर एक दशक के न्यूनतम स्तर पर आ गए हैं और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम दाम मिल रहा है। सोयाबीन की कीमतों में गिरावट और सरकारी मदद न मिलने के मुद्दे पर तिलहन उत्पादक मध्य प्रदेश के किसान लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66e516f60d273.jpg" alt="" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_660d46194e7cb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र सरकार ने सोयाबीन, सूरजमुखी और पाम ऑयल पर सीमा शुल्क बढ़ाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_660d46194e7cb.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र सरकार ने प्याज और बासमती से न्यूनतम निर्यात मूल्य की पाबंदी हटाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-government-removed-restriction-on-minimum-export-price-of-onion-and-basmati-rice.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Sep 2024 19:14:17 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-government-removed-restriction-on-minimum-export-price-of-onion-and-basmati-rice.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने प्याज और बासमती चावल को लेकर बड़ा फैसला लिया है। प्याज के निर्यात पर लागू न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) की पांबदी को हटा दिया है। जबकि बासमती चावल के निर्यात के लिए लागू 950 डॉलर प्रति टन की न्यूनतम मूल्य सीमा को भी समाप्त कर दिया है। सरकार ने प्याज पर निर्यात शुल्क को भी 40 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया है।&nbsp;</p>
<p>शुक्रवार को डीजीएफटी की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, "प्याज के निर्यात पर न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) की शर्त तत्काल प्रभाव से और अगले आदेश तक हटा दी गई है।" वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, बासमती चावल के निर्यात के लिए लागू न्यूनतम निर्यात मूल्य को सरकार ने समाप्त करने का फैसला किया है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम कीमतों के चलते प्याज और बासमती पर लागू इन पाबंदियों के कारण निर्यात में दिक्कतें आ रही थीं। इससे व्यापारियों और किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा था। विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा भाजपा को सियासी नुकसान पहुंचा सकता है। संभवतः यही वजह है कि महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव से पहले प्याज और बासमती पर निर्यात से जुड़ी पाबंदी हटाने का फैसला लिया गया है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा के कुरुक्षेत्र से चुनाव प्रचार की शुरुआत करेंगे।&nbsp;</p>
<p>देश में प्याज की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले साल दिसंबर में प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। लोकसभा चुनाव से पहले 4 मई को प्याज निर्यात पर लगी रोक तो हटा दी, लेकिन 550 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य लगा दिया था। यानी इससे कम भाव पर भारत से प्याज का निर्यात नहीं हो सकता था। एमईपी के चलते भारत से प्याज का निर्यात नहीं हो पा रहा था। इससे व्यापारियों के साथ-साथ किसानों को नुकसान हुआ।</p>
<p><strong>महाराष्ट्र में प्याज बड़ा मुद्दा</strong></p>
<p>प्याज उत्पादक महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव में भी प्याज बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना था। इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले प्याज पर एमईपी समाप्त करने का फैसला किया है। नए सीजन में प्याज की आपूर्ति और उत्पादन की स्थिति को देखते हुए भी सरकार ने प्याज के निर्यात में ढील देने का फैसला किया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66e441fc7146f.jpg" alt="" width="537" height="728" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><b>हरियाणा के लिए बासमती महत्वपूर्ण</b></p>
<p>बासमती चावल के निर्यात पर 950 डॉलर प्रति टन की न्यूनतम मूल्य सीमा लागू थी। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती की कम कीमतों के कारण भारत से बासमती का निर्यात प्रभावित हो रहा था। इसका फायदा पाकिस्तान को मिल रहा था, जबकि देश में बासमती धान की कीमत 2500-3000 रुपये प्रति कुंतल तक गिर गई हैं। देश के प्रमुख बासमती उत्पादक राज्य हरियाणा में चावल निर्यात पर लागू पाबंदी को लेकर किसानों और आढ़तियों में काफी नाराजगी है। इसका असर विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। क्योंकि निर्यात पाबंदियों के चलते हरियाणा के धान किसानों और व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा है।&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार ने पिछले साल खरीफ सीजन में फसलों को हुए नुकसान को देखते हुए अगस्त, 2023 में बासमती निर्यात पर 1,200 डॉलर प्रति टन का एमईपी लगा दिया था। इसके बाद अक्टूबर, 2023 में बासमती चावल के निर्यात के लिए अनुबंध की न्यूनतम मूल्य सीमा को 1,200 डॉलर प्रति टन से घटाकर 950 डॉलर प्रति टन किया गया था। लेकिन इस भाव पर भी बासमती निर्यात में भारतीय व्यापारियों को दिक्कतें आ रही थीं जिसका फायदा पाकिस्तान के बासमती को मिल रहा था।</p>
<p>भारतीय चावल निर्यातक काफी दिनों से बासमती पर लागू 950 डॉलर की लिमिट हटाने की मांग कर रहे थे। अब सियासी नफे-नुकसान, घरेलू बाजार में चावल कीमतों और नए सीजन के धान की आपूर्ति को देखते हुए बासमती से एमईपी हटाया गया है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: center;"><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66e499f28df64.jpg" alt="" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66e448ba3fc02.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र सरकार ने प्याज और बासमती से न्यूनतम निर्यात मूल्य की पाबंदी हटाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    <item>
        <title><![CDATA[भारी बारिश से कई राज्यों में खरीफ की फसलों को नुकसान, धान और गन्ना भी प्रभावित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/excessive-monsoon-rains-damage-kharif-pulses-and-oilseeds-paddy-and-sugarcane-also-affected.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Sep 2024 17:59:41 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
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        <description><![CDATA[ <p>देश भर में हो रही भारी बारिश और मानसून लंबा खिंचने के कारण खरीफ की दलहन-तिलहन, गन्ना, धान समेत अन्य फसलों पर काफी नुकसान पहुंच रहा है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश समेत दक्षिण भारत के कई राज्यों में फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई क्षेत्रों में तो किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो गई। सितंबर में ज्यादा बारिश होने से खरीफ फसलों की कटाई पर भी असर पड़ेगा।&nbsp;</p>
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<p>देश में आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून की अवधि जून से सितंबर तक होती है और सितंबर के मध्य से इसकी वापसी शुरू हो जाती है। लेकिन इस साल मानसून के लंबे खिंचने से सितंबर में खूब बारिश हो रही है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने इस साल अक्टूबर तक बारिश की संभावना जताई है।&nbsp;</p>
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<p><strong>देश भर में सामान्य से अधिक बारिश &nbsp; &nbsp; &nbsp;</strong></p>
<p>आईएमडी के अनुसार, देश में अब तक मानसून की बारिश सामान्य से 8 फीसदी अधिक हुई है। देश के 41 फीसदी क्षेत्र में मानसून की बारिश सामान्य रही है जबकि 35 फीसदी क्षेत्र में सामान्य से अधिक और 9 फीसदी क्षेत्र में अत्यधिक बारिश दर्ज की गई है। देश का 15 फीसदी क्षेत्र अब भी बारिश की कमी से जूझ रहा है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>इस साल सबसे ज्यादा बारिश पश्चिमी क्षेत्र में हुई, जो सामान्य से 23 फीसदी अधिक है। मध्य भारत में सामान्य से 19 फीसदी अधिक और उत्तर पश्चिम भारत में सामान्य से 7 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। हालांकि, पूर्व और उत्तर पूर्व में बारिश अभी भी सामान्य से 17 फीसदी कम है।</p>
<p><strong>राजस्थान में मक्का, सोयाबीन और बाजरा को नुकसान</strong></p>
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<p>राजस्थान में ज्यादा बारिश से मक्का, सोयाबीन और बाजरा की फसल प्रभावित हुई हैं। बारां जिले के किसान <strong>धर्मा धाकड़</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि सितंबर में हुई भारी बारिश से राज्य के कई इलाकों में फसलों को नुकसान हुआ है। बारां, कोटा, बूंदी और झालावाड़ जिलों में मक्का और सोयाबीन की 25-30 फीसदी फसल खराब हो गई है, जबकि डीडवाना, कुचामन, अलवर जैसे जिलों में बाजरा की फसल पर बुरा असर पड़ा है। कुछ क्षेत्रों में तो बाजरा की पूरी फसल बर्बाद हो गई है, जिससे किसान काफी परेशान हैं। अधिक बारिश से नदी-नहरों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे निचले इलाकों में खेतों में पानी भर गया और फसलें खराब हो गईं।</p>
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<p><strong>गिरदावरी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश&nbsp;</strong></p>
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<p>फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने अधिकारियों को अतिवृष्टि से हुए फसलों के नुकसान की गिरदावरी का कार्य जल्द पूरा करने को कहा है। उन्होंने कहा कि जल्द फसलों को आकलन करके किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।&nbsp;</p>
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<p><strong>यूपी में धान को नुकसान, गन्ने में लगा रोग&nbsp;</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश में भी अधिक बारिश से धान और गन्ने की फसलें प्रभावित हुई हैं। तराई किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष <strong>तजिंदर सिंह विर्क</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि तराई क्षेत्रों में अधिक बारिश से धान की 15 से 25 फीसदी फसल को नुकसान हुआ है। एक महीने पहले भी भारी बारिश से फसलों को नुकसान हुआ था। अब फिर से फसलों को नुकसान हुआ है। अधिक बारिश और उत्तराखंड के बांधों से छोड़े गए पानी के चलते तराई में नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति बन गई है।&nbsp;</p>
<p>भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रदेश उपाध्यक्ष <strong>कपिल खाटियान</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश की वजह से गन्ने की फसल को काफी नुकसान हो रहा है। ज्यादा बारिश और उमस के कारण गन्ने में रोग लग गया है, जिससे पत्तियां पीली और काली पड़ रही हैं। कहीं गन्ने में फनका रोग है, तो कहीं उकठा रोग, जिससे किसान बहुत परेशान हैं। कीटनाशक इस्तेमाल करने के बाद भी फसल पर कोई असर नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में करीब 20-25 फीसदी गन्ने की फसल रोग से प्रभावित हुई है।</p>
<p><strong>मध्य प्रदेश में सोयाबीन और मक्के को नुकसान&nbsp;</strong></p>
<p>मध्य प्रदेश में अगले हफ्ते से सोयाबीन की कटाई शुरू होनी है, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण इसमें देरी हो सकती है। वहीं अधिक बारिश के चलते कई इलाकों में सोयाबीन की फसल को 15 से 20 फीसदी तक नुकसान हुआ है।&nbsp;संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य <strong>राम इनानिया</strong> ने <strong>रूरल वॉयस </strong>को बताया कि नीमच, मंसौर, हरदा, धार, खरगौन समेत प्रदेश के कई जिलों में बारिश से खेतों में पानी भर गया है, जिससे फसलें खराब हो रही हैं। ऐसे हालात में समय पर कटाई की उम्मीद नहीं है, क्योंकि गीले खेतों में मशीनों का काम करना मुश्किल है। अगर बारिश जारी रही और फसल ज्यादा समय तक खड़ी रही, तो सोयाबीन की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है। पहले ही कीमतों में गिरावट झेल रहे किसानों के लिए यह नई मुसीबत है। कई क्षेत्रों में मक्के की फसल को भी नुकसान पहुंचा है।&nbsp;</p>
<p>इस बीच, प्रदेश सरकार ने बारिश से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए कृषि और राजस्व विभाग को निर्देश दिए हैं, और जिलाधिकारियों से जल्द सर्वे रिपोर्ट मांगी है।</p>
<p><strong>आगे कैसा रहेगा मौसम&nbsp;</strong></p>
<p>आईएमडी के अनुसार, 14 से 17 सितंबर के बीच उत्तराखंड, पश्चिम उत्तर प्रदेश, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, कोंकण और गोवा में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। इसी तरह, विदर्भ, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, गुजरात और मध्य प्रदेश में 15 से 18 सितंबर के बीच बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और तेलंगाना में 15 से 17 सितंबर के बीच बारिश होने की संभावना है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारी बारिश से कई राज्यों में खरीफ की फसलों को नुकसान, धान और गन्ना भी प्रभावित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश के प्रमुख जलाशयों में 23 फीसदी बढ़ा जल स्तर, रबी फसलों के लिए अच्छी संभावना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/water-level-increased-by-23-percent-in-major-reservoirs-of-the-country-good-prospects-for-rabi-crops.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Sep 2024 13:08:06 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/water-level-increased-by-23-percent-in-major-reservoirs-of-the-country-good-prospects-for-rabi-crops.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में इस साल मानसून की अच्छी बारिश हुई है, जिससे प्रमुख जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। मानसून की शुरुआत में देश के 150 प्रमुख जलाशयों का जलस्तर पिछले साल के मुकाबले 21 फीसदी तक कम था, लेकिन मानसून के दूसरे हिस्से में हुई अधिक बारिश के चलते अब जल स्तर पिछले साल के मुकाबले 28.71 फीसदी तक बढ़ गया है। इससे रबी सीजन में फसलों के लिए अच्छी संभावना बन गई है। देश में कई हिस्सों में जलाशयों के पानी का इस्तेमाल खेती और सिंचाई जैसे कार्यों के लिए किया जाता है। इस वर्ष अच्छी बारिश के चलते जलाशयों में जल अच्छे स्तर पर पहुंच गया है, जिससे आगामी रबी सीजन में फसलों की सिंचाई में पानी की कमी नहीं होगी और पर्याप्त पानी उपलब्ध रहेगा।</p>
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<p>केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के मुताबिक, 12 सितंबर तक देश के 150 प्रमुख जलाशयों में 153.757 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी दर्ज किया गया है, जो उनकी कुल क्षमता का 85 फीसदी है। पिछले साल इसी समय में जलाशयों में 119.451 बीसीएम पानी था, जबकि सामान्य तौर पर इनमें 130.594 बीसीएम पानी होता है। इस साल जल स्तर पिछले साल के मुकाबले 28.71 फीसदी और सामान्य जल संग्रह के मुकाबले 17.73 फीसदी तक बढ़ा है।&nbsp;</p>
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<p>देश के उत्तरी क्षेत्र में स्थित जलाशयों की कुल क्षमता का 68 फीसदी पानी भरा हुआ है। इसमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान राज्य शामिल हैं। सीडब्ल्यूसीकी निगरानी में यहां 11 जलाशय हैं जिनकी कुल क्षमता 19.836 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) है। 12 सितंबर तक इन जलाशयों में 13.468 बीसीएम पानी था, जो कुल क्षमता का 68 फीसदी है। पिछले साल इसी समय पर जलस्तर 81 फीसदी था और सामान्य स्तर 82 फीसदी था। इस साल का जलस्तर पिछले साल और सामान्य स्तर दोनों से कम है।</p>
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<div contenteditable="true" translate="no" class="ProseMirror" id="prompt-textarea">पूर्वी क्षेत्र में असम, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, नागालैंड और बिहार शामिल हैं। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसीकी ) की निगरानी में यहां 25 जलाशय हैं जिनकी कुल संग्रहण क्षमता 20.798 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) है। 12 सितंबर तक इन जलाशयों में 15.797 बीसीएम पानी था, जो उनकी कुल क्षमता का 76 फीसदी है। पिछले साल इसी समय पर जलस्तर 58 फीसदी था, जबकि सामान्य तौर पर यह 69 फीसदी रहता है। इस साल का जलस्तर पिछले साल से और सामान्य स्तर से भी बेहतर है।</div>
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<p>पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा शामिल हैं। सीडब्ल्यूसी की निगरानी में यहां 50 जलाशय हैं जिनकी कुल संग्रहण क्षमता 37.357 बीसीएम है। 12 सितंबर तक इन जलाशयों में 33.526 बीसीएम&nbsp; पानी था, जो कुल क्षमता का 90 फीसदी है। पिछले साल इसी समय पर जलस्तर 75 फीसदी था और सामान्य स्तर 73 फीसदी था। इस साल का जलस्तर पिछले साल और सामान्य स्तर दोनों से बेहतर है।</p>
<p>मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। सीडब्ल्यूसी की निगरानी में यहां 26 जलाशय हैं जिनकी कुल संग्रहण क्षमता 48.227 बीसीएम है। 12 सितंबर 2024 तक इन जलाशयों में 42.808 बीसीएम पानी था, जो कुल क्षमता का 89 फीसदी है। पिछले साल इसी समय पर जलस्तर 76 फीसदी था और सामान्य स्तर 77 फीसदी था। इस साल का जलस्तर पिछले साल और सामान्य स्तर दोनों से बेहतर है।</p>
<p>दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। सीडब्ल्यूसी की निगरानी में यहां 43 जलाशय हैं जिनकी कुल संग्रहण क्षमता 54.634 बीसीएम है। 12 सितंबर तक इन जलाशयों में 48.158 बीसीएम पानी था, जो कुल क्षमता का 88 फीसदी है। पिछले साल इसी समय पर जलस्तर 49 फीसदी था और सामान्य स्तर 65 फीसदी था। इस साल का जलस्तर पिछले साल और सामान्य स्तर दोनों से बेहतर है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66e3e67ae0368.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश के प्रमुख जलाशयों में 23 फीसदी बढ़ा जल स्तर, रबी फसलों के लिए अच्छी संभावना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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        <title><![CDATA[वनस्पति तेलों का आयात पांच महीने के निचले स्तर पर, अगस्त में 16 फीसदी की गिरावट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/vegetable-oil-imports-at-five-month-low-imports-decline-by-16-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 12 Sep 2024 14:46:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/vegetable-oil-imports-at-five-month-low-imports-decline-by-16-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अगस्त 2024 में वनस्पति तेलों का आयात पांच महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गया। अगस्त में वनस्पति तेलों के आयात में 16 फीसदी की गिरावट आई है। देश में इस साल अगस्त में कुल 15.63 लाख टन वनस्पति तेलों का आयात हुआ, जो अगस्त 2023 में 18.66 लाख टन था। वहीं, चालू तेल वर्ष 2023-24 में नवंबर से अगस्त तक पहले 10 महीनों में वनस्पति तेलों के आयात में 3 फीसदी की कमी आई है। <strong>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए)</strong> द्वारा जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है।</p>
<p>एसोसिएशन के मुताबिक, अगले दो महीनों सितंबर-अक्टूबर के दौरान खाद्य तेलों के आयात का व्यापार अनुमान लगभग 27 से 28 लाख टन है। ऐसे में तेल वर्ष 2023-24 (नवंबर-अक्टूबर) के लिए कुल आयात पिछले वर्ष के लगभग बराबर 160-165 लाख टन के बीच रहने की संभावना है।</p>
<p>तेल वर्ष 2023-24 के पहले 10 महीनों में 1.36 करोड़ टन वनस्पति तेलों का आयात हुआ, जबकि तेल वर्ष 2022-23 की इसी अवधि में यह 1.41 करोड़ टन था। इस साल अगस्त महीने में देश में 15.36 लाख टन खाद्य तेल और 27,100 टन गैर खाद्य वनस्पति तेल का आयात हुआ जबकि अगस्त 2023 में खाद्य तेल का आयात 18.52 लाख टन और गैर खाद्य वनस्पति तेल का आयात 14,008 टन हुआ था।&nbsp;</p>
<p>एसोसिएशन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पिछले दो महीनों में सोयाबीन की कीमतें केंद्र सरकार द्वारा आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन (2024-25) के लिए तय 4892 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 550 से 600 रुपये प्रति क्विंटल कम रही थीं, जिससे किसान काफी चिंतित थे। नई फसल आने में अब सिर्फ 4 से 5 हफ्तों का समय बाकी है, जिससे कटाई के दौरान किसानों पर और दबाव बढ़ेगा। एसोसिएशन ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक को 4892 रुपये प्रति क्विंटल पर सोयाबीन खरीदने की अनुमति देने के लिए केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया है। एसोसिएशन का कहना है कि इससे कीमतों को समर्थन मिला है और हाल ही में कीमतें 4600 से 4700 रुपये प्रति क्विंटल के बीच आ गई हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66e2d387e6b19.jpg" alt="" width="625" height="245" /></p>
<p>एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से कच्चे खाद्य तेलों और रिफाइंड तेलों के आयात शुल्क में 20 से 25 फीसदी की वृद्धि करने और 15 फीसदी का शुल्क अंतर रखने की मांग की है। एसोसिएशन ने कहा है कि इससे किसानों को उनकी उपज के लिए अच्छा मूल्य मिलेगा और बाजार में कीमतें एमएसपी से अधिक हो जाएंगी, जिससे सरकार को एमएसपी पर खरीद नहीं करनी पड़ेगी। यह सभी के लिए एक जीत की स्थिति होगी। एसईए केंद्र सरकार से आयात शुल्क बढ़ाने की लगातार मांग कर रहा है और उम्मीद है कि सरकार इस पर सकारात्मक निर्णय लेगी।</p>
<p>चालू तेल वर्ष 2023-24 में नवंबर 2023 से अगस्त 2024 के दौरान 10 महीनों में पाम ऑयल का आयात 7 फीसदी घटा है। यह आयात गत वर्ष में 82.46 लाख टन था, जो इस साल घटकर 76.42 लाख टन रह गया। इस दौरान रिफाइंड ऑयल के आयात में 16 फीसदी और क्रूड ऑयल के आयात में 2 फीसदी की गिरावट आई है।&nbsp;</p>
<p>एसोसिएशन के मुताबिक, तेल वर्ष 2023-24 के पहले 10 महीनों के दौरान भारत में सोयाबीन तेल का आयात 27.14 लाख टन रहा, जो नवंबर-अगस्त 2022-23 के दौरान 31.82 लाख टन था। हालांकि, नवंबर-अगस्त 2023-24 के दौरान भारत में सूरजमुखी तेल का आयात बढ़कर 31.14 लाख टन रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 25.46 लाख टन था।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_666afdcd87fc3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ वनस्पति तेलों का आयात पांच महीने के निचले स्तर पर, अगस्त में 16 फीसदी की गिरावट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र को सोयाबीन की सरकारी खरीद के लिए प्रस्ताव भेजा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/madhya-pradesh-government-demanded-the-centre-government-to-increase-the-msp-of-soybean-sent-a-proposal-for-purchase.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 10 Sep 2024 19:44:55 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
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        <description><![CDATA[ <div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="afa6d11c-a2fd-4e33-8e23-ec78a1dd27b3" dir="auto" class="min-h-[20px] text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>सोयाबीन की कीमतों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे जाने के चलते किसानों की नाराजगी झेल रही मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार को सोयाबीन की सरकारी खरीद के लिए प्रस्ताव भेजने का फैसला लिया है। मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से सोयाबीन की सरकारी खरीद का आग्रह किया है। आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए केंद्र सरकार ने 4892 रुपये प्रति क्विंटल का एमएसपी तय किया है।&nbsp;</p>
<p>मंगलवार को हुई राज्य कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को भेजने का निर्णय लिया गया। बैठक के बाद नगरीय विकास एवं आवास, संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सोयाबीन की कम कीमतों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार को सोयाबीन की खरीद का प्रस्ताव भेजने का फैसला लिया है। राज्य में इस साल सोयाबीन की अच्छी बुवाई हुई है, जिससे अच्छे उत्पादन का अनुमान है लेकिन कीमतों में आई गिरावट और किसानों की परेशानियों को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र को खरीद करने का प्रस्ताव भेजा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र से अनुमति मिलने के बाद प्रदेश में सोयाबीन की खरीदी की जायेगी।</p>
<p>मध्य प्रदेश में सोयाबीन की कीमतों को लेकर किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदेश में सोयाबीन का भाव हाल ही के दिनों में 10 साल पुराने स्तर पर पहुंच गया था। 15 से 20 दिनों पहले प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन की कीमतें 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गईं थी। हालांकि, किमतों में अब सुधार हुआ है और यह बढ़कर 4000 से 4500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच आ गई हैं। मंडियों में अभी पुराना सोयाबीन आ रहा है। अगले महीने से मंडियों में नए सोयाबीन की आवक शुरू हो जाएगी। कारोबारियों का कहना है कि नया सोयाबीन आने पर अगर सरकारी खरीद नहीं होती है तों कीमतें और कम हो जाएंगी।</p>
<p>मध्य प्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष&nbsp;<strong>केदार शंकर सिरोही</strong>&nbsp;ने&nbsp;<strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि प्रदेश में सोयाबीन की कम कीमतों से किसान काफी परेशान है। उन्होंने कहा कि हाल ही केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के लिए सोयाबीन खरीद की अनुमति दी थी। लेकिन मध्य प्रदेश में खरीद शुरू करने के लिए अभी तक कोई आदेश नहीं आया है जबकि प्रदेश में सोयाबीन का अच्छा उत्पादन होता है और केंद्रीय कृषि मंत्री भी मध्य प्रदेश ही आते हैं। उन्होंने कहा कि एक तो किसानों को दाम नहीं मिल रहे हैं, उपर से अगर सरकार खरीद नहीं करेगी तो किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।&nbsp;</p>
<p>प्रदेश भर के किसानों ने सोयाबीन की कम कीमतों को लेकर सोशल मीडिया पर मुहिम छेड़ रखी है। सोशल मीडिया के जरिए किसान लगातार सोयाबीन की कम कीमतों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। हाल ही में <span>1 से 7 सितंबर तक प्रदेश के विभिन्न किसान संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा मध्य प्रदेश के तत्वाधान में </span>गांवों में <span>पंचायत सचिवों के माध्यम से प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजे थे। जिसमें</span> सोयाबीन का दाम 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग की गई थी।&nbsp;</p>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र को सोयाबीन की सरकारी खरीद के लिए प्रस्ताव भेजा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मानसून लंबा खिंचने से खरीफ की दलहन और तिलहन फसलों को नुकसान, उत्पादन पर पड़ सकता है प्रतिकूल असर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/prolonged-monsoon-in-the-country-will-affect-the-production-of-kharif-crops.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 10 Sep 2024 18:58:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/prolonged-monsoon-in-the-country-will-affect-the-production-of-kharif-crops.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में इस साल मानसून लंबा खिंचेगा जिसका असर खऱीफ की फसलों पर दिखना शुरू हो गया है। खरीफ सीजन की तिलहन फसल सोयाबीन और दालों के उत्पादन पर बारिश का असर पड़ने लगा है। अगले एक सप्ताह में सोयाबीन की फसल की कटाई शुरू होने का समय आ जाएगा लेकिन अगर बारिश यही स्थिति रहती है तो समय पर कटाई होना मुश्किल है। वहीं दालों पर भी अधिक बारिश का प्रतिकूल असर पड़ने के आसार हैं।</p>
<p>मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दक्षिण भारत के कई राज्यों बारिश के चलते फसलों को नुकसान पहुंचा है। देश में दक्षिण पश्चिम पश्चिम मानसून की अवधि जून से सिंतबर तक होती है और आधे सिंतबर के बाद मानसून की वापसी (रिट्रिव) शुरू हो जाती है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) का कहना है कि इस साल अक्टूबर के अंत तक मानसून की बारिश देखने को मिलेगी। लंबे मानसून के कारण फसलों की कटाई में देरी हो सकती है। साथ ही अधिक बारिश के चलते उत्पादन भी प्रभावित होने की संभावना है।&nbsp;</p>
<p><strong>देशभर में सामान्य से अधिक बारिश&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>आईएमडी का कहना है कि ला नीना के सक्रिय होने से अक्टूबर के अंत तक बारिश जारी रह सकती है। सितंबर के मध्य में इसके सक्रिय होने का अनुमान है। अब तक देश के लगभग 40 फीसदी हिस्से में मानसून की बारिश सामान्य से ज्यादा हुई है। आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में 10 सितंबर तक मानसून की बारिश सामान्य से 7 फीसदी ज्यादा हुई है। देश में सबसे ज्यादा बारिश पश्चिमी क्षेत्रों में देखने को मिली है, जहां यह सामान्य से 26 फीसदी अधिक है। मध्य भारत में मानसून की बारिश अब तक सामान्य से 18 फीसदी और उत्तर पश्चिम भारत में 8 फीसदी अधिक हुई है। हालांकि, पूर्व और उत्तर पूर्व मानसून की बारिश अभी भी सामान्य से 15 फीसदी कम है।&nbsp;</p>
<p><strong>सोयाबीन और दालों पर पड़ने का लगा है असर&nbsp; &nbsp;</strong></p>
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<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>मध्य प्रदेश के कई किसानों और कारोबारियों ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया सितंबर में हो रही अधिक बारिश के चलते प्रदेश के कई इलाकों में सोयाबीन की फसल को 15 से 20 फीसदी तक नुकसान हुआ है। 15 सितंबर से प्रदेश में सोयाबीन की फसल की कटाई शुरू होनी है। मौजूदा हालात में इसके समय पर शुरू होने की उम्मीद नहीं दिख रही है। गीले खेतों में कटाई मशीनों का जाना और कटाई करना संभव नहीं है। वहीं अगर बारिश जारी रहती है और फसल खड़ी रहती है तो सोयाबीन की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। ऐसे में पहले से ही सोयाबीन की कीमतों में गिरावट का संकट झेल रहे किसानों पर यह दोहरी मार होगी।</p>
<p>दालों को लेकर भी स्थिति बेहतर नहीं है। निचले इलाकों में खेतों में पानी रुकने से फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। यदि बारिश इसी तरह जारी रही, तो धान को छोड़कर बाकी सभी फसलों को और नुकसान पहुंचेगा। हालांकि धान की फसल को फायदा हो रहा है। पिछले कुछ सालों में राज्य के होशंगाबाद, सिरोही, नरसिंहपुर, भोपाल और रायसेन जैसे जिलोंं में दाल का रकबा करीब 50 फीसदी घट गया है और यह रकबा धान की तरफ शिफ्ट हुआ है।&nbsp;</p>
<p><strong>आगे कैसे रहेगा मौसम&nbsp;</strong></p>
<p>आईएमडी के डेली बुलेटिन के अनुसार, 11 और 12 सितंबर को कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप, आंध्र प्रदेश, और तेलंगाना में मध्यम बारिश की संभावना है। 13 से 16 सितंबर के बीच त्रिपुरा, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, और दक्षिण मणिपुर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। 12 से 14 सितंबर के दौरान पश्चिम बंगाल, सिक्किम, बिहार, झारखंड, और ओडिशा में भी बारिश होने की संभावना है। 11 से 14 सितंबर के बीच उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, और पूर्वी राजस्थान में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना है, जबकि 12 सितंबर को हरियाणा में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।&nbsp;</p>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मानसून लंबा खिंचने से खरीफ की दलहन और तिलहन फसलों को नुकसान, उत्पादन पर पड़ सकता है प्रतिकूल असर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[धान&amp;#45;मोटे अनाज की बुवाई सामान्य क्षेत्र से आगे, कपास का रकबा 9 फीसदी से अधिक घटा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/paddy-and-coarse-grain-sowing-ahead-of-normal-area-cotton-area-decreased-by-more-than-9-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 10 Sep 2024 11:24:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/paddy-and-coarse-grain-sowing-ahead-of-normal-area-cotton-area-decreased-by-more-than-9-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में इस साल धान, दलहन और मोटे अनाज की अच्छी बुवाई हुई है। अच्छे मानसून के चलते धान की बुवाई पिछले पांच सालों के औसत सामान्य क्षेत्र से आगे बढ़ गई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, 9 सितंबर तक 409.50 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हो चुकी है, जो औसत सामान्य क्षेत्र के 401.55 लाख हेक्टेयर से अधिक है। वहीं पिछले साल इस समय तक धान का क्षेत्र 393.57 लाख हेक्टेयर था। इसी तरह मोटे आनाज का क्षेत्र भी औसत सामान्य क्षेत्र के 180.86 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 188.72 लाख हेक्टेयर हो गया है। तिहलन की बुवाई अब तक 192.40 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो औसत सामान्य क्षेत्र के 190.18 लाख लाख हेक्टेयर क्षेत्र से आगे है। हालांकि, दलहन का रकाब अभी भी औसत सामान्य क्षेत्र से पीछे है। वहीं महत्वपूर्ण नकदी फसल कपास के क्षेत्र में 9 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है।</p>
<p><strong>खरीफ बुवाई 2.15 फीसदी बढ़ी&nbsp;</strong></p>
<p>खरीफ फसलों की बुवाई अब तक 1092.33 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो पिछले साल के 1069.29 लाख हेक्टेयर से 2.15 फीसदी अधिक है। हालांकि, खरीफ बुवाई औसत सामान्य क्षेत्र के 1095.84 लाख हेक्टेयर से पिछे है।&nbsp;</p>
<p><strong>दलहन का रकबा 7.5 फीसदी बढ़ा</strong></p>
<p>दलहन की बुवाई में इस साल सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है। अब तक 126.20 लाख हेक्टेयर में दालों की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले साल इसी अवधि के दौरान 117.39 लाख हेक्टेयर से 7.5 फीसदी अधिक है। दालों में अरहर की बुवाई का क्षेत्र सबसे अधिक है। अब तक 45.78 लाख हेक्टेयर में अरहर की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले साल इसी समय 40.74 लाख हेक्टेयर थी। मूंग की बुवाई अब तक 35.06 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक 31.05 हेक्टेयर में मूंग की बुवाई हुई थी। उड़द की बुवाई फिलहाल पिछड़ी है। अब तक 30.02 लाख हेक्टेयर में उड़द की बुवाई है, जो पिछले साल इस समय तक 31.71 लाख हेक्टेयर थी। वहीं, अन्य दालों की बुवाई अब तक 4.45 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल इस समय तक इनका क्षेत्र 4.17 लाख हेक्टेयर था।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66dfdf755ff43.jpg" alt="" width="553" height="576" /></p>
<p><strong>बाजरा की बुवाई पिछड़ी&nbsp;</strong></p>
<p>मोटे अनाज की बुवाई 3.84 फीसदी बढ़ी है। अब तक 188.72 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मोटे अनाज की बुवाई हुई है, जो पिछले साल इस समय तक 181.74 लाख हेक्टेयर थी। मोटे अनाज में ज्वार की बुवाई अब तक 15.18 लाख हेक्टेयर, रागी की बुवाई 10.78 लाख हेक्टेयर, मक्के की बुवाई 87.27 लाख और बाजरा की बुवाई 69.81 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। मोटे अनाज में सिर्फ बाजरा की बुवाई पिछले साल से कम है। &nbsp;</p>
<p><strong>तिलहन की बुवाई में मामूली वृद्धि</strong></p>
<p>तिलहन की बुवाई में 1.56 फीसदी की मामूली वृद्धि हुई है। अब तक 192.40 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले साल इसी अवधि के दौरान 189.44 लाख थी। इसमें मूंगफली की बुवाई 47.49 लाख हेक्टेयर, सोयाबीन की बुवाई 125.11 लाख हेक्टेयर, सूरजमुखी की बुवाई 0.74 लाख हेक्टेयर और तील की बुवाई 10.95 लाख हेक्टेयर में की गई है। तिलहन में सिर्फ तील की बुवाई का क्षेत्र पिछले साल से घटा है। &nbsp;</p>
<p><strong>कपास का क्षेत्र में 9.12 फीसदी घटा&nbsp;</strong></p>
<p>गन्ने की बुवाई में हल्की वृद्धि हुई है, जिससे कुल क्षेत्रफल 57.68 &nbsp;लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल इस समय तक यह 57.11 लाख हेक्टेयर था। वहीं कपास की बुवाई में 9.12 फीसदी की गिरावट आई है। कपास का क्षेत्र पिछले साल के 123.39 लाख हेक्टेयर से घटकर सितंबर 2024 में 112.13 लाख हेक्टेयर रह गया है। जूट और मेस्टा की बुवाई भी 5.71 लाख हेक्टेयर तक सिमट गई है, जो पिछले साल की तुलना में कम है।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_669b5b06e2825.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ धान-मोटे अनाज की बुवाई सामान्य क्षेत्र से आगे, कपास का रकबा 9 फीसदी से अधिक घटा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_669b5b06e2825.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों ने कृषि मंत्री से कहा सेब का न्यूनतम आयात मूल्य 90 रुपये करना जरूरी, चीन का सेब यूएई होकर आ रहा भारत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/apple-growers-urged-agriculture-minister-to-fix-mip-at-rs-90-per-kg-chinese-apple-is-coming-in-india-via-uae.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 09 Sep 2024 13:02:40 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/apple-growers-urged-agriculture-minister-to-fix-mip-at-rs-90-per-kg-chinese-apple-is-coming-in-india-via-uae.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय सेब उत्पादक किसानों ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को कहा है कि सेब का न्यनतम आयात मूल्य (एमआईपी) कम से कम 90 रुपये प्रति किलोग्राम होना चाहिए क्योंकि घरेलू किसानों की लागत इसके आसपास ही आती है। सरकार द्वारा सेब की मौजूदा एमआईपी 50 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई है जिसके चलते देश में सस्ती कीमतों पर ईरान और तुर्की का सेब बड़े पैमाने पर आयात हो रहा है। इसके साथ ही चीन का सेब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) होकर भारत आ रहा है जबकि यूएई में सेब पैदा नहीं होता। फिर भी वहां से आयात का सीधा मतलब चीनी सेब का भारत आना है। इसी तरह साउथ एशियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (साफटा) की आड़ में बड़ी मात्रा में ईरान का सेब अफगानिस्तान के रूट से भारत आ रहा है।</p>
<p>एमआईपी कम होने और आयात शुल्क होने के चलते घरेलू सेब उत्पादकों के लिए अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है। इस स्थिति में घरेलू बाजार में हिमाचल की हिस्सेदारी घट गई है जो चिंताजनक है। शिवराज सिंह को लिखे एक पत्र में <strong>प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन</strong> ने यह बातें कहीं। एसोसिएशन द्वारा 5 सितंबर, 2024 को भेजे इस पत्र की प्रति<strong> रूरल वॉयस</strong> के पास है।&nbsp;</p>
<p>एसोसिएशन की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने 2023 में विदेशी सेबों के लिए 50 रुपये प्रति किलोग्राम का एमआईपी निर्धारित किया था। इस निर्णय के बाद ईरान, यूएई, अफगानिस्तान और तुर्की जैसे देशों से सस्ते सेब भारत में बड़ी मात्रा में आयात किए जा रहे हैं। यह सेब भारतीय सेबों की तुलना में काफी कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं, जिससे बागवानों को अपनी लागत निकालने में दिक्कत हो रही है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66deac16a3cbe.jpg" alt="" /></p>
<p>एसोसिएशन ने कहा है कि भारत में सेब उत्पादन में भी गिरावट देखी जा रही है। 2010-11 में देश में 2,891 हजार मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता था, जो 2021-22 में घटकर 2,437 हजार मीट्रिक टन रह गया। हिमाचल प्रदेश का हिस्सा भी 31 फीसदी से घटकर 26.42 फीसदी हो गया। इस बीच चीन और ईरान जैसे देश भारतीय बाजार में अपने सस्ते सेब बेच रहे हैं, जिससे भारतीय सेब उत्पादकों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं।&nbsp;</p>
<p>एसोसिएशन के अनुसार, ईरान, यूएई, अफगानिस्तान और तुर्की से आयात किए जाने वाले सेब अब भारत के कुल सेब आयात का लगभग 65 फीसदी हैं। 2023-24 में इन देशों से कुल 1,901 करोड़ रुपये का सेब भारत पहुंचा, जो देश की कुल मांग का करीब 11 फीसदी है। इससे भारतीय किसानों को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पहले चीन भारत में सेब का सबसे बड़ा निर्यातक था, लेकिन अब ईरान, यूएई और अफगानिस्तान के सस्ते सेब भारतीय बाजार में हावी हो रहे हैं।</p>
<p>एसोसिएशन के अध्यक्ष <strong>लोकिंदर बिष्ट</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि कम आयात शुल्क के कारण आज बाजार में ईरान जैसे देशों का सेब 60 से 70 रुपये प्रति किलो के दाम पर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय सेब उत्पादक ईरान से आने वाले सस्ते सेब का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि हमारे यहां उत्पादन, कटाई, पैकेजिंग और माल ढुलाई की लागत ही 55 से 60 रुपये प्रति किलो है।</p>
<p>बिष्ट ने कहा कि यदि सेब आयात किया जा रहा है, तो नियमों के अनुसार इसे इतने कम दाम पर बेचना संभव नहीं है। एमआईपी लागू होने के बाद 50 रुपये प्रति किलो से कम पर सेब भारत नहीं पहुंच सकता और उस पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क जुड़ने के बाद इसकी कीमत 75 रुपये प्रति किलो हो जाती है। इसके बाद व्यापारियों का मुनाफा जुड़ने से यह 100 रुपये प्रति किलो से कम पर नहीं बिक सकता। इसके बावजूद, ईरानी सेब सस्ते दामों पर बिक रहे हैं, जो किसी गड़बड़ी का संकेत है। उन्होंने कहा कि या तो इन देशों से आने वाले फलों की कीमत कम दिखाई जा रही है ताकि आयात शुल्क से बचा जा सके, या फिर इन्हें साउथ एशियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (साफटा) के तहत आयात किया जा रहा है, जहां आयात शुल्क लागू नहीं है।</p>
<p>बिष्ट ने कहा कि सेब उत्पादकों ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि यदि तुरंत कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो बढ़ती इनपुट लागत और ईरान से हो रहे सस्ते आयात से सेब की पूरी अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर उचित कदम उठाएगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों ने कृषि मंत्री से कहा सेब का न्यूनतम आयात मूल्य 90 रुपये करना जरूरी, चीन का सेब यूएई होकर आ रहा भारत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अगस्त में शाकाहारी थाली 8 फीसदी और नॉन वेज थाली 12 फीसदी सस्ती हुई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/vegetarian-thali-became-8-percent-cheaper-and-non-veg-thali-became-12-percent-cheaper-in-august-2024.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Sep 2024 17:00:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/vegetarian-thali-became-8-percent-cheaper-and-non-veg-thali-became-12-percent-cheaper-in-august-2024.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अगस्त 2024 में टमाटर की कीमतों में भारी गिरावट के कारण शाकाहारी और मांसाहारी थाली की लागत में कमी आई है। क्रिसिल की 'राइस रोटी रेट' रिपोर्ट के अनुसार, शाकाहारी थाली (वेज थाली) की लागत अगस्त 2024 में 8 फीसदी घटकर 31.2 रुपये प्रति थाली हो गई, जबकि पिछले साल यह 34.0 रुपये थी। इसके अलावा, महीने के आधार पर भी शाकाहारी थाली की लागत में 4 फीसदी की कमी आई है। जुलाई 2024 में यह 32.6 रुपये थी।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, टमाटर की कीमतों में पिछले एक साल के दौरान 51 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। अगस्त 2023 में टमाटर की कीमत 102 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अगस्त 2024 में घटकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों से टमाटर की ताजा आवक के कारण कीमतों में यह गिरावट आई है।</p>
<p>ईंधन की कीमतों में आई गिरावट का भी थाली की लागत पर असर पड़ा है। अगस्त 2023 में दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1,103 रुपये थी, जो मार्च 2024 तक घटकर 803 रुपये हो गई थी। इसके अलावा, वनस्पति तेल, मिर्च और जीरा की कीमतों में क्रमशः 6 फीसदी, 30 फीसदी, और 58 फीसदी की गिरावट आई है, हालांकि इनकी थाली में हिस्सेदारी 5 फीसदी से भी कम है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66dae6f7254bc.jpg" alt="" /></p>
<p>मांसाहारी थाली (नॉन-वेज थाली) की लागत भी सालाना आधार पर 12 फीसदी घटकर 59.3 रुपये हो गई, जो अगस्त 2023 में 67.5 रुपये थी। महीने के आधार पर भी नॉन-वेज थाली की लागत में 3 फीसदी की कमी आई है। जुलाई 2024 में यह लागत 61.4 रुपये थी। ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में 13 फीसदी की कमी के कारण मांसाहारी थाली की लागत में यह गिरावट आई है, क्योंकि ब्रॉयलर की कीमत थाली की कुल लागत का लगभग 50 फीसदी हिस्सा होती है। हालांकि, आलू और प्याज की कीमतों में क्रमशः 2 फीसदी और 3 फीसदी की वृद्धि ने मांसाहारी थाली की लागत में और अधिक गिरावट को रोक दिया।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6687d51f19e16.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अगस्त में शाकाहारी थाली 8 फीसदी और नॉन वेज थाली 12 फीसदी सस्ती हुई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकारी एजेंसियों की कम कीमत पर प्याज की बिक्री से महाराष्ट्र के किसान नाराज,  बन सकता है चुनावी मुद्दा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/maharashtra-onion-farmers-are-angry-on-government-agencies-low-price-onion-sale.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Sep 2024 15:02:28 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/maharashtra-onion-farmers-are-angry-on-government-agencies-low-price-onion-sale.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र में प्याज का मुद्दा एक बार फिर से चर्चा में है। केंद्र सरकार ने हाल ही में नेशनल कंज्यूमर कोऑपरेटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया (एनसीसीएफ) के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दरों पर प्याज की बिक्री शुरू की है, जिसका किसान संगठनों ने विरोध जताया है। किसान संगठनों का कहना है कि सरकार के इस निर्णय के बाद प्याज की कीमतों में 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है। केंद्र सरकार का यह कदम किसानों के हितों के खिलाफ है, अगर सरकार का यही रवैया रहा, तो उन्हें इसका खामियाजा आगामी विधानसभा चुनाव में भुगतना होगा।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग डिवीजन के अनुसार, फिलहाल प्याज का औसत खुदरा भाव 49.5 रुपये प्रति किलो (किलोग्राम) है, और बाजार में प्याज 50 से 60 रुपये प्रति किलो में बिक रहा है। वहीं, थोक बाजार में प्याज की कीमतें 2500 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच हैं, जबकि एक महीने पहले ये कीमतें 2300 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास थीं। किसानों का कहना है कि प्याज का खुदरा भाव पिछले महीने भी 50 रुपये के आसपास था, लेकिन उनके लिए मुनाफे की स्थिति नहीं बन रही है। किसानों का कहना है कि जैसे ही प्याज की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी होती है, सरकार अपनी नीतियों से दाम गिरा देती है, जिससे वे उचित लाभ नहीं कमा पाते।</p>
<p><strong>विधानसभा चुनावों में 'प्याज' बनेगा मुद्दा&nbsp;</strong></p>
<p>महाराष्ट्र के किसान संगठन स्वाभिमानी शेतकरी संघठना के प्रमुख और पूर्व सांसद <strong>राजू शेट्टी</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है, लेकिन इसके बावजूद यहां के किसान हमेशा कम कीमतों को लेकर परेशान रहते हैं। जब प्याज की कीमतों में थोड़ा सुधार होता है, तो सरकार बफर स्टॉक से रियायती दरों पर प्याज बेचना शुरू कर देती है, जिससे कीमतें फिर गिर जाती हैं। शेट्टी ने कहा कि किसानों की यह नाराजगी आने वाले विधानसभा चुनावों में सरकार के खिलाफ बड़ी भूमिका निभा सकती है।</p>
<p>किसान संगठन शेतकरी संघठना के नेता और एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के सदस्य <strong>अनिल घनवट</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि पिछले महीने महाराष्ट्र में प्याज की कीमतों में गिरावट आई थी, लेकिन खुदरा कीमतें तब भी ऊपर थीं। हाल ही में जब प्याज की थोक कीमतों में थोड़ा सुधार हुआ, तो सरकार ने 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज बेचना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि जब किसी कृषि उपज की कीमतें सही होती हैं, तब सरकार दाम गिरा देती है, लेकिन जब दाम कम होते हैं, तब नुकसान की भरपाई के लिए कुछ नहीं करती।</p>
<p><strong>घनवट</strong> ने कहा कि बाजार में प्याज का खुदरा भाव 55 से 60 रुपये प्रति किलो है, जबकि सरकार इसे 35 रुपये में बेच रही है। इससे बाजार पर असर पड़ेगा और किसानों को आर्थिक नुकसान होगा। घनवट ने सुझाव दिया कि सरकार को रिटेल में सस्ते में बेचने की बजाय ओपन ऑक्शन के जरिए मंडियों में प्याज बेचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार का यही रवैया रहा तो आगामी विधानसभा चुनाव में यह बड़ा मुद्दा बनेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>उपभोक्ताओं पर मेहरबान है सरकार&nbsp;</strong></p>
<p>महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष <strong>भारत दिघोले</strong> ने भी सरकार के इस कदम पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि भले ही सरकार ने प्याज निर्यात पर लगी रोक हटा दी हो, लेकिन प्याज पर 40 प्रतिशत एक्सपोर्ट ड्यूटी और 500 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य अभी भी लागू है। इसके कारण प्याज का निर्यात प्रभावित हो रहा है और किसानों को बेहतर कीमत नहीं मिल पा रही है।&nbsp;</p>
<p>दिघोले ने कहा कि हाल के दिनों में प्याज की कीमतों में थोड़ा सुधार हुआ था, लेकिन सरकार के रियायती दरों वाला प्याज बेचने के निर्णय से फिर कीमतें गिर गईं। उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते तक किसानों को 4300 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिला था, जो अब गिरकर 2500 से 3700 रुपये प्रति क्विंटल के बीच आ गया है। उन्होंने कहा कि सरकार उपभोक्ताओं के लिए मेहरबान है, लेकिन किसानों की परेशानियों से सरकार को कोई लेना देना हनीं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार यही चाहती है, तो किसान भी इसके लिए तैयार हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार को इसका नतीजा देखने को मिलेगा।</p>
<p>किसान संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार को कड़े शब्दों में कहा है कि अगर सरकार का यही रवैया रहा, तो उन्हें इसका खामियाजा आगामी विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा। किसान नेताओं का कहना है कि प्याज का मुद्दा लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी अहम भूमिका निभाएगा।</p>
<p><strong>केंद्र ने बढ़ाई प्याज की खरीद&nbsp;</strong></p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अनुसार, इस साल सरकार ने सरकारी एजेंसियों के माध्यम से 4.7 लाख टन प्याज की खरीद की, जो पिछले साल से ज्यादा है। पिछले साल सरकार ने 3.0 लाख टन प्याज खरीदा था। सरकार के मुताबिक, इस साल प्याज की कीमतें पिछले साल की तुलना में बेहतर रही हैं। मंडी में प्याज की कीमतें पिछले साल 693 से 1,205 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले इस साल 1,230 से 2,578 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बनी हुई हैं। औसत बफर खरीद मूल्य भी इस साल 2,833 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि पिछले साल यह 1,724 रुपये था।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 26 अगस्त, 2024 तक खरीफ प्याज की बुवाई क्षेत्र में पिछले साल के मुकाबले 102 फीसदी की वृद्धि हुई है। इस अवधि तक 2.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्याज की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले साल इसी समय पर यह क्षेत्र 1.94 लाख हेक्टेयर था। इसके अलावा, लगभग 38 लाख टन प्याज अभी भी किसानों और व्यापारियों के पास स्टोर में है। सरकार का कहना है कि वह प्याज की उपलब्धता और कीमतों पर नजर रखेगी और किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को किफायती कीमत पर प्याज उपलब्ध कराएगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकारी एजेंसियों की कम कीमत पर प्याज की बिक्री से महाराष्ट्र के किसान नाराज,  बन सकता है चुनावी मुद्दा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान सभा ने डिजिटलीकरण को कृषक वर्ग की आजीविका के लिए खतरा बताया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/all-india-kisan-sabha-called-digital-agriculture-a-threat-to-farmers-livelihood.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Sep 2024 19:57:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/all-india-kisan-sabha-called-digital-agriculture-a-threat-to-farmers-livelihood.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार की ओर से हाल में घोषित डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन सहित 14 हजार करोड़ रुपये की सात योजनाओं को लेकर किसान संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। <strong>अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस)</strong> ने डिजिटलीकरण को कृषि के कॉरपोरेटकरण की सोची-समझी साजिश और किसानों की आजीविका के लिए खतरा करार दिया है। किसान सभा का कहना है कि भारतीय किसानों का बड़ा हिस्सा छोटे, सीमांत, भूमिहीन और बटाईदार किसान हैं। यदि इन्हें बड़े बिजनेस के तहत डिजिटलीकरण में शामिल किया जाएगा, तो बड़े कॉरपोरेट पूरे कृषि उत्पादन पर हावी हो सकते हैं और कृषक वर्ग की आजीविका को बर्बाद कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>अखिल भारतीय किसान सभा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि कृषि आय को &ldquo;बढ़ाने&rdquo; के नाम पर यह परियोजना ऐसे समय आ रही है, जब मोदी सरकार का &ldquo;किसानों की आय दोगुनी करना&rdquo; का दावा पूरी तरह नाकाम हो चुका है। मोदी सरकार की कॉरपोरेट समर्थक और किसान विरोधी नीतियां विवादास्पद भूमि अधिग्रहण अध्यादेश और काले कृषि कानूनों में उजागर हो चुकी हैं। किसानों के आंदोलन ने इन्हें वापस लेने पर मजबूर किया था।</p>
<p>एआईकेएस के अध्यक्ष <strong><span>अशोक ढवले</span></strong>&nbsp;ने कहा कि सत्ताधारी दल को समझ आ गया है कि किसान वर्ग कृषि के कॉरपोरेटकरण के एजेंडे के आगे नहीं झुकेगा। इसलिए जमीनी हकीकत और गंभीर असमानताओं को ध्यान में रखे बगैर लुभावनी योजनाओं की घोषणा की जा रही है। इन योजनाओं से कॉरपोरेट और अन्य निहित स्वार्थों को लाभ पहुंचेगा। जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी के चलते ऐसा करने में मदद मिलेगी।</p>
<p>एआईकेएस के महासचिव <strong>विजू कृष्णन</strong> का कहना है कि भारतीय कृषि के डिजिटलीकरण की बहुप्रचारित परियोजना पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय वित्त पूंजी की मांगों के अनुरूप है। विश्व बैंक मॉडल में किसानों का अधिक से अधिक डेटा प्राप्त कर डिजिटल कॉरपोरेशन का प्रभाव बढ़ाने की परिकल्पना की गई है। कृषि अनुसंधान के &ldquo;आधुनिकीकरण&rdquo; की घोषित योजना में केंद्र सरकार की मुक्त बाजार की मंशा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इससे सार्वजनिक निवेश में कमी आएगी और भारतीय कृषि के अनुसंधान एजेंडे पर डिजिटल और कृषि कॉरपोरेट्स का प्रभाव बढ़ेगा। इसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के साथ कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के समझौते और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा अपने बजट भाषण में निजी अनुसंधान को सार्वजनिक वित्त पोषण की पेशकश की घोषणा के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>अखिल भारतीय किसान सभा ने किसानों को आगाह किया है कि वे भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की कृषि के कॉरपोरेटकरण की साजिशों से सावधान रहें और एकजुट होकर कॉरपोरेट समर्थक नीतियों का मुकाबला करें। एआईकेएस ने केंद्र सरकार से कृषि में सार्वजनिक निवेश बढ़ाने, गारंटीशुदा खरीद के साथ सी2+50% पर एमएसपी सुनिश्चित करने, सभी कृषि इनपुट पर जीएसटी हटाने, छोटे और मध्यम किसानों व कृषि मजदूरों को प्राथमिकता देकर किसानों का कर्ज माफ करने की मांग की है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66d9bd167f83d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान सभा ने डिजिटलीकरण को कृषक वर्ग की आजीविका के लिए खतरा बताया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिल्ली&amp;#45;एनसीआर में 35 रुपये प्रति किलो में मिलेगा प्याज, इन स्थानों पर होगी बिक्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/onion-will-be-available-in-delhi-ncr-for-rs-35-kilogram-will-be-sold-at-these-places.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Sep 2024 11:05:06 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/onion-will-be-available-in-delhi-ncr-for-rs-35-kilogram-will-be-sold-at-these-places.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्याज की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने अब टमाटर के बाद प्याज की बिक्री शुरू करने का फैसला लिया है।&nbsp;गुरुवार से दिल्ली-एनसीआर में मोबाइल वैन और एनसीसीएफ की खुदरा दुकानों के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर प्याज बेचा जाएगा। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी इसकी शुरुआत कृषि भवन से करेंगे।</p>
<p>सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि प्याज की बिक्री दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर मोबाइल वैन के जरिए होगी। इनमें कृषि भवन, एनसीयूआई कॉम्प्लेक्स, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन, पटेल चौक मेट्रो स्टेशन और नोएडा के कुछ हिस्से शामिल हैं। कुल मिलाकर 38 स्थानों पर रियायती दर वाले प्याज की बिक्री की जाएगी।&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">महंगाई को कहें अलविदा! <br />NCCF द्वारा प्याज अब दिल्ली-NCR में सिर्फ ₹35 प्रति किलो में उपलब्ध।<br />आज से बिक्री शुरू! <a href="https://twitter.com/hashtag/OnionAt35?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#OnionAt35</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/NCCF?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#NCCF</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/DelhiNCR?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#DelhiNCR</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Onions?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Onions</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/DiscountedOnions?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#DiscountedOnions</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Sale?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Sale</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/nccf?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#nccf</a> <a href="https://t.co/6PljgN7BEo">pic.twitter.com/6PljgN7BEo</a></p>
&mdash; NCCF of India Limited (@Nccf_India) <a href="https://twitter.com/Nccf_India/status/1831566501213610379?ref_src=twsrc%5Etfw">September 5, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य बाजार में प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना और स्थानीय आपूर्ति में सुधार करना है। फिलहाल, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्याज की कीमतें 60 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक पहुंच गई हैं। एनसीसीएफ ने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के किसानों से सीधे प्याज खरीदकर उसका बफर स्टॉक तैयार किया है।&nbsp;</p>
<p>सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने और बिचौलियों द्वारा की जाने वाली अधिक कीमतों से राहत दिलाने के लिए यह प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जाएगा। इस पहल से न सिर्फ कीमतों पर लगाम लगेगी, बल्कि किसानों से सीधे खरीदी करके उपभोक्ताओं तक रियायती दर पर प्याज पहुंचाने में मदद मिलेगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66d9424eb36f5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिल्ली-एनसीआर में 35 रुपये प्रति किलो में मिलेगा प्याज, इन स्थानों पर होगी बिक्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66d9424eb36f5.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[धान की बुवाई का रकबा सामान्य से अधिक, लेकिन कपास का क्षेत्र नौ फीसदी से अधिक घटा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/paddy-acreage-is-higher-than-normal-but-cotton-acreage-decreased-by-9-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 02 Sep 2024 18:07:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/paddy-acreage-is-higher-than-normal-but-cotton-acreage-decreased-by-9-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में इस साल अच्छे मानसून के चलते धान की बुवाई पिछले पांच सालों के औसत सामान्य क्षेत्र से आगे बढ़ गई है। 30 अगस्त 2024, तक धान की बुवाई 408.72 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो औसत सामान्य क्षेत्र के 401.55 लाख हेक्टेयर से अधिक है। धान की बुवाई पिछले साल की तुलना में 3.84 फीसदी बढ़ी है। पिछले साल इस समय तक 393.57 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई थी।&nbsp;इसी तरह, मोटे अनाज की बुवाई औसत सामान्य क्षेत्र के 180.86 लाख हेक्टेयर से बढ़कर अब तक 187.74 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है। तिलहन की बुवाई अब तक 190.63 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है, जो औसत सामान्य क्षेत्र के 190.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से आगे है। वहीं महत्वपूर्ण नकदी फसल कपास के क्षेत्र में 9 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है।</p>
<p><strong>खरीफ बुवाई 1.91 फीसदी बढ़ी&nbsp;</strong></p>
<p>कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, 30 अगस्त 2024 तक खरीफ फसलों की बुवाई 1087.33 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो साल 2023 के इसी समय के 1066.89 लाख हेक्टेयर से 1.91 फीसदी अधिक है। हालांकि, यह बुवाई पिछले पांस सालों के औसत सामान्य क्षेत्र 1095.84 लाख हेक्टेयर से कम है।</p>
<p><strong>दलहन का क्षेत्र 7.26 फीसदी बढ़ा</strong></p>
<p>दलहन की बुवाई में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है। इस साल दलहन की बुवाई का क्षेत्र 7.26 फीसदी बढ़कर 125.13 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 116.66 लाख हेक्टेयर था। अरहर और मूंग की बुवाई में वृद्धि हुई है, जबकि उड़द की बुवाई पिछले साल से कम है। अब तक अरहर की बुवाई 45.78 लाख हेक्टेयर और मूंग की बुवाई 34.76 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि उड़द की बुवाई 29.62 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के 31.42 लाख हेक्टेयर से कम है। दालों की बुवाई औसत सामान्य क्षेत्र 136.02 लाख हेक्टेयर से पीछे है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66d5c8e478e5c.jpg" alt="" width="641" height="662" /></p>
<p><strong>बाजरा की बुवाई पिछले साल के कम</strong></p>
<p>मोटे अनाज (श्रीअन्न) की बुवाई इस साल 3.68 फीसदी बढ़ी है। अब तक 187.74 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मोटे अनाज की बुवाई हुई है, पिछले इस समय तक यह क्षेत्र 181.06 लाख हेक्टेयर था। इसमें मक्का की बुवाई 87.27 लाख हेक्टेयर, ज्वार की 15.16 लाख हेक्टेयर, बाजरा की 69.55 लाख हेक्टेयर और रागी की 10.31 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। मोटे अनाज में सिर्फ बाजरा की बुवाई पिछड़ी है, जो पिछले साल से कम है।&nbsp;</p>
<p>तिलहन की बुवाई में 0.95 फीसदी की मामूली वृद्धि हुई है। इसमें मूंगफली की बुवाई 47.49 लाख हेक्टेयर, सोयाबीन की बुवाई 125.11 लाख हेक्टेयर, सूरजमुखी की बुवाई 0.71 लाख हेक्टेयर और तील की बुवाई 10.77 लाख हेक्टेयर में की गई है।&nbsp;</p>
<p><strong>कपास का क्षेत्र 9.23 फीसदी घटा</strong></p>
<p>गन्ने की बुवाई में हल्की वृद्धि हुई है, जिससे कुल क्षेत्रफल 57.68 लाख हेक्टेयर हो गया है। वहीं कपास की बुवाई में 9.23 फीसदी की गिरावट आई है। कपास का क्षेत्र पिछले साल के 123.11 लाख हेक्टेयर से घटकर अगस्त 2024 में 111.74 लाख हेक्टेयर रह गया है। जूट और मेस्टा की बुवाई भी 5.70 लाख हेक्टेयर तक सिमट गई है, जो पिछले साल की तुलना में कम है।</p>
<p>कुल मिलाकर इस साल खरीफ फसलों की बुवाई में धान, दलहन और मोटे अनाज में बढ़त के साथ अच्छी प्रगति हुई है, लेकिन कुछ फसलों में गिरावट भी दर्ज की गई है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a4bb7d32827.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ धान की बुवाई का रकबा सामान्य से अधिक, लेकिन कपास का क्षेत्र नौ फीसदी से अधिक घटा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a4bb7d32827.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रिकॉर्ड  उत्पादन के आंकड़ों के बावजूद गेहूं  को लेकर क्यों खड़ी हो सकती हैं मुश्किलें]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/despite-record-wheat-production-data-why-its-price-and-availability-is-going-to-be-a-challenge.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 02 Sep 2024 07:31:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/despite-record-wheat-production-data-why-its-price-and-availability-is-going-to-be-a-challenge.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन के सरकारी आंकड़ों के बीच गेहूं की कीमतों का लगातार बढ़ना, सरकारी खरीद का तीसरे साल लक्ष्य से कम रहना और केंद्रीय पूल में गेहूं के स्टॉक का निचले स्तर पर पहुंचना, एक बड़े गेहूं संकट की आहट है। यह ऐसा मसला है जो गेहूं-चावल के फसल चक्र को तोड़ने की धारणा को भी बदल सकता है। एक अगस्त, 2024 को केंद्रीय पूल में 268.1 लाख टन गेहूं था जो 2022 में इसी समय के 266.5 लाख टन से तो अधिक है लेकिन 2008 के बाद 16 साल में सबसे कम है। गेहूं के स्टॉक की यह स्थिति भारत के खाद्यान्न सरप्लस होने के दावे को कमजोर करती है। क्योंकि सरकार ने पिछले दो साल से गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा है और घरेलू बाजार में स्टॉक लिमिट जैसी पाबंदियां लागू कर रखी हैं।&nbsp;</p>
<p>वहीं, चावल के मामले में स्थिति गेहूं के उलट है। पिछले दो साल को छोड़ दें तो अगस्त में आमतौर पर केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक चावल से अधिक होता था। गेहूं की रबी फसल आने के बाद जून में सरकारी खरीद बंद होती है और स्टॉक उच्च स्तर पर रहता है, जबकि चावल के मामले में सरकारी खरीद सीजन सीजन अक्टूबर से शुरू होता है, इसलिए अगस्त में स्टॉक कम रहता है। लेकिन अब ऐसा नहीं है। साल 2015 में एक अगस्त को केंद्रीय पूल में चावल का स्टॉक गेहूं से लगभग आधा था जबकि इस साल एक अगस्त को केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक चावल के मुकाबले लगभग 60 फीसदी है। &nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p style="text-align: center;"><strong>केंद्रीय पूल में 1 अगस्त तक का स्टॉक</strong> <strong>(लाख टन)</strong></p>
<table style="margin-left: auto; margin-right: auto;">
<tbody>
<tr>
<td width="70">
<p>&nbsp;</p>
</td>
<td width="66">
<p><strong>गेहूं</strong></p>
</td>
<td width="67">
<p><strong>चावल</strong></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="70">
<p>2015</p>
</td>
<td width="66">
<p>367.78</p>
</td>
<td width="67">
<p>186.61</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="70">
<p>2016</p>
</td>
<td width="66">
<p>268.79</p>
</td>
<td width="67">
<p>221.39</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="70">
<p>2017</p>
</td>
<td width="66">
<p>300.59</p>
</td>
<td width="67">
<p>237.02</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="70">
<p>2018</p>
</td>
<td width="66">
<p>408.58</p>
</td>
<td width="67">
<p>249.44</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="70">
<p>2019</p>
</td>
<td width="66">
<p>435.88</p>
</td>
<td width="67">
<p>328.85</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="70">
<p>2020</p>
</td>
<td width="66">
<p>513.28</p>
</td>
<td width="67">
<p>350.97</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="70">
<p>2021</p>
</td>
<td width="66">
<p>564.80</p>
</td>
<td width="67">
<p>444.59</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="70">
<p>2022</p>
</td>
<td width="66">
<p>266.45</p>
</td>
<td width="67">
<p>409.88</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="70">
<p>2023</p>
</td>
<td width="66">
<p>280.39</p>
</td>
<td width="67">
<p>374.37</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="70">
<p>2024</p>
</td>
<td width="66">
<p>268.12</p>
</td>
<td width="67">
<p>454.83</p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align: center;"><em><strong>स्रोत: खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग</strong></em></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>एक अगस्त, 2024 को केंद्रीय पूल में 454.8 लाख टन चावल था। गैर-बासमती व्हाइट राइस के निर्यात पर लगा प्रतिबंध भी इसकी वजह है। भारत ने वर्ष 2021-22 में 212.10 लाख टन चावल का निर्यात किया था। वहीं 2022-23 में निर्यात 223.5 लाख टन रहा और भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश रहा। भारत की हिस्सेदारी वैश्विक बाजार में 40 फीसदी तक पहुंच गई थी। लेकिन उसके बाद घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ने और खराब मानसून के चलते उत्पादन में कमी को देखते हुए सरकार ने गैर-बासमती व्हाइट राइस के निर्यात पर रोक लगा दी। वहीं, सेला राइस पर 20 फीसदी निर्यात शुल्क और बासमती पर 950 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) लागू कर रखा है। इसके चलते 2023-24 में भारत का चावल निर्यात घटकर 163.6 लाख टन रह गया था।&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>गेहूं का निर्यात 2021-22 में 72.4 लाख टन था। उसके बाद 2022-23 में यह 46.9 लाख टन रहा और 2023-24 में 1.9 लाख टन गेहूं का निर्यात हुआ। सरकार ने मई, 2022 में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था क्योंकि प्रतिकूल मौसम के चलते देश में गेहूं का उत्पादन प्रभावित हुआ था। तब से यह प्रतिबंध लागू है। हालांकि, सरकार रिकॉर्ड उत्पादन के आंकड़े जारी कर रही है।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p>गेहूं और चावल के मामले में कृषि जलवायु क्षेत्र को लेकर स्थिति अलग है। गेहूं की रबी सीजन में ही केवल एक फसल होती जबकि चावल की देश के विभिन्न हिस्सों में खरीफ और रबी दोनों सीजन में फसल होती है। गेहूं का उत्पादन उत्तरी भारत, पश्चिमी और मध्य भारत के एग्रो क्लाइमेंट क्षेत्र में ही संभव है। देश में ऐसे केवल आठ राज्य हैं जहां सालाना 20 लाख टन से अधिक गेहूं का उत्पादन होता है जबकि चावल के मामले में ऐसे राज्यों की संख्या 16 है यानी चावल की खेती का क्षेत्र काफी व्यापक है। गेहूं उत्पादक राज्यों में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में देश का 76 फीसदी गेहूं पैदा होता है।&nbsp;</p>
<p>शीर्ष गेहूं उत्पादक राज्य (मिलियन टन)</p>
<table style="height: 466px;">
<tbody>
<tr style="height: 48px;">
<td style="height: 48px; width: 145px;">
<p>उत्तर प्रदेश</p>
</td>
<td style="height: 48px; width: 84px;">
<p>34.46</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td style="height: 48px; width: 145px;">
<p>मध्य प्रदेश</p>
</td>
<td style="height: 48px; width: 84px;">
<p>20.96</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td style="height: 48px; width: 145px;">
<p>पंजाब</p>
</td>
<td style="height: 48px; width: 84px;">
<p>16.85</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 34px;">
<td style="height: 34px; width: 145px;">
<p>&nbsp;</p>
</td>
<td style="height: 34px; width: 84px;">
<p>&nbsp;</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td style="height: 48px; width: 145px;">
<p>हरियाणा</p>
</td>
<td style="height: 48px; width: 84px;">
<p>11.37</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td style="height: 48px; width: 145px;">
<p>राजस्थान</p>
</td>
<td style="height: 48px; width: 84px;">
<p>10.69</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td style="height: 48px; width: 145px;">
<p>बिहार</p>
</td>
<td style="height: 48px; width: 84px;">
<p>6.32</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td style="height: 48px; width: 145px;">
<p>गुजरात</p>
</td>
<td style="height: 48px; width: 84px;">
<p>3.42</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td style="height: 48px; width: 145px;">
<p>महाराष्ट्र</p>
</td>
<td style="height: 48px; width: 84px;">
<p>2.07</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td style="height: 48px; width: 145px;">
<p>कुल</p>
</td>
<td style="height: 48px; width: 84px;">
<p><strong>109.73*</strong></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>(नोट: आंकड़े 2019-20 से 2023-24 तक के पांच साल के औसत हैं। अन्य राज्यों का उत्पादन भी इनमें शामिल है।)</p>
<p><strong>स्रोत: कृषि एवं किसान कल्याण विभाग।</strong></p>
<p>देश में बढ़ती आबादी और खानपान में बदलाव के चलते गेहूं की खपत बढ़ रही है जबकि जलवायु परिवर्तन के कारण गेहूं उत्पादन पर हर साल मौसम की मार पड़ती है। पिछले कुछ वर्षों में दिसंबर में कम ठंड पड़ती है जबकि गेहूं की फसल में दाना बनने के समय फरवरी-मार्च में तापमान तेजी से बढ़ता है। इस तरह मौसम का बदला मिजाज गेहूं के उत्पादन को प्रभावित कर रहा है।&nbsp;</p>
<p>सरकारी अनुमानों में गेहूं की खपत को करीब 10.4 करोड़ टन के आसपास माना गया है। लेकिन हकीकत यह है कि देश में गेहूं की खपत लगातार बढ़ रही है। गेहूं की खपत अब केवल चपाती बनाने और उसके पारंपरिक राज्यों में अधिक खपत के रूप में नहीं रह गई है। अब चावल की खपत वाले राज्यों में भी गेहूं की खपत लगातार बढ़ रही है। जिस तरह से बेकरी उद्योग, पिज्जा-बर्गर से लेकर मैदा और सूजी से बनने वाले तमाम उत्पादों की खपत का दायरा बढ़ रहा है उसके चलते अब पूरे देश में गेहूं के उत्पादों की खपत बढ़ रही है।&nbsp;</p>
<p>साल 2002-23 के हाउसहोल्ड एक्सपेंडिचर सर्वे के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं की प्रति व्यक्ति मासिक खपत 3.9 किलो है और शहरों में यह 3.6 किलो है। लेकिन यह आंकड़ा खपत की पूरी तस्वीर पेश नही करता है। वहीं, चावल के मामले में उससे तैयार होने वाले उत्पाद सीमित हैं। साथ ही देश के कई राज्यों में सिंचाई सुविधाएं बढ़ने से चावल उत्पादन बढ़ा है। ऐसे में गेहूं और चावल के उत्पादन और खपत को अलग तरीके से देखने की जरूरत है। क्योंकि अब गेहूं-चावल चक्र को तोड़ने की नीतिगत सोच को भी बदलना पड़ सकता है। साथ ही गेहूं की बढ़ती खपत के लिए उत्पादन बढ़ाने के उन तरीकों पर काम करना होगा जो जलवायु परिवर्तन और तापमान के बदलाव के बावजूद गेहूं की पैदावार बढ़ा सकें। क्योंकि गेहूं के उत्पादन का क्षेत्र बढ़ाने की संभावना कम है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66d1d06149c8b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रिकॉर्ड  उत्पादन के आंकड़ों के बावजूद गेहूं  को लेकर क्यों खड़ी हो सकती हैं मुश्किलें ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66d1d06149c8b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चाय का उत्पादन जुलाई में 14.39 फीसदी घटा, असम और पश्चिम बंगाल में कम उत्पादन रही वजह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/tea-production-decreased-by-14.39-percent-in-july-due-to-uneven-rainfall.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 31 Aug 2024 16:12:06 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/tea-production-decreased-by-14.39-percent-in-july-due-to-uneven-rainfall.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चाय के उत्पादन में इस साल जुलाई में गिरावट दर्ज की गई है। चाय बोर्ड के प्रोविजनल आकलन के अनुसार, जुलाई 2024 में चाय का उत्पादन 14.39 फीसदी घटकर 1468.4 लाख किलोग्राम रहा, जो पिछले साल इसी महीने में 1715.5 लाख किलोग्राम था। इस गिरावट का मुख्य कारण असम और पश्चिम बंगाल जैसे प्रमुख चाय उत्पादक राज्यों में उत्पादन में आई कमी है।</p>
<p>देश के सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य असम में जुलाई 2024 में चाय का उत्पादन 15.53 फीसदी की गिरावट के साथ 783 लाख किलोग्राम पर आ गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 927 लाख किलोग्राम था। असम घाटी में 734.1 लाख किलोग्राम उत्पादन हुआ, जो पिछले साल 874.1 लाख किलोग्राम था। कछार में उत्पादन घटकर 48.9 लाख किलोग्राम रह गया, जो पिछले साल 52.9 लाख किलोग्राम था।&nbsp;</p>
<p>पश्चिम बंगाल में भी चाय के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। यहां जुलाई 2024 में उत्पादन 21.44 फीसदी की गिरावट के साथ 415.9 लाख किलोग्राम पर आ गया, जबकि पिछले साल यह 529.5 लाख किलोग्राम था। पश्चिम बंगाल के दुआर्स क्षेत्र में उत्पादन 230.1 लाख किलोग्राम, तराई क्षेत्र में 176.8 लाख किलोग्राम, और दार्जिलिंग में 9 लाख किलोग्राम रहा। तीनों क्षेत्रों में उत्पादन पिछले साल से कम है।&nbsp;</p>
<p>उत्तर भारत में चाय उत्पादन में 17.41 फीसदी गिरावट दर्ज की गई, जो जुलाई 2024 में 1241.6 लाख किलोग्राम रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1503.4 लाख किलोग्राम थी।&nbsp;</p>
<p>इसके विपरीत, दक्षिण भारत में चाय उत्पादन में 7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। जुलाई 2024 में दक्षिण भारत में 226.8 लाख किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ, जो पिछले साल 211.9 लाख किलोग्राम था। तमिलनाडु में 182.1 लाख किलोग्राम, केरल में 42.4 लाख किलोग्राम और कर्नाटक में 2.3 लाख किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ। तीन राज्यों में चाय का उत्पादन बढ़ा है।&nbsp;</p>
<p>भारतीय चाय संघ (आईटीए) के महासचिव अरिजीत राहा ने जुलाई में चाय के उत्पादन में गिरावट के लिए जलवायु को बजह बताया है। उन्होंने कहा कि जुलाई में असमान बारिश के पैटर्न ने उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया है। हालांकि कुल मिलाकर गिरावट मुख्य रूप से असम और पश्चिम बंगाल जैसे प्रमुख राज्यों में कम उत्पादन के कारण हुई है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66d2d8bb91312.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चाय का उत्पादन जुलाई में 14.39 फीसदी घटा, असम और पश्चिम बंगाल में कम उत्पादन रही वजह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66d2d8bb91312.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पहली तिमाही में सिर्फ 2% रही कृषि विकास दर, जीडीपी ग्रोथ भी घट कर 6.7% पर आई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/gdp-grows-less-than-7-percent-as-agriculture-growth-stumbles-to-just-2-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 31 Aug 2024 14:27:06 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/gdp-grows-less-than-7-percent-as-agriculture-growth-stumbles-to-just-2-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल की पहली तिमाही में कृषि और संबद्ध क्षेत्र की विकास दर सिर्फ 2 प्रतिशत दर्ज हुई है। इसका असर पूरे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर हुआ है, जिसकी वृद्धि दर घट कर 6.7 प्रतिशत पर आ गई है। वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में कृषि विकास दर 3.7 प्रतिशत और जीडीपी विकास दर 8.2 प्रतिशत थी।</p>
<p>केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार कृषि और खनन समेत पूरे प्राइमरी सेक्टर की विकास दर पिछले साल की पहली तिमाही के 4.2 प्रतिशत की तुलना में इस वर्ष पहली तिमाही में 2.7 प्रतिशत रही। ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) में प्राइमरी सेक्टर का हिस्सा भी घट कर 18.1 प्रतिशत रह गया है।</p>
<p>रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने विकास दर में गिरावट के लिए शहरी खपत कमजोर होने, कंपनियों के नतीजे कमजोर रहने और सरकारी खर्च में कमी को मुख्य वजह बताया है। उनका कहना है कि निजी खपत का ट्रेंड मिश्रित है, लेकिन ग्रामीण खपत बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। निजी खपत पिछले साल सिर्फ चार प्रतिशत बढ़ी थी, इस बार इसके बेहतर रहने की उम्मीद है।&nbsp;</p>
<p>जोशी के अनुसार बेहतर मानसून के कारण कृषि में ग्रोथ बढ़ने के आसार हैं। खाद्य महंगाई भी नीचे आएगी। इसलिए खास तौर से ग्रामीण इलाकों में निजी खपत बढ़ने की उम्मीद है। कृषि विकास दर बढ़ने से लोगों की आय बढ़ेगी, खाद्य महंगाई कम होगी और लोगों की खर्च करने की क्षमता में इजाफा होगा।</p>
<p>क्रिसिल का मानना है कि पिछले साल के विपरीत इस वर्ष ग्रामीण खपत बढ़ने की दर शहरों से अधिक रहेगी। ब्याज दर ऊंची रहने के कारण शहरी खपत प्रभावित होगी। भारतीय रिजर्व बैंक के कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे से भी यह बात साबित होती है।</p>
<p>सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पहली तिमाही में कुल जीवीए में कृषि, मवेशी, वन और मत्स्य क्षेत्र की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत और खनन की दो प्रतिशत रही। मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा 14 प्रतिशत, बिजली, गैस, जलापूर्ति आदि का 2 प्रतिशत, कंस्ट्रक्शन का 9 प्रतिशत, ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन आदि का 15 प्रतिशत, फाइनेंस, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज का 26 प्रतिशत तथा जन-प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं का 16 प्रतिशत रहा।</p>
<p>पिछले वित्त वर्ष 2023-24 में कृषि विकास दर सिर्फ 1.4 प्रतिशत थी। उससे पहले 2022-23 में यह 4.7 प्रतिशत रही थी। तिमाही आधार पर देखें तो 2023-24 की पहली तिमाही में कृषि क्षेत्र की ग्रोथ 3.7 प्रतिशत, दूसरी में 1.7 प्रतिशत, तीसरी में 0.4 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 0.6 प्रतिशत रही थी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पहली तिमाही में सिर्फ 2% रही कृषि विकास दर, जीडीपी ग्रोथ भी घट कर 6.7% पर आई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश में सामान्य से 7 फीसदी अधिक बारिश, लंबा खिंचेंगा मानसून सीजन, फसल कटाई हो सकती है प्रभावित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/country-received-7-percent-more-rain-than-usual-which-may-prolong-the-monsoon-and-potentially-affect-crop-harvesting.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 30 Aug 2024 16:35:29 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/country-received-7-percent-more-rain-than-usual-which-may-prolong-the-monsoon-and-potentially-affect-crop-harvesting.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में इस साल मानसून की बारिश सामान्य से 7 फीसदी अधिक हुई है। सिर्फ अगस्त महीने में ही मानसून के बादल 44 फीसदी अधिक बरसे हैं। वहीं मौसम विभाग ने सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान जताया है, जिससे खरीफ फसलों की कटाई प्रभावित हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, इस साल मानसून सीजन लंबा खिंच सकता है। जिसका प्रतिकूल असर खेती-बाड़ी पर पड़ेगा। मानसून सीजन की शुरुआत में जहां कम बारिश के कारण खरीफ फसलों की बुवाई में देरी हुई थी, वहीं अब सितंबर में अधिक बारिश और लंबे मानसून के कारण फसलों की कटाई में भी देरी हो सकती है।&nbsp;</p>
<p>भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 28 अगस्त तक देशभर में मानसून की बारिश सामान्य से 7 फीसदी ज्यादा हुई है। अब तक के मानसून सीजन में पूर्व और पूर्वोत्तर भारत को छोड़कर देश में सभी हिस्सों में मानसून की बारिश सामान्य से अधिक हुई है। पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में जहां मानसून के बादल 11 फीसदी कम बरसे हैं, वहीं उत्तर-पश्चिम भारत में 2 फीसदी, मध्य भारत में 17 फीसदी और दक्षिण भारत में 18 फीसदी अधिक बारिश हुई है।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>अगले हफ्ते कैसा रहेगा मौमस का हाल</strong></p>
<p>मौसम विभाग ने 4 सितंबर तक देश के विभिन्न हिस्सों में भारी से मध्यम बारिश का अनुमान जताया है। आईएमडी के डेली बुलेटिन के अनुसार, 1 से 4 सितंबर के बीच पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, कोंकण, गोवा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मराठवाड़ा, सौराष्ट्र, और कच्छ में भारी से मध्यम बारिश की संभावना है। इसके अलावा, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, ओडिशा, और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी 1 से 4 सितंबर के बीच बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। कुल मिलाकर, अगले हफ्ते के अधिकांश दिनों में मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है।</p>
<p><strong>सितंबर में अधिक बारिश का अनुमान</strong></p>
<p>भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया है। सितंबर के पहले हफ्ते तक ला नीना परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं, जिससे मानसूनी बारिश में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, मानसून के दूसरे हिस्से में पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश में सामान्य से 7 फीसदी अधिक बारिश, लंबा खिंचेंगा मानसून सीजन, फसल कटाई हो सकती है प्रभावित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डीएपी की कीमत 620 डॉलर पर पहुंची, कम आयात से किसानों के लिए हो सकती है किल्लत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/dap-price-reaches-620-dollar-low-imports-may-lead-to-shortage-for-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 30 Aug 2024 16:29:40 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/dap-price-reaches-620-dollar-low-imports-may-lead-to-shortage-for-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अक्टूबर से शुरू हो रहे आगामी रबी सीजन में डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की उपलब्धता को लेकर किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते उर्वरक कंपनियों ने डीएपी का आयात कम किया है। इस साल अप्रैल से जून तक डीएपी का आयात पिछले साल के मुकाबले करीब 46 फीसदी घटा है। ऐसे में अगर अगले एक माह के भीतर आयात में बढ़ोतरी नहीं होती है तो गेहूं और दूसरी रबी फसलों के लिए किसानों को डीएपी की उपलब्धता को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमत 620 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई हैं। इसके चलते न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत सरकार द्वारा तय मौजूदा दरों पर डीएपी का आयात उर्वरक कंपनियों के लिए घाटे का सौदा बन गया है। यही वजह है कि इस साल डीएपी का आयात कम हुआ और रबी सीजन के लिए उपलब्धता को लेकर आशंकाएं पैदा हो रही हैं। ऐसे में डीएपी की उपलब्धता को लेकर राज्य सरकारों ने केंद्र सरकार के दरवाजे पर दस्तक देना शुरू कर दिया है।</p>
<p>केंद्र सरकार न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत गैर-यूरिया (विनियंत्रित उर्वरकों) के लिए नाइट्रोजन (एन), फॉस्फोरस (पी) और पोटाश (के) की सब्सिडी दरें तय करती है। कॉम्प्लेक्स उर्वरकों में इनकी मात्रा के आधार पर प्रति टन सब्सिडी दी जाती है। देश में यूरिया के बाद सबसे अधिक खपत डीएपी की होती है। एनबीएस के तहत खरीफ 2024 सीजन (1 अप्रैल से लेकर 30 सितंबर) के लिए सरकार डीएपी पर 21676 रुपये प्रति टन की सब्सिडी दे रही है। रबी सीजन के लिए सरकार एनबीएस की नई दरें घोषित कर सकती है जो 1 अक्तूबर, 2024 से 31 मार्च, 2025 की अवधि के लिए लागू होंगी।</p>
<p><strong>डीएपी आयात का गणित &nbsp;</strong></p>
<p>मौजूदा वैश्विक कीमतों पर डीएपी का आयात मूल्य करीब 52000 रुपये प्रति टन बैठता है। इसके अलावा हैंडलिंग और बैगिंग का करीब 5000 रुपये प्रति टन का खर्च अतिरिक्त है। ऐसे में कंपनियों के लिए डीएपी की आयात लागत करीब 57 हजार रुपये प्रति टन बैठ रही है। वहीं, 21676 रुपये प्रति टन की सब्सिडी और 1350 रुपये प्रति बैग (50 किलो) के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के हिसाब से 27 हजार रुपये प्रति टन के बिक्री मूल्य को जोड़कर भी डीएपी आयात करने वाली कंपनियों को करीब आठ रुपये प्रति टन का नुकसान उठाना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>मई से बढ़ रही कीमतें </strong></p>
<p>इस साल अप्रैल में डीएपी की कीमतें घटकर 500 डॉलर प्रति टन से नीचे आ गई थीं। लेकिन उसके बाद मई में कीमतें बढ़ने लगीं। सरकारी क्षेत्र की एक उर्वरक कंपनी ने मई में 528 डॉलर प्रति टन के रेट पर आयात सौदा किया था। उसके बाद जून में कीमतें और अधिक हो गईं और एक दूसरी सरकारी उर्वरक कंपनी के टेंडर में 575 डॉलर प्रति टन की कीमत आई जिसे कंपनी ने स्वीकार नहीं किया और टेंडर रद्द कर दिया। इसके साथ ही जून के अंतिम दिनों में डीएपी के सबसे बड़े निर्यातकों में शुमार चीन ने डीएपी का निर्यात बंद कर दिया।</p>
<p><strong>सब्सिडी बढ़ने पर टिकी आस </strong></p>
<p>उर्वरक उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सरकार डीएपी पर सब्सिडी बढ़ा सकती है और इसी उम्मीद में आयात किया जा रहा है। हाल ही में भारतीय कंपनियों ने दुनिया की सबसे बड़ी डीएपी निर्यातक कंपनी मोरक्को की ओसीपी के साथ 620 डॉलर प्रति टन पर करीब पांच लाख टन डीएपी आयात के सौदे किये हैं। लेकिन अगर सरकार डीएपी सब्सिडी नहीं बढ़ाती है तो रबी सीजन में किसानों के लिए डीएपी की उपलब्धता का संकट पैदा हो सकता है। डीएपी की जरूरत फसल की बुवाई के समय अधिक होती है। इसलिए इसकी उपलब्धता के मामले में अगले दो-तीन माह काफी महत्वपूर्ण रहेंगे।</p>
<p><strong>राज्यों की चिंताएं </strong></p>
<p>स्थिति को देखते हुए राज्य सरकारों ने केंद्र के साथ डीएपी की उपलब्धता को लेकर बैठकें करनी शुरू कर दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, डीएपी की सबसे अधिक खपत वाले राज्यों में शुमार पंजाब के अधिकारियों ने इसी सप्ताह दिल्ली में कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के साथ डीएपी की आपूर्ति के मुद्दे पर बैठक की। पंजाब सरकार रबी सीजन में डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता को लेकर चिंतित है।</p>
<p>उर्वरक उद्योग सूत्रों का कहना है कि अगर कंपनियां आयात सौदे नहीं करती हैं तो रबी सीजन तक डीएपी की उपलब्धता का संकट खड़ा हो सकता है। सौदों के बाद आयातित उर्वरक के किसानों के लिए रिटेल शॉप तक पहुंचने में डेढ़ से दो माह तक का समय लगता है। जबकि मध्य एशिया में तनाव के चलते शिपिंग की अवधि भी बढ़ गई है। ऐसे में केंद्र सरकार को समय रहते डीएपी की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के उपाय करने होंगे।</p>
<p>&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ डीएपी की कीमत 620 डॉलर पर पहुंची, कम आयात से किसानों के लिए हो सकती है किल्लत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चंद्रकिशोर जायसवाल और रेनू यादव को श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/chandrakishore-jaiswal-and-renu-yadav-awarded-iffco-literature-award.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 29 Aug 2024 18:52:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/chandrakishore-jaiswal-and-renu-yadav-awarded-iffco-literature-award.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उर्वरक क्षेत्र की अग्रणी सहकारी संस्था इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) द्वारा वर्ष 2024 के 'श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान&rsquo; के लिए कथाकार चंद्रकिशोर जायसवाल तथा प्रथम &lsquo;श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको युवा साहित्य सम्मान&rsquo; के लिए रेनू यादव के नाम की घोषणा की गई है। रचनाकारों का चयन वरिष्ठ साहित्यकार असग़र वजाहत की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने किया है। इस वर्ष की सम्&zwj;मान चयन समिति में डॉ. अनामिका, प्रियदर्शन, यतीन्&zwj;द्र मिश्र, उत्&zwj;कर्ष शुक्&zwj;ल एवं डॉ. नलिन विकास शामिल थे।</p>
<p>चंद्रकिशोर जायसवाल का जन्म 15 फरवरी, 1940 को बिहार के मधेपुरा जिले के बिहारीगंज में हुआ। आपने पटना विश्वविद्यालय, पटना से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर शिक्षा हासिल की और अरसे तक अध्यापन करने के बाद भागलपुर अभियंत्रणा महाविद्यालय, भागलपुर से प्राध्यापक के रूप में सेवानिवृत्त हुए।</p>
<p>आपकी प्रमुख कृतियाँ हैं&mdash;&lsquo;गवाह गैरहाजिर&rsquo;, &lsquo;जीबछ का बेटा बुद्ध&rsquo;, &lsquo;शीर्षक&rsquo;, &lsquo;चिरंजीव&rsquo;, &lsquo;माँ&rsquo;, &lsquo;दाह&rsquo; &lsquo;पलटनिया&rsquo;, &lsquo;सात फेरे&rsquo;, &lsquo;मणिग्राम&rsquo;, &lsquo;भट्ठा&rsquo;, &lsquo;दुखग्राम&rsquo; (उपन्यास); &lsquo;मैं नहिं माखन खायो&rsquo;, &lsquo;मर गया दीपनाथ&rsquo;, &lsquo;हिंगवा घाट में पानी रे!&rsquo;, &lsquo;जंग&rsquo;, &lsquo;नकबेसर कागा ले भागा&rsquo;, &lsquo;दुखिया दास कबीर&rsquo;, &lsquo;किताब में लिखा है&rsquo;, &lsquo;आघातपुष्प&rsquo;, &lsquo;तर्पण&rsquo;, &lsquo;जमीन&rsquo;, &lsquo;खट्टे नहीं अंगूर&rsquo;, &lsquo;हम आजाद हो गए!&rsquo;, &lsquo;प्रतिनिधि कहानियाँ&rsquo; (कहानी-संग्रह); &lsquo;शृंगार&rsquo;, &lsquo;सिंहासन&rsquo;, &lsquo;चीर-हरण&rsquo;, &lsquo;रतजगा&rsquo;, &lsquo;गृह-प्रवेश&rsquo;, &lsquo;रंग-भंग&rsquo; (नाटक); &lsquo;आज कौन दिन है?&rsquo;, &lsquo;त्राहिमाम&rsquo;, &lsquo;शिकस्त&rsquo;, &lsquo;जबान की बन्दिश&rsquo; (एकांकी)।</p>
<p>आप &lsquo;रामवृक्ष बेनीपुरी सम्मान&rsquo; (हजारीबाग), &lsquo;बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान&rsquo; (आरा), &lsquo;आनन्द सागर कथाक्रम सम्मान&rsquo; (लखनऊ), बिहार राष्ट्रभाषा परिषद का &lsquo;साहित्य साधना सम्मान&rsquo; (पटना) और बिहार सरकार का जननायक &lsquo;कर्पूरी ठाकुरी सम्मान&rsquo; (पटना) से सम्मानित हैं।</p>
<p>आपके उपन्यास &lsquo;गवाह गैरहाजिर&rsquo; पर राष्ट्रीय फ़िल्म विकास निगम द्वारा निर्मित फ़िल्म &lsquo;रूई का बोझ&rsquo; और कहानी &lsquo;हिंगवा घाट में पानी रे!&rsquo; पर दूरदर्शन द्वारा निर्मित फ़िल्में काफी चर्चित रही हैं। &lsquo;रूई का बोझ&rsquo; नेशनल फ़िल्म फेस्टिवल पैनोरमा (1998) के लिए चयनित हुई थी और अनेक अन्तराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सवों में प्रदर्शित हो चुकी है।</p>
<p>रेनू यादव का जन्म 16 सितम्बर, 1984 को गोरखपुर में हुआ था। वह ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा एवं साहित्य विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उनकी प्रमुख कृतियां है- 'महादेवी वर्मा के काव्य में वेदना का मनोविश्लेषण' (आलोचनात्मक पुस्तक), 'मैं मुक्त हूँ' (काव्य-संग्रह), साक्षात्कारों के आईने में - सुधा ओम ढींगरा (संपादित पुस्तक)।</p>
<p>रेनू यादव का मासिक पत्रिका साहित्य नंदिनी में 'चर्चा के बहाने' स्तम्भ (कॉलम) प्रकाशित होता है तथा इससे पहले कैनेडा से निकलने वाली पत्रिका हिन्दी चेतना में 'ओरियानी के नीचे' नामक स्तम्भ प्रकाशित होता था। उनकी स्त्री-विमर्श पर केन्द्रित कहानियाँ, कविताएँ एवं शोधात्मक आलेख आदि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। वे 'सृजन श्री' सम्मान सृजन-सम्मान बहुआयामी सांस्कृतिक संस्था, प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान, रायपुर (छत्तीसगढ़), 'विरांगना सावित्रीबाई फूले नेशनल फेलोशिप अवार्ड' भारतीय दलित साहित्य अकादमी, दिल्ली से सम्मानित हो चुकी हैं।</p>
<p>मूर्धन्य कथाशिल्पी श्रीलाल शुक्ल की स्मृति में वर्ष 2011 में शुरू किया गया यह सम्मान प्रत्येक वर्ष ऐसे हिन्दी लेखक को दिया जाता है जिसकी रचनाओं में मुख्यतः ग्रामीण व कृषि जीवन का चित्रण किया गया हो। इससे पहले यह सम्मान विद्यासागर नौटियाल, शेखर जोशी, संजीव, मिथिलेश्वर, अष्टभुजा शुक्ल, कमलाकांत त्रिपाठी, रामदेव धुरंधर, रामधारी सिंह दिवाकर, महेश कटारे, रणेंद्र, शिवमूर्ति, जयनंदन और मधु कांकरिया को प्रदान किया गया है। इस पुरस्कार के अन्तर्गत सम्मानित साहित्यकार को एक प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र तथा ग्यारह लाख रुपये की राशि का चैक प्रदान किया जाता है।</p>
<p>इफको निदेशक मंडल के अनुमोदन से इस वर्ष से शुरू हुए &lsquo;श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको युवा साहित्य सम्मान&rsquo; के अंतर्गत सम्मानित साहित्यकार को एक प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति-पत्र और ढाई लाख रुपये का चैक प्रदान किया जाएगा।</p>
<p>चंद्रकिशोर जायसवाल एवं रेनू यादव को यह सम्मान 30 सितंबर, 2024 को नई दिल्&zwj;ली में आयोजित कार्यक्रम में प्रदान किया जाएगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66d077a5dd78b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चंद्रकिशोर जायसवाल और रेनू यादव को श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66d077a5dd78b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि अवसंरचना कोष के विस्तार को मंजूरी दी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/union-cabinet-approves-expansion-of-agriculture-infrastructure-fund.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 28 Aug 2024 17:59:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/union-cabinet-approves-expansion-of-agriculture-infrastructure-fund.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज &lsquo;कृषि अवसंरचना कोष&rsquo; के अंतर्गत फंडिंग की योजना के क्रमिक विस्तार को मंजूरी दी है ताकि इसे और अधिक आकर्षक, प्रभावी और समावेशी बनाया जा सके। केंद्र सरकार ने कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) योजना के दायरे का विस्तार करने के लिए कई उपायों की घोषणा भी की है।&nbsp;</p>
<p><strong>सामुदायिक कृषि संपत्तियां:</strong> अब सामुदायिक कृषि संपत्तियों के निर्माण के लिए सभी पात्र लाभार्थियों को अनुमति दी जाएगी। इससे सामुदायिक कृषि क्षमताओं के विकास में तेजी आएगी और क्षेत्र में उत्पादकता और स्थिरता में सुधार होगा।</p>
<p><strong>एकीकृत प्रसंस्करण परियोजनाएं:</strong> एआईएफ के तहत अब प्राथमिक और द्वितीयक प्रसंस्करण परियोजनाओं को शामिल किया जाएगा। लेकिन केवल एकीकृत परियोजनाएं ही इसके लिए पात्र होंगी, जबकि स्टैंडअलोन सेकेंडरी प्रोजेक्ट्स को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय योजनाओं के तहत कवर किया जाएगा।</p>
<p><strong>पीएम कुसुम कंपोनेंट-ए:</strong> पीएम-कुसुम के कंपोनेंट-ए को एआईएफ के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे किसानों के समूह, सहकारी समितियों और पंचायतों को सहायता मिलेगी।&nbsp;</p>
<p><strong>एनएबी संरक्षण:</strong> एफपीओ के लिए एआईएफ क्रेडिट गारंटी कवरेज को एनएबी संरक्षण ट्रस्टी कंपनी के माध्यम से बढ़ाया जाएगा। इससे एफपीओ की वित्तीय सुरक्षा बढ़ेगी और कृषि अवसंरचना परियोजनाओं में अधिक निवेश होगा।</p>
<p>2020 में प्रधानमंत्री द्वारा एआईएफ के शुभारंभ के बाद से एआईएफ ने 6623 गोदामों, 688 कोल्ड स्टोर और 21 साइलो परियोजनाओं के निर्माण में सहायता की है। इससे देश में लगभग 500 एलएमटी की अतिरिक्त भंडारण क्षमता स्थापित की गई है, जिसमें 465 एलएमटी शुष्क भंडारण और 35 एलएमटी शीत भंडारण क्षमता शामिल है। इससे सालाना 18.6 एलएमटी खाद्यान्न और 3.44 एलएमटी बागवानी उपज की बचत की जा सकेगी।</p>
<p>अब तक एआईएफ के तहत 74,508 परियोजनाओं के लिए 47,575 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इन परियोजनाओं ने कृषि क्षेत्र में 78,596 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया है, जिसमें से 78,433 करोड़ रुपये निजी संस्थाओं से प्राप्त हुए हैं। सरकार का दावा है कि एआईएफ के तहत स्वीकृत परियोजनाओं ने 8.19 लाख से अधिक ग्रामीण रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि अवसंरचना कोष के विस्तार को मंजूरी दी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बासमती पर MEP घटाने के लिए चावल निर्यातकों ने पीएम मोदी को लिखा पत्र]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/all-india-rice-exporters-association-wrote-letter-to-the-prime-minister-regarding-reduction-of-minimum-export-price-on-basmati-rice.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 28 Aug 2024 14:13:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/all-india-rice-exporters-association-wrote-letter-to-the-prime-minister-regarding-reduction-of-minimum-export-price-on-basmati-rice.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चावल के निर्यात पर लागू पाबंदियों के चलते भारतीय चावल उद्योग को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही इसका असर घरेलू बाजार में बासमती और गैर बासमती चावल की कीमतों पर भी पड़ा है। इस संबंध में <strong>ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन</strong> ने प्रधानमंत्री <strong>नरेंद्र मोदी</strong> को पत्र लिखा है। पत्र में बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) को मौजूदा 950 डॉलर प्रति टन से घटाकर 700 डॉलर प्रति टन करने की मांग की गई है। एसोसिएशन का तर्क है कि अधिक एमईपी के कारण भारतीय बासमती अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी नहीं रह गया है, जबकि पाकिस्तानी निर्यातक बासमती चावल 700 डॉलर प्रति टन की कीमत पर बेचकर फायदा उठा रहे हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66cef27c72666.jpg" alt="" width="639" height="826" /></p>
<p>ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में मंगलवार को केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री <strong>प्रल्हाद जोशी</strong> से भी मुलाकात की। एसोसिएशन ने उन्हें इस संबंध में ज्ञापन सौंपकर एमईपी घटाने का आग्रह किया है।</p>
<p>ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष <strong>सतीश गोयल</strong> ने<strong> रूरल वॉयस</strong> को बताया कि मौजूदा चावल निर्यात नीति में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अधिक एमईपी के चलते चावल निर्यातक कम कीमत वाली बासमती की कुछ किस्मों को निर्यात नहीं कर पा रहे हैं। इससे भारतीय चावल उद्योग तो प्रभावित हुआ ही है, साथ ही देश में बासमती की कीमतों में भी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा लागू 950 डॉलर प्रति टन एमईपी के चलते भारतीय बासमती का निर्यात प्रभावित हो रहा है। वहीं, पाकिस्तान में एमईपी केवल 700 डॉलर प्रति टन है, जिससे वहां के बासमती की मांग बढ़ गई है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66cef1dd4f948.jpg" alt="" width="635" height="811" /></p>
<p>सतीश गोयल ने सुझाव दिया कि यदि भारत को बासमती का निर्यात बढ़ाना है तो एमईपी को घटाकर 700 डॉलर करना होगा या इसे पूरी तरह से हटाना होगा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने ऐसा नहीं किया, तो पाकिस्तान से बासमती का निर्यात बढ़ जाएगा और भारतीय बासमती के निर्यात कारोबार को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय खाद्य मंत्री ने एसोसिएशन का आश्वासन दिया है कि यह मुद्दा गंभीर है और भारत सरकार इस पर जरूर कोई कदम उठाएगी।&nbsp;</p>
<p><strong>बासमती की कीमतों में गिरावट</strong></p>
<p>हरियाणा राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने भी केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और हरियाणा में करनाल से लोकसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखकर एमईपी घटाने की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष <strong>सुशील जैन</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि हरियाणा की मंडियों में नया बासमती 1509 धान आना शुरू हो गया है और यह 2200-2600 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है, जबकि पिछले साल इसका भाव 3200-3800 रुपये था। उन्होंने कहा कि बासमती की कीमतों में गिरावट से उद्योग के साथ-साथ किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। निर्यातक और मिल मालिक इस धान को खरीदने में असमर्थ हैं, क्योंकि चावल का एमईपी अधिक होने से निर्यात नहीं हो पा रहा है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66cef2ad45287.jpg" alt="" width="640" height="910" /></p>
<p>सुशील जैन ने कहा यदि एमईपी कम नहीं किया गया, तो बासमती के अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की स्थिति कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि चावल उद्योग पिछले साल के धान की कीमतों में गिरावट के कारण पहले से ही घाटे का सामना कर रहा है, क्योंकि पिछले साल का स्टॉक अधिक था। उन्होंने कहा कि अब नया बासमती धान बाजार में आने के साथ कीमतें और भी गिर सकती हैं, जिससे उद्योग और किसान दोनों को बड़ा नुकसान होगा।</p>
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<p></p>
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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बासमती पर MEP घटाने के लिए चावल निर्यातकों ने पीएम मोदी को लिखा पत्र ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अफगानिस्तान के ड्यूटी फ्री सेब ने बढ़ाई हिमाचल&amp;#45;कश्मीर के बागवानों की चिंता, गिरने लगे दाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/duty-free-apples-from-afghanistan-have-increased-the-concern-of-himachal-kashmir-orchardists-prices-have-started-falling.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 28 Aug 2024 13:42:23 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/duty-free-apples-from-afghanistan-have-increased-the-concern-of-himachal-kashmir-orchardists-prices-have-started-falling.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में अफगानिस्तान के सेबों की आवक शुरू हो गई है, जिससे हिमाचल प्रदेश और कश्मीर के बागवानों की चिंता बढ़ गई है। अफगानिस्तान से देश में जो सेब आता है वह एशियन फ्री ट्रेड एरिया (आफटा) के तहत आता है। जिस पर कोई आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) नहीं लगता। अफगानिस्तान का सेब ड्यूटी फ्री होने के चलते देश की मंडियों में कम दाम पर बिकता है। इसे आढ़ती कम दाम वाला सेब भी कहते हैं। जहां हिमाचल और कश्मीर का सेब बाजार में 100 से 150 रुपये प्रति किलो के बीच बिकता है, वहीं अफगानिस्तान का सेब सिर्फ 50 से 60 रुपये प्रति किलो के दाम पर उपलब्ध हो जाता है। जिस वजह से मंडियों को प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है और भारतीय सेब के दाम गिर जाते हैं। फिलहाल, अफगानिस्तान के सेबों की आवक शुरू होते ही हिमाचल और कश्मीर के सेबों के दाम में गिरावट शुरू हो गई है।&nbsp;</p>
<p>पिछले कुछ वर्षों में देश में अफगानिस्तान से सेब का आयात काफी तेजी से बढ़ा है। <span>कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़ों के अनुसार, </span>वित्त वर्ष 2022-23 में अफगानिस्तान से 1,508 टन सेब का आयात हुआ था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़कर 37,837 टन पहुंच गया। इस हिसाब से देखें तो देश में अफगानिस्तान से सेब का आयात लगभग <strong>2400 फीसदी</strong> बढ़ा है। जिससे बागवानों की चिंता और बढ़ गई है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>हिमाचल प्रदेश फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष <strong>हरीश चौहान</strong> ने<strong> रूरल वॉयस</strong> को बताया कि अफगानिस्तान से सेबों का भारत आना शुरू हो गया है। यह आवक अगस्त-सितंबर में शुरू होती है और अक्टूबर-नवंबर तक चलती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की आजादपुर मंडी देश में अफगानिस्तान के ड्यूटी फ्री सेबों की सबसे बड़ी मंडी है और अब वहां उनकी शुरुआती खेप आनी शुरू हो गई है। इससे हिमाचल और कश्मीर के सेबों का व्यापार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि अभी तो केवल शुरुआती खेप आई है, जिससे भारतीय सेब के दाम गिरने लगे हैं। जैसे-जैसे सितंबर-अक्टूबर में इसकी आवक बढ़ेगी, दाम और भी गिर जाएंगे, जिससे बागवानों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि पहले ही अत्यधिक गर्मी और बेमौसम बारिश के कारण सेब के उत्पादन पर असर पड़ा है, और अगर बागवानों को सही दाम नहीं मिलेंगे, तो उनका नुकसान और बढ़ जाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि अफगानिस्तान के सेब को ड्यूटी-फ्री के दायरे से बाहर किया जाए और विदेशी सेबों पर 100 फीसदी आयात शुल्क लगाया जाए।</p>
<p>कश्मीर फल उत्पादक एवं डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष <strong>फैयाज अहमद मलिक</strong> ने<strong> रूरल वॉयस</strong> को बताया कि अफगानिस्तान का ड्यूटी-फ्री सेब भारतीय सेब व्यापार को कड़ी टक्कर देता है। सस्ता होने के कारण आढ़ती इसे खरीदते हैं, जिससे हमारे सेब के दाम गिर जाते हैं, और बागवानों को कम दाम पर अपना सेब बेचना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि हर बागवान का सेब ए-ग्रेड क्वालिटी का हो, अधिकतर बागवानों के सेब मध्यम क्वालिटी के होते हैं। आढ़ती इसका फायदा उठाकर और अफगानिस्तान के सेब के नाम पर दाम गिरा देते हैं, जिससे हमारे बागवानों को कम दाम मिलते हैं, और वे उचित मुनाफा नहीं कमा पाते।</p>
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</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अफगानिस्तान के ड्यूटी फ्री सेब ने बढ़ाई हिमाचल-कश्मीर के बागवानों की चिंता, गिरने लगे दाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ बुवाई में 2 फीसदी की बढ़त, दलहन का क्षेत्र 5.72 फीसद और धान का 4.24 फीसदी बढ़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/kharif-sowing-increased-by-2-percent-area-under-pulses-and-paddy-also-increased.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 27 Aug 2024 18:53:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/kharif-sowing-increased-by-2-percent-area-under-pulses-and-paddy-also-increased.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल खरीफ फसलों की बुवाई में पिछले साल की तुलना में 1.93 फीसदी (लगभग 2 फीसदी) की वृद्धि दर्ज की गई है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, 27 अगस्त 2024 तक खरीफ फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र 1065.08 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि वर्ष 2023 में इस समय तक यह क्षेत्र 1044.85 लाख हेक्टेयर था। इस वर्ष विशेष रूप से धान, दलहन और मोटे अनाज की बुवाई में वृद्धि देखी गई है।</p>
<p><strong>दलहन की बुवाई 5.72 फीसदी बढ़ी</strong></p>
<p>कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दलहन की बुवाई में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है। दलहन की बुवाई का क्षेत्र 5.72 फीसदी बढ़कर 122.16 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो वर्ष 2023 में 115.55 लाख हेक्टेयर था। दालों में अरहर और मूंग की बुवाई में सबसे अधिक वृद्धि हुई है, जबकि उड़द की बुवाई पिछली साल की तुलना में पिछड़ी है। अरहर की बुवाई 45.78 लाख हेक्टेयर और मूंग की बुवाई 34.07 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। वहीं, उड़द की बुवाई 29.04 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के 30.81 लाख हेक्टेयर से कम है।</p>
<p>धान की बुवाई में 4.24 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। अब तक 394.28 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हो चुकी है, जो वर्ष 2023 में इस समय तक 369.05 लाख हेक्टेयर थी।</p>
<p><strong>मोटे अनाज की बुवाई 4.51 फीसदी बढ़ी</strong></p>
<p>मोटे अनाज की बुवाई 4.51 फीसदी बढ़कर 185.51 लाख हेक्टेयर हो गई है, जबकि वर्ष 2023 में यह क्षेत्र 177.50 लाख हेक्टेयर था। इसमें मक्का की बुवाई 87.23 लाख हेक्टेयर, ज्वार की 14.93 लाख हेक्टेयर, बाजरा की 68.85 लाख हेक्टेयर और रागी की 9.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। मोटे अनाज में सिर्फ बाजरा की बुवाई पिछड़ी है, जो पिछले साल से कम है।&nbsp;</p>
<p><strong>तिलहन और अन्य फसलों की स्थिति</strong></p>
<p>तिलहन की बुवाई में भी 0.83 फीसदी की मामूली वृद्धि हुई है। इसमें मूंगफली की बुवाई 46.82 लाख हेक्टेयर, सोयाबीन की बुवाई 125.11 लाख हेक्टेयर, सुजरमुखी की बुवाई 0.71 लाख हेक्टेयर और तील की बुवाई 10.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।&nbsp;</p>
<p>गन्ने का रकबे हल्की बढ़त के साथ उसका बुआई कुल क्षेत्रफल 57.68 लाख हेक्टेयर हो गया है। वहीं, कपास की बुवाई में 11.36 फीसदी की गिरावट आई है, जिससे यह क्षेत्र 2023 के 111.39 लाख हेक्टेयर से घटकर 2024 में 122.74 लाख हेक्टेयर रह गया है। जूट और मेस्टा की बुवाई भी 5.70 लाख हेक्टेयर तक सिमट गई है, जो पिछले साल की तुलना में कम है।</p>
<p>कुल मिलाकर, इस साल खरीफ फसलों की बुवाई में धान, दलहन और मोटे अनाज में बढ़त के साथ अच्छी प्रगति हुई है, लेकिन कुछ फसलों में गिरावट भी दर्ज की गई है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ बुवाई में 2 फीसदी की बढ़त, दलहन का क्षेत्र 5.72 फीसद और धान का 4.24 फीसदी बढ़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एफएसएसएआई ने ए2 दूध पर दिए अपने निर्देश को वापस लिया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/fssai-withdraws-its-order-on-a1-a2-milk.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 26 Aug 2024 18:26:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/fssai-withdraws-its-order-on-a1-a2-milk.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने ए1 और ए2 दूध का दावा कर डेयरी उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के अपने आदेश को वापस ले लिया है। एफएसएसएआई ने एक स्पष्टीकरण जारी किया है जिसमें कहा गया है कि इस मुद्दे पर डेयरी उद्योग के कारोबारियों और हितधारकों के साथ गहन चर्चा की जाएगी और इसके बाद निर्णय लिया जाएगा। तब तक के लिए एफएसएसएआई इस संबंध में जारी अपना पुराना आदेश वापस लेता है।&nbsp;</p>
<p>एफएसएसएआई ने 21 अगस्त, 2024 को दूध और दूध उत्पादों में ए1 और ए2 के नाम पर किए जा रहे दावों को खाद्य सुरक्षा मानक कानून का उल्लंघन करार देते हुए उन्हें हटाने का निर्देश दिया था। पहले के आदेश में कंपनियों को अपने उत्पादों से ए1 और ए2 के दावे तुरंत हटाने को कहा गया था।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66cc7a2fa9af0.jpg" alt="" width="642" height="756" /></p>
<p>एफएसएसएआई ने कहा था कि ए1 और ए2 का अंतर केवल प्रोटीन की संरचना से संबंधित है, जो उपभोक्ताओं के लिए भ्रमित करने वाला हो सकता है। खाद्य सुरक्षा और मानक विनियम, 2011 में दूध के मानक के तौर पर ए1 या ए2 प्रकार का कोई उल्लेख नहीं है।&nbsp;एफएसएसएआई ने मौजूदा प्री-प्रिंटेड लेबल्स का उपयोग जारी रखने के लिए छह महीने की समयसीमा भी दी थी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66cc7a4b44e08.jpg" alt="" width="635" height="757" /></p>
<p><strong>21 अगस्त को जारी एफएसएसएआई का आदेश</strong>&nbsp;</p>
<p>भारतीय डेयरी एसोसिएशन और कई डेयरी विशेषज्ञों ने एफएसएसएआई के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा था कि यह कदम उपभोक्ताओं को ए1 और ए2 दूध और दूध उत्पादों के बीच श्रेष्ठता को लेकर अवैज्ञानिक दावों से सुरक्षा प्रदान करेगा। हालांकि, कुछ ही दिनों में एफएसएसएआई ने अपना आदेश वापस ले लिया है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66cc7afd4b664.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एफएसएसएआई ने ए2 दूध पर दिए अपने निर्देश को वापस लिया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजनीतिक नुकसान से बचने के लिए भाजपा ने कंगना के किसानों पर दिये बयान  से खुद को किया अलग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/bjp-distances-itself-from-kangana-ranaut-anti-farmer-statement-to-avoid-political-damage.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 26 Aug 2024 16:56:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/bjp-distances-itself-from-kangana-ranaut-anti-farmer-statement-to-avoid-political-damage.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मंडी से भाजपा की लोकसभा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत द्वारा किसानों और किसान आंदोलन पर दिया गया विवादास्पद बयान भाजपा के लिए मुश्किलें पैदा कर रहा है। खासतौर से किसान आंदोलन के गढ़ रहे हरियाणा में आगमी 1 अक्तूबर, 2024 को विधान सभा चुनाव होने हैं, इन चुनावों के पहले किसानों और केंद्र द्वारा लाये गये तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर चले 13 माह के आंदोलन को लेकर कंगना रनौत ने जिस तरह से विवादास्पद टिप्पणियां की हैं उससे भाजपा असहज महसूस कर रही है। इसके चलते ही सोमवार को भाजपा ने रनौत के बयान और टिप्पणियों से पल्ला झाड़ लिया है। पार्टी द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि कंगना का बयान उनका खुद का बयान है और पार्टी उनके बयान से सहमति नहीं रखती है। साथ ही कंगना को इस तरह से नीतिगत मुद्दों पर बयान नहीं देने के लिए भी कहा गया है।</p>
<p>असल में कंगना का बयान आने के बाद तमाम किसान संगठन लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। साथ ही कुछ संगठनों ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की है। वहीं राजनीतक दल भी इस मौके को चूकना नहीं चाह रहे हैं। हरियाणा में भाजपा के सामने सबसे मजबूत प्रतिद्वंदी कांग्रेस कंगना के इन बयानों के जरिये भाजपा पर हमला कर रही है और उसे किसान विरोधी पार्टी बता रही है।</p>
<p>हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद कंगना रनौत ने हाल ही में एक इंटरव्यू में किसान आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए था कि आंदोलन के दौरान हिंसा हुई, हत्याएं हुईं और रेप हुए। उनके इस बयान पर किसान संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने कड़ी आपत्ति जताई है।&nbsp;</p>
<p>पंजाब में कांग्रेस की सरकार के पूर्व मंत्री राजकुमार वेरका ने कंगना पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की मांग की है और कहा कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।</p>
<p>भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कंगना के बयान पर कहा कि अगर कंगना के आरोपों में सच्चाई होती, तो जांच एजेंसियां पहले ही कार्रवाई कर चुकी होतीं। उन्होंने कहा कि वह एक सांसद हैं और उन्हें ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। उन्हें अपने क्षेत्र के किसानों के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि बेतुके बयान देकर अपनी छवि को खराब करना चाहिए।</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक दर्शन पाल ने भी कंगना के बयान की निंदा की और कहा कि उन्हें जिम्मेदारी से बोलना चाहिए। अपने इस बयान से कंगना ने पहले से परेशान किसानों के जख्मों पर नमक न डालने का काम किया है।&nbsp;&nbsp;</p>
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<p>किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) के नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि कंगना ने यह बयान सिर्फ अपनी फिल्म के प्रचार के लिए दिया है। जब उनके पास कोई मुद्दा नहीं होता, तो वह पंजाब और किसानों के खिलाफ बयान देकर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करती हैं, लेकिन अब जनता उनकी सच्चाई जान चुकी है और उनकी बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता।</p>
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<p>अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) ने भी कंगना रनौत के बयान की कड़ी निंदा की है। एआईकेएस ने बयान जारी कर कहा है कि कंगना का बयान किसानों के संघर्ष को बदनाम करने और भ्रामक प्रचार करने की कोशिश है। अपने इस बयान के लिए कंगना को किसानों से माफी मांगनी चाहिए। किसान सभा ने न्यायालय से उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील भी की है।</p>
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<p>हरियाणा के कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने हैंडल से लिखा, "भाजपा को देश के अन्नदाता से इतनी नफरत क्यों है? भाजपा ने तो हमेशा हमारे अन्नदाताओं पर झूठ,फरेब, साजिश और अत्याचार किया है। और एक बार फिर हमारे अन्नदाताओं पर बीजेपी की सांसद ने अनर्गल आरोप लगाया है। सवाल ये है कि..क्या कंगना ने बीजेपी की चुनावी रणनीति के हिसाब से किसान पर ये घटिया आरोप लगाया है ? क्या कंगना के सिर्फ शब्द थे या फिर कॉपी किसी और ने लिखी है ? अगर नहीं तो फिर देश के प्रधानमंत्री, हरियाणा के मुख्यमंत्री और तमाम बीजेपी सांसद-विधायक इस मसले पर खामोश क्यों हैं ?</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजनीतिक नुकसान से बचने के लिए भाजपा ने कंगना के किसानों पर दिये बयान  से खुद को किया अलग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    <item>
        <title><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने 11 लाख नई &amp;apos;लखपति दीदियों&amp;apos; को बांटे प्रमाण पत्र]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/prime-minister-narendra-modi-distributed-certificates-to-11-lakh-new-lakhpati-didi-in-jalgaon-maharashtra.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 26 Aug 2024 12:38:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/prime-minister-narendra-modi-distributed-certificates-to-11-lakh-new-lakhpati-didi-in-jalgaon-maharashtra.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को महाराष्ट्र के जलगांव में आयोजित 'लखपति दीदी सम्मेलन' में 11 लाख नई लखपति दीदियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस कार्यक्रम में उन्होंने देशभर की लखपति दीदियों से संवाद करते हुए 2,500 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फंड जारी किया, जिससे 4.3 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के 48 लाख सदस्यों को फायदा होगा। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने 5,000 करोड़ रुपये के बैंक ऋण भी वितरित किए, जिससे 2.35 लाख एसएचजी के 25.8 लाख सदस्यों को आर्थिक सहयोग मिलेगा।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने बताया कि लखपति दीदी योजना के तहत अब तक एक करोड़ महिलाओं को &lsquo;लखपति दीदी&rsquo; बनाया जा चुका है और अगले लक्ष्य के रूप में तीन करोड़ लखपति दीदियों को सशक्त करने का संकल्प रखा गया है। उन्होंने कहा, &ldquo;लखपति दीदी अभियान न केवल बहनों-बेटियों की आय बढ़ाने का अभियान है, बल्कि यह पूरे परिवार और गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रहा है।&rdquo;</p>
<p>प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि पिछले 10 वर्षों में 1 करोड़ लखपति दीदियां बनाई गईं, जबकि पिछले दो महीनों में ही 11 लाख नई लखपति दीदियां जुड़ीं। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में भी 1 लाख लखपति दीदियां बनाई गई हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने महिलाओं के हित में कई अहम फैसले लिए हैं, जिनमें घरों की रजिस्ट्री महिलाओं के नाम पर करना, प्रधानमंत्री जन धन योजना में महिलाओं के नाम पर अधिकतर खाते खोलना, और मुद्रा योजना के तहत महिलाओं को 70 फीसदी लाभार्थी बनाना शामिल है। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि स्वनिधि योजना और विश्वकर्मा योजना जैसी योजनाओं ने महिलाओं को बिना गारंटी के ऋण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद की है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि आज महिलाएं गांवों में बैंक सखियों, ड्रोन पायलटों और पशु सखियों जैसी भूमिकाओं में अपना योगदान दे रही हैं। उन्होंने कृषि सखी कार्यक्रम का भी उल्लेख किया, जिसके माध्यम से सरकार लाखों महिलाओं को आधुनिक खेती में प्रशिक्षित करने की योजना बना रही है।&nbsp;</p>
<p>महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने सख्त रुख अपनाया और राज्य सरकारों से महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और दोषियों को सख्त सजा दिलाने के प्रावधान किए गए हैं।</p>
<p>इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने महिलाओं की भूमिका को देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनकी सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आने वाले समय में महिलाओं को और अधिक अवसर प्रदान करने का आश्वासन दिया और समाज में उनके योगदान को मान्यता देने की दिशा में सरकार के प्रयासों को रेखांकित किया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्रधानमंत्री मोदी ने 11 लाख नई 'लखपति दीदियों' को बांटे प्रमाण पत्र ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सेब को टक्कर दे रही नाशपाती, 900&amp;#45;1200 रुपये पहुंचा हाफ बॉक्स का रेट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pears-half-box-price-reaches-900-1200-rupees-in-himachal-and-jammu-kashmir-mandis.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 24 Aug 2024 16:03:28 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pears-half-box-price-reaches-900-1200-rupees-in-himachal-and-jammu-kashmir-mandis.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में नाशपाती अब सेब को कड़ी टक्कर दे रही है। नाशपाती का हाफ बॉक्स 900 से 1200 रुपये के बीच बिक रहा है, जो सेब के हाफ बॉक्स की कीमत के बराबर है। हिमाचल की मंडियों में अच्छी किस्म की नाशपाती के हाफ बॉक्स को 1500 रुपये तक का रेट मिल रहा है, जबकि नाशपाती का औसत भाव 900 से 1000 रुपये के बीच है। वहीं, जम्मू-कश्मीर की सोपोर मंडी में भी नाशपाती के हाफ बॉक्स की कीमत 1000 रुपये के आसपास बनी हुई है। त्योहारी सीजन और खासकर जन्माष्टमी के मद्देनजर फिलहाल बाजार में नाशपाती की अच्छी डिमांड है, जिससे इसे अच्छे दाम मिल रहे हैं।</p>
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<p>राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) के राष्ट्रीय बागवानी डेटाबेस के अनुसार, देश में हर साल 3.5 लाख टन से अधिक नाशपाती का उत्पादन होता है। भारत में नाशपाती का मुख्य उत्पादन जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में होता है। इन राज्यों की मंडियों में निर्धारित दरों के आधार पर ही देशभर में नाशपाती के दाम तय होते हैं।</p>
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<p>हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित पराला फल मंडी के आढ़ती एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट <strong>सुशील ठाकुर</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि फिलहाल नाशपाती की कीमतों में तेजी बनी हुई है। त्योहारी सीजन और अच्छी डिमांड के चलते नाशपाती के हाफ बॉक्स का रेट 900 से 1000 रुपये के बीच बना हुआ है। हालांकि, पिछले 10 दिनों में कीमतों में थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन बागवान अब भी इन दरों से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर से नाशपाती की आवक शुरू होने के कारण नाशपती की कीमतों में हल्की गिरावट आई है।</p>
<p>हिमाचल प्रदेश प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष <strong>लोकेंद्र बिष्ट</strong> ने कहा कि मंडियों में सेब के मुकाबले नाशपाती बेहतर दामों पर बिक रही है। जहां सेब के दाम पिछले एक हफ्ते में 600 से 700 रुपये प्रति बॉक्स (20 किलोग्राम) तक गिरे हैं, वहीं नाशपाती के दाम स्थिर हैं। उन्होंने बताया कि नाशपाती का हाफ बॉक्स अब सेब के हाफ बॉक्स के बराबर दाम पर बिक रहा है, जिससे नाशपाती उत्पादक बागवानों को अच्छी आमदनी हो रही है। उन्होंने कहा कि इस साल हिमाचल में नाशपाती का उत्पादन कम हुआ है, और अच्छी डिमांड के चलते इसके दाम ऊपर बने हुए हैं।</p>
<p>कश्मीर फल उत्पादक एवं डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष <strong>फैयाज अहमद मलिक</strong> ने रूरल वॉयस को बताया कि जम्मू-कश्मीर की सोपोर मंडी में नाशपाती का हाफ बॉक्स 700 से 1000 रुपये के बीच बिक रहा है। ए-ग्रेड नाशपाती 900-1000 रुपये और बी-ग्रेड 600-700 रुपये के रेट पर बिक रही है। उन्होंने कहा कि बाजार में नाशपाती की अच्छी मांग बनी हुई है, जिससे अगले 15 दिनों तक रेट ऐसे ही बने रहने की संभावना है। हालांकि, जैसे-जैसे नाशपाती की आवक बढ़ेगी, कीमतों में गिरावट की उम्मीद है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सेब को टक्कर दे रही नाशपाती, 900-1200 रुपये पहुंचा हाफ बॉक्स का रेट ]]></media:description>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर पश्चिम भारत में पंजाब&amp;#45;हरियाणा समेत 6 राज्यों में सामान्य से कम मानसून की बारिश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-rain-below-normal-in-6-states-including-punjab-haryana-in-northwest-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 23 Aug 2024 19:11:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-rain-below-normal-in-6-states-including-punjab-haryana-in-northwest-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में मानसून अब आधे से ज्यादा बीत चुका है लेकिन कई क्षेत्रों में अभी भी बारिश की कमी बनी हुई है, जिसका प्रतिकूल असर खेती पर पड़ रहा है। 1 जून से 23 अगस्त तक भले ही देशभर में सामान्य से 3 फीसदी अधिक बारिश हुई हो लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत के पंजाब, हरियाणा समेत छह राज्यों में मानसून की बारिश अभी भी सामान्य से कम है। इसके अलावा, बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर के अधिकतर राज्यों में भी मानसून की बारिश कम दर्ज की गई है।</p>
<p>उत्तर-पश्चिम भारत में 20 दिन पहले मानसून की बारिश सामान्य से 5 फीसदी कम थी, जो अब लगभग पूरी हो गई है। इसके बावजूद कई हिस्सों में बारिश का स्तर सामान्य से 3 से 33 फीसदी तक कम है, जो खरीफ फसलों के उत्पादन और उत्पादन लागत पर असर डाल सकता है।&nbsp;विशेषकर पंजाब में स्थिति चिंताजनक है, जहां सामान्य से 33 फीसदी कम बारिश हुई है। हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 16 फीसदी, हिमाचल प्रदेश में 22 फीसदी, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 26 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 8 फीसदी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 12 फीसदी की कमी देखी गई है।&nbsp;</p>
<p>पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत में भी मानसून की स्थिति अच्छी नहीं है। अरुणाचल प्रदेश में 19 फीसदी, मणिपुर-नागालैंड-त्रिपुरा में 13 फीसदी, पश्चिम बंगाल के गंगा क्षेत्र में 20 फीसदी, झारखंड में 12 फीसदी, बिहार में 23 फीसदी, और असम में 4 फीसदी कम बारिश हुई है। इसके विपरीत, मध्य और दक्षिण भारत में इस वर्ष मानसून अच्छा रहा है। 23 अगस्त तक मध्य भारत में सामान्य से 8 फीसदी और दक्षिण भारत में 20 फीसदी अधिक बारिश हुई है।</p>
<p>देश के कई क्षेत्रों में किसान आज भी खेती-बाड़ी के लिए बारिश के पानी पर निर्भर हैं। लेकिन बारिश नहीं होने से उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कम बारिश वाले क्षेत्रों में यह स्थिति किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पहले से ही बारिश की कमी के कारण फसल उत्पादन पर दबाव है।</p>
<p>देश में इस साल मानसून की शुरुआत काफी अच्छी रही, विशेषकर मध्य और दक्षिण भारत में जहां शुरुआत में भारी बारिश हुई थी। लेकिन उत्तर और पूर्वोत्तर भारत की ओर बढ़ते ही मानसून की गति धीमी पड़ गई थी, जिसका प्रभाव अब स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।</p>
<p>भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने अगस्त और सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान जताया है। अगस्त के अंत तक ला नीना परिस्थितियों के अनुकूल होने की संभावना है, जिससे मानसूनी बारिश में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, मानसून के दूसरे हिस्से में पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की संभावना बनी हुई है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर पश्चिम भारत में पंजाब-हरियाणा समेत 6 राज्यों में सामान्य से कम मानसून की बारिश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[टमाटर के दाम 60 फीसदी घटकर 300 रुपये प्रति क्रेट पर आए, किसान परेशान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/tomato-price-fell-by-60-percent-reduced-to-rs-300-per-crate-forfarmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 23 Aug 2024 12:00:40 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/tomato-price-fell-by-60-percent-reduced-to-rs-300-per-crate-forfarmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बीते 25 दिनों में टमाटर के थोक दामों में 60-70 फीसदी तक की गिरावट आई है। 25 दिन पहले जहां टमाटर का थोक मूल्य लगभग 900 से 1000 रुपये प्रति क्रेट (25 किलो) था, वह अब घटकर 250 से 400 रुपये प्रति क्रेट पर आ गया है। यह गिरावट मुख्यतः कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख टमाटर उत्पादक राज्यों से नई फसल के आने के कारण हुई है। इसके साथ ही हिमाचल और महाराष्ट्र से भी नई फसल आने से कीमतों में और गिरावट दर्ज की गई है। &nbsp; &nbsp;</p>
<p>टमाटर में इस गिरावट का असर खुदरा कीमतों पर भी दिखने लगा है। बाजार में टमाटर का भाव घटकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम से कम हो गया है। इसकी कीमतें माह भर पहले करीब 100 रुपये किलो तक पहुंच गई थी। जैसे-जैसे दक्षिणी राज्यों से टमाटर की आवक बढ़ेगी, कीमतों और कम होने की संभावना है।</p>
<p>भारतीय सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष <strong>श्रीराम गाढवे</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि टमाटर की कीमतों में भारी गिरावट आई है। एक महीने पहले 1000 रुपये प्रति क्रेट बिकने वाला टमाटर अब 250-300 रुपये प्रति क्रेट पर आ गया है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से नई फसल की आवक के कारण दामों में यह भारी गिरावट आई है। महाराष्ट्र की पूणे मंडी में भी टमाटर के दाम 200 रुपये प्रति क्रेट के आसपास बने हुए हैं, जो पहले 800 रुपये प्रति क्रेट थे। गाढवे ने कहा कि अगले एक महीने में टमाटर की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है और अगले साल मार्च-अप्रैल तक कीमतों में सुधार की कोई संभावना नहीं है।</p>
<p>हिमाचल प्रदेश की सोलन मंडी में टमाटर के थोक दाम अब 250-300 रुपये प्रति क्रेट पर आ गए हैं। 25 दिन पहले यहां टमाटर 1000 रुपये प्रति क्रेट तक बिक रहा था। स्थानीय मंडी के <strong>आढ़ती सतीश</strong> ने <strong>रूरल वॉयल</strong> को बताया कि सोलन में टमाटर की बंपर आवक के चलते दाम गिर गए हैं। इसके साथ ही दक्षिण भारत के टमाटर उत्पादक राज्यों से भी नई फसल आने लगी है, जिससे कीमतों में और गिरावट आई है।</p>
<p>बाजार में एक महीने पहले तक टमाटर की कीमत 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी, जिससे किसानों को अच्छे दाम मिल रहे थे लेकिन अब कीमतें काफी गिर चुकी हैं। सोलन के <strong>टमाटर किसान हरिनंद</strong> ने बताया कि टमाटर के दाम इतने कम हो गए हैं कि उनके लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। एक महीने पहले उन्होंने टमाटर 30-35 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचा था, लेकिन अब ये घटकर 18-20 रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गए हैं। उन्होंने कहा कि टमाटर की उत्पादन लागत ही 20-22 रुपये प्रति किलोग्राम के करीब आती है, जिससे उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है।</p>
<p>हरिनंद ने कहा कि पहले बारिश के कारण टमाटर की पैदावार प्रभावित हुई और अब कीमतों में भारी गिरावट से उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि हर साल कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन बिचौलियों की वजह से उन्हें खास मुनाफा नहीं हो पाता। हालांकि, कीमतें बढ़ने से थोड़ी राहत जरूर मिलती है, लेकिन यह केवल कुछ ही महीनों के लिए होता है।</p>
<p>कीमतों में गिरावट के चलते तमिलनाडु के किसानों ने टमाटर को सड़क पर फेंक कर अपना गुस्सा जाहिर किया है। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें किसान उचित दाम न मिलने से नाराज होकर टमाटर सड़क पर फेंकते हुए दिख रहे हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66c8992c33fd7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ टमाटर के दाम 60 फीसदी घटकर 300 रुपये प्रति क्रेट पर आए, किसान परेशान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 लाख &amp;apos;लखपति दीदियों&amp;apos; को देंगे प्रमाण पत्र, 25 अगस्त को होगा समारोह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/prime-minister-narendra-modi-will-give-certificates-to-11-lakh-lakhpati-didi-in-jalgaon-maharashtra-on-25-august.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 22 Aug 2024 18:42:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/prime-minister-narendra-modi-will-give-certificates-to-11-lakh-lakhpati-didi-in-jalgaon-maharashtra-on-25-august.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 अगस्त को महाराष्ट्र के जलगांव में 'लखपति दीदियों' के सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी इन महिला उद्यमियों के साथ संवाद करेंगे और उन्हें प्रमाण पत्र भी वितरित करेंगे। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान इस बात की जानकारी दी।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री 2500 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फंड और सामुदायिक निवेश फंड जारी करेंगे, जिसका लाभ 4.3 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लगभग 48 लाख सदस्यों को मिलेगा। इसके अलावा, 5000 करोड़ रुपये का बैंक ऋण भी जारी किया जाएगा, जिससे 2,35,400 स्वयं सहायता समूहों के 25.8 लाख सदस्यों को सहायता मिलेगी। इस कार्यक्रम में देशभर के 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 30,000 से अधिक स्थानों के जिला मुख्यालय और सीएलएफ वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहेंगे, जिससे इसे एक राष्ट्रीय उत्सव का रूप मिलेगा।</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लखपति दीदियां ऐसी महिलाएं हैं जो सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक कमाती हैं। अब तक 1 करोड़ महिलाएं इस स्तर पर पहुंच चुकी हैं, और अगले तीन साल में 3 करोड़ लखपति दीदियों का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह जानकर खुशी होती है कि इनमें से एक सीआरपी ने 95&nbsp;लखपति दीदियाँ बनाई हैं।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि स्वयं सहायता समूहों को मजबूत बनाने और उन्हें सफल उद्यमी बनाने के लिए एक संरचित प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसमें राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रशिक्षकों की एक मजबूत कैडर तैयार की गई है। 3 लाख सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों का एक कैडर इन महिला उद्यमियों के प्रशिक्षण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।</p>
<p>प्रेसवार्ता के दौरान राज्यवार लक्ष्यों की सूची भी साझा की गई, जिसमें विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 11 लाख लखपति दीदियां तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस सूची में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर लखपति दीदियों की संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 लाख 'लखपति दीदियों' को देंगे प्रमाण पत्र, 25 अगस्त को होगा समारोह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ए2 के नाम पर दूध की गुणवत्ता का दावा भ्रामक और नियम विरूद्ध: एफएसएसएआई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/claiming-quality-of-milk-products-in-the-name-of-a1-or-a2-is-illegal-and-misleading-fssai.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 22 Aug 2024 17:54:36 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/claiming-quality-of-milk-products-in-the-name-of-a1-or-a2-is-illegal-and-misleading-fssai.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दूध और दूध उत्पादों में ए1 या ए2 के नाम पर गुणवत्ता का दावा दिग्भ्रमित करने वाला और खाद्य संरक्षा मानक कानून का उल्लंघन है। जो कंपनियां इस तरह का दावा कर दूध और दूध के उत्पाद बेच रही हैं उन्हें इसे तुरंत हटाने का निर्देश दिया गया है। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 21 अगस्त को जारी एक निर्देश में यह बात कही है।&nbsp; एफएसएसएआई के निर्देश के मुताबिक, ए1 या ए2 के आधार पर दूध उत्पादों की मार्केटिंग में गुणवत्ता का दावा करना भ्रामक और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन है।&nbsp;</p>
<p>आदेश में कहा गया है कि एफएसएसएआई के संज्ञान में आया है कि कई फूड बिजनेस आपरेटर (एफबीओ) एफएसएसएआई लाइसेंस संख्या और पंजीकरण प्रमाणपत्र संख्या के तहत ए1 और ए2 के नाम पर दूध और दूध से बने उत्पाद जैसे घी, मक्खन, दही आदि की बिक्री कर रहे हैं। दूध में ए1 और ए2 का अंतर केवल प्रोटीन (बीटा कैसीन) की संरचना से संबंधित है, जो उपभोक्ताओं के लिए भ्रम पैदा कर सकता है। इसके अलावा, खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य उत्पाद मानक और खाद्य योजक) विनियम, 2011 में दूध के मानक के तौर पर ए1 या ए2 प्रकार का कोई उल्लेख नहीं है। इस आधार पर दूध और दूध उत्पादों पर ए2 का दावा करना नियमों के विपरीत है।</p>
<p>एफएसएसएआई ने ई-कॉमर्स फूड बिजनेस आपरेटर्स को भी निर्देश दिया है कि वे अपनी वेबसाइटों से ए1 और ए2 प्रोटीन से संबंधित सभी दावों को तुरंत हटा दें। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि ऐसे सभी दावे एफएसएस अधिनियम, 2006 और उसके तहत बनाए गए विनियमों के अनुरूप नहीं हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66c72df8ebcae.jpg" alt="" width="507" height="605" /></p>
<p>हालांकि, एफएसएसएआई ने एफबीओ को अपने मौजूदा प्री-प्रिंटेड लेबल्स का उपयोग करने के लिए छह महीने की समयसीमा दी है। इसके बाद कोई अतिरिक्त समय या विस्तार नहीं दिया जाएगा&nbsp; और इसका सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।</p>
<p><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">इंडियन डेयरी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट <strong>डॉ. आर एस सोढ़ी</strong> ने एफएसएसएआई के निर्देश को ट्वीट करते हुए कहा है कि&nbsp; कंपनियों को दूध या उत्पादों पर A1 या A2 का दावा करने की अनुमति नहीं है। यह उपभोक्ताओं को A1 दूध उत्पादों की तुलना में A2 उत्पादों की श्रेष्ठता के संबंध में खाद्य और डेयरी कंपनियों के अवैज्ञानिक दावों से बचाने के लिए एफएसएसएआई के इस कदम को ऐतिहासिक बताया है।&nbsp;</span></p>
<p>यह कदम उपभोक्ताओं को सही और प्रमाणित जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिससे दूध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम न हो। असल में कई कंपनियां ए2 के नाम पर दूध और दूध उत्पादों की बेहतर गुणवत्ता का दावा कर ऊंची कीमतों पर अपने उत्पाद बेच रही हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ए2 के नाम पर दूध की गुणवत्ता का दावा भ्रामक और नियम विरूद्ध: एफएसएसएआई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत की यूरिया आयात निर्भरता घटकर 10&amp;#45;15 फीसदी रहने का अनुमान: क्रिसिल रिपोर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-urea-import-dependence-expected-to-decrease-to-10-15-percent-says-crisil-report.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 22 Aug 2024 14:38:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-urea-import-dependence-expected-to-decrease-to-10-15-percent-says-crisil-report.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की यूरिया आयात निर्भरता घटकर 10-15 फीसदी होने की उम्मीद है। भारत का यूरिया उद्योग तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। यह देश की 55 फीसदी रासायनिक उर्वरक मांग को पूरा करता है। क्रिसिल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र की आयात निर्भरता जो वित्त वर्ष 2021 में 30 फीसदी थी, अब निकट से मध्यम अवधि में घटकर 10-15 फीसदी रह जाएगी। यह कमी मुख्य रूप से नई उत्पादन क्षमताओं के शुरू होने और स्थिर होने के कारण होगी।</p>
<p>नए संयंत्रों के पूरी क्षमता से चलने की उम्मीद है, जिससे उद्योग को अच्छा और स्थिर लाभ मिलेगा। कच्चे माल की स्थिर कीमतों, अनुकूल नीतियों और पर्याप्त सब्सिडी आवंटन की बदौलत पुराने संयंत्रों को भी इस वित्तीय वर्ष में स्थिर लाभ मिलने की संभावना है। क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट इन निष्कर्षों का समर्थन करती है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2007 से 2012 के बीच यूरिया की मांग घरेलू उत्पादन से अधिक हो गई थी, जिससे आयात निर्भरता 20-25 फीसदी बढ़ गई थी। इस समस्या को हल करने के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2013 में नई निवेश नीति (एनआईपी) 2012 लागू की थी। इस नीति के तहत पिछले पांच वर्षों में 7.62 मिलियन टन क्षमता वाले छह संयंत्र शुरू किए गए हैं।</p>
<p>क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक आनंद कुलकर्णी ने कहा, "एनआईपी 2012 ने आयात निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नए संयंत्र इस वित्तीय वर्ष में पूरी क्षमता से काम करेंगे, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 85-90 फीसदी था। अगले वित्त वर्ष में एक और संयंत्र शुरू होने से घरेलू उत्पादन बढ़ेगा।"</p>
<p>इन नए संयंत्रों की उच्च क्षमता उपयोग से उनकी दक्षता और लाभप्रदता बढ़ेगी। बाकी 75 प्रतिशत उद्योग के लिए भी लाभप्रदता स्थिर रहने की उम्मीद है, क्योंकि प्राकृतिक गैस की कीमतें स्थिर हैं और नीतियां स्थिर हैं।&nbsp;सरकार के उपायों के कारण यूरिया उद्योग का कार्यशील पूंजी चक्र स्थिर है। क्योंकि यह सरकारी सब्सिडी पर बहुत निर्भर करता है, जो बिक्री का 80-85 फीसदी है।</p>
<p>क्रिसिल रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर नितिन बंसल ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में 1.19 लाख करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन पर्याप्त होगा, जिससे सब्सिडी में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में सरकार के समय पर सब्सिडी वितरण के चलते स्थिर क्रेडिट प्रोफाइल बने रहने में मदद मिलेगी। किसी बड़े पूंजीगत व्यय की योजना नहीं होने के कारण, इस वित्तीय वर्ष में शुद्ध उत्तोलन 3.0 गुना पर स्थिर रहने की उम्मीद है, जो वित्तीय वर्ष 2024 के समान है।</p>
<div class="mt-1 flex gap-3 empty:hidden -ml-2">
<div class="items-center justify-start rounded-xl p-1 flex">
<div class="flex items-center">
<div class="flex items-center pb-0">नैनो यूरिया के बढ़ते उपयोग से भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी आ सकती है, लेकिन सख्त ऊर्जा मानदंड जैसी नीतिगत बदलाव लाभप्रदता को प्रभावित कर सकते हैं।<br /><span class="overflow-hidden text-clip whitespace-nowrap text-sm"></span></div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत की यूरिया आयात निर्भरता घटकर 10-15 फीसदी रहने का अनुमान: क्रिसिल रिपोर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्राकृतिक खेती के सफल मॉडलों का राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने की तैयारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/preparations-underway-to-create-a-national-database-of-successful-models-of-natural-farming.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 22 Aug 2024 12:40:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/preparations-underway-to-create-a-national-database-of-successful-models-of-natural-farming.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में प्राकृतिक खेती के सफल मॉडलों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य भारत में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाना है। इसके लिए नीति आयोग एक बड़ा राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार कर रहा है, जो सफल पहलुओं को पहचानने और उन्हें समर्थन देने में मदद करेगा। इस पहल में जीआईजेड इंडिया और कंसोर्टियम फॉर एग्रोइकोलॉजिकल ट्रांसफॉर्मेशन (सीएटी) मिलकर काम कर रहे हैं।</p>
<p>एग्रो इकोलॉजी के विशेषज्ञ रामंजनेयुलु जी.वी ने बताया कि बताया कि इस डेटाबेस में राज्यों, जिलों और ब्लॉकों में चल रही पहलों का मानचित्रण किया जाएगा। इसका उद्देश्य नीति आयोग को प्राथमिकता वाले जिलों और संभावित भागीदारों की पहचान में मदद करना है, ताकि प्राकृतिक खेती के प्रसार को और सशक्त किया जा सके।</p>
<p>रामंजनेयुलु जी.वी ने बताया कि इस सहयोग को सफल बनाने के लिए, नीति आयोग ने सीएसओ, बाजार सहभागियों और वित्तीय संस्थाओं से आग्रह किया है कि वे एक संक्षिप्त <a href="https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSc44K1YBzFwijol8DZGul7EfghKLsiL9q5W_puhjl4-k6_fGQ/viewform"><strong>गूगल फॉर्म</strong></a> भरकर इस प्रयास में शामिल हों। इससे उन्हें अपने काम की विविधता और विषयगत क्षेत्रों को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा, जो बाद में नीति आयोग के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66c6eef2ac655.jpg" alt="" /></p>
<p>रामंजनेयुलु जी.वी ने बताया कि यह पहल जीआईजेड इंडिया, इंडिया क्लाइमेट कोलैबोरेटिव (आईसीसी), और सीएटी के संयुक्त प्रयासों के तहत संचालित की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक खेती के प्रसार और समर्थन के लिए जमीनी स्तर की संस्थाओं का एक व्यापक डेटाबेस तैयार करना है, जिससे नीति आयोग के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। इस पहल से देशभर में प्राकृतिक खेती के प्रसार में एक नया अध्याय जुड़ने की उम्मीद है, जहां विभिन्न हितधारक एक साथ आकर इस बदलाव में सहयोग करेंगे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66c6e4441a843.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्राकृतिक खेती के सफल मॉडलों का राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने की तैयारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एमएसपी गारंटी किसान मोर्चा ने कानून बनाने  के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी को लिखा पत्र]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/msp-guarantee-kisan-morcha-wrote-a-letter-to-pm-modi-and-rahul-gandhi-for-legal-guarantee.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 21 Aug 2024 20:43:36 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/msp-guarantee-kisan-morcha-wrote-a-letter-to-pm-modi-and-rahul-gandhi-for-legal-guarantee.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एमएसपी गारंटी किसान मोर्चा (एमएसपी जीकेएम) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) गारंटी कानून बनाने की मांग की है। मोर्चा ने प्रधानमंत्री से आगामी संसद सत्र में एमएसपी गारंटी से संबंधित बिल पेश करने की मांग की है, जबकि राहुल गांधी से इंडिया गठबंधन वाले राज्यों में इस कानून को लागू कराने के लिए कहा है।</p>
<p>एमएसपी गारंटी किसान मोर्चा की दिल्ली में बुधवार को बैठक हुई, जिसमें देश भर के किसान संगठनों के करीब 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री और राहुल गांधी को लिए पत्र जारी किये गये।</p>
<p>मोर्चा के अध्यक्ष वी एम सिंह द्वारा लिखे गये पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को याद दिलाया गया है कि वर्ष 2011 में जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने एमएसपी गारंटी कानून लाने की सिफारिश की थी। अब जब वह खुद प्रधानमंत्री हैं, तो इस कानून को लागू करना उनका कर्तव्य है।</p>
<p>राहुल गांधी को लिखे पत्र में वीएम सिंह ने अपील की है कि वे सरकार को इस दिशा में कदम उठाने के लिए मजबूर करें और इंडिया गठबंधन की राज्य सरकारों द्वारा भी एमएसपी गारंटी बिल लाने की प्रक्रिया को शुरू करें।</p>
<p>वीएम सिंह ने कहा कि किसानों की स्थिति सुधारने के लिए जल्दी से जल्दी कदम उठाने की जरूरत है। ये वही किसान हैं जिन्होंने कोरोना काल में देश को पर्याप्त भोजन प्रदान किया। इसलिए हमें उनकी स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही, 2018 में कंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित राउंड टेबल में विभिन्न पार्टियों ने इस कानून की आवश्यकता पर सहमति का भी उल्लेख पत्र में किया गया है।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि जब सरकार उद्योगपतियों और चीनी मिल मालिकों के लिए एमएसपी की गारंटी दे सकती है, तो किसानों को समान सुरक्षा क्यों नहीं दी जा सकती।&nbsp; जब सरकार चीनी मिलों का एमएसपी बाजार मूल्य से अधिक तय कर सकती है। पेट्रोलियम कंपनियों को वैश्विक कीमतों में कमी के बाद भी अधिक कीमत दे सकती है तो किसानों को उनकी फसल के वाजिब दाम के लिए कानूनी गारंटी क्यों नहीं दे सकती है।&nbsp;</p>
<p>पत्र में कहा गया है कि किसानों को उनकी उपज के लिए एमएसपी की गारंटी मिलने पर उन्हें प्रति एकड़ 10,000 रुपये से अधिक का अतिरिक्त लाभ होगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और सरकार के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66c603b161666.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एमएसपी गारंटी किसान मोर्चा ने कानून बनाने  के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी को लिखा पत्र ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[6 राज्यों में फसल बीमा कराने की तारीख बढ़ी, केसीसी धारकों के लिए 25 अगस्त तक का मौका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-fasal-bima-yojana-date-extended-in-6-states-kcc-holders-have-time-till-august-25.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 21 Aug 2024 14:44:24 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-fasal-bima-yojana-date-extended-in-6-states-kcc-holders-have-time-till-august-25.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने केसीसी (कृषि क्रेडिट कार्ड) धारक किसानों के लिए फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब किसान अपनी फसल का बीमा 25 अगस्त 2024 तक करा सकते हैं। पहले यह तिथि 16 अगस्त थी, लेकिन बड़ी संख्या में किसानों के रजिस्ट्रेशन पूरा नहीं होने के कारण सरकार ने तिथि बढ़ाने का निर्णय लिया है।&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसकी जानकारी साझा की गई है। सरकार ने किसानों को उनकी खरीफ फसलों का बीमा कराने के लिए अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया है, ताकि वे संभावित फसली जोखिमों से बेहतर तरीके से सुरक्षित रह सकें। आधिकारिक बयान में किसानों से अपील की गई है कि वे 25 अगस्त तक अपनी खरीफ फसलों का बीमा करवा लें और इस अवसर को न चूकें।&nbsp;</p>
<p>इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 6 राज्यों त्रिपुरा, असम, कर्नाटक, झारखंड, तमिलनाडु, और पुडुचेरी के लिए भी रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है। इन राज्यों के किसान अब 31 अगस्त 2024 तक योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं, जबकि पहले अंतिम तिथि 16 अगस्त थी। यह फैसला उन किसानों को राहत देने के लिए किया गया है जो समय पर रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पाए थे।&nbsp;</p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="8157b92d-7543-4768-a3d2-0868ffe2775c" dir="auto" class="min-h-[20px] text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 break-words [.text-message+&amp;]:mt-5 overflow-x-auto whitespace-pre-wrap">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>फसल बीमा कराने के लिए किसान अपनी नजदीकी बैंक शाखा में जा सकते हैं। इसके अलावा, पीएम फसल बीमा योजना की वेबसाइट <a rel="noopener" target="_new" href="https://pmfby.gov.in/">https://pmfby.gov.in/</a> पर जाकर भी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए किसान हेल्पलाइन नंबर 14447 पर संपर्क कर सकते हैं।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="mt-1 flex gap-3 empty:hidden -ml-2">
<div class="items-center justify-start rounded-xl p-1 flex">
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<div class="flex items-center pb-0"><span class="overflow-hidden text-clip whitespace-nowrap text-sm"></span></div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ 6 राज्यों में फसल बीमा कराने की तारीख बढ़ी, केसीसी धारकों के लिए 25 अगस्त तक का मौका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल से दो फीसदी अधिक, दलहन&amp;#45;तिलहन और धान का रकबा बढ़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sowing-of-kharif-crops-is-two-percent-more-than-last-year-area-under-pulses-oilseeds-and-paddy-increased.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 20 Aug 2024 19:38:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sowing-of-kharif-crops-is-two-percent-more-than-last-year-area-under-pulses-oilseeds-and-paddy-increased.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खरीफ फसलों की बुवाई में इस वर्ष पिछले साल की तुलना में 2 फीसदी की वृद्धि हुई है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, 20 अगस्त 2024 तक बुवाई का कुल रकबा 1031.56 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो वर्ष 2023 की इसी अवधि पर 1010.52 लाख हेक्टेयर था। इस साल विशेष रूप से धान, दलहन, मोटे अनाज और तिलहन की बुवाई में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।</p>
<p><strong>धान की बुवाई</strong> वर्ष 2023 के 349.49 लाख हेक्टेयर से बढ़कर वर्ष 2024 में 369.05 लाख हेक्टेयर हो गई है। <strong>दलहन का क्षेत्र</strong> भी बढ़कर 120.18 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि वर्ष 2023 में यह 113.69 लाख हेक्टेयर था। इसमें अरहर की बुवाई 45.78 लाख हेक्टेयर, मूंग की 33.24 लाख हेक्टेयर और उड़द की 28.33 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।&nbsp;</p>
<p><strong>मोटे अनाज की बुवाई</strong> भी बढ़कर 181.11 लाख हेक्टेयर हो गई है, जो वर्ष 2023 में 176.39 लाख हेक्टेयर थी। इसमें मक्का की बुवाई 87.23 लाख हेक्टेयर, ज्वार की 14.62 लाख हेक्टेयर, बाजरा की 66.91 लाख हेक्टेयर और रागी की 7.56 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।&nbsp;</p>
<p>तिलहन के तहत बुवाई 186.77 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जो वर्ष 2023 के 185.13 लाख हेक्टेयर से अधिक है। इसमें मूंगफली की बुवाई 46.36 लाख हेक्टेयर, सोयाबीन की बुवाई 125.11 लाख हेक्टेयर, सुजरमुखी की बुवाई 0.70 लाख हेक्टेयर और तील की बुवाई 10.55 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।&nbsp;</p>
<p><strong>गन्ने की खेती</strong> में मामूली वृद्धि के साथ रकबा 57.68 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि कपास की बुवाई वर्ष 2023 में 122.15 लाख हेक्टेयर से घटकर वर्ष 2024 में 111.07 लाख हेक्टेयर रह गई है। जूट और मेस्टा का रकबा भी घटकर 5.70 लाख हेक्टेयर हो गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल से दो फीसदी अधिक, दलहन-तिलहन और धान का रकबा बढ़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोयाबीन की कीमतें 10 साल पुराने स्तर पर, मंडियों में 3500 रुपये प्रति क्विंटल रह गया दाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/soybean-prices-are-at-10-year-old-level-price-in-mandis-remains-at-rs-3500-per-quintal-in-madhya-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 20 Aug 2024 15:47:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/soybean-prices-are-at-10-year-old-level-price-in-mandis-remains-at-rs-3500-per-quintal-in-madhya-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में सोयाबीन की कीमतें 10 साल पुराने स्तर पर पहुंच गई हैं। प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में बिक रही है। सीजन शुरू होने से पहले ही सोयाबीन की कीमतों में आई गिरावट ने किसानों को चिंता बढ़ दी है।<span>&nbsp;</span>प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी नीचे चल रहा है। आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए केंद्र सरकार ने सोयाबीन के लिए <span>4892&nbsp;</span>रुपये प्रति क्विंटल का एमएसपी निर्धारित किया है। यानी किसानों को प्रति क्विंटल पर सीधा 1000 से 1300 रुपये का नुकसान हो रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>उत्पादन लागत निकालना हो रहा मुश्किल&nbsp;</strong></p>
<p>खरीफ मार्केटिंग सीजन 2024-25 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने के लिए केंद्र सरकार ने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की जिस रिपोर्ट को आधार बनाया था उसके अनुसार, सोयाबीन की उत्पादन लागत 3261 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि किसान इसे 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में बेच रहे हैं। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के आंकड़ों के मुताबिक, 2013-14 में सोयाबीन का औसत भाव <span>3823 रुपये प्रति क्विंटल था, जो लगभग मौजूदा कीमतों के करीब आ गया है।&nbsp; </span></p>
<p>मध्य प्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष <strong>केदार शंकर सिरोही</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि किसानों के लिए सोयाबीन की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन का जो दाम किसानों को मिल रहा है, वो एमएसपी से भी कम है। उन्होंने कहा कि सोयाबीन की कीमतों में 30 फीसदी तक की गिरावट आई है। पिछले साल इसी समय सोयाबीन का दाम 5000 रुपये के आसपास था, लेकिन अब दाम गिरकर 3500 रुपये के आसपास आ गए हैं।</p>
<p>केदार सिरोही ने कहा कि प्रदेश में एमएसपी पर सोयाबीन की खरीद नाममात्र की होती है जबकि मध्य प्रदेश में सोयाबीन का सबसे ज्यादा उत्पादक राज्य है। उन्होंने कहा कि इस साल प्रदेश में सोयाबीन का अच्छा उत्पादन होने का अनुमान है। लेकिन सीजन शुरू होने से पहले ही कीमतों में आई गिरावट किसानों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अगर कीमतें ऐसे ही गिरती रहीं, तो किसानों को मजबूरन &nbsp;सोयाबीन की खेती छोड़नी पड़ेगी।</p>
<p><strong>आयात शुल्क में कटौती से बढ़ी समस्याएं&nbsp; </strong></p>
<p>सिरोही ने कहा कि सोयाबीन की कीमतों में गिरावट का एक प्रमुख कारण आयात शुल्क में की गई कटौती है। पहले सोयाबीन रिफाइंड तेल पर आयात शुल्क 32 फीसदी था, जिससे आयात कम होता था। लेकिन अब इसे घटाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे दूसरे देशों से सस्ते दामों पर आयात बढ़ा है और घरेलू बाजार में सोयाबीन की मांग कम हो गई है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अर्जेंटीना, ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों का दबदबा बढ़ने से भारतीय सोयाबीन की मांग पर भी असर पड़ा है।</p>
<p>वैश्विक स्तर पर अर्जेंटीना, ब्राजील और अमेरिका सोयाबीन के सबसे बड़े उत्पादक देश हैं, जिनकी कुल बाजार हिस्सेदारी लगभग 95 फीसदी है। इसके मुकाबले भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2.5 से 3 फीसदी तक है। भारत मुख्य रूप से यूरोप को सोयाबीन निर्यात करता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रमुख उत्पादक देशों का बढ़ता प्रभाव भारतीय सोयाबीन की मांग पर नकारात्मक असर डाल रहा है। पिछले साल इन देशों में उत्पादन कम होने के कारण सोयाबीन की कीमतें संतोषजनक थीं, लेकिन इस साल अच्छे उत्पादन की संभावना से कीमतों में और गिरावट आने की आशंका है।</p>
<p>किसान सत्याग्रह मंच के संस्थापक सदस्य<strong> शिवम बघेल</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि सोयाबीन के दाम 10 साल पुराने रेट पर आ गए हैं। उन्होंने कहा कि 2013-14 में किसानों को जो दाम मिल रहा था, आज उसी दाम पर किसान सोयाबीन बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में सोयाबीन की कीमतों में लगातार गिरावट आई है। हर साल सीजन से पहले दाम कम हो जाते हैं लेकिन इस साल दाम 3500 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गए हैं, जिससे किसानों के लिए उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि किसानों को हो रहे इस नुकसान से बचाने के लिए जल्द से जल्द कोई ठोस कदम उठाए जाएं।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.ruralvoice.in/states/not-getting-the-right-price-for-soybean-farmer-ran-tractor-over-10-bigha-standing-crop-in-madhya-pradesh.html">सोयाबीन का सही भाव नहीं मिला, किसान ने 10 बीघा में खड़ी फसल पर चला दिया ट्रैक्टर</a></strong></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोयाबीन की कीमतें 10 साल पुराने स्तर पर, मंडियों में 3500 रुपये प्रति क्विंटल रह गया दाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने खाद्य मंत्री से की बासमती का एमएसपी तय करने की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/peasant-welfare-association-demanded-to-fix-msp-for-basmati-wrote-a-letter-to-minister-pralhad-joshi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 20 Aug 2024 13:10:26 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/peasant-welfare-association-demanded-to-fix-msp-for-basmati-wrote-a-letter-to-minister-pralhad-joshi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन की शुरुआत से पहले ही बासमती धान की कीमतों में आई गिरावट से किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। किसानों ने केंद्र सरकार से बासमती धान के लिए अलग से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करने और निर्यात के लिए तय 950 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) को कम करने की मांग की है। इस संदर्भ में पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी को पत्र लिखा है।</p>
<p>एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक बालियान द्वारा केंद्रीय खाद्य मंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है कि बासमती धान की कीमतों में 27-28 फीसदी तक की गिरावट आई है और यह 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गई हैं। पिछले साल इसी समय बासमती की कीमतें 3200-3500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच थीं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने सामान्य धान के लिए 2300 रुपये और ग्रेड-ए धान के लिए 2320 रुपये प्रति क्विंटल का एमएसपी निर्धारित किया है, जबकि बासमती के लिए कोई एमएसपी नहीं है, जिससे किसान बाजार की गिरती कीमतों के सामने मजबूर हो जाते हैं।</p>
<p>बालियान ने कहा कि भारत सरकार ने बासमती के निर्यात पर 950 डॉलर प्रति टन का एमईपी लागू किया हुआ है, जिससे निर्यात प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान में बासमती निर्यात के लिए एमईपी केवल 700 डॉलर प्रति टन है, जिससे उनके बासमती की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक मांग है। उन्होंने कहा कि प्रमुख निर्यात बाजार जैसे सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, इराक और कुवैत में भारतीय बासमती की भारी मांग है, लेकिन उच्च एमईपी के कारण निर्यात में कमी आई है।</p>
<p>बालियान ने कहा कि भारत में बासमती धान जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उगाया जाता है, जबकि पंजाब में इसकी सबसे अधिक खेती होती है। बासमती की उपज सामान्य चावल की तुलना में कम होती है, लेकिन किसानों को इसकी उच्च कीमत मिलने की उम्मीद रहती है।</p>
<p>बालियान ने कहा कि अगर बासमती के लिए भी अगस से एमएसपी घोषित किया जाए और एमईपी में कटौती की जाए, तो इससे किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और चावल उद्योग को भी लाभ होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से बासमती के लिए एमएसपी तय करने और एमईपी को कम करने के लिए त्वरित कदम उठाने की मांग की है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने खाद्य मंत्री से की बासमती का एमएसपी तय करने की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बासमती धान की कीमतों में 28 फीसदी की गिरावट, मंडियों में 2500 रुपये प्रति क्विंटल रह गया दाम ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/basmati-prices-fell-by-28-percent-the-price-in-the-markets-remained-at-rs-2500-per-quintal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 19 Aug 2024 15:32:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/basmati-prices-fell-by-28-percent-the-price-in-the-markets-remained-at-rs-2500-per-quintal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बासमती चावल की कीमतों में सीजन से पहले ही गिरावट शुरू हो गई है। एक साल पहले की तुलना में बासमती धान के दाम 28.5 फीसदी तक कम हो गए हैं। अभी सीजन शुरू भी नहीं हुआ है और कीमतें गिरकर 2500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गई हैं, जबकि पिछले साल इसी समय बासमती धान की कीमतें 3200 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच थीं। अक्टूबर-नवंबर में कीमतें बढ़कर 4000 से 4800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई थीं।</p>
<p>कीमतों में आई इस गिरावट का एक मुख्य कारण भारत सरकार द्वारा बासमती पर लागू किया गया 950 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) है, जिसके कारण बासमती के निर्यात पर असर पड़ा है। इस गिरावट से किसानों की चिंता बढ़ गई है, खासकर तब जब देश में बासमती का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। पिछले साल बासमती चावल का उत्पादन लगभग 25 फीसदी बढ़ा था, और इस साल भी अच्छी बुवाई के कारण उत्पादन में 15 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है। देश में बासमती किसानों की आय का मुख्य स्रोत है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मिर सहित अन्य मुख्य बासमती उत्पादक राज्यों में हर साल लगभग 15 लाख हेक्टेयर में बासमती की खेती की जाती है।</p>
<p>करनाल मंडी के व्यापारी <strong>संदीप</strong> ने <strong>रूरल वॉयल</strong> को बताया कि हाल ही के दिनों में बासमती की कीमतें लगातार कम हुई हैं। एक हफ्ते में ही कीमतों में 100 से 150 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि फिलहाल दाम 2500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रह गया है, जो पिछले साल 3500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास था। किसानों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है। बासमती धान की कीमतें अब सामान्य किस्म के धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के थोड़ा ही ऊपर रह गई हैं। केंद्र सरकार ने आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए सामान्य धान के लिए 2300 रुपये और ग्रेड-ए धान के लिए 2320 रुपये प्रति क्विंटल का एमएसपी निर्धारित किया है। सामान्य धान और बासमती धान की कीमत में बड़ा अंतर रहता है। बासमती चावल उत्पादन का अधिकांश हिस्सा निर्यात होता है और घरेलू बाजार में भी बासमती चावल की कीमतें सामान्य चावल से काफी अधिक रहती हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>बासमती निर्यातक और <strong>ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया</strong> ने <strong>रूरल वॉयल</strong> को बताया कि बासमती का पुराना स्टॉक अभी भी बचा हुआ है और जल्दी में बोई गई बासमती की नई फसल भी मंडियों में आना शुरू हो गई है, जिससे कीमतों में गिरावट आई है। उन्होंने 950 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) को भी कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह बताया। सेतिया ने कहा कि उच्च एमईपी बासमती के निर्यात को प्रभावित कर रहा है और इस समस्या को हल करने के लिए सरकार को इसे कम करने पर ध्यान देना चाहिए। इससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को उचित दाम मिल सकेगा।</p>
<p><strong>हरियाणा राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील जैन</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि एक साल पहले की तुलना में बासमती की कीमतों में 20 से 25 फीसदी की गिरावट आई है। इसका एक मुख्य कारण भारत सरकार द्वारा बासमती पर लागू किया गया 950 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) है, जिसके कारण बासमती का निर्यात प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर, पाकिस्तान में एमईपी केवल 700 डॉलर प्रति टन है, जिसके चलते उनके बासमती की मांग बढ़ी है।&nbsp;</p>
<p>सुशील जैन ने कहा कि अगर भारत को बासमती का निर्यात बढ़ाना है तो एमईपी को घटाकर 700 डॉलर करना होगा या इसे पूरी तरह से हटाना होगा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार यह कदम उठाती है, तभी देश से बासमती का निर्यात हो पाएगा। अन्यथा पाकिस्तान से बासमती का निर्यात बढ़ेगा और भारत के बासमती व्यापार को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि इसका असर किसानों पर भी पड़ेगा और उन्हें उचित दाम नहीं मिलेंगे।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>बासमती चावल की निर्यात नीति और कीमतों में आई गिरावट से भारतीय बासमती व्यापार को झटका लग सकता है। अगर एमईपी में बदलाव नहीं किया गया तो पाकिस्तान से बासमती का निर्यात बढ़ेगा और भारत के किसानों और व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए, सरकार के सामने यह चुनौती है कि वह निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए उचित कदम उठाए और बासमती की कीमतों में स्थिरता लाए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बासमती धान की कीमतों में 28 फीसदी की गिरावट, मंडियों में 2500 रुपये प्रति क्विंटल रह गया दाम  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश के प्रमुख जलाशयों में 11 फीसदी बढ़ा जल स्तर, उत्तरी क्षेत्र में 29 फीसदी की कमी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/water-level-in-major-reservoirs-of-the-country-increased-by-11-percent-but-the-situation-in-the-northern-region-is-still-worrying.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 19 Aug 2024 11:30:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/water-level-in-major-reservoirs-of-the-country-increased-by-11-percent-but-the-situation-in-the-northern-region-is-still-worrying.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एक महीने पहले तक पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की कमी की चिंता अब कुछ हद तक कम होती नजर आ रही है। मानसून सीजन के दूसरे हिस्से में हुई अच्छी बारिश के कारण देश के प्रमुख जलाशयों का जल स्तर बढ़ गया है। <strong>केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी)</strong> के अनुसार, 16 अगस्त तक देश के 150 प्रमुख जलाशयों में जल स्तर 124.016 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) दर्ज किया गया, जो उनकी कुल क्षमता का 69 फीसदी है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 10 फीसदी अधिक है।</p>
<p>पिछले साल इसी अवधि में इन जलाशयों में उपलब्ध संग्रहण 111.85 बीसीएम था जबकि सामान्य तौर पर इन जलाशयों में 108.79 बीसीएम पानी रहता है। इस प्रकार जलाशयों का जल स्तर पिछले साल के मुकाबले 10.8 फीसदी (करीब 11 फीसदी) और सामान्य जल संग्रह के मुकाबले 13.9 फीसदी (करीब 14 फीसदी) तक बढ़ा है। हालांकि, उत्तरी क्षेत्र के जलाशयों में जल स्तर पिछले वर्ष की तुलना में अभी भी 29 फीसदी कम है, जो चिंता का विषय है।</p>
<p><strong>उत्तरी क्षेत्र में सबसे ज्यादा कमी</strong></p>
<p>देश के प्रमुख जलाशयों में जल स्तर की स्थिति में भले ही सुधार हुआ हो, लेकिन उत्तरी क्षेत्र के जलाशयों में जल स्तर अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में 29 फीसदी कम है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के जलाशय सबसे अधिक प्रभावित हैं। इन जलाशयों में केवल 51 फीसदी पानी उपलब्ध है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में जल स्तर 88 फीसदी था, जो इस वर्ष 29 फीसदी की कमी को दर्शाता है।</p>
<p><strong>अन्य क्षेत्रों की स्थिति</strong></p>
<p>पूर्वी क्षेत्र के जलाशयों में कुल क्षमता का केवल 53 फीसदी पानी मौजूद है। इस क्षेत्र में असम, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, नागालैंड और बिहार जैसे राज्य शामिल हैं। सीडब्ल्यूसी की निगरानी में यहां 23 जलाशय आते हैं, जिनकी कुल संग्रहण क्षमता 20.430 बीसीएम है। वर्तमान में इन जलाशयों में 10.814 बीसीएम पानी उपलब्ध है, जो कुल क्षमता का 53 फीसदी है। पिछले वर्ष इसी अवधि में जलाशयों में 14 फीसदी पानी था, और इस वर्ष यह संग्रहण 6 फीसदी बढ़ा है।</p>
<p>पश्चिमी क्षेत्र की स्थिति अन्य क्षेत्रों से काफी बेहतर है। यहां के जलाशयों में कुल संग्रहण क्षमता का 94 फीसदी पानी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 54 प्रतिशत अधिक है। इन क्षेत्रों के जलाशयों का जल स्तर इस साल उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। जिसमें गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्य शामिल हैं।&nbsp;</p>
<p>मध्य क्षेत्र के जलाशयों में अभी 72 फीसदी पानी उपलब्ध है। यह पिछले वर्ष के 69 फीसदी जल स्तर से 15 फीसदी अधिक है, जो इस क्षेत्र में जल संग्रहण की स्थिति में सुधार दर्शाता है। इन क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ शामिल हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश के प्रमुख जलाशयों में 11 फीसदी बढ़ा जल स्तर, उत्तरी क्षेत्र में 29 फीसदी की कमी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश भर में सामान्य से 4 फीसदी अधिक बरसा मानसून, लेकिन पंजाब, हरियाणा और पूर्वोत्तर में तीन से 34 फीसदी तक कम बारिश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-has-rained-4-percent-more-so-far-but-rain-is-still-less-than-normal-in-punjab-haryana-bihar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 17 Aug 2024 20:06:26 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-has-rained-4-percent-more-so-far-but-rain-is-still-less-than-normal-in-punjab-haryana-bihar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में मानसून अब आधे से ज्यादा बीत चुका है, लेकिन कई हिस्सों में अभी भी बारिश की कमी बनी हुई है। जिसका प्रतिकूल असर खेती-किसानी पर पड़ा है। 1 जून से 17 अगस्त तक देश में भले ही सामान्य से 4 फीसदी अधिक बारिश हो चुकी हो, लेकिन पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में मानसून की बारिश अभी भी सामान्य से कम है।&nbsp;</p>
<p><strong>पंजाब-हरियाणा, बिहार में सबसे कम बारिश&nbsp;</strong></p>
<p>उत्तर पश्चिम भारत में 10 दिन पहले मानसून की बारिश 5 फीसदी कम थी, लेकिन अब बारिश ने इस कमी को पूरा कर लिया है। लेकिन देश में सामान्य से अधिक बारिश के बावजूद देश के कई हिस्सों में अभी भी बारिश का स्तर समान्य से तीन फीसदी से 34 फीसदी तक कम बना हुआ है। जिसका असर खरीफ की फसलों के उत्पादन में कमी और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी के रूप में किसानों के उपर पड़ने की आशंका है। पंजाब में 34 फीसदी, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 15 फीसदी, हिमाचल प्रदेश में 21 फीसदी, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सामान्य से 28 फीसदी कम बारिश हुई है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 7 फीसदी, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 13 फीसदी और उत्तराखंड में 3 फीसदी कम बारिश हुई है।</p>
<p>पूर्व और उत्तर पूर्व भारत में भी मानसून की बारिश के लिहाज से स्थिति चिंताजनक है। अरुणाचल प्रदेश में 16 फीसदी, मणिपुर-नागालैंड-त्रिपुरा में 24 फीसदी, पश्चिम बंगाल के गंगा&nbsp;क्षेत्र में 22 फीसदी, झारखंड में 13 फीसदी, बिहार में 25 फीसदी और असम में 5 फीसदी कम बारिश हुई है। इसके विपरीत, मध्य और दक्षिण भारत में इस वर्ष मानसून अच्छा रहा है। मध्य भारत में 17 अगस्त तक सामान्य से 11 फीसदी और दक्षिण भारत में 21 फीसदी अधिक बारिश हुई है।&nbsp;</p>
<p>देश के कई क्षेत्रों में किसान आज भी खेती-बाड़ी के लिए बारिश के पानी पर निर्भर हैं। लेकिन बारिश नहीं होने से उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। देश में इस साल मानसून की शुरुआत अच्छी रही थी, खासकर मध्य और दक्षिण भारत में भारी बारिश हुई थी। लेकिन उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई, &nbsp;जिसका असर अब स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।</p>
<p><strong>अगस्त-सितंबर में अधिक बारिश का अनुमान&nbsp;</strong></p>
<p>आईएमडी ने अगस्त और सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान जताया है। अगस्त के अंत तक अनुकूल ला नीना स्थितियों के विकसित होने की संभावना है, जिससे मानसूनी बारिश बढ़ सकती है। हालांकि, मानसून के दूसरे हिस्से में कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश की संभावना बनी हुई है, विशेषकर पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश भर में सामान्य से 4 फीसदी अधिक बरसा मानसून, लेकिन पंजाब, हरियाणा और पूर्वोत्तर में तीन से 34 फीसदी तक कम बारिश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ये हैं देश की टॉप एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज, आईएआरआई फिर अव्वल,  जीबी पंत 8वें स्थान पर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/top-agricultural-universities-in-nirf-ranking-2024-icar-iari-again-ranked-first-gb-pant-at-8th-position.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 17 Aug 2024 12:31:28 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/top-agricultural-universities-in-nirf-ranking-2024-icar-iari-again-ranked-first-gb-pant-at-8th-position.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 2024 के लिए<a href="https://www.nirfindia.org/Rankings/2024/AgricultureRanking.html"><strong> 'नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क' (एनआईआरएफ)</strong></a> जारी कर दी है, जिसमें देश के प्रमुख कृषि संस्थानों की रैंकिंग की गई है। इस साल एग्रीकल्चर कैटेगरी में <strong>भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई)</strong> ने ऑल इंडिया नंबर-1 रैंक हासिल की है, जिससे उसकी प्रतिष्ठा और भी मजबूत हुई है।&nbsp;</p>
<p>देश के टॉप 10 एग्रीकल्चर संस्थानों में <strong>राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई, करनाल) </strong>को दूसरा स्थान मिला है। <strong>पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना</strong>&nbsp;तीसरे स्थान पर है, जबकि <strong>बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू)</strong> चौथे स्थान पर है। <strong>भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर, बरेली </strong>को पांचवा स्थान प्राप्त हुआ है।&nbsp;</p>
<p>छठे स्थान पर <strong>तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (टीएनएयू),</strong> सातवें स्थान पर <strong>चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार </strong>और आठवें स्थान पर <strong>जी.बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर</strong> ने जगह बनाई है। <strong>केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान और मत्स्य विश्वविद्यालय (<span>सीआईएफई), </span>मुंबई</strong>&nbsp;को नौवां स्थान मिला है, जबकि <strong>शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सुकास्ट), जम्मू</strong> ने दसवीं रैंक प्राप्त की है।&nbsp;</p>
<p>एनआईआरएफ रैंकिंग 2024 में इस साल भी संस्थानों की शिक्षा, अनुसंधान, स्नातक परिणाम, समावेशिता और दृष्टिकोण जैसे विभिन्न मानदंडों के आधार पर मूल्यांकन किया गया है। यह रैंकिंग छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षणिक संस्थानों को चुनने में मदद करती है, जो उनके करियर के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा तय करती है। एनआईआरएफ रैंकिंग को शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मापदंड माना जाता है, जिससे संस्थानों की गुणवत्ता का आकलन किया जा सकता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66c0472c8a217.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ये हैं देश की टॉप एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज, आईएआरआई फिर अव्वल,  जीबी पंत 8वें स्थान पर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा विधानसभा चुनाव एक अक्टूबर को, जम्मू&amp;#45;कश्मीर में 18 सितंबर से तीन चरणों में मतदान, नतीजे चार अक्टूबर को]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/assembly-elections-announced-in-haryana-and-jammu-and-kashmir-results-will-be-declared-on-october-4.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 16 Aug 2024 16:53:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/assembly-elections-announced-in-haryana-and-jammu-and-kashmir-results-will-be-declared-on-october-4.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग 1 अक्टूबर को होगी। वहीं, जम्मू-कश्मीर में पहले चरण की वोटिंग 18 सितंबर, दूसरा चरण की 25 सितंबर और तीसरे चरण की 1 अक्टूबर को होगी। दोनों राज्यों में चुनाव परिणाम 4 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। चुनाव आयोग ने हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों राज्यों में चुनावी कार्यक्रम की घोषणा की। हरियाणा में चुनाव एक ही चरण में होगा, जबकि जम्मू-कश्मीर में तीन चरणों में वोटिंग होगी।&nbsp;</p>
<p>हरियाणा में 90 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होगा। यहां नामांकन 12 सितंबर को शुरू होगा, 13 सितंबर को स्क्रूटनी होगी, और 16 सितंबर तक नाम वापसी की जा सकेगी। 1 अक्टूबर को वोटिंग होगी और 4 अक्टूबर को मतगणना कराई जाएगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66bf3776865ed.jpg" alt="" width="607" height="361" /></p>
<p>जम्मू-कश्मीर में भी 90 विधानसभा सीटों के लिए वोटिंग होगी। पहले चरण में 24 सीटों, दूसरे चरण में 26 सीटों और तीसरे चरण में 40 सीटों पर चुनाव होंगे। नामांकन की प्रक्रिया 27 अगस्त से शुरू होगी और 30 अगस्त तक चलेगी, जिसके बाद 18 सितंबर को पहले चरण का मतदान होगा। दूसरे चरण के लिए नामांकन 5 सितंबर से 6 सितंबर तक होंगे और वोटिंग 25 सितंबर को होगी। तीसरे चरण के लिए नामांकन 12 सितंबर से 17 सितंबर तक होंगे और वोटिंग 1 अक्टूबर को होगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66bf376463827.jpg" alt="" width="605" height="360" /><br />मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और चुनाव निष्पक्ष एवं पारदर्शी होंगे। दोनों राज्यों में चुनाव के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाएंगे। चुनाव आयोग का यह निर्णय महत्वपूर्ण है, खासकर जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में, जहां लंबे समय बाद विधानसभा चुनाव हो रहे हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66bf35e916e85.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा विधानसभा चुनाव एक अक्टूबर को, जम्मू-कश्मीर में 18 सितंबर से तीन चरणों में मतदान, नतीजे चार अक्टूबर को ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66bf35e916e85.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्रधानमंत्री ने कृष‍ि क्षेत्र में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/the-prime-minister-stressed-the-need-for-change-in-the-agriculture-sector.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 15 Aug 2024 12:09:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/the-prime-minister-stressed-the-need-for-change-in-the-agriculture-sector.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>78वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कृषि क्षेत्र में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए व्यापक प्रयास कर रही है। साथ ही उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के कारण मिट्टी के स्वास्थ्य में गिरावट पर भी चिंता व्यक्त की।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार ने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कार्यक्रम शुरू किए हैं। ऐसी कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए बजट आवंटन भी बढ़ाया गया है। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि भारत दुनिया की जैविक खाद्य टोकरी बन सकता है। उन्होंने कहा कि हमारी कृषि प्रणाली को बदलना बहुत महत्वपूर्ण है। यह समय की मांग है। सरकार किसानों को आधुनिक पद्धतियां अपनाने के लिए हरसंभव मदद मुहैया करा रही है। ड्रोन की खरीद के लिए आसान ऋण ऐसे ही एक उपाय है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत के भविष्य के लिए महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। पीएम मोदी ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के भारत के प्रयासों में ग्रीन जॉब्स के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश का ध्यान अब ग्रीन ग्रोथ और ग्रीन जॉब्स पर है, जो पर्यावरण संरक्षण में योगदान करते हुए रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में वैश्विक नेता बनने और पर्यावरण संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।</p>
<p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 78वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय विशेष कार्यक्रम के लिए 1,000 से अधिक किसानों को राष्ट्रीय राजधानी में आमंत्रित किया है। इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस की थीम 2024 में विकसित भारत है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66bda2644320c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्रधानमंत्री ने कृष‍ि क्षेत्र में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66bda2644320c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ सीजन की 89 फीसदी बुवाई पूरी, दलहन&amp;#45;तिलहन और धान की बुवाई में तेजी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/89-percent-sowing-of-kharif-season-completed-sowing-of-pulses-oilseeds-and-paddy-on-the-rise.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 12 Aug 2024 19:09:44 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/89-percent-sowing-of-kharif-season-completed-sowing-of-pulses-oilseeds-and-paddy-on-the-rise.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले दो सप्ताह के दौरान देश भर में हुई अच्छी बारिश से खरीफ की बुवाई पूरी होने की तरफ बढ़ रही है। कृषि मंत्रालय की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार<strong>,</strong> 12 अगस्त तक देश में कुल <strong>979.89</strong> लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल इस अवधि तक 966.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की बुवाई हुई थी। इस तरह चालू खरीफ सीजन में पिछले साल के मुकाबले करीब 13 लाख हेक्टेयर यानी 1.40 फीसदी ज्यादा क्षेत्र में फसलों की बुवाई हुई है। अगर खरीफ फसलों के सामान्य क्षेत्र <strong>1095.84</strong> लाख हेक्टेयर से तुलना करें तो देश में खरीफ सीजन की लगभग 89 फीसदी बुवाई पूरी हो चुकी है।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p>इस सीजन में <strong>धान</strong> की बुवाई 331.78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस अवधि तक 318.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई हुई थी। <strong>दलहन</strong> फसलों की बुवाई 117.43 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है जो पिछले साल इस अवधि तक हुई बुवाई से करीब 6.68 फीसदी अधिक है। दलहन में<strong>&nbsp;</strong>सबसे ज्यादा 15.80 फीसदी की बढ़त <strong>अरहर</strong> की बुवाई में हुई है। इस साल करीब 44.57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में अरहर की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक अरहर की बुवाई का क्षेत्र 38.49 लाख हेक्टेयर था। <strong>मूंग</strong> की बुवाई 9 फीसदी से अधिक बढ़कर 32.78 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। हालांकि<strong>, उड़द</strong> की बुवाई 3.71 फीसदी घटकर 27.76 लाख हेक्टेयर रह गई है।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>मूंगफली और सायोबीन का क्षेत्र बढ़ा </strong></p>
<p>खरीफ सीजन में अब तक 183.69 लाख हेक्टेयर में <strong>तिलहन</strong> फसलों की बुवाई हो चुकी है जो पिछले साल की इसी अवधि से करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर अधिक है। मूंगफली और सोयाबीन की बुवाई न सिर्फ पिछले साल की समान अवधि से अधिक है बल्कि सीजन के सामान्य क्षेत्र को पार कर चुकी है। 45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली और 124 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी है। &nbsp;<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>श्री अन्न व मोटे अनाजों की बुवाई</strong></p>
<p>श्री अन्न व मोटे अनाजों की बुवाई 173.36 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो पिछले साल की समान अवधि में हुई बुवाई से करीब एक फीसदी अधिक है। मक्का का क्षेत्र 7.58 फीसदी बढ़कर 85.17 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है जो मक्का के सामान्य क्षेत्र 76.96 से भी अधिक है। हालांकि, रागी और बाजरा की बुवाई कम हुई है।</p>
<p><strong>गन्ना क्षेत्र बढ़ा</strong><strong>,&nbsp;</strong><strong>कपास में गिरावट</strong></p>
<p>देश में गन्ने का क्षेत्र पिछले साल के मुकाबले करीब एक फीसदी बढ़कर 57.68 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है जो गन्ने के सामान्य क्षेत्र 51.15 लाख हेक्टेयर से करीब 13 फीसदी अधिक है। कपास की बुवाई&nbsp; इस सीजन में 8.87 फीसदी घटकर 110.49 लाख हेक्टेयर रही है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong></strong></p>
<table width="380">
<tbody>
<tr>
<td colspan="5" style="text-align: center; width: 376.4px;">
<p><strong>Area coverage under kharif crops as on 15th July 2024 </strong><strong>(In lakh hactare)</strong></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;"></td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;"></td>
<td colspan="2" style="text-align: center; width: 140.375px;">Area Sown</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;"></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;"><strong>Crop</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;"><strong>Normal Kharif Area</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;"><strong>2024</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;"><strong>2023</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;"><strong>Change (%)</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Paddy</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">401.55</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">331.78</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">318.16</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">4.28</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;"><strong>Pulses</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;"><strong>136.02</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;"><strong>117.43</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;"><strong>110.08</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;"><strong>6.68</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Arhar</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">45.55</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">44.57</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">38.49</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">15.80</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Urdbean</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">36.76</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">27.76</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">28.83</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">-3.71</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Moongbean</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">36.99</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">32.78</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">29.89</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">9.67</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Kulthi*</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">1.9</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">0.18</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">0.22</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">-18.18</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Other pulses</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">14.82</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">3.45</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">3.37</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">2.37</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;"><strong>Shree Anna &amp; Coarse Cereals</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;"><strong>180.86</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;"><strong>173.13</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;"><strong>171.36</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;"><strong>1.03</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Jowar</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">16.01</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">14.23</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">13.29</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">7.07</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Bajra</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">72.63</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">65.69</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">68.81</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">-4.53</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Ragi</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">10.96</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">3.61</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">5.91</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">-38.92</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Small millets</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">4.47</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">4.44</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">4.18</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">6.22</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Maize</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">76.96</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">85.17</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">79.17</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">7.58</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;"><strong>Oilseeds</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;"><strong>190.18</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;"><strong>183.69</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;"><strong>182.17</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;"><strong>0.83</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Groundnut</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">45.28</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">45.42</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">41.91</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">8.38</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Soybean</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">122.95</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">124.69</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">122.89</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">1.46</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Sunflower</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">1.4</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">0.69</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">0.62</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">11.29</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Sesamum**</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">10.26</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">10.14</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">11.14</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">-8.98</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Niger</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">1.22</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">0.26</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">0.21</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">23.81</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Castor</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">9.07</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">2.44</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">5.34</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">-54.31</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Other Oilseeds</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">0</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">0.04</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">0.05</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">-20.00</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Sugarcane</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">51.15</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">57.68</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">57.11</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">1.00</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Jute &amp; Mesta</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">6.74</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">5.7</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">6.28</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">-9.24</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;">Cotton</td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;">129.34</td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;">110.49</td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;">121.24</td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;">-8.87</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center; width: 102.863px;"><strong>Total</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 62.325px;"><strong>1095.84</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 61.35px;"><strong>979.89</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 76.225px;"><strong>966.40</strong></td>
<td style="text-align: center; width: 62.4375px;"><strong>1.40</strong></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><br /><br /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66ba106d5f85b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ सीजन की 89 फीसदी बुवाई पूरी, दलहन-तिलहन और धान की बुवाई में तेजी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66ba106d5f85b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्रधानमंत्री ने फसलों की अधिक उपज देने वाली, जलवायु अनुकूल और बायो फोर्टिफाइड 109 किस्में जारी कीं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-releases-109-high-yielding-resilient-and-biofortified-varieties-of-crops.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 11 Aug 2024 15:10:34 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-releases-109-high-yielding-resilient-and-biofortified-varieties-of-crops.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) में फसलों की 109 उच्च उपज देने वाली, जलवायु अनुकूल और बायो फोर्टिफाइड किस्मों को जारी किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने किसानों और वैज्ञानिकों से बातचीत भी की। इन नई फसल किस्मों के महत्व पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कृषि में मूल्य संवर्धन के महत्व पर बल दिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले बजट भाषण में इन किस्मों को जारी करने की घोषणा की थी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66b886c790d50.jpg" alt="" /></p>
<p>प्रधानमंत्री ने मोटे अनाजों के महत्व पर चर्चा की और इस बात को रेखांकित किया कि कैसे लोग पौष्टिक भोजन की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने प्राकृतिक खेती के लाभों और जैविक खेती के प्रति आम लोगों के बढ़ते विश्वास के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि लोगों ने जैविक खाद्य पदार्थों का सेवन और मांग करना शुरू कर दिया है। किसानों ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की।</p>
<p>किसानों ने जागरूकता पैदा करने में कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) द्वारा निभाई गई भूमिका की भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि केवीके को हर महीने विकसित की जा रही नई किस्मों के लाभों के बारे में किसानों को सक्रिय रूप से सूचित करना चाहिए ताकि उनके लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66b886c9a7e1a.jpg" alt="" /></p>
<p>प्रधानमंत्री ने इन नई फसल किस्मों के विकास के लिए वैज्ञानिकों की भी सराहना की। वैज्ञानिकों ने बताया कि वे प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए सुझाव के अनुरूप काम कर रहे हैं, ताकि अप्रयुक्त फसलों को मुख्यधारा में लाया जा सके।</p>
<p>प्रधानमंत्री द्वारा जारी की गई 61 फसलों की 109 किस्मों में 34 फील्ड और 27 बागवानी फसलें शामिल हैं। फील्ड फसलों में मोटे अनाज, चारा फसलें, तिलहन, दलहन, गन्ना, कपास, रेशा और अन्य संभावित फसलों सहित विभिन्न अनाजों के बीज जारी किए गए। बागवानी फसलों में फलों, सब्जियों, रोपण फसलों, कंद फसलों, मसालों, फूलों और औषधीय फसलों की विभिन्न किस्में जारी की गईं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66b886c8634c1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्रधानमंत्री ने फसलों की अधिक उपज देने वाली, जलवायु अनुकूल और बायो फोर्टिफाइड 109 किस्में जारी कीं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66b886c8634c1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[टमाटर की कीमतों में गिरावट शुरू, किसानों के लिए 400 से 600 रुपये प्रति क्रेट रह गया दाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/tomato-prices-start-falling-price-for-farmers-comes-down-at-rs-400-to-600-per-crate.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 10 Aug 2024 14:44:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/tomato-prices-start-falling-price-for-farmers-comes-down-at-rs-400-to-600-per-crate.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्याज के बाद अब टमाटर की कीमतों में गिरावट शुरू हो गई है। बीते 15 दिनों में टमाटर के दाम थोक बाजार में <strong>40 फीसदी</strong> तक कम हुए हैं। 15 दिन पहले टमाटर का औसत थोक मूल्य 900-1000 रुपये प्रति क्रेट (25 किलो) के आसपास था, जो अब गिरकर <strong>400 से 600 रुपये प्रति क्रेट</strong> पर आ गया है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से टमाटर की नई फसल आने लगी है, जिससे कीमतों में गिरावट आई है। इसका असर खुदरा कीमतों पर भी दिखना शुरू हो गया है। बाजार में टमाटर का दाम घटकर अब 60 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया है जो 15 दिन पहले 100 रुपये किलो तक पहुंच गया था। जैसे-जैसे दक्षिणी राज्यों में टमाटर की आवक बढ़ेगी, कीमतों में और गिरावट आएगी।&nbsp;</p>
<p><strong>भारतीय सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष श्रीराम गाढवे</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से टमाटर की नई आ रही है, जिससे दाम कम हो गए हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे नई फसल की आवक बढ़ेगी, दाम और कम होंगे। उन्होंने कहा कि अगले एक महीने के अंदर टमाटर की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है।&nbsp;</p>
<p>हिमाचल की सोलन सब्जी मंडी में आढ़ती<strong> सतीश</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि पिछले 15 दिनों में टमाटर के दाम काफी कम हो गए हैं। उन्होंने कहा कि 15 दिन पहले 1000 रुपये प्रति क्रेट तक दाम मिल रहा था, लेकिन अब दाम घटकर 400 से 600 प्रति क्रेट पर आ गया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में हो रही बारिश से कई इलाकों में टमाटर की फसल प्रभावित हुई है। साथ ही क्वालिटी पर भी असर पड़ा है। इस वजह से भी दाम कम हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कीमतों में गिरावट की एक वजह यह भी है कि दक्षिण भारत के टमाटर उत्पादक राज्यों से नई फसल आने लगी है।</p>
<p><strong>किसानों के लिए 20-25 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया दाम</strong></p>
<p>बाजार में एक महीने पहले तक टमाटर का दाम 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था, जिससे किसानों को भी अच्छे भाव मिल रहे थे। एक महीने पहले किसानों को 30-35 रुपये प्रति किलोग्राम दाम मिल रहा था, जो अब घटकर 20-22 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया है। टमाटर की उत्पादन लागत ही 20-22 रुपये प्रति किलोग्राम तक आती है। किसानों का कहना है कि कीमतें हर साल बढ़ती हैं लेकिन बिचौलियों के कारण उन्हें कुछ खास मुनाफा नहीं होता। हालांकि, कीमतें बढ़ने से उन्हें थोड़ी राहत जरूर मिलती है लेकिन यह साल के कुछ ही महीनों में होता है। &nbsp; &nbsp;</p>
<p><strong>क्यों बढ़ी थी टमाटर की कीमतें&nbsp;</strong></p>
<p>टमाटर की कीमतें बढ़ने के पीछे अप्रैल-मई में पड़ी भीषण गर्मी और हीट वेव बड़ी वजह रहीं। अप्रैल-मई में पड़ी भीषण गर्मी के चलते फसल प्रभावित हुई थी। इस वजह से मुख्य टमाटर उत्पादक राज्यों से टमाटर की आवक कम हो गई थी और दाम तेजी से बढ़े थे। हालांकि, हिमाचल से टमाटर की आवक जारी थी। इस वजह से यहां के किसानों को अच्छे दाम मिल रहे थे लेकिन अब दक्षिणी राज्यों से टमाटर की नई फसल आना शुरू हो गई है, जिससे कीमतों में गिरावट आई है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66b72ce260b16.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ टमाटर की कीमतों में गिरावट शुरू, किसानों के लिए 400 से 600 रुपये प्रति क्रेट रह गया दाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66b72ce260b16.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर पश्चिम भारत में 5 फीसदी कम बारिश, पंजाब&amp;#45;हरियाणा में अब तक सबसे कम बरसा मानसून]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rainfall-decreased-by-5-percent-in-northwest-india-punjab-haryana-received-the-least-monsoon-rain.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 09 Aug 2024 15:34:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rainfall-decreased-by-5-percent-in-northwest-india-punjab-haryana-received-the-least-monsoon-rain.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मानसून अब आधा बीत चुका है, लेकिन देश के कई हिस्सों में अभी भी कम बारिश हुई है। जिससे सूखे जैसे हालात बने हुए हैं और खेती-किसानी पर प्रतिकूल असर पड़ा है। कम बारिश के कारण खरीफ फसलों की बुवाई में देरी हुई है और सिंचाई भी समय पर नहीं हो पाई। उत्तर पश्चिम भारत और उत्तर पूर्व भारत के किसान कम बारिश होने से खासे परेशान हैं। देश में 1 जून से 8 अगस्त तक भले ही सामान्य से <strong>7 फीसदी अधिक बारिश</strong> हो चुकी हो, लेकिन <strong>उत्तर और पूर्वोत्तर भारत</strong> में मानसून की बारिश अभी भी&nbsp;सामान्य से कम है। पूर्व और उत्तर पूर्व भारत में 8 अगस्त तक <strong>11 फीसदी कम</strong> बारिश हुई है। जबकि उत्तर पश्चिम भारत में मानसून के बादल <strong>5 फीसदी कम</strong> बरसे हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>पंजाब-हरियाणा में सबसे कम बारिश&nbsp;</strong></p>
<p>उत्तर पश्चिम भारत की बात करें तो यहां पंजाब-हरियाणा और हिमाचल में सबसे कम बारिश हुई है। आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में 42, हरियाणा-चंडीगढ़ और दिल्ली में 27, हिमाचल प्रदेश में 28 फीसदी, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 33 फीसदी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 4 फीसदी, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 14 और उत्तराखंड में 1 फीसदी कम बारिश हुई है।</p>
<p>कुछ ऐसा ही हाल पूर्व और उत्तर पूर्व भारत का भी है। यहां, अरुणाचल प्रदेश में 17 फीसदी, मणिपुर-नागालैंड-त्रिपुरा में 24 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 21 फीसदी, झारखंड में 13 फीसदी, बिहार में 25 फीसदी और असम में 2 फीसदीकम बारिश हुई है। मध्य और दक्षिण भारत की बात करें तो इन क्षेत्रों में इस वर्ष मानसून काफी अच्छा रहा है। मध्य भारत में 8 अगस्त तक सामान्य से 19 फीसदी और दक्षिण भारत में सामान्य से 25 फीसदी अधिक बारिश हो चुकी है। &nbsp; &nbsp;</p>
<p>देश के कई क्षेत्रों में आज भी किसान खेती-बाढ़ी के लिए बारिश के पानी पर निर्भर हैं। लेकिन, बारिश नहीं होने से उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। देश में इस साल मानसून की शुरुआत अच्छी रही थी, खासकर मध्य और दक्षिण भारत में भारी बारिश हुई थी। लेकिन उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई, जिसका असर अब स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।</p>
<p><strong>अगस्त-सितंबर में अधिक बारिश का अनुमान&nbsp;</strong></p>
<p>आईएमडी ने <strong>अगस्त और सितंबर</strong> के महीनों में सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान जताया है। अगस्त के अंत तक अनुकूल ला नीना स्थितियों के विकसित होने की संभावना है, जिससे मानसूनी बारिश बढ़ सकती है। हालांकि, मानसून के दूसरे हिस्से में कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश की संभावना बनी हुई है, विशेषकर पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66ab4fcfa9436.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर पश्चिम भारत में 5 फीसदी कम बारिश, पंजाब-हरियाणा में अब तक सबसे कम बरसा मानसून ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66ab4fcfa9436.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[संयुक्त किसान मोर्चा ने विनेश फोगाट को रजत पदक देने की अपील का समर्थन किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/samyukta-kisan-morcha-supports-appeal-to-award-silver-medal-to-vinesh-phogat-in-paris-olympics-2024.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 08 Aug 2024 19:13:06 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/samyukta-kisan-morcha-supports-appeal-to-award-silver-medal-to-vinesh-phogat-in-paris-olympics-2024.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संयुक्त किसान मोर्चा ने भारतीय पहलवान विनेश फोगाट को पेरिस ओलंपिक फाइनल से पहले अयोग्य ठहराए जाने पर गहरी निराशा व्यक्त की है। विनेश इतिहास रचते हुए 50 किलोग्राम भार वर्ग में कुश्ती स्पर्धा के फाइनल में पहुंची थी, लेकिन फाइनल से पहले उन्हें वजन ज्यादा होने के कारण अयोग्य घोषित किया गया। एसकेएम ने विनेश फोगाट को रजत पदक देने की अपील का समर्थन किया है।</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा ने इस पूरे प्रकरण के लिए भारतीय ओलंपिक संघ और भारत सरकार के रवैये की भी निंदा की है। एसकेएम की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विनेश फोगाट के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से पता चलता है कि भारतीय कुश्ती महासंघ और भारतीय ओलंपिक संघ के कई अधिकारी उन्हें ओलंपिक में जाने से रोकने की कोशिश कर रहे थे। देश की जनता भी इस बात से भली-भांति परिचित है कि केंद्र सरकार के चहेते तत्कालीन भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आवाज उठाने वाली विनेश फोगाट पहले से ही मोदी सरकार की आंखों की किरकिरी बनी हुई थीं।</p>
<p>देश का नाम रोशन करने वाली विनेश फोगाट के कुश्ती से संन्यास लेने के फैसले पर गहरा दुख जताते हुए एसकेएम ने उन्हें देश की महान खिलाड़ी बताया। एसकेएम का कहना है कि संगठन पूरी तरह से विनेश के साथ उनकी मुश्किल घड़ी में खड़ा है। भले ही ओलंपिक संघ ने विनेश को अयोग्य घोषित कर दिया हो, लेकिन भारत की जनता के दिलों में ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता के तौर पर उनकी जगह कोई नहीं ले सकता।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ संयुक्त किसान मोर्चा ने विनेश फोगाट को रजत पदक देने की अपील का समर्थन किया ]]></media:description>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, रिजर्व बैंक ने 6.5 प्रतिशत पर रखा बरकरार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/no-change-in-repo-rate-rbi-kept-it-at-6.5-percent-gdp-growth-projection-at-7.2-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 08 Aug 2024 13:25:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/no-change-in-repo-rate-rbi-kept-it-at-6.5-percent-gdp-growth-projection-at-7.2-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने अपनी <strong>मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी)</strong> की बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है। यह दर फरवरी 2023 में <strong>6.5 प्रतिशत</strong> पर बढ़ाई गई थी और तब से इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। एमपीसी की बैठक 6 से 8 अगस्त 2024 तक आयोजित की गई, और इसके बाज आज आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने निर्णयों की घोषणा की।</p>
<p>आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए <strong>जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 7.2 प्रतिशत</strong> और <strong>महंगाई दर का अनुमान 4.5 प्रतिशत</strong> पर बरकरार रखा है। महंगाई दर के लिए आरबीआई का लक्षित स्तर चार प्रतिशत (प्लस या माइनस दो प्रतिशत) है। दास ने कहा कि ईंधन की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है, लेकिन खाद्य महंगाई अभी भी उच्च स्तर पर बनी हुई है। उन्होंने बताया कि महंगाई दर को नियंत्रित रखने के लिए मौद्रिक नीति को अवस्फीतिकारी बनाए रखना आवश्यक है।</p>
<p>दास ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि खाद्य महंगाई अस्थायी होती, तो एमपीसी उच्च महंगाई दर पर विचार कर सकती थी। हालांकि, लगातार उच्च खाद्य महंगाई की स्थिति में ऐसा करना जोखिम भरा हो सकता है। इसीलिए, एमपीसी ने रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर ही रखने का निर्णय लिया।</p>
<p><strong>जीडीपी ग्रोथ का अनुमान</strong></p>
<p>आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए विकास दर के अनुमान को 7.2 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। जीडीपी ग्रोथ के लिए अनुमान है कि पहली तिमाही में 7.1 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 7.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 7.3 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 7.2 प्रतिशत रहेगी। इस दौरान खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) के 4.5 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है। पहली तिमाही में महंगाई 4.4 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 4.7 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 4.3 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या होता है रेपो रेट</strong></p>
<p>रेपो रेट वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) सरकारी और निजी बैंकों को लोन देता है। यह दर बैंकों द्वारा लोन की लागत को प्रभावित करती है, और महंगाई पर नियंत्रण रखने के लिए इसका बढ़ना या घटना एक महत्वपूर्ण आर्थिक नीति है। जब महंगाई दर उच्च होती है, तो आरबीआई रेपो रेट को बढ़ाकर अर्थव्यवस्था में मनी फ्लो को कम करने का प्रयास करता है। उच्च रेपो रेट का मतलब है कि बैंकों को आरबीआई से मिलने वाला कर्ज महंगा हो जाता है, जिससे बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन की दरें भी बढ़ा देते हैं। इस स्थिति में, मनी फ्लो कम हो जाता है, जिससे अर्थव्यवस्था में डिमांड घटती है और महंगाई की दर में कमी आती है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, रिजर्व बैंक ने 6.5 प्रतिशत पर रखा बरकरार ]]></media:description>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश में प्याज का उत्पादन 20 फीसदी घटा, वित्त वर्ष 2023&amp;#45;24 में उत्पादन 242 लाख टन रहा   ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/onion-production-declined-by-20-per-cent-to-242-lakh-tones-in-the-financial-year-2023-24.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 07 Aug 2024 21:11:17 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/onion-production-declined-by-20-per-cent-to-242-lakh-tones-in-the-financial-year-2023-24.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में प्याज के उत्पादन में गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2023-24 में प्याज का उत्पादन <strong>19.84 फीसदी</strong> (करीब 20 फीसदी) घट गया। देश में वित्त वर्ष 2022-23 में 302.08 लाख टन प्याज का उत्पादन हुआ था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में घटकर 242.12 लाख टन रहा। वहीं, वित्त वर्ष 2021-22 में उत्पादन 316.87 लाख टन था। इस हिसाब से देश में पिछले दो सालों में प्याज का उत्पादन <strong>23.59 फीसदी</strong> कम हुआ है। <strong>केंद्रीय कृषि मंत्रालय</strong> की ओर से जारी किए गए आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 में देश के मुख्य प्याज उत्पादक राज्यों में उत्पादन घटा है। जिस वजह से देश के प्याज उत्पादन में गिरावट आई है। &nbsp;</p>
<p>आंकड़ों के अनुसार, देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्य <strong>महाराष्ट्र</strong> में प्याज का उत्पादन 28 फीसदी कम हुआ है। महाराष्ट्र में वित्त वर्ष 2023-24 में 86.02 लाख प्याज का उत्पादन हुआ, जो 2022-23 में 120.33 लाख टन था। इसी तरह <strong>मध्य मध्य प्रदेश और कर्नाटक</strong> में भी प्याज का उत्पादन कम हुआ है। कर्नाटक में पिछले साल के मुकाबले उत्पादन 38 फीसदी घटा है। कर्नाटक में वित्त वर्ष 2023-24 में 16.38 लाख तन प्याज का उत्पादन हुआ, जो 2022-23 में 26.65 लाख टन था। वहीं मध्य प्रदेश में प्याज का उत्पादन 20 फीसदी कम हुआ है। मध्य प्रदेश में वित्त वर्ष 2023-24 में प्याज का उत्पादन 41.66 लाख टन रहा, जो वित्त वर्ष 2022-23 में 52.62 लाख टन था। <strong>आंध्र प्रदेश</strong> में भी प्याज का उत्पादन 46 फीसदी कम हुआ है। वित्त वर्ष 2023-24 में आंध्र प्रदेश में प्याज का उत्पादन 5.13 लाख टन रहा, जो वित्त वर्ष 2022-23 में 9.56 लाख टन था।&nbsp;</p>
<p>इसके अलावा, <strong>बिहार</strong> में वित्त वर्ष 2023-24 में प्याज का उत्पादन 13.88 टन रहा, जो पिछले साल 13.44 लाख टना था। <strong>गुजरात</strong> में वित्त वर्ष 2023-24 में प्याज का उत्पादन 20.57 लाख टन रहा, जो पिछले साल 20.47 लाख टन था। <strong>राजस्थान</strong> में वित्त वर्ष 2023-24 में 16.31 लाख टन प्याज का उत्पादन हुआ, जो पिछले साल 16.15 लाख टन था। <strong>पश्चिम बंगाल</strong> में वित्त वर्ष 2023-24 में प्याज का उत्पादन 8.85 लाख टन रहा, जो पिछले साल 8.92 लाख टन था। <strong>उत्तर प्रदेश</strong> में वित्त वर्ष 2023-24 में 5.77 लाख टन प्याज का उत्पादन हुआ, जो पिछले साल 5.11 साथ टन था।&nbsp;</p>
<p><strong>प्याज का निर्यात 36 फीसदी घटा&nbsp;</strong></p>
<p>देश में प्याज का निर्यात भी घटा है। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 में 25.27 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में <strong>36.4 फीसदी</strong> घटकर 16.07 लाख टन रहा। वित्त वर्ष 2023-24 में बांग्लादेश को सबसे ज्यादा 7.24 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ। इसके अलावा, श्रीलंका को 1.7 लाख टन, मलेशिया को 1.67 लाख टन और यूएई को 1.55 लाख टन प्याज का निर्यात किया गया। &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>31 जुलाई तक 2.60 लाख टन प्याज का निर्यात &nbsp;</strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया है कि 4 मई, 2024 से प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध हटाए जाने के बाद से चालू वित्त वर्ष 2024-25 में 31 जुलाई, 2024 तक कुल <strong>2.60 लाख टन</strong> प्याज का निर्यात किया जा चुका है। बयान में कहा गया है कि सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण बफर के लिए एनसीसीएफ और नेफेड के माध्यम से मुख्य रूप से महाराष्ट्र से 4.68 लाख टन प्याज की खरीद की है। पिछले साल (2023) की तुलना में चालू वर्ष में प्याज किसानों को काफी अधिक कीमत मिली है। अप्रैल और जुलाई, 2024 के बीच महाराष्ट्र में प्याज की औसत मासिक मंडी मॉडल कीमतें 1,230 रुपये से 2,578 रुपये प्रति क्विंटल के बीच थीं, जबकि पिछले साल (2023) इसी अवधि के लिए यह 693 रुपये से 1,205 रुपये प्रति क्विंटल थी। चालू वर्ष में बफर स्टॉक के लिए प्याज का औसत खरीद मूल्य 2,833 रुपये प्रति क्विंटल था, जो पिछले वर्ष के 1,724 रुपये प्रति क्विंटल के खरीद मूल्य से 64 फीसदी अधिक है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश में प्याज का उत्पादन 20 फीसदी घटा, वित्त वर्ष 2023-24 में उत्पादन 242 लाख टन रहा    ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जयंत चौधरी ने चीनी निर्यात के लिए खाद्य मंत्री को लिखा पत्र]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/jayant-chaudhary-wrote-a-letter-to-the-food-minister-for-sugar-export.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 07 Aug 2024 17:47:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/jayant-chaudhary-wrote-a-letter-to-the-food-minister-for-sugar-export.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में चीनी उत्पादन के अच्छे अनुमानों के बीच, केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री <strong>जयंत&nbsp;चौधरी</strong> ने केंद्र सरकार से चीनी का निर्यात किए जाने का आग्रह किया है। उन्होंने संभावना जताई है कि चीनी का अच्छा उत्पादन घरेलू कीमतों में गिरावट का कारण बन सकता है, जिससे चीनी बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस संबंध में उन्होंने उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री <strong>प्रहलाद जोशी</strong> को पत्र लिखकर 20 लाख टन चीनी के निर्यात को अनुमति देने का आग्रह किया है।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को लिखे पत्र में जयंत चौधरी ने लिखा कि इंडियन शुगर एंड बायो इनर्जी मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन <strong>&nbsp;(इस्मा)</strong> के हालिया प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक, आगामी सीजन 2024-25 में देश में लगभग 333 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। 01.10.2024 तक 90 लाख टन के शुरुआती स्टॉक को ध्यान में रखते हुए, चीनी की कुल उपलब्धता लगभग 423 लाख टन होगी। घरेलू जरूरतों के लिए लगभग 290 लाख टन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, लगभग 133 लाख टन चीनी अधिशेष में होगी, जो कि 55 लाख टन के मानक चीनी स्टॉक से काफी अधिक है।</p>
<p>चौधरी ने लिखा कि चीनी की अधिक उपलब्धता से घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में गिरावट आ सकती है, जिससे चीनी बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा, अधिशेष इन्वेंट्री भी चीनी मिलों पर उनकी वहन लागत के कारण अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। इसे देखते हुए, चीनी के निर्यात की अनुमति देना सही समय है, क्योंकि यह चीनी उद्योग के लिए वित्तीय बफर प्रदान करेगा और परिचालन लागत के साथ-साथ किसानों के मौजूदा बकाया गन्ना भुगतान के भुगतान में भी मदद करेगा।</p>
<p>चौधरी ने लिखा कि&nbsp;चीनी के निर्यात से देश को बहुमूल्य विदेशी मुद्रा अर्जित करने और घरेलू बाजार को स्थिर करने में भी मदद मिलेगी। इसलिए, वर्तमान सत्र में कम से कम 20 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने पर विचार करने की आवश्यकता है। चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मात्रा में चीनी के निर्यात से घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66b364f517d13.jpg" alt="" width="648" height="931" /></p>
<p><strong><br />चीनी के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने का आग्रह</strong></p>
<p></p>
<p>इस्मा ने भी घरेलू खपत और एथनॉल निर्माण के लिए चीनी की पर्याप्त उपलब्धता का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से चीनी निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने का आग्रह किया है। इस्मा के महानिदेशक <strong>दीपक बल्लानी</strong> ने कहा कि मौजूदा मानसून सीजन में देश में भरपूर बारिश हो रही है, जिससे 2025-26 के मार्केटिंग सीजन में चीनी का उत्पादन बढ़ेगा। इस अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग एथनॉल निर्माण में भी किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार शीघ्र चीनी निर्यात की अनुमति देती है, तो इससे उद्योग को भंडारण और रखरखाव के खर्च को कम करने में सहायता मिलेगी और ब्याज का बोझ भी घटेगा।</p>
<p><strong>निर्यात में समस्याओं का सामना कर रहा उद्योग</strong></p>
<p>बल्लानी ने यह भी कहा कि 2023-24 के मौजूदा सीजन में सरकार ने अभी तक चीनी निर्यात की स्वीकृति नहीं दी है, जिससे उद्योग को निर्यात में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस्मा का मानना है कि अगले सीजन में घरेलू मांग और खपत को पूरा करते हुए चीनी का निर्यात भी संभव होगा, जिससे पूरे उद्योग को लाभ होगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जयंत चौधरी ने चीनी निर्यात के लिए खाद्य मंत्री को लिखा पत्र ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एक महीने में प्याज का थोक दाम 21 फीसदी गिरा, खुदरा कीमतें अभी भी ऊपर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/onion-prices-fell-21-percent-in-a-month-in-maharashtra-retail-prices-still-high.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 07 Aug 2024 14:08:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/onion-prices-fell-21-percent-in-a-month-in-maharashtra-retail-prices-still-high.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र में पिछले एक महीने में प्याज के दामों में <strong>21 फीसदी की गिरावट</strong> आई है। जुलाई में प्याज का औसत थोक मूल्य 3000 से 3200 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अगस्त में गिरकर 2300 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है। इस गिरावट का मुख्य कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय प्याज की मांग में कमी और 40 प्रतिशत एक्सपोर्ट ड्यूटी है। हालांकि थोक कीमतों में गिरावट के बावजूद खुदरा बाजार में प्याज का दाम 50 रुपये प्रति किलो के आसपास बना हुआ है। एक महीने में प्याज की खुदरा कीमतों में <strong>10 फीसदी की बढ़ोतरी</strong> हुई है। लेकिन इस बढ़ोतरी का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र के किसान संगठन<strong> शेतकरी संघठना</strong> के नेता और एमएसपी पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के सदस्य <strong>अनिल घनवट</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> बताया कि महाराष्ट्र में प्याज की कीमतों में पिछले एक महीने में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि नासिक प्याज मंडी जुलाई में प्याज का औसत दाम 3500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था, जो अब गिरकर 2300 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। उन्होंने कहा कि इस साल प्याज किसानों को अच्छा दाम मिलने की उम्मीद थी। केंद्र सरकार द्वारा एक्सपोर्ट पर बैन हटाए जाने के बाद कीमतों में सुधार तो हुआ था, लेकिन अब फिर कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है। जबकि बाजार में प्याजा के दाम लागातर ऊपर बने हुए हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>अंतर्राष्ट्रीय बाजार में घटी डिमांड&nbsp;</strong></p>
<p>घनवट ने बताया कि सरकार ने भले ही प्याज न&zwj;िर्यात पर लगी रोक हटा दी है, लेकिन प्याज पर <strong>40 प्रतिशत एक्सपोर्ट ड्यूटी</strong> और <strong>500 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य</strong>&nbsp;अभी भी लागू है जो उन्हें परेशान कर रहा है। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही न&zwj;िर्यातबंदी के कारण काफी नुकसान उठा चुके हैं। वहीं एक्सपोर्ट ड्यूटी और न्यूनतम निर्यात मूल्य के कारण भी प्याज एक्सपोर्ट पर असर पड़ा है। जिस वजह से उन्हें बेहतर कीमत नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पाकिस्तान ने से प्याज की आवक शुरू हो गई है। जिस वजह से भारतीय प्याज की डिमांड पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि सप्लाई तो भरपूर है, लेकिन डिमांड घटी है। पाकिस्तान का प्याज सस्ता है, जिस वजह से उसकी ज्यादा डिमांड है। जबकि एक्सपोर्ट ड्यूटी के चलते भारत का प्याज महंगा बिक रहा है।</p>
<p><strong>किसानों को नहीं मिल रहा उचित लाभ&nbsp;</strong></p>
<p><strong>महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ </strong>के अध्यक्ष <strong>भारत दिघोले</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि प्याज के भाव कम होने से किसानों को उचित लाभ नहीं मिल रहा है। महीने भर पहले किसानों को प्रति किलो प्याज का औसतन 30 से 35 रुपये दाम मिल रहा था, जो अब घटकर 23 से 25 रुपये प्रति किलो पर आ गया है। जबकि प्रति किलो प्याज उत्पादन की लागत ही 20 रुपये के आसपास है। इस हिसाब से किसान प्रति किलो पर मात्र 3 से 4 रुपये ही कमा रहे हैं।</p>
<p>दिघोले ने बताया कि बाजार में प्याज की कीमतें अभी भी ऊपर हैं, लेकिन किसानों को इसका आधा दाम ही मिल रहा है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के <strong>प्राइस मॉनिटरिंग डिवीजन</strong> के अनुसार, देशभर में प्याज की औसत खुदरा कीमत 43.14 रुपये प्रति किलो है। जबकि एक महीने पहले प्याज का औसत खुदरा दाम 41.92 रुपये प्रति किलो था। वहीं बाजार में प्याज 50 रुपये के आसपास बिक रहा है।</p>
<p>कुल मिलाकर, प्याज की थोक कीमतों में गिरावट के बावजूद खुदरा बाजार में इसका असर नहीं दिख रहा है। वहीं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डिमांड घटने और एक्सपोर्ट ड्यूटी के चलते भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66b32c9d5440e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एक महीने में प्याज का थोक दाम 21 फीसदी गिरा, खुदरा कीमतें अभी भी ऊपर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66b32c9d5440e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[क्लेम देने में देरी हुई तो बीमा कंपनी 12 फीसदी पेनल्टी देगी: शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/insurance-company-will-pay-12-percent-penalty-to-the-farmer-if-there-is-delay-in-giving-claim-said-union-agriculture-minister.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 06 Aug 2024 19:28:17 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/insurance-company-will-pay-12-percent-penalty-to-the-farmer-if-there-is-delay-in-giving-claim-said-union-agriculture-minister.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अगर बीमा कंपनियां किसानों को क्लेम भुगतान में देरी करती हैं, तो उन पर <strong>12 फीसदी पेनल्टी</strong> लगेगी, जो सीधे किसान के खाते में जाएगी। यह बात मंगलवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सभा में कही। वह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित सवालों का जवाब दे रहे थे।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कई बार क्लेम भुगतान में देरी होती है, जिसका मुख्य कारण राज्यों द्वारा प्रीमियम सब्सिडी देरी से जारी करना होता है। उन्होंने राज्य सरकारों से कहा कि वे अपने हिस्से की राशि समय पर जारी करें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों के शेयर से खुद को डी-लिंक कर दिया है, जिससे केंद्र अपनी राशि तत्काल जारी कर सके। इससे किसानों को भुगतान में देरी नहीं होगी और उन्हें केंद्र की राशि समय पर मिलेगी। उन्होंने कहा कि अब नुकसान का आकलन नजरी के बजाय रिमोट सेंसिंग के माध्यम से कम से कम 30 प्रतिशत करना अनिवार्य कर दिया गया है।</p>
<p><strong>पीएम फसल बीमा योजना में किया गया सुधार</strong></p>
<p>चौहान ने कहा कि पूर्ववर्ती फसल बीमा योजनाओं में प्रीमियम की अधिकता और दावों के निपटान में विलंब जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। लेकिन नई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कई सुधार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले केवल 3.51 करोड़ आवेदन आते थे, लेकिन अब 8.69 करोड़ आवेदन आए हैं। जब कांग्रेस की सरकार थी, तब अऋणी किसानों के केवल 20 लाख आवेदन आते थे, अब 5.48 करोड़ आए हैं। कांग्रेस सरकार में कुल किसान आवेदन 3.71 करोड़ थे, जो अब 14.17 करोड़ हैं। उन्होंने कहा कि किसानों ने 32,440 करोड़ रुपये प्रीमियम दिया, जबकि उन्हें 1.64 लाख करोड़ रु. क्लेम दिया गया।&nbsp;</p>
<p><strong>योजना में 3.97 करोड़ किसान हुए कवर</strong></p>
<p>कृषि मंत्री ने कहा कि पुरानी फसल बीमा योजना में बीमा आवश्यक रूप से किया जाता था और बीमे की प्रीमियम की राशि बैंक अपने-आप काट लेते थे। मौजूदा सरकार ने इस विसंगति को दूर किया है। अब किसान की मर्जी है तो वह बीमा कराएं और मर्जी नहीं है तो ना कराएं। उन्होंने कहा कि पहले अऋणी किसान बीमा नहीं करवाता था, लेकिन अब वो भी चाहे तो बीमा करवा सकता है। 2023 में . बीमा कवर बढ़कर 5.98 लाख हेक्टेयर हो गया है। वहीं 3.97 करोड़ किसान कवर हुए हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>पीएम फसल बीमा योजना के तीन मॉडल</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तीन अलग-अलग मॉडल हैं। उस मॉडल में केंद्र सरकार केवल पॉलिसी बनाती है। राज्य सरकार जिस मॉडल को चुनना चाहे, उस मॉडल को चुनती है। ये फसल बीमा योजना हर राज्य के लिए आवश्यक नहीं है, जो राज्य इस योजना को अपनाना चाहे अपनाएं और जो राज्य नहीं अपनाना चाहे, नहीं अपनाएं। उन्होंने कहा कि बिहार में अभी तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू नहीं किया गया है। बिहार की अपनी एक योजना है, वह उस योजना के हिसाब से अपने किसान को लाभान्वित करते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66b21817712ec.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ क्लेम देने में देरी हुई तो बीमा कंपनी 12 फीसदी पेनल्टी देगी: शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[टमाटर की बढ़ती कीमतों का असर, जुलाई में शाकाहारी थाली 11 फीसदी मंहगी हुई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/due-to-rising-tomato-prices-veg-thali-became-11-percent-more-expensive-cost-of-non-veg-thali-increased-by-6-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 06 Aug 2024 13:59:36 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/due-to-rising-tomato-prices-veg-thali-became-11-percent-more-expensive-cost-of-non-veg-thali-increased-by-6-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>टमाटर की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है, जिसका सीधा असर आम जनता की थाली पर दिखने लगा है। जुलाई 2024 में वेज थाली (शाकाहारी) की लागत 11 फीसदी बढ़कर 32.26 रुपये प्रति थाली हो गई है, जबकि नॉन-वेज थाली की लागत में 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।&nbsp;</p>
<p>क्रिसिल की 'राइस रोटी रेट' रिपोर्ट के अनुसार, जून 2024 में वेज थाली की लागत 29.4 रुपये थी, जो अब बढ़कर 32.26 रुपये हो गई है। पिछले साल इसी समय वेज थाली की लागत 34.1 रुपये थी, जिससे सालाना आधार पर 4 फीसदी की कमी आई है।</p>
<p><strong>टमाटर की बढ़ती कीमतों का असर</strong></p>
<p>वेज थाली की बढ़ती लागत के पीछे टमाटर की कीमतों में हुई जबरदस्त वृद्ध मुख्य कारण ह। जुलाई 2024 में टमाटर के दाम 55 फीसदी बढ़कर 66 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए, जबकि जून 2024 में ये 42 रुपये प्रति किलोग्राम थे। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख टमाटर उत्पादक राज्यों में बेमौसम बारिश और वायरस इंफेक्शन के कारण टमाटर की आवक प्रभावित हुई है।</p>
<p><strong>प्याज और आलू के दाम भी बढ़े</strong></p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, प्याज और आलू की कीमतों में भी जुलाई में क्रमशः 20 फीसदी और 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। प्याज की कीमत पर रबी की कम पैदावार का असर पड़ा है, जबकि पंजाब, गुजरात और उत्तर प्रदेश में लेट ब्लाइट के कारण आलू की पैदावार प्रभावित हुई है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p><strong>नॉन-वेज थाली की लगात 6 फीसदी बढ़ी</strong></p>
<p>नॉन-वेज थाली की लगात भी जुलाई में 6 फीसदी बढ़ी है। जून 2024 में लागत 58 रुपये से बढ़कर जुलाई 2024 में 61.4 रुपये हो गई। हालांकि, साल के आधार पर नॉन-वेज थाली की लागत में 9 फीसदी की कमी आई है, क्योंकि ब्रॉयलर की कीमतें स्थिर रही हैं। जबकि सब्जियों (टमाटर-प्याज) की महंगाई ने भी नॉन-वेज थाली की पर भी असर डाला है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ टमाटर की बढ़ती कीमतों का असर, जुलाई में शाकाहारी थाली 11 फीसदी मंहगी हुई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्रीय कृषि मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएगी कांग्रेस, सदन को गुमराह करने का लगाया आरोप]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/congress-will-bring-a-privilege-violation-motion-against-the-union-agriculture-minister-shivraj-singh-chouhan-accusing-him-of-misleading-the-house.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 06 Aug 2024 12:52:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/congress-will-bring-a-privilege-violation-motion-against-the-union-agriculture-minister-shivraj-singh-chouhan-accusing-him-of-misleading-the-house.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कांग्रेस पार्टी ने मौजूदा संसद सत्र में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव (ब्रीच ऑफ प्रिविलेज) लाने की घोषणा की है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चौहान ने विभिन्न मुद्दों पर सदन को गुमराह किया है।</p>
<p>सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला और दिग्विजय सिंह ने केंद्रीय कृषि मंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा दावा करते हैं कि किसानों को इनपुट लागत पर पचास प्रतिशत मुनाफा (एमएसपी) दिया जाएगा, लेकिन 6 फरवरी 2015 को सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में भाजपा सरकार ने कहा था कि यह संभव नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह संभव नहीं है, तो सरकार कैसे यह दावा कर रही है।</p>
<p>सुरजेवाला ने केंद्रीय कृषि मंत्री के उस दावे का भी खंडन किया जिसमें उन्होंने कहा था कि किसानों को एमएसपी की जरूरत नहीं है क्योंकि वे फसलों पर एमएसपी से अधिक मूल्य प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार कहती कुछ है, और करती कुछ और है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने गलत बयानी की है, इस देश के किसान को गुमराह किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रोसिडिंग देखकर केंद्रीय कृषि मंत्री के खिलाफ ब्रीच ऑफ प्रिविलेज लेकर आएगी।&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">देश के कृषि मंत्री ने संसद के पटल पर गलत बयानबाजी की है। <br />उन्होंने देश की किसानों के साथ गुमराह तथा धोखा किया है।<br /><a href="https://t.co/HAvNcWRr7Z">https://t.co/HAvNcWRr7Z</a></p>
&mdash; Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) <a href="https://twitter.com/rssurjewala/status/1820392403330863266?ref_src=twsrc%5Etfw">August 5, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने चौहान पर आदतन झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने चौहान के इस दावे को खारिज किया कि 2003 में जब दिग्विजय सिंह ने पद छोड़ा, तब मध्य प्रदेश में केवल 7 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित थी। वास्तव में, 1997-98 में राज्य में 33 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित थी। सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार ने किसानों को कर्जमाफी प्रदान की थी, और कमल नाथ के मुख्यमंत्रित्व काल में 37 लाख किसानों का कर्ज माफ किया गया था।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66b1d04999f2f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्रीय कृषि मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएगी कांग्रेस, सदन को गुमराह करने का लगाया आरोप ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आलू का भाव 55 फीसदी तक गिरा, किसानों को 1800 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा दाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/potato-prices-fell-by-55-percent-farmers-are-getting-1800-to-2000-rupees-per-quintal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 05 Aug 2024 13:00:42 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/potato-prices-fell-by-55-percent-farmers-are-getting-1800-to-2000-rupees-per-quintal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में पिछले 20 दिनों में आलू के दाम 55 फीसदी तक गिरे हैं। आलू का औसत थोक मूल्य 2600-2800 रुपये प्रति क्विंटल से गिरकर 1800-2000 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है। कर्नाटक से आ रही आलू की नई फसल के चलते कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। आलू की थोक कीमतों में भले ही गिरावट आई है, लेकिन खुदरा कीमतों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है। बाजार में आलू अभी भी 40 से 45 रुपये प्रति किलो के भाव में ही बिक रहा है। आलू की खुदरा कीमतों में पिछले दो महीनों से तेजी बनी हुई है। मई के बाद से आलू का भाव 25 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 45 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है लेकिन आलू की बढ़ी किसानों का फायदा किसानों को नहीं मिल रहा है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के आलू किसान और कोल्ड स्टोरेज कारोबारी <strong>डूंगर सिंह खंडौली</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> बताया कि पिछले 20 दिनों में आलू की कीमतों में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि थोक बाजार में आलू का भाव 1800 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है, जबकि बाजार में आलू का दाम 40 रुपये प्रति किलो के आसापास बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले महीने जरूर दाम ऊपर थे, लेकिन अब यह कम हो गए हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>बिचौलिए उठा रहे बढ़ी कीमतों का फायदा&nbsp;</strong></p>
<p>डूंगर सिंह ने बताया कि बाजर में आलू की बढ़ी कीमतों का फायाद बिचौलियों को हो रहा है, जबकि किसानों को सिर्फ आधी कीमत ही मिल रहा है। उन्होंने कहा कि 2020 के बाद इस साल आलू की कीमतों में थोड़ा सुधार हुआ था।&nbsp;मई के बाद से आलू के दाम बढ़ाना शुरू हुए थे। शुरुआत में किसानों को ठीक दाम मिला, लेकिन अब दाम फिर गए हैं। उन्होंने बताया कि अब आलू की नई फसल आना शुरू हो चुकी है। फिलहाल कर्नाटक ने शुरुआती आलू आ रहा है। अगले दो महीनों में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से भी आलू की आवक शुरू हो जाएगा। जिसके बाद दाम और गिर जाएंगे।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>लगातार घट रहा आलू का उत्पादन&nbsp;</strong></p>
<p>डूंगर सिंह ने बताया हाल में जो आलू की कीमतें बढ़ी थी, उसके पीछे इस साल आलू के उत्पादन में आई गिरावट और अत्यधिक गर्मी के चलते सब्जियों का उत्पादन कम होना वजह थी। उन्होंने बताया कि देश में आलू का उत्पादन लगाताार घट रहा है। सबसे बड़े आलू उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में इस साल आलू का उत्पादन 10 फीसदी तक गिरा है, जबकि देश भर में उत्पादन पांच फीसदी तक कम हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में 2023-2024 में 567 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ, जो इसके पहले साल 2022-2023 के मुकाबले 34 लाख टन कम रहा। पिछले साल (2022-2023) देश में<span>&nbsp;601 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ था।</span></p>
<p><strong>किसानों को मिल रही आधी कीमत</strong></p>
<p>डूंगर सिंह ने बताया कि बाजार में आलू की कीमतें अभी भी ऊपर हैं, लेकिन किसानों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है। जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जून में आलू की कीमतें बढ़ने पर किसानों को 2400 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल का दाम मिला था, जो एक महीने बाद घटकर 1800 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए है। जबकि बाजार में आलू का दाम 40 रुपये प्रति किलो बना हुआ है। यानी किसानों को उपज का आधे से भी कम दम मिल रहा है।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के <strong>प्राइस मॉनिटरिंग डिवीजन के अनुसार</strong>, देशभर में आलू की औसत खुदरा कीमत 37.08 रुपये प्रति किलो है।&nbsp;बाजार में आलू औसतन 40 रुपये तक बिक रहा है, जबकि किसानों को प्रति किलो मात्र 18 से 20 रुपये ही मिल रहे हैं।</p>
<p><strong>आलू की खेती छोड़ रहे किसान&nbsp;</strong></p>
<p>डूंगर सिंह ने बताया कि कम दाम मिलने के कारण किसान आलू की खेती छोड़ रहे हैं और अन्य नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से आलू पर समर्थन मूल्य दिए जाने की मांग उठाई, जिससे किसानों को उचित मुनाफा मिल सके और वे आलू की खेती जारी रख सकें। उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों से किसान अपनी उपज घाटे में बेच रहे थे। इस साल मई में दाम बढ़ने से किसानों को और अच्छे दाम मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन अब दाम फिर गिर गए हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आलू का भाव 55 फीसदी तक गिरा, किसानों को 1800 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा दाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पिछले 10 वर्षों में भारत की कृषि जीडीपी की वृद्धि दर दुनिया में सबसे अधिकः प्रो. रमेश चंद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/in-the-last-10-years-agri-gdp-growth-of-india-is-the-highest-in-the-world-says-ramesh-chand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 04 Aug 2024 12:31:29 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/in-the-last-10-years-agri-gdp-growth-of-india-is-the-highest-in-the-world-says-ramesh-chand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">भारत ने वर्ष 2016-17 से लेकर 2022-23 तक सात वर्षों में कृषि क्षेत्र में सबसे अधिक 5 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है। यह कहना है नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद का। वे शनिवार को नई दिल्ली में कृषि अर्थशास्त्रियों की अंतर्राष्ट्रीय कान्फ्रेंस (ICAE) को संबोधित कर रहे थे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अपने संबोधन में उन्होंने विकास की रणनीतियों में कृषि क्षेत्र पर फोकस किए जाने का श्रेय सरकार को दिया। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड बैंक के पिछले 10 वर्षों के आंकड़े देखें तो दुनिया भर में कृषि क्षेत्र की जीडीपी की वृद्धि दर भारत में सबसे अधिक रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व जीडीपी में कृषि क्षेत्र का हिस्सा वर्ष 2006 में 3.2 प्रतिशत था। यह हाल के वर्षों में बढ़कर 4.3 प्रतिशत हो गया है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">प्रो. रमेश चंद के अनुसार वित्त वर्ष 2006-07 में वैश्विक आर्थिक संकट के बाद कृषि क्षेत्र की विकास दर बाकी गैर-कृषि सेक्टर की तुलना में अधिक रही है। ऐसा विश्व स्तर पर देखने को मिला है। कृषि क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए नीति आयोग के सदस्य ने कहा कि पिछले 15 वर्षों के दौरान कृषि क्षेत्र के विकास ने अनेक देशों की अर्थव्यवस्था को गिरने से बचाया है। वर्कफोर्स के बड़े हिस्से को रोजगार देने का जिम्मा आज भी कृषि क्षेत्र पर है, क्योंकि कृषि से लेबर फोर्स को बाहर निकलने में इंडस्ट्री सेक्टर का रिकॉर्ड बहुत ही खराब रहा है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उन्होंने कहा कि मौजूदा चुनौतियां आर्थिक और मानव विकास में कृषि क्षेत्र की भूमिका को नए सिरे से रेखांकित करती हैं। इसलिए हर स्तर पर कृषि क्षेत्र पर नए तरीके से फोकस करने की आवश्यकता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ एग्रीकल्चरल इकोनॉमिस्ट की तरफ से इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। 2 अगस्त को शुरू हुई यह कॉन्फ्रेंस 7 अगस्त तक चलेगी। भारत में यह कॉन्फ्रेंस 65 वर्षों के बाद हो रही है। इस वर्ष के कॉन्फ्रेंस की थीम सस्टेनेबल कृषि खाद्य प्रणाली की और ट्रांसफॉर्मेशन है। इसमें जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों का क्षरण, उत्पादन की बढ़ती लागत तथा युद्ध जैसी वैश्विक चुनौतियां से जूझते हुए सस्टेनेबल खेती का समाधान तलाशना है। इसमें करीब 75 देशों के लगभग एक हजार प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।</span></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66af27aea9369.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पिछले 10 वर्षों में भारत की कृषि जीडीपी की वृद्धि दर दुनिया में सबसे अधिकः प्रो. रमेश चंद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66af27aea9369.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[&amp;apos;भारत की खाद्य सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत हैं छोटे किसान&amp;apos;, आईसीएई 2024 में बोले पीएम मोदी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/small-farmers-are-the-biggest-strength-of-india-food-security-said-pm-modi-at-icae-2024.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 03 Aug 2024 16:20:48 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/small-farmers-are-the-biggest-strength-of-india-food-security-said-pm-modi-at-icae-2024.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत की खाद्य सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत, देश के छोटे किसान हैं। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में <strong>कृषि अर्थशास्त्रियों के 32वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीएई)</strong> के उद्घाटन अवसर पर कही। प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने वाले प्रयासों पर प्रकाश डाला। मोदी ने पिछले दशक में लगभग 1900 जलवायु-संवेदनशील फसल किस्मों की शुरुआत का उल्लेख किया और मणिपुर, असम और मेघालय के औषधीय गुणों से भरपूर काले चावल की भी बात की।</p>
<p><strong>प्राचीन कृषि परंपराओं का महत्व</strong></p>
<p>मोदी ने भारत की पुरानी कृषि परंपराओं का उल्लेख करते हुए 'कृषि पाराशर' नामक 2000 साल पुरानी किताब की बात की। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 100 से अधिक अनुसंधान संस्थानों और 500 से ज्यादा कृषि कॉलेजों का भी जिक्र किया, जो भारत की मजबूत कृषि शिक्षा और अनुसंधान प्रणाली का हिस्सा हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने भारत के अनूठे कृषि परिदृश्य को रेखांकित किया, जिसमें 15 अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्र हैं। उन्होंने 65 साल पहले की खाद्य सुरक्षा की स्थिति की तुलना आज के खाद्य अधिशेष वाले भारत से की, और देश के दूध, दालों, मसालों के सबसे बड़े उत्पादक और अन्य खाद्य पदार्थों जैसे अनाज, फल, सब्जियां, कपास, चीनी, चाय, और मछली के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक के रूप में परिवर्तन पर प्रकाश डाला।</p>
<p><strong>वैश्विक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता</strong></p>
<p>वैश्विक कल्याण के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, मोदी ने 'एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य', 'मिशन लाइफ' और 'एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य' जैसी पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने टिकाऊ कृषि और खाद्य प्रणाली चुनौतियों से निपटने के लिए समग्र दृष्टिकोण पर जोर दिया।</p>
<p>मोदी ने मिलेट (श्री अन्न) को पानी की न्यूनतम आवश्यकता और अधिक उत्पादन के कारण पोषण चुनौती के समाधान के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत की मिलेट किस्मों को विश्व स्तर पर साझा करने की बात कही और पिछले वर्ष को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष के रूप में मनाने का उल्लेख किया।</p>
<p><strong>कृषि में आधुनिक प्रौद्योगिकी का एकीकरण</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड, सौर खेती, ई-नाम डिजिटल कृषि बाजार, किसान क्रेडिट कार्ड और पीएम फसल बीमा योजना जैसी पहलों के माध्यम से कृषि में आधुनिक प्रौद्योगिकी के एकीकरण पर विस्तार से बताया। उन्होंने सूक्ष्म सिंचाई, इथेनॉल मिश्रण और वास्तविक समय फसल सर्वेक्षण डेटा के लिए डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी प्रगति पर प्रकाश डाला, जो किसानों को लाभान्वित करते हैं और वैश्विक खाद्य सुरक्षा को बढ़ाते हैं।</p>
<p><strong>सम्मेलन में 75 देशों के प्रतिनिधि हुए शामिल&nbsp;</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के अंत में उम्मीद जताई कि आईसीएई सम्मेलन सतत कृषि-खाद्य प्रणालियों को लेकर महत्वपूर्ण वैश्विक चर्चाओं को प्रोत्साहित करेगा। सम्मेलन 7 अगस्त, 2024 तक चलेगा, जिसमें युवा शोधकर्ताओं और पेशेवरों को अपने विचार प्रस्तुत करने और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग का अवसर मिलेगा। इस वर्ष का सम्मेलन "स्थायी कृषि-खाद्य प्रणालियों की ओर परिवर्तन" पर केंद्रित है, जो जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी, बढ़ती उत्पादन लागत, और संघर्ष जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच स्थायी कृषि की आवश्यकता को उजागर करता है। इस कार्यक्रम में 75 देशों से लगभग 1,000 प्रतिनिधि शामिल हुए।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद, सम्मेलन के अध्यक्ष प्रोफेसर मतीन कैम, और डेयर के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक भी इस दौरान मौजूद रहे।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ 'भारत की खाद्य सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत हैं छोटे किसान', आईसीएई 2024 में बोले पीएम मोदी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नाबार्ड ने असिस्टेंट मैनेजर के 102 पदों पर निकाली भर्ती, एक लाख रुपये महीना वेतन, ऐसे करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/nabard-recruitment-for-102-posts-of-assistant-manager-salary-1-lakh-rupees-per-month-apply-here.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 03 Aug 2024 11:48:34 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/nabard-recruitment-for-102-posts-of-assistant-manager-salary-1-lakh-rupees-per-month-apply-here.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) ने <strong>असिस्टेंट मैनेजर ग्रेड &lsquo;ए&rsquo; के 102 पदों</strong> के लिए भर्ती निकाली है। ये पद ग्रामीण विकास बैंकिंग सेवा (आरडीबीएस) और राजभाषा सेवा में हैं। इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 27 जुलाई 2024 से शुरू हो चुकी है, जो <strong>15 अगस्त 2024</strong> तक जारी रहेगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार नाबार्ड की वेबसाइट<strong><a href="https://www.nabard.org/"> http://www.nabard.org</a></strong> पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन केवल ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। असिस्टेंट मैनेजर के पद के लिए चयनित उम्मीदवारों को लगभग 1 लाख रुपये महीने वेतन मिलेगा।</p>
<p><strong>पदों का विवरण और आरक्षण</strong></p>
<p>असिस्टेंट मैनेजर के कुल 102 पद विभिन्न श्रेणियों में भरे जाएंगे। इनमें सामान्य, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वित्त, आईटी, कृषि, पशुपालन, मछली पालन, फूड प्रोसेसिंग, वानिकी, प्लांटेशन और हॉर्टिकल्चर, जियो इंफार्मेटिक्स, विकास प्रबंधन, सांख्यिकी, सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, पर्यावरण इंजीनियरिंग/विज्ञान, मानव संसाधन प्रबंधन और राजभाषा के पद शामिल हैं। इन पदों में आरक्षण सरकार के मानदंडों के अनुसार अनारक्षित (यूआर), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ी जाति (ओबीसी) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) की श्रेणियों के लिए लागू है।</p>
<p>सामान्य श्रेणी: 50 पद<br />चार्टर्ड अकाउंटेंट: 4 पद<br />वित्त: 7 पद<br />आईटी: 16 पद<br />कृषि: 2 पद<br />पशुपालन: 2 पद<br />मछली पालन: 1 पद<br />फूड प्रोसेसिंग: 1 पद<br />वानिकी: 2 पद<br />प्लांटेशन और हॉर्टिकल्चर: 1 पद<br />जियो इंफार्मेटिक्स:1 पद<br />विकास प्रबंधन: 3 पद<br />सांख्यिकी: 2 पद<br />सिविल इंजीनियरिंग: 3 पद<br />इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग: 1 पद<br />पर्यावरण इंजीनियरिंग/विज्ञान: 2 पद<br />मानव संसाधन प्रबंधन: 2 पद<br />राजभाषा: 2 पद</p>
<p><strong>ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया</strong></p>
<p>उम्मीदवारों को नाबार्ड की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा और सुनिश्चित करना होगा कि वे पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं। आवेदन में दी गई जानकारी साक्षात्कार या शामिल होने के समय सत्यापित की जाएगी। किसी भी विसंगति या गलत जानकारी पाए जाने पर पात्रता रद्द की जा सकती है।</p>
<p>आवेदन प्रक्रिया, शुल्क भुगतान या कॉल लेटर डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवार &ldquo;कैंडिडेट ग्रीवेंस लॉजिंग एंड रिड्रेसल मैकेनिज्म" <a href="https://cgrs.ibps.in/"><strong>http://cgrs.ibps.in/</strong> </a>का उपयोग कर सकते हैं। आगे के विवरण और अपडेट नाबार्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे। अधिक जानकारी और आवेदन के लिए नाबार्ड की आधिकारिक वेबसाइट<strong> <a href="https://www.nabard.org/">http://www.nabard.org</a></strong> पर विजिट करें। भर्ती की अधिसूचना के लिए लिंक पर क्लिक करें। (<a href="https://www.nabard.org/auth/writereaddata/CareerNotices/2707240233final-advertisement-grade-a-rdbs-rajbhasha-2024.pdf"><strong>भर्ती अधिसूचना</strong></a>)&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66adc827039f4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नाबार्ड ने असिस्टेंट मैनेजर के 102 पदों पर निकाली भर्ती, एक लाख रुपये महीना वेतन, ऐसे करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार की घोषणा के बावजूद नहीं मिल रहा भारत आटा, दाम बढ़ाने की तैयारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/bharat-atta-and-bharat-rice-is-not-available-despite-government-announcement-price-likely-to-increase.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 02 Aug 2024 18:26:44 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/bharat-atta-and-bharat-rice-is-not-available-despite-government-announcement-price-likely-to-increase.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने भले ही भारत आटा और भारत चावल की बिक्री जारी रखने की घोषणा कर दी है, लेकिन आम उपभोक्ताओं को फिलहाल सस्ता आटा और चावल नहीं मिल पा रहा है। इस बीच, भारत आटा और भारत चावल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है। भारत आटा का रेट 27.50 रुपये बढ़ाकर 30 रुपये प्रति किलोग्राम और भारत चावल का रेट 29 रुपये किलो से बढ़ाकर 34 रुपये प्रति किलोग्राम करने की तैयारी है।</p>
<p>आम जनता को महंगाई की मार से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले साल नवंबर में <strong>भारत आटा</strong> और इस साल फरवरी में <strong>भारत चावल</strong> की बिक्री शुरू करवाई थी। सहकारी संस्था <strong>नेफेड, एनसीसीएफ</strong> और <strong>केंद्रीय भंडार</strong> के रिटेल आउटलेट और मोबाइल वैन के जरिए भारत आटा और भारत चावल बेचा गया। इसके अलावा सरकार समर्थित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म <strong>ओएनडीसी</strong> के जरिए भी भारत आटा और भारत चावल की बिक्री हुई थी। लेकिन अब अधिकतर रिटेल या ऑनलाइन आउटलेट्स पर भारत आटा उपलब्ध नहीं है। &nbsp;</p>
<p><strong>केंद्रीय भंडार</strong> के नई दिल्ली स्थित स्टोर से पता चला कि काफी दिनों से भारत आटा और भारत चावल का नया स्टॉक नहीं आया है। इसलिए इसकी बिक्री नहीं की जा रही है। जैसे ही नया स्टॉक आएगा, दोबारा भारत आटा और भारत चावल की बिक्री शुरू की जाएगी। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी भारत आटा और भारत चावल उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है। जियो मार्ट से लेकर नेफेड बाजार ऑनलाइन पोर्टल पर भारत आटा <strong>&ldquo;आउट ऑफ स्टॉक&rdquo;</strong> दिखा रहा है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66acda0e9d039.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>केंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले खाद्यान्न महंगाई पर काबू पाने के लिए 31 मार्च तक रियायती दरों पर आटा और चावल बेचने की योजना शुरू की थी, जिसे बाद में 30 जून तक बढ़ाया गया। भारत आटा की बिक्री से जुड़े रिटलर्स का कहना है कि 30 जून के बाद से नया स्टॉक नहीं आया है। जिन स्टोर पर पुराना स्टॉक बचा होगा, वहीं भारत आटा या भारत चावल मिल सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>एक अगस्त</strong> को केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री <strong>प्रल्हाद जोशी</strong> ने भारत आटा और भारत चावल की बिक्री जारी रखने का ऐलान किया है। खाद्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अब भारत आटा 30 रुपये और भारत चावल 34 रुपये प्रति किलोग्राम के रेट पर बेचा जाएगा। इस प्रकार भारत आटा करीब 9 फीसदी और भारत चावल 17 फीसदी महंगा हो सकता है। यानी महंगाई पर काबू पाने की सरकारी योजना पर भी <strong>महंगाई </strong>के असर से अछूती नहीं रही है।&nbsp;</p>
<p>भारत आटा 27.5 रुपये किलो के रेट पर बिकने से फूड कंपनियों पर भी दाम कम रखने का दबाव था, लेकिन अगर भारत आटा 30 रुपये किलो मिलेगा तो ब्रांडेड आटे के दाम पर भी इसका असर दिखेगा और यह 34-35 रुपये किलो से कम रेट पर मिलना मुश्किल है। आम जनता पर पहले ही महंगाई की मार पड़ रही है। जून में थोक महंगाई दर 16 महीनों के उच्चतम स्तर 3.36 फीसदी तक पहुंच गई थी, जबकि खुदरा महंगाई दर चार महीनों की सर्वाधिक 5.08 फीसदी रही। इस दौरान उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक 9.36 फीसदी बढ़ा। सरकार के लिए खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई रोकना बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसके लिए ही भारत ब्रांड से विभिन्न वस्तुओं की बिक्री शुरू की गई थी।</p>
<p><strong>गेहूं और आटे की कीमतों में 60 फीसदी अंतर</strong>&nbsp;</p>
<p>गेहूं का एमएसपी 2275 रुपये प्रति क्विंटल है। भारत आटा के लिए सरकार ने गेहूं का रिजर्व प्राइस 2150 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। इस पर केंद्र सरकार की तरफ से 435 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी <strong>प्राइस स्टेबलाइजेश फंड (पीएसएफ)</strong> से दी गई। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा गेहूं <strong>17.15 रुपये</strong> प्रति किलोग्राम की दर से और चावल <strong>18.59 रुपये</strong> प्रति किलोग्राम की दर से इस योजना के लिए नेफेड व एनसीसीएफ को उपलब्ध कराया गया। रियायती दर पर मिले इस गेहूं का भारत आटा उपभोक्ताओं को<strong> 27.50 रुपये</strong> प्रति किलोग्राम और चावल<strong> 29 रुपये</strong> प्रति किलोग्राम की दर से बेचा गया। &nbsp;</p>
<p>इस तरह करीब 60 फीसदी मार्जिन के बाद भारत आटा और 55 फीसदी मार्जिन के बाद भारत चावल की खुदरा बिक्री हुई। एफसीआई से मिले गेहूं व चावल और उपभोक्ताओं को बेचे गये भारत आटा और भारत चावल के बीच ही कीमतों में लगभग 55-60 फीसदी का अंतर आ गया। ऐसे में अगर अब भारत आटा और भारत चावल के दाम बढ़ते हैं तो इस योजना को लेकर सवाल जरूर खड़े होंगे।&nbsp;</p>
<p></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr">States can buy rice from Food Corporation of India without participating in e-auction for Rs 2,800 per quintal under Open Market Sale Scheme (Domestic): Shri Pralhad Joshi<br /><br />Quality and nutritious food top priority of Modi government, sale of rice, atta under Bharat brand to&hellip; <a href="https://t.co/roHHOT0iB8">pic.twitter.com/roHHOT0iB8</a></p>
&mdash; PIB India (@PIB_India) <a href="https://twitter.com/PIB_India/status/1818953169814405516?ref_src=twsrc%5Etfw">August 1, 2024</a></blockquote>
<p>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66acd610468bb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार की घोषणा के बावजूद नहीं मिल रहा भारत आटा, दाम बढ़ाने की तैयारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मानसून सामान्य से 2 फीसदी अधिक बरसा, लेकिन 25 फीसदी क्षेत्र में कम बारिश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-is-2-percent-more-than-normal-in-first-half-but-25-percent-area-has-less-rain.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 01 Aug 2024 15:12:04 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-is-2-percent-more-than-normal-in-first-half-but-25-percent-area-has-less-rain.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में मानसून की औसत बारिश अब तक 2 फीसदी अधिक रही है। 1 जून से 30 जुलाई, 2024 तक देश में 453.8 मिलीमीटर (मिमी) बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य के 445.8 मिमी के मुकाबले दो फीसदी अधिक है। हालांकि, देश के 25 फीसदी हिस्से में बारिश कम रही है, जिससे मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिला है। देश के कई हिस्सों में भारी बारिश ने तबाही मचाई है। हिमाचल, उत्तराखंड, केरल समेत कई राज्यों में भारी बारिश और भूस्खलन से काफी नुकसान हुआ है। वहीं, कई हिस्सों में बारिश नहीं होने से सीधे तौर पर खेती-किसानी के कार्य प्रभावित हुए हैं। कम बारिश वाले क्षेत्रों में खरीफ फसलों की बुवाई में देरी हुई और सूखे के चलते समय पर सिंचाई नहीं हो पाई।&nbsp; &nbsp;</p>
<p><strong>जुलाई में सामान्य से 9 फीसदी अधिक बरसे बादल&nbsp;</strong></p>
<p><a href="https://mausam.imd.gov.in/"><strong>भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी)</strong></a>&nbsp;के निदेशक <strong>मृत्युंजय महापात्रा</strong> ने गुरुवार को बताया कि जून में कम बारिश होने से देश में सूखे की स्थिति रही, लेकिन जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश ने इस कमी को पूरा किया। उन्होंने कहा कि जुलाई में भारत में सामान्य से 9 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई। मध्य भारत में लगातार तीसरे साल मानसून के दौरान अच्छी बारिश हुई है, जो कृषि के लिए लाभकारी साबित हो रही है। मध्य भारत में जुलाई में 33 फीसदी अधिक बारिश हुई।</p>
<p>महापात्रा ने कहा कि जुलाई में पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में काफी कम बारिश हुई। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बारिश की कमी 35 फीसदी से 45 फीसदी तक रही। उन्होंने कहा कि गंगा के मैदानी इलाकों और कुछ अन्य क्षेत्रों में भी सामान्य से कम बारिश हुई। जिस वजह से उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल रहा।</p>
<p><strong>अगस्त-सितंबर में अधिक बारिश का अनुमान&nbsp;</strong></p>
<p>महापात्रा ने कहा कि अगस्त और सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान है। अगस्त के अंत तक अनुकूल ला नीना स्थितियों के विकसित होने की संभावना है, जिससे देश में मानसूनी बारिश बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि मानसून का भारतीय कृषि परिदृश्य में महत्वपूर्ण योगदान है, क्योंकि कुल खेती योग्य क्षेत्र का 52 फीसदी हिस्सा बारिश पर निर्भर है। इसके अलावा, देश भर में पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण जलाशयों को फिर से भरने के लिए मानसून की बारिश अहम है। उन्होंने कहा कि अगस्त और सितंबर में भारत में बारिश 422.8 मिमी की लंबी अवधि के औसत का 106 फीसदी होने की संभावना है।</p>
<p><strong>इन क्षेत्रों में कम बारिश की संभावना</strong></p>
<p>महापात्रा ने कहा कि मानसून सीजन के दूसरे हिस्से (अगस्त और सितंबर) में पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों, पूर्वी भारत से सटे लद्दाख, सौराष्ट्र, कच्छ, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश की संभावना है। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में भी कम बारिश की आशंका जताई गई है। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक अधिकतम तापमान रहने की संभावना है, जबकि गंगा के मैदानी इलाकों, मध्य भारत और भारत के दक्षिण-पूर्वी तट के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम अधिकतम तापमान रहने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>जलवायु परिवर्तन और मानसून की अस्थिरता</strong></p>
<p>महापात्रा ने जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून में बढ़ते उतार-चढ़ाव और अस्थिरता के बारे में भी बताया, जिसके चलते चरम मौसम की घटनाओं और शुष्क अवधियों की संभावना बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तनशीलता मानसून की प्राकृतिक विशेषता है, लेकिन जलवायु परिवर्तन इसे और अधिक अस्थिर बना रहा है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66ab4fcfa9436.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मानसून सामान्य से 2 फीसदी अधिक बरसा, लेकिन 25 फीसदी क्षेत्र में कम बारिश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66ab4fcfa9436.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार ने माना देश में पशु चारे की कमी, डेयरी सेक्टर पर पड़ रहा असर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-admitted-that-there-is-a-shortage-of-animal-fodder-in-the-country-which-is-affecting-the-dairy-sector.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 01 Aug 2024 12:24:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-admitted-that-there-is-a-shortage-of-animal-fodder-in-the-country-which-is-affecting-the-dairy-sector.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने माना है कि देश में पशु चारे की कमी चल रही है। इससे आने वाले दिनों में देश के डेयरी सेक्टर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के आसार हैं। केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने बुधवार को संसद में पशु चारे की कमी के आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि आईसीएआर-भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (आईजीएफआरआई) झांसी के अनुसार, देश में <strong>हरे चारे की 11.24-32 प्रतिशत</strong> और <strong>सूखे चारे की 23 प्रतिशत</strong> कमी है।&nbsp;</p>
<p><strong>चारे की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास</strong></p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्य सरकारों के साथ मिलकर चारे की उपलब्धता बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। 2014-15 से राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत चारा और चारा विकास पर उप मिशन के माध्यम से राज्य सरकारों को सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त, कृषि विभाग <a href="https://www.nddb.coop/"><strong>राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी)</strong></a> के माध्यम से 100 एफपीओ, मुख्य रूप से चारा-केंद्रित एफपीओ बनाने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए '10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन और संवर्धन' योजना लागू कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य चारे की उपलब्धता में सुधार करना और डेयरी उद्योग को समर्थन प्रदान करना है।</p>
<p>रंजन सिंह ने बताया कि <strong><a href="https://igfri.icar.gov.in/">आईजीएफआरआई झांसी-आईसीएआर</a></strong> ने भी 25 राज्यों के लिए चारा संसाधन विकास योजना तैयार की है, ताकि विभिन्न राज्यों में फसल पैटर्न और पशुधन प्रजातियों के आधार पर चारे की उपलब्धता को बढ़ाया जा सके।</p>
<p><strong>बढ़ती मांग और उत्पादन में गिरावट</strong></p>
<p>देश में पशु चारे की बढ़ती मांग और उत्पादन में गिरावट, इसकी कमी की मुख्य वजह है। अगर स्थिति ऐसी ही रही तो आने वाले दिनों में चारे की कीमतों में और इजाफा होगा। जिससे दूध की उत्पादन लागत बढ़ेगी, जो डेयरी उत्पादों की कीमतों पर असर डालेगा। यह स्थिति न केवल डेयरी सेक्टर को प्रभावित करेगी, बल्कि उपभोक्ताओं पर भी इसका असर पड़ेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>6 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ रहा दूध उत्पादन&nbsp;</strong></p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने संसद दूध उत्पादन के आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने बताया कि देश में दूध का उत्पादन 2018-19 में 187.7 मिलियन टन था, जो 2022-23 में बढ़कर 230.6 मिलियन टन हो गया। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश देश के कुल दूध उत्पादन में 53.08 प्रतिशत का योगदान करते हैं। सिंह ने यह भी बताया कि भारत दूध उत्पादन में पहले स्थान पर है और वैश्विक दूध उत्पादन में 25 प्रतिशत का योगदान देता है। पिछले 9 वर्षों में दूध उत्पादन लगभग 6 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है, जिससे प्रति व्यक्ति उपलब्धता 459 ग्राम प्रति दिन हो गई है और देश घरेलू मांग को पूरा करने में आत्मनिर्भर है।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66ab2d1fa8e41.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार ने माना देश में पशु चारे की कमी, डेयरी सेक्टर पर पड़ रहा असर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत में दालों का आयात 90 फीसदी बढ़ा, वित्त वर्ष 2023&amp;#45;24 में 47.38 लाख टन हुआ इंपोर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/import-of-pulses-in-india-increased-by-90-percent-47.38-lakh-tonnes-were-imported-in-the-financial-year-2023-24.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 31 Jul 2024 11:08:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/import-of-pulses-in-india-increased-by-90-percent-47.38-lakh-tonnes-were-imported-in-the-financial-year-2023-24.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एक ओर भारत सरकार देश को दालों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर देश में दालों का आयात लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए दालों का आयात वित्त वर्ष 2022-23 के मुकाबले 89.82 फीसदी (करीब 90 फीसदी) अधिक रहा। इस बात की पुष्टि खुद केंद्र सरकार के आंकड़े कर रहे हैं।</p>
<p><strong>दालों का आयात बढ़ा, निर्यात घटा</strong></p>
<p>मंगलवार को संसद में कृषि राज्य मंत्री राम नाथ ठाकुर ने इस बारे में जानकारी दी। कृषि राज्य मंत्री की ओर से पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में दालों का आयात 26.99 लाख टन और निर्यात 3.87 लाख टन रहा, जबकि वित्त वर्ष 2022-23 में आयात पिछले वर्ष के मुकाबले घटकर 24.96 लाख टन और निर्यात बढ़कर 7.62 लाख टन रहा। 2023-24 में दालों का आयात पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 90 फीसदी बढ़कर 47.38 लाख टन रहा। इस दौरान निर्यात 5.94 लाख टन के साथ पिछले वर्ष के मुकाबले 22 फीसदी कम रहा।&nbsp;</p>
<p><strong>दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ा</strong></p>
<p>राम नाथ ठाकुर ने कहा कि पिछले दस वर्षों में 2014-15 से 2023-24 (तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार) के दौरान, कुल दलहन और तिलहन उत्पादन में क्रमशः 43 फीसदी और 44 फीसदी की वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2015-16 में दालों का कुल उत्पादन 163.23 लाख टन था, जो वित्त वर्ष 2023-24 (तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार) में बढ़कर 244.93 लाख टन हो गया। उन्होंने कहा कि&nbsp;सरकार ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के बजट आवंटन को 2013-14 के बजट अनुमान में 27,662.67 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2023-24 के बजट अनुमान में 1,25,035.79 करोड़ रुपये कर दिया है।</p>
<p><strong>पीएम किसान निधि बढ़ाने का कोई विचार नहीं</strong></p>
<p>ठाकुर ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पीएम किसान) के बारे में भी जानकारी दी। इस योजना के तहत भूमि-धारक किसानों को प्रति वर्ष 6 हजार रुपये की वित्तीय सहायत दी जाती है। यह लाभ दो हजार रुपये की तीन किस्तों में डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से किसानों के खातों में भेजी जाती है। उन्होंने बताया कि अब तक योजना के तहत 17 किस्तों में 11 करोड़ से अधिक किसानों को 3.24 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि फिलहाल इस योजना के तहत वित्तीय लाभ बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत में दालों का आयात 90 फीसदी बढ़ा, वित्त वर्ष 2023-24 में 47.38 लाख टन हुआ इंपोर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[&amp;apos;किसानों को चक्रव्यूह में फंसाया! हम दिलाएंगे एमएसपी की कानूनी गारंटी&amp;apos;, संसद में राहुल गांधी का दावा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/a-conspiracy-was-hatched-against-the-farmers-we-will-provide-them-legal-guarantee-of-msp-claims-rahul-gandhi-in-parliament.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 29 Jul 2024 16:49:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/a-conspiracy-was-hatched-against-the-farmers-we-will-provide-them-legal-guarantee-of-msp-claims-rahul-gandhi-in-parliament.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>लोकसभा में सोमवार को मानसून सत्र के छठे दिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ। बजट पर चर्चा के दौरान</span> लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एमएसपी और किसानों के मुद्दे पर जोरदार ढंग से अपनी बात रखी और सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हमारा अन्नदाता सरकार से सिर्फ एक चीज मांग रहा है। एमएसपी की लीगल गारंटी। ये कोई बड़ा काम नहीं है। अगर सरकार बजट में इसका प्रोविजन कर देती, तो हमारे किसान जो चक्रव्यूह में फंसे हैं, वो निकल पाते।&nbsp;</p>
<p>राहुल गांधी ने कहा कि तीन काले कानून लाकर, जमीन अधिग्रहण बिल को कमजोर करके और किसानों को फसल का सही दाम न देकर सरकार ने किसानों को 'चक्रव्यूह' में फंसाने का काम किया। इसके लिए किसान एमएसपी की मांग कर रहे थे। राहुल गांधी ने कहा, "मैं यहां इंडिया गठबंधन की तरफ से गारंटी देता हूं कि हम इस सदन में एमएसपी लीगल गारंटी कानून पास करके दिखाएंगे।"</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">मैं INDIA गठबंधन की तरफ से देश के किसानों से कहना चाहता हूं-<br /><br />हम किसानों को MSP की कानूनी गारंटी देंगे। <br /><br />: नेता विपक्ष श्री <a href="https://twitter.com/RahulGandhi?ref_src=twsrc%5Etfw">@RahulGandhi</a> <a href="https://t.co/aQcy0UCgUA">pic.twitter.com/aQcy0UCgUA</a></p>
&mdash; Congress (@INCIndia) <a href="https://twitter.com/INCIndia/status/1817854753113530448?ref_src=twsrc%5Etfw">July 29, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p><strong>किसानों को संसद में आने से रोका गया</strong></p>
<p>राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने किसानों को बॉर्डर पर रोक रखा है। आज तक सड़कें उनके लिए बंद हैं। सरकार उनसे बात करने को तैयार नहीं है। वहीं, जब किसान मुझसे मिलने संसद आए, तो उन्हें अंदर नहीं आने दिया गया। उन्होंने कहा कि मुझे बताया गया कि उन्हें अंदर नहीं आने दिया जाएगा। जब मैं उनसे मिलने गया और मीडिया को यह बात पता चली, उसके बाद उन्हें अंदर आने की अनुमति दी गई।&nbsp;</p>
<p><strong>अडानी-अंबानी का नाम लेने से रोक</strong></p>
<p>संसद में राहुल गांधी को अडानी-अंबानी का नाम लेने से भी रोका गया। भाषण के दौरान उन्होंने जैसे ही अंबानी-अडाणी का नाम लिया तो लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें टोक दिया। स्पीकर ने कहा कि जो व्यक्ति सदन में नहीं है, उसका नाम नहीं लिया जा सकता। इस मुद्दे पर सदन में काफी हंगामा हुआ।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a775b418c28.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ 'किसानों को चक्रव्यूह में फंसाया! हम दिलाएंगे एमएसपी की कानूनी गारंटी', संसद में राहुल गांधी का दावा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिल्ली&amp;#45;एनसीआर में 60 रुपये के रेट पर टमाटर की बिक्री शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/nccf-started-tomato-mega-sale-in-delhi-ncr-at-the-rate-of-60-rupees-per-kg.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 29 Jul 2024 14:32:38 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/nccf-started-tomato-mega-sale-in-delhi-ncr-at-the-rate-of-60-rupees-per-kg.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>टमाटर की बढ़ती कीमतों को से उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) ने रियायती दरों पर टमाटर की बिक्री शुरू कर दी है। उपभोक्ताओं को 60 रुपये प्रति किलोग्राम के रेट पर टमाटर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। एनसीसीएफ ने इसे '<strong>टमाटर मेगा सेल'</strong>&nbsp;नाम दिया है। फिलहाल दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में रियायती दरों पर टमाटर की बिक्री शुरू की गई है। एनसीसीएफ आने वाले दिनों में देश के अन्य हिस्सों में भी टमाटर की बिक्री शुरू करेने की योजना बना रहा है।&nbsp;</p>
<p>देश में बारिश के कारण टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में फसल को भारी नुकसान हुआ है। सप्लाई बाधित होने से टमाटर की कीमतों में तेज उछाल आया है। देश में फिलहाल टमाटर की मौजूदा औसत खुदरा कीमतें 80 से 100 रुपये किलोग्राम के बीच है। जबकि, एक महीने पहले टमाटर 40 से 80 रुपये किलोग्राम में बिक रहा था। दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई शहरो में टमाटर का भाव 100 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर पहुंच गया है। ऐसे में उपभोक्ताओं को सस्ता टमाटर उपलब्ध कराने के लिए एनसीसीएफ ने यह कदम उठाया है। पिछले साल भी देश में टमाटर की कीमतें बढ़ी थी। उस समय भाव 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था। जिसके बाद सरकार को हस्तक्षेप कर सस्ती दरों पर टमाटर बिकवाना पड़ा था।&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr">Tomorrow monday (29/07/2024) point of sale &amp; Mobile Van locations.<a href="https://twitter.com/hashtag/Vanlocatons?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Vanlocatons</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Pointofsale?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Pointofsale</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Sale?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Sale</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Tomato?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Tomato</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/nccf?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#nccf</a> <a href="https://t.co/u3IEUIOoKG">pic.twitter.com/u3IEUIOoKG</a></p>
&mdash; NCCF of India Limited (@Nccf_India) <a href="https://twitter.com/Nccf_India/status/1817609867424657616?ref_src=twsrc%5Etfw">July 28, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p><strong>दिल्ली-एनसीआर में इन स्थानों पर मिलेगा सस्ता टमाटर&nbsp;</strong></p>
<p>दिल्ली-एनसीआर में एनसीसीएफ रिटेल स्टोर्स और मोबाइल वैन के जरिए टमाटरों की बिक्री कर रहा है। एनसीसीएफ के तीन रिटेल स्टोर्स राजीव चौक, पटेल चौक मेट्रो स्टेशन और नेहरू प्लेस पर उपभोक्ता टमाटर खरीद सकते हैं। मोबाइल वैन से टमाटर की बिक्री कृषि भवन दिल्ली, सीजीओ कॉम्प्लेक्स, लोधी कॉलोनी, हौज खास, संसद मार्ग, आईएनए मार्केट, मंडी हाउस, कैलाश कॉलोनी, आईटीओ, साउथ एक्सटेंशन, मोती नगर, द्वारका, नोएडा सेक्टर 14 और सेक्टर 76, रोहिणी और गुरुग्राम में की जा रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>एक उपभोक्ता को सिर्फ एक किलो टमाटर&nbsp;</strong></p>
<p>दिल्ली में रियायती दरों पर टमाटर की बिक्री की शुरुआत पर केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि दिल्ली में टमाटर के दाम 80 रुपए किलो से ऊपर पहुंच गए हैं। इसलिए हमने दिल्ली के 18 सेंटर पर आज से 60 रुपए किलो में टमाटर बेचने की शुरुआत कर दी है। धीरे-धीरे अन्य क्षेत्रों में भी बिक्री शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि एक आदमी 1 किलो ही टमाटर ले सकता है। बाजार में टमाटर के दाम कम होने तक यह बिक्री जारी रहेगी।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a75945a8bee.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिल्ली-एनसीआर में 60 रुपये के रेट पर टमाटर की बिक्री शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a75945a8bee.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पेट्रोल में ब्लैंडिंग वाले हर तीसरे लीटर एथनॉल का उत्पादन मक्का से, एथेनॉल उत्पादन में खाद्यान्न की हिस्सेदारी हुई गन्ने से ज्यादा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/every-third-liter-of-ethanol-now-is-coming-from-maize-grain-has-surpassed-sugarcane-in-ethanol-production.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 29 Jul 2024 06:38:47 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/every-third-liter-of-ethanol-now-is-coming-from-maize-grain-has-surpassed-sugarcane-in-ethanol-production.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में पेट्रोल में ब्लैंडिंग के लिए उपयोग होने वाले एथेनॉल का हर तीसरी लीटर मक्का से आ रहा है। मक्का की हिस्सेदारी इसी दर से बढ़ी तो यह गन्ना जूस से सीधे और चीनी के सहउत्पाद शीरे (मोलेसेस) से बनने वाले एथेनॉल की मात्रा को पार कर जाएगी। इसके साथ ही चालू एथेनॉल सप्लाई साल (ईएसवाई) में नवंबर, 2023 से जून, 2024 के दौरान पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लैंडिंग 13 फीसदी तक पहुंच गई है।</p>
<p>मक्का के एथेनॉल में बढ़ते उपयोग के चलते ही मक्का के आयात की स्थिति बन गई है। हाल ही में पशुपालन एवं डेयरी सचिव अलका उपाध्याय ने खाद्य सचिव को पत्र लिखकर 35 लाख टन मक्का के शुल्क मुक्त आयात की सिफारिश की है। अभी तक की कुल 401 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति में 135 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन मक्का से हुआ है। वहीं, मक्का और मानव उपयोग के लिए अनुपयुक्त खाद्यान्न से उत्पादित हुए एथेनॉल की हिस्सेदारी 52 फीसदी पर पहुंच गई है।</p>
<p>इसके साथ ही खाद्यान्न से उत्पादित एथेनॉल की हिस्सेदारी गन्ने के जूस से सीधे और चीनी के सहउत्पाद बी-हैवी व सी-हैवी मोलेसेस की संयुक्त हिस्सेदारी से अधिक हो गई है। नवंबर, 2023 से जून, 2024 के दौरान कुल आपूर्ति हुए 401 करोड़ लीटर एथेनॉल का 52.7 फीसदी यानी 211 करोड़ लीटर एथेनॉल की तेल मार्केटिंग कंपनियों को आपूर्ति खाद्यान्न से उत्पादित एथेनॉल की हुई है। गन्ने के जूस और मोलेसेस से उत्पादित एथेनॉल की मात्रा इस अवधि के दौरान 190 करोड़ लीटर रही है। इसके पहले साल 2022-23 में खाद्यान्न से उत्पादित एथेनॉल की पेट्रोल में ब्लैंडिंग हिस्सेदारी 27.1 फीसदी रही थी।</p>
<p>केंद्र सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी को साल 2025 में 20 फीसदी पर ले जाने का लक्ष्य रखा है। देश भर में इसका औसत स्तर जून के अंत तक 13 फीसदी पर ही पहुंचा है। इसके पहले साल (2022-23) में ब्लैंडिंग का स्तर 12.1 फीसदी रहा था। वहीं 2021-22 में यह 10 फीसदी पर था।</p>
<p>चालू साल (2023-24) में यह नवंबर, 2023 में 10.2 फीसदी पर था, दिसंबर, 2023 में 11.2 फीसदी, जनवरी, 2024 में 12.2 फीसदी, फरवरी में 12.9 फीसदी, मार्च में 12.8 फीसदी, अप्रैल में 12.7 फीसदी, मई में 15.4 फीसदी और जून में 15.9 फीसदी रहा है।</p>
<p>सरकार ने 2018-19 में एथेनॉल ब्लैंडिंग प्रोग्राम (ईबीपी) को तेज करने के लिए कई अहम कदम उठाये। इसके तहत सरकार ने चीनी मिलों को बी-हैवी मोलेसेस और गन्ने के जूस से सीधे एथेनॉल बनाने पर अतिरिक्त इंसेंटिव दिया। इसके साथ ही डिस्टिलरी क्षमता स्थापित करने के लिए जहां मंजूरी प्रक्रिया को सरल किया गया वहीं इसके लिए कर्ज पर ब्याज छूट का भी प्रावधान किया गया। इसके चलते चीनी मिलों द्वारा नई डिस्टिलरी स्थापित करने के साथ ही क्षमता में भारी बढ़ोतरी की गई। वहीं खाद्यान्न आधारित डिस्टीलरी को भी बढ़ावा दिया गया और उसी का नतीजा है कि चालू एथेनॉल आपूर्ति साल में जून के अंत तक ईबीपी के लिए आपूर्ति किया गया हर तीसरा लीटर एथेनॉल मक्का से आ रहा है। साथ ही चीनी मिल कंपनियों ने शीरे की आपूर्ति नहीं होने वाले समय में कई बड़े चीनी मिल ग्रुप्स ने डिस्टीलरी में खाद्यान्न को सप्लीमेंटरी फीडस्टॉक के रूप में उपयोग करने का प्रावधान भी किया है। जिनमें त्रिवेणी इंजीनियरिंग, डीसीएम श्रीराम, धामपुर शुगर मिल्स, बलरामपुर चीनी और ईआईडी पैरी प्रमुख हैं।</p>
<p>एथेनॉल उत्पादन के लिए डिस्टीलरीज को भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से डेमेज्ड और ब्रोकन चावल मिल रहा था। लेकिन जुलाई, 2023 में एफसीआई ने इसे बंद कर दिया। इसके चलते अब कंपनियां को खुले बाजार से खाद्यान्न खरीद रही हैं। वहीं चीनी उत्पादन में कमी की आशंका के चलते सरकार ने दिसंबर में गन्ने के जूस और बी-हैवी मोलेसेस से एथेनॉल बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। बी-हैवी मोलोसेस के लिए बाद में कुछ छूट दी गई।</p>
<p>इस स्थिति के चलते ही मक्का से बनने वाले एथेनॉल की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी हुई। वहीं सरकार ने मक्का से बनने वाले एथेनॉल की कीमत एक्स डिस्टीलरी कीमत को बढ़ाकर 71.86 रुपये प्रति लीटर कर दिया। वहीं सी-हैवी मोलेसेस से बनने वाले एथेनॉल की कीमत को 56.28 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 60.73 रुपये प्रति लीटर, बी-हैवी मोलेसेस के लिए कीमत को 65.61 रुपये प्रति लीटर डेमेज्ड ग्रेन के एथेनॉल की कीमत 64 रुपये प्रति लीटर कर दी।</p>
<p>मक्का का इस्तेमाल पोल्ट्री फीड और पशु आहार के अलावा एथेनॉल उत्पादन में भी होता है। पोल्ट्री इंडस्ट्री का मानना है कि इस साल देश में मक्का उत्पादन 360 लाख टन के आसपास रहेगा जबकि एथेनॉल ब्लेंडिंग सहित मक्का की कुल आवश्यकता 410 लाख टन है। इसमें से करीब 234 लाख टन मक्का की आवश्यकता लाइवस्टॉक फीड इंडस्ट्री को है। इस तरह देश में उत्पादित करीब 60 फीसदी से अधिक मक्का का इस्तेमाल पोल्ट्री और फीड इंडस्ट्री में किया जाता है।</p>
<p>पिछले दो साल से देश में मक्का की बुवाई का क्षेत्र 107 लाख हेक्टेयर के आसपास स्थिर रहा है जबकि मक्का का उत्पादन 2022-23 में 380 लाख टन से घटकर 2023-24 में 357 लाख टन रह गया। इस प्रकार मक्का की पैदावार 35.45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से घटकर 33.21 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रह गई है। पिछले साल मक्का उत्पादक राज्यों में कमजोर मानसून और बारिश में कमी के चलते मक्का की उपज प्रभावित हुई। यही वजह है कि मक्का का उत्पादन घटा और मक्का आयात की नौबत आ गई है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65990d1f84983.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पेट्रोल में ब्लैंडिंग वाले हर तीसरे लीटर एथनॉल का उत्पादन मक्का से, एथेनॉल उत्पादन में खाद्यान्न की हिस्सेदारी हुई गन्ने से ज्यादा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65990d1f84983.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आईसीएआर किसान हित की आड़ में संदिग्ध समझौतों से बाज आए: भारतीय किसान संघ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/icar-should-desist-from-dubious-agreements-in-the-guise-of-farmers-interest-bharatiya-kisan-sangh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 28 Jul 2024 21:27:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/icar-should-desist-from-dubious-agreements-in-the-guise-of-farmers-interest-bharatiya-kisan-sangh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय किसान संघ की ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित अखिल भारतीय प्रबंध समिति की दो दिवसीय बैठक में <strong>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)</strong> के निजी कंपनियों के साथ संदिग्ध समझौतों पर आपत्ति जताते हुए एक <strong>प्रस्ताव</strong> पास किया गया। संगठन ने आईसीएआर के इन समझौतों को निरस्त कर इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।&nbsp;</p>
<p>भारतीय किसान संघ की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में किसान हितैषी बीज कानून तत्काल बनाने पर भी प्रस्ताव पारित किया गया और कृषि लागत कम करने पर मंथन हुआ। <span>बीज कानून संबधी प्रस्ताव को अखिल भारतीय मंत्री बाबूभाई पटेल तथा आईसीएआर संबधी प्रस्ताव डॉ. सोमदेव शर्मा ने प्रबंध समिति बैठक में रखा।</span></p>
<p>भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री <strong>मोहिनी मोहन मिश्र</strong> ने बताया कि केंद्र सरकार के अधीन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद कृषि क्षेत्र की सर्वोच्च सार्वजनिक कृषि शिक्षा, शोध एवं प्रचार की संस्था है। जिसमें देश भर में 731 कृषि विज्ञान केंद्र का बड़ा नेटवर्क है। इसके बावजूद भी 2023 से लगातार निजी कंपनियों जैसे <strong>ऐमाजोन, धानुका, बायर, कोरोमंडल</strong> आदि से कृषि शोध, सलाह, तकनीकी मार्गदर्शन व कृषि उत्पाद का व्यापार जैसे विषयों पर लगातार समझौता कर रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>आईसीएआर के समझौतों पर उठाए सवाल</strong></p>
<p>मोहिनी मोहन मिश्र ने सवाल उठाया कि देश भर के किसानों, किसान संगठनों, कृषक उत्पादक समूह की उपेक्षा कर विदेशी कंपनियों को प्राथमिकता देकर समझौते करना क्या देश हित में है? कंपनियों के चयन में क्या प्रक्रिया, नियम, मापदण्ड अपनाये? जबकि संविधान अनुसार कृषि एक राज्य का विषय है। क्या समझौते के दस्तावेज सार्वजनिक किए गये हैं? आईसीएआर बायर कंपनी से क्या सीखेगा? इन समझौतों में यह स्पष्ट नहीं है कि किस समस्या को हल करने का प्रयास किया जा रहा है।&nbsp;</p>
<p>मिश्रा ने कहा कि देश के किसान को यह जानने का हक है कि आईसीएआर की क्या मजबूरी है कि कुछ चुनिंदा विदेशी कंपनियों से ही समझौता करना पड़ा। जो संस्थाएं हमारे कृषि क्षेत्र के आर्थिक और पर्यावरण संकट के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें ही हिस्सेदारी देना तर्कसंगत नहीं है। इनका उद्देश्य मात्र मुनाफा कमाना है।&nbsp;</p>
<p><b>जवाबदेही का मुद्दा</b></p>
<p>भारतीय किसान संघ की ओर से पारित प्रस्ताव में चिंता जताई गई कि आईसीएआर भारत की जनता के प्रति जबाबदेह है। यदि आईसीएआर कृषि मंत्रालय द्वारा तय मापदंडों को ताक पर रखकर निर्णय ले रही है तो देश का कृषि मंत्रालय अनभिज्ञ क्यों है? भारतीय किसान संघ ने आईसीएआर को सुझाव दिया कि किसानों के लिए नीतिगत निर्णय लेने से पहले देश के सभी कृषि हितधारकों, किसान संगठनों से चर्चा कर सहमति बनाकर किसान हित में नीति निर्धारित करें।&nbsp;</p>
<p><strong>समझौते निरस्त करने की मांग</strong></p>
<p>भारतीय किसान संघ ने प्रस्ताव पास कर आईसीएआर द्वारा किए गये संदिग्ध समझौतों को निरस्त करने तथा समझौतों की प्रतियां व पायलट प्रोजेक्ट की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग रखी है। साथ ही इसकी विस्तृत जांच कर इसमें शामिल देश-विरोधी अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही की जाए तथा केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र के सार्वजनिक शोध संस्थानों के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रावधान करे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_66a66c1326d68.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>किसान हितैषी बीज कानून पर प्रस्ताव</strong></p>
<p>भारतीय किसान संघ की बैठक में किसान हितैषी बीज कानून तत्काल बनाने का प्रस्ताव पास किया गया। सही बीज कानून न होने के कारण नकली, अप्रमाणिक व अनाधिकृत बीज धड़ल्ले से बाजार में चल रहे हैं। इन बीजों के कारण किसानों का भारी नुकसान हो रहा है। मूल्य नियंत्रण न होने के कारण किसानों की लागत में बेतहाशा वृद्वि हो रही है। 15 हजार करोड़ के बीज बाजार पर किसान की निर्भरता बढ़ रही है। इसलिए केंद्र सरकार से आग्रह किया कि किसान के शोषण को रोकने के लिए सरकार तुरंत कानून बनाए। जिससे बीज किफायती मूल्यों पर उपलब्ध हो। गलत बीज, नकली बीज बनाने वाली कंपनियों के लिए कड़े दंड का विधान हो और किसानों को अच्छी गुणवत्ता के बीज उचित मूल्य पर मिल सकें।&nbsp;</p>
<p><strong>कृषि लागत कम करने पर मंथन</strong></p>
<p>भारतीय किसान संघ की बैठक में किसानों की कृषि लागत कम करने पर भी मंथन हुआ। देश भर से आए किसानों ने सुझाव रखे कि सरकार को किसान सम्मान निधि में इजाफा कर किसान को आर्थिक मदद देनी चाहिए। कृषि आदानों पर जीएसटी कम करने की मांग भी किसानों द्वारा रखी गई। किसानों ने खाद सब्सिडी के नाम पर कंपनीयों को दी जाने वाली सब्सिडी किसानों को देने, सस्ती बिजली, पानी देनेेे की मांग को रखा।</p>
<p>बैठक में देश भर के दो सौ से अधिक किसान प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष बद्रीनारायण चौधरी, कार्यकारी अध्यक्ष रामभरोस वासोतिया, महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र, संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी, महिला आयाम प्रमुख मंजू दीक्षित, मंत्री वीणा सतीश और सुशीला सिंह उपस्थिति रहे।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a66ae73ac70.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आईसीएआर किसान हित की आड़ में संदिग्ध समझौतों से बाज आए: भारतीय किसान संघ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एमएसपी के मुद्दे पर कृषि मंत्री का विपक्ष पर पलटवार, दिखाया यूपीए का कैबिनेट नोट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-minister-hits-back-at-congress-over-msp-puts-upa-cabinet-note-on-table.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 27 Jul 2024 17:51:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-minister-hits-back-at-congress-over-msp-puts-upa-cabinet-note-on-table.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसानों के मुद्दों पर संसद में खूब बहस छिड़ी है। कांग्रेस और विपक्षी दल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर सरकार को घेरने में जुटे हैं। वहीं, विपक्ष पर पलटवार करते हुए केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यूपीए सरकार की याद दिलाई जिसने <span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">स्वामीनाथन कमेटी की लागत पर डेढ़ गुना एमएसपी देने की सिफारिश को खारिज कर दिया था। उन्होंने विपक्ष पर किसानों के नाम पर केवल राजनीति करने का आरोप लगाया।&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p>शुक्रवार को राज्यसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला। कृषि मंत्री ने कहा कि स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट में जब यह कहा गया था कि लागत पर 50 फीसदी मुनाफा देकर समर्थन मूल्य घोषित करना चाहिए, तब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। उन्होंने एमएसपी को उत्पादन लागत से 50 फीसदी अधिक तय करने की सिफारिश को स्वीकार नहीं किया था। यूपीए के मंत्रियों ने भी एमएसपी को खारिज करने वाले बयान दिए थे।&nbsp;</p>
<p><strong>यूपीए का कैबिनेट नोट&nbsp;</strong></p>
<p>कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यूपीए सरकार के समय <strong>28 जुलाई, 2007</strong> का एक कैबिनेट नोट सदन के सामने रखते हुए एमएसपी को लेकर कांग्रेस की नीति पर सवाल उठाये। कैबिनेट नोट के अनुसार, उपज लागत पर डेढ़ गुना एमएसपी तय करने की राष्ट्रीय किसान आयोग की सिफारिश को यूपीए सरकार ने इस आधार पर खारिज कर दिया था कि लागत पर कम से कम 50 फीसदी की वृद्धि निर्धारित करने से<strong> मंडी में विकृति</strong> आ सकती है। विपक्ष को घेरते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इन्होंने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश को स्वीकार करने से इंकार कर दिया था।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_66a4e6271d3fa.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>याद दिलाए यूपीए के मंत्रियों के बयान&nbsp;</strong></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने यूपीए सरकार के तत्कालीन मंत्रियों शरद पवार, कांतिलाल भूरिया और केवी थॉमस के एमएसपी को लेकर दिए गये बयानों का भी जिक्र किया। कृषि मंत्री ने कहा कि यूपीए सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को खारिज कर दिया था। तत्कालीन कृषि राज्य मंत्री कांतिलाल भूरिया ने कहा था कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा था कि सरकार सीएसीपी की सिफारिशों के आधार पर एमएसपी तय करती है और यह पहचानने की आवश्यकता है कि उत्पादन लागत और एमएसपी के बीच कोई आंतरिक संबंध नहीं हो सकता है।</p>
<p>कृषि मंत्री ने कहा कि 2010 में यूपीए सरकार ने <strong>"काउंटर-प्रोडक्टिविटी"</strong> का हवाला देते हुए स्वामीनाथन आयोग की प्रमुख सिफारिश को खारिज कर दिया था और तर्क दिया था कि यह बाजार को विकृत कर देगा।&nbsp;तब खाद्य मंत्री रहे केवी थॉमस का जवाब था कि इस सिफारिश को सरकार ने स्वीकार नहीं किया है क्योंकि एमएसपी की सिफारिश कृषि लागत और मूल्य आयोग द्वारा वस्तुनिष्ठ मानदंड होने के आधार पर प्रासंगिक कारकों के विचार पर की जाती है।</p>
<p><strong>विपक्ष पर साधा निशाना</strong></p>
<p>कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि ये किसान के नाम पर केवल राजनीति करना चाहते हैं और देश को अराजकता में झोंकना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि खेती को लाभ का धंधा बनाने में वे कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अधिकतम एमएसपी पर खरीद हुई है। इस साल तुअर, मसूर और उड़द किसान जितनी भी पैदा करेगा, सरकार खरीदेगी। समृद्धि पोर्टल बनाया है। किसान रजिस्ट्रेशन करवाए, उसकी पूरी उपज सरकार खरीदेगी। कृषि मंत्री ने कहा कि आंकड़े गवाह हैं कि जब यूपीए सरकार थी, तब खरीदी कितनी होती थी और जब हमारी सरकार है, तब कितनी खरीदी होती है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr" style="text-align: left;">किसानों के नाम पर विपक्ष सिर्फ राजनीति कर रहा है।<br /><br />स्वामीनाथन कमेटी ने लागत पर 50% मुनाफा देकर समर्थन मूल्य की सिफारिश की, लेकिन यूपीए सरकार ने इसे खारिज किया।<br /><br />आदरणीय प्रधानमंत्री श्री <a href="https://twitter.com/narendramodi?ref_src=twsrc%5Etfw">@narendramodi</a> जी के नेतृत्व में खेती को लाभ का धंधा बनाने में और किसानों की आमदनी दोगुनी करने&hellip; <a href="https://t.co/IIGY8UYhHW">pic.twitter.com/IIGY8UYhHW</a></p>
&mdash; Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) <a href="https://twitter.com/ChouhanShivraj/status/1816796351457305007?ref_src=twsrc%5Etfw">July 26, 2024</a></blockquote>
<p>
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</p>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a4df88b69a7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एमएसपी के मुद्दे पर कृषि मंत्री का विपक्ष पर पलटवार, दिखाया यूपीए का कैबिनेट नोट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ बुवाई 74 फीसदी पूरी, तिलहन&amp;#45;दलहन में बढ़ोतरी, धान का क्षेत्र मामूली कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sowing-of-kharif-crops-is-74-percent-complete-paddy-acreage-reduced-due-to-less-rain.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 27 Jul 2024 15:05:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sowing-of-kharif-crops-is-74-percent-complete-paddy-acreage-reduced-due-to-less-rain.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में खरीफ फसलों की बुवाई लगातार जारी है। <strong>खरीफ फसलों की बुवाई</strong> का कार्य अब तक 74 फीसदी पूरा हो चुका है। <strong>दलहन और तिलहन</strong> फसलों के रकबे में इस वर्ष जहां बढ़ोतरी हुई है। वहीं, कम बारिश के बारिश के कारण <strong>धान की बुवाई</strong> पर असर पड़ा है। पिछले साल के मुकाबले धान की बुवाई सुस्त दिख रही है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों अनुसार, 26 जुलाई तक देश में 811.87 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है, जो पिछसे साल की तुलना में 18.24 फीसदी अधिक है। पिछले साल इस समय तक 793.63 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी।&nbsp;</p>
<p><strong>धान, कपास, जूट का रकबा घटा&nbsp;</strong></p>
<p>आंकड़ों के अनुसार, 26 जुलाई तक देश में <strong>धान की बुवाई</strong> 215.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है, जो पिछले साल की तुलना में कम है। पिछले साल इस समय तक 216.39 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई हुई थी। धान के अलावा जूट और कपास के रकबे में भी गिरावट आई है। अब तक 5.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में <strong>जूट की बुवाई</strong> हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जूट की बुवाई हुई थी। <strong>कपास की बुवाई</strong> अब तक 105.73 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक कपास का रकबा 113.54 लाख हेक्टेयर क्षेत्र था।&nbsp;</p>
<p><strong>दलहन और तिलहन के रकबे में बढ़ोतरी</strong></p>
<p>इस वर्ष दलहन और तिलहन के रकबे में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। यही वजह है कि पिछले साल के मुकाबले खरीफ फसलों की बुवाई इस वर्ष आगे है। आंकड़ों के अनुसार, 26 जुलाई तक देश में 102.03 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में <strong>दलहन की बुवाई</strong> हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक 89.41 लाख हेक्टेयर में दलहन की बुवाई हुई थी। दालों में सबसे ज्यादा बुवाई अरहर की हुई है। <strong>अरहर की बुवाई</strong> अब तक 38.53 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है, जो पिछले साल इस समय तक 28.73 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई थी। <strong>मूंग की बुवाई </strong>भी पिछसे साल की तुलना में आगे है। अब तक 30.37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मूंग की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले साल इस समय तक 27.01 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई थी। वहीं, उड़द की बुवाई पिछले साल की तुलना में पिछड़ी है। अब तक 23.12 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में <strong>उड़द की बुवाई</strong> हो चुकी है, जो पिछले साल इस समय तक 23.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई थी।&nbsp;</p>
<p>26 जुलाई तक देश में 171.67 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में <strong>तिलहन की बुवाई</strong> हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक 165.37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तिलहन फसलों की बुवाई हुई थी। <strong>मूंगफली की बुवाई</strong> अब तक 41.03 लाख हेक्टेयर क्षेत्र, <strong>सोयाबीन की बुवाई</strong> 121.73 लाख हेक्टेयर क्षेत्र,<strong> सूरजमुखी की बुवाई</strong> 0.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र और <strong>तिल की बुवाई</strong> 7.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है। &nbsp;</p>
<p>श्री अन्न एवं मोटे अनाज की बुवाई भी पिछले वर्ष की तुलना में आगे है। 26 जुलाई तक देश में 153.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में श्री अन्न की बुवाई हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक 145.76 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में श्री अन्न की बुवाई हुई थी।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a4bb7d32827.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ बुवाई 74 फीसदी पूरी, तिलहन-दलहन में बढ़ोतरी, धान का क्षेत्र मामूली कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर पश्चिम भारत में 16 फीसदी कम बारिश, किसान परेशान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-rain-in-north-west-india-is-16-percent-less-farmers-worried-imd-monsoon-prediction.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 26 Jul 2024 12:30:09 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-rain-in-north-west-india-is-16-percent-less-farmers-worried-imd-monsoon-prediction.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देशभर में मानसून की दस्तक को अब करीब 2 महीने होने को है, लेकिन इसके बाद भी देश कई हिस्सों में बारिश नहीं होने से सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। बारिश नहीं होने से खेती-किसानी सबसे ज्याद प्रभावित हो रही है। खासकर उत्तर पश्चिम भारत और उत्तर पूर्व भारत के किसान बारिश नहीं होने से काफी परेशान हैं। देशभर में 1 जून से 25 जुलाई तक भले ही सामान्य से 2 फीसदी अधिक बारिश हो चुकी हो, लेकिन उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है। जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व और उत्तर पूर्व भारत में 25 जुलाई तक 15 फीसदी कम बारिश हुई है। जबकि, उत्तर पश्चिम भारत में मानसून के बादल 16 फीसदी कम बरसे हैं।&nbsp;</p>
<p>उत्तर पश्चिम भारत की बात करें तो यहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 15 फीसदी, हरियाणा-चंडीगढ़ और दिल्ली में 39 फीसदी, पंजाब में 44 फीसदी, हिमाचल प्रदेश में 38 फीसदी, उत्तराखंड में 2 फीसदी, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 33 फीसदी, पश्चिम राजस्थान में 2 फीसदी और &nbsp;पूर्वी राजस्थान में 3 फीसदी कम बारिश हुई है। कुछ ऐसा ही हाल पूर्व और उत्तर पूर्व भारत का भी है। यहां, अरुणाचल प्रदेश में 11 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 68 फीसदी, &nbsp;झारखंड में 46 फीसदी और बिहार में 30 फीसदी कम बारिश हुई है। मध्य और दक्षिण भारत की बात करें तो इन क्षेत्रों में इस वर्ष मानसून काफी अच्छा रहा है। मध्य भारत में 25 जुलाई तक सामान्य से 15 फीसदी और दक्षिण भारत में सामान्य से 25 फीसदी अधिक बारिश हो चुकी है। &nbsp; &nbsp;</p>
<p>देश के कई क्षेत्रों में आज भी किसान खेती-बाढ़ी के लिए बारिश के पानी पर निर्भर हैं। लेकिन, बारिश नहीं होने से उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। देश में इस साल मानसून की शुरुआत काफी अच्छी रही। मध्य और दक्षिण भारत में जमकर मानसून के बादल बरसे। लेकिन, उत्तर और पूर्वोत्तर भारत की तरफ आते-आते मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई थी। जिसका प्रभाव अब ज्यादा देखने को मिल रहा है और भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के आंकड़े भी इस बात की तस्दीक कर रहे हैं।</p>
<p>मौसम विभाग की मानें तो बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओं के कमजोर पड़ने से उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में कम बारिश हो रही है। इन क्षेत्रों में अब तक जितनी भी बारिश हुई है वह अरब सागर से आने वाली हवाओं के कारण हुई है। हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी फिर सक्रिय होने से अच्छी बारिश होने की संभावना है।</p>
<p><strong>इन राज्यों में होगी बारिश&nbsp;</strong></p>
<p>आईएमडी के डेली बुलेटिन के अनुसार, 27 से 31 जुलाई तक मध्य महाराष्ट्र, कोंकण, गोवा, छत्तीसगढ़, विदर्भ, सौराष्ट्र, कच्छ, मध्य प्रदेश, गुजरात क्षेत्र, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा-चंडीगढ़, पंजाब, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश होने की संभावना है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a359754c546.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर पश्चिम भारत में 16 फीसदी कम बारिश, किसान परेशान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a359754c546.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[संसद में सुरजेवाला ने सरकार को घेरा, किसानों से बदला लेने का आरोप लगाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/randeep-surjewala-raised-issue-of-msp-in-parliament-said-msp-has-now-become-maximum-suffering-for-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 25 Jul 2024 17:31:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/randeep-surjewala-raised-issue-of-msp-in-parliament-said-msp-has-now-become-maximum-suffering-for-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राज्यसभा में गुरुवार को बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने केंद्र सरकार को जमकर निशाना साधा। सुरजेवाला ने सरकार के बजट को किसान विरोध बताया और सरकार पर किसानों से बदला लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज देश के अन्नदाता ने जब 400 पार को 240 पर लाकर खड़ा कर दिया है, तो सरकार बजट के जरिए किसानों से बदला ले रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के किसानों से दो वादे किए थे। पहला वादा था किसानों को लागत पर 50 फीसदी मुनाफा मिलेगा। यानी इनपुट कॉस्ट, फैमिली लेबर, जमीन की किराया और उपकरणों की कीमत पर 50 फीसदी मुनाफा मिलेगा, यही एमएसपी होगी। दूसरा वादा था कि 2022 तक किसान की आय दोगुनी हो जाएगी।</p>
<p>सुरजेवाला ने कहा कि क्या 2024 का बजट और सरकार इन वादों पर खरी उतरी है। इसका हल बड़ा सीधा था, या तो सरकार एमएसपी बढ़ाती, फसल की खरीद करती, किसान की आय दोगुनी हो जाती। या सरकार प्रति एकड़ उत्पादन बढ़ाती, जिससे किसाना की आय दोगुनी हो जाती है। लेकिन, क्या ये हुआ, सवाल यह है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में पैरा चार में कहा, "अन्न्दाता के लिए हमने एक महीने पहले सभी मुख्य फसलों के लिए उत्तम न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करके, लागत पर 50 फीसदी मार्जन देने का वादा पूरा किया।" उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने संसद में सरेआम झूठ बोला है। इससे बड़ा झूठ कोई हो नहीं सकता। सच ये है कि एक भी फसल ऐसी नहीं जिसके लिए लागत पर 50 फीसदी मुनाफा दिया गया हो।</p>
<p>सुरजेवाला ने कहा कि <span>कृषि लागत और मूल्य आयोग (</span>सीएसीपी) की रिपोर्ट के अनुसार, खरीफ 2024-25 में धान के लिए सी2+ 50% 3012 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए था, लेकिन सरकार ने दिया 2300 रुपये प्रति क्विंटल, जो 700 रुपये कम है। इसी तरह, अन्य फसलों के लिए भी सी2+50% नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि मैं वित्त मंत्री ने पूछना चाहता हूं की वह एक फसल बता दें, जिस पर सरकार ने लागत पर 50 फीसदी मुनाफा पर एमएसपी दिया हो। रिपोर्ट के मुताबिक, एक भी फसल ऐसी नहीं जिस पर किसानों को फायदा मिला हो। यानी वित्त मंत्री ने सरेआम पटल पर झूठ बोला।&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">राज्यसभा में बजट पर चर्चा के दौरान श्री <a href="https://twitter.com/rssurjewala?ref_src=twsrc%5Etfw">@rssurjewala</a> का वक्तव्य .. <a href="https://twitter.com/hashtag/Budget?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Budget</a> <a href="https://t.co/vgwBIA0M3b">https://t.co/vgwBIA0M3b</a></p>
&mdash; INC TV (@INC_Television) <a href="https://twitter.com/INC_Television/status/1816375694206861341?ref_src=twsrc%5Etfw">July 25, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>सुरजेवाला ने कहा कि सरकार एमएसपी तो तय करती है, लेकिन एमएसपी पर फसल नहीं खरीदती। <span>मोदी सरकार में एमएसपी अब "मैक्सिमम सफरिंग फॉर फार्मर" बन गया है। </span>उन्होंने कृषि मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में देश में गेहूं, तिहलन और दालों का उत्पादन बड़े पैमाने पर हुआ। लेकिन, सरकार ने उत्पादन के मुकाबले आधी खरीद भी नहीं की।&nbsp;उन्होंने कहा कि एक ओर तो सरकार एमएसपी देने का वादा करती है और दूसरी ओर किसानो से एमएसपी पर खरीद ही नहीं होती। किसानों के साथ इसे बड़ा अन्नया क्या हो सकता है।</p>
<p>सुरजेवाला ने किसानों के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि&nbsp;<span>आज देश के 35 फीसदी से अधिक किसान पीएम किसान सम्मान निधि से वंचित हैं। साल 2018 की कृषि जनगणना के मुताबिक, देश में 14.64 करोड़ किसान थे। लेकिन जब योजना शुरू हुई तो केवल 11 करोड़ किसानों को किस्त दी गई। यानी पहले दिन ही 3 करोड़ से ज्यादा किसान इस योजना से बाहर कर दिए गए। 2021-22 में 10.79 करोड़ किसानों को यह किस्त दी गई। बीते 8 जून को इसकी 17वीं किस्त 9.26 करोड़ किसानों को दी गई। यानी देश के कुल 5.17 करोड़ किसान सम्मान निधि से वंचित हैं। </span>&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ संसद में सुरजेवाला ने सरकार को घेरा, किसानों से बदला लेने का आरोप लगाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[संसद भवन में राहुल गांधी से मिल आए किसान नेता, मिला यह भरोसा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rahul-gandhi-meets-farmer-leaders-says-msp-law-is-farmers-right-will-put-pressure-on-the-government.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 24 Jul 2024 16:05:49 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
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        <description><![CDATA[ <p>कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को संसद भवन परिसर में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के नेताओं से मुलाकात की। यह बैठक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) गारंटी कानून सहित अन्य मांगों को लेकर पिछले पांच महीनों से प्रदर्शन कर रहे किसानों के मुद्दों पर केंद्रित थी। बैठक में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक के 12 किसान नेता शामिल थे।&nbsp;</p>
<p>कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा, गुरजीत सिंह औजला, धर्मवीर गांधी, अमर सिंह, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, जय प्रकाश और जयराम रमेश भी बैठक में मौजूद थे। किसान प्रतिनिधिमंडल में जगजीत सिंह डल्लेवाल, सरवन सिंह पंढेर, कुर्बुरु शांताकुमार, अभिमन्यु कोहाड़, सुरजीत फूल, पीआर पाण्डेयन, लखविंदर सिंह औलख, अमरजीत मोहड़ी, रमनदीप मान, तेजवीर सिंह, वेंकेटेश्वर राव और गुरामणित मांगत मौजूद थे।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>किसान नेताओं ने राहुल गांधी को अपने मुद्दों से अवगत कराया और उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा। बैठक के बाद किसान मजदूर मोर्चा के नेता <strong>सरवन सिंह पंढेर </strong>ने कहा, "हम आज लोक सभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी से मिलने आए थे। उन्होंने पूरी तरह हमारी बात सुनी है। हमने उन्हें एमएसपी लीगल गारंटी सहित अपनी अन्य मांगों के बारे में बताया। विपक्षी दलों ने हमें भरोसा दिलाया है कि वे संसद में इन मुद्दों को उठाएंगे और इन्हें पूरा करने की कोशिश करेंगे।"&nbsp;</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के नेता <strong>जगजीत सिंह डल्लेवाल </strong>ने कहा, "हरियाणा सरकार ने किसानों पर जो अत्याचार किए, गोलियां चलाई, हमने उस पर भी राहुल गांधी से चर्चा की। वह किसानों की आवाज बनकर हमारी मांगें संसद में रखेंगे। हमें उम्मीद है कि इस मामले में निष्पक्ष और इंडिपेंडेंट इन्वेस्टिगेशन होगी।"</p>
<p>मुलाकात के दौरान <strong>राहुल गांधी</strong> ने किसान नेताओं को आश्वासन दिया कि फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी किसानों का अधिकार है और इंडिया गठबंधन यह सुनिश्चित करेगा कि यह हक उन्हें मिले। किसान नेताओं कोराहुल गांधी ने भरोसा दिलाया कि संसद में किसानों की आवाज गूंजेगी। वह इंडिया गठबंधन के अन्य सहयोगियों के साथ इस मुद्दे को उठाएंगे और एमएसपी की कानूनी गारंटी के लिए सरकार पर दबाव डालेंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>संसद भवन पहुंचे किसान नेता</strong></p>
<p>लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और किसान नेताओं की मुलाकात के पहले विवाद भी हुआ। राहुल गांधी ने संसद में अपने कार्यालय में किसान नेताओं को मिलने बुलाया था। लेकिन उन्हें संसद परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया और गेट पर ही रोक दिया। जब किसानों से मिलने के लिए राहुल गांधी ने बाहर आने की बात कही तो अंततः किसान नेताओं को संसद परिसर के अंदर जाने की अनुमति दी गई, जहां उन्होंने राहुल गांधी के साथ विस्तृत बैठक की।&nbsp;<span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"></span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ संसद भवन में राहुल गांधी से मिल आए किसान नेता, मिला यह भरोसा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बजट को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन, खड़गे बोले&amp;#45; सिर्फ दो राज्यों को &amp;apos;पकोड़ा&amp;apos;]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/opposition-protests-in-parliament-against-the-union-budget-2024-25-mallikarjun-kharge-said-pakora-for-only-two-states.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 24 Jul 2024 14:35:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/opposition-protests-in-parliament-against-the-union-budget-2024-25-mallikarjun-kharge-said-pakora-for-only-two-states.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संसद के मानसून सत्र का आज तीसरा दिन हंगामेदार रहा। बीते मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले बजट का आज जोरदार विरोध हुआ। संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के घटक दलों के सांसदों ने संसद भवन परिसर में बजट के खिलाफ प्रदर्शन किया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि बजट "भेदभावपूर्ण" है और इसमें "दूरदर्शिता" की कमी है। इस प्रदर्शन में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई अन्य विपक्षी सांसद शामिल हुए।&nbsp;</p>
<p>कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि भाजपा बुनियादी मुद्दों को हल करने में विफल रही है और बजट में उसकी "मजबूरी" दिख रही है। उन्होंने कहा, "पूरा देश बजट से परेशान है क्योंकि भाजपा उनके बुनियादी मुद्दों को हल करने में विफल रही है। इंडिया ब्लॉक बजट में किए गए अन्याय के खिलाफ विरोध कर रहा है।"</p>
<p>प्रदर्शन के बाद, राज्यसभा में बजट पर चर्चा शुरू हुई। विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बजट का विरोध किया। खड़गे ने आरोप लगाया कि यह बजट जनविरोधी है। उन्होंने कहा, "मोदी सरकार के बजट में किसी भी राज्य को कुछ नहीं मिला। बजट से 90 प्रतिशत देश गायब है। जिन राज्यों में लोगों ने भाजपा को नकारा है, उन राज्यों को बजट में कुछ नहीं दिया गया।"&nbsp;</p>
<p>खड़गे ने बिहार और तमिलनाडु को दिए गए विशेष पैकेज का भी विरोध किया और कहा, "सबकी थाली खाली है और दो राज्यों की थाली में 'पकोड़ा' और 'जलेबी' हैं। यह बजट सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने के लिए लाया गया है।"</p>
<p>दूसरी ओर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट को भेदभावपूर्ण बताने के विपक्ष के आरोपों को अपमानजनक बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दल लोगों को गलत धारणा देने का प्रयास कर रहे हैं और राज्यों को धन या योजनाएं आवंटित नहीं की गईं।&nbsp;<span>वित्त मंत्री ने जैसे ही विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देना शुरू की, विपक्ष नारेबाजी करता हुआ वॉकआउट कर गया।</span></p>
<p>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "आज, इंडिया जनबंधन के सांसदों के साथ संसद भवन के परिसर में एनडीए के 'कुर्सी बचाओ बजट' के विरुद्ध प्रदर्शन किया। यह बजट भारत के संघीय ढांचे की गरिमा पर आघात है - सत्ता बचाने के लोभ में देश के अन्य राज्यों की उपेक्षा है, उनके साथ पक्षपात है। इंडिया हर राज्य को समान न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाता रहेगा।"</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बजट को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन, खड़गे बोले- सिर्फ दो राज्यों को 'पकोड़ा' ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[घोषणाएं कई, पर्याप्त बजट नहीं! कैसे लगेगी कृषि क्षेत्र में लंबी छलांग?]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-budget-how-agriculture-sector-keep-pace-with-developed-india-with-small-steps.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 24 Jul 2024 12:54:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-budget-how-agriculture-sector-keep-pace-with-developed-india-with-small-steps.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024-25 का बजट पेश करते समय विकसित भारत की नौ प्राथमिकताओं में कृषि उत्पादकता और रिजिलिएंस को पहले स्थान पर रखा है। इसके तहत जिन कदमों को उठाया गया है वह विकसित भारत में कृषि की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित कर पाएंगे, कहना मुश्किल है। क्योंकि जो कदम इस बजट में कृषि क्षेत्र के लिए उठाये गये हैं वह एक निरतंतरता को दर्शाते हैं, न कि एक बड़े बदलाव को। इन कदमों से कृषि और सहयोगी क्षेत्र के कायाकल्प की संभावना नजर नहीं आती है। वित्त मंत्री ने कृषि और सहयोगी क्षेत्र के लिए जो 1.52 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया है, वह आंशिक बढ़ोतरी ही है और जबकि नई योजनाओं और घोषणाओं के लिए कोई बड़ा आवंटन बजट में नहीं है।</p>
<p>बजट में वित्त मंत्री ने कहा है कि कृषि शोध की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। इसके तहत उत्पादकता में वृद्धि और जलवायु अनुकूल किस्मों के शोध को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं, सार्वजनिक क्षेत्र के साथ ही निजी क्षेत्र को भी कृषि शोध के लिए फंड दिया जाएगा। लेकिन पूरे बजट में इस फंडिंग को लेकर स्पष्टता नहीं है। जहां तक कृषि शिक्षा और शोध विभाग के बजट की बात है तो इसके लिए 9941.09 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जो पिछले साल 9876 करोड़ रुपये था। इस तरह बिना किसी नये और बड़े फंड के कृषि अनुसंधान का कायाकल्प कैसे होगा? इसको लेकर बजट में चुप्पी है। जबकि यह बात अहम है। कृषि शोध के सिस्टम में सुधार के साथ ही बड़े स्तर पर संसाधनों की जरूरत है।</p>
<p>बजट में जलवायु अनुकूल और अधिक उपज वाली 109 किस्मों किस्मों को जारी करने की बात कही गई है। किसी भी नई किस्म को विकसित करने में चार से पांच साल लगते हैं। इसलिए या तो यह किस्में पहले तैयार हैं और उनको रिलीज किया जाना है अन्यथा इन पर अगर शोध अब शुरू होता है परिणाम आने में लंबा समय लगेगा। इसमें घोषणा में भी स्पष्ट नहीं है। जबकि यह महत्वपूर्ण विषय है। देश में बेहतर उपज वाली की किस्में नहीं होने से अधिकांश फसलों की हमारी औसत उत्पादकता वैश्विक स्तर पर उच्चतम उत्पादकता के आधा से भी कम है।</p>
<p>अगले दो साल में एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने की बात कही है। लेकिन प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की योजना के लिए बजट में 365 करोड़ रुपये का प्रावधान है जो पिछले साल 459 करोड़ रुपये था लेकिन वास्तव में केवल 100 करोड़ रुपये ही खर्च किये गये हैं। प्राकृतिक खेती और खाद्य सुरक्षा को लेकर देश में वैज्ञानिक समुदाय के बीच भी एकराय नहीं है। गत वर्षों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों का क्या परिणाम रहा है, इससे उत्पादन और किसानों की आय पर क्या असर पड़ा, इसकी जानकारी न बजट में दी गई और न ही कृषि मंत्रालय ने बताया है।</p>
<p>पिछले साल तीन साल में एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने की बात बजट में कही थी। वही बात इस बार भी दोहराई गई है। वित्त मंत्री दो साल पहले गंगा को दोनों तटों के की एक तय दूरी तक प्राकृतिक खेती की घोषणा कर चुकी है। बेहतर होगा कि आगे बढ़ने के पहले पुरानी घोषणाओं के नतीजों की समीक्षा की जाए।</p>
<p>टेक्नोलॉजी को लेकर जो कदम घोषित किये गये हैं वह अहम हैं। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीई) के उपयोग से कृषि में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के कुछ फायदे हो सकते हैं। लेकिन सवाल है कि डिजिटलीकरण की इस प्रक्रिया का मकसद क्या है? डिजिटल एग्रीकल्चर में किसानों के हित कैसे सुनिश्चित होंगे? अभी किसानों को हर सीजन में और अलग-अलग फसलों और योजनाओं के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने पड़ते हैं। कई किसान योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में डेटा का दुरुपयोग ना हो और डिजिटल डिवाइड ना बढ़े, यह भी सुनिश्चित करना होगा।</p>
<p>कृषि कर्ज की व्यवस्था के तहत किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) को बढ़ाने देने के लिए केसीसी बनाने की प्रक्रिया को कुछ स्थानों पर सरल किया जाएगा। लेकिन ब्याज दरों में कोई बदलाव इस बजट में नहीं किया गया है।</p>
<p>खाद्य तेलों और दालों में आत्मनिर्भरता के लिए मिशन शुरू करने की घोषणा की गई है। लेकिन इस मोर्चे पर पिछले कुछ बरसों में एमएसपी में बढ़ोतरी करने और बफर स्टॉक बनाये जैसे कदमों का फायदा नहीं मिल सका है। उम्मीद है मिशन मोड में काम करना बेहतर साबित हो। हम जहां दालों में आयात पर निर्भर है वहीं खाद्य तेलों की करीब 62 फीसदी जरूरत आयात से पूरी करते हैं। इससे आपूर्ति व कीमत दोनों मोर्चों पर मुश्किलें खड़ी होती हैं और जो पैसा हमारे किसानों की जेब में जाना चाहिए, उसका फायदा विदेशी किसान उठाते हैं।</p>
<p>सब्जियों की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के चलते भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार को महंगाई को लक्षित स्तर पर लाने में कामयाबी नहीं मिल रही है। टॉप जैसी स्कीम कामयाब नहीं रही है। ऐसे में सब्जियों के बेहतर उत्पादन, मार्केटिंग और भंडारण पर बजट की घोषणा सही दिशा में उठाया गया कदम है। लेकिन इसके लिए कितना बजट दिया है, यह नहीं बताया गया।</p>
<p>बजट में कृषि के सहयोगी क्षेत्रों डेयरी और फिशरीज के मामले में केवल झींगा उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के कदम उठाये गये हैं। इसका निर्यात 60 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच गया है लेकिन देश में दूध के उत्पादन का मूल्य कुल खाद्यान्न से अधिक हो गया है, उसको लेकर कोई नया कदम नहीं है। किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिए खाद्य प्रसंस्करण अहम है लेकिन इसका बजट भी पिछले साल से मामूली अधिक है और कोई नई योजना भी नहीं है।</p>
<p>किसानों को सहकारिता के फायदे के लिए नई नीति लाने की घोषणा की गई है। इसके लिए पिछली सरकार के दौरान सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी। इसके प्रावधानों के लिए नीति आने तक इंतजार करना होगा।</p>
<p>असल में इस साल बजट में कृषि और सहयोगी क्षेत्र के लिए कोई बड़े बदलाव या घोषणाएं नहीं हैं। कुछ छोटे और सांकेतिक कदम उठाने की बात है लेकिन उनके लिए भी बजट में कोई खास वित्तीय प्रावधान नहीं किया है। उर्वरक सब्सिडी पिछले साल से कम है क्योंकि वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतें कम हुई हैं। हम कह सकते हैं कि सरकार की विकसित भारत की नौ प्राथमिकताओं में कृषि पहले स्थान पर जरूर है लेकिन जिस तरह के संकेत आर्थिक सर्वे में दिये गये थे उस तरह के बड़े प्रावधान इस बजट में नहीं है। इस तरह कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार का एक और मौका सरकार ने गंवा दिया।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ घोषणाएं कई, पर्याप्त बजट नहीं! कैसे लगेगी कृषि क्षेत्र में लंबी छलांग? ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में मूंग खरीद को लेकर असमंजस की स्थिति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/there-is-confusion-among-farmers-regarding-moong-procurement-in-madhya-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 24 Jul 2024 12:23:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/there-is-confusion-among-farmers-regarding-moong-procurement-in-madhya-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में मूंग खरीद को लेकर किसानों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। पहले भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) ने मूंग उपार्जन की सीमा पूरी होने के बाद खरीद बंद करने के आदेश जारी किए थे। लेकिन, अब मध्य प्रदेश सरकार ने मूंग खरीद जारी रखने की घोषणा की है। इस संबंध में मध्य प्रदेश कृषि विभाग ने मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ को मूंग की खरीद जारी रखने को कहा है। सरकार के इस आदेश के बाद मूंग किसन असमंजस की स्थिति है। क्योंकि, सरकार ने भले ही खरीद जारी रखने को कहा है, लेकिन आदेश में मूंग उपार्जन की लिमिट का कोई जिक्र नहीं किया गया है। यानी प्रदेश में खरीद तो जारी रहेगी, लेकिन कितनी लिमिट तक यह तय नहीं है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_66a0a43230210.jpg" alt="" /><br />(मध्य प्रदेश कृषि विभाग द्वारा मूंग खरीद जारी रखने का आदेश)</p>
<p>एक ओर जहां मूंग उपार्जन की लिमिट तय नहीं होने से किसान दुविधा में है। वहीं, प्रदेश में मूंग खरीद को लेकर स्लॉट बुकिंग 22 जुलाई से बंद है। जिस वजह से किसान अपनी उपज बेचने को लेकर अपना स्लॉट बुक नहीं करवा पा रहे हैं। मध्यप्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष <strong>केदार शंकर सिरोही</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि प्रदेश सरकार के आदेश के बाद किसानों में असमंजस की स्थिति है। पहली बात यह कि सरकार ने मूंग उपार्जन की लिमिट तय नहीं की है। यानी खरीदी लंबे समय तक जारी नहीं रहेगी। दूसरी बात यह कि किसानों की स्लॉट बुकिंग नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि जब नेफेड ने खरीद बंद करने को कहा, तो किसानों ने इसका विरोध किया। जिसके बाद सरकार ने खरीद जारी रखने के आदेश जारी किए हैं। लेकिन, जब स्लॉट बुकिंग ही नहीं होगी, तो किसान अपनी उपज कैसे बेचेंगे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_66a0a493446d2.jpg" alt="" /><br />(नेफेड द्वारा मूंग खरीद बंद करने का आदेश)&nbsp;&nbsp;</p>
<p>केदार सिरोही ने कहा कि सरकार के इस फैसले से ऐसा प्रतीत होता है कि जिन किसानों के स्लॉट पहले बुक हो चुके थे, अब सिर्फ उन्हीं की उपज खरीदी जाएगी। इससे उन किसानों को नुकसान होगा, जो अपनी बची हुई फसल के लिए अभी तक स्लॉट बुक नहीं करवा पाए। क्योंकि, ओपन मार्केट में मूंग का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम है। ओपन मार्केट में मूंग का दाम 6500 से 8000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है। जबकि, <strong>मूंग का एमएसपी</strong> 8558 रुपये प्रति क्विंटल है। इससे किसानों को सीधा 2000 हजार रुपये तक का नुकसान होगा।&nbsp;</p>
<p>मध्य प्रदेश में मूंग खरीद शुरू होने के बाद से किसान कई तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। इससे पहले प्रदेश में मूंग खरीद की मात्रा को लेकर भी विवाद हुआ था। जिससे किसानों को नुकसान हो रहा था। हालांकि, सरकार ने बाद किसानों की मुख्य मांगों पर गौर करते हुए उन्हें थोड़ी राहत दी थी। वहीं, अब मूंग खरीद बंद होने से किसान एक बार फिर परेशान हो रहे हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में मूंग खरीद को लेकर असमंजस की स्थिति ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बजट से क्यों निराश हैं किसान संगठन? घोषणाओं पर उठाए सवाल, किसानों की अनदेखी का आरोप]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/why-are-farmer-organizations-disappointed-with-the-budget-raised-questions-on-the-announcements.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 23 Jul 2024 20:36:01 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/why-are-farmer-organizations-disappointed-with-the-budget-raised-questions-on-the-announcements.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गये केंद्रीय बजट को किसान संगठनों ने निराशाजनक करार देते हुए सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया है। किसान संगठनों ने बजट में एमएसपी की कानूनी गारंटी पर चुप्पी साधने, <span>पीएम-किसान की धनराशि न बढ़ाने</span>, <span>कई योजनाओं के बजट में कटौती और कृषि अनुसंधान के लिए प्राइवेट सेक्टर को फंडिंग को लेकर सरकार की आलोचना की है। </span></p>
<p>भारत किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता <strong>राकेश टिकैत</strong> ने कहा कि बजट ने किसानों को "खाली हाथ" छोड़ दिया है। न एमएसपी गारंटी कानून का जिक्र है, <span>न ही किसानों की कर्जमाफी का। कुल 48 लाख करोड रुपये के बजट में देश की अर्थव्यवस्था की धुरी किसानों के हिस्से में केवल 1.52 लाख करोड़ रुपये आए। देश की 65 प्रतिशत आबादी को सिर्फ 3 प्रतिशत बजट में सीमित कर दिया। यह ग्रामीण भारत के साथ सबसे बड़ा भेदभाव है। राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि सरकार जलवायु अनुकूल किस्मों और उत्पादकता बढ़ाने के नाम पर बड़े कॉरपोरेट्स को खेती में लेकर आना चाहती है।&nbsp;</span></p>
<p><span>राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक <strong>वीएम सिंह&nbsp;</strong>ने कहा कि किसानों की एक ही मांग है। अपनी उपज का वाजिब दाम चाहिए। एमएसपी की गारंटी चाहिए। किसानों जो चाहिए उसके लिए बजट में कुछ नहीं किया। ना ही किसान सम्मान निधि बढ़ाई। </span><span>सबको उम्मीद थी कि किसानों ने चुनाव में जो नाराजगी दिखाई है तो किसानों की बात मानी जाएगी। लेकिन बजट ने किसानों को निराश किया है।</span></p>
<p><strong>आशा-किसान स्वराज</strong> संगठन ने कृषि बजट के आवंटन में लगातार कमी को किसान विरोधी करार देते हुए कहा कि सरकार ने किसान आंदोलन और लोकसभा चुनाव के नतीजों से कोई सबक नहीं लिया है। आशा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बजट में ऐसे कोई ठोस कदम नहीं उठाए गये हैं जो कृषि को आर्थिक रूप से लाभकारी, <span>पर्यावरण के दृष्टि से टिकाऊ और सामाजिक रूप से न्यायसंगत बनाने की मंशा को दर्शाता हो।</span></p>
<p>आशा के सह-संयोजक <strong>किरण विस्सा</strong> ने कहा, "<span>बीते कई सालों में भाजपा/एनडीए सरकार एक तरफ तो बड़ी घोषणाएं करती है</span>, <span>वहीं दूसरी तरफ योजनाओं और किसानों के लिए वित्तीय प्रावधानों में कमी की जाती है।</span>&rdquo; <span>आशा ने आईसीएआर के बड़े कॉरपोरेट्स के साथ एमओयू और प्राइवेट सेक्टर को भी बजटीय सहायता देने की घोषणा पर सवाल उठाया है। साथ ही कृषि के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) योजना से वास्तविक किसानों के वंचित रह जाने की आशंका जताई है।&nbsp;</span></p>
<p>पिछले साल की बजट घोषणाओं को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। मिसाल के तौर पर, <span>पिछले साल बजट में <strong>प्राकृतिक खेती</strong> के लिए 459 करोड़ रुपये का बजट रखा था</span>, <span>जिसे संशोधित कर 100 करोड़ रुपये कर दिया। इस बार बजट में प्राकृतिक खेती के लिए 365 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। </span><span>पिछले साल बजट भाषण में तीन साल में एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने में मदद करने की घोषणा की गई थी जबकि इस बार अगले दो साल में एक करोड़ किसानों के प्राकृतिक खेती शुरू करने की बात कही गई है।&nbsp;</span></p>
<p><span>इसी तरह 10 हजार <strong>एफपीओ</strong> की स्थापना के लिए 202</span>3<span>-2</span>4<span> के बजट में </span>955<span> करोड़ रुपये का बजट था</span>, <span>जिसे घटाकर इस साल 581 करोड़ रुपये कर दिया है। अब तक कितने एफपीओ बने, एफपीओ से किसानों को कितना लाभ हुआ इसका बजट में कोई उल्लेख नहीं है।&nbsp;</span></p>
<p><span>किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) के नेता <strong>सरवन सिंह पंधेर</strong> ने बजट में कृषि क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बजट में न तो एमएसपी को कानूनी गारंटी देने और न ही किसानों की ऋण माफी के बारे में कुछ कहा गया है। पंधेर ने बजट को दिशाहीन और निराशाजनक करार देते हुए कहा कि इसमें कृषि क्षेत्र के लिए कोई विजन नहीं है।</span></p>
<p>भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता <strong>धर्मेंद्र मलिक</strong> ने कहा कि बजट से किसानो को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में लघु सीमांत किसानों को प्रीमियम से मुक्त किए जाने, <span>फसलों का लाभकारी मूल्य</span>, <span>सम्मान निधि में वृद्धि जैसे मुद्दों को छुआ तक नहीं है। मलिक ने कहा कि प्राकृतिक खेती की बात बेमानी है। इससे किसान को नहीं कंपनियों को लाभ हो रहा है।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बजट से क्यों निराश हैं किसान संगठन? घोषणाओं पर उठाए सवाल, किसानों की अनदेखी का आरोप ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ग्रामीण विकास: नहीं बढ़ा मनरेगा का बजट, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का बजट घटा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rural-development-mnrega-budget-did-not-increase-pradhan-mantri-gram-sadak-yojana-budget-decreased.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 23 Jul 2024 15:40:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rural-development-mnrega-budget-did-not-increase-pradhan-mantri-gram-sadak-yojana-budget-decreased.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संसद में वर्ष 2024-25 का आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ग्रामीण विकास के लिए 2.66 लाख करोड़ रुपये आवंटित करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पीएम आवास योजना के तहत तीन करोड़ अतिरिक्त घर बनाए जाएंगे।</p>
<p>ग्रामीण विकास विभाग का बजट गत वर्ष के संशोधित अनुमान 1.71 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.77 करोड़ रुपये किया गया है। लेकिन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम (मनरेगा) के बजट में गत वर्ष के संशोधित अनुमान 86 हजार करोड़ रुपये के मुकाबले कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इस साल भी मनरेगा के लिए 86 हजार करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। जबकि 2022-23 में मनरेगा का बजट 90.8 हजार करोड़ रुपये था जिसे घटाकर 2023-24 में 60 हजार करोड़ रुपये कर दिया था।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का चौथा चरण, लेकिन बजट घटा&nbsp;</strong>&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के चौथे चरण की शुरुआत की घोषणा करते वित्त मंत्री ने कहा कि 25 हजार ग्रामीण बस्तियों को हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी। हालांकि, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का बजट पिछले साल 19 हजार करोड़ रुपये के बजट अनुमान से करीब 37 फीसदी घटाकर इस साल 12 हजार करोड़ रुपये निर्धारित किया है। यह गत वर्ष पीएमजीएसवाई के संशोधित अनुमान 17 हजार करोड़ रुपये से भी कम है।</p>
<p><strong>तीन करोड़ अतिरिक्त आवास&nbsp;</strong></p>
<p>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पीएम आवास योजना के तहत तीन करोड़ अतिरिक्त घर बनाए जाएंगे। बजट में पीएम आवास योजना-ग्रामीण का बजट पिछले साल के बजट अनुमान के लगभग बराबर 54,500 करोड़ रुपये रखा गया है। हालांकि, यह गत वर्ष के संशोधित अनुमान 32 हजार करोड़ रुपये से करीब 70 फीसदी अधिक है।&nbsp;</p>
<p><strong>भू-अभिलेखों का</strong> <strong>डिजिटलीकरण </strong></p>
<p>बजट में भूमि से संबंधित कई सुधारों के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि के लिए विशिष्ट पहचान संख्या या 'भू-आधार' भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण का प्रस्ताव रखा है।&nbsp;वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इन भूमि सुधारों को लागू करने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम करेगी। अगले तीन वर्षों में इन सुधारों को पूरा करने के लिए राज्यों को प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता दी जाएगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ग्रामीण विकास: नहीं बढ़ा मनरेगा का बजट, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का बजट घटा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_669f853bd8f5c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्रीय बजट: 20 लाख युवाओं को स्किल ट्रेनिंग,  एक करोड़ को मिलेगा इंटर्नशिप का मौका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/employment-opportunities-for-youth-skill-training-for-20-lakh-internship-opportunity-for-1-crore-youth-in-union-budget-2024-25.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 23 Jul 2024 15:28:46 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/employment-opportunities-for-youth-skill-training-for-20-lakh-internship-opportunity-for-1-crore-youth-in-union-budget-2024-25.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2024-2025 के लिए केंद्र सरकार का बजट पेश किया। बजट में विशेष रूप से रोजगार, कौशल, एमएसएमई और मध्यम वर्ग पर ध्यान केंद्रित किया गया है। खास तौर पर रोजगार और कौशल को सरकार ने विशेष प्राथमिकता दी है। इसके लिए वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री पैकेज के तहत 5 योजनाओं की घोषणा की। जिन पर 5 साल में करीब दो लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। इन योजनाओं के जरिए सरकार 4.1 करोड़ युवाओं को रोजगार और कौशल के अवसर प्रदान करेगी। सरकार ने बजट में शिक्षा, रोजगार और कौशल के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।</p>
<p>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार प्रधानमंत्री पैकेज के हिस्से के रूप में &lsquo;रोजगार से जुड़े प्रोत्साहन&rsquo; के लिए 5 योजनाएं लागू करेगी। ये पहली बार काम करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित करेंगी। ईपीएफओ में नामांकन पर आधारित होंगी। साथ ही कर्मचारियों और नियोक्ताओं पर ध्यान केंद्रित करेंगी।</p>
<p><strong>पहली बार काम करने वालों को वेतन देगी सरकार</strong></p>
<p><strong>पहली योजना</strong> प्राइवेट सेक्टर में पहली बार काम करने वाले कर्मचारियों के लिए है। यह योजना सभी प्राइवेट सेक्टर्स में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों को सरकार एक महीने का वेतन प्रदान करेगी। ईपीएफओ में पंजीकृत पहली बार काम करने वाले कर्मचारियों को 3 किस्तों में एक महीने का वेतन दिया जाएगा, जो 15,000 रुपये तक होगा। इसके लिए कर्मचारी का वेतन एक लाख रुपये प्रति माह तक होना चाहिए। इस योजना से 210 लाख युवाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>विनिर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर होगी भर्ती &nbsp;</strong></p>
<p><strong>दूसरी योजना</strong> विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार के अतिरिक्त अवसर पैदा करने के साथ कर्मचारियों को प्रोत्साहित करेगी। बड़े पैमाने पर युवाओं की भर्ती की जाएगी। रोजगार के पहले 4 वर्षों में ईपीएफओ अंशदान के संबंध में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को सीधे निर्दिष्ट पैमाने पर प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। इस योजना से रोजगार में प्रवेश करने वाले 30 लाख युवाओं और उनके नियोक्ताओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>एंपलॉयर्स को प्रोत्साहित करेगी सरकार &nbsp;</strong></p>
<p><strong>तीसरी योजना</strong> एंपलॉयर्स (नियोक्ताओं) के लिए है। नियोक्ता-केंद्रित योजना सभी क्षेत्रों में अतिरिक्त रोजगार को कवर करेगी। सरकार प्रत्येक अतिरिक्त कर्मचारी के लिए ईपीएफओ अंशदान के लिए नियोक्ताओं को दो साल के लिए 3,000 रुपये प्रति माह तक की प्रतिपूर्ति करेगी। इस योजना से 50 लाख लोगों को अतिरिक्त रोजगार मिलने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>महिलाओं को कार्यक्षेत्र में मिलेंगी सुविधाएं&nbsp;</strong></p>
<p>सरकार उद्योग के सहयोग से कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावासों की स्थापना करेगी, ताकि महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। साथ ही कार्यक्षेत्र में शिशुओं और छोटे बच्चों की देखभाल के लिए भी व्यवस्था की जाएगी। सरकार और उद्योग की यह साझेदारी महिला-विशिष्ट कौशल कार्यक्रमों को व्यवस्थित करने और महिला एसएचजी उद्यमों के लिए बाजार पहुंच को बढ़ावा देने में मदद करेगी।</p>
<p><strong>20 लाख युवाओं को मिलेगी स्किल ट्रेनिंग</strong></p>
<p><strong>चौथी योजना</strong> के रूप में केंद्र सरकार ने 20 लाख युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देने का लक्ष्य तय किया है। 5 साल की अवधि में 20 लाख युवाओं को कौशल प्रदान किया जाएगा। 1,000 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। पाठ्यक्रम की सामग्री और डिजाइन को उद्योग की कौशल आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाएगा, और उभरती जरूरतों के लिए नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे।</p>
<p><strong>एक</strong><strong> करोड़ युवाओं को मिलेगा इंटर्नशिप का मौका</strong></p>
<p><strong>5वीं योजना</strong> के रूप में केंद्र सरकार युवाओं को इंटर्नशिप का मौका देगी। सरकार 5 वर्षों में 1 करोड़ युवाओं को 500 शीर्ष कंपनियों में इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करने के लिए एक व्यापक योजना शुरू करेगी। उन्हें 12 महीनों के लिए वास्तविक जीवन के कारोबारी माहोल, विभिन्न व्यवसायों और रोजगार के अवसरों का अनुभव मिलेगा। 5,000 रुपये प्रति माह का इंटर्नशिप भत्ता और 6,000 रुपये की एकमुश्त सहायता प्रदान की जाएगी। प्रशिक्षण लागत और इंटर्नशिप लागत कंपनियां&nbsp;अपने सीएसआर फंड से वहन करेंगी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्रीय बजट: 20 लाख युवाओं को स्किल ट्रेनिंग,  एक करोड़ को मिलेगा इंटर्नशिप का मौका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[1 अगस्त को केंद्र सरकार के पुतले फूंकेंगे किसान, 15 अगस्त को ट्रैक्टर मार्च का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmers-will-burn-the-effigy-of-the-central-government-on-1st-august-tractor-march-on-15th-august.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 22 Jul 2024 19:14:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmers-will-burn-the-effigy-of-the-central-government-on-1st-august-tractor-march-on-15th-august.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) गारंटी कानून और अन्य मांगों को लेकर बड़ा ऐलान किया है। सोमवार को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में किसान मजदूर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि 1 अगस्त को पूरे देश में केंद्र सरकार की पुतले जलाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त को पूरे भारत में ट्रैक्टर मार्च आयोजित किया जाएगा। राष्ट्रीय सम्मेलन में किसानों की समस्याओं और मांगों पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही आगे की रणनीति भी तैयार की गई।</p>
<p>सम्मेलन के बाद किसान मजदूर मोर्चा के नेता <strong>सरवन सिंह पंढेर</strong> ने कहा कि 1 अगस्त को देशभर में किसान केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे और पुतले जलाएंगे। फिर 15 अगस्त को देशभर में जिला स्तर पर ट्रैक्टर मार्च निकाल कर सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास किया जाएगा। 31 अगस्त को खनौरी और शंभू बॉर्डर पर किसान फिर प्रदर्शन करेंगे। इसके लिए किसानों से बॉर्डर पर पहुंचने की अपील की गई है। ​​उन्होंने कहा कि 31 अगस्त को "दिल्ली चलो" मार्च के 200 दिन पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर सभी किसान इकट्ठा होंगे और प्रदर्शन करेंगे। इसके अलावा, 15 सितंबर को हरियाणा के जींद में प्रदर्शन और 22 सितंबर को पीपली में किसान रैली का आयोजन किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>किसान नेताओं ने हाईकोर्ट के ऑर्डर को न मानने पर हरियाणा सरकार के रवैये की आलोचना की। किसान नेता <strong>अभिमन्यु कोहाड़</strong>&nbsp;ने कहा, "हम एक बात स्पष्ट करना चाहते हैं कि जैस ही पंजाब-हरियाणा बॉर्डर खुलेगा, किसान अपना सामान ट्रॉलियों में भरकर एक सप्ताह के भीतर दिल्ली की ओर चल देंगे।"&nbsp;</p>
<p>किसान 13 फरवरी, 2024&nbsp; से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी के लिए कानून बनाने सहित अन्य मांगों को लेकर पंजाब और हरियाणा के शंभू बॉर्डर और खनौरी बार्डर पर डटे हुए हैं। 10 जुलाई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शंभू बॉर्डर को खोलने का आदेश जारी किया था लेकिन, हरियाणा सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई। जिस पर अब 24 जुलाई को सुनवाई होगी।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_669e5e792b6ff.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ 1 अगस्त को केंद्र सरकार के पुतले फूंकेंगे किसान, 15 अगस्त को ट्रैक्टर मार्च का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आर्थिक सर्वेक्षण: जीडीपी ग्रोथ 6.5 से 7 फीसदी रहने का अनुमान, कृषि नीतियों पर पुनर्विचार का सुझाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/economic-survey-gdp-growth-estimated-at-6.5-to-7-percent-suggestion-to-reassessment-agricultural-policies.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 22 Jul 2024 16:00:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/economic-survey-gdp-growth-estimated-at-6.5-to-7-percent-suggestion-to-reassessment-agricultural-policies.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर थोड़ी धीमी पड़ सकती है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में अर्थव्यवस्था का रिपोर्ट कार्ड यानी <a href="https://www.indiabudget.gov.in/economicsurvey/"><strong>आर्थिक सर्वेक्षण</strong><strong>&nbsp;2023-24</strong></a> पेश किया। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2024-25 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.5 से 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह पिछले वित्त वर्ष की 8.2 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर और चालू वित्त वर्ष के लिए आरबीआई के 7.2 फीसदी वृद्धि दर के अनुमान से भी कम है। पिछले 5 वर्षों के दौरान कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर स्थिर कीमतों पर 4.18 फीसदी रही है।</p>
<p>आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि क्षेत्र की बुनियादी चुनौतियों की पहचान करते हुए तत्काल व्यापक सुधारों पर जोर दिया गया है क्योंकि इससे देश का समग्र आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है। आम बजट से एक दिन पहले पेश हुए आर्थिक सर्वेक्षण में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल की प्राथमिकताओं और 2024 तक विकसित भारत बनाने के दृष्टिकोण को रेखांकित किया गया है। इसमें निजी निवेश को बढ़ावा देने, छोटे व्यवसायों और कृषि को मजबूत करने, जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने और आय की असमानता से निपटने पर जोर दिया गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>कृषि पर राष्ट्रीय चर्चा की जरूरत&nbsp;</strong></p>
<p>आर्थिक सर्वेक्षण की प्रस्तावना में <strong>मुख्य आर्थिक सलाहकार</strong> <strong>वी. अनंथा नागेश्वरन</strong> ने देश की मौजूदा कृषि नीतियों पर पुनर्विचार करने और कृषि क्षेत्र पर अखिल भारतीय चर्चा का सुझाव भी दिया है। आर्थिक सर्वेक्षण में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत ने अभी तक आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए कृषि क्षेत्र की क्षमता का पूरा लाभ नहीं उठाया है। इसके लिए कृषि क्षेत्र में छिपी बेरोजगारी को कम करने, फसल विविधिकरण को बढ़ावा देने और दक्षता बढ़ाने की पैरवी की गई है। साथ ही नीतियों के क्रियान्वयन में सुधार की बात कही गई है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>संरचनात्मक बदलावों पर जोर</strong></p>
<p>सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारतीय कृषि में गंभीर संरचनात्मक बदलावों की आवश्यकता है क्योंकि आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन और जल संकट का खतरा मंडरा रहा है। सर्वेक्षण में कृषि क्षेत्र की कई प्रमुख चुनौतियों की पहचान की गई है, जिसमें खाद्य महंगाई को संभालने के साथ-साथ ग्रोथ को बनाए रखना, प्राइस डिस्कवरी की व्यवस्था में सुधार और छोटी व बिखरी कृषि जोत की समस्या शामिल है। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए व्यापक सुधारों की सिफारिश की गई है जिनमें कृषि प्रौद्योगिकी को उन्नत बनाना, एग्रीकल्चर मार्केटिंग के अवसरों को बढ़ाना, कृषि नवाचारों को अपनाना, इनपुट अपव्यय को कम करना और कृषि-उद्योग संबंधों में सुधार करना शामिल है।</p>
<p><strong>किसान हितैषी नीतियों का सुझाव</strong></p>
<p>आर्थिक सर्वेक्षण में किसानों को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने और खाद्य कीमतों को नियंत्रित रखने के बीच संतुलन बनाने का सुझाव दिया गया है। इस दोहरे लक्ष्य के लिए बहुत सावधानी से नीतिगत कदम उठाने की आवश्यकता है। बाजार किसानों के हित में काम करें इसके लिए किसान-हितैषी नीतिगत ढांचे की जरूरत भी आर्थिक सर्वेक्षण में बताई गई है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong><span>इन्फ्लेशन </span>टारगेटिंग की नीति पर पुनर्विचार&nbsp;</strong></p>
<p>आर्थिक सर्वेक्षण में वस्तुओं की कीमतें बढ़ने का पहला संकेत मिलते ही प्रतिबंध लगाने से बचने, केवल असाधारण परिस्थितियों में ही प्रतिबंध लगाने, <span>इन्फ्लेशन </span>टारगेटिंग की नीति पर फिर से विचार करने, सिंचित क्षेत्र बढ़ाने और जलवायु के हिसाब से कृषि पद्धतियां अपनाने का सुझाव दिया गया है। वहीं, भारत को कृषि से उद्योग व सेवाओं की तरफ बढ़ने के पुराने विकास मॉडल पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>कृषि क्षेत्र पर फोकस बढ़ा</strong></p>
<p>सर्वेक्षण में निजी क्षेत्र द्वारा धीमी निवेश वृद्धि के साथ-साथ अनिश्चित मौसम पैटर्न को अर्थव्यवस्था की चुनौती माना गया है। सर्वेक्षण के अनुसार, अगर संरचनात्मक सुधार लागू किए जाते हैं तो निरंतर आधार पर 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर संभव है। इसके लिए आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि क्षेत्र पर फोकस बढ़ाने की बात की गई है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश में कृषि क्षेत्र रोजगार के सबसे अधिक मौके देता है। साथ ही देश के निर्यात में भी इसकी अहम भूमिका है। ऐसे में कृषि क्षेत्र पर और ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आर्थिक सर्वेक्षण: जीडीपी ग्रोथ 6.5 से 7 फीसदी रहने का अनुमान, कृषि नीतियों पर पुनर्विचार का सुझाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बजट से पहले कांग्रेस ने की एमएसपी की कानूनी गारंटी और किसान कर्जमाफी की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/before-the-budget-congress-demanded-legal-guarantee-of-msp-and-farmer-loan-waiver.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 22 Jul 2024 11:49:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/before-the-budget-congress-demanded-legal-guarantee-of-msp-and-farmer-loan-waiver.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय बजट से पहले कांग्रेस ने केंद्र सरकार से किसानों के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं करने की मांग की। कांग्रेस ने कहा कि बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने, स्वामीनाथन फार्मूले के आधार पर एमएसपी तय करने और किसानों के लिए कर्जमाफी करने की<span>&nbsp;जरूरत है। </span></p>
<p>कांग्रेस महासचिव (संचार) <strong>जयराम रमेश</strong> की ओर से जारी एक वक्तव्य में कहा कि आगामी बजट में केंद्र सरकार को एमएसपी के अंतर्गत आने वाली 22 फसलों के लिए एमएसपी में वृद्धि करनी चाहिए और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप C2+50 फीसदी के फॉर्मूले के अनुरूप एमएसपी तय करने चाहिए।&nbsp;</p>
<p>कांग्रेस ने केंद्र सरकार से एमएसपी को कानूनी दर्जा देकर इसे मजबूती से लागू करने के लिए एक प्रणाली विकसित करने की मांग की है जिसमें रणनीतिक खरीद, बेहतर विनियमन और मूल्य अंतर मुआवजा शामिल है। जयराम रमेश ने किसान की कर्जमाफी की मांग करते हुए इसकी आवश्यकता का आकलन करने और कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक स्थायी आयोग बनाने का सुझाव दिया। ताकि कर्ज में डूबे किसानों को राहत मिल सके।</p>
<p><strong>एमएसपी कमेटी पर सवाल&nbsp;</strong>&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए जयराम रमेश ने कहा, "नवंबर 2021 में तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद, प्रधानमंत्री ने एमएसपी से संबंधित मामलों की समीक्षा के लिए एक समिति के गठन की घोषणा की थी। सरकार को समिति गठित करने में आठ महीने लगे और दो साल बाद भी अभी तक कोई अंतरिम रिपोर्ट जारी नहीं की है। अगर सरकार चाहती तो अब तक एमएसपी को कानूनी दर्जा मिल जाता।"</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने राज्य के किसानों के कृषि ऋण माफ करना शुरू कर दिया है, जिससे कुल 40 लाख किसानों को 2 लाख रुपये तक के कर्ज पर राहत मिलेगी। उन्होंने यूपीए सरकार के 2008 में 72,000 करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफी का उदाहरण भी दिया। रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने पूंजीपतियों के 16 लाख करोड़ रुपये के बैंक ऋण माफ किए हैं, लेकिन किसानों के कृषि ऋण का एक भी रुपया माफ नहीं किया।</p>
<p><strong>यूपीए सरकार में बढ़ा ज्यादा एमएसपी&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए जयराम रमेश ने कहा कि केंद्र सरकार की तमाम विफलताओं में से कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की अक्षमता और दुर्भावना सबसे अधिक नुकसानदायक रही है। जहां यूपीए ने गेहूं की एमएसपी 119 फीसदी और धान की एमएसपी में 134 फीसदी बढ़ाई थी, वहीं मोदी सरकार ने इसे क्रमशः 47 फीसदी और 50 फीसदी बढ़ाया है। यह महंगाई और कृषि इनपुट की बढ़ती कीमतों के हिसाब से बिलकुल भी लिए पर्याप्त नहीं है। आधे से ज्यादा किसान कर्ज में डूबे हैं। एनएसएसओ के अनुसार, 2013 के बाद से बकाया ऋण में 58% की वृद्धि हुई है। 2014 से अब तक 1 लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बजट से पहले कांग्रेस ने की एमएसपी की कानूनी गारंटी और किसान कर्जमाफी की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विदेशी सेबों के आगे फीकी पड़ रही भारतीय सेब उद्योग की लाली, आयात 33 फीसदी बढ़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indian-apple-industry-facing-high-competition-from-foreign-apples-import-increased-by-33-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 21 Jul 2024 11:50:36 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indian-apple-industry-facing-high-competition-from-foreign-apples-import-increased-by-33-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>विदेशों से आयात होने वाले सेब के चलते भारतीय सेब उद्योग काफी चुनौतियों का सामना कर रहा है। साल दर साल भारतीय सेब उद्योग की लाली फीकी पड़ रही है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत में विदेशी सेबों का आयात वित्त वर्ष 2023-24 में 33.98 फीसदी बढ़ गया। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में वित्त वर्ष 2023-24 में 5.1 लाख टन सेबों का आयात हुआ, जबकि वित्त वर्ष 2022-23 में यह 3.7 लाख टन था।</p>
<p><strong>ईरान से आयात होता है सबसे ज्यादा सेब&nbsp;</strong><br />भारत में सबसे ज्यादा सेब का आयात ईरान, तुर्की, इटली, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड और अमेरिका से होता है। पिछले कुछ वर्षों में इन देशों से आयात होने वाले सेब में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में ईरान से 1.37 लाख टन सेब का आयात हुआ, जो वित्त वर्ष 2022-23 के 80,346 टन के मुकाबले 71.77 फीसदी अधिक रहा। इसी तरह तुर्की से सेब का आयात वित्त वर्ष 2023-24 में 9 फीसदी अधिक रहा। वित्त वर्ष 2023-24 में तुर्की से 1.17 लाख टन सेब का आयात हुआ, जो वित्त वर्ष 2022-23 में 1.07 लाख टन था।&nbsp;</p>
<p><strong>अफगानिस्तान से सेब का आयात 2400 फीसदी बढ़ा&nbsp;</strong><br />पिछले कुछ वर्षों में अफगानिस्तान से भी सेब का आयात काफी तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2022-23 में अफगानिस्तान से 1,508 टन सेब का आयात हुआ था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 2400 फीसदी बढ़कर 37,837 टन पहुंच गया। इसी तरह, वित्त वर्ष 2023-24 में पोलैंड से सेब का आयात 33,409 टन रहा, जो वित्त वर्ष 2022-23 में 26,323 टन था। इसके अलावा, दक्षिण अफ्रीका से वित्त वर्ष 2023-24 में 27,738 टन सेब का आयात हुआ, जो वित्त वर्ष 2022-23 में 19,256 टन था। अमेरिका से सेब का आयात वित्त वर्ष 2023-24 में 20,540 टन रहा, जो वित्त वर्ष 2022-23 में 4,486 हजार टन था।&nbsp;</p>
<p><strong>विदेशी सेब भारतीय सेब को कैसे दे रहे चुनौती</strong>&nbsp;<br />भारत में विदेश से जो सेब आयात होता है, उस पर अभी 50 फीसदी आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) लगता है, जो पहले 75 फीसदी था। केंद्र सरकार ने जून 2023 में यह शुल्क घटाकर 50 फीसदी कर दिया था, जिसे अब 100 फीसदी करने की मांग की जा रही है। हिमाचल प्रदेश फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष <strong>हरीश चौहान</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि विदेश से आयात होने वाला सेब भारतीय सेब के मुकाबले सस्ता होता है। इस वजह से भारतीय सेब की डिमांड पर असर पड़ता है और दाम कम मिलते हैं। उन्होंने कहा कि बागवान लंबे समय से आयात शुल्क बढ़ाकर 100 फीसदी करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक यह मांग पूरी नहीं हुई है। इससे हर साल हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के लाखों बागवानों को नुकसान हो रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सेब सीजन खत्म होने के बाद कई बागवान अपना सेब कोल्ड स्टोर में रखते हैं, ताकि बाद में अच्छी कीमत पर बेच सकें। लेकिन, विदेशी सेब सस्ता होने के चलते बागवानों को दाम नहीं मिलता और उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेब की डिमांड घटने के चलते कोल्ड स्टोर में अभी तक पिछले साल का सेब बचा हुआ है। इसके चलते बाजार में हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के नए सेब की डिमांड कम है। उन्होंने कहा कि बीते सीजन का स्टोर में रखा सेब बागवानों के लिए चिंता का सबब बन गया है। वैसे ही इस साल हिमाचल में कम बारिश और फंगल बीमारियों के चलते सेब के उत्पादन पर असर पड़ा है। अगर स्थिति ऐसी ही रही, तो आने वाले दिनों सेब की डिमांड और घट सकती है। इससे बागवानों को और नुकसान उठाना पड़ सकता है।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ विदेशी सेबों के आगे फीकी पड़ रही भारतीय सेब उद्योग की लाली, आयात 33 फीसदी बढ़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_669b9c5f6f5be.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वायर्ड फॉर सक्सेसः घाटे वाली बिजली वितरण कंपनियों को मुनाफे में लाने की कहानी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wired-for-success-the-story-of-transforming-loss-making-discoms-in-to-profitable.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 21 Jul 2024 09:20:41 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wired-for-success-the-story-of-transforming-loss-making-discoms-in-to-profitable.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा के मौजूदा डीजीपी शत्रुजीत कपूर (आईपीएस) की पुस्तक "वायर्ड फॉर सक्सेस" बेहतरीन नेतृत्व और अभिनव तरीके से समस्या के समाधान का वृत्तांत है। हरियाणा की दो बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) लगातार घाटे में थीं, जब तक प्रतिष्ठित पुलिस अधिकारी कपूर ने उन कंपनियों का कार्यभार नहीं संभाला। पुस्तक उस यात्रा पर प्रकाश डालती है, जिसके कारण दोनों डिस्कॉम घाटे से मुनाफे में आईं। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की जटिलताओं और अंतर्निहित अक्षमताओं को देखते हुए लेखक की यह उपलब्धि निश्चित ही बड़ी है।</p>
<p>यह पुस्तक रणनीतिक प्रबंधन और उत्कृष्ट परिचालन का जीवंत उदाहरण है। लेखक ने दोनों डिस्कॉम के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) का पद संभालने पर आने वाली चुनौतियों का इसमें वर्णन किया है। इन चुनौतियों में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी और तकनीकी नुकसान से लेकर प्रशासनिक अड़चनें और दिवालिया होने के कगार तक पहुंचने की स्थिति शामिल हैं। पुस्तक की खास बात इन मुद्दों के निदान के लिए अपनाए गए दृष्टिकोण और खास समाधान हैं, जिनमें तकनीकी इनोवेशन को मानव संसाधन के श्रेष्ठ उपयोग से जोड़ा गया है।</p>
<p>"वायर्ड फॉर सक्सेस" के मूल में समस्या के समाधान के समग्र दृष्टिकोण को अपनाना है। लेखक ने इसमें डेटा-आधारित निर्णय लेने, मजबूत मॉनिटरिंग प्रणाली के कार्यान्वयन और कर्मचारियों की प्रेरणा के साथ ग्राहकों के जुड़ाव की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया है। इन तत्वों पर सिर्फ सैद्धांतिक चर्चा नहीं की गई है, बल्कि वास्तविक जीवन के उदाहरणों और परिणामों से उन्हें प्रभावशाली बनाया गया है।</p>
<p>सीएमडी के रूप में उनके कार्यकाल में न केवल डिस्कॉम घाटे से लाभ में आ गए, बल्कि पूरे राज्य में बिजली की आपूर्ति में सुधार हुआ, जिससे उद्योग, किसानों और आवासीय उपभोक्ताओं को बेहतर आपूर्ति सुनिश्चित हुई। इससे राज्य की प्रतिष्ठा निवेश के गंतव्य के रूप में भी बढ़ी।</p>
<p>पुस्तक का सबसे खास पहलू इसकी सहजता है। तकनीकी विवरणों और प्रबंधन रणनीतियों की बारीकियों के बावजूद, लेखन स्पष्ट और आकर्षक है। जटिल तथ्यों को भी सहज तरीके से प्रस्तुत किया गया है। केस स्टडी के उदाहरण विशद पृष्ठभूमि प्रदान करते हैं और यह सुनिश्चित करते है कि पाठक को सूचना मिलने के साथ वह प्रेरित भी हो।</p>
<p>"वायर्ड फॉर सक्सेस" सरकार, लोक प्रशासन और निजी क्षेत्र के महत्वाकांक्षी व्यक्तियों के लिए बहुत काम की चीज है। यह दूरदर्शी नेतृत्व की क्षमता और अनुशासित तरीके से कार्य करने का प्रमाण है। दो संकटग्रस्त डिस्कॉम को लाभ में लाने की लेखक की क्षमता अन्य क्षेत्रों में समान चुनौतियों से निपटने के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण रखती है।&nbsp;</p>
<p>पुस्तक का विस्तार परिचालन रणनीति से परे शासन और सार्वजनिक सेवा के व्यापक विषयों तक फैला हुआ है। यह नेतृत्व की भूमिकाओं में ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व को रेखांकित करता है। व्यक्तिगत मतों और नैतिक विचारों को साझा करके लेखक एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करता है। कुल मिलाकर, "वायर्ड फॉर सक्सेस" सार्वजनिक क्षेत्र के प्रबंधन और नेतृत्व को समझने की दिशा में एक बेहतरीन प्रयास है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ वायर्ड फॉर सक्सेसः घाटे वाली बिजली वितरण कंपनियों को मुनाफे में लाने की कहानी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ फसलों की 64 फीसदी बुवाई पूरी, दलहन और तिलहन का रकबा बढ़ा पर मोटे अनाज का घटा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/kharif-sowing-completed-64-percent-increase-in-area-under-pulses-and-oilseeds.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 20 Jul 2024 12:11:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/kharif-sowing-completed-64-percent-increase-in-area-under-pulses-and-oilseeds.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में खरीफ फसलों की बुवाई का कार्य अब तक 64 फीसदी पूरा हो चुका है। खासकर <strong>दलहन और तिलहन</strong> फसलों के रकबे में इस वर्ष अच्छी बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते खरीफ फसलों का रकबा बढ़ा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों अनुसार, 19 जुलाई तक देश के 704.04 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले साल की तुलना में 23.69 फीसदी अधिक है। पिछले साल इस समय तक 680.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी।&nbsp;</p>
<p>आंकड़ों के अनुसार, 19 जुलाई तक देश में 85.79 लाख हेक्टेयर में <strong>दलहन की बुवाई </strong>हो चुकी है, जो पिछले साल की तुलना में 15.64 लाख हेक्टेयर अधिक है। पिछले साल इस समय तक 70.14 लाख हेक्टेयर में दलहन की बुवाई हुई थी। दालों में सबसे ज्यादा बुवाई अरहर की हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14.14 फीसदी अधिक है। <strong>अरहर की बुवाई</strong> अब तक 33.48 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। <strong>मूंग की बुवाई</strong> भी अब जोर पकड़ी रही है। अब तक 25.11 लाख हेक्टेयर में मूंग की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.35 फीसदी अधिक है। वहीं, <strong>उड़द की बुवाई</strong> पिछले साल की तुलना में पिछड़ रही है। अब तक 19.62 लाख हेक्टेयर में उड़द की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.24 फीसदी कम है। इसी तरह, कुलथी की बुवाई पिछले साल की तुलना में अब तक 0.05 फीसदी और मोठ की बुवाई 1.13 फीसदी कम हुई है।&nbsp;</p>
<p><strong>तिलहन की बुवाई</strong> 85 फीसदी पूरी हो चुकी है। 19 जुलाई तक देश में 163.11 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले साल की तुलना में 12.20 फीसदी अधिक है। पिछले साल इस समय तक 150.91 लाख हेक्टेयर में तिलहन फसलों की बुवाई हुई थी। <strong>मूंगफली की बुवाई</strong> अब तक 37.34 लाख हेक्टेयर, <strong>सोयाबीन की बुवाई</strong> 119.04 लाख हेक्टेयर, <strong>सूरजमुखी की बुवाई</strong> 0.57 लाख हेक्टेयर और <strong>तिल की बुवाई</strong> 5.61 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>जहां, दालों और तिलहन फसलों का रकबा अब तक बढ़त बनाए हुए है। वहीं, <strong>श्री अन्न एवं मोटे अनाज की बुवाई</strong> पिछले वर्ष की तुलना में पिछड़ रही है। 19 जुलाई तक देश में 123.72 लाख हेक्टेयर में श्री अन्न की बुवाई हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.20 लाख हेक्टेयर कम है। पिछले साल इस समय तक 134.91 लाख हेक्टेयर में श्री अन्न की बुवाई हुई थी।</p>
<p>इसी तरह, <strong>धान की बुवाई</strong> अब तक 166.06 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.41 लाख हेक्टेयरअधिक है। पिछले साल इस समय तक 155.65 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई थी।</p>
<p>अन्य नकदी फसलों जैसे <strong>गन्ना की बुवाई</strong> पिछले साल की इसी अवधि के 57.05 लाख हेक्टेयर की तुलना में लगभग 57.68 लाख हेक्टेयर में हुई है। <strong>जूट की बुवाई</strong> 6.03 लाख हेक्टेयर की तुलना में लगभग 5.64 लाख हेक्टेयर और <strong>कपास की बुवाई</strong> 105.66 लाख हेक्टेयर की तुलना में लगभग 102.05 लाख हेक्टेयर में हुई है।&nbsp;<br />&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ फसलों की 64 फीसदी बुवाई पूरी, दलहन और तिलहन का रकबा बढ़ा पर मोटे अनाज का घटा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बजट में हो सकता है कॉटन मिशन लॉन्च करने का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/there-may-be-announcement-to-launch-cotton-mission-in-the-budget.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 19 Jul 2024 18:03:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/there-may-be-announcement-to-launch-cotton-mission-in-the-budget.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार 23 जुलाई को पेश होने वाले चालू वित्त वर्ष के बजट में कॉटन मिशन की घोषणा कर सकती है। पिछले कुछ वर्षों से देश में कपास के उत्पादन में गिरावट को देखते हुए कपास की चुनौतियों का सामना करने के लिए कॉटन मिशन की शुरुआत हो सकती है। कॉटन मिशन के तहत रिसर्च का काम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी आईसीएआर के जिम्मे होगा। वहीं डेवलपमेंट का काम भी कृषि मंत्रालय के जरिए ही होगा। जबकि मशीनरी और ऑपरेशन का काम टेक्सटाइल मंत्रालय के तहत रहेगा।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक कपास के मुद्दे पर जरूरी कदमों पर कृषि मंत्रालय, टेक्सटाइल मंत्रालय और आईसीएआर की बैठक हुई थी। इस बैठक में ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (तास) के चेयरमैन और आईसीएआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. आर एस परोदा ने एक प्रजेंटेशन दिया था। इसके पहले तास ने कॉटन पर एक विस्तृत पॉलिसी पेपर जारी किया था।</p>
<p>करीब एक दशक पहले भारत कपास उत्पादन में 400 लाख गांठ के साथ दुनिया का सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश बन गया था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उत्पादन में गिरावट के चलते देश में कपास उत्पादन 320 लाख गांठ रह गया है। कपास उत्पादन में चीन भारत से आगे निकल गया है। अधिक उत्पादन के दौर में भारत कपास के बड़े निर्यातक देश के रूप में स्थापित हो गया था। लेकिन अब इसमें बड़ी गिरावट आई है। इस स्थिति को देखते हुए कॉटन मिशन शुरू किए जाने की संभावना है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि कपास जैसी महत्वपूर्ण नकदी फसल पर फोकस करना जरूरी है। जिस तरह से अन्य नकदी फसलों जैसे चाय, रबर, कॉफी और कोकोनट के लिए बोर्ड बने हैं, उसी तरह कॉटन मिशन भी मिशन शुरू किया जाना चाहिए। कपास के उत्पादन में गिरावट के बारे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि बेहतर गुणवत्ता और कीट व बीमारियों से लड़ने वाले बीजों की उपलब्धता नहीं होना इसकी मुख्य वजह है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बीज की नई टेक्नोलॉजी नहीं अपनाने से यह स्थिति पैदा हुई है। इसलिए सरकार को कपास बीज की नई टेक्नोलॉजी को मंजूरी देनी चाहिए जो पिछले करीब एक दशक से लंबित है।</p>
<p><strong>कपास पर पिंक बॉलवर्म का प्रकोप</strong></p>
<p>इस साल भी हरियाणा, पंजाब और राजस्थान की कपास बेल्ट में पिंक बॉलवर्म और व्हाइट फ्लाई का प्रकोप देखा जा रहा है। लगातार तीन-चार साल से कपास की फसल पर किसी ना किसी कीट का प्रकोप रहा है जिसके चलते किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। इस साल भी पंजाब के कई जिलों में कपास की फसल पर पिंक बॉलवर्म का प्रकोप देखा जा रहा है।</p>
<p>जुलाई के पहले सप्ताह तक हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में लगभग 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई थी जो पिछले साल के मुकाबले करीब 30 फीसदी कम है। इस साल पंजाब में कपास का रकबा एक लाख हेक्टेयर से भी कम है जो 2019 में सवा तीन लाख हेक्टेयर से भी अधिक था। हरियाणा और राजस्थान में भी कपास का रकबा घटा है। कॉटन ट्रेडर्स इस साल कपास की खेती के क्षेत्र में लगभग 10-15 फीसदी गिरावट का अनुमान लगा रहे हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>कपास से होने लगा मोहभंग&nbsp;</strong></p>
<p>कपास पर कीटों के प्रकोप, पैदावार में गिरावट और सही दाम न मिलने के कारण किसानों का कपास से मोहभंग होने लगा है। बहुत से किसान कपास छोड़कर धान का रुख कर रहे हैं। कीटों की रोकथाम और किसानों को नुकसान से बचाने के लिए सरकार की तरफ से भी कोई खास उपाय नहीं किए गये हैं। कॉटन मिशन के जरिए सरकार कपास से जुड़ी इन चुनौतियों से निपटने का प्रयास कर सकती है। &nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बजट में हो सकता है कॉटन मिशन लॉन्च करने का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आईसीएआर के स्थापना दिवस पर केवीके कर्मचारियों ने क्यों किया विरोध&amp;#45;प्रदर्शन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/protest-against-disparity-in-pay-and-service-conditions-of-kvk-staff-across-the-nation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 18 Jul 2024 17:42:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/protest-against-disparity-in-pay-and-service-conditions-of-kvk-staff-across-the-nation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि विज्ञान केंद्रों के कर्मचारियों में वेतन और सेवा शर्तों की असमानता को लेकर असंतोष है। इसे लेकर 16 जुलाई को देश भर के कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) पर एक दिवसीय विरोध-प्रदर्शन किया गया, जिसमें कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर काले बैज पहने। यह विरोध-प्रदर्शन उसी दिन हुआ, जिन दिन नई दिल्ली में आईसीएआर का 96वां स्थापना और प्रौद्योगिकी दिवस समारोह मनाया जा रहा था।&nbsp;</p>
<p>यह विरोध-प्रदर्शन आईसीएआर द्वारा संचालित केवीके के कर्मचारियों और गैर-आईसीएआर द्वारा संचालित केवीके के कर्मचारियों के बीच वेतन और सेवा शर्तों, पदोन्नति, सेवानिवृत्ति के बाद के लाभ, मृत्यु मुआवजे और अन्य सुविधाओं में पूर्ण असमानता के खिलाफ हुआ। देश भर में 731 केवीके में से केवल 66 ही सीधे आईसीएआर द्वारा चलाए जाते हैं, जबकि बाकी राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, राज्य विभागों, गैर सरकारी संगठनों आदि के अधीन हैं। दोनों प्रकार के केवीके में कर्मचारियों के वेतन और सेवा शर्तों में काफी अंतर होता है।</p>
<p>कर्मचारियों का आरोप है कि आईसीएआर और मेजबान संगठनों के अनुचित निर्णयों ने लगभग 10,000 कर्मचारियों को प्रभावित किया है, जिससे उन्हें नौकरी की असुरक्षा और अनिश्चितता में धकेल दिया है। केवीके और एआईसीआरपी के राष्ट्रीय मंच ने मांग की है कि आईसीएआर अधिकारी केवीके के कर्मचारियों की समस्याओं का जल्द समाधान करें ताकि वे किसानों के हित में दोगुने उत्साह के साथ काम कर सकें। मंच ने सरकार से केवीके कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को संबोधित करने और सभी के लिए उचित व्यवहार सुनिश्चित करने की भी अपील की है।</p>
<p>उन्नत कृषि तकनीक और नए शोध को किसानों तक पहुंचाने में कृषि विज्ञान केंद्र की अहम भूमिका रही है। कृषि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, विस्तार सेवाओं और प्रौद्योगिकी अपनाने में केवीके महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन विभिन्न मेजबान संस्थानों के तहत केवीके को वेतन लाभ, पदोन्नति, सेवा नियमों और सेवानिवृत्ति के बाद के लाभों से संबंधित मुद्दों पर कर्मचारियों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आईसीएआर के स्थापना दिवस पर केवीके कर्मचारियों ने क्यों किया विरोध-प्रदर्शन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम मोदी के लिए &amp;apos;असली 400 पार&amp;apos; का मौका, बजट में 400 रुपये हो न्यूनतम मजदूरी: कांग्रेस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/real-opportunity-for-pm-modi-to-cross-400-minimum-wage-should-be-rs-400-in-the-budget-congress.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 18 Jul 2024 15:10:39 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/real-opportunity-for-pm-modi-to-cross-400-minimum-wage-should-be-rs-400-in-the-budget-congress.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>&nbsp;श्रमिकों की क्रय शक्ति और वास्तविक मजदूरी में कमी का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आगामी बजट में न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन करने की मांग की है।&nbsp;</p>
<p>कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत के श्रमिकों की क्रय शक्ति (चीज़ों को खरीदने की क्षमता) आज 10 साल पहले की तुलना में कम हो गई है। भारत के अधिकांश हिस्सों में वास्तविक मजदूरी या तो स्थिर है या उसमें गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास बजट में असली 400 पार करने का मौका है। देश भर में न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये होनी चाहिए।&nbsp;</p>
<p>जयराम रमेश ने इस बारे में एक बयान जारी करते हुए कहा कि धीमी वेतन वृद्धि और कमरतोड़ महंगाई के कारण वास्तविक मजदूरी में अभूतपूर्व गिरावट आई है। श्रम ब्यूरो के वेतन दर सूचकांक (सरकारी डेटा) के अनुसार, 2014 और 2023 के बीच, श्रमिकों की वास्तविक मजदूरी स्थिर रही है और 2019 से 24 के बीच इसमें गिरावट आई है।&nbsp;</p>
<p>इसी तरह कृषि मंत्रालय की कृषि सांख्यिकी का हवाला देते हुए जयराम रमेश ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में, खेतिहर मजदूरों की वास्तविक मजदूरी हर साल 6.8 फीसदी बढ़ी, जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में वास्तविक मजदूरी में हर साल -1.3% की गिरावट आई है। उन्होंने आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण श्रृंखला का हवाला देते हुए कहा कि समय के साथ औसत वास्तविक आय 2017 से 2022 के बीच सभी प्रकार के रोजगारों - वेतनभोगी श्रमिकों, आकस्मिक श्रमिकों और स्व-नियोजित श्रमिकों में स्थिर रही है। रमेश का कहना है कि सेंटर फॉर लेबर रिसर्च एंड एक्शन के आंकड़ों के अनुसार 2014 और 2022 के बीच ईंट भट्ठों के श्रमिकों की वास्तविक मजदूरी स्थिर हो गई है या घट गई है। ईंट भट्टे का काम अत्यधिक शारीरिक श्रम और कम वेतन वाला काम है जो सबसे गरीब लोगों का अंतिम विकल्प है।&nbsp;</p>
<p>गौरतलब है कि कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव से पहले अपने &ldquo;न्याय पत्र&rdquo; में हर महीने 400 रुपए न्यूनतम मजदूरी देने की गारंटी दी थी। जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा चुनाव में 400 पार के प्रयासों को मतदाताओं ने सिरे से खारिज कर दिया है। लेकिन केंद्रीय बजट में उनके पास असली 400 पार करने का मौका है। देश भर में 400 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम वेतन का समय आ गया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम मोदी के लिए 'असली 400 पार' का मौका, बजट में 400 रुपये हो न्यूनतम मजदूरी: कांग्रेस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शंभू बॉर्डर खोलने की डेडलाइन आज हो रही खत्म, किसानों के दिल्ली कूच का ऐलान, 15 अगस्त को निकालेंगे ट्रैक्टर मार्च]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmers-will-march-towards-delhi-as-soon-as-the-border-opens-announce-to-take-out-tractor-march-on-15-august.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 17 Jul 2024 20:51:20 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmers-will-march-towards-delhi-as-soon-as-the-border-opens-announce-to-take-out-tractor-march-on-15-august.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बीते दिनों हरियाणा सरकार को शंभू बॉर्डर पर लगे बैरिकेड हटाने को कहा था। इसके लिए हाईकोर्ट ने सरकार को एक हफ्ते का समय दिया था। जिसकी डेडलाइन आज खत्म हो रही है। इसी बीच किसानों ने दिल्ली कूच का ऐलान कर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के सदस्य और किसान नेता <strong>जगजीत सिंह डल्लेवाल</strong> ने कहा कि जैसे ही सरकार शंभू बॉर्डर खोलेगी, हम दिल्ली की ओर कूच करेंगे। उन्होंने कहा कि बॉर्डर हमने बंद नहीं किए हैं। बॉर्डर बंद करने का फैसला सरकार का था। हम बस अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि किसान पीछे हटने वाले नहीं और उनकी सभी मांगें पूरी होने तक यह प्रदर्शन जारी रहेगा। किसानों का मकसद किसी को परेशान करना नहीं, वह बस अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>डल्लेवाल ने कहा कि किसान सब कुछ शांतिपूर्ण तरीके से करना चाहते हैं। लेकिन, सरकार उन्हें ऐसा करने नहीं दे रही। हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अब तो कोर्ट ने भी मान लिया है कि हाईवे किसानों की नहीं, बल्कि सरकार की वजह से बाधित हुआ है। ऐसे में सरकार जल्द बॉर्डर खोले और उन्हें आगे जाने दिया जाए। उन्होंने कहा कि 22 जुलाई को दिल्ली में किसान सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। यह एक संयुक्त सम्मेलन होगा, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के नेता मौजूद होंगे।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए राहुल गांधी और विपक्ष के तमाम नेताओं को पत्र भी लिखा गया है। किसान विपक्ष के समक्ष अपनी सभी मांगों को रखेंगे, ताकि विपक्ष उन्हें संसद के आगामी सत्र में उठा सके। उन्होंने कहा कि किसानों ने&nbsp;15 अगस्त को ट्रैक्टर मार्च निकालने का भी फैसला लिया गया है। यह मार्च देश भर में निकाला जाएगा।&nbsp;</p>
<p>बता दें कि किसान पिछले पांच महीनों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी के लिए कानून बनाने सहित अन्य मांगों को लेकर शंभू बॉर्डर पर डटे हुए हैं। 10 जुलाई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शंभू बॉर्डर को खोलने का आदेश जारी किया था। लेकिन, हरियाणा सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चली गई। जिस पर अब 22 जुलाई को सुनवाई होगी। उधर दिल्ली कूच करने के लिए शंभू और खनौरी बार्डर पर किसान जुटना शुरू हो गए हैं। वह अपने साथ छह माह का राशन लेकर भी आ रहे हैं।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ शंभू बॉर्डर खोलने की डेडलाइन आज हो रही खत्म, किसानों के दिल्ली कूच का ऐलान, 15 अगस्त को निकालेंगे ट्रैक्टर मार्च ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वैज्ञानिक साल में एक महीना खेत में जाकर किसानों को सिखायें: शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/scientists-should-go-to-the-fields-for-one-month-in-a-year-and-teach-farmers-shivraj-singh-chouhan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 17 Jul 2024 14:26:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/scientists-should-go-to-the-fields-for-one-month-in-a-year-and-teach-farmers-shivraj-singh-chouhan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के जुड़ाव पर जोर देते हुए कहा कि सारे वैज्ञानिक साल में एक महीना खेत में जाकर किसानों को सिखाएं। किसानों को अगर वैज्ञानिकों से जोड़ देंगे, तो उत्पादन भी बढ़ेगा और टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए हम लागत भी घटा पाएंगे। यह बात उन्होंने मंगलवार को नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद&nbsp;(आईसीएआर) के स्थापना एवं प्रौद्योगिकी दिवस&nbsp;समारोह को संबोधित करते हुए कही।</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आईसीएआर ने 6 हजार किस्में दी हैं। इनमें से कितनी किस्में लैब से लैंड तक पहुंची हैं। किसान और वैज्ञानिक कितना जुड़ा है, हमें इस पर काम करना है। उन्होंने कहा देश में 731 कृषि विज्ञान केंद्र हैं। उनमें 2-2 वैज्ञानिकों को एक-एक केंद्र में भेजिये। वे वहां अध्ययन और शोध करें, तभी हम किसानों को फायदा पहुंचा सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने कृषि वैज्ञानिकों से देश को दलहन और तिलहन में भी आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ाना ज़रूरी है लेकिन इस पर भी ध्यान देना जरूरी है कि मानव शरीर पर उसका क्या प्रभाव होगा। कृषि मंत्री ने प्राकृतिक खेती पर अनुसंधान करने पर भी जोर दिया। साथ ही जलवायु परिवर्तन को देखते हुए काम करने की आवश्यकता बताई।</p>
<p>कृषि मंत्री ने कहा कि छोटी जोत के किसान के लिए मॉडल फॉर्म बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि <span>कृषि विविधिकरण से किसानों आय बढ़ाना संभव है। उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि हम&nbsp;</span><span>चार</span><span>&nbsp;साल के लक्ष्य निर्धारित करें और&nbsp;</span><span>चार</span><span> साल के बाद हम कहें कि हमने यह लक्ष्य पूरे किये। </span>भारत को 2047 तक विकसित बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए<span> कृषि और संबंधित क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे।&nbsp;</span>&nbsp;</p>
<p>समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैज्ञानिकों को समानित किया गया तथा आईसीएआर के कई प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। इस मौके पर केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि जिन संस्थाओं ने आईसीएआर के साथ अनुबंध किये हैं वो जल्दी से जल्दी क्रियान्वित करें ताकि किसानों को लाभ मिले। सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं महानिदेशक (आईसीएआर) हिमांशु पाठक ने कहा कि आईसीएआर ने प्रौद्योगिकी उपज के उपयोग से भारत को वैश्विक कृषि-निर्यातक बनने में मदद की है।&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी एवं राम नाथ ठाकुर,&nbsp;केंद्रीय मत्स्य पालन,&nbsp;पशुपालन एवं डेयरी तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और केंद्रीय मत्स्य पालन,&nbsp;पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्रालय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल और आईसीएआर से जुड़े कृषि वैज्ञानिक उपस्थित रहे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_669783d866c0e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ वैज्ञानिक साल में एक महीना खेत में जाकर किसानों को सिखायें: शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_669783d866c0e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आईएमएफ ने रिवाइज की भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर, जीडीपी ग्रोथ के 7 फीसदी पर रहने का अनुमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/imf-revised-india-economic-growth-rate-estimated-to-be-at-7-percent-in-2024-2025.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 17 Jul 2024 13:21:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/imf-revised-india-economic-growth-rate-estimated-to-be-at-7-percent-in-2024-2025.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ)</strong> ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर (जीडीपी ग्रोथ) का अनुमान बढ़ा दिया है। आईएमएफ ने 0.20 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ <strong>जीडीपी ग्रोथ के 7 फीसदी</strong> रहने का अनुमान जताया है। आईएमएफ ग्रोथ फोरकास्ट के अनुसार, अप्रैल 2024 में भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.8 फीसदी था। जिसे अब बढ़ाकर कर 7 फीसदी कर दिया गया है। वहीं, 2025-26 में जीडीपी ग्रोथ के 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है। जबकि 2023-24 में यह 8.2 फीसदी पर थी। &nbsp;</p>
<p>आईएमएफ ने अपनी <strong>वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट</strong> में बताया कि भारत के आर्थिक विकास दर को रिवाइज कर 7.0 फीसदी कर दिया गया है। आईएमएफ ने भारत में निजी खपत (प्राइवेट कंजम्पशन) में सुधार का अनुमान जताया है, जिससे देश की आर्थिक विकास दर को और गति मिल सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत के बाद दूसरे नंबर चीन है, जिसकी जीडीपी ग्रोथ के 5 फीसदी रहने का अनुमान है। ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ 3.2 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है, जो पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के 3.3 फीसदी की तुलना में कम है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_66977d18b5df8.jpg" alt="" /></p>
<p>भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर को लेकर आईएमएफ का अनुमान <strong>भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई)</strong> से 2 फीसदी कम है। जून महीने में आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.2 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि पिछले तीन सालों से भारत की आर्थिक विकास दर 7 फीसदी से ऊपर रही है, जो एक सकारात्मक संकेत है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr"><br /><br /></p>
</blockquote> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आईएमएफ ने रिवाइज की भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर, जीडीपी ग्रोथ के 7 फीसदी पर रहने का अनुमान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नीति आयोग का पुनर्गठन; उपाध्यक्ष व पूर्णकालिक सदस्यों में बदलाव नहीं, सहयोगी दलों के मंत्री शामिल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/niti-aayog-reconstituted-vice-chairman-and-full-time-members-will-continue-ministers-from-nda-allies-made-part-of-it.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 17 Jul 2024 13:15:26 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/niti-aayog-reconstituted-vice-chairman-and-full-time-members-will-continue-ministers-from-nda-allies-made-part-of-it.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने मंगलवार को नीति आयोग का पुनर्गठन कर दिया। अर्थशास्त्री सुमन के. बेरी नीति आयोग के उपाध्यक्ष तथा वैज्ञानिक वी के सारस्वत, कृषि अर्थशास्त्री प्रोफेसर रमेश चंद, बाल रोग विशेषज्ञ वीके पॉल और अर्थशास्त्री अरविंद विरमानी पूर्णकालिक सदस्य बने रहेंगे। नीति आयोग में भाजपा और सहयोगियों दलों सहित 15 केंद्रीय मंत्री पदेन या विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति आयोग के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है।&nbsp;</p>
<p>एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीति आयोग के अध्यक्ष बने रहेंगे। चार पदेन सदस्य केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह (रक्षा), अमित शाह (गृह), शिवराज सिंह चौहान (कृषि) और निर्मला सीतारमण (वित्त) होंगे।</p>
<p>पुनर्गठित नीति आयोग में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (सड़क परिवहन और राजमार्ग), जगत प्रकाश नड्डा (स्वास्थ्य), एचडी कुमारस्वामी (भारी उद्योग और इस्पात), जीतन राम मांझी (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) तथा राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह (मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी) विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे। अन्य विशेष आमंत्रित सदस्यों में केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार (सामाजिक न्याय और अधिकारिता), किंजरापु राममोहन नायडू (नागरिक उड्डयन), जुएल ओराम (जनजातीय मामले), अन्नपूर्णा देवी (महिला और बाल विकास), चिराग पासवान (खाद्य प्रसंस्करण उद्योग) और राव इंद्रजीत सिंह (सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन) शामिल हैं।</p>
<p>कुमारस्वामी एनडीए सहयोगी जेडीएस, मांझी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा, राजीव रंजन सिंह जेडीयू, राममोहन नायडू टीडीपी और चिराग पासवान लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से हैं।&nbsp;नीति आयोग का गठन 2015 में मोदी सरकार ने 65 साल पुराने योजना आयोग की जगह किया था। सरकार ने मंत्रिपरिषद में बदलाव के बाद नीति आयोग का पुनर्गठन किया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नीति आयोग का पुनर्गठन; उपाध्यक्ष व पूर्णकालिक सदस्यों में बदलाव नहीं, सहयोगी दलों के मंत्री शामिल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार ने रिटेल कंपनियों से दालों पर मुनाफा घटाने को कहा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-ask-retailers-why-declining-pulses-price-trend-is-not-reflecting-in-retail-prices.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 16 Jul 2024 20:25:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-ask-retailers-why-declining-pulses-price-trend-is-not-reflecting-in-retail-prices.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग की सचिव निधि खरे ने रिलायंस रिटेल, डी मार्ट, टाटा स्टोर्स, स्पेंसर, आरएसपीजी और वी मार्ट जैसी बड़ी रिटेल चेन कंपनियों के प्रतिनिधियों से कहा है कि प्रमुख मंडियों में पिछले एक माह में दालों की कीमतों में जो कमी आई है वह दालों की खुदरा कीमतों में क्यों दिखाई नहीं दे रही हैं।&nbsp; </span><span id="ltrSubtitle"></span></p>
<p><span>उपभोक्ता मामलों के विभाग की सचिव खरे ने कहा कि पिछले एक महीने में प्रमुख मंडियों में चना, तुअर और उड़द की कीमतों में चार फीसदी तक की गिरावट आई है, लेकिन इनकी खुदरा कीमतों में ऐसी कोई गिरावट नहीं देखी गई है। उन्होंने थोक मंडी कीमतों और खुदरा कीमतों के बीच अलग-अलग रुझानों की ओर इशारा किया, जिससे लगता है कि खुदरा विक्रेताओं को ज़्यादा मुनाफा मिल रहा है।</span></p>
<p>उपभोक्ता मामलों के विभाग ने मंगलवार को भारतीय खुदरा विक्रेता संघ (आरएआई) के साथ एक बैठक की। जिसमें दालों के संबंध में मूल्य परिदृश्य तथा निर्दिष्ट खाद्य पदार्थों पर लाइसेंसिंग आवश्यकताओं, स्टॉक सीमाओं और आवागमन प्रतिबंधों को हटाने के आदेश और&nbsp;निर्धारित तुअर-चना के लिए स्टॉक सीमाओं के अनुपालन पर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग की सचिव निधि खरे ने की।</p>
<p><span>उन्होंने यह भी बताया कि खरीफ दलहन की बुआई की प्रगति अच्छी है। सरकार ने प्रमुख खरीफ दलहन उत्पादक राज्यों में तुअर और उड़द के उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए हैं, जिसमें नेफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का वितरण शामिल है।&nbsp;</span></p>
<p><span>मौजूदा मूल्य परिदृश्य और खरीफ संभावना को ध्&zwj;यान में रखते हुए उन्होंने&nbsp; खुदरा उद्योग से कहा कि वे दालों की कीमतों को उपभोक्ताओं के लिए किफायती बनाए रखने के सरकार के प्रयासों में हर संभव सहायता प्रदान करें। उन्होंने बताया कि बड़े खुदरा विक्रेताओं सहित सभी स्टॉकहोल्डिंग संस्थाओं की स्टॉक स्थिति पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्धारित सीमा का उल्लंघन न हो। स्टॉक सीमा का उल्लंघन, बेईमान सट्टेबाजी और बाजार से जुड़े लोगों की ओर से मुनाफाखोरी पर सरकार की ओर से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</span></p>
<p><span>खुदरा उद्योग से जुड़े प्रतिभागियों ने भरोसा दिलाया कि वे अपने खुदरा मार्जिन में आवश्यक सुधार करेंगे तथा उपभोक्ताओं को किफायती मूल्य पर कीमतें उपलब्ध कराने के लिए इसे नाममात्र स्तर पर बनाए रखेंगे। </span><span>इस बैठक में आरएआई,&nbsp;रिलायंस रिटेल,&nbsp;डी मार्ट,&nbsp;टाटा स्टोर्स,&nbsp;स्पेंसर,&nbsp;आरएसपीजी,&nbsp;वी मार्ट आदि के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार ने रिटेल कंपनियों से दालों पर मुनाफा घटाने को कहा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6696864578422.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विधानसभा उपचुनाव में 10 सीटों पर इंडिया गठबंधन की जीत, भाजपा के खाते में सिर्फ दो सीटें आईं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/assembly-by-election-result-india-alliance-won-10-seats-bjp-won-3-aap-and-dmk-won-one-each.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Jul 2024 18:53:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/assembly-by-election-result-india-alliance-won-10-seats-bjp-won-3-aap-and-dmk-won-one-each.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के 7 राज्यों की 13 सीटों पर हुए विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। इसमें भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को बड़ा झटका लगा है। उसे सिर्फ दो सीटों पर जीत मिली है जबकि विपक्ष का इंडिया गठबंधन 10 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब रहा है। एक सीट पर निर्दलीय को जीत मिली है।&nbsp;<br />पार्टी के लिहाज से देखें तो इंडिया गठबंधन की कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को चार-चार तथा आम आदमी पार्टी (आप) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) को 1-1 सीट पर जीत मिली है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सिर्फ हिमाचल प्रदेश की हमीरपुर और मध्य प्रदेश की अमरवाड़ा सीट पर जीत मिली है। भाजपा तीन ऐसी सीटों पर भी चुनाव हारी है, जहां पहले उसका कब्जा था।</p>
<p>राज्यवार देखें तो पश्चिम बंगाल की सभी चार सीटें तृणमूल कांग्रेस के खाते में गई हैं। पंजाब की एक सीट पर आप, हिमाचल की तीन सीटों में से दो पर कांग्रेस और एक पर भाजपा, उत्तराखंड की दोनों सीटों पर कांग्रेस, तमिलनाडु की एक सीट पर डीएमके, मध्य प्रदेश की एक सीट पर भाजपा और बिहार की एक सीट पर निर्दलीय को जीत मिली है।</p>
<p><strong>हिमाचल में मुख्यमंत्री सुक्खू की पत्नी जीतीं</strong><br />उपचुनाव में हिमाचल प्रदेश की देहरा सीट से राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी और कांग्रेस की उम्मीदवार कमलेश ठाकुर की जीत हुई है। उन्होंने भाजपा के होशियार सिंह को 9,399 वोटों के अंतर से शिकस्त दी है। कमलेश ठाकुर को कुल 32,737 वोट पड़े। जबकि, होशियार सिंह को सिर्फ 23,338 वोट मिले। हालांकि सीएम सुक्खू के गृह जिले हमीरपुर में बीजेपी ने चुनाव जीता है। यहां से बीजेपी उम्मीदवार आशीष शर्मा ने कांग्रेस के डॉ. पुष्पिंदर वर्मा को 1571 वोटों के अंतर से हरा दिया। आशीष शर्मा को 27,041 वोट और पुष्पिंदर वर्मा को 25,470 वोट मिले।&nbsp;<br />वहीं, हिमाचल की नालागढ़ सीट से कांग्रेस उम्मीदवार हरदीप सिंह बावा ने 8,990 वोटों के अंतर से जीत हासिल की है। यहां उनका मुकाबला, बीजेपी के के.एल. ठाकुर से था।&nbsp;</p>
<p><strong>पश्चिम बंगाल में टीएमसी का क्लीन स्वीप</strong><br />पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने क्लीन स्वीप किया है। यहां चार सीटों पर उपचुनाव हुए थे। भाजपा यहां एक भी सीट नहीं जीत पाई। यहां की रायगंज सीट से टीएमसी के कृष्णा कल्याणी ने जीत हासिल की है। उन्होंने बीजेपी के मानस कुमार घोष को 50 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया है। रानाघाट दक्षिण सीट से टीएमसी के मुकुट मणि अधिकारी 39,048 वोटों के अंतर से जीते हैं। उन्होंने बीजेपी के मनोज कुमार बिस्वास को शिकस्त दी है। बागदा सीट से टीएमसी की मधुपर्णा ठाकुर ने बीजेपी के बिनय कुमार बिस्वास को 33,455 वोटों से मात दी है। वहीं, मानिकतला सीट से टीएमसी की सुप्ती पांडे ने बीजेपी के कल्याण चौबे को 62,312 वोटों के अंतर से हराया है।</p>
<p><strong>उत्तराखंड में कांग्रेस ने जीती दोनों सीट&nbsp;</strong><br />पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में कांग्रेस ने दोनों सीटें जीती हैं। बद्रीनाथ सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार लखपत सिंह बुटोला जीते हैं। उन्हें कुल 28,161 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के राजेंद्र सिंह भंडारी को 22,937 वोट मिले। बुटोला ने राजेंद्र सिंह को 5,224 वोटों के अंतर से हराया है। वहीं, मंगलौर सीट से कांग्रेस के काजी मोहम्मद निजामुद्दीन 422 वोटों के अंतर से जीते हैं। उन्होंने बीजेपी के करतार सिंह भड़ाना को शिकस्त दी है। &nbsp;</p>
<p><strong>डीएमके-आप को एक-एक सीट</strong><br />उपचुनाव में डीएमके और आप ने एक-एक सीट जीती है। डीएमके ने तमिलनाडु की विक्रावांडी सीट जीती है। यहां डीएमके के अन्नियुर शिवा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी पीएमके के अन्बुमणि.सी को &nbsp;67,757 वोटों के अंतर से हराया है। वहीं, पंजाब की जालंधर पश्चिम सीट से आप ने चुनाव जीता है। यहां आप के मोहिंदर भगत ने बीजेपी के शीतल अंगुराल को 37,325 वोटों से शिकस्त दी है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश की अमरवाड़ा सीट पर बीजेपी चुनाव जीत गई है। यहां कमलेश प्रताप शाह ने कांग्रेस के धीरन साह सुखराम दास इनवती को 3,027 वोटों से हराया है। बिहार की रुपौली सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार शंकर सिंह को जीत मिली है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जनता दल यूनाइटेड के कलाधर प्रसाद मंडल को 8246 मतों के अंतर से हराया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ विधानसभा उपचुनाव में 10 सीटों पर इंडिया गठबंधन की जीत, भाजपा के खाते में सिर्फ दो सीटें आईं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66927792dc7c1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[युवाओं में आवश्यक जलवायु कौशल विकसित करेगा ब्रिटिश काउंसिल का ‘क्लाइमेट स्किल’ प्रोग्राम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/british-council-climate-skill-change-program-will-develop-essential-climate-skills-among-youth-in-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Jul 2024 15:38:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/british-council-climate-skill-change-program-will-develop-essential-climate-skills-among-youth-in-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>शैक्षिक अवसरों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए यूके के अंतरराष्ट्रीय संगठन ब्रिटिश काउंसिल ने शनिवार को एचएसबीसी इंडिया के साथ साझेदारी में "क्लाइमेट स्किल - सीड्स फॉर ट्रांजिशन इंडिया" प्रोग्राम लांच किया। इस पहल का उद्देश्य भारत में युवाओं और समुदायों को जलवायु परिवर्तन के आसन्न प्रभाव के प्रति रेसिलिएंट बनाना है। साथ ही युवाओं को नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर बढ़ने के अवसरों में योगदान करने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करना है।&nbsp;<br />यह प्रोग्राम विश्व स्तर पर जलवायु कौशल का दृष्टिकोण स्थापित करने के लिए ब्रिटिश काउंसिल के लंबे समय से चल रहे अंतर्राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा है, जो युवाओं को सशक्त बनाता है। यह निर्णयकर्ताओं को वैकल्पिक जलवायु शिक्षा की रणनीतियों के बारे में बताता है और जमीनी स्तर पर राष्ट्रीय और वैश्विक जलवायु चुनौतियों का समाधान करता है।</p>
<p>यह केवल चर्चा मात्र से आगे बढ़कर सरकारों, समुदायों और संस्थानों के साथ साझेदारी करने का प्रयास करता है, ताकि भविष्य की पीढ़ी के लिए ठोस समाधान तैयार किए जा सकें। साथ ही जीवन के सभी पहलुओं पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सके और उन्हें जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर आवश्यक कौशल से लैस किया जा सके। यह प्रोग्राम भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, मैक्सिको और वियतनाम सहित पांच देशों में 18-30 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए शुरू किया गया है।</p>
<p>ब्रिटिश काउंसिल के चीफ एक्जीक्यूटिव स्कॉट मैकडोनाल्ड ने कहा, "ब्रिटिश काउंसिल में हम युवाओं को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान से सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। "क्लाइमेट स्किल&nbsp;- सीड्स फॉर ट्रांजिशन इंडिया" प्रोग्राम एचएसबीसी के साथ साझेदारी सस्टेनेबल भविष्य के हमारे साझा दृष्टिकोण को दर्शाती है। आवश्यक जलवायु रेसिलिएंस स्किल कौशल से लैस हो कर युवा हरित अर्थव्यवस्थाओं में परिवर्तन का नेतृत्व कर सकते हैं और अपने समुदायों में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। ये कौशल हमारे ग्रह और उसके प्राकृतिक संसाधनों के जीवन के अनुमानों पर विचार करते समय तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।"</p>
<p>ब्रिटिश काउंसिल से साझेदारी पर, एचएसबीसी इंडिया के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर हितेंद्र दवे ने कहा, " यह सहयोग और ऐसे कार्यक्रमों के सह-निर्माण का हमारा लंबा इतिहास रहा है, जो एक बड़े सामाजिक उद्देश्य को प्राप्त करने में मदद करते हैं। जलवायु कौशल कार्यक्रम पर हमारी साझेदारी युवाओं और शिक्षा पर केंद्रित होगी, जो युवा पीढ़ी को जलवायु परिवर्तन को समझने और उसके अनुकूल होने के लिए तैयार करने में हमारी संयुक्त प्रतिबद्धता को दर्शाती है। साथ मिलकर, हमारा लक्ष्य भारत में हाशिए पर पड़े युवा समुदायों के बीच जलवायु साक्षरता और रोजगार क्षमता में सुधार करना है।"</p>
<p>जुलाई 2024 से फरवरी 2026 तक चलने वाले इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य सरकारी संस्थानों, नीति निर्माताओं, उच्च शिक्षण संस्थानों और युवाओं सहित प्रमुख हितधारकों के बीच जागरूकता बढ़ाना, भागीदारी और जुड़ाव को प्रोत्साहित करना है। इसका उद्देश्य 2 हजार युवाओं को सीधे जोड़ना और 300 मास्टर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करना है। यह पहल जलवायु के प्रति कार्रवाई में ब्रिटिश काउंसिल के नेतृत्व और इसकी आगामी वैश्विक जलवायु परिवर्तन रणनीति पर प्रकाश डालती है। इस प्रोग्राम का एक अनूठा पहलू यह है कि इसका ध्यान युवाओं के नेतृत्व वाली सामाजिक कार्रवाई को जलवायु शिक्षा के साथ एकीकृत करके शहरी और ग्रामीण दोनों युवाओं को सशक्त बनाने पर है। कार्यक्रम की अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर नेतृत्व वाले हस्तक्षेप प्रदान करना और उन्हें पांच देशों में वैश्विक नेटवर्क से जोड़ना है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66924d541142d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ युवाओं में आवश्यक जलवायु कौशल विकसित करेगा ब्रिटिश काउंसिल का ‘क्लाइमेट स्किल’ प्रोग्राम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66924d541142d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डीएपी की आयातित कीमत 560 डॉलर पर पहुंची, आयात सौदों में तेजी नहीं आई तो रबी में होगी किल्लत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/import-price-for-dap-reaches-560-dollars-a-ton-rabi-sowing-might-suffer-as-import-deals-are-stuck.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Jul 2024 13:53:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/import-price-for-dap-reaches-560-dollars-a-ton-rabi-sowing-might-suffer-as-import-deals-are-stuck.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वैश्विक बाजार में डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की कीमतों में बढ़ोतरी के रुख के चलते भारतीय कंपनियां आयात सौदे नहीं कर रही हैं। दो माह में कीमतें 528 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 560 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई हैं। यही नहीं, एक सरकारी कंपनी को आयात टेंडर इसलिए रद्द करना पड़ा क्योंकि उसमें कम से कम कीमत 575 डॉलर प्रति टन की आई थी। इस स्थिति के चलते डीएपी के अधिक सौदे नहीं हो रहे हैं। अगर यह स्थिति कुछ दिन और जारी रही तो आगामी रबी सीजन में किसानों को डीएपी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>उद्योग सूत्रों के मुताबिक करीब माह भर पहले सरकारी कंपनी एनएफएल के टेंडर के लिए 575 डॉलर प्रति टन का दाम आया था। पिछले दो माह में तीन-चार सौदे ही हुए हैं। इनमें 50 हजार टन का एक आयात सौदा सार्वजनिक क्षेत्र की एक कंपनी ने 559 डॉलर प्रति टन की कीमत पर किया था। यह आयात सौदा चीन की कंपनियों के साथ ही सऊदी अरब की उर्वरक कंपनी मादेन ने किया है। एक उर्वरक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने रूरल वॉयस को बताया कि डीएपी के स्टॉक की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। ऐसे में अगर आयात सौदे जल्दी नहीं होते हैं तो रबी सीजन में किल्लत पैदा हो सकती है। हालांकि चालू खरीफ सीजन के लिए डीएपी की उपलब्धता में कोई दिक्कत नहीं है।</p>
<p>अप्रैल और मई में डीएपी की कीमतें कम हो गई थीं। उद्योग सूत्रों का कहना है कि चीन ने निर्यात कम कर दिया है। वह चाहता है कि कीमतें 600 डॉलर प्रति टन तक चली जाएं। चीन उर्वरकों का बड़ा निर्यातक है और निर्यात को लेकर उसके फैसले वैश्विक बाजार में कीमतों को सीधे प्रभावित करते हैं। भारत चीन से डीएपी और यूरिया दोनों का आयात करता है। देश में सालाना 100 लाख टन से अधिक डीएपी की खपत होती है और इसका अधिकांश हिस्सा आयात होता है। देश में डीएपी का जो उत्पादन होता है उसके लिए भी रॉक फास्फेट या सल्फ्यूरिक एसिड जैसे कच्चे माल का आयात किया जाता है। देश में पिछले साल (2023-24) में 108.12 लाख टन डीएपी की खपत हुई थी। इसके पहले साल डीएपी की खपत 104.18 लाख टन रही थी।</p>
<p>लेकिन यूरिया के मोर्चे पर सरकार के लिए राहत की खबर है। इसकी की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है। इस समय यूरिया की आयातित कीमत (सीएफआर) 350.50 डॉलर प्रति टन तक आ गई है। हाल में एक भारतीय कंपनी के टेंडर में पश्चिमी तट के लिए 350.50 डॉलर प्रति टन और पूर्वी तट लिए 365 डॉलर प्रति टन की कीमत आई। इस टेंडर में चीन, ओमान और रूस की कंपनियों ने भागीदारी की।</p>
<p>दो साल पहले यूक्रेन और रूस का युद्ध शुरू होने के बाद आई तेजी के चलते यूरिया की कीमत 900 डॉलर प्रति टन को पार कर गई थी। भारत करीब 100 लाख टन यूरिया का आयात करता है। लेकिन पिछले दो साल में नये संयंत्रों में यूरिया उत्पादन शुरू होने से इसके आयात में गिरावट की संभावना है। पिछले साल (2023-24) देश में यूरिया की खपत 357.80 लाख टन रही थी। यह उससे पहले साल में 357.25 लाख टन की खपत से मामूली अधिक है।</p>
<p>उद्योग सूत्रों का कहना है कि यूरिया के मोर्चे पर सरकार को सब्सिडी की बचत होगी। लेकिन डीएपी के मामले में सरकार न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनबीएस) के तहत प्रति किलो के हिसाब से सब्सिडी देती है। ऐसे में वैश्विक बाजार में डीएपी के रेट बढ़ने के चलते उर्वरक आयातक कंपनियों को नुकसान होगा। मौजूदा सब्सिडी दरों पर भी कंपनियों को मुनाफा नहीं है। ऐसे में अगर कंपनियां आयात के सौदे नहीं करती हैं तो रबी सीजन में मुश्किल आ सकती है। आयातित उर्वरक के सौदे से लेकर उसके किसानों तक पहुंचने में करीब दो माह तक का समय लग जाता है। वहीं रबी सीजन में डीएपी की अधिकांश खपत अक्तूबर और नवंबर में गेहूं और अन्य रबी फसलों की बुवाई के समय ही होती है। &nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ डीएपी की आयातित कीमत 560 डॉलर पर पहुंची, आयात सौदों में तेजी नहीं आई तो रबी में होगी किल्लत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश में मानसून की बारिश सामान्य से 3 फीसदी कम, उत्तर पश्चिम भारत में सबसे कम बरसे बादल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-rain-is-still-3-percent-less-than-normal-rain-alert-across-the-country-till-july-16.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Jul 2024 12:50:42 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-rain-is-still-3-percent-less-than-normal-rain-alert-across-the-country-till-july-16.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में जमकर बारिश हो रही है। लेकिन, देश के 11 राज्यों में बारिश अभी भी सामान्य से कम है। मौसम विभाग के मुताबिक, 1 जून से 12 जुलाई 2024 तक देशभर में सामान्य से 3 फीसदी कम बारिश हुई है। उत्तर पश्चिम भारत में सबसे कम बारिश रिकॉर्ड हुई है। हालांकि, यह कमी जल्द ही पूरी हो सकती है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने अगले एक हफ्ते तक उत्तर भारत से लेकर दक्षिण और पूर्वोत्तर के अगल-अलग हिस्सों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में शनिवार सुबह जमकर बारिश हुई, जिससे मौसम सुहावना हो गया है। मौमस विभाग की मानें तो अगले एक हफ्ते तक दिल्ली में ऐसा ही मौसम बना रहेगा। मौसम विभाग ने बताया कि मानसून पहले अपनी नॉर्मल पोजीशन पर था। लेकिन, अब यह पूर्वोत्तर की ओर शिफ्ट हो रहा है। जिस वजह से पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी बारिश की स्थिति बनी हुई है। वहीं, देश के अलग-अलग क्षेत्रों में हुई बारिश से फसलों और सब्जियों का काफी नुकसान पहुंचा है। खासकर सब्जियों की पैदावार बारिश से काफी प्रभावित हुई हैं। जिससे सब्जियां इन दिनों महंगी हो गई हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>इन राज्यों में होगी बारिश&nbsp;</strong></p>
<p>मौसम विभाग ने 16 जुलाई तक देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी से मध्यम बारिश का अलर्ट जारी किया है। आईएमडी के डेली बुलिटेन के अनुसार, अगले 5 दिनों के दौरान हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में छिटपुट से भारी बारिश की संभावना है। 13 से 16 जुलाई के दौरान गोवा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात क्षेत्र, तेलंगाना, केरल, तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।</p>
<p>इसके अलावा, अगले 5 दिनों के दौरान असम, मेघालय, ओडिशा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, झारखंड, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, नागालैंड और मणिपुर में भी बारिश होने की संभावना है।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश में मानसून की बारिश सामान्य से 3 फीसदी कम, उत्तर पश्चिम भारत में सबसे कम बरसे बादल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वनस्पति तेलों का आयात जून में 18 फीसदी बढ़ा, 15.51 लाख टन तेल हुआ आयात]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/import-of-vegetable-oils-increased-by-18-percent-in-june-2024.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 12 Jul 2024 14:32:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/import-of-vegetable-oils-increased-by-18-percent-in-june-2024.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गत जून महीने में वनस्पति तेलों का आयात 18 फीसदी बढ़ा है। इस साल जून में कुल 15.51 लाख टन वनस्पति तेलों का आयात हुआ है, जो जून 2023 के 13.15 लाख टन वनस्पति तेल आयात से 18 फीसदी अधिक है। चालू तेल वर्ष 2023-24 में नवंबर से जून तक पहले 8 महीनों में वनस्पति तेलों के आयात में 2 फीसदी की कमी आई है। <strong>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए)</strong> द्वारा जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है।</p>
<p>एईए के मुताबिक, तेल वर्ष 2023-24 के पहले 8 महीनों में 1.02 करोड़ टन वनस्पति तेलों का आयात किया, जबकि तेल वर्ष 2022-23 की इसी अवधि में यह 1.04 करोड़ टन था। इस जून महीने में देश में 15.27 लाख टन खाद्य तेल और 23,178 टन गैर खाद्य वनस्पति तेल का आयात हुआ। जबकि, जून 2023 में खाद्य तेल का आयात 13.11 लाख टन और गैर खाद्य वनस्पति तेल का आयात 2900 टन हुआ था।&nbsp;</p>
<p>चालू तेल वर्ष 2023-24 में नवंबर 2023 से जून 2024 के दौरान 8 महीनों में पाम ऑयल का आयात 4 फीसदी घटा है। यह आयात गत वर्ष में 60.31 लाख टन था, जो इस साल घटकर 57.63 लाख टन रह गया। इस दौरान रिफाइंड ऑयल के आयात में 2 फीसदी और क्रूड ऑयल के आयात में 3 फीसदी की गिरावट आई है।&nbsp;</p>
<p>एईए के मुताबिक, तेल वर्ष 2023-24 के पहले आठ महीनों के दौरान भारत में सोयाबीन तेल का आयात 18.68 लाख टन रहा, जो नवंबर-जून 2022-23 के दौरान 24.8 लाख टन था। हालांकि, नवंबर-जून 2023-24 के दौरान भारत में सूरजमुखी तेल का आयात बढ़कर 24.63 लाख टन हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 18.53 लाख टन था।&nbsp;</p>
<p>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने कहा, "हमें विश्वास है कि इस वर्ष का बजट कृषि पर ध्यान केंद्रित करेगा। तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और खाद्य तेलों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए खाद्य तेलों पर राष्ट्रीय मिशन शुरू करेगा। जिससे आयात पर हमारी निर्भरता कम होगी।" एसईए ने पूर्व-बजट ज्ञापन में क्रुड और रिफाइंट तेलों के बीच शुल्क के अंतर को 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की मांग की है। साथ ही क्रूड ऑयल पर वर्तमान शुल्क को 5 फीसदी से बढ़कार 20 फीसदी करने तथा रिफाइंड ऑयल पर शुल्क को बढ़ाकर 35 फीसदी करने की मांग की है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ वनस्पति तेलों का आयात जून में 18 फीसदी बढ़ा, 15.51 लाख टन तेल हुआ आयात ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बिना सब्सिडी वाले उर्वरकों को विनियंत्रित करने पर विचार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-may-plan-to-deregulate-non-subsidised-fertilisers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 12 Jul 2024 07:24:28 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-may-plan-to-deregulate-non-subsidised-fertilisers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>लोक सभा चुनावों के पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रालयों से नई सरकार के पहले 100 दिनों का एजेंडा बनाने को कहा था। उर्वरक मंत्रालय ने अपने 100 दिन के एजेंडा में सब्सिडी में कटौती से लेकर यूरिया और डीएपी जैसे समेत तमाम उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी जैसे कदमों को शामिल किया था। &nbsp;लेकिन लोक सभा चुनाव में नतीजे भाजपा के मुताबिक नहीं आने और गठबंधन की सरकार&nbsp; के चलते किसानों पर बोझ डालने वाले कदम उठाये की संभावना काफी कम रह गई है। ऐसे में उर्वरक सुधारों के मोर्चे पर बिना सब्सिडी वाले स्पेशियलाइज्ड उर्वरकों और लिक्विड उर्वरकों की मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाने और विनियंत्रित करने जैसे फैसलों की संभावना बन रही है।&nbsp;</p>
<p>नई सरकार के पहले 100 दिन के एजेंडा में यूरिया और यूरिया गोल्ड की कीमतों को तर्कसंगत बनाने की बात शामिल थी। वहीं डीएपी और दूसरे कॉम्पलेक्स उर्वरकों की कीमतों को भी तर्कसंगत यानी रेशनलाइज करने की बात कही गई है। यहां कीमतों को तर्कसंगत करने का सीधा मतलब कीमत वृद्दि से है। लेकिन अब जहां सरकार राजनीतिक रूप से बहुत मजबूत नहीं है और अक्तूबर में महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे कृषि के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले राज्यों में विधान सभा चुनाव हैं तो सरकार यूरिया या डीएपी जैसे उर्वरकों की कीमतों में किसी भी तरह&nbsp; के इजाफे से बचेगी क्योंकि उससे राजनीति&nbsp; नुकसान हो सकता है।</p>
<p>वहीं वैश्विक बाजार में यूरिया के दाम कम होने से सब्सिडी के मोर्चे पर सरकार के लिए स्थिति अब बेहतर है। यूरिया की आयात कीमत (सीएफआर) घटकर 350 डॉलर प्रति टन के आसपास आ गई है। रूस यूक्रेन युद्ध के बाद 2022 में यूरिया की कीमतें &nbsp;900 डॉलर प्रति टन तक चली गई थी। वहीं डीएपी के कच्चे माल सल्फ्यूरिक एसिड की कीमत 1700 डॉलर प्रति टन को पार कर गई थी। ऐसे में सरकार को सब्सिडी के मोर्चे पर पहले अधिक राहत है। उर्वरकों की घटती कीमतों के चलते ही उर्वरक सब्सिडी 2022-23 के 251,339.36 करोड़ रुपये से घटकर 2023-24 में 189487.44 करोड़ रुपये पर आ गई थी। वहीं चालू वित्त वर्ष (2024-25) के अंतरिम बजट में सरकार ने 163,999.80 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी का प्रावधान किया है।</p>
<p>सरकार के प्रावधानों के मुताबिक यूरिया को छोड़कर न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनपीएस) स्कीम के तहत आने वाले उर्वरकों की कीमतें विनियंत्रित हैं लेकिन सरकार ने कॉम्पलेक्स उर्वरकों की कीमत को तय स्तर पर रखने के लिए अनौपचारिक रूप से उर्वरक कंपनियों को निर्देश दे रखा है। यही वजह है कि आयात लागत अधिक होने के बावजूद कंपनियों ने डीएपी की अधिकतम खुदरा बिक्री कीमत (एमआरपी) को 27000 रुपये टन, एमओपी की कमत को 30000 से 31000 रुपये प्रति टन और एसएसपी की कीमत को 11000 रुपये टन पर रखा है। वहीं उर्वरक कंपनियों को मुनाफे को तर्कसंगत स्तर पर रखने के भी निर्देश हैं। उद्योग सूत्रों का कहना है कि डीएपी की मौजूदा वैश्विक कीमतों पर भी उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।</p>
<p>वहीं यूरिया की एमआरपी सरकार ने नवंबर, 2012 से 5360 रुपये प्रति टन के स्तर पर ही स्थिर रखी है। सब्सिडी के तहत आने वाले 29 उर्वरकों में करीब 94 फीसदी बिक्री यूरिया, डीएपी, एसएसपी,एमओपी समेत सात उर्वरकों की ही होती है।&nbsp;</p>
<p>मौजूदा राजनीतिक परिदृष्य में सरकार के पास उर्वरकों के मोर्चे पर सुधार के लिए जो विकल्प हैं उनमें बिना सब्सिडी वाले उर्वरकों को बढ़ावा देने वाले कदम शामिल हैं। इनके तहत स्पेशियलाइज्ड उर्वरकों की मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है जिसकी उद्योग लगातार मांग करता रहा है। भारत में उर्वरक उत्पादों की मंजूरी प्रक्रिया काफी लंबी है। वर्ल्ड बैंक की 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मंजूरी प्रक्रिया में 804 दिन लगते हैं। जबकि रूस में 570 दिन, ब्राजील में 528 दिन, पाकिस्तान में 356 दिन, चीन में 270 दिन, कनाडा में 225 दिन, अर्जेंटीना में 120 दिन, थाइलैंड में 100 दिन, अमेरिका में 90 दिन, जापान में 30 दिन और यूरोपीय यूनियन में इसकी अवधि रिपोर्ट में शून्य बताई गई है।</p>
<p>भारत में आवेदन करने और फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर जारी होने तक की प्रक्रिया को उद्योग काफी लंबी और थकाऊ बताता रहा है। उद्योग का तर्क है कि न्यूट्रिएंट के मानक पूरा करने वाले उत्पादों के मामले में इस अवधि को घटाया जाता है तो बाजार में अधिक उर्वरक उत्पाद उतारे जा सकते हैं और किसानों को इसका फायदा होगा। वहीं एक तर्क यह है कि सरकार सब्सिडी वाले उर्वरकों की खपत कम करने के लिए वाटर साल्यूबल फर्लिटाइजर्स (डब्लूएसएफ) की तर्ज पर स्पेशियलाइज्ड उर्वरकों की मंजूरी प्रकिया को सरल करती है तो सब्सिडी वाले उर्वरकों की खपत कम होगी।</p>
<p>सरकार ने अक्तूबर 2015 में जनरल स्पेसिफिकेशन के मानकों को पूरा करने वाले वाटर साल्यूबल फर्टिलाइजर (डब्लूएसएफ) को ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन का प्रावधान कर दिया था। इसके चलते कई कंपनियों ने करीब 100 डब्लूएसएफ उत्पाद बाजार में उतारे&nbsp; हैं। सूत्रों के मुताबिक डब्लूएसएफ की तरह ही न्यूट्रिएंट मानकों को पूरा करने वाले लिक्विड उर्वरकों को ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन के प्रावधान के तहत लाने का प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है। इन उत्पादों में 15 फीसदी न्यूनतम प्राइमरी न्यूट्रिएंट होने का मानक रखा जा सकता है।</p>
<p>मौजूदा परिस्थिति में सरकार यूरिया और डीएपी जैसे उत्पादों को विनियंत्रित करने की स्थिति में तो नहीं है लेकिन गैर सब्सिडी वाले लिक्विड उर्वरकों के संबंध में इस तरह का कदम उठा सकती है।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बिना सब्सिडी वाले उर्वरकों को विनियंत्रित करने पर विचार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार के लिए 15 जुलाई से करें आवेदन, पशुपालकों को मिलेगा 5 लाख का इनाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/apply-for-national-gopal-ratna-award-2024-from-15-july-know-how-to-apply.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 11 Jul 2024 15:48:09 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/apply-for-national-gopal-ratna-award-2024-from-15-july-know-how-to-apply.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय पशुपालन और डेयरी विभाग के तहत <strong>राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार</strong> के लिए <strong>15 जुलाई, 2024</strong> से आवेदन प्रक्रिया शुरू हो रही है। पशुपालक 15 जुलाई से राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। यह पुरस्कार विभिन्न श्रेणियों के लिए दिया जाएगा। जिसमें प्रथम आने वाले पशुपालक को 5 लाख रुपये का इनाम मिलेगा। पुरस्कार के लिए आवेदन 31 अगस्त तक स्वीकार किए जाएंगे। अंतिम तिथि के बाद पशुपालक इसके लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे।&nbsp;</p>
<p>यह पुरस्कार स्वदेशी गाय/भैंस नस्ल का पालन करने वाला सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान, सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी समिति (डीसीएस)/दूध उत्पादक कंपनी (एमपीसी)/डेयरी किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (एआईटी) की श्रेणियों में दिया जाएगा। इस वर्ष से विभाग ने उत्तर पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) राज्यों के लिए एक विशेष पुरस्कार शामिल किया है, ताकि उत्तर पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) में डेयरी विकास गतिविधियों को प्रोत्साहित और बढ़ावा दिया जा सके।</p>
<p>सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान और सर्वश्रेष्ठ डीसीएस/एफपीओ/एमपीसी के विजेताओं को योग्यता प्रमाणपत्र, एक स्मृति चिन्ह के साथ नकद इनाम भी दिया जाएगा। इन दोनों श्रेणियों में प्रथम आने वाले विजेता को 5 लाख, दूसरे स्थान के विजेता को 3 लाख, तीसरे स्थान के विजेता को 2 लाख और उत्तर पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) के लिए विशेष पुरस्कार विजेता को भी 2 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। वहीं, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (एआईटी) के विजेता को योग्यता प्रमाण पत्र और एक स्मृति चिन्ह दिया जाएगा। इस श्रेणी के लिए नगद इनाम नहीं दिया जाएगा।</p>
<p>राष्ट्रीय दुग्ध दिवस (26 नवंबर, 2024) के अवसर पर यह पुरस्कार विजेताओं को दिए जाएंगे। पुरस्कार से जुड़ी अधिक जानकारी और आवेदन करने के लिए पशुपालक <strong><a href="https://awards.gov.in/">https://awards.gov.in</a></strong> या <a href="https://dahd.nic.in/"><strong>https://dahd.nic.in</strong></a> पर आवेदन कर सकते हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668faed55a909.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार के लिए 15 जुलाई से करें आवेदन, पशुपालकों को मिलेगा 5 लाख का इनाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668faed55a909.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत से बासमती का निर्यात 13 फीसदी बढ़ा, अप्रैल&amp;#45;मई में 8651 करोड़ रुपये का निर्यात]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/demand-for-indian-basmati-increased-by-13-percent-in-international-markets-exports-reached-8.6-thousand-crore-rupees.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 11 Jul 2024 12:36:04 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/demand-for-indian-basmati-increased-by-13-percent-in-international-markets-exports-reached-8.6-thousand-crore-rupees.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>विदेशी बाजारों में भारतीय बासमती चावल की डिमांड में उछाल देखने को मिला है। जिस वजह से अप्रैल-मई (2024-25) में बासमती चावल के निर्यात में 13 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल-मई (2024-25) में भारत का कुल निर्यात 8651.43 करोड़ रुपये रहा। जबकि, एक साल पहले की अवधि में यह 7,536.60 करोड़ रुपये था। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, एक साल पहले बासमती चावल का निर्यात 8.3 लाख टन था, जो अप्रैल-मई 2024-25 में 16 फीसदी बढ़कर 9.65 लाख टन हो गया।&nbsp;</p>
<p>सऊदी अरब ने भारत से सबसे ज्यादा बासमती चावल खरीदा है। सऊदी अरब ने अप्रैल-मई में 2.18 लाख टन से अधिक मात्रा में बासमती की खरीद की है, जो पिछले साल की तुलना में 1.54 लाख टन के साथ 41 फीसदी अधिक है। वहीं, मूल्य के हिसाब से देखें तो भारत ने सऊदी अरब को 2036 करोड़ रुपये का बासमती चावल निर्यात किया है। जबकि, एक साल पहले की अवधि में यह 1286 करोड़ रुपये था।&nbsp;</p>
<p>इसी तरह, दूसरे सबसे बड़े खरीदार इराक ने भारत से 1.57 लाख टन से अधिक का बासमती निर्यात किया है, जो पिछले साल से 27 फीसदी अधिक है। मूल्य के हिसाब से इराक ने पिछले साल 1081 करोड़ रुपये का बासमती भारत से खरीदा था, जो 23 फीसदी बढ़कर इस साल 1348 करोड़ रुपये रहा। अप्रैल-मई में ईरान भारतीय बासमती का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा। लेकिन, ईरान के शिपमेंट में 24 फीसदी की कमी आई है। अप्रैल-मई (2024-25) में शिपमेंट एक साल पहले के 1.53 लाख टन की तुलना में घटकर 1.16 लाख टन रह गया।&nbsp;</p>
<p>अमेरिका ने भी अप्रैल-मई में पिछले साल की तुलना से 43 फीसदी अधिक बासमती चावल आयात किया है। मूल्य के हिसाब से अमेरिका ने भारत से अप्रैल-मई में 500.47 करोड़ रुपये का बासमती चावल खरीदा है, जो एक साल पहले की अवधि में 342.69 करोड़ रुपये था।&nbsp;<br />&nbsp;<br />भारत दुनिया में बासमती चावल का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। पिछले वित्तीय वर्ष में बासमती चावल का निर्यात 15 फीसदी अधिक रहा था। निर्यातक लगातार बासमती चावल के एक्सपोर्ट पर लगे 950 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) को कम करने की मांग कर रहे हैं। जिससे बासमती चावल का एक्सपोर्ट और बढ़ सके। निर्यातकों को उम्मीद है कि सरकार जल्द इस पर कोई फैसला ले सकती है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668f81db54b03.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत से बासमती का निर्यात 13 फीसदी बढ़ा, अप्रैल-मई में 8651 करोड़ रुपये का निर्यात ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[&amp;apos;किसानों को प्रदर्शन करने से नहीं रोका जा सकता&amp;apos;, हाईकोर्ट ने शंभू बॉर्डर खोलने का दिया आदेश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/high-court-asked-the-haryana-government-to-remove-the-barricades-at-shambhu-border-within-a-week.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 10 Jul 2024 16:21:51 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/high-court-asked-the-haryana-government-to-remove-the-barricades-at-shambhu-border-within-a-week.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>शंभू बॉर्डर पर किसान पिछले पांच महीनों से न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून (एमएसपी कानून) सहित अन्य मांगों को लेकर डटे हुए हैं। लेकिन, अब किसान दिल्ली की ओर कूच कर पाएंगे। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शंभू बॉर्डर को खोलने का आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट ने इसके लिए हरियाणा सरकार को 7 दिनों की मोहलत दी है। आदेश जारी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अंबाला के निकट शंभू बॉर्डर पर लगाए गए बैरिकेड्स को एक सप्ताह के भीतर हटाया जाए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा को कानून व्यवस्था बनाए रखने का भी आदेश जारी किया है।</p>
<p>हाईकोर्ट ने कहा कि शंभू बॉर्डर पर स्थिति शांतिपूर्ण है। किसानों की मांग केंद्र सरकार से है और इसलिए उन्हें दिल्ली की तरफ जाने की छूट दे देनी चाहिए। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने कहा कि अगर वे शंभू बॉर्डर से बैरिकेड हटा देते हैं तो फिर किसान अंबाला में घुस जाएंगे और एसपी ऑफिस का घेराव करेंगे। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में किसानों को राज्य में घुसने या घेराव करने से नहीं रोका जा सकता।</p>
<p>हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि हम हाईकोर्ट के आदेश को पढ़ेंगे। बाद में 16 जुलाई को सभी किसान संगठन मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों की तरफ से कोई भी रास्ता बंद नहीं किया जाएगा। वहीं, किसान नेता मनजीत राय ने कहा, "हम इस फैसले का स्वागत करते हैं। हम यहां नहीं बैठना चाहते, हम दिल्ली जाना चाहते हैं। हम इस बारे में मीटिंग कर अगली रणनीति तय करेंगे और अगले संघर्ष का एलान करेंगे।"&nbsp;</p>
<p>हरियाणा के अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक सभरवाल ने कहा कि अदालत ने हरियाणा सरकार को सात दिनों के भीतर बैरिकेडिंग हटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि कोई कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है, तो वह कानून के अनुसार निवारक कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार से यह भी कहा गया है कि यदि उनकी तरफ कोई बैरिकेडिंग है, तो उसे भी हटा दिया जाना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>सभरवाल ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 10 फरवरी को बैरिकेड्स लगाए गए थे। किसान 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डटे हुए हैं। हालांकि, बॉर्डर पर किसानों की संख्या में धीरे-धीरे कमी आई है।</p>
<p>बता दें कि शंभू बॉर्डर खुलवाने की मांग को लेकर अंबाला निवासी एडवोकेट वासु शांडिल्य ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। याचिका में केंद्र, हरियाणा व पंजाब सहित कई किसान नेताओं को पक्ष बनाया गया था। लगभग पांच महीने से नेशनल हाईवे-44 किसान प्रदर्शन की वजह से बंद पड़ा है। इससे अंबाला के दुकानदार,व्यापारी, छोटे-बड़े रेहड़ी फड़ी वालों का व्यापार पूरी तरह से ठप हो गया है।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668e7412918c9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ 'किसानों को प्रदर्शन करने से नहीं रोका जा सकता', हाईकोर्ट ने शंभू बॉर्डर खोलने का दिया आदेश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत में टिकाऊ कृषि&amp;#45;खाद्य प्रणाली के लिए सार्वजनिक&amp;#45;निजी भागीदारी पर जोर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/emphasis-on-public-private-partnership-for-sustainable-agri-food-system-in-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 10 Jul 2024 12:13:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/emphasis-on-public-private-partnership-for-sustainable-agri-food-system-in-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सार्वजनिक-निजी भागीदारी कृषि की कई चुनौतियों का समाधान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है<span>, </span>जिसमें किसानों तक नवाचार का प्रसार<span>, </span>अनुसंधान को बढ़ावा देना और किसानों को सही बाजार संपर्क प्राप्त करने में मदद करना शामिल है। मंगलवार को कृषि विज्ञान उन्नयन ट्रस्ट (<span>TAAS) </span>ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (<span>ICAR), </span>भारतीय बीज उद्योग महासंघ (<span>FSII) </span>और भारतीय राष्ट्रीय बीज संघ (<span>NSAI) </span>के सहयोग से राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (<span>NASC), </span>पूसा परिसर में "कृषि में सार्वजनिक-निजी भागीदारी: भावी रणनीति" विषय पर एक विचार-मंथन का आयोजन किया। इसमें कृषि वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने कृषि में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की संभावनाओं और चुनौतियों पर अपने विचार रखे। इस दौरान कई महत्वपूर्ण सुझाव भी आए।<span>&nbsp;</span></p>
<p>वर्तमान में<span>, </span>भारत का कृषि क्षेत्र देश के <span>50%</span> से अधिक कार्यबल को रोजगार देता है और देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग <span>17%</span> का योगदान देता है। हालांकि<span>, </span>इस योगदान को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए नई तकनीकों और तौर-तरीकों को अपनाना आवश्यक है। इस संबंध में निजी क्षेत्र ने जबरदस्त क्षमता दिखाई है। खास तौर पर जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत बीज किस्में विकसित करने के मामले में। <span>2022</span> तक<span>, </span>आनुवंशिक रूप से संशोधित बीटी कॉटन को अपनाने से उपज में <span>24%</span> की वृद्धि और कीटनाशक के उपयोग में <span>50%</span> की कमी आई है<span>, </span>जो निजी भागीदारी के परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाता है।</p>
<p>इस विचार-मंथन में वैज्ञानिकों<span>, </span>शोधकर्ताओं<span>, </span>नीति निर्माताओं और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों सहित <span>60</span> से अधिक प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। किसानों के लाभ और नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए कृषि क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट रोड मैप विकसित करने पर जोर दिया गया।<span>&nbsp;</span></p>
<p><strong>डॉ. आरएस परोदा</strong><span>, </span>संस्थापक अध्यक्ष<span>, </span>टीएएएस व पूर्व सचिव डेयर तथा महानिदेशक<span>, </span>आईसीएआर ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा<span>, "</span>भारतीय कृषि एक चौराहे पर है। बढ़ती खाद्य मांग को पूरा करने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए<span>, </span>हमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की ताकत का लाभ उठाना चाहिए। टिकाऊ कृषि के लिए नवाचारों को बढ़ाने के लिए प्रभावी पीपीपी आवश्यक हैं।" उन्होंने आगे कहा<span>, "</span>कृषि अनुसंधान में वर्तमान सार्वजनिक निवेश बहुत कम है<span>, </span>इसलिए साझेदारी के माध्यम कृषि अनुसंधान निवेश को बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने की आवश्यकता है। हमें कृषि में वार्षिक वृद्धि दर को कम से कम <span>4% </span>तक बढ़ाने की आवश्यकता है। भारत की अनुमानित <span>5 </span>ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि से लगभग <span>1 </span>ट्रिलियन डॉलर का योगदान करना होगा।"</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_668e2d4a6c01f.jpg" alt="" /></p>
<p>मुख्य अतिथि <strong>डॉ. त्रिलोचन महापात्रा</strong><span>, </span>अध्यक्ष<span>, </span>पीपीवी एंड एफआरए ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी मौजूदा चुनौतियों का सामना करने और कृषि विकास के नए अवसरों को खोलने का प्रभावी साधन है।</p>
<p>एफएसआईआई के अध्यक्ष <strong>अजय राणा </strong>ने कृषि के कायाकल्प में बीज उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा<span>, "</span>निजी बीज क्षेत्र ने पहले ही महत्वपूर्ण योगदान दिया है<span>, </span>विशेष रूप से बीटी कॉटन जैसी आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों के क्षेत्र में। फिर भी स्ट्रैटेजिक पीपीपी के माध्यम से आगे की प्रगति की अपार संभावनाएं हैं। हमारा लक्ष्य उच्च गुणवत्ता वाली बीज किस्मों का विकास और प्रसार है जो भारतीय कृषि में क्रांति ला सकते हैं।"</p>
<p>विचार-मंथन में शामिल हितधारक सार्वजनिक और निजी दोनों अनुसंधान संस्थानों की क्षमताओं का उपयोग करने को लेकर एकमत थे। राष्ट्रीय महत्व की पीपीपी परियोजनाओं के माध्यम से ऐसी क्षमताओं का प्रभावी ढंग से दोहन किया जा सकता है। अनुसंधान<span>, </span>पहुंच, प्रॉफिट शेयरिंग तथा सक्षम नीतियों में प्रभावी सहयोग की तत्काल आवश्यकता है।</p>
<p>भारतीय बीज उद्योग महासंघ (FSII) के सलाहकार <strong>राम कौंडिन्या</strong> ने कहा<span>, "</span>बाजार संचालित अनुसंधान और जीनोम एडिटिंग जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाना महत्वपूर्ण है। मजबूत पीपीपी के माध्यम से<span>, </span>हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नवाचार हों तथा किसानों की उत्पादकता और लाभ बढ़ाने के लिए जल्द उन तक पहुंचें।"</p>
<p>विचार-मंथन सत्र में पीपीपी की प्रमुख बाधाओं और सफल मॉडलों की पहचान की गई<span>, </span>जिन्हें बड़े पैमाने पर दोहराया जा सकता है। चर्चाएं जैव प्रौद्योगिकी<span>, </span>डिजिटल कृषि<span>, </span>सटीक खेती और मूल्य श्रृंखला सुधार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित थीं। कृषि अनुसंधान और विकास में निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने के लिए मददगार नीतियों और प्रोत्साहनों की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_668e2d6a90858.jpg" alt="" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668e2d05726ee.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत में टिकाऊ कृषि-खाद्य प्रणाली के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर जोर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668e2d05726ee.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज की महंगाई रोकने के लिए सरकार ने कमर कसी, बफर स्टॉक पर दारोमदार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-has-geared-up-to-curb-the-price-rise-of-onion-the-responsibility-is-on-the-buffer-stock.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 09 Jul 2024 18:52:24 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-has-geared-up-to-curb-the-price-rise-of-onion-the-responsibility-is-on-the-buffer-stock.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्याज की महंगाई पर काबू पाने इस साल भी केंद्र सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। सरकार के सामने प्याज उत्पादक किसानों की नाराजगी से बचने और उपभोक्ताओं को प्याज की बढ़ती कीमतों की मार से बचाने की दोहरी चुनौती है। ऐसे में पूरा दारोमदार बफर स्टॉक के लिए 5 लाख टन प्याज की खरीद पर है। केंद्र सरकार की मूल्य स्थिरीकरण योजना के तहत यह बफर स्टॉक बनाया जाता है।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग ने 2024-25 के लिए सहकारी संस्थाओं नेफेड और एनसीसीएफ को ढाई-ढाई लाख टन प्याज की खरीद का लक्ष्य दिया है। ये नोएड एजेंसियां मंत्रालय द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) और सहकारी समितियों (पैक्स) को वरीयता देते हुए इनके माध्यम से प्याज की खरीद करती हैं।</p>
<p>उपभोक्ता मामलों के विभाग ने 2015-16 में प्याज का बफर स्टॉक बनाने की शुरुआत की थी। पिछले तीन साल से बफर स्टॉक के लिए प्रतिवर्ष दो-दो लाख टन से अधिक प्याज की खरीद हो रही है। हाल के वर्षों में प्याज की कीमतों को थामने में यह रणनीति काफी कारगर साबित हुई है। क्योंकि बाजार में हस्तक्षेप के लिए सरकार के पास प्याज का पर्याप्त स्टॉक रहता है। इसी के बूते लोकसभा चुनाव से पहले सरकार प्याज की कीमतों पर काबू पाने में कामयाब रही थी।&nbsp;</p>
<p><strong>खरीद प्रक्रिया में कई बदलाव</strong>&nbsp;&nbsp;</p>
<p>बफर स्टॉक के लिए प्याज खरीद के लिए नेफेड ने पहली बार ए ग्रेड प्याज के लिए 63 फीसदी रिकवरी का बेंचमार्क रखा है। पिछले वर्ष यह 56 फीसदी था। उससे पहले बेंचमार्क रिकवरी दर 45-50 फीसदी के बीच रहती थी। रिकवरी दर बढ़ने से पांच लाख टन के बफर में 90,000 टन अधिक प्याज की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। इससे सरकार को करीब 500 करोड़ रुपए की बचत होगी और बाजार में हस्तक्षेप के लिए अतिरिक्त स्टॉक होगा। पिछले साल जहां प्याज की औसत दर 16.93 रुपये प्रति किलोग्राम थी, वहीं इस साल लगभग 29.5 रुपये प्रति किलोग्राम पर खरीद हो रही है। खरीद का भुगतान किसानों को डीबीटी के माध्यम से किया जा रहा है।&nbsp;</p>
<p>बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीद की व्यवस्था में और भी कई बदलाव किए गये हैं। प्याज की खरीद मंडियों की बजाय सीधे किसानों, एफपीओ, एफपीसी या पैक्स से की जा रही है। प्याज खरीद के लिए कीमतें हर सप्ताह मंत्रालय द्वारा तय होती हैं। इससे प्याज खरीद में मंडियों और आढ़तियों की भूमिका घटी है और कीमतों में उतार-चढ़ाव की उनकी क्षमता भी प्रभावित हुई है।&nbsp;</p>
<p>प्याज की कीमतों पर उतार-चढ़ाव पर अंकुश लगाने में कृषि मंत्रालय की मार्केट इंटरवेंशन स्कीम और खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की टॉप स्कीम के नाकाम होने के बाद केंद्र सरकार का पूरा दारोमदार अब नेफेड और एनसीसीएफ के जरिए बफर स्टॉक बनाने पर है। इस वर्ष देश में प्याज का उत्पादन पिछले साल की तुलना में 20-25 फीसदी कम रहने की आशंका है। अभी से महानगरों में प्याज के दाम 60-70 रुपये किलो तक पहुंच गये हैं। ऐसे में बफर स्टॉक के लिए पर्याप्त खरीद महत्वपूर्ण हो जाती है। &nbsp;</p>
<p><strong>प्याज खरीद पर विवाद&nbsp;</strong></p>
<p>बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीद को लेकर हाल में कुछ विवाद उठे हैं। महाराष्ट्र में केंद्रीय एजेंसियों नेफेड और एनसीसीएफ के लिए प्याज की खरीद में अनियमितता के आरोप लग रहे हैं। असल में यह पूरा विवाद मंडी से खरीद बनाम किसानों या एफपीओ से सीधे खरीद को लेकर है। बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीद से मंडी के व्यापारियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव की क्षमता प्रभावित हुई है। लेकिन सरकारी एजेंसियों की खरीद का कितना लाभ किसानों को मिल पा रहा है, इसका आकलन भी जरूरी है। बफर के लिए खरीद में <span>किसानों की बजाय व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के आरोप भी लग रहे हैंं।&nbsp;</span></p>
<p>हालांकि, बफर स्टॉक के लिए मंडियों से प्याज खरीदने में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें हैं। मंडी में उपज की गुणवत्ता और बराबर दाम सुनिश्चित करना मुश्किल होता है जबकि सरकारी एजेंसियों को निर्धारित कीमत पर ही खरीद करनी पड़ती है। उन्हें क्वालिटी का भी ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि बफर स्टॉक के लिए खरीदा गया प्याज स्टोरेज के लिए होता है, रोजाना खुदरा बिक्री के लिए नहीं।&nbsp;</p>
<p>किसानों के लिए भी खेत से ही एजेंसियों को प्याज की बिक्री में ज्यादा सहूलियत है। उन्हें पहले से पता होता है कि किसी भाव पर प्याज की खरीद होगी। इससे उन्हें उचित फैसला लेने में सहूलियत होती है। दूसरी तरफ मंडी जाने वाले किसानों को कीमत का सही अंदाजा नहीं होता है। क्योंकि मंडियों में रोजाना कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>कई सवाल</strong>&nbsp;</p>
<p>पिछले दो-तीन वर्षों देश में प्याज लॉबी की मजबूत पकड़ को तोड़ने में बफर खरीद से काफी मदद मिली है। लेकिन इसे लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। यह भी कहा गया है कि सरकारी एजेंसियों के लिए खरीदी गई प्याज का कोई अता-पता नहीं है। हालांकि एजेंसियों का दावा है कि प्याज स्टोरेज की जियो टैगिंग की जाती है जिनकी लोकेशन और पूरा ब्योरा पोर्टल पर उपलब्ध है। स्टोरेज पर क्यूआर कोड लगाए गये हैं जिनमें वजन, जमा करने की तिथि और जिन किसानों से प्याज खरीदा गया उनके नाम दर्ज होते हैं।&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र के अलावा अन्य राज्यों से भी प्याज खरीद के लिए नेफेड और एनसीसीएफ केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा निर्धारित प्रक्रिया को अपना रहा है। लेकिन खरीद में गड़बड़ी के आरोप मुख्यत: महाराष्ट्र में नासिक और आसपास के इलाकों में लग रहे हैं। बफर स्टॉक बनने से सबसे ज्यादा प्रभाव इसी क्षेत्र की प्याज मंडियों पर पड़ा है।&nbsp;</p>
<p><strong>सिर्फ बफर स्टॉक काफी नहीं&nbsp;</strong></p>
<p>जहां तक ​​प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव के संकट से उबरने का सवाल है तो केवल बफर स्टॉक बनाने से यह पूरी समस्या हल होने वाली नहीं है। इसके लिए कृषि मंत्रालय को प्याज के उत्पादन में बढ़ोतरी और किसानों को उपज का सही दाम दिलावने के उपाय निकालने होंगे। बफर स्टॉक बनाने और एफपीओ से सीधी खरीद से मंडी सिस्टम की पकड़ कुछ ढीली जरूर पड़ी है। लेकिन इस खरीद की अपनी सीमाएं हैं। इसका लाभ सीमित संख्या में किसानों को मिलता है जबकि देश में प्याज के उत्पादन में स्थायित्व के लिए सभी किसानों को उपज का सही दाम मिलना चाहिए। अभी भी प्याज किसानों को मिलने वाले दाम और खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं के लिए प्याज के दाम में कई गुना का अंतर है।&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668d3553cc2ce.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज की महंगाई रोकने के लिए सरकार ने कमर कसी, बफर स्टॉक पर दारोमदार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668d3553cc2ce.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों को नहीं मिल रहा मूंग की एमएसपी में बढ़ोतरी का फायदा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmers-are-not-getting-the-benefit-of-increase-in-msp-of-moong-in-madhya-pradesh-and-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 09 Jul 2024 08:38:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmers-are-not-getting-the-benefit-of-increase-in-msp-of-moong-in-madhya-pradesh-and-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में मूंग के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की है। फसल विविधिकरण के तहत भी मूंग जैसी दलहन फसलों को उगाने पर जोर दिया जाता है। लेकिन किसानों को मूंग को सही दाम नहीं मिल पा रहा है।&nbsp;प्रमुख उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में मूंग एमएसपी से कम दाम पर बिक रही है। मूंग की सरकारी खरीद में भी किसानों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मूंग का एमएसपी 8,558 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि किसानों को 7 से 8 हजार प्रति क्विंटल में अपनी उपज बेचनी पड़ रही है।</p>
<p>मध्य प्रदेश सरकार ने इस बार मूंग खरीद की मात्रा 8 क्विंटल तक सीमित कर दी है। जबकि, कई जिलों में मूंग की पैदावार 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। जिस वजह से किसान अपनी पूरी उपज सरकार को नहीं बेच पा रहे हैं और उन्हें ओपन मार्केट में एमएसपी के कम दाम पर अपनी फसल बेचने को मजबूर होना पड़ा रहा है।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में मूंग का औसत खुदरा कीमत 118 रुपये प्रति किलो के आसपास है। खुदरा बाजार में मूंग 120 से 150 प्रति किलो में बिक रही है। जबकि, किसानों से उनकी उपज 60 से 80 प्रति किलो में खरीदी जा रही है। यानी किसानों को उनकी उपज के लिए आधा दाम भी बड़ी मुश्किल से मिल रहा है।</p>
<p>मध्यप्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष <strong>केदार शंकर सिरोही</strong>&nbsp;ने<strong> रूरल वॉयस</strong> को बताया कि किसानों को खरीद में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहला यह कि राज्य सरकार ने मूंग खरीद को अधिकतम 8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक सीमित कर दिया है। जबकि, राज्य में मूंग की उत्पादकता औसतन 10 से 12 कुंटल प्रति हेक्टेयर है। कई जिलों में यह 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक भी है। लेकिन खरीद की मात्रा सीमित होने के चलते किसानों को नुकसान हो रहा है और उन्हें बची हुई उपज एमएसपी ने कम दाम पर निजी व्यापारियों को बेचनी पड़ रही है।</p>
<p>दूसरी ओर किसानों से मूंग की प्रतिदिन खरीद मात्रा भी सरकार ने 25 क्विंटल तक सीमित कर दी है, जिसे 40 क्विंटल करने की मांग की जा रही थी। सिरोही ने कहा कि एक दिन में किसान सिर्फ 25 क्विंटल मूंग की बेच पा रहे हैं। जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बार-बार मंडियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने वादा किया था कि किसानों से उनकी पूरी उपज खरीदी जाएगी। लेकिन, ऐसा होता दिख नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार दालों के मामले में आत्मनिर्भरता का सपना देख रही है। वहीं दूसरी तरफ देश मे उत्पादित दलहन की खरीद में आनाकानी की जा रही है।&nbsp;</p>
<p>उधर, <strong>पंजाब</strong> में इस वर्ष सरकार ने मूंग की खरीद नहीं की है। राज्य में किसानों को एमएसपी से कम भाव पर मूंग व्यापारियों को बेचनी पड़ रही है।&nbsp;पंजाब राज्य कृषि विपणन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, मई के आखिर से अब तक राज्य की मंडियों में लगभग 26,966 टन मूंग पहुंची है। इसमें से 26,865 टन मूंग एमएसपी से कम दाम पर बिकी है। इस तरह मूंग की अधिकांंश खरीद एमएसपी से नीचे हुई। इसका फायदा निजी खरीददारों ने उठाया। पंजाब में मूंग की खरीद पंजाब राज्य सहकारी आपूर्ति एवं विपणन संघ लिमिटेड (मार्कफेड) की ओर से की जाती है। लेकिन इस बार राज्य सरकार की तरफ से मूंग खरीद का आदेश जारी नहीं हुआ। यह स्थिति तब है जबकि किसानों को फसल विविधिकरण के तहत मूंग उगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। लेकिन अब मूंग का एमएसपी दिलाने की कोई व्यवस्था नहीं है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों को नहीं मिल रहा मूंग की एमएसपी में बढ़ोतरी का फायदा ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बजट पूर्व बैठकों का दौर पूरा, वित्त वर्ष 2024&amp;#45;25 का पूर्ण बजट 23 जुलाई को]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pre-budget-meetings-concludes-budget-to-be-presented-on-23rd-july.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 07 Jul 2024 21:18:38 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pre-budget-meetings-concludes-budget-to-be-presented-on-23rd-july.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2024-25 के पूर्ण बजट के लिए बजट-पूर्व परामर्श का दौर पूरा कर लिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन की अध्यक्षता में 19 जून 2024 को वित्त मंत्रालय ने विभिन्न समूहों के साथ बजट पूर्व चर्चा शुरू की थी। वित्त मंत्रालय की तरफ से रविवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार इस क्रम में आखिरी बैठक 5 जुलाई 2024 को हुई।<br />इस परामर्श के दौरान 10 समूहों के 120 से अधिक आमंत्रित लोगों ने भाग लिया। परामर्श में हिस्सा लेने वालों में किसान संगठन एवं कृषि क्षेत्र, ट्रेड यूनियन, शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र, रोजगार एवं कौशल, एमएसएमई, व्यापार एवं सेवा, उद्योग, वित्तीय क्षेत्र एवं पूंजी बाजार के साथ-साथ बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और शहरी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ व प्रतिनिधि शामिल थे।<br />2024-25 का पूर्ण बजट 23 जुलाई को पेश किया जाएगा। आम चुनाव का साल होने के कारण 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश किया गया था। माना जा रहा है कि पूर्ण बजट में अगले कुछ वर्षों के लिए विकास का रोडमैप रखा जाएगा। इस बजट में रोजगार, कृषि और एमएसएमई जैसे क्षेत्रों पर फोकस बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा निर्यात बढ़ाने के उपायों पर भी जोर दिया जा सकता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बजट पूर्व बैठकों का दौर पूरा, वित्त वर्ष 2024-25 का पूर्ण बजट 23 जुलाई को ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[टमाटर की महंगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट, भीषण गर्मी से उत्पादन प्रभावित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/tomato-inflation-spoils-kitchen-budget-production-affected-due-to-extreme-heat.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 06 Jul 2024 13:59:24 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/tomato-inflation-spoils-kitchen-budget-production-affected-due-to-extreme-heat.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्याज के बाद अब टमाटर ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। बीते एक महीने में टमाटर के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं। एक महीने पहले तक 40 से 50 रुपये प्रति किलो बिकने वाला टमाटर अब 70-80 रुपये तक पहुंच चुका है। दिल्ली-एनसीआर में टमाटर 70 से 80 रुपये किलो के भाव बिक रहा है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग की प्राइस मॉनिटरिंग डिवीजन के अनुसार, देश भर में टमाटर की औसत खुदरा कीमत 58.25 रुपये किलो है, जो महीने भर पहले की कीमत 35.39 रुपये से करीब 64 फीसदी अधिक है।</p>
<p>टमाटर की कीमतें बढ़ने के पीछे भीषण गर्मी और हीट वेव बड़ी वजह हैं। पिछले महीने तक पड़ी भीषण गर्मी के चलते टमाटर की फसल प्रभावित हुई है। इस वजह से मुख्य टमाटर उत्पादक राज्यों से टमाटर की आवक कम हो गई है और दाम तेजी से बढ़े हैं। हालांकि टमाटर अब भी पिछले साल से सस्ता बिक रहा है। पिछले साल इस समय तक टमाटर के दाम 150 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गये थे। व्यापारियों का कहना है कि इस साल टमाटर की कीमतें उतनी नहीं बढ़ेंगी। नई फसल आने के बाद दाम कम होंगे।</p>
<p><strong>किसानों को मिल रहे 25 से 30 रुपये&nbsp;</strong><br />बाजार में भले ही टमाटर की कीमतें 70-80 रुपये तक पहुंच गई हों, लेकिन किसानों को इसका आधा दाम भी नहीं मिल रहा। किसानों को प्रति किलो 25 से 30 रुपये में बेचना पड़ रहा है। टमाटर की उत्पादन लागत 20 से 22 रुपये तक है। किसानों का कहना है कि कीमतें हर साल बढ़ती हैं। लेकिन, बिचौलियों के कारण उन्हें कुछ खास मुनाफा नहीं होता। हालांकि, कीमतें बढ़ने से उन्हें थोड़ी राहत जरूर मिलती है। लेकिन, यह साल के सिर्फ कुछ ही महीनों में होता है। &nbsp; &nbsp;</p>
<p><strong>क्यों बढ़ रहे टमाटर के दाम</strong><br />भारत में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत के राज्यों में टमाटर का उत्पादन सबसे ज्यादा होता है। लेकिन, अप्रैल और मई में पड़ी भीषण गर्मी के चलते टमाटर के उत्पादन पर असर पड़ा है। साथ ही हीटवेव के कारण कई क्षेत्रों में टमाटर की फसल खराब हुई है। <strong>रूरल वॉयस</strong> से बात करते हुए भारतीय सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष <strong>श्रीराम गाढवे</strong> ने कहा कि अप्रैल-मई में इस बार भीषण गर्मी पड़ी थी, जिस वजह से महाराष्ट्र में 80 फीसदी उत्पादन प्रभावित हुआ है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि गर्मी ज्यादा होने से टमाटर की फसल में कीट लग जाते हैं। साथ ही पिछले 3 सालों से रसेट माइट, व्हाइटफ़्लाई और वायरस इंफेक्शन के चलते भी आवक लगातार कम हुई है। उन्होंने कहा कि यही हाल दक्षिण भारत का भी है। पहले गर्मी के कारण उपज प्रभावित हुई और अब बारिश के कारण फसल खराब हो रही है। इस वजह से उत्तर भारत में टमाटर की सप्लाई पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के मुकाबले उत्तर भारत में टमाटर के दाम ज्यादा हैं। वहां टमाटर 50 रुपये किलो तक बिक रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>कब कम होंगे टमाटर के दाम</strong><br />उधर हिमाचल में हो रही लगातार बारिश के कारण उत्तर भारत के लिए टमाटर की सप्लाई प्रभावित हुई है। उससे भी दाम तेजी से बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि दाम पिछले साल 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए थे। लेकिन, इस बार दाम उतने नहीं बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि अब गर्मी भी कम हो गई है, ऐसे में अगले 40 से 50 दिनों में नई फसल बाजार में आ जाएगी। जिसके बाद दाम कम होने की उम्मीद है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ टमाटर की महंगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट, भीषण गर्मी से उत्पादन प्रभावित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वेज थाली 10 फीसदी महंगी हुई, प्याज&amp;#45;टमाटर की बढ़ती कीमतों का असर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/veg-thali-rates-increased-by-10-percent-due-to-rising-prices-of-onion-tomato-and-potato-rates-of-non-veg-thali-decreased.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 05 Jul 2024 15:57:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/veg-thali-rates-increased-by-10-percent-due-to-rising-prices-of-onion-tomato-and-potato-rates-of-non-veg-thali-decreased.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्याज-टमाटर और आलू की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। जिसका असर अब आम जनता की थाली पर दिखने लगा है। जून 2024 में वेज थाली की लागत 10 फीसदी बढ़ गई है। जबकि, नॉन वेज थाली की लागत में 4 फीसदी की कमी आई है।</p>
<p><strong>क्रिसिल मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिसिस (क्रिसिल)</strong> की ओर से जून महीने के लिए जारी की गई <strong>"राइस रोटी रेट"</strong> रिपोर्ट से यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार,&nbsp;वेज थाली की लागत जून में 10 फसदी बढ़कर 29.4 रुपये प्रति थाली हो गई है। एक साल पहले की अवधि में यह कीमत 26.7 रुपये थी। वहीं, मई 2024 में वेज थाली की लागत 27.8 रुपये थी।</p>
<p><strong>वेज थाली</strong> की बढ़ी लागत के पीछे सब्जियों (टमाटर, प्याज और आलू) की लगातार बढ़ रही कीमतों को वजह बताया गया है। पिछले एक साल की अवधि में टमाटर की कीमतों में 30 फीसदी, प्याज में 46 फीसदी और आलू के दाम में 59 फीसदी की वृद्धि हुई है। जिसके चलते वेज थाली की लागत मई के मुकाबले 6 फीसदी बढ़ी है। पिछले एक महीने के दौरान (मई 2024 से जून 2024) आलू 9 फीसदी, प्याज 15 फीसदी और टमाटर 29 फीसदी महंगा हुआ है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, प्याज की बुवाई के क्षेत्र में गिरावट, बेमौसम बारिश के कारण आलू की पैदावार में गिरावट और टमाटर में अत्यधिक गर्मी के कारण वायरस इंफेक्शन की वजह से इन सब्जियों के उत्पादन और आवक पर असर पड़ा है।&nbsp;बुवाई के क्षेत्र में कमी और आवक में कमी के कारण चावल की कीमतें 13 फीसदी बढ़ गई हैं। इसी तरह खरीफ सीजन में बारिश की कमी के चलते दालों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। दालों की कीमतों में सालाना आधार पर 22 फीसदी की वृद्धि हुई है।&nbsp;</p>
<p>वेज थाली की कीमत भले ही बढ़ी हो, लेकिन <strong>नॉन-वेज थाली</strong> की कीमत कम हुई है। जून में नॉन-वेज थाली की लागत घटकर 58 रुपये रह गई, जबकि एक साल पहले यह 60.5 रुपये थी। वहीं, मई 2024 में नॉन-वेज थाली की कीमत 55.9 रुपये थी। महीने के हिसाब से देखें तो जून में नॉन-वेज 3.75 फीसदी महंगी हुई है।</p>
<p>सालाना आधार पर नॉन-वेज थाली की घटने के&nbsp;ब्रॉयलर की कीमतों में आई लगभग 14 फीसदी की कमी प्रमुख वजह है। जबकि सब्जियों की महंगाई का असर नॉन-वेज थाली पर भी पड़ा है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ वेज थाली 10 फीसदी महंगी हुई, प्याज-टमाटर की बढ़ती कीमतों का असर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि नवाचर और खाद्य सुरक्षा के लिए अमेरिका और भारत में आपसी सहयोग पर जोर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/us-india-agricultural-cooperation-is-necessary-for-food-security-emphasis-will-have-to-be-given-on-wheat-production.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 03 Jul 2024 13:16:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/us-india-agricultural-cooperation-is-necessary-for-food-security-emphasis-will-have-to-be-given-on-wheat-production.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>द व्हीट प्रोडक्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (डब्ल्यूपीपीएस) द्वारा आयोजित वैश्विक सीईओ कॉन्क्लेव 2024 में "डब्ल्यूपीपीएस ग्लोबल सीईओ कॉन्क्लेव गेहूं और गेहूं उत्पाद विजन 2030: व्यापार गतिशीलता, रुझान और प्रौद्योगिकी" विषय के अंतर्गत प्रभावशाली चर्चाओं का सिलसिला जारी रहा। इस कार्यक्रम का समापन वैश्विक गेहूं उद्योग के भविष्य को आकार देने के उद्देश्य से गहन अंतर्दृष्टि और रणनीतिक सिफारिशों के साथ हुआ।<strong></strong><strong>&nbsp;</strong></p>
<p>इस सम्मेलन ने वैश्विक गेहूं बाजार के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। वैश्विक गेहूं बाजार जलवायु परिवर्तन और उतार-चढ़ाव वाली मांग जैसे मुद्दों के बीच 2027 तक 258.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। भारत और विदेश से 50 से अधिक वक्ताओं ने केंद्रित व्यावसायिक सत्रों और पैनल चर्चाओं में भाग लिया, जिसमें गेहूं उद्योग के महत्वपूर्ण पहलुओं पर गहन चर्चा की गई। चर्चाएँ आटे के फोर्टिफिकेशन पर केंद्रित थीं, जिसका उद्देश्य वैश्विक आबादी के 30 प्रतिशत में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को कम करना था, साथ ही बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच गेहूं के अर्थशास्त्र की जाँच करना था। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गेहूं उत्पादक के रूप में वैश्विक खाद्य सुरक्षा को बढ़ाने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को भी प्रमुखता से दिखाया गया।<strong></strong>&nbsp;</p>
<p><strong>खाद्य सुरक्षा के लिए यू.एस. भारत कृषि सहयोग: द्विपक्षीय प्रयासों को मजबूत करना<br /></strong><br />यू.एस. कृषि विभाग/विदेशी कृषि सेवा में कृषि मंत्री-परामर्शदाता <strong>क्ले एम. हैमिल्टन</strong> ने हाल ही में "खाद्य सुरक्षा के लिए यू.एस.-भारत कृषि सहयोग" पर एक मुख्य प्रस्तुति दी। अंतर्राष्ट्रीय कृषि सहयोग के ढांचे के भीतर आयोजित इस सत्र में प्रौद्योगिकी और साझेदारी पहलों के माध्यम से वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक प्रयासों पर प्रकाश डाला गया।&nbsp;</p>
<p>प्रस्तुति में दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों, संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच कृषि सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया। दोनों राष्ट्र वैश्विक जनसंख्या वृद्धि, बदलते आहार पैटर्न और पर्यावरणीय अनिश्चितताओं के बीच अपनी आबादी की खाद्य मांगों को पूरा करने में महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। अपनी-अपनी शक्तियों का लाभ उठाकर और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देकर, अमेरिका और भारत का लक्ष्य कृषि उत्पादकता को बढ़ाना, खाद्य वितरण प्रणालियों में सुधार करना और स्थायी खाद्य सुरक्षा समाधान सुनिश्चित करना है।&nbsp;</p>
<p>डब्ल्यूपीपीएस के अध्यक्ष <strong>अजय गोयल</strong> ने सम्मेलन के दौरान चर्चा की गई रणनीतिक सिफारिशों के महत्व पर जोर दिया: "हमारा उद्योग एक महत्वपूर्ण बिंदु पर है जहाँ सहयोग और नवाचार पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। इस सम्मेलन से प्राप्त अंतर्दृष्टि और सिफारिशों का लाभ उठाकर, हम आगे की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं और वैश्विक गेहूं क्षेत्र के लिए एक टिकाऊ और समृद्ध भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।"&nbsp;</p>
<p><strong>वैश्विक निहितार्थ और स्थानीय कार्यवाहियाँ</strong><br /><br />सम्मेलन के विषय में गेहूं उद्योग की दीर्घकालिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करने में संधारणीय कृषि पद्धतियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया। चूंकि उद्योग को बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए सम्मेलन ने संधारणीय खेती का समर्थन करने वाले नीतिगत ढाँचों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। सिफारिशों में पर्यावरण के अनुकूल उर्वरकों, कुशल जल प्रबंधन प्रणालियों और सटीक कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा देना शामिल था जो गेहूं उत्पादन के पारिस्थितिक पदचिह्न को कम करते हुए उत्पादकता बढ़ाते हैं।<br /><br />नीति निर्माताओं से ऐसे नियम विकसित करने और लागू करने का आग्रह किया गया जो संधारणीय प्रथाओं को प्रोत्साहित करते हैं और किसानों को पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करते हैं। नीतिगत पहलों को संधारणीयता लक्ष्यों के साथ जोड़कर, गेहूं उद्योग अपने कार्बन पदचिह्न को काफी कम कर सकता है, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कर सकता है और जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों में योगदान दे सकता है। यह दृष्टिकोण न केवल गेहूं की खेती की संधारणीयता सुनिश्चित करता है बल्कि पूरे कृषि क्षेत्र की लचीलापन को भी बढ़ाता है।&nbsp;</p>
<p><strong>अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी को मजबूत करना</strong><br /><br />व्यापार की गतिशीलता और प्रवृत्तियों पर केंद्रित विषय के आलोक में, सम्मेलन ने अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी को मजबूत करने के महत्व पर महत्वपूर्ण जोर दिया। वैश्विक गेहूं आपूर्ति श्रृंखला की विशेषता इसकी जटिलता और अन्योन्याश्रितता है, जिसमें उत्पादन, प्रसंस्करण और वितरण कई देशों में फैला हुआ है। सम्मेलन की सिफारिशों में भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक उतार-चढ़ाव और जलवायु संबंधी चुनौतियों के कारण होने वाले व्यवधानों का सामना करने में सक्षम लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण के लिए राष्ट्रों के बीच सहयोग और समन्वय बढ़ाने का आह्वान किया गया।<br /><br />अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देकर, गेहूं उद्योग वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भी गेहूं और गेहूं उत्पादों की स्थिर और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित कर सकता है। इसमें ऐसे व्यापार समझौते स्थापित करना शामिल है जो माल के सुचारू प्रवाह को सुविधाजनक बनाते हैं, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करते हैं और कुशल रसद और वितरण का समर्थन करने वाले बुनियादी ढांचे में निवेश करते हैं। वैश्विक गेहूं बाजार की अखंडता और स्थिरता को बनाए रखने के लिए इन साझेदारियों को मजबूत करना महत्वपूर्ण है, जिससे दुनिया भर की आबादी के लिए खाद्य आपूर्ति सुरक्षित हो सके।<br /><br />ग्लोबल सीईओ कॉन्क्लेव 2024 ने गेहूं उद्योग के भविष्य के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रदान किया, जिसमें नवाचार, स्थिरता और सहयोग पर जोर देने वाली सिफारिशें शामिल हैं। इन सिफारिशों को अपनाकर, उद्योग के हितधारक वैश्विक गेहूं क्षेत्र के लिए एक समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं, जिससे उत्पादकों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण को समान रूप से लाभ हो। जैसे-जैसे गेहूं उद्योग आगे बढ़ता है, सम्मेलन से प्राप्त अंतर्दृष्टि और सिफारिशें 2030 के दृष्टिकोण के अनुरूप स्थायी विकास और स्थिरता प्राप्त करने के लिए एक मार्गदर्शक ढांचे के रूप में काम करेंगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6684fed7aa5fd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि नवाचर और खाद्य सुरक्षा के लिए अमेरिका और भारत में आपसी सहयोग पर जोर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मानसून ने समय से 6 दिन पहले देश को किया कवर, जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-covered-the-country-6-days-ahead-of-schedule-july-forecast-to-have-above-normal-rainfall.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 03 Jul 2024 12:17:13 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-covered-the-country-6-days-ahead-of-schedule-july-forecast-to-have-above-normal-rainfall.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दक्षिण-पश्चिम मानसून ने समय से 6 दिन पहले पूरे भारत को कवर कर लिया है। मंगलवार को मानसून देश के बचे हुए क्षेत्रों में आगे बढ़ गया। सामान्य रूप से मानसून 8 जुलाई तक पूरे देश में पहुंचता है। लेकिन, इस वर्ष मानसून समय से पहले चल रहा है। मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि मानसून अपने सामान्य समय से छह दिन पहले ही पूरे भारत में पहुंच गया है।</p>
<p>मानसून केरल और पूर्वोत्तर क्षेत्र में 30 मई को पहुंचा था, जो सामान्य से दो दिन पहले था। इसके बाद महाराष्ट्र तक यह सामान्य रूप से आगे बढ़ा, लेकिन फिर इसकी गति धीमी हो गई। जिसकी वजह से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बारिश का इंतजार बढ़ गया। यही वजह रही की इस वर्ष उत्तर भारत में भीषण गर्मी का प्रभाव देखने को मिला। हालांकि, अब मानसून पूरे देश में पहुंच चुका है और मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में अच्छी बारिश का पूर्वानुमान जताया है।</p>
<p><strong>जुलाई ने सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान</strong></p>
<p>मौसम विभाग ने जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया है। आईएमडी प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों और उत्तर-पश्चिम, पूर्व और दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। यह लंबी अवधि के औसत (एलपीए) 28.04 सेमी से 106 प्रतिशत अधिक रह सकती है। उन्होंने कहा कि हम जुलाई में मानसून के दौरान अच्छी बारिश की उम्मीद कर रहे हैं। इसके साथ ही आईएमडी ने पश्चिमी तट को छोड़कर उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे रहने की संभावना भी जताई है।&nbsp;</p>
<p><strong>इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट&nbsp;</strong></p>
<p>मौसम विभाग ने आने वाले 3 से 4 दिनों में देशभर में भारी बारिश का अनुमान जताया है। आईएमडी के डेली बुलेटिन के मुताबिक, 4 से 6 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पूर्वी राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है। इसी तरह, 5 और 6 जुलाई को अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है। इसको लेकर मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मानसून ने समय से 6 दिन पहले देश को किया कवर, जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों के मुद्दे पर संसद में तीखी बहस, राहुल और शिवराज आए आमने&amp;#45;सामने]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/heated-debate-between-rahul-gandhi-and-shivraj-singh-chouhan-in-parliament-on-the-issue-of-msp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 01 Jul 2024 19:03:45 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/heated-debate-between-rahul-gandhi-and-shivraj-singh-chouhan-in-parliament-on-the-issue-of-msp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसानों से जुड़े मुद्दों पर सोमवार को संसद में जोरदार बहस हुई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मुद्दे पर आमने-सामने आ गए। राहुल गांधी ने संसद में किसान आंदोलन, फसलों की एमएसपी समेत कई मुद्दों पर बीजेपी सरकार को घेरा। लेकिन, माहौल तब गरमाया जब उन्होंने केंद्र सरकार पर किसानों को एमएसपी न दिए जाने का आरोप लगाया। जिस पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी और कांग्रेस पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों से फसलों का सही एमएसपी दिया जा रहा है और खरीद भी लगातार जारी है।&nbsp;</p>
<p>राहुल गांधी ने संसद में बीजेपी पर हमला करते हुए कहा, "केंद्र सरकार किसानों को डराने के लिए तीन कृषि कानून लेकर आई थी। ये कानून किसानों को नहीं, बल्कि अडानी-अंबानी को फायदा पुहंचाने के लिए लाए गए थे। किसान आंदोलन में 700 किसान शहीद हुए, लेकिन आपने उनके लिए मौन तक नहीं रखा। आपने किसानों को आतंकवादी तक कहा। सरकार ने अरबपतियों का 16 लाख करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया, तो किसानों का कर्ज क्यों नहीं माफ किया। किसानों ने आपसे एमएसपी की मांग की, लेकिन आपने न एमएसपी दी और न कर्ज माफ किया।"</p>
<p>राहुल गांधी के इन सवालों पर केंद्रीय कृषि मंत्री तुरंत खड़े हुए और उन पर गलत बयान देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "ये गलत बयानी कर सदन को गुमराह कर रहे हैं। एमएसपी पर खरीद आज भी जारी है। अभी 14 खरीफ फसलों का एमएसपी बढ़ाया गया है। उत्पादन की लागत पर कम से कम 50 फीसदी जोड़कर किसानों को एमएसपी दी जा रही है। यदि नहीं दी जा रही है तो इस बात को सत्यापित करें।" इस दौरान कृषि मंत्री ने कांग्रेस सरकार के समय एमएसपी खरीद को लेकर भी सवाल पूछा। उन्होंने कहा, "ये बताएं कि जब इनकी सरकार थी तब कितनी एमएसपी थी और उसमें खरीद कितनी होती थी।"</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान की बात सुनकर राहुल गांधी फिर खड़े हुए और एमएसपी के लिए लीगल गारंटी की मांग की। उन्होंने कहा कि किसान एमएसपी पर लीगल गारंटी चाहते हैं। लेकिन, सरकार ने किसानों को डरा रखा है। हर वर्ग सरकार से परेशान है और सरकार ने हर वर्ग को भय का तोहफा दिया है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों के मुद्दे पर संसद में तीखी बहस, राहुल और शिवराज आए आमने-सामने ]]></media:description>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कुल खाद्य तेल खपत में 38% से अधिक हुआ पाम ऑयल का हिस्सा, घरेलू उत्पादन बढ़ाने के प्रयास]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/efforts-to-boost-domestic-production-of-palm-oil-as-it-exceeds-38-percent-of-total-edible-oil-consumption.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 30 Jun 2024 11:43:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/efforts-to-boost-domestic-production-of-palm-oil-as-it-exceeds-38-percent-of-total-edible-oil-consumption.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">पाम ऑयल पर भारत की निर्भरता बढ़ रही है। देश के कुल खाद्य तेल उपभोग में 38% से अधिक हिस्सा पाम ऑयल का हो गया है। इस मांग को पूरा करने के लिए 2025-26 तक अतिरिक्त 6 लाख हेक्टेयर तक पाम ऑयल की खेती के क्षेत्र के विस्तार करने की जरूरत है। इस विस्तार से घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। संकेत है कि कच्चे पाम ऑयल का उत्पादन 2025-26 तक 11.2 लाख टन तक पहुंच सकता है। यह 2029-30 तक 28 लाख टन तक पहुंच सकता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इंदौर में "पाम ऑयल - स्वास्थ्य और पोषण के लिए धारणाओं में बदलाव" पर आयोजित कार्यशाला में ये बातें कही गईं। इसका आयोजन सॉलिडारिडाड, एशियन पाम ऑयल एलायंस एवं द सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने संयुक्त रूप से किया। कार्यशाला में पोषण विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और खाद्य तेल उद्योग द्वारा पाम ऑयल के गुणों और भारत के खाद्य तेल परिदृश्य में इसकी भूमिका पर चर्चा की गई। कार्यशाला का मुख्य फोकस पाम ऑयल के स्वास्थ्य संबंधी गुणों पर प्रकाश डालते हुए इसके बारे में फैली गई भ्रामक जानकारियों को दूर करना है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस अवसर पर एशियन पाम ऑयल अलायंस के चेयरमैन अतुल चतुर्वेदी ने बताया कि दुनिया में पाम ऑयल का सबसे बड़ा आयातक होने के नाते भारत खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत में सदियों से पाम ऑयल का इस्तेमाल कई खाद्य और गैर-खाद्य उत्पादों में होता रहा है। हालांकि, हाल के वर्षों में स्वास्थ्य, पोषण और पर्यावरण पर इसके प्रभाव के बारे में भ्रामक रिपोर्ट सामने आई हैं, जिससे हमारे किसानों, खासकर छोटे किसानों को नुकसान हुआ है और हमारी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">डॉ. शतद्रु चट्टोपाध्याय, प्रबंध निदेशक, सॉलिडारिडाड एशिया ने मानकों के अनुसार स्वस्थ्य कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देते बताया कि महत्वपूर्ण फसल होने के बाद भी पाम ऑयल के विषय में गलत धारणाएं न केवल इस उद्योग की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करती हैं। छोटे किसान भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।&nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x_6680f714134da.jpg" alt="" /></p>
<p><span style="font-weight: 400;">द सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय झुनझुनवाला ने कहा कि हम भारतीय पाम ऑयल उद्योग में टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसानों को भारतीय पाम ऑयल स्थिरता मानक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करके, हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हमारी कृषि पद्धतियां पर्यावरण के अनुकूल और सामाजिक रूप से जिम्मेदार हों।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एसईए के कार्यकारी निदेशक डॉ. बीवी मेहता ने पाम के आर्थिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया, "भारत प्रतिवर्ष लगभग 90 लाख टन पाम ऑयल का आयात करता है, जिससे साफ है कि स्थानीय स्तर पर पाम की खेती बढ़ाने की आवश्यकता है। देश में कुल खाद्य तेल खपत में से पाम ऑयल की खपत 38% से अधिक हो गई है। सोयाबीन, सरसों और सूरजमुखी के तेलों की खपत भी उसके बाद है। खाद्य तेल उद्योग में अग्रणी होने के नाते, हम अपने किसानों को लाभ पहुंचाने और घरेलू उत्पादन को मजबूत करने के लिए पाम ऑयल के न्यूनतम विक्रय मूल्य को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड में ऑयल पाम बिजनेस के सीईओ सौगाता नियोगी ने कहा बताया कि &lsquo;खाद्य तेलों का राष्ट्रीय मिशन - ऑयल पाम&rsquo; हमारे देश के लिए खाद्य तेल आयात को कम करने की दिशा में एक सही कदम है। पाम 3-4 टन प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष उपज देने की क्षमता के साथ, अन्य वनस्पति तेल की तुलना में अधिक उपज देने वाली फसल है। इसमें गन्ना और धान जैसी अन्य फसलों की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है। ऑयल पाम क्षेत्र में जैव विविधता को बढ़ाने में भी सहायता करता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एनजी रंगा कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व डीन और पोषण विशेषज्ञ डॉ. विजया खादेर ने पाम ऑयल की गुणवत्ता पर कहा कि कई अध्ययनों से पता चलता है कि पाम ऑयल में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसी कारण से खाद्य और गैर-खाद्य दोनों उत्पादों में इसका उपयोग होता है। पाम ऑयल के बारे में कोई भी राय बनाने से पहले, यह जरूरी है कि लोग इसके गुणों के बारे में अच्छे से पढ़ें और समझे तभी वह&nbsp; केवल सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा करने के बजाय सही निर्णय ले पाएंगे।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कुल खाद्य तेल खपत में 38% से अधिक हुआ पाम ऑयल का हिस्सा, घरेलू उत्पादन बढ़ाने के प्रयास ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डेयरी इंडस्ट्री और दूध किसानों के लिए संकट बना स्किम्ड मिल्क पाउडर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/dairy-industry-and-milk-farmers-have-a-troubled-relationship-with-skimmed-milk-powder..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 29 Jun 2024 17:13:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/dairy-industry-and-milk-farmers-have-a-troubled-relationship-with-skimmed-milk-powder..html</guid>
        <description><![CDATA[ <p dir="ltr"><span>महाराष्ट्र के दूध किसानों को गाय के दूध के लिए 25 से 26 रुपये लीटर की कीमत मिल रही है। यह पिछले साल 38 रुपये प्रति लीटर तक थी। इसके चलते किसानों का आंदोलन हुआ तो राजनीतिक नुकसान से बचने के लिए राज्य सरकार ने 28 जून को पेश बजट में पांच रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी देने की घोषणा कर दी।&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>लेकिन ऐसी नौबत क्यों आई? करीब माह भर पहले ही देश के सबसे बड़े दूध ब्रांड अमूल, मदर डेयरी और नंदिनी ने दूध की खुदरा कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इसके विपरीत दक्षिण भारत के बड़े ब्रांड आरोक्या, डोडला और कुछ अन्य कंपनियों ने उपभोक्ताओं के लिए हाल में दूध की कीमतों में कमी की है क्योंकि किसानों से मिल रहे कम कीमत के फायदे को यह कंपनियां उपभोक्ताओं के साथ बांट रही हैं। पूरा मामला काफी पेचीदा है। इसमें दो बातें सच हैं। एक तो यह कि किसानों को दूध की कीमत कम मिल रही है और डेयरी कंपनियों की मुश्किलें भी बढ़ी हैं। दूसरा, पूरे मसले की जड़ में है स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) की कीमतों में भारी गिरावट जो मार्च 2023 की 350 रुपये प्रति किलो से घटकर अब 210 रुपये प्रति किलो पर आ गई हैं।</span></p>
<p dir="ltr"><span>असल संकट एसएमपी का है, इसलिए इस संकट को एसएमपी के बिजनेस डायनामिक्स से ही समझने की जरूरत है। इसके साथ यह भी सच है कि अगर इस मुश्किल का कोई हल नहीं निकला तो किसानों और डेयरी उद्योग के लिए यह संकट न केवल बना रहेगा बल्कि आने वाले दिनों में इसमें इजाफा होगा। जिन कंपनियों ने दूध की कीमतें बढ़ाई हैं, उसके पीछे भी एसएमपी के घाटे को कवर करना बड़ी वजह है।</span></p>
<p dir="ltr"><span>इस समय देश में करीब तीन लाख टन एसएमपी का स्टॉक है। यह स्टॉक सहकारी संस्थाओं अमूल, नंदिनी और निजी डेयरी कंपनियों के पास है। इसके उत्पादन की लागत करीब 300 से 350 रुपये प्रति किलो के बीच है। ऐसे में कंपनियों को मौजूदा कीमत पर बेचने पर करीब 700 करोड़ रुपये का घाटा झेलना पड़ेगा। देश में सालाना करीब पांच लाख टन एसएमपी का उत्पादन होता है।</span></p>
<p dir="ltr"><span>एसएमपी की मुश्किल गाय के दूध की वजह से अधिक है और अब देश में दूध उत्पादन में गाय के दूध की हिस्सेदारी बढ़ रही है। गाय के दूध में 3.5 फीसदी फैट और 8.5 फीसदी एसएनएफ होता है, यानी यही एसएमपी है। भारत में एनीमल फैट की खपत लगातार बढ़ रही है। इसलिए फैट का उत्पादन भी बढ़ा है।&nbsp;</span><span>दूध से जब फैट का उत्पादन करते हैं तो एसएमपी का भी उत्पादन होता है। इसे इस तरह समझ सकते हैं। 100 लीटर दूध का वजन 102.8 किलो होता है। इसमें से 3.5 फीसदी फैट है, तो गाय के 100 लीटर दूध से 3.598 किलो फैट मिलता है। इस दूध में 8.5 फीसदी एसएनएफ होने के चलते इससे 8.738 किलो एसएमपी भी मिलता है।&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>इस समय देश में एसएमपी की कीमत 210 रुपये प्रति किलो चल रही है। ऐसे में 8.738 किलो एसएमपी की बिक्री से 1835 रुपये की कमाई होती है। वहीं यलो बटर में 82 फीसदी फैट होता है जिससे 350 रुपये प्रति किलो की दर पर एक किलो फैट की कीमत 427 रुपये किलो बनती है। इसकी बिक्री से 1536 रुपये की कमाई होती है। इस तरह दोनों को जोड़ा जाए तो 100 लीटर गाय के दूध से बने फैट और एसएमपी की बिक्री से 3371 रुपये यानि 33.71 रुपये प्रति लीटर की कमाई डेयरी कंपनियों को रही है।&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>एसएमपी और फैट उत्पादन के लिए दूध के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और डेयरी के दूसरे खर्च करीब 3.5 रुपये लीटर बैठते हैं। दूध के कलेक्शन, कमीशन और ट्रांसपोर्ट पर भी करीब 3.5 रुपये लीटर का खर्च आता है। इस पूरी गणना के आधार पर बिना किसी मुनाफे या घाटे पर डेयरी कंपनियां किसानों को करीब 26.71 रुपये लीटर का भुगतान कर सकती हैं और महाराष्ट्र की निजी डेयरी कंपनियां किसानों को यही कीमत दे रही हैं।</span></p>
<p dir="ltr"><span>फरवरी-मार्च 2023 में जब दूध की किल्लत थी तो महाराष्ट्र की डेयरी कंपनियां येलो बटर से 430 से 435 रुपये किलो की कमाई कर रही थीं। उन्हें एसएमपी की कीमत 315 से 320 रुपये प्रति किलो मिल रही थी। यही वजह है कि पिछले साल कपनियां किसानों को 36 से 38 रुपये लीटर की दर से दूध का भुगतान कर रही थीं।</span></p>
<p dir="ltr"><span>एसएमपी की वैश्विक कीमत 2766 डॉलर प्रति टन चल रही है और रूपये की मौजूदा विनिमय दर पर करीब 231 रुपये किलो बैठती है। घरेलू कीमत 210 रुपये प्रति किलो है। ऐसे में देश में जो एसएमपी स्टॉक है, उसके निर्यात की संभावना न के बराबर है। दूसरी ओर एसएमपी का उत्पादन लगातार बढ़ता ही जाएगा। सितंबर में दूध उत्पादन का फ्लश सीजन शुरू होगा तो यह उत्पादन और बढ़ेगा।&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>हालांकि भैंस के दूध के मामले में यह समस्या कम है क्योंकि भैंस के दूध में सात फीसदी फैट और 9 फीसदी एसएनएफ होता है। इसलिए गाय के दूध से उतनी मात्रा में फैट का उत्पादन करने पर करीब दोगुना एसएमपी उत्पादन होता है। एसएमपी की खपत के विकल्प भी सीमित हैं। बिस्किट, कंफैक्शनरी, आइसक्रीम और कुछ दूसरे उत्पादों में ही इसकी खपत होती है। देश में उपभोक्ताओं में इसकी सीधी खपत बहुत अधिक नहीं होती है। वहीं, भारत के बाहर एनीमल फैट की बहुत ज्यादा खपत नहीं है। ऐसे में वहां की डेयरी कंपनियों की स्थिति भारत की कंपनियों से अलग है।</span></p>
<p dir="ltr"><span>डेयरी उद्योग के एक्सपर्ट का कहना है कि भारत को इसका हल खुद ही निकालना होगा। बेहतर होगा कि सरकार एसएमपी का बफर स्टॉक बनाये, या पड़ोसी देशों को सस्ते में या मुफ्त में निर्यात कर दे। कुछ कंपनियों ने टेक्नोलॉजी विकसित कर एसएमपी से प्रोटीन अलग कर उत्पाद बनाने शुरू किये हैं, लेकिन यह काम बड़े पैमाने पर सरकार को ही करना होगा। उस प्रोटीन को फोर्टिफिकेशन या दूसरे विकल्पों में उपयोग किया जा सकता है।&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>फिर भी, यह सच है कि एसएमपी का संकट बढ़ता जाएगा और इसका खामियाजा दूध किसानों को कम कीमत के रूप में भुगतान पड़ सकता है, क्योंकि देश में दूध उत्पादन बढ़ रहा है और इसमें गाय के दूध की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है। दिलचस्प बात यह है कि तरल दूध बेचने वाले बिजनेस में यह संकट नहीं है। यही वजह है कि किसानों से सस्ता दूध खरीदने वाली दक्षिण की कंपनियों ने उपभोक्ताओं के लिए दूध के दाम घटा दिये हैं। वहीं एसएमपी का घाटा पूरा करने के लिए उत्तर भारत में कंपनियों ने दूध के दाम बढ़ाए हैं।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ डेयरी इंडस्ट्री और दूध किसानों के लिए संकट बना स्किम्ड मिल्क पाउडर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फसल लागत की गणना में सुधार और सी2 के आधार पर एमएसपी तय करने की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/the-demand-to-fix-msp-of-crops-on-the-basis-of-comprehensive-cost-c2-gained-momentum..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 29 Jun 2024 15:37:48 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/the-demand-to-fix-msp-of-crops-on-the-basis-of-comprehensive-cost-c2-gained-momentum..html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार किसानों को फसलों की लागत का डेढ़ गुना एमएसपी देने का दावा कर रही है जबकि किसान संगठनों की ओर से फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने में व्यापक लागत (सी2) को आधार बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। <strong>ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस)</strong> ने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) से एक श्वेत पत्र जारी कर किसानों को सी2 और ए2+एफएल लागत के आधार पर एमएसपी के अंतर को समझाने की मांग की है। कई दूसरे किसान संगठन भी कमतर लागत (ए2+एफएल) की बजाय व्यापक लागत (सी2) के आधार पर एमएसपी घोषित करने की मांग उठा रहे हैं।</p>
<p>पिछले दिनों नई दिल्ली में <strong>कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी)</strong> ने रबी फसलों के एमएसपी निर्धारण से पहले किसान संगठनों के साथ बैठक की। इस बैठक में किसान संगठनों ने उपज की लागत गणना का मुद्दा उठाया। बैठक में <strong>भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) </strong>के प्रतिनिधियों ने एमएसपी का कानून बनाने तथा फसलों के दाम सी2 लागत के आधार पर तय करने की वकालत करते हुए एमएसपी को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x_667fefc4c5d87.jpg" alt="" width="648" height="420" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>भाकियू (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता <strong>धर्मेंद्र मलिक</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि एमएसपी की व्यवस्था और फसल लागत की गणना में सुधार के लिए कई सुझाव दिए गये हैं। एमएसपी की गणना में सी2 लागत को भी शामिल किया जाये। क्योंकि सी2 एक अधिक व्यापक लागत है, जिसमें खेती के खर्च (ए2) + पारिवारिक श्रम के मूल्य (एफएल) के साथ भूमि का किराया और बाकी खर्चों पर लगने वाला ब्याज भी शामिल किया जाता है। इसलिए सी2 लागत के ऊपर 50 फीसदी जोड़कर एमएसपी तय किया जाना चाहिए। धर्मेंद्र मलिक का कहना है कि हर सीजन में पारिवारिक श्रम (एफएल) के तहत केवल आठ दिनों के काम को गिना जाता है। कई वर्षों से सरकारी गणना में किसानों की उत्पादन लागत में मामूली बढ़ोतरी दर्शायी जा रही है, जिसके कारण किसानों को फसलों का सही दाम नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि जो एमएसपी तय किया जाता है, वह दाम किसानों को मिले, इसके लिए भी एक सिस्टम विकसित करना चाहिए।</p>
<p><strong>भाकियू (अराजनैतिक)</strong> ने सभी फसलों के एमएसपी तय करने, बागवानी फसलों और डेयरी उत्पादों को एमएसपी के दायरे में लाने तथा जलवायु परिवर्तन के कारण खेती के नुकसान को उत्पादन लागत की गणना में शामिल करने का सुझाव दिया है। साथ ही उत्पादन के आंकड़ों में पारदर्शिता और क्रॉप कटिंग डेटा के पैरामीटर तय करने की मांग की है।&nbsp;</p>
<p><strong>ऑल इंडिया किसान सभा </strong>(एआईकेएस) ने खरीफ फसलों पर उत्पादन लागत से डेढ़ गुना एमएसपी देने के सरकार के दावे पर आपत्ति जताते हुए इसे गलत करार दिया है। किसान सभा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भाजपा ने <span>2014 में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश को लागू करने का वादा किया था। लेकिन 10 साल बाद भी ए2+एफएल के आधार पर एमएसपी तय किए जा रहे हैं जो सी2+50% से बहुत कम है। </span>सी2 के आधार पर एमएसपी निर्धारित नहीं होने से किसानों को धान पर 712 रुपये प्रति कुंतल का नुकसान हो रहा है। एआईकेएस ने कहा कि 10 फीसदी से भी कम किसान सीएसीपी द्वारा घोषित एमएसपी से लाभान्वित होते हैं, क्योंकि एमएसपी पर सभी फसलों की खरीद सुनिश्चित करने की व्यवस्था नहीं है।&nbsp;<span>एआईकेएस ने अपनी मांगों के संबंध में सीएसीपी के अध्यक्ष प्रोफेसर विजय पाल शर्मा को इस संबंध में एक पत्र सौंपा।</span>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667fdce1410c2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ फसल लागत की गणना में सुधार और सी2 के आधार पर एमएसपी तय करने की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कोल ट्रांजिशन ने हाशिए के समुदायों के लिए पैदा की गंभीर चुनौतियां, एनएफआई की रिपोर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/coal-transition-poses-serious-challenges-for-marginalised-communities-national-foundation-for-india-report-reveals.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 26 Jun 2024 12:49:44 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/coal-transition-poses-serious-challenges-for-marginalised-communities-national-foundation-for-india-report-reveals.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया</strong> (एनएफआई) के एक व्यापक अध्ययन से यह पता चला है कि कोयले का इस्तेमाल खत्म करना हाशिए की आबादी के लिए गंभीर चुनौतियां पेश करता है। बुधवार को इस अध्ययन के निष्कर्षों पर आधारित रिपोर्ट जारी की गई। इस अध्ययन में शामिल छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के 1209 परिवारों में से 41.5 फीसदी परिवार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), 23 फीसदी अनुसूचित जनजाति (एसटी) और 17 फसदी अनुसूचित जाति (एससी) से संबंधित हैं, जबकि केवल 15.5 फीसदी परिवार ही सामान्य श्रेणी से हैं। आबादी के बड़े हिस्से, विशेष रूप से एससी, एसटी और ओबीसी की शिक्षा तक सीमित पहुंच पाई गई, जिनमें से कई ने केवल प्राथमिक शिक्षा हासिल की है या वे साक्षर भी नहीं है।&nbsp;</p>
<p><strong>"एट द क्रॉसरोड्स: मार्जिनलाइज्ड कम्युनिटीज एंड द जस्ट ट्रांजिशन डिलेमा"</strong> शीर्षक वाली अध्ययन रिपोर्ट भारत में कोल ट्रांजिशन&nbsp;के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पर एनएफआई द्वारा 2021 में किए गए अध्ययन की अगली कड़ी है। इस अध्ययन में तीन भारतीय राज्यों- छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के दो-दो जिलों को शामिल किया गया। इन जिलों में 1209 परिवारों का सर्वेक्षण किया गया और 20 फोकस समूह चर्चाएं (एफडीजी) आयोजित की गईं। इस अध्ययन में एससी/एसटी और हाशिए के समुदायों, जिनमें शिक्षा और स्वास्थ्य का स्तर पर काफी नीचे हैं, को बड़े पैमाने पर शामिल किया गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष</strong></p>
<p><strong>स्वास्थ्य चिंताएं:</strong> लंबे समय तक कोयला खनन से होने वाले प्रदूषण के संपर्क में रहने के कारण स्थानीय आबादी में सांस और त्वचा संबंधी बीमारियां बड़े पैमाने पर पाई गईं। फोकस समूह चर्चाओं (एफडीजी) में शामिल कम-से-कम 75 फीसदी प्रतिभागियों ने क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, अस्थमा और त्वचा संबंधी विभिन्न समस्याओं के बारे में बताया।&nbsp;</p>
<p><strong>आर्थिक प्रभाव/कोयले पर आर्थिक निर्भरता:</strong> कोयले का इस्तेमाल चरणबद्ध तरीके से ख़त्म करने से कोयले पर निर्भर क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नौकरियां खत्म होने और आर्थिक चुनौतियां सामने आने की आशंका है। इसका सीधा असर न केवल कोयला खनिकों और श्रमिकों पर पड़ेगा, बल्कि यह व्यापक स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>जाति-आधारित गैर-बराबरी</strong>: संसाधनों और अवसरों तक वंचित समुदाय की पहुंच में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) जैसे हाशिए के समुदाय विशेष रूप से प्रभावित हैं। रिपोर्ट में न्यायपूर्ण तरीके से कोल ट्रांजिशन&nbsp;का लक्ष्य हासिल करने से संबंधित कई चुनौतियों की पहचान की गई है, जिसमें आम तौर पर अल्पशिक्षित कामगारों के कौशल प्रशिक्षण की जरूरत और वैकल्पिक आजीविका की कमी आदि शामिल है। रिपोर्ट में समुदाय केंद्रित विशेष नीतियों, मजबूत संस्थागत तंत्र और सरकारी विभागों के बीच समन्वित प्रयासों की अहमियत को रेखांकित किया गया है। अध्ययन इन समुदायों के हितों की रक्षा के लिए एक संभावित रूपरेखा भी प्रस्तुत करता है।</p>
<p><strong>वैकल्पिक आजीविका:</strong> ऐसे नए आर्थिक अवसर पैदा करने पर जोर देना जो कोयले पर आधारित न हो।&nbsp;</p>
<p><strong>पारिस्थितिक सेहत बेहतर करना:</strong> कोयला खनन के स्वास्थ्य दुष्प्रभावों को कम करने के लिए पर्यावरण बेहतर करने के उपायों को बढ़ावा देना।&nbsp;</p>
<p><strong>समावेशी नीतियां:</strong> यह सुनिश्चित करना कि कोल ट्रांजिशन&nbsp;संबंधी नीतियां समावेशी हों और ये हाशिए के समुदायों की जरूरतों को ध्यान में रखे।&nbsp;</p>
<p>अध्ययन की सह-लेखिका और एनएफआई की रिसर्च एसोसिएट <strong>पूजा गुप्ता</strong> ने कहा, "अध्ययन में शामिल विभिन्न जिलों में सामाजिक और आर्थिक असमानताएं स्पष्ट रूप से सामने आईं। इन जिलों में लोगों के आय के स्तर अलग-अलग हैं और उन्हें अनियमित मजदूरी मिलती है।" उन्होंने आगे कहा, "पूरी तरह से कोयला पर निर्भर धनबाद (झारखंड) और कोरिया (छत्तीसगढ़) में लोगों की आय अंगुल (ओडिशा) जैसे ज्यादा विविधता वाले औद्योगिक जिलों की तुलना में कम है।"</p>
<p>उन्होंने यह भी बताया कि सर्वेक्षण और क्षेत्र भ्रमण के दौरान यह पाया गया कि बुनियादी कल्याण योजनाओं तक लोगों की पहुंच बहुत कम थी, जिससे ये समुदाय और ज्यादा असुरक्षित हो जाते हैं। यह भी पाया गया कि इन क्षेत्रों में बड़ी नीतिगत और संस्थागत चुनौतियां हैं, जो प्रशासनिक लापरवाही, सेवाओं की अपर्याप्त उपलब्धता और अपूर्ण संरचनाओं के रूप में सामने आता है। उन्होंने कहा, "स्पष्ट योजना के बिना, बंद होने वाले उद्योगों में काम करने वाले श्रमिक अचानक बेरोजगार हो सकते हैं और उन्हें पर्याप्त सहयोग या रोजगार के वैकल्पिक अवसर भी उपलब्ध नहीं होंगे। ऐसे हालात में प्रभावित समुदायों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।"</p>
<p>एनएफआई के कार्यकारी निदेशक <strong>बिराज पटनायक</strong> ने कहा, "अध्ययन से जानकारी मिली है कि कोयला-निर्भर क्षेत्रों में शिक्षा और आजीविका के अवसरों तक पहुंच में जाति-आधारित गैर-बराबरी मौजूद है। हाशिए के समुदायों पर कोल ट्रांजिशन के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों से निपटने के लिए समुदाय-विशिष्ट नीतियों और मजबूत संस्थागत तंत्र की तत्काल आवश्यकता है।" पटनायक ने यह भी उम्मीद जताई कि इस रिपोर्ट के आधार पर न्यायपूर्ण कोल ट्रांजिशन&nbsp;सुनिश्चित करने की दिशा में सार्थक चर्चाएं होगीं और साथ ही यह पहलकदमी के लिए प्रेरित भी करेगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि कमजोर आबादी स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य की ओर बढ़ने के दौरान पीछे न छूट जाए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कोल ट्रांजिशन ने हाशिए के समुदायों के लिए पैदा की गंभीर चुनौतियां, एनएफआई की रिपोर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ट्रैक्टर के बाद ऊंट की सवारी, अब इस अंदाज में संसद पहुंचे आदिवासी नेता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/mp-from-rajasthan-banswara-lok-sabha-seat-rajkumar-roat-reached-parliament-sitting-on-a-camel.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 25 Jun 2024 12:48:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/mp-from-rajasthan-banswara-lok-sabha-seat-rajkumar-roat-reached-parliament-sitting-on-a-camel.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान की बांसवाड़ा लोकसभा सीट से सांसद राजकुमार रोत मंगलवार को ऊंट पर बैठकर शपथ लेने संसद पहुंचे। आदिवासी नेता राजकुमार रोत इस दौरान वह पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। उन्होंने एक दिन पहले ही इस बात का ऐलान कर दिया था कि वह ऊंट पर सवार होकर संसद पहुंचेंगे। हालांकि, वह ऊंट के साथ संसद भवन परिसर में प्रवेश नहीं कर पाए और पुलिस ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया।&nbsp;</p>
<p>पुलिस ने उनसे कहा कि संसद परिसर में जानवर ले जाने की इजाजत नहीं है। ऐसे में उन्हें गेट पर ही उतरना पड़ेगा। जिसके बाद सांसद राजकुमार रोत ने ऊंट से उतरकर संसद में प्रवेश किया। उन्होंने इस बात का विरोध किया कि उन्हें ऊंट पर अंदर नहीं जाने दिया गया। उन्होंने कहा, "जब अटल बिहारी वाजपेयी बैलगाड़ी पर बैठ कर संसद आ सकते थे, तो मैं ऊंट पर बैठकर क्यों नहीं जा सकता। प्रशासन की मानसिकता गलत है। हम इस संबंध में शिकायत दर्ज कराएंगे।"</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">रेगिस्तान के जहाज पर राजकुमार रोत <a href="https://twitter.com/hashtag/rajkumarroat?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#rajkumarroat</a> <a href="https://t.co/apO5mJiVIi">pic.twitter.com/apO5mJiVIi</a></p>
&mdash; Swati sahu (@Swatisahu_) <a href="https://twitter.com/Swatisahu_/status/1805483959377183126?ref_src=twsrc%5Etfw">June 25, 2024</a></blockquote>
<p>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</p>
<p>राजकुमार रोत एक आदिवासी नेता हैं, जिन्होंने हाल में हुए लोकसभा चुनाव में राजस्थान की बांसवाड़ा सीट से चुनाव लड़ा था। वह भारत आदिवासी पार्टी (BAP) की टिकट पर चुनाव जीतकर पहली बार सांसद बने हैं। इससे पहले वह 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में सबसे कम उम्र के विधायक चुने गए थे।&nbsp;</p>
<p>बता दें कि राजकुमार रोत से पहले सोमवार को राजस्थान की सीकर सीट से सांसद अमराराम ट्रैक्टर पर सवार होकर संसद पहुंचे थे। ट्रैक्टर पर सवार होकर संसद पहुंचने का उनका वीडियो बीते दिनों खूब वायरल हुआ था।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667a6dc11cf3b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ट्रैक्टर के बाद ऊंट की सवारी, अब इस अंदाज में संसद पहुंचे आदिवासी नेता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667a6dc11cf3b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ट्रैक्टर पर सवार होकर संसद पहुंचे किसान नेता अमराराम, बताई वजह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cpim-mp-from-sikar-rajasthan-amra-ram-reached-parliament-on-a-tractor.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 24 Jun 2024 18:15:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cpim-mp-from-sikar-rajasthan-amra-ram-reached-parliament-on-a-tractor.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान के किसान नेता और सीकर से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के सांसद अमराराम सोमवार को ट्रैक्टर पर सवार होकर शपथ लेने संसद पहुंचे। सोमवार को संसद सत्र का पहला दिन था। लोकसभा चुनाव जीतकर आए सभी नवनिर्वाचित सांसद शपथ लेने सोमवार को दिल्ली पहुंचे। सांसद अमराराम ट्रैक्टर पर सवार होकर संसद के लिए रवाना हुए। अमराराम ने दिल्ली के राजस्थान हाऊस से संसद तक का सफर ट्रैक्टर पर तय किया। ट्रैक्टर पर बैठे सांसद अपने ठेट राजस्थानी अंदाज में दिखे।&nbsp;</p>
<p>जब पत्रकारों ने अमराराम से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि सरकार ने 13 महीने तक राजधानी में जिस ट्रैक्टर और किसान को घुसने नहीं दिया, आज वही किसान और ट्रैक्टर संसद तक पहुंच रहा है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">जय जवान जय किसान <a href="https://t.co/YNTY8eba2T">pic.twitter.com/YNTY8eba2T</a></p>
&mdash; Amra Ram (@AmraRamMPSikar) <a href="https://twitter.com/AmraRamMPSikar/status/1805136333859696917?ref_src=twsrc%5Etfw">June 24, 2024</a></blockquote>
<p>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</p>
<p>ट्रैक्टर पर सवार होकर संसद पहुंचने का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। अमराराम राजस्थान में किसानों के दिग्गज नेता माने जाते हैं। वह ऑल इंडिया किसान सभा के राष्ट्रीय नेताओं में शुमार हैं। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में वह इंडिया गठबंधन की ओर से राजस्थान के सीकर से सांसद चुने गए हैं। इसके अलावा, वह चार बार राजस्थान विधानसभा में धोद और दांता रामगढ़ से विधायक भी रहे हैं। जमीनी संघर्ष और अपनी सादगी के चलते अलग पहचान रखने वाले अमराराम आज दिल्ली में ट्रैक्टर की सवार कर सुर्खियों में छा गये।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6679687f4ddf4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ट्रैक्टर पर सवार होकर संसद पहुंचे किसान नेता अमराराम, बताई वजह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6679687f4ddf4.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भीषण हीटवेव से राहत, जल्द उत्तर भारत में दस्तक देगा मानसून]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/relief-from-severe-heatwave-monsoon-will-soon-hit-north-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 24 Jun 2024 14:30:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/relief-from-severe-heatwave-monsoon-will-soon-hit-north-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर भारत के कई इलाकों में हल्की बारिश और बूंदाबांदी के चलते भीषण हीटवेव से कुछ राहत मिली है। रविवार को जम्मू-कश्मीर, <span>हिमाचल</span>, <span>उत्तराखंड</span>, <span>दिल्ली एससीआर और यूपी के कुछ स्थानों पर बारिश के चलते गर्मी कुछ कम हुई</span>, <span>हालांकि मौसम में उमस बढ़ गई है। उत्तर पश्चिम भारत में अधिकतम तापमान 40 से 43 डिग्री के बीच आ गया है।&nbsp;</span></p>
<p>इस बीच मानसून जल्द ही गति पकड़ने वाला है। फिलहाल मानसून गुजरात, <span>मध्यप्रदेश</span>, <span>छत्तीसगढ़</span>, <span>झारखंड और बिहार में आगे बढ़ रहा है। अगले तीन-चार दिनों के भीतर मानसून उत्तर प्रदेश में दस्तक दे सकता है। मौसम की स्थितियां मानसून के आगे बढ़ने के अनुकूल बन रही हैं। अगले 5 दिनों के दौरान उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, बिहार, झारखंड, ओडिशा में आंधी, बिजली और तेज हवा (30-40 किमी प्रति घंटे) के साथ छिटपुट से लेकर व्यापक रूप से हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है।<strong>&nbsp;</strong></span></p>
<p><strong>पश्चिमी तट पर भारी से बहुत भारी वर्षा की&nbsp;</strong></p>
<p><span>मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों में दक्षिण भारत के पश्चिमी तटवर्ती इलाकों और मध्य भारत के कई हिस्सों में भारी वर्षा का अनुमान जताया है।&nbsp;</span><span>इस दौरान केरल</span><span>, </span><span>कोंकण व गोवा</span><span>, </span><span>कर्नाटक</span><span>,</span> <span>महाराष्ट्र</span><span>, </span><span>तेलंगाना</span><span>,</span> <span>तमिलनाडु</span><span>, गुजरात, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की संभावना है। </span>आज गुजरात में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। अगले 5 दिनों के दौरान कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों, कर्नाटक में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। 24, 27 और 28 जून को पश्चिमी मध्य प्रदेश, विदर्भ में, 24-28 जून के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश में तथा 26-28 जून के दौरान छत्तीसगढ़ में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है।</p>
<p><strong>उत्तर पश्चिमी भारत को मिलेगी गर्मी से राहत&nbsp;</strong></p>
<p><span>दक्षिण-पूर्वी राजस्थान पर एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके प्रभाव से अगले पांच दिनों में उत्तर प्रदेश</span><span>, </span><span>पूर्वी राजस्थान</span><span>, बिहार, झारखंड और ओडिशा में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। आगामी 26 से 28 जून के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में, 28 जून को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, 24, 27 और 28 जून को पूर्वी राजस्थान में तथा 27 और 28 जून को उत्तराखंड में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना है।</span></p>
<p><strong>कई जगह हीटवेव जारी&nbsp;</strong></p>
<p><span>इस बीच</span><span>, </span><span>पंजाब</span><span>, </span><span>हरियाणा</span><span>, </span><span>राजस्थान</span><span> और पश्चिमी यूपी</span> <span>में कुछ स्थानों पर अगले एक-दो दिन भीषण गर्मी की स्थिति बने रहने की संभावना है। इसके बाद</span><span>, </span><span>स्थिति में सुधार होगा। रविवार को देश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 43.6 डिग्री सेल्सियस राजस्थान के जोधपुर में दर्ज किया गया जो पिछले सप्ताह देश में दर्ज किए गये अधिकतम तापमान से करीब चार-पांच डिग्री कम है।</span></p>
<p><span>&nbsp;</span></p>
<p><span>&nbsp;</span></p>
<p><span>&nbsp;</span></p>
<p><span>&nbsp;</span></p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667935714c450.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भीषण हीटवेव से राहत, जल्द उत्तर भारत में दस्तक देगा मानसून ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667935714c450.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हर तरह के दूध कैन और कार्टन बॉक्स पर 12% जीएसटी, जानिए काउंसिल ने और क्या फैसले लिए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/12-percent-gst-on-all-types-of-milk-can-and-carton-boxes-know-other-decisions-of-gst-council.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 23 Jun 2024 00:08:29 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/12-percent-gst-on-all-types-of-milk-can-and-carton-boxes-know-other-decisions-of-gst-council.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दूध के हर तरह के कैन पर 12% जीएसटी लगेगा, चाहे वह कैन स्टील का बना हो या एल्युमिनियम का। शनिवार को जीएसटी काउंसिल की 53वीं बैठक में यह फैसला किया गया। फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि सभी तरह के कार्टन बॉक्स पर भी 12% जीएसटी लगेगा चाहे वह कोरूगेटेड बॉक्स हो या नॉन कोरूगेटेड। इन पर अभी 18% जीएसटी लगता है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से हिमाचल और जम्मू कश्मीर के सेब उत्पादकों को फायदा होगा।</p>
<p>जीएसटी काउंसिल ने स्प्रिंकलर और हर तरह के सोलर कुकर पर भी 12% टैक्स लगाने का निर्णय लिया है। काउंसिल ने केमिकल और फर्टिलाइजर पर स्थाई समिति की उस सिफारिश पर भी चर्चा की जिसमें फर्टिलाइजर बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल पर टैक्स की दर घटाने की बात कही गई थी। हालांकि इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। समिति ने फरवरी में यह सिफारिश की थी। अभी उर्वरकों पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगता है जबकि उर्वरक बनाने में इस्तेमाल होने वाले सल्फ्यूरिक एसिड तथा अमोनिया जैसे रसायनों पर 18% टैक्स है।</p>
<p><strong>जीएसटी काउंसिल के अन्य फैसले</strong></p>
<p>अन्य महत्वपूर्ण फैसले में जीएसटी इनपुट लेने में धोखाधड़ी रोकने के लिए उसके बायोमैट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन का निर्णय लिया गया है। रेलवे की विभिन्न सेवाओं जैसे प्लेटफॉर्म टिकट, रिटायरिंग रूम, वेटिंग रूम, क्लॉक रूम, प्लेटफार्म पर चलने वाली बैटरी कार आदि पर जीएसटी खत्म करने का फैसला किया गया है। वित्त वर्ष 2017-18 से 2019-20 के दौरान टैक्स डिमांड नोटिस पर पेनल्टी और ब्याज नहीं लेने का भी निर्णय लिया गया है। लेकिन शर्त यह है कि टैक्स की रकम मार्च 2025 तक जमा करनी पड़ेगी। प्रति व्यक्ति 20000 रुपये प्रतिमाह हॉस्टल चार्ज को भी जीएसटी से मुक्त कर दिया गया है। बशर्ते आवास सेवा न्यूनतम 90 दिनों की निरंतर अवधि के लिए आपूर्ति की गई हो।</p>
<p>विभिन्न अदालतों में जीएसटी से संबंधित मुकदमे दर्ज करने के लिए रकम की सीमा में भी संशोधन किया गया है। 20 लाख रुपए की डिमांड होने पर टैक्स विभाग जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल में मुकदमा दायर करेगा। हाई कोर्ट के लिए कम से कम एक करोड़ रुपए और सुप्रीम कोर्ट के लिए कम से कम 2 करोड़ रुपए की सीमा तय की गई है। वित्त मंत्री ने बताया कि बजट पेश होने के बाद जीएसटी काउंसिल की फिर बैठक होगी।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हर तरह के दूध कैन और कार्टन बॉक्स पर 12% जीएसटी, जानिए काउंसिल ने और क्या फैसले लिए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र में फिर गरमाया प्याज का मुद्दा, सरकारी खरीद में कम दाम पर उठे सवाल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/maharashtra-rajya-kanda-utpadak-shetkari-sanghatana-has-appealed-to-farmers-not-to-sell-onions-to-nafed-and-nccf.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 21 Jun 2024 13:44:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/maharashtra-rajya-kanda-utpadak-shetkari-sanghatana-has-appealed-to-farmers-not-to-sell-onions-to-nafed-and-nccf.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>लोकसभा चुनाव में भाजपा और सहयोगी दलों को नुकसान पहुंचाने वाला प्याज का मुद्दा महाराष्ट्र में अभी शांत नहीं हुआ है। प्याज की महंगाई से उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार<span>&nbsp;राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ)</span> के माध्यम से बफर स्टॉक के लिए 5 लाख टन की खरीद करवा रही है। लेकिन सरकारी खरीद के लिए प्याज का भाव बाजार रेट से कम रखा गया है, <span>जिसके चलते किसान नेफेड और एनसीसीएफ को प्याज बेचने से बच रहे हैं। यही वजह है कि खरीद एजेंसियां प्याज की ज्यादा खरीद नहीं कर पा रही हैं। इस बीच, बाजार में प्याज की कीमतें बढ़ती जा रही हैं।</span></p>
<p>महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष<strong> भारत दिघोले</strong> ने सवाल उठाया कि सरकार या उसकी एजेंसी बाजार भाव से कम दाम पर प्याज खरीदने के बारे में कैसे सोच सकती हैं। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे नेफेड और एनसीसीएफ को प्याज न बेचें,<span> क्योंकि मंडियों में अधिक दाम मिल रहे हैं। भारत दिघोले का कहना है कि जब प्याज के दाम एक-दो रुपये किलो तक गिरते हैं तो सरकार किसानों को कोई राहत नहीं देती, लेकिन भाव में थोड़ी-सी बढ़ोतरी होते ही कीमतें गिराने के प्रयास शुरू हो जाते हैं।&nbsp;</span></p>
<p>महाराष्ट्र के किसान नेता <strong>अनिल घनवट</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि काफी समय बाद प्याज के दाम बढ़े हैं। अगर सरकार प्याज की कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए कोई कदम उठाती है तो लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी किसानों के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। इस साल महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार प्याज की कीमतों पर ज्यादा अंकुश लगाने की स्थिति में नहीं है।&nbsp;</p>
<p>उपभोक्ताओं को सस्ता प्याज उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार मूल्य स्थिरीकरण कोष योजना के तहत नेफेड और एनसीसीएफ के जरिए प्याज की खरीद करवाती है। रबी सीजन की प्याज खरीद लोकसभा चुनाव से पहले शुरू होनी थी। लेकिन खरीद <span>चुनाव के बाद शुरू हो पाई। सरकारी खरीद के लिए किसानों को बाजार से कम भाव दिया जा रहा है</span>, <span>जिससे प्याज उत्पादक किसानों में असंतोष है। नेफेड सीधे किसानों से प्याज खरीदने की बजाय एफपीओ के माध्यम से खरीद कर रहा है। इसे लेकर भी प्याज उत्पादकों में नाराजगी है।&nbsp;</span></p>
<p>महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज का भाव 3000-3500 रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गया है। जबकि नेफेड ने पहले 2105 और फिर 2555 रुपये प्रति कुंतल के रेट पर प्याज खरीदना शुरू किया था। मंडियों में बेहतर दाम मिलने के कारण किसान नेफेड और एनसीसीएफ को प्याज नहीं बेच रहे हैं। इसे देखते हुए प्याज का भाव स्थानीय स्तर पर तय करने का फैसला लिया गया। अब सरकारी खरीद के लिए विभिन्न जिलों में प्याज का भाव 2357 रुपये से लेकर 2987 रुपये प्रति कुंतल के बीच तय किया गया है। लेकिन यह भाव भी बाजार रेट से कम है।&nbsp; <span>&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p>वर्ष 2023-24 के दौरान देश में प्याज का उत्पादन लगभग 16 फीसदी घटने का अनुमान है। प्याज निर्यात पर रोक हटने के बाद घरेलू बाजार में प्याज की आवक घटी है और प्याज के दाम बढ़ रहे हैं। पिछले एक महीने में प्याज के थोक दाम लगभग 50 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। ऐसे में नेफेड और एनसीसीएफ के लिए बाजार भाव से कम कीमत पर प्याज की खरीद करना मुश्किल हो गया है। यही कारण है कि 5 लाख टन प्याज खरीद के लक्ष्य के मुकाबले अभी तक बहुत कम खरीद हुई है।&nbsp;</p>
<p>भरत दिघोले ने कहा कि नेफेड को पुराने सिस्टम के तहत प्याज खरीदना चाहिए। पहले नेफेड के अधिकारी खुद मंडियों में जाकर बोली लगाते थे। जिससे किसानों को अच्छा दाम मिलता था। लेकिन अब नेफेड बड़े व्यापारियों और कृषि उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) से प्याज खरीदता है, <span>जो एक तय दाम पर खरीदा जाता है। उन्होंने कहा कि नेफेड पहले किसानों के हित में काम करता था। लेकिन</span>&nbsp;<span>अब ऐसा लगता है की नेफेड उपभोक्ताओं के लिए काम कर रहा है</span>, <span>ताकि उन्हें सस्ता प्याज उपलब्ध कराया जा सके। नेफेड की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल उठ रहे हैं।&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र में फिर गरमाया प्याज का मुद्दा, सरकारी खरीद में कम दाम पर उठे सवाल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में सोलर पंप पर 60 फीसदी अनुदान पाने का मौका, आवेदन प्रक्रिया शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/uttar-pradesh-government-is-giving-60-percent-subsidy-on-solar-pump-apply-here.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 21 Jun 2024 11:37:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/uttar-pradesh-government-is-giving-60-percent-subsidy-on-solar-pump-apply-here.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ सीजन के दौरान सिंचाई के लिए किसानों को सब्सिडी पर सोलर पंप मुहैया कराने का फैसला लिया है। किसानों को यह सोलर पंप 60 फीसदी अनुदान पर दिए जाएंगे। यानी किसानों को सोलर पंप की कुल लागत का सिर्फ 40 फीसदी भुगतान ही करना होगा। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम योजना) योजना के अंतर्गत किसानों को यह सब्सिडी दी जाएगी। प्रदेश के किसान पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर आसानी से योजना का लाभ उठा सकते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>इतनी मिलेगी सब्सिडी &nbsp;</strong></p>
<p>किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए 2 एचपी, 3 एचपी, 5 एचपी, 7.5 एचपी और 10 एचपी तक के सोलर पंप सेट लगवाने के लिए अनुदान दिया जाएगा। 2 एचपी डीसी और 2 एचपी एसी सरफेस पंप लगवाने की लागत 1 लाख 71 हजार 716 रुपये है। जिस पर किसानों को 63 हजार 686 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। किसानों को यह पंप 1 लाख 3 हजार 30 रुपये में मिलेगी। &nbsp;2 एचपी डीसी सबमर्सिबल पंप किसानों को 1,04,725 रुपये में मिलेगा। सरकार इस पर 64,816 रुपये की सब्सिडी देगी। इसका मुल्य 1,74,541 रुपये है। 3 एचपी डीसी सबमर्सिबल पंप किसानों को 88,088 रुपये की सब्सिडी के साथ 1,39,633 रुपये में मिलेगा। इसका मुल्य 2,32,721 रुपये है।&nbsp;</p>
<p>इसी तरह, 3 एचपी एसी सबमर्सिबल पंप किसानों को 87,178 रुपये की सब्सिडी के साथ 1,38,267 रुपये, 5 एचपी एसी सबमर्सिबल पंप 1,25,999 रुपये की सब्सिडी के साथ 1,96,499 रुपये, 7.5 एचपी एसी सबमर्सिबल पंप 1,72,638 रुपये की सब्सिडी के साथ 2,66,456 रुपये और 10 एचपी एसी सबमर्सिबल पंप 2,86,164 रुपये की सब्सिडी के साथ 2,66,456 रुपये में मिलेगा। इन सभी पंपों पर किसानों को आवेदन करते समय 5,000 रुपये टोकन फीस भी जमा करनी होगी।</p>
<p><strong>योजना की नियम एवं शर्तें</strong></p>
<p>योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट <strong><a href="https://www.agriculture.up.gov.in/">www.agriculture.up.gov.in</a></strong> पर पंजीकरण करना होगा। किसान वेबसाइट पर <strong>"अनुदान पर सोलर पंप की बुकिंग करें"</strong> लिंक पर क्लिक कर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। योजना से जुड़ी शेष नियम एवं शर्तें विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध हैं। वहीं, जिन किसानों ने योजना के लिए आवेदन कर दिया है, उनके टोकन 25 जून 2024 को कंफर्म किए जाएंगे। जिसका मैसेज किसान के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा। जिसके बाद किसानों को विभागीय पोर्टल से ही चालान जनरेट कर बची हुई राशि ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन इण्डियन बैंक की किसी भी शाखा में निर्धारित अवधि के अंदर जमा करानी होगी।&nbsp;</p>
<p><strong>किसान हो सकते हैं ठगी का शिकार&nbsp;</strong></p>
<p>कृषि विभाग ने किसानों को योजना के प्रति अलर्ट भी किया है। विभाग का कहना है कि किसानों को मोबाइल नंबर पर मैसेज आने के बाद शेष राशि जमा करनी होगी। ध्यान रहे यदि किसी व्यक्ति विशेष द्वारा किसान को पैसे जमा करने के लिए फोन किया जाता है तो उस पर ध्यान न दें। ऐसे में किसान ठगी का शिकार हो सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने जनपद के उप कृषि निदेशक कार्यालय में संपर्क करें या विभाग की वेबसाइट पर विजिट करें।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में सोलर पंप पर 60 फीसदी अनुदान पाने का मौका, आवेदन प्रक्रिया शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6675167c7d427.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[10 साल में भी दोगुना नहीं हुआ कई फसलों का MSP, यूपीए के समय हुई थी तीन गुना तक बढ़ोतरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/msp-of-many-crops-did-not-double-in-10-years-increased-up-to-three-times-during-upa.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 20 Jun 2024 16:23:40 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/msp-of-many-crops-did-not-double-in-10-years-increased-up-to-three-times-during-upa.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने वर्ष 2024-25 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। अगर पिछले 20 वर्षों में एमएसपी में हुई बढ़ोतरी को देखें तो यूपीए सरकार का प्रदर्शन मोदी सरकार से बेहतर रहा है।&nbsp;</p>
<p>वर्ष 2024-25 के लिए खरीफ की मुख्य फसल धान का एमएसपी 5.36<span> फीसदी बढ़ा है जबकि ज्वार का एमएसपी 6.01 फीसदी</span>, <span>बाजरा का 5 फीसदी</span>, <span>मक्का का 6.46 फीसदी</span>, <span>रागी का 11.54 फीसदी</span>,&nbsp;<span>मूंगफली का 6.37 फीसदी</span>, <span>सूरजमुखी का 7.69 फीसदी</span>, <span>सोयाबीन का 6.35 फीसदी</span>, <span>तिल का 7.32 फीसदी और कपास </span>(<span>मध्यम रेशा</span>)<span> का एमएसपी 7.57 फीसदी बढ़ाया गया है। सर्वाधिक 12.71 फीसदी एमएसपी नाइजरसीड का बढ़ा है।&nbsp;</span></p>
<p><span>दलहन के मामले में आत्मनिर्भरता के लिए किसानों को दालें उगाने के लिए प्रोत्साहन देने की जरूरत है। लेकिन मूंग का एमएसपी मात्र 1.45 फीसदी बढ़ाया गया है। अरहर के एमएसपी में 7.86 फीसदी और उड़द का एमएसपी 6.47 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।&nbsp;</span></p>
<p>जिन फसलों की एमएसपी पर सरकारी खरीद अधिक होती है, <span>सरकार ने उनके एमएसपी कम बढ़ाए हैं जबकि जिन फसलों की एमएसपी पर खरीद ही नहीं होती या बहुत कम खरीद होती है उनके एमएसपी में अधिक बढ़ोतरी की गई है। </span></p>
<p><span>सबसे ज्यादा 983 रुपये यानी 12.71 फीसदी एमएसपी नाइजरसीड का बढ़ा है। लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार</span>, <span>पिछले 20 वर्षों में सरकार ने नाइजरसीड की शून्य खरीद की है। इसी प्रकार रागी का एमएसपी 11.54 फीसदी बढ़ाया गया है जिसकी बहुत कम सरकारी खरीद होती है।&nbsp;</span></p>
<p>सबसे ज्यादा सरकारी खरीद वाली उपज धान का एमएसपी 5.36 फीसदी बढ़ाकर 2300 रुपये प्रति कुंतल किया गया है जबकि छत्तीसगढ़ सरकार पहले ही 3100 रुपये प्रति कुंतल के भाव पर धान की खरीद कर रही है और ओडिशा में भी इसी भाव पर खरीद का वादा किया गया है।</p>
<p><strong>मोदी सरकार बनाम यूपीए सरकार&nbsp;</strong>&nbsp;</p>
<p>अगर कांग्रेस की यूपीए सरकार के दस वर्षों (2003-04 <span>से 2013-14</span>)<span> और भाजपा की मोदी सरकार के 10 वर्षों </span>(2013-14 <span>से 2023-24</span>)<span> में खरीफ फसलों के एमएमपी वृद्धि की तुलना करें तो यूपीए के कार्यकाल में खरीफ फसलों के एमएसपी 108 से 228 फीसदी तक बढे थे</span>, <span>जबकि मोदी सरकार के 10 वर्षों में खरीफ फसलों के एमएसपी 59 से 156 फीसदी तक बढ़े।&nbsp;</span></p>
<p>मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया था, <span>लेकिन खरीफ की अधिकांश फसलों के एमएसपी में मोदी सरकार के 10 वर्षों के दौरान दोगुना से कम बढ़ोतरी हुई।&nbsp;</span></p>
<p>खरीफ की प्रमुख फसल धान का एमएसपी 2003-04 में 550 रुपये था जो 2013-14 में 138 <span>फीसदी बढ़कर 1310 रुपये प्रति कुंतल हो गया था। लेकिन 2013-14 से 2023-24 तक धान का एमएसपी 66 फीसदी ही बढ़ा और 2183 रुपये निर्धारित किया गया। यूपीए के कार्यकाल में सबसे ज्यादा 228 फीसदी बढ़ोतरी मूंग के एमएसपी में हुई जो 2003-04 में 1370 रुपये से बढ़कर 2013-14 में 4500 रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गया। लेकिन उसके बाद 10 वर्षों में मूंग का एमएसपी 90 फीसदी ही बढ़ा। यूपीए के कार्यकाल में अरहर</span>, <span>उड़द</span>, <span>ज्वार</span>, <span>रागी और सूरजमुखी का एमएसपी करीब तीन गुना हो गया था।</span>&nbsp;</p>
<p>मोदी सरकार के पहले दो कार्यकाल (2013-14 से 2013-24) के दौरान खरीफ की अधिकांश फसलों के एमएसपी में दोगुने से कम बढ़ोतरी हुई है। इन 10 वर्षों में सबसे कम 59.43 फीसदी एमएसपी मूंगफली और 59.54 फीसदी मक्का का बढ़ा। इस दौरान अरहर और उड़द का एमएसपी क्रमश: 61.63 फीसदी और 62.79 फीसदी बढ़ाया गया।</p>
<p>2013-14 से 2013-24 के बीच सबसे अधिक 156 फीसदी एमएसपी रागी का बढ़ा है, <span>जबकि नाइजरसीड का एमएसपी 121 फीसदी</span>,<span> ज्वार का 112 फीसदी और बाजरा का एमएसपी 100 फीसदी बढ़ाया गया। जबकि दालों के एमएसपी में 61 से 90 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई।&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_66740a75dd4f0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ 10 साल में भी दोगुना नहीं हुआ कई फसलों का MSP, यूपीए के समय हुई थी तीन गुना तक बढ़ोतरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश के 150 प्रमुख जलाशयों का जलस्तर पिछले साल के मुकाबले 21 फीसदी कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/water-level-of-the-major-reservoirs-is-21-percent-lower-than-last-year.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 19 Jun 2024 19:26:06 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/water-level-of-the-major-reservoirs-is-21-percent-lower-than-last-year.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर चिंताजनक स्थिति बनी हुई है। मानसून सीजन के दौरान अभी तक देश में कम बारिश के चलते प्रमुख जलाशयों का जल स्तर चिंताजनक रूप से कम बना हुआ है। देश के 150 प्रमुख जलाशयों में जल स्तर पिछले वर्ष की तुलना में 21 फीसदी कम है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के बुलेटिन के अनुसार, 13 जून को देश के 150 प्रमुख जलाशयों में जलस्तर 38.491 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) था, जो उनकी कुल क्षमता का सिर्फ 22 फीसदी है। पिछले साल इसी अवधि में इन जलाशयों में उपलब्ध संग्रहण 48.592 बीसीएम था जबकि सामान्य तौर पर इन जलाशयों में 42 बीसीएम पानी रहता है । इस प्रकार जलाशयों के जल स्तर में पिछले साल के मुकाबले 21 फीसदी और सामान्य जल संग्रह के मुकाबले 8 फीसदी की कमी आई है।</p>
<p>वहीं, 150 में से 28 जलाशयों में सामान्य जल भंडारण क्षमता का 50 फीसदी, 85 जलाशयों में सामान्य भंडारण क्षमता का लगभग 80 फसदी और 65 जलाशयों में सामान्य भंडारण क्षमता का 80 फीसदी या उससे कम पानी मौजूद है।&nbsp;सीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट बताती है की जलाशयों में जल स्तर की स्थिति को लेकर दक्षिण क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित है। दक्षिण क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु राज्य शामिल हैं। सीडब्ल्यूसी की निगरानी में यहां 42 जलाशय हैं, जिनकी कुल संग्रहण क्षमता 53.334 बीसीएम है। इन जलाशयों में उपलब्ध कुल संग्रहण क्षमता 7.568 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 14 फीसदी है। पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान संग्रहण 22 फीसदी था। इस प्रकार, चालू वर्ष के दौरान संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि के संग्रहण से कम है।&nbsp;</p>
<p>इसी तरह पूर्वी क्षेत्र के जलाशयों में कुल क्षमता का सिर्फ 21 फीसदी पानी ही मौजूद है। पूर्वी क्षेत्र में असम, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, नागालैंड और बिहार राज्य शामिल हैं। सीडब्ल्यूसी की निगरानी में यहां 23 जलाशय हैं, जिनकी कुल संग्रहण क्षमता 20.430 बीसीएम है। इन जलाशयों में उपलब्ध कुल संग्रहण क्षमता 4.380 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 21 फीसदी है। पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान संग्रहण 19 फीसदी था। इस प्रकार, चालू वर्ष के दौरान संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में बेहतर है।&nbsp;</p>
<p>बात अगर पश्चिमी क्षेत्र की करें तो इसमें गुजरात और महाराष्ट्र राज्य शामिल हैं। सीडब्ल्यूसी की निगरानी में यहां 49 जलाशय हैं, जिनकी कुल संग्रहण क्षमता 37.130 बीसीएम है। इन जलाशयों में उपलब्ध कुल संग्रहण 7.931 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 21.36 फीसदी है। पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान संग्रहण 24 फीसदी था। इस प्रकार, चालू वर्ष के दौरान संग्रहण पिछले वर्ष के संग्रहण से कम है।</p>
<p>मध्य क्षेत्र के जलाशयों में कुल क्षमता का सिर्फ 26.73 फीसदी पानी ही मौजूद है। पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान संग्रहण 34 फीसदी था। &nbsp;इस प्रकार, चालू वर्ष के दौरान संग्रहण पिछले वर्ष के संग्रहण से कम है। मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य शामिल हैं। वहीं, उत्तरी क्षेत्र में जलाशयों में कुल क्षमता का सिर्फ 29 फीसदी पानी ही मौजूद है। पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान संग्रहण 39 फीसदी था। इस प्रकार, चालू वर्ष के दौरान संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में कम है। उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान राज्य शामिल हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश के 150 प्रमुख जलाशयों का जलस्तर पिछले साल के मुकाबले 21 फीसदी कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बारिश न होने से सेब की फसल पर संकट, भीषण गर्मी से ऐसे करें बचाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/apple-crop-affected-due-to-lack-of-rain-farmers-should-avoid-spraying-take-these-measures-for-extreme-heat.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 19 Jun 2024 14:42:10 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/apple-crop-affected-due-to-lack-of-rain-farmers-should-avoid-spraying-take-these-measures-for-extreme-heat.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भीषण गर्मी और बारिश न होने से सेब की उपज पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मई और जून में सामान्य से कम बारिश होने के चलते जहां सेब की फसल को नुकसान पहुंच रहा है वहीं, फसल में अब ड्रॉपिंग भी होने लगी है। जिसका सीधा असर सेब उत्पादन पर पड़ रहा है। कम बारिश होने के चलते सेब उत्पादन में भी कमी आई है। पिछले साल कम कीमत मिलने से नुकसान झेल रहे बागवान इस साल अच्छे सीजन की उम्मीद कर रहे हैं। 2023 के सेब सीजन की शुरुआत में भले ही बागवनों को दाम अच्छा मिला था। लेकिन, बाद में कीमतों में आई गिरावट से बागवानों को नुकसान हुआ था।&nbsp;</p>
<p>बागवानों को पेश आ रही इन समस्याओं पर <strong>रूरल वॉयस</strong> से बात करते हुए बागवानी विशेषज्ञ और नौणी विश्वविद्यालय (डॉ वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय) के रिटायर्ड प्रोफेसर <strong>एसपी भारद्वाज</strong> ने कहा कि पहाड़ों में इस बार गर्मी पिछले सालों के मुकाबले ज्यादा पड़ रही है। जबकि, बारिश भी काफी कम हुई है। इसका सीधा असर सेब उत्पादन पर पड़ रहा है। बारिश न होने के चलते पानी के प्राकृतिक स्रोत सूख गए हैं और सेब बागवानों को सिंचाई करने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं अत्यधिक गर्मी पड़ने से कई क्षेत्रों में सेब के पेड़ सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। पर्याप्त पानी न मिलने से जहां पेड़ों में कीट और कई रोग देखने को मिल रहे हैं। वहीं, सेब के फल भी झड़ने लगे हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>पेड़ के तलों को ढककर रखें बागवान&nbsp;</strong></p>
<p>बागवानी विशेषज्ञ एसपी भारद्वाज ने बताया कि जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है, वहां बागवान पेड़ के तलों को ढककर रखें। ऐसा करने से पेड़ ज्यादा पानी नहीं सोखेंगे और उनमें नमी की कमी नहीं होगी। उन्होंने बताया कि अत्यधिक गर्मी पड़ने पर ऐसा करना सबसे ऊचित रहता है। इसके लिए बागवान घास, पॉलिथीन, पत्थरों या लकड़ी की बाड़ का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि पेड़ के तलों को ढककर रखने से वहां ज्यादा हीट नहीं बनती और नमी बनी रहती है। इसके अलावा पड़े के तलों और आसपास खरपतवार भी नहीं उगती, जो पानी सोखते हैं।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि अगर क्षेत्र में पानी की कमी है तो बागवान तीन दिन बाद पेड़ में पानी डाल सकते हैं। हालांकि, बागवानों को इस बात का भी ध्यान रखना है कि पेड़ों में ज्यादा पानी न डाला जाए। उन्होंने बताया की गर्मी भले ही ज्यादा पड़ रही हो, लेकिन इसका एक फायदा यह है की सेब की फसल पर ज्यादा बीमारियां देखने को नहीं मिलेगी।&nbsp;</p>
<p><strong>स्प्रे करने से बचें किसान</strong></p>
<p>एसपी भारद्वाज ने बागवानों को गर्मियों के दौरान पेड़ों पर स्प्रे न करने की भी हिदायत दी। कई बार स्प्रे करने से पेड़ पर इसका विपरीत प्रभाव देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि स्प्रे करने से पेड़ का रक्षा तंत्र कमजोर पड़ जाता है। जिससे उत्पादन में कमी आती है। ऐसे में बागवान गर्मियों के दौरान पेड़ों पर स्प्रे करने से बचें। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति ऐसी ही रही और मानसून की बारिश में और देरी हुई तो इससे उत्पादन पर असर पड़ेगा। बारिश न होने से सेब की ग्रोथ नहीं होगी और इसका रंग भी फीका पड़ जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द पहाड़ों में मानसून की दस्तक होगी और बागवानों को राहत मिलेगी।</p>
<p><strong>बागवान पहले ही झेल रहे नुकसान&nbsp;</strong></p>
<p>रूरल वॉयस से बात करते हुए हिमाचल प्रदेश सब्जी और फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष <strong>हरीश चौहान</strong> ने बताया कि इस साल ज्यादा गर्मी पड़ने से सेब की फसल पर असर पड़ा है। सेब की ड्रॉपिंग काफी बढ़ गई है। अगर समय पर बारिश नहीं हुई तो सेब उत्पादन में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि सेब बागवान पहले ही नुकसान झेल रहे हैं। पिछले सीजन से बागवानों को फसल का उचित दाम नहीं मिल पाया था। प्रदेश में जहां औसतन 1400 से 1500 रुपये (प्रति बॉक्स) के बीच किसानों का सेब बिका था। वहीं, ईरान-तुर्की समेत बाहरी देशों से इंपोर्ट होने वाले सेब ने भी प्रदेश की बागवानी पर असर डाला है। बाहर से इंपोर्ट होने वाले सेब के चलते बागवानों की उचित दाम नहीं मिलता और उन्हें घाटे में अपनी फसल बेचने को मजबूर होना पड़ता है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बारिश न होने से सेब की फसल पर संकट, भीषण गर्मी से ऐसे करें बचाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जून में सामान्य से कम बारिश का अनुमान, जानें कहां पहुंचा मानसून]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/the-meteorological-department-has-predicted-less-than-normal-rainfall-in-june-monsoon-update.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 19 Jun 2024 11:30:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/the-meteorological-department-has-predicted-less-than-normal-rainfall-in-june-monsoon-update.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश का बड़ा भू-भाग भीषण गर्मी और बारिश की कमी से जूझ रहा है। अब भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने जून में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है। मौसम विभाग ने कहा है कि जून में देश भर में औसत वर्षा सामान्य से कम (एलपीए के 92 प्रतिशत से कम) होने की संभावना है। मानसून सीजन की शुरुआत के बाद से अब तक देश में सामान्य से 20 प्रतिशत कम बारिश हुई है। 1 से 18 जून के बीच देश में 64.5 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य बारिश 80.6 मिमी से 20 प्रतिशत कम है। आईएमडी ने कहा कि बारिश लाने वाली प्रणाली में 12 से 18 जून के बीच कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हुई है जिससे मानसून की बारिश में कमी आई है। इससे पहले आईएमडी ने इस साल मानसून सीजन (जून से सितंबर) में सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान जताया था।&nbsp;</p>
<p><strong>कहां कितनी बारिश का अनुमान&nbsp;</strong></p>
<p>मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण प्रायद्वीप भारत के कुछ हिस्सों और पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना है। वहीं, उत्तर-पश्चिम और उससे सटे मध्य भारत के इलाकों के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत के कुछ इलाकों में कम बारिश होने का अनुमान है। देश के 11 मौसम उप-प्रभागों में 1 से 18 जून के बीच सामान्य से लेकर बहुत अधिक वर्षा हुई है, जबकि 25 उप-प्रभागों में बहुत कम वर्षा हुई है।&nbsp;</p>
<p><strong>कहां पहुंचा मानसून&nbsp;</strong></p>
<p>30 मई को केरल और पूर्वोत्तर क्षेत्र में मानसून ने दस्तक दी थी। यह पिछले दस वर्षों में चौथी बार था जब मानसून समय से पहले आया हो। वहीं, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी मानसून की एंट्री समय से पहले हुई। लेकिन इसके बाद मानसून आगे नहीं बढ़ा। हालांकि, अब मानसून फिर सक्रिय हो गया है। आईएमडी के मुताबिक, अगले तीन से चार दिनों में इसके छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार और झारखंड के कुछ हिस्सों में मानसून आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।</p>
<p><strong>पहले सामान्य बारिश का था अनुमान&nbsp;</strong></p>
<p>मई के अंतिम सप्ताह में मौसम विभाग ने जून का पूर्वानुमान जारी करते हुए बताया था कि पूरे देश में औसत बारिश "सामान्य रहने की संभावना है।" मौसम विभाग ने जहां दक्षिण प्रायद्वीप के अधिकांश क्षेत्रों और मध्य भारत के आस-पास के क्षेत्रों तथा उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया था। वहीं, उत्तर-पश्चिम भारत के उत्तरी और पूर्वी भागों तथा मध्य भारत के पूर्वी भाग के कई क्षेत्रों और पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में जून में "सामान्य से कम" बारिश होने की उम्मीद जताई थी। लेकिन, पूर्वोत्तर में जहां ज्यादा बारिश हुई है। वहीं, मध्य और उत्तर पश्चिम भारत में काफी कम बारिश हुई है। &nbsp;</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जून में सामान्य से कम बारिश का अनुमान, जानें कहां पहुंचा मानसून ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम किसान योजना की 17वीं किस्त जारी, 9.26 करोड़ किसानों के खाते में 20 हजार करोड़ ट्रांसफर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/prime-minister-released-17th-installment-of-pm-kisan-yojana-20-crore-rupees-transferred-to-more-than-9-crore-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 18 Jun 2024 18:43:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/prime-minister-released-17th-installment-of-pm-kisan-yojana-20-crore-rupees-transferred-to-more-than-9-crore-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 17वीं किस्त के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 18 जून को देशभर के 9.26 करोड़ किसानों के खातों में 20 हजार करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की 30 हजार से अधिक महिलाओं को कृषि सखी के रूप में प्रमाण पत्र भी जारी किए। इस दौरान प्रधानमंत्री ने तीन करोड़ लखपति दीदियां बनाए जाने के संकल्प को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। वाराणसी में किसान सम्मेलन में यह किस्त जारी की। प्रधानमंत्री के उद्बोधन का बड़ा हिस्सा वाराणसी और पूर्वांचल में हो रहे विकास कार्यों पर केंद्रित रहा।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने चुनाव में काशी की जनता के भारी समर्थन के लिए उनका धन्यवाद भी किया। उन्होंने कहा कि काशी के लोगों ने मुझे लगातार तीसरी बार अपना प्रतिनिधि चुनकर धन्य कर दिया है। उन्होंने कहा कि मैने किसान, नौजवान, नारी शक्ति को इन्हें विकसित भारत का मजबूत स्तंभ माना है। इसलिए मैंने सरकार बनने के बाद सबसे पहले इन्हीं को प्राथमिकता में रखा और किसानों के हित में फैसला लिया। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि दुनिया की सबसे बड़ी ट्रांसफर निधि बन चुकी है। कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के कदमों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मेरा सपना है दुनिया की हर डाइनिंग टेबल पर भारत का कोई न कोई खाद्यान्न यानी फूड प्रोडक्ट होना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि माता-बहनों के बिना खेती की कल्पना संभव नहीं है। बहनों की भूमिका का विस्तार किया जा रहा है। कृषि सखी कार्यक्रम ऐसा ही एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि किसानों की मदद के लिए कई बहनों को प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे खेती में विभिन्न कार्यों के माध्यम से किसानों का सहयोग कर सकें और सालाना लगभग 60-80 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकें। इसके साथ ही उन्होंने काशी में बनास डेयरी संकुल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बनास डेयरी ने पशु पालकों का भाग्य बदलने का काम किया है। डेढ़ साल में काशी के 14 हजार पशु पालक बनास डेयरी से जुड़े हैं। जिससे उनकी कमाई में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि आगे 16 हजार नए पशु पालकों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। &nbsp;</p>
<p>इससे पहले केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान इसकी आत्मा है। किसानों और खेती के प्रति हमारी प्रतिबद्धता ही है कि पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद अगर किसी फाइल पर हस्ताक्षर किए तो वह किसान सम्मान निधि थी। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए आगे भी इसी तरह कार्य किया जाएगा। &nbsp;&nbsp;<br />&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम किसान योजना की 17वीं किस्त जारी, 9.26 करोड़ किसानों के खाते में 20 हजार करोड़ ट्रांसफर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फिर सक्रिय हुआ मानसून, मध्य भारत में जल्द बारिश के आसार, जानें मानसून की प्रोग्रेस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-soon-to-enter-central-india-rainfall-alert-in-many-states-heatwave-alert.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 18 Jun 2024 16:35:45 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-soon-to-enter-central-india-rainfall-alert-in-many-states-heatwave-alert.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। महाराष्ट्र में एट्री के बाद कमजोर पड़े मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। मानसून के सक्रिय होती ही आने वाले 4 से 5 दिनों में मध्य भारत में बारिश होने के आसार हैं। मौसम विभाग (आईएमडी) की मानें तो आने वाले एक हफ्ते के अदंर मध्य भारत में मानसून की एंट्री हो सकती है। वहीं, उत्तर भारत को मानसून की बारिश के लिए अभी इंतजार करना होगा। दिल्ली समेत उत्तर भारत के सभी राज्यों में भीषण गर्मी और लू का दौर अभी जारी रहेगा।</p>
<p>मौसम का पूर्वानुमान जारी करने वाली करने वाली निजी वेबसाइट स्काईमेट वेदर के मुताबिक, पूर्वी भारत में मानसून फिर सक्रिय हो गया है। जिसका असर भी देखने को मिल रहा है। पूर्वी भारत के राज्यों में जोरदार बारिश हो रही है। जिसे लेकर मौसम विभाग ने अलर्ट भी जारी किया है। आईएमडी के डेली बुलेट के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने इन राज्यों में अगले पांच दिनों के लिए भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है।&nbsp;</p>
<p>इसके अलावा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, सिक्किम, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, मराठवाड़ा और दक्षिणपूर्व राजस्थान, दक्षिण गुजरात, दक्षिणी ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों, तटीय कर्नाटक और केरल में भी हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने का अनुमान है।&nbsp;</p>
<p><strong>इन राज्यों में हुई मानसून की एंट्री&nbsp;</strong></p>
<p>स्काईमेट के मुताबिक, 30 मई को केरल और पूर्वोत्तर क्षेत्र में मानसून ने दस्तक दी थी। ये पिछले दस वर्षों में चौथी बार था जब मानसून पूर्वानुमान से पहले आया हो। वहीं, महाराष्ट्र और गुजरात में भी मानसून की एंट्री समय से पहले हुई। महाराष्ट्र में 9 जून और गुजरात में 11 जून को मानसून ने दस्तक दी थी। इसके बाद मानसून धीमा पड़ने से मध्य भारत में इसके फैलाव में देरी हई। लेकिन, अब मानसून फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले चार दिनों के अंदर मध्य भारत में मानसून की एंट्री हो जाएगी। जिसके बाद यह उत्तर भारत की ओर बढ़ेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>इन राज्यों में जारी रहेगी लू &nbsp;</strong></p>
<p>मध्य भारत को भले ही भीषण गर्मी से जल्द राहत मिलने वाली हो, लेकिन उत्तर भारत में लू का दौर जारी रहेगा। मौसम विभाग ने 21 जून तक उत्तर भारत में लू चलने की संभावना जताई है। आईएमडी के मुताबिक, 18 से 20 जून तक उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में लू चलने की संभावना है। 18 से 21 जून के बीच पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, बिहार के कुछ हिस्सों, जम्मू-कश्मीर और उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों, उत्तरी मध्य प्रदेश और उत्तरी राजस्थान में लू चलने की संभावना है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ फिर सक्रिय हुआ मानसून, मध्य भारत में जल्द बारिश के आसार, जानें मानसून की प्रोग्रेस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तीन साल बाद आलू किसानों के अच्छे दिन, कम उत्पादन और सब्जियों के दाम बढ़ने का फायदा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/potato-farmers-are-getting-better-price-in-tree-year-heat-wave-and-low-production-increased-price.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 18 Jun 2024 13:48:37 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/potato-farmers-are-getting-better-price-in-tree-year-heat-wave-and-low-production-increased-price.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>तीन साल से आलू की खेती में घाटा झेल रहे किसानों के लिए यह साल बेहतर साबित हो सकता है। आलू की कीमतों में आए उछाल से किसानों को राहत मिली है। एक महीने में आलू की कीमतों में 20 रुपये प्रति किलो तक की तेजी आई है। पिछले महीने तक जो आलू 10 से 20 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा था, वह अब 30 से 40 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं, देशभर की थोक मंडियों में आलू 1800 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है। आलू कारोबारियों के मुताबिक, कीमतें अभी और बढ़ेंगी। कीमतें में यह उछाल नवंबर तक जारी रहेगा। अक्तूबर के बाद से बाजार में नई फसल आने पर ही कीमतों में कमी आ सकेगी।&nbsp;</p>
<p>आलू की बढ़ी कीमतों आई तेजी पर <strong>रूरल वॉयस</strong> से बात करते हुए उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के किसान और कोल्ड स्टोरेज के मालिक डूंगर सिंह खंडौली कहा कि 2020 के बाद इस साल आलू की कीमतों में थोड़ा सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि इस साल गर्मी काफी ज्यादा पड़ रही है। जिससे सब्जियों का उत्पादन कम हुआ है और कीमतें बढ़ी हैं। सब्जियों की बढ़ी कीमतों को फायदा आलू की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में मिल रहा है। उन्होंने बताया कि थोक मंडियों में आलू 1800 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है। इस हिसाब से किसानों को 18 से 20 रुपये प्रति किलो का दाम मिल रहा है। जो पिछले तीन सालों में सबसे बेहतर है।</p>
<p>आलू की कीमतों में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह इस साल आलू के उत्पादन में गिरावट आना भी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2023-2024 में कुल 567 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ, जो पिछले साल 2022-2023 के मुकाबले 34 लाख टन कम है। साल 2022-23 में 601 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ था। उत्पादन में गिरावट के बारे में पूछने पर डूंगर सिंह ने बताया कि प्रतिकूल मौसम के चलते इस साल आलू के उत्पादन में गिरावट आई है।&nbsp;</p>
<p>आलू की कीमतों में आए उछाल के पीछे कम उत्पादन और बढ़ती गर्मी को एक बड़ी वजह है।। बढ़ती गर्मी के चलते इस बार सब्जियां के उत्पादन पर असर पड़ा है। जिस वजह से सब्जियों की कीमतों तेजी से बढ़ी हैं। सब्जियों की कीमतों में आए उछाल का असर आलू पर भी देखने को मिल रहा है। सब्जियों का उत्पादन घटने से बढ़ी मांग और कीमतों में आए उछाल के चलते आलू महंगा हो गया है। वहीं हाल ही में जारी खाद्य महंगाई के आंकड़ों के मुताबिक, मई में सब्जियां 32.42 फीसदी मंहगी हुई हैं, जो अप्रैल में 23.60 फीसदी थी। इसी तरह आलू भी 64.05 फीसदी तक महंगा हुआ है।&nbsp;</p>
<p><strong>नई फसल आने के बाद कम होंगे दाम&nbsp;</strong></p>
<p>डूंगर सिंह ने बताया कि किसान पिछले तीन सालों से अपनी उपज को घाटे में बेच रहा था। लेकिन, इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया। उन्होंने कहा कि आलू रोजाना खाने में इस्तेमाल होने वाली चीज है। इसलिए जब भी इसके दाम बढ़ते हैं तो लोगों का ध्यान इस ओर जाता है। उन्होंने कहा कि पिछले साल किसानों ने एक रुपये किलो के हिसाब से भी अपना आलू बेचा। जबकि, एक किलो आलू के पीछे किसान की लागत 10 रुपये आती है। लेकिन, इस बार आलू की कीमतों में आए उछाल से किसानों को थोड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि आलू की कीमतें अभी और बढ़ेंगी। यह उछाल नवंबर तक जारी रहेगा। बाजार में नई फसल आते ही कीतमें में गिरावट आएगी।&nbsp;</p>
<p><strong>आलू पर समर्थन मूल्य दे सरकार&nbsp;</strong></p>
<p>डूंगर सिंह ने सरकार से आलू पर समर्थन मूल्य दिए जाने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि किसान धीरे-धीरे आलू की खेती छोड़ रहे हैं, क्योंकि उन्हें उचित मुनाफा नहीं हो रहा है। इससे साल दर साल उत्पादन भी कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि किसान औने पौने दाम पर भी अपनी फसल बेच देता है। ऐसे में आलू पर भी समर्थन मूल्य दिया जाना चाहिए। सरकार को इस दिशा में कदम उठाने चाहिए।&nbsp;</p>
<p><strong>किस मंडी में कितना है दाम&nbsp;</strong></p>
<p>केंद्रीय कृष&zwj;ि व क&zwj;िसान कल्याण मंत्रालय के एगमार्कनेट पोर्टल के अनुसार, मंगलवार 18 जून को केरल की कोडुवायूर मंडी में आलू का सबसे अच्छा दाम मिला। यहां आलू 5400 रुपये/क्विंटल के भाव में बिका। इसी तरह, केरल की कट्टप्पना मंडी में आलू 5000 रुपये/क्विंटल, तेलंगाना की सिद्दीपेट (रायथु बाजार) मंडी में 4000 रुपये/क्विंटल और त्रिपुरा की चौमानु मंडी में 4000 रुपये/क्विंटल के भाव में बिका। वहीं, बात अगर आलू के सबसे बड़े उत्पादक उत्तर प्रदेश की करें तो यहां आलू औसतन 1800 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है। जबकि, पश्चिम बंगाल में आलू औसतन 2300 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में बिक रहा है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ तीन साल बाद आलू किसानों के अच्छे दिन, कम उत्पादन और सब्जियों के दाम बढ़ने का फायदा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश में चीनी उत्पादन 9.65 लाख टन घटा, मई तक एथेनॉल ब्लैंडिंग 12.48 फीसदी रही]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sugar-production-decreased-by-9.65-lakh-tonnes-ethanol-blending-till-may-was-12.48-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 18 Jun 2024 10:06:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sugar-production-decreased-by-9.65-lakh-tonnes-ethanol-blending-till-may-was-12.48-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू चीनी साल (2023-24) में देश में चीनी का उत्पादन 321.5 लाख टन रहा है जो पिछले साल (2022-23) के 330.90 लाख टन चीनी उत्पादन से 2.92 फीसदी कम है। उद्योग के 31 मई, 2024 तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल चीनी का उत्पादन 9.65 लाख टन कम रहा है। चीनी उत्पादन में यह गिरावट शुरुआती अनुमानों के मुकाबले काफी कम है जिसे देखते हुए सरकार ने गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से एथेनॉल उत्पादन पर रोक लगा दी थी।&nbsp;</p>
<p>उद्योग के अनुमानों के मुताबिक, नये साल में एक अक्तूबर, 2024 को चीनी का ओपनिंग स्टॉक करीब 85 लाख टन रहेगा जो तीन माह की औसत खपत से काफी अधिक है। ऐसे में अगर सरकार चीनी का उत्पादन गिरने की आशंका में दिसंबर, 2023 में गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से एथेनॉल उत्पादन पर रोक नहीं लगाती तो उससे जहां पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लैंडिंग का औसत 15 फीसदी पर पहुंच जाता। वहीं चीनी उद्योग को भी नुकसान नहीं उठाना पड़ता। मई तक एथेनॉल ब्लैंडिंक का स्तर 12.48 फीसदी ही रहा है।</p>
<p>चीनी उद्योग का कहना है कि सरकार द्वारा गन्ने का फेयर एंड रिम्यूनेरेटिव प्राइस (एफआरपी) बढ़ाये जाने और दूसरी लागतों के चलते चीनी उत्पादन की लागत करीब 250 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ गई है। इसलिए चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) मौजूदा 31 रूपये प्रति किलो से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति किलो किया जाना चाहिए। सरकार ने आखिरी बार चीनी का एमएसपी फरवरी, 2019 में बढ़ाकर 31 रुपये प्रति किलो किया था। पांच साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह उसी स्तर पर है।</p>
<p><strong>उद्योग सूत्रों</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि इस साल गरमी अधिक होने और लोक सभा चुनाव के चलते चीनी की खपत बढ़ी है और औसतन 275 लाख टन के मुकाबले इस साल घरेलू खपत 290 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। लेकिन इसके बावजूद चीनी उद्योग के पास 20 लाख टन चीनी को निर्यात करने या एथेनॉल में तब्दील करने की संभावना थी जिसका उपयोग नहीं हुआ है। इसके चलते उद्योग पर वर्किंग कैपिटल का बोझ बढ़ने के साथ ही चीनी के स्टॉक की कैरीओवर लागत बढ़ी है।</p>
<p><strong>अब फायदेमंद नहीं निर्यात</strong></p>
<p>ब्राजील के वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के चलते अब भारतीय चीनी का निर्यात फायदेमंद नहीं रहा है। सरकार ने पिछले साल चीनी के निर्यात को रेस्ट्रिक्टेड लिस्ट यानी प्रतिबंधित सूची में डाल दिया था जिसे 31 अक्तूबर, 2024 तक बढ़ाया। इसलिए चालू सीजन के लिए निर्यात का कोटा जारी नहीं किया था। इस समय व्हाइट शुगर की वैश्विक कीमत 19.25 सेंट है जो करीब 40 रुपये प्रति किलो बैठती है। जबकि घरेलू बाजार में रिफाइंड शुगर की एक्स फैक्टरी कीमत 3900 रुपये प्रति क्विंटल चल रही है। इसलिए निर्यात करना अब फायदेमंद नहीं है।</p>
<p><strong>एथेनॉल ब्लैंडिंग प्रोग्राम पर असर&nbsp;</strong></p>
<p>गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से एथेनॉल उत्पादन पर रोक का असर एथेनॉल ब्लैंडिंग प्रोग्राम पर भी पड़ा है। एथेनॉल सप्लाई साल (1 नवंबर, 2023 से 31 अक्तबूर, 2024) में मई तक पेट्रोल में एथेनॉल ब्लैंडिंग का स्तर 12.48 फीसदी रहा है। सरकारी तेल कंपनियों के मुताबिक, उन्होंने 26 मई, 2024 तक 327.31 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदा है। जबकि पूरे साल की जरूरत 825 करोड़ लीटर है। इसमें से चीनी उद्योग ने 165.37 करोड़ लीटर की आपूर्ति की है जो कुल आपूर्ति का 50.52 फीसदी है। वहीं ग्रेन सेक्टर ने 161.96 करोड़ लीटर की आपूर्ति की है जो कुल आपूर्ति का 49.48 फीसदी है।&nbsp;</p>
<p>चीनी उद्योग सूत्रों का कहना है कि अगर दिसंबर में गन्ने के रस और बी-हैवी मोलेसेस से एथेनॉल बनाने पर रोक नहीं लगती तो ब्लैंडिंग 15 फीसदी तक पहुंच सकती थी। मई माह में 15 फीसदी ब्लैंडिंग का स्तर रहा है। लेकिन यह केवल एक माह में ही हासिल हुआ है। जबकि सरकार ने 2025 तक 20 फीसदी एथेनॉल ब्लैंडिंग का लक्ष्य रखा है।</p>
<p><strong>चीनी उत्पादन में महाराष्ट्र अव्वल&nbsp;</strong></p>
<p>जहां तक चीनी उत्पादन की बात है तो इसमें 110.20 लाख टन&nbsp; उत्पादन के साथ महाराष्ट्र पहले स्थान पर रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश का चीनी उत्पादन 103.65 लाख टन रहा है। चालू सीजन में महाराष्ट्र का उत्पादन 4.90 लाख टन बढ़ा है जबकि उत्तर प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले चीनी उत्पादन में 1.15 लाख टन की गिरावट आई है।सीजन के शुरू में महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन में गिरावट की आशंका जताई गई थी लेकिन अक्तूबर के बाद से बारिश होने का फायदा मिलने से वहां उत्पादन बढ़ गया है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश में चीनी उत्पादन 9.65 लाख टन घटा, मई तक एथेनॉल ब्लैंडिंग 12.48 फीसदी रही ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[क्या है कृषि सखी योजना जिसमें 90 हजार महिलाओं को मिल रही ट्रेनिंग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/what-is-krishi-sakhi-scheme-in-which-90-thousand-women-are-getting-training.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 16 Jun 2024 21:29:49 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/what-is-krishi-sakhi-scheme-in-which-90-thousand-women-are-getting-training.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 जून को वाराणसी में पीएम-किसान के तहत 9.26 करोड़ से अधिक किसानों को 20 हजार करोड़ रुपये की 17वीं किस्त जारी करेंगे। साथ ही 30 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों <span>(एसएचजी) </span>को कृषि सखियों के तौर पर प्रमाण-पत्र प्रदान करेंगे।</p>
<p>केंद्र सरकार ने तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है जिसमें से लगभग एक करोड़ लखपति दीदी बन चुकी हैं, 2 करोड़ और बननी हैं। उसी का एक आयाम है कृषि सखी। किसानों की सहायता के लिए कई महिलाओं को प्रशिक्षण देकर तैयार किया है ताकि वो खेती के अलग-अलग कामों में किसानों का सहयोग कर सकें और लगभग 60-80 हजार रुपये तक की सालाना अतिरिक्त आय अर्जित कर पाएं।</p>
<p>कृषि सखी कार्यक्रम को पहले चरण में 12 राज्यों - &nbsp;गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, ओडिशा, झारखंड, आंध्र प्रदेश और मेघालय&nbsp; में शुरू किया गया है। कृषि मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, अभी तक तक 70 हजार में से 34 हजार से अधिक कृषि सखियों को पैरा-एक्सटेंशन वर्कर के रूप में प्रमाण-पत्र दिया जा चुका है।</p>
<p>कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि कृषि सखियों को एग्री पैरा-एक्सटेंशन वर्कस के रूप में इसलिए चुना जाता है क्योंकि समुदाय में उनकी विश्वसनीयता है और वे खुद अनुभवी किसान हैं। कृषि सखियों को पहले से ही विभिन्न कृषि पद्धतियों में व्यापक प्रशिक्षण प्राप्त है, जिससे वे किसानों को प्रभावी ढंग से सहायता कर सकती हैं। कृषि में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ क्या है कृषि सखी योजना जिसमें 90 हजार महिलाओं को मिल रही ट्रेनिंग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[धीमी हुई मानसून के आगे बढ़ने की रफ्तार, जानें आपके राज्य में कब होगी बारिश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-may-arrive-late-in-north-and-central-india-due-to-slowing-down-in-maharashtra.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 16 Jun 2024 18:34:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-may-arrive-late-in-north-and-central-india-due-to-slowing-down-in-maharashtra.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भीषण गर्मी से जूझ रहे उत्तर भारत के लिए मानसून का इंतजार लंबा हो सकता है। इसकी वजह है मानसून का कमजोर पड़ना। आमतौर पर जून के पहले हफ्ते तक उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में मानसून की एंट्री हो जाती है। लेकिन, जून का तीसरा हफ्ता खत्म होने को है और बारिश का अभी तक कोई नामोनिशान नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार देश में मानसून की एंट्री भले ही समय से पहले हुई थी, लेकिन अब यह कमजोर पड़ने लगा है। इस वजह से अगले कुछ दिनों तक इसकी रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इससे मध्य और उत्तर भारत के राज्यों में इसके फैलाव में देरी होने की आशंका है।</p>
<p>मौसम का पूर्वानुमान जारी करने वाली करने वाली निजी वेबसाइट स्काईमेट वेदर के मुताबिक, महाराष्ट्र पहुंचने के बाद मानसून धीमा हो गया है और इसे फिर से गति पकड़ने में एक सप्ताह का वक्त लग सकता है। भले ही देश के दक्षिणी इलाकों में चक्रवात की समाप्ति से मानसून कमजोर पड़ गया है, लेकिन 15-16 जून के बीच पूर्वी भारत में यह फिर से सक्रिय हो सकता है। 22 जून तक यह पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश तक सक्रिय हो जाएगा। मानसून अभी अस्थायी तौर पर कमजोर हुआ है, और ऐसा हर साल होता है।&nbsp;</p>
<p><strong>इन राज्यों में हुई मानसून की एंट्री&nbsp;</strong></p>
<p>स्काईमेट के मुताबिक, 30 मई को केरल और पूर्वोत्तर क्षेत्र में मानसून ने दस्तक दी थी। ये पिछले दस वर्षों में चौथी बार था जब मानसून पूर्वानुमान से पहले आया हो। वहीं, महाराष्ट्र और गुजरात में भी मानसून की एंट्री समय से पहले हुई। महाराष्ट्र में 9 जून और गुजरात में 11 जून को मानसून ने दस्तक दी। हालांकि, मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से अब इसके फैलाव में देरी के आसार हैं। दोनों राज्यों को कवर करने में इसे अभी एक हफ्ते तक का समय लग सकता है।&nbsp;<br />&nbsp;<br /><strong>उत्तर भारत में लू का प्रकोप जारी&nbsp;</strong></p>
<p>मानसून कमजोर पड़ने के बीच उत्तर और मध्य भारत में लू का प्रकोप भी जारी है। मौसम विभाग ने उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में लू का अलर्ट जारी किया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के डेली बुलेटिन के मुताबिक, 15 से 18 जून के बीच उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू संभाग, बिहार, झारखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों और उत्तरी ओडिशा में लू चलने की आशंका है।&nbsp;</p>
<p><strong>इन राज्यों में बारिश का अनुमान<br /></strong></p>
<p>आईएमडी के मुताबिक, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कई राज्यों में 15 से 19 जून तक मध्यम से भारी बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग ने अगले 7 दिनों के दौरान अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में गरज, बिजली और तेज हवाओं (30-40 किमी प्रति घंटे) के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान जताया है।&nbsp;</p>
<p>15 जून को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, 15 से 19 जून के बीच मेघालय, 17 से 19 जून के बीच असम और 15 से 19 जून के बीच ओडिशा में बारिश होने की संभावना है। इसी तरह, 17 और 18 जून को केरल, 16 जून को उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मराठवाड़ा, 19 जून को मध्य महाराष्ट्र और गुजरात क्षेत्र, 18 और 19 जून को कोंकण और गोवा में भारी बारिश का पूर्वानुमान है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ धीमी हुई मानसून के आगे बढ़ने की रफ्तार, जानें आपके राज्य में कब होगी बारिश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छह हजार रुपये ही रहेगी पीएम किसान योजना की राशि: शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-has-no-proposal-to-increase-the-amount-of-pm-kisan-yojana-said-union-agriculture-minister-shivraj-singh-chouhan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 15 Jun 2024 14:30:17 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-has-no-proposal-to-increase-the-amount-of-pm-kisan-yojana-said-union-agriculture-minister-shivraj-singh-chouhan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसानों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पीएम किसान योजना) की राशि 6 हजार रुपये ही रहेगी। यह जवाब केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार, 15 जून को पूसा दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछे गए एक सावाल के जवाब में दिया।</p>
<p>जब उनसे पूछा गया कि क्या पीएम किसान योजना की राशि बढ़ाने पर सरकार कोई विचार कर रही है, तो उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में किसानों को मिलने वाली राशि अलग है। कई राज्य सरकारें किसानों को पीएम किसान योजना के साथ अतिरिक्त राशि दे रही हैं। लेकिन केंद्र की ओर से पीएम किसान योजना की राशि 6 हजार है और अभी यही रहेगी।&nbsp;</p>
<p><strong>18 जून को जारी होगी 17वीं किस्त&nbsp;</strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 जून को वाराणसी दौरे पर जाएंगे। वहां वह एक किसान सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी किसानों को पीएम किसान योजना की 17वीं किस्त जारी करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार बनते ही प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहला फैसला किसानों के हित में लिया और पीएम किसान योजना की 17वीं किस्त जारी करने की फाइल पर हस्ताक्षर किए। इतना ही नहीं, उनका पहला कार्यक्रम भी किसानों के लिए होने जा रहा है, जो किसानों के प्रति उनकी और सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p>
<p><strong>9 करोड़ किसानों को मिलेगा लाभ&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि किसान भाइयों की आर्थिक प्रगति सुनिश्चित करने के लिए पीएम किसान योजिना की शुरुआत की गई थी और अब तक लगभग 12 करोड़ किसानों को 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि 18 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगभग 9 करोड़ किसानों को 17वीं किस्त के रूप में 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जारी करेंगे। देश के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों पर किसान प्रधानमंत्री का संवाद लाइव सुन सकेंगे। देशभर में 50 ऐसे कृषि विज्ञान केंद्र चिन्हित किए गए हैं, जहां केंद्रीय मंत्री जाएंगे और किसानों के साथ प्रधानमंत्री का संवाद सुनेंगे। इस दौरान उन्हें विभाग की विभिन्न योजनाओं के बारे में जागरूक भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लगभग 2.5 करोड़ किसान इस कार्यक्रम में जुड़ेंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>एक करोड़ महिलाओं के बनाया लखपति दीदी&nbsp;</strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने तीन करोड़ लखपति दीदियां बनाने का संकल्प लिया है, जिसमें से लगभग एक करोड़ लखपति दीदियां बन चुकी हैं, जबकि 2 करोड़ और बनाई जानी हैं। कृषि सखी उसी का एक आयाम है। उन्होंने कहा कि किसानों की मदद के लिए कई बहनों को प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे खेती में विभिन्न कार्यों के माध्यम से किसानों का सहयोग कर सकें और सालाना लगभग 60-80 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि पीएम किसान की किस्त जारी करने के कार्यक्रम के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी 30 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को कृषि सखी के रूप में प्रमाण पत्र भी प्रदान करेंगे।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ छह हजार रुपये ही रहेगी पीएम किसान योजना की राशि: शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 42 रुपये प्रति किलो तय करे सरकार: एनएफसीएसएफ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/nfcsf-demanded-the-government-to-fix-the-minimum-selling-price-of-sugar-at-42-rupees-per-kg.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 15 Jun 2024 11:49:45 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/nfcsf-demanded-the-government-to-fix-the-minimum-selling-price-of-sugar-at-42-rupees-per-kg.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नेशनल फे़रेशन ऑफ कोआपरेटिव शुगर फैक्टरीज (एनएइसीएसएफ) ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाकर 42 रुपये प्रति किलो करने की जरूरत है। फेडरेशन के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल ने केंद्र सरकार से कहा है कि गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में हर साल लगातार बढ़ोतरी के मद्देनजर चीनी के एमएसपी को बढ़ाकर कम से कम 42 रुपये किलो करने की जरूरत है। एनएफसीएसएफ ने चीनी के उत्पादन लागत में वृद्धि के आंकड़ों के साथ इस संबंध में केंद्र सरकार को अपना प्रस्ताव पहले ही सौंप दिया है।</p>
<p>पुणे में एक बैठक के दौरान, पाटिल ने लंबे समय से लंबित मुद्दे को हल करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा एफआरपी लगातार बढ़ रहा है, जिससे चीनी उद्योग की व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए एमएसपी में भी इसी अनुपात में वृद्धि की आवश्यकता है। इस बैठक में केंद्रीय खाद्य एवं सहकारिता मंत्रालयों, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के निदेशक और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।&nbsp;</p>
<p>बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए हर्षवर्धन पाटिल ने कहा कि चीनी के एमएसपी में वृद्धि का मुद्दा लंबे समय से लंबित है। एनएफसीएसएफ और इस्मा ने संयुक्त रूप से देश भर से एकत्रित तथ्यात्मक जानकारी और विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर चीनी की उत्पादन लागत की गणना की है और 3 जून, 2024 को केंद्र सरकार के संबंधित विभागों को भेज दिया है। हर्षवर्धन पाटिल ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि अगर चीनी का एमएसपी 42 रुपये प्रति किलोग्राम हो जाता है तो चीनी उद्योग व्यवहार्य हो सकता है। इस दौरान एनएफसीएसएफ के प्रबंध निदेशक प्रकाश नायकनवरे भी उपस्थित रहे।&nbsp;</p>
<p>पाटिल ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्रीय मंत्रिमंडल अपने पहले सौ दिनों के भीतर इस मामले पर सकारात्मक निर्णय लेगा। उन्होंने कई सफल पहल पर भी प्रकाश डाला, जिसमें 24 अप्रैल को चीनी मिलों को इथेनॉल उत्पादन के लिए 7 लाख टन बी-हैवी शीरा का उपयोग करने की अनुमति देने का निर्णय और आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ना हार्वेस्टिंग मशीनों की आपूर्ति के लिए एनसीडीसी के साथ सहयोगात्मक प्रयास शामिल हैं। गन्ना हार्वेस्ट वाली मशीनें सहकारी कारखानों को उनकी पेराई क्षमता के अनुसार उपलब्ध कराई जाएंगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 42 रुपये प्रति किलो तय करे सरकार: एनएफसीएसएफ ]]></media:description>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मई में व्यापार घाटा बढ़कर 23.78 बिलियन डॉलर रहा, निर्यात 9 फीसदी और आयात 7.7 फीसदी बढ़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/trade-deficit-widens-in-may-exports-rise-9-per-cent-and-imports-by-7-per-cent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 14 Jun 2024 19:51:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/trade-deficit-widens-in-may-exports-rise-9-per-cent-and-imports-by-7-per-cent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मई 2024 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 23.78 बिलियन डॉलर पहुंच गया है, जो अप्रैल में 19.1 बिलियन&nbsp;डॉलर था। गुरुवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई 2024 में व्यापारिक निर्यात 9.10 फीसदी बढ़ा है, जबकि आयात में 7 फीसदी का उछाल आया है। मई 2024 में व्यापारिक निर्यात 38.13 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा, जबकि मई 2023 में यह 34.95 बिलियन अमरीकी डॉलर था। इसी तरह, मई 2024 में व्यापारिक आयात 61.91 फीसदी रहा, जो मई 2023 मे 57.48 फीसदी था। ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा-प्लास्टिक समेत पेट्रोलियम, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक प्रॉडक्ट्स का एक्सपोर्ट और इंपोर्ट बढ़ाने से ट्रेड डेफिसिट में वृद्धि हुई है।&nbsp;<br />&nbsp;<br />मई में गैर-पेट्रोलियम और आभूषणों का आयात बढ़कर 41.97 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा, जबकि 8.83 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ कुल निर्यात 28.60 बिलियन अमरीकी डॉलर दर्ज किया गया। इसी तरह, पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात मई 2024 में बढ़कर 6.78 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा, जबकि आयात बढ़कर 1.99 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा। इंजीनियरिंग प्रॉडक्ट्स का निर्यात मई 2024 में 9.99 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा। वहीं, मई 2024 में इलेक्ट्रॉनिक प्रॉडक्ट्स का कारोबार (निर्यात) 2.97 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा, जबकि आयात 71.49 बिलियन अमरीकी डॉलर दर्ज किया गया। इसके अलावा, ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स का निर्यात मई 2024 में 2.30 बिलियन अमरीकी डॉलर, रेडीमेड कपड़ों का निर्यात 1.36 बिलियन अमरीकी डॉलर, प्लास्टिक और लिनोलियम निर्यात 0.76 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा।&nbsp;</p>
<p>मई 2024 के लिए भारत का कुल निर्यात (माल और सेवाएं) 68.29 बिलियन अमरीकी डॉलर होने का अनुमान है, जो मई 2023 की तुलना में 10.25 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि दिखाता है। मई 2024 के लिए कुल आयात (माल और सेवाएं) 79.20 बिलियन अमरीकी डॉलर होने का अनुमान है। जिसमें मई 2023 की तुलना में 7.95 फीसदी की वृद्धि हुई है।</p>
<p>वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने इन आंकड़ों के बारे में कहा कि निर्यात के नजरिये से मई महीना उत्कृष्ट रहा है। एक्&zwj;सपोर्ट में बढ़ोतरी एक संकेत है कि एडवांस इकोनॉमी वाले देशों में महंगाई कम हुई है। उन्होंने कहा कि उन देशों में महंगाई का प्रेशर कम होने के साथ ही कंज्&zwj;यूमर्स की परचेजिंग पावर भी बढ़ी है, जो उनके यहां इंपोर्ट को बढ़ावा देगी। ये हमारे लिए पॉजिटिव साइन है, जो आगे भी जारी रहने की उम्&zwj;मीद है&gt;&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मई में व्यापार घाटा बढ़कर 23.78 बिलियन डॉलर रहा, निर्यात 9 फीसदी और आयात 7.7 फीसदी बढ़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[थोक महंगाई दर 15 महीने के उच्च स्तर पर, मई में 2.61 फीसदी पहुंची]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wholesale-inflation-reached-a-15-month-high-in-may-2024.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 14 Jun 2024 15:56:44 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wholesale-inflation-reached-a-15-month-high-in-may-2024.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मई 2024 में थोक महंगाई दर बढ़कर 15 महीनों के उच्चतम स्तर 2.61 फीसदी पर पहुंच गई है। गुरुवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, थोक महंगाई दर लगातार तीसरे महीने बढ़ी है। इसके पहले अप्रैल में यह 1.26 फीसदी और मार्च में 0.26 थी। वहीं, एक साल पहले की समान अवधि यानी मई 2023 में यह शून्य से नीचे 3.61 फीसदी पर रही थी।</p>
<p>खाने पीने की चीजों खासकर सब्जियों और मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स की कीमतों में वृद्धि के कारण थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी हुई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि मुद्रास्फीति (महंगाई) की सकारात्मक दर मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों, खाद्य उत्पादों के विनिर्माण, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, खनिज तेल, अन्य विनिर्माण आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण है।</p>
<p><strong>9.82 महंगी हुई खाने पीने की चीजें&nbsp;</strong></p>
<p>आंकड़ों के अनुसार, खाने पीने की चीजों की थोक महंगाई दर इस साल मई में 9.82 फीसदी रही, जबकि अप्रैल में यह 7.74 फीसदी थी। इसी तरह मई में सब्जियों की थोक महंगाई दर 32.42 फीसदी रही, जो अप्रैल में 23.60 फीसदी थी। वहीं, प्याज की महंगाई दर 58.05 फीसदी, आलू की महंगाई दर 64.05 फीसदी और दालों की महंगाई दर मई में 21.95 प्रतिशत रही।</p>
<p>दूसरी तरफ ईंधन और बिजली थोक महंगाई दर मई में मामूली रूप से घटकर 1.35 फीसदी रही, जो अप्रैल में 1.38 फीसदी थी। मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई दर मई में 0.78 फीसदी रही, जो अप्रैल में शून्य से नीचे 0.42 फीसदी पर थी।</p>
<p><strong>मई में खुदरा मंहगाई दर घटी&nbsp;</strong></p>
<p>जहां एक ओर मई में थोक महंगाई दर बढ़ी है। वहीं, खुदरा मंहगाई दर के आंकड़े इसके उलट हैं। मई में खुदरा महंगाई घटकर 4.75 प्रतिशत पर आ गई, जो एक साल का सबसे निचला स्तर है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_666abf999ac5b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ थोक महंगाई दर 15 महीने के उच्च स्तर पर, मई में 2.61 फीसदी पहुंची ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वनस्पति तेलों का आयात मई में 45 फीसदी बढ़ा, 15.29 लाख टन तेल हुआ आयात]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/import-of-vegetable-oils-in-india-increased-by-45-percent-in-may-2024.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 14 Jun 2024 09:52:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/import-of-vegetable-oils-in-india-increased-by-45-percent-in-may-2024.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू तेल वर्ष (2023-24) में मई माह में वनस्पति तेलों का आयात 45 फीसदी बढ़ गया है। इस साल मई में कुल 15.29 लाख टन वनस्पति तेलों का आयात हुआ है जो मई, 2023 के 10.58 लाख टन वनस्पति तेल आयात से 45 फीसदी अधिक है। मई में&nbsp; 14.98 लाख टन खाद्य तेल और 31761 लाख टन गैर खाद्य वनस्पति तेल का आयात हुआ। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) द्वारा जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। एईए के मुताबिक अप्रैल 2024 में 13.04 लाख टन खाद्य तेलों का आयात हुआ था।</p>
<p>हालांकि, नवंबर 2023 से मई 2024 के दौरान कुल खाद्य तेलों के आयात में 5 प्रतिशत की गिरावट आई है। एसईए के मुताबिक&nbsp; तेल वर्ष 2023-24 के पहले सात महीनों में 85.67 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया, जबकि तेल वर्ष 2022-23 की इसी अवधि में यह 90.55 लाख टन था।&nbsp;</p>
<p>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने कहा कि पिछले एक महीने में अर्जेंटीना और ब्राजील से सोयाबीन तेल की आपूर्ति में व्यवधान ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों पर दबाव डाला है। अर्जेंटीना में श्रमिकों की हड़ताल के कारण सोयाबीन तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इससे पेराई कम हुई है। उन्होंने कहा कि ब्राजील में हाल ही में आई बाढ़ ने सोयाबीन उत्पादन को प्रभावित किया और 27.1 लाख टन नुकसान का अनुमान है।</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि सूरजमुखी तेल और सोयाबीन तेल की कीमतों में वृद्धि ने घरेलू बाजार में सरसों की कीमत को बढ़ा दिया है। सरसों की कीमत 6,200 प्रति क्विंटल से अधिक हो गई है, जो मौजूदा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,650 प्रति क्विंटल के ज्यादा है। मेहता के इस बयान के उलट यह बात भी सच है कि इस साल किसानों को बड़े पैमाने पर सस्ते खाद्य तेल आयात के चलते सरसों को एमएसपी से कम दाम पर बेचना पड़ा था। सरसों की फसल के बाजार में आने समय कीमतें 5000 रुपये प्रति क्विटंल से भी कम रही।</p>
<p>एसईए के मुताबिक 1 जून, 2024 को विभिन्न बंदरगाहों पर खाद्य तेलों का 6.68 लाख टन होने का अनुमान है। वहीं, घरेलू उत्पादन और खपत को देखते हुए पाइपलाइन स्टॉक 17.49 लाख टन है। 1 जून, 2024 को कुल स्टॉक 24.17 लाख है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_666afdcd87fc3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ वनस्पति तेलों का आयात मई में 45 फीसदी बढ़ा, 15.29 लाख टन तेल हुआ आयात ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं  की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने कहा आयात शुल्क में बदलाव का प्रस्ताव नहीं, कीमतों पर है नजर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/central-government-said-there-is-no-plan-to-reduce-import-duty-on-rising-wheat-prices.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 13 Jun 2024 18:11:42 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/central-government-said-there-is-no-plan-to-reduce-import-duty-on-rising-wheat-prices.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गेहूं की बढ़ती कीमतों और उद्योग द्वारा की जा रही आयात शुल्क घटाने की मांग के बीच सरकार ने कहा है कि गेहूं पर आयात शुल्क में बदलाव का अभी कोई विचार नहीं है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि विभाग कीमतों पर नजर बनाए हुए है। गेहूं की जमाखोरी और बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं।</p>
<p>असल में गेहूं की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। पिछले एक महीने में गेहूं 8 फीसदी तक मंहगा हुआ है। गेहूं की कीमतें 2700 रुपये प्रति क्विंटल तक तक पहुंच गई हैं। वहीं, देशभर की थोक मंडियों में गेहूं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसी बीच उद्योग की ओर से गेहूं आयात और उस पर लगने वाली ड्यूटी को घटाने की मांग उठी है। वहीं, इस पर बयान जारी कर सरकार ने साफ किया है की ड्यूटी घटाने पर सरकार कोई विचार नहीं कर रही है।</p>
<p>गेहूं की कीमतें ऐसी स्थिति में बढ़ रही हैं जब देश में गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। केंद्र सरकार के रबी सीजन (2023-24) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में 11.2 करोड़ टन गेहूं उत्पादन हुआ है। इसके बावजूद चालू रबी मार्केटिंग सीजन (2024-25) में गेहूं की सरकारी खरीद 266 लाख टन तक ही पहुच सकी है जो 2023-24 के मुकाबले केवल तीन लाख टन ही अधिक है। चालू सीजन के लिए सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2275 रुपये प्रति क्विटंल रखा है। हालांकि मध्य प्रदेश और राजस्थान में राज्य सरकार द्वारा 125 रुपये प्रति क्विटंल का बोनस देने से गेहूं का खरीद मूल्य 2400 रुपये प्रति क्विटंल रहा। केंद्रीय पूल में 1 जून, 2024 को गेहूं का स्टॉक 299.05 लाख टन था जो पिछले साल इसी तिथि को 313,8 लाख टन था।</p>
<p><strong>रूरल वॉयस</strong> से बात करते हुए रोलर फ्लोर मिल्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रमोद कुमार जैन ने बताया कि बाजार में गेहूं की काफी शॉर्टेज है। जिस वजह से गेहूं के दाम बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार भी इस बार गेहूं खरीद का टारगेट पूरा नहीं कर पाई है। कई ट्रेडर्स और किसान अच्छे दाम की उम्मीद में गेहूं को स्टॉक कर रहे हैं। जिस वजह से बाजार में गेहूं का दाम बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति ऐसी ही रही तो सरकार को गेहूं का आयात करना पड़ेगा, ताकि उद्योग की मांग को पूरा किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से ओपन मार्केट सेल और गेहूं का आयात शुल्क घटाने की मांग भी उठाई। &nbsp;</p>
<p><strong>योजनाओं के लिए नहीं होगी गेहूं की कमी</strong></p>
<p>सरकार ने अपने बयान में यह भी कहा है कि किसी भी सरकारी स्कीम के लिए गेहूं की कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार का कहना है कि फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) ने अब तक 266 लाख टन गेहूं की खरीदी की है, जो तय टारगेट 320 लाख टन से काफी कम है। वहीं, गेहूं का सीजन अब लगभग खत्म होने की कगार पर है। देश के ज्यादतर राज्यों में गेहूं की खरीद पूरी हो चुकी है। जबकि, बचे हुए राज्यों में इस महीने के अंत तक गेहूं की खरीद पूरी होने की उम्मीद है। मंडियों में आवक को देखते हुए जून महीने में गेहूं खरीद में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_644f91f359b6a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं  की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने कहा आयात शुल्क में बदलाव का प्रस्ताव नहीं, कीमतों पर है नजर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खुदरा मंहगाई दर 12 माह के निचने स्तर पर, मई में 4.75 फीसदी पर पहुंची]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/retail-inflation-falls-in-may-2024-to-lowest-level-in-12-months.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 13 Jun 2024 15:23:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/retail-inflation-falls-in-may-2024-to-lowest-level-in-12-months.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मई के महीने में देश की खुदरा महंगाई दर में गिरावट आई है। बुधवार को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में महंगाई दर घटकर 12 महीने के निचले स्तर 4.75 फीसदी पर पहुंच गई है। इसके पहले अप्रैल में महंगाई दर 4.83 फीसदी पर थी। वहीं, एक साल पहले की समान अवधि यानी मई 2023 में यह आंकड़ा 4.31 फीसदी था। मई के महीने में महंगाई दर में आई गिरावट फ्यूल कीमतों में आई कमी की वजह से देखने को मिली है। हालांकि खाद्य कीमतें अभी भी ऊपर बनी हुई हैं।</p>
<p><strong>खाद्य महंगाई दर में मामूली गिरावट</strong></p>
<p>मई में खाद्य महंगाई दर में भले ही गिरावट आई है। लेकिन, सब्जी और दालें अभी भी महंगी बनी हुई हैं। खाद्य महंगाई दर अप्रैल के 8.75 फीसदी से घटकर 8.62 फीसदी पर आ गई है। जबकि, बीते साल मई 2023 में दर्ज खाद्य महंगाई दर 2.96 फीसदी पर थी।</p>
<p>मई में सब्जियां 27.8 फीसदी महंगी हुई जबकि&nbsp; खाद्यान्न महंगाई दर 8.69 फीसदी, दालों की कीमतें 17.14 फीसदी बढ़ीं। फ्यूल और लाइट महंगाई दर मई में घटकर 3.83 फीसदी रह गई है। वहीं, कपड़े और जूते की महंगाई 2.74 फीसदी और आवास क्षेत्रों की महंगाई दर 2.56 फीसदी रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>मंहगाई दर लगातार तीन महीनों में 5 फीसदी से नीचे</strong></p>
<p>एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2024 की तुलना में सालाना आधार पर मसालों की कैटेगरी में सबसे बड़ी गिरावट हुई है। इसके बाद कपड़ा, जूते, घर और अन्&zwj;य चीजों की कैटेगरी में महंगाई पिछले माह की तुलना में कम हुई है। वहीं, मंहगाई दर पिछले तीन महीनों में लगातार 5 फीसदी से नीचे बनी हुई है। महंगाई दर में फरवरी 2024 से लगातार कमी आई है। यह फरवरी में 5.1 फीसदी थी, जबकि अप्रैल 2024 में घटकर 4.8 फीसदी पर आ गई थी। वहीं, मई में यह आंकड़ा 4.75 फीसदी पर पहुंच गया है।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खुदरा मंहगाई दर 12 माह के निचने स्तर पर, मई में 4.75 फीसदी पर पहुंची ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रिकॉर्ड उत्पादन आंकड़ों के बाद भी क्यों बढ़ रहे गेहूं के दाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/why-are-wheat-prices-rising-despite-of-record-production-estimate.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 12 Jun 2024 18:58:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/why-are-wheat-prices-rising-despite-of-record-production-estimate.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार के रबी सीजन (2023-24) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में रिकार्ड 11.2 करोड़ टन गेहूं उत्पादन हुआ है। इसके बावजूद पिछले एक महीने में गेहूं 8 फीसदी तक मंहगा हुआ है और कीमतें 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक तक पहुंच गई हैं। वहीं, देशभर की थोक मंडियों में गेहूं का दाम लगातार बढ़ रहे हैं। चालू रबी मार्केटिंग सीजन (2024-25) में गेहूं की सरकारी खरीद 265 लाख टन तक ही पहुंची हैं। इसके साथ ही गेहूं की कीमतों में आने वाले दिनों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। वहीं उद्योग की ओर से गेहूं आयात की मांग होने लगी है।&nbsp;</p>
<p>केंद्र अब तक 265 लाख टन गेहूं की खरीद कर पाया है, जो तय टारगेट 320 लाख टन से काफी कम है। वहीं, गेहूं का सीजन अब लगभग खत्म होने की कगार पर है। देश के ज्यादतर राज्यों में गेहूं की खरीद पूरी हो चुकी है। जबकि, बचे हुए राज्यों में इस महीने के अंत तक गेहूं की खरीद पूरी होने की उम्मीद है। मंडियों में आवक को देखते हुए जून महीने में गेहूं खरीद में कोई उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद नहीं है।&nbsp;</p>
<p><strong>रूरल वॉयस</strong> से बात करते हुए रोलर फ्लोर मिल्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रमोद कुमार जैन ने बताया कि बाजार में गेहूं की काफी शॉर्टेज है। जिस वजह से गेहूं के दाम बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार भी इस बार गेहूं खरीद का टारगेट पूरा नहीं कर पाई है। कई ट्रेडर्स और किसान अच्छे दाम की उम्मीद में गेहूं को स्टॉक कर रहे हैं। जिस वजह से बाजार में गेहूं का दाम बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति ऐसी ही रही तो सरकार को गेहूं का आयात करना पड़ेगा, ताकि उद्योग की मांग को पूरा किया जा सके।&nbsp;</p>
<p>वहीं, मध्य भारत कंसोर्टियम ऑफ एफपीओ के सीईओ योगेश द्विवेदी ने बताया कि इस बार किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2400 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी के भाव पर किसानों से गेहूं खरीदा था। जिसमें राज्य सरकार ने 125 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया था। जबकि केंद्र सरकार ने चालू साल के लिए 2275 रुपये प्रति क्विंटल का एमएसपी तय किया है। लेकिन ओपन मार्केट में वही गेहूं 2600 से 2700 रुपये प्रति क्विंटल में बिक रहा है। ऐसे में अच्छे दाम के लिए किसान अपनी उपज प्राइवेट व्यापारियों को बेच रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>दूसरी तरफ केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक भी पिछले साल के मुकाबले काफी कम है। फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून 2024 को केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक 299.05 लाख टन था, जो पिछले साल की इसी अवधि से कम है। जून 2023 में यही केंद्रीय पूल में 313.8 लाख टन था। वहीं, एक अप्रैल, 2024 को केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक 2008 के बाद सबसे कम स्तर पर रहा। एक अप्रैल के लिए बफर मानक के तहत केंद्रीय पूल में 74.6 लाख टन गेहूं का स्टॉक होना चाहिए था। जबकि, एक अप्रैल, 2024 को केंद्रीय पूल में 75.02 लाख टन गेहूं था, जो पिछले 16 वर्षों में सबसे कम स्तर है। अप्रैल 2008 में गेहूं का स्टॉक 58.03 लाख टन रह गया था।</p>
<p>पिछले साल जब कीमतें बढ़ी थीं, तो कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने ओपन मार्केट सेल स्कीम (ओएमएसएस) के तहत 100 लाख टन गेहूं खुले बाजार में उतारा था। लेकिन इस साल गेहूं खरीद की स्थिति को देखते हुए सरकार इतनी अधिक मात्रा में गेहूं खुले बाजार में बेचने की हालत में नहीं होगी।</p>
<p><strong>किस राज्य में कितनी हुई खरीद</strong></p>
<p>एफसीआई के मुताबिक पंजाब और हरियाणा में&nbsp; कुल 19.56 मिलियन टन गेहूं की खरीद की गई है। जबकि दोनों राज्यों का संयुक्त लक्ष्य 210 लाख टन था।&nbsp; इसी तरह, उत्तर प्रदेश में अब तक 9.27 लाख टन, मध्य प्रदेश में 48.34 लाख टन और राजस्थान में 11.73 लाख टन गेहूं की ही खरीद हो पाई है। जो तीनों राज्यों के संयुक्त लक्ष्य का आधा भी नहीं है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रिकॉर्ड उत्पादन आंकड़ों के बाद भी क्यों बढ़ रहे गेहूं के दाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[100 दिनों के एक्शन प्लान में जुटे कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-singh-chouhan-held-a-meeting-regarding-the-100-days-action-plan-of-the-agriculture-ministry.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 12 Jun 2024 18:09:51 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-singh-chouhan-held-a-meeting-regarding-the-100-days-action-plan-of-the-agriculture-ministry.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान कार्यभार संभालते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 100 दिनों के एक्शन प्लान को पूरा करने में जुट गए हैं। 100 दिनों की कृषि कार्ययोजना के संबंध में शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तार से चर्चा की। इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों से कहा कि वे अपना पूरा फोकस किसानोन्मुखी कार्यों पर करें ताकि देश के किसानों और कृषि क्षेत्र के निरंतर विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संकल्पना के मुताबिक तेजी से काम किया जा सकें।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में, पहले 100 दिनों की विभागीय कार्ययोजना के सभी पहलुओं को समझने के साथ ही देश के कृषि क्षेत्र की मजबूती तथा किसानों के दुःख-दर्द को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने के दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हमारे किसान भाइयों-बहनों को गुणवत्तापूर्ण खाद-बीज आदि आदानों की उपलब्धता प्राथमिकता से सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस संबंध में उन्हें कहीं-कोई परेशानी नहीं आनी चाहिए।</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि देश में कृषि उत्पादन व उत्पादकता बढ़ने चाहिए। साथ ही हम अपनी घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के अलावा दुनिया के अन्य देशों को भी जरूरत अनुसार गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद निर्यात कर सकें, ऐसी ठोस कार्ययोजना पर अमल करना चाहिए। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने विभागवार योजनाओं की प्रस्तुतियां दी।</p>
<p>बैठक में कैबिनेट मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, भागीरथ चौधरी और कृषि सचिव मनोज अहूजा व कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के सचिव एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक भी उपस्थित थे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ 100 दिनों के एक्शन प्लान में जुटे कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 17वीं किस्त 18 जून को जारी होगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-modi-will-release-the-17th-installment-of-pm-kisan-yojana-from-kashi-on-18th-june.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 12 Jun 2024 17:25:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-modi-will-release-the-17th-installment-of-pm-kisan-yojana-from-kashi-on-18th-june.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 17वीं किस्त का 18 जून को जारी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने वाराणसी दौरे के दौरान किसानों को पीएम किसान योजना की 17वीं किस्त की सौगात देंगे। प्रधानमंत्री मोदी 18 जून को काशी दौरे पर जा रहे हैं। जहां वह किसान सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इसी दौरान वह किसानों के खाते में 17वीं किस्ता का पैसा भी ट्रांसफर करेंगे।</p>
<p>मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल का सबसे पहला फैसला किसानों के हित में लिया है। तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी ने 10 जून को सबसे पहले पीएम किसान निधि की 17वीं किस्त जारी करने की फाइल पर हस्ताक्षर किए थे। इसके साथ ही पीएम मोदी ने 17वीं किस्त जारी करने का ऐलान किया था। वहीं, अब 17वीं किस्त जारी होने की डेट भी आई है। पीएम मोदी 18 जून को करोड़ों लाभार्थियों के खाते में डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से अगली किस्त जारी करेंगे।</p>
<p><strong>9.3 करोड़ किसानों को मिलेंगे 20 हजार करोड़ रुपये&nbsp;</strong></p>
<p>पीएम किसान योजना की अब तक 16 किस्तों जारी हो चुकी हैं। जिसके तहत 12 करोड़ 33 लाख से ज्यादा लाभार्थियों को 3 लाख करोड़ से अधिक राशि सीधे ट्रांसफर की गई है। वहीं, अब 18 जून को 9.3 करोड़ किसानों को 17वीं किस्त के रूप में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये वितरित किए जाएंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>किसानों को सालाना 6 हजार रुपये की आर्थिक मदद</strong></p>
<p>पीएम किसान सम्मान निधि केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसके तहत किसानों को आर्थिक मदद दी जाती है। इस योजना की शुरुआत 24 फरवरी, 2019 को हुई थी। योजना के तहत किसनों को हर साल 6 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिलती है। योजना की राशि दो-दो हजार रुपये की तीन किस्तों में किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। अब तक योजना की 16 किस्तें जारी हो चुकी हैं। वहीं, अब प्रधानमंत्री मोदी ने 17वीं किस्त जारी करने का ऐलान किया है। जिसके लिए 20 हजार करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए किसान आधिकारिक वेबसाइट <strong><a href="https://pmkisan.gov.in/">https://pmkisan.gov.in/</a></strong> पर विजिट कर सकते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_66699d18869ea.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 17वीं किस्त 18 जून को जारी होगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज की कीमतों में उछाल, किसानों को एक्सपोर्ट ड्यूटी हटने और दाम बढ़ने की उम्मीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/onion-prices-rise-still-farmers-not-getting-good-price-slowdown-in-onion-exports.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 11 Jun 2024 16:11:14 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/onion-prices-rise-still-farmers-not-getting-good-price-slowdown-in-onion-exports.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में प्याज की कीमतों में एक बार उछाल देखने को मिला है। प्याज की कीमतें पिछले 15 दिनों में करीब 25 से 30 फीसदी तक बढ़ी हैं। थोक मंडियों में प्याज की आवक जारी है। इसके बावजूद कीमतों में तेजी देखी जा रही है। हालांकि, किसान प्याज के मौजूदा दामों से संतुष्ट नहीं हैं। किसानों को और बेहतर दाम की उम्मीद है। अभी उन्हें औसतन 24 से 26 रुपये प्रति किलो के आसपास दाम मिल रहा है। लेकिन दाम बढ़ने की उम्मीद में कई किसान मंडियों तक लाने में संकोच कर रहे हैं और बेहतर दाम मिलने की आस में प्याज स्टॉक कर रहे हैं। जहां एक ओर देश की खुदरा मंडियों में प्याज की कीमत 40 से 50 रुपये प्रति किलो चल रही है। वहीं, थोक मंडियों में प्याज 4 हजार से 7 हजार रुपये/क्विंटल के बीच बिक रहा है।&nbsp;</p>
<p>प्याज की कीमतों और किसानों को पेश आ रही समस्याओं को लेकर <strong>रूरल वॉयस</strong> से बात करते हुए महाराष्ट्र के किसान संगठन शेतकरी संघठना के नेता और एमएसपी पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई समिति के सदस्य <strong>अनिल घनवट</strong> ने बताया कि नासिक की मंडी में अभी औसतन 2500 रुपये प्रति क्विंटल का दाम चल रहा है। हालांकि, किसान इससे खुश नहीं है। किसानों को प्रति किलो प्याज पर 24 से 26 रुपये मिल रहे हैं, जो अभी भी कम हैं। उन्होंने कहा प्याज की कीमतों में बड़ी गिरावट के बाद किसान अब बेहतर दाम की उम्मीद कर रहे हैं। जिस वजह से मंडियों में प्याज की सामान्य आवक हो रही है। खुदरा बाजारों में प्याज की कीमत 40 से 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने के बाद भी किसानों को दाम बेहद कम मिल रहा है। ऐसे में किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ेंगी, जिससे उन्हें अच्छा दाम मिलेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>न&zwj;िर्यातबंदी ने तोड़ी किसानों की कमर&nbsp;</strong></p>
<p>किसानों का कहना है कि सरकार ने भले ही प्याज न&zwj;िर्यात पर लगी रोक हटा दी, लेकिन प्याज पर 40 प्रतिशत एक्सपोर्ट ड्यूटी और 500 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य लागू है जो उन्हें परेशान कर रहा है। किसानों का कहना है कि वे पहले ही न&zwj;िर्यातबंदी के कारण काफी नुकसान उठा चुके हैं। वहीं, एक्सपोर्ट ड्यूटी और न्यूनतम निर्यात मूल्य के कारण प्याज एक्सपोर्ट पर भी असर पड़ा है। जिस वजह से उन्हें बेहतर कीमत नहीं मिल रही है।</p>
<p>नासिक के एक प्याज ट्रेडर मनोज जैन ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि किसान उम्मीद कर रहे हैं कि केंद्र सरकार अब प्याज पर एक्सपोर्ट ड्यूटी हटा सकती है। इसी अनुमान के दम पर स्टॉकिस्ट और किसान प्याज का भंडारण कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि एक्सपोर्ट ड्यूटी हटने के बाद प्याज के दाम काफी ऊपर जा सकते हैं और इस समय पर वो अपनी प्याज की अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>एक्सपोर्ट में फिलहाल बनी हुई है सुस्ती</strong></p>
<p>मनोज जैन ने बताया कि प्याज के निर्यात पर 40 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी की वजह से फिलहाल इसकी गति धीमी बनी हुई है। आगामी 17 जून को ईद उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार मनाया जाएगा तो ट्रेडर्स का दावा है कि घरेलू मांग में कुछ और समय तक तेजी जारी रहेगी। वहीं, महाराष्ट्र से आने वाली प्याज के लिए मांग लगातार बढ़ रही है। खासकर दक्षिणी राज्यों से डिमांड तेजी से बढ़ी है।&nbsp;</p>
<p><strong>किस मंडी में कितना है दाम&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>केंद्रीय कृष&zwj;ि व क&zwj;िसान कल्याण मंत्रालय के एगमार्कनेट पोर्टल के अनुसार, मंगलवार 11 जून को &nbsp;केरल की चेंगन्नूर मंडी में प्याज को सबसे अच्छा दाम मिला। यहां प्याज 7200 रुपये/क्विंटल के भाव में बिका। इसी तरह, केरल की थलयोलापरम्बु मंडी में प्याज 7000 रुपेय/क्विंटल, मन्नार मंडी में 6700 रुपये/क्विंटल, हिमाचल की पालमपुर मंडी में 5000 रुपये/क्विंटल और तेलंगाना की सिद्दीपेट मंडी में 4500 रुपये/क्विंटल के भाव में बिका। वहीं, बात अगर महाराष्ट्र की मंडियों की करें तो वहां किसानों को औसतन 2 से ढाई हजार रुपये प्रति क्विंटल का दाम मिल रहा है जबकि, अधिकतम दाम 4000 रुपये/क्विंटल को पार कर चुके हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज की कीमतों में उछाल, किसानों को एक्सपोर्ट ड्यूटी हटने और दाम बढ़ने की उम्मीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6668280dd1fb1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शिवराज ने कृषि मंत्रालय का कार्यभार संभाला, अमित शाह और नड्डा ने भी लिया चार्ज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-singh-chouhan-took-over-as-agriculture-minister-home-minister-amit-shah-modi-government-minister-list.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 11 Jun 2024 13:58:34 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/shivraj-singh-chouhan-took-over-as-agriculture-minister-home-minister-amit-shah-modi-government-minister-list.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के नए कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपना पदभार संभाल लिया है। मंगलवार सुबह शिवराज सिंह ने पहले पौधरोपण किया। उसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना कर अपने कार्यालय पहुंचे और कृषि मंत्रालय का चार्ज संभाला। रिकॉर्ड समय तक मध्य प्रदेश की सत्ता संभालने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस बार केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री बनाया गया है। वहीं, उन्हें मिली इस बड़ी जिम्मेदारी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा है कि वह पूरी निष्ठा से इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>'किसानों का हर सपना पूरा होगा'</strong></p>
<p>मंगलवार को पदभार संभालने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, "भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। सशक्त तथा संपन्न किसान समृद्ध भारत का आधार हैं। सरकार की प्राथमिकता किसान का कल्याण तथा गांवों का उत्थान है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में हम विकसित भारत के विराट संकल्पों को सिद्ध करेंगे तथा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगे।"&nbsp;</p>
<p><strong>गृह और स्वास्थ्य मंत्री ने संभाला चार्ज</strong></p>
<p>शिवराज सिंह के अलावा, गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपना पदभार संभाल लिया है। गृह मंत्री के रूप में उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत की है। कार्यभार संभालने से पहले शाह नेशनल पुलिस मेमोरियल पहुंचे। यहां उन्होंने शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद गृह मंत्रालय पहुंचकर अपना पदभार संभाला। वहीं, &nbsp;भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी स्वास्थ्य मंत्रालय में पदभार ग्रहण किया। इस दौरान उनके साथ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री जाधव प्रतापराव गणपतराव भी मौजूद रहे। नड्डा 2014 से 2019 तक मोदी के पहले मंत्रिमंडल में भी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री थे।&nbsp;</p>
<p><strong>इन मंत्रियों ने भी संभाला पदभार&nbsp;</strong></p>
<p>विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी विदेश मंत्री के तौर पर अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत की है। उन्होंने साउथ ब्लॉक स्थित विदेश मंत्रालय में पहली फाइल पर साइन किए। वहीं, अश्विनी वैष्णव ने रेल और सूचना-प्रसारण मंत्री, गिरिराज सिंह ने टेक्सटाइल मंत्री, मनोहर लाल खट्टर ने ऊर्जा मंत्री, हरदीप सिंह पुरी ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री, चिराग पासवान ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और केरल से भाजपा के पहले सांसद सुरेश गोपी ने पर्यटन मंत्रालय के राज्य मंत्री के तौर पर अपना पदभार संभाल लिया है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ शिवराज ने कृषि मंत्रालय का कार्यभार संभाला, अमित शाह और नड्डा ने भी लिया चार्ज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बासमती चावल और डेयरी प्रोडक्ट्स का निर्यात बढ़ा, गेहूं&amp;#45;फल समेत इन एग्री प्रोडक्ट्स की घटी मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/export-of-basmati-rice-and-dairy-products-increased-in-april-2024-agri-export.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 11 Jun 2024 11:00:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/export-of-basmati-rice-and-dairy-products-increased-in-april-2024-agri-export.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू वित्त वर्ष में बासमती चावल के निर्यात की अच्छी शुरुआत हुई है। अप्रैल महीने में बासमती चावल के निर्यात में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा कई अन्य खाद्य पदार्थों के निर्यात में भी वद्धी हुई है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के अनुसार, अप्रैल महीने में चावल, डेयरी प्रोडक्ट्स, प्रॉसेस्ड फलों और जूस का निर्यात बढ़ा है। वहीं, ताजे फल-सब्जियां, गेहूं, दालें और पोल्ट्री प्रोडक्ट्स के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है।</p>
<p><strong>15 फीसदी बढ़ा डेयरी एक्सपोर्ट &nbsp;</strong></p>
<p>एपीडा से मिले आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में डेयरी प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट सबसे बेहतर रहा है। जिसमें 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल में कुल एक्सपोर्ट 14,407 टन रहा। जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 12,372 टन था। इसके बाद सबसे अच्छा एक्सपोर्ट बासमती चावल का रहा, जिसमें लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अप्रैल में कुल एक्सपोर्ट 4.99 लाख टन रहा। जबकि पिछले साल यह 4.25 लाख टन था। सऊदी अरब और इराक जैसे प्रमुख खरीदारों से मांग बढ़ने के चलते अप्रैल महीने में अच्छी खरीद हुई।&nbsp;</p>
<p><strong>सऊदी ने खरीदा सबसे ज्यादा बासमती&nbsp;</strong></p>
<p>एपीडा के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में सऊदी अरब बासमती का सबसे बड़ा खरीदार रहा। जिसमें 1.45 लाख टन से अधिक की खरीद की, जिसका मूल्य 177.24 मिलियन डॉलर से अधिक था। उसके बाद इराक ने 1.37 लाख टन की खरीद की, जिसका मूल्य 141.60 मिलियन डॉलर था। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात ने 130.43 मिलियन डॉलर मूल्य पर 0.99 लाख टन चावल खरीदा। जबकि, अमेरिका ने 124 मिलियन डॉलर मूल्य पर 0.58 लाख टन चावल की खरीदा की। &nbsp;</p>
<p><strong>प्रॉसेस्ड फलों और जूस का निर्यात बढ़ा&nbsp;</strong></p>
<p>एपीडा के अनुसार इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल तक ग्रॉस एग्री प्रोडक्ट एक्सपोर्ट में अप्रैल के दौरान 6.39 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह एक साल पहले के 2.245 अरब डॉलर के मुकाबले घटकर 2.101 अरब डॉलर हो गया। ग्वार गम का निर्यात 43 प्रतिशत बढ़कर 50 मिलियन डॉलर रहा, जबकि प्रॉसेस्ड फलों और जूस का निर्यात 12 प्रतिशत बढ़कर 73 मिलियन डॉलर रहा।</p>
<p><strong>गेहूं, ताजे फल-सब्जियों का निर्यात गिरा&nbsp;</strong></p>
<p>निर्यात पर प्रतिबंध के कारण गैर बासमती चावल का निर्यात 21 प्रतिशत घटकर 418 मिलियन डॉलर रह गया। इसी तरह निर्यात पर अंकुश के कारण गेहूं के शिपमेंट में 75 प्रतिशत की गिरावट आई है। कुल मिलाकर अनाज का शिपमेंट एक साल पहले के 1.064 अरब डॉलर के मुकाबले 8.44 प्रतिशत कम होकर 974 मिलियन डॉलर रहा। जिन कृषि उत्पादों के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई उनमें फूलों की खेती के प्रोडक्ट, ताजे फल, ताजी सब्जियां, दालें और भैंस का मांस और पोल्ट्री प्रोडक्ट शामिल हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बासमती चावल और डेयरी प्रोडक्ट्स का निर्यात बढ़ा, गेहूं-फल समेत इन एग्री प्रोडक्ट्स की घटी मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्रमुख केंद्रीय मंत्रियों में बदलाव नहीं, शिवराज को कृषि व ग्रामीण विकास, नड्डा स्वास्थ्य मंत्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/no-major-change-in-the-key-ministers-of-the-centre-shivraj-has-been-made-agriculture-and-rural-development-minister-nadda-as-health-minister.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 10 Jun 2024 21:08:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/no-major-change-in-the-key-ministers-of-the-centre-shivraj-has-been-made-agriculture-and-rural-development-minister-nadda-as-health-minister.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनने के बाद मंत्रियों के बीच मंत्रालयों का बंटवारा हो गया है। चार बड़े मंत्रालय यानी गृह, रक्षा, वित्त और विदेश में कोई बदलाव नहीं किया गया है। राजनाथ सिंह को रक्षा मंत्री, अमित शाह को गृह मंत्री, निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्री और एस जयशंकर को विदेश मंत्री बनाया गया है। सहकारिता मंत्रालय भी अमित शाह के पास ही रहेगा। नितिन गडकरी को लगातार तीसरी बार सड़क परिवहन मंत्रालय सौंपा गया है। रक्षा, विदेश, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम मंत्रालय भाजपा ने अपने पास रखे हैं। अधिकांश मंत्रियों को पुराने विभागों के साथ रिपीट किया है।</p>
<p>मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। जबकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा स्वास्थ्य मंत्री बनाए गए हैं। उन्हें रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय का जिम्मा भी दिया है। जेडीयू के नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह को पंचायती राज तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री बनाया है। प्रल्हाद जोशी को उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय मंत्रालय मिले हैं। अन्नपूर्णा देवी नई महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं।</p>
<p>एलजेपी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री बनाया गया है। हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर आवास, शहरी मामले और ऊर्जा दो अहम मंत्रालय संभालेंगे। पीयूष गोयल के पास उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय रहेगा जबकि धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री बने रहेंगे। भूपेंद्र यादव को इस बार भी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री बनाया गया है। डॉ. मनसुख मंडाविया खेल और श्रम मंत्रालय संभालेंगे।</p>
<p>पिछली सरकार में रेल मंत्रालय संभालने वाले अश्विनी वैष्णव को रेल और सूचना व प्रसारण मंत्रालय के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का जिम्मा भी दिया गया है। हरदीप सिंह पुरी के पास पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री का जिम्मा बरकरार रहेगा। किरेन रिजिजू को संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय दिए हैं, जबकि सर्बानंद सोनोवाल के पास शिपिंग मंत्रालय रहेगा।</p>
<p>राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अलावा योजना और संस्कृति मंत्रालय का जिम्मा दिया गया है। राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी को कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय का राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया है। अर्जुनराम मेघवाल कानून और संसदीय मामलों के राज्यमंत्री बने रहेंगे। डॉ. जितेंद्र सिंह को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान मंत्रालय के साथ-साथ पीएमओ में राज्यमंत्री बनाया गया है।</p>
<p>भाजपा ने ज्यादातर अहम मंत्रालय अपने पास रखे हैं और मंत्रियों के दायित्व में बड़ा फेरबदल नहीं किया है। भाजपा के सहयोगियों में से जनता दल (सेक्युलर) के एचडी कुमारस्वामी को भारी उद्योग और इस्पात मंत्रालय मिला है। जीतन राम मांझी (एचएएम-सेक्युलर) को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय मिला है, जबकि टीडीपी के राममोहन नायडू को नागरिक उड्डयन मंत्री बनाया गया है।</p>
<p>ज्योतिरादित्य सिंधिया को संचार और पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। गुजरात के भाजपा नेता सीआर पाटिल को जल शक्ति मंत्रालय मिला है, जबकि राजस्थान के गजेंद्र सिंह शेखावत संस्कृति और पर्यटन मंत्री होंगे। जुएल ओराम जनजातीय मामलों के मंत्री बने हैं। गिरिराज सिंह को कपड़ा मंत्रालय मिला है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्रमुख केंद्रीय मंत्रियों में बदलाव नहीं, शिवराज को कृषि व ग्रामीण विकास, नड्डा स्वास्थ्य मंत्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्रधानमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी ने किसानों के लिए साइन की पहली फाइल, 9 करोड़ किसानों को मिलेंगे 20 हजार करोड़ रुपये]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-modi-released-20-thousand-crores-rupees-for-the-17th-installment-of-pm-kisan-samman-nidhi-yojana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 10 Jun 2024 12:26:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-modi-released-20-thousand-crores-rupees-for-the-17th-installment-of-pm-kisan-samman-nidhi-yojana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार 10 जून से तीसरे कार्यकाल का पदभार संभाल लिया है। पदभार संभालते ही प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहला तोहफा देश के किसानों को दिया है। प्रधानमंत्री ने <strong><a href="https://pmkisan.gov.in/">पीएम किसान सम्मान निधि योजना</a></strong> (पीएम कियान योजना) की 17वीं किस्त जारी करने को मंजूरी दे दी है। अपने तीसरे कार्यकाल की पहली फाइल पर हस्ताक्षर करते हुए उन्होंने किसान निधि के 20 हजार करोड़ रुपये जारी किए हैं। अब जल्द ही किसानों के खाते में 2 हजार रुपये की अगली किस्त ट्रांसफर कर दी जाएगी। इससे देश के 9.3 करोड़ किसानों को फायदा होगा।&nbsp;</p>
<p><strong>फाइल साइन करने के बाद क्या बोले पीएम मोदी?</strong></p>
<p>फाइल पर हस्ताक्षर करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हमारी सरकार किसान कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसलिए यह उचित है कि कार्यभार संभालने पर हस्ताक्षरित पहली फाइल किसान कल्याण से संबंधित है। हम आने वाले समय में किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए और भी अधिक काम करना चाहते हैं।" आज मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक भी होनी है। माना जा रहा है कि कैबिनेट बैठक में भी सरकार कुछ बड़े फैसले ले सकती है। कैबिनेट बैठक से पहले सरकार सभी मंत्रियों को उनके मंत्रालयों का बंटवारा कर सकती है।&nbsp;</p>
<p><strong>'मोदी 3.0 का पहला दिन किसानों को समर्पित'</strong></p>
<p>वहीं केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "आज प्रधानमंत्री मोदी जी ने &lsquo;पीएम किसान सम्मान निधि&rsquo; की 17वीं किस्त जारी कर 20 हजार करोड़ वितरित किए, जिससे लगभग 9.3 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे। किसानों को सहायता देने वाली इस योजना की अब तक की 16 किस्तों में 12 करोड़ 33 लाख से ज्यादा लाभार्थियों को 3 लाख करोड़ से अधिक सीधे DBT से वितरित किये गए हैं। यह निर्णय बताता है कि NDA सरकार के लिए किसानों का हित सर्वोच्च प्राथमिकताओं में एक है। मैं इस कल्याणकारी निर्णय के लिए पीएम श्री<strong><a href="https://x.com/narendramodi"> @narendramodi</a></strong> जी का देश के करोड़ों किसानों की ओर से आभार व्यक्त करता हूं।"</p>
<p></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">मोदी 3.0 का पहला दिन किसानों को समर्पित&hellip;<br /><br />आज प्रधानमंत्री मोदी जी ने &lsquo;पीएम किसान सम्मान निधि&rsquo; की 17वीं क़िस्त जारी कर ₹20,000 करोड़ वितरित किए, जिससे लगभग 9.3 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे। किसानों को सहायता देने वाली इस योजना की अब तक की 16 किस्तों में 12 करोड़ 33 लाख से ज्यादा&hellip; <a href="https://t.co/zZniBKrKQx">pic.twitter.com/zZniBKrKQx</a></p>
&mdash; Amit Shah (Modi Ka Parivar) (@AmitShah) <a href="https://twitter.com/AmitShah/status/1800061868939354469?ref_src=twsrc%5Etfw">June 10, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p><strong>किसानों को सालाना 6 हजार रुपये की आर्थिक मदद</strong></p>
<p>पीएम किसान सम्मान निधि केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसके तहत किसानों को आर्थिक मदद दी जाती है। इस योजना की शुरुआत 24 फरवरी, 2019 को हुई थी। योजना के तहत किसनों को हर साल 6 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिलती है। योजना की राशि दो-दो हजार रुपये की तीन किस्तों में किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। अब तक योजना की 16 किस्तें जारी हो चुकी हैं। वहीं, अब प्रधानमंत्री मोदी ने 17वीं किस्त जारी करने का ऐलान किया है। जिसके लिए 20 हजार करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6666a0e8f3c6e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्रधानमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी ने किसानों के लिए साइन की पहली फाइल, 9 करोड़ किसानों को मिलेंगे 20 हजार करोड़ रुपये ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6666a0e8f3c6e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मोदी कैबिनेट में यूपी का दबदबा, दक्षिण भारत को भी अहम जिम्मेदारी, देखें किस राज्य से कितने नेता मंत्री बने]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/up-dominates-modi-cabinet-south-india-gets-important-responsibility-modi-cabinet-ministers-list.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 10 Jun 2024 11:36:20 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/up-dominates-modi-cabinet-south-india-gets-important-responsibility-modi-cabinet-ministers-list.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नरेंद्र मोदी अब औपचारिक रूप से भारत के 14वें प्रधानमंत्री बन गए हैं। रविवार 9 जून को प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति भवन में पद और गोपनीयता की शपथ ली। शपथ ग्रहण के लिए आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री मोदी के साथ 71 सांसदों को भी पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। जिसमें 30 कैबिनेट मंत्री, 36 राज्य मंत्री और पांच को स्वतंत्र प्रभार दिया गया है। मोदी कैबिनेट में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश के 10 सांसदों को मंत्री बनाया गया है। इसके बाद बिहार से 8, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से छह-छह और राजस्थान से चार नेताओं को मोदी कैबिनेट में जगह मिली है। वहीं हरियाणा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से तीन-तीन मंत्री बनाए गए हैं। जबकि ओडिशा, असम, झारखंड, तेलंगाना, पंजाब, पश्चिम बंगाल और केरल को दो-दो मंत्रिपद मिले हैं। आइए जानते हैं किस राज्य से कितने मंत्रियों को सरकार में शामिल किया गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>मोदी कैबिनेट में यूपी का दबदाबा&nbsp;</strong></p>
<p>मोदी सरकार में सबसे ज्यादा मंत्री उत्तर प्रदेश से बनाए गए हैं। उत्तर प्रदेश के 10 सांसदों ने रविवार को मंत्री मद की शपथ ली। हालांकि, लोकसभा चुनाव में इस बार उत्तर प्रदेश में बीजेपी का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। उत्तर प्रदेश में लोकसभा की कुल 80 सीटें हैं। जिनमें 37 पर समाजवादी पार्टी, 33 पर बीजेपी, 6 पर कांग्रेस, 2 पर आरएलडी, 1 पर आजाद समाज पार्टी और 1 पर अपना दल ने जीत दर्ज की। उत्तर प्रदेश में बीजेपी के इस प्रदर्शन के बावजूद यूपी को मोदी सरकार में 10 मंत्रियों के साथ बड़ा दर्जा मिला है।&nbsp;</p>
<p><strong>दक्षिण भारत पर बीजपी का फोकस&nbsp;</strong></p>
<p>मोदी कैबिनेट में दक्षिण भारत पर भी फोकस किया गया है। दक्षिण भारत के कुल 13 सांसदों को मंत्री बनाया गया है। जिसमें सबसे ज्यादा मंत्री कर्नाटक के हैं। कर्नाटक से पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी समेत 5 को कैबिनेट में जगह दी गई है। दक्षिण में कर्नाटक बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा सीटें लेकर आया है। यहां 28 लोकसभा सीटों में से एनडीए के खाते में 19 सीटें आई हैं। जिसमें अकेले बीजेपी ने 17 सीटें जीती हैं। जबकि उसके सहयोगी दल जेडीएस ने दो सीटें हासिल की हैं।&nbsp;</p>
<p>इसके अलावा मोदी कैबिनेट में निर्मला सीतारमण और प्रल्हाद जोशी भी हैं। हालांकि ये दोनों पिछली कैबिनेट का भी हिस्सा थे। पिछली मोदी सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे और राज्य सरकार में पूर्व मंत्री वी सोमन्ना ने भी शपथ ली। इसी तरह तीन मंत्री आंध्र प्रदेश से हैं। आंध्र में एनडीए को 21 सीटें मिली हैं। तेलंगाना से मोदी कैबिनेट में दो मंत्री बने हैं। यहां एनडीए के खाते में आठ सीटें आई हैं। केरल से भी दो राज्य मंत्री बनाए गए हैं। केरल में भाजपा का खाता खोलने वाले सुरेश गोपी को राज्य मंत्री बनाया गया है। वहीं, तमिलनाडु के पूर्व भाजपा प्रमुख एल मुरुगन को भी मोदी कैबिनेट में जगह मिली है।&nbsp;</p>
<table border="1" style="border-collapse: collapse; width: 100%; height: 580px;">
<tbody>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px; text-align: center;"><strong>राज्य&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 50%; height: 20px; text-align: center;"><strong>मंत्री&nbsp;</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">उत्तर प्रदेश</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">राजनाथ सिंह (कैबिनेट मंत्री)<br />हरदीप सिंह पुरी (राज्यसभा, कैबिनेट मंत्री)<br />जयंत चौधरी (राज्यसभा, स्वतंत्र प्रभार, राज्यमंत्री)<br />जितिन प्रसाद (राज्य मंत्री)<br />पंकज चौधरी (राज्य मंत्री)<br />अनुप्रिया पटेल (राज्य मंत्री)<br />एसपी सिंह बघेल (राज्य मंत्री)<br />कीर्तिवर्धन सिंह (राज्य मंत्री)<br />बीएल वर्मा (राज्य मंत्री)<br />कमलेश पासवान (राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">बिहार</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">जीतनराम मांझी (हम, कैबिनेट मंत्री)<br />राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह (जेडीयू, कैबिनेट मंत्री)<br />गिरिराज सिंह, (कैबिनेट मंत्री)<br />चिराग पासवान (एलजेपी- रामविलास, कैबिनेट मंत्री)<br />रामनाथ ठाकुर (राज्यसभा, राज्यमंत्री)<br />नित्यानंद राय (राज्य मंत्री)<br />सतीश दुबे (राज्यसभा, राज्य मंत्री)<br />राजभूषण चौधरी (राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">गुजरात&nbsp;</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">अमित शाह (कैबिनेट मंत्री)<br />जेपी नड्डा (राज्यसभा, कैबिनेट मंत्री)<br />सुब्रह्मण्यम जयशंकर (राज्यसभा, कैबिनेट मंत्री)<br />मनसुख मंडाविया (कैबिनेट मंत्री)<br />सीआर पाटिल (कैबिनेट मंत्री)<br />नीमूबेन बमभानिया (राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">महाराष्ट्र</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">नितिन गडकरी (कैबिनेट मंत्री)<br />पीयूष गोयल &nbsp;(कैबिनेट मंत्री)<br />प्रताप राव जाधव (राज्यमंत्री, स्वतंत्र प्रभार)<br />रामदास अठावले (राज्यसभा, राज्य मंत्री)<br />रक्षा खड़से (राज्य मंत्री)<br />मुरलीधर मोहोल (राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">मध्य प्रदेश</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">शिवराज सिंह चौहान (कैबिनेट मंत्री)<br />डॉ. वीरेंद्र कुमार &nbsp;(कैबिनेट मंत्री)<br />ज्योतिरादित्य सिंधिया (कैबिनेट मंत्री)<br />एल मुरुगन (राज्यसभा, राज्य मंत्री)<br />दुर्गादास उइके (राज्य मंत्री)<br />सवित्री ठाकुर (राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">कर्नाटक</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">निर्मला सीतारमण (राज्यसभा, कैबिनेट मंत्री)<br />एचडी कुमारस्वामी (जेडीएस, कैबिनेट मंत्री)<br />प्रह्लाद जोशी (कैबिनेट मंत्री)<br />वी सोमन्ना (राज्य मंत्री)<br />शोभा करांदलाजे (राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">हरियाणा</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">मनोहर लाल (कैबिनेट मंत्री)<br />राव इंद्रजीत सिंह (राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार)<br />कृष्णपाल गुर्जर (राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">ओडिशा</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">धर्मेंद्र प्रधान (कैबिनेट मंत्री)<br />जुएल ओरांव (कैबिनेट मंत्री)<br />अश्विनी वैष्णव (राज्यसभा, कैबिनेट मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 60px;">
<td style="width: 50%; height: 60px;">आंध्र प्रदेश</td>
<td style="width: 50%; height: 60px;">राममोहन नायडू (टीडीपी, कैबिनेट मंत्री)<br />चंद्रशेखर पेम्मासानी (टीडीपी, राज्य मंत्री)<br />भूपति राजू श्रीनिवास वर्मा (राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 80px;">
<td style="width: 50%; height: 80px;">राजस्थान</td>
<td style="width: 50%; height: 80px;">भूपेंद्र यादव (कैबिनेट मंत्री)<br />गजेंद्र सिंह शेखावत &nbsp;(कैबिनेट मंत्री)<br />अर्जुन राम मेघवाल (राज्यमंत्री, स्वतंत्र प्रभार)<br />भगीरथ चौधरी (राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 40px;">
<td style="width: 50%; height: 40px;">झारखंड&nbsp;</td>
<td style="width: 50%; height: 40px;">अन्नपूर्णा देवी (कैबिनेट मंत्री)<br />संजय सेठ (राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">अरुणाचल प्रदेश</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">किरण रिजिजू (कैबिनेट मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">तेलंगाना&nbsp;</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">जी किशन रेड्डी (कैबिनेट मंत्री)<br />बंडी संजय कुमार (राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">जम्मू-कश्मीर</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">श्रीपद यशो नाइक (राज्य मंत्री)&nbsp;</td>
</tr>
<tr style="height: 40px;">
<td style="width: 50%; height: 40px;">केरल</td>
<td style="width: 50%; height: 40px;">सुरेश गोपी (राज्य मंत्री)<br />जॉज कुरियन ( राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">उत्तराखंड</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">अजय टम्टा (राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">पश्चिम बंगाल</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">शांतनु ठाकुर (राज्य मंत्री)<br />सुकांत मजूमदार (राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">पंजाब&nbsp;</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">रवनीत सिंह बिट्टू (राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">छत्तीसगढ़</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">तोखन साहू (राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">नई दिल्ली</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">हर्ष मल्होत्रा (राज्य मंत्री)</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="width: 50%; height: 20px;">असम&nbsp;</td>
<td style="width: 50%; height: 20px;">सर्बानंद सोनेवाल (कैबिनेट मंत्री)<br />पवित्रा मार्गेरिटा, (राज्यसभा, राज्य मंत्री)</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6666936b9de4e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मोदी कैबिनेट में यूपी का दबदबा, दक्षिण भारत को भी अहम जिम्मेदारी, देखें किस राज्य से कितने नेता मंत्री बने ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मोदी तीसरी बार बने प्रधानमंत्री, नई मंत्रिपरिषद में कुल 31 कैबिनेट, 5 स्वतंत्र प्रभार और 36 राज्य मंत्री शामिल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/modi-becomes-prime-minister-for-3rd-time-31-cabinet-5-independent-and-36-ministers-of-state-take-oath.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 09 Jun 2024 22:04:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/modi-becomes-prime-minister-for-3rd-time-31-cabinet-5-independent-and-36-ministers-of-state-take-oath.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने तीसरी बार शपथ ले ली है। जवाहर लाल नेहरू के बाद मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता हैं। वे वाराणसी से तीसरी बार सांसद बने हैं। उनके साथ शपथ लेने वालों में 30 कैबिनेट मंत्री, 5 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 36 राज्य मंत्री भी शामिल हैं। कुल 72 मंत्रियों ने शपथ ली जिनमें 27 ओबीसी और पांच अल्पसंख्यक थे। केंद्रीय मंत्री के रूप में नए चेहरों में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और आरएलडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी भी शामिल हैं। पहली बार सांसद बने कई नेताओं को भी मंत्री बनाया गया है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मोदी के बाद लखनऊ से भाजपा सांसद राजनाथ सिंह ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। पिछली सरकार में वे रक्षा मंत्री थे। तीसरे नंबर पर गुजरात के गांधीनगर से सांसद अमित शाह ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। पिछली सरकार में वे गृहमंत्री और सहकारिता मंत्री थे। उनके बाद नागपुर से सांसद नितिन गडकरी ने शपथ ली। वे पिछली सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री थे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पांचवें नंबर पर जगत प्रकाश नड्डा ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। वे 2019 से भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष हैं। वे 2014 की मोदी सरकार में भी मंत्री थे। उनके बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और विदिशा से सांसद शिवराज सिंह चौहान ने शपथ ली। इस चुनाव में उन्होंने 8 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। वे चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उनके बाद निर्मला सीतारमण ने शपथ ली। वे कर्नाटक से राज्यसभा सांसद हैं। पिछली सरकार में वे वित्त मंत्री थीं। वर्ष 2017 स 2019 के दौरान वे रक्षा मंत्री भी थीं। गुजरात से राज्यसभा सांसद एस. जयशंकर ने भी शपथ ली। पिछली सरकार में विदेश मंत्री। वे 1977 बैच के आईएफएस रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उनके बाद हरियाणा की करनाल सीट से सांसद और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शपथ ली। उनके बाद शपथ लेने वाले थे कर्नाटक के मांड्या से जेडीएस सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी। वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उत्तर मुंबई से सांसद चुने गए पीयूष गोयल ने भी कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। पिछली सरकार में वे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री थे। उनके बाद ओडिशा के संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने मंत्री पद की शपत ली। पिछली सरकार में वे पेट्रोलियम मंत्री थे। ओडिशा विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद माना जा रहा था कि उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उनके बाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और बिहार के मुंगेर से सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने शपथ ली। ललन सिंह पहली बार केंद्र सरकार में मंत्री बने हैं।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उनके बाद शपथ लेने वालों में असम के पूर्व मुख्यमंत्री और डिब्रूगढ़ से सांसद सर्वानंद सोनोवाल और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार शामिल हैं। फिर श्रीकाकुलम से टीडीपी सासंद 36 साल के राममोहन नायडु ने शपथ ली। वे नई मोदी सरकार के सबसे युवा मंत्री हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उनके पश्चात कर्नाटक के धारवाड़ से भाजपा सासंद प्रह्लाद जोशी ने शपथ ली। वे 2004 से लगातार सांसद हैं। पिछली सरकार में वे संसदीय कार्य मंत्री थे। ओडिशा के सुंदरगढ़ से सांसद जुएल उरांव ने भी शपथ ली। वे छह बार के लोकसभा सांसद हैं। पहली मोदी सरकार में वे आदिवासी कल्याण मंत्री थे।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">बिहार के बेगूसराय से सांसद और पिछली सरकार में मंत्री रह चुके गिरिराज सिंह को भी इस बार मंत्री बनाया गया है। वे तीसरी बार सांसद बने हैं। ओडिशा से भाजपा के राज्यसभा सांसद अश्विनी वैष्णव दूसरी बार मंत्री बने हैं। पिछली सरकार में वे आईटी और रेल मंत्री थे।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मध्य प्रदेश के गुना से पांच बार के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मंत्री बनाए गए हैं। वे पहले कांग्रेस पार्टी में थे और यूपीए के दोनों कार्यकाल में मंत्री थे। पिछली सरकार में वे उड्डयन मंत्री थे। राजस्थान के अलवर से भाजपा सांसद भूपेंद्र यादव भी मंत्री बनाए हैं। वे दो बार राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। राजस्थान के ही जोधपुर से सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी मंत्री पद की शपथ ली। वे पिछली सरकार में जल शक्ति मंत्री थे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">झारखंड के कोडरमा से भाजपा सांसद अन्नपूर्णा देवी दूसरी बार केंद्रीय मंत्री बनाई गई हैं। उनके बाद अरुणाचल पश्चिम से सांसद किरने रिजिजू ने शपथ ली। वे चौथी बार सांसद बने हैं। वे इससे पहले मोदी सरकार के दोनों कार्यकाल में मंत्री रह चुके हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उनके बाद शपथ लेने वालों में राज्यसभा सांसद और पिछली सरकार में शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी, गुजरात के पोरबंदर से सांसद और पिछली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडवीय, तेलंगाना के सिकंदराबाद से सांसद जी. किशन रेड्डी, बिहार के हाजीपुर से लोक जनशक्ति पार्टी (आरवी) के सांसद चिराग पासवान, गुजरात के नवसारी से सांसद और राज्य भाजपा अध्यक्ष सी.आर. पाटिल शामिल हैं।&nbsp;</span></p>
<p><b>स्वतंत्र प्रभार वाले पांच राज्य मंत्रियों ने ली शपथ</b></p>
<p><span style="font-weight: 400;">राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ लेने वालों में गुड़गांव से भाजपा सांसद राव इंद्रजीत सिंह, उधमपुर से भाजपा सांसद डॉ. जीतेंद्र सिंह, बीकानेर से भाजपा सांसद अर्जुन राम मेघवाल, महाराष्ट्र की बुलढाना सीट से शिवसेना शिंदे गुट के सांसद प्रतापराव जाधव, आरएलडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी शामिल रहे।&nbsp;</span></p>
<p><b>36 राज्य मंत्रियों ने ली शपथ</b></p>
<p><span style="font-weight: 400;">राज्य मंत्री के रूप में पीलीभीत से भाजपा सांसद जितिन प्रसाद, नॉर्थ गोवा से भाजपा सांसद श्रीपद नाइक, उत्तर प्रदेश के महाराजगंज से सांसद पंकज चौधरी, हरियाणा के फरीदाबाद से सांसद कृष्णपाल गुर्जर, महाराष्ट्र से आरपीआई (ए) के राज्यसभा सांसद रामदास अठवले, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के बेटे और राज्यसभा सांसद रामनाथ ठाकुर, बिहार के उजियारपुर से सांसद नित्यानंद राय, मिर्जापुर से अपना दल (एस) की सांसद अनुप्रिया पटेल, कर्नाटक से भाजपा सांसद वी. सोमन्ना, गुंटूर से पहली बार टीडीपी सांसद बने चंद्रशेखर पेम्मासानी, आगरा से भाजपा सासंद प्रो. एसपी सिंह बघेल, कर्नाटक के बेंगलुरु उत्तर से भाजपा सांसद शोभा करंदलाजे, उत्तर प्रदेश के गोंडा से सांसद कीर्तिवर्धन सिंह, उत्तर प्रदेश से भाजपा के 2020 से राज्यसभा सांसद बनवारी लाल वर्मा, पश्चिम बंगाल की बनगांव सीट से भाजपा सांसद शांतनु ठाकुर ने पद और गोपनीयता की शपथ ली।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अन्य राज्य मंत्रियों में केरल में भाजपा का खाता खोलने वाले त्रिशूर से सांसद और मलयालम फिल्मों के सुपर स्टार सुरेश गोपी, मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद डॉ. एल. मुरुगन, उत्तराखंड के अल्मोड़ा से भाजपा अजय टमटा, तेलंगाना के करीमनगर से भाजपा सासंद तथा प्रदेश पार्टी अध्यक्ष बंडी संजय कुमार, उत्तर प्रदेश के बांसगांव से भाजपा सांसद कमलेश पासवान, राजस्थान के अजमेर से भाजपा सांसद भगीरथ चौधरी, बिहार से भाजपा के राज्यसभा सांसद सतीश दुबे, झारखंड के रांची से भाजपा सांसद संजय सेठ, पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते और पंजाब की लुधियाना सीट पर भाजपा के टिकट पर हारने वाले रवनीत सिंह बिट्टू, मध्य प्रदेश के बैतूल से सांसद दुर्गादास उइके, एकनाथ खड्से की बहू और महाराष्ट्र के रावेस से भाजपा सांसद रक्षा खडसे शामिल हैं।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पश्चिम बंगाल की बालूरघाट सीट से भाजपा सासंद सुकांत मजूमदार, मध्य प्रदेश के धार से भाजपा सांसद सावित्री ठाकुर, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से भाजपा सांसद तोखन साहू, बिहार के मुजफ्फरपुर से भाजपा के टिकट पर पहली बार सांसद बने डॉ. राजभूषण चौधरी, आंध्र प्रदेश के नरसापुरम से भाजपा सांसद भूपति राजू श्रीनिवास वर्मा, पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद हर्ष मल्होत्रा, गुजरात की भावनगर सीट से पहली बार की सांसद (भाजपा) नीमूबेन बाभनिया, महाराष्ट्र के पुणे से पहली बार के सांसद (भाजपा) मुरलीधर मोहोल, केरल भाजपा के महासचिव जॉर्ज कुरियन और असम से भाजपा के राज्यसभा सांसद पबित्र मार्गरेटा ने भी राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। </span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6665d797584af.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मोदी तीसरी बार बने प्रधानमंत्री, नई मंत्रिपरिषद में कुल 31 कैबिनेट, 5 स्वतंत्र प्रभार और 36 राज्य मंत्री शामिल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6665d797584af.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, शपथ लेने वालों में राजनाथ, अमित शाह और जेपी नड्डा भी शामिल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/narendra-modi-becomes-prime-minister-for-3rd-time-rajnath-amit-shah-and-jp-nadda-also-take-oath.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 09 Jun 2024 19:59:04 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/narendra-modi-becomes-prime-minister-for-3rd-time-rajnath-amit-shah-and-jp-nadda-also-take-oath.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने तीसरी बार शपथ ले ली है। जवाहर लाल नेहरू के बाद मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता हैं। वे वाराणसी से तीसरी बार सांसद बने हैं। उनके साथ शपथ लेने वालों में 30 कैबिनेट मंत्री, 5 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 36 राज्य मंत्री भी शामिल हैं। कुल 72 मंत्रियों ने शपथ ली जिनमें 27 ओबीसी और पांच अल्पसंख्यक थे। <br /></span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मोदी के बाद लखनऊ से भाजपा सांसद राजनाथ सिंह ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। पिछली सरकार में वे रक्षा मंत्री थे। तीसरे नंबर पर गुजरात के गांधीनगर से सांसद अमित शाह ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। पिछली सरकार में वे गृहमंत्री और सहकारिता मंत्री थे। उनके बाद नागपुर से सांसद नितिन गडकरी ने शपथ ली। वे पिछली सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री थे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पांचवें नंबर पर जगत प्रकाश नड्डा ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। वे 2019 से भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष हैं। वे 2014 की मोदी सरकार में भी मंत्री थे। उनके बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और विदिशा से सांसद शिवराज सिंह चौहान ने शपथ ली। इस चुनाव में उन्होंने 8 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। वे चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उनके बाद निर्मला सीतारमण ने शपथ ली। वे कर्नाटक से राज्यसभा सांसद हैं। पिछली सरकार में वे वित्त मंत्री थीं। वर्ष 2017 स 2019 के दौरान वे रक्षा मंत्री भी थीं। गुजरात से राज्यसभा सांसद एस. जयशंकर ने भी शपथ ली। पिछली सरकार में विदेश मंत्री। वे 1977 बैच के आईएफएस रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उनके बाद हरियाणा की करनाल सीट से सांसद और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शपथ ली। उनके बाद शपथ लेने वाले थे कर्नाटक के मांड्या से जेडीएस सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी। वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उत्तर मुंबई से सांसद चुने गए पीयूष गोयल ने भी कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। पिछली सरकार में वे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री थे। उनके बाद ओडिशा के संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने मंत्री पद की शपत ली। पिछली सरकार में वे पेट्रोलियम मंत्री थे। ओडिशा विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद माना जा रहा था कि उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उनके बाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और बिहार के मुंगेर से सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने शपथ ली। ललन सिंह पहली बार केंद्र सरकार में मंत्री बने हैं।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उनके बाद शपथ लेने वालों में असम के पूर्व मुख्यमंत्री और डिब्रूगढ़ से सांसद सर्वानंद सोनोवाल और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार शामिल हैं। फिर श्रीकाकुलम से टीडीपी सासंद 36 साल के राममोहन नायडु ने शपथ ली। वे नई मोदी सरकार के सबसे युवा मंत्री हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उनके पश्चात कर्नाटक के धारवाड़ से भाजपा सासंद प्रह्लाद जोशी ने शपथ ली। वे 2004 से लगातार सांसद हैं। पिछली सरकार में वे संसदीय कार्य मंत्री थे। ओडिशा के सुंदरगढ़ से सांसद जुएल उरांव ने भी शपथ ली। वे छह बार के लोकसभा सांसद हैं। पहली मोदी सरकार में वे आदिवासी कल्याण मंत्री थे।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">बिहार के बेगूसराय से सांसद और पिछली सरकार में मंत्री रह चुके गिरिराज सिंह को भी इस बार मंत्री बनाया गया है। वे तीसरी बार सांसद बने हैं। ओडिशा से भाजपा के राज्यसभा सांसद अश्विनी वैष्णव दूसरी बार मंत्री बने हैं। पिछली सरकार में वे आईटी और रेल मंत्री थे।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मध्य प्रदेश के गुना से पांच बार के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मंत्री बनाए गए हैं। वे पहले कांग्रेस पार्टी में थे और यूपीए के दोनों कार्यकाल में मंत्री थे। पिछली सरकार में वे उड्डयन मंत्री थे। राजस्थान के अलवर से भाजपा सांसद भूपेंद्र यादव भी मंत्री बनाए हैं। वे दो बार राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। राजस्थान के ही जोधपुर से सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी मंत्री पद की शपथ ली। वे पिछली सरकार में जल शक्ति मंत्री थे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">झारखंड के कोडरमा से भाजपा सांसद अन्नपूर्णा देवी दूसरी बार केंद्रीय मंत्री बनाई गई हैं। उनके बाद अरुणाचल पश्चिम से सांसद किरने रिजिजू ने शपथ ली। वे चौथी बार सांसद बने हैं। वे इससे पहले मोदी सरकार के दोनों कार्यकाल में मंत्री रह चुके हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उनके बाद शपथ लेने वालों में राज्यसभा सांसद और पिछली सरकार में शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी, गुजरात के पोरबंदर से सांसद और पिछली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडवीय, तेलंगाना के सिकंदराबाद से सांसद जी. किशन रेड्डी, बिहार के हाजीपुर से लोक जनशक्ति पार्टी (आरवी) के सांसद चिराग पासवान, गुजरात के नवसारी से सांसद और राज्य भाजपा अध्यक्ष सी.आर. पाटिल शामिल हैं।&nbsp;</span></p>
<p><b>स्वतंत्र प्रभार वाले पांच राज्य मंत्रियों ने ली शपथ</b></p>
<p><span style="font-weight: 400;">राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ लेने वालों में गुड़गांव से भाजपा सांसद राव इंद्रजीत सिंह, उधमपुर से भाजपा सांसद डॉ. जीतेंद्र सिंह, बीकानेर से भाजपा सांसद अर्जुन राम मेघवाल, महाराष्ट्र की बुलढाना सीट से शिवसेना शिंदे गुट के सांसद प्रतापराव जाधव, आरएलडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी शामिल रहे।&nbsp;</span></p>
<p><b>36 राज्य मंत्रियों ने भी ली शपथ<br /></b></p>
<p><span style="font-weight: 400;">राज्य मंत्री के रूप में पीलीभीत से भाजपा सांसद जितिन प्रसाद, नॉर्थ गोवा से भाजपा सांसद श्रीपद नाइक, उत्तर प्रदेश के महाराजगंज से सांसद पंकज चौधरी, हरियाणा के फरीदाबाद से सांसद कृष्णपाल गुर्जर, महाराष्ट्र से आरपीआई (ए) के राज्यसभा सांसद रामदास अठवले, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के बेटे और राज्यसभा सांसद रामनाथ ठाकुर, बिहार के उजियारपुर से सांसद नित्यानंद राय, मिर्जापुर से अपना दल (एस) की सांसद अनुप्रिया पटेल, कर्नाटक से भाजपा सांसद वी. सोमन्ना, गुंटूर से पहली बार टीडीपी सांसद बने चंद्रशेखर पेम्मासानी, आगरा से भाजपा सासंद प्रो. एसपी सिंह बघेल, कर्नाटक के बेंगलुरु उत्तर से भाजपा सांसद शोभा करंदलाजे, उत्तर प्रदेश के गोंडा से सांसद कीर्तिवर्धन सिंह, उत्तर प्रदेश से भाजपा के 2020 से राज्यसभा सांसद बनवारी लाल वर्मा, पश्चिम बंगाल की बनगांव सीट से भाजपा सांसद शांतनु ठाकुर ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अन्य राज्य मंत्रियों में केरल में भाजपा का खाता खोलने वाले त्रिशूर से सांसद और मलयालम फिल्मों के सुपर स्टार सुरेश गोपी, मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद डॉ. एल. मुरुगन, उत्तराखंड के अल्मोड़ा से भाजपा अजय टमटा, तेलंगाना के करीमनगर से भाजपा सासंद तथा प्रदेश पार्टी अध्यक्ष बंडी संजय कुमार, उत्तर प्रदेश के बांसगांव से भाजपा सांसद कमलेश पासवान, राजस्थान के अजमेर से भाजपा सांसद भगीरथ चौधरी, बिहार से भाजपा के राज्यसभा सांसद सतीश दुबे, झारखंड के रांची से भाजपा सांसद संजय सेठ, पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते और पंजाब की लुधियाना सीट पर भाजपा के टिकट पर हारने वाले रवनीत सिंह बिट्टू, मध्य प्रदेश के बैतूल से सांसद दुर्गादास उइके, एकनाथ खड्से की बहू और महाराष्ट्र के रावेस से भाजपा सांसद रक्षा खडसे शामिल हैं। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पश्चिम बंगाल की बालूरघाट सीट से भाजपा सासंद सुकांत मजूमदार, मध्य प्रदेश के धार से भाजपा सांसद सावित्री ठाकुर, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से भाजपा सांसद तोखन साहू, बिहार के मुजफ्फरपुर से भाजपा के टिकट पर पहली बार सांसद बने डॉ. राजभूषण चौधरी, आंध्र प्रदेश के नरसापुरम से भाजपा सांसद भूपति राजू श्रीनिवास वर्मा, पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद हर्ष मल्होत्रा, गुजरात की भावनगर सीट से पहली बार की सांसद (भाजपा) नीमूबेन बाभनिया, महाराष्ट्र के पुणे से पहली बार के सांसद (भाजपा) मुरलीधर मोहोल, केरल भाजपा के महासचिव जॉर्ज कुरियन और असम से भाजपा के राज्यसभा सांसद पबित्र मार्गरेटा ने भी राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। </span></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, शपथ लेने वालों में राजनाथ, अमित शाह और जेपी नड्डा भी शामिल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनडीए का मतलब न्यू इंडिया, डेवलप्ड इंडिया, एस्पिरेशनल इंडिया, संसदीय दल के नेता चुने जानें पर बोले पीएम मोदी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/narendra-modi-elected-leader-of-nda-parliamentary-party-will-take-oath-as-pm-on-9th-june.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 07 Jun 2024 14:11:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/narendra-modi-elected-leader-of-nda-parliamentary-party-will-take-oath-as-pm-on-9th-june.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) को अब रूप में परिभाषित किया है। उन्होंने कहा कि अगर मैं एक तरफ एनडीए और भारत के लोगों की आकांक्षाओं और संकल्पों को रखूं, तो मैं कहूंगा - एनडीए: नया भारत, विकसित भारत, आकांक्षी भारत। दअअसल, उन्होंने ये बातें 7 जून को हुई एनडीए की संसदीय दल की बैठक के दौरान कही। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने देश को सुशासन दिया है और एक तरह से, एनडीए कहने से ही सुशासन का पर्याय बन जाता है। गरीब कल्याण और सुशासन हम सभी के ध्यान में सर्वोपरि रहे हैं। उन्होंने सर्वसम्मति के लिए अपने प्रयासों को जारी रखने की भी कसम खाई, क्योंकि उन्होंने एनडीए को सबसे सफल गठबंधन कहा।&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं देश की जनता को भरोसा दिलाता हूं कि उन्होंने हमें सरकार चलाने के लिए जो बहुमत दिया है, हमारा प्रयास होगा कि हम आम सहमति बनाने का प्रयास करें और देश को आगे ले जाने में कोई कसर न छोड़ें। एनडीए ने लगभग तीन दशक पूरे कर लिए हैं, यह कोई साधारण बात नहीं है। मैं कह सकता हूं कि यह सबसे सफल गठबंधन है। एनडीए सत्ता हासिल करने या सरकार चलाने के लिए कुछ दलों का जमावड़ा नहीं है। यह एक ऐसा समूह है जो राष्ट्र प्रथम की मूल भावना के साथ राष्ट्र प्रथम के लिए प्रतिबद्ध है।"&nbsp;</p>
<p><strong>पीएम ने कांग्रेस पर कसा तंज</strong></p>
<p>अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा, "आप किसी भी बच्चे से पूछ सकते हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले किसकी सरकार थी? वह कहेगा एनडीए। फिर उससे पूछिए कि 2024 के बाद किसकी सरकार बनेगी, तो वह कहेगा एनडीए। पहले भी एनडीए थी, आज भी एनडीए है, और कल भी एनडीए है। 10 साल बाद भी कांग्रेस 100 सीटों का आंकड़ा नहीं छू पाई। गठबंधन के इतिहास में संख्या के लिहाज से यह सबसे मजबूत गठबंधन सरकार है।&nbsp;</p>
<p><strong>वाजपेयी, बालासाहेब, बादल को किया याद</strong></p>
<p>उन्होंने कहा, "मेरे लिए संसद में सभी दलों के सभी नेता समान हैं। जब हम सबका प्रयास की बात करते हैं, तो हमारे लिए सभी समान हो जाते हैं, चाहे वे हमारी पार्टी के हों या नहीं। यही कारण है कि एनडीए गठबंधन पिछले 30 सालों में मजबूत रहा है और आगे बढ़ा है। एनडीए राष्ट्र के लिए प्रतिबद्ध समूह है। यह 30 साल की लंबी अवधि के बाद शुरू में ही इकट्ठा हुआ होगा। लेकिन आज मैं कह सकता हूं कि एनडीए भारत की राजनीतिक व्यवस्था में एक जैविक गठबंधन है और अटल बिहारी वाजपेयी, प्रकाश सिंह बादल, बालासाहेब ठाकरे जैसे महान नेताओं ने जो बीज बोया था, आज भारत के लोगों ने एनडीए के भरोसे को सींचा है और उस बीज को फलदायी बना दिया है। हम सभी के पास ऐसे महान नेताओं की विरासत है और हमें इस पर गर्व है। पिछले 10 वर्षों में, हमने एनडीए की उसी विरासत, उन्हीं मूल्यों के साथ आगे बढ़ने और देश को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।" हालांकि, यहां ये बात भी अहम है की जिन नेताओं का नाम पीएम मोदी ने अपने भाषण में लिया, उनकी पार्टियां अब एनडीए से दूर हो चुकी हैं। अंत में उन्होंने गठबंधन के नेता के रूप में उन्हें चुनने के लिए एनडीए में शामिल दलों के नेताओं को धन्यवाद भी दिया।</p>
<p><strong>पुराने संसद भवन में हुई बैठक&nbsp;</strong></p>
<p>दरअसल, एनडीए की संसदीय दल की बैठक 7 जून को पुराने संसद भवन (संविधान सदन) के सेंट्रल हॉल में आयोजित की गई। जिसमें सर्वसम्मति से नरेंद्र मोदी को तीसरी बाद एनडीए संसदीय दल का नेता चुन लिया गया। बीजेपी सांसद और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे एनडीए के 13 घटक दलों का समर्थन मिला।</p>
<p>बैठक में एनडीए के सभी 293 सांसद, राज्यसभा सांसद और सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम भी मौजूद रहे। बैठक की शुरुआत बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्&zwnj;डा के स्वागत भाषण से हुई। जिसके बाद राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव रखा। जिसके बाद बीजेपी सांसद और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत एनडीए के अन्य सांसदों ने इसका समर्थन किया और एनडीए संसदीय दल के नेता के रूप में नरेंद्र मोदी के नाम का अनुमोदन किया। अंत में सर्वसम्मति से नरेंद्र मोदी को तीसरी बाद एनडीए संसदीय दल का नेता चुन लिया गया। जिसके बाद एनडीए के अहम घटक दल के नेताओं ने अपना-अपना संबोधन दिया। आइए आपको बताते हैं किस नेता ने क्या कहा?</p>
<p>एनडीए के अहम घटक दल टीडीपी (तेलगू देशम पार्टी) के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने कहा- "हम सभी को बधाई देते हैं। मैंने चुनाव प्रचार के दौरान देखा है कि 3 महीने तक पीएम ने कभी आराम नहीं किया। उन्होंने उसी भावना के साथ शुरुआत की और उसी भावना के साथ खत्म किया। आंध्र में हमने 3 जनसभाएं और 1 बड़ी रैली की और इसने चुनाव जीतने में बहुत बड़ा अंतर पैदा किया।"</p>
<p>इसके बाद जेडीयू प्रमुख और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा- "मैं मोदी जी के नाम का समर्थन करता हूं। हम सब साथ हैं और ऐसे ही साथ मिलकर आगे भी चलेंगे। मैं तो चाहता था कि वो आज ही शपथ लें। यह बहुत खुशी की बात है कि 10 साल से प्रधानमंत्री हैं, अब फिर पीएम होने जा रहे हैं। इन्होंने देश की सेवा की, जो कुछ भी बचा है, उसे अब पूरा कर देंगे। बिहार का बाकी काम भी पूरा होगा। अगली बार जब आप आइएगा तो जो कुछ इधर उधर के लोग जो जीत गया है न, वो कोई नहीं जीतेगा।"</p>
<p>वहीं, अमित शाह ने कहा, " रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा के नेता, भाजपा और एनडीए संसदीय दल के नेता के रूप में नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव रखा है। मैं इसका तहे दिल से समर्थन करता हूं। यह प्रस्ताव केवल यहां बैठे लोगों की इच्छा नहीं है। यह देश के 140 करोड़ लोगों का प्रस्ताव है। यह देश की आवाज है कि पीएम मोदी अगले 5 साल तक देश का नेतृत्व करें।"</p>
<p><strong>9 जून को पीएम पद की शपथ लेंगे मोदी&nbsp;</strong></p>
<p>नरेंद्र मोदी पीएम पद की शपथ कब लेंगे इसकी औपचारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। हालांकि, बैठक के दौरान जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार ने कहा कि नरेंद्र मोदी 9 जून को शपथ लेने जा रहे हैं।&nbsp;मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नरेंद्र मोदी 9 जून शाम 6 बजे राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री पद की तीसरी बार शपथ लेंगे। खबर है कि मोदी के साथ पूरा मंत्रिमंडल शपथ ले सकता है। बता दें कि लोकसभा चुनाव के बाद एनडीए की पहली बैठक 5 जून को पीएम आवास में शाम 4 बजे हुई थी। एक घंटे चली बैठक में 16 पार्टियों के 21 नेता शामिल हुए थे। सभी ने नरेंद्र मोदी को एनडीए का नेता चुना था। लेकिन आज होने वाली संसदीय दल की बैठक में मोदी को आधिकारिक तौर पर एनडीए का नेता चुना गया है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनडीए का मतलब न्यू इंडिया, डेवलप्ड इंडिया, एस्पिरेशनल इंडिया, संसदीय दल के नेता चुने जानें पर बोले पीएम मोदी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पूसा दिल्ली में हुआ &amp;apos;नवोन्मेषी कृषक सम्मेलन&amp;apos; का आयोजन, 40 किसानों को किया गया सम्मानित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/innovative-farmers-conference-was-organized-in-pusa-delhi-40-farmers-were-honored.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 06 Jun 2024 18:43:34 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/innovative-farmers-conference-was-organized-in-pusa-delhi-40-farmers-were-honored.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) के डॉ. बी.पी. पाल सभागार में आज 6 जून को देशभर के प्रगतिशील किसानों के लिए 'नवोन्मेषी कृषक सम्मेलन' का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य देश के नवोन्मेषी और अध्येता किसानों को सम्मानित करना था। सम्मेलन के दौरान 6 राज्यों के 7 किसानों को &lsquo;अध्येता किसान&rsquo; और 22 राज्यों के 33 किसानों को &lsquo;नवोन्मेषी किसान&rsquo; पुरस्कार &nbsp;से सम्मानित किया गया। इसमें 8 राज्यों से 9 महिला किसान और 6 आदिवासी किसान भी शामिल थे। यह बहुआयामी कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ ए.के. सिंह और संयुक्त निदेशक (प्रसार) डॉ आर.एन. पड़ारिया के नेतृत्व में आयोजित किया गया।&nbsp;</p>
<p>सम्मेलन में सम्मानित किए गए सभी किसानों ने खेती के विभिन्न मॉडल तैयार कर अपने-अपने क्षेत्रों में समेकित कृषि प्रणाली का विकास किया है। इसमें खाद्यान्न फसलें, बागवानी फसलें आदि शामिल हैं। कई सफल किसानों ने फसल विविधीकरण को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि की है। इसके अलावा, हाईटेक कृषि पद्धतियों जैसे संरक्षित खेती, गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत, सोलर प्रणालियां, जल-संसाधन के संरक्षण और उपयोग दक्षता बढ़ाने वाली तकनीकों को भी अपनाया गया है। कई किसानों ने आई.पी.एम (इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट), उन्नत कृषि मशीनरी और हाइड्रोपोनिक्स जैसी तकनीकों का उपयोग भी किया है।</p>
<p>भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान हर वर्ष लगभग 40 किसानों को सम्मानित करता है। संस्थान में 2008 से 'नवोन्मेषी किसान सम्मान' और 2012 से 'अध्येता किसान सम्मान' की शुरुआत की थी। अब तक देशभर के विभिन्न राज्यों के 400 से अधिक किसानों को इन सम्मानों से नवाजा जा चुका है। इस अवसर पर चार पद्मश्री से सम्मानित किसानों को भी आमंत्रित किया गया था। सम्मेलन में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशक (कृषि प्रसार) डॉ यू.एस. गौतम, पूसा संस्थान के निदेशक डॉ ए.के. सिंह, संस्थान के सभी संयुक्त निदेशक और सभी संभाध्यक्ष एवं कृषि के विद्यार्थियों ने भाग लिया।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6661b49170c74.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पूसा दिल्ली में हुआ 'नवोन्मेषी कृषक सम्मेलन' का आयोजन, 40 किसानों को किया गया सम्मानित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फूड बिजनेस ऑपरेटर्स के लिए जरूरी सूचना, एफएसएसएआई ने सालाना रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि बढ़ाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/fssai-has-extended-the-last-date-for-filing-annual-returns-for-food-business-operators-to-30th-june.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 06 Jun 2024 11:23:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/fssai-has-extended-the-last-date-for-filing-annual-returns-for-food-business-operators-to-30th-june.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य कारोबारियों को सालाना रिटर्न दाखिल करने में बड़ी राहत दी है। एफएसएसएआई ने खाद्य कारोबारी यानी फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (एफबीओ) के लिए सालाना रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। इस संबंध में एफएसएसएआई ने एक अधिसूचना भी जारी की है। एफएसएसएआई की ओर से जारी बयान के मुताबिक, &nbsp;वित्त वर्ष 2022-23 के लिए वार्षिक रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि 30 जून, 2023 तक बढ़ा दी गई है। अब खाद्य कारोबारी 30 जून तक अपना सालाना रिटर्ट फाइल कर पाएंगे।&nbsp;</p>
<p>एफएसएसएआई इस वजह से बढ़ाई डेट&nbsp;</p>
<p>अधिसूचना में एफएसएसएआई ने सालाना रिटर्न दाखिल करने की डेट बढ़ाने का कारण भी बताया है। एफएसएसएआई ने बताया कि खाद्य सुरक्षा अनुपालन प्रणाली (FOSCOS) पोर्टल पर भारी यूजर ट्रैफिक के कारण कई यूजर्स पेज लोड नहीं कर पा रहे थे। जिस वजह से उनका रिटर्न फाइल नहीं हो पाया। क्योंकि, &nbsp;रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि 31 मई 2024 थी। ऐसे में यूजर्स को पेश आई समस्याओं को देखते हुए एफएसएसएआई ने उन्हें बड़ी राहत दी है। एफएसएसएआई ने रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि 30 जून, 2024 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr">Attention Food Business Operators (FBOs)! <br />The date for the submission of Annual Returns for FY 2023-24 has been extended and must now be submitted by June 30,2024, to avoid penalty. For more details, visit <a href="https://t.co/gdcqZJrL4q">https://t.co/gdcqZJrL4q</a>.<br /><a href="https://twitter.com/hashtag/FoSCoS?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#FoSCoS</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/FSSAI?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#FSSAI</a> <a href="https://t.co/2nZyjX3CDw">pic.twitter.com/2nZyjX3CDw</a></p>
&mdash; FSSAI (@fssaiindia) <a href="https://twitter.com/fssaiindia/status/1798174173988040801?ref_src=twsrc%5Etfw">June 5, 2024</a></blockquote>
<p></p>
<p><strong>सिर्फ ऑनलाइन फाइल होगा रिटर्न</strong></p>
<p>एफएसएसएआई ने ये भी बताया है की रिटर्न सिर्फ ऑनलाइन तरीके से ही स्वीकार किया जाएगा। इसके लिए फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को FOSCOS डैशबोर्ड <strong><a href="https://foscos.fssai.gov.in/">https://foscos.fssai.gov.in</a></strong> पर जाना होगा। जहां से वे रिटर्न फाइल कर पाएंगे।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_66614dadab2b8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ फूड बिजनेस ऑपरेटर्स के लिए जरूरी सूचना, एफएसएसएआई ने सालाना रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि बढ़ाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_66614dadab2b8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कुल खाद्यान्न उत्पादन में ग‍िरावट, गेहूं और चावल का उत्पादन बढ़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/decline-in-food-grain-production-record-production-of-wheat-and-rice.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 05 Jun 2024 19:10:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/decline-in-food-grain-production-record-production-of-wheat-and-rice.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>लोकसभा चुनाव के परिणामों के साथ ही केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2023-24 के लिए प्रमुख कृषि फसलों का तीसरा अग्रिम अनुमान जारी कर दिया है।&nbsp; मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक कुल खाद्यान्न 32.88 करोड़ टन अनुमानित है, जो 2022-23 के खाद्यान्न उत्पादन से थोड़ा कम है।&nbsp;</p>
<p>सरकार ने ये भी कहा है कि 2023-24 में पिछले वर्ष के मुकाबले चावल और गेहूं का उत्पादन ज्यादा होने का अनुमान है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के बयान के मुताबिक, गेहूं का उत्पादन 11.29 करोड़ टन अनुमानित है, जो पिछले वर्ष के उत्पादन की तुलना में 23.71 लाख टन अधिक है। जबक&zwj;ि कुल चावल उत्पादन 13.67&nbsp; करोड़ टन अनुमानित है, जो 2022-23 के 13.57 करोड़ टन की तुलना में 9.45 लाख टन की वृद्धि दर्शाता है।</p>
<p><strong>क&zwj;िस फसल का क&zwj;ितना उत्पादन&nbsp;</strong></p>
<p>चावल -13.67 करोड़ टन।<br />गेहूं &ndash; 11.29 करोड़ टन।<br />मक्का &ndash; 356.73 लाख&nbsp; टन।<br />श्रीअन्न&ndash; 174.08 लाख टन।<br />तूर &ndash; 33.85 लाख टन।<br />चना &ndash; 115.76 लाख&nbsp; टन।<br />कुल तिलहन&ndash; 395.93 लाख टन।<br />सोयाबीन &ndash; 130.54 लाख टन।<br />रेपसीड और सरसों &ndash; 131.61 लाख टन।<br />गन्ना &ndash; 44.25 करोड़ टन।<br />कपास &ndash; 325.22 लाख गांठ (170 किलो)।<br />जूट &ndash; 92.59 लाख गांठ (180 किलो)।<br />कुल खाद्यान्न&ndash; 32.88 करोड़ टन।</p>
<p><strong>बढ़ेगा मूंग-मसूर का उत्पादन &nbsp;</strong></p>
<p>अन्न का उत्पादन वर्ष 2022-23 के उत्पादन से 0.87 लाख टन की थोड़ी सी वृद्धि दर्शाते हुए 174.08 लाख टन अनुमानित है। इसके अलावा, पोषक या मोटे अनाजों का उत्पादन 547.34 लाख टन होने का अनुमान है जो औसत उत्पादन से 46.24 लाख टन अधिक है। तूर का उत्पादन 33.85 लाख टन होने का अनुमान है, जो कि पिछले वर्ष के 33.12 लाख टन उत्पादन से 0.73 लाख टन अधिक है। मसूर का उत्पादन 17.54 लाख टन अनुमानित है, जो पिछले वर्ष के 15.59 लाख टन उत्पादन से 1.95 लाख टन अधिक है।</p>
<p>सोयाबीन का उत्पादन 130.54 लाख टन अनुमानित है। जबक&zwj;ि रेपसीड और सरसों का उत्पादन 131.61 लाख टन अनुमानित है, जो पिछले वर्ष के उत्पादन से 5.18 लाख टन अधिक है। कपास का उत्पादन 325.22 लाख गांठ (170 किलो) और गन्ने का उत्पादन 44.25 करोड़ टन होने का अनुमान है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_66606a159d065.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कुल खाद्यान्न उत्पादन में ग‍िरावट, गेहूं और चावल का उत्पादन बढ़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के वाइस चांसलर बने प्रो. राकेश मोहन जोशी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/prof.-rakesh-mohan-joshi-became-the-vice-chancellor-of-indian-institute-of-foreign-trade-iift.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 05 Jun 2024 18:48:23 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/prof.-rakesh-mohan-joshi-became-the-vice-chancellor-of-indian-institute-of-foreign-trade-iift.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रतिष्ठित एकेमिशियन प्रोफेसर राकेश मोहन जोशी भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) के नए वाइस चांसलर नियुक्त किये गये हैं। उन्होंने बुधवार 5 जून से अपना पदभार संभाल लिया है। आईआईएफटी भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाला एक प्रमुख बिजनेस स्कूल है। आईआईएफटी में वरिष्ठ प्रोफेसर और पूर्व डीन प्रोफेसर जोशी भारतीय इंडियन इस्टीट्यूट ऑफ प्लांटेशन, बेंगलुरू के डारयेक्टर के रूप में प्रतिनियुक्ति पर थे। आईआईएफटी से गोल्ड&nbsp; मैडलिस्ट जोशी ने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल (बोस्टन), आईआईएफटी, राजस्थान विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई), करनाल से अपनी शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त किया है।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस से कई किताबें भी लिखी हैं और आईआईएफटी की प्रतिष्ठित त्रैमासिक पत्रिका, फॉरेन ट्रेड रिव्यू (FTR) के संपादक भी रह चुके हैं। प्रो. जोशी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक अनुभव है और वह विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक, अंकटाड, अंतर्राष्ट्रीय डेयरी महासंघ, एशियाई उत्पादकता संगठन (एपीओ) आदि जैसे कई बहुपक्षीय संगठनों से जुड़े रहे हैं। प्रो. जोशी 'विदेशी शैक्षणिक संस्थानों के लिए विनियमन तैयार करने के लिए यूजीसी समिति' के अध्यक्ष और "उच्च शिक्षा संस्थानों में वैश्विक नागरिकता के लिए शैक्षिक ढांचे के विकास" 2021 के लिए विशेषज्ञ समूह के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।&nbsp;</p>
<p>वर्तमान में वह भारतीय मानक ब्यूरो और भारत सरकार की व्यावसायिक सेवा अनुभागीय समिति के अध्यक्ष हैं। वह अखिल भारतीय प्रबंधन संघ (एआईएमए) की प्रबंधन परिषद में भी हैं। प्रो. जोशी का भारतीय संस्कृति के अंतर्राष्ट्रीयकरण पर शोध करने के लिए एक मजबूत झुकाव है और उन्होंने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) द्वारा "समकालीन प्रबंधन में भगवद गीता के निहितार्थ" पर एक प्रमुख रिसर्च प्रोजेक्ट भी किया है। उनके द्वारा लिखी गईं केस स्टडीज को लंदन बिजनेस स्कूल द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले हैं। उन्हें भारतीय आर्थिक संघ द्वारा आर्थिक अनुसंधान और नीति में उनके आजीवन योगदान के लिए प्रतिष्ठित अटल बिहारी वाजपेयी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।</p>
<p>वह देश के कुछ सबसे अधिक मांग वाले प्रबंधन प्रोफेसरों में से एक हैं, जो सम्मेलनों, कार्यशालाओं, टीवी चैनलों और कई अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों में विशेषज्ञ, लेखक और वक्ता के रूप में अपनी सेवाएं देते हैं। आईआईएफटी में शामिल होने के तुरंत बाद, प्रो. जोशी ने आईआईएफटी को अत्याधुनिक अनुसंधान, प्रशिक्षण और शिक्षा के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और प्रबंधन पर केंद्रित एक विश्व स्तरीय बी-स्कूल में बदलने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वैश्विक महाशक्ति बनने की भारत की यात्रा में योगदान देगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_666064b876e5c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के वाइस चांसलर बने प्रो. राकेश मोहन जोशी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_666064b876e5c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पूरी कर लें पीएम किसान की ई&amp;#45;केवाईसी, सरकार दे रही है मौका, जानें पूरा प्रोसेस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-kisan-yojana-e-kyc-process-complete-before-20th-june-pm-kisan-e-kyc-drive.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 05 Jun 2024 14:10:26 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-kisan-yojana-e-kyc-process-complete-before-20th-june-pm-kisan-e-kyc-drive.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पीएम किसान) से जुड़े लाभार्थियों के लिए बड़ा अपडेट है। देश भर के करोड़ों किसान 17वीं किस्ता का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन, इससे पहले उन्हें अपनी ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ई-केवाईसी पूरी होने के बाद ही उन्हें योजना का लाभ मिलेगा। ऐसे में किसानों की ई-केवाईसी कराने के लिए सरकार ने सैचुरेशन ड्राइव शुरू की है। जिसकी शुरुआत आज (5 जून, 2024) से हो गई है। किसान घर बैठे-बैठे भी ऑनलाइन ये काम कर सकते हैं। अगर आप भी पीएम किसान योजना का लाभ उठाना चाहते हैं और अभी तक ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं की है, तो आज ही सैचुरेशन ड्राइव में हिस्सा लेकर इसे पूरा करें। आइए आपको स्टेप बाय स्टेप ई-केवाईसी की पूरी प्रक्रिया के बारे में बताते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>20 जून से पहले पूरी कर लें ई-केवाईसी</strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से जारी बयान के मुताबिक, किसानों की ई-केवाईसी कराने के लिए सरकार ने सैचुरेशन ड्राइव शुरू की है। जो 5 से 20 जून तक चलेगी। इस दौरान किसान ई-केवाईसी का काम पूरा कर सकते हैं। इसके लिए किसान अपने नजदीकी जनसेवा केंद्र और नोडल अधिकारी से संपर्क करें। पीएम किसान योजना के तहत पंजीकृत किसानों को ई-केवाईसी करना अनिवार्य हैं। ऐसे में जल्द से जल्द इस काम को निपटा लें।&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">भारत सरकार द्वारा CSC के सहयोग से पीएम किसान सम्मान निधि योजना से पात्र किसानों को जोड़ने हेतु 5 से 20 जून तक सैचुरेशन ड्राइव चलाई जा रही है, जिसके अंतर्गत सभी पात्र किसान अपनी ई-केवाईसी (<a href="https://twitter.com/hashtag/eKYC?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#eKYC</a>) पूर्ण कर योजना का लाभ ले सकते हैं।<a href="https://twitter.com/hashtag/AgriGoI?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#AgriGoI</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/PMKisan?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#PMKisan</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/PMKisanSaturationDrive?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#PMKisanSaturationDrive</a> <a href="https://t.co/4udIhqk4I1">pic.twitter.com/4udIhqk4I1</a></p>
&mdash; Agriculture INDIA (@AgriGoI) <a href="https://twitter.com/AgriGoI/status/1797844816015036425?ref_src=twsrc%5Etfw">June 4, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p><strong>कैसे करें ई-केवाईसी?</strong></p>
<p>ई-केवाईसी कराने के लिए किसानों के पास तीन विकल्प है।<strong> पहला-</strong> किसान ओटीपी-आधारित ई-केवाईसी कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें पीएम किसान योजना के पोर्टल पर जाना होगा। जहां उन्हें ओटीपी-आधारित ई-केवाईसी का विकल्प दिख जाएगा। <strong>दूसरा-</strong> किसान बायोमेट्रिक-आधारित ईकेवाईसी कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपने नजदीकी जनसेवा केंद्रों पर जाना होगा। <strong>तीसरा-</strong> किसान अपनी सुविधानुसार मोबाइल के जरिए फेस-ऑथेन्टिकेशन के माध्यम से भी ई-केवाईसी कर सकते हैं। &nbsp;</p>
<p><strong>किसान 17वीं किस्त का कर रहे इंतजार</strong></p>
<p>बता दें कि देशभर के करोड़ों किसान पीएम किसान की अगली यानी 17वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। &nbsp;योजना के तहत किसानों को हर साल 6 हजार रुपये दिए जाते हैं। ये राशि 2 हजार रुपये की तीन किस्तों में किसानों के खातों में भेजी जाती है। पीएम मोदी ने 28 फरवरी को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 16वीं किस्त के रूप में किसानों के खाते में दो-दो हजार रुपये ट्रांसफर किए थे। वहीं, अब किसान 17वीं किस्त का इंतजार कर रहे है। लेकिन, उससे पहले किसानों को ई-केवाईसी करानी होगी। किसानों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य है। ऐसे में बिना इसके किसान योजना का लाभ नहीं उठा पाएंगे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_66604b9ab64ea.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पूरी कर लें पीएम किसान की ई-केवाईसी, सरकार दे रही है मौका, जानें पूरा प्रोसेस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_66604b9ab64ea.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एफएसएसएआई की फूड कंपनियों को चेतावनी, नहीं कर सकते 100% फ्रूट जूस का दावा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/fssai-asks-food-companies-to-remove-100-percent-fruit-juice-claim-on-packaged-juices.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 05 Jun 2024 11:15:24 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/fssai-asks-food-companies-to-remove-100-percent-fruit-juice-claim-on-packaged-juices.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खाद्य उत्पाद से जुड़ी कई जानी-मानी कंपनियां अपने डिब्बा बंद जूस और प्रोडक्ट्स पर '100 प्रतिशत फ्रूट जूस' होने का दावा करती है। लेकिन, अब कंपनियां ऐसा नहीं कर पाएंगी। दरअसल, खाद्य सुरक्षा नियामक भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने '100 प्रतिशत फ्रूट जूस' वाले दावे पर कड़ा ऐतराज जताया है। एफएसएसएआई ने इन दावों को भ्रामक बताते हुए कंपनियों को ऐसे विज्ञापन तुरंत हटाने को कहा है। इसके साथ ही एफएसएसएआई ने भ्रामक विज्ञापन करने वाली कंपनियों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।&nbsp;</p>
<p><strong>1 सितंबर से पहले हटाने होंगे विज्ञपान</strong></p>
<p>एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने निर्देश जारी कर सभी खाद्य व्यापार संचालकों (FBO) को फ्रूट जूस के लेबल और विज्ञापनों से '100% फ्रूट जूस' के किसी भी दावे को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्देश दिया है। सभी एफबीओ को 1 सितंबर, 2024 से पहले ऐसे सभी मौजूदा प्री-प्रिंटेड पैकेजिंग सामग्री को समाप्त करने का भी निर्देश दिया गया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x_665ffbe7c435e.jpg" alt="" width="674" height="887" /></p>
<p><strong>गलत तरीके से हो रही मार्केटिंग</strong></p>
<p>एफएसएसएआई ने अपने बयान में कहा, "कई एफबीओ विभिन्न प्रकार के फलों के रसों को 100% फ्रूट जूस होने का दावा कर गलत तरीके से बेच रहे हैं। गहन जांच के बाद, एफएसएसएआई ने निष्कर्ष निकाला है कि खाद्य सुरक्षा और मानक (विज्ञापन और दावे) विनियम, 2018 के अनुसार, '100%' दावा करने का कोई प्रावधान नहीं है।</p>
<p><strong>भ्रामक दावे कर रहीं कंपनियां&nbsp;</strong></p>
<p>एफएसएसएआई ने कहा है कि कंपनियों द्वारा किए जा रहे ऐसे दावे भ्रामक हैं। खासकर उन परिस्थितियों में जहां फ्रूट जूस का प्रमुख घटक पानी है और प्राथमिक घटक, जिसके लिए दावा किया जाता है, केवल सीमित सांद्रता में मौजूद है। या जब जूस को पानी और फलों के कंसंट्रेट या पल्प का उपयोग कर बनाया जाता है। ऐसे फ्रूट जूस को '100% फलों के रस' के रूप में बेचना गलत है। एफबीओ को खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य उत्पाद मानक और खाद्य योजक) विनियमन, 2011 के नियमों के तहत फलों के जूस के मानकों का अनुपालन करने के लिए कहा गया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_665ff9a410e09.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एफएसएसएआई की फूड कंपनियों को चेतावनी, नहीं कर सकते 100% फ्रूट जूस का दावा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_665ff9a410e09.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[लखपति दीदी योजना के नाम पर चल रही फर्जी वेबसाइट, साइबर ठगी से सावधान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/beware-of-fake-website-of-lakhpati-didi-yojana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 05 Jun 2024 08:28:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/beware-of-fake-website-of-lakhpati-didi-yojana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत में ऑनलाइन ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। खासकर नौकरी देने या किसी योजना के नाम पर ठगी के मामले सामने आते हैं। आए दिन आपको ऐसी खबर सुनने या पढ़ने को मिल जाती होंगी, जहां नौकरी या योजना का लाभ दिलाने के नाम पर लोगों का ठगी का शिकार बनाया जाता है। पैसों की डिमांड के लिए या तो ठग खुद फोन से करते हैं या फिर फर्जी वेबसाइटों का सहारा लेते हैं। फर्जी वेबसाइट बनाकर सरकारी योजना के नाम पर ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>लखपति दीदी योजना के नाम पर भी फर्जी वेबसाइट चल रही हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि 'लखपति दीदी योजना' के तहत सरकार महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान कर रही है। इसके नाम पर एक फर्जी वेबसाइट तैयार की गई है। जिसका लिंक सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। रोजगार दिलाने के लिए वेबसाइट पर 1680 रुपये देकर रजिस्ट्रेशन करने को कहा जा रहा है। असल में यह वेबसाइट फर्जी है।&nbsp;</p>
<p>प्रेस इन्फोर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) ने सोशल मीडिया पर लखपति दीदी योजना के नाम पर चल रही फर्जी वेबसाइट का फैक्ट चेक किया है। पीआईबी ने लोगों को अलर्ट करते हुए कहा है कि ये वेबसाइट फर्जी है। इसका भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय से कोई संबंध नहीं है।&nbsp;</p>
<p>सरकार लखपति दीदी योजना के तहत महिलाओं को रोजगार के अवसर जरूर प्रदान कर रही है। लेकिन, इसके लिए सिर्फ सरकारी विभाग या आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें।</p>
<p><strong>क्या दावा कर रही फर्जी वेबसाइट?</strong></p>
<p>सोशल मीडिया पर प्रचारित फर्जी वेबसाइट के मुताबिक, लखपति दीदी योजना का लाभ उठाने के लिए 1,680 रुपये का शुल्क चुकाकर पंजीकरण करा सकते हैं। वहीं, पीआईबी ने इस दावे को फेक बताया है। लोगों को ऐसी फर्जी वेबसाइट से सावधान रहना चाहिए।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr">A <a href="https://twitter.com/hashtag/Fake?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Fake</a> website claims to be associated with the <a href="https://twitter.com/MoRD_GoI?ref_src=twsrc%5Etfw">@MoRD_GoI</a> is offering employment opportunities for a registration fee of ₹1,680<a href="https://twitter.com/hashtag/PIBFactCheck?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#PIBFactCheck</a><br /><br />❌ This website is NOT associated with the Ministry of Rural Development <br /><br />Send your queries to</p>
</blockquote> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_665ff418a0b11.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ लखपति दीदी योजना के नाम पर चल रही फर्जी वेबसाइट, साइबर ठगी से सावधान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_665ff418a0b11.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमूल और मदर डेयरी ने बढ़ाए दूध के दाम, जानें अब कितनी हुई कीमतें]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/amul-and-mother-dairy-increased-the-price-of-milk-by-2-rupees-per-liter-milk-price-hike-know-the-latest-price.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 03 Jun 2024 11:41:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/amul-and-mother-dairy-increased-the-price-of-milk-by-2-rupees-per-liter-milk-price-hike-know-the-latest-price.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>लोकसभा चुनाव से नतीजों से एक दिन पहले डेयरी प्रोडक्ट ब्रांड 'अमूल' और मदर डेयरी का पैक्ड दूध दो रुपये मंहगा हो गया है। अमूल ने देशभर में अपने पैक्ड दूध के दाम बढ़ा दिए हैं। वहीं, मदर डेयरी ने दिल्ली एनसीआर के इलाकों में दूध की कीमतों में बढ़ोतरी की है। 'अमूल' ब्रांड के तहत डेयरी उत्पादों का विपणन करने वाले गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (जीसीएमएमएफ) ने देश में दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। जबकि, मदर डेयरी ने भी दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। अमूल और मदर डेयरी दूध की कीमतों में हुई ये बढ़ोतरी सोमवार (3 जून, 2024) से लागू हो गई है। यानी आज से ग्राहकों को अमूल और मदर डेयरी का दूध 2 रुपये मंहगा मिलेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>अमूल ने क्यों बढ़ाए दाम?</strong></p>
<p>गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ &nbsp;(जीसीएमएमएफ) ने दूध के कीमतों में हुई बढ़ोतरी की वजह भी बताई है। जीसीएमएमएफ ने एक बयान जारी कर बताया कि दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी यानी खुदरा मूल्य में 3-4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, जो औसत खाद्य मुद्रास्फीति से काफी कम है। जीसीएमएमएफ ने कहा है कि फरवरी, 2023 से उसने प्रमुख बाजारों में ताजा पाउच दूध की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। जीसीएमएमएफ ने कहा, "यह मूल्य वृद्धि दूध के प्रसंस्करण और उत्पादन की कुल लागत में वृद्धि के कारण की जा रही है। हमारे सदस्य संघों ने पिछले एक साल में किसानों के लिए कीमत में लगभग 6-8 प्रतिशत की वृद्धि की है।" अमूल की नीति के रूप में दूध और दूध उत्पादों के लिए उपभोक्ताओं द्वारा भुगतान किए गए प्रत्येक रुपये का लगभग 80 पैसा दूध उत्पादकों को जाता है। बयान में कहा गया है, "मूल्य संशोधन से हमारे दूध उत्पादकों को लाभकारी दूध कीमतें बनाए रखने और उन्हें अधिक दूध उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।"</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x_665d6b3575d15.jpg" alt="" width="573" height="569" /></p>
<p><strong>अब कितने का मिलेगा अमूल दूध?</strong></p>
<p>दाम में बढ़ोतरी के बाद अमूल गोल्ड 68 रुपये प्रति लीटर, अमूल गाय का दूध 57 रुपये प्रति लीटर, अमूल ताजा 56 रुपये प्रति लीटर की दर से मिलेगा। अमूल भैंस के दूध पर तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है जो 73 रुपये लीटर के रेट पर मिलेगा। &nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x_665d688aeff82.jpg" alt="" width="555" height="406" /></p>
<p><strong>मदर डेयरी ने इस वजह से बढ़ाए दाम&nbsp;</strong></p>
<p>मदर डेयरी ने पिछले 15 महीनों में इनपुट लागत में वृद्धि के कारण दिल्ली-एनसीआर बाजार में दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है। दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ अन्य बाजारों में जहां इसकी मौजूदगी है, वहां दूध के सभी प्रकारों की कीमतों में बढ़ोतरी सोमवार (3 जून) से लागू होगी। एक बयान में मदर डेयरी ने कहा कि वह 03 जून, 2024 से सभी बाजारों में अपने तरल दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>68 रुपये में मिलेगा मदर डेयरी का फुल क्रीम दूध&nbsp;</strong></p>
<p>कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद दिल्ली-एनसीआर में मदर डेयरी का फुल क्रीम दूध अब 68 रुपये प्रति लीटर, जबकि टोंड और डबल-टोंड दूध क्रमश: 56 रुपये और 50 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध होगा। भैंस और गाय के दूध की कीमतें क्रमश: 72 रुपये और 58 रुपये प्रति लीटर कर दी गई हैं। वहीं, टोकन दूध (बल्क वेंडेड दूध) 54 रुपये प्रति लीटर पर बेचा जाएगा। मदर डेयरी ने कहा कि उसने फरवरी 2023 में अपने तरल दूध की कीमतों में आखिरी बार संशोधन किया था।</p>
<p>मदर डेयरी ने कहा, "पिछले कुछ महीनों में दूध की खरीद के लिए अधिक कीमत चुकाने के बावजूद उपभोक्ता कीमतें बरकरार रखी गईं। इसके अलावा, देश भर में अभूतपूर्व गर्मी पड़ रही है। इससे दूध उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना है। दूध के मूल्य में वृद्धि मुख्य रूप से उत्पादकों को बढ़ी हुई उत्पादन लागत की भरपाई करने के लिए की गई है, जो एक साल से अधिक समय से बढ़ रही है।"</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x_665d6e0291664.jpg" alt="" width="606" height="274" /></p>
<p>मदर डेयरी का कहना है कि वह दूध से होने वाली बिक्री का औसतन लगभग 75-80 प्रतिशत दूध किसानों को देती है। इससे डेयरी फार्मिंग को लाभप्रद बनाए रखने और गुणवत्तापूर्ण दूध की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा, "कृषि उत्पादों की कीमतों में वृद्धि का असर आंशिक रूप से ही उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है, जिसमें 3-4 प्रतिशत का संशोधन किया गया है। इससे दूध उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों की रक्षा हो रही है।"&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_665d5e05e0073.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमूल और मदर डेयरी ने बढ़ाए दूध के दाम, जानें अब कितनी हुई कीमतें ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_665d5e05e0073.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डेयरी और पशुपालकों के लिए बेहद काम की हैं ये 6 सरकारी योजनाएं, जानिए इनकी खूबियां]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/world-milk-day-six-government-run-schemes-beneficial-for-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 02 Jun 2024 13:09:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/world-milk-day-six-government-run-schemes-beneficial-for-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">देश के ग्रामीण इलाकों में खेती और पशुपालन की परंपरा बहुत पुरानी है. खासकर पिछले कुछ सालों में पशुपालन की तरफ किसानों का रुझान तेजी से बढ़ा है. खेती के बाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आय का यह दूसरा प्रमुख हिस्सा है। पशुपालन के जरिए किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. वहीं, पशुपालन के साथ किसानों का रुझान अब डेयरी व्यवसाय की ओर भी बढ़ रहा है. दूध की बढ़ती मांग को देखते हुए पिछले कुछ समय में गाय-भैंस पालन का चलन तेजी से बढ़ा है और इसी मांग के जरिए डेयरी बिजनेस भी खूब फल-फूल रहा है। अगर आप भी एक किसान हैं और डेयरी या पशुपालन से जुड़ना चाहते हैं तो सरकार की कुछ योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं. रूरल वॉयस की इस खबर में आज हम आपको 6 ऐसी सरकारी योजनाओं के बारे में बताएंगे, जिनसे न केवल आप पशुपालन और डेयरी व्यवसाय से जुड़ सकते हैं, बल्कि इन योजनाओं के जरिए लोन के साथ-साथ कई सुविधाओं का लाभ भी उठा सकते हैं. आइए आपको इन योजनाओं के बारे में विस्तार से बताते हैं</span></p>
<ol>
<li><strong> राष्ट्रीय गोकुल मिशन/National Gokul Mission</strong></li>
</ol>
<p><span style="font-weight: 400;"><strong><a href="https://dahd.nic.in/schemes/programmes/rashtriya_gokul_mission">राष्ट्रीय गोकुल मिशन</a></strong> (आरजीएम) का उद्देश्य स्वदेशी पशुपालन और संरक्षण को बढ़ावा देना है. इस योजना की शुरुआत दिसंबर 2014 में हुई थी. इस मिशन के तहत किसानों को सर्वश्रेष्ठ स्वदेशी नस्ल के समूह का प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाता है और कामधेनु पुरस्कार प्रदान किया जाता है। इस योजना के तहत देश में पहली बार राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम (एनएआईपी) को लागू किया गया है, ताकि कृत्रिम गर्भाधान कवरेज को वर्तमान में 30% से बढ़ाकर 70% किया जा सके तथा किसानों के घर-द्वार पर निःशुल्क कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं प्रदान की जा सके। योजना के तहत अब तक 7.13 करोड़ पशुओं को कवर किया गया है तथा 8.81 करोड़ कृत्रिम गर्भाधान किए गए हैं. कार्यक्रम के तहत अब तक 4.75 करोड़ किसान लाभान्वित हो चुके हैं.</span></p>
<ol start="2">
<li><strong> राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम/National Dairy Development Programme</strong></li>
</ol>
<p><span style="font-weight: 400;"><a href="https://dahd.nic.in/schemes/programmes/npdd"><strong>राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम</strong></a> (एनपीडीडी) को फरवरी-2014 से पूरे देश में कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य राज्य कार्यान्वयन एजेंसी (एसआईए) अर्थात राज्य सहकारी डेयरी संघ के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण दूध के उत्पादन, दूध तथा दूध उत्पादों की खरीद, प्रसंस्करण तथा विपणन के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण/सुदृढ़ीकरण करना है। जुलाई 2021 में एनपीडीडी योजना का पुनर्गठन किया गया था. जिसका उद्देश्य दूध और दूध उत्पादों की गुणवत्ता को बढ़ाना तथा संगठित खरीद, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन में हिस्सेदारी बढ़ाना है. इस योजना के तहत 17.45 लाख नए किसानों को डेयरी सहकारी समितियों की सदस्यता का लाभ दिया है। परियोजनाओं के तहत 83.56 लाख लीटर अतिरिक्त दूध की खरीद की गई. इसके अलावा, संग्रहण स्थल पर ही दूध की गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित करने के लिए 6022 इलेक्ट्रॉनिक दूध मिलावट जांच मशीनें, 33854 दूध विश्लेषक के साथ स्वचालित दूध संग्रह इकाई और 4017 दूध विश्लेषक स्थापित किए गए हैं। दूध और दूध उत्पादों में मिलावट का पता लगाने के लिए लगभग 233 डेयरी संयंत्र प्रयोगशालाओं को भी सुसज्जित किया गया है और दूध और दूध उत्पादों के अवशेषों, संदूषकों, भारी धातुओं, मिलावट, रासायनिक और सूक्ष्मजैविक गुणवत्ता का पता लगाने के लिए लगभग 10 राज्य केंद्रीय प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।</span></p>
<ol start="3">
<li><strong> पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम/Livestock Health and Disease Control Programme (LHDCP)</strong></li>
</ol>
<p><span style="font-weight: 400;"><strong><a href="https://dahd.nic.in/schemes-programmes/lh-dc">पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम</a> </strong>भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो पशुधन के स्वास्थ्य और रोगों के नियंत्रण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी। इस कार्यक्रम के तहत विभिन्न पशुधन रोगों के खिलाफ टीकाकरण और उनका नियंत्रण किया जाता है. यह कार्यक्रम एनएडीसीपी के तहत चलाया जा रहा है और इसका मुख्य उद्देश्य एफएमडी और ब्रूसेलोसिस के लिए राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के माध्यम से टीकाकरण के द्वारा 2025 तक एफएमडी का नियंत्रण और 2030 तक इसका उन्मूलन करना है. इसके परिणामस्वरूप घरेलू उत्पादन में वृद्धि होगी और अंततः दूध और पशुधन उत्पादों के निर्यात में वृद्धि होगी.</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस योजना का उद्देश्य पशुओं की बीमारियों के खिलाफ रोगनिरोधी टीकाकरण, पशु चिकित्सा सेवाओं का क्षमता निर्माण, रोग निगरानी और पशु चिकित्सा बुनियादी ढांचे को मजबूत करके पशु स्वास्थ्य के लिए जोखिम को कम करना है। प्रमुख गतिविधियां खुरपका और मुंहपका रोग (एफएमडी), ब्रुसेलोसिस (पूर्ववर्ती राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनएडीसीपी जो अब एलएचडीसीपी का घटक है), पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स (पीपीआर) और क्लासिकल स्वाइन फीवर (सीएसएफ) के खिलाफ टीकाकरण, राज्य द्वारा प्राथमिकता प्राप्त आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण विदेशी, आकस्मिक और जूनोटिक पशु रोगों के नियंत्रण के लिए राज्यों को सहायता (एएससीएडी) और पशु चिकित्सा अस्पतालों और औषधालयों-मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (ईएसवीएचडी-एमवीयू) की स्थापना और सुदृढ़ीकरण हैं। इसके अलावा, सरकार ने दूरदराज के क्षेत्रों में किसानों के दरवाजे पर पशु चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए एमवीयू की खरीद और अनुकूलन के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 100% वित्तीय सहायता प्रदान की है।</span></p>
<ol start="4">
<li><strong> राष्ट्रीय पशुधन मिशन/National Livestock Mission</strong></li>
</ol>
<p><span style="font-weight: 400;">पशुधन क्षेत्र के सतत और निरंतर विकास के लिए विभाग ने <strong><a href="https://nlm.udyamimitra.in/">राष्ट्रीय पशुधन मिशन</a></strong> के साथ शुरुआत की है, जिसमें रोजगार सृजन, उद्यमिता विकास, प्रति पशु उत्पादकता में वृद्धि और इस प्रकार छत्र योजना विकास कार्यक्रमों के तहत मांस, बकरी के दूध, अंडे और ऊन के उत्पादन में वृद्धि को लक्षित किया गया है। अतिरिक्त उत्पादन घरेलू मांगों को पूरा करने के बाद निर्यात आय में मदद करेगा। एनएलएम योजना की अवधारणा असंगठित क्षेत्र में उपलब्ध उपज के लिए आगे और पीछे की कड़ी बनाने और संगठित क्षेत्र से जोड़ने के लिए उद्यमी विकसित करना है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">योजना को निम्नलिखित तीन उप-मिशन के साथ लागू किया गया है:</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">क) पशुधन और मुर्गी पालन के नस्ल विकास पर उप-मिशन</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">ख) चारा और चारा विकास पर उप-मिशन</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">ग) विस्तार और नवाचार पर उप-मिशन</span></p>
<ol start="5">
<li><strong> पशुपालन अवसंरचना विकास निधि/Animal Husbandry Infrastructure Development Fund</strong></li>
</ol>
<p><span style="font-weight: 400;">आत्मनिर्भर भारत अभियान प्रोत्साहन पैकेज के तहत, 15000 करोड़ रुपये के कोष के साथ <strong><a href="https://ahidf.udyamimitra.in/">पशुपालन अवसंरचना विकास निधि</a></strong> (एएचआईडीएफ) की स्थापना की गई थी। इस योजना को व्यक्तिगत उद्यमियों, निजी कंपनियों, एमएसएमई, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और धारा 8 कंपनियों द्वारा (i) डेयरी प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन अवसंरचना, (ii) मांस प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन अवसंरचना और (iii) पशु आहार संयंत्र (iv) नस्ल सुधार प्रौद्योगिकी और नस्ल गुणन फार्म स्थापित करने के लिए निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अनुमोदित किया गया है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस योजना का उद्देश्य दूध और मांस प्रसंस्करण क्षमता और उत्पाद विविधीकरण को बढ़ाना है, जिससे असंगठित ग्रामीण दूध और मांस उत्पादकों को संगठित बाजार तक अधिक पहुंच, उत्पादक के लिए मूल्य प्राप्ति, घरेलू उपभोक्ता के लिए गुणवत्ता वाले उत्पादों की उपलब्धता, उद्यमियों को पैदा करना, निर्यात को बढ़ावा देना, गुणवत्तापूर्ण और सस्ता पशु आहार और भारतीय उपभोक्ता को गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन युक्त भोजन की उपलब्धता हो सके।</span></p>
<ol start="6">
<li><strong> किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी)/Kisan credit card</strong></li>
</ol>
<p><span style="font-weight: 400;">2019 के बाद पहली बार पशुधन और डेयरी किसानों को <strong><a href="https://eseva.csccloud.in/kcc/Default.aspx?AspxAutoDetectCookieSupport=1">किसान क्रेडिट कार्ड</a></strong> (केसीसी) सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे उन्हें संस्थागत ऋण सुविधा की आसान पहुंच मिल सके। विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर यह स्पष्ट है कि भारत का डेयरी क्षेत्र न केवल इसकी कृषि अर्थव्यवस्था की आधारशिला है, बल्कि विकास, नवाचार और सशक्तीकरण का भी प्रतीक है। दूध उत्पादन में भारत की उपलब्धियां, सहकारी समितियों में महिलाओं की भागीदारी और डेयरी फार्मिंग में तकनीकी प्रगति ने दुनिया के लिए एक मानक स्थापित किया है, जो दर्शाता है कि कैसे कोई देश अपनी अर्थव्यवस्था और अपने लोगों, दोनों का समर्थन करने के लिए पशुधन संसाधनों का स्थायी रूप से उपयोग कर सकता है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_665c2160845ac.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ डेयरी और पशुपालकों के लिए बेहद काम की हैं ये 6 सरकारी योजनाएं, जानिए इनकी खूबियां ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_665c2160845ac.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारतीय शहरों में बढ़ती गर्मी के लिए जलवायु परिवर्तन ही जिम्मेदार नहीं, शहरीकरण भी बड़ी वजह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/climate-change-alone-is-not-making-indian-cities-hotter-urbanization-is-a-major-contributor.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 28 May 2024 16:01:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/climate-change-alone-is-not-making-indian-cities-hotter-urbanization-is-a-major-contributor.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर, मध्य और पश्चिमी भारत के इलाके भीषण हीटवेव की चपेट में हैं। खासतौर पर महानगरों में गर्मी का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है। लेकिन केवल जलवायु परिवर्तन ही भारतीय शहरों को गर्म नहीं बना रहा है, इसमें शहरीकरण का प्रमुख योगदान है। भारत के शहर देश के बाकी हिस्सों की तुलना में लगभग दोगुनी दर से गर्म हो रहे हैं। शहरों के बढ़ते तापमान के लिए शहरीकरण 60 फीसदी जिम्मेदार है। यह तथ्य आईआईटी, भुवनेश्वर के एक <a href="https://www.nature.com/articles/s44284-024-00074-0">अध्ययन</a> में सामने आया है। इसके अलावा एक अध्ययन में यह भी पता चला है कि भारत के शहर रात में उतने ठंडे नहीं हो रहे हैं जितने वर्ष 2001 से 2010 के दौरान हुआ करते थे।</p>
<p>आईआईटी, भुवनेश्वर के शोधकर्ताओं ने देखा कि पिछले दो दशकों में भारत के 141 शहरों में रात के समय के तापमान में किस हद तक वृद्धि हुई है और इसके लिए शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन किस हद तक जिम्मेदार हैं। इसके लिए उन्होंने 2003 से 2020 के दौरान सैटेलाइट डेटा की मदद से रात के समय भूमि सतह के तापमान का विश्लेषण किया। <span>आईआईटी के शोधकर्ता वी विनोज और सौम्या सत्यकांत सेठी के इस अध्ययन पर हाल ही में जर्नल नेचर सिटीज में रिपोर्ट प्रकाशित हुई है।&nbsp;</span></p>
<p>आसपास के गैर-शहरी क्षेत्रों के साथ शहरों में गर्मी के रुझान की तुलना करने पर शोधकर्ताओं ने पाया कि क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन के कारण शहरी क्षेत्रों में कुछ गर्मी बढ़ी है। लेकिन अधिकांश शहरों में गर्मी बढ़ने की दर आसपास के क्षेत्रों के मुकाबले अधिक थी। लगभग सभी शहरों में प्रति दशक 0.53&deg; सेल्सियस की औसत वृद्धि एनएलएसटी में देखी गई। शोध में सामने आया है कि अकेले शहरीकरण के कारण भारतीय शहरों में गर्मी में 60% की वृद्धि हुई है, जिसमें पूर्वी भारत के टियर-2 शहर अग्रणी हैं।</p>
<p>हालाँकि, शहरीकरण के कारण होने वाली गर्मी और जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली तापमान वृद्धि के बीच अंतर करना जटिल है। कई अध्ययनों ने क्षेत्रीय या ग्लोबल वार्मिंग तथा शहरीकरण के कारण बढ़ने वाली गर्मी के आकलन का प्रयास किया गया है। इसमें सामने आया कि शहरीकरण का लोकल और रीजनल वार्मिंग बढ़ाने में काफी योगदान है, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग में इसका योगदान न्यूनतम आंका गया है।</p>
<p>आईआईटी, भुवनेश्वर के शोधकर्ताओं ने भारतीय शहरों में रात के समय सतह के तापमान में वृद्धि पर शहरीकरण और क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को अलग-अलग कर मापने का प्रयास किया। इस अध्ययन में, शहरों को स्थानीय स्तर के शहरीकरण और क्षेत्रीय जलवायु-परिवर्तन-संबंधी वार्मिंग के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। इससे पता चलता है कि भारतीय शहरों में बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए अलग-अलग पैमाने पर अलग-अलग प्रयासों की आवश्यकता है।&nbsp;</p>
<p>सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के एक नए <a href="https://www.cseindia.org/decoding-the-urban-heat-stress-among-indian-cities-12191">अध्ययन</a> में सामने आया है कि भारत के महानगरों में रात का तापमान उतना कम नहीं हो रहा है जितना 2001-2010 के दौरान हुआ था। यानी महानगरों में रात के समय भी गर्मी से निजात नहीं मिल रही है। गर्मी की मार का संबंध सिर्फ बढ़ते बढ़ते तापमान से ही नहीं है बल्कि हवा का तापमान, भूमि की सतह का तापमान और सापेक्ष आर्द्रता मिलकर हीट स्ट्रेस यानी गर्मी के प्रभाव को बढ़ाते हैं।&nbsp;</p>
<p>इस अध्ययन में जनवरी 2001 से अप्रैल 2024 की अवधि में छह प्रमुख शहरों - दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई और बेंगलुरु के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि हालांकि कुछ शहरों में हवा का तापमान उतना अधिक नहीं बढ़ा है, लेकिन बढ़ी ह्यूमिडिटी गर्मी के प्रभाव को बढ़ा रही है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_6655b2748bd2a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारतीय शहरों में बढ़ती गर्मी के लिए जलवायु परिवर्तन ही जिम्मेदार नहीं, शहरीकरण भी बड़ी वजह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_6655b2748bd2a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दालों में आत्मनिर्भरता के दावों के बीच चना का घटता उत्पादन, बढ़ती कीमतें और आयात का सहारा ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/amidst-claims-of-self-sufficiency-in-pulses-declining-production-of-gram-rising-prices-and-resort-to-imports.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 27 May 2024 08:01:01 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/amidst-claims-of-self-sufficiency-in-pulses-declining-production-of-gram-rising-prices-and-resort-to-imports.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">सरकार ने दालों के मामले में 2027 तक आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य रखा है, लेकिन उत्पादन में गिरावट के चलते इस लक्ष्य को हासिल कर पाना मुश्किल दिख रहा है। उत्पादन के अनुमानों में बदलाव और मार्केट अनुमानों के बीच चना की कीमतें भी बढ़ रही हैं। इसका बफर स्टॉक भी कम रह गया है। दालों के दाम पहले ही बढ़ रहे हैं और चना का रुख देखते हुए उपभोक्ताओं को आगे इनकी और अधिक कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना चाहिए।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">चना की कीमतें कितनी ऊपर जाएंगी यह वैश्विक बाजार की कीमत से ही तय होगा। इस समय आस्ट्रेलिया से चना का आयात मूल्य करीब 7200 रुपये प्रति क्विंटल पड़ रह है। वहीं अप्रैल, 2024 के महंगाई के आंकड़ों के मुताबिक दालों की महंगाई दर 16.84 फीसदी रही है और उपभोक्ता मामले विभाग के अनुसार 23 मई को चना दाल की कीमत 85 रुपये प्रति किलो रही। एक साल पहले यह 70 रुपये प्रति किलो थी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी और सरकारी खरीद जैसे उठाये गये कदमों से दालों का उत्पादन 2015-16 के 163.2 लाख टन से बढ़कर 2021-22 में 273 लाख टन तक पहुंच गया था, उसमें भी चना उत्पादन अधिक बढ़ा। वहीं दो साल की सरकारी खरीद में चना का बफर स्टॉक पिछले साल 30 लाख टन को पार कर गया। लेकिन सूत्रों के मुताबिक अभी यह पांच लाख टन से भी कम है। ऐसे में 7000 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच चुकी चना की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने इसके आयात पर शुल्क खत्म कर दिया है। चालू रबी मार्केटिंग सीजन (2024-25) के लिए चना का एमएसपी 5440 रुपये प्रति क्विंटल है। पिछले साल यह 5335 रुपये प्रति क्विंटल था।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सरकारी एजेंसियों की खरीद के चलते 2023 में सरकार के पास 30 लाख टन से अधिक चना का बफर स्टॉक था। पिछले साल सरकार ने 23.55 लाख टन की खरीद की थी और 14.37 लाख टन का उससे पहले के साल का बकाया स्टॉक था। लेकिन पिछले करीब एक साल में सरकार ने दालों की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया। सरकार ने ऐसा बेहतर उत्पादन की उम्मीद में किया, लेकिन वास्तव में उत्पादन घट गया। पिछले साल सरकार ने 135 लाख टन चना उत्पादन का अनुमान जताया था, जिसे बाद में घटाकर 122 लाख टन कर दिया गया। इस साल भी 121.6 लाख टन के अनुमान के मुकाबले मार्केट का मानना है कि उत्पादन करीब 100 लाख टन के आसपास है। इसी का असर कीमतों पर पड़ा है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">फरवरी में सरकार ने कहा था कि वह किसानों के साथ दाल खरीदने का लान्ग टर्म कांट्रैक्ट करेगी और एमएसपी के अलावा बाजार कीमतों पर भी दालों की खरीद करेगी। लेकिन इस दावे के बीच सरकार नेफेड के जरिये इस साल केवल 45 हजार टन चना ही एमएसपी पर खरीद सकी। हालांकि ट्रेड ने चना की खरीदारी अधिक की है। इस समय मंडी स्तर पर चना का भाव करीब 6500 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि मार्केट में यह 7000 रुपये प्रति क्विंटल पर है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">चना की आपूर्ति बेहतर करने के लिए इस पर 60 फीसदी आयात शुल्क समाप्त कर दिया गया है। इस आयात शुल्क पर सरचार्ज भी लगता था जिसके चलते प्रभावी शुल्क 66 फीसदी था। भारत में महंगे आयात शुल्क के चलते आस्ट्रेलिया से अधिकांश निर्यात बांग्लादेश, पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को होता था। अब भारत ने आयात शुल्क समाप्त कर दिया है तो कुछ कारोबारियों ने ऑप्शन के सौदों को भारत में निर्यात करने का फैसला लिया है क्योंकि यहां बाजार बड़ा है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उद्योग सूत्रों के मुताबिक आस्ट्रेलिया से अभी करीब एक लाख टन चना आयात हुआ है। वहां से भारत में चना की आयात कीमत 840-850 डॉलर प्रति टन (सीआईएफ) के आसपास है जो करीब 7200 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है। आस्ट्रेलिया से जो आयात हो रहा है वह पिछले साल की फसल का है। चना की अगली फसल तंजानिया में अगस्त में आएगी। वहीं आस्ट्रेलिया की अगली फसल अक्तूबर में आएगी।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भारत से आयात की मांग निकलने का सीधा मतलब वैश्विक बाजार में कीमतों में इजाफा होना है। इसलिए 16.84 फीसदी को पार चुकी दालों की महंगाई को लेकर सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं और उपभोक्ताओं को इसकी अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। अधिकांश दालों की कीमतें पहले ही बढ़ रही हैं। साल 2027 तक दालों में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य हासिल करने की नीति हकीकत से कितनी अलग है, उसका अंदाजा चना की स्थिति से आसानी से लगाया जा सकता है।&nbsp;</span></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दालों में आत्मनिर्भरता के दावों के बीच चना का घटता उत्पादन, बढ़ती कीमतें और आयात का सहारा  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अगले पांच दिनों तक हीटवेव से राहत नहीं, मौसम विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/no-respite-from-heatwave-in-next-five-days-imd-issues-red-alert.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 22 May 2024 18:20:01 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/no-respite-from-heatwave-in-next-five-days-imd-issues-red-alert.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के कई राज्य भीषण हीटवेव की चपेट में है। अगले पांच दिनों तक राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी यूपी, गुजरात और पश्चिमी मध्य प्रदेश में हीटवेव से राहत की उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग ने 26 मई तक इन क्षेत्रों में हीटवेव की संभावना जताई है। कई स्थानों पर भीषण हीटवेव हो सकती है। ऐसी स्थितियों के बीच 25 मई को लोकसभा के छठे चरण का मतदान होगा। मौसम विभाग ने इस साल अप्रैल-जून की अवधि के दौरान अत्यधिक गर्मी की संभावना जताई थी।</p>
<p>मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों के दौरान राजस्थान, पश्चिमी यूपी, <span>हरियाणा</span>, <span>पंजाब और दिल्ली में हीटवेव का रेड अलर्ट जारी किया है। जबकि गुजरात, पश्चिमी मध्य प्रदेश और पूर्वी यूपी में हीट वेव का ऑरेंज अलर्ट है। </span><span>उत्तर पश्चिमी भारत के मैदानी इलाकों अलावा जम्मू डिविजन और हिमाचल प्रदेश के निचले इलाकों में भी हीटवेव की संभावना है। मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी से बचने के लिए लोग जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड का रुख करते हैं लेकिन वहां भी गर्मी बढ़ रही है।&nbsp;</span></p>
<p>गुरुवार को पश्चिम राजस्थान के अधिकांश स्थानों तथा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली व पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों में भीषण हीटवेव की संभावना है जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश, गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ के अलग-अलग स्थानों में हीटवेव की संभावना है। अगले चार-पांच दिनों तक ऐसी ही स्थितियां रहेंगी।&nbsp;</p>
<p>पंजाब, <span>हरियाणा</span>, <span>दिल्ली</span>, <span>पश्चिमी यूपी और राजस्थान में 17 मई</span>, <span>2024 से हीटवेव की स्थिति बनी हुई है जबकि गुजरात में 15 तारीख से और सौराष्ट्र व कच्छ 16 से हीटवेव है। कल देश में सर्वाधिक तापमान हरियाणा के सिरसा में 47.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भीषण गर्मी के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश</span>, <span>दिल्ली</span>, <span>राजस्थान</span>, <span>पंजाब और हरियाणा गर्म रात की स्थिति बनी रहने की संभावना है। उत्तर-पश्चिमी भारत के कई क्षेत्रों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस चला गया है। </span></p>
<p>उधर, <span>दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 22 मई</span>, <span>2024 को दक्षिण अरब सागर के कुछ हिस्सों</span>, <span>मालदीव के कुछ और हिस्सों</span>, <span>कोमोरिन क्षेत्र</span>, <span>बंगाल की दक्षिण खाड़ी</span>, <span>अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और अंडमान सागर में आगे बढ़ गया है। अगले 2 दिनों के दौरान दक्षिण बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों</span>, <span>अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के शेष हिस्सों</span>, <span>अंडमान सागर और पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं।</span></p>
<p>22 और 23 तारीख को तमिलनाडु, <span>पुडुचेरी और कराईकल में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। लक्षद्वीप और केरल में भी कई स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा हो सकती है। तटीय और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में 22 और 23 तारीख को अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। आज केरल में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। </span></p>
<p>&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अगले पांच दिनों तक हीटवेव से राहत नहीं, मौसम विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रिकार्ड उत्पादन के दावे के बीच क्यों बन रही गेहूं आयात की स्थिति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/why-is-the-situation-of-wheat-import-getting-worse-amid-claims-of-record-production.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 22 May 2024 14:25:51 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/why-is-the-situation-of-wheat-import-getting-worse-amid-claims-of-record-production.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने रबी सीजन (2023-24) में रिकार्ड 11.2 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का दावा किया है। इसके बावजूद इस साल देश में गेहूं आयात की स्थिति पैदा हो सकती है। इसका कारण गेहूं की सरकारी खरीद का पिछले साल के 262 लाख टन के आसपास ही सिमट जाना है जबकि एक अप्रैल, 2024 को केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक 2008 के बाद सबसे कम स्तर 75.02 लाख टन पर रहा है। कीमतों पर नियंत्रण के लिए 2023-24 में सरकार ने ओपन मार्केट सेल स्कीम (ओएमएसएस) के जरिये 100 लाख टन गेहूं खुले बाजार में उतारा था। लेकिन इस साल गेहूं खरीद की स्थिति को देखते हुए सरकार इतनी अधिक मात्रा में गेहूं खुले बाजार में बेचने की हालत में नहीं होगी।</p>
<p>यही कारण है कि इस साल सरकार ने नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट (एनएफएसए) और दूसरी योजनाओं के लिए जरूरी गेहूं की मात्रा में कटौती कर दी है। इसके बाद भी गेहूं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार के पास पिछले साल जितनी मात्रा नहीं होगी। वहीं गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी जारी है और ऐसे में लोक सभा चुनाव के बाद सरकार पर शुल्क मुक्त गेहूं आयात का दबाव बन सकता है।</p>
<p>सरकारी खरीद की स्थिति को देखते हुए फ्लोर मिलें सरकार से गेहूं के शुल्क मुक्त आयात की मांग कर रही हैं। लेकिन लोक सभा चुनावों के चलते सरकार शुल्क मुक्त गेहूं आयात का रास्ता खोलकर राजनीतिक रूप से कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है। लेकिन चुनाव के बाद नई सरकार को गेहूं के आयात के बारे में फैसला लेना पड़ सकता है।</p>
<p>खाद्य मंत्रालय ने पीडीएस और दूसरी सरकारी योजनाओं के लिए चालू साल (2024-25) में कुल 590 लाख टन खाद्यान्न में 184.10 लाख टन गेहूं का आवंटन किया है। जबकि 411 लाख टन चावल का आवंटन किया है और 1.6 लाख टन श्री अन्न को इसके तहत रखा गया है। वहीं एक अप्रैल के लिए बफर मानक के तहत केंद्रीय पूल में 74.6 लाख टन गेहूं का प्रावधान है जबकि एक अप्रैल, 2024 को केंद्रीय पूल में 75.02 लाख टन गेहूं था जो पिछले 16 वर्षों में सबसे कम स्तर है। अप्रैल 2008 में केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक 58.03 लाख टन रह गया था।</p>
<p><amp-iframe width="560" height="315" src="https://www.youtube.com/embed/38DiMkNBoe4?si=j2kqHjvHJDjKwXKw" title="YouTube video player" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen="allowfullscreen"></amp-iframe></p>
<p>ऐसे में अगर चालू रबी मार्केटिंग सीजन (2024-25) में गेहूं की सरकारी खरीद 265 लाख टन तक भी पहुंचती है, तो उसके बाद भी सरकार के पास चालू वर्ष में करीब 340 लाख टन गेहूं उपलब्ध होगा। इसमें एक अप्रैल, 2025 में 74.60 लाख टन बफर मानक के तहत होना चाहिए। तो सरकार के पास बाजार में कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए करीब 80 लाख टन गेहूं ही उपलब्ध होगा।</p>
<p>खाद्य महंगाई पर अंकुश लगाने की तमाम कोशिशों के बावजूद ताजा आंकड़ों के मुताबिक, खाद्यान्न महंगाई दर 8.63 फीसदी रही है। वहीं विश्व बाजार में गेहूं की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में 25 डॉलर प्रति टन से अधिक का उछाल आया है। सबसे सस्ते रूस के गेहूं की कीमत मार्च में कीमत 199 डॉलर प्रति टन चल रही थी जो अब बढ़कर 225 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई है। इसमें शिपिंग और दूसरे खर्च जोड़ने पर यह कीमत 275 डॉलर पर पहुंच जाती जो डॉलर और रूपये की मौजूदा दर पर गेहूं की आयात लागत 22800 रुपये प्रति टन से अधिक बैठती है। यह कीमत चालू सीजन के लिए सरकार द्वारा तय गेहूं के 2275 रुपये प्रति क्विंटल से मामूली अधिक है। जबकि गेहूं पर 40 फीसदी का आयात शुल्क लागू है। यूरोपीय यूनियन के देशों के गेहूं की कीमत 260 डॉलर और अमेरिकी गेहूं की कीमत 290 डॉलर प्रति टन चल रही है। ऐसे में फिलहाल गेहूं का आयात आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं है।</p>
<p>इस साल गेहूं की सरकारी खरीद उम्मीद से काफी कम रही है। जिससे गेहूं उत्पादन के अनुमानों पर सवाल उठ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 22 मई तक देश में कुल 261.28 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। इसमें सर्वाधिक 123.86 लाख टन खरीद पंजाब में हुई है। हरियाणा में 71.06 लाख टन और मध्य प्रदेश 47.69 लाख टन गेहूं की खरीद हुई। उत्तर प्रदेश में गेहूं खरीद का आंकड़ा 8.92 लाख टन तक पहुंचा है जबकि राजस्थना से 9.60 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है। सरकार को उम्मीद थी कि इस साल बेहतर फसल को देखते हुए गेहूं की सरकारी खरीद 310 से 330 लाख टन के बीच रह सकती है।</p>
<p>चार साल पहले गेहूं खरीद में पंजाब को पीछे छोड़ने वाले मध्य प्रदेश में इस साल कम खरीद एक पहेली बन गई है। इसके पीछे गेहूं की फसल पर मौसम की मार और किसानों द्वारा भाव बढ़ने की उम्मीद में गेहूं नहीं बेचने को वजह माना जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार ने इस साल किसानों को गेहूं के एमएसपी के अलावा 125 रुपये का बोनस दिया है जिससे सरकारी खऱीद मूल्य 2400 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इसके बावजूद गेहूं खरीद कम रहना वहां उत्पादन में गिरावट का साफ संकेत है। राजस्थान में भी राज्य सरकार के बोनस के साथ किसानो को 2400 रुपये प्रति क्विटंल का दाम मिला है। इससे राजस्थान में गेहूं की खरीद में बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रिकार्ड उत्पादन के दावे के बीच क्यों बन रही गेहूं आयात की स्थिति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमृतकाल में भारतीय कृषि को जलवायु परिवर्तन और रिसर्च फंडिंग में कमी की चुनौती से निपटने की जरूरत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indian-agriculture-must-address-challenge-of-depleting-ground-water-low-investment-in-research-in-amritkaal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 17 May 2024 19:44:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indian-agriculture-must-address-challenge-of-depleting-ground-water-low-investment-in-research-in-amritkaal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय कृषि को किसानों के लिए फायदे का सौदा बनाने और जलवायु परिवर्तन के संकट से निपटने के लिए पुराने तौर-तरीकों से अलग हटकर सोचने की जरूरत है। अभी तक की नीतियों और योजनाओं से मिश्रित सफलता मिली है, जिनमें सुधार की आवश्यकता है। साथ ही जलवायु परिवर्तन, घटते भूजल स्तर और एग्रीकल्चर रिसर्च के लिए फंडिंग की कमी जैसी चुनौतियों से निपटने की आवशयकता है।</p>
<p>&ldquo;अमृतकाल में कृषि&rdquo; विषय पर भारत कृषक समाज और रूरल वॉयस की ओर से शुक्रवार को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में एक सम्मेलन का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि देश की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित रखते हुए कृषि विविधिकरण, नई तकनीक और नीतिगत बदलाव अगले 25 वर्षों के लिए जरूरी हैं।</p>
<p>सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व खाद्य और कृषि सचिव टी. नंदकुमार ने कहा कि कृषि नीतियों को किसान केंद्रित बनाने की आवश्यकता है। यह मानसिकता बदलने की जरूरत है कि कृषि नीति और किसानों के लिए नीति अलग-अलग हैं। उन्होंने कहा कि कृषि नीतियों का लक्ष्य देश के किसानों की खुशहाली होना चाहिए। किसानों के विकल्प और निर्णयों को सीमित करने की बजाय नीतियों का जोर किसानों को स्वतंत्रता और लेने की छूट देने पर होना चाहिए। नंदकुमार ने कहा कि स्टॉक सीमा और निर्यात प्रतिबंध से जुड़े एडहॉक फैसलों से किसानों को नुकसान पहुंचता है। इसकी भरपाई कैसे होगी, इस बारे में भी सोचना चाहिए।</p>
<p><span>कार्यक्रम की शुरुआत में&nbsp; विषय को प्रतिभागियों के सामने रखते हुए भारत कृषक समाज के चेयरमैन अजय वीर जाखड़ ने कहा कि कृषि और किसानों से जुड़ी समस्याओं की लंबी फेहरिस्त है। इनमें नीति निर्माण, क्लाइमेट चेंज, किसानों की आय, पानी की बढ़ती समस्या, क्रेडिट, डब्लूटीओ की नीतियां और घरेलू बाजार व फसलों की वाजिब कीमत और टेक्नोलॉजी जैसे विषय शामिल हैं। कृषि के लिए नीतिगत मुद्दों पर गंभीर चिंतन के बाद नीतियां&nbsp; बनाने और उनको लागू करने की जरूरत है। ऐसे में अमृत काल में कृषि के लिए क्या जरूरी है, इन सब पर चिंतन करने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है।&nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x_664775f6a6c78.jpg" alt="" /></p>
<p>सम्मेलन को संबोधित करते हुए आईटीसी के कृषि और आईटी बिजनेस के प्रमुख एस. शिवा कुमार ने कहा कि यदि हम भारतीय किसानों को समृद्ध बनाना चाहते हैं तो हमें उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना होगा। उन्होंने कहा कि भारत में कृषि से जुड़े <span>1500</span> से अधिक स्टार्टअप काम कर रहे हैं<span>, </span>उन्हें अपने इनोवेशन के जरिए किसानों की आय में बढ़ोतरी के उपाय निकालने होंगे।</p>
<p>प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक और भारतीय कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सीडी मायी ने कहा कि देश को राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (एनएआरएस) के तहत विभिन्न क्षेत्रों के अनुसंधान संस्थानों जैसे आईआईटी<span>, </span>आईआईएम और समाजशास्त्रियों को एकीकृत करने की आवश्यकता है। उन्होंने एग्रीकल्चर रिसर्च के लिए फंडिंग की कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत में कृषि जीडीपी का लगभग <span>0.4-0.6</span> प्रतिशत अनुसंधान पर खर्च होता है जबकि इसका विश्व औसत <span>0.94</span> प्रतिशत है। डॉ. मायी के अनुसार, <span>&nbsp;"</span>हमें अगले <span>25</span> वर्षों में इस खर्च को कम से कम कृषि जीडीपी के <span>1</span> प्रतिशत तक बढ़ाने की जरूरत है।" उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) की भूमिका और फंडिंग में उनकी हिस्सेदारी पर फिर से विचार करने की जरूरत बताई।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x_6647761e245d1.jpg" alt="" /></p>
<p>पंजाब के पूर्व कृषि आयुक्त बलविंदर सिद्धू ने अपने संबोधन में कहा कि गिरते भूजल स्तर की समस्या और इससे निपटने के लिए नीतिगत उपायों पर जोर दिया। उन्होंने देश की खाद्य सुरक्षा और फसल विविधिकरण की चुनौतियों के बारे में भी अपने अनुभव साझा किए।</p>
<p>सम्मेलन में द्वारा होल्डिंग्स के सह-संस्थापक और प्रबंध ट्रस्टी समीर शाह ने एग्रीकल्चर क्रेडिट की मौजूदा स्थिति, फिनटेक की भूमिका और इस क्षेत्र की संभावनाओं के बारे में अपने विचार रखे।&nbsp;</p>
<p>सम्मेलन में वर्ल्ड इकनॉमिक सेंटर के सेंटर फॉर फोर्थ इंडस्ट्रियल रेवलूशन के प्रमुख पुरूषोत्तम कौशिक ने डिजिटल एग्रीकल्चर के क्षेत्र में हो रहे नए प्रयासों और नवाचारों के बारे में बताते हुए किसानों की आमदनी बढ़ाने में डिजिटल तकनीक की संभावनाओं के बारे में बताया। सम्मेलन में ओलम इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनुपम कौशिक सहित कृषि क्षेत्र के कई विशेषज्ञ और किसान प्रतिनिधि शामिल हुए। &nbsp;&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_664761b160c61.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमृतकाल में भारतीय कृषि को जलवायु परिवर्तन और रिसर्च फंडिंग में कमी की चुनौती से निपटने की जरूरत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_664761b160c61.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं पर सरकार की मुश्किलें बढ़ी, सरकारी खरीद पिछले साल के स्तर पर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-problems-increased-on-wheat-government-procurement-at-last-year-level.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 16 May 2024 19:21:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-problems-increased-on-wheat-government-procurement-at-last-year-level.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सरकार द्वारा रिकार्ड गेहूं उत्पादन के दावों के बीच हकीकत साफ होने लगी है। गेहूं की कीमतें देश के अधिकांश हिस्सों में चालू रबी मार्केटिंग सीजन (आरएमएस 2024-25) के लिए तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2275 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर चली गई हैं। जबकि गेहूं की सरकारी खरीद पिछले साल के 262.02 लाख टन के आसपास ही रह सकती है जो अभी 255.24 लाख टन तक पहुंची है। देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड समेत सभी जगह गेहूं कटाई हो चुकी है और अब बाजार में आवक भी बहुत कम रह गई है। ऐसे में सरकारी खरीद केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय और भारतीय खाद्य निगम द्वारा तय 372.90 लाख टन के सरकारी लक्ष्य से करीब 100 लाख टन कम रह सकती है।</p>
<p>गेहूं की कम सरकारी खरीद और 1 अप्रैल, 2024 को केंद्रीय पूल में 16 साल के सबसे कम स्टॉक को देखते हुए इस साल देश में गेहूं आयात की स्थिति पैदा सकती है। गेहूं की कीमतों को नियंत्रित करने की सीमित क्षमता के बीच सरकार चुनावों के बाद इस बारे में विचार कर सकती है। वैसे भी यूक्रेन और रूस का गेहूं जुलाई से बाजार में आने लगता है। फिलहाल गेहूं आयात पर 40 फीसदी का शुल्क लागू है। जिसके चलते अभी आयात व्यवहार्य नहीं है।</p>
<p>गेहूं की सरकारी खरीद के आंकड़ों से सरकार के उत्पादन के अनुमान और खरीद लक्ष्य पर भी सवाल उठने लाजिमी है। कृषि मंत्रालय की ओर से जारी दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में देश में गेहूं का उत्पादन 11.20 करोड़ टन रहेगा जो अब तक का सर्वाधिक है। गत वर्ष 11.05 लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ था। इस साल गेहूं की फसल के लिए बेहद अनुकूल मौसम के चलते पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं की पैदावार अच्छी रही है और किसानों के मुताबिक यह पिछले चार साल में सबसे बेहतर है।</p>
<p>आईसीएआर के संस्थान आईआईडब्ल्यूबीआर के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने<strong> रूरल वॉयस</strong> को बताया कि हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी यूपी में इस साल पांच टन प्रति हैक्टेयर से अधिक का उत्पादन लेने वाले किसानों की बड़ी संख्या रही है।</p>
<p>लेकिन मध्य भारत और खासतौर से मध्य प्रदेश में इस साल दिसंबर के असामान्य तापमान और फरवरी-मार्च में बेमौसम की बारिश और ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया है।</p>
<p>आईसीएआर के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के मुताबिक मध्य प्रदेश में कई जगह गेहूं की उत्पादकता 15-20 फीसदी तक प्रभावित हुई है। मध्य भारत कंसोर्सियम ऑफ एफपीओ के सीईओ <strong>योगेश द्विवेदी</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि कई जगह उत्पादन 25 फीसदी तक प्रभावित रहा है। लेकिन हैरानी की बात है कि मार्केट के सिगनल के बावजूद सरकार उत्पादन के अनुमानों &nbsp;में अभी तक अपने रुख में कोई बदलाव करती नहीं दिखती है।</p>
<p>अभी तक देश में कुल 255.24 लाख टन की गेहूं की सरकारी खरीद हुई है। पंजाब में 122.31 लाख टन, हरियाणा में 70.32 लाख टन, मध्य प्रदेश में 45.66 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है। वहीं उत्तर प्रदेश में 8.47 लाख टन, राजस्थान में 8.35 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद की गई।</p>
<p>मध्य प्रदेश में सरकारी खरीद के आंकड़े गेहूं उत्पादन प्रभावित होने की ओर साफ इशारा करते हैं। साल 2019-20 में मध्यप्रदेश ने 129.42 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद के साथ पंजाब को पीछे छोड़कर देश में पहला स्थान हासिल कर लिया था। उस साल पंजाब में 127.14 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। जबकि देश में गेहूं की कुल खरीद 389.93 लाख टन रही थी।</p>
<p>इसके अगले साल 2020-21 में सरकारी खरीद अभी तक के रिकार्ड स्तर 433.44 लाख टन पर पहुंच गई। लेकिन तब मध्य प्रदेश गेहूं की सरकारी खरीद में दूसरे स्थान पर आ गया। उस साल उत्तर प्रदेश में 56.41 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई थी जबकि इस साल यूपी 10 लाख टन तक पहुंचने के लिए भी स्ट्रगल कर रहा है।</p>
<p>इस बार फिर गेहूं की सरकारी खरीद में पंजाब और हरियाणा ने अहम भूमिका निभाई और यह साबित किया है कि देश की खाद्य सुरक्षा के मामले में अभी भी इन दोनों राज्यों पर सबसे अधिक दारोमदार है। मध्यप्रदेश और राजस्थान में गेहूं के एमएसपी के ऊपर 125 रुपये प्रति क्विटंल बोनस देने से सरकारी खरीद का दाम 2400 रुपये प्रति क्विटंल है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में सरकारी खरीद कम रहने की एक बड़ी वजह प्राइवेट ट्रेड द्वारा एमएसपी से ऊंचे दामों पर खरीद करना है।</p>
<p>मध्य प्रदेश में बेहतर गुणवत्ता का गेहूं 2400 रुपये प्रति क्विटंल से अधिक दाम पर ही बिका। कारोबारियों का कहना है कि वहां कम गुणवत्ता का गेहूं ही सरकारी खरीद में आया। बड़े पैमाने पर वहां किसानों द्वारा बेहतर दाम की उम्मीद में गेहूं का स्टॉक भी बचाकर रखा गया है क्योंकि पिछले साल कीमतें 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक चली गई थी।</p>
<p>पिछले साल सरकार ने बड़े स्तर पर खुले बाजार की बिक्री के तहत गेहूं की बिक्री कर कीमतों को नियंत्रित करने की लगातार कोशिश की थी। लेकिन इस साल केंद्रीय पूल में गेहूं के स्टॉक का 16 साल का सबसे कम स्तर, सरकारी खऱीद का लक्ष्य से करीब 100 लाख टन कम रहना है और कीमतों का सरकारी खरीद सीजन के दौरान ही एमएसपी से अधिक रहना, ऐसे कारक हैं जो अगले कुछ माह में कीमतों में बढ़ोतरी की जमीन तैयार कर चुके हैं। साथ ही गेहूं उत्पादन के सरकार के अनुमानों पर भी सवाल खड़े करते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_66460f0c11320.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं पर सरकार की मुश्किलें बढ़ी, सरकारी खरीद पिछले साल के स्तर पर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अप्रैल में खाद्य तेल आयात 27 फीसदी बढा, तिलहन उत्पादकों के लिए चुनौती]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/edible-oil-import-increased-by-27-percent-in-april-challenge-for-oilseed-producers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 15 May 2024 12:43:13 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/edible-oil-import-increased-by-27-percent-in-april-challenge-for-oilseed-producers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने के दावों के बावजूद देश में विदेशी खाद्य तेलों का आयात बढ़ता जा रहा है। भारत ने अप्रैल 2024 में 13.04 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया, जो पिछले साल के मुकाबले 27.67 प्रतिशत अधिक है। मार्च 2024 में भारत का खाद्य तेल आयात 11.49 लाख टन था। इस दौरान सोयाबीन तेल का आयात 2.62 लाख टन से बढ़कर 3.85 लाख टन हो गया है।&nbsp;</p>
<p>अप्रैल में पाम ऑयल का आयात सालाना आधार पर 34.11 प्रतिशत बढ़कर 6.84 लाख टन तक पहुंच गया है। भारत ने तेल वर्ष 2023-24 के पहले छह महीनों के दौरान 42.13 लाख टन पाम तेल (आरबीडी पामोलीन और सीपीओ सहित) का आयात किया, जबकि पिछले तेल वर्ष की इसी अवधि में यह 49.09 लाख टन था।&nbsp;</p>
<p>भारत ने तेल वर्ष 2023-24 (नवंबर-अक्टूबर) के पहले छह महीनों में 70.69 लाख टन&nbsp; खाद्य तेलों का आयात किया, जो एक साल पहले इसी अवधि में 80.02 लाख टन के मुकाबले 11.65 प्रतिशत कम है। तेल वर्ष 2023-24 के पहले छह महीनों के दौरान भारत का वनस्पति तेलों (खाद्य और अखाद्य तेलों सहित) का कुल आयात 71.48 लाख टन रहा, जो 2022-23 की इसी अवधि में 81.10 लाख टन के मुकाबले 11.86 प्रतिशत कम है। .</p>
<p>खाद्य तेल उद्योग के संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार, अप्रैल में भारत के कुल 13.04 लाख टन खाद्य तेल आयात में पाम तेल की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत थी। जबकि सूरजमुखी और सोयाबीन ऑयल का आयात 6.20 लाख टन रहा है। गैर-खाद्य तेलों सहित, कुल वनस्पति तेलों का आयात अप्रैल में 26 प्रतिशत बढ़कर 13.18 लाख टन हो गया।</p>
<p>एसईए ने कहा कि वैश्विक कीमतों में गिरावट की वजह से आरबीडी पामोलीन और कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का अधिक आयात हुआ। इनमें पिछले महीने लगभग 100 डॉलर प्रति टन की गिरावट आई। जबकि वैश्विक स्तर पर सोयाबीन तेल की कीमतें 40 डॉलर प्रति टन गिर गईं। सूरजमुखी तेल की कीमत पिछले महीने में 15 डॉलर प्रति टन कम हुईं।</p>
<p>भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक है। इंडोनेशिया और मलेशिया आरबीडी पामोलीन और कच्चे पाम तेल (सीपीओ) के प्रमुख निर्यातक हैं, जबकि सोयाबीन तेल अर्जेंटीना, ब्राजील से और सूरजमुखी तेल रूस, रोमानिया और यूक्रेन से आयात किया जाता है।</p>
<p>एसईए के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने कहा कि अप्रैल में कीमतों में गिरावट के रुझान ने खाद्य तेलों के अधिक आयात को प्रोत्साहित किया। आरबीडी पामोलीन और कच्चे पाम तेल (सीपीओ) की अंतरराष्ट्रीय कीमत में लगभग 100 डॉलर प्रति टन की गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में सोयाबीन तेल भी 40 डॉलर प्रति टन और सूरजमुखी तेल सिर्फ 15 डॉलर प्रति टन कम हुआ है।</p>
<p><strong>सूरजमुखी तेल के आयात में वृद्धि</strong></p>
<p>नवंबर-अप्रैल 2023-24 के दौरान भारत में कच्चे सूरजमुखी तेल का आयात बढ़कर 15.87 लाख टन हो गया, जो 2022-23 की इसी अवधि में 13.67 लाख टन था।</p>
<p>तेल वर्ष 2023-24 के नवंबर-अप्रैल के दौरान, रूस ने भारत को 6.26 लाख टन कच्चे सूरजमुखी तेल का निर्यात किया, इसके बाद रोमानिया ने 5.21 लाख टन, अर्जेंटीना ने 1.76 लाख टन और यूक्रेन ने 1.69 लाख टन का निर्यात किया।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_645f076491949.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अप्रैल में खाद्य तेल आयात 27 फीसदी बढा, तिलहन उत्पादकों के लिए चुनौती ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सतत विकास पर चर्चा के लिए सीएससी&amp;#45;आईईएसजीएन एसडीजी कॉन्क्लेव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/empowering-sustainable-development-csc-iesgn-sdg-conclave-promotes-esg-awareness.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 05 May 2024 12:04:49 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/empowering-sustainable-development-csc-iesgn-sdg-conclave-promotes-esg-awareness.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">ईएसजी के क्षेत्र में देश में जागरूकता फैलाने के लिए, सीएससी अकादमी और इंडियन ईएसजी नेटवर्क ने तीन मई 2024 को नई दिल्ली के इंडिया हेबिटेट सेंटर, में "सीएससी-आईईएसजीएन एसडीजी कॉन्क्लेव" का आयोजन किया। इस कॉन्क्लेव का मकसद नामी-गिरामी विशेषज्ञों की मौजूदगी में ईएसजी से जुड़े प्रमुख विषयों पर सार्थक बहस करना था। कॉन्क्लेव में, देश में सतत विकास के लक्ष्य कैसे हासिल किए जाएं, बड़े पैमाने पर सामाजिक प्रभाव के लिए रणनीति, ईएसजी बनाम सीएसआर, और सीएसआर का बदलता परिदृश्य जैसे सामयिक मुद्दों पर चर्चा हुई। आज के दौर में ईएसजी काफी लोकप्रिय शब्द है जो कि सतत विकास से संबंधित है। ईएसजी का मतलब है - एनवायरनमेंट, सोशल और गवर्नेंस। ईएसजी ने धरती और लोगों की बेहतरी के लिए काम करने के मानक विकसित किये हैं।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">कॉन्क्लेव का उद्घाटन करते हुए, अतुल कुमार तिवारी, सचिव- कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने कहा, &ldquo;आईईएसजीएन और सीएससी के बीच सहयोग, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लाभार्थियों को उनके घर के पास जाकर सुविधाएं प्रदान कर, सीएससी केंद्र ग्रामीण भारत को सशक्त बना रहे हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग दो-तिहाई कंपनियां एसडीजी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रयास करती हैं, और 60% क्षमता निर्माण और तकनीकी पर जोर देती हैं। सीएससी इस दिशा में प्रमुख भूमिका निभा रहा है।&rdquo;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उन्होंने कहा, &ldquo;सीएसआर परियोजनाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देखना उत्साहजनक है। सीएससी बाल विद्यालय जैसी पहल के साथ तकनीक-आधारित शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है और सबसे गरीब तबके तक भी अपनी सेवाएं पहुंचा रहा है। पीएम विश्वकर्मा योजना में सीएससी की महत्वपूर्ण भूमिका, ईएसजी लक्ष्यों के माध्यम से ग्रामीण आजीविका को बढ़ाने की हमारी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।&rdquo;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">कार्यक्रम के दौरान अपने विचार रखते हुए एस. कृष्णन, सचिव-इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा, &ldquo;कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के प्रति सीएससी की प्रतिबद्धता से सामाजिक बदलाव पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। सीएससी की सफलता हमें प्रेरित करती है कि योजनाओं को अच्छी तरह से डिजाइन किया जाए, उनकी संकल्पना ठीक से हो, और लक्ष्यों का निर्धारण ठीक से किया जाए। ऐसी परियोजनाएं स्वाभाविक रूप से अपने प्रभाव से लोगों का ध्यान आकर्षित करती हैं जैसा कि सीएससी ने किया है। सीएससी मॉडल में विचारों और दृष्टिकोणों की विविधता दिखाई देती है और इस तरह से यह समाज में व्यापक और सार्थक योगदान दे रहा है।&rdquo;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सतत विकास की दिशा में किए गए प्रयास देश में सामाजिक विकास लाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। सीएससी गरीबी उन्मूलन, लैंगिक समानता, ग्रामीण विकास और आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को सशक्त बना रहा है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस मौके पर अतिथियों का स्वागत करते हुए, सीएससी अकादमी के अध्यक्ष और सचिव संजय राकेश ने कहा, &ldquo;लगभग 5.7 लाख से अधिक वीएलई के साथ सीएससी की 15 वर्षों की यात्रा, सामाजिक उत्थान की दिशा में सामुदायिक और गैर-सरकारी सेवा वितरण की ताकत को दर्शाती है। सतत विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता डिजिटल वैन, स्त्री स्वाभिमान और बाल स्वास्थ्य जैसी पहलों के माध्यम से बढ़ी है। इन सभी में हमारे पार्टनर्स का काफी बड़ा योगदान है। सीएससी अकादमी द्वारा सीएससी बाल विद्यालय जैसी नवीन परियोजनाओं की शुरूआत और आईआईटी-दिल्ली के सहयोग से 20 मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से संज्ञानात्मक विकास को बढ़ाना तकनीक आधारित शिक्षा और स्थानीय विकास पर हमारे फोकस को रेखांकित करता है। हमारा लक्ष्य है- दूरदराज के इलाकों में लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर गांव से शहर की तरफ होने वाले पलायन को कम करके स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाएं।"</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">कॉन्क्लेव के दौरान ईएसजी के दौर में सीएसआर की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी चर्चा की गई और इस बात पर भी विचार किया गया कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास के लक्ष्य दोनों को एक साथ कैसे हासिल किया जाये? विशेषज्ञों के नेतृत्व में हुई परिचर्चा में सतत विकास हासिल करने की दिशा में शिक्षा, कौशल, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल और वित्तीय साक्षरता और स्वास्थ्य सेवा में सीएससी की पहल को साझा किया गया।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस अवसर पर विक्रांत एब्रॉल, संस्थापक - इंडिया ईएसजी नेटवर्क, प्रो. ज्योति कुमार, आईआईटी दिल्ली, डॉ. निशांत चड्ढा - डॉयरेक्टर, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, प्रिया नाइक, फाउंडर-सम्हिता, आशिमा सिंह, जनरल मैनेजर- लर्निंग लिंक फाउंडेशन, मैरी रूपा टेटे, उपाध्यक्ष - उषा समूह, राजीव मलिक, सीईओ - ग्रैपोस कनेक्ट, डॉ. अजीत (सेवानिवृत्त आईएएस), अर्थ केयर फाउंडेशन, दिनेश अग्रवाल सलाहकार-कंसोशिया एडवाइजरी, डॉ. चंद्रशेखर, ईडी, ईडीसीआईएल, अक्षय धूत, निदेशक- स्मार्टपिंग, शीना सुरेश, एवीपी- एचएसबीसी, गिरिजा मुकुंद, निदेशक-कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी और ईएसजी किंड्रिल, विदुषी सक्सेना, एडोबी, प्रदीप सिंह, प्रमुख सीएसआर मॉनिटरिंग और इम्पैक्ट असेसमेंट एचडीएफसी बैंक, संजीव सहगल, एमडी और संस्थापक-स्पर्श सीसीटीवी जैसे गणमान्य लोग उपस्थित थे।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">कॉन्क्लेव के दौरान सीएससी की यात्रा और प्रमुख उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया गया। इस कार्यक्रम ने ईएसजी से जुड़े पेशेवरों को एक साथ जुड़ने का एक अच्छा अवसर भी प्रदान किया।</span></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सतत विकास पर चर्चा के लिए सीएससी-आईईएसजीएन एसडीजी कॉन्क्लेव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज निर्यात पर सरकारी फैसलों से कुछ निर्यातकों को भारी मुनाफा, किसानों को घाटा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-decisions-on-onion-export-bring-huge-profits-to-some-exporters-and-losses-to-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 05 May 2024 10:23:20 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-decisions-on-onion-export-bring-huge-profits-to-some-exporters-and-losses-to-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चार मई को दिल्ली के खुदरा बाजार में अच्छी गुणवत्ता के प्याज की कीमत 23 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश के प्याज किसानों को क्या दाम मिला होगा। कृषि उपज के आयात-निर्यात संबंधी फैसलों के जरिए महंगाई नियंत्रण की नीति किसानों को घाटा पहुंचा रही है। जबकि कई निर्यातक विशेष अनुमति का फायदा उठाकर प्याज निर्यात से मोटा मुनाफा कमाने में कामयाब रहे।&nbsp;</p>
<p>अब पांच महीनों बाद केंद्र सरकार ने प्याज निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटाया है लेकिन 550 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) और 40 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी की शर्तें लगा दी हैं। इसके बावजूद जिस तरह की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में चल रही हैं उससे प्याज निर्यातकों के पास कमाई का मौका है। देखना है कि निर्यात खुलने से किसानों को कितना फायदा पहुंचता है।&nbsp;</p>
<p>लोकसभा चुनाव के मद्देनजर महंगाई रोकने के लिए दिसंबर में सरकार ने प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इससे देश में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट आई और विश्व बाजार में भी प्याज के दाम बढ़ गए। लेकिन बीच-बीच में सरकार ने कुछ देशों को प्याज निर्यात की विशेष अनुमति दे दी। जिसका फायदा उन निर्यातकों को मिला जिन्होंने सस्ते दाम पर प्याज खरीदकर महंगे रेट पर एक्सपोर्ट किया।</p>
<p>प्याज निर्यात पर प्रतिबंध के दौरान संयुक्त अरब अमीरात में प्याज की कीमत 150 रुपये प्रति किलो तक चली गई जबकि पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी कीमत 100 रुपये के आसपास तक पहुंच गई थी। इसी का फायदा प्याज निर्यात की विशेष अनुमति के जरिए कुछ निर्यातकों ने उठाया। प्याज कारोबार पर करीबी नजर रखने वाले सूत्रों का कहना है कि निर्यात के लिए प्याज 20 से 22 रुपये प्रति किलो पर खरीदा गया। जबकि निर्यात बाजार में कीमत 100 रुपये से 150 रुपये किलो तक रही। इस तरह हजारों टन प्याज का निर्यात हुआ। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुछ चुनिंदा निर्यातकों को कितना बड़ा फायदा पहुंचाया गया।</p>
<p>महाराष्ट्र के किसान नेता अनिल घनवट का कहना है कि प्याज निर्यात पर प्रतिबंध से जहां देश के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा, वहीं प्याज निर्यात की विशेष अनुमति के जरिए कुछ खास निर्यातकों को लाभ पहुंचाया गया। घनवट ने गुजरात के बंदरगाहों से प्याज की तस्करी का आरोप भी लगाया। उन्होंने सफेद प्याज के निर्यात की छूट को भी गुजरात के चंद निर्यातकों को फायदा पहुंचाने वाला पक्षपातपूर्ण कदम बताया।</p>
<p>भारत के साथ अब मिस्र ने भी प्याज निर्यात पर रोक हटा दी है। इसके साथ ही पाकिस्तान ने भी प्याज निर्यात शुरू कर दिया है। भारत और मिस्र द्वारा निर्यात पर रोक लगाने के चलते ही मध्य पूर्व एशियाई देशों में प्याज की कीमतें बढ़ी थीं। अभी भी वहां प्याज की कीमत 120 रुपये प्रति किलो से आसपास चल रही हैं। लेकिन कई देशों से आपूर्ति बढ़ने के चलते अब कीमतों का यह स्तर बना रहेगा या नहीं यह अगले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा। हालांकि कारोबारी सूत्रों का कहना है कि सरकार द्वारा 550 डॉलर प्रति टन का एमईपी और 40 फीसदी का निर्यात शुल्क लगाने के बावजूद अभी भी वैश्विक बाजार में प्याज का निर्यात फायदे का सौदा है। लेकिन बांग्लादेश को इन शर्तों के साथ निर्यात मुश्किल हो जाएगा।&nbsp;</p>
<p>प्याज निर्यात खुलने के बावजूद इस पर लागू दो शर्तों से महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक खुश नहीं हैं। पूर्व सांसद और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता राजू शेट्टी कहते हैं कि केंद्र सरकार किसानों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है और चुनाव में किसानों की नाराजगी को देखते हुए निर्यात प्रतिबंध हटाने का फैसला करना पड़ा। लेकिन इस पर भी कड़ी शर्तें लगा दी।&nbsp;</p>
<p>प्याज की रबी की मुख्य फसल फरवरी-मार्च में आती है। रबी के प्याज की ही शेल्फ लाइफ अधिक होती है। लेकिन जब फसल बाजार में आई तो निर्यात पर प्रतिबंध लगा हुआ था। जब कीमतों में भारी गिरावट आई तो सरकार ने नेफेड और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर फेडरेशन (एनसीसीएफ) के जरिये प्याज खरीदने का फैसला किया। नेफेड और एनसीसीएफ बाजार में चल रही कीमतों पर ही प्याज खरीदती हैं और एफपीओ, सहकारी समितियों और कारोबारियों के जरिये प्याज की खरीद करती हैं।</p>
<p>निर्यात प्रतिबंध के दौरान विशेष अनुमति के तहत छह देशों को प्याज का निर्यात किया गया। इसके लिए घरेलू बाजार से प्याज खरीद और निर्यात की व्यवस्था का जिम्मा नेशनल कोआपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीईएल) को दिया गया था। प्याज निर्यात पर प्रतिबंध के दौरान घरेलू बाजार से खरीदी गई प्याज की कीमतों और निर्यात की कीमतों के बीच भारी अंतर को लेकर सरकारी स्तर पर भी चर्चा हुई कि इसका फायदा किसानों को मिलना चाहिए था जो नहीं मिला।</p>
<p>अब लोक सभा चुनावों के तीसरे चरण के पहले प्याज निर्यात पर प्रतिबंध समाप्त करने का मकसद प्याज उत्पादक किसानों और व्यापारियों की नाराजगी कम करना है। महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य और वहां प्याज बड़ा राजनीतिक मुद्दा है। ऐसे में सरकार का ताजा फैसला सत्तारूढ़ दल की कितनी मदद करता है, यह तो 4 जून को ही पता लगेगा। लेकिन इतना स्पष्ट है कि महंगाई नियंत्रण की नीतियां किसानों के लिए घाटे का सौदा बन रही हैं, जबकि कुछ निर्यातक इससे भी मुनाफा बनाने में कामयाब रहे।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज निर्यात पर सरकारी फैसलों से कुछ निर्यातकों को भारी मुनाफा, किसानों को घाटा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र में मतदान से पहले प्याज निर्यात पर रोक हटी, 40% एक्सपोर्ट ड्यूटी और 550 डॉलर MEP की शर्त]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/center-lifts-ban-on-onion-export-but-40-percent-export-duty-550-dollar-mep-condition.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 04 May 2024 11:17:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/center-lifts-ban-on-onion-export-but-40-percent-export-duty-550-dollar-mep-condition.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव के बीच प्याज के निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटाने का फैसला किया है। लेकिन साथ ही दो कड़ी शर्तें भी लगा दी हैं। प्याज का निर्यात 550 डॉलर प्रति टन से कम रेट पर नहीं होगा और निर्यात पर 40 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी लागू होगी।&nbsp;</p>
<p>डीजीएफटी की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, प्याज के निर्यात पर 550 डॉलर प्रति टन का एमईपी यानी न्यूनतम निर्यात मूल्य लागू रहेगा। कोई भी निर्यातक इससे कम दाम पर प्याज का न&zwj;िर्यात नहीं करेगा। इससे पहले शुक्रवार को केंद्र सरकार ने प्याज पर 40 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाने का आदेश भी जारी किया था। इन दोनों शर्तों के साथ लगभग 62 रुपये प्रति किलोग्राम से कम भाव पर प्याज का निर्यात नहीं हो पाएगा।&nbsp;</p>
<p>खासतौर पर महाराष्ट्र के प्याज किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए प्याज निर्यात पर प्रतिबंध हटाने का फैसला किया गया है। पिछले पांच महीने से निर्यात पर लगी रोक की वजह से प्याज उत्पादकों और व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। यह महाराष्ट्र में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। इसका खामियाजा महाराष्ट्र की प्याज बेल्ट में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को उठाना पड़ सकता है।&nbsp;</p>
<p>प्याज निर्यात पर प्रतिबंध हटाने से किसानों और व्यापारियों को राहत मिलेगी लेकिन साथ ही जो दो शर्तें लगाई गई हैं, उसे लेकर सवाल उठेंगे। महाराष्ट्र की कम से कम एक दर्जन सीटों पर प्याज बड़ा मुद्दा है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x_6635d06c1a715.jpg" alt="" width="604" height="810" /></p>
<p>केंद्र सरकार ने प्याज की कीमतों पर नियंत्रण के ल&zwj;िए 8 द&zwj;िसंबर 2023 को प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा द&zwj;िया था। इसके बाद 22 मार्च को यह रोक अन&zwj;िश्च&zwj;ितकाल के ल&zwj;िए बढ़ा दी थी। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने मुख्यत गुजरात में पैदा होने वाले सफेद प्याज के 2000 टन न&zwj;िर्यात की मंजूरी दी थी जिसे लेकर महाराष्ट्र में काफी नाराजगी सामने आई। आखिरकार सरकार को प्याज के निर्यात से प्रतिबंध हटाने का फैसला लेना पड़ा।</p>
<p>इस बीच, सरकार की तरफ से छह देशों को 99,150 टन प्याज निर्यात की खबर भी आई, जो पुरानी घोषणाएं निकली। इसे लेकर महाराष्ट्र के नेताओं ने भाजपा पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया था।&nbsp;</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:</strong> <a href="https://www.ruralvoice.in/agribusiness/onions-caught-in-the-politics-of-gujarat-and-maharashtra-doubts-on-the-announcement-of-export-permission.html">गुजरात और महाराष्ट्र की राजनीति में फंसा प्याज, निर्यात की घोषणा पर संशय</a></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65e571b491d42.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र में मतदान से पहले प्याज निर्यात पर रोक हटी, 40% एक्सपोर्ट ड्यूटी और 550 डॉलर MEP की शर्त ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं खरीद में केंद्र के लिए चुनौती बने तीन भाजपा शासित राज्य, पंजाब पर बढ़ा दारोमदार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centres-challenge-in-wheat-procurement-increases-burden-on-three-bjp-ruled-states-punjab-increases.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 02 May 2024 15:42:24 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centres-challenge-in-wheat-procurement-increases-burden-on-three-bjp-ruled-states-punjab-increases.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रबी सीजन 2024-25 के लिए गेहूं की सरकारी खरीद जोर पकड़ चुकी है। केंद्रीय खाद्यान्न खरीद पोर्टल के अनुसार, <span>अब तक सरकारी एजेंसियां लगभग 202 लाख टन गेहूं खरीद चुकी हैं। यह पिछले साल की समान अवधि में हुई खरीद से करीब 10 फीसदी कम है जबकि इस साल के लिए निर्धारित 372.90 लाख गेहूं खरीद के लक्ष्य से 46 फीसदी कम है। इस कमी का मुख्य कारण मध्य प्रदेश</span>, <span>यूपी और राजस्थान में गेहूं की कम खरीद है। तीनों भाजपा शासित राज्य हैं लेकिन केंद्रीय पूल के लिए गेहूं खरीद के मामले में लक्ष्य से पिछड़ रहे हैं। </span></p>
<p>अब तक पंजाब में सबसे ज्यादा लगभग 95<span> लाख टन गेहूं की खरीद हुई है जबकि मध्य प्रदेश</span>, <span>उत्तर प्रदेश और राजस्थान तीनों राज्यों को मिलाकर भी 50 लाख टन से कम गेहूं खरीदा गया है। इसे देखते हुए गेहूं खरीद के लक्ष्य को हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। पंजाब में लेट कटाई के कारण गेहूं की खरीद पिछड़ी है लेकिन सीजन के आखिर तक 130 लाख टन खरीद होने का अनुमान है।&nbsp;</span></p>
<p>पिछले साल देश में रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन के दावों के बावजूद सरकारी खरीद घटकर 261.97 लाख टन रह गई थी। जबकि वर्ष 2021-22 में खरीद 433 लाख टन तक पहुंच गई थी। इस बार भी गेहूं की बंपर फसल का अनुमान है जिसे देखते हुए गेहूं खरीद बढ़ने की उम्मीद थी। मगर सरकारी खरीद के ताजा आंकड़े अलग तस्वीर पेश करते हैं।</p>
<p><strong>मध्यप्रदेश में कम खरीद&nbsp;</strong>&nbsp;</p>
<p>देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य मध्यप्रदेश में अब तक करीब 37 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है जो 80 लाख टन गेहूं खरीद के लक्ष्य का आधा भी नहीं है। यह स्थिति तब है जबकि मध्यप्रदेश सरकार गेहूं खरीद पर 2,<span>275 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी के अलावा 125 रुपये का बोनस भी दे रही है। किसानों को 2</span>,<span>400 रुपये का भाव देने के बावजूद एमपी में गेहूं की खरीद कम हो रही है। </span></p>
<p>खरीद बढ़ाने के लिए सरकार ने किसानों से गेहूं खरीदने की अंतिम तिथि 15 मई से बढ़ाकर 20 मई कर दी है। साथ ही बारिश और ओलावृष्टि में भीगे गेहूं के खरीद नियमों में ढील देते हुए लस्टर लॉस (<span>गेहूं के दाने की चमक उड़ना</span>, <span>दाना खराब होना और सिकुड़ना)</span> की सीमा को 30 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया है। <span>इसके अलावा टूटे हुए गेहूं के दाने की सीमा छह प्रतिशत से बढ़ाकर </span>15 <span>प्रतिशत कर दी है।&nbsp;</span></p>
<p><strong>एमपी में पैदावार भी प्रभावित</strong></p>
<p>मध्य प्रदेश में बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को नुकसान हुआ था। खरीद में कमी के पीछे गेहूं की पैदावार और उत्पादन में गिरावट भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। क्योंकि गेहूं खरीद का भाव अधिक होने से प्राइवेट ट्रेडर्स मध्यप्रदेश से अधिक खरीद नहीं करेंगे। इस लिहाज से सरकारी खरीद बढ़नी चाहिए। लेकिन किसानों को अधिक दाम देने और क्वालिटी मानकों में ढील के बाद भी मध्यप्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद कम होना चिंताजनक है।</p>
<p>मध्य भारत कंसोर्सियम ऑफ एफपीओ के सीईओ <strong>योगेश द्विवेदी</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि राज्य में गेहूं की फसल को बारिश और ओलावृष्टि से 15 से 20 फीसदी नुकसान हुआ है। अभी गेहूं की सरकारी खरीद में आवक कम है हालांकि सरकार ने इसकी समयावधि बढ़ा दी है और गुणवत्ता मानकों में भी छूट दी है। लेकिन इसके बावजूद राज्य में गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य पूरा होना संभव नहीं दिख रहा है। बेहतर दाम की उम्मीद में भी किसान पूरी फसल को मंडियों में नहीं ला रहे हैं।</p>
<p><strong>यूपी और राजस्थान में भी लक्ष्य के मुकाबले कम खरीद&nbsp;</strong></p>
<p>राजस्थान में भी 125 रुपये प्रति क्विंटल के बोनस के साथ 2,400 रुपये के रेट पर गेहूं की खरीद हो रही है। राज्य में अब तक 4.52 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है जो पिछले साल से अधिक है लेकिन देश में कुल गेहूं खरीद का मात्र 2.25 फीसदी है।</p>
<p>इसी तरह उत्तर प्रदेश में 5.97 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है जो 60 लाख टन गेहूं खरीद के लक्ष्य का मात्र 10 फीसदी है। उत्तर प्रदेश में गेहूं खरीद का मूल्य मध्यप्रदेश और राजस्थान से कम होने की वजह से किसान तुरंत गेहूं बेचने की बजाए अच्छे भाव की उम्मीद में स्टॉक कर रहे हैं। यह यूपी में गेहूं खरीद कम होने की वजह सकती है।</p>
<p>मध्यप्रदेश, <span>राजस्थान और उत्तर प्रदेश में कुल मिलाकर करीब 48 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है जबकि तीनों राज्यों से कुल 160 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य है। इन राज्यों से कम खरीद को देखते हुए लक्ष्य पूरा होना मुश्किल लग रहा है। &nbsp;</span></p>
<p><strong>पंजाब, हरियाणा पर बढ़ी निर्भरता&nbsp;</strong></p>
<p>गेहूं खरीद के मामले में पंजाब और हरियाणा पर दारोमदार बढ़ गया है। हरियाणा में करीब 60 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है जो 70 लाख टन तक पहुंच सकती है। हरियाणा और पंजाब से अब तक करीब 155-160 लाख टन गेहूं खरीदा गया है जो सीजन के आखिर तक 200 लाख टन तक पहुंच सकता है। इस तरह देश में गेहूं की कुल खरीद 270-280 लाख टन के आसपास रह सकती है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>गेहूं की सर्वाधिक खरीद अप्रैल-मई इन दो महीनों में होती है। अप्रैल का महीना समाप्त हो चुका है और कुल खरीद लक्ष्य के मुकाबले करीब 171 लाख टन कम हुई है। लगभग यही स्थिति पिछले साल थी जब 261.97 <span>लाख टन गेहूं खरीदा गया था जबकि लक्ष्य </span>341.50 <span>लाख टन खरीद का रखा गया था। </span>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं खरीद में केंद्र के लिए चुनौती बने तीन भाजपा शासित राज्य, पंजाब पर बढ़ा दारोमदार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र ने बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात समेत छह देशों को 99,150 टन प्याज निर्यात की अनुमति दी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centre-allows-export-of-99150-mt-onion-to-six-countries-including-bangladesh-and-uae.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 28 Apr 2024 09:54:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centre-allows-export-of-99150-mt-onion-to-six-countries-including-bangladesh-and-uae.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सरकार ने छह पड़ोसी देशों बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), भूटान, बहरीन, मॉरीशस और श्रीलंका को 99,150 मीट्रिक टन प्याज के निर्यात की अनुमति दी है। पिछले वर्ष की तुलना में 2023-24 में खरीफ एवं रबी फसलों की अनुमानित कम उपज को देखते हुए घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्याज निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था।<br />उपभोक्ता मंत्रालय की तरफ से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन देशों को निर्यात के लिए आवंटित कोटे की आपूर्ति गंतव्य देशों की मांग के अनुसार की जा रही है। महाराष्ट्र देश में प्याज का सबसे बड़ा उत्पादक है। इसलिए निर्यात के लिए एनसीईएल को सबसे ज्यादा आपूर्ति महाराष्ट्र की तरफ से की गई है।<br />इन देशों को प्याज का निर्यात करने वाली एजेंसी, नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीईएल) ने ई-प्लेटफॉर्म के माध्यम से निर्यात किए जाने वाले घरेलू प्याज को एल1 कीमतों पर खरीदा। इसने गंतव्य देशों की सरकारों द्वारा नामित एजेंसी या एजेंसियों को शत-प्रतिशत अग्रिम भुगतान के आधार पर तय दर पर आपूर्ति की। एनसीईएल द्वारा खरीदारों को दरों की पेशकश गंतव्य बाजार और अंतरराष्ट्रीय एवं घरेलू बाजारों में प्रचलित कीमतों को ध्यान में रखकर की जाती है।&nbsp;<br />सरकार ने मध्य-पूर्व और कुछ यूरोपीय देशों के निर्यात बाजारों के लिए विशेष रूप से उगाए गए 2000 मीट्रिक टन सफेद प्याज के निर्यात की भी अनुमति दी थी। पूरी तरह से निर्यात उन्मुख होने के कारण, सफेद प्याज की उत्पादन लागत अधिक होती है। इसका बीज महंगा होता है और इसमें अच्छी कृषिगत पद्धति (जीएपी) भी अपनानी पड़ती है। इसके अलावा सख्त अधिकतम अवशेष सीमा (एमआरएल) संबंधी आवश्यकताओं के अनुपालन के कारण भी अन्य प्याज की तुलना में इसकी लागत अधिक होती है।<br />उपभोक्ता कार्य विभाग के मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के तहत रबी-2024 में से प्याज की बफर खरीद का लक्ष्य इस वर्ष पांच लाख टन निर्धारित किया गया है। केन्द्रीय एजेंसियां यानी एनसीसीएफ और एनएएफईडी किसी भी भंडारण-योग्य प्याज की खरीद शुरू करने के लिए खरीद, भंडारण और किसानों के पंजीकरण के लिए एफपीओ, एफपीसी, पीएसी जैसी स्थानीय एजेंसियों को साथ जोड़ रही हैं। डीओसीए, एनसीसीएफ और एनएएफईडी की एक उच्चस्तरीय टीम ने पीएसएफ बफर के लिए पांच लाख टन प्याज की खरीद के बारे में किसानों, एफपीओ, एफपीसी और पीएसी के बीच जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से 11-13 अप्रैल, 2024 के दौरान महाराष्ट्र के नासिक और अहमदनगर जिलों का दौरा किया था।<br />प्याज के भंडारण में होने वाली हानि को कम करने के लिए, उपभोक्ता कार्य विभाग ने बीएआरसी, मुंबई के तकनीकी सहयोग से विकिरणित और ठंडे भंडारण वाले स्टॉक की मात्रा को पिछले वर्ष के 1200 मी. टन से बढ़ाकर इस वर्ष 5000 मी. टन से अधिक करने का निर्णय लिया। पिछले वर्ष शुरू की गई प्याज को विकिरणित व शीत भंडारण करने के पायलट प्रोजेक्ट के परिणामस्वरूप भंडारण में होने वाला नुकसान घटकर 10 प्रतिशत से भी कम रह गया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e3179e46aad.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र ने बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात समेत छह देशों को 99,150 टन प्याज निर्यात की अनुमति दी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e3179e46aad.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों की दोगुनी आय के दावों पर उठे सवाल, आईसीएआर ने गठित की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/questions-raised-on-farmers-claims-of-doubling-income-icar-formed-fact-finding-committee.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 20 Apr 2024 15:00:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/questions-raised-on-farmers-claims-of-doubling-income-icar-formed-fact-finding-committee.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2016 में किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा की थी, जिसका समय 2022 में समाप्त हो गया। तभी से ही इस दावे को लेकर विपक्षी दल और किसान संगठन सवाल उठाते रहे हैं। वहीं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने ऐसे 75 हजार किसानों का एक दस्तावेज जारी किया था, जिनकी आय दोगुनी हो गई है। लेकिन पिछले दिनों एक मीडिया रिपोर्ट में उन किसानों की जमीनी पड़ताल करते हुए आईसीएआर के दावे पर सवाल खड़े कर दिये।</p>
<p>किसानों की दोगुनी आय के दावों को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। ऐसे में आईसीएआर ने किसानों की दोगुनी आय संबंधी दस्तावेज के तथ्यों और आंकड़ों की पुष्टि के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की है। आईसीएआर द्वारा 19 अप्रैल को एक ऑफिस आर्डर जारी कर कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी के तहत हरियाणा में गुरूग्राम और उत्तर प्रदेश में गौतम बुद्ध नगर के लिए दो-दो टीम बनाई गई हैं। यह टीम 20 अप्रैल को इन स्थानों पर जाकर जानकारी हासिल करेंगी और 22 अप्रैल, 2024 यानी सोमवार को अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप देंगी।</p>
<p>इस आर्डर में कहा गया है कि कंपिटेंट अथारिटी ने एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की है जो किसानों की आय दोगुना होने के दस्तावेज के तथ्यों की सत्यता जानने के लिए संबंधित किसानों के साथ बातचीत कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके लिए गुरूग्राम और गौतम बुद्ध नगर को चुना गया है। दोनों जगह&nbsp; लिए दो-दो टीम बनाई गई हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x_662387291ebd0.jpg" alt="" /></p>
<p>गुरूग्राम की टीम-एक की चेयरमैन इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएआरआई) की एक्सटेंशन की पूर्व प्रमुख डॉ. प्रेमलता सिंह होंगी वहीं उनके साथ दूसरे सदस्य कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में एडिशनल कमिश्नर (एक्सटेंशन) डॉ. वाई आर मीणा होंगे। गुरूग्राम की दूसरी टीम के चेयरमैन योजना आयोग के पूर्व सलाहकार डॉ वी वी सदामते होंगे। उनके साथ सदस्य कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में डायरेक्टर एस के मिश्रा होंगे।</p>
<p>गौतम बुद्ध नगर के लिए टीम-एक के चेयरमैन जम्मू स्थित शेरे कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एसकेयूएएसटी) के वाइस चांसलर डॉ जे पी शर्मा हैं जिनके साथ कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के एडिशनल कमिश्नर (एक्सटेंशन) डॉ संजय कुमार दूसरे सदस्य हैं। गौतम बुद्ध नगर की टीम दो में डॉ. एस के सिंह चैयरमैन हैं और उसके साथ कृषि मंत्रालय के ज्वाइंट कमिश्नर (एक्सटेंशन) डॉ वेणु प्रसाद दूसरे सदस्य हैं।</p>
<p>आदेश के मुताबिक कमेटी के सदस्य 20 अप्रैल को मौके पर जाएंगे और 22 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे। अब देखना है कि क्या आईसीएआई की कमेटी उन किसानों को खोज पाती है या नहीं जिनकी आय दोगुनी हुई है। लोकसभा चुनाव के बीच किसानों की आय का मुद्दा राजनीतिक तौर पर भी मायने रखता है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_662386cc61fe0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों की दोगुनी आय के दावों पर उठे सवाल, आईसीएआर ने गठित की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_662386cc61fe0.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी उत्पादन घटने के आसार, देश भर में 448 चीनी मिलों में पेराई पूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sugar-production-likely-to-remain-low-448-sugar-mills-closed-across-the-country.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 17 Apr 2024 16:18:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sugar-production-likely-to-remain-low-448-sugar-mills-closed-across-the-country.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सरकार द्वारा एथेनॉल के लिए उपयोग होने वाली चीनी की मात्रा को 45 लाख टन से घटाकर 17 लाख टन कर देने के बावजूद चालू पेराई सीजन (2023-24) में चीनी का उत्पादन पिछले साल से कम रहने के आसार बन रहे हैं। चालू सीजन में 15 अप्रैल तक देश भर में<strong> 448 चीनी मिलें</strong> अपना पेराई सत्र पूरा कर बंद हो चुकी हैं जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 47 अधिक है।</p>
<p><strong>पिछले साल</strong> 15 अप्रैल तक 401 चीनी मिलें बंद हुई थीं। सबसे अधिक तेजी से<strong> उत्तर प्रदेश</strong> में चीनी मिलें बंद हो रही हैं। यहां 15 अप्रैल तक 79 चीनी मिलें पेराई बंद कर सत्र समाप्त कर चुकी हैं और 42 मिलें पेराई कर रही हैं। जबकि पिछले साल 15 अप्रैल तक यूपी में 77 चीनी मिलें पेराई कर रही थीं और 40 मिलें ही बंद हुई थीं। राज्य में पिछले साल जहां 117 चीनी मिलों में पेराई हुई थी जबकि इस साल यह संख्या 121 मिलों की थी।</p>
<p><strong>इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा)</strong> के मुताबिक, 15 अप्रैल तक देश भर में चीनी का कुल उत्पादन <strong>310.93 लाख टन</strong> रहा है जबकि पिछले साल उक्त तिथि तक देश में कुल चीनी उत्पादन 312.38 लाख टन रहा था। देश में इस साल गन्ना उत्पादन में आई कमी के चलते चीनी उत्पादन कम रहा है। हालांकि कीमतों में बढ़ोतरी पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने दिसंबर, 2023 में एक आदेश जारी कर गन्ने के रस से सीधे <strong>ऐथनॉल</strong> बनाने पर रोक लगा दी थी। इस साल एथेनॉल उत्पादन के लिए 17 लाख टन चीनी की मात्रा तय की गई है जबकि पिछले साल 45 लाख टन चीनी का डायवर्जन एथेनॉल उत्पादन के लिए किया गया था।</p>
<p style="text-align: center;"><strong>State-wise Sugar Production</strong></p>
<table width="505" height="552" style="height: 518px;">
<tbody>
<tr style="height: 52px;">
<td style="text-align: center; width: 82.4844px; height: 52px;">
<p><strong>YTD</strong></p>
</td>
<td colspan="4" style="text-align: center; width: 243.938px; height: 52px;">
<p><strong>15<sup>th</sup> April&rsquo; 2024</strong></p>
</td>
<td colspan="4" style="text-align: center; width: 243.938px; height: 52px;">
<p><strong>15<sup>th</sup> April&rsquo; 2023</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td style="text-align: center; width: 82.4844px; height: 48px;">
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
</td>
<td colspan="3" style="text-align: center; width: 167.047px; height: 48px;">
<p><strong>Number of Factories</strong></p>
</td>
<td style="text-align: center; width: 73.8906px; height: 48px;">
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
</td>
<td colspan="3" style="text-align: center; width: 167.047px; height: 48px;">
<p><strong>Number of Factories</strong></p>
</td>
<td style="width: 73.8906px; height: 48px;">
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 88px;">
<td style="text-align: center; width: 82.4844px; height: 88px;">
<p><strong>ZONE</strong></p>
</td>
<td style="text-align: center; width: 48.2344px; height: 88px;">
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>Started</strong></p>
</td>
<td style="text-align: center; width: 46.6875px; height: 88px;">
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>Closed</strong></p>
</td>
<td style="text-align: center; width: 66.125px; height: 88px;">
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>Operating</strong></p>
</td>
<td style="text-align: center; width: 73.8906px; height: 88px;">
<p><strong>Sugar Production (Lac Tons)</strong></p>
</td>
<td style="text-align: center; width: 48.2344px; height: 88px;">
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>Started</strong></p>
</td>
<td style="text-align: center; width: 46.6875px; height: 88px;">
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>Closed</strong></p>
</td>
<td style="text-align: center; width: 66.125px; height: 88px;">
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>Operating</strong></p>
</td>
<td style="text-align: center; width: 73.8906px; height: 88px;">
<p><strong>Sugar Production (Lac Tons)</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td style="width: 82.4844px; height: 48px;">
<p>U.P.</p>
</td>
<td style="width: 48.2344px; height: 48px;">
<p>121</p>
</td>
<td style="width: 46.6875px; height: 48px;">
<p>79</p>
</td>
<td style="width: 66.125px; height: 48px;">
<p>42</p>
</td>
<td style="width: 73.8906px; height: 48px;">
<p>101.45</p>
</td>
<td style="width: 48.2344px; height: 48px;">
<p>117</p>
</td>
<td style="width: 46.6875px; height: 48px;">
<p>40</p>
</td>
<td style="width: 66.125px; height: 48px;">
<p>77</p>
</td>
<td style="width: 73.8906px; height: 48px;">
<p>96.70</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td style="width: 82.4844px; height: 48px;">
<p>Maharashtra&nbsp;</p>
</td>
<td style="width: 48.2344px; height: 48px;">
<p>207</p>
</td>
<td style="width: 46.6875px; height: 48px;">
<p>192</p>
</td>
<td style="width: 66.125px; height: 48px;">
<p>15</p>
</td>
<td style="width: 73.8906px; height: 48px;">
<p>109.20</p>
</td>
<td style="width: 48.2344px; height: 48px;">
<p>211</p>
</td>
<td style="width: 46.6875px; height: 48px;">
<p>211</p>
</td>
<td style="width: 66.125px; height: 48px;">
<p>0</p>
</td>
<td style="width: 73.8906px; height: 48px;">
<p>105.90</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td style="width: 82.4844px; height: 48px;">
<p>Karnataka</p>
</td>
<td style="width: 48.2344px; height: 48px;">
<p>76</p>
</td>
<td style="width: 46.6875px; height: 48px;">
<p>76</p>
</td>
<td style="width: 66.125px; height: 48px;">
<p>0</p>
</td>
<td style="width: 73.8906px; height: 48px;">
<p>50.60</p>
</td>
<td style="width: 48.2344px; height: 48px;">
<p>75</p>
</td>
<td style="width: 46.6875px; height: 48px;">
<p>73</p>
</td>
<td style="width: 66.125px; height: 48px;">
<p>2</p>
</td>
<td style="width: 73.8906px; height: 48px;">
<p>54.95</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td style="width: 82.4844px; height: 48px;">
<p>Gujarat&nbsp;&nbsp;</p>
</td>
<td style="width: 48.2344px; height: 48px;">
<p>17</p>
</td>
<td style="width: 46.6875px; height: 48px;">
<p>17</p>
</td>
<td style="width: 66.125px; height: 48px;">
<p>0</p>
</td>
<td style="width: 73.8906px; height: 48px;">
<p>9.19</p>
</td>
<td style="width: 48.2344px; height: 48px;">
<p>16</p>
</td>
<td style="width: 46.6875px; height: 48px;">
<p>15</p>
</td>
<td style="width: 66.125px; height: 48px;">
<p>1</p>
</td>
<td style="width: 73.8906px; height: 48px;">
<p>9.98</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td style="width: 82.4844px; height: 48px;">
<p>Tamil Nadu</p>
</td>
<td style="width: 48.2344px; height: 48px;">
<p>29</p>
</td>
<td style="width: 46.6875px; height: 48px;">
<p>13</p>
</td>
<td style="width: 66.125px; height: 48px;">
<p>16</p>
</td>
<td style="width: 73.8906px; height: 48px;">
<p>8.60</p>
</td>
<td style="width: 48.2344px; height: 48px;">
<p>29</p>
</td>
<td style="width: 46.6875px; height: 48px;">
<p>1</p>
</td>
<td style="width: 66.125px; height: 48px;">
<p>28</p>
</td>
<td style="width: 73.8906px; height: 48px;">
<p>10.10</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td style="width: 82.4844px; height: 48px;">
<p>Others</p>
</td>
<td style="width: 48.2344px; height: 48px;">
<p>82</p>
</td>
<td style="width: 46.6875px; height: 48px;">
<p>71</p>
</td>
<td style="width: 66.125px; height: 48px;">
<p>11</p>
</td>
<td style="width: 73.8906px; height: 48px;">
<p>31.89</p>
</td>
<td style="width: 48.2344px; height: 48px;">
<p>85</p>
</td>
<td style="width: 46.6875px; height: 48px;">
<p>61</p>
</td>
<td style="width: 66.125px; height: 48px;">
<p>24</p>
</td>
<td style="width: 73.8906px; height: 48px;">
<p>34.75</p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 48px;">
<td style="width: 82.4844px; height: 48px;">
<p><strong>ALL INDIA</strong></p>
</td>
<td style="width: 48.2344px; height: 48px;">
<p><strong>532</strong></p>
</td>
<td style="width: 46.6875px; height: 48px;">
<p><strong>448</strong></p>
</td>
<td style="width: 66.125px; height: 48px;">
<p><strong>84</strong></p>
</td>
<td style="width: 73.8906px; height: 48px;">
<p><strong>310.93</strong></p>
</td>
<td style="width: 48.2344px; height: 48px;">
<p><strong>533</strong></p>
</td>
<td style="width: 46.6875px; height: 48px;">
<p><strong>401</strong></p>
</td>
<td style="width: 66.125px; height: 48px;">
<p><strong>132</strong></p>
</td>
<td style="width: 73.8906px; height: 48px;">
<p><strong>312.38</strong></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>इस साल देश भर में <strong>532 चीनी मिलों</strong> ने पेराई शुरू की थीं। इनमें से 488 चीनी मिलें 15 अप्रैल तक पेराई पूरी कर चुकी हैं और 84 फैक्टरियों में पेराई चल रही है। वहीं पिछले साल पेराई शुरू करने वाली चीनी मिलों की संख्या 533 थी। इनमें से 15 अप्रैल तक 401 चीनी मिलं बंद हो चुकी थीं जबकि 132 चीनी मिलों में पेराई चल रही थी। इस प्रकार 15 अप्रैल तक चल रही चीनी मिलों की संख्या पिछले साल के मुकाबले 48 कम है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>इस्मा</strong> के मुताबिक,&nbsp;इस वर्ष अप्रैल के पहले पखवाड़े में चीनी मिलों के बंद होने की गति पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक रही है। इस अवधि में 128 मिलों ने पेराई बंद कर दी जबकि पिछले साल 55 चीनी मिलें बंद हुई थीं।</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश</strong> में चीनी मिलें तेजी से बंद होने की एक बड़ी वजह गन्ना उत्पादन में कमी के साथ ही गुड़ और खांडसारी इकाइयों द्वारा गन्ने का बेहतर मूल्य देना और नकद भुगतान रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुड़ और खांडसारी इकाइयों ने राज्य सरकार द्वारा तय 370 रुपये प्रति क्विंटल के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) से भी अधिक दाम किसानों को दिया। गुड़ की मांग के चलते इसके दाम 50 रूपये किलो को पार कर गये और इसका फायदा गुड़ इकाइयों ने उठाया।</p>
<p>पिछले सप्ताह तक शामली जिले की एक चीनी मिल ने किसानों को 400 रुपये और 420 रुपये प्रति क्विंटल तक गन्ना मूल्य का भुगतान किया। चीनी मिलों के बीच गन्ना आपूर्ति को लेकर अभी भी जबरदस्त <strong>प्रतिस्पर्धा</strong> रही है। कमजोर गन्ना उत्पादन को देखते हुए अगले कुछ दिनों में ही राज्य की अधिकांश चीनी मिलें बंद हो सकती हैं जिसके चलते चीनी उत्पादन पिछले साल से कम रहेगा। वहीं महाराष्ट्र में नवंबर और दिसंबर में बारिश होने से गन्ना की फसल को फायदा हुआ है और वहां उत्पादन बेहतर रहने के आसार हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65b0dcc3a49c8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी उत्पादन घटने के आसार, देश भर में 448 चीनी मिलों में पेराई पूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65b0dcc3a49c8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सामान्य से बेहतर मानूसन का अनुमान, लेकिन उत्तर&amp;#45;पश्चिम भारत में कम बारिश के आसार      ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/more-than-normal-rainfall-expected-in-monsoon-but-less-rainfall-expected-in-north-west-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 15 Apr 2024 18:46:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/more-than-normal-rainfall-expected-in-monsoon-but-less-rainfall-expected-in-north-west-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मौसम विभाग (आईएमडी) ने मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। मानसून सीजन (जून-सितंबर) के दौरान सामान्य से अधिक बारिश की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, <span>आगामी मानसून सीजन के दौरान पूरे देश में दीर्घावधि औसत </span>(<span>एलपीए</span>) <span>का </span>106 <span>फीसदी बारिश होने का अनुमान है। अनुकूल ला-नीना स्थितियों के कारण इस साल सामान्य से अधिक मानसूनी बारिश हो सकती है। मानसून का सामान्य से बेहतर रहना देश की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है।&nbsp;</span></p>
<p><strong>पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय</strong> के सचिव <strong>एम रविचंद्रन</strong> ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि मानसून की ऋतुनिष्ठ वर्षा दीर्घावधि औसत का 104 फीसदी से अधिक होने की 61 फीसदी उच्च संभावना है। वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र पर अल-नीनो की मध्यम स्थिति बनी हुई है। जलवायु मॉडल से संकेत मिलते हैं कि मानसून सीजन के शुरुआती दिनों तक अल-नीनो कमजोर हो जाएगा। मानसून सीजन के दूसरे हिस्से में ला-नीना स्थितियां विकसित होने की संभावना है। इससे अच्छी बारिश के आसार बन सकते हैं।&nbsp;</p>
<p><span></span>फिलहाल देश के कुछ हिस्से अत्यधिक गर्मी से जूझ रहे हैं। अप्रैल से जून की अवधि में काफी अधिक संख्या में हीटवेव वाले दिनों की आशंका है। पूरे देश में औसत बारिश सामान्य से अधिक होने के बावजूद देश में कई इलाकों को बारिश की कमी का सामना करना पड़ा सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व में कम बारिश की उम्मीद </strong></p>
<p>आईएमडी के महानिदेशक <strong>मृत्युंजय महापात्र</strong> ने कहा कि उत्तर-पश्चिम, <span>पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों में मानसून सीजन के दौरान सामान्य से कम बारिश हो सकती है।&nbsp;</span></p>
<p>जलवायु मॉडलों ने मध्य प्रदेश, <span>राजस्थान</span>, <span>महाराष्ट्र</span>, <span>ओडिशा</span>, <span>छत्तीसगढ़</span>, <span>मध्य प्रदेश</span>, <span>उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों के लिए मानसून वर्षा के बारे में कोई "स्पष्ट संकेत" नहीं दिया है। यह देश का मुख्य मानसून क्षेत्र है जहां कृषि काफी हद तक वर्षा आधारित है। </span></p>
<p>महापात्र ने कहा कि आईएमडी मई के मध्य में भारतीय भूभाग पर मानसून की शुरुआत और जून, <span>जुलाई</span>, <span>अगस्त और सितंबर के दौरान वर्षा पर अपडेट देगा।&nbsp;</span></p>
<p><strong>ला-नीना से अधिक बारिश की संभावना </strong></p>
<p>पिछले 72 साल के मौसम के आंकड़ों से पता चलता है कि जब अल-नीनो के बाद ला-नीना की घटना हुई, उन सभी नौ मौकों पर मानसून बारिश सामान्य से अधिक रही है। देश में 22<span> में से </span>20 <span>ला-नीना वर्षों में मानसून बारिश सामान्य या सामान्य से अधिक हुई।</span></p>
<p><strong>आईएमडी</strong> के अनुसार, <span>मानसून के मौसम में सामान्य वर्षा की </span>29<span> प्रतिशत संभावना</span>, <span>सामान्य से अधिक वर्षा की </span>31<span> प्रतिशत संभावना और अधिक वर्षा की </span>30<span> प्रतिशत संभावना है। देश में </span>50<span> वर्षों की औसत सालाना बारिश </span>(<span>दीर्घावधि औसत</span>) 87<span> सेमी से </span>96<span>-</span>104<span> प्रतिशत के बीच वर्षा को </span>'<span>सामान्य</span>' <span>माना जाता है। दीर्घावधि औसत के </span>90<span> प्रतिशत से कम वर्षा को </span>'<span>कम</span>' <span>माना जाता है जबकि </span>105<span> प्रतिशत से </span>110<span> प्रतिशत के बीच </span>'<span>सामान्य से अधिक</span>' <span>और </span>110<span> प्रतिशत से अधिक वर्षा को </span>'<span>अत्यधिक</span>' <span>वर्षा माना जाता है।</span>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_661d289ed4d67.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सामान्य से बेहतर मानूसन का अनुमान, लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत में कम बारिश के आसार       ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_661d289ed4d67.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोमवार से दालों के स्टॉक की निगरानी, सचिव ने की उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बैठक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-to-monitor-pulses-stock-since-monday-as-the-secretary-meets-industry-representatives.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 14 Apr 2024 20:41:44 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-to-monitor-pulses-stock-since-monday-as-the-secretary-meets-industry-representatives.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">सरकार सोमवार, 15 अप्रैल से दालों के स्टॉक की ऑनलाइन निगरानी करने जा रही है। उपभोक्ता कार्य विभाग की सचिव निधि खरे ने इस सिलसिले में दाल उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की है। बैठक में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दालों के वायदा व्यापार में संलिप्&zwj;त पाए जाने वाले व्यक्ति के साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कड़ाई से निपटा जाएगा। तथ्&zwj;यों की अतिरिक्&zwj;त पुष्टि के लिए स्टॉक की स्थिति के संबंध में उद्योग जगत से प्राप्&zwj;त फीडबैक और बाजार के विभिन्न प्रतिभागियों से जानकारी एकत्र की गई है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आयातकों और उद्योग जगत के अन्य प्रतिभागियों जैसे मिल मालिकों, स्टॉकिस्टों, खुदरा विक्रेताओं आदि से https://fcainfoweb.nic.in/psp/ पोर्टल पर 15 अप्रैल, 2024 से साप्ताहिक आधार पर आयातित पीली मटर सहित दालों के अपने स्टॉक की ईमानदारी से घोषणा करने को कहा गया है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भी सभी स्टॉकहोल्डिंग संस्थाओं द्वारा साप्ताहिक स्टॉक प्रकटीकरण लागू करने और उनके द्वारा घोषित स्टॉक को सत्यापित करने को कहा गया है। प्रमुख बंदरगाहों और दाल उद्योग केंद्रों में स्थित गोदामों में स्टॉक को समय-समय पर सत्यापित किया जाना चाहिए और स्टॉक प्रकटीकरण पोर्टल पर गलत जानकारी देने वाली स्टॉकहोल्डिंग संस्थाओं पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सचिव ने म्यांमार से दालों के आयात के संबंध में संशोधित विनिमय दरों और म्यांमार में आयातकों द्वारा रखे गए स्टॉक के मद्देनजर आयात की कीमतों जैसे मुद्दों पर यांगून में भारतीय मिशन के साथ भी चर्चा की है। भारतीय मिशन ने बताया कि कारोबारी लेनदेन को सरल और अधिक कुशल बनाने के लिए रुपया-क्यात निपटान तंत्र 25 जनवरी, 2024 से चालू कर दिया गया है। सेंट्रल बैंक ऑफ म्यांमार ने स्पेशल रुपी वोस्ट्रो अकाउंट (एसआरवीए) के तहत भुगतान प्रक्रियाओं के लिए 26 जनवरी, 2024 को दिशानिर्देश जारी किए हैं। नया तंत्र समुद्र और सीमा व्यापार, दोनों और वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं के व्यापार पर भी लागू होगा। व्यापारियों द्वारा तंत्र को अपनाने से मुद्रा रूपांतरण से संबंधित लागत में कमी आएगी और कई मुद्रा रूपांतरणों की आवश्यकता को समाप्त करके विनिमय दरों से संबंधित जटिलताओं को समाप्&zwj;त कर दिया जाएगा।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">विभाग की तरफ से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस तंत्र के संचालन के बारे में व्यापारिक समुदायों विशेषकर दालों के आयातकों के बीच अलग से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, जिसमें उनसे पंजाब नेशनल बैंक के माध्यम से एसआरवीए का उपयोग करके रुपया-क्यात प्रत्यक्ष भुगतान प्रणाली का उपयोग करने का अनुरोध किया जा रहा है।</span></p>
<p><br /><br /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_60e1e2ee11b84.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोमवार से दालों के स्टॉक की निगरानी, सचिव ने की उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बैठक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत में सूरजमुखी तेल का रिकॉर्ड आयात, तिलहन किसान एमएसपी से वंचित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/record-import-of-sunflower-oil-in-india-farmers-deprived-of-oilseed-msp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 12 Apr 2024 15:06:28 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/record-import-of-sunflower-oil-in-india-farmers-deprived-of-oilseed-msp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एक तरफ देश के तिलहन किसान उपज के एमएसपी से वंचित हैं, वहीं पिछले दो महीनों में देश में सूरजमुखी तेल का रिकॉर्ड मात्रा में आयात हुआ। मार्च महीने में सूरजमुखी तेल का आयात 50 फीसदी बढ़कर 4.45 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, इस दौरान पाम ऑयल के आयात में 2.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अधिक होने के कारण पाम ऑयल का आयात घटा है, लेकिन दूसरी तरफ सूरजमुखी और सोयाबीन तेल का आयात बढ़ गया है। यह भारत के तिलहन किसानों के सामने एक नई चुनौती है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>खाद्य तेल उद्योग के संगठन <strong>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया </strong><strong>(</strong><strong>एसईए</strong><strong>) </strong>के मुताबिक, चालू तेल वर्ष 2023-24 में (नवंबर से मार्च तक) देश में 57.65 लाख टन <strong>खाद्य तेलों</strong> का आयात हुआ, जो पिछले वर्ष इस अवधि में हुए 69.80 लाख टन आयात से 17.40 फीसदी कम है। लेकिन इस दौरान <strong>सूरजमुखी</strong> <strong>तेल</strong> का आयात 13.52 लाख टन तक पहुंचा गया जो पिछले साल 11.17 लाख था। इस तरह पांच महीनों में सूरजमुखी तेल का आयात 21 फीसदी बढ़ा है। चालू तेल वर्ष में <strong>पाम ऑयल</strong> का आयात 19.77 फीसदी घटकर 35.20 लाख टन रह गया।&nbsp;</p>
<p>एसईए के कार्यकारी निदेशक <strong>बी.वी. मेहता</strong> का कहना है कि इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे उत्पादक देशों में पाम ऑयल के कम उत्पादन और घटते स्टॉक के कारण ऊंची कीमतों के चलते भारतीय खरीदार पाम तेल की बजाय सूरजमुखी तेल को प्रमुखता दे रहे हैं। वैश्विक बाजार में पाम ऑयल सूरजमुखी तेल से करीब 70 डॉलर प्रति टन महंगा है।</p>
<p><strong> 50 फीसदी बढ़ा&nbsp;सूरजमुखी तेल का आयात</strong></p>
<p>मार्च महीने में देश में <strong>खाद्य तेलों</strong> का कुल आयात फरवरी की तुलना में 18.82 फीसदी बढ़कर छह महीने के उच्चतम स्तर 11.49 लाख टन तक पहुंच गया है। इसके पीछे सूरजमुखी और सोयाबीन तेल के आयात में हुई बढ़ोतरी वजह है। मार्च में <strong>सूरजमुखी तेल</strong> का आयात 50 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 4.45 लाख टन तक पहुंच गया। इससे पहले फरवरी में 2.97 लाख टन सूरजमुखी तेल का आयात हुआ था। यानी दो महीनों में 7.42 लाख टन सूरजमुखी तेल का आयात देश में हुआ। यह स्थिति तब है जबकि<strong> सरसों</strong> उगाने वाले देश के किसान एमएसपी से नीचे उपज बेचने को मजबूर हैं।&nbsp;</p>
<p>मार्च में करीब 4.85 लाख टन <strong>पाम ऑयल</strong> का आयात हुआ, जो फरवरी में हुए 4.97 लाख टन आयात से करीब 2.5 फीसदी कम है। इस तरह अब पाम और सूरजमुखी तेल के आयात के बीच कम ही अंतर रह गया है। सोयाबीन तेल का आयात मार्च में 26.4 फीसदी बढ़कर 2.18 लाख टन हो गया। खाद्य तेलों में आधे से अधिक आयात अब सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे सॉफ्ट ऑयल का हो रहा है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>मध्य प्रदेश के किसान नेता <strong>केदार सिरोही</strong> का कहना है कि एक तरफ सरकार खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की बात करती है जबकि दूसरी तरफ सूरजमुखी और सोयाबीन तेल का आयात बढ़ने की खबरें आ रही हैं। ऐसे में देश के तिलहन किसानों को सही भाव कैसे मिलेगा। सरकार का आत्मनिर्भरता का दावा भी खोखला साबित हुआ है। सरसों उगाने वाले किसानों को एमएसपी भी नहीं मिल पा रहा है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>खाद्य तेलों में आयात निर्भरता</strong></p>
<p><strong>इंडोनेशिया</strong> और <strong>मलेशिया</strong> में कमजोर उत्पादन के कारण पाम ऑयल के दाम पिछले कुछ सप्ताह से बढ़े हैं। इस समय क्रूड पाम ऑयल का दाम 1,045 डॉलर प्रति टन है, जबकि कच्चे सूरजमुखी तेल का दाम 975 डॉलर प्रति टन और कच्चे सोयाबीन तेल का दाम 1,025 डॉलर प्रति टन हैं। इसलिए पाम ऑयल के मुकाबले सूरजमुखी और सोयाबीन तेल का आयात बढ़ा है।&nbsp;</p>
<p><strong>भारत</strong> दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेलों का आयातक है जो अपनी जरूरत का करीब <strong>57 फीसदी</strong> आयात से पूरा करता है। भारत में पाम ऑयल इंडोनेशिया और मलेशिया से, सूरजमुखी तेल रूस और यूक्रेन से तथा सोयाबीन तेल अर्जेंटीना व ब्राजील से आयात होता है।</p>
<p>भारत सरकार ने खाद्य तेलों के लिए कम <strong>आयात शुल्क</strong> की व्यवस्था को मार्च, 2025 तक बढ़ा दिया है। सरकार के इस कदम से खाद्य तेल के आयात को बढ़ावा मिला है। जबकि तिलहन फसलें उगाने वाले किसानों को सही भाव नहीं मिल पा रहा है। बाजार में नई फसल आने के समय सरसों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी नीचे गिर चुके हैं।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत में सूरजमुखी तेल का रिकॉर्ड आयात, तिलहन किसान एमएसपी से वंचित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट में रामदेव और बालकृष्ण का माफीनामा अस्वीकार, पकड़ा गया झूठ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/ramdev-and-balkrishna-apology-rejected-in-supreme-court-lie-caught.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 10 Apr 2024 16:42:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/ramdev-and-balkrishna-apology-rejected-in-supreme-court-lie-caught.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भ्रामक विज्ञापन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने योग गुरु रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक बालकृष्ण की माफी को अस्वीकार कर दिया है। जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कहा कि माफीनामा केवल "कागज पर" है और कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें।</p>
<p>सुनवाई के दौरान रामदेव और बालकृष्ण के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि रामदेव और बालकृष्ण सार्वजनिक माफी मांगने के लिए तैयार हैं। लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। अदालत ने मामले की दोबारा सुनवाई 16 अप्रैल को तय की। अदालत ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि जब पतंजलि कंपनी पूरे जोर-शोर से यह कह रही थी कि एलोपैथी में कोविड का कोई इलाज नहीं है, तब केंद्र ने अपनी आंखें बंद क्यों रखीं।&nbsp;</p>
<p>रामदेव और बालकृष्ण ने अदालत की रोक के बावजूद पतंजलि की दवाओं के बारे में प्रकाशित विज्ञापनों को लेकर अदालत के समक्ष "बिना शर्त माफी" मांगी है। पीठ ने रामदेव और बालकृष्ण की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से कहा, "हम इसे स्वीकार करने या माफ करने से इनकार करते हैं। हम इसे आदेश का जानबूझकर किया गया उल्लंघन मानते हैं।"&nbsp;</p>
<p>रामदेव और बालकृष्ण ने विदेश यात्रा के झूठे दावे कर कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत हाजरी से बचने की कोशिश की। लेकिन उनका यह झूठ भी कोर्ट में पकड़ा गया। कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद, उन्होंने इस आधार पर "व्यक्तिगत उपस्थिति से बचने" का प्रयास किया कि वे विदेश यात्रा कर रहे थे। कोर्ट ने पाया कि यद्यपि आवेदन 30 मार्च को दायर किए गए थे, लेकिन हवाई यात्रा के टिकटों पर 31 मार्च की तारीख थी।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि और दिव्य फार्मेसी के भ्रामक विज्ञापनों पर एक्शन ना लेने के लिए उत्तराखंड सरकार की लाइसेंस अथॉरिटी को भी फटकार लगाई। अदालत ने कहा, "हम यह जानकर चकित हैं कि फाइलों को आगे बढ़ाने के अलावा, राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने कुछ नहीं किया और चार-पांच साल से इस मुद्दे पर "गहरी नींद" में था। पीठ ने पूछा कि उसे यह क्यों नहीं सोचना चाहिए कि अधिकारी पतंजलि/दिव्य फार्मेसी के साथ ''मिले हुए'' थे। अदालत ने निर्देश दिया कि 2018 से आज तक राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण, हरिद्वार के संयुक्त निदेशक का पद संभालने वाले सभी अधिकारी निष्क्रियता को लेकर हलफनामा दाखिल करें।&nbsp;</p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_6616a4d5718a5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट में रामदेव और बालकृष्ण का माफीनामा अस्वीकार, पकड़ा गया झूठ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अगले चार दिनों तक कई राज्यों में आंधी, बारिश के आसार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/meteorological-department-forecasts-storm-and-rain-in-many-states-for-four-days.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 08 Apr 2024 17:09:06 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/meteorological-department-forecasts-storm-and-rain-in-many-states-for-four-days.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अचानक बढ़ी गर्मी के बाद अगले कुछ दिनों में मौसम तेजी से करवट बदल सकता है। मौसम विभाग ने देश के पूर्वी, मध्&zwj;य और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में अगले चार दिन में आंधी-तूफान और ओलावृष्टि के साथ हल्&zwj;की से मध्&zwj;यम वर्षा का अनुमान जताया है। मध्&zwj;य प्रदेश, छत्&zwj;तीसगढ़, मराठवाड़ा, विदर्भ, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और महाराष्&zwj;ट्र में 11 अप्रैल तक गरज के साथ <strong>बारिश</strong> हो सकती है। इस दौरान 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। ओडिशा, मध्&zwj;य प्रदेश, विदर्भ, छत्&zwj;तीसगढ़ और मराठवाड़ा के कुछ स्थानों पर आज और कल <strong>ओले</strong> पड़ सकते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>मौसम विभाग</strong> के अनुसार, पूर्वी भारत में आज तथा मध्य व प्रायद्वीपीय भारत में 8 से 11 अप्रैल के दौरान आंधी-तूफान के साथ हल्की से मध्यम<strong> बारिश </strong>होने की संभावना है। अगले 2 दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत में अधिक बारिश/तूफान जारी रहने और उसके बाद तीव्रता में कमी आने की संभावना है। अगले 24 घंटों के दौरान प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में <strong>लू </strong>की स्थिति बनी रहने और उसके बाद कम होने की संभावना है। <strong>13 से 15 अप्रैल </strong>के बीच उत्तर पश्चिम भारत में वर्षा होने की संभावना है।</p>
<p><strong>निचले क्षोभमंडल</strong> स्तर में उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश से रायलसीमा तक दक्षिण तमिलनाडु तक एक ट्रफ/हवा का असंतुलन बना हुआ है। इसके प्रभाव में पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा में गरज, बिजली और तेज हवाओं (30-50 किमी प्रति घंटे) के साथ छिटपुट से लेकर काफी व्यापक हल्की/मध्यम वर्षा होने की संभावना है। <strong>8 </strong><strong>से 12 </strong><strong>अप्रैल</strong> के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ और पश्चिम मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा, मध्य महाराष्ट्र में अलग-अलग स्थानों पर गरज, बिजली और तेज हवाओं (30-50 किमी प्रति घंटे) के साथ छिटपुट से लेकर काफी व्यापक हल्की/मध्यम वर्षा होने की संभावना है। <strong>8 </strong><strong>से 14 </strong><strong>अप्रैल</strong> के दौरान तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में गरज, बिजली और तेज हवाओं (30-50 किमी प्रति घंटे) के साथ छिटपुट हल्की/मध्यम वर्षा होने की संभावना है। आज विदर्भ और छत्तीसगढ़ में अलग-अलग स्थानों पर <strong>ओलावृष्टि</strong> की संभावना है।</p>
<p><strong>हीटवेव और ओलावृष्टि का अलर्ट&nbsp;</strong></p>
<p><span>विदर्भ और छत्तीसगढ़ में आज अलग-अलग स्थानों में <strong>ओलावृष्टि</strong> की संभावना है। जबकि&nbsp;</span><span>तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में आज अलग-अलग स्थानों पर <strong>हीटवेव</strong> की संभावना है। उत्तरी आंतरिक कर्नाटक के अलग-अलग स्थानों में 9 अप्रैल को भी हीटवेव की संभावना है। जबकि तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के अलग-अलग स्थानों में आज हीटवेव की संभावना जताई गई है।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अगले चार दिनों तक कई राज्यों में आंधी, बारिश के आसार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सेंट्रम ब्रोकिंग का आकलन, ऑफ सीजन में बढ़ सकते हैं चीनी के दाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sugar-prices-may-go-up-in-off-season-says-centrum-broking.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 07 Apr 2024 11:27:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sugar-prices-may-go-up-in-off-season-says-centrum-broking.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ऑफ सीजन में चीनी महंगी हो सकती है। यह आकलन है ब्रोकरेज फॉर्म सेंट्रम ब्रोकिंग का। इसने अपनी रिसर्च रिपोर्ट में लिखा है कि घरेलू बाजार में चीनी के दाम फिलहाल स्थिर हो गए हैं। उत्तर प्रदेश में एक्स मिल कीमत 37.5 रुपये प्रति किलो है और महाराष्ट्र में 34 रुपये प्रति किलो। रिपोर्ट के अनुसार सीजन की शुरुआत में चीनी की कीमतों में वृद्धि हुई थी, लेकिन बाद में इसके डायवर्जन पर रोक लगने के बाद कीमतों में गिरावट आई। उसके बाद इसमें स्थिरता आने लगी। गौरतलब है कि दो दिन पहले संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (फाओ) ने अपने मासिक बुलेटिन में बताया कि भारत में चीनी उत्पादन के अनुमानों में बढ़ोतरी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके दाम कम हुए हैं।<br /><a href="https://www.ruralvoice.in/international/higher-international-quotations-for-vegetable-oils-and-dairy-products-more-than-offset-lower-quotations-for-cereals-and-sugar.html"><strong>पढ़ें- विश्व बाजार में अनाज और चीनी के दाम में गिरावट का रुख</strong></a></p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार हाल में उत्तर प्रदेश में चीनी की कीमत 37.53 रुपए प्रति किलो तक गिरने के बाद स्थिर हो गई। पेराई सीजन को देखते हुए इसे प्रॉफिटेबल कीमत कहा जा सकता है। सीजन खत्म होने के बाद ऑफ सीजन में कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। चीनी के सीजन 2023-24 (अक्टूबर से सितंबर) में 31 मार्च तक के राज्यवार पेराई आंकड़ों के अनुसार पिछले महीने के अंत तक 29.5 करोड़ टन गन्ने की पेराई हो चुकी थी। पिछले साल इस समय तक 30.5 करोड़ टन गन्ने की पेराई हुई थी।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/agribusiness/earnings-of-sugar-mills-will-increase-price-of-potash-made-from-molasses-fixed.html"><strong>पढ़ें- बढ़ेगी चीनी मिलों की कमाई, शीरे से बने पोटाश का भाव तय</strong></a></p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए तो चीनी की रिकवरी इस बार पिछले साल से बेहतर हुई है। इसलिए इसमें उत्पादन का अनुमान 317 लाख टन के पिछले अनुमान से बढ़ाकर 320 लाख टन किया गया है। पिछले साल 331 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। अनुमान में यह संशोधन मुख्य रूप से महाराष्ट्र में उत्पादन वृद्धि के कारण किया गया है। हालांकि उत्तर प्रदेश में पिछले पखवाड़े में गन्ना मिलों में पेराई में कमी आई है।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/national/sugarcane-frp-increased-by-rs-25-but-farmers-will-get-lower-price-due-to-less-sugar-recovery.html"><strong>पढ़ें- गन्ने का एफआरपी 25 रुपये बढ़ा</strong></a></p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी सेक्टर पर कुल मिलाकर आउटलुक थोड़ा नेगेटिव है। सरकार के हाल के नोटिफिकेशन से एथेनॉल उत्पादन प्रभावित होने के आसार हैं। इसके अतिरिक्त चीनी उत्पादन बढ़ने से इन्वेंटरी का स्तर बढ़ेगा और इसका असर चीनी की कीमतों में गिरावट के रूप में सामने आएगा। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस सेक्टर के लिए बुरा वक्त बीत चुका है।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_6449e11edd667.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सेंट्रम ब्रोकिंग का आकलन, ऑफ सीजन में बढ़ सकते हैं चीनी के दाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_6449e11edd667.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश के जलाशयों में क्षमता का 35% पानी, दक्षिणी क्षेत्र की स्थिति विकट, सिर्फ 20% भरे हैं यहां के जलाशय]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/reservoirs-are-filled-only-35-pc-of-capacity-southern-region-having-just-20-pc-water-in-crisis.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 07 Apr 2024 10:25:42 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/reservoirs-are-filled-only-35-pc-of-capacity-southern-region-having-just-20-pc-water-in-crisis.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">गर्मियां शुरू होते ही देश के जलाशयों में पानी की कमी दिखने लगी है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार इसके अधीन आने वाले 150 जलाशयों में 61.80 अरब घन मीटर (बीसीएम) पानी है। यह इन जलाशयों की कुल 178.78 बीसीएम क्षमता का सिर्फ 35% है। पिछले साल इस समय इन जलाशयों में 74.47 बीसीएम पानी था। बीते 10 वर्षों का औसत भी 63 बीसीएम से अधिक है। इस तरह देखा जाए तो पिछले साल की तुलना में इस समय जलाशयों में 83% पानी है और 10 साल के औसत का 98% है। सबसे विकट स्थिति दक्षिण भारत में है जहां के जलाशयों में क्षमता का सिर्फ 20% पानी है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आयोग की तरफ से 4 अप्रैल को जारी बुलेटिन के अनुसार उत्तरी क्षेत्र में आने वाले हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के 10 जलाशय आयोग की मॉनिटरिंग के दायरे में हैं। इनकी कुल क्षमता 19.66 बीसीएम है। लेकिन इन जलाशयों में इस समय 6.33 बीसीएम पानी है। यह इनकी कुल क्षमता का 32% है। पिछले साल इस समय इन जलाशयों में क्षमता का 41% पानी था। पिछले 10 साल का औसत 33% है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पूर्वी क्षेत्र की स्थिति पिछले साल से बेहतर है। असम, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, नगालैंड और बिहार के 23 जलाशयों में 9.24 बीसीएम पानी हैष यह इनकी 20.43 बीसीएम की कुल क्षमता का 45.24 प्रतिशत है। इसी समय पिछले साल इन जलाशयों में क्षमता का 40% पानी था। 10 साल का औसत भी 44.94% है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पश्चिम क्षेत्र के गुजरात और महाराष्ट्र में 49 जलाशयों की मॉनिटरिंग केंद्रीय जल आयोग करता है और उनकी क्षमता 37.13 बीसीएम है। बुलेटिन के अनुसार इनमें इस समय 14.83 बीसीएम पानी है जो इनकी कुल क्षमता का 40% है। पिछले साल इनमें क्षमता का 47% पानी था और 10 साल का औसत 38% है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">केंद्रीय क्षेत्र में आने वाले राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 26 जलाशयों की कुल क्षमता 48.22 बीसीएम है। इनमें अभी 20.81 बीसीएम पानी है जो इनकी कुल क्षमता का 43% है। पिछले साल यह 47% था और 10 साल का औसत 39% है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">दक्षिणी क्षेत्र के तहत आने वाले राज्यों आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के 42 जलाशय आयोग की मॉनिटरिंग में आते हैं और उनकी कुल क्षमता 53.33 बीसीएम है। इनमें अभी सिर्फ 10.57 बीसीएम पानी है जो इनकी कुल क्षमता का सिर्फ 20% है। पिछले साल इस समय इनमें क्षमता का 34% पानी था और 10 साल का औसत 28% है।</span></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_6612272df3ee2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश के जलाशयों में क्षमता का 35% पानी, दक्षिणी क्षेत्र की स्थिति विकट, सिर्फ 20% भरे हैं यहां के जलाशय ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रेपो रेट में लगातार 7वीं बार कोई बदलाव नहीं, 6.5 फीसदी पर बरकरार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/no-change-in-repo-rate-for-the-7th-consecutive-time-remains-at-6.5-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 05 Apr 2024 12:13:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
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        <description><![CDATA[ <p>भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को लगातार सातवीं बार प्रमुख ब्याज दर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है। आरबीआई का कहना है कि वह खाद्य मुद्रास्फीति के बढ़ने के जोखिम के प्रति सतर्क है। <span>रेपो रेट वह ब्याज दर है जिसके आधार पर बैंक लोन की ब्याज दर तय करते हैं।</span></p>
<p>चालू वित्त वर्ष के लिए पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने प्रमुख ब्याज दर यानी रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। दरअसल, खाद्य मुद्रास्फीति की अनिश्चितता के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका है। इसलिए आरबीआई खाद्य मुद्रास्फीति और महंगाई बढ़ने के जोखिम को लेकर सतर्क है। मौद्रिक नीति समिति के छह में पांच सदस्य रेपो रेट को अपरिवर्तित रखने के पक्ष में थे।&nbsp;</p>
<p>फरवरी में उपभोक्ता मूल्य आधारित मुद्रास्फीति (सीपीआई) 5.1 फीसदी थी। जबकि सरकार ने आरबीआई को सीपीआई मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के मार्जिन के साथ 4 प्रतिशत पर सुनिश्चित करने को कहा है। महंगाई की चुनौती को देखते हुए फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है।&nbsp;</p>
<p>इससे लोगों को सस्ते लोन के लिए इंतजार करना पड़ेगा। लंबे समय से आरबीआई ने रेपो रेट में कटौती नहीं की है। कई एक्सपर्ट्स उम्मीद जता रहे थे कि पैनल इस बार भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। इससे पहले वित्त वर्ष 20223-24 की अंतिम बैठक में रेपो रेट को 6.50 फीसदी पर स्थिर रखने का फैसला किया था।</p>
<p>आरबीआई ने रेपो रेट को आखिरी बार पिछले साल फरवरी 2023 में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर 6.25 फीसदी से 6.50 फीसदी कर दिया था। पिछले साल अप्रैल में दर वृद्धि को रोक दिया गया था।&nbsp;आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी रहने का अनुमान है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में मांग मजबूत हो रही है और &nbsp;निजी खपत भी बढ़ने की उम्मीद है। वित्तीय वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.8% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया गया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रेपो रेट में लगातार 7वीं बार कोई बदलाव नहीं, 6.5 फीसदी पर बरकरार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मौसम के मिजाज को देखते हुए गेहूं किसानों के लिए एडवाइजरी जारी, रखें यह सावधानी   ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/considering-the-weather-patterns-advisory-issued-for-wheat-farmers-farmers-should-take-this-precaution.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 04 Apr 2024 12:26:49 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/considering-the-weather-patterns-advisory-issued-for-wheat-farmers-farmers-should-take-this-precaution.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल गर्मियों ने समय से पहले दस्तक दे दी है। देश के कई इलाकों में <strong>हीट वेव</strong> चलनी शुरू हो गईं। मौसम विभाग ने इस बार गर्मी के मौसम में सामान्य से अधिक हीटवेव वाले दिनों की संभावना जताई है। गेहूं कटाई के दौरान उत्तर भारत के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 2-3 डिग्री सेल्सियस ऊपर रहने की संभावना है।</p>
<p>करनाल स्थित आईसीएआर के <strong>भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर)</strong> ने मौसम विभाग से मिले इनपुट के आधार पर अगले एक पखवाड़े के लिए गेहूं किसानों को एडवाइजरी जारी की है। संस्थान ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब के किसानों को गेहूं की फसल के लिए उचित नमी की मात्रा सुनिश्चित करने की सलाह दी है।&nbsp;</p>
<p><strong>आईआईडब्ल्यूबीआर</strong> के निदेशक<strong> डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह</strong> ने बताया कि मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के किसानों को सलाह दी जाती है कि वे कटाई के समय उचित नमी (12% -13%) सुनिश्चित करें। उत्तर-पूर्व और उत्तर-पश्चिम के किसानों को फसल की आवश्यकता के अनुसार हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई है ताकि फसल पकने के लिए मिट्टी में उचित नमी बनी रहे।</p>
<p><strong>एडवाइजरी के अनुसार,</strong> यदि अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है, तो फसल को सूखे से बचाने के लिए 0.2% म्यूरेट ऑफ पोटाश (प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में 400 ग्राम एमओपी) या 2% KNO3 (200 लीटर पानी में 4.0 किलोग्राम प्रति एकड़) का स्प्रे कर सकते हैं।</p>
<p><strong>पर्वतीय क्षेत्र</strong> में किसानों को <strong>पीला रतुआ</strong> या <strong>भूरा रतुआ</strong> पर नजर रखनी चाहिए और प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी का छिड़काव करना चाहिए। एक लीटर पानी में एक मिलीलीटर रसायन मिलाना चाहिए। एक एकड़ गेहूं की फसल में 200 मिलीलीटर कवकनाशी को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। देर से बोई गई गेहूं की फसल में हल्की <strong>सिंचाई</strong> ही करें। साथ ही कटाई से 8-10 दिन पहले फसल में सिंचाई बंद कर देनी चाहिए।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x_660e501c55762.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>मौसम विभाग</strong> ने अप्रैल से जून के लिए अपडेटेड सीजनल आउटलुक जारी किया है। गर्मी के मौसम में उत्तर पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों, दक्षिण प्रायद्वीप, मध्य भारत और पूर्वी भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक <strong>हीट वेव</strong> दिन रहने की संभावना है। अप्रैल 2024 के दौरान, दक्षिण प्रायद्वीप के कई हिस्सों और उससे सटे उत्तर-पश्चिम मध्य भारत और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में सामान्य से अधिक उष्ण लहर/हीट वेव दिन रहने की संभावना जताई गई है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मौसम के मिजाज को देखते हुए गेहूं किसानों के लिए एडवाइजरी जारी, रखें यह सावधानी    ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भ्रामक विज्ञापन केस: सुप्रीम कोर्ट में रामदेव&amp;#45;बालकृष्ण को फटकार, माफी भी अस्वीकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/misleading-advertisement-case-sc-lashes-out-at-ramdev-and-balkrishna-terms-their-apology-lip-service.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 02 Apr 2024 19:42:46 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/misleading-advertisement-case-sc-lashes-out-at-ramdev-and-balkrishna-terms-their-apology-lip-service.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भ्रामक विज्ञापन मामले में योग गुरु<strong> रामदेव</strong> और पतंजलि आयुर्वेद के एमडी<strong> आचार्य बालकृष्ण</strong> को आज व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में हाजिर होना पड़ा। दोनों ने सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी। लेकिन अदालत ने उनके माफीनामे को "जुबानी कार्यवाही" करार देते हुए <span>स्वीकार नहीं किया। </span>कोर्ट की अवमानना के मामले में रामदेव और बालकृष्ण पर कड़ी फटकार पड़ी। अदालत ने उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए अब आखिरी मौका दिया है। साथ ही अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई के लिए तैयार करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी। तब भी दोनों को अदालत में मौजूद रहना होगा।</p>
<p>आज सुनवाई के दौरान <strong>जस्टिस हिमा कोहली</strong> और <strong>जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह</strong> की बेंच ने अदालत के निर्देशों की अवमानना को लेकर कड़ा रुख दिखाया। बेंच ने कहा, "केवल सुप्रीम कोर्ट नहीं, देश की हर अदालत के आदेश का सम्मान होना चाहिए। आपको अदालत के निर्देशों का पालन करना था, लेकिन आपने हर सीमा लांघ दी।"</p>
<p><strong>इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए)</strong> ने एलोपैथी के खिलाफ दुष्प्रचार और गंभीर बीमारियों के इलाज से जुड़े दावों को लेकर पतंजलि के खिलाफ याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पतंजलि से दवाओं से जुड़े भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने को कहा था। इसके बावजूद पतंजलि ने ऐसे विज्ञापन छपवाये। इसे लेकर कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। 19 मार्च को हुई सुनवाई में कोर्ट ने रामदेव और बालकृष्ण को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा था।&nbsp;</p>
<p>आज सुनवाई के दौरान रामदेव के वकील<strong> बलवीर सिंह</strong> ने कोर्ट से कहा कि रामदेव माफी मांगने के लिए तैयार हैं लेकिन भीड़ की वजह से कोर्टरूम में नहीं आ पाए। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर माफी मांगना चाहते हैं तो प्रॉपर एफिडेविट देना चाहिए था।&nbsp;</p>
<p>अदालत ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि कंपनी के<strong> मीडिया डिपार्टमेंट</strong> को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि <span>पतंजलि अपने मीडिया विभाग पर यह कहकर जिम्मेदारी नहीं डाल सकता कि उन्हें पता नहीं था कि अदालत ने ऐसे विज्ञापन न चलाने का आदेश दिया था।&nbsp;</span></p>
<p><strong>कोविड</strong> के दौरान रामदेव द्वारा <strong>एलोपैथी</strong> को बदनाम करने और केंद्र सरकार की अनदेखी पर भी कोर्ट ने सवाल उठाया। कोर्ट ने पूछा कि सरकार ने अपनी "आंखें बंद" क्यों रखीं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दवा एवं लाइसेंस विभाग को भी पार्टी बनाने को कहा है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि, रामदेव और बालकृष्ण को <strong>"झूठे साक्ष्य"</strong> को लेकर भी चेतावनी दी। क्योंकि कुछ दस्तावेज, जो अन्य कागजात के साथ संलग्न थे, बाद में बनाए गए थे। पीठ ने कहा, "यह झूठे साक्ष्य का मामला है। हम आपके लिए दरवाजे बंद नहीं कर रहे हैं बल्कि वह बता रहे हैं जो हमने नोट किया है।"</p>
<p>अदालत ने बालकृष्ण की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि <strong>ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स (मैजिक रेमेडीज) अधिनियम </strong>बहुत "पुराना" हो गया है। जस्टिस कोहली ने कहा कि रामदेव और बालकृष्ण के कद और सामाजिक सम्मान को ध्यान में रखते हुए उन्हें जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए। उन्हें न केवल जनता बल्कि अदालत को भी बेहतर स्पष्टीकरण देना चाहिए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भ्रामक विज्ञापन केस: सुप्रीम कोर्ट में रामदेव-बालकृष्ण को फटकार, माफी भी अस्वीकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वित्तीय संसाधन कृषि उत्पादन को 24 फीसदी बढ़ाने और जलवायु जोखिम को 16 फीसदी कम करने में कारगर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/financial-resources-are-effective-in-increasing-agricultural-production-by-24-percent-and-reducing-climate-risk-by-16-percent..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 02 Apr 2024 12:24:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/financial-resources-are-effective-in-increasing-agricultural-production-by-24-percent-and-reducing-climate-risk-by-16-percent..html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बेहतर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता कृषि उत्पादन में 24 फीसदी तक बढ़ोतरी करने की क्षमता रखती है। वहीं जलवायु परिवर्तन जैसे जोखिम को 16 फीसदी तक कम करने में वित्तीय संसाधन कारगर हो सकते हैं। यह महत्वपूर्ण तथ्य भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के <strong><a href="https://niap.icar.gov.in/">राष्ट्रीय कृषि आर्थिकी एवं नीति अनुसंधान संस्थान (एनआईएपी)</a> </strong>के एक पॉलिसी पेपर<strong> &lsquo;केन फाइनेंस मीटिगेट क्लाइमेट रिस्क्स इन एग्रीकल्चर&rsquo;&nbsp;</strong>में सामने आया है।</p>
<p>यह पेपर वित्तीय संसाधनों को केंद्र में रखकर कृषि उत्पादन और जलवायु परिवर्तन से जुड़े जमीनी तथ्यों के आधार पर पड़ताल करने के बाद उपरोक्त नतीजा बताता है। इस पेपर को संस्थान के डायरेक्टर <strong>प्रताप एस बिरथल</strong>, वाशिंगटन स्थित आईएफपीआरआई के सीनियर रिसर्च फैलो<strong> देवेश रॉय</strong>, ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के पोस्ट डॉक्टोरल स्कोलर <strong>जावेरियाह हजराना</strong> और नाबार्ड के पूर्व चीफ जनरल मैनेजर <strong>केजेएस सत्यसाईं</strong> ने लिखा है।</p>
<p>पेपर में कहा गया है कि वित्तीय संसाधनों के कृषि उत्पादन पर असर का आकलन किया जा सकता है। इसके चलते <strong>उत्पादकता</strong> में 24 फीसदी तक की बढ़ोतरी संभव है जबकि उत्पादकता घटने के जोखिम को यह 16 फीसदी तक कम कर सकता है। इसका वित्तीय संसाधनों के संगठित क्षेत्र या असंगठित क्षेत्र के जरिए उपलब्धता से सीधा संबंध है। संगठित क्षेत्र से उपलब्ध वित्तीय संसाधन असंगठित क्षेत्र के स्रोत से हासिल संसाधनों के मुकाबले दोगुना अधिक प्रभावी हैं। वहीं जोखिम को कम करने में भी संगठित क्षेत्र से उपलब्ध संसाधन अधिक कारगर हैं। हालांकि दोनों एक दूसरे के पूरक भी हैं।</p>
<p>पेपर की एक अहम सिफारिश में कहा गया है कि <strong>क्लामेइट एक्शन</strong> के लिए 40 फीसदी वित्तीय संसाधनों का आवंटन किया जाना चाहिए। इसके साथ <strong>शार्ट टर्म क्रेडिट</strong> का अगर पूंजीगत निवेश के रूप में उपयोग होता है तो वह अधिक फायदेमंद रहता है। फिलहाल कृषि में लघु अवधि और दीर्घअवधि संसाधनों का अनुपात 3:2 का है। जबकि इसे इसके उलट होना चाहिए। दीर्घकालिक संसाधनों में बढ़ोतरी के जरिये कृषि क्षेत्र में कमजोर पूंजी निर्माण की स्थिति और जोखिम के लिए जरूरी वित्तीय संसाधनों की स्थिति को सुधारा जा सकता है।</p>
<p>पेपर में रेखांकित किया गया है कि<strong> ग्रामीण वित्तीय बाजार</strong> में वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के मामले में स्थिति महिलाओं और छोटे किसानों के प्रतिकूल है जबकि उनको ही अधिक वित्तीय संसाधनों की दरकार है। इसके साथ ही हार्टिकल्चर फसलों, पशुपालन और दूसरे गैर-फसली कामकाज के जरिये आय के स्रोत के विविधिकरण के लिए 30 फीसदी बढ़ोतरी की जरूरत है जो आईटी, इनपुट, फसल बीमा और दूसरी सेवाओं के लिए जरूरी है।</p>
<p>पेपर में कहा गया है कि कृषि में <strong>जलवायु परिवर्तन</strong> के जोखिम को देखते हुए <strong>रिक्स मैनेजमेंट</strong> पर जोर देने के लिए नीतिगत बदलाव की जरूरत है। भारत की कृषि नीति व क्रेडिट नीति मुख्य रूप से उत्पादन केंद्रित है। लेकिन जलवायु परिवर्तन के बढ़ते जोखिम को देखते हुए इसे कृषि फाइनेंस और क्रेडिट प्लानिंग के साथ जोड़ने की जरूरत है। वहीं क्लाइमेट स्मार्ट इंटरवेंशन के जरिये क्षेत्र विशेष पर आधारित उपायों को तैयार करना होगा। वित्तीय संस्थानों को सभी भागीदारों, समुदायों और रिसर्च संस्थानों के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। जिनमें स्वयंसेवी समूह, एक्सटेंशन एजेंसीज, गैर सरकारी संगठन, एग्रीबिजनेस कंपनियां और पंचायत स्तर पर काम करने वाली संस्थाएं शामिल हैं। इसके जरिये एग्रो क्लाइमेटिक परिस्थितियों के आधार पर जोखिम कम करने के उपायों को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकता है।&nbsp;</p>
<p>वित्तीय संस्थानों को किसान समुदाय की वित्तीय जरूरतों, खासतौर से <strong>छोटे किसानों</strong> की जरूरत, को ध्यान रखते हुए बाजार द्वारा होने वाले भेदभाव को दूर करने के तरीके अपनाने चाहिए। इसके लिए कोलेटरल के चलते बढ़ने वाली वित्तीय लागत को कम करने के उपाय खोजने की जरूरत है साथ ही लेन-देन की लागत को घटना जरूरी है। सामुदायिक स्तर पर प्रबंधित संसाधनों में निवेश के जरिये छोटे किसानों की मदद की जा सकती है।&nbsp;</p>
<p>पेपर में कहा गया है निजी क्षेत्र के <strong>एग्रीटेक निवेश</strong> का बड़ा हिस्सा फसल उपरांत प्रबंधन और रिटेल की गतिविधियों में ही लगा है।&nbsp; जबकि इसके साथ ही क्लाइमेट रिस्क को करने वाले कदमों पर भी निवेश किया जा सकता है। इसके लिए एग्रीबिजनेस फर्म, स्टार्ट-अप्स, कोआपरेटिव्स और एफपीओ के बीच समझौते का सुझाव दिया गया है।&nbsp;</p>
<p>सरकार द्वारा हाल ही में कार्बन और <strong>ग्रीन क्रेडिट</strong> नेशनल मार्केट का हवाला देते हुए पेपर में कहा गया है कि संबंधित भागीदार जलवायु परिवर्तन जोखिम को करने वाली तकनीक का इस्तेमाल कर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कर सकते हैं। किसानों और दूसरे भागीदारों को वित्तीय संसाधान उपलब्ध कारकर वित्तीय संस्थान इस मार्केट में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>क्लाइमेट स्मार्ट इंटरवेंशन</strong> के फायदों का आकलन एक पेचीदा मामला है क्योंकि इसमें फसलों का उत्पादकता जुड़े कई तरह के सिस्टम काम करते हैं। क्लाइमेट स्मार्ट कदमों के फायदे और नुकसान का आकलन करने के मौजूदा मानक अभी बहुत विश्वसनीय नहीं हैं। इस स्थिति में कृषि बीमा जोखिम से सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण उपाय है। लेकिन इसके लिए प्रीमियम का भुगतान फसल उत्पादन सीजन के पहले होना चाहिए और यह ऐसा समय होता है जब किसान अपने सीमित वित्तीय संसाधनों के साथ कई दूसरी जरूरतों को पूरा करने लिए जूझता रहता है। भारत में 2020 तक फसल बीमा बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेने वाले किसानों के लिए अनिवार्य था। इसकी एक वजह बीमा कंपनियों की ट्रांजेक्शन लागत को कम रखना भी थी। लेकिन अब यह अनिवार्यता समाप्त होने से फसल बीमा सुविधा लेने पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_660bab23c1b34.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ वित्तीय संसाधन कृषि उत्पादन को 24 फीसदी बढ़ाने और जलवायु जोखिम को 16 फीसदी कम करने में कारगर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_660bab23c1b34.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम मोदी और बिल गेट्स की बातचीत: कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य में बड़ी भूमिका निभा सकती है टेक्नोलॉजी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-modis-conversation-with-bill-gates-technology-can-play-a-big-role-in-agriculture-education-health.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 29 Mar 2024 18:12:23 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-modis-conversation-with-bill-gates-technology-can-play-a-big-role-in-agriculture-education-health.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री <strong>नरेंद्र मोदी</strong> ने आज दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार तथा माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक <strong>बिल गेट्स</strong> से कई मुद्दों पर खास बातचीत की। इस दौरान डिजिटल इंडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लेकर एग्रीकल्चर, एजुकेशन, हेल्थकेयर और क्लाइमेट चेंज व गवर्नेंस जैसे विषयों पर चर्चा हुई।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि <strong>डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर</strong> अपने आप में एक बड़ी आवश्यकता है। सरकार सभी गांवों तक डिजिटल सुविधाएं पहुंचा रही है। कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में टेक्नोलॉजी बड़ी भूमिका निभा सकती है। पीएम मोदी ने कहा, वह दुनिया में डिजिटल विभाजन के बारे में सुनते थे, तो उन्होंने फैसला किया कि भारत में ऐसा कुछ नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी कृषि को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने में मदद कर सकती है और इसका उपयोग शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए भी किया जा रहा है।</p>
<p>चर्चा के दौरान <strong>बिल गेट्स</strong> ने कहा कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लगातार समृद्ध होता जा रहा है। सरकार ने लगभग सभी सरकारी भुगतान कार्यक्रमों का <strong>डिजिटलीकरण</strong> कर दिया है। इससे बहुत सारा पैसा बचाया गया। लेकिन अब जब आप विभिन्न क्षेत्रों में जा रहे हैं, किसानों के लिए सलाह, उनकी भूमि का पंजीकरण, बच्चों के लिए ट्यूशन और स्वास्थ्य रिकॉर्ड, इन सभी को जोड़ना, यह एक तरह से दूसरा चरण है। और हम अभी तीसरे चरण की शुरुआत में हैं जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में ये प्रगति शीर्ष पर आ जाएगी।</p>
<p><strong>एआई</strong> के महत्व पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में मां को &lsquo;&rsquo;आई&rsquo;&rsquo; बोलते हैं। हमारे यहां बच्&zwj;चा पैदा होता है तो &lsquo;&rsquo;आई&rsquo;&rsquo; भी बोलता है, एआई भी बोलता है, वो इतना एडवांस हो गया है। पीएम ने काशी-तमिल संगम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां तमिल लोग आए हुए थे। तमिल भाषा में वह बोल नहीं सकते हैं तो उन्होंने एआई का इस्तेमाल किया। उन्होंने हिन्दी में बोला और सबने मेरा भाषण तमिल में सुना। वह एआई का बहुत उपयोग करते हैं और पूरे देश में ये बहुत काम आता है।&nbsp;पीएम मोदी ने कहा कि एआई जैसी शक्तिशाली तकनीक के दुरुपयोग का एक बड़ा जोखिम है, खासकर जब इसे अकुशल हाथों में दिया जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि गलत सूचना को रोकने के लिए एआई-जनित सामग्री पर स्पष्ट वॉटरमार्क होना चाहिए।&nbsp;</p>
<p><span>पीएम मोदी और बिल गेट्स ने भारत की&nbsp;<strong>डिजिटल क्रांति</strong> के बारे में काफी बातें कीं। </span>पीएम मोदी ने बिल गेट्स को <strong>नमो ड्रोन दीदी</strong> कार्यक्रम के बारे में बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके पीछे दो लक्ष्&zwj;य हैं। एक तो भारत के गांवों में तीन करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाना। दूसरा, गांव में महिलाओं के हाथ में टेक्&zwj;नोलॉजी देकर लोगों की मानसिकता में बदलाव लाना। नमो ड्रोन दीदी योजना बहुत सफलतापूर्वक चल रही है।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री</strong> ने एग्रीकल्&zwj;चर को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने की जरूरत पर जोर दिया है। भारत ने एकाधिकार को रोकने के लिए प्रौद्योगिकी लोकतंत्रीकरण किया है। यह जनता द्वारा और जनता के लिए है। सरकार विभिन्&zwj;न समुदायों के भीतर उभरती प्रतिभाओं को अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। हम लोगों के बीच प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्वास को बढावा देने के लिए लगातार योगदान दे रहे हैं और इसके मूल्य को बढा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन सब के बावजूद आज डेटा सुरक्षा सर्वोपरि चिंता बनी हुई है।&nbsp;</p>
<p><strong>बिल गेट्स</strong> ने कहा कि डेटा निश्चित रूप से बहुत रोमांचक होने वाला है। हम गोपनीयता बनाए रखने में सक्षम होंगे और फिर भी डेटा से बहुत कुछ सीखेंगे। आपको कौन सी फसल लगानी चाहिए? यदि हमें किसानों से उनके नाम के बिना सारा डेटा मिलता है, तो हम उनकी गोपनीयता पर हमला नहीं करते हैं बल्कि किसानों को बेहतर सलाह देते हैं। व्यक्तिगत गोपनीयता को खतरे में डाले बिना हम बहुत अधिक स्मार्ट हो सकते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_6606b9ffe851b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम मोदी और बिल गेट्स की बातचीत: कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य में बड़ी भूमिका निभा सकती है टेक्नोलॉजी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_6606b9ffe851b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ट्रेडर्स को अनिवार्य रूप से घोषित करना होगा गेहूं का स्टॉक, आदेश जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/traders-will-have-to-compulsorily-provide-wheat-stock-information-order-issued.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 29 Mar 2024 13:05:51 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/traders-will-have-to-compulsorily-provide-wheat-stock-information-order-issued.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गेहूं खरीद की तैयारियों के साथ-साथ केंद्र सरकार ने जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए भी कमर कस ली है। केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में व्यापारियों/थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, बड़ी श्रृंखला के खुदरा विक्रेताओं और प्रोसेसरों को अपने गेहूं स्टॉक की स्थिति अनिवार्य रूप से घोषित करनी होगी।</p>
<p>इस बारे में गुरुवार को <strong>उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय</strong> की ओर से ट्रेडर्स, थोक व्यापारियों, रिटेलर्स, बड़ी रिटेल चेन और प्रोसेसर्स को आदेश जारी करते हुए कहा गया है कि वे <strong>1 अप्रैल, 2024</strong> से अपने गेहूं स्टॉक की स्थिति मंत्रालय के पोर्टल <strong><a href="https://evegoils.nic.in/wheat/login.html">(https://evegoils.nic.in/wheat/login.html)</a> </strong>पर घोषित करें और हर शुक्रवार को स्टॉक की जानकारी दें। सभी संबंधित एजेंसियों को सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि व्यापारियों द्वारा गेहूं के स्टॉक की स्थिति नियमित और सही ढंग से घोषित की जाए।</p>
<p>गेहूं पर लागू स्टॉक लिमिट 31 मार्च को समाप्त हो रही है। लेकिन इसके बाद भी व्यापारियों को मंत्रालय के पोर्टल पर अपने गेहूं के स्टॉक की जानकारी देनी होगी। चावल के स्टॉक के लिए इस तरह की व्यवस्था पहले से ही लागू है। मंत्रालय का कहना है कि जो व्यापारी पोर्टल पर पंजीकृत नहीं हैं, वे खुद को पंजीकृत कर प्रत्येक शुक्रवार को गेहूं और चावल के स्टॉक का खुलासा करना शुरू कर सकते हैं। गेहूं और चावल के स्टॉक की घोषणा नियमित रूप से करनी होगी।&nbsp;खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग का कहना है कि देश में कीमतों को नियंत्रित करने और आसान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए गेहूं और चावल की स्टॉक स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।&nbsp;</p>
<p>अभी गेहूं की फसल बाजार में आनी ही शुरू हुई है और रिकॉर्ड उत्पादन के दावों के बावजूद सरकार को गेहूं के स्टॉक की निगरानी बढ़ाने जैसे कदम उठाने पड़ रहे हैं। आमतौर पर ऐसे निर्णय खरीद सीजन के बाद अनाज की कमी को देखते हुए उठाए जाते हैं। लेकिन चुनावों के समय महंगाई रोकने के लिए सरकार इस बार पहले से अधिक मुस्तैद है। इसलिए गेहूं खरीद सीजन की शुरुआत के साथ ही ट्रेडर्स को स्टॉक की स्थिति घोषित करने का आदेश दे दिया गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>कृषि मंत्रालय</strong> के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, वर्ष 2023-24 में देश में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 11.20 करोड़ टन तक पहुंच सकता है जो पिछले साल 11.05 करोड़ टन था। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास गेहूं का स्टॉक, इस महीने की शुरुआत में 97 लाख टन था, जो सात साल में सबसे कम है। केंद्रीय पूल का गेहूं स्टॉक 1 अप्रैल तक 74.6 लाख टन के बफर मानक से भी नीचे आ सकता है। यह 16 वर्षों में पहली बार होगा कि गेहूं का स्टॉक बफर मानक से नीचे होगा। ऐसा पिछले दो साल से गेहूं की कम खरीद और एफसीआई द्वारा खुले बाजार में अधिक बिक्री के कारण हुआ। इसलिए इस बार सरकार गेहूं खरीद बढ़ाने का प्रयास कर रही है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_66066f409c39f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ट्रेडर्स को अनिवार्य रूप से घोषित करना होगा गेहूं का स्टॉक, आदेश जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_66066f409c39f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चुनाव से पहले सरकार ने बढ़ाई मनरेगा मजदूरी, जानिए किस राज्य में कितनी मजदूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/mnrega-wages-increased-before-elections-know-by-how-much-mnrega-wages-increased-in-which-state.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 28 Mar 2024 16:23:29 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/mnrega-wages-increased-before-elections-know-by-how-much-mnrega-wages-increased-in-which-state.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>लोकसभा चुनाव की हलचल के बीच केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की मजदूरी दरों में बढ़ोतरी कर दी है। विभिन्न राज्यों में मनरेगा मजदूरी की दरें 3 से 10 प्रतिशत तक बढ़ाई गई हैं। इसका फायदा देश से 14 करोड़ से अधिक मनरेगा श्रमिकों को मिलेगा। केंद्र सरकार के इस फैसले को चुनाव आयोग की मंजूरी मिल चुकी है। संशोधित दरें एक अप्रैल से लागू होंगी।&nbsp;</p>
<p>ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, मनरेगा के तहत सबसे ज्यादा 374 रुपये मजदूरी <strong>हरियाणा</strong> में है, जबकि अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में सबसे कम 234 रुपये है। मनरेगा मजदूरी की दरों में सबसे ज्यादा 10.56 फीसदी बढ़ोतरी<strong> गोवा</strong> में हुई जबकि सबसे कम 3.04 फीसदी बढ़ोतरी <strong>उत्तर प्रदेश</strong> व <strong>उत्तराखंड</strong> में हुई।</p>
<p>गोवा में मनरेगा मजदूरी सर्वाधिक 34 रुपये की बढ़ोतरी के बाद 356 रुपये, <strong>कर्नाटक</strong> में 33 रुपये की बढ़ोतरी के बाद 349 रुपये, <strong>केरल</strong> में 13 रुपये की बढ़ोतरी के बाद 346 रुपये तथा <strong>पंजाब</strong> में 19 रुपये की वृद्धि के साथ 322 रुपये हो गई है। <strong>आंध्र प्रदेश</strong> और <strong>तेलंगाना</strong> में मनरेगा की मजदूरी 28 रुपये बढ़ाकर 300 रुपये तय की गई है। मनरेगा मजदूरी में सबसे ज्यादा 10 फीसदी की बढ़ोतरी आंध्र प्रदेश, गोवा, कर्नाटक और तेलंगाना में हुई।&nbsp;</p>
<p>देश में सबसे कम मनरेगा मजदूरी 234 रुपये <strong>अरुणाचल प्रदेश</strong> और <strong>नागालैंड</strong> में है। इनके बाद सबसे कम मनरेगा मजदूरी 237 रुपये <strong>उत्तर प्रदेश</strong> और <strong>उत्तराखंड</strong> में है। इन्हीं दोनों राज्यों में मनरेगा मजदूरी में <strong>सबसे कम</strong> 7-7 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। जबकि <strong>बिहार</strong> में मनरेगा मजदूरी 245 रुपये है। <strong>छत्तीसगढ़</strong> और <strong>मध्य प्रदेश</strong> में 22 रुपये की बढ़ोतरी से मनरेगा मजदूरी 243 रुपये हो गई है। <strong>पश्चिम बंगाल</strong> में मनरेगा मजदूरी की दर 13 रुपये बढ़ाकर 250 रुपये की गई है। जबकि<strong> ओडिशा</strong> में मनरेगा मजदूरी की दर 254 रुपये तथा <strong>राजस्थान</strong> में 266 रुपये है।&nbsp;</p>
<p>नई अधिसूचना के बाद देश में <strong>औसत मनरेगा मजदूरी</strong> 17.9 रुपये बढ़कर <strong>282.4 रुपये</strong> हो गई है। यूपी, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान में मनरेगा मजदूरी राष्ट्रीय औसत से कम है। जबकि हरियाणा, गोवा, कर्नाटक, केरल, पंजाब और तमिलनाडु में मनरेगा मजदूरी राष्ट्रीय औसत से अधिक है। विभिन्न प्रदेशों के बीच मनरेगा मजदूरी में बड़े अंतर को लेकर सवाल उठते रहे हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>मनरेगा</strong> योजना के तहत ग्रामीण परिवारों के व्यस्क सदस्यों को कम से कम 100 दिन काम की गारंटी दी जाती है। यह योजना केवल अकुशल श्रमिकों के लिए है। इस योजना से ग्रामीण इलाकों में लोगों को आजीविका सुरक्षा देने में अहम भूमिका निभाई है। इस साल की शुरुआत में संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट में, ग्रामीण विकास और पंचायती राज पर <strong>संसदीय स्थायी समिति</strong> ने राज्यों में मनरेगा मजदूरी में भिन्नता को रेखांकित करते हुए इस मजदूरी को अपर्याप्त माना था।</p>
<table width="604" style="height: 861px;">
<tbody>
<tr style="height: 81px;">
<td style="text-align: left; height: 81px; width: 121.151px;"><strong>States</strong></td>
<td style="text-align: left; height: 81px; width: 163.196px;">
<p><strong>MGNREGA Wage Rate per Day</strong></p>
<p><strong> 2024-25 (Rs)</strong></p>
</td>
<td style="text-align: left; height: 81px; width: 81.5625px;"><strong>2023-24</strong></td>
<td style="text-align: left; height: 81px; width: 126.051px;"><strong>Change</strong></td>
<td style="text-align: left; height: 81px; width: 96.6335px;"><strong>Change in %</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Arunachal Pradesh</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">234</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">224</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">10</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">4.46</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Nagaland</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">234</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">224</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">10</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">4.46</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">UP</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">237</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">230</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">7</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">3.04</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Uttarakhand</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">237</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">230</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">7</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">3.04</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Tripura</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">242</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">226</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">16</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">7.08</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Chattisgarh</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">243</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">221</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">22</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">9.95</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">MP</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">243</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">221</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">22</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">9.95</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Bihar</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">245</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">228</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">17</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">7.46</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Jharkhand</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">245</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">228</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">17</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">7.46</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Assam</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">249</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">238</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">11</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">4.62</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">West Bengal</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">250</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">237</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">13</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">5.49</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Meghalaya</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">254</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">238</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">16</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">6.72</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Odisha</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">254</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">237</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">17</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">7.17</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">J&amp;K</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">259</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">244</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">15</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">6.15</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Ladakh</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">259</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">244</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">15</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">6.15</td>
</tr>
<tr style="height: 40px;">
<td style="height: 40px; width: 121.151px;">Himachal Pradesh (avg)</td>
<td style="height: 40px; width: 163.196px;">265</td>
<td style="height: 40px; width: 81.5625px;">252</td>
<td style="height: 40px; width: 126.051px;">13</td>
<td style="height: 40px; width: 96.6335px;">5.16</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Mizoram</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">266</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">249</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">17</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">6.83</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Rajasthan</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">266</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">255</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">11</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">4.31</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Manipur</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">272</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">260</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">12</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">4.62</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Gujarat</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">280</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">256</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">24</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">9.38</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;"><strong>India Average&nbsp;</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;"><strong>282.4</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;"><strong>264.5</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;"><strong>17.9</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;"><strong>6.77</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Maharashtra</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">297</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">273</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">24</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">8.79</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Andhra Pradesh</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">300</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">272</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">28</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">10.29</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Telangana</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">300</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">272</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">28</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">10.29</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Sikkim (avg)</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">311.5</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">295</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">16.5</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">5.59</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Lakshadweep</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">315</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">304</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">11</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">3.62</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Tamil Nadu</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">319</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">294</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">25</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">8.50</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Puducherry</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">319</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">294</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">25</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">8.50</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Punjab</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">322</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">303</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">19</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">6.27</td>
</tr>
<tr style="height: 60px;">
<td style="height: 60px; width: 121.151px;">Dadra &amp; Nagar Haveli and Daman &amp; Diu</td>
<td style="height: 60px; width: 163.196px;">324</td>
<td style="height: 60px; width: 81.5625px;">297</td>
<td style="height: 60px; width: 126.051px;">27</td>
<td style="height: 60px; width: 96.6335px;">9.09</td>
</tr>
<tr style="height: 40px;">
<td style="height: 40px; width: 121.151px;">Andamam &amp; Nicobar (Avg)</td>
<td style="height: 40px; width: 163.196px;">338</td>
<td style="height: 40px; width: 81.5625px;">319.5</td>
<td style="height: 40px; width: 126.051px;">18.5</td>
<td style="height: 40px; width: 96.6335px;">5.79</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Kerala</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">346</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">333</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">13</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">3.90</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Karnataka</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">349</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">316</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">33</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">10.44</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Goa</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">356</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">322</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">34</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">10.56</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 121.151px;">Haryana</td>
<td style="height: 20px; width: 163.196px;">374</td>
<td style="height: 20px; width: 81.5625px;">357</td>
<td style="height: 20px; width: 126.051px;">17</td>
<td style="height: 20px; width: 96.6335px;">4.76</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_660548e909e8e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चुनाव से पहले सरकार ने बढ़ाई मनरेगा मजदूरी, जानिए किस राज्य में कितनी मजदूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र सरकार किसानों से खरीदेगी 5 लाख टन प्याज, जल्द शुरू होगी खरीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/central-government-will-buy-5-lakh-tonnes-of-onion-from-farmers-procurement-will-start-soon.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 27 Mar 2024 13:27:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/central-government-will-buy-5-lakh-tonnes-of-onion-from-farmers-procurement-will-start-soon.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार जल्द ही किसानों से रबी प्याज की खरीद शुरू करने जा रही है। सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नेफेड) और भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) को बफर स्टॉक के लिए सीधे किसानों से 5 लाख टन प्याज की खरीद शुरू करने को कहा है। रबी की प्याज मंडियों में आनी शुरू हो गई है। प्याज निर्यात पर जारी प्रतिबंध के कारण किसानों की चिंताओं को देखते हुए इस साल सरकार प्याज खरीद जल्द शुरू करने जा रही है।</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के सचिव <strong>रोहित कुमार सिंह</strong> ने बताया कि अगले दो-तीन दिनों में 5 लाख टन रबी प्याज की खरीद शुरू कर देंगे। आमतौर पर सरकार बफर स्टॉक के लिए प्रचलित मंडी भाव पर प्याज खरीदते हैं। अगर प्याज के भाव किसानों की लागत से भी नीचे चले जाते हैं तो सुनिश्चित करेंगे कि कम से कम किसानों की लागत निकल जाए। किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>रोहित कुमार सिंह ने कहा कि प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध से व्यापारियों पर असर पड़ रहा है, न कि किसानों पर। महाराष्ट्र में प्याज की औसत मंडी (थोक) कीमतें फिलहाल 13-15 रुपये प्रति किलोग्राम हैं, जो पिछले वर्ष से लगभग दोगुनी हैं। फिर भी, सरकार ने हस्तक्षेप करने का फैसला किया ताकि किसानों को नुकसान ना उठाना पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार ने कभी भी लागत से कम कीमत पर किसानों से प्याज नहीं खरीदा। पिछले रबी सीजन में औसतन 17 रुपये प्रति किलोग्राम के रेट पर प्याज खरीदा गया था।</p>
<p>देश के वार्षिक प्याज उत्पादन में <strong>रबी प्याज</strong> का हिस्सेदारी 72-75 फीसदी होता है। खरीफ प्याज की तुलना में रबी प्याज की शेल्फ जीवन लाइफ अधिक है और इसे नवंबर-दिसंबर तक स्टोर किया जा सकता है। इसलिए साल भर प्याज की उपलब्धता बनाए रखने के लिए रबी प्याज महत्वपूर्ण है।</p>
<p>साल 2023-24 में केंद्र सरकार ने <strong>बफर स्टॉक</strong> के लिए 6.4 लाख टन प्याज (रबी व खरीफ दोनों) की खरीद की थी। पिछले साल जून में प्याज की खरीद शुरू हुई थी लेकिन इस बार खरीद कई महीने पहले ही शुरू हो जाएगी। प्याज खरीद के लिए नेफेड और एनसीसीएफ किसानों का <strong>पंजीकरण</strong> करेंगे ताकि किसानों को डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में भुगतान किया जा सके।</p>
<p>प्याज की कीमतों पर <strong>नियंत्रण</strong> के लिए सरकार ने खुदरा बिक्री के जरिए हस्तक्षेप का तरीका अपनाया है। एनसीसीएफ, नेफेड, केंद्रीय भंडार और राज्यों की सहकारी संस्थाओं के रिटेल आउटलेट और मोबाइल वैन के माध्यम से पिछले साल 25 रुपये प्रति किलोग्राम के रेट पर प्याज की बिक्री की गई थी। प्याज उत्पादन में गिरावट के अनुमान को देखते हुए सरकार ने प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध को 31 मार्च से आगे बढ़ा दिया है। साथ ही बाजार में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन साथ ही यह भी चुनौती है कि किसानों को उपज का उचित दाम मिले।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;<strong>प्याज उत्पादन में गिरावट </strong></p>
<p>कृषि मंत्रालय के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, वर्ष 2023-24 में प्याज का उत्पादन लगभग 254.73 लाख टन होने की उम्मीद है, जबकि पिछले साल यह लगभग 302.08 लाख टन था। प्याज उत्पादन में गिरावट का यह दूसरा साल है। साल 2021-22 में प्याज उत्पादन 316.87 लाख टन था।&nbsp;इस साल रबी सीजन में प्याज उत्पादन 193 लाख टन रहने का अनुमान है जो जो एक साल पहले 236 लाख टन रहा था। पिछले दो साल में प्याज उत्पादन में लगभग 19 फीसदी की गिरावट का अनुमान है। &nbsp;</p>
<p><strong>बफर स्टॉक </strong><strong>25 हजार</strong><strong> टन बचा</strong></p>
<p>केंद्र सरकार ने 2023-24 (अप्रैल-मार्च) सीजन में 6.4 लाख टन प्याज खरीदा था, जिसमें जून में शुरू हुई रबी फसल की 5 लाख टन प्याज भी शामिल थी। इसमें से केवल 25 हजार टन प्याज ही बफर स्टॉक में है, जबकि बाकी मात्रा बाजार में बेची जा चुकी है।</p>
<p>&nbsp;<strong>प्याज उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास </strong></p>
<p>सरकार प्याज की आपूर्ति-मांग के अंतर को दो तरह से दूर करने के प्रयास कर रही है। एक ओर, विकिरण तकनीक का उपयोग कर प्याज की शेल्फ लाइफ बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, सरकार खरीफ प्याज की अगेती बुवाई के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है ताकि त्योहारों के दौरान पर्याप्त उपलब्धता रहे।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_6603d17e8738a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र सरकार किसानों से खरीदेगी 5 लाख टन प्याज, जल्द शुरू होगी खरीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_6603d17e8738a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं के उत्पादन और निर्यात की संभावनाएं, भारत कैसे बनेगा ग्लोबल लीडर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/possibilities-of-wheat-production-and-export-how-will-india-become-a-global-leader.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 26 Mar 2024 14:57:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/possibilities-of-wheat-production-and-export-how-will-india-become-a-global-leader.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है। देश में सालाना लगभग 11 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन होता है जबकि करीब 8-9 करोड़ टन गेहूं की आवश्यकता घरेलू खपत को पूरा करने के लिए होती है। अगर उन्नत किस्मों और तकनीक के जरिए गेहूं की पैदावार बढ़ाई जाए तो भारत गेहूं के मामले में ग्लोबल लीडर बन सकता है। इससे जुड़ी विभिन्न संभावनाओं और चुनौतियों को लेकर ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (तास), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) तथा भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) द्वारा संयुक्त रूप से एक परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें गेहूं पर शोध से जुड़े देश के प्रमुख कृषि वैज्ञानिक और नीति-निर्माता शामिल हुए।&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर तास के चेयरमैन तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डॉ. आर एस परोदा ने बढ़ती जनसंख्या की चुनौती को देखते हुए गेहूं के उत्पादन और उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने गेहूं की उच्च उपज देने वाली किस्मों को विकसित करने के लिए नए नवाचारों और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी को अपनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि देश को न केवल अपनी खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करना है, बल्कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर भारतीय गेहूं उपलब्ध कराने की संभावनाओं को भी पूरा करना है। इससे भारत में गेहूं उगाने वाले किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x_660293e217254.jpg" alt="" /></p>
<p>कार्यक्रम के प्लेनरी सत्र के मुख्य अतिथि नीति आयोग के सदस्य कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद ने कहा कि कृषि से जुड़ा परिदृश्य बहुत तेजी से बदल रहा है। बदलती आवश्यकताओं के अनुरुप गेहूं के साथ-साथ गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात की भी बहुत संभावनाएं हैं। वैल्यू एडिशन पर जोर दिया जाए तो किसानों को भी बेहतर दाम मिल सकता है। हमें किसानों को मदद करने के वैकल्पिक तरीके निकालने होंगे। अभी गेहूं का सरप्लस कम होने की वजह से बहुत अधिक निर्यात नहीं होता है। पिछले दस वर्षों में भारतीय कृषि ने चीन से बेहतर प्रदर्शन किया है। गेहूं में भी हम उत्पादन बढ़ा सकते हैं। &nbsp;तेजी से बदलती जलवायु परिस्थितियों में राजनीतिक व सामाजिक व्यवधानों को संबोधित करने के लिए अभी भी एक बफर बनाने की आवश्यकता है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>विश्व में भारत को गेहूं के प्रमुख उत्पादक के तौर पर देखा जाता है और बहुत से देश खाद्य सुरक्षा के लिए भारत पर निर्भर हैं। ऐसे में अगर देश में गेहूं का उत्पादन बढ़ता है तो निर्यात की अच्छी संभावनाएं हैं। करनाल स्थित भारतीय गेहूं एंव जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने निर्यात के मद्देनजर उच्च प्रोटीन कंटेंट वाले डूरम गेहूं के उत्पादन को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया। निर्यात के मामले में प्रोसेसिंग क्वालिटी के अलावा पोषण गुणवत्ता का महत्व भी बढ़ता जा रहा है। प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स के लिए गेहूं के निर्यात को बढ़ावा दिए जाने की भरपूर संभावनाएं हैं। इसके लिए गेहूं को कीट व रोगों से बचाने रखने के लिए विशेष उपाय करने होंगे।&nbsp;</p>
<p>दिन भर के कार्यक्रम में ब्रेकआउट सत्र के दौरान तीन ग्रुप बनाये गये और इन ग्रुप की सिफारिशों को सभी प्रतिभागियों के सामने रखा गया। यह ग्रुप के विषय थे इको-रीजनल प्रॉडक्शन ऑप्शंस, एक्सपोर्ट ऑप्शंस एंड वे फॉरवर्ड और क्वेरेंटाइ एंड एसपीएस कंसीडरेशन। पहले ग्रुप के कनवीनर आईआईडब्लूबीआर के डायरेक्टर डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह थे। दूसरे ग्रुप के कनवीनर एफएमसी के पब्लिक एंड इंडस्ट्री अफेयर, डायरेक्टर&nbsp; राजू कपूर और तीसरे ग्रुप के कनवीनर डीपीपीक्यूएस में प्लांट प्रोटेक्शन एडवाइजर जे पी सिंह थे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x_660294172feb7.jpg" alt="" /></p>
<p>गेहूं का उत्पादन बढ़ाने की रणनीति भविष्य में विविध और बहुविध आनुवंशिक सुधारों की आवश्यकता के साथ-साथ फसल वृद्धि चक्र को छोटा करने की संभावना है। फिलहाल भारत में करीब 3.17 करोड़ हेक्टेअर क्षेत्र में गेहूं की खेती होती है और गेहूं की औसत पैदावार औसतन 3.5 टन प्रति हेक्टेअर है। वर्ष 2010-11 और 2021-22 के बीच गेहूं की उत्पादकता में 17.94 फीसदी की वृद्धि हुई है। कृषि वैज्ञानिकों को मानना है कि अगर यूपी जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में जल्द बुवाई वाली किस्मों को अपनाया जाए तो गेहूं की उत्पादकता प्रति हेक्टर 5.5 से 6 टन तक पहुंचाई जा सकती है। हालांकि, गेहूं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए जलवायु परिवर्तन, घटते प्राकृतिक संसाधन, कीट और रोग पैटर्न और एबायोटिक स्ट्रेस (गर्मी, सूखा और लवणता) जैसी चुनौतियों से निपटना होगा।&nbsp;</p>
<p>एफएमसी के डायरेक्टर राजू कपूर का मानना है कि अभी भारत में निर्यात के लिए बहुत कम सरप्लस गेहूं है। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए गेहूं का उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ एक्सपोर्ट कलस्टर बनाने होंगे जहां और ग्लोबल पैरामीटर के हिसाब से &nbsp;गेहूं की टेस्टिंग, ग्रेडिंग और क्लीनिंग की सुविधा हो। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए रीजनल मैपिंग और गेहूं निर्यात केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता है। साथ ही व्यापार नीतियों में स्थायित्व पर भी जोर दिया।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x_6602948fbef3e.jpg" alt="" /></p>
<p>प्लांट प्रोटेक्शन एडवाइजर जेपी सिंह ने गेहूं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए &nbsp;पेस्ट फ्री प्रोडक्टशन, पेस्ट फ्री एरिया, पेस्ट स्कैनर समेत और प्रभावी निगरानी तंत्र को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने इस दिशा में किए जा रहे कार्यों और प्रगति के बारे में भी बताया। परिचर्चा के दौरान इको रीजनल प्रोडक्शन, निर्यात की संभावनाओं और उपायों तथा क्वारंटाइन से जुड़े मुद्दों पर तीन विशेषज्ञ समूहों से सुझाव प्राप्त किए।</p>
<p>परिचर्चा में डॉ. हिमांशु पाठक, डीजी आईसीएआर एवं सचिव डेयर, डॉ. भाग मल, सचिव तास, डॉ. आरबी सिंह, पूर्व अध्यक्ष नास, डॉ. पीएल गौतम, चांसलर आरसीपीएयू, एमएस सहारन, हेड पैथोलॉजी आईएआरआई तथा आरके त्यागी वरिष्ठ सलाहकार तास सहित कई कृषि वैज्ञानिक, एग्रीबिजनेस एक्सपर्ट, एफपीओ प्रतिनिधि और नीति-निर्माता शामिल हुए।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x_660294aede8e3.jpg" alt="" /></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_6602921e277fe.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं के उत्पादन और निर्यात की संभावनाएं, भारत कैसे बनेगा ग्लोबल लीडर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_6602921e277fe.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरसों का भाव एमएसपी से नीचे, खाद्य तेल उद्योग ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/mustard-price-below-msp-edible-oil-industry-demands-government-intervention.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 22 Mar 2024 12:55:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/mustard-price-below-msp-edible-oil-industry-demands-government-intervention.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खाद्य तेल उद्योग संगठन <strong>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए)</strong> ने सरसों की थाेक कीमतें 5,650 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी से नीचे आने पर चिंता जताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह किया है।एसईए के अध्यक्ष <strong>अजय झुनझुनवाला</strong> ने एमएसपी पर सरसों खरीद के लिए प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों खरीद केंद्र स्थापित करने के लिए नेफेड को निर्देश देने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरसों की मौजूदा बाजार कीमतें एमएसपी से नीचे हैं, जिसे देखते हुए तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता है।</p>
<p>अभी गुजरात और कोटा संभाग को छोड़कर देश में सरसों की सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई है। इस बीच, मंडियों में सरसों की आवक शुरू हो गई है और किसानों को एमएसपी से 1000 रुपये तक कम भाव पर सरसों बेचनी पड़ रही है। इससे तिलहन उत्पादक किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह लगातार दूसरा साल है जब किसानों को सरसों में घाटा हुआ। इस साल पहले फसल पर मौसम की मार पड़ी और अब सही भाव नहीं मिल पा रहा है।</p>
<p>एसईए के सीनियर एडवाइजर तथा पूर्व अध्यक्ष <strong>अतुल चतुर्वेदी</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि अगर किसानों को सरसों का उचित दाम नहीं मिलेगा तो वे इसे उगाने से हतोत्साहित हो जाएंगे। यह उद्योग जगत के भी हित में नहीं होगा। सरसों ही ऐसी फसल है जो देश को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की तरफ ले जा सकती है। पाम प्लांटेशन को तैयार होने में कई साल लग जाते हैं। बड़ी कोशिशों के बाद किसानों का रुझान सरसों की तरफ बढ़ा था, इसलिए किसानों को उचित दाम मिलना जरूरी है।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p>एसईए ने खाद्य तेलों की बढ़ती <strong>आयात निर्भरता</strong> पर भी चिंता जताई है। भारत में पिछले साल 1.38 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 165 लाख टन खाद्य तेलों का आयात हुआ था। देश में खाद्य तेलों की घरेलू जरूरत का करीब 57 फीसदी आयात के जरिए पूरा करता है। आयात पर निर्भरता कम करने के लिए तिलहन उत्पादन बढ़ाना जरूरी है।&nbsp;</p>
<p>खाद्य तेल उद्योग ने&nbsp;<strong>थोक मूल्य सूचकांक</strong> (डब्ल्यूपीआई) में खाद्य तेलों के वेटेज पर पुनर्विचार करने की भी मांग की है।&nbsp;एसईए का कहना है कि कुछ तेलों को दिया गया वेटेज उनके वास्तविक उपभोग रुझानों के अनुरूप नहीं है। इस बारे में हमने उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय से पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरसों का भाव एमएसपी से नीचे, खाद्य तेल उद्योग ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरसों का भाव एमएसपी से 900 रुपये तक गिरा, किसानों को सरकारी खरीद का इंतजार  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/mustard-price-falls-upto-rs-900-compared-from-msp-farmers-wait-for-government-procurement.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 21 Mar 2024 16:54:47 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/mustard-price-falls-upto-rs-900-compared-from-msp-farmers-wait-for-government-procurement.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के प्रमुख सरसों उत्पादक राज्यों में सरसों की कीमत 5650 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से<strong> 900 रुपये</strong> प्रति क्विंटल तक गिर चुकी हैं। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और असम की मंडियों में सरसों की कीमतें 4700 रुपये से 4800 रुपये प्रति क्विंटल के बीच हैं। कुछ जगह तो भाव 4200 रुपये तक गिर गया है। सरसों का भाव एमएसपी से नीचे गिरने के बावजूद सरकारी खरीद शुरू ना होने से किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है।&nbsp;</p>
<p>सरसों की फसल फरवरी में बाजार में आनी शुरू हो गई थी। एमएसपी से नीचे चल रही कीमतों से किसानों को राहत देने के लिए <strong>प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस)</strong> के तहत सरसों की खरीद अभी प्रभावी स्तर पर नहीं चल रही है। सरकार में <strong>उच्च पदस्थ सूत्रों</strong> के मुताबिक, अभी केवल गुजरात में खरीद शुरू हुई है और राजस्थान के कोटा संभाग में खरीद शुरू हुई है। अधिकांश राज्यों में होली के बाद ही सरकारी खरीद में तेजी आएगी। पीएसएस के तहत सरसों की खरीद नेफेड के जरिये की जाती है। चालू सीजन में सरकार ने 27.85 लाख टन सरसों की सरकारी खरीद का लक्ष्य रखा है।</p>
<p>हरियाणा में सरसों खरीद में देरी से किसानों में नाराजगी है और विपक्षी दल इसे मुद्दा बना रहे हैं। हरियाणा के जींद जिले की नरवाना तहसील के किसान <strong>अशोक दनौदा</strong> का कहना है कि हरियाणा सरकार सबसे ज्यादा फसलों की एमएसपी पर खरीद का दावा करती है लेकिन सरसों की खरीद अब तक शुरू नहीं की है जबकि किसान औने-पौने दाम पर सरसों बेचने को मजबूर हैं।&nbsp;</p>
<p>राजस्थान में <span>ग्रामीण किसान-मजदूर समिति (जीकेएस) के नेता <strong>संतवीर सिंह मोहनपुरा</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि सरसों की खरीद के लिए शुक्रवार से रजिस्ट्रेशन शुरू होंगे। लेकिन सरकार ने प्रति किसान परिवार 25 क्विंटल खरीद की लिमिट तय कर दी है। यह लिमिट बढ़ाकर 40 क्विंटल करनी चाहिए और हर किसान से खरीद होनी चाहिए। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन कराने में संयुक्त जोत वाले किसानों को कई दिक्कतें आ रही हैं जिन्हें दूर करने की जरूरत है। टॉप क्वालिटी की सरसों का दाम भी एमएसपी से लगभग 500 रुपये कम है। इससे किसानों के नुकसान का अंदाजा लगा सकते हैं।&nbsp; &nbsp; &nbsp;&nbsp;</span></p>
<p><span><strong>सस्ते आयात की मार</strong>&nbsp;</span></p>
<p>पिछले साल भी बड़े स्तर पर किसानों को सरसों की बिक्री एमएसपी से नीचे करनी पड़ी थी। यह स्थिति तब है जबकि देश में खाद्य तेलों की कुल जरूरत का करीब <strong>57 फीसदी</strong> हिस्सा आयात से पूरा होता है। सरसों की कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह खाद्य तेलों का <strong>सस्ता आयात </strong>भी&nbsp;है। देश में खाद्य तेलों की सालाना खपत करीब 240 से 250 लाख टन है। इसमें करीब 110 लाख टन की पूर्ति घरेलू उत्पादन से होती है जबकि बाकी जरूरत को आयातित खाद्य तेलों से पूरा किया जाता है। इसके लिए सालाना 140 से 150 लाख टन तक खाद्य तेलों का आयात होता है।</p>
<p>सरकार ने खाद्य तेलों के सस्ते आयात के लिए&nbsp;<strong>शून्य व रियायती आयात शुल्क</strong> पर 31 मार्च, 2025 तक आयात की छूट दे रखी है। जाहिर है ऐसे में पॉम ऑयल, सनफ्लावर ऑयल, सोयाबीन तेल और कैनोला तेल का आयात बढ़ेगा। वैश्विक बाजार में इन तेलों की कम कीमत के चलते सरसों किसानों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>सरकारी सूत्रों</strong> के मुताबिक सरकार लोक सभा चुनावों के मद्देनजर खाद्य तेलों कीमतों के मामले में कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहती है। ऐसे में फैसले उपभोक्ता हितों को देखकर ही लिए जा रहे हैं। वहीं एक्सपर्ट्स का कहना है कि आत्मनिर्भरता की वकालत करने वाली सरकार किसानों के हितों की अनदेखी कर खाद्य तेलों में देश को आत्मनिर्भर कैसे बना सकती है।</p>
<p><strong>बेहतर दाम के बाद किसानों को नुकसान&nbsp;</strong></p>
<p>दो साल पहले <strong>रूस-यूक्रेन युद्ध</strong> के चलते खाद्य तेलों की वैश्विक कीमतें आसमान छूने लगी थी। उस साल सरसों की कीमत 8000 रुपये प्रति क्विंटल को पार कर गई थी। बेहतर कीमत की उम्मीद में पिछले साल सरसों का रिकॉर्ड उत्पादन करने वाले किसानों को मायूसी हाथ लगी थी।</p>
<p>पिछले साल सरकारी एजेंसियों ने अप्रैल में सरसों की खरीद शुरू की थी। उसमें भी पीएसएस स्कीम के तहत कुल उत्पादन की 20 फीसदी खरीद की सीमा तय है। राज्य सरकारें अपनी खरीद की मात्रा केंद्र को भेजती हैं। जिसके आधार पर नेफेड खरीद करती है।</p>
<p>इस साल के लिए अभी राज्य सरकारें अपनी मांग केंद्र को भेज रही हैं। वहीं सरसों की फसल फरवरी में बाजार में आने शुरू हो जाती है। जबकि सरकारी खरीद अप्रैल में जाकर शुरू होती है। इस बीच, बड़े पैमाने पर किसानों को एमएसपी से नीचे सरसों बेचनी पड़ती है। इस साल भी अधिकांश राज्यों में यही हो रहा है।</p>
<p><strong>तिलहन उत्पादन में गिरावट का अनुमान&nbsp;</strong></p>
<p>तिलहन उत्पादन बढ़ाकर खाद्य तेलों में <strong>आत्मनिर्भरता</strong> लाने सरकार के दावों के बावजूद चालू वर्ष 2023-24 के खरीफ सीजन में देश का कुल <strong>तिलहन उत्पादन</strong> करीब 33 लाख टन घटकर 228.42 लाख टन रह सकता है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, चालू रबी सीजन में तिलहन उत्पादन पिछले साल से करीब चार लाख टन घटकर 137.56 लाख टन रहने की संभावना है। पिछले साल के मुकाबले इस रबी सीजन में सरसों की बुवाई का क्षेत्र 3.32 लाख हेक्टअर घटकर 85.20 लाख हेक्टेअर रहा है जबकि सरसों उत्पादन पिछले साल के लगभग बराबर <strong>126.96 लाख टन</strong> रहने का अनुमान है।&nbsp;</p>
<p>देश में साल 2021-22 में 107.19 लाख टन <strong>खाद्य तेलों</strong> का उत्पादन हुआ था जिसमें 38.19 लाख टन उत्पादन के साथ सरसों तेल सबसे ऊपर रहा। वहीं 2022-23 में कुल 113.48 लाख टन खाद्य तेल उत्पादन में सरसों की हिस्सेदारी 39.8 लाख टन रही। देश में खाद्य तेल उत्पादन में सरसों पहले स्थान पर है। इसके बाद सोयाबीन तेल, उसके बाद कॉटन सीड ऑयल और फिर राइस ब्रान ऑयल आता है। सरसों का एमएसपी निर्धारित होने के बावजूद अधिकांश सरसों उत्पादक राज्यों में किसानों को एमएसपी से कम कीमत पर सरसों बेचनी पड़ रही है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरसों का भाव एमएसपी से 900 रुपये तक गिरा, किसानों को सरकारी खरीद का इंतजार   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जोमैटो ने ‘प्योर वेज फ्लीट’ की हरी यूनिफॉर्म से हाथ खींचा, हुआ भूल का अहसास]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/zomato-had-to-remove-the-green-uniform-of-pure-veg-fleet-realized-its-mistake.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 20 Mar 2024 16:13:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/zomato-had-to-remove-the-green-uniform-of-pure-veg-fleet-realized-its-mistake.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>फूड डिलिवरी प्लेटफार्म जोमैटो के राइडर वेज फूड ले जा रहे हैं या नॉन-वेज फूड, उन्हें अब कपड़ों से नहीं पहचाना जाएगा। शुद्ध शाकाहारियों के लिए अलग "प्योर वेज मोड" सेवा शुरू करने के 18 घंटे के भीतर ही जोमैटो को अपनी गलती का अहसास हुआ और कंपनी ने हरी यूनिफॉर्म से हाथ खींच लिया।&nbsp;</p>
<p>जोमैटो के सीईओ <strong>दीपिंदर गोयल</strong> ने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि शाकाहारियों के लिए फ्लीट जारी रहेगी, लेकिन इसके लिए हरे रंग की यूनिफॉर्म का इस्तेमाल नहीं होगा। जोमैटो के सभी राइडर लाल पोशाक में दिखेंगे।</p>
<p><strong>क्यों हटानी पड़ी हरी पोशाक?</strong>&nbsp;&nbsp;</p>
<p>जोमैटो ने यह निर्णय शुद्ध शाकाहारी लोगों के लिए अलग फ्लीट पर मचे विवाद के बाद लिया है। अब वेज या नॉन-वेज फूड वाले जोमैटो राइडर्स लाल रंग की पोशाक में ही दिखेंगे। हालांकि, ऐप पर दिखेगा कि शाकाहारी ऑर्डर को शाकाहारी फ्लीट द्वारा पहुंचाया जा रहा है।</p>
<p>प्योज वेज डिलिवरी के लिए हरे रंग और रेगुलर सर्विस के राइडर की लाल रंग की यूनिफॉर्म को लेकर कई आपर्त्तियां जताई जा रही थीं। इस विवाद के बाद कंपनी ने फ्लीट के बीच रंग का भेद खत्म करने का निर्णय लिया है।</p>
<p><strong>सीईओ ने दी सफाई</strong></p>
<p>हरी पोशाक हटाने के फैसले के बारे में जोमैटो के सीईओ दीपिंदर गोयल का कहना है कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि हमारे लाल यूनिफॉर्म वाले डिलीवरी पार्टनर गलत तरीके से नॉन-वेज भोजन के साथ ना जोड़े जाएं, और उन्हें किसी विशेष दिन आरडब्ल्यूए या सोसायटी द्वारा ना रोका जाए। राइडर्स की सुरक्षा उनके लिए सर्वोपरि है।</p>
<p>गोयल ने कहा, &ldquo;हमें एहसास हुआ कि फ्लीट की अलग पहचान से कुछ ग्राहकों को भी मकान मालिकों के साथ परेशानी हो सकती है। अगर हमारी वजह से ऐसा हुआ तो यह अच्छी बात नहीं होगी। कल रात इस बारे में बात करने के लिए सभी को धन्यवाद। आपने हमें इस रोलआउट के अनपेक्षित परिणामों के बारे में समझाया।&rdquo;&nbsp;</p>
<p><strong>क्या है प्योज वेज मोड?</strong>&nbsp;</p>
<p>मंगलवार को जोमैटो ने "प्योर वेज फ्लीट" के साथ "प्योर वेज मोड" वाली सर्विस को लॉन्च किया था। यह सेवा उन ग्राहकों के लिए शुरू की गई है जो शुद्ध शाकाहारी भोजन पसंद करते हैं। इसमें यूजर्स को केवल शाकाहारी भोजन परोसने वाले रेस्तरां से फूड चुनने की अनुमति देगी। इस सेवा में वे आउटलेट शामिल नहीं होंगे जो शाकाहारी और मांस दोनों प्रकार की चीजें परोसते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>खूब हुई आलोचना</strong></p>
<p>जोमैटो के अलग शुद्ध शाकाहारी फ्लीट के निर्णय की खूब आलोचना हुई। इसके जरिए शुद्ध शाकाहार को थोपने के आरोप लगे। राइडर्स के हरे या लाल रंग की पोशाक से यह पहचानना आसान हो जाएगा कि वे जो खाना ले जा रहे हैं वह शाकाहारी है या मांसाहारी। इससे राइडर्स को भेदभाव और मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।&nbsp;</p>
<p>इस पर सफाई देते हुए गोयल ने कहा था कि "प्योर वेज फ्लीट" का उद्देश्य "किसी भी धार्मिक, या राजनीतिक प्राथमिकता" को अलग-थलग करना नहीं है। गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि वेज फ्लीट में भागीदारी डिलिवरी पार्टनर की आहार प्राथमिकताओं के आधार पर भेदभाव नहीं करेगी। लेकिन इससे विवाद नहीं थमा। आखिरकार कंपनी को "प्योज वेज फ्लीट" के लिए हरी यूनिफॉर्म लागू करने के फैसले को वापस लेना पड़ा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जोमैटो ने ‘प्योर वेज फ्लीट’ की हरी यूनिफॉर्म से हाथ खींचा, हुआ भूल का अहसास ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पूर्व अधिकारियों के समूह ने ग्रीन क्रेडिट नियमों पर उठाए सवाल, खतरों से किया आगाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/group-of-91-former-bureaucrats-raised-questions-on-green-credit-rules-warned-of-dangers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 19 Mar 2024 23:21:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/group-of-91-former-bureaucrats-raised-questions-on-green-credit-rules-warned-of-dangers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ग्रीन क्रेडिट नियमों के खतरों से आगाह करते हुए देश के 91 पूर्व अधिकारियों के समूह <strong>कॉन्स्टिट्यूशन&nbsp;कंडक्ट ग्रुप (सीसीजी)</strong> ने केंद्र सरकार को एक खुला पत्र लिखा है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री को लिखे इस पत्र में समूह ने ग्रीन क्रेडिट नियमों के जरिए जंगलों पर कॉरपोरेट के कब्जे की आशंका जताते हुए इन नियमों को वापस लेने का अनुरोध किया है।&nbsp;</p>
<p>मंगलवार को लिखे इस पत्र में सीसीजी ने<strong> ग्रीन क्रेडिट नियमों</strong> की खामियों को उजागर करते हुए कहा कि कोई भी धनराशि जंगल और जैव-विविधता वाली वन भूमि की भरपाई नहीं कर सकती है। इसके बावजूद सरकार ग्रीन क्रेडिट के जरिए उद्यमियों और उद्योगपतियों को उनकी परियोजनाओं के लिए वन भूमि के अधिग्रहण को आसान बना रही है। यह पर्यावरण और लोगों की आजीविका के लिए संकट पैदा कर सकता है।</p>
<p><strong>केंद्र सरकार</strong> ने पिछले साल ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम की शुरुआत की थी जो पर्यावरण से जुड़े विभिन्न स्वैच्छिक कार्यों के लिए बाजार आधारित तंत्र हैं। 22 फरवरी को जारी ग्रीन क्रेडिट नियमों के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति या निजी संस्था अब राज्य सरकार के नियंत्रण वाले खुले जंगल, झाड़ीदार भूमि, बंजर भूमि और जलग्रहण क्षेत्रों सहित खराब भूमि पर वृक्षारोपण कर ग्रीन क्रेडिट हासिल कर सकती है। इन ग्रीन क्रेडिट का कारोबार किया जा सकता है और इन्हें सीएसआर के कार्यों के रूप में माना जा सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>अधिसूचना</strong> में यह भी कहा गया है कि गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए वन भूमि के डायवर्जन के मामले में प्रतिपूरक वनीकरण को पूरा करने के लिए ग्रीन क्रेडिट का आदान-प्रदान किया जा सकता है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव को लिखे पत्र में सीसीजी ने आरोप लगाया कि सरकार उद्यमियों और उद्योगपतियों को जमीन के बदले जमीन देने की बजाय धन देकर वन भूमि के अधिग्रहण को आसान बनाने की कोशिश कर रही है।</p>
<p><strong>सेवानिवृत्त अधिकारियों</strong> के समूह का कहना है कि केवल पेड़ों की गिनती से जंगलों को मापना पूरी तरह से गलत है। सभी वन भूमि, चाहे घास के मैदान, आर्द्रभूमि, रेगिस्तान, झाड़ियं वन, या खुले वन अपने आप में पारिस्थितिक तंत्र हैं। इन क्षेत्रों में वृक्षारोपण करने का मतलब इन और अन्य प्रजातियों के अस्तित्व को समाप्त करना होगा।</p>
<p>सीसीजी का कहना है कि ऐसा लगता है कि सरकार ने इस विश्वास के साथ नियम जारी किए हैं कि वृक्षारोपण प्राकृतिक झाड़ियों की तुलना में अधिक कार्बन अवशोषित करते हैं। जबकि यह सच नहीं है। वृक्षारोपण आम तौर पर तेजी से बढ़ने वाले मोनोकल्चर हैं और यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध तथ्य है कि प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र की तुलना में वह कार्बन पृथक्करण के मामले में खराब हैं। देश में प्रतिपूरक वनीकरण के लिए वृक्षारोपण की सफलता पहले ही संदिग्ध है।</p>
<p><strong>ग्रीन क्रेडिट</strong> की अवधारणा को प्राकृतिक पर्यावरण के मुद्रीकरण और इसके दोहन के लिए कॉरपोरेट्स को सौंपने के उपाय के तौर पर देखा जा रहा है। वन विभाग को खराब वन भूमि पर वृक्षारोपण करने के लिए फंड देकर अर्जित ग्रीन क्रेडिट के बदले प्राचीन वन भूमि को कॉरपोरेट्स को सौंपना वास्तव में चौंकाने वाला है। ग्रीन क्रेडिट की व्यवस्था को कई विशेषज्ञ अवैज्ञानिक और पर्यावरण के लिए खतरनाक मान रहे हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पूर्व अधिकारियों के समूह ने ग्रीन क्रेडिट नियमों पर उठाए सवाल, खतरों से किया आगाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने रामदेव और बालकृष्ण को पेश होने को कहा, जानिए क्या है पूरा मामला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/supreme-court-asked-ramdev-and-balkrishna-to-appear-know-what-is-the-whole-matter.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 19 Mar 2024 13:01:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/supreme-court-asked-ramdev-and-balkrishna-to-appear-know-what-is-the-whole-matter.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पतंजलि की दवाओं के कथित भ्रामक प्रचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने योग गुरु रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने रामदेव को नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की जाए। मामले में अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।&nbsp;</p>
<p>जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने अवमानना नोटिसों का जवाब ना देने पर कड़ी नाराजगी जताई। पिछली सुनवाई में अदालत ने पतंजलि आयुर्वेद और आचार्य बालकृष्ण को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था कि क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। साथ ही पतंजलि की दवाओं के विज्ञापनों के प्रकाशन पर पाबंदियां लगा दी थीं। लेकिन पतंजलि की तरफ से जवाब नहीं आया। जिस पर अदालन ने अवमानना की कार्यवाही शुरू करते हुए रामदेव और बालकृष्ण को तलब किया है।&nbsp;</p>
<p>इससे पहले भी अदालत को दिए वचन का उल्लंघन करते हुए विज्ञापन छपवाने को लेकर पतंजलि के अधिकारियों को फटकार लगाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इलाज से जुड़े भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए केंद्र सरकार को भी निर्देश दिए थे।&nbsp;</p>
<p>पतंजलि की दवाओं के प्रचार और गंभीर बीमारियों के उपचार को लेकर रामदेव के दावे सवालों के घेरे में हैं। वे एलोपैथी चिकित्सा प्रणाली की भी खूब आलोचना करते रहे हैं। यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है और अब अवमानना की कार्यवाही भी शुरू हो चुकी है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>क्या है मामला</strong><strong>? </strong></p>
<p>इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) <span>ने एक याचिका दायर कर पतंजलि पर आधुनिक चिकित्सा पद्धति और दवाओं को बदनाम करने का आरोप लगाया है। पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने पतंजलि आयुर्वेद और उसके अधिकारियों को मीडिया (प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक दोनों) में भ्रामक विज्ञापन तुरंत बंद करने और अन्य चिकित्सा प्रणालियों की आलोचना ना करने की चेतावनी दी थी। पतंजलि ने अदालत को दिए हलफनामे में वचन दिया था कि औषधीय असर का दावा करने वाला कोई भी विज्ञापन या किसी दवा प्रणाली के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया जाएगा। लेकिन फिर भी पतंजलि ने विज्ञापन छपवाये। इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने पतंजलि और बालकृष्ण को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे।&nbsp;&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65f93f1c795cd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट ने रामदेव और बालकृष्ण को पेश होने को कहा, जानिए क्या है पूरा मामला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65f93f1c795cd.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मिशन पाम ऑयल के जरिए खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता पर जोर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/emphasis-on-self-sufficiency-in-edible-oils-through-palm-oil.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 15 Mar 2024 13:36:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/emphasis-on-self-sufficiency-in-edible-oils-through-palm-oil.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत सरकार खाद्य तेलों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए उत्तर-पूर्व क्षेत्र में ताड़ (पाम) की खेती पर जोर दे रही है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने के लिए उत्तर-पूर्व क्षेत्र में पाम तेल की खेती के महत्व पर जोर दिया है।&nbsp;</p>
<p>कृषि मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, "भारत वर्तमान में खाद्य तेल का शुद्ध आयातक है। देश में कुल खाद्य तेल का 57% विभिन्न देशों से आयात किया जाता है। खाद्य तेलों का आयात हमारे विदेशी मुद्रा पर 20.56 बिलियन डॉलर का नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। इसलिए देश के लिए तिलहन और पाम तेल को बढ़ावा देकर खाद्य तेल के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनना अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।"&nbsp;</p>
<p>अरुणाचल प्रदेश की यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन पाम ऑयल के तहत पहली तेल मिल का उद्घाटन किया था। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "मिशन पाम ऑयल भारत को खाद्य तेल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा और किसानों की आय में बढ़ोतरी करेगा।" उन्होंने ताड़ (पाम) की खेती करने के लिए किसानों का आभार व्यक्त किया था।</p>
<p>केंद्र सरकार ने अगस्त 2021 में राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - ऑयल पाम (एनएमईओ-ओपी) शुरू किया था, जिसके तहत 2025-26 तक कच्चे पाम तेल का उत्पादन 11.20 लाख टन तक बढ़ाने का लक्ष्य है। यह योजना 15 राज्यों में चालू है, जिसमें 21.75 लाख हेक्टेयर का संभावित क्षेत्र शामिल है। एनएमईओ-ओपी के तहत पाम ऑयल को बढ़ावा देने के लिए 11,040 रुपये के कुल राष्ट्रीय बजट में से विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए 5,870 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें केंद्र सरकार 90 फीसदी योगदान करेगी।</p>
<p>अब तक, मिशन के तहत 1 करोड़ रोपण सामग्री की क्षमता वाली 111 नर्सरी स्थापित की गई हैं और 1.2 करोड़ रोपण सामग्री की क्षमता वाले 12 बीज उद्यान स्थापित किए गए हैं। पूर्वोत्तर के छह राज्यों- अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा में पाम ऑयल का उत्पादन का होता है। इन राज्यों में पाम ऑयल उत्पादन के लिए 8.4 लाख हेक्टेयर का एक विशाल संभावित क्षेत्र है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>एनएमईओ-ओपी के तहत किसानों को रोपण सामग्री, प्रबंधन और एनईआर के किसानों के सामने आने वाली भूमि से संबंधित चुनौतियों (भूमि निकासी, हाफ-मून छत निर्माण, जैव-बाड़ लगाना) के समाधान के लिए प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये की विशेष सहायता दी जाती है। इसके अलावा किसानों को कटाई उपकरणों की खरीद के लिए 2.90 लाख रुपये की सहायता दे रहा है। कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) की स्थापना के लिए 25 लाख रुपये की सहायता दी गई है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मिशन पाम ऑयल के जरिए खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता पर जोर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रामलीला मैदान में एसकेएम ने दिखाई एकजुटता; देशव्यापी आंदोलन का आह्वान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/skm-showed-strength-in-ramlila-maidan-call-for-mass-movement-across-the-country.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 14 Mar 2024 20:53:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/skm-showed-strength-in-ramlila-maidan-call-for-mass-movement-across-the-country.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दिल्ली के रामलीला मैदान में संयुक्त किसान मोर्चा (<span>एसकेएम</span>) <span>की किसान-मजदूर महापंचायत में आज बड़ी तादाद में देश भर के किसान जुटे। इस महापंचायत को ट्रेड यूनियनों ने भी समर्थन दिया था। एसकेएम ने भाजपा की नीतियों की आलोचना करते हुए देश भर में संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। &nbsp;भाजपा के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की अपील&nbsp;</span></p>
<p>लंबे समय बाद संयुक्त किसान मोर्चा के तमाम बड़े नेता एक मंच पर नजर आए। एसकेएम के नेताओं ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (<span>एमएसपी</span>) <span>की कानूनी गारंटी की मांग करते हुए केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। किसान नेताओं ने हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर किसानों के खिलाफ दमनकारी कार्रवाई की निंदा की।</span>&nbsp;</p>
<p>भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली के रामलीला मैदान से किसानों ने सरकार को संदेश दिया है कि देश का किसान एकजुट है। सरकार किसानों से बात करे और उनकी समस्या का समाधान निकाले। किसान आंदोलन खत्म नहीं होगा। कश्मीर से कन्याकुमारी तक हमारे आंदोलन चलेंगे।&nbsp;</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान-मजदूर महापंचायत में देश के सभी तबकों के लोगों से केंद्र सरकार की कॉर्पोरेट, सांप्रदायिक, तानाशाही नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया तथा भाजपा के खिलाफ देशव्यापी जन आंदोलन खड़ा करने की अपील की। &nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x_65f3163db13c8.jpg" alt="" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>एसकेएम ने सभी फसलों के एमएसपी के बारे में 9 दिसंबर 2021 को हुए समझौते को लागू नहीं करने को लेकर सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। किसान नेताओं ने भाजपा द्वारा लखीमपुर खीरी से केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी को उम्मीदवार बनाए पर सवाल उठाते हुए सरकार पर टेनी को बचाने का आरोप लगाया। एसकेएम ने वर्ष 2014-2022 के बीच एक लाख से ज्यादा किसानों की आत्महत्या के बावजूद किसानों के लिए व्यापक ऋण माफी योजना लागू नहीं करने को लेकर भी मोदी सरकार की आलोचना की।&nbsp;</p>
<p>खनौरी बॉर्डर पर किसान शुभकरण सिंह की हत्या और किसानों के दमन को लेकर एसकेएम ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे और पुलिस गोलीबारी की न्यायिक जांच की मांग की है। एसकेएम ने कॉरपोरेट लूट से किसानों की रोजी-रोटी को बचाने तथा देश के लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष स्वरूप की रक्षा का आह्वान भी किया। धनबल और बाहुबल के खतरे के खिलाफ एसकेएम 23 मार्च 2024 को देश भर के गांवों में 'लोकतंत्र बचाओ' दिवस मनाएगा।</p>
<p>किसान मजदूर महापंचायत को किसान नेता जोगिंदर सिंह उग्राहां, गुरनाम सिंह चढूनी, बलबीर सिंह राजेवाल, हरमीत सिंह कादियान, हरेंद्र सिंह लाखोवाल, कुलवंत संधू, सुरेश कौथ, तजिंदर सिंह विर्क, राजाराम सिंह, डॉ. दर्शनपाल, विजू कृष्णन, अविक साहा और राकेश टिकैत के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर सहित कई किसान नेताओं ने संबोधित किया।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x_65f3165a1ebc5.jpg" alt="" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65f316276839c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रामलीला मैदान में एसकेएम ने दिखाई एकजुटता; देशव्यापी आंदोलन का आह्वान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिल्ली में आज किसान मजदूर महापंचायत, किसानों को रोकने पर भड़के टिकैत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/kisan-mazdoor-mahapanchayat-in-delhi-today-tikait-angry-at-stopping-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 14 Mar 2024 10:02:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/kisan-mazdoor-mahapanchayat-in-delhi-today-tikait-angry-at-stopping-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सहित कई मांगों को लेकर आज दिल्ली के रामलीला मैदान में किसानों की बड़ी महापंचायत बुलाई गई है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) द्वारा आयोजित अखिल भारतीय किसान मजदूर महापंचायत में भाग लेने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की तादाद में किसान दिल्ली पहुंच चुके हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x_65f27cf26ea7a.jpg" alt="" /></p>
<p>इस बीच, किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोके जाने की खबरें भी मिल रही हैं। बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि उत्तर प्रदेश के जनपद गौतम बुद्ध नगर में दिल्ली महापंचायत में आ रहे किसानों को पुलिस प्रशासन गांव में जाकर रोकने का काम कर रहा है। जो भी थाना किसानों को रोकेगा, हम वहीं पर पंचायत करेंगे।&nbsp;</p>
<p>मुरादाबाद से दिल्ली जा रही किसानों से भरी ट्रेन को बीती रात 1 बजे गाजियाबाद में रोका। ट्रेन रोकने पर किसान भड़क गए और काफी हंगामा हुआ। तब जाकर ट्रेन आगे बढ़ाई गई। रामलीला मैदान में किसान महापंचायत के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक एडवाजरी जारी की है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x_65f27b8461668.jpg" alt="" /></p>
<p>दिल्ली किसान महापंचायत के लिए बीकेयू उग्रहां की तरफ से 1500 बसों का काफिला दिल्ली के लिए रवाना हुआ। महापंचायत में एसकेएम के सभी बड़े नेता मौजूद रहेंगे। किसानों के मार्च के मद्देनजर दिल्ली की तीनों सीमाओं सिंघू, टिकरी और गाजीपुर पर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। वहां सख्त चेकिंग के चलते जाम लग गया है।&nbsp;</p>
<p>किसानों ने आरोप लगाया कि दिल्ली में आज होने वाली किसान महापंचायत से पहले सीवर का गंदा पानी रामलीला मैदान में भर दिया। इसकी परवाह ने करते हुए हजारों की तादाद में किसान रामलीला मैदान में जुटे।</p>
<p>महापंचायत का समय सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक रखा गया है। कई राज्यों से किसान रात में ही दिल्ली पहुंचना शुरू हो गए थे। किसानों को रामलीला मैदान में महापंचायत की अनुमति कई शर्तों के साथ मिली है। इस दौरान 5 हजार किसानों को ही मैदान में जुटने की अनुमति है और वह अपने साथ ट्रैक्टर आदि नहीं ला सकेंगे।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिल्ली में आज किसान मजदूर महापंचायत, किसानों को रोकने पर भड़के टिकैत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गांवों की महिलाओं को सशक्त बनाने से विश्व की जीडीपी 82 लाख करोड़ रुपए बढ़ जाएगीः एफएओ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/global-gdp-to-increase-by-1-trillion-dollar-if-rural-women-are-empowered.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 10 Mar 2024 16:56:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/global-gdp-to-increase-by-1-trillion-dollar-if-rural-women-are-empowered.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">अगर लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण में निवेश किया जाए तो इससे बेहतर आर्थिक विकास और खाद्य सुरक्षा मिलने के साथ लोगों को आमदनी के अवसर मिलेंगे तथा उनका जीवन स्तर बेहतर होगा। खासकर ग्रामीण इलाकों में इसका फायदा मिलेगा जहां सबसे ज्यादा गरीब रहते हैं। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की तरफ से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि उत्पादकता और मजदूरी में अगर लैंगिक भेद को खत्म किया जाए तो पूरी दुनिया का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) एक प्रतिशत बढ़ सकता है। यह लगभग 1 लाख करोड़ डॉलर यानी 82 लाख करोड़ रुपए के बराबर होगा। एफएओ ने एग्री फूड सिस्टम में महिलाओं की स्थिति पर रिपोर्ट भी जारी की है। इसमें कहा गया है कि लैंगिक समानता से विश्व स्तर पर खाद्य असुरक्षा कम करने में मदद मिलेगी। कम से कम 4.5 करोड़ ज्यादा लोग खाद्य सुरक्षा हासिल कर सकेंगे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट की वाइस प्रेसिडेंट गेरारडिन मुकेशिमाना ने कहा, महिलाओं में निवेश का मतलब है सतत विकास। निवेश पर रिटर्न सिर्फ गरीबी से लड़ने और असमानता दूर करने के रूप में नहीं मिलेगी, बल्कि इससे हमारे संस्थान, हमारी अर्थव्यवस्था और अंततः हमारी कम्युनिटी मजबूत होगी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एफएओ की डिप्टी डायरेक्टर जनरल मारिया हेलेना सीमेदो ने कहा, खासकर निम्न और मध्य आय वाले देशों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि खाद्य प्रणाली में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए समावेशी और समान ग्रामीण विकास के लिए लैंगिक भेद को मिटाना महत्वपूर्ण है। इस अंतर को कम करने से न सिर्फ महिलाएं सशक्त होंगी बल्कि इसका उनके परिवार और समुदाय को भी लाभ मिलेगा।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एफएओ के अनुसार एग्री फूड सिस्टम अनेक देशों में महिलाओं के लिए आमदनी का प्रमुख साधन है। एफएओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2019 में पूरी दुनिया में 36% कामकाजी महिलाएं और 38 प्रतिशत कामकाजी पुरुष एग्री फूड सिस्टम पर निर्भर थे। उप सहारा अफ्रीका में 66% महिलाएं एग्री फूड सिस्टम पर निर्भर हैं जबकि पुरुषों के मामले में यह निर्भरता 60% है। दक्षिण एशिया में 71% महिलाएं एग्री फूड सिस्टम पर निर्भर है जबकि सिर्फ 47% पुरुष एग्री फूड सिस्टम में काम करते हैं।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा के लिए महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद हमारे भेदभाव वाले सामाजिक तौर-तरीकों के कारण महिलाओं को समान दर्जा नहीं हासिल है। इससे वे भूख और गरीबी से ज्यादा जूझ रही हैं। वर्ष 2022 में 38.8 करोड़ महिलाएं और लड़कियां अत्यधिक गरीबी में जी रही थीं। यही नहीं 27.8% महिलाएं आंशिक या गंभीर रूप से खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही थीं। एफएओ के अनुसार कृषि में महिलाओं की आमदनी पुरुषों की तुलना में 18.4% कम होती है। इसके अलावा हीट वेव और बाढ़ जैसी आपदाएं ग्रामीण महिलाओं और पुरुषों को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करती हैं। इससे भी दोनों के बीच आमदनी का अंतर बढ़ जाता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एफएओ, इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट तथा वर्ल्ड फूड प्रोग्राम की एक साझा रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2030 तक लैंगिक समानता हासिल करने में सबसे बड़ी बाधा फाइनेंसिंग की है। इसमें हर साल 360 अरब डॉलर की कमी है। वर्ष 2020 के बाद कोविड-19 महामारी, युद्ध, जलवायु संकट तथा आर्थिक संकट ने 7.5 करोड़ अतिरिक्त लोगों को भीषण गरीबी में धकेल दिया है। इस वजह से इस दशक के अंत तक 34.2 करोड़ महिलाएं और लड़कियां गरीबी रेखा से नीचे जी रही होंगी।</span></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65ec47057bad4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गांवों की महिलाओं को सशक्त बनाने से विश्व की जीडीपी 82 लाख करोड़ रुपए बढ़ जाएगीः एफएओ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चुनाव से पहले चुनाव आयुक्त अरुण गोयल ने क्यों दिया इस्तीफा?]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/why-election-commissioner-arun-goel-resigned-before-lok-sabha-elections.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 10 Mar 2024 10:52:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/why-election-commissioner-arun-goel-resigned-before-lok-sabha-elections.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">लोकसभा चुनाव की तारीख इस हफ्ते घोषित किए जाने की उम्मीद है, लेकिन उससे पहले चुनाव आयुक्त अरुण गोयल ने इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफा के बाद आयोग में अब सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार रह गए हैं। तीन आयुक्तों में से एक आयुक्त का पद पहले ही खाली पड़ा है। अनूप चंद्र पांडे हाल ही चुनाव आयुक्त पद से रिटायर हुए हैं। गोयल से पहले 2020 में अशोक लवासा ने भी चुनाव आयुक्त पद से इस्तीफा दिया था।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">शनिवार को अरुण गोयल का इस्तीफा चौंकाने वाला रहा। क्योंकि एक दिन पहले तक चुनावी तैयारी के सिलसिले में वे लगातार बैठकें कर रहे थे। वे 12 मार्च को जम्मू-कश्मीर जगाने वाले थे वहां चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाना था। राष्ट्रपति भवन की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में गोयल का इस्तीफा स्वीकार करने की बात कही गई है, लेकिन उसमें कोई कारण नहीं बताया गया है। यह इसलिए भी चौंकाने वाला है कि, खबरों के मुताबिक, इस्तीफे की प्रति मुख्य चुनाव आयुक्त को नहीं भेजी गई। गोयल 1985 बैच के पंजाब कैडर के आईएएस अधिकारी हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार चुनाव आयोग एक सदस्य के साथ भी काम कर सकता है। इस अनुच्छेद में कहा गया है कि आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त होंगे। उनके साथ चुनाव आयुक्त होंगे, यदि राष्ट्रपति उन्हें नियुक्त करते हैं तो। हालांकि 1993 से आयोग में कभी एक आयुक्त नहीं रहा।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">जिस तरह अरुण गोयल का इस्तीफा चौंकाने वाला है उसी तरह उनकी नियुक्ति ने भी चौंकाया था। आयोग में आने से पहले वह भारी उद्योग मंत्रालय में सचिव थे। 18 नवंबर 2022 को अचानक उन्होंने स्वैच्छिक रिटायरमेंट (वीआरएस) ले लिया। एक दिन बाद ही सरकार ने उन्हें चुनाव आयुक्त नियुक्त किया और 21 नवंबर को उन्होंने पदभार संभाला। उनकी नियुक्ति की फाइल बिजली की गति से पास होने के कारण फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई थी। हालांकि अगस्त 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार का कार्यकाल फरवरी 2025 में खत्म होगा। उनके बाद गोयल ही मुख्य चुनाव आयुक्त होते। इस्तीफा न देने पर 2027 तक वे आयोग में रहते। इससे पहले 2020 में अशोक लवासा ने चुनाव आयुक्त पद से इस्तीफा दिया था। चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आयोग की तरफ से बहुमत से क्लीन चिट दी गई थी, लेकिन लवासा ने इसके खिलाफ मत दिया था।</span></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चुनाव से पहले चुनाव आयुक्त अरुण गोयल ने क्यों दिया इस्तीफा? ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65ed4383c62d3.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महिला दिवस विशेषः श्रम बल में शामिल होने वाली 79% नई महिलाओं को काम असंगठित क्षेत्र में]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/womens-day-special-79-of-new-women-joining-the-labor-force-work-in-the-informal-sector..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 08 Mar 2024 15:40:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/womens-day-special-79-of-new-women-joining-the-labor-force-work-in-the-informal-sector..html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वर्ष 2030 तक दुनिया में कामकाजी उम्र के प्रत्येक पांच लोगों में से एक भारतीय होगा। भारत लगातार 7% से ऊपर की विकास दर हासिल करेगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत जनसांख्यिकी में इस बदलाव का कितना लाभ उठाता है। सीधे शब्दों में कहें तो मौजूदा कामकाजी लोगों और आने वाली श्रम शक्ति, दोनों को खपाने के लिए 11.5 करोड़ से अधिक नौकरियां सृजित करनी पड़ेंगी। इस सफलता के दो प्रमुख तत्व हैं- महिला श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) में बढ़ोतरी और औपचारिक क्षेत्र में नौकरियां पैदा करना। लेकिन श्रम बल में शामिल होने वाली 79% नई महिलाएं असंगठित क्षेत्र में जा रही हैं।</p>
<p>ग्लोबल रिसर्च फर्म नेटिक्सिस ने महिला दिवस पर जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही है। इसके मुताबिक पिछले दशक में भारत ने इन दोनों मोर्चों पर प्रगति की है, लेकिन अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है। नए श्रम सर्वेक्षण के आधार पर देखें तो श्रम बल में महिला भागीदारी दर 2012 के 31% से बढ़कर 2023 में 37% हो गई है। पुरुषों की भागीदारी दर 80% के आसपास ही है। कुल श्रम भागीदारी दर 2012 में 56% थी, जो 2023 में बढ़कर 58% हो गई है। यह श्रम बल में महिलाओं के शामिल होने के कारण हो सका है।&nbsp;</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत में लगभग 11.2 करोड़ नौकरियां पैदा हुई हैं और इसमें 6.1 करोड़ महिलाएं और 5.1 करोड़ पुरुष हैं। हालांकि दूसरे एशियाई देशों से तुलना करें तो इस अनुपात को और बढ़ाने की गुंजाइश है। वियतनाम में महिला एलएफपीआर 75% और चीन में 71% है। पूरे एशिया का औसत 63% है।</p>
<p><strong>संगठित क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी कम</strong><br />नेटिक्सिस की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के विकास की एक अहम शर्त श्रम बाजार को संगठित बनाने की है। एक बड़ा मध्यम वर्ग बनाने, भारतीय परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ाने, प्रत्यक्ष कर से मिलने वाले राजस्व का हिस्सा बढ़ाने और पेंशन और म्यूचुअल फंड में अधिक निवेश के लिए यह महत्वपूर्ण है। पेरोल डेटा के आधार पर देखा जाए तो बीते 10 वर्षों में संगठित क्षेत्र में 6.4 करोड़ नौकरियां बढ़ी हैं। महिलाएं इस प्रक्रिया में तेजी से शामिल हो रही हैं, लेकिन अब भी केवल 1.28 करोड़ महिलाएं संगठित क्षेत्र में हैं। श्रम बल में शामिल होने वाली 79% नई महिलाएं असंगठित क्षेत्र में जा रही हैं, संगठित क्षेत्र में पुरुषों को अधिक काम मिल रहा है।</p>
<p>इन दोनों मोर्चों पर प्रगति हुई है, फिर भी भारत को 2030 तक महिला एलएफपीआर को 50% करने और संगठित क्षेत्र में नौकरी का अनुपात 20% तक करने की जरूरत है। इसके लिए प्रति वर्ष 1.65 करोड़ नौकरियां पैदा करने की आवश्यकता होगी। बीते दशक में प्रति वर्ष 1.24 करोड़ नौकरियां पैदा हुई हैं। इन 1.65 करोड़ नौकरियों में से 1.04 करोड़ संगठित क्षेत्र में होनी चाहिए। ऐसा करने और श्रम बल की डिमांड बढ़ाने के लिए सभी स्तर पर सुधार लागू करने होंगे। अगर ऐसा हुआ तो यह न केवल भारत बल्कि दुनिया को भी बदल देगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महिला दिवस विशेषः श्रम बल में शामिल होने वाली 79% नई महिलाओं को काम असंगठित क्षेत्र में ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज और आलू उत्पादन में कमी के आसार, बढ़ेगा टमाटर उत्पादन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/onion-and-potato-production-likely-to-decrease-tomato-production-to-increase.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 07 Mar 2024 22:05:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/onion-and-potato-production-likely-to-decrease-tomato-production-to-increase.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि मंत्रालय ने विभिन्न बागवानी फसलों के क्षेत्र और उत्पादन के 2022-23 के अंतिम अनुमान और 2023-24 के पहले अग्रिम अनुमान जारी किए हैं। इस साल प्याज और आलू के उत्पादन में कमी आ सकती है जबकि टमाटर का उत्पादन बढ़ने का अनुमान है।&nbsp;</p>
<p>देश में बागवानी उत्पादन पिछले वर्ष के 35.54 करोड़ टन के मुकाबले लगभग 35.52 करोड़ टन होने का अनुमान है। लेकिन प्याज उत्पादन में करीब 16 फीसदी की गिरावट आ सकती है। वर्ष 2023-24 में प्याज का उत्पादन लगभग 254.73 लाख टन होने की उम्मीद है, जबकि पिछले साल यह लगभग 302.08 लाख टन था। इस गिरावट का कारण महाराष्ट्र में 34.31 लाख टन, कर्नाटक में 9.95 लाख टन, आंध्रप्रदेश में 3.54 लाख टन और राजस्थान में 3.12 लाख टन प्याज उत्पादन की कमी है।&nbsp;</p>
<p>2021-22 में 316.87 लाख टन प्याज का उत्पादन हुआ था। पिछले साल भी प्याज उत्पादन में कमी आई थी जिसके चलते सरकार को महंगाई रोकने के लिए प्याज के निर्यात पर रोक लगाने समेत कई कदम उठाने पड़े। पिछले दो साल में प्याज उत्पादन में करीब 20 फीसदी की गिरावट महंगाई के मोर्चे पर सरकार के लिए चिंताजनक है। इस साल मौसम के बिगड़े मिजाज के कारण प्याज की फसल को नुकसान पहुंचा है।</p>
<p>2023-24 में आलू का उत्पादन लगभग 589.94 लाख टन होने की उम्मीद है, जबकि पिछले वर्ष लगभग 601.42 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ था। इस गिरावट का कारण पश्चिम बंगाल में पिछले वर्ष की तुलना में आई कमी है। टमाटर का उत्पादन पिछले साल के लगभग 204.25 लाख टन की तुलना में इस साल लगभग 208.19 लाख टन होने की उम्मीद है, जो 1.93 प्रतिशत लाख टन की वृद्धि है।</p>
<p>कृषि मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, बागवानी फसलों का क्षेत्रफल पिछले वर्ष के 284.4 लाख हेक्टेयर से मामूली वृद्धि के साथ 2023-24 में 287.7 लाख हेक्टेयर हो गया है। फलों का उत्पादन 2022-23 में 11.02 करोड़ टन से बढ़कर 2023-24 में 11.20 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान मुख्य रूप से केला, नारंगी और आम के उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद है।</p>
<p>वर्ष 2023-24 में सब्जियों का उत्पादन 21.25 करोड़ टन से घटकर 20.93 करोड़ टन होने का अनुमान है। हालांकि, पत्तागोभी, फूलगोभी, कद्दू, टमाटर और अन्य सब्जियों के उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद है। टमाटर का उत्पादन पिछले साल के लगभग 204.25 लाख टन की तुलना में इस साल लगभग 208.19 लाख टन होने की उम्मीद है, जो 1.93 प्रतिशत लाख टन की वृद्धि है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज और आलू उत्पादन में कमी के आसार, बढ़ेगा टमाटर उत्पादन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[क्या नाना पाटेकर ने किसानों से कहा, अच्छे समय का इंतजार मत करो, तय करो सरकार किसकी लानी है?]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/did-nana-patekar-tell-the-farmers-do-not-wait-for-good-times-decide-whose-government-to-bring.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Mar 2024 18:01:45 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/did-nana-patekar-tell-the-farmers-do-not-wait-for-good-times-decide-whose-government-to-bring.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसानों के बारे में अभिनेता नाना पाटेकर का एक बयान काफी वायरल हो रहा है। इनमें नाना पाटेकर ने किसानों से कहा कि सरकार से अब कुछ मत मांगो। बल्कि तय करो कि देश में सरकार किसकी लानी है। नाना पाटेकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर किसान आंदोलन चल रहा है और देश के कई इलाकों में किसान अपनी मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>नाना पाटेकर ने यह बयान पांच मार्च को नासिक के निकट सह्याद्री फार्म में आयोजित शेतकरी साहित्य सम्मेलन के अवसर पर दिया था। नाना पाटेकर ने ही इस सम्मेलन का उद्घाटन किया था। अपने संबोधन में नाना पाटेकर ने कहा कि जब सोने की कीमतें बढ़ रही हैं, तो चावल की कीमतें क्यों नहीं बढ़ रही हैं? किसान पूरे देश को भोजन उपलब्ध कराते हैं लेकिन सरकार के पास उनकी शिकायतों को दूर करने के लिए समय नहीं है। ऐसी सरकार से किसानों को कुछ नहीं मांगना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>नाना पाटेकर ने कहा, &ldquo;पहले किसान 80-90 फीसदी किसान थे। अब 50 फीसदी किसान हैं। सरकार से अब कुछ मांगों मत। तय करो कि सरकार किसकी लानी है।&rdquo; उन्होंने कहा कि किसान अच्छे समय का इंतजार न करें बल्कि दृढ़ता से अच्छा समय लाना चाहिए। मौजूदा स्थिति को बदलने के लिए हम सभी को एकजुट होकर प्रयास करना चाहिए।</p>
<p>राजनीति में शामिल होने के सवाल पर नाना पाटेकर ने कहा, &ldquo;मैं राजनीति में नहीं जा सकता क्योंकि, जो पेट में है वही मुंह पर आ जाएगा और वो मुझे पार्टी से निकाल देंगे। पार्टियां बदलते-बदलते एक महीने के अंदर सारी पार्टियां खत्म हो जाएंगी। यहां आपके यानी हमारे किसान भाईयों के सामने हम दिल की बात कर सकते हैं। जो हमें रोज अन्न देता है, उसकी किसी को पड़ी नहीं, तो हमें आपकी यानी सरकार की क्या पड़ी है?&rdquo; उन्होंने कहा, "अगर मैं आत्महत्या भी कर लूं तो भी मैं किसान ही बनकर जन्म लूंगा, किसान कभी ये नहीं कहेगा कि मैं किसान के रूप में जन्म नहीं लेना चाहता हूं।"&nbsp;</p>
<p>नाना पाटेकर किसानों के मुद्दों पर पहले भी आवाज उठाते रहे हैं। महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त किसानों की मदद के लिए वह नाम फाउंडेशन चलाते हैं। उनका कहा था कि किसान आत्महत्या ना करें, बल्कि उन्हें फोन करें। शेतकरी साहित्य सम्मेलन का आयोजन सह्याद्री फार्म्स के संस्थापक विलास शिंदे ने किया जो शरद जोशी की चतुरंग कृषि की अवधारणा को क्रियान्वित करने का प्रयास कर रहे हैं। नाना पाटेकर ने शेतकरी साहित्य सम्मेलन की गतिविधियों के लिए नाम फाउंडेशन की ओर से दो लाख रुपये देने की भी घोषणा की।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ क्या नाना पाटेकर ने किसानों से कहा, अच्छे समय का इंतजार मत करो, तय करो सरकार किसकी लानी है? ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे जयंत चौधरी! बागपत व बिजनौर से उम्मीदवारों का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/jayant-chaudhary-will-not-contest-lok-sabha-elections-candidates-announced-from-baghpat-and-bijnor.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 04 Mar 2024 20:17:34 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/jayant-chaudhary-will-not-contest-lok-sabha-elections-candidates-announced-from-baghpat-and-bijnor.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने के बाद राष्ट्रीय लोकदल ने दो लोकसभा और एक विधान परिषद सीट पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। एनडीए गठबंधन में रालोद के हिस्से में यूपी की दो लोकसभा सीटें बागपत और बिजनौर आई हैं।&nbsp;</p>
<p>चौंकाने वाले बात है कि राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी बागपत से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। बागपत से पार्टी ने पुराने, <span>निष्ठावान नेता डॉ. राजकुमार सांगवान को उम्मीदवार बनाया है जबकि बिजनौर सीट से मीरापुर विधायक चंदन चौहान को मैदान में उतारा है। डॉ. सांगवान चौधरी चरण सिंह के अनुयायी और लोकदल के पुराने</span>, <span>समर्पित नेता हैं। उन्हें उम्मीदवार बनाकर पार्टी कार्यकर्ताओं को अच्छा संदेश देने की कोशिश की गई है। यूपी विधान परिषद के लिए राष्ट्रीय लोकदल ने योगेश चौधरी को प्रत्याशी बनाया है।</span>&nbsp;</p>
<p>लगभग पांच दशक बाद पहली बार बागपत लोकसभा सीट से चौधरी चरण सिंह परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। <span>बागपत की पहचान लोकदल की परंपरागत सीट के तौर पर रही है।&nbsp;</span> सन 1977 से 1987 तक पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने लोकसभा में बागपत का प्रतिनिधित्व किया था,<span> जबकि 1989 से 2014 तक पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह बागपत से लोकसभा चुनाव लड़ते रहे। इस दौरान वे सिर्फ एक बार 1998 में चुनाव हारे, लेकिन 1999 में दोबारा जीत गये थे। 2014 में उन्हें बागपत से दोबारा हार का सामना करना पड़ा था। 2019 में अजित सिंह ने मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ा, जबकि जयंत चौधरी बागपत से चुनाव लड़े थे।</span></p>
<p><span>जयंत चौधरी के लोकसभा चुनाव ना लड़ने के फैसले से पार्टी के नेता और कार्यकर्ता हैरान हैं।</span> जयंत फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं और स्पष्ट है कि अब वे राज्यसभा के सहारे अपनी राजनीति को आगे बढ़ाएंगे। करीब 53 साल बाद चौधरी चरण सिंह परिवार का कोई सदस्य लोकसभा चुनाव में नहीं है। हालांकि, डॉ. सांगवान जैसे समर्पित नेता और चंदन चौहान व योगेश चौधरी जैसे युवा चेहरों को मौका देकर जयंत चौधरी ने कार्यकर्ताओं का मनोबल को बढ़ाने का प्रयास किया है।&nbsp;</p>
<p>माना जा रहा था कि अगर जयंत चौधरी बागपत से चुनाव नहीं लड़ते हैं तो उनकी पत्नी चारू चौधरी बागपत से चुनाव लड़ सकती हैं। लेकिन सभी कयासों को धता बताते हुए राष्ट्रीय लोकदल ने डॉ. राजकुमार सांगवान को बागपत से पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया। उम्मीदवारों के ऐलान पर जयंत चौधरी ने ट्विट किया, &ldquo;राष्ट्रीय लोकदल का झंडा बुलंद रखने वाले ये तीनों प्रतिनिधि आपके सहयोग और आशीर्वाद से सदन पहुँचकर किसान, कमेरा और विकास की बात करेंगे!&rdquo;&nbsp;</p>
<p>शनिवार को जयंत चौधरी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर औपचारिक तौर पर एनडीए में शामिल होने का ऐलान किया था। बागपत और बिजनौर लोकसभा सीटों पर रालोद उम्मीदवारों के ऐलान के साथ यह स्पष्ट हो गया कि भाजपा से गठबंधन में पार्टी को दो लोकसभा और एक विधान परिषद की सीट मिली है।</p>
<p>2009 का लोकसभा चुनाव भी राष्ट्रीय लोकदल ने भाजपा गठबंधन में लड़ा था। तब रालोद को सात सीटें मिलें थीं, <span>जिनमें से पांच सीटों पर पार्टी ने जीत हासिल की थी। कयास लगाये जा रहे हैं कि एनडीए में शामिल होने के बाद भाजपा रालोद को यूपी सरकार में मंत्री पद देकर उसे सरकार में भागीदार बना सकती है। हालांकि, भाजपा से हाथ मिलाने और चौधरी चरण सिंह की विरासत वाली पार्टी के महज दो सीटों पर चुनाव लड़ने से लोकदल के बहुत से समर्थकों में मायूसी भी है।&nbsp;</span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे जयंत चौधरी! बागपत व बिजनौर से उम्मीदवारों का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[निर्यात पाबंदियों के बीच 64,400 टन प्याज और 30 हजार टन गैर&amp;#45;बासमती चावल निर्यात की अनुमति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/permission-to-export-64400-tonnes-of-onion-and-30-thousand-tonnes-of-non-basmati-rice-amid-export-restrictions.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 04 Mar 2024 12:51:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/permission-to-export-64400-tonnes-of-onion-and-30-thousand-tonnes-of-non-basmati-rice-amid-export-restrictions.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्याज और गैर-बासमती चावल के निर्यात पर जारी प्रतिबंधों के बीच केंद्र सरकार ने बांग्लादेश को 50 हजार टन तथा संयुक्त अरब अमीरात को 14400 टन प्याज के निर्यात की अनुमति दी है। इसी तरह तंजानिया को 30,000 टन गैर-बासमती सफेद चावल तथा जिबूती व गिनी बिसाऊ देशों को 80 हजार टन टूटे चावल के निर्यात की अनुमति दी गई है।&nbsp;</p>
<p>इन निर्यात अनुमतियों के बारे में <strong>विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी)</strong> की ओर से अधिसूचना जारी की गई हैं। डीजीएफटी की अधिसूचना के अनुसार, "नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीईएल) के माध्यम से संयुक्त अरब अमीरात को 14,400 टन प्याज का निर्यात किया जाएगा।" केंद्र सरकार ने एनसीईएल के माध्यम से बांग्लादेश को 50 हजार टन प्याज के निर्यात की अनुमति दी है।&nbsp;</p>
<p>बांग्लादेश को प्याज निर्यात के तौर-तरीकों के बारे में एनसीईएल द्वारा उपभोक्ता मामलों के विभाग के साथ परामर्श किया जाएगा।&nbsp;प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध जारी है, लेकिन सरकार कुछ मित्र देशों के अनुरोध पर तय मात्रा में प्याज निर्यात की अनुमति दी है।&nbsp;</p>
<p>घरेलू बाजार में प्याज की कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए केंद्र सरकार ने 8 दिसंबर को प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था जो 31 मार्च तक लागू है। प्याज उत्पादक और व्यापारी सरकार से निर्यात से प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन अभी तक यह प्रतिबंध नहीं हटा है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x_65e5738f2a4f4.jpg" alt="" /></p>
<p>पिछले कई दिनों से प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध हटने की अटकलें लगाई जा रही थी। लेकिन फिलहाल प्रतिबंध जारी है। इस बीच, सहकारी कंपनी के माध्यम से करीब 64 हजार टन प्याज के निर्यात की अनुमति दी गई है।</p>
<p>भारत सरकार ने तंजानिया को 30,000 टन गैर-बासमती सफेद चावल तथा जिबूती और गिनी बिसाऊ को 80,000 टन टूटे चावल के निर्यात की अनुमति भी दी है।&nbsp;विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने अधिसूचना में कहा है कि यह निर्यात भी राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) के माध्यम से किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार ने पिछले साल जुलाई में गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन कुछ देशों के अनुरोध पर उनकी खाद्य सुरक्षा के लिए गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात की अनुमति दी गई है। अधिसूचना के अनुसार, जिबूती को 30,000 टन और गिनी बिसाऊ को 50,000 टन टूटे चावल के निर्यात की अनुमति दी गई है। इससे पहले भारत ने नेपाल, कैमरून, गिनी, मलेशिया, फिलीपींस और सेशेल्स जैसे देशों को भी चावल निर्यात किया था।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ निर्यात पाबंदियों के बीच 64,400 टन प्याज और 30 हजार टन गैर-बासमती चावल निर्यात की अनुमति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65e571b491d42.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बारिश&amp;#45;ओलावृष्टि से हरियाणा में गेहूं और सरसों को काफी नुकसान, यूपी के कई इलाके भी चपेट में]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/major-loss-to-wheat-and-mustard-crops-in-haryana-due-to-hailstorm-up-also-affected.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 03 Mar 2024 13:50:38 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/major-loss-to-wheat-and-mustard-crops-in-haryana-due-to-hailstorm-up-also-affected.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में शनिवार और रविवार को मौसम ने एक बार फिर किसानों को नुकसान पहुंचाया है। कई जगहों पर ओलावृष्टि के साथ मूसलाधार बारिश हुई, जिससे खेतों में बर्फ की चादर सी बिछ गई। ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसलों को क्षति पहुंची है। किसानों के अनुसार कुछ इलाकों में तो फसल को 70 फीसदी तक नुकसान पहुंचा है। कांग्रेस ने सरकार से तुरन्त विशेष गिरदावरी करवाकर किसानों को मुआवज़ा देने की मांग की है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">हरियाणा में सरसों की फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है जो पकने की अवस्था में पहुंच गई है। सरसों के पौधे ओलावृष्टि को नहीं झेल पाते हैं, इसलिए नुकसान ज्यादा हुआ है। तेज हवा के कारण पौधे जमीन पर गिर जाने से गेहूं की फसल को भी क्षति पहुंची है। किसानों का कहना है कि शनिवार-रविवार को जितनी ओलावृष्टि हुई, उतनी पिछले कई दशकों में नहीं हुई है। खेतों में ओला बिछ जाने से सरसों की कटी फसल को 70 प्रतिशत और खड़ी फसल को 50 प्रतिशत तक क्षति पहुंची है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार राज्य के रोहतक में 47 मिमी, सोनीपत में 8.5 मिमी, हिसार में 26 मिमी और अंबाला में 24 मिमी बारिश हुई। इसके अलावा चरखी दादरी, जींद, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, फतेहाबाद और भिवानी जिले में भी पश्चिमी विक्षोभ के कारण बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है। कल राज्य के उत्तरी इलाकों में भी बारिश की संभावना है। उसके बाद स्थिति सामान्य हो जाने की उम्मीद है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ समेत कई जिलों में भी यही स्थिति रही। वहां गेहूं के अलावा आलू और आम को भी नुकसान हुआ है। हालांकि यहां नुकसान उतना नहीं जितना हरियाणा में हुआ है। फिर भी अनेक गांवों में बारिश के साथ ओलावृष्टि होने से खेतों में खड़ी गेहूं, जौ एवं सरसों की फसल गिर पड़ी। सब्जी की फसल को भी काफी नुकसान पहुंचा है। कुछ इलाकों में 12 मिमी तक बारिश हुई है।</span></p>
<p><strong>विशेष गिरदावरी करवाए सरकारः हुड्डा</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा, बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से प्रदेशभर में किसानों की सरसों और गेहूं की फसल बर्बाद हुई हैं। सरकार तुरन्त स्पेशल गिरदावरी करवाकर किसानों को मुआवज़ा दे। उन्होंने ट्वीट किया कि किसान पर दोहरी मार पड़ रही है। कई जगह बीमा कंपनियों की मनमानी है तो कई जगह मौसम की मार। पिछले कई सीजन से बीजेपी-जेजेपी सरकार किसानों को खराबे का कोई मुआवजा नहीं दे रही है। बाढ़ का सैकड़ों करोड़ मुआवजा ही अब तक पीड़ित किसानों को नहीं मिला। पीएम फसल बीमा योजना सिर्फ कंपनियों की तिजोरी भरने का जरिया बन गई है। क्योंकि किसानों के खाते से प्रीमियम काटने की तारीख तो निश्चित है, लेकिन किसानों को मुआवजा देने की कोई तारीख तय नहीं की गई है।</span></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बारिश-ओलावृष्टि से हरियाणा में गेहूं और सरसों को काफी नुकसान, यूपी के कई इलाके भी चपेट में ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भाजपा ने लोकसभा चुनाव में 195 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की, मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे, दिल्ली के कई बड़े नाम सूची में नहीं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/bjp-releases-1st-list-of-195-candidates-for-lok-sabha-elections-pm-modi-to-contest-from-varanasi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 02 Mar 2024 21:55:55 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/bjp-releases-1st-list-of-195-candidates-for-lok-sabha-elections-pm-modi-to-contest-from-varanasi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए 16 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के 195 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी से और गृह मंत्री अमित शाह गुजरात के गांधीनगर से चुनाव लड़ेंगे। उम्मीदवारों की सूची को केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) ने अंतिम रूप दिया, जिसकी गुरुवार को पीएम मोदी के साथ मैराथन बैठक हुई।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भाजपा की सूची में 34 केंद्रीय मंत्री और दो पूर्व मुख्यमंत्री शामिल हैं। पार्टी ने केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी की जगह नई दिल्ली सीट से दिवंगत सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज को मैदान में उतारा है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राज्य के विदिशा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे, जबकि त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब त्रिपुरा पश्चिम से चुनाव लड़ेंगे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला राजस्थान के कोटा से चुनाव लड़ेंगे। अलवर निर्वाचन क्षेत्र से केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव और जोधपुर से गजेंद्र शेखावत राजस्थान से चुनाव लड़ने वाले दो अन्य प्रमुख नेता हैं। दो अन्य केंद्रीय मंत्री, राजीव चंद्रशेखर तिरुवनंतपुरम से और वी मुरलीधरन अट्टिंगल से चुनाव लड़ेंगे। नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश के गुना से, स्मृति ईरानी उत्तर प्रदेश के अमेठी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडवीय गुजरात के पोरबंदर से चुनाव लड़ेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ से चुनाव लड़ेंगे। भाजपा ने उत्तर प्रदेश से हेमा मालिनी, अजय मिश्रा टेनी, महेश शर्मा, एसपीएस बघेल और साक्षी महाराज को दोहराया है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पार्टी ने गुजरात और राजस्थान में 15-15 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है। इनके अलावा केरल में 12, असम, झारखंड और छत्तीसगढ़ में 11-11, तेलंगाना में नौ, दिल्ली में पांच, उत्तराखंड में तीन, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में दो-दो और गोवा, त्रिपुरा, अंडमान और निकोबार और दमन और दीव में एक-एक नामों की घोषणा की है। सूची में 28 महिला उम्मीदवार, 47 युवा, 27 अनुसूचित जाति, 18 अनुसूचित जनजाति और 57 ओबीसी उम्मीदवार हैं।</span></p>
<p><strong>कई बड़े नामों का पत्ता कटा<br /></strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भोपाल से मौजूदा लोकसभा सांसद, प्रज्ञा सिंह ठाकुर को टिकट नहीं मिला है। उनकी जगह भोपाल के पूर्व मेयर आलोक शर्मा को लाया गया। कयास लगाए जा रहे हैं कि हाल के दिनों में दिए गए विवादित बयान के कारण पार्टी ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर को टिकट नहीं दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी अपनी मुरैना सीट सुरक्षित करने में असफल रहे। हालांकि उन्होंने पिछली बार विधानसभा चुनाव जीता था। उनकी जगह दिमनी के मौजूदा विधायक शिवमंगल सिंह तोमर को टिकट दिया गया है। पश्चिम बंगाल में पार्टी ने टीएमसी के शत्रुघ्न सिन्हा के खिलाफ आसनसोल से पवन सिंह को मैदान में उतारा है। पूर्व अभिनेत्री जया प्रदा की जगह भी रामपुर से घनश्याम लोधी को टिकट दिया गया है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पार्टी की पहली सूची जारी करने से कुछ घंटे पहले इसके दो मौजूदा सांसदों, जयंत सिन्हा और गौतम गंभीर ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से चुनाव न लड़ने की इच्छा व्यक्त की थी। सिन्हा ने कहा कि वे भारत और दुनिया में वैश्विक जलवायु परिवर्तन से निपटने के अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। गंभीर ने क्रिकेट प्रतिबद्धताओं पर ध्यान केंद्रित करने की इच्छा व्यक्त की।&nbsp;</span></p>
<p><strong>दिल्ली में रमेश बिधूड़ी, प्रवेश शर्मा, मीनाक्षी लेखी और हर्ष वर्धन को टिकट नहीं</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">बीजेपी ने दिल्ली की 7 में से 5 सीटों पर नामों का ऐलान किया है। पार्टी ने राष्ट्रीय राजधानी की ज्यादातर सीटों पर अपने उम्मीदवार बदल दिये हैं। केवल अभिनेता से नेता बने मनोज तिवारी उत्तर-पूर्वी दिल्ली से अपनी सीट बचाने में सफल रहे। अन्य चार लोकसभा सीटों पर आगामी चुनावों में नए चेहरे दिखाई देंगे। जहां नई दिल्ली से मीनाक्षी लेखी की जगह बांसुरी स्वराज को टिकट दिया गया, वहीं चांदनी चौक सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन की जगह प्रवीण खंडेलवाल को टिकट मिला है। खंडेलवाल व्यापारी संगठन कैट के महासचिव हैं। मनोज तिवारी उत्तर पूर्व दिल्ली से, कमलजीत सहरावत पश्चिम दिल्ली से, रामवीर सिंह बिधूड़ी दक्षिण दिल्ली से चुनाव लड़ेंगे। पार्टी ने अभी उत्तरी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। पिछली बार पार्टी ने दिल्ली की सभी सात सीटों पर जीत दर्ज की थी।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भाजपा ने लोकसभा चुनाव में 195 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की, मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे, दिल्ली के कई बड़े नाम सूची में नहीं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डब्लूटीओ की 13वीं मंत्रिस्तरीय बैठक खत्म, कृषि समेत किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे पर नहीं हो सका फैसला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wto-13th-ministerial-conference-ends-as-no-decision-taken-on-any-important-issues.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 02 Mar 2024 15:15:04 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wto-13th-ministerial-conference-ends-as-no-decision-taken-on-any-important-issues.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) की 13वीं मंत्रिस्तरीय बैठक कृषि और फिशरीज सब्सिडी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। कुल 166 सदस्य देशों में सहमति बनाने के लिए बैठक की अवधि एक दिन बढ़ाई गई थी, इसके बावजूद सभी गुटों के अपने पक्ष पर अड़े होने के कारण कोई समाधान नहीं निकला। हालांकि कृषि में पब्लिक स्टॉक होल्डिंग और फिशरीज का मुद्दा अहम था और भारत चाहता था कि इस पर कोई निर्णय हो। भारत के शुरुआती विरोध के बावजूद ई-कॉमर्स पर कस्टम ड्यूटी न लगाने का प्रावधान दो साल के लिए बढ़ा दिया गया। भारतीय प्रतिनिधि मंडल के प्रमुख और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, हमने किसी मुद्दे पर कुछ खोया नहीं है। मैं खुश और संतुष्ट होकर लौटूंगा।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भारत के लिए पब्लिक स्टॉक होल्डिंग का मुद्दा अहम है। विकसित देश इसे कृषि व्यापार में तथाकथित सुधारों से जोड़ना चाहते थे, जिसका भारत के नेतृत्व में जी-33 देशों ने विरोध किया।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">डब्लूटीओ के कृषि संबंधी समझौते (एओए) की समीक्षा का एक भाग ऐसा है जो भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का आधार है। इसमें कहा गया है कि डब्ल्यूटीओ के सदस्य फसलों और इनपुट के लिए जो सब्सिडी देंगे, वह कृषि उपज के मूल्य के अधिकतम 10% तक होगा। कृषि समझौते के अनुसार किसी भी कमोडिटी के लिए उसके मौजूदा प्रशासित मूल्य अथवा मार्केट प्राइस सपोर्ट और 1986-88 की अंतरराष्ट्रीय कीमत (जिसे तय बाह्य संदर्भ मूल्य कहा जाता है) का अंतर उसकी सब्सिडी होगी।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भारत ने अपने नागरिकों की खाद्य सुरक्षा के लिए इसका विरोध किया था, तब 2013 में एक पीस क्लॉज बना था जिसमें भारत समेत विकासशील देशों को छूट मिली थी। यह भी तय हुआ था कि डब्ल्यूटीओ के सदस्य सरकारी स्टॉक होल्डिंग के लिए 2017 तक स्थायी समाधान निकालेंगे। स्थायी समाधान न होने की स्थिति में यह क्लॉज जारी रहेगा।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">फिशरीज के मुद्दे पर भी कोई फैसला नहीं हो सका। भारत छोटे मछुआरों के हितों को देखते हुए विशेष छूट चाहता है, क्योंकि यहां करीब 90 लाख लोगों की यह आजीविका है। भारत का तर्क था कि विकासशील देशों को समुद्र तट से 200 नॉटिकल मील तक मछली पकड़ने पर मछुआरों को सब्सिडी देने की अनुमति जारी रहे, लेकिन विकसित देशों में 200 नॉटिकल मील से आगे गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए सब्सिडी खत्म हो।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ डब्लूटीओ की 13वीं मंत्रिस्तरीय बैठक खत्म, कृषि समेत किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे पर नहीं हो सका फैसला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं उत्पादन में बढ़ोतरी, लेकिन दलहन, तिलहन समेत कुल खाद्यान्न उत्पादन में गिरावट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/increase-in-wheat-production-but-decline-in-total-food-grain-production-including-pulses-oilseeds.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 01 Mar 2024 17:10:45 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/increase-in-wheat-production-but-decline-in-total-food-grain-production-including-pulses-oilseeds.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि उत्पादन और कृषि व सहयोगी क्षेत्र की वृद्धि दर से जुड़े सारे आंकड़े इसके कमजोर हालात को बयां कर रहे हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा चालू फसल वर्ष (2023-24) के उत्पादन के आंकड़े इस स्थिति को और अधिक साफ करते हैं। मंत्रालय द्वारा जारी दूसरे आरंभिक अनुमानों के मुताबिक, फसल वर्ष 2023-24 में खरीफ और रबी में कुल खाद्यान्न उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 41 लाख टन घट सकता है।</p>
<p>दलहन, तिलहन, श्री अन्न, गन्ना, मक्का और कपास उत्पादन में भी गिरावट का अनुमान है। इसके पीछे कमजोर मानसून और मौसम की मार के अलावा भी कई कारण हैं, जिन्हें समझने की जरूरत है।&nbsp;</p>
<p>हालांकि, पिछले साल के मुकाबले <strong>गेहूं</strong> उत्पादन में 15 लाख टन की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है और यह 11.20 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। पिछले साल देश में 11.05 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हुआ था।</p>
<p>खरीफ में <strong>चावल</strong> उत्पादन 11.14 करोड़ टन रहेगा जो पिछले साल से 9.46 लाख टन अधिक है। लेकिन रबी में चावल उत्पादन 123.5 लाख टन रहेगा जो गत वर्ष 150 लाख टन तक पहुंच गया था। यानी रबी के चावल उत्पादन में करीब 26 लाख टन की कमी का अनुमान है।&nbsp;</p>
<p><strong>खरीफ</strong> सीजन 2023-24 में देश का <strong>कुल खाद्यान्न</strong> उत्पादन 15.42 करोड़ टन रहने का अनुमान है जो गत वर्ष के मुकाबले करीब 15 लाख टन कम है। इसी तरह रबी खाद्यान्न उत्पादन 15.52 करोड़ टन रह सकता है, जो एक साल पहले 15.78 करोड़ टन था। यानी रबी खाद्यान्न उत्पादन में भी करीब 26 लाख टन की कमी आ सकती है।</p>
<p>इस साल खरीफ सीजन में <strong>दलहन</strong> उत्पादन गत वर्ष के 76.21 लाख टन से घटकर 71.18 लाख टन रहने का अनुमान है। जबकि रबी दलहन का उत्पादन पिछले साल के लगभग बराबर 163.24 लाख टन रहेगा। अरहर का उत्पादन पिछले वर्ष के स्तर के बराबर 33.39 लाख टन रहेगा जबकि खरीफ में उड़द का उत्पादन पिछले साल के 17.68 लाख टन से घटकर 15.50 लाख टन रहेगा। खरीफ की मूंग का उत्पादन 17.18 लाख टन से घटकर 14.05 लाख टन रहने का अनुमान है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>रबी सीजन में उगाई जाने वाली दालों में, <strong>चने</strong> का उत्पादन मामूली गिरावट के साथ 121.61 लाख टन होने का अनुमान लगाया है जबकि <strong>मसूर</strong> का उत्पादन पिछले साल 15.59 लाख टन से बढ़कर 16.36 लाख टन हो जाएगा।&nbsp;</p>
<p><strong>तिलहन उत्पादन</strong> को खरीफ सीजन 2023-24 में झटका लगा है और यह पिछले साल के मुकाबले करीब 33 लाख टन घटकर 228.42 लाख टन रह सकता है। रबी सीजन में तिलहन उत्पादन पिछले साल से करीब चार लाख टन कम 137.56 लाख टन रहने की संभावना है।&nbsp;</p>
<p>तिलहन फसलों में <strong>सरसों</strong> का उत्पादन 126.96 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि एक साल पहले की अवधि में यह 126.43 लाख टन था। सोयाबीन के उत्पादन में बड़ी गिरावट का अनुमान है। पिछले साल सोयाबीन का उत्पादन 149.85 लाख टन तक पहुंच गया था जो इस साल घटकर 125.62 लाख टन रह सकता है।&nbsp;</p>
<p>रबी <strong>मक्का</strong> का उत्पादन गत वर्ष 116.9 लाख टन से घटकर इस साल 97.5 लाख टन रहने की संभावना है। जबकि खरीफ मक्का का उत्पादन 236.74 लाख टन से घटकर 227.20 लाख टन रहने का अनुमान है। फसल विविधिकरण पर जोर देने के बावजूद कई दालों, तिलहनों और मक्का उत्पादन में कमी सरकार के सामने एक नई चुनौती है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>श्री अन्न</strong> के उत्पादन को बढ़ावा देने पर सरकार का काफी जोर है। लेकिन इन पौष्टिक अनाजों के उत्पादन में भी कमी आई है। वर्ष 2023-24 के खरीफ सीजन में मोटे अनाजों का उत्पादन 129 लाख टन होने का अनुमान है जो पिछले खरीफ में 139 लाख टन तक पहुंच गया था। हालांकि, रबी सीजन में मोटे अनाजों का उत्पादन गत वर्ष के 23.22 लाख टन से थोड़ा अधिक 24.88 लाख टन रहेगा।&nbsp;</p>
<p>इस साल <strong>गन्ना</strong> उत्पादन में भी गिरावट आ सकती है। इस साल गन्ना उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 4.41 करोड़ टन घटकर 44.64 करोड़ टन रह जाएगा। गन्ना उत्पादन में करीब 9 फीसदी की गिरावट है। इसी तरह <strong>कपास</strong> का उत्पादन गत वर्ष 336 से घटकर 323 गांठ रहने का अनुमान है। कपास की फसल को इस साल मौसम के बिगड़े मिजाज और पिंक बॉलवर्म के प्रकोप के चलते नुकसान हुआ है।</p>
<p><strong>कृषि मंत्रालय</strong> का कहना है कि रबी फसल का उत्पादन प्रारंभिक बोए गए क्षेत्र की रिपोर्ट और औसत उपज पर आधारित होता है। इसलिए, ये आंकड़े अपडेट हो सकते हैं। विभिन्न ग्रीष्मकालीन फसलों का उत्पादन आगामी तीसरे अग्रिम अनुमान में शामिल किया जाएगा।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं उत्पादन में बढ़ोतरी, लेकिन दलहन, तिलहन समेत कुल खाद्यान्न उत्पादन में गिरावट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.4 फीसदी, लेकिन कृषि में गिरावट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/gdp-growth-8.4-percent-in-third-quarter-but-agriculture-sector-declined.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 29 Feb 2024 20:12:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/gdp-growth-8.4-percent-in-third-quarter-but-agriculture-sector-declined.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू वित्त वर्ष (2023-24) में कृषि और सहयोगी क्षेत्र की विकास दर एक फीसदी से भी नीचे चली गई है और इसके&nbsp; 0.7 फीसदी पर रहने का अनुमान है। जबकि पिछले साल कृषि क्षेत्र 4.7 फीसदी की दर से बढ़ा था। वहीं चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कृषि और सहयोगी क्षेत्र के उत्पादन में 0.8 फीसदी की<strong> गिरावट</strong> दर्ज की गई है यानी यह क्षेत्र ग्रोथ करने के बजाय सिकुड़ रहा है। हालांकि, चालू साल में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है जो तीसरी तिमाही (अक्तूबर से दिसंबर, 2023) के दौरान 8.2 फीसदी रही है।</p>
<p>इन आंकड़ों से यह बात साफ हो गई है कि पिछला <strong>मानसून</strong> सामान्य नहीं रहा और देश का बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में था। यही नहीं इस स्थिति के चलते कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है। ग्रामीण मार्केट से मांग की कमजोर स्थिति की मुख्य वजह कमजोर वृद्धि दर है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा गुरुवार को जारी आर्थिक वृद्धि दर के आंकड़ों से यह तस्वीर उभरी है।</p>
<p><strong>एनएसओ</strong> के मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 की तीसरी तिमाही (<span>अक्टूबर-दिसंबर</span>) <span>में सकल घरेलू उत्पाद </span>(<span>जीडीपी</span>) <span>की ग्रोथ बढ़कर <strong>8.4 फीसदी</strong> तक पहुंच गई जो एक साल पहले 4.3 फीसदी थी। इससे चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर </span>7.6 फीसदी रहने का अनुमान है। मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और माइनिंग सेक्टर में आए सुधार की वजह से जीडीपी की ग्रोथ बढ़ी है लेकिन साथ ही कृषि क्षेत्र में गिरावट आई। मतलब, देश की अर्थव्यवस्था तो बढ़ रही है लेकिन कृषि और संबंधित क्षेत्रों के उत्पादन में गिरावट आई है।&nbsp;</p>
<p>चालू वित्त वर्ष की <strong>तीसरी तिमाही</strong> में मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ 11.6 फीसदी रही जबकि माइनिंग में 7.5 फीसदी ग्रोथ हुई। कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ग्रोथ 9.5 फीसदी रही है। लेकिन इस&nbsp;दौरान <strong>कृषि क्षेत्र</strong> के उत्पादन में 0.8 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। चालू वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र की ग्रोथ गत वर्ष के 4.7 फीसदी के मुकाबले घटकर 0.7 फीसदी रह जाएगी। यह आंकड़ा कृषि और संबंधित क्षेत्रों के लिए खतरे की घंटी है।</p>
<p>व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और प्रसारण से संबंधित सेवाओं में तीसरी तिमाही के दौरान 6.7 प्रतिशत की ग्रोथ रही जबकि गत वर्ष समान अवधि में इन क्षेत्रों में 9.2 प्रतिशत की ग्रोथ थी। वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं में 7 फीसदी की वृद्धि हुई, जो एक साल पहले 7.7 फीसदी थी।&nbsp;</p>
<p>एनएसओ ने चालू वित्त वर्ष के लिए दूसरा अग्रिम अनुमान भी जारी किया है। जनवरी में जारी पहले अग्रिम अनुमान में इस वर्ष जीडीपी ग्रोथ 7.3 फीसदी रहने की संभावना जताई गई थी। दूसरे अग्रिम अनुमानों के मुताबिक, वर्ष 2023-24 में जीडीपी ग्रोथ 7.6 फीसदी रहेगी। जबकि 2022-23 में जीडीपी विकास दर 7.0 प्रतिशत थी। एनएसओ ने 2022-23 के लिए जीडीपी की ग्रोथ के पहले के अनुमान 7.2 फीसदी को घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65e098969cff1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.4 फीसदी, लेकिन कृषि में गिरावट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ सीजन के लिए 24,420 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी को मंजूरी ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-rs-24420-cr-subsidy-for-pk-fertilizers-for-2024-kharif-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 29 Feb 2024 18:59:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-rs-24420-cr-subsidy-for-pk-fertilizers-for-2024-kharif-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने बुधवार को खरीफ सीजन 2024 के लिए फॉस्फेट और पोटाश (पीएंडके) उर्वरकों पर 24,420 करोड़ रुपये की सब्सिडी देने का ऐलान किया है। साथ ही न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (<span>एनबीएस</span>) <span>योजना के तहत तीन नए उर्वरक ग्रेड को शामिल करने की अनुमति दी है।</span>&nbsp;</p>
<p>गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में आगामी खरीफ सीजन 2024 के लिए फास्फेट और पोटाश उर्वरकों पर सब्सिडी की दरें तय करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस पर लगभग <strong>24,</strong><span><strong>420 करोड़</strong> रुपये खर्च होंगे।</span>&nbsp;</p>
<p>न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (<span>एनबीएस</span>) <span>योजना के तहत </span>पोषक तत्वों की सब्सिडी दरें निर्धारित की जाती हैं, जिनके आधार पर 25 तरह के पीएंडके उर्वरक किसानों को रियायती दरों पर उपलब्ध कराए जाते हैं। सरकार ने एनबीएस योजना के तहत 3 नए उर्वरक ग्रेड को शामिल करने का भी निर्णय लिया है। उर्वरक कंपनियों को अनुमोदित और अधिसूचित दरों के अनुसार सब्सिडी प्रदान की जाएगी ताकि किसानों को सस्ती कीमतों पर उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके।&nbsp;</p>
<p>मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री <strong>अनुराग ठाकुर</strong> ने बताया कि <span>दुनिया में उर्वरकों के दाम बढ़े, लेकिन मोदी सरकार ने इनके दाम नही बढ़ने दिए हैं। फॉस्फेट और पोटाश उर्वरकों पर आगामी खरीफ सीजन के लिए 24,420 करोड़ रुपये की सब्सिडी मंजूरी की गई है।</span> नाइट्रोजन (एन) पर सब्सिडी 47.02 रुपये प्रति किलोग्राम, फॉस्फेट (पी) पर 28.72 रुपये प्रति किलोग्राम, पोटाश (के) पर 2.38 रुपये प्रति किलोग्राम और सल्फर (एस) पर 1.89 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई है। फॉस्फेट उर्वरकों पर सब्सिडी रबी सीजन 2023 में 20.82 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इसे बढ़ाकर खरीफ सीजन 2024 के लिए 28.72 रुपये प्रति किलोग्राम किया है। नाइट्रोजन (एन), पोटाश (के) और सल्फर (एस) पर सब्सिडी की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।&nbsp;</p>
<p>डीएपी पर आयात निर्भरता को कम करने के लिए कैबिनेट ने एनबीएस योजना के तहत तीन नए <strong>उर्वरक ग्रेड</strong> को शामिल करने को मंजूरी दे दी। उर्वरक कंपनियों को अधिसूचित दरों के अनुसार सब्सिडी प्रदान की जाएगी ताकि किसानों को सस्ती कीमतों पर उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ सीजन के लिए 24,420 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी को मंजूरी  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं के बंपर उत्पादन के दावे के बीच सरकार ने  खरीद लक्ष्य घटाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/despite-estimates-of-bumper-wheat-production-of-procurement-target-reduced.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 29 Feb 2024 17:17:44 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/despite-estimates-of-bumper-wheat-production-of-procurement-target-reduced.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के बीच सरकार ने रबी सीजन 2024-25 के लिए गेहूं खरीद की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार को फसल वर्ष 2023-24 में 11.2 करोड़ टन के रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन की उम्मीद है। इस साल गेहूं खरीद का लक्ष्य 300 से 320 लाख टन तय किया है। &nbsp;</p>
<p>गेहूं खरीद की तैयारियों को लेकर बुधवार को केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा की अध्यक्षता में राज्यों के खाद्य सचिवों के साथ बैठक हुई। खाद्य मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श के बाद आगामी रबी सीजन 2024-25 में गेहूं खरीद का अनुमान 300 से 320 मिलियन टन के बीच तय किया गया। रबी सीजन के धान खरीद का अनुमान 90से 100 लाख टन निर्धारित किया गया है जबकि 6 लाख टन मोटे अनाजों की खरीद की जाएगी।</p>
<p>गत वर्ष 2023-24 में सरकार ने 341.5 लाख टन के गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा था लेकिन इसके मुकाबले लगभग 262 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। इसी तरह 2022-23 में गेहूं की खरीद 444 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले केवल 188 लाख टन रही थी। हाल के वर्षों के ट्रेंड को देखते हुए इस साल गेहूं खरीद का लक्ष्य ही घटाकर 300 से 320 लाख टन रखा गया है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>हाल के वर्षों में गेहूं खरीद के आंकड़े सरकार के बंपर उत्पादन के दावों पर भी सवाल खड़े करते हैं। इस साल भी एक ओर जहां सरकार 11.2 करोड़ टन के रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन की उम्मीद जता रही है, जबकि गेहूं खरीद का लक्ष्य हाल के वर्षों से कम रखा गया है।&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध के बावजूद सरकार को आटे की कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए अपने स्टॉक से खुले बाजार में करीब 95 लाख टन गेहूं उतारना पड़ा, इसके साथ ही भारत आटा ब्रांड नाम से पर रियायती दर पर आटा बेचा जा रहा है। इसके लिए गेहूं पर अतिरिक्त रियायत दी जा रही है। सरकार ने पिछले साल रिकार्ड गेहूं उत्पादन का अनुमान जारी किया था जिसे बाद में घटा दिया गया था। इसकी वजह सरकारी खरीद और बाजार में कीमतों में हुआ इजाफा रहा।</p>
<p>इन स्थितियों के चलते भी गेहूं उत्पादन के सरकारी अनुमानों पर पिछले दो साल से सवाल खड़े होते रहे हैं। कीमतों में बढ़ोतरी के चलते सरकार ने पिछले साल सरकारी खरीद सीजन के बीच ही गेहूं पर स्टॉक लिमिट लागू कर दी थी और उसके बाद इसकी सीमा मे और कटौती की गई।</p>
<p>वहीं 2022-23 में मार्च माह में अचानक तापमान बढ़ने से देश के बड़े गेहूं उत्पादक राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में गेहूं की उत्पादकता में पांच फीसदी से 20 फीसदी तक की कमी आई थी। यही वजह रही कि जब सरकारी खरीद में उस साल भारी गिरावट आई तो सरकार को गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा था। जबकि कुछ दिन पहले तक सरकार गेहूं के बड़े निर्यात के दावे कर रही थी।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>तीन साल पहले 2021-22 में गेहूं की रिकॉर्ड 430 लाख टन से अधिक खरीद हुई थी। 2020-21 में मध्यप्रदेश ने गेहूं खरीद में पंजाब को पीछे छोड़ते हुए 129.4 लाख खरीद की थी। लेकिन बीते वर्ष मध्यप्रदेश से 71 लाख टन गेहूं की खरीद हुई। इस साल मध्यप्रदेश में 80 लाख टन गेहूं खरीद का अनुमान है। जबकि पंजाब में करीब 130 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य है। उत्तर प्रदेश में इस सीजन में करीब 60 लाख टन गेहूं की खरीद का अनुमान है।&nbsp;</p>
<p>पिछले दो साल में गेहूं की सरकारी खरीद में गिरावट आने के चलते केंद्रीय पूल में खाद्यान्न स्टॉक का स्तर कम हुआ है। भारतीय खाद्य निगम के आंकड़ों के मुताबिक गेहूं का स्टॉक करीब 100 लाख टन है जो आठ साल का सबसे कम स्तर है।</p>
<p>रबी सीजन 2024 -25 की खरीद के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 2275 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है।आमतौर पर गेहूं की खरीद अप्रैल से मार्च तक की जाती है। लेकिन राज्य आवक के हिसाब से मार्च के पहले सप्ताह से खरीद शुरू कर सकते हैं। खरीद बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान अतिरिक्त खरीद केंद्र खोले जाएंगे। खाद्य सचिव ने कहा था कि पंजाब-हरियाणा सीमाओं पर किसानों के विरोध प्रदर्शन से खरीद कार्यों पर असर पड़ने की संभावना नहीं है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं के बंपर उत्पादन के दावे के बीच सरकार ने  खरीद लक्ष्य घटाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शुभकरण की मौत के मामले में हत्या का केस दर्ज, आज होगा अंतिम संस्कार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/murder-case-registered-in-shubhakarans-death-last-rites-to-be-held-today.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 29 Feb 2024 11:20:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/murder-case-registered-in-shubhakarans-death-last-rites-to-be-held-today.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>युवा किसान शुभकरण सिंह की मौत के मामले में पंजाब पुलिस ने सात दिन बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है। 21 फरवरी को पंजाब-हरियाणा के खनौरी बॉर्डर पर हुई झड़प में बठिंडा निवासी शुभकरण (21) की मौत हो गई थी। आज सुबह शुभकरण के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शनों के लिए खनौरी बॉर्डर लाया गया, जहां किसानों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। आज दोपहर 3 बजे बठिंडा स्थित पैतृक गांव में शुभकरण का अंतिम संस्कार होगा।&nbsp;</p>
<p>पंजाब पुलिस ने पटियाला के पातड़ां पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 114 (अपराध के लिए उकसाने) के तहत एफआईआर दर्ज की है। शुभकरण के पिता की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। घटनास्थल हरियाणा के जींद के गढ़ी में दिखाया गया है जो खनौरी के पास है। <span>&nbsp;</span></p>
<p>एफआईआर दर्ज होने के बाद ही बुधवार रात को पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में शुभकरण के पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम हो सका। शुभकरण के परिजन और आंदोलनकारी किसान इस बात पर अड़े थे कि हत्या की एफआईआर दर्ज होने के बाद ही पोस्टमार्टम होगा। कई दिनों के गतिरोध के बाद बुधवार रात करीब पौने 11 बजे पंजाब पुलिस ने शुभकरण की मौत के मामले में हत्या का केस दर्ज किया। <span>&nbsp;</span></p>
<p>किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा<span>, "</span>खनौरी और शंभू बॉर्डर पर मार्च का आज 17वां दिन है। हमें जानकारी मिली है कि (शुभकरण सिंह की मृत्यु के मामले में) आईपीसी की धारा 302 और 114 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है... आज हम मृतक (शुभकरण सिंह) के शव को खनौरी बॉर्डर पर ले जाएंगे और उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में किया जाएगा।" <span>&nbsp;</span></p>
<p>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान शुभकरण के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा और बहन को सरकारी नौकरी देने की घोषणा कर चुके हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ शुभकरण की मौत के मामले में हत्या का केस दर्ज, आज होगा अंतिम संस्कार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम किसान की 16वीं किस्त जारी, 9 करोड़ किसानों के खातों में पहुंचे पैसे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/16th-installment-of-pm-kisan-released-money-reached-the-accounts-of-9-crore-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 28 Feb 2024 20:03:28 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/16th-installment-of-pm-kisan-released-money-reached-the-accounts-of-9-crore-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को महाराष्ट्र के यवतमाल से पीएम-किसान सम्मान निधि (<span>पीएम-किसान</span>)<span> की 16वीं किस्त जारी की। प्रधानमंत्री ने रिमोट का बटन दबाकर <strong>9 करोड़</strong> से अधिक किसानों के खातों में </span><strong>21</strong><span><strong> हजार करोड़</strong> रुपये से अधिक धनराशि डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की। प्रधानमंत्री ने यवतमाल में विभिन्न विकास योजनाओं का शुभारंभ और लोकार्पण किया।&nbsp;</span></p>
<p>मोदी सरकार ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले किसानों के खातों में डीबीटी के माध्यम से सालाना 6 हजार रुपये की राशि दो-दो हजार रुपये की तीन किस्तों में पहुंचाने के लिए पीएम-किसान योजना की शुरुआत की थी। अब तक सरकार 11 करोड़ से अधिक किसानों को 16 किस्तों में कुल<strong> तीन लाख करोड़</strong> रुपये से अधिक धनराशि ट्रांसफर कर चुकी है।&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र में पीएम-किसान के अलावा <strong>नमो शेतकरी महासम्मान निधि</strong> की किस्त भी वितरित की। इस योजना के तहत किसानों को पीएम-किसान के 6 हजार रुपये के अतिरिक्त प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की धनराशि दी जाती है। इस तरह महाराष्ट्र में किसानों को सालाना 12 हजार रुपये की सहायता मिलेगी। महाराष्ट्र के प्रधानमंत्री ने कई सिंचाई और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित की।</p>
<p>जिन लाभार्थी किसानों के खातों में पीएम-किसान की किस्त नहीं पहुंची है, <span>वे <strong>हेल्पलाइन नंबर </strong></span><strong>155261 / 011-24300606 </strong>पर पूछताछ कर सकते हैं। पीएम-किसान की किस्त पाने के लिए सभी लाभार्थी किसानों को अपनी <strong>ई-केवाईसी, भू-सत्यापन</strong> और <strong>आधार लिंक</strong> करवाना अनिवार्य है।&nbsp;</p>
<p>योजना के तहत&nbsp;पंजीकृत किसान वेबसाइट <a href="https://pmkisan.gov.in/">https://pmkisan.gov.in</a>&nbsp;या<span>&nbsp;फिर <strong>कॉमन सर्विस सेंटर</strong> पर जाकर अपना ई-केवाईसी करवा सकते हैं। पीएम किसान सम्मान निधि योजना<strong> ऐप</strong> के अंतर्गत फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से अब किसान घर बैठें ई-केवाईसी करवा सकते हैं।&nbsp;</span><strong></strong></p>
<p><strong>PM kisan Yojana: </strong><strong>ऐसे चेक करें लाभार्थी सूची में नाम&nbsp;</strong></p>
<ul>
<li>पीएम किसान योजना के आधिकारिक पोर्टल <strong>pmkisan.gov.in</strong> पर जाएं</li>
<li><strong>'बेनिफिशियरी लिस्ट'</strong> वाले ऑप्शन पर क्लिक करें</li>
<li>अपने राज्य, जिला, ब्लॉक और गांव को चुनें</li>
<li><strong>'गेट रिपोर्ट'</strong> पर क्लिक करें</li>
<li>लाभार्थियों की सूची में अपना नाम चेक कर सकते हैं&nbsp;</li>
</ul>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम किसान की 16वीं किस्त जारी, 9 करोड़ किसानों के खातों में पहुंचे पैसे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65df43c68f25d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी का एमएसपी बढ़ाने और बफर स्टॉक को लेकर खाद्य सचिव के साथ बैठक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sugar-industry-will-meet-food-secretary-on-msp-and-creation-of-buffer-stock.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 28 Feb 2024 12:48:28 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sugar-industry-will-meet-food-secretary-on-msp-and-creation-of-buffer-stock.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चीनी उद्योग और सरकार के अनुमानों के आधार पर चालू पेराई सीजन (2023-24) में चीनी का उत्पादन 315 लाख टन रहने का अनुमान है। उद्योग का कहना है कि उत्पादन 317 लाख टन रहेगा, वहीं सरकार का अनुमान 314 लाख टन चीनी उत्पादन का है। एथेनॉल समेत कुल उत्पादन 338 लाख टन रहने की संभावना है। चालू सीजन के लिए सरकार ने 17 लाख टन चीनी को एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट करने की अनुमति दी है। वहीं पिछले सप्ताह लिए फैसले में अगले पेराई सीजन (2024-25) के लिए गन्ने का एफआरपी 25 रुपये बढ़ाकर 340 रुपये प्रति क्विटंल कर दिया है।</p>
<p>इन परिस्थितियों के बीच निजी और सहकारी चीनी मिल उद्योग के संगठनों ने सरकार से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने की मांग की है। सालाना करीब 285 लाख टन चीनी की खपत के आधार पर उद्योग का कहना है कि सरकार को कम से कम 10 लाख टन अतिरिक्त चीनी को एथेनॉल के लिए डायवर्ट करने की अनुमति देनी चाहिए। ऐसा नहीं होने की स्थिति में सरकार को दस लाख टन चीनी का बफर स्टॉक बनाना चाहिए। इन मुद्दों को लेकर 29 फरवरी को सहकारी चीनी मिलों की संस्था नेशनल फेडरेशन ऑफ कोआपरेटिव शुगर फैक्टरीज&nbsp; लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) और निजी चीनी मिलों की संस्था इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के प्रतिनिधि केंद्रीय खाद्य सचिव के साथ बैठक करेंगे।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, खाद्य सचिव के साथ बैठक में दोनों संगठनों के चार-चार प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसी मुद्दे पर उद्योग प्रतिनिधियों ने खाद्य मंत्री पीयूष गोयल से मिलने का समय भी मांगा है। चीनी उद्योग के प्रतिनिधि केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह के साथ भी मिलना चाहते हैं।</p>
<p>उद्योग सूत्रों ने रूरल वॉयस को बताया कि चालू सीजन में चीनी का <strong>ग्रॉस उत्पादन 338 लाख</strong> टन रहने की संभावना है। जो पिछले साल 366 लाख टन रहा था। पिछले साल एथेनॉल उत्पादन के लिए 45 लाख टन चीनी का डायवर्सन किया गया था। इस साल अभी तक&nbsp; सरकार ने 17 लाख टन चीनी डायवर्जन की सीमा तय कर रखी है। सरकार का अनुमान है कि एथेनॉल के डायवर्जन के बाद करीब 314 लाख टन चीनी का उत्पादन होगा। वहीं चीनी उद्योग का अनुमान है कि उत्पादन 317 लाख टन रहेगा। ऐसे में 315 लाख टन को उत्पादन का औसत माना जा सकता है।&nbsp;</p>
<p>ऐसे में उद्योग का कहना है कि चीनी की उपलब्धता पिछले साल के 57 लाख टन बकाया स्टॉक के साथ कुल 372 लाख टन होगी। वहीं देश में चीनी की इस साल की अनुमानित खपत 285 लाख टन है। ऐसे में देश मेंं करीब 87 लाख टन अतिरिक्त चीनी है। सीजन के अंत में एक अक्तूबर को बकाया के मानकों के आधार पर 60 लाख टन चीनी का स्ट़ॉक होना चाहिए। जबकि उत्पादन के अनुमानोें के आधार पर यह बकाया स्टॉक काफी अधिक है। इस स्थिति में यह स्टॉक बनाये रखने पर चीनी मिलों के ऊपर अतिरिक्त वित्तीय बोझ होगा। उस स्थिति में सरकार को कम से कम दस लाख टन को एथेनॉल के लिए डायवर्ट करने की अनुमति देनी चाहिए। ऐसा करने से जहां सरकार के एथेनॉल ब्लैंडिंग प्रोग्राम (ईबीपी) के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी वहीं चीनी उद्योग की वित्तीय स्थिति बेहतर होने से चीनी मिलों द्वारा गन्ना किसानों को समय से भुगतान करने में आसानी होगी।&nbsp;</p>
<p>वहीं बैठक का दूसरा बड़ा मुद्दा चीनी के एमएसपी में बढ़ोतरी करना है। उद्योग सूत्रों का कहना है कि <strong>कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी)</strong> द्वारा गन्ने के एफआरपी में बढ़ोतरी के समय ही लागत के आधार पर चीनी के एमएसपी में बढ़ोतरी की सिफारिश करनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इसका चीनी मिलों और किसान दोनो को नुकसान हो रहा है। सरकार द्वारा तय चीनी का एमएसपी साल 2019 से 31 रुपये प्रति किलो पर स्थिर है। पांच साल से बढ़ोतरी नहीं होना उद्योग के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है। वहीं 27 फरवरी को देश में चीनी की एक्स-फैक्टरी कीमत 3360 रुपये से 3830 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रही। उत्तर प्रदेश में एम ग्रेड की चीनी की एक्स-फैक्टरी कीमत 3730 रुपये से 3830 रुपये प्रति क्विंटल रही। वहीं महाराष्ट्र में एस ग्रेड की चीनी की कीमत 3360 रुपये से 3450 रुपये प्रति क्विंटल रही।</p>
<p>असल में सरकार ने आगामी लोक सभा चुनावों को देखते हुए पिछले सप्ताह गन्ने के एफआरपी में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर इसे 340 रुपये प्रति क्विंटल करने का फैसला लिया था। ऐसा पहली बार हो रहा है कि सरकार ने फरवरी माह में ही आगामी अगले सीजन का एफआरपी तय किया गया हो। गन्ने का पेराई सीजन अक्तूबर से सितंबर के बीच चलता है। सामान्य तौर पर गन्ने का एफआरपी अगस्त के आसपास घोषित होता रहा है। सीएसीपी ने इस साल सामान्य बरसों के मुकाबले समय से पहली गन्ने के एफआरपी पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी और इसी के आधार पर साल 2024-25 के लिए एफआरपी पर कैबिनेट की मुहर फरवरी में ही लग सकी। करीब आठ फीसदी की बढ़ोतरी के साथ सरकार करोड़ों गन्ना किसानों को संदेश देना चाहती है कि वह उनके हित में अहम फैसला ले रही है। चुनावों के एकदम पहले सरकार के इस कदम को गन्ना किसानों को लुभाने के कदम कदम के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>वहीं इस फैसले के बाद चीनी उद्योग भी सरकार पर चीनी के एमएसपी में बढ़ोतरी का दबाव बना रहा है। इसी के लिए चीनी उद्योग अधिकारियों और मंत्रियों के साथ बैठक कर रहा है। हालांकि चुनावों के नजदीक होने और चीनी की कीमतों पर अतिसंवेदनशील सरकार इस बारे में जल्द कोई फैसला लेगी उसकी संभावना काफी कम है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी का एमएसपी बढ़ाने और बफर स्टॉक को लेकर खाद्य सचिव के साथ बैठक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापनों को लेकर पतंजलि आयुर्वेद को लगाई फटकार, अवमानना नोटिस जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/supreme-court-issues-contempt-notice-to-patanjali-ayurved-for-misleading-ads-on-medicinal-cures.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 27 Feb 2024 20:11:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/supreme-court-issues-contempt-notice-to-patanjali-ayurved-for-misleading-ads-on-medicinal-cures.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इलाज से जुड़े भ्रामक विज्ञापनों को लेकर पतंजलि आयुर्वेद को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कंपनी को ऐसी बीमारियों के इलाज के दावे वाले विज्ञापन देने पर रोक लगाने को कहा जो ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आब्जेक्शनेबल एडवरटाइजमेंट) एक्ट, 1954 के दायरे में आती हैं। साथ ही सरकार से भी पूछा है कि कंपनी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई।&nbsp;</p>
<p>पिछले साल सितंबर में पतजंलि आयुर्वेद ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया था कि बीमारियों के उपचार से जुड़े भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित नहीं करेगी। लेकिन प्रथम दृष्टया यह देखते हुए कि कंपनी ने अपने वचन का उल्लंघन किया है, अदालत ने पतंजलि आयुर्वेद और आचार्य बालकृष्ण (पतंजलि के प्रबंध निदेशक) को नोटिस जारी कर यह बताने को कहा कि अदालत की अवमानना के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।&nbsp;</p>
<p>जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच <strong>इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमएस)</strong>&nbsp;द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पतंजलि पर भ्रामक विज्ञापनों और इलाज से जुड़े झूठे दावे करने का आरोप लगाया गया है।</p>
<p>सुनवाई के दौरान बेंच ने <span>टिप्पणी की,</span><em><span>&nbsp;</span><strong>"पूरे देश को धोखा दिया गया है! दो साल से आप इंतजार कर रहे हैं कि ड्रग्स एक्ट कब इसे प्रतिबंधित करेगा।</strong></em><strong>&rdquo;</strong> <span>कोर्ट ने उसके आदेशों की अवहेलना के लिए कंपनी को फटकार लगाई। साथ ही भ्रामक विज्ञापनों पर रोकथाम को लेकर सरकार के सुस्त रवैये की भी आलोचना की।</span></p>
<p>अदालत ने पतंजलि आयुर्वेद और उसके अधिकारियों को प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में किसी भी दवा प्रणाली के खिलाफ कोई भी बयान देने से आगाह किया है। कंपनी को निर्देश दिया है कि वो भ्रामक जानकारी देने वाले अपनी दवाओं के सभी इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट विज्ञापनों को तत्काल प्रभाव से बंद कर दे। शीर्ष अदालत ने इससे पहले भी पतंजलि आयुर्वेद को कई बीमारियों के इलाज के बारे में विज्ञापनों में "झूठे" और "भ्रामक" दावे ना करने की चेतावनी दी थी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापनों को लेकर पतंजलि आयुर्वेद को लगाई फटकार, अवमानना नोटिस जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान आंदोलन की एकजुटता का दिन, आगे आए उग्राहां और टिकैत, कई राज्यों में ट्रैक्टर मार्च]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/day-of-solidarity-of-farmer-movement-ugrahan-and-tikait-came-forward-tractor-march-in-many-states.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 26 Feb 2024 21:08:26 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/day-of-solidarity-of-farmer-movement-ugrahan-and-tikait-came-forward-tractor-march-in-many-states.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आज का दिन बिखरे हुए किसान मोर्चों की एकजुटता की तरफ बढ़े कदम का गवाह बना। इस आंदोलन में पहली बार शंभू और खनौरी बॉर्डर पर मोर्चा जमाए बैठे किसानों के साथ बीकेयू उग्राहां से लेकर बीकेयू टिकैत तक दर्जनों किसान संगठनों ने एकजुटता दिखाते हुए ट्रैक्टर मार्च निकाले। कई राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रैक्टरों का बोलबाला रहा। साथ ही किसानों ने पुतले जलाकर सरकार की दमनकारी नीतियों और डब्ल्यूटीओ का विरोध किया। 13 फरवरी को शुरू हुए किसान आंदोलन के बाद यह पहला मौका था जब प्रमुख किसान संगठनों ने अपने-अपने तरीके से विरोध-प्रदर्शन किया।&nbsp;</p>
<p>फसलों के न्यूनतम समर्थन (एमएसपी) <span>की कानूनी गारंटी सहित कई मांगों को लेकर किसानों की तमाम जत्थेबंदियों ने एकजुटता का परिचय दिया। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, यूपी और उत्तराखंड में कई जगह ट्रैक्टर मार्च और विरोध प्रदर्शन हुए। डब्ल्यूटीओ की नीतियों के चलते भारत पर फूड सब्सिडी में कटौती का दबाव है। इस कारण भी सरकार एमएसपी की गारंटी देने से बच रही है।&nbsp;</span></p>
<p>हरियाणा-पंजाब के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसानों ने आज डब्ल्यूटीओ, <span>कॉरपोरेट घरानों और सरकार की नीतियों के खिलाफ पुतले दहन किये। <strong>किसान मजदूर मोर्चा</strong> और <strong>संयुक्त किसान मोर्चा</strong></span><strong> (</strong><span><strong>गैर-राजनीतिक)</strong> के आह्वान पर पंजाब और हरियाणा सहित कई राज्यों में प्रदर्शन हुए। दोनों मोर्चों ने मांग उठाई कि पंजाब सरकार युवा किसान <strong>शुभकरण सिंह</strong> के हत्यारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करे।&nbsp;</span>&nbsp;</p>
<p><strong>संयुक्त किसान मोर्चा </strong>के आह्वान पर कई राज्यों में ट्रैक्टर मार्च के साथ "डब्ल्यूटीओ छोड़ो" दिवस मनाया गया। संयुक्त किसान मोर्चा 14 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में <strong>किसान महापंचायत</strong> आयोजित करेगा, जिसमें देशभर से किसान भाग लेंगे।</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान संगठनों ने पंजाब से लेकर पश्चिमी यूपी और तराई तक कई जिलों में हाईवे पर ट्रैक्टर ले जाकर विरोध-प्रदर्शन किया। बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता <strong>राकेश टिकैत</strong> ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार किसानों की वास्तविक मांगों को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग उठाते हुए पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर किसानों के दमन की निंदा की। दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी यूपी और तराई के कई जिलों में एसकेएम के विरोध-प्रदर्शन का असर दिखा।&nbsp;</p>
<p><strong>पंजाब</strong>&nbsp;में, किसानों ने जालंधर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग सहित कई स्थानों पर अपने ट्रैक्टर खड़े किए। इस प्रदर्शन में <strong>भारती किसान यूनियन (राजेवाल), बीकेयू (कादियान), बीकेयू (एकता उगराहां)</strong> सहित कई अन्य किसान संगठन शामिल हुए। संगरूर में किसानों ने कई किलोमीटर लंबा ट्रैक्टर मार्च निकाला, जिसमें हजारों की संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर पहुंचे। <strong>हरियाणा</strong> के हिसार में किसानों ने राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई स्थानों पर अपने ट्रैक्टर खड़े करके विरोध प्रदर्शन किया। <strong>राजस्थान</strong> में भी कई जगह किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकाले। <strong>उत्तराखंड</strong> में हरिद्वार-दिल्ली नेशनल हाईवे पर किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ धरने पर बैठ गये।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान आंदोलन की एकजुटता का दिन, आगे आए उग्राहां और टिकैत, कई राज्यों में ट्रैक्टर मार्च ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गांव में आमदनी का 46% खाने पर खर्च करते हैं लोग, शहरों में यह अनुपात 39% है]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rural-households-spent-46-percent-on-food-whereas-urban-households-spent-39-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 25 Feb 2024 17:05:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rural-households-spent-46-percent-on-food-whereas-urban-households-spent-39-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">ग्रामीण परिवारों को अपनी आमदनी की तुलना में खाने-पीने पर शहरी परिवारों की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ता है। ग्रामीण परिवार अपनी आमदनी का 46% खाद्य पदार्थों पर खर्च करता है तो शहरी परिवार अपनी आय का सिर्फ 39% खानपान पर लगता है। करीब एक दशक बाद जारी पारिवारिक खपत व्यय सर्वेक्षण 2022-23 में यह जानकारी दी गई है। पिछला सर्वेक्षण 2011-12 का था। उस समय से तुलना करें तो ग्रामीण इलाकों में प्रति व्यक्ति खर्च 2.6 गुना बढ़ा है तो शहरी इलाकों में 2.5 गुना की वृद्धि हुई है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">वर्ष 2022-23 में गांव में प्रतिमाह प्रति व्यक्ति औसत खर्च 3773 रुपए था जबकि शहरी क्षेत्र में यह है 6459 रुपए था। एक दशक पहले यह अंतर 1.8 गुना था, अब 1.71 गुना है। इस सर्वेक्षण से परिवारों के खर्च में खाद्य पदार्थों और अन्य मदों पर होने वाले खर्च का पता चलता है। इससे गरीबी के आकलन में भी मदद मिलेगी। एक दशक पहले गांव में लोग आमदनी का 53% खाने पर खर्च करते थे, जबकि शहरों में यह अनुपात 42.6% था।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एक दशक पहले आमदनी का 4.2% आने-जाने पर खर्च होता था, अब यह 7.6% हो गया है। टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं पर होने वाला खर्च 4.9% से बढ़कर 6.9% हो गया है। सर्वे में यह भी सामने आया है कि शहरी तथा ग्रामीण दोनों इलाकों में अगर समाज कल्याण योजनाओं के तहत मिलने वाले मुफ्त सामान को जोड़ा जाए तो शहरी और ग्रामीण दोनों परिवारों का खर्च अधिक हो जाता है। इन योजनाओं के तहत सरकार की तरफ से राशन के अलावा लैपटॉप, मोबाइल, साइकिल, मोटरसाइकिल, स्कूल यूनिफॉर्म, जूते आदि दिए जाते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">वर्ष 1999-2000 में ग्रामीण इलाकों में प्रति व्यक्ति मासिक खर्च 486 रुपए और शहरी इलाकों में 855 रुपए था। वर्ष 2004-05 में ग्रामीण खर्च 579 रुपए और शहरों में 1105 रुपए हो गया। वर्ष 2009-10 में यह क्रमशः 1054 रुपए और 1984 रुपए हुआ। इसके बाद पिछले सर्वे में 2010-11 में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति औसत खर्च 1430 रुपए और शहरों में 2630 रुपए रहा। 2022-23 में यह क्रमशः 3773 रुपए और 6459 रुपए है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">राज्यवार देखा जाए तो प्रति व्यक्ति मासिक खर्च सिक्किम में सबसे अधिक और छत्तीसगढ़ में सबसे कम है। यह शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में देखने को मिलता है। सिक्किम के गांव में प्रति व्यक्ति औसत खर्च 7731 रुपए और शहरों में 12105 है। छत्तीसगढ़ में यह क्रमशः 2466 रुपए और 4483 रुपए है। सबसे कम आय और सबसे अधिक आय वालों के बीच अंतर भी शहरी और ग्रामीण इलाकों में अलग-अलग है। गांव में सबसे अधिक आय वाले पांच प्रतिशत लोगों की आमदनी सबसे कम आय वाले पांच प्रतिशत की तुलना में 7.3 गुना है। शहरों में यह अंतर 9.9 गुना का है।</span></p>
<p><br /><br /><br /><br /></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गांव में आमदनी का 46% खाने पर खर्च करते हैं लोग, शहरों में यह अनुपात 39% है ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारतीय किसान संघ की एग्री इनपुट पर जीएसटी हटाने और किसान सम्मान निधि बढ़ाने की मांग ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/bharatiya-kisan-sangh-demands-to-abolish-gst-on-agri-inputs-increase-in-kisan-samman-nidhi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 25 Feb 2024 11:34:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/bharatiya-kisan-sangh-demands-to-abolish-gst-on-agri-inputs-increase-in-kisan-samman-nidhi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">आरएसएस से जुड़े भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने मांग की है कि कृषि इनपुट पर जीएसटी खत्म किया जाना चाहिए। अजमेर में अपनी अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के दूसरे दिन बीकेएस ने यह मांग रखी। इसने यह भी कहा कि किसानों को लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">बैठक में बीकेएस महासचिव मोहिनी मोहन मिश्रा ने कहा, "किसान सम्मान निधि में पर्याप्त बढ़ोतरी की जानी चाहिए। जीएम बीजों को जैविक पर प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए। बीज किसानों का अधिकार है। सरकारों को बाजारों में किसानों का शोषण रोकने की व्यवस्था करनी चाहिए।"</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उन्होंने कहा कि अनाज की मार्केटिंग के लिए एक व्यापक नीति बनाई जानी चाहिए और किसानों को लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए। किसान आंदोलन के प्रस्ताव पर चर्चा में देशभर से आए किसान प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए। बीकेएस ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "किसानों ने कहा कि हमारे संगठन की नीति है कि किसानों का हित राष्ट्रीय हित के ढांचे के भीतर है। इसलिए हम हिंसक आंदोलनों का समर्थन नहीं करते हैं।"</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मिश्रा ने कहा कि जब देश के किसान संगठन अनुशासित और शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली आकर अपनी समस्याओं और मांगों को रखते हैं तो सरकार उनसे बात करना उचित नहीं समझती है। उन्होंने कहा, "सरकार का यह रवैया कुछ हद तक खेदजनक है। इससे हिंसक आंदोलन को बढ़ावा मिलने की आशंका बढ़ जाती है।"</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">श्रीअन्न के संबंध में एक प्रस्ताव भी बैठक में जारी किया गया। इसमें कहा गया कि दुनिया को स्वस्थ भोजन उपलब्ध कराने में भारत की दिशा भविष्य में वरदान साबित होगी। भारत सरकार भी श्रीअन्न को बढ़ावा देने के लिए अच्छा काम कर रही है। देश के सुरक्षा संस्थानों में कार्यरत सैन्यकर्मियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की मंशा से सरकार ने भोजन में 25 फीसदी श्रीअन्न का योगदान दिया है। यह एक स्वागत योग्य कदम है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">प्रस्ताव के जरिए किसान संघ ने सुझाव दिया कि श्रीअन्न के पारंपरिक बीजों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए और इसका पर्याप्त उत्पादन और उचित मूल्य पर उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। किसान संघ ने अनाज की मार्केटिंग के लिए एक व्यापक नीति की भी मांग की है।</span></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65dad81830807.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारतीय किसान संघ की एग्री इनपुट पर जीएसटी हटाने और किसान सम्मान निधि बढ़ाने की मांग  ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शुभकरण के परिवार को 1 करोड़ की मदद, बहन को सरकारी नौकरी देगी पंजाब सरकार  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/compensation-of-rs-1-crore-to-shubhakarans-family-punjab-government-will-give-government-job-to-sister.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 23 Feb 2024 14:41:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/compensation-of-rs-1-crore-to-shubhakarans-family-punjab-government-will-give-government-job-to-sister.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले युवा किसान शुभकरण सिंह के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा और बहन को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की।&nbsp;<span>&nbsp;</span></p>
<p>बुधवार को पंजाब-हरियाणा के खनौरी बॉर्डर पर पुलिस और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच हुई झड़प में बठिंडा निवासी 21 वर्षीय शुभकरण सिंह की मौत हो गई थी जबकि कई किसान घायल हो गए। टकराव के दौरान कई पुलिकर्मियों को भी चोटें आईं।&nbsp;</p>
<p>किसान शुभकरण की मौत को लेकर प्रदर्शनकारी किसानों में काफी रोष है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को घटना के दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। शुक्रवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में सीएम मान ने ऐलान किया, <span>''</span>खनौरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए शुभकरण सिंह के परिवार को पंजाब सरकार की ओर से <span>1</span> करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और उनकी छोटी बहन को सरकारी नौकरी दी जाएगी। दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।<span>''</span>&nbsp;</p>
<p>आंदोलनकारी किसान शुभकरण सिंह के परिवार को एक करोड़ रुपये के मुआवजे और परिवार के एक सदस्य के लिए सरकारी नौकरी के अलावा उनकी मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग कर रहे थे। युवा किसान को सरकार की ओर से "शहीद" का दर्जा देने की मांग भी की जा रही है।<span>&nbsp;</span></p>
<p>मुख्यमंत्री ने बुधवार को कहा कि वह युवा किसान की मौत से दुखी हैं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। खनौरी में झड़पों में एक प्रदर्शनकारी की मौत और कई किसानों के घायल होने के बाद किसान नेताओं ने बुधवार को <span>'</span>दिल्ली चलो<span>' </span>मार्च दो दिनों के लिए रोक दिया था और उसके बाद अगली रणनीति तय करने की बात कही थी।&nbsp;</p>
<p>फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सहित अपनी मांगों को लेकर हजारों किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ट्रकों के साथ खनौरी और शंभू में डेरा डाले हुए हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65d861a5e975e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ शुभकरण के परिवार को 1 करोड़ की मदद, बहन को सरकारी नौकरी देगी पंजाब सरकार   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65d861a5e975e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान आंदोलन को लेकर एसकेएम का ऐलान, आज मनाएंगे काला दिवस, 26 को ट्रैक्टर मार्च]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/skm-announcement-regarding-farmers-movement-observing-black-day-today-tractor-march-on-26th.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 23 Feb 2024 12:48:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/skm-announcement-regarding-farmers-movement-observing-black-day-today-tractor-march-on-26th.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसान आंदोलन को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (<span>एसकेएम</span>) ने भी कमर कस ली है। गुरुवार को चंडीगढ़ में हुई संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में किसानों के दमन की निंदा करते हुए देश भर में विरोध-प्रदर्शन करने का ऐलान किया। आज एसकेएम की ओर से काला दिवस मनाया जाएगा जबकि 26 ट्रैक्टर मार्च निकालने की घोषणा की गई है। 14 फरवरी को दिल्ली के रामलीला मैदान में किसान-मजदूर महापंचायत होगी।&nbsp;</p>
<p>एसकेएम की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले युवा किसान शुभकरण सिंह को श्रद्धांजलि दी गई। एसकेएम ने प्रदर्शनकारी किसानों के &nbsp;गंभीर दमन के लिए केंद्रीय गृह मंत्री, हरियाणा के मुख्यमंत्री और राज्य के गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की। साथ ही पंजाब सरकार से हरियाणा पुलिस के खिलाफ धारा <span>302</span> के तहत एफआईआर दर्ज करने तथा गोलीबारी व ट्रैक्टरों को हुए नुकसान की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराने की मांग की। एसकेएम ने शोक संतप्त परिवार को मुआवजे के रूप में एक करोड़ रुपये और क्षतिग्रस्त <span>100</span> ट्रैक्टरों की मरम्मत के खर्च की भी मांग की है।<span>&nbsp;</span></p>
<p>बैठक में शामिल भारतीय किसान यूनियन के नेता <strong>युद्धवीर सिंह</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि एसकेएम की बैठक में किसान संगठनों को एकजुट करने और पुराने सदस्यों के साथ समन्वय के लिए छह सदस्यीय समिति बनाने का निर्णय लिया। समिति में किसान नेता <strong>जोगिंदर सिंह उगराहां</strong><strong><span>, </span></strong><strong>बलबीर सिंह राजेवाल<span>, </span></strong><strong>युद्धवीर सिंह<span>, </span></strong><strong>दर्शन पाल</strong><strong>, </strong><strong>हन्नान मोल्ला </strong>और <strong>रमिंदर पटियाला</strong> शामिल हैं।&nbsp;<span>एसकेएम का हिस्सा रहे संगठनों को फिर से साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है ताकि किसानों के संघर्ष को मजबूती दी जा सके।&nbsp;</span></p>
<p>एसकेएम ने <strong>23 फरवरी</strong> को विरोध-प्रदर्शन कर काला दिवस/आक्रोश दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया है।<strong> 26 फरवरी</strong> को डब्ल्यूटीओ छोड़ो दिवस के रूप में मनाया जाएगा। एसकेएम ने देश के किसानों से अपील किया है कि वे डब्ल्यूटीओ छोड़ने की मांग और सरकार की नीति का विरोध करने के लिए यातायात को अवरुद्ध किए बिना राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर मार्च करें और अपने ट्रैक्टरों को खड़ा करें।<span>&nbsp;</span></p>
<p>एसकेएम ने <strong>14 मार्च</strong> को दिल्ली के रामलीला मैदान में किसान-मजदूर महापंचायत आयोजित करने का ऐलान किया है। चंडीगढ़ में संयुक्त किसान मोर्चा की मीटिंग में पश्चिम बंगाल<span>, </span>बिहार<span>, </span>उत्तर प्रदेश<span>, </span>मध्य प्रदेश<span>, </span>आंध्र प्रदेश<span>, </span>केरल<span>, </span>हरियाणा<span>, </span>झारखंड<span>, </span>उत्तराखंड<span>, </span>दिल्ली और पंजाब के <span>100</span> से अधिक सदस्य प्रतिनिधि शामिल हुए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान आंदोलन को लेकर एसकेएम का ऐलान, आज मनाएंगे काला दिवस, 26 को ट्रैक्टर मार्च ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गन्ने का एफआरपी 25 रुपये बढ़ा, लेकिन कम रिकवरी से किसानों को पूरा लाभ मिलना मुश्किल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sugarcane-frp-increased-by-rs-25-but-farmers-will-get-lower-price-due-to-less-sugar-recovery.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 22 Feb 2024 15:41:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sugarcane-frp-increased-by-rs-25-but-farmers-will-get-lower-price-due-to-less-sugar-recovery.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>केंद्र सरकार ने गन्ने का का <strong>उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी)</strong> 315 रुपये से बढ़ाकर 340 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।&nbsp;</span><span>आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने चीनी सीजन 2024-25 के लिए गन्ने के एफआरपी में 25 रुपये प्रति क्विंटल यानी करीब 8 फीसदी की बढ़ोतरी को मंजूरी </span><span>दी है। गन्ने का एफआरपी चीनी की 10.25 फीसदी रिकवरी के आधार पर अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 सीजन के लिए तय किया गया है। अगर चीनी की रिकवरी 10.25 फीसदी से कम रहती है तो गन्ने का रेट घट जाएगा।&nbsp;</span></p>
<p><span>केंद्र सरकार द्वारा गन्ने के एफआरपी में बढ़ोतरी को किसानों के लिए बड़ी <strong>सौगत</strong> करार दिया जा रहा है। असल में ऐसा नहीं है। इसकी दो वजह हैं। </span></p>
<p><span><strong>पहला,</strong> चीनी उद्योग के मुताबिक चालू सीजन में गन्ने में औसत <strong>चीनी रिकवरी 9.79 फीसदी</strong> है। इस स्थिति में गन्ने के एफआरपी में बढ़ोतरी का पूरा लाभ किसानों तक पहुंचना मुश्किल है। चीनी रिकवरी 10.25 फीसदी से अधिक होने पर प्रति 0.1 फीसदी रिकवरी पर 3.32 रुपये प्रति क्विंवटल एफआरपी बढ़ जाएगा। वहीं, अगर रिकवरी 10.25 फीसदी से कम रहती है तो इसी दर से एफआरपी में कटौती होगी। चीनी रिकवरी 9.5 फीसदी या इससे कम होने की स्थिति में गन्ना किसानों को 315.10 रुपये प्रति क्विंटल का एफआरपी मिलेगा।&nbsp;</span></p>
<p><span>चीनी रिकवरी के ताजा आंकड़ों को देखें तो देश में गन्ना किसानों को 340 रुपये का एफआरपी मिलने की स्थितियां नहीं हैं। </span><span>2023-24 सीजन में अभी तक गन्ने में चीनी रिकवरी का राष्ट्रीय औसत 9.79 फीसदी है। सभी बड़े चीनी उत्पादक राज्यों में रिकवरी 10.05 से 8.10 फीसदी है। देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में रिकवरी दर 10.05 फीसदी है तो दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक महाराष्ट्र में चीनी रिकवरी का स्तर 9.6 फीसदी है।&nbsp;</span></p>
<p><span>कुछ साल पहले तक एफआरपी तय के लिए <strong>9.50 फीसदी</strong> की चीनी रिकवरी को आधार माना जाता है। लेकिन एफआरपी निर्धारण के लिए चीनी रिकवरी को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 10.25 फीसदी कर दिया गया।&nbsp;</span><span>असल में चीनी उत्पादक राज्यों को दो हिस्सों में रखा जा सकता है। एक जहां एफआरपी के आधार पर गन्ने का दाम मिलता है और दूसरे वह राज्य जहां राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) के आधार पर किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाता है।</span></p>
<p><span>यही <strong>दूसरा</strong> कारण है। पिछले और मौजूदा किसान आंदोलन का असर जिन राज्यों पंजाब, हरियाणा, यूपी और उत्तराखंड में है, वहां किसानों को गन्ने का भाव एफआरपी की बजाय <strong>राज्य परामर्श मूल्य यानी एसएपी</strong> के आधार पर दिया जाता है। </span><span>इसमें रिकवरी का कोई आधार नहीं है बल्कि अगैती और सामान्य प्रजातियों को आधार बनाकर कीमत तय की जाएगी। इस हिसाब से भी केंद्र द्वारा एफआरपी में की गई बढ़ोतरी का यूपी, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड के गन्ना किसानों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा। ना ही इसका उनके लिए खास महत्व है।&nbsp;</span></p>
<p><span><strong>चालू सीजन</strong> में उत्तर प्रदेश में अगैती किस्म के गन्ने का एसएपी 370 रुपये प्रति क्विंटल, उत्तराखंड में 375 रुपये प्रति क्विंटल, हरियाणा में 384 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि पंजाब में गन्ने का एसएपी 391 रुपये घोषित किया गया है। ऐसे में अगले सीजन के लिए तय एफआरपी से अधिक कीमत यहां गन्ना किसानों को पहले से ही मिल रही है। और वह भी एफआरपी के लिए तय चीनी की रिकवरी से कम रिकवरी के बावजूद। ऐसे में इन राज्यों के किसानों पर एफआरपी ताजा का घोषणा का कोई सीधा असर होगा, यह कहना मुश्किल है।</span></p>
<p><span><strong>कुल मिलाकर</strong> स्थिति यह है कि जिन राज्यों में एफआरपी के आधार पर गन्ने का भुगतान होता है वहां रिकवरी दर कम होने से पूरा फायदा नहीं मिलेगा। जबकि यूपी जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य में किसानों को एफआरपी नहीं बल्कि एसएपी के आधार पर गन्ने का भाव दिया जाता है।&nbsp;</span></p>
<p><span><strong>सरकारी विज्ञप्ति</strong> के मुताबिक, केंद्र सरकार ने गन्ने का एफआरपी लागत (ए2+एफएल) से 107 प्रतिशत अधिक है। इससे गन्ना किसानों की समृद्धि सुनिश्चित होगी। भारत पहले से ही दुनिया में गन्ने की सबसे ज्यादा कीमत चुका रहा है लेकिन इसके बावजूद सरकार भारत के घरेलू उपभोक्ताओं को दुनिया की सबसे सस्ती चीनी उपलब्&zwj;ध करा रही है। सरकार का दावा है कि केन्&zwj;द्र सरकार के इस फैसले से 5 करोड़ से अधिक गन्ना किसानों (परिवार के सदस्यों सहित) और चीनी क्षेत्र से जुड़े लाखों अन्य लोगों को फायदा होगा।&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गन्ने का एफआरपी 25 रुपये बढ़ा, लेकिन कम रिकवरी से किसानों को पूरा लाभ मिलना मुश्किल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि मंत्री ने किसानों को फिर वार्ता के लिए बुलाया, शंभू बॉर्डर पर दागे आंसू गैस गोले ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-minister-again-called-farmers-for-talks-tear-gas-shells-fired-at-shambhu-border.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 21 Feb 2024 14:09:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-minister-again-called-farmers-for-talks-tear-gas-shells-fired-at-shambhu-border.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार के एमएसपी पर दिए गये प्रस्ताव को खारिज करने के बाद किसान संगठन दिल्ली कूच करने पर आमादा हैं। इससे हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर तनाव बढ़ गया है। इस बीच, कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने किसानों को पांचवें दौर की बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। शंभू और खनौरी बॉर्डर पर भारी तादाद में किसानों का जमावड़ा है।&nbsp;</p>
<p>आज सुबह 11 बजे के आसपास जैसे ही किसानों ने <strong>शंभू बॉर्डर</strong> के बैरिकेड की ओर बढ़ने का प्रयास किया, हरियाणा पुलिस ने आंसू गैस के गोले दाग दिये। किसानों ने खेतों में भागकर खुद को बचाया। खबर है कि आंसू गैस के गोले बरसाने के पुलिस ने ड्रोन का इस्तेमाल किया। जींद के <strong>खनौरी</strong> बॉर्डर पर भी किसानों और पुलिस के बीच टकराव हुआ, जिसमें कई किसान घायल हो गए और एक किसान की मौत की खबर है।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>अर्जुन मुंडा</strong> ने किसानों को फिर से बातचीत के लिए बुलाया और उनसे शांति बनाएं रखने की अपील की है। अर्जुन मुंडा ने कहा, &ldquo;सरकार चौथे दौर के बाद पांचवें दौर में सभी मुद्दे जैसे की एमएसपी, क्रॉप डायवर्सिफिकेशन,पराली का विषय और एफआईआर पर बातचीत के लिए तैयार है। मैं दोबारा किसान नेताओं को चर्चा के लिए आमंत्रित करता हूँ। हमें शांति बनाये रखना जरूरी है।"</p>
<p>केंद्र सरकार के न्योते के बाद किसानों ने फिलहाल <strong>दिल्ली कूच</strong> कुछ समय के लिए रोक दिया है। किसानों की पटियाला प्रशासन से भी बात चल रही है। आंसू गैस के गोले छोड़े जाने के बीच किसान नेताओं ने युवा किसानों से आगे ना बढ़ने और शांति बनाए रखने की अपील की।</p>
<p>किसान नेता <strong>सरवन सिंह पढेर</strong> ने कहा है कि कोई युवा किसान आगे नहीं जाएगा। लीडर पहले आगे जाएंगे। हम खाली हाथ जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार <span>किसान-मजदूरों पर अर्धसैनिक बल के जरिए ज़ुल्म करा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संविधान की रक्षा करनी चाहिए और हमें शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाने देना चाहिए।&nbsp;</span></p>
<p>किसानों की तरफ से आज दिल्ली मार्च को लेकर <strong>भारी तैयारियां</strong> की गई हैं। शंभू बॉर्डर पर किसान हाईड्रोलिक क्रेन, जेसीबी व बुलेटप्रूफ पोकलेन जैसी भारी मशीनरी ले आए। गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार को एक एडवाइजरी भेजकर किसान आंदोलन के मद्देनजर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कहा है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>हरियाणा पुलिस की प्रवक्ता एआईजी <strong>मनीषा चौधरी</strong> ने किसानों द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए भारी मशीनरी जैसे जेसीबी, पोकलेन आदि का प्रयोग न करने की घोषणा का स्वागत किया है। हरियाणा पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों से ट्रैक्टर-ट्राली का प्रयोग ना करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि मंत्री ने किसानों को फिर वार्ता के लिए बुलाया, शंभू बॉर्डर पर दागे आंसू गैस गोले  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र ने किसानों को क्या प्रस्ताव दिया? किन फसलों की होगी 5 साल तक एमएसपी पर खरीद?]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/what-proposal-did-the-central-government-put-forward-to-the-farmers-which-crops-will-be-purchased-on-msp-for-5-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 19 Feb 2024 12:51:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/what-proposal-did-the-central-government-put-forward-to-the-farmers-which-crops-will-be-purchased-on-msp-for-5-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (<span>एमएसपी</span>) <span>की कानूनी गारंटी समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों और तीन केंद्रीय मंत्रियों पीयूष गोयल</span>, <span>अर्जुन मुंडा व नित्यानंद राय के बीच चौथे देर की वार्ता रविवार देर रात तक चली। केंद्र सरकार ने किसानों के सामने एक प्रस्ताव रखा है,</span>&nbsp;<span>जिसके तहत फसल विविधिकरण अपनाने वाले</span> किसानों से सहकारी एजेंसियां एमएसपी पर दालों, मक्का और कपास की खरीद के लिए पांच साल का अनुबंध करेंगी। किसान नेताओं का कहना है कि वे सरकार के प्रस्ताव पर आपस में विचार कर एक-दो दिन में अगला निर्णय लेंगे।&nbsp;<span></span></p>
<p>चंडीगढ़ में किसान नेताओं के साथ बातचीत के बाद केंद्रीय मंत्री<strong> पीयूष गोयल</strong> ने कहा कि एनसीसीएफ और नेफेड जैसी सहकारी संस्थाएं उन किसानों के साथ अनुबंध करेंगी जो अरहर, उड़द, मसूर दाल या मक्का उगाएंगे। अगले <strong>5 वर्षों</strong> तक उनकी फसलें एमएसपी पर खरीदी जाएंगी। खरीद की मात्रा की कोई सीमा नहीं होगी और इसके लिए एक पोर्टल बनाया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इससे पंजाब भूजल स्तर में सुधार होगा और जमीन को बंजर होने से रोका जा सकेगा। गोयल के मुताबिक, &ldquo;<span>किसान मक्का उगाना चाहते हैं लेकिन कीमतें एमएसपी से नीचे जाने पर उन्हें जो नुकसान होता है</span>, <span>उससे वे बचना चाहते हैं।</span>&rdquo;&nbsp;</p>
<p>गोयल ने कहा कि हमने किसान नेताओं को प्रस्ताव दिया है। वे चर्चा कर सोमवार सुबह तक हमें जवाब दे सकते हैं। अगर किसान कोई निर्णय लेते हैं, तो सरकार उसके अनुरुप चर्चा कर आगे बढ़ेगी। किसानों की अन्य मांगों पर गोयल ने कहा कि उन पर गहन चर्चा के बिना समाधान निकालना संभव नहीं था। चुनाव आ रहे हैं और नई सरकार बनेगी। इन मुद्दों पर चर्चा जारी रहेगी। <span>केंद्रीय मंत्री ने सरकार के प्रस्ताव को <em><strong>इनोवेटिव</strong> </em>और <em><strong>आउट ऑफ द बॉक्स</strong> </em>बताते हुए कहा कि किसानों को अपना विरोध समाप्त कर देना चाहिए। यदि किसान सहमत होते हैं तो अन्य मांगों पर भी चर्चा की जाएगी।</span><span></span></p>
<p><strong>प्रस्ताव पर विचार करेंगे किसान&nbsp;</strong></p>
<p>केंद्र के प्रस्ताव पर किसान नेता <strong>सरवन सिंह पंढेर</strong> ने कहा कि अगले एक-दो दिन अपने मंचों पर चर्चा करेंगे और इस बारे में विशेषज्ञों की राय लेंगे। उसके बाद ही आगे की रणनति तय की जाएगी। कर्ज माफी और अन्य मांगों पर अभी चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने मंगलवार तक इन मसलों पर ही कुछ सहमति बनने की उम्मीद जताई। किसानों का 'दिल्ली चलो' मार्च फिलहाल रुका हुआ है, लेकिन अगर सभी मुद्दों का हल नहीं निकला तो 21 फरवरी से फिर दिल्ली मार्च शुरू होगा।</p>
<p>रविवार को केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक में किसान यूनियनों के 14 प्रतिनिधि मौजूद थे। बैठक शुरू होने से पहले दो मिनट का मौन रखकर किसान आंदोलन के दौरान मरने वाले किसान ज्ञान सिंह को श्रद्धांजलि दी गई।&nbsp;</p>
<p><strong>पंजाब के मुख्यमंत्री ने उठाया दालों के आयात का मुद्दा&nbsp;</strong></p>
<p>बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी शामिल थे। किसानों के साथ वार्ता से पहले केंद्रीय मंत्रियों ने पंजाब के मुख्यमंत्री के साथ अलग से भी बैठक की थी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उन्होंने किसानों के वकील के रूप में बैठक में भाग लिया। अंतिम निर्णय किसानों को लेना है। बैठक के दौरान उन्होंने मोजाम्बिक और कोलंबिया से दालों के आयात का मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री मान का कहना है कि अगर इन फसलों के लिए एमएसपी दिया जाता है तो पंजाब दालों के उत्पादन में देश का नेतृत्व कर सकता है और यह दूसरी हरित क्रांति होगी। राज्य के किसान कपास और मक्का तभी अपना सकते हैं जब उन्हें इन फसलों पर एमएसपी की गारंटी मिले।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या हैं किसानों की मांगें?</strong>&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार से वार्ता विफल रहने के बाद गत 13 फरवरी को किसानों ने दिल्ली मार्च शुरू किया था, लेकिन उन्हें हरियाणा के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर रोक दिया गया। किसानों ने हरियाणा की सीमा में दाखिल होने की कोशिश की तो सुरक्षाबलों और आंदोलनकारी किसानों के बीच टकराव हुआ। किसानों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले बरसाए और पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ। ड्रोन से भी आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इस दौरान कई किसान और पुलिसकर्मी घायल हो गये। फिलहाल हजारों किसान शंभू बॉर्डर और खनौरी बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं।&nbsp;</p>
<p>किसानों की <strong>मुख्य मांगों</strong> में एमएसपी की कानूनी गारंटी,&nbsp;<span>स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने</span>, किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए पेंशन, कृषि ऋण माफी, बिजली दरों में बढ़ोतरी पर रोक, <span>किसानों के खिलाफ पुलिस केस वापस लेने</span>, <span>आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिजनों को मुआवजे</span>, <span>भूमि अधिग्रहण अधिनियम</span> 2013 को बहाल करने और लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए "न्याय" की मांग शामिल है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दो साल पहले हुए किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए मोदी सरकार ने तीनों कानूनों को वापस लेने का फैसला किया था। साथ ही एमएसपी के मुद्दे का हल निकालने समेत कई वादे किए थे। आंदोलित किसान अब सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहे हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र ने किसानों को क्या प्रस्ताव दिया? किन फसलों की होगी 5 साल तक एमएसपी पर खरीद? ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान आंदोलन और एमएसपी के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने में जुटी कांग्रेस ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/congress-attacked-modi-government-on-the-issue-of-farmers-movement-and-msp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 14 Feb 2024 19:58:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/congress-attacked-modi-government-on-the-issue-of-farmers-movement-and-msp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जोर पकड़ते किसान आंदोलन के बीच कांग्रेस एमएसपी की कानूनी गारंटी और किसानों के साथ किए जा रहे बर्ताव को लेकर मोदी सरकार को घेरने में जुट गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू न कर किसानों के साथ विश्वासघात किया है। इस बीच, कयास लगाए जा रहे हैं कि राहुल गांधी जल्द की किसान आंदोलन में शामिल हो सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली कूच के दौरान पुलिस कार्रवाई में घायल हुए किसान गुरमीत सिंह से फोन पर बात की और मोदी सरकार पर अन्नदाताओं के साथ तानाशाही रवैए का आरोप लगाया। घायल किसान से राहुल गांधी ने हालचाल जाना और किसानों के शांतिपूर्ण आंदोलन को समर्थन देने की बात कही। &nbsp;</p>
<p>गुरमीत सिंह ने बताया कि वह पूर्व सैनिक हैं। उनकी एक आंख और दोनों हाथों में गोलियों के छर्रे लगे हैं। करीब 100 लोग घायल हुए हैं। दिल्ली कूच पर अड़े किसानों और हरियाणा पुलिस के बीच शंभू बॉर्डर और जींद बॉर्डर पर टकराव हुआ था। किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।&nbsp;</p>
<p><strong>कांग्रेस ने किया एमएसपी की कानूनी गारंटी का वादा </strong></p>
<p>मंगलवार को छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र में इंडिया गठबंधन की सरकार आने पर किसानों को स्वामीनाथन कमीशन के अनुसार एमएसपी की कानूनी गारंटी देने का वादा किया। उन्होंने दिल्ली कूच कर रहे किसानों को दमनकारी तरीके से रोके जाने पर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा।&nbsp;</p>
<p>राहुल गांधी ने कहा कि आज किसानों को दिल्ली की ओर जाने से रोका जा रहा है। किसानों पर आंसू गैस चलाई जा रही है। किसानों को जेल में डाला जा रहा है। किसान सिर्फ ये कह रहे हैं कि उन्हें उनकी मेहनत का फल मिलना चाहिए।&nbsp;भाजपा सरकार ने&nbsp;स्वामीनाथन जी को&nbsp;भारत रत्न दिया। मगर किसानों के लिए स्वामीनाथन जी ने जो रिपोर्ट दी, उसे लागू करने के लिए भाजपा सरकार तैयार नहीं है।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या से आएगा पैसा?</strong></p>
<p>एमएसपी की कानूनी गारंटी लागू करने के लिए आवश्यक संसाधनों को लेकर उठ रहे सवालों पर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा सबको भ्रमित किया जा रहा है कि एमएसपी दे देंगे <span>तो लाखों करोड़ का नुकसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि एमएसपी का अर्थ ये नहीं होता कि सारी उपज सरकार खरीद लेगी। एमएसपी का अर्थ होता है कि सरकार एक मिनिमम सपोर्ट प्राईस बताएगी और जितना सरकार को लेना है वो लेगी</span>, <span>बाकी उस प्राईस से कम मार्केट में भी नहीं बिकेगा।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>किसानों को धोखा देने का आरोप&nbsp;</strong></p>
<p>कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए एमएसपी को लेकर जो सिफारिश की थी, अब उसी का विरोध कर रहे हैं। चाहे 2014 का भाजपा का घोषणा-पत्र हो या सीएम मोदी की समिति की सिफारिश, मोदी सरकार ने एमएसपी की कानूनी गारंटी देने में किसानों को धोखा दिया। पीएम<span> मोदी ने न सिर्फ अपना वादा तोड़ा, बल्कि किसानों के रास्ते पर कील बिछवाई। खेड़ा ने कहा क&zwj;ि&nbsp;</span>किसानों पर जो अत्याचार भाजपा और मोदी सरकार ने किया है, वो आजादी के बाद किसी भी सरकार ने नहीं किया।&nbsp;</p>
<p><strong>एमएसपी कमेटी का क्&zwj;या हुआ?&nbsp;</strong></p>
<p>एक संवाददाता सम्मेलन में पवन खेड़ा ने कहा कि 2021 में जब प्रधानमंत्री ने माफी मांगते हुए तीनों काले कानून वापस लिए थे, तब कहा था कि एमएसपी की समस्या का समाधान निकालने के लिए एक कमेटी बनेगी। दो साल से ऊपर हो गये, क्या हुआ उस कमेटी का? आज जब किसान एमएसपी को लेकर फिर से धरना दे रहे हैं, तो उन पर रबर की गोलियां चलाई जा रही हैं, आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं, रास्ते में कीलें बिछाई जा रही हैं। आंसू गैस किसानों पर छोड़कर टेस्&zwj;ट किया जा रहा है कि ड्रोन से आंसू गैस कैसे छूटते हैं। जो काम देश की सीमाओं को सुरक्ष&zwj;ित करने के लिए करना था वो देश के भीतर कर रहे हैं। देश के अपने किसानों के साथ कर रहे हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान आंदोलन और एमएसपी के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने में जुटी कांग्रेस  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत रत्न डॉ. स्वामीनाथन की बेटी ने कहा, अन्नादाताओं के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार ना करें]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/bharat-ratna-dr-swaminathan-daughter-said-do-not-treat-annadatas-like-criminals.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 14 Feb 2024 14:58:46 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/bharat-ratna-dr-swaminathan-daughter-said-do-not-treat-annadatas-like-criminals.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार द्वारा प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमएस स्वामीनाथन को भारत देने की घोषणा करने के कुछ दिन बाद ही उनकी बेटी मधुरा स्वामिनाथन ने एक सरकारी कार्यक्रम में पंजाब से किसानों के दिल्ली मार्च का जिक्र करते हुए कहा कि अन्नदाताओं के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। अगर हम डॉ. स्वामीनाथन का सम्मान करते हैं तो हमें किसानों को साथ लेकर चलना होगा। डॉ. स्वामीनाथन को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने की घोषणा के उपलक्ष में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा नई दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें उनकी बेटी अर्थशास्त्री मधुरा स्वामिनाथन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा लिया।&nbsp;</p>
<p>मधुरा स्वामीनाथन ने अपने संबोधन में कहा, &ldquo;पंजाब के किसान दिल्ली की ओर मार्च कर रहे हैं। ऐसी खबरें आ रही हैं कि हरियाणा में उनके लिए जेलें तैयार की जा रही हैं, बैरिकेड्स हैं और उन्हें रोकने के लिए हर तरह के उपाय आजमाए जा रहे हैं...ये किसान हैं, ये अपराधी नहीं हैं... मैं आप सभी से, भारत के प्रमुख वैज्ञानिकों से अनुरोध करती हूं कि हमें अपने अन्नदाताओं से बात करनी होगी। <strong>हम उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं कर सकते हैं।</strong> हमें समाधान ढूंढना होगा। कृपया, यह मेरा अनुरोध है, अगर हम एमएस स्वामीनाथन का सम्मान करते हैं तो भविष्य के लिए जो भी रणनीति बना रहे हैं, उसमें हमें किसानों को साथ लेकर चलना होगा।&nbsp;</p>
<p>एमएसपी की कानूनी गारंटी कई मांगों को लेकर पंजाब के किसान दिल्ली कूच करने का प्रयास कर रहे हैं जिन्हें पुलिस ने हरियाणा-पंजाब बॉर्डर से आगे नहीं बढ़ने दिया। शंभू और जींद बॉर्डर पर मंगलवार से प्रदर्शनकारी किसानों और सुरक्षाबलों के बीच कई बार झड़प हो चुकी हैं। किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने ड्रोन से आंसू गैस के गोले बरसाए। किसानों का आरोप है कि पुलिस ने उन पर रबर की गोलियां चलाईं। हरियाणा और दिल्ली की सीमाओं पर कंक्रीट, कीलों और कटीले तारों से भारी किलेबंदी की गई है।&nbsp;</p>
<p>किसानों की मांगों में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना तथा फसलों पर लागत का डेढ़ गुना दाम तय करने का मुद्दा भी शामिल है। डॉ. स्वामीनाथन ने राष्ट्रीय किसान आयोग के अध्यक्ष रहते कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए अपनी सिफारिशें दी थीं। इसी के तहत फसलों की लागत पर डेढ़ गुना दाम देने का फामूला सुझाया था। हरित क्रांति में अहम भूमिका निभाने वाले डॉ. स्वामीनाथन को देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत रत्न से सम्मानित करने का ऐलान किया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत रत्न डॉ. स्वामीनाथन की बेटी ने कहा, अन्नादाताओं के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार ना करें ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[78 लाख किसानों के लिए पीएम&amp;#45;किसान निधि पाने का मौका, ई&amp;#45;केवाईसी के लिए अभियान शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/opportunity-for-78-lakh-farmers-to-get-pm-kisan-fund-campaign-for-e-kyc-started.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 14 Feb 2024 07:45:51 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/opportunity-for-78-lakh-farmers-to-get-pm-kisan-fund-campaign-for-e-kyc-started.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पीएम-किसान सम्मान निधि से वंचित देश के करीब 78 लाख किसानों के लिए ई-केवाईसी करवाने का मौका है। इसके लिए कृषि मंत्रालय ने <strong>12 से 21 फरवरी</strong> तक 10 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। किसान कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से ई-केवाईसी करवा सकते हैं।</p>
<p>कृषि मंत्रालय के अनुसार, पीएम-किसान सम्मान निधि की सालाना 6 हजार रुपये की धनराशि प्राप्त करने के पात्र 78 लाख किसान ऐसे हैं, जिनके ई-केवाईसी पेंडिंग हैं। ई-केवाईसी होते ही ये किसान पीएम-किसान योजना के पात्र हो जाएंगे। फरवरी के आखिर तक पीएम-किसान योजना की 16वीं किस्त किसानों के खातों में आने वाली है। अगर लाभार्थी किसान 21 फरवरी से पहले अपना ई-केवाईसी करवा लेते हैं, तो उन्हें अगली किस्त का लाभ मिल सकता है।&nbsp;</p>
<p>इस बारे में केंद्रीय कृषि सचिव <strong>मनोज आहूजा</strong> ने राज्यों के प्रमुख सचिवों को पत्र लिखकर सभी पात्र किसानों को 21 फरवरी से पहले सभी पात्र किसानों का पीएम-किसान योजना के लिए ई-केवाईसी करवाने का आग्रह किया है। ई-केवाईसी अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार और विशेष ग्राम सभाएं आयोजित करवाने को कहा गया है। अभियान के दौरान विलेज लेवल नोडल ऑफिसर ई-केवाईसी से छूट गए लाभार्थी किसानों की पहचान करेंगे।&nbsp; &nbsp; &nbsp;</p>
<p>अभियान के बारे में सीएससी एसपीवी के प्रबंध निदेशक और सीईओ <strong>संजय राकेश</strong> ने कहा कि अभी भी कुछ किसानों को पीएम-किसान की किस्त नहीं मिल पा रही है। इसकी दो प्रमुख वजह हैं। पहला,&nbsp; ई-केवाईसी का नहीं होना और दूसरा बैंक खाते का आधार से लिंक न होना। इन दोनों समस्याओं के लिए हम 12 से 21 फरवरी तक विशेष अभियान चला रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से सीएससी उद्यमियों द्वारा गांवों में शिविर लगाकर लोगों का समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इसके अलावा अगर कोई लाभार्थी पीएम-किसान योजना की 15वीं किस्त से वंछित रह गए हैं तो इस शिविर में समस्याओं के निराकरण के बाद उनको पुरानी किस्त के पैसे भी मिल जाएंगे।&nbsp;</p>
<p>सीएससी देश के दूर-दराज इलाकों में मौजूद सीएससी के विशाल नेटवर्क की बदौलत पहले से ही हम किसानों को टेली-परामर्श, फसल बीमा, ई-पशु चिकित्सा, किसान क्रेडिट कार्ड और पीएम किसान योजनाओं के जरिए विभिन्न सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। गत12 फरवरी से कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से शुरू हुए ई-केवाईसी अभियान के लिए प्रदेश और जिला स्तर पर सीएससी के अधिकारियों के साथ बैठक कर लाभार्थी किसानों की पहचान कर उनके ई-केवाईसी करवाने के निर्देश भी दिए गये हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ 78 लाख किसानों के लिए पीएम-किसान निधि पाने का मौका, ई-केवाईसी के लिए अभियान शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिल्ली कूच कर रहे किसानों पर ड्रोन से बरसाए आंसू गैस के गोले, शंभू और जींद बॉर्डर पर टकराव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/tear-gas-shells-fired-on-farmers-marching-to-delhi-situation-of-confrontation-at-shambhu-border.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 13 Feb 2024 13:56:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/tear-gas-shells-fired-on-farmers-marching-to-delhi-situation-of-confrontation-at-shambhu-border.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अपनी मांगों को लेकर पंजाब से दिल्ली के लिए निकले किसानों और पुलिस के बीच मंगलवार को हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर दिन-भर टकराव चलता रहा। किसानों ने बैरिकेड हटाने की कोशिश की तो पुलिस ने <strong>आंसू गैस</strong> के गोले दाग दिए। किसानों पर <strong>ड्रोन</strong> से आंसू गैस के गोले बरसाए गये। अधिकारियों का कहना कि जब दिल्ली मार्च में शामिल कुछ युवाओं ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की तो पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। शंभू बॉर्डर के पास कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी खबर है।&nbsp;</p>
<p><span>शंभू बॉर्डर पर किसानों ने सीमेंट के बैरिकेड खींचने शुरू कर दिए और ओवरब्रिज की रेलिंग तोड़ दी। प्रदर्शनकारी किसानों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन और रबर बुलेट का इस्तेमाल भी किया। झड़प में कई <strong>किसान</strong> <strong>घायल</strong> हो गए। वहीं, अंबाला पुलिस का कहना है कि किसानों के पथराव में उनके भी कई <strong>जवान घायल</strong> हैं। रात तक हजारों किसान शंभू और संगरूर बॉर्डर पर डटे रहे। </span></p>
<p><span>जींद के <strong>खनौरी बॉर्डर</strong> पर भी किसानों और पुलिस के बीच झड़प हुई। वहां भी पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और किसानों पर लाठियां बरसाईं। इस दौरान कई किसान घायल हुए हैं।<br /></span></p>
<p>फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत कई मांगों को लेकर केंद्रीय मंत्रियों के साथ<strong> वार्ता बेनतीजा</strong> रहने के बाद पंजाब की किसान यूनियनों ने मंगलवार सुबह 10 बजे से दिल्ली मार्च शुरू किया। पंजाब के कई इलाकों से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ शंभू बॉर्डर की ओर बढ़े। इससे शंभू बॉर्डर पर हलचल बढ़ गई। किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए सुरक्षा के भारी इंतजाम किए हैं। हरियाणा, पंजाब और दिल्ली की सीमाओं पर मजबूत किलेबंदी की गई है। <span>हरियाणा के 7 जिलों कुरुक्षेत्र, अंबाला, कैथल, जींद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा में मोबाइल इंटरनेट सेवा को बंद कर दी गई।</span></p>
<p><strong>संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक)</strong> और <strong>किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम)</strong> के बैनर तले किसान अंबाला-शंभू, खनौरी-जींद और डबवाली सीमाओं से दिल्ली की ओर कूच करने का प्रयास कर रहे हैं। पंजाब के किसानों ने मंगलवार सुबह करीब 10 बजे <strong>फतेहगढ़ साहिब</strong> से मार्च शुरू किया। किसानों का एक काफिला <strong>संगरूर</strong> के मेहल कलां से खनौरी बॉर्डर से राष्ट्रीय राजधानी की ओर बढ़ रहा है।</p>
<p>किसानों के दिल्ली कूच को रोकने के लिए हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर कंक्रीट ब्लॉक, लोहे की कीलों और कंटीले तारों से रास्ते बंद कर दिए गये हैं। हरियाणा सरकार ने 15 जिलों में धारा 144 लगाकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ किसी भी प्रकार के प्रदर्शन या मार्च पर रोक लगा दी है। <strong>दिल्ली बॉर्डर</strong> पर भी मल्टी-लेयर बैरिकेड्स और कंक्रीट ब्लॉक से&nbsp; सुरक्षा बढ़ा दी गई है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>सोमवार रात चंडीगढ़ में किसान नेताओं की केंद्रीय मंत्रियों <strong>अर्जुन मुंडा</strong> और<strong> पीयूष गोयल</strong> के साथ करीब पांच घंटे चली बैठक बेनतीजा रही थी। बैठक के बाद किसान नेता <strong>सरवन सिंह पंढेर</strong> ने कहा, "सरकार बस समय निकालना चाहती है। हम लोगों ने पूरी कोशिश की है कि हम मंत्रियों से लंबी बातचीत करें और कोई निर्णय निकलें। लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं...दिल्ली कूच जारी रहेगा!"&nbsp;</p>
<p>बैठक में मौजूद किसान नेताओं ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि सरकार एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्जमाफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के मुद्दों पर एक <strong>समिति</strong> का गठन करना चाहती है। लेकिन किसान नेताओं ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। एमएसपी के मुद्दे पर सरकार ने दो साल पहले भी एक समिति गठित की थी, जिसकी रिपोर्ट आज तक नहीं आई है।</p>
<p>दिल्ली मार्च से पहले फतेहगढ़ साहिब में किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर भारी बैरिकेडिंग की <strong>निंदा</strong> करते हुए कहा कि ऐसा नहीं लगता कि पंजाब और हरियाणा दो राज्य हैं। ऐसा लगता है कि वे अंतरराष्ट्रीय सीमा बन गए हैं। पंजाब और हरियाणा सीमा पर कंक्रीट की दीवारें खड़ी कर दी गई हैं! हम खाद्यान्न उगाते हैं लेकिन उन्होंने हमारे लिए कीलों की फसल उगाई है।</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेता<strong> जगजीत सिंह डल्लेवाल</strong> ने कहा, "हम जो बात रखना चाह रहे हैं वो कोई नई नहीं है। ये सब हमारे साथ किए गए वादे हैं। हमने बार-बार सरकार का उसी के वादों के बारे में ध्यान खींचा। लेकिन सरकार ने अभी इस मामले में अभी तक कोई गंभीरता नहीं दिखाई।"</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>अर्जुन मुंडा</strong> ने कहा, &ldquo;सरकार चाहती है कि बातचीत के माध्यम से समाधान निकले। अधिकांश विषयों पर हम सहमति तक पहुंचे, लेकिन आंदोलन में शामिल लोगों में से कुछ ऐसे भी हो सकते हैं जो समाधान के बजाए इसे समस्या के रूप में देखना चाहते हैं। <span>किसानों को समझने की जरूरत है कि भारत सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।"</span></p>
<p>आंदोलनकारी किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी के अलावा <strong>स्वामीनाथन आयोग</strong> की सिफारिशों को लागू करने, किसानों व कृषि मजदूरों के लिए पेंशन, कृषि ऋण माफ करने, पुलिस में दर्ज मामलों को वापस लेने, लखीमपुरी खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय, भूमि अधिग्रहण कानून 2013 बहाल करने और पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65cc49df66c6f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिल्ली कूच कर रहे किसानों पर ड्रोन से बरसाए आंसू गैस के गोले, शंभू और जींद बॉर्डर पर टकराव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चौधरी चरण सिंह, नरसिम्हा राव और डॉ. एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न, पीएम मोदी ने किया ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/chaudhary-charan-singh-narasimha-rao-agricultural-scientist-ms-swaminathan-awarded-bharat-ratna-pm-modi-announced.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 09 Feb 2024 13:50:34 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/chaudhary-charan-singh-narasimha-rao-agricultural-scientist-ms-swaminathan-awarded-bharat-ratna-pm-modi-announced.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, पीवी नरसिम्हा राव और मशहूर कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमएस स्वामीनाथन को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान &lsquo;भारत रत्न' (मरणोपरांत) से सम्मानित करने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह जानकारी दी है।&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारी सरकार का यह सौभाग्य है कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री <strong>चौधरी चरण सिंह</strong> जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जा रहा है। यह सम्मान देश के लिए उनके अतुलनीय योगदान को समर्पित है। उन्होंने किसानों के अधिकार और उनके कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हों या देश के गृहमंत्री और यहां तक कि एक विधायक के रूप में भी, उन्होंने हमेशा राष्ट्र निर्माण को गति प्रदान की। वे आपातकाल के विरोध में भी डटकर खड़े रहे। हमारे किसान भाई-बहनों के लिए उनका समर्पण भाव और इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र के लिए उनकी प्रतिबद्धता पूरे देश को प्रेरित करने वाली है।&nbsp;</p>
<p>एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा,"यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारे पूर्व प्रधान मंत्री श्री <strong>पीवी नरसिम्हा राव</strong> को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। एक प्रतिष्ठित विद्वान और राजनेता के रूप में, नरसिम्हा राव ने विभिन्न क्षमताओं में भारत की बड़े पैमाने पर सेवा की। उन्हें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और कई वर्षों तक संसद और विधानसभा सदस्य के रूप में किए गए कार्यों के लिए समान रूप से याद किया जाता है। उनका दूरदर्शी नेतृत्व भारत को आर्थिक रूप से उन्नत बनाने, देश की समृद्धि और विकास के लिए एक ठोस नींव रखने में सहायक था।"&nbsp;</p>
<p>पीएम मोदी ने हरित क्रांति के पुरोधा <strong>डॉ. एमएस स्वामीनाथन</strong> को भारत रत्&zwj;न देने की घोषणा करते हुए कहा, "यह बेहद खुशी की बात है कि भारत सरकार कृषि और किसानों के कल्याण में हमारे देश में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. एमएस स्वामीनाथन जी को भारत रत्न से सम्मानित कर रही है। उन्होंने चुनौतीपूर्ण समय के दौरान भारत को कृषि में आत्मनिर्भरता हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारतीय कृषि को आधुनिक बनाने की दिशा में उत्कृष्ट प्रयास किए। हम एक अन्वेषक और संरक्षक के रूप में और कई छात्रों के बीच सीखने और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने वाले उनके अमूल्य काम को भी पहचानते हैं। डॉ. स्वामीनाथन के दूरदर्शी नेतृत्व ने न केवल भारतीय कृषि को बदल दिया है बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और समृद्धि भी सुनिश्चित की है। वह ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें मैं करीब से जानता था और मैं हमेशा उनकी अंतर्दृष्टि और इनपुट को महत्व देता था।"&nbsp;</p>
<p>सरकार ने इससे पहले <strong>लालकृष्ण आडवाणी</strong> और <strong>कर्पूरी ठाकुर</strong> को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान की घोषणा की थी। चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने की खबर पर उनके पौत्र और राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने कहा कि दिल जीत लिया। जयंत चौधरी ने <span>इस फैसले के लिए </span> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कि जो फैसला पूर्व की कोई भी सरकार नहीं कर पाई, वो फैसला नरेंद्र मोदी जी के विजन और समर्पण भाव से हो पाया। यह चौधरी चरण सिंह के सभी अनुयायियों के लिए खुशी का दिन है। बहुत समय से लोगों में यह टीस थी कि किसान-कमेरा वर्ग के लिए संघर्ष करने वाले चौधरी चरण सिंह को यह सम्मान नहीं मिला। आज चौधरी अजित सिंह का अधूरा सपना भी पूरा हुआ।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x_65c5ebbeeec62.jpg" alt="" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65c5e5c277a2b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चौधरी चरण सिंह, नरसिम्हा राव और डॉ. एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न, पीएम मोदी ने किया ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आरबीआई ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, 2024&amp;#45;25 में 7 फीसदी विकास दर का अनुमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rbi-keeps-interest-rate-unchanged-projects-7-pc-growth-for-next-financial-year.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 08 Feb 2024 13:33:38 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rbi-keeps-interest-rate-unchanged-projects-7-pc-growth-for-next-financial-year.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों (रेपो रेट) में लगातार छठी बार कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई के इस फैसले के बाद बैंक और वित्तीय संस्थान कर्ज की ब्याज दरों को स्थिर रख सकेंगे और आम जनता पर ईएमआई का बोझ नहीं बढ़ेगा। आरबीआई ने आखिरी बार फरवरी 2023 में रेपो दर को 6.5 प्रतिशत तक बढ़ाया था। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए, आरबीआई ने <strong>7 प्रतिशत</strong> की विकास दर और खुदरा मुद्रास्फीति (सीपीआई) <strong>4.5 प्रतिशत</strong> रहने का अनुमान लगाया है।</p>
<p>द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि वर्तमान और उभरती व्यापक आर्थिक स्थिति के आकलन के आधार पर नीति रेपो दर को अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। दास ने कहा कि नीतिगत रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। भूराजनीतिक घटनाएं और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर उनके प्रभाव तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों और कमोडिटी की कीमतों में अस्थिरता से मुद्रास्फीति के बढ़ते का खतरा है।</p>
<p>आरबीआई का अनुमान है कि अगले वित्तीय वर्ष में 2024-25 में खुदरा मुद्रास्फीति 4.5 फीसदी रहेगी, बशर्ते मानसून सामान्य रहे। खुदरा मुद्रास्फीति 2023-24 के लिए 5.4 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मुख्य रूप से खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने से खुदरा मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी हुई है। दिसंबर 2023 में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 5.7% हो गई, जबकि अक्टूबर में यह 4.9% दर्ज की गई थी। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर खुदरा मुद्रास्फीति पर पड़ रहा है। जबकि आरबीआई खुदरा मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत लक्ष्य सीमा के भीतर रखने के लिए प्रतिबद्ध है।&nbsp;</p>
<p>भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 7 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया, जो चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 7.3 प्रतिशत की विकास दर से कम है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के अनुसार, मार्च 2024 को समाप्त होने वाले चालू वित्तीय वर्ष में देश की विकास दर 7.3 प्रतिशत रहने उम्मीद है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि ग्रामीण मांग में तेजी जारी है, शहरी खपत मजबूत बनी हुई है और पूंजीगत व्यय में वृद्धि के कारण निवेश चक्र में तेजी आ रही है। निजी निवेश में सुधार के संकेत दिख रहे हैं।&nbsp;आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का मानना है कि कि घरेलू आर्थिक गतिविधि अच्छी चल रही है और निवेश मांग में तेजी, आशावादी व्यापारिक माहौल और बढ़ते उपभोक्ता विश्वास से इसे समर्थन मिलने की उम्मीद है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आरबीआई ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, 2024-25 में 7 फीसदी विकास दर का अनुमान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीयूष गोयल का दावा, गन्ना किसानों का 99 फीसदी बकाया चुकाया गया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/piyush-goyal-claims-over-99-percent-dues-of-sugarcane-farmers-have-been-paid.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 07 Feb 2024 17:52:13 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/piyush-goyal-claims-over-99-percent-dues-of-sugarcane-farmers-have-been-paid.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का दावा है कि देश में किसानों का 99 प्रतिशत से अधिक गन्ना बकाया मिलों द्वारा चुका दिया गया है, जो 1.15 लाख करोड़ रुपये में से 1.14 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।&nbsp;बुधवार को उन्होंने लोकसभा में कहा कि&nbsp;गन्ना किसानों के भुगतान की समस्या हल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो कदम उठाए, उनके कारण गन्ना किसानों की उत्पादकता बढ़ी है और उन्हें समय पर भुगतान मिल रहा है। दूसरी तरफ, <span>चीनी मिलों की स्थिति में सुधार हुआ है।&nbsp;</span></p>
<p>केंद्रीय वाणिज्य, उद्योग और खाद्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, उत्तर प्रदेश की तीन चीनी मिलों पर अब सिर्फ 516 करोड़ रुपये बकाया है जिनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013-14 में किसानों को गन्ना मूल्य के रूप में 57,000 करोड़ रुपये मिले थे और किसानों को गन्ने का बकाया भुगतान दो-तीन साल बाद दिया जाता था। 2022-23 में गन्ना उत्पादन डेढ़ गुना बढ़ गया और गन्ना भुगतान 1,15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसमें से किसानों को 1,14,000 करोड़ रुपये का भुगतान समय पर किया गया है, जो 99 प्रतिशत से अधिक है।</p>
<p>हालांकि, इस पर कुछ विपक्षी सदस्यों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दावा किया कि आंकड़े सही नहीं हैं। केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि 2014 में जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, तब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए हैं। एथेनॉल को प्राथमिकता दी गई है ताकि चीनी मिलों को गन्ना किसानों का भुगतान करने में मदद मिल सके। पहले पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण केवल एक प्रतिशत था, लेकिन अब यह 12 प्रतिशत है। इन कदमों से चीनी मिलों को पैसा मिलना शुरू हो गया है और वे व्यवहार्य हो गई हैं। परिणामस्वरूप, 99 प्रतिशत किसानों को उनका भुगतान समय पर मिल रहा है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीयूष गोयल का दावा, गन्ना किसानों का 99 फीसदी बकाया चुकाया गया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[संयुक्त किसान मोर्चा ने 16 फरवरी की हड़ताल और ग्रामीण बंद के लिए विपक्षी दलों से समर्थन मांगा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/united-kisan-morcha-seeks-support-from-opposition-parties-for-february-16-strike-and-rural-bandh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 07 Feb 2024 11:42:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/united-kisan-morcha-seeks-support-from-opposition-parties-for-february-16-strike-and-rural-bandh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) और ट्रेड यूनियनों ने विपक्षी गठबंधन (इंडिया अलायंस) में शामिल राजनीतिक दलों से 16 फरवरी को औद्योगिक/क्षेत्रीय हड़ताल और ग्रामीण बंद के लिए उनका समर्थन मांगा है। एसकेएम और ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच की ओर से विपक्षी दलों को एक पत्र भेजा गया है जिसमें हड़ताल और ग्रामीण बंद का समर्थन करने का आग्रह किया गया है।</p>
<p>किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी, न्यूनतम वेतन, नए श्रम कोड को खत्म करने सहित कई मुद्दों को लेकर 16 फरवरी को एसकेएम और ट्रेड यूनियनों की ओर से औद्योगिक हड़ताल और ग्रामीण बंद का आह्वान किया गया है। इसे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और द्रमुक सहित कई दलों का समर्थन मिला है।</p>
<p>एसकेएम का कहना है कि औद्योगिक/क्षेत्रीय हड़ताल और ग्रामीण बंद को ट्रेड यूनियनों और छात्रों, युवाओं, महिलाओं और शिक्षकों और परिवहन ऑपरेटरों सहित अन्य वर्गों के विभिन्न जन संगठनों द्वारा समर्थन दिया जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा और ट्रेड यूनियन ने 16 फरवरी 2024 को ग्रामीण बंद और औद्योगिक/क्षेत्रीय हड़ताल के समर्थन में आम जनता से एकजुट होने की अपील की है।</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा की राष्ट्रीय समन्वय समिति की ऑनलाइन बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि मोर्चा द्वारा "दिल्ली चलो" का कोई आह्वान नहीं किया गया है। 13 फरवरी 2024 को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करने के कुछ किसान संगठनों के निर्णय का संयुक्त किसान मोर्चा से कोई लेना-देना नहीं है। एसकेएम ने मजदूर-किसान एकता को मजबूत करने और मोदी सरकार के खिलाफ आम जनता से व्यापक रूप से एकजुट होने का आह्वान किया है।</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा ने 2020-21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन का नेतृत्व किया था। लेकिन आंदोलन समाप्त होने के बाद कई किसान संगठन आपसी मतभेद और चुनाव लड़ने के मुद्दे पर अलग राह पर चले गये। अब किसान संगठनों के एक समूह ने 13 फरवरी को दिल्ली कूच की कॉल दी है जबकि संयुक्त किसान मोर्चा ने 16 फरवरी को ट्रेड यूनियनों के साथ हड़ताल और ग्रामीण भारत बंद का ऐलान किया है।&nbsp;<span></span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ संयुक्त किसान मोर्चा ने 16 फरवरी की हड़ताल और ग्रामीण बंद के लिए विपक्षी दलों से समर्थन मांगा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नए मालिकों के हाथों में जाएंगी शामली समेत तीन चीनी मिलें, शुगर इंडस्ट्री में हलचल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/hot-deal-in-sugar-industry-three-sugar-mills-including-shamli-will-go-into-the-hands-of-new-owners.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 06 Feb 2024 19:57:45 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/hot-deal-in-sugar-industry-three-sugar-mills-including-shamli-will-go-into-the-hands-of-new-owners.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चीनी मिल उद्योग में बेहतर संभावनाओं के चलते उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों के अधिग्रहण का बाजार गरमा गया है। देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य में वित्तीय संकट से जूझ रही कई चीनी मिलों को दूसरे समूह खरीदने के लिए जोर लगा रहे हैं। इससे राज्य की शुगर इंडस्ट्री में हलचल बढ़ गई है।</p>
<p><strong>शामली</strong> जिले में स्थित देश की सबसे पुरानी चीनी मिलों में शुमार लेकिन पिछले कई साल से वित्तीय संकट में फंसी सर शादी लाल एंटरप्राइजेज लिमिटेड की अपर दोआब शुगर मिल में त्रिवेणी समूह 51 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने की राह पर है। इस चीनी मिल के दो हिस्सेदारों से त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने 25.43 फीसदी इक्विटी खरीदने का समझौता किया है। शामली चीनी मिल एक समय बेहतर प्रबंधन के लिए जानी जाती थी। लेकिन कई साल से मिल गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को लेकर परेशानी से जूझ रही है।&nbsp;</p>
<p>उद्योग सूत्रों के मुताबिक, वित्तीय संकट से जूझ रहे सिंभावली शुगर मिल समूह की <strong>बृजनाथपुर</strong> और <strong>चिलवरिया</strong> शुगर मिल को खरीदने के लिए एक निजी चीनी मिल समूह और सार्वजनिक क्षेत्र की एक कंपनी बातचीत पर काफी आगे बढ़ गई है।</p>
<p>शामली चीनी मिल पर पिछले पेराई सत्र (2022-23) का करीब 214 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है, जिसे लेकर किसानों ने कई महीनों तक धरना दिया था। चीनी मिल की परिसंपत्तियों को बेचकर भुगतान करने के आश्वासन के बाद ही किसानों का धरना समाप्त हुआ था। शामली चीनी मिल त्रिवेणी समूह के पास जाने से किसानों के बकाया गन्ना भुगतान की उम्मीद बढ़ गई है। चीनी मिल ने पिछले सीजन का जनवरी, 2023 का भी पूरा भुगतान नहीं किया है हालांकि, चालू सीजन की गन्ना आपूर्ति के लिए मिल भुगतान कर रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>बांबे स्टॉक एक्सचेंज</strong> को दी जानकारी में सर शादी लाल एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने बताया कि कंपनी के ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक विश्वनाथन और डायरेक्टर राधिका विश्वनाथन ने अपने हिस्से के 25.43 फीसदी शेयर बेचने के लिए 30 जनवरी, 2024 <span>को त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है। </span>सूत्रों के मुताबिक, जल्दी ही सर शादी लाल एंटरप्राइजेज में त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड 51 फीसदी इक्विटी हासिल कर लेगी। इसके लिए उसने 26 फीसदी इक्विटी शेयरों के लिए ओपन ऑफर जारी कर दिया है। इसे एक तरह से अधिग्रहण की प्रक्रिया के रूप में देखा जा सकता है।</p>
<p>त्रिवेणी समूह ने सर शादीलाल एंटरप्राइजेज के शेयरों को ओपन ऑफर के तहत खरीदने के लिए 262.15 रुपये प्रति शेयर की कीमत तय की है। ओपन ऑफर के लिए 6 फरवरी को डिटेल्ड पब्लिक स्टेटमेंट जारी किया गया है। इस बीच, सर शादीलाल एंटरप्राइजेज लिमिटेड का शेयर मंगलवार को <strong>52 सप्ताह</strong> के उच्चतम स्तर 300 रुपये तक पहुंच गया। 25 जनवरी, 2024 को कंपनी का शेयर 136 रुपये के आसपास था। कंपनी के एक हिस्सेदार रजत लाल के पास अभी करीब 30 फीसदी इक्विटी है। अब देखना को होगा रजत लाल अपनी इक्विटी बेचते हैं या बरकरार रखते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>त्रिवेणी समूह</strong> उत्तर प्रदेश की निजी चीनी मिलों मेंं एक प्रमुख समूह है इसकी खतौली, देवबंद, साबितगढ, मिलक नारायणपुर समेत सात चीनी मिलें है।&nbsp;पिछले कई महीनों से यूपी की शुगर इंडस्ट्री में कई चीनी मिलों की बिक्री और अधिग्रहण को लेकर हलचल है। अक्टूबर, 2023 में <strong>श्री रेणुका शुगर्स</strong> ने बुलंदशहर की अनामिका शुगर मिल्स को 235.5 करोड़ में खरीदने का सौदा किया था। इसके साथ ही <strong>डालमिया समूह</strong> ने हरदोई जिले में भगोली स्थित चीनी मिल खरीदी थी। इसे एनसीएलटी की प्रक्रिया के तहत खरीदा गया है। डालमिया समूह की उत्तर प्रदेश में तीन चीनी मिलें हैं और महाराष्ट्र में दो चीनी मिलें हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65c2419f66514.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नए मालिकों के हाथों में जाएंगी शामली समेत तीन चीनी मिलें, शुगर इंडस्ट्री में हलचल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बंद होंगी 199 जिला कृषि मौसम इकाइयां, बचाव में आए गडकरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/199-district-agriculture-meteorological-units-will-be-closed-gadkari-comes-to-the-rescue.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 06 Feb 2024 12:08:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/199-district-agriculture-meteorological-units-will-be-closed-gadkari-comes-to-the-rescue.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसानों को ब्लॉक स्तर पर मौसम संबंधी सलाह उपलब्ध कराने वाली <strong>जिला कृषि मौसम&nbsp;इकाइयों (डीएएमयू)</strong> को सरकार बंद करने जा रही है। मौसम विभाग ने 17 जनवरी को जारी एक आदेश में कहा है कि जिला कृषि मौसम इकाइयों (डीएएमयू) की सेवाओं को चालू वित्तीय वर्ष (2023-2024) से आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इस आदेश के बाद से डीएएमयू में काम करने वाले<strong> 398 कर्मचारियों</strong> के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। इस मामले में कृषि मौसम विज्ञान यूनिटों के संगठन (एयूए) ने प्रधानमंत्री से भी गुहार लगाई है।</p>
<p>अब केंद्रीय मंत्री <strong>नितिन गडकरी</strong> ने&nbsp;पृथ्वी विज्ञान मंत्री से डिस्ट्रिक्ट एग्रोमेट यूनिट्स को बंद ना करने का आग्रह किया है। नितिन गडकरी ने केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री <strong>जितेंद्र सिंह</strong> को पत्र लिखकर 199 डिस्ट्रिक्ट एग्रोमेट यूनिट्स की सेवाएं जारी रखने का अनुरोध किया। एयूए के पत्र का हवाला देते हुए गडकरी ने कहा कि डीएएमयू सप्ताह में दो बार कृषि मौसम संबंधी सलाह तैयार करती हैं और उसे ग्रामीण स्तर तक किसानों तक पहुंचाती हैं। उन्हें बताया गया कि इससे किसानों को काफी फायदा हुआ है। इसलिए इन्हें जारी रखने के अनुरोध पर विचार किया जाना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>इससे पहले <strong>एग्रोमेटियोरोलॉजिकल यूनिट्स एसोसिएशन (एयूए)</strong> ने प्रधानमंत्री नरेंद्र को पत्र लिखकर कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) में जिला कृषि मौसम विज्ञान इकाइयों की सेवाएं जारी रखने के लिए हस्तक्षेप का अनुरोध किया था। डीएएमयू सप्ताह में दो बार कृषि मौसम संबंधी सलाह तैयार करता है और उसे ग्रामीण स्तर तक किसानों तक पहुंचाता है। एयूए का कहना है कि इससे किसानों को काफी फायदा हुआ है। अगर डीएएमयू को बंद कर दिया जाता है, तो इसका कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और कृषक समुदाय की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार ने <strong>2018</strong> में, किसानों को ब्लॉक स्तर पर मौसम संबंधी सलाह उपलब्ध कराने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों में जिला कृषि मौसम इकाइयों की शुरुआत की थी। इसके अलावा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित 130 <strong>एग्रोमेट फील्ड यूनिट (एएमएफयू)</strong> के जरिए भी किसानों को मौसम संबंधी सलाह दी जाती है। जिला कृषि मौसम इकाइयां मौसम विभाग (पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (कृषि मंत्रालय) का संयुक्त उपक्रम हैं। फिलहाल देश में 199 डीएमएयू संचालित हैं। हर यूनिट में दो कर्मचारी होते हैं। डीएमएयू बंद होने से 398 कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटक गया है। साथ ही किसानों को ब्लॉक स्तर पर मिलने वाली मौसम संबंधी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।&nbsp;</p>
<p>उधर, मौसम विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि मौसम संबंधी आंकड़ें जुटाने और सूचनाओं के प्रसार का काम अब <strong>स्वचालित</strong> हो गया है। मौसम संबंधी आंकड़ों का केंद्रीय स्तर पर विश्लेषण कर संचार तकनीक की मदद से किसानों तक पहुंचाया जा सकता है। इसलिए जिला कृषि मौसम इकाइयों की कोई आवश्यकता नहीं है। यानी डीएएमयू के कर्मचारियों पर ऑटोमैशन की मार पड़ रही है।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65c1d0c227719.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बंद होंगी 199 जिला कृषि मौसम इकाइयां, बचाव में आए गडकरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[20 महीने, 36 मीटिंग, MSP कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार, किसान दिल्ली कूच को तैयार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/20-months-36-meetings-wait-for-msp-committee-report-farmers-ready-to-delhi-march.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 06 Feb 2024 09:01:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/20-months-36-meetings-wait-for-msp-committee-report-farmers-ready-to-delhi-march.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार द्वारा तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 13 माह तक चलते एतिहासिक किसान आंदोलन को समाप्त करने के लिए कानूनी की वापसी के साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मुद्दे पर एक समिति बनाकर हल निकालने का वादा किया गया था। उसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले आंदोलन चला रहे किसान दिल्ली के बार्डरों से वापस चले गये थे। लेकिन जहां केंद्र की मौजूदा सरकार अपने अंतिम चरण में हैं और किसान संगठन एक बार फिर इस मुद्दे पर दिल्ली कूच की तैयारी कर रहे हैं, वहीं पूर्व कृषि सचिव संजय अग्रवाल की अध्यक्षता वाली भारी-भरकम समिति की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। ऐसे में समिति की सिफारिशों पर मौजूदा केंद्र सरकार के कार्यकाल में अमल सकेगा, कहना मुश्किल है। समिति के एक सदस्य ने <strong>रूरल वॉयस</strong> के साथ बातचीत में कहा कि अभी तक समिति के सदस्यों और उसके तहत गठित ग्रुप और सब-ग्रुप की <strong>36 बैठकें</strong> हो चुकी हैं। इस पूरी कवायद के बाद अब समिति जल्दी ही अपनी रिपोर्ट फाइनल कर सकती है।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक समिति की कुछ माह पहले रिपोर्ट को लेकर काफी हद तक <strong>सहमति</strong> बन गई थी लेकिन कुछ सदस्यों की राय अलग होने के चलते इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। हालांकि कुछ सदस्य ऐसे भी हैं जिन्होंने समिति की किसी भी बैठक में हिस्सा नहीं लिया। जबकि संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों के लिए रखे गये पद मोर्चा द्वारा समिति में शामिल नहीं होने के चलते खाली रहे।</p>
<p>समिति के सदस्यों का एक वर्ग चाहता है कि कृषि उत्पादों की मार्केटिंग में बाजार खोलने की कवायद के रूप में एग्रीकल्चर मार्केट प्रॉड्यूस कमेटी (एपीएमसी) के <strong>एकाधिकार</strong> को समाप्त करने की जरूरत है। लेकिन इसके साथ ही &nbsp;कृषि उत्पादों की एमएसपी से नीचे खरीद नहीं होने की शर्त भी लागू की जाए। एमएसपी से नीचे खरीद की स्थिति में <strong>पैनल्टी</strong> का प्रावधान किया जाए। साथ की सरकारी खरीद में प्राइमरी एग्रीकल्चर कोआपरेटिव सोसायटी (पैक्स) और कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) की भूमिका बढ़ाने की सिफारिश भी सदस्यों की राय है।</p>
<p>सदस्यों का कहना है कि एमएसपी की इस व्यवस्था को लागू करने का जिम्मा राज्य सरकारों का होना चाहिए। इस समिति के कामकाज की शर्तों (टीओआर) में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की संस्था को लेकर भी सिफारिश देने के लिए कहा गया है। इस बारे में समिति के एक सदस्य ने रूरल वॉयस को बताया कि हम लोग चाहते हैं कि सीएसीपी को स्वायत्त और <strong>संवैधानिक</strong> संस्था का दर्जा दिया जाए। साथ ही इसका चेयरमैन किसानों के प्रतिनिधि को बनाया जाना चाहिए।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>तीन कृषि कानूनों के खिलाफ साल भर से अधिक चले किसान आंदोलन को समाप्त करने के लिए सहमति के बाद एमएसपी के मुद्दे पर समिति बनाई गई थी। केंद्र सरकार ने पूर्व कृषि सचिव संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में एमएसपी समिति बनाई थी। लेकिन समिति का दायरा एमएसपी तक सीमित न रखते हुए इसमें <strong>सीएसीपी</strong> की कार्यशैली और प्राकृतिक खेती जैसे विषय जोड़े गये थे। समिति का गठन 12 जुलाई, 2022 को एक गजट नोटिफिकेशन के जरिये किया गया था। इसकी पहली बैठक 22 अगस्त, 2022 को हुई थी। समिति ने देश के अलग-अलग हिस्सों में कई बैठकें की हैं।</p>
<p>वहीं एमएसपी को लेकर समिति की सिफारिशें तो अभी तक नहीं आई लेकिन कई <strong>किसान संगठनों</strong> ने सरकार द्वारा एमएसपी को कानूनी दर्जा नहीं दिये जाने और एमएसपी तय करने के लिए सी-2 लागत पर 50 फीसदी मुनाफा जोड़ने सहित कई मांगें नहीं माने जाने के चलते इसी माह दिल्ली का रुख करने का ऐलान कर रखा है। ऐसे में अब देखना होगा कि समिति अपनी रिपोर्ट कब सौंपती है। हालांकि, रिपोर्ट आने के बाद भी इसकी सिफारिशों पर केंद्र सरकार अमल करेगी, यह कहना मुश्किल है। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ 20 महीने, 36 मीटिंग, MSP कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार, किसान दिल्ली कूच को तैयार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गैर&amp;#45;बासमती सुगंधित चावल की ग्रेडिंग के नियम जारी, गोबिंदभोग और काला नमक को मिलेगी पहचान    ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rules-for-grading-of-non-basmati-aromatic-rice-released-gobindabhog-and-kala-namak-rice-will-get-recognition.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 03 Feb 2024 18:17:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rules-for-grading-of-non-basmati-aromatic-rice-released-gobindabhog-and-kala-namak-rice-will-get-recognition.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने गैर-बासमती सुगंधित चावल की ग्रेडिंग के नियम जारी कर दिए हैं। इसके तहत पांच खास किस्मों के चावल की विशेषताओं और गुणवत्ता के मानक तय किए गये हैं। सरकार के इस कदम से गोबिंदभोग और काला नमक जैसे खास चावलों की खेती करने वाले किसानों को फायदा होगा। ये नियम गैर-सुगंधित बासमती चावल की ग्रेडिंग और मार्केटिंग में मददगार होंगे।&nbsp;</p>
<p>गत 31 जनवरी को <strong>कृषि मंत्रालय</strong> की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, <strong>गैर-बासमती सुगंधित चावल श्रेणीकरण और चिह्नांकन नियम, 2024</strong> जारी किए गये हैं जो चावल की पांच किस्मों <strong>गोबिंदभोग</strong><strong>, </strong><strong>तुलाईपंजी</strong><strong>, </strong><strong>कटारिभोग</strong><strong>, </strong><strong>कालोनूनिया (काला नमक) और राधुनिपागल </strong>पर लागू होंगे। ये नियम कृषि उपज (ग्रेडिंग व मार्किंग) अधिनियम, 1937 के तहत जारी किए हैं।</p>
<p>ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष <strong>विजय सेतिया</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि गैर-बासमती सुगंधित चावल की ग्रेडिंग के नियम जारी होना अच्छी खबर है। इससे खास विशेषताओं पर गोबिंदभोग जैसे चावलों को पहचान मिलेगी। इंडस्ट्री की तरफ से गैर-सुगंधित चावलों की ग्रेडिंग के नियम जारी करने की मांग की जा रही थी।&nbsp;ग्रेडिंग के नियम ना होने से इन चावलों के व्यापार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में कई तरह की दिक्कतें आ रही थीं।&nbsp;</p>
<p>ग्रेडिंग नियमों के तहत गैर-बासमती सुगंधित चावल की <strong>न्यूनतम अपेक्षित विशेषताएं, ग्रेड</strong> और <strong>गुणवत्ता</strong> के मापदंड तय किए हैं। इससे उपभोक्ताओं को भी इनकी खूबियों का पता चलेगा और इनके व्यापार में मदद मिलेगी। साथ ही गैर-बासमती सुगंधित चावलों के नाम पर अन्य किस्मों चावलों की बिक्री पर भी रोक लग सकेगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x_65be387e9e30a.jpg" alt="" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65be35d6422ce.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गैर-बासमती सुगंधित चावल की ग्रेडिंग के नियम जारी, गोबिंदभोग और काला नमक को मिलेगी पहचान     ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ सीजन में 650 लाख टन से अधिक धान की खरीद,  पंजाब और छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक खरीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/more-than-650-lakh-tonnes-of-paddy-purchased-in-kharif-season-highest-purchase-in-punjab-and-chhattisgarh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 03 Feb 2024 13:24:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/more-than-650-lakh-tonnes-of-paddy-purchased-in-kharif-season-highest-purchase-in-punjab-and-chhattisgarh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सरकार ने खरीफ सीजन में 650 लाख टन से अधिक धान की खरीद कर ली है। सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत वितरण के लिए किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान की खरीद करती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खरीफ सीजन 2023-24 में अब तक करीब 74 लाख किसानों से धान खरीदा गया, जिन्हें 1.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान हुआ है। पिछले खरीफ सीजन (2022-23) के दौरान कुल 846 लाख टन धान की खरीद हुई थी। &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>खरीफ मार्केटिंग सीजन</strong> अक्टूबर से सितंबर तक चलता है, जिसके दौरान सरकार खरीफ और रबी दोनों सीजन में उगाए गए धान की खरीद करती है। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, 650 लाख टन धान की खरीद के मौजूदा के साथ केंद्रीय पूल में लगभग 525 लाख टन से अधिक चावल है। जबकि कल्याणकारी योजनाओं के लिए सरकार को करीब 400 लाख टन &nbsp;चावल की आवश्यकता होती है।</p>
<p><strong>खाद्य मंत्रालय</strong> के आंकड़ों के अनुसार, इस साल कुल 22 राज्यों में धान की खरीद हुई है, जिनमें सर्वाधिक 185 लाख टन धान की खरीद पंजाब से हुई जो इससे पिछले सीजन के मुकाबले करीब तीन लाख टन अधिक है। खरीफ मार्केटिंग सीजन 2023-24 के लिए सरकार ने धान की सामान्य श्रेणी का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2183 रुपये प्रति क्विंटल और ए ग्रेड के धान का एमएसपी 2203 रुपये तय किया है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>पंजाब</strong> में इस साल बाढ़ की वजह से धान की फसल बर्बाद हो गई थी। इससे उत्पादन घटने का अनुमान लगाया जा रहा था। लेकिन किसानों ने बाढ़ से बर्बाद हुई पौध की दोबारा और तिबारा तक बुवाई की।&nbsp;</p>
<p>पंजाब के बाद सर्वाधिक 144 लाख टन धान की खरीद <strong>छत्तीसगढ़</strong> में हुई है। छत्तीसगढ़ में इस साल रिकॉर्ड मात्रा में धान की खरीद हुई। किसानों की मांग को देखते हुए राज्य में धान खरीद की आखिरी तारीख चार फरवरी तक बढ़ा दी है। शनिवार और रविवार को छुट्टी के दिन भी छत्तीसगढ़ में धान की खरीद होगी।</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश</strong> में भी करीब 55 लाख टन धान की खरीद हो चुकी है। उत्तर प्रदेश में पिछले सीजन में 65.5 लाख टन धान की खरीद हुई थी। तेलंगाना में इस सीजन में 47 लाख टन, ओडिशा में 46 लाख टन और मध्य प्रदेश में 38 लाख टन धान खरीदा गया है।</p>
<p>इस साल मानसून की गड़बड़ी के कारण खरीफ सीजन में धान का उत्पादन प्रभावित होने की आशंकाएं जताई जा रही हैं। वर्ष 2023-24 में खरीफ फसलों के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, धान का उत्पादन का अनुमान 10.63 करोड़ टन रहेगा जो पिछले सीजन में 11.05 करोड़ टन के उत्पादन से 3.79 फीसदी कम है। जबकि खरीफ सीजन में धान की बुवाई का रकबा 411 लाख हेक्टेयर के पार पहुंच गया था जो पिछले सीजन से करीब 11 लाख हेक्टेयर अधिक है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65bdf11d195e5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ सीजन में 650 लाख टन से अधिक धान की खरीद,  पंजाब और छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक खरीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ट्रेडर्स को देनी होगी चावल के स्टॉक की जानकारी, निर्यात पाबंदियां हटने के आसार नहीं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/traders-will-have-to-give-information-about-rice-stock-no-plans-to-lift-restrictions-on-rice-exports-2250.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 02 Feb 2024 18:18:37 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/traders-will-have-to-give-information-about-rice-stock-no-plans-to-lift-restrictions-on-rice-exports-2250.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खाद्य वस्तुओं की महंगाई रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक और कदम उठाया है। अब सभी ट्रेडर्स, थोक व्यापारियों, रिटेलर्स, <span>रिटेल चेन और राइस मिलर्स को अपने चावल या धान के स्टॉक की जानकारी सरकार को देनी होगी। व्यापारियों से हर शुक्रवार को खाद्य मंत्रालय के <strong><a href="https://evegoils.nic.in/rice/login.html">पोर्टल</a></strong> पर चावल के स्टॉक की स्थिति अपडेट करने को कहा गया है। सरकार के इस कदम को चावल पर स्टॉक लिमिट लगाने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।</span></p>
<p>आम जनता को खाद्य महंगाई से राहत दिलाने के लिए सरकार अगले सप्ताह से खुदरा बाजार में <strong>29 रुपये</strong> प्रति किलोग्राम के रेट पर <strong>'भारत चावल'</strong> की बिक्री शुरू करने जा रही है। इसके लिए पहले चरण में सरकारी एजेंसियों नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार को 5 लाख टन चावल आवंटित किया गया है। पांच और 10 किलो के पैक में बिकने वाला भारत चावल सहकारी संस्थाओं द्वारा मोबाइल वैन और स्टोर के जरिए बेचा जाएगा। जल्द ही भारत चावल रिटेल चेन और <strong>ई-कॉमर्स</strong> प्लेटफार्म के जरिए भी उपलब्ध होगा।<br /><span></span></p>
<p>चावल की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार की ओर से कई कदम उठाए गये हैं। बाजार में चावल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार एफसीआई के जरिए 29 रुपये प्रति किलोग्राम के आरक्षित मूल्य पर थोक व्यापारियों को चावल दे रही है। योजना के तहत 31 जनवरी तक खुले बाजार में 1.66 लाख टन चावल की बिक्री हो चुकी है, <span>जो अब तक की सर्वाधिक है। केंद्रीय खाद्य सचिव<strong> संजीव चोपड़ा</strong> का कहना है कि </span>चावल निर्यात पर पाबंदियां हटाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि कीमतें कम होने तक प्रतिबंध जारी रहेंगे।</p>
<p>खरीफ सीजन में अच्छी फसल और पर्याप्त स्टॉक के बावजूद चावल की कीमतें बढ़ती जा रही हैं। सरकार ने चावल के निर्यात पर कई तरह की पाबंदिया भी लगाई हैं, <span>इसके बावजूद साल भर में चावल की खुदरा कीमतें 14.51 फीसदी से अधिक बढ़ गई हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद चावल के दाम बढ़ना सरकार के लिए परेशानी का सबब है।&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65bce176683ca.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ट्रेडर्स को देनी होगी चावल के स्टॉक की जानकारी, निर्यात पाबंदियां हटने के आसार नहीं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अंतरिम बजट को संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रो&amp;#45;कॉरपोरेट और किसान विरोधी करार दिया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/samyukta-kisan-morcha-skm-termed-the-interim-budget-as-pro-corporate-and-anti-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 01 Feb 2024 20:17:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/samyukta-kisan-morcha-skm-termed-the-interim-budget-as-pro-corporate-and-anti-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट को किसान संगठनों ने कॉरपोरेट समर्थक और किसान विरोधी करार दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा रखे गए प्रस्ताव को कृषि, रोजगार सृजन और विकास के लिए खतरनाक बताया। एसकेएम की ओर से जारी बयान के अनुसार, अंतरिम बजट के प्रस्ताव कृषि क्षेत्र को घरेलू और विदेशी कॉरपोरेट घराने को एक थाली में परोसने के अलावा और कुछ नहीं है।&nbsp;</p>
<p>अंतरिम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फसल कटाई के बाद की गतिविधियों जैसे स्टोरेज, सप्लाई चेन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग में निजी और सार्वजनिक <strong>निवेश</strong> को बढ़ावा देने की बात कही है। संयुक्त किसान मोर्चा ने इसे देश की आत्मनिर्भरता व खाद्य सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया।</p>
<p><strong>संयुक्त किसान मोर्चा</strong> की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, एकाधिकार वाले <strong>कॉरपोरेट घरानों</strong> को फसल कटाई के बाद के कार्यों को अपने हाथ में लेने की अनुमति देना तीन काले कृषि कानूनों की पिछले दरवाजे से एंट्री के समान है, जिन्हें किसानों के ऐतिहासिक संघर्ष के कारण सरकार को रद्द करना पड़ा था। एसकेएम इस प्रस्ताव का पुरजोर विरोध करेगा और सुनिश्चित करेगा कि यह प्रस्ताव लागू ना किया जाए।</p>
<p>बजट भाषण में वित्त मंत्री ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए <strong>&lsquo;फर्स्ट डेवलप इंडिया&rsquo;</strong> की नीति के तहत "विदेशी साझेदार" के साथ द्विपक्षीय निवेश संधियों को लेकर बातचीत करने की बात कही है। इस प्रस्ताव पर आपत्ति व्यक्त करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि यह एक संप्रभु देश के रूप में भारत की स्थिति को कमजोर करता है। वित्त मंत्री को यह बताना चाहिए कि ये "विदेशी साझेदार" कौन हैं।</p>
<p>एसकेएम ने सी2+50% फार्मूले के आधार पर <strong>एमएसपी</strong> के बारे में बजट घोषणा ना किए जाने को किसानों के साथ विश्वासघात करार दिया है। बजट में रोजगार, न्यूनतम वेतन और एमएसपी के आश्वासन, ऋण माफी और महंगाई कम करने के लिए पर्याप्त आवंटन ना होने पर निराशा जाहिर की।</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा ने सभी किसानों से 3 फरवरी 2024 को ग्राम स्तर पर कॉरपोरेट समर्थक बजट की प्रतियां जलाने की अपील की है और देश भर के लोगों से 16 फरवरी 2024 को ग्रामीण बंद एवं औद्योगिक/सेक्टोरल हड़ताल सफल बनाने का आह्वान किया।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65bbac1d9f8d8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अंतरिम बजट को संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रो-कॉरपोरेट और किसान विरोधी करार दिया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65bbac1d9f8d8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि मंत्रालय का बजट मामूली बढ़ा, लेकिन कई योजनाओं के बजट व सब्सिडी में कटौती]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-budget-increased-marginally-budget-of-many-schemes-and-subsidies-slashed.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 01 Feb 2024 18:37:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-budget-increased-marginally-budget-of-many-schemes-and-subsidies-slashed.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट में कृषि मंत्रालय के बजट में मामूली बढ़ोतरी की गई है। लेकिन कृषि से जुड़ी कई अहम योजनाओं के बजट और सब्सिडी में कटौती की गई है। चुनावी साल होने के बावजूद सरकार ने लुभावनी घोषणाओं के बजाय राजकोष की स्थिति को ध्यान में रखा है।</p>
<p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के लिए वर्ष 2024-25 में 1.27 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है जबकि पिछले बजट में कृषि मंत्रालय के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था। इसी तरह कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का कुल बजट 1.47 लाख करोड़ रुपये है जो 2023-24 के लिए 1.44 लाख करोड़ रुपये था।</p>
<p>अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री <strong>निर्मला सीतारमण</strong> ने कई बार अन्नदाता किसानों का जिक्र किया और उन्हें देश की तरक्की का आधार बताया। लेकिन कृषि से जुड़ी कई योजनाओं के बजट में कटौती की गई है। इनमें कई योजनाएं ऐसी हैं जिन पर किसानों को बाजार की मार से बचाने का दारोमदार था।&nbsp;किसानों को मौसम की मार से बचाने वाली <strong>प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना</strong> के बजट में कटौती हुई है। इस योजना के लिए 14,600 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है जो वर्ष 2023-24 में 15,000 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से कम है।</p>
<p><strong>पीएम-किसान</strong> के तहत किसानों को मिलने वाली सालाना 6 हजार रुपये की धनराशि में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन सरकार ने योजना के बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। गत वर्ष के समान इस बार भी पीएम किसान योजना के लिए 60000 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान है। स्पष्ट है कि पीएम किसान का दायरा बढ़ाने या इसकी धनराशि में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है।</p>
<p>किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए शुरू की गई <strong>मार्केट इंटरवेंशन स्कीम एंड प्राइस सपोर्ट स्कीम</strong> के लिए बजट आवंटित नहीं किया है। जबकि 2022-23 में इस योजना पर 4 हजार करोड़ रुपये का बजट मिला था। चालू वित्त वर्ष में भी इसके लिए 40 करोड़ रुपये का संशोधित अनुमान है। राज्यों में <strong>दालों के वितरण</strong> के लिए सरकार ने पिछले बजट में 800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। लेकिन इस बार इस योजना को भी बजट नहीं मिला है।&nbsp;</p>
<p>किसानों से जुड़ी जिन योजनाओं के बजट में कटौती की गई है उनमें कई योजनाएं प्रधानमंत्री के नाम से चलाई जा रही हैं। <strong>प्रधानमंत्री किसान मान धन योजना</strong> का बजट सरकार ने 138 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से घटाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया है। जबकि <strong>प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण योजना (पीएम आशा)</strong> <span>का बजट मौजूदा वित्त वर्ष में 2200 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से घटाकर 1737 करोड़ रुपये किया गया है। <strong>प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना</strong> के लिए 729 करोड़ का बजट है जो पिछली बार 923 करोड़ रुपये था। &nbsp;</span></p>
<p>देश में 10 हजार <strong>एफपीओ</strong> गठित करने की योजना के लिए पिछले बजट में 955 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। लेकिन अगले वित्त वर्ष के बजट में इसे घटाकर 582 करोड़ रुपये कर दिया है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाली योजना में भी बजट कटौती हुई है। <strong>प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन</strong> का बजट 459 करोड़ रुपये से घटकर 366 करोड़ रुपये रह गया है। गत वर्ष आवंटित 459 करोड़ रुपये के बजट में से भी मौजूदा वर्ष में सिर्फ 100 करोड़ रुपये खर्च हो पाएंगे।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>सब्सिडी में कटौती</strong></p>
<p>वर्ष 2024-25 के बजट में केंद्र सरकार ने सब्सिडी के बोझ को कम करने का प्रयास किया है। <strong>उर्वरक सब्सिडी</strong> के लिए 2024-25 के अंतरिम बजट में 1.64 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जो पिछले बजट में 1.75 लाख करोड़ रुपये और संशोधित अनुमान में 1.89 लाख करोड़ था। <strong>न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी</strong> मौजूदा वित्त वर्ष के संशोधित अनुमानों में 60,300 करोड़ है जबकि आगामी वित्त वर्ष के लिए इसे 45,000 करोड़ रुपये रखा गया है। <strong>यूरिया सब्सिडी</strong> के लिए 1.19 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान है जो पिछली बार 1.31 लाख करोड़ के बजट अनुमान से कम है। <strong>फूड सब्सिडी</strong> को सरकार ने 2024-25 में 2.05 लाख करोड़ रुपये तक सीमित रखा है जबकि चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमानों में फूड सब्सिडी 2.12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि मंत्रालय का बजट मामूली बढ़ा, लेकिन कई योजनाओं के बजट व सब्सिडी में कटौती ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अंतरिम बजट: तिलहन में आत्मनिर्भरता पर जोर, डेयरी किसानों की मदद करेगी सरकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/interim-budget-2024-emphasis-on-self-reliance-in-oilseeds-government-will-help-dairy-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 01 Feb 2024 12:53:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/interim-budget-2024-emphasis-on-self-reliance-in-oilseeds-government-will-help-dairy-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज वित्त वर्ष 2024-25 को अंतरिम बजट लोकसभा में पेश किया। लोकसभा चुनाव से पहले इस बजट में किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी घोषणाओं की उम्मीद की जा रही थी। वैसी बड़ी घोषणाएं तो अंतरिम बजट में नहीं की गई हैं। पीएम किसान के तहत सालाना छह हजार रुपये की धनराशि भी नहीं बढ़ाई गई है। जबकि तिलहन में आत्मनिर्भरता लाने और डेयरी किसानों की सहायता करने पर जोर दिया गया है।&nbsp;</p>
<p>वित्त मंत्री <strong>निर्मला सीतारमण</strong> ने अपने बजट भाषण में अन्नदाता को सरकार के चार प्रमुख प्राथमिकताओं में बताया। वित्त मंत्री ने कहा कि <strong>खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता</strong> हासिल करने के लिए सरकार ने आत्मनिर्भर तिलहन अभियान शुरू किया है। इसी तर्ज पर सरसों, <span>मूंगफली</span>, <span>सोयाबीन और सूरजमुखी जैसी तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नई रणनीति तैयार की जाएगी। तिलहन की उच्च उत्पादकता वाली किस्मों पर शोध</span>, <span>आधुनिक कृषि पद्धतियों को प्रसार</span>, <span>मार्केट लिंकेज और वैल्यू एडिशन पर जोर दिया जाएगा।</span>&nbsp;</p>
<p>वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में वैल्यू एडिशन और किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास तेज किए जाएंगे। फसल कटाई के बाद की गतिविधियों जैसे स्टोरेज, <span>सप्लाई चेन</span>, <span>प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के लिए सरकार प्राइवेट और पब्लिक<strong> इंवेस्टमेंट</strong> को बढ़ावा देगी।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>डेयरी किसानों</strong> की मदद के लिए भी सरकार एक व्यापक कार्यक्रम शुरू करेगी। भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है लेकिन दुधारू पशुओं की उत्पादक कम है। वित्त मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन, <span>नेशनल लाइवस्टोक मिशन जैसी मौजूदा योजनाओं की सफलता से सीख लेते हुए डेयरी किसानों के लिए एक व्यापक कार्यक्रम तैयार किया जाएगा।</span>&nbsp;</p>
<p>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नैनो यूरिया की सफलता के बाद सरकार अब <strong>नैनो डीएपी</strong> को अपनाने पर भी जोर दे रही है। सभी कृषि जलवायु क्षेत्रों में विभिन्न फसलों पर नैनो डीएपी का इस्तेमाल किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>अंतरिम बजट में वित्त मंत्री ने किसानों के लिए कोई बड़ी घोषणा तो नहीं की, लेकिन&nbsp;कृषि क्षेत्र में सरकार की<strong> उपलब्धियों</strong> का जिक्र जरूर किया। उन्होंने कहा कि पीएम-किसान सम्मान योजना के तहत 11.8 करोड़ किसानों को हर साल सीधे वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। चार करोड़ किसानों का फसल बीमा हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार (eNAM) का लाभ 1361 मंडियां और 1.8 करोड़ किसानों को मिल रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना से 38 लाख किसान लाभान्वित हुए और 10 लाख रोजगार पैदा हुए हैं।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अंतरिम बजट: तिलहन में आत्मनिर्भरता पर जोर, डेयरी किसानों की मदद करेगी सरकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ग्रामीण क्षेत्रों में 2 करोड़ आवास, 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/target-to-build-2-crore-houses-3-crore-lakhpati-didi-in-rural-areas.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 01 Feb 2024 10:57:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/target-to-build-2-crore-houses-3-crore-lakhpati-didi-in-rural-areas.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त वर्ष 2024-25 का अंतरिम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2047 तक विकसित भारत बनाने का विजन सामने रखा। उन्होंने सर्वांगीण, सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी विकास पर जोर दिया। जुलाई में पूर्ण बजट के दौरान सरकार <strong>विकसित भारत</strong> का विस्तृत रोडमैप पेश करेगी।</p>
<p>ग्रामीण क्षेत्रों में <strong>पीएम आवास योजना</strong> के तहत केंद्र सरकार तीन करोड़ मकान बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के करीब है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आवास की जरूरतों को देखते हुए अगले पांच वर्षों में दो करोड़ मकान और बनाए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में दो करोड़ नए आवास बनाने का ऐलान लोकसभा चुनावों से पहले राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। मोदी सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) और विकास योजनाओं के जरिए लाभार्थी वर्ग को साधने का प्रयास कर रही है। सरकार मध्य वर्ग के लिए भी नई आवास योजना शुरू करेगी। वित्त मंत्री</p>
<p><strong>तीन करोड़ लखपति दीदी </strong></p>
<p>स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सरकार लगभग एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनने में मदद कर चुकी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नौ करोड़ महिलाओं वाले 83 लाख स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के साथ ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को बदल रहे हैं। इस सफलता से प्रेरणा लेते हुए लखपति दीदी का लक्ष्य दो करोड़ से बढ़ाकर तीन करोड़ किया गया है।</p>
<p><strong>एक करोड़ परिवारों को रूफटॉप सोलर </strong></p>
<p>रूफटॉप सोलर के माध्यम से सरकार देश के एक करोड़ परिवार हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली दिलाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर की प्रतिष्ठा के दिन इस योजना का ऐलान किया था। बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस योजना जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुफ्त सौर बिजली प्राप्त करने और सरप्लस बिजली वितरण कंपनियों को बेचने से परिवारों को सालाना पंद्रह से अठारह हजार रुपये तक की बचत होगी।</p>
<p><strong>ग्रामीण विकास का बजट बढ़ाया</strong></p>
<p>केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास मंत्रालय का बजट पिछले साल के 1.57 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2024-25 के लिए 1.77 लाख करोड़ रुपये कर दिया, जो लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि है। हालांकि, 1.71 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान की तुलना में यह करीब तीन प्रतिशत अधिक है।</p>
<p><strong>मनरेगा</strong> योजना के लिए 86,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। पिछली बार के बजट में मनरेगा को 60,000 करोड़ रुपये का बजट मिला था जिसे संशोधित अनुमानों में बढ़ाकर 86,000 करोड़ रुपये कर दिया था।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ग्रामीण क्षेत्रों में 2 करोड़ आवास, 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छोटे किसान कमा सकेंगे कार्बन क्रेडिट, कृषि मंत्री ने जारी की रूपरेखा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/small-farmers-will-earn-carbon-credits-agriculture-minister-launched-framework-for-voluntary-carbon-market-in-agri-sector.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 30 Jan 2024 12:36:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/small-farmers-will-earn-carbon-credits-agriculture-minister-launched-framework-for-voluntary-carbon-market-in-agri-sector.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसान अब खेती के जरिए कार्बन क्रेडिट भी बना सकेंगे। कृषि क्षेत्र में स्वैच्छिक कार्बन बाजार को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने सोमवार को इसकी रूपरेखा जारी की। इसके जरिए किसानों को कार्बन क्रेडिट का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कार्बन क्रेडिट का लाभ उन किसानों को मिलेगा जो पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धति जैसे प्राकृतिक या जैविक खेती अपनाएंगे।</p>
<p>कृषि मंत्री <strong>अर्जुन मुंडा</strong> ने कहा कि छोटे एवं मझौले किसानों को कार्बन क्रेडिट का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करने की दृष्टि से देश के <strong>कृषि क्षेत्र में स्वैच्छिक कार्बन बाजार (वीसीएम)</strong> को बढ़ावा देने का फ्रेमवर्क तैयार किया है। किसानों को कार्बन बाजार से परिचित कराने से न केवल उन्हें लाभ होगा<span>, </span>बल्कि पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने में भी तेजी आएगी। कृषि मंत्री ने किसानों के हित में कार्बन बाजार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्यों के संबंधित मंत्रालयों और अन्य संबंधित संगठनों से पूर्ण सहयोग का अनुरोध किया। उन्होंने आईसीएआर से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा है।</p>
<p>कृषि मंत्री ने कहा कि देश में कृषि क्षेत्र अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आजीविका में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मंत्रालय ने सतत विकास के लिए कई कदम उठाए हैं।<span>&nbsp;</span></p>
<p><strong>कृषि वानिकी नर्सरी के एक्रेडिटेशन प्रोटोकॉल का विमोचन</strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कृषि वानिकी नर्सरी के एक्रेडिटेशन प्रोटोकॉल का विमोचन भी किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कृषि वानिकी नर्सरी के एक्रेडिटेशन प्रोटोकॉल देश में कृषि वानिकी को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर रोपण सामग्री के उत्पादन और प्रमाणीकरण के लिए संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करेंगे। उन्होंने सभी हितधारकों से कहा कि वे उसे अपनाएं ताकि गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री से सुनिश्चित रिटर्न मिल सकें तथा राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति के उद्देश्य प्राप्त किए जा सकें। साथ ही<span>, </span>प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग करने का आग्रह किया। का भी आग्रह किया।</p>
<p>इस अवसर पर कृषि सचिव मनोज अहूजा<span>, </span>कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डा. हिमांशु पाठक सहित केंद्र एवं राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे<span>, </span>वहीं अनेक हितधारक वर्चुअल भी जुड़े थे।</p>
<p><span>&nbsp;</span></p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65b89fe990d49.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ छोटे किसान कमा सकेंगे कार्बन क्रेडिट, कृषि मंत्री ने जारी की रूपरेखा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गैर&amp;#45;यूरिया उर्वरकों पर मूल्य नियंत्रण, सरकार ने तय किए फर्टिलाइजर कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indirect-price-control-on-non-urea-fertilizers-government-fixed-profit-margin-of-fertilizer-companies.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 30 Jan 2024 05:56:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indirect-price-control-on-non-urea-fertilizers-government-fixed-profit-margin-of-fertilizer-companies.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी स्कीम (एनबीएस) के तहत आने वाले विनियंत्रित उर्वरकों जैसे डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी), म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) के लिए फर्टिलाइजर कंपनियों के उचित मुनाफे (रीजनेबल प्रॉफिट) की सीमा तय कर दी है। इस कदम को विनियंत्रित उर्वरकों को यूरिया की तरह कीमतों की नियंत्रित व्यवस्था के तहत लाने के रूप में देखा जा रहा है।&nbsp;</p>
<p>सरकार नाइट्रोजन (एन), फॉस्फोरस (पी), पोटाश (के) और सल्फर (एस) पर प्रतिकिलो की दर से एनबीएस के तहत सब्सिडी देती है। तकनीकी रूप से इन उर्वरकों की कीमतें तय करने का अधिकार उर्वरक कंपनियों को है। लेकिन जिस तरह सरकार ने उर्वरकों की बिक्री पर <strong>रीजनेबल प्रॉफिट</strong> के प्रावधान लागू करने का फैसला किया है, उसे इन उर्वरकों की कीमतों को परोक्ष रूप से नियंत्रण के दायरे में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।</p>
<p>इस संबंध में उर्वरक विभाग द्वारा 18 जनवरी, 2024 को एक ऑफिस मेमोरेंडम के जरिये विस्तृत गाइडलाइंस जारी की गई हैं। गाइडलाइंस के मुताबिक, <strong>फर्टिलाइजर</strong> <strong>आयातकों </strong>को अधिकतम आठ फीसदी<strong>, मैन्यूफैक्चरर्स </strong>को 10 फीसदी और <strong>इंटीग्रेटेड मैन्यूफैक्चरर्स </strong>को 12 फीसदी मुनाफे की सीमा तय की गई है। गैर-यूरिया उर्वरकों का उत्पादन करने वाली फर्टिलाइजर कंपनियों को इस मुनाफा सीमा के आधार पर ही उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तय करने होंगे।</p>
<p>गाइडलाइंस में कहा गया है कि कंपनियों द्वारा कमाए गये <strong>अनुचित मुनाफे</strong> (अनरीजनेबल प्रॉफिट) को अगले वर्ष में 10 अक्तूबर तक उर्वरक विभाग को लौटाना होगा। निर्धारित समय-सीमा तक अनुचित मुनाफा नहीं लौटाने की स्थिति में 12 फीसदी की दर से ब्याज देना पड़ेगा। यह ब्याज अगले वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से लागू होगा। मसलन वित्त वर्ष 2023-24 के लिए ब्याज की वसूली 1 अप्रैल, 2024 से लागू होगी।</p>
<p>फर्टिलाइजर कंपनियों के अनुचित मुनाफे को सरकार द्वारा दी जाने वाली <strong>सब्सिडी</strong> के साथ भी एडजस्ट किया जा सकेगा। इसके साथ ही कंपनियों को डीएपी और एमओपी के अधिकतम खुदरा मूल्य पर दो फीसदी <strong>डीलर मार्जिन</strong> कटौती दी जाएगी। जबकि एनबीएस के तहत आने वाले बाकी उर्वरकों के लिए चार फीसदी डीलर मार्जिन की अनुमति होगी।</p>
<p><strong>गाइडलाइंस</strong> में कहा गया है कि कंपनियां अपने मुनाफे का आकलन कॉस्ट ऑडिटर रिपोर्ट और कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर द्वारा मंजूर कॉस्ट डाटा के आधार पर कर सकती हैं। कंपनी की रिपोर्ट और डाटा अगले वित्त वर्ष में 10 अक्तूबर तक उर्वरक विभाग को देने होंगे। इसके बाद उर्वरक विभाग एमआरपी के तर्कसंगत स्तर की समीक्षा करेगा और 28 फरवरी तक पिछले वित्त वर्ष के लिए अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देगा। इसके आधार पर तय होगा कि अनुचित मुनाफा कमाया गया है या नहीं। अगर कमाया गया है तो वह कपंनी से रिकवर किया जाएगा। इस आधार पर 2023-24 वित्त वर्ष के लिए रिपोर्ट 28 फरवरी, 2025 तक पूरी होगी।</p>
<p><strong>उर्वरक उद्योग</strong> के सूत्रों के मुताबिक, सरकार विनियंत्रित उर्वरकों को परोक्ष रूप से नियंत्रण के दायरे में लाने का प्रयास कर रही है। पहले ही अनौपचारिक निर्देश के तहत डीएपी के लिए 27 हजार रुपये प्रति टन, एमओपी के लिए 33100 रुपये प्रति टन, 12:32:16 व 10:26:26 एनपीके के लिए 29400 रुपये प्रति टन का एमआरपी तय है। जबकि आधिकारिक रूप से विनियंत्रित उर्वरकों के दाम तय करने का अधिकार उर्वरक कंपनियों के पास है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_649d4a0808ec1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गैर-यूरिया उर्वरकों पर मूल्य नियंत्रण, सरकार ने तय किए फर्टिलाइजर कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_649d4a0808ec1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अंतरिम बजट में किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी घोषणाओं का इंतजार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/awaiting-big-announcements-for-farmers-and-agriculture-sector-in-the-interim-budget.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 29 Jan 2024 17:10:42 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/awaiting-big-announcements-for-farmers-and-agriculture-sector-in-the-interim-budget.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आगामी एक फरवरी को पेश होने वाले वित्त वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट में किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी घोषणाओं की उम्मीद की जा रही है। लोकसभा चुनाव से पहले बजट के जरिए केंद्र सरकार किसानों और ग्रामीण मतदाताओं को साधने का प्रयास कर सकती है। 2019 के अंतरिम बजट में मोदी सरकार ने किसानों को सालाना 6 हजार रुपये के नकद भुगतान की <strong>पीएम किसान सम्मान निधि</strong> (पीएम-किसान) योजना का ऐलान किया था। तब यह योजना गेमचेंजर साबित हुई थी। माना जा रहा है कि इस बार भी सरकार किसानों के लिए कोई बड़ी घोषणा कर सकती है। पीएम किसान की धनराशि को 6 हजार रुपये से बढ़ाकर 9 हजार रुपये किए जाने की अटकलें काफी दिनों से लगाई जा रही हैं।</p>
<p>अंतरिम बजट में कृषि ऋण के लक्ष्य को सरकार 20 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 22 लाख करोड़ रुपये या इससे अधिक कर सकती है। इससे किसानों को कृषि कार्यों के लिए पहले से अधिक ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा। अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए कृषि और ग्रामीण क्षेत्र पर ध्यान देने की जरूरत है। इसके लिए बजट में खास प्रावधान होने चाहिए।&nbsp;</p>
<p>खेती में ड्रोन, एआई जैसी आधुनिक तकनीक, इनोवेशन और स्टार्टअप को बढ़ावा देने पर मोदी सरकार काफी जोर देती रही है। बजट में इन्हें प्रोत्साहन देने के लिए कुछ बड़ी घोषणाओं की उम्मीद की जा सकती है। इसके अलावा वित्त मंत्री का जोर बजट भाषण के जरिए कृषि क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों को सामने रखने पर भी रहेगा। खासकर पीएम किसान के जरिए प्रत्यक्ष नकद भुगतान, एमएसपी पर हुई खरीद और फर्टिलाइजर सब्सिडी पर खर्च हुई धनराशि का जिक्र जोर शोर से किया जा सकता है।&nbsp;</p>
<p>पिछले दिनों नेफेड के द्वारा किसानों से दलहन की खरीद के लिए ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत हुई थी। दलहन के मामले में आयात पर निर्भरता कम करना जरूरी है। सरकार दलहन उगाने वाले किसानों को प्रोत्साहन के लिए कोई बड़ी घोषणा बजट में होनी चाहिए। साथ ही प्राकृतिक खेती और डिजिटल एग्रीकल्चर भी नजर रहेगी। मोटे अनाजों और तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसी बड़ी घोषणा का इंतजार रहेगा।</p>
<p>अलग सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने पर सरकार का ध्यान गया है। अंतरिम बजट में सहकारिता मंत्रालय के बजट में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा सकती है। कृषि बजट को खर्च ना कर पाने को लेकर पिछले दिनों सरकार की काफी आलोचना हुई है। इस बार कृषि बजट के आवंटन में बढ़ोतरी के साथ-साथ गत बजट क्रियान्वयन के आंकड़ों पर भी नजर रहेगी।</p>
<p>एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की सफलता के लिए सरकार मक्का से एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दे सकती है। इस बारे में सरकार की तरफ से किसी बड़ी घोषणा की उम्मीद की जा रही है। पराली की समस्या के समाधान और बायोफ्यूल को बढ़ावा देने के लिए उद्योग जगत विशेष रियायतों की उम्मीद कर रहा है। कृषि क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास पर पिछले कई बजट में सरकार का जोर रहा है। देखना है इस बार सरकार इस दिशा में क्या कदम उठाती है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अंतरिम बजट में किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी घोषणाओं का इंतजार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा किसान मोर्चा करेगा गांव परिक्रमा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/bjp-kisan-morcha-will-do-village-parikrama-before-lok-sabha-elections-2240.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 29 Jan 2024 16:25:34 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/bjp-kisan-morcha-will-do-village-parikrama-before-lok-sabha-elections-2240.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने तैयारियां तेज कर दी हैं। किसानों और ग्रामीण मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद करने के लिए भाजपा किसान मोर्चा ने भी कमर कस ली है। जहां भाजपा चार फरवरी से गांव चलो अभियान शुरू करने जा रही है,<span> वहीं उत्तर प्रदेश में भाजपा किसान मोर्चा गांव परिक्रमा यात्रा निकालने की तैयारियों में जुटा है।</span>&nbsp;</p>
<p>रविवार को लखनऊ में आयोजित भाजपा किसान मोर्चा की दो दिवसीय "प्रादेशिक कार्यशाला" में किसान और ग्रामीण मतदाताओं को साधने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। किसान मोर्चा द्वारा पूरे प्रदेश में लगभग 50 हजार गांवों तक पहुंचने की योजना बनाई गई है। इस दौरान गांवों में घर-घर पहुंचकर किसानों के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और उपलब्धियों का प्रचार किया जाएगा। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, आगामी 10 <span>फरवरी से भाजपा किसान मोर्चा के नेता और कार्यकर्ता गांवों का रुख करेंगे। इससे पहले भाजपा किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। गांव परिक्रम यात्रा के दौरान गांव की चौपाल पर जाकर किसानों से संवाद किया जाएगा। साथ ही किसान मोर्चा के नेता गांवों में रात्रि प्रवास भी करेंगे। गांव चौपाल के दौरान किसानों की समस्याओं को सुनेंगे।</span></p>
<p><span>लखनऊ में हुई भाजपा किसान मोर्चा की प्रादेशिक कार्यशाला में जिलाध्यक्षों</span>, <span>जिला प्रभारियों और जिला संयोजकों को इस अभियान को सफल बनाने का रोडमैप दिया गया है। लोकसभा चुनाव से पहले लगभग 50 हजार गांवों तक पहुंचने की योजना है। </span>फरवरी में ही हरियाणा में किसान मोर्चा का सम्मेलन होगा। इसमें देश भर से 25 <span>हजार कार्यकर्ता इकट्ठा होंगे। यूपी से इनमें </span>5000 <span>किसान मोर्चा कार्यकर्ता पहुंचेंगे।</span>&nbsp;</p>
<p>भाजपा कार्यकर्ता प्रत्येक गांव में घर-घर दस्तक देकर मोदी सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को पहुंचाएंगे। अभियान के लिए 30 जनवरी को जिला स्तर और 1-2 फरवरी को मंडल स्तर पर कार्यशाला आयोजित की जाएगी। भाजपा गांव चलो अभियान के लिए प्रत्येक गांव में एक प्रवासी और एक संयोजक तैनात करेगी। प्रवासी दूसरे गांव या शहरी क्षेत्र से होंगे जबकि संयोजक उसी गांव से होंगे। प्रवासी को हर 15 दिन के अंतराल पर उस गांव में 24 घंटे का प्रवास करना है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा किसान मोर्चा करेगा गांव परिक्रमा ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पद्मश्री किसान: नारियल अम्मा से ग्रीन वॉरियर तक, जानिए किन किसानों को मिला सम्मान ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/padmashri-kisan-from-coconut-amma-to-green-warrior-know-farmers-got-the-honor.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 27 Jan 2024 14:39:29 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/padmashri-kisan-from-coconut-amma-to-green-warrior-know-farmers-got-the-honor.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>समाज में विशिष्ट योगदान के लिए इस साल 132 लोगों को पद्म पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। इनमें 5 पद्म विभूषण, 17 पद्म भूषण और 110 पद्म श्री पुरस्कार दिए जाएंगे। राष्ट्रपति के द्वारा प्रदान किए जाने वाले इन पुरस्कारों से कई गुमनाम हस्तियों को भी सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने अपने अपने क्षेत्रों में विशेष योगदान दिया है। इनमें खेत-किसानी में पहचान बनाने वाले कई किसान भी शामिल हैं। ऐसे किसान जिन्होंने तमाम मुश्किलों से पार पाकर कृषि के क्षेत्र में कामयाबी की इबारत लिख दी। आइए जानते हैं कौन से हैं ये पद्मश्री किसान</p>
<p><strong>नारियल अम्मा चेलाम्मल</strong></p>
<p>दक्षिण अंडमान में रहने वाली के. चेलाम्मल को नारियल अम्मा के नाम से जाना जाता है। 69 वर्षीय नारियल अम्मा जैविक खेती करती हैं। उन्होंने अपनी 10 एकड़ जमीन में इंटरक्रॉपिंग विधि से अनानास, केले, लौंग और अदरक की खेती की 150 से ज्यादा किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।&nbsp;</p>
<p>नारियल अम्मा प्रति वर्ष 27,000 से अधिक नारियल का उत्पादन करती हैं। उनके दो हेक्टेयर जमीन में नारियल के बागान हैं। इनमें अंडमान की खास लंबी किस्म के 460 पाम के पेड़ हैं। उन्होंने सिर्फ कक्षा छह तक पढ़ाई की, लेकिन पिछले पांच दशकों से लीक से हटकर खेती कर रही हैं। उन्होंने नारियल और ताड़ के पेड़ों को होने वाले नुकसान से बचाने के प्रभावी और सस्ते उपाय खोजे हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>सत्यनारायण बेलेरी</strong></p>
<p>केरल के कासरगोड में रहने वाले किसान सत्यनारायण बेलेरी पारंपरिक धान की किस्मों के संरक्षण पर काम करते हैं। उनके द्वारा विकसित राजकयमा धान को कम पानी की आवश्यकता पड़ती है और अब कई राज्यों में यह धान उगाया जाता है। पिछले 15 वर्षों की कड़ी मेहनत से उन्होंने बीजों के संरक्षण की पॉलीबैग विधि विकसित की है। वह धान की 650 से अधिक पारंपरिक किस्मों का संरक्षण कर रहे हैं।</p>
<p>सत्यनारायण बेलेरी केरल के सुदूर नेट्टानिगे गांव में धान की खेती करते हैं। उन्हें इलाके के लोग सीडिंग सत्य के नाम से भी जानते हैं। वे धान की पारंपरिक किस्मों को संरक्षित करने के लिए बीज बैंक तैयार कर रहे हैं। उन्होंने अनुसंधान केंद्रों को चावल की 50 किस्में उपलब्ध कराकर और किसानों को मुफ्त चावल के बीज वितरित कर धान अनुसंधान और संरक्षण को बढ़ावा दिया। &nbsp;</p>
<p><strong>सरबेश्वर बसुमतारी</strong></p>
<p>असम के 61 वर्षीय किसान सरबेश्वर बसुमतारी को पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है। वह मिक्स्ड इंटिग्रेटेड फार्मिंग से नारियल, संतरे जैसे फसलों की खेती करते हैं। बासुमतारी एक दिहाड़ी मजदूर से किसान बने और उन्नत खेती की मिसाल बन गए। उन्होंने अपने अनुभव को अन्य किसानों तक पहुंचाया, जिससे अन्य लोगों की दक्षता तो बढ़ी ही साथ ही उन्हें अपनी आजीविका बढ़ाने में भी मदद मिली।</p>
<p>बसुमतारी एक आदिवासी किसान हैं जिन्होंने जो मिश्रित एकीकृत कृषि को अपनाया। उन्होंने नारियल के साथ संतरे, धान, लीची और मक्का की खेती की। औपचारिक शिक्षा से वंचित रहे बसुमतारी कभी दिहाड़ी मजदूर थे। लेकिन अपनी लगन और मेहनत के बूते खेती में सफलता की मिसाल बन गए।&nbsp;</p>
<p><strong>संजय अनंत पाटिल</strong></p>
<p>गोवा के किसान संजय अनंत पाटिल एक ग्रीन वॉरियर हैं, जिन्हें लोग &lsquo;वन-मैन आर्मी&rsquo; कहते हैं। उन्होंने 10 एकड़ की बंजर भूमि को हरे-भरे प्राकृतिक खेत में बदल दिया है। 58 वर्षीय नवोन्वेषी किसान संजय अनंत पाटिल को कृषि में उनकी विशिष्ट सेवा के लिए भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री के प्राप्तकर्ता के रूप में घोषित किया गया है।</p>
<p><strong>डॉ. राम चेत चौधरी</strong></p>
<p>यूपी के काला नमक धान को नवजीवन देने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉ. राम चेत चौधरी को भारत सरकार ने पद्मश्री देने की घोषणा की है। डॉ. चौधरी लंबे समय से 'काला नमक' चावल के संरक्षण और संवर्धन के काम में जुटे हुए हैं। उनकी मेहनत और प्रयासों के चलते काला नमक चावल आज दुनिया भर में पहुंच रहा है।&nbsp;</p>
<p>काला नमक चावल को नकदी फसल के रूप पहचान दिलाने में कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामचेत चौधरी ने अहम भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से आज पूर्वांचल के 11 जिलों में 80 हजार हेक्टेयर में नमक धान की खेती हो रही है। उन्होंने पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में 10 साल और डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय विश्वविद्यालय पूसा, बिहार में 5 साल सेवाएं देने के अलावा संयुक्त राष्ट्र के साथ 40 से ज्यादा देशों में कृषि क्षेत्र में सेवाएं दीं। वे सेवानिवृत्ति के बाद गोरखपुर लौटे और कालानमक धान के संरक्षण संवर्धन में जुट गए।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पद्मश्री किसान: नारियल अम्मा से ग्रीन वॉरियर तक, जानिए किन किसानों को मिला सम्मान  ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विरोध&amp;#45;प्रदर्शन के लिए कमर कस रहे किसान संगठन, फिर भरेंगे हुंकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmer-organizations-are-gearing-up-for-protest-and-delhi-march-again.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 24 Jan 2024 18:34:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmer-organizations-are-gearing-up-for-protest-and-delhi-march-again.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अपनी विभिन्न मांगों को लेकर किसान संगठन अगले तीन सप्ताह के दौरान विरोध-प्रदर्शन करने जा रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर देश भर में जिला या तहसील स्तर पर ट्रैक्टर परेड निकालने का ऐलान किया है। इसके बाद कई किसान जत्थेबंदियां 13 फरवरी को दिल्ली कूच की तैयारी में जुटी हैं जबकि 16 फरवरी को संयुक्त किसान मोर्चा ने ट्रेड यूनियनों के साथ हड़ताल और ग्रामीण भारत बंद का आह्वान किया है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>हरियाणा और पंजाब समेत कई राज्यों के किसान संगठनों ने 13 फरवरी के दिल्ली कूच को समर्थन देने का ऐलान किया है। एमएसपी की कानूनी गारंटी और किसानों के साथ वादाखिलाफी के सहित कई मुद्दों को लेकर किसान एक बार फिर दिल्ली कूच करेंगे। इसकी तैयारी के लिए 3 फरवरी को हरियाणा के नारनौंद में किसान रैली आयोजित की जा रही है। 13 फरवरी के दिल्ली कूच के लिए गांव-गांव जाकर किसानों का आह्वान किया जा रहा है।&nbsp;</p>
<p>दूसरी तरफ संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की ओर से 16 फरवरी को औद्योगिक हड़ताल और ग्रामीण बंद का आह्वान किया गया है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता <strong>राकेश टिकैत</strong> ने कहा कि "हमने 16 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) सहित कई किसान समूह इसका हिस्सा हैं। किसान उस दिन अपने खेतों में नहीं जाएंगे और कृषि हड़ताल करेंगे। इससे देश में एक बड़ा संदेश जाएगा।" उन्होंने कहा, "हम व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों से भी समर्थन की अपील कर रहे हैं। लोगों को भी उस दिन कोई खरीदारी नहीं करनी चाहिए। हम दुकानदारों से किसानों और मजदूरों के समर्थन में अपनी दुकानें बंद रखने की अपील करते हैं।"&nbsp;</p>
<p>राकेश टिकैत ने कहा कि यह अकेले किसानों की हड़ताल नहीं होगी, अन्य संगठन भी इसमें हिस्सा लेने वाले हैं। एमएसपी गारंटी पर कानून, बेरोजगारी, अग्निवीर योजना, सेवा से सेवानिवृत्त होने वाले लोगों के लिए पेंशन योजना भी देश में एक बड़ा मुद्दा है।</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने सभी समान विचारधारा वाले संगठनों से केंद्र सरकार की मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ 16 फरवरी 2024 को हड़ताल और ग्रामीण बंद का समर्थन करने की अपील की है। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 26 जनवरी, 2024 को जिला मुख्यालयों पर ट्रैक्टर/वाहन परेड के एसकेएम के आह्वान का समर्थन किया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ विरोध-प्रदर्शन के लिए कमर कस रहे किसान संगठन, फिर भरेंगे हुंकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एक लाख करोड़ का कृषि बजट वापस, एक लाख किसानों की आत्महत्या, एसकेएम ने सरकार को घेरा  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/skm-cornered-the-government-on-returning-agriculture-budget-of-rs-1-lakh-crore-and-suicide-of-one-lakh-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 24 Jan 2024 12:32:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/skm-cornered-the-government-on-returning-agriculture-budget-of-rs-1-lakh-crore-and-suicide-of-one-lakh-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने किसानों की आत्महत्या और कृषि मंत्रालय का बजट खर्च ना कर पाने को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है। एसकेएम ने मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि मोदी सरकार के शासनकाल (2014-2022) में एक लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्या की। दूसरी तरफ, केंद्र सरकार ने पिछले पांच वर्षों में कृषि मंत्रालय को आवंटित 1,05,544 करोड़ रुपये बिना खर्चे वापस लौटा दिए। अगर सरकार इस पैसे का इस्तेमाल करती तो कई किसानो की जान बचाई जा सकती थी।</p>
<p>एसकेएम ने कहा कि कृषि मंत्रालय की "वर्ष 2022-23 के लिए खाते पर एक नजर" शीर्षक वाली रिपोर्ट से पता चला है कि केंद्र सरकार ने 2018-19 से पिछले पांच वर्षों के दौरान 1,05,544 करोड़ रुपये, जो कृषि मंत्रालय को आवंटित किए थे, खर्च किए बिना ही वापस लौटा दिए। उक्त रिपोर्ट के अनुसार, 2018-19 में कृषि मंत्रालय के लिए कुल आवंटन 54,000 करोड़ रुपये था। उस साल 21,043.75 करोड़ रुपये बिना खर्चे वापस लौटाए गये थे। इसके बाद के वर्षों 2019-20 में 34,517.7 करोड़ रुपये, 2020-21 में 23,824.53 करोड़ रुपये, 2021-22 में 5,152.6 करोड़ रुपये और 2022-23 में 21,005.13 करोड़ रुपये वापस लौटाए गये।&nbsp;</p>
<p>कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण पर स्थायी समिति ने यह भी बताया है कि आवंटित धन का इस तरह लौटना उत्तर पूर्वी राज्यों, अनुसूचित जाति उपयोजना और अनुसूचित जनजाति उपयोजना पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने किसानों को कर्ज से मुक्ति दिलाने का वादा किया था। मोदी सरकार ने पिछले दस साल में बड़े कॉरपोरेट घरानों का 14.56 लाख करोड़ रुपये बकाया माफ कर दिया है। लेकिन किसानों का एक भी रुपये का कर्ज माफ नहीं किया। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2014 से 2022 के बीच 1,00,474 किसानों ने आत्महत्या की। अगर सरकार कृषि मंत्रालय के वापस लौटाए गए पैसे का इस्तेमाल करती तो कई किसानो की जान बचाई जा सकती थी।&nbsp;</p>
<p>किसान पहले से ही लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने, कृषि बुनियादी ढांचे के विकास, सिंचाई के विस्तार और अनुसंधान के लिए आवंटन में वृद्धि की भी मांग कर रहे हैं। लेकिन किसानों <span>के लिए जो बजट आवंट&zwj;ित हो रहा है वो भी खर्च नहीं क&zwj;िया जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा ने इसे देश के किसानों के साथ विश्वासघात करार दिया है।</span></p>
<p>एसकेएम ने संकटग्रस्त किसानों के प्रति भाजपा सरकार की असंवेदनशीलता और इसके पीछे की कृषि को कॉरपोरेट्स को सौंपने की मंशा का आरोप लगाया। मोर्चा ने केंद्र सरकार की किसान-विरोधी नीतियों का कड़ा विरोध करते हुए किसानों व आम लोगों से कृषि और देश को बचाने का आह्वान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा देश के विभिन्न किसान संगठनों का साझा मंच है जिसने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का नेतृत्व किया था।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एक लाख करोड़ का कृषि बजट वापस, एक लाख किसानों की आत्महत्या, एसकेएम ने सरकार को घेरा   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मराठवाड़ा में 2023 में 1,088 किसानों ने आत्महत्या की, कृषि मंत्री के जिले में सबसे ज्यादा किसान आत्महत्या]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/1088-farmers-suicide-in-marathwada-in-2023-highest-number-of-farmer-suicides-in-agriculture-minister-district.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 23 Jan 2024 16:36:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/1088-farmers-suicide-in-marathwada-in-2023-highest-number-of-farmer-suicides-in-agriculture-minister-district.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के प्रमुख कृषि उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में किसानों के बारे में चिंताजनक रिपोर्ट आई है। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के आठ जिलों में वर्ष 2023 में कम से कम 1,088 किसानों ने आत्महत्या की। संभागीय आयुक्त कार्यालय की एक रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है। मराठवाड़ा में किसानों की आत्महत्या के मामले 2022 की तुलना में 65 अधिक हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, <span>मराठवाड़ा में साल 2023 में किसानों की आत्महत्या के मामले सबसे ज्यादा 269 मामले बीड जिले में सामने आए जो महाराष्ट्र के कृषि मंत्री <strong>धनंजय मुंडे</strong> का गृह जनपद है। मुंडे इस जिले के प्रभारी मंत्री हैं। छत्रपति संभाजीनगर में 182</span>, <span>नांदेड़ में 175</span>, <span>धाराशिव में 171 और परभणी में 103 किसान आत्महत्या दर्ज हुईं। जालना</span>, <span>लातूर और हिंगोली में क्रमशः 74</span>, <span>72 और 42 ऐसी मौतें हुईं। मराठवाड़ा में 2022 में 1,023 किसानों की आत्महत्या की सूचना मिली थी। </span></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, <span>प्रशासन ने किसान खुदकुशी के प्रत्येक मामले की जांच की और पात्र मामलों में परिजनों को </span>1<span> लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी गई। कुल</span> 1,088 <span>मामलों में से </span>777 <span>अनुग्रह राशि के लिए पात्र थे</span>, <span>जिन्हें अनुग्रह राशि वितरित कर दी गई है। </span>151 <span>मामलों की वर्तमान में जांच चल रही है।&nbsp;</span>महाराष्ट्र में इस साल मौसम के बिगड़े मिजाज के चलते किसानों को फसलों का नुकसान उठाना पड़ा है। इसके अलावा निर्यात पाबंदियों के चलते भी प्याज सरीखी उपज के उत्पादकों को नुकसान पहुंचा है। किसानों की आत्महत्या का मुद्दा महाराष्ट्र में राजनीतिक तौर पर गरमा रहा है। विपक्ष किसानों के मुद्दों को लेकर एकनाथ शिंदे सरकार को घेरने में जुटा है।</p>
<p>स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के अध्यक्ष और पूर्व सांसद <strong>राजू शेट्टी</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि मराठवाड़ा में किसानों की आत्महत्या के बढ़ते मामले मौसम की मार और सरकार की किसान विरोधी नीतियों का परिणाम हैं। साल 2020 में इस क्षेत्र में 770 किसानों ने आत्महत्या की थी। तीन साल में यह आंकड़ा बढ़कर 1088 तक पहुंच गया है। इस क्षेत्र में कपास और सोयाबीन की फसल पर मौसम की मार के अलावा सरकार की नीतियों की मार भी पड़ी है। जब सोयाबीन को बारिश की जरूरत थी तब बारिश नहीं हुई और कटाई के वक्त बारिश से फसल को काफी नुकसान पहुंचा। सरकार ने पाम ऑयल पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाकर खाद्य तेलों के आयात को बढ़ावा दिया, जिससे सोयाबीन के दाम गिरकर आधे से भी कम रह गये। इसी तरह कपास की फसल भी अक्टूबर की बारिश में बर्बाद हुई। कपास के इंपोर्ट से भी भाव गिरे। शेट्टी मानते हैं कि इन कारणों में मराठवाड़ा में किसानों की खुदकुशी के मामले बढ़े हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मराठवाड़ा में 2023 में 1,088 किसानों ने आत्महत्या की, कृषि मंत्री के जिले में सबसे ज्यादा किसान आत्महत्या ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम सूर्योदय योजना: एक करोड़ घरों पर लगेगा रूफटॉप सोलर, अयोध्या से लौटते ही पीएम मोदी का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-suryodaya-yojana-rooftop-solar-systems-will-be-installed-on-one-crore-houses-pm-modi-announcement-as-soon-as-he-returns-from-ayodhya.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 23 Jan 2024 12:32:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-suryodaya-yojana-rooftop-solar-systems-will-be-installed-on-one-crore-houses-pm-modi-announcement-as-soon-as-he-returns-from-ayodhya.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद देश को एक महत्वपूर्ण सोलर योजना का उपहार दिया है। <strong>प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना</strong> के तहत देश के एक करोड़ घरों की छत पर सोलर सिस्टम लगाया जाएगा। अयोध्या से लौटते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर इस योजना का ऐलान किया।&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी की सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, &ldquo;<span>आज अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा के शुभ अवसर पर मेरा ये संकल्प और प्रशस्त हुआ कि भारतवासियों के घर की छत पर उनका अपना सोलर रूफटॉप सिस्टम हो। अयोध्या से लौटने के बाद मैंने पहला निर्णय लिया है कि हमारी सरकार एक करोड़ घरों पर रूफटॉप सोलर लगाने के लक्ष्य के साथ </span>&lsquo;<span>प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना</span>&rsquo;<span> प्रारंभ करेगी। इससे गरीब और मध्यम वर्ग का बिजली बिल तो कम होगा ही, साथ ही भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनेगा।</span>&rdquo;</p>
<p><span>अपनी अयोध्या यात्रा के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने </span><span>लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर </span><span>"प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना" शुरू करने के लिए </span><span></span>पीएमओ और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। <span>प्रधानमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा का उपयोग प्रत्येक घर द्वारा बिजली के बिल को कम करने और बिजली की जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनाने के लिए किया जा सकता है।&nbsp;</span></p>
<p><span>प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना का लक्ष्य <strong>निम्न और मध्यम आय वाले व्यक्तियों</strong> को रूफटॉप सोलर की स्थापना के माध्यम से बिजली उपलब्ध करना है। साथ ही उन्हें अतिरिक्त बिजली उत्पादन से अतिरिक्त आय का अवसर भी मिलेगा। </span><span>प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लोगों को रूफटॉप सोलर अपनाने को लेकर प्रेरित करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया जाना चाहिए।&nbsp;</span>&nbsp;</p>
<p>सरकार ग्रीन एनर्जी के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए <strong>विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा</strong> पर जोर दे रही है। सरकार ने इस साल के अंत तक सौर ऊर्जा से 100 गीगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य भी रखा है, जिसमें से 40 मेगावाट बिजली का उत्पादन छतों पर सोलर पैनल लगाकर करने की योजना है।&nbsp;</p>
<p>08 सोलर रूफटॉप सिस्टम से परिवारों को बिजली के बिल की बचत होगी और सौर ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। पीएम सूर्योदय योजना को मोदी सरकार द्वारा मुफ्त बिजली के विकल्प के तौर पर भी देखा जा सकता है।</p>
<p><strong>पहले से चल रही है नेशनल रूफटॉप स्कीम&nbsp;</strong></p>
<p class="">फिलहाल केंद्र सरकार घरों पर सोलर रूफटॉप से जुड़ी एक योजना 'नेशनल रूफटॉप स्कीम' चला रही है। इसके तहत घर की छत पर 3 किलोवाट तक के सोलर पैनल लगवाने पर सरकार 40 फीसदी सब्सिडी देती है। यह योजना नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से चलाई जा रही है। <span>रूफटॉप सोलर स्कीम के दोनों चरण से अभी करीब 10 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। रूफटॉप स्कीम के दूसरे चरण को 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया गया है।&nbsp;</span><span></span></p>
<p class=""><strong>क्या है रूफटॉप सोलर&nbsp;</strong></p>
<p>रूफटॉप सोलर में किसी प्रतिष्ठान या घर की छत पर सोलर फोटोवोल्टिक पैनल स्थापित किया जाता है। इससे ग्रिड-कनेक्टेड बिजली की खपत कम करने में मदद मिलती है। रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाने का शुरुआत में खर्च आता है जो फोटोवोल्टिक पैनल और बैटरी की क्षमता पर निर्भर करता है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर</strong> (सीईईडब्ल्यू) के सीनियर प्रोग्राम लीड,<strong> नीरज कुलदीप</strong> का कहना है,&nbsp; "भारत में रूफटॉप सोलर स्थापित करने के लिए ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। सीईईडब्ल्यू के एक हालिया अध्ययन के अनुसार, तकनीकी रूप से भारतीय घरों में 640 गीगावॉट से ज्यादा रूफटॉप सोलर स्थापित किया जा सकता है। वर्तमान में लगभग 7-8 लाख घरों में रूफटॉप सोलर स्थापित है और उन्हें सरकारी पूंजी सब्सिडी कार्यक्रम का लाभ मिला है। इससे लगभग 4 गीगावॉट सोलर क्षमता प्राप्त हुई है। 1 करोड़ घरों को सौर ऊर्जा से रोशन करने की नई घोषणा से रूफटॉप सोलर क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा। रूफटॉप सोलर वाले घरों में 12-14 गुना बढ़ोतरी से 20-25 गीगावॉट अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी।"&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम सूर्योदय योजना: एक करोड़ घरों पर लगेगा रूफटॉप सोलर, अयोध्या से लौटते ही पीएम मोदी का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला विराजमान, प्राण&amp;#45;प्रतिष्ठा संपन्न  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/ayodhya-ram-lalla-consecrated-at-shri-ram-janmabhoomi-temple-pran-pratishtha-completed.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 22 Jan 2024 14:30:39 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/ayodhya-ram-lalla-consecrated-at-shri-ram-janmabhoomi-temple-pran-pratishtha-completed.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अयोध्या के नवनिर्मित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला विराजमान हो गये हैं। आज बड़ी धूमधाम और विधि-विधान के साथ <span>शुभ मूहुर्त में </span>रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना की और प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान में भाग लिया। उनके साथ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल तथा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी गर्भगृह में मौजूद रहे। <span class="Y2IQFc" lang="hi">इस कार्यक्रम का करोड़ों लोगों ने लाइव टेलीकास्ट देखा। जबकि </span><span class="Y2IQFc" lang="hi">प्रमुख विपक्षी नेता अयोध्या में आयोजित समारोह में शामिल नहीं हुए।&nbsp;</span></p>
<p>इस अवसर पर अयोध्या नगरी को खूब सजाया गया। देश-विदेश से हजारों रामभक्त और विशिष्ट लोग ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए राम जन्मभूमि अयोध्या पहुंचे। जैसे ही प्रभु श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई, वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने राम मंदिर प्रांगण में फूलों की वर्षा की। <span class="Y2IQFc" lang="hi">इस दौरान&nbsp;</span><span class="Y2IQFc" lang="hi">देश भर के 50 पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र की "मंगल ध्वनि" गूंजती रही। </span>&nbsp;&nbsp;</p>
<p>कार्यक्रम की शुरुआत में श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मंदिर से जुड़ी कई जानकारियां साझा की। प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूजा सामग्री और चांदी का छत्र लिए करीब 12 बजे मंदिर के गर्भगृह में पहुंचे। पूजाचार्यों ने विधि विधान से पूजा कराई। पीएम मोदी ने रामलला की पूजा अर्चना की और प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान में भाग लिया। इस दौरान गर्भगृह में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, <span>राज्यपाल आनंदीबेन पटेल</span>, <span>संघ प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद थे। कल 23 जनवरी से श्रद्धालु अयोध्या स्थिति राम मंदिर में रामलला के दर्शन कर सकेंगे।&nbsp;</span></p>
<p>रामलला के गर्भगृह में विराजमान होने की जो पहली तस्वीर सामने आई है उसमें रामलला स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा कि अयोध्या धाम में श्री राम लला की प्राण-प्रतिष्ठा का अलौकिक क्षण हर किसी को भाव-विभोर करने वाला है। इस दिव्य कार्यक्रम का हिस्सा बनना मेरा परम सौभाग्य है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला विराजमान, प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं को पाले और रोग से बचाने के लिए एडवाइजरी जारी, ऐसे करें बचाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/advisory-issued-to-protect-wheat-from-frost-and-disease-protect-it-like-this.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 20 Jan 2024 15:38:47 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/advisory-issued-to-protect-wheat-from-frost-and-disease-protect-it-like-this.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रबी सीजन की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है। इस बार गेहूं की बंपर पैदावार की उम्मीद है क्योंकि गेहूं की बुवाई का रकबा बढ़कर 340<span> लाख हेक्टेयर के पार पहुंच गया है। इस वर्ष गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में काफी ठंड पड़ रही है जो गेहूं की उपज के लिए फायदेमंद है। लेकिन इस दौरान फसल को पाले और रोग से बचाना भी जरूरी है। शीतलहर और कड़ाके की ठंड के बीच हरियाणा के करनाल स्थित भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) ने गेहूं की फसल के लिए किसानों को एडवाइजरी जारी की है।&nbsp;</span></p>
<p><strong>आईआईडब्ल्यूबीआर की सलाह</strong> के अनुसार, <span>नाइट्रोजन की खुराक का प्रयोग बुआई के </span>40-45<span> दिन बाद तक पूरा कर लेना चाहिए। बेहतर परिणाम के लिए सिंचाई से ठीक पहले यूरिया डालें। जिन किसानों ने देर से गेहूं की बुवाई की है और उनके खेत में संकरी या चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार हैं तो पहली सिंचाई से पहले या सिंचाई के </span>10-15<span> दिन बाद </span>120-150<span> लीटर पानी में सल्फोसल्फ्यूरॉन </span>75<span> डब्ल्यूजी </span>13.5<span> ग्राम/एकड़ या सल्फोसल्फ्यूरॉन+मेटसल्फ्यूरॉन </span>16<span> ग्राम/एकड़ की दर से </span>120-150<span> लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।</span></p>
<p><strong>पीला रतुआ (येलो रस्ट) </strong></p>
<p>गेहूं की कुछ पत्तियां मौसम की वजह से पीली होती हैं, <span>जबकि कुछ पीले रतुआ की वजह से। जो मौसम में कोहरा धुंध होने की वजह से फसल में पीलापन आता है वह मौसम सही होते ही सही हो जाता है। लेकिन लगातार कोहरे और वातावरण में ठंड व नमी से यह रोग गेहूं की फसल में तेजी से बढ़ता है। </span></p>
<p><strong>पीला रतुआ की पहचान </strong></p>
<p>पीला रतुआ में पत्तियां धरीदार पीले रंग लाइन दिखाई देंगी। हाथों छूने पर एक पीले रंग जो हल्दी की तरह दिखने वाला एक पाउडर निकलेगा। किसान अपनी फसल पर निगरानी बनाए रखें।</p>
<p><strong>पीला रतुआ के लिए सलाह </strong></p>
<p>रतुआ रोग के लिए अनुकूल आर्द्र मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह दी गई है कि वे धारीदार रतुआ (पीला रतुआ) की घटनाओं को देखने के लिए नियमित रूप से अपनी फसल का निरीक्षण करें। यदि किसान अपने गेहूं के खेतों में पीला रतुआ देखते हैं, <span>तो निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं:</span></p>
<ul>
<li>पीला रतुआ के प्रसार को रोकने के लिए संक्रमण क्षेत्र पर प्रोपीकोनाज़ोल 25<span> ईसी </span>@0.1<span> प्रतिशत या टेबुकोनाज़ोल </span>50% + <span>ट्राइफ्लोक्सीस्ट्रोबिन </span>25%<span> डब्ल्यूजी </span>@ 0.06%<span> का एक स्प्रे दिया जाना चाहिए।</span></li>
<li>एक लीटर पानी में एक मिलीलीटर रसायन मिलाना चाहिए। इस प्रकार एक एकड़ गेहूं की फसल में 200<span> मिलीलीटर कवकनाशी को </span>200<span> लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।</span></li>
<li>जिन किसानों ने पिछले वर्ष अपने खेते में किसी कवकनाशी का उपयोग किया है उन्हें इस वर्ष वैकल्पिक कवकनाशी का उपयोग करने का सुझाव दिया गया है। किसानों को मौसम साफ होने पर फसल पर छिड़काव करने की सलाह दी जाती है।</li>
</ul>
<p><strong>अगेती बोई गेहूं</strong> की फसल में लोजिंग (फसल का गिरना) नियंत्रण के लिए ग्रोथ रेगुलेटर का उपयोग किया जा सकता है। क्लोरमेक्वाट क्लोराइड (सीसीसी) 0.2% + <span>टेबुकोनाज़ोल </span>250<span> ईसी </span>0.1%<span> मिश्रण के दो स्प्रे पहले नोड (बुवाई के </span>50-50<span> दिन बाद) और ध्वज पत्ती (बुवाई के </span>75-85<span> दिन बाद) पर करें। जिन किसानों ने अगेती बुवाई वाले गेहूं पर पहला छिड़काव नहीं किया है वे बुवाई के </span>70-80<span> दिन बाद केवल एक ही छिड़काव कर सकते हैं।</span></p>
<p><strong>पाले से बचाव</strong> के लिए किसानों को मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान रखते हुए गेहूं की फसल में हल्की सिंचाई करने की सलाह दी जाती है।</p>
<p><strong>गुलाबी छेदक</strong> का हमला उन क्षेत्रों में देखा गया है जहां विशेष रूप से धान, <span>मक्का</span>, <span>कपास</span>, <span>गन्ना उगाया जाता है। गेहूं की फसल को मुख्यतः इल्लियों द्वारा क्षति होती है। कैटरपिलर तने में प्रवेश करता है और ऊतकों को खाता है। इससे फसल की प्रारंभिक अवस्था में तने में डेड हार्ट बन जाते हैं। प्रभावित पौधे पीले पड़ जाते हैं और आसानी से उखाड़े जा सकते हैं। जब पौधों को उखाड़ा जाता है तो उनकी निचली शिराओं पर गुलाबी रंग की इल्लियों देखी जा सकती हैं।</span></p>
<p><strong>कीट प्रबंधन</strong></p>
<ul>
<li>संक्रमित कल्लों को हाथ से चुनने और उन्हें नष्ट करने से छेदक का हमला कम हो जाता है।</li>
<li>संक्रमण से बचने के लिए, <span>नाइट्रोजन उर्वरकों को विभाजित खुराकों में उपयोग करने की सलाह दी जाती है।</span></li>
<li>यदि प्रकोप अधिक हो तो 1000<span> मिलीलीटर क्विनालफॉस </span>25%<span> को </span>500<span> लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें।</span></li>
</ul>
<p><strong>मौसम का पूर्वानुमान (</strong><strong>16-30<span> जनवरी</span>, 2024) </strong></p>
<p>मौसम विभाग ने 20-30<span> जनवरी के दौरान भारत के उत्तर-पूर्व और मध्य इलाकों में बारिश की संभावना जताई है। आने वाले सप्ताह में तापमान सामान्य से नीचे जाने की उम्मीद है।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं को पाले और रोग से बचाने के लिए एडवाइजरी जारी, ऐसे करें बचाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रबी सीजन में गेहूं का रकबा बढ़ा, लेकिन दालों का क्षेत्र घटा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wheat-area-increased-in-rabi-season-but-area-under-sowing-of-pulses-decreased.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 19 Jan 2024 20:12:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wheat-area-increased-in-rabi-season-but-area-under-sowing-of-pulses-decreased.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि मंत्रालय ने रबी फसलों की बुवाई की प्रगति के बारे में जानकारी दी है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, फसल वर्ष 2023-24 के चालू रबी सीजन में 19 जनवरी, 2024 तक <strong>गेहूं</strong> की बुवाई का क्षेत्र 340 लाख हेक्टेयर के पार पहुंच गया है। जबकि एक साल पहले इस अवधि तक 337.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई हुई थी।&nbsp;</p>
<p><strong>दलहन</strong> का रकबा गत वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 7.53 लाख हेक्टेयर कम है। जबकि मोटे अनाज और तिलहन का बुआई क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ा है। इस रबी सीजन में धान का क्षेत्र भी कम रहा है। 2023-24 <strong>रबी सीजन</strong> में सभी फसलों का कुल क्षेत्र 687.18 लाख हेक्टेयर रहा है, जबकि गत वर्ष इस अवधि तक यह 689.09 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार चालू रबी सीजन की कुल बुवाई पिछले साल के मुकाबले थोड़ी कम रही है।</p>
<p>चालू रबी सीजन में दालों की बुवाई 155.13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जो पिछले साल 162.66 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से करीब 4.63 फीसदी कम है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चना, उड़द और मूंग की बुवाई का क्षेत्र घटा है। हालांकि, चालू रबी सीजन में मसूर का रकबा 19.51 लाख हेक्टेयर से अधिक है, जो गत वर्ष इस अवधि तक 18.46 लाख हेक्टेयर था।</p>
<p>रबी सीजन के <strong>धान</strong> का रकबा भी गत वर्ष के 29.33 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 28.25 लाख हेक्टेयर रह गया है। <strong>मोटे अनाजों</strong> के क्षेत्र में जरूर इजाफा हुआ है। मोटे अनाज का कुल क्षेत्रफल 53.83 लाख हेक्टेयर है, जो एक साल पहले इसी अवधि में 50.77 लाख हेक्टेयर था।</p>
<p>आंकड़ों से पता चलता है कि रबी सीजन में <strong>तिलहन</strong> का क्षेत्र बढ़कर 109.88 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है जो पिछले साल इस अवधि तक 108.82 लाख हेक्टेयर था। सरसों की बुवाई में बढ़ोतरी के कारण तिलहन का क्षेत्र बढ़ा है। गेहूं के अलावा अन्य रबी फसलों की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65aa8a63dfc1a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रबी सीजन में गेहूं का रकबा बढ़ा, लेकिन दालों का क्षेत्र घटा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65aa8a63dfc1a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हूती हमलों से बढ़ सकते हैं उर्वरकों के दाम, डीएपी की कीमत 630 डॉलर तक पहुंची]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/fertilizer-prices-may-increase-due-to-houthi-attacks-dap-price-reaches-630-dollar-per-ton.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 19 Jan 2024 13:36:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/fertilizer-prices-may-increase-due-to-houthi-attacks-dap-price-reaches-630-dollar-per-ton.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उर्वरकों की कीमतों के मामले में भारत के लिए बहुत अच्छी खबर नहीं है। लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों के चलते जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। इस कारण उर्वरकों के दाम बढ़ सकते हैं। प्रमुख उर्वरक डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की कीमतें 630 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई हैं। जबकि भारतीय कंपनियां डीएपी के लिए फिलहाल 595 डॉलर प्रति टन से अधिक दाम चुकाने को तैयार नहीं हैं। इसी माह के शुरू में एक भारतीय उर्वरक कंपनी ने 595 डॉलर प्रति टन पर आयात सौदा किया था।</p>
<p>उर्वरक उद्योग के सूत्रों ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमतें 600 से 630 डॉलर प्रति टन चल रही हैं। यूरोप के लिए कीमतें इससे भी अधिक हैं। पिछले तीन माह में भारत के लिए डीएपी के सौदे 595 डॉलर प्रति टन के आसपास ही हुए हैं। उद्योग सूत्रों का कहना है कि सरकार ने डीएपी के आयात के लिए 595 डॉलर की कीमत सीमा तय की हुई है। कंपनियों के इससे अधिक कीमत सौदे नहीं करने की सलाह दी गई है। वहीं लाल सागर में जो स्थिति बन रही है उसके चलते कीमतों में बढ़ोतरी होने की आशंका है। जहाजों पर हूती विद्रोहियों के हमले के चलते प्रमुख फर्टिलाइजर कंपनी ओसीपी और रूस से आयात प्रभावित हो सकता है।</p>
<p>जहां तक सरकार द्वारा डीएपी पर सब्सिडी दरों की बात है तो उद्योग सूत्रों का कहना है कि मौजूदा सब्सिडी दरों पर उर्वरक कंपनियों को 7-8 हजार रुपये प्रति टन का नुकसान उठाना पड़ रहा है। महंगे आयात के चलते अगर उर्वरकों के दाम बढ़ते हैं तो सरकार को सब्सिडी बढ़ाने पर विचार करना पड़ सकता है।</p>
<p>दिसंबर के अंत तक देश में डीएपी का करीब 18 लाख टन का स्टॉक था। फिलहाल डीएपी की बहुत अधिक मांग भी नहीं है तो ऐसे में उपलब्धता बेहतर स्थिति में है। डीएपी की मांग अब अप्रैल के बाद खरीफ फसलों के लिए ही बढ़ेगी। सरकार विनियंत्रित उर्वरकों (डिकंट्रोल फर्टिलाइजर्स) के लिए खरीफ सीजन की अप्रैल में और रबी सीजन की अक्तूबर में न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनबीएस) की दरें अधिसूचित करती है। जिसमें नाइट्रोजन (एन), फॉस्फोरस (पी), पोटाश (के) और सल्फर (एस) के लिए सब्सिडी दरें तय की जाती हैं। यूरिया के लिए सब्सिडी की अलग नीति है।</p>
<p>वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतें 318 डॉलर प्रति टन के आसपास चल रही हैं। पिछले दिनों भारत के पूर्वी तट के लिए 329.40 डॉलर प्रति टन और पश्चिमी तट के लिए 316.80 डॉलर प्रति टन की दर से यूरिया के सौदे हुए हैं। उर्वरकों के लिए प्रमुख कच्चे माल अमोनिया की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।</p>
<p>हाल ही में केंद्रीय उर्वरक मंत्री ने कहा था कि चालू वित्त वर्ष (2023-24) में उर्वरक सब्सिडी 1.7 से 1.8 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। जबकि पिछले साल उर्वरक सब्सिडी 2.56 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। उर्वरक सब्सिडी में यह कमी वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों में आई कमी के चलते आ सकती है।</p>
<p>भारत सालाना करीब 100 लाख टन डीएपी और करीब 75 लाख टन यूरिया आयात करता है। उर्वरकों का अधिकांश आयात रूस, सऊदी अरब, जार्डन और चीन से होता है। ऐसे में खाड़ी देशों में ताजा हालात उर्वरकों की कीमतों के मामले में भारत के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं। इसकी सीधा असर उर्वरक सब्सिडी पर पड़ेगा। क्योंकि चुनावी साल में सरकार किसानों के लिए उर्वरकों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का राजनीतिक जोखिम लेने से बचेगी। जल्द ही सरकार आगामी वित्त वर्ष (2024-25) का अंतरिम बजट पेश करेगी। देखना होगा कि सरकार उर्वरक सब्सिडी के लिए बजट में क्या रुख अपनाती है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हूती हमलों से बढ़ सकते हैं उर्वरकों के दाम, डीएपी की कीमत 630 डॉलर तक पहुंची ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत का बागवानी उत्पादन 2.32 फीसदी बढ़ने का अनुमान, जारी नहीं हुआ प्याज का डेटा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indias-horticulture-production-estimated-to-increase-by-two-percent-onion-data-not-released.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 19 Jan 2024 12:43:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indias-horticulture-production-estimated-to-increase-by-two-percent-onion-data-not-released.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मौसम के बिगड़े मिजाज के बावजूद भारत का बागवानी उत्पादन 2022-23 में 2.32 फीसदी बढ़कर 355.25 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय ने वर्ष 2022-23 में विभिन्न बागवानी फसलों के क्षेत्रफल और उत्पादन का तीसरा अग्रिम अनुमान जारी किया है। वर्ष 2022-23 में बागवानी उत्पादन का अनुमान वर्ष 2021-22 (अंतिम) के 347.18 लाख टन की तुलना में लगभग 8.07 मिलियन टन अधिक है। नवीनतम अनुमान 351.92 मिलियन टन बागवानी उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान से भी लगभग एक फीसदी अधिक है।&nbsp;</p>
<p>अभी तक कृषि मंत्रालय ने चालू सीजन 2023-24 की बागवानी फसलों के उत्पादन पर कोई अनुमान जारी नहीं किया गया है। हालिया आंकड़ों में सरकार ने प्याज का डेटा भी जारी नहीं किया है। संभवत: कीमतें बढ़ने के डर से प्याज उत्पादन का अनुमान सार्वजनिक नहीं किया। अनियमित बारिश और जलाशय स्तर में कमी के कारण जनवरी के पहले सप्ताह तक महाराष्ट्र और कर्नाटक के मुख्य उत्पादक क्षेत्रों में रबी (सर्दियों) प्याज की बुआई 20 फीसदी तक गिर गई थी। 2021-22 में प्याज का उत्पादन 31.7 मिलियन टन था। 2022-23 के दूसरे अग्रिम अनुमान में प्याज उत्पादन घटकर 30.2 मिलियन टन रहने का अनुमान था जिसमें और भी गिरावट आ सकती है।&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>फलों का उत्पादन वर्ष&nbsp;2021-22&nbsp;में&nbsp;107.51&nbsp;मिलियन टन से बढ़कर वर्ष&nbsp;2022-23&nbsp;में&nbsp;109.53&nbsp;मिलियन टन होने का अनुमान है। सब्जियों का उत्पादन वर्ष&nbsp;2022-23&nbsp;में&nbsp;213.88&nbsp;मिलियन टन तक पहुंच सकता है जो वर्ष&nbsp;2021-22&nbsp;में उत्पादन&nbsp;209.14&nbsp;मिलियन टन रहा था। आलू उत्पादन बढ़ने से सब्जियों के उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद है। आलू का उत्पादन&nbsp;60.22&nbsp;मिलियन टन होने की उम्मीद है जो वर्ष&nbsp;2021-22&nbsp;में&nbsp;56.18&nbsp;मिलियन था। टमाटर के उत्पादन में मामूली कमी आई है। टमाटर का उत्पादन वर्ष&nbsp;2021-22&nbsp;में&nbsp;20.69&nbsp;मिलियन टन की अपेक्षा वर्ष&nbsp;2022-23&nbsp;में&nbsp;20.37&nbsp;मिलियन टन होने का अनुमान है।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा है कि देश में लगातार बढ़ रहे बागवानी उत्पादन की यह उपलब्धि हमारे किसान भाइयों-बहनों व वैज्ञानिकों की मेहनत तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की कृषि और किसान हितैषी अच्छी नीतियों का सद्परिणाम है। जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद, किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के प्रयासों की बदौलत बागवानी उत्पादन में वृद्धि हुई है।&nbsp;</p>
<p>बागवानी फसलों का क्षेत्रफल गत वर्ष के 28.04 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 2022-23 में 28.34 मिलियन हेक्टेयर होने का अनुमान है। सब्जियों का क्षेत्र 11.37 मिलियन हेक्टेयर से घटकर 11.36 मिलियन हेक्टेयर और फलों का क्षेत्र 7.06 मिलियन हेक्टेयर से घटकर 7 मिलियन हेक्टेयर हो गया।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत का बागवानी उत्पादन 2.32 फीसदी बढ़ने का अनुमान, जारी नहीं हुआ प्याज का डेटा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने जीएम फसलों पर रोक की मांग वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/supreme-court-reserves-order-on-petition-demanding-moratorium-on-release-of-gmos-into-environment.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 18 Jan 2024 15:43:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/supreme-court-reserves-order-on-petition-demanding-moratorium-on-release-of-gmos-into-environment.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उच्चतम न्यायालय ने आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों (<span>जीएमओ</span>)<span> को पर्यावरण में जारी करने पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और संजय करोल की पीठ ने सभी पक्षों को </span>22 <span>जनवरी तक लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है। पीठ ने गुरुवार को अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी</span>, <span>सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वकील प्रशांत भूषण</span>, <span>वकील संजय पारिख की दलीलें सुनी।</span>&nbsp;इससे पहले शीर्ष अदालत ने कहा था कि आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों का मुद्दा बहुत तकनीकी और वैज्ञानिक है। देश के लिए क्या अच्छा है इसके आधार पर जीएम सरसों के पर्यावरणीय रिलीज पर फैसला लिया जाएगा।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से पूछा था कि आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) फसलों की जैव सुरक्षा पर अदालत द्वारा नियुक्त तकनीकी विशेषज्ञ समिति (टीईसी) की रिपोर्ट पर जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (जीईएसी) द्वारा ध्यान क्यों नहीं दिया गया।</p>
<p>केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए अटॉर्नी जनरल&nbsp;<span class="Y2IQFc" lang="hi">आर वेंकटरमणी&nbsp;</span>ने कहा था कि जीईएसी खुद एक संविधानिक निकाय है और जीईएसी को इन रिपोर्ट को देखने की जरूरत नहीं है, <span>लेकिन </span><span class="Y2IQFc" lang="hi">पर्यावरणीय रिलीज के लिए आगे बढ़ने से पहले हर प्रासंगिक वैज्ञानिक निष्कर्ष पर विचार किया गया है।</span></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में एक्टिविस्ट अरुणा रोड्रिग्स और एनजीओ '<span>जीन कैंपेन</span>' <span>की अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से स्वतंत्र विशेषज्ञ द्वारा सार्वजनिक डोमेन में एक व्यापक</span>, <span>पारदर्शी और कठोर जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल लंबित होने तक पर्यावरण में किसी भी आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (जीएमओ) को जारी करने पर रोक लगाने की मांग की गई है।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>रूरल वॉयस</strong> के साथ बात करते हुए एक वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि भारत में जीएम फसलों की पर्यावरण सुरक्षा के लिए दुनिया के सबसे सख्त प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। जहां तक टेक्नीकल एक्सपर्ट कमेटी (टीईसी) की सिफारिशों की बात है तो हमें देखना चाहिए कि यह सिफारिशें कब आई थी और उसके बाद से जेनेटिकली मॉडिफाइड किस्मों की तकनीक और जीन एडिटिंंग जैसी तकनीक में कितना बदलाव आ चुका है। इसके साथ ही टीईसी की सिफारिशों और उसके लिए तय टर्म ऑफ रेफरेंस (टीओआर) को भी साथ रखकर देखना चाहिए। वहीं टीईसी की रिपोर्ट के अलावा डॉ. आर.एस. परोदा की अलग से सौंपी गई रिपोर्ट को भी देखा जाना चाहिए।</p>
<p><strong>क्या है मामला</strong><br /><span>उत्पादन बढ़ाने के लिए दुनिया भर में अनुवांशिक रूप से संशोधित&nbsp;फसलों (जीएम) की खेती की जा रही है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और जेनेटिक्स के प्रोफेसर दीपक पेंटल के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने साल </span>2002 <span>में सरसों की जीएम किस्म डीएमएच-</span>11 <span>को विकसित किया था। दावा किया जा रहा है कि इससे देश के किसानों को फायदा होगा और देश में सरसों के तेल की उपलब्धता भी बढ़ेगी।</span>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट ने जीएम फसलों पर रोक की मांग वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत का चीनी उत्पादन 148 लाख टन तक पहुंचा, पिछले सीजन से 7 फीसदी कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-sugar-production-reached-148-lakh-tonnes-7-percent-less-than-last-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 17 Jan 2024 17:13:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-sugar-production-reached-148-lakh-tonnes-7-percent-less-than-last-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चीनी उत्पादन में गिरावट के अनुमान के बीच गन्ना पेराई सीजन जोरों पर है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, चालू पेराई सत्र में <span>15 जनवरी 2024 तक देश में<strong> 148.70 लाख टन</strong> चीनी का उत्पादन हुआ। देश भर में 511 चीनी मिलों ने 2023-24 सीजन में कुल 1563.00 लाख टन गन्ने की पेराई की है। इस साल चीनी उत्पादन पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब <strong>7 फीसदी</strong> कम रहा है। पिछले साल इस अवधि तक देश में 160 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ था और 519 चीनी मिलों ने 1681.49 लाख टन गन्ने की पेराई की थी। चीनी उत्पादन के मामले में फिलहाल महाराष्ट्र सबसे आगे है</span>, <span>इसके बाद उत्तर प्रदेश और कर्नाटक का स्थान है।</span>&nbsp;</p>
<p>देश में चीनी की <strong>औसत रिकवरी</strong> दर पिछले सीजन से थोड़ी कम रही है। 15 जनवरी 2024 तक, <span>औसत चीनी रिकवरी 9.51 फीसदी है</span>, <span>जबकि पिछले सीजन में इसी अवधि के दौरान यह 9.52 फीसदी थी। </span>उत्तर प्रदेश चीनी रिकवरी 9.90<span> प्रतिशत के साथ देश में सबसे आगे है। इसके बाद तेलंगाना </span>9.75<span> प्रतिशत चीनी रिकवरी के साथ दूसरे और कर्नाटक </span>9.60<span> प्रतिशत चीनी रिकवरी के साथ तीसरे स्थान पर है। जबकि महाराष्ट्र में चीनी रिकवरी </span>9.30<span> फीसदी दर्ज की गई है।</span>&nbsp;</p>
<p>इस साल चीनी सीजन के अंत तक देश में चीनी का उत्पादन<strong> 305.50</strong><span><strong> लाख टन</strong> होने की उम्मीद है। एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष <strong>जय प्रकाश दांडेगांवकर</strong> ने कहा</span>, &ldquo;<span>इसके </span>8<span> से </span>10<span> लाख टन तक बढ़ने की संभावना है।</span>&rdquo; <span>बारिश की वापसी से गन्ने की खड़ी फसल को मदद मिली जिससे इन तीन राज्यों में चीनी उत्पादन में वृद्धि हुई।</span></p>
<p><span>एनएफसीएसएफ द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में 15 जनवरी 2024 तक 197 चीनी मिलें चालू हैं जिन्होंने 51 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है जबकि उत्तर प्रदेश में 120 चीनी मिलों ने 46.10 लाख टन चीनी बनाई है। तीसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य कर्नाटक में चीनी उत्पादन 31.00 लाख टन तक पहुंच गया। वहां 69 चीनी मिलें पेराई कर रही हैं।&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत का चीनी उत्पादन 148 लाख टन तक पहुंचा, पिछले सीजन से 7 फीसदी कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि मंत्रालय ने 5 साल में 1 लाख करोड़ का बजट सरेंडर किया, कांग्रेस ने उठाए सवाल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-ministry-surrendered-budget-of-rs-1-lakh-crore-in-5-years-congress-raised-questions.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 17 Jan 2024 11:02:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agriculture-ministry-surrendered-budget-of-rs-1-lakh-crore-in-5-years-congress-raised-questions.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि बजट में कटौती और बजट खर्च ना करने को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार पिछले पांच साल किसानों के लिए जारी कृषि बजट की एक लाख करोड़ रुपये से अधिक धनराशि को खर्च नहीं कर पायी है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने मोदी सरकार को किसान विरोधी बताते हुए कहा कृषि बजट खर्च नहीं किया जा रहा है और दूसरी तरफ कृषि बजट में हर साल गिरावट हो रही है। कृषि निर्यात पर लगी पाबंदियों को लेकर भी उन्होंने केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए।&nbsp;</p>
<p>नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए राज्यसभा सांसद <strong>दीपेंद्र सिंह हुड्डा</strong> ने कहा कि स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि मोदी सरकार ने पांच साल में कृषि बजट का एक लाख करोड़ रुपए से अधिक सरेंडर कर दिया है। यह पैसा बजट में कृषि के लिए दिया गया, <span>लेकिन खर्च नहीं किया गया। भाजपा सरकार में 2014-2022 तक एक लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्या कर ली। यानी देश में रोजाना मजबूर होकर 30 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। क्या इन पैसों से किसानों को राहत देकर</span>, <span>किसानों की जान नहीं बचाई जा सकती थी। इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग को भी पूरा किया जा सकता था</span>, <span>जिसे लेकर किसानों ने आंदोलन भी किया था। देश के 80 प्रतिशत किसानों को गेहूं और 76 प्रतिशत किसानों को धान पर न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलता है।</span></p>
<p>हुड्डा ने कहा कि देश में जितना कृषि बजट दिखाया जा रहा है, <span>वो छल है</span>, <span>क्योंकि खर्च नहीं किया जा रहा है। वहीं</span>, <span>दूसरी तरफ देश के ओवरआल बजट के मुकाबले कृषि बजट में हर वर्ष गिरावट हो रही है। दस वर्षों में किसान की तो कोई कर्जमाफी नहीं हुई</span>, <span>मगर बड़े-बड़े उद्योगपति घरानों के साढ़े 14 लाख करोड़ के कर्जे माफ कर दिए गए। वहीं कांग्रेस सरकार में 72 हजार करोड़ रुपए के किसानों के कर्ज माफ हुए थे। जहां यूपीए की सरकार में न्यूनतम समर्थन मूल्य की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई, कर्जा माफी हुआ। वहीं भाजपा की सरकार में ना न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ा, ना कर्ज माफ हुआ। किसान की आय दोगुनी होगी, ये भी किसान के साथ बड़ा छल था।</span></p>
<p>कृषि उपज पर निर्यात पाबंदियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि जब दुनिया के बाजारों में गेहूं, <span>धान और अन्य अनाजों का भाव मिल सकता है</span>, <span>तब एक्सपोर्ट बैन कर दिया जाता है। जहां इंपोर्ट करना होता है</span>, <span>वहां तुरंत सारे कायदे-कानूनों को ताक पर रख दिया जाता है। यह देश के किसान पर मोदी सरकार की दोहरी मार है। फरवरी में फिर से किसान आंदोलन की बातें उठ रही हैं</span>, <span>क्योंकि सरकार ने जो भी बातें किसानों की मानी थीं</span>, <span>वो पूरी नहीं हुईं। </span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65a7660df3266.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि मंत्रालय ने 5 साल में 1 लाख करोड़ का बजट सरेंडर किया, कांग्रेस ने उठाए सवाल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार ने शीरे पर 50 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाया, एथेनॉल इंडस्ट्री को होगा फायदा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indian-government-imposes-50-percent-export-duty-on-molasses-ethanol-industry-will-benefit.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 16 Jan 2024 21:08:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indian-government-imposes-50-percent-export-duty-on-molasses-ethanol-industry-will-benefit.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने एथेनॉल इंडस्ट्री को एक और राहत देते हुए शीरे (मोलासेज) पर 50 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगा दिया है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, यह आदेश 18 जनवरी से लागू होगा। सरकार के इस कदम से शीरे के निर्यात पर अंकुश लगेगा और एथेनॉल उत्पादन के लिए शीरे की उपलब्धता बढ़ सकेगी। इससे सरकार को एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी।&nbsp;</p>
<p>हर साल लगभग 15-16 लाख टन शीरे का निर्यात किया जाता है, जो उत्पादित शीरे की कुल मात्रा का लगभग 10% है। भारत मुख्यता वियतनाम, दक्षिण कोरिया, नीदरलैंड और फिलीपींस सहित देशों को शीरे का निर्यात करता है। चीनी उत्पादन में गिरावट की आशंका को देखते हुए पिछले महीने केंद्र सरकार ने एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के रस के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार चीनी मिलों को एथेनॉल उत्पादन के लिए अधिकतम सी हेवी मोलासेज़ का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>इस्मा ने सरकार के कदम का स्वागत किया</strong></p>
<p>&nbsp;इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने शीरे के निर्यात पर 50 फीसदी शुल्क लगाने के फैसले का स्वागत किया है। इस्मा के अध्यक्ष<strong> एम. प्रभाकर राव</strong> ने कहा, &ldquo;हमने सरकार से शीरे के निर्यात को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह से रोकने का अनुरोध किया था क्योंकि इससे देश के एथेनॉल उत्पादन में वृद्धि होगी, जिससे अन्य फ़ीड स्टॉक पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो जाएगी। चीनी से बने शीरे पर 50% निर्यात शुल्क लगाने का कदम बहुत स्वागत योग्य है।</p>
<p>&nbsp;इस्मा ने सरकार से गन्ने के सिरप/जूस, बी-हैवी मोलासेज और सी-हैवी मोलसेज से बने एथेनॉल के खरीद मूल्य में कम से कम 10 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि पर विचार करने का भी अनुरोध किया है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार ने शीरे पर 50 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाया, एथेनॉल इंडस्ट्री को होगा फायदा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मदर डेयरी ने दिल्ली&amp;#45;एनसीआर में उतारा भैंस का दूध, कीमत 70 रुपये लीटर ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/mother-dairy-launches-buffalo-milk-in-delhi-ncr-price-rs-70-per-liter.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 16 Jan 2024 18:30:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/mother-dairy-launches-buffalo-milk-in-delhi-ncr-price-rs-70-per-liter.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दूध और दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति करने वाली मदर डेयरी दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में भैंस के दूध की बिक्री शुरू करने जा रही है। अगले साल मार्च तक भैंस का दूध 500 करोड़ रुपये का ब्रांड बनने की उम्मीद है। मदर डेयरी दिल्ली-एनसीआर में प्रतिदिन 35-36 लाख लीटर और पूरे भारत में 45-47 लाख लीटर दूध की आपूर्ति करती है।&nbsp;</p>
<p><strong>70 रुपए प्रति लीटर भाव&nbsp;</strong><br />मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक मनीष बैंडलिश ने कहा कि भैंस का दूध 70 रुपए प्रति लीटर के दाम पर पेश कर रहे हैं। फिलहाल इसे दिल्ली-एनसीआर में लेकर आ रहे हैं। भैंस का दूध इसी सप्ताह से बाजार में मिलने लगेगा। मदर डेयरी दिल्ली-एनसीआर बाजार में प्रतिदिन 50,000-75,000 लीटर भैंस के दूध की आपूर्ति करेगी। मार्च, 2025 तक लक्ष्य भैंस के दूध की आपूर्ति दो लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का है।&nbsp;</p>
<p>मदर डेयरी के भैंस के दूध में 6.5 प्रतिशत फैट है। इसमें 9 प्रतिशत एसएनएफ (सॉलिड नॉट फैट) होता है। यह दूध गाढ़ा, मलाईदार और बेहतर स्वाद वाला होगा। इस नए वेरिएंट में A2 प्रोटीन शामिल है। मदर डेयरी ने 7-8 साल पहले गाय का दूध लॉन्च किया था और अब वह मार्केट लीडर बन गई है। मदर डेयरी गाय के दूध की बड़ी सफलता के बाद एक और प्रजाति-विशिष्ट भैंस का दूध पेश कर रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>यहां भी जल्द शुरू होगी बिक्री</strong><br />मदर डेयरी अगले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र में भी भैंस के दूध की बिक्री शुरू करेगी। कंपनी ने सात-आठ साल पहले गाय का दूध बेचना शुरू किया था और अब वह इस सेगमेंट में अगुवा बन गई है। वर्ष 1974 में स्थापित मदर डेयरी अब राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के पूर्ण-स्वामित्व वाली अनुषंगी है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मदर डेयरी ने दिल्ली-एनसीआर में उतारा भैंस का दूध, कीमत 70 रुपये लीटर  ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[थोक महंगाई नौ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची, खाद्य वस्तुओं की महंगाई का असर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wholesale-inflation-at-highest-level-in-nine-months-food-items-became-expensive.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 15 Jan 2024 19:02:14 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wholesale-inflation-at-highest-level-in-nine-months-food-items-became-expensive.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर दिसंबर 2023 में बढ़कर नौ महीने के उच्चतम स्तर 0.73 प्रतिशत पर पहुंच गई है। थोक महंगाई बढ़ने के पीछे मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि है। इससे पहले खुदरा महंगाई दर भी दिसंबर 2023 में चार महीने के उच्चतम स्तर 5.69 फीसदी पर थी। यानी आम जनता पर महंगाई की मार पड़ रही है।</p>
<p>थोक महंगाई दर पिछले साल मार्च में 1.34 फीसदी थी। इसके बाद अप्रैल से अक्टूबर तक यह नकारात्मक रही। गत नवंबर में थोक महंगाई दर 0.26 फीसदी रही थी। दिसंबर में इसमें इजाफा हुआ और यह बढ़कर 0.73 फीसदी तक पहुंच गई। थोक महंगाई दर का यह नौ महीने का उच्चतम स्तर है।&nbsp;</p>
<p>वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, <span>दिसंबर </span><span>2023&nbsp;</span><span>में मुद्रास्फीति की सकारात्मक दर मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं</span><span>,&nbsp;</span><span>मशीनरी और उपकरण</span><span>,&nbsp;</span><span>अन्य विनिर्माण</span><span>,&nbsp;</span><span>अन्य परिवहन उपकरण और कंप्यूटर</span><span>,&nbsp;</span><span>इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑप्टिकल उत्पादों आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण है।</span></p>
<p>दिसंबर 2023 में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर नवंबर के 8.18 फीसदी से बढ़कर 9.38 फीसदी हो गई। सब्जियों की महंगाई दर 26.30 फीसदी, जबकि दालों की महंगाई दर 19.60 फीसदी रही। सब्जियों में, प्याज की मुद्रास्फीति 91.77 प्रतिशत थी जो अगस्त 2023 से लगातार दोहरे अंकों में है। दिसंबर में आलू की मुद्रास्फीति (-) 24.08 प्रतिशत रही। यानी आलू की थोक कीमतों में गिरावट आई है।&nbsp;</p>
<p>दिसंबर महीने में प्राथमिक वस्तुओं की थोक महंगाई दर बढ़कर 5.78 प्रतिशत हो गई जो नवंबर महीने में 4.76 प्रतिशत थी। इस बीच, ईंधन और बिजली व विनिर्माण क्षेत्र में मुद्रास्फीति क्रमश: शून्य से 2.41 प्रतिशत नीचे और शून्य से 0.71 प्रतिशत नीचे रही। रिजर्व बैंक ने पिछले महीने अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को स्थिर रखा और नवंबर-दिसंबर में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने को लेकर चिंता जताई थी।&nbsp;</p>
<p>इस साल कमजोर मानसून और अल नीनो प्रभाव के चलते देश का कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। खरीफ के बाद अगर रबी सीजन पर भी मौसम की मार पड़ी तो महंगाई के मोर्चे पर चुनौती बढ़ जाएगी। सरकार खाद्य महंगाई से निपटने के लिए आयात बढ़ाने और निर्यात पर अंकुश लगाने की नीति अपना रही है जो किसानों के हितों पर प्रतिकूल असर डालेगी।&nbsp;</p>
<p><span></span></p>
<p><span></span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ थोक महंगाई नौ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची, खाद्य वस्तुओं की महंगाई का असर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इंडियन ऑयल खोलेगी देश में 300 एथेनॉल फ्यूल स्टेशन: नितिन गडकरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indian-oil-will-open-300-ethanol-fuel-stations-in-the-country-nitin-gadkari-said.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Jan 2024 12:00:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indian-oil-will-open-300-ethanol-fuel-stations-in-the-country-nitin-gadkari-said.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार बायोफ्यूल के तौर पर एथेनॉल को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। देश में 300 एथेनॉल फ्यूल स्टेशन खोलने की तैयारी चल रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री <strong>नितिन गडकरी</strong> ने कहा है कि देश की शीर्ष रिफाइनर कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन 300 एथेनॉल फ्यूल स्टेशन खोलेगी।&nbsp;पुणे में वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (वीएसआई) द्वारा आयोजित तीसरे अंतरराष्ट्रीय चीनी सम्मेलन में बोलते हुए नितिन गडकरी ने कहा, &ldquo;एथेनॉल पंप खोलने की मेरी मांग को पेट्रोलियम मंत्री ने स्वीकार कर लिया है। इंडियन ऑयल ने देश में 300 एथेनॉल पंप शुरू करने का फैसला लिया है।&rdquo;</p>
<p>पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाने और कार्बन फुटप्रिंट में कटौती के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एथेनॉल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम चलाया जा रहा है और हाइब्रिड वाहनों पर टैक्स कम कर प्रोत्साहन दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन 300 एथेनॉल स्टेशन स्थापित करने के लिए तैयार है। उन्होंने मिल मालिकों को सुझाव दिया कि वे अपनी फैक्ट्री में एथेनॉल पंप शुरू करें।&nbsp;</p>
<p>भारत सरकार ने वर्ष 2024-25 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत और 2029-30 तक 30 प्रतिशत एथेनॉल-मिश्रण का लक्ष्य रखा है। एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल से वर्ष 2022-23 में 24,300 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इसके अलावा किसानों को लगभग 19,300 करोड़ रुपये का शीघ्र भुगतान किया गया है। वैकल्पिक हरित ईंधन अपनाने से लागत में कटौती के साथ-साथ वाहनों के कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी।&nbsp;</p>
<p><strong>अप्रैल के बाद निकलेगा एथेनॉल का समाधान</strong></p>
<p>केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने चीनी मिल मालिकों को आश्वासन दिया कि एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के उपयोग पर सरकार की नीति के कारण उनकी समस्याओं का समाधान अप्रैल के बाद ढूंढ लिया जाएगा।&nbsp;वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत एक दिन ऊर्जा का निर्यातक होगा और ऐसा करने के लिए कृषि को विकसित करने की आवश्यकता है। इस संस्थान के अध्यक्ष राकांपा प्रमुख शरद पवार हैं।</p>
<p>केंद्र सरकार ने पिछले महीने गन्ने के रस से एथेनॉल बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, बाद में एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के रस के साथ-साथ बी-हैवी मोलासेज के उपयोग की अनुमति देने का ऐलान किया गया था। लेकिन चीनी के डायवर्जन को 17 लाख टन पर सीमित कर दिया था। गडकरी ने कहा कि जहां तक एथेनॉल का सवाल है, सरकार उचित कदम उठाएगी... मुझे पता है कि आप किन समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यह एक अस्थायी चरण है। अप्रैल के बाद हम इसका समाधान खोज लेंगे। इसलिए चिंता न करें।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इंडियन ऑयल खोलेगी देश में 300 एथेनॉल फ्यूल स्टेशन: नितिन गडकरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत में मसूर के रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद, विश्व में होगा सर्वाधिक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/record-production-of-lentils-expected-in-india-will-leave-canada-behind.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 12 Jan 2024 18:09:05 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/record-production-of-lentils-expected-in-india-will-leave-canada-behind.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल भारत में मसूर दाल का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। कनाडा को पीछे छोड़कर भारत विश्व में मसूर का सबसे बड़ा उत्पादक बन सकता है। उपभोक्ता मामलों के सचिव <strong>रोहित कुमार सिंह</strong> ने नई दिल्ली में वैश्विक दाल सम्मेलन (जीपीसी) से जुड़े एक आयोजन में यह उम्मीद जताई।</p>
<p>सचिव रोहित कुमार सिंह ने कहा कि जिस तरह की रिपोर्ट मिल रही हैं, <span>उसे देखते हुए भारत में मसूर उत्पादन 16-17 लाख टन के उच्चतम स्तर तक पहुंच सकता है। भारत का मसूर उत्पादन विश्व में सर्वाधिक होगा। उन्होंने कहा कि किसानों और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है। मौसम की गड़बड़ी के बावजूद दालों की कीमतें उचित नियंत्रण में रही हैं। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सीजन से पहले रजिस्ट्रेशन और मार्केट रेट पर दालों की खरीद जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।</span>&nbsp;</p>
<p>दालों की घरेलू खपत को पूरा करने के लिए भारत आयात पर निर्भर है। गत वर्षों में देश के मसूर उत्पादन में काफी उतार-चढ़ाव रहा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017-18 में मसूर का उत्पादन 16.22 लाख टन रहा था जो 2019-20 में घटकर 11.03 लाख टन रह गया। इसके बाद मसूर उत्पादन में बढ़ोतरी हुई और 2022-23 में 15.59 लाख टन तक पहुंच गया था।</p>
<p>इस साल रबी सीजन में 12 जनवरी तक दलहन की कुल बुवाई पिछले सीजन के मुकाबले 7.83 लाख हेक्टेयर कम रही है जबकि मसूर की बुवाई का क्षेत्र 1.06 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। मसूर की बुवाई का क्षेत्र बढ़ने से उत्पादन में बढ़ोतरी का अनुमान है। हाल के वर्षों में मसूर का एमएसपी बढ़ने और अच्छे दाम मिलने से किसान इसे उगाने के लिए प्रेरित हुए हैं।</p>
<p><strong>ग्लोबल पल्स कन्वेंशन के लिए रोडशो आयोजित </strong></p>
<p>नई दिल्ली में आगामी 14 से 17 फरवरी तक आयोजित होने वाले ग्लोबल पल्स कन्वेंशन के सिलसिले में शुक्रवार को रोड शो कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दलहन उद्योग का यह प्रमुख आयोजन 18 वर्षों के बाद भारत में नेफेड के साथ आयोजित किया जा रहा है। ग्लोबल पल्स कॉन्फेडरेशन (जीपीसी) और नेफेड की ओर से आयोजित होने वाले इस वार्षिक सम्मेलन में दलहन उद्योग से जुड़े 40 देशों के लगभग 800 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।</p>
<p>जीपीसी बोर्ड के अध्यक्ष विजय अयंगर का कहना है कि इस वर्ष जीपीसी के नई दिल्ली सम्मेलन का समय और स्थान बहुत महत्वपूर्ण है। भारत ने अपने घरेलू दलहन उत्पादन को बढ़ाने और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सस्ती दालें उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए हैं। कार्यक्रम में नेफेड के प्रबंध निदेशक रितेश चौहान, अतिरिक्त प्रबंध निदेशक सुनील कुमार सिंह और दलहन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थिति रहे।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत में मसूर के रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद, विश्व में होगा सर्वाधिक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[&amp;apos;पीएम किसान ट्रैक्टर योजना&amp;apos; निकली फर्जी, जानिए दावे की सच्चाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-kisan-tractor-scheme-turned-out-to-be-fake-know-the-truth-of-the-claim.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 12 Jan 2024 12:03:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-kisan-tractor-scheme-turned-out-to-be-fake-know-the-truth-of-the-claim.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने किसानों के लिए 'पीएम किसान ट्रैक्टर योजना' शुरू की है। इसके तहत सरकार किसानों को ट्रैक्टर खरीदने पर सब्सिडी दे रही है। बहुत से किसान इस दावे को सच मान रहे थे, लेकिन यह दावा फर्जी निकला। केंद्र सरकार की 'पीएम किसान ट्रैक्टर योजना' नाम से कोई स्कीम नहीं है।&nbsp;</p>
<p>सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने किसानों की मदद के लिए 'पीएम किसान ट्रैक्टर योजना' की शुरुआत की है। इसके साथ एक वेबसाइट का लिंक भी दिया जा रहा है जिस पर लॉगिन कर स्कीम का लाभ लेने की बात कही गई है। लेकिन भारत सरकार के पीआईबी ने इस वायरल दावे की सच्चाई का पता लगाया तो यह स्कीम और वेबसाइट फर्जी निकली।</p>
<p><strong>पीआईबी का फैक्ट चेक</strong></p>
<p>पीआईबी ने 'पीएम किसान ट्रैक्टर योजना' को लेकर किए जा रहे दावे का फैक्ट चेक किया है। पीआईबी फैक्ट चेक के मुताबिक, एक फेक वेबसाइट किसानों को कृषि मंत्रालय की 'पीएम किसान ट्रैक्टर योजना' के तहत सब्सिडी उपलब्ध कराने का दावा कर रही है। भारत सरकार की ऐसी कोई स्कीम नहीं है। यह वेबसाइट फर्जी है और इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। कृषि मंत्रालय ऐसी कोई स्कीम नहीं चला रहा है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65a0dc1ba06e3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ 'पीएम किसान ट्रैक्टर योजना' निकली फर्जी, जानिए दावे की सच्चाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65a0dc1ba06e3.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर&amp;#45;पश्चिम व मध्य भारत में बारिश की संभावना, राजस्थान&amp;#45;एमपी में ओलावृष्टि के आसार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/severe-cold-in-north-western-and-central-india-chances-of-rain-or-hailstorm-in-the-next-two-days.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 08 Jan 2024 16:51:39 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/severe-cold-in-north-western-and-central-india-chances-of-rain-or-hailstorm-in-the-next-two-days.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर और मध्य भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले 24 घंटे में उत्तर भारत में कोहरे और ठंड की स्थिति बनी रहेगी। उसके बाद कोहरा धीरे-धीरे कम होगा। पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्यप्रदेश में कहीं-कहीं ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है जबकि उत्तर पश्चिम और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में बारिश हो सकती है।&nbsp;</p>
<p>मौसम विभाग की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते 9 जनवरी को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है। उत्तर पश्चिमी और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में 9 जनवरी को कहीं-कहीं बारिश की संभावना है। महाराष्ट्र और गुजरात में कुछ स्थानों पर 10 जनवरी तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। अगले 5 दिनों के दौरान देश के उत्तरी भागों में न्यूनतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना नहीं है।&nbsp;</p>
<p><strong>राजस्थान में ओलावृष्टि और शीतलहर की संभावना&nbsp;</strong></p>
<p>पूर्वी राजस्थान में 8 और 9 जनवरी को और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 9 जनवरी को कहीं-कहीं ओलावृष्टि होने का अनुमान है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और बिहार के कुछ इलाकों में अगले दो-तीन दिनों तक रात और सुबह के समय घना कोहरा रहेगा। 12 और 13 जनवरी को उत्तरी राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में शीत लहर की संभावना है। 08-10 जनवरी के दौरान राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में और 08 जनवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शीत दिवस की स्थिति रहेगी।&nbsp;</p>
<p><strong>गेहूं किसानों को सलाह&nbsp;</strong></p>
<p>भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल के निदेशक <strong>डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया गेहूं की फसल को इस ठंड से कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि फायदा ही है। उन्होंने किसानों को फसल पर नजर बनाए रखने और हल्की सिंचाई व उर्वरक की सामान्य मात्रा के उपयोग की सलाह दी है। डॉ. सिंह का कहना है कि अगर कोहरे की वजह से गेहूं की पत्तियों पर पीलापन आता है तो चिंता की बात नहीं है। मौसम खुलने के साथ यह पीलापन भी कम हो जाएगा।&nbsp;</p>
<p><strong>11 जनवरी के बाद साफ होगा मौसम</strong></p>
<p>घने कोहरे और कड़ाकें की ठंड से 11 जनवरी के बाद थोड़ी राहत मिलेगी। हल्की धूप खिलने लग जाएगी जिससे मौसम भी साफ होगा। हालांकि दिन और रात का जो कोहरा है वो वैसा ही बना रहेगा और शीत लहर भी चलती रहेगी लेकिन धूप निकलने की वजह से लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर-पश्चिम व मध्य भारत में बारिश की संभावना, राजस्थान-एमपी में ओलावृष्टि के आसार ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शाकाहारी थाली साल भर में 12 फीसदी महंगी, प्याज, टमाटर व दालों की महंगाई का असर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cost-of-the-veg-thali-rose-12-per-cent-on-year-basis-due-to-increase-in-price-of-onion-tomato-and-pulses.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 08 Jan 2024 14:22:09 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cost-of-the-veg-thali-rose-12-per-cent-on-year-basis-due-to-increase-in-price-of-onion-tomato-and-pulses.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले एक साल में शाकाहारी थाली 12 फीसदी महंगी हो गई है। क्रिसिल मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स (एमआईएंडए) की ओर से जारी फूड प्लेट कॉस्ट इंडीकेटर के अनुसार, सालाना आधार पर शाकाहारी थाली की लागत में 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि नॉन-वेज भोजन की लागत में 4 फीसदी की गिरावट आई।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि शाकाहारी थाली की लागत में वृद्धि का कारण प्याज और टमाटर की कीमतों में क्रमशः 82 प्रतिशत और 42 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है। दालों की कीमतें, जो शाकाहारी थाली की लागत का 9 प्रतिशत है, भी साल-दर-साल 24 प्रतिशत बढ़ी है। नॉन-वेज थाली की कीमत में गिरावट अधिक उत्पादन के बीच ब्रॉयलर की कीमतों में सालाना आधार पर 15 फीसदी की गिरावट के कारण आई।</p>
<p>दिसंबर महीने में खाद्य महंगाई से थोड़ी राहत मिली है। दिसंबर में प्याज और टमाटर की कीमतों में गिरावट के कारण घर में बनी शाकाहारी और मांसाहारी थाली की लागत में मासिक आधार पर क्रमशः 3 प्रतिशत और 5 प्रतिशत की कमी आई।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि त्योहारी सीजन खत्म होने के साथ ही प्याज और टमाटर की कीमतों में मासिक आधार पर 14 प्रतिशत और 3 प्रतिशत की कमी के कारण घर पर बनी शाकाहारी और मांसाहारी थाली की कीमतें कम हुईं। ब्रॉयलर की कीमत में महीने-दर-महीने 5-7 प्रतिशत की गिरावट के कारण नॉन-वेज थाली की लागत में तेजी से गिरावट आई है, जो लागत का 50 प्रतिशत है।</p>
<p>घर पर थाली तैयार करने की औसत लागत की गणना उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में प्रचलित इनपुट कीमतों के आधार पर की जाती है। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि थाली की कीमत में बदलाव लाने वाले तत्व (अनाज, दालें, ब्रॉयलर, सब्जियां, मसाले, खाद्य तेल और रसोई गैस) हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ शाकाहारी थाली साल भर में 12 फीसदी महंगी, प्याज, टमाटर व दालों की महंगाई का असर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सल्फर कोटेड यूरिया के दाम तय, मिलेगा 12.5 फीसदी महंगा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/price-of-sulfur-coated-urea-fixed-will-be-12.7-percent-costlier.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 06 Jan 2024 17:28:38 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/price-of-sulfur-coated-urea-fixed-will-be-12.7-percent-costlier.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने सल्फर कोटेड यूरिया के दाम तय कर दिए हैं। यूरिया गोल्ड नाम वाले सल्फर कोटेड यूरिया का रेट नीम कोटेड यूरिया के मुकाबले करीब 12.50 फीसदी महंगा होगा। सल्फर कोटेड यूरिया का 40 किलो का बैग नीम कोटेड यूरिया के 45 किलो के बैग के दाम पर मिलेगा।</p>
<p>रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने सभी उर्वरक कंपनियों के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीएमडी को पत्र भेजकर बताया है कि आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने सल्फर कोटेड यूरिया की शुरुआत के लिए जो मंजूरी दी थी उस पर आगे बढ़ते हुए सल्फर कोटेड यूरिया के 40 किलो के बैक में शुरूआत को संबंधित अथारिटी से मंजूरी मिल गई है।</p>
<p>सल्फर कोटेड यूरिया के 40 किलोग्राम के बैग का अधिकतम खुदरा मूल्य (जीएसटी समेत)<span> नीम कोटेड यूरिया के 45 किलोग्राम बैग के बराबर 266.50 रुपये रहेगा। </span>सल्फर कोटेड यूरिया के बैग की कीमत तो नीम कोटेड यूरिया के बराबर ही होगी, लेकिन इसमें 5 किलो यूरिया कम होगा। यानी सल्फर कोटेड यूरिया मीम कोटेट यूरिया से करीब 12.50 फीसदी महंगा पड़ेगा। पत्र में कहा गया है कि मंत्रालय की ओर से इस बारे में जल्द ही अधिसूचना जारी की जाएगी।</p>
<p>पिछले साल 28 जून, 2023 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने "यूरिया गोल्ड" के नाम से बिकने वाले सल्फर कोटेड यूरिया के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x_6599416f26034.jpg" alt="" /></p>
<p>उद्योग सूत्रों के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र की उर्वरक उत्पादक कंपनी नेशनल फर्टिलाइर्स लिमिटेड (एनएफएल) के पास सल्फर कोटेट यूरिया की टेक्नोलॉजी है और उसने इसका उत्पादन भी किया है। पहले उर्वरक उद्योग को सल्फर कोटेड यूरिया के लिए 10 फीसदी अधिक दाम लेने की अनुमति थी। इसके साथ ही आरसीएफ ने भी सल्फर कोटेड यूरिया का उत्पादन शुरू किया था।</p>
<p>सरकार के ताजा फैसले के बाद सल्फर कोटेड यूरिया का उत्पादन बढ़ने की संभावना है। इसके चलते किसानों को फसलों की उर्वरक जरूरत के मुताबिक एक और उत्पाद उपलब्ध हो जाएगा।&nbsp;</p>
<p>सल्फर कोटेड यूरिया सल्फर के फोर्टिफिकेशन से तैयार किया जाता है। सामान्य यूरिया में 46 फीसदी नाइट्रोजन (एन) होता है। यूरिया गोल्ड मेंं 37 फीसदी नाइट्रोजन होगा जबकि इसमें 17 फीसदी सल्फर (एस) होगा। इसका फायदा जहां मिट्टी में सल्फर की कमी है वहां लिया जा सकेगा साथ ही दालों और तिलहन फसलों में काफी प्रभावी हो सकता है। भारत दालों और खाद्य तेल दोनों में आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में अगर दाल और तिलहन उत्पादक क्षेत्र में यूरिया गोल्ड को बढ़ावा दिया जाता है तो यह उत्पादन बढ़ाने में मददगार होगा।&nbsp;</p>
<p>इसके साथ ही इसका फायदा नाइट्रोजन यूज एफिशिएंसी (एनयूई) में भी मिलेगा। सल्फर की कोटिंग होने से नाइट्रोजन की रिलीज प्रक्रिया की धीमी हो जाती है। किसानों द्वारा यूरिया उपयोग का फैसला फसल की हरियाली को देखकर लिया जाता है इसमें कमी आने पर वह यूरिया अप्लाई करते हैं। अगर फसल अधिक समय तक हरी रहेगी तो यह स्थिति किसानों की यूरिया उपयोग के फैसले को प्रभावित करेगी और उसका नतीजा गेहूं और धान में यूरिया की कम खपत के रूप में आ सकता है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सल्फर कोटेड यूरिया के दाम तय, मिलेगा 12.5 फीसदी महंगा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मक्का से एथेनॉल बनाने पर जोर, प्रति लीटर 5.79 रुपये के प्रोत्साहन का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/emphasis-on-making-ethanol-from-maize-incentive-of-rs-5.79-per-liter-by-omcs.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 06 Jan 2024 13:51:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/emphasis-on-making-ethanol-from-maize-incentive-of-rs-5.79-per-liter-by-omcs.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने मक्का से बने एथेनॉल पर 5.79 रुपये प्रति लीटर के अतिरिक्त प्रोत्साहन का ऐलान किया है। मक्के से उत्पादित एथेनॉल का दाम 66.07 रुपये से बढ़ाकर 71.86 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। इससे अनाज आधारित एथेनॉल संयंत्र चलाने वाली कंपनियों को फायदा होगा। </span><span>केंद्र सरकार </span><span>मक्का से एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना चाहती है। इसके पीछे मक्का की खेती को बढ़ावा देने के अलावा चीनी उत्पादन में गिरावट की आशंका भी वजह है। पिछले महीने सरकार ने गन्ना जूस से एथेनॉल उत्पादन पर रोक लगा दी थी।&nbsp;</span><span></span></p>
<p>गन्ने जूस के अलावा कंपनियां बी-हैवी मोलासेज और सी-हैवी मोलासेस से भी एथेनॉल बनाती हैं। सी-हैवी मोलेसेज से बनने वाले एथेनॉल की कीमत सबसे कम है। केंद्र सरकार खाद्य सुरक्षा के मद्देनजर चीनी के उत्पादन में गिरावट की स्थिति से बचना चाहती है। इसलिए गन्ना जूस के बजाय शीरे या मक्का से एथेनॉल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सी-हैवी मोलासेस से एथेनॉल बनाने पर सरकारी तेल कंपनियां 6.87 रुपये प्रति लीटर इंसेंटिव देने की घोषणा कर चुकी हैं।</p>
<p>इस्मा के पूर्व डीजी और एथेनॉल इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञ <strong>अबिनाश वर्मा</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि मक्का से बने एथेनॉल के दाम बढ़ना अच्छी खबर है। इससे मक्का की खरीद को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन सिर्फ मक्का से एथेनॉल की मांग पूरी नहीं की जा सकती है। चावल से एथेनॉल उत्पादन को भी बढ़ावा मिलना चाहिए। <strong>ऑल इंडिया डिस्टलरीज एसोसिएशन (एआईडीए)</strong> <span>ने भी मक्का से उत्पादित एथेनॉल के दाम बढ़ाने के कदम का स्वागत किया है। </span></p>
<p>केंद्र सरकार मक्का से एथेनॉल उत्पादन को सरकार बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 4 जनवरी को कहा था कि सरकार जल्द ही मक्का के किसानों को एथेनॉल संयंत्रों से जोड़ेगी। किसानों के मक्का उगाने वाले खेत पेट्रोल पैदा करने वाले कुएं बन जाएंगे। अमित शाह का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल के साथ 20 एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है। इसके लिए लाखों टन एथेनॉल की आवश्यकता है। जो किसान मक्का उगाते हैं, <span>उन्हें सीधे एथेनॉल बनाने वाली फैक्ट्रियों से जोड़ देंगे।</span></p>
<p>&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मक्का से एथेनॉल बनाने पर जोर, प्रति लीटर 5.79 रुपये के प्रोत्साहन का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.3% रहने का अनुमान, लेकिन कृषि क्षेत्र की ग्रोथ घटी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indias-gdp-growth-estimated-but-agriculture-sector-growth-slows-down.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 05 Jan 2024 19:29:01 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indias-gdp-growth-estimated-but-agriculture-sector-growth-slows-down.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div dir="auto">भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है। चालू वित्त वर्ष 2023-24 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो एक साल पहले 7.2 प्रतिशत रही थी। खनन, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के अच्छे प्रदर्शन के कारण जीडीपी की ग्रोथ रेट बढ़ी है। लेकिन कृषि क्षेत्र की ग्रोथ रेट को बड़ा झटका लगा है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">चालू वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र में 1.8 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष दर्ज की गई 4 प्रतिशत की वृद्धि से काफी कम है। <span>कृषि क्षेत्र में यह पिछले आठ साल की सबसे धीमी ग्रोथ होगी। इसके पीछे </span>कमजोर मानसून और मौसम के बिगड़े मिजाज से कृषि को हुए नुकसान को वजह माना जा रहा है। इससे पहले 2015-16 में सूखे के चलते कृषि क्षेत्र की ग्रोथ घटकर महज 0.6 फीसदी रह गई थी।&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी राष्ट्रीय आय के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 2022-23 में 1.3 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर 6.5 प्रतिशत होने का अनुमान है। इसी तरह, चालू वित्त वर्ष में खनन क्षेत्र की वृद्धि 2022-23 में 4.1 प्रतिशत के मुकाबले 8.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वित्तीय सेवाओं, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं में इस वित्तीय वर्ष में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2013 में यह 7.1 प्रतिशत थी।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">एनएसओ के अनुसार, "वास्तविक जीडीपी या स्थिर (2011-12) कीमतों पर जीडीपी वर्ष 2023-24 में 171.79 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि वर्ष 2022-23 के लिए जीडीपी का अनंतिम अनुमान 160.06 लाख करोड़ रुपये है।" वर्ष 2023-24 के दौरान वास्तविक जीडीपी में वृद्धि 2022-23 में 7.2 फीसदी की तुलना में 7.3 फीसदी रहने का अनुमान है।&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">एनएसओ का अनुमान चालू वित्त वर्ष के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 7 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि अनुमान से अधिक है। वर्तमान अनुमान के अनुसार, अर्थव्यवस्था का आकार 2023-24 के दौरान 296.58 लाख करोड़ रुपये या 3.57 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"></div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.3% रहने का अनुमान, लेकिन कृषि क्षेत्र की ग्रोथ घटी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि क्षेत्र को औद्योगिक उपयोग के तौर पर देखने की जरूरत: प्रो. विजय पाल शर्मा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cacp-chairman-vijay-paul-sharma-says-need-to-look-at-agri-sector-beyond-food-consumption-into-industrial-applications.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 05 Jan 2024 15:08:13 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cacp-chairman-vijay-paul-sharma-says-need-to-look-at-agri-sector-beyond-food-consumption-into-industrial-applications.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) के चेयरमैन प्रो. विजय पाल शर्मा ने कृषि के औद्योगिक इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। नई दिल्ली में आयोजित बिजनेसलाइन एग्री एंड कमोडिटी समिट को संबोधित करते हुए सीएसीपी चेयरमैन ने कहा कि कृषि क्षेत्र को खाद्य जरूरतों को पूरा करने से आगे बढ़कर औद्योगिक उपयोग के तौर पर देखा जाना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>एथेनॉल का उदाहरण देते हुए प्रो. विजय पाल शर्मा ने कहा कि कृषि के औद्योगिक उपयोग की संभावनाएं तलाशनी होंगी। एथेनॉल उत्पादन में शुगर इंडस्ट्री अहम भूमिका निभा रही है। इसी तरह मक्का से भी एथेनॉल उत्पादन को काफी बढ़ावा मिल सकता है। प्रो. शर्मा ने कहा कि भारत में कृषि निर्यात बढ़ाने की बहुत क्षमता है। निर्यात में बढ़ोतरी की क्षमताओं का लाभ उठाना चाहिए। प्रो. शर्मा ने खेती की छोटी जोत की चुनौतियों को देखते हुए भूमि सुधारों की जरूरत पर जोर दिया है।</p>
<p>पिछले दिनों सरकार ने चीनी उत्पादन में गिरावट को देखते हुए गन्ना जूस से एथेनॉल बनाने पर रोक लगा दी थी। इस बीच, फ्यूल के तौर पर फूड के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ी है। एक तरफ खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंताएं हैं तो दूसरी तरफ खेती को मुनाफे का सौदा बनाने के लिए औद्योगिक इस्तेमाल की वकालत की जा रही है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही मक्का से एथेनॉल उत्पादन को प्रोत्साहन देने के योजना ला सकती है।&nbsp;</p>
<p><strong>खाद्य तेल का आयात पर चिंता</strong><br />सीएसीपी चेयरमैन प्रो. विजय पाल शर्मा ने देश में खाद्य तेलों के आयात पर चिंता जताते हुए कहा कि खाद्य तेल एक ऐसा सेगमेंट है जिसके आयात पर हमारी निर्भरता है। हमें इसके बारे में सोचना चाहिए।&nbsp;</p>
<p><strong>दालों में आत्मनिर्भरता पर जोर</strong><br />प्रोफेसर शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने पर ध्यान केंद्रित करने की घोषणा के साथ कृषि नीति में एक बड़ा बदलाव आया है। किसानों की आय और कल्याण कृषि नीति का केंद्र बिंदु है। उन्होंने कहा कि दालों में सरकार आत्मनिर्भरता हासिल करने का प्रयास कर रही है। दलहन की खरीद पर जोर दिया जा रहा है ताकि किसान दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित हो सकें। सरकार की एमएसपी नीति से मोटे अनाजों सहित विभिन्न फसलों को प्रोत्साहन मिला है।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_6597cdbe828eb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि क्षेत्र को औद्योगिक उपयोग के तौर पर देखने की जरूरत: प्रो. विजय पाल शर्मा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों से तूर खरीद के लिए पोर्टल लॉन्च, 2027 तक दालों में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/portal-launched-for-purchasing-tur-from-farmers-target-of-self-sufficiency-in-pulses-by-2027.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 04 Jan 2024 23:27:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/portal-launched-for-purchasing-tur-from-farmers-target-of-self-sufficiency-in-pulses-by-2027.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में किसानों से तूर खरीद के ऑनलाइन पोर्टल <span>ई-समृद्धि का </span>लोकार्पण किया। यह पोर्टल भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) द्वारा विकसित किया गया है। इसके जरिए किसानों को एडवांस में रजिस्टर कर तूर दाल की बिक्री में सुविधा होगी और उन्हें MSP या फिर इससे अधिक बाजार मूल्य का भुगतान डीबीटी के जरिए हो सकेगा।</p>
<p><span></span></p>
<p><span>"दलहन में आत्मनिर्भरता" पर राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए </span>केंद्रीय मंत्री <strong>अमित शाह</strong> ने कहा कि पिछले एक दशक में खाद्यान्न उत्पादन में बहुत बढ़ोतरी हुई है लेकिन दलहन में देश आज आत्मनिर्भर नहीं है। हालांकि, हमने मूंग और चने में आत्मनिर्भरता प्राप्त की है। <span>उन्होंने भरोसा जताया कि किसानों के सहयोग से भारत दिसंबर,&nbsp;</span><span>2027&nbsp;</span><span>से पहले दलहन उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन जाएगा और देश को एक किलो दाल भी आयात नहीं करनी पड़ेगी।&nbsp;</span></p>
<p><strong>एमएसपी से अधिक भाव पर भी हो सकेगी खरीद</strong></p>
<p>अमित शाह ने कहा कि पहले किसानों के सामने दुविधा थी कि अगर वे दलहन का उत्पादन करते थे तो उन्हें उचित दाम नहीं मिलता था। <span>लेकिन अब हमने निश्चित कर लिया है कि&nbsp;</span><span>जो किसान उत्पादन करने से पूर्व ही पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराएगा</span><span>,&nbsp;</span><span>उसकी दलहन को एमएसपी पर शत-प्रतिशत खरीदा जाएगा।</span><span>&nbsp;इस&nbsp;</span><span>पोर्टल पर रजिस्टर करने के बाद किसानों के दोनों हाथों में लड्डू होंगे।&nbsp;</span><span>फसल आने पर अगर दाम एमएसपी से ज्यादा होगा तो उसकी एवरेज निकाल कर किसान से ज्यादा मूल्य पर दलहन खरीदने का एक वैज्ञानिक फार्मूला बनाया गया है। इससे किसानों के साथ कभी अन्याय नहीं होगा।&nbsp;</span></p>
<p><span>किसानों से अपील करते हुए अमित शाह ने कहा कि वे पोर्टल पर रजिस्टर करें। प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी है कि सरकार उनकी दलहन खरीदेगी। उन्हें बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। इस शुरुआत से किसानों की समृद्धि, दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता और पोषण अभियान को मजबूती मिलेगी। साथ ही क्रॉप पैटर्न चेंजिंग के अभियान में गति आएगी और भूमि सुधार एवं जल संरक्षण के क्षेत्रों में भी बदलाव आएगा।&nbsp;</span></p>
<p><strong>मक्का का खेत बनेगा पेट्रोल का कुआं</strong>&nbsp;</p>
<p>तूर की तर्ज पर सरकार जल्द ही मक्का की खरीद के लिए भी पोर्टल शुरू करने जा रही है। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए लाखों टन इथेनॉल का उत्पादन करना है। नेफेड और एनसीसीएफ इसी पैटर्न पर आने वाले दिनों में मक्के का रजिस्ट्रेशन चालू करने वाले हैं। जो किसान मक्का बोएगा, उसके लिए हम सीधा इथेनॉल बनाने वाली फैक्ट्री के साथ एमएसपी पर मक्का बेचने की व्यवस्था कर देंगे। इससे उनका कोई शोषण नहीं होगा और पैसा सीधा उनके बैंक अकाउंट में जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे आपका खेत मक्का उगाने वाला नहीं बल्कि पेट्रोल बनाने वाला कुआं बन जाएगा।</p>
<p><strong>सामूहिक प्रयासों से दालों में बनेंगे आत्मनिर्भर: मुंडा&nbsp;</strong></p>
<p>इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>अर्जुन मुंडा</strong> ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए कई पहल की हैं। दो शीर्ष सहकारी संस्थाओं द्वारा ऐसा पोर्टल बनाया गया है, जहां किसान पंजीयन पश्चात स्टॉक एंट्री कर पाएंगे और स्टॉक के वेयरहाउस पहुंचते ई-रसीद जारी होने पर किसानों को सीधा पेमेंट पोर्टल से बैंक खाते में होगा। पोर्टल को वेयरहाउसिंग एजेंसियों के साथ एकीकृत किया है। मुंडा ने सबके सामूहिक प्रयासों से ही भारत दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा।</p>
<p>इस अवसर पर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य व सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, सहकारिता राज्यमंत्री बी.एल, वर्मा, नेफेड के अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह, एनसीसीएफ के अध्यक्ष विशाल सिंह, केंद्रीय सहकारिता सचिव ज्ञानेश कुमार, उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह,<span> कृषि सचिव मनोज अहूजा</span>, <span>नेफेड के एमडी रितेश चौहान और एनसीसीएफ की एमडी ए. चंद्रा मौजूद रहे। </span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों से तूर खरीद के लिए पोर्टल लॉन्च, 2027 तक दालों में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज निर्यात पर प्रतिबंध ने तोड़ी किसानों की कमर, अब रोक हटने का इंतजार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/ban-on-onion-export-broke-the-back-of-farmers-now-waiting-for-the-ban-to-be-lifted.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 03 Jan 2024 06:32:51 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/ban-on-onion-export-broke-the-back-of-farmers-now-waiting-for-the-ban-to-be-lifted.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चुनावी साल में महंगाई पर अंकुश लगाने की सरकार की कोशिशें किसानों पर भारी पड़ रही हैं। प्याज उत्पादक महाराष्ट्र की थोक मंडियों में प्याज के दाम एक महीने में घटकर लगभग एक तिहाई रह गए हैं, <span>जिससे किसानों की लागत निकलना भी मुश्किल है। विपक्षी दल प्याज निर्यात के मुद्दे पर लगातार सरकार को घेरने में जुटे हैं। </span></p>
<p><span>इस बीच</span>, <span>उम्मीद है कि सरकार प्याज निर्यात पर प्रतिबंध हटाने पर विचार कर सकती है।&nbsp;</span>पिछले एक महीने के दौरान प्याज के खुदरा और थोक दाम औसतन 30-35 फीसदी तक गिर चुके हैं। प्याज उत्पादक इलाकों की कृषि मंडियों में यह गिरावट और भी ज्यादा है। प्याज की महंगाई से उपभोक्ताओं को तो राहत मिली है लेकिन किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा।&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र में शेतकरी संगठन के नेता <strong>अनिट घनवट</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि प्याज निर्यात पर पाबंदियों और प्रतिबंध लगने से किसानों को लगभग 3000 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान पहुंचा है। देश के प्याज उत्पादक किसानों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। आम तौर पर प्याज के निर्यात पर अक्टूबर से दिसंबर के बीच रोक लगती है और नई फसल आने पर निर्यात शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार सरकार ने दिसंबर से मार्च तक रोक लगाकर किसानों की पूरे सीजन की कमाई पर पानी फेर दिया। क्योंकि खरीफ के प्याज को अधिक दिनों तक स्टोर नहीं किया जा सकता है। ऐसे में आवक बढ़ने से प्याज के दाम और भी नीचे जा सकते हैं। इसलिए निर्यात पर लगी रोक हटाना बेहद जरूरी है।&nbsp;</p>
<p>प्याज के मुद्दे पर महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई हुई है। लोकसभा चुनाव से पहले सरकार किसानों की नाराजगी को देखते हुए निर्यात खोलने पर विचार कर सकती है। क्योंकि पिछले कुछ दिनों से प्याज के खुदरा दाम तो काबू में है लेकिन आवक बढ़ने से कृषि मंडियों में प्याज के दाम तेजी से गिरे हैं।&nbsp;उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर प्याज मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार ने 2023 के खरीफ सीजन में अब तक 25 हजार टन प्याज की खरीद की है। सरकार ने प्याज के बफर स्टॉक के लक्ष्य को बढ़ाकर 7 लाख टन कर दिया है। यह खरीद नेफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से की जाएगी। इस लक्ष्य के मुकाबले अभी तक करीब 5.3 लाख टन प्याज की खरीद हो चुकी है।</p>
<p>उपभोक्ता मामलों के सचिव <strong>रोहित कुमार सिंह</strong> का कहना है कि निर्यात पर प्रतिबंध और बाजार हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप प्याज की औसत खुदरा कीमतें एक महीने में 59 रुपये से घटकर 39 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं। पिछले एक महीने में औसत थोक कीमतें भी करीब 35 फीसदी घटी हैं। सरकार प्याज की मांग, <span>आपूर्ति और उपलब्धता की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। </span></p>
<p>प्याज के गिरते भाव और गरमाई राजनीति के मद्देनजर सरकार सहकारी संस्थाओं के जरिए प्याज निर्यात का रास्ता खोल सकती है। कई देशों में प्याज की मांग है जिसे भारत निर्यात के जरिए पूरा कर सकता है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने प्याज की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए 17 अगस्त को प्याज पर 40 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी लगा दी थी। इसके बाद प्याज के निर्यात पर 800 डॉलर प्रति मीट्रिक टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) लगा दिया था। यह भी नाकाफी लगा तो सरकार ने 7 दिसंबर को प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज निर्यात पर प्रतिबंध ने तोड़ी किसानों की कमर, अब रोक हटने का इंतजार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश का चीनी उत्पादन 7.7 प्रतिशत घटकर 112 लाख टन रहा: एनएफसीएसएफ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-sugar-production-declined-by-7.7-percent-to-112-lakh-tonnes-according-to-nfcsf.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 02 Jan 2024 17:33:49 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-sugar-production-declined-by-7.7-percent-to-112-lakh-tonnes-according-to-nfcsf.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के चीनी उत्पादन में इस साल कमजोर मानसून और अल नीनो प्रभाव के चलते काफी गिरावट आई है। चालू पेराई सत्र 2023-24 के पहले तीन महीनों (<span>अक्टूबर से दिसंबर</span>)<span> के दौरान चीनी का उत्पादन </span>7.7 प्रतिशत घटकर 112 लाख टन रह गया है। पिछले साल इसी अवधि में चीनी का उत्पादन 121.35 लाख टन रहा था। इस गिरावट के पीछे देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम उत्पादन वजह है।</p>
<p>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ (एनएफसीएसएफ) के अनुसार, पेराई सत्र 2023-24 में देश का कुल चीनी उत्पादन 305 लाख टन होने का अनुमान लगाया है, जो 2022-23 सीजन में 330.90 लाख टन उत्पादन से करीब 26 लाख टन कम है।</p>
<p>एनएफसीएसएफ के मैनेजिंग डायरेक्टर <strong>प्रकाश नायकनवरे</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि प्रारंभिक अनुमानों के मुकाबले देश में चीनी उत्पादन की स्थिति में थोड़ा सुधार आया है इसलिए देश में स्थानीय खपत के लिए नई चीनी की कुल उपलब्धता 305 लाख टन होने की उम्मीद है।</p>
<p>एनएफसीएसएफ के आंकड़ों के अनुसार, देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में दिसंबर तक चीनी उत्पादन 38.20 लाख टन था, जबकि एक साल पहले इस अवधि तक यह 47.40 लाख टन था। उत्तर प्रदेश में दिसंबर तक 34.65 लाख टन से अधिक चीनी का उत्पादन हुआ, जबकि एक साल पहले की अवधि में यह 30.80 लाख टन था। कर्नाटक में चीनी उत्पादन 24 लाख टन रहा, जबकि उक्त अवधि में यह 26.70 लाख टन था।</p>
<p>देश में औसत चीनी रिकवरी 9.17 प्रतिशत है। पेराई सीजन के अंत तक उत्तर प्रदेश में 115 लाख टन, महाराष्ट्र में 90 लाख टन, कर्नाटक में 42 लाख टन, तमिलनाडु में 12 लाख टन और गुजरात में 10 लाख टन चीनी का उत्पादन होने की उम्मीद है।</p>
<p>प्रकाश नायकनवरे का कहना है कि चीनी उत्पादन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए एथेनॉल उत्पादन पर मौजूदा प्रतिबंध में कुछ ढील दी जा सकती है। क्योंकि सीजन की शुरुआत में अनुमानित 290 लाख टन चीनी उत्पादन में लगभग 15 लाख टन की वृद्धि होने की उम्मीद है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश का चीनी उत्पादन 7.7 प्रतिशत घटकर 112 लाख टन रहा: एनएफसीएसएफ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महंगाई रोकने की रणनीति में उपभोक्ता हितों के सामने किसानों के हित पड़े कमजोर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmers-lose-as-government-rushes-to-control-food-inflation-for-consumers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 02 Jan 2024 08:59:23 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmers-lose-as-government-rushes-to-control-food-inflation-for-consumers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र में सत्तारुढ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार 2024 लोक सभा चुनावों में महंगाई को मुद्दा बनने से रोकने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। मोदी के पहले कार्यकाल 2014 से 2019 में 2019 के लोक सभा चुनावों में जाने के समय महंगाई नियंत्रण में थी। लेकिन मोदी के दूसरे कार्यकाल में सरकार जब 2024 के चुनावों में जा रही है तो महंगाई के मोर्चे पर स्थिति 2019 जैसी नहीं है। जहां खुदरा महंगाई दर पर नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बनी हुई है वहीं खाद्यान्न महंगाई दर लगातार दो अंकों में बनी हुई है। नवंबर के ताजा आंकड़ों में तो दालों की खुदरा महंगाई दर 20 फीसदी को पार कर गई है। ऐसे में महंगाई को नियंत्रण में लाने के लिए अपनाई जा रही नीतियों में उपभोक्ता हितों के संरक्षण के चलते किसानों के हित कमजोर पड़ गये हैं।</p>
<p>मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) का औसत 4.3 फीसदी था जबकि दूसरे कार्यकाल में नवंबर, 2023 तक यह 5.8 फीसदी रही है। वहीं जहां पहले कार्यकाल में खाद्य महंगाई दर खुदरा महंगाई दर से कम थी जबकि दूसरे कार्यकाल में खाद्य महंगाई दर का औसत नवंबर, 2023 तक की एक साल की अवधि में 6.4 फीसदी रही है।</p>
<p><strong>रूरल वॉयस</strong> के साथ एक अनौपचारिक बातचीत में सरकार में नीतिगत मामलों के एक वरिष्ठ एक्सपर्ट ने कहा था कि सरकार कोई भी फैसला उत्पादक और उपभोक्ता हितों के बीच संतुलन बनाकर लेती है और जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता हितों का पलड़ा भारी रहता है। इस बात को समझने के लिए सरकार द्वारा पिछले दो साल में कृषि उत्पादों के आयात और निर्यात से जुड़े फैसलों को देखने की जरूरत है। मसलन यूक्रेन और रूस से बीच युद्ध शुरू होने के बाद सरकार गेहूं, चावल, चीनी, खाद्य तेल, दालों और प्याज को लेकर बड़े फैसले किये। इस फैसलों के पीछे घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाना मुख्य मकसद रहा है ताकि खाद्य उत्पादों की घरेलू कीमतों को बढ़ने से रोका जा सके। इसके लिए जहां आयात में बढ़ोतरी के लिए शुल्क दरों में कटौती और मुक्त आयात की अनुमति जैसे फैसले लिये गये वहीं दूसरी ओर निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए निर्यात पर प्रतिबंध, निर्यात शुल्क में बढ़ोतरी और न्यूनतम निर्यात मूल्य में बढ़ोतरी जैसे कदम उठाये गये।</p>
<p>साल 2020 के अंत में पॉम ऑयल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी बढ़ोतरी की स्थिति से निपटने के लिए क्रूड पॉम पर सीमा शुल्क में कटौती की। उसके बाद सोयाबीन और सुरजमुखी तेल पर यह कटौती करते हुए इन पर सीमा शुल्क शून्य कर दिया। वहीं रिफाइंड तेल पर भी सीमा शुल्क को घटाकर 12.5 फीसदी कर दिया। यूक्रेन और रुस युद्ध के दौरान खाद्य तेलों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई थी और घेरलू बाजार में लगभग सभी खाद्य तेलों की कीमतें 200 रुपये प्रति लीटर को पार कर गई थी। सरसों तेल की कीमत को 300 रुपये प्रति लीटर के करीब चली गई थी। सीमा शुल्क दरों में कटौती के चलते अभी क्रूड ऑयल पर 5.5 फीसदी का प्रभावी सीमा शुल्क लागू है। वहीं रिफाइंड तेल पर सीमा शुल्क की दर 13.75 फीसदी है। सरकार ने रियायती सीमा शुल्क दरों पर खाद्य तेलों का आयात जारी रखा है जबकि इस साल सरसों किसानों को बड़े स्तर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम दाम पर सरसों बेचनी पड़ी। चालू रबी बुआई सीजन में देश के सबसे बड़े सरसों उत्पादक राज्य राजस्थान में सरसों के क्षेत्रफल में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। देश में खाद्य तेलों का आयात खपत के करीब 65 फीसदी तक पहुंच गया है।</p>
<p>वहीं दालों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए लगातार सीमा शुल्क दरों कमी की गई और अधिकांश दालों के आयात को मुक्त श्रेणी में डाल दिया गया है जिसे 31 मार्च, 2025 तक बढ़ाने का आदेश दिसंबर, 203 में ही जारी किया गया ताकि आयातकों को भरोसा रहे कि वह बिना किसी चिंता के अगले साल तक के आयात सौदे कर सकते हैं। इसके पहले 15 मई, 2021 को उड़द और अरहर के आयात पर मात्रात्मक प्रतिबंधों (क्यूआर) को समाप्त किया गया। यानी उड़द, अरहर और मसूर का शुल्क मुक्त आयात बिना किसी मात्रात्मक प्रतिबंध के 31 मार्च, 2025 तक किया जा सकेगा। पीली मटर और सफेद मटर के आयात पर भी मात्रात्मक प्रतिबंध समाप्त कर दिया गया है इसके साथ ही इन पर 50 फीसदी सीमा शुल्क और न्यूनतम 200 रुपये की आयात कीमत की शर्त भी समाप्त कर दिया गया है। अब केवल मूंग और चना के आयात पर ही 40 से 60 फीसदी का सीमा शुल्क और मात्रात्मक प्रतिबंध लागू हैं। लेकिन इन कोशिशों के बीच नवंबर, 2023 में दालों की खुदरा महंगाई दर 20 फीसदी को पार कर गई थी।</p>
<p>इसके पहले सरकार ने मई, 2022 में गेहूं क निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था और जून, 2023 में घरेलू मार्केट में गेहूं के लिए स्टॉक लिमिट लगा दी गई थी। पिछले दिनों स्टॉक लिमिट में कटौती की गई ताकि कीमतों पर लगाम लगाई जा सके। दिलचस्प बात यह है कि पिछले सरकार रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन के आंकड़े जारी कर रही थी जिसे बाद में कम किया गया है और रबी 2022-23 में रिकार्ड उत्पादन का दावा किया गया जिसे बाद में कम किया गया क्योंकि सरकारी खरीद और बाजार परिस्थिति दूसरी ही सचाई बयां कर रही थी। वहीं चावल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जहां पिछले साल ब्रोकन राइस का निर्यात बंद किया गया। वहीं 25 फीसदी सीमा शुल्क के साथ पारबॉयल्ड गैर बासमती चावल के ही निर्यात की अब अनुमति है जबकि बासमती के निर्यात पर 950 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य&nbsp; (एमईपी) लागू है। इसके अलावा पिछले साल पहले चीनी के निर्यात को रेस्ट्रिक्टेड लिस्ट में डाला गया जिसे अब 31 अक्तूबर, 20124 तक बढ़ा दिया गया है और इसके निर्यात का कोई कोटा जारी नहीं कर व्हवहारिक रूप से इसके निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके साथ ही चालू पेराई सीजन 2023-24 में चीनी उत्पादन के करीब 290 लाख टन रह जाने के अनुमानों के बीच दिसंबर, 2023 में आदेश&nbsp; जारी कर गन्ने के रस-जूस से सीधे एथेनॉल बनाने पर रोक लगाने का फैसला लागू कर गया। चालू सीजन में करीब 45 लाख टन चीनी का उपयोग एथेनॉल बनाने में होना था लेकिन अब इसे 17 लाख टन सीमित कर दिया गया। इस फैसले पर चीनी उद्योग ने कहा कि इसके चलते किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान में देरी होगी और सीजन लंबा चलेगा। वहीं प्याज के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।</p>
<p>लेकिन मोदी-दो के उलट मोदी-एक में नीतियां उत्पादकों के हितों के लिए बन रही थी मतलब किसानों को आयात से संरक्षण दिया जा रहा था। इसकी वजह घरेलू उत्पादन अधिक होने से अधिक स्टॉक थे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कृषि उत्पादों की कीमतें कम थी। मोदी &ndash;एक के दौरान चीनी निर्यात पर 10 हजार रुपये प्रति टन से अधिक तक की सब्सिडी दी और देश से चीनी का निर्यात 2021-22 में 110 लाख टन तक के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। यही नहीं 2022-23 में भारत चावल के वैश्विक बाजार में 40 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबड़े बड़ा निर्यातक देश बन गया। गेहूं का निर्यात 2021-22 में 70 लाख टन तक पहुंच गया था। एमएसपी पर अधिक खऱीद होने से केंद्रीय पूल में भारी खाद्यान्न स्टॉक के चलते ही सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत कोविड के दौरान एनएफएसए के अतिरिक्त पांच किलो खाद्यान्न मुफ्त में 80 करोड़ लोगों को दिया। 30 जून, 2017 के पहले दालों पर शून्य आयात शल्क की सुविधा को समाप्त कर दिया और अरहर व मसूर पर 10 फीसदी सीमा शुल्क लगा दिया था। चना और मसूर पर 2017 के अंत में सीमा शुल्क को बढ़ाकर 30 फीसदी कर दिया गया और चना व सफेद मटर पर सीमा शुल्क को बढ़ाकर 50 फीसदी करने के ससाथ ही दालों के आयात पर मात्रात्मक प्रतिबंध भी लगाये गये। यह वह समय था जब सरकार ने देश में दालों का उत्पादन बढ़ाने के लिए एमएसपी में भारी बढ़ोतरी के साथ सरकारी खऱीद की नीति अपनाई जिसकी सिफारिश दालों का आयात करने पर बनी मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन की अध्यक्षता वाली समिति ने की थी। इसके बाद मार्च, 208 में चना और काबुली चना पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 60 फीसदी और 40 फीसदी कर दिया गया। वहीं अप्रैल, 2018 में पीली मटर और सफेद मटर पर 200 रुपये प्रति किलो के न्यूनतम आयात मूल्य की शर्त लागू की गई। जिससे इनका आयात बंद हो गया।</p>
<p>वहीं खाद्य तेलों पर भी सीमा शुल्क में&nbsp; बढ़ोतरी कर क्रूड सोयाबीन व सुरजमुखी पर 35 फीसदी और क्रूड पॉम पर 44 फीसदी कर दी गई। यह कदम सितंबर, 2026 से जून 2018 के बीच उठाये गये।</p>
<p>लेकिन&nbsp; अब स्थिति बदल गई और उसका जिक्र खबर के पहले हिस्से में किया गया। चुनाव सामने है और सरकार की कृषि उत्पादों की कीमतों को नियंत्रित रखने की रणनीति जारी रहेगी। यानि&nbsp; किसानों के हितों की बजाय उपभोक्ता हितों के संरक्षण की नीति जा रहेगी। इसके साथ ही खरीफ के उत्पादन के आंकड़ों और रबी की संभावनाओ को देखते हुए खाद्य उत्पादों के मामले में सरकार को उदार आयात नीति जारी रखेगी क्योंकि उत्पादन में सुधार की संभावना बहुत बेहतर नहीं है। उत्पादन गिरने के चलते किसान को दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है कमजोर उत्पादन से उसकी आय कम हुई और सरकार वैश्विक बाजार की ऊंची कीमतों का फायदा उनको लेने नहीं देगी। समुन्नति एग्रो के डायरेक्टर प्रवेश शर्मा ने रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव में एक संबोधन में कहा था कि घरेलू किसानों को अंतरराष्ट्रीय कीमतो का फायदा नहीं मिलने से एक तरीके से उनके ऊपर 15 फीसदी का परोक्ष कर लादा गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महंगाई रोकने की रणनीति में उपभोक्ता हितों के सामने किसानों के हित पड़े कमजोर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि मूल्य 2024 और 2025 में दो&amp;#45;दो फीसदी घटने का अनुमानः आरबीआई रिपोर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agricultural-prices-projected-to-fall-by-2-per-cent-in-2024-and-2025-says-rbi-report.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 31 Dec 2023 02:30:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agricultural-prices-projected-to-fall-by-2-per-cent-in-2024-and-2025-says-rbi-report.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">वर्ष 2023 के दौरान कृषि जिंसों के दामों में औसतन सात फीसदी कमी का अनुमान है। अगले दो वर्षों के दौरान देखा जाए तो 2024 में कृषि जिंसों के दाम दो फीसदी और 2025 में भी इतना ही कम होने के आसार हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने 28 दिसंबर को जारी फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट में यह बात कही है। इसमें कहा गया है सप्लाई बढ़ने के कारण कृषि जिंसों की कीमतों में यह गिरावट आएगी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के फूड प्राइस इंडेक्स में वर्ष 2022 के मध्य से नरमी देखने को मिल रही है। नवंबर 2023 में इसमें सालाना आधार पर 10.7 प्रतिशत की गिरावट आई। सप्लाई बढ़ने पर आगे भी गिरावट जारी रहने का अनुमान है।</span></p>
<p><strong>अल नीनो खाद्य कीमतों के लिए चुनौती</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रिपोर्ट के अनुसार मध्य पूर्व में युद्ध का कमोडिटी की कीमतों पर सीमित असर पड़ा है। इससे पता चलता है कि मांग और आपूर्ति का संतुलन बेहतर हुआ है। हालांकि कृषि उत्पादन पर अल नीनो का असर अभी पूरी तरह दिखना बाकी है। घरेलू स्तर पर अल नीनो का प्रभाव कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में दाम कम हुए हैं तथा घरेलू स्तर पर बेहतर सप्लाई मैनेजमेंट से खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आरबीआई की रिपोर्ट में दूसरी कमोडिटी के बारे में भी बताया गया है। इसके मुताबिक हाल के महीनों में कमोडिटी के दाम में कमी को मध्य पूर्व में लड़ाई और वैश्विक स्तर पर हो रहे ध्रुवीकरण से चुनौती मिल रही है। हालांकि अभी इनका असर सीमित है, लेकिन अगर युद्ध का दायरा बढ़ा तो कमोडिटी के दाम बढ़ सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान और रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने पर सप्लाई चेन में रुकावटें बढ़ गई थीं। लेकिन इसमें सुधार के बाद ग्लोबल सप्लाई चेन प्रेशर इंडेक्स 26 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया।</span></p>
<p><strong>ग्रामीण महंगाई ज्यादा, मांग पर असर संभव</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रिपोर्ट में भारत के ग्रामीण क्षेत्रों की मांग का भी आकलन किया गया है। इसमें कहा गया है कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में महंगाई ज्यादा है। हाल के महीनों में यह ट्रेंड देखने को मिला है। इसका ग्रामीण क्षेत्रों की मांग पर असर हो सकता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने के कारण जुलाई 2023 में महंगाई दर 7.4 फीसदी पर पहुंच गई थी। उसके बाद धीरे-धीरे यह चार फीसदी के मध्यम अवधि के लक्ष्य की ओर आ रही है। नवंबर 2023 में यह 5.6 फीसदी थी, लेकिन इसे खाद्य कीमतों में वृद्धि का झटका लगने का डर है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">बैंक कर्ज के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि क्षेत्र को बैंक कर्ज इस सेक्टर के प्रदर्शन के अनुरूप ही रहता है। हाल में कृषि क्षेत्र की ग्रोथ कमजोर रही है। इसके साथ कृषि कर्ज का एनपीए बनना भी बढ़ा है। हाल में कृषि क्षेत्र के एनपीए में कुछ गिरावट आई है, फिर भी इसका स्तर ऊंचा है। </span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि मूल्य 2024 और 2025 में दो-दो फीसदी घटने का अनुमानः आरबीआई रिपोर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एथेनॉल प्लांट के लिए ब्याज छूट की अवधि जून, 2024 तक बढ़ी, इंडस्ट्री को होगा फायदा ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/incentive-deadline-of-interest-subvention-for-ethanol-plant-by-june-2024.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 29 Dec 2023 17:48:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/incentive-deadline-of-interest-subvention-for-ethanol-plant-by-june-2024.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार पेट्रोल में एथेनॉल ब्लैंडिंग के प्रोग्राम (ईबीपी) को लेकर काफी गंभीर है। यही वजह है कि एथेनॉल के नये संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करने वाली योजना के तहत छूट पाने वाली कंपनियों के लिए समयावधि बढ़ा दी गई है। इसके लिए 28 दिसंबर को अधिसूचना जारी कर कहा गया है कि ब्याज छूट योजना के तहत नए एथेनॉल प्लांट स्थापित करने के लिए खाद्य मंत्रालय से ली गई सैद्धांतिक मंजूरी की अवधि को एक साल के लिए बढ़ाकर 30 जून, 2024 कर दिया है।&nbsp;</p>
<p>यह अधिसूचना खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा जारी की गई है। अधिसूचना के मुताबिक एथेनॉल प्लांट की क्षमता विस्तार या नए प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिए ऐसे आवेदक जो जमीन खरीद चुके हैं और पर्यावरण मंजूरी ले चुके हैं, उन्हें ब्याज छूट योजना के लिए 22 अप्रैल, 2022 से छह महीने की समयसीमा दी गई थी। इसे बाद में 21 जून, 2023 तक बढ़ाया गया था। शुक्रवार को जारी अधिसूचना में इसे 30 जून, 2024 तक बढ़ा दिया है। इसमें कहा गया है कि बैंकों, एनसीडीसी, ईरेडा, एनबीएफसी या किसी अन्य वित्तीय संस्थान से कर्ज लेने वाली कंपनियों को यह सुविधा मिलेगी। कर्ज जारी होने की तिथि से 30 जून, 2024 या एक साल जो भी अधिक अवधि होगी, उस समय तय यह छूट दी जाएगी। यह सुविधा शीरे और खाद्यान्न से एथेनॉल बनाने वाली डिस्टलरीज को मिलेगी।&nbsp;</p>
<p>सरकार के इस कदम पर उद्योग सूत्रों का कहना है कि सरकार का यह कदम दर्शाता है कि वह एथेनॉल ब्लैंडिंग के प्रोग्राम को लेकर काफी गंभीर है और उसके लिए तय लक्ष्यों को हासिल करना चाहती है। यही वजह है कि सरकार खाद्यान्न आधारित एथेनॉल उत्पादन डिस्टलरीज की अधिक क्षमता स्थापना को प्रोत्साहित करना चाहती है।&nbsp;</p>
<p>सरकार ने पिछले दिनों गन्ने के जूस से सीधे एथेनॉल बनाने पर रोक लगा दी थी। जिसे ईबीपी के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा था। उद्योग सूत्रों का कहना है कि इस स्थिति में ईबीपी के लक्ष्यों को हासिल करना काफी मुश्किल है क्योंकि फीड स्टॉक की कमी एथेनॉल उत्पादन को प्रभावित करेगी। इसके पहले सरकार ने ग्रेन आधारित रिफाइनरियों&nbsp; के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के स्टॉक से चावल देना बंद कर दिया था। लेकिन 28 दिसंबर की अधिसूचना से उद्योग अधिक क्षमता स्थापित करने लिए सकारात्मक संकेत दिया गया है। इसके साथ ही चीनी मिलों को प्रोत्साहित करने के लिए सी-हैवी मोलेसेज से बनने वाले एथेनॉल की खरीद पर तेल कंपनियों ने 6.87 रूपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एथेनॉल प्लांट के लिए ब्याज छूट की अवधि जून, 2024 तक बढ़ी, इंडस्ट्री को होगा फायदा  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ की तरह रबी की दालों ने भी बढ़ाई चिंता, बुवाई रकबा करीब 11 लाख हेक्टेयर घटा, गेहूं के क्षेत्रफल में भी आई 4 लाख हेक्टेयर की कमी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/like-kharif-rabi-pulses-also-increased-the-concern-sowing-area-decreased-by-11-lakh-hectares.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 29 Dec 2023 17:32:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/like-kharif-rabi-pulses-also-increased-the-concern-sowing-area-decreased-by-11-lakh-hectares.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दाल उत्पादन के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश सफल होती नजर नहीं आ रही है। खरीफ सीजन की तरह ही रबी सीजन में भी दलहन फसलों के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ गई है क्योंकि इसके रकबे में करीब 11 लाख हेक्टेयर की कमी आ गई है। रबी की प्रमुख दलहन फसल चना की बुवाई करीब 9 लाख हेक्टेयर घट गई है। इसी तरह, रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई का रकबा 4 लाख हेक्टेयर से ज्यादा घट गया है। इसके अलावा, रबी की अन्य फसल धान, मूंगफली और सूरजमुखी की बुवाई भी घटी है। हालांकि, सरसों, मसूर, मक्का एवं जौ की बुवाई के क्षेत्रफल में इजाफा हुआ है।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्रालय के 29 दिसंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, गेहूं की बुवाई का रकबा 320.54 लाख हेक्टेयर रहा है, जो पिछले साल की समान अवधि में 324.58 लाख हेक्टेयर था। देश के कई इलाकों में धान की कटाई देरी से होने के चलते गेहूं की बुवाई पिछड़ी है। गेहूं की बुवाई अभी अंतिम चरण में है और पछैती किस्मों की बुवाई हफ्ते-दस दिन तक और चलेगी। इसी तरह, रबी की धान की बुवाई पिछले साल की समान अवधि के 16.57 लाख हेक्टेयर के मुकाबले घटकर 14.36 लाख हेक्टेयर रह गई है।</p>
<p>आंकड़ों के मुताबिक, दलहन फसलों की कुल बुवाई का रकबा 153.22 लाख हेक्टेयर से घटकर 142.49 लाख हेक्टेयर रह गया है। कुल रकबे में 10.72 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। रबी की प्रमुख दलहन फसल चना का क्षेत्रफल 8.75 लाख हेक्टेयर घटकर 97.05 लाख हेक्टेयर और उड़द एवं कुल्थी की बुवाई घटकर क्रमशः 4.78 लाख हेक्टेयर और 3.55 लाख हेक्टेयर पर आ गई है। पिछले साल 29 दिसंबर तक 105.80 लाख हेक्टेयर में चना की और उड़द एवं कुल्थी की बुवाई क्रमशः 5.77 लाख और 3.81 लाख हेक्टेयर में हुई थी। रबी की मूंग की बुवाई का रकबा 2.93 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.81 लाख हेक्टेयर रह गया है।</p>
<p>हालांकि, इस समय तक मसूर की बुवाई 66 हजार हेक्टेयर बढ़कर 18.68 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गई है। पिछले साल इस समय तक 18.02 लाख हेक्टेयर में इसकी बुवाई हुई थी। मटर की बुवाई 9.22 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 9.43 लाख हेक्टेयर रही है। अन्य दालों की बुवाई का रकबा 4.30 लाख हेक्टेयर से घटकर 3.77 लाख हेक्टेयर रह गया है।</p>
<p>जहां तक तिलहन फसलों की बात है, तो रबी की प्रमुख तिलहन फसल सरसों की बुवाई का कुल रकबा 95.63 लाख हेक्टेयर की तुलना में 1.65 लाख हेक्टेयर बढ़ गया है। 29 दिसंबर तक सरसों की बुवाई 97.29 लाख हेक्टेयर में हुई है। सरसों को छोड़कर बाकी सभी तिलहन फसलों की बुवाई घटी है। मूंगफली का क्षेत्रफल 1.02 लाख हेक्टेयर घटकर 3.32 लाख हेक्टेयर और सूरजमुखी का 71 हजार हेक्टेयर से घटकर 34 हजार हेक्टेयर रह गया है। अलसी का रकबा 2.98 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 2.85 लाख हेक्टेयर और तिल का 33 हजार हेक्टेयर से घटकर 25 हजार पर आ गया है।</p>
<p>मोटे अनाजों में ज्वार, बाजरा, मक्का और रागी का रकबा लगभग पिछले साल के समान स्तर पर ही रहा है। जौ का रकबा 7.32 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.01 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_658eb515ac69a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ की तरह रबी की दालों ने भी बढ़ाई चिंता, बुवाई रकबा करीब 11 लाख हेक्टेयर घटा, गेहूं के क्षेत्रफल में भी आई 4 लाख हेक्टेयर की कमी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तेल कंपनियों ने सी हैवी मोलेसेज से बने एथेनॉल के दाम 6.87 प्रति लीटर बढ़ाये, चीनी मिलों को बड़ा फायदा  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/oil-marketing-companies-increased-price-for-ethanol-made-from-c-heavy-molasses-good-news-for-sugar-industry.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 29 Dec 2023 17:12:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/oil-marketing-companies-increased-price-for-ethanol-made-from-c-heavy-molasses-good-news-for-sugar-industry.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सरकारी पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) ने सी हैवी शीरे (मोलेसेज) से बनने वाले एथेनॉल की कीमतों में 6.87 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। इस बढ़ोतरी के बाद सी हैवी शीरे से बनने वाले एथेनॉल की कीमत 56.28 रुपये प्रति लीटर हो गई है। जो अभी तक 49.41 रुपये प्रति लीटर थी। यह कीमत एथेनॉल सप्लाई वर्ष (ईएसवाई) 2023-24 के लिए तय की गई है। तेल कंपनियों का यह फैसला चीनी मिलों के लिए बड़ा फायदा लेकर आया है। चीनी मिलों को सी हैवी शीरे से बनने वाले एथेनॉल के लिए बढ़ी हुई कीमत 1 नवंबर, 2023 की पूर्व तारीख से ही मिलेगी। लेकिन यह कीमत एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2023-24 में सप्लाई होने वाले एथेनॉल के लिए ही मिलेगी। चीनी मिलों को एथेनॉल से होने वाली कमाई बढ़ने से वे गन्ना किसानों को भुगतान करने के लिए बेहतर स्थिति में होंगी।</p>
<p>सरकार का सी हैवी मोलेसेज से बनने वाले एथेनॉल का दाम बढ़ाने का यह फैसला एथेनॉल ब्लैंडिंग प्रोग्राम (ईबीपी) को लगातार बढ़ावा देने के मकसद से लिया गया है। पिछले दिनों सरकार ने एक आदेश जारी कर गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल बनाने पर रोक लगा दी थी। जिसे एथेनॉल ब्लैंडिंग प्रोग्राम को बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>सरकार के इस फैसले के बारे में<strong> रूरल वॉयस</strong> के साथ बातचीत करते हुए नेशनल फेडरेशल ऑफ कोआपरेटिव शुगर फैक्टरीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) के मैनेजिंग डायरेक्टर <strong>प्रकाश नायकनवरे</strong> ने कहा कि इस फैसले से उद्योग को प्रोत्साहन मिला है और यह कदम चीनी उद्योग को अधिक एथेनॉल उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करेगा। उनका कहना है कि हमें पांच रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की उम्मीद थी लेकिन सरकार ने 6.87 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर उद्योग को बेहतर संकेत दिया है।</p>
<p>चीनी मिलें गन्ने के सीरप से सीधे एथेनॉल बनाती हैं। इसके अलावा बी हैवी मोलेसेज और सी हैवी मोलेसेज से भी एथेनॉल बनता है। तीनों तरह से बनने वाले एथेनॉल की अलग-अलग कीमत है। सी-हैवी मोलेसेज से बनने वाले एथेनॉल की कीमत सबसे कम है। लेकिन ताजा बढ़ोतरी ने इसे आकर्षक बना दिया है और चीनी मिलें शीरे को दूसरे उद्योगो को बेचने की बजाय एथेनॉल उत्पादन के लिए अधिक इस्तेमाल करेंगी।</p>
<p>उद्योग सूत्रों से <strong>रूरल वॉयस</strong> को मिली जानकारी के मुताबिक तेल कंपनियों ने चालू आपूर्ति वर्ष (2023-24) के लिए 10 दिसंबर, 2023 तक 360 करोड़ लीटर के आपूर्ति कांट्रैक्ट किये हैं जिसमें से 52 करोड़ लीटर की आपूर्ति हुई है। इसका ब्लैंडिंग का औसत 10.50 फीसदी है। चीनी उद्योग के साथ इसमें से 218 करोड़ लीटर एथेनॉल के आपूर्ति कांट्रैक्ट हुए हैं और वहां से 22 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई है।</p>
<p>गन्ने के जूस से सीधे बनने वाले एथेनॉल की आपूर्ति 17 करोड़ लीटर रही है जबकि इसके तहत कुल 135 करोड़ लीटर एथेऩॉल के कांट्रैक्ट हुए हैं। वहीं चार करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति बी-हैवी मोलेसेज से बनने वाले एथेनॉल की हुई है। इस श्रेणी के एथेनॉल के लिए 83 करोड़ लीटर की मात्रा के कांट्रैक्ट हुए हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>रूरल वॉयस</strong> को प्राप्त जानकारी के मुताबिक तेल कंपनियों आईओसीएल, बीपीसीएल, एमआरपीएल और एचपीसीएल की ओर से बीपीसीएल के मुख्यलाय में डीजीएम बॉयोफ्यूएल द्वारा दाम बढ़ाने का पत्र जारी किया गया है।&nbsp;इसमें दाम बढ़ोतरी को इंसेंटिव कहा गया है और बताया गया है कि तेल कंपनियां इस बढ़ोतरी का परचेज आर्डर में इंसेंटिव को शामिल कर या क्रेडिट नोट के जरिये भुगतान करेंगी। यह इंसेंटिव ईएसवाई 2023-24 के लिए किये गये आवंटन हेतु सी-हैवी मोलेसेज से बनने वाले एथेनॉल के लिए है। ईएसवाई 2022-23 के आवंटन या परचेज आर्डर के तहत की जाने वाली आपूर्ति पर यह बढ़ोतरी लागू नहीं है।</p>
<p>केंद्र सरकार के फूड एवं पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन डिपार्टमेंट ने 15 दिसंबर, 2023 को सभी चीनी मिलों और डिस्टलरीज के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर को एक पत्र लिखकर सी-हैवी मोलेसेज से एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने का सलाह दी थी। सी हैवी मोलेसेज से अधिक से अधिक एथेनॉल का उत्पादन करने के निर्देश दिए गये थे। गन्ने से जूस से सीधे एथेनॉल बनाने पर रोक के चलते आवंटित मात्रा की भरपाई चीनी मिलें सी-हैवी मोलेसेज से बनने वाले एथेनॉल की अतिरिक्त आपूर्ति के जरिये कर सकती हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/03/image_750x500_604508a05fe86.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ तेल कंपनियों ने सी हैवी मोलेसेज से बने एथेनॉल के दाम 6.87 प्रति लीटर बढ़ाये, चीनी मिलों को बड़ा फायदा   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/03/image_750x500_604508a05fe86.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[2025 तक अरहर व उड़द के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति, आयातकों की राह आसान, आत्मनिर्भरता दूर की कौड़ी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/duty-free-import-of-pigeon-pea-and-urad-allowed-till-2025.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 28 Dec 2023 17:27:55 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/duty-free-import-of-pigeon-pea-and-urad-allowed-till-2025.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दालों की महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार दालों के आयात को सुगम बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती है। इसी दिशा में कदम उठाते हुए अरहर और उड़द के आयात के बारे में एक अहम फैसला लिया गया है। केंद्र सरकार ने अरहर और उड़द के आयात को 31 मार्च, 2025 तक मुक्त श्रेणी में रख दिया है। अभी तक यह छूट 31 मार्च, 2024 तक थी। गुरुवार को विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की ओर से इस बारे में अधिसूचना जारी की गई। इससे पहले सरकार ने मसूर दाल पर आयात शुल्क की छूट को एक साल के लिए बढ़ाया था।&nbsp;</p>
<p>सरकार के इस फैसले से दाल आयातकों को संकेत दिये गये हैं कि 31 मार्च, 2025 तक देश में दालों के आयात की उदार नीति जारी रहेगी। इसके साथ ही सरकार के इस कदम से दाल निर्यातक देशों को संकेत मिल गया है कि भारत में दालों आयात की संभावना का वह फायदा उठा सकते हैं। वहीं सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि वह दालों के मामले में देश के आत्मनिर्भरता हासिल करने को लेकर बहुत आश्वस्त नहीं है। अक्तूबर, 2023 में दालों की महंगाई दर साल 18.79 फीसदी पर पहुंच गई थी। जो नवंबर माह में बढ़कर 20.23 फीसदी पर पहुंच गई।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_658d611f941f4.jpg" alt="" /></p>
<p>इस साल कमजोर मानसून और अल-नीनो प्रभाव के चलते देश के दलहन उत्पादन को झटका लग सकता है। 2025 तक इन दालों के आयात को मुक्त श्रेणी में रखने से स्पष्ट है कि दलहन के मामले में देश में आत्मनिर्भरता नहीं है और घरेलू खपत को पूरा करने के लिए दालों का आयात बढ़ाना पड़ेगा। पिछले दिनों सरकार ने पीली मटर के आयात को भी शुल्क मुक्त कर दिया था।&nbsp;</p>
<p>मौजूदा वित्त वर्ष में अप्रैल-अक्टूबर के दौरान भारत ने कुल 19.63 लाख टन दालों का आयात किया। लोकसभा में एक लिखित जवाब में कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने यह जानकारी दी। भारत हर साल अपनी जरूरत का लगभग 10-15 फीसदी यानी करीब 25 लाख टन दालों का आयात करता है। लेकिन इस साल सात महीने में ही दालों का आयात 20 लाख टन के करीब पहुंच गया।&nbsp;</p>
<p><strong>उत्पादन और बुवाई में कमी&nbsp;</strong></p>
<p>कृषि मंत्रालय के पहले अग्रिम अनुमानों के मुताबिक, चालू खरीफ सीजन में दलहन उत्पादन 71.18 लाख टन रहेगा जो पिछले साल के मुकाबले करीब पांच लाख टन कम है। वर्ष 2016-17 के बाद खरीफ सीजन में यह दालों का यह सबसे कम उत्पादन है। इस साल खरीफ सीजन में दलहन की बुवाई पिछले साल के मुकाबले 5.41 लाख हेक्टेअर (4.2 फीसदी) घटकर 123.57 लाख हेक्टेअर रही है, जबकि खरीफ में दलहन का सामान्य क्षेत्र 139.70 लाख टन माना जाता है।&nbsp;</p>
<p><strong>आयात को बढ़ावा</strong></p>
<p>दालों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने जून में अरहर और उड़द के भंडारण पर स्टॉक लिमिट लगा दी थी जिसे सितंबर में और कम कर दिया था। दालों के आयात को सुगम बनाने के लिए अरहर और उड़द के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी गई है। इन रियायतों की वजह से भी दालों का आयात बढ़ा है।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_658d607e1336f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ 2025 तक अरहर व उड़द के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति, आयातकों की राह आसान, आत्मनिर्भरता दूर की कौड़ी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं बुवाई के रकबे में आई कमी, 308.60 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wheat-sowing-area-decrease-reached-308-lakh-60-thousand-hectares.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 28 Dec 2023 14:24:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wheat-sowing-area-decrease-reached-308-lakh-60-thousand-hectares.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के कुछ इलाकों में गेहूं की बुवाई में देरी के चलते चालू रबी सीजन में 22 दिसंबर तक गेहूं का रकबा घटकर 308.60 लाख हेक्टेयर रह गया है। पिछले सीजन की इसी अवधि में 314.40 हेक्टेयर रकबे में गेहूं की बुवाई हुई थी। हालांकि, गेहूं की बुवाई अभी जारी और अपने अंतिम चरण में है।</p>
<p>पिछले साल तापमान में बढ़ोतरी की वजह से गेहूं का उत्पादन प्रभावित हुआ था। इसे देखते हुए सरकार ने चालू सीजन में जलवायु अनुकूल गेहूं की किस्मों की बुवाई 60 फीसदी रकबे में करने का लक्ष्य रखा है। केंद्रीय कृषि आयुक्त पीके सिंह के मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल कर लिया गया है।</p>
<p>पीके सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश के कुछ हिस्सों में जहां धान की कटाई में देरी हुई है, वहां गेहूं की बुवाई में देरी हुई है। इस वजह से गेहूं की बुवाई के रकबे में कमी आई है। गेहूं की बुआई अच्छी चल रही है। उन्होंने बताया कि पिछले साल गेहूं किसानों को मौसम में अचानक परिवर्तन और तापमान में वृद्धि की समस्या का सामना करना पड़ा। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस साल जलवायु अनुकूल गेहूं की किस्मों को बढ़ावा दिया है और कुल रकबे के 60 फीसदी को कवर करने का लक्ष्य रखा है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि हमने लक्ष्य पार कर लिया है। अब तक 60 फीसदी से अधिक रकबे में गर्मी प्रतिरोधी किस्मों को बोया गया है। पिछले साल इन किस्मों को 45 फीसदी क्षेत्र में बोया गया था। अगर मार्च-अप्रैल 2024 में तापमान सामान्य से ज्यादा रहता है तो इन किस्मों की बुवाई से उत्पादन प्रभावित होने की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।</p>
<p>मार्च 2022 में तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की वजह से उत्तर और मध्य भारत के गेहूं उत्पादक राज्यों में पैदावार प्रभावित हुई थी। कृषि आयुक्त ने कहा कि किसानों को गर्मी से निपटने के लिए पहले से तैयार करने के तहत सरकार ने साप्ताहिक वैज्ञानिक सलाह जारी करना शुरू कर दिया है। इसमें उन्हें बताया जाएगा कि विकास के विभिन्न चरणों और मौसम की स्थिति में फसल की देखभाल कैसे करें।</p>
<p>उन्होंने कहा, ''पहले हम पाक्षिक आधार पर सलाह जारी करते थे, लेकिन इस साल हम किसानों को पहले से तैयार करने के लिए इसे साप्ताहिक कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि जागरूकता पैदा करने और किसानों को संभावित परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करने से उत्पादन संबंधी चिंताओं को दूर करने में मदद मिलेगी।</p>
<p>कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में गेहूं की बुवाई का रकबा 2023-24 रबी सीजन के 22 दिसंबर तक बढ़कर 94.4 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो एक साल पहले की समान अवधि में 92.9 लाख हेक्टेयर था। हालांकि, मध्य प्रदेश में गेहूं बुवाई का रकबा घटकर 81.7 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में 83.9 लाख हेक्टेयर था। पंजाब और हरियाणा में इस रबी सीजन में 22 दिसंबर तक गेहूं की बुवाई का रकबा पिछले साल के समान स्तर क्रमशः 34.9 लाख हेक्टेयर और 23.1 लाख हेक्टेयर रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं बुवाई के रकबे में आई कमी, 308.60 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रेगिस्तान में अनार की बहार लाने वाले इस किसान ने एक सीजन में बेचा 70 लाख का अनार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/desert-pomegranate-farmer-sold-pomegranates-worth-rs-70-lakh-in-one-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 28 Dec 2023 06:34:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/desert-pomegranate-farmer-sold-pomegranates-worth-rs-70-lakh-in-one-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान के रेगिस्तान में खेती करना अपने आप में मुश्किल काम है। पानी की कमी, मौसम की अनिश्चितता जैसी मुश्किलों से जूझते हुए रेगिस्तान में अनार की खेती को मुमकिन कर दिखाया है फलोदी जिले के डेचू गांव के किसान चंद्रप्रकाश माली ने। यह गांव जोधपुर और जैसलमेर के लगभग बीच में है। इस गांव के और भी किसान अनार की खेती करते हैं। अनार की खेती के लिए चंद्रप्रकाश माली को रूरल वॉयस नेकॉफ अवार्ड 2023 से भी सम्मानित किया गया है। बेस्ट फार्मिंग प्रैक्टिसेज कैटेगरी में उन्हें यह अवार्ड दिया गया है।</p>
<p><strong>रूरल वॉयस</strong> से बातचीत में चंद्रप्रकाश माली ने बताया कि चालू सीजन में उन्होंने अब तक 70 लाख रुपये का अनार बेचा है। करीब 30 फीसदी अनार और बचा हुआ है जिसकी तुड़ाई अगले साल मार्च तक होती रहेगी। चंद्रप्रकाश माली अपनी 123 बीघा जमीन में से 80 बीघा में अनार की ही खेती करते हैं। रेत के टीलों से घिरे बगीचे में इन्होंने अनार के नौ हजार से ज्यादा पेड़ लगा रखे हैं। अनार की खेती शुरू करने से पहले वे सरसों, चना, जीरा, इसबगोल और मूंगफली की खेती करते रहे हैं जो अब भी कर रहे हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_65881522b4a4f.jpg" alt="" /></p>
<p><em>नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद से रूरल वॉयस नेकॉफ अवार्ड ग्रहण करते चंद्रप्रकाश माली।</em></p>
<p><em></em></p>
<p>अनार की खेती शुरू करने की प्रेरणा कैसे मिली, यह पूछने पर उन्होंने बताया कि मेरा एक दोस्त अनार की खेती करता है जिसे देखने मैं गया था। उससे जरूरी जानकारी लेने के बाद मैंने राज्य सरकार के हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट से संपर्क किया। हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट ने सब्सिडी पर मुझे अनार के पौधे मुहैया कराए। एक पौधे की लागत 40 रुपये थी जिस पर मुझे 16 रुपये की सब्सिडी मिली। वर्ष 2017 में मैंने अनार के 12,000 पौधे लगाए थे। इसमें से 3,000 पौधे विभिन्न वजहों से खराब हो गए। अब मेरे खेत में 9,000 पौधे बचे हैं। मैंने तीन साल तक इन पौधों की देखभाल के लिए कड़ी मेहनत की। अनार के पौधे तीन साल बाद ही फल देना शुरू करते हैं और 20 साल तक फल देते रहते हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में पहली बार अनार की तुड़ाई हुई। 2021 में पाला पड़ने की वजह से ज्यादातर फसल खराब हो गई। 2022 में भी शीतलहर ने नुकसान पहुंचाया। 2023 में फसल अच्छी रही है और अब तक 70 लाख रुपये की अनार वे बेच चुके हैं। करीब 200 टन का उत्पादन हो चुका है। उन्होंने कहा कि एक-डेढ़ महीने पहले तक भाव अच्छा मिला लेकिन अभी भाव काफी घट गया है। अगर भाव में तेजी बनी रहती तो कमाई और ज्यादा होती। उन्होंने बताया कि अनार की खेती की लागत काफी ज्यादा है। ऐसे में अगर भाव न मिले तो नुकसान झेलना मुश्किल होता है। मेरी लागत 20 लाख रुपये सालाना है। उनके मुताबिक, अगर मौसम अनुकूल रहा और भाव ठीक मिला तो प्रति बीघा 1 लाख रुपये की कमाई अनार की खेती से हो जाती है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_658c02fb0e8ed.jpg" alt="" /></p>
<p><em>रेत के टीलों के बीच चंद्रप्रकाश माली का अनार का बगीचा।</em></p>
<p><em></em></p>
<p>चंद्रप्रकाश माली के मुताबिक, रेगिस्तान में अनार उगाने में मौसम संबंधी समस्याओं (आंधी-तूफान, शीतलहर) और पानी की कमी का काफी सामना करना पड़ता है। पानी की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीक को अपनाया है।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने बताया कि तकनीक की जानकारी देने, उनका इस्तेमाल करने और फसल को कीटों से बचाने में जोधपुर स्थित साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर के संस्थापक भगीरथ चौधरी और उनकी टीम का पूरा सहयोग मिला है। उनकी टीम समय-समय पर मेरे फार्म का दौरा करती रहती है और जरूरी जानकारी और सलाह देती रहती है। &nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रेगिस्तान में अनार की बहार लाने वाले इस किसान ने एक सीजन में बेचा 70 लाख का अनार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_658bfae9384aa.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कोपरा का एमएसपी घोषित, 2024 सीजन के लिए 250&amp;#45;300 रुपये प्रति क्विंटल तक की हुई वृद्धि]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-minimum-support-price-for-copra-for-2024-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 27 Dec 2023 17:39:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-minimum-support-price-for-copra-for-2024-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कोपरा के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 250-300 रुपये प्रति क्विंटल तक की वृद्धि करने की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री नरेन्&zwj;द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने 2024 सीजन के लिए कोपरा के एमएसपी को मंजूरी दे दी।</p>
<p>सीजन 2024 के लिए सामान्य गुणवत्ता वाले मिलिंग कोपरा का एमएसपी 11,160 रुपये प्रति क्विंटल और बॉल कोपरा का 12,000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। मिलिंग कोपरा के एमएसपी में पिछले सीजन की तुलना में 300 रुपये और बॉल कोपरा के एमएसपी में 250 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। मिलिंग कोपरा का उपयोग तेल निकालने के लिए किया जाता है, जबकि बॉल कोपरा को सूखे फल के रूप में खाया जाता है और धार्मिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। केरल और तमिलनाडु मिलिंग कोपरा के प्रमुख उत्पादक हैं, जबकि बॉल कोपरा का उत्पादन मुख्य रूप से कर्नाटक में होता है।</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान मंत्रालय ने एक बयान में इसकी जानकारी देते हुए बताया है कि मिलिंग कोपरा के लिए 51.84 फीसदी और बॉल कोपरा&nbsp; के लिए 63.26 फीसदी का मार्जिन सुनिश्चित होगा, जो उत्पादन की अखिल भारतीय भारित औसत लागत से 1.5 गुना से भी अधिक है। बयान के मुताबिक, उच्च एमएसपी न केवल नारियल उत्पादकों के लिए बेहतर लाभकारी मूल्&zwj;य सुनिश्चित करेगा, बल्कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नारियल उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कोपरा उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित भी करेगा।</p>
<p>चालू सीजन 2023 में सरकार ने 1,493 करोड़ रुपये की लागत से 1.33 लाख टन से अधिक कोपरा की रिकॉर्ड &nbsp;खरीद की है। इससे लगभग 90,000 किसानों को लाभ हुआ है। मौजूदा सीजन की खरीद में पिछले सीजन (2022) की तुलना में 227 फीसदी की वृद्धि हुई है। केंद्रीय नोडल एजेंसी नेफेड और एनसीसीएफ मूल्य समर्थन योजना के तहत कोपरा और छिलके रहति नारियल की खरीद करती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_658c13e355cb5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कोपरा का एमएसपी घोषित, 2024 सीजन के लिए 250-300 रुपये प्रति क्विंटल तक की हुई वृद्धि ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_658c13e355cb5.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कान्क्लेव में “कृषि वैज्ञानिका” काव्य पुस्तिका का विमोचन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/release-of-krishi-vaigyanik-poetry-book-in-rural-voice-agriculture-conclave.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 27 Dec 2023 15:47:05 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/release-of-krishi-vaigyanik-poetry-book-in-rural-voice-agriculture-conclave.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली में आयोजित रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव में बड़ी तादाद में किसानों और विशेषज्ञों की मौजूदगी में <em><strong>"कृषि वैज्ञानिका - कृषि विज्ञान, नवाचार और खेती की काव्य अभिव्यक्तियां&rdquo;</strong> </em>पुस्तक का विमोचन किया गया। किसान दिवस के मौके पर 23 दिसंबर को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटैट सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. रमेश चन्द्र, सदस्य, नीति आयोग, भारत सरकार; डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव, चेयरमैन, कृभको; राम इक़बाल सिंह, चेयरमैन, नेकॉफ; हरवीर सिंह, प्रधान संपादक, रूरल वॉयस; डॉ. डी. कुमार, पूर्व वैज्ञानिक काजरी और डॉ. भागीरथ चौधरी, फाउंडर डायरेक्टर, साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर,जोधपुर द्वारा संयुक्त रूप से पुस्तक का विमोचन गया।<br /><br /><em>&ldquo;कृषि वैज्ञानिका - कृषि विज्ञान, नवाचार और खेती की काव्य अभिव्यक्तियां&rdquo;</em> की रचना डॉ. डी. कुमार और प्रकाशन साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (एसएबीसी), जोधपुर ने किया हैं। इस पुस्तक में कृषि की जटिल तकनीकियों को आसान भाषा में 75 कविताओं के संग्रह के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। भारत की आजादी के 75वें अमृत महोत्सव में किसान समाज को यह पुस्तक समर्पित है। <em>कृषि वैज्ञानिका</em> पुस्तक में कृषि सम्बंधित समस्याओं व उनके समाधानों को समझकर, सरल भाषा में कविताओं के रूप में पिरोकर आमजनों, किसानों तथा वैज्ञानिकों को पेश किया गया है। यह काव्य संग्रह कृषि ज्ञान का एक अद्भुत खजाना है, जो कृषक जीवन की सरलता, तरलता व निरंतरता से ओतप्रोत है। खेती संबंधित नये-पुराने ज्ञान व तकनीकियों को गुनगुनाते, गाते, खेत व खलिहानों तक ले जाने का एक अनूठा प्रयास है। <br /><br />दूसरे साहित्यक रसों जैसे वीर रस, श्रृंगार रस इत्यादि के अतिरिक्त यह नया कृषि और खाद्य रस है। इस कृषि रसीली पुस्तक में प्रथम कविता <em>नमस्ते - किसान, नमस्ते - भारत</em>, व अंतिम कविता, <em>मैं कृषि वैज्ञानिक हूँ का</em>, समावेश है। कुल 75 कवितायें: मृदा, कृषी सभ्यता, गाँव, कृषक, कृषि जलवायु, फसलें, जैविक खेती, सफलतम कहानियाँ, कीट व रोग प्रबंधन, गाय माता इत्यादि पर आधारित हैं। बाजरा के गौरव, जीरे का जलवा और थार उत्पादित अनार के मिठास पर कविताओं को भी शामिल किया गया है। <br /><br />पुस्तक में तीन संदेश नरेंद्र सिंह तोमर, पूर्व कृषि व किसान कल्याण मंत्री, भारत सरकार; अशोक गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री, राजस्थान सरकार तथा डॉ हिमांशु पाठक, सचिव, कृषि अनुसन्धान व शिक्षा विभाग, भारत सरकार एव महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा प्रेषित हैं। पुस्तक में गाँव की कितनी सुंदर व्याख्या की गई है: <br /><br /><em>गाँव की उड़ती धूल को; प्राण वायु समझो तुम।</em><br /><em>उपवनों की गहरी छाया को; वातानुकूलित छाया समजो तुम।।</em><br /><em>गाँव से दूर ना भागो तुम, गाँव में, शिक्षा-व्यापार करो तुम।</em><br /><em>गाँव को भारत मानो तुम, इस भारत से प्यार करो तुम।।</em><br /><br />कविताओं में मृदाओं पर काफी जोर दिया गया है। उत्पादन स्थिर रखने व जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए एकीकृत खेती पर जोर दिया गया है:<br /><br /><em>फल-फसल- मृदा-पशु को, एकीक्रत करना होगा।</em><br /><em>फसल सुधार संग, भूमी प्रजनन पर विशेष जोर देना होगा।।</em><br /><em>भूमी को माँ, फ़सलों, पशुओं को पुत्र मानना होगा।</em><br /><em>मोह जाल से, एकीक्रत उपायोन से, एक चक्र्व्हू रचना होगा।</em><br /><em>फसां चक्र्व्युहू में कृषि आपदाओं को, खेती करनी होगी।।</em><br /><em>बचा खेती,भारत को, दुनिया का संकटमोचन बनाना होगा।।</em><br /><br />सफलतम कहानियों पर आधारित कवितायें कृषकों के लिए काफी रोचक और ज्ञानवर्धन हैं। इसमें अनार पर पद्मश्री गेनाराम पटेल की कहानी, मारवाड़ में खजूर पर सादुल राम की कहानी, पोलीहाउस पर आत्माराम विश्नोई की कहानी, गेहूं और जीरे पर निर्यात की इत्यादि।&nbsp;<br /><br />बाजरा के बारे में क्या खूब लिखा गया है:<br /><br /><em>मैं भुखमरी व कंगाली के आंशु पोंछ कर, इज्जत की मुस्कान दिलाता हूँ।</em><br /><em>मैं कच्चे मकानों, झुग्गी, झोपडी से चल, पांच सितारा होटल पहुंच गया हूँ।।</em><br /><em>मैं सेठो, शाहूकारों, स्टारनायकों, महानायकों की पसंद बन चुका हूँ।</em><br /><em>सस्ते में उगाओ, खाओ मुज बाजरा को, स्वस्थ व स्वाबलंबी भारत के लिये।</em><br /><em>बचायें मानव को कुपोषण से, भुखमरी से, बाजरा से, परिष्कृत पदार्थों से।।</em><br /><br />आवश्यकता अनुसार अपना व्यावहारिक ज्ञान चुनकर कृषक अपने कल्याण के पथ पर अग्रसर होंगें। यह कृषी-अनुसंधान-विस्तार-कौशल का बिलकुल जुदा तरीका है।</p>
<p><br /><em>जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसन्धान!</em></p>
<p><em>कृषि वैज्ञानिका</em> की सॉफ्ट कॉपी यहां से डाउनलोड कर सकते हैं:&nbsp;<strong><em><a href="https://lnkd.in/gsGkCKRY" data-attribute-index="0" target="_self">https://lnkd.in/gsGkCKRY</a></em></strong></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_658bfa23287f2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कान्क्लेव में “कृषि वैज्ञानिका” काव्य पुस्तिका का विमोचन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पॉल्ट्री उद्योग की कमाई में चालू वित्त वर्ष में होगी 10 फीसदी तक की वृद्धिः इक्रा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/year-2024-will-be-good-for-poultry-industry-icra-report.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 27 Dec 2023 13:10:04 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/year-2024-will-be-good-for-poultry-industry-icra-report.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय पॉल्ट्री उद्योग की कमाई 8-10 प्रतिशत बढ़ सकती है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाला साल पॉल्ट्री उद्योग के लिए अच्छा रहेगा। रेटिंग एजेंसी <strong>इक्रा</strong> की रिपोर्ट के अनुसार, <span>वित्त वर्ष 2023</span>-24 में घरेलू पॉल्ट्री उद्योग की राजस्व वृद्धि 8-10 प्रतिशत रहने की संभावना है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल की पहली छमाही में प्राप्तियां मजबूत थीं, लेकिन बाद में अतिरिक्त आपूर्ति के कारण उनमें कमी आनी शुरू हो गई। इसके बाद चालू वित्त वर्ष में मांग में बढ़ोतरी के परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही में औसत कमाई बढ़कर 107 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो वित्त वर्ष 2022-23 में 101 रुपये प्रति किलोग्राम थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि त्योहारी सीजन और ठंड का मौसम मांग का समर्थन करेगा और शेष वित्तीय वर्ष में कमाई बढ़ने की संभावना है।</p>
<p>वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही में प्राप्तियों में सुधार हुआ है। फीड की लागत में कमी,<span> नियंत्रित आपूर्ति और मांग बढ़ने से पॉल्ट्री उद्योग बढ़ाने में मदद मिली है। मक्का</span>, जो फीड लागत का 60-65 प्रतिशत है, की कीमतों में वित्त वर्ष 2013 की पहली छमाही में 9 प्रतिशत की गिरावट आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में देश भर में एवियन इन्फ्लूएंजा या बर्ड फ्लू की सीमित घटनाएं हुई हैं।</p>
<p>इक्रा के उपाध्यक्ष और सेक्टर प्रमुख <strong>शीतल शरद</strong> ने कहा कि सोयाबीन (फीड लागत का 30-35 प्रतिशत) में वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही में 21 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कहा, कच्चे माल की कीमत अब तक अनुकूल रही है, लेकिन खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन की फसल में काफी कमी और मक्के की बुआई में देरी से फीड लागत बढ़ने की चिंता पैदा हो गई है। इससे पॉल्ट्री कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ने की संभावना है।</p>
<p>वित्त वर्ष 2022-23 की चौथी तिमाही और वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में केरल और झारखंड में बर्ड फ्लू की स्थानीय घटनाएं दर्ज की गईं, जो आगे नहीं फैलीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी भी बड़े स्थानीय प्रकोप से प्रभावित और आस-पास के क्षेत्रों में मांग और कमाई पर प्रभाव पड़ सकता है। लंबी अवधि में भारतीय पॉल्ट्री कंपनियों को वैश्विक बाजार में नए अवसर मिलने की उम्मीद है। सितंबर 2023 में भारत और अमेरिका ने लंबे समय से चले आ रहे पॉल्ट्री विवाद के समाधान की घोषणा की। इससे भारतीय बाजार अमेरिकी पॉल्ट्री उत्पादों के लिए खुल सकते हैं। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कमाई पर दबाव बढ़ेगा।</p>
<p>मध्यम से लंबी अवधि में, घरेलू मांग अनुकूल रहेगी, जिसे बढ़ती शहरी आबादी और खान-पान की बदलती आदतों का समर्थन मिलेगा। उच्च मार्जिन मूल्य वर्धित उत्पादों में परिवर्तन का समर्थन करने के लिए पॉल्ट्री कंपनियों को फीड मिलों की क्षमता बढ़ाने में निवेश करना पड़ेगा। लागत में वृद्धि के बीच फीडस्टॉक के लिए कार्यशील पूंजी की बढ़ती आवश्यकताएं कर्ज को उच्च स्तर पर रख सकती हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पॉल्ट्री उद्योग की कमाई में चालू वित्त वर्ष में होगी 10 फीसदी तक की वृद्धिः इक्रा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_658bd11da4043.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इकरो, एसएबीसी, साधन सहकारी समिति और अनार किसान चंद्रप्रकाश माली को मिला 2023 का रूरल वॉयस नेकॉफ अवार्ड]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/icro-sabc-sadhan-cooperative-society-and-pomegranate-farmer-chandraprakash-mali-received-nacof-award-2023.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 24 Dec 2023 17:03:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/icro-sabc-sadhan-cooperative-society-and-pomegranate-farmer-chandraprakash-mali-received-nacof-award-2023.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंडियन पोटाश लिमिटेड और नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल की सहयोगी संस्था इकरो (आईपील सेंटर फॉर रूरल आउटरीच), साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (एसएबीसी), साधन सहकारी समिति लिमिटेड निधौली कलांऔर राजस्थान के अनार किसान चंद्रप्रकाश माली को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए 2023 के नेकॉफ अवार्ड से नवाजा गया है। रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव में चार श्रेणियों के लिए नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद द्वारा यह अवार्ड दिया गया।</p>
<p>एग्रीकल्चर एक्सटेंशन कैटेगरी में पुरस्कृत संस्था इकरो (ICRO) की स्थापना मार्च 2022 में इंडियन पोटाश लिमिटेड ने अपने सीएसआर के हिस्से के रूप में नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल के साथ संयुक्त रूप से की थी। इसका मकसद रूरल आउटरीच, हेल्थकेयर,&nbsp; साक्षरता को बढ़ावा देने, सस्टेनेबिलिटी, प्रोडक्टिविटी और जलवायु परिवर्तन से संबंधित सामाजिक कार्य शुरू करना था। इकरो अपने अमृत इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत जो कार्य कर रहा है, उनमें प्रमुख हैं- युवाओं और ग्रामीण लोगों के बीच व्यावसायिक कौशल को बढ़ाते हुए उत्पादकता से संबंधित रोजगार को बढ़ावा देना, कृषि उत्पादकता में वृद्धि के बारे में जागरूकता पैदा करना, ग्रामीण परिवेश में काम करने के लिए कौशल वाले युवा उद्यमियों का नेटवर्क बनाना, युवाओं के साथ मिलकर नॉलेज रिसोर्सेज में सुधार की दिशा में काम करना और पर्यावरण सस्टेनेबिलिटी और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना।</p>
<p>इकरो की ओर से डॉ. राजीव रंजन ने यह अवार्ड ग्रहण किया। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजीव रंजन इस परियोजना के प्रमुख भी हैं। अवार्ड मिलने पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा कि कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर इकरो के प्रयास को सम्मान मिलना यह बताता है कि हम सही दिशा की ओर बढ़ रहे हैं। &nbsp;&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_65881510a9f16.jpg" alt="" /></p>
<p><em>रूरल वॉयस नेकॉफ अवार्ड 2023 ग्रहण करते इकरो के परियोजना प्रमुख डॉ. राजीव रंजन (बाएं से तीसरे)।</em></p>
<p></p>
<p>एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी कैटेगरी का अवार्ड जोधपुर स्थित साउथ एशिया बॉयोटेक्नोलॉजी सेंटर (एसएबीसी) को दिया गया। यह डीएसआईआर से मान्यता प्राप्त वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान संगठन है। बायोटेकसेंटर के नाम से लोकप्रिय एसएबीसी एक नॉलेज और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर हब के रूप में कार्य करता है और जमीनी स्तर पर सस्टेनेबल कृषि उत्पादन को बढ़ावा देता है।</p>
<p>इसके अलावा, SABC का उद्देश्य कृषि के क्षेत्र में जानकारी के अंतर को पाटना, टेक्नोलॉजी और बायो इनोवेशन के ट्रांसफर को बढ़ावा देना, बेहतर कृषि प्रथाओं के साथ इंटीग्रेटेड पेस्ट और न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट को लोकप्रिय बनाना और घरेलू और निर्यात बाजारों के लिए अच्छी क्वालिटी के खाद्य पदार्थों के उत्पादन के लिए किसानों की मदद करना है। एसएबीसी नीति आयोग एनजीओ दर्पण के साथ पंजीकृत है। इसने कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग, स्पाइसेज बोर्ड ऑफ इंडिया और नाबार्ड के साथ एमओयू किया है।</p>
<p>एसएबीसी के फाउंडिंग डायरेक्टर भगीरथ चौधरी ने यह अवार्ड ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि किसानों के बीच तकनीकी विस्तार और इसके उपयोग के लिए उनके द्वारा किया जा रहे प्रयास का फायदा किसानों को मिल रहा है। राजस्थान के जीरा किसानों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले तक किसानों को जीरा का जो भाव मिल रहा था, उसमें अब तीन गुणा से ज्यादा की वृद्धि हुई है। जीरा की खेती में तकनीक के इस्तेमाल से यह संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि अब वे इसी तरह का प्रयास सौंफ उगाने वाले किसानों के लिए कर रहे हैं। उम्मीद है कि अगले चार साल में बेहतर नतीजे सामने आएंगे। &nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_6588150560742.jpg" alt="" /></p>
<p><em>रूरल वॉयस नेकॉफ अवार्ड लेते साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर के फाउंडर डायरेक्टर भगीरथ चौधरी (बाएं से चौथे)।</em></p>
<p>पैक्स (प्राइमरी एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव सोसायटी) श्रेणी में यह अवार्ड उत्तर प्रदेश के एटा जिले के निधौली कलां स्थित साधन सहकारी समिति लिमिटेड को दिया गया। यह समिति &nbsp;अपने सदस्यों को उर्वरक और बीज वितरण करने के अलावा उनसे गेहूं और धान की खरीद करती है, किसान क्रेडिट के माध्यम से अल्पकालिक ऋण वितरण करती है, मवेशियों के लिए ऋण वितरण करती है। साथ ही धर्मकांटा का संचालन भी करती है। समिति के अध्यक्ष योगेंद्रपाल सिंह सोलंकी ने प्रो. रमेश चंद से यह अवार्ड ग्रहण किया।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_658815327ef1e.jpg" alt="" /></p>
<p><em>साधन सहकारी समिति लिमिटेड निधौली कलां के अध्यक्ष योगेंद्रपाल सिंह सोलंकी ने रूरल वॉयस नेकॉफ अवार्ड ग्रहण किया।</em></p>
<p>बेस्ट फार्मिंग प्रैक्टिसेज कैटेगरी का अवार्ड राजस्थान के अनार किसान चंद्रप्रकाश माली को दिया गया। राजस्थान के रेगिस्तान में अनार की खेती को उन्होंने मुमकिन कर दिखाया है। &nbsp;फलोदी जिले के डेचू गांव के चंद्रप्रकाश माली अपनी 123 बीघा जमीन में से 80 बीघा पर अनार की ही खेती करते हैं। रेत के टीलों से घिरे खेत में इन्होंने अनार के नौ हजार से ज्यादा पेड़ लगा रखे हैं। टेक्नोलॉजी और मनुष्य के श्रम के संगम का क्या परिणाम हो सकता है, उन्होंने इसकी बेहतरीन मिसाल पेश की है। पानी बचाने वाली स्प्रिंकलर सिंचाई की बदौलत माली सरसों, चना, जीरा, इसबगोल और मूंगफली की भी खेती करते हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_65881522b4a4f.jpg" alt="" /></p>
<p><em>प्रो. रमेश चंद से अवार्ड लेते अनार किसान चंद्रप्रकाश माली।</em></p>
<p>चंद्रप्रकाश माली ने कहा कि किसान अगर कुछ ठान ले तो निरंतर प्रयास से उसे हासिल किया जा सकता है। कृषि बागवानी में क्रांति लाकर देश के करोड़ों किसानों के लिए मिसाल बने माली ने अवार्ड मिलने पर खुशी जताई।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_65881541efc05.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इकरो, एसएबीसी, साधन सहकारी समिति और अनार किसान चंद्रप्रकाश माली को मिला 2023 का रूरल वॉयस नेकॉफ अवार्ड ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_65881541efc05.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रूरल वॉयस कॉन्कलेवः कृषि क्षेत्र की तेज वृद्धि दर के बगैर विकसित भारत का लक्ष्य रहेगा अधूराः प्रो. रमेश चंद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/without-the-rapid-growth-rate-of-agriculture-sector-the-goal-of-developed-india-will-remain-incomplete-said-prof.-ramesh-chand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 23 Dec 2023 11:56:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/without-the-rapid-growth-rate-of-agriculture-sector-the-goal-of-developed-india-will-remain-incomplete-said-prof.-ramesh-chand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने कहा है कि कृषि क्षेत्र की तेज वृद्धि दर के बगैर विकसित भारत के लक्ष्य को पाना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि भारत दो लक्ष्य के साथ चल रहा है- भारत को विकसित बनाना है और इस विकास में सबको साथ लेकर चलना है। रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव 2023 का उद्घाटन करते हुए बतौर मुख्य वक्ता उन्होंने यह बात कही।</p>
<p>नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित यह कॉन्क्लेव रूरल वॉयस के स्थापना दिवस पर 23 दिसंबर को आयोजित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. रमेश चंद ने कहा कि विकसित भारत बनने के लिए अगले 24-25 वर्षों तक 7 से 8 प्रतिशत की विकास दर होनी चाहिए। तब हमारी आय इतनी हो जाएगी कि हम विकसित देश कहलाने के काबिल हो जाएंगे। विश्व बैंक के अनुसार जिस देश की प्रति व्यक्ति आय 12000 डॉलर यानी 10 लाख रुपये प्रति व्यक्ति हो जाए, तो वह विकसित देश हो गया है। अभी हमारी प्रति व्यक्ति आय 1,70,000 रुपये के आसपास है। इसे अगले 24 वर्षों में 6 से 7 गुना बढ़ाना पड़ेगा। देश ने विकास के इसी रास्ते को अपनाने का फैसला किया है। सारी नीतियां उसी के इर्द-गिर्द पर बनाई जाएंगी ताकि वांछित ग्रोथ रेट मिले और उसमें सब की भागीदारी हो।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इतनी ग्रोथ हासिल करने के लिए उसमें सबको शामिल करना पड़ेगा चाहे वह कृषि हो या इंडस्ट्री हो। इसमें कृषि की जिम्मेदारी ज्यादा हो जाती है। देश की 18 से 20% आय कृषि से आती है। अगर यह 3.5 से 4% की दर से नहीं बढ़ता है तो 2047 तक विकसित भारत बनना लगभग असंभव हो जाएगा। कृषि में ऊंची विकास दर हासिल किए बिना हम विकसित भारत नहीं बन सकते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश रहा है और भविष्य में भी भारत के विकास में इसकी बड़ी भूमिका रहेगी। अगर कृषि क्षेत्र को दरकिनार कर हम विकसित भारत बनते भी हैं तो वह समावेशी विकास नहीं होगा। ऐसी कोई वजह है नहीं है कि देश को विकसित बनाने में कृषि की जो भूमिका होनी चाहिए वह नहीं हो सकती, लेकिन उसके लिए हमें अपना माइंड सेट बदलना पड़ेगा। हमें सबसे पहले कृषि के प्रति अपने विचार को नकारात्मक से बदलकर सकारात्मक की ओर ले जाना चाहिए।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_6586814ca3bcd.jpg" alt="" /></p>
<p>हमारे कई राज्यों में कृषि की विकास दर इतनी अधिक है कि उतनी ग्रोथ इंडस्ट्री में भी नहीं है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश ऐसे राज्य हैं जहां कृषि की ग्रोथ 6% से ज्यादा है। अगर तीन-चार राज्य 6 से 7% कृषि विकास दर हासिल कर सकते हैं तो उनकी नीतियों को अपना कर क्या बाकी देश में कृषि की वह विकास दर हासिल नहीं की जा सकती? अगर हम सही तरीके से कोशिश करें तो कृषि हमारी आर्थिक विकास का इंजन अवश्य बन सकता है।</p>
<p>प्रोफेसर रमेश चंद ने कहा कि गांव के विकास का मतलब है समावेशी विकास। उन्होंने युवा पीढ़ी को पूर्व प्रधानमंत्री और किसान नेता चौधरी चरण सिंह की किताब जॉइंट फार्मिंग एक्सरेड पढ़ने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा, चौधरी चरण सिंह ने कहा था कि किसानों का जमीन से जुड़ाव संतान से भी ज्यादा है। जमीन के साथ उसका मां बेटे का रिश्ता होता है। युवा पीढ़ी को इस किताब को पढ़ना चाहिए। इस किताब से चौधरी चरण सिंह की दूरदर्शिता का पता चलता है। इससे पता चलता है कि कृषि और ग्रामीण व्यवस्था को वह कैसे देखते थे। उनकी कही बातें आज भी प्रासंगिक हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_658682c1c3bea.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>पॉलिसी एडवोकेसी और किसानों के विकास में रूरल वॉयस की अहम भूमिका</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया आज बेहद कारगर माध्यम है क्योंकि इसके जरिये किसानों तक अहम जानकारी पहुंचाने के साथ- साथ नीति बनाने वालों यानी सरकारों तक पहुंचना बेहद आसान है। डिजिटल माध्यम में असीम संभावनाए हैं। इस दिशा में रूरल वॉयस बेहद अहम भूमिका निभा रहा है।&nbsp;</p>
<p>रमेश चंद के अनुसार, रूरल वॉयस पॉलिसी एडवोकेसी में भी अहम भूमिकाएं निभा रहा है। यह न केवल बेबाक तरीके से कृषि मुद्दों पर अपनी बातें रखता है। बल्कि पॉलिसी एडवोकेसी की दिशा में अहम कोशिशें कर रहा है। इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र को लेकर किसानों और निजी क्षेत्र दोनों को नजरिया बदलने की जरूरत है। उनके अनुसार, कॉरपोरेट जगत को किसान को केवल उपभोक्ता नहीं समझना चाहिए, बल्कि उसके साथ मिलकर विकास का नया मानक तय करना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र के जलगांव जिले का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां पर एक प्राइवेट कंपनी और किसानों ने मिलकर जलगांव को दुनिया का 5 वां सबसे ज्यादा केला उत्पादन करने वाला एरिया बना दिया।</p>
<p>कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए रूरल वॉयस के एडिटर इन चीफ हरवीर सिंह ने कहा कि तीन साल पहले कृषि और ग्रामीण भारत के लिए नई सोच के रूप में हमने रूरल वॉयस की शुरुआत की थी। महात्मा गांधी ने कहा था कि भारत गांवों में बसता है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का कहना था कि देश की खुशहाली का रास्ता गांवों से होकर गुजरता है। आज चौधरी चरण सिंह का जन्मदिन भी है जिसे किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। हमने रूरल वॉयस की स्थापना के लिए इसी दिन को चुना जो हमारे लिए एक प्रेरणादायक दिन भी है।<br />उन्होंने कहा कि भारत पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, लेकिन आर्थिक तरक्की की इस लहर के उतार-चढ़ाव में गांव और ग्रामीण आबादी कहीं पीछे छूटती जा रही है। यह अंतर कैसे कम हो, इसी विचार को आगे बढ़ाने के लिए इसी साल नवंबर में हमने &lsquo;रूरल वर्ल्ड&rsquo; का प्रकाशन भी शुरू किया।&nbsp;&nbsp;<br />ताजा आंकड़े कहते हैं कि भारत में कामकाजी लोगों का 45.8 फीसदी अब भी कृषि और सहयोगी क्षेत्र में काम करता है। ऐसे में भारत के लिए नया फॉर्मूला तलाशना होगा। भारत के विकसित राष्ट्र बनने का रास्ता कृषि केंद्रित अर्थव्यवस्था की नीति ही होगी, लेकिन यह रास्ता आसान नहीं है। इसी के मद्देजर हमने रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कान्क्लेव 2023 का मुख्य थीम मेकिंग एग्रीकल्चर इंजिन ऑफ इकोनामिक ग्रोथ रखा है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_6586794578ba7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रूरल वॉयस कॉन्कलेवः कृषि क्षेत्र की तेज वृद्धि दर के बगैर विकसित भारत का लक्ष्य रहेगा अधूराः प्रो. रमेश चंद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_6586794578ba7.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव और नेकॉफ अवार्ड्स 2023 कार्यक्रम आज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rural-voice-agriculture-conclave-nacof-award-2023-today.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 23 Dec 2023 05:45:09 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rural-voice-agriculture-conclave-nacof-award-2023-today.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव और नेकॉफ अवार्ड्स 2023 का आयोजन रूरल वॉयस के तीसरे स्थापना दिवस के मौके पर आज (23 दिसंबर) नई दिल्ली में किया जा रहा है। आज किसान दिवस भी है। इस साल इस कॉन्क्लेव का थीम &ldquo;मेकिंग एग्रीकल्चर इंजिन ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ एंड ऑपर्च्युनिटी&rdquo; है।&nbsp;</p>
<p>नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर के सिल्वर ओक हॉल में आयोजित हो रहे इस कॉन्क्लेव के मुख्य वक्ता नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद हैं। सुबह साढ़े 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलने वाले इस एक दिवसीय कार्यक्रम में तीन सत्र रखे गए हैं। पहले सत्र का विषय &ldquo;इन्वेस्टमेंट एंड जॉब ऑपर्च्युनिटीज इन रूरल एरियाज&rdquo; है। इस सत्र के पैनलिस्ट में प्रो. रमेश चंद के अलावा इंडियन डेयरी एसोसिएशन (आईडीए) के प्रेसीडेंट और अमूल के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. आर.एस. सोढ़ी, एमसीएक्स के चेयरमैन और नाबार्ड के पूर्व चेयरमैन डॉ. हर्ष कुमार भानवाला और डीसीएम श्रीराम लिमिटेड के शुगर बिजनेस के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीईओ रोशन लाल टामक शामिल हैं।</p>
<p>दूसरे सत्र का विषय &ldquo;फार्मर्स कलेक्टिव एंड न्यू राइजिंग सेक्टर्स इन एग्रीकल्चर&rdquo; है। इस सत्र में फर्टिलाइलजर कोऑपरेटिव कृभको के चेयरमैन डॉ. चंद्रपाल यादव, नेशनल शुगर फेडरेशन एनएफसीएसएफ लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नायकनवरे, नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल के पूर्व डायरेक्टर जनरल और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप कुमार नायक और सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. डी.एन. ठाकुर हिस्सा ले रहे हैं।</p>
<p>तीसरे और अंतिम सत्र का विषय &ldquo;गवर्नेंस एजेंडा फॉर एग्रीकल्चर एंड फार्मिंग फॉर 2024-29&rdquo; रखा गया है। इस सत्र में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के सचिव रोहित कुमार सिंह शामिल के अलावा भारत कृषक समाज के चेयरमैन अजर वीर जाखड़, समुन्नति एग्रो के डायरेक्टर प्रवेश शर्मा और इंडियन एक्सप्रेस के रूरल अफेयर्स एवं एग्रीकल्चर एडिटर हरीश दामोदरन शामिल हैं।</p>
<p>तीनों सत्रों के समापन के बाद मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री कैलाश चौधरी नेकॉफ अवार्ड 2023 वितरित करेंगे। कृषि एवं कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों, संस्थाओं और कंपनियों को ये अवार्ड दिए जाएंगे। चार श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्य के लिए दिए जाने वाले इस अवार्ड में किसान, सहकारी संस्था, सहकारी समिति एवं कंपनी शामिल हैं।</p>
<p>कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्पित डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म रूरल वॉयस की स्थापना तीन वर्ष पूर्व 2020 में हुई थी। हिंदी और अंग्रेजी में न्यूज पोर्टल के अलावा रूरल वॉयस का रूरल वॉयस इन नाम से यूट्यूब चैनल भी है जिस पर कृषि क्षेत्र से जुड़ी खबरों, फैसलों, विश्लेषण आदि से जुड़े वीडियो लगातार अपलोड किए जाते हैं। रूरल वॉयस मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने नवंबर 2023 से प्रिंट मीडिया में भी कदम रखा है और रूरल वर्ल्ड नाम से मैगजीन का प्रकाशन शुरू किया है। रूरल वॉयस अपने स्थापना दिवस पर प्रत्येक वर्ष एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव एवं अवार्ड्स आयोजित करता है। &nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_658635c030502.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव और नेकॉफ अवार्ड्स 2023 कार्यक्रम आज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खाद्य तेलों और मसूर का घटे शुल्क पर आयात की समय सीमा एक साल के लिए बढ़ी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/import-of-edible-oils-and-lentils-at-reduced-duty-extended-by-one-year.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 22 Dec 2023 17:29:46 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/import-of-edible-oils-and-lentils-at-reduced-duty-extended-by-one-year.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों एवं मसूर के आयात पर शुल्क घटाने के अपने फैसले को एक साल के लिए और बढ़ा दिया है। आयात शुल्क घटाने का फैसला मार्च 2024 तक के लिए किया गया था जिसे बढ़ाकर अब मार्च 2025 कर दिया गया है। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है। खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।</p>
<p>खाद्य तेलों की महंगाई घटाने के लिए सरकार ने क्रूड सोयाबीन ऑयल और क्रूड सनफ्लावर ऑयल पर आयात शुल्क को घटाकर 5 फीसदी कर दिया था। वहीं, क्रूड पाम ऑयल पर 7.5 फीसदी आयात शुल्क लागू है। इसी तरह, रिफाइंड सोयाबीन ऑयल और रिफाइंड सनफ्लॉवर ऑयल के लिए आयात शुल्क 17.5 फीसदी से घटाकर 12.5 फीसदी कर दिया था। मसूर का आयात शुल्क मुक्त है। यह फैसला मार्च 2024 तक के लिए लागू किया गया था। अधिसूचना के मुताबिक, अब इसकी अंतिम तिथि को बढ़ाकर मार्च 2025 कर दिया गया है।</p>
<p>भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक है। यह अपनी जरूरत का करीब 65 फीसदी खाद्य तेल आयात करता है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार, नवंबर 2023 में खाद्य तेल का आयात 11.48 लाख टन रहा, जबकि गैर-खाद्य तेल का आयात 12,498 टन था। तेल वर्ष 2023-24 (नवंबर-अक्टूबर) के पहले महीने में वनस्पति तेलों का आयात 25 प्रतिशत घटकर 11.60 लाख टन रह गया है। पिछले साल नवंबर में 15.45 लाख टन वनस्पति तेलों का आयात हुआ था।</p>
<p>इस साल नवंबर में क्रूड वनस्पति तेल का आयात 26.34 प्रतिशत घटकर 9.77 लाख टन रह गया, जो एक साल पहले की अवधि में 13.26 लाख टन था। इसी तरह, रिफाइंड वनस्पति तेलों का आयात इस साल नवंबर में 15.41 प्रतिशत घटकर 1,71,069 टन रह गया। पिछले साल नवंबर में 2,02,248 टन खाद्य तेलों का आयात हुआ था।</p>
<p>हालांकि क्रूड वनस्पति तेलों में आरबीडी पामोलीन का आयात घटकर 1.71 लाख टन रह गया। नवंबर 2022 में इसका 2.02 लाख टन का आयात हुआ था। लेकिन इस साल अक्टूबर की तुलना में देखें तो आयात 53,497 टन से तीन गुना हो गया।</p>
<p>भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम ऑयल और अर्जेंटीना से सोयाबीन ऑयल सहित थोड़ी मात्रा में क्रूड सॉफ्ट ऑयल का आयात करता है। सूरजमुखी तेल यूक्रेन और रूस से आयात किया जाता है। मसूर का आयात मुख्य रूप से कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से होता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खाद्य तेलों और मसूर का घटे शुल्क पर आयात की समय सीमा एक साल के लिए बढ़ी ]]></media:description>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव और नेकॉफ अवार्ड्स 2023 का आयोजन कल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rural-voice-agriculture-conclave-and-nacof-award-2023-to-be-held-tomorrow.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 22 Dec 2023 14:32:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rural-voice-agriculture-conclave-and-nacof-award-2023-to-be-held-tomorrow.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव और नेकॉफ अवार्ड्स 2023 का आयोजन रूरल वॉयस के तीसरे स्थापना दिवस के मौके पर शनिवार 23 दिसंबर को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित किया जा रहा है। इस साल इस कॉन्क्लेव का थीम &ldquo;मेकिंग एग्रीकल्चर इंजिन ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ एंड ऑपर्च्युनिटी&rdquo; है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान करेंगे, जबकि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे एवं नाकोफ अवार्ड 2023 वितरित करेंगे।</p>
<p>नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर के सिल्वर ओक हॉल में आयोजित होने वाले इस एक दिवसीय कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद होंगे। सुबह साढ़े 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलने वाले इस कार्यक्रम में तीन सत्र रखे गए हैं जिसमें पैनलिस्ट संबंधित विषय पर अपने-अपने विचार रखेंगे। पहले सत्र का विषय &ldquo;इन्वेस्टमेंट एंड जॉब ऑपर्च्युनिटीज इन रूरल एरियाज&rdquo; है। इस सत्र के पैनलिस्ट में प्रो. रमेश चंद के अलावा इंडियन डेयरी एसोसिएशन (आईडीए) के प्रेसीडेंट और अमूल के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. आर.एस. सोढ़ी, एमसीएक्स के चेयरमैन और नाबार्ड के पूर्व चेयरमैन डॉ. हर्ष कुमार भानवाला और डीसीएम श्रीराम लिमिटेड के शुगर बिजनेस के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीईओ रोशन लाल टमक शामिल होंगे।</p>
<p>दूसरे सत्र का विषय &ldquo;फार्मर्स कलेक्टिव एंड न्यू राइजिंग सेक्टर्स इन एग्रीकल्चर&rdquo; है। इस सत्र में फर्टिलाइलजर कोऑपरेटिव कृभको के चेयरमैन डॉ. चंद्रपाल यादव, नेशनल शुगर फेडरेशन एनएफसीएसएफ लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नायकनवरे, नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल के पूर्व डायरेक्टर जनरल और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप कुमार नायक और सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. डी.एन. ठाकुर हिस्सा लेंगे।</p>
<p>तीसरे और अंतिम सत्र का विषय &ldquo;गवर्नेंस एजेंडा फॉर एग्रीकल्चर एंड फार्मिंग फॉर 2024-29&rdquo; रखा गया है। इस सत्र में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के सचिव रोहित कुमार सिंह शामिल होंगे। उनके अलावा सत्र के अन्य पैनलिस्ट में भारत कृषक समाज के चेयरमैन अजर वीर जाखड़, समुन्नति एग्रो के डायरेक्टर प्रवेश शर्मा और इंडियन एक्सप्रेस के रूरल अफेयर्स एवं एग्रीकल्चर एडिटर हरीश दामोदरन शामिल हैं।</p>
<p>तीनों सत्रों के समापन के बाद मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री कैलाश चौधरी नेकॉफ अवार्ड 2023 वितरित करेंगे। कृषि एवं कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों, संस्थाओं और कंपनियों को ये अवार्ड दिए जाएंगे। चार श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्य के लिए दिए जाने वाले इस अवार्ड में किसान, सहकारी संस्था, सहकारी समिति एवं कंपनी शामिल हैं।</p>
<p>कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्पित डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म रूरल वॉयस की स्थापना तीन वर्ष पूर्व 2020 में हुई थी। हिंदी और अंग्रेजी में न्यूज पोर्टल के अलावा रूरल वॉयस का रूरल वॉयस इन नाम से यूट्यूब चैनल भी है जिस पर कृषि क्षेत्र से जुड़ी खबरों, फैसलों, विश्लेषण आदि से जुड़े वीडियो लगातार अपलोड किए जाते हैं। रूरल वॉयस मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने नवंबर 2023 से प्रिंट मीडिया में भी कदम रखा है और रूरल वर्ल्ड नाम से मैगजीन का प्रकाशन शुरू किया है। रूरल वॉयस अपने स्थापना दिवस पर प्रत्येक वर्ष एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव एवं अवार्ड्स आयोजित करता है। &nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव और नेकॉफ अवार्ड्स 2023 का आयोजन कल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कपास उत्पादन 25 लाख गांठ घटकर 294 लाख गांठ रहने का अनुमानः सीएआई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cotton-output-may-fall-8pc-to-294-lakh-bales-this-year-said-cai.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 22 Dec 2023 12:19:36 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cotton-output-may-fall-8pc-to-294-lakh-bales-this-year-said-cai.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर भारत के कपास उत्पादक क्षेत्रों में पिंक बॉलवर्म के भयानक प्रकोप और दक्षिण भारत में मानसून की कम बारिश के चलते चालू कपास सीजन (2023-24) में उत्पादन करीब 25 लाख गांठ (एक गांठ में 170 किलो) घटने का अनुमान है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के ताजा अनुमान के मुताबिक, अधिकांश क्षेत्रों में कम पैदावार के कारण 2023-24 (अक्टूबर-सितंबर) सीजन में कपास का उत्पादन लगभग 8 फीसदी 294.10 लाख गांठ रह सकता है। 2022-23 सीजन में कुल कपास उत्पादन 318.90 लाख गांठ रहा था।</p>
<p>सीएआई के मुताबिक, उत्तरी क्षेत्र में पिंक बॉलवर्म के संक्रमण के कारण इस वर्ष उत्पादन में कमी आई है, जबकि 1 अगस्त से 15 सितंबर तक बारिश नहीं होने के कारण दक्षिणी और मध्य क्षेत्रों में भी उपज प्रभावित होने का अनुमान है। सीएआई ने कहा है कि नवंबर 2023 के अंत तक कपासी की कुल आपूर्ति 92.05 लाख गांठ रहने का अनुमान है। इसमें नई फसल की आवक 60.15 लाख गांठ रहने, 3 लाख गांठ का आयात होने और सीजन की शुरुआत में 28.90 लाख गांठ का शुरुआती स्टॉक शामिल है।</p>
<p>सीएआई ने नवंबर 2023 के अंत तक देश में कपास की खपत 53 लाख गांठ रहने का अनुमान लगाया है, जबकि 30 नवंबर तक निर्यात 3 लाख गांठ होने का अनुमान है। नवंबर के अंत में स्टॉक 36.05 लाख गांठ रहने का अनुमान है। इसमें कपड़ा मिलों के पास 27 लाख गांठें और शेष 9.05 लाख गांठें सीसीआई, महाराष्ट्र फेडरेशन और अन्य (बहुराष्ट्रीय कंपनियों, व्यापारियों, जिनर्स) के पास हैं। इसमें वह कपास भी शामिल है जिसकी बिक्री हो चुकी है लेकिन डिलीवरी नहीं हुई है।</p>
<p>सीएआई ने कपास सीजन 2023-24 के अंत तक (30 सितंबर, 2024 तक) कपास की कुल आपूर्ति को 345 लाख गांठ पर बरकरार रखा है। इसमें सीजन की शुरुआत में 28.90 लाख गांठ का शुरुआती स्टॉक, 294.10 लाख गांठ का उत्पादन और 22 लाख गांठ का आयात शामिल है। सीएआई द्वारा चालू सीजन के लिए अनुमानित आयात पिछले वर्ष की तुलना में 9.50 लाख गांठ अधिक है। सीएआई ने कहा, "इस साल कम उत्पादन अनुमान के कारण आयात अधिक होने की उम्मीद है। सीजन 2023-24 के लिए निर्यात पिछले सीजन के 15.50 लाख गांठ के मुकाबले 14 लाख गांठ रहने का अनुमान है।"</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कपास उत्पादन 25 लाख गांठ घटकर 294 लाख गांठ रहने का अनुमानः सीएआई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मंडावा प्रभाकर राव बने इस्मा प्रेसीडेंट, गौतम गोयल नए वाइस प्रेसीडेंट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/mandava-prabhakar-rao-became-isma-president-gautam-goyal-became-the-new-vice-president.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 21 Dec 2023 15:24:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/mandava-prabhakar-rao-became-isma-president-gautam-goyal-became-the-new-vice-president.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मंडावा प्रभाकर राव को चीनी उद्योग के शीर्ष संगठन इंडियन शुगर मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) का प्रेसीडेंट बनाया गया है। जबकि गौतम गोयल को वाइस प्रेसीडेंट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राव ने आदित्य झुनझुनवाला की जगह ली है। इससे पहले वह संगठन के वाइस प्रेसीडेंट थे। उन्होंने अपना पदभार संभाल लिया है।</p>
<p>राव आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के एक प्रतिष्ठित किसान परिवार से जुड़े हैं। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से कृषि में एमएससी की शिक्षा हासिल की है। राव एनएसएल ग्रुप और एनएसएल शुगर्स लिमिटेड, हैदराबाद के चेयरमैन हैं। एनएसएल ग्रुप बीज, कपड़ा, चीनी, बुनियादी ढांचा और नवीकरणीय ऊर्जा के कारोबार में सक्रिय है। अब तक के अपने शानदार करियर में उन्होंने अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धियों के अलावा कपास, गन्ना, चावल, मक्का, सब्जियों के विकास में अहम योगदान दिए हैं। उन्होंने भारतीय और वैश्विक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बीच सहयोग एवं साझेदारी और चीनी उद्योग की वृद्धि एवं किसानों की लाभप्रदता में सुधार के एक नए युग की नींव रखी है।</p>
<p>विविध व्यवसायों के प्रबंधन के अलावा राव ने विभिन्न उद्योग निकायों में सक्रिय रूप से भाग लिया है। वह नेशनल सीड एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनएसएआई) के संस्थापक सदस्य और आईसीएआर राष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रत्यायन बोर्ड (एनएईएबी), फिक्की के आंध्र प्रदेश राज्य परिषद में भी रहे हैं। वह क्लब्स इंडिया, हैदराबाद चैप्टर के सीईओ रहे हैं। पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (पीपीवीएफआर प्राधिकरण), फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की कृषि समित, केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय के कपास सलाहकार बोर्ड, केंद्रीय कृषि मंत्रालय की बीज समिति और भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले अंतर्राष्ट्रीय बीज महासंघ (आईएसएफ) के बोर्ड मेंबर भी रहे हैं। इसके अलावा आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्वविद्यालय, हैदराबाद, भारत सरकार के केंद्रीय बीज प्रमाणीकरण बोर्ड और आंध्र प्रदेश सीड्समैन एसोसिएशन में भी रहे हैं।</p>
<p>वहीं गौतम गोयल 2012 में इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के प्रेसीडेंट रहे हैं। उन्होंने 2012 में इंडियन शुगर एक्जिम कॉरपोरेशन (आईएसईसी) के चेयरमैन के रूप में भी काम किया है। गौतम डीबीओ की विभिन्न सीएसआर पहलों में सक्रिय रूप से शामिल हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के गांवों में ऐसे स्कूलों का संचालन शामिल है जहां छात्रों को आधुनिक शिक्षा अनुभव देने के लिए नवीनतम एवी टेक्नोलॉजी और उपकरणों के साथ एक स्मार्ट क्लास सक्षम वातावरण प्रदान किया जाता है। इसके अलावा, सीएसआर पहलों में पीएचडी रूरल डेवलपमेंट फाउंडेशन के सहयोग से नि:शुल्क मोबाइल हेल्थ कैंप सेवाओं का आयोजन करके स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा दिया जाता है। साथ ही, संपूर्ण प्रशिक्षण केंद्र में सिलाई में कौशल विकास के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को सुनिश्चित किया जाता है। गौतम एक खिलाड़ी भी हैं। उन्होंने राष्ट्रीय अंतर राज्यीय स्क्वैश चैंपियनशिप में दिल्ली का प्रतिनिधित्व किया है और गोल्फर भी हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मंडावा प्रभाकर राव बने इस्मा प्रेसीडेंट, गौतम गोयल नए वाइस प्रेसीडेंट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फिनहाट ने सीड फंडिंग के लिए ओमनिवोर से जुटाए 30 लाख डॉलर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/insurance-platform-finhaat-raises-3m-dollar-from-omnivore-to-drive-financial-resilience.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 20 Dec 2023 17:27:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/insurance-platform-finhaat-raises-3m-dollar-from-omnivore-to-drive-financial-resilience.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म स्टार्टअप फिनहाट ने सीड फंडिंग के लिए ओमनिवोर से 30 लाख डॉलर जुटाए हैं। ओमनिवोर ने केटलबोरो वेंचर कैपिटल की भागीदारी के साथ यह फंडिंग की है। फिनहाट ग्रामीण समुदायों और टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में मध्यम एवं निम्न आय वर्गों के लोगों सहित वंचित समूहों को डिजिटल बीमा सेवाएं प्रदान करता है।</p>
<p>फिनहाट ने जून 2022 में बीमा परिचालन शुरू किया था। यह स्टार्टअप एनबीएफसी, एमएफआई, बीसी नेटवर्क, निधि कंपनियों, सहकारी समितियों, एनजीओ और एफपीओ सहित वंचितों के साथ काम करने वाले संस्थानों के लिए एक बी2बी बीमा वितरण और सर्विसिंग प्लेटफॉर्म का निर्माण कर रहा है।</p>
<p>फिनहाट के सह-संस्थापक विनोद सिंह ने कहा, &ldquo;हम अपनी यात्रा में ओमनिवोर का समर्थन पाकर खुश हैं। फर्म का समर्थन ग्रामीण भारत के लिए आवश्यक वित्तीय सेवाओं की पहुंच और दक्षता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता &nbsp;है। हमारा परिचालन पहले से ही भारत में 65 फीसदी से अधिक पिन कोड को कवर करता है। इस फंडिंग के साथ हम मजबूत तकनीकी मॉडल बनाकर, उत्पाद अनुभव को समृद्ध कर, नवीन उत्पादों को पेश कर, अपने साझेदार आधार को बढ़ाकर और नए कार्यक्षेत्रों के लिए संसाधनों को जुटाकर और विस्तार करने की उम्मीद करते हैं। हम वंचित लोगों के लिए वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।&rdquo;</p>
<p>ओमनिवोर के मैनेजिंग पार्टनर जिनेश शाह ने कहा, &ldquo;ग्रामीण भारत में वित्तीय समावेशन निराशाजनक रूप से कम है। केवल 11.5% परिवारों के पास शुद्ध बचत है और 10% से कम के पास जीवन बीमा है। कम आय वाले क्षेत्रों में यह स्थिति सबसे गंभीर है, खासकर उन किसानों के लिए जो असंख्य जोखिमों का सामना कर रहे हैं। अनिश्चितताओं को कम करने और वित्तीय स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने के लिए अनुकूलित उत्पाद बहुत कम हैं। फिनहाट इस परिदृश्य को बदल रहा है। औपचारिक प्रणालियों द्वारा पीछे रह गए लाखों लोगों के लिए वित्तीय पहुंच और लचीलेपन में सुधार के इस मिशन का समर्थन कर हम उत्साहित हैं।&rdquo;</p>
<p>मुंबई स्थित फिनहाट की स्थापना 2021 में इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट आनंद (आईआरएमए) के स्नातकों और वित्तीय सेवाओं के दिग्गज संदीप कटियार, नवनीत श्रीवास्तव और विनोद सिंह द्वारा की गई थी। संदीप ने अपना करियर आईसीआईसीआई बैंक से शुरू किया था और बाद में आर्य कोलैटरल में मुख्य वित्तीय अधिकारी के रूप में काम किया। उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए भी किया है।</p>
<p>नवनीत श्रीवास्तव ने बिड़ला सन लाइफ, फ्यूचर जेनराली और आदित्य बिड़ला हेल्थ सहित कई बीमा कंपनियों में काम किया है। उन्हें बीमा क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। विनोद सिंह ने एचएसबीसी में लंबे समय तक काम किया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ फिनहाट ने सीड फंडिंग के लिए ओमनिवोर से जुटाए 30 लाख डॉलर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फूड सिस्टम्स डायलॉग इंडिया 2023 में पेश किया गया इंडिया फूड सिस्टम्स ट्रांसफॉर्मेशन हब]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-food-systems-transformation-hub-launched-at-food-systems-dialogue-india-2023.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 20 Dec 2023 16:06:48 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-food-systems-transformation-hub-launched-at-food-systems-dialogue-india-2023.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>फूड सिस्टम्स डायलॉग (एफएसडी) इंडिया 2023 में पहली बार इंडिया फूड सिस्टम्स ट्रांसफॉर्मेशन हब पेश किया गया। इसका उद्देश्य संबंधित पक्षों और हितधारकों के प्रयासों को एकीकृत करके भारत की खाद्य प्रणाली में सतत परिवर्तन को संभव बनाना है। इंडिया फूड सिस्टम्स ट्रांसफॉर्मेशन हब (आई-एफएसटीएच) फूड एंड लैंड यूज कोएलिशन इंडिया और भारत कृषक समाज का&nbsp; संयुक्त प्रयास है।</p>
<p>आई-एफएसटीएच के बारे में फोलू इंडिया के कंट्री कोऑर्डिनेटर डॉ. केएम जयहरि ने कहा, "यह सूचना और संसाधन के बीच के अंतर की पहचान करने और निवेश की सबसे अनुकूल विधि को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक ज्ञान और कामकाज के तरीकों का एक केन्द्र है।"<br />भारत कृषक समाज के अध्यक्ष अजय वीर जाखड़ ने कहा, &ldquo;यह मंच भारतीय खाद्य प्रणालियों पर जानकारी के एकल खुले स्रोत के रूप में सभी क्षेत्रीय संगठनों के बीच बहुस्तरीय साझेदारी को सक्षम बनाएगा। हमारा लक्ष्य ब्लॉक स्तर सहित सभी पत्रकारों का एक व्यापक डाटाबेस तैयार करना भी है। आई-एफएसटीएच 2024 में लॉन्च होगा।&rdquo;</p>
<p>फूड सिस्टम्स डायलॉग (एफएसडी) इंडिया 2023 के दूसरे दिन की शुरुआत नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद द्वारा 'भविष्य के विकास में कृषि को एक इंजन के रूप में विकसित करने पर पुनर्विचार' विषय पर एक पेपर प्रस्तुति के साथ हुई। उन्होंने कहा, &ldquo;विभिन्न राज्यों में कृषि और गैर-कृषि विकास के अलग-अलग तरीके हैं। भविष्य के विकास के पथ पर अग्रसर होने के दौरान कृषि को बढ़ावा देने पर पुनर्विचार करने के लिये हमें सफलताओं और विफलताओं के उपलब्ध अनुभवों से सीख लेनी होगी।''</p>
<p>खाद्य प्रणालियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया जिसमें वक्ताओं ने कार्यबल में लिंग समावेशन, पोषण में अंतर, वर्तमान कृषि प्रणालियां और वित्त पोषण जैसे विषयों पर अपने विचार पेश किये। इन वक्ताओं में 4एसडी फाउंडेशन के रणनीतिक निदेशक सर डेविड नाबरो, &nbsp;एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. सौम्या स्वामीनाथन, कृषि मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव फैज अहमद किदवई और नाबार्ड के डीजीएम कुलदीप चंद शामिल थे।<br />भारत कृषक समाज और फूड एंड लैंड यूज कोएलिशन इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एफएसडी 2023 खाद्य प्रणाली में सतत परिवर्तन शुरू करने के लिए पर्याप्त क्षमता वाले नीति परिदृश्यों की पहचान करना चाहता है। साथ ही स्टार्टअप के विकास को बढ़ावा देने और शुरुआती मौके उपलब्ध कराए जाने पर भी जो देता है। यह उन सटीक लघु और दीर्घकालिक उपायों पर जोर देगा जिन्हें परिवर्तन के लिए लागू करने की आवश्यकता है।</p>
<p>इस तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए टाटा-कॉर्नेल इंस्टीट्यूट के संस्थापक निदेशक प्रोफेसर प्रभु पिंगली ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जलवायु के अनुरूप ढल जाने वाली कृषि प्रणाली के साथ खाद्य सुरक्षा हासिल करना संभव है। उन्होंने कहा कि इनपुट उपयोग दक्षता, फसल और पशुधन प्रणालियों का विविधीकरण और अंतर-क्षेत्रीय ऊर्जा, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके खाद्य सुरक्षा और जलवायु शमन (ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन रोकना) के बीच तालमेल बढ़ाया जा सकता है।</p>
<p>इस मौके पर पूर्व कृषि सचिव टी नंद कुमार ने कहा, &ldquo;भारत ने जो वैश्विक घोषणाएं की हैं उनसे खाद्य प्रणालियों में परिवर्तन होगा। हो सकता है कि यह एक राष्ट्रीय प्रयास के रूप में न हो, बल्कि अनेक स्थानीय प्रयासों के रूप में हो। हमारे लिए चुनौती अपने लोगों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए अपनी धारणाओं और विकल्पों को बदलने की होगी। जब किसान, जनता और जलवायु तीनों के बीच तालमेल बैठेगा तभी यह परिवर्तन संभव होगा। हम जिस इंडिया फूड सिस्टम ट्रांसफार्मेशन हब की योजना बना रहे हैं, वह इस बदलाव को आगे बढ़ाने में सहायक होगा।''</p>
<p>4एसडी फाउंडेशन के रणनीतिक निदेशक सर डेविड नाबरो ने अपने संबोधन में कहा: &ldquo;सीओपी28 (COP28) में खाद्य प्रणालियों पर चर्चाओं में मुख्य जोर समावेश पर रहा। ऐसा करने के लिए हमें अधिकार क्षेत्र के भीतर कार्य करने की आवश्यकता है, विशेषकर भू परिदृश्य के स्तर पर। भारत में यह संरचना मौजूद है। हमें इसका लाभ उठाने पर ध्यान देना चाहिए।&rdquo;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ फूड सिस्टम्स डायलॉग इंडिया 2023 में पेश किया गया इंडिया फूड सिस्टम्स ट्रांसफॉर्मेशन हब ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[लम्पी की वजह से 2022&amp;#45;23 में धीमी हो गई दूध उत्पादन की वृद्धि दर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/growth-in-milk-output-slows-in-fy23-due-to-lumpy-skin-disease.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 20 Dec 2023 13:26:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/growth-in-milk-output-slows-in-fy23-due-to-lumpy-skin-disease.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दुधारू पशुओं, खासकर गायों में लम्पी जैसी बीमारियों के कारण पिछले वित्त वर्ष (2022-23) में दूध उत्पादन की वृद्धि दर धीमी होकर 3.83 फीसदी रह गई। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री परशोत्तम रूपाला ने संसद में यह जानकारी दी है।</p>
<p>लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में रूपाला ने कहा, "देश में दूध उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर वर्ष 2021-22 के दौरान 5.77 फीसदी थी, जो वर्ष 2022-23 में घटकर 3.83 फीसदी पर पहुंच गई है।" उन्होंने लोकसभा में बताया कि 2022-23 में दूध का उत्पादन 23.06 करोड़ टन रहा। 2021-22 में यह 22.21 करोड़ &nbsp;टन और 2020-21 में 21 करोड़ टन रहा था। वृद्धि दर में कमी के बावजूद भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बना हुआ है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया में दूध के सबसे बड़े उत्पादक की स्थिति बरकरार रखे हुए है।</p>
<p>एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि पशुपालन और डेयरी विभाग स्वदेशी नस्लों के विकास एवं संरक्षण,&nbsp;गोवंश के आनुवंशिक उन्नयन तथा दूध उत्पादन एवं गोवंश की उत्पादकता में वृद्धि के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन चला रहा है। यह दूध उत्पादक किसानों के लिए अधिक लाभकारी है। यह योजना विभाग की संशोधित पुनर्गठित योजनाओं के तहत 2021-2022 <span>से </span>2025-2026 <span>तक के लिए जारी है।</span></p>
<p>उन्होंने बताया कि यह योजना निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ कार्यान्वित की गई है:</p>
<ol>
<li>उन्नत प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके गोवंश की उत्पादकता और दूध उत्पादन को स्थायी तरीके से बढ़ाना।</li>
<li>प्रजनन उद्देश्यों के लिए उच्च आनुवंशिक योग्यता वाले सांडों के उपयोग का प्रचार करना।</li>
<li>प्रजनन नेटवर्क को मजबूत करने और किसानों के दरवाजे पर कृत्रिम गर्भाधान संबंधी सेवाओं की आपूर्ति के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान के कवरेज को बढ़ाना।</li>
<li>वैज्ञानिक एवं समग्र तरीके से स्वदेशी गाय और भैंस के पालन और संरक्षण को बढ़ावा देना।</li>
</ol>
<p>राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत वैज्ञानिक और समग्र तरीके से गोवंश के स्वदेशी नस्लों के संरक्षण एवं विकास के उद्देश्य से एकीकृत स्वदेशी मवेशी विकास केंद्रों के रूप में 16 <span>गोकुल ग्रामों की स्थापना के लिए धनराशि जारी की गई है।</span></p>
<p>गोकुल ग्राम के उद्देश्य इस प्रकार हैं:</p>
<ol>
<li>वैज्ञानिक तरीके से स्वदेशी मवेशियों के पालन और संरक्षण को बढ़ावा देना।</li>
<li>स्वदेशी नस्लों की उत्पादकता और पशु उत्पादों से होने वाले आर्थिक लाभों को स्थायी तरीके से बढ़ाना।</li>
<li>स्वदेशी नस्लों के उच्च आनुवंशिक योग्यता वाले सांडों का प्रचार करना।</li>
<li>पशु शक्ति के उपयोग के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहित करना।</li>
<li>संतुलित पोषण और एकीकृत पशु स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना।</li>
<li>आधुनिक फार्म प्रबंधन से संबंधित कार्यप्रणालियों को अनुकूलित करना और साझा संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देना।</li>
<li>हरित ऊर्जा और इको प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना।</li>
</ol> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ लम्पी की वजह से 2022-23 में धीमी हो गई दूध उत्पादन की वृद्धि दर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र ने चावल उद्योग से तत्काल खुदरा कीमतें घटाने को कहा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centre-directs-rice-industry-to-ensure-reduced-retail-price-of-rice-with-immediate-effect.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 19 Dec 2023 11:51:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centre-directs-rice-industry-to-ensure-reduced-retail-price-of-rice-with-immediate-effect.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खाद्य वस्तुओं की महंगाई पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार लगातार कोशिशें कर रही हैं। लेकिन कुछ कोशिशें ऐसी हैं जिनके वांछित परिणाम नहीं आ पा रहे हैं। चावल निर्यात पर कई पांबदियों के बावजूद चावल की खुदरा कीमतें बढ़ती जा रही हैं। महंगाई के मोर्चे पर सरकार के लिए यह चिंता का सबब है।</p>
<p>अब केंद्र सरकार ने चावल उद्योग संगठनों को तत्काल प्रभाव से चावल की खुदरा कीमतों में कमी लाने को कहा है। सोमवार को खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा ने गैर-बासमती चावल के घरेलू मूल्य की समीक्षा करने के लिए राइस प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक बुलाई थी।&nbsp;</p>
<p>बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि इस साल खरीफ की अच्छी फसल, एफसीआई के पास पर्याप्त भंडार और चावल निर्यात पर विभिन्न नियमों के बावजूद चावल के घरेलू दाम बढ़ रहे हैं। चावल उद्योग को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि घरेलू बाजार में कीमतों को उचित स्तर पर लाया जाए। मुनाफाखोरी के प्रयासों से कड़ाई से निपटा जाएगा। चावल की वार्षिक मुद्रास्फीति दर पिछले दो वर्षों से 12 प्रतिशत के आसपास चल रही है जो चिंताजनक है।</p>
<p>बैठक में जोर दिया गया कि कीमतों में कमी का लाभ अंतिम उपभोक्ताओं तक तेजी से पहुंचाया जाना चाहिए। प्रमुख चावल उद्योग संघों को परामर्श दिया गया कि वे अपने संघ के सदस्यों के साथ इस मुद्दे को उठाएं और सुनिश्चित करें कि चावल की खुदरा कीमत तत्काल प्रभाव से कम हो। ऐसी खबरें हैं कि थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं द्वारा प्राप्त लाभ के अंतर में भारी वृद्धि हुई है, जिसे नियंत्रित करने की आवश्यकता है। इसके अलावा, यह सुझाव दिया गया कि जहां अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) और वास्तविक खुदरा मूल्य के बीच व्यापक अंतर मौजूद है। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए इसे वास्तविक स्तर पर लाने की आवश्यकता है।</p>
<p>भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने चावल प्रसंस्करण उद्योग को बताया कि अच्छी गुणवत्ता वाले चावल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है जिसे खुला बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के अंतर्गत 29 रुपये प्रति किलोग्राम के आरक्षित मूल्य पर प्रदान किया जा रहा है। यह भी सुझाव दिया गया कि निर्माता/व्यापारी खुला बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के अंतर्गत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से चावल उठाने पर विचार कर सकते हैं जिसे उपभोक्ताओं को उचित लाभ के अंतर के साथ बेचा जा सकता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/01/image_750x500_63bb0c6bda775.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र ने चावल उद्योग से तत्काल खुदरा कीमतें घटाने को कहा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चालू पेराई सीजन 2023&amp;#45;24 में 15 दिसंबर तक चीनी उत्पादन 11 फीसदी घटकर 74 लाख टन रहा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sugar-output-dips-11pc-at-74-lakh-ton-during-oct-1-to-dec-15-in-current-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 18 Dec 2023 14:12:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sugar-output-dips-11pc-at-74-lakh-ton-during-oct-1-to-dec-15-in-current-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू पेराई सीजन (2023-24) में एक अक्तूबर से 15 दिसंबर, 2023 तक देश में चीनी उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 11 फीसदी घटकर 74.05 लाख टन रहा है। चीनी उद्योग के संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) द्वारा जारी इन आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र और कर्नाटक में उत्पादन घटने के चलते यह गिरावट आई है।&nbsp;</p>
<p>इस्मा के मुताबिक पिछले सीजन (2022-23) में इसी अवधि में चीनी उत्पादन 82.95 लाख टन रहा था जो इस साल घटकर 74.05 लाख टन रह गया है। चीनी उत्पादन सीजन अक्तूबर से सितंबर के दौरान रहता है। चीनी उत्पादन कर रही चीनी मिलों की संख्या 497 बनी हुई है। इस्मा के मुताबिक इस साल कर्नाटक और महाराष्ट्र में चीनी मिलों में उत्पादन 10 से 15 दिन देरी से शुरू हुआ है। इस्मा के मुताबिक उत्तरप्रदेश में चीनी उत्पादन पिछले साल से अधिक रहा है। पिछले साल 15 दिसंबर तक वहां 20.26 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ था जबकि चालू पेराई सीजन में 15 दिसंबर तक 22.11 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है।</p>
<p>कर्नाटक में चीनी उत्पादन पिछलेसीजन के 19.20 लाख टन से घटकर 16.95 लाख टन रहा है जबकि इस सीजन में 15 दिसंबर तक महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन पिछले साल के 33.02 लाख टन से घटकर 25.45 लाख टन&nbsp; रहा है।</p>
<p>पिछले सीजन का बकाया स्टाक 56 लाख टन था। जबकि चालू सीजन में चीनी उत्पादन के घटकर 290 लाख टन के करीब रहने का अनुमान है। इसके चलते सरकार ने पिछले सप्ताह गन्ने से जूस से सीधे एथेनॉल बनाने पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया था। इसे बाद में संशोधित करज 17 लाख टन चीनी को एथेननॉल में तब्दील करने की छूट दे दी है।&nbsp;</p>
<p>उत्पादन में कमी के चलते सरकार घरेलू बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी पर अंकुश लगाने के लिए कई कदम उठा चुकी है। सरकार ने चालू सीजन के लिए चीनी निर्यात कोटा जारी नहीं किया है और चीनी निर्यात को प्रतिबंधित सूची में डाल रखा है&nbsp; जिसकी अवधि को 31 अक्तूबर, 2024 तक बढ़ा दिया गया था।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/05/image_750x500_6293a4816855c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चालू पेराई सीजन 2023-24 में 15 दिसंबर तक चीनी उत्पादन 11 फीसदी घटकर 74 लाख टन रहा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बागवानी उत्पादन में 10 वर्षों में 27 प्रतिशत की वृद्धि]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/horticulture-production-rises-by-27-percent-in-10-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 17 Dec 2023 12:23:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/horticulture-production-rises-by-27-percent-in-10-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">वर्ष 2022-23 के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, देश कुल बागवानी उत्पादन 35.19 करोड़ टन होने का अनुमान है। यह इस वर्ष कुल खाद्यान्न उत्पादन के अनुमान से अधिक है। इस वर्ष कुल खाद्यान्न उत्पादन 32.96 करोड़ टन रहने का अनुमान है। भारत दुनिया में सब्जियों और फलों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। केला, नीबू, पपीता, भिंडी जैसी कई फसलों के उत्पादन में देश पहले स्थान पर है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पिछले पांच वर्षों के दौरान बागवानी उत्पादन में 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2018-19 के दौरान कुल 3110.52 लाख टन उत्पादन हुआ था, जो 2022-23 के दूसरे अग्रिम अनुमान में 3519.21 लाख टन पहुंच गया है। बीते दस वर्षों की तुलना करें तो इस दौरान उत्पादन में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2013-14 में उत्पादन 2773.52 लाख टन रहा था।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_657e9a35b8ae3.jpg" alt="" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_6499cbda5253a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बागवानी उत्पादन में 10 वर्षों में 27 प्रतिशत की वृद्धि ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_6499cbda5253a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नवंबर में वनस्पति तेलों का आयात 25% घटा, क्रूड ऑयल आयात में 26% और रिफाइंड में 15% की कमी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-sees-25pc-fall-in-vegetable-oils-import-in-november-says-sea.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 16 Dec 2023 21:04:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-sees-25pc-fall-in-vegetable-oils-import-in-november-says-sea.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">भारत में वनस्पति तेलों का आयात 2023-24 तेल वर्ष के पहले महीने नवंबर में 25 प्रतिशत घटकर 11.60 लाख टन रह गया। पिछले साल नवंबर में 15.45 लाख टन वनस्पति तेलों का आयात हुआ था। इंडस्ट्री बॉडी सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार, नवंबर 2023 के दौरान कुल वनस्पति तेल आयात में&nbsp; खाद्य तेल 11.48 लाख टन और गैर-खाद्य तेल 12,498 टन थे। भारत, दुनिया का सबसे बड़ा वनस्पति तेल खरीदार है। यह खाद्य तेल श्रेणी में रिफाइंड और क्रूड, दोनों वनस्पति तेलों का आयात करता है। तेल वर्ष नवंबर से अक्टूबर तक चलता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एसईए के आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल नवंबर में क्रूड वनस्पति तेल का आयात 26.34 प्रतिशत घटकर 9.77 लाख टन रह गया, जो एक साल पहले की अवधि में 13.26 लाख टन था। इसी तरह, रिफाइंड वनस्पति तेलों का आयात इस साल नवंबर में 15.41 प्रतिशत घटकर 1,71,069 टन रह गया। पिछले साल नवंबर में 2,02,248 टन खाद्य तेलों का आयात हुआ था।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">हालांकि क्रूड वनस्पति तेलों में आरबीडी पामोलीन का आयात घटकर 1.71 लाख टन रह गया। नवंबर 2022 में इसका 2.02 लाख टन का आयात हुआ था। लेकिन इस साल अक्टूबर की तुलना में देखें तो आयात 53,497 टन से तीन गुना हो गया।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एसईए ने कहा कि क्रूड पाम तेल (सीपीओ) और रिफाइंड तेल के आयात शुल्क में 8.25 प्रतिशत का प्रभावी अंतर है। इससे सीपीओ के बजाय देश में रिफाइंड पामोलीन के आयात को बढ़ावा मिलता है। एसईए ने बयान में कहा, "कहने की जरूरत नहीं कि रिफाइंड तेल का आयात हमारे राष्ट्रीय हितों के विपरीत है और यह हमारे पाम रिफाइनिंग उद्योग की क्षमता उपयोग को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।"</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पामोलीन आयात में वृद्धि का मुख्य कारण निर्यातक देशों (मलेशिया और इंडोनेशिया) द्वारा अपने उद्योग को दिया गया प्रोत्साहन है। एसईए के बयान में कहा गया है कि उन देशों ने क्रूड पाम पर ऊंचा निर्यात शुल्क और रिफाइंड पामोलीन पर कम निर्यात शुल्क रखा है। भारत में सीपीओ और रिफाइंड पामोलीन के बीच आयात शुल्क में 8.25 प्रतिशत का अंतर है, यह पामोलीन आयात को रेगुलेट करने के लिए अपर्याप्त है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एसईए के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल नवंबर में सीपीओ का आयात घटकर 6.92 लाख टन रह गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में 9.31 लाख टन था। इसी प्रकार, उक्त अवधि में कच्चे सूरजमुखी तेल का आयात 1.57 लाख टन से घटकर 1.28 लाख टन हो गया, जबकि कच्चे सोयाबीन तेल का आयात 2.29 लाख टन से गिरकर 1.49 लाख टन हो गया।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">1 दिसंबर को खाद्य तेल का स्टॉक 29.60 लाख टन था, जो पिछले महीने से 1.79 लाख टन कम है। भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम तेल और अर्जेंटीना से सोयाबीन तेल सहित थोड़ी मात्रा में क्रूड सॉफ्ट ऑयल का आयात करता है। सूरजमुखी तेल यूक्रेन और रूस से आयात किया जाता है।</span></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नवंबर में वनस्पति तेलों का आयात 25% घटा, क्रूड ऑयल आयात में 26% और रिफाइंड में 15% की कमी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गन्ना जूस से एथेनॉल बनाने की छूट मिलेगी, 17 लाख टन चीनी के डायवर्सन की तैयारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/exemption-to-make-ethanol-from-sugarcane-juice.-preparation-for-diversion-of-17-lakh-tonnes-of-sugar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 15 Dec 2023 22:34:15 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/exemption-to-make-ethanol-from-sugarcane-juice.-preparation-for-diversion-of-17-lakh-tonnes-of-sugar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div dir="auto">गन्ने के जूस से एथेनॉल बनाने पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को लेकर शुगर इंडस्ट्री की परेशानियों को देखते हुए सरकार अब कुछ रियायत देने के मूड में है। एथेनॉल उत्पादन के लिए 17 लाख टन चीनी के उपयोग की अनुमति का आदेश जल्द जारी हो सकता है। पिछले सप्ताह केंद्र सरकार ने चीनी उत्पादन में गिरावट के मद्देनजर एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना जूस के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इस फैसले से शुगर इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया। उद्योग जगत की ओर से इस फैसले को वापस लेने की मांग की जा रही है।&nbsp;&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">
<div dir="auto">चालू सीजन 2023-24 में एथेनॉल बनाने के लिए 17 लाख टन चीनी की लिमिट के भीतर चीनी मिलों को गन्ने के रस और बी-हैवी मोलासेज (शीरे) दोनों का उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी। शुक्रवार को इस मुद्दे पर मंत्रियों की समिति की बैठक हुई थी। किस अनुपात में गन्ने के रस और बी-हैवी मोलासेज से एथेनॉल उत्पादन की छूट दी जाएगी, इस पर विचार किया जा रहा है। जल्द ही इस बारे में सरकार की ओर से नया आदेश जारी हो सकता है। पिछले सीजन में कुल 38 लाख टन चीनी का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन के लिए किया गया था। फूड का इस्तेमाल फ्यूल के लिए करने को लेकर भी नीतिगत बहस छिड़ी है।&nbsp;&nbsp;</div>
<div dir="auto">
<p>इस बीच, खाद्य मंत्रालय ने सभी चीनी मिलों और डिस्टिलरीज को ताजा निर्देश जारी किया है। मंत्रालय ने कहा कि तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) "प्रत्येक डिस्टिलरी" को 2023-24 आपूर्ति वर्ष के लिए "गन्ने के रस और बी हेवी मोलासेज आधारित एथेनॉल" का "संशोधित आवंटन" जारी करेंगी। संशोधित आवंटन प्राप्त होने के बाद, चीनी मिलों और डिस्टिलरीज को गन्ने के रस और बी-हैवी मोलासेज&nbsp; की संशोधित मात्रा के अनुसार ही एथेनॉल की आपूर्ति करने के लिए कहा गया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_657d4a4696bda.jpg" alt="" /></p>
</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">इस साल कमजोर मानसून और मजबूत अल नीनो प्रभाव के चलते देश में गन्ना की फसल को नुकसान पहुंचा है। 2023-24 सीजन (अक्टूबर-सितंबर) में चीनी उत्पादन घटकर 323-330 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले सीजन में यह 373 लाख टन था। महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ने की फसल को इस साल काफी झटका लगा है।&nbsp;</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गन्ना जूस से एथेनॉल बनाने की छूट मिलेगी, 17 लाख टन चीनी के डायवर्सन की तैयारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दुबई में नए जलवायु समझौते पर सहमति बनी, लेकिन स्पष्टता की कमी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/new-climate-deal-on-transition-away-from-fossil-fuels-at-cop28-but-lack-of-clarity.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 14 Dec 2023 18:12:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
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        <description><![CDATA[ <p>दुबई में हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (<span>कॉप28</span>)<span> में आखिरकार दुनिया के लगभग 200 देश एक नए समझौते पर सहमत हो गये। ऐतिहासिक बताए जा रहे इस समझौते में </span>&ldquo;<span>जीवाश्म ईंधन से दूर हटने</span>&rdquo; <span>यानी फॉसिल फ्यूल </span>(कोयला, तेल और गैस) <span>पर निर्भरता घटाने का आह्वान किया गया है। जलवायु वार्ताओं के तीन दशक के इतिहास में पहली बार </span>&ldquo;<span>जीवाश्म ईंधन</span>&rdquo;<span> शब्द को किसी समझौते के अंतिम दस्तावेज में शामिल किया गया है। </span>लेकिन यह लागू कैसे होगा, इसमें स्पष्टता का अभाव है। समझौते के कमजोर और अस्पष्ट प्रावधानों को लेकर काफी आलोचना हो रही है।</p>
<p>संयुक्त अरब अमीरात की मेजबानी में हुए कॉप28 के पहले दिन &ldquo;लॉस एंड डैमेज फंड&rdquo; के क्रियान्वयन को बड़ी सफलता के तौर पर देखा गया था। लेकिन उसके बाद वार्ता खटाई में पड़ती दिख रही थी। आखिरी मौके पर जलवायु समझौते पर सहमति बन गई। दरअसल, तेल उत्पादन देश जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल खत्म करने के पक्ष में नहीं थे। अंत में ऐसे समझौते पर सहमति बनी जिसमें जीवाश्म ईंधन का जिक्र तो है मगर इसका उपयोग पूरी तरह खत्म करने की बात नहीं है।&nbsp;</p>
<p><strong>ऐतिहासिक समझौता, मगर कमजोर शर्तें</strong></p>
<p>जलवायु संकट से निपटने का रोडमैप और शब्दावली क्या होगी, इसे लेकर सम्मेलन में काफी मंथन हुआ। दुबई समझौते में जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने के लिए 8 सूत्री योजना सुझायी गई है। साल 2050 तक नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करने के लिए <span>उचित, व्यवस्थित और न्यायसंगत तरीके से "जीवाश्म ईंधन से दूर हटने" पर जोर दिया है। साथ ही देशों से </span><span>बेरोकटोक कोयले के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से कम करने के प्रयास तेज करने का आग्रह किया है। लेकिन 21 पेज के दस्तावेज में </span>तेल और गैस का कोई उल्लेख नहीं है।&nbsp;</p>
<p>अपने समापन भाषण में सम्मेलन के अध्यक्ष <strong>सुल्तान अल-जबेर</strong> ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री तक सीमित रखने की दिशा में यह ऐतिहासिक समझौता है। साल 2030 तक विश्व की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता को तिगुना करने और औसत ऊर्जा दक्षता को दोगुना करने के प्रयास किए जाएंगे। <span class="Y2IQFc" lang="hi"></span>समापन सत्र को संबोधित करते हुए भारत के पर्यावरण मंत्री <strong>भूपेन्द्र यादव</strong> ने कहा कि यहां के सामूहिक प्रयासों ने पेरिस में निर्धारित तापमान लक्ष्यों को हासिल करने की प्रतिबद्धता पर बल देने का संदेश दिया है। आगे का रास्ता समानता और जलवायु न्याय पर आधारित होना चाहिए।&nbsp;</p>
<p><strong>समझौते में कई खामियां</strong></p>
<p>दिल्ली स्थित क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशक <strong>आरती खोसला</strong> का कहना है कि दुबई समझौता सकारात्मक है, हालांकि इसमें कई कमियां हैं। पहली बार जलवायु समझौते में जीवाश्म ईंधन से दूर हटने की आवश्यकता को स्वीकार किया गया है। इसका अर्थ न केवल कोयला बल्कि तेल और गैस से भी है। लेकिन समझौते में तेल और गैस को लेकर काफी ढील बरती गई है। यह स्पष्ट नहीं है कि क्या उत्पादन और खपत में वास्तविक कटौती होगी, या फिर बढ़ती मांग के साथ देश अपने ऊर्जा मिश्रण में केवल 'बदलाव' करेंगे। बड़े कार्बन उत्सर्जकों को खुश करने के लिये &lsquo;ट्रांजिशन फ्यूल&rsquo; के नाम पर गैस को खुली छूट दी है। वित्त के मामले में भी कोई बड़ा नतीजा नहीं निकला।</p>
<p><strong>COP28 में पहुंचे 85 हजार प्रतिनिधि</strong></p>
<p>कॉप28 की शुरुआत दुबई में 30 नवंबर को शुरू हुई थी और यह एक दिन आगे बढ़कर 13 दिसंबर को समाप्त हुआ। इसमें 198 देशों के लगभग 85,000 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जलवायु सम्मेलन में यह अब तक का सबसे बड़ा जमावड़ा था। सम्मेलन के उद्घाटन के दिन लॉस एंड डैमेज फंड का ऐलान उन विकासशील और गरीब देशों के लिए अच्छी खबर है जो जलवायु संकट में बहुत कम योगदान देने के बावजूद इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। लेकिन जलवायु समझौते में अस्पष्टता और क्लीन एनर्जी अपनाने के लिए गरीब व विकासशील देशों के लिए वित्त का प्रावधान ना होने से समझौते की सफलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दुबई में नए जलवायु समझौते पर सहमति बनी, लेकिन स्पष्टता की कमी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा कृषि क्षेत्रः सुमन बेरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agri-to-play-key-role-in-indias-development-said-niti-aayog-vc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 14 Dec 2023 16:32:49 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agri-to-play-key-role-in-indias-development-said-niti-aayog-vc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने कहा है कि कृषि क्षेत्र भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा क्योंकि मजबूत ग्रामीण मांग मैन्युफैक्चरिंग और आर्थिक पुनरुद्धार का समर्थन करती है।</p>
<p>एक सरकारी बयान के मुताबिक, नीति आयोग और अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) ने एक आशय पत्र (एसओआई) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका मकसद भारत के विकास उद्देश्यों में योगदान देने वाली नीति और कार्यक्रम ढांचे को मजबूत करना है।</p>
<p>बयान में सुमन बेरी के हवाले से कहा गया है, "भारत के विकास पथ में कृषि एक केंद्रीय भूमिका निभाएगी।" उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक और मिट्टी के अनुकूल प्रथाओं की ओर बदलाव के साथ-साथ कृषि की उत्पादकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "मजबूत ग्रामीण मांग मैन्युफैक्चरिंग और आर्थिक पुनरुद्धार का समर्थन करती है। अगले 25 वर्षों में भारत के परिवर्तन के लिए यह महत्वपूर्ण है।"</p>
<p>नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने कहा कि यह आशय पत्र सरकारी थिंक टैंक और आईएफपीआरआई के बीच सहयोगात्मक कार्य को बढ़ावा देगा जो भारत और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक विकास को आकार देने में कृषि की भूमिका में नई अंतर्दृष्टि उत्पन्न कर सकता है।</p>
<p>बयान के मुताबिक, एसओआई गतिविधियों में ग्रामीण परिवर्तन संकेतकों को विकसित करना और उन पर नज़र रखना, प्रमुख कार्यक्रमों के डिजाइन और मूल्यांकन का समर्थन करना, नीति विश्लेषणात्मक उपकरण प्रदान करना और क्षेत्रीय और वैश्विक संदर्भों में भारत के कृषि-खाद्य व्यापार पर साक्ष्य तैयार करना शामिल है।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि आईएफपीआरआई खाद्य प्रणाली परिवर्तन के व्यापक दायरे में पारस्परिक रूप से पहचाने गए क्षेत्रों में नीति आयोग को नीति विश्लेषण और समर्थन प्रदान करेगा। साथ ही शुरुआत में भारत में कृषि, ग्रामीण विकास, व्यापार और जलवायु परिवर्तन नीतियों पर ध्यान केंद्रित करेगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा कृषि क्षेत्रः सुमन बेरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तमिलनाडु के नारियल उत्पादकों ने दिल्ली में शुरू की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/tn-coconut-growers-launch-indefinite-hunger-strike-in-delhi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 14 Dec 2023 14:33:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/tn-coconut-growers-launch-indefinite-hunger-strike-in-delhi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार की सहकारी एजेंसी नेफेड द्वारा खरीदे गए एक लाख टन खोपरा नारियल को भारत नारियल तेल के नाम से तेल में बदलने की मांग को लेकर तमिलनाडु के नारियल उत्पादक नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका कहना है कि मांग पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। भूख हड़ताल बुधवार से शुरू हुई और गुरुवार को दूसरे दिन में प्रवेश कर गई।</p>
<p>तमिलनाडु फार्मर्स प्रोटेक्शन एसोसिएशन के संस्थापक ईसन मुरुगासामी ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया, &ldquo;नेफेड ने किसानों से 108.60 रुपये प्रति किलो पर खोपरा नारियल खरीदा है। &nbsp;अकेले तमिलनाडु से एक लाख टन की खरीद हुई है। अब नेफेड नारियल को खुले बाजार में बेचने की व्यवस्था कर रहा है। इसका फायदा उठाते हुए नारियल तेल कारोबार में शामिल बड़ी कंपनियों ने एक सिंडिकेट बनाया है और 65 रुपये प्रति किलो पर बोली लगाने की योजना बनाई है।&rdquo;</p>
<p>उन्होंने कहा कि कुल खोपरा नारियल उत्पादन का केवल 10 फीसदी केंद्र सरकार द्वारा खरीदा जाता है, शेष 90 फीसदी नारियल खुले बाजार में बेचे जाते हैं। कर्नाटक में नेफेड द्वारा खरीदे गए खोपरा का 20 फीसदी खुले बाजार में बेचा गया था। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में खोपरा की कीमत 90 रुपये से घटकर 85 रुपये हो गई है। नेफेड द्वारा एक लाख टन खोपरा बेचने पर प्रति किलो खोपरा की कीमत 85 रुपये से गिरकर 50 रुपये हो जाएगी, जबकि नारियल की कीमत 12 रुपये से घटकर 5 रुपये हो जाएगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_657ac4701a228.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने कहा कि नेफेड जिस तरह से गेहूं का आटा भारत आटा के नाम से, दाल भारत दाल के नाम से और प्याज भारत प्याज के नाम से बेचता है, उसी तरह से किसानों के हितों की रक्षा के लिए भारत नारियल तेल के नाम से नारियल तेल की बिक्री करे। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि नेफेड खोपरा नारियल खरीद रहा है और उन्हें खोपरा के रूप में बाजार में बेच रहा है। इससे नारियल किसान बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए नारियल किसानों और सभी किसान संघों की ओर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की जा रही है।</p>
<p>उन्होंने कोकोनट ग्रोअर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, तमिलनाडु फार्मर्स प्रोटेक्शन एसोसिएशन, तमिलनाडु कावेरी फार्मर्स प्रोटेक्शन एसोसिएशन और तमिलनाडु फार्मर्स सोसायटीज के संयुक्त आंदोलन की ओर से कहा कि हम सभी से बड़ी संख्या में भूख हड़ताल में भाग लेने का अनुरोध करते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_657ac47d161c0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ तमिलनाडु के नारियल उत्पादकों ने दिल्ली में शुरू की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_657ac47d161c0.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[थोक महंगाई 8 महीने के शिखर पर आई, नवंबर में खाने&amp;#45;पीने के सामानों के दाम में हुई तेज वृद्धि]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wholesale-inflation-reached-its-peak-in-8-months-sharp-rise-in-prices-of-food-items-in-november.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 14 Dec 2023 13:32:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wholesale-inflation-reached-its-peak-in-8-months-sharp-rise-in-prices-of-food-items-in-november.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि की वजह से नवंबर में थोक महंगाई की दर 8 महीने बाद ऋणात्मक से निकलकर शून्य से ऊपर पहुंच गई है। नवंबर में थोक महंगाई में 0.74 फीसदी की तेज बढ़ोतरी हुई है और यह 0.26 फीसदी पर पहुंच गई है। नवंबर 2022 में यह 6.12 फीसदी थी। इससे पहले अक्टूबर 2023 में यह शून्य से नीचे 0.52 फीसदी पर थी। अप्रैल 2023 से ही थोक महंगाई की दर शून्य से नीचे बनी हुई थी। इस साल अप्रैल में थोक महंगाई की दर घटकर -0.92 फीसदी पर पहुंच गई थी।</p>
<p>वाणिज्य मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी थोक महंगाई के आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर में खाद्य महंगाई की थोक दर अक्टूबर के 2.53 फीसदी से बढ़कर 8.18 फीसदी पर पहुंच गई है। इसी तरह, रोजमर्रा के सामानों की थोक महंगाई दर 1.82 फीसदी से बढ़कर 4.76 फीसदी रही है। विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर -1.13% से बढ़कर -0.64 रही है। हालांकि, ईंधन और बिजली की थोक महंगाई दर -2.47 फीसदी से घटकर -4.61 पर पहुंच गई</p>
<p>इससे पहले मंगलवार (12 दिसंबर) को जब खुदरा महंगाई के आंकड़े आए थे तो, खुदरा महंगाई की दर भी तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। नवंबर में खुदरा महंगाई की दर 5.55 फीसदी पर पहुंच गई। आलू, प्याज, सब्जियों, फलों और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते खुदरा महंगाई बढ़ी है। अक्टूबर में खुदरा महंगाई 4.87 फीसदी रही थी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ थोक महंगाई 8 महीने के शिखर पर आई, नवंबर में खाने-पीने के सामानों के दाम में हुई तेज वृद्धि ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बढ़ती आयात निर्भरता, सात महीनों में 19.63 लाख टन दालों का आयात]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/increasing-import-dependence-import-of-19.63-lakh-tonnes-of-pulses-in-seven-months.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 13 Dec 2023 20:19:06 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/increasing-import-dependence-import-of-19.63-lakh-tonnes-of-pulses-in-seven-months.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल कमजोर मानसून और अल-नीनो प्रभाव के चलते देश के दलहन उत्पादन को झटका लग सकता है। घरेलू खपत को पूरा करने के लिए दालों का आयात बढ़ रहा है। महंगाई रोकने की तमाम कोशिशों के बावजूद नवंबर में दालों की खुदरा महंगाई दर 20.23 फीसदी तक पहुंच गई। खाद्य वस्तुओं की महंगाई बढ़ने से खुदरा महंगाई दर 3 महीने के उच्चतम स्तर 5.55 प्रतिशत पर है। दालों के आयात पर बढ़ती निर्भरता से दलहन उत्पादन बढ़ाने की नीतियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।&nbsp;</p>
<p>कुछ साल पहले देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने में कामयाबी मिली थी। लेकिन मौजूदा वित्त वर्ष में अप्रैल-अक्टूबर के दौरान भारत ने कुल 19.63 लाख टन दालों का आयात किया। लोकसभा में एक लिखित जवाब में कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने यह जानकारी दी। भारत हर साल अपनी जरूरत का लगभग 10-15 फीसदी यानी करीब 25 लाख टन दालों का आयात करता है। लेकिन इस साल सात महीने में ही दालों का आयात 20 लाख टन के करीब पहुंच गया। दलहन की बुवाई के क्षेत्र और उत्पादन में कमी को देखते हुए अब ब्राजील और अर्जेंटीना से दाल आयात की कोशिशें की जा रही हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>दलहन उत्पादन में गिरावट&nbsp;</strong></p>
<p>दालों पर एमएसपी बढ़ाकर दलहन उत्पादन बढ़ाने की रणनीति कारगर रही थी। इसी का नतीजा है कि दलहन उत्पादन साल 2018-19 <span>में 220.76 लाख टन से बढ़कर </span>2021-22 में 273.02 लाख टन तक पहुंच गया था। लेकिन इस बीच कई इलाकों में किसानों को दालों के सही दाम नहीं मिल पाए। और एमएसपी से नीचे दालें बेचने को मजबूर होना पड़ा। ऊपर से मौसम की मार। इन्हीं सब वजहों से 2022-23 में दलहन उत्पादन घटकर 260.58 लाख टन रह गया।</p>
<p>कृषि मंत्रालय के पहले अग्रिम अनुमानों के मुताबिक, चालू खरीफ सीजन में दलहन उत्पादन 71.18 लाख टन रहेगा जो पिछले साल के मुकाबले करीब पांच लाख टन कम है। वर्ष 2016-17 के बाद खरीफ सीजन में यह दालों का यह सबसे कम उत्पादन है। साल 2016-17 के खरीफ सीजन में दलहन उत्पादन 95.85 लाख टन रहा था। तब से खरीफ सीजन में दालों का उत्पादन 2016-17 के स्तर को नहीं छू पाया। मतलब, दालों के मामले में कुछ साल पहले हासिल हुई कामयाबी को छू पाना भी मुश्किल हो रहा है। जबकि घरेलू खपत लगातार बढ़ती जा रही है। &nbsp;</p>
<p><strong>घटी दलहन की बुवाई&nbsp;</strong></p>
<p>कमजोर मानसून और मजबूत अल नीनो के चलते इस साल कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इससे किसानों को तो नुकसान होगा ही, महंगाई के मोर्चे पर सरकार के लिए भी मुश्किलें खड़ी होंगी। एनएसओ के अनुसार, नवंबर में खाद्य महंगाई दर 8.7 फीसदी रही जो पिछले साल नवंबर में 4.67 फीसदी थी। खाने-पीने की चीजों की महंगाई रोकना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।</p>
<p>चिंता की बात यह है कि इस साल खरीफ सीजन में दलहन की बुवाई पिछले साल के मुकाबले 5.41 लाख हेक्टेअर (4.2 फीसदी) घटकर 123.57 लाख हेक्टेअर रही है, जबकि खरीफ में दलहन का सामान्य क्षेत्र 139.70 लाख टन माना जाता है। सामान्य क्षेत्र की तुलना में खरीफ सीजन में दलहन बुवाई 11.5 फीसदी कम क्षेत्र में होना खतरे की घंटी है। यह कमी मुख्यत: अरहर (तुहर) और मूंग की बुवाई कम होने की वजह से आई है। मौसम के अलावा बुवाई घटने के क्या कारण हैं, नीतियों में कहां चूक हो रही है, <span>इसे समझने की जरूरत है।</span></p>
<p><strong>आयात को बढ़ावा</strong></p>
<p>दालों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने जून में अरहर और उड़द के भंडारण पर स्टॉक लिमिट लगा दी थी जिसे सितंबर में और घटा दिया। दालों के आयात को सुगम बनाने के लिए अरहर, मसूर और उड़द के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी गई है। इन रियायतों की वजह से भी दालों का आयात बढ़ा है। हाल ही में सरकार ने पीली मटर के ड्यूटी फ्री आयात की भी अनुमति दी है। लेकिन सवाल है कि क्या आयात के रास्ते आत्मनिर्भरता आ सकती है?&nbsp;&nbsp;</p>
<p>नाबार्ड और इक्रीअर की एक रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि भारत में दालों के साथ-साथ तिलहन के उत्पादन और घरेलू मांग के बीच अंतर आने वाले सात वर्षों यानी 2030 तक बना रहेगा। इसके चलते आयात पर निर्भरता रहेगी। इसलिए दलहन उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने की जरूरत है। लेकिन यह भी देखना होगा कि देश में दलहन उत्पादन बढ़ने के बाद आखिर कहां चूक हुई।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बढ़ती आयात निर्भरता, सात महीनों में 19.63 लाख टन दालों का आयात ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नैनो तरल यूरिया की 6.76 करोड़ बोतलों की हुई बिक्री, इफको ने जून 2021 में किया था लॉन्च]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/over-6cr-76lakh-500ml-bottles-of-nano-liquid-urea-sold-during-aug-2021-nov-2023.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 13 Dec 2023 14:12:04 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/over-6cr-76lakh-500ml-bottles-of-nano-liquid-urea-sold-during-aug-2021-nov-2023.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नैनो तरल यूरिया की लॉन्चिंग के बाद से अब तक 6.76 करोड़ बोतलों (500 एमएल) की बिक्री हो चुकी है। केंद्रीय रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री भगवंत खुबा ने संसद को यह जानकारी दी है। भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको) ने दुनिया का पहला नैनो यूरिया जून 2021 में लॉन्च किया था।</p>
<p>भगवंत खुबा ने राज्यसभा में दिए जवाब में बताया कि अगस्त 2021-नवंबर 2023 की अवधि के दौरान 500 मिलीलीटर वाले नैनो तरल यूरिया की 6.76 करोड़ बोतलों की बिक्री हुई। उन्होंने राज्यसभा को बताया कि सरकार ने उर्वरक नियंत्रण आदेश (एफसीओ), 1985 में नैनो यूरिया को अधिसूचित किया है। इफको ने सालाना 17 करोड़ बोतल (500 मिलीलीटर प्रत्येक) की क्षमता वाले तीन संयंत्र स्थापित किए हैं जो कलोल, फूलपुर और आंवला में है। उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया संयंत्रों की स्थापना में सरकार सीधे तौर पर शामिल नहीं है। हालांकि, उर्वरक कंपनियों ने देश में छह और नैनो यूरिया संयंत्र स्थापित करने का फैसला किया है।</p>
<p>आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2021 से मार्च 2022 के दौरान नैनो यूरिया की बिक्री 2,12,13,280 बोतल रही। 2022-23 के दौरान 3,25,35,338 बोतलों की बिक्री हुई। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-नवंबर अवधि के दौरान नैनो यूरिया की बिक्री 1,38,77,154 बोतल रही है। अगस्त 2021 से नवंबर 2023 के दौरान नैनो यूरिया की कुल बिक्री 6,76,25,772 बोतल रही है।</p>
<p>इफको ने दुनिया का पहला नैनो यूरिया उर्वरक लॉन्च करने के बाद इस साल नैनो डीएपी (डाइ-अमोनियम फॉस्फेट) भी लॉन्च किया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नैनो तरल यूरिया की 6.76 करोड़ बोतलों की हुई बिक्री, इफको ने जून 2021 में किया था लॉन्च ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्धः मुंडा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-committed-to-providing-remunerative-prices-to-farmers-said-arjun-munda.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 12 Dec 2023 17:36:01 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-committed-to-providing-remunerative-prices-to-farmers-said-arjun-munda.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने किसानों से प्याज की खरीद के संबंध में मंगलवार को नेफेड, एनसीसीएफ, कृषि और खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक में समीक्षा की। बैठक में मुंडा ने कहा कि किसानों को लाभकारी मूल्य मिले, इसके लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार प्याज उत्पादक किसानों की हमेशा चिंता करती आई है और आगे भी उनके हितों के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।</p>
<p>एक सरकारी बयान में कहा गया है कि चालू वर्ष में सरकार ने एनसीसीएफ व नेफेड को बफर स्टाक के लिए 7 लाख टन प्याज खरीदने का निर्देश दिया है। अब तक दो चरणों में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान व आंध्र प्रदेश से प्याज की खरीद की गई है। वहीं गुजरात के किसानों से भी एजेंसियों द्वारा प्याज खरीदने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p>बयान के मुताबिक, किसानों को लाभकारी मूल्य देने के लिए एनसीसीएफ व नेफेड ने किसानों एवं एफपीओ के बीच जागरूकता का प्रचार-प्रसार करते हुए पेम्पलेट वितरित करना शुरू किया है। साथ ही, गुणवत्तापूर्ण उपज खरीदकर किसानों को सही कीमत देने के उद्देश्य से व्यापक प्रचार तथा किसानों तक पहुंच के लिए समाचार-पत्रों में विज्ञापन भी प्रकाशित किए जा रहे हैं।</p>
<p>बैठक के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के विशेष सचिव ने बताया कि प्याज की अधिक बुवाई के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य सरकारों के साथ बैठकें की गई है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_65784c6d364ac.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्धः मुंडा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_65784c6d364ac.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तमिलनाडु के किसान रविचंद्रन वी अय्यर को मिला कोर्टेवा एग्रीसाइंस अवार्ड]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/tn-farmer-ravichandran-v-iyer-bags-corteva-agriscience-award.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 12 Dec 2023 14:20:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/tn-farmer-ravichandran-v-iyer-bags-corteva-agriscience-award.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि समाधानों की वैश्विक कंपनी कोर्टेवा एग्रीसाइंस ने अपने क्लाइमेट पॉजिटिव लीडर्स प्रोग्राम के लिए भारत को विजेता घोषित किया है। तमिलनाडु के किसान रविचंद्रन वंचीनाथ अय्यर को यह अवार्ड मिला है। वे जलवायु सकारात्मक प्रथाओं को खेती में सफलतापूर्वक अपनाने वाले शुरुआती किसानों में से एक हैं। इन प्रथाओं को वे दूसरे किसानों से भी साझा कर रहे हैं। &nbsp;</p>
<p>इस कार्यक्रम का मकसद उन किसानों को सम्मानित करना है जिन्होंने जलवायु सकारात्मक कृषि को आगे बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रभाव डाला है। जलवायु परिवर्तन पर बढ़ती चिंताओं और टिकाऊ समाधानों की अनिवार्यता को देखते हुए कोर्टेवा पर्यावरण संरक्षण के साथ कृषि उत्पादकता को बढ़ाने वाली नई प्रथाओं की वकालत करने और सुविधा प्रदान करने में सबसे आगे है।</p>
<p>तमिलनाडु के रविचंद्रन धान, कपास, दालों और गन्ना जैसी प्रमुख फसलों की खेती करते हैं। &nbsp;कृषि वैज्ञानिकों, सार्वजनिक और निजी अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, निजी क्षेत्र के शोधकर्ताओं और साथी किसानों के मार्गदर्शन का लाभ उठाते हुए उन्होंने बेहतर सिंचाई प्रबंधन के माध्यम से पर्यावरण अनुकूल चावल उगाने पर ध्यान केंद्रित किया है। ड्रिप सिंचाई तकनीक, उर्वरकों के बेहतर इस्तेमाल और चावल की किस्मों के रणनीतिक चयन पर अधिक जोर देने के साथ उन्होंने अच्छी कृषि पद्धतियों को अपनाकर पानी की खपत में 50 फीसदी तक की कमी लाई है। इसके जरिये मीथेन उत्सर्जन और कार्बन फूटप्रिंट को कम करने में उन्होंने सफलता पाई है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_65781ebcde7d9.jpg" alt="" /></p>
<p>कोर्टेवा ने एक बयान में कहा है कि रविचंद्रन खेती में शून्य प्लास्टिक अपशिष्ट और शून्य प्रदूषण रणनीति अपनाते हैं। वे वनस्पति अपशिष्ट को गीली घास में बदल कर मिट्टी को &nbsp;कार्बन से समृद्ध बनाते हैं और यूरिया का उपयोग कम करते हैं।</p>
<p>बयान के मुताबिक, रविचंद्रन के प्रयास कोर्टेवा के मूल मूल्यों का प्रतीक हैं जो टिकाऊ कृषि को प्राथमिकता देते हैं। उनकी उपलब्धियां यह बात साबित करती है कि उत्पादकता से समझौता किए बिना खेती में स्थिरता हासिल की जा सकती है। इस अवार्ड के तहत ग्लोबल फार्मर राउंडटेबल में प्रशिक्षण और व्यक्तिगत भागीदारी के अलावा उन्हें ग्लोबल फार्मर नेटवर्क (जीएफएन) की आजीवन सदस्यता प्राप्त होगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_65781eb17c296.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ तमिलनाडु के किसान रविचंद्रन वी अय्यर को मिला कोर्टेवा एग्रीसाइंस अवार्ड ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_65781eb17c296.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज की अतिरिक्त 2 लाख टन की होगी खरीद, बफर स्टॉक के लिए सरकार पहली बार खरीदेगी खरीफ की फसल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-to-buy-2-lakh-tonne-onion-for-buffer-stock-will-procure-kharif-crop-first-time.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 12 Dec 2023 12:45:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-to-buy-2-lakh-tonne-onion-for-buffer-stock-will-procure-kharif-crop-first-time.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्याज किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए केंद्र सरकार ने पहली बार खरीफ के प्याज की सरकारी खरीद करने का फैसला किया है। इसके तहत 2 लाख टन प्याज की खरीद बफर स्टॉक के लिए की जाएगी। नेफेड और एनसीसीएफ यह खरीद करेगी। चालू वित्त वर्ष में अभी तक 5.10 लाख टन प्याज की खरीद बफर स्टॉक के लिए हो चुकी है। यह खरीद अतिरिक्त होगी।</p>
<p>प्याज की बढ़ती घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 8 दिसंबर को प्याज निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके खिलाफ महाराष्ट्र के किसान और व्यपारी प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बाद ही सरकार ने बफर स्टॉक के लिए अतिरिक्त 2 लाख टन प्याज खरीदने का फैसला किया है ताकि प्रतिबंध के कारण कीमतों में भारी गिरावट न हो।</p>
<p>उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि निर्यात प्रतिबंध का किसानों पर कोई असर नहीं होगा क्योंकि सरकारी खरीद जारी है। उन्होंने कहा, ''इस साल अब तक हमने 5.10 लाख टन प्याज की खरीद की है और लगभग 2 लाख टन खरीफ फसल की खरीद की जाएगी।''</p>
<p>आमतौर पर सरकार बफर स्टॉक के लिए रबी प्याज की खरीद करती है क्योंकि इसकी जीवन अवधि (5-6 महीने) ज्यादा होती है। खरीफ के प्याज की जीवन अवधि 2-3 महीने से ज्यादा नहीं होती है। मगर किसानों के हितों की रक्षा करने और खुदरा बाजारों में कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने के लिए सरकार पहली बार खरीफ की प्याज खरीदेगी।</p>
<p>सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए बफर स्टॉक के लक्ष्य को बढ़ाकर 7 लाख टन कर दिया है, जो पिछले साल 3 लाख टन था। बफर स्टॉक के लिए किसानों से लगभग 5.10 लाख टन प्याज खरीदा गया है, जिसमें से 2.73 लाख टन का निपटान बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत थोक मंडियों में किया गया है। रोहित सिंह के मुताबिक, पिछले 50 दिनों में देशभर के 218 शहरों के खुदरा बाजार में लगभग 20,718 टन प्याज रियायती दरों पर बेचा गया है। खुदरा बिक्री अभी भी जारी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बाजार में हस्तक्षेप जारी रहेगा क्योंकि इस साल खरीफ के प्याज का उत्पादन मामूली रूप से घटने की संभावना है। इसके अलावा, मौसम के कारण खरीफ की फसल आने में भी देरी हो रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीद/निपटान से लेकर निर्यात पर हालिया प्रतिबंध जैसे कदमों से कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने में मदद मिली है। प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत घटकर 56 रुपये प्रति किलो हो गई है, जो पिछले महीने इस समय 59.5 रुपये प्रति किलो थी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64ef3629a8275.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज की अतिरिक्त 2 लाख टन की होगी खरीद, बफर स्टॉक के लिए सरकार पहली बार खरीदेगी खरीफ की फसल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64ef3629a8275.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कपास का भाव दो साल के निचले स्तर पर, उत्पादन घटने के बावजूद क्यों नहीं बढ़ रहे दाम, ये है वजह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cotton-price-is-at-the-lowest-level-in-two-years-this-is-the-reason-why-the-prices-are-not-increasing-despite-the-decrease-in-production.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 12 Dec 2023 06:56:44 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cotton-price-is-at-the-lowest-level-in-two-years-this-is-the-reason-why-the-prices-are-not-increasing-despite-the-decrease-in-production.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिंक बॉलवर्म के भयानक प्रकोप की वजह से इस साल उत्तर भारत के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों, खासकर राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में कपास की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। इससे उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद कपास का भाव दो साल के निचले स्तर पर पहुंच चुका है। उत्तर भारत की ज्यादातर कृषि उपज मंडियों में इन दिनों कपास का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे चल रहा है। इसे लेकर शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने और पंजाब में कपास की खरीद एमएसपी पर करने का अनुरोध किया है। &nbsp;</p>
<p>पंजाब में फिलहाल कपास का भाव 4700-6600 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। वहीं राजस्थान में औसतन 6200 रुपये प्रति क्विंटल का भाव है। जबकि सबसे बड़े कपास उत्पादक राज्य महाराष्ट्र की मंडियों में भाव एमएसपी से ऊपर चल रहा है। 2022 और 2021 के सीजन में किसानों को कपास का भाव 12,000-13,000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिला था। केंद्र सरकार ने चालू सीजन के लिए लंबे रेशे वाले कपास का एमएसपी 7020 रुपये प्रति क्विंटल और मध्यम रेशे वाले का एमएमपी 6620 रुपये क्विंटल तय किया है।</p>
<p>नाम नहीं छापने की शर्त पर कपास उद्योग के एक सूत्र ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि उत्पादन घटने के बावजूद घरेलू बाजार में कीमतें नहीं बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह गुणवत्ता है। पिंक बॉलवर्म की वजह से न सिर्फ उत्पादन घटा है, बल्कि कपास के रेशे की गुणवत्ता भी काफी प्रभावित हुई है। उद्योग के सूत्रों का कहना है कि इस साल जैसी खराब गुणवत्ता पिछले 25-30 सालों में देखने को नहीं मिली है। इस वजह से विदेशों से ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। चीन, बांग्लादेश जैसे देश जिन्हें हम कपास का ज्यादा निर्यात करते थे, वे गुणवत्ता को देखते हुए ऑर्डर नहीं दे रहे हैं।</p>
<p>कपास की कीमतें अंतरराष्ट्रीय भाव से तय होती है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका, ब्राजील, तुर्की और ग्रीस जैसे प्रमुख कपास उत्पादक देशों में इस बार फसल अच्छी है और उनकी गुणवत्ता भी बेहतर है। जो आयातक पहले भारत से आयात करते थे, वे अब दूसरे देशों का रुख कर रहे हैं। गुणवत्ता की वजह से ही घरेलू खरीदारों (कपड़ा उद्योग) की ओर से भी मांग कम निकल रही है। घरेलू खरीदार महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कपास का इंतजार कर रहे हैं। वहां अभी कटाई नहीं हुई है और वहां इस साल पिंक बॉलवर्म का प्रकोप भी नहीं है।</p>
<p>राजस्थान के कपास किसानों के हितों के लिए काम करने वाले जोधपुर स्थित साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी के संस्थापक भगीरथ चौधरी ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया,&nbsp; &ldquo;कपास उत्पादन को लेकर इस साल संकट की स्थिति है। एक तरफ उत्पादन 20 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंचने का अनुमान है, दूसरी तरफ किसानों को वाजिब कीमत भी नहीं मिल रही है। पिछले दो-तीन महीने से कपास के भाव एमएसपी से नीचे चल रहे हैं, जबकि आमतौर पर इसका भाव एमएसपी से ऊपर ही रहता है। इस बार उत्पादन अगर 290 लाख गांठ तक भी पहुंच जाए तो बहुत बड़ी बात होगी।&rdquo;</p>
<p>कपास उद्योग के संगठन कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने 2023-24 में 295 लाख गांठ उत्पादन का अनुमान लगाया है, जो पिछले साल के उत्पादन से करीब 7.5 फीसदी कम है। 2022-23 में करीब 319 लाख गांठ कपास का उत्पादन देश में हुआ था। सीएआई ने उत्तर भारत में इस साल 43 लाख गांठ (एक गांठ में 170 किलो) उत्पादन का अनुमान लगाया है। उत्तरी क्षेत्र में राजस्थान, हरियाणा और पंजाब आते हैं। मध्य क्षेत्र में 179.60 लाख गांठ उत्पादन का अनुमान है, जो पिछले सीजन के 194.62 लाख गांठ से कम है। मध्य क्षेत्र में गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश हैं। वहीं दक्षिण भारत में उत्पादन 74.85 लाख गांठ से घटकर 67.50 लाख गांठ रहने का अनुमान सीएआई ने लगाया है।</p>
<p>भगीरथ चौधरी के मुताबिक, बाजार में कपास के कम भाव को देखते हुए सीसीआई (कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) को हस्तक्षेप करना चाहिए और पूरे देश में बड़े पैमाने पर एमएसपी पर कपास की खरीद करनी चाहिए। इस साल न सिर्फ पिंक बॉलवर्म का असर पड़ा है, बल्कि मौसम ने भी काफी नुकसान पहुंचाया है। साथ ही, इस साल कपास खेती की लागत भी ज्यादा रही। भाव नहीं मिलने से किसानों पर चौतरफा मार पड़ी है। उनका कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और इजराइल-हमास संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय सेंटीमेंट प्रभावित हुआ है और कपड़ा उद्योग की मांग में कमी आई है। आपूर्ति बाधित होने और मांग घटने के कारण कीमतों पर असर पड़ा है। इसे सुधारने के लिए केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए और देशों के स्तर पर द्विपक्षीय बातचीत के जरिये इसका समाधान निकालना चाहिए। पारंपरिक देशों के अलावा भारत को अन्य निर्यात बाजार भी तलाशने की जरूरत है। &nbsp;</p>
<p>शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी कपास को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा है कि उन्हें किसानों से शिकायतें मिली हैं कि भारतीय कपास निगम (सीसीआई) ने पंजाब में एमएसपी घटा दिया है और बहुत कम मात्रा में कपास खरीदा जा रहा है। सीसीआई गुणवत्ता के नाम पर एमएसपी में 150 रुपये की कटौती कर रहा है। साथ ही, सीसीआई थोड़ी-थोड़ी मात्रा में फसल खरीद रही है। इससे किसान निजी व्यापारियों को फसल बेचने के लिए मजबूर हैं। निजी व्यापारी 5000-5200 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत पर फसल खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में खरीदी गई लगभग 3.5 लाख क्विंटल कपास में से सीसीआई ने केवल एक लाख क्विंटल खरीदी है।</p>
<p>उन्होंने प्रधानमंत्री से कपास की खरीद सुनिश्चित करने के लिए सीसीआई को आवश्यक निर्देश देने का आग्रह करते हुए कहा कि किसानों को एमएसपी दिया जाना चाहिए। जिन्होंने अपनी फसल एमएसपी से कम पर सीसीआई को बेची, उन्हें बकाया भुगतान किया जाना चाहिए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कपास का भाव दो साल के निचले स्तर पर, उत्पादन घटने के बावजूद क्यों नहीं बढ़ रहे दाम, ये है वजह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि वस्तुओं का निर्यात सितंबर में घटकर 17.93 लाख टन रहाः एपीडा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/exports-of-agri-items-fall-to-17-lakh-93-thousand-toones-in-september-said-apeda.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 11 Dec 2023 13:26:20 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/exports-of-agri-items-fall-to-17-lakh-93-thousand-toones-in-september-said-apeda.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गैर बासमती सफेद चावल, गेहूं और चीनी के निर्यात पर प्रतिबंधों के चलते कृषि वस्तुओं का निर्यात सितंबर में घटकर 17.93 लाख टन रह गया है। इससे पिछले महीने अगस्त में कृषि वस्तुओं का निर्यात 27.94 लाख टन रहा था। कृषि-निर्यात प्रोत्साहन संस्था एपीडा (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादन निर्यात विकास प्राधिकरण) के ताजा आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है।</p>
<p>इस साल अप्रैल और मई में कृषि वस्तुओं का निर्यात लगभग 33-33 लाख टन रहा था। मगर टूटे चावल और गैर-बासमती सफेद चावल सहित चावल की विभिन्न किस्मों के निर्यात पर कई प्रतिबंधों के कारण कृषि वस्तुओं का निर्यात मई के बाद लगातार घटता गया। तब से सितंबर तक इसमें 15 लाख टन की कमी आई है।</p>
<p>एपीडा के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 के अगस्त में कृषि वस्तुओं का निर्यात 27.94 लाख टन था। कीमतों के लिहाज से देखें तो कृषि वस्तुओं का निर्यात सितंबर में घटकर 14,153 करोड़ रुपये रह गया, जो अगस्त में 18,128 करोड़ रुपये था।</p>
<p>आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में ज्यादातर निर्यात गैर-बासमती चावल का हुआ जो 4.25 लाख टन रहा। <span>&nbsp;</span>बासमती चावल का निर्यात 1.21 लाख टन, प्याज का 1.51 लाख टन और भैंस के मांस का 1,21,427 टन निर्यात हुआ था। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में कृषि वस्तुओं का कुल निर्यात 172.27 लाख टन रहा।</p>
<p>घरेलू आपूर्ति को बढ़ावा देने और खाद्य महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए चावल की विभिन्न किस्मों पर प्रतिबंध, बासमती चावल पर न्यूनतम निर्यात मूल्य लगाने के कारण कृषि वस्तुओं के निर्यात पर असर पड़ा है। एपीडा मांस और पॉल्ट्री उत्पादों सहित 47 कृषि वस्तुओं के निर्यात के आंकड़े जारी करता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/08/image_750x500_611cf1fb79917.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि वस्तुओं का निर्यात सितंबर में घटकर 17.93 लाख टन रहाः एपीडा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एजेंडा फॉर रूरल इंडियाः नए ग्रामीण भारत की आकांक्षाएं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agenda-for-rural-india-aspirations-of-new-rural-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 11 Dec 2023 07:25:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agenda-for-rural-india-aspirations-of-new-rural-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>रूरल वॉयस (रूरल वर्ल्ड का सहयोगी प्रकाशन) और सॉक्रेटस (गैर सरकारी संगठन) ने यह असाधारण कार्य किया है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में गया, वहां लोगों की बातें सुनीं। इसने भारत के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच केंद्रों में लोगों की आकांक्षाओं को समझने का प्रयास किया। संक्षेप में कहें, तो यह प्रयास बहुसंख्यक भारतीयों की चिंताओं, प्राथमिकताओं और आकांक्षाओं के साथ भविष्य के दृष्टिकोण का खाका प्रस्तुत करता है। सरकार और नीति निर्माताओं के लिए यह ग्रामीण विकास को नया स्वरूप देने और आकांक्षी ग्रामीण भारत की समस्याओं के समाधान का एक टेम्पलेट भी मुहैया कराता है। </span></p>
<p><span>आयोजकों ने विकास, जलवायु और पर्यावरण तथा राजनीतिक-आर्थिक के अलग-अलग शीर्षकों के तहत मुद्दों को रेखांकित किया है। फिर भी, साझा तौर पर जो मुद्दे सामने आते हैं, वे हैं: अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में लोग उर्वरकों और कीटनाशकों का कम उपयोग करना चाहते हैं, बाजार तक बेहतर पहुंच के साथ उपज की अच्छी कीमत चाहते हैं, मानव-पशु संघर्ष का समाधान चाहते हैं- विशेष रूप से आवारा पशुओं के संदर्भ में, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस के साथ पर्यावरण की रक्षा के लिए अधिक प्रयास चाहते हैं।</span><br /><span></span></p>
<p><span>हालांकि इन मुद्दों को विभिन्न मंचों पर अनेक बार उठाया गया है, यह संभवतः पहली बार है कि उन्हें एक ठोस, एक्शन योग्य प्रारूप में रखा गया है। ग्रामीण भारत की आम शिकायत है कि चुनावों में किए जाने वाले बड़े-बड़े वादों पर अमल नहीं होता है। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि ग्रामीण भारत नेताओं और उनके चुनावी वादों से निराश है। उन्हें एहसास होने लगा है कि चुनावी वादे तो बस जुमले हैं। यदि ग्रामीण भारत को समृद्ध, स्वस्थ और शांतिपूर्ण बनाना है तो इस धारणा को बदलना होगा। सरकार से लोगों के निराश होने का परिणाम समाज में अशांति हो सकती है और उग्रवाद का मार्ग प्रशस्त हो सकता है जो देश के समग्र विकास के लिए हानिकारक है।</span><br /><span></span></p>
<p><span>ग्रामीण भारत को अवरुद्ध करने वाली इनमें से अधिकांश समस्याओं से सरकार अवगत है। उसने मनरेगा, स्वच्छ भारत, ग्रामीण पेयजल मिशन (जल शक्ति), ग्रामीण विद्युतीकरण, पीएम किसान, आकांक्षी जिला (अब ब्लॉक) कार्यक्रम, मध्याह्न भोजन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, आईसीडीएस जैसी योजनाओं के माध्यम से समय-समय पर इन समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया है। इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण भारतीयों की आय और जीवन में सुधार है। अधिकांश योजनाओं के सकारात्मक परिणाम रहे हैं। हालांकि, आकांक्षी ग्रामीण भारत गरीबों के जीवन में सुधार लाने वाले ऐसे कार्यक्रमों से अधिक और तेज नतीजों की उम्मीद करता है। इस लिहाज से देखा जाए तो कुछ योजनाओं को एकीकृत करने और गांव तथा ब्लॉक स्तर पर प्रयासों को साथ लाने के लिए नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है।</span><br /><span></span></p>
<p><span>ग्रामीण विकास मंत्रालय अपने गठन के बाद से ही ग्रामीण विकास और गरीबी दूर करने के कार्यक्रम तैयार और कार्यान्वित कर रहा है। इस मद में वह काफी व्यय भी करता है। इनमें आईआरडीपी और इसके बाद के अवतार मनरेगा, पीएमजीएसवाई जैसे कुछ प्रमुख कार्यक्रम शामिल हैं। स्वास्थ्य, पेयजल और स्वच्छता, कृषि, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन, पंचायती राज, जल संसाधन जैसे अन्य मंत्रालयों के भी कई प्रमुख कार्यक्रम ग्रामीण भारत के लिए हैं, जिन्हें संबंधित मंत्रालय संचालित करते हैं। इन्हें जिला और ब्लॉक स्तरों पर लागू किया जाता है। इन कार्यक्रमों को लागू करने वाली संबंधित एजेंसियों द्वारा केंद्रीय और राज्य स्तर पर इनकी निगरानी की जाती है। लेकिन ऐसा लगता है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय के पास सभी ग्रामीण विकास कार्यक्रमों और ग्रामीण आबादी पर उनके प्रभाव की जानकारी नहीं है। व्यापक विकास के परिप्रेक्ष्य से नतीजों को मापना और प्रभावों का आकलन करना एक चुनौती बना हुआ है।</span><br /><span></span></p>
<p><span>सरकार को चाहिए कि वह सभी ग्रामीण कार्यक्रमों की योजना बनाने और उनकी निगरानी में ग्रामीण विकास विभाग को बड़ी भूमिका दे। उसकी भूमिका नीति आयोग के लगभग समानांतर हो। कार्यक्रमों को ब्लॉक और जिला स्तर पर लागू करने की जिम्मेदारी भी उसी के पास हो। इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय में योजना बनाने के साथ उनकी निगरानी कार्य समाहित करने की आवश्यकता है।</span><br /><span></span></p>
<p><span>केंद्रीय मंत्रालयों में मंत्री और सचिव स्तर पर शासन के पद-क्रम की प्रकृति को देखते हुए, इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय में एक अलग तरह की समन्वय अथॉरिटी की आवश्यकता है। पारंपरिक समन्वय समिति या मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह से परिणाम मिलने की संभावना नहीं है। संबंधित मंत्रालय राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार कार्यक्रम डिजाइन करने के लिए स्वतंत्र रहें, लेकिन कार्यान्वयन और परिणामों की निगरानी की जिम्मेदारी नई समन्वय अथॉरिटी को सौंपी जानी चाहिए। राज्य स्तर पर भी ऐसी ही अथॉरिटी बनाई जानी चाहिए।</span><br /><span></span></p>
<p><span>अधिकांश केंद्रीय कार्यक्रमों का प्रभावी कार्यान्वयन राज्य और जिला स्तर के प्रशासन पर निर्भर करता है। विकास के अधिकांश कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में जिला प्रमुख प्रशासनिक इकाई बन गया है। लेकिन जिला कलेक्टर की व्यवस्था अब भी पुराने राजस्व और कानून-व्यवस्था सिस्टम की तर्ज पर चल रही है। जिला स्तर पर जिला विकास आयुक्त और जिला परिषद प्रणाली गठित करने के प्रयोगों के वांछित परिणाम नहीं मिले हैं। राज्य सरकारें अपनी भूमिका और अधिकारों को किसी जिला स्तरीय संस्था को सौंपने में झिझकती रही हैं, चाहे वह निर्वाचित हो या अन्य। एक-दो राज्यों को छोड़कर, जिला स्तरीय पंचायती राज (जिला परिषद) प्रयोग को कोई खास सफलता नहीं मिली है।</span><br /><span></span></p>
<p><span>आधुनिक समय में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में होने वाली प्रगति विकास को आगे बढ़ा रही है। इसके साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी का महत्व भी बढ़ा है। इसे देखते हुए जिला स्तर पर शासन के मॉडल को इसके दायरे, इसकी शक्तियों और जिम्मेदारियों के संदर्भ में एक नया स्वरूप देने की आवश्यकता है। योजना बनाना निर्वाचित प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी होनी चाहिए, कार्यान्वयन की जिम्मेदारी कार्यपालिका की ही होनी चाहिए। विकास की निगरानी अलग ढंग से हो और योजनाओं में ही उनमें सुधार की गुंजाइश होनी चाहिए। जिला कलेक्टर कार्यालय कामकाज के मौजूदा मानदंडों के साथ आकांक्षी भारत की चुनौतियों को पूरा करने में सक्षम नहीं होगा। इस कार्यालय को व्यापक तौर पर रीडिजाइन करने और मजबूत बनाने की जरूरत है। जिला कलेक्टर की मदद के लिए युवा और कुशल तकनीक वाले प्रोफेशनल होने चाहिए। कलेक्टर को कई नियमित समितियों और बैठकों से भी मुक्त किया जाना चाहिए जो उसके कामकाज पर असर डालती हैं। यदि सार्थक ग्रामीण विकास हासिल करना है तो जिला कलेक्टर की भूमिका और कार्यों को तत्काल नए सिरे से डिजाइन करने की आवश्यकता है।</span><br /><span></span></p>
<p><span>खंड विकास कार्यालय ग्रामीण विकास का आधार है। तत्कालीन योजना आयोग के सामुदायिक विकास एजेंडे में इसकी कल्पना की गई थी। सभी प्रशासनिक कार्यालयों में यह संभवतः सबसे अधिक समीक्षा, पर्यवेक्षण और निगरानी किया जाने वाला कार्यालय है। कौशल और सपोर्ट सिस्टम को देखते हुए इस कार्यालय से अपेक्षाएं बहुत अधिक हैं। ऐसे में कोई आश्चर्य नहीं कि दिए गए टार्गेट को हासिल करना प्राथमिकता बन जाती है, चाहे वह टारगेट जो भी हो।</span><br /><span>कार्यान्वयन के पद-क्रम में खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कार्यों और जिम्मेदारियों के मामले में सबसे महत्वपूर्ण होता है, लेकिन कौशल और सपोर्ट सिस्टम के लिहाज से उसकी स्थिति शायद सबसे कमजोर होती है। केंद्र और राज्य सरकारों ने इस कमी को दूर करने के लिए अक्सर अपर्याप्त और तदर्थ प्रयास ही किए हैं। उन्होंने खंड विकास कार्यालय के काम के ढांचे को रीडिजाइन करने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया है। उन्होंने अधिकारियों को कामकाज की प्रक्रिया या प्रौद्योगिकी के मामले में प्रशिक्षण देने में पर्याप्त निवेश भी नहीं किया है। आज का खंड विकास कार्यालय भविष्य का कार्यालय होने के बजाय अतीत का प्रतिनिधित्व करता है।</span><br /><span></span></p>
<p><span>जिन राज्यों ने 73वें संविधान संशोधन की परिकल्पना के अनुसार पंचायतों को अधिक काम और जिम्मेदारियां सौंपी हैं, उनके परिणाम उन राज्यों की तुलना में बेहतर रहे हैं जो पंचायतों को सशक्त बनाने में धीमे थे। कई राज्यों ने तो पंचायतों को किसी तरह की स्किल या वित्तीय शक्ति दिए बिना सिर्फ कागजों पर अधिकार दे दिए। तेज ग्रामीण विकास हासिल करने के लिए उठाए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है- उपलब्ध सर्वोत्तम तकनीकी सहायता के साथ स्थानीय रूप से उपयुक्त योजनाओं को डिजाइनिंग, प्लानिंग और कार्यान्वित करने के लिए पंचायतों को सशक्त बनाना। वित्त आयोग के अनुदान के बावजूद राज्य पंचायतों को संसाधन आवंटित करने और उन्हें बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए मदद करने में असमर्थ रहे हैं। यह स्थिति ग्रामीण विकास के लिए अभिशाप है। कम समय में ग्रामीण परिदृश्य बदलने के लिए पांच साल का निवेश कार्यक्रम पहला कदम है। इसमें कौशल विकास, प्रौद्योगिकी उन्नयन, मैनेजमेंट ओरिएंटेशन, रिपोर्टिंग और मॉनिटरिंग सिस्टम, अधिक राशि का हस्तांतरण और इसके उपयोग के लिए निरंतर मार्गदर्शन शामिल होना चाहिए।</span><br /><span></span></p>
<p><span>बेशक, राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत मुद्दे हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। इनमें कृषि, पशुधन और मत्स्य पालन, रासायनिक उर्वरकों के लिए इन्सेंटिव, प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा, ग्रामीण बाजारों को शहरी मांग केंद्रों से जोड़ना, कृषि उपज के प्रसंस्करण के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश, ग्रामीण बुनियादी ढांचे में निवेश तथा जलवायु और पर्यावरण से संबंधित नीतियां शामिल हैं।</span><br /><span></span></p>
<p><span>किसी भी जन-हितैषी और जन-केंद्रित योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विभिन्न स्तर पर लोगों की बातों को ध्यान से सुनने की सरकार की क्षमता है। रूरल वॉयस और सॉक्रेटस का यह प्रयास ग्रामीण भारत की समस्याओं और आकांक्षाओं को समझने की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम है। सरकार को सलाह होगी कि वह समस्याओं और आकांक्षाओं को समझने तथा लोगों के अनुकूल नीतियों को डिजाइन करने में लोगों की आवाज सुनने के लिए ऐसे अनौपचारिक प्लेटफॉर्मों का उपयोग करे।</span></p>
<p><em><strong>(लेखक खाद्य एवं कृषि मंत्रालय, भारत सरकार के पूर्व सचिव और एनडीडीबी के पूर्व चेयरमैन हैं)</strong></em></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_650455f306f04.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एजेंडा फॉर रूरल इंडियाः नए ग्रामीण भारत की आकांक्षाएं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जूट पैकेजिंग मानदंडों को सीसीईए की मंजूरी, खाद्यान्न एवं चीनी की पैकेजिंग में अनिवार्य रूप से होता है इस्तेमाल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-jute-packaging-norms-for-foodgrains-sugar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 09 Dec 2023 15:13:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approves-jute-packaging-norms-for-foodgrains-sugar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (<span>सीसीईए) ने जूट वर्ष </span>2023-24 (1 <span>जुलाई</span>,&nbsp;2023 <span>से </span>30 <span>जून</span>,&nbsp;2024) <span>के लिए पैकेजिंग में जूट के अनिवार्य उपयोग के लिए आरक्षण मानदंडों को मंजूरी दे दी है। इसके तहत खाद्यान्नों की पैकेजिंग में शत-प्रतिशत और चीनी की पैकेजिंग में अनिवार्य रूप से </span>20 <span>फीसदी जूट की बोरियों का इस्तेमाल करने का प्रावधान है। </span></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई सीसीईए की बैठक में जूट के आरक्षण मानदंडों को मंजूरी दी गई। एक सरकारी बयान में कहा गया है कि जूट पैकेजिंग सामग्री में पैकेजिंग के लिए आरक्षण से देश में उत्पादित कच्चे जूट (2022-23 <span>में) का लगभग </span>65 <span>फीसदी हिस्सा खपत होता है। जेपीएम अधिनियम, 1987 के तहत आरक्षण संबंधी मानदंड जूट के क्षेत्र में चार लाख श्रमिकों और </span>40 <span>लाख किसानों को सीधे रोजगार प्रदान करते हैं। यह अधिनियम जूट किसानों</span>,&nbsp;श्रमिकों और जूट के सामान के उत्पादन में लगे लोगों के हितों की रक्षा करता है। इसके अलावा,&nbsp;यह पर्यावरण की रक्षा में मदद करता है क्योंकि जूट प्राकृतिक,&nbsp;जैविक रूप से अपघटित होने योग्य,&nbsp;नवीकरणीय एवं पुनः उपयोग योग्य रेशा है। इसलिए यह टिकाऊ होने के सभी मानकों को पूरा करता है।</p>
<p>भारत सरकार खाद्यान्नों की पैकिंग के लिए हर साल लगभग 12,000 <span>करोड़ रुपये मूल्य के जूट की बोरियां खरीदती है। यह कदम</span>&nbsp;जूट किसानों एवं श्रमिकों की उपज के लिए गारंटीकृत बाजार सुनिश्चित करता है। जूट की बोरियों का औसत उत्पादन सालाना लगभग 30 <span>लाख गांठ (</span>9 <span>लाख मीट्रिक टन) है। सरकार जूट किसानों</span>,&nbsp;श्रमिकों तथा जूट उद्योग में लगे लोगों के हितों की रक्षा के लिए जूट की बोरियों के उत्पादन का पूरा उठाव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>जूट उद्योग विशेष तौर पर पूर्वी क्षेत्र यानी पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम, त्रिपुरा, मेघालय सहित आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। &nbsp;पश्चिम बंगाल के प्रमुख उद्योगों में से यह एक है। जूट उद्योग के कुल उत्पादन का 75 <span>फीसदी हिस्सा जूट की बोरियां हैं</span>,&nbsp;जिसमें से 85 <span>फीसदी हिस्से को भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) एवं राज्य की खरीद एजेंसियों (एसपीए) को आपूर्ति की जाती है। शेष को सीधे बेचा जाता है।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जूट पैकेजिंग मानदंडों को सीसीईए की मंजूरी, खाद्यान्न एवं चीनी की पैकेजिंग में अनिवार्य रूप से होता है इस्तेमाल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गन्ना जूस से एथेनॉल बनाने पर रोक अस्थायी कदम, लगातार होगी समीक्षा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/temporary-ban-on-making-ethanol-from-sugarcane-juice-continuous-review-will-be-done.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 09 Dec 2023 10:29:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/temporary-ban-on-making-ethanol-from-sugarcane-juice-continuous-review-will-be-done.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने जूस के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के बाद सरकार चीनी उद्योग की आशंकाओं को दूर करने का प्रयास कर रही है। उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने कहा है कि गन्ने के जूस से एथेनॉल बनाने पर अस्थायी रोक लगाई गई है और इस फैसले की निरंतर समीक्षा की जाएगी। सरकार चीनी उत्पादन के आंकड़ों पर नजर बनाए हुए है।</p>
<p>कमजोर मानसून के कारण इस साल गन्ना उत्पादन में गिरावट का अनुमान है जिससे चीनी उत्पादन में कमी आ सकती है। इसी के मद्देदेनजर केंद्र सरकार ने गन्ने के जूस से एथेनॉल बनाने पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। हालांकि, 'बी-मोलासेज' यानी शीरे से एथेनॉल उत्पादन जारी रहेगा। उपभोक्ता मामलों के सचिव का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य चीनी की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करना है। ताकी अगले पेराई सत्र तक चीनी का पर्याप्त स्टॉक रहे।</p>
<p>एथेनॉल का इस्तेमाल पेट्रोल मिश्रण के लिए होता है। भारत सरकार ने साल 2025 तक पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है। लेकिन गन्ने के जूस से एथेनॉल उत्पादन पर रोक के फैसले से एथेनॉल मिश्रण के कार्यक्रम को लेकर कई आशंकाएं जताई जा रही हैं।&nbsp;</p>
<p>शुक्रवार को एक संयुक्त मीडिया ब्रीफिंग में खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा और पेट्रोलियम सचिव पंकज जैन ने दावा किया था कि गन्ने के रस से एथेनॉल उत्पादन पर प्रतिबंध से एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सरकार के पास बी और सी-हैवी मोलासेज, खराब चावल और मक्का से एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना है। सरकार 2025-26 तक 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण लक्ष्य को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।</p>
<p>2022-23 आपूर्ति वर्ष (नवंबर-अक्टूबर) में 12 फीसदी एथेनॉल मिश्रण किया गया था। चालू वर्ष में एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 15 प्रतिशत है जिसके लिए 690 लीटर एथेनॉल की आवश्यकता होगी। तेल कंपनियों ने इस आपूर्ति वर्ष के लिए 500 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति के लिए निविदाएं प्राप्त कर ली हैं।&nbsp;पेट्रोलियम और खाद्य सचिवों ने स्पष्ट किया था कि तेल कंपनियों द्वारा प्राप्त मौजूदा प्रस्तावों के लिए बी-हैवी मोलासेज से एथेनॉल बनाने की अनुमति दी जाएगी। तेल कंपनियों ने पहले चक्र के लिए बी-हैवी मोलासेज की आपूर्ति के लिए बोलियां सुरक्षित कर ली हैं। जब दूसरे चक्र के लिए बोलियां मांगी जाएंगी, तब तक चीनी उत्पादन की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।</p>
<p>इस साल कमजोर मानसून के कारण देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना उत्पादन में गिरावट का अनुमान है। कृषि मंत्रालय के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, गन्ने का उत्पादन 2023-24 फसल वर्ष (जुलाई-जून) में 494.2 मिलियन टन के मुकाबले कम होकर 434.8 मिलियन टन रहेगा। 2023-24 सीजन (अक्टूबर-सितंबर) के लिए 32.3 - 33 मिलियन टन चीनी उत्पादन का अनुमान है, जबकि पिछले सीजन में यह 37.3 मिलियन टन था।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गन्ना जूस से एथेनॉल बनाने पर रोक अस्थायी कदम, लगातार होगी समीक्षा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीली मटर के आयात से हटा शुल्क, खाद्य महंगाई घटाने को दो दिन में हुए चार बड़े फैसले]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/import-duty-removed-from-yellow-peas-four-big-decisions-taken-by-modi-govt-in-two-days-to-reduce-food-inflation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 08 Dec 2023 17:39:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/import-duty-removed-from-yellow-peas-four-big-decisions-taken-by-modi-govt-in-two-days-to-reduce-food-inflation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सरकार ने पीली मटर के आयात को शुल्क मुक्त कर दिया है। साथ ही, कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर को पूरी तरह से वापस ले लिया है। पीली मटर के आयात पर अभी 50 फीसदी शुल्क लगता था और इसका न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) 200 रुपये प्रति किलो था। इसे प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया था। घरेलू खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह फैसला किया गया है। खुदरा बाजार में पीली मटर का भाव 120 रुपये किलो के आसपास चल रहा है। यह फैसला 8 दिसंबर, 2023 से लागू हो गया है और 31 मार्च, 2024 तक प्रभावी रहेगा।</p>
<p>आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए सरकार का पूरा फोकस खाद्य महंगाई घटाने पर है। इसके लिए दो दिन में चार बड़े फैसले किए गए हैं। 7 दिसंबर को पहले गन्ने के जूस से एथेनॉल बनाने पर पाबंदी लगाई गई ताकि घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बेहतर रहे। उसके बाद पीली मटर के आयात पर से शुल्क हटाया गया ताकि खुदरा कीमतों में नरमी आए। 8 दिसंबर को प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया और व्यापारियों, रिटेलर और प्रोसेसर्स के लिए गेहूं स्टॉक की लिमिट को घटाकर आधा कर दिया गया ताकि बाजार में उपलब्धता बनी रहे और कीमतें न बढ़े।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_657306b0c161c.jpg" alt="" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा 7 दिसंबर को एक अधिसूचना जारी कर पीली मटर पर से आयात शुल्क पूरी तरह से हटाने की जानकारी दी गई है। घरेलू किसानों के हितों को देखते हुए सरकार ने 2019 में मटर आयात को नियंत्रित करने के लिए भारी भरकम शुल्क लगाने और एमआईपी तय करने का फैसला किया था। इससे पीली मटर का आयात लगभग बंद हो गया था। सरकार के इस फैसले से अब मटर का आयात तेजी से बढ़ने की संभावना है। इससे चना सहित अन्य दालों की खपत पर दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस समय देश में ज्यादातर दालों के भाव में तेजी है। दालों की कमी और ऊंची कीमतों को देखते हुए ही शायद यह फैसला किया गया है। &nbsp;</p>
<p>भारत मुख्य रूप से कनाडा, रूस और यूक्रेन से पीली मटर का आयात करता है। रूस और यूक्रेन से आपूर्ति बाधित होने के चलते उम्मीद है कि कनाडा के अलावा अन्य देशों से इसका आयात हो सकता है। मटर रबी सीजन की महत्वपूर्ण दलहन फसल है जिसकी बुवाई अंतिम चरण में पहुंच गई है। मार्च-अप्रैल में इसकी आवक शुरू हो जाती है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीली मटर के आयात से हटा शुल्क, खाद्य महंगाई घटाने को दो दिन में हुए चार बड़े फैसले ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं भंडारण की सीमा हुई आधी, ई&amp;#45;नीलामी की मात्रा बढ़ाकर की गई 4 लाख टन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wheat-stock-limit-halved-e-auction-quantity-increased-to-4-lakh-tonnes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 08 Dec 2023 15:49:01 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wheat-stock-limit-halved-e-auction-quantity-increased-to-4-lakh-tonnes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खाद्य महंगाई को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार एक के बाद एक फैसले कर रही है। इसी के तहत के अब गेहूं भंडारण की सीमा को 2000 टन से घटाकर 1000 टन कर दिया है ताकि बाजार में गेहूं की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और 31 मार्च, 2024 तक प्रभावी रहेगा। इसके अलावा, खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत हर हफ्ते (बुधवार) होने वाली गेहूं की नीलामी के तहत की जाने वाली पेशकश की मात्रा को भी 3 लाख टन से बढ़ाकर 4 लाख टन कर दिया गया है।</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में बताया कि व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, बड़े रिटेल चेन और प्रोसेसर्स के लिए गेहूं भंडारण की सीमा के 12 जून, 2023 के आदेश को संशोधित कर दिया गया है। नए आदेश के मुताबिक, व्यापारियों और थोक विक्रेताओं के लिए गेहूं भंडारण की सीमा 1000 टन निर्धारित की गई है। वहीं, खुदरा विक्रेताओं और बड़े रिटेल चेन के प्रत्येक आउटलेट के लिए भंडारण सीमा 10 टन से घटाकर 5 टन कर दी गई है। आटा मिलों और अन्य प्रोसेसर्स के लिए यह सीमा उनकी कुल मासिक क्षमता का 70 फीसदी तय की गई है। पहले यह 75 फीसदी था।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि नोटिफिकेशन जारी होते समय अगर किसी व्यापारी, रिटेल चेन या प्रोसेसर्स के पास तय सीमा से अधिक गेहूं है, तो उसका निपटान 30 दिन के भीतर किया जाना जरूरी है।</p>
<p>बयान के मुताबिक, ओएमएसएस के तहत की जाने वाली गेहूं की ई-नीलामी की हफ्तेवार मात्रा को बढ़ाकर 4 लाख टन कर दिया गया है। ओएमएसएस के तहत केंद्रीय पूल से जनवरी-मार्च 2024 तक अतिरिक्त 25 लाख टन गेहूं की बिक्री खुले बाजार में की जा सकती है, जो बाजार की जरूरत पर निर्भर करेगा। इस योजना के तहत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) अब तक 44.65 लाख टन गेहूं बाजार में उतार चुका है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं भंडारण की सीमा हुई आधी, ई-नीलामी की मात्रा बढ़ाकर की गई 4 लाख टन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज निर्यात पर 31 मार्च तक के लिए लगी पाबंदी, किसानों पर असर पड़ने की संभावना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/onion-export-banned-till-march-31-farmers-likely-to-be-affected.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 08 Dec 2023 14:14:39 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/onion-export-banned-till-march-31-farmers-likely-to-be-affected.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्याज की महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगा दी है। यह पाबंदी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और 31 मार्च, 2024 तक रहेगी। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने शुक्रवार को एक नोटिफिकेशन जारी कर यह घोषणा की। पहले से नुकसान झेल रहे प्याज किसानों को इस पाबंदी से और नुकसान होना तय है। खरीफ के प्याज की आवक शुरू हो गई है।</p>
<p>इससे पहले सरकार ने प्याज की महंगाई को थामने के लिए निर्यात पर 40 फीसदी शुल्क लगाया था और उसके बाद इसका न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) 800 डॉलर प्रति टन कर दिया था। इससे थोड़े समय के लिए तो खुदरा कीमतों पर असर पड़ा, लेकिन फिर से कीमतें बढ़ने लगी। इसकी वजह यह है कि खरीफ के प्याज की फसल इस बार देर से बाजारों में आनी शुरू हुई और पिछले रबी सीजन का पुराना स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है। महाराष्ट्र जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक राज्य में खरीफ के प्याज की आवक 15 दिसंबर के बाद ही शुरू होगी। इससे कीमतों पर दबाव है।</p>
<p>वाणिज्य मंत्रालय के अधीन आने वाले डीजीएफटी ने अपने नोटिफिकेशन में कहा है कि प्याज के निर्यात पर पाबंदी 8 दिसंबर, 2023 से 31 मार्च, 2023 तक रहेगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक, जिन निर्यातकों ने नोटिफिकेशन जारी होने से पहले निर्यात की खेप कस्टम विभाग को सौंप दी है, उन पर यह पाबंदी लागू नहीं होगी। इन खेपों को 5 जनवरी, 2024 तक निर्यात किया जा सकेगा। इसके अलावा, दुनिया के किसी देश की सरकार द्वारा अगर प्याज की मांग की जाती है, तो सरकार की मंजूरी से इसका निर्यात किया जा सकेगा। &nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_6572d6e27eccd.jpg" alt="" /></p>
<p>शेतकारी संगठन के पूर्व अध्यक्ष और स्वतंत्र भारत पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष अनिल घनवत ने <strong>रूरल वॉयस</strong> से कहा, &ldquo;सरकार का यह कदम न सिर्फ किसानों के लिए बल्कि प्याज व्यापारियों के लिए भी नुकसानदेह। पिछले तीन-चार साल से प्याज किसानों को घाटा हो रहा है। पिछले रबी सीजन में भी बेमौसम बारिश के चलते प्याज किसानों को नुकसान हुआ और उत्पादन प्रभावित हुआ। जब बाजार में किसानों को प्याज के अच्छे दाम मिलने लगे तो पहले सरकार ने 40 फीसदी निर्यात शुल्क लगा दिया और उसके बाद न्यूनतम निर्यात मूल्य 800 डॉलर प्रति टन कर दिया। अब जब खरीफ की नई फसल आने लगी है, तो इसके निर्यात पर पाबंदी लगा दी गई है। इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना खत्म हो गई है।&rdquo;</p>
<p>उन्होंने कहा कि निर्यात पर इन प्रतिबंधों के चलते भारत निर्यात बाजार में भी अपनी हिस्सेदारी खोता जा रहा है। इसका असर आने वाले कुछ सालों तक पड़ता रहेगा जिससे किसान आगे भी प्रभावित होते रहेंगे। सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ उपभोक्ताओं पर है, किसानों की उसे चिंता नहीं है। उन्होंने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज निर्यात पर 31 मार्च तक के लिए लगी पाबंदी, किसानों पर असर पड़ने की संभावना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अर्जुन मुंडा देश के नए कृषि मंत्री, आदिवासी नेता को मिली अहम जिम्मेदारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/arjun-munda-new-agriculture-minister-of-india-tribal-leader-gets-important-responsibility.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 08 Dec 2023 14:12:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/arjun-munda-new-agriculture-minister-of-india-tribal-leader-gets-important-responsibility.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्र सरकार में जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा को कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विधानसभा चुनाव जीतने वाले भाजपा सांसदों के इस्तीफे के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, जलशक्ति एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल और आदिवासी मामलों की राज्यमंत्री रेणुका सिंह ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। राष्ट्रपति दौपद्री मुर्मू ने गुरुवार को तीनों मंत्रियों के इस्तीफे तत्काल प्रभाव से स्वीकार <span>कर लिए हैं।</span></p>
<p>राष्ट्रपति ने कैबिनेट मंत्री अर्जुन मुंडा को कृषि मंत्रालय, राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर को जल शक्ति मंत्रालय और राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार को जनजातीय कार्य मंत्रालय का प्रभार सौंपा है। अर्जुन मुंडा ने शुक्रवार को कृषि मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया।</p>
<p>केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफे के बाद नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद पटेल और रेणुका सिंह के सियासी भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के पांच दिन बाद भी राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के नाम को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। नरेंद्र सिंह तोमर और प्रह्लाद पटेल मध्य प्रदेश और रेणुका सिंह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद की रेस में हैं। छत्तीसगढ़ में रेणुका सिंह को बड़ी जिम्मेदारी देकर भाजपा आदिवासी महिला मुख्यमंत्री का दांव खेल सकती है। &nbsp;</p>
<p>अर्जुन मुंडा को कृषि मंत्रालय का प्रभार देकर भाजपा ने आदिवासी चेहरे को आगे बढ़ाया है। ऐसा ही कुछ संदेश भाजपा छत्तीसगढ़ में भी दे सकती है। अगर ऐसा हुआ तो रेणुका सिंह छत्तीसगढ़ की पहली आदिवासी महिला मुख्यमंत्री होंगी। अर्जुन मुंडा तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और भाजपा के प्रमुख आदिवासी नेता हैं। झारखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अर्जुन मुंडा को कृषि मंत्रालय का जिम्मा मिलना मायने रखता है।</p>
<p>झारखंड मुक्ति मोर्चा से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले अर्जुन मुंडा साल 2000 में भाजपा में आ गये थे। अलग झारखंड राज्य बनने के बाद वे बाबूराल मरांडी सरकार में मंत्री रहे और 2003 में 35 साल की उम्र में झारखंड के दूसरे मुख्यमंत्री बने। 2005 में वे दोबारा झारखंड के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 2010 में भी उन्हें झारखंड का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। 2014 में एनडीए ने स्पष्ट बहुमत के साथ झारखंड में वापसी की थी लेकिन अर्जुन मुंडा विधानसभा चुनाव हार गये थे। साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में अर्जुन मुंडा खूंटी लोकसभा सीट से चुनकर आए और मोदी सरकार में आदिवासी मामलों के कैबिनेट मंत्री बने।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_6572d3b0dedb4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अर्जुन मुंडा देश के नए कृषि मंत्री, आदिवासी नेता को मिली अहम जिम्मेदारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_6572d3b0dedb4.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गन्ने के जूस से एथेनॉल बनाने पर तत्काल प्रभाव से रोक, शीरे से जारी रहेगा उत्पादन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/prohibition-on-making-ethanol-from-sugarcane-juice-with-immediate-effect.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 07 Dec 2023 16:25:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/prohibition-on-making-ethanol-from-sugarcane-juice-with-immediate-effect.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के चीनी उत्पादन में गिरावट के पूर्वानुमान को देखते हुए केंद्र सरकार ने गन्ने के जूस से एथेनॉल बनाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। हालांकि, <span>शीरे से एथेनॉल का उत्पादन जारी रहेगा। इस साल देश के चीनी उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले करीब 12 फीसदी गिरावट का अनुमान है। इसके मद्देनजर सरकार चीनी की किल्लत और महंगाई रोकने के उपाय कर रही है।</span></p>
<p>खाद्य मंत्रालय के डायरेक्टर (<span>शुगर) की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि</span>&nbsp;<span>सभी चीनी मिलें और डिस्टलरी गन्ने के जूस/शुगर&nbsp;</span>सिरप का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन के लिए नहीं करें। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। बी-हैवी मोलेसेस यानी शीरे से एथेनॉल का उत्पादन जारी रहेगा। गन्ने के जूस से एथेनॉल बनना शुगर इंडस्ट्री के लिए फायदे का सौदा है। लेकिन चीनी उत्पादन में गिरावट को देखते हुए सरकार चुनावी साल में चीनी के दाम काबू में रखना चाहती है। इसलिए गन्ने से जूस से एथेनॉल बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_65719f56d6ece.jpg" alt="" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस साल कमजोर मानूसन और अल नीनो प्रभाव के चलते महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की फसल को काफी नुकसान पहुंचा। इसके चलते देश का चीनी उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 41 लाख टन घटने का अनुमान है जो पिछले सीजन (2022-23) में करीब 331 लाख टन रहा था। चालू पेराई सत्र (2023-24) में करीब 290 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। जबकि देश में चीनी की खपत 287 लाख टन के आसपास है। इससे जहां घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें तेज रहेंगी, वहीं निर्यात की संभावना लगभग न के बराबर रह गई है।</p>
<p>चीनी उद्योग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 20 लाख टन घटकर 85 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले सीजन (2022-23) में 105.30 लाख टन रहा था। हालांकि, दूसरे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन पिछले साल से बेहतर रहने का अनुमान है। इसके चलते उत्तर प्रदेश तीन साल बाद फिर से सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य बन जाएगा। वहीं अनुपात के हिसाब से चीनी उत्पादन में सबसे अधिक गिरावट कर्नाटक में रहेगी। कर्नाटक में पिछले सीजन में 59.80 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ, जिसके चालू सीजन में गिरकर 38 लाख टन रह जाने का अनुमान है। कर्नाटक में चीनी उत्पादन में यह गिरावट 36 फीसदी बैठती है।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/national/sugar-production-estimated-to-decrease-by-41-lakh-tonnes-in-the-current-season.html" title="चीनी उत्पादन" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़े: चालू सीजन में चीनी उत्पादन 41 लाख टन घटने का अनुमान</strong></a></p>
<p>पिछले सीजन में देश से 64 लाख टन चीनी का निर्यात हुआ था, जबकि चालू सीजन में अभी एक लाख टन चीनी के निर्यात का उद्योग का आंकड़ा है। हालांकि, उद्योग सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से उत्पादन की स्थिति बन रही है उसके चलते चीनी निर्यात की संभावना ना के बराबर है। सरकार ने अक्टूबर, 2022 में चीनी निर्यात को मुक्त निर्यात से रेस्ट्रिक्टेड लिस्ट में डाल दिया था। इस साल अक्टूबर में इसे अगले एक साल के लिए रेस्ट्रिक्टेड सूची में ही रखने का फैसला लिया है।&nbsp;</p>
<p>इस साल&nbsp;करीब 40 लाख टन चीनी का डायवर्जन एथेनॉल बनाने के लिए होना था। पिछले सीजन में 44 लाख टन चीनी का डायवर्जन एथेनॉल उत्पादन के लिए किया गया था।&nbsp;सरकार जल्द ही <span>गन्ने की बजाय मक्का से एथेनॉल बनाने की नीति पर भी विचार कर रही है। ताकि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए गन्ने के अलावा मक्का से भी एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा मिल सके।&nbsp;</span></p>
<p></p>
<p></p>
<p>&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_6571a3295ee35.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गन्ने के जूस से एथेनॉल बनाने पर तत्काल प्रभाव से रोक, शीरे से जारी रहेगा उत्पादन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पांच देशों को गैर&amp;#45;बासमती चावल निर्यात की अनुमति, नेपाल भेजा जाएगा 20 टन चावल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/permission-to-export-non-basmati-rice-to-five-countries-20-tons-of-rice-will-be-sent-to-nepal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 07 Dec 2023 15:54:24 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/permission-to-export-non-basmati-rice-to-five-countries-20-tons-of-rice-will-be-sent-to-nepal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत सरकार ने गैर-बासमती चावल के निर्यात पर जारी पाबंदियों के बीच पांच देशों को <span>2.40 लाख टन गैर-बासमती चावल के निर्यात को मंजूरी दी है।</span> इनमें कीनिया को एक लाख टन, मिस्र को 60 हजार टन, इक्वेटोरियल गिनी को 10 हजार टन, मेडागास्कर को 50 हजार टन और कोमोरोस को 20 हजार टन गैर-बासमती सफेद चावल का निर्यात किया जाएगा। इसके अलावा आपदा सहायता के तौर पर नेपाल को 20 टन गैर-बासमती सफेद चावल भेजा जाएगा।</p>
<p>वाणिज्य मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, अफ्रीका के पांच देशों को गैर-बासमती चावल का यह निर्यात नेशनल कॉपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड (एनसीईएल) के माध्यम से किया जाएगा। नेपाल में भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए भारतीय चावल निर्यातक संघ को 20 टन गैर-बासमती चावल भेजने की अनुमति भी दी गई है।&nbsp;देश में चावल उत्पादन की स्थिति और कीमतों को देखते हुए भारत सरकार ने जुलाई महीने में गैर-बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन विभिन्न देशों में खाद्य सुरक्षा के मद्देनजर सरकार के स्तर पर चावल निर्यात की अनुमति दी जा रही है।&nbsp;</p>
<p>पिछले सप्ताह भारत सरकार ने भूटान सहित पांच देशों को करीब 9 लाख टन टूटे चावल के निर्यात की अनुमति दी थी। यह निर्यात भी नेशनल कॉपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड के जरिए होगा। सहकारिता मंत्रालय ने कृषि उपजों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए इस कंपनी का गठन किया है। केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि एनसीईएल को 16 देशों को 14.92 लाख टन गैर-बासमती चावल और 50 हजार टन चीनी निर्यात की अनुमति दी गई है। &nbsp;</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_65719c3bd5eab.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पांच देशों को गैर-बासमती चावल निर्यात की अनुमति, नेपाल भेजा जाएगा 20 टन चावल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डीएपी पर सब्सिडी या खुदरा कीमतें बढ़ाने की होगी जरूरत, ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों से कंपनियों पर पड़ रहा असरः एफएआई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/high-dap-cost-affecting-viability-farmers-may-need-higher-subsidy-or-mrp-said-fai.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 07 Dec 2023 14:44:20 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/high-dap-cost-affecting-viability-farmers-may-need-higher-subsidy-or-mrp-said-fai.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हाल के महीनों में डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की वैश्विक कीमतों में 150 डॉलर प्रति टन से ज्यादा की वृद्धि हुई है। इस तेज वृद्धि को देखते हुए फर्टिलाइजर उद्योग के शीर्ष संगठन फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) ने कहा है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में दरें ऊंची बनी रहती हैं तो सब्सिडी या खुदरा कीमतें बढ़ाने की आवश्यकता होगी। फर्टिलाइजर कंपनियां वर्तमान में डीएपी की 50 किलो की बोरी 1,350 रुपये में बेच रही हैं। डीएपी की वैश्विक कीमतें इस साल जुलाई में 440 डॉलर प्रति टन थी जो बढ़कर 595 डॉलर प्रति टन हो गई हैं।</p>
<p>एफएआई के अध्यक्ष एन सुरेश कृष्णन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि डीएपी के आयात मूल्य को देखते हुए फर्टिलाइजर उद्योग के लिए मौजूदा कीमत पर इसकी बिक्री करना व्यावहारिक रूप से थोड़ी चुनौतीपूर्ण होगी। यदि वैश्विक कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो या तो खुदरा कीमतें बढ़ाने या सरकार से ज्यादा समर्थन की आवश्यकता हो सकती है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय मूल्य में अस्थिरता और रबी सीजन 2023-24 के लिए एनबीएस (न्यूट्रिशन आधारित सब्सिसडी) की दरों में कमी पीएंडके (फॉस्फेटिक और पोटाश) क्षेत्र की व्यवहार्यता को प्रभावित कर रही है।" एफएआई ने मांग की कि यूरिया को भी पीएंडके उर्वरकों की तर्ज पर एनबीएस योजना के तहत लाया जाना चाहिए ताकि यूरिया और पीएंडके उर्वरकों की खुदरा कीमतों की असमानताओं को ठीक करने में मदद मिल सके।</p>
<p>अप्रैल 2022 में डीएपी की कीमत 924 अमेरिकी डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई थी, जबकि फॉस्फोरिक एसिड की कीमत 1,530 डॉलर प्रति टन हो गई थी। जुलाई 2023 में फॉस्फेरिक एसिड का दाम घटकर 970 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया और अक्टूबर 2023 में यह फिर से बढ़कर 985 डॉलर प्रति टन हो गया। अमोनिया की कीमतों में भी इसी तरह का रुझान देखा गया है जो अप्रैल 2022 में 1,530 अमेरिकी डॉलर प्रति टन थी। जुलाई 2023 में अमोनिया का दाम घटकर 285 डॉलर पर आ गया और अक्टूबर 2023 में फिर से बढ़कर 575 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया।</p>
<p>कृष्णन ने म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) पर कम सब्सिडी पर चिंता जताते हुए कहा कि इसकी वजह से मिट्टी का यह पोषक तत्व डीएपी से महंगा हो गया है और इसकी खपत कम हो गई है। उन्होंने कहा, "एमओपी की खपत में लगातार गिरावट आई है। एमओपी पर सब्सिडी में भारी कमी से मिट्टी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और यह फसलों के पोषण की वृद्धि के लिए नुकसानदेह होगी।</p>
<p>घरेलू उर्वरक क्षेत्र की प्रगति के बारे में कृष्णन ने कहा कि चालू वित्त वर्ष 2023-24 में यूरिया उत्पादन पिछले वर्ष के 2.85 करोड़ टन से बढ़कर 3 करोड़ टन होने की उम्मीद है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले कुछ वर्षों में घरेलू उत्पादन में वृद्धि के साथ देश आत्मनिर्भर हो जाएगा।</p>
<p>कृष्णन ने बताया कि नैनो यूरिया की खपत भी बढ़ रही है। उम्मीद है कि वर्ष 2030 तक &nbsp;नैनो यूरिया कुल मांग का 20 फीसदी पूरा कर सकता है। इस वर्ष अप्रैल-अक्टूबर के दौरान यूरिया और एमओपी का आयात पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में क्रमशः 9.7 फीसदी और 63.8 फीसदी बढ़ गया। इस दौरान डीएपी और एनपीके के आयात में क्रमशः 8.8 फीसदी और 18 फीसदी की कमी दर्ज की गई।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ डीएपी पर सब्सिडी या खुदरा कीमतें बढ़ाने की होगी जरूरत, ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों से कंपनियों पर पड़ रहा असरः एफएआई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्रो. रमेश चंद एफएआई के &amp;apos;अवस्थी इफको अवॉर्ड&amp;apos; से सम्मानित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/prof-ramesh-chand-honored-with-usawasthi-iffco-award-by-fai.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Dec 2023 18:50:41 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/prof-ramesh-chand-honored-with-usawasthi-iffco-award-by-fai.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नीति आयोग के सदस्य और जाने-माने कृषि अर्थशास्त्री प्रो. रमेश चंद को इस साल फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) ने <strong>यूएस&nbsp;अवस्थी इफको अवॉर्ड</strong> से सम्मानित किया है। बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित एफएआई के वार्षिक अधिवेशन में <span>केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री </span><span>डॉ. मनसुख मांडविया ने </span>प्रो. रमेश चंद को यह पुरस्कार प्रदान किया गया। उन्हें उर्वरक उद्योग के विकास में अहम योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया है। पुरस्कार के तहत प्रशस्ति पत्र, 25 लाख रुपये की नकद राशि और 100 ग्राम सोने का स्वर्ण पदक प्रदान किया जाता है।</p>
<p>भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली से कृषि अर्थशास्त्र में पीएचडी प्रो. रमेश चंद विगत कई दशकों से कृषि नीति और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान कर रहे हैं। नीति आयोग का सदस्य बनने से पहले वह राष्ट्रीय कृषि आर्थिकी एवं नीति अनुसंधान संस्थान (एनआईएपी), नई दिल्ली के निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ इकनॉमिक ग्रोथ, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रमुख और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना में प्रोफेसर रह चुके हैं। प्रो. रमेश चंद 15वें वित्त आयोग के सदस्य भी रहे हैं।</p>
<p>प्रो. रमेश चंद CIMMYT समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थान के साथ जुड़े हैं। कृषि नीति और विकास के क्षेत्र में वे राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर अहम योगदान कर रहे हैं। भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में उन्होंने खाद्य और कृषि से संबंधित कई महत्वपूर्ण समितियों की अध्यक्षता की है। साथ ही जी20 और सार्क जैसे मंचों पर कृषि से जुड़े विषयों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। कृषि नीति पर उनकी कई पुस्तकें और 150 से अधिक शोध-पत्र विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_65707518613cf.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्रो. रमेश चंद एफएआई के 'अवस्थी इफको अवॉर्ड' से सम्मानित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि मंत्री तोमर समेत विधायक बने भाजपा सांसदों के इस्तीफे, कौन बनेगा कृषि मंत्री?]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/resignation-of-bjp-mps-who-became-mlas-including-agriculture-minister-tomar-who-will-become-agriculture-minister.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Dec 2023 16:15:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/resignation-of-bjp-mps-who-became-mlas-including-agriculture-minister-tomar-who-will-become-agriculture-minister.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव जीतने वाले सांसदों से इस्तीफे दिलवा दिए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री प्रह्लाद पटेल समेत विधायक बनने वाले भाजपा के 12 में से 10 सांसदों ने संसद सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। दो अन्य सांसद भी जल्द ही इस्तीफा दे सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के संसद सदस्यता छोड़ने के बाद कृषि मंत्री किसे बनाया जाएगा, इसे लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। इस्तीफा देने वाले 10 सांसदों में नौ लोकसभा और एक राज्यसभा के सदस्य हैं। दीया कुमारी, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, रीति पाठक, उदय प्रताप, किरोड़ी लाल मीणा, अरुण साव, गोमती साईं और राकेश सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं, केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह और बाबा बालकनाथ ने अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है। संभवत: ये दोनों भी जल्द इस्तीफा देंगे। <span>इस्तीफा देने वाले कई सांसद मुख्यमंत्री की रेस में हैं।&nbsp;</span></p>
<p>विधानसभा चुनाव जीतने वाले भाजपा सांसदों ने आज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके बाद जेपी नड्डा के नेतृत्व में सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति जगदीप सिंह धनखड़ से मिले और उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया। <span>विधानसभा चुनावों में भाजपा ने अपने सांसदों को मैदान में उतारकर सभी को चौंका दिया था।</span> भाजपा ने 21 सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारा था, जिनमें से 12 सांसद चुनाव जीते, जबकि 9 सांसद हार गए। विधानसभा चुनाव हारने वालों में केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते भी शामिल हैं।</p>
<p>सांसदों के इस्तीफे से मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री पद की दौड़ रोचक हो गई है। <span>इस्तीफा देने वाले कई सांसद मुख्यमंत्री की दौड़ में हैं। </span>केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों के इस्तीफे से माना जा रहा है कि भाजपा इन राज्यों में नए प्रयोग कर सकती है। वैसे भी भाजपा ने चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया था।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_65704e3ed718d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि मंत्री तोमर समेत विधायक बने भाजपा सांसदों के इस्तीफे, कौन बनेगा कृषि मंत्री? ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महंगे प्याज&amp;#45;टमाटर से नवंबर में बढ़ गए थाली के दामः क्रिसिल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/high-onion-tomato-cost-make-veg-non-veg-meals-dearer-crisil.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Dec 2023 15:28:40 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/high-onion-tomato-cost-make-veg-non-veg-meals-dearer-crisil.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्याज और टमाटर की बढ़ी कीमतों की वजह से नवंबर में शाकाहारी और मांसाहारी थाली के दाम बढ़ गए। महीने-दर-महीने आधार पर नवंबर में प्याज की कीमतों में 58 फीसदी और टमाटर में 35 फीसदी की वृद्धि हुई है। घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अपनी ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।</p>
<p>क्रिसिल ने भोजन की थाली की अपनी मासिक रिपोर्ट में कहा है कि प्याज और टमाटर की कीमतों में बढ़ोतरी त्योहारी मांग और अनियमित बारिश के कारण खरीफ सीजन में इनके कम उत्पादन के कारण हुई। इसकी वजह से नवंबर में शाकाहारी थाली की कीमत में 10 फीसदी की और मांसाहारी थाली की कीमत में 5 फीसदी की वृद्धि हुई है। हालांकि, महीने-दर-महीने आधार पर ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में 1-3 फीसदी की मामूली गिरावट के कारण मांसाहारी थाली की कीमत शाकाहारी थाली की तुलना में धीमी गति से बढ़ी। मांसाहारी थाली में ब्रॉयलर की लागत 50 फीसदी है। नॉन-वेज थाली की लागत का प्रतिशत।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि नवंबर 2022 की तुलना में नवंबर 2023 में प्याज और टमाटर की कीमतों में क्रमशः 93 फीसदी और 15 फीसदी की वृद्धि के कारण शाकाहारी थाली की कीमत सालाना आधार पर 9 फीसदी बढ़ी है। शाकाहारी थाली की लागत में 9 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले दालों की कीमतें सालाना आधार पर 21 फीसदी बढ़ी है।</p>
<p>घर पर थाली तैयार करने की औसत लागत की गणना उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में प्रचलित इनपुट कीमतों के आधार पर की जाती है। थाली की कीमत में बदलाव लाने वाले तत्व अनाज, दालें, ब्रॉयलर, सब्जियां, मसाले, खाद्य तेल और रसोई गैस हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64d206afb9e7b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ महंगे प्याज-टमाटर से नवंबर में बढ़ गए थाली के दामः क्रिसिल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64d206afb9e7b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एमएसपी की कानूनी गारंटी का फैसला कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही होगाः तोमर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/decision-to-give-legal-rights-to-msp-will-be-taken-after-committee-report-comes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Dec 2023 13:54:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/decision-to-give-legal-rights-to-msp-will-be-taken-after-committee-report-comes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एमएसपी पर बनी कमेटी की सिफारिशें मिलने के बाद ही सरकार फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने पर कोई फैसला ले सकती है। किसान आंदोलन के बाद एमएसपी के कानूनी अधिकार समेत किसानों से जुड़े मुद्दों पर विचार के लिए एक समिति का गठन किया गया था। समिति की अब तक 35 बैठकें हो चुकी हैं और उसकी सिफारिशें आनी बाकी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकसभा में यह जानकारी दी है।</p>
<p>लोकसभा में पूरक प्रश्नों का लिखित जवाब देते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों के मुताबिक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दे रही है। अब सरकार 2.28 लाख करोड़ रुपये के फसलों की खरीदारी कर रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "न्यूनतम समर्थन मूल्य सहित विभिन्न मुद्दों की जांच के लिए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध के बाद केंद्र द्वारा गठित समिति ने अब तक 30 से 35 बैठकें की हैं। समिति की सिफारिशें अभी आनी बाकी हैं।"</p>
<p>प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के एक सवाल का जवाब देते हुए तोमर ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने एमएस स्वामीनाथन आयोग का गठन किया था, लेकिन इसकी रिपोर्ट मनमोहन सिंह सरकार के समय आई। मनमोहन सरकार ने आयोग की सिफारिशों पर विचार करने के लिए तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री की अध्यक्षता में एक समूह का गठन किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन आयोग ने 201 सिफारिशें की थीं। इनमें से 100 सिफारिशों पर एनडीए सरकार काम कर रही है, लेकिन मुख्य सिफारिश एमएसपी पर थी। स्वामीनाथन आयोग ने कहा था कि लागत पर 50 फीसदी मुनाफा जोड़कर एमएसपी घोषित किया जाना चाहिए। इसी सिफारिश के मुताबिक अब सरकार उत्पादन लागत पर 50 फीसदी मुनाफा जोड़कर एमएसपी तय कर रही है। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एमएसपी की कानूनी गारंटी का फैसला कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही होगाः तोमर ]]></media:description>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम&amp;#45;किसान की राशि 6000 रुपये सालाना से बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं: नरेंद्र सिंह तोमर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pm-no-proposal-to-increase-farmers-amount-from-rs-6000-annually-says-tomar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 05 Dec 2023 18:00:29 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pm-no-proposal-to-increase-farmers-amount-from-rs-6000-annually-says-tomar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पीएम-किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत किसानों को तीन किस्तों में मिलने वाली सालाना 6 हजार रुपये की धनराशि को बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इस बारे में चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में कहा, "फिलहाल, पीएम-किसान की राशि 6,000 रुपये से और बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।"</p>
<p>दिसंबर 2018 से लागू हुई पीएम-किसान योजना के तहत प्रति वर्ष 6,000 रुपये की राशि 2,000 रुपये की तीन मासिक किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित की जाती है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि अब तक केंद्र सरकार ने 15 किस्तों में 2.81 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है, जिससे 11 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ पहुंचा।</p>
<p>इस योजना का उद्देश्य देश भर में सभी भूमिधारक किसान परिवारों को सीधे तौर पर वित्तीय सहायता प्रदान करना है, ताकि उन्हें कृषि और संबद्ध गतिविधियों के साथ-साथ घरेलू जरूरतों से संबंधित खर्चों को पूरा करने में सक्षम बनाया जा सके। पीएम-किसान योजना दुनिया की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना में से एक है।</p>
<p>पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान पीएम-किसान के तहत मिलने वाली धनराशि में बढ़ोतरी का मुद्दा खबरों में छाया रहा। इसी दौरान प्रधानमंत्री ने पीएम किसान की 15वीं किस्त भी सीधे किसानों के खातों में पहुंचायी थी, <span>जिसे लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए थे। फिलहाल यह स्पष्ट हो गया है कि अभी पीएम-किसान योजना के तहत मिलने वाली धनराशि में कोई बढ़ोतरी नहीं होने जा रही है। </span></p>
<p>कई राज्य सरकारें पीएम-किसान के अलावा अपनी तरफ से भी किसानों के खातों में सीधी सहायता पहुंचा रही हैं। इसकी शुरुआत ओडिशा और तेलंगाना से हुई थी। तेलंगाना में रायथु बंधु योजना के तहत किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार रुपये सालाना की मदद दी जाती है। ओडिशा में छोटे व सीमांत किसानों को राज्य सरकार की तरफ से 4 हजार रुपये प्रतिवर्ष दिए जाते हैं। जबकि झारखंड में मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना के तहत छोटे किसानों को सालाना 5 हजार रुपये प्रति एकड़ की सहायता दी जाती है।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम-किसान की राशि 6000 रुपये सालाना से बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं: नरेंद्र सिंह तोमर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विश्व मृदा दिवसः मिट्टी की सेहत बनाए रखने में किसानों की मदद कर रही कोर्टेवा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agri-innovator-corteva-helps-farmers-in-maintaining-soil-health.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 05 Dec 2023 17:53:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agri-innovator-corteva-helps-farmers-in-maintaining-soil-health.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मिट्टी की सेहत को बनाए रखने की सतत प्रक्रिया है। इसके लिए सभी हितधारकों जैसे सरकार, उर्वरक और कृषि-रसायन उद्योग, गैर सरकारी संगठनों, वैज्ञानिकों और किसानों द्वारा लगातार ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने और किसानों को उनकी मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए एग्री इन्नोवेटर कोर्टेवा सबसे उपयुक्त और प्रभावी समाधान प्रदान करता है।</p>
<p>विश्व मृदा दिवस (5 दिसंबर) के मौके पर पर कोर्टेवा ने एक बयान में कहा है कि कंपनी के हरित रसायन उत्पाद टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देते हुए पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। ये उत्पाद पोषक तत्वों की हानि को कम करके मिट्टी की संरचना में सुधार और माइक्रोबियल गतिविधि को बढ़ाकर मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं। उदाहरण के लिए, डीएसआर (डायरेक्ट सीडिंग राइस) पद्धति को अपनाने से धान की खेती में पानी के उपयोग में 35-37 फीसदी की कमी आ सकती है, मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर हो सकता है और ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन 20-30 फीसदी कम हो सकता है।</p>
<p>कोर्टेवा के मुताबिक, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार के लिए सैटेलाइट इमेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक तकनीकों का लाभ उठाना आवश्यक है। मिट्टी का प्रबंधन करने के अलावा सक्रिय रूप से मिट्टी के स्वास्थ्य को बढ़ाने और कृषि भूमि एवं धरती को लाभ पहुंचाने में इसकी बड़ी भूमिका हो सकती है। स्वस्थ मिट्टी फसल उत्पादकता और स्थिरता की नींव है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की 2022 की रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है कि अगले 60 वर्षों में मिट्टी का विनाशकारी नुकसान होगा। वहीं, 2050 तक दुनिया भर में भोजन, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं और आय की हानि के कारण मिट्टी के क्षरण की लागत 2.3 करोड़ डॉलर हो सकती है।</p>
<p>कृषि में मिट्टी का स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है। निकट भविष्य में इसके स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ने की संभावना है। मिट्टी के कटाव को कम करने, जल संग्रहण को ज्यादा करने, पोषक तत्व चक्र में सुधार करने, इनपुट पर खर्च कम करने और कार्यशील भूमि के लचीलेपन में सुधार करने के लिए मृदा स्वास्थ्य का प्रबंधन करना किसानों के लिए जरूरी है।</p>
<p>कोर्टेवा ने कहा है कि उच्च और स्वस्थ फसल पैदावार स्वस्थ मिट्टी पर निर्भर करता है। किसान मृदा स्वास्थ्य को बढ़ाने वाले समाधानों को अपनाने और विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जिस भूमि पर वे खेती करते हैं, उस मिट्टी से गहरा संबंध और समझ रखने वाले भूमि के संरक्षक के रूप में किसान मिट्टी के रिजेनरेशन में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। मिट्टी के अनुकूल खेती के भविष्य के लिए वे एक मिसाल कायम कर रहे हैं।</p>
<p>कॉर्टेवा के मुताबिक, "जैसे-जैसे मिट्टी के स्वास्थ्य के महत्व के बारे में हमारी समझ बढ़ी है, किसान विभिन्न मिट्टी-केंद्रित कृषि दृष्टिकोणों को अपना रहे हैं जिससे उनकी उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ी है।" किसान अपनी मिट्टी के स्वास्थ्य को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा सकते हैं, जैसे-</p>
<p>- बिना जुताई या न्यूनतम जुताई जैसी प्रथाओं को अपनाकर बाधा कम करना।</p>
<p>- नमी बनाए रखने और कटाव को कम करने के लिए कवर फसलें लगाना।</p>
<p>- कृषि इनपुट को कम करके या ऐसे इनपुट का चयन करके मिट्टी में जैव विविधता को बढ़ावा देना जो मिट्टी के लाभकारी जीवों के लिए कम विघटनकारी हों।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ विश्व मृदा दिवसः मिट्टी की सेहत बनाए रखने में किसानों की मदद कर रही कोर्टेवा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं की लेट बुवाई के लिए IIWBR ने सुझाई उपयुक्त किस्में, 25 दिसंबर तक बुवाई पूरी करने की सलाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/iiwbr-suggests-suitable-varieties-for-late-sowing-of-wheat.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 05 Dec 2023 15:12:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/iiwbr-suggests-suitable-varieties-for-late-sowing-of-wheat.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रबी सीजन की बुवाई जोरों पर चल रही है। खरीफ फसलों की कटाई में देरी के चलते कई क्षेत्रों में किसान गेहूं की पछेती बुवाई कर रहे हैं। करनाल स्थित आईसीएआर के भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) ने देर से बुवाई के लिए अलग-अलग राज्यों में गेहूं की उपयुक्त किस्में सुझाई हैं। इन किस्मों की बुवाई किसानों को 25 दिसंबर तक कर लेनी चाहिए। संस्थान ने 25 दिसंबर के बाद बुवाई के लिए भी गेहूं की किस्मों का सुझाव दिया है।</p>
<p>आईआईडब्ल्यूबीआर की ओर से जारी एडवाइजरी के अनुसार, कई क्षेत्रों से गेहूं की बुवाई में देरी की रिपोर्ट और मौसम विभाग से मिली जानकारी के आधार पर विभिन्न राज्यों के लिए गेहूं की निम्न किस्में सुझाई गई हैं।</p>
<p>उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, और पश्चिमी यूपी के लिए <strong>PBW 752, PBW 771, DBW 173, JKW 261, HD 3059, WH 1021</strong> किस्म लगाने का सुझाव दिया गया है। वहीं, पूर्वी यूपी, बिहार, बंगाल, झारखंड के लिए <strong>DBW 316, PBW 833, DBW 107, HD 3118</strong> किस्म और&nbsp;मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के लिए <strong>HD 3407, HI 1634, CG 1029, MP 3336</strong> किस्म बोने का सुझाव किसानों को दिया है। इन किस्मों के गेहूं की बुवाई सिंचित क्षेत्रों में 25 दिसंबर तक करने की सलाह दी गई है।</p>
<p>25 दिसंबर के बाद बुवाई के लिए सिंचित क्षेत्रों में गेहूं की <strong>HD 3271, HI 1621, WR 544</strong> किस्मों की बुवाई का सुझाव दिया गया है। पछेती बुवाई में इन किस्मों के 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज के इस्तेमाल की सलाह दी गई है। <strong>आईआईडब्ल्यूबीआर</strong> के निदेशक <strong>डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि जो किसान गेहूं की बुवाई देरी से कर रहे हैं, उन्हें जल्द से जल्द बुवाई पूरी कर लेनी चाहिए ताकि फसल को पकने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। संस्थान की ओर से गेहूं की जितनी भी किस्में सुझाई गई हैं वे जलवायु सहिष्णु हैं। किसान इन किस्मों का इस्तेमाल कर सकते हैं। मौसम विभाग ने इस साल सर्दियों में कम ठंड पड़ने का पूर्वानुमान लगाया है। फसलों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए कृषि मंत्रालय ने इस साल गेहूं की 60 फीसदी बुवाई मौसम की मार झेलने में सक्षम किस्मों से कराने का लक्ष्य रखा है।</p>
<p>पिछले साल के मुकाबले इस साल अभी तक गेहूं की बुवाई पिछड़ी हुई है। इस साल 1 दिसंबर तक गेहूं की बुवाई करीब <strong>188 लाख हेक्टेयर</strong> क्षेत्र में हुई है जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 10 लाख हेक्टेयर कम है। पंजाब, हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र और गुजरात में गेहूं की बुवाई पिछड़ी है, जबकि यूपी और एमपी में बुवाई बढ़ी है। रबी सीजन की कुल बुवाई 1 दिसंबर तक करीब 6 फीसदी पिछड़ी है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं की लेट बुवाई के लिए IIWBR ने सुझाई उपयुक्त किस्में, 25 दिसंबर तक बुवाई पूरी करने की सलाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम किसान निधि के अलावा भी किसानों को मिलेगी नगदी, जानें कहां कितनी रकम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/apart-from-pm-kisan-nidhi-farmers-will-also-get-cash-transfer-know-where-they-will-get-how-much-amount.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 05 Dec 2023 06:54:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/apart-from-pm-kisan-nidhi-farmers-will-also-get-cash-transfer-know-where-they-will-get-how-much-amount.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में किसान वोटरों को लुभाने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने कई लुभावने वादे किए थे। विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं। तीन राज्यों में भाजपा की, एक में कांग्रेस की और एक में जेडपीएम की सरकार बनने जा रही है। देशभर के किसानों को अभी पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 6,000 रुपये सालाना दिए जाते हैं। यह राशि किसानों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर की जाती है। तेलंगाना और ओडिशा जैसे कुछ राज्य हैं जहां के किसानों को पीएम किसान निधि के अलावा भी राज्य की योजनाओं के जरिये नगदी मिलती रही है। अब इस फेहरिस्त में कुछ और राज्य जुड़ जाएंगे जहां के किसानों को अतिरिक्त नगदी मिलेगी।</p>
<p>आइए जानते हैं किस राज्य के किसानों को अब कुल कितनी नकदी मिलेगी-</p>
<p><strong>तेलंगाना</strong></p>
<p>तेलंगाना के किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से नगदी के रूप में अभी सबसे ज्यादा राशि मिलती है। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत जहां राज्य के किसानों को सालाना 6,000 रुपये की नगदी मिलती है, वहीं प्रदेश सरकार की रायथु बंधु योजना के तहत अभी प्रति एकड़ सालाना 10,000 रुपये मिलते हैं। यह राशि दो किस्तों में दी जाती है। कांग्रेस ने इस राशि को बढ़ाकर 15,000 रुपये करने का चुनावी वादा किया था। अब प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनाने जा रही है। उम्मीद है कि सरकार बनने के बाद जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। इस तरह, तेलंगाना के किसानों को अब भी सबसे ज्यादा नगद राशि मिला करेगी। &nbsp;</p>
<p><strong>मध्य प्रदेश</strong></p>
<p>पीएम किसान सम्मान निधि के अलावा मध्य प्रदेश के किसानों को अभी तक कोई नगद सहायता नहीं दी जाती है। मगर भाजपा ने चुनाव के दौरान वादा किया था कि किसानों को पीएम किसान निधि और किसान कल्याण योजना के जरिये कुल 12,000 रुपये दिए जाएंगे यानी प्रदेश सरकार की ओर से 6,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। प्रदेश में सरकार बनने के बाद इसकी घोषणा की जा सकती है।</p>
<p><strong>राजस्थान</strong></p>
<p>राजस्थान में भी भाजपा ने किसानों को कुल 12,000 रुपये देने का चुनावी वादा किया था। इस पश्चिमी प्रदेश में भी भाजपा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने जा रही है, तो यहां के किसानों को भी पीएम किसान निधि के अलावा अतिरिक्त 6,000 रुपये मिलने का रास्ता साफ हो गया है।</p>
<p><strong>छत्तीसगढ़</strong></p>
<p>भाजपा ने यहां के किसानों को भी 12,000 रुपये की नगद सहायता देने का वादा किया था। इसमें पीएम किसान निधि की 6,000 रुपये की राशि सहित किसान कल्याण योजना के जरिये 6,000 रुपये अतिरिक्त देने का वादा शामिल है। इस प्रदेश में भी अब भाजपा सत्ता में आ गई है, तो किसानों को अब और अधिक नगदी मिलने वाली है। साथ ही, यहां के भूमिहीन खेतिहर मजदूरों को भी 10,000 रुपये दिए जाएंगे। पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार खेतिहर मजदूरों को 7,000 रुपये की आर्थिक सहायता दे रही थी, जिसे बढ़ाकर 10,000 रुपये करने का भाजपा ने वादा किया है।</p>
<p><strong>ओडिशा</strong></p>
<p>ओडिशा में आजीविका और आय संवर्धन योजना के तहत छोटे, सीमांत एवं भूमिहीन किसानों की सहायता करने के लिए सालाना 4,000 रुपये दिए जाते हैं। यह राशि दो किस्तों में दी जाती है। इस योजना को कालिया सहायता योजना के नाम से जाता है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने वर्ष 2018 में यह योजना शुरू की थी। इस तरह, पीएम किसान एवं कालिया योजना के जरिये राज्य के किसानों को कुल 10,000 रुपये सालाना की आर्थिक सहायता मिलती है।</p>
<p><strong>झारखंड </strong></p>
<p>प्रदेश के छोटे एवं सीमांत किसानों को मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना के तहत प्रति एकड़ सालाना 5,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह योजना उन किसानों के लिए है जिनके पास 5 एकड़ या इससे कम जमीन है। यह राशि पीएम किसान सम्मान निधि की राशि के अतिरिक्त है।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम किसान निधि के अलावा भी किसानों को मिलेगी नगदी, जानें कहां कितनी रकम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खुले बाजार में गेहूं बेचने के बावजूद 6.5% तक बढ़े दाम, ओएमएसएस के तहत 41 लाख टन गेहूं की हो चुकी है बिक्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/despite-selling-wheat-in-the-open-market-prices-increased-by-6-point-5-percent-41-lakh-tonnes-of-wheat-sold-under-omss.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 02 Dec 2023 07:00:17 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/despite-selling-wheat-in-the-open-market-prices-increased-by-6-point-5-percent-41-lakh-tonnes-of-wheat-sold-under-omss.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गेहूं की घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखने और बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार केंद्रीय पूल से खुले बाजार में गेहूं की बिक्री कर रही है। इसके बावजूद कीमतों में करीब 6.5 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत 28 जून, 2023 से 27 नवंबर तक 23 नीलामियों में 41 लाख टन गेहूं की बिक्री की जा चुकी है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की ओर से ई-नीलामी के जरिये केंद्रीय पूल से गेहूं बेचा जा रहा है।</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून से लेकर 30 नवंबर तक पांच महीनों में गेहूं की खुदरा कीमतों में 6.47 फीसदी की वृद्धि हुई है। वहीं गेहूं का आटा 5.89 फीसदी महंगा हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून को अखिल भारतीय स्तर पर गेहूं की औसत खुदरा कीमत 29.2 रुपये प्रति किलो थी, जो 30 नवंबर को बढ़कर 31.09 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। इस दौरान गेहूं का आटा 34.32 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 36.34 रुपये किलो हो गया।</p>
<p>इसी तरह, अखिल भारतीय स्तर पर गेहूं की औसत थोक कीमत में 5.71 फीसदी और गेहूं के आटे के थोक दाम में 5.24 फीसदी की वृद्धि हुई है। उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि 30 नवंबर, 2023 को गेहूं की औसत थोक कीमत 2756.51 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई, जो पांच महीने पहले 30 जून को 2607.56 रुपये प्रति क्विंटल थी। इसी तरह, गेहूं के आटे की औसत थोक कीमत 3025.09 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 3183.52 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>ओएमएसएस के तहत आटा मिलों, ब्रेड निर्माताओं और छोटे व्यापारियों को गेहूं की बिक्री की जा रही है ताकि कीमतें नियंत्रण में रहे। जमाखोरी रोकने के लिए बड़े व्यापारियों को गेहूं की ई-नीलामी में शामिल होने की मंजूरी नहीं दी गई है। इसके अलावा, पिछले साल से ही सरकार ने गेहूं के निर्यात पर पाबंदी लगा रखी है। इसके बावजूद कीमतें काबू में नहीं आ रही हैं।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्रालय के 2022-23 के लिए फसलों के अंतिम अनुमान के मुताबिक, पिछले रबी सीजन में गेहूं का उत्पादन 1105.54 लाख टन रहा। 2021-22 में 1077.42 लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ था। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खुले बाजार में गेहूं बेचने के बावजूद 6.5% तक बढ़े दाम, ओएमएसएस के तहत 41 लाख टन गेहूं की हो चुकी है बिक्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अरहर दाल की 10 लाख टन तक होगी सरकारी खरीद, नेफेड और एनसीसीएफ खरीदेंगे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/plan-to-increase-government-procurement-of-arhar-dal-to-10-lakh-tonnes-nafed-and-nccf-will-buy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 01 Dec 2023 16:09:05 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/plan-to-increase-government-procurement-of-arhar-dal-to-10-lakh-tonnes-nafed-and-nccf-will-buy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अरहर दाल की बढ़ती घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन तक सरकारी खरीद करने की योजना बनाई है। यह खरीद सरकारी कोऑपरेटिव नेफेड और एनसीसीएफ के जरिये की जाएगी। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने यह जानकारी दी है। इससे पहले अरहर के आयात पर शुल्क घटाने, स्टॉक लिमिट लगाने सहित कई फैसले किए जा चुके हैं, लेकिन कीमतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।</p>
<p>सहकारिता मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट जारी कर कहा गया है कि सरकार का लक्ष्य तूर (अरहर) दाल की खरीद को बढ़ावा देकर दाल की कीमतों को स्थिर करना है। दो प्रमुख राष्ट्रीय सहकारी समितियों नेफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से खरीद में वृद्धि 8-10 लाख टन <span>&nbsp;</span>होगी। एक अन्य पोस्ट में मंत्रालय ने बताया है कि यह खरीद बाजार मूल्य पर प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड (पीएसएफ) के माध्यम से होगी। यह पहल किसानों को उनकी उपज के लिए सुनिश्चित बाजार और लाभकारी मूल्य पाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।</p>
<p>पिछले साल अरहर के घरेलू उत्पादन में करीब 8 लाख टन की कमी आई थी। इसके बाद से ही अरहर दाल की कीमतों में लगातार तेजी का रुख बना हुआ है। पिछले साल 120-125 रुपये प्रति किलो मिलने वाली यह दाल अब 170-190 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के 2022-23 के लिए फसल उत्पादन के अंतिम अनुमानों के मुताबिक, अरहर का उत्पादन 33.12 लाख टन रहा। 2023-24 के पहले अग्रिम अनुमान में अरहर का उत्पादन 34.21 लाख टन अनुमानित है। 2021-22 में अरहर का घरेलू उत्पादन 42.20 लाख टन रहा था।</p>
<p>खरीफ सीजन की प्रमुख दलहन फसल अरहर की बुवाई का रकबा चालू खरीफ सीजन 2023-24 में करीब 37.50 लाख हेक्टेयर रहा है। यह पिछले सीजन के 40.58 लाख हेक्टेयर के मुकाबले करीब 3 लाख हेक्टेयर कम है। इस बार मानसून की स्थिति भी ठीक नहीं रही है। ऐसे में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता है। अरहर की कटाई अगले कुछ दिनों में शुरू होने वाली है। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अरहर दाल की 10 लाख टन तक होगी सरकारी खरीद, नेफेड और एनसीसीएफ खरीदेंगे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोलर पंप के लिए मिलती है 60% सब्सिडी, खेती की लागत कम करने को पीएम कुसुम योजना का उठा सकते हैं फायदा, यहां करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmers-get-60-percent-subsidy-for-installing-solar-pumps-take-advantage-of-pm-kusum-scheme-to-reduce-the-cost-of-farming.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 01 Dec 2023 07:17:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmers-get-60-percent-subsidy-for-installing-solar-pumps-take-advantage-of-pm-kusum-scheme-to-reduce-the-cost-of-farming.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खेती की लागत और बिजली पर निर्भरता कम करने के लिए पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को सोलर पंप लगवाने पर केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कुल 60 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है। डीजल महंगा होने से खेती की लागत काफी बढ़ गई है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सिंचाई की उचित व्यवस्था नहीं है, वहां किसानों को डीजल पंपों से सिंचाई करनी पड़ती है। जिन इलाकों में सिंचाई के लिए बिजली की व्यवस्था है, वहां भी अक्सर पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिल पाती है। ऐसे किसानों के लिए सोलर पंप लगवाना फायदेमंद है।</p>
<p>इस योजना के तहत बिजली या डीजल से चलने वाले सिंचाई पंप को सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप में भी बदला जा सकता है। पीएम कुसुम योजना के तहत दी जाने वाली सब्सिडी में 30-30 फीसदी हिस्सेदारी केंद्र और राज्य सरकारों की है। साथ ही, 30 फीसदी बैंक लोन दिया जाता है यानी किसानों को सोलर पंप लगावाने के लिए अपनी जेब से सिर्फ 10 फीसदी राशि ही खर्च करनी होती है। इस योजना के तहत व्यक्तिगत किसान 1 एचपी से लेकर 10 एचपी तक के पंप लगवा सकते हैं।</p>
<p>जिन इलाकों में बिजली की आपूर्ति उपलब्ध नहीं है, वहां व्यक्तिगत किसानों को 7.5 एचपी तक के सोलर पंप लगवाने के लिए सरकारी सहायता मिलती है। इसके अलावा, उत्तर पूर्वी राज्यों, सिक्किम, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड, लक्षद्वीप और अंडमान एवं निकोबार द्वीप द्वीप समूह में व्यक्तिगत किसानों को सोलर पंप की बेंचमार्क लागत या निविदा लागत का कुल 50 फीसदी तक सब्सिडी दी जाती है और 30 फीसदी लोन मिलता है। इन राज्यों के किसानों को अपनी जेब से 20 फीसदी राशि खर्च करनी पड़ती है।</p>
<p>सोलर पंप का उपयोग सिर्फ सिंचाई के लिए ही नहीं, बल्कि बिजली उत्पादन के लिए भी किया जा सकता है और इस्तेमाल की बाद बची बिजली को वितरण वितरण कंपनियों को बेचा जा सकता है। इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी भी होगी। किसानों से संबंधित राज्य के विद्युत नियामक आयोग (एसईआरसी) द्वारा निर्धारित फीड-इन-टैरिफ (एफआईटी) पर बिजली खरीदा जाएगा। हर राज्य में यह टैरिफ अलग-अलग हो सकती है।</p>
<p>वर्ष 2019 में ऊर्जा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत किसानों के समूह, सहकारी समितियां, पंचायतें, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), जल उपयोगकर्ता संघ (डब्ल्यूए) भी 500 किलोवाट से 2 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा आधारित बिजली संयंत्र लगा सकते हैं। उन्हें भी व्यक्तिगत किसानों की तरह ही 60 फीसदी सब्सिडी और 30 फीसदी लोन मिलता है।</p>
<p><strong>कहां करें आवेदन</strong></p>
<p>अगर आप भी अपने खेतों में सोलर पंप लगवाना चाहते हैं तो आधिकारिक वेबसाइट pmkusum.mnre.gov.in&nbsp;पर जाकर सब्सिडी वाला पंप पाने के लिए ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। इसके अलावा जिस राज्य के आप निवासी हैं, उस राज्य के आधिकारिक वेबसाइट पर भी ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। साथ ही, राज्यों के बिजली विभाग से भी इस संबंध में विस्तृत जानकारी ली जा सकती है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>किन दस्तावेजों की होगी जरूरत</strong></p>
<p>ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरने के बाद आधार कार्ड, जमीन के दस्तावेज (खाता-खसरा नंबर), एक घोषणा पत्र, बैंक खाते का ब्यौरा जो आधार से लिंक्ड हो, मोबाइल नंबर जैसी आवश्यक जानकारी देनी होगी।</p>
<p>इस योजना का लक्ष्य 31 मार्च, 2026 तक ग्रामीण क्षेत्रों में 30,800 मेगावाट की सौर क्षमता जोड़ना और 15 लाख कृषि पंपों को सोलर पंप में बदलना है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोलर पंप के लिए मिलती है 60% सब्सिडी, खेती की लागत कम करने को पीएम कुसुम योजना का उठा सकते हैं फायदा, यहां करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जीडीपी ग्रोथ दूसरी तिमाही में 7.6% रही, कृषि क्षेत्र की वृद्धि आधी घटकर 1.2% पर सिमट गई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indian-gdp-growth-was-better-than-expected-at-7-point-6-percent-in-second-quarter-agri-growth-down.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 30 Nov 2023 19:35:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indian-gdp-growth-was-better-than-expected-at-7-point-6-percent-in-second-quarter-agri-growth-down.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रिजर्व बैंक सहित सारे अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए भारत की जीडीपी ग्रोथ चालू वित्त वर्ष 2023-24 की दूसरी तिमाही में 7.6 फीसदी रही है। वित्त वर्ष 2022-23 की दूसरी तिमाही विकास दर 6.2 फीसदी रही थी। तेज दौड़ती भारतीय अर्थव्यवस्था का नकारात्मक पहलू यह है कि इस तिमाही में कृषि क्षेत्र की विकास दर घटकर आधी से भी कम रह गई है। अल-नीनो के मजबूत होने से मानसून प्रभावित हुआ जिसकी वजह से कृषि क्षेत्र की ग्रोथ सिमट कर 1.2 फीसदी रह गई है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कृषि क्षेत्र ने 2.5 फीसदी की विकास दर हासिल की थी। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने गुरुवार को दूसरी तिमाही के जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े जारी किए। आंकड़ों के मुताबिक, दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र की विकास दर पहली तिमाही के मुकाबले 2 फीसदी घट गई। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कृषि क्षेत्र की विकास दर 3.5 फीसदी रही थी। ताज आंकड़े स्पष्ट बताते हैं कि इस साल अनियमित मानसून की वजह से फसलों की पैदावार पर असर पड़ा है। इससे किसानों की आमदनी घटी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है। अल-नीनो का असर रबी सीजन में भी रहने की आशंका विशेषज्ञों की ओर से जताई गई है।</p>
<p>दूसरी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था आरबीआई के अनुमानों को पार कर गई है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने दूसरी तिमाही में 6.5 फीसदी की दर से अर्थव्यवस्था के बढ़ने का अनुमान लगया था। हालांकि, दूसरी तिमाही की विकास दर पहली तिमाही के 7.8 फीसदी से कम है।</p>
<p>आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की विकास में काफी तेजी आई है। यह बढ़कर 13.9 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसमें 3.8 फीसदी की गिरावट आई थी। निर्माण क्षेत्र की विकास दर 13.3 फीसदी रही है।</p>
<p>हालांकि, 2023-24 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में जीडीपी की वृद्धि दर घटकर 7.7 फीसदी रह गई, जो पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में 9.5 फीसदी थी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/05/image_750x500_62964a3a632ef.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जीडीपी ग्रोथ दूसरी तिमाही में 7.6% रही, कृषि क्षेत्र की वृद्धि आधी घटकर 1.2% पर सिमट गई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोलहवें वित्त आयोग के लिए टर्म ऑफ रेफरेंस को कैबिनेट की मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/union-cabinet-gives-nod-to-terms-of-reference-for-16th-finance-commission.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 29 Nov 2023 17:11:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/union-cabinet-gives-nod-to-terms-of-reference-for-16th-finance-commission.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कैबिनेट ने सोलहवें वित्त आयोग के लिए संदर्भ-शर्तों (टर्म ऑफ रेफरेंस) को मंजूरी दे दी है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की हुई बैठक में यह मंजूरी दी गई। यह आयोग&nbsp;1&nbsp;अप्रैल,&nbsp;2026 <span>से शुरू होने वाली पांच साल की अवधि के लिए अपनी</span>&nbsp;रिपोर्ट 31 <span>अक्टूबर</span>,&nbsp;2025 <span>तक देगा।</span></p>
<p>वित्त मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, सोलहवें वित्त आयोग के लिए&nbsp;संदर्भ-शर्तों को उचित समय पर अधिसूचित किया जाएगा।&nbsp;16<span>वें</span>&nbsp;वित्त&nbsp;आयोग की सिफारिशें 1&nbsp;&nbsp;अप्रैल,&nbsp;2026 <span>से शुरू होने वाली पांच वर्षों की अवधि के लिए होंगी।</span></p>
<p>संविधान&nbsp;के अनुच्छेद&nbsp;280(1) <span>में कहा गया है कि</span>&nbsp;संघ&nbsp;और&nbsp;राज्यों के बीच टैक्स से होने वाली शुद्ध आय के वितरण,&nbsp;अनुदान-सहायता और राज्यों के राजस्व और नियत अवधि के दौरान पंचायतों के संसाधनों की पूरकता के लिए&nbsp;आवश्यक उपाय करने तथा आय से संबंधित हिस्सेदारी को राज्यों के बीच आवंटन पर सिफारिश करने के मद्देनज़र&nbsp;एक वित्त आयोग की स्थापना की जाएगी।</p>
<p>पंद्रहवें वित्त आयोग का गठन 27 <span>नवंबर</span>,&nbsp;2017 <span>को किया गया था। उसने अपनी अंतरिम और अंतिम रिपोर्ट के माध्यम से एक अप्रैल</span>,&nbsp;2020 <span>से शुरू होने वाली छह वर्षों की अवधि के लिए संबंधित सिफारिशें कीं। पंद्रहवें वित्त आयोग की सिफारिशें वित्त वर्ष </span>2025-26 <span>तक मान्य हैं।</span></p>
<p><strong>सोलहवें वित्त आयोग के लिए संदर्भ-शर्तें:</strong></p>
<ol>
<li>संघ और राज्यों के बीच टैक्स की शुद्ध आय का वितरण,&nbsp;जो संविधान के अध्याय-I,&nbsp;भाग-XII&nbsp;के तहत उनके बीच विभाजित किया जाना है,&nbsp;या किया जा सकता है और ऐसी आय से संबंधित हिस्सेदारी का&nbsp;राज्यों के बीच आवंटन।</li>
<li>वे सिद्धांत जो संविधान के अनुच्छेद 275 <span>के तहत भारत की संचित निधि से राज्यों के राजस्व के सहायता अनुदान और उनके राजस्व के सहायता अनुदान के माध्यम से राज्यों को भुगतान की जाने वाली राशि को नियंत्रित करते हैं। उस अनुच्छेद के खंड (</span>1) <span>के प्रावधानों में निर्दिष्ट उद्देश्यों के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए,</span>&nbsp;और</li>
<li>राज्य के वित्त आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर राज्य में पंचायतों और नगर पालिकाओं के संसाधनों के पूरक उपाय के लिए राज्य की समेकित निधि को बढ़ाने के लिए आवश्यक उपाय।</li>
</ol>
<p>बयान में कहा गया है कि यह आयोग आपदा प्रबंधन अधिनियम,&nbsp;2005 <span>के तहत गठित निधियों के संदर्भ में</span>,&nbsp;आपदा प्रबंधन पहल&nbsp;के वित्त&nbsp;पोषण पर वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा कर सकता है और उस पर उचित सिफारिशें कर सकता है।</p>
<p>वित्त आयोग को अपनी सिफ़ारिशें देने में आम तौर पर लगभग दो साल लगते हैं। संविधान के अनुच्छेद 280 <span>के खंड (</span>1) <span>के अनुसार</span>,&nbsp;वित्त आयोग का गठन हर पांचवें वर्ष या उससे पहले किया जाना है।&nbsp;चूंकि&nbsp;15<span>वें वित्त आयोग की सिफारिशें </span>31 <span>मार्च, </span>2026 <span>तक छह साल की अवधि के बारे में हैं</span>,&nbsp;इसलिए 16<span>वें वित्त आयोग का गठन अब प्रस्तावित है। </span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_656723085bd35.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोलहवें वित्त आयोग के लिए टर्म ऑफ रेफरेंस को कैबिनेट की मंजूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_656723085bd35.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[81.35 करोड़ लाभार्थियों को पांच साल तक अनाज मुफ्त देगी सरकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-will-provide-free-foodgrains-to-81.35-crore-beneficiaries-for-five-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 29 Nov 2023 16:03:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-will-provide-free-foodgrains-to-81.35-crore-beneficiaries-for-five-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत सरकार देश के 81.35 करोड़ लोगों को पांच साल तक हर महीने 5 किलो मुफ्त अनाज देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ में एक चुनावी रैली के दौरान यह घोषणा की थी, <span>जिस पर मंत्रिमंडल की मुहर लग गई। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय लिया है कि केंद्र सरकार पांच साल की अवधि के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत लगभग </span>81.35 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराएगी।&nbsp;</p>
<p>मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि पीएमजीकेएवाई के तहत खाद्य सब्सिडी के रूप में अगले पांच वर्षों के दौरान 11.80 लाख करोड़ रुपये की धनराशि खर्च होगी। योजना का विस्तार 1 जनवरी 2024 से लागू होगा। अनुराग ठाकुर का कहना है कि मुफ्त अनाज योजना को 5 साल तक बढ़ाने में धन की कोई कमी नहीं आएगी और खरीद में भी कोई समस्या नहीं है। योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी।</p>
<p>देश के 81.35 करोड़ लोगों को खाद्य और पोषण सुरक्षा देने की दिशा में यह योजना एक महत्वपूर्ण कदम है। खासकर ऐसे समय जब खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़ रही है और देश कमजोर मानसून की स्थितियों से जूझ रहा है। इससे सरकार को महंगाई के मोर्चे पर भी निपटने में भी मदद मिलेगी। मुफ्त अनाज के तहत चावल, गेहूं और मोटे अनाज का वितरण सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से किया जाता है। वन नेशन,<span> वन राशन कार्ड पहल के तहत लाभार्थियों को देश में किसी भी उचित मूल्य की दुकान से मुफ्त खाद्यान्न प्राप्त करने की अनुमति होगी। </span></p>
<p>प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) की शुरुआत कोविड-19 महामारी के दौरान साल 2020 में की गई थी। इसमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत 5 किलोग्राम अनाज के अलावा प्रति लाभार्थी प्रति माह 5 किलोग्राम मुफ्त खाद्यान्न दिया जाता था। पिछले साल दिसंबर में केंद्र सरकार ने पीएमजीकेएवाई को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के साथ जोड़ दिया था। पिछली बार योजना को 31 दिसंबर, 2023 <span>तक एक साल के लिए बढ़ाया गया था। </span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ 81.35 करोड़ लाभार्थियों को पांच साल तक अनाज मुफ्त देगी सरकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्री ड्रोन के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलेगी 8 लाख रुपये तक की सब्सिडी, सरकार ने 1261 करोड़ का किया प्रावधान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/women-self-help-groups-will-get-subsidy-of-rs-8-lakh-for-agri-drones-from-central-government.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 29 Nov 2023 15:29:49 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/women-self-help-groups-will-get-subsidy-of-rs-8-lakh-for-agri-drones-from-central-government.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि क्षेत्र में तकनीक को बढ़ावा देने के मकसद से सरकार ने 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों को एग्री ड्रोन से लैस करने की योजना बनाई है। इसके लिए सरकार ने 8 लाख रुपये तक की सब्सिडी देने का फैसला किया है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला किया गया।</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि कैबिनेट ने वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक देशभर के 15 हजार चुनिंदा महिला स्वयं सहायता समूहों को एग्री ड्रोन मुहैया कराने के लिए एक योजना शुरू करने का फैसला किया है। इसके लिए वित वर्ष 2024-25 और 2025-26 में 1261 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाएगा। &nbsp;</p>
<p>इस योजना के तहत केंद्रीय सहायता के तौर पर ड्रोन और उसके एसेसरीज की कुल लागत का 80 फीसदी (8 लाख रुपये तक) सब्सिडी दी जाएगी। बाकी 20 फीसदी राशि के लिए नेशनल एग्रीकल्चर इन्फ्रा फाइनेंसिंग फैसिलिटी (एआईएफ) के तहत लोन दिया जाएगा। इस लोन पर 3 फीसदी ब्याज सब्सिडी भी दी जाएगी। नैनो फर्टिलाइजर और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए किसानों को किराये पर ड्रोन देकर महिला स्वयं सहायता समूह कमाई भी कर सकेंगे।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि महिला स्वयं सहायता समूह के एक सदस्य, जिसकी उम्र 18 वर्ष या इससे अधिक होगी, को ड्रोन उड़ाने की 15 दिन की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें से 5 दिन की ड्रोन पायलट ट्रेनिंग आवश्यक होगी और 10 दिन की अतिरिक्त ट्रेनिंग उर्वरकों और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए दी जाएगी। उस सदस्य का चुनाव राज्य ग्रामीण आजिविका मिशन (एसआरएलएम) और लीड फर्टिलाइजर कंपनी (एलएफसी) द्वारा किया जाएगा।</p>
<p>महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा ड्रोन खरीदने, उसके मरम्मत और रखरखाव की दिक्कतों को देखते हुए यह फैसला किया गया है एलएफसी ड्रोन सप्लायर कंपनियों और स्वयं सहायता समूहों के बीच पुल का काम करेंगे। साथ ही नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे नैनो फर्टिलाइजर को बढ़ावा भी देंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्री ड्रोन के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलेगी 8 लाख रुपये तक की सब्सिडी, सरकार ने 1261 करोड़ का किया प्रावधान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पूर्व नाबार्ड प्रमुख डॉ. हर्ष भानवाला एचडीएफसी बैंक के इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/former-nabard-chief-dr.-harsh-bhanwala-appointed-independent-director-of-ndfc-bank.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 27 Nov 2023 15:14:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/former-nabard-chief-dr.-harsh-bhanwala-appointed-independent-director-of-ndfc-bank.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एचडीएफसी बैंक लिमिटेड ने नाबार्ड के पूर्व चेयरमैन डॉ. हर्ष कुमार भानवाला को कंपनी का इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त करने का ऐलान किया है। नामांकन और पारिश्रमिक समिति की सिफारिश के आधार पर कंपनी के निदेशक मंडल ने तीन साल के लिए डॉ. भानवाला की नियुक्ति को मंजूरी दी है। इसके लिए अब शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी। डॉ. भानवाला का कार्यकाल 24 जनवरी, 2024 से 24 जनवरी 2027 तक रहेगा। यह जानकारी एचडीएफसी बैंक ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को एक्सचेंज फाइलिंग के माध्यम से दी है।&nbsp;</p>
<p>रूरल फाइनेंस और एग्रीकल्चर सेक्टर में लंबा अनुभव रखने वाले डॉ. हर्ष भानवाला नाबार्ड के बाद नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) कैपिटल इंडिया फाइनेंस लिमिटेड के एक्जिक्यूटिव चेयरमैन रहे। इससे पहले वे इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी (IIFCL) के चेयरमैन व एमडी, IL&amp;FS वाटर के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और दिल्ली राज्य सहकारी बैंक के एमडी रह चुके हैं। साथ ही <span>वेंचर कैपिटल फंड&nbsp;</span><em>ओम्नीवोर</em><span> पार्टनर्स के सीनियर एडवाइजर हैं। </span>पिछले साल मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एमसीएक्स) ने उन्हें अपने गवर्निंग बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया था। एनडीआरआई, करनाल से ग्रेजुएट और आईआईएम-अहमदाबाद से पोस्ट ग्रेजुएट भानवाला के पास विकास वित्त, ग्रामीण विकास और कृषि से जुड़े वेंचर्स को बढ़ावा देने में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। वे आईआईएम, रोहतक समेत कई संस्थाओं के बोर्ड में शामिल हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पूर्व नाबार्ड प्रमुख डॉ. हर्ष भानवाला एचडीएफसी बैंक के इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त ]]></media:description>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पांच साल में 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ा दूध व मीट उत्पादन, अंडा उत्पादन में भी वृद्धि]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/milk-and-meat-production-increased-by-more-than-20-percent-in-five-years-jump-in-egg-production.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 27 Nov 2023 12:51:37 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/milk-and-meat-production-increased-by-more-than-20-percent-in-five-years-jump-in-egg-production.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले पांच वर्षों के दौरान देश के दुग्ध और मीट उत्पाद में 20 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी हुई है। अंडे के उत्पादन में तो 33 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है जबकि ऊन उत्पादन करीब 17 फीसदी गिरा है। केंद्रीय पशुपालन मंत्री परषोत्तम रूपाला ने राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के मौके पर गुवाहाटी में आयोजित कार्यक्रम में आधारित बुनियादी पशुपालन आंकड़े 2023 (दूध, <span>अंडा</span>, <span>मांस और ऊन उत्पादन) जारी किए। देश में दुग्ध</span>, <span>अंडा</span>, <span>मांस और ऊन के उत्पादन का अनुमान वार्षिक एकीकृत नमूना सर्वेक्षण (आईएसएस) के नतीजों के आधार पर लगाया जाता है।</span></p>
<p>इन आंकड़ों के अनुसार, <span>वर्ष 2022-23 के दौरान देश में कुल <strong>दुग्ध उत्पादन</strong> 23.06 करोड़ टन अनुमानित है</span>, <span>जिसमें पिछले 5 वर्षों में 22.81 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2022-23 के दौरान दुग्ध उत्पादन गत वर्ष की तुलना में 3.83 प्रतिशत बढ़ गया है। दुग्ध उत्पादन में वृद्धि की दर वर्ष 2018-19 में 6.47 प्रतिशत</span>, <span>वर्ष 2019-20 में 5.69 प्रतिशत</span>; <span>वर्ष 2020-21 में 5.81 प्रतिशत और वर्ष 2021-22 में 5.77 प्रतिशत थी। इस लिहाज से देखें तो दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी तो हुई है लेकिन वार्षिक वृद्धि में गिरावट आई है।&nbsp;</span>दुग्ध उत्पादन में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। देश के कुल दुग्ध उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 15.72 प्रतिशत है। इसके बाद राजस्थान (14.44 प्रतिशत), <span>मध्य प्रदेश (8.73 प्रतिशत)</span>, <span>गुजरात (7.49 प्रतिशत) और आंध्र प्रदेश (6.70 प्रतिशत) का स्थान था। दुग्ध उत्पादन में सालान वृद्धि दर के मामले में कर्नाटक (8.76 प्रतिशत) पहले</span>, <span>पश्चिम बंगाल (8.65 प्रतिशत) दूसरे और उत्तर प्रदेश (6.99 प्रतिशत) तीसरे स्थान पर है।</span></p>
<p><span>केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री <strong>परषोत्तम रूपाला</strong> ने कहा कि भारत के डेयरी क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता वर्ष 2022-23 में 459 ग्राम तक पहुंच गई है जबकि वर्ष 1950 में यह 130 ग्राम और वर्ष 2013-14 में 303 ग्राम थी। 9 साल की इतनी कम समय अवधि में यह शानदार वृद्धि किसी चमत्कार से कम नहीं है, खासकर विशाल जनसंख्या को देखते हुए। प्रधानमंत्री ने डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।</span></p>
<p>वर्ष 2022-23 के दौरान देश में <strong>मीट उत्पादन</strong> 97.7 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है, <span>जिसमें पांच वर्षों में 20.39 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मीट उत्पादन में सालाना आधार पर वर्ष 2022-23 में 5.13 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष 2018-19 में मीट उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर 5.99 प्रतिशत</span>, <span>वर्ष 2019-20 में 5.98 प्रतिशत</span>; <span>वर्ष 2020-21 में 2.30 प्रतिशत और वर्ष 2021-22 में 5.62 प्रतिशत थी।&nbsp;</span>मीट उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। देश के कुल मीट उत्पादन में उत्तर प्रदेश 12.20 प्रतिशत का योगदान करता है। इसके बाद पश्चिम बंगाल (11.93 प्रतिशत), <span>महाराष्ट्र (11.50 प्रतिशत)</span>, <span>आंध्र प्रदेश (11.20 प्रतिशत) और तेलंगाना (11.06 प्रतिशत) का स्थान है। </span></p>
<p>देश में <strong>अंडा उत्पादन</strong> वर्ष 2022-23 में 13.8 करोड़ होने का अनुमान है जो पांच साल पहले की तुलना में 33.31 प्रतिशत अधिक है। सालाना आधार पर वर्ष 2022-23 के दौरान अंडा उत्पादन में 6.77 प्रतिशत, <span>वर्ष 2018-19 में 9.02 प्रतिशत</span>; <span>वर्ष 2019-20 में 10.19 प्रतिशत</span>; <span>वर्ष 2020-21 में 6.70 प्रतिशत और वर्ष 2021-22 में 6.19 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। देश के कुल अंडा उत्पादन में सर्वाधिक योगदान आंध्र प्रदेश का रहा है</span>, <span>जिसकी हिस्सेदारी कुल अंडा उत्पादन में 20.13 प्रतिशत है। इसके बाद तमिलनाडु (15.58 प्रतिशत)</span>, <span>तेलंगाना (12.77 प्रतिशत)</span>, <span>पश्चिम बंगाल (9.94 प्रतिशत) और कर्नाटक (6.51 प्रतिशत) का स्थान है। </span></p>
<p>देश का <strong>ऊन उत्पादन</strong> पांच साल में 16.84 फीसदी की गिरावट के साथ 3.36 करोड़ किलोग्राम रहने का अनुमान है। हालांकि, <span>सालाना आधार पर वर्ष 2022-23 में ऊन उत्पादन 2.12 प्रतिशत बढ़ गया है। जबकि वर्ष 2018-19 में ऊन उत्पादन की वार्षिक वृद्धि -2.51 प्रतिशत</span>; <span>वर्ष 2019-20 में -9.05 प्रतिशत</span>, <span>वर्ष 2020-21 में -0.46 प्रतिशत और वर्ष 2021-22 में -10.87 प्रतिशत रही थी। लगातार गिरावट के बाद ऊन उत्पादन में इस साल सुधार के संकेत मिले हैं।&nbsp;</span>देश के कुल ऊन उत्पादन में सर्वाधिक 47.98 प्रतिशत हिस्सेदारी राजस्थान की है। उसके बाद जम्मू-कश्मीर (22.55 प्रतिशत), <span>गुजरात (6.01 प्रतिशत)</span>, <span>महाराष्ट्र (4.73 प्रतिशत) और हिमाचल प्रदेश (4.27 प्रतिशत) का स्थान है।</span></p>
<p>&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पांच साल में 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ा दूध व मीट उत्पादन, अंडा उत्पादन में भी वृद्धि ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एफपीओ को क्यों नहीं मिलता बैंक लोन, क्यों एनबीएफसी से लेना पड़ता है महंगा कर्ज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/why-fpos-do-not-get-bank-loans-why-they-have-to-take-expensive-loans-from-nbfcs.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 27 Nov 2023 10:02:28 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/why-fpos-do-not-get-bank-loans-why-they-have-to-take-expensive-loans-from-nbfcs.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एक तरफ सरकार किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को बढ़ावा दे रही है, ताकि किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सके, दूसरी तरफ, हकीकत यह है कि एफपीओ को सरकारी बैंकों से उनके कामकाज के लिए कर्ज नहीं मिलता है। उन्हें गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से महंगे ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ता है। एनबीएफसी उनसे 15-17 फीसदी तक ब्याज वसूलते हैं। केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 10 हजार एफपीओ बनाने को मंजूरी दी है। अब तक 5,000 से ज्यादा एफपीओ देशभर में बन चुके हैं। &nbsp;</p>
<p>किसान उत्पादक संगठन किसानों का समूह है जो किसानों की मदद करते हैं। एफपीओ किसानों को सस्ते दामों पर बीज, खाद, कीटनाशक, मशीनरी, कृषि तकनीक, मार्केट लिंकेज, ट्रेनिंग, नेटवर्किंग और आर्थिक मदद उपलब्ध करवाते हैं, ताकि किसान का मनोबल बढ़े और वो बिना किसी अड़चन के बेहतर खेती कर सकें। इसके अलावा, वे किसानों से बेहतर दाम पर उनकी फसल भी खरीदते हैं। एफपीओ बनाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से आर्थिक मदद भी दी जाती है।</p>
<p>मध्य भारत कंसोर्टियम ऑफ एफपीओ के सीईओ योगेश द्विवेदी <strong>रूरल वॉयस</strong> से कहते हैं, &ldquo;एफपीओ को अपने कामकाज के लिए कार्यशील पूंजी की जरूरत होती है। इसके लिए हमें अभी एनबीएफसी से महंगे ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ता है। एनबीएफसी 15-17 फीसदी तक ब्याज वसूलती हैं। एफपीओ को सस्ते दर पर कर्ज उपलब्ध करवाने के लिए नीतिगत पहल की जरूरत है। यह पॉलिसी का मामला हैं। रिजर्व बैंक की ओर से अभी तक बैंकों को इस तरह का कोई दिशा-निर्देश नहीं दिया गया है कि एफपीओ को कर्ज मुहैया कराया जाए। इसलिए बैंक एफपीओ को कर्ज नहीं देते हैं। साथ ही, वे कर्ज देने के लिए टर्नओवर और बैलेंस शीट की मांग करते हैं। नए एफपीओ का टर्नओवर कितना होगा। शुरुआत में तो उन्हें किसानों को अपने साथ जोड़ने के लिए ही जूझना पड़ता है, तो टर्नओवर कहां से होगा। इसलिए, वे सीधे नहीं बल्कि एनबीएफसी के जरिये ही कर्ज मुहैया करवाते हैं।&rdquo;</p>
<p>उनका कहना है, &ldquo;एनबीएफसी के लिए ब्याज दरों को लेकर कोई सीमा तय नहीं की गई है। वे मनमाने दर पर एफपीओ को कर्ज देते हैं। इसकी सीमा तय करने के लिए भी रिजर्व बैंक की ओर से नीतिगत पहल होनी चाहिए और ब्याज दर की एक सीमा तय की जानी चाहिए कि इससे ज्यादा ब्याज वे नहीं वसूल सकते। एनबीएफसी का तर्क होता है कि उन्हें भी महंगे दर पर बैंकों या प्राइवेट लैंडर से कर्ज लेना पड़ता है, इसलिए वे सस्ते दर पर कर्ज कैसे दे सकते हैं।&rdquo;</p>
<p>योगेश द्विवेदी के मुताबिक, महंगे कर्ज की वजह से एफपीओ को संचालन में दिक्कत आती है और मुनाफा प्रभावित होता है। जब तक एफपीओ को मुनाफा नहीं होगा, तब तक किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम कैसे दिया जा सकेगा। एफपीओ किसानों को कृषि मशीनरी भी किराये पर उपलब्ध करवाते हैं। अगर एफपीओ के पास धन की कमी होगी तो वे मशीनरी कैसे खरीद पाएंगे। अभी जो पूंजी होती है वह किसानों को खाद, बीज उपलब्ध करवाने और फसलों की खरीद में ही खर्च हो जाता है। एफपीओ का विस्तार करने और कृषि क्षेत्र एवं किसानों की मदद के लिए सस्ते कर्ज की जरूरत है। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एफपीओ को क्यों नहीं मिलता बैंक लोन, क्यों एनबीएफसी से लेना पड़ता है महंगा कर्ज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि सुधार पर अब राज्य आगे बढ़ेंः प्रो. रमेश चंद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/states-should-now-move-forward-on-agricultural-reforms-says-prof-ramesh-chand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 26 Nov 2023 07:00:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/states-should-now-move-forward-on-agricultural-reforms-says-prof-ramesh-chand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नीति आयोग के सदस्य <strong>प्रोफेसर रमेश चंद</strong> दुनिया के जाने-माने एग्रीकल्चरल इकोनॉमिस्ट हैं। देश की कृषि नीतियों के निर्धारण में हमेशा उनकी छाप दिखती है। एग्रीकल्चरल इकोनॉमिस्ट होने के नाते उन्होंने कई पेपर और किताबें लिखी हैं। हाल ही में हरित क्रांति और अमृत काल को लेकर भारतीय कृषि पर उनका महत्वपूर्ण पेपर आया है, जिसमें उन्होंने देश के कृषि क्षेत्र के भविष्य का रोडमैप रखने की कोशिश की है। <strong>रूरल वॉयस </strong>और<strong> रूरल वर्ल्ड</strong> के एडिटर इन चीफ <strong>हरवीर सिंह</strong> से उनकी बातचीत के प्रमुख अंशः&nbsp;</p>
<p><strong>एग्रीकल्चरल मार्केटिंग अब भी बड़ा जटिल मुद्दा है। इसके चलते फसलों की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव होते हैं जो किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए नुकसानदेह हैं। कृषि सुधारों का रोडमैप क्या होना चाहिए</strong><strong>? </strong><strong>किसान एमएसपी की गारंटी मांग रहे हैं</strong><strong>, </strong><strong>लेकिन आप किसानों के लिए भावांतर को एक प्रभावी नीतिगत कदम मानते हैं। इस पर आपकी क्या राय है और कैसे काम होना चाहिए</strong><strong>?</strong></p>
<p>कृषि उत्पादन की प्रकृति ऐसी है कि वह मौसम और जलवायु पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है। इस कारण उनमें अस्थायित्व और उतार-चढ़ाव है, जो स्वाभाविक है। उसे रोक नहीं सकते, लेकिन जो उतार-चढ़ाव उत्पादन की प्रकृति की वजह से होते हैं और जिसका असर किसानों एवं उपभोक्ताओं पर पड़ता है, उसे हम मार्केट की सही नीतियों से कम कर सकते हैं और करना भी चाहिए। किसानों को उपज की जो कीमत मिलती है उसके दो पक्ष हैं। एक तो सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिलता है और दूसरा, बाजार से कीमत मिलती है। ये दोनों एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि पूरक हैं। बाजार प्रतिस्पर्धी हो तो किसानों को वाजिब कीमत मिल जाएगी, लेकिन उत्पादन ज्यादा होने पर प्रतिस्पर्धा के बावजूद कीमत गिर जाती है। इसलिए बाजार में भी कीमतों को लेकर सरकार की ओर से हस्तक्षेप करने की जरूरत पड़ती है। हमें दो-तीन चीजों का ध्यान रखना चाहिए। एक तो यह कि हम एमएसपी इतना न बढ़ाएं कि बाजार में यदि किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है, तो एमएसपी उसको नुकसान पहुंचाए। दूसरा यह कि एमएसपी देने का जरिया क्या है। हमारे देश में इसे ज्यादातर सरकारी खरीद के जरिये दिया जाता है। अनाजों की सरकारी खरीद इसलिए भी जरूरी है कि हमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए अनाज चाहिए। अगर हमें पीडीएस से अलग अनाज की जरूरत है तब हमें दूसरे साधन अपनाने की जरूरत है, जैसे भावांतर भुगतान योजना जिसका आइडिया मैंने बहुत साल पहले दिया था। मध्य प्रदेश और हरियाणा में इस पर थोड़ा अमल हुआ है। इसलिए इस तरह के दूसरे साधनों का भी प्रयोग करना चाहिए जो एमएसपी के नकारात्मक असर को नियंत्रित कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>कृषि सब्सिडी नीति निर्धारकों और अर्थविदों के लिए बड़ा मुद्दा रहा है। यह जटिल होने के साथ राजनीतिक रूप से संवेदनशील भी है। आपके मुताबिक सब्सिडी देने की नीति पर अमल जारी रहना चाहिए या प्रोत्साहन आधारित आर्थिक नीति अपनानी चाहिए। कुछ राज्यों ने किसानों को सीधे कैश ट्रांसफर की नीति अपनाई हैं। केंद्र सरकार भी पांच साल से किसानों को डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के रूप में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि दे रही है। क्या यह भविष्य में सब्सिडी की जगह ले सकता है</strong><strong>?</strong></p>
<p>दोनों के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं। इसके बारे में पहले मैं विस्तार से बता दूं कि इस पर क्या विचार करना चाहिए और हम किस स्थिति की ओर जा रहे हैं। सब्सिडी का सबसे ज्यादा फायदा यह है कि यह उत्पादन को प्रोत्साहित करता है और ग्रोथ लाता है, क्योंकि अधिकांश सब्सिडी इनपुट पर होती है। जो किसान इनपुट इस्तेमाल करेगा उसी को सब्सिडी मिलेगी। इसका एक पक्ष यह भी है कि कोई किसान अपनी जमीन में इनपुट का उपयोग नहीं करता है, तो उसे सब्सिडी मिलने का कोई औचित्य भी नहीं है। दूसरा है नगद देना, जिसका इस्तेमाल किसान किसी भी रूप में कर सकता है, चाहे वह फर्टिलाइजर इनपुट हो या कोई और इनपुट या कुछ और। यह सभी को मिलेगा, भले वह इनपुट इस्तेमाल करता हो या नहीं। लेकिन सब्सिडी से उत्पादन पर जितना सकारात्मक असर पड़ता है उतना नगद हस्तांतरण से नहीं पड़ता। जो फर्टिलाइजर का ज्यादा इस्तेमाल करता है उसका उत्पादन ज्यादा होता है। यह सिस्टम में एक बैलेंस लाता है। सब्सिडी कई तरह की हैं। जैसे आप बीज पर सब्सिडी देते हैं, फिर जो टेक्नोलॉजी का कैरियर है उस पर सब्सिडी देना अच्छी बात है। एग्रीकल्चर कंजर्वेशन के लिए सब्सिडी अच्छी है। यदि आप फार्म मैकेनाइजेशन के लिए सब्सिडी देते हैं, जिसकी वजह से किसान पराली जलाने की बजाय उसका प्रबंधन कर पाता है, तो यह बहुत अच्छा है। महत्वपूर्ण यह है कि सब्सिडी किस तरीके से देते हैं और किस चीज पर देते हैं। सब्सिडी देने से ज्यादा इसके नकारात्मक प्रभाव सब्सिडी देने के तरीकों से पैदा हुए हैं। हम सिंचाई के लिए किसानों को मुफ्त बिजली देते हैं, इससे पानी का ज्यादा इस्तेमाल होगा और भूजल स्तर नीचे चला जाएगा। इस तरह दोनों के नकारात्मक और सकारात्मक पहलू हैं। हमें सारे पक्षों को ध्यान में रखकर एक बैलेंस्ड अप्रोच बनाकर चलना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>हम डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और इनकम सपोर्ट की ओर जा रहे हैं और सब्सिडी भी दे रहे हैं, लेकिन किसी भी सरकार ने इसे तर्कसंगत नहीं बनाया है, ऐसा नहीं होना चाहिए। तर्क दिया जाता है कि किसानों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर या इनकम सपोर्ट सब्सिडी कम करने के लिए दिया जा रहा है, लेकिन वास्तव में हम उसको कम नहीं कर रहे हैं। यदि सभी सकारात्मक और नकारात्मक पक्षों को देखा जाए तो इनकम सपोर्ट के रूप में दी जाने वाली राशि सब्सिडी की तुलना में बेहतर है।</p>
<p><strong>खाद्य सुरक्षा में भारत ने आत्मनिर्भरता हासिल की है और देश एक बड़े कृषि निर्यातक के रूप में उभरा है। कृषि निर्यात का स्तर </strong><strong>50 </strong><strong>अरब डॉलर को पार कर गया है। लेकिन दो साल से गेहूं</strong><strong>, </strong><strong>चावल और चीनी निर्यात पर प्रतिबंध या सख्ती की स्थिति क्यों पैदा हो गई है</strong><strong>, </strong><strong>जबकि सरकार ने रिकॉर्ड उत्पादन के दावे किये हैं। कृषि उत्पादों के निर्यात को लेकर नीतियों में स्थायित्व क्यों नहीं है</strong><strong>? </strong><strong>अचानक लिए जाने वाले फैसलों को आप कैसे देखते हैं</strong><strong>?</strong></p>
<p>यदि आपकी परिस्थिति में स्थायित्व नहीं है तो आप नीति को भी स्थायी नहीं रख सकते हैं। नीतियां परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। यदि ऐसी परिस्थिति बनती है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में 10-15 फीसदी के सामान्य उतार-चढ़ाव से ज्यादा बदलाव आ जाता है तो यह हस्तक्षेप जरूरी हो जाता है। देश में अचानक कहीं बाढ़ या कोई प्राकृतिक आपदा आ गई, या किसी परिस्थिति में उत्पादन ज्यादा प्रभावित हो गया, तो उस स्थिति में आपको यह चुनना होता है कि आप देश को प्राथमिकता देते हैं या विदेश को। आपका अपना उपभोक्ता प्राथमिकता में है या विदेश का। इसलिए मैंने कहा की परिस्थिति स्थायी नहीं रहती, खासकर कृषि के मामले में। इसलिए हम नीतियों को भी स्थायी नहीं रख सकते।&nbsp;</p>
<p>बहुत से फैसले देखने में लगता है कि अचानक लिए गए, लेकिन आप देखेंगे कि जरूर कोई न कोई कारण रहा होगा। जैसा पिछले दिनों आपने प्याज के मामले में देखा। प्याज में अचानक इस तरह की स्थिति बनी थी। अगर उसमें हस्तक्षेप नहीं किया जाता तो जैसा कि पहले होता था, प्याज की कीमत 100 रुपये तक चली जाती। फूड मैनेजमेंट और फूड प्राइस को नियंत्रित रखना उपभोक्ता और किसानों दोनों के लिहाज से जरूरी हो जाता है। मैं आपकी इस बात से जरूर सहमत हूं कि यह हस्तक्षेप तभी होना चाहिए जब कीमत एक तय सीमा से ऊपर या नीचे चली जाए।&nbsp;</p>
<p>किसानों और व्यापारियों सभी के मन में यह रहना चाहिए अगर कीमतें तय सीमा में रहेंगी तो सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी। उससे ऊपर या नीचे जाएंगी तो सरकार जरू हस्तक्षेप करेगी। विदेशों में भी ज्यादातर सरकारें ऐसा करती हैं। हमारे यहां भी शुरू से ऐसा होता रहा है। ऐसा नहीं कि ट्रेड को फ्री छोड़ दिया गया है। हमने हमेशा पॉलिसी ऑफ स्ट्रैटेजिक लिबरलाइजेशन को माना है। हमारा लक्ष्य रहा है कि हम अपने प्राइस को इंटरनेशनल ट्रेड के हिसाब से ऊपर-नीचे जाने देंगे, लेकिन उतार-चढ़ाव ज्यादा होने पर हम उसे प्रोटेक्ट करेंगे, कभी उपभोक्ता के लिए, तो कभी किसानों के हित में।</p>
<p><strong>क्या रद्द किये गये तीन कृषि कानून समय की जरूरत थी</strong><strong>, </strong><strong>क्या अब भी कृषि सुधारों पर काम होना चाहिए</strong><strong>? </strong><strong>सरकार दो साल से लगातार आवश्यक वस्तु अधिनियम का उपयोग कर रही है जो तीन कृषि कानूनों की उदार कृषि बाजार भावना के अनुरूप नहीं है। ये दोनों विषय एक दूसरे के प्रतिकूल हैं</strong><strong>, </strong><strong>तो कृषि क्षेत्र में सुधारों की कितनी जरूरत है</strong><strong>?&nbsp;</strong></p>
<p>जब तीन कृषि कानून वापस लिए गए थे तो प्रधानमंत्री ने कहा था कि शायद हम किसानों को इन कानूनों के फायदे समझाने में असफल रहे। नीतियों में कमियां हो सकती हैं। जब किसान प्रदर्शन कर रहे थे तब मैंने नीति आयोग से पेपर जारी किया था। जो लोग इसमें रुचि रखते हैं उनको वह पेपर देखना चाहिए कि सरकार के विचारकों ने किस सोच के साथ नए कानून लाने की प्रक्रिया शुरू की थी। मेरा मानना है कि किसी भी इकोनॉमी में प्रगति के कई महत्वपूर्ण कारण होते हैं। जैसे, टेक्नोलॉजी प्रोडक्शन बढ़ाने का कारक होता है, दूसरा, हमारी पॉलिसी और इंस्टीट्यूशन उसके कारक होते हैं। परिस्थिति के हिसाब से यदि हम पॉलिसी और इंस्टीट्यूशन में सुधार नहीं करते हैं तो इंक्रीमेंटल चेंज ही आएगी, ट्रांसफॉर्मेशनल चेंज नहीं आएगी। सुधार लाना बहुत जरूरी है। पिछले दिनों मैं मार्केटिंग के एक कॉन्फ्रेंस में तमिलनाडु गया था। वहां मैंने मार्केटिंग सोसायटी से कहा था आप हर राज्य में यह डिबेट करें, क्योंकि वर्ष 2002 से इस पर बहुत अच्छे-अच्छे विचार आ चुके हैं, इन पर बहुत डिबेट हो चुकी है, हमें उसको छोड़ना नहीं चाहिए। थिंकर्स ने अपनी ओर से बेहतर करने का प्रयत्न किया, लेकिन वह किन्हीं कारणों से पूरा नहीं हो सका। राज्य स्तरीय समितियों को अपनी परिस्थितियों के हिसाब से इन कानूनों के उन मॉडल पर चर्चा करनी चाहिए जो फायदेमंद हो सकते हैं। जैसे मॉडल एपीएमसी एक्ट आया था, मॉडल कांट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट था, मॉडल लैंड लीजिंग एक्ट था, उन मॉडल को लेकर राज्य अपने यहां चर्चा करें। मैं किसानों से भी आपके माध्यम से अपील करूंगा कि वे खुले मन से इन पर चर्चा करें। इनको ठंडे बस्ते में डालना कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए अच्छा नहीं होगा।&nbsp;</p>
<p>थिंकर्स इसको एक बार लाकर वापस कर चुके हैं, तो मुझे नहीं लगता कि केंद्र की तरफ से इसको दोबारा लाने का कोई औचित्य है। हम सब जानते हैं कि कृषि क्षेत्र के कुछ पहलू केंद्र के स्तर पर हैं और कुछ राज्य के स्तर पर। राज्यों की भी जिम्मेदारी उतनी ही बड़ी है, या कहें कि कृषि क्षेत्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी ज्यादा बड़ी है। उनको इसके सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष पर व्यापक चर्चा करनी चाहिए, और उससे जो निकल कर आए उसे लेकर सुधारों की ओर जाना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>दूसरा, आपका सवाल है कि केंद्र सरकार एक ओर आवश्यक वस्तु अधिनियम में सुधार लेकर आई थी, तो दूसरी ओर खुद उसका ज्यादा इस्तेमाल कर रही है। आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव लाने का आधार यह था कि मार्केट में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तो मार्केट में निजी निवेश बढ़ेगा। यदि कभी किसी चीज की उपलब्धता की जरूरत हो, तो सरकार का ही नहीं बल्कि निजी क्षेत्र का भी बफर स्टॉक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। क्योंकि दो ही तरीके से कीमतें स्थिर रह सकती हैं, या तो आप ट्रेड करो या फिर स्टॉक में रखो। ज्यादातर देशों में सरकारी स्टॉक नहीं होता है, वहां प्राइवेट स्टॉक से ही उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया जाता है। यदि बाजार से संबंधित कानून लागू हो जाता तो आप देखते कि निजी निवेश कितना बढ़ता, कितने भंडारण गृह बनते। बजाय इसके कि सारा माल एकदम से बाजार में आ जाए, वह धीरे-धीरे कीमत के हिसाब से बाहर आता। आवश्यक वस्तु अधिनियम और बाजार को लेकर कानून एक दूसरे के पूरक थे। आवश्यक वस्तु अधिनियम रहेगा तो निजी निवेश नहीं आएगा, और अगर निजी निवेश नहीं आता है तो आपको आवश्यक वस्तु अधिनियम की जरूरत पड़ेगी। यह एक वजह है कि पहले सरकार जो करना चाहती थी अब उसके विपरीत कर रही है।</p>
<p><strong>आपने पिछले दिनों </strong><strong>&lsquo;</strong><strong>हरित क्रांति से अमृत कालः लेसंस एंड वे फारवर्ड फॉर इंडियन एग्रीकल्चर</strong><strong>&rsquo; </strong><strong>पेपर जारी किया</strong><strong>, </strong><strong>जिसमें हरित क्रांति से सबक लेकर कृषि की भावी रणनीति के लिए कदमों को सामने रखा है। इन पर अमल कैसे होगा</strong><strong>?</strong></p>
<p>पिछले 75 वर्षों में हमारी कई उपलब्धियां रही हैं और पिछले 10 वर्षों में तो हमारा ऐतिहासिक रिकॉर्ड रहा है। कृषि क्षेत्र की ग्रोथ 4-5 फीसदी रही है। ऐसी कई उपलब्धियां हैं। उनके साथ बहुत सारी चुनौतियां भी खड़ी हुई हैं। जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है, केमिकल के बहुत ज्यादा प्रयोग से लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ा है। इन सब चीजों को ध्यान में रखकर उस पर साइंटिफिक तरीके से रोड मैप नहीं बनाएंगे तो इधर-उधर भटकने की आशंका रहेगी। मैंने उसमें यह बात भी लिखी है कि हम जो प्राकृतिक खेती की ओर जाने की बात कह रहे हैं, उससे हरित क्रांति के नकारात्मक प्रभावों में सुधार आएगा। इनको देखते हुए एक रोड मैप तैयार किया है। उसमें एक-दो बातें मैं आपके माध्यम से कहना चाहूंगा। अधिकांश सबूत ऐसे हैं कि एग्रो-केमिकल आधारित खेती को छोड़कर परंपरागत खेती, जिसमें एग्रो-केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता था और देसी बीज का उपयोग होता था, में उत्पादकता 30 से 35 फीसदी प्रभावित होगी। परंपरागत खेती में उत्पादकता की कमी को मैं दूसरे तरीके से देखता हूं। हरित क्रांति की वजह से जो आधुनिक खेती शुरू हुई, उसमें 100 साल के विज्ञान की भूमिका है। मक्का का हाइब्रिड 1920 में ही आ गया था। फिर केमिकल आए, तरह-तरह के सीड्स आए, और कई सारी चीजें आईं। एक ओर 100 साल का विज्ञान और दूसरी ओर परंपरागत खेती जिसमें हमने विज्ञान को शामिल ही नहीं किया।&nbsp;</p>
<p>इन सबको देखते हुए मैंने एक रोड मैप रखा है कि उत्पादन प्रभावित होने की जो आशंका है, उसका एक हिस्सा हम सहन कर सकते हैं क्योंकि अब हम खाद्यान्न में सरप्लस हैं। हम यह चांस ले सकते हैं कि धीरे-धीरे उस ओर बढ़ते जाएं लेकिन बहुत संभल कर। दस साल बाद इसका जायजा लें कि इस दौरान इसमें विज्ञान को शामिल कर उत्पादकता बढ़ाने में कामयाब हो गए ताकि हमारी खाद्य सुरक्षा पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।&nbsp;</p>
<p>उदाहरण के लिए, जब हम अगले 25 साल के लिए विकास की बात करते हैं, तो अक्सर कहा जाता है कि विकसित देशों में कृषि को लेकर क्या हुआ था। जब वे विकासशील से विकसित देश बने तो उनका एक मॉडल था। वे उसी के अनुसार विकसित हुए और वहां की सभी सरकारों ने उस मॉडल को लेकर अपनी नीतियां बनाई। वह मॉडल यह था कि जब कोई अर्थव्यवस्था प्रगति करती है तो वहां इंडस्ट्री बढ़ती है और मजदूर कृषि क्षेत्र छोड़ कर इंडस्ट्री में आते हैं। दोनों क्षेत्रों में नई-नई मांग आती है और देश की आय और देश के रोजगार में कृषि की हिस्सेदारी घटती जाती है। पश्चिमी देशों में आप देखेंगे कि कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी इकोनॉमी में 2-4 फीसदी ही है और 2-4 फीसदी लोग ही वहां कृषि में लगे हुए हैं। मगर पिछले कुछ सालों में यह पाया गया कि गैर कृषि क्षेत्र, विशेष तौर पर इंडस्ट्री सेक्टर बहुत कम रोजगार पैदा कर पा रहा है। सेक्टर की ग्रोथ तो 10 फीसदी हो रही हो लेकिन रोजगार की ग्रोथ 2-4 फीसदी ही है।</p>
<p>विकासशील से विकसित बने उन देशों ने जो मॉडल अपनाया, हमारे लिए आज की इंडस्ट्री उस विकल्प को बंद कर चुकी है। हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विकसित भारत का लक्ष्य लेकर अगर हम चल रहे हैं, जिसमें हर व्यक्ति की आमदनी 2100 डॉलर से बढ़कर 11-12 हजार डॉलर हो जाएगी, तो फिर लोगों को रोजगार कहां मिलेगा, लोगों की आमदनी कहां से होगी। सरकार का इनक्लूसिव ग्रोथ का जो लक्ष्य है, उसमें हमें सिर्फ देश की आमदनी नहीं बढ़ानी, बल्कि सभी लोगों की आमदनी बढ़ानी है, और आमदनी बढ़ती है रोजगार से। उस रोड मैप में मैंने इस चीज को भी उजागर करने की कोशिश की है कि हमें अब कृषि केंद्रित विकास के बारे में सोचना होगा, क्योंकि हमारा रोजगार अब भी कृषि केंद्रित है। 2022-23 का पीएलएफएस का सर्वे भी कहता है कि 45.8 फीसदी कार्यबल कृषि क्षेत्र में ही है। उसमें बहुत धीमी गति से कमी आ रही है। सस्टेनेबिलिटी, इम्प्लॉयमेंट, क्लाइमेट चेंज और इसी तरह ग्रोथ की गति को बरकरार रखना, इन सब को देखकर मैंने उसमें एक पोजीशन लिया है कि विकसित भारत बनाने में कृषि केंद्रीय भूमिका अदा करेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>कृषि में नई तकनीक पर जोर है लेकिन कृषि शोध और ढांचागत सुविधाओं पर सार्वजनिक निवेश नहीं बढ़ रहा है जिसकी जरूरत लगातार कृषि वैज्ञानिकों की ओर से बताई जाती रही। जीएम टेक्नोलॉजी को लेकर भी सरकार की नीति बहुत स्पष्ट नहीं। क्या जीएम टेक्नोलॉजी भारत के लिए उपयोगी है और क्या शोध एवं तकनीक को अपनाने एवं निवेश बढ़ाने को लेकर हमें आक्रामक रुख अपनाना चाहिए</strong><strong>?&nbsp;</strong></p>
<p>कृषि क्षेत्र में तकनीक कई सारे क्षेत्र से आ रहे हैं। पहले हम पब्लिक सेक्टर पर ही पूरी तरह निर्भर थे। अब आप देख रहे होंगे कि एग्री-स्टार्टअप भी आ रहे हैं, निजी क्षेत्र भी है। लेकिन हमने एग्रीकल्चर का जो फ्रेगमेंटेशन कर दिया- एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, वेटनरी यूनिवर्सिटी, हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी, फिशरीज यूनिवर्सिटी- उससे फिक्स्ड कॉस्ट इतनी ज्यादा बढ़ गई कि जो पैसा शोध में जाना चाहिए था वह वेतन में जाने लगा। उसका हम एफिशिएंट इस्तेमाल कर सकते थे। कई सरकारें यह भी कहती हैं कि सब्सिडी पर सारा पैसा खर्च हो जाता है तो शोध के लिए कहां से दें। हमें इसको गंभीरता से लेना चाहिए। पब्लिक सेक्टर के शोध से ही देश में मजबूती आती है। मैं तो यह भी कहूंगा कि किसान भाई के फायदे के लिए जो टेक्नोलॉजी है वह उसका प्रचार करें, राज्यों को भी इसके लिए कोशिश करनी चाहिए और यह बहुत जरूरी है। आजकल टेक्नोलॉजी महंगी भी होती जा रही है। हमें विश्व के साथ प्रतिस्पर्धा करनी है।&nbsp;</p>
<p>आपने जीएम टेक्नोलॉजी का सवाल पूछा, यह संवेदनशील मुद्दा है लेकिन मैं इसका जवाब देने में हिचकिचाऊंगा नहीं क्योंकि यह देश और किसानों के भविष्य का मामला है। पहले तो मेरा यह मानना है कि जहां परंपरागत तकनीक से आपको सफलता मिलती है वहां हमें जीएम में बिल्कुल नहीं जाना चाहिए। जैसे गेहूं में, चावल में जो सफलता मिल रही है तो उसमें जाने की जरूरत नहीं है। मगर पूरा जोर लगाने के बाद भी अगर परंपरागत तकनीक से हमें कुछ नहीं मिलता है तब हमें मजबूरी में जीएम टेक्नोलॉजी की ओर जाना चाहिए। दूसरा, जो यह कहा जा रहा है कि प्राइवेट सेक्टर सीड्स के जरिये टेक्नोलॉजी को बहुत महंगा कर देता है, तो जहां पर जीएम का डेवलपमेंट पब्लिक सेक्टर इंस्टीट्यूशन करती है, जैसे बैंगन को डेवलप किया, सरसों को डेवलप किया, हमें वैसा करना चाहिए। तीसरा हमारे देश में जीएम टेक्नोलॉजी का ऑब्जेक्टिव असेसमेंट नहीं है। यहां तक कि जीईएसी में भी कोई कृषि वैज्ञानिक ही नहीं था। कृषि वैज्ञानिक को नीति निर्धारण में रखना जरूरी है। हम केमिकल का इस्तेमाल कम करना चाहते हैं, जीएम टेक्नोलॉजी तो कई तरह के केमिकल का सब्सटीट्यूट हैं जिसमें आपको केमिकल से मुक्ति मिलती है, तो इन सब चीजों को हमें देखना चाहिए। और चौथा, हम टेक्नोलॉजी को कहीं बहुत ज्यादा इग्नोर तो नहीं कर रहे हैं। एक तरफ टेक्नोलॉजी की अनदेखी कर रहे हैं और दूसरी तरफ हमें खाद्य तेलों के आयात पर अरबों डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इन सब बातों को देखते हुए देश को इसे पूरी तरह खारिज नहीं करना चाहिए। कहीं और हमें सफलता नहीं मिलती है तो खाद्य तेल में इसको जरूर मौका देना चाहिए।</p>
<p><strong>पर्यावरण में बदलाव की बढ़ती घटनाओं से कृषि पर बड़ा असर पड़ रहा है। किसान भी समझने लगे हैं कि क्लाइमेट चेंज का क्या नुकसान है। हाल ही संयुक्त राष्ट्र् के कृषि एवं खाद्य संगठन (एफएओ) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले तीन दशकों में कृषि और सहयोगी क्षेत्र के उत्पादन को क्लाइमेट चेंज</strong><strong>, </strong><strong>प्राकृतिक आपदा और प्रतिकूल मौसम से </strong><strong>3.8 </strong><strong>ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। इससे हम कैसे निपट पाएंगे। कृषि उत्पादन और किसानों की आय को इससे कैसे सुरक्षित रख पाएंगे</strong><strong>, </strong><strong>इससे कैसे संतुलन बना पाएंगे</strong><strong>?</strong></p>
<p>यह प्लेनेट और लोगों के सर्वाइवल का मुद्दा है, किसानों की आमदनी का मुद्दा नहीं। पर्यावरण संबंधी एक नेशनल एक्शन प्लान है जिसमें अलग-अलग मिशन हैं। वाटर मिशन भी है जो एग्रीकल्चर से जुड़ा हुआ है। एग्रीकल्चर ऐसा सेक्टर है जो क्लाइमेट चेंज से प्रभावित भी होता है और क्लाइमेट को प्रभावित भी करता है। तापमान एक डिग्री बढ़ जाए तो उससे कार या फ्रिज का उत्पादन प्रभावित नहीं होता, लेकिन कृषि उत्पादन प्रभावित होता है। क्लाइमेट चेंज का सबसे नकारात्मक असर एग्री फूड सेक्टर पर होने वाला है।&nbsp;</p>
<p>दूसरा एक मुद्दा है जिसे पूरी तरह इग्नोर किया गया है। मैंने भी एफएओ के जरिये दुनिया के 14 देशों के महत्वपूर्ण लोगों को बुलाया था इसी बात पर चर्चा करने के लिए। मैंने एफएओ से भी इस मुद्दे को आगे लाने के लिए कहा कि किसान अब यह तो समझ रहे हैं कि क्लाइमेट चेंज से कृषि पर क्या असर हो रहा है, लेकिन इस बात को लेकर जागृत नहीं हैं कि कृषि का भी क्लाइमेट चेंज पर प्रभाव पड़ता है। हम इसे केवल इंडस्ट्री और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर नहीं छोड़ सकते कि वे अपना उत्सर्जन कम करें। भारत में क्लाइमेट चेंज में एग्रीकल्चर की भूमिका 17 फीसदी है। एग्रीकल्चर तो इसमें सबसे बड़ा स्टेकहोल्डर है। एग्रीकल्चर से ग्रीन हाउस गैसें निकलती हैं। जिस तरह हम इलेक्ट्रिकल व्हीकल की बात कर रहे हैं, ग्रीन इकोनॉमी और ग्रीन हाइड्रोजन की बात कर रहे हैं, उसी तरह कृषि में उत्सर्जन कम करने पर बात करनी पड़ेगी। अभी यह फैसला हुआ है कि डेढ़ डिग्री तापमान वृद्धि पर हमें रोक लगानी है। अभी तक हमें इसका नुकसान इसीलिए महसूस नहीं हुआ क्योंकि विज्ञान क्लाइमेट चेंज के असर को कम करने में कामयाब हुआ है। मगर उसकी एक सीमा है और हम ऊपरी सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। जब हम उस सीमा पर पहुंच जाएंगे तब कोई भी साइंस उसको काउंटर करने में सक्षम नहीं होगा। हमें क्लाइमेट चेंज से एग्रीकल्चर को बचाना है, और पर्यावरण को बचाने के लिए एग्रीकल्चर का योगदान भी बाकी सेक्टर की तरह कम करना है।&nbsp;</p>
<p><strong>फसलों से अधिक उत्पादन वृद्धि डेयरी</strong><strong>, </strong><strong>फिशरीज और हॉर्टिकल्चर में आ रही है। ऐसे में क्या आपको लगता है कि कृषि विविधीकरण के जरिये किसानों की आय में वृद्धि की जा सकती है</strong><strong>?</strong></p>
<p>निश्चित तौर पर, अगर आप आमदनी को देखें तो&hellip; हॉर्टिकल्चर क्रॉप में रिस्क जरूर है लेकिन नॉन हॉर्टिकल्चर क्रॉप की तुलना में इसमें 4 से 5 गुना ज्यादा आमदनी है। आज सबसे ज्यादा उत्पादकता और सबसे ज्यादा ग्रोथ उन राज्यों में आ रही है जो विविधीकरण की ओर जा रहे हैं। हरित क्रांति की वजह से उत्पादकता में आगे रहने वाले हरियाणा और पंजाब जैसे राज्य अब टॉप पर नहीं हैं। आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश आगे निकल रहे हैं। जहां विविधीकरण हुआ या हो रहा है वहीं तेजी से ग्रोथ हो रही है, वहीं पर ज्यादा उत्पादकता मिल रही है। हमें एमएसपी पर निर्भर किसानों को नए रास्ते देने होंगे। मेरे जिस पेपर का आपने जिक्र किया था, उसमें मैंने इससे संबंधित एक ग्राफ दिया है। एग्रीकल्चर के जिस सेगमेंट में सरकार का ज्यादा हस्तक्षेप है, चाहे एमएसपी से या सब्सिडी से, उसकी ग्रोथ उतनी कम है। उसकी वजह यही है कि विविधीकरण मांग पर निर्भर है और जो मांग पर निर्भर होता है उसकी कीमत देने की शक्ति ज्यादा होती है। इसलिए आप देख रहे हैं कि सब्जियों, फल, अंडे, पोल्ट्री, दूध और मछली में मांग के हिसाब से ग्रोथ हो रही है। अनाजों की मांग बहुत धीमी गति से बढ़ रही है। विविधीकरण ग्रोथ और किसानों की आमदनी बढ़ाने का बहुत बड़ा कारक है।&nbsp;</p>
<p><strong>आपका आकलन है कि आने वाले दशकों में भारत को अपने अतिरिक्त उत्पादन के </strong><strong>25 </strong><strong>फीसदी तक के लिए निर्यात बाजार तलाशने होंगे। क्या इस तरह की किसी रणनीति पर काम हो रहा है</strong><strong>? </strong><strong>विश्व व्यापार संगठन और क्षेत्रीय स्तर पर हो रहे व्यापार समझौतों में इसकी कितनी गुंजाइश है</strong><strong>?</strong></p>
<p>हमें अगले 10 साल में कितने फीसदी विदेशी मार्केट की तलाश करनी पड़ेगी, वह इस उम्मीद पर है कि हमारा कृषि क्षेत्र 3 से 3.5 फीसदी ग्रोथ करेगा। इंडस्ट्री डिमांड दो-सवा दो फीसदी हो रही है, तो हमारा सरप्लस बढ़ता जाएगा। आज स्थिति सामान्य नहीं है, अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं। आज तो आपका कुछ भी एक्सपोर्ट हो जाएगा। लेकिन दो-तीन साल बाद कीमतें नीचे आ जाएंगी क्योंकि कीमतों का एक चक्र होता है। गेहूं की कीमत नीचे आ जाएगी। हमें कृषि क्षेत्र को उस स्थिति में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए तैयार करना है। उसके लिए मैंने सुझाव भी दिए हैं कि दो तरीके से प्रतिस्पर्धा होती है। एक है सप्लाई चेन और दूसरा प्रोडक्शन। हमें उनको लेकर चलना है, वरना प्राइस क्रैश के चांस बन जाते हैं। हमें कृषि में एफिशिएंसी लाकर कुछ हिस्सों को निर्यातोन्मुखी बनाना होगा। उसमें बहुत सारे विकल्प आ रहे हैं। आपने ओएनडीसी प्लेटफार्म यानी ओपन नेटवर्क व डिजिटल कॉमर्स के बारे में सुना होगा। उसके जरिये अगर उपज बेचेंगे तो लागत में बचत होती है। दूसरा जरिया है एफपीओ का जिसको हम ओएनडीसी के साथ लिंक कर रहे हैं। इस तरह के कुछ इन्नोवेटिव विचार हैं मार्केटिंग में। हमें सिर्फ प्रोडक्शन में नहीं, मार्केटिंग में भी लागत कम करनी है। हमें उत्पादन के साथ सप्लाई चेन में भी एफिशिएंसी लानी होगी। हमें ट्रांसपोर्टेशन और मार्केटिंग दोनों को प्रतिस्पर्धी बनाकर आगे बढ़ाना है। यही हमारी कृषि का भविष्य है।</p>
<p><strong>अब भी भारत की कामकाजी आबादी का </strong><strong>4</strong><strong>5</strong><strong>.8 </strong><strong>फीसदी खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों से ही आजीविका कमा रहा है। गैर कृषि क्षेत्र वालों और इनकी आय का अंतर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में ग्रामीण और शहरी भारत के बीच की खाई बढ़ रही है</strong><strong>, </strong><strong>उसे कैसे कम किया जाए</strong><strong>?</strong></p>
<p>हमारी जोतों का आकार छोटा है। छोटे किसान बड़े किसानों की तुलना में ज्यादा एफिशिएंट हो रहे हैं। कहा जाता है कि स्मॉल इज ब्यूटीफुल (जो छोटा है वह खूबसूरत है), लेकिन यहां जो छोटा है वह मजबूत नहीं है। उनके लिए आय के वैकल्पिक स्रोत जरूरी हैं। ऐसे पार्ट टाइम किसान हैं जिनकी आधी से ज्यादा आमदनी गैर-कृषि स्रोतों से आती है, जैसे छोटा-मोटा रोजगार। बहुत से ऐसे किसान हैं जो कृषि छोड़कर जाना चाहते हैं। ऐसे भी हैं जो लीज पर जमीन लेकर अपनी जोत बढ़ाना चाहते हैं। इस तरह के सभी मैकेनिज्म को हमें बढ़ावा देना चाहिए। छोटे और सीमांत किसानों के संदर्भ में यह महत्वपूर्ण है कि हम उन्हें संगठित करें, उनका स्केल बढ़ाएं। खेती में हार्वेस्टिंग के बाद वैल्यू एडिशन की संभावना बढ़ाएं। छोटे और सीमांत किसानों के लिए हमें पार्ट टाइम फार्मर का ही मॉडल अपनाना पड़ेगा और उन्हें गैर कृषि क्षेत्र से आधी से ज्यादा आमदनी दिलाने के अवसर पैदा करने होंगे। इसलिए मैंने शुरुआत में ही कहा था कि कृषि का जो मॉडल विकसित देशों ने अपनाया था उसे हम नहीं अपना सकते, हमें अपना अलग मॉडल बनाना पड़ेगा।</p>
<p><strong>भारत में फसलों की उत्पादकता का औसत अमेरिका जैसे विकसित देश और चीन जैसे विकासशील देश के मुकाबले कई फसलों में आधा है। इसकी वजह कृषि शोध की कमी है या किसानों के पास संसाधनों व जरूरी कौशल न होना इसकी वजह है</strong><strong>?</strong></p>
<p>इसमें बहुत से फैक्टर हैं, लेकिन सकारात्मक फैक्टर यह है कि पैदावार का अंतर कम हो रहा है। पिछले 10 साल में भारत का कृषि विकास चीन से ज्यादा है। यह पहली बार हुआ है। बीते 10 साल में हमारी ग्रोथ रेट विश्व औसत के डेढ़ गुना से भी ज्यादा है। चीन और अमेरिका से हमारी ग्रोथ ज्यादा है, इसलिए पैदावार का अंतर कम होना शुरू हो गया है। चीन में ऊंची पैदावार के दो कारण हैं। एक तो वहां फर्टिलाइजर का इस्तेमाल बहुत ज्यादा होता है, हमारे देश से दो-गुना तीन-गुना ज्यादा। दूसरा, चीन के लोग फसलों की देखभाल ज्यादा करते हैं, तो उसका भी असर उत्पादकता पर है। हम मोनोक्रॉपिंग के खिलाफ बातें करते हैं, वहां काफी मजबूत मोनोक्रॉपिंग होती है। बहुत से ऐसे फैक्टर हैं, लेकिन अब हम इसे लेकर काफी सतर्क हैं। बाहर से टेक्नोलॉजी आ रही है और देश में भी विकसित हो रही है। ऐसा नहीं कि हम सब में कमतर हैं, कुछ फसलों में विश्व औसत से बेहतर उत्पादकता है। यदि हमारी पैदावार का स्तर कम है तो हमारे पास चीन और अमेरिका की तुलना में ग्रोथ के अवसर बहुत ज्यादा हैं, जबकि उनके लिए ग्रोथ के मौके सीमित होते जा रहे हैं।</p>
<p><strong>कृषि क्षेत्र के लिए कर्ज पर सरकार सब्सिडी देती है लेकिन अलग-अलग राज्यों में करीब </strong><strong>15 </strong><strong>से </strong><strong>30 </strong><strong>फीसदी खेती करने वाले बटाईदारों को इसका फायदा नहीं मिलता है। मॉडल लैंड लीजिंग एक्ट या दूसरे सुधारों को लागू किया जाना क्या अब समय की जरूरत है</strong><strong>?</strong></p>
<p>देश के अलग-अलग इलाकों में अलग स्थिति है। यदि आप बिहार, झारखंड, असम, ओडिशा जैसे पूर्वी राज्यों को देखेंगे तो वहां अब भी&nbsp; इंस्टीट्यूशनल कर्ज कम है। हमें उसको बढ़ावा देने की जरूरत है। दूसरी ओर कुछ ऐसे भी राज्य हैं जहां ज्यादा क्रेडिट दिया जा रहा है। वह कर्ज इधर-उधर खर्च हो रहा है। वहां हमें अलग नीति की जरूरत है। जैसा कि किसान नेता कहते हैं, किसानों को गिरवी रखने में बैंकों का भी रोल है, वह उनको बहुत ज्यादा कर्ज देते हैं। इसमें बदलाव आ रहा है। किसान क्रेडिट कार्ड बने हैं, अब तो पशु किसान कार्ड भी बना रहे हैं, मछली पालन के लिए भी किसान क्रेडिट कार्ड बन रहे हैं। किसानों को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि वे ऐसा लोन लें जिसको वापस करने में सहूलियत बनी रहे। कई इलाकों में एग्रीकल्चर क्रेडिट का एक मैकेनिज्म बन गया है। साल पूरा होने पर आपने पैसा वापस किया और अदल-बदल करके फिर ले लिया। मैं कहूंगा कि नॉर्थ वेस्ट इंडिया में क्रेडिट का रोल डायवर्सिफिकेशन लाने में होना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>आपने लैंड लीज एग्रीमेंट का जो सवाल उठाया, तो उन किसानों की संख्या बढ़ती जा रही है और आगे भी बढ़ेगी। लेकिन उनके पास जमीन नहीं है, इसलिए लोन के लिए उनकी पात्रता नहीं है। बहुत पहले नीति आयोग ने एक लैंड लीज मॉडल दिया था जिसको कुछ राज्यों ने सीमित रूप में अपनाया लेकिन इसकी हमें बहुत बड़ी जरूरत है। देश में परती भूमि बढ़ती जा रही है। किसानों के बेटे अब गैर कृषि क्षेत्र में आ रहे हैं। कुछ परिवारों में अगर एक ही बेटा है तो वहां कोई खेती करने वाला नहीं है। उनकी जमीन खाली पड़ी है। मॉडल लैंड लीजिंग एक्ट लागू करने पर राज्यों को जरूर ध्यान देना चाहिए। इससे बहुत फर्क पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत से छोटे किसान जमीन बटाई पर लेकर गुजारा करने की बेहतर स्थिति में होंगे। अभी जिनको साहूकारों से कर्ज लेना पड़ रहा है उनको भी सब्सिडी वाला कर्ज मिल सकेगा। लैंड लीज मॉडल अपनाना बहुत महत्वपूर्ण है। इससे जमींदार और बटाईदार दोनों की सुरक्षा हो सकेगी।</p>
<p><strong>किसान कर्ज माफी कितना जरूरी है और इसका मकसद सही है या नहीं</strong><strong>?</strong></p>
<p>यदि कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आ जाती है तो उस स्थिति में मैं कहूंगा कि इसे जस्टिफाई किया जा सकता है। अगर कोई बड़ी विकट स्थिति उत्पन्न नहीं होती है, तो कर्ज माफी से इंस्टीट्यूशनल क्रेडिट डिलीवरी सिस्टम को बहुत ज्यादा नुकसान होता है। मेरे ख्याल से सामान्य परिस्थितियों में इस तरह की चीजों से बचना चाहिए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि सुधार पर अब राज्य आगे बढ़ेंः प्रो. रमेश चंद ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चालू सीजन में चीनी उत्पादन 41 लाख टन घटने का अनुमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sugar-production-estimated-to-decrease-by-41-lakh-tonnes-in-the-current-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 25 Nov 2023 07:56:17 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sugar-production-estimated-to-decrease-by-41-lakh-tonnes-in-the-current-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मानसून के कमजोर रहने के चलते चालू पेराई सीजन (2023-24) में पिछले साल के मुकाबले चीनी उत्पादन में करीब 41 लाख टन की गिरावट का अनुमान है। चीनी उद्योग के ताजा अनुमान के मुताबिक, कुल उत्पादन 290 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि चालू साल में देश में चीनी खपत भी 285 लाख टन रहने का अनुमान है। पिछले साल चीनी उत्पादन 330.90 लाख टन रहा था। इसके चलते जहां घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें तेज रहेंगी, वहीं निर्यात की संभावना लगभग न के बराबर रह गई है। चीनी उत्पादन में गिरावट की बड़ी वजह महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ना उत्पादन में आई कमी है।</p>
<p>चीनी उत्पादन के अलावा इस साल (2023-24) करीब 40 लाख टन चीनी का डायवर्जन एथेनॉल बनाने के लिए होगा। पिछले सीजन में 44 लाख टन चीनी का डायवर्जन एथेनॉल उत्पादन के लिए किया गया था। इस तरह, अगर एथेनॉल के लिए डायवर्जन की जाने वाली चीनी को जोड़ लें तो उसके समेत उत्पादन करीब 330 लाख टन रहेगा।</p>
<p>चीनी उद्योग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 20 लाख टन घटकर 85 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले सीजन (2022-23) में 105.30 लाख टन रहा था। हालांकि, दूसरे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन पिछले साल से बेहतर रहने का अनुमान है। इस साल उत्तर प्रदेश का चीनी उत्पादन 110 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल 104.80 लाख टन रहा था। इसके चलते उत्तर प्रदेश तीन साल बाद फिर से चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य बन जाएगा।</p>
<p>वहीं अनुपात के हिसाब से चीनी उत्पादन में सबसे अधिक गिरावट कर्नाटक में रहेगी। कर्नाटक में पिछले सीजन (2022-23) में 59.80 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ, जिसके चालू साल (2023-24) में गिरकर 38 लाख टन रह जाने का अनुमान है। कर्नाटक में चीनी उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले यह गिरावट 36 फीसदी बैठती है।</p>
<p>चीनी उद्योग से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि अल-नीनो की वजह से महाराष्ट्र और कर्नाटक में कमजोर मानसून के चलते गन्ना उत्पादन में गिरावट आई है। वहां पेराई सीजन में भी देरी हुई है। हालांकि, उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और पंजाब में उत्पादन में सुधार के चलते महाराष्ट्र और कर्नाटक में उत्पादन में होने वाली गिरावट की कुछ भरपाई हो जाएगी। इसके बावजूद कुल उत्पादन घरेलू खपत से मामूली रूप से ही अधिक होगा। इसके चलते चीनी की कीमतें मजबूत बनी रहेंगी और किसानों को भी गन्ना का बेहतर दाम मिलने की संभावना अधिक रहेगी।</p>
<p>चालू सीजन के अंत में बकाया स्टॉक 59 लाख टन रहने का अनुमान है। पिछले साल का बकाया स्टॉक 57 लाख टन रहा था। वहीं 2024-25 में सीजन के अंत में चीनी का बकाया स्टॉक 44 लाख टन रहने का अनुमान उद्योग ने लगाया है। उद्योग के मुताबिक, पिछले सीजन में चीनी की खपत 280 लाख टन रही थी जिसके चालू सीजन (2023-24) में 287 लाख टन और अगले साल&nbsp; 285 लाख टन रहने का अनुमान है। वहीं पिछले सीजन में देश से 64 लाख टन चीनी का निर्यात हुआ था, जबकि चालू सीजन में अभी एक लाख टन चीनी के निर्यात का उद्योग का आंकड़ा है। हालांकि, उद्योग सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से उत्पादन की स्थिति बन रही है उसके चलते चीनी निर्यात की संभावन न के बराबर है।</p>
<p>सरकार ने अक्टूबर 2022 में चीनी निर्यात को मुक्त निर्यात से रेस्ट्रिक्टेड लिस्ट में डाल दिया था। उसके बाद इसे इस साल अक्टूबर में अगले एक साल के लिए रेस्ट्रिक्टेड सूची में ही रखने का फैसला लिया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चालू सीजन में चीनी उत्पादन 41 लाख टन घटने का अनुमान ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं की बुवाई 248.59 लाख हेक्टेयर तक पहुंची, 60 फीसदी रकबे में जलवायु अनुकूल किस्मों की बुवाई का सरकार ने रखा लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wheat-sowing-reached-248-lakh-59-thousand-hectares-govt-set-a-target-of-sowing-climate-friendly-varieties-in-60-percent-area.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 24 Nov 2023 17:33:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wheat-sowing-reached-248-lakh-59-thousand-hectares-govt-set-a-target-of-sowing-climate-friendly-varieties-in-60-percent-area.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई अब तक 248.59 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। रबी सीजन 2022-23 में मौसम में हुए अचानक परिवर्तन की वजह से गेहूं की फसल को हुए नुकसान को देखते हुए सरकार ने इस बार जलवायु अनुकूल किस्मों की बुवाई गेहूं के कुल रकबे में 60 फीसदी पर करने का लक्ष्य रखा है। रबी सीजन में औसतन 648.33 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई होती है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की अध्&zwj;यक्षता में शुक्रवार को फसलों के संबंध में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में बताया गया कि इस वर्ष गेहूं के कुल रकबे में से करीब 60 फीसदी रकबे में जलवायु अनुकूल किस्&zwj;मों की बुवाई का लक्ष्&zwj;य रखा गया है। ऐसी किस्&zwj;मों से उत्&zwj;पादन में स्थिरता लाने में मदद मिलेगी। तोमर ने इस लक्ष्&zwj;य की प्राप्ति के लिए एक निगरानी समिति का गठन करने का सुझाव दिया।</p>
<p>पिछले रबी सीजन में गेहूं उत्पादक प्रमुख राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल को काफी नुकसान पहुंचा था। इसकी वजह से उत्पादन में कमी आई थी। 2022-23 के लिए कृषि मंत्रालय के अंतिम अनुमान के मुताबिक, पिछले सीजन में गेहूं का उत्पादन 1105.54 लाख टन रहा। 2021-22 में देश में 1077.42 लाक टन गेहूं का उत्पादन हुआ था। उत्पादन में कमी की वजह से केंद्रीय पूल के लिए गेहूं की सरकारी खरीद भी लक्ष्य से काफी कम 262 लाख टन रह गया था।</p>
<p>बैठक में खरीफ फसलों के प्रदर्शन एवं अनुमानित उपज के संदर्भ में बताया गया कि मानसून की देरी &nbsp;&nbsp;और अगस्&zwj;त में कम बारिश से फसलों की पैदावार प्रभावित हुई, लेकिन सितंबर में ज्&zwj;यादातर राज्यों में बारिश सामान्&zwj;य रहने से खरीफ का उत्&zwj;पादन अधिक प्रभावित नहीं होने की संभावना है। रबी की बुवाई के संदर्भ में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि मृदा में नमी की औसत मात्रा अच्&zwj;छी है और बुवाई का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं की बुवाई 248.59 लाख हेक्टेयर तक पहुंची, 60 फीसदी रकबे में जलवायु अनुकूल किस्मों की बुवाई का सरकार ने रखा लक्ष्य ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[करनाल के राम सिंह को सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान का पुरस्कार, राष्ट्रीय गोपाल रत्न अवार्ड की घोषणा, 26 नवंबर को दिया जाएगा अवार्ड]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/award-for-best-dairy-farmer-to-ram-singh-of-karnal-national-gopal-ratna-award-announced.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 24 Nov 2023 14:57:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/award-for-best-dairy-farmer-to-ram-singh-of-karnal-national-gopal-ratna-award-announced.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र के सबसे बड़े पुरस्कारों में से एक राष्ट्रीय गोपाल रत्न अवार्ड की घोषणा कर दी गई है। हरियाणा के करनाल के किसान राम सिंह को सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान के रूप में चुना गया है। जबकि सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी/दूध उत्पादक कंपनी/डेयरी किसान उत्पादक संगठन के रूप में केरल के वायनाड स्थित पुलपल्ली क्षीरोलपादका सहकारण संगम डी लिमिटेड को चुना गया है। वहीं सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (एआईटी) का पुरस्कार बिहार के अररिया के सुमन कुमार साह को दिया जाएगा।</p>
<p>26 नवंबर को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के मौके पर केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री परशोत्तम रूपाला गुवाहाटी के वेटनरी कॉलेज ग्राउंड में विजेताओं को राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार प्रदान करेंगे। पुरस्कार समारोह में असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वसरमा और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान भी मौजूद रहेंगे।</p>
<p>केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, केंद्रीय पशुपालन और डेयरी विभाग दिया जाने वाला यह पुरस्कार पशुधन और डेयरी क्षेत्र के सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कारों में से एक है। इसका मकसद स्वदेशी पशुओं को पालने वाले किसानों, एआई तकनीशियनों और डेयरी सहकारी समितियों, दूध उत्पादक कंपनियों और डेयरी किसान उत्पादक संगठनों जैसे सभी व्यक्तियों को पहचानना और प्रोत्साहित करना है। यह पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिया जाता है। पहला, स्वदेशी मवेशी/भैंस नस्ल का पालन करने वाले सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान। दूसरा, सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी/दूध उत्पादक कंपनी/डेयरी किसान उत्पादक संगठन और तीसरा, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (एआईटी)।</p>
<p>प्रत्येक श्रेणी में प्रथम पुरस्कार के लिए 5 लाख रुपये, दूसरे स्थान के लिए 3 लाख रुपये दिए जाते हैं। &nbsp;पहली दो श्रेणियों यानी सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान और सर्वश्रेष्ठ डीसीएस/एफपीओ/एमपीसी में तीसरी रैंक के लिए योग्यता प्रमाण-पत्र और एक स्मृति चिन्ह के साथ 2 लाख रुपये दिए जाते हैं। सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (एआईटी) श्रेणी के मामले में तीसरी रैंक के विजेता को केवल योग्यता प्रमाण-पत्र और एक स्मृति चिन्ह दिया जाता है।</p>
<p>स्वदेशी मवेशी/भैंस नस्ल का पालन करने वाले सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान की श्रेणी में दूसरा पुरस्कार गुजरात के सूरत के निलेश मगनभाई अहीर ने जीता है। तीसरे नंबर पर संयुक्त रूप से गुजरात के वलसाड के ब्रिंदा सिद्धार्थ साह और महाराष्ट्र के नासिक के राहुल मनोहर खैरनार हैं। सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी/दूध उत्पादक कंपनी/डेयरी किसान उत्पादक संगठन श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार कर्नाटक के मांड्या स्थित टीएम होसूर मिल्क प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड और तीसरा पुरस्कार तमिलनाडु के डिंडीगुल स्थित &nbsp;नाथमकोविलपट्टी दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति ने जीता है।</p>
<p>इसी तरह, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (एआईटी) श्रेणी में दूसरा पुरस्कार ओडिशा के अनुगुल के अनिल कुमार प्रधान और तीसरा पुरस्कार आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम के मुद्दपु प्रसादराव को दिया जाएगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ करनाल के राम सिंह को सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान का पुरस्कार, राष्ट्रीय गोपाल रत्न अवार्ड की घोषणा, 26 नवंबर को दिया जाएगा अवार्ड ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में धान की खरीद बढ़ी, 182 लाख टन से ऊपर पहुंची]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/paddy-procurement-increased-in-punjab-reached-above-182-lakh-tonnes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 24 Nov 2023 06:40:24 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/paddy-procurement-increased-in-punjab-reached-above-182-lakh-tonnes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में धान की सरकारी खरीद पिछले साल के मुकाबले बढ़ गई है। यह 182 लाख टन से ऊपर पहुंच गई है। पंजाब में 1 अक्टूबर, 2023 से धान की खरीद शुरू हुई है और 30 नवंबर तक चलेगी। केंद्रीय पूल के लिए खरीदे जाने वाले धान के मामले में पंजाब नंबर-1 पर है, जबकि दूसरे नंबर पर तेलंगाना है।</p>
<p>पंजाब स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के 23 नवंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ मार्केटिंग सीजन 2023-24 के लिए राज्य में अब तक 182 लाख 53,987.98 टन धान की खरीद हुई है। पिछले सीजन की इसी अवधि तक राज्य में 182 लाख 44,453.07 टन धान की खरीद हुई थी। इस लिहाज से इस साल अब तक 9,534.91 टन धान की ज्यादा खरीद हुई है। जहां तक उठाव की बात है तो मंडियों से अब तक 166 लाख 12,647.78 टन धान का उठाव हो चुका है।</p>
<p>खरीफ मार्केटिंग सीजन 2023-24 के लिए सरकार ने धान की सामान्य श्रेणी का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2183 रुपये प्रति क्विंटल और ए ग्रेड के धान का एमएसपी 2203 रुपये तय किया है। केंद्रीय पूल के लिए सरकारी एजेंसियों द्वारा एमएसपी पर ही किसानों से धान की खरीद की जाती है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>पंजाब में इस साल दो बार आई बाढ़ की वजह से धान की फसल बर्बाद हो गई थी। इससे उत्पादन घटने का अनुमान लगाया जा रहा था। हालांकि, किसानों ने बाढ़ से बर्बाद हुई पौध की दोबारा और तिबारा तक बुवाई की। धान खरीद के ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि उत्पादन में कमी नहीं आई है। &nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_655f3319a7688.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में धान की खरीद बढ़ी, 182 लाख टन से ऊपर पहुंची ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शामली चीनी मिल चलाने पर हुआ समझौता, गन्ना किसानों को 14 दिन में नया भुगतान और पुराना बकाया 6 किस्तों में चुकाने पर राजी हुआ प्रबंधन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/shamli-farmers-agreed-to-running-sugar-mill-management-agreed-to-repay-old-dues.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 23 Nov 2023 18:11:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/shamli-farmers-agreed-to-running-sugar-mill-management-agreed-to-repay-old-dues.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गन्ना बकाये के भुगतान की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश के शामली स्थित अपर दोआब चीनी मिल पर पिछले 94 दिन से धरना दे रहे किसानों और मिल प्रबंधन के बीच समझौता हो गया है। धरना दे रहे किसान मिल को चालू करने पर राजी हो गए हैं, जबकि मिल प्रबंधन ने बकाये का भुगतान एक तय सीमा के भीतर करने पर अपनी सहमति दे दी है। मिल पर गन्ना किसानों का 221 करोड़ रुपये बकाया है।</p>
<p>भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के प्रदेश महामंत्री कपिल खाटियान ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया, &ldquo;शामली के डीएम रविंद्र सिंह की अध्यक्षता में बुधवार देर शाम मिल प्रबंधन और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता में इस बात पर सहमति बनी कि चालू पेराई सत्र (2023-24) का नया भुगतान 14 दिन में किया जाएगा और पिछले पेराई सत्र (2022-23) के बकाये का भुगतान अप्रैल 2024 तक 6 किस्तों में किया जाएगा। गुरुवार को किसान नेताओं ने इस सहमति को धरना दे रहे किसानों के समक्ष रखा जिस पर उन्होंने अपनी मंजूरी दे दी। इसके बाद इस पर लिखित समझौता हुआ।&rdquo;</p>
<p>उत्तर प्रदेश के चीनी मिलों में चालू सीजन के लिए 1 नवंबर से ही गन्ने की पेराई शुरू हो चुकी है, लेकिन इस मिल में धरने की वजह से पेराई बंद है। अब जल्दी ही यहां भी पेराई शुरू हो जाएगी।&nbsp;कपिल खाटियान ने बताया कि गन्ना खरीद 10 दिन बाद शुरू होगी क्योंकि मिल के मेंटेनेंस का काम बाकी है।</p>
<p>रूरल वॉयस के पास मौजूद समझौता-पत्र में निम्नलिखित बातों पर सहमति बनी है-</p>
<ul>
<li>नए पेराई सत्र का भुगतान नियमानुसार चीनी एवं सह उत्पादों की बिक्री से 14 दिन के अंदर सुनिश्चित कराया जाएगा।</li>
<li>पिछले पेराई सत्र का भुगतान चालू पेराई सत्र के दौरान ही कराया जाएगा। चीनी मिल प्रबंधन स्वयं के संसाधनों के भुगतान कराये या मिल बेचकर कराये, यह जिला प्रशासन द्वारा सुनिश्चित कराया जाएगा।</li>
<li>चीनी मिल को नए सत्र में अर्जित लाभ से खर्च तथा वर्तमान सत्र का भुगतान निकाल कर प्रतिमाह अवशेष धनराशि से पिछले पेराई सत्र का बकाया भुगतान भी कराया जाएगा।</li>
<li>इस समझौते की निगरानी के लिए शामली के उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जाएगा जो प्रतिमाह उपरोक्त समझौते की समीक्षा कर किसानों द्वारा गठित कमेटी के समक्ष प्रस्तुत करेगी।</li>
</ul>
<p>हालांकि, धरना दे रहे किसानों का एक वर्ग इस समझौते से नाराज है। उनका कहना है कि जब यही समझौता होना था, तो मिल प्रबंधन पहले ही 30 करोड़ रुपये का भुगतान करने पर राजी था, तब क्यों नहीं समझौता किया गया। साथ ही, समझौते में इस बात का कोई जिक्र नहीं किया गया है कि हर महीने की किस तारीख तक भुगतान किया जाएगा।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>बकाया भुगतान की मांग को लेकर धरना दे रहे किसान इस बात पर अड़े थे कि जब तक पूरा बकाया नहीं मिलेगा तब तक मिल को चालू करने नहीं दिया जाएगा। उनकी इस मांग पर मिल के मालिक रजत लाल ने किसानों से अपील की थी कि मिल के चलने पर ही भुगतान हो पाएगा क्योंकि उनके पास रुपया नहीं है। उन्होंने कहा था कि मिल को बेचकर किसानों की पाई-पाई चुकाएंगे। इसके लिए वे खरीदार तलाश रहे हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ शामली चीनी मिल चलाने पर हुआ समझौता, गन्ना किसानों को 14 दिन में नया भुगतान और पुराना बकाया 6 किस्तों में चुकाने पर राजी हुआ प्रबंधन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बासमती धान के दाम में आई तेजी, 6000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंचा भाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/basmati-paddy-price-rises-reach-above-rs-6000-per-quintal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 23 Nov 2023 13:51:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/basmati-paddy-price-rises-reach-above-rs-6000-per-quintal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती चावल की मांग बढ़ने से बासमती धान के भाव में तेजी दर्ज की जा रही है। बासमती धान का भाव 6,000 रुपये से ऊपर पहुंच गया है। हरियाणा की सरकारी खरीद एजेंसी हैफेड (हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति और विपणन संघ लिमिटेड) द्वारा बासमती धान की खरीद शुरू किए जाने से भी भाव में तेजी आई है। इससे किसानों के चेहरे खिल गए हैं।</p>
<p>करनाल अनाज मंडी के प्रधान रजनीश चौधरी ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि बासमती सीएसआर-30 का भाव गुरुवार को 6200 रुपये प्रति क्विंटल रहा। दो-तीन दिन पहले 6500 रुपये प्रति क्विंटल तक इसकी बोली लगी थी। इसी तरह, 1121 किस्म के भाव में भी तेजी आई है। इसका भाव 4700 रुपये पर पहुंच गया है, जबकि 1509 किस्म का भाव 3600 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। 1718 किस्म के धान का भाव किसानों को 4500 रुपये मिल रहा है। पिछले साल की तुलना में इस बार भाव 700-800 रुपये प्रति क्विंटल तक अधिक रहा है।</p>
<p><a href="https://eng.ruralvoice.in/national/basmati-paddy-price-crossed-rs-6000-per-quintal-in-haryana-mandis-farmers-are-reaping-benefit-of-higher-price.html" title="Basmati Paddy price" target="_blank" rel="noopener"><strong>अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंः Basmati paddy price crossed Rs 6,000 per quintal in Haryana mandis, farmers are reaping benefit of higher price</strong></a></p>
<p>उन्होंने बताया कि भाव में तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ना है। इस साल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती चावल की अच्छी मांग है जिसके चलते घरेलू बाजार में भाव बढ़ रहा है। हैफेड के भी खरीद में उतरने से मंडी में प्रतिस्पर्द्धा बढ़ी है जिससे भी भाव में तेजी आई है। बाजार में जितनी प्रतिस्पर्द्धा बढ़ेगी किसानों को फसल का उतना अच्छा दाम मिलेगा। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>पिछले साल हैफेड ने 85,000 टन धान खरीदा था और 65,000 टन चावल का निर्यात किया था। बासमती धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय नहीं किया जाता है। मांग के आधार पर इसके भाव में उतार-चढ़ाव होता रहता है। बासमती धान की खरीद अधिकतर निर्यातक या स्थानीय चावल कारोबारी करते हैं।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/national/edible-oil-industry-demands-higher-duty-differential-between-crude-refined-palm-oil-to-15pc.html" title="पाम ऑयल आयात" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः क्रूड और रिफाइंड पाम ऑयल आयत के बीच के शुल्क अंतर को 15 फीसदी करने की एसईए ने की मांग, घरेलू उद्योग हो रहा प्रभावित</strong></a></p>
<p>बासमती के नाम पर गैर-बासमती सफेद चावल का निर्यात का मामला सामने आने के बाद सरकार ने बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) 1200 डॉलर प्रति टन कर दिया था। घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर पाबंदी लगा रखी है। ज्यादा एमईपी के विरोध में पिछले महीने निर्यातकों ने बासमती धान की खरीद बंद कर दी थी। उनका कहना था कि इससे निर्यात प्रभावित होगा क्योंकि पाकिस्तान 800-900 डॉलर प्रति टन पर बासमती का निर्यात करता है। अंतरराष्ट्रीय बासमती बाजार में पाकिस्तान भारत का प्रमुख प्रतिद्वंद्वी है।</p>
<p>इसके बाद सरकार ने निर्यातकों की मांग मानते हुए एमईपी को घटाकर 950 डॉलर प्रति टन कर दिया। इससे निर्यातकों का उत्साह बढ़ा और खरीद में तेजी आई, जिसका असर भाव पर देखने को मिल रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बासमती धान के दाम में आई तेजी, 6000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंचा भाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[क्रूड और रिफाइंड पाम ऑयल आयत के बीच के शुल्क अंतर को 15 फीसदी करने की एसईए ने की मांग, घरेलू उद्योग हो रहा प्रभावित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/edible-oil-industry-demands-higher-duty-differential-between-crude-refined-palm-oil-to-15pc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 22 Nov 2023 13:43:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/edible-oil-industry-demands-higher-duty-differential-between-crude-refined-palm-oil-to-15pc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रिफाइंड पाम ऑयल के आयात में वृद्धि से घरेलू रिफाइनर प्रभावित हो रहे हैं। इसे देखते हुए खाद्य तेल उद्योग के संगठन एसईए ने मांग की है कि सरकार को क्रूड और रिफाइंड पाम ऑयल के बीच के आयात शुल्क अंतर को 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करना चाहिए। इससे रिफाइंड तेल के आयात में कमी आएगी।</p>
<p>भारत खाद्य तेलों का प्रमुख आयातक है। मलेशिया और इंडोनेशिया से पाम ऑयल का आयात होता है, जबकि अर्जेंटीना और ब्राजील से सोयाबीन तेल का आयात किया जाता है। पाम ऑयल में आरबीडी पामोलीन का आयात तेल मार्केटिंग वर्ष (नवंबर से अक्टूबर) 2022-23 में बढ़कर 21.1 लाख टन हो गया, जो पिछले वर्ष 18.4 लाख टन था। वहीं क्रूड पाम ऑयल (सीपीओ) का आयात बढ़कर 75.9 लाख टन पर पहुंचगया, जो एक साल पहले की अवधि में 54.9 लाख टन था।</p>
<p>खाद्य तेल उत्पादकों के संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के प्रेसीडेंट अजय झुनझुनवाला ने एसईए सदस्यों को लिखे एक पत्र में कहा है कि भारतीय वनस्पति तेल (खाद्य और गैर-खाद्य तेल) रिफाइनिंग उद्योग चुनौतियों का सामना कर रहा है। 3 लाख करोड़ रुपये (35 अरब अमेरिकी डॉलर) के आकार वाला घरेलू खाद्य तेल उद्योग काफी महत्व रखता है। पिछले 12 वर्षों में इंडोनेशिया और मलेशिया ने अपने रिफाइनिंग उद्योग की सुरक्षा के लिए रिफाइंड तेल की तुलना में सीपीओ पर अधिक निर्यात शुल्क लगाया है। इससे रिफाइंड तेल सस्ता हो गया है जिससे भारतीय रिफाइनिंग क्षमता अनावश्यक और अप्रयुक्त हो गई है।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/national/basmati-paddy-price-rises-reach-above-rs-6000-per-quintal.html" title="बासमती धान का भाव बढ़ा" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः बासमती धान के दाम में आई तेजी, 6000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंचा भाव</strong></a></p>
<p>झुनझुनवाला ने कहा, "भारत में सीपीओ और रिफाइंड पाम ऑयल के बीच आयात शुल्क अंतर को घटाकर 7.5 फीसदी कर दिया गया है। यह घरेलू वेजिटेबल रिफाइनिंग इंडस्ट्री पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। एसईए अध्यक्ष ने कहा, "इसे देखते हुए एसईए ने एक बार फिर सरकार से क्रूड और रिफाइंड पाम ऑयल के बीच शुल्क अंतर को 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करने की अपील की है।" तेल वर्ष 2022-23 के दौरान वेजिटेबल ऑयल का आयात सर्वोच्च स्तर पर पहुंच कर 167.1 लाख टन हो गया है। इसमें खाद्य तेल का आयात रिकॉर्ड 164.7 लाख टन रहा है। कुल खाद्य तेलों के आयात में पाम ऑयल की हिस्सेदारी 60 फीसदी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि निर्यातक देशों द्वारा क्रूड ऑयल पर ज्यादा निर्यात शुल्क लगाने के कारण आरबीडी पामोलीन की कीमतें सीपीओ से कम हैं। यह स्थिति घरेलू रिफाइनिंग उद्योग के &nbsp;लिए खतरा पैदा कर रही है। घरेलू रिफाइनिंग उद्योग अब सिर्फ पैकर्स के रूप में काम कर रहा है। झुनझुनवाला ने कहा कि यह स्थिति अवांछनीय है क्योंकि इससे बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में वृद्धि हो सकती है। साथ ही उद्योग और मूल्य श्रृंखला में बेरोजगारी बढ़ सकती है। उन्होंने राइसब्रान के निर्यात पर प्रतिबंध पर भी चिंता जताई है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ क्रूड और रिफाइंड पाम ऑयल आयत के बीच के शुल्क अंतर को 15 फीसदी करने की एसईए ने की मांग, घरेलू उद्योग हो रहा प्रभावित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ट्रैक्टर खरीदने पर किसानों को मिलती है 70 फीसदी तक सब्सिडी, जानें किन राज्यों में कितनी है सब्सिडी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmers-get-up-to-70-percent-subsidy-on-buying-tractors-know-how-much-subsidy-in-which-states.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 22 Nov 2023 06:43:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmers-get-up-to-70-percent-subsidy-on-buying-tractors-know-how-much-subsidy-in-which-states.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार सहित राज्य सरकारें ट्रैक्टर खरीदने के लिए किसानों को भारी-भरकम सब्सिडी देती है। एक राज्य के किसानों को तो इसके लिए 70 फीसदी तक सब्सिडी मिलती है। झारखंड सरकार ने अभी हाल ही में किसानों के लिए&nbsp;<strong>ट्रैक्टर वितरण योजना</strong>&nbsp;<span>शुरू करने का फैसला किया है। इस योजना के लिए </span>80 <span>करोड़ रुपये का शुरुआती प्रावधान किया गया है। योजना के तहत किसानों को ट्रैक्टर खरीद के लिए लागत मूल्य पर </span>50 <span>फीसदी सब्सिडी दी जाएगी।</span> जीएसटी सहित रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस से संबंधित खर्च किसानों को खुद वहन करना होगा। योजना के पहले चरण में 1<span>,</span>112 <span>ट्रैक्टर वितरित किए जाने का लक्ष्य है।</span></p>
<p>हेमंत सोरेन कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही यह योजना लागू हो जाएगी और किसान इसके लिए आवेदन कर सकेंगे। योजना के तहत उन किसान समूहों या व्यक्तिगत किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनके पास कम से कम 10 एकड़ या इससे ज्यादा खेती लायक जमीन है। सब्सिडी की राशि किसानों के खाते में भेजी जाएगी। जो किसान इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, वे जिला स्तरीय समिति के माध्यम से अपना आवेदन जमा करवा सकते हैं।</p>
<p>इससे पहले केंद्र सरकार ने पीएम किसान ट्रैक्टर योजना के तहत 50 फीसदी सब्सिडी देने की योजना शुरू की थी। कई राज्यों में इसी तरह की अन्य योजनाएं शुरू की जा चुकी हैं जिसके तहत ट्रैक्टर खरीदने वाले किसानों को सब्सिडी दी जाती है। आइए जानते हैं किन राज्यों में कितनी सब्सिडी मिलती है।</p>
<p><strong>असम में सबसे ज्यादा सब्सिडी</strong></p>
<p>ट्रैक्टर खरीदने के लिए किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी में असम पहले नंबर पर है। यहां के किसानों को मुख्यमंत्री समग्र ग्राम्य उन्नयन योजना के तहत 70 <span>फीसदी (करीब </span>5.5 <span>लाख रुपये) तक की सब्सिडी मिलती है। </span></p>
<p><strong>राजस्थान-तेलंगाना में 50 फीसदी अनुदान</strong></p>
<p>राजस्थान सरकार किसानों को टैक्टर सहित अन्य कई कृषि उपकरणों की खरीद पर 50 फीसदी सब्सिडी देती है। इनमें टैक्टर के अलावा सीड ड्रिल, सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, डिस्क प्लाऊ, डिस्क हैरो, रोटावेटर, मल्टी क्रॉप थ्रेसर, रिज फैरो प्लांटर,<strong>&nbsp;</strong>ऑपरेटेड रिपर, चिजल प्लाऊ आदि प्रमुख हैं। तेलंगाना में यंत्र लक्ष्मी योजना के तहत मशीनरी खरीदने पर किसानों को 50 <span>फीसदी अनुदान मिलता है। </span></p>
<p><strong>मध्य प्रदेश</strong></p>
<p>एग्रीकल्चर मशीनरी पर सब्सिडी देने में मध्य प्रदेश सरकार भी पीछे नहीं है। यहां के किसानों को मैक्रो मैनेजमेंट स्कीम के तहत छोटे ट्रैक्टर खरीदने पर 20-50 फीसदी तक&nbsp;सब्सिडी मिलती है। यह योजना केंद्र के सहयोग से चलाई जा रही है। जो किसान महंगी मशीनें खरीदना चाहते हैं उन्हे सरकार कर्ज मुहैया कराती है।</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश के किसानों को राज्य सरकार द्वारा ट्रैक्टर खरीद के लिए कुल लागत का 25 <span>फीसदी और अधिकतम </span>45<span>,</span>000 <span>रुपये की सब्सिडी दी जाती है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत प्रदेश के कुछ जिलों में किसानों को ट्रैक्टर खरीद पर 1 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। हालांकि, यह सब्सिडी 20 हॉर्स पावर तक के ट्रैक्टर के लिए ही है।</span></p>
<p><strong>गुजरात एवं महाराष्ट्र </strong></p>
<p>गुजरात के किसानों को ट्रैक्टर की खरीद के लिए सामान्य श्रेणी में 25 फीसदी और विशेष श्रेणी में 35 फीसदी की सब्सिडी दी जा रही है। महाराष्ट में फार्म मशीनीकरण योजना के तहत सीमांत एवं छोटे किसानों को ट्रैक्टर खरीदने के लिए 35 फीसदी की छूट एवं अन्य एग्रीकल्चरल मशीनरी के लिए 50 फीसदी की सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा है।</p>
<p><strong>तमिलनाडु</strong></p>
<p>तमिलनाडु सरकार ने ट्रैक्टर, पावर टिलर, सीड ड्रिल, जीरो टिल, सीड फर्टिलाइजर, पावर स्पेयर आदि की खरीद करने के लिए 40 फीसदी सब्सिडी देने की योजना चला रखी है। एससी एवं एसटी किसानों को 50 फीसदी सब्सिडी लाभ मिलता है।</p>
<p><strong>केरल</strong></p>
<p>एग्रीकल्चर मशीनरी की खरीद पर केरल सरकार की ओर से फार्म मशीनीकरण प्रणाली योजना के तहत ट्रैक्टर खरीदने पर 25 फीसदी की सब्सिडी दी जाती है। इसके अलावा रोटावेटर, टिलर आदि मशीनों के लिए कर्ज दिया जाता है।</p>
<p>इन राज्यों के अलावा, हरियाणा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और बिहार की सरकारें भी बैंकों के जरिये किसानों को सस्ती दरों पर ट्रैक्टर और कृषि उपकरण खरीदने के लिए लोन उपलब्ध कराती हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ट्रैक्टर खरीदने पर किसानों को मिलती है 70 फीसदी तक सब्सिडी, जानें किन राज्यों में कितनी है सब्सिडी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि कर्ज माफी पर  सियासी दलों का चुनावी दांव कितना कारगर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agricultural-loan-waiver-political-benefit-or-solution-to-farmers-problems.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 19 Nov 2023 06:19:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agricultural-loan-waiver-political-benefit-or-solution-to-farmers-problems.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपना सबसे आजमाया हुआ दांव खेलते हुए किसानों की कर्ज माफी का वादा किया है। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अपने घोषणा-पत्र में किसानों का 2 लाख रुपये तक का और तेलंगाना में 1 लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने का वादा किया है। राजस्थान का घोषणा-पत्र अभी जारी नहीं किया गया है लेकिन चुनावी रैलियों में पार्टी नेताओं की ओर से किसानों से यह वादा किया गया है कि प्रदेश में पार्टी सत्ता में लौटी, तो किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा।&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>2018 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने किसान कर्ज माफी का वादा किया था, जिसका लाभ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मिला और पार्टी बहुमत से सत्ता में आई। तीनों राज्यों में सरकार बनने के बाद उसने इस वादे को निभाया भी। हालांकि, मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार 15 महीने में ही गिर गई, लेकिन उसके बाद बनी भाजपा सरकार ने भी बाद में किसान कर्ज माफी योजना के तहत डिफॉल्टर किसानों का कर्ज माफ किया था।</p>
<p>किसान कर्ज माफी को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। कुछ अर्थशास्त्री और बाजार नीतियों के पक्षधर विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ता है और कर्ज की संस्कृति खराब होती है। वहीं, दूसरी ओर किसान संगठनों का कहना है कि जब सरकार कारपोरेट सेक्टर के कर्जों को राइट आफ करती है या रिस्ट्रक्चर करती है तो इस तरह से सवाल नहीं उठते हैं।</p>
<p>सवाल यह भी है कि क्या कर्ज माफी किसानों की समस्या का स्थायी समाधान है और इससे कितने किसानों की हालत में सुधार हुआ है। एसबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 से जुलाई 2022 तक राज्यों ने किसानों का 2.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया है, जबकि उन पर उस समय तक 16 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज (सभी तरह का) था। वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में केंद्र सरकार ने कृषि कर्ज के लक्ष्य को बढ़ाकर 20 लाख करोड़ रुपये करने की घोषणा की है।</p>
<p>किसान कर्ज माफी को लेकर नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने <strong>रूरल वॉयस</strong> के सहयोगी प्रकाशन <strong>रूरल वर्ल्ड</strong> के ताजा अंक में दिए इंटरव्यू में एक सवाल के जवाब में कहा है &ldquo;यदि कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आ जाती है तो उस स्थिति में मैं कहूंगा कि इसे जस्टिफाई किया जा सकता है। अगर उस तरह की कोई बड़ी विकट स्थिति उत्पन्न नहीं होती है, तो कर्ज माफी से इंस्टीट्यूशनल क्रेडिट डिलीवरी सिस्टम को बहुत ज्यादा नुकसान होता है। मेरे खयाल से सामान्य परिस्थितियों में इस तरह की चीजों से बचना चाहिए।</p>
<p><strong>कब हुई थी पहली किसान कर्ज माफी</strong></p>
<p>सबसे पहले वीपी सिंह की सरकार ने 1990 में देशभर के किसानों का कर्ज माफ किया था। उस समय देवीलाल कृषि मंत्री थे और उस कर्ज माफी को लागू कराने में उनकी भूमिका अहम रही थी। तब यह राशि 10 हजार करोड़ रुपये थी। इसके बाद मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 2008-09 में किसानों का करीब 71 हजार करोड़ रुपये माफ किया था। इस फैसले का लाभ यूपीए को अगले आम चुनाव में मिला और 2009 में यूपीए की केंद्र में वापसी हुई। इसके बाद तो राजनितिक दलों&nbsp; ने इस फार्मूले को कई बार अपनाया है।</p>
<p>2014 से करीब दर्जन भर राज्य सरकारें किसानों के कर्ज माफ कर चुकी हैं। कहीं लघु एवं सीमांत किसानों का कर्ज माफ किया गया, तो कहीं सभी किसानों के लिए एक निश्चित राशि तय की गई। 2014 के बाद सबसे पहले आंध्र पदेश ने 24 हजार करोड़ रुपये का, फिर तेलंगाना ने 17 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया। 2016 में तमिलनाडु ने 6,000 करोड़ रुपये, 2017 में महाराष्ट्र ने 34 हजार करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश ने 36,000 हजार करोड़ रुपये और पंजाब ने 1,000 करोड़ रुपये का किसानों का कर्ज माफ किया। 2018 के बाद से मध्य प्रदेश में करीब 40,000 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ में करीब 9000 करोड़ रुपये और राजस्थान में 18,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज माफ किए जा चुके हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि कर्ज माफी पर  सियासी दलों का चुनावी दांव कितना कारगर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं बुवाई का रकबा 5 लाख हेक्टेयर घटा, 86 लाख हेक्टेयर में हुई बिजाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wheat-sowing-down-5lakh-hectares-so-far-in-ongoing-rabi-season-at-86-lakh-hectares.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 18 Nov 2023 13:50:40 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wheat-sowing-down-5lakh-hectares-so-far-in-ongoing-rabi-season-at-86-lakh-hectares.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू रबी सीजन में अब तक गेहूं बुवाई का रकबा 5 लाख हेक्टेयर घटकर 86.02 लाख हेक्टेयर रह गया है। पिछले साल की समान अवधि में गेहूं का बुवाई रकबा 91.02 लाख हेक्टेयर था। कई खरीफ फसलों की कटाई देर से होने के चलते गेहूं की बुवाई में देरी हुई है।</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान मंत्रालय ने कहा है, "पिछले वर्ष 17 नवंबर तक 91.02 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई थी मगर इस साल इस अवधि तक लगभग 86.02 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई हुई है। &nbsp;पिछले वर्ष की तुलना में यह 5.5 फीसदी कम है।" मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और गुजरात में रकबा कम रहा है।</p>
<p>गेहूं उत्पादन में नंबर एक राज्य उत्तर प्रदेश में अभी तक 3.87 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है। पंजाब में 2.28 लाख हेक्टेयर, हरियाणा में 2.14 लाख हेक्टेयर और गुजरात 0.71 लाख हेक्टेयर रकबे में गेहूं की बुवाई हुई है। इसकी तुलना में मध्य प्रदेश और राजस्थान के बुवाई रकबे में पिछले साल की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश में 3.44 लाख हेक्टेयर में और राजस्थान में 0.68 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है।</p>
<p>घरेलू बाजार में गेहूं की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार ने पिछले साल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था जो अभी जारी है। साथ ही घरेलू आपूर्ति को बढ़ावा देने और गेहूं और आटा की खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार अपने बफर स्टॉक से गेहूं को खुले बाजार में उतार रही है।</p>
<p>आंकड़ों के मुताबिक, रबी सीजन की धान का बुवाई रकबा भी पिछले साल की तुलना में कम है। पिछले साल 17 नवंबर तक रबी की धान का रकबा 8.05 लाख हेक्टेयर रहा था, जो इस साल इस अवधि तक 7.65 लाख हेक्टेयर रहा है। रबी सीजन की दालों का बुवाई क्षेत्रफल 69.37 लाख हेक्टेयर की तुलना में 65.16 लाख हेक्टेयर रहा है। हालांकि, मोटे अनाज का रकबा 15.85 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 18.03 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है।</p>
<p>तिलहन फसलों का क्षेत्रफल 73.17 लाख हेक्टेयर से घटकर 71.74 लाख हेक्टेयर हो गया है। रबी की मुख्य तिलहन फसल सरसों/रेपसीड का रकबा 69.31 लाख हेक्टेयर की तुलना में 68.55 लाख हेक्टेयर रह गया है। 17 नवंबर तक सभी रबी फसलों का कुल क्षेत्रफल 3 फीसदी गिरकर 248.59 लाख हेक्टेयर रहा है। एक साल पहले की समान अवधि में यह 257.46 लाख हेक्टेयर था।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं बुवाई का रकबा 5 लाख हेक्टेयर घटा, 86 लाख हेक्टेयर में हुई बिजाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एफसीआई की 21वीं ई&amp;#45;नीलामी में 2.84 लाख टन गेहूं और 5830 टन चावल की हुई बिक्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-sells-2-lakh-84-thousand-tonnes-wheat-5830-tonnes-of-rice-from-buffer-stock-to-check-retail-prices.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 16 Nov 2023 18:08:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-sells-2-lakh-84-thousand-tonnes-wheat-5830-tonnes-of-rice-from-buffer-stock-to-check-retail-prices.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चावल, गेहूं और आटे की खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बाजार हस्तक्षेप की सरकार की पहल के तहत केंद्रीय पूल से गेहूं और चावल की साप्ताहिक (प्रत्येक बुधवार) ई-नीलामी की जाती है। यह ई-नीलामी एफसीआई द्वारा आयोजित की जाती है। 15 नवंबर को हुई 21वीं ई-नीलामी में खुले बाजार बिक्री योजना के तहत बोली के लिए 3 लाख टन गेहूं और 1.79 लाख टन चावल की पेशकश की गई थी। ई-नीलामी में 2,334 बोलीदाताओं को 5,830 टन चावल के साथ 2.84 लाख टन गेहूं की बिक्री की गई।</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान में ई-नीलामी के आंकड़ों की जानकारी दी है। बयान में कहा गया है कि सामान्य गुणवत्ता (एफएक्यू) वाले गेहूं के लिए अखिल भारतीय स्तर पर भारित औसत विक्रय मूल्य 2150 रुपये प्रति क्विंटल के आरक्षित मूल्य के मुकाबले 2246.86 रुपये प्रति क्विंटल रुपये रहा। जबकि कम गुणवत्ता (यूआरएस) वाले गेहूं के आरक्षित मूल्य 2125 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले भारित औसत बिक्री मूल्य 2232.35 रुपये क्विंटल रहा।</p>
<p>बयान के मुताबिक, ई-नीलामी के अलावा ओएमएसएस के तहत केंद्रीय भंडार, एनसीसीएफ, नेफेड जैसे अर्द्ध-सरकारी तथा सहकारी संगठनों को 2.5 लाख टन गेहूं आवंटित किया गया है, ताकि आवंटित गेहूं को आटा में परिवर्तित किया जा सके। ये संस्थाएं 'भारत आटा' ब्रांड के तहत 27.50 रुपये किलो पर आम लोगों को आटा बेच रही हैं। 14 नवंबर तक इन तीनों सहकारी समितियों ने 15,337 टन गेहूं का उठान किया है ताकि उन्हें आटा में परिवर्तित किया जा सके।</p>
<p>बड़े व्यापारियों को ओएमएसएस के तहत गेहूं बिक्री के दायरे से बाहर रखा गया है। स्टॉक की जमाखोरी से बचने के लिए 14 नवंबर तक देश भर में 1917 खरीदारों की निगराणी की गई है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एफसीआई की 21वीं ई-नीलामी में 2.84 लाख टन गेहूं और 5830 टन चावल की हुई बिक्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ट्रैक्टरों की घरेलू बिक्री अक्टूबर में 4 फीसदी घटी, जानें क्यों आई गिरावट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/domestic-sales-of-tractors-declined-by-4-percent-in-october-2023.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 16 Nov 2023 17:23:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/domestic-sales-of-tractors-declined-by-4-percent-in-october-2023.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल अल-नीनो के चलते मानसून कमजोर रहा है जिससे खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट आई है। उत्पादन घटने से किसानों की आमदनी कम हुई है जिसका असर टैक्टरों की बिक्री पर पड़ा है। अक्टूबर 2023 में ट्रैक्टरों की घरेलू बिक्री 4 फीसदी से ज्यादा (4.28 फीसदी) घटकर 1,18,232 यूनिट्स रह गई है। अक्टूबर 2022 में 1,23,525 ट्रैक्टरों की बिक्री हुई थी। यही नहीं, अक्टूबर में ट्रैक्टरों का निर्यात भी जून 2020 के बाद सबसे कम रहा है। ट्रैक्टर उद्योग के संगठन ट्रैक्टर एंड मैकेनाइजेशन एसोसिएशन (टीएमए) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है।</p>
<p>टीएमए के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2023 में ट्रैक्टरों की कुल बिक्री 1,25,428 यूनिट्स रही है। इसमें से 7,186 ट्रैक्टरों का निर्यात हुआ है। पिछले साल अक्टूबर में 8,888 ट्रैक्टरों का निर्यात किया गया था। हालांकि, सितंबर 2023 के मुकाबले घरेलू बिक्री में 22 फीसदी का इजाफा हुआ है। पिछले महीने घरेलू बाजार में 96,934 ट्रैक्टरों की बिक्री हुई थी, जबकि निर्यात 8,523 यूनिट्स का हुआ था। सितंबर 2022 में 11,320 ट्रैक्टरों का देश से निर्यात किया गया था।</p>
<p>एक बहुराष्ट्रीय ट्रैक्टर निर्माता कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि मानसून की कमजोरी का असर निश्चित तौर पर बिक्री पर दिखाई पड़ रहा है क्योंकि फसलों का उत्पादन घटने से किसानों का सेंटीमेंट कमजोर है। हम अभी आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं। उम्मीद है कि नवंबर में स्थिति में सुधार आएगा।</p>
<p>इससे पहले पिछले दिनों <strong>रूरल वॉयस</strong> को दिए इंटरव्यू में कोटक महिंद्रा बैंक के ट्रैक्टर फाइनेंस एवं गोल्ड लोन के प्रेसीडेंट श्रीपद जाधव ने भी यह संभावना जताई थी कि कमजोर मानसून का असर ट्रैक्टरों की बिक्री पर पड़ेगा। टीएमए के आंकड़ों के मुताबिक, देश की सबसे बड़ी ट्रैक्टर कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा की बिक्री अक्टूबर में 2 फीसदी घटकर 49,336 यूनिट्स रह गई है।</p>
<p>जहां तक उत्पादन की बात है तो अक्टूबर में कंपनियों ने कुल 94,438 ट्रैक्टर बनाए थे, जो इससे पिछले महीने सितंबर में 90,688 यूनिट्स रही थी। अक्टूबर 2022 में 86,856 ट्रैक्टरों का देश में उत्पादन हुआ था। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ट्रैक्टरों की घरेलू बिक्री अक्टूबर में 4 फीसदी घटी, जानें क्यों आई गिरावट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विधानसभा चुनावों की हलचल के बीच पीएम&amp;#45;किसान सम्मान निधि की 15वीं किस्त जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/central-government-transfers-instalment-of-pm-kisan-samman-nidhi-to-eight-crore-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 15 Nov 2023 18:35:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/central-government-transfers-instalment-of-pm-kisan-samman-nidhi-to-eight-crore-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज झारखंड के खूंटी में जनजातीय गौरव दिवस (बिरसा मुंडा जयंती) पर आयोजित कार्यक्रम में पीएम-किसान सम्मान निधि की 15वीं किस्त जारी की। डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से करीब 8 करोड़ किसानों को यह किस्त सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की गई। कई राज्यों में विधानसभा चुनावों से पहले पीएम-किसान की किस्त को लेकर राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दल कांग्रेस ने ठीक विधानसभा चुनाव के मतदान से पहले पीएम-किसान की किस्त जारी करने और जानबूझकर किस्त में देरी का आरोप लगाया है।&nbsp;<br />राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में जनजातीय मतदाताओं के असर को देखते हुए भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के झारखंड दौरे को अहम माना जा रहा है। पीएम मोदी ने झारखंड में रेल, सड़क, शिक्षा, कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे कई क्षेत्रों में 7200 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने 'विकसित भारत संकल्प यात्रा' और प्रधानमंत्री विशेष कमजोर जनजातीय समूह विकास मिशन का शुभारंभ किया।&nbsp;<br />प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के तहत 8 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को लगभग 18,000 करोड़ रुपये की 15वीं किस्त प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से जारी की गई। योजना के तहत अब तक 14 किश्तों में किसानों के खातों में 2.62 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जा चुके हैं।&nbsp;<br />कई राज्यों में विधानसभा चुनाव के मतदान से ठीक पहले पीएम-किसान के किस्त पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि पीएम-किसान की 6ठीं और 9वीं किस्त अगस्त में और 12वीं किस्त अक्टूबर में जारी की गई थी। अब जब छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में 2 दिन में चुनाव है, राजस्थान में 10 दिन में और तेलंगाना में 15 दिन में मतदान होगा तब आज 15वीं किस्त जारी की जा रही है। क्या यह विलंब जानबूझकर नहीं किया गया है?<br />https://twitter.com/Jairam_Ramesh/status/1724639040803414239<br />उल्लेखनीय है कि पीएम-किसान योजना की शुरुआत से ही चुनाव के साथ इसका नाता रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार की वापसी के पीछे पीएम-किसान का योगदान भी माना जाता है। अब जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, वहां किसानों की काफी तादाद है। संभवत: इसलिए नकद भुगतान के जरिए किसानों को लुभाने के लिए ही पीएम-किसान की किस्त को विधानसभा चुनावों से ठीक पहले जारी किया जा रहा है।&nbsp;<br />साल 2019 में शुरु हुई पीएम-किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर साल दो-दो हजार रुपये की तीन किस्तों में कुल 6 हजार रुपये का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जाता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_6554c10c62258.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ विधानसभा चुनावों की हलचल के बीच पीएम-किसान सम्मान निधि की 15वीं किस्त जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[थोक महंगाई लगातार सातवें महीने शून्य से नीचे, अक्टूबर में रही (&amp;#45;)0.52 फीसदी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wholesale-inflation-in-negative-territory-for-7th-month-in-october-23.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 14 Nov 2023 16:12:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wholesale-inflation-in-negative-territory-for-7th-month-in-october-23.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी के कारण खुदरा महंगाई में गिरावट के बाद अक्टूबर में थोक महंगाई में भी कमी आई है। यह लगातार सातवां महीना है जब थोक महंगाई शून्य से नीचे बनी हुई है। थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अक्टूबर में (-)0.52 फीसदी पर रही, जो इससे पिछले महीने सितंबर में (-)0.26 फीसदी थी। पिछले साल अक्टूबर में थोक महंगाई 8.67 फीसदी पर थी।</p>
<p>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने अक्टूबर महीने का थोक मूल्य सूचकांक आंकड़ा जारी करते हुए बताया कि &nbsp;खाद्य वस्तुओं की महंगाई थोक में घटकर 2.53 फीसदी पर आ गई। सितंबर में यह 3.35 फीसदी थी। हालांकि, अनाजों की महंगाई दर पिछले महीने के 7.28 फीसदी से बढ़कर 7.51 फीसदी पर पहुंच गई है, जबकि पिछले साल इसी महीने अनाजों की महंगाई दर 12.09 फीसदी थी। दालों की महंगाई दर सितंबर के 17.69 फीसदी से बढ़कर 19.43 फीसदी और प्याज की 55.05 फीसदी से बढ़कर 62.6 फीसदी पर पहुंच गई है। वहीं गेहूं की महंगाई दर 6.33 फीसदी से घटकर 4.75 फीसदी, आलू की -25.24 फीसदी से गिरकर -29.27 फीसदी, सब्जियों की -15 फीसदी के मुकाबले -21.04 फीसदी और दूध की 8.58 फीसदी से कम होकर 7.92 फीसदी रह गई है।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि अक्टूबर 2023 में थोक महंगाई की नकारात्मक दर मुख्य रूप से पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में रसायनों और रासायनिक उत्पादों, बिजली, कपड़ा, बुनियादी धातुओं, खाद्य उत्पादों, कागज और कागज उत्पादों आदि की कीमतों में गिरावट के कारण है। ईंधन और बिजली क्षेत्र की मुद्रास्फीति अक्टूबर में -2.47 फीसदी रही, जो सितंबर में -3.35 फीसदी थी। विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर -1.13 फीसदी रही। सितंबर में यह -1.34 फीसदी थी।</p>
<p>इससे पहले सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में खुदरा महंगाई 5 महीने के निचले स्तर 4.87 फीसदी पर पहुंच गई है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_65534ef10b9b0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ थोक महंगाई लगातार सातवें महीने शून्य से नीचे, अक्टूबर में रही (-)0.52 फीसदी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वनस्पति तेलों के आयात में 16 फीसदी की वृद्धि, तेल वर्ष 2022&amp;#45;23 में 167.1 लाख टन पर पहुंचा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-veg-oils-import-up-16pc-at-167-lt-in-2022-23-oil-yr.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 14 Nov 2023 14:35:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-veg-oils-import-up-16pc-at-167-lt-in-2022-23-oil-yr.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खाद्य तेलों के बढ़ते आयात के चलते घरेलू तिलहन किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्हें उनकी फसल की वाजिब कीमत नहीं मिल पा रही है। इसकी पुष्टि खाद्य तेलों के आयात के ताजा आंकड़े भी कर रहे हैं। खाद्य तेलों पर आयात शुल्क कम होने की वजह से तेल वर्ष (नवंबर-अक्टूबर) 2022-23 में वनस्पित तेलों के आयात में 16 फीसदी की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।</p>
<p>खाद्य तेल उत्पादकों के संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के आंकड़ों के मुताबिक, 31 अक्टूबर को समाप्त हुए पिछले तेल वर्ष 2022-23 में 167.1 लाख टन वनस्पति तेलों का आयात किया गया। 2021-22 में 144.1 लाख टन वनस्पति तेल का आयात हुआ था। आंकड़ों के मुताबिक, कुल वनस्पति तेलों में से खाद्य तेलों का ही ज्यादातर आयात किया गया। 2022-23 में जहां 164.7 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया गया, वहीं अखाद्य तेलों की मात्रा केवल 2.4 लाख टन रही।</p>
<p>एसईए ने कहा है कि इससे पिछले वर्ष की तुलना में 24.4 लाख टन की यह वृद्धि कच्चे पाम ऑयल, सोयाबीन और सूरजमुखी ऑयल पर मौजूदा कम आयात शुल्क (5.5 फीसदी) की वजह से है।" एसईए ने एक बयान में कहा है कि आरबीडी पामोलिन आयात कुल पाम तेल आयात का 25 फीसदी से अधिक है, जो घरेलू रिफाइनिंग उद्योग को काफी प्रभावित कर रहा है। इसकी वजह से घरेलू रिफाइनर अपनी स्थापित क्षमता से कम का इस्तेमाल कर पा रहे हैं।</p>
<p>पाम तेलों में आरबीडी पामोलिन का आयात 2022-23 के दौरान 18.4 लाख टन से बढ़कर 21.1 लाख टन हो गया, जबकि कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का आयात 54.9 लाख टन से बढ़कर 75.9 लाख टन पर पहुंच गया। कच्चे पाम कर्नेल तेल (सीपीकेओ) का आयात 2022-23 के दौरान बढ़कर 94,148 टन हो गया, जो पिछले तेल वर्ष में 79,740 टन था। कुल आयात में पाम ऑयल की हिस्सेदारी 56 फीसदी से बढ़कर 59 फीसदी हो गई है। तेल वर्ष 2022-23 के दौरान सूरजमुखी तेल का आयात बढ़कर 30 लाख टन पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 19.4 लाख टन था। वहीं सोयाबीन तेल का आयात घटकर 36.8 लाख टन रह गया जो पिछले वर्ष 41.7 लाख टन था।</p>
<p>एसईए ने कहा है कि कीमतों में देश का खाद्य तेल आयात 2022-23 में 1.38 लाख करोड़ रुपये का रहा, जो 2021-22 के 1.57 लाख करोड़ रुपये से कम है। 2020-21 में 1.17 लाख करोड़ रुपये के खाद्य तेल का देश में आयात किया गया था।</p>
<p>भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक है, जो अपनी जरूरत का करीब 65 फीसदी खाद्य तेल आयात करना है। भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम तेल और अर्जेंटीना से सोयाबीन सहित थोड़ी मात्रा में कच्चे नरम तेल का आयात करता है। सूरजमुखी तेल का आयात यूक्रेन और रूस से किया जाता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ वनस्पति तेलों के आयात में 16 फीसदी की वृद्धि, तेल वर्ष 2022-23 में 167.1 लाख टन पर पहुंचा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खुदरा महंगाई में लगातार तीसरे महीने गिरावट, अक्टूबर में 4.87 फीसदी रही]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/retail-inflation-declined-for-the-third-consecutive-month-stood-at-4-point-87-percent-in-october.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 13 Nov 2023 18:16:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/retail-inflation-declined-for-the-third-consecutive-month-stood-at-4-point-87-percent-in-october.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को खुदरा महंगाई से राहत मिली है। खाद्य महंगाई में मामूली और अन्य वस्तुओं के दाम घटने में कमी आने से लगातार तीसरे महीने महंगाई घटी है। अक्टूबर में खुदरा महंगाई की दर गिरकर 4.87 फीसदी पर आ गई। इससे पिछले महीने सितंबर में खुदरा महंगाई 5.02 फीसदी थी।</p>
<p>सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल के इसी महीने के खुदरा महंगाई के आंकड़ों के कम रहने और कुछ वस्तुओं की कीमतों में नरमी के कारण महंगाई कम हुई है। हालांकि, अक्टूबर में दालों की महंगाई बढ़कर 18.79 <span>फीसदी पर पहुंच गई जो सितंबर में दालों 1</span>6.38 <span>फीसदी थी।</span>&nbsp;प्याज के बढ़ते दाम ने भी महंगाई में गिरावट को सीमित कर दिया। आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में खाद्य महंगाई दर 6.61 <span>फीसदी रही जो सितंबर में </span>6.62 <span>फीसदी थी, जबकि अक्टूबर </span>2022 <span>में खाद्य महंगाई दर </span>7.01 <span>फीसदी थी।</span></p>
<p>अगस्त में खुदरा महंगाई की दर 6.83 <span>फीसदी थी। जुलाई में खुदरा महंगाई दर </span>15 <span>महीने के उच्च स्तर </span>7.44 <span>फीसदी पर जा पहुंची थी। अक्टूबर </span>2022 <span>में खुदरा महंगाई दर </span>6.77 <span>फीसदी रही थी। अक्टूबर 2023 में ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर </span>5.12 <span>फीसदी, तो खाद्य महंगाई दर </span>6.71 <span>फीसदी रही है। शहरी इलाकों में खुदरा महंगाई </span>4.62 <span>फीसदी और खाद्य महंगाई दर </span>6.35 <span>फीसदी रही। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खुदरा महंगाई में लगातार तीसरे महीने गिरावट, अक्टूबर में 4.87 फीसदी रही ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चाय नीलामी वालों ने अपने व्यापारिक हित के लिए बनाया संगठन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/tea-auctioneers-form-body-to-safeguard-trade-interests.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 11 Nov 2023 16:02:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/tea-auctioneers-form-body-to-safeguard-trade-interests.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के चाय नीलामीकर्ताओं ने अपने हितों की रक्षा के लिए एक संगठन बनाने को हाथ मिलाया है। एसोसिएशन ऑफ टी ऑक्शनर्स (एटीए) नाम की यह संस्था देश में चाय नीलामी प्रणाली के सुचारू कामकाज के लिए भी काम करेगी।</p>
<p>चाय बोर्ड द्वारा लाइसेंस प्राप्त लगभग 13 चाय नीलामीकर्ताओं, जिनमें प्रमुख रूप से जे थॉमस, कंटेम्परेरी ब्रोकर्स और पार्कोन शामिल हैं, ने एटीए का गठन किया है। एटीए सचिव सुजीत पात्रा के मुताबिक, नीलामीकर्ताओं के मुद्दों को सामूहिक रूप से निपटाने के लिए अब तक कोई औपचारिक संस्था नहीं थी। नवगठित संगठन केंद्र और चाय उत्पादक राज्यों की सरकारों और चाय बोर्ड जैसे नियामकीय प्राधिकरणों के साथ संपर्क करेगा।</p>
<p>2008-09 से चाय नीलामी की पुरानी प्रथा को इलेक्ट्रॉनिक नीलामी में बदल दिया गया है। अब यह उत्तर और दक्षिण भारत दोनों में प्रचलित है। एसोसिएशन ने शुक्रवार को कुल 3.60 लाख किलो की लगभग 650 लॉट असम परंपरागत चाय की औपचारिक मैन्युअल नीलामी की व्यवस्था की।</p>
<p>प्रमुख चाय निर्यातक शाह ब्रदर्स के अध्यक्ष एसबी शाह ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण इस साल चाय की कीमतें कम हैं और निर्यात भी कम हो गया है। हालांकि, भारतीय चाय निर्यातक तुर्की, जॉर्डन और सीआईएस के कुछ देशों जैसे नए बाजारों में प्रवेश करने में सक्षम हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चाय नीलामी वालों ने अपने व्यापारिक हित के लिए बनाया संगठन ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केले का नीदरलैंड को हुआ परीक्षण निर्यात]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/first-trial-shipment-of-bananas-exported-to-the-netherlands.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 11 Nov 2023 12:59:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/first-trial-shipment-of-bananas-exported-to-the-netherlands.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केले की पहली परीक्षण खेप नीदरलैंड को निर्यात की गई है। केले के परीक्षण शिपमेंट के लिए कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने तकनीकी सहायता के लिए आईसीएआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (सीआईएसएच), लखनऊ का सहयोग लिया है। साथ ही आईएनआई फार्म्स ने यूरोप में डिस्ट्रीब्यूशन एवं मार्केटिंग के लिए डेल मोंटे के साथ और लॉजिस्टिक के लिए मर्स्क के साथ साझेदारी की है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में यह जानकारी दी है।</p>
<p>वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि नीदरलैंड को केले के निर्यात से कीमतों में तेजी आएगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी। दुनिया का सबसे बड़ा केला उत्पादक होने के बावजूद वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी केवल 1 फीसदी है। हालांकि, दुनिया के 3.53 करोड़ टन केला उत्पादन में देश की हिस्सेदारी 26.45 फीसदी है। 2022-23 में भारत ने 17.6 करोड़ डॉलर मूल्य के केले का निर्यात किया।</p>
<p>वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, "यूरोपीय बाजार में पहले परीक्षण शिपमेंट के साथ यह अनुमान लगाया गया है कि भारत अगले पांच वर्षों में 1 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के केले का निर्यात करने में सक्षम हो सकता है।" भारतीय केले का निर्यात मुख्य रूप से ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, उज्बेकिस्तान, सऊदी अरब, नेपाल, कतर, कुवैत, बहरीन, अफगानिस्तान और मालदीव में होता है।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि अमेरिका, रूस, जापान, जर्मनी, चीन, नीदरलैंड, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों में निर्यात के बड़े अवसर हैं। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में निर्यात 30.3 करोड़ डॉलर से अधिक हो जाएगा।</p>
<p>आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा केला उत्पादन होता है। इसके बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश का स्थान है। 2022-23 में भारत के केला उत्पादन में सामूहिक रूप से इन पांच राज्यों का योगदान लगभग 67 फीसदी रहा है। केला उत्पादन करने वाले अन्य राज्यों में गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मिजोरम और त्रिपुरा शामिल हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ केले का नीदरलैंड को हुआ परीक्षण निर्यात ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दक्षा अनमैन्ड सिस्टम्स ने इफको को शुरू की एग्री ड्रोन की डिलीवरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/dhaksha-unmanned-systems-delivers-kisan-drones-to-iffco.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 10 Nov 2023 17:39:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/dhaksha-unmanned-systems-delivers-kisan-drones-to-iffco.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चेन्नई स्थित ड्रोन निर्माता कंपनी और कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड की सहायक कंपनी दक्षा अनमैन्ड सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड ने इफको को 'एग्री ड्रोन' की डिलीवरी शुरू करने की घोषणा की है। इसे किसान ड्रोन के नाम से भी जाना जाता है।</p>
<p>दक्षा का 'डीएच-एग्रीगेटर-ई10 प्लस' एक अत्याधुनिक किसान ड्रोन है जो 10 लीटर स्प्रे टैंक और एक शक्तिशाली 25,200 एमएएच बैटरी से लैस है। इसे एक बार चार्ज करने पर यह तीन एकड़ खेत की उड़ान भर सकता है और स्पे कर सकता है। कंपनी के एक बयान में कहा है कि ये ड्रोन एफपीवी कैमरे, बाधा और इलाकाई सेंसर, कम बैटरी या कम लिक्विड होने पर रिटर्न-टू-लॉन्च (आरटीएल) कार्यक्षमता जैसी उन्नत सुविधाओं से लैस हैं। आधुनिक कृषि के लिए यह एक बहुमुखी ई-टूल है।</p>
<p>दक्षा अनमैन्ड सिस्टम्स के सीईओ रामनाथन नारायणन ने कहा, "देश की अग्रणी कृषि सहकारी समितियों में से एक इफको को किसान ड्रोन की डिलीवरी की शुरुआत की घोषणा करते हुए हम उत्साहित हैं। हमारे 'किसान ड्रोन' को विशेष रूप से इफको की सख्त तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिजाइन और प्रमाणित किया गया है। हमें कृषि उत्पादकता और स्थिरता बढ़ाने के उनके मिशन का समर्थन करने पर गर्व है।"</p>
<p>ड्रोन की पहली खेप की डिलीवरी की शुरुआत के दौरान दोनों कंपनियों के अधिकारी मौजूद थे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दक्षा अनमैन्ड सिस्टम्स ने इफको को शुरू की एग्री ड्रोन की डिलीवरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बासमती का उत्पादन कम होने से कीमतों में तेजी, 4500 रुपये तक पहुंचे भाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/decrease-in-production-the-price-of-basmati-paddy-reached-rs-4500-per-quintal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 10 Nov 2023 16:23:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/decrease-in-production-the-price-of-basmati-paddy-reached-rs-4500-per-quintal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सरकार द्वारा बासमती चावल के लिए 1200 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) तय करने के बाद किसानों के सामने बासमती धान का दाम घटने&nbsp; संकट पैदा हो गया था। लेकिन इसमें कटौती के बाद बासमती धान के भाव में तेजी से किसानों के चेहरे खिल गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा बासमती चावल का एमईपी घटाए जाने के बाद निर्यातकों ने बासमती धान की खरीद बढ़ा दी है। इसके चलते बासमती उत्पादक राज्यों की कई कृषि उपज मंडियों में बासमती धान के भाव 4200-4500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। दाम बढ़ने की एक बड़ी वजह कमजोर मानसून के चलते इस बार बासमती धान के उत्पादन में कमी आना भी है।&nbsp;</p>
<p>पंजाब की खन्ना मंडी के बासमती धान व्यापारी सतवंत सिंह ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि 1121 और 1509 किस्म के बासमती धान का औसत भाव 4200-4500 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। सबसे अच्छी किस्म का बासमती इससे भी ऊपर के भाव पर बिक रहा है। वैसे, सामान्य किस्म के बासमती का औसत भाव 3200-3500 रुपये प्रति क्विंटल है। मध्य प्रदेश के विदिशा और सीहोर जिले की मंडियों में भी 1121 किस्म के धान का औसत भाव 3800-4200 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>खन्ना जिले के किसान हरप्रीत सिंह ने बताया कि बासमती धान के बेहतर भाव मिलने से इलाके के किसान काफी खुश हैं। हालांकि, उत्पादन में पिछले साल की तुलना में कमी आई है। अगर पंजाब में बाढ़ नहीं आई होती तो उत्पादन पिछले साल के स्तर पर ही रहता।</p>
<p>मानसून की देरी और अनियमितता के चलते इस बार देश के ज्यादातर बासमती उत्पादक क्षेत्रों में बुवाई में कमी आई थी। हालांकि, धान का कुल रकबा इस साल पिछले साल के मुकाबले ज्यादा रहा लेकिन जुलाई में पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आई बाढ़ और अगस्त में देशभर में सूखे जैसे हालात की वजह से धान उत्पादन घटने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p>उत्पादन घटने की आशंका और चावल की घरेलू कीमतों में तेजी को देखते हुए सरकार ने गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि गैर-बासमती पार बॉयल्ड चावल (सेला चावल) के निर्यात पर 20 फीसदी शुल्क लगा दिया है। यही नहीं बासमती चावल का एमईपी भी 1200 डॉलर प्रति टन कर दिया गया था जिसके बाद निर्यातकों द्वारा इसका विरोध किया जाने लगा। अपनी मांगों के समर्थन में निर्यातकों ने बासमती धान की खरीद भी बंद कर दी थी जिससे किसानों को नुकसान हो रहा था।</p>
<p>निर्यातकों और किसानों के बढ़ते विरोध को देखते हुए सरकार ने बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य घटाकर 950 डॉलर प्रति टन कर दिया। &nbsp;<br /><br /></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बासमती का उत्पादन कम होने से कीमतों में तेजी, 4500 रुपये तक पहुंचे भाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी मंडी अगले साल फरवरी में शुगर एवं एथेनॉल पर बड़ा कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/chinimandi-organising-biggest-sugar-and-ethanol-india-conference-in-feb-24.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 09 Nov 2023 17:47:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/chinimandi-organising-biggest-sugar-and-ethanol-india-conference-in-feb-24.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चीनी और संबद्ध उद्योगों से संबंधित न्यूज एवं नेटवर्किंग पोर्टल 'चीनी मंडी' अगले साल 1-2 फरवरी को नई दिल्ली में "शुगर एंड एथनॉल इंडिया कांफ्रेंस (एसईआईसी) 2024" का आयोजन कर रहा है। एसईआईसी का यह लगातार तीसरा सम्मेलन है। इस कांफ्रेंस का टैग लाइन है- "इस बार कुछ हटके"।</p>
<p>चीनी मंडी ने एक बयान में कहा है कि इस बार कांफ्रेंस के साथ-साथ 'शुगर एंड एथनॉल इंटरनेशनल अवॉर्ड्स 2024 का भी आयोजन किया जाएगा। इस कांफ्रेंस में चीनी एवं एथनॉल निर्माताओं एवं उसके संघों-संगठनों को विशिष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जाएगा।</p>
<p>बयान के मुताबिक, भारत द्वारा ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस का नेतृत्व किए जाने के कारण यह कांफ्रेंस अत्यन्त महत्वपूर्ण होगा। स्वदेशी चीनी उद्योग देश के जैव ईंधन एजेंडा में काफी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। यह दो दिवसीय कांफ्रेंस फरवरी 2024 में आयोजित होगा और तब तक 2023-24 के चालू मार्केटिंग सीजन में चीनी के घरेलू उत्पादन की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।</p>
<p>चीनी मंडी के सह संस्थापक एवं सीईओ उप्पल शाह के मुताबिक, इस कांफ्रेंस में केंद्रीय मंत्रियों, उच्च अधिकारियों, अंतर्राष्ट्रीय एवं स्वदेशी चीनी उद्योग के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं तथा वैज्ञानिकों की मौजूदगी होगी। इससे पूरे उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र को चीनी के वर्तमान एवं भविष्य के परिदृश्य को परखने का बेहतरीन मौका मिलेगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी मंडी अगले साल फरवरी में शुगर एवं एथेनॉल पर बड़ा कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खाद्य महंगाई के असर से लड़ने के लिए लोगों की आय बढ़ाने की जरूरतः नीति आयोग सदस्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/need-to-raise-peoples-income-to-fight-off-impact-of-high-food-prices-says-niti-aayog-member-ramesh-chand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 08 Nov 2023 16:47:23 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/need-to-raise-peoples-income-to-fight-off-impact-of-high-food-prices-says-niti-aayog-member-ramesh-chand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद ने सुझाव दिया है कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए लोगों की आमदनी बढ़ाई जानी चाहिए क्योंकि तकनीकी प्रगति के बावजूद कृषि उत्पादन लागत में कमी नहीं आई है। नीति आयोग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने बढ़ती खाद्य कीमतों और खाद्य उत्पादन लागत में वृद्धि से संबंधित चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।</p>
<p>नीति आयोग के एक बयान में प्रो. रमेश चंद ने कहा, "तकनीकी प्रगति के बावजूद उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी नहीं आई है और आपूर्ति श्रृंखलाएं टुकड़ों में बंटी हुई हैं। इन मुद्दों से निपटने के लिए हमें लोगों की आय को बढ़ावा देना चाहिए।"</p>
<p>कार्यक्रम में नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने कहा कि भारत 2030 से पहले गरीबी को आधा करने का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल कर सकता है। यह वैश्विक समुदाय, खासकर विकासशील देशों को अपने संबंधित लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए एक मॉडल प्रदान करेगा।</p>
<p>नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वीके पॉल ने 'भुखमरी को पूरी तरह से खत्म करने', 'अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण' और 'गुणवत्तापूर्ण शिक्षा' के एसडीजी लक्ष्यों के संबंध में भारत की प्रगति पर प्रकाश डाला और पोषण, एनसीडी (गैर-संचारी रोग) एवं रोकी जा सकने वाली मौतों पर विशेष ध्यान देने के साथ 'भुखमरी को खत्म करने' पर भारत के फोकस को रेखांकित किया। उन्होंने सभी हितधारकों से इन लक्ष्यों के परिणाम बढ़ाने के लिए अपनी सिफारिशें और नए विचार साझा करने का आह्वान किया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खाद्य महंगाई के असर से लड़ने के लिए लोगों की आय बढ़ाने की जरूरतः नीति आयोग सदस्य ]]></media:description>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इजरायल&amp;#45;हमास संघर्ष से फर्टिलाइजर इंडस्ट्री पर असर पड़ने की संभावनाः क्रिसिल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/israel-hamas-conflict-likely-to-impact-fertilizer-industry-says-crisil.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 08 Nov 2023 13:32:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/israel-hamas-conflict-likely-to-impact-fertilizer-industry-says-crisil.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले एक महीने से जारी इजरायल-हमास संघर्ष की वजह से कुछ क्षेत्रों, खासकर फर्टिलाइजर क्षेत्र पर प्रभाव पड़ सकता है। घरेलू क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अपने एक नोट में यह अनुमान जताया है। क्रिसिल ने कहा है कि व्यापक आधार पर देखें तो पश्चिम एशिया के संघर्ष ने अब तक भारत के व्यापार पर नगण्य प्रभाव डाला है। फर्टिलाइजर और हीरा जैसे कुछ क्षेत्रों पर जरूर मामूली प्रभाव पड़ा है, जबकि अन्य क्षेत्रों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p>हालांकि, क्रिसिल ने कहा है कि 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमास के आश्चर्यजनक हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष ने सोने और कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है। इन पर नजर रखने की जरूरत है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत जैसे देश के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत कच्चे तेल के लिए आयात पर निर्भर है और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का कई अन्य क्षेत्रों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।</p>
<p>क्रिसिल के मुताबिक, इजरायल के साथ भारत का व्यापार अपेक्षाकृत कम है। वित्त वर्ष 2022-23 में भारत का इजरायल को निर्यात केवल 1.9 फीसदी और आयात 0.3 फीसदी रहा है। &nbsp;निर्यात में मुख्य रूप से परिष्कृत हाइड्रोकार्बन सहित पॉलिश किए गए हीरे और पेट्रोलियम उत्पाद शामिल हैं, जबकि आयात में बड़े पैमाने पर औद्योगिक उपकरण, &nbsp;फर्टिलाइजर, कच्चे हीरे और कीमती पत्थर शामिल हैं।</p>
<p>घरेलू हीरा पॉलिश करने वालों के लिए इजरायल मुख्य रूप से एक व्यापारिक केंद्र है। पिछले वित्त वर्ष में देश से हुए हीरे के कुल निर्यात में इजरायल को 5 फीसदी निर्यात हुआ था। &nbsp;इसके अलावा, आयातित कच्चे हीरे 2 फीसदी इजरायल से आयात होता है। नोट में कहा गया है कि जहां तक उर्वरकों की बात है कि इजरायल म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) का एक प्रमुख वैश्विक उत्पादक है और उन शीर्ष तीन देशों में से एक है जहां से भारत एमओपी का आयात करता है। पिछले वित्त वर्ष में कुल एमओपी आयात का एक चौथाई आयात इजरायल से हुआ था। घरेलू उर्वरक खपत में एमओपी की हिस्सेदारी (अंतिम उत्पाद के रूप में या अन्य उर्वरकों में एक घटक के रूप में) 10 फीसदी से भी कम है।</p>
<p>रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि संघर्ष शुरू होने के बाद से सोने की कीमतों में 13-15 फीसदी की वृद्धि हुई है और यह 60 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक हो गई है। क्रिसिल ने चेतावनी दी है कि आगे और तेज बढ़ोतरी से रिटेल ज्वैलर्स के ग्रोथ पर असर पड़ेगा।</p>
<p>नोट के मुताबिक, हालांकि भारत पर इसका समग्र प्रभाव अभी कम है, लेकिन संघर्ष बढ़ने पर प्रमुख बंदरगाहों के परिचालन में बाधा आ सकती है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि वह घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रही है और कर्ज गुणवत्ता पर असर का आकलन करेगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इजरायल-हमास संघर्ष से फर्टिलाइजर इंडस्ट्री पर असर पड़ने की संभावनाः क्रिसिल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आलू, टमाटर के दाम घटने से अक्टूबर में सस्ती हुई थाली, प्याज और दाल की कीमतों में तेजी से फिर महंगी होने की उम्मीदः क्रिसिल  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/thali-became-cheaper-in-october-due-to-falling-prices-of-potatoes-and-tomatoes-will-expensive-in-november-says-crisil.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 07 Nov 2023 00:41:26 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/thali-became-cheaper-in-october-due-to-falling-prices-of-potatoes-and-tomatoes-will-expensive-in-november-says-crisil.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आलू, टमाटर और ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में गिरावट के चलते अक्टूबर में घर पर बनी शाकाहारी और मांसाहारी थाली की कीमतें पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में क्रमशः 5 और 7 फीसदी घटी हैं। हालांकि, प्याज के दाम बढ़ने और दाल महंगी होने से नवंबर में दोनों तरह की थाली फिर से महंगी हो सकती है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की ओर से सोमवार को जारी थाली की कीमतों की मासिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि शाकाहारी थाली की कीमतों में गिरावट आलू और टमाटर के दाम में सालाना आधार पर क्रमशः 21 फीसदी और 38 फीसदी की कमी के कारण है। यह खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट को भी दर्शाती है। अक्टूबर में शाकाहारी थाली की कीमत 27.50 रुपये रही जो पिछले साल अक्टूबर में 29 रुपये थी। पिछले महीने (सितंबर) थाली की कीमत 27.90 रुपये थी।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, मांसाहारी थाली की कीमतों में तेज गिरावट आई है क्योंकि ब्रॉयलर चिकन) की कीमत, जो थाली की लागत में 50 फीसदी हिस्सेदारी रखती है, में पिछले वर्ष के उच्च आधार की तुलना में अनुमानित 5-7 फीसदी कमी आई है। अक्टूबर में मासांहारी थाली की कीमत घट कर 58.40 रुपये रह गई जो एक साल पहले इस महीने में 62.70 रुपये थी। सितंबर 2023 में इसकी कीमत 60.50 रुपये थी।</p>
<p>क्रिसिल ने कहा है कि ईंधन की लागत, जो शाकाहारी और मांसाहारी थाली की कुल लागत का क्रमशः लगभग 14 और 8 प्रतिशत है, में 14 प्रतिशत की गिरावट आई है, क्योंकि 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत पिछले वर्ष की तुलना में 1,053 रुपये से गिरकर 903 रुपये हो गई।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण थाली की कीमतों में गिरावट सीमित हो गई। पहले पखवाड़े के औसतन 34 रुपये प्रति किलो से बढ़कर दूसरे पखवाड़े में प्याज के दाम औसतन 40 रुपये प्रति किलो हो गए। इसी तरह, शाकाहारी थाली की कुल लागत में 9 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली दालों की कीमत में पिछले साल की तुलना में 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p>क्रिसिल ने कहा है कि अगर प्याज की महंगाई जारी रहीं, तो नवंबर में थाली की कीमतें बढ़ेंगी। शाकाहारी थाली की कुल लागत में प्याज की हिस्सेदारी लगभग 10 फीसदी है। &nbsp;नवंबर के पहले हफ्ते में प्याज की कीमतें पिछले महीने की तुलना में 75 फीसदी ज्यादा हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आलू, टमाटर के दाम घटने से अक्टूबर में सस्ती हुई थाली, प्याज और दाल की कीमतों में तेजी से फिर महंगी होने की उम्मीदः क्रिसिल   ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जलवायु परिवर्तन की समस्या बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करने की जरूरत: राष्ट्रपति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/need-to-shift-from-foods-that-add-to-climate-change-problem-said-prez.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 06 Nov 2023 16:59:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/need-to-shift-from-foods-that-add-to-climate-change-problem-said-prez.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि उन खाद्य पदार्थों से दूर रहने की जरूरत है जो जलवायु परिवर्तन की समस्या को बढ़ाते हैं। साथ ही स्वस्थ खाद्य पदार्थों को चुनने की जरूरत है जो प्रकृति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। उन्होंने दुनिया के कई हिस्सों में भुखमरी की समस्या पर भी चिंता जताई और कहा कि "बड़े पैमाने पर हो रही भुखमरी" वितरण की कमी के कारण है, जबकि दुनिया पर्याप्त अनाज का उत्पादन कर रही है।</p>
<p>वह यहां वर्ल्ड फूड इंडिया (डब्ल्यूएफआई) कार्यक्रम के समापन सत्र में बोल रही थीं। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम (3-5 नवंबर) के दौरान लगभग 35,000 करोड़ रुपये की निवेश प्रतिबद्धताएं जताई गईं। वर्ल्ड फूड इंडिया का पहला संस्करण 2017 में आयोजित किया गया था, लेकिन उसके बाद कोविड-19 महामारी के कारण इसे आयोजित नहीं किया जा सका।</p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि इस बात दु:ख जताया कि विश्&zwj;व के कई भागों में लोग बड़ी संख्या में भूखे पेट सोते हैं। यह मानव जाति द्वारा अर्जित की गई बड़ी से बड़ी आर्थिक और तकनीकी प्रगति पर बदनुमा दाग है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बड़े पैमाने पर हो रही भुखमरी का मुख्&zwj;य कारण खाद्यान्&zwj;न उत्&zwj;पादन की कमी नहीं,&nbsp;<span>बल्कि उसके ठीक वितरण की कमी है।</span></p>
<p>हम जो हम खाते हैं उसकी पर्यावरणीय लागत की ओर इशारा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि अब वह समय आ गया है जब हमें अपना खान-पान का इस तरह चयन करना होगा,&nbsp;<span>जिससे प्रकृति को किसी भी तरह का नुकसान न हो। उन्होंने कहा कि हमें उन खाद्य पदार्थों से दूरी बनाने के लिए सचेत निर्णय लेने की जरूरत है जो जलवायु परिवर्तन की समस्या को बढ़ाते हैं। हमें उन खाद्य पदार्थों की ओर जाना चाहिए जो न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए बल्कि हमारे ग्रह के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छे हों।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x_6548cd793d21a.jpg" alt="" /></p>
<p>इस अवसर पर उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की सराहना करते हुए कहा कि वर्ल्ड फूड इंडिया को भारत की समृद्ध खाद्य संस्कृति से दुनिया को परिचित कराने के लिए लंबा रास्&zwj;ता तय करना है। यह इस क्षेत्र के सूक्ष्म,&nbsp;<span>लघु और मध्यम उद्यमों के लिए एक शानदार मंच सिद्ध होगा</span>,&nbsp;<span>जिससे इस क्षेत्र को बड़े घरेलू और वैश्विक दिग्&zwj;गजों के साथ बेहतर ढंग से जुड़ने में मदद मिलेगी।</span></p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ल्ड फूड इंडिया में भारत को विश्&zwj;व का खाद्य आपूर्तिकर्ता बनाने में सहायता प्रदान करने की क्षमता है। यह आयोजन कृषि और खाद्य वस्तुओं के लिए एक सोर्सिंग केंद्र के रूप में भारत की क्षमता का प्रदर्शन करने वाला आदर्श मंच है। उन्होंने विश्वास जताया कि निवेशक समुदाय को हमारे खाद्य प्रसंस्करण और संबद्ध क्षेत्रों में व्&zwj;यापक अवसर उपलब्&zwj;ध होंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जलवायु परिवर्तन की समस्या बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करने की जरूरत: राष्ट्रपति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि क्षेत्र में राज्यों की जिम्मेदारी ज्यादा बड़ी, सुधार के लिए वे कानून बनाएंः प्रो. रमेश चंद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/onus-of-agri-reforms-is-on-states-said-niti-aayog-member-ramesh-chand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 06 Nov 2023 13:06:36 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/onus-of-agri-reforms-is-on-states-said-niti-aayog-member-ramesh-chand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नीति आयोग के सदस्य और जाने-माने कृषि अर्थशास्त्री प्रो. रमेश चंद ने कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए राज्यों से अपनी जरूरत के मुताबिक कानून बनाने तथा बड़ी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि कृषि क्षेत्र के कुछ पहलू केंद्र के स्तर पर हैं और कुछ राज्य के स्तर पर। राज्यों की भी जिम्मेदारी उतनी ही बड़ी है, या कहें कि कृषि क्षेत्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी ज्यादा बड़ी है। उनको इसके सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष पर व्यापक चर्चा करनी चाहिए और सुधारों की ओर जाना चाहिए। यह इसलिए भी जरूरी है कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में कृषि क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।</p>
<p>प्रो. रमेश चंद ने <strong>रूरल वर्ल्ड</strong> पत्रिका को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में यह बातें कही। हाल ही में हरित क्रांति और अमृत काल को लेकर भारतीय कृषि पर उनका महत्वपूर्ण पेपर आया है, जिसमें उन्होंने देश के कृषि क्षेत्र के भविष्य का रोडमैप रखने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि बीते 10 वर्षों में कृषि उत्पादकता के क्षेत्र में भारत की ग्रोथ चीन और अमेरिका से बेहतर रही है, इसलिए पैदावार का अंतर काम हुआ है। किसानों को अपने फायदे के लिए उपलब्ध टेक्नोलॉजी को अपनाना चाहिए और राज्यों को भी इसमें भूमिका निभानी चाहिए। आजकल टेक्नोलॉजी काफी खर्चीली होती जा रही है और हमें दुनिया से प्रतिस्पर्धा करनी है, इसलिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है।</p>
<p>यह पूछने पर कि क्या रद्द किए गए तीनों कृषि कानून समय की जरूरत थे, उन्होंने कहा कि जब ये कानून वापस लिए गए थे तो प्रधानमंत्री ने कहा था कि शायद हम किसानों को इन कानूनों के फायदे समझाने में असफल रहे। नीतियों में कमियां हो सकती हैं। जब किसान प्रदर्शन कर रहे थे तब मैंने नीति आयोग से पेपर जारी किया था। उसमें कोई भी देख सकता है कि इन कानूनों को लाने के पीछे सरकार के विचारकों की क्या मंशा थी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय समितियों को अपनी परिस्थितियों के हिसाब से इन कानूनों के उन मॉडल पर चर्चा करनी चाहिए जो फायदेमंद हो सकते हैं। जैसे मॉडल एपीएमसी एक्ट आया था, मॉडल कांट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट था, मॉडल लैंड लीजिंग एक्ट था, उन मॉडल को लेकर राज्य अपने यहां चर्चा करें। किसानों को भी खुले मन से इन पर चर्चा करनी चाहिए। इनको ठंडे बस्ते में डालना कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए अच्छा नहीं होगा।&nbsp;</p>
<p>प्रो. रमेश चंद ने पिछले दिनों &lsquo;हरित क्रांति से अमृत कालः भारतीय कृषि के लिए सीख और आगे की राह&rsquo; पेपर जारी किया, जिसमें हरित क्रांति से सबक लेकर कृषि की भावी रणनीति के लिए कदमों को सामने रखा है। यह पूछने पर कि इन पर अमल कैसे होगा, उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है। केमिकल के बहुत ज्यादा प्रयोग से लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ा है। इन बातों को ध्यान में रखकर उस पर साइंटिफिक तरीके से रोड मैप नहीं बनाएंगे तो इधर-उधर भटकने की आशंका रहेगी। प्राकृतिक खेती की ओर जाने से हरित क्रांति के नकारात्मक प्रभावों में सुधार आएगा।</p>
<p>उन्होंने कहा, हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विकसित भारत का लक्ष्य लेकर अगर हम चल रहे हैं, जिसमें हर व्यक्ति की आमदनी 2100 डॉलर से बढ़कर 11-12 हजार डॉलर हो जाएगी, तो फिर लोगों को रोजगार कहां मिलेगा, लोगों की आमदनी कहां से होगी। सरकार का इन्क्लूसिव ग्रोथ का जो लक्ष्य है, उसमें हमें सिर्फ देश की आमदनी नहीं बढ़ानी, बल्कि सभी लोगों की आमदनी बढ़ानी है, और आमदनी बढ़ती है रोजगार से। हमें अब कृषि केंद्रित विकास के बारे में सोचना होगा, क्योंकि हमारा रोजगार अब भी कृषि केंद्रित है। 2022-23 का पीएलएफएस सर्वे कहता है कि 45.8 फीसदी कार्यबल कृषि क्षेत्र में ही है। उसमें बहुत धीमी गति से कमी आ रही है। इसलिए मेरा मानना है कि विकसित भारत बनाने में कृषि केंद्रीय भूमिका अदा करेगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_6548e716108c1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि क्षेत्र में राज्यों की जिम्मेदारी ज्यादा बड़ी, सुधार के लिए वे कानून बनाएंः प्रो. रमेश चंद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_6548e716108c1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[टमाटर सप्लाई चेन के प्रबंधन के लिए स्टार्टअप्स से सरकार ने मांगा आईडिया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-taps-startups-for-ideas-to-manage-tomato-supply-chain.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 06 Nov 2023 12:30:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-taps-startups-for-ideas-to-manage-tomato-supply-chain.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने टमाटर सप्लाई चेन के प्रबंधन के लिए स्टार्टअप्स की राय मांगी है क्योंकि कुछ महीनों के दौरान इसकी कीमतें काफी बढ़ जाती हैं। बारिश के कारण उत्पादक क्षेत्रों से आपूर्ति बाधित होने के बाद जुलाई में दिल्ली-एनसीआर सहित देश के ज्यादातर हिस्सों में टमाटर की कीमतें काफी बढ़ गई थी।</p>
<p>पीयूष गोयल ने गुरुग्राम में एक स्टार्टअप कार्यक्रम में कहा, "मैं आपमें से कुछ लोगों से यह आईडिया चाहता हूं कि हम टमाटर की अर्थव्यवस्था को बेहतर तरीके से कैसे प्रबंधित कर सकते हैं क्योंकि टमाटर की कीमतें 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।"</p>
<p>उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने उपभोक्ताओं को सस्ती कीमतों पर टमाटर की उपलब्धता सुनिश्चित करने और टमाटर किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने में मदद करने के लिए टमाटर सप्लाई चेन के विभिन्न स्तरों पर नए आईडिया को आमंत्रित करने के लिए इसी साल जुलाई में टमाटर ग्रैंड चैलेंज हैकथॉन की भी घोषणा की थी।</p>
<p>गोयल ने कहा कि स्टार्टअप्स को प्राथमिक और "बड़ी" दोनों गंभीर समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए। &nbsp;नए उद्यमी भारत को एक विकसित देश बनाने में मदद करेंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ टमाटर सप्लाई चेन के प्रबंधन के लिए स्टार्टअप्स से सरकार ने मांगा आईडिया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छत्तीसगढ़ चुनावः कांग्रेस घोषणापत्र में 3200 रुपये क्विंटल पर धान खरीद का वादा, 200 यूनिट बिजली मुफ्त, जाति जनगणना भी होगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/congress-promises-paddy-procurement-at-rs-3200-per-quintal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 05 Nov 2023 23:34:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/congress-promises-paddy-procurement-at-rs-3200-per-quintal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>छत्&zwj;तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने रविवार को घोषणा पत्र जारी कर दिया है। पार्टी के प्रमुख वादों में किसानों का कर्ज माफ करना और प्रति एकड़ 20 क्विंटल धान की खरीद के साथ धान का खरीद मूल्य 3200 रुपये प्रति क्विंटल करना शामिल हैं। पार्टी ने इसका नाम भरोसे का घोषणा पत्र दिया है। मुख्&zwj;यमंत्री भूपेश बघेल ने राजनांदगांव, कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने रायपुर, गृहमंत्री ताम्रध्&zwj;वज साहू ने दुर्ग में घोषणा पत्र जारी किया। इसमें कहा गया है कि जिसकी जितनी आबादी, उसका उतना हक को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस प्रदेश में जातिगत जनगणना करवाएगी।&nbsp;</p>
<p><strong>किसानः कर्ज माफ, धान खरीद 3200 रु/क्विंटल पर</strong><br />पार्टी ने कहा है, 2018 में कांग्रेस सरकार बनते ही 18.5 लाख किसानों का 9272 करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया गया था। इस बार भी कांग्रेस सरकार बनते ही कर्ज माफ किया जाएगा। पहले राज्य सरकार 15 क्विंटल प्रति एकड़ की धान खरीद करती थी। इसे बढ़ाकर 20 क्विंटल प्रति एकड़ किया गया है। किसानों को धान की कीमत 3200 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगी।&nbsp;<br />तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रति मानक बोरा 4000 रुपये की जगह अब 6000 रुपये मिलेंगे। इसके अतिरिक्त 4000 रुपये सालाना बोनस भी मिलेगा। राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के अंतर्गत सभी हितग्राहियों को मिलने वाली राशि 7000 रुपए प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 10,000 रुपए प्रतिवर्ष की जाएगी। मौजूदा कांग्रेस सरकार ने 7 की जगह 63 लघु वनोपजों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदना शुरू किया है। पार्टी का वादा है कि समर्थन मूल्य के अतिरिक 10 रुपए प्रति किलो दिए जाएंगे।</p>
<p><strong>घरेलूः 200 यूनिट बिजली फ्री, गैस सिलिंडर पर 500 रु. सब्सिडी</strong><br />पार्टी ने कहा है कि अगली बार उसकी सरकार बनते ही 200 यूनिट तक बिजली फ्री मिलेगी। 200 यूनिट से अधिक खपत वाले उपभोक्ताओं को भी 200 यूनिट प्रति माह तक निःशुल्क बिजली मिलेगी। पार्टी ने वादा किया है कि अगली बार उसकी सरकार बनने पर महिला स्व-सहायता समूहों तथा महिलाओं द्वारा सक्षम योजना के तहत लिए गए ऋण माफ किए जाएंगे। प्रति सिलिंडर रिफिल करने पर 500 रुपए की सब्सिडी घर की महिला के बैंक खाते में जमा की जाएगी। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र 7.5 लाख परिवारों को केंद्र सरकार ने आवास नहीं दिया है। हम उन सभी 7.5 लाख परिवारों और 10 लाख अन्य जरूरतमंद परिवारों को मुख्यमंत्री आवास न्याय योजना के तहत आवास दिया जाएगा। यानी कुल 17.50 लाख गरीब परिवार को आवास दिया जाएगा।</p>
<p><strong>युवाः प्रवेश शुल्क नहीं, उद्योग के लिए कर्ज पर 50% सब्सिडी</strong><br />राज्य के उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी शासकीय महाविद्यालयों में डिप्लोमा/स्नातक/स्नातकोत्तर के सभी वर्ग के छात्र-छात्राओं को शिक्षा एवं प्रवेश शुल्क नहीं देना होगा। स्कूली शिक्षा पहले की तरह निःशुल्क रहेगी। राज्य के 6,000 शासकीय हायर सेकेंड्री एवं हाई स्कूलों को स्वामी आत्मानंद इंग्लिश एवं हिन्दी मीडियम स्कूलों में अपग्रेड किया जाएगा। &nbsp;युवाओं को उद्योग व्यवसाय के लिए ऋण पर अब तक 40% सब्सिडी दी जाती थी। इसे बढ़ाकर 50% करने का वादा है।&nbsp;</p>
<p><strong>स्वास्थ्यः गरीबों को 5 लाख की जगह 10 लाख तक की सहायता</strong><br />डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत गरीबों को इलाज के लिए 5 लाख रुपए की बजाय 10 लाख रुपए तक मिलेंगे। गरीबी रेखा से ऊपर (APL) के लोगों को 50 हजार की बजाय अब 5 लाख रुपए तक की सहायता मिल सकेगी। सड़क दुर्घटना या अन्य आकस्मिक दुर्घटना में घायल लोगों को मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।<br />राज्य में दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण के लिए 7 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। दूसरे चरण का मतदान 17 नवंबर को होगा।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x_6547d8dc8110c.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>छत्तीसगढ़ से कांग्रेस का वादा</strong><br />-20 क्विंटल/एकड़ धान खरीदी&nbsp;<br />-किसानों का कर्ज माफ&nbsp;<br />-KG से PG तक शिक्षा मुफ्त&nbsp;<br />-तेंदूपत्ता प्रति मानक बोरा की दर 6000 रूपए, और 4000 रुपए सालाना बोनस<br />-भूमिहीन कृषि मजदूरों को 10 हजार रूपए किसानों को धान की कीमत 3200/क्विंटल&nbsp;<br />-200 यूनिट फ्री बिजली&nbsp;<br />-प्रति सिलेंडर रिफिल पर 500 रूपए की सब्सिडी<br />-17.50 लाख गरीब परिवार को आवास देंगे<br />-लघु वनोउपजों की MSP पर 10 रु/किलो अतिरिक्त मिलेंगे<br />-10 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज&nbsp;<br />-सड़क हादसों/आकस्मिक घटनाओं में मुफ्त इलाज&nbsp;<br />-तिवरा फसल की MSP पर खरीदी&nbsp;<br />-परिवहन व्यवसाय से जुड़े मोटर मालिकों के साल 2018 तक मोटरयान कर व ब्याज कर्ज माफ&nbsp;<br />-700 रूरल व अर्बन इंडस्ट्रियल पार्क बनेंगे&nbsp;<br />-सभी सरकारी स्कूल आत्मानंद स्कूलों में अपग्रेड होंगे&nbsp;<br />-महिलाओं के स्व-सहायता समूह व सक्षम योजना के कर्ज माफ होंगे&nbsp;<br />-जाति जनगणना होगी<br />-युवाओं को उद्योग हेतु 50% सब्सिडी के साथ सीधा ऋण उपलब्ध होगा&nbsp;<br />-अंत्येष्टि संस्कार में आवश्यक सामग्री (लकड़ी-कंडे) सरकार देगी</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_6548838dc81db.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ छत्तीसगढ़ चुनावः कांग्रेस घोषणापत्र में 3200 रुपये क्विंटल पर धान खरीद का वादा, 200 यूनिट बिजली मुफ्त, जाति जनगणना भी होगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिल्ली&amp;#45;एनसीआर में मदर डेयरी के सफल केंद्रों से 25 रुपये किलो के दाम पर प्याज की बिक्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/mother-dairy-safal-outlets-to-sell-buffer-onion-at-rs-25-per-kg-in-delhi-ncr.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 05 Nov 2023 17:31:20 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/mother-dairy-safal-outlets-to-sell-buffer-onion-at-rs-25-per-kg-in-delhi-ncr.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">प्याज की बढ़ती कीमतों से उपभोक्ताओं को राहत देने के मकसद से सरकार ने मदर डेयरी के सफल आउटलेट से दिल्ली-एनसीआर में 25 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर प्याज की बिक्री शुरू करने का फैसला किया है। हैदराबाद कृषि सहकारी संघ तेलंगाना और अन्य दक्षिणी राज्यों में सस्ती दर पर प्याज की बिक्री कर रहा है। कोऑपरेटिव बॉडी एनसीसीएफ और नेफेड केंद्र सरकार की तरफ से रियायती दर पर प्याज की बिक्री कर रही हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">नेफेड ने अब तक 21 राज्यों के 55 शहरों में मोबाइल वैन और अन्य आउटलेट सहित 329 खुदरा बिक्री केंद्र स्थापित किए हैं। इसी तरह एनसीसीएफ ने 20 राज्यों के 54 शहरों में 457 खुदरा बिक्री केंद्र स्थापित किए हैं। केंद्रीय भंडार ने भी 3 नवंबर से दिल्ली-एनसीआर में अपने आउटलेट पर प्याज की खुदरा बिक्री शुरू की है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "मदर डेयरी के सफल केंद्रों से इसी सप्ताहांत से प्याज की बिक्री शुरू होगी। हैदराबाद कृषि सहकारी संघ (एचएसीए) तेलंगाना और अन्य दक्षिणी राज्यों में उपभोक्ताओं को प्याज की खुदरा बिक्री कर रहा है।" मंत्रालय ने खरीफ के प्याज की आवक में देरी के कारण हुई प्याज की कीमतों में वृद्धि से उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की बिक्री शुरू की है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सरकार ने चालू वर्ष के लिए पांच लाख टन प्याज का बफर स्टॉक रखा है। इसके अलावा, दो लाख टन का अतिरिक्त बफर बनाने की योजना है। सरकार द्वारा हाल ही में उठाए गए कदमों के कारण थोक कीमतों में गिरावट का रुख देखने को मिला है। हालांकि खुदरा बाजारों में इसका असर दिखने में थोड़ा समय लग सकता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में 28 अक्टूबर को प्याज का थोक मूल्य 4,800 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि 3 नवंबर को यह 3,650 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया था। एक हफ्ते में 24 फीसदी की गिरावट आई है। मंत्रालय का कहना है, "खुदरा कीमतों में आने वाले सप्ताह में गिरावट की उम्मीद है।"</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मानसून की बारिश और व्हाइट फ्लाई के संक्रमण के कारण आपूर्ति में व्यवधान के चलते जून 2023 के अंतिम सप्ताह से टमाटर की कीमतें बढ़ गई थीं। इस समय सरकार ने कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र से एनसीसीएफ और नेफेड के माध्यम से टमाटर खरीदकर कम दाम पर बिक्री की थी। इसके अलावा, आम घरों में दाल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 60 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती कीमत पर भारत दाल लॉन्च की है।&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_621a29c8e0661.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिल्ली-एनसीआर में मदर डेयरी के सफल केंद्रों से 25 रुपये किलो के दाम पर प्याज की बिक्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पर्यावरण मंत्रालय ने जल संचय और वृक्षारोपण के जरिए ग्रीन क्रेडिट हासिल करने का ड्राफ्ट जारी किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/environment-ministry-issues-draft-norms-to-help-earn-green-credits.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 05 Nov 2023 13:53:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/environment-ministry-issues-draft-norms-to-help-earn-green-credits.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जल संचय और वृक्षारोपण परियोजनाओं के माध्यम से ग्रीन क्रेडिट उत्पन्न करने के तरीके का ड्राफ्ट जारी किया है। इस ग्रीन क्रेडिट को केंद्र सरकार द्वारा प्रबंधित प्लेटफॉर्म के माध्यम से खरीदा या बेचा जा सकेगा। सरकार ने कुछ दिनों पहले ही ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम की अधिसूचना जारी की थी।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मंत्रालय ने ड्राफ्ट जारी करते हुए सभी हितधारकों से सुझाव या आपत्तियां मांगी हैं। मसौदे में यह भी बताया गया है कि व्यक्ति, कोऑपरेटिव अथवा शहरी और ग्रामीण निकाय किस तरह के कार्यों को इसमें चुन सकते हैं। इनमें राज्य और जिला-वार मिट्टी के तालाब और पॉली टैंक जैसे जल संरक्षण और संचयन संरचनाएं शामिल हैं। इस मकसद के लिए पेड़-पौधों की विभिन्न प्रजातियां भी बताई गई हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">व्यक्तियों या संस्थाओं के कार्य का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। उसके बाद गणना के निर्दिष्ट तरीके से यह आकलन किया जाएगा कि कितना ग्रीन क्रेडिट उत्पन्न हुआ है। उदाहरण के लिए, पात्र आवेदकों को 100 पेड़ों के लिए 10 वर्षों के लिए 100 ग्रीन क्रेडिट दिया जाएगा। वृक्षारोपण परियोजना से संबंधित मसौदे में कहा गया है कि ग्रीन क्रेडिट में क्वालिफाई करने के लिए कम से कम 100 पेड़ रोपने होंगे। प्रति हेक्टेयर न्यूनतम 100 पेड़ और अधिकतम 1,000 पेड़ लगाने की आवश्यकता होगी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इसी प्रकार जल संचय संरचनाओं के लिए ग्रीन क्रेडिट गणना के तरीके बताए गए हैं। इसके मुताबिक जल संरक्षण/संचयन संरचना का आकार या भंडारण क्षमता कम से कम 100 घन मीटर (या 1 लाख लीटर) और अधिकतम आकार 10,000 घन मीटर होगा। व्यक्तियों और संस्थाओं को निर्धारित वर्ष पूरे होने के बाद प्रति 100 घन मीटर के लिए 75 ग्रीन क्रेडिट मिलेंगे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इससे पहले मंत्रालय ने 13 अक्टूबर को पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली (LiFE) अभियान के तहत ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी) और ईकोमार्क योजना की अधिसूचना जारी की थी। ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम एक बाजार-आधारित व्यवस्था है जिसे व्यक्तियों, समुदायों, निजी क्षेत्र के उद्योगों और कंपनियों जैसे विभिन्न हितधारकों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में स्वैच्छिक पर्यावरणीय कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें दो प्रमुख गतिविधियों को शामिल किया गया है- जल संरक्षण और वनीकरण। ग्रीन क्रेडिट प्राप्त करने के लिए, व्यक्तियों और संस्थाओं को केंद्र सरकार के&nbsp; ऐप/वेबसाइट www.moefcc-gcp.in के माध्यम से अपनी गतिविधियों को पंजीकृत कराना होगा।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">ईकोमार्क योजना का मकसद पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को प्रोत्साहन प्रदान करना है। इसके अंतर्गत मान्यता प्राप्त उत्पाद न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव सुनिश्चित करते हुए विशिष्ट मानदंडों का पालन करेंगे। यह पर्यावरण संबंधी मुद्दों के बारे में उपभोक्ताओं में जागरूकता पैदा करेगा। यह निर्माताओं को पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन की ओर बढ़ने के लिए भी प्रेरित करेगा। </span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पर्यावरण मंत्रालय ने जल संचय और वृक्षारोपण के जरिए ग्रीन क्रेडिट हासिल करने का ड्राफ्ट जारी किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गरीब कल्याण अन्न योजना पांच साल के लिए बढ़ाई जाएगी, दुर्ग की चुनावी सभा में पीएम मोदी का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/in-durg-pm-modi-announces-extension-of-pmgkay-for-5-more-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 05 Nov 2023 13:10:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/in-durg-pm-modi-announces-extension-of-pmgkay-for-5-more-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीब कल्याण अन्न योजना की अवधि अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने की घोषणा की है। इस योजना के तहत 80 करोड़ गरीब लोगों को हर महीने पांच किलो गेहूं या चावल और एक किलो दाल मुफ्त दी जाती है। इस योजना से सरकार पर हर साल करीब दो लाख करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में एक चुनावी सभा में मोदी ने कहा, &ldquo;मैंने निश्चय कर लिया है कि देश के 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन देने वाली योजना को भाजपा सरकार अब अगले पांच साल के लिए और बढ़ाएगी।&rdquo;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की शुरुआत कोविड महामारी के समय की थी। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत इसमें पांच किलो अनाज मुफ्त दिया जाता था। यह सब्सिडी पर मिलने वाले पांच किलो अनाज के अतिरिक्त था। शुरू में यह योजना तीन महीने के लिए लांच की गई थी, जिसे बाद में छह बार विस्तार दिया गया। पिछले साल दिसंबर में एक साल के लिए बढ़ाते हुए योजना को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में मिला दिया गया था। यह योजना इस साल दिसंबर में खत्म होने वाली थी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अगले साल आम चुनाव को देखते हुए योजना की अवधि छह महीने और बढ़ाने का अनुमान जताया जा रहा था, लेकिन पांच साल बढ़ाने का ऐलान चौंकाने वाला है। प्रधानमंत्री ने यह घोषणा चुनावी सभा में की, इसलिए इसके चुनावी निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं। इससे पहले कभी योजना को पांच साल के लिए नहीं बढ़ाया गया। चुनाव से चंद महीने पहले इसे पांच साल के लिए बढ़ाने के कई मायने निकाले जा रहे हैं। अब इसका अमल मूल रूप से अगली सरकार पर निर्भर करेगा। </span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_6547469729b74.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गरीब कल्याण अन्न योजना पांच साल के लिए बढ़ाई जाएगी, दुर्ग की चुनावी सभा में पीएम मोदी का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[निवेशक अनुकूल नीतियों से भारत का खाद्य क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छू रहा: पीएम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/investor-friendly-policies-take-indian-food-sector-to-new-heights-said-pm.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 03 Nov 2023 16:31:37 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/investor-friendly-policies-take-indian-food-sector-to-new-heights-said-pm.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सरकार की निवेशक अनुकूल नीतियां भारत के खाद्य क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की खाद्य विविधता वैश्विक निवेशकों के लिए फायदेमंद है। खाद्य सुरक्षा 21वीं सदी में दुनिया के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों में से एक है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में मेगा फूड इवेंट&nbsp;'वर्ल्ड फूड इंडिया&nbsp;2023'&nbsp;के दूसरे संस्करण का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। इस मौके पर उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने के लिए एक लाख से अधिक एसएचजी सदस्यों को बीज के लिए आर्थिक सहायता का भी वितरण किया।&nbsp;इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत को&nbsp;'दुनिया के खाद्य केंद्र'&nbsp;के रूप में प्रदर्शित करना और&nbsp;2023&nbsp;को इंटरनेशनल मिलेट ईयर के रूप में मनाना है।</p>
<p>उन्होंने कहा&nbsp;<span>कि</span>&nbsp;सरकार की निवेशक अनुकूल नीतियां खाद्य क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं।&nbsp;पिछले&nbsp;9&nbsp;वर्षों में भारत के कृषि निर्यात में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी&nbsp;13&nbsp;प्रतिशत से बढ़कर&nbsp;23&nbsp;प्रतिशत हो गई है जिससे निर्यातित प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में कुल मिलाकर&nbsp;150&nbsp;प्रतिशत की वृद्धि हुई है।&nbsp;आज भारत कृषि उपज में&nbsp;50 अरब अमरेकी डॉलर से अधिक के कुल निर्यात मूल्य के साथ&nbsp;7वें स्थान पर है।&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में तेज वृद्धि का कारण सरकार के निरंतर और समर्पित प्रयास रहे हैं।&nbsp;देश में पहली बार कृषि-निर्यात नीति के निर्माण,&nbsp;राष्ट्रव्यापी लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे के विकास,&nbsp;जिले को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाले&nbsp;100&nbsp;से अधिक जिला-स्तरीय केंद्रों के निर्माण,&nbsp;मेगा फूड पार्कों की संख्या में&nbsp;2&nbsp;से बढ़कर&nbsp;20&nbsp;से अधिक और भारत की खाद्य प्रसंस्करण क्षमता&nbsp;12&nbsp;लाख मीट्रिक टन से बढ़कर&nbsp;200&nbsp;लाख मीट्रिक टन से अधिक हो गई है जो पिछले&nbsp;9&nbsp;वर्षों में&nbsp;15&nbsp;गुना वृद्धि को दर्शाती है।&nbsp;प्रधानमंत्री ने भारत से पहली बार निर्यात किए जा रहे उन कृषि उत्पादों का उदाहरण दिया जिनमें हिमाचल प्रदेश से काले लहसुन,&nbsp;जम्मू और कश्मीर से ड्रैगन फ्रूट,&nbsp;मध्य प्रदेश से सोया दूध पाउडर,&nbsp;लद्दाख से कार्किचू सेब,&nbsp;पंजाब से कैवेंडिश केले,&nbsp;<span>जम्मू से गुच्ची मशरूम और कर्नाटक से कच्चा शहद शामिल हैं।</span></p>
<p>भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास मार्ग का उल्&zwj;लेख करते हुए,&nbsp;प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था में महिलाओं के बढ़ते योगदान पर प्रकाश डाला, <span>जिससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को लाभ हुआ है।</span>&nbsp;उन्होंने कहा कि आज भारत में&nbsp;9&nbsp;करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं।&nbsp;हजारों वर्षों से भारत में खाद्य विज्ञान में महिलाओं के नेतृत्व का उल्&zwj;लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में भोजन की विविधता और खाद्य विविधता भारतीय महिलाओं के कौशल और ज्ञान का परिणाम है।&nbsp;उन्होंने कहा कि महिलाएं अचार,&nbsp;पापड़,&nbsp;चिप्स,&nbsp;मुरब्बा आदि कई उत्पादों का बाजार अपने घर से ही चला रही हैं।&nbsp;महिलाओं के लिए हर स्तर पर कुटीर उद्योगों और स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया जा रहा है।&nbsp;प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर&nbsp;1&nbsp;लाख से ज्यादा महिलाओं को करोड़ों रुपये की प्रारंभिक वित्&zwj;तीय सहायता प्रदान करने का उल्&zwj;लेख किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वर्ल्ड फूड इंडिया के परिणाम भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को 'सूर्योदय क्षेत्र' के रूप में पहचाने जाने का एक बड़ा उदाहरण हैं। पिछले&nbsp;<span>9</span>&nbsp;वर्षों में सरकार की उद्योग समर्थक और किसान समर्थक नीतियों के परिणामस्वरूप इस क्षेत्र ने&nbsp;50,000&nbsp;करोड़ रुपये से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित किया है।&nbsp;प्रधानमंत्री ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में पीएलआई योजना का उल्&zwj;लेख करते हुए कहा कि यह उद्योग में नए उद्यमियों को बड़ी सहायता प्रदान कर रही है।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे के लिए एग्री-इंफ्रा फंड के तहत हजारों परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है,&nbsp;जिसमें लगभग&nbsp;50,000&nbsp;करोड़ रुपये से अधिक का निवेश है,&nbsp;जबकि मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्र में प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे को भी हजारों करोड़ रुपये के निवेश के साथ प्रोत्साहित किया जा रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ निवेशक अनुकूल नीतियों से भारत का खाद्य क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छू रहा: पीएम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एफसीआई ने 19वें दौर की ई&amp;#45;नीलामी में बेचा 2.87 लाख टन गेहूं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/fci-sells-2-lakh-87-thousand-tons-wheat-in-19th-round-of-e-auction.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 03 Nov 2023 13:41:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/fci-sells-2-lakh-87-thousand-tons-wheat-in-19th-round-of-e-auction.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्रीय पूल से खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत 28 जून, 2023 से आटा मिलों, ब्रेड निर्माताओं और छोटे व्यापारियों को गेहूं की बिक्री की जा रही है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) इसके लिए प्रत्येक बुधवार को ई-नीलामी आयोजित करता है। 19वें दौर की ई-नीलामी में 2.87 लाख टन गेहूं की बिक्री की गई।</p>
<p>केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के एक बयान में बताया गया है कि पिछली नीलामी 1 नवंबर को हुई थी। इस ई-नीलामी में बेचे गए गेहूं की मात्रा थोड़ी अधिक रही क्योंकि एफसीआई ने ओएमएसएस के तहत बोली की मात्रा अधिकतम 100 टन से बढ़ाकर 200 रुपये टन कर दी है। इस वजह से ई-नीलामी में हिस्सा लेने वाले बोलीदाताओं की संख्या में वृद्धि देखने को मिली। 2,389 बोलीदाताओं को 2.87 लाख टन गेहूं बेचा गया है।</p>
<p>बयान के मुताबिक, ई-नीलामी में सामान्य गुणवत्ता वाले गेहूं के लिए भारित औसत बिक्री मूल्य 2,291.15 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि इसके लिए आरक्षित मूल्य 2,150 रुपये प्रति क्विंटल था। वहीं औसत से कम गुणवत्ता वाले गेहूं का भारित औसत बिक्री मूल्य 2,311.62 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि इसके लिए आरक्षित मूल्य 2,125 रुपये प्रति क्विंटल था।</p>
<p>ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री 31 मार्च, 2024 तक जारी रहेगी और तब तक केंद्रीय पूल से करीब 101.5 लाख टन गेहूं खुले बाजार में उतारा जाएगा। जमाखोरी रोकने के लिए ओएमएसएस के तहत बड़े व्यापारियों को गेहूं की ई-नीलामी में शामिल होने के दायरे से बाहर रखा गया है। ई-नीलामी के जरिये जो बोलीदाता गेहूं खरीद रहे हैं सरकार उनकी निगरानी भी कर रही है, ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि वे इसकी जमाखोरी तो नहीं कर रहे। 3 अक्टूबर तक देश भर में लगभग 1,721 ऐसी जांच की गई थी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एफसीआई ने 19वें दौर की ई-नीलामी में बेचा 2.87 लाख टन गेहूं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ धान की 161.47 लाख टन हुई खरीद, 9.33 लाख किसानों से एमएसपी पर खरीदा गया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-paddy-procurement-at-msp-reaches-161-lakh-47-thousand-tons-so-far.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 03 Nov 2023 13:05:38 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-paddy-procurement-at-msp-reaches-161-lakh-47-thousand-tons-so-far.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खरीफ की धान की सरकारी खरीद पिछले महीने से ही शुरू हो चुकी है। कुछ राज्यों में 1 नवंबर से इसकी खरीद शुरू हुई है। सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितंबर) 2023-24 में अब तक 161.47 लाख टन खरीफ धान की खरीद किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की है। धान की खरीद राज्यों की एजेंसियों के साथ-साथ भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा की जाती है।</p>
<p>केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा है, "1 नवंबर तक 161.47 लाख टन खरीफ धान की खरीद की गई है जिससे लगभग 9.33 लाख किसानों को 35,571.14 करोड़ रुपये का एमएसपी मिला है।" बयान में कहा गया है कि 2023-24 का खरीफ मार्केटिंग सीजन सुचारू रूप से आगे बढ़ रहा है। सरकारी एजेंसियां ​​किसानों से सीधे धान खरीदती हैं और बाद में उसे चावल मिलों को चावल बनाने के लिए देती हैं। मिलों से चावल लेने के बाद उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिये जरूरतमंदों को वितरित किया जाता है और बफर स्टॉक के लिए रखा जाता है।</p>
<p>सरकार ने चालू खरीफ मार्केटिंग सीजन में केंद्रीय पूल के लिए 521.27 लाख टन चावल खरीदने का लक्ष्य रखा है। इसमें से 20.76 प्रतिशत (108.23 लाख टन) पहले ही पंजाब, हरियाणा और तमिलनाडु से खरीदा जा चुका है।</p>
<p>बयान के मुताबिक, पंजाब से लगभग 66.42 लाख टन, हरियाणा से 36.11 लाख टन और तमिलनाडु से 3.26 लाख टन चावल खरीदा गया है। धान की खेती खरीफ और रबी दोनों सीजन की जाती है। देश के कुल चावल उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत खरीफ सीजन से ही आता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ धान की 161.47 लाख टन हुई खरीद, 9.33 लाख किसानों से एमएसपी पर खरीदा गया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रूरल वर्ल्ड मैगजीन हुई लॉन्च, रूरल वॉयस मीडिया अब प्रिंट पब्लिकेशन में भी उतरा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rural-world-magazine-launched-rural-voice-media-now-enters-print-publication-too.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 02 Nov 2023 17:58:02 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rural-world-magazine-launched-rural-voice-media-now-enters-print-publication-too.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रूरल वॉयस की सहयोगी प्रकाशन पत्रिका <strong>रूरल वर्ल्ड</strong> की लॉन्चिंग नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में हुई। नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद, पूर्व केंद्रीय कृषि सचिव एवं एनडीडीबी के पूर्व चेयरमैन टी. नंदकुमार, नाबार्ड के पूर्व चैयरमैन और एमसीएक्स के चेयरमैन डॉ. हर्ष कुमार भानवाला, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप कुमार नायक, नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नायकनवरे और सहकार भारती के अध्यक्ष डॉ. डीएन ठाकुर की मौजूदगी में मैगजीन को लॉन्च किया गया।</p>
<p>नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एजेंडा फॉर रूरल इंडिया की नेशनल कनविनिंग में रूरल वर्ल्ड का पहला अंक नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद ने जारी किया। रूरल वर्ल्ड के संपादक हरवीर सिंह ने बताया कि रूरल वॉयस मीडिया प्रा. लिमिटेड की मौजूदगी अब डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट मीडिया में भी हो गई है। इस पत्रिका में कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े रिपोर्ट, आलेख, ओपनियन आदि पाठकों के लिए पेश किए जाएंगे। यह पत्रिका अभी त्रैमासिक होगी यानी हर तीन महीने पर इसका प्रकाशन किया जाएगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x_6542038c87adc.jpg" alt="" /></p>
<p>रूरल वर्ल्ड के पहले अंक में एजेंडा फॉर रूरल इंडिया से संबंधित देशभर के 60 जिलों के 300 से अधिक किसानों और ग्रामीण नागरिकों द्वारा कृषि एवं इससे जुड़े क्षेत्रों और ग्रामीण जीवन को लेकर बताई गई समस्याओं और उनके संभावित समाधानों पर कवर स्टोरी छापी गई है। रूरल वॉयस और गैर सरकारी संगठन सॉक्रेटस ने पिछले 6 महीने में देश के अलग-अलग 5 जगहों पर एजेंडा फॉर रूरल इंडिया कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसके अलावा, नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद का विस्तृत इंटरव्यू है। साथ ही, टी. नंदकुमार के विचार हैं। इसके अलावा, डेयर के पूर्व सचिव एवं आईसीएआर के पूर्व डायरेक्टर जनरल तथा तास के मौजूदा चेयरमैन पद्मभूषण डॉ. आरएस परोदा ने 21वीं सदी के युवाओं को कृषि क्षेत्र से जोड़ने की पहल करने की वकालत करते हुए अपने विचार रखे हैं।</p>
<p>यह पत्रिका द्विभाषी है यानी इसमें अंग्रेजी और हिंदी दोनों में रिपोर्ट और आलेख पढ़ने को मिलेंगे। पत्रिका का अगला अंक फरवरी 2024 में आएगा। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रूरल वर्ल्ड मैगजीन हुई लॉन्च, रूरल वॉयस मीडिया अब प्रिंट पब्लिकेशन में भी उतरा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पिंक बॉलवार्म और अल&amp;#45;नीनो का कहरः कपास उत्पादन 15 साल में सबसे कम रहने का अनुमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/pink-bollworm-and-el-nino-havoc-cotton-production-estimated-to-be-lowest-in-15-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 02 Nov 2023 16:05:00 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/pink-bollworm-and-el-nino-havoc-cotton-production-estimated-to-be-lowest-in-15-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के कपास उत्पादक क्षेत्रों में पिंक बॉलवर्म के भयानक प्रकोप और अल-नीनो के असर से देश का कुल कपास उत्पादन 2023-24 में 15 साल में सबसे कम रहने का अनुमान लगाया गया है। कपास उद्योग के शीर्ष संगठन कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने चालू मार्केटिंग वर्ष में कपास का उत्पादन घटकर 295.1 लाख गांठ (एक गांठ में 170 किलो) रहने का अनुमान लगाया है। इससे पहले 2008-09 में कपास का उत्पादन 290 लाख टन रहा था।</p>
<p>मार्केटिंग वर्ष 2022-23 में कपास का घरेलू उत्पादन 318.9 लाख गांठ रहा था। सीएआई का अनुमान न सिर्फ पिछले साल के उत्पादन से 7.49 फीसदी कम है, बल्कि यह 2023-24 के लिए सरकार द्वार लगाए गए अनुमान से भी कम है। सरकार ने चालू मार्केटिंग वर्ष के लिए 316.5 लाख गांठ कपास का उत्पादन रहने का अनुमान लगाया है।</p>
<p>सीएआई ने चालू मार्केटिंग वर्ष का अपना पहला अनुमान जारी करते हुए कहा, ''2008-09 के बाद कपास का सबसे कम उत्पादन होने का अनुमान है। इस साल कपास की बुवाई का कुल रकबा 5.5 फीसदी कम रहा है। अल-नीनो के कारण प्रतिकूल मौसम और उत्तर भारत में पिंक बॉलवर्म के प्रकोप से उपज में भी 20 फीसदी तक की गिरावट आने की संभावना है।&rdquo;</p>
<p>सीएआई ने उत्तर भारत में उत्पादन 62 लाख टन से घटकर 40 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है। सीएआई के मुताबिक, 2023-24 में गुजरात में 85 लाख गांठ, महाराष्ट्र में 76 लाख गांठ, तेलंगाना में 30 लाख गांठ, कर्नाटक में 18.5 लाख गांठ, मध्य प्रदेश में 18 लाख गांठ और हरियाणा में 16 लाख गांठ कपास का उत्पादन होगा। 1 अक्टूबर को शुरुआती स्टॉक 28.9 लाख गांठ रहने का अनुमान है।</p>
<p>सीएआई ने कहा है कि 2023-24 में कपास का आयात 22 लाख गांठ और निर्यात 14 लाख गांठ होने का अनुमान है। इस वर्ष घरेलू मांग 311 लाख गांठ रहने का अनुमान है और अधिशेष लगभग 35 लाख गांठ रहेगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पिंक बॉलवार्म और अल-नीनो का कहरः कपास उत्पादन 15 साल में सबसे कम रहने का अनुमान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी उत्पादन 8 फीसदी घटने का इस्मा ने लगाया अनुमान, 2023&amp;#45;24 में 337 लाख टन रहेगा कुल उत्पादन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/isma-pegs-8pc-fall-in-gross-sugar-output-for-2023-24.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 02 Nov 2023 14:49:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/isma-pegs-8pc-fall-in-gross-sugar-output-for-2023-24.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चीनी उद्योग के शीर्ष संगठन इस्मा (इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन) ने चालू मार्केटिंग वर्ष 2023-24 में चीनी का कुल उत्पादन 337 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है। यह 2022-23 के कुल उत्पादन 366 लाख टन से करीब 8 फीसदी कम है। इसमें एथनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी भी शामिल है। हालांकि, इस्मा ने दावा किया है कि घरेलू मांग पूरा करने के लिए यह उत्पादन काफी है क्योंकि घरेलू बाजार में चीनी की सालाना औसत खपत 278.5 लाख टन है।</p>
<p>इस्मा ने अपने ताजा अनुमान में यह नहीं बताया है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का डायवर्जन कितना रह सकता है। इससे पहले अगस्त के अपने अनुमान में इस्मा ने एथेनॉल के लिए 41 लाख टन के डायवर्जन अनुमान के साथ चीनी का शुद्ध उत्पादन 328 लाख टन और कुल उत्पादन 369 लाख टन रहने का अनुमान लगाया था।</p>
<p>इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन ने एक बयान में कहा, "2023-24 चीनी सीजन के लिए सकल चीनी उत्पादन लगभग 337 लाख टन होने का अनुमान लगाया गया है।" चीनी मार्केटिंग वर्ष अक्टूबर से सितंबर तक चलता है। इस्मा ने कहा है कि देश की घरेलू खपत औसतन 278.5 लाख टन है। उत्पादन अनुमान घरेलू खपत के लिए पर्याप्त है।</p>
<p>इस्मा ने बयान में कहा है कि दिसंबर में शुरू होने वाले 2023-24 एथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए एथेनॉल खरीद मूल्य की घोषणा के बाद ही एथेनॉल के लिए चीन के डायवर्जन का अनुमान लगाया जाएगा। इस्मा के मुताबिक, देश में गन्ने का कुल रकबा 2023-24 में लगभग 57 लाख हेक्टेयर रहा है।</p>
<p>मार्केटिंग वर्ष 2022-23 में देश से 61 लाख टन चीनी का निर्यात हुआ जो इससे पिछले वर्ष &nbsp;रिकॉर्ड 112 लाख टन रहा था। चीनी उत्पादन घटने की आशंका को देखते हुए सरकार ने अभी तक चालू मार्केटिंग वर्ष के लिए निर्यात की अनुमति नहीं दी है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_6543697e057f4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी उत्पादन 8 फीसदी घटने का इस्मा ने लगाया अनुमान, 2023-24 में 337 लाख टन रहेगा कुल उत्पादन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों को फसलों का बाजिव मूल्य दिलाने को एमएसपी और भावांतर भुगतान योजना एक साथ चलाने की जरूरतः प्रो. रमेश चंद, सदस्य, नीति आयोग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/bhavantar-and-msp-can-go-together-as-price-support-for-farmers-said-niti-aayog-member-chand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 02 Nov 2023 13:32:38 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/bhavantar-and-msp-can-go-together-as-price-support-for-farmers-said-niti-aayog-member-chand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने कहा है कि फसलों के बाजार मूल्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के बीच के अंतर को पाटने के लिए भावांतर भुगतान जैसी योजनाओं के जरिये किसानों को भुगतान किया जाना चाहिए। किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए एमएसपी और भावांतर भुगतान योजना एक साथ चलाई जा सकती हैं।</p>
<p><strong>रूरल वॉयस</strong> के सहयोगी प्रकाशन <strong>रूरल वर्ल्ड</strong> पत्रिका को दिए विशेष इंटरव्यू में प्रोफेसर चंद ने कहा कि कृषि मार्केटिंग अभी भी बहुत ही जटिल मुद्दा है क्योंकि उत्पादन काफी हद तक जलवायु पर निर्भर करता है। जलवायु की वजह से फसलों के उत्पादन में उतार-चढ़ाव होता रहता है। इसका असर किसानों एवं उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ता है। इस उतार-चढ़ाव को तो रोका नहीं जा सकता है, लेकिन बाजार की सही नीतियों के जरिये इसके असर को कम किया जा सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा, &ldquo;किसानों को उनकी उपज के लिए जो कीमत मिलती है उसके दो पहलू हैं। एक तो सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिलता है और दूसरा, बाजार से कीमत मिलती है। ये दोनों एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि पूरक हैं। बाजार प्रतिस्पर्धी हो तो किसानों को वाजिब कीमत मिल जाएगी, लेकिन उत्पादन ज्यादा होने पर प्रतिस्पर्धा के बावजूद कीमत गिर जाती है। इसलिए बाजार में कीमतों के एक तय सीमा से ज्यादा ऊपर या ज्यादा नीचे जाने पर सरकारी हस्तक्षेप की जरूरत पड़ती है।&rdquo;</p>
<p>प्रो. रमेश चंद ने कहा, &ldquo;हमें दो-तीन चीजों का ध्यान रखना चाहिए। एक तो यह है कि हम एमएसपी इतना न बढ़ाएं कि बाजार में यदि किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है, तो एमएसपी उसको नुकसान न पहुंचाए। दूसरा यह कि एमएसपी देने का जरिया क्या है। हमारे देश में इसे ज्यादातर सरकारी खरीद के जरिये दिया जाता है। अनाजों की सरकारी खरीद इसलिए भी जरूरी है कि हमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए अनाज चाहिए। अगर हमें पीडीएस से अलग अनाज की जरूरत है तब हमें दूसरे साधन अपनाने की जरूरत है, जैसे भावांतर भुगतान योजना जिसका आइडिया मैंने बहुत साल पहले दिया था। मध्य प्रदेश और हरियाणा में इस पर थोड़ा अमल हुआ है। इसलिए इस तरह के दूसरे साधनों का भी प्रयोग करना चाहिए जो एमएसपी के नकारात्मक असर को नियंत्रित कर सकते हैं।&rdquo;&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि खाद्य प्रबंधन और खाद्य कीमतों पर नियंत्रण उपभोक्ताओं और किसानों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। किसानों और व्यापारियों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अगर कीमतें तय सीमा के अंदर रहेंगी तो सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी। यदि यह उससे ऊपर या नीचे जाता है तो सरकार अवश्य हस्तक्षेप करेगी। विदेशों में भी अधिकतर सरकारें ऐसा करती हैं।</p>
<p>कृषि सब्सिडी और किसानों को सीधे नगद हस्तांरण किए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, &ldquo;दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं। सब्सिडी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह उत्पादन को प्रोत्साहित करता है, क्योंकि ज्यादातर सब्सिडी इनपुट पर दी जाती है। जो किसान इनपुट का इस्तेमाल नहीं करते हैं उन्हें सब्सिडी नहीं मिलती है, जबकि नगद हस्तांरण सभी के लिए है और वह चाहे जिस तरीके से इसे खर्च करे। सब्सिडी से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि सब्सिडी देने का तरीका क्या है और किस चीज पर दी जाती है, क्योंकि सब्सिडी देने से अधिक सब्सिडी वितरण के तरीके से इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, हम किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली देते हैं, लेकिन इससे पानी का उपयोग अधिक होगा और भूजल स्तर नीचे चला जाएगा। इस तरह दोनों के नकारात्मक और सकारात्मक पहलू हैं। हमें सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।&rdquo;</p>
<p>नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद दुनिया के जाने-माने एग्रीकल्चरल इकोनॉमिस्ट हैं। देश की कृषि नीतियों के निर्धारण में हमेशा उनकी छाप दिखती है। एग्रीकल्चरल इकोनॉमिस्ट होने के नाते उन्होंने कई पेपर और किताबें लिखी हैं। हाल ही में हरित क्रांति और अमृत काल को लेकर भारतीय कृषि पर उनका महत्वपूर्ण पेपर आया है, जिसमें उन्होंने देश के कृषि क्षेत्र के भविष्य का रोडमैप रखने की कोशिश की है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों को फसलों का बाजिव मूल्य दिलाने को एमएसपी और भावांतर भुगतान योजना एक साथ चलाने की जरूरतः प्रो. रमेश चंद, सदस्य, नीति आयोग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि केंद्रित विकास से ही भारत बनेगा विकसितः प्रो. रमेश चंद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-will-become-developed-only-through-agriculture-centric-development-said-prof-ramesh-chand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 01 Nov 2023 13:26:09 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-will-become-developed-only-through-agriculture-centric-development-said-prof-ramesh-chand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने कहा है कि विकसित भारत बनाने के लिए हमें अपनाना मॉडल विकसित करना होगा। चूंकि हमारी 60 फीसदी से ज्यादा आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है और इनमें से ज्यादातर कार्यबल खेती-किसानी और इससे जुड़े क्षेत्रों में काम कर रही है, इसलिए हमें कृषि केंद्रित विकास का मॉडल अपनाने की जरूरत है। एजेंडा फॉर रूरल इंडिया- नई दिल्ली के राष्ट्रीय आयोजन को बुधवार को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। इस मौके पर कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी त्रैमासिक पत्रिका रूरल वर्ल्ड को भी लॉन्च किया जो रूरल वॉयस का सहयोगी प्रकाशन है।</p>
<p>प्रोफेसर रमेश चंद ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के बावजूद कृषि का दबदबा कायम रहेगा। उन्होंने कहा, "पहले ग्रामीण विकास केवल कृषि तक ही सीमित था, लेकिन अब इसका क्षेत्र बढ़ गया है। हालांकि, ग्रामीण विकास पर कृषि का वर्चस्व बरकरार रहेगा क्योंकि ग्रामीण विकास और कृषि दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और इन्हें एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है।"</p>
<p>नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) में आयोजित कार्यक्रम में 'रूरल वर्ल्ड' पत्रिका लॉन्च करते हुए कहा कि पत्रिका के संपादक हरवीर सिंह द्वारा की गई यह शुरुआत &nbsp;अत्यंत सामयिक है। प्रोफेसर चंद ने कहा कि 1961 में भारत की 82% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती थी, लेकिन अब यह आंकड़ा घटकर 64% रह गया है। 2047 तक यह और भी कम हो जाएगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के समावेशी विकास को ध्यान में रखते हुए भारत का एक विकास मॉडल तैयार करना होगा। उन्होंने कृषि के महत्व को देखते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर समग्रता से चर्चा करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कृषि केंद्रित रोजगार को ध्यान में रखते हुए कृषि केंद्रित विकास के बारे में सोचा जाए।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_6542038c0c17a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि केंद्रित विकास से ही भारत बनेगा विकसितः प्रो. रमेश चंद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[‘एजेंडा फॉर रूरल इंडिया’ का राष्ट्रीय आयोजन आज, ‘रूरल वर्ल्ड’ पत्रिका की भी होगी लांचिंग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/national-conclave-on-agenda-for-rural-india-new-delhi-today-rural-world-magazine-will-also-be-released.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 01 Nov 2023 06:34:40 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/national-conclave-on-agenda-for-rural-india-new-delhi-today-rural-world-magazine-will-also-be-released.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">&lsquo;एजेंडा फॉर रूरल इंडिया&rsquo; श्रृंखला के तहत बुधवार को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसका मकसद ग्रामीण भारत की वर्तमान स्थिति पर अपनी राय व्यक्त करने के लिए ग्रामीण नागरिकों को एक मंच पर लाना है। इस श्रृंखला के तहत डिजिटल मीडिया संगठन <strong>रूरल वॉयस</strong> और गैर-सरकारी संगठन <strong>सॉक्रेटस</strong> ने अलग-अलग </span><span style="font-weight: 400;">कृषि-जलवायु, आर्थिक शक्ति और फसल पैटर्न वाले पांच राज्यों में सम्मेलन का आयोजन किया था। </span><span style="font-weight: 400;">नई दिल्ली में आयोजित हो रहा सम्मेलन इस श्रृंखला की आखिरी कड़ी है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस दौरान रूरल वॉयस मीडिया प्रा. लिमिटेड की ओर से कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों पर आधारित त्रैमासिक पत्रिका रूरल वर्ल्ड को भी जारी किया जाएगा। नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति इस पत्रिका का विमोचन करेंगे। इस एकदिवसीय कार्यक्रम में पैनल चर्चा के कई सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन पैनल चर्चाओं में &lsquo;ग्रामीण भारत कैसे बदल रहा है&rsquo;, &lsquo;ग्रामीण भारत में मीडिया और सिविल सोसायटी की भूमिका&rsquo;, &lsquo;ग्रामीण भारत अपने जनप्रतिनिधियों से क्या चाहता है&rsquo; और &lsquo;ग्रामीण भारत में बदलाव को किसान संगठन कैसे स्वीकार कर रहे हैं&rsquo; जैसे विषय शामिल किए गए हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पिछले छह माह के दौरान आयोजित &lsquo;ग्रामीण भारत का एजेंडा&rsquo; सम्मेलनों का उद्देश्य ग्रामीण परिदृश्य में पिछले 15 वर्षों में हुए परिवर्तनों से संबंधित स्थानीय प्रतिक्रियाओं और चिंताओं का पता लगाना था। ये सम्मेलन 5 स्थानों पर आयोजित किए गए। प्रत्येक सम्मेलन में आसपास के 10-11 जिलों से लोग एकत्र हुए। ये सम्मेलन भुवनेश्वर, कोयंबटूर, जोधपुर, मुजफ्फरनगर और शिलांग में आयोजित किए गए थे जहां कृषि एवं ग्रामीण विषयों सहित ग्रामीणों को प्रभावित करने वाले विविध मुद्दों पर चर्चा की गई। जिन राज्यों में ये सम्मेलन आयोजित किए वे&nbsp; सांस्कृतिक, आर्थिक, कृषि-जलवायु और राजनीतिक रूप से एक दूसरे से पूरी तरह से अलग हैं। इन सम्मेलनों में देशभर के 60 जिलों से 300 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इन चर्चाओं में कृषि क्षेत्र के लिए जो जोखिम उभर कर सामने आए, उनमें कर्ज का बढ़ता स्तर, श्रमिकों की मजदूरी समेत बढ़ती इनपुट लागत, नकली कीटनाशकों की बेरोकटोक बिक्री, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, उपज की उचित कीमत न मिलना और राजनीतिक उदासीनता शामिल हैं। </span><span style="font-weight: 400;">स</span><span style="font-weight: 400;">म्मेलनों में विभिन्न पेशे के लोगों ने भाग लिया। उनमें किसान, स्थानीय व्यापारी और व्यवसायी, स्वयं सहायता समूहों के सदस्य, स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधि, स्थानीय सरकारी अधिकारी, मजदूर और प्रवासी, कॉलेज छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और सेवा क्षेत्र के पेशेवर शामिल थे। सम्मेलन में यह सुनिश्चित भी किया गया कि सभी लिंग और सामाजिक समूहों के लोग उपस्थित हों।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ‘एजेंडा फॉर रूरल इंडिया’ का राष्ट्रीय आयोजन आज, ‘रूरल वर्ल्ड’ पत्रिका की भी होगी लांचिंग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की खराब हवा पर जताई नाराजगी, गुणवत्ता सुधारने के कदमों पर हलफनामा दाखिल करने का 5 राज्यों को निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sc-laments-delhi-air-pollution-asks-5-states-to-file-affidavits-on-remedial-steps.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 31 Oct 2023 16:58:34 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sc-laments-delhi-air-pollution-asks-5-states-to-file-affidavits-on-remedial-steps.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों को हलफनामा दायर कर यह बताने का निर्देश दिया है कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उन्होंने क्या-क्या उपाय किए हैं। सर्वोच्च अदालत ने इस बात पर अफसोस जताया कि कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) द्वारा कई कदम उठाए जाने के बावजूद राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण बना हुआ है।</p>
<p>दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) लगातार चौथे दिन मंगलवार को "बहुत खराब" श्रेणी में रहा और कई इलाकों में "गंभीर" श्रेणी में दर्ज किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की हवा खराब करने में धान की पराली जलाने को एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में माना है। इसके अलावा, यह पाया है कि पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी की खबरें आ रही हैं।</p>
<p>एसएएफएआर के आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी में 24 घंटे का औसत एक्यूआई 327 दर्ज किया गया। मंगलवार सुबह दिल्ली स्थित इंडिया गेट प्रदूषण की वजह से पूरी तरह ढक गया। दिल्ली के पूसा रोड और लोधी रोड क्षेत्रों में एक्यूआई स्तर क्रमशः 300 और 306 दर्ज किया गया और दोनों 'बहुत खराब' श्रेणी में आते हैं।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुछ दशक पहले तक यह (अक्टूबर-नवंबर) दिल्ली का सबसे अच्छा समय हुआ करता था, मगर अब शहर की हवा खराब हो गई है और घर से बाहर कदम रखना मुश्किल हो गया है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसके कौल की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने पांचों राज्यों को एक हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। पीठ ने कहा, "संबंधित राज्यों को एक हलफनामा दायर करना चाहिए जिसमें बताया जाए कि उन्होंने स्थिति को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए हैं। हम दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते &nbsp;हैं।" पीठ के अन्य जजों में न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति पीके मिश्रा शामिल हैं। पीठ मामले की अगली सुनवाई 7 नवंबर तय की है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने सीएक्यूएम को भी निर्देश दिया है कि वह समस्या शुरू होने की अवधि, वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) जैसे मापदंडों और पराली जलाने की घटनाओं की संख्या सहित वर्तमान जमीनी स्थिति की रिपोर्ट &nbsp;सारणीबद्ध रूप में कोर्ट में पेश करे। पीठ ने कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण का एक मुख्य कारण पराली जलाना है। शीर्ष अदालत ने इससे पहले दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर सीएक्यूएम से रिपोर्ट मांगी थी।</p>
<p>दिल्ली में हवा की गुणवत्ता खराब होने को देखते हुए सीएक्यूएम ने 6 अक्टूबर को सरकारी अधिकारियों को होटल और रेस्तरां में कोयले के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों और थर्मल पावर प्लांटों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया था। ये निर्देश प्रदूषण नियंत्रण योजना के तहत जारी किए गए थे जिसे 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (जीआरएपी) के नाम से जाना जाता है।</p>
<p>सीएक्यूएम एक स्वायत्त संस्था है जिसका काम दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता में सुधार लाना है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की खराब हवा पर जताई नाराजगी, गुणवत्ता सुधारने के कदमों पर हलफनामा दाखिल करने का 5 राज्यों को निर्देश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज के न्यूनतम निर्यात मूल्य से थोक में घटे दाम, खुदरा भाव अब भी 80 रुपये किलो]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/onion-wholesale-prices-reduced-due-to-minimum-export-price-retail-price-still-rs-80-per-kg.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 31 Oct 2023 14:19:45 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/onion-wholesale-prices-reduced-due-to-minimum-export-price-retail-price-still-rs-80-per-kg.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्याज का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) 800 डॉलर प्रति टन तय करने के सरकार के फैसले के बाद थोक मंडियों में दाम में कमी आई है, मगर इसका फायदा उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा है। खुदरा बाजार में अभी भी प्याज 70-80 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। थोक और खुदरा बाजार में प्याज की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार ने 28 अक्टूबर को न्यूनतम निर्यात मूल्य तय करने का फैसला किया था।</p>
<p>एनसीसीएफ और नेफेड द्वारा बफर स्टॉक से प्याज जारी करने की मात्रा बढ़ाए जाने के बाद मंडियों में आवक बढ़ गई है जिसका असर थोक भाव पर पड़ा है। हालांकि, विशेषज्ञ बता रहे हैं कि यह गिरावट अस्थायी है। एमईपी तय किए जाने का बाजार के सेंटीमेंट पर असर पड़ा है जो कुछ दिनों तक रह सकता है। नई फसल आने के बाद ही कीमतों में स्थायी गिरावट आने की संभावना है। नई फसल दिवाली के बाद ही आएगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, एनसीसीएफ और नेफेड अगस्त से ही बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतार रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों में बफर स्टॉक से प्याज जारी करने की मात्रा घट गई थी जिससे कीमतों में तेजी देखने को मिली।</p>
<p>केंद्र सरकार ने दावा किया है कि एमईपी तय करने से महाराष्ट्र में थोक कीमतों में 5-9 फीसदी तक की गिरावट आई है। महाराष्ट्र की सभी मंडियों में औसत थोक कीमतों में 4.5 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। हालांकि, थोक में दाम घटने के बावजूद देश के ज्यादातर शहरों में प्याज 70-80 रुपये प्रति किलो ही बिक रहा है। खुद केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़े भी कह रहे हैं कि सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्याज का औसत खुदरा भाव 78 रुपये प्रति किलो था। जबकि अखिल भारतीय स्तर पर औसत भाव 50.35 रुपये प्रति किलो रहा। आंकड़ों के मुताबिक, प्याज की अधिकत खुदरा कीमत 83 रुपये और न्यूनतम 17 रुपये किलो रही।</p>
<p>उपभोक्ताओं को किफायती कीमत पर प्याज उपलब्ध कराने के लिए एनसीसीएफ और नेफेड की ओर से मोबाइल वैन के जरिये भी प्याज की बिक्री की जा रही है। देश के 170 शहरों में 685 मोबाइल वैन के जरिये 25 रुपये प्रति किलो पर प्याज की खुदरा बिक्री की जा रही है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e348d7ac63f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज के न्यूनतम निर्यात मूल्य से थोक में घटे दाम, खुदरा भाव अब भी 80 रुपये किलो ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खाद्य पदार्थों की बर्बादी कम करने को हो टेक्नोलॉजी का इस्तेमालः शोभा करंदलाजे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/technology-should-be-used-to-reduce-food-wastage-said-shobha-karandlaje.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 31 Oct 2023 13:04:45 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/technology-should-be-used-to-reduce-food-wastage-said-shobha-karandlaje.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा है कि खाद्य पदार्थों के नुकसान और बर्बादी को रोकना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। दुनिया में लगभग 3 अरब टन खाद्य पदार्थों की बर्बादी होती है। टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से विकसित और विकासशील देश इस बर्बादी को रोकने के उपाय कर सकते हैं। उन्होंने कि सामाजिक संगठनों को भी विभिन्न हितधारकों के बीच जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की जरूरत है और भोजन की बर्बादी को कम करने के तरीकों को अपनाना चाहिए। भारत में सालाना 7.4 करोड़ टन खाद्य पदार्थों का नुकसान होता है।</p>
<p>नई दिल्ली में&nbsp;'साउथ एशियन रीजन में फूड लॉस एंड वेस्ट प्रीवेंशन'&nbsp;विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला&nbsp;<span>का उद्घाटन करते हुए उन्होंने यह बात कही। इस कार्यशाला का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और जर्मनी के थुनेन संस्थान</span>&nbsp;द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस कार्यक्रम में &nbsp;भारत, बांग्लादेश, भूटान, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, नेपाल और श्रीलंका के लगभग&nbsp;120&nbsp;<span>प्रतिनिधि मौजूद रहे।</span></p>
<p>कार्यशाला को संबोधित करते हुए शोभा करंदलाजे ने कहा कि दुनिया भर में लगभग&nbsp;3&nbsp;<span>अरब टन खाद्य पदार्थों की बर्बादी होती है। विकसित और विकासशील देशों की उपयुक्त प्रौद्योगिकियों और कार्यप्रणालियों को आगे लाया जाना चाहिए ताकि समाज स्वीकार्य तरीकों का उपयोग करके दुनिया भर में हो रही खाद्य पदार्थों की हानि और बर्बादी को कम किया जा सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सामाजिक संगठनों को विभिन्न हितधारकों के बीच जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की जरूरत है और खाद्य-पदार्थों की बर्बादी को कम करने के तौर-तरीकों को अपनाना चाहिए। </span></p>
<p>उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों की बर्बादी न केवल उपभोक्ताओं के लिए नुकसानदेह है,&nbsp;बल्कि इसका पर्यावरण एवं पूरक अर्थव्यवस्थाओं पर भी असर पड़ता है। दक्षिण एशिया खाद्यान्न का एक प्रमुख उत्पादक होने के साथ-साथ उपभोक्ता भी है और खाद्य-पदार्थों की हानि और बर्बादी को कम करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी के साथ-साथ आर्थिक जरूरत भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि खाद्य-पदार्थों की बर्बादी करना एक अपराध है और सभी को अपने बच्चों को खाद्य-पदार्थों को बर्बाद नहीं करने के महत्व के बारे में बताने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p>जर्मनी के थुनेन इंस्टीट्यूट के अनुसंधान निदेशक डॉ. स्टीफन लैंग कहा कि खाद्य पदार्थों की हानि और बर्बादी को कम करने एवं रोकने से ही जरूरतमंदों तक खाद्य पदार्थों का पहुंचना सुनिश्चित होगा। उन्होंने बताया कि&nbsp;&ldquo;खाद्य-पदार्थों की हानि और बर्बादी पर एक सहयोगात्मक पहल&rdquo;&nbsp;<span>खाद्य-पदार्थों की हानि और बर्बादी की समस्या से निपटने में अनुसंधान परिणामों और व्यावहारिक अनुभव के वैश्विक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। भारत सरकार खाद्य-पदार्थों की हानि और बर्बादी को रोकने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर और सहयोगी प्रयासों को शुरू करने में सभी पड़ोसी देशों को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।</span></p>
<p>संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम,&nbsp;फ्रांस की क्लेमेंटाइन ओकॉनर ने कहा कि महामारी,&nbsp;जलवायु परिवर्तन और युद्धों का भी खाद्य-पदार्थों की हानि और बर्बादी पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने याद दिलाया कि&nbsp;2030&nbsp;<span>तक खाद्य पदार्थों की हानि को कम करके आधा करने के लक्ष्य</span>&nbsp;12.3&nbsp;<span>के सतत विकास को हासिल करने के लिए केवल कुछ ही साल बचे हैं।</span></p>
<p>फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान और खाद्य पदार्थों की बर्बादी दुनिया के भौगोलिक क्षेत्रों में अलग-अलग होती हैं। यह काफी हद तक फसलों और वस्तुओं,&nbsp;भंडारण की अवधि,&nbsp;जलवायु,&nbsp;तकनीकी उपाय,&nbsp;मानव व्यवहार,&nbsp;परंपराओं आदि पर निर्भर करता है। भारत में हर साल लगभग&nbsp;7.4&nbsp;<span>करोड़ टन खाद्य-पदार्थों का नुकसान होता है। अगर इसे रोका जाए,</span>&nbsp;तो इससे काफी लोग लाभान्वित होंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खाद्य पदार्थों की बर्बादी कम करने को हो टेक्नोलॉजी का इस्तेमालः शोभा करंदलाजे ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बजाज हिंदुस्तान शुगर के खिलाफ एसबीआई की याचिका एनसीएलटी में खारिज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sbi-petition-against-bajaj-sugar-rejected-in-nclt.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 30 Oct 2023 12:50:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sbi-petition-against-bajaj-sugar-rejected-in-nclt.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने बजाज हिंदुस्तान शुगर के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी है। यह मामला बजाज शुगर द्वारा लिए कर्ज से जुड़ा था जिसका भुगतान कंपनी कर चुकी है।</p>
<p>बजाज हिंदुस्तान शुगर पर बैंकों का लगभग 4,771 करोड़ रुपये बकाया था और उसने दो कर्ज-पुनर्गठन योजनाओं का लाभ उठाया था। एसबीआई का सबसे ज्यादा करीब 1,192 करोड़ रुपये बकाया था। मामले को एनसीएलटी में ले जाने से पहले बैंकों ने बजाज हिंदुस्तान शुगर के कर्ज को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिया था।</p>
<p>बजाज समूह के प्रवक्ता और ग्रुप प्रेसीडेंट एवं चीफ कम्युनिकेशंस ऑफिसर नीरज जा ने इस पर प्रतिकिया देते हुए कहा, यह हमारे लिए अत्यंत सुखद अनुभूति है। इसके लिए हम सभी का आभार व्यक्त करते हैं क्योंकि कंपनी के कठिन समय और विपरीत परिस्थितियों में सबने हमारा बखूबी साथ निभाया। उस समय हमारा सब कुछ दांव पर लगा था, लेकिन इस सबके बावजूद कंपनी की प्रतिष्ठा हमारे लिए सर्वोपरि रही। इस विशेष अवसर पर हम सभी कर्जदाताओं और हितधारकों को हम पर अटूट विश्वास रखने के लिए दिल से धन्यवाद देते हैं।<br />उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि यह फैसला हमारे सभी हितधारकों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा, जिसमें हमारे कर्जदाता, सरकारें और उनकी एजेंसियां, हमारे कर्मचारी, हितधारक और निवेशक तथा सबसे महत्वपूर्ण हमसे जुड़े लाखों गन्ना किसान शामिल हैं।</p>
<p>बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड चीनी एवं एथेनॉल उद्योग की बड़ी कंपनी है। कंपनी उत्तर प्रदेश में 14 चीनी मिलों का संचालन करती है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बजाज हिंदुस्तान शुगर के खिलाफ एसबीआई की याचिका एनसीएलटी में खारिज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कार्बन कैप्चर की गति बेहद धीमी, 2.5 डिग्री बढ़ सकता है वातावरण का तापमान, कृषि के लिए खतरा बढ़ेगा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/carbon-capture-to-urgently-scale-to-7-billion-tonnes-per-year-to-hit-net-zero.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 29 Oct 2023 11:58:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/carbon-capture-to-urgently-scale-to-7-billion-tonnes-per-year-to-hit-net-zero.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">जलवायु परिवर्तन से भले ही भारत समेत दुनिया भर में कृषि क्षेत्र प्रभावित हो रहा हो, लेकिन अभी तक इसे रोकने के लिए उठाए गए कदम अपर्याप्त हैं। वर्ष 2050 तक विश्व स्तर पर नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए हर साल 700 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड को कैप्चर करने की जरूरत है। इस समय कार्बन कैप्चर की दिशा में जो कदम उठाए गए हैं, उनसे 2050 तक सालाना 200 करोड़ टन कार्बन ही वातावरण से हटाया जा सकेगा। अगर मौजूदा स्थिति जारी रही तो वातावरण का तापमान औद्योगीकरण की शुरुआत होने से पहले की तुलना में 2.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा, जबकि इसे 1.5 डिग्री सेल्सियस तक रोकने का लक्ष्य है। कार्बन क्रेडिट्स डॉट कॉम ने वुड्स मैकेंजी रिसर्च के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में यह बात कही है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इसमें कहा गया है कि 1.5 डिग्री सेल्सियस के महत्वपूर्ण लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें सदी के मध्य तक सालाना 700 करोड़ टन कार्बन कैप्चर करना पड़ेगा। कार्बन कैप्चर यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) कॉन्फ्रेंस में वुड्स मैकेंजी के प्रतिनिधि ने कहा, हमें अपनी इंडस्ट्री और पावर सेक्टर से बड़ी मात्रा में कार्बन कैप्चर करने की जरूरत है। सिर्फ ग्रीन इलेक्ट्रिफिकेशन अथवा ऐसे विकल्पों से यह संभव नहीं है। वातावरण का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ने तक सीमित रखने के लिए हमें जमीनी स्तर पर तत्काल कदम उठाने पड़ेंगे।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x_653dfb04d2de2.jpg" alt="" /></p>
<p><em><strong>साभारः https://carboncredits.com/</strong></em></p>
<p><span style="font-weight: 400;">वुड्स मैकेंजी इस समय हर साल 140 करोड़ टन सीसीयूएस क्षमता की मॉनीटरिंग कर रही है। इसमें कार्बन कैप्चर, ट्रांसपोर्टेशन और स्टोरेज समेत हर तरह के प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसमें सबसे अधिक 33% हिस्सेदारी अमेरिका की है। उसके बाद इंग्लैंड की 14 प्रतिशत, कनाडा की 12 प्रतिशत, ऑस्ट्रेलिया की 6 प्रतिशत, रूस की पांच प्रतिशत और चीन की सिर्फ दो प्रतिशत है। भारत समेत अन्य देशों का हिस्सा 17% है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ सीसीयूएस प्रोजेक्ट आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं हैं, लेकिन अगर उनके मुनाफे में आने का इंतजार किया गया तो जलवायु परिवर्तन के लक्ष्य को हासिल करना अधिक मुश्किल हो जाएगा। जलवायु परिवर्तन के असर से जो संकट पैदा होंगे उसके आर्थिक नुकसान ज्यादा होंगे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">संयुक्त राष्ट्र के आईपीसी तथा अन्य महत्वपूर्ण संगठनों का मानना है कि कार्बन उत्सर्जन कम करने और वातावरण का तापमान बढ़ने से रोकने में सीसीयूस की बड़ी भूमिका है। इसे कैप्चर करना पेरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण है। सीसीसीयूएस कार्बन हटाने की एक टेक्नोलॉजी है। हाल के वर्षों में सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों के निवेशकों ने इसमें काफी रुचि दिखाई है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_653dfb094f4ae.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कार्बन कैप्चर की गति बेहद धीमी, 2.5 डिग्री बढ़ सकता है वातावरण का तापमान, कृषि के लिए खतरा बढ़ेगा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज का न्यूनतम निर्यात मूल्य 800 डॉलर प्रति टन हुआ तय, कीमतों पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना फिलहाल कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-imposes-minimum-export-price-of-usd-800-per-tonne-on-onion-till-dec-31.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 28 Oct 2023 20:53:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-imposes-minimum-export-price-of-usd-800-per-tonne-on-onion-till-dec-31.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>शतकवीर बनने की ओर अग्रसर प्याज की कीमतों को थामने के लिए सरकार ने प्याज का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) 800 डॉलर प्रति टन तय कर दिया है। किलो में यह 67 रुपये प्रति किलो बैठता है यानी इस कीमत से कम मूल्य पर प्याज का निर्यात नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, सरकार ने पहले से प्याज के निर्यात पर 40 फीसदी शुल्क लगा रखा है जिससे निर्यात लगभग ठप है। विशेषज्ञ बता रहे हैं कि सरकार के इस कदम का कीमतों पर फिलहाल बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और अभी करीब एक महीने तक महंगे प्याज से उपभोक्ताओं का सामना होता रहेगा।</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के एक बयान में कहा गया है कि यह फैसला 29 अक्टूबर से 31 दिसंबर, 2023 तक प्रभावी रहेगा। घरेलू बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने बफर स्टॉक के तहत 2 लाख टन अतिरिक्त प्याज खरीदने का भी फैसला किया है। इस साल अभी तक बफर स्टॉक के लिए 5 लाख टन प्याज की सरकारी खरीद हो चुकी है जिसमें से 1.70 लाख टन बाजार में उतारा जा चुका है। एनसीसीएफ और नेफेड के जरिये देश के चुनिंदा बाजारों में उपभोक्ताओं को 25 रुपये प्रति किलो की दर पर किफायती प्याज मुहैया कराया जा रहा है।</p>
<p>शेतकारी संगठन के पूर्व अध्यक्ष और भारत स्वतंत्र पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष अनिल घनवत ने <strong>रूरल वॉयस</strong> से कहा, &ldquo;सरकार के इस कदम का कीमतों पर फिलहाल ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि जब स्टॉक है ही नहीं तो कोई भी कदम उठाया जाए कीमतों को बढ़ने से रोकना मुश्किल है। वैसे भी प्याज निर्यात भारी भरकम शुल्क की वजह से पहले से लगभग ठप ही है। नई फसल आने के बाद ही कीमतें नियंत्रण में आ सकती है। इसके अलावा, कीमतों को थामने के लिए आयात ही एकमात्र विकल्प है लेकिन शिपमेंट आने और आयातित प्याज के उपभोक्ताओं तक पहुंचने में भी करीब-करीब एक महीने लग ही जाएंगे।&rdquo; &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>राजधानी दिल्ली सहित देश के ज्यादातर इलाकों में प्याज की खुदरा कीमत 70-90 रुपये प्रति किलो पर पहुंच चुकी है। इसकी सबसे बड़ी वजह रबी की प्याज के स्टॉक का लगभग खत्म होना और खरीफ की नई फसल आने में देरी होना है। आमतौर पर इस समय तक खरीफ की नई फसल आ जाती थी लेकिन इस बार मानसून की अनियमितता के चलते खरीफ की बुवाई में देरी हुई जिससे कटाई में देरी हो रही है। खरीफ की नई फसल आने में अभी दो-तीन हफ्ते की देर है। तब तक उपभोक्ताओं को महंगा प्याज ही खाना पड़ेगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e3179e46aad.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज का न्यूनतम निर्यात मूल्य 800 डॉलर प्रति टन हुआ तय, कीमतों पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना फिलहाल कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e3179e46aad.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मानसून की कम बारिश का खरीफ की धान पर पड़ा असर, पहले अग्रिम अनुमान में उत्पादन घटकर 10.63 करोड़ टन रहने की संभावना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/first-advance-foodgrains-production-estimate-paddy-production-is-likely-to-decline-to-10-cr-63-lakh-tonnes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 28 Oct 2023 13:24:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/first-advance-foodgrains-production-estimate-paddy-production-is-likely-to-decline-to-10-cr-63-lakh-tonnes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अल नीनो के चलते इस साल मानसून की बारिश प्रभावित होने का असर धान उत्पादन पर पड़ने की संभावना की पुष्टि सरकार ने भी कर दी है। इसे देखते हुए सरकार ने फसल वर्ष 2023-24 के खरीफ सीजन में धान उत्पादन का अनुमान 10.63 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया है। यह पिछले फसल वर्ष के समान सीजन के उत्पादन 11.05 करोड़ टन से 3.79 फीसदी कम है। धान खरीफ सीजन की मुख्य फसल है।</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने फसल वर्ष 2023-24 (<span>जुलाई-जून) की प्रमुख खरीफ फसलों के उत्पादन का पहला अग्रिम अनुमान जारी कर दिया। इसके मुताबिक, खरीफ खाद्यान्नों का उत्पादन 14.85 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया गया है। अग्रिम अनुमान के मुताबिक, खरीफ की प्रमुख फसल धान का रकबा पिछले वर्ष के अंतिम अनुमान से लगभग </span>2<span> लाख हेक्टेयर और औसत रकबे से लगभग </span>4.5<span> लाख हेक्टेयर अधिक रहा है। इसका उत्&zwj;पादन भी औसत खरीफ धान उत्पादन की तुलना में लगभग </span>1<span> लाख टन अधिक अनुमानित है।</span></p>
<p>कृषि मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि खरीफ की प्रमुख दलहन फसल तूर (अरहर) का उत्पादन 34.21 <span>लाख टन अनुमानित है जो पिछले वर्ष के उत्पादन के लगभग बराबर है। जबकि मूंग का उत्पादन 14.05 लाख टन होने का अनुमान है। इसके अलावा</span>, <span>उड़द का उत्पादन 15.05 लाख टन अनुमानित है। वर्ष </span>2023-24 <span>के दौरान कुल खरीफ दलहन उत्पादन </span>71.18 <span>लाख टन अनुमानित है।</span></p>
<p>पहले अग्रिम अनुमान में खरीफ की तिलहन फसलों का उत्पादन&nbsp;215.33&nbsp;<span>लाख टन रहने का अनुमान जताया गया है। खरीफ की प्रमुख तिलहन फसल मूंगफली का उत्पादन </span>78.29 <span>लाख टन और सोयाबीन का उत्पादन </span>115.28 <span>लाख टन रहना अनुमानित है।</span></p>
<p>इसी तरह, खरीफ का मक्का और ज्वार का रकबा पिछले वर्ष के रकबे और इन फसलों के औसत रकबे की तुलना में अधिक अनुमानित है। खरीफ मक्का का उत्&zwj;पादन 213.51<span> लाख टन औसत उत्पादन की तुलना में लगभग </span>11<span> लाख टन अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है। इसका उत्पादन </span>224.82<span> लाख टन अनुमानित है। बयान के मुताबिक, वर्ष </span>2023-24 <span>के दौरान मोटे अनाजों का उत्पादन </span>351.37 <span>लाख टन अनुमानित है जो </span>350.91 <span>लाख टन औसत उत्पादन की तुलना में थोड़ा अधिक है। </span></p>
<p>नकदी फसलों में गन्&zwj;ने का उत्&zwj;पादन 43<span>.</span>47<span> करोड़ टन अनुमानित है जो </span>42<span>.</span>22<span> करोड़ टन औसत गन्ना उत्पादन से अधिक है। कपास का उत्पादन </span>316.57 <span>लाख गांठे (प्रत्येक </span>170 <span>किलोग्राम) और&nbsp; पटसन और मेस्ता का उत्पादन </span>91.91<span> लाख गांठे (प्रत्येक </span>180 <span>किलोग्राम) अनुमानित है। वर्ष </span>2023-24 (<span>केवल खरीफ) के लिए यह पहला उत्पादन अनुमान मुख्य रूप से</span>&nbsp;<span>पिछले </span>3 <span>वर्षों की औसत उपज पर आधारित है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_651e99063c4a3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मानसून की कम बारिश का खरीफ की धान पर पड़ा असर, पहले अग्रिम अनुमान में उत्पादन घटकर 10.63 करोड़ टन रहने की संभावना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_651e99063c4a3.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ओएमएसएस के तहत गेहूं की ई&amp;#45;नीलामी में अब 200 टन तक की बोली लगा सकेंगे खरीदार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/under-omss-buyers-will-now-bid-up-to-200-tonnes-e-auction-of-wheat.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 27 Oct 2023 17:08:46 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/under-omss-buyers-will-now-bid-up-to-200-tonnes-e-auction-of-wheat.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खुले बाजार में गेहूं की उपलब्धता बढ़ाने और गेहूं की कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकार खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत केंद्रीय पूल से ई-नीलामी कर रही है। 31 मार्च, 2024 तक चलने वाली इस नीलामी में प्रत्येक नीलामी के लिए गेहूं की मात्रा को 2 लाख टन से बढ़ाकर 3 लाख टन कर दिया गया है। साथ ही, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा की जा रही इस नीलामी में 1 नवंबर से खरीदार 200 टन तक के लिए बोली लगा सकेंगे। पहले यह मात्रा अधिकतम 100 टन तक थी।</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के एक बयान में बिक्री और बोली के लिए गेहूं की मात्रा बढ़ाने संबंधी जानकारी दी गई है। चावल, <span>गेहूं और आटे की खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बाजार में हस्तक्षेप की सरकार की पहल के तहत गेहूं और चावल दोनों की साप्ताहिक ई-नीलामी आयोजित की जाती है। </span>2023-24 <span>की </span>18<span>वीं ई-नीलामी </span>26<span> अक्टूबर को आयोजित की गई थी। इस दौरान देश भर के </span>444 <span>डिपो से </span>2.01 <span>लाख टन गेहूं की बिक्री की गई। </span></p>
<p>बयान के मुताबिक, ई-नीलामी में गेहूं के लिए 2763 <span>सूचीबद्ध खरीददारों ने भाग लिया और </span>2318 <span>सफल बोली लगाने वालों को </span>1.92 <span>लाख टन गेहूं बेचा गया। एफएक्यू गेहूं के लिए भारित औसत विक्रय मूल्य </span>2251.57<span> रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि आरक्षित मूल्य &nbsp;</span>2150<span> रुपये प्रति क्विंटल था। यूआरएस गेहूं का भारित औसत बिक्री मूल्य आरक्षित मूल्य </span>2125<span> रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले </span>2317.85<span> रुपये प्रति क्विंटल था।</span></p>
<p>स्टॉक की जमाखोरी से बचने के लिए बड़े व्यापारियों को ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री से बाहर रखा गया है। ओएमएसएस के तहत गेहूं खरीदने वाले प्रोसेसरों की आटा मिलों पर नियमित जांच भी की जा रही है। 26<span> अक्टूबर तक देशभर में </span>1627 <span>जांच किए जा चुके है।&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ओएमएसएस के तहत गेहूं की ई-नीलामी में अब 200 टन तक की बोली लगा सकेंगे खरीदार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज अभी और होगा महंगा, जानिए कब तक आएगी नई फसल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/onion-will-become-more-expensive-know-when-will-the-new-crop-arrive.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 27 Oct 2023 14:34:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/onion-will-become-more-expensive-know-when-will-the-new-crop-arrive.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्याज पर 40 फीसदी निर्यात शुल्क लगाए जाने के बाद करीब डेढ़ महीने तक तो भाव स्थिर रहे लेकिन अब फिर से बढ़ने शुरू हो गए हैं। महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों की कृषि उपज मंडियों में प्याज के थोक मूल्य में पिछले चार-पांच दिनों में 50 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। इसकी वजह से खुदरा बाजार में गुणवत्ता के लिहाज से भाव 50-80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।</p>
<p>महाराष्ट्र स्थित प्याज की सबसे बड़ी थोक मंडी लासलगांव में प्याज के भाव 40 रुपये प्रति किलो और अन्य मंडियों में 45 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। जबकि उज्जैन के चिमनगंज मंडी में गुरुवार को भाव 51 रुपये प्रति किलो और दिल्ली की आजादपुर थोक मंडी में 62 रुपये प्रति किलो तक की बोली लगी। यह पिछले चार साल में सबसे ज्यादा थोक भाव है। दरअसल, प्याज की कीमतें बढ़ने की सबसे बड़ी वजह आपूर्ति में कमी होना है। रबी सीजन की प्याज खत्म हो रही है और बहुत कम स्टॉक बचा हुआ है, दूसरी तरफ खरीफ की नई फसल आने में अभी दो-तीन हफ्ते की देरी है। इसका असर आपूर्ति पर पड़ा है। &nbsp;</p>
<p>शेतकारी संगठन के पूर्व अध्यक्ष और स्वतंत्र भारत पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष अनिल घनवत ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया, &ldquo;प्याज की कीमतें बढ़ने की वजह खरीफ की नई फसल आने में देरी होना है। इस साल अनियमित मानसून की वजह से प्याज की बुवाई में देरी हुई जिसकी वजह से नई फसल दो-तीन हफ्ते बाद ही बाजार में आ पाएगी। साथ ही, यह भी महत्वपूर्ण है कि पिछले चार साल से प्याज की खेती में किसानों को घाटा हो रहा है, इसलिए वे कम रकबे में प्याज की खेती कर रहे हैं जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियां हैं। जब किसानों को अच्छी कीमत मिलने लगती है तो उपभोक्ताओं का ख्याल करते हुए सरकार बाजार में हस्तक्षेप करती है। इससे थोड़े समय के लिए तो कीमतें स्थिर रहती हैं लेकिन बाद में बढ़ने लगती है। जब उत्पादन ही कम होगा तो सरकार नियंत्रण की कितनी भी कोशिश करे, कीमतें बढ़ेंगी ही। सरकार की इस तरह की नीति से किसानों को तो नुकसान होता ही है, उपभोक्ताओं को भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है।&rdquo;</p>
<p>तीन कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई समित के भी अनिल घनवत सदस्य रहे हैं। घनवत कहते हैं कि सरकार महंगाई थामने के लिए खाद्य पदार्थों के दाम नियंत्रित करने की कोशिश करती है, जबकि गैर-खाद्य पदार्थों की महंगाई ज्यादा बढ़ रही है। इसके अलावा, जब दाम बहुत घट जाते हैं तब सरकार हस्तक्षेप करने क्यों नहीं आती है और किसानों को राहत क्यों नहीं देती है। अभी कुछ महीने पहले ही जब टमाटर के दाम बढ़े तो सरकार ने हस्तक्षेप किया और कीमतें नीचे आ गईं। मौजूदा समय में टमाटर की कीमत काफी घट गई है, किसानों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो रहा है और वे टमाटर फेंक रहे हैं, अब सरकार क्यों हस्तक्षेप नहीं कर रही है। इसी तरह, मार्च-अप्रैल में अचानक बारिश की वजह से रबी की प्याज खराब हो गई और भाव 2 रुपये किलो तक पहुंच गया था, तब सरकार सामने क्यों नहीं आई। उनका कहना है कि सरकार की नीतियां किसानों को हतोत्साहित कर रही हैं।</p>
<p>दरअसल, इस साल स्टॉक जल्दी खत्म होने के पीछे एक वजह यह भी है कि मार्च में बेमौसम बारिश की वजह से रबी के प्याज की जीवन अवधि करीब तीन हफ्ते कम हो गई थी। इसे ही भंडारित कर रखा जाता है। रबी की प्याज का इस्तेमाल अक्टूबर-नवंबर तक होता है। उसके बाद खरीफ की प्याज आने लगती है। खरीफ के प्याज की जीवन अवधि दो-ढाई महीने से ज्यादा नहीं होती है। &nbsp;</p>
<p>&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज अभी और होगा महंगा, जानिए कब तक आएगी नई फसल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बासमती का न्यूनतम निर्यात मूल्य घटा, 1200 डॉलर से हुआ 950 डॉलर प्रति टन, निर्यातकों और किसानों को होगा फायदा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/floor-price-of-basmati-exports-slashed-to-usd-950-per-ton.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 27 Oct 2023 13:02:04 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/floor-price-of-basmati-exports-slashed-to-usd-950-per-ton.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>निर्यातकों की लगातार मांग को देखते हुए सरकार ने बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) 1,200 डॉलर प्रति टन से घटाकर 950 डॉलर प्रति टन करने का फैसला किया है। निर्यातकों का कहना था कि एमईपी ज्यादा होने से भारत निर्यात बाजार में अपनी हिस्सेदारी खो रहा है और इसका फायदा पाकिस्तान को मिल रहा है। पाकिस्तान 800 डॉलर प्रति टन पर बासमती चावल का निर्यात कर रहा है।</p>
<p>27 अगस्त को सरकार ने बासमती चावल का एमईपी 1200 डॉलर प्रति टन कर दिया था। इसके पीछे यह तर्क दिया गया था कि बासमती चावल की आड़ में निर्यातक गैर-बासमती सफेद चावल का निर्यात कर रहे हैं। सरकार ने घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए गैर-बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बाद से ही निर्यातक बासमती का एमईपी घटाने की मांग कर रहे थे। अपनी मांग के समर्थन में उन्होंने किसानों से बासमती धान की खरीदारी भी बंद कर दी थी जिससे बाजार में बासमती धान की कीमतों में 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट आई थी। हालांकि, बाद में जब खरीदारी शुरू हुई तो भाव में उछाल आने लगा।</p>
<p>निर्यात संवर्धन संगठन कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) को भेजे एक पत्र में केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है, "बासमती चावल के निर्यात के लिए अनुबंध के पंजीकरण की मूल्य सीमा को 1,200 डॉलर प्रति टन से संशोधित कर 950 अमेरिकी डॉलर प्रति टन करने का निर्णय लिया गया है।" एपीडा को केवल उन्हीं अनुबंधों को पंजीकृत करने का निर्देश दिया गया है जिनका मूल्य 950 अमेरिकी डॉलर प्रति टन और उससे अधिक है। एपीडा जल्द ही इस बारे में सूचना जारी करेगा।</p>
<p>कीमत के हिसाब से 2022-23 में भारत का बासमती चावल का कुल निर्यात 4.8 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि मात्रा के हिसाब से यह 45.6 लाख टन था। चावल निर्यातक संघ के मुताबिक, पिछले 2-3 वित्तीय वर्षों में बासमती के लिए भारत की औसत निर्यात प्राप्ति 800-900 डॉलर प्रति टन रही है।</p>
<p>चावल की खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने और घरेलू आपूर्ति बढ़ने देने के लिए सरकार ने &nbsp;पिछले साल सितंबर टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस साल जुलाई में &nbsp;गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध और गैर-बासमती सेला (पारबॉयल्ड) चावल के निर्यात पर 20 फीसदी निर्यात शुल्क लगाया था।</p>
<p>विदेश व्यापार नीति के अनुसार, एपीडा को बासमती चावल के निर्यात के सभी अनुबंधों को पंजीकृत करना अनिवार्य है। एपीडा इन चावलों के निर्यात के लिए पंजीकरण-सह-आवंटन प्रमाण-पत्र जारी करता है। खरीफ सीजन में उगाई जाने वाली बासमती धान की फसल बाजार में आनी शुरू हो गई है। एमईपी घटने से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को बेहतर दाम मिल सकेंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बासमती का न्यूनतम निर्यात मूल्य घटा, 1200 डॉलर से हुआ 950 डॉलर प्रति टन, निर्यातकों और किसानों को होगा फायदा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम कृषि सिंचाई योजना में जमरानी बांध परियोजना को शामिल करने की मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/ccea-decision-approval-to-include-jamrani-dam-project-of-uttarakhand-in-pm-agricultural-irrigation-scheme.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Oct 2023 18:01:46 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/ccea-decision-approval-to-include-jamrani-dam-project-of-uttarakhand-in-pm-agricultural-irrigation-scheme.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (पीएमकेएसवाई-एआईबीपी) के तहत उत्तराखंड की जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना को शामिल करने की मंजूरी दे दी है। इस परियोजना में उत्तराखंड के नैनीताल जिले में राम गंगा नदी की सहायक नदी गोला नदी पर जमरानी गांव के पास एक बांध के निर्माण की योजना है। यह बांध मौजूदा गोला बैराज को अपनी 40.5 किमी लंबी नहर प्रणाली और 244 किमी लंबी नहर प्रणाली के माध्यम से पानी देगा जो 1981 में पूरा हुआ था।</p>
<p>इस परियोजना की अनुमानित लागत 2,584.10 करोड़ रुपये है। इसमें से उत्तराखंड को 1,557.18 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता देने को भी मंजूरी दी गई है। इस परियोजना को मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में इन फैसलों को मंजूरी दी गई है।</p>
<p>इस परियोजना से उत्तराखंड के नैनीताल और उधम सिंह नगर जिलों और उत्तर प्रदेश के रामपुर और बरेली जिलों में अतिरिक्त 57,065 हेक्टेयर (उत्तराखंड में 9,458 हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश में 47,607 हेक्टेयर) भूमि की सिंचाई हो सकेगी है। दो नई फीडर नहरों के निर्माण के अलावा परियोजना के तहत 207 किमी मौजूदा नहरों का नवीनीकरण किया जाना है। परियोजना के तहत 278 किमी पक्के फील्ड चैनल भी क्रियान्वित किए जाने हैं। इसके अलावा, इस परियोजना में 14 मेगावाट की जल विद्युत उत्पादन के साथ-साथ हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में 42.70 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पीने के पानी के प्रावधान की भी परिकल्पना की गई है जिससे 10.65 लाख से अधिक आबादी लाभान्वित होगी।</p>
<p>परियोजना के सिंचाई लाभों का एक बड़ा हिस्सा पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश को भी होगा। दोनों राज्यों के बीच 2017 में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन के अनुसार लागत और लाभ साझा किया जाना है। हालांकि, पीने का पानी और बिजली उत्पादन का लाभ पूरी तरह से उत्तराखंड को ही मिलेगा।</p>
<p>केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के तहत आने वाले प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) वर्ष 2015-16 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य खेत पर पानी की पहुंच को बढ़ाना और सुनिश्चित सिंचाई के तहत खेती योग्य क्षेत्र का विस्तार करना, खेत में पानी के उपयोग की दक्षता में सुधार करना, स्थायी जल संरक्षण पद्धितियों को लागू करना आदि है। भारत सरकार ने दिसंबर 2021 में 2021-26 के दौरान पीएमकेएसवाई के कार्यान्वयन के लिए 93,068.56 करोड़ रुपये (37,454 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता) को मंजूरी दी थी। पीएमकेएसवाई-एआईबीपी के तहत अब तक 53 परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं और 25.14 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता सृजित हुई है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_65390a7616c5d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम कृषि सिंचाई योजना में जमरानी बांध परियोजना को शामिल करने की मंजूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[न्यूट्रिशन बेस्ड फर्टिलाइजर सब्सिडी में भारी कटौती, नई दरों को कैबिनेट की मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approved-nutrition-based-subsidy-rates-for-rabi-season-2023-24-for-p-and-k-fertilizers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Oct 2023 17:13:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/cabinet-approved-nutrition-based-subsidy-rates-for-rabi-season-2023-24-for-p-and-k-fertilizers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने 2023-24 के रबी सीजन (अक्टूबर-मार्च) के लिए फॉस्फेट एवं पोटाशयुक्त (पीएंडके) फर्टिलाइजर के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (न्यूट्रिशन बेस्ड सब्सिडी) की नई दरों को मंजूरी दे दी है। पीएंडके फर्टिलाइजर की सब्सिडी दरों में बड़ी कटौती की गई है। नई दरें 1 अक्टूबर, 2023 से लागू होंगी और 31 मार्च, 2024 तक के लिए होंगी। चालू रबी सीजन 2023-24 में पोषक तत्व आधारित सब्सिडी पर 22,303 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में न्यूट्रिशन बेस्ड सब्सिडी (एनबीएस) की दरें तय करने के लिए उर्वरक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। उर्वरक विभाग ने रबी सीजन 2023-24 के लिए नाइट्रोजन (एन) पर प्रति किलो 47.02 रुपये, फॉस्फोरस (पी) पर 20.82 रुपये प्रति किलो, पोटाश (के) पर 2.38 रुपये प्रति किलो और सल्फर (एस) पर 1.89 रुपये प्रति किलो सब्सिडी देने का प्रस्ताव रखा था।&nbsp;इससे पहले खरीफ सीजन 2023-24 के लिए सरकार ने नाइट्रोजन पर प्रति किलो 76 रुपये, फॉस्फोरश पर 41 रुपये प्रति किलो, पोटाश पर 15 रुपये प्रति किलो और सल्फर पर 2.8 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी दी थी।</p>
<p>कैबिनेट के फैसले के बारे में जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार किसानों को सस्ती कीमतों पर उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "हमारा अनुमान है कि 2023-24 के रबी सीजन के लिए पीएंडके उर्वरकों पर सब्सिडी के रूप में 22,303 करोड़ रुपये खर्च होंगे।" इससे पहले मई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2023-24 के खरीफ सीजन के लिए पीएंडके उर्वरकों पर 38,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी को मंजूरी दी।</p>
<p>ठाकुर ने बताया कि किसानों को डीएपी (डाइ-अमोनियम फॉस्फेट) 1,350 रुपये प्रति बैग (50 किलो) की पुरानी दर पर मिलता रहेगा। इसी तरह, एनपीके पहले की तरह 1,470 रुपये प्रति बैग और एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) लगभग 500 रुपये प्रति बैग पर उपलब्ध होगा। एमओपी (म्यूरेट ऑफ पोटाश) की कीमत 1,700 रुपये प्रति बैग से घटकर 1,655 रुपये प्रति बैग हो जाएंगी। उर्वरकों और संबंधित सामग्रियों के अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों में हाल के रूझानों को ध्यान में रखते हुए फॉस्फेट और पोटाशयुक्त उर्वरकों पर सब्सिडी की नई दरें तय की गई हैं।</p>
<p>सरकार उर्वरक निर्माताओं एवं आयातकों के माध्यम से किसानों को रियायती कीमतों पर 25 ग्रेड का पीएंडके उर्वरक उपलब्ध कराती है। पीएंडके उर्वरकों पर सब्सिडी एनबीएस योजना के तहत 1 अप्रैल, 2010 से दी जा रही है। बयान में कहा गया है कि सरकार किसानों को किफायती मूल्यों पर पीएंडके उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उर्वरकों और संबंधित सामग्रियों यानी यूरिया, डीएपी, एमओपी और सल्फर की अंतरराष्ट्रीय मूल्यों में हाल के रुझानों को देखते हुए सरकार ने यह फैसला किया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_6450fed5427a8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ न्यूट्रिशन बेस्ड फर्टिलाइजर सब्सिडी में भारी कटौती, नई दरों को कैबिनेट की मंजूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चित्तूरी जगपति राव को मिला &amp;quot;इंटरनेशनल एग पर्सन&amp;quot; ऑफ द ईयर अवार्ड, यह अवार्ड पाने वाले पहले एशियाई बने]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/chitturi-jagapati-rao-becomes-the-first-asian-to-win-iec-international-egg-person-of-the-year-award-2023.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 20 Oct 2023 18:26:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/chitturi-jagapati-rao-becomes-the-first-asian-to-win-iec-international-egg-person-of-the-year-award-2023.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>श्रीनिवास फार्म्स ग्रुप के अध्यक्ष और भारत में राष्ट्रीय अंडा समन्वय समिति (एनईसीसी) के संस्थापकों में से एक, चित्तूरी जगपति राव को अंतरराष्ट्रीय अंडा आयोग (आईईसी) द्वारा प्रतिष्ठित "इंटरनेशनल एग पर्सन ऑफ द ईयर 2023" से सम्मानित किया गया है। यह सर्वोच्च पुरस्कार पाने वाले वह पहले एशियाई हैं। आईईसी ने हाल ही में आईईसी ग्लोबल लीडरशिप कॉन्फ्रेंस लेक लुईस 2023 में वैश्विक अंडा उद्योग में उनकी उल्लेखनीय सफलता और उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए जगपति राव को पुरस्कार प्रदान किया।</p>
<p>आईईसी के अध्यक्ष ग्रेग हिंटन ने पुरस्कार प्रदान करते हुए कहा, &ldquo;श्री चित्तूरी ने अपने पूरे जीवनकाल में भारतीय पॉल्ट्री क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने न केवल अपना खुद का श्रीनिवास फार्म्स ग्रुप बनाया, बल्कि उन्होंने उद्योग के लिए प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, रोजगार के बेहतर अवसर पैदा करने और भारत में पॉल्ट्री उत्पादों की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।&rdquo;</p>
<p>उन्होंने कहा, &ldquo;श्री चित्तूरी भारत में एनईसीसी के संस्थापकों में से एक रहे हैं जो अंडा उत्पादकों का एक संघ है। एनईसीसी ने अंडा उद्योग को तेजी से बढ़ने में सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारतीय लेयर उद्योग में उनके योगदान ने न केवल इस क्षेत्र में क्रांति ला दी है बल्कि कई लोगों के जीवन में भी सुधार किया है।&rdquo;</p>
<p>इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के मिलने पर जगपति राव ने कहा, "प्रतिष्ठित 'इंटरनेशनल एग पर्सन ऑफ द ईयर' पुरस्कार पाकर मैं बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूं। अंडे न केवल पोषण का स्रोत हैं, बल्कि एक उज्जवल भविष्य के लिए आशा और स्थिरता का प्रतीक भी हैं। यह सम्मान विश्व स्तर पर अंडा उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित अनगिनत व्यक्तियों और संगठनों के अविश्वसनीय काम का प्रमाण है। मैं इस सम्मान को उन सभी लोगों और श्रीनिवास हैचरीज समूह के परिवार के साथ साझा करता हूं जो अंडे के लाभों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"</p>
<p>श्रीनिवास समूह की स्थापना 1965 में हुई जब जगपति राव चित्तूरी (अध्यक्ष) ने हैदराबाद में पॉल्ट्री व्यवसाय में कदम रखा। यह भारत में एक एकीकृत लेयर और ब्रॉयलर प्रजनन व्यवसाय संचालित करता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चित्तूरी जगपति राव को मिला "इंटरनेशनल एग पर्सन" ऑफ द ईयर अवार्ड, यह अवार्ड पाने वाले पहले एशियाई बने ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फलों&amp;#45;सब्जियों का हुआ रिकॉर्ड 35.19 करोड़ टन उत्पादन, बागवानी उत्पादों का दूसरा अग्रिम अनुमान जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/horticulture-production-pegged-at-record-352-million-tonnes-in-2nd-advance-estimate-for-2022-23.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Oct 2023 17:16:09 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/horticulture-production-pegged-at-record-352-million-tonnes-in-2nd-advance-estimate-for-2022-23.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में फलों, सब्जियों और अन्य बागवानी उत्पादों का रिकॉर्ड 35.19 करोड़ टन उत्पादन हुआ है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 2022-23 के लिए दूसरे अग्रिम अनुमान में यह अनुमान लगाया गया है। 2021-22 (अंतिम) में बागवानी उत्पादन 34.71 करोड़ टन रहा था।</p>
<p>विभिन्न बागवानी फसलों के रकबे और उत्पादन के लिए वर्ष 2022-23 का दूसरा अग्रिम अनुमान जारी कर दिया है। इसके अनुसार, वर्ष 2022-23 में देश में कुल बागवानी उत्पादन रिकार्ड 35.19 करोड़ टन रहने का अनुमान है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि देश में खाद्यान्न के साथ ही बागवानी का भी लगातार रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है। तोमर ने इसके लिए बागवानी किसानों व वैज्ञानिकों को हार्दिक बधाई दी है।</p>
<p>कृषि मंत्रालय ने एक बयान में बताया है कि वर्ष 2022-23 में कुल बागवानी उत्पादन 35.19 करोड़ टन होने का अनुमान है, जो वर्ष 2021-22 (अंतिम) की तुलना में लगभग 47.4 लाख &nbsp;टन (1.37%) की बढ़ोतरी है। फलों, सब्जियों, वृक्षारोपण फसलों, फूलों व शहद के उत्पादन में वृद्धि का अनुमान मंत्रालय ने जताया है।</p>
<p>बयान के मुताबिक, फलों का उत्पादन वर्ष 2021-22 के 10.75 करोड़ टन की तुलना में वर्ष 2022-23 में 10.83 करोड़ टन होने का अनुमान है। सब्जियों का उत्पादन वर्ष 2022-23 में 21.29 करोड़ टन होने का अनुमान है, जबकि वर्ष 2021-22 में यह 20.91 करोड़ टन था।</p>
<p>वृक्षारोपण फसलों का उत्पादन वर्ष 2021-22 में 1.57 करोड़ टन से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 1.60 करोड़ टन होने का अनुमान है, जो लगभग 1.78% की वृद्धि है।</p>
<p>इसी तरह, आलू का उत्पादन 6.05 करोड़ टन होने की उम्मीद है, जबकि वर्ष 2021-22 में यह 5.61 करोड़ टन रहा था। दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, 2022-23 में बागवानी उत्पादों का रकबा 2.81 करोड़ हेक्टेयर रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ फलों-सब्जियों का हुआ रिकॉर्ड 35.19 करोड़ टन उत्पादन, बागवानी उत्पादों का दूसरा अग्रिम अनुमान जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सात देशों को होगा 10 लाख टन से अधिक गैर&amp;#45;बासमती सफेद चावल का निर्यात, केंद्र की मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/india-allows-export-of-over-10-lakh-tonnes-of-non-basmati-white-rice-to-seven-countries.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Oct 2023 16:50:26 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/india-allows-export-of-over-10-lakh-tonnes-of-non-basmati-white-rice-to-seven-countries.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने नेपाल, कैमरून और मलेशिया सहित सात देशों को 10,34,800 टन गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात को मंजूरी दी है। घरेलू आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इसी साल 20 जुलाई को गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया था मगर जरूरतमंद देशों के अनुरोध पर अनुमति के आधार पर निर्यात का फैसला किया गया था। उसी फैसले के तहत यह निर्यात किया जा रहा है।</p>
<p>विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने इस संबंध में एक अधिसूचना में कहा है कि राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) के माध्यम से गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात की अनुमति दी गई है।</p>
<p>अधूसचना में कहा गया है, "नेपाल, कैमरून, कोटे डी आइवर, गिनी, मलेशिया, फिलीपींस और सेशेल्स को गैर-बासमती सफेद चावल का निर्यात अधिसूचित किया गया है।" नेपाल के लिए अधिसूचित मात्रा 95,000 टन, कैमरून के लिए 1,90,000 टन, कोटे डी' आइवर के लिए 1,42,000 टन और गिनी के लिए 1,42,000 टन है। इसी तरह मलेशिया को 1,70,000 टन, फिलीपींस को 2,95,000 टन और सेशेल्स को 800 टन चावल का निर्यात किया जाएगा।</p>
<p>घरेलू बाजार में चावल के बढ़ते दाम को देखते हुए केंद्र सरकार ने 20 जुलाई को गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, लेकिन कुछ देशों को उनकी खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए उनके अनुरोध पर सरकार द्वारा अनुमति के आधार पर निर्यात की अनुमति दी गई है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सात देशों को होगा 10 लाख टन से अधिक गैर-बासमती सफेद चावल का निर्यात, केंद्र की मंजूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी निर्यात पर 31 अक्टूबर के बाद भी रहेगी पाबंदी, डीजीएफटी ने जारी की अधिसूचना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sugar-export-will-remain-banned-even-after-october-31-dgft-issued-notification.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Oct 2023 16:26:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sugar-export-will-remain-banned-even-after-october-31-dgft-issued-notification.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>त्योहारी सीजन के दौरान घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बेहतर बनाए रखने के लिए सरकार ने चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध को 31 अक्टूबर, 2023 से आगे बढ़ा दिया है। इस साल घरेलू उत्पादन में कमी को देखते हुए सरकार ने निर्यात का अतिरिक्त कोटा जारी नहीं करने का फैसला किया था और 31 अक्टूबर तक निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया गया था।</p>
<p>विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में कहा है, "चीनी (कच्ची चीनी, सफेद चीनी, परिष्कृत चीनी और जैविक चीनी) के निर्यात पर प्रतिबंध 31-10-2023 से अगले आदेश तक बढ़ा दिया गया है। अन्य शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी।"</p>
<p>हालांकि, अधिसूचना में कहा गया है कि ये प्रतिबंध सीएक्सएल और टीआरक्यू शुल्क रियायत कोटा के तहत यूरोपीय संघ और अमेरिका को निर्यात की जाने वाली चीनी पर लागू नहीं होंगे। इन क्षेत्रों में सीएक्सएल और टीआरक्यू (टैरिफ दर कोटा) के तहत एक निर्दिष्ट मात्रा में चीनी का निर्यात किया जाता है।</p>
<p>भारत दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। इस साल करीब 61 लाख टन चीनी का निर्यात हुआ है। सरकार पूरे देश में उत्पादन, खपत, निर्यात और थोक और खुदरा बाजारों में मूल्य रुझान सहित चीनी क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी निर्यात पर 31 अक्टूबर के बाद भी रहेगी पाबंदी, डीजीएफटी ने जारी की अधिसूचना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_6449e11edd667.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं उत्पादन के अंतिम अनुमान में 21.9 लाख टन की कटौती, 2022&amp;#45;23 में खाद्यान्नों का हुआ रिकॉर्ड 3296.87 लाख टन उत्पादन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-cuts-down-2022-23-wheat-output-estimate-by-21-lakh-90-thousand-tons.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Oct 2023 12:24:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-cuts-down-2022-23-wheat-output-estimate-by-21-lakh-90-thousand-tons.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल फरवरी-मार्च में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचा था। इस वजह से गेहूं का उत्पादन घटने की आशंका पहले से जताई जा रही थी। अब सरकार ने भी इसकी पुष्टि करते हुए फसल वर्ष 2022-23 में गेहूं उत्पादन के अनुमान में 21.9 लाख टन की कटौती कर दी है। उत्पादन अनुमान में कटौती के बावजूद रिकॉर्ड गेहूं का उत्पादन हुआ है।</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2022-23 <span>के लिए जारी प्रमुख फसलों के उत्पादन के अंतिम अनुमान में गेहूं उत्पादन का अनुमान घटाकर </span>1105.54 <span>लाख टन कर दिया गया है। इससे पहले जून में जारी तीसरे अग्रिम अनुमान में 1127.4 लाख टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। वर्ष 2021-22 में देश में </span>1077.42 <span>लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ था। </span>2022-23 <span>के दौरान</span>&nbsp;28.12 <span>लाख टन अधिक उत्पादन हुआ है। </span></p>
<p>2022-23 <span>के अंतिम अनुमान के मुताबिक</span>,&nbsp;देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 3296.87 <span>लाख टन होने का अनुमान है</span>&nbsp;जो 2021-22 <span>के </span>3156.16 <span>लाख टन खाद्यान्न उत्पादन से </span>140.71 <span>लाख टन अधिक है। इसके अलावा</span>,&nbsp;2022-23 <span>के दौरान उत्पादन पिछले पांच वर्षों (</span>2017-18 <span>से </span>2021-22) <span>के औसत खाद्यान्न उत्पादन की तुलना में </span>308.69 <span>लाख टन अधिक है।</span></p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने खाद्यान्न के रिकॉर्ड उत्पादन पर कहा है कि किसान लगातार कड़ी मेहनत कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक और संस्थान भी बहुत शानदार कार्य कर रहे हैं।&nbsp;सभी के प्रयासों से कृषि क्षेत्र में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन सहित बेहतर परिणाम परिलक्षित हो रहे हैं।</p>
<p>अंतिम अनुमानों के अनुसार,&nbsp;2022-23 <span>में चावल का उत्पादन रिकॉर्ड </span>1357.55 <span>लाख टन होने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के </span>1294.71 <span>लाख टन से </span>62.84 <span>लाख टन अधिक है और पिछले पांच वर्षों के औसत उत्पादन </span>1203.90 <span>लाख टन से </span>153.65 <span>लाख टन अधिक है। मोटा अनाज </span>का उत्पादन 573.19 <span>लाख टन और मक्का का उत्पादन </span>380.85 <span>लाख टन रहने का अनुमान है। जबकि दालों का उत्पादन </span>260.58 <span>लाख टन रहा है जिसमें से तुअर का उत्पादन </span>33.12 <span>लाख टन और चना का </span>122.67 <span>लाख टन रहा है। </span>2022-23 <span>के दौरान कुल</span>&nbsp;<span>दलहन</span>&nbsp;<span>उत्पादन पिछले पांच वर्षों के औसत दलहन उत्पादन </span>246.56 <span>लाख टन से </span>14.02 <span>लाख टन अधिक है। </span></p>
<p>&nbsp;इस दौरान तिलहन फसलों का उत्पादन 413.55 <span>लाख टन रहने का अंतिम अनुमान है। तिलहन की प्रमुख फसलों में मूंगफली उत्पादन </span>102.97 <span>लाख टन, सोयाबीन </span>149.85 <span>लाख टन और सरसों एवं रेपसीड का उत्पादन </span>126.43 <span>लाख टन हुआ है। कुल</span>&nbsp;<span>तिलहन</span>&nbsp;<span>उत्पादन </span>2021-22 <span>के उत्पादन की तुलना में </span>33.92 <span>लाख टन अधिक है। इसके अलावा</span>,&nbsp;2022-23 <span>के दौरान तिलहन का उत्पादन औसत तिलहन उत्पादन </span>340.22 <span>लाख टन से </span>73.33 <span>लाख टन अधिक है।</span></p>
<p>नकदी फसलों में गन्ना का उत्पादन 2022-23 में 4905.33 <span>लाख टन, कपास का </span>336.60 <span>लाख गांठ (प्रत्येक </span>170 <span>किलोग्राम की), और जूट एवं मेस्टा का उत्पादन</span> 93.92 <span>लाख गांठें रहने (प्रत्येक </span>180 <span>किलोग्राम की) का अनुमान जताया गया है। 2021-22 में </span>4394.25 <span>लाख टन गन्ना उत्पादन हुआ था। </span>&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/03/image_750x500_640b518e6d5c4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं उत्पादन के अंतिम अनुमान में 21.9 लाख टन की कटौती, 2022-23 में खाद्यान्नों का हुआ रिकॉर्ड 3296.87 लाख टन उत्पादन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/03/image_750x500_640b518e6d5c4.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कांग्रेस के वादे की काट में मोदी सरकार ने गेहूं का एमएसपी 150 रुपये क्विंटल बढ़ाया, नौ साल में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/modi-govt-increased-wheat-msp-by-rs-150-per-quintal-the-biggest-increase-in-nine-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Oct 2023 17:06:53 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/modi-govt-increased-wheat-msp-by-rs-150-per-quintal-the-biggest-increase-in-nine-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कांग्रेस पार्टी द्वारा मध्य प्रदेश के अपने चुनावी घोषणा-पत्र में 2600 रुपये प्रति क्विंटल पर गेहूं खरीदने के वादे के एक दिन बाद ही नरेंद्र मोदी सरकार ने मार्केटिंग ईयर 2024-25 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 150 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी करने की घोषणा कर दी। उम्मीद जताई जा रही है कि कांग्रेस राजस्थान के घोषणा-पत्र में भी गेहूं खरीद के लिए इस कीमत का वादा कर सकती है। शायद यही वजह है कि मोदी सरकार ने पिछले नौ साल में गेहूं के एमएसपी में इस बार इतनी बड़ी बढ़ोतरी की है।</p>
<p>मध्य प्रदेश और राजस्थान प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में से एक हैं और इन दोनों राज्यों सहित पांच राज्यों में नवंबर में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। इसके बाद अगले साल अप्रैल-मई में लोकसभा के चुनाव होने हैं। इस साल मौसम के अचानक करवट लेने से जिस तरह से फसलों को नुकसान हुआ है और किसानों को उनकी उपज की वाजिब कीमत नहीं मिलने से उनमें जो नाराजगी है, शायद उसे दूर करने की कवायद के तहत ही छह रबी फसलों के एमएसपी में अच्छी खासी बढ़ोतरी की गई है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी (सीसीईए) की हुई बैठक में रबी फसलों के एमएसपी में वृद्धि को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण अनुराग ठाकुर ने मीडिया को कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि मार्केटिंग ईयर 2024-25 के लिए गेहूं का एमएसपी 150 रुपये बढ़ाकर 2275 रुपये प्रति क्विंटल करने का फैसला किया गया है। 2023-24 के लिए गेहूं का एमएसपी 2125 रुपये प्रति क्विंटल है। इसके साथ ही 5 अन्य रबी फसलों का भी एमएसपी बढ़ाया &nbsp;गया है।</p>
<p>इससे पहले मोदी सरकार ने 2023-24 के लिए गेहूं का एमएसपी 110 रुपये बढ़ाकर 2125 रुपये और 2022-23 के लिए 40 रुपये बढ़ाकर 2015 रुपये किया था। मार्केटिंग ईयर 2021-22 के लिए एमएसपी में 50 रुपये की, 2020-21 के लिए 85 रुपये, 2019-20 के लिए 105 रुपये की, 2018-19 के लिए 110 रुपये की, 2017-18 के लिए 100 रुपये की, 2016-17 के लिए 75 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई थी। इसी तरह, 2015-16 के लिए 50 रुपये और 2014-15 के लिए सरकार की ओर से गेहूं के एमएसपी में 50 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई थी। &nbsp;</p>
<p>रबी सीजन की प्रमुख तिलहन फसल सरसों एवं रैपसीड के एमएसपी में 200 रुपये की वृद्धि की गई है। इसे 5450 रुपये से बढ़ाकर 5650 रुपये प्रति क्विंटल करने का फैसला किया गया है। वहीं, मसूर के एमएसपी को 425 रुपये बढ़ाकर 6425 रुपये प्रति क्विंटल और चना का 105 रुपये बढ़ाकर 5440 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। जौ के एमएसपी में 115 रुपये और कुसुम में 150 रुपये की वृद्धि की गई है। अगले मार्केटिंग सीजन के लिए जौ का समर्थन मूल्य 1850 रुपये और कुसुम का 5800 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।</p>
<p>सरकारी एजेंसियां एमएसपी से कम कीमत पर किसानों से फसलों की खरीद नहीं करती हैं। हालांक, सच्चाई यह भी है कि धान, गेहूं, सरसों, चना, मसूर जैसी प्रमुख फसलों की ही सरकारी खरीद होती है, जबकि 27 फसलों का एमएसपी सरकार तय करती है। &nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_64427f5f0f202.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कांग्रेस के वादे की काट में मोदी सरकार ने गेहूं का एमएसपी 150 रुपये क्विंटल बढ़ाया, नौ साल में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_64427f5f0f202.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मछली पालन और जलीय कृषि को जलवायु संकट से बचाने को एक दूसरे का सहयोग करें दुनिया के देशः रुपाला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/world-should-cooperate-with-each-other-to-save-fisheries-and-aquaculture-from-climate-crisis-said-parshottam-rupala.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Oct 2023 15:00:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/world-should-cooperate-with-each-other-to-save-fisheries-and-aquaculture-from-climate-crisis-said-parshottam-rupala.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री परषोत्तम रुपाला ने मछली पालन व जलीय कृषि क्षेत्र को जलवायु संकट से बचाने के लिए सहयोगात्मक वैश्विक कार्रवाई पर जोर देने का आह्वान किया है। चेन्नई के महाबलीपुरम में &ldquo;जलवायु परिवर्तन को अंतरराष्ट्रीय मत्स्य पालन प्रशासन में मुख्यधारा में लाने और भारत-प्रशांत क्षेत्र में मत्स्य पालन प्रबंधन उपायों को मजबूत करने&rdquo; संबंधी विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने यह बात कही।</p>
<p>17-19 अक्टूबर तक चलने वाले इस सम्मेलन का आयोजन संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्यपालन विभाग और बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन (बीओबीपी-आईजीओ) के सहयोग से किया जा रहा है। यह सम्मेलन जलवायु अनुकूल मत्स्य पालन प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय मत्स्य पालन प्रशासन में जलवायु परिवर्तन के एकीकरण के लिए रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से हो रहा है।</p>
<p>परषोत्तम रुपाला ने कहा कि इस कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन, मत्स्य पालन पर इसके प्रभाव के प्रति सरकारों और क्षेत्रीय मत्स्य निकायों की तैयारियों पर प्रमुख तत्वों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने सामान्य जिम्मेदारियों और समान हितों के आधार पर सभी हितधारकों के समावेश और मत्स्य पालन व जलीय कृषि क्षेत्र में जलवायु संकट को दूर करने के लिए सहयोगात्मक वैश्विक कार्रवाई पर जोर देने का आग्रह किया। उन्होंने हिंद महासागर और प्रशांत महासागर द्वारा साझा किए गए सामान्य अवसरों और आम चुनौतियों के लिए रणनीतिक अंतर्संबंध का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चुनौतियों और खतरों का मिलकर सामना करने और समस्याओं का हल करने की जिम्मेदारी उठानी होगी ताकि इस क्षेत्र को सभी प्राणियों के लिए एक उपयुक्त निवास स्थान बनाया जा सके।</p>
<p>जलवायु परिवर्तन और मत्स्य पालन पर इसके प्रभाव पर केंद्रित इस महत्वपूर्ण कार्यशाला को संयुक्त रूप से आयोजित करने के लिए एफएओ को धन्यवाद देते हुए रुपाला ने कहा कि कार्यशाला के नतीजे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के मछुआरे समुदायों को प्रतिकूलताओं से निपटने और संभावित दुष्प्रभावों को कम करने में बड़ी मदद करेंगे। चुनौतियों के बीच इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से की गई पहल का उल्लेख करते हुए रुपाला ने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले नौ वर्षों में मछली उत्पादन और उत्पादकता, प्रौद्योगिकी समावेशन, बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, विकास के क्षेत्रों में आमूल परिवर्तनों और सुधारों तथा उद्यमिता और रोजगार आदि की शुरुआत की है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार तमिलनाडु में 1.27 अरब रुपये की लागत से एक बहुउद्देशीय समुद्री शैवाल पार्क (एकीकृत एक्वापार्क) स्थापित कर रही है। मछली पालन क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में अच्छी हिस्सेदारी रखता है और प्राथमिक स्तर पर 2.8 करोड़ से अधिक मछुआरों और मछली पालकों को आजीविका प्रदान करता है। उन्होंने कहा, &ldquo;पिछले नौ वर्षों में समुद्री खाद्य निर्यात दोगुना से अधिक हो गया है और 2022-23 में 63,969 करोड़ रुपये (8.09 अरब मेरिकी डॉलर) का रिकॉर्ड निर्यात हुआ है। पिछले नौ वर्षों में झींगा निर्यात भी दोगुना से अधिक हो गया है, जो 2022-23 में 43,135 करोड़ रुपये (5.48 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया है।&rdquo; उन्होंने कहा, &ldquo;विभिन्न योजनाओं के तहत पिछले नौ वर्षों में अनुमानित 61.9 लाख रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा हुए हैं।&rdquo; रुपाला ने सभी प्रतिभागियों को विश्व मत्स्य पालन दिवस के अवसर पर 21-22 नवंबर, 2023 के दौरान गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित होने वाले पहले वैश्विक मत्स्य पालन सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।</p>
<p>केंद्र सरकार के मत्स्य पालन विभाग द्वारा 'समुद्री मत्स्य पालन में जलवायु परिवर्तन के साथ तालमेल बिठाने के लिए भारत की तैयारियों पर विचार-मंथन सत्र' पर एक समानांतर कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है। सत्र में विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं, जो मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन और अनुकूलन रणनीतियों के संबंध में भारतीय मत्स्यपालन की स्थिति पर चर्चा करेंगे और समुद्री मत्स्य पालन में जलवायु परिवर्तन को अपनाने के लिए भारत की तैयारी का जायजा लेंगे।</p>
<p>भारत में एफएओ के प्रतिनिधि डॉ. ताकायुकी हागिवारा ने इस अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला की मेजबानी के लिए केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग की सराहना की और सदस्य देशों से मत्स्य पालन क्षेत्र में आजीविका, पोषण और कल्याण के लिए काम करते समय सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को ध्यान में रखने का आह्वान किया। उन्होंने पोषण सुरक्षा और नीली क्रांति को प्राप्त करने के लिए क्षेत्र में लैंगिक समावेश का भी सुझाव दिया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मछली पालन और जलीय कृषि को जलवायु संकट से बचाने को एक दूसरे का सहयोग करें दुनिया के देशः रुपाला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए स्थायी जल प्रबंधन करना जरूरीः प्रो. रमेश चंद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sustainable-water-management-is-necessary-for-food-and-nutrition-security-said-prof-ramesh-chand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Oct 2023 13:41:16 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sustainable-water-management-is-necessary-for-food-and-nutrition-security-said-prof-ramesh-chand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत को खाद्य और पोषण की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थायी जल प्रबंधन करना जरूरी है। अगर इस समस्या का समाधान समय पर नहीं किया गया तो बहुत देर हो जाएगी। नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ), कृषि विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय कोष (आईएफएडी) और संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) द्वारा विश्व खाद्य दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही। इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र के इन संगठनों ने स्थायी जल प्रबंधन का आह्वान किया।</p>
<p>भारत में दुनिया की 18 फीसदी आबादी रहती है मगर उसके पास केवल 4 फीसदी जल संसाधन हैं। यह इसे दुनिया के सबसे अधिक जल-तनाव वाले देशों में से एक बनाता है। भारत की पानी की जरूरतों का 40 फीसदी हिस्सा भूजल है और यह अस्थिर दर से घट रहा है। दरअसल, भारत दुनिया का सबसे बड़ा भूजल निकालने वाला देश है जो वैश्विक दोहन का 12 फीसदी है।</p>
<p>नीति आयोग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि शमन उपायों के बिना भारत को 2050 तक सकल घरेलू उत्पाद में 6 फीसदी की हानि का सामना करना पड़ेगा। तब तक पानी की मांग आपूर्ति से अधिक हो जाएगी। इसे ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र खाद्य एजेंसियों (एफएओ, आईएफएडी, और डब्ल्यूएफपी) ने भारत को एक ऐसी कृषि-खाद्य प्रणाली की ओर बदलाव में तेजी लाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया जो अधिक टिकाऊ, लचीली और अधिक कुशलता से पानी का उपयोग करने वाली हो।</p>
<p>नीति आयोग के सदस्य और आर्थिक विकास संस्थान, नई दिल्ली के अध्यक्ष रमेश चंद ने भारत में खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की चुनौतियों और संभावित समाधानों पर एक पैनल चर्चा की अध्यक्षता की।</p>
<p>प्रोफेसर चंद ने सभी के लिए खाद्य सुरक्षा प्राप्त करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए कहा, &ldquo;किसी भी समस्या का समाधान करने के लिए पहली बात हितधारकों को संवेदनशील बनाना और समाज को संवेदनशील बनाना है। अभी कार्रवाई का समय है। यदि हम कार्रवाई करें, तो हम इस जल समस्या का समाधान कर सकते हैं। अगर हम इस स्तर पर कार्रवाई नहीं करते हैं, तो बहुत देर हो जाएगी।&rdquo;</p>
<p>इस पैनल में जल शक्ति मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव और राष्ट्रीय जल मिशन की निदेशकर अर्चना वर्मा, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव फ्रैंकलिन एल खोबुंग और अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन में भारत के प्रतिनिधि आलोक सिक्का शामिल थे। पैनल में जल संसाधनों और पर्यावरण को संरक्षित करते हुए भारत में भोजन और पोषण के लिए एक स्थायी और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की रणनीतियों पर चर्चा की गई।</p>
<p>भारत में एफएओ के प्रतिनिधि ताकायुकी हागिवार ने कहा, &ldquo;चरम जलवायु पैटर्न और घटते भूजल संसाधनों के साथ कृषि के लिए पानी की सुरक्षा, संरक्षण और सोच-समझकर उपयोग पर ध्यान देना आवश्यक हो गया है। भारत सरकार पानी से संबंधित मुद्दों को समझती है और कृषि और खाद्य सुरक्षा में इसका अत्यधिक महत्व है। एफएओ का ध्यान भारत में जल दक्षता में सुधार के लिए कृषि-खाद्य प्रणालियों और जलवायु-स्मार्ट कृषि प्रथाओं के स्थायी परिवर्तन की वकालत और समर्थन करना है।&rdquo;</p>
<p>आईएफएडी के भारत के निदेशक और प्रतिनिधि उलैक डेमिराग ने कहा, &ldquo;चरम मौसम की घटनाओं और पानी की उपलब्धता में परिवर्तनशीलता कृषि उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है, कृषि-पारिस्थितिकी स्थितियों को बदल रही है और मौसम को बदल रही है। वर्षा के पैटर्न में परिवर्तन और उच्च तापमान भी फसल उत्पादकता को प्रभावित करते हैं जिससे भोजन की उपलब्धता कम हो जाती है। आईएफएडी खाद्य प्रणालियों को अधिक टिकाऊ और चरम मौसम की स्थिति के प्रति लचीला बनाने के लिए सरकार का समर्थन कर रहा है, छोटे किसानों की आजीविका में सुधार पर जोर दे रहा है ताकि भोजन पूरे साल खेत से थाली तक निर्बाध रूप से पहुंच सके।&rdquo;</p>
<p>डब्ल्यूएफपी इंडिया के प्रतिनिधि और कंट्री डायरेक्टर एलिज़ाबेथ फॉरे ने कहा, "खाद्य सुरक्षा सुर्खियों में रही है, लेकिन अक्सर हम भूल जाते हैं कि जल सुरक्षा के बिना कोई खाद्य सुरक्षा नहीं है। डब्ल्यूएफपी अपने साझेदारों के साथ मिलकर सौर प्रौद्योगिकियों के माध्यम से लचीलापन बढ़ाने, जलवायु प्रभावों को प्रबंधित करने में मदद करने के लिए समुदाय-आधारित जलवायु सलाहकार सेवाओं की स्थापना और मोटा अनाज मूल्य श्रृंखला को बढ़ावा देने के लिए नवीन दृष्टिकोण पर काम कर रहा है जो पानी के उपयोग को कम करता है और पोषण में सुधार करता है।"</p>
<p>इस कार्यक्रम में वीडियो स्टोरीटेलिंग के जरिये जल सहेलियों नीलम देवी और मंजू लता कुरील के साथ एक विशेष सत्र के माध्यम से सामुदायिक आवाज़ों को भी बढ़ाया गया। ये दोनों उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की जल योद्धा हैं जो अपने समुदायों में जल सुरक्षा को बढ़ावा देने का काम कर रही हैं। ये महिलाएं जल संसाधन योजना, प्रबंधन और संरक्षण के माध्यम से पानी की उपलब्धता को सुलभ बनाती हैं।</p>
<p>इन जल सहेलियों ने हैंडपंपों की मरम्मत की है, सरकारी आवंटन से चेक डैम बनाए हैं और गांवों में पारंपरिक तालाबों को पुनर्जीवित करने के लिए समुदाय द्वारा 'श्रमदान' या स्वैच्छिक योगदान का आयोजन किया है। जल संसाधनों को बहाल करके, सिंचाई के नहरों को खोदकर और जलवायु चरम सीमाओं के खिलाफ प्राकृतिक बाधाओं का पुनर्निर्माण करके समुदायों और स्थानीय खाद्य प्रणालियों की रक्षा की जा सकती है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए स्थायी जल प्रबंधन करना जरूरीः प्रो. रमेश चंद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[‘फोर्टिफाइड चावल एनीमिया और थैलेसीमिया के मरीजों के लिए हानिकारक है’ की लेबलिंग पर हुई कार्रवाई बताए केंद्र, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sc-directs-centre-to-apprise-it-of-action-taken-for-rice-fortification-labelling-norms.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 17 Oct 2023 13:16:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sc-directs-centre-to-apprise-it-of-action-taken-for-rice-fortification-labelling-norms.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह निर्देश दिया है कि फोर्टिफाइड चावल के पैकेट पर लेबलिंग के जरिये यह बताया जाना चाहिए कि सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया से पीड़ित लोगों के लिए यह हानिकारक है। खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य पदार्थों का फोर्टिफिकेशन) विनियम, 2018 के प्रावधान का पालन करने के लिए उठाए गए कदमों के तहत ऐसे उपभोक्ताओं को इससे अवगत कराना जरूरी है। न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने केंद्र सरकार से चार सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दायर करने और इस संबंध में की गई कार्रवाई के बारे में कोर्ट को सूचित करने को कहा है।</p>
<p>शीर्ष अदालत की दो सदस्यीय पीठ ने कहा, "भारत सरकार की ओर से पेश वकील यह बताएंगे कि याचिका में इस संबंध में की गई शिकायत के बारे में क्या कदम उठाए गए हैं और क्या याचिकाकर्ताओं की ओर से पहले से ही दिए गए अभ्यावेदन पर कोई कार्रवाई की गई है। इस संबंध में चार सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दायर किया जाए। चार सप्ताह के बाद इसे तुरंत सूचीबद्ध करें।''</p>
<p>राजेश कृष्णन और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यह निर्देश दिया है। याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिकाओं में फोर्टिफाइड चावल की बोरियों पर अनिवार्य लेबलिंग करने के लिए खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य पदार्थों का फोर्टिफिकेशन) विनियम, 2018 के खंड 7(4) का पालन की मांग की गई है।</p>
<p>इस खंड के अनुसार, सूक्ष्म पोषक तत्व आयरन से भरपूर भोजन के प्रत्येक पैकेज पर यह लिखा होना चाहिए कि "थैलेसीमिया से पीड़ित लोग चिकित्सकीय देखरेख में ले सकते हैं और सिकल सेल एनीमिया वाले व्यक्तियों को आयरन-फोर्टिफाइड खाद्य उत्पादों का सेवन न करने की सलाह दी जाती है।" फोर्टिफिफाइड चावल, दूध और नमक जैसे प्रमुख खाद्य पदार्थों में उनकी पोषण सामग्री में सुधार करने के लिए आयरन, आयोडीन, जिंक और विटामिन ए और डी जैसे प्रमुख विटामिन और खनिजों को अलग से शामिल किया जाता है।</p>
<p>इस बीच, अलायंस फॉर होलिस्टिक एंड सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (आशा) और राइट टू फूड कैंपेन ने एक बयान में दावा किया है कि दो राज्यों के किए गए दौरे में उनकी टीमों ने पाया कि बिना किसी जांच या चिकित्सकीय पर्यवेक्षण के आयरन चावल का अंधाधुंध वितरण किया जा रहा था और हीमो-ग्लोबिनोपैथियों के मरीजों को इस बात का पता ही नहीं था कि यह चावल उनके लिए हानिकारक है।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि केंद्र सरकार की ओर से भी राज्य सरकारों को इस चेतावनी के बारे में कोई निर्देश नहीं दिया गया है। यह देखते हुए कि मध्याह्न भोजन जैसी कुछ योजनाओं में चावल को खुले या पके हुए रूप में वितरित किया जा रहा था। इस बारे में कोई लिखित या मौखिक चेतावनी नहीं थी। यह केवल बोरियों पर धुंधले अक्षरों में दिखाई दे रही थी। इसके अलावा, ऐसे मरीजों को कोई वैकल्पिक आयरन मुक्त चावल उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था।</p>
<p>सिंथेटिक आयरन फोर्टिफाइड चावल खाने वाले सरकारी खाद्य योजनाओं के लाभार्थी ज्यादातर गरीब नागरिक हैं जो सब्सिडी वाले भोजन पर निर्भर हैं। उनके लिए आयरन फोर्टिफाइड चावल अनिवार्य हो गया है क्योंकि वे खुले बाजार से अन्य (गैर-फोर्टिफाइड) चावल खरीदने में सक्षम नहीं हैं। इस कार्यक्रम का विस्तार 15 राज्यों में एक पायलट योजना के पूरा होने या स्वतंत्र रूप से और कठोरता से मूल्यांकन करने से पहले हुआ। एक आरटीआई के जवाब में सरकार ने बताया है कि पायलट प्रोजेक्ट का मूल्यांकन 2022 के अंत में किया जाना था, लेकिन आज तक कोई मूल्यांकन उपलब्ध नहीं है।</p>
<p>जनहित याचिका में याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि सरकार खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 7(4) का अनुपालन करे और चेतावनियां उपलब्ध कराए जो सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचे। उन्होंने यह भी मांग की कि ऐसे रोगियों के लिए गैर-फोर्टिफाइड चावल उपलब्ध कराया जाए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ‘फोर्टिफाइड चावल एनीमिया और थैलेसीमिया के मरीजों के लिए हानिकारक है’ की लेबलिंग पर हुई कार्रवाई बताए केंद्र, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है चाय उद्योग, निर्यात प्रोत्साहन बढ़ाने की आईटीए ने की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/tea-industry-passing-through-acute-financial-crisis.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 17 Oct 2023 06:00:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/tea-industry-passing-through-acute-financial-crisis.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चाय बागान मालिकों की अग्रणी संस्था इंडियन टी एसोसिएशन (आईटीए) का कहना है कि देश का चाय उद्योग गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहा है। चाय की कीमतें बढ़ती उत्पादन लागत के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही हैं।</p>
<p>आईटीए ने अपने स्टेटस पेपर 'चाय परिदृश्य 2023' में कहा है कि पिछले दशक में जहां चाय की कीमतें लगभग चार फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ी हैं, वहीं इसी अवधि के दौरान कोयला और गैस जैसे महत्वपूर्ण इनपुट की लागत में वृद्धि नौ फीसदी से बढ़कर 15 फीसदी पर पहुंच गया है। इसके अलावा, छोटे चाय उत्पादकों के उभरने के बाद उत्पादन में तेजी से वृद्धि हुई है जिसके परिणामस्वरूप अधिशेष चाय बची हुई है क्योंकि घरेलू खपत और निर्यात में इसकी तुलना में वृद्धि नहीं हुई है।</p>
<p>रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि 2022 की तुलना में 2023 में चाय की कीमतों में काफी गिरावट आई है। असम चाय के लिए बिक्री संख्या 14 से 39 को कवर करने वाली सीटीसी और डस्ट टी की नीलामी कीमतें 12.49 रुपये प्रति किलो तक आ गई हैं। जबकि पश्चिम बंगाल चाय के लिए यह कीमत 11.30 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। पारंपरिक किस्म की नीलामी कीमतें भी समान बिक्री संख्या के मामले 95 रुपये प्रति किलो तक हो गई हैं।</p>
<p>आईटीए स्टेटस पेपर में कहा गया है कि 2022 में चाय निर्यात में सुधार के कुछ संकेत दिखे थे और यह 23.1 करोड़ किलो तक पहुंच गया था, जबकि 2023 में जनवरी से जुलाई के दौरान इसमें 26.1 लाख किलो की गिरावट आई है। निर्यात परिदृश्य गंभीर बना हुआ है क्योंकि भुगतान मामले के कारण ईरान को निर्यात में &nbsp;अनिश्चितता बनी हुई है। भारत से कुल चाय निर्यात में ईरान को लगभग 20 फीसदी निर्यात होता है। भुगतान संकट की वजह से निर्यातकों पर वित्तीय दबाव है और चाय के उठाव में गिरावट आई है।</p>
<p>उच्च निर्यात लागत को कम करने और निर्यातकों को प्रतिस्पर्धा में बने रहने में सक्षम बनाने के लिए चाय उद्योग ने सरकार से उच्च गुणवत्ता वाली सीटीसी, पारंपरिक और दार्जिलिंग चाय के लिए निर्यात उत्पादों पर शुल्क की प्रोत्साहन सीमा को बढ़ाने पर विचार करने का आग्रह किया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_65068c4fb0bb5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है चाय उद्योग, निर्यात प्रोत्साहन बढ़ाने की आईटीए ने की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनडीडीबी डेरी सर्विसेज के महाराष्ट्र का राहुरी सीमेन स्टेशन बना नंबर वन, तीन स्टेशनों को मिली &amp;apos;ए&amp;apos; रैंकिंग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/nddb-dairy-services-semen-station-at-rahuri-in-maharashtra-as-india’s-number-one-semen-facility-centre.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 16 Oct 2023 16:08:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/nddb-dairy-services-semen-station-at-rahuri-in-maharashtra-as-india’s-number-one-semen-facility-centre.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने गुणवत्ता, पशु आनुवांशिकी से लेकर स्वास्थ्य और सुरक्षा नियमों के मानकों पर एनडीडीबी डेरी सर्विसेज के महाराष्ट्र के राहुरी सीमेन स्टेशन को भारत का नंबर एक सीमेन स्टेशन का दर्जा दिया है। कंपनी ने एक बयान में यह जानकारी दी है।</p>
<p>हाल ही में केंद्रीय पशुपालन एवं डेरी विभाग को केंद्रीय निगरानी इकाई (सीएमयू) ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए 55 स्टेशनों की तकनीकी ऑडिट रपट जमा की थी जिसमें राहुरी सीमेन स्टेशन को 97 अंक दिए गए। दूसरे नंबर पर &nbsp;उत्तर प्रदेश का सलोन (एनडीएस का स्टेशन) का पशु बीजक केंद्र रहा जिसे 95 अंक प्राप्त हुए।</p>
<p>सीएमयू की रपट में कुल 9 स्टेशनों को 90 से ज्यादा अंक और 'ए' ग्रेड दिए गए। बाकी 7 में&nbsp; एनडीएस के दो स्टेशन (साबरमती आश्रम गौशाला, बिदाज, गुजरात और तमिलनाडु में अलमाड़ी सीमेन स्टेशन) के अतिरिक्त&nbsp; कर्नाटक सरकार एक एसएलबीटीसी हेस्सरघट्टा, धोनी में केरल सरकार का स्टेशन, पूर्णिया में बिहार सरकार का स्टेशन, उरालिकंचन (महाराष्ट्र) में बीआइएएफ का स्टेशन और बीएसएसआरसी, हिसार शामिल रहे।&nbsp;</p>
<p>एनडीडीबी के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह जो एनडीएस के भी चेयरमैन हैं, ने कहा, "हम सभी के लिए यह गर्व का विषय है और इससे हमें डेरी किसानों के लिए और भी कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी। इसका श्रेय पशु चिकित्सक विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की टीम को जाता है, जो दुधारू पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने और घरेलू प्रजातियों के आनुवांशिकी बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।&ldquo;&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा, "एनडीडीबी डेरी सर्विसेज का सीमेन स्टेशन न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में पेशेवरों द्वारा संचालित सर्वश्रेष्ठ सीमेन स्टेशन है। यह स्टेशन कड़ाई से गुणवत्ता मानकों के साथ-साथ बीमारी-मुक्त सीमेन के उत्पादन के लिए जैव-सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन करते है। सीएमयू की मूल्यांकन रपट और हमारे स्टेशनों को प्राप्त अंक हमारी प्रक्रिया और विशेषज्ञता की पुनर्पुष्टि करते हैं।" &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>एनडीएस स्टेशनों के पास 35 प्रजाति के लगभग 1,800 बैल हैं जिनकी कुल 5.2 करोड़ सीमेन खुराकें मूल्यांकन अवधि (2022-23) में बेची गईं। साथ ही, ये 'इन वीवो' और 'इनविट्रो' भ्रूण उत्पादन और स्थानांतरण में भी सक्रिय रूप से शामिल हैं।&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>एनडीडीबी डेरी सर्विसेज उत्पादक कंपनियों और उच्च आनुवांशिक गुणों वाली वीर्य डोज के वितरण, कृत्रिम वीर्यसेचन वितरण सेवाएं, भ्रूण अंतरण, पशु पोषण सेवाएं और ब्रैंड 'एसएजी लाइव' के अंतर्गत उच्च आनुवांशिक गुण संपन्न जीवित पशु उपपादन (इंडक्शन) जैसी उत्पादन संवर्धन सेवाओं और उत्पादक कंपनियों को बढ़ावा देने जैसे जमीनी कार्यों के लिए एनडीडीबी की वितरण संस्था के तौर पर कार्य करती है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनडीडीबी डेरी सर्विसेज के महाराष्ट्र का राहुरी सीमेन स्टेशन बना नंबर वन, तीन स्टेशनों को मिली 'ए' रैंकिंग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी पर स्टॉक लिमिट लगा सकती है सरकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-may-impose-stock-limit-on-sugar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 16 Oct 2023 09:01:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-may-impose-stock-limit-on-sugar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खाद्य उत्पादों की महंगाई को नियंत्रित करने के लिए लगातार कदम उठा रही केंद्र सरकार चीनी के लिए स्टॉक लिमिट लागू कर सकती है। सरकार ने उद्योग और चीनी का कारोबार करने वाले संस्थानों से स्टॉक की जानकारी देने के लिए पिछले माह आदेश जारी किया था। यह जानकारी करीब दस दिन पहले मिल जाने की संभावना था। लेकिन अभी तक कुछ कारोबारियों और संस्थानों ने सरकारी पोर्टल पर जानकारी नहीं दी है और उसको लेकर सरकार सख्ती दिखा रही है जिसके लिए 17 अक्तूबर तक जानकारी साझा करने के लिए कहा गया है। सूत्रों के मुताबिक इस कवायद के पूरा होने के बाद सरकार चीनी पर स्टॉक लिमिट लागू करने का फैसला ले सकती है। इसके पहले सरकार गेहूं और दालों पर स्टॉक लिमिट लागू कर चुकी है।</p>
<p>चीनी उद्योग के अनुमान के मुताबिक चालू पेराई सीजन (2023-24) में चीनी के उत्पादन में करीब दस लाख टन की गिरावट का अनुमान है। इसके साथ ही इस साल महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश कम होने के चलते गन्ना उत्पादन में जहां कमी आने की आशंका है वहीं फसल में देरी हो रही है जिसके चलते पेराई सीजन अक्तूबर की बजाय नवंबर में ही शुरू सकेगा। वहीं चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। खासतौर से उत्तर भारत में दाम महाराष्ट्र और दक्षिण के मुकाबले अधिक बढ़े हैं। त्यौहारी सीजन को देखते हुए सरकार ने चीनी मिलों से अक्तूबर का कोटा 10 तारीख तक ही बेचने के लिए कहा था। इसकी वजह कीमतों में बढ़ोतरी को रोकना है। अक्तूबर के लिए 13 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया गया था</p>
<p>चालू पेराई सीजन (अक्तूबर 2023 से सितंबर 2024) में चीनी उत्पादन पिछले सीजन से नौ लाख टन घटकर 317 लाख&nbsp; टन रहने का अनुमान है। चीनी उद्योग के अनुमानों के मुताबिक 278 लाख टन की घरेलू खपत के बाद चालू सीजन के अंत में चीनी का स्टॉक 97 लाख टन रहने की संभावना है। पिछले सीजन (2022-23) के अंत में चीनी का स्टॉक 58 लाख टन रहा जो पांच साल में सबसे कम है। साल 2022-23 में चीनी उत्पादन 326 लाख टन रहा और खपत 275 लाख टन रही। 2021-22 में चीनी का उत्पादन 357.60 लाख टन रहा था और खपत 273.30 लाख टन रही थी। वहीं बकाया स्टॉक 70 लाख टन रहा था। साल 2021-22 में देश से चीनी का निर्यात 110.70 लाख टन रहा था।</p>
<p>वहीं इस साल अक्तूबर में शुरू हुए चीनी सीजन का ओपनिंग स्टॉक 58 लाख टन रहा जो पिछले पांच साल का सबसे कम है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत 50 रुपये किलो से अधिक चल रही है। इंटरनेशनल शुगर आर्गनाइजेशन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इस साल चीनी का उत्पादन खपत से कम रहेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस समय चीनी की कीमतें काफी तेज बनी हुई हैं। यह कीमतें लंदन व्हाइट के लिए भारत से एफओबी कीमत 691 डॉलर प्रति टन यानी 5420 रुपये प्रति क्विटंल और न्यूयार्क रॉ के लिए 25.93 सेंट जो भारत से एफओबी 4950 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है। घरेलू उत्पादन कम रहने और वैश्विक बाजार में उत्पादन कम रहने के चलते घरेलू और वैश्विक बाजार में चीनी के दाम तेज रहेंगे। ऐसे में सरकार नहीं चाहेगी कि चीनी की कीमतों को लेकर कोई भी ढील दी जाए।</p>
<p>सरकार ने इस साल निर्यात को लेकर भी फैसला नहीं लिया है। पिछले साल (2022-23) में 63 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया था। सरकार ने पिछले साल चीनी के निर्यात को फ्री से रेस्ट्रिक्टेड लिस्ट में रख दिया था। इसके लिए जारी अधिसूचना 31 अक्तूबर, 2023 को समाप्त हो रही है। सूत्रों के मुताबिक इसकी अवधि बढ़ाकर 31 अक्तूबर, 2024 की जा सकती है। हालांकि अभी सरकार का चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध का इरादा नहीं है लेकिन इसके बारे में फैसला फरवरी, 2024 में किये जाने की संभावना है क्योंकि उस समय तक देश में चीनी उत्पादन की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी पर स्टॉक लिमिट लगा सकती है सरकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बासमती पर 1200 डॉलर प्रति टन का एमईपी जारी रखने का फैसला, निर्यातकों ने की बासमती धान की खरीद बंद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-retains-1200-dollar-per-tonne-mep-on-basmati-rice-traders-stopped-buying-basmati-paddy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 15 Oct 2023 12:50:52 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-retains-1200-dollar-per-tonne-mep-on-basmati-rice-traders-stopped-buying-basmati-paddy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>घरेलू बाजार में चावल की कीमतों को नियंत्रित रखने के मकसद से सरकार ने बासमती चावल के निर्यात पर 1200 डॉलर प्रति टन की न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) की शर्त को जारी रखने का फैसला किया है। वहीं बासमती उत्पादक राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में निर्यातकों ने बासमती धान की खरीद बंद कर दी है। जिसके चलते इसकी कीमतों में बड़ी गिरावट की स्थिति पैदा हो सकती है। उपभोक्ता मामले मंत्रालय द्वारा 14 अक्तूबर को जारी ऑफिस मेमोरेंडम में कहा गया है कि बासमती चावल के निर्यात पर 1200 डॉलर प्रति टन का एमईपी 15 अक्तूबर के बाद भी जारी रहेगा। वहीं निर्यातकों को उम्मीद थी कि सरकार 15 अक्तूबर के बाद एमईपी को 850 डॉलर प्रति टन के आसपास ला सकती है और उसके चलते बातमती की 1509 व दूसरी जल्दी आने वाली प्रजातियों के किसानों को 3600 से 3800 रुपये प्रति क्विंटल तक की कीमत मिली। पिछले कुछ दिनों में बासमती धान की कीमत घटकर 3500 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गई है। निर्यातकों का कहना है कि अगर सरकार द्वारा 1200 डॉलर प्रति टन का एमईपी जारी रखने के फैसले में बदलाव नहीं होता है तो बासमती धान की कीमत में 500 रुपये प्रति क्विंटल तक की और कमी आ सकती है। बासमती की 1121 किस्म और पारंपरिक बासमती की किस्म उगाने वाले किसानों को कीमतों में गिरावट के चलते भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।</p>
<p>ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन (एआईआरईए) के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि अभी तक केवल 30 फीसदी बासमती धान बाजार में आया है और 70 फीसदी फसल का बाजार में आना बाकी है। ऐसे में सरकार 1200 डॉलर प्रति टन की एमईपी जारी रखने के फैसले से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। निर्यातकों ने फिलहाल सभी बासमती उत्पादक राज्यों में बासमती धान की खरीद रोक दी है। अगर सरकार अपना फैसला बदलती है तो हम इसे शुरू कर सकते हैं।</p>
<p>पिछले साल देश से करीब 48 हजार करोड़ रुपये का 45 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया गया था।</p>
<p>केंद्र सरकार ने अगस्त में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात संवर्धन अथारिटी (एपीडा) को निर्देश दिया था कि बासमती चावल के&nbsp; निर्यात के लिए रजिस्ट्रेशन एवं अलोकेशन सर्टिफिकेट जारी करने के लिए 1200 डॉलर प्रति टन की शर्त पर अमल करे। इस मुद्दे पर निर्यातकों ने सरकार के साथ बैठक की जिसके बाद एक समिति का गठन किया गया जिसे इस फैसले पर अक्तूबर में रिपोर्ट देने के लिए कहा गया। इस समिति ने बासमती उत्पादक राज्यों में संबंधित पक्षकारों के साथ बैठकें की। निर्यातकों को उम्मीद थी कि सरकार एमईपी में कटौती करेगी। विजय सेतिया ने बताया कि इस समिति ने 7 राज्यों में बैठकें कर अपनी रिपोर्ट सरकार को दे दी थी। निर्यातकों से संगठन की भी वाणिज्य मंत्री के साथ बैठक हुई थी। हमें आश्वासन दिया गया था कि एमईपी में बदलाव किया जाएगा और उसके 850 डॉलर प्रति टन होने की उम्मीद में निर्यातकों ने 3600 रुपये से 3800 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत पर बासमती धान खऱीदा। लेकिन अभी 70 फीसदी फसल बाजार में आना बाकी है। सरकार द्वारा फैसले में देरी के चलते बासमती धान की कीमत घटकर 3500 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गई है। वहीं अगर सरकार फैसला नहीं बदलती है तो इसमें 500 रुपये प्रति क्विंटल तक की और गिरावट आ सकती है।</p>
<p>उनका कहना है कि भारत का करीब 80 फीसदी बासमती चावल मध्य पूर्व के देशों में जाता है। वहां बिरयानी में इस्तेमाल होने वाला पारबॉयल्ड बासमती जाता है। पिछले तीन साल में इसकी कीमत का औसत 2020-21 में 850 डॉलर, 2021-22 में 894 डॉलर और 2022-23 में 1054 डॉलर प्रति टन रहा है। ऐसे में सरकार के इस कदम से हमारा 80 फीसदी निर्यात प्रभावित हो रहा है क्योंकि हम 1200 डॉलर की कीमत पर इसे निर्यात करने की स्थिति में नहीं है।</p>
<p>सेतिया कहते हैं कि हमने सेटेलाइट इमेजिंग के जरिये फसल का जो अनुमान लगाया है उसमें इस साल पाकिस्तान की फसल पिछले साल के दोगुना है। सरकार के इस फैसले ने वैसे ही पाकिस्तान को दो माह का खुला विंडो दे दिया जिसका वह फायदा उठाएगा। जबकि हम निर्यात करने की स्थिति में ही नहीं हैं। उनका कहना है कि बासमती की 1121 किस्म का कुछ चावल जो स्टीम्ड राइस के रूप में इस्तेमाल होता है वह 1200 डॉलर पर निर्यात हो सकता है लेकिन इसकी मात्रा बहुत कम है।</p>
<p>सरकार द्वारा एमईपी तय करने के फार्मूले पर उनका कहना है कि सीजन के अंत में पुराना चावल जाता है जिसके लिए दाम अधिक मिलता है। अभी भी दो साल पुराना चावल 1600 डॉलर तक कीमत पर जा सकता है वहीं छोटे पैकेट में दाम इससे भी अधिक है। लेकिन यह सीमित मात्रा है। इसे एमईपी का आधार नहीं बनाया जा सकता है।</p>
<p>अभी बासमती की सबसे अधिक उत्पादन वाली किस्म 1121 और पारंपरिक बासमती की फसल बाजार में आनी है। ऐसे में इनके उत्पादक किसानों को कीमतों में गिरावट की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>निर्यातकों का कहना है कि वैश्विक बाजार में भारत का बड़ा प्रतिस्पर्धी पाकिस्तान 900 डॉलर प्रति टन की कीमत के आसपास बासमती का निर्यात कर रहा है। ऐसे में भारत के लिए 1200 डॉलर या उसके उपर की कीमत पर बासमती का निर्यात करना मुश्किल हो जाएगा। पिछले वित्त वर्ष (2022-23) में देश से चावल का कुल निर्यात 223 लाख टन तक पहुंच गया था। जिसमें 45 लाख टन बासमती और बाकी मात्रा गैर बासमती चावल की थी। चावल के वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी 40 फीसदी तक पहुंच गई थी। लेकिन घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ने के चलते सरकार ने गैर बासमती व्हाइट राइस के निर्यात पर रोक लगा दी थी। जिसका करीब 100 लाख टन का निर्यात हुआ था। वहीं इसके बाद पारबॉयल्ड चावल (सेला चावल) के निर्यात पर 20 फीसदी का निर्यात शुल्क लगा दिया था। इस शुल्क की अवधि को भी अब 31 मार्च, 2024 तक बढ़ा दिया गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बासमती पर 1200 डॉलर प्रति टन का एमईपी जारी रखने का फैसला, निर्यातकों ने की बासमती धान की खरीद बंद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार ने पार&amp;#45;बॉयल्ड राइस पर 20% निर्यात शुल्क मार्च 2024 तक के लिए बढ़ाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-extends-20-percent-export-duty-on-parboiled-rice-until-march-2024.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 14 Oct 2023 10:08:25 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-extends-20-percent-export-duty-on-parboiled-rice-until-march-2024.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">घरेलू बाजार में चावल की कीमतों में तेजी को देखते हुए सरकार ने पार बॉयल्ड राइस पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 31 मार्च 2024 तक के लिए बढ़ा दी है। सरकार ने अगस्त में इस चावल के निर्यात पर 20% का शुल्क लगाया था। उस समय यह आदेश तत्काल प्रभावी हो गया था। अगस्त का आदेश 15 अक्टूबर को खत्म हो रहा था। उससे पहले ही सरकार ने इसकी अवधि बढ़ा दी है। वित्त मंत्रालय की तरफ से शुक्रवार देर शाम जारी अधिसूचना के अनुसार यह निर्यात शुल्क 31 मार्च 2024 तक जारी रहेगा। इसका मकसद देश में इसका पर्याप्त भंडार बनाए रखना और घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखना है। इस समय भारत से हर किस्म के गैर बासमती चावल के निर्यात पर अंकुश या पाबंदी है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इससे पहले सरकार ने घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के उद्देश्य से जुलाई में गैर बासमती सफेद चावल के निर्यात पर रोक लगाई गई थी। भारत से चावल के कुल निर्यात में गैर बासमती सफेद चावल का हिस्सा लगभग 25% रहता है।&nbsp;</span><span style="font-weight: 400;">उससे पहले पिछले साल सितंबर में टूटे चावल के निर्यात पर पाबंदी लगाई गई थी।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस वर्ष अप्रैल से जून के दौरान 15.5 लाख टन गैर बासमती चावल का निर्यात किया गया था। अप्रैल-जून 2022 में 11.5 लाख टन गैर बासमती सफेद चावल का निर्यात हुआ था। इस चावल के निर्यात में करीब 35% की बढ़ोतरी होने और घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों को ध्यान में रखते हुए इसके निर्यात पर रोक लगाई गई थी।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आमतौर पर खरीफ फसलों के उत्पादन का अनुमान सितंबर के तीसरे या चौथे हफ्ते में जारी किया जाता है। लेकिन इस बार सरकार ने अभी तक यह आंकड़े जारी नहीं किए हैं। इस साल धान की बुवाई पिछले साल की तुलना में अधिक क्षेत्र में हुई है। लेकिन हरियाणा, पंजाब में बाढ़ और अगस्त में कई इलाकों में कम बारिश के चलते उत्पादन कम रहने का अंदेशा है। पिछले साल खरीफ सीजन में 11 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था। इस साल 11.1 करोड़ टन के लक्ष्य से कम उत्पादन के आसार हैं।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_652a1b14a37a4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार ने पार-बॉयल्ड राइस पर 20% निर्यात शुल्क मार्च 2024 तक के लिए बढ़ाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आईडीएच और बेटर कॉटन भारतीय कृषि को पुनर्जीवित करने के लिए रिजेनेरेटिव खेती को दे रहा बढ़ावा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/revitalizing-indias-agriculture-idh-better-cotton-promote-regenerative-farming-for-sustainable-future .html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Oct 2023 15:31:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/revitalizing-indias-agriculture-idh-better-cotton-promote-regenerative-farming-for-sustainable-future .html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दुनिया की सबसे बड़ी कपास स्थिरता पहल आईडीएच और बेटर कॉटन ने रिजेनेरेटिव कृषि के दायरे और गुणों पर आम सहमति बनाने के साथ-साथ नीति, व्यवसाय, वित्त और अनुसंधान में कार्रवाई के अवसरों की पहचान करने के लिए विचारकों, अभिनेताओं और नवप्रवर्तकों को एक साथ लेकर आया। सहयोग, नवाचार और एक सक्षम वातावरण बनाकर भारत में रिजेनेरेटिव खेती को बढ़ावा देने के लिए नई दिल्ली में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।</p>
<p>कृषि भारत की अर्थव्यवस्था और समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जिससे 46 फीसदी से अधिक आबादी जुड़ी हुई है। इसमें से 86 फीसदी छोटे किसान हैं। कृषि क्षेत्र को पर्यावरणीय असंतुलन, मिट्टी की गुणवत्ता में कमी और पानी की कमी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जो इसकी दीर्घकालिक स्थिरता को खतरे में डाल रही हैं। जैसे-जैसे भारत की जनसंख्या बढ़ती जा रही है, फसल और खाद्य सुरक्षा तथा लाखों लोगों के लिए आजीविका सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होता जा रहा है।</p>
<p>एक बयान में कहा गया है कि रिजेनेरेटिव कृषि मृदा स्वास्थ्य को पुनर्जीवित कर, जल संसाधनों को संरक्षित कर और जैव विविधता को बढ़ावा देकर एक स्थायी समाधान प्रदान करती है। साथ ही जलवायु परिवर्तन के प्रति उत्पादकता और लचीलापन भी बढ़ाती है। इस कार्यक्रम ने कृषक समुदायों, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज और सरकार के प्रतिभागियों को सहयोग करने, अंतर्दृष्टि साझा करने और एक स्थायी और रिजेनेरेटिव कृषि भविष्य की दिशा में सार्थक प्रगति करने के लिए एक मंच प्रदान किया जो पर्यावरण की रक्षा करेगा और भारत में खाद्य और फाइबर (कपास) फसलों के उत्पादन में शामिल लाखों छोटे कृषक समुदायों की आजीविका में सुधार करेगा।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान आयोजित चर्चाओं में मिट्टी से कार्बन को अलग कर जलवायु परिवर्तन के मुद्दों को संबोधित करने, मिट्टी के क्षरण और पानी की कमी को रोकने और जैव विविधता के नुकसान को रोकने के लिए रिजेनेरेटिव कृषि के महत्व को दोहराया गया ताकि &nbsp;खाद्य सुरक्षा में वृद्धि, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल किया जा सके।</p>
<p>आईडीएच की ग्लोबल डायरेक्टर (टेक्सटाइल्स एंड मैन्युफैक्चरिंग) प्रमित चंदा ने सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, "इस आयोजन के माध्यम से, हम एक गतिशील, बहु-क्षेत्रीय नेटवर्क बनाने और भारत में कृषि के लिए अधिक टिकाऊ और रिजेनेरेटिव भविष्य के लिए हितधारकों को संगठित करने की आकांक्षा रखते हैं। इसमें यह सर्वोपरि है कि प्रत्येक हितधारक समूह इसे वास्तविक बनाने के लिए अपनी भूमिका पर विचार करे।"</p>
<p>बेटर कॉन के कंट्री डायरेक्टर (भारत) ज्योति नारायण कपूर ने आयोजन के महत्व पर टिप्पणी करते हुए कहा, "रिजेनेरेटिव कृषि पद्धतियों के उपयोग को बढ़ाना विश्व स्तर पर कृषक समुदायों के लिए महत्वपूर्ण होगा, यदि वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के उनके संचालन लचीले हों। यह आयोजन क्रॉस-कमोडिटी संबंधों को मजबूत करने और इस मुद्दे का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध संगठनों को एकजुट करने में एक लंबा रास्ता तय करेगा।"</p>
<p>रिजेनेरेटिव कृषि भारतीय कृषि के सामने आने वाली गंभीर चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक स्थायी समाधान प्रदान करती है। अपने संयुक्त प्रयासों के माध्यम से आईडीएच और बेटर कॉटन का लक्ष्य पुनरुत्पादक प्रथाओं को अपनाने में तेजी लाना, एक सक्षम वातावरण बनाना और भारत के कृषि क्षेत्र के पुनरुद्धार में योगदान देना है। आईडीएच और बेटर कॉटन पुनरुत्पादक कृषि पर बहु-हितधारक संवाद जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिसमें खाद्य और फैशन उद्योगों के हितधारकों के साथ-साथ सरकारी संस्थाओं, नागरिक समाज संगठनों, शिक्षाविदों और वित्तीय क्षेत्र जैसे अन्य प्रमुख समूहों की भागीदारी शामिल है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आईडीएच और बेटर कॉटन भारतीय कृषि को पुनर्जीवित करने के लिए रिजेनेरेटिव खेती को दे रहा बढ़ावा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खुदरा महंगाई दो महीने बाद घटी, खाद्य पदार्थों के दाम में कमी से सितंबर में 5.02% पर पहुंची]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/lower-food-prices-ease-retail-inflation-to-3-month-low-of-5-pc-in-september.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Oct 2023 12:29:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/lower-food-prices-ease-retail-inflation-to-3-month-low-of-5-pc-in-september.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट के चलते सितंबर में खुदरा महंगाई की दर घटकर तीन महीने के निचले स्तर 5.02 फीसदी पर आ गई है। दो महीने बाद महंगाई की दर रिजर्व बैंक के अनुकूल स्तर 6 फीसदी से नीचे आई है।</p>
<p>उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दी दर अगस्त में 6.83 फीसदी थी, जबकि सितंबर 2022 में 7.41 फीसदी थी। इससे पहले इसका निचला स्तर इस साल जून में था जब महंगाई घटकर 4.87 फीसदी पर पहुंच गई थी।</p>
<p>राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में खाद्य पदार्थों की महंगाई दर अगस्त के 9.94 फीसदी से घटकर 6.56 फीसदी पर आ गई। रिजर्व बैंक अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति तय करते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को ध्यान में रखता है।</p>
<p>इस बीच, एनएसओ ने औद्योगिक उत्पादन का आंकड़ा भी जारी किया है। एनएसओ के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में औद्योगिक उत्पादन दर बढ़कर 10.3 फीसदी पर पहुंच गया। अगस्त 2022 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में करखाना उत्पादन 0.7 फीसदी पर सिमट गया था। एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों से पता चला है कि अगस्त 2023 में विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 9.3 फीसदी बढ़ गया।</p>
<p>इस दौरान खनन उत्पादन 12.3 फीसदी बढ़ा है, जबकि बिजली उत्पादन में 15.3 फीसदी की वृद्धि हुई है। अप्रैल-अगस्त 2023 में आईआईपी की वृद्धि दर 6.1 फीसदी रही है, जबकि 2022 की समान अवधि में यह 7.7 फीसदी थी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खुदरा महंगाई दो महीने बाद घटी, खाद्य पदार्थों के दाम में कमी से सितंबर में 5.02% पर पहुंची ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अरहर दाल 200 रुपये किलो के पार, 2015 में पहली बार इस स्तर पर पहुंचा था भाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/arhar-dal-price-crosses-rs-200-per-kg-price-had-reached-these-level-8-years-ago-in-2015.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Oct 2023 07:21:29 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/arhar-dal-price-crosses-rs-200-per-kg-price-had-reached-these-level-8-years-ago-in-2015.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अरहर दाल की कीमतों को नियंत्रित रखने की तमाम कोशिशों के बावजूद खुदरा बाजार में भाव 200 रुपये के करीब पहुंच चुका है। वहीं ऑनलाइन ग्रॉसरी स्टोरों पर यह 200 रुपये किलो को पार कर 215-225 रुपये प्रति किलो पर मिल रहा है। इससे पहले अक्टूबर 2015 में अरहर दाल ने यह स्तर छुआ था। जून 2023 के बाद से खुदरा कीमतों में 70-80 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हो चुकी है। &nbsp;</p>
<p>अरहर की कीमतों में तेजी से मूंग, मसूर और चना दाल भी दबाव में आ गए हैं और इनकी खुदरा कीमतें भी बढ़ गई हैं। मसूर दाल की खुदरा कीमत जहां 110-120 रुपये प्रति किलो और चना की 90-100 रुपये किलो पहुंच गई है, वहीं मूंग दाल 130 रुपये किलो के भाव बिक रहा है। अरहर की नई फसल नवंबर से आनी शुरू हो जाएगी। उसके बाद दामों में नरमी आने की संभावना है।</p>
<p><strong>रूरल वॉयस</strong> द्वारा अरहर दाल की थोक और खुदरा कीमतों की पड़ताल करने पर पता चला कि मंडियों में अरहर दाल की थोक कीमत 14500-16400 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच चुकी है। जबकि खुदरा बाजार में सामान्य गुणवत्ता वाले अरहर दाल के दाम 180-190 रुपये प्रति किलो हो गए हैं और जल्द ही 200 रुपये किलो पर पहुंच सकते हैं। वहीं बेहतर गुणवत्ता वाले अरहर दाल का भाव 200 रुपये किलो को पार कर गया है। अमेजन, ब्लिंकिट, जियो मार्ट, जेप्टो जैसे ऑनलाइन ग्रॉसरी स्टोर्स पर ब्रांडेड अरहर दाल 215-225 रुपये प्रति किलो मिल रहे हैं। केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अखिल भारतीय स्तर पर अरहर दाल की औसत खुदरा कीमत 11 अक्टूबर, 2023 को 150.56 रुपये किलो रही जो एक महीने पहले 144.67 रुपये और एक साल पहले 112.03 रुपये प्रति किलो थी।</p>
<p>अरहर की कीमतों में लगातार तेजी की सबसे बड़ी वजह पिछले साल (2023-23) उत्पादन में 7.90 लाख टन की कमी रहना है। चालू खरीफ सीजन (2023-24) में भी उत्पादन घटने की पूरी आशंका है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अरहर की बुवाई का रकबा 2022 के 45.61 लाख हेक्टेयर से घटकर 2023 में 42.92 लाख हेक्टेयर रह गया है। इसका असर उत्पादन पर पड़ना तय है जिससे कीमतें प्रभावित होने की संभावना है। इसे देखते हुए भी भाव में तेजी का दौर बना हुआ है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अरहर दाल 200 रुपये किलो के पार, 2015 में पहली बार इस स्तर पर पहुंचा था भाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[लचीली कृषि&amp;#45;खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं और युवा कृषि उद्यमियों को सहायता की जरूरत  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/women-and-young-agri-entrepreneurs-need-support-to-promote-resilient-agri-food-systems.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 12 Oct 2023 17:03:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/women-and-young-agri-entrepreneurs-need-support-to-promote-resilient-agri-food-systems.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महिलाओं और युवा कृषि-उद्यमियों को अभी भी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जो उन्हें न्यायसंगत और लचीली कृषि-खाद्य प्रणालियों की दिशा में आगे बढ़ने से रोकती हैं। इन चुनौतियों में फाइनेंस तक पहुंच की कमी, सीमित भूमि स्वामित्व, अनौपचारिक और अवैतनिक कार्य और उनकी जरूरतों के बारे में आवाज उठाने के कम अवसर शामिल हैं। आईसीएआर-एनएएससी पूसा में 9-12 अक्टूबर तक आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय जेंडर सम्मेलन में व्यापारिक दिग्गजों, मॉडल किसानों और वैज्ञानिकों के एक पैनल द्वारा इन मामलों को सामने लाया गया।</p>
<p>&ldquo;अनुसंधान से प्रभाव तक : न्यायसंगत और लचीली कृषि-खाद्य प्रणालियां&rdquo; विषय पर आयोजित सम्मेलन की मेजबानी सीजीआईएआर जेंडर इम्पैक्ट प्लेटफॉर्म और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा की गई है। इसका उद्घाटन सोमवार को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने किया था। इस चार दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन 18 सत्र आयोजित हुए जिसमें बाजरा की कटाई के बाद प्रसंस्करण में महिला किसानों के कठिन परिश्रम को कम करने के उपाय, महिला रेहड़ी-पटरी वालों और फेरीवालों के बीच लिंग अंतर का आकलन और आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में किसानों के बीच बीज की पसंद के लिंग आधारित चालक जैसे विषयों पर 80 से अधिक वैज्ञानिक पोस्टरों की प्रस्तुतियां शामिल थीं।</p>
<p>इस सम्मेलन के महत्व को दोहराते हुए सीजीआईएआर जेंडर इम्पैक्ट प्लेटफॉर्म के निदेशक डॉ. निकोलिन डी हान ने कहा कि विश्व स्तर पर कृषि-खाद्य प्रणालियों में लैंगिक असमानता बहुत ही महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। कुल मिलाकर, भोजन में महिलाएं अक्सर पुरुषों की तुलना में कम सुरक्षित होती हैं और वे बाढ़ और सूखे जैसे बाहरी झटकों से भी अधिक प्रभावित होती हैं। हम नीति-निर्माताओं और निवेशकों को सर्वोत्तम समाधानों की दिशा में मार्गदर्शन करने के लिए अनुसंधान, साक्ष्य और व्यावहारिक समझ का संयोजन कर रहे हैं जो हमें लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण पर वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता प्रदान सकता है।</p>
<p>सम्मेलन के दूसरे दिन शहद उत्पादक कंपनी बी फ्रेश प्रोडक्ट्स की संस्थापक और निदेशक अनुषा जुकुरी, एम लेंस रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड (एक संगठन जो एकल-उपयोग दूध मिलावट परीक्षण कार्ड का उत्पादन करता है) के संस्थापक और प्रबंध निदेशक ध्रुव तोमर, लखनऊ फार्मर्स मार्केट (स्टार्ट-अप और उपभोक्ताओं को जोड़ने वाला एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म) की सीईओ ज्योत्सना कौर हबीबुल्लाह, और पूसा कृषि (एक एजी-टेक इनक्यूबेटर और आईसीएआर में वरिष्ठ स्केल वैज्ञानिक) की सीईओ डॉ. आकृति शर्मा ने पैनल चर्चा में भाग लिया। 'अनुसंधान को आधार बनाना : क्षेत्र से अनुभव' शीर्षक वाले सत्र की अध्यक्षता तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. वी. गीतालक्ष्मी ने की।</p>
<p>ज्योत्सना कौर हबीबुल्लाह ने कहा कि जब खेतों में जाते हैं तो अक्सर महिलाएं ही खेतों में काम करती हुई दिखाई देती हैं, लेकिन उन महिलाओं के पास न तो अपनी जमीन होती है और न ही उन्हें अपनी मेहनत का पैसा मिलता है। अधिकांश समय उनके कार्यों पर ध्यान ही नहीं दिया जाता और न ही उन्हें कोई भुगतान किया जाता है। अनुषा जुकुरी ने चार साल में अपना व्यवसाय पांच से बढ़ाकर 1,500 मधुमक्खी के छत्ते तक कर लिया। उन्होंने फाइनेंस तक पहुंच की कमी पर अफसोस जताते हुए कहा कि जब उन्होंने पहली बार इस काम की शुरुआत की थी तो उन्हें बैंक कर्ज देने के इच्छुक नहीं थे। अब जब उन्होंने व्यवसाय में सफलता हासिल कर ली है, तो वे कर्ज देने की इच्छा जता रहे हैं। &nbsp;</p>
<p>सत्र का समापन ऑस्ट्रेलियन सेंटर फॉर इंटरनेशनल एग्रीकल्चरल रिसर्च (एसीआईएआर) में आउटरीच और क्षमता निर्माण के महाप्रबंधक एलेनोर डीन द्वारा किया गया। डीन ने कहा कि गरीबी और असमानता असमान शक्ति संबंधों पर आधारित है और इनका लिंग के मामले में इतना महत्व नहीं हैं। यही एक कारण है कि एसीआईएआर ने न केवल लैंगिक समानता बल्कि सामाजिक समावेशन को भी शामिल करने के लिए अपने काम का विस्तार किया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ लचीली कृषि-खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं और युवा कृषि उद्यमियों को सहायता की जरूरत   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जूट आयात रोकने की केंद्र ने मिलों को दी सलाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centre-requests-mills-to-halt-raw-jute-import.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 12 Oct 2023 16:31:05 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centre-requests-mills-to-halt-raw-jute-import.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में अधिक आपूर्ति के कारण मिलों को कच्चे जूट का आयात बंद करने की सलाह दी है। साथ ही जूट आयातकों को दिसंबर तक एक निर्धारित प्रारूप में लेनदेन की रोजाना रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।</p>
<p>केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय के अधीन आने वाले कोलकाता स्थित जूट आयुक्त के कार्यालय ने एक नोटिस में जूट मिलों को टीडी 4 से टीडी 8 वेरिएंट (व्यापार में इस्तेमाल किए गए पुराने वर्गीकरण के अनुसार) के जूट का आयात नहीं करने की भी सिफारिश की है क्योंकि ये देश में पर्याप्त रूप से उपलब्ध हैं।</p>
<p>भारतीय जूट मिल्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष संजय कजारिया ने कहा, ''कुल जूट उत्पादन और व्यापार में इन वेरिएंट की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत है।'' चालू सीजन में जूट की उपलब्धता 119 लाख गांठ रहने का अनुमान है। इसमें से 91 लाख गांठ उत्पादन, 23 लाख गांठ ओपनिंग स्टॉक और 5 लाख गांठ आयातित कच्चे जूट की हिस्सेदारी शामिल है।</p>
<p>2021-22 के आंकड़ों के अनुसार, जूट का आयात 62,500 टन था जिसका मूल्य 449 करोड़ रुपये था, जबकि निर्यात 32,000 टन तक पहुंच गया था जिसका मूल्य 222 करोड़ रुपये था। जूट आयुक्त ने हाल ही में किसानों के हितों की रक्षा के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) स्तर से नीचे कच्चे जूट के लेनदेन पर रोक लगा दी है। मंडियों में कच्चे जूट की कीमतें 4,100 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गई हैं, जबकि औसत किस्म के लिए जूट का एमएसपी 5,050 रुपये प्रति क्विंटल है।</p>
<p>भारतीय जूट निगम को एमएसपी पर किसानों से कच्चा जूट खरीदने का काम सौंपा गया है, लेकिन हितधारकों ने नोट किया है कि उनका संचालन हर कोने को कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं है जिससे किसानों की सुरक्षा के लिए नियामक को हस्तक्षेप करना पड़ा।</p>
<p>पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मेघालय, त्रिपुरा और आंध्र प्रदेश जूट के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं जहां के लाखों किसान इसकी खेती करते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63fb3528e1f4c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जूट आयात रोकने की केंद्र ने मिलों को दी सलाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[साल 2023&amp;#45;24 में चीनी  उत्पादन 9 लाख टन घटकर 317 लाख टन रहने का अनुमान, कीमतों में रहेगी तेजी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/current-season-sugar-production-estimated-at-317-lakh-tonnes-prices-will-remain-firm.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 12 Oct 2023 08:16:09 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/current-season-sugar-production-estimated-at-317-lakh-tonnes-prices-will-remain-firm.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के कई बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों में अल नीनो के चलते मानसून की कम बारिश का गन्ना उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है। इस साल चीनी सीजन देर से शुरू होगा। इसके चलते चालू पेराई सीजन (अक्तूबर 2023 से सितंबर 2024) में चीनी उत्पादन पिछले सीजन से नौ लाख टन घटकर 317 लाख  टन रहने का अनुमान है। चीनी उद्योग द्वारा लगाये गये इस उत्पादन अनुमान में गन्ना उत्पादन पर अल नीनो के चलते कम बारिश को मुख्य वजह बताया गया है। देश के सबसे बड़े दो चीनी उत्पादक राज्यों में शुमार महाराष्ट्र में गन्ना उत्पादन में कमी आने का अनुमान है। वहीं कर्नाटक में भी गन्ना उत्पादन में कमी का अनुमान उद्योग ने लगाया है। ऐसे में चीनी मिलों के लिए गन्ने की आपूर्ति में कमी आना लगभग तय है।</p>
<p>चीनी की कीमतों के लगातार मजबूत रहने की संभावना के चलते चीनी मिलों के बीच गन्ने को लेकर प्रतिस्पर्धा रहेगी। घरेलू बाजार में चीनी की एक्स फैक्टरी कीमत 3600 रुपये से 3870 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है, जबकि खुदरा बाजार में कीमत 43.90 रुपये प्रति क्विंटल पर चल रही हैं।</p>
<p>चीनी उद्योग के अनुमानों के मुताबिक 278 लाख टन की घरेलू खपत के बाद चालू सीजन के अंत में चीनी का स्टॉक 97 लाख टन रहने की संभावना है। पिछले सीजन (2022-23) के अंत में चीनी का स्टॉक 58 लाख टन रहा जो पांच साल में सबसे कम है।</p>
<p>कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने चीनी मिलों को अक्तूबर का कोटा शुरू में ही बेचने की छूट दी है। इसके लिए 13 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, अक्तूबर के लिए चीनी मिलों को अतिरिक्त कोटा जारी किया जाएगा।</p>
<p>उत्पादन की मौजूदा स्थिति के आधार पर निर्यात के लिए करीब 30 लाख टन चीनी उद्योग के पास होगी, लेकिन निर्यात पर कोई भी फैसला जनवरी-फरवरी 2024 में उत्पादन की स्थिति का आकलन करने के बाद ही लिये जाने की संभावना है। चीनी उद्योग भी सरकार से निर्यात की मंजूरी के लिए फरवरी तक इंतजार करने के पक्ष में है। फिलहाल चीनी का निर्यात रेस्ट्रिक्टेड लिस्ट में है। पिछले साल देश से 63 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया था, लेकिन सरकार ने बाद में कोटा जारी नहीं किया। चीनी निर्यात को रेस्ट्रिक्टेड लिस्ट में रखने की अधिसूचना 31 अक्तूबर, 2023 को समाप्त हो रही है। सूत्रों के मुताबिक सरकार इस अधिसूचना को 31 अक्तूबर, 2024 तक के लिए बढ़ा सकती है। इसका अर्थ होगा कि निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगेगा और अगर अतिरिक्त चीनी होगी तो फरवरी, 2024 के बाद निर्यात के बारे में सरकार कोई फैसला ले सकती है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस समय चीनी की कीमतें काफी तेज बनी हुई हैं। यह कीमतें लंदन व्हाइट के लिए भारत से एफओबी कीमत 691 डॉलर प्रति टन यानी 5420 रुपये प्रति क्विटंल और न्यूयार्क रॉ के लिए 25.93 सेंट जो भारत से एफओबी 4950 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है। यानी इस समय भारत से निर्यात के लिए चीनी की कीमत बहुत आकर्षक बनी हुई है लेकिन फिलहाल निर्यात संभव नहीं है और सरकार का पूरा फोकस घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखना है। हालांकि, पिछले दिनों महाराष्ट्र में एक्स-फैक्टरी कीमतें कुछ कम हुई हैं लेकिन उत्तर प्रदेश में कीमतों में कोई कमी नहीं आई है।</p>
<p>साल 2022-23 में चीनी उत्पादन 326 लाख टन रहा और खपत 275 लाख टन रही। 2021-22 में चीनी का उत्पादन 357.60 लाख टन रहा था और खपत 273.30 लाख टन रही थी। वहीं बकाया स्टॉक 70 लाख टन रहा था। साल 2021-22 में देश से चीनी का निर्यात 110.70 लाख टन रहा था। जहां तक चालू सीजन (2023-24) की बात है तो उत्पादन  की सही स्थिति फरवरी 2024 तक ही साफ होगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/05/image_750x500_6293a5c5da259.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ साल 2023-24 में चीनी  उत्पादन 9 लाख टन घटकर 317 लाख टन रहने का अनुमान, कीमतों में रहेगी तेजी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/05/image_750x500_6293a5c5da259.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[टिकाऊ कृषि&amp;#45;खाद्य प्रणालियों को प्रोत्साहन देने के लिए नवाचारों को अपनाने की जरूरतः रुपाला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/need-for-innovations-to-foster-sustainable-agri-food-systems-said-parshottam-rupala.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Oct 2023 16:16:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/need-for-innovations-to-foster-sustainable-agri-food-systems-said-parshottam-rupala.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय मत्स्य पालन, <span>पशुपालन और डेयरी मंत्री परशोत्तम रुपाला ने कहा है कि खाद्यान्न की बढ़ती मांग</span>, <span>पर्यावरणीय गिरावट और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों को देखते हुए वैज्ञानिक नवाचारों के माध्यम से कृषि-खाद्य प्रणालियों को टिकाऊ उद्यमों में परिवर्तित करने की तत्काल जरूरत है। कोच्चि में चार दिवसीय </span>16<span>वीं कृषि विज्ञान कांग्रेस (एएससी) के उद्घाटन मौके पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। </span></p>
<p>रूपाला ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों को कृषि उत्पादन प्रक्रिया में अधिक से अधिक मशीनीकरण को शामिल करने और कृषि में महिलाओं के लिए विशेष कृषि उपकरणों को विकसित करने और लोकप्रिय बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने सागर परिक्रमा अभियान के दौरान अपना यह अवलोकन साझा किया कि समुद्री और अंतर्देशीय जल प्रदूषण ने जलीय जीवन और तटीय व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। उन्होंने वैज्ञानिकों से इस भयानक खतरे से निपटने के लिए स्थायी और टिकाऊ समाधान खोजने का आह्वान किया।</p>
<p>रूपाला ने इस बात पर जोर दिया कि पोक्कली चावल जैसे पारंपरिक कृषि उत्पादों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है और पोक्कली किसानों के लिए मुनाफा सुनिश्चित करने के उपाय किए जाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना उत्पादन को बढ़ावा देने के बराबर है और इसे उन्नत तकनीकी हस्तक्षेपों पर ध्यान केंद्रित करके प्राप्त किया जा सकता है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x_65267cb6a519d.jpg" alt="" /></p>
<p>कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि भारत की खाद्यान्न मांग वर्ष 2033 <span>तक बढ़कर </span>340 <span>से </span>355 <span>मीट्रिक टन तक हो जाएगी। कृषि और वस्तुओं में तकनीकी सफलताओं के लिए जीनोमिक्स और जीनोम संपादन पर शोध मुख्य फोकस होगा जहां पारंपरिक प्रजनन वांछित परिणाम नहीं दे सकता है।</span></p>
<p>केरल के कृषि मंत्री पी प्रसाद ने इको-सिस्टम और पर्यावरण के स्वास्थ्य को बनाए रखते हुए देश के सभी नागरिकों के लिए खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि केरल सरकार द्वारा हाल ही में शुरू की गई '<span>पोषक समृद्धि</span>' <span>योजना इस लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान देगी।</span></p>
<p>राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (एनएएएस) द्वारा आयोजित चार दिवसीय कृषि विज्ञान कांग्रेस (एएससी) में देश-विदेश से 1500 <span>से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। यह कृषि विज्ञान कांग्रेस केरल में पहली बार आयोजित हो रही है और केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) द्वारा आयोजित की जा रही है।</span></p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ टिकाऊ कृषि-खाद्य प्रणालियों को प्रोत्साहन देने के लिए नवाचारों को अपनाने की जरूरतः रुपाला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कपास के घरेलू दाम ज्यादा रहने से निर्यात 64 फीसदी घटाः सीएआई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/high-cotton-prices-may-impact-exports-in-2022-23.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Oct 2023 10:43:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/high-cotton-prices-may-impact-exports-in-2022-23.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>घरेलू बाजार में ज्यादा कीमतों के कारण 30 सितंबर को समाप्त कपास विपणन वर्ष 2022-23 में कपास निर्यात में 64 फीसदी की गिरावट का अनुमान है। कपास विपणन वर्ष 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक होता है।</p>
<p>कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने कहा है कि विपणन वर्ष 2021-22 के दौरान कपास का निर्यात 43 लाख गांठ था जो 2022-23 में गिरकर 15.50 लाख गांठ रह गया है। सीएआई के प्रेसीडेंट अतुल गनात्रा ने कहा, "2022-23 में निर्यात में गिरावट मुख्य रूप से घरेलू बाजार में कपास की ऊंची कीमतों के कारण रही है। अक्टूबर 2022 से मार्च 2023 के दौरान घरेलू कीमतें वैश्विक कीमतों से काफी अधिक थी। इस वजह से निर्यात प्रभावित हुआ है।" उन्होंने कहा कि उच्च आयात शुल्क के कारण 2022-23 में कपास का आयात भी 2.50 लाख गांठ घटकर 12.50 लाख गांठ रहने की उम्मीद है।</p>
<p>इस बीच, सीएआई ने 2022-23 सीजन के लिए कपास उत्पादन 318.90 लाख गांठ रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले महीने के अनुमान 311.18 लाख गांठ से ज्यादा है। 2021-22 में कुल कपास उत्पादन 307.05 लाख गांठ रहा। 2022-23 में कपास की कुल आपूर्ति 355.40 लाख गांठ होने का अनुमान है, जो इसके पिछले अनुमान 350.18 लाख गांठ से 5.22 लाख गांठ अधिक है। अनुमानित कुल कपास आपूर्ति में 318.90 लाख गांठ उत्पादन, 12.50 लाख गांठ का आयात और 2022-23 मार्केटिंग सीजन की शुरुआत में ओपनिंग स्टॉक 24 लाख गांठ शामिल है।</p>
<p>सीएआई ने 2022-23 सीजन के लिए अपना घरेलू खपत अनुमान 311 लाख गांठ बरकरार रखा है। आंकड़ों के अनुसार, कैरी-ओवर स्टॉक जो पहले 23.18 लाख गांठ अनुमानित था, अब 28.90 लाख गांठ रहने का अनुमान है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कपास के घरेलू दाम ज्यादा रहने से निर्यात 64 फीसदी घटाः सीएआई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि&amp;#45;खाद्य प्रणालियों में महिलाओं के योगदान को नहीं मिली मान्यता: राष्ट्रपति मुर्मू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/womens-contribution-in-agri-food-systems-not-recognized-said-prez-murmu.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 10 Oct 2023 09:46:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/womens-contribution-in-agri-food-systems-not-recognized-said-prez-murmu.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं के योगदान को मान्यता नहीं दी गई है। इसे बदलने की जरूरत है। <span>वे कृषि संरचना के सबसे निचले पिरामिड का बड़ा हिस्सा हैं</span><span>, </span><span>लेकिन उन्हें निर्णय लेने वालों की भूमिका निभाने के लिए सीढ़ी पर चढ़ने के अवसर से वंचित किया जाता है।</span> नई दिल्ली में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वास्तव में कोविड-19 महामारी ने कृषि-खाद्य प्रणालियों और समाज में संरचनात्मक असमानता के बीच एक मजबूत संबंध को सामने ला दिया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "महिलाएं भोजन बोती हैं, अनाज उगाती हैं, काटती हैं, संसाधित करती हैं और उसका विपणन करती हैं। वे भोजन को खेत से थाली तक लाने में अपरिहार्य हैं। फिर भी दुनिया भर में भेदभावपूर्ण सामाजिक मानदंडों द्वारा उन्हें पीछे रखा जाता है और रोका जाता है, उनके योगदान को मान्यता नहीं दी जाती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद व सीजीआईएआर जेंडर इम्पेक्ट प्लेटफार्म द्वारा &lsquo;अनुसंधान से प्रभाव तक: न्यायसंगत और अनुकूल कृषि खाद्य प्रणालियों की दिशा में बढ़ते कदम&rsquo; विषय पर आयोजित 4 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सोमवार को उद्घाटन करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह बात कही।</p>
<p>राष्ट्रपति ने सम्मेलन में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों व वैज्ञानिक समुदाय को संबोधित करते हुए कहा, " <span>यदि कोई समाज न्याय रहित है, तो उसकी समृद्धि के बावजूद अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। कोविड-19 महामारी ने कृषि-खाद्य प्रणालियों और समाज में संरचनात्मक असमानता के बीच मजबूत संबंध भी सामने ला दिया है। वैश्विक स्तर पर हमने देखा है कि महिलाओं को लंबे समय तक कृषि-खाद्य प्रणालियों से बाहर रखा गया, जबकि वे कृषि संरचना के सबसे निचले पिरामिड का बड़ा हिस्सा हैं</span><span>, </span><span>लेकिन उन्हें निर्णय लेने वालों की भूमिका निभाने के लिए सीढ़ी पर चढ़ने के अवसर से वंचित किया जाता है। दुनियाभर में उन्हें भेदभावपूर्ण सामाजिक मानदंडों और ज्ञान</span><span>, </span><span>स्वामित्व</span><span>, </span><span>संपत्ति</span><span>, </span><span>संसाधनों व सामाजिक नेटवर्क में बाधाओं द्वारा रोका जाता है। उनके योगदान को मान्यता नहीं दी गई</span><span>, </span><span>उनकी भूमिका को हाशिए पर रखा गया, कृषि-खाद्य प्रणालियों की पूरी श्रृंखला में उनके योगदान को नकार दिया गया है। इस कहानी को अब बदलने की जरूरत है। भारत में हम विधायी और सरकारी हस्तक्षेपों के माध्यम से महिलाओं को और अधिक सशक्त होने के साथ उन परिवर्तनों को देख रहे हैं।</span>"</p>
<p><span>राष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक अस्तित्वगत खतरा है, हमें अभी व तेजी से कार्रवाई करने की जरूरत है। जलवायु परिवर्तन</span><span>, </span><span>ग्लोबल वार्मिंग</span><span>, </span><span>बर्फ पिघलने और प्रजातियों के विलुप्त होने से खाद्य उत्पादन बाधित हो रहा है और कृषि-खाद्य चक्र भी टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल नहीं है। कृषि-खाद्य प्रणालियों को दुष्चक्र से बाहर निकालने के लिए चक्रव्यूह को तोड़ने की जरूरत है। उन्होंने जैव विविधता बढ़ाने व पारिस्थितिकी तंत्र बहाल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि सबके लिए अधिक समृद्ध व न्यायसंगत भविष्य के साथ कृषि-खाद्य प्रणालियों के माध्यम से खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। </span></p>
<p>उद्घाटन समारोह में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी एवं शोभा करंदलाजे, कृषि सचिव मनोज अहूजा, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक, सीजीआईएआर के कार्यकारी प्रबंध निदेशक डॉ. एंड्रयू केम्पबेल, दक्षिण एशिया क्षेत्रीय निदेशक डॉ. टेमिना ललानी शरीफ, जेंडर प्लेटफार्म निदेशक डॉ. निकोलीन डे हान विशेष रूप से मौजूद थे।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं के योगदान को नहीं मिली मान्यता: राष्ट्रपति मुर्मू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[डीएमएच&amp;#45;11 किस्म के जीएम सरसों के ट्रायल में उत्पादकता हाइब्रिड किस्मों के बराबर, तेल की मात्रा बेहतर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/in-dmh-11-variety-of-gm-mustard-productivity-found-to-be-equivalent-to-hybrids-and-oil-content-better.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 09 Oct 2023 02:39:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/in-dmh-11-variety-of-gm-mustard-productivity-found-to-be-equivalent-to-hybrids-and-oil-content-better.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) सरसों की किस्म डीएमएच-11 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में इसी सप्ताह सुनवाई है। उम्मीद है कि इसकी मंजूरी को लेकर कोई अहम फैसला आ सकता है। पिछले साल 18 अक्टूबर को जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रैजल कमेटी (जीईएसी) ने डीएमएच-11 के फील्ड ट्रायल की अनुमति दी थी और इसका जिम्मा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने यथास्थिति रखने का आश्वासन दिया था, लेकिन उससे पहले आईसीएआर (ICAR) ने छह स्थानों पर इस किस्म के ट्रायल के लिए बुवाई कर दी थी, जिसके आंकड़े आईसीएआर के पास हैं। उच्चपदस्थ सूत्रों ने रूरल वॉयस को बताया, फील्ड ट्रायल में पता चला कि उत्पादकता का स्तर निजी कंपनियों की सरसों की हाइब्रिड किस्मों के बराबर है जबकि इसके बीज में तेल का स्तर बेहतर है।<br />उक्त सूत्रों ने बताया कि जीएम (GM) किस्म डीएमच-11 की उत्पादकता का स्तर पायनियर कंपनी की हाइब्रिड किस्म के बराबर है। वहीं तेल की मात्रा के मामले में यह उससे बेहतर है। आईसीएआर ने दिल्ली, भरतपुर, लुधियाना, बनारस और कोटा समेत छह स्थानों पर इसका ट्रायल किया है। इस जीएम किस्म को विकसित करने वाले वैज्ञानिक डॉ. दीपक पेंटल की टीम के पास डीएमएच-11 (DMH-11) किस्म का करीब 500 किलो बीज उपलब्ध होने की बात भी उक्त सूत्र ने बताई।<br />सुप्रीम कोर्ट में 10 अक्टूबर की सुनवाई में अगर सरसों की इस किस्म के पक्ष में फैसला आता है तो चालू रबी सीजन में इसके देश भर में बड़े ट्रायल के लिए पर्याप्त बीज उपलब्ध होगा। आईसीएआर के ट्रायल उत्पादन का उपयोग बीज के रूप में किया जा सकेगा। सरसों के लिए प्रति हेक्टेयर एक किलो बीज की जरूरत होती है।<br />आईसीएआर के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक का कहना है कि सरसों के लिए बारनेस (Barnase) और बारस्टार (Barstar) जीन का उपयोग करने वाली टेक्नोलॉजी को मंजूरी मिल जाती है, तो उसका फायदा यह होगा कि डीएमएच-11 किस्म के अलावा इसका उपयोग कर सरसों की बेहतर उत्पादकता वाली हाइब्रिड किस्में तैयार की जा सकती हैं। हाइब्रिड किस्मों के लिए एवाईआर और एवाईबी प्रक्रिया के जरिये पेरेंटल लाइन से हाइब्रिड बीज का उत्पादन किया जा सकेगा।<br />उक्त वैज्ञानिक का कहना है कि जीएम कॉटन की मंजूरी के समय इसकी हाइब्रिड किस्मों का उत्पादन स्तर बहुत अच्छा नहीं था। बाद में बेहतर उत्पादकता वाली हाइब्रिड किस्मों में बीटी टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया। बीटी कॉटन की हाइब्रिड किस्मों के रूप में देश में 1500 किस्में नोटिफाई हो चुकी हैं। ऐसे में डीएमएच-11 की मंजूरी की तुलना में इसके लिए उपयोग की गई टेक्नोलॉजी को मंजूरी मिलना अधिक महत्वपूर्ण है।<br />देश में खाद्य तेलों की आपूर्ति में सरसों की अहम भूमिका है। लेकिन सरसों की उत्पादकता बढ़ाने में हम लगातार नाकाम रहे हैं। इसलिए वैज्ञानिक तर्क दे रहे हैं कि जीएम सरसों के उत्पादन को मंजूरी देना उत्पादकता बढ़ाने का एक प्रमुख उपाय है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर डॉ. दीपक पेंटल ने जीएम सरसों की किस्म धारा मस्टर्ड हाइब्रिड-11 (डीएमएच-11) विकसित की थी, जिसके कमर्शियल रिलीज की अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। इसी किस्म के कमर्शियल रिलीज की मंजूरी के पक्ष में सब-कमेटी ने अपनी सिफारिशें दी थीं।<br />डॉ. पेंटल ने इस जीएम किस्म के लिए बारनेस-बारस्टार (Barnase-barstar) तकनीक को अपनाया है। इसमें बारनेस के जरिये मेल को स्टेराइल (निष्प्रभावी) किया जाता है। वहीं बारस्टार के जरिये दूसरी लाइन में मेल को एक्टिवेट किया जाता है। इस प्रक्रिया में उपयोग जीन को बीए जीन नाम से जाना जाता है। इस जीएम इवेंट पर 1991 में अमेरिका में पेटेंट लिया गया था। डॉ. पेंटल ने इसमें बदलाव किया है जिसे वैज्ञानिक &lsquo;ट्विक करना&rsquo; कहते हैं। उन्होंने भी इसका पेटेंट अमेरिका से हासिल कर रखा है। इस जीएम वैरायटी के लिए सरसों की वरुणा प्रजाति का उपयोग किया गया है।<br />जीएम सरसों की इस किस्म को जीईएसी द्वारा मंजूरी देने के पहले गठित सब कमेटी के एक सदस्य ने रूरल वॉयस को बताया कि सरसों का उत्पादन बढ़ाने के लिए बेहतर गुणवत्ता वाली हाइब्रिड किस्मों की जरूरत है। कई निजी कंपनियों की हाइब्रिड किस्में बाजार में बिक रही हैं। लेकिन उत्पादकता का उच्च स्तर जीएम किस्म की मंजूरी से ही हासिल किया जा सकता है। परंपरागत तरीके से सरसों की हाइब्रिड किस्में तैयार करना काफी लंबा और मुश्किल काम है। जीएम तकनीक के जरिये इसकी प्रक्रिया को छोटा किया जाना संभव है।<br />भारत खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता का चक्र नहीं तोड़ पा रहा है। ऐसे में जीएम सरसों की मंजूरी के बाद बेहतर जीएम किस्में तेल उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी कर सकती हैं। कॉटन के मामले में भी यही हुआ। जीएम कॉटन के जरिए आयात पर निर्भरता खत्म हुई ही, भारत एक बड़ा कॉटन निर्यातक देश भी बन गया था। हालांकि किसी नई टेक्नोलॉजी को मंजूरी नहीं मिलने से पुरानी टेक्नोलॉजी का फायदा लगभग खत्म हो गया है और कपास के उत्पादन में गिरावट आने लगी है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_650fd6c56f2ce.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ डीएमएच-11 किस्म के जीएम सरसों के ट्रायल में उत्पादकता हाइब्रिड किस्मों के बराबर, तेल की मात्रा बेहतर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_650fd6c56f2ce.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मोनोक्रोटोफॉस सहित 4 कीटनाशकों पर सरकार ने लगाया प्रतिबंध, किसानों की आत्महत्याओं से आया था विवादों में]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-bans-use-of-four-pesticides-including-controversial-monocrotophus.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 08 Oct 2023 00:03:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-bans-use-of-four-pesticides-including-controversial-monocrotophus.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने अत्यधिक खतरनाक चार कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रतिबंधित कीटनाशकों में डाइकोफोल, डिनोकैप, मेथोमाइल और मोनोक्रोटोफॉस शामिल हैं। किसानों द्वारा कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने के मामले में मोनोक्रोटोफॉस का नाम कुख्यात रहा है। इन पर प्रतिबंध लगाने का फैसला सितंबर में ही किया गया था लेकिन इस संबंध में शुक्रवार को अधिसूचना जारी की गई।</p>
<p>पूरे देश में कई पेस्टिसाइड पॉइजनिंग मामलों में मोनोक्रोटोफॉस का नाम शामिल रहा है जिसमें कुख्यात यवतमाल पेस्टिसाइड पॉइजनिंग प्रकरण भी शामिल है। महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ पेस्टिसाइड पॉइजन्ड पर्सन्स (एमएपीपीपी) 2017 से इस पर और किसानों की मौत तथा किसानों एवं मजदूरों को नुकसान पहुंचाने वाले अन्य कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने की वकालत कर रहा है। दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने इस पर और 4 अन्य कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा है। उस पत्र का भारत सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया।</p>
<p>ताजा आदेश में भी सीधे तौर पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, बल्कि शर्तों के साथ प्रतिबंध लगाया गया है। भारत सरकार ने किसानों को विकल्पों की ओर बढ़ने के लिए एक साल का समय दिया है। इसमें यह भी कहा गया है, "मोनोक्रोटोफॉस 36% एसएल की बिक्री, वितरण या उपयोग की अनुमति केवल मौजूदा स्टॉक की समाप्ति अवधि तक दी जाएगी।" इस भाषा में अस्पष्टता है जिसका उपयोग एक वर्ष के इस विंडो पीरियड में स्टॉक बनाने के लिए किया जा सकता है जिससे 1 वर्ष की अवधि से परे और स्टॉक खत्म होने तक मोनोक्रोटोफॉस का उपयोग जारी रखा जा सकता है।</p>
<p><strong>अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंः</strong> <a href="https://eng.ruralvoice.in/national/government-bans-use-of-four-pesticides-including-controversial-monocrotophus.html" title="pesticides ban" target="_blank" rel="noopener">Government bans use of four pesticides including controversial monocrotophus</a></p>
<p>इस बीच, पेस्टिसाइड एक्शन नेटवर्क (पैन) इंडिया ने फरवरी, 2023 में प्रकाशित मसौदा आदेश के बाद इन चार कीटनाशकों, विशेष रूप से मोनोक्रोटोफॉस को शामिल करने पर प्रतिबंध का स्वागत किया है क्योंकि इसने इसे प्रतिबंध सूची में शामिल करने का प्रतिनिधित्व किया था।</p>
<p>सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ डॉ. नरसिम्हा रेड्डी का कहना है, "यह प्रतिबंध लगभग बॉन में रसायन प्रबंधन पर पांचवें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (ICCM5) में हाल ही में संपन्न वार्ता और रसायनों के वैश्विक ढांचे के उद्भव और 2035 तक अत्यधिक खतरनाक कीटनाशक (एचएचपी) को खत्म करने के लक्ष्य के साथ मेल खाता है।"</p>
<p>पैन ने एक में बयान में कहा है कि मोनोक्रोटोफॉस (इसके सभी फॉर्मूलेशन) के निर्माण पर प्रतिबंध लगाने वाली एक विशिष्ट लाइन की आवश्यकता है। पेस्टिसाइड एक्शन नेटवर्क इंडिया के सीईओ ए. डी. दिलीप कुमार ने कहा, &ldquo;लेबल परिवर्तन के लिए कोई तर्कसंगतता नहीं है और न ही पूर्ण प्रतिबंध, जैसा कि हमने प्रस्तुत किया है और विशेषज्ञ समिति द्वारा सिफारिश की गई है। लेबल परिवर्तन केवल एक तकनीकी मामला है जिसका फील्ड में उपयोग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। यह देखते हुए कि देश में कई कीटनाशकों को कृषि विश्वविद्यालयों और कमोडिटी बोर्डों द्वारा इस्तेमाल न करने की अनुशंसा की गई है, इसके बावजूद वास्तविकता में इनका उपयोग हो रहा है और फसलों के अवशेषों के विश्लेषण में &nbsp;इन गैर-अनुमोदित कीटनाशकों का पता चला है&rdquo;।</p>
<p>हालांकि, पैन इंडिया ने कुछ कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने पर भारत सरकार के प्रयासों की सराहना की, लेकिन यह महसूस किया है कि नियामकीय निर्णयों की समीक्षा करने के लिए 2020 ड्राफ्ट प्रतिबंध अधिसूचना के बाद समितियों की नियुक्ति का हालिया घटनाक्रम नियामकीय परिणामों को संतुष्ट करने के लिए कम करने की एक प्रक्रिया है। कृषि रसायन उद्योग का उद्देश्य लाभ कमाना है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय कल्याण को कमजोर करता है।</p>
<p>पैन इंडिया ने भारत सरकार से 2020 के मसौदा आदेश में सूचीबद्ध शेष कीटनाशकों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है जिसमें 27 कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव था। विशेषज्ञ समिति और पंजीकरण समिति ने पाया कि इनके उपयोग से मनुष्यों और जानवरों के लिए जोखिम होने की संभावना है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मोनोक्रोटोफॉस सहित 4 कीटनाशकों पर सरकार ने लगाया प्रतिबंध, किसानों की आत्महत्याओं से आया था विवादों में ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मिलेट्स का आटा और शीरा पर जीएसटी में कटौती, 5 फीसदी टैक्स की जीएसटी काउंसिल ने की सिफारिश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/gst-cut-on-millets-flour-and-molasses-gst-council-recommends-5-percent-tax.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 07 Oct 2023 22:30:04 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/gst-cut-on-millets-flour-and-molasses-gst-council-recommends-5-percent-tax.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जीएसटी काउंसिल ने मिलेट्स के आटे और शीरा पर जीएसटी में कटौती करने का फैसला किया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में शनिवार को हुई काउंसिल की बैठक में इन दोनों कृषि उत्पादों पर जीएसटी को घटाकर 5 फीसदी करने पर सहमति बनी। इसी तरह मानव उपभोग के लिए शराब को लेवी से छूट देने सहित बैठक में कई अहम फैसलों पर सहमति बनी। शीरे पर टैक्स की दर घटने से <span style="font-weight: 400;">एथेनॉल की लागत कम होने और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। संशोधित दरें अधिसूचना जारी होने की तारीख से प्रभावी होंगी।<br /></span></p>
<p>केंद्रीय वित्त मंत्रालय के एक बयान में जीएसटी काउंसिल के फैसलों की जानकारी दी गई है। बयान के मुताबिक, मिलेट्स के पैकेट वाले आटे जिसमें 70 फीसदी मिलेट्स हों, पर लगने वाले 18 फीसदी जीएसटी को घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। खुले रूप में यह आटा बेचने पर जीएसटी नहीं लगेगा। जीएसटी परिषद ने गन्ना किसानों को राहत देने के लिए शीरा पर जीएसटी 28 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने की सिफारिश की है। इससे चीनी मिलों के पास नकदी बढ़ेगी और किसानों को गन्ना बकाये का तेजी से भुगतान किया जा सकेगा। साथ ही पशु चारा निर्माण की लागत भी कम की जा सकेगी।</p>
<p><span style="font-weight: 400;">काउंसिल की सिफारिशों पर एग्रीमंडीलाइव.रिसर्च के सह-संस्थापक और सीईओ उप्पल शाह ने कहा, &ldquo;हम शीरे पर जीएसटी की दर 28% से घटाकर 5% करने के काउंसिल के फैसले का स्वागत करते हैं। गन्ना से एथेनॉल बनाने वालों के लिए यह बड़ा लाभदायक होगा। ये एथेनॉल बनाने में शीरे का प्रयोग करते हैं। इस निर्णय से एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। चीनी उद्योग काफी दिनों से शीरे पर जीएसटी दर घटाने की मांग कर रहा था।&rdquo; शाह ने कहा, इस निर्णय से वर्ष 2025 तक 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य पाने में मदद मिलेगी, क्योंकि उसके लिए हमें सालाना 1,016 करोड़ लीटर एथेनॉल की जरूरत पड़ेगी। इस फैसले से चीनी मिलों के पास नकदी बढ़ेगी और वे गन्ना किसानों को समय पर भुगतान कर सकेंगे।</span></p>
<p>जीएसटी परिषद ने मानव उपभोग के लिए शराब के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ईएनए) को जीएसटी से बाहर रखने की सिफारिश की है। ईएनए को जीएसटी के दायरे से बाहर करने के लिए विधि आयोग कानून में उपयुक्त संशोधन पर विचार करेगा। औद्योगिक उपयोग के लिए संशोधित स्पिरिट को कवर करने के क्रम में सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम में 8 <span>अंकों के स्तर पर एक अलग टैरिफ एचएस कोड बनाया गया है। औद्योगिक उपयोग के लिए ईएनए से जुड़ी एक प्रविष्टि बनाने के लिए जीएसटी दर अधिसूचना में संशोधन किया जाएगा। इस पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है।</span></p>
<p>जीएसटी परिषद ने प्रस्तावित जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरणों के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की शर्तों में पात्रता एवं आयु के संबंध में संशोधन की भी सिफारिश की है। साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विदेशी &nbsp;जहाजों को तटीय मार्ग में परिवर्तन करने पर सशर्त और सीमित अवधि के लिए आईजीएसटी छूट की सिफारिश की है। इसके अलावा, <span>जीएसटी परिषद ने सरकारी प्राधिकरणों को आपूर्ति की जाने वाली जल आपूर्ति</span>, <span>सार्वजनिक स्वास्थ्य</span>, <span>स्वच्छता संरक्षण</span>, <span>ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्लम सुधार और उन्नयन की सेवाओं को छूट देने की भी सिफारिश की है।</span>&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>52<span>वीं जीएसटी परिषद की नई दिल्ली में आयोजित बैठक में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी</span>, <span>वित्त विभाग संभालने वाले गोवा और मेघालय के मुख्यमंत्रियों के अलावा अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मिलेट्स का आटा और शीरा पर जीएसटी में कटौती, 5 फीसदी टैक्स की जीएसटी काउंसिल ने की सिफारिश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पिंक बॉलवॉर्म से राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा में कपास की फसल को बड़ा नुकसान, उत्पादन पर पड़ेगा असर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/terrible-outbreak-of-pink-bollworm-cotton-crop-in-punjab-haryana-and-rajasthan-got-damaged-up-to-70-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 07 Oct 2023 00:24:39 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/terrible-outbreak-of-pink-bollworm-cotton-crop-in-punjab-haryana-and-rajasthan-got-damaged-up-to-70-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कपास उत्पादक जिलों में पिंक बॉलवॉर्म बीमारी के चलते बड़े स्तर पर फसल को नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि नुकसान 50 फीसदी तक है वहीं कुछ जगहों पर फसल को 90 फीसदी तक नुकसान हुआ है। नुकसान की भरपाई के लिए किसान सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। हरियाणा सरकार ने किसानों को 12,500 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने का फैसला किया है लेकिन पंजाब और राजस्थान ने अभी नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की कोई घोषणा नहीं की है। राजस्थान के किसान पिछले करीब दो हफ्ते से मुआवजे की &nbsp;मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। &nbsp;</p>
<p>रूरल वॉयस ने कपास उत्पादक इलाकों के किसानों से बात की है।&nbsp; हरियाणा में फसल को सबसे ज्यादा नुकसान सिरसा, फतेहाबाद और हिसार जिलों में हुआ है जो कपास उत्पादन का सबसे बड़ा क्षेत्र है। राज्य में करीब 70 फीसदी कपास का उत्पादन इन्हीं जिलों में होता है। बाकी जिलों में भी इसका असर है। वहीं राजस्थान के श्रीगंगानगर, हनुमागढ़ और अनूपगढ़ तथा पंजाब के अबोहर, फाजिल्का, बठिंडा और मनसा जिलों में पिंक बॉलवॉर्म ने काफी नुकसान पहुंचाया है। हरियाणा में यह लगातार दूसरा सीजन है जब पिंक बॉलवॉर्म की वजह से फसल खराब हुई है।</p>
<p>पिंक बॉलवॉर्म काफी घातक कीट है जो कपास को नुकसान पहुंचाता और पौधों पर आने वाली बाल से कपास को नष्ट कर देता है। इसकी वजह से कपास की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है और पैदावार घट जाती है।</p>
<p>सिरसा जिले के किसान परमजीत सिंह ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि उनकी 50 फीसदी फसल खराब हो गई है। गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवॉर्म) के अलावा बारिश ने भी फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। पिछले साल भी कीटों के प्रकोप की वजह से फसल खराब हुई थी। पिछले अनुभव को देखते हुए किसानों ने शुरुआत से ही कीटनाशकों का छिड़काव करना शुरू कर दिया था जिससे उनका नुकसान कम हुआ। जिन किसानों ने थोड़ी भी देर की उनकी फसल बर्बाद हो गई। परमजीत सिंह 2 एकड़ में कपास की खेती करते हैं। इस साल तो कपास किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल दिख रहा है।</p>
<p>हरियाणा की तुलना में पंजाब और राजस्थान में नुकसान ज्यादा है क्योंकि वहां पिछले साल कीटों का प्रकोप नहीं था, इसलिए वहां के किसान इसके प्रति जागरूक नहीं थे। राजस्थान में तो पहली बार पिंक बॉलवॉर्म का इतना भयानक प्रकोप हुआ। जब तक किसानों को इसकी जानकारी मिली और वे जागरूक हुए तब तक उनकी फसल खराब हो चुकी थी।</p>
<p>पंजाब की मंडियों में कपास की नई फसल की आवक शुरू हो चुकी है। &nbsp;इसका भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर चल रहा है। कर्नाटक में भी कपास की नई फसल मंडियों में आने लगी है। हरियाणा में पहले चरण की तुड़ाई-तैयारी शुरू हो गई। राजस्थान में भी अगैती फसल की आवक जल्दी ही शुरू होने वाली है। केंद्र सरकार ने लंबे रेशे वाले कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 7020 रुपये प्रति क्विंटल और मध्यम रेशे वाले कपास का एमएसपी 6620 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।</p>
<p>इस साल कपास का कुल रकबा पिछले साल के 126.87 लाख हेक्टेयर से घटकर 125 लाख हेक्टेयर रह गया है। सामान्य तौर पर कपास का रकबा 128.67 लाख हेक्टेयर रहता है। रकबे में कमी और फसल बर्बाद होने को देखते हुए इस साल कपास के घरेलू उत्पादन में फिर से गिरावट आने की पूरी संभावना है।</p>
<p>आमतौर पर एक एकड़ में 10-12 क्विंटल कच्चे कपास का उत्पादन होता है लेकिन इस बार 2-2.5 क्विंटल प्रति एकड़ फसल मिल रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2022-23 में देश में कपास का कुल उत्पादन 343.5 लाख गांठ (एक गांठ में 170 किलो) रहा था, जबकि औसत उत्पादन 447 किलो प्रति हेक्टेयर रहा था।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पिंक बॉलवॉर्म से राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा में कपास की फसल को बड़ा नुकसान, उत्पादन पर पड़ेगा असर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 6.5 फीसदी पर रखा बरकरार, महंगाई 5 फीसदी से ऊपर बनी रहेगी, विकास दर में आएगी गिरावट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rbi-retains-repo-rate-at-6-point-5pc-growth-projection-6-point-5pc-inflation-forecast-5-point-4pc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Oct 2023 12:43:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rbi-retains-repo-rate-at-6-point-5pc-growth-projection-6-point-5pc-inflation-forecast-5-point-4pc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खुदरा महंगाई अगली कई तिमाही तक 5 फीसदी से ऊपर बने रहने के आसार हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा में वित्त वर्ष 2023-24 के लिए खुदरा महंगाई 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। इस वर्ष जुलाई से सितंबर की तिमाही में खुदरा महंगाई 6.4 फीसदी, तीसरी तिमाही में 5.6 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.2 फीसदी रहने का अनुमान है। अगले वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही के लिए इसका अनुमान 5.2 फीसदी का है। इसने आने वाली दो तिमाहियों में जीडीपी विकास दर में गिरावट का अंदेशा भी जताया है।</p>
<p>आरबीआई ने शुक्रवार को जारी मौद्रिक नीति की समीक्षा में सर्वसम्मति से रेपो दर को लगातार चौथी बार 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि मौद्रिक नीति समीक्षा समिति (एमपीसी) के सभी सदस्यों - डॉ. शशांक भिड़े, डॉ. आशिमा गोयल, प्रो. जयंत आर. वर्मा, डॉ. राजीव रंजन और डॉ. माइकल देबब्रत पात्रा ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को 6.5 फीसदी पर अपरिवर्तित रखने के लिए मतदान किया।</p>
<p>समीक्षा में कहा गया है कि सब्जियों की कीमतों में गिरावट और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हालिया कटौती के कारण निकट अवधि में मुद्रास्फीति के परिदृश्य में सुधार होने की उम्मीद है। भविष्य की गति कई कारकों पर निर्भर करेगी जैसे, कम रकबे में दालों की बुआई, जलाशयों के स्तर में गिरावट, अल नीनो की स्थिति और वैश्विक ऊर्जा और खाद्य कीमतों में अस्थिरता। रिजर्व बैंक के सर्वेक्षण के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को पिछली तिमाही की तुलना में तीसरी तिमाही में इनपुट लागत अधिक बढ़ने लेकिन बिक्री कीमतों में मामूली वृद्धि की उम्मीद है।</p>
<p>सेवाओं में निरंतर उछाल, ग्रामीण मांग में सुधार, उपभोक्ताओं और व्यापारी वर्ग की उम्मीदों, पूंजीगत व्यय पर सरकार के जोर और बैंकों और कॉरपोरेट्स की स्वस्थ बैलेंस शीट से घरेलू मांग की स्थिति को लाभ होने की उम्मीद है। लेकिन भू-राजनीतिक तनाव, अस्थिर वित्तीय बाजार और ऊर्जा की कीमतें और जलवायु संकट जैसे वैश्विक कारकों से प्रतिकूल परिस्थितियां विकास को बाधित कर सकती हैं। इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए पूरे 2023-24 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि 6.5 फीसदी होने का अनुमान है। इसके दूसरी तिमाही में 6.5 फीसदी, तीसरी में 6 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.7 फीसदी रहने के आसार हैं। 2024-25 की पहली तिमाही के लिए जीडीपी वृद्धि 6.6 प्रतिशत अनुमानित है।</p>
<p>एमपीसी ने पाया कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में अभूतपूर्व झटके मुद्रास्फीति पर प्रभाव डाल रहे हैं। वैश्विक खाद्य और ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि और वैश्विक वित्तीय बाजार में अस्थिरता के मौजूदा माहौल को देखते हुए एमपीसी ने हाई अलर्ट पर रहने का निर्णय लिया है। घरेलू बाजार में सब्जियों की कीमतों में और गिरावट संभव है, साथ में महंगाई दर भी कम हो रही है। एमपीसी के अनुसार, फिर भी महंगाई दर ऊपरी सीमा से अधिक बनी हुई है। इसलिए मौद्रिक नीति को महंगाई को नियंत्रित करने वाला बनाए रखने की आवश्यकता है।</p>
<p>समिति का कहना है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां अच्छी चल रही हैं और त्योहारी मांग, निवेश के इरादों में तेजी और उपभोक्ता और व्यावसायिक दृष्टिकोण में सुधार से इसे और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रिजर्व बैंक पिछले साल मई से कई चरणों में रेपो रेट में 2.5 &nbsp;फीसदी की बढ़ोतरी कर चुका है। इसका कहना है कि अर्थव्यवस्था में इसका पूरा असर अभी दिखना बाकी है। इसलिए एमपीसी ने इस बैठक में नीतिगर रेपो दर को 6.5 फीसदी पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 6.5 फीसदी पर रखा बरकरार, महंगाई 5 फीसदी से ऊपर बनी रहेगी, विकास दर में आएगी गिरावट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[टमाटर के दाम घटने से सस्ती हो गई शाकाहारी और मासांहारी थाली]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/veg-and-nonveg-thali-gets-cheaper-thanks-to-fall-in-tomato-prices.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Oct 2023 09:34:51 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/veg-and-nonveg-thali-gets-cheaper-thanks-to-fall-in-tomato-prices.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>टमाटर की कीमतों में भारी गिरावट के कारण सितंबर में शाकाहारी और मांसाहारी थाली &nbsp;सस्ती हो गई। क्रिसिल मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स के भोजन की थाली की लागत के मासिक संकेतक - रोटी चावल दर (आरआरआर) के अनुसार सितंबर में शाकाहारी और मांसाहारी थाली की कीमत पिछले महीने की तुलना में क्रमशः 17 फीसदी और 9 फीसदी घट गई।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि टमाटर की कीमत महीने-दर-महीने के आधार पर 62 फीसदी घटकर 39 रुपये प्रति किलो पर आ गई। अगस्त में टमाटर 102 रुपये प्रति किलो बिक रहा था। थाली की कीमतों में गिरावट का यह एक प्रमुख कारण था। रिपोर्ट के अनुसार, सालाना आधार पर सितंबर में शाकाहारी थाली की कीमत में 1 फीसदी की मामूली कमी आई, जबकि गेहूं और पाम तेल की ऊंची कीमतों के कारण मांसाहारी थाली की कीमत में 0.65 फीसदी की मामूली वृद्धि हुई।</p>
<p>क्रिसिल रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में प्याज की कीमतें महीने-दर-महीने के आधार पर 12 फीसदी बढ़ी हैं और आगे भी इसके बढ़ने की संभावना है क्योंकि चालू खरीफ सीजन में खरीफ का उत्पादन कम होने की उम्मीद है। सितंबर में मांसाहारी थाली की कीमत में गिरावट 9 फीसदी तक सीमित थी, क्योंकि ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में, जो थाली की लागत में 50 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी रखती है, 2-3 फीसदी की मामूली वृद्धि देखी गई।</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि ईंधन की कीमतों में 18 फीसदी की गिरावट आई क्योंकि 14.2 किलो वाले रसोई गैस सिलेंडर के दाम 1103 रुपये से घटकर 903 रुपये हो गए। शाकाहारी और मांसाहारी थालियों की कुल लागत में ईंधन की लागत क्रमशः 14 फीसदी और 8 फीसदी है।</p>
<p>क्रिसिल ने कहा है कि सितंबर में मिर्च की कीमतों में भी कुछ राहत मिली है। अगस्त की तुलना में इस महीने कीमतों में 31 प्रतिशत की गिरावट आई है। सितंबर में मिर्च की औसत कीमत 30 रुपये प्रति किलोग्राम थी जो अगस्त में 44 रुपये प्रति किलोग्राम थी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_651f874988014.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ टमाटर के दाम घटने से सस्ती हो गई शाकाहारी और मासांहारी थाली ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[धान की सरकारी खरीद तीन दिन में 12.21 लाख टन हुई, इस राज्य के किसानों को मिल रहा सबसे ज्यादा दाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/paddy-procurement-was-12-lakh-21-thousand-tonnes-in-three-days-farmers-of-this-state-are-getting-the-highest-price.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Oct 2023 16:40:20 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/paddy-procurement-was-12-lakh-21-thousand-tonnes-in-three-days-farmers-of-this-state-are-getting-the-highest-price.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय और राज्य सरकारों की एजेंसियों ने पहली अक्टूबर से धान की सरकारी खरीद शुरू कर दी है। कुछ राज्यों को छोड़कर ज्यादातर राज्यों में अभी सरकारी खरीद रफ्तार नहीं पकड़ पाई है, फिर भी चार दिनों में 12.21 लाख टन धान किसानों से खरीदा जा चुका है। खरीफ मार्किटिंग सीजन 2023-24 के लिए सामान्य किस्म के धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2183 प्रति क्विंटल और ए ग्रेड वाले धान का एमएसपी 2203 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक बयान में बताया है कि खरीफ मार्केटिंग सीजन 2023-24 की शुरुआत हाल ही में हुई है और 3 अक्टूबर तक तमिलनाडु, पंजाब और हरियाणा में 12.21 लाख टन धान की खरीद की गई है। इससे 99,675 किसानों को 2689.77 करोड़ रुपये के एमएसपी का लाभ हुआ है। खरीफ मार्केटिंग सीजन की शुरुआत 1 अक्टूबर से हुई है।</p>
<p>धान का एमएसपी केंद्र सरकार की ओर से तय किया जाता है और राज्य सरकारें चाहें तो एमएसपी के ऊपर प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा कर सकती हैं। चुनावी साल होने के बावजूद छत्तीसगढ़ को छोड़कर किसी भी राज्य ने अलग से प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा नहीं की है। धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने 600 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की है। इस लिहाज से छत्तीसगढ़ में किसानों को सामान्य किस्म के धान के लिए 2783 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड ए के धान के लिए 2803 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है।</p>
<p>केंद्र सरकार चालू खरीफ मार्केटिंग सीजन में 521.27 लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा है, जबकि पिछले सीजन में वास्तविक खरीद 496 लाख टन रही थी। चालू खरीफ सीजन में 411.96 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई की गई है जो पिछले सीजन से काफी अधिक है। इसे देखते हुए इस साल धान की बंपर पैदावार होने का अनुमान लगाया जा रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ धान की सरकारी खरीद तीन दिन में 12.21 लाख टन हुई, इस राज्य के किसानों को मिल रहा सबसे ज्यादा दाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एफसीआई की ई&amp;#45;नीलामी के 15वें दौर में 1.89 लाख टन गेहूं और 5000 टन चावल की हुई बिक्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/1-lakh-89-thousand-tonnes-of-wheat-and-500-tonnes-of-rice-sold-in-the-15th-round-of-fci-e-auction.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Oct 2023 15:57:43 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/1-lakh-89-thousand-tonnes-of-wheat-and-500-tonnes-of-rice-sold-in-the-15th-round-of-fci-e-auction.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गेहूं और चावल की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और घरेलू कीमतों को निंयत्रित करने के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) खुली बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत केंद्रीय पूल से गेहूं और चावल की बिक्री ई-नीलामी के जरिये कर रहा है। बुधवार को आयोजित ई-नीलामी के 15वें दौर में कुल 2,255 बोलीदाताओं को 1.89 लाख टन गेहूं और 5000 टन चावल की बिक्री की गई। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक बयान में यह जानकारी दी है।</p>
<p>बयान के मुताबिक, बुधवार की ई-नीलामी में देशभर के 481 डिपो से 2.01 लाख टन गेहूं और 264 डिपो से 4.87 लाख टन चावल की पेशकश की गई। चावल, गेहूं और आटे की खुदरा कीमत को नियंत्रित करने के लिए बाजार में हस्तक्षेप की केंद्र सरकार की पहल के तहत गेहूं और चावल दोनों की साप्ताहिक ई-नीलामी आयोजित की जाती है। ई-नीलामी में गेहूं और चावल दोनों के लिए 2447 सूचीबद्ध खरीदारों ने भाग लिया।</p>
<p>एफएक्यू गेहूं के लिए आरक्षित मूल्य 2150 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले भारित औसत विक्रय मूल्य 2185.05 रुपये प्रति क्विंटल रहा। वहीं यूआरएस गेहूं के लिए आरक्षित मूल्य 2125 रुपये प्रति क्विंटल की तुलना भारित औसत बिक्री मूल्य 2193.12 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। इसी तरह, 2932.83 रुपये प्रति क्विंटल आरक्षित मूल्य के मुकाबले चावल का भारित औसत विक्रय मूल्य 2932.91 रुपये प्रति क्विंटल रहा।</p>
<p>ई-नीलामी की वर्तमान श्रृंखला में खरीदार गेहूं के लिए 10-100 टन तक की और चावल के लिए 10-1000 टन तक की बोली लगा सकते हैं। यह निर्णय छोटे और सीमांत अंतिम उपयोगकर्ताओं को प्रोत्साहित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए है कि अधिक से अधिक खरीदार बोली में शामिल हो सकें और अपनी पसंद के डिपो से चावल या गेहूं के लिए बोली लगा सकें।</p>
<p>स्टॉक की जमाखोरी से बचने के लिए व्यापारियों को ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री के दायरे से बाहर रखा गया है। ओएमएसएस के तहत गेहूं खरीदने वाले प्रोसेसरों की आटा मिलों पर नियमित जांच किया जा रहा है। देशभर में 4 अक्टूबर तक 1229 जांच-पड़ताल की गई है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एफसीआई की ई-नीलामी के 15वें दौर में 1.89 लाख टन गेहूं और 5000 टन चावल की हुई बिक्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी, 2030 तक निर्यात बढ़कर 1 अरब डॉलर पहुंचने की उम्मीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-sets-up-national-turmeric-board-exports-may-touch-usd-1-bn-by-2030.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Oct 2023 15:00:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-sets-up-national-turmeric-board-exports-may-touch-usd-1-bn-by-2030.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके जरिये हल्दी और हल्दी उत्पादों के विकास और वृद्धि पर फोकस किया जाएगा। साथ ही राष्ट्रीय बोर्ड हल्दी के बारे में जागरूकता और खपत बढ़ाएगा तथा निर्यात बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए बाजार विकसित करेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि 2030 तक हल्दी निर्यात बढ़कर 1 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।</p>
<p>केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड हल्दी से संबंधित मामलों में नेतृत्व प्रदान करेगा, प्रयासों को मजबूत बनाएगा तथा हल्दी क्षेत्र के विकास और वृद्धि में मसाला बोर्ड और अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ अधिक समन्वय की सुविधा प्रदान करेगा।</p>
<p>बयान के मुताबिक, हल्दी के गुणों और स्वास्थ्य लाभों को देखते हुए विश्व भर में महत्वपूर्ण संभावनाएं और रुचि है जिसका लाभ बोर्ड जागरूकता और खपत बढ़ाने, निर्यात बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए बाजार विकसित करने, नए उत्पादों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने तथा मूल्यवर्धित हल्दी उत्पादों के लिए हमारे पारंपरिक ज्ञान के विकास का काम करेगा। यह विशेष रूप से मूल्य संवर्धन से अधिक लाभ पाने के लिए हल्दी उत्पादकों की क्षमता निर्माण और कौशल विकास पर फोकस करेगा। बोर्ड गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों और ऐसे मानकों के पालन को भी प्रोत्साहित करेगा। साथ ही मानवता के लिए हल्दी की पूरी क्षमता की सुरक्षा और उपयोगी दोहन के लिए भी कदम उठाएगा।</p>
<p>बोर्ड की गतिविधियां हल्दी उत्पादकों के क्षेत्र पर केंद्रित और समर्पित फोकस तथा खेतों के निकट बड़े मूल्यवर्धन के माध्यम से हल्दी उत्पादकों की बेहतर भलाई और समृद्धि में योगदान देंगी जिससे उत्पादकों को उनकी उपज की बेहतर कीमत मिलेगी। अनुसंधान, बाजार विकास, बढ़ती खपत और मूल्य संवर्धन में बोर्ड की गतिविधियां यह भी सुनिश्चित करेंगी कि हमारे उत्पादक और प्रोसेसर उच्च गुणवत्ता वाले हल्दी और हल्दी उत्पादों के निर्यातकों के रूप में वैश्विक बाजारों में अपनी प्रमुख स्थिति बनाए रखना जारी रखेंगे।</p>
<p>हल्दी बोर्ड में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष, आयुष मंत्रालय, केंद्र सरकार के फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और किसान कल्याण, वाणिज्य और उद्योग विभाग, तीन राज्यों के वरिष्ठ प्रतिनिधि (रोटेशन के आधार पर), अनुसंधान में शामिल राष्ट्रीय/राज्य संस्थानों, चुनिंदा हल्दी किसानों और निर्यातकों के प्रतिनिधि होंगे। बोर्ड के सचिव की नियुक्ति वाणिज्य विभाग द्वारा की जाएगी।</p>
<p>भारत विश्व का सबसे बड़ा हल्दी उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक है। हल्दी के विश्व व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 62 फीसदी से अधिक है। 2022-23 के दौरान 380 से अधिक निर्यातकों द्वारा 20.74 करोड़ डॉलर मूल्य के 1.534 लाख टन हल्दी और हल्दी उत्पादों का निर्यात किया गया था। भारतीय हल्दी के लिए प्रमुख निर्यात बाजार बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और मलेशिया हैं। बोर्ड की केंद्रित गतिविधियों से &nbsp;उम्मीद है कि 2030 तक हल्दी निर्यात 1 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।</p>
<p>वर्ष 2022-23 में 11.61 लाख टन (वैश्विक हल्दी उत्पादन का 75 फीसदी से अधिक) के उत्पादन के साथ भारत में 3.24 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हल्दी की खेती की गई थी। भारत में हल्दी की 30 से अधिक किस्में 20 से अधिक राज्यों में उगाई जाती है। हल्दी के सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी, 2030 तक निर्यात बढ़कर 1 अरब डॉलर पहुंचने की उम्मीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अंकटाड ने भारत की विकास दर अनुमान को बढ़ाकर किया 6.6 फीसदी, पहले 6 फीसदी ग्रोथ का लगाया था अनुमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/unctad-raises-indian-economic-growth-forecast-to-6-point-6pc-in-2023-but-says-global-economy-a-mixed-bag.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Oct 2023 13:43:42 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/unctad-raises-indian-economic-growth-forecast-to-6-point-6pc-in-2023-but-says-global-economy-a-mixed-bag.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संयुक्त राष्ट्र के व्यापार और विकास सम्मेलन (अंकटाड) ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर अनुमान में 0.6 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। अंकटाड की ताजा रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2023 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 फीसदी रहेगी। इससे पहले अप्रैल में अंकटाड ने 6 फीसदी वृद्धि दर का अनुमान लगाया था। हालांकि, रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2024 में देश की वृद्धि धीमी होकर 6.2 फीसदी रह जाएगी। यह रिपोर्ट विश्व बैंक द्वारा वित्त वर्ष 2023-24 में भारत की अर्थव्यवस्था के 6.3 फीसदी की दर से बढ़ने के अनुमान के एक दिन बाद आई है। 2022-23 में भारत की वृद्धि दर 7.2 फीसदी रही थी।</p>
<p>अंकटाड द्वारा जारी व्यापार और विकास रिपोर्ट 2023 में चेतावनी दी गई है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो रही है। पिछले साल की तुलना में अधिकांश क्षेत्रों में विकास धीमा हो गया है। केवल कुछ ही देश इस प्रवृत्ति से आगे निकल रहे हैं। पूर्वी और मध्य एशिया को छोड़कर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था 2022 के बाद से धीमी हो गई है। अंकटाड ने अनुमान लगाया है कि 2023 में विश्व आर्थिक उत्पादन की वृद्धि घटकर 2.4 फीसदी रह जाएगी, लेकिन 2024 में इसमें मामूली वृद्धि दर्ज की जाएगी और यह 2.5 फीसदी रहेगी।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक चौराहे पर खड़ी है, जहां अलग-अलग विकास पथ, बढ़ती असमानताएं, बढ़ती बाजार एकाग्रता और बढ़ते कर्ज का बोझ भविष्य पर प्रभाव डाल रहा है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को पूरा करने की संभावना कम हो रही है क्योंकि बढ़ती ब्याज दरों, कमजोर मुद्राओं और धीमी निर्यात वृद्धि &nbsp;से सरकारों के लिए जलवायु परिवर्तन से लड़ने और अपने लोगों को देने के लिए आवश्यक राजकोषीय गुंजाइश कम हो रही है। रिपोर्ट में नीतिगत दिशा में बदलाव का आह्वान किया गया है जिसमें अग्रणी केंद्रीय बैंक भी शामिल हैं।</p>
<p>रिपोर्ट में दुनिया के देशों से वैश्विक वित्तीय सुधारों, मुद्रास्फीति, असमानता और संप्रभु कर्ज संकट से निपटने के लिए अधिक व्यावहारिक नीतियों और प्रमुख बाजारों की मजबूत निगरानी का किया गया है। साथ ही वित्तीय स्थिरता हासिल करने, उत्पादक निवेश को बढ़ावा देने और ज्यादा नौकरियां पैदा करने के लिए राजकोषीय, मौद्रिक और आपूर्ति-पक्ष उपायों के संतुलित नीति मिश्रण का उपयोग करके वैश्विक अर्थव्यवस्था को सही दिशा में आगे बढ़ाने की बात कही गई है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व स्तर पर कोविड-19 महामारी के बाद रिकवरी अलग-अलग है। इसमें कहा गया है- "हालांकि ब्राजील, चीन, भारत, जापान, मैक्सिको, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कुछ अर्थव्यवस्थाओं ने 2023 में लचीलापन दिखाया है, जबकि अन्य को अधिक कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है"। जिनेवा स्थित संगठन ने कहा कि भारत में निजी और सरकारी क्षेत्र के साथ-साथ बाहरी क्षेत्र ने घरेलू विकास में योगदान दिया है। इसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि भारत की 10 सबसे बड़ी कंपनियों का कुल निर्यात में 8 फीसदी हिस्सा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अंकटाड ने भारत की विकास दर अनुमान को बढ़ाकर किया 6.6 फीसदी, पहले 6 फीसदी ग्रोथ का लगाया था अनुमान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उज्जवला के लाभार्थियों के लिए त्योहारों से पहले बड़ी खुशखबरी, एलपीजी सिलेंडर के दाम में 100 रुपये की कटौती, अब देने होंगे 600 रुपये   ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/good-news-before-the-festivals-for-the-beneficiaries-of-ujjwala-scheme-price-of-lpg-cylinder-cut-by-rs-100-now-pay-rs-600.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 04 Oct 2023 16:42:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/good-news-before-the-festivals-for-the-beneficiaries-of-ujjwala-scheme-price-of-lpg-cylinder-cut-by-rs-100-now-pay-rs-600.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उज्जवला योजना के 9.60 करोड़ लाभार्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले इस योजना के लाभार्थियों को बड़ा तोहफा देते हुए एलपीजी सिलेंडर के दाम 100 रुपये और घटा दिए हैं। अब उन्हें 14.2 किलो वाले रसोई गैस सिलेंडर के लिए करीब 600 रुपये देने होंगे। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को यह फैसला किया है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में उज्जवला योजना के तहत रसोई गैस सिलेंडर के लिए दी जाने वाली सब्सिडी को 200 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कैबिनेट की बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। इससे पहले सितंबर में रक्षा बंधन के मौके पर मोदी सरकार ने सभी उपभोक्ताओं के लिए घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 200 रुपये घटाकर 900 रुपये कर दिया था। तब उज्जवला के लाभार्थियों के लिए यह कीमत 700 रुपये की गई थी जिसे अब और घटाकर 600 रुपये कर दिया गया है। &nbsp;</p>
<p>अनुराग ठाकुर ने प्रेस कॉनफ्रेंस कर कहा, ''प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई। हमने रक्षा बंधन और ओणम के अवसर पर रसोई गैस के सिलेंडर में 200 रुपये की कटौती की थी जिससे कीमत 1100 रुपये से घटकर 900 रुपये हो गई। उज्जवला योजना के लाभार्थी को 700 रुपये में रसोई गैस मिलने लगा था। अब उज्जवला योजना के लाभार्थी को 300 रुपये की सब्सिडी मिलेगी यानी उन्हें 600 रुपये में गैस सिलेंडर मिलेंगे।''</p>
<p>सितंबर में केंद्र सरकार ने न सिर्फ रसोई गैस सिलेंडर के दाम घटाए थे, बल्कि उज्जवला योजना के तहत 75 लाख नए एलपीजी कनेक्शन देने की भी घोषणा की थी। इसके लिए सरकार 1,650 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया है। अगले तीन साल में महिलाओं को ये कनेक्शन दिए जाएंगे। इसके बाद पीएम उज्जवला योजना के लाभार्थियों की संख्या 10.35 करोड़ हो जाएगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी। इस योजना का मकसद गरीबों और निम्न आय वर्ग की महिलाओं को एलपीजी सिलेंडर देना था। इस योजना के तहत ग्रामीण और शहरी इलाकों में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली महिलाओं को मुफ्त में गैस कनेक्शन मिलता है। इसका लाभ केवल बीपीएल कार्डधारकों को ही मिलता है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए राशन कार्ड होना आवश्यक है। साथ ही परिवार की आमदनी 27,000 रुपये से कम होनी चाहिए।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64ede4468d839.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उज्जवला के लाभार्थियों के लिए त्योहारों से पहले बड़ी खुशखबरी, एलपीजी सिलेंडर के दाम में 100 रुपये की कटौती, अब देने होंगे 600 रुपये    ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64ede4468d839.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारतीय कृषि क्षेत्र की विकास दर 3.5%और जीडीपी 6.3% की रफ्तार से बढ़ेगीः विश्व बैंक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indian-agriculture-sector-growth-rate-will-grow-at-3-point-5-percent-and-gdp-will-grow-at-6-point-3-percent-said-world-bank.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 04 Oct 2023 13:40:01 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indian-agriculture-sector-growth-rate-will-grow-at-3-point-5-percent-and-gdp-will-grow-at-6-point-3-percent-said-world-bank.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रतिकूल वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद विश्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में भारत की विकास दर 6.3 फीसदी रहने के अपने पूर्वानुमान को बरकरार रखा है। इससे पहले अप्रैल में भी विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी ग्रोथ इसी दर पर रहने का अनुमान लगाया था। 2022-23 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.2 फीसदी रही थी।</p>
<p>क्षेत्रीय विकास अनुमानों को जारी करते हुए विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि सेवा क्षेत्र की मजबूती की बदौलत भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज रहेगी। सेवा क्षेत्र की विकास दर 7.4 फीसदी और कृषि क्षेत्र की 3.5 फीसदी रहने का अनुमान रिपोर्ट में लगाया गया है। साथ ही कहा गया है कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल में भी भारत लगातार लचीलापन दिखा रहा है। विश्व बैंक के मुताबिक 2023-24 में भारतीय औद्योगिक विकास दर 5.7 फीसदी रहने की उम्मीद है। वहीं, निवेश वृद्धि 8.9 फीसदी पर मजबूत रहने का अनुमान है।</p>
<p>इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने ताजा अनुमान में कहा था कि 2023-24 में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.5 फीसदी की दर से बढ़ेगी। पिछले महीने एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की विकास दर का अनुमान थोड़ा घटाकर 6.3 फीसदी कर दिया था, जबकि आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में भारत की जीडीपी की वृद्धि का अनुमान 6 फीसदी के पिछले अनुमान से बढ़ाकर 6.3 फीसदी कर दिया है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने जहां भारत की वृद्धि दर का अनुमान 6.3 फीसदी पर बरकरार रखा है, वहीं एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस ने अपने पहले के 5.9 फीसदी के अनुमान को बढ़ाकर 6.6 फीसदी कर दिया है।</p>
<p>मुद्रास्फीति के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य पदार्थों की कीमतें सामान्य होने और सरकारी उपायों से प्रमुख वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलने से महंगाई धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है। विश्व बैंक ने पूरे वर्ष के दौरान खुदरा महंगाई 5.9 फीसदी रहने की उम्मीद जताई है। विश्व बैंक को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा जीडीपी के 6.4 फीसदी से घटकर 5.9 फीसदी पर आ जाएगी। जबकि चालू खाते का घाटा जीडीपी के 1.4 फीसदी तक घटने का अनुमान है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारतीय कृषि क्षेत्र की विकास दर 3.5%और जीडीपी 6.3% की रफ्तार से बढ़ेगीः विश्व बैंक ]]></media:description>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड का होगा गठन, हल्दी की खेती को मिलेगा बढ़ावा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/national-turmeric-board-will-be-formed-turmeric-farming-will-get-a-boost.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 02 Oct 2023 16:01:23 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/national-turmeric-board-will-be-formed-turmeric-farming-will-get-a-boost.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हल्दी की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड का गठन करने की घोषणा की है। सरकार के इस पहल से न सिर्फ हल्दी उत्पादन में बढ़ोतरी होगी बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने किसानों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा है कि है। राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड की स्थापना करके हमारा लक्ष्य हल्दी किसानों की क्षमता का उपयोग करना और उन्हें वह समर्थन देना है जिसके वे हकदार हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने रविवार को तेलंगाना में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड का गठन करने की घोषणा की थी। उनकी इस घोषणा पर निजामाबाद के सांसद अरविंद धर्मपुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी एक फोटो पोस्ट करते हुए लिखा था, किसानों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण! आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड की घोषणा तेलंगाना, विशेषकर निजामाबाद के किसानों के जीवन के उत्थान के लिए भाजपा की प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है। यह कदम हल्दी की खेती में क्रांति लाएगा, उचित मूल्य और वैश्विक मान्यता सुनिश्चित करेगा।&rdquo;</p>
<p>उन्होंने अपने पोस्ट में इसके फायदे बताते हुए लिखा, &ldquo;हल्दी सिर्फ एक फसल नहीं है, यह हमारी संस्कृति का एक अभिन्न अंग है जिसका उपयोग स्वास्थ्य, पाक और धार्मिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। इम्युनिटी बढ़ाने वाले इसके गुणों के कारण महामारी के दौरान के इसकी मांग बढ़ गई। हल्दी बोर्ड किसानों और उपभोक्ताओं दोनों का समर्थन करते हुए इसे संबोधित करता है। हल्दी बोर्ड बुवाई से लेकर कटाई तक, मार्केटिंग से लेकर निर्यात तक हमारे किसानों के लिए गेमचेंजर साबित होगा। यह सुनिश्चित करता है कि उनकी कड़ी मेहनत को उचित पुरस्कार मिले, समृद्धि को बढ़ावा मिले और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी कृषि विरासत सुरक्षित रहे। राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड तेलंगाना के कृषि समुदाय के लिए आशा की किरण है!&rdquo;</p>
<p>अरविंद धर्मपुरी के पोस्ट का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया- "हमारे किसानों की भलाई और समृद्धि हमेशा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड की स्थापना करके हमारा लक्ष्य हमारे हल्दी किसानों की क्षमता का दोहन करना और उन्हें वह समर्थन देना है जिसके वे हकदार हैं। निजामाबाद के लिए यह लाभ विशेष रूप से बहुत अधिक है। हम अपने हल्दी किसानों के उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास करते रहेंगे।"</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड का होगा गठन, हल्दी की खेती को मिलेगा बढ़ावा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मधु कांकरिया को मिला श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/madhu-kankaria-received-shrilal-shukla-smriti-iffco-literary-award.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 30 Sep 2023 18:43:42 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/madhu-kankaria-received-shrilal-shukla-smriti-iffco-literary-award.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उर्वरक क्षेत्र की प्रमुख सहकारी संस्था इफको द्वारा वर्ष 2023 का &lsquo;श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान&rsquo; कथाकार मधु कांकरिया को दिया गया है। शनिवार को नई दिल्ली के एनसीयूआई सभागार में आयोजित एक समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी एवं मृदुला गर्ग ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।</p>
<p>मधु कांकरिया का जन्म कोलकाता में 23 मार्च, 1957 को हुआ था। उनके सात उपन्यास और बारह कहानी संग्रह प्रकाशित हैं। उपन्यासों में &lsquo;पत्ताखोर&rsquo;, &lsquo;सेज पर संस्कृत&rsquo;, &lsquo;सूखते चिनार&rsquo;, &lsquo;ढलती साँझ का सूरज&rsquo; चर्चित रहे हैं। &lsquo;बीतते हुए&rsquo;, &lsquo;...और अन्त में ईशु&rsquo;, &lsquo;चिड़िया ऐसे मरती है&rsquo;, &lsquo;भरी दोपहरी के अँधेरे&rsquo;, &lsquo;युद्ध और बुद्ध&rsquo;, &lsquo;जलकुम्भी&rsquo;, &lsquo;नंदीग्राम के चूहे&rsquo; आदि उनके प्रमुख कहानी संग्रह हैं। &lsquo;बादलों में बारूद&rsquo; नाम से उन्होंने यात्रा वृत्तांत भी लिखा है। तेलुगू, मराठी सहित कई भाषाओं में उनकी रचनाओं के अनुवाद हुए हैं। मानवीय त्रासदी के विविध पहलुओं की बारीक अभिव्यक्ति मधु कांकरिया के रचनाकर्म की विशिष्ट पहचान है। मानव कल्याण की भावना के साथ पिछले दो दशकों से वे लगातार लिख रही हैं। अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया है।</p>
<p>वरिष्ठ साहित्यकार प्रो असगर वजाहत की अध्यक्षता वाली निर्णायक समिति ने मधु कांकरिया का चयन हाशिये का समाज, भारत के बदलते यथार्थ पर केन्द्रित उनके व्यापक साहित्यिक अवदान को ध्यान में रखकर किया। निर्णायक मंडल में मुरली मनोहर प्रसाद सिंह, डॉ. अनामिका, प्रियदर्शन, रवींद्र त्रिपाठी एवं उत्कर्ष शुक्ल शामिल थे।</p>
<p>मूर्धन्य कथाशिल्पी श्रीलाल शुक्ल की स्मृति में वर्ष 2011 में शुरू किया गया यह सम्मान प्रतिवर्ष किसी ऐसे रचनाकार को दिया जाता है जिसकी रचनाओं में ग्रामीण और कृषि जीवन से जुड़ी समस्याओं, आकांक्षाओं और संघर्षों को मुखरित किया गया हो। इससे पहले विद्यासागर नौटियाल, शेखर जोशी, संजीव, &nbsp;मिथिलेश्वर, अष्टभुजा शुक्ल, कमलाकान्त त्रिपाठी, रामदेव धुरंधर, रामधारी सिंह दिवाकर, महेश कटारे, रणेंद्र, शिवमूर्ति और जयनंदन को यह पुरस्कार दिया जा चुका है। सम्मानित साहित्यकार को एक प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र तथा 11 लाख रुपये की राशि का चेक दिया जाता है।</p>
<p>इफको के मैनेजिंग डायरेक्ट डॉ॰ उदय शंकर अवस्थी ने मधु कांकरिया को बधाई देते हुए कहा कि मधु कांकरिया गहरे सामाजिक सरोकारों की रचनाकार हैं। उन्होंने वेश्या जीवन से लेकर युवाओं में बढ़ रही नशाखोरी तक के व्यापक और चिंतनीय विषयों पर कुशलता के साथ अपनी लेखनी चलाई है। डॉ. अवस्थी ने मधु जी के रचनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अपने कथा संसार में उन्होंने समय के क्रूर यथार्थ को पकड़ने की कोशिश की है। उन्होंने कहा की इफको 35,000 सहकारी समितियों से बनी एक संस्था है जो सदैव किसानों के हित के लिए कार्यरत है, केवल किसान ही नहीं बल्कि भूमि और वातावरण का भी चिंतन करती है। रसायनिक खाद के नकारात्मक परिणामों के बारे में आभास कराने के साथ-साथ उन्होंने नैनो उर्वरकों के विशेषताओं के बारे में भी बताया। डॉ. अवस्थी ने श्रीलाल शुक्ल साहित्य सम्मान के बारे में बताया के कैसे विशेष तौर से वह उन लोगों को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है जो किसानों, देहात और भूमि को अपने साहित्य में समेकित करते हैं और उनका उल्ललेख करते हैं। उन्होंने कहा कि देश में साहित्य को जीवित रखने के लिए हर परिवार को प्रति वर्ष कम से कम एक पुस्तक खरीदने का प्रण करना चाहिए। इससे साहित्यकारों को ही लाभ नहीं होगा बल्कि पुस्तक हमारे जीवन में सकारात्मकता भी लाएगी।&nbsp;</p>
<p>मधु कांकरिया ने पुरस्कार ग्रहण करते हुए कहा की यह पुरस्कार पाकर वह अभिभूत हैं। इफको और डॉ. उदय शंकर अवस्थी को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा की साहित्य विरोधी युग में साहित्य को जीवित रखने में इफको की विशेष भूमिका है जो आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी।</p>
<p>सम्मान समारोह में दिल्ली की नाट्य मंडली &lsquo;थर्ड बेल आर्ट एंड कल्चरल सोसायटी&rsquo; के कलाकारों ने विजय श्रीवास्तव निर्देशित श्रीलाल शुक्ल की रचना पर आधारित नाटक &lsquo;एक चोर की कहानी&rsquo; का मंचन भी किया। इस अवसर पर खेती-किसानी एवं हास्य रस पर केंद्रित कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया गया। कवि सम्मेलन में अष्टभुजा शुक्ल, अनामिका अनु, इब्बार रब्बी, सरिता शर्मा, अनिल अग्रवंशी, सुरेश अवस्थी ने अपनी कविताओं से सबका मन मोह लिया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मधु कांकरिया को मिला श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज की बैंगलोर रोज किस्म को निर्यात शुल्क से मिली सशर्त छूट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-exempts-bangalore-rose-onion-from-export-duty.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 30 Sep 2023 18:00:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-exempts-bangalore-rose-onion-from-export-duty.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने कुछ शर्तों के साथ प्याज की बैंगलोर रोज किस्म के निर्यात को शुल्क से छूट दे दी है। बैंगलोर रोज प्याज को 2015 में जीआई टैग दिया गया था। इस प्याज का बड़ी मात्रा में निर्यात किया जाता है लेकिन देश में इसका इस्तेमाल कम ही किया जाता है। जिन देशों को इसका निर्यात किया जाता है उनमें सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया, बहरीन, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देश शामिल हैं। प्याज की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने अगस्त से प्याज के निर्यात पर 40 फीसदी शुल्क लगा दिया है।</p>
<p>एक सरकारी बयान में कहा गया है कि वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की है। साथ ही मंत्रालय ने यह शर्त रखी है कि प्याज निर्यातकों को राज्य बागवानी आयुक्त से एक प्रमाण-पत्र लेना होगा जो निर्यात किए जाने वाले बैंगलोर रोज प्याज की किस्म और मात्रा को प्रमाणित करता हो।</p>
<p>सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और स्थानीय बाजार में बढ़ती कीमत को रोकने के लिए प्याज की सभी किस्मों के निर्यात पर अगस्त 2023 में 40 फीसदी शुल्क लगाया था। उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर प्याज की औसत कीमत 33.53 रुपये प्रति किलो है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने 2022-23 में बफर स्टॉक के लिए 2.50 लाख टन प्याज खरीदा है। हालांकि, देश में प्याज के पर्याप्त भंडार के बावजूद इस साल लंबे समय तक ज्यादा गर्मी के कारण खराब गुणवत्ता वाले प्याज की अधिकता के कारण अच्छी गुणवत्ता वाला प्याज महंगा हो गया है। वहीं 2022-23 के दौरान प्याज का निर्यात मात्रा के हिसाब से 64 फीसदी बढ़कर छह साल के उच्चतम स्तर 25.25 लाख टन पर पहुंच गया।</p>
<p>बैंगलोर रोज प्याज की अनूठी विशेषताएं हैं। इस प्याज में सपाट आधार वाले बल्ब होते हैं, यह गोलाकार होता है और इसका रंग गहरा लाल होता है। सामान्य प्याज के मुकाबले ये एंथोसायनिन, फिनोल और उच्च तीखेपन से भरपूर होते हैं। इसके अलावा यह फास्फोरस, प्रोटीन, आयरन और कैरोटीन से भरपूर होता है। अचार में इस्तेमाल करने के लिए इसे सबसे उपयोगी माना जाता है।</p>
<p>वित्त वर्ष 2010-11 में लगभग 22,000 टन बैंगलोर रोज प्याज का निर्यात किया गया था। हालांकि, यह 2003-04 और 2005-06 के निर्यात की तुलना में कम था। इन वर्षों में इन प्याज का निर्यात क्रमशः 36000 टन और 32,000 टन रहा था।</p>
<p>उत्पादन और निर्यात बढ़ाने के लिए कर्नाटक में इसके लिए कृषि निर्यात क्षेत्र की स्थापना की गई। इसके अलावा, भारत सरकार ने 2015 में इस प्याज को जीआई टैग प्रदान किया। इन उपायों से कर्नाटक में बैंगलोर रोज प्याज का उत्पादन प्रति वर्ष लगभग 60,000 टन तक पहुंच गया है। प्याज पर निर्यात शुल्क लगाने के बाद इसका निर्यात बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। बैंगलोर रोज प्याज और कृष्णापुरम प्याज का लगभग 90 फीसदी निर्यात होता है। &nbsp;कृष्णापुरम प्याज रोज प्याज की तरह ही है।</p>
<p>लगभग 80-85 फीसदी बैंगलोर रोज प्याज का उत्पादन रबी सीजन में होता जाता है और बाकी का उत्पादन खरीफ सीजन के दौरान किया जाता है। 40 फीसदी निर्यात शुल्क के कारण किसानों को बैंगलोर रोज प्याज को 6 रुपये प्रति किलोग्राम की बहुत कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे किसानों की आय पर असर पड़ा है।</p>
<p>शेतकारी संघटना के पूर्व अध्यक्ष और कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति के सदस्य अनिल घनवत ने रूरल वॉयस को बताया कि प्याज की किसी भी किस्म के निर्यात पर शुल्क की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, ''प्याज पर कोई निर्यात शुल्क लगाने की जरूरत नहीं है। यह पूरी तरह से मुक्त होना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले और उसके समय पर राजनीति दिख रही है।</p>
<p>प्याज की इस किस्म को कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना के सीमावर्ती इलाकों में उगाया जाता है। उन्होंने कहा कि चूंकि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में चुनाव होने वाले हैं इसलिए इस क्षेत्र के किसानों को खुश करने और उनके वोट हासिल करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इस प्याज की खासियत के बारे में पूछे जाने पर घनवत ने कहा कि इसकी गुणवत्ता बेहतर है और उत्पादकता भी अधिक है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज की बैंगलोर रोज किस्म को निर्यात शुल्क से मिली सशर्त छूट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पराली प्रबंधन की मशीनरी के लिए सरकार दे रही 65 फीसदी सब्सिडी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-subsidy-on-machinery-to-check-stubble-burning.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 30 Sep 2023 13:33:38 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-subsidy-on-machinery-to-check-stubble-burning.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>धान की पराली का स्थानीय स्तर पर प्रबंधन करने के लिए सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन के दिशानिर्देशों में संशोधन किया है। साथ ही इसके लिए जरूरी मशीनरी की खरीद पर वित्तीय सहायता भी दी जा रही है। कृषि मंत्रालय की एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिशानिर्देशों में संशोधन की जानकारी देते हुए कहा कि भारत सरकार किसानों को पराली प्रबंधन में मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव एस रुक्मणि ने कृषि मंत्रालय और सीआईआई द्वारा पराली प्रबंधन के लिए स्वच्छ एवं हरित समाधान पर नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में कहा, &ldquo;हमने फसल अवशेष प्रबंधन पर संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं और अब पराली के स्थानीय प्रबंधन को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके लिए 65 फीसदी तक की सब्सिडी के जरिये से मशीनरी की पूंजीगत लागत के लिए वित्तीय सहायता की पेशकश कर रहे हैं, जबकि उद्योग को परिचालन लागत के लिए 25 फीसदी का योगदान करने की आवश्यकता होगी।&rdquo;</p>
<p>सीआईआई ने एक बयान में कहा कि एस रुक्मणि ने इस बात पर जोर दिया कि पराली आमदनी का जरिया बन सकती है। उन्होंने पराली की आपूर्ति श्रृंखला पर सरकार की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि पराली का इस्तेमाल करने वाले उद्योगों को इसमें शामिल करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत इसे बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि धान की पराली के कई उपयोग हैं लेकिन इन उद्योगों के लिए कोई मजबूत आपूर्ति श्रृंखला उपलब्ध नहीं है।</p>
<p>खेतों में पराली जलाने के मुद्दे पर सीआईआई नेशनल एग्रीकल्चर काउंसिल के चेयरमैन और आईटीसी लिमिटेड के ग्रुप हेड (कृषि एवं आईटी बिजनेस) एस शिवकुमार ने कहा कि हर समस्या में एक समाधान छिपा होता है लेकिन लगभग सभी समाधान नई समस्याएं पैदा करते हैं। यह एक सतत यात्रा है और पराली प्रबंधन का मुद्दा कोई अपवाद नहीं है। उदाहरण के लिए, एक फसल की कटाई और अगली की बुआई के बीच की छोटी अवधि को देखते हुए पराली जलाना एक समाधान की तरह लगता था लेकिन इससे मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो जाती है और भारी प्रदूषण पैदा होता है। उन्होंने कहा कि यह समझने के लिए कि संपूर्ण समाधान में क्या बाधा आ रही है हमें यह समझने की जरूरत है कि कमियां कहां हैं। चाहे जागरूकता के संदर्भ में हो, लागत के मुद्दे हो या निवेश हो जो हमें पीछे खींच रहा है, &nbsp;प्रत्येक क्षेत्र को अद्वितीय चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा जिन्हें दूर किया जाना चाहिए।</p>
<p>कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के उपायुक्त अरविंद मेश्राम ने संशोधित दिशानिर्देशों के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और अन्य मशीनें धान की पराली को मिट्टी में मिलाने में मदद कर सकती हैं जिससे मिट्टी को समृद्ध करके किसानों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना से किसानों को धान की पुआल बेचने से आय होगी, जबकि उद्योगों को निरंतर आपूर्ति होती रहेगी।</p>
<p>इसी साल जुलाई में केंद्र सरकार ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में पराली जलाने से होने वाली समस्या के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर पराली प्रबंधन को सक्षम बनाने के लए फसल अवशेष प्रबंधन दिशानिर्देशों को संशोधित किया था। संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, धान की पराली आपूर्ति श्रृंखला के लिए लाभार्थी/एग्रीगेटर (किसान, ग्रामीण उद्यमी, किसानों की सहकारी समितियां, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और पंचायतें) और पराली का इस्तेमाल करने वाले उद्योगों के बीच द्विपक्षीय समझौते के तहत तकनीकी-वाणिज्यिक पायलट परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पराली प्रबंधन की मशीनरी के लिए सरकार दे रही 65 फीसदी सब्सिडी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_6517d63fe5782.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरित क्रांति के जनक डॉ. एमएस स्वामीनाथन का 98 वर्ष की उम्र में निधन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/father-of-indian-green-revolution-m-s-swaminathan-dead.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 28 Sep 2023 13:35:34 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/father-of-indian-green-revolution-m-s-swaminathan-dead.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में हरित क्रांति के जनक और दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिकों में शुमार डॉ. एमएस स्वामीनाथन का 98 वर्ष की उम्र में गुरुवार को चेन्नई में निधन हो गया। 7 अगस्त, 1925 को कुंभकोणम में जन्मे स्वामीनाथन का पूरा नाम मनकोम्बु संबासिवन स्वामीनाथन था। देश की खाद्य आत्मनिर्भरता में उनका सबसे बड़ा योगदान है। सी2 लागत पर 50% मुनाफा देकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की उनकी सिफारिश ने उन्हें किसानों के घर-घर तक पहुंचा दिया। &nbsp;</p>
<p>स्वामीनाथन उम्र संबंधी बीमारियों से काफी समय से पीड़ित थे। गुरुवार को 11.20 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी तीन बेटियां हैं- सौम्या स्वामीनाथन, मधुरा स्वामीनाथन और नित्या राव। उनकी पत्नी मीना स्वामीनाथन की मृत्यु पहले ही हो गई थी। सर्जन पिता एम.के. संबासिवन और मां पार्वती थंगम्मल के घर जन्मे स्वामीनाथन की स्कूली शिक्षा कुंभकोणम में ही हुई। कृषि विज्ञान में उनकी गहरी रुचि थी। स्वतंत्रता आंदोलन में उनके पिता की भागीदारी और महात्मा गांधी के प्रभाव ने उन्हें इस विषय में उच्च अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया, नहीं तो वे एक पुलिस अधिकारी बन गए होते जिसके लिए उन्होंने 1940 के दशक के अंत में योग्यता हासिल कर ली थी। तब तक उन्होंने दो स्नातक डिग्रियां प्राप्त कर लीं थी जिनमें से एक कृषि महाविद्यालय, कोयंबटूर (अब तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय) से थी।</p>
<p>डॉ. स्वामीनाथन ने 'हरित क्रांति' की सफलता के लिए दो केंद्रीय कृषि मंत्रियों सी. सुब्रमण्यम (1964-67) और जगजीवन राम (1967-70 और 1974-77) के साथ मिलकर काम किया। हरित क्रांति की बदौलत ही भारत गेहूं और चावल के उत्पादन में आत्मनिर्भर बन पाया। प्रसिद्ध अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक और 1970 के नोबेल पुरस्कार विजेता नॉर्मन बोरलाग की गेहूं पर खोज ने इस संबंध में बड़ी भूमिका निभाई थी।</p>
<p>स्वामीनाथन को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा "आर्थिक पारिस्थितिकी के जनक" के रूप में भी जाना जाता था। भारत में ज्यादा उपज देने वाली गेहूं और चावल की किस्मों को विकसित करने और उनका नेतृत्व करने के लिए उन्हें 1987 में पहले विश्व खाद्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया जिसके बाद उन्होंने चेन्नई में एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की।</p>
<p>स्वामीनाथन को 1971 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार और 1986 में अल्बर्ट आइंस्टीन विश्व विज्ञान पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। स्वामीनाथन ने धान की ज्यादा उपज देने वाली किस्मों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिली कि भारत के कम आय वाले किसान अधिक उत्पादन कर सकें।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरित क्रांति के जनक डॉ. एमएस स्वामीनाथन का 98 वर्ष की उम्र में निधन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अखिल भारतीय किसान सभा ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर शुल्क कटौती वापस लेने की मांग की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/aiks-seeks-rollback-of-tariff-relaxation-on-us-products.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 27 Sep 2023 14:20:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/aiks-seeks-rollback-of-tariff-relaxation-on-us-products.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) ने काबुली चना, मसूर, बादाम, अखरोट और सेब सहित विभिन्न अमेरिकी उत्पादों के आयात पर केंद्र सरकार द्वारा शुल्क में दी गई छूट को वापस लेने की मांग की है। एआईकेएस ने एक बयान में कहा कि भारत और अमेरिका ने जून में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में लंबित व्यापार विवादों को हल करने का फैसला किया था, लेकिन विवाद सुलझाने के नाम पर नरेंद्र मोदी सरकार ने भारतीय किसानों के हितों का आत्मसमर्पण कर दिया है।</p>
<p>काबुली चना, मसूर, बादाम, अखरोट और सेब सहित कुछ अमेरिकी उत्पादों पर भारत द्वारा की गई शुल्क कटौती का उल्लेख करते हुए एआईकेएस ने पॉल्ट्री, सेब, नट्स और दाल सहित विभिन्न अमेरिकी कृषि वस्तुओं के आयात पर की गई टैरिफ कटौती को तत्काल वापस लेने की मांग की।</p>
<p>एआईकेएस ने कहा है कि शुल्कों में की गई ये कटौतियां दर्शाती है कि भारत सरकार किसानों की कीमत पर अमेरिका की इच्छा पूर्ति कर रही है। इससे लाभकारी आय की भारतीय किसानों की जरूरत को धक्का लगेगा और भारतीय बाजार अमेरिका के सस्ते कृषि उत्पादों से पट जाएगा। शुल्कों में और अधिक कटौती से भारतीय सेब उत्पादकों के लिए स्थिति और भी विकट हो जाएगी। भारत में पिछले कुछ समय में मसूर व अन्य दालों के उत्पादन में गिरावट देखी गई है। शुल्कों में कटौती से भारत के छोटे और सीमांत दाल उगाने वाले किसानों को भारी नुकसान होगा।</p>
<p>बयान के मुताबिक, एआईकेएस ने यह भी मांग की है कि सरकार को कृषि में मुक्त व्यापार समझौते में प्रवेश नहीं करना चाहिए। यह भारतीय किसानों के लिए हानिकारक होगा। एआईकेएस ने कृषि को डब्ल्यूटीओ के कृषि समझौते से बाहर लाने की लंबे समय से चली आ रही मांग को दोहराया है। बयान में कहा गया है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ अपने फायदे के मुताबिक समझौता करने के लिए विकासशील देशों के खिलाफ मामले उठाने को डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटारा तंत्र का उपयोग करने के लिए जाना जाता है।</p>
<p>इसी साल जून में अमेरिका और भारत डब्ल्यूटीओ में छह लंबित विवादों को सुलझाने पर सहमत हुए। इसके तहत भारत काबुली चना, मसूर, बादाम, अखरोट, सेब, बोरिक एसिड और डायग्नोस्टिक अभिकर्मकों सहित कुछ अन्य अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करने पर सहमत हुआ। एआईकेएस देश का सबसे बड़ा किसान संगठन है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अखिल भारतीय किसान सभा ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर शुल्क कटौती वापस लेने की मांग की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एमएसपी कमेटी के किसान सदस्यों की राय&amp;#45; फसलों की रिजर्व प्राइस को कानूनी मान्यता और सीएसीपी को वैधानिक दर्जा मिले]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmer-members-of-msp-committee-want-legal-recognition-to-floor-price-of-crops-and-statutory-status-to-cacp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 27 Sep 2023 09:44:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmer-members-of-msp-committee-want-legal-recognition-to-floor-price-of-crops-and-statutory-status-to-cacp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मुद्दे पर गठित समिति में फसलों की न्यूनतम कीमत को कानूनी मान्यता देने पर विचार किया जा रहा है। समिति में शामिल किसान प्रतिनिधियों ने ए2प्लस एफएल लागत के ऊपर 50 फीसदी राशि जोड़कर रिजर्व प्राइस तय करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें कहा गया है कि रिजर्व प्राइस का कानूनी प्रावधान किया जाए और किसी को भी उससे कम कीमत पर किसानों से फसल खरीदने की अनुमति न हो। मंडियों में नीलामी रिजर्व प्राइस से ही शुरू हो, उससे कम पर नहीं। रिजर्व प्राइस से कम पर खरीदने वालों पर जुर्माना लगे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">हालांकि सरकार के मुताबिक ए2प्लस एफएल लागत पर 50 फीसदी राशि जोड़कर एमएसपी 2018 से तय की जा रही है। लेकिन जहां तक अधिकांश बड़े किसान संगठनों की बात है तो वह सी2 लागत पर 50 फीसदी राशि जोड़कर एमएसपी तय करने और उसे लागू करने की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारी किसान संगठनों की यही मांग थी। यह बात अलग है कि संयुक्त किसान मोर्चा के घटकों ने सरारक द्वारा बनाई गई समिति में शामिल होने से इनकार कर दिया था। लेकिन समिति में शामिल किसानों राय से लगता है कि वह एमएसपी निर्धारण के फार्मूले के मामले में सरकार के साथ ही चल रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">तीन कृषि कानूनों के खिलाफ साल भर से अधिक चले किसान आंदोलन को समाप्त करने की सहमति के बाद एमएसपी के मुद्दे पर समिति बनाई गई थी। इस समिति के तहत एक सब ग्रुप ऑन एमएसपी इफेक्टिवनेस एंड ट्रांसपेरेंसी बनी थी। इसी उप-समिति ने रिजर्व प्राइस का सुझाव समिति के चेयरमैन को दिया है। इस उप-समिति में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएपीसी) के सदस्य नवीन पी सिंह, किसान नेता पाशा पटेल, गुणवंत पाटिल और कृष्णबीर चौधरी सदस्य हैं।<strong> रूरल वॉयस</strong> ने इन प्रस्तावों के दस्तावेजों को देखा है।&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">प्रस्ताव में कहा गया है कि मंडियों में कृषि उत्पादों की बोली रिजर्व प्राइस के ऊपर ही शुरू होनी चाहिए। राज्य सरकारें इसके लिए कानूनी प्रावधान करें। समिति का कहना है कि देश में कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क निर्धारित करने में इस तथ्य को ध्यान में रखा जाना चाहिए कि आयात रिजर्व प्राइस से कम कीमत पर न हो।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सीएसीपी को वैधानिक दर्जा देने अथवा स्वायत्त बनाने और किसी किसान प्रतिनिधि को इसका अध्यक्ष बनाने की सिफारिश भी इस उप-समिति ने की है। इसके प्रस्ताव में कहा गया है कि फसलों की लागत का आकलन करने के सीएसीपी के मौजूदा फार्मूले को बदलकर वास्तविक लागत को आधार बनाया जाए। किसानों को कहीं भी अपनी फसल बेचने की छूट हो और देश भर में किसानों को डेफिसिएंसी पेमेंट का प्रावधान किया जाए। मंडी टैक्स की दरें भी पूरे देश में एक समान हों।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उप-समिति की अन्य सिफारिशों में उत्पादन की वास्तविक लागत का आकलन करने के लिए अलग समिति बनाना, सैंपल साइज में ज्यादा संख्या में किसानों को शामिल करना, एमएसपी तय करते वक्त विभिन्न राज्यों में दी जा रही सब्सिडी पर भी गौर करना, किसान, व्यापारी, उपभोक्ता और सरकार के प्रतिनिधियों को मिलाकर जिला स्तर पर विवाद निस्तारण अथॉरिटी बनाना शामिल हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">केंद्र सरकार ने पूर्व कृषि सचिव संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में एमएसपी समिति बनाई थी। लेकिन समिति का दायरा एमएसपी तक सीमित न रखते हुए इसमें सीएसीपी की कार्यशैली और प्राकृतिक खेती जैसे विषय जोड़े गये थे। समिति का गठन 12 जुलाई, 2022 को एक गजट नोटिफिकेशन के जरिये किया गया था। इसकी पहली बैठक 22 अगस्त, 2022 को हुई थी। समिति ने देश के अलग-अलग हिस्सों में कई बैठकें की हैं। हालांकि, गठन के एक साल बाद भी यह कहना मुश्किल है कि इसकी सिफारिशें कब आएंगी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सूत्रों के मुताबिक समिति की सिफारिशों पर सदस्यों में तीखे मतभेद हैं। सबसे विवादित मुद्दा एमएसपी की जगह रिजर्व प्राइस तय कर उसे कानूनी रूप देने का है। सीएसीपी को वैधानिक दर्जा देकर उसमें किसान प्रतिनिधियों को प्रमुखता के प्रस्ताव पर भी कई सदस्य सहज नहीं हैं। कुछ सदस्यों ने राष्ट्रव्यापी रायशुमारी का सुझाव दिया है तो कुछ सदस्यों का कहना है कि निर्यात पर सारे प्रतिबंध समाप्त कर आवश्यक वस्तु अधिनियम को भी खत्म कर दिया जाए। यह बात अलग है कि सरकार ने पिछले डेढ़ साल से खाद्य उत्पादों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों का लगातार इस्तेमाल किया है।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एमएसपी कमेटी के किसान सदस्यों की राय- फसलों की रिजर्व प्राइस को कानूनी मान्यता और सीएसीपी को वैधानिक दर्जा मिले ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र सरकार ने अरहर और उड़द दाल के लिए स्टॉक लिमिट की अवधि 31 दिसंबर तक बढ़ाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centre-extends-time-till-dec-31-for-stock-limits-on-tur-and-urad.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 25 Sep 2023 19:21:10 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centre-extends-time-till-dec-31-for-stock-limits-on-tur-and-urad.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div dir="auto">केंद्र सरकार ने अरहर और उड़द दाल के लिए स्टॉक लिमिट की अवधि को 31 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दिया है। इसके साथ ही कुछ श्रेणियों के लिए स्टॉक की सीमा में भी बदलाव किये हैं। खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि थोक विक्रेताओं और बड़ी रिेटेल चेन के लिए स्टॉक की सीमा को 200 टन से घटाकर 50 टन कर दिया गया है।&nbsp;</div>
<div dir="auto">वहीं दाल मिलों के लिए स्टॉक सीमा को पिछले तीन के उत्पादन या उनकी सालाना क्षमता के 25 फीसदी के स्तर से घटाकर पिछले एक माह के उत्पादन या सालाना क्षमता के 10 फीसदी में जो अधिक होगा उसके बराबर कर दिया गया है।&nbsp; &nbsp;</div>
<div dir="auto">&nbsp;मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि स्टॉक लिमिट और समयवाधि में बदलाव के फैसले बाजार में अरहर और उड़द दाल की बेहतर आपूर्ति बनाये रखने के लिए किये गये हैं ताकि उपभोक्ताओं को उचित दाम पर दाल उपलब्ध हो सके। यह बदलाव सभी राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों के लिए किये गये हैं।</div>
<div dir="auto">&nbsp;स्टॉक लिमिट के तहत थोक बिक्रेताओं के लिए 50 टन, खुदरा विक्रेताओं के लिए पांच टन और हर रिटेल आउटलेट के लिए पांच टन की सीमा तय की गई है वहीं बड़ी रिटेल चेन के डिपो के लिए 50 टन की सीमा तय की गई है। वहीं आयातकों को आयातित दाल का स्टॉक कस्टम क्लियरेंस के 30 दिन से अधिक रखने की अनुमति नहीं है।</div>
<div dir="auto">सरकार द्वारा जारी आदेश के तहत सभी संस्थानों को स्टॉक के बारे में उपभोक्ता मामले विभाग की पोर्टल&nbsp; (<a href="https://fcainfoweb.nic.in/psp" target="_blank" data-saferedirecturl="https://www.google.com/url?q=https://fcainfoweb.nic.in/psp&amp;source=gmail&amp;ust=1695732142629000&amp;usg=AOvVaw1OtqoWCzi-O6FoEVe4Z3Qs" rel="noopener">https://fcainfoweb.nic.in/psp</a><wbr />) पर जानकारी देनी होगी। अगर किसी संस्थान के पास तय सीमा से अधिक का स्टॉक है तो उसे अधिसूचना जारी होने के 30 दिन के भीतर स्टॉक को उसके लिए तय सीमा तक लाना होगा।&nbsp;</div>
<div dir="auto">सरकार ने दो जनवरी को अरहर ओर उड़द की जमाखोरी रोकने और बाजार में उसकी उपलब्धता बढ़ाने के लिए स्टॉक लिमिट लागू की थी। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि उपभोक्ता मामले विभाग दोनों दालों के स्टॉक के बारे में पोर्टल पर दी जा रही जानकारी की निगरानी और समीक्षा कर रहा है।&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">चालू खरीफ साीजन में दालों का रकबा पिछले साल से कम बना हुआ है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 22 सितंबर देश में दालों का क्षेत्रफल 122.57 लाख हैक्टेयर रहा जो पिछले साल इसी अवधि में 128.49 लाख हैक्टेयर रहा था। देश में दालों की कमी को पूरा करने के लिए लगातार आयात किया जा रहा है।&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र सरकार ने अरहर और उड़द दाल के लिए स्टॉक लिमिट की अवधि 31 दिसंबर तक बढ़ाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सामान्य समय से आठ दिन बाद मानसून की वापसी शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-starts-retreating-from-india-8-days-behind-normal-date.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 25 Sep 2023 17:44:05 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-starts-retreating-from-india-8-days-behind-normal-date.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div dir="auto">दक्षिण पश्चिम मानसून की वापसी शुरू हो गई है। इस साल यह वापसी सामान्य समय से आठ दिन बाद हो रही है। सामान्य रूप से 17 सितंबर से दक्षिण पश्चिम मानसून की वापसी होती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा है कि लगातार 13 साल से मानसून की देरी से वापसी हो रही है। खरीफ फसलों के उत्पादन के लिए दक्षिण पश्चिम मानसून अहम होता है। हालांकि रबी सीजन की फसलों की निर्भरता भी सामान्य मानसून पर रहती है क्योंकि मानसून की बारिश के चलते ही जलाशयों में एकत्रित जल से रबी फसलों की सिंचाई होती है और सितंबर तक होने वाली बारिश से रबी फसलों की बुवाई के लिए जरूरी नमी मिलती है।&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">ऐसे में देरी से मानसून की वापसी का फायदा अधिक मिलता है। देश के पश्चिमोत्तर हिस्से से लिए यह मानसू काफी अहम होता है। आईएमडी ने कहा है कि दक्षिण पश्चिम राजस्थान से 25 सितंबर को मानसून की वापसी हुई है जबकि सामान्य स्थिति में यह इन हिस्सों से 17 सितंबर को चला जाता है।&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">मानसून देश में एक जून को केरल के तट से प्रवेश करता है और 8 जुलाई तक देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिय हो जाता है। जबकि इसकी वापसी 17 सितंबर से होती है और अक्तूबर के मध्य तक इसकी पूरे देश से वापसी हो जाती है। इस साल मानसून देरी से आया था। आईएमडी ने सामान्य मानसून का अनुमान जारी किया था। अभी तक कुल बारिश 796.4 मिलीमीटर हुई है जो सामान्य से छह फीसदी कम है। सामान्य रूप से देश मे्ं 843.2 मिलीमीटर बारिश होती है। हालांकि आईएमडी के मुताबिक दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के 94 से 106 फीसदी के बीच की बारिश को सामान्य माना जाता है। जून से सितंबर के चार माह की मानसून अवधि में देश में औसतन 870 मिलीमीटर बारिश होती है।&nbsp;</div>
<div dir="auto">इस साल आईएमडी ने अल नीनो के मानसून पर असर की आशंका भी जताई थी। मानसून देरी से आया लेकिन जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश हुई। लेकिन अगस्त में बहुत कम बारिश हुई और 1901 से अभी तक के आंकड़ों के मुताबिक साल 2023 का अगस्त माह सबसे कम बारिश वाला अगस्त रहा है। इसकी वजह अल नीनो के प्रभाव का माना जा रहा है। अगस्त में बारिश की कमी का खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। हालांकि सितंबर में&nbsp; बारिश होने से कुछ भरपाई हुई है लेकिन इसके बावजूद खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित रहेगा।&nbsp;&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_64644b73d6bb1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सामान्य समय से आठ दिन बाद मानसून की वापसी शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नेफेड ने 2022&amp;#45;23 में 264.51 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया, 15 फीसदी लाभांश की घोषणा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/nafed-earns-a-net-profit-of-rs-264-crore-in-fy-2022-23.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 22 Sep 2023 23:31:06 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/nafed-earns-a-net-profit-of-rs-264-crore-in-fy-2022-23.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित (नेफेड) ने वित्त वर्ष 2022-23 में 264.51 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। इसने इस वर्ष 21,404.58 करोड़ का कारोबार किया जिस पर उसे 437.64 करोड़ का परिचालन लाभ हुआ। शुक्रवार को नेफेड की 66वीं वार्षिक सामान्य निकाय बैठक (एजीएम) में इसके प्रबंधन ने सालाना नतीजे पेश किए। हाल के वर्षों में संघ के असाधारण प्रदर्शन को देखते हुए निदेशक मंडल ने सदस्य संघों/सोसाइटियों को 15% लाभांश देने की भी घोषणा की।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">नेफेड ने 2022-23 में पीएसएस के तहत 17,120.49 करोड़ मूल्य के 30.44 लाख मीट्रिक टन तिलहन एवं दलहन की खरीदी की। इसके अतिरिक्त, नेफेड ने उपभोक्ता मामले विभाग, भारत सरकार की ओर से पीएसएफ के तहत 91.23 करोड़ मूल्य की 0.15 लाख मीट्रिक टन दालें खरीदीं। नेफेड ने 300 करोड़ रुपये के तूर, मसूर और उड़द के कुल 40,383.490 मीट्रिक टन आयातित स्टॉक भी खरीदे। बफर स्टॉक बढ़ाने के लिए इसने महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में 385.73 करोड़ मूल्य के 2.69 लाख मीट्रिक टन प्याज की भी खरीद की।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस मौके पर नेफेड अध्यक्ष डॉ बिजेंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और सहकारिता मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और उपभोक्ता मामले विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का नेफेड को उनके निरंतर समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। कृभको और आईसीए (एशिया पेसिफिक) के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव और इफको और एनसीयूआई के अध्यक्ष दिलीप संघानी तथा नेफेड के प्रबंध निदेशक रितेश चौहान ने भी अपने विचार रखे।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">नेफेड को 10,000 एफपीओ बनाने के लिए भारत सरकार की तरफ से चौथी राष्ट्रीय कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में नामित किया गया था, और उसे वर्ष 2020-21 से 2022-23 तक 28 राज्यों में 1167 एफपीओ स्थापित करने का लक्ष्य आवंटित किया गया था। 31 मार्च 2023 तक नेफेड ने 646 एफपीओ पंजीकृत किए थे, जिससे लगभग 2.06 लाख किसानों को सहायता मिली। संगठन की सदस्यता भी 974 से बढ़कर 994 हो गई है, जिसके परिणामस्वरूप साझा पूंजी 41.02 करोड़ से बढ़कर 43.07 करोड़ हो गई है।&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नेफेड ने 2022-23 में 264.51 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया, 15 फीसदी लाभांश की घोषणा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[थोक और खुदरा विक्रेताओं, बिग चेन रिटेलरों और प्रोसेसरों के लिए हर सप्ताह चीनी का स्टॉक बताना अनिवार्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centre-makes-it-mandatory-to-disclose-weekly-sugar-stocks-by-wholesalers-retailers-big-chain-retailers-and-processors.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 21 Sep 2023 18:41:45 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centre-makes-it-mandatory-to-disclose-weekly-sugar-stocks-by-wholesalers-retailers-big-chain-retailers-and-processors.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, बिग चेन के रिटेलरों और प्रोसेसरों के लिए हर सप्ताह चीनी की स्टॉक बताना अनिवार्य कर दिया है। इस बारे में उपभोक्&zwj;ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की तरफ से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि चीनी बाजार में जमाखोरी से निपटने और बेईमान सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इन कारोबारियों को हर सोमवार को खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल (https://esugar. nic.in) पर अपना चीनी का स्टॉक बताना होगा।<br />मंत्रालय का कहना है कि जमाखोरी और सट्टेबाजी रोककर सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी उपभोक्ताओं के लिए चीनी सस्ती दरों पर उपलब्ध हो। यह उपाय नियामक अधिकारियों को स्टॉक स्तरों की सूक्ष्मता से निगरानी करने और किसी भी संभावित बाजार धोखाधड़ी के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम बनाता है।<br />मंत्रालय के अनुसार, पूरी तरह से डिजिटल यह पहल कमोडिटी जमाखोरों को किसी भी सट्टा लेनदेन से रोकने के साथ चीनी बाजार को सुचारू बनाने में मदद करेगी। इसके अतिरिक्त, यह पहल चीनी स्टॉक पर रियल टाइम में डेटा भी प्रदान करेगी और आवश्यकता पड़ने पर सरकार को नीतिगत निर्णय लेने में मदद करेगी।<br />सरकार प्रासंगिक कानूनों और मासिक घरेलू कोटा मानदंडों का पालन करने के लिए चीनी मिलों और व्यापारियों से भी सहयोग की उम्मीद कर रही है। इसका उल्लंघन करने वाली मिलों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।<br />मंत्रालय के अनुसार, अगस्त 2023 के अंत में 83 लाख टन अक्टूबर 2023 में पेराई शुरू होने की उम्मीद के साथ, &nbsp;भारत के पास घरेलू खपत के लिए पर्याप्त स्टॉक है और त्योहारों के लिए कोई कमी नहीं है। सरकार ने 13 लाख टन की घरेलू बिक्री कोटा की पहली किस्त भी जारी कर दी है, जिसे चीनी मिलें तत्काल बेचना आरंभ कर सकती हैं। बाजार की स्थितियों को देखते हुए शीघ्र ही और कोटा जारी किया जाएगा।&nbsp;<br />इस बीच, खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा है कि सितंबर में अच्छी बारिश को देखते हुए चीनी उत्पादन में सुधार की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सरकार मिलों से चीनी का अतिरिक्त स्टॉक बेचने के लिए कहेगी ताकि घरेलू बाजार में कीमतों पर लगाम लगाई जा सके।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः</strong> <a href="https://www.ruralvoice.in/latest-news/iso-estimate-global-sugar-deficit-at-two-million-tons.html"><strong>आईएसओ के मुताबिक वैश्विक स्तर पर खपत से 21 लाख टन कम रहेगा चीनी उत्पादन</strong></a></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ थोक और खुदरा विक्रेताओं, बिग चेन रिटेलरों और प्रोसेसरों के लिए हर सप्ताह चीनी का स्टॉक बताना अनिवार्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एशियन डवलपमेंट बैंक ने भारत की विकास दर में कमी की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/adb-lowers-india-growth-projection-on-slowing-exports.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 21 Sep 2023 11:49:55 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/adb-lowers-india-growth-projection-on-slowing-exports.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div dir="auto">एशियन डवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने चालू वित्त वर्ष (2023-24) के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में मामूली कमी कर इसके 6.3 फीसदी पर रहने का अनुमान लगाया है। पहले के अनुमान में इसे 6.4 फीसदी पर रखा गया है। वृद्धि दर में कमी की वजह के रूप में निर्यात में गिरावट और मानसून के कमजोर रहने के चलते कृषि उत्पादन में कमी होने की आशंका बताई गई है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">एडीबी की रिपोर्ट एशियन डेवलपमेंट बैंक आउटलुक सितंबर 2023 में कहा गया है कि घरेलू उपभोग में बढ़ोतरी और उपभोक्ताओं के मजबूद भरोसे चलते अगले साल भारत की विकास दर बेहतर रहेगी। निवेश में बढ़ोतरी और सरकार द्वारा पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी का अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा।&nbsp;</div>
<div dir="auto">एडीबी ने कहा है कि निर्यात में आ रही कमी&nbsp; का अर्थव्यवस्था की वृद्धि पर असर पड़ेगा। इसके साथ की बारिश के असंतुलित पैटर्न के चलते कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसे देखते हुए ही विकास दर में मामूली कमी कर इसके 6.3 फीसदी पर रहने का अनुमान जारी किया गया है।&nbsp;</div>
<div dir="auto">एडीबी ने चालू साल के लिए जीडीपी की वृद्धि दर 6.4 फीसदी रहने का अनुमान जारी किया था जबकि अगले साल की आर्थिक वृद्धि दर को 6.7 फीसदी के स्तर पर ही बरकरार रखा गया है। एडीबी के मुताबिक निजी निवेश में बढ़ोतरी और औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि अर्थव्यवस्था को गति देंगे।&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">एडीबी के मुताबिक जियो पालिटिकल स्तर पर तनाव के चलते पैदा हुई अनिश्चितता का असर पड़ रहा है वहीं इसके चलते वैश्विक स्तर पर खाद्य उत्पादों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा मौसम संबंधी बदलावों के चलते खरीफ सीजन (जुलाई-अक्तूबर) और उसके बाद रबी सीजन में भी कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है।&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">सकारात्मक कारकों के रूप में अगले वित्त वर्ष (2024-25) में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र मेंं प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में बढ़ोतरी के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग के चलते सप्लाई चेन के विविधिकरण का फायदा भारत को मिलेगा जिसमें भारत को उत्पादन केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ताजा अनुमान के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.5 फीसदी रहने की बात कही गई है। वहीं आर्गनाइजेशन फॉर इकोनामिक एंड डेवपमेंट (ओईसीडी) की ताजा रिपोर्ट में भारत की जीडीपी की वृद्धि दर 6.3 फीसदी पर रहने का अनुमान लगाया गया है। ओईसीडी का इसके पहले का अनुमान 6 फीसदी वृद्धि दर का था। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने भारत की वृद्धि दर 6.3 फीसदी और एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलीजेंस ने 6.6 फीसदी पर रहने का अनुमान जारी किया है।&nbsp;&nbsp;</div>
<div dir="auto">महंगाई को लेकर एडीबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके 2022 के 6.7 फीसदी से घटकर 2023 में 5.5 फीसदी पर रहने की संभावना है। हालांकि खाद्य उत्पादों की महंगाई के चलते इसके दबाव में रहने की बात भी कही गई है।&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"></div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एशियन डवलपमेंट बैंक ने भारत की विकास दर में कमी की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आईएसओ के मुताबिक वैश्विक स्तर पर  खपत से 21 लाख टन कम रहेगा चीनी उत्पादन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/iso-estimate-global-sugar-deficit-at-two-million-tons.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 20 Sep 2023 13:05:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/iso-estimate-global-sugar-deficit-at-two-million-tons.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आगामी चीनी सीजन (2023-24) के दौरान वैश्विक स्तर पर चीनी की खपत उत्पादन से 21.18 लाख टन अधिक रहने का अनुमान है। इस दौरान दुनिया भर में चीनी का कुल उत्पादन 17.48 करोड़ टन रहेगा जबकि खपत इसके मुकाबले 21.18 लाख टन अधिक होगी। इंटरनेशनल शुगर आर्गनाइजेशन (आईएसओ) द्वारा 2023-24 के लिए जारी अनुमानों में यह जानकारी दी गई है।&nbsp;</p>
<p>आईएसओ ने चीनी सीजन 2023-24 (अक्तूबर, 2023 से सितंबर, 2024) के लिए जारी बैलेंस शीट में कहा है कि 2023-24 में विश्व में चीनी का कुल उत्पादन 17.48 करोड़ टन रहेगा जबकि 2022-23 में उत्पादन&nbsp; 17.70 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया गया है। वहीं 2023-24 में चीनी की खपत 17.69 करोड़ टन रहेगी जो उत्पादन से 21.18 लाख टन अधिक है। आईएसओ के मुताबिक वैश्विक स्तर पर चीनी की आयात मांग 643.73 लाख टन रहेगी जबकि निर्यात के लिए चीनी की उपलब्धता 615.59 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है। चालू साल (2022-23) में आयात मांग 653.80 लाख टन और निर्यात के लिए उपलब्धता 655.19 लाख टन रहने का अनुमान है। वहीं 2023-24 के अंत में 10.22 करोड़ टन चीनी का स्टॉक रहने का अनुमान लगाया गया है जो चालू सीजन के लिए 10.15 करोड़ टन है।&nbsp;</p>
<p>चीनी के कारोबार और उत्पादन संबंधी आंकड़ों पर काम करने वाली संस्था चीनी मंडी के संस्थापक और एग्री मंडी के सीईओ उप्पल शाह ने आईएसओ द्वारा जारी अनुमानों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि चीनी उत्पादन पर सितंबर और अक्तूबर में होने वाली बारिश का असर पड़ेगा। इसके साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते ब्राजील एथेनॉल उत्पादन बढ़ा सकता है। उसका भी असर चीनी की उपलब्धता पर पड़ेगा। इस साल ब्राजील में गन्ने की बेहतर फसल होने की संभावना जताई जा रही है। अगले कुछ महीने भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। हालांकि चीनी को लेकर सही स्थिति जनवरी, 2024 में स्पष्ट हो सकेगी।&nbsp;</p>
<p>चीनी मंडी के मुताबिक भारत में 2023-24 में चीनी उत्पादन 304 लाख टन रहने का अनुमान है जो चालू सीजन के 329 लाख टन के मुकाबले 7.6 फीसदी कम है। बकाया स्टॉक के साथ आगामी साल में चीनी की कुल उपलब्धता 361 लाख टन रहेगी। इसमें चालू सीजन के अंत की बकाया 57 लाख टन चीनी का स्टॉक शामिल है। चीनी मंडी के मुताबिक देश में चीनी खपत 281 लाख टन रहने का अनुमान है। इसके चलते निर्यात के लिए उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। चालू सीजन में देश से 62 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया था, लेकिन आगामी साल में निर्यात की संभावना काफी कम रह गई है।</p>
<p><span style="font-weight: 400;">महाराष्ट्र में भारत का एक तिहाई चीनी उत्पादन होता है। उद्योग सूत्रों के अनुसार 1 अक्तूबर से शुरू होने वाले 2023-24 के सीजन में राज्य में 90 लाख टन चीनी उत्पादन की संभावना है। 2022-23 में उत्पादन 105 लाख टन रहा था। महाराष्ट्र और कर्नाटक में देश का आधे से ज्यादा चीनी उत्पादन होता है। मौसम विभाग के अनुसार इन दोनों राज्यों के चीनी उत्पादन वाले जिलों में मानसून के दौरान बारिश औसत से 50% तक कम रही है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भारत से चीनी निर्यात के लिए महाराष्ट्र में इसका अच्छा उत्पादन होना जरूरी है, लेकिन मुंबई स्थित एक ग्लोबल ट्रेडिंग हाउस के डीलर ने कहा कि मानसून की बारिश को देखते हुए निर्यात की संभावना बहुत कम रह गई है। वर्ष 2021 में महाराष्ट्र में 137 लाख टन रिकॉर्ड चीनी का उत्पादन हुआ था। उस साल भारत से 112 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया था। लेकिन वर्ष 2022-23 में महाराष्ट्र में उत्पादन घटकर 105 लाख टन रह गया तो निर्यात भी 61 लाख टन पर अटक गया।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">माना जा रहा है कि अक्तूबर से शुरू होने वाले नए सीजन में सरकार मिलों द्वारा चीनी निर्यात पर रोक लगा सकती है। ऐसा 7 साल में पहली बार होगा। एक अधिकारी के अनुसार खाद्य महंगाई बड़ी चिंता है। हाल में चीनी की कीमतों में वृद्धि ने इसकी निर्यात की संभावना को खत्म कर दिया है। विश्व बाजार में भारत की गैर मौजूदगी न्यूयॉर्क तथा लंदन मार्केट की बेंचमार्क कीमतों को बढ़ा सकती है। वहां चीनी की कीमतें पहले ही एक दशक से भी ज्यादा के रिकॉर्ड स्तर पर चल रही हैं।&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_6449e11edd667.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आईएसओ के मुताबिक वैश्विक स्तर पर  खपत से 21 लाख टन कम रहेगा चीनी उत्पादन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान ऋण पोर्टल व विंड्स मैनुअल लांच, घर&amp;#45;घर केसीसी अभियान की शुरुआत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/ministry-of-agriculture-and-farmers-welfare-launched-kisan-rin-portal-and-kcc-ghar-ghar-abhiyaan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 20 Sep 2023 07:38:18 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/ministry-of-agriculture-and-farmers-welfare-launched-kisan-rin-portal-and-kcc-ghar-ghar-abhiyaan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कृषि-ऋण व फसल बीमा से संबंधित तीन महत्वपूर्ण पहल विंड्स मैनुअल<strong>, </strong>किसान ऋण पोर्टल, घर-घर केसीसी अभियान की शुरुआत की। इसके लिए आयोजित एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और मंत्रालय में राज्य मंत्री कैलाश चौधरी व शोभा करंदलाजे सहित अन्य मंत्रालय के अधिकारी मौजूद थे। कृषि मंत्रालय द्वारा एक प्रेस रिलीज में कहा गया है कि इन परिवर्तनकारी पहलों का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना<strong>, </strong>डेटा उपयोग को अनुकूल बनाना एवं किसानों के जीवनस्तर में सुधार लाना है।</p>
<p>वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमारे किसान जिस तरह से कोविड19 के दौरान प्रतिकूल परिस्थितियों में भी भी डटे रहे, उसके लिए देश उनका बहुत आभारी है। लॉकडाउन के दौरान भी, यह ग्रामीण भारत व कृषक भारत भारत ही था, जिसने हमें आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि उनमें से किसी को भी कोविड-19 का दबाव महसूस नहीं हुआ, उन्होंने न्यूनतम सुरक्षा उपाय करते हुए देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की, जिसके लिए किसानों की जितनी तारीफ की जाएं, वह कम है। वित्त मंत्री ने कृषि मंत्री को भरोसा दिलाते हुए कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रारंभ, कृषि उद्देश्यों के लिए समर्पित पोर्टल पर बैंकों को दिसंबर-2023 तक सभी आवश्यक डेटा उपलब्ध कराना होगा। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का डिजिटल परिवर्तन किया जा रहा है, यह अधिक गति से होगा। किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए आरआरबी को व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ानी होगी। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि केंद्र सरकार घरेलू खाद्य तेल की खपत को बढ़ावा देने हेतु नेशनल आयल पाम मिशन लागू करने सहित अनेक उपाय कर रही है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी। वित्त मंत्री ने कृषि मंत्री को आश्वस्त किया कि बैंकें 'घर-घर केसीसी अभियान' को सफल बनाने में कृषि मंत्रालय के साथ मिलकर काम करेगी और पूरा सहयोग करेगी। श्रीमती सीतारमन ने सराहना करते हुए कहा कि न केवल डेटा प्राप्त करने के लिए, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी कि भारत में कृषि क्षेत्र दूरदर्शी, प्रौद्योगिकी-सक्षम, अधिक अनुकूल व किसानों के लिए सुलभ हो, प्रौद्योगिकी के माध्यम से किसानों की अधिक भलाई हेतु कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा उत्कृष्ट कार्य किया गया है। उन्होंने चावल व गेहूं की फसल के उत्पादन के लिए वास्तविक समय अनुमान की सराहना की व इसे दलहन एवं तिलहन की फसलों तक बढ़ाने का आह्वान भी किया, जिससे अर्थव्यवस्था को मदद मिलेगी।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज पूरा देश विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार द्वारा विकास कार्यों के लिए भरपूर पैसा दिया जा रहा है। इसका उदाहरण है कृषि मंत्रालय का बजट, जो वर्ष 2013-14 में लगभग 23 हजार करोड़ रु. था, वह आज 1.25 लाख करोड़ रुपए है। यह प्रधानमंत्री व वित्त मंत्री के नेतृत्व की कार्यकुशलता का ही परिणाम है। श्री तोमर ने कहा कि कृषि प्रधान हमारे देश में कृषि अर्थव्यवस्था छोटी बेशक हो<strong>, </strong>लेकिन वह देश के लिए बैकबोन की तरह काम करती है। विपरीत परिस्थितियों में भी कृषि की अर्थव्यवस्था ने अपनी उपयोगिता को साबित किया है। कोविड के कालखंड में हम सबसे इसे देखा भी है। कृषि क्षेत्र में जिस गति से काम होना चाहिए था<strong>, </strong>पूर्व की सरकारों में उसका अभाव रहा। यही कारण है कि मौसम की मार हो या अन्य प्रकोप<strong>, </strong>किसान घाटे की खेती के लिए बाध्य होता रहा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 2014 में कार्यभार संभालने के बाद कई ऐसे नवाचार किए<strong>, </strong>जिनसे किसानों के घरों में खुशहाली आई है और आज उनके मन में संतोष है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए पीएम किसान सम्मान निधि योजना लागू की गई। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच दिया गया<strong>, </strong>जो किसानों को काफी मदद कर रहा है, जिसके अंतर्गत किसानों ने जहां 29 हजार करोड़ रु. का प्रीमियम दिया, वहीं उन्हें नुकसान की भरपाई के रूप में 1.41 लाख करोड़ रु. दिए जा चुके हैं। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत 20 लाख करोड़ रु. तक का ऋण मिल सकता है। उन्होंने वित्त मंत्री व बैंकर्स का आभार मानते हुए कहा कि कोविडकाल में भी बैंकर्स ने मिलकर 2 करोड़ नए किसानों को केसीसी से जोड़ा। घर-घर केसीसी अभियान फिर से शुरू होने पर एक बड़ा काम इस क्षेत्र में होगा। किसानों को 3 लाख रु. तक अल्पकालिक ऋण मिल सकेगा, जो खेती-किसानी के लिए बहुत मददगार साबित होगा। इसी तरह आज लांच किया गया किसान ऋण पोर्टल पारदर्शी व आसान है, वहीं विंड्स मैनुअल से खेती हेतु मौसम की सटीक जानकारी मिल सकेगी। कृषि कार्य में तकनीक का अच्छे से अच्छा उपयोग करने के लिए कृषि मंत्रालय तेजी से काम कर रहा है</p>
<p>इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव श्री मनोज अहूजा<strong>, </strong>वित्त मंत्रालय के सचिव (वित्तीय सेवाएं) श्री विवेक जोशी<strong>,</strong> भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा. हिमांशु पाठक, नाबार्ड के चेयरमैन श्री शाजी के.वी.<strong>, </strong>कृषि मंत्रालय के ओएसडी (क्रेडिट एवं पीएमएफबीवाई) श्री अजीत कुमार साहू, संयुक्त सचिव व पीएमएफबीवाई के सीईओ श्री रितेश चौहान, बैंकर्स आदि मौजूद थे।</p>
<p><strong>&nbsp;</strong><strong>&nbsp;</strong></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान ऋण पोर्टल व विंड्स मैनुअल लांच, घर-घर केसीसी अभियान की शुरुआत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने &amp;apos;भारत&amp;apos; में विकास को गति देने के लिए  &amp;quot;स्वदेश बैंकिंग&amp;quot; लांच की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/au-small-finance-bank-unveils-swadesh-banking-to-enhance-financial-inclusion-and-emphasize-rural-focus.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 18 Sep 2023 18:39:40 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/au-small-finance-bank-unveils-swadesh-banking-to-enhance-financial-inclusion-and-emphasize-rural-focus.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रमुख एसएफबी, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU SFB) ने ग्रामीण भारत में बैंकिंग में बदलाव लाने के लिए &ldquo;स्वदेश बैंकिंग&rdquo; की शुरुआत की है। &ldquo;स्वदेश बैंकिंग&rdquo; वर्टिकल को एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (एयू एसएफबी)&nbsp; हर व्यक्ति और व्यवसाय तक उपयोगी और किफायती फाइनेंशियल प्रोडक्ट और सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की साथ ही किसानों, स्व-रोजगार कर्मियों व भारत में सूक्ष्म उद्यम के लिए 360-डिग्री व्यापक समाधान के साथ ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों की गहरी समझ का लाभ उठाने के लिए डिजाइन किया गया है।<br /><br />वित्तीय और डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने की अटूट प्रतिबद्धता के साथ, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक वंचित समुदायों को सशक्त बनाने और ग्रामीण और उन क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है, जहां अब तक वित्तीय सेवाओं की पहुंच ना के बराबर है। इसलिए, 'स्वदेश बैंकिंग' की शुरुआत के साथ, एयू एसएफबी अपनी ग्रामीण शाखाओं, बैंकिंग आउटलेट्स, बैंकिंग संवाददाताओं, वित्तीय और डिजिटल समावेशन इकाई और लघु व सीमांत किसान (SMF) लेंडिंग यूनिट (लोन देने वाली इकाइयों) को एक ही छत और नेतृत्व के तहत व्यवस्थित करेगा, ताकि बैंक के ग्राहकों को लाभ मिल सके।</p>
<p><br />स्वदेश बैंकिंग ग्रामीण समुदायों और व्यवसायों की खास जरूरतों और चुनौतियों को पूरा करने के लिए उपयोगी बैंकिंग उत्पादों, सेवाओं और संचालन को बढ़ावा देगी। इसमें स्थानीय व्यापारियों और दुकान के मालिकों के लिए डिजिटल समाधानों का विस्तार करने के साथ ही वित्तीय साक्षरता और डिजिटल समावेशन को आगे बढ़ाना, स्थानीय उद्योगों के लिए विशेष उत्पाद और स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देना शामिल होगा। <br /><br />बैंक द्वारा जारी एक प्रेस वक्तव्य में कहा गया है कि डिजिटल भारत की सोच को आगे बढ़ाते हुए, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर देने के साथ यूजर फ्रेंडली डिजिटल प्लेटफार्म में पर्याप्त निवेश किया है। इसके मोबाइल बैंकिंग ऐप, इंटरनेट पोर्टल और इनोवेटिव वीडियो बैंकिंग सेवाओं ने न सिर्फ बैंकिंग परिचालन और लेनदेन की सुविधा और पहुंच को बढ़ाया है, बल्कि व्यक्तिगत संपर्क भी बनाए रखा है। सिर्फ पिछले साल में, एयू एसएफबी ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों में वीडियो बैंकिंग के माध्यम से 66,000 से अधिक खाता खोलने की सुविधा प्रदान की, जिसमें 92,000 से अधिक वीडियो बैंकिंग कॉल अपने मूल्यवान ग्राहकों को प्रदान करने के लिए की गईं।<br /><br />अब तक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक एक परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में उभरा है, जिसने जमीनी स्तर पर सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा दिया है। बैंक ने 94 फीसदी प्राथमिकता वाले क्षेत्र को लोन देने, 25 लाख रुपये तक के टिकट साइज के 62 फीसदी लोन और बैंक रहित ग्रामीण क्षेत्रों में 31 फीसदी टचप्वॉइंट के साथ रेगुलेटरी (नियामक) जरूरतों को पूरा करते हुए शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक न सिर्फ केवल रेगुलेटरी आदेशों को पूरा कर रहा है, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में वास्तविक वित्तीय समावेशन (हर व्यक्ति और व्यवसाय तक उपयोगी और किफायती फाइनेंशियल प्रोडक्ट और सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना) का भी नेतृत्व कर रहा है।<br /><br />राजस्थान में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के विस्तार में सुल्तान सिंह पलसानिया ने स्वदेश बैंकिंग के राष्ट्रीय प्रमुख की भूमिका निभाई है। इसी क्षमता की वजह से उन्हें बैंक के बड़े दायरे में मौजूद वित्तीय सेवाओं के माध्यम से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रभाव डालने का काम सौंपा गया है। इसके अलावा, स्वदेश बैंकिंग, सरकारी व्यवसाय, थोक जमा और सहकारी बैंकिंग के एकीकरण का उद्देश्य बैंक के भीतर अधिक तालमेल को बढ़ावा देना है, जो शूरवीर सिंह शेखावत के नेतृत्व में किया जा रहा है। इस संशोधित संरचना में शेखावत लगातार बैंक के कार्यकारी निदेशक उत्तम टिबरेवाल को रिपोर्ट करना जारी रखेंगे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x_65084afe2cff2.jpg" alt="" /></p>
<p><br /><br />इस डेवलपमेंट पर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के फाउंडर और एमडी व सीईओ संजय अग्रवाल ने कहा कि &ldquo;ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को समझने में अपने 28 साल के अनुभव के आधार पर, हमने अपनी कई तरह की पहल, कम्&zwj;युनिटी इंटरेक्शन और वर्कशॉप के जरिए ग्रामीण परिवेश की गहरी समझ का प्रदर्शन किया है। इस प्रकार हमने साइकिल्&zwj;स&nbsp;(चक्रों) के माध्यम से डिलिवर करते हुए एक वित्तीय समावेशन मॉडल स्थापित किया है जो स्केलेबल यानी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने वाला बिजनेस और सस्टेनेबल यानी टिकाऊ है। हमने अपने लंबे चौड़े विस्तार के उपयोग के जरिए और लोकल बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए बड़े इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) के साथ सहयोग करके ग्रामीण ग्राहकों पर फोकस &nbsp;बढ़ाने के लिए स्वदेश बैंकिंग को सावधानीपूर्वक तैयार किया है। जो आखिरकार हमारे देश के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को ऊपर उठाता है।&ldquo;<br /><br />उन्होंने कहा कि &ldquo;स्वदेश बैंकिंग के साथ, हमारी सोच साफ है, यानी ग्रामीण भारत के हर कोने को प्रगति और संपन्&zwj;नता बढ़ाने वाले वित्तीय समाधानों के साथ सशक्त बनाना। यह पहल सिर्फ बैंकिंग से कहीं अधिक है। यह अवसरों को बढ़ाने, आत्मनिर्भरता विकसित करने और हर गांव और कस्बे में उज्जवल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करने की प्रतिबद्धता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने 'भारत' में विकास को गति देने के लिए  "स्वदेश बैंकिंग" लांच की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जी&amp;#45;20 सफल बनाने के लिए किसान हितों की अनदेखीः संयुक्त किसान मोर्चा (एनपी)]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indian-farmers-interest-has-been-surrendered-to-the-us-to-ensure-g20-success.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 18 Sep 2023 13:36:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indian-farmers-interest-has-been-surrendered-to-the-us-to-ensure-g20-success.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">संयुक्त किसान मोर्चा-एनपी (गैर राजनैतिक) का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय बातचीत में दोनों देश विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में अपने विवादों को खत्म करने पर राजी हुए। इस सहमति के अनुसार भारत, अमेरिका से आयात किए जाने वाले कई प्रोडक्ट- जिनमें चना, मसूर, बादाम, अखरोट, सेब, फ्रोजन चिकन, फ्रोजन टर्की, फ्रोजन डक, ताजी ब्लूबेरी और क्रैनबेरी, फ्रोजन ब्लूबेरी और क्रैनबेरी, सूखी ब्लूबेरी और क्रैनबेरी तथा प्रोसेस्ड ब्लूबेरी और क्रैनबेरी पर आयात शुल्क कम करेगा। मोर्चा का कहना है कि उसने 18 अगस्त को इस सिलसिले में प्रधानमंत्री और वाणिज्य मंत्री को एक पत्र भेजा था, जिसमें कहा गया है कि आयात शुल्क घटाने के बजाए इसे बढ़ाया जाए। लेकिन जी20 सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सरकार ने किसानों के हितों को दरकिनार कर दिया है। मोर्चा द्वारा जारी एक बयान में यह बातें कही गई हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अगस्त 2017 में अमेरिकी सरकार ने भारत से आयात पर टैक्स लगाना शुरू किया था। उससे पहले 4 मार्च 2017 को उसने भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ़ प्रेफरेंस (जीएसपी) से हटा दिया। इसमें शामिल होने के कारण भारत से अमेरिका को 3000 से अधिक वस्तुओं का निर्यात शुल्क मुक्त होता था। अमेरिका के उसे कदम के जवाब में भारत ने वहां से आयात होने वाले कई कृषि जिंसों पर आयात शुल्क बढ़ा दिया। इस साल 15 जून को भारत ने घोषणा की, कि वह अमेरिका से आयात होने वाले सेब, मसूर, बादाम और अखरोट समेत 26 प्रोडक्ट पर 20% टैरिफ लगाएगा। अब भारत सरकार इस टैरिफ को कम करने जा रही है जबकि इसके बदले भारत को कोई ट्रेड बेनिफिट नहीं मिल रहा है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सरकार ने 19 जुलाई 2023 को अमेरिका से आयात होने वाले सेब पर शुल्क पहले ही 70% से घटाकर 50% कर दिया। अमेरिका में किसानों को अधिक सब्सिडी मिलने के कारण वहां का सेब तुलनात्मक रूप से सस्ता पड़ता है। आंकड़े बताते हैं कि सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने के बाद अमेरिका से इसका आयात कम हो गया था और इसका फायदा भारतीय किसानों को मिला। वर्ष 2018 में जनवरी से 15 जून तक अमेरिका ने 78 लाख बॉक्स (एक बॉक्स 40 पाउंड का) सेब भारत भेजे थे। इस पर आयात शुल्क 70% किए जाने के बाद 2019 में जनवरी से 15 जून तक 26 लाख बॉक्स सेब का आयात हुआ जो एक साल पहले की तुलना में 66.8 प्रतिशत कम है। इससे साफ पता चलता है कि जुलाई 2023 में आयात शुल्क घटाकर 50% करने का भारतीय सेब उत्पादकों पर कितना गंभीर असर पड़ेगा।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अमेरिका बादाम का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। दुनिया का 70% बादाम उत्पादन और 80% निर्यात अकेले अमेरिका करता है। वर्ष 2017 में अमेरिका से भारत को सबसे अधिक कृषि उपज निर्यात बादाम का ही हुआ था। उस वर्ष 65.7 करोड़ डॉलर का बादाम अमेरिका ने भारत को निर्यात किया। दूसरी ओर भारत अमेरिका का सबसे बड़ा बादाम आयातक है। हाल के वर्षों में यह अखरोट का भी सबसे बड़ा उपभोक्ता बनकर उभरा है। आयात शुल्क बढ़ाए जाने से पहले 1 अगस्त 2016 से 31 मई 2017 तक अमेरिका के कैलिफोर्निया से भारत को 20.18 करोड़ पाउंड बादाम निर्यात किया गया जो एक साल पहले की तुलना में 12% अधिक था। यह आंकड़े कैलिफोर्निया अलमंड बोर्ड के हैं। टैरिफ बढ़ाने के बाद इसमें लगभग 70% कमी आ गई।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि अगर भारत सेब, बादाम और अखरोट का आयात बंद कर दे तो जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के किसानों को बहुत फायदा होगा। मोर्चा के अनुसार अमेरिका से आयत को नियंत्रित कर हम किसानों की आमदनी बढ़ा सकते हैं। अभी इन पर्वतीय राज्यों के किसान आमदनी के लिए लगभग पूरी तरह पर्यटन पर निर्भर हैं।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_64fd667227714.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जी-20 सफल बनाने के लिए किसान हितों की अनदेखीः संयुक्त किसान मोर्चा (एनपी) ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चाय कंपनियों के निर्यात में 8% गिरावट के आसारः क्रिसिल रिपोर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/tea-companies-to-witness-8-pc-dip-in-revenue-on-decline-in-exports-says-crisil-report.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 17 Sep 2023 10:51:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/tea-companies-to-witness-8-pc-dip-in-revenue-on-decline-in-exports-says-crisil-report.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">भारत के चाय उद्योग के कारोबार में मौजूदा वित्त वर्ष में पिछले साल की तुलना में 8% की गिरावट आने के आसार हैं। इसकी मुख्य वजह श्रीलंका से सप्लाई बढ़ने के कारण भारत से चाय का निर्यात कम होना है। क्रिसिल रेटिंग्स ने अपनी नई रिपोर्ट में यह बात कही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि चाय उद्योग के ऑपरेटिंग प्रॉफिट में लगातार दूसरे साल गिरावट की आशंका है। यह एक प्रतिशत घटकर पांच प्रतिशत रह जाने की संभावना है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पिछले साल चाय उद्योग के मुनाफे में 1.5% की गिरावट आई थी। इसका प्रमुख कारण मजदूरों की मजदूरी में वृद्धि था। वित्त वर्ष 2022-23 में मजदूरी में 15% की वृद्धि की गई थी। चाय उद्योग की कुल इनपुट लागत में 20% हिस्सा मजदूरी का होता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि लगभग शून्य पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) और अन्य कारणों से इंडस्ट्री का क्रेडिट प्रोफाइल स्थिर बना रहेगा। निर्यात में गिरावट के चलते इंडस्ट्री के रेवेन्यू में सालाना आधार पर 8% की कमी आएगी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भारतीय चाय उद्योग की कुल बिक्री में 82% हिस्सा घरेलू बाजार का होता है। इसके मौजूदा वित्त वर्ष में 110 करोड़ किलो पर स्थिर रहने की संभावना है। मात्रा के लिहाज से 18% हिस्सा निर्यात का और मूल्य के लिहाज से 30% हिस्सा निर्यात का होता है। इसमें 12% गिरावट आने की संभावना है। यह 20 करोड़ किलो तक रह जाएगा। पिछले साल मात्रा के लिहाज से निर्यात में 14% की वृद्धि हुई थी। क्रिसिल रेटिंग्स के डायरेक्टर नितिन कंसल के अनुसार पिछले साल श्रीलंका में उत्पादन कम होने के कारण भारत से निर्यात में वृद्धि हुई थी। श्रीलंका विश्व बाजार में चाय का बड़ा निर्यातक देश है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">ग्लोबल चाय निर्यात में भारत चौथे स्थान पर है। चीन, केन्या और श्रीलंका तीन सबसे बड़े निर्यातक हैं। कुल निर्यात में भारत का हिस्सा 11% है। इससे भारतीय चाय कंपनियों का बिजनेस प्रभावित होने के आसार हैं। घरेलू चाय उत्पादन 13.5 करोड़ किलो पर स्थिर रहने की संभावना है। ऑपरेटिंग प्रॉफिट में गिरावट आने से मौजूदा वित्त वर्ष में कंपनियां को मिलने वाले कैश में 40 प्रतिशत कमी आने की संभावना रिपोर्ट में जताई गई है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">क्रिसिल रेटिंग्स की एसोसिएट डायरेक्टर अर्घ चंदा ने रिपोर्ट में कहा है, पूंजीगत खर्च कम होने और कामकाजी पूंजी का चक्र स्थिर रहने से कंपनियों का कर्ज भी नियंत्रण में रहेगा। इसलिए चाय कंपनियों की पूंजी का ढांचा भी स्थिर रहने की संभावना है। बैलेंस शीट मजबूत रहने से कंपनियों का क्रेडिट प्रोफाइल बेहतर रहने की संभावना है। इसलिए कमजोर ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस के बावजूद इंटरेस्ट कवरेज इस वर्ष 3 गुना से अधिक रहेगा।</span></p>
<p style="text-align: justify;"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चाय कंपनियों के निर्यात में 8% गिरावट के आसारः क्रिसिल रिपोर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि संबंधी एकीकृत डाटा के लिए पोर्टल लॉन्च, एक ही जगह मिलेंगी सभी विश्वसनीय सूचनाएं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/unified-portal-launched-for-agri-statistics-to-provide-credible-data-on-agri-sector.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 16 Sep 2023 12:04:22 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/unified-portal-launched-for-agri-statistics-to-provide-credible-data-on-agri-sector.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नीति&nbsp;आयोग&nbsp;के&nbsp;सदस्य&nbsp;प्रो. रमेश चंद ने कृषि&nbsp;सांख्यिकी&nbsp;आंकड़ों&nbsp;से&nbsp;संबंधित&nbsp;एकीकृत&nbsp;पोर्टल <a href="http://www.upag.gov.in">www.upag.gov.in</a><span> का</span> शुभारंभ किया। यह देश के कृषि क्षेत्र के सामने आने वाली जटिल प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक अभूतपूर्व पहल है। यह प्लेटफॉर्म कृषि क्षेत्र में डाटा प्रबंधन को व्यस्थित और बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह अधिक कुशल एवं उत्तरदायी कृषि आधारित नीतिगत ढांचा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p>प्रो. रमेश चंद ने इस तरह की पहल के लिए टीम की सराहना करते हुए इसे कृषि डाटा प्रबंधन &nbsp;क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल लंबे समय से लंबित थी। इसमें एक "छोटे पौधे" से "विशालकाय वृक्ष" बनने की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने लोगों से कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तनों के बारे में अपनी मानसिकता में बदलाव लाने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह पोर्टल वास्तविक समय, <span>विश्वसनीय एवं मानकीकृत जानकारी के साथ हितधारकों को समर्थ बनाता है जिससे अधिक प्रतिक्रियाशील और कुशल कृषि नीतियों का मार्ग प्रशस्त होता है। डाटा की निष्पक्षता जितनी अधिक होगी</span>, <span>नीति निर्माण में गलत फैसलों की गुंजाइश उतनी ही कम होगी।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x_65054baa61c53.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने कहा कि शोध से पता चला है कि डाटा में 1 डॉलर के निवेश से 32 डॉलर का प्रभाव उत्पन्न होता है। उन्होंने सलाह दी कि पोर्टल को डाटा विश्वसनीयता सुनिश्चित करनी चाहिए। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव मनोज आहूजा ने कहा कि कृषि सांख्यिकी आंकड़ों से संबंधित एकीकृत पोर्टल के इस्तेमाल से खोज लागत तथा परेशानी कम होगी। साथ ही उपयोगकर्ताओं को विश्वसनीय, <span>विस्तृत एवं वस्तुनिष्ठ डेटा तक पहुंच सुनिश्चित होगी और उन्हें लाभ होगा।</span></p>
<p>एकीकृत पोर्टल से हल होने वाली प्रमुख चुनौतियां:</p>
<ol>
<li>मानकीकृत डाटा का अभाव: वर्तमान में कृषि डाटा अनेक स्रोतों में बिखरा हुआ है और अक्सर विभिन्न प्रारूपों एवं इकाइयों में पेश किया जाता है। एकीकृत पोर्टल का लक्ष्य इस डाटा को एक मानकीकृत प्रारूप में समेकित करना है, <span>जिससे इसे उपयोगकर्ताओं के लिए आसानी से सुलभ और समझने योग्य बनया जा सकता है।</span></li>
<li>सत्यापित डाटा की कमी: सटीक नीतिगत निर्णयों के लिए विश्वसनीय डाटा बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह पोर्टल यह सुनिश्चित करता है कि एगमार्कनेट जैसे स्रोतों से डाटा की समय-समय पर जांच और अद्यतन होता रहे जिससे नीति निर्माताओं को कृषि कीमतों पर सटीक जानकारी मिलती रहती है।</li>
<li>बिखरा हुआ डाटा: किसी भी फसल के संबंध में व्यापक दृष्टिकोण बनाने के उद्देश्य से उत्पादन, <span>व्यापार और कीमतों सहित कई बिंदुओं पर विचार करने की आवश्यकता होती है। कृषि सांख्यिकी आंकड़ों से संबंधित एकीकृत पोर्टल विभिन्न स्रोतों से डाटा एक साथ लेकर आता है</span>, <span>जो कृषि से जुड़ी हुई वस्तुओं का समग्र मूल्यांकन प्रदान करता है।</span></li>
</ol>
<p>इस पोर्टल का उद्देश्य कृषि क्षेत्र की विविधता का उपयोग करना और विकास के लिए उत्प्रेरक के रूप में डाटा का इस्तेमाल करना है। इसका उद्देश्य कृषि संबंधी उत्पादों पर वास्तविक समय, <span>मानकीकृत और सत्यापित डाटा उपलब्ध कराना तथा नीति निर्माताओं</span>, <span>शोधकर्ताओं एवं हितधारकों के लिए डेटा-संचालित निर्णय लेने की सुविधा प्रदान करना है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_65054ba25443e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि संबंधी एकीकृत डाटा के लिए पोर्टल लॉन्च, एक ही जगह मिलेंगी सभी विश्वसनीय सूचनाएं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x500_65054ba25443e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं स्टॉक लिमिट में 1000 टन की कटौती, अब 2000 टन तक ही भंडारण कर पाएंगे कारोबारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-further-cuts-stock-limit-on-wheat-amid-uptick-in-prices.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 14 Sep 2023 19:23:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-further-cuts-stock-limit-on-wheat-amid-uptick-in-prices.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कीमतों को नियंत्रित करने की तमाम कोशिशों के बावजूद गेहूं के लगातार बढ़ते दाम से परेशान केंद्र सरकार ने गुरुवार को स्टॉक लिमिट में कटौती करने का एक और कदम उठाने का ऐलान किया है। सरकार ने गेहूं व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और बड़े रिटेल चेन के लिए गेहूं के स्टॉक लिमिट को तत्काल प्रभाव से 3,000 टन से घटाकर 2,000 टन कर दिया। इससे पहले 12 जून को सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाने और उससे पहले पिछले साल मई में गेहूं का निर्यात रोकने का फैसला किया था ताकि घरेलू बाजार में कीमतें नियंत्रण में रहे।<br />केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा, "गेहूं की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए हमने भंडारण सीमा की समीक्षा की। हमने पाया कि गेहूं की कीमतों में तेजी है। इसे देखते हुए आज से व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और बड़े रिटेल चेन के लिए भंडारण सीमा को घटाकर 2000 टन कर दिया गया है।" पिछले एक महीने में कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स पर गेहूं का दाम 4 फीसदी बढ़कर 2,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।'<br />चोपड़ा ने संवाददाताओं से कहा, "हालांकि देश में गेहूं की पर्याप्त उपलब्धता है। मुझे लगता है कि कुछ तत्व हैं जो कुछ गेहूं की कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।" गेहूं पर स्टॉक लिमिट 31 मार्च, 2024 तक के लिए लगाया गया है। खुदरा बाजार में गेहूं की अखिल भारतीय औसत कीमत गुरुवार को महीने के आधार पर 1.3 फीसदी और सालाना आधार पर 10.4 फीसदी बढ़कर लगभग 30 रुपये प्रति किलो हो गई। थोक बाजार में अखिल भारतीय स्तर पर गेहूं की औसत कीमतें 2,668 रुपये प्रति किलो रही जो महीने-दर-महीने 0.2 फीसदी और सालाना आधार पर 4.2 फीसदी की वृद्धि दर्शाती है।<br />चोपड़ा ने बताया कि फिलहाल केंद्रीय पूल में 2.55 करोड़ टन गेहूं मौजूद है, जबकि आवश्यकता 2.02 करोड़ टन की है। बाजार हस्तक्षेप के लिए बफर स्टॉक के अतिरिक्त 30 लाख टन अधिशेष गेहूं उपलब्ध है और अन्य 57 लाख टन पहले ही बाजार हस्तक्षेप के लिए रखा जा चुका है।<br />खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर टिप्पणी करते हुए चोपड़ा ने कहा कि त्योहारी सीजन के दौरान आने वाले महीनों में चीनी और खाद्य तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी होने की उम्मीद नहीं है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं स्टॉक लिमिट में 1000 टन की कटौती, अब 2000 टन तक ही भंडारण कर पाएंगे कारोबारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रबर किसानों ने केंद्र की कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ जंतर&amp;#45;मंतर पर जताया विरोध]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rubber-growers-from-south-india-protest-in-delhi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 14 Sep 2023 18:10:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rubber-growers-from-south-india-protest-in-delhi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) से जुड़े केरल, त्रिपुरा, तमिलनाडु और कर्नाटक के सैकड़ों रबर किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया और संसद तक मार्च किया। धरने के दौरान किसान नेताओं ने शिकायत की कि सरकार की नीतियों की वजह से रबर किसानों के सामने अभूतपूर्व संकट पैदा हो गया है। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकारों की कॉरपोरेट समर्थक नीतियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।</p>
<p>धरने को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि आसियान देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते को विशेष महत्व दिया गया जिसे भाजपा सरकार ने शुरू किया था और अंततः 2009 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने उस समझौते पर हस्ताक्षर किए। मुक्त व्यापार समझौते की वजह से थाईलैंड, मलेशिया, वियतनाम और अन्य देशों से रबर के शुल्क-मुक्त आयात में जबरदस्त वृद्धि हुई है।</p>
<p>ऑल इंडिया किसान सभा ने एक बयान में कहा कि प्राकृतिक रबर का देश में आयात 2005-06 में 45 टन होता था जो बढ़कर 2022-23 में 5.28 लाख मीट्रिक टन हो गया है। केरल के किसान नेताओं ने याद दिलाया कि कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने वादा किया था कि आसियान समझौते से भारत के सबसे बड़े रबर उत्पादक राज्य केरल के रबर किसानों को भारी लाभ होगा। मगर इससे एमआरएफ जैसी दिग्गज टायर कंपनियों को लाभ हुआ। विरोध प्रदर्शन में इस बात पर आम सहमति थी कि रबर किसानों और राष्ट्रीय हित को बचाने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों को खत्म कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने रबर को कृषि फसल बनाने की भी मांग की।</p>
<p>किसान नेताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि रबर के लिए कम से कम 300 रुपये प्रति किलोग्राम का उचित लाभकारी मूल्य (एफआरपी) सरकार द्वारा तुरंत घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई कॉरपोरेट समर्थक नीतियों से उत्पादन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है लेकिन इसकी तुलना में प्राकृतिक रबर की कीमत नहीं मिल रही है जिससे किसानों के लिए जिंदा रहना असंभव हो गया है।</p>
<p>एआईकेएस ने अपने बयान में कहा, जले पर नमक छिड़कते हुए मोदी सरकार रबर बोर्ड को खत्म करने और पूरी तरह से इसे कॉरपोरेट के हवाले करने मार्ग प्रशस्त करने की प्रक्रिया में है।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि रबर (संवर्द्धन और विकास) विधेयक, 2023 भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की कॉरपोरेट समर्थक नीति का एक स्पष्ट उदाहरण है। वक्ताओं ने कहा कि बहुराष्ट्रीय टायर कंपनियों के नापाक मंसूबे रबर किसानों की आजीविका को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बहुराष्ट्रीय टायर कंपनियों का भयावह खेल तब उजागर हुआ जब भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने 2022 में बाजार में हेराफेरी के लिए उन पर लगभग 1,788 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। एक तरफ रबर किसान और मजदूर आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ एमआरएफ, अपोलो, जेके, सीएट और बिड़ला जैसी अग्रणी बहुराष्ट्रीय कंपनियां ने भारी भरकम संपत्ति अर्जित की है। यह संपत्ति रबर किसानों के जीवन की कीमत पर अर्जित की गई है। किसान नेताओं ने दोहराया कि सीसीआई जुर्माने की राशि रबर किसानों को मिलनी चाहिए। एआईकेएस ने पहले भी इसकी मांग की थी।</p>
<p>एआईकेएस के अध्यक्ष अशोक धावले, उपाध्यक्ष ईपी जयराजन, हन्नान मोल्ला, महासचिव वीजू कृष्णन सहित अन्य नेताओं ने रबर किसानों के धरने को संबोधित किया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रबर किसानों ने केंद्र की कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ जंतर-मंतर पर जताया विरोध ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[थोक महंगाई पांच महीने के उच्च स्तर पर, अगस्त में &amp;#45;0.52 फीसदी पर पहुंची, खाद्य महंगाई 10 फीसदी के ऊपर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/wholesale-inflation-increased-in-august-food-inflation-above-10-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 14 Sep 2023 14:08:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/wholesale-inflation-increased-in-august-food-inflation-above-10-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अगस्त में खुदरा महंगाई दर में गिरावट के बावजूद थोक महंगाई दर में तेज वृद्धि का सिलसिला जारी है। हालांकि, थोक महंगाई अभी भी माइनस में ही बनी हुई है लेकिन प्लस की ओर यह तेज गति से बढ़ रही है। ईंधन एवं ऊर्जा और विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की वजह से अगस्त 2023 में थोक महंगाई की दर बढ़कर -0.52 फीसदी पर पहुंच गई जो जुलाई में -1.36 फीसदी थी। इससे पहले जून में थोक महंगाई की दर इस साल के सबसे निचले स्तर -4.18 फीसदी पर पहुंच गई थी। अप्रैल 2023 के बाद से ही यह शून्य से नीचे चल रही है।</p>
<p>केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी थोक महंगाई के आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा महंगाई की तरह थोक महंगाई में भी खाद्य महंगाई की दर 10 फीसदी के करीब बनी हुई है। अगस्त में गिरावट के बावजूद खुदरा में खाद्य महंगाई 9.94 फीसदी रही है, जबकि थोक में खाद्य महंगाई 10.60 फीसदी रही है। हालांकि, टमाटर एवं अन्य सब्जियों की कीमतों में कमी की वजह से जुलाई के मुकाबले इसमें 3.65 फीसदी की तेज गिरावट आई है लेकिन यह अभी भी दोहरे अंक में बनी हुई है। टमाटर की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी की वजह से जून के 1.32 फीसदी से बढ़कर जुलाई में थोक महंगाई 14.25 फीसदी पर पहुंच गई थी। अगस्त 2022 में थोक में खाद्य महंगाई की दर 12.55 फीसदी रही थी।</p>
<p>अनाजों की थोक महंगाई में भी अगस्त में गिरावट दर्ज की गई है। जुलाई के 8.31 फीसदी के मुकाबले अगस्त में यह घटकर 7.25 फीसदी पर आ गई है। अगस्त 2022 में यह 11.77 फीसदी थी। हालांकि, अगस्त में चावल की थोक महंगाई दर जुलाई के 9.03 फीसदी बढ़कर 9.18 फीसदी और दालों की 9.59 फीसदी की तुलना में 10.45 फीसदी पर पहुंच गई है। गेहूं की महंगाई दर 8.01 फीसदी से घटकर 5.81 फीसदी पर आ गई है। सब्जियों की थोक महंगाई जुलाई के 62.12 फीसदी के मुकाबले घटी लेकिन यह अब भी 48.39 फीसदी के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। प्याज की थोक महंगाई दर 7.13 फीसदी से साढ़े तीन गुना बढ़कर 31.42 फीसदी पर पहुंच गई है।</p>
<p>गैर-खाद्य पदार्थों में विनिर्मित वस्तुओं की थोक महंगाई में हिस्सेदारी 64.23 फीसदी और ईंधन एवं ऊर्जा की 13.15 फीसदी है। विनिर्मित वस्तुओं की महंगाई में 0.14 फीसदी की और ईंधन एवं ऊर्जा में 2.96 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।</p>
<p>&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64d9ef686de46.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ थोक महंगाई पांच महीने के उच्च स्तर पर, अगस्त में -0.52 फीसदी पर पहुंची, खाद्य महंगाई 10 फीसदी के ऊपर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ज्यों ज्यों दवा की मर्ज बढ़ता गया, कुछ इसी राह पर है चावल की महंगाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rice-prices-increasing-despite-governments-steps.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 14 Sep 2023 07:00:31 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rice-prices-increasing-despite-governments-steps.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>25 अगस्त, 2023-</strong> गैर-बासमती पारबॉयल्ड राइस (सेला चावल) के निर्यात पर 20 लगा फीसदी शुल्क लगाने और बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य 1200 डॉलर प्रति टन करने का फैसला।</p>
<p><strong>9 अगस्त, 2023-</strong> खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत ई-नीलामी के जरिये केंद्रीय पूल से 31 मार्च, 2024 तक 25 लाख टन चावल बेचने एवं ई-नीलामी के लिए चावल का रिजर्व प्राइस 200 रुपये घटाकर 2900 रुपये प्रति क्विंटल करने का फैसला।</p>
<p><strong>20 जुलाई, 2023-</strong> गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर लगी रोक।</p>
<p><strong>12 जून, 2023-</strong> ओएमएसएस के तहत राज्यों को गेहूं एवं चावल देने पर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने लगाई रोक।</p>
<p><strong>8 सितंबर, 2022-</strong> टूटे चावल का निर्यात बंद करने और गैर-बासमती सफेल चावल के निर्यात पर 20 फीसदी शुल्क लगाने का फैसला। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>ये वो फैसले हैं जो घरेलू बाजार में चावल की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के मकसद से मोदी सरकार ने किए हैं। इसके बावजूद चावल की कीमतें कम होने की बजाय लगातार बढ़ रही हैं। खुद केंद्र सरकार के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने (12 अगस्त-12 सितंबर तक) में चावल (सामान्य) की खुदरा कीमतों में 2.77 फीसदी और थोक कीमतों में 2.4 फीसदी की वृद्धि हुई है। जबकि पिछले एक साल (12 सितंबर, 2022 से 12 सितंबर, 2023 तक) में चावल के दाम खुदरा में 10.48 फीसदी और थोक में 11.21 फीसदी बढ़े हैं।</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अखिल भारतीय स्तर पर चावल की औसत खुदरा कीमत 42.26 रुपये प्रति किलो है जो एक महीने पहले 41.12 रुपये और एक साल पहले 38.25 रुपये किलो थी। अखिल भारतीय स्तर पर चावल की औसत थोक कीमत इस समय 3727.04 रुपये प्रति क्विंटल है जो पिछले महीने 3639.69 रुपये और एक साल पहले 3351.42 रुपये प्रति क्विंटल थी। 12 सितंबर को ही सरकार ने अगस्त 2023 के खुदरा महंगाई के आंकड़े भी जारी किए हैं। उन आंकड़ों में भी यह स्पष्ट है कि अनाजों की महंगाई दोहरे अंक में 11.85 फीसदी पर बनी हुई है। वहीं खाद्य महंगाई 9.94 फीसदी रही है।</p>
<p>इन सबके अलावा एक हकीकत और है कि ओएमएसएस के तहत की जा रही ई-नीलामी में चावल के लिए बहुत कम बोली लग रही है। घरेलू बाजार में चावल की उपलब्धता बढ़ाने और दाम को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने न सिर्फ राज्यों को इसमें बोली लगाने से प्रतिबंधित कर दिया है, बल्कि बड़े व्यापारियों की बजाय छोटे व्यापारियों को बोली लगाने को तरजीह दी है ताकि ज्यादा से ज्यादा व्यापारी इसमें हिस्सा ले सकें और बड़े व्यापारियों द्वारा की जाने वाली जमाखोरी को रोका जा सके। इसके बावजूद एफसीआई के चावल का उठान बहुत कम है। उदाहरण के तौर पर, 11वें दौर की पिछली नीलामी (6 सितंबर) में एफसीआई की ओर से 4.89 लाख टन चावल बिक्री की पेशकश की गई थी जिसके मुकाबले सिर्फ 17 हजार टन यानी 3.47 फीसदी के लिए खरीदारों ने बोली लगाई। यही हाल इससे पहले की 10 नीलामियों का रहा है। &nbsp;</p>
<p>इस बारे में पूर्व कृषि सचिव और एफसीआई के पूर्व चेयरमैन सिराज हुसैन ने <strong>रूरल वॉयस</strong> से कहा, &ldquo;ओएमएसएस के तहत चावल की ई-नीलामी में निजी व्यापारियों का रुझान पहले भी कम ही रहा है। राज्य सरकारों की ओर से ही चावल का उठान किया जाता रहा है। चूंकि अब राज्यों को ओएमएसएस की नीलामी में हिस्सा लेने से रोक दिया गया है इसलिए चावल का उठान कम है। निजी व्यापारी महंगा चावल खरीदेंगे तो किस भाव पर बेचेंगे, उनकी मुश्किल यह होती है।&rdquo;</p>
<p>सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद घरेलू बाजार में चावल के दाम क्यों नहीं घट रहे हैं? <strong>रूरल वॉयस</strong> के इस सवाल के जवाब में ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व प्रेसीडेंट और चमन लाल सेतिया एक्पोर्ट्स लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर &nbsp;विजय कुमार सेतिया कहते हैं, &ldquo;चावल के मामले में सरकार को उपभोक्ता और किसान दोनों का ध्यान रखना होता है। किसानों के हितों की सुरक्षा करने को जहां गैर बासमती धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किया जाता है और उसकी सरकारी खरीद की जाती है, वहीं सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिये गरीब उपभोक्ताओं को सस्ते दाम पर चावल दिया जाता है। इस तरह से कीमत नियंत्रण का मैकेनिज्म बना हुआ है। &nbsp;दूसरी तरफ, इसी किस्म के अतिरिक्त चावल का जब ज्यादा निर्यात होने लगता है तो घरेलू दाम बढ़ने लगते हैं। गैर-बासमती चावल निर्यात पर पाबंदी लगाने से पहले यह बात कही जा रही थी कि दाम 30 फीसदी तक बढ़ गया है लेकिन उसमें सच्चाई कुछ और है।&rdquo;</p>
<p>उन्होंने बताया, &ldquo;कोरोना के दौर में और उसके बाद भी सरकार पीडीएस का चावल गरीबों को मुफ्त में दे रही थी। वह चावल किसी भी तरीके से खुले बाजार में आ रहा था और 20-25 रुपये किलो मिल रहा था। जैसे ही सरकार ने मुफ्त में देना बंद किया और उसकी कीमत 3100 रुपये प्रति क्विंटल तय कर राज्यों से उसे बांटने को कहा, खुले बाजार में दाम बढ़ गए। जो चावल पहले 2000-2500 रुपये क्विंटल पर मिलता था उसकी थोक कीमत 2800-2900 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।&rdquo;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ज्यों ज्यों दवा की मर्ज बढ़ता गया, कुछ इसी राह पर है चावल की महंगाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूएनडीपी का नाबार्ड से एमओयू, कृषि में डाटा आधारित नवाचारों को बढ़ावा देने को हुआ करार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/undp-and-nabard-tie-up-to-boost-data-driven-innovations-in-agriculture.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 13 Sep 2023 13:18:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/undp-and-nabard-tie-up-to-boost-data-driven-innovations-in-agriculture.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) ने छोटे किसानों की सहायता करने के लिए कृषि और खाद्य प्रणालियों में डाटा आधारित नवाचारों का सह-निर्माण करने के तहत एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।</p>
<p>इस एमओयू के तहत दोनों संगठन उत्पाद विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और कृषि नीतियों के निर्माण का समर्थन करने के लिए ओपन-सोर्स डेटा साझा करके छोटे किसानों के जीवन और आजीविका को बेहतर बनाने के लिए काम करेंगे। एमओयू पर नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक संजीव रोहिल्ला और यूएनडीपी की डिप्टी रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव इसाबेल सान ने हस्ताक्षर किए।</p>
<p>एमओयू के तहत यूएनडीपी कृषि निवेश में डेटा-संचालित निर्णय लेने के नाबार्ड के एजेंडे को सहयोग देने के लिए खुले नवाचारों, डेटा सहयोग, डेटा विज्ञान दृष्टिकोण और वैश्विक जानकारी में अपनी विशेषज्ञता का लाभ उठाएगा। इसमें डीआईसीआरए (डाटा इन क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर) जैसे सहयोगी डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं को बढ़ाना और प्रसारित करना शामिल है। डीआईसीआरए एक सहयोगी डिजिटल सार्वजनिक वस्तु है जो जलवायु लचीली कृषि से संबंधित प्रमुख भू-स्थानिक डेटासेट तक खुली पहुंच प्रदान करती है।</p>
<p>कृषि में सार्वजनिक निवेश की जानकारी देने के लिए यूएनडीपी और साझेदार संगठनों द्वारा डीआईसीआरए बनाया गया है। यह पहले से भारत के 5 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए जलवायु लचीलेपन की जानकारी प्रदान करता है। इस साझेदारी के तहत इसके उपयोग को बढ़ाने के लिए नाबार्ड यूएनडीपी के तकनीकी समर्थन से डीआईसीआरए प्लेटफॉर्म की देखरेख और रखरखाव करेगा। साथ ही नीति निर्माण, अनुसंधान और विकास गतिविधियों के लिए अपने प्रमुख भू-स्थानिक डेटासेट का उपयोग करेगा। इस पांच वर्षीय तकनीकी सहयोग की परिकल्पना सामूहिक जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा देने, ग्रामीण भारत में आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ाने के लिए नया मंच प्रदान करने और नए उत्पाद की पेशकश के लिए की गई है।</p>
<p>नाबार्ड के अध्यक्ष शाजी केवी ने इस एमओयू पर कहा, &ldquo;नाबार्ड यूएनडीपी के साथ इस सहयोग को लेकर बेहद उत्साहित है। यह दोनों संगठनों के लिए डेटा का लाभ उठाने और &nbsp;किसानों के विशाल ग्रामीण समुदाय के लिए डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रूप में पेश करने के अवसरों को खोलता है। जैसे-जैसे हम प्रगति कर रहे हैं हम यूएनडीपी के साथ मजबूत संबंधों की आशा कर रहे हैं। यह समझौता ज्ञापन इसी दिशा में एक कदम है।''</p>
<p>यूएनडीपी की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए डिप्टी रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव इसाबेल सान ने कहा, &ldquo;भारत में आजीविका का सबसे बड़ा स्रोत कृषि है जिसमें 80 फीसदी ग्रामीण महिलाएं कार्यरत हैं, जो जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील है। डीआईसीआर उन खेतों की पहचान करने के लिए अत्याधुनिक डेटा विज्ञान और मशीन लर्निंग का उपयोग करता है जो जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीले हैं और जो अत्यधिक असुरक्षित हैं। इस तरह के खुले डेटा नवाचार बेहतर प्रथाओं को उजागर कर सकते हैं, कृषि निवेश को अनुकूलित कर सकते हैं और आबादी को जोखिम से बचा सकते हैं। नाबार्ड के साथ सहयोग से स्थायी कृषि पद्धतियों के निर्माण और छोटे किसानों, विशेषकर महिलाओं की असुरक्षा को कम करते हुए आजीविका सुरक्षित करने में हमारा सहयोग मजबूत होगा।''</p>
<p>यह साझेदारी यूएनडीपी और नाबार्ड के डेटा संसाधनों को बढ़ाने, वाटरशेड प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई, गोदाम अनुकूलन और जलवायु संबंधी पहल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के बारे में निर्णय लेने के लिए समय के साथ कृषि रुझानों का विश्लेषण करने में भी मदद करेगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूएनडीपी का नाबार्ड से एमओयू, कृषि में डाटा आधारित नवाचारों को बढ़ावा देने को हुआ करार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खुदरा महंगाई घटी मगर खाद्य महंगाई अब भी 10 फीसदी के करीब]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/retail-inflation-decreased-but-food-inflation-is-still-close-to-10-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 13 Sep 2023 10:39:12 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/retail-inflation-decreased-but-food-inflation-is-still-close-to-10-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>टमाटर सहित अन्य सब्जियों की कीमतें घटने की वजह से अगस्त में खुदरा महंगाई की दर घटकर 6.83 फीसदी पर पहुंच गई है लेकिन खाद्य महंगाई की दर अभी भी 10 फीसदी के करीब बनी हुई है। इससे पिछले महीने खुदरा महंगाई की दर 7.44 फीसदी थी, जबकि खाद्य महंगाई 11.51 फीसदी पर थी।</p>
<p>सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में खाद्य महंगाई 9.94 फीसदी पर रही। अगस्त 2022 में खाद्य महंगाई की दर 7.62 फीसदी थी, जबकि उस समय खुदरा महंगाई 7 फीसदी थी। अनाजों की महंगाई इस साल अगस्त में दोहरे अंक में 11.85 फीसदी रही जो जुलाई में 13 फीसदी थी। दूध और दुग्ध उत्पादों की मुद्रास्फीति पिछले महीने के 8.34 फीसदी की तुलना में 7.73 फीसदी पर आ गई।</p>
<p>जुलाई में बारिश चलते टमाटर और अन्य सब्जियों की कीमतों में काफी उछाल आया था, खासकर टमाटर के दाम 250 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने के चलते सब्जियों की महंगाई दर आश्चर्यजनक तौर पर बढ़कर 37.34 फीसदी पर पहुंच गई थी। अगस्त में यह घटकर 26.14 फीसदी पर आ गई है। खाद्य तेल और वसा की महंगाई दर पिछले महीने के 16.8 फीसदी से गिरकर 15.3 फीसदी पर आ गई है।</p>
<p>खाने-पीने की चीजों के दाम लगातार बढ़ने को देखते हुए सरकार ने अधिकांश खाद्य पदार्थों के व्यापार को विनियमित कर दिया है। चावल और गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जबकि के निर्यात पर 40 फीसदी शुल्क लगाया है। इसी तरह, दालों के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी है और अरहर एवं उड़द दाल पर स्टॉक लिमिट लगाने के साथ मसूर दाल के स्टॉक की साप्ताहिक जानकारी देना कारोबारियों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।</p>
<p>खाद्य वस्तुओं की कीमतें पिछले साल से सरकार के लिए एक प्रमुख चिंता का कारण रही है क्योंकि मौसम में अचानक परिवर्तन की स्थिति ने सब्जियों, दूध और अनाज के उत्पादन को नुकसान पहुंचाया है। विश्लेषकों को उम्मीद है कि सितंबर में मुद्रास्फीति और घटेगी जब खरीफ की नई फसलें बाजार में आएंगी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 2023-24 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति 5.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है।</p>
<p>इस बीच, मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में भारत का औद्योगिक उत्पादन 5.7 फीसदी की दर से बढ़ा गया है जो जुलाई 2022 में 2.2 फीसदी था।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खुदरा महंगाई घटी मगर खाद्य महंगाई अब भी 10 फीसदी के करीब ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान अधिकारों की रक्षा पर भारतीय कानून दुनिया के लिए बन सकता है आदर्श: राष्ट्रपति मुर्मू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/indian-law-on-protection-of-farmers-rights-can-be-model-for-entire-world-said-prez-murmu.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 12 Sep 2023 18:27:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/indian-law-on-protection-of-farmers-rights-can-be-model-for-entire-world-said-prez-murmu.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि किसानों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके भविष्य की देखभाल करना सरकार की जिम्मेदारी है क्योंकि वे अन्नदाता हैं और पूरी मानवता के लिए भोजन प्रदाता हैं।</p>
<p>मंगलवार को नई दिल्ली में किसानों के अधिकारों पर आयोजित चार दिवसीय पहली वैश्विक संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों के अधिकारों की रक्षा करके हम दुनिया के भविष्य को उज्जवल और अधिक समृद्ध बनाकर उसकी रक्षा करते हैं। देश की विविधता के बारे में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत में 45,000 से अधिक प्रकार के पौधे और प्रजातियों की विस्तृत श्रृंखला है और उन्हें बचाकर और संरक्षित करके हम न केवल मानवता बल्कि पूरी दुनिया को बचाएंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 में हस्ताक्षरित खाद्य व कृषि के लिए पादप आनुवंशिक संसाधनों पर अंतर्राष्ट्रीय संधि, भोजन और कृषि के लिए पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण, उपयोग व प्रबंधन के लिए सदस्य देशों के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौतों में से एक थी। पहली बार इसने भोजन और कृषि के लिए दुनिया के पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण, विनिमय और टिकाऊ उपयोग के माध्यम से खाद्य सुरक्षा की गारंटी देने की बात की। भारत ने पौधों की विविधता और किसान अधिकार संरक्षण कानून (पीपीवीएफआर)-2001 को पेश करने में अग्रणी भूमिका निभाई थी, जो हमारे किसानों की सुरक्षा के लिए खाद्य व कृषि हेतु पादप आनुवंशिक संसाधनों पर अंतरराष्ट्रीय संधि से जुड़ा है। हमारा देश किसानों को कई प्रकार के अधिकार प्रदान करता है। भारतीय किसान खुद की किस्मों को पंजीकृत कर सकते हैं जिन्हें सुरक्षा मिलती है। ऐसा कानून पूरी दुनिया के लिए अनुकरणीय उत्कृष्ट मॉडल के रूप में काम कर सकता है। जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों के मद्देनजर व मानवता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को पूरा करने के लिए इसका महत्व और बढ़ जाता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध कृषि-जैव विविधता वैश्विक समुदाय के लिए एक खजाना रही है। हमारे किसानों ने कड़ी मेहनत व उद्यमपूर्वक पौधों की स्थानीय किस्मों का संरक्षण किया है, जंगली पौधों को पालतू बनाया है एवं पारंपरिक किस्मों का पोषण किया है, जिन्होंने विभिन्न फसल प्रजनन कार्यक्रमों के लिए आधार प्रदान किया है। इससे मनुष्यों व जानवरों के लिए भोजन और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। जैव विविधता को संरक्षित व पोषित करके किसान बिरादरी न केवल मानवता को, बल्कि पूरे ग्रह को बचा रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र विशेष की फसलों की किस्में समाज व संस्कृति से गहराई से जुड़ी होती हैं। इनमें औषधीय गुण भी होते हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/09/image_750x_65005dbc10170.jpg" alt="" /></p>
<p>खाद्य एवं कृषि के लिए पादप आनुवंशिक संसाधनों पर अंतरराष्ट्रीय संधि (आईटीपीजीआरएफए), खाद्य व कृषि संगठन (एफएओ) ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर इस चार दिवसीय वैश्विक संगोष्ठी का आयोजन कि या है। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सभ्यता की शुरूआत से ही हमारे किसान ही असली इंजीनियर व वैज्ञानिक हैं जिन्होंने मानवता के लाभ के लिए प्रकृति की ऊर्जा व उदारता का उपयोग किया है। एक नोबेल पुरस्कार विजेता व अर्थशास्त्री ने बिहार के गांव का दौरा करते समय एक बार टिप्पणी की थी "भारतीय किसान वैज्ञानिकों से बेहतर हैं"। राष्ट्रपति ने कहा कि मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूं क्योंकि कृषि में हमने परंपरा को प्रौद्योगिकी के साथ सहजता से मिश्रित किया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हमने कई पौधों-प्रजातियों को खो दिया है। फिर भी पौधों-प्रजातियों की कई किस्मों की रक्षा व पुनर्जीवित करने के किसानों के प्रयास सराहनीय है। उनका अस्तित्व आज हम सबके लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने खुशी जताई कि आईटीपीजीआरएफए ने किसानों के अधिकारों पर पहली वैश्विक संगोष्ठी के आयोजन स्थल के रूप में भारत को चुना। जैव विविधता में भारत पौधों व प्रजातियों की विस्तृत श्रृंखला से संपन्न देशों में से एक है। हमारे कृषि-जैव विविधता संरक्षकों व मेहनती किसानों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं के प्रयासों ने सरकारी समर्थन के साथ मिलकर देश में कई कृषि क्रांतियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान अधिकारों की रक्षा पर भारतीय कानून दुनिया के लिए बन सकता है आदर्श: राष्ट्रपति मुर्मू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बारिश की कमी के बावजूद धान की बुवाई का रकबा 403 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा, पिछले साल से 10.60 लाख हेक्टेयर रहा ज्यादा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/despite-lack-of-rain-sowing-area-of-paddy-reached-403-lakh-hectares.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 11 Sep 2023 17:34:21 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/despite-lack-of-rain-sowing-area-of-paddy-reached-403-lakh-hectares.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू खरीफ सीजन 2023-24 की बुवाई खत्म हो चुकी है। खरीफ की प्रमुख फसल धान की अगैती और कम अवधि वाले किस्म की कटाई भी शुरू हो गई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, चालू खरीफ सीजन में धान की बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले 10 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। यही नहीं सामान्य तौर पर खरीफ सीजन में होने वाली धान की बुवाई के औसत रकबे से भी यह ज्यादा पर पहुंच गया है।</p>
<p>खरीफ सीजन में धान की औसत बुवाई का रकबा 399.45 लाख हेक्टेयर है लेकिन इस साल मानसून की बारिश में 11 फीसदी की कमी के बावजूद धान बुवाई का कुल क्षेत्रफल 403.41 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है। यह पिछले साल के मुकाबले 10.60 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। पिछले साल 392.81 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई थी। हालांकि, दलहन फसलों की बुवाई ने चिंता बढ़ा दी है क्योंकि दालों की बुवाई 8.58 फीसदी घटकर 119.91 लाख हेक्टेयर रह गई है। पिछले साल 131.71 लाख हेक्टेयर में दालहन फसलों की बुवाई हुई थी।</p>
<p>कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, मोटे अनाजों की बुवाई अब तक 182.21 लाख हेक्टेयर में हुई है जो एक साल पहले की अवधि के 181.24 लाख हेक्टेयर से थोड़ा अधिक है। तिलहन फसलों की बुवाई घटकर 191.49 लाख हेक्टेयर पर आ गई है जो एक साल पहले की अवधि में 193.30 लाख हेक्टेयर रही थी। नकदी फसलों में गन्ने की बुवाई का रकबा 8 सितंबर तक बढ़कर 59.91 लाख हेक्टेयर हो गया जो एक साल पहले की अवधि में 55.65 लाख हेक्टेयर था।</p>
<p>कपास की बुवाई का रकबा 126.87 लाख हेक्टेयर से कम होकर 125 लाख हेक्टेयर पर और जूट/मेस्ता का 6.57 लाख हेक्टेयर रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, सभी खरीफ फसलों की बुवाई के कुल क्षेत्रफल में मामूली वृद्धि हुई है और 1,088.50 लाख हेक्टेयर रहा है, जबकि एक साल पहले की अवधि में यह 1,088.02 लाख हेक्टेयर था।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बारिश की कमी के बावजूद धान की बुवाई का रकबा 403 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा, पिछले साल से 10.60 लाख हेक्टेयर रहा ज्यादा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एफसीआई की पिछली ई&amp;#45;नीलामी में 1.66 लाख टन गेहूं की हुई बिक्री, चावल के लिए सिर्फ 17 हजार टन की लगी बोली]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/fci-sells-1-lakh-66-thousand-ton-wheat-and-17-thousand-ton-rice-through-open-market-sale-scheme.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 11 Sep 2023 14:13:46 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/fci-sells-1-lakh-66-thousand-ton-wheat-and-17-thousand-ton-rice-through-open-market-sale-scheme.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की ओर से खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत की गेहूं और चावल की ई-नीलामी का 11वां दौर 6 सितंबर को संपन्न हुआ। इस दौर में 1.66 लाख टन गेहूं और 17 हजार टन चावल की ई-नीलामी हुई।</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने सोमवार को एक बयान में कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में ओएमएसएस के तहत 11वें दौर की ई-नीलामी में देश भर के 500 डिपो से 2 लाख टन गेहूं और 337 डिपो से 4.89 लाख टन चावल की बिक्री की पेशकश की गई थी। इसकी तुलना में 1.66 लाख टन गेहूं और 17 हजार टन चावल के लिए खरीदारों ने बाली लगाई। बयान में कहा गया है कि चावल, गेहूं और आटे की घरेलू खुदरा कीमत को नियंत्रित करने के लिए बाजार में हस्तक्षेप की पहल करते हुए समय-समय पर गेहूं और चावल दोनों की साप्ताहिक ई-नीलामी आयोजित की जा रही है।</p>
<p>बयान के मुताबिक, 6 सितंबर की ई-नीलामी में एफएक्यू गेहूं (सामान्य गुणवत्ता वाला) के लिए औसत बोली 2,169.65 रुपये प्रति क्विंटल की लगाई गई, जबकि इसका आरक्षित मूल्य &nbsp;2,150 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया था। इसी तरह, यूआरएस गेहूं (कम गुणवत्ता वाला) का औसत बिक्री मूल्य 2,150.86 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि इसका आरक्षित मूल्य 2,125 रुपये क्विंटल था। चावल का औसत बिक्री मूल्य आरक्षित मूल्य 2,952.27 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले 2,956.19 रुपये प्रति क्विंटल रहा।</p>
<p>ई-नीलामी के तहत बोली लगाने वाले खरीदारों के लिए गेहूं की अधिकतम 100 टन तक और चावल की 1000 टन तक की मात्रा तय की गई है ताकि ई-नीलामी में ज्यादा से ज्यादा बोलीदाता हिस्सा ले सकें। बयान के मुताबिक, छोटे और सीमांत व्यापारियों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है।</p>
<p>स्टॉक की जमाखोरी से बचने के लिए बड़े व्यापारियों को ओएमएसएस के तहत गेहूं की बोली लगाने से &nbsp;बाहर रखा गया है। उन आटा मिलों की नियमित जांच की जा रही है जिन्होंने ओएमएसएस के तहत गेहूं खरीदा है। 5 सितंबर तक देशभर में 898 निरीक्षण किए जा चुके हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एफसीआई की पिछली ई-नीलामी में 1.66 लाख टन गेहूं की हुई बिक्री, चावल के लिए सिर्फ 17 हजार टन की लगी बोली ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जी&amp;#45;20 में भूख&amp;#45;कुपोषण की समस्या दूर करने पर जोर, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों के निर्यात पर रोक न लगाने पर सहमति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/g20-nations-commit-to-end-hunger-and-malnutrition-and-not-to-ban-export-of-agri-products-and-fertilisers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 10 Sep 2023 12:18:01 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/g20-nations-commit-to-end-hunger-and-malnutrition-and-not-to-ban-export-of-agri-products-and-fertilisers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भूख और कुपोषण दूर करने पर फोकस रखते हुए जी-20 देशों के नेताओं ने शनिवार को कृषि, खाद्य और उर्वरकों के व्यापार में खुले, पारदर्शी और नियम आधारित व्यापार के लिए प्रतिबद्धता जताई। इन देशों ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के मुताबिक जब-तब निर्यात पर रोक न लगाने की बात भी कही। नई दिल्ली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन जारी घोषणा में खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने में विकासशील देशों की मदद करने पर भी सहमति बनी। घोषणा में कहा गया है कि कमोडिटी के बढ़ते दाम लोगों के जीवन-यापन के खर्च पर दबाव बढ़ा रहे हैं।<br />सदस्य देश अफोर्डेबल सुरक्षित, पोषक और स्वस्थ भोजन तक पहुंच बढ़ाने और पर्याप्त भोजन के अधिकार को सुनिश्चित करने पर भी सहमत हुए। घोषणा में कहा गया है कि हम विश्व स्तर पर सबके लिए खाद्य सुरक्षा और पोषण बढ़ाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। यह कार्य खाद्य सुरक्षा और पोषण 2023 पर जी-20 डेक्कन उच्चस्तरीय सिद्धांतों के अनुरूप होगा।<br />इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सदस्य देशों ने 6 उच्चस्तरीय सिद्धांतों पर सहमति जताई। इनमें खाद्य और उर्वरकों का खुला और मुक्त व्यापार भी शामिल है। घोषणा में कहा गया है कि हम कृषि, खाद्य और उर्वरक के क्षेत्र में खुला, निष्पक्ष, अनुमान योग्य और नियम आधारित व्यापार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। साथ ही हमारी प्रतिबद्धता निर्यात पर अंकुश अथवा रोक न लगाने को लेकर भी है। यह डब्लूटीओ के नियमों के अनुरूप होगा। गौरतलब है कि घरेलू स्तर पर महंगाई को नियंत्रित करने के लिए भारत ने चावल की कुछ किस्मों और गेहूं के निर्यात पर रोक लगा रखी है।&nbsp;<br />मुक्त व्यापार के अलावा जी-20 सदस्य देशों ने दो और कमोडिटी को ट्रैक करने की बात कही है। यह कमोडिटी उर्वरक और वनस्पति तेल हैं। इनकी ट्रैकिंग एग्रीकल्चरल मार्केटिंग इनफार्मेशन सिस्टम (एमिस) और ग्रुप ऑन अर्थ ऑब्जर्वेशन ग्लोबल एग्रीकल्चरल मॉनिटरिंग (जिओग्लैम) के तहत होगी ताकि पारदर्शिता बढ़े और खाद्य पदार्थों की कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव ना हो।<br />सदस्य देश उर्वरकों पर एमिस के कार्यों का समर्थन करने पर सहमत हुए। साथ ही उन्होंने वनस्पति तेलों को भी शामिल करने पर सहमति दिखाई। एमिस में अभी चार फसलों- गेहूं, चावल, मक्का और सोया को ट्रैक किया जाता है। इसमें सदस्य देशों से आंकड़े जुटाए जाते हैं और उसके आधार पर आउटलुक तथा कीमतों को लेकर अनुमान व्यक्त किए जाते हैं। यह पहली बार होगा जब एमिस के तहत उर्वरकों की ट्रैकिंग की जाएगी। हाल के दिनों में उर्वरकों की वैश्विक कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।<br />घोषणा में उर्वरकों तथा अन्य कृषि इनपुट की उपलब्धता बढ़ाने और उनके प्रभावी इस्तेमाल के महत्व पर भी जोर दिया गया है। इसमें स्थानीय स्तर पर उर्वरक उत्पादन बढ़ाने और मिट्टी की सेहत में सुधार शामिल हैं। जी-20 के तहत मुख्य कृषि वैज्ञानिकों की 12वीं बैठक के नतीजे का स्वागत करते हुए सदस्य देशों ने जलवायु रोधी और पोषक अनाज में रिसर्च को बढ़ावा देने में आपसी सहयोग पर भी सहमति जताई। इनमें मिलेट के साथ गेहूं, चावल और मक्का जैसे पारंपरिक अनाज भी शामिल हैं।<br />जी-20 घोषणा के अनुसार सदस्य देश कृषि उत्पादकता बढ़ाने, पूरे वैल्यू चेन में खाद्य पदार्थों का नुकसान और उनकी बर्बादी कम करने, मार्केटिंग और स्टोरेज सुविधाओं को बेहतर बनाने तथा कृषि और खाद्य प्रणाली को ज्यादा सस्टेनेबल और जलवायु प्रभाव रोधी बनाने पर सहमत हुए हैं। खाद्य और ऊर्जा की कीमतों में उच्च स्तर की तुलना में गिरावट तो आई है, इसके बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं को देखते हुए इनकी कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है।<br />सदस्य देशों ने खाद्य एवं ऊर्जा असुरक्षा के विश्व इकोनॉमी पर प्रभाव पर जी-20 की रिपोर्ट पर भी गौर किया। घोषणा में कहा गया है कि हम इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट (आईएफएडी) के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य का स्वागत करते हैं। यह कार्य इसी साल के अंत तक किए जाने की उम्मीद है।<br />महिलाओं की खाद्य सुरक्षा, उनके पोषण और बेहतर जीवन पर फोकस करते हुए घोषणा में कहा गया है, सदस्य देश समावेशी, सस्टेनेबल और टिकाऊ कृषि तथा खाद्य प्रणाली में निवेश को बढ़ावा देंगे। यह देश सबकी पहुंच वाले, अफॉर्डेबल, सुरक्षित और पोषक तथा स्वस्थ भोजन को स्कूलों के खाद्य कार्यक्रमों में शामिल करने का समर्थन करेंगे। जी-20 देश महिलाओं के लिए और महिलाओं द्वारा एग्री वैल्यू चेन विकसित करने को बढ़ावा देंगे। इसमें कहा गया है कि महिलाओं की खाद्य सुरक्षा और उनका पोषण व्यक्तिगत और सामुदायिक विकास के लिए आवश्यक है, क्योंकि इससे महिलाओं के साथ-साथ बच्चों, परिवार और पूरे समुदाय के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित होता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जी-20 में भूख-कुपोषण की समस्या दूर करने पर जोर, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों के निर्यात पर रोक न लगाने पर सहमति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए एग्री&amp;#45;फिनटेक इनोवेशन पर नाबार्ड का जोर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/nabard-emphasises-on-agri-fintech-innovations-for-taking-rural-and-agri-economy-forward.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 09 Sep 2023 17:31:57 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/nabard-emphasises-on-agri-fintech-innovations-for-taking-rural-and-agri-economy-forward.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) ने मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में ग्रामीण और कृषि-अर्थव्यवस्था के साथ डिजिटल वित्तीय सेवाओं को एकीकृत करने के अपने अभूतपूर्व कार्य पर प्रकाश डाला। तीन दिवसीय यह आयोजन 5-7 सितंबर को हुआ।</p>
<p>इस दौरान नाबार्ड ने महत्वपूर्ण विषयों को संबोधित करते हुए पैनल चर्चाओं की एक श्रृंखला में भाग लिया। इन विषयों में डिजिटल पहचान और अपने ग्राहक को जानें (केवाईसी) समाधानों के दूरगामी प्रभाव के साथ-साथ फिनटेक और एग्री-टेक से जुड़ाव शामिल हैं। नाबार्ड ने इन क्षेत्रों के साथ काम करने के अपने व्यापक अनुभव को साझा किया और व्यापक डिजिटल वित्तीय सेवाओं के माध्यम से कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से किए गए कई पहलों के बारे में बताया।</p>
<p>इन चर्चाओं ने एग्रीटेक और फिनटेक के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के विभिन्न पहलुओं और महत्व को रेखांकित किया गया। इस तरह के सहयोगी नवाचार मौजूदा कृषि मूल्य श्रृंखला में नए मूल्य को जोड़ते हैं जो अधिक टिकाऊ, कुशल और तकनीकी रूप से उन्नत कृषि पारिस्थितिकी तंत्र की नींव रखते हैं।</p>
<p>इन पहलों के साथ नाबार्ड ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और कृषि में मूल्य श्रृंखला वित्त पोषण के माध्यम से वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने, दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में डिजिटल वित्तीय सेवाएं प्रदान करने के लिए अभिनव समाधान विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</p>
<p>सम्मेलन में शामिल महाराष्ट्र के जलगांव जिले के एक किसान ने कहा, &ldquo;मुझे अपनी कंपनी बनाने में मिली आर्थिक सहायता के लिए मैं नाबार्ड को धन्यवाद देना चाहता हूं। नाबकिसान ने हमें अपना एफपीओ बनाने के लिए सीसी लोन दिया है। एफपीओ और मेरे जैसे किसानों के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त करने में आसानी का कृषि मूल्य श्रृंखला पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है।&rdquo; नाबार्ड ने एक बयान में कहा कि वह ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2023 के समापन दिवस पर एक पैनल सत्र के दौरान नाबार्ड के योगदान को स्वीकार कर रहे थे।</p>
<p>ग्लोबल फिनटेक फेस्ट ने ग्रामीण भारत में वित्तीय सेवाओं में क्रांति लाने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने में अपने अग्रणी प्रयासों को प्रदर्शित करने के लिए नाबार्ड को एक मंच प्रदान किया। इस आयोजन में भाग लेकर नाबार्ड ने देश भर में वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने और ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता जताई।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए एग्री-फिनटेक इनोवेशन पर नाबार्ड का जोर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वैश्विक अनाज उत्पादन इस साल 2021 के रिकॉर्ड स्तर पर रहने का एफएओ ने जताया अनुमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/world-cereal-production-in-2023-seen-on-par-with-the-2021-record-outturn.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 08 Sep 2023 17:51:07 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/world-cereal-production-in-2023-seen-on-par-with-the-2021-record-outturn.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने चालू कैलेंडर वर्ष 2023 में वैश्विक अनाज उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 0.9 फीसदी वृद्धि का अनुमान जताया है। शुक्रवार को जारी अपने ताजा अनुमान में एफएओ ने हालांकि जुलाई में जताए गए अनुमान में 40 लाख टन की कटौती कर दी है। इसके बावजूद इस साल 281.50 करोड़ टन अनाज उत्पादन का अनुमान है। यह 2021 के रिकॉर्ड उत्पादन के बराबर है।</p>
<p>एफएओ ने अपने अनुमान में वैश्विक गेहूं उत्पादन में 2022 की तुलना में 2.6 फीसदी गिरावट आने की संभावना जताई है, जबकि मोटे अनाज का कुल उत्पादन 2.7 फीसदी बढ़ने का अनुमान लगाया है। ब्राजील और यूक्रेन में बेहतर पैदावार से मक्का उत्पादन 121.50 करोड़ टन के नए रिकॉर्ड पर पहुंचने की संभावना एफएओ ने जताई है। इसी तरह, चावल उत्पादन भी पिछले साल के मुकाबले 1.1 फीसदी रहने का अनुमान है।</p>
<p>एफएओ ने वैश्विक गेहूं उत्पादन के ताजा अनुमान में जुलाई के पूर्वानुमान के मुकाबले 22 लाख टन की कटौती की है। अब इस साल 78.11 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। कनाडा और यूरोपीय संघ के देशों में सूखे की स्थिति की वजह से गेहूं का उत्पादन घटने की संभावना है। इसे देखते हुए ही जुलाई के पूर्वानुमान में कटौती की गई है। एफएओ ने चीन के गेहूं उत्पादन का पूर्वानुमान भी घटा दिया है। हालांकि इसमें कम कटौती की गई है क्योंकि चीन के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में भारी बारिश से उपज की संभावनाएं कम हो गई हैं। इसकी तुलना में अमेरिका, भारत और यूक्रेन के सरकारी आंकड़ों में उत्पादन बढ़ने के संकेत को देखते हुए एफएओ ने भी अपने अनुमान में वृद्धि की है।</p>
<p>जहां तक ​​चावल की बात है तो एफएओ ने 2023-24 के अनुमान में 5,00,000 टन की कटौती की है और इसे 52.32 करोड़ टन कर दिया है जो 2022-23 के निचले स्तर से 1.1 फीसदी ऊपर है। इंडोनेशिया और थाईलैंड में बुवाई का रकबा घटने और अनियमित बारिश एवं सिंचाई के लिए पानी की कम आपूर्ति होने से पैदावार प्रभावित होने की संभावना है। वहीं चीन के उत्तर-पूर्वी प्रांतों में सामान्य से ज्यादा बारिश और बाढ़ ने चावल उत्पादन की उम्मीदों को कम कर दिया है।</p>
<p>मोटा अनाज के उत्पादन अनुमान में भी एफएओ ने 13 लाख टन की कटौती कर दी है। इसके बावजूद इसमें सालाना आधार पर 2.7 फीसदी वृद्धि के साथ 151.10 करोड़ टन बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। जबकि &nbsp;जौ के उत्पादन में 5.6 फीसदी की कमी आने का ताजा अनुमान है। इस साल जौ का उत्पादन 14.38 करोड़ टन रहने का पूर्वानुमान एफएओ ने लगाया है जो जुलाई के पूर्वानुमान के मुकाबले 29 फीसदी कम है। यूरोपीय संघ और कनाडा में फसल की स्थिति और उपज में गिरावट को देखते हुए जौ उत्पादन अनुमान को घटाया गया है। जबकि कनाडा, यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका में बुवाई घटने की वजह से जई (ओट) का उत्पादन घटकर 11 साल के निचले स्तर 2.31 करोड़ टन रहने का अनुमान है। इसकी तुलना में एफएओ ने विश्व मक्का उत्पादन अनुमान में 36 लाख टन की वृद्धि की है। 2023 में 121.50 करोड़ टन मक्का का उत्पादन होने का अनुमान है जो एक रिकॉर्ड है। ब्राजील और यूक्रेन में बेहतर फसल से मक्का की पैदावार ज्यादा होने की संभावना जताई गई है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ वैश्विक अनाज उत्पादन इस साल 2021 के रिकॉर्ड स्तर पर रहने का एफएओ ने जताया अनुमान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अल&amp;#45;नीनो के असर से चीनी उपलब्धता के संकट की आशंका नहीं: एनएफसीएसएफ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/el-nino-unlikely-to-cause-sugar-shortage-in-india-said-nfcsf.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 08 Sep 2023 14:31:50 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/el-nino-unlikely-to-cause-sugar-shortage-in-india-said-nfcsf.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अल-नीनो के कारण देश में चीनी की कमी की अफवाहों को खारिज करते हुए सहकारी चीनी मिलों के संगठन एनएफसीएसएफ ने कहा है कि 2023-24 सीजन में चीनी की घरेलू उपलब्धता "प्रतिकूल" होने की उम्मीद नहीं है। चीनी वर्ष अक्टूबर से सितंबर तक चलता है और 2023-24 का पेराई सत्र अगले महीने से शुरू होने वाला है।</p>
<p>नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) ने एक बयान में कहा है कि अल-नीनो ने महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में मानसून की बारिश पर असर डाला है। एनएफसीएसएफ के प्रबंध निदेशक प्रकाश नायकनवरे ने कहा, "हालांकि, अन्य गन्ना उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, उत्तराखंड में सामान्य से अधिक या सामान्य बारिश हुई है जिससे निश्चित रूप से गन्ने का वजन और सुक्रोज बढ़ाने में मदद मिली है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह देखा गया है कि कुछ वर्गों में व्यापक रूप से यह अफवाह है कि चीनी वर्ष 2023-24 में चीनी की गंभीर कमी होगी। जबकि तथ्यात्मक स्थिति इस काल्पनिक अनुमान के विपरीत है। कुछ राज्यों में अपेक्षित ज्यादा उत्पादन का उदाहरण देते हुए &nbsp;नायकनवरे ने कहा कि कर्नाटक में चीनी का शुद्ध उत्पादन घटकर 35 लाख टन रहने की आशंका थी लेकिन वास्तव में 45 लाख टन से अधिक उत्पादन होने का अनुमान है। जबकि सबसे बड़े गन्ना और चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में शुद्ध चीनी उत्पादन 10 लाख टन से अधिक रहने का अनुमान है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "जहां तक ​​महाराष्ट्र का सवाल है, अगस्त में लंबे समय तक बारिश नहीं होने के बाद सितंबर में मानसून फिर से सक्रिय हो गया है। इससे गन्ने की फसल और गन्ने में सुक्रोज को सुधारने में मदद मिलेगी।" नायकनवरे ने बयान में इस बात का भी जिक्र किया है कि समानांतर रूप से इस बात पर भी विचार चल रहा है कि एक निश्चित मात्रा में कच्ची चीनी का आयात किया जा सकता है। जलवायु के असर की वजह से कुछ क्षेत्रों में पेराई के लिए गन्ने की संभावित कमी की आशंका है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इन राज्यों की पेराई क्षमता बढ़ गई है। यदि पेराई के लिए गन्ने के साथ कच्ची चीनी का उपयोग किया जाए तो न केवल मिलों को आर्थिक संचालन में, बल्कि शुद्ध चीनी उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।</p>
<p>कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 1 सितंबर तक गन्ने की बुआई का रकबा बढ़कर 59.91 लाख हेक्टेयर हो गया है जो एक साल पहले की समान अवधि में 55.65 लाख हेक्टेयर था। चीनी वर्ष 2022-23 में चीनी का उत्पादन 340 लाख टन रहने का अनुमान है जो इससे पिछले वर्ष में 358 लाख टन रहा था।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_6449e11edd667.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अल-नीनो के असर से चीनी उपलब्धता के संकट की आशंका नहीं: एनएफसीएसएफ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[टमाटर में नरमी के बावजूद महंगी दालों, प्याज, जीरा ने थाली का स्वाद किया फीका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/tomato-relents-a-bit-but-costlier-pulses-onion-jeera-robs-away-taste-from-thali.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 07 Sep 2023 17:06:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/tomato-relents-a-bit-but-costlier-pulses-onion-jeera-robs-away-taste-from-thali.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>टमाटर के दाम शिखर से घटकर पूर्व स्तर पर पहुंचने के बावजूद दालों, प्याज और जीरा की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने भारतीय थाली को फीका कर दिया है। कृषि उपज मंडियों में मूंग की कीमत बढ़कर 11,000 रुपये प्रति क्विंटल, चने की थोक कीमत 6,500 रुपये और अरहर की थोक कीमत 16,000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को पार कर गई है। इसी तरह, जीरा थोक में 60,000 हजार रुपये और खुदरा में 80-90 हजार रुपये प्रति क्विंटल पर बिक रहा है। वहीं प्याज भी टमाटर की तरह महंगा होता जा रहा है।</p>
<p>रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त में शाकाहारी थाली की कीमत 24 फीसदी और मांसाहारी थाली की कीमत 13 फीसदी बढ़ी है। शाकाहारी थाली की कीमत में 24 फीसदी की बढ़ोतरी में से 21 फीसदी का कारण टमाटर की कीमतों में बढ़ोतरी रही है। अगस्त में इसकी कीमत सालाना आधार पर 176 फीसदी बढ़कर 102 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई जो एक साल पहले 37 रुपये प्रति किलो थी।</p>
<p>सालाना आधार पर प्याज के दाम 8 फीसदी, मिर्च के 20 फीसदी और जीरे के दाम में 158 फीसदी की वृद्धि हुई है। मांसाहारी थाली के दाम में वृद्धि थोड़ी धीमी रही क्योंकि ब्रॉयलर चिकन की कीमत जो थाली की लागत का 50 फीसदी से अधिक है, में सालाना आधार पर 1-3 फीसदी बढ़ी है।</p>
<p>हालांकि, वनस्पति तेल की कीमत में 17 फीसदी और आलू की कीमत में 14 फीसदी की गिरावट से दोनों थालियों की कीमतों में वृद्धि की दर कुछ हद तक कम हो गई है। सितंबर में लागत में कुछ कमी और देखने को मिल सकती है क्योंकि टमाटर की खुदरा कीमत पिछले महीने की तुलना में आधी घटकर 51 रुपये प्रति किलो हो गई है। साथ ही 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत जो अगस्त में 1,103 रुपये थी, सितंबर में घटकर 903 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई है। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।</p>
<p>क्रिसिल के मुताबिक, घर पर थाली तैयार करने की औसत लागत की गणना उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में प्रचलित इनपुट कीमतों के आधार पर की जाती है। कीमतों में मासिक परिवर्तन आम आदमी के खर्च पर प्रभाव को दर्शाता है। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि थाली की कीमत में बदलाव लाने वाले तत्व अनाज, दालें, ब्रॉयलर चिकन, सब्जियां, मसाले, खाद्य तेल एवं रसोई गैस हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_64a6b1b051534.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ टमाटर में नरमी के बावजूद महंगी दालों, प्याज, जीरा ने थाली का स्वाद किया फीका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रकबा बढ़ने के बावजूद सोयाबीन की पैदावार पर मंडराया संकट, अगस्त में सूखे जैसे हालात से एमपी में आधी फसल हुई बर्बाद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/despite-increase-in-acreage-soybean-production-is-in-crisis-half-the-crop-was-ruined-due-to-drought-like-conditions-in-august.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 07 Sep 2023 07:00:08 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/despite-increase-in-acreage-soybean-production-is-in-crisis-half-the-crop-was-ruined-due-to-drought-like-conditions-in-august.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खरीफ सीजन की प्रमुख तिलहन फसल सोयाबीन की बुवाई के रकबे में चालू खरीफ सीजन 2023-24 में करीब सवा लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। सोयबीन उत्पादक तीन प्रमुख राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में जुलाई महीने में अच्छी बारिश की वजह से बुवाई का रकबा बढ़ा। इससे उम्मीद जताई जा रही थी कि इस साल सोयाबीन का उत्पादन काफी बेहतर रहेगा लेकिन अगस्त में पूरे देश में सूखे जैसे हालात ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।</p>
<p>अगस्त में सामान्य से 36 फीसदी कम बारिश हुई है जो पिछले 120 सालों में सबसे कम है। बारिश नहीं होने से तापमान सामान्य से ज्यादा रहा जिसकी वजह से सोयाबीन की करीब 50 फीसदी फसल जल गई है। अगस्त में सोयाबीन में फूल आता है। बारिश नहीं होने की वजह से फूल बिखर गए। किसानों ने सिंचाई के जरिये पौधों को बचाने की कोशिश की। जो पौधे बचे थे उसमें इस समय दाना आ रहा है लेकिन ज्यादा तापमान की वजह से सोयबीन की फलियां सूख कर पापड़ हुई जा रही हैं। अब सिंचाई से भी स्थिति सुधरती नहीं दिख रही है।</p>
<p>सोयाबीन का सबसे ज्यादा उत्पादन मध्य प्रदेश में होता है। मध्य प्रदेश के मालवा-नीमाड़ इलाके में इसकी सबसे ज्यादा खेती होती है। इसके अंतर्गत धार, झाबुआ, रतलाम, देवास, इंदौर, उज्जैन, मंदसौर, सीहोर, शाजापुर, रायसेन, राजगढ़ तथा विदिशा जिले आते हैं। विदिशा जिले के अहमदपुर गांव के सोयाबीन किसान मनमोहन शर्मा ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि बारिश नहीं होने की वजह गर्मी बढ़ गई है जिससे सोयाबीन की करीब-करीब आधी फसल बर्बाद हो गई है। यह समय सोयाबीन की फलियों में दाना आने का है लेकिन गर्मी की वजह से फलियां सूख रही हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सिर्फ बारिश नहीं होना ही चिंता का कारण नहीं है बल्कि पर्याप्त बिजली भी नहीं मिल पा रही है। पहले गांव में 10 घंटे बिजली आती थी जो अब 6 घंटे मिल रही है। इसमें भी 1 घंटा लोड शेडिंग रहता है यानी सिंचाई के लिए 5 घंटे ही बिजली मिल रही है। इसकी वजह से भी सोयाबीन किसानों की स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई है। पर्याप्त सिंचाई नहीं होने से मनमोहन शर्मा की 10 बीघे की फसल खराब हो गई है। बाकी बचे 10 बीघे की फसल की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। अगर सितंबर में भी बारिश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो क्या होगा कहना मुश्किल है। उनके गांव के ज्यादातर किसानों की यही स्थिति है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>विदिशा जिले के ही खामखेड़ा के सोयाबीन किसान आशीष व्यास ने <strong>रूरल वॉयस</strong> से कहा कि इस बार मेरे इलाके में सोयाबीन की बुवाई के रकबे में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई। 7000 बीघे के रकबे में से करीब 5000 रकबे में सोयाबीन की बुवाई हुई लेकिन अगस्त में बारिश नहीं होने से खेतों में दरारें पड़ गई हैं और स्थिति गंभीर हो गई है। बारिश होने से तापमान कम रहता है जो सोयाबीन की फसल के लिए अच्छा है। मगर तापमान ज्यादा रहने से सिंचाई का भी ज्यादा फायदा नहीं मिलता है। यही वजह है कि सिंचाई के बावजूद फसल की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। गर्मी की वजह से यिल्लियों (कीड़ा) का भी प्रकोप ज्यादा है। अगर आगे भी बारिश नहीं हुई तो फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी। जो फसल बचेगी उसकी गुणवत्ता खराब होगी और दाने छोटे होंगे। ऐसे में लागत निकालना भी मुश्किल होगा। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान मंत्रालय के 1 सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, चालू खरीफ सीजन में सोयाबीन की बुवई का रकबा पिछले साल की इसी अवधि के 123.91 लाख हेक्टेयर से 1.22 लाख हेक्टेयर बढ़कर 125.13 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है। मध्य प्रदेश में रकबा 53.87 लाख हेक्टेयर से घटकर 53.35 लाख हेक्टेयर रहा है। जबकि महाराष्ट्र में 48.70 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 50.44 लाख हेक्टेयर रहा है। राजस्थान में 11.44 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हुई है जो पिछले साल 11.51 लाख हेक्टेयर थी।</p>
<p>चालू खरीफ मार्केटिंग सीजन 2023-24 के लिए सरकार ने सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4,600 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इस समय मंडियों में सोयाबीन का भाव 5,000-7,700 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रकबा बढ़ने के बावजूद सोयाबीन की पैदावार पर मंडराया संकट, अगस्त में सूखे जैसे हालात से एमपी में आधी फसल हुई बर्बाद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मसूर के स्टॉक की नियमित जानकारी देना हुआ अनिवार्य, दालों के बढ़ते दाम थामने को सरकार ने उठाया एक और कदम  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/centre-issues-advisory-for-mandatory-stock-disclosure-of-masur-with-immediate-effect.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Sep 2023 18:04:30 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/centre-issues-advisory-for-mandatory-stock-disclosure-of-masur-with-immediate-effect.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद दालों की महंगाई नियंत्रण में नहीं आ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह पिछले साल दालों का उत्पादन घटना और इस साल दालों की बुवाई के रकबे में करीब 11 लाख हेक्टेयर की कमी होना है। केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से दाल कारोबारियों के लिए मसूर के स्टॉक की नियमित जानकारी देना अनिवार्य कर दिया है। इससे पहले इसी साल जून में सरकार ने अरहर और उड़द पर स्टॉक लिमिट लगाने की घोषणा की थी।</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग ने बुधवार को एक एडवाइजरी जारी कर दाल व्यापारियों, स्टॉकिस्टों और आयातकों के लिए मसूर के स्टॉक की नियमित घोषणा सरकारी पोर्टल (<a href="https://fcainfoweb.nic.in/psp">https://fcainfoweb.nic.in/psp</a>) पर करने को अनिवार्य कर दिया है। यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। विभाग ने एक बयान में कहा है कि हर शुक्रवार को सभी हितधारकों को पोर्टल पर मसूर के स्टॉक की घोषणा करनी होगी। अगर घोषित स्टॉक से ज्यादा पाया जाता है तो उसे जमाखोरी माना जाएगा और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/national/moong-price-reached-rs-10-thousand-per-quintal-gram-and-tur-also-increased.html" title="मूंग में आई तेजी" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः&nbsp;मूंग का भाव 10 हजार रुपये क्विंटल पर पहुंचा, चना और अरहर भी हुए तेज</strong></a></p>
<p>उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव रोहित कुमार सिंह ने साप्ताहिक मूल्य समीक्षा बैठक के दौरान विभाग को मसूर की बफर खरीद को व्यापक बनाने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य एमएसपी के आसपास कीमतों पर उपलब्ध स्टॉक की खरीद करना है। यह ऐसे समय में हुआ है जब नेफेड और एनसीसीएफ को कार्टेलाइजेशन के संकेतों के बीच कुछ आपूर्तिकर्ताओं से प्राप्त अत्यधिक ऊंची बोलियों के कारण आयातित दाल खरीदने के लिए अपनी निविदाएं निलंबित करनी पड़ीं।</p>
<p>रोहित कुमार सिंह ने कहा कि ऐसे समय में जब कनाडा से मसूर का और अफ्रीकी देशों से तुअर का आयात बढ़ रहा है, कुछ कारोबारी बाजार में हेरफेर करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रही है और स्टॉक को बाजार में उतारने के लिए कड़े कदम उठाएगी ताकि त्योहारी सीजन में उचित कीमतों पर सभी के लिए दालों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/national/chana-wholesale-price-reached-rs-6500-per-quintal.html" title="चना में उछाल" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः&nbsp;चना भी खा रहा ताव, थोक दाम 6500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा</strong></a></p>
<p>उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के साथ-साथ किसानों के हितों को भी संतुलित रखना सर्वोपरि है। उपभोक्ताओं और किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मसूर के स्टॉक की नियमित जानकारी देना हुआ अनिवार्य, दालों के बढ़ते दाम थामने को सरकार ने उठाया एक और कदम   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चना भी खा रहा ताव, थोक भाव 6500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/chana-wholesale-price-reached-rs-6500-per-quintal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Sep 2023 14:11:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/chana-wholesale-price-reached-rs-6500-per-quintal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मूंग, उड़द और अरहर दालों के भाव में तेजी से चना दबाव में आ गया और इसके दाम भी बढ़ने लगे हैं। &nbsp;इसके अलावा आगामी त्योहारी मौसम में चना की मांग बढ़ने को देखते हुए भी इसमें तेजी का रुख है। साबूत चना का थोक भाव 6,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जबकि चना दाल 8,000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को छू गया है। हालांकि, चना की यह तेजी त्योहारी मौसम तक ही रहने की संभावना है क्योंकि नेफेड के पास करीब 38 लाख टन चना का पर्याप्त स्टॉक है और उसने 10 लाख टन चना बाजार में उतारने की घोषणा की है।</p>
<p>पिछले साल अरहर और उड़द के उत्पादन में कमी की वजह से इसके भाव में लगातार तेजी बनी हुई है। सरकार द्वारा दोनों दालों का आयात बढ़ाने और स्टॉक लिमिट लगाने के बावजूद घरेलू दाम में बहुत ज्यादा कमी नहीं आई। बाकी कसर इस साल खरीफ सीजन में दलहन फसलों की बुवाई में करीब 11 लाख हेक्टेयर की कमी ने पूरी कर दी है। इससे बाजार का सेंटीमेंट खराब हुआ है और दालों की कीमतें बढ़ने लगी हैं। वहीं अगस्त में 120 साल बाद सबसे कम बारिश की वजह से तापमान सामान्य से ज्यादा रहा जिससे मूंग की फसल काफी प्रभावित हुई है, खासकर राजस्थान में करीब 40 फीसदी फसल जलने की खबर आ रही है।</p>
<p>राजस्थान में ही मूंग की खेती सबसे ज्यादा होती है क्योंकि यहां की मिट्टी इसके लिए सबसे उपयुक्त है। खरीफ सीजन में यहां करीब 20 लाख हेक्टेयर में इसकी खेती होती है। अरहर, उड़द और मूंग के दाम में तेजी की वजह से चना दबाव में आ गया है क्योंकि इन तीनों के मुकाबले चना का भाव हमेशा कम रहता है। साथ ही बाकी दालों के महंगा होने से चना दाल की मांग बढ़ गई है। इसके अलावा, त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है जिसमें चने की मांग बेसन के लिए ज्यादा होती है। बेसन से कई तरह की मिठाइयां बनती है और त्योहारों के दौरान बेसन वाले मिठाइयों की मांग ज्यादा रहती है।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/latest-news/centre-issues-advisory-for-mandatory-stock-disclosure-of-masur-with-immediate-effect.html" title="मसूर स्टॉक की घोषणा" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः&nbsp;मसूर के स्टॉक की नियमित जानकारी देना हुआ अनिवार्य, दालों के बढ़ते दाम थामने को सरकार ने उठाया एक और कदम &nbsp;</strong></a></p>
<p>इन सब वजहों से साबूत चना का औसत थोक भाव 6,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। एक महीने पहले तक भाव 5,500 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि 2023-24 मार्केटिंग सीजन के लिए चना का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,335 रुपये प्रति क्विंटल है। चना की खेती मुख्य रूप से रबी सीजन में होती है। जानकारों का कहना है कि चना के दाम में यह तेजी अस्थायी है क्योंकि रबी सीजन 2022-23 में चना का रिकॉर्ड 135.43 लाख टन उत्पादन हुआ है। इसके अलावा नेफेड के पास 37.50 लाख टन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। नेफेड ने इस साल 23.50 लाख टन चना की खरीद की है, जबकि पिछले स्टॉक का 14 लाख टन बचा हुआ है।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/national/moong-price-reached-rs-10-thousand-per-quintal-gram-and-tur-also-increased.html" title="मूंग के भाव में उछाल" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः&nbsp;मूंग का भाव 10 हजार रुपये क्विंटल पर पहुंचा, चना और अरहर भी हुए तेज</strong></a></p>
<p>दालों की घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए नेफेड ने अपने स्टॉक से 10 लाख टन चना बाजार में उतारने की घोषणा की है और इसके लिए बोलियां भी मंगवानी शुरू कर दी है। इसके अलावा नेफेड भारत दाल के नाम से 60 रुपये प्रति किलो पर चना दाल की खुदरा बिक्री कर रहा है। नेफेड, एनसीसीएफ और सफल के स्टोरों पर इसकी बिक्री की जा रही है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चना भी खा रहा ताव, थोक भाव 6500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बारिश ने अगस्त में तरसाया, सितंबर में हालात नहीं सुधरे तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा ज्यादा असर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rain-caused-havoc-in-august-if-conditions-do-not-change-in-september-production-of-kharif-crops-will-be-affected.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 05 Sep 2023 15:13:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rain-caused-havoc-in-august-if-conditions-do-not-change-in-september-production-of-kharif-crops-will-be-affected.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>धान और मोटे अनाजों की बुवाई में वृद्धि की वजह से खरीफ फसलों की कुल बुवाई के रकबे में बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 सितंबर तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई पिछले साल के 1073.22 लाख हेक्टेयर के मुकाबले बढ़कर 1077.82 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गई है। इसकी वजह से चालू खरीफ सीजन में बंपर पैदावार की संभावना जताई जा रही थी। मगर अल-नीनो के मजबूत होने से अगस्त में 120 साल बाद सबसे कम बारिश होने और तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की वजह से इस उम्मीद पर पानी फिरता नजर आने लगा है। इसका असर खरीफ के साथ-साथ रबी सीजन की फसलों पर भी पड़ने की आशंका जताई जाने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त में सूखे जैसे हालात की वजह से खरीफ के उत्पादन पर 15-20 फीसदी असर पड़ सकता है, खासकर दलहन और तिलहन फसलों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>भारत मौसम विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2023 में सामान्य से 36 फीसदी कम बारिश हुई है। जबकि मानसून की कुल बारिश 11 फीसदी कम रही है। हालांकि, आईएमडी ने सितंबर में सामान्य बारिश की भविष्यवाणी की है लेकिन इस महीने का पहला हफ्ता बीतने वाला है और हालात अगस्त जैसे ही हैं। 15 सितंबर के बाद से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की शुरुआत हो जाती है।</p>
<p>नेशनल रेनफेड डेवलपमेंट अथॉरिटी के पूर्व चेयरमैन और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जनरल, नेचुलर रिसोर्स मैनेजमेंट डॉ. जे.एस. सामरा&nbsp;ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि इस साल दो तरह के हालात बने हैं। एक तरफ, राजस्थान और गुजरात के उन इलाकों में मानसून से पहले और मानसून के दौरान बहुत अच्छी बारिश हुई है जिन्हें कम बारिश वाला क्षेत्र कहा जाता है। इससे वहां बाजरा और अन्य मोटे अनाजों की बुवाई में वृद्धि हुई। मगर अब ताजा हालात यह है कि अगस्त में बारिश की बहुत ज्यादा कमी की वजह से सूखे जैसे हालात बन गए हैं। इससे पैदावार प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। जून-जुलाई में ज्यादा बारिश की वजह से इन इलाकों को बुवाई में जो फायदा मिला अगर सितंबर में भी हालात अगस्त जैसे ही रहे या फिर सामान्य से कम बारिश हुई तो पैदावार में वह फायदा नहीं मिलेगा। इससे राजस्थान में दलहन फसलों पर ज्यादा असर पड़ सकता है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि शेष भारत के वो इलाके जहां पहले ज्यादा बारिश होती थी और बाढ़ आती थी वहां इस साल सूखे की स्थिति है, खासकर बिहार, झारखंड, बंगाल, ओडिशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के क्षेत्र में। अब बारिश की संभावना बहुत ही कम है। इन इलाकों में धान सहित दलहन और तिलहन फसलों के उत्पादन पर असर पड़ेगा। दक्षिण-पश्चिम मानसून के द्वार केरल में इस साल पूरे देश के मुकाबले सबसे कम बारिश हुई है। वहां मसालों के उत्पादन पर असर पड़ेगा। कुल मिलाकर खरीफ के उत्पादन पर 15-20 फीसदी असर पड़ने की संभावना है।</p>
<p>धान की फसल पर सामान्य से कम बारिश का क्या असर पड़ेगा, इस बारे में डॉ. जे एस सामरा कहते हैं कि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य जहां सिंचाई की बेहतर सुविधा है वहां बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा लेकिन बारिश पर निर्भर राज्यों में निश्चित तौर पर उत्पादन प्रभावित होगा। इस इलाके में इस बार सामान्य से ज्यादा बारिश की वजह से डैम और जलाशयों में पानी भी ज्यादा है इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है। मगर जिन राज्यों में बारिश कम हुई है वहां के जलाशयों में भी पानी कम है जिससे सिंचाई प्रभावित होगी।</p>
<p>मानसून की बारिश में कमी का देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा, इस सवाल के जवाब में जेएनयूके पूर्व प्रोफेसर डॉ. अरूण कुमार ने <strong>रूरल वॉयस</strong> से कहा कि कृषि उत्पादन घटने का सबसे पहला असर दामों पर पड़ेगा और महंगाई बढ़ेगी। दामों का असर खपत पर पड़ेगा और खपत का असर एक तरफ गरीबी पर और दूसरी तरफ इंडस्ट्री पर पड़ेगा। मांग कम होने से इंडस्ट्री का उत्पादन घटेगा। यह तो सामान्य स्थिति है मगर दूसरी तरफ स्थिति यह है कि 1989 से पहले जब सूखा पड़ता था तो कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर में गिरावट आती थी जिसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता था और अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर घट जाती थी। लेकिन 1989-90 के बाद से सेवा क्षेत्र में काफी वृद्धि हुई है। कुल जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 55 फीसदी और कृषि क्षेत्र की करीब 18 फीसदी है। ऐसे में कृषि क्षेत्र में गिरावट आने के बावजूद पूरी अर्थव्यवस्था पर इसका बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ता है लेकिन इस क्षेत्र से जुड़े लोगों की आमदनी पर असर जरूर पड़ता है। कृषि क्षेत्र से अभी भी सबसे ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं, जबकि सेवा क्षेत्र कुल रोजगार का एक चौथाई रोजगार देता है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बारिश ने अगस्त में तरसाया, सितंबर में हालात नहीं सुधरे तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा ज्यादा असर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आईसीएआर का बेयर से एमओयू, फसलों के संसाधन कुशल और जलवायु लचीला समाधान विकसित करने को हुआ करार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/icar-bayer-ink-mou-to-develop-resource-efficient-climate-resilient-solutions-for-crops.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 04 Sep 2023 18:29:05 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/icar-bayer-ink-mou-to-develop-resource-efficient-climate-resilient-solutions-for-crops.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और बेयर क्रॉप साइंस ने फसलों, किस्मों, फसल सुरक्षा, खरपतवार और मशीनीकरण के लिए संसाधन कुशल एवं जलवायु लचीला समाधान विकसित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस करार के तहत किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि इनपुट और सलाहकार सेवाएं प्रदान करके कृषि स्थिरता कार्यक्रम प्रयासों पर एक साथ काम करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।</p>
<p>बेयर के एक बयान में कहा गया है कि इस साझेदारी का उद्देश्य फसलों में संसाधन-कुशल कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देना, छोटे किसानों को कृषि संबंधी सलाह के साथ सशक्त बनाना और कार्बन क्रेडिट बाजार विकसित करना है। साथ ही संयुक्त रिसर्च के माध्यम से सटीक कृषि पद्धतियों को विकसित करना भी है। आईसीएआर के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञता का लाभ उठाकर व्यापक किसान आधार तक पहुंच को मजबूत करेंगे।</p>
<p>दोनों संस्थानों के बीच हुई यह साझेदारी धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) जैसी कुशल कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए काम करेगी। साथ ही बेयर पहचान किए गए क्लस्टर में जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रमों, इनपुट उपलब्धता और मशीनीकरण समाधानों के माध्यम से केवीके कृषि-उद्यमियों की मदद करेगी।</p>
<p>आईसीएआर और बेयर छोटे किसानों को अधिक पैदावार प्राप्त करने, जल-कुशल प्रथाओं को अपनाने और बेहतर बाजार संबंधों के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर प्रदान करने के लिए सशक्त बनाने की दिशा में काम करेंगे।</p>
<p>डेयर सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने संसाधन-कुशल प्रौद्योगिकी विकास और प्रसार के लिए अनुसंधान और विस्तार में निजी भागीदारों के सहयोग की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि केवीके पहचान किए गए मुख्य क्षेत्रों में विकसित विशिष्ट कार्य योजनाओं के साथ-साथ विभिन्न कृषि-पारिस्थितिकी में इन प्रौद्योगिकियों का आकलन और प्रचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।</p>
<p>बेयर क्रॉप साइंस बिजनेस के कंट्री डिविजनल हेड (भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका) साइमन थॉर्स्टन विबुश ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खाद्य और पोषण सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने किसानों की जरूरतों के मुताबिक भविष्य के लिए तैयार<span>, </span>डिजिटल रूप से सक्षम और टिकाऊ पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता के बारे में कहा कि यह साझेदारी आर्थिक सफलता सुनिश्चित करने के लिए, खासकर चावल और बागवानी उत्पादों के सुधार का कृषि मॉडल विकसित करने पर केंद्रित है।</p>
<p>इस एमओयू पर आईसीएआर के उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. उधम सिंह गौतम और विबुश ने हस्ताक्षर किए। क्षमता निर्माण और विस्तार गतिविधियों पर आईसीएआर के बागवानी संस्थान और बेयर के बीच चल रहे सहयोग के परिणामों में सुरक्षित फसल सुरक्षा इनपुट और ड्रोन जैसे सटीक कृषि उपकरण शामिल हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आईसीएआर का बेयर से एमओयू, फसलों के संसाधन कुशल और जलवायु लचीला समाधान विकसित करने को हुआ करार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मूंग का भाव 10 हजार रुपये क्विंटल पर पहुंचा, चना और अरहर भी हुए तेज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/moong-price-reached-rs-10-thousand-per-quintal-gram-and-tur-also-increased.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 04 Sep 2023 17:01:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/moong-price-reached-rs-10-thousand-per-quintal-gram-and-tur-also-increased.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दलहन फसलों की बुवाई में भारी कमी की वजह से उत्पादन घटने की आशंका पहले से जताई जा रही थी, रही-सही कसर अगस्त में मानसून की बारिश के सामान्य से 30 फीसदी से ज्यादा कम रहने ने पूरी कर दी। इसकी वजह से दालों के भाव में तेजी का दौर शुरू हो गया है। कृषि उपज मंडियों में मूंग का भाव बढ़कर जहां 10,000 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, वहीं चना 8,000 रुपये और अरहर 16,000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को पार कर गया है।</p>
<p>कृषि उपज मंडियों में मूंग की नई फसल की आवक शुरू हो गई है। राजस्थान के नागौर जिले की मेड़ता मंडी में 2 सितंबर को मूंग का भाव 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। नागौर कृषि उपज मंडी में भी भाव 9,775 रुपये पर पहुंच गया। करीब आठ साल बाद मूंग के भाव ने 9,000 रुपये के स्तर को पार किया है। खरीफ मार्केटिंग सीजन 2023-24 के लिए सरकार ने मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाकर 8,558 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है जो पिछले साल 7,755 रुपये प्रति क्विंटल था। मूंग के भाव में तेजी की वजह अगस्त में कम बारिश से फसल का खराब होना है। अगस्त में देशभर में मानसून की बारिश सामान्य से करीब 33 फीसदी कम हुई है। पिछले कई दशकों में अगस्त में सबसे कम बारिश हुई है।</p>
<p>राजस्थान भी इससे अछूता नहीं है। ज्यादा तापमान की वजह से मूंग की फसल जल गई है। एक अनुमान के मुताबिक, राजस्थान में करीब 40-50 फीसदी फसल ज्यादा गर्मी की वजह से खराब हो गई है। मूंग की फसल 50-60 दिन की छोटी अवधि में तैयार हो जाती है और संवेदनशील होती है। यह न तो बहुत ज्यादा गर्मी झेल पाती है और न ही बहुत ज्यादा बारिश। यही वजह है कि अगस्त में बारिश काफी कम होने का असर इसके उत्पादन पर पड़ा है।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/latest-news/centre-issues-advisory-for-mandatory-stock-disclosure-of-masur-with-immediate-effect.html" title="मसूर स्टॉक" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः&nbsp;मसूर के स्टॉक की नियमित जानकारी देना हुआ अनिवार्य, दालों के बढ़ते दाम थामने को सरकार ने उठाया एक और कदम &nbsp;</strong></a></p>
<p>नागौर में सबसे अच्छी गुणवत्ता वाले मूंग का उत्पादन होता है। नागौरी मूंग की चमक की वजह से इसे काफी पसंद किया जाता है। मानसून से ठीक पहले और मानसून की शुरुआत में राजस्थान में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की वजह से मूंग की बुवाई का रकबा बढ़ा था। राज्य में 12 लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में मूंग बोई जाती है जिसमें से अकेले नागौर जिले में इस साल 6.26 लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में मूंग की बुवाई हुई थी। रकबा बढ़ने की वजह से बंपर उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा था लेकिन अगस्त में सूखे जैसे हालात ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उत्पादन घटने का असर अब भाव पर साफ नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में भाव में और तेजी की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2023-24 के लिए मूंग के अलावा अरहर और उड़द के एमएसपी में भी अच्छी बढ़ोतरी की है। उड़द का एमएसपी 350 रुपये बढ़ाकर 6950 रुपये प्रति क्विंटल और अरहर का 400 रुपये बढ़ाकर 7,000 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। इसके बावजूद खरीफ सीजन में दलहन फसलों की कुल बुवाई करीब 11 लाख हेक्टेयर घट गई है।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/national/chana-wholesale-price-reached-rs-6500-per-quintal.html" title="चना में आई तेजी" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः&nbsp;चना भी खा रहा ताव, थोक दाम 6500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा</strong></a></p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के 1 सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, दलहन फसलों की कुल बुवाई का रकबा पिछले साल के 130.13 लाख हेक्टेयर से घटकर 119.09 लाख हेक्टेयर रह गया है। मूंग की बुवाई में 2.59 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। यह पिछले साल के 33.57 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 30.98 लाख हेक्टेयर रही है। इसी तरह, उड़द की बुवाई का क्षेत्रफल 4.97 लाख हेक्टेयर कम होकर 31.68 लाख हेक्टेयर रह गया है। पिछले साल 36.65 लाख हेक्टेयर में उड़द की बुवाई हुई थी। अरहर की बुवाई का रकबा भी 45.27 लाख हेक्टेयर से घटकर 42.66 लाख हेक्टेयर पर आ गया है।&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मूंग का भाव 10 हजार रुपये क्विंटल पर पहुंचा, चना और अरहर भी हुए तेज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खेती में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम करने, किसानों की आय बढ़ाने को नज इंस्टीट्यूट ने तैयार की एग्री&amp;#45;इकिगई आधारित रूपरेखा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/agri-ikigai-to-mitigate-climate-change-effects-increase-farmers-income.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 02 Sep 2023 14:07:38 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/agri-ikigai-to-mitigate-climate-change-effects-increase-farmers-income.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खेती में जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए एग्री-इकिगई के तहत 13 प्रमुख कार्य बिंदुओं की पहचान की गई है। इनमें धान की सीधी बुवाई, बीजों का उपचार, फसल चक्र आदि शामिल हैं। इकिगई एक जापानी तकनीक है जिसमें उन चीजों को करना बताया जाता है जिससे खुशी, मकसद और योगदान की भावना आती है।</p>
<p>द नज इंस्टीट्यूट ने सभी हितधारकों - किसानों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण को फायदा पहुंचाने के मकसद से भारत में कृषि के लिए इकिगई पर आधारित एक रूपरेखा तैयार की है। 70 से अधिक संगठनों से बात करने के बाद, जिसमें निजी कंपनियां और सिविल सोसायटी &nbsp;शामिल हैं, एग्री-इकिगई की रिपोर्ट में 13 प्रमुख कार्य बिंदु सामने आए हैं। किसानों को अधिक आय और उपभोक्ताओं को बेहतर भोजन प्राप्त करने में मदद करते हुए जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों को कम करने के लिए इन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।</p>
<p>इन 13 कार्य बिंदुओं में धान की सीधी बुवाई, बीजों का उपचार, जैव-उत्तेजक, बड़े खेत वाले तालाब (गैर-प्लास्टिक), एकीकृत कीट प्रबंधन, फसल चक्र और शून्य जुताई शामिल हैं। ट्रांसफॉर्मिंग एग्रीकल्चर फॉर स्मॉलहोल्डर फार्मर्स (टीएएसएफ) कार्यक्रम द्वारा तैयार की गई संस्थान की इस रिपोर्ट का लक्ष्य "वित्तीय और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ तरीके से" एक करोड़ छोटे किसानों की आमदनी को दोगुना करना और आमदनी के उतार-चढ़ाव को कम करना है। इस अवधारणा को हितधारकों तक पहुंचा कर जाकर नए हस्तक्षेप कारोबार मॉडल की पहचान और विकास करने की संस्थान की इच्छा है।</p>
<p>द नज इंस्टीट्यूट में कृषि प्रैक्टिस का नेतृत्व करने वाले रवि त्रिवेदी कहते हैं, "देश के कुल किसानों में छोटे किसानों की हिस्सेदारी 27 फीसदी हैं और वे 25 फीसदी कृषि योग्य भूमि पर खेती करते हैं। उन्हें अपनी आमदनी बढ़ाने में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इस सूची में गैर-वैज्ञानिक प्रथाओं का इस्तेमाल, इनपुट और 'श्रम की ज्यादा लागत और अच्छी बाजार पहुंच की कमी शामिल है।''</p>
<p>रिपोर्ट में बताए गए कार्य बिंदुओं का परीक्षण करने के लिए संस्थान पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में कुछ पायलट परीक्षण कर रहा है। उन्होंने कहा, "हम धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) के लाभों का अध्ययन करने के लिए लगभग 300 किसानों के साथ काम कर रहे हैं और अध्ययन के अंत में एक रिपोर्ट पेश करेंगे।" डीएसआर धान रोपाई का एक वैकल्पिक तरीका है जिसमें कम पानी का इस्तेमाल होता है और फसल चक्र कम होता है क्योंकि इसमें धान के पौध उगाने की आवश्यकता नहीं होती है। खरपतवार के उचित नियंत्रण से यह उत्सर्जन को काफी कम कर सकता है और श्रम की कमी को दूर कर सकता है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि "मीथेन उत्सर्जन ग्लोबल वार्मिंग में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले गैसों में से एक है। डीएसआर इन उत्सर्जन में कमी लाता है। साथ ही डीएसआर 25 फीसदी तक पानी बचाता है क्योंकि धान की बुवाई के लिए खेतों में बाढ़ वाली सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है। इसके अलावा यह 27 फीसदी तक ऊर्जा (डीजल की खपत) बचा सकता है क्योंकि इसमें खेत की तैयारी, पौध तैयार करने और खेत में लबालब पानी की आवश्यकता नहीं होती है।''</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खेती में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम करने, किसानों की आय बढ़ाने को नज इंस्टीट्यूट ने तैयार की एग्री-इकिगई आधारित रूपरेखा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[धान का रकबा 4% बढ़ा, दालों का 8% घटा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/paddy-acreage-rises-nearly-4-pc-so-far-this-kharif-season-pulses-acreage-falls-8-pc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 01 Sep 2023 18:19:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/paddy-acreage-rises-nearly-4-pc-so-far-this-kharif-season-pulses-acreage-falls-8-pc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू खरीफ सीजन में अब तक धान की बुवाई का रकबा लगभग 4 फीसदी बढ़कर 398.08 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जबकि दालों का रकबा 8 फीसदी घट गया है। कृषि मंत्रालय के 1 सितंबर तक के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल की समान अवधि में धान का रकबा 383.79 लाख हेक्टेयर रहा था।</p>
<p>ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में धान के बुवाई रकबे में 5 लाख हेक्टेयर, छत्तीसगढ़ में 4.66 लाख हेक्टेयर, झारखंड में 1.82 लाख हेक्टेयर और पश्चिम बंगाल में 1.56 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। जबकि मध्य प्रदेश में 1.48 लाख हेक्टेयर, हरियाणा में 1.29 हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश में 1.21 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 33,000 हेक्टेयर और पंजाब में 31,000 हेक्टेयर ज्यादा क्षेत्र में इस साल धान की बुवाई हुई है। कर्नाटक में धान का रकबा 1.67 लाख हेक्टेयर और आंध्र प्रदेश में 1.21 लाख हेक्टेयर कम रहा है।</p>
<p>शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दालों की बुवाई का क्षेत्रफल एक साल पहले की अवधि में 130.13 लाख हेक्टेयर था जो इस साल 8 प्रतिशत घटकर 119.09 लाख हेक्टेयर रह गया है। मोटे अनाज का रकबा एक साल पहले के 179.13 लाख से मामूली बढ़कर 181.06 लाख हो गया है। तिलहनों फसलों की बुवाई भी 191.91 लाख हेक्टेयर के मुकाबले अब तक थोड़ी कम होकर 190.11 लाख हेक्टेयर रह गई है।</p>
<p>मूंगफली का क्षेत्रफल 45 लाख हेक्टेयर से घटकर 43.37 लाख हेक्टेयर और सोयाबीन का रकबा 123.91 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 125.13 लाख हेक्टेयर हो गया है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, कपास की बुवाई का क्षेत्र 125.63 लाख हेक्टेयर से घटकर 122.99 हेक्टेयर पर आ गया है। हालांकि, गन्ने का क्षेत्रफल एक साल पहले की अवधि के 55.65 लाख हेक्टेयर से अधिक 59.91 लाख हेक्टेयर रहा है। चालू खरीफ सीजन में बुवाई का कुल क्षेत्रफल 1,073.22 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1,077.82 लाख हेक्टेयर हो गया है।</p>
<p>1901 के बाद से देश में इस साल अगस्त का महीना सबसे सूखा रहा है। अगस्त में कम बारिश के बावजूद सितंबर के पहले हफ्ते के अंत तक दक्षिण-पश्चिम मानसून के फिर से सक्रिय होने की उम्मीद है जिससे देश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में बारिश होने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा है कि सितंबर में दीर्घ अवधि (एलपीए) औसत के 91-109 फीसदी के बीच सामान्य वर्षा होने की संभावना है। हालांकि, महापात्र ने कहा है कि भले ही सितंबर में बारिश अधिक रहे, लेकिन जून-सितंबर में मानसून की बारिश का औसत सामान्य से कम रहने की उम्मीद है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ धान का रकबा 4% बढ़ा, दालों का 8% घटा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गैर&amp;#45;बासमती सफेद चावल निर्यात की 30 अक्टूबर तक सशर्त छूट, भूटान, मॉरीशस और सिंगापुर को 1.43 टन निर्यात की विशेष मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/conditional-exemption-for-export-of-non-basmati-white-rice-till-october-30-special-approval-for-export-of-1-lakh-43-thousand-tonnes-to-bhutan-mauritius-and-singapore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 01 Sep 2023 16:24:37 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/conditional-exemption-for-export-of-non-basmati-white-rice-till-october-30-special-approval-for-export-of-1-lakh-43-thousand-tonnes-to-bhutan-mauritius-and-singapore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चावल निर्यात पर प्रतिबंध के बावजूद केंद्र सरकार ने भूटान, मॉरीशस और सिंगापुर को 1.43 लाख टन गैर-बासमती सफेद चावल निर्यात की विशेष मंजूरी दी है। इन तीनों देशों को यह निर्यात नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीईएल) के जरिये की जाएगी। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। ताजा अधिसूचना में निर्यातकों को 30 अक्टूबर तक गैर-बासमती सफेद चावल का निर्यात करने की सशर्त छूट भी दी गई है।</p>
<p>डीजीएफटी की 29 अगस्त की अधिसूचना में कहा गया है कि गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर 20 जुलाई को लगाई गई पाबंदी से पहले जिन निर्यातकों ने निर्यात शुल्क जमा कर दिया था या अपनी निर्यात खेप सीमा-शुल्क विभाग को सौंप दी थी और उसे निर्यात के लिए सीमा-शुल्क प्रणाली में दर्ज कर लिया गया था तो फिर उस खेप का निर्यात किया जा सकता है। डीजीएफटी ने इसके लिए 20 जुलाई की रात 9 बजकर 57 मिनट तक की समय सीमा तय की है यानी इस समय तक निर्यात शुल्क जमा करने वाले निर्यातकों को ही यह छूट दी गई है। अधिसूचना में कहा गया है कि यह छूट 30 अक्टूबर तक के लिए ही दी जा रही है यानी इस समय तक निर्यात की खेप को भेजना जरूरी होगा।</p>
<p>गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर जब पाबंदी लगाई गई थी तो कहा गया था कि विभिन्न देशों की खाद्य सुरक्षा जरूरतों और उन देशों की सरकारों द्वारा अनुरोध किए जाने सहित कुछ विशेष परिस्थितियों में सरकार द्वारा निर्यात की मंजूरी दी जाएगी। इसी के तहत भूटान, मॉरीशस और सिंगापुर को चावल निर्यात की मंजूरी दी गई है। अधिसूचना में बताया गया है कि भूटान को 79 हजार टन, मॉरीशस को 14 हजार टन और सिंगापुर को 50 हजार टन गैर-बासमती सफेद चावल का निर्यात किया जाएगा।</p>
<p>चावल की घरेलू कीमत में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने 20 जुलाई को गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर रोक लगाने की घोषणा की थी। इसके बाद 26 अगस्त को गैर-बासमती सेला (पारबॉयल्ड) चावल के निर्यात पर 20 फीसदी शुल्क लगाने और बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य 1200 डॉलर प्रति टन करने का फैसला किया था।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64ec5de8f211a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गैर-बासमती सफेद चावल निर्यात की 30 अक्टूबर तक सशर्त छूट, भूटान, मॉरीशस और सिंगापुर को 1.43 टन निर्यात की विशेष मंजूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारतीय अर्थव्यवस्था अप्रैल&amp;#45;जून में 7.8% की रफ्तार से सबसे तेजी से दौड़ी, कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.5% रही]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/gdp-grows-at-7-point-8-pc-in-apr-jun-agri-gva-grows-at-3-point-5-pc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 01 Sep 2023 12:12:48 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/gdp-grows-at-7-point-8-pc-in-apr-jun-agri-gva-grows-at-3-point-5-pc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि और वित्तीय क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन के कारण चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की विकास दर 7.8 फीसदी रही है। पिछली चार तिमाहियों में यह दर सबसे ज्यादा है लेकिन वित्त वर्ष 2022-23 की इसी तिमाही के मुकाबले कम है। अप्रैल-जून 2022 में अर्थव्यवस्था की विकास दर 13.1 फीसदी रही थी। इस तिमाही में भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली रही है। इस दौरान अमेरिका, चीन, जापान जैसे देश भारत से पीछे रहे हैं। &nbsp;</p>
<p>राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से गुरुवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 की अप्रैल-जून तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.5 फीसदी रही है जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 2.4 फीसदी रही थी। हालांकि, जनवरी-मार्च 2023 के मुकाबले यह वृद्धि दर कम है क्योंकि तब कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर में 5.5 फीसदी की तेजी देखी गई थी। आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा क्योंकि चीन ने अप्रैल-जून 2023 में 6.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है। 2022-23 की जनवरी-मार्च तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.1 फीसदी और अक्टूबर-दिसंबर में 4.5 फीसदी रही थी।</p>
<p>एनएसओ ने अपने बयान में कहा है कि वास्तविक जीडीपी या स्थिर (2011-12) कीमतों पर 2023-24 की पहली तिमाही में जीडीपी 40.37 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचने का अनुमान है, जबकि 2022-23 की पहली तिमाही में यह 37.44 लाख करोड़ रुपये थी, जो 7.8 फीसदी की वृद्धि दर्शाती है। जबकि 2023-24 की पहली तिमाही में मौजूदा कीमतों पर व्यवहारिक जीडीपी 70.67 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया है, जो एक साल पहले की इसी अवधि में 65.42 लाख करोड़ रुपये था। यह 8 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है। 2022-23 की पहली तिमाही में यह 27.7 फीसदी थी।</p>
<p>इस बीच, मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि महंगाई को लेकर चिंता का कोई कारण नहीं है क्योंकि सरकार और आरबीआई पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के लिए उपाय कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनाजों का नया स्टॉक आने और सरकार के कदमों से खाद्य महंगाई कम होने की संभावना है। अगस्त में कम बारिश के असर पर नजर रखनी होगी।</p>
<p>ताजा आंकड़ों के अनुसार, 'खनन और उत्खनन' क्षेत्र की वृद्धि दर घटकर 5.8 फीसदी पर पहुंच गई जो एक साल पहले की समान तिमाही में 9.5 फीसदी थी। इसी तरह, बिजली, गैस, जल आपूर्ति और अन्य उपयोगिता सेवाओं' की वृद्धि दर 14.9 फीसदी से गिरकर 2.9 फीसदी और 'निर्माण' क्षेत्र की 16 फीसदी मुकाबले 7.9 फीसदी रह गई।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/05/image_750x500_62964a3a632ef.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारतीय अर्थव्यवस्था अप्रैल-जून में 7.8% की रफ्तार से सबसे तेजी से दौड़ी, कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.5% रही ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जीएम सरसों पर सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर तक टाली केंद्र की याचिका, कहा&amp;#45; पर्यावरण नुकसान की कैसे हो सकती है भरपाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/sc-on-gm-mustard-environmental-harm-cannot-be-undone-defers-hearing-on-centre-plea-for-withdrawal-of-undertaking.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 30 Aug 2023 14:16:55 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/sc-on-gm-mustard-environmental-harm-cannot-be-undone-defers-hearing-on-centre-plea-for-withdrawal-of-undertaking.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस याचिका पर 26 सितंबर तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी है जिसमें आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) सरसों की व्यावसायिक खेती पर जोर नहीं देने के बारे में कोर्ट से किए गए मौखिक वादे को वापस लेने की मांग की गई है। इस मामले पर 29 अगस्त को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने कहा कि पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती है।</p>
<p>न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने केंद्र की इस याचिका पर सुनवाई टाल दी। याचिका में कहा गया था कि या तो इसे नवंबर 2022 में केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट से किए गए मौखिक वादे से मुक्त कर दिया जाए या वैकल्पिक रूप से सरकार को इस सीजन में कुछ जगहों पर जीएम सरसों बोने की अनुमति दी जाए। यदि अदालत हमें अपना वादा वापस लेने की अनुमति देती है, तो हम शुरू में प्रस्तावित दस जगहों पर जीएम सरसों के बीज बोने और रिसर्च करने के लिए आगे बढ़ सकते हैं। याचिका में कोर्ट से अनुरोध किया गया कि अदालत को हमारी रिसर्च रिपोर्टों का लाभ भी इस मामले का फैसला करते समय मिलेगा।</p>
<p>केंद्र सरकार की ओर से पेश हुई अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत से कहा, "वैकल्पिक रूप से कम से कम सरकार को आठ जगहों पर बीज बोने और अदालत के समक्ष रिपोर्ट पेश करने की अनुमति दी जाए।" उन्होंने कहा कि सरकार एक और बुवाई का मौसम खोना नहीं चाहती है। उनकी इस दलील पर अदालत ने उन्हें याद दिलाया कि पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई करना कितना मुश्किल है। पीठ ने कहा कि एक साल आगे या पीछे होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। यह केवल एक सीजन है। अगले साल एक और सीजन आएगा लेकिन पर्यावरण को जो नुकसान पहुंचेगा उसकी भरपाई कैसे की जाएगी। &nbsp;पीठ ने याचिका को 26 सितंबर तक के लिए टालते हुए कहा कि हमें आवेदन पर सुनवाई करनी होगी और उस पर विचार करना होगा।</p>
<p>अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में उन परिस्थितियों का उल्लेख किया जिसके तहत केंद्र की ओर से कोर्ट को मौखिक वचन दिया गया था कि इस मामले का फैसला आने तक केंद्र सरकार कोई कदम नहीं उठाएगी। तब शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह इस मामले पर जल्दबाजी में कोई कदम न उठाए क्योंकि मामले को नवंबर 2022 में अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना था। उस समय 10 में से 8 जगहों पर जीएम सरसों के बीज पहले ही बोए जा चुके थे और बुवाई का अगला सीजन एक साल दूर था। इन परिस्थितियों में कोर्ट से मौखिक वादा किया गया था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हम शोध के अंतिम चरण में हैं। यह कोई व्यावसायिक रिलीज नहीं है, बल्कि एक पर्यावरणीय रिलीज है। पीठ ने पूछा कि अगर केंद्र सरकार को अपने वचन से मुक्त कर दिया जाता है कि वह जीएम सरसों की व्यावसायिक खेती के साथ आगे नहीं बढ़ेगी तो सरकार क्या फैसला करेगी। पीठ ने सुनवाई स्थगित करते हुए कहा कि तीन हफ्तों में कुछ भी नहीं बदलेगा।</p>
<p>एक्टिविस्ट अरुणा रोड्रिग्स की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने केंद्र सरकार की दलीलों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जीएम सरसों के पर्यावरणीय उत्सर्जन से गैर-जीएम फसलें प्रदूषित हो सकती हैं। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने मौखिक वचन को वापस लेने की मांग करने वाली केंद्र की याचिका पर एनजीओ 'जीन कैंपेन' और अन्य से जवाब मांगा था। जीन कैंपेन की ओर से पेश वकील अपर्णा भट्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय मांगा।</p>
<p>3 नवंबर, 2022 को शीर्ष अदालत ने व्यावसायिक खेती के लिए जीएम सरसों को मंजूरी देने के जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (जीईएसी) के फैसले पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। अदालत ने सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि इस मुद्दे पर कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई होने तक "कोई त्वरित कार्रवाई" नहीं की जाए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जीएम सरसों पर सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर तक टाली केंद्र की याचिका, कहा- पर्यावरण नुकसान की कैसे हो सकती है भरपाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एलपीजी सिलेंडर हुआ 200 रुपये सस्ता, पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार का बड़ा दांव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/lpg-cylinder-becomes-cheaper-by-rs-200-modi-governments-big-bet-before-assembly-elections-of-five-states.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 29 Aug 2023 17:58:19 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/lpg-cylinder-becomes-cheaper-by-rs-200-modi-governments-big-bet-before-assembly-elections-of-five-states.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पांच राज्यों में नवंबर-दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले केंद्र सरकार ने बड़ा दांव खेलते हुए रसोई गैस सिलेंडर के दाम में 200 रुपये कटौती करने की घोषणा की है। नई दर बुधवार से प्रभावी होगी और इसका फायदा 33 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों को मिलेगा। माना जा रहा है कि इन राज्यों में कांग्रेस द्वारा सस्ता सिलेंडर देने के वादे की काट के तौर पर केंद्र सरकार ने यह फैसला किया है। मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>दिल्ली में अभी 14.2 किलो वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 1,103 रुपये है जो बुधवार से 903 रुपये हो जाएगी। कोलकाता में कीमत 1,129 रुपये से घटकर 929 रुपये, मुंबई में 1,102 रुपये की जगह 902 रुपये, चेन्नई में 1,118 रुपये की बजाय 918 रुपये और पटना में 1,200 रुपये से घटकर कीमत 1,000 रुपये हो जाएगा। उज्जवला योजना के लाभार्थियों को अब 703 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर मिलेगा। इससे पहले मई में दो बार बढ़ोतरी के बाद जुलाई में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 50 रुपये बढ़ाई गई थी।</p>
<p>केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैबिनेट द्वारा एलपीजी सिलेंडर के दाम घटाने के फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस सिलेंडर के दाम में 200 रुपये कटौती करने का फैसला किया गया है। उज्जवला योजना के लाभार्थियों को अब 400 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी मिलेगी। इस योजना के तहत लाभार्थियों को पहले से 200 रुपये की सब्सिडी मिलती रही है। उन्होंने बताया कि उज्ज्वला योजना के तहत 75 लाख नए एलपीजी कनेक्शन भी मुफ्त में दिए जाएंगे। फिलहाल इस योजना के 9.6 करोड़ लाभार्थी हैं जो बढ़कर 10.35 करोड़ हो जाएंगे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64ede4468d839.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एलपीजी सिलेंडर हुआ 200 रुपये सस्ता, पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार का बड़ा दांव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64ede4468d839.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वायु प्रदूषण ने 5.3 वर्ष कम की भारतीयों की जीवन प्रत्याशा, दिल्ली&amp;#45;एनसीआर में यह 11.9 वर्ष कम हुई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/air-pollution-reduces-life-expectancy-of-indians-in-delhi-ncr-it-is-reduced-by-almost-12-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 29 Aug 2023 09:30:26 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/air-pollution-reduces-life-expectancy-of-indians-in-delhi-ncr-it-is-reduced-by-almost-12-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">भारत दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित देश है। वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कणों (पीएम2.5) के कारण भारतीयों की औसत जीवन प्रत्याशा कम हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के 5 &mu;g/m3 के दिशानिर्देश को पूरा करने से जो जीवन प्रत्याशा बनती, उससे यह 5.3 वर्ष कम है। भारत के कुछ क्षेत्रों की स्थिति औसत से भी अधिक खराब है। वायु प्रदूषण के कारण दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में जीवन प्रत्याशा 11.9 वर्ष कम हो गई है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देश को पूरा करने के लिए वैश्विक पीएम2.5 वायु प्रदषूण को स्थायी रूप से कम करने पर औसत मानव जीवन प्रत्याशा में 2.3 वर्ष की वृद्धि होती, या संयुक्त रूप से जीवन के 17.8 अरब वर्ष बचाए जा सकते थे। वैश्विक जीवन प्रत्याशा पर पीएम2.5 का दुष्प्रभाव धूम्रपान से होने वाले नुकसान के बराबर है। साथ ही यह नुकसान शराब और असुरक्षित पानी के उपयोग से होने वाले नुकसान से 3 गुना से अधिक, सड़क दुर्घटनाओं से होने वाले नुकसान से 5 गुना से अधिक और एचआईवी/एड्स से 7 गुना से अधिक नुकसानदेह है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया के चार देश दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में शामिल हैं और यहां </span><span style="font-weight: 400;">दुनिया की लगभग एक चौथाई आबादी रहती है। बांग्लादेश, भारत, नेपाल और पाकिस्तान के एक्यूएलआई आंकड़ों से पता चलता है यदि प्रदषूण का यह स्तर बना रहा, तो यहां के निवासियों की जीवन प्रत्याशा में लगभग 5 वर्ष की कमी की आशंका है। 2013 के बाद से, दुनिया के प्रदूषण में लगभग 59 प्रतिशत वृद्धि अकेले भारत से हुई है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रिपोर्ट में भारत से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि भारत के सभी 1.3 अरब लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां सूक्ष्म कणों (पीएम2.5) से होने वाले वार्षिक औसत प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ दिशानिर्देशों से अधिक है। 67.4 प्रतिशत आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जहां प्रदूषण का स्तर देश के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक 40 &mu;g/m3 से अधिक है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">जीवन प्रत्याशा के संदर्भ में देखा जाए तो कणीय प्रदूषण भारत में मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है, जिससे औसत भारतीय नागरिक की जीवन प्रत्याशा 5.3 वर्ष घट जाती है। इसके विपरीत, हृदय संबंधी बीमारियों से औसत भारतीय की जीवन प्रत्याशा लगभग 4.5 वर्ष कम हो जाती है। बाल और मातृ कुपोषण से जीवन प्रत्याशा 1.8 वर्ष घटती है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">समय के साथ कणीय प्रदूषण में वृद्धि हुई है। 1998 से 2021 तक औसत वार्षिक कणीय प्रदूषण में 67.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे औसत भारतीय नागरिक की जीवन प्रत्याशा 2.3 वर्ष कम हो गई। पूरी दुनिया में 2013 से 2021 तक जितना प्रदूषण बढ़ा है उसमें से भारत का 59.1 प्रतिशत योगदान है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">देश के सबसे प्रदूषित क्षेत्र भारत के उत्तरी मैदानी इलाकों में 52.12 करोड़ लोग रहते हैं जो देश की आबादी का लगभग 38.9 प्रतिशत है। अगर प्रदूषण का वर्तमान स्तर बरकरार रहता है तो जीवन प्रत्याशा में डब्ल्यूएचओ दिशानिर्देश के सापेक्ष औसतन 8 साल और राष्ट्रीय मानक के सापेक्ष औसतन 4.5 साल कम होने का खतरा है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">यदि भारत डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देश के अनुरूप कणीय प्रदूषण कम कर लेता है, तो भारत की राजधानी और सबसे अधिक आबादी वाले शहर दिल्ली के निवासियों की जीवन प्रत्याशा 11.9 वर्ष बढ़ जाएगी। इसी तरह, देश के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले जिले उत्तर 24 परगना के निवासियों की जीवन प्रत्याशा में 5.6 वर्ष की वृद्धि होगी।</span></p>
<p><strong>अब तक उठाई गये कदम</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भारत ने 2019 में प्रदूषण के खिलाफ युद्ध की घोषणा की और नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीए/एनकैप) की शुरूआत कर कणीय प्रदूषण कम करने की अपनी इच्छा प्रदर्शित की। एनकैप का मूल लक्ष्य 2024 तक राष्ट्रीय स्तर पर कणीय प्रदूषण में 2017 के स्तर के मुकाबले 20-30 प्रतिशत तक की कमी लाना था। इसमें शुरुआत में 102 शहरों पर ध्यान केंद्रित किया गया था , जो भारत के राष्ट्रीय वार्षिक पीएम2.5 मानक को पूरा नहीं कर रहे थे। ऐसे शहरों को "नोन-अटेंमेंट सिटीज" (गैर-प्राप्ति शहर) कहा गया।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">2022 में भारत सरकार ने एनकैप के लिए अपने कणीय प्रदूषण कटौती संबंधी नए लक्ष्य की घोषणा की। इसमें कोई राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया लेकिन शहर स्तर पर और बड़े लक्ष्य तय किए गए। नए लक्ष्य के मुताबिक 2025-26 तक, शहरों की विस्तारित संख्या (131) के साथ नोन-अटेंमेंट सिटीज़ में 2017 के स्तर के मुकाबले 40 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। यदि इस संशोधित लक्ष्य को प्राप्त कर लिया जाता है, तो इन शहरों का कुल वार्षिक औसत पीएम2.5 वर्ष 2017 के स्तर से 21.9 &mu;g/m3 कम हो जाएगा। इससे इन चुने हुए 131 शहरों में रहने वाले औसत भारतीय की जीवन प्रत्याशा में 2.1 वर्ष और देश के स्तर पर हरेक औसत भारतीय के जीवन प्रत्याशा में 7.9 महीने की वृद्धि होगी।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64eb32f878d3f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ वायु प्रदूषण ने 5.3 वर्ष कम की भारतीयों की जीवन प्रत्याशा, दिल्ली-एनसीआर में यह 11.9 वर्ष कम हुई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूरिया और डीएपी की वैश्विक कीमतों में 150 डॉलर प्रति टन तक की बढ़ोतरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/global-prices-of-urea-and-dap-increased-by-up-to-150-dollars-per-tonne.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 29 Aug 2023 07:30:33 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/global-prices-of-urea-and-dap-increased-by-up-to-150-dollars-per-tonne.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी का रुख शुरू हो गया है। &nbsp;पिछले करीब एक महीने में यूरिया और डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की कीमतों में 150 डॉलर प्रति टन तक की वृद्धि हो चुकी है। कीमतों में तेजी की वजह ब्राजील द्वारा की गई बड़ी खरीदारी है, वहीं चीन द्वारा डीएपी के निर्यात पर सितंबर के अंत तक रोक लगाना इसकी दूसरी बड़ी वजह है।</p>
<p>उद्योग सूत्रों के मुताबिक 20 जुलाई के आसपास डीएपी की कीमत 430 डॉलर प्रति टन तक गिर गई थी। यह कीमत भारत में पोर्ट तक पहुंचने की लागत सहित थी। इस अवधि के दौरान एक भारतीय कंपनी द्वारा इस कीमत पर 45 हजार टन डीएपी का सौदा किया था। मगर अब कीमत 555 से 560 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है।</p>
<p>वहीं यूरिया की कीमत में भी इसी तरह की तेजी वैश्विक बाजार में देखी गई है। यूरिया की सबसे कम कीमत 240 से 250 डॉलर प्रति टन तक आ गई थी। मगर अब यह कीमत बढ़कर 396 से 399 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। कुछ दिनों के लिए यूरिया की कीमत 425 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई थी लेकिन इस समय यह 400 डॉलर प्रति टन से कम है। वहीं उर्वरक उत्पादन के लिए जरूरी अमोनिया गैस की कीमत भी 260 से 270 डॉलर प्रति टन के स्तर से बढकर 390 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है।</p>
<p>उक्त सूत्र के मुताबिक कीमतों में यह तेजी उर्वरक उद्योग के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है क्योंकि सरकार द्वारा पिछले दिनों अधिकांश विनियंत्रित उर्वरकों पर सब्सिडी में कटौती की गई थी। वैश्विक बाजार में कीमत बढ़ोतरी की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि ब्राजील से उर्वरकों की भारी मांग निकली है। वहीं चीन की सरकार ने डीएपी के निर्यात पर सितंबर के अंत तक रोक लगा दी है। इन दोनों कारकों के चलते कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। भारत चीन से हर साल 15 से 20 लाख टन डीएपी का आयात करता है जबकि करीब 10 लाख टन यूरिया का भी आयात चीन से होता है।</p>
<p>घरेलू स्तर पर उर्वरकों की उपलब्धता के बारे में उन्होंने बताया कि देश में उर्वरकों की उपलब्धता बेहतर है। इस समय डीएपी का स्टॉक पिछले साल के मुकाबले 17 लाख टन अधिक है। हालांकि, आगामी रबी सीजन के लिए भारत को महंगा आयात करना पड़ सकता है।</p>
<p><a href="https://eng.ruralvoice.in/national/urea-dap-prices-rise-up-to-150-dollars-per-tonne-in-the-global-market.html" title="Urea price hike" target="_blank" rel="noopener"><strong>Read in English: Urea, DAP prices rise up to $150 per tonne in the global market</strong></a></p>
<p>दिसंबर 2021 के बाद से वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों में भारी इजाफा हुआ था। उसके बाद फरवरी 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध होने से उर्वरकों की वैश्विक आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई थी। उसी दौरान दुनिया के बड़े उर्वरक निर्यातकों में शुमार चीन ने डीएपी के निर्यात पर रोक लगा दी थी। उसके चलते डीएपी की कीमतें 1000 डॉलर प्रति टन को पार कर गई थी। वहीं यूरिया की कीमतें भी 900 डॉलर प्रति टन को पार कर गई थी। इस कीमत बढ़ोतरी के चलते सरकार को 2022-23 में रिकॉर्ड उर्वरक सब्सिडी देनी पड़ी थी।</p>
<p>डीएपी पर सब्सिडी का स्तर 50 हजार रुपये प्रति टन तक चला गया था। मगर इस साल मार्च से उर्वरकों की कीमतों में गिरावट आनी शुरू हो गई थी जो सरकार के लिए सब्सिडी की बचत का कारण रही। एक बार फिर जिस तरह से वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतें बढ़ रही हैं उसके चलते सरकार का सब्सिडी बोझ बढ़ सकता है। भारत हर साल करीब 70 लाख टन यूरिया का आयात करता है। डीएपी की सालाना करीब 110 लाख टन की खपत होती है जिसमें से 70 लाख टन का आयात होता है और करीब 40 लाख टन डीएपी का आयात देश में होता है लेकिन इसके लिए डीएपी के मुख्य कच्चे माल फॉस्फोरिक एसिड और रॉक फॉस्फेट का आयात करना पड़ता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूरिया और डीएपी की वैश्विक कीमतों में 150 डॉलर प्रति टन तक की बढ़ोतरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि में डिजिटलीकरण अगली बड़ी हरित क्रांति लाएगा: अमिताभ कांत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/digitisation-in-agriculture-will-bring-in-the-next-big-green-revolution-said-amitabh-kant.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 28 Aug 2023 18:39:11 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/digitisation-in-agriculture-will-bring-in-the-next-big-green-revolution-said-amitabh-kant.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि क्षेत्र में डिजिटलीकरण और तकनीकी नवाचारों में हुई प्रगति की सराहना करते हुए भारत के जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने कहा है कि कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने और अगली बड़ी हरित क्रांति लाने में कृषि डिजिटलीकरण की अहम भूमिका होगी। डाटा-संचालित अनुकूल प्रणाली जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकती है। नई दिल्ली में सोमवार को आयोजित जी20 इंडिया एग्री-टेक समिट को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। &nbsp;</p>
<p>शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए अमिताभा कांत ने कहा, &ldquo;कृषि क्षेत्र को डाटा-संचालित, स्मार्ट और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाना इस क्षेत्र में परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें किसानों, खासकर छोटे और सीमांत किसानों के कल्याण को बढ़ाने के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों से स्टार्टअप और जिम्मेदार निवेशकों को शामिल करते हुए खुली पहुंच वाले कृषि डाटा प्लेटफार्मों और उन्हें वैश्विक सार्वजनिक वस्तुओं के रूप में मान्यता देने जैसे पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना शामिल होगा। जी20 के सदस्य देश प्रमुख कृषि उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक होने के नाते एक टिकाऊ और लचीली कृषि खाद्य प्रणाली में परिवर्तन की दिशा में सामूहिक जिम्मेदारी लेने के लिए एक साथ आए हैं।&rdquo;</p>
<p>उन्होंने कहा कि मूल रूप से हमारी महत्वाकांक्षा कृषि, कृषि-खाद्य क्षेत्र को बहुत ही आकर्षक और आकर्षक आधुनिक व्यावसायिक उद्यम में बदलने की होनी चाहिए। किसानों को इस डिजिटल क्रांति के केंद्र में रखकर समावेशी डिजिटल बुनियादी ढांचे तक किफायती पहुंच की सुविधा प्रदान कर और कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने वाले डिजिटल उपकरणों की खोज कर ऐसा करने की आवश्यकता है।</p>
<p>भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में कृषि क्षेत्र में नवाचार, सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया गया। खेती के भविष्य के लिए परिवर्तनकारी समाधान तलाशने के लिए दुनिया भर के विशेषज्ञों और हितधारकों ने इसमें हिस्सा लिया।</p>
<p>कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग, स्थिरता पर जोर देने, &nbsp;नीतियों, तकनीकी प्रगति और किसान-केंद्रित दृष्टिकोणों को शामिल करने के महत्व पर सम्मेलन में जोर दिया गया। सम्मेलन में शामिल हुए विशेषज्ञों ने नीति निर्धारण, टिकाऊ कृषि पद्धतियों, एआई-संचालित कृषि व्यवसाय और किसानों के कल्याण जैसे कई विषयों पर हुई चर्चा में हिस्सा लिया। इस दौरान आयोजित चार पैनल चर्चाओं में कृषि-तकनीक में स्टार्टअप, एआई फर्मों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं सहित अन्य प्रतिभागी शामिल थे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि में डिजिटलीकरण अगली बड़ी हरित क्रांति लाएगा: अमिताभ कांत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बासमती चावल के नाम पर गैर&amp;#45;बासमती सफेद चावल का अवैध निर्यात रोकने को सरकार ने उठाया कदम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/fresh-safeguards-to-prevent-illegal-export-of-white-non-basmati-rice-in-the-garb-of-basmati-rice.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 28 Aug 2023 14:13:55 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/fresh-safeguards-to-prevent-illegal-export-of-white-non-basmati-rice-in-the-garb-of-basmati-rice.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने और देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के तहत चावल के निर्यात को प्रतिबंधित करने के लिए सरकार विभिन्न उपाय कर रही है। इसी के तहत 20 जुलाई, 2023 से गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया।</p>
<p>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि निर्धारित किस्मों पर प्रतिबंध के बावजूद चालू वर्ष के दौरान चावल का निर्यात अधिक रहा है। 17 अगस्त, 2023 तक चावल का कुल निर्यात (टूटे हुए चावल को छोड़कर, जिसका निर्यात पहले से प्रतिबंधित है) पिछले वर्ष की इसी अवधि के 63.7 लाख टन की तुलना में 73.3 लाख टन रहा और इसमें 15.06 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। गैर-बासमती सेला (पारबॉयल्ड) चावल और बासमती चावल के निर्यात में भी तेजी देखी गई है। इन दोनों किस्मों के निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। गैर-बासमती सेला चावल का निर्यात 21.18 फीसदी बढ़कर 32.9 लाख टन पर पहुंच गया जो पिछले वर्ष की इस अवधि &nbsp;में 27.2 लाख टन था। बासमती चावल के निर्यात में 9.35 फीसदी की तेजी आई है। पिछले वर्ष के 17 लाख टन की तुलना में चालू वर्ष के दौरान 18.6 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ है।</p>
<p>बयान के मुताबिक, गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर 9 सितंबर, 2022 से 20 फीसदी का शुल्क लगाया गया था और 20 जुलाई, 2023 से इसे प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसका निर्यात भी 4.36 फीसदी बढ़कर 19.7 लाख टन पर पहुंच गया है जो पिछले वर्ष की इस अवधि में 18.9 लाख टन था। कृषि और किसान कल्याण विभाग के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, रबी सीजन 2022-23 के दौरान चावल का उत्पादन 158.95 लाख टन रहा जो इससे पहले के रबी सीजन 2021-22 की तुलना में 13.84 फीसदी कम है। रबी सीजन 2021-22 में चावल का उत्पादन 184.71 लाख टन रहा था।</p>
<p>एशियाई देशों से खरीदारों की मजबूत मांग, थाईलैंड जैसे कुछ प्रमुख उत्पादक देशों में 2022-23 में उत्पादन में कमी और अल-नीनो की शुरुआत के संभावित प्रतिकूल प्रभाव की आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल की कीमतें पिछले साल से लगातार बढ़ रही हैं। एफएओ चावल मूल्य सूचकांक जुलाई 2023 में 129.7 अंक तक पहुंच गया। यह सितंबर 2011 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर था। पिछले वर्ष के स्तर के मुकाबले इसमें 19.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में भारतीय चावल की कीमतें अभी भी कम है जिसकी वजह से भारतीय चावल की मांग मजबूत रही है। इस वजह से 2021-22 और 2022-23 के दौरान चावल का रिकॉर्ड निर्यात हुआ है।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि सरकार को गैर-बासमती सफेद चावल के गलत वर्गीकरण और अवैध निर्यात के संबंध में विश्वसनीय जमीनी रिपोर्टें मिली हैं। गैर-बासमती सफेद चावल का निर्यात सेला (पारबॉयल्ड) चावल और बासमती चावल के एचएस कोड के तहत करने की जानकारी सरकार को मिली हुई है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) बासमती चावल के निर्यात के नियमन के लिए उत्तरदायी है और इसके लिए पहले से ही एक वेब-आधारित प्रणाली मौजूद है। इसलिए सरकार ने बासमती चावल के नाम पर गैर-बासमती सफेद चावल के संभावित अवैध निर्यात को रोकने के लिए अधिक उपाय शुरू करने के लिए एपीडा को निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं-</p>
<ol>
<li>केवल 1200 अमेरिकी डॉलर प्रति टन और उससे अधिक मूल्य के बासमती निर्यात के लिए अनुबंधों को पंजीकरण-सह-आवंटन प्रमाण पत्र (आरसीएसी) जारी करने के लिए पंजीकृत किया जाना चाहिए।</li>
<li>1200 डॉलर प्रति टन से कम मूल्य वाले निविदाओं को स्थगित रखा जा सकता है और मूल्यों में अंतर और गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात के लिए इस मार्ग के उपयोग को समझने के लिए एपीडा के अध्यक्ष द्वारा गठित की जाने वाली समिति द्वारा इनका मूल्यांकन किया जा सकता है। यह पाया गया है कि चालू माह के दौरान 1214 अमरिकी डॉलर प्रति टन के औसत निर्यात मूल्य की पृष्ठभूमि में न्यूनतम अनुबंध मूल्य 359 डॉलर प्रति टन के साथ निर्यात किए जा रहे बासमती के अनुबंध मूल्य में काफी अंतर है। समिति एक महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करे जिसके बाद बासमती के कम मूल्य के निर्यात पर निर्णय उद्योग जगत द्वारा उचित रूप से लिया जा सकता है।</li>
<li>एपीडा को इस मामले के बारे में उन्हें संवेदनशील बनाने के लिए व्यापार जगत के साथ परामर्श करना चाहिए और गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात के लिए इस प्रकार के किसी भी उपयोग को रोकने के लिए उनके साथ काम करना चाहिए।</li>
</ol> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बासमती चावल के नाम पर गैर-बासमती सफेद चावल का अवैध निर्यात रोकने को सरकार ने उठाया कदम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मिलेट उत्पादन और खपत बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय मिशन की जरूरतः फिक्की&amp;#45;पीडब्लूसी रिपोर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/national-millets-mission-is-necessary-to-increase-its-production-and-consumption.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 27 Aug 2023 12:19:59 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/national-millets-mission-is-necessary-to-increase-its-production-and-consumption.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">भारत में मिलेट यानी मोटे अनाज का उत्पादन बढ़ने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मिशन शुरू करने की जरूरत है। इसके अलावा मिलेट की खेती का रकबा बढ़ाकर, फसलों की वैरायटी में सुधार, उत्पादन से लेकर खपत तक पूरी वैल्यू चेन में इनोवेशन को अपनाकर तथा विभिन्न स्तर पर इन्सेंटिव देकर इनके उत्पादन और खपत में वृद्धि की जा सकती है। उद्योग संगठन फिक्की और कंसल्टेंसी फर्म पीडब्लूसी की तरफ से जारी रिपोर्ट में ये सुझाव दिए गए हैं। इसमें मिलेट उत्पादन बढ़ाने के लिए व्यापक नीतिगत समर्थन की बात भी कही गई है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रिपोर्ट में मिलेट की खेती के फायदे भी बताए गए हैं। इसमें कहा गया है कि इनकी खेती मुख्य रूप से शुष्क और अर्ध शुष्क इलाकों में होती है। अर्थात ये अधिक तापमान और सूखे जैसी परिस्थितियों को भी झेलने में सक्षम होते हैं। मिलेट के लिए सिर्फ 350 मिलीमीटर पानी की जरूरत पड़ती है जबकि धान की फसल को इसका 3.5 गुना, यानी 1250 मिलीमीटर पानी की आवश्यकता होती है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस तरह, चावल की तुलना में मिलेट उत्पादन में 70% कम पानी की जरूरत पड़ती है। गेहूं की तुलना में मिलेट फसलें कम समय में तैयार हो जाती हैं। एक और खासियत यह है कि इनके लिए रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की जरूरत भी कम पड़ती है। इससे किसानों की लागत कम करने के साथ पारिस्थितिकी संतुलन में भी मदद मिलती है। मिलेट की खेती से किसान फसल चक्र को डायवर्सिफाई कर सकते हैं। फसल चक्र में बदलाव एक प्राकृतिक सुरक्षा मेकैनिज्म का काम करता है। इससे मिट्टी का क्षरण रुकता है और कीटों का प्रभाव भी कम होता है। एक फसल बार-बार उगाने से कीटों के हमले ज्यादा होते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मिलेट का एक और फायदा कार्बन कंटेंट के मामले में है। फसल की कटाई के बाद उनके पौधों को अगर मिट्टी में मिला दिया जाए तो उस मिट्टी में कार्बन का स्तर काफी बढ़ जाता है। यह सस्टेनेबल खेती के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे मिट्टी की सेहत और उर्वरता दोनों बेहतर होती है। इस तरह यह दीर्घकाल में सतत खेती को बढ़ावा देते हैं।&nbsp;</span></p>
<p><strong>हर थाली तक मिलेट पहुंचाने के चार उपाय</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रिपोर्ट में राष्ट्रीय स्तर पर पांच साल का नेशनल मिलेट मिशन अपनाने की जरूरत बताई गई है। कहा गया है कि मिलेट को निर्धारित समय में मुख्य धारा में लाने के लिए यह आवश्यक है। मिलेट को हर थाली तक पहुंचाने के लिए रिपोर्ट में चार उपाय बताए गए हैं। ये हैं- PAID (पेड)- पी यानी प्रोडक्शन एनहांसमेंट (उत्पादन में वृद्धि), ए यानी अवेयरनेस क्रिएशन (जागरूकता बढ़ाना), आई यानी इनोवेशन और डी यानी डिमांड जेनरेशन (मांग बढ़ाना)।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उत्पादन बढ़ाने के उपायों में फसलों की वैरायटी में सुधार, उत्पादन और प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी में इनोवेशन तथा मिलेट उत्पादन के लिए व्यापक नीतिगत समर्थन शामिल हैं। जागरूकता बढ़ाने के लिए मिलेट को मुख्य धारा में लाने के महत्व के बारे में लोगों को बताने और किसानों, उपभोक्ताओं तथा निवेशकों के हितों को प्राथमिकता देने के सुझाव दिए गए हैं। इनोवेशन के तहत मिलेट की खेती का क्षेत्रफल बढ़ाने और खास तरह के प्रोडक्ट डेवलपमेंट के प्रयास करने की बात कही गई है ताकि उनकी खपत बढ़ सके। यह इनोवेशन प्रोडक्ट, प्रक्रिया और पॉलिसी तीनों स्तर पर जरूरी है। उत्पादकता, क्वालिटी और मार्केटिंग बढ़ाने के लिए नए तरह के प्रयास करने पड़ेंगे। इसके लिए समग्र नजरिया अपनाने की जरूरत है। इनोवेशन वैल्यू एडेड प्रोडक्ट में भी किया जा सकता है। इसमें उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाना, बाय प्रोडक्ट की प्रोसेसिंग और नए तरह के व्यंजन शामिल हैं। खेती के तौर-तरीकों और प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों में भी इनोवेशन का सुझाव है। मांग बढ़ाने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) का मॉडल अपनाने और वैश्विक स्तर पर पहल करने का सुझाव है।</span></p>
<p><strong>हर साल रकबा बढ़ाने का लक्ष्य तय हो</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एक सुझाव मिलेट की खेती का रकबा बढ़ाने का है। रिपोर्ट में कहा गया है राज्यों के लिए साल दर साल रकबा बढ़ाना निर्धारित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, जिन राज्यों में पहले ही मिलेट की अधिक खेती होती है वहां हर साल रकबा 5% बढ़ाने की नीति बन सकती है। मध्यम खेती वाले राज्यों में हर साल रकबा 10% बढ़ाने का लक्ष्य रखा जा सकता है। एक और सुझाव सीड रिप्लेसमेंट रेशियो बढ़ाने का है। इससे बेहतर उत्पादकता और रोग प्रतिरोधी क्षमता हासिल करने में मदद मिलेगी। किसानों को इंसेंटिव देने और मिलेट किसानों का एफपीओ बनाने का भी सुझाव दिया गया है।</span></p>
<p><strong>मिलेट आधारित प्रोडक्ट पर जीएसटी कम हो</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मिलेट आधारित प्रोडक्ट का उत्पादन बढ़ाने और उन पर जीएसटी की दर कम रखने का भी सुझाव है ताकि उनकी कीमत कम हो और ज्यादा से ज्यादा लोग उन्हें खरीद सकें। मिलेट प्रोडक्ट की प्रोसेसिंग और निर्यात को इंसेंटिव देने और क्वालिटी जांचने वाली लैब स्थापित करने का भी सुझाव दिया गया है। ये लैब मिलेट के दानों की क्वालिटी और पोषकता के बारे में बताएंगी। इससे क्वालिटी मानकों का पालन हो सकेगा।&nbsp;</span></p>
<p><strong>सेहत के लिए फायदेमंद मिलेट</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मिलेट को &lsquo;चमत्कारी फसल&rsquo; भी कहा जाता है। इनमें न सिर्फ पोषक तत्व और फाइबर प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। मिलेट हमें आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने के साथ डायबिटीज नियंत्रित करने, खाद्य सुरक्षा बढ़ाने और जैव विविधता संरक्षित करने में भी मदद करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आज जब बदलती जीवन शैली के कारण बच्चों, किशोरों तथा वयस्कों में मेटाबॉलिक सिंड्रोम, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे की समस्या पूरे विश्व में चिंता का विषय बन गई है। मिलेट खून में ग्लूकोज और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा घटाकर और इंसुलिन की सेंसिटिविटी सुधार कर हमें कई फायदे दे सकते हैं।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मिलेट प्रोटीन, फाइबर, विटामिन बी, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, जिंक, पोटेशियम, कॉपर, सेलेनियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। ये खून में ग्लूकोज और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में भी मददगार हैं। ये हमारे शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को भी बढ़ाते हैं।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में लोगों को पर्याप्त भोजन न मिलने का स्तर चिंताजनक हो गया है। वर्ष 2021 में लगभग 82.8 करोड़ लोग इससे प्रभावित थे। मार्च 2023 में जारी एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक गर्भवती और दूध पिलाने वाली महिलाओं में कुपोषण बढ़ता जा रहा है। खाद्य और पोषण संकट से सबसे अधिक जूझने वाले दुनिया के 12 देशों में प्रभावित लोगों की संख्या 55 लाख से बढ़कर 2020 में 69 लाख हो गई। यही नहीं, दुनिया में 2 साल से कम उम्र के 5.1 करोड़ बच्चे स्टंटिंग से ग्रस्त हैं। अर्थात कुपोषण की वजह से उनका विकास नहीं हो पा रहा है। विश्व खाद्य संगठन के मुताबिक भारत में 2019 से 2021 के बीच अल्पपोषित लोगों की संख्या 22.43 करोड़ थी। ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2022 में भारत 121 देशों में 107वें स्थान पर था।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">दुनिया में 42.02 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। 30 से 79 वर्ष आयु वर्ग में हाइपरटेंशन से पीड़ित लोगों की संख्या 128 करोड़ पहुंच गई है। इनमें से ज्यादातर कम और मध्य आय वाले देशों में रहते हैं। यही नहीं, दुनिया में करीब 230 करोड़ लोग मोटापे की बीमारी से पीड़ित हैं। इनमें बच्चे और बड़े दोनों शामिल हैं। भारत में मोटापे से पीड़ित लोगों की संख्या 25.4 करोड़ और हाइपरटेंशन वाले 31.5 करोड़ हैं। इस परिदृश्य में मिलेट जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों का सस्ता समाधान हो सकते हैं।&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e9e237e182c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मिलेट उत्पादन और खपत बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय मिशन की जरूरतः फिक्की-पीडब्लूसी रिपोर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e9e237e182c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बासमती के लिए 1200 डॉलर प्रति टन से ऊपर  का न्यूनतम निर्यात मूल्य तय, पाकिस्तान को हो सकता है  फायदा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/minimum-export-price-for-basmati-rice-fixed-at-above-1200-usd-per-tone-pakistan-may-get-advantage.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Aug 2023 21:03:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/minimum-export-price-for-basmati-rice-fixed-at-above-1200-usd-per-tone-pakistan-may-get-advantage.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने बासमती निर्यात पर 1200 डॉलर प्रति टन से अधिक न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) लागू करने का फैसला लिया है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा एपीडा के चेयरमैन को लिखे एक पत्र में कहा है कि बासमती निर्यात के लिए रजिस्ट्रेशन-कम-एलोकेशन सर्टिफिकेट को 1200 डॉलर प्रति टन से ऊपर की कीमत के सौदों तक ही सीमित रखा जाए। इस पत्र में कमेटी ऑफ सेक्रेटरीज की 21 अगस्त, 2023 को हुई बैठक में लिये गये फैसला का हवाला दिया गया है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा एपीडा चेयरमैन को 25 अगस्त को यह पत्र भेजा गया है। इसके साथ ही वित्त मंत्रालय ने 25 अगस्त को जारी अधिसूचना के जरिये पारबॉयल्ड राइस (सेला चावल) के निर्यात पर 20 फीसदी शुल्क भी लगा दिया है।</p>
<p>इसके साथ ही इसमें कहा गया है कि यह रजिस्ट्रेशन-कम-अलोकेशन सर्टिफिकेट जारी करने के लिए 1200 डॉलर प्रति टन से ऊपर की कीमत का यह फैसला 15 अक्तूबर, 2023 तक के लिए लागू होगा। अक्तूबर के पहले सप्ताह में समीक्षा के बाद आगे की अवधि के लिए फैसला लिया जाएगा। अक्तूबर में समीक्षा के पीछे सरकार द्वारा नई फसल की आवक को देखना माना जा सकता है। अक्तूबर में बासमती धान की बाजार में आवक शुरू हो जाएगी और इसके उत्पादन की स्थिति भी साफ हो जाएगी। हालांकि सरकार के इस कदम का बासमती धान की कीमत पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।&nbsp;</p>
<p>इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय बासमती चावल की कीमत 1550 डॉलर प्रति टन तक मिल रही है। वहीं भारत के प्रतिस्पर्धी पाकिस्तान के बासमती चावल की कीमत 1350 डॉलर प्रति टन है। सरकार द्वारा लागू की गई न्यूनतम निर्यात कीमत का फायदा पाकिस्तान को मिल सकता है। अमेरिकी कृषि विभाग की ताजा रिपोर्ट में इस साल पाकिस्तान से 49 लाख टन चावल के निर्यात का अनुमान लगाया गया है, जबकि पिछले साल वहां से 36 लाख टन चावल का निर्यात हुआ था।</p>
<p>इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत से चावल का निर्यात 190 लाख टन रहने का अनुमान है। पिछले साल भारत ने 223 लाख टन चावल का निर्यात किया था। भारत के कुल चावल निर्यात में बासमती चावल की मात्रा करीब 45 लाख टन रही थी।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/latest-news/government-impose-20-percent-export-duty-on-parboiled-rice-to-discourage-export.html" title="सेला चावल के निर्यात पर 20 फीसदी ड्यूटी" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः&nbsp;गैर बासमती सेला चावल के निर्यात पर 20 फीसदी शुल्क लागू, निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए उठाया कदम</strong></a></p>
<p>सरकार ने चावल निर्यात पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कई कदम उठाये हैं। सितंबर 2022 में ब्रोकन राइस के निर्यात पर रोक लगाई गई थी। साथ ही गैर बासमती चावल के निर्यात पर 20 फीसदी निर्यात शुल्क लगा दिया था। हालांकि सेला चावल को इससे बाहर रखा था। उसके बाद पिछले माह, 20 जुलाई को सरकार ने गैर-बासमती व्हाइट राइस के निर्यात पर रोक लगा दी थी। जबकि 25 अगस्त, 2023 को सेला चावल के निर्यात पर 20 फीसदी शुल्क लगाने का फैसला लिया गया। अब बासमती चावल के लिए 1200 डॉलर प्रति टन का न्यूनतन निर्यात मूल्य तय कर दिया है।&nbsp;</p>
<p>सरकार में एक उच्च पदस्थ सूत्र से इस बारे में रूरल वॉयस बात की तो उनका कहना था कि अगर सरकार चावल निर्यात पर अंकुश के कदम नहीं उठाती तो देश से 300 लाख टन तक चावल निर्यात हो सकता था। घरेलू बाजार में उपलब्धता बरकरार रखने और बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाये हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/01/image_750x500_63bb0c6bda775.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बासमती के लिए 1200 डॉलर प्रति टन से ऊपर  का न्यूनतम निर्यात मूल्य तय, पाकिस्तान को हो सकता है  फायदा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनसीसीएफ ने बफर स्टॉक के लिए किसानों से चार दिन में खरीदा 2,826 टन प्याज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/nccf-buys-2826-tn-onion-from-farmers-for-buffer-stock.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Aug 2023 18:30:32 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/nccf-buys-2826-tn-onion-from-farmers-for-buffer-stock.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) ने बफर स्टॉक के लिए अतिरिक्त प्याज की खरीद शुरू कर दी है। पिछले चार दिनों में एनसीसीएफ ने किसानों से सीधे 2,826 टन प्याज की खरीद 2,410 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर की है। इनमें से ज्यादातर की खरीद महाराष्ट्र से की गई है। सरकार ने इस साल प्याज के बफर स्टॉक को 3 लाख टन से बढ़ाकर 5 लाख टन करने का फैसला हाल ही में किया है।</p>
<p>प्याज की घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने निर्यात पर 40 फीसदी का शुल्क दिया है। साथ ही इस फैसले से किसानों द्वारा घबराहट में बिक्री से बचने के लिए दो सहकारी समितियों एनसीसीएफ और नेफेड को किसानों से सीधे 2,410 रुपये प्रति क्विंटल पर 1-1 लाख टन प्याज खरीदने का आदेश दिया गया है। प्याज की बढ़ती खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए दोनों सहकारी समितियां थोक और खुदरा दोनों बाजारों में बफर स्टॉक से प्याज जारी कर रही हैं।</p>
<p>एनसीसीएफ ने 22 अगस्त से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में किसानों से सीधे खरीद शुरू की है। महाराष्ट्र में अभी 12-13 खरीद केंद्र खोले गए हैं। जल्द ही और खरीद केंद्र खोले जाएंगे। &nbsp;एनसीसीएफ किसानों से सीधे 2,410 रुपये प्रति क्विंटल पर प्याज खरीद रहा है जो मौजूदा थोक दर 1900-2000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक है।</p>
<p>घरेलू उपलब्धता को बढ़ावा देने और बढ़ती खुदरा कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए एनसीसीएफ उन 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बफर प्याज स्टॉक बेच भी रहा है जहां कीमतें बढ़ रही हैं। अब तक थोक बाजारों में मौजूदा मंडी दरों पर 6,450 टन प्याज बेचा जा चुका है। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में दिल्ली, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, असम, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पंजाब और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।</p>
<p>एनसीसीएफ के प्रबंध निदेशक एनीस जोसेफ चंद्रा ने कहा, "हम अधिक पारदर्शिता लाने के लिए सीधे और ई-नीलामी दोनों तरीकों से प्याज के बफर स्टॉक की खुदरा बिक्री कर रहे हैं। प्याज की पहली ई-नीलामी 25 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर में की गई थी और 36 टन बेची गई थी। आने वाले दिनों में पंजाब के दो शहरों में नीलामी की जाएगी।" सहकारी समिति एनसीडीएफआई और भीम पोर्टल के माध्यम से प्याज की थोक बिक्री करने का भी प्रयास कर रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एनसीसीएफ ने पहले ही दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद में सीमित पैमाने पर प्याज की खुदरा बिक्री शुरू कर दी है। आने वाले सप्ताह में इसे बढ़ाया जाएगा। बिना किसी मात्रात्मक प्रतिबंध के 25 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर उपभोक्ताओं को सीधे प्याज बेचा जा रहा है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e3179e46aad.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनसीसीएफ ने बफर स्टॉक के लिए किसानों से चार दिन में खरीदा 2,826 टन प्याज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जहां दस्तक देता है दक्षिण&amp;#45;पश्चिम मानसून वहीं हुई सबसे कम बारिश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/where-the-south-west-monsoon-knocks-the-least-rain.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Aug 2023 16:56:09 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/where-the-south-west-monsoon-knocks-the-least-rain.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अल-नीनो के मजबूत होने के चलते मानसून के दूसरे हिस्से (अगस्त-सितंबर) में देश के ज्यादातर इलाके सामान्य से कम बारिश से जूझ रहे हैं। अगस्त महीने में अब तक जहां सामान्य से 29 फीसदी कम बारिश हुई है, वहीं 26 अगस्त तक मानसून की कुल बारिश सामान्य से 7 फीसदी कम रही है। उत्तर पश्चिमी भारत को छोड़कर बाकी सभी इलाकों में कम बारिश हुई है। पूरे देश में अब तक सबसे कम बारिश केरल में हुई है, जबकि दक्षिण-पश्चिम मानसून जून में सबसे पहले यहीं दस्तक देता है और उसके बाद धीरे-धीरे जुलाई की शुरुआत तक पूरे देश में छा जाता है।</p>
<p>भारत मौसम विभाग (आईएमडी) के 26 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक, केरल में इस बार सामान्य से 47 फीसदी कम बारिश हुई है। देश के ऐसे शीर्ष 10 इलाकों में दूसरे नंबर पर लक्षद्वीप है जहां 35 फीसदी कम तीसरे नंबर पर झारखंड है जहां 34 फीसदी कम बारिश हुई है। चौथे नंबर पर रायलसीमा का इलाका है जहां 30 फीसदी कम और पांचवें नंबर पर दक्षिण कर्नाटक का अंदरूनी इलाका है जहां 29 फीसदी कम बारिश हुई है। छठे नंबर पर संयुक्त रूप से बिहार, पश्चिम बंगाल का मैदानी इलाका (गंगेटिक पश्चिम बंगाल), पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा है जहां सामान्य से 25 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है।</p>
<p>ताजा आंकड़ों के मुताबिक, टॉप-10 की सूची में सातवें नंबर पर मध्य महाराष्ट्र (-21 फीसदी), आठवें पर मराठवाड़ा (-18 फीसदी) और नौवें नंबर पर छत्तीसगढ़ (-15 फीसदी) है। दसवें नंबर पर संयुक्त रूप से तटीय कर्नाटक और असम एवं मेघालय है जहां सामान्य से 15 फीसदी कम बारिश हुई है।</p>
<p>इसके अलावा पश्चिमी मध्य प्रदेश (-13 फीसदी), गुजरात रीजन (-10 फीसदी), ओडिशा (-9 फीसदी), विदर्भ (-9 फीसदी), तमिलनाडु एवं पुडुचेरी (-9 फीसदी), उत्तरी कर्नाटक का अंदरूनी इलाका (-9 फीसदी), पूर्वी मध्य प्रदेश (-7 फीसदी), अरुणाचल प्रदेश (-7 फीसदी) और तटीय आध्र प्रदेश (-6 फीसदी) ऐसे इलाके हैं जहां मानसून की बारिश सामान्य से कम हुई है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>आईएमडी के मुताबिक, उत्तर पश्चिमी भारत में अब तक सामान्य से 8 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। जबकि पूर्वी एवं उत्तर पूर्वी भारत में सामान्य से 17 फीसदी कम और मध्य भारत में सामान्य से 6 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य से 16 फीसदी कम वर्षा हुई है। जिन इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है उनमें पहले नंबर पर सौराष्ट्र एवं कच्छ (+65 फीसदी), दूसरे नंबर पर पश्चिम राजस्थान (+52 फीसदी) और तीसरे नंबर पर हिमाचल प्रदेश (+38 फीसदी) है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_6481ba819e08a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जहां दस्तक देता है दक्षिण-पश्चिम मानसून वहीं हुई सबसे कम बारिश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_6481ba819e08a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गैर बासमती सेला चावल के निर्यात पर 20 फीसदी शुल्क लागू, निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए उठाया कदम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/government-impose-20-percent-export-duty-on-parboiled-rice-to-discourage-export.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Aug 2023 14:56:27 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/government-impose-20-percent-export-duty-on-parboiled-rice-to-discourage-export.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>घरेलू बाजार में चावल की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के मकसद से सरकार ने गैर बासमती सेला चावल (पारबॉयल्ड राइस) के निर्यात पर 20 फीसदी शुल्क लगा दिया है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा 25 अगस्त को जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक सेला चावल पर यह निर्यात तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। सरकार ने 20 जुलाई, 2023 को गैर बासमती सफेद चावल (व्हाइट राइस) के निर्यात पर रोक लगी दी थी। इसके पहले सितंबर 2022 में ब्रोकन राइस के निर्यात पर रोक लगा दी थी उसके साथ की गैर बासमती चावल पर 20 फीसदी निर्यात शुल्क लगा दिया था। लेकिन यह शुल्क गैर बासमती सेला चावल पर नहीं लगाया गया था। लेकिन 25 अगस्त के नोटिफेकेशन के जरिये अब सेला चावल के निर्यात पर 20 फीसदी शुल्क लगा दिया गया है। सरकार द्वारा एक साल के भीतर गैर बासमती चावल के निर्यात पर अंकुश लगाने के लिए यह तीसरा कदम उठाया गया है।&nbsp;</p>
<p>भारत ने 2022-23 में 223 लाख टन चावल निर्यात किया था। भारत वैश्विक बाजार में 40 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश रहा। कुल चावल निर्यात में 177.87 लाख टन गैर बासमती चावल निर्यात किया गया था। जिसमें 78.46 लाख टन पारबॉयल्ड (सेला) चावल निर्यात किया गया था।&nbsp;</p>
<p>सरकार खाद्यान्नों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से काफी चिंतित है। पिछले एक साल में चावल की कीमतों में 10 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में पिछले फसल वर्ष (2022-23) में चावल का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। लेकिन कीमत फिर भी बढ़ रही है। <strong>रूरल वॉयस</strong> ने इस बारे में सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों से बात की तो उन्होंने कहा कि इस बात की आशंका है कि गैर बासमती व्हाइट राइस के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बाद पारबॉयल्ड चावल का निर्यात काफी बढ़ सकता है। उक्त सूत्र ने कहा कि गैर बासमती निर्यात पर रोक के बावजूद चावल का निर्यात 180 से 200 लाख टन तक पहुंच सकता है। जब उनके पूछा गया कि पारबॉयल्ड चावल का निर्यात बढ़ता है तो सरकार क्या कदम उठाएगी तो उन्होंने इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की संभावना से इनकार नहीं किया। हालांकि सरकार ने इसके निर्यात पर अभी प्रतिबंध तो नहीं लगाया लेकिन 20 फीसदी का निर्यात शुल्क लगा दिया। यह कदम इसके निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए उठाया गया है।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/latest-news/minimum-export-price-for-basmati-rice-fixed-at-above-1200-usd-per-tone-pakistan-may-get-advantage.html" title="बासमती निर्यात पर एमईपी लागूू" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः&nbsp;बासमती के लिए 1200 डॉलर प्रति टन से ऊपर&nbsp; का न्यूनतम निर्यात मूल्य तय, पाकिस्तान को हो सकता है फायदा</strong></a></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x_64e9cc97147e9.jpg" alt="" /></p>
<p>भारत द्वारा गैर बासमती व्हाइट राइस के निर्यात पर रोक लगाने के बाद से वैश्विक बाजार में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। सरकार से ताजा कदम से यह कीमतें और अधिक बढ़ने की आशंका है। इसके साथ ही जिस तरह देश के बड़े हिस्से में मानसून&nbsp; की बारिश काफी कमजोर है उसे देखते हुए धान का रकबा पिछले साल से अधिक रहने के बावजूद चावल उत्पादन में कमी आ सकती है।</p>
<p>सरकार ने पिछले सप्ताह ही प्याज की कीमतों पर अंकुश लगाने और घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्याज पर 40 फीसदी निर्यात शुल्क लगाया था। प्याज किसान इसका&nbsp; विरोध कर रहे हैं। सरकार द्वारा गैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक लगाने और सेला चावल के निर्यात पर 20 फीसदी शुल्क लगाने के चलते किसानों को धान की मिलने वाली कीमत प्रभावित हो सकती है। अगले माह से धान की फसल बाजार में आने लगेगी। लेकिन सरकार चुनावी साल के चलते कीमतों में बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए लगातार कदम उठा रही है क्योंकि महंगाई चुनावी नतीजों को प्रभावित करती रही है।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64d3665fdf5fa.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गैर बासमती सेला चावल के निर्यात पर 20 फीसदी शुल्क लागू, निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए उठाया कदम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रिसर्च की कमी और किसानों तक टेक्नोलॉजी की पहुंच न होना मिलेट उत्पादन बढ़ाने में बाधकः फिक्की&amp;#45;पीडब्लूसी रिपोर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/lack-of-research-and-non-availability-of-technology-to-farmers-affecting-millet-production-says-ficci-pwc-report.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Aug 2023 14:32:24 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/lack-of-research-and-non-availability-of-technology-to-farmers-affecting-millet-production-says-ficci-pwc-report.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">भारत में मिलेट यानी मोटे अनाज की मांग हाल के समय में बढ़ रही है, लेकिन इसके बढ़ने की दर बहुत धीमी है। जलवायु परिवर्तन से निपटने और पोषण उपलब्ध कराने के इन अनाजों के गुणों को देखते हुए मिलेट का उत्पादन और खपत बढ़ाना काफी मददगार हो सकता है। उद्योग संगठन फिक्की और कंसल्टेंसी फर्म पीडब्लूसी की तरफ से मिलेट पर जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इसमें मिलेट उत्पादन बढ़ाने में आने वाली समस्याओं पर भी गौर किया गया है। किसानों तक टेक्नोलॉजी की पहुंच न होना, प्रोसेसिंग मशीनों का महंगा होना, पर्याप्त रिसर्च का अभाव आदि इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रिपोर्ट के अनुसार, मिलेट को लेकर कई ऐसी धारणाएं हैं जो स्वास्थ्य और पोषण में इनके इस्तेमाल के साथ किसानों की संपन्नता को भी बाधित करती हैं। विपरीत मौसम को झेलने में सक्षम होने के कारण लंबे समय से मिलेट को &lsquo;गरीबों की फसल&rsquo; कहा जाता रहा है। किसानों को भी जब अवसर मिलता है, वे मिलेट की जगह दूसरी फसल उगाना चाहते हैं क्योंकि उनकी उन्हें बेहतर कीमत मिलती है।</span></p>
<p><strong>टेक्नोलॉजी तक किसानों की पहुंच नहीं</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भारत के ज्यादातर राज्यों में अभी तक छोटे किसान पारंपरिक तरीके से ही मिलेट की खेती करते हैं। इसकी मूल वजह आधुनिक टेक्नोलॉजी का अभाव नहीं, बल्कि किसानों को या तो टेक्नोलॉजी की जानकारी नहीं होती या उनके पास इतने पैसे नहीं होते कि वे नई टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर सकें। इससे फसलों की उत्पादकता प्रभावित होती है। एक और चुनौती प्रोसेस्ड मिलेट की कम शेल्फ लाइफ है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भारत में नौ तरह के मिलेट उगाए जाते हैं। उन सबका आकार अलग होता है। यहां तक कि किसी एक मिलेट में भी देखा जाए तो दानों का आकार, टेक्सचर आदि अलग होते हैं। कुछ मिलेट के छिलके आसानी से उतर जाते हैं तो कुछ के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। इसलिए इनकी प्रोसेसिंग में अलग तरह के फैब्रिकेशन की आवश्यकता पड़ती है। इस समय ज्यादातर प्रोसेसिंग उपकरण निर्माता कोई एक तरह की मशीन ही उपलब्ध कराते हैं।</span></p>
<p><strong>प्रोसेसिंग का ज्यादा खर्च</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रिपोर्ट के अनुसार, अभी जो प्रोसेसिंग मशीनरी बाजार में उपलब्ध हैं उनकी क्षमता प्रति घंटे दो टन तक होती है जो बहुत कम है। बड़ी मशीनों की कीमत दो करोड़ रुपए के आसपास होने के कारण छोटी इकाइयां उन्हें नहीं खरीद सकती हैं। ज्यादातर प्रोसेसिंग मशीनों को धान की प्रोसेसिंग मशीनों में मामूली बदलाव करके बनाया गया है। इसके अलावा इन मशीनों में ग्रेन रिकवरी भी 70% से 80% तक ही है जो कम है। इस तरह शुरू में 15 से 20 लाख रुपए मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट में लगाने के बाद भी प्रोसेसिंग का खर्च काफी अधिक होता है। यह 10 से 14 रुपए प्रति किलो के आसपास बैठता है।</span></p>
<p><strong>पॉलिसी और रिसर्च में ध्यान कम</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरप्लस खाद्यान्न वाला देश बन गया है, लेकिन अनाज उत्पादन बढ़ाने में पूरा फोकस सिर्फ गेहूं और चावल पर किया गया। इन दोनों की तुलना में मिलेट पर निवेश कम हुआ। पॉलिसी और रिसर्च दोनों नजरिए से इस पर ध्यान भी कम दिया गया। जहां तक वैरायटी में सुधार की बात है तो वह भी प्रमुख मिलेट तक ही सीमित रहा। अभी तक मिलेट के लिए कोई क्वालिटी स्टैंडर्ड अथवा ग्रेड तय नहीं हुआ है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">हाल तक मिलेट सरकार की खरीद पॉलिसी में शामिल नहीं थे। मोटे अनाजों की खरीद मक्के तक सीमित होती थी। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) हर साल प्रमुख मिलेट यानी ज्वार, बाजरा और रागी का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करता है, लेकिन छोटी मिलेट फसलों के लिए कोई खरीद नीति न होने के कारण इनका एमएसपी भी तय नहीं किया जाता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मिलेट रिसर्च को हाल में ग्लोबल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस ऑन मिलेट का दर्जा दिया गया है, लेकिन इसमें मुख्य रूप से ज्वार पर ही फोकस किया जाता है। देश में छोटी मिलेट किस्मों पर रिसर्च के लिए 14 केंद्र हैं, लेकिन फसल के हिसाब से कोई निर्धारित रिसर्च सेंटर अथवा इंस्टीट्यूट नहीं है। आईआईएमआर के अनुसार 2012 तक छोटी मिलेट फसलों की सिर्फ 14 वैरायटी जारी की गई थी। हालांकि मिलेट वैल्यू चेन में शामिल विभिन्न पक्ष अपनी तरफ से प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वैश्विक मिलेट इकोसिस्टम को अगले स्तर तक ले जाने के लिए चौतरफा प्रयासों की जरूरत है।</span></p>
<table>
<tbody>
<tr>
<td colspan="3">
<p><b>मिलेट का सबसे अधिक उत्पादन करने वाले 10 देश</b><b>&nbsp;</b></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<p><b>देश</b></p>
</td>
<td>
<p><b>उत्पादन</b></p>
</td>
<td>
<p><b>हिस्सेदारी&nbsp;</b></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">भारत&nbsp;</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">12.64 मिलियन टन</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">41%</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">निगर&nbsp;</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">3.10 मिलियन टन</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">10%</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">चीन&nbsp;</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">2.69 मिलियन टन</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">9%</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">नाइजीरिया&nbsp;</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">1.96 मिलियन टन</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">6%</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">माली&nbsp;</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">1.78 मिलियन टन</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">6%</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">सूडान&nbsp;</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">1.45 मिलियन टन</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">5%</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">इथोपिया&nbsp;</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">1.15 मिलियन टन</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">4%</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">सेनेगल&nbsp;</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">1.02 मिलियन टन</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">3%</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">बुरकीनाफासो&nbsp;</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">0.91 मिलियन टन</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">3%</span></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">चाड&nbsp;</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">0.68 मिलियन टन</span></p>
</td>
<td>
<p><span style="font-weight: 400;">2%</span></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><strong>भारत में दुनिया का 41% मिलेट उत्पादन</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रिपोर्ट के अनुसार मिलेट का वैश्विक उत्पादन लगभग 30.59 मिलियन टन है और 30.86 मिलियन हेक्टर जमीन में इसकी खेती होती है। दुनिया के शीर्ष 10 मिलेट उपजाने वाले देश 90% मिलेट का उत्पादन करते हैं। शीर्ष 10 देशों में भारत और चीन को छोड़कर बाकी सब अफ्रीका के हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा मिलेट उत्पादक देश है। यहां दुनिया का 41% और एशिया का 80% मिलेट उत्पादन होता है जबकि 40% खपत अफ्रीका में होती है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">वर्ष 2021 में दुनिया में 198.66 मिलियन डॉलर के मिलेट का निर्यात किया गया। सबसे अधिक निर्यात यूक्रेन, अमेरिका, भारत, रूस और फ्रांस ने किया। सबसे बड़े आयातकों में इंडोनेशिया, यूरोपीय यूनियन, जर्मनी, बेल्जियम और कनाडा शामिल हैं। मिलेट का ग्लोबल बाजार 2023 से 2028 तक सालाना औसतन 4.6 प्रतिशत की दर से बढ़ते हुए 13.8 अरब डॉलर का हो जाने की उम्मीद है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भारत में सबसे अधिक बाजरे का उत्पादन होता है। उसके बाद ज्वार और रागी हैं। सबसे अधिक उत्पादन राजस्थान में होता है। टॉप 10 राज्यों में उसके बाद महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मिलेट दुनिया में सबसे पुराने खेती किए जाने वाले अनाज हैं। हड़प्पा की खुदाई में जले हुए मिलेट मिले हैं। इसके अलावा वेदों में भी इनका जिक्र है। इससे पता चलता है कि मिलेट का काफी लंबा इतिहास रहा है। एशिया और अफ्रीका में ये स्टेपल फूड यानी रोज खाया जाने वाला अनाज रहे हैं। ज्यादातर मिलेट का मूल एशिया और अफ्रीका रहा है। माना जाता है कि ज्वार, बाजरा और रागी का मूल अफ्रीका, कुटकी और कोदो का भारत, कंगनी और बर्री का चीन तथा झंगोरा का जापान रहा है।</span></p>
<p><strong>जलवायु परिवर्तन को सहने में सक्षम</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन और सेहत से जुड़ी समस्याओं के संदर्भ में मिलेट महत्वपूर्ण समाधान उपलब्ध कराते हैं। आज दुनिया भर के विशेषज्ञ इन पोषक अनाजों का उत्पादन और खपत बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं। मिलेट किसानों और उपभोक्ताओं के साथ जलवायु संकट का भी समाधान बन सकते हैं। हर साल जलवायु परिवर्तन का असर बढ़ता जा रहा है और यह वैश्विक कृषि तथा खाद्य उत्पादन प्रणाली को प्रभावित कर रहा है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">वर्ल्ड बैंक का आकलन है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से वर्ष 2030 तक 3.2 करोड़ से लेकर 13.2 करोड़ तक लोग गरीबी रेखा से नीचे चले जाएंगे। इनमें सबसे ज्यादा लोग सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया के होंगे। ऐसे परिदृश्य में मिलेट जलवायु रोधी खेती के लिए भविष्य की फसल के तौर पर कम कर सकते हैं।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">संयुक्त राष्ट्र के अनुसार बीते तीन दशकों में एक्सट्रीम वेदर की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं और इसके पीछे जलवायु परिवर्तन का हाथ है। इन दिनों हीटवेव, सूखा और बाढ़ की घटनाएं बहुत आम हो गई हैं। दूसरी तरफ ग्लेशियर पिघलने से समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है। आर्कटिक सागर में बर्फ काफी कम हो गई है। समुद्र का तापमान बढ़ने से मरीन हीटवेव बढ़ा है। जलवायु से संबंधित ये बदलाव हमारे जीवन को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से प्रभावित कर रहे हैं और खाद्य सुरक्षा पर भी असर डाल रहे हैं। मिलेट हमें बेहतर पर्यावरण और आर्थिक संपन्नता का अवसर मुहैया कराते हैं। ये अधिक तापमान, कम पानी तथा अपेक्षाकृत कम पोषक मिट्टी में भी पनप सकते हैं। इनके लिए ज्यादा इनपुट की भी जरूरत नहीं पड़ती। इसलिए छोटे किसानों को इन पर अधिक खर्च नहीं करना पड़ेगा।</span></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/11/image_750x500_636fd9e82567b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रिसर्च की कमी और किसानों तक टेक्नोलॉजी की पहुंच न होना मिलेट उत्पादन बढ़ाने में बाधकः फिक्की-पीडब्लूसी रिपोर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/11/image_750x500_636fd9e82567b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[धान की बुवाई 384 लाख हेक्टेयर पर पहुंची, प्रमुख उत्पादक राज्यों में कम बारिश के बावजूद बढ़ा रकबा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/paddy-sowing-area-reached-384-lakh-hectare-acreage-area-increased-despite-less-rain-in-major-producing-states.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 25 Aug 2023 18:01:54 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/paddy-sowing-area-reached-384-lakh-hectare-acreage-area-increased-despite-less-rain-in-major-producing-states.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में मानसून की बारिश सामान्य से कम होने के बावजूद खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान की बुवाई के रकबे में पिछले साल के मुकाबले बढ़ोतरी हुई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी 25 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक, 384.05 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक 367.83 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई थी। सामान्य तौर पर देश में खरीफ सीजन में 399.45 लाख हेक्टेयर में धान बोई जाती है।</p>
<p>ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में धान की बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले 5.08 लाख हेक्टेयर बढ़ा है, जबकि राज्य में 25 अगस्त तक मानसून की बारिश सामान्य से 27 फीसदी कम हुई है। इसी तरह, छत्तीसगढ़ में पिछले साल की तुलना में बुवाई का रकबा 4.52 लाख हेक्टेयर ज्यादा रहा है। यहां बारिश सामान्य से 15 फीसदी कम दर्ज की गई है। झारखंड में मानसून की बारिश 34 फीसदी कम होने के बावजूद धान के क्षेत्रफल में 1.82 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। जबकि तेलंगाना में 2.64 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त रकबे में इस साल धान बोई गई है।</p>
<p>इसी तरह, हरियाणा (1.64 लाख हेक्टेयर ज्यादा), उत्तर प्रदेश (1.19 लाख हेक्टेयर ज्यादा), मध्य प्रदेश (1.11 लाख हेक्टेयर ज्यादा), पश्चिम बंगाल (93 हजार हेक्टेयर ज्यादा), ओडिशा (40 हजार हेक्टेयर ज्यादा), राजस्थान (34 हजार हेक्टेयर ज्यादा) और पंजाब (25 हजार हेक्टेयर ज्यादा) में भी पिछले साल की तुलना में इस साल ज्यादा रकबे में धान की बुवाई हुई है। जबकि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और असम जैसे प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में बुवाई घट गई है। कर्नाटक में सबसे ज्यादा 1.72 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। इसके बाद आंध्र प्रदेश में 1.20 लाख हेक्टेयर और असम में 33 हजार हेक्टयर कम क्षेत्रफल में खरीफ की धान बोई गई है। &nbsp;</p>
<p>इस दौरान दलहन फसलों की बुवाई का रकबा 128.07 लाख हेक्टेयर से घटकर 117.44 लाख हेक्टेयर रह गया है। तिलहन फसलों की बुवाई में भी कमी आई है। पिछले साल इस समय तक तिलहन फसलों की बुवाई 190.38 लाख हेक्टेयर में हुई थी जो घटकर 188.58 लाख हेक्टेयर रह गई है। जबकि मोटा अनाज की बुवाई का रकबा 176.31 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 178.33 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है। गन्ने की बुवाई 55.59 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 56.06 लाख हेक्टेयर रही है।</p>
<p>नकदी फसलों में कपास का रकबा 124.82 लाख हेक्टेयर से घटकर 122.56 लाख हेक्टेयर पर आ गया है। इसी तरह, जूट एवं मेस्ता की बुवाई 6.96 लाख हेक्टेयर से कम होकर 6.56 लाख हेक्टेयर में हुई है। हालांकि, खरीफ फसलों की कुल बुवाई 1049.96 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1053.59 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गई है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x500_64c490a9e6a12.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ धान की बुवाई 384 लाख हेक्टेयर पर पहुंची, प्रमुख उत्पादक राज्यों में कम बारिश के बावजूद बढ़ा रकबा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मिलेट्स क्षेत्र में बढ़ रही स्टार्टअप्स की भागीदारी, डेढ़ साल में 80 से ज्यादा स्टार्टअप्स ने रखा कदम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/startups-participation-increasing-in-millets-sector-more-than-80-startups-stepped-in-in-one-and-a-half-year.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 25 Aug 2023 16:46:23 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/startups-participation-increasing-in-millets-sector-more-than-80-startups-stepped-in-in-one-and-a-half-year.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मोटा अनाज (श्री अन्न) के क्षेत्र में स्टार्टअप्स की भागीदारी लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले करीब डेढ़ वर्ष में 80 से ज्यादा स्टार्टअप्स ने इस क्षेत्र में कदम रखा है जो मिलेट्स से बने उत्पादों की बेहतर पैकिंग कर देश-विदेश में बेच रहे हैं। मिलेट्स सेक्टर में स्टार्टअप्स की इस महत्वपूर्ण वृद्धि ने सरकार का भी ध्यान खींचा है और वह इससे उत्साहित है। गौरतलब है कि यह वर्ष इंटरनेशनल मिलेट्स ईयर के रूप में मनाया जा रहा है।</p>
<p>उद्योग संगठन फिक्की द्वारा आयोजित मिलेट कॉन्क्लेव में केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव शुभा ठाकुर ने युवाओं की भागीदारी और मिलेट को बढ़ावा देने वाले स्टार्टअप आंदोलन पर खुशी जताते हुए मिलेट आंदोलन को भारत और विश्व स्तर पर एक जन आंदोलन बनाने के महत्व पर जोर दिया। एपीडा के सचिव डॉ. सुधांशु ने इस मौके पर बताया कि पिछले डेढ़ साल में मिलेट क्षेत्र में 80 से अधिक स्टार्टअप आए हैं। उनके उत्पादों और नवाचार को बड़ी रिटेल कंपनियों ने भी सराहा और &nbsp;स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि केवल बड़ी निर्यात कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय इस क्षेत्र में छोटे उद्यमियों और स्टार्टअप को मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करने के लिए लगातार प्रयासों की आवश्यकता है।</p>
<p>इस मौके पर फिक्की के राष्ट्रीय कृषि समिति के चेयरमैन और ट्रैक्टर कंपनी टैफे के ग्रुप प्रेसीडेंट टीआर केसवन ने नियमित भोजन में मिलेट्स को शामिल करने की वकालत की और किसानों के लिए पोषण मूल्य, जलवायु लचीलापन और आय सृजन सहित इसके बहुमुखी लाभों पर जोर दिया। उन्होंने खेती में चुनौतियों, मशीनीकरण की आवश्यकता और मिलेट्स को लाभदायक बनाने पर प्रकाश डाला।</p>
<p>सेलिब्रिटी शेफ रणवीर बरार ने अपने विशेष संबोधन में 'मिलेट ईयर 2023' अभियान का &nbsp;समर्थन करते हुए भारतीय व्यंजनों में मिलेट्स के इस्तेमाल को फिर से बढ़ावा देने का &nbsp;आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चावल और गेहूं के बाद मोटे अनाजों का उपयोग भारत की सभी संस्कृतियों, राज्यों और व्यंजनों में बड़े पैमाने पर किया जाता था। उन्होंने कहा, "एक शेफ के रूप में मैंने हमेशा कहा है कि एक देश के रूप में हम सभी मोटा अनाज खाकर बड़े हुए हैं और फिर हम चावल और गेहूं की ओर मुड़ गए। मुझे लगता है कि हमें सीखने की जरूरत है।" उन्होंने कहा कि यह समझने के लिए कि पारंपरिक रूप से मिलेट्स का उपयोग कैसे किया जाता था हमें अपनी जड़ों की ओर लौटने की जरूरत है।</p>
<p>भारत के मिलेट मैन के नाम से मशहूर डॉ. खादर वली ने अपने संबोधन में विभिन्न बीमारियों को खत्म करने में मोटा अनाज के इस्तेमाल की जोरदार वकालत की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मिलेट्स पोषण देने के अलावा वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का एक अनूठा समाधान पेश करता है। उन्होंने कहा कि मोटा अनाज की खेती में बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। उन्होंने मोटा अनाज के कई पारंपरिक किस्मों के लुप्त होने पर अफसोस जताया।</p>
<p>इस मौके पर फिक्की पीडब्ल्यूसी नॉलेज रिपोर्ट- &lsquo;भारत के बाजरा क्षेत्र को एक स्थायी भविष्य की ओर ले जाना&rsquo; जारी की गई। पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर शशि कांत सिंह ने कहा कि इस रिपोर्ट में मिलेट्स के लिए अगले 10-15 वर्षों के नीतिगत अमल, उत्पादन पहलुओं, जागरूकता निर्माण, नवाचार और बाजार विकास की रूपरेखा तैयार की गई है। उन्होंने मिलेट्स के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग पैदा करने की आवश्यकता पर जोर दिया और सरकार द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों की सराहना की।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e88d1a0f1be.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मिलेट्स क्षेत्र में बढ़ रही स्टार्टअप्स की भागीदारी, डेढ़ साल में 80 से ज्यादा स्टार्टअप्स ने रखा कदम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e88d1a0f1be.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खेती वाले यूरिया के औद्योगिक इस्तेमाल पर होगी जेल, केंद्र ने डायवर्जन रोकने को बनाई व्यापक कार्य योजना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-to-curb-diversion-of-subsidised-urea.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 25 Aug 2023 14:25:41 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-to-curb-diversion-of-subsidised-urea.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खेती में इस्तेमाल होने वाले सब्सिडी वाले यूरिया के प्लाइवुड और अन्य उद्योगों में इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक कार्य योजना तैयार की है। सब्सिडी वाले यूरिया के डायवर्जन पर अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय अन्य केंद्रीय मंत्रालयों के साथ-साथ राज्यों के साथ समन्वय करेगा और इसके लिए संयुक्त अभियान शुरू करने की भी योजना है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि कृषि ग्रेड यूरिया के औद्योगिक इस्तेमाल पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी और पकड़े जाने पर जेल की सजा भी हो सकती है।</p>
<p>इस सप्ताह की शुरुआत में केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कृषि ग्रेड यूरिया के उद्योगों को डायवर्जन पर अंकुश लगाने के लिए कहा है। केंद्र सरकार द्वारा किसानों को नीम कोटेड यूरिया 266 रुपये प्रति बैग (45 किलो) की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाता है जो औद्योगिक उपयोग के तकनीकी-ग्रेड यूरिया से काफी सस्ता है। कृषि वाले यूरिया के सस्ता होने की वजह से गोंद, प्लाईवुड, क्रॉकरी, मोल्डिंग पाउडर, पशु चारा और औद्योगिक खनन विस्फोटक बनाने वाले उद्योगों में अवैध रूप से इसका काफी इस्तेमाल होता है।</p>
<p>उर्वरक विभाग ने यूरिया सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि इसका फायदा किसानों को ही मिले, खेती वाले यूरिया के डायवर्जन को रोकने के लिए "व्यापक कार्य योजना" तैयार की है। सूत्रों ने कहा कि ऐसे मामले सामने आए हैं कि कृषि वाले यूरिया की नीम कोटिंग को कुछ रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से हटा दिया जाता है और उसका औद्योगिक इस्तेमाल किया जाता है। उर्वरक विभाग कृषि ग्रेड यूरिया का उपयोग करने वाले उद्योगों पर नकेल कसने के लिए वित्त और वाणिज्य सहित विभिन्न मंत्रालयों के साथ-साथ राज्य सरकारों के साथ समन्वय करेगा। इसमें जीएसटी इंटेलीजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआई) की भी मदद ली जाएगी। केंद्र सरकार और राज्यों द्वारा एक संयुक्त अभियान भी जल्द ही शुरू किया जाएगा।</p>
<p>इसके अलावा, विभाग तकनीकी ग्रेड यूरिया के घरेलू उत्पादन और आयात दोनों की कुल आपूर्ति की निगरानी करेगा। साथ ही उन उद्योगों द्वारा उत्पादित कुल उत्पादों पर भी नजर रखेगा जिन्हें कच्चे माल के रूप में यूरिया की आवश्यकता होती है। इन उपायों से सरकार को तकनीकी ग्रेड यूरिया की आपूर्ति और उपयोग का आकलन करने और कृषि ग्रेड यूरिया के डायवर्जन रोकने में मदद मिलेगी।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, विभाग नीम कोटिंग यूरिया का इस्तेमाल करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, उर्वरक नियंत्रण आदेश और कालाबाजारी रोकथाम अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई करेगा। इसके अलावा, केंद्र सरकार उद्योगों से अपने प्लांटों में यूरिया की खपत और कुल उत्पादन से संबंधित डाटा विभाग को आवश्यक रूप से देने का निर्देश देने पर भी विचार कर रही है।</p>
<p>पिछले साल जुलाई में उर्वरक विभाग ने खेती वाले यूरिया के डायवर्जन को रोकने के लिए देशव्यापी कार्रवाई शुरू की थी। इसके लिए एक विशेष टीम 'उर्वरक फ्लाइंग स्क्वाड' का गठन किया गया था। उस समय एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि लगभग 10 लाख टन खेती वाले यूरिया का डायवर्जन उद्योगों और कुछ पड़ोसी देशों को किया गया। इसकी वजह से लगभग 6,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी का दुरुपयोग हुआ।</p>
<p>औद्योगिक उपयोग के लिए सालाना लगभग 13-14 लाख टन तकनीकी-ग्रेड यूरिया की आवश्यकता है जिसमें से केवल 1.5 लाख टन का ही उत्पादन देश में होता है। बाकी का या तो आयात किया जाता है या फिर खेती वाले यूरिया का अवैध रूप से इस्तेमाल किया जाता है। वित्त वर्ष 2022-23 में भारत ने 284.95 लाख टन यूरिया का उत्पादन किया और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए 75 लाख टन यूरिया का आयात किया।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e86c36b49ff.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खेती वाले यूरिया के औद्योगिक इस्तेमाल पर होगी जेल, केंद्र ने डायवर्जन रोकने को बनाई व्यापक कार्य योजना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e86c36b49ff.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नासिक में तीन दिन बाद शुरू हुई प्याज की नीलामी, 16&amp;#45;17 रुपये किलो पर खुला भाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/onion-auction-started-in-nashik-mandis-after-three-days-open-price-at-rs-16-17-per-kg.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 24 Aug 2023 14:49:03 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/onion-auction-started-in-nashik-mandis-after-three-days-open-price-at-rs-16-17-per-kg.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नासिक की मंडियों में तीन दिन की हड़ताल के बाद गुरुवार दोपहर से प्याज की नीलामी फिर से शुरू हो गई। हालांकि, निर्यात शुल्क लगाए जाने से पहले थोक मंडियों में प्याज का जो भाव 22-23 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया था गुरुवार को उसकी बोली 16-17 रुपये प्रति किलो लगी। प्याज निर्यात पर 40 फीसदी शुल्क लगाए जाने के केंद्र सरकार के फैसले के विरोध में प्याज व्यापारियों और किसानों ने सोमवार से नीलामी रोक दी थी और हड़ताल पर चले गए थे।</p>
<p>बुधवार को प्याज व्यापारियों और किसानों के प्रतिनिधिमंडल की केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती पवार के साथ बैठक हुई जिसमें गुरुवार से नीलामी शुरू करने पर सहमति बनी। पवार ने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार से निर्यात शुल्क पर दोबारा विचार करने और सकारात्मक निर्णय लेने का अनुरोध किया जाएगा। पवार नासिक जिले के डिंडोरी से सांसद हैं। हालांकि, गुरुवार सुबह जब कृषि उपज मंडियों में प्याज की नीलामी शुरू हुई तो भाव गिरने की वजह से किसानों ने फिर से नीलामी रोक दी और व्यापारियों द्वारा भाव बढ़ाने का आश्वासन दिए जाने के बाद दोपहर बाद ही नीलामी शुरू हो पाई। &nbsp;</p>
<p>नासिक के पिंपलगांव मंडी के प्याज व्यापारी संदीप जगताप ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि गुरुवार सुबह 16-17 रुपये प्रति किलो पर नीलामी शुरू हुई। इसके विरोध में किसानों ने फिर से नीलामी रोक दी। उनकी मांग थी कि केंद्र सरकार ने नेफेड के जरिये 2,410 रुपये प्रति क्विंटल पर प्याज खरीदने की घोषणा की है तो नेफेड के लोग मंडी में आकर खरीदारी करें। जबकि हकीकत यह है कि नेफेड मंडी में आकर नहीं बल्कि उनके द्वारा तय किए गए व्यापारियों के जरिये खरीदारी करती है। हालांकि, दोपहर बाद पिंपलगांव मंडी में फिर से प्याज की नीलामी शुरू हो गई। पिंपलगांव में गुरुवार को प्याज की करीब 200 गाड़ियों की आवक रही।</p>
<p>स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजू शेट्टी ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि बुधवार को हड़ताल वापस लेने पर सहमति बनी थी लेकिन गुरुवार को भाव नीचे गिरने की वजह से किसानों ने फिर से नीलामी रोक दी। व्यापारियों और किसानों के बीच भाव को लेकर बातचीत चल रही है। व्यापारियों ने आश्वासन दिया है कि वे प्याज का भाव बढ़ाएंगे। अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।</p>
<p>प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 40 फीसदी निर्यात शुल्क लगा दिया है जिससे प्याज का निर्यात बंद हो गया है और मंडियों में कीमत घट गई है। इसकी वजह से व्यापारियों और किसानों दोनों को नुकसान हो रहा है। किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक के लिए अतिरिक्त 2 लाख टन प्याज 2,410 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदने की घोषणा की है।</p>
<p>हालांकि, किसानों का कहना है कि इस कीमत पर भी उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है क्योंकि मई-जून में बारिश की वजह से उनकी 40-45 फीसदी फसल खराब हो चुकी है। उन्हें 55-60 फीसदी फसल की कीमत ही मिल पा रही है। अगर निर्यात शुल्क नहीं लगाया जाता तो मंडी में कीमत 35-40 रुपये प्रति किलो तक जाता जिससे उन्हें राहत मिलती। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नासिक में तीन दिन बाद शुरू हुई प्याज की नीलामी, 16-17 रुपये किलो पर खुला भाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ मार्केटिंग सीजन 2023&amp;#45;24 में 521 लाख टन चावल की होगी सरकारी खरीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/rice-procurement-during-kharif-marketing-season-2023-24-estimated-at-521-lmt.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 23 Aug 2023 15:28:56 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/rice-procurement-during-kharif-marketing-season-2023-24-estimated-at-521-lmt.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2023-24 में केंद्रीय पूल के लिए 521.27 लाख टन चावल खरीद का अनुमान लगाया है। पिछले मार्केटिंग सीजन 2022-23 में 496 लाख टन चावल की सरकारी खरीद की गई थी, जबकि अनुमान 518 लाख टन का लगाया गया था। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में बताया कि खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव ने 21<span> अगस्त को राज्य के खाद्य सचिवों और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के साथ एक बैठक में खरीफ मार्केटिंग सीजन </span>2023-24 <span>में खरीफ फसलों की खरीद पर चर्चा की। </span></p>
<p>आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन के दौरान 521.27 <span>लाख टन</span>&nbsp;चावल की खरीद का अनुमान लगाया गया है। इस दौरान पंजाब में सबसे ज्यादा 122 <span>लाख टन</span>,&nbsp;छत्तीसगढ़ में 61 <span>लाख टन और तेलंगाना में </span>50 <span>लाख टन चावल खरीद का अनुमान है। इसके बाद</span>&nbsp;ओडिशा में 44.28 <span>लाख टन</span>,&nbsp;उत्तर प्रदेश में 44 <span>लाख टन</span>,&nbsp;<span>हरियाणा में </span>40 <span>लाख टन और</span>&nbsp;मध्य प्रदेश में 34 <span>लाख &nbsp;टन चावल की खरीद होगी। जबकि बिहार में </span>30 <span>लाख टन</span>,&nbsp;आंध्र प्रदेश में 25 <span>लाख टन</span>,&nbsp;पश्चिम बंगाल में 24<span> लाख टन और तमिलनाडु में </span>15<span> लाख टन खरीद का अनुमान है। </span></p>
<p>बयान के मुताबिक, खरीफ मार्किटिंग सीजन 2023-24 <span>में </span>33.09&nbsp;लाख टन मोटा अनाज (श्रीअन्न/बाजरा) की खरीद का अनुमान सरकार ने लगाया गया है,&nbsp;जबकि 2022-23 (<span>खरीफ और रबी) में </span>7.37&nbsp;लाख टन मोटा अनाज की वास्तविक खरीद की गई थी। खरीफ मार्केटिंग सीजन 2023-24<span> से तीन वर्षों तक रागी के न्&zwj;यूनतम समर्थन मूल्&zwj;य पर राज्यों द्वारा </span>6<span> छोटे दाने वाले मोटे अनाज या श्रीअन्न की खरीद भी शुरू की गई है। </span></p>
<p>बयान में कहा गया है कि मोटा अनाज की खरीद और खपत बढ़ाने के लिए सरकार ने श्रीअन्न की वितरण अवधि को संशोधित किया है। साथ ही&nbsp;श्रीअन्न को एक राज्&zwj;य से दूसरे राज्&zwj;य में पहुंचाने के लिए परिवहन को शामिल किया गया है एवं&nbsp;उन्नत सब्सिडी के प्रावधान सहित&nbsp;2 <span>फीसदी की दर से प्रशासनिक शुल्क और छह छोटे दाने वाले मोटे अनाजों की खरीद की सुविधा के लिए दिशा-निर्देशों में भी संशोधन किया गया है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को फसलों के विविधीकरण और आहार पैटर्न में पोषण बढ़ाने के लिए भी श्रीअन्न की खरीद पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी गई है।</span></p>
<p>बैठक के दौरान टाट की बोरियों की आवश्यकता,&nbsp;निर्दिष्&zwj;ट डिपो से उचित मूल्य की दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचाने के लिए मार्ग अनुकूलन,&nbsp;खरीद केंद्रों में बुनियादी ढांचे में सुधार,&nbsp;गेहूं स्टॉक सीमा पोर्टल की निगरानी आदि से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की गई।</p>
<p>इस बैठक में आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा,&nbsp;हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, राजस्थान, &nbsp;केरल, मध्य प्रदेश,&nbsp;महाराष्ट्र,&nbsp;ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के प्रधान सचिव/सचिव (खाद्य) या प्रतिनिधियों ने भाग लिया। साथ ही एफसीआई के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक और एफसीआई,&nbsp;खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग,&nbsp;भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ मार्केटिंग सीजन 2023-24 में 521 लाख टन चावल की होगी सरकारी खरीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शेतकारी संघटना नेता विजय जावंधिया ने प्याज पर निर्यात शुल्क के खिलाफ पीएम को लिखी चिट्ठी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/shetkari-sanghatana-wrote-a-letter-to-pm-against-ban-on-export-of-onion-wheat-and-rice.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 23 Aug 2023 14:08:45 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/shetkari-sanghatana-wrote-a-letter-to-pm-against-ban-on-export-of-onion-wheat-and-rice.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>शेतकारी संघटना के वरिष्ठ नेता विजय जावंधिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिख कर प्याज पर 40 फीसदी निर्यात शुल्क लगाने के फैसले को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में प्रधानमंत्री को याद दिलाया है कि 2010-11 में जब तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने कपास निर्यात पर पाबंदी लगाई थी तो आपने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर इस फैसले का विरोध करते हुए सवाल उठाया था कि क्या केंद्र सरकार को किसानों की चिंता नहीं है? बतौर प्रधानमंत्री अब आपने गेहूं, चावल का निर्यात बंद कर दिया है और प्याज के निर्यात पर 40 फीसदी शुल्क लगा दिया है, क्या दिल्ली का सिंहासन किसान विरोधी है? &nbsp;</p>
<p>विजय जावंधिया ने अपने पत्र में लिखा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं के दाम बढ़ने लगे तो आपने गेहूं का निर्यात बंद कर दिया, चावल के दाम बढ़ने लगे तो चावल का निर्यात बंद कर दिया। टमाटर के दाम बढ़े तो नेपाल से टमाटर आयात कर लिया। अब प्याज के दाम बढ़ रहे हैं और निर्यात भी बढ़ रहा है तो आपने निर्यात पर 40 फीसदी शुल्क लगा दिया।</p>
<p>पत्र में उन्होंने लिखा है कि जब आप गुजरात के मुख्यमंत्री थे और 2010 में डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने कपास निर्यात पर 2500 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी में 356 किलो) का शुल्क लगाया था। उसके बाद 2011-12 में 85 लाख गांठ कपास का निर्यात करने के बाद घरेलू बाजार में दाम 3900 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी से बढ़कर 6000-7000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए थे तो सरकार ने निर्यात बंद कर दिया था। तब आपने इसका विरोध करते हुए तत्कालीन केंद्र सरकार से सवाल किया था- &ldquo;केंद्र सरकार को राज्य के किसानों के अधिकार की चिंता नहीं है क्या? यह गुजरात के किसानों के साथ यूपीए सरकार का षडयंत्र है।&rdquo;</p>
<p>जावंधिया ने लिखा है कि आज आप प्याज पर 40 फीसदी निर्यात शुल्क के जरिये इसका निर्यात रोक कर दाम नियंत्रित करना चाहते हैं। अगर किसानों को अच्छा दाम मिल रहा है तो मिलने दीजिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की है कि निर्यात शुल्क वापस लेकर सरकार बाजार से प्याज की खरीदी करे। उन्होंने लिखा है- &ldquo;मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि शायद दिल्ली का सिंहासन ही किसान विरोधी है। आपसे विनती है कि इस धारणा को बदलिए।&rdquo;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_6489a2720d5aa.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ शेतकारी संघटना नेता विजय जावंधिया ने प्याज पर निर्यात शुल्क के खिलाफ पीएम को लिखी चिट्ठी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज की खरीद 2,410 रुपये क्विंटल पर करने की घोषणा मगर किसानों ने निर्यात शुल्क की वापसी तक आंदोलन जारी रखने का किया ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-procure-onion-at-rs-2410-per-quintal-but-farmers-agitation-will-continue-till-export-duty-is-withdrawn.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 22 Aug 2023 18:09:26 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-procure-onion-at-rs-2410-per-quintal-but-farmers-agitation-will-continue-till-export-duty-is-withdrawn.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्याज पर 40 फीसदी निर्यात शुल्क लगाए जाने के फैसले के खिलाफ किसानों के तेज होते आंदोलन और उनकी नाराजगी को दूर करने की कोशिश के तहत मंगलवार को केंद्र सरकार ने ऐलान किया कि किसानों से 2,410 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर प्याज की खरीद की जाएगी। प्याज किसानों के हित में सरकार सभी कदम उठा रही है। मगर किसान संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार निर्यात शुल्क को वापस नहीं लेती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।</p>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में कहा कि बफर स्टॉक के लिए अतिरिक्त 2 लाख टन प्याज की खरीद 2,410 रुपये प्रति क्विंटल पर करने का फैसला किया गया है। उन्होंने किसानों से कहा कि वे इससे कम कीमत पर अपनी फसल न बेचें। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के साथ-साथ उपभोक्ताओं के हितों का भी ध्यान रख रही है। इसलिए एनसीसीएफ के खुदरा आउटलेट और मोबाइल वैन के जरिये 25 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर प्याज की बिक्री शुरू की गई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार ने उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए प्याज निर्यात पर 40 फीसदी शुल्क लगाया है ताकि घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाई जा सके, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने बफर स्टॉक के लिए 2 लाख टन अतिरिक्त प्याज किसानों से खरीदने का फैसला किया है। इसलिए किसानों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। किसान और उपभोक्ता दोनों हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। पीयूष गोयल के इस ऐलान के बाद किसान संगठनों ने साफ कर दिया है कि इससे किसानों का भला होने वाला नहीं है। जब तक सरकार निर्यात शुल्क लगाने का फैसला वापस नहीं लेती है तब तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा।</p>
<p>स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने <strong>रूरल वॉयस</strong> से कहा, &ldquo;जून महीने में जब बारिश की वजह से प्याज की फसल खराब हो गई और बाजार में दाम गिर गए थे तब सरकारी एजेंसी नेफेड ने 10-11 रुपये प्रति किलो पर प्याज खरीदा। तब हम मांग कर रहे थे कि 25 रुपये प्रति किलो पर सरकारी खरीद की जाए ताकि बारिश की वजह से हुए नुकसान से किसानों को कुछ राहत मिल सके। मगर तब सरकार ने ऐसा नहीं किया। बारिश और किसानों के पास भंडारण की क्षमता न होने की वजह से 40-45 फीसदी प्याज खराब हो गया। किसानों को तो उनकी उपज के 55-60 फीसदी हिस्से का ही दाम मिल पा रहा है। सरकार ने जिस कीमत पर खरीदने की बात कही है उससे नुकसान की पूरी भरपाई कैसे हो पाएगी। जब किसानों की फसल बर्बाद हो रही थी और उनका नुकसान हो रहा था तब सरकार ने उनकी कोई मदद नहीं की। अब जब दाम बढ़ रहे थे और किसानों की कमाई का समय आया तो सरकार ने 40 फीसदी निर्यात शुल्क लगाकर एक बार फिर से उनका नुकसान कर दिया।&rdquo;</p>
<p>राजू शेट्टी का कहना है कि अगर निर्यात शुल्क नहीं लगाया जाता तो किसानों को 35-40 रुपये प्रति किलो तक दाम मिल सकते थे जिससे उनको राहत मिलती और नुकसान की भरपाई होती। इसलिए जब तक सरकार अपना यह फैसला वापस नहीं लेती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सरकार के इस फैसले से व्यापारियों का भी नुकसान हो रहा है, इसलिए वे भी किसानों के समर्थन में हैं। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>मंगलवार को पूरे महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन जारी रहा। आंदोलन के समर्थन में प्याज की थोक मंडियां बंद रहीं।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज की खरीद 2,410 रुपये क्विंटल पर करने की घोषणा मगर किसानों ने निर्यात शुल्क की वापसी तक आंदोलन जारी रखने का किया ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज पर निर्यात शुल्क के खिलाफ बढ़ रहा विरोध, एमपी तक फैला आंदोलन, भारतीय किसान संघ ने दी चेतावनी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/protest-against-export-duty-on-onion-spread-to-mp-bhartiya-kisan-sangh-warned-modi-govt.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 22 Aug 2023 14:29:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/protest-against-export-duty-on-onion-spread-to-mp-bhartiya-kisan-sangh-warned-modi-govt.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्याज के निर्यात पर 40 फीसदी शुल्क लगाने के खिलाफ किसानों और व्यापारियों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। महाराष्ट्र के प्रमुख प्याज उत्पादक जिले नासिक, अहमदनगर, पुणे से सोमवार को शुरू हुआ किसानों का आंदोलन मध्य प्रदेश तक पहुंच गया है। मध्य प्रदेश के इंदौर, रतलाम सहित मालवा नीमाड़ इलाके के अन्य जिलों में मंगलवार को किसान संगठनों ने केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। महाराष्ट्र के बाद मध्य प्रदेश दूसरा सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है। विरोध करने वाले संगठनों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा किसान संगठन भारतीय किसान संघ भी शामिल है। भारतीय किसान संघ ने केंद्र सरकार को चेतावनी भी दी है।</p>
<p>प्याज की सबसे बड़ी थोक मंडी नासिक के लासलगांव सहित महाराष्ट्र की अन्य कृषि उपज बाजार समितियों (एपीएमसी) में मंगलवार को भी प्याज की नीलामी बंद रही। प्रदर्शनकारी किसानों ने निर्यात शुल्क वापस लिए जाने की मांग को लेकर जगह-जगह रास्ता रोका। किसानों का कहना है कि इस साल प्राकृतिक आपदा की वजह से प्याज किसानों को काफी नुकसान हुआ है। अब जब किसानों को उनकी उपज के अच्छे दाम मिलने की संभावना नजर आ रही है तो सरकार ने भारी भरकम निर्यात शुल्क लगाकर इस पर पानी फेर दिया है।</p>
<p>उधर, मध्य प्रदेश के इंदौर में मगंलवार को भारतीय किसान संघ ने इस फैसले के विरोध में कलेक्ट्रेट का घेराव किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम शुल्क वापस लेने संबंधी ज्ञापन सौंपा। भारतीय किसान संघ ने चेतावनी दी है कि अगर 15 दिन के भीतर यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो सभी सांसदों का घेराव किया जाएगा और मंडियों को बंद किया जाएगा। इसके अलावा, मालवा इलाके के 15 जिलों में शुल्क वापस लेने संबंधी ज्ञापन सौंपा गया। मध्य प्रदेश का मालवा नीमाड़ इलाका प्याज का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। इससे पहले सोमवार को मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में किसान संगठनों ने इस फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया था। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>भारतीय किसान संघ, इंदौर के जिलाध्यक्ष कृष्णपाल सिंह राठौर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछले तीन वर्षों से मध्य प्रदेश के प्याज किसान नुकसान झेल रहे हैं। इस फैसले से लाखों किसान प्रभावित होंगे। यदि केंद्र सरकार किसानों का भला चाहती है तो जल्द से जल्द इस फैसले को वापस ले।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e478981ca7b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज पर निर्यात शुल्क के खिलाफ बढ़ रहा विरोध, एमपी तक फैला आंदोलन, भारतीय किसान संघ ने दी चेतावनी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अगस्त में ठहर गया मानसून, अल&amp;#45;नीनो के मजबूत होने से 29 फीसदी कम हुई बारिश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-takes-pause-in-aug-after-jul-deluge-el-nino-may-further-weaken-rains.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 21 Aug 2023 18:16:20 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/monsoon-takes-pause-in-aug-after-jul-deluge-el-nino-may-further-weaken-rains.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अगस्त में अब तक मानसून की बारिश सामान्य से 29 फीसदी कम रही है जिसकी वजह से &nbsp;देश के कई इलाकों में सूखा बना हुआ है। चिंताजनक बात यह भी है कि अमेरिकी मौसम विज्ञानी अल नीनो के मजबूत होने की 66 फीसदी संभावना जता रहे हैं। इसका मतलब है कि अल नीनो का प्रभाव भारत में भी महसूस किया जा सकता है जिससे मानसून और कमजोर हो सकता है। कुल मिलाकर अब तक देश में मानसून की बारिश +/-4 फीसदी के साथ सामान्य बनी हुई है, लेकिन अगस्त में कम बारिश हुई है।</p>
<p>भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने अपने पूर्वानुमान में कहा था कि अगस्त में अल नीनो का असर बारिश पर पड़ेगा। जबकि जुलाई में सामान्य या सामान्य से 6 फीसदी अधिक बारिश होगी। हालांकि, पश्चिमी विक्षोभ के चलते जुलाई में सामान्य की तुलना में लगभग 13 फीसदी अधिक बारिश हुई। आमतौर पर मानसून के चार महीनों में जुलाई के बाद अगस्त सबसे अधिक बारिश वाला दूसरा महीना होता है। मगर इस बार ऐसा नहीं हुआ है और अगस्त में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।</p>
<p>मजबूत होते अल नीनो ने मानसून के दूसरे भाग में बारिश को रोक दिया है। आमतौर पर अगस्त में 25.49 सेमी बारिश होती है। आईएमडी ने कहा है कि मानसून सीजन के दूसरे हिस्से (अगस्त-सितंबर) के दौरान पूरे देश में औसत वर्षा सामान्य (दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का 94-106%) होने की संभावना है। इसमें सामान्य का पक्ष नकारात्मक रहेगा। &nbsp;अगस्त के दौरान पूरे देश में औसत वर्षा सामान्य से कम (एलपीए का 94%) होने की संभावना है।</p>
<p>30 जून को आईएमडी ने पूर्वानुमान लगाया था कि जुलाई में बारिश सामान्य या सामान्य से 6 फीसदी अधिक होगी। हालांकि, पश्चिमी विक्षोभ के कारण जुलाई में सामान्य की तुलना में लगभग 13 फीसदी अधिक बारिश हुई। जुलाई में उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी भारत में बारिश कम होने का अनुमान आईएमडी ने लगाया था लेकिन उसका पूर्वानुमान सही नहीं निकला। उत्तर-पश्चिम में सामान्य से 25 फीसदी अधिक और दक्षिणी भारत में 45 फीसदी अधिक बारिश हुई। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 32 कम बारिश दर्ज की गई।</p>
<p>आईएमडी ने जुलाई के मानसून के विश्लेषण में कहा कि कुल मिलाकर उत्तर पश्चिम भारत में 2001 के बाद सबसे अधिक बारिश हुई है। चंडीगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश के सारे रिकॉर्ड टूट गए। जून में मानसून शुरू होने से पहले आईएमडी ने जून-सितंबर के लिए बारिश सामान्य से 4 फीसदी कम होने का अनुमान लगाया था। अब तक जून और जुलाई की संयुक्त बारिश सामान्य से 5 फीसदी अधिक है।</p>
<p>आईएमडी ने एक बयान में कहा था कि अगस्त में दक्षिण प्रायद्वीप, पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत के अधिकांश हिस्सों और उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से ज्यादा तापमान रहेगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_64644b73d6bb1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अगस्त में ठहर गया मानसून, अल-नीनो के मजबूत होने से 29 फीसदी कम हुई बारिश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/05/image_750x500_64644b73d6bb1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज पर 40 फीसदी निर्यात शुल्क के विरोध में उतरे किसान संगठन, किसान विरोधी कदम के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/farmers-organizations-protest-against-40-percent-export-duty-on-onions-announced-to-intensify-movement-against-anti-farmer-move.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 21 Aug 2023 16:54:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/farmers-organizations-protest-against-40-percent-export-duty-on-onions-announced-to-intensify-movement-against-anti-farmer-move.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्याज की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश रखने के लिए निर्यात पर 40 फीसदी शुल्क लगाने के केंद्र सरकार के फैसले के विरोध में किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र के नासिक जिले की थोक मंडियों में सोमवार को किसानों ने प्याज की नीलामी रोक दी और हड़ताल शुरू कर दी। प्याज के थोक व्यापारियों ने भी किसानों के समर्थन में दुकानें बंद कर दी। किसान संगठनों का कहना है कि यह पूरी तरह से चुनावी राजनीति के तहत उठाया गया किसान विरोधी कदम है। अभी इसकी कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि अभी प्याज के दाम उस स्तर पर नहीं पहुंचे हैं जब इस तरह का कदम उठाना पड़े। इसके खिलाफ किसान संगठनों ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है।</p>
<p>भारत से प्रमुख रूप से बांग्लादेश, मलेशिया, यूएई, श्रीलंका, नेपाल, इंडोनेशिया, कतर, वियतनाम, ओमान और कुवैत को प्याज का निर्यात किया जाता है। भारतीय प्याज का सबसे ज्यादा निर्यात (26 फीसदी से ज्यादा) &nbsp;बांग्लादेश को किया जाता है। चालू वित्त वर्ष 2023-24 में 1 अप्रैल से 4 अगस्त तक 9.75 लाख टन प्याज का निर्यात किया गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष 2022-23 में कुल करीब 23 लाख टन प्याज का निर्यात किया गया था जिसका मूल्य करीब 4,006 करोड़ रुपये था।</p>
<p>स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने सरकार के इस कदम को किसान विरोधी बताते हुए <strong>रूरल वॉयस</strong> से कहा, &ldquo;पांच राज्यों में नवंबर-दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। सरकार को डर है कि अगर चुनाव के दौरान प्याज के दाम बढ़ गए तो मुश्किल हो सकती है। इस साल मई-जून में जब प्याज की कीमतें घटकर 2-3 रुपये प्रति किलो तक आ गई थी और किसान सड़कों एवं खेत में अपनी फसल फेंक रहे थे, तब सरकार कहां थी, क्या उनकी मदद करने आई थी? उससे पहले फरवरी-मार्च में जब बेमौसम बारिश की वजह से प्याज की फसल बर्बाद हो गई थी तो क्या सरकार ने किसानों को मुआवजा दिया था? तब उन्हें बाजार के भरोसे छोड़ दिया गया। अब जब दाम बढ़ रहे हैं और इसका फायदा किसानों को मिल सकता था, तो फिर सरकार बाजार में हस्तक्षेप क्यों कर रही है। इसके विरोध में शुरू हुए आंदोलन को तेज किया जाएगा और पूरे महाराष्ट्र में आंदोलन किया जाएगा।&rdquo;</p>
<p><em><strong>भारत से प्याज के प्रमुख आयातक देश</strong></em></p>
<table width="616" height="666">
<tbody>
<tr>
<td style="width: 89.7917px;">
<p><strong>क्रम सं. </strong></p>
</td>
<td style="width: 167.135px;">
<p><strong>आयातक देश</strong></p>
</td>
<td style="width: 193.958px;">
<p><strong>2022-23 में निर्यात (टन में)</strong></p>
</td>
<td style="width: 153.781px;">
<p><strong>मूल्य&nbsp; </strong><strong>(लाख रुपये में)</strong></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 89.7917px;">
<p><strong>1</strong></p>
</td>
<td style="width: 167.135px;">
<p>बांग्लादेश</p>
</td>
<td style="width: 193.958px;">
<p>671,125.27</p>
</td>
<td style="width: 153.781px;">
<p>89,728.81</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 89.7917px;">
<p><strong>2</strong></p>
</td>
<td style="width: 167.135px;">
<p>मलेशिया</p>
</td>
<td style="width: 193.958px;">
<p>393,461.34</p>
</td>
<td style="width: 153.781px;">
<p>84,877.95</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 89.7917px;">
<p><strong>3</strong></p>
</td>
<td style="width: 167.135px;">
<p>यूएई</p>
</td>
<td style="width: 193.958px;">
<p>403,219.30</p>
</td>
<td style="width: 153.781px;">
<p>78,477.43</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 89.7917px;">
<p><strong>4</strong></p>
</td>
<td style="width: 167.135px;">
<p>श्रीलंका</p>
</td>
<td style="width: 193.958px;">
<p>270,501.29</p>
</td>
<td style="width: 153.781px;">
<p>45,193.05</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 89.7917px;">
<p><strong>5</strong></p>
</td>
<td style="width: 167.135px;">
<p>नेपाल</p>
</td>
<td style="width: 193.958px;">
<p>174,764.16</p>
</td>
<td style="width: 153.781px;">
<p>26,771.43</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 89.7917px;">
<p><strong>6</strong></p>
</td>
<td style="width: 167.135px;">
<p>इंडोनेशिया</p>
</td>
<td style="width: 193.958px;">
<p>116,695.71</p>
</td>
<td style="width: 153.781px;">
<p>22,184.63</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 89.7917px;">
<p><strong>7</strong></p>
</td>
<td style="width: 167.135px;">
<p>कतर</p>
</td>
<td style="width: 193.958px;">
<p>79,826.94</p>
</td>
<td style="width: 153.781px;">
<p>16,878.87</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 89.7917px;">
<p><strong>8</strong></p>
</td>
<td style="width: 167.135px;">
<p>वियतनाम</p>
</td>
<td style="width: 193.958px;">
<p>75,909.41</p>
</td>
<td style="width: 153.781px;">
<p>14,131.47</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 89.7917px;">
<p><strong>9</strong></p>
</td>
<td style="width: 167.135px;">
<p>ओमान</p>
</td>
<td style="width: 193.958px;">
<p>61,989.92</p>
</td>
<td style="width: 153.781px;">
<p>12,786.45</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 89.7917px;">
<p><strong>10</strong></p>
</td>
<td style="width: 167.135px;">
<p>कुवैत</p>
</td>
<td style="width: 193.958px;">
<p>45,399.12</p>
</td>
<td style="width: 153.781px;">
<p>9,626.44</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 89.7917px;">
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
</td>
<td style="width: 167.135px;">
<p><strong>कुल </strong></p>
</td>
<td style="width: 193.958px;">
<p><strong>2,292,892.46</strong></p>
</td>
<td style="width: 153.781px;">
<p><strong>400,656.53</strong></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>स्रोतः एपीडा</p>
<p>शेतकारी संगठन के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व अध्यक्ष और स्वतंत्र भारत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल घनवत ने <strong>रूरल वॉयस</strong> से कहा, &ldquo;अभी यह कदम उठाने की कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि अभी प्याज की खुदरा कीमत 30-35 रुपये प्रति किलो तक ही पहुंची है। अगर कीमत 50 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच जाती तो इस तरह का कदम उठाया जा सकता था। सरकार ने जल्दबाजी में यह निर्णय लिया है जो किसानों के हित में नहीं है। किसानों की लागत ही 18-20 रुपये प्रति किलो बैठती है। अगर उन्हें वाजिब कीमत नहीं मिलेगी तो वे अपना कर्ज कैसे चुकाएंगे। कर्ज नहीं चुका पाने की वजह से नासिक जिले के 62 हजार प्याज किसानों की जमीनें बैंकों ने जब्त कर ली है और वे उसे नीलाम कर सकते हैं।&rdquo;</p>
<p>तीन कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जो समिति बनाई थी अनिल घनवत उसके भी सदस्य थे। घनवत कहते हैं, &ldquo;यह सिर्फ कीमत का ही मामला नहीं है बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की साख का भी सवाल है। सरकार के इस तरह के अचानक फैसलों से निर्यात बाजार में भारत की विश्वसनीयता घटी है। यही वजह है कि एक समय प्याज निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 40 फीसदी थी जो अब घटकर 8 फीसदी रह गई है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे छोटे देशों ने हमारे निर्यात बाजार पर कब्जा कर लिया है। अभी बांग्लादेश हमारा सबसे बड़ा प्याज आयातक है लेकिन भारत के लगातार इस तरह के फैसलों को देखते हुए उसने प्याज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य रखा है और अपने किसानों को इसके लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इसके अलावा भारतीय प्याज के आयातक उन देशों का रुख कर रहे हैं जो उन्हें बिना किसा बाधा के निरंतर आपूर्ति करते रहें।&rdquo;</p>
<p>यह पूछने पर कि सरकार ने बफर स्टॉक के तहत 2 लाख टन अतिरिक्त प्याज खरीदने का फैसला किया है, क्या इससे किसानों को फायदा होगा, घनवत कहते हैं कि इसका कोई फायदा किसानों को नहीं मिलता है क्योंकि सरकारी खरीद एजेंसी नेफेड और एनसीसीएफ बाजार कीमत पर ही प्याज खरीदते हैं। प्याज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तो होता नहीं है, बाजार में जो मूल्य होता है उसी भाव पर सरकारी खरीद होती है तो किसानों को कैसे फायदा होगा। मगर सरकारी एजेंसियों को जरूर फायदा होता है क्योंकि जब बाजार में दाम बढ़ने लगते हैं तब बफर से बढ़े हुए दाम पर स्टॉक जारी किया जाता है। राजू शेट्टी ने भी कहा कि सरकारी खरीद से किसानों को कोई फायदा नहीं होगा। &nbsp;&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e348d7ac63f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज पर 40 फीसदी निर्यात शुल्क के विरोध में उतरे किसान संगठन, किसान विरोधी कदम के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e348d7ac63f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज का बफर 5 लाख टन करने का फैसला, एनसीसीएफ और नेफेड को अतिरिक्त 2 लाख टन स्टॉक खरीदने का निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/govt-to-procure-2-lt-of-onion-to-create-5-lt-buffer-stock.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 21 Aug 2023 13:23:04 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/govt-to-procure-2-lt-of-onion-to-create-5-lt-buffer-stock.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>घरेलू बाजार में प्याज की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए निर्यात पर 40 फीसदी शुल्क लगाने के बाद सरकार ने चालू वित्त वर्ष में प्याज का बफर स्टॉक 3 लाख टन से बढ़ाकर 5 लाख टन करने का फैसला किया है। इस संबंध में उपभोक्ता मामलों के विभाग ने भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (एनसीसीएफ) और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) को 1-1 लाख टन अतिरिक्त प्याज खरीदने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, एनसीसीएफ ने प्रमुख बाजारों में सोमवार से 25 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर उपभोक्ताओं के लिए प्याज बेचना शुरू कर दिया है।</p>
<p>प्याज की बढ़ती खुदरा कीमतों को देखते हुए सरकार ने हाल ही में बफर स्टॉक से बाजार में प्याज जारी करने का फैसला किया था। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के एक बयान में कहा है कि प्रमुख उपभोग केंद्रों में खरीदे गए बफर के प्याज का निपटान शुरू हो गया है। फिलहाल उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रमुख बाजारों को बफर स्टॉक से प्याज भेजा जा रहा है जहां खुदरा कीमतें अखिल भारतीय औसत से अधिक हैं या पिछले महीने की तुलना में काफी अधिक हैं। अभी तक बफर से लगभग 1,400 टन प्याज लक्षित बाजारों में भेजा गया है और उपलब्धता बढ़ाने के लिए इसे लगातार जारी किया जा रहा है।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि आने वाले दिनों में अन्य संस्&zwj;थाओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिये भी प्याज की खुदरा बिक्री को उपयुक्त रूप से बढ़ाया जाएगा। बयान के मुताबिक, बफर के लिए अतिरिक्त खरीद, लक्षित स्टॉक जारी करने और निर्यात शुल्क लगाने जैसे सरकार के विभिन्न उपायों से किसानों और उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।</p>
<p>इस बीच, एनसीसीएफ ने दिल्ली-एनसीआर में खुदरा दुकानों और मोबाइल वैन के माध्यम से उपभोक्ताओं को 25 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर प्याज की बिक्री शुरू कर दी है। &nbsp;सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, रविवार को अखिल भारतीय स्तर पर प्याज का औसत खुदरा मूल्य 19 फीसदी बढ़कर 29.73 रुपये प्रति किलो हो गया है जो एक साल पहले 25 रुपये प्रति किलो था। दिल्ली-एनसीआर में प्याज की खुदरा कीमत एक साल पहले के 28 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 37 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e3179e46aad.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज का बफर 5 लाख टन करने का फैसला, एनसीसीएफ और नेफेड को अतिरिक्त 2 लाख टन स्टॉक खरीदने का निर्देश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64e3179e46aad.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बढ़ती कीमतों का असर, सरकार ने पहली बार प्याज पर 40% एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/as-retail-prices-of-onion-increases-government-imposes-40-percent-export-duty-for-the-first-time.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 20 Aug 2023 12:45:58 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/as-retail-prices-of-onion-increases-government-imposes-40-percent-export-duty-for-the-first-time.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">गेहूं और चावल के बाद अब प्याज की बारी है। पिछले कुछ दिनों में प्याज की बढ़ती कीमतों के बाद घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने इसके निर्यात पर 40% ड्यूटी लगा दी है। यह ड्यूटी फिलहाल दिसंबर तक लगाई गई है। प्याज पर पहली बार एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार शनिवार को दिल्ली में इस कमोडिटी की कीमत 37 रुपए प्रति किलो पहुंच गई थी। हालांकि राजधानी के रिहायशी इलाकों में खुदरा विक्रेता इसे 40 से 50 रुपए किलो के भाव बेच रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">वित्त मंत्रालय ने एक कस्टम नोटिफिकेशन जारी करते हुए कहा है कि 31 दिसंबर 2023 तक प्याज पर 40% एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई गई है। मौजूदा वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 4 अगस्त तक 9.75 लाख टन प्याज का निर्यात किया गया है। भारत से मुख्य रूप से तीन देशों बांग्लादेश, मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात को प्याज का निर्यात किया गया।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उपभोक्ता मामले मंत्रालय के सचिव रोहित कुमार सिंह ने कहा है कि घरेलू बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने, खासकर त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में प्याज निर्यात में काफी बढ़ोतरी भी देखने को मिली है। हालांकि सरकार के इस कदम को आसन्न विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है। अभी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना में चुनाव होने हैं। चुनाव से पहले सरकार महंगाई को नियंत्रण में रखना चाहती है। जुलाई में खुदरा महंगाई दर 7.44% पर पहुंच गई थी जो 15 महीने में सबसे ज्यादा है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अभी तक प्याज निर्यात पर अंकुश लगाने के लिए सरकार न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) का रास्ता अपनाती रही है। पहली बार इस पर एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई गई है। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार शनिवार को देशभर में प्याज की खुदरा कीमतों का औसत 30.72 रुपए प्रति किलो था। देश में इसकी सबसे अधिक कीमत 63 रुपए और सबसे कम कीमत 10 रुपए प्रति किलो थी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">दिल्ली में औसत कीमत शनिवार को 37 रुपए प्रति किलो थी। हालांकि ट्रेड के आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में खुदरा बाजार में प्याज 50 रुपए किलो तक के भाव बिक रहा है। मौजूदा खरीफ सीजन में प्याज की फसल पिछड़ने की खबरों के बीच इसकी कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। जुलाई के थोक महंगाई के आंकड़ों के मुताबिक प्याज की महंगाई दर 7.13% रही थी जबकि जून में यह (-)4.31% थी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सरकार ने इस साल तीन लाख टन प्याज का बफर स्टॉक रखा है। पिछले सप्ताह से सरकार ने प्रमुख शहरों के थोक बाजारों में इसकी बिक्री शुरू की है। सचिव ने बताया कि अभी तक दिल्ली, असम, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की थोक मंडियों में बफर स्टॉक से 2000 टन प्याज की बिक्री की गई है। बफर स्टॉक से प्याज का इस्तेमाल आमतौर पर अगस्त और सितंबर में बाजार हस्तक्षेप के तहत किया जाता है। अक्टूबर से प्याज की नई फसल आने लगती है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64d7477769044.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बढ़ती कीमतों का असर, सरकार ने पहली बार प्याज पर 40% एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x500_64d7477769044.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एमएसपी गारंटी नहीं तो वोट नहीः वीएम सिंह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/no-msp-guarantee-no-vote-said-mspgkm-president-sardar-vm-singh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 19 Aug 2023 19:48:35 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
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        <description><![CDATA[ <p>एमएसपी गारंटी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने चेतावनी दी है कि अगर केंद्र सरकार फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी देने वाला कानून नहीं बनाती है तो किसान वोट नहीं देंगे। एमएसपी गारंटी किसान मोर्चा की समन्वय समिति की शनिवार को हुई बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह बात कही। इस मोर्चा में 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के 260 से अधिक किसान संगठन शामिल हैं।</p>
<p>वीएम सिंह ने कहा कि किसान केवल सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी पर अपनी फसल का भुगतान चाहते हैं, चाहे इसकी खरीद सरकार करे या फिर कोई निजी कंपनी। हमारी मांग है कि एमएसपी की गारंटी का कानून बनाकर एमएसपी से कम कीमत पर फसलों की खरीद को अवैध बनाया जाए। ऐसा नहीं है कि इस कानून से एमएसपी पर खरीद का पूरा बोझ सरकार पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जुलाई 2018 में एमएसपी प्राइवेट मेंबर बिल संसद में पेश किया गया था। उसमें भी यह बताया गया था कि एमएसपी पर खरीद का पूरा भार न तो राज्यों पर पड़ेगा और न ही केंद्र सरकार पर। हमारी मांग सिर्फ यही है कि कानून के जरिये यह तय किया जाए कि एमएसपी से कम पर देश में फसलों की खरीद नहीं होगी।</p>
<p>फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग दो दशक से भी अधिक पुरानी है। इसकी शुरुआत अक्टूबर 2000 में उत्तर प्रदेश के किसानों ने एक बड़े राज्यव्यापी आंदोलन से की थी। यह आंदोलन पीलीभीत से शुरू हुआ था और राज्य के अन्य हिस्सों में फैल गया था। इस दौरान एक सप्ताह तक रेल एवं सड़क यातायात पूरी तरह बाधित रहा था। आंदोलन के एक सप्ताह बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्ता को पद छोड़ना पड़ा था और राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही घंटों के भीतर उन्होंने किसानों की मांग मान ली और राज्य में एमएसपी पर धान खरीद शुरू हो गई थी।</p>
<p>वीएम सिंह ने कहा कि 2017 में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने देश भर का दौरा किया था और समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची थी कि यदि किसानों के लिए कर्ज माफी और एमएसपी गारंटी के दो कानून बना दिए जाएं तो उनकी दुर्दशा को कम किया जा सकता है। इस क्रम में मार्च 2018 में 20 से अधिक राजनीतिक दलों ने इन विधेयकों के प्रस्ताव को समर्थन करते हुए हस्ताक्षर किए जिसके बाद संसद के दोनों सदनों में इन्हें बतौर "निजी सदस्य विधेयक" पेश किया गया था।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एमएसपी गारंटी नहीं तो वोट नहीः वीएम सिंह ]]></media:description>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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        <title><![CDATA[उर्वरकों की बोरी का नया डिजाइन, पीएम की अपील, लागत, सब्सिडी एवं कीमत की जानकारी देना हुआ अनिवार्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/national/under-one-nation-one-fertiliser-appeal-by-prime-minister-is-to-be-printed-on-the-bags.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 19 Aug 2023 13:32:06 GMT]]></pubDate>
		<category>national</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/national/under-one-nation-one-fertiliser-appeal-by-prime-minister-is-to-be-printed-on-the-bags.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना के तहत सरकार ने जो &lsquo;एक राष्ट्र एक उर्वरक&rsquo; अभियान की शुरुआत की है, उसमें उर्वरकों के बैग पर किसानों से रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल कम करने की अपील भी छापी जाएगी। इस बारे में केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने 18 अगस्त को सभी उर्वरक कंपनियों के सीएमडी तथा एमडी को पत्र भेजा है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस संबंध में जारी अधिसूचना में कहा गया है कि सभी उर्वरक उत्पादक कंपनियों को बैग के ऊपर प्रधानमंत्री की किसानों से यह अपील भी छापनी पड़ेगी। प्रधानमंत्री की तरफ से किसानों से रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल कम करने और संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करने की अपील की गई है, ताकि धरती को बचाया जा सके।&nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x_64e076c3b6256.jpg" alt="" /></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अधिसूचना के मुताबिक यह आदेश केंद्र सरकार की तरफ से हाल में स्वीकृत पीएम प्रणाम के लक्ष्यों के अनुरूप है। पीएम प्रणाम में धरती को बचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए रासायनिक उर्वरकों के संतुलित और सस्टेनेबल प्रयोग को बढ़ावा देने, ऑर्गेनिक/बायो तथा नैनो फर्टिलाइजर को विकल्प के तौर पर अपनाने, प्राकृतिक/ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने, संसाधनों को बचाने के लिए माइक्रो इरिगेशन और जीरो टिलेज जैसे तरीके अपनाने पर जोर दिया गया है।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/08/image_750x_64e05f3c2c2c4.jpg" alt="" /></p>
<p><span style="font-weight: 400;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 अक्टूबर 2022 को पीएम किसान सम्मान सम्मेलन 2022 में प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना- एक राष्ट्र एक उर्वरक की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि &lsquo;एक राष्ट्र, एक उर्वरक&rsquo; से किसान को खाद की गुणवत्ता और उसकी उपलब्धता को लेकर फैली हर तरह की भ्रांति से मुक्ति मिलने वाली है। अब देश में बिकने वाला यूरिया एक ही नाम, एक ही ब्रांड और एक ही गुणवत्ता का होगा और यह ब्रांड &lsquo;भारत&rsquo; है! अब यूरिया पूरे देश में केवल 'भारत' ब्रांड नाम के तहत ही उपलब्ध होगा। उन्&zwj;होंने यह भी कहा कि इससे उर्वरकों की लागत कम होगी और उनकी उपलब्धता भी बढ़ेगी। उस दिन देश भर में 3.25 लाख से अधिक उर्वरक दुकानों को &lsquo;प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों&rsquo; के रूप में विकसित करने का एक अभियान भी शुरू किया गया था।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उर्वरकों की बोरी का नया डिजाइन, पीएम की अपील, लागत, सब्सिडी एवं कीमत की जानकारी देना हुआ अनिवार्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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