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    <title>Farmer News: Government Schemes for Farmers, Successful Farmer Stories &#45; : States</title>
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    <description>Farmer News: Government Schemes for Farmers, Successful Farmer Stories &amp;#45; : States</description>
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    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में 6500 केंद्रों पर गेहूं की सरकारी खरीद 25 मार्च से, राज्य सरकार का 50 लाख टन गेहूं खरीद का फैसला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/uttar-pradesh-to-begin-wheat-procurement-from-wednesday-state-targets-50-lakh-tonnes-purchase.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 24 Mar 2026 12:28:27 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/uttar-pradesh-to-begin-wheat-procurement-from-wednesday-state-targets-50-lakh-tonnes-purchase.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">उत्तर प्रदेश सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अन्तर्गत गेहूं क्रय नीति को स्वीकृति प्रदान की है। पूरे प्रदेश में गेहूं क्रय की अवधि 25 मार्च, 2026 से 15 जून, 2026 तक निर्धारित की गई है। गेहूं खरीद के लिए आठ एजेंसियां कुल करीब 6,500 क्रय केंद्र स्थापित करेंगी। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">यह जानकारी देते हुए प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि विभाग की तरफ से 30 लाख मीट्रिक टन खरीद के प्रस्ताव को बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन करने का फैसला किया गया है। केंद्र सरकार ने 2026-27 मार्केटिंग सीजन के लिए गेहूं का एमएसपी 2,585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।</span></p>
<p><strong>किस खरीद एजेंसी के कितने केंद्र</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">गेहूं खरीद के लिए उत्तर प्रदेश सहकारी संघ (पीसीएफ) के सबसे ज्यादा 3,300 केंद्र खोलने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा खाद्य विभाग की विपणन शाखा के 1,250, उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के 100, उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव यूनियन (यूपीपीसीयू) के 700, उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ (यूपीएसएस) के 350, भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नैफेड) के 300, भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (एनसीसीएफ) के 100 तथा भारतीय खाद्य निगम के 400 क्रय केन्द्र प्रस्तावित किए गए हैं।</span></p>
<p><strong>गेहूं खरीद केंद्र खुलने का समय</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">कैबिनेट के फैसले के मुताबिक गेहूं क्रय केन्द्र सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खुले रखे जाएंगे, लेकिन जिलाधिकारी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार क्रय केन्द्र के खुलने व बन्द होने के समय में आवश्यक परिवर्तन करने के लिए अधिकृत होंगे। रविवार एवं राजपत्रित अवकाश को छोड़कर, शेष कार्य दिवसों एवं स्थानीय अवकाश व द्वितीय शनिवार को क्रय केन्द्र खुले रहेंगे।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रबी विपणन वर्ष 2026-27 में इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ परचेज मशीन के माध्यम से किसानों के बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण द्वारा क्रय केन्द्रों/मोबाइल क्रय केन्द्रो पर गेहूं की खरीद की जाएगी। गोबाइल क्रय केन्द्रों पर होने वाली प्रत्येक खरीद का ई-पॉप डिवाइस के जरिए अक्षांश-देशान्तर भी कैप्चर किया जाएगा।</span></p>
<p><strong>भुगतान पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से 48 घंटे में&nbsp;</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">बटाईदार किसान भी पंजीकरण कराकर गेहूं की बिक्री कर सकेंगे। समस्त क्रय एजेंसियों द्वारा किसानों से खरीदे गए गेहूं के मूल्य का भुगतान भारत सरकार के पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से यथासम्भव 48 घण्टे के अन्तर्गत उनके बैंक खाते में सुनिश्चित किया जायेगा।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">गेहूं खरीद वर्ष 2026-27 के अन्तर्गत पंजीकृत ट्रस्ट का भी गेहूं क्रय किया जायेगा। क्रय केन्द्र पर ट्रस्ट के संचालक अधिकृत प्रतिनिधि का बायोमैट्रिक सत्यापन कराते हुए गेहूं की खरीद की जाएगी तथा भुगतान ट्रस्ट के बैंक खाते में पीपीए मोड के माध्यम से कराया जायेगा।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">राज्य सरकार की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि गेहूं क्रय केन्द्रों पर किसानों के लिए पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था एवं वाहन पार्किंग इत्यादि की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। क्रय केन्द्रों पर गेहूं को वर्षा व अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए क्रेट्स व तिरपाल की व्यवस्था की जाएगी, ताकि किसी भी स्थिति में गेहूं खराब न होने पाए।</span></p>
<p><strong>बागपत सहकारी चीनी मिल की क्षमता बढ़ेगी</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">कैबिनेट ने बागपत स्थित दि किसान सहकारी चीनी मिल लि. की पेराई क्षमता 2,500 टीसीडी से बढ़ाकर 5,000 टीसीडी० करते हुए नई चीनी मिल की स्थापना के लिए पब्लिक इन्वेस्टमेण्ट बोर्ड की तरफ से 37249.89 लाख रुपये के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इसमें 50 प्रतिशत राशि राज्य सरकार की अंशपूंजी/अनुदान के रूप में तथा बाकी 50 प्रतिशत राशि राज्य सरकार से ऋण के रूप में होगी।</span></p>
<p><strong>उप्र निजी बिजनेस पार्क विकास योजना-2025 स्वीकृत</strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश निजी बिजनेस पार्क विकास योजना-2025 के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। बिजनेस पार्को में वैश्विक निगमों के लिए कार्यालय, अनुसंधान एव विकास केन्द्र, वैश्विक क्षमता केन्द्रों तथा संचालन केन्द्रों की स्थापना के लिए रेडी-टू-ऑपरेट एवं प्लग एण्ड प्ले सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी। ऐसे बिजनेस पार्क नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में कार्य करेंगे, जो नॉलेज बेस्ड उद्योगों को आकर्षित करेंगे, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देंगे, अनुसंधान क्षमताओं में वृद्धि करेंगे तथा उद्यमिता को प्रोत्साहित करेंगे।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में 6500 केंद्रों पर गेहूं की सरकारी खरीद 25 मार्च से, राज्य सरकार का 50 लाख टन गेहूं खरीद का फैसला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में कपास उत्पादकता 30% घटी, किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये का नुकसानः एचएयू की रिपोर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-agri-university-report-cotton-farmers-suffer-losses-exceeding-rs-15000-per-acre.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 23 Mar 2026 17:09:29 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-agri-university-report-cotton-farmers-suffer-losses-exceeding-rs-15000-per-acre.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा के किसानों के लिए कपास की खेती घाटे का सौदा बन चुकी है। राज्य के किसानों को कपास की खेती में प्रति एकड़ औसतन 15 हजार रुपये से अधिक का नुकसान हो रहा है। इसकी मुख्य वजह है उत्पादकता में गिरावट और किसानों को उपज की कम कीमत मिलना। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की हाल की एक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है। खरीफ सीजन 2025 की यह रिपोर्ट 13-14 फरवरी 2026 को एग्रीकल्चर ऑफिसर्स वर्कशॉप में प्रस्तुत की गई।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, कपास की प्रति एकड़ औसत पैदावार 2025 में सिर्फ चार क्विंटल रह गई, जो पिछले साल 5.70 क्विंटल थी। यानी प्रति एकड़ उत्पादकता 30 प्रतिशत कम हो गई। किसानों को मिलने वाली कीमत में भी कमी आई है। औसत कीमत पिछले साल 7,071 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो इस साल 15 प्रतिशत घटकर 6,020 रुपये प्रति क्विंटल रह गई।&nbsp;</p>
<p>मई 2025 में केंद्र सरकार ने मध्यम रेशे वाली कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 7,710 रुपये और लंबे रेशे वाली कपास का एमएसपी 8,110 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69c107bc785f2.jpg" alt="" /></p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के किसानों के लिए प्रति एकड़ औसत लागत 40,024 रुपये थी। इसके बदले उन्हें कपास की बिक्री से 24,081 रुपये और बाई-प्रोडक्ट से 801 रुपये प्राप्त हुए। इस तरह किसानों को कपास की खेती में प्रति एकड़ 15,142 रुपये का नुकसान हो रहा है। लागत के आकलन में खेत तैयार करने, सिंचाई, बीज, उर्वरक, तुड़ाई आदि को जोड़ा गया है।</p>
<p>इस अध्ययन का हिस्सा रहे हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्र विभाग में सहा. वैज्ञानिक <strong>डॉ. विनय महला</strong> ने रूरल वॉयस को बताया कि विश्वविद्यालय हर साल खरीफ व रबी की रिपोर्ट तैयार करता है। कपास के मामले में देखा जाए तो साल 2017 के बाद से किसानों को नुकसान हो रहा है। कपास की फसल पर कीटों और रोगों की मार के चलते यह समस्या खड़ी हुई है। अगर नई किस्में नहीं आईं तो आने वाले 3 से 5 वर्षों में हरियाणा में कपास किसानों की संख्या बहुत कम हो जाएगी।&nbsp;</p>
<p>राज्य में कपास की खेती मुख्य रूप से हिसार, भिवानी, फतेहाबाद, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी और सिरसा जिलों में होती है। कपास की खेती में किसानों का सबसे अधिक खर्च फतेहाबाद जिले में आया। उनका प्रति एकड़ खर्च 48,721 रुपये था। उनका नुकसान भी 17,315 रुपये प्रति एकड़ था। हालांकि सबसे अधिक 17,515 रुपये प्रति एकड़ का औसत नुकसान हिसार के किसानों का था। बाकी जिलों में महेंद्रगढ़ के किसानों का औसत नुकसान 14,144 रुपये, &nbsp;चरखी दादरी का 15,276 रुपये, रेवाड़ी का 9,548 रुपये, भिवानी का 14,852 रुपये और सिरसा के किसानों का 11,250 रुपये प्रति एकड़ था।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69c107bdf39fe.jpg" alt="" /></p>
<p>रूरल वॉयस ने राज्य के कई कपास किसानों से बात की। सिसवाला, हिसार के पवन कुमार ने बताया कि बीते वर्ष 8.7 हैक्टेयर में कपास की खेती की थी, जिसमें 3 किवंटल प्रति एकड़ के लगभग कपास उत्पादन हुआ व मंडी में 5600 रुपये का भाव प्राप्त हुआ। पवन के अनुसार उन्हें काफी नुकसान का सामना करना पड़ा और वे यह नुकसान 2018 से लगातार झेल रहे हैं।</p>
<p>एक अन्य किसान हरपाल सिंह ने बताया कि बीते वर्ष 4 हेक्टेयर में कपास की खेती की थी। उन्हें खेतों में गुलाबी सूंडी का सामना करना पड़ा व बारिश की वजह से फसल भी खराब हुई। जब मंडी में फसल बेचने गए तब उन्हें लागत भी नहीं मिली।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में कपास उत्पादकता 30% घटी, किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये का नुकसानः एचएयू की रिपोर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जलगांव में 200 करोड़ रुपये के निवेश से केले का क्लस्टर विकसित करने को सरकार की मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/jalgaon-banana-cluster-project-shivraj-singh-chouhan-farmers-price-compensation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 20 Mar 2026 15:42:41 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/jalgaon-banana-cluster-project-shivraj-singh-chouhan-farmers-price-compensation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया है कि जलगांव में लंबे समय से प्रस्तावित केले का क्लस्टर विकसित करने की परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है। इसे 200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। इस क्लस्टर के अंतर्गत गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस, मैकेनाइजेशन, बायो-कंट्रोल, फ्रूट कवर तथा प्री-कूलिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही कोल्ड स्टोरेज, राइपनिंग चेंबर, रेफ्रिजरेटेड वैन, प्रोसेसिंग एवं निर्यात से जुड़ी अधोसंरचना भी तैयार की जाएगी। MIDH और एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत इन सुविधाओं के लिए सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी जिससे किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने किसानों को मिलने वाले कम दाम और शहरों में ऊंची कीमतों के बीच बड़े अंतर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई बार किसानों को टमाटर जैसे उत्पाद बहुत कम कीमत पर बेचने पड़ते हैं जबकि शहरों में वही उत्पाद कई गुना अधिक मूल्य पर बिकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस मूल्य अंतर को कम करने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करेंगी ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि केला जैसी फसलें MSP पर खरीदकर लंबे समय तक रखी नहीं की जा सकती, इसलिए सरकार ऐसे वैकल्पिक मॉडल पर विचार कर रही है, जिसमें बाजार मूल्य अत्यधिक कम होने पर किसानों को लागत या निर्धारित मॉडल मूल्य और बाजार भाव के बीच का अंतर प्रदान किया जा सके। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के प्रयोग मिर्च और आम जैसी फसलों में किए गए हैं और &lsquo;पीएम-आशा&rsquo; योजना के तहत भी नए मॉडल विकसित किए जा रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि किसानों से प्राप्त सुझावों और समस्याओं के समाधान के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया जाएगा और जलगांव के केले को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।&nbsp;</p>
<p>चौहान ने अत्यधिक रासायनिक खाद और कीटनाशकों के उपयोग से मिट्टी की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे ऑर्गेनिक कार्बन की कमी हो रही है, मित्र कीट नष्ट हो रहे हैं और भूमि की उर्वरता घट रही है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे प्राकृतिक खेती को अपनाएं और शुरुआत छोटे स्तर पर प्रयोग के रूप में करें। उन्होंने विश्वास जताया कि सही तरीके से की गई प्राकृतिक खेती से उत्पादन में कमी नहीं आती, बल्कि भूमि की क्षमता और उत्पादकता बढ़ती है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जलगांव में 200 करोड़ रुपये के निवेश से केले का क्लस्टर विकसित करने को सरकार की मंजूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश में सस्टेनेबल अरंडी बीज उत्पादन 1.70 लाख टन पहुंचा, इस बीज के लिए अब तक 13,500 से अधिक किसान प्रमाणित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/india-sustainable-castor-output-hits-1.70-lakh-tonnes-more-than-13500-farmers-certified-so-far.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Mar 2026 15:06:28 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/india-sustainable-castor-output-hits-1.70-lakh-tonnes-more-than-13500-farmers-certified-so-far.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत में सतत (सस्टेनेबल) अरंडी बीज उत्पादन ने 1.70 लाख टन के स्तर को छू लिया है। यह गुजरात में किसानों की भागीदारी से संचालित पहल का नतीजा है, जिसका नेतृत्व जयंत एग्रो-ऑर्गेेनिक्स (Jayant Agro-Organics Limited) द्वारा उसके प्रमुख प्रोजेक्ट &lsquo;प्रगति&rsquo; के माध्यम से किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के नौ वर्ष पूरे हो गए हैं और अब यह वैश्विक स्तर पर टिकाऊ और ट्रेसेबल आपूर्ति श्रृंखला का मॉडल बन चुका है।</p>
<p>साल 2016 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम को आरकेमा (Arkema) और बीएएसएफ (BASF) के साथ मिलकर, तथा विकास संगठन सॉलिडेरिडैड (Solidaridad) के सहयोग से लागू किया गया। इसके साथ ही इहसेदु एग्रोकेम (Ihsedu Agrochem) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित &lsquo;आई-प्रगति&rsquo; परियोजना ने किसानों तक इसकी पहुंच को और विस्तार दिया है।</p>
<p>वर्ष 2025 तक दोनों परियोजनाओं के तहत 13,500 से अधिक किसानों को प्रमाणित किया जा चुका है और 16,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि को सक्सेस (SuCCESS&reg;) सस्टेनेबिलिटी कोड के अंतर्गत लाया गया है। इन पहलों के माध्यम से कुल मिलाकर लगभग 1.70 लाख टन प्रमाणित कैस्टर बीज का उत्पादन हुआ है, जिससे वैश्विक स्पेशलिटी रसायन बाजार में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है।</p>
<p>खेत स्तर पर इसका प्रभाव भी उल्लेखनीय रहा है। प्रगति से जुड़े किसानों ने सरकारी मानकों की तुलना में 32% अधिक उत्पादन दर्ज किया, जबकि डेमो प्लॉट में पारंपरिक खेती के मुकाबले लगभग 30% कम पानी का उपयोग हुआ। सस्टेनेबल खेती के तहत बढ़ता रकबा इस बात का संकेत है कि किसान अरंडी को एक लाभकारी और जलवायु-अनुकूल फसल के रूप में अपना रहे हैं, खासकर अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में।</p>
<p>जयंत एग्रो समूह के चेयरमैन अभय वी. उदेशी के अनुसार, यह पहल दर्शाती है कि टिकाऊ कृषि पद्धतियां किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक उद्योगों के लिए विश्वसनीय आपूर्ति भी सुनिश्चित कर सकती हैं। प्रमाणित किसानों की बढ़ती संख्या इस मॉडल पर किसानों के विश्वास को भी दर्शाती है।</p>
<p>गुजरात भारत का प्रमुख अरंडी उत्पादन का केंद्र है। यहां से शुरू हुई पहल अब एक वैश्विक ढांचे में विकसित हो चुकी है। किसानों ने बेहतर कृषि प्रथाओं और प्रमाणित बीजों के उपयोग से लागत में 20-25% तक कमी और उत्पादन में वृद्धि का अनुभव किया है।</p>
<p>उत्पादन बढ़ाने के अलावा यह कार्यक्रम किसानों के क्षमता निर्माण पर भी ध्यान दे रहा है। वर्ष के दौरान 450 से अधिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए और 500 से अधिक लीड किसानों को अन्य किसानों का मार्गदर्शन करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। साथ ही 10,000 से अधिक सुरक्षा किट वितरित किए गए और 150 से अधिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए, जिनसे हजारों ग्रामीण परिवारों को लाभ मिला।</p>
<p>कार्यक्रम महिलाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा दे रहा है। इसके तीसरे चरण में 1,150 से अधिक महिलाओं को सस्टेनेबल खेती, डिजिटल और वित्तीय साक्षरता का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे निर्णय लेने की उनकी क्षमता और ग्रामीण समुदायों की मजबूती में सुधार हुआ है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश में सस्टेनेबल अरंडी बीज उत्पादन 1.70 लाख टन पहुंचा, इस बीज के लिए अब तक 13,500 से अधिक किसान प्रमाणित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में सरसों एवं चना की समर्थन मूल्य पर खरीद का कार्यक्रम तय, कुछ जिलों में 25 मार्च से तो कुछ में 1 अप्रैल से शुरू होगी खरीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/procurement-of-mustard-and-chana-on-msp-to-begin-from-1st-april-in-rajasthan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Mar 2026 16:08:31 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/procurement-of-mustard-and-chana-on-msp-to-begin-from-1st-april-in-rajasthan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026 के लिए सरसों एवं चना की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद के लिए पंजीकरण और खरीद की तारीखों की घोषणा की है। राज्य के क्षेत्रीय कार्यालयों के मुताबिक पंजीकरण और खरीद की तारीखें अलग-अलग निर्धारित की गई हैं। कोटा, अजमेर, भरतपुर और श्रीगंगानगर क्षेत्रीय कार्यालयों के तहत आने वाले जिलों में 15 मार्च से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हो रहा है। इन जिलों में 25 मार्च से खरीद प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर क्षेत्रीय कार्यालयों के तहत आने वाले जिलों में 20 मार्च से रजिस्ट्रेशन शुरू होगा। वहां दोनों फसलों की खरीद 1 अप्रैल से शुरू होगी।&nbsp;</p>
<p>राज्य में राजफेड के माध्यम से समर्थन मूल्य पर खरीद होगी। इसके लिए किसानों को पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जिसके बाद वे निर्धारित केन्द्रों पर अपनी फसल बेच सकेंगे। एमएसपी पर खरीद किसानों की बायोमीट्रिक पहचान के माध्यम से ही की जाएगी।</p>
<p>केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के लिए सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 6,200 रुपये प्रति क्विंटल तथा चना का 5,875 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। राज्य में सरसों की 13.78 लाख टन और चना की 5.53 लाख टन खरीद की सीमा तय की गई है।</p>
<p>उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां जयपुर ग्रामीण, उदय दीप सिंह राठौड़ ने बताया कि किसानों की सुविधा तथा खरीद से संबंधित किसी भी समस्या के त्वरित समाधान के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-6001 भी उपलब्ध कराया गया है। जयपुर जिले में किसानों की सुविधा के लिए कुल 42 खरीद केन्द्र स्थापित किए गए हैं, जहां सरसों एवं चना की खरीद की जाएगी।</p>
<p>उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां जयपुर ग्रामीण, शिरीष वी. चान्दे ने कहा, पंजीकृत किसानों से अनुरोध है कि वे अपने मोबाइल पर प्राप्त संदेश के अनुसार निर्धारित तिथि पर ही अपनी एफएक्यू मापदण्ड की उपज संबंधित खरीद केन्द्र पर लेकर आएं। किसानों को यह भी ध्यान रखना होगा कि निर्धारित तिथि से अधिकतम 10 दिन के भीतर ही उपज की तुलाई करवाई जा सकती है, ताकि समय पर उपज का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69ba7c2bce719.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में सरसों एवं चना की समर्थन मूल्य पर खरीद का कार्यक्रम तय, कुछ जिलों में 25 मार्च से तो कुछ में 1 अप्रैल से शुरू होगी खरीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जम्मू&amp;#45;कश्मीर के अनंतनाग में 100 करोड़ की लागत से बनेगा इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क, कोल्ड&amp;#45;वॉटर फिशरीज पर नई गाइडलाइन जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/centre-approves-rs-100-crore-integrated-aqua-park-in-anantnag-to-boost-cold-water-fisheries-new-guideline-for-cold-water-fisheries.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 14 Mar 2026 18:49:41 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/centre-approves-rs-100-crore-integrated-aqua-park-in-anantnag-to-boost-cold-water-fisheries-new-guideline-for-cold-water-fisheries.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अहम कदम उठाया है। केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने अनंतनाग जिले में 100 करोड़ रुपये की लागत से एक इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क परियोजना को मंजूरी देने की घोषणा की है।</p>
<p>यह घोषणा श्रीनगर स्थित शेरे कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय कोल्ड-वॉटर फिशरीज सम्मेलन के दौरान की गई। कार्यक्रम का आयोजन केंद्र सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने किया था। इस अवसर पर मंत्री ने कोल्ड-वॉटर फिशरीज के विकास के लिए मॉडल गाइडलाइन भी जारी की। इस कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, केंद्रीय राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल सहित तथा कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।</p>
<p>राजीव रंजन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि अनंतनाग में स्थापित होने वाला यह एक्वा पार्क इस क्षेत्र में मत्स्य पालन ढांचे को मजबूत करेगा, कोल्ड-वॉटर फिशरीज के विकास को बढ़ावा देगा, मछली उत्पादन में वृद्धि करेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने विशेष रूप से ट्राउट मछली के उत्पादन को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य कोल्ड वॉटर क्षेत्रों में पूरी वैल्यू चेन का विकास करना है, ताकि किसान उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और मार्केटिंग तक आधुनिक सुविधाओं का लाभ उठा सकें। मंत्री ने यह भी कहा कि ट्राउट और अन्य ठंडे पानी की प्रजातियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग है और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाया जा सकता है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपील की कि वे मछुआरों को सहकारी समितियों और फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FFPO) के माध्यम से संगठित करें। उन्होंने कहा कि अनंतनाग में स्वीकृत एक्वा पार्क और फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF) के माध्यम से स्थानीय उद्यमों को विस्तार का अवसर मिलेगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69b5600abf5cd.jpg" alt="" /></p>
<p>कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री, उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री ने संयुक्त रूप से रिजर्वायर फिशरीज और एक्वाकल्चर प्रबंधन के लिए मॉडल गाइडलाइन भी जारी की। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि अनंतनाग में प्रस्तावित एक्वा पार्क जम्मू कश्मीर के मत्स्य क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि हिमालयी क्षेत्र भारत में कोल्ड-वॉटर फिशरीज का प्राकृतिक केंद्र है और यहां ब्रूडस्टॉक विकास, हैचरी, फीड मिल और रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) जैसी सुविधाओं के जरिए महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने जोर दिया कि बेहतर बाजार संपर्क और किसानों की आय में वृद्धि भविष्य की रणनीति का प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69b56009e20f8.jpg" alt="" /></p>
<p>मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के समृद्ध कोल्ड वॉटर संसाधनों का सतत उपयोग करना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक पद्धतियों को अपनाकर कोल्ड वॉटर एक्वाकल्चर का विस्तार किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना उत्पादन बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि नई तकनीकों और शोध संस्थानों के साथ सहयोग के जरिए इस क्षेत्र में उत्पादकता और स्थिरता को मजबूत किया जा सकता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b5600b22a30.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में 100 करोड़ की लागत से बनेगा इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क, कोल्ड-वॉटर फिशरीज पर नई गाइडलाइन जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b5600b22a30.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ओडिशा में 360 करोड़ रुपये के निवेश से बडंबा सहकारी चीनी मिल का पुनरुद्धार करेगा आईपीएल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/ipl-to-revive-badamba-cooperative-sugar-mill-in-odisha-with-investment-of-rs-360-crore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 14 Mar 2026 15:22:36 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/ipl-to-revive-badamba-cooperative-sugar-mill-in-odisha-with-investment-of-rs-360-crore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">पिछले 15 वर्षों से बंद ओडिशा की बडंबा सहकारी चीनी मिल अब पुनः शुरू होने जा रही है। इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) ने बडंबा चीनी मिल के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए लगभग 360 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ ओडिशा सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस समझौता ज्ञापन पर डॉ. पी. एस. गहलौत, प्रबंध निदेशक, इंडियन पोटाश लिमिटेड तथा राजेश प्रभाकर पाटिल, आईएएस, आयुक्त-सह-सचिव, सहकारिता विभाग, ओडिशा सरकार ने 6 मार्च 2026 को हस्ताक्षर किए। यह समझौता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी की उपस्थिति में संपन्न हुआ।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">समझौते के अनुसार, बडंबा सहकारी चीनी मिल में एक वर्ष के भीतर संचालन शुरू करने की उम्मीद है और इसकी क्षमता 3,500 टीसीडी (टन गन्ना प्रति दिन) होगी। इसके साथ ही इसमें 16 मेगावाट का को-जनरेशन पावर प्लांट, 10 टन प्रतिदिन क्षमता का बायो-सीएनजी प्लांट तथा अत्याधुनिक कोल्ड स्टोरेज सुविधा भी स्थापित की जाएगी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस परियोजना से कटक जिले के बडंबा ब्लॉक के लगभग 10,000 किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे राज्य में गन्ना खेती को पुनर्जीवित करने, किसानों की आय बढ़ाने और क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस प्रोजेक्ट के लिए नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ लिमिटेड तथा एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड (SBICAPS) को विस्तृत तकनीकी और वित्तीय व्यवहार्यता अध्ययन के लिए शामिल किया गया।</span><span style="font-weight: 400;">समझौते के तहत ओडिशा सरकार आईपीएल को मिल और उससे संबंधित अवसंरचना की स्थापना के लिए 112 एकड़ भूमि दीर्घकालिक पट्टे पर उपलब्ध कराएगी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">चीनी मिल के पुनरुद्धार का उद्देश्य गन्ना खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय में वृद्धि करना है। गन्ने को आजकल ऊर्जा फसल (Energy Crop) के रूप में भी देखा जा रहा है, क्योंकि इससे एथेनॉल, बिजली और जैव-ईंधन का उत्पादन संभव है। यह परियोजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और क्षेत्र के किसानों को फिर से गन्ना खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस अवसर पर इंडियन पोटाश लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. पी. एस. गहलौत ने कहा, &ldquo;बडंबा चीनी मिल का पुनरुद्धार किसानों के समर्थन और कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के प्रति आईपीएल की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस मिल के पुनः संचालन से हम किसानों के लिए स्थायी अवसर पैदा करना, गन्ना खेती को प्रोत्साहित करना, रोजगार सृजित करना और क्षेत्र के आर्थिक विकास में योगदान देना चाहते हैं। इस परियोजना को सफल बनाने के लिए हम ओडिशा सरकार और स्थानीय किसान समुदाय के साथ मिलकर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।&rdquo;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b28c6b81973.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ओडिशा में 360 करोड़ रुपये के निवेश से बडंबा सहकारी चीनी मिल का पुनरुद्धार करेगा आईपीएल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एपीडा की पहल से असम से ब्रिटेन और इटली को जीआई टैग वाले जोहा चावल का निर्यात]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/apeda-facilitates-first-export-of-gi-tagged-joha-rice-from-assam-to-the-uk-and-italy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Mar 2026 17:06:24 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/apeda-facilitates-first-export-of-gi-tagged-joha-rice-from-assam-to-the-uk-and-italy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने असम से ब्रिटेन और इटली को जीआई टैग वाले 25 मीट्रिक टन जोहा चावल की पहली निर्यात खेप भेजने में सहायता की है। यह खेप असम सरकार के कृषि विभाग के सहयोग से गुरुवार को रवाना की गई।</p>
<p>असम की एक स्वदेशी सुगंधित किस्म, जोहा चावल को 2017 में जीआई टैग प्राप्त हुआ। अपनी विशिष्ट सुगंध, महीन दानेदार बनावट और समृद्ध स्वाद के लिए जाना जाने वाला यह चावल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम बाजारों में पहचान अर्जित कर रहा है।</p>
<p>असम में लगभग 21,662 हेक्टेयर क्षेत्र में जोहा चावल की खेती की जाती है, जिसका वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान अनुमानित उत्पादन लगभग 43,298 मीट्रिक टन रहा है। प्रमुख उत्पादक जिलों में नागांव, बक्सा, गोलपारा, शिवसागर, माजुली, चिरांग और गोलाघाट शामिल हैं, जो निर्यात विस्तार के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने की संभावना प्रदान करते हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69b3f64bc4159.jpg" alt="" /></p>
<p><em>जोहा चावल का सैंपल।</em></p>
<p>एपीडा जोहा चावल की वैश्विक उपस्थिति को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। इससे पहले प्राधिकरण ने जीआई-टैग वाले एक मीट्रिक टन जोहा चावल के वियतनाम और दो मीट्रिक टन मध्य पूर्वी देशों - कुवैत, बहरीन, कतर, ओमान और सऊदी अरब को निर्यात की सुविधा प्रदान की थी।</p>
<p>असम के कृषि मंत्री अतुल बोरा ने निर्यात खेप को झंडी दिखाकर रवाना किया। यह निर्यात एपीडा में पंजीकृत निर्यातक मेसर्स सेफ एग्रीट्रेड प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता द्वारा किया जा रहा है। खेप की प्रोसेसिंग और पैकिंग असम के गुवाहाटी स्थित प्रतीक एग्रो फूड प्रोसेसिंग में की गई है।</p>
<p>यह पहल भारत से जीआई-टैग वाले कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने और उत्पादकों तथा अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच बाजार संबंधों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ उत्तर पूर्वी क्षेत्र से कृषि निर्यात का विस्तार करने और किसानों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए एपीडा के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b3f64c62883.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एपीडा की पहल से असम से ब्रिटेन और इटली को जीआई टैग वाले जोहा चावल का निर्यात ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b3f64c62883.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आंध्र प्रदेश में मिलावटी दूध से अब तक 14 की मौत, एथिलीन ग्लाइकोल बना मौत की वजह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/14-people-die-in-andhra-pradesh-after-consuming-adulterated-milk-ethylene-glycol-the-cause-of-death.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Mar 2026 16:13:36 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/14-people-die-in-andhra-pradesh-after-consuming-adulterated-milk-ethylene-glycol-the-cause-of-death.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी ज़िले में दूध में मिलावट के एक गंभीर मामले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। वहीं छह अन्य लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं और उनका इलाज जारी है। इस घटना ने खाद्य सुरक्षा और दूध की आपूर्ति व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, प्रयोगशाला जांच में पुष्टि हुई है कि जिन लोगों की मौत हुई है, उन्होंने एथिलीन ग्लाइकोल से मिलावटी दूध का सेवन किया था। यह एक अत्यंत खतरनाक रसायन है, जिसका इस्तेमाल आम तौर पर औद्योगिक कार्यों में किया जाता है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, मिलावटी दूध पीने से पीड़ितों को एक्यूट रीनल फेलियर हुआ, जिसके बाद शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों ने काम करना बंद कर दिया।</p>
<p>यह घटना 16 फरवरी की है, जब लालाचेरुवु गांव में एक ही जगह से सप्लाई किए गए मिलावटी दूध की वजह से लोगों को यूरिन में रुकावट और किडनी से जुड़ी परेशानियां हुईं, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मामला 22 फरवरी को तब सामने आया, जब काकीनाडा सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान पीड़ितों की मौत होने लगी।</p>
<p>स्थानीय प्रशासन के अनुसार, दूध पीने के कुछ समय बाद ही कई लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। पीड़ितों को उल्टी, पेट दर्द, चक्कर और बेहोशी जैसी शिकायतें होने लगीं। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें तत्काल अस्पतालों में भर्ती कराया गया।</p>
<p>डॉक्टरों का कहना है कि एथिलीन ग्लाइकोल शरीर में पहुंचने के बाद तेजी से विषाक्त प्रभाव पैदा करता है। यह मुख्य रूप से किडनी पर हमला करता है और समय पर इलाज न मिलने पर किडनी फेलियर के साथ-साथ अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है।</p>
<p>घटना के बाद पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग ने मामले की जांच तेज कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि मिलावटी दूध की सप्लाई चेन का पता लगाने के लिए कई टीमों को लगाया गया है। यह भी जांच की जा रही है कि दूध में एथिलीन ग्लाइकोल कैसे मिला और इसके पीछे किसकी भूमिका है।</p>
<p>पुलिस ने दूध के नमूने जब्त कर लिए हैं और संदिग्ध डेयरी सप्लायर से पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि दूध की सप्लाई के दौरान किसी स्तर पर खतरनाक रसायन मिलाया गया हो सकता है। लैबोरेटरी जांच में पता चला है कि पीड़ितों की मौत एथिलीन ग्लाइकोल मिला दूध पीने के बाद एक्यूट रीनल फेलियर के कारण हुए मल्टी-ऑर्गन फेलियर से हुई।</p>
<p>जांच में पता चला कि जिस दूध सप्लायर गणेश्वरराव से पीड़ितों ने दूध लिया था, उसने दो कंटेनर वाले फ्रीजर में दूध स्टोर किया, उसे कैन में भरा और राजामहेंद्रवरम के लालाचेरुवु के चौदेश्वरनगर और स्वरूपनगर इलाकों के घरों में सप्लाई किया।</p>
<p>16 से 24 फरवरी के बीच गणेश्वरराव का दिया हुआ दूध पीने के बाद करीब 20 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हुए। जांच में यह भी पता चला कि दूध स्टोर करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फ्रीजर में लीक हो गया था, जिसे एक वर्कशॉप में ठीक कराया गया। लीक को सील करने के लिए कंटेनर की दीवारों पर चिपकने वाला कंपाउंड लगाया गया था।</p>
<p>राज्य सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b3ea1fe8003.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आंध्र प्रदेश में मिलावटी दूध से अब तक 14 की मौत, एथिलीन ग्लाइकोल बना मौत की वजह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b3ea1fe8003.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में सरसों भावांतर और तुअर की 100% खरीद को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की हरी झंडी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/shivraj-approves-mustard-bhavantar-scheme-and-100-procurement-of-tur-in-madhya-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Mar 2026 12:11:21 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/shivraj-approves-mustard-bhavantar-scheme-and-100-procurement-of-tur-in-madhya-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को दिल्ली में मुलाकात की। दोनों के बीच राज्य के कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में मध्यप्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस चर्चा में भावांतर योजना, दलहन-तिलहन मिशन, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और ग्रामीण सड़कों सहित अनेक विषयों पर मध्यप्रदेश को बड़ी राहत देने वाले निर्णय लिए गए।</p>
<p><strong>सरसों की खरीद पर भावांतर भुगतान को स्वीकृति</strong></p>
<p>बैठक में मध्यप्रदेश में सरसों की खरीद से जुड़े लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री ने सरसों की खरीद के लिए भावांतर भुगतान योजना के तहत मध्यप्रदेश के प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए संबंधित विभागों को भुगतान प्रक्रिया को त्वरित गति से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। इस निर्णय से सरसों उत्पादक किसानों को राहत मिलेगी।</p>
<p><strong>तुअर की शत-प्रतिशत खरीद का पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा</strong></p>
<p>चौहान ने बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को तुअर (अरहर) की शत-प्रतिशत खरीद से संबंधित स्वीकृति पत्र भी सौंपा। इस निर्णय के बाद तुअर उगाने वाले मध्यप्रदेश के किसानों को उनकी उपज का पूर्ण सरकारी उपार्जन सुनिश्चित होगा, जिससे उन्हें बाजार में भाव गिरने का जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा और आय में स्थिरता आएगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69b3b181d3fae.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>किसान कल्याण वर्ष में मध्यप्रदेश को विशेष प्राथमिकता</strong></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है और इस संदर्भ में मध्यप्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्य को केंद्र सरकार विशेष प्राथमिकता दे रही है। किसान कल्याण वर्ष में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरसों, तुअर, मूंग, उड़द और तिलहनों की खेती करने वाले किसानों को हरसंभव सहायता मिले और राज्य ग्रामीण विकास के हर पैमाने पर अग्रणी रहे।</p>
<p>बैठक में मध्यप्रदेश को दलहन-तिलहन उत्पादन का इंजन बनाने के लिए दीर्घकालिक रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और राज्य सरकार की संयुक्त टीम से कहा कि वे अगले कुछ दिनों में मूंग, उड़द, चना, तिल, सरसों और ऑयल पाम आदि फसलों के लिए फसल-वार रणनीति बनाकर पेश करें, ताकि राज्य में फसल विविधीकरण और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा सके।</p>
<p><strong>फसल बीमा में किसानों के हित में तकनीकी सुधार के निर्देश</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में मध्यप्रदेश के अनुभवों को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान ने तकनीकी सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सोयाबीन जैसी फसलों के लिए केवल सैटेलाइट आधारित आकलन पर निर्भर न रहकर क्रॉप कटिंग प्रयोग और रिमोट सेंसिंग दोनों को मिलाकर वास्तविक उपज का आकलन किया जाए, ताकि किसानों के दावे सही बनें और भुगतान में किसी तरह की कटौती न हो।</p>
<p><strong>मनरेगा से विकसित भारत - जी राम जी में सुचारु विकास पर जोर</strong></p>
<p>केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने मनरेगा से विकसित भारत - जी राम जी कार्यक्रम में सुचारू विकास के लिए मध्यप्रदेश की विशेष भूमिका रेखांकित की। उन्होंने राज्य से कहा कि ई&ndash;KYC, जॉब कार्ड की शुद्धता, सोशल ऑडिट की समय पर रिपोर्ट और लंबित ATR को तेजी से पूरा किया जाए, ताकि जी राम जी के तहत गांवों में जल संरक्षण, अधोसंरचना और आजीविका के कार्य बिना किसी बाधा के तेज़ी से आगे बढ़ सकें।</p>
<p>प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण पर चर्चा के दौरान यह तय हुआ कि मध्यप्रदेश में 2018 की आवास प्लस सूची के सभी पात्र परिवारों को जल्द से जल्द पक्का घर उपलब्ध कराने के लक्ष्य पर मिलकर काम किया जाएगा। डुप्लीकेट जॉब कार्ड और डेटा एंट्री से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए विशेष मॉड्यूल के माध्यम से समाधान करने और राज्य द्वारा शुद्धिकरण पूरा करने के बाद शेष पात्र परिवारों को भी आवास स्वीकृत करने पर सहमति बनी।</p>
<p>प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण सड़कों की मोटाई और चौड़ाई के मानकों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। चौहान ने संकेत दिया कि भारी यातायात और खनन क्षेत्रों में अधिक मजबूत सड़क संरचना की राज्य की मांग को तकनीकी और वित्तीय दोनों स्तरों पर सहानुभूतिपूर्वक देखा जाएगा, ताकि गांवों को टिकाऊ और सुरक्षित सड़क संपर्क मिल सके।</p>
<p>राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) की समीक्षा के दौरान शिवराज सिंह ने कहा कि राज्य ग्रामीण महिलाओं और स्व-सहायता समूहों की आर्थिक गतिविधियों को तेजी से विस्तार दे, ताकि केंद्र से प्राप्त धनराशि का पूरा उपयोग हो और गांवों में सूक्ष्म उद्यम, प्रोसेसिंग इकाइयाँ और अन्य रोज़गारमूलक गतिविधियाँ तेजी से बढ़ सकें।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में सरसों भावांतर और तुअर की 100% खरीद को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की हरी झंडी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र विधानसभा में उठा &amp;apos;फार्मर आईडी&amp;apos; की डेटा सुरक्षा का मुद्दा, प्राइवेट एजेंसियों की भूमिका पर सवाल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/issue-of-data-security-of-farmer-id-raised-in-the-maharashtra-assembly-question-on-the-role-of-private-agencies.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 12 Mar 2026 13:06:43 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/issue-of-data-security-of-farmer-id-raised-in-the-maharashtra-assembly-question-on-the-role-of-private-agencies.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="109" data-end="382"><strong data-start="109" data-end="382">डिजिटल एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने के लिए एग्री स्टैक पहल के तहत देश भर में किसानों के फार्मर आईडी बनाए जा रहे हैं। फार्मर आईडी बनाने में प्राइवेट कंपनियों की भूमिका और डेटा सुरक्षा को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने सवाल उठाया।</strong></p>
<p data-start="384" data-end="824">वडेट्टीवार ने बुधवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान दावा किया कि राज्य में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है कि प्राइवेट कंपनियां इन दिनों किसानों को बिना इजाजत के &lsquo;फार्मर ID&rsquo; बांट रही हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पहचान-पत्र बांटने का मामला नहीं है, बल्कि यह बहुत गंभीर मुद्दा है। किसानों की बेहद संवेदनशील जानकारी किसी अनजान कंपनी के हाथ लग रही है। भविष्य में इस जानकारी के गलत इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p data-start="826" data-end="1284">कांग्रेस नेता ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर भी उठाते हुए ट्वीट किया कि किसानों का डेटा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इकट्ठा किया जा रहा है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने साइबर हैकिंग या डेटा चोरी को रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं बनाई है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक प्राइवेट कंपनी किस अधिकार से किसानों की ID बना रही है और यह जानकारी उनके पास कैसे पहुंची। यह किसानों के डेटा की लूट का साफ मामला है। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।</p>
<p data-start="1652" data-end="1955">वडेट्टीवार ने यह भी जानना चाहा कि क्या प्राइवेट कंपनियों को सरकार की ओर से फार्मर आईडी बनाने का काम सौंपा गया है। किसान ID सिस्टम के तहत किसानों की व्यक्तिगत, खेत और बैंक से जुड़ी जानकारियां एकत्र की जा रही हैं। ऐसे में इस अहम डेटा की सुरक्षा और उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार ने क्या उपाय किए हैं।</p>
<p data-start="1957" data-end="2386">महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्ता भराणे ने स्पष्ट किया कि फार्मर ID कार्ड आधिकारिक रूप से प्रिंट कर बेचने के लिए नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई CSC या सर्विस सेंटर ऐसी गतिविधि में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अब तक फार्मर ID कार्ड की बिक्री के बारे में कोई शिकायत नहीं मिली है। हालांकि, यदि किसी भी तरह की गड़बड़ी की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p data-start="1957" data-end="2386">गौरतलब है कि देश के कृषि क्षेत्र में डिजिटलीकरण की बड़ी पहल करते हुए केंद्र सरकार ने एग्री स्टैक नाम की पहल शुरू की है, जिसके तहत देश भर के किसानों को फार्मर ID दी जा रही है। सरकार का कहना है कि यह कदम सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए उठाया गया है और इससे किसानों को सरकारी योजनाओं तथा वित्तीय सेवाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।</p>
<p data-start="1957" data-end="2386"></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="mr" dir="ltr">राज्यात सध्या खासगी कंपन्यांकडून शेतकऱ्यांना अनधिकृत 'फार्मर आयडी' वाटले जात असल्याचा धक्कादायक प्रकार समोर आला आहे. हा केवळ ओळखपत्र वाटपाचा विषय नसून, बळीराजाची अत्यंत खासगी आणि संवेदनशील माहिती एखाद्या अनोळखी कंपनीच्या हाती जाणे ही अत्यंत गंभीर बाब आहे. या माहितीचा भविष्यात&hellip; <a href="https://t.co/O9lFLOvAj7">pic.twitter.com/O9lFLOvAj7</a></p>
&mdash; Vijay Wadettiwar (@VijayWadettiwar) <a href="https://twitter.com/VijayWadettiwar/status/2031670048658797044?ref_src=twsrc%5Etfw">March 11, 2026</a></blockquote>
<p data-start="1957" data-end="2386">
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69b26cae69a0b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र विधानसभा में उठा 'फार्मर आईडी' की डेटा सुरक्षा का मुद्दा, प्राइवेट एजेंसियों की भूमिका पर सवाल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नागौरी मेथी पर किसानों को मिला कानूनी अधिकार, भारत सरकार के पौध किस्म प्राधिकरण ने किया पंजीकृत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-get-legal-rights-over-nagauri-fenugreek-registered-by-the-plant-variety-authority-of-the-government-of-india..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Mar 2026 16:27:01 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-get-legal-rights-over-nagauri-fenugreek-registered-by-the-plant-variety-authority-of-the-government-of-india..html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान के नागौर जिले की पहचान नागौरी पान मेथी को कानूनी मान्यता मिल गई है। भारत सरकार के पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPVFRA) ने &ldquo;नागौरी पान मेथी&rdquo; की बीज किस्म को आधिकारिक रूप से किसानों की सामुदायिक किस्म (कम्युनिटी राइट्स) के रूप में पंजीकृत किया है। यह जानकारी 02 फरवरी 2026 को प्रकाशित <em>प्लांट वैरायटी जर्नल</em> में दी गई है जो भारत सरकार के गजैट के समतुल्य है।</p>
<p>इस पंजीकरण का अर्थ है कि अब नागौर के किसान कानूनी रूप से नागौरी पान मेथी के असली मालिक माने जाएंगे। यह पहली बार है कि इस विशेष पान मेथी के बीजों को वैश्विक स्तर पर कानूनी बौद्धिक संपदा अधिकार प्राप्त हुआ है। यह उन किसानों की सामूहिक नवाचार, संरक्षण और पारंपरिक ज्ञान को मान्यता देता है, जिन्होंने पीढ़ियों से नागौर की शुष्क कृषि-जलवायु में इस विशिष्ट और उपेक्षित पौध आनुवंशिक संसाधन को संरक्षित और विकसित किया है।</p>
<p><strong>किसानों को मिले कानूनी अधिकार</strong></p>
<p>पौध किस्म एवं कृषक अधिकार अधिनियम, 2001 के तहत नागौर के मुंडवा किसान समुदाय, जिसका प्रतिनिधित्व महिला प्रधान गीता देवी कर रही हैं, को नागौरी पान मेथी का वैधानिक संरक्षक और अधिकारधारी माना गया है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र का खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) वर्ष 2026 को <em>अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष</em> के रूप में मना रहा है, ऐसे समय में किसानों को सामुदायिक अधिकार प्रदान कर पौध किस्म एवं किसान अधिकार प्राधिकरण (PPVFRA) ने नागौरी पान मेथी पर किसानों, विशेषकर महिला किसानों को अधिकार देकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।</p>
<p><strong>पंजीकरण से किसानों को लाभ </strong></p>
<ul>
<li>अब कोई भी बाहरी व्यक्ति या कंपनी नागौरी पान मेथी का नाम या बीज गलत तरीके से इस्तेमाल नहीं कर सकेगी।</li>
<li>दुनिया भर में नागौरी पान मेथी के बीजों से उत्पादित खुशबूदार पान मेथी को एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।</li>
<li>यह पंजीकरण नागौरी पान मेथी को भौगोलिक संकेतक (GI टैग) दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे किसानों को बेहतर दाम और बाजार में पहचान मिलेगी।</li>
</ul>
<p><strong></strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69b149cbb0eaa.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (</strong><strong>SABC)</strong> के <strong>डॉ. भागीरथ चौधरी</strong>&nbsp;का कहना है, &ldquo;पौध किस्म एवं किसान अधिकार प्राधिकरण द्वारा &lsquo;नागौरी पान मेथी&rsquo; का पंजीकरण कर नागौर के किसानों की पीढ़ियों की कड़ी मेहनत को ऐतिहासिक पहचान दी गई है। नागौर के किसान समुदाय को नागौरी मेथी पर बौद्धिक संपदा अधिकार मिल गया है।&rdquo;</p>
<p>भारत सरकार के जैवप्रौद्योगिकी विभाग के <em>बायोटेक किसान हब</em> और नाबार्ड-पोषित कृषि निर्यात सुविधा केंद्र के सहयोग से नागौरी मेथी को पिछले वर्ष मसाला बोर्ड की अनुसूची-I में शामिल किया गया था, जिससे इसे मसाला श्रेणी में स्थान मिला और निर्यात के रास्ते खुले।</p>
<p>डॉ. चौधरी ने कहा कि &ldquo;कसूरी मेथी&rdquo; नाम से लंबे समय से चली आ रही गलत पहचान को अब ठीक कर दिया गया है, जिससे नागौरी मेथी को घरेलू और वैश्विक बाजार में उसकी वास्तविक पहचान मिलेगी।</p>
<p><strong>नागौरी पान मेथी खास क्यों</strong><strong>?</strong></p>
<p>नागौरी पान मेथी की खेती राजस्थान में नागौर जिले के लगभग 7,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होती है। यह मुख्य रूप से मूंडवा, नागौर, मेड़ता, जायल, डेगाना और खींवसर क्षेत्रों में उगाई जाती है।</p>
<p>नागौरी पान मेथी एक बहु-कटाई (मल्टी-कटिंग) वाली पत्तेदार फसल है, जिसकी पत्तियों को धूप में सुखाकर बेचा जाता है। प्रत्येक कटाई में प्रति एकड़ लगभग 175 किलोग्राम सूखी पत्तियां प्राप्त होती हैं, जिससे किसानों को हर दस दिन में लगभग रुपये 25,000 की आय होती है।</p>
<p>एक सीजन में औसतन दस कटिंग के आधार पर किसान प्रति एकड़ लगभग रुपये 2.5 लाख की कमाई करते हैं। इस प्रकार नागौरी पान मेथी देश की सबसे अधिक आय देने वाली फसलों में से एक बन गई है।</p>
<p><strong>सालाना 450 करोड़ की आय </strong></p>
<p>वर्ष 2024-25 के सीजन में नागौर जिले के किसानों ने लगभग 30 <span>हजार </span>टन नागौरी पान मेथी की सूखी पत्तियों का उत्पादन किया, जिससे किसानों को लगभग रुपये 450 करोड़ की आय प्राप्त हुई।</p>
<p>नागौरी पान मेथी की कई विशिष्ट विशेषताएं हैं, जो इसे अन्य मेथी किस्मों से अलग पहचान देती हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी तेज और विशिष्ट खुशबू है, जो पत्तियों को सुखाने के बाद भी लंबे समय तक बनी रहती है। इसके बीज आकार में छोटे होते हैं तथा फलियां हंसिया के आकार की होती हैं।</p>
<p>सूखी पत्तियों में गहरा स्वाद और भरपूर सुगंध पाई जाती है, जो इसे मसालों और खाद्य पदार्थों में अत्यंत लोकप्रिय बनाती है। इसके अतिरिक्त नागौर क्षेत्र की विशिष्ट मिट्टी और अनुकूल जलवायु इस मेथी की गुणवत्ता को और भी विशेष बनाती है। यही कारण है कि नागौरी पान मेथी ने देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।</p>
<p><strong>कैसे मिली उपलब्धि</strong><strong>?</strong></p>
<p>नागौरी पान मेथी किस्म का पंजीकृत कराने के लिए साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर, जोधपुर ने पिछले 4-5 वर्षों से इस पर फील्ड आधारित अनुसंधान किया और 25 जून 2024 को आवेदन के साथ बीज सामग्री पौध किस्म प्राधिकरण में जमा कराई।</p>
<p>मेथी की पहचान और वैज्ञानिक अध्ययन भारत सरकार के जैवप्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की <em>बायोटेक किसान हब</em> परियोजना के तहत किया गया। इसमें ICAR-राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्र, अजमेर और नाबार्ड-पोषित कृषि निर्यात सुविधा केंद्र का भी सहयोग रहा।</p>
<p>नागौरी पान मेथी के पंजीकरण से पहले भी साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) ने किसानों की नवाचार क्षमता और उनके अधिकारों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।&nbsp;यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण हैं कि राजस्थान के किसान अब केवल कृषि उत्पादक ही नहीं, बल्कि जैव विविधता के संरक्षक, नवाचारकर्ता और बीज प्रजनक के रूप में भी उभर कर सामने आ रहे हैं।</p>
<p><strong>किसान-केंद्रित मॉडल</strong></p>
<p>नागौरी पान मेथी का सामुदायिक किस्म के रूप में पंजीकरण एक ऐसा उदाहरण है, जिसमें पारंपरिक किसान किस्मों को आधुनिक कानूनी ढांचे के माध्यम से संरक्षित किया जा सकता है। इससे किसानों की उपज का अधिक मूल्य सुनिश्चित होगा और बीजों के व्यापार से होने वाला लाभ किसानों के साथ साझा किया जा सकेगा।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नागौरी मेथी पर किसानों को मिला कानूनी अधिकार, भारत सरकार के पौध किस्म प्राधिकरण ने किया पंजीकृत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं पर किसानों को राजस्थान में 150 और मध्य प्रदेश में 40 रुपये बोनस मिलेगा, खरीद की तैयारियां शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/wheat-farmers-get-rs-150-bonus-in-rajasthan-and-rs-40-in-madhya-pradesh-preparations-for-procurement-begin.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 07 Mar 2026 15:03:42 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/wheat-farmers-get-rs-150-bonus-in-rajasthan-and-rs-40-in-madhya-pradesh-preparations-for-procurement-begin.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रबी सीजन 2026-27 में गेहूं की खरीद के लिए राज्य सरकारों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राजस्थान सरकार ने 10 मार्च से शुरू होने जा रही गेहूं खरीद पर 150 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का फैसला किया है, जबकि मध्य प्रदेश सरकार गेहूं की खरीद पर किसानों को 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देगी। यह बोनस केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल के अतिरिक्त दिया जाएगा।</p>
<p>इस प्रकार राजस्थान में किसानों को गेहूं का भाव 2735 रुपये और मध्य प्रदेश में 2625 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा। देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश ने गेहूं खरीद पर कोई बोनस घोषित नहीं किया है। यूपी के किसानों को सरकारी खरीद में गेहूं 2585 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर ही बेचना होगा और यहां सरकारी खरीद भी अन्य राज्यों की तुलना में कम रहने की संभावना है।</p>
<p>मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले साल गेहूं खरीद पर 175 रुपये का बोनस देते हुए 2600 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर गेहूं की खरीद की थी। लेकिन इस बार एमपी सरकार ने गेहूं पर केवल 40 रुपये का बोनस घोषित किया है, जिसे विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं ने नाकाफी बताते हुए इसकी आलोचना की है।</p>
<p>मध्य प्रदेश कांग्रेस किसान प्रकोष्ठ के कार्यकारी अध्यक्ष केदार सिरोही का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले किसानों को एक चौथाई बोनस भी नहीं मिला है, जबकि भाजपा ने 2023 के चुनाव में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2700 रुपये देने का वादा किया था। उनका कहना है कि आज तीन साल बाद भी किसानों को यह भाव नहीं मिला है।</p>
<p>उधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में कहा कि सरकार ने किसानों के हित में अपने संकल्प-पत्र में वर्ष 2028 तक 2700 रुपये प्रति क्विंटल पर गेहूं खरीदने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार आगामी वर्षों में इस लक्ष्य को पूरा करेगी और उससे भी आगे बढ़ेगी। इस दौरान कुछ स्थानों पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन में कठिनाई आने की बात सामने आई, जिस पर मुख्यमंत्री ने अंतिम तिथि 7 मार्च से बढ़ाकर 10 मार्च करने का ऐलान किया।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_6731c9cd9f211.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं पर किसानों को राजस्थान में 150 और मध्य प्रदेश में 40 रुपये बोनस मिलेगा, खरीद की तैयारियां शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_6731c9cd9f211.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में कृषि विभाग के 60% पद खाली, जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/mp-congress-chief-jitu-patwari-writes-to-pm-modi-flags-60-percent-vacancies-in-madhya-pradesh-agriculture-department.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Mar 2026 12:43:44 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/mp-congress-chief-jitu-patwari-writes-to-pm-modi-flags-60-percent-vacancies-in-madhya-pradesh-agriculture-department.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य में कृषि तंत्र की तथाकथित खराब स्थिति और हजारों पद खाली होने का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि एक ओर राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को &ldquo;कृषक कल्याण वर्ष&rdquo; घोषित किया है, वहीं दूसरी ओर कृषि और उससे जुड़े विभागों में बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं, जिससे सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है।</p>
<p>पत्र में पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश को देश का &ldquo;कृषि प्रधान राज्य&rdquo; कहा जाता है, लेकिन वर्तमान में कृषि व्यवस्था सरकारी उदासीनता के कारण कमजोर पड़ती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की मोहन यादव सरकार की तरफ से &ldquo;कृषक कल्याण वर्ष&rdquo; की घोषणा की गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर सरकारी तंत्र की स्थिति इस घोषणा के विपरीत दिखाई देती है।</p>
<p>पटवारी ने पत्र में कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि विभाग में स्वीकृत 14,537 पदों में से 8,468 पद खाली हैं, यानी करीब 60 प्रतिशत पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में पद खाली होने के बावजूद प्रदेश के किसानों की समस्याओं का समाधान करने का दावा किया जा रहा है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि कृषि से जुड़े अन्य विभागों में भी स्थिति चिंताजनक है। मत्स्य पालन विभाग में 1,290 में से 722 पद, उद्यानिकी विभाग में 3,079 में से 1,459 पद और पशुपालन एवं डेयरी विभाग में 7,992 में से 1,797 पद रिक्त हैं। सहकारिता विभाग में भी लगभग 35 प्रतिशत पद खाली हैं। खाद्य संचालनालय में 109 पदों के मुकाबले केवल 48 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि जिला कार्यालयों में 598 पदों के मुकाबले 245 कर्मचारी ही मौजूद हैं।</p>
<p>बीज एवं फार्म विकास निगम में 14 में से 5 पद रिक्त हैं। जैविक प्रमाणीकरण संस्था में 23 में से 8 पद खाली हैं। कृषि विस्तार प्रशिक्षण संस्थान में 49 में से 27 पद रिक्त हैं। मंडी बोर्ड में भी लगभग 40% पद खाली हैं।</p>
<p>पटवारी के अनुसार कृषि प्रशासन के शीर्ष स्तर पर भी हालात गंभीर हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के 182 स्वीकृत पदों में से 113 पद खाली हैं, जिनमें अपर संचालक, संयुक्त संचालक और उप संचालक जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के भी लगभग 60 प्रतिशत पद रिक्त हैं, जबकि यही अधिकारी किसानों तक योजनाएं और तकनीकी सलाह पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।</p>
<p>पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में केंद्र में कृषि मंत्री के रूप में कार्यरत शिवराज सिंह लंबे समय तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। यदि उस दौरान कृषि व्यवस्था को मजबूत किया गया होता तो आज यह स्थिति नहीं बनती।</p>
<p>पटवारी ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि मध्य प्रदेश में कृषि और उससे जुड़े विभागों में रिक्त पदों की तत्काल समीक्षा कराई जाए, भर्ती प्रक्रिया शुरू कराई जाए और किसानों तक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मैदानी स्तर पर सरकारी क्षमता बढ़ाने की रणनीति बनाई जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसान पहले ही फसल नुकसान, बढ़ती लागत और बाजार अस्थिरता जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं, ऐसे में कमजोर सरकारी तंत्र उनकी मुश्किलें और बढ़ा रहा है।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a4ed109d7cd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में कृषि विभाग के 60% पद खाली, जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में मसूर की खरीद 20 मार्च और सरसों की खरीद 28 मार्च से शुरू होगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/in-haryana-procurement-of-lentils-will-begin-from-march-20-and-mustard-from-march-28.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Mar 2026 17:36:22 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/in-haryana-procurement-of-lentils-will-begin-from-march-20-and-mustard-from-march-28.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="118" data-end="412">हरियाणा सरकार ने दलहन और तिलहन फसलों की खरीद के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। राज्य में मसूर की खरीद 20 मार्च से 30 अप्रैल तक, सरसों की खरीद 28 मार्च से 1 मई तक, चने की खरीद 1 अप्रैल से 10 मई तक, ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद 15 मई से 20 जून तक और सूरजमुखी की खरीद 1 जून से 30 जून 2026 तक की जाएगी।</p>
<p data-start="414" data-end="629">मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने हाल ही में रबी विपणन सीजन 2026-27 के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के अंतर्गत सरसों, चना, मसूर, सूरजमुखी तथा ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद को लेकर किए जा रहे प्रबंधों की व्यापक समीक्षा की।</p>
<p data-start="631" data-end="977">समीक्षा बैठक के दौरान बताया गया कि वर्ष 2025-26 में प्रमुख फसलों के रकबे और उत्पादन में उत्साहजनक वृद्धि दर्ज की गई है। सरसों का उत्पादन लगभग 13.17 लाख टन होने का अनुमान है। सूरजमुखी का उत्पादन 0.70 लाख टन रहने की संभावना है, जबकि चना और मसूर के उत्पादन में भी सुधार दर्ज किया गया है। ग्रीष्मकालीन मूंग के उत्पादन में भी वृद्धि होने का अनुमान है।</p>
<p data-start="979" data-end="1276">सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्य सचिव ने उच्च उत्पादन अनुमानों पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि समयबद्ध खरीद सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को बिना किसी विलंब के लाभकारी मूल्य मिल सके। साथ ही किसानों में एमएसपी और खरीद प्रक्रिया के संबंध में व्यापक जागरूकता सुनिश्चित की जाए।</p>
<p data-start="1278" data-end="1501">चालू सीजन 2025-26 में सरसों के लिए एमएसपी 6,200 रुपये प्रति क्विंटल, चने के लिए 5,875 रुपये, मसूर के लिए 7,000 रुपये, सूरजमुखी के लिए 7,721 रुपये तथा ग्रीष्मकालीन मूंग के लिए 8,768 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।</p>
<p data-start="1503" data-end="1828">हरियाणा में वर्ष 2024-25 में 8.12 लाख टन से अधिक सरसों की खरीद की गई थी। मुख्य सचिव ने एजेंसियों को निर्देश दिए कि मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत निर्धारित 25 प्रतिशत खरीद सीमा सहित सभी मानकों का कड़ाई से पालन करें। यदि आवश्यक हो तो किसानों के हित में इस सीमा से अधिक खरीद के लिए भी आवश्यक वित्तीय प्रावधान सुनिश्चित किए जाएं।</p>
<p data-start="1830" data-end="2207">मुख्य सचिव ने दोहराया कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। खरीद के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक पात्र किसान को बिना किसी असुविधा के न्यूनतम समर्थन मूल्य मिले। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि प्रदेश में खरीद प्रक्रिया सुचारू, कुशलतापूर्वक और पूर्णतः पारदर्शी ढंग से संपन्न हो सके।</p>
<p data-start="2209" data-end="2554">बैठक में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राज शेखर वुंडरू, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल, विभाग के निदेशक राजनारायण कौशिक, हैफेड के प्रबंध निदेशक मुकुल कुमार, हरियाणा स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक डॉ. शालीन समेत विभिन्न सरकारी खरीद एजेंसियों के अधिकारी भी मौजूद रहे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69a9710563e32.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में मसूर की खरीद 20 मार्च और सरसों की खरीद 28 मार्च से शुरू होगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अरावली की गोद में उजड़ती पान की खेती, जलवायु परिवर्तन ने छीनी पीढ़ियों की आजीविका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/betel-cultivation-in-the-aravalli-mountains-is-devastated-climate-change-has-snatched-the-livelihood.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 03 Mar 2026 16:34:48 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/betel-cultivation-in-the-aravalli-mountains-is-devastated-climate-change-has-snatched-the-livelihood.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान के भरतपुर जिले की बयाना तहसील में अरावली पर्वत श्रृंखला से सटे खरैरी, बागरैन और खानखेड़ा गांव कभी पान की खेती के लिए पहचाने जाते थे। सदियों से यहां तम्बोली समुदाय पान उगाता आया है और यही खेती इन गांवों की आर्थिक धुरी थी। लेकिन पिछले डेढ़ दशक में बदलते मौसम ने इस परंपरागत खेती को गहरी चोट पहुंचाई है। अत्यधिक सर्दी, असामान्य गर्मी और अनियमित वर्षा ने पान की खेती को कमजोर कर दिया है, जिसके कारण उत्पादन लगातार घट रहा है और किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।<br />खरैरी गांव इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। कभी यहां लगभग पांच सौ लोग पान की खेती से जुड़े थे, आज यह संख्या घटकर सौ के आसपास रह गई है। खेती सिमटने के साथ ही आर्थिक गतिविधियां भी थम गईं। गांव में कभी अलवर-भरतपुर ग्रामीण आंचलिक बैंक की लीड ब्रांच खुली थी जो स्थानीय समृद्धि का संकेत थी। पान का कारोबार के घटते ही बैंक ने भी अपना कामकाज समेट लिया। एक समय तम्बोली समुदाय इतना संपन्न था कि अन्य जातियों को रोजगार देता था और ब्याज पर धन उधार देने का काम भी करता था। आज वही परिवार रोजी-रोटी के संकट से जूझ रहे हैं।</p>
<p><strong>बदलते मौसम के साथ बदले हालात</strong><br />खरैरी के किसान विजेन्द्र तम्बोली बताते हैं कि पंद्रह साल पहले तक यहां का मौसम पान के लिए अनुकूल था। न ज्यादा सर्दी पड़ती थी, न तेज गर्मी। बारिश भी समय पर हो जाती थी। पान की बेल पंद्रह फीट तक चढ़ती थी और एक बेल से सौ से अधिक पत्ते मिलते थे। अब स्थिति उलट चुकी है। सर्दियों में तापमान बीस डिग्री से नीचे जाते ही पत्तों पर धब्बे पड़ जाते हैं और वे जल जाते हैं। अधिक सर्दी से शीतलहर का असर पड़ता है, जबकि वर्षा में कमी या असमय बारिश से बेल सूख जाती है। यदि अधिक वर्षा हो जाए तो जड़ों में गलन रोग लग जाता है। पान की फसल में फूल या फल नहीं होते, सिर्फ पत्ते ही आय का आधार हैं। पत्ते खराब हुए तो पूरी मेहनत व्यर्थ।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69a56d9883a66.jpg" alt="" /></p>
<p><em>भरतपुर जिले में बयाना तहसील के खरैरी गांव मेंं पान के खेत में खड़े किसान विजेन्द्र तम्बोली। फोटो: अमरपाल सिंह वर्मा</em></p>
<p>उत्पादन में गिरावट साफ दिखाई देती है। जहां पहले बेल पंद्रह फीट तक बढ़कर 100&ndash;105 पत्ते देती थी, अब मुश्किल से सात&ndash;आठ फीट तक पहुंचती है और 70&ndash;80 पत्ते ही मिलते हैं। लागत बढ़ी है। बांस, पन्नी, छाया संरचना पर खर्च पहले से ज्यादा है लेकिन आमदनी घट गई है। खेती छोड़ चुके किसान सुरेश कुमार तम्बोली कहते हैं, &ldquo;जब मेहनत ज्यादा और आमदनी कम हो जाए तो खेती कैसे टिकेगी?&rdquo; यही कारण है कि तम्बोली समुदाय के अनेक परिवार इस पेशे से विमुख हो गए हैं।</p>
<p><strong>पान की खेती फसल बीमा योजना में नहीं&nbsp;</strong><br />नीतिगत स्तर पर भी किसानों को राहत नहीं मिल रही। कृषि स्नातक युवा कोमल कुमार तम्बोली बताते हैं कि राजस्थान में पान की खेती फसल बीमा योजना में शामिल नहीं है। जलवायु जोखिम बढ़ रहा है, लेकिन हमें बीमा का संरक्षण नहीं मिलता। वर्षों से मांग कर रहे हैं, पर सुनवाई नहीं होती। इससे किसानों की असुरक्षा और बढ़ गई है। प्राकृतिक आपदा की स्थिति में उन्हें कोई आर्थिक सहारा नहीं मिलता।<br />बाजार और परिवहन की समस्या अलग है। आसपास कोई मंडी नहीं है जहां पान के पत्ते बेचे जा सकें। किसानों को अपनी उपज लेकर दिल्ली, अलीगढ़, बनारस, आगरा, सहारनपुर और मेरठ जैसे शहरों तक जाना पड़ता है। एक समय गांवों से दिल्ली और आगरा के लिए राजस्थान परिवहन निगम की बसें चलती थीं, जिससे आवागमन आसान था। पिछले एक दशक से यह सुविधा बंद है। अब निजी साधनों पर निर्भरता बढ़ी है, जिससे लागत और जोखिम दोनों बढ़ते हैं।<br />तीन-चार वर्ष पहले खेती छोड़ चुके गुड्डू तम्बोली कहते हैं कि राज्य स्तर पर पान की खेती को बढ़ावा देने की कोई ठोस योजना नहीं बनी। वे बताते हैं कि कई राज्यों में पान के बरेजा लगाने के लिए अनुदान दिया जाता है। इसके विपरीत राजस्थान में पान उत्पादकों को न अनुदान मिलता है, न प्रशिक्षण और न ही संस्थागत समर्थन।</p>
<p><strong>पलायन कर रह गांव वाले</strong><br />खेती के संकट ने सामाजिक ढांचे को भी बदल दिया है। पान की खेती सिमटते ही पलायन तेज हो गया। खरैरी, बागरैन और खानखेड़ा से बड़ी संख्या में लोग जयपुर, दिल्ली और अन्य शहरों की ओर चले गए। कोई सिक्योरिटी गार्ड है, कोई हलवाई का सहायक, कोई ऑटो रिक्शा चला रहा है, तो कोई दिहाड़ी मजदूरी कर रहा है। कोमल कुमार बताते हैं कि उनके कई हमउम्र साथी गांव छोड़ चुके हैं। अब यहां उनका कोई हमउम्र नहीं बचा। वे एक-एक कर नाम गिनाने लगते हैं - उत्तमचंद जयपुर में सुरक्षा गार्ड हैं, महेश हलवाई के यहां काम करते हैं, दिनेश और राजीव ऑटो चलाते हैं, अरविंद और कैलाश दिल्ली में छोटे-मोटे काम कर रहे हैं&hellip;। यह सूची लंबी होती जा रही है। गांव में अधिकतर बुजुर्ग ही रह गए हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x_69a56d958a7c6.jpg" alt="" /></p>
<p><em>भरतपुर जिले की बयाना तहसील के खरैरी गांव मेंं पान की खेती छोड़ चुके किसान सुरेश कुमार तम्बोली और गुड्डू तम्बोली। फोटो: अमरपाल सिंह वर्मा</em></p>
<p>पलायन का असर केवल आर्थिक नहीं, सामाजिक भी है। दर्जनों घरों में ताले लटके हैं, गलियां सूनी हैं। सामुदायिक जीवन की रौनक कम हो गई है। जो परिवार शहरों में गए, वे वहां अस्थायी बस्तियों या किराए के कमरों में रहकर गुजर-बसर कर रहे हैं। कई बच्चों की पढ़ाई बीच में छूट गई। परंपरागत खेती से जुड़ा कौशल पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता था; अब वह कड़ी टूट रही है।<br />तम्बोली समुदाय के लिए पान केवल फसल नहीं, पहचान भी था। खेतों में बांस और पन्नी से बने बरेजे, सुबह-सुबह पत्तों की तोड़ाई और दूर-दराज के बाजारों तक आपूर्ति- यह सब स्थानीय संस्कृति का हिस्सा था। आज वही बरेजे जर्जर पड़े हैं या पूरी तरह हटा दिए गए हैं। &nbsp;<br />जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अक्सर आंकड़ों में दर्ज होता है, पर यहां उसका चेहरा साफ दिखाई देता है&mdash;घटती बेलें, जले हुए पत्ते, खाली घर और शहरों की ओर जाती बसें। कोमल कुमार तम्बोली कहते हैं, यदि समय रहते पान की खेती को बीमा, बाजार, परिवहन और तकनीकी सहयोग से जोड़ा नहीं गया तो संभव है कि अरावली की तलहटी में सदियों से चली आ रही यह परंपरा पूरी तरह इतिहास बन जाए। अभी कुछ किसान डटे हैं, लेकिन अकेले उनके प्रयास से यह खेती नहीं बच सकती।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69a56d9a93201.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अरावली की गोद में उजड़ती पान की खेती, जलवायु परिवर्तन ने छीनी पीढ़ियों की आजीविका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/03/image_750x500_69a56d9a93201.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फसल 70 प्रतिशत खराब, रिकॉर्ड में शून्य: राजस्थान में फसल बीमा पर बड़ा सवाल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/70-pc-crop-damage-zero-records-a-big-question-mark-on-crop-insurance-in-rajasthan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Feb 2026 19:04:51 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/70-pc-crop-damage-zero-records-a-big-question-mark-on-crop-insurance-in-rajasthan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="179" data-end="576">राजस्थान विधानसभा में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा द्वारा फसल बीमा योजना में गड़बड़ियों की एसओजी जांच की घोषणा ने वर्षों से संघर्ष कर रहे किसानों की लड़ाई को एक तरह से वैधता दी है। मंत्री का यह कहना कि राज्य में फसल बीमा योजना में गड़बड़ी कर संगठित अपराध किया जा रहा है और इसके पीछे माफिया सक्रिय है, केवल एक बयान नहीं बल्कि उस पीड़ा की स्वीकारोक्ति है जिसे किसान लंबे समय से झेलते आ रहे हैं।</p>
<p data-start="578" data-end="948">कृषि मंत्री ने विधानसभा में श्रीगंगानगर जिले का उदाहरण देते हुए बताया कि जहां वास्तव में 70 प्रतिशत तक फसल खराब थी, वहां बीमा कंपनी के सर्वेयर ने मिलीभगत कर नुकसान शून्य प्रतिशत दिखा दिया। इस हेराफेरी के चलते किसानों को करीब 128 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम नहीं मिला। मंत्री के अनुसार सर्वेयर ने स्वयं हस्ताक्षर कर रिपोर्ट तैयार की और नुकसान को कागजों में गायब कर दिया।</p>
<p data-start="950" data-end="1165">मंत्री ने बताया कि बीमा कंपनी प्रथम दृष्टया हमारी नजर में डिफॉल्टर है और इसलिए हमने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है कि इस मामले में शामिल कंपनी को टेंडर नहीं दिया जाए। इस कंपनी को राजस्थान में काम नहीं मिलना चाहिए।</p>
<p data-start="1167" data-end="1536">इस मामले की एफआईआर (नंबर 0210) श्रीगंगानगर जिले के रावला पुलिस थाने में क्षेमा जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड के खिलाफ दर्ज कराई गई है। एफआईआर में सर्वे कंपनी का भी जिक्र है। एफआईआर के अनुसार जिस नुकसान को शून्य प्रतिशत दिखाया गया है, वह खराबा रबी 2023-24 में रावला क्षेत्र के गांवों में हुआ था। आरोप है कि सर्वेयर ने किसानों और सरकारी कर्मचारियों के हस्ताक्षर स्वयं कर दिए।</p>
<h3 data-start="1538" data-end="1571">लंबी है आंदोलन की पृष्ठभूमि</h3>
<p data-start="1573" data-end="2058">राज्य के विभिन्न जिलों में फसल बीमा को लेकर किसान आंदोलित होते रहे हैं। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में किसानों ने बीमा क्लेम के लिए वर्षों तक संघर्ष किया है। कभी तहसील मुख्यालयों पर धरने, कभी जिला स्तर तक प्रदर्शन&mdash;किसानों की यह लड़ाई एक-दो मौसम की नहीं बल्कि लगभग एक दशक की है। इसके बावजूद लंबे समय तक उनकी शिकायतों को या तो नजरअंदाज किया गया या यह कहकर खारिज कर दिया गया कि रिकॉर्ड में नुकसान नहीं है। अब विधानसभा में मंत्री के बयान से स्पष्ट हो गया है कि रिकॉर्ड ही संदिग्ध थे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x_6997088d201e4.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>हनुमानगढ़ में फसल बीमा क्लेम देने की मांग को लेकर प्रदर्शन के मौके पर सभा का दृश्य। फाइल फोटो</em></p>
<h3 data-start="1538" data-end="1571"></h3>
<p data-start="1573" data-end="2058"></p>
<h3 data-start="2060" data-end="2089">किसान महापंचायत का सवाल</h3>
<p data-start="2091" data-end="2329">किसान महा पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने एसओजी जांच की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि यह सिर्फ पहला कदम है। जांच इस सवाल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए कि गड़बड़ी हुई या नहीं, बल्कि यह भी सामने आना चाहिए कि इसमें कौन-कौन शामिल था।</p>
<p data-start="2331" data-end="2832">रामपाल जाट का कहना है कि अगर किसी क्षेत्र में 70 प्रतिशत तक खराबा था और उसे शून्य दिखा दिया गया तो इसके लिए केवल बीमा कंपनी ही नहीं बल्कि उन सरकारी विभागों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए, जिनका काम क्रॉप कटिंग करना और उसकी रिपोर्ट तैयार करना है। बीमा कंपनी क्लेम क्रॉप कटिंग के आधार पर देती है और यह प्रक्रिया कृषि व राजस्व विभाग की संयुक्त जिम्मेदारी होती है। जाट कहते हैं कि अगर वास्तव में नुकसान हुआ था तो क्रॉप कटिंग रिपोर्ट में वह क्यों नहीं दिखा&mdash;यह सवाल अब जांच का केंद्र होना चाहिए।</p>
<h3 data-start="2834" data-end="2874">हनुमानगढ़ की कहानी: सिस्टम पर सवाल</h3>
<p data-start="2876" data-end="3148">हनुमानगढ़ में पिछले करीब एक दशक से किसानों को बीमा क्लेम दिलाने के लिए आंदोलन कर रहे अखिल भारतीय किसान संघ के जिला महासचिव मंगेज चौधरी का कहना है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी अकेले किसी कंपनी के बूते की बात नहीं हो सकती। इसमें प्रभावशाली लोग, अफसर और नेता सभी शामिल हो सकते हैं।</p>
<p data-start="3150" data-end="3513">चौधरी सवाल उठाते हैं कि जब क्रॉप कटिंग के समय पटवारी और कृषि पर्यवेक्षक मौके पर मौजूद रहते हैं, जिला कलेक्टर और उपखंड अधिकारी इसकी मॉनिटरिंग करते हैं, फिर जिला स्तरीय शिकायत निवारण समिति, राज्य स्तरीय समिति और राष्ट्रीय समिति हर महीने बैठकें करती हैं, तो इसके बावजूद घोटाले कैसे हो रहे हैं? और अगर हो रहे हैं तो ये संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभा रहीं?</p>
<h3 data-start="3515" data-end="3544">ये हैं गड़बड़ी के तरीके</h3>
<p data-start="3546" data-end="3857">मंगेज चौधरी के अनुसार फसल बीमा में गड़बड़ी के कई तरीके सामने आए हैं। पहला, क्रॉप कटिंग के बाद जब खराबे की रिपोर्ट तैयार हो जाती है तो बीमा कंपनी उस पर आपत्ति लगाकर भुगतान रोक देती है। दूसरा, इससे भी गंभीर तरीका यह है कि किसान द्वारा प्रीमियम भरकर ली गई बीमा पॉलिसी को अलग-अलग बहानों से निरस्त कर दिया जाता है।</p>
<p data-start="3859" data-end="4166">चौधरी बताते हैं कि हनुमानगढ़ जिले में 2021 से 2024 के बीच ई-मित्र केंद्रों के माध्यम से ली गई लगभग सभी पॉलिसियों को कंपनी ने बिना ठोस कारण बताए खारिज कर दिया। इन पॉलिसियों पर बनने वाला क्लेम करीब 500 करोड़ रुपये था। इसे क्यों खारिज किया गया, यह आज तक किसानों को नहीं बताया गया। यह भी जांच का बड़ा विषय है।</p>
<h3 data-start="4168" data-end="4199">500 करोड़ से 150 करोड़ तक</h3>
<p data-start="4201" data-end="4752">चौधरी बताते हैं कि खरीफ 2023 का मामला इस पूरी व्यवस्था की तस्वीर साफ कर देता है। पहले 171 करोड़ रुपये का क्लेम जारी हुआ, लेकिन बाद में कंपनी ने यह कहकर भुगतान रोक दिया कि क्रॉप कटिंग ही गलत हुई है। जबकि पटवारी और कृषि पर्यवेक्षकों के पास खराबे के वीडियो साक्ष्य मौजूद थे। आखिरकार राज्य स्तरीय समिति ने सैटेलाइट आंकड़ों के आधार पर करीब 150 करोड़ रुपये का क्लेम देने का निर्णय किया। यानी जो नुकसान 500&ndash;600 करोड़ रुपये तक आंका जा रहा था, उसे 150 करोड़ रुपये में समेट दिया गया। यह भी नुकसान को कम दिखाने और जिम्मेदारी से बचने का एक तरीका माना जा रहा है।</p>
<h3 data-start="4754" data-end="4778">हर मौसम में आंदोलन</h3>
<p data-start="4780" data-end="5210">हनुमानगढ़ के माकपा नेता रघुवीर वर्मा कहते हैं कि पिछले एक दशक में ऐसा कोई रबी या खरीफ सीजन नहीं गया, जब किसानों को बीमा क्लेम के लिए आंदोलन न करना पड़ा हो। हर बार फसल खराबा हुआ और हर बार किसानों को अपने हक के लिए भटकना पड़ा। आज भी कई मामले लंबित हैं। वर्मा के अनुसार कृषि मंत्री की घोषणा ने कम से कम यह तो साबित कर दिया है कि किसान गलत नहीं थे। सरकार ने आज किसानों को सही ठहराया है। अब जरूरत है कि यह जांच कागजों तक सीमित न रहे।</p>
<h3 data-start="5212" data-end="5230">अब आगे क्या?</h3>
<p data-start="5232" data-end="5491">श्रीगंगानगर में संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा के प्रवक्ता सुभाष सहगल कहते हैं कि फसल बीमा का क्लेम लेना किसानों के लिए हमेशा एक चुनौती रहा है। अगर सब कुछ नियमों के तहत और पारदर्शिता से होता तो किसानों को आंदोलन न करने पड़ते। आगे निष्पक्ष जांच हो, यह जरूरी है।</p>
<p data-start="5493" data-end="5755">रामपाल जाट कहते हैं कि विधानसभा में हुई यह घोषणा किसानों के लंबे संघर्ष का एक पड़ाव भर है। असली परीक्षा अब शुरू होगी। वह पूछते हैं&mdash;क्या एसओजी जांच दोषियों तक पहुंचेगी? क्या लंबित बीमा क्लेम का निपटारा होगा? और क्या भविष्य में फसल नुकसान का आकलन पारदर्शी बनेगा?</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ फसल 70 प्रतिशत खराब, रिकॉर्ड में शून्य: राजस्थान में फसल बीमा पर बड़ा सवाल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नरेश टिकैत के &amp;apos;हलवाई का ततैया&amp;apos; बयान पर जयंत चौधरी का जवाब &amp;#45; मुझे मीठे का कोई शौक नहीं!]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/jayant-chaudhary-response-to-naresh-tikait-wasp-remark-i-have-no-fondness-for-sweets.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Feb 2026 16:01:29 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/jayant-chaudhary-response-to-naresh-tikait-wasp-remark-i-have-no-fondness-for-sweets.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="140" data-end="389">अमेरिका के साथ ट्रेड डील में किसानों के हितों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पश्चिमी यूपी के दो दिग्गजों की बयानबाजी ने सियासी गर्मी बढ़ा दी है। ट्रेड डील से किसानों को होने वाले नफे-नुकसान पर बहस के साथ ही आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी तेज हो गया है।</p>
<p data-start="391" data-end="957">केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष <strong>जयंत चौधरी</strong> ने 16 फरवरी को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के बिसावर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि अमेरिका से आलू तो आने वाला नहीं है, न गेहूं आने वाला है। अमेरिका से धान भी नहीं आने वाला और न ही फल-सब्जियां आने वाली हैं। आपका पैदा किया हुआ आम जरूर वहां जा सकता है। आपकी फसलें जरूर&nbsp; वहां जा सकती हैं। वहां से दूध भी नहीं आने वाला है। साफ इंकार है। दो टूक, भारत सरकार की एक ही शर्त थी कि हम व्यापार में विस्तार चाहते हैं, मगर किसान और कामगार के हितों से समझौता नहीं कर सकते। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जितने भी करार हुए हैं, उनमें यही पहली शर्त है, जो मानी गई है।</p>
<p data-start="959" data-end="1313">जयंत चौधरी के इस बयान पर भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष<strong> नरेश टिकैत</strong> ने तंज कसते हुए कहा कि जयंत चौधरी अपना काम चला रहे हैं। सरकार में हैं तो सरकार की बात तो कहनी ही पड़ेगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हलवाई का ततैया हलवाई को नहीं काटता और मिठाई पर बैठा रहता है। हलवाई उसे हटाता रहता है, लेकिन उससे कुछ नहीं कहता। जयंत चौधरी की भी मजबूरी है, क्या करें!</p>
<p data-start="1315" data-end="1469">नरेश टिकैत का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रालोद और भाकियू समर्थकों के बीच बहस छिड़ गई। दोनों ओर से एक-दूसरे पर तीखी टिप्पणियां की जा रही हैं।</p>
<p data-start="1471" data-end="1678">नरेश टिकैत के &lsquo;हलवाई का ततैया&rsquo; वाले बयान पर पलटवार करते हुए <strong>जयंत चौधरी</strong> ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि <span>जो हलवाई और ततैया का किस्सा सुना रहे हैं उन्हें बता दूँ, मुझे मीठे का कोई शौक नहीं!</span></p>
<p data-start="1680" data-end="1918">इस पोस्ट के सामने आते ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। सियासी खेमों में इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। मीठे का शौक न होने संबंधी जयंत चौधरी के बयान को 2027 के राजनीतिक समीकरणों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<p data-start="1920" data-end="2343">इस बीच, भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता <strong>राकेश टिकैत</strong> ने मामले को संतुलित करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अमेरिका से जो समझौता हुआ है, वह डील नहीं बल्कि एकतरफा घोषणा है। इस पर देश में बहस चल रही है। प्रेस के लोग सवालों में उलझाकर विवाद पैदा कर देते हैं। राकेश टिकैत ने कहा कि जयंत चौधरी सरकार में शामिल हैं, इसलिए सरकार की जो भाषा होगी, वही उन्हें बोलनी चाहिए। वे अपनी बात कह रहे हैं, लेकिन प्रेस के लोग विवाद खड़ा कर रहे हैं।</p>
<p data-start="2345" data-end="2628">राकेश टिकैत ने जोर देकर कहा कि हम एक हैं। कोई कहीं भी रहे, सब एक हैं। हम दिल्ली के चारों तरफ हैं, जरूरत पड़ी तो फिर घेरेंगे। जयंत चौधरी के बयान का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने सही कहा है। उन्हें &lsquo;मीठे&rsquo;, यानी सरकार से कोई लगाव नहीं है। जब जरूरत होगी, वे जनता के बीच होंगे।</p>
<p data-start="2630" data-end="3038">गौरतलब है कि राष्ट्रीय लोकदल और भाकियू दोनों का प्रभाव पश्चिमी यूपी के किसान वर्ग में है। अतीत में दोनों संगठन मिलकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। खासकर किसान आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय लोकदल ने भाकियू का समर्थन किया था। किसान आंदोलन से बने माहौल का सियासी लाभ रालोद को 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में मिला। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी भाजपा से गठबंधन कर एनडीए के पाले में चले गए थे।</p>
<p data-start="2630" data-end="3038"></p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560">
<p lang="hi" dir="ltr">&ldquo;जितने भी अंतरराष्ट्रीय करार हो रहे हैं, उनमें सरकार की एक ही शर्त है- हम व्यापार में विस्तार चाहते हैं, मगर किसान और कामगार के हितों से समझौता नहीं करेंगे।&rdquo;<br /><br />- माननीय केंद्रीय मंत्री श्री जयन्त चौधरी (बिसावर, हाथरस)<a href="https://twitter.com/hashtag/TradeDeal?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#TradeDeal</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/JayantChaudhary?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#JayantChaudhary</a> <a href="https://t.co/D15YV46ZXp">pic.twitter.com/D15YV46ZXp</a></p>
&mdash; Office of Ch Jayant Singh (@Office_ChJayant) <a href="https://twitter.com/Office_ChJayant/status/2023387342359482464?ref_src=twsrc%5Etfw">February 16, 2026</a></blockquote>
<p data-start="2630" data-end="3038">
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x500_6996dff2bb9fe.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नरेश टिकैत के 'हलवाई का ततैया' बयान पर जयंत चौधरी का जवाब - मुझे मीठे का कोई शौक नहीं! ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान के मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का बड़ा खुलासा, 1150 करोड़ रुपये के फसल बीमा घोटाले का आरोप]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-minister-kirodi-lal-meena-makes-a-major-revelation-alleging-a-rs-1150-crore-crop-insurance-scam-insurance.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 14 Feb 2026 18:33:35 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-minister-kirodi-lal-meena-makes-a-major-revelation-alleging-a-rs-1150-crore-crop-insurance-scam-insurance.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान में फसल बीमा को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। राजस्थान के कृषि मंत्री<strong> डॉ.</strong> <strong>किरोड़ी लाल मीणा</strong> ने राज्य में फसल बीमा योजना में बड़े घोटाले का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि राज्य में लगभग 15 हजार फर्जी किसानों के नाम पर फसल बीमा का प्रीमियम काटा गया, जिनके पास कोई जमीन ही नहीं है, और इन मामलों में करीब 1150 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम भी पास करवाया गया। यह बीमा <strong>प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना</strong> के तहत किया गया था।</p>
<p><strong>सालासर की एसबीआई शाखा में 71 </strong><strong>संदिग्ध मामले</strong></p>
<p>किरोड़ी लाल मीणा शुक्रवार को चूरू जिले के सालासर स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा पहुंचे। वहां उन्होंने फसल बीमा से संबंधित दस्तावेजों की जांच की। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल सालासर ब्रांच में 71 ऐसे लोगों के नाम पर बीमा प्रीमियम काटा गया, जो वास्तव में किसान नहीं हैं।</p>
<p>इन 71 मामलों में कथित किसानों के नाम पर 12-12 लाख रुपये, यानी लगभग करीब 9 करोड़ रुपये के बीमा क्लेम भुगतान प्रस्तावित था। हालांकि, जांच में अनियमितता सामने आने के बाद भुगतान पर रोक लगा दी गई।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x_69907261ad905.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>15 हजार से ज्यादा फर्जी फसल बीमा</strong><strong>!</strong></p>
<p>एक सोशल मीडिया पोस्ट में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि किसानों के हक पर डाका डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सालासर में एसबीआई शाखा सहित अन्य सरकारी एवं प्राइवेट बैंकों द्वारा राजस्थान भर में करीब 15,000 से ज्यादा फर्जी फसल बीमा बनाकर करीब 1150 करोड़ का बीमा घोटाला फर्जी हस्ताक्षर व फर्जी जमा बंदी खसरे अंकित कर बैंककर्मी व बीमा माफिया और फसल बीमा कंपनी के एजेंट मिलीभगत करके बड़ा घोटाला किया जा रहा था। ऐसे में जांच कर फर्जी क्लेम रोके गए, एफआईआर दर्ज होगी और दोषी जेल जाएंगे।</p>
<p><strong>किसान और पिता का नाम एक जैसा</strong></p>
<p>मंत्री ने बताया कि संदिग्ध सूची में कई किसान और उनके पिता का नाम एक ही दर्ज है। इन व्यक्तियों के पास न तो जमाबंदी की प्रति है और न ही खसरा नंबर का कोई रिकॉर्ड। उन्होंने दावा किया कि इन कथित किसानों की जमीन बीकानेर जिले के गजनेर क्षेत्र के विभिन्न चकों में दर्शाई गई, जबकि वहां उनकी कोई वास्तविक भूमि नहीं है।</p>
<p>कृषि मंत्री ने शाखा प्रबंधक से दस्तावेज मांगे, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मंत्री ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच करवाई जाएगी और संबंधित लोगों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।&nbsp;</p>
<p><strong>बीमा कंपनी पर भी सवाल</strong></p>
<p>इस प्रकरण में बीमा कंपनी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>मीणा के अनुसार, पूरे राज्य में करीब 15 हजार किसानों के नाम पर लगभग 1150 करोड़ रुपये की राशि काटी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि फसल बीमा में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।</p>
<p>राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा इससे पहले उर्वरक फैक्ट्रियों और बीज कंपनियों पर छापेमारी कर नकली खाद-बीज के खुलासों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। अब फसल बीमा प्रकरण को लेकर उनके आरोपों ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">किसानों के हक पर डाका डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।<br /><br />सालासर में State Bank of India शाखा सहित अन्य सरकारी एवं प्राइवेट बैंकों द्वारा राजस्थान भर में करीब 15,000 से ज्यादा फर्जी फसल बीमा बनाकर करीब 1150 करोड़ का बीमा घोटाला फर्जी हस्ताक्षर व फर्जी जमा बंदी खसरे अंकित कर 1/2 <a href="https://t.co/6BFuVjJBoF">pic.twitter.com/6BFuVjJBoF</a></p>
&mdash; Dr. Kirodi Lal Meena (@DrKirodilalBJP) <a href="https://twitter.com/DrKirodilalBJP/status/2022283453644026101?ref_src=twsrc%5Etfw">February 13, 2026</a></blockquote>
<p>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x500_69907065c8ef5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान के मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का बड़ा खुलासा, 1150 करोड़ रुपये के फसल बीमा घोटाले का आरोप ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान बजट 2026: कृषि, पशुपालन और ग्रामीण विकास से जुड़ी कई घोषणाएं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-budget-2026-27-several-announcements-related-to-agriculture-animal-husbandry-and-rural-development.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Feb 2026 20:53:41 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-budget-2026-27-several-announcements-related-to-agriculture-animal-husbandry-and-rural-development.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान की उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री <strong>दीया कुमारी</strong> ने राज्य विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3 लाख 50 हजार 54 करोड़ रुपये के व्यय का बजट पेश किया। बजट में 3 लाख 25 हजार 740 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्तियों का अनुमान है। राज्य का राजस्व घाटा 24 हजार 313 करोड़ 93 लाख रुपये रहने का अनुमान है।</p>
<p>वित्त मंत्री ने बजट को &lsquo;ग्रामीण समृद्धि और किसानों की आय बढ़ाने वाला&rsquo; बताते हुए कृषि बजट के तहत 69 हजार 4 सौ 22 करोड़ रुपये का व्यय प्रस्तावित किया है जो राज्य के कुल बजट का 11. 36 फीसदी और गत वर्ष से 7.59 फीसदी अधिक है।&nbsp;</p>
<p>राज्य सरकार का कहना है कि बजट का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना तथा कृषि और पशुपालन को टिकाऊ बनाना है। <span style="font-size: 14px;">हालांकि विपक्ष ने बजट को घोषणाओं तक सीमित बताते हुए जमीनी हकीकत से दूर करार दिया है।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x_698c9f7c5b2a5.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<h2>सिंचाई, सौर पंप और भूमि पट्टा राहत</h2>
<p>बजट में सिंचाई से जुड़े कार्यों पर 11 हजार 300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। आगामी वित्त वर्ष के दौरान 50 हजार सौर पंप स्थापित करने का लक्ष्य है, जिन पर लगभग 1 हजार 500 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा। कृषि भूमि पट्टों की बकाया किस्तें 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक एकमुश्त जमा कराने पर ब्याज में शत-प्रतिशत छूट दी जाएगी।</p>
<h2>कृषि यंत्रीकरण और बीज स्वावलंबन</h2>
<p>कृषि यंत्रीकरण के लिए पावर टिलर, डिस्क हल, कल्टीवेटर, हैरो और रीपर जैसे उपकरणों पर 160 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा, जिससे करीब 50 हजार किसान लाभान्वित होंगे। 96 करोड़ रुपये की लागत से 500 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे।</p>
<p>मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना के तहत 90 प्रतिशत अनुदान पर 70 हजार क्विंटल बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पर 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे और लगभग 3 लाख किसानों को लाभ मिलेगा। 5 हजार किसानों को नेपियर घास का नि:शुल्क वितरण भी किया जाएगा।</p>
<h2>एग्री स्टैक और संरक्षित खेती</h2>
<p>किसानों को डेटा आधारित परामर्श, फसल योजना और बाजार सूचना उपलब्ध कराने के लिए एग्री स्टैक परियोजना प्रबंधन इकाई का गठन किया जाएगा। 3 हजार 300 किसानों को राज्य से बाहर अध्ययन भ्रमण पर भेजा जाएगा।</p>
<p>संरक्षित खेती के तहत ग्रीनहाउस, पॉलीहाउस, शेडनेट और लो टनल के लिए 4 हजार किसानों को 200 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। वर्टिकल सपोर्ट सिस्टम आधारित खेती के लिए 5 हजार किसानों को सहायता प्रदान की जाएगी तथा 500 सोलर फसल ड्रायर भी वितरित किए जाएंगे।&nbsp;</p>
<h2>ऋण और ब्याज अनुदान</h2>
<p>ब्याज मुक्त अल्पकालीन फसली ऋण योजना के तहत 35 लाख से अधिक किसानों को 25 हजार करोड़ रुपये का ऋण दिया जाएगा। इस पर 800 करोड़ रुपये का ब्याज अनुदान प्रस्तावित है। दीर्घकालीन सहकारी ऋणों पर 590 करोड़ रुपये के ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाएगा, जिससे लगभग 26 हजार किसान और लघु उद्यमी लाभान्वित होंगे।</p>
<h2>विपणन और भंडारण</h2>
<p>&lsquo;भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश में 250 और 500 टन क्षमता के 50-50 गोदामों का निर्माण किया जाएगा, जिस पर लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा 200 नवगठित गोदाम-विहीन ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 100 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम और कार्यालय भवन का निर्माण 30 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा।</p>
<h2>पशुपालन और डेयरी क्षेत्र</h2>
<p>200 ग्राम पंचायतों में पशु चिकित्सा उपकेंद्र खोले जाएंगे, 25 उपकेंद्रों को पशु चिकित्सालय और 50 पशु चिकित्सालयों को प्रथम श्रेणी में क्रमोन्नत किया जाएगा। राजस्थान सहकारी डेयरी संरचना विकास कोष को 1 हजार करोड़ से बढ़ाकर 2 हजार करोड़ रुपये किया गया है।</p>
<p>मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना के तहत 700 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा, जिससे लगभग 5 लाख पशुपालक लाभान्वित होंगे। एनसीआर, उत्तरप्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सरस उत्पादों के बिक्री केंद्र स्थापित करने पर 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे।</p>
<p>ग्रामीण क्षेत्रों में 1 हजार नए दुग्ध संग्रह केंद्र स्थापित किए जाएंगे। अलवर में 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र 200 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 500 डेयरी बूथों का आवंटन किया जाएगा।&nbsp;</p>
<h2>विशेष उत्पादों के लिए 'राज गिफ्ट'</h2>
<p>राजस्थान के विशिष्ट कृषि-प्रसंस्कृत उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा उनसे जुड़े किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के उद्देश्य से राज गिफ्ट (जियोग्राफिकल इंडिकेशन फॉर ट्रांसफ़ॉर्मेशन ऑफ प्रोडक्शन एंड लाइवलीहुड्स)&rsquo; मिशन शुरू किया गया है।</p>
<h2>प्याज, किन्नू और आम उत्कृष्टता केंद्र</h2>
<p>अलवर में प्याज और सब्जियों, श्रीगंगानगर में किन्नू तथा बांसवाड़ा में आम के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। जोधपुर, कोटा और उदयपुर में जैविक खाद्य बाजार शुरू किए जाएंगे। चयनित जिलों में 2 हजार किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं, व्यापारियों और निर्यातकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।</p>
<h2>नई मंडियों का ऐलान&nbsp;</h2>
<p>बजट में प्रावधान किया गया है कि राज्य में नई कृषि उपज मंडियों, सब्ज़ी मंडियों, जिला सहकारी उपभोक्ता भंडार और उपहार विक्रय केंद्रों की स्थापना की जाएगी। बागीदौरा-बांसवाड़ा, सिकराय-दौसा, राजियासर स्टेशन (सूरतगढ़)-श्रीगंगानगर में नवीन कृषि उपज अनाज मण्डी एवं सवाई माधोपुर व बयाना-भरतपुर में सब्जी मण्डी स्थापित की जाएगी।</p>
<h2>नए जिलों में सहकारी उपभोक्ता भंडार</h2>
<p>वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि नवगठित जिलों में जिला सहकारी उपभोक्ता भण्डार खोले जाएगे। इसी के साथ समस्त जिलों में नवीन उपहार विक्रय केन्द्र खुलेंगे। &nbsp;किसानों को गर्मी एवं बरसात से बचाव के लिए शैड निर्माण सहित मण्डियों तक पहुंच मार्ग एवं यार्डों का निर्माण सहित अन्य आधारभूत कार्यों के लिए 350 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। &nbsp;</p>
<h2>सियासी प्रतिक्रिया</h2>
<p>मुख्यमंत्री <strong>भजनलाल शर्मा</strong> ने इसे "विकसित राजस्थान 2047" की दिशा में ऐतिहासिक बजट बताया। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को मजबूती देने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। राजस्थान के कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री <strong>डॉ. किरोड़ी लाल</strong> ने दावा किया कि यह बजट किसानों, पशुपालकों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण वर्ग के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।</p>
<p>वहीं, कांग्रेस नेता <strong>सचिन पायलट</strong> ने बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि यह डबल इंजन सरकार का जनता पर दोहरा कुठाराघात है। किसान नेता <strong>रामपाल जाट</strong> ने कहा कि पिछले वर्ष के बजट की घोषणाएं आज तक जमीन पर नहीं उतरीं और इस बार फिर नई घोषणाओं की बौछार कर दी गई। यह सरकार की नीयत नहीं, किसानों को भ्रमित करने की नीति को दिखाता है।&nbsp;<br /><br /></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान बजट 2026: कृषि, पशुपालन और ग्रामीण विकास से जुड़ी कई घोषणाएं ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोलर परियोजनाओं की आड़ में खेजड़ी की कटाई के खिलाफ राजस्थान में आंदोलन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/agitaion-against-the-felling-of-khejri-trees-under-the-guise-of-solar-projects-in-rajasthan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 09 Feb 2026 20:18:57 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
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        <description><![CDATA[ <p data-start="140" data-end="555">बीकानेर संभाग मुख्यालय के हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, चूरू, नागौर, जोधपुर, पाली, बाड़मेर और जैसलमेर सहित राज्य के कई ज़िलों में खेजड़ी बचाओ आंदोलन के समर्थन में लगातार धरने और प्रदर्शन हो रहे हैं। खेजड़ी पर मंडरा रहे संकट को लेकर लोगों में गहरा आक्रोश है। लगभग तीन दशक पहले शुरू हुए कीट प्रकोप के कारण खेजड़ी के हज़ारों पेड़ सूख चुके हैं और बीते कई वर्षों से सोलर प्लांट लगाने के नाम पर इसकी अंधाधुंध कटाई की जा रही है।</p>
<p data-start="557" data-end="991">आंदोलन का नेतृत्व कर रही पर्यावरण संघर्ष समिति के संयोजक रामगोपाल बिश्नोई का कहना है कि खेजड़ी इस समय गंभीर संकट में है। पहले लंबे समय तक चले कीट प्रकोप ने हज़ारों पेड़ों को नष्ट किया और अब सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए ज़मीन खाली करने के नाम पर खेजड़ी पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। इसी वजह से लाखों पेड़ काटे जा चुके हैं। राज्य का कल्पवृक्ष कहलाने वाली खेजड़ी आज अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है और इसे बचाना समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है।</p>
<p data-start="993" data-end="1427">खेजड़ी की कटाई पर रोक लगाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी, लेकिन लगातार अनदेखी के चलते लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है। धरना-प्रदर्शन पहले भी होते रहे हैं, लेकिन फरवरी की शुरुआत के साथ ही इस आंदोलन ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। 2 फरवरी को बीकानेर के पॉलीटेक्निक कॉलेज परिसर में हज़ारों लोगों ने महापड़ाव डालकर साफ़ ऐलान कर दिया कि जब तक खेजड़ी के संरक्षण के लिए सख़्त कानून नहीं बनाया जाएगा, आंदोलन जारी रहेगा।</p>
<p data-start="1429" data-end="1870">3 फरवरी को महापड़ाव स्थल पर सैकड़ों लोगों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। पहले चरण में 363 लोग अनशन पर बैठे, जिनकी संख्या बाद में बढ़कर 450 तक पहुँच गई। इस अनशन में 18 वर्ष के युवाओं से लेकर 80 वर्ष तक के बुज़ुर्ग शामिल थे। तीसरे दिन आमरण अनशन पर बैठे 17 लोगों की तबीयत बिगड़ गई, जिनमें से तीन को गंभीर हालत में पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को अनशन स्थल पर 75-75 बेड के दो अस्थायी अस्पताल स्थापित करने पड़े।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/02/image_750x_698a042331eef.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="1872" data-end="2607">5 फरवरी की रात प्रदेश के उद्योग मंत्री के.के. बिश्नोई अनशन स्थल पर पहुँचे और यह कहते हुए अनशन समाप्त करने का आग्रह किया कि सरकार ने बीकानेर और जोधपुर संभाग में खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि आंदोलनकारियों ने यह कहते हुए मंत्री के आग्रह को अस्वीकार कर दिया कि जब तक पूरे राज्य में खेजड़ी की कटाई पर रोक नहीं लगाई जाती, तब तक बेमियादी अनशन जारी रहेगा। बाद में आधी रात को आमरण अनशन तो समाप्त कर दिया गया, लेकिन यह घोषणा भी की गई कि जब तक खेजड़ी की कटाई रोकने के लिए सख़्त कानून नहीं बनता, क्रमिक अनशन जारी रहेगा। इसके बाद से बीकानेर में क्रमिक अनशन लगातार जारी है और बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। साथ ही राज्य के विभिन्न ज़िलों में धरना-प्रदर्शन भी जारी हैं। राज्य विधानसभा और लोकसभा में भी यह मुद्दा उठ चुका है।</p>
<p data-start="2609" data-end="3063">राजस्थान के किसानों के लिए खेजड़ी केवल राज्य वृक्ष नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। सामुदायिक सहभागिता के चलते नागौर, बीकानेर, अजमेर, चूरू, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, पाली, सिरोही, जालौर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, जयपुर, करौली, सीकर और झुंझुनू जैसे ज़िलों में आज भी लाखों खेजड़ी के पेड़ मौजूद हैं। यह पशुओं के लिए चारे का प्रमुख स्रोत है, घरों में जलाऊ लकड़ी देती है, सांगरी जैसी सब्ज़ी के रूप में भोजन का हिस्सा है और खेतों के लिए प्राकृतिक खाद का काम करती है।</p>
<p data-start="3065" data-end="3289">हालांकि लगभग तीन दशक पहले हुए कीटों के गंभीर हमले ने इसके अस्तित्व पर गहरा संकट खड़ा कर दिया था। यह संकट पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन किसानों और सरकारी विभागों के संयुक्त प्रयासों से खेजड़ी को अब तक बचाए रखा जा सका है।</p>
<p data-start="3291" data-end="3922">जोधपुर स्थित शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (एएफआरआई) के वन संरक्षण विभाग के वैज्ञानिकों ने वर्ष 2010 में इस समस्या की जड़ तक पहुँचने के लिए सात वर्षों का विस्तृत शोध शुरू किया था। शोध का उद्देश्य खेजड़ी के सूखने और मरने के कारणों की पहचान करना और उनके व्यावहारिक समाधान सुझाना था। अध्ययन में यह सामने आया कि खेजड़ी के क्षरण के पीछे दो प्रमुख जैविक कारक हैं&mdash;एक जड़ सड़न पैदा करने वाला कवक गैनोडर्मा ल्यूसिडम और दूसरा जड़ों में छेद करने वाला कीट एकैंथोफोरस सेराटिकॉर्निस। इसके अलावा कुछ अजैविक कारण भी सामने आए, जिनमें भूजल स्तर का लगातार गिरना और ट्रैक्टरों से की जाने वाली गहरी जुताई शामिल है, जो पेड़ों की जड़ों को नुकसान पहुँचाती है।</p>
<p data-start="3924" data-end="4371">शोध पूरा होने के बाद वैज्ञानिकों ने खेजड़ी के संरक्षण को लेकर किसानों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए। इनमें प्रमुख सलाह यह थी कि खेजड़ी की छंटाई हर वर्ष करने के बजाय दो वर्ष में एक बार की जाए, ताकि पेड़ों पर अनावश्यक दबाव न पड़े और उनकी जीवन-क्षमता बनी रहे। लेकिन पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक ओर वैज्ञानिक बार-बार छंटाई से बचने की सलाह दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सोलर प्लांटों और अन्य परियोजनाओं के लिए खेजड़ी की अंधाधुंध कटाई की जा रही है।</p>
<p data-start="4373" data-end="4797">पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार सौर ऊर्जा परियोजनाओं के नाम पर राजस्थान में बीते एक दशक में लाखों पेड़ काटे गए हैं, जिनमें खेजड़ी जैसे परंपरागत और जीवनदायी वृक्ष बड़ी संख्या में शामिल हैं। खेजड़ी को राजस्थान में &lsquo;कल्पवृक्ष&rsquo; का दर्जा प्राप्त है, क्योंकि यह मरुस्थलीय पारिस्थितिकी को संतुलित रखने के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका का आधार भी है। जन्म से मृत्यु तक के सामाजिक और सांस्कृतिक संस्कारों में इसकी मौजूदगी अहम मानी जाती है।</p>
<p data-start="4799" data-end="5308">एक ओर बीकानेर स्थित आईसीएआर-केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान ने &lsquo;थार शोभा खेजड़ी&rsquo; जैसी नई किस्में विकसित की हैं, वहीं दूसरी ओर इसकी कटाई लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। बीकानेर स्थित महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर अनिल छंगाणी द्वारा किए गए अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि केवल सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए पिछले दस वर्षों में अकेले बीकानेर ज़िले में ही लगभग दो लाख पेड़ काटे जा चुके हैं। इनमें खेजड़ी के अलावा बेर, केर, रोहिड़ा और बबूल जैसे स्थानीय वृक्ष भी शामिल हैं।</p>
<p data-start="5310" data-end="5852">अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि सौर संयंत्रों के आसपास का तापमान औसतन चार से पाँच डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है, जिससे स्थानीय जलवायु पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पेड़ों की कटाई से कीट-पतंगों, मधुमक्खियों, पक्षियों और अन्य जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं। साथ ही गोंद और पशु-चारे जैसे वन-आधारित संसाधनों की उपलब्धता घट रही है, जिसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इसके अलावा सौर संयंत्रों को साफ़ और ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है, जबकि राजस्थान पहले से ही गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है।</p>
<p data-start="5854" data-end="6235">आंदोलन से जुड़े बिश्नोई समाज के वरिष्ठ नेता परसराम बिश्नोई का कहना है कि जब तक पूरे राज्य में खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा, तब तक कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि जो भी समझौता होगा, वह जनता के बीच और सार्वजनिक मंच पर होगा। संपूर्ण राज्य में खेजड़ी की कटाई पर रोक लगाना ही आंदोलन की <strong data-start="6176" data-end="6187">एकमात्र</strong> मांग है और इसके पूरा होने तक संघर्ष जारी रहेगा।</p>
<p data-start="6237" data-end="6771">उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन सोलर प्लांट या औद्योगिक विकास के खिलाफ नहीं है। &ldquo;हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन खेजड़ी नहीं कटनी चाहिए। उद्योग चाहे जितने लगें, पर खेजड़ी की बलि नहीं दी जा सकती। खेजड़ी न काटने के सौ कारण हैं, लेकिन उसे काटने का एक भी कारण नहीं हो सकता।&rdquo; परसराम बिश्नोई का सुझाव है कि यदि किसी स्थान पर सोलर प्लांट लगाने में पेड़ आड़े आ रहे हैं तो परियोजना के लिए अतिरिक्त भूमि ली जानी चाहिए। अगर सौ बीघा ज़मीन की ज़रूरत है और उसमें पेड़ हैं, तो 110 बीघा ले ली जाए। इससे सोलर प्लांट भी लग जाएगा और पेड़ भी बच जाएंगे।</p>
<p data-start="6773" data-end="7156">पर्यावरण संघर्ष समिति के संयोजक रामगोपाल बिश्नोई बताते हैं कि सरकार ने बातचीत के लिए संतों को आमंत्रित किया है। यदि सरकार पूरे राज्य में खेजड़ी की कटाई पर प्रतिबंध लगाने की बात मान लेती है, तो समाधान संभव है। अन्यथा फाल्गुन माह में मुकाम में लगने वाले मेले में आंदोलन की आगे की दिशा पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। इस मेले में विभिन्न राज्यों से दस लाख से अधिक लोगों के आने की संभावना है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोलर परियोजनाओं की आड़ में खेजड़ी की कटाई के खिलाफ राजस्थान में आंदोलन ]]></media:description>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान: किसानों का धनिया की खेती से घट रहा रुझान, बुआई क्षेत्र और उत्पादन में कमी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-farmers-in-the-hadoti-region-losing-interest-in-coriander-cultivation-sowing-area-and-production-declining.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 22 Jan 2026 15:13:51 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-farmers-in-the-hadoti-region-losing-interest-in-coriander-cultivation-sowing-area-and-production-declining.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान का हाड़ौती क्षेत्र धनिया की खेती के लिए देश-विदेश में जाना जाता है। इस क्षेत्र में रामगंज मंडी देश की प्रमुख धनिया मंडी है। लेकिन बीते कुछ वर्षों में यहां के किसान धनिया की बजाय अन्य फसलों को प्राथमिकता देने लगे हैं। इस कारण रामगंज मंडी में धनिया की आवक लगातार घटती जा रही है, जो कृषि व्यापार के लिए चिंता का विषय है।&nbsp;</p>
<p>हाड़ौती क्षेत्र में उगने वाले धनिया की मुख्य विशेषता इसकी सुगंध और रंग है। यहां के धनिया में सुगंध लंबे समय तक बनी रहती है और इसके बीजों का रंग गहरा हरा होता है। देश भर की मसाला कंपनियों में हाड़ौती के धनिया की मांग रहती है।</p>
<p><strong>क्षेत्र और उत्पादन में गिरावट </strong></p>
<p>रबी मौसम में हाड़ौती क्षेत्र की मुख्य और परंपरागत फसल होने के बावजूद हर साल धनिया की बुआई का क्षेत्र और उत्पादन घट रहा है। हाड़ौती क्षेत्र के <strong>कृषि अनुसंधान केंद्र</strong> से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025&ndash;26 में किसानों ने लगभग 35,000 हेक्टेयर क्षेत्र में धनिया की बुआई की है। वहीं, <strong>कृषि विभाग</strong> के आंकड़ों के मुताबिक,<span> वर्ष </span>2022&ndash;23 में धनिया का कुल बुआई क्षेत्रफल 87,536 हेक्टेयर था और उत्पादन 1,05,360 टन रहा। लेकिन वर्ष 2024&ndash;25 में यह घटकर 39,974 हेक्टेयर रह गया और उत्पादन 51,347 टन तक सीमित हो गया।</p>
<p><strong>धनिया की खेती में घाटा </strong></p>
<p>धनिया की खेती करने वाले रामगंज मंडी&nbsp;क्षेत्र के किसान <strong>रामनिवास </strong>ने बताया कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से धनिया की खेती करता आ रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने धनिया की बुआई काफी कम कर दी है। इस वर्ष उन्होंने 13 बीघा में धनिया बोया है, जबकि पिछले वर्ष 20 बीघा में बुआई की थी। कुछ वर्षों पहले वह 50-60 बीघा में धनिया की खेती करते थे।</p>
<p>रामनिवास कहते हैं कि बाजार में उचित भाव न मिलने, उत्पादन में गिरावट, <span>और फसल में रोगों से तंग आकर उन्होंने धनिया की खेती कम कर दी। वर्ष </span>2025 में उन्हें प्रति बीघा केवल 2 क्विंटल उपज मिली और बाजार में 8,400 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिला, जो काफी कम था। इसके चलते उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा।</p>
<p><strong>रोग का प्रकोप </strong></p>
<p>धनिया की बुआई के क्षेत्र और पैदावार में गिरावट के बारे में कृषि विश्वविद्यालय, कोटा के <strong>कृषि अनुसंधान केंद्र,</strong> उम्मेदगंज के प्रोफेसर <strong>डॉ. बनवारी लाल नागर </strong>ने बताया कि 2017&ndash;18 के बाद हाड़ौती क्षेत्र में धनिया में अधिक नमी के कारण <strong>पत्ता पट्टिका (स्टेम गॉल) </strong>रोग का प्रकोप बढ़ा है। इससे पौधा कमजोर हो जाता है और दाना नहीं बन पाता, जिससे 30 से 70 प्रतिशत तक फसल का नुकसान होता है।</p>
<p>डॉ. नागर ने बताया कि रोग से बचाव के लिए <strong>एसीआर-</strong><strong>1</strong> और <strong>एसीआर-</strong><strong>2</strong> जैसी प्रतिरोधक किस्में विकसित की गईं, लेकिन इनसे कम उपज के कारण किसानों ने इन्हें नहीं अपनाया। इसके अलावा, फसल में रोग लगने के बाद फसल चक्र नहीं अपनाने से किसानों को और नुकसान हुआ। मंडी में अन्य फसलों के बेहतर दाम मिलने के कारण भी किसान धनिया से दूरी बना रहे हैं।</p>
<p><strong>धनिया की जगह लहसुन</strong><strong>, </strong><strong>चिया व अश्वगंधा</strong></p>
<p>हाड़ौती क्षेत्र के किसानों ने बताया कि उन्होंने धनिया की खेती छोड़कर दूसरी फसलों की तरफ रुख किया है। कोटा के किसान <strong>कालूराम धाकड़</strong> पहले 10 बीघा में धनिया की खेती करते थे, लेकिन इस वर्ष उन्होंने धनिया की जगह <strong>लहसुन</strong><strong>, </strong><strong>चिया और अश्वगंधा </strong>की खेती शुरू कर दी है, <span>जिन्हें वे बेहतर दाम के लिए नीमच (मध्य प्रदेश) की मंडियों में बेचते हैं। </span></p>
<p>किसान बताते हैं कि धनिया की फसल काफी नाजुक होती है और बारिश या पाले से फसल को नुकसान होता है। इसके बाद मंडी में भी अच्छे भाव नहीं मिलते। धनिया की पैदावार में गिरावट और सही दाम न मिल पाने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x_6972096fafb2b.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>रामगंज मंडी में घटी आवक &nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>धनिया की खेती घटने से रामगंज मंडी की रौनक भी कम होती जा रही है। मंडी के व्यापारी <strong>विनोद धाकड़</strong> का कहना है कि मंडी में धनिया की आवक कम होती जा रही है। सबसे अधिक आवक वर्ष 2017&ndash;18 में हुई थी, जब सीजन के दौरान प्रतिदिन 40&ndash;45 हजार बोरियां (40 किग्रा की बोरी) आती थीं। अब आवक करीब 25 प्रतिशत तक घट चुकी है। हालांकि,<span> इस वर्ष अब तक पाला या बारिश न होने से बेहतर फसल और आवक की उम्मीद की जा रही है।</span></p>
<p><strong>अच्छी किस्मों का अभाव, GI टैग का इंतजार</strong></p>
<p>धनिया की रोगमुक्त,<span> बेहतर किस्मों के नए बीज किसानों को नहीं मिल पा रहे हैं</span>, जिसके कारण वे पुराने बीजों की बुआई करते आ रहे हैं। किसान रामनिवास ने बताया कि गेहूं, चना और अन्य फसलों की तरह धनिया की <strong>उन्नत किस्मों</strong> का विकल्प नहीं हैं। इसलिए किसान अपने खेतों की फसल से ही अगले सीजन के लिए बीज तैयार करते हैं और आपस में आदान-प्रदान कर लेते हैं। धनिया की उन्नत किस्मों के शोध को बढ़ावा देकर नई किस्में किसानों तक पहुंचाने के प्रयास भी बहुत कारगार साबित नहीं हुए हैं।</p>
<p>कृषि विभाग के <strong>वरिष्ठ वैज्ञानिकों</strong> के अनुसार, राज्य सरकार और कृषि विभाग हाड़ौती क्षेत्र के धनिया को जीआई टैग (भौगोलिक संकेत) दिलाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। देश में कई क्षेत्र विशेष फसलों को जीआई टैग मिल चुका है, लेकिन इसके बावजूद किसान बाजार और बेहतर भाव के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में यह देखना होगा कि जीआई टैग मिलने से हाड़ौती की इस प्रमुख फसल की खेती को कितनी मदद मिल पाती है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_69720763c5cc7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान: किसानों का धनिया की खेती से घट रहा रुझान, बुआई क्षेत्र और उत्पादन में कमी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमित शाह से मिले पंजाब सीएम: बीज विधेयक पर आपत्ति, बॉर्डर तार शिफ्ट करने की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-cm-meets-amit-shah-objects-to-seed-bill-demands-shifting-of-border-fence.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 17 Jan 2026 21:21:33 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-cm-meets-amit-shah-objects-to-seed-bill-demands-shifting-of-border-fence.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और पंजाब से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर विचार-विमर्श किया। इनमें सीमावर्ती सुरक्षा प्रबंध, अंतरराज्यीय जल विवाद और ग्रामीण विकास फंड के बकाए की अदायगी में हो रही देरी प्रमुख रूप से शामिल हैं।</p>
<p>बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात के दौरान हमने अपने सीमावर्ती किसानों का मुद्दा उठाया। तारबंदी के पार खेती करने वाले किसानों के लिए मांग रखी कि तार का दायरा बढ़ाया जाए, ताकि किसान बिना किसी डर के खेती कर सकें। गृह मंत्री के आश्वासन के अनुसार इस मुद्दे का जल्द समाधान किया जाएगा।</p>
<p>पंजाब के कई इलाकों में सीमावर्ती कंटीली तार दो से तीन किलोमीटर अंदर तक स्थित है। इसके कारण हजारों एकड़ कृषि योग्य भूमि तार के उस पार चली गई है और किसानों को रोजाना पहचान पत्र दिखाकर बीएसएफ की निगरानी में खेती करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।</p>
<p>पंजाब सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कंटीली तार को अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक दोबारा स्थापित किया जाता है, तो भारतीय भूमि का बड़ा हिस्सा इस पार आ जाएगा। इससे किसान बिना किसी डर और रोजाना की पाबंदियों के खेती कर सकेंगे और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी कोई समझौता नहीं होगा। केंद्रीय गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री को बताया कि यह मुद्दा विचाराधीन है और पठानकोट में भी इसी तरह की व्यवस्था को लेकर प्रयास किए जा चुके हैं।</p>
<h3>बीज विधेयक पर जताई आपत्ति</h3>
<p>प्रस्तावित बीज विधेयक 2025 पर गंभीर आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि बीज विधेयक का मौजूदा खाका राज्य के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित नहीं करता। बीज क्षेत्र को सीधे प्रभावित करने वाले फैसलों में राज्य की आवाज दबाई गई है। उन्होंने कहा, &ldquo;प्रस्तावित बीज बिल में राज्य की मौजूदा शक्तियों को घटा दिया गया है, क्योंकि बीज पंजीकरण में राज्य बीज समिति की कोई भूमिका नहीं रखी गई है। इसके अलावा, उन किसानों के लिए किसी मजबूत मुआवजा ढांचे का भी प्रावधान नहीं किया गया है, जिन्हें रजिस्टर्ड बीजों से अपेक्षित परिणाम न मिलने के कारण नुकसान उठाना पड़ता है।&rdquo;</p>
<p>पंजाब के मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विदेशों में टेस्ट और जारी की गई बीज किस्मों को पंजाब और अन्य राज्यों में आयात व बिक्री के लिए अनिवार्य स्थानीय परीक्षण के बिना अनुमति दी जा रही है, जिससे किसानों के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को बीजों के लिए पूरी तरह कंपनियों पर निर्भर होने के लिए मजबूर करना न तो उचित है और न ही किसानों के हित में है। इस विधेयक को मौजूदा रूप में संसद के सामने नहीं लाया जाना चाहिए।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x_696bc776ef59f.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<h3>नहर विवाद पर रुख दोहराया</h3>
<p>नदियों के पानी को लेकर पंजाब के स्पष्ट रुख को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, &ldquo;पंजाब के पास किसी अन्य राज्य के साथ साझा करने के लिए कोई अतिरिक्त पानी नहीं है। सतलुज, रावी और ब्यास नदियों के पानी की उपलब्धता में काफी कमी आई है और ऐसे में सतलुज-यमुना लिंक नहर का निर्माण व्यावहारिक नहीं है।&rdquo;&nbsp;</p>
<h3>ढुलाई और भंडारण की समस्या</h3>
<p>अनाज की ढुलाई और भंडारण की समस्या उठाते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि एफसीआई द्वारा पिछले पांच महीनों में राज्य से केवल 4 से 5 लाख टन गेहूं और 5 से 6 लाख टन चावल की ही ढुलाई की जा रही है। खरीफ सीजन 2025-26 के 95 लाख टन चावल की डिलीवरी की जानी है, जबकि वर्तमान में केवल 20 लाख टन जगह उपलब्ध है। उन्होंने स्टॉक की समयबद्ध ढुलाई के लिए विशेष रेलगाड़ियां चलाने की मांग करते हुए कहा कि पंजाब राष्ट्रीय पूल में लगभग 125 लाख टन गेहूं का योगदान देता है और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए पर्याप्त भंडारण व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।</p>
<h3>आढ़तिया कमीशन का मुद्दा</h3>
<p>आढ़तिया कमीशन के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब कृषि उत्पाद और मार्केटिंग एक्ट 1961 के प्रावधानों के विपरीत आढ़तिया कमीशन को 2019-20 के खरीद सीजन से फ्रीज कर दिया गया है। वर्तमान में गेहूं के लिए कमीशन 46 रुपए प्रति क्विंटल और धान के लिए 45.88 रुपए प्रति क्विंटल तक सीमित है। <span>कमीशन संशोधन में देरी से राज्य की खरीद प्रक्रिया में अड़ंगा पैदा हो सकता है इसलिए दरों को जल्द अंतिम रूप दिया जाना चाहिए।</span></p>
<h3>ग्रामीण विकास फंड का मुद्दा</h3>
<p>ग्रामीण विकास फंड की अदायगी न होने का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्पष्ट कानूनी प्रावधानों के बावजूद राज्य सरकार को आरडीएफ की राशि का भुगतान नहीं किया गया है। खरीफ सीजन 2021-22 से आरडीएफ की अनुमति नहीं दी गई है। आरडीएफ के 9030.91 करोड़ रुपये और मार्केट फीस के 2267.83 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित हैं, जिससे ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास पर बुरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा, &ldquo;आरडीएफ कोई चैरिटी नहीं है। यह पंजाब का हक है और हम अपना हक मांग रहे हैं।&rdquo;&nbsp;</p>
<p><span>मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों के 60:40 अनुपात को बनाए रखने तथा एफसीआई </span><span>में जीएम के पद पर पंजाब कैडर के ही अधिकारी की नियुक्ति की भी मांग की। गृह मंत्री ने सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिया।</span></p>
<p><span></span></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_696bb74e72717.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमित शाह से मिले पंजाब सीएम: बीज विधेयक पर आपत्ति, बॉर्डर तार शिफ्ट करने की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में आयोजित होगा राष्ट्रीय अमरूद महोत्सव, टॉप किस्मों को मिलेगा पुरस्कार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/national-guava-festival-to-be-held-in-rajasthan-top-varieties-to-get-awards.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 14 Jan 2026 10:49:56 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/national-guava-festival-to-be-held-in-rajasthan-top-varieties-to-get-awards.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान में पहली बार राष्ट्रीय अमरूद महोत्सव 18 और 19 जनवरी 2026 को सवाई माधोपुर जिले में आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन जिले के 263वें स्थापना दिवस के अवसर पर कृषि एवं उद्यान विभाग द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से किया जा रहा है।</p>
<p>राजस्थान के कृषि मंत्री <strong>किरोड़ी लाल मीणा</strong> ने बताया कि दो दिवसीय अमरूद महोत्सव में राजस्थान सहित देश के कई राज्यों से किसान, व्यापारी, एफपीओ, वैज्ञानिक और संस्थान भाग लेंगे। यहां दर्जनों उन्नत अमरूद किस्मों का प्रदर्शन और स्वाद चखने का अवसर मिलेगा। उत्कृष्ट और टॉप किस्मों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।</p>
<p>महोत्सव की खास बात यह होगी कि किसानों का वैज्ञानिकों से सीधा संवाद होगा। चौपालें सजेंगी, जहां उन्नत खेती, किस्म चयन, पौध संरक्षण और बाजार से जुड़ी जानकारियां साझा की जाएंगी। व्यापारी और किसानों के बीच प्रत्यक्ष संवाद से बिचौलियों की भूमिका कम करने पर भी जोर रहेगा।</p>
<p>सहायक कृषि अधिकारी पिंटू मीना पहाड़ी ने बताया कि&nbsp;<strong>अमरूद प्रसंस्करण</strong> इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगा। मेले में अमरूद से बने जूस, चिप्स, कैंडी, बार, जैली, बर्फी और लड्डू जैसे उत्पादों का स्वाद चखने के साथ-साथ इनके निर्माण की तकनीक भी सिखाई जाएगी। पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित कई राज्यों से आने वाले विशेषज्ञ अमरूद आधारित मूल्य संवर्धन पर प्रशिक्षण देंगे।</p>
<p>इसके अलावा देशभर की उन्नत किस्मों की <strong>नर्सरी</strong> उपलब्ध होगी, जहां 25 से 30 किस्मों के गुणवत्तापूर्ण पौधे किसान खरीद सकेंगे। आयोजकों का कहना है कि उन्नत किस्मों के प्रसार से अमरूद उत्पादन, गुणवत्ता और मिठास में बढ़ोतरी होगी, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।</p>
<p>कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने किसानों, व्यापारियों और आमजन से 18-19 जनवरी को आयोजित अमरूद महोत्सव में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन अमरूद उत्पादकों को नई पहचान देगा और सवाई माधोपुर को राष्ट्रीय कृषि मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगा।</p>
<p><strong>कार्यक्रम स्थल:</strong> 18-19 जनवरी 2026, फूल उत्कृष्टता केंद्र के सामने, दशहरा मैदान, सवाई माधोपुर।</p>
<p style="text-align: center;"><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x_6967274545685.jpg" alt="" /></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_696728c60127f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में आयोजित होगा राष्ट्रीय अमरूद महोत्सव, टॉप किस्मों को मिलेगा पुरस्कार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड: किसान आत्महत्या पर विपक्ष ने सरकार और कानून&amp;#45;व्यवस्था पर उठाए सवाल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/uttarakhand-opposition-raises-questions-on-government-and-law-and-order-over-farmer-suicides.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 14 Jan 2026 00:09:19 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/uttarakhand-opposition-raises-questions-on-government-and-law-and-order-over-farmer-suicides.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष <strong>गणेश गोदियाल</strong> और नेता प्रतिपक्ष <strong>यशपाल आर्य</strong> ने मंगलवार को ऊधमसिंह नगर के ग्राम पैगा पहुंचकर मृतक किसान के परिजनों से मुलाकात की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।</p>
<p>कांग्रेस नेताओं ने किसान आत्महत्या मामले की न्यायिक जांच की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। यह केवल एक किसान की आत्महत्या का मामला नहीं है, बल्कि धामी सरकार और राज्य पुलिस के माथे पर कलंक है।</p>
<p>गणेश गोदियाल ने कहा कि किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही मृतक किसान के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए और एसएसपी समेत आरोपी पुलिस अधिकारियों पर कठोर एक्शन लिया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।&nbsp;</p>
<p>नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि इस मामले में पुलिस कर्मियों को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन की प्रताड़ना और सत्ता के अहंकार के कारण एक किसान आत्महत्या करने को मजबूर हुआ। उन्होंने दोषी पुलिस अधिकारियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज करने, मृतक किसान के परिवार को तत्काल 50 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की।</p>
<p><strong>सीएम धामी ने दिलाया न्याय का भरोसा</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री <strong>पुष्कर सिंह धामी</strong> ने किसान सुखवंत सिंह के परिजनों को न्याय का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच में किसी भी स्तर पर कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को सुखवंत सिंह के भाई परविंदर सिंह से दूरभाष पर बातचीत कर शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं और परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने बताया कि मामले की जानकारी मिलते ही उच्चाधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए और कुमाऊं कमिश्नर को मजिस्टीरियल जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि वह शीघ्र ही पीड़ित परिवार से भी मुलाकात करेंगे।</p>
<p><strong>क्या है मामला?&nbsp;</strong></p>
<p><span>किसान सुखवंत सिंह ने हल्द्वानी के गौलापार स्थित देवभूमि होटल में शनिवार देर रात खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। </span>आत्महत्या से पहले सुखवंत सिंह ने अपने वीडियो में कहा कि उनके साथ चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई। उसका आरोप है कि जब वह न्याय की आस लेकर थाने पहुंचा तो पुलिस अधिकारियों ने शिकायत सुनने के बजाय पैसे लेकर दूसरे पक्ष का साथ दिया और उसे डराया-धमकाया गया। उसे <span>बार-बार थाने बुलाकर प्रताड़ित किया गया।&nbsp;</span><span></span><span>सुसाइड नोट और वीडियो में सुखवंत सिंह ने कई पुलिस अधिकारियों और प्रॉपर्टी डीलरों पर आरोप लगाए।&nbsp;</span></p>
<p>इस मामले में एसएसपी ऊधमसिंह नगर मणिकांत मिश्रा ने थानाध्यक्ष कुंदन सिंह रौतेला और दरोगा प्रकाश सिंह बिष्ट को निलंबित कर दिया। वहीं, चौकी प्रभारी जितेंद्र कुमार समेत 10 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है। मृतक किसान के परिजनों और किसान यूनियन की ओर से आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की जा रही है। इस मामले ने उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था और सिस्टम की संवेदनहीनता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड: किसान आत्महत्या पर विपक्ष ने सरकार और कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में अनुसूचित जाति के किसानों को ट्रैक्टर पर मिलेगा 3 लाख तक का अनुदान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/scheduled-caste-farmers-will-get-subsidy-of-up-to-rs-3-lakh-on-tractors-in-haryana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 12 Jan 2026 20:07:49 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/scheduled-caste-farmers-will-get-subsidy-of-up-to-rs-3-lakh-on-tractors-in-haryana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="128" data-end="413">हरियाणा सरकार अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के किसानों को ट्रैक्टर खरीदने के लिए तीन लाख रुपये तक का अनुदान देगी। राज्य के&nbsp;<strong data-start="139" data-end="180"><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने&nbsp;</span></span></strong>वर्ष 2025&ndash;26 के लिए ट्रैक्टर अनुदान योजना के तहत अनुसूचित जाति (SC) के किसानों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक किसान 15 जनवरी तक विभागीय पोर्टल <a data-start="362" data-end="384" target="_new" href="http://www.agriharyana.gov.in">www.agriharyana.gov.in </a>पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।</p>
<p data-start="128" data-end="413">सरकारी विज्ञप्ति के&nbsp;अनुसार, <span lang="HI">"मेरी फसल मेरा ब्यौरा (</span><span>MFMB)&nbsp;<span lang="HI">पोर्टल पर पंजीकृत अनुसूचित जाति के ऐसे किसान</span>&nbsp;<span lang="HI">जिनके नाम कृषि भूमि है,</span><span lang="HI">&nbsp;</span>45<span lang="HI">&nbsp;हॉर्स पावर (</span>HP)&nbsp;<span lang="HI">या उससे अधिक क्षमता के ट्रैक्टर पर </span>तीन<span lang="HI"> लाख रुपये प्रति इकाई अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। परिवार पहचान पत्र (PPP/Family Id) के अंतर्गत परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर कृषि भूमि मान्य है।&nbsp;</span></span><span><span lang="HI"></span></span><span><span lang="HI">लाभार्थियों का चयन जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय कार्यकारी समिति द्वारा ऑनलाइन ड्रा के माध्यम से किया जाएगा।</span></span></p>
<p data-start="128" data-end="413"><span><span lang="HI">सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि</span></span><span><span lang="HI">&nbsp;ट्रैक्टर की खरीद तथा भौतिक सत्यापन के उपरांत अनुदान राशि सीधे लाभार्थी के उस बैंक खाते में जमा की जाएगी</span>,&nbsp;<span lang="HI">जो "मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकृत होगा। लाभार्थी हरियाणा राज्य का निवासी और अनुसूचित जाति (</span>SC)&nbsp;<span lang="HI">वर्ग से संबंधित होना चाहिए। </span></span></p>
<p data-start="1202" data-end="1420" data-is-last-node="" data-is-only-node="">इसके अलावा, यह भी शर्त है कि लाभार्थी ने पिछले पांच वर्षों में विभाग की किसी भी योजना के अंतर्गत ट्रैक्टर पर अनुदान का लाभ न लिया हो। ट्रैक्टर की खरीद की तिथि से अगले पांच वर्षों तक लाभार्थी ट्रैक्टर को बेच नहीं सकेगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_6965065c3d3d5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में अनुसूचित जाति के किसानों को ट्रैक्टर पर मिलेगा 3 लाख तक का अनुदान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नहरबंदी के मुद्दे पर श्रीगंगानगर के किसानों में उबाल, रबी फसलों को लेकर चिंता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sriganganagar-farmers-upset-over-canal-closure-rabi-crop-crisis-deepens.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 11 Jan 2026 16:13:46 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sriganganagar-farmers-upset-over-canal-closure-rabi-crop-crisis-deepens.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के किसान इन दिनों नहरों में पानी की कमी को लेकर परेशान और आक्रोशित हैं। रबी फसलों के पकाव के दौर में सिंचाई संकट गहराने की आशंका के बीच पंजाब की फिरोजपुर फीडर नहर को मरम्मत कार्य के लिए 21 जनवरी से 37 दिनों तक बंद किया जा रहा है। इसी फीडर के माध्यम से गंग नहर परियोजना को पानी मिलता है।</p>
<p>हालांकि सिंचाई विभाग ने बंदी के दौरान गंग नहर के हिस्से का पानी पुरानी बीकानेर कैनाल के जरिए देने की वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी की है, लेकिन किसान इससे संतुष्ट नहीं हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी मांगों को लेकर 12 जनवरी से श्रीगंगानगर के महाराजा गंगा सिंह चौक पर पड़ाव डालने का ऐलान कर दिया है।</p>
<h3>तीन महीने से चल रहा है विरोध</h3>
<p>करीब तीन महीने पहले किसानों को यह जानकारी मिली थी कि पंजाब सरकार जनवरी से फिरोजपुर फीडर की री-लाइनिंग के लिए नहर बंद करना चाहती है। तभी से विरोध शुरू हो गया था। पिछले महीने किसानों ने जिला प्रशासन को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर जनवरी के बजाय 15 मार्च के बाद नहरबंदी लेने और तब तक वैकल्पिक जल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की थी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x_6963803bf21c6.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>फिरोजपुर फीडर में बंदी के मुद्दे को लेकर श्रीगंगानगर में प्रदर्शन करते किसान</em></p>
<p>किसानों का कहना है कि जनवरी-फरवरी का समय रबी फसलों के लिए बेहद अहम होता है। इस दौरान सरसों, गेहूं, चना और जौ की फसलों को नियमित सिंचाई की जरूरत रहती है। किसानों का आरोप है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद सरकार और प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट नहीं की, जिसके चलते उन्हें धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।</p>
<h3>अधिसूचना से बढ़ी नाराजगी</h3>
<p>किसानों को उम्मीद थी कि उनकी मांग मानी जाएगी, लेकिन हाल ही में पंजाब सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में 21 जनवरी से 24 फरवरी तक फिरोजपुर फीडर बंद रखने की घोषणा कर दी गई। इस काम पर कुल 647.62 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसमें पंजाब का हिस्सा 379.12 करोड़ रुपये और राजस्थान का 268.50 करोड़ रुपये होगा।</p>
<p>गंग नहर परियोजना के अधीक्षण अभियंता धीरज चावला के अनुसार, वर्तमान में फिरोजपुर फीडर में 11,192 क्यूसेक पानी प्रवाहित हो पाता है। री-लाइनिंग के बाद इसकी क्षमता बढ़कर 13,842 क्यूसेक हो जाएगी। इससे भविष्य में गंग नहर प्रणाली को तय हिस्से का पानी बेहतर तरीके से मिल सकेगा और मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी भी लिया जा सकेगा।</p>
<p>चावला बताते हैं कि पंजाब सरकार पहले 5 जनवरी और फिर 15 फरवरी से बंदी लेना चाहती थी, लेकिन किसानों की जरूरतों को देखते हुए सहमति नहीं दी गई। अब सर्दी बढ़ गई है और मावठ की संभावना है, इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर पुरानी बीकानेर कैनाल से पानी देकर काम चलाने की योजना है। उन्होंने कहा कि किसानों की मांग पर हम पंजाब सरकार से फिर संपर्क में हैं और फरवरी में बंदी लेने का अनुरोध कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला पंजाब सरकार को ही करना है।</p>
<h3>क्या है किसान संगठनों की आपत्ति</h3>
<p>अखिल भारतीय किसान महासभा के जिलाध्यक्ष कालूराम थोरी कहते हैं कि फिरोजपुर फीडर के पुनर्निर्माण का काम होना चाहिए, किसान इसके खिलाफ नहीं हैं। हम तो बीस साल से इसकी मांग करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार ने समय गलत चुना है। अगर फरवरी से बंदी ली जाए, तो किसानों को कोई आपत्ति नहीं होगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x_69637da5d3ce4.jpg" alt="" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>श्रीगंगानगर में बहती गंग नहर</em></p>
<p>गंग कैनाल किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता एडवोकेट सुभाष सहगल का कहना है कि करीब 99 फीसदी बुवाई हो चुकी है। इस समय सरसों, चना, जौ और गेहूं को सिंचाई की सख्त जरूरत है। फिरोजपुर फीडर बंद होने से पानी की आपूर्ति कम हो जाएगी। सहगल का कहना है कि पुरानी बीकानेर कैनाल की हालत खराब है और उसमें पानी का नुकसान ज्यादा होगा। 1500 क्यूसेक पानी छोड़े जाने पर श्रीगंगानगर तक केवल 1200&ndash;1300 क्यूसेक पानी ही पहुंच पाएगा। खरीफ के दौरान भी पूरा पानी नहीं मिला और अब रबी में फिर संकट खड़ा हो गया है।</p>
<h3>पानी उपलब्ध, फिर भी संकट</h3>
<p>सहगल के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस समय बांधों में ज्यादा पानी उपलब्ध है। पोंग बांध में जहां पिछले साल पानी का स्तर 1307 फीट था, वहीं इस साल 1358 फीट है। भाखड़ा बांध में भी पानी का स्तर 40&ndash;45 फीट अधिक है। इसके बावजूद यदि फसलें सूखती हैं, तो इसे कैसे जायज ठहराया जा सकता है?</p>
<h3>उत्पादन घटने की आशंका</h3>
<p>किसान संगठनों का कहना है कि अगर समय पर सिंचाई नहीं हुई, तो औसत उत्पादन में भारी गिरावट आएगी। सहगल के मुताबिक, श्रीगंगानगर जिले में सामान्य तौर पर गेहूं का उत्पादन 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और सरसों का 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है, जो पानी की कमी से 40 फीसदी तक घट सकता है।</p>
<h3 style="text-align: center;"></h3>
<h3>वार्ता रही बेनतीजा</h3>
<p>प्रशासन और सिंचाई विभाग ने किसानों से बातचीत के लिए श्रीगंगानगर में बैठक बुलाई और बंदी के दौरान पुरानी बीकानेर कैनाल से 1500 क्यूसेक पानी देने का प्रस्ताव रखा, लेकिन किसान नेता इससे सहमत नहीं हुए। उनकी मांग है कि फरवरी के पहले सप्ताह से नहरबंदी ली जाए, ताकि जौ, सरसों और गेहूं की सिंचाई हो सके।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x_696380b911567.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>श्रीगंगानगर में नहरबंदी के मुद्दे पर आयोजित बैठक में किसानों से चर्चा करते जनप्रतिनिधि तथा प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारी</em></p>
<p>किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष अमर सिंह बिश्नोई का कहना है कि कई इलाकों में अब तक जौ और गेहूं की पहली सिंचाई भी नहीं हो पाई है। ठंड बढ़ने से सरसों में पानी की जरूरत और बढ़ गई है। इस समय नहरबंदी से किसानों को भारी नुकसान तय है।</p>
<p>बिश्नोई के अनुसार, पुरानी बीकानेर कैनाल में 1500 क्यूसेक पानी का प्रवाह व्यावहारिक नहीं है। नहर की सफाई नहीं हुई है और उसमें भारी मात्रा में मलबा जमा है। करीब 250&ndash;300 क्यूसेक पानी रास्ते में ही व्यर्थ हो जाएगा। यदि बिना ट्रायल के पानी छोड़ा गया और सौ साल पुरानी नहर टूट गई, तो फसलें पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैं।</p>
<h3></h3> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_69637fbdced63.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नहरबंदी के मुद्दे पर श्रीगंगानगर के किसानों में उबाल, रबी फसलों को लेकर चिंता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छत्तीसगढ़ में चावल निर्यातकों को मंडी शुल्क से छूट एक वर्ष के लिए बढ़ी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/chhattisgarh-to-extend-mandi-fee-exemption-for-rice-exporters-for-one-more-year.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 11 Jan 2026 11:43:01 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/chhattisgarh-to-extend-mandi-fee-exemption-for-rice-exporters-for-one-more-year.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को चावल निर्यातकों को बड़ी राहत देते हुए मंडी शुल्क में दी गई छूट को एक और वर्ष के लिए बढ़ाने की घोषणा की। यह कदम राज्य से चावल निर्यात को प्रोत्साहित करने और किसानों व निर्यातकों दोनों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।</p>
<p>मुख्यमंत्री साय ने यह घोषणा रायपुर के एक निजी रिसॉर्ट में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दूसरे संस्करण को संबोधित करते हुए की। एक सरकारी बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि मंडी शुल्क छूट का विस्तार निर्यातकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा और इससे वैश्विक चावल बाजार में छत्तीसगढ़ की स्थिति और मजबूत होगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह समिट इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें 12 देशों से खरीदारों और छह देशों के दूतावासों के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया है। यह भागीदारी छत्तीसगढ़ के चावल क्षेत्र में बढ़ती अंतरराष्ट्रीय रुचि को दर्शाती है। वैश्विक हितधारकों की मौजूदगी से अंतरराष्ट्रीय चावल व्यापार में राज्य को व्यापक पहचान मिलेगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को &lsquo;भारत का धान का कटोरा&rsquo; कहा गया है और राज्य आज भी इस पहचान पर खरा उतरता है। चावल राज्य की खाद्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और यहां बड़ी संख्या में धान की किस्मों की खेती की जाती है। उन्होंने विशेष रूप से सरगुजा क्षेत्र की सुगंधित जीराफूल और दुबराज धान किस्मों का उल्लेख किया, जो अपनी विशिष्ट खुशबू और उच्च गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x_69633edf96814.jpg" alt="" /></p>
<p><em>राइस समिट को संबोधित करते मुख्यमंत्री विष्णु देव साय।</em></p>
<p>मुख्यमंत्री ने बताया कि मंडी शुल्क में छूट की मांग निर्यातक कई वर्षों से कर रहे थे। इसे पिछले वर्ष लागू किया गया था और इसकी अवधि दिसंबर 2025 में समाप्त हो गई थी। अब इसके एक वर्ष के विस्तार से राज्य से चावल निर्यात को और गति मिलेगी।</p>
<p>साय ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में लघु उद्योगों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है, जिससे चावल प्रसंस्करण और निर्यात क्षमता को मजबूती मिलेगी। वर्तमान में छत्तीसगढ़ से लगभग एक लाख टन चावल का निर्यात करीब 90 देशों में किया जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार निर्यातकों को हर संभव सहयोग देती रहेगी।</p>
<p>किसानों के हितों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में धान किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है और प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल तक धान की खरीदी की जा रही है। पिछले वर्ष लगभग 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी और चालू वर्ष में इसके और बढ़ने की उम्मीद है।</p>
<p>इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन भी किया। समिट के दौरान उन्होंने चावल आधारित एक प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जिसमें विभिन्न चावल किस्मों, क्षेत्र-विशेष प्रजातियों, धान की खेती में नवाचारों और उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों को प्रदर्शित किया गया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ छत्तीसगढ़ में चावल निर्यातकों को मंडी शुल्क से छूट एक वर्ष के लिए बढ़ी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जीआई टैग से बंधी उम्मीदें: क्या ‘नागौरी अश्वगंधा’ बदलेगी किसानों की तकदीर?]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/hopes-pinned-on-the-gi-tag-nagauri-ashwagandha-change-the-fortunes-of-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 09 Jan 2026 22:58:08 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/hopes-pinned-on-the-gi-tag-nagauri-ashwagandha-change-the-fortunes-of-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="306" data-end="614">राजस्थान की प्रमुख औषधीय फसल <strong>नागौरी अश्वगंधा </strong>को <strong>जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई)</strong> टैग मिला है। इससे उम्मीद जगी है कि अब राज्य में अश्वगंधा की खेती को बढ़ावा मिलेगा और इसके विशेष गुणों के बूते वैश्विक बाजार में पहचान बनेगी, जिससे स्थानीय किसानों को भी लाभ मिलेगा।</p>
<p data-start="306" data-end="614"><strong>भौगोलिक संकेत (GI)</strong> किसी खास भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़े उत्पादों को विशिष्ट खूबियों के आधार पर दिया जाता है। क्योंकि ये खूबियां उस इलाके की मिट्टी, पानी और जलवायु से आती हैं। जीआई टैग से उत्पादों की विशिष्टता और प्रमाणिकता का भरोसा बढ़ता है। साथ ही बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के तहत कानूनी संरक्षण प्राप्त होता है।&nbsp; <span jsuid="dTdQ2b_d" class="uJ19be notranslate" jsaction="rcuQ6b:&amp;dTdQ2b_d|npT2md" jscontroller="udAs2b" data-wiz-uids="dTdQ2b_e,dTdQ2b_f"><span class="vKEkVd" data-animation-atomic="" data-wiz-attrbind="class=dTdQ2b_d/TKHnVd">&nbsp;</span></span></p>
<p data-start="616" data-end="1048">नागौरी अश्वगंधा राजस्थान के नागौर, बीकानेर, चूरू, बाड़मेर, सीकर और जोधपुर के आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती है। हालांकि, अश्वगंधा की खेती भारत के कई हिस्सों में होती है। लेकिन मध्य से पश्चिमी राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों (जलवायु, मिट्टी आदि) और पारंपरिक खेती पद्धतियों के कारण नागौरी अश्वगंधा को जीआई टैग मिला है।&nbsp;</p>
<p>नागौरी अश्वगंधा को जीआई टैग दिलाने में <strong>नागौरी वेलफेयर सोसाइटी</strong> की पहल को <strong>आईसीएआर के औषधीय एवं सुगंधित पादप अनुसंधान निदेशालय (DMAPR), राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड</strong> और राजस्थान सरकार के <strong>कृषि विभाग</strong> का सहयोग प्राप्त हुआ।</p>
<p>इस पहल में अहम भूमिका निभाने वाले&nbsp;आईसीएआर-डीएमएपीआर के प्रधान वैज्ञानिक <strong>डॉ. पी.एल. सारण</strong> ने <em>रूरल वॉयस</em> को बताया कि नागौरी अश्वगंधा को जीआई टैग दिलवाने के लिए कई वर्षों से प्रयास किए जा रहे थे। मध्य से पश्चिमी राजस्थान में उगाई जाने वाली नागौरी अश्वगंधा की जड़े लंबी, मोटी, भंगुर, गुहा रहित और स्टार्च युक्त होती हैं। ये विशेषताएं नागौरी अश्वगंधा को सर्वश्रेष्ठ किस्मों में शुमार करती हैं। इसके पीछे खास कृषि-परिस्थितिकी और मृदा कारक हैं। खास गुणों के कारण नागौरी अश्वगंधा को दवा और पोषण से जुड़े उद्योग द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है।&nbsp;</p>
<h3 data-start="2210" data-end="2244"><strong>किसानों की अहम भूमिका&nbsp;</strong></h3>
<p>नागौरी अश्वगंधा को जीआई टैग दिलाने में प्रगतिशील किसानों का भी भरपूर समर्थन मिला। नागौरी वेलफेयर सोसायटी की अध्यक्ष <strong>पारुल चौधरी</strong> ने इस पहल को आगे बढ़ाया जबकि बीकानेर के प्रगतिशील किसान <strong>केशा राम</strong> और चूरू <strong>बीरबल राम सारण</strong> के पारंपरिक ज्ञान, अनुभव और भागीदारी ने नागौरी अश्वगंधा की विशिष्टता और प्रमाणिकता को साबित करने में अहम योगदान दिया।</p>
<p>नागौर, कुचामन, लाडनूं, बीदासर, डूंगरगढ़, नोखा और आसपास के क्षेत्रों में कई किसान समूह अश्वगंधा की व्यवसायिक खेती कर रहे हैं। हालांकि, इनकी तादाद अभी सीमित है।</p>
<h3 data-start="2210" data-end="2244"><strong>जटिल दस्तावेजी प्रक्रिया</strong>&nbsp;</h3>
<p data-start="1364" data-end="1811">किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष <strong>रामपाल जाट</strong> मानते हैं कि राजस्थान में झालावाड़ के संतरे और श्रीगंगानगर का किन्नू जैसी कई फसलें अपनी गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं, लेकिन जीआई टैग मिलना केवल गुणवत्ता पर नहीं, बल्कि दस्तावेजी प्रक्रिया, संगठित दावेदारी और सरकारी स्तर पर प्रभावी पैरवी पर भी निर्भर करता है।&nbsp;</p>
<p data-start="1813" data-end="2203">जाट कहते हैं कि नागौरी अश्वगंधा की अभी बड़े पैमाने पर व्यावसायिक खेती नहीं हो रही है। नागौर जिले के कुछ हिस्सों में यह प्राकृतिक रूप से उगती है और कुछ ही किसान इसकी खेती करते हैं। कोटा संभाग के रामगंजमंडी और झालावाड़ क्षेत्रों में अश्वगंधा का व्यावसायिक उत्पादन होता है। जीआई टैग एक अवसर है, लेकिन इसकी सार्थकता तभी होगी जब नीतियां और बाजार किसानों के पक्ष में खड़े होंगे।</p>
<h3 data-start="2210" data-end="2244"><strong>टैग तो मिला, इसके बाद क्या?</strong></h3>
<p data-start="2246" data-end="2516">जीआई टैग से उत्पाद की गुणवत्ता और नाम को कानूनी सुरक्षा मिलती है और अन्य इलाकों की अश्वगंधा को नागौरी अश्वगंधा के नाम से नहीं बेचा जा सकेगा। इससे वैश्विक स्तर पर नागौरी अश्वगंधा को ब्रांड बनाने और किसानों को बेहतर दाम दिलाने में मदद मिल सकती है। लेकिन इस राह में कई चुनौतियां भी हैं।&nbsp;</p>
<p data-start="2246" data-end="2516">रामपाल जाट का कहना है कि केवल टैग दे देना पर्याप्त नहीं है। सवाल यह है कि क्या सरकार की भूमिका यहीं समाप्त हो जाती है? किसानों को भंडारण, पहचान निर्माण और बाजार तक सीधी पहुंच में सहयोग मिलेगा या नहीं, यही असली परीक्षा है। इनके बिना कोई भी टैग प्रभावी साबित नहीं हो सकता।&nbsp;</p>
<h3 data-start="2210" data-end="2244"><strong>औषधीय गुणों से भरपूर&nbsp;</strong></h3>
<p data-start="2569" data-end="2831">नागौर के वरिष्ठ आयुर्वेद विशेषज्ञ <strong>डॉ. गोपाल शर्मा </strong>बताते हैं कि नागौरी अश्वगंधा एक विशेष औषधि है। उनके अनुसार अश्वगंधा एक बहुगुणी औषधि है। देश के कई हिस्सों में यह उगती है, लेकिन नागौरी अश्वगंधा को ही सर्वोत्तम और अत्यधिक गुणकारी माना गया है।</p>
<p data-start="2833" data-end="3133">यह सामान्य दुर्बलता दूर करने, बलवर्धन, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और बढ़ती उम्र के प्रभाव कम करने में सहायक है। डॉ. शर्मा बताते हैं कि नागौर के स्थानीय वैद्य सदियों से इसका शास्त्रोक्त उपयोग करते आए हैं।&nbsp;</p>
<h3 data-start="2210" data-end="2244"><strong>खेती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद </strong>&nbsp;</h3>
<p data-start="3191" data-end="3520">नागौर में कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक<strong> हरीश मेहरा</strong> बताते हैं कि नागौरी अश्वगंधा वन क्षेत्रों और परती भूमि में स्वतः उगती है। स्थानीय लोग और घुमंतू समुदाय इसका संग्रह करते हैं। फिलहाल लगभग 300 से 400 हेक्टेयर क्षेत्र में ही किसान प्रयोग के तौर पर इसकी व्यावसायिक खेती कर रहे हैं। मेहरा के अनुसार, पड़ोसी चूरू और बीकानेर जिलों में भी यह प्राकृतिक रूप से पाई जाती है। जीआई टैग मिलने से इसे वैश्विक पहचान मिलेगी और उम्मीद है कि किसान इसकी खेती की ओर अधिक आकर्षित होंगे।</p>
<p data-start="3763" data-end="4085">पद्मश्री से सम्मानित नागौर के वरिष्ठ पर्यावरण कार्यकर्ता और किसान चौधरी <strong>हिम्मताराम भांभू</strong> इसे नागौर के लिए सुखद उपलब्धि मानते हैं। उनका कहना है कि नागौरी अश्वगंधा का उपयोग नागौर के ग्रामीण जीवन में सदियों से होता रहा है, लेकिन इसकी विधिवत खेती अधिक नहीं हुई। अब जब इसे पहचान मिली है, तो इसके विस्तार की संभावनाएं भी बनी हैं।&nbsp;</p>
<p data-start="3763" data-end="4085"><span>नागौरी अश्वगंधा को जीआई टैग मिलना प्राकृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण की दिशा में भी अहम पहल है।&nbsp;</span></p>
<h3 data-start="4092" data-end="4127"><strong>पान मेथी को भी जीआई की कोशिश&nbsp;</strong></h3>
<p data-start="4129" data-end="4421">जोधपुर स्थित दक्षिण एशिया जैव प्रौद्योगिकी संस्थान के संस्थापक निदेशक <strong>भागीरथ चौधरी</strong> जीआई टैग को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखते हैं। वे बताते हैं कि नागौर की पान मेथी और अश्वगंधा दोनों के लिए जीआई टैग का आवेदन किया गया था। अश्वगंधा को टैग मिल चुका है, जबकि पान मेथी को शीघ्र मिलने की संभावना है।</p>
<p data-start="4423" data-end="4701">चौधरी के अनुसार, नागौर जिले में लगभग 6,000 हेक्टेयर क्षेत्र में पान मेथी का उत्पादन होता है, लेकिन यह पूरी दुनिया में कसूरी मेथी के नाम से बिकती है। नागौरी मेथी की कोई अलग पहचान नहीं बन पाई है। जीआई टैग मिलने के बाद इसे अपनी विशिष्ट पहचान मिलेगी, जिसका सीधा लाभ किसानों को होगा।</p>
<h3 data-start="4708" data-end="4733"><strong>जीआई और चुनौतियां&nbsp;</strong></h3>
<p data-start="4735" data-end="5078">भागीरथ चौधरी बताते हैं कि भारत में करीब पौने तीन सौ खाद्य उत्पादों को जीआई टैग मिला है, लेकिन वास्तविक लाभ बहुत कम मामलों में ही किसानों तक पहुंचा है। समस्या यह है कि जीआई प्रमाण-पत्र मिलने के बाद उस पर आगे काम नहीं किया जाता। जबकि जीआई के साथ एक प्रमाणन संस्था भी बनती है, जिसका काम उत्पादन नियंत्रण, पहचान निर्माण और बाजार से जोड़ना होता है।&nbsp;जब तक मूल्य श्रृंखला विकसित नहीं होगी, तब तक किसानों को वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा। जीआई प्रमाण-पत्र अपने-आप में कोई चमत्कार नहीं करता।</p>
<p data-start="5215" data-end="5530">रामपाल जाट कहते हैं कि जीआई टैग से पहचान और कानूनी सुरक्षा जरूर मिलती है, लेकिन किसानों को लाभ तभी होगा जब उसके साथ बाजार तक सीधी पहुंच, स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और प्रभावी बिक्री व्यवस्था विकसित की जाएगी। अकेला टैग किसान की आय नहीं बढ़ाता। असली बदलाव तब आता है, जब उसके साथ पूरी व्यवस्था खड़ी की जाती है।</p>
<p data-start="5215" data-end="5530"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जीआई टैग से बंधी उम्मीदें: क्या ‘नागौरी अश्वगंधा’ बदलेगी किसानों की तकदीर? ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान: हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ आंदोलन जारी, एमओयू निरस्त करने और मुकदमे वापसी की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/protest-against-ethanol-factory-continues-in-hanumangarh-demands-cancellation-of-mou-and-withdrawal-of-cases.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 08 Jan 2026 11:37:16 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/protest-against-ethanol-factory-continues-in-hanumangarh-demands-cancellation-of-mou-and-withdrawal-of-cases.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="129" data-end="768">राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी तहसील के राठीखेड़ा गांव में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ उठा किसान आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को जिले के संगरिया की धान मंडी में आयोजित किसान महापंचायत में किसानों ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर सरकार और कंपनी के बीच हुआ एमओयू औपचारिक रूप से निरस्त नहीं किया जाता और आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। किसानों ने 11 फरवरी 2025 को टिब्बी तहसील के तलवाड़ा झील गांव में अगली किसान पंचायत के आयोजन का एलान कर यह संकेत दे दिया है कि वे इस संघर्ष को अल्पकालिक दबाव नहीं, बल्कि दीर्घकालिक लड़ाई के रूप में देख रहे हैं।</p>
<p data-start="770" data-end="1169">संगरिया की नई धान मंडी में हुई इस महापंचायत में हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों के किसानों के साथ-साथ पंजाब और हरियाणा से आए किसानों की भी भागीदारी रही। पंजाब के किसान नेताओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एथेनॉल फैक्ट्रियों को पहले विकास और रोजगार के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन कुछ वर्षों में इसके दुष्परिणाम किसानों को जल संकट, प्रदूषण और भूमि की गिरती गुणवत्ता के रूप में झेलने पड़ते हैं।</p>
<p data-start="1171" data-end="1576">महापंचायत की शुरुआत 7 जनवरी 1970 के किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। सभास्थल पर प्रतीकात्मक किसान शहीद स्मारक बनाया गया, जहां लगातार श्रद्धासुमन अर्पित किए जाते रहे। इस मौके पर &lsquo;शहीद किसान अमर रहें&rsquo; और &lsquo;शहीदों का बलिदान हर किसान याद रखेगा&rsquo; जैसे नारों ने यह स्पष्ट किया कि आंदोलन को केवल वर्तमान की चिंता नहीं, बल्कि ऐतिहासिक संघर्षों की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x_695f48851b5a7.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="1578" data-end="1862">इस मौके पर पूर्व माकपा विधायक बलवान पूनिया ने कहा कि यह प्रचार किया जा रहा है कि कंपनी फैक्ट्री लगाने के फैसले से पीछे हट गई है, लेकिन न तो सरकार और न ही प्रशासन ने अब तक एमओयू निरस्त करने को लेकर कोई लिखित आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि किसान केवल लिखित फैसले पर ही भरोसा करेंगे।</p>
<p data-start="1864" data-end="2122">भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि किसानों को सरकार के आश्वासनों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश भर में किसान अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और हर जगह किसानों के साथ अन्याय हो रहा है।</p>
<p data-start="2124" data-end="2373">टिब्बी की &lsquo;फैक्ट्री हटाओ, क्षेत्र बचाओ संघर्ष समिति&rsquo; के नेता महंगा सिंह सिद्धू ने कहा कि आंदोलन की केवल दो ही मांगें हैं&mdash;एमओयू का निरस्तीकरण और किसानों पर दर्ज मुकदमों की वापसी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन मांगों से कम कुछ भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।</p>
<p data-start="2375" data-end="2658">संघर्ष समिति के नेता मदन दुर्गेसर ने कहा कि यह लड़ाई आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए है और विकास के नाम पर जमीन, पानी और पर्यावरण को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। भाना सिंह सिद्धू ने कहा कि फैक्ट्री से विकास होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हमारे पानी, हवा और मिट्टी का क्या होगा।</p>
<p data-start="2660" data-end="2958">माकपा नेताओं प्रो. ओम जांगू और मंगेज चौधरी ने कहा कि सरकार किसानों के धैर्य की परीक्षा ले रही है। माकपा नेता रामेश्वर वर्मा ने कहा कि अत्यधिक उपजाऊ भूमि पर यह फैक्ट्री किसी भी सूरत में नहीं लगने दी जाएगी। किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ और अशोक चौधरी ने भी आंदोलन को निर्णायक मोड़ तक ले जाने की बात कही।</p>
<p data-start="2960" data-end="3303">इस बीच, जिला प्रशासन ने आंदोलन को शांत करने के लिए कई कदम उठाने की जानकारी दी है। प्रशासन के अनुसार संघर्ष समिति की मांगों को राज्य सरकार तक भेजा गया है और पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। समिति के तकनीकी सदस्यों ने 4 जनवरी को संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी आशंकाओं पर चर्चा की और भूजल के नमूने भी एकत्र किए।</p>
<p data-start="3305" data-end="3533">प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों की जांच सीआईडी-सीबी, जयपुर द्वारा की जा रही है और फिलहाल जिला पुलिस स्तर पर कोई जांच या कार्रवाई नहीं चल रही है। पूर्व में गिरफ्तार सभी व्यक्तियों को जमानत मिल चुकी है।</p>
<p data-start="3535" data-end="3808">हालांकि प्रशासन के प्रयास अपनी जगह हैं, लेकिन किसानों का कहना है कि ये कदम आंदोलन को टालने या समय खींचने की रणनीति प्रतीत होते हैं। माकपा नेता रघुवीर वर्मा ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में गंभीर है, तो एमओयू निरस्त करने और मुकदमे वापस लेने का लिखित आदेश जारी किया जाना चाहिए।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_695f486ebbe9e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान: हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ आंदोलन जारी, एमओयू निरस्त करने और मुकदमे वापसी की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x500_695f486ebbe9e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा अंतर्देशीय मत्स्य पालन में अग्रणी राज्य बनकर उभरा, 2 लाख टन मछली उत्पादन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/inland-fisheries-are-on-the-rise-in-haryana-with-2-lakh-tonnes-of-fish-production.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 06 Jan 2026 13:12:19 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/inland-fisheries-are-on-the-rise-in-haryana-with-2-lakh-tonnes-of-fish-production.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा अंतर्देशीय मत्स्य पालन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य के कृषि एवं मत्स्य पालन मंत्री <strong>श्याम सिंह राणा</strong> ने कहा कि हरियाणा ने 23,850 हेक्टेयर जल क्षेत्र से कुल 2.04 लाख टन मछली उत्पादन किया है।</p>
<p>हैदराबाद में आयोजित <strong>राष्ट्रीय मत्स्य पालन सम्मेलन</strong> को संबोधित करते हुए श्याम सिंह राणा ने कहा कि हरियाणा में 166 करोड़ मछली बीज का उत्पादन हुआ है। लैंडलॉक्ड राज्यों में पंजाब पहले और हरियाणा दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि तालाब आधारित और अंतर्देशीय जल मत्स्य पालन के जरिये लैंडलॉक्ड राज्य देश के कुल मत्स्य उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, लेकिन तटीय राज्यों की तुलना में इन्हें अपेक्षाकृत कम वित्तीय सहायता मिलती है, जिसका असर मछली पालकों और राज्य की जीडीपी पर पड़ता है।</p>
<p>मंत्री राणा ने बताया कि हरियाणा में मत्स्य पालन को वैकल्पिक आजीविका के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। बेहतर लाभ के कारण कई किसान पारंपरिक कृषि से मछली पालन की ओर बढ़ रहे हैं। बीज गुणवत्ता सुधार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सभी जिलों में ब्लॉक स्तर पर मछली बीज बैंक सुनिश्चित किए गए हैं।</p>
<p>भुवनेश्वर स्थित सीफा से आनुवंशिक रूप से सुधरी प्रजातियां प्राप्त कर उच्च गुणवत्ता वाला ब्रुड स्टॉक तैयार किया जा रहा है, जिससे उत्पादकता बढ़ी है। उन्होंने केंद्र सरकार से मछली बीज प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दिशा निर्देश और योजनाएं जारी करने का आग्रह किया ताकि सभी राज्यों में गुणवत्ता वाले बीज की एकसमान उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।</p>
<p>मत्स्य पालन मंत्री ने बताया कि मछली पालकों और उद्यमियों को दिल्ली की गाजीपुर और आजादपुर मंडियों की तर्ज पर सोनीपत के गन्नौर में इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट में समर्पित स्थान प्रदान किया गया है। उन्होंने हरियाणा में मत्स्य पालन हेतू बढ़ा हुआ बजटीय समर्थन प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रति आभार व्यक्त किया और केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह के निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।&nbsp;</p>
<p><strong>केंद्र के समक्ष कई प्रस्ताव </strong></p>
<p>श्याम सिंह राणा ने मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष कई प्रस्ताव रखे। इनमें फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार, यमुनानगर और पंचकूला में आधुनिक थोक मछली बाजार स्थापित करना शामिल है, जिसकी अनुमानित लागत 300 करोड़ रुपये है। साथ ही करनाल में मछली प्रसंस्करण इकाई और सिरसा में झींगा प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, जिसमें लगभग 200 करोड़ रुपये का निवेश होगा। उन्होंने बताया कि पंचकूला में विश्व स्तरीय एक्वेरियम हाउस बनाने की भी योजना है, जिसकी अनुमानित लागत 1,000 करोड़ रुपये है।&nbsp;</p>
<p>गुरुग्राम के गांव सुल्तानपुर में पांच एकड़ भूमि <strong>राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड</strong> के क्षेत्रीय केंद्र के लिए हस्तांतरित की गई है, जिससे हरियाणा और पड़ोसी राज्यों को लाभ मिलेगा। मंत्री ने केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्रालय से 2026-27 में लैंडलॉक्ड राज्यों पर विशेष ध्यान देने और उनकी चुनौतियों पर हरियाणा में एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का आग्रह किया।</p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा अंतर्देशीय मत्स्य पालन में अग्रणी राज्य बनकर उभरा, 2 लाख टन मछली उत्पादन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश: चीनी मिलों से 15 किमी के दायरे में नहीं लगेगी खांडसारी यूनिट, नीति में बदलाव से छोटे उद्योगों पर शिकंजा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/uttar-pradesh-khandsari-units-barred-within-15-km-of-sugar-mills-policy-changes-tighten-rules-for-small-industries.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 05 Jan 2026 12:30:03 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/uttar-pradesh-khandsari-units-barred-within-15-km-of-sugar-mills-policy-changes-tighten-rules-for-small-industries.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार ने पांच वर्षों (पेराई सत्र 2021-22 से 2025-26) की अवधि के लिए <strong>खांडसारी लाइसेंसिंग नीति</strong> घोषित की थी। सरकार का कहना है कि यह नीति राज्य में खांडसारी उद्योग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लाई गई है। लेकिन अहम बात यह है कि पिछले वर्ष इस नीति में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। इन बदलावों से खांडसारी उद्योग पर नियमन का शिकंजा कस गया है और राज्य के अधिकांश हिस्सों में नई खांडसारी इकाइयों की स्थापना की राह काफी मुश्किल हो गई है।</p>
<p>21 जनवरी, 2025 को जारी <strong>शासनादेश</strong> के जरिए खांडसारी नीति में किए गए बदलाव नई इकाइयों को प्रोत्साहित करने के बजाय उनकी स्थापना को और कठिन बनाते हैं। नीति में सबसे अहम संशोधन चीनी मिलों और खांडसारी इकाइयों के बीच दूरी को लेकर किया गया है। पावर क्रशर और खांडसारी इकाइयों के नए लाइसेंस के लिए चीनी मिल से त्रिज्यात्मक दूरी को 7.5 किलोमीटर से बढ़ाकर <strong>15 किलोमीटर</strong> कर दिया गया है। यानी अब पहले से स्थापित चीनी मिल से 15 किलोमीटर से कम दायरे में किसी पावर क्रशर या नई खांडसारी इकाई को लाइसेंस नहीं मिलेगा।</p>
<p>दिलचस्प है कि केंद्र सरकार की नीति के अनुसार दो चीनी मिलों के बीच भी न्यूनतम 15 किलोमीटर की दूरी होनी चाहिए। इस तरह दूरी के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने खांडसारी इकाइयों को चीनी मिलों के बराबर खड़ा कर दिया है।</p>
<p>करीब एक दशक पहले जब उत्तर प्रदेश सरकार ने चीनी के लिए प्रोत्साहन नीति लागू की थी, तब 15 किलोमीटर की दूरी को लेकर कई चीनी उद्योग समूहों के बीच मुकदमों की स्थिति आ गई थी और राज्य में जहां गन्ने की उपलब्धता थी वह अधिकांश इलाके चीनी मिलों से कवर हो गये थे। ऐसे में अब खांडसारी इकाइयों के लिए चीनी मिलों के बराबर दूरी के प्रावधान से नए गन्ना क्षेत्र मिलना मुश्किल हो जाएगा।</p>
<p>साथ ही, खांडसारी इकाइयों को लाइसेंस देने के लिए पिछले तीन वर्षों में <strong>गन्ने की उपलब्धता</strong> को भी आधार बनाया गया है, जबकि 21 जनवरी, 2025 से पहले की नीति में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था।</p>
<p>कई नए प्रावधानों के जरिए खांडसारी इकाइयों और पावर क्रशर पर नियम-कायदों का बोझ बढ़ा दिया गया है। पहले नीति में यह कहा गया था कि 33&times;46 सेंटीमीटर तक के आकार वाले पावर क्रशर के लाइसेंस के लिए क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण-पत्र सहित आवश्यक दस्तावेजों के साथ विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करने के 50 घंटे के भीतर सहायक चीनी आयुक्त तथा इतनी ही अवधि में चीनी आयुक्त के स्तर पर निर्णय लिया जाएगा।</p>
<p>वहीं 33&times;46 सेंटीमीटर से अधिक आकार वाले पावर क्रशर के मामलों में पिछले तीन पेराई सत्रों में गन्ने की उपलब्धता को आधार बनाने का प्रावधान था। लेकिन अब यह शर्त 33&times;46 सेंटीमीटर तक और उससे अधिक क्षमता वाले सभी पावर क्रशरों पर लागू कर दी गई है। इसके साथ ही दोनों ही स्थितियों में चीनी मिल से 15 किलोमीटर की परिधि में पहले से स्थापित खांडसारी इकाइयों की मौजूदगी को भी नए लाइसेंस के लिए आधार बनाया गया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2026/01/image_750x_695b63ff13633.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>एक अन्य शर्त के तहत लाइसेंस प्राप्त खांडसारी और पावर क्रशर इकाइयों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है कि वे किसानों को गन्ना मूल्य का नकद नहीं बल्कि <strong>ऑनलाइन भुगतान</strong> करेंगी। इसके अलावा आवेदन के समय क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनापत्ति प्रमाण पत्र के साथ-साथ आबकारी आयुक्त द्वारा जारी पंजीयन प्रमाण-पत्र भी आवश्यक दस्तावेजों के रूप में अपलोड करना होगा। यह शर्त भी 21 जनवरी, 2025 से पहले लागू नहीं थी।</p>
<p>जहां तक लाइसेंस आवेदन पर निर्णय की <strong>समय-सीमा</strong> का सवाल है, पहले की 50 घंटे की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। नए आदेश में कहा गया है कि ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों पर निर्णय चीनी आयुक्त, उत्तर प्रदेश के स्तर पर लिया जाएगा। यानी अब कोई समय-सीमा नहीं है।</p>
<p>वैसे तो इस खांडसारी नीति की अवधि केवल चालू पेराई सत्र (अक्तूबर 2025 से सितंबर 2026) तक के लिए है, लेकिन अंतिम वर्ष में किए गए बदलाव काफी अहम हैं। करीब एक वर्ष पहले किए गए इन बदलावों का असर चालू सत्र से दिखने लगेगा। क्योंकि नया पेराई सत्र अक्तूबर 2025 से शुरू हुआ है और यदि कोई नई इकाई स्थापित होती है तो उसका यह पहला पेराई सत्र होगा।</p>
<p>उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस वर्ष बड़ी संख्या में खांडसारी और पावर क्रशर आधारित <strong>गुड़ इकाइयां बंद</strong> हुई हैं। पिछले वर्ष गन्ने की कम उपलब्धता के कारण राज्य में चीनी उत्पादन घटा था और चालू सत्र में भी कमजोर फसल के चलते गुड़ और खांडसारी इकाइयां राज्य सरकार द्वारा तय 400 रुपये प्रति क्विंटल के राज्य परामर्श मूल्य (SAP) के बराबर या उससे अधिक दाम पर गन्ना खरीद रही हैं। इससे गन्ना मूल्य को लेकर प्रतिस्पर्धा और प्राइस वार जैसी स्थिति बन रही है।</p>
<p>इसी बीच, केंद्र सरकार ने भी कुछ माह पहले <strong>शुगर कंट्रोल ऑर्डर</strong> में संशोधन कर गुड़, खांडसारी, शक्कर और बूरा को चीनी की परिभाषा में शामिल कर लिया है। साथ ही 500 टन प्रतिदिन क्रशिंग क्षमता वाली इकाइयों पर चीनी मिलों की तरह फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस (एफआरपी) के भुगतान समेत कई अन्य शर्तें भी लागू कर दी गई हैं।</p>
<p>ऐसे प्रावधान पावर क्रशर और खांडसारी इकाइयों पर नियमन का बोझ बढ़ाएंगे और इन उद्योगों को हतोत्साहित कर सकते हैं। इससे इन इकाइयों के लिए चीनी मिलों के सामने प्रतिस्पर्धा में टिकना मुश्किला हो जाएगा। इससे गन्ना किसानों के लिए बेहतर दाम पाने का विकल्प कमजोर पड़ सकता हैं।</p>
<p>आश्चर्यजनक है कि करीब एक वर्ष पहले उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा खांडसारी इकाइयों की लाइसेंस नीति में किए गए ये अहम बदलाव लगभग अनदेखे रह गए और इस पर सार्वजनिक चर्चा भी बहुत कम हुई है। जबकि यह उत्तर प्रदेश के एक अहम उद्योग और गन्ना किसानों के हितों से जुड़ा मुद्दा है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश: चीनी मिलों से 15 किमी के दायरे में नहीं लगेगी खांडसारी यूनिट, नीति में बदलाव से छोटे उद्योगों पर शिकंजा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[’प्रधानमंत्री धन&amp;#45;धान्य कृषि योजना’ के लिए हरियाणा में  राज्य स्तरीय समिति गठित, मुख्य सचिव होंगे अध्यक्ष]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/state-level-committee-constituted-in-haryana-for-pradhan-mantri-dhan-dhanya-krishi-yojana-chief-secretary-will-be-the-chairman.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 01 Jan 2026 17:33:15 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/state-level-committee-constituted-in-haryana-for-pradhan-mantri-dhan-dhanya-krishi-yojana-chief-secretary-will-be-the-chairman.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="173" data-end="353">हरियाणा सरकार ने <strong data-start="190" data-end="228">&lsquo;प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना&rsquo;</strong> के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में <strong data-start="313" data-end="337">&lsquo;राज्य स्तरीय समिति&rsquo;</strong> का गठन किया है।&nbsp;कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है।</p>
<p data-start="428" data-end="779">कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रशासनिक सचिव इस समिति के सदस्य सचिव होंगे। इसके अलावा, मत्स्य पालन, सिंचाई, सहकारिता, पशुपालन एवं डेयरी, उद्योग, विकास एवं पंचायत तथा ग्रामीण विकास विभागों के प्रशासनिक सचिव समिति के सदस्य होंगे। इसके अतिरिक्त, राज्य के सभी कृषि, बागवानी, पशु चिकित्सा और मत्स्य विश्वविद्यालयों के कुलपति भी समिति में शामिल किए गए हैं।</p>
<p data-start="781" data-end="1016">समिति में नाबार्ड के राज्य प्रतिनिधि तथा राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। वहीं, समिति के अध्यक्ष को राज्य सरकार की स्वीकृति से अन्य प्रासंगिक सदस्यों को शामिल करने का अधिकार भी दिया गया है।</p>
<p data-start="1018" data-end="1550">&lsquo;प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना&rsquo; के अंतर्गत गठित यह समिति यह सुनिश्चित करेगी कि चयनित जिलों में परियोजना मोड में संचालित सभी योजनाओं के लिए पर्याप्त एवं समयबद्ध वित्तीय संसाधन उपलब्ध हों और विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी तालमेल स्थापित किया जा सके। इसके साथ ही, जिला योजनाओं में आवश्यक आदानों (इनपुट्स) के साथ-साथ विपणन एवं मूल्य संवर्धन से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा। साथ ही यह अपेक्षा की गई है कि राज्य के संबंधित विभाग इन जिलों के उत्पादों के विपणन, ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन के लिए विशेष सहयोग और समर्थन प्रदान करें।</p>
<p data-start="1552" data-end="1921">राज्य स्तरीय समिति योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि फील्ड लेवल के पद समय पर भरे जाएं, धनराशि समय पर जारी हो तथा सभी एजेंसियां जिला प्रशासन को आवश्यक सहयोग प्रदान करें। समिति यह भी सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक विभाग की वार्षिक योजनाएं वित्त वर्ष शुरू होने से पहले &lsquo;प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना&rsquo; की वार्षिक योजना के साथ समेकित कर ली जाएं।</p>
<p data-start="1552" data-end="1921"><strong>प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना&nbsp;</strong></p>
<p data-start="120" data-end="511">प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) की घोषणा केंद्रीय बजट 2025&ndash;26 में की गई थी। आकांक्षी जिला कार्यक्रम की तर्ज पर शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य भारतीय कृषि की तस्वीर बदलना है। यह योजना देश के कम कृषि उत्पादकता वाले 100 जिलों में 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं के समन्वय के माध्यम से कृषि उत्पादकता बढ़ाने, सिंचाई और ऋण सुविधाओं में सुधार करने तथा किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्रित है।</p>
<p data-start="513" data-end="725">योजना के तहत वित्त वर्ष 2025&ndash;26 से छह वर्षों की अवधि के लिए 24 हजार करोड़ रुपये का वार्षिक बजट निर्धारित किया गया है। इसमें राज्य सरकारों की योजनाओं के साथ-साथ निजी क्षेत्र के साथ साझेदारियों को भी शामिल किया जाएगा।</p>
<p data-start="513" data-end="725"></p>
<p data-start="513" data-end="725"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ’प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ के लिए हरियाणा में  राज्य स्तरीय समिति गठित, मुख्य सचिव होंगे अध्यक्ष ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब विधानसभा ने ‘जी राम जी’ विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया, मनरेगा बहाली की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-assembly-passes-resolution-against-vb-g-ram-g-demands-reinstatement-of-mnrega.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 31 Dec 2025 15:25:42 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-assembly-passes-resolution-against-vb-g-ram-g-demands-reinstatement-of-mnrega.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार के वीबी-जी राम जी कानून के खिलाफ सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है। प्रस्ताव में नए कानून को मनरेगा को खत्म करने की सोची-समझी साजिश और गरीब व दलित मजदूरों की रोजी-रोटी छीनने का आरोप लगाया। विधानसभा ने केंद्र सरकार से मनरेगा को उसके असल स्वरूप में तत्काल बहाल करने की मांग करते हुए सभी उपस्थित सदस्यों की सहमति से यह प्रस्ताव पारित किया। इस दौरान भाजपा के दो विधायक सदन में मौजूद नहीं थे।</p>
<p>प्रस्ताव पेश करते हुए कैबिनेट मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि जी राम जी कानून गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों, अनुसूचित जाति समुदायों और ग्रामीण मजदूरों पर गंभीर असर डालेगा। नए कानून से दलित मजदूरों की आजीविका छीनी जा रही है। उन्होंने कहा कि मनरेगा को खत्म करना केवल एक योजना का अंत नहीं, बल्कि गरीब और दलित समुदायों के जीवन के अधिकार पर हमला है।</p>
<p>आम आदमी पार्टी की सरकार ने मनरेगा की जगह &lsquo;वीबी-जी राम जी&rsquo; कानून लाने के विरोध में विधानसभा का एक दिन का सत्र बुलाया था। गौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल (बादल) ने पूरे मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी है, जिसे 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा के साथ संभावित गठबंधन से जोड़ा जा रहा है। वहीं, आम आदमी पार्टी इस मामले को दलित मुद्दा बनाने का प्रयास कर रही है।</p>
<p>चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नए कानून को गरीब, दलित, किसान, मजदूर और महिलाओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह गरीबों के &ldquo;चूल्हे बुझाने&rdquo; वाला कदम है। मुख्यमंत्री मान ने कहा कि आम आदमी पार्टी &ldquo;दलितों और गरीब मज़दूरों की आवाज़&rdquo; बनेगी और प्रधानमंत्री के सामने मनरेगा का मामला उठाएगी। वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि मनरेगा को खत्म करना न सिर्फ गरीबों पर, बल्कि फेडरलिज्म पर भी हमला है।</p>
<p>चर्चा के दौरान सदन में मौजूद अकेले भाजपा विधायक अश्विनी शर्मा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए भ्रम फैला रही है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा वर्ष में मनरेगा के तहत औसतन केवल 26 दिन का रोजगार दिया गया, जबकि पिछले तीन वर्षों में यह औसत 38 दिन रहा। शर्मा ने सोशल ऑडिट न होने और मनरेगा में भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया। प्रस्ताव पास होने पर वह सदन से चले गए।</p>
<p>कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने पलटवार करते हुए कहा कि रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करना केवल दिखावा है, क्योंकि मजदूरों को महीनों तक मजदूरी नहीं मिलती। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने एक महिला मनरेगा मजदूर का पत्र पढ़ते हुए कहा कि नियमों में बदलाव और केंद्रीकरण से गरीब परिवारों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ेगा।</p>
<p>कांग्रेस नेता परगट सिंह ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि केवल निंदा प्रस्ताव पारित करना पर्याप्त नहीं है और राज्य सरकार को इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के सामने विरोध दर्ज कराना होगा।</p>
<p>आम आदमी पार्टी के विधायक पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में मनरेगा मजदूरों द्वारा लिखे गए लाखों पत्र लेकर पहुंचे। मनरेगा मजदूर भी आज पंजाब विधान सभा में हाजिर थे। पंजाब सरकार इन पत्रों को देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का संकल्प लिया है।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब विधानसभा ने ‘जी राम जी’ विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया, मनरेगा बहाली की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हनुमानगढ़ से विवादित एथेनॉल फैक्ट्री मध्यप्रदेश शिफ्ट करने की तैयारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/hanumangarhs-controversial-ethanol-plant-set-to-be-shifted-to-madhya-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 30 Dec 2025 18:33:35 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/hanumangarhs-controversial-ethanol-plant-set-to-be-shifted-to-madhya-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="86" data-end="461">राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में प्रस्तावित एथेनॉल संयंत्र को राज्य से बाहर शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है। परियोजना से जुड़ी कंपनी की ओर से संकेत हैं कि सभी औपचारिकताएं पूरी होते ही इस संयंत्र को मध्यप्रदेश स्थानांतरित कर दिया जाएगा। किसान विरोध और कानून-व्यवस्था की स्थिति के चलते राज्य में इस परियोजना को आगे बढ़ाना फिलहाल संभव नहीं लग रहा है।</p>
<p data-start="463" data-end="864">यह संयंत्र चंडीगढ़ की ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा हनुमानगढ़ जिले के राठी खेड़ा गांव (टिब्बी तहसील) में लगाया जा रहा था। करीब 400 करोड़ रुपये की लगात से 40 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित यह परियोजना प्रतिदिन 1,320 किलोलीटर अनाज-आधारित एथेनॉल उत्पादन के साथ 40 मेगावाट का बिजली उत्पादन भी करती। कंपनी की योजना स्थानीय स्तर पर उपलब्ध धान, मक्का और पराली का उपयोग करने की थी।</p>
<p data-start="463" data-end="864">राजस्थान के जल संकट से प्रभावित हनुमानगढ़ क्षेत्र में प्रदूषण सहित कई मुद्दों को लेकर एथेनॉल प्लांट का विरोध किया जा रहा था। फैक्ट्री के खिलाफ किसानों ने बड़ा आंदोलन छेड़ दिया था, जिसके चलते सरकार को भी इस परियोजना से कदम वापस खींचने पड़े।&nbsp;</p>
<p data-start="866" data-end="1255">एथेनॉल फैक्ट्री को वर्ष 2023 में मंजूरी मिली थी, लेकिन दिसंबर 2025 में यह परियोजना काफी विवादों में आ गई। स्थानीय किसानों ने आशंका जताई कि फैक्ट्री से निकलने वाले प्रदूषण और औद्योगिक कचरे से खेतों की उर्वरता और भूजल दूषित हो सकता है। इसके बाद इलाके में विरोध तेज हो गया और कुछ ही हफ्तों में काम रोकना पड़ा।</p>
<p data-start="1257" data-end="1644">हालांकि, कंपनी की ओर से किसानों को भरोसा दिलाने की कोशिश की गई कि संयंत्र में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम और आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण तकनीकें अपनाई जाएंगी, लेकिन फैक्ट्री का विरोध कम नहीं हुआ। मौजूदा हालात में हनुमानगढ़ में इस परियोजना को आगे बढ़ाना संभव नहीं है।</p>
<p data-start="1646" data-end="2003">किसानों का विरोध 10 दिसंबर को उस समय उग्र हो गया था, जब टिब्बी में आयोजित महापंचायत में हजारों किसान जुटे। बैठक के बाद प्रदर्शनकारी निर्माण स्थल की ओर बढ़े और बाउंड्री वॉल के कुछ हिस्सों को तोड़ दिया। पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल से हालात बिगड़ गए, जिसमें किसानों और पुलिसकर्मियों सहित 50 से अधिक लोग घायल हो गए और कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए।</p>
<p data-start="2005" data-end="2201">घटना के बाद प्रशासन ने उसी दिन परियोजना का काम रुकवा दिया। इसके बाद 17 दिसंबर को किसान संगठनों ने महापंचायत में आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया और सरकार को 20 दिन का अल्टीमेटम दिया था।&nbsp;</p>
<p data-start="2203" data-end="2468" data-is-last-node="" data-is-only-node="">किसान नेताओं का कहना है कि जब तक परियोजना को औपचारिक रूप से रद्द करने का लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, कंपनी सूत्रों के अनुसार, फैक्ट्री को अब मध्यप्रदेश में लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_6953ce2a6f287.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हनुमानगढ़ से विवादित एथेनॉल फैक्ट्री मध्यप्रदेश शिफ्ट करने की तैयारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब सरकार VB&amp;#45;G RAM G कानून के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाएगी, ग्रामीण आजीविका के लिए खतरा बताकर किया विरोध]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-to-move-assembly-resolution-against-vb-g-ram-g-law-calls-it-a-threat-to-rural-livelihoods.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 28 Dec 2025 10:11:57 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-to-move-assembly-resolution-against-vb-g-ram-g-law-calls-it-a-threat-to-rural-livelihoods.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब सरकार ने 30 दिसंबर को होने वाले एक दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र में विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) कानून के खिलाफ प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है। यह घोषणा शनिवार को कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने की। उन्होंने केंद्र सरकार पर ग्रामीण आजीविका को कमजोर करने और नए कानून के माध्यम से भारत के संघीय ढांचे पर हमला करने का आरोप लगाया।</p>
<p>केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए सौंद ने VB-G RAM G कानून को &ldquo;काला कानून&rdquo; बताते हुए कहा कि यह कानून लाखों MGNREGA मजदूरों के जीवनयापन के लिए सीधा खतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई योजना के तहत ग्रामीण रोजगार का वित्तीय बोझ राज्यों पर डाला जा रहा है, जबकि मजदूरों को मिलने वाली गारंटी को कमजोर किया जा रहा है।</p>
<p>मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित बदलावों का सबसे अधिक प्रभाव गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों, अनुसूचित जातियों और उन ग्रामीण मजदूरों पर पड़ेगा जो MGNREGA पर अपने जीवन निर्वाह के लिए निर्भर हैं। सौंद ने केंद्र पर दोहरे लक्ष्य साधने का आरोप लगाया &ndash; एक तो मांग-आधारित रोजगार को कमजोर करना और दूसरा राज्यों पर वित्तीय बोझ डालना, जिसे उन्होंने देश के संघीय ढांचे पर हमला बताया।</p>
<p>सौंद ने केंद्र के उस दावे पर सवाल उठाया कि नई योजना 125 दिन रोजगार प्रदान करेगी, जबकि MGNREGA के तहत 100 दिन की गारंटी थी। उन्होंने आधिकारिक आंकड़े साझा करते हुए कहा कि बीते साल BJP नेतृत्व वाली सरकार ने औसतन केवल 45 दिन रोजगार प्रदान किया। मंत्री ने कहा, &ldquo;बिना डिलीवरी के बड़े-बड़े वादे करना BJP की आदत बन गई है।&rdquo;</p>
<p>पंजाब पर वित्तीय प्रभाव बताते हुए सौंद ने कहा कि MGNREGA के तहत मजदूरों की मजदूरी पूरी तरह से केंद्र द्वारा वित्त पोषित होती थी, जबकि सामग्री लागत केंद्र और राज्यों के बीच 75:25 अनुपात में साझा होती थी। नई VB-G RAM G योजना में इसे 60:40 कर दिया गया है, जिससे केवल पंजाब पर ही लगभग 600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त सालाना बोझ पड़ेगा।</p>
<p>मंत्री ने आरोप लगाया कि नए कानून से मजदूर सुरक्षा कमजोर होगी। उनके अनुसार यह कृषि मौसम के दौरान रोजगार की गारंटी नहीं देता और बेरोजगारी भत्ते की व्यवस्था कमजोर करता है। उन्होंने चिंता जताई कि पारंपरिक सामाजिक लेखा-जोखा (social audit) को AI-आधारित बायोमेट्रिक और जियो-टैगिंग सिस्टम से बदल दिया जाएगा, जिससे कमजोर मजदूरों को नुकसान हो सकता है।</p>
<p>सौंद ने यह भी कहा कि पंजाब में लगभग 70 प्रतिशत MGNREGA मजदूर महिलाएं हैं और योजना को 10 महीने तक सीमित करने से महिलाओं पर असमान प्रभाव पड़ेगा, जिससे कई परिवार और अधिक आर्थिक संकट में फंस सकते हैं।</p>
<p>राज्य सरकार का रुख दोहराते हुए सौंद ने घोषणा की कि आम आदमी पार्टी (AAP) के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार 30 दिसंबर को विशेष विधानसभा सत्र बुला रही है, जिसमें VB-G RAM G कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से कानून पर पुनर्विचार करने और ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों, आजीविका और गरिमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने का औपचारिक अनुरोध करेगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/05/image_750x500_6285d49aae91a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब सरकार VB-G RAM G कानून के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाएगी, ग्रामीण आजीविका के लिए खतरा बताकर किया विरोध ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/05/image_750x500_6285d49aae91a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एथेनॉल फैक्ट्री विरोध: अगली महापंचायत के लिए 7 जनवरी के दिन और संगरिया के मायने]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/ethanol-factory-protests-january-7th-marks-the-date-for-the-next-mahapanchayat-and-the-significance-of-sangaria.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 22 Dec 2025 19:30:40 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/ethanol-factory-protests-january-7th-marks-the-date-for-the-next-mahapanchayat-and-the-significance-of-sangaria.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के राठीखेड़ा गांव में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहा किसान आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। जिला मुख्यालय पर हुई हालिया महापंचायत के बाद यह आंदोलन सिर्फ एक स्थानीय विरोध भर नहीं रह गया, बल्कि उसने पूरे इलाके के किसान आंदोलन के इतिहास और स्मृतियों को फिर से जीवित कर दिया है। किसानों ने साफ शब्दों में कह दिया है कि जब तक सरकार फैक्ट्री से जुड़ा एमओयू निरस्त नहीं करती, तब तक आंदोलन वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता। दूसरी ओर, सरकार ने जांच समिति के गठन की घोषणा कर फिलहाल समय हासिल करने की रणनीति अपनाई है। ऐसे में आने वाले बीस दिन इस पूरे विवाद की दिशा और दशा तय करने वाले माने जा रहे हैं।</p>
<p>महापंचायत के तुरंत बाद किसान संगठनों ने आंदोलन को चरणबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने की रणनीति बना ली है। सरकार को बीस दिन का स्पष्ट अल्टीमेटम दिया गया है और 7 जनवरी को संगरिया में अगली महा पंचायत बुलाने का ऐलान कर दिया गया है। किसान नेताओं का कहना है कि यदि इस अवधि में सरकार की ओर से कोई ठोस और निर्णायक फैसला नहीं आया, तो आंदोलन को जिले और राज्य स्तर से आगे ले जाकर व्यापक रूप दिया जाएगा।</p>
<p>सवाल उठता है कि अगली महापंचायत के लिए 7 जनवरी की तारीख और संगरिया कस्बे को ही क्यों चुना गया? जानकार इसे संयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति बताते हैं। इसके पीछे इलाके के सबसे बड़े और ऐतिहासिक किसान आंदोलन की स्मृति जुड़ी हुई है। यही वह धरती है, जहां पचास से अधिक वर्ष पहले किसानों ने अपनी जमीन और अधिकारों के लिए खून बहाया था।</p>
<p>दरअसल, 1960 के दशक के अंत में श्रीगंगानगर जिले, जिसका हिस्सा उस समय हनुमानगढ़ क्षेत्र भी था, में भूमि नीलामी और सिंचाई शुल्क जैसे मुद्दों को लेकर एक बड़ा किसान आंदोलन खड़ा हुआ था। नहरी इलाके की उपजाऊ जमीनें सरकार द्वारा नीलामी के जरिए पैसे वाले लोगों को दी जा रही थीं, जबकि किसानों और भूमिहीनों की मांग थी कि इन जमीनों का आवंटन उन्हें किया जाए, जो वर्षों से यहां खेती और मजदूरी कर रहे हैं। इसी आंदोलन के दौरान 7 जनवरी 1970 को संगरिया में पुलिस ने किसानों पर गोलियां चला दीं, जिसमें छह किसानों की मौके पर ही मौत हो गई। &nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_69494ec5e15b7.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>संगरिया में 7 जनवरी 1970 को पुलिस की गोली से शहीद हुए किसानों का स्मारक। फाइल फोटो</em></p>
<p>संगरिया में गोली लगने से उस दिन अमरपुरा जालू खाट के देवेन्द्र सिंह, नाथवाना के केसराराम, रतनपुरा के रूड़ सिंह, चौटाला गांव के हरियाणा पुलिस के एक सिपाही रामपहर राम, संगरिया के चंदूराम और एक अन्य की मौत हो गई। उसी दिन भादरा कस्बे में फायरिंग में किसान आंदोलन से जुड़े दो छात्र शहीद हुए, जबकि पड़ोसी जिले चूरू में भी एक किसान की जान चली गई। यह पूरा इलाका उस दिन गोलियों की आवाज से दहल उठा था।</p>
<p>इस व्यापक आंदोलन की चिंगारी को भड़काने में अनूपगढ़ की घटना ने आग में घी डालने का काम किया। 3 अक्टूबर 1969 को अनूपगढ़ में सरकारी भूमि की नीलामी प्रस्तावित की गई थी। इसके विरोध में किसानों और भूमिहीनों ने संगठित होकर आंदोलन शुरू किया। माकपा नेता शोपत सिंह मक्कासर और हेतराम बेनीवाल के नेतृत्व में किसानों का एक जत्था रेलगाड़ी से अनूपगढ़ पहुंचा। आउटर पर रेल रोक दी गई और किसान नीलामी स्थल की ओर बढ़ चले। उधर, रायसिंहनगर से कॉमरेड योगेंद्र हांडा के नेतृत्व में दूसरा दल वैकल्पिक रास्ते से अनूपगढ़ पहुंच गया।</p>
<p>नीलामी का विरोध कर रहे किसानों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज किया, जिसमें कॉमरेड योगेंद्र हांडा गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद योगेंद्र हांडा, शोपत सिंह, हेतराम बेनीवाल सहित सैकड़ों किसानों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। लाठीचार्ज के अगले ही दिन आंदोलन को नई दिशा देने के लिए चौधरी कुम्भाराम और प्रो. केदार अनूपगढ़ पहुंचे। उन्होंने आंदोलन की कमान संभालते हुए ऐलान किया कि जब तक नीलामी रद्द नहीं होती, तब तक हर गांव से रोजाना एक किसान या भूमिहीन स्वेच्छा से गिरफ्तारी देगा।</p>
<p>संगरिया के पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल ने राजस्थान के जाने-माने माकपा नेता, कई बार विधायक और सांसद रहे कॉमरेड शोपत सिंह के जीवन पर लिखी अपनी &nbsp;पुस्तक &lsquo;संघर्षों के जननायक शोपत सिंह&rsquo; में संगरिया गोलीकांड का विस्तार से वर्णन किया है। वे लिखते हैं कि उस दौर में वे स्वयं, कॉमरेड शोपत सिंह और कॉमरेड हरिराम एक सांसद के साथ प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिले थे। उनसे मांग की गई कि भूमि नीलामी बंद कर भूमिहीनों को जमीन का आवंटन किया जाए। प्रधानमंत्री ने तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया को नीलामी रोकने के निर्देश दिए। इसके अगले ही दिन राजस्थान सरकार ने नीलामी कार्यक्रम रद्द कर दिया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि अब उस भूमि का क्या किया जाएगा। इसी अस्पष्टता के चलते आंदोलन जारी रहा।</p>
<p>संघर्ष समिति की कुल 31 मांगें थीं। सत्याग्रह के तहत गिरफ्तारी देने का सिलसिला तेज हो गया। हालात ऐसे बने कि पूरे राजस्थान की जेलें एक सप्ताह के भीतर भर गईं। दो बार जेलें खाली कराने के बावजूद जब जनता ने गिरफ्तारी देना बंद नहीं किया, तो प्रशासन ने पुलिस को सख्ती के आदेश दे दिए।</p>
<p>आज भी 7 जनवरी को संगरिया में किसान शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। शहीद किसानों की स्मृति में श्रद्धासुमन अर्पित किए जाते हैं। इस तारीख के साथ किसानों का गहरा भावनात्मक रिश्ता है। 1970 के बाद यह पहला मौका है जब किसी बड़े किसान आंदोलन के तहत एक बार फिर 7 जनवरी को संगरिया में किसानों का विशाल हुजूम उमड़ने जा रहा है। यही वजह है कि राठीखेड़ा की एथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ चल रहा आंदोलन केवल वर्तमान का संघर्ष नहीं, बल्कि अतीत से जुड़ी उस विरासत की पुनरावृत्ति बनता जा रहा है, जिसमें किसान अपने हक के लिए संघर्ष करते रहे हैं।</p>
<p><br /><br /></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एथेनॉल फैक्ट्री विरोध: अगली महापंचायत के लिए 7 जनवरी के दिन और संगरिया के मायने ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हांसी बना हरियाणा का 23वां जिला, जानिए कौन&amp;#45;कौन से इलाके होंगे शामिल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/hansi-becomes-the-23rd-district-of-haryana-know-which-areas-will-be-included.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 18 Dec 2025 14:40:01 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/hansi-becomes-the-23rd-district-of-haryana-know-which-areas-will-be-included.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="58" data-end="329">हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए हांसी को राज्य का 23वां जिला बनाने की मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर औपचारिक मुहर लगाई गई।</p>
<p data-start="331" data-end="535">राज्य पुनर्गठन समिति की ओर से विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार की अध्यक्षता में 9 दिसंबर को हुई बैठक में जिले के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसे बाद में मुख्यमंत्री ने स्वीकृति प्रदान की।</p>
<p data-start="537" data-end="919">नए जिले में हांसी और नारनौंद विधानसभा क्षेत्रों के 110 गांव शामिल होंगे, जो वर्तमान में हिसार जिले का हिस्सा हैं। प्रशासनिक ढांचे के रूप में प्रस्तावित जिले में दो उपमंडल&mdash;हांसी और नारनौंद&mdash;स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही तीन तहसीलें हांसी, नारनौंद और बास तथा एक उप-तहसील खेड़ी जालब भी नए जिले में शामिल होंगे। ग्रामीण विकास के लिए तीन ब्लॉक हांसी-1, हांसी-2 और नारनौंद बनाए जाएंगे।</p>
<p data-start="921" data-end="1104">जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 1,34,976 हेक्टेयर होगा, जबकि अनुमानित जनसंख्या करीब 5,40,994 बताई गई है। हांसी जिले के गठन के बाद राज्य में कुल जिलों की संख्या बढ़कर 23 हो जाएगी।</p>
<p data-start="1106" data-end="1410">राज्य सरकार के अनुसार, नए जिले के गठन से नागरिक-केंद्रित सेवाओं तक पहुंच और सरल होगी तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में गति और पारदर्शिता बढ़ेगी। प्रशासनिक दक्षता, अंतर-विभागीय समन्वय और लोगों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हिसार के उपायुक्त की ओर से यह प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया था।</p>
<p data-start="1412" data-end="1651">हांसी और नारनौंद विधानसभा क्षेत्रों के तहत आने वाले 110 गांवों में हांसी शहर, नारनौंद, सिसाय बोला, सुल्तानपुर, मिर्चपुर, पुट्ठी मंगलखां, सिंधर, बास अकबरपुर, खरबला, बुडाना, जमावड़ी, गामड़ा, रामपुरा, उगालन, उमरा सहित अन्य गांव शामिल होंगे।</p>
<p data-start="1653" data-end="1924">सरकार का दावा है कि इस निर्णय से क्षेत्र में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी और स्थानीय निवासियों को प्रशासनिक सुविधाएं अब पहले से अधिक निकट और सुगम होंगी। बताते चलें कि हांसी ऐतिहासिक महत्व वाला क्षेत्र है और इसे जिला स्तर पर उन्नत करना लंबे समय से स्थानीय मांग रही है।</p>
<p data-start="1926" data-end="2020" data-is-last-node="" data-is-only-node="">इस कदम को प्रदेश के प्रशासनिक पुनर्गठन और स्थानीय विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। <span>हांसी कभी कपास उद्योग का बड़ा केंद्र रहा। जिला बनने से व्यापार, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_6943c47c2af88.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हांसी बना हरियाणा का 23वां जिला, जानिए कौन-कौन से इलाके होंगे शामिल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_6943c47c2af88.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हनुमानगढ़ महापंचायत: किसान एथेनॉल फैक्ट्री हटने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/hanumangarh-mahapanchayat-farmers-will-continue-their-agitation-until-the-ethanol-factory-is-removed.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 17 Dec 2025 21:24:40 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/hanumangarh-mahapanchayat-farmers-will-continue-their-agitation-until-the-ethanol-factory-is-removed.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के राठीखेड़ा गांव में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों के तेवर बरकरार हैं। आज हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय की धान मंडी में आयोजित महा पंचायत में किसानों ने फैक्ट्री के विरोध में हुंकार भरी। हालांकि सभा के बीच ही प्रशासन ने किसान नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया और उनकी मांगें सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। जिला प्रशासन ने शाम को वार्ता के बाद सरकार को तत्काल पत्र भी भेज दिया, लेकिन महापंचायत में किसान नेताओं ने कहा, &lsquo;&lsquo;जब तक फैक्ट्री लगाने का एमओयू सरकार निरस्त नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।&rsquo;&rsquo;</p>
<p>महापंचायत में हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा से भी किसान पहुंचे। किसानों ने सर्वसम्मति से सरकार को निर्णय के लिए बीस दिन का समय दिया। उन्होंने साफ कहा कि अगर सरकार ने बीस दिनों में उनकी मांगें स्वीकार नहीं कीं तो वे 7 जनवरी को संगरिया कस्बे में महा पंचायत कर पड़ाव डालेंगे। इस बीच आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_6942d393a755e.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में आयोजित पंचायत में किसान नेता राकेश टिकैत</em></p>
<p>महापंचायत में आज हजारों किसान उमड़े। सभा को संबोधित करते हुए किसान नेता <strong>राकेश टिकैत</strong> ने आंदोलनकारियों से ट्रैक्टर के &lsquo;बंपर मजबूत&rsquo; रखने का आह्वान किया। टिकैत ने कहा, &lsquo;&lsquo;एथेनॉल फैक्ट्री को विकास और रोजगार से जोड़ा जा रहा है, जबकि हकीकत यह है कि फैक्ट्री लगने से आसपास की जमीन, हवा और पानी गंभीर रूप से दूषित होंगे। जब फैक्ट्री शुरू होगी तो प्रशासन को बार-बार प्रदूषित पानी दिखाते रहना। इस फैक्ट्री का प्रदूषण लगभग 14 फैक्ट्रियों के बराबर होगा।&rsquo;&rsquo;</p>
<p>टिकैत ने कहा कि टिब्बी की संघर्ष समिति जो भी निर्णय लेगी, संयुक्त किसान मोर्चा उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। उत्तर प्रदेश के एक उदाहरण का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि मुजफ्फरनगर में जब हाईवे गुरुद्वारे की जमीन से होकर गुजर रहा था, तब विरोध में झंडा गाड़ दिया गया था, जिसके बाद सरकार को सड़क का मार्ग बदलना पड़ा। टिकैत ने कहा कि इसी तरह यदि राठीखेड़ा में भी झंडा गाड़कर एक किलोमीटर के दायरे में ट्रकों का प्रवेश रोक दिया जाए तो फैक्ट्री का संचालन अपने-आप ठप हो जाएगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_6942d530bd7d7.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>हनुमानगढ़ में किसान महापंचायत में उमड़े किसान। फोटो: हिमांशु मिढ़ा</em></p>
<p><strong>सभा के दौरान वार्ता का बुलावा</strong><br />किसान पंचायत चल ही रही थी कि प्रशासन ने किसान नेताओं को वार्ता के लिए आमंत्रित कर लिया। कई प्रशासनिक अधिकारी वार्ता का न्योता लेकर पहुंचे। इसके बाद किसान नेता जिला कलक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों से बातचीत की। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने वार्ता उपरांत अधिकृत प्रेस नोट जारी कर जानकारी साझा की। वार्ता के अनुसार संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव ने स्थानीय जनभावनाओं और समस्त परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लोकहित में समुचित निर्णय के लिए राज्य सरकार को पत्र भेज दिया।</p>
<p>वार्ता में मौजूद राज्य के आयोजना शासन सचिव <strong>डॉ. रवि कुमार सुरपुर</strong> ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के प्रति संवेदनशील है और किसान हितों की रक्षा उसकी प्राथमिकता है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बीजू जॉर्ज जोसफ ने किसान प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि पुलिस प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।&nbsp;</p>
<p>अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के प्रदेश सचिव <strong>कॉमरेड रघुवीर वर्मा</strong> ने बताया कि&nbsp;&nbsp;प्रशासनिक अधिकारियों ने वार्ता के दौरान बार-बार ये ही कहा कि आप हम पर भरोसा करो। लेकिन बात भरोसे की नहीं, भविष्य की है। हमने सरकार को बीस दिन का समय दे दिया है। अगर इस दौरान किसानों की मांग नहीं मानी गई तो 7 जनवरी को संगरिया में महा पंचायत होगी और उसमें निर्णायक लड़ाई का फैसला किया जाएगा।&nbsp;<br /><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_6942d58dd800b.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>हनुमानगढ़ में प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ वार्ता करते किसान नेता। फोटो: हिमांशु मिढ़ा</em><strong></strong></p>
<p><strong>पांच सदस्यीय समिति गठित</strong><br />सरकार ने बीती रात एथेनॉल प्लांट से संभावित भू-जल दोहन और पर्यावरणीय प्रदूषण की जांच के लिए बीकानेर के संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया। समिति में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के विशिष्ट शासन सचिव, हनुमानगढ़ के जिला कलेक्टर, राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता अरविंद अग्रवाल तथा भूजल विभाग के मुख्य अभियंता सूरजभान शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि 12 दिसंबर को किसान संघर्ष समिति और प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की संयुक्त बैठक में समिति गठन पर सहमति बनी थी।</p>
<p>किसानों के साथ वार्ता में संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा, पुलिस महानिरीक्षक हेमंत शर्मा, हनुमानगढ़ में जिला कलेक्टर रह चुके आईएएस काना राम, एसपी हरीशंकर, जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव और एडीएम उम्मेदी लाल मीना मौजूद रहे।</p>
<p>किसानों की ओर से संयुक्त किसान मोर्चा और संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंगेज चौधरी, रेशम सिंह माणुका, मदन दुर्गेसर, रवि जोसन, नितिन ढाका, जगजीत सिंह जग्गी, बलजिंद्र सिंह, मनदीप मान, मान सिंह राठौड़, रघुवीर वर्मा, शेर सिंह शाक्य, रविन्द्र सिंह, काका सिंह, गगनदीप, संदीप कंग और सुभाष मक्कासर ने भागीदारी की।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x500_6942d31c3c6d5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हनुमानगढ़ महापंचायत: किसान एथेनॉल फैक्ट्री हटने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नकली खाद बेचने वालों और कालाबाजारी करने वालों पर लगेगा एनएसए, सीएम योगी के सख्त निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/action-will-be-taken-under-nsa-against-those-selling-fake-fertilizers-or-engaging-in-black-marketing-cm-yogi-issues-strict-instructions.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 17 Dec 2025 17:44:24 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/action-will-be-taken-under-nsa-against-those-selling-fake-fertilizers-or-engaging-in-black-marketing-cm-yogi-issues-strict-instructions.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="236" data-end="705">उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में खाद की समुचित उपलब्धता और सुचारु वितरण को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मिलावटी अथवा नकली खाद बेचने वालों और खाद की कालाबाजारी में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे तत्वों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। यदि खाद से संबंधित किसी भी समस्या का सामना किसानों को करना पड़ता है, तो जवाबदेही तय की जाएगी और दोषी चाहे कोई भी हो, उसे छोड़ा नहीं जाएगा। <span>मुख्यमंत्री योगी&nbsp;</span><span class="il">आदित्यनाथ</span><span> ने अपने सरकारी आवास पर एक उच्चस्तरीय बैठक में प्रदेश में खाद की समुचित उपलब्धता और सुचारु वितरण के सम्बन्ध में सख्त निर्देश दिए।</span></p>
<p data-start="236" data-end="705">राज्य सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सहकारिता और कृषि मंत्री प्रतिदिन खाद की उपलब्धता और वितरण की स्थिति की समीक्षा करें। मुख्यमंत्री कार्यालय से प्रत्येक जनपद में सीधी निगरानी रखी जाएगी और खाद वितरण में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी और उप-जिलाधिकारी स्वयं खाद की दुकानों और समितियों का आकस्मिक निरीक्षण करें। ओवररेटिंग किसी भी स्थिति में न हो और खाद समितियां निर्धारित अवधि के अनुसार अनिवार्य रूप से खुली रहें। किसानों को डीएपी, यूरिया और पोटाश केवल तय सरकारी दरों पर ही उपलब्ध कराए जाएं। जहां भी गड़बड़ी पाई जाए, वहां तत्काल जवाबदेही तय की जाए।</p>
<p data-start="1310" data-end="1735">मुख्यमंत्री ने कहा कि फील्ड में तैनात अधिकारियों की गतिविधियों पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी। यदि किसी स्तर पर मिलीभगत या लापरवाही सामने आती है, तो खुली विजिलेंस जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपलब्धता के बावजूद किसी किसान को खाद के लिए भटकना न पड़े, यही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री का साफ संदेश है कि खाद संकट पैदा करने या कृत्रिम अभाव दिखाने की कोशिश करने वालों के लिए प्रदेश में कोई स्थान नहीं है।</p>
<p data-start="1737" data-end="2227">बैठक में मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि प्रदेश में 16 दिसंबर 2025 तक कुल 9.57 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 3.77 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 3.67 लाख मीट्रिक टन एनपीके उर्वरक किसानों के लिए उपलब्ध हैं। सहकारी क्षेत्र में 3.79 लाख मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र में 5.78 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। इसी तरह सहकारी क्षेत्र में 1.47 लाख मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र में 2.30 लाख मीट्रिक टन डीएपी तथा सहकारी क्षेत्र में 0.88 लाख मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र में 2.79 लाख मीट्रिक टन एनपीके उर्वरक उपलब्ध है।</p>
<p data-start="2229" data-end="2510">मुख्यमंत्री को यह भी बताया गया कि रबी फसलों की बोआई लगभग पूर्ण हो चुकी है और गेहूं की फसल में टॉप ड्रेसिंग के लिए यूरिया का वितरण किया जा रहा है। गत वर्ष की तुलना में इस अवधि में यूरिया की बिक्री अधिक रही है और वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 54,249 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण हो रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नकली खाद बेचने वालों और कालाबाजारी करने वालों पर लगेगा एनएसए, सीएम योगी के सख्त निर्देश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्यप्रदेश: बहुउद्देशीय परियोजनाओं के डूब प्रभावितों के लिए 1,782 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज स्वीकृत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-a-special-package-of-rs-1782-crore-approved-for-the-flood-affected-people-of-multipurpose-projects.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 17 Dec 2025 12:04:35 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-a-special-package-of-rs-1782-crore-approved-for-the-flood-affected-people-of-multipurpose-projects.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="211" data-end="550">मध्यप्रदेश सरकार ने अपर नर्मदा, राघवपुर और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजनाओं के डूब प्रभावित लोगों के लिए विशेष पैकेज को मंजूरी दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों की इन परियोजनाओं के डूब प्रभावितों के लिए 1,782 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज स्वीकृत किया गया।</p>
<p data-start="552" data-end="677">परियोजनाओं के डूब प्रभावितों के लिए डीपीआर में प्रावधानित 1,656.2 करोड़ रुपये के अतिरिक्त यह विशेष पैकेज स्वीकृत किया गया है।</p>
<p data-start="679" data-end="1143">उल्लेखनीय है कि अपर नर्मदा, राघवपुर और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजनाओं की कुल लागत 5,512 करोड़ 11 लाख रुपये है। इन परियोजनाओं से 71,967 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा तथा 125 मेगावाट विद्युत उत्पादन का प्रावधान है। तीनों परियोजनाओं से कुल 13,873 परिवार प्रभावित होंगे, जिन्हें विशेष पैकेज के तहत प्रति परिवार 12.50 लाख रुपये की निर्धारित मुआवजा राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, 50,000 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति परिवारों को अतिरिक्त मुआवजा राशि भी देय होगी।</p>
<h3 data-start="1145" data-end="1200">मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अवसंरचना योजना को अनुमति</h3>
<p data-start="1202" data-end="1487">मंत्रि-परिषद द्वारा वित्तीय वर्ष 2025&ndash;26 के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अवसंरचना योजना के अंतर्गत विभाग में 10 लाख रुपये या उससे अधिक लागत वाले कार्यों को स्वीकृति देने की अनुमति प्रदान की गई। स्वीकृति के अनुसार 693 करोड़ 76 लाख रुपये की लागत के लगभग 3,810 कार्य पूरे किए जा सकेंगे।</p>
<h3 data-start="1489" data-end="1543">वन विज्ञान केंद्रों की स्थापना के लिए राशि स्वीकृत</h3>
<p data-start="1545" data-end="1997">मंत्रि-परिषद ने वित्तीय वर्ष 2025&ndash;26 से 2029&ndash;30 तक राज्य में छह वन विज्ञान केंद्रों की स्थापना के लिए 48 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके तहत वन क्षेत्र के बाहर वानिकी विस्तार गतिविधियों को बढ़ावा देने, वन भूमि की उत्पादकता बढ़ाने, काष्ठ विदोहन से अतिरिक्त आय के अवसर विकसित करने, वृक्ष खेती को प्रोत्साहित करने तथा कृषि वानिकी को बढ़ावा देने का उद्देश्य है। अशासकीय संस्थाएं भी वन विभाग की अनुमति से वन विज्ञान केंद्रों की स्थापना कर सकेंगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्यप्रदेश: बहुउद्देशीय परियोजनाओं के डूब प्रभावितों के लिए 1,782 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज स्वीकृत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में ‘महक क्रांति नीति’ का शुभारंभ, एक लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/uttrakhand-cm-launches-aroma-revolution-policy-aims-to-connect-one-lakh-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 15 Dec 2025 15:02:07 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/uttrakhand-cm-launches-aroma-revolution-policy-aims-to-connect-one-lakh-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में सुगंधित पौधों की खेती और इससे जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के सेलाकुई स्थित सुगंध पौधा केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड महक क्रांति नीति 2026&ndash;36 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने सैटेलाइट सेंटर भाऊवाला का लोकार्पण तथा एएमएस प्रयोगशाला का शिलान्यास किया। साथ ही पाँच सैटेलाइट सेंटर&mdash;परसारी (चमोली), रैथल (उत्तरकाशी), भैसोड़ी (अल्मोड़ा), खतेड़ा (चंपावत) एवं विषाड़ (पिथौरागढ़)&mdash;का शिलान्यास भी किया गया।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड महक क्रांति नीति के शुभारंभ को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस नीति के तहत राज्य में सात एरोमा वैलियों के विकास की शुरुआत की जाएगी। प्रथम चरण में पिथौरागढ़ में तिमूर वैली, चमोली एवं अल्मोड़ा में डैमस्क रोज वैली, ऊधमसिंह नगर में मिंट वैली, चंपावत और नैनीताल में सिनेमन वैली तथा हरिद्वार और पौड़ी में लेमनग्रास एवं मिंट वैली विकसित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि नीति के अंतर्गत पौधशाला विकास सहयोग, खेती हेतु अनुदान, प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास, फसल बीमा, तथा पैकेजिंग और ब्रांडिंग जैसी आवश्यक सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने बताया कि इस नीति के तहत राज्य में लगभग 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित फसलों की खेती विकसित कर करीब एक लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। आगामी दस वर्षों में सुगंधित फसलों के कारोबार का टर्नओवर सौ करोड़ रुपये से बढ़ाकर लगभग 1,200 करोड़ रुपये तक पहुँचाने का लक्ष्य है, जिससे किसानों के साथ-साथ राज्य की आय में भी अभूतपूर्व वृद्धि होगी।</p>
<p><strong>किसानों के लिए कई योजनाएं&nbsp;</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के किसानों के उत्थान और समृद्धि के लिए संकल्पित होकर निरंतर कार्य कर रही है। राज्य में किसानों को तीन लाख रुपये तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि उपकरणों की खरीद के लिए फार्म मशीनरी बैंक योजना के तहत 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। गेहूं खरीद पर किसानों को 20 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस प्रदान किया जा रहा है, जबकि गन्ने के मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। किसानों के हित में नहरों से सिंचाई को पूरी तरह मुफ्त किया गया है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए पॉलीहाउस निर्माण हेतु 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत अब तक लगभग 115 करोड़ रुपये की सहायता से करीब 350 पॉलीहाउस स्थापित किए जा चुके हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती को समर्थन देने के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये की लागत से उत्तराखंड क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव रेन-फेड फार्मिंग प्रोजेक्ट को भी स्वीकृति दी गई है। राज्य सरकार सब्जियों के साथ-साथ फलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रही है।</p>
<p><strong>बागवानी को बढ़ावा&nbsp;</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने 1,200 करोड़ रुपये की लागत से नई सेब नीति, कीवी नीति, स्टेट मिलेट मिशन और ड्रैगन फ्रूट नीति सहित कई योजनाएँ लागू की हैं। इन नीतियों के तहत किसानों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जा रही है। सुगंध उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए काशीपुर में 40 एकड़ क्षेत्र में लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से एरोमा पार्क विकसित किया जा रहा है। &lsquo;हाउस ऑफ हिमालयाज&rsquo; के माध्यम से सुगंध तेलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। साथ ही धौलादेवी, मुनस्यारी और बेतालघाट के चाय बागानों को जैविक चाय बागानों के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान सुगंध पौधा केंद्र और डाबर इंडिया लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए गए। एमओयू पर कैप की ओर से निदेशक नृपेन्द्र सिंह चौहान तथा डाबर इंडिया लिमिटेड की ओर से कार्यकारी निदेशक डॉ. सौरभ लाल उपस्थित रहे।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में ‘महक क्रांति नीति’ का शुभारंभ, एक लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में एथेनॉल फैक्ट्री विरोध की जड़ें पंजाब से जुड़ीं, जल संकट और प्रदूषण बना मुद्दा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/opposition-to-an-ethanol-factory-in-rajasthan-has-its-roots-in-punjab-with-water-scarcity-and-pollution-becoming-key-issues.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Dec 2025 22:15:40 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/opposition-to-an-ethanol-factory-in-rajasthan-has-its-roots-in-punjab-with-water-scarcity-and-pollution-becoming-key-issues.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र की मोदी सरकार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को बड़ी उपलब्धि और किसान हितैषी कदम के तौर पर पेश करती रही है। लेकिन राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी तहसील के <span>राठीखेड़ा गांव में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ किसानों के आंदोलन ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गत </span>10 <span>दिसंबर को आंदोलन के हिंसक रूप लेने के बाद फैक्ट्री निर्माण पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। जबकि आंदोलनकारी किसान फैक्ट्री को पूरी तरह हटाने की मांग पर अडिग हैं।</span>&nbsp;</p>
<p>शुक्रवार को प्रशासन की मध्यस्थता में हुए समझौते के बाद बवाल थमता दिख रहा है, <span>लेकिन इस मुद्दे पर सियासत अभी भी गरमाई हुई है। टिब्बी के किसानों के समर्थन में किसान संगठनों ने </span>17 <span>दिसंबर को हनुमानगढ़ में महापंचायत बुलाई है जिसमें राकेश टिकैत</span>, <span>गुरनाम सिंह चढूनी और जोगिंदर सिंह उग्राहां सहित कई बड़े किसान नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।</span>&nbsp;</p>
<p>श्रीगंगानगर के सांसद कुलदीप इंदौरा और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल इस मुद्दे को लोकसभा में उठा चुके।&nbsp;<span>कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। कांग्रेस जहां किसानों पर लाठीचार्ज को लेकर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा कर रही है</span>, <span>वहीं भाजपा सरकार के मंत्री कांग्रेस नेताओं पर आंदोलन को भड़काने के आरोप लगा रहे हैं। इन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों के बीच एक सच्चाई ऐसी है</span>, <span>जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। टिब्बी का यह आंदोलन अचानक पैदा नहीं हुआ</span>, <span>बल्कि इसकी जड़ें पंजाब के जीरा आंदोलन से जुड़ी हैं।</span>&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_693d9f39cea03.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>टिब्बी में शनिवार को धरने पर बैठे किसान | फोटो: अमरपाल सिंह वर्मा&nbsp;</em></p>
<p><strong>जीरा का आंदोलन बना नजीर</strong><strong>&nbsp;</strong></p>
<p>राजस्थान का हनुमानगढ़ जिला पंजाब और हरियाणा के नजदीक होने के कारण सीमावर्ती जिलों में किसान संगठनों के बीच काफी संपर्क रहता है। पंजाब के फिरोजपुर जिले की जीरा तहसील के गांव मंसूरवाल में स्थित मालब्रोस इंटरनेशनल इथेनॉल डिस्टिलरी को बंद कराने के लिए वहां के किसानों ने जो लंबा आंदोलन चलाया, <span>उसी ने टिब्बी के किसानों को संघर्ष का रास्ता दिखाया। जीरा की तर्ज पर टिब्बी में भी पिछले करीब सोलह महीनों से आंदोलन चल रहा है।</span>&nbsp;</p>
<p>पंजाब के जीरा में 44 <span>गांवों के किसानों ने</span> 24 <span>जुलाई</span> 2022 <span>को आंदोलन शुरू किया था। यह आंदोलन</span> 177 <span>दिन तक लगातार चला। आखिरकार</span>, <span>जनदबाव और पर्यावरणीय चिंताओं को देखते हुए पंजाब सरकार ने जनवरी</span> 2023 <span>में उस एथेनॉल फैक्ट्री को बंद कराने का आदेश दिया। इसके बाद तो पंजाब सरकार ने गत</span> 2 <span>नवम्बर</span> 2025 <span>को पहली बार नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के समक्ष औपचारिक रूप से स्वीकार किया है कि जीरा में मालब्रोस इंटरनेशनल डिस्टिलरी ने गंभीर पर्यावरणीय नुकसान पहुंचाया और इसे स्थायी रूप से बंद किया जाना चाहिए।</span>&nbsp;</p>
<p>यह फैसला हनुमानगढ़ के किसानों के लिए एक बड़ा उदाहरण बना। टिब्बी में फैक्ट्री हटाओ क्षेत्र बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य मदन दुर्गेसर, <span>महंगा सिंह सिद्धू</span>, <span>जगजीत सिंह जग्गी सहित कई किसान जीरा गए और वहां के आंदोलनकारी किसानों से बातचीत की। मदन दुर्गेसर बताते हैं</span>, &ldquo;<span>जीरा के किसानों ने जो हालात बताए</span>, <span>उन्हें सुनकर हमारे पैरों तले से जमीन खिसक गई। हमें समझ आ गया कि अगर समय रहते नहीं रोका गया तो टिब्बी का हश्र भी वही होगा।</span>&rdquo;&nbsp;</p>
<p><strong>जल संकट और प्रदूषण की चिंता&nbsp;</strong></p>
<p>मदन दुर्गेसर बताते हैं कि जीरा क्षेत्र में वर्ष 2006 <span>में स्थापित एथेनॉल फैक्ट्री से निकलने वाले औद्योगिक कचरे और दुर्गंध ने कृषि भूमि</span>, <span>भूजल और पर्यावरण को बुरी तरह प्रभावित किया। प्रदूषित पानी खेतों में जाने से मिट्टी की उर्वरता घट गई</span>, <span>फसलें प्रभावित हुईं और पीने के पानी की गुणवत्ता बिगड़ गई। लोगों में स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ने की बातें भी सामने आईं।</span>&nbsp;&nbsp;</p>
<p>जीरा में छह महीने तक चले आंदोलन के बाद फैक्ट्री बंद होना टिब्बी के किसानों के लिए एक चेतावनी भी था और एक मॉडल भी। दोनों आंदोलनों में कई समानताएं दिखती हैं जैसे लंबा धरना, <span>गांव-गांव सभाएं</span>, <span>सोशल मीडिया के जरिए जनसमर्थन और पर्यावरणीय नुकसान को केंद्र में रखना।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>डेढ़ साल से जारी था विरोध-प्रदर्शन</strong></p>
<p>दो साल पहले जब टिब्बी क्षेत्र के किसानों को पता चला कि चंडीगढ़ की ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड राठीखेड़ा गांव में करीब 45 <span>एकड़ जमीन पर</span> 450 <span>करोड़ रुपये की लागत से</span> 1320 <span>केएलपीडी क्षमता का अनाज आधारित इथेनॉल प्लांट और</span> 24.5 <span>मेगावाट का पावर प्लांट लगाने जा रही है</span>, <span>तभी से क्षेत्र में बेचैनी शुरू हो गई थी। किसानों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इसका विरोध दर्ज कराया।</span>&nbsp;&nbsp;</p>
<p>हनुमानगढ़ का टिब्बी क्षेत्र सिंचाई के लिए ट्यूबवेल पर निर्भर है। एथेनॉल फैक्ट्री के निर्माण से अत्यधिक भूजल दोहन और प्रदूषण फैलने की चिंताओं ने किसान आंदोलन को जन्म दिया। जुलाई 2024 <span>में जैसे ही कंपनी ने प्रस्तावित भूमि पर चारदीवारी का निर्माण शुरू किया</span>, <span>आंदोलन खुलकर सामने आ गया।</span> 12 <span>अगस्त</span> 2024 <span>को बड़ी संख्या में किसान फैक्ट्री स्थल पर धरने पर बैठ गए और वहीं पड़ाव डाल दिया। यह धरना लगातार चलता रहा।</span> 19 <span>नवंबर</span> 2025 <span>को प्रशासन ने पुलिस बल की मदद से किसानों को वहां से हटवाकर चारदीवारी का काम फिर शुरू करवाया।</span></p>
<p><strong>10 दिसंबर को क्या हुआ&nbsp;</strong></p>
<p><span>गत 10 दिसम्बर को दर्जनों गांवों के किसान टिब्बी में एसडीएम कार्यालय के बाहर महा पंचायत में जुटे। </span><span>महापंचायत के बाद हजारों आक्रोशित किसान ट्रैक्टरों के काफिले के साथ फैक्ट्री स्थल की ओर बढ़े। किसानों ने जैसे ही चारदीवारी को धक्का देना शुरू किया तो </span><span>हालात बिगड़ गए। आगजनी और तोड़फोड़ के बाद पुलिस ने आंसू गैस</span>, <span>लाठीचार्ज और प्लास्टिक की गोलियों का इस्तेमाल किया। दोनों पक्षों से दर्जनों लोग घायल हुए। </span></p>
<p></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_693d9fc9aa2f5.jpg" alt="" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>फैक्ट्री स्थल पर आगजनी के हवाले किए गये वाहन | फोटो: अमरपाल सिंह वर्मा&nbsp;</em></p>
<p></p>
<p><span>स्थिति को काबू में करने के लिए इंटरनेट बंद किया गया और पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।</span>&nbsp;पुलिस के लाठीचार्ज और आंसू गैस से कार्रवाई में कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया सहित दर्जनों लोग घायल हो गए। हिंसा में 16 <span>से अधिक वाहन जलाए गए और कई क्षतिग्रस्त हुए। </span>10 <span>दिसंबर की हिंसा के बाद </span>107 <span>लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई और कई गिरफ्तारियां हुईं।</span></p>
<p>तीन दिन तक चले तनाव के बाद प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की बैठक में फैक्ट्री निर्माण पर रोक लगाने पर सहमति बनी। हालांकि, <span>किसान अभी भी धरने पर बैठे हैं। संघर्ष समिति के सदस्य जगजीत सिंह जग्गी साफ कहते हैं कि जब तक फैक्ट्री लगाने का फैसला पूरी तरह निरस्त नहीं किया जाता</span>, <span>आंदोलन जारी रहेगा।</span>&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_693da0e03ab7e.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>हनुमानगढ़ में शुक्रवार रात को प्रशासन और किसानों के बीच बैठक | फोटो: अमरपाल सिंह वर्मा&nbsp;</em></p>
<p><strong>कंपनी के दावों पर भरोसा नहीं</strong><strong>&nbsp;</strong></p>
<p>हालांकि, <span>ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारी लगातार यह दावा करते रहे हैं कि प्लांट में आधुनिक तकनीक</span>, <span>प्रदूषण नियंत्रण उपकरण और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली लागू होगी। कंपनी का कहना है कि इससे किसानों को फसलों और पराली का बेहतर दाम मिलेगा। बड़ी संख्या में लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। लेकिन किसान इन दावों से संतुष्ट नहीं हैं।</span></p>
<p>टिब्बी की निवासी और पूर्व जिला प्रमुख शबनम गोदारा कहती हैं, &ldquo;<span>यह भरोसे का नहीं</span>, <span>भविष्य का सवाल है। हम विकास के नाम पर ऐसा कुछ नहीं होने देंगे</span>, <span>जो हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरा बने।</span>&rdquo; <span>किसान विनोद नेहरा का कहना है कि जहां-जहां एथेनॉल प्रोजेक्ट लगे हैं</span>, <span>वहां जल</span>, <span>जमीन और हवा को नुकसान पहुंचा है। टिब्बी इससे अलग कैसे रहेगा</span>?&nbsp;&nbsp;</p>
<p>फिलहाल, <span>किसानों के विरोध के बाद फैक्ट्री निर्माण पर रोक है। प्रशासन ने किसानों के साथ बैठक कर उनकी आशंकाओं की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय करने की बात कही है। लेकिन किसान अपनी मांग पर अडिग हैं कि फैक्ट्री की मंजूरी पूरी तरह निरस्त की जाए। इसी मांग को लेकर टिब्बी में धरना जारी है। संघर्ष समिति के सदस्य मदन दुर्गेसर कहते हैं</span>, &ldquo;<span>जब तक फैसला वापस नहीं होता</span>, <span>तब तक आंदोलन ही रास्ता है।</span>&rdquo;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में एथेनॉल फैक्ट्री विरोध की जड़ें पंजाब से जुड़ीं, जल संकट और प्रदूषण बना मुद्दा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में फर्टिलाइजर के साथ जबरन उत्पादों की टैगिंग को लेकर कार्रवाई शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-takes-action-against-companies-for-forcibly-tagging-products-with-fertilizers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 12 Dec 2025 16:56:06 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-takes-action-against-companies-for-forcibly-tagging-products-with-fertilizers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="184" data-end="477">हरियाणा सरकार ने किसानों को खाद के साथ जबरदस्ती कीटनाशक थोपने वाली फर्टिलाइजर कंपनियों और डीलरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कृषि विभाग को मिली शिकायतों के बाद कई जिलों में जांच शुरू की गई है और अनियमितताएँ पाए जाने पर लाइसेंस निलंबन, जुर्माना और एफआईआर दर्ज करने जैसी कार्रवाई की जा रही है।</p>
<p data-start="479" data-end="806">जानकारी के अनुसार, कुछ कंपनियां किसानों को यूरिया, डीएपी और अन्य खाद तभी उपलब्ध करा रही थीं जब वे साथ में महंगे कीटनाशक या अन्य इनपुट खरीदें। किसानों ने इसे मनमानी और शोषण बताते हुए विभाग से शिकायत की थी। इसके बाद जिला स्तर पर उर्वरक निरीक्षकों ने आकस्मिक जांच अभियान चलाए, जिनमें कई जगह उत्पादों की जबरन टैगिंग के प्रमाण मिले।</p>
<p data-start="808" data-end="840"><strong data-start="808" data-end="840">चंबल फर्टिलाइजर पर कार्रवाई</strong></p>
<p data-start="842" data-end="1434">उत्पादों की टैगिंग को लेकर चंबल फर्टिलाइजर एंड केमिकल लिमिटेड के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों पर हरियाणा कृषि विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला अंबाला से प्राप्त शिकायत के आधार पर की गई जांच में आरोप सही पाए जाने पर कृषि निदेशक ने कंपनी द्वारा निर्मित/विपणन किए जाने वाले बिना सब्सिडी वाले उत्पाद जैसे मैग्नीशियम सल्फेट, सल्फर 90 प्रतिशत, जिंक सल्फेट, माइकोराइजल बायोफर्टिलाइज़र इत्यादि के भंडारण और बिक्री की स्वीकृति वापस ले ली है। साथ ही, कंपनी द्वारा बेचे जाने वाले कीटनाशकों की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए एक सप्ताह के भीतर बाजार से स्टॉक हटाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।</p>
<p data-start="842" data-end="1434">कृषि विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ खाद निर्माता कंपनियां यूरिया और डीएपी के साथ कीटनाशक दवाइयों आदि की जबरन टैगिंग कर रही हैं और अनियमित तरीके से बिक्री कर रही हैं। सभी खाद निर्माता कंपनियों तथा खुदरा एवं थोक विक्रेताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ किसी भी अन्य कृषि उत्पाद की अवैध और जबरन टैगिंग न करें। आदेशों की अवहेलना पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p data-start="1905" data-end="2311">इस संबंध में कृषि विभाग के निदेशक की ओर से 9 दिसंबर को आदेश जारी किए गए थे। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि खाद जैसे आवश्यक कृषि इनपुट की बिक्री के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग पूरी तरह अवैध है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी डीलर को खाद के साथ कीटनाशक या अन्य उत्पाद जबरन बेचने की अनुमति नहीं है। उल्लंघन करने वालों पर उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) और कीटनाशक अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p data-start="2313" data-end="2491">सरकार ने किसानों से अपील की है कि यदि कहीं भी खाद बिक्री में जबरदस्ती कीटनाशक थोपने जैसी गतिविधि दिखे, तो तुरंत संबंधित कृषि विभाग कार्यालय या टोल-फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं।</p>
<p data-start="2313" data-end="2491"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में फर्टिलाइजर के साथ जबरन उत्पादों की टैगिंग को लेकर कार्रवाई शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में फसल नुकसान की भरपाई के लिए 53,821 किसानों को 116 करोड़ रुपये मुआवजा जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/116-crore-rupees-compensation-released-to-53821-farmers-for-crop-loss-in-haryana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 11 Dec 2025 12:44:19 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/116-crore-rupees-compensation-released-to-53821-farmers-for-crop-loss-in-haryana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अगस्त&ndash;सितंबर माह में हुई भारी बारिश और बाढ़ से हुए फसली नुकसान की भरपाई के लिए 53,821 <span>किसानों को कुल </span>116 <span>करोड़ </span>15 <span>लाख रुपये की मुआवजा राशि जारी की। इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा भी उपस्थित रहे।</span></p>
<p>चंडीगढ़ सिविल सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि जारी की गई मुआवजा राशि में बाजरे के लिए 35 <span>करोड़ </span>29 <span>लाख रुपये</span>, <span>कपास के लिए </span>27 <span>करोड़ </span>43 <span>लाख रुपये</span>, <span>धान के लिए </span>22 <span>करोड़ </span>91 <span>लाख रुपये और ग्वार के लिए </span>14 <span>करोड़ </span>10 <span>लाख रुपये शामिल हैं। इस राशि का भुगतान तुरंत प्रभाव से शुरू कर दिया गया है और अगले एक सप्ताह में संपूर्ण राशि लाभार्थी किसानों के खातों में पहुंच जाएगी।</span></p>
<p>उन्होंने बताया कि गत अगस्त&ndash;सितंबर में भारी बारिश के चलते कई जिलों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए 15 <span>सितंबर तक ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला गया था और किसानों को फसल नुकसान का विवरण दर्ज कराने का आह्वान किया गया था।</span></p>
<p>प्रदेश के तीन जिलों में सर्वाधिक नुकसान दर्ज किया गया। चरखी दादरी के किसानों को 23 <span>करोड़ </span>55 <span>लाख रुपये</span>, <span>हिसार को </span>17 <span>करोड़ </span>82 <span>लाख रुपये और भिवानी को </span>12 <span>करोड़ </span>15 <span>लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है। इससे पहले भी सरकार बाढ़ के कारण पशुधन हानि</span>, <span>मकान क्षति और अन्य उपयोगी वस्तुओं के नुकसान की भरपाई के लिए </span>4 <span>करोड़ </span>72 <span>लाख रुपये जारी कर चुकी है।</span></p>
<p><strong>5 लाख से ज्यादा किसानों ने कराया था पंजीकरण</strong></p>
<p>खरीफ सीजन 2025 <span>की फसलों के प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति पोर्टल पर </span>5,29,199 <span>किसानों ने </span>31 <span>लाख एकड़ क्षेत्र का पंजीकरण कराया। सत्यापन के बाद </span>53,821 <span>किसानों की </span>1,20,380 <span>एकड़ कृषि भूमि प्रभावित पाई गई।</span></p>
<p>मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के साथ खड़ी है और यदि किसान को कोई नुकसान होता है तो सरकार उसकी भरपाई करती है। पिछले 11 <span>वर्षों में फसल नुकसान मुआवजा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से कुल </span>15,448 <span>करोड़ रुपये की सहायता किसानों को दी गई है।</span></p>
<p><strong>कांग्रेस पर हमला</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार किसानों के साथ &ldquo;भद्दा मजाक&rdquo; करती थी। पटवारियों द्वारा ठीक से सत्यापन न किए जाने के कारण किसानों को पूरा मुआवजा नहीं मिलता था। कई किसानों को 2-2 <span>रुपये और </span>5-5 <span>रुपये के चेक दिए जाते थे। कांग्रेस सरकार के </span>10 <span>वर्षों में कुल </span>1,138 <span>करोड़ रुपये का मुआवजा जारी किया गया था।</span></p>
<p><strong>लापरवाही पर कार्रवाई</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन 2025 <span>में फसलों के नुकसान के सत्यापन कार्य में लापरवाही बरतने वाले </span>6 <span>पटवारियों को निलंबित कर दिया गया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि हर अधिकारी जनता के प्रति जवाबदेह है</span>, <span>और आगे भी किसी तरह की कोताही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।</span></p>
<p><strong>बाजरा किसानों को 358 करोड़ रुपये जारी</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए खरीफ सीजन 2021 <span>में बाजरे को भावांतर भरपाई योजना में शामिल किया गया था। खरीफ सीजन </span>2025-26 <span>में बाजरे की खरीद </span>23 <span>सितंबर से आरंभ की गई थी।</span></p>
<p>उन्होंने बताया कि सरकार ने किसानों को 575 <span>रुपये प्रति क्विंटल की दर से बाजारा भावांतर योजना का लाभ देने का निर्णय लिया। इसी तहत आज </span>1 <span>लाख </span>57 <span>हजार किसानों को </span>358 <span>करोड़ </span>62 <span>लाख रुपये की राशि जारी कर दी गई है। इसका भुगतान तुरंत शुरू हो गया है और एक सप्ताह में राशि किसानों के खातों में चली जाएगी।</span></p>
<p>इस सीजन में 6.23 <span>लाख मीट्रिक टन बाजरे की खरीद की गई</span>, <span>और अब तक </span>927 <span>करोड़ रुपये भावांतर के रूप में किसानों को दिए जा चुके हैं। आज जारी राशि के साथ यह आंकड़ा बढ़कर </span>1,285 <span>करोड़ </span>62 <span>लाख रुपये हो गया है।</span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में फसल नुकसान की भरपाई के लिए 53,821 किसानों को 116 करोड़ रुपये मुआवजा जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[लैंड पूलिंग पॉलिसी पर दिल्ली देहात के किसानों की मुहिम तेज, राहुल गांधी जल्द करेंगे दौरा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/delhi-rural-farmers-intensify-campaign-against-land-pooling-policy-rahul-gandhi-expected-to-visit-soon.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 07 Dec 2025 19:27:46 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/delhi-rural-farmers-intensify-campaign-against-land-pooling-policy-rahul-gandhi-expected-to-visit-soon.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>नई दिल्ली से पूजा प्रसाद की रिपोर्ट&nbsp;</strong></em></p>
<p>बारह सालों से परेशान दिल्ली देहात को अब राहुल गांधी का इंतजार है। लैंड पूलिंग पॉलिसी से पीड़ित किसानों ने अब अपनी मुहिम को तेज गति दे दी है। गरीब किसानों की मांगें संसद के शीतकालीन सत्र में गूंज सकती हैं। दिल्ली देहात के किसान प्रतिनिधिमंडल ने ससंद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और लैंड पूलिंग नीति की तथाकथित अवैध शर्तें हटाने की मांग की।&nbsp;</p>
<p>दिल्ली देहात मोर्चा के संस्थापक राजीव यादव ने बताया, &ldquo;राहुल गांधी ने ज्ञापन रिसीव करने के साथ ही खुद हमसे पूछा कि आप हमसे क्या चाहते हैं। तब हमने अपना पक्ष भी रखा और अपनी मांगें उन्हें मौखिक रूप से बताईं। राहुल गांधी ने हमसे स्पष्ट वादा किया है कि मैं दिल्ली देहात आऊंगा।&rdquo;</p>
<p>राजीव यादव ने रूरल वॉयस को बताया, प्रतिनिधिमंडल ने राहुल गांधी से गुजारिश की कि हमारे सदस्यों से मीटिंग की जाए और हमारे मसलों को वह क्षेत्र में पहुंचकर अपनी आंख से खुद देखें और समझें। हमने मांग की है कि एलओपी के तौर पर दिल्ली देहात के लैंड पूलिंग से जुड़े इस मसले को संसद में उठाएं। किसानों का कहना है कि यह लड़ाई अब केवल जमीन की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/image_750x_6935955a7b4c6.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>क्या हैं दिल्ली देहात की मांगें</strong></p>
<p>दरअसल, दिल्ली देहात की मांग है कि लैंड पूलिंग की चारों किसान-विरोधी शर्तें हटाई जाएं। साथ ही, मास्टर प्लान 2041 में स्मार्ट विलेज और प्लॉट योजना लागू की जाए। जमीन के मालिकाना हक, कलेक्टर रेट वृद्धि और देहात में कैंपस&ndash;स्टेडियम की मांग भी इस ज्ञापन के जरिए की गई है। देहात डेलिगेशन का आरोप है कि मौजूदा सरकार ने संविधान और कानून की अनदेखी करते हुए ऐसी नीतियां लागू की हैं जिनसे हजारों किसान अपने मूल अधिकारों और जमीन से वंचित हो रहे हैं।</p>
<p>प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से लैंड पूलिंग पॉलिसी में शामिल चार कथित रूप से असंवैधानिक और किसान-विरोधी शर्तों को तुरंत वापस लेने की मांग रखी है। ये शर्तें हैं- 5 एकड़ की अनिवार्यता, लगभग 20 करोड़ रुपये तक का बाहरी विकास शुल्क, 40% जमीन मुफ्त देने की मजबूरी, और बिल्डरों के साथ समूह बनाने की बाध्यता। किसानों का कहना है कि ये आजाद भारत के इतिहास का सबसे बड़ा धोखा है।</p>
<p><strong>&ldquo;सबको प्लॉट &ndash; स्मार्ट विलेज&rdquo; पर जोर</strong></p>
<p>प्रतिनिधिमंडल की मांग है कि दिल्ली मास्टर प्लान 2041 में नए &ldquo;स्मार्ट विलेज&rdquo; बसाए जाने चाहिए। 36 बिरादरियों को उनकी ही जमीन से प्लॉट आवंटित करने की &ldquo;सबको प्लॉट &ndash; स्मार्ट विलेज&rdquo; योजना लागू करें। साथ ही, 17 साल पुराने कलेक्टर रेट को 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक संशोधित करने और 74/4 जमीन वाले किसानों को खेत और प्लॉट का मालिकाना हक लौटाने की मांग रखी गई है।</p>
<p>किसानों ने खून के रिश्तों वाली गिफ्ट डीड पर स्टांप शुल्क समाप्त करने, नजफगढ़ में वेस्ट कैंपस, कंझावला&ndash;बवाना क्षेत्र में नॉर्थ-वेस्ट कैंपस और दिल्ली देहात में इंटरनेशनल स्टैंडर्ड का स्पोर्ट्स स्टेडियम स्थापित करने की भी मांग रखी है। उनके अनुसार देहात को शिक्षा, खेल से जोड़ना सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है। राजीव यादव ने कहा, &ldquo;दिल्ली देहात बारह वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा में खड़ा है। हमारी जमीन, हमारे अधिकार और हमारे भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। यह संघर्ष सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि हमारे सम्मान और अस्तित्व का है।&rdquo;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ लैंड पूलिंग पॉलिसी पर दिल्ली देहात के किसानों की मुहिम तेज, राहुल गांधी जल्द करेंगे दौरा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में गन्ने का भाव 405 रुपये हुआ, सीएम धामी ने 30 रुपये बढ़ोतरी का ऐलान किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-price-fixed-at-rs-405-in-uttarakhand-rs-30-hike-announced.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 01 Dec 2025 13:48:21 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-price-fixed-at-rs-405-in-uttarakhand-rs-30-hike-announced.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड सरकार ने पेराई सत्र 2025&ndash;26 &nbsp;के लिए गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) घोषित कर दिया है। सरकार ने गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि नए पेराई सत्र के लिए गन्ना मूल्य में वृद्धि करते हुए अगैती प्रजाति का मूल्य 405 प्रति प्रति क्विंटल तथा सामान्य प्रजाति का मूल्य 395 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।</p>
<p>मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को शीर्ष प्राथमिकता देती है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2024&ndash;25 की तुलना में इस वर्ष गन्ना मूल्य में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। पिछले पेराई सत्र में अगैती प्रजाति का मूल्य 375 रुपये प्रति क्विंटल तथा सामान्य प्रजाति का मूल्य 365 रुपये प्रति क्विंटल था। इस प्रकार गन्ने मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।</p>
<p>गौरतलब है कि यूपी सरकार ने भी इस साल गन्ना मूल्य 30 रुपये बढ़ाकर 400 रुपये कर दिया है। इस प्रकार उत्तराखंड में किसानों को गन्ने का भाव उत्तर प्रदेश से 5 रुपये अधिक मिलेगा। आमतौर पर उत्तराखंड में यूपी की तर्ज पर ही गन्ना मूल्य का निर्धारण होता है। इस साल पंजाब ने गन्ने का भाव 416&nbsp; रुपये&nbsp; तथा हरियाणा ने 415 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इस प्रकार उत्तराखंड देश में सर्वाधिक गन्ना मूल्य वाले टॉप तीन राज्य में शुमार हो गया है।&nbsp;</p>
<p>उत्तराखंड में पेराई सीजन शुरू होने के बाद भी गन्ना मूल्य का ऐलान नहीं हुआ था। दाम निर्धारण में देरी को लेकर विपक्ष राज्य सरकार पर हमलावर था। क्योंकि लेकिन गन्ना मूल्य 30 रुपये बढ़ाकर मुख्यमंत्री धामी ने किसानों को साधने का प्रयास किया है।&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना और उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर दिलाना है। उन्होंने बताया कि मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया में सहकारी, सार्वजनिक एवं निजी चीनी मिलों, गन्ना विभाग, किसान संगठनों तथा संबंधित हितधारकों के साथ विस्तृत विमर्श किया गया। साथ ही केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित एफआरपी, उत्तर प्रदेश में प्रभावी गन्ना मूल्य तथा राज्य की परिस्थितियों का विश्लेषण कर संतुलित निर्णय लिया गया है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि क्रय केंद्रों पर किसी प्रकार की असुविधा न हो और भुगतान बिना देरी के सुनिश्चित किया जाए।</p>
<p><br /><br /></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/12/img_692d50a4dc1257-94574233-77170239.gif' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में गन्ने का भाव 405 रुपये हुआ, सीएम धामी ने 30 रुपये बढ़ोतरी का ऐलान किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में मनरेगा की गड़बड़ियों की होगी जांच, केंद्र से भेजी जाएगी टीम: शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/mnrega-irregularities-in-punjab-will-be-investigated-a-team-will-be-sent-from-the-centre-shivraj-singh-chouhan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 27 Nov 2025 21:13:37 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/mnrega-irregularities-in-punjab-will-be-investigated-a-team-will-be-sent-from-the-centre-shivraj-singh-chouhan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को पंजाब प्रवास के दौरान मनरेगा सहित ग्रामीण विकास मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। जालंधर में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में गड़बड़ियों और अनियमितताओं की गंभीर शिकायतें मिली हैं। इनकी जांच के लिए केंद्र सरकार जल्द ही एक टीम पंजाब भेजेगी।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मनरेगा गरीब और ग्रामीण मजदूरों की आजीविका से जुड़ी योजना है। इसमें एक रुपये की भी हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार पंजाब के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और केंद्र की सभी योजनाओं का लाभ त्वरित रूप से पंजाब को दिया जा रहा है।</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पंजाब में मनरेगा के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि मनरेगा की धनराशि ठेकेदारों या बिचौलियों के लिए नहीं, बल्कि गरीब मजदूरों को रोजगार देने के लिए है, इसलिए ऐसे सभी मामलों की गहन जांच कर दोषियों को दंडित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि जिन जिलों से शिकायतें आई हैं, वहां तत्काल जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए, जबकि केंद्र की टीम भी मौके पर जाकर जांच-पड़ताल करेगी।</p>
<p><strong>मनरेगा में 150 </strong><strong>दिन रोजगार की मंजूरी</strong></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सामान्यत: मनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार दिया जाता है, लेकिन पंजाब में बाढ़ के मद्देनज़र रोजगार के दिन बढ़ाकर 150 दिन करने का आदेश जारी किया गया है, जिससे ग्रामीण मजदूरों को अतिरिक्त रोजगार मिल सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस पहल को स्वीकार किया है और अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जरूरतमंद मजदूरों को अधिक दिनों का रोजगार समय पर प्राप्त हो।</p>
<p><strong>मुफ्त बीज वितरण के लिए राशि स्वीकृत</strong></p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पंजाब के किसानों को बाढ़ से हुए फसल नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को कनक के बीज मुफ्त वितरित करने के लिए 74 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जबकि बरसीम के बीज के लिए भी अलग बजट स्वीकृत किया गया है, ताकि लगभग 12,500 क्विंटल बीज का वितरण किया जा सके।</p>
<p><strong>पीएम-आवास योजना की समीक्षा</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बाढ़ प्रभावित परिवारों के मकानों की समीक्षा के बाद शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पंजाब सरकार ने पहले 14 हजार और बाद में 36 हजार मकानों की सूची केंद्र को भेजी थी। इनमें से लगभग 30 हजार आवासों को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि करीब 6 हजार स्वीकृतियां लंबित हैं।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने यह मुद्दा भी उठाया कि पिछले वर्षों में पंजाब के एक लाख से अधिक गरीब परिवारों के लिए केंद्र सरकार द्वारा आवास स्वीकृत किए गए थे, लेकिन उनमें से केवल लगभग 76 हजार की ही स्वीकृतियां राज्य सरकार जारी कर पाई है। उन्होंने राज्य सरकार से शेष पात्र लाभार्थियों को तुरंत स्वीकृति देने की अपील की, ताकि कोई भी पात्र परिवार पक्का घर पाने से वंचित न रह जाए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में मनरेगा की गड़बड़ियों की होगी जांच, केंद्र से भेजी जाएगी टीम: शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में गेहूं पर केवल 15 रुपये बोनस मिलेगा, 2600 रुपये प्रति क्विंटल पर होगी खरीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/in-madhya-pradesh-only-rs-15-bonus-will-be-given-on-wheat-procurement-will-be-at-rs-2600-per-quintal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 24 Nov 2025 17:04:03 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/in-madhya-pradesh-only-rs-15-bonus-will-be-given-on-wheat-procurement-will-be-at-rs-2600-per-quintal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद को लेकर बनी संशय की स्थिति साफ हो गई है। राज्य &nbsp;सरकार ने आगामी खरीद सीजन में 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदने का ऐलान किया है। राज्य सरकार ने पिछले साल भी इसी दर पर गेहूं खरीदा था।</p>
<p>मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यह ऐलान सागर जिले के बंडा में आयोजित एक जनसभा में किया। केंद्र सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए गेहूं का एमएसपी 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इस तरह किसानों को केवल 15 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस राज्य सरकार की ओर से मिलेगा।</p>
<p>गौरतलब है कि पिछले वर्ष गेहूं का एमएसपी 2425 रुपये प्रति क्विंटल था और राज्य सरकार ने 175 रुपये बोनस देकर किसानों को बड़ी राहत दी थी। हालांकि, विधानसभा चुनाव में भाजपा ने किसानों को गेहूं का एमएसपी 2700 रुपये देने का वादा किया था। लेकिन इस बार मध्य प्रदेश सरकार ने 175 रुपये की बजाय केवल 15 रुपये बोनस देने का निर्णय लिया है। इसके पीछे राज्य की वित्तीय स्थिति को वजह माना जा रहा है।</p>
<p>मध्यप्रदेश में गेहूं खरीद को लेकर संशय की स्थिति पैदा हो गई थी। राज्य सरकार ने 72 हजार करोड़ रुपए के भारी कर्ज बोझ का हवाला देते हुए केंद्र से विकेंद्रीकृत खरीद की बजाय केंद्रीयकृत खरीद करने का अनुरोध किया था। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रहलाद जोशी को पत्र भी भेजा था। इस पर केंद्र सरकार की तरह से अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। इस बीच, मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि खरीद राज्य स्तर पर ही होगी और किसानों को किसी तरह का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार किसानों को प्रोत्साहन राशि देना जारी रखेगी और खरीद प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा नहीं आने देगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा था कि सोयाबीन के भावांतर और धान के बोनस के लिए धन कहां से आएगा, लेकिन सरकार के पास धन की कमी नहीं है और किसानों को एमएसपी एवं प्रोत्साहन राशि का पूरा लाभ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भावांतर के माध्यम सोयाबीन पर 5328 प्रति क्विंटल भावांतर की राशि किसानों को दी जा रही है। गेहूं इसी साल से 2600 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी पर खरीदेंगे।</p>
<p>मध्य प्रदेश में पिछले सीजन में 44 लाख टन गेहूं खरीदा गया था और लगभग 9969 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि का भुगतान किसानों को किया गया था।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_69244280946a8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में गेहूं पर केवल 15 रुपये बोनस मिलेगा, 2600 रुपये प्रति क्विंटल पर होगी खरीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नीतीश कुमार 10वीं बार बने बिहार के मुख्यमंत्री, दो डिप्टी सीएम व 24 मंत्रियों ने शपथ ली]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/nitish-kumar-becomes-bihar-chief-minister-for-the-10th-time-two-deputy-cms-and-24-ministers-take-oath.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 20 Nov 2025 20:56:20 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/nitish-kumar-becomes-bihar-chief-minister-for-the-10th-time-two-deputy-cms-and-24-ministers-take-oath.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बिहार के राजनीति इतिहास में एक और अहम अध्याय जुड़ गया है। नीतीश कुमार ने गुरुवार को पटना के गांधी मैदान में हुए भव्य समारोह में 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे।</p>
<p>शपथ के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंच पर मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जाकर मिले और उनका अभिवादन किया। इसके बाद नए उपमुख्यमंत्रियों सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा को शपथ दिलाई गई।</p>
<p>नए मंत्रिमंडल में भाजपा के 14<span>, </span>जदयू के 9, लोजपा (रामविलास) के 2, हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के एक-एक मंत्री को जगह मिली है। मंत्रियों के विभागों की घोषणा बाद में की जाएगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को <span>10</span>वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई दी। पीएम मोदी ने नीतीश कुमार की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे एक कुशल और अनुभवी प्रशासक हैं। राज्य में सुशासन का उनका शानदार ट्रैक रिकॉर्ड रहा है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x_691f3273be022.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>मंत्रिपरिषद में शामिल नए मंत्री</strong></p>
<p>शपथ लेने वाले मंत्रियों में विजय कुमार चौधरी, विजेंद्र कुमार यादव, श्रवण कुमार, मंगल पांडे, दिलीप जायसवाल, अशोक चौधरी, लेशी सिंह, मदन सहनी, नितिन नवीन, रामकृपाल यादव, संतोष कुमार सुमन, सुनील कुमार, मोहम्मद जमा खान, संजय सिंह टाइगर, अरुण शंकर प्रसाद, सुरेंद्र मेहता, नारायण प्रसाद, रमा निषाद, लखेंद्र कुमार रौशन, श्रेयसी सिंह, प्रमोद कुमार, संजय कुमार, संजय कुमार सिंह और दीपक प्रकाश शामिल रहे।<br />राज्यपाल ने पांच से छह सदस्यों के समूह में मंत्रियों को मंच पर बुलाकर उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।</p>
<p><strong>शपथ ग्रहण में राजनीतिक दिग्गजों की मौजूदगी</strong></p>
<p>समारोह में कई राज्यों के मुख्यमंत्री और शीर्ष नेता शामिल हुए। इनमें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, नागालैंड के नेफियू रियो, राजस्थान के भजनलाल शर्मा, मध्य प्रदेश के मोहन यादव, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी, दिल्ली की रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी शामिल रहे।<br />एनडीए शासित राज्यों के उपमुख्यमंत्रियों और विभिन्न घटक दलों के प्रमुख नेताओं ने भी शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया।</p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नीतीश कुमार 10वीं बार बने बिहार के मुख्यमंत्री, दो डिप्टी सीएम व 24 मंत्रियों ने शपथ ली ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_691f32af3a4ae.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में समूह प्रदर्शन, प्रमाणित बीज वितरण  के लिए अनुदान, इच्छुक किसान कर सकते हैं आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/barley-and-wheat-demonstration-plants-in-haryana-subsidy-will-be-given-for-seed-distribution-interested-farmers-can-apply.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 19 Nov 2025 20:36:23 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/barley-and-wheat-demonstration-plants-in-haryana-subsidy-will-be-given-for-seed-distribution-interested-farmers-can-apply.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा सरकार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (मोटे अनाज) स्कीम के अन्तर्गत राज्य के 7 जिलों &nbsp;पंचकूला, रोहतक, भिवानी, सिरसा, हिसार, झज्जर और चरखी दादरी जिलों में जौ अनाज के बीज वितरण व प्रदर्शन, पौध संरक्षण एवं पोषक तत्व प्रबंधन के लिए किसानों को अनुदान दिया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>अनुदान लेने के इच्छुक किसान कृषि तथा किसान कल्याण विभाग हरियाणा की वेबसाइट&nbsp;&nbsp;<a href="https://agriharyana.gov.in/">https://agriharyana.gov.in/</a> पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 15 दिसंबर है। समूह प्रदर्शन के लिए प्रति एकड़ 3000 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। एक किसान अधिकतम <span>5 </span>एकड़ का लाभ ले सकता है।</p>
<p>हरियाणा कृषि तथा किसान कल्याण विभाग के प्रवक्ता ने इस बारे में&nbsp; जानकारी देते हुए बताया कि किसान अपना आवेदन अपनी फसल की बिजाई के समय अनुसार कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के कृषि विकास अधिकारी खण्ड कृषि अधिकारी/उपमण्डल कृषि अधिकारी/उप कृषि निदेशक के कार्यालय से सम्पर्क कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>इसी प्रकार ,राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (गेहूं) स्कीम के अन्तर्गत हरियाणा के 8 जिला अम्बाला, भिवानी, हिसार, झज्जर, मेवात, पलवल, चरखी दादरी तथा रोहतक में गेहूं के समूह प्रदर्शन, बीज वितरण, पौध एवं मृदा संरक्षण प्रबंधन पर किसानों को अनुदान दिया जाना है। यह अनुदान लेने के इच्छुक किसान भी कृषि तथा किसान कल्याण विभाग हरियाणा की वेबसाईट <a href="https://agriharyana.gov.in/">https://agriharyana.gov.in/</a>&nbsp;पर आवेदन कर सकते हैं। गेहूं के समूह प्रदर्शन प्लाट के लिए 3600 रुपये प्रति एकड़ की दर से अनुदान दिया जाएगा। एक किसान अधिकतम <span>5 </span>एकड का लाभ ले सकता है।</p>
<p><span>राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत&nbsp;</span>राज्य में दलहन के लिए भी इस प्रकार की योजना चलाई जा रही है।&nbsp;</p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_691ddce0b42ff.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में समूह प्रदर्शन, प्रमाणित बीज वितरण  के लिए अनुदान, इच्छुक किसान कर सकते हैं आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_691ddce0b42ff.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[झारखंड सरकार का बड़ा फैसला: धान पर 100 रुपये बोनस, एकमुश्त होगा भुगतान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/jharkhand-government-big-decision-rs-100-bonus-on-paddy-one-time-payment.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 18 Nov 2025 14:10:14 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/jharkhand-government-big-decision-rs-100-bonus-on-paddy-one-time-payment.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>झारखंड सरकार ने राज्य के किसानों को राहत देते हुए धान पर 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का ऐलान किया है। यह बोनस केंद्र द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अतिरिक्त होगा। झारखंड की रजत जयंती के अवसर पर यह घोषणा करते हुए राज्य के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री <strong>इरफान अंसारी</strong> ने कहा कि धान की खरीद प्रक्रिया 15 दिसंबर तक शुरू कर दी जाएगी और किसानों को धान खरीद का एकमुश्त भुगतान किया जाएगा।</p>
<p>मंत्री ने कहा कि धान पर 100 रुपये अतिरिक्त बोनस देने के प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में धान की कटाई अगले 10&ndash;15 दिनों में पूरी हो जाएगी। इसे ध्यान में रखते हुए, सरकारी खरीद 15 दिसंबर तक शुरू कर दी जाएगी, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने में कोई परेशानी न हो। दूसरे राज्यों के बिचौलियों को रोकने के लिए विशेष निगरानी तंत्र को भी सक्रिय कर दिया है।</p>
<p>अंसारी का कहना है कि यह फैसला किसानों को बिचौलियों के चंगुल से बचाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे किसानों को फसल का बेहतर दाम मिलेगा और उन्हें पैसा लेने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।</p>
<p>केंद्र ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सामान्य धान का एमएसपी 2,369 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का एमएसपी रुपये 2,389 प्रति क्विंटल तय किया है। झारखंड के किसानों को इनमें 100 रुपये जोड़कर धान का भुगतान किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>राज्य में पहली बार किसानों को एकमुश्त भुगतान मिलेगा। अब तक यह भुगतान दो किश्तों में होता था, और दूसरी किश्त मिलने में काफी समय लग जाता था। मजबूरी में किसान धान बिचौलियों को बेच देते थे।</p>
<p>झारखंड सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब मोंथा चक्रवात के कारण कई जिलों में फसलों को भारी नुकसान हुआ है। धान पर बोनस और खरीद शुरू करने की घोषणा किसानों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। राज्य सरकार का कहना है कि मौजूदा संकट से उबारने के लिए किसानों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ झारखंड सरकार का बड़ा फैसला: धान पर 100 रुपये बोनस, एकमुश्त होगा भुगतान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हुड्डा के नेतृत्व में राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, किसानों को प्रति एकड़ 60 हजार रुपये मुआवजे और धान खरीद घोटाले की जांच की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/hooda-submitted-a-memorandum-to-the-governor-demanding-compensation-of-rs-60000-per-acre-for-farmers-and-an-investigation-into-the-paddy-procurement-scam.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 13 Nov 2025 13:47:27 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/hooda-submitted-a-memorandum-to-the-governor-demanding-compensation-of-rs-60000-per-acre-for-farmers-and-an-investigation-into-the-paddy-procurement-scam.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और कांग्रेस विधायक दल के साथ मंगलवार को राज्यपाल से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें भारी बारिश से किसानों को हुए नुकसान के मुआवजे, धान की फसल खरीद में घोटाले, बढ़ते अपराध और राशन कार्ड घोटाले की जांच को मांग उठाई।&nbsp;</p>
<p>ज्ञापन में भारी बारिश से फसलों को हुए नुकसान का उल्लेख करते हुए सरकार से विशेष गिरदावरी करवाकर किसानों को 50 से 60 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा देने की मांग की गई है। कांग्रेस ने कहा कि धान, कपास और खरीफ फसलों के खेत जलमग्न हैं, लेकिन सरकार न तो सही सर्वे करवा रही है और न ही किसानों के लिए ठोस राहत की घोषणा कर रही है।&nbsp;</p>
<p>भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 24 फसलों पर MSP देने की बात धरातल पर बिल्कुल भी सही नहीं है। मंडियों में किसान अपनी फसलें MSP से 500&ndash;1000 रुपये प्रति क्विंटल कम दामों पर बेचने को मजबूर हैं। धान की सरकारी खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और घोटाले की शिकायतें सामने आई हैं। हुड्डा ने कहा कि किसानों को नमी के बहाने लूटा जा रहा है, जबकि कई मंडियों में फर्जी खरीद-फरोख्त के मामले सामने आए हैं। उन्होंने राज्य में खाद की कमी और कालाबाजारी पर भी चिंता जताई।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x_6915db6395810.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>ज्ञापन में धान खरीद में अनियमितताओं और घोटाले के आरोप लगाते हुए मांग की गई है कि इस पूरे मामले की जांच हरियाणा हाईकोर्ट के सिटिंग जज से करवाई जाए।</p>
<p>कांग्रेस ने बढ़ते अपराधों पर भी राज्यपाल का ध्यान आकर्षित किया। ज्ञापन में कहा कि हरियाणा में हत्या, लूट, बलात्कार, नशा और फिरौती के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। न्याय न मिलने की उम्मीद के कारण खुद पुलिस अधिकारियों को भी आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ रहा है। कांग्रेस ने मांग उठाई कि ADGP और ASI की आत्महत्या के मामलों की CBI जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए। ताकि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिले।</p>
<p>इसके अलावा, कांग्रेस ने सरकार पर राशन कार्ड घोटाले का आरोप लगाया कि चुनाव से पहले लाखों लोगों को बीपीएल घोषित कर मुफ्त राशन का लालच देकर वोट लिए गए, लेकिन चुनाव के बाद उन्हीं के कार्ड काट दिए गए। पार्टी ने मांग की कि गलत तरीके से बनाए गए कार्डों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।</p>
<p>हुड्डा ने कहा कि यह सरकार किसानों, गरीबों और आम जनता के प्रति जवाबदेह नहीं है और अब राज्यपाल को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हरियाणा में संविधान के अनुरूप सरकार चले तथा जनता को दमन, भ्रष्टाचार और असुरक्षा से मुक्ति मिले।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6915dbb035318.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हुड्डा के नेतृत्व में राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, किसानों को प्रति एकड़ 60 हजार रुपये मुआवजे और धान खरीद घोटाले की जांच की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पराली बनी हरियाणा की नई इंडस्ट्री, देश के लिए मिसाल: श्याम सिंह राणा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/stubble-burning-has-become-haryanas-new-industry-setting-an-example-for-the-country-shyam-singh-rana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 10 Nov 2025 20:55:08 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/stubble-burning-has-become-haryanas-new-industry-setting-an-example-for-the-country-shyam-singh-rana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="171" data-end="393">हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने राज्य में पराली प्रबंधन में हुई प्रगति की सराहना करते हुए इसे &ldquo;नई इंडस्ट्री&rdquo; करार दिया, जिसने किसानों की जिंदगी बदल दी है और टिकाऊ कृषि को नई दिशा दी है।</p>
<p data-start="395" data-end="735">सोमवार को मीडिया से बातचीत में राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा ने पराली जलाने की समस्या को मुनाफे के अवसर में बदलकर पूरे देश के सामने मिसाल पेश की है। उन्होंने कहा, &ldquo;पराली को धुएं नहीं, धन के रूप में देखें। पराली प्रबंधन अब एक नई इंडस्ट्री बन चुका है। किसान अब फसल अवशेष जलाने की बजाय उससे कमाई कर रहे हैं।&rdquo;</p>
<p data-start="737" data-end="1027">हरियाणा के किसान पराली का उपयोग बायोफ्यूल संयंत्रों, पशु चारे, कम्पोस्ट और पेपर निर्माण में कर रहे हैं। कभी प्रदूषण का कारण मानी जाने वाली पराली अब किसानों के लिए आय का स्थायी स्रोत बन गई है। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय जनजागरूकता अभियानों, प्रोत्साहन योजनाओं और नई तकनीक को दिया।</p>
<p data-start="1029" data-end="1353">कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार ने पहले चरण में 75,000 एकड़ भूमि के लिए प्रति एकड़ एक पैकेट मुफ्त डिकंपोजर वेटेबल पाउडर वितरित किया है। यह डिकंपोजर फसल अवशेष को पोषक तत्वों से भरपूर खाद में बदल देता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, फफूंदीजनित रोग घटते हैं और रासायनिक खादों के उपयोग में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आती है।</p>
<p data-start="1355" data-end="1386"><strong data-start="1355" data-end="1386">पराली प्रबंधन के लिए सहायता</strong></p>
<p data-start="1388" data-end="1702">सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, हरियाणा में किसानों को सब्सिडी पर 1,882 हैप्पी सीडर और सुपर सीडर मशीनें दी गई हैं, जिनकी मदद से किसान बिना पराली हटाए सीधे गेहूं की बुवाई कर रहे हैं। कई प्रगतिशील किसानों ने प्रति एकड़ 3 से 5 क्विंटल तक गेहूं की पैदावार में वृद्धि दर्ज की है और यूरिया पर काफी बचत हुई है।</p>
<p data-start="1704" data-end="1928">पराली न जलाने वाले किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार प्रति एकड़ Rs 1,200 की सहायता राशि 1.87 लाख किसानों को दे रही है, जिससे 16.31 लाख एकड़ भूमि कवर हो रही है। सरकार भविष्य में इस राशि को और बढ़ाने की योजना बना रही है।</p>
<p data-start="1930" data-end="2164">विपक्ष द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए राणा ने दावा किया कि सैनी सरकार की एमएसपी नीति अब देश के लिए एक मॉडल बन चुकी है। इस खरीफ सीजन में अब तक करीब 60 लाख टन धान की खरीद एमएसपी पर की जा चुकी है।</p>
<p data-start="2166" data-end="2206"><strong data-start="2166" data-end="2206">उर्वरक की कालाबाजारी रोकने के प्रयास</strong></p>
<p data-start="2208" data-end="2651">हरियाणा सरकार ने उर्वरक की कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए राज्य में उर्वरक वितरण को &lsquo;मेरी फसल मेरा ब्यौरा (एमएफएमबी)&rsquo; पोर्टल से जोड़ने का ऐलान किया। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि अब हर उर्वरक का बैग सीधे किसान को उसकी फसल के अनुसार मिलेगा। इस पारदर्शिता से न तो उर्वरक की हेरा-फेरी होगी और न ही जमाखोरी। उन्होंने आश्वासन दिया कि हरियाणा में पर्याप्त उर्वरक स्टॉक मौजूद है और राज्य में कोई भी खेत खाद की कमी के कारण खाली नहीं रहेगा।</p>
<p data-start="2653" data-end="2838">सरकार ने उर्वरक की कालाबाजारी रोकने के लिए छापेमारी और निगरानी अभियान शुरू किए हैं, साथ ही किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि रासायनिक निर्भरता घटाई जा सके।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पराली बनी हरियाणा की नई इंडस्ट्री, देश के लिए मिसाल: श्याम सिंह राणा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बिजनौर में नकली खाद का बड़ा भंडाफोड़, 450 कट्टे जब्त, नामी कंपनियों की पैकिंग में भरी जा रही थी फर्जी खाद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/major-fake-fertilizer-bust-in-bijnor-450-bags-seized-fake-fertilizer-was-being-packed-in-packaging-of-renowned-companies.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 08 Nov 2025 14:50:20 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/major-fake-fertilizer-bust-in-bijnor-450-bags-seized-fake-fertilizer-was-being-packed-in-packaging-of-renowned-companies.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में नकली खाद के एक अवैध कारोबार का भंडाफोड़ हुआ है। प्रशासन की छापेमारी में खाद के 450<span>&nbsp;कट्टे बरामद किए गए हैं</span>, <span>जिन्हें नामी कंपनियों की पैकिंग में भरकर बेचने की तैयारी की जा रही थी। </span></p>
<p>बिजनौर की रिंग रोड पर स्थित कृष्णापुरम कॉलोनी के एक मकान पर यह कार्रवाई की गई। उप जिलाधिकारी सदर <strong>रितु चौधरी</strong> और उप कृषि निदेशक <strong>घनश्याम वर्मा </strong>के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर छापेमारी की। <span>आरोप है कि मोहित व सोहित पुत्र राकेश कुमार निवासी आदमपुर द्वारा कई अन्य लोगों के साथ मिलकर नकली खाद का कारोबार चलाया जा रहा था।&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p>एसडीएम सदर रितु चौधरी ने बताया कि उन्हें एक मकान में फर्जी खाद लाकर बड़ी कंपनियों के नाम पर सप्लाई किए जाने की शिकायत मिली थी। सूचना के आधार पर छापा मारा गया। बरामद खाद के सैंपल लिए गए हैं, <span>जिन्हें अग्रिम कार्रवाई के लिए जांच हेतु भेजा जा रहा है। अधिकारियों ने तुरंत मकान को सील कर दिया और मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी। मौके से नकली खाद के 450 कट्टे जब्त किए गए हैं।&nbsp;</span></p>
<p>फर्जी खाद का मामला सामने आने के बाद जिले में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि यह नकली खाद कहां से आ रही थी और इसकी सप्लाई कहां-कहां हो रही थी। साथ ही, <span>इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी की इसमें मिलीभगत थी।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x_690f0b45c93ac.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>किसान नेता ने कृषि विभाग पर उठाए सवाल</strong></p>
<p>इस भंडाफोड़ के बाद भाकियू (अराजनैतिक) के युवा प्रदेश अध्यक्ष <strong>चौधरी दिगंबर सिंह</strong> ने गंभीर आरोप लगाते हुए कृषि विभाग को कटघरे में खड़ा किया है। चौधरी दिगंबर सिंह ने कहा कि नकली खाद का यह धंधा कृषि विभाग की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और अवैध कारोबार को संरक्षण देने वाले सभी सरकारी अधिकारियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। इस मामले पर उन्होंने जिला कृषि अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाया।&nbsp;</p>
<p>चौधरी दिगंबर सिंह ने कहा, "<span>यह पहली बार नहीं है जब नकली खाद का मामला सामने आया है। इससे पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं</span>, <span>लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ऐसा लगता है कि इन माफियाओं को विभागीय संरक्षण प्राप्त है।"</span></p>
<p><strong>किसानों के साथ बड़ी धोखाधड़ी </strong></p>
<p>नकली खाद से किसानों को दोहरा नुकसान पहुंचता है। उनका पैसा भी खर्च होता है लेकिन असली खाद की जगह नकली खाद डालने से फसलों को पोषण नहीं मिल पाता और उत्पादन गिर जाता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है। पूरे देश में नकली खाद एक बड़ी समस्या बन चुका है।&nbsp;</p>
<p>प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पूरी तरह प्रमाणित व अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद खरीदें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल विभाग को दें।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बिजनौर में नकली खाद का बड़ा भंडाफोड़, 450 कट्टे जब्त, नामी कंपनियों की पैकिंग में भरी जा रही थी फर्जी खाद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_690f0582a6ad3.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गुजरात सरकार ने बारिश से प्रभावित किसानों के लिए 10,000 करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/gujarat-government-announces-rs-10000-crore-relief-package-for-farmers-affected-by-unseasonal-rains.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 08 Nov 2025 13:19:58 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/gujarat-government-announces-rs-10000-crore-relief-package-for-farmers-affected-by-unseasonal-rains.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गुजरात सरकार ने बेमौसम बारिश से फसलों को हुए नुकसान से प्रभावित किसानों की मदद के लिए 10,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की है। पिछले कुछ हफ्तों में हुई भारी बारिश से राज्य के सभी 33 जिलों में बड़े पैमाने पर फसलें खराब हुई हैं। सरकारी सर्वे में प्रदेश के 251 तालुका में 16,500 गांवों के 44 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसल नुकसान का अनुमान है।</p>
<p>राहत पैकेज के तहत प्रत्येक प्रभावित किसान को प्रति हेक्टेयर 22,000 <span>रुपये</span> का मुआवजा दिया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 2 हेक्टेयर (यानी अधिकतम 44,000 <span>रुपये) तय की गई है। यह मुआवजा सिंचित और असिंचित दोनों प्रकार की फसलों पर लागू होगा</span>, जिसमें अनाज, दालें, तिलहन और कपास शामिल हैं। फसल नुकसान में भिन्नता के बावजूद राज्य सरकार ने सभी प्रभावित किसानों के लिए समान पैकेज लागू करने का फैसला किया है। इसे गुजरात में फसल नुकसान के लिए घोषित अब तक का सबसे बड़ा पैकेज बताया जा रहा है।</p>
<p>राहत पैकेज की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री <strong>भूपेंद्र पटेल</strong> ने कहा कि हाल के हफ्तों में राज्य के विभिन्न जिलों में भारी और असमय वर्षा से फसलें चौपट हो गई हैं। राज्यभर में फसलों को हुए नुकसान को ध्यान में रखते हुए किसानों के लिए लगभग 10,000 करोड़ रुपये का राहत पैकेज घोषित किया जा रहा है। राज्य सरकार किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>सरकार ने नुकसान के आकलन के लिए प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे करवाया है और जिन किसानों का नाम प्रारंभिक सूची में नहीं आया है, उन्हें भी पात्र माना जाएगा। यह मुआवजा सीधे प्रभावित किसानों के बैंक खातों में वितरित किया जाएगा।</p>
<p><strong>15 हजार करोड़ की फसल खरीद </strong></p>
<p>राज्य सरकार ने यह भी घोषणा की है कि 9 नवंबर से प्रभावित फसलों की लगभग 15,000 करोड़ रुपये की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर शुरू की जाएगी, जिससे किसानों की आय को स्थिर करने में मदद मिलेगी।&nbsp;सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों और कृषि अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे नुकसान के आकलन की प्रक्रिया में तेजी लाएं ताकि किसी भी पात्र किसान को इस राहत पैकेज से वंचित न होना पड़े। इस राहत पैकेज से मुख्यतः कपास, <span>मूंगफली</span>, <span>बाजरा</span>, <span>दलहन और धान जैसी फसलों के किसानों को मदद मिलेगी। </span></p>
<p><strong>कांग्रेस की किसान आक्रोश यात्रा </strong></p>
<p>किसान संगठनों और विपक्षी दलों ने इस घोषणा का स्वागत तो किया है, लेकिन यह भी कहा कि किसानों का नुकसान घोषित मुआवजे से अधिक हो सकता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष <strong>अमित चावड़ा</strong> ने किसानों के लिए ऋण माफी की मांग की है। कांग्रेस ने 6 नवंबर को सोमनाथ मंदिर से अपनी 18 दिवसीय किसान आक्रोश यात्रा शुरू की, जो 23 नवंबर तक 11 जिलों से होते हुए द्वारका पहुंचेगी। इस यात्रा में कर्ज माफी, एमएसपी गारंटी और नीतिगत विफलताओं व कर्ज के खिलाफ बेहतर सुरक्षा की मांग की गई। किसान संगठनों ने यह भी मांग की है कि आगामी रबी की बुवाई में देरी से बचने के लिए मुआवजा वितरण प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_690ef6120b2b5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गुजरात सरकार ने बारिश से प्रभावित किसानों के लिए 10,000 करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_690ef6120b2b5.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कर्नाटक में कामयाब रहा किसान आंदोलन, 3300 रुपये प्रति टन मिलेगा गन्ना का भाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/karnataka-farmers-protest-successful-sugarcane-price-to-be-rs-3300-per-tonne.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 07 Nov 2025 20:30:59 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/karnataka-farmers-protest-successful-sugarcane-price-to-be-rs-3300-per-tonne.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="123" data-end="491">कर्नाटक में गन्ने के दाम को लेकर पिछले 8 दिनों से चल रहा किसान आंदोलन अब समाप्ति की ओर है। शुक्रवार को चीनी मिल मालिकों और किसान प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने घोषणा की है कि किसानों को प्रति टन गन्ने का भाव 3,300 रुपये दिया जाएगा, जिसमें 3,250 रुपये चीनी मिलें देंगी और 50 रुपये का योगदान राज्य सरकार करेगी। यह दाम 11.25% चीनी रिकवरी पर मिलेगा।</p>
<p data-start="493" data-end="737">बैठक में, मिल मालिकों ने 11.25 प्रतिशत उपज वाले गन्ने के लिए ₹3,200 प्रति टन भुगतान करने के निर्णय पर सहमति व्यक्त की थी। इस पर राज्य सरकार और मिल मालिकों ने 50-50 रुपये अतिरिक्त जोड़कर किसानों को 3,300 रुपये प्रति टन भुगतान करने का निर्णय लिया है।&nbsp;</p>
<p data-start="493" data-end="737">आंदोलनकारी किसानों ने राज्य सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए आंदोलन वापस लेने पर सहमति जता दी है। उन्होंने इसे किसान आंदोलन की जीत बताया। राज्य में गन्ना किसान दाम बढ़ाने की मांग कर रहे थे और 3,500 रुपये प्रति टन कीमत की मांग रख रहे थे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x_690e09361912f.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="739" data-end="1228">आंदोलन में अहम भूमिका निभा रहे किसान नेता और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष <strong>राजू शेट्टी</strong>&nbsp;ने&nbsp;<strong><em data-start="834" data-end="845">रूरल वॉयस</em></strong> को बताया कि किसानों ने सरकार को सुबह 8 बजे तक निर्णय लेने का अल्टीमेटम दिया था। कल मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की चीनी मिल मालिकों के साथ बैठक में मिलों ने दाम बढ़ाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद यह संदेश किसानों तक पहुंचने पर आज किसानों ने पुणे-बेंगलुरु हाईवे जाम कर दिया। इसके बाद सरकार ने 3,300 रुपये प्रति टन का दाम देने का फैसला किया।&nbsp;</p>
<p data-start="1230" data-end="1675">गौरतलब है कि कर्नाटक में किसानों को अपेक्षाकृत कम कीमत मिल रही थी और सरकार की उदासीनता के चलते यह आंदोलन खड़ा हुआ। आंदोलन का परिणाम गन्ने की कीमत बढ़ोतरी के रूप में सामने आया। कर्नाटक में गन्ना बेल्ट महाराष्ट्र से लगते क्षेत्रों में काफी अहम मानी जाती है। राजू शेट्टी महाराष्ट्र के हातकणंगले से दो बार सांसद रह चुके हैं और राज्य के गन्ना किसानों के लिए लगातार आंदोलन करते रहे हैं। कर्नाटक की महाराष्ट्र से लगती गन्ना बेल्ट में भी उनका प्रभाव है।</p>
<p data-start="1230" data-end="1675"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कर्नाटक में कामयाब रहा किसान आंदोलन, 3300 रुपये प्रति टन मिलेगा गन्ना का भाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कर्नाटक में गन्ना किसानों का आंदोलन: चीनी मिलें ठप, हाईवे जाम, 3,500 रुपये प्रति टन दाम की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-farmers-protest-in-karnataka-sugar-mills-shut-down-highways-blocked-demand-for-rs-3500-per-tonne.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 07 Nov 2025 14:37:36 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-farmers-protest-in-karnataka-sugar-mills-shut-down-highways-blocked-demand-for-rs-3500-per-tonne.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="257" data-end="694">उत्तरी कर्नाटक में गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर किसान पिछले 8 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। 3,500 रुपये प्रति टन मूल्य की मांग करते हुए किसानों ने हाईवे जाम कर दिए हैं और लगभग 26 चीनी मिलों का संचालन ठप हो गया है। बेलगावी, बागलकोट, विजयपुरा, हुबली-धारवाड़, कलबुरगी सहित कई जिलों में फैले इस आंदोलन ने राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस आंदोलन को कर्नाटक राज्य रैयथ संघ, कर्नाटक गन्ना उत्पादक संघ और कई अन्य संगठनों का समर्थन है।</p>
<p data-start="696" data-end="1267">कर्नाटक के मुख्यमंत्री <strong>सिद्धरमैया</strong> ने गन्ना किसानों के आंदोलन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तत्काल मुलाकात का समय मांगा है। मुख्यमंत्री का कहना है कि गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) तय करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। यह समस्या केंद्र सरकार द्वारा एफआरपी न बढ़ाने, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में वृद्धि न होने, निर्यात प्रतिबंध और एथेनॉल की सीमित खरीद से जुड़ी है। राज्य सरकार ने कटाई और परिवहन शुल्क से अलग 11.25% रिकवरी पर 3,200 रुपये प्रति टन और 10.25% रिकवरी पर 3,100 रुपये प्रति टन का भुगतान सुझाया है, लेकिन किसान इससे संतुष्ट नहीं हैं।</p>
<p data-start="1269" data-end="1438">मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और मिल मालिकों के बीच लगातार संवाद की कोशिश कर रही है, लेकिन आंदोलन लगातार तेज हो रहा है और किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।</p>
<p data-start="1440" data-end="1475"><strong data-start="1440" data-end="1475">मंत्री के काफिले पर फेंकी चप्पल</strong></p>
<p data-start="1477" data-end="1899">बेलगावी जिले में गुस्साए किसानों ने गुरुवार को कर्नाटक सरकार के मंत्री <strong>शिवानंद पाटिल</strong> के वाहन पर चप्पलें फेंक दीं। यह घटना उस समय हुई जब मंत्री पाटिल बेलगावी में किसानों से बातचीत के बाद लौट रहे थे। मंत्री से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला तो नाराज किसानों ने नारेबाजी शुरू कर दी। पाटिल ने कहा कि गन्ने की कीमत तय करने की असल जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। संबंधित विभाग के मंत्री कर्नाटक से हैं लेकिन केंद्र ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।</p>
<p data-start="1901" data-end="2165">किसानों के आंदोलन में छात्र और अन्य सामाजिक संगठन भी शामिल हो गए हैं, जिससे आंदोलन को मजबूती मिल रही है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया शुक्रवार को राज्यभर के चीनी मिल मालिकों के साथ बैठक करेंगे, जिसमें किसानों को राहत देने के लिए कोई बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x_690db7dc39ef1.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="2167" data-end="2186"><strong data-start="2167" data-end="2186">क्या है मुद्दा?</strong></p>
<p data-start="2188" data-end="2643">केंद्र सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए गन्ने का FRP 10.25% रिकवरी पर 355 रुपये प्रति क्विंटल (3,550 रुपये प्रति टन) निर्धारित किया है, जिसमें कटाई और परिवहन शुल्क भी शामिल है। इससे कम रिकवरी पर कीमत में कटौती हो जाती है। कटाई और परिवहन लागत घटाने के बाद कर्नाटक में किसानों को 9-9.5% रिकवरी पर केवल 2,600-3,000 रुपये प्रति टन का ही भुगतान मिल पाता है। जबकि किसान कटाई और परिवहन कटौती के बाद 3,500 रुपये प्रति टन के भुगतान और समय पर भुगतान की मांग कर रहे हैं।</p>
<p data-start="2645" data-end="2829">भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर किसान-विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर शुक्रवार की बैठक से कोई ठोस निर्णय नहीं निकला, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।</p>
<p data-start="2831" data-end="2876"><strong data-start="2831" data-end="2876">यूपी, महाराष्ट्र से अलग कर्नाटक की स्थिति</strong></p>
<p data-start="2878" data-end="3436" data-is-last-node="" data-is-only-node="">यूपी और महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक देश का तीसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है, जहां पिछले वर्ष के 6.4 लाख हेक्टेयर की तुलना में गन्ने का रकबा लगभग 6% बढ़कर 6.8 लाख हेक्टेयर हो गया है। उत्तर प्रदेश में सरकार ने गन्ने का रेट (SAP) 400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि महाराष्ट्र में 355 रुपये प्रति क्विंटल की दर से FRP का भुगतान किया जाता है। महाराष्ट्र में कटाई और ढुलाई का खर्च चीनी मिलें वहन करती हैं और सहकारी चीनी मिलों में किसानों को मुनाफे में हिस्सेदारी भी मिलती है। कर्नाटक में किसानों को गन्ना मूल्य यूपी और महाराष्ट्र की तुलना में कम मिलता है।&nbsp;</p>
<p data-start="2878" data-end="3436" data-is-last-node="" data-is-only-node=""></p>
<p data-start="2878" data-end="3436" data-is-last-node="" data-is-only-node=""></p>
<p data-start="2878" data-end="3436" data-is-last-node="" data-is-only-node=""></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_690db65b6a9c8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कर्नाटक में गन्ना किसानों का आंदोलन: चीनी मिलें ठप, हाईवे जाम, 3,500 रुपये प्रति टन दाम की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में बाढ़ प्रभावित किसानों के ट्यूबवेल बिजली बिल 6 माह के लिए स्थगित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/tubewell-electricity-bills-of-flood-affected-farmers-in-haryana-postponed-for-6-months.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 05 Nov 2025 12:31:31 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/tubewell-electricity-bills-of-flood-affected-farmers-in-haryana-postponed-for-6-months.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मानसून सीजन के दौरान राज्य में भारी वर्षा एवं बाढ़ से प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करने के लिए एक विशेष योजना की घोषणा की है। इस निर्णय के तहत राज्य के सभी कृषि ट्यूबवेल उपभोक्ताओं के जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 तक के बिजली बिलों के भुगतान को छह माह के लिए स्थगित कर दिया गया है।</p>
<p>ऊर्जा विभाग के प्रवक्ता के अनुसार, जुलाई 2025 में जारी बिजली बिलों का भुगतान अब जनवरी 2026, अगस्त 2025 के बिलों का फरवरी 2026, सितंबर 2025 के बिलों का मार्च 2026, और इसी क्रम में दिसंबर 2025 के बिलों का भुगतान जून 2026 में किया जाएगा। दावा है कि इस निर्णय से राज्य के लगभग 7.10 लाख कृषि उपभोक्ता लाभान्वित होंगे।</p>
<p><strong>विलंब शुल्क नहीं लगेगा</strong></p>
<p>राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्थगित अवधि के दौरान उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVNL) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVNL) द्वारा किसी भी कृषि ट्यूबवेल उपभोक्ता से विलंब अधिभार (Late Payment Surcharge/LPS) नहीं वसूला जाएगा।&nbsp;साथ ही, किसानों की बिजली आपूर्ति सामान्य रूप से जारी रहेगी। इस योजना से बिजली निगमों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को हरियाणा सरकार स्वयं वहन करेगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह निर्णय किसानों को तात्कालिक आर्थिक राहत देने और उन्हें अपनी कृषि गतिविधियों को पुनः पटरी पर लाने में मदद करने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसान हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और हर संभव सहायता प्रदान करती रहेगी।</p>
<p><strong>भारी बारिश से नुकसान</strong></p>
<div>इस साल जुलाई से सितंबर तक हरियाणा में भारी बारिश से कई जिलों में बाढ़ के हालात पैदा हो गये थे। हिसार, भिवानी, रोहतक, जींद, कैथल, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, पलवल और फरीदाबाद सहित कई जिलों में फसलों को नुकसान पहुंचा। सरकार द्वारा यह कदम प्रभावित किसानों को कुछ राहत दोगा। राज्य सरकार ने जिलों के उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रभावित किसानों की स्थिति पर निगरानी रखें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी पात्र किसान इस योजना के लाभ से वंचित न रहे।</div>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में बाढ़ प्रभावित किसानों के ट्यूबवेल बिजली बिल 6 माह के लिए स्थगित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बिहार चुनाव: महागठबंधन ने किसानों को मुफ्त बिजली, धान पर 300 व गेहूं पर 400 रुपये बोनस का वादा किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/bihar-elections-grand-alliance-promises-farmers-free-electricity-rs-300-bonus-on-paddy-and-rs-400-on-wheat.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 04 Nov 2025 20:08:16 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/bihar-elections-grand-alliance-promises-farmers-free-electricity-rs-300-bonus-on-paddy-and-rs-400-on-wheat.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div>बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से महज दो दिन पहले महागठबंधन ने किसानों को लुभाने के लिए बड़े वादे किए हैं। मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने कहा कि महागठबंधन की सरकार बनने पर किसानों को धान पर 300 रुपये और गेहूं पर 400 <span>रुपये</span> प्रति क्विंटल का बोनस दिया जाएगा। इसके अलावा, सिंचाई के लिए किसानों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी और प्रदेश में उपज खरीद के लिए मंडी व्यवस्था को फिर से बहाल किया जाएगा।&nbsp;</div>
<p>तेजस्वी यादव ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान उनकी सरकार की प्राथमिकता होगी और बिहार में खेती को घाटे का सौदा नहीं बनने दिया जाएगा। किसानों को आर्थिक राहत देने के लिए महागठबंधन ने सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली देने का भी वादा किया है। तेजस्वी यादव ने कहा, "मुफ्त बिजली से खेती की लागत घटेगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी।"</p>
<p><strong>मंडी व्यवस्था बहाल करने का वादा</strong></p>
<p>तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में मंडी व्यवस्था बहाल की जाएगी। इसके लिए एपीएमसी अधिनियम फिर से लागू किया जाएगा। पंचायत स्तर पर दलहन, तिलहन और मक्का की सरकारी खरीद होगी। सब्जी, फल और दूध उत्पादकों को विशेष सब्सिडी देने की योजना भी प्रस्तावित है। साथ ही 8,400 पैक्स और व्यापार मंडलों के प्रमुखों को मानदेय और &ldquo;जनप्रतिनिधि&rdquo; का दर्जा दिया जाएगा।&nbsp;</p>
<p><strong>महिलाओं के लिए &lsquo;माई-बहन मान योजना&rsquo;</strong></p>
<p>तेजस्वी यादव ने महिलाओं को आर्थिक संबल देने के लिए &lsquo;माई-बहन मान योजना&rsquo; का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार बनने पर महिलाओं को सालाना 30,000 रुपये की राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह भुगतान मकर संक्रांति (14 जनवरी) को सीधे महिलाओं के खातों में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महंगाई के बीच माताओं-बहनों को राहत देना महागठबंधन का बड़ा लक्ष्य है।</p>
<p><strong>ट्रांसफर-पोस्टिंग में होगा बदलाव</strong></p>
<p>महागठबंधन ने सरकारी कर्मचारियों के लिए भी राहत की घोषणा की है। तेजस्वी यादव ने कहा कि पुलिसकर्मी, शिक्षक और स्वास्थ्यकर्मी जैसे कर्मचारियों का ट्रांसफर पोस्टिंग घर से 70 किलोमीटर के दायरे में ही किया जाएगा ताकि वे सामाजिक और पारिवारिक संतुलन बनाए रख सकें।</p>
<p><strong>किसान और महिला वोटर प्राथमिक फोकस</strong></p>
<p>तेजस्वी का कहना है कि बिहार तभी विकसित होगा जब किसान, महिलाएं और युवा सशक्त होंगे। कृषक समुदाय की आय बढ़ाने और महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा देने के ये चुनावी वादे बिहार की चुनावी राजनीति को एक नई दिशा में ले जाते दिख रहे हैं।</p>
<p>बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए मतदान 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बिहार चुनाव: महागठबंधन ने किसानों को मुफ्त बिजली, धान पर 300 व गेहूं पर 400 रुपये बोनस का वादा किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_690a0f7a440d5.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी सरकार ने नॉन&amp;#45;हाइब्रिड धान की कुटाई पर दी 1% रिकवरी छूट, राइस मिलर्स को मिलेगा फायदा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-government-gives-1-recovery-rebate-on-threshing-of-non-hybrid-paddy-benefiting-rice-millers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 04 Nov 2025 12:50:20 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-government-gives-1-recovery-rebate-on-threshing-of-non-hybrid-paddy-benefiting-rice-millers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार ने राइस मिलर्स को नॉन-हाइब्रिड धान की कुटाई में 1 प्रतिशत रिकवरी छूट देने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से होने वाली वित्तीय प्रतिपूर्ति राज्य सरकार अपने बजट से करेगी। इसके लिए कुल ₹167 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।</p>
<p>राज्य सरकार हाइब्रिड धान की कुटाई पर पहले से ही 3% रिकवरी छूट देती है, जिसके लिए प्रतिवर्ष लगभग ₹100 करोड़ की प्रतिपूर्ति की जाती है। अब एक फीसदी की रिकवरी छूट इसके अतिरिक्त होगी। इससे राज्य में 2,000 से अधिक राइस मिलरों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा।</p>
<p>निर्णय की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री <strong>योगी आदित्यनाथ</strong> ने सोशल मीडिया पोस्ट किया कि विगत दिनों नॉन-हाइब्रिड धान में अपेक्षित रिकवरी न मिलने की समस्या संज्ञान में आई थी। अतः अन्नदाता किसान और राइस मिलर्स की भावनाओं का यथोचित सम्मान करते हुए निर्णय लिया गया है कि नॉन-हाइब्रिड धान की कुटाई में 1% रिकवरी छूट की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार अपने बजट से करेगी। इस हेतु ₹167 करोड़ की प्रतिपूर्ति की जाएगी।</p>
<p>सीएम योगी का मानना है कि इस निर्णय से 13-15 लाख अन्नदाता किसानों व 2000 से अधिक राइस मिलर्स को सीधा लाभ मिलेगा तथा प्रदेश में 02 लाख रोजगार के अवसर सुदृढ़ होंगे। यह निर्णय चावल मिल उद्योग को नई ऊर्जा प्रदान करेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_6909ae277d38f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी सरकार ने नॉन-हाइब्रिड धान की कुटाई पर दी 1% रिकवरी छूट, राइस मिलर्स को मिलेगा फायदा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं&amp;#45;धान की खरीद से पल्ला झाड़ रही मध्य प्रदेश सरकार! केंद्र को लिखा पत्र]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-government-shirks-responsibility-for-wheat-and-paddy-procurement-writes-to-centre.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 03 Nov 2025 17:14:10 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-government-shirks-responsibility-for-wheat-and-paddy-procurement-writes-to-centre.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में गेहूं और धान की सरकारी खरीद को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। मप्र सरकार इस खरीद से खुद को अलग करना चाहती है। वित्तीय बोझ का हवाला देते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि विकेंद्रीकृत उपार्जन योजना के स्थान पर केंद्रीकृत उपार्जन योजना संचालन की अनुमति प्रदान की जाए। यानी केंद्र सरकार की एजेंसी सीधे किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं व धान की खरीद करे।&nbsp;</p>
<p>इस बारे में मुख्यमंत्री <strong>डॉ. मोहन यादव</strong> ने केंद्रीय खाद्य मंत्री <strong>प्रल्हाद जोशी</strong> को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि गेहूं और धान खरीद की व्यवस्था केंद्रीकृत तरीके से की जाए। उन्होंने लिखा कि विकेंद्रीकृत व्यवस्था में स्टॉक के निराकरण में बहुत ज्यादा समय लग रहा है। साथ ही राज्य सरकार की जो लागत आती है,<span> उसका समय पर भुगतान न होने से राज्य को काफी वित्तीय हानि हो रही है। उक्त उपार्जन योजना में बैंकों से ली गई उधार राशि </span>72.17 करोड़ रुपये है जिसके पुर्नभुगतान में काफी समस्या हो रही हैं।&nbsp;</p>
<p>उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में एमएसपी पर गेहूं खरीद के लिए वर्ष 1999 <span>और धान खरीद के लिए </span>2007 <span>से विकेन्द्रीकृत उपार्जन योजना लागू है। इसमें राज्य सरकार अपनी एजेंसियों के माध्यम से किसानों से एमएसपी पर अनाज की खरीद करती है और फिर केंद्रीय एजेंसी भारतीय खाद्य निगम द्वारा इसका उठाव किया जाता है। अगर इस साल मध्य प्रदेश सरकार खरीद में भाग नहीं लेती है तो एफसीआई को गेहूं व धान की खरीद के लिए सीधे मंडियों में सक्रिय होना पड़ेगा।</span></p>
<p>केंद्रीकृत व्यवस्था लागू होने के बाद भी किसानों से एमएसपी पर खरीद जारी रहेगी, <span>लेकिन व्यवस्था में बदलाव से किसानों को कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर एफसीआई के खरीद मानकों को लेकर किसानों की चिंताएं हैं। </span>अगर केंद्र सरकार मध्य प्रदेश सरकार के आग्रह को स्वीकार कर लेती है तो राज्य में धान और गेहूं की खरीद में नागरिक आपूर्ति निगम की भूमिका समाप्त हो जाएगी।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x_69089576db5ae.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>किसानों को होगा घाटा: जीतू पटवारी </strong></p>
<p>वहीं, सीएम मोहन यादव का पत्र सामने आने के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। विपक्षी दल कांग्रेस के नेता जीतू पटवारी ने आरोप लगाया, "मप्र की भाजपा सरकार ने गेहूं व धान की सरकारी खरीदी करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को पत्र भी लिख दिया है। सरकार का कुतर्क है अब <strong>FCI</strong> खरीदी करेगा! मैं प्रामाणिक तौर पर कह रहा हूं इससे किसानों को सिर्फ नुकसान ही होगा! गुणवत्ता मानक के नाम पर लाखों क्विंटल गेहूं रिजेक्ट होगा। <strong>किसान</strong> को अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई औने-पौने दामों पर बाजार की शर्तों और निजी व्यापारियों को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा!"</p>
<p>जीतू पटवारी ने मध्यप्रदेश सरकार के इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि किसानों के आर्थिक शोषण की इस नीति को तत्काल वापस लेना चाहिए।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/11/image_750x500_69089518a84cf.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं-धान की खरीद से पल्ला झाड़ रही मध्य प्रदेश सरकार! केंद्र को लिखा पत्र ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र में किसानों को राहत की उम्मीद, कर्जमाफी के लिए समिति गठित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-farmers-hope-for-relief-committee-formed-for-loan-waiver.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 31 Oct 2025 14:18:31 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-farmers-hope-for-relief-committee-formed-for-loan-waiver.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र में कर्जमाफी को लेकर चल रहे किसान आंदोलन को देखते हुए राज्य सरकार एक महत्वपूर्ण ऐलान किया है। किसानों की कर्जमाफी पर सुझाव देने के लिए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है जो छह महीने में अपनी रिपोर्ट देगी। &nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री <strong>देवेंद्र फडणवीस</strong> ने कहा कि समिति की रिपोर्ट के आधार पर किसानों की कर्जमाफी पर <strong>30 जून 2026</strong> <span>तक निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह बात किसान नेताओं के साथ बैठक के बाद कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने किसानों से किया वादा निभाने का संकल्प लिया है और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।</span></p>
<p>आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेता <strong>बच्चू कडू</strong> ने किसानों को तत्काल राहत की मांग करते हुए सरकार से स्पष्ट समयसीमा तय करने को कहा था। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जून 2026 <span>तक निर्णय ले लिया जाएगा और इस बीच किसानों को अन्य राहत योजनाओं का लाभ मिलेगा। किसान प्रतिनिधिमंडल में पूर्व सांसद राजू शेट्टी, पूर्व मंत्री महादेव जानकर, वामनराव चटप, रवीकांत तुपकर, और अजित नवले सहित अन्य नेता शामिल थे।<br /></span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_690475a510143.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>राज्य सरकार ने 9 सदस्य उच्चस्तरीय समिति गठित की है, <span>जिसके अध्यक्षता मुख्यमंत्री के प्रधान आर्थिक सलाहकार <strong>प्रवीन परदेशी</strong> करेंगे। यह समिति किसानों को कर्ज के जाल से मुक्त कराने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपाय सुझाएगी। समिति में राजस्व</span>, <span>वित्त</span>, <span>कृषि और सहकारिता विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे</span>, <span>साथ ही महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक</span>, <span>बैंक ऑफ महाराष्ट्र और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रतिनिधि भी इसका हिस्सा होंगे। समिति छह माह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। </span></p>
<p>महाराष्ट्र सरकार ने भारी बारिश से प्रभावित किसानों के लिए 32,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सरकार ने अब तक वर्षा प्रभावित फसलों के लिए किसानों के बैंक खातों में करीब 6,000 <span>करोड़ रुपये की सहायता राशि जमा की है।</span>&nbsp;फिलहाल यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि आगामी रबी सीजन के लिए बाढ़ पीड़ित किसानों के खातों में सीधे धनराशि जमा की जाए।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_69047488dc014.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>किसान नेताओं ने सरकार के इस कदम पर संतोष जाहिर करते हुए कहा कि सरकार ने उनकी बातों को गंभीरता से लिया है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जून 2026 <span>तक वादा पूरा नहीं हुआ</span>, <span>तो आंदोलन दोबारा तेज किया जाएगा। बच्चू कडू ने आंदोलन की सफलता का श्रेय <strong>राजू शेट्टी</strong></span><strong>, </strong><span><strong>अजित नवले</strong> जैसे किसानों नेताओं के समर्थन और किसानों की एकजुटता को दिया। इस आंदोलन को एनसीपी शरद पवार</span>, <span>किसान सभा और राजू शेट्टी के संगठन का समर्थन था। </span></p>
<p>अब देखना यह है कि सरकार की ओर से गठित समिति क्या सुझाव देती है और कर्जमाफी की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है, <span>ताकि किसानों को कर्ज के बोझ से राहत मिल सके।</span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_69030cd9b1c99.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र में किसानों को राहत की उम्मीद, कर्जमाफी के लिए समिति गठित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र में बच्चू कडू के नेतृत्व में किसानों का कर्जमाफी आंदोलन, सरकार से आज अहम बैठक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-loan-waiver-movement-intensifies-in-maharashtra-under-the-leadership-of-bacchu-kadu-important-meeting-with-the-government-today.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 30 Oct 2025 11:36:38 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-loan-waiver-movement-intensifies-in-maharashtra-under-the-leadership-of-bacchu-kadu-important-meeting-with-the-government-today.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र के नागपुर में प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेता बच्चू कडू के नेतृत्व में किसानों का कर्जमाफी आंदोलन जोर पकड़ रहा है। बुधवार को हजारों किसानों ने नागपुर-वर्धा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) जाम कर दिया और और सरकार से तत्काल संपूर्ण कर्जमाफी की मांग की है। इस आंदोलन को पूर्व सांसद राजू शेट्टी और अन्य किसान नेताओं का भी समर्थन प्राप्त है।</p>
<p>कडू की अगुवाई में चल रहे &lsquo;महाअल्गार मार्च&rsquo; की शुरुआत सोमवार को अमरावती जिले के चांदूरबाजार से हुई थी। हाईकोर्ट ने अखबारों में छपी खबरों का स्वत: संज्ञान लिया कि आंदोलन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर करीब 20 किलोमीटर तक ट्रैफिक जाम लग गया है जिससे एम्बुलेंस और पुलिस वाहन भी नहीं निकल पा रहे हैं।</p>
<p>बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने प्रदर्शनकारियों को बुधवार शाम 6 बजे तक हाइवे खाली करने का निर्देश दिया था। आंदोलनकारी अपनी गिरफ्तारी देने को भी तैयार थे। इस बीच, <span>सरकार की तरफ से किसान नेताओं को मुंबई आकर मुख्यमंत्री से बात करने का प्रस्ताव दिया गया। आखिरकार बच्चू कडू &nbsp;हाईवे से हटकर पास के मैदान में जाने के लिए तैयार हुए। हालांकि कडू ने साफ किया कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि अगर गुरुवार की बैठक में समाधान नहीं निकला</span>, तो 31 अक्टूबर को रेल रोको आंदोलन किया जाएगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_69030cd9e8623.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>किसानों की मांगें </strong></p>
<p>किसानों की प्रमुख मांगों में संपूर्ण कर्जमाफी के साथ-साथ भारी बारिश से बर्बाद फसलों का मुआवजा, <span>किसानों की उपज के लिए एमएसपी की गारंटी आदि मांगें शामिल हैं। आंदोलन में राज्य के विभिन्न जिलों से किसान बड़ी संख्या में शामिल हुए हैं।</span></p>
<p><strong>सीएम फडणवीस की अपील </strong></p>
<p>मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सरकार फिलहाल भारी बारिश से प्रभावित किसानों को राहत देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।&nbsp; लेकिन वे कर्जमाफी के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने किसान नेताओं से अपील की थी कि बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।</p>
<p><strong>आज अहम बैठक </strong></p>
<p>इस बीच, सरकार और आंदोलनकारी नेताओं के बीच आज मुंबई में अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में कर्जमाफी की संभावित तारीख और अन्य राहत उपायों पर चर्चा होने की उम्मीद है। यदि बैठक में संतोषजनक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन और तीव्र हो सकता है।</p>
<p>राजनीतिक रूप से यह आंदोलन सरकार के लिए चुनौती बन सकता है क्योंकि चुनाव से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन ने किसानों की कर्जमाफी का वादा किया था। अब किसान उसी वादे की याद दिला रहे हैं।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र में बच्चू कडू के नेतृत्व में किसानों का कर्जमाफी आंदोलन, सरकार से आज अहम बैठक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी सरकार ने गन्ना मूल्य 30 रुपये बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-price-in-up-rises-to-rs-400-an-increase-of-rs-30-per-quintal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 29 Oct 2025 10:35:54 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-price-in-up-rises-to-rs-400-an-increase-of-rs-30-per-quintal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गन्ना मूल्य में 30 रुपये की बढ़ोतरी का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी के गन्ना किसानों बड़ी राहत देते हुए गन्ने का <strong>राज्य परामर्श मूल्य (SAP)</strong> 30 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ा दिया है।</p>
<p>फैसले के अनुसार, 2025-26 के पेराई सत्र के लिए अगैती प्रजाति के गन्ने का मूल्य 370 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजाति के गन्ने का मूल्य 360 रुपये से बढ़ाकर 390 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।&nbsp;</p>
<p>राज्य के चीनी उद्योग एवं गन्ना मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने गन्ना मूल्य 30 रुपये बढ़ाने के सरकार के फैसले की जानकारी दी है।&nbsp;सरकार के इस निर्णय को गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में दो साल से गन्ने का दाम 370 रुपये पर अटका हुआ था जबकि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। गन्ना मूल्य में 30 रुपये यानी करीब 8 फीसदी की बढ़ोतरी से प्रदेश के लगभग 45 लाख किसान परिवारों को आर्थिक रूप से लाभ होगा।&nbsp;</p>
<p>हालांकि, किसान संगठन पिछले साल से ही गन्ने का भाव 400 पार की मांग उठा रहे थे। लेकिन 30 रुपये की बढ़ोतरी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाकियू (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने योगी सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे गन्ना किसानों के हित में सही फैसला बताया।&nbsp;</p>
<p dir="ltr"></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65f97a104d02e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी सरकार ने गन्ना मूल्य 30 रुपये बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65f97a104d02e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में 50 फीसदी अनुदान पर रबी फसलों के बीज, 10 लाख किसानों को नि:शुल्क बीज मिनीकिट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rabi-crop-seeds-will-be-available-at-50-percent-subsidy-in-up-10-lakh-farmers-will-get-free-seed-minikits.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 27 Oct 2025 14:15:38 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rabi-crop-seeds-will-be-available-at-50-percent-subsidy-in-up-10-lakh-farmers-will-get-free-seed-minikits.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रबी सीजन की बुवाई के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को गेहूं, <span>सरसों</span>, <span>चना</span>, <span>मटर आदि फसलों के बीज 50 फीसदी अनुदान पर उपलब्ध करा रही है। किसानों को ये बीज ब्लॉक स्थित राजकीय कृषि बीज भंडार के माध्यम से मिलेंगे। साथ ही प्रदेश के 10 लाख से अधिक किसानों को दलहन और तिलहन फसलों की नि:शुल्क बीज मिनीकिट उपलब्ध कराई जा रही है।&nbsp;</span></p>
<p>प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सोमवार को लखनऊ में कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की समीक्षा बैठक बुलाई। समीक्षा बैठक में प्रदेश के किसानों को नि:शुल्क बीज मिनीकिट, <span>पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता एवं वितरण को सुनिश्चित करने हेतु अधिकारियों सख्त निर्देश दिए गए।</span></p>
<p><span>10लाख से अधिक किसानों को दलहन और तिलहन में उत्तर प्रदेश और भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आन लाइन आवेदन पर लाटरी निकाल निःशुल्क मिनी कीट उपलब्ध करा रही है वहीं शेष किसानों को 50प्रतिशत अनुदान पर किसान कल्याण केन्द्र (उप्र कृषि विभाग के बीज गोदाम)पर आधारीय और प्रमाणित उत्कृष्ट बीज(गेहूँ ,चना ,मसूर ,दालवाली मटर ,सरसो आदि का आधे दाम पर किसान भाईयों के जोत के आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध करा रही है जिसका विवरण संलग्न चार्ट में दिया गया है ।</span></p>
<p><strong>10 लाख किसानों को नि:शुल्क मिनी बीज किट </strong></p>
<p>कृषि मंत्री शाही ने किसानों को आश्वस्त किया है कि प्रदेश सरकार द्वारा रबी सीजन के लिए बीज और खाद की समुचित व्यवस्था कर ली गई है। <span>सभी 75 जिलों में रबी सीजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं ताकि बुआई कार्य सुचारू रूप से हो सके। आठ प्रकार की फसलों के बीज अनुदान पर दिए जा रहे हैं, जिनमें गेहूं, चना, मसूर, मटर, सरसों, राई, तोरिया शामिल हैं।</span></p>
<p><strong>दलहन व तिलहन</strong> के लिए प्रदेश के 10 <span>लाख से अधिक किसानों को निःशुल्क बीज मिनीकिट उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं</span>,<span> शेष किसानों को </span>50 <span>प्रतिशत अनुदान पर गेहूं</span>, <span>चना</span>, <span>मसूर</span>, <span>मटर</span>, <span>सरसों आदि का आधारीय और प्रमाणित बीज उपलब्ध कराया जाएगा। </span></p>
<p><strong>नि:शुल्क मिनीकिट</strong> वितरण आनलाइन आवेदन पर लाटरी के माध्यम से होगा। विभागीय पोर्टल <a href="https://l.facebook.com/l.php?u=https%3A%2F%2Fagridarshan.up.gov.in%2F%3Ffbclid%3DIwZXh0bgNhZW0CMTAAYnJpZBExNGpBdHZaZ3BaWGEzclhjMQEeeuwq21k1oYfFrjNg6d3_UZTJ68oYKU5rWk58JXqjCXUuIVSP2nncf4MpmUY_aem_I02lnWk7Oq9mgxGgrBlv9g&amp;h=AT21SduMlArZBNA0a2QVzzh-diSw1ET5UqhkhvvbADAuDODnD_D34UOIddvZhc8gEXYEN_CdOL0gFMLxMmdnfkpVj_4VyudT5hhLZLzxUwJ7khLlAS9oPJmZAk7IVioahh7_ti5ICBtxsqopCsRYi_xf0xc8Hi6u&amp;__tn__=-UK-R&amp;c%5b0%5d=AT2CshJfsY88VTrreXA_yV6T9FqfiKq_DKtfH4uF1ELVbdMDN9lvMWT5D4tYfBTJiZ4d2frupZHmoSiiW-5jSxtIpB2rt3yrUEHBrJh5KPYKqEfqdKNejfuOfpkcWDUsKS9xokhLP2OrmmQonbO4syXOeiMHP98pidxe0F-AIuKoaOtC2E_YCfM1DqdwJ2ehSXyTfVctsvAXtUy5g9qZPfUI"><strong>https://agridarshan.up.gov.in</strong></a> पर पंजीकरण कर किसान बीज प्राप्त कर सकते हैं। कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे सरकार द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान पर दिए जा रहे बीजों के लिए कोई भी अतिरिक्त मूल्य का भुगतान न करें।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68ff31274d6f2.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>8&nbsp;</strong><strong>फसलों के बीजों पर 50 फीसदी अनुदान </strong></p>
<p>किसानों को 8 रबी फसलों के बीज अनुदान पर दिए जा रहे हैं। गेंहू के प्रमाणित बीज 4680 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उपलब्ध है जिसमें 2340 अनुदान दिया जा रहा है जबकि 2340 कृषक अंश जमा करना है। राई या सरसों के प्रमाणित बीज पर 5423 रुपये का अनुदान है और 5424 रुपये कृषक अंश जमा करना है। चने के प्रमाणित बीज पर 5160 रुपये का अनुदान है और 5160 रुपये कृषक अंश जमा करना है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि पॉस मशीन पर अगूठा लगाकर पर्ची प्राप्त करें और पर्ची पर अकिंत कृषक अंश की धनराशि को ही जमा करें।&nbsp;</p>
<p><strong>खाद की पर्याप्त उपलब्धता का दावा&nbsp;</strong></p>
<p><span>कृषि मंत्री शाही ने बताया कि प्रदेश में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है। रबी फसलों की बुआई में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने</span>&nbsp;कालाबाजारी और नकली खाद, <span>बीज बनाने और बेचने वालों के ऊपर कठोर कार्यवाही करने के निर्देश दिए। साथ ही किसानों से एमआरपी पर अपनी जोत के अनुसार खाद लेने का अनुरोध किया।&nbsp;</span><span></span></p>
<p><span></span></p>
<p><span></span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68ff3140eb62b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में 50 फीसदी अनुदान पर रबी फसलों के बीज, 10 लाख किसानों को नि:शुल्क बीज मिनीकिट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68ff3140eb62b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में बाहरी वाहनों पर लगेगा &amp;apos;ग्रीन सेस&amp;apos;, जानिए किस वाहन पर कितना शुल्क]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/green-cess-will-be-imposed-on-outside-vehicles-in-uttarakhand-know-how-much-cess-will-be-collected-from-which-vehicle.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 27 Oct 2025 05:27:03 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/green-cess-will-be-imposed-on-outside-vehicles-in-uttarakhand-know-how-much-cess-will-be-collected-from-which-vehicle.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div _ngcontent-ng-c3999645256="" inline-copy-host="" class="markdown markdown-main-panel enable-updated-hr-color" id="model-response-message-contentr_840cfdcfec7dc71b" dir="ltr">
<p>उत्तराखंड में बाहर से आने वाहनों से ग्रीन सेस लिया जाएगा। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में प्रवेश करने वाले अन्य राज्यों के वाहनों पर <b>'ग्रीन सेस' (हरित उपकर)</b> लगाने का फैसला किया है। <span>मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम करार दिया है। ग्रीन सेस से होने वाली आमदनी को वायु प्रदूषण नियंत्रण, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और पर्यावरण संरक्षण पर खर्च किया जाएगा।&nbsp;</span></p>
<p>सरकार का अनुमान है कि दिसंबर 2025 से पूरी तरह लागू होने वाली इस नई व्यवस्था से सरकारी राजस्व में सालाना <b>100 से 150 करोड़ रुपये</b> तक की वृद्धि होगी। <span>परिवहन विभाग ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए एक निजी कंपनी के साथ करार किया है।</span></p>
<p><span>उत्तराखंड में अब तक यह शुल्क सिर्फ <strong>कॉमर्शियल वाहनों</strong> पर लागू था, लेकिन अब निजी वाहनों को इसके दायरे में लाया जाएगा। उत्तराखंड से पहले हिमाचल प्रदेश में भी वाहनों से एंट्री टैक्स के रूप में इस प्रकार का शुल्क लिया जा रहा है। उत्तराखंड में प्रदूषण और यातायात की बढ़ती समस्या को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</span></p>
<h3><strong>फास्टैग से स्वचालित वसूली</strong></h3>
<p>ग्रीन सेस की वसूली के लिए पूरी प्रक्रिया को <b>स्वचालित</b> बनाया गया है। राज्य की सीमाओं पर <b>16 स्थानों</b> पर <b>ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे</b> लगाए गए हैं। जैसे ही कोई बाहरी वाहन राज्य में प्रवेश करेगा, उस पर लगा <b>फास्टैग (FASTag)</b> स्कैन हो जाएगा और सेस की राशि अपने आप कट जाएगी।&nbsp;</p>
<p><b>ग्रीन सेस की वैधता</b></p>
<ul>
<li>
<p>यह सेस <b>24 घंटे</b> के लिए वैध रहेगा। यदि कोई वाहन 24 घंटे के भीतर दोबारा राज्य में प्रवेश करता है, तो उसे दोबारा कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा।&nbsp;</p>
</li>
</ul>
<h3><strong>सेस की प्रस्तावित दरें</strong></h3>
<p>सरकार ने वाहनों के प्रकार के आधार पर ग्रीन सेस की दरें निर्धारित की हैं, जबकि कुछ वाहनों को इससे पूरी तरह छूट दी गई है।</p>
<table>
<thead>
<tr>
<td><strong>वाहन का प्रकार</strong></td>
<td><strong>ग्रीन सेस (प्रतिदिन)</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>कार</td>
<td>₹80</td>
</tr>
<tr>
<td>बस</td>
<td>₹140</td>
</tr>
<tr>
<td>भारी वाहन</td>
<td>₹120 प्रति दिन</td>
</tr>
<tr>
<td>डिलीवरी वैन</td>
<td>₹250</td>
</tr>
<tr>
<td>ट्रक (आकार के अनुसार)</td>
<td>₹140 से ₹700</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><strong>इन वाहनों को मिलेगी छूट</strong></p>
<p>सरकार ने <b>इलेक्ट्रिक वाहन (EV)</b>, <b>सीएनजी वाहन</b>, <b>दोपहिया वाहन</b>, <b>सरकारी वाहन</b>, <b>एंबुलेंस</b> और <b>फायर ब्रिगेड</b> की गाड़ियों को ग्रीन सेस से पूरी तरह मुक्त रखा है। इस छूट का उद्देश्य स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को बढ़ावा देना है।</p>
<p><strong>आशंकाएं और सुझाव</strong></p>
<p data-start="1340" data-end="1659">इस कदम पर कुछ आशंकाएं भी जताई जा रही हैं। पर्यटकों और छोटे वाहन चालकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका है। साथ ही सेस के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल हैं।&nbsp;सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस शुल्क से प्राप्त धन का <strong>पारदर्शी</strong> तरीके से <strong>प्रभावी</strong> उपयोग हो, ताकि ग्रीन सेस केवल राजस्व बढ़ाने का माध्यम नहीं बल्कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी का प्रतीक बन सके।&nbsp;</p>
<p data-start="1340" data-end="1659"></p>
<p></p>
<p></p>
</div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68febede81efb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में बाहरी वाहनों पर लगेगा 'ग्रीन सेस', जानिए किस वाहन पर कितना शुल्क ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र बनेगा प्राकृतिक खेती का नया केंद्र : मुख्यमंत्री फडणवीस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-gears-up-to-become-indias-next-natural-farming-hub-cm-fadnavis.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 25 Oct 2025 13:21:54 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-gears-up-to-become-indias-next-natural-farming-hub-cm-fadnavis.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि महाराष्ट्र देश का अगला प्राकृतिक खेती का केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और हाइब्रिड बीजों के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी की उर्वरता को घटाया है और किसानों की लागत बढ़ाई है, जबकि प्राकृतिक खेती इस स्थिति का टिकाऊ समाधान प्रस्तुत करती है।</p>
<p>राजभवन में आयोजित प्राकृतिक खेती सम्मेलन में राज्यपाल आचार्य देवव्रत की उपस्थिति में मुख्यमंत्री ने कहा, &ldquo;अब समय आ गया है कि हम रासायनिक खेती की परंपरा से बाहर निकलें। प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी को जीवंत बनाती है, बल्कि उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने का रास्ता भी दिखाती है।&rdquo;</p>
<p>उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2014 में शुरू किए गए &lsquo;प्राकृतिक खेती मिशन&rsquo; के तहत अब तक 14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया जा चुका है। इसे बढ़ाकर 25 लाख हेक्टेयर तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए खेती को पूरी तरह प्राकृतिक बनाना ही एकमात्र विकल्प है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान के नीति निर्देशक तत्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने गोसंवर्धन (गाय संरक्षण) को कृषि के लिए अनिवार्य बताया था। &ldquo;गौमाता कृषि की आत्मा हैं। गोधन की रक्षा करना खेती के जीवन को सुरक्षित रखने के समान है।&rdquo;</p>
<p>फडणवीस ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत की दूरदर्शिता और कृषि क्षेत्र में इनोवेटिव दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में महाराष्ट्र ने बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती मिशन शुरू किया है। उनकी प्रेरणा से महाराष्ट्र जल्द ही प्राकृतिक खेती का प्रमुख केंद्र बनेगा।</p>
<p>अपने संबोधन में राज्यपाल देवव्रत ने मंत्रिमंडल और विधानमंडल के सदस्यों से मिशन मोड में प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की। उन्होंने जैविक और प्राकृतिक खेती के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती मिट्टी की संरचना और पर्यावरण दोनों को दीर्घकालीन लाभ देती है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र बनेगा प्राकृतिक खेती का नया केंद्र : मुख्यमंत्री फडणवीस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भेड़&amp;#45;बकरियों में फैल रही फुट रॉट बीमारी, लुवास ने जारी की एडवाइजरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/foot-rot-disease-spreading-among-sheep-and-goats-luvas-issues-advisory.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 24 Oct 2025 10:25:00 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/foot-rot-disease-spreading-among-sheep-and-goats-luvas-issues-advisory.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा के कई जिलों में भेड़ और बकरियों में फुट रॉट (पैर सड़न) नामक संक्रामक बीमारी फैल रही है। रोग के बढ़ते मामलों को देखते हुए <strong>लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास)</strong><strong>, </strong><strong>हिसार</strong> ने पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है।</p>
<p>विश्वविद्यालय के पशु जन-स्वास्थ्य एवं महामारी विज्ञान विभाग के अध्यक्ष <strong>डॉ. राजेश खुराना </strong>ने बताया कि विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ टीमें लगातार फील्ड में सक्रिय हैं और प्रभावित पशुओं की जांच व उपचार कर रही हैं। हाल के मानसून सीजन में गीले व कीचड़युक्त वातावरण के कारण फुट रॉट बीमारी के तेजी से फैलने की आशंका बढ़ गई है।</p>
<p>यह रोग मुख्यतः Dichelobacter nodosus <span>और </span>Fusobacterium necrophorum <span>नामक जीवाणुओं के संक्रमण से उत्पन्न होता है</span>, <span>जो पशुओं के खुरों (हूफ़) की ऊपरी सतह तथा इंटरडिजिटल (ऊँगली-के बीच का हिस्सा) त्वचा को प्रभावित करते हैं। यदि समय पर इसका उपचार न किया जाए</span>, तो इससे पशुओं में लंगड़ापन, तेज दर्द और दूध व ऊन उत्पादन में भारी गिरावट हो सकती है।</p>
<p><strong>रोग के लक्षण </strong></p>
<p>फुट रॉट के प्रमुख लक्षणों में चलने-फिरने में कठिनाई, खुरों के आसपास सूजन व लालिमा, दुर्गंधयुक्त सड़न, खुर की ऊपरी सतह का अलग होना और कभी-कभी बुखार व बेचैनी देखी जाती है।</p>
<p>हरियाणा सरकार की ओर जारी विज्ञप्ति के अनुसार, फुट रॉट (पैर सड़न) रोग विशेष रूप से हरियाणा के हिसार, भिवानी, जींद और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों चूरू व हनुमानगढ़ में अधिक पाया गया है ।</p>
<p><strong>पशुपालकों को सलाह </strong></p>
<p>लुवास द्वारा पशुपालकों को सलाह दी गई है कि</p>
<ul>
<li><strong>पशुओं के रहने-स्थान</strong> को नियमित रूप से साफ और <strong>सूखा</strong> रखें।</li>
<li><strong>नियमित फुट-बाथ</strong>: जिसमें 10% <span>जिंक सल्फेट</span>, 4 % <span>फॉर्मेलिन या </span>5 % <span>लाल दवा के घोल से खुरों की सफाई करें </span></li>
<li><strong>संक्रमित पशुओं</strong> को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें, <span>खुरों की नियमित सफाई करें और घावों को मक्खियों-कीटों से सुरक्षित रखें </span></li>
<li><strong>बीमारी के लक्षण</strong> दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें</li>
</ul>
<p>डॉ. खुराना ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय की टीमें पी.पी.आर., चिचड़ी जनित रोग और आंतरिक परजीवियों से होने वाले अन्य संक्रामक रोगों की भी पहचान कर रहीं हैं और पशुपालकों को समय पर रोकथाम व बचाव संबंधी जानकारी प्रदान की जा रही है। फुट रॉट बीमारी से संबंधित लुवास के वैज्ञानिक डॉ रमेश और डॉ पल्लवी ने पशुपालकों से अपील की है कि वे इस बीमारी को फैलने से रोकने हेतु स्वच्छता, जैव-सुरक्षा एवं आवश्यक सतर्कता बरतें।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68fb060a7ca93.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ भेड़-बकरियों में फैल रही फुट रॉट बीमारी, लुवास ने जारी की एडवाइजरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68fb060a7ca93.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गंगा एक्सप्रेसवे की मांग को लेकर बिजनौर के किसानों का पोस्टकार्ड अभियान, सीएम को भेजेंगे 1 लाख पोस्टकार्ड]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/bijnor-farmers-send-50000-postcards-to-cm-demanding-ganga-expressway.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 21 Oct 2025 18:52:37 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/bijnor-farmers-send-50000-postcards-to-cm-demanding-ganga-expressway.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div>गंगा एक्सप्रेसवे को बिजनौर से निकालने और गन्ना मूल्य वृद्धि सहित कई मांगों लेकर बिजनौर जिले में किसानों ने पोस्टकार्ड अभियान छेड़ दिया है। भाकियू (अराजनैतिक) के युवा प्रदेशाध्यक्ष दिगंबर सिंह के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान के तहत जिलेभर के किसानों ने मुख्यमंत्री को पोस्टकार्ड भेजने शुरू कर दिए हैं। इस पहल को लोगों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।</div>
<div></div>
<div>किसान नेता दिगंबर सिंह ने बिजनौर से गंगा एक्सप्रेसवे निकालने, गन्ना मूल्य वृद्धि और नजीबाबाद शुगर मिल की क्षमता विस्तार की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को एक लाख पोस्ट कार्ड भेजने की बात कहीं थी। जानकारी के अनुसार, अब तक 50 हजार से अधिक पोस्टकार्ड&nbsp;मुख्यमंत्री को भेजे जा चुके हैं। जिले के डाकघरों में पोस्टकार्ड खत्म हो गए तो किसानों की मांग पर&nbsp;65 हजार पोस्टकार्डों की नई खेप&nbsp;लखनऊ से मंगाई गई। जिसमें से 20 हजार पोस्टकार्ड पहले ही दिन बिक गए।</div>
<div data-smartmail="gmail_signature">
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<div dir="auto">
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68f78c642ac64.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>अभियान का नेतृत्व कर रहे&nbsp;किसान नेता दिगंबर सिंह का कहना है कि गंगा एक्सप्रेसवे बिजनौर से होकर गुजरे तो बिजनौर जिले के विकास को नई रफ्तार मिलेगी। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और मजबूती होगी। इस मांग को उठाने के लिए यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है।</p>
<p>युवाओं की इस अभियान में अहम भूमिका रही। वे गांव-गांव जाकर लोगों को पोस्टकार्ड लिखने और मुख्यमंत्री को भेजने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। डाकघरों में पोस्टकार्डों की भारी मांग के चलते कई जगह स्टॉक खत्म हो गया।&nbsp;</p>
<p>किसानों का कहना है कि यह सिर्फ गंगा एक्सप्रेसवे का नहीं बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास का सवाल है। अगर सरकार ने बिजनौर मार्ग को मंजूरी दी तो यह क्षेत्र औद्योगिक, व्यापारिक और कृषि दृष्टि से एक बड़ा केंद्र बन जाएगा।</p>
<p><strong>गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना</strong></p>
<p dir="ltr">गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का एक<span>&nbsp;</span>महत्वाकांक्षी 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट<span>&nbsp;</span>है, जिसे<span>&nbsp;</span>मेरठ से प्रयागराज&nbsp;तक बनाया जाएगा।&nbsp;<span>एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक कोरिडोर विकसित किया जाएगा।&nbsp;</span><span>यह एक्सप्रेसवे 12 जिलों से होकर गुजरेगा और इसे भारतीय वायुसेना के विमानों की आपातकालीन लैंडिंग के लिए 3.5 किमी लंबी हवाई पट्टी के साथ बनाया जा रहा है।</span></p>
<div dir="auto">
<p>यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देगा।&nbsp;<span>दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के बाद भारत का दूसरा सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बन जाएगा।</span></p>
<h3>प्रमुख ज़िले जिनसे होकर एक्सप्रेसवे गुजरेगा:</h3>
<p>मेरठ &rarr; हापुड़ &rarr; बुलंदशहर &rarr; अमरोहा &rarr; संभल &rarr; बदायूं &rarr; शाहजहांपुर &rarr; हरदोई &rarr; उन्नाव &rarr; रायबरेली &rarr; प्रतापगढ़ &rarr; प्रयागराज</p>
<h3>उद्देश्य:</h3>
<ul>
<li>
<p>पश्चिम से पूर्व तक औद्योगिक और कृषि उत्पादों के त्वरित परिवहन को बढ़ावा देना।</p>
</li>
<li>
<p>निवेश और रोजगार सृजन में वृद्धि करना।</p>
</li>
<li>
<p>दिल्ली और प्रयागराज के बीच यात्रा समय को लगभग 8 घंटे से घटाकर 5 घंटे करना।</p>
</li>
</ul>
<div dir="auto"><span><strong>लागत:</strong>&nbsp;</span></div>
<div dir="auto"><span>लगभग 36,230 करोड़ रुपये</span></div>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
</div>
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</div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68f78c4f1e02e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गंगा एक्सप्रेसवे की मांग को लेकर बिजनौर के किसानों का पोस्टकार्ड अभियान, सीएम को भेजेंगे 1 लाख पोस्टकार्ड ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा सरकार ने गन्ना मूल्य बढ़ाकर 415 रुपये किया, देश में सर्वाधिक दाम देने का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-government-hikes-sugarcane-price-to-rs-415-announces-highest-price-in-the-country.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 19 Oct 2025 20:10:58 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-government-hikes-sugarcane-price-to-rs-415-announces-highest-price-in-the-country.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गन्ना किसानों के लिए दीपावली पर बड़ा ऐलान किया है। हरियाणा सरकार ने गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (SAP) में बढ़ोतरी करते हुए देश में सबसे अधिक गन्ना मूल्य प्रदान करने का निर्णय लिया।</p>
<p>नई दरों के अनुसार, अगेती किस्म के गन्ने का भाव 400 रुपये से बढ़ाकर 415 रुपये प्रति क्विंटल और पछेती किस्म का भाव 393 रुपये से बढ़ाकर 408 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इसे किसानों की मेहनत और समर्पण को सम्मान देने वाला कदम बताया।</p>
<p>सीएम सैनी ने कहा कि किसानों का हित सरकार के लिए सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, &ldquo;गन्ना किसानों को देश में सर्वाधिक समर्थन मूल्य देकर हम उनके जीवन में समृद्धि और खुशहाली लाने का प्रयास कर रहे हैं। यह निर्णय दीपावली के पर्व को और मीठा बनाएगा।&rdquo;</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मूल्य वृद्धि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति देगी और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा सरकार का यह निर्णय न केवल गन्ना उत्पादकों को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल साबित होगा।</p>
<p>अहम बात यह है कि देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में गन्ने की अगैती किस्म का एसएपी पिछले दो पेराई सीजन 2023- 2024 और 2024-25 में 370 रुपये प्रति क्विंटल था। पिछले सात पेराई सीजन में उत्तर प्रदेश में गन्ना एसएपी में केवल तीन बार ही बढ़ोतरी हुई जबकि चार बार गन्ना मूल्य फ्रीज रहा है। हरियाणा सरकार द्वारा गन्ने का एसएपी चालू सीजन (2025-26) के लिए 415 रुपये प्रति क्विंटल करने के फैसले से उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसानों को मिलने वाले भाव में 45 रुपये प्रति क्विंटल का बड़ा अंतर आ गया है। जबकि हरियाणा में गन्ने में चीनी की रिकवरी का स्तर उत्तर प्रदेश से कम है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों में नाराजगी बढ़ सकती है और राज्य सरकार पर गन्ने के एसएपी में बढ़तरी का दबाव बनेगा। लेकिन हरियाणा, पंजाब में उत्तर प्रदेश के मुकाबले गन्ने के एसएपी में जितना अंतर खड़ा हो गया है उसे पाटने की कोई संभावना नजर नहीं आती है। पंजाब ने पिछले सीजन के लिए गन्ने का एसएपी 401 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। चालू साल में उत्तर प्रदेश में गन्ने के रकबे में पिछले साल के मुकाबले करीब 50 हजार हैक्टेयर की कमी आई है &nbsp;जो यहां के किसानों के बीच गन्ने की फसल के प्रति घटते रुझान का संकेत है।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68f4fdbca259e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा सरकार ने गन्ना मूल्य बढ़ाकर 415 रुपये किया, देश में सर्वाधिक दाम देने का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68f4fdbca259e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अस्पताल की मांग को लेकर उत्तराखंड में अभूतपूर्व आंदोलन, महिलाओं ने संभाला मोर्चा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/a-unique-movement-in-uttarakhand-demanding-better-hospital-and-health-services-women-took-charge.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 16 Oct 2025 10:17:31 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/a-unique-movement-in-uttarakhand-demanding-better-hospital-and-health-services-women-took-charge.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="316" data-end="697">उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले का चौखुटिया क्षेत्र। गेवाड़ घाटी में इन दिनों जनाक्रोश की गूंज सुनाई दे रही है। चौखुटिया के बाजार में बड़ी तादाद में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग सड़कों पर उतर आए। लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ लोगों ने आंदोलन छेड़ दिया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग को लेकर चल रहे इस आंदोलन को &lsquo;ऑपरेशन स्वास्थ्य&rsquo; नाम दिया गया है।</p>
<p data-start="699" data-end="1062">चौखुटिया क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली अब एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में न तो विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न ही आवश्यक जांच उपकरण। मरीजों को अक्सर अल्मोड़ा या हल्द्वानी रेफर कर दिया जाता है, जहां तक पहुंचते-पहुंचते कई बार रास्ते में ही जान चली जाती है। इसी लाचारी ने लोगों को सड़कों पर उतरने पर मजबूर कर दिया है।</p>
<p data-start="699" data-end="1062">आंदोलन तेज होता देख मुख्यमंत्री <strong>पुष्कर सिंह धामी</strong> ने चौखुटिया सीएचसी को उपजिला अस्पताल में अपग्रेड करने का प्रस्ताव शासन को भेजने और एक महीने के भीतर शासनादेश जारी करने की घोषणा की है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68f077c382dca.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="699" data-end="1062"><strong>ऑपरेशन स्वास्थ्य बना जन आंदोलन&nbsp;</strong></p>
<p data-start="1064" data-end="1354">आंदोलन की अगुवाई दो पूर्व सैनिक <strong>भुवन कठायत</strong> और <strong>हीरा सिंह पटवाल</strong> कर रहे हैं। अग्रणी मोर्चे पर महिलाओं की भागीदारी ने इस आंदोलन को ऐतिहासिक बना दिया है। आंदोलन का स्वरूप अब तक शांतिपूर्ण रहा है। बीते दिनों हीरा सिंह पटवाल ने रामगंगा नदी के तट पर &ldquo;जल सत्याग्रह&rdquo; कर अपनी मांगों को उठाया।&nbsp;</p>
<p data-start="1356" data-end="1556">चौखुटिया अस्पताल को अपग्रेड करने, विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती, 24 घंटे इमरजेंसी सुविधा और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता की मांग को लेकर &lsquo;ऑपरेशन स्वास्थ्य&rsquo; आंदोलन 2 अक्टूबर से लगातार जारी है।</p>
<p data-start="1356" data-end="1556"><strong>सड़कों पर दिखा जनाक्रोश&nbsp;</strong></p>
<p data-start="1558" data-end="2050">15 अक्टूबर का दिन इस आंदोलन में ऐतिहासिक साबित हुआ। सुबह से ही आसपास के गांवों से हजारों लोग चौखुटिया बाजार में जुटने लगे। व्यापारियों ने समर्थन में अपनी दुकानें बंद रखीं। पूर्व सैनिकों ने भी आंदोलन को पूरा समर्थन दिया। हजारों लोगों ने अपनी मांगों के समर्थन में चौखुटिया बाजार से तहसील कार्यालय तक विशाल जनाक्रोश रैली निकाली। चौखुटिया बाजार<strong> &ldquo;डॉक्टर दो, अस्पताल बचाओ&rdquo;</strong> और <strong>&ldquo;रेफर नहीं, इलाज चाहिए&rdquo;</strong> जैसे नारों से गूंज उठा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68f077f7caee9.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="2052" data-end="2319">खास बात यह है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल या संगठन द्वारा नहीं चलाया जा रहा है। बरसों से स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और डॉक्टरों की कमी ने लोगों को आंदोलन करने पर मजबूर कर दिया है। पहाड़ के अस्पताल बुनियादी सुविधाओं के अभाव में केवल &ldquo;रेफर सेंटर&rdquo; बनकर रह गए हैं।</p>
<p data-start="2052" data-end="2319"><strong>टकराव नहीं सुधार चाहिए</strong></p>
<p data-start="2321" data-end="2575">चौखुटिया निवासी <strong>धीरज सिंह नेगी</strong> कहते हैं, &ldquo;इस रैली के माध्यम से हमने सरकार तक अपनी बात पहुँचाने की कोशिश की है। हमारी बस इतनी-सी मांग है कि स्वास्थ्य केंद्र को सशक्त बनाया जाए, ताकि हमारे लोग इलाज के लिए दूर-दूर न भटकें। हम टकराव नहीं, सुधार चाहते हैं।&rdquo;</p>
<p data-start="2577" data-end="2924">आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक सीएचसी को अपग्रेड नहीं किया जाता, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं होती और अस्पताल में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। धरनास्थल पर प्रदर्शनकारियों ने अनशन भी शुरू कर दिया है। बीते हफ्ते अनशन पर बैठे भूपाल सिंह बोरा को पुलिस ने जबरन धरना स्थल से हटाया, जिससे माहौल और गरमा गया।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68f0784ce0919.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="2577" data-end="2924"><strong>असल मुद्दों की बजाय प्रचार पर जोर&nbsp;</strong></p>
<p data-start="2926" data-end="3331">उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष <strong>बॉबी पंवार</strong> का कहना है कि उत्तराखण्ड सरकार जल्द ही मांगों को पूरा करें अन्यथा चौखुटिया के अलावा प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में इस प्रकार के जनांदोलन शुरू होंगे। चेहरा चमकने के लिए खर्च किए गए 1000 करोड़ का यदि 50% भी स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी के लिए खर्च होता तो आज तस्वीरें कुछ और होती। यह आंदोलन सिर्फ चौखुटिया का नहीं, बल्कि उत्तराखंड के हर उस क्षेत्र की आवाज है जो विकास के दावों के बीच पीछे छूट गया है।&nbsp;</p>
<p data-start="3333" data-end="3518"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68f07615cb99f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अस्पताल की मांग को लेकर उत्तराखंड में अभूतपूर्व आंदोलन, महिलाओं ने संभाला मोर्चा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में बनेगी डिजिटल कृषि नीति, सीएम योगी ने यूपी एग्रीज परियोजना की समीक्षा की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/uttar-pradesh-to-formulate-digital-agriculture-policy-cm-yogi-reviews-up-agris-project.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 15 Oct 2025 11:05:07 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/uttar-pradesh-to-formulate-digital-agriculture-policy-cm-yogi-reviews-up-agris-project.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को डिजिटल और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में <em>उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल इंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग प्रोजेक्ट (UP AGRIS)</em> की प्रगति की समीक्षा करते हुए राज्य में डिजिटल कृषि नीति तैयार करने के निर्देश दिए।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर, टिकाऊ और डिजिटल रूप से सक्षम बनाना शामिल है। उन्होंने निर्देश दिए कि <em>&lsquo;</em><em>डिजिटल एग्रीकल्चर इकोसिस्टम&rsquo;</em> के निर्माण की प्रक्रिया को गति दी जाए, ताकि फसल, मौसम, बीज, सिंचाई, उर्वरक, बीमा, बाजार, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत सेवाओं से जुड़ी सभी सूचनाएं एकीकृत प्लेटफॉर्म पर रियल टाइम उपलब्ध हो सकें। <span>इसके लिए प्रदेश में डिजिटल कृषि नीति तैयार की जाए, जो राष्ट्रीय तकनीकी मानकों पर आधारित हो और सुरक्षित साइबर अवसंरचना तथा नवाचार आधारित अनुसंधान को प्रोत्साहित करे।</span></p>
<p>योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह परियोजना <em>&ldquo;</em><em>बीज से लेकर बाजार तक&rdquo;</em> की प्रक्रिया को जोड़ते हुए किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने और कृषि क्षेत्र को तकनीकी रूप से उन्नत बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने <em>&ldquo;</em><em>कृषि से उद्योग तक&rdquo;</em> की सोच के साथ मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और स्थानीय रोजगार सृजन को प्राथमिकता देने पर बल दिया।</p>
<p><strong>4000 </strong><strong>करोड़ रुपये की परियोजना, 28 </strong><strong>जिलों में क्रियान्वयन</strong><br />बैठक में बताया गया कि लगभग ₹4000 करोड़ की यह परियोजना विश्व बैंक के सहयोग से छह वर्षों तक पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के 28 जिलों में लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य बदलते जलवायु परिदृश्य के अनुरूप सतत कृषि वृद्धि, किसानों को बाजार से जोड़ना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है।</p>
<p><strong>फसल क्लस्टर और मत्स्य विकास पर फोकस</strong><br />मुख्यमंत्री को बताया गया कि कमोडिटी क्लस्टर दृष्टिकोण के तहत बुंदेलखंड में मूंगफली, वाराणसी में लाल मिर्च व सब्जियां, बाराबंकी से आज़मगढ़ तक केला, और अन्य जिलों में काला नमक चावल, हरी मटर, उड़द और आलू के क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने केले की खेती में <em>&lsquo;</em><em>टिशू कल्चर&rsquo;</em> तकनीक को प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया।</p>
<p>मत्स्यपालन क्षेत्र पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मछली के सीड राज्य में ही तैयार किए जाएं ताकि मत्स्यपालकों की लागत घटे। परियोजना के तहत लगभग 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मत्स्य उत्पादन को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे एक लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिलेगा।</p>
<p><strong>कृषि वित्तीय प्रणाली को सुदृढ़ बनाने पर जोर</strong><br />मुख्यमंत्री ने छोटे और सीमांत किसानों को ऋण सुविधा, जोखिम प्रबंधन और निजी निवेश प्रोत्साहन पर बल देते हुए कृषि वित्तीय प्रणाली को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने परियोजना की सतत मॉनिटरिंग और विशेषज्ञों की नियुक्ति के निर्देश भी दिए।</p>
<p>बैठक में यह भी बताया गया कि परियोजना से जुड़ी संस्थागत तैयारियों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) के साथ छह वर्षीय उत्पादकता कार्यक्रम का अनुबंध स्वीकृत किया जा चुका है, जबकि तकनीकी और परामर्शी एजेंसियों के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में बनेगी डिजिटल कृषि नीति, सीएम योगी ने यूपी एग्रीज परियोजना की समीक्षा की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में ‘मेरी फसल–मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकरण के बाद ही किसानों को मिलेगी खाद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/in-haryana-farmers-will-get-fertilizers-only-after-registering-on-the-meri-fasal-mera-byora-portal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 09 Oct 2025 11:14:38 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/in-haryana-farmers-will-get-fertilizers-only-after-registering-on-the-meri-fasal-mera-byora-portal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा सरकार ने खाद वितरण प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए इसे अब पूरी तरह <strong>&lsquo;</strong><strong>मेरी</strong> <strong>फसल</strong><strong>&ndash;</strong><strong>मेरा</strong> <strong>ब्यौरा</strong><strong>&rsquo; (</strong><strong>एमएफएमबी</strong><strong>) </strong><strong>पोर्टल</strong> से जोड़ दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब किसानों को पोर्टल पर पंजीकरण के बाद ही खाद उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने इस प्रणाली को पंचकूला में सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है।</p>
<p>कृषि विभाग ने बताया कि इस व्यवस्था को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। मंजूरी के बाद <strong>इंटीग्रेटेड</strong> <strong>फर्टिलाइजर</strong> <strong>मैनेजमेंट</strong> <strong>सिस्टम</strong><strong> (</strong><strong>आईएफएमएस</strong><strong>)</strong> को &lsquo;मेरी फसल&ndash;मेरा ब्यौरा&rsquo; (एमएफएमबी) पोर्टल से जोड़ दिया गया है। विभाग की ओर से किसानों को पंजीकरण कराने के लिए मैसेज भेजने शुरू कर दिए हैं।</p>
<p>कृषि विभाग के अनुसार, किसानों को खाद उपलब्ध कराने के फिलहाल कोई अतिरिक्त नियम या शर्त नहीं रखी गई है। सिर्फ पोर्टल पर पंजीकरण कराना पर्याप्त है। <strong>प्वाइंट</strong> <strong>ऑफ</strong> <strong>सेल</strong><strong> (</strong><strong>पीओएस</strong><strong>)</strong> मशीन पर किसान का पंजीकरण नंबर और <strong>बायोमेट्रिक</strong> <strong>सत्यापन</strong> के बाद ही खाद दी जाएगी।</p>
<p>प्रदेश में नई व्यवस्था बुधवार से लागू कर दी गई है। अब किसान केवल आधार कार्ड दिखाकर खाद नहीं&nbsp;ले सकेंगे। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और बायोमेट्रिक मशीन पर किसान का अंगूठा लगने के बाद ही खाद वितरित की जाएगी।</p>
<p>यह बदलाव ऐसे समय किया गया है जब खाद की किल्लत और मारामारी की खबरें आ रही हैं। खरीफ सीजन के बाद अब रबी सीजन के लिए भी खाद खरीदने के लिए किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस बीच सरकार खाद की तस्करी और गैर-कृषि कार्यों में खाद का दुरुपयोग रोकने की कोशिश कर रही है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68e74bb3b07ca.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में ‘मेरी फसल–मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकरण के बाद ही किसानों को मिलेगी खाद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में औने&amp;#45;पौने भाव पर धान बेचने को मजबूर किसान, मंडियों के बाहर खरीद पर रोक लगाने की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-up-are-forced-to-sell-paddy-at-throwaway-prices-demanding-a-ban-on-purchases-outside-mandis.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 08 Oct 2025 18:09:04 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-up-are-forced-to-sell-paddy-at-throwaway-prices-demanding-a-ban-on-purchases-outside-mandis.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खरीफ फसलों पर मौसम की मार के बाद अब बाजार की मार भी किसानों पर पड़ रही है। उत्तर प्रदेश में किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी कम, मात्र 1500&ndash;1600 रुपये प्रति कुंतल के भाव पर व्यापारियों को धान बेचने को मजबूर हैं।</p>
<p><strong>भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक)</strong> के राष्ट्रीय प्रवक्ता <strong>धर्मेंद्र मलिक</strong> ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मंडियों के बाहर व्यापारियों और चावल मिलों द्वारा की जा रही खरीद पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन खरीदारों द्वारा किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं दिया जा रहा है। <span>किसानों का धान 1500 से 1600 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदा जा रहा है। गौरतलब है कि धान का एमएसपी </span><span>2389 रुपये प्रति क्विंटल है।&nbsp;</span></p>
<p>धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि किसानों को पहले ही फसल में रोग और अधिक बारिश के कारण भारी नुकसान झेलना पड़ा है। राज्य सरकार ने धान खरीद शुरू कर दी है, लेकिन क्रय केंद्रों पर अधिकारी नमी, परिवहन और बारदाने का बहाना बनाकर किसानों को लंबी लाइनों में खड़ा कर रहे हैं। इसके चलते किसान खराब मौसम को देखते हुए मजबूरी में सस्ते दामों पर मंडी के बाहर धान बेच रहे हैं।</p>
<p>मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में मलिक ने बताया कि कुछ मंडियों में किसानों की फसल औने-पौने दामों में खरीदी जा रही है। खासकर तराई क्षेत्र के जनपदों <strong>रामपुर, पीलीभीत, बरेली, शाहजहांपुर और बाराबंकी</strong> में मंडी या उपमंडी स्थलों के बाहर व्यापारियों व चावल मिलों द्वारा धान की खरीद की जा रही है। ऐसी खरीद में किसानों को उनकी उपज का प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जबकि मंडी अधिनियम लागू करने और नई मंडियों के निर्माण का उद्देश्य ही किसानों को शोषण से बचाना और उन्हें उचित मूल्य दिलाना है।</p>
<p><strong>भाकियू (अ)</strong> ने सरकार से अपील की है कि किसानों का धान समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए और मंडियों के बाहर व्यापारियों व चावल मिलों की अवैध खरीद पर तत्काल रोक लगाई जाए। धर्मेंद्र मलिक ने सवाल उठाया, &ldquo;जब हरियाणा और पंजाब में धान की 80% से अधिक खरीद एमएसपी पर होती है, तो उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा मात्र 30% क्यों रहता है? यह खरीद न होने का प्रमाण है।&rdquo; उन्होंने आरोप लगाया कि धान क्रय केंद्र के निरीक्षक, चावल मिल मालिक और भारतीय खाद्य निगम के अधिकारी मिलकर किसानों के धान की लूट कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने सरकार से मंडी स्थलों के बाहर व्यापारियों और चावल मिलों द्वारा धान क्रय पर तत्काल रोक लगाने और अब तक हुई खरीद का विवरण एकत्र कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित व प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य मिल सके।</p>
<p></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68e65b41bf9a7.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68e65c15a48f1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में औने-पौने भाव पर धान बेचने को मजबूर किसान, मंडियों के बाहर खरीद पर रोक लगाने की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68e65c15a48f1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र बाढ़: सीएम फडणवीस ने किसानों के लिए 31 हजार करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-floodscm-fadnavis-announces-rs-31628-crore-relief-package-for-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 07 Oct 2025 22:34:50 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-floodscm-fadnavis-announces-rs-31628-crore-relief-package-for-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में बाढ़ और भारी बारिश से प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करने के लिए<strong> 31,628 करोड़ रुपये</strong> के विशेष पैकेज की घोषणा की है। हालांकि, विपक्षी दलों ने राहत पैकेज को नाकाफी और खोखला करार दिया है। &nbsp;</p>
<p>मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुंबई में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री <strong>देवेंद्र फडणवीस</strong> ने कहा कि सरकार किसानों को हर संभव मदद देगी जिसमें मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता और क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मत के लिए मुआवजा शामिल है।&nbsp;जिन किसानों की जमीन बाढ़ में बह गई है या खेती योग्य नहीं रही, <span>उन्हें </span>47 <span>हजार रुपये नकद और </span>3 <span>लाख रुपये नरेगा योजना के माध्यम से दिए जाएंगे</span>, <span>ताकि वे अपनी जमीन को फिर से खेती योग्य बना सकें। </span>इस दौरान उनके साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार भी मौजूद थे।</p>
<p>मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार ने अतिवृष्टि से प्रभावित और नुकसानग्रस्त किसानों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने के उद्देश्य से राहत पैकेज घोषित किया है। यह राहत पैकेज किसानों के पुनर्वास में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता को दर्शाता है।</p>
<p>महाराष्ट्र में भारी बारिश और बाढ़ से लगभग<strong> 68 लाख हेक्टेयर</strong> से अधिक कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है और लगभग 60 लाख किसान प्रभावित हुए हैं। किसानों के लिए घोषित राहत पैकेज महाराष्ट्र के 36 में से बाढ़ प्रभावित 29 जिलों और 358 <span>में से </span>253 तालुका को कवर करेगा। राहत पैकेज के तहत फसल बीमा कराने वाले 45 <span>लाख किसानों को प्रति हेक्टेयर </span>17,000 <span>रुपये की बीमा राशि मिलेगी।</span> रबी फसलों के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर <strong>10,000 </strong><span><strong>रुपये</strong> अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। </span></p>
<p>मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सरकार समय आने पर<strong> ऋण माफी</strong> की घोषणा करेगी। लेकिन फिलहाल प्राथमिकता किसानों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद करना है। राज्य सरकार की ओर से किसानों को हुए नुकसान पर एक व्यापक ज्ञापन केंद्र को सौंपने की तैयारी की जा रही है।</p>
<p><strong>राहत पैकेज</strong> में फसल नुकसान, <span>मिट्टी के कटाव</span>, <span>घायलों के </span>उपचार, <span>निकट परिजन के लिए अनुग्रह राशि</span>, <span>घरों</span>, <span>दुकानों और पशु</span>ओं को हुए नुकसान आदि के लिए मुआवजा शामिल है। एनडीआरएफ के नियमों के तहत केवल तीन पशुओं तक ही मुआवजा दिया जाता था लेकिन राज्य सरकार ने किसानों के हरेक मृत पशु को राहत पैकेज में कवर करने का निर्णय लिया है।</p>
<p>राज्य सरकार ने <strong>ध्वस्त मकानों</strong> के फिर से निर्माण के लिए सहायता तथा नुकसान उठाने वाले दुकानदारों के लिए <strong>50 हजार रुपये</strong> की मदद का ऐलान किया है। बाढ़ में क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सहायता दी जाएगी। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि&nbsp;<span>किसानों की मानसिक </span>पीड़ा और आर्थिक नुकसान की पूरी भरपाई संभव नहीं है, <span>लेकिन सरकार का दायित्व है कि वह हर किसान के साथ खड़ी रहे</span>।</p>
<p><strong>गन्ने के एफआरपी</strong> के मुद्दे पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि हमने किसानों को एफआरपी के जरिए मदद पहुंचाने को कहा है लेकिन कुछ चीनी मिल मालिक विरोध कर रहे हैं। हमारे किसान आपदा की मार झेल रहे हैं लेकिन कुछ लोग इस आपदा का राजनीतिकरण करना चाहते हैं। किसानों के हित में हम जल्द ही निर्णय लेंगे।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र बाढ़: सीएम फडणवीस ने किसानों के लिए 31 हजार करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जम्मू&amp;#45;कश्मीर के बाढ़ प्रभावित किसानों को पीएम&amp;#45;किसान की अग्रिम किस्त जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/advance-installment-of-pm-kisan-released-to-flood-affected-farmers-of-jammu-and-kashmir.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 07 Oct 2025 17:45:49 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/advance-installment-of-pm-kisan-released-to-flood-affected-farmers-of-jammu-and-kashmir.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 21वीं किस्त अग्रिम रूप से जारी की।</p>
<p>इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, जम्मू-कश्मीर के कृषि मंत्री जावेद अहमद डार, अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और किसान वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।</p>
<p>आज जारी की गई किस्त के तहत लगभग 8.55 लाख किसानों के बैंक खातों में सीधे 171 करोड़ रुपये स्थानांतरित किए गए हैं, जिनमें 85,418 महिला किसान शामिल हैं। अब तक जम्मू-कश्मीर के किसानों को पीएम-किसान योजना के अंतर्गत कुल 4,052 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बाढ़ और अन्य आपदाओं से प्रभावित किसानों के साथ केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने कहा, &ldquo;हम किसी भी किसान को संकट की इस घड़ी में अकेला नहीं छोड़ेंगे। पीएम-किसान की अग्रिम किस्त के रूप में दी गई यह राशि किसानों के लिए बड़ी राहत साबित होगी, जिससे वे अपने आवश्यक कार्य कर सकेंगे।&rdquo;</p>
<p style="text-align: center;"><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68e505d7a5fa5.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर सरकार से लगभग 5,100 घरों के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिली है। इन घरों के पुनर्निर्माण के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 85.62 करोड़ रुपये के विशेष प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इस राशि में मूल सहायता के साथ शौचालय निर्माण और मनरेगा से भी धनराशि प्रदान की जाएगी, ताकि प्रभावित परिवार अपने घर दोबारा बना सकें।</p>
<p>चौहान ने कहा कि राज्य से प्रस्ताव प्राप्त होने पर मनरेगा के तहत 100 दिनों के बजाय 150 दिनों की मजदूरी दी जाएगी, जिससे प्रभावित परिवारों को अतिरिक्त आजीविका सहायता मिल सके। उन्होंने यह भी बताया कि खेती-बाड़ी को फिर से शुरू करने के लिए बीज, खाद और अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह तैयार है।</p>
<p>&lsquo;जिसका खेत, उसकी रेत&rsquo; की नीति के तहत राज्य सरकार ने रेत बेचने की अनुमति भी प्रदान कर दी है। राज्य से प्रस्ताव मिलने पर आवश्यकता के अनुसार एनडीआरएफ के तहत अतिरिक्त सहायता राशि भी दी जाएगी। साथ ही, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राज्य का प्रस्ताव मिलने पर पीड़ित किसानों को बीमा राशि सीधे उनके बैंक खातों में दी जाएगी।</p>
<p>कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और राज्य के कृषि मंत्री जावेद अहमद डार ने भी अपने विचार रखे और केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही सहायता के लिए आभार व्यक्त किया। दोनों मंत्रियों ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को हाल ही में प्रभावित क्षेत्रों के उनके दौरे के लिए धन्यवाद दिया।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जम्मू-कश्मीर के बाढ़ प्रभावित किसानों को पीएम-किसान की अग्रिम किस्त जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में सोयाबीन के लिए भावांतर योजना के रजिस्ट्रेशन शुरू, विरोध में लामबंद हो रहे किसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/registration-for-the-soybean-price-support-scheme-in-madhya-pradesh-has-begun-opposition-raises-questions.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 03 Oct 2025 18:34:18 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/registration-for-the-soybean-price-support-scheme-in-madhya-pradesh-has-begun-opposition-raises-questions.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर योजना शुरू करने का ऐलान किया है। शुक्रवार 3 अक्टूबर से भावांतर योजना के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके तहत किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और मंडी के मॉडल भाव/बिक्री मूल्य के बीच के अंतर की भरपाई की जाएगी। हालांकि, प्रदेश में पिछली बार चलाई गई भावांतर योजना की खामियों को देखते हुए, फिर से योजना शुरू करने को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। किसान संगठनों ने भावांतर का विरोध शुरू कर दिया है।</p>
<p>मुख्यमंत्री <strong>डॉ. मोहन यादव</strong> ने कहा कि शुक्रवार से ही सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए भावांतर योजना के तहत पंजीयन प्रारंभ हो गया है। अब किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। सोयाबीन मंडी में बेचें, यदि एमएसपी से कम राशि में फसल बिकती है, तो बेची गई फसल की कीमत और एमएसपी के अंतर की राशि यानि भावांतर की राशि अगले 15 दिनों में सीधे किसानों के बैंक खाते में भेज दी जाएगी।&nbsp;</p>
<p><strong>भावांतर से भाव गिरने की आशंका</strong><br />पिछली बार, 2017 में मध्य प्रदेश में भावांतर योजना लागू होने के बाद, व्यापारियों ने मिलीभगत कर दाम गिरा दिए थे और सस्ते भाव पर खरीद कर मुनाफा कमाया। इस साल भी सोयाबीन के दाम एमएसपी 5,328 रुपये प्रति क्विंटल से काफी नीचे गिर चुके हैं और किसानों को 3,500&ndash;4,000 प्रति क्विंटल के भाव में बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। एमएसपी की घोषणा से जहां बाजार भाव बढ़ता है, वहीं भावांतर योजना की घोषणा के बाद बाजार कीमतों में गिरावट आती है, जिसका नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है।</p>
<p><strong>विपक्ष ने उठाए सवाल</strong><br />मध्य प्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष <strong>केदार सिरोही</strong> का कहना है कि भावांतर योजना से केवल व्यापारियों को फायदा होगा। जब केंद्र सरकार ने सोयाबीन का एमएसपी तय किया है, तो किसानों को एमएसपी मिलना चाहिए। लेकिन सरकार भावांतर योजना चला रही है। सिरोही के अनुसार, भावांतर योजना में किसानों को केवल मॉडल भाव और एमएसपी का अंतर मिलेगा, जिससे कम कीमत पर सोयाबीन बेचने वाले किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।</p>
<p>इस साल अतिवृष्टि और कीटों के हमले से सोयाबीन की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार किसानों के नुकसान का सही सर्वे कर राहत पहुंचाने में असफल रही है और अब उपज का एमएसपी भी सुनिश्चित नहीं कर पा रही है।</p>
<p><strong>लामबंद हो रहे किसान</strong></p>
<p>एक तरफ राज्य सरकार भावांतर योजना लागू करने में जुटी है। वहीं, भावांतर के विरोध में किसान संगठन लामबंद हो रहे हैं। हरदा जिले में आम किसान यूनियन ने ट्रैक्टर रैली निकालकर समर्थन मूल्य पर खरीदी और मुआवजे की मांग की। किसानों का कहना है "<span>अतिवृष्टि और कीटों से फसलें बर्बाद हो गई हैं, और सरकार समर्थन मूल्य पर खरीदी की बजाय भावांतर योजना लागू कर रही है, जिसका फायदा बिचौलियों को होगा।</span>&nbsp;इसी को लेकर आम किसान यूनियन ने आंदोलन का बिगुल बजा दिया है।"</p>
<p><strong>क्षतिपूर्ति का आकलन</strong><br />यदि मंडी में औसत गुणवत्ता की कृषि उपज का विक्रय मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम हो लेकिन राज्य सरकार द्वारा घोषित औसत मॉडल भाव से अधिक हो, तो किसान को केवल एमएसपी और वास्तविक बिक्री मूल्य के अंतर की क्षतिपूर्ति दी जाएगी। यदि मंडी में कृषि उपज का विक्रय मूल्य घोषित औसत मॉडल भाव से भी कम हो, तो किसान को एमएसपी और मॉडल भाव के अंतर की भरपाई प्राप्त होगी।</p>
<p><strong>किसानों का पंजीकरण व सत्यापन </strong></p>
<p>भावांतर योजना के लिए पंजीयन ई-उपार्जन पोर्टल पर होंगे। सोसायटियों में स्थापित केंद्रों, एमपी ऑनलाइन और किसान एप पर भी पंजीकरण हो सकेंगे।&nbsp;प्रदेश के किसानों और उनके रकबे का सत्यापन राजस्व विभाग के माध्यम से किया जाएगा। भावांतर की राशि पंजीकरण के समय दर्ज बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित की जाएगी। पंजीकरण के लिए किसानों को फसल, भूमि दस्तावेज, बैंक खाता और आधार कार्ड जैसी जानकारी प्रस्तुत करनी होगी।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में सोयाबीन के लिए भावांतर योजना के रजिस्ट्रेशन शुरू, विरोध में लामबंद हो रहे किसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र में लाखों एकड़ फसलों को नुकसान, 33 जिले प्रभावित, किसानों को मदद का इंतजार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/millions-of-acres-of-crops-damaged-in-maharashtra-33-districts-affected-farmers-waiting-for-government-aid.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 03 Oct 2025 12:54:16 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/millions-of-acres-of-crops-damaged-in-maharashtra-33-districts-affected-farmers-waiting-for-government-aid.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="201" data-end="516">महाराष्ट्र में भारी बारिश और बाढ़ के चलते फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है। हालांकि पिछले 2&ndash;3 दिनों से बारिश थमी है, लेकिन अभी भी राज्य के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। कुल 33 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं, जिनमें मराठवाड़ा के 8 जिले तथा पश्चिम महाराष्ट्र के सोलापुर और अहिल्यानगर जिले सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं।</p>
<p data-start="518" data-end="975">प्रदेश सरकार के अनुसार, महाराष्ट्र के लगभग 60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारी बारिश का सिलसिला जारी रहा, तो फसल बर्बादी का आंकड़ा एक करोड़ हेक्टेयर से ऊपर जा सकता है। आमतौर पर महाराष्ट्र में बाढ़ का खतरा ज्यादा नहीं रहता, लेकिन इस साल मानसून सीजन के दौरान सामान्य से अधिक बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। अगले चार&ndash;पांच दिनों में नुकसान का अपडेटेड आंकड़ा सामने आने की संभावना है।</p>
<p data-start="518" data-end="975"><strong data-start="977" data-end="1005">किन जिलों में हुआ नुकसान</strong><br data-start="1005" data-end="1008" />गोदावरी नदी के किनारे नाशिक, छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, हिंगोली, परभणी और नांदेड जिलों में सबसे ज्यादा खेती को नुकसान हुआ है। वहीं, अहिल्यानगर, सोलापुर और धाराशिव जिलों से बहने वाली सीना नदी के किनारे भी भारी क्षति हुई है। बीड, जालना, धाराशिव और सोलापुर जिलों में बड़े पैमाने पर खेतों की उपजाऊ मिट्टी बह गई है, जो किसानों के लिए एक नई चुनौती है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68df75d0c8ffe.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="977" data-end="1359" style="text-align: center;"><em>महाराष्ट्र के कई जिलों में गन्ने की फसल को काफी नुकसान पहुंचा</em></p>
<p data-start="1361" data-end="1647">सबसे ज्यादा नुकसान सोयाबीन, अरहर, मूंग, उड़द, कपास और गन्ने की फसलों को हुआ है। इसके अलावा मोसंबी, आम, अंगूर, अनार और अमरूद जैसी प्रमुख बागवानी फसलें भी प्रभावित हुई हैं। उपजाऊ मिट्टी का बह जाना, पशुधन की हानि और सिंचाई पंप व कुओं को हुए नुकसान ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68df76a717a33.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="1649" data-end="1914" style="text-align: center;"><em>खेतों की उपजाऊ मिट्टी बहकर खेती बरबाद हुई है, ये नया गंभीर संकट है&nbsp;</em><strong data-start="1649" data-end="1677"><br /></strong></p>
<p data-start="1649" data-end="1914"><strong data-start="1649" data-end="1677">किसानों को मदद का इंतजार</strong><br data-start="1677" data-end="1680" />प्रदेश सरकार ने मई से अगस्त माह तक हुए फसल नुकसान के लिए अब तक 2,250 करोड़ रुपये की राशि किसानों के बैंक खातों में जमा कराई है। फिलहाल महाराष्ट्र में आपदा प्रभावित किसानों को 2 हेक्टेयर भूमि पर 8,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x_68df77268e8b1.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="1916" data-end="2324" style="text-align: center;"><em>अधिक बारिश में खराब होने के कारण सोयाबीन काला पडा है</em></p>
<p data-start="1916" data-end="2324">हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राज्य में बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी दी और केंद्र से मदद की मांग की। फडणवीस ने बताया कि केंद्र सरकार ने नुकसान का विस्तृत डेटा मांगा है, जिसे अगले कुछ दिनों में भेज दिया जाएगा। उसके बाद केंद्र सरकार मदद की राशि राज्य को उपलब्ध कराएगी। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि दिवाली से पहले प्रभावित किसानों को सहायता राशि दी जाएगी।</p>
<p data-start="2326" data-end="2525">आपदा की मार झेल रहे किसानों के लिए कर्जमाफी की मांग भी उठ रही है। इस पर राज्य सरकार को जल्द निर्णय लेना होगा। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी बाढ़ प्रभावित किसानों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है।</p>
<p data-start="2527" data-end="2708">किसानों की निगाहें अब मुंबई और दिल्ली की सरकारों पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर पर्याप्त मदद नहीं मिली, तो प्रदेश में किसानों की आत्महत्या के मामले बढ़ सकते हैं।&nbsp;</p>
<p data-start="2527" data-end="2708"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र में लाखों एकड़ फसलों को नुकसान, 33 जिले प्रभावित, किसानों को मदद का इंतजार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/10/image_750x500_68df757a383fb.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में ट्यूबवेल बिजली बिलों का भुगतान दिसंबर तक स्थगित, फसली ऋण वसूली भी टली]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/payment-of-tubewell-electricity-bills-in-haryana-postponed-until-december-recovery-of-crop-loans-also-deferred.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 02 Oct 2025 13:36:10 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/payment-of-tubewell-electricity-bills-in-haryana-postponed-until-december-recovery-of-crop-loans-also-deferred.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार ने कई ऐलान किए हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ट्यूबवेल कनेक्शनों के बिजली बिलों का भुगतान दिसंबर&nbsp;2025&nbsp;तक स्थगित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जुलाई&nbsp;2025&nbsp;तक देय बिल अब जनवरी&nbsp;2026&nbsp;से बिना अतिरिक्त शुल्क अदा किए जा सकेंगे,&nbsp;जिससे&nbsp;7.10&nbsp;लाख किसानों को तुरंत राहत मिलेगी। &nbsp;</p>
<p>चंडीगढ़ में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने फसली ऋण की वसूली स्थगित करने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में बाढ़ से&nbsp;50&nbsp;प्रतिशत से अधिक फसलों का नुकसान हुआ है और वहां के ऋणी किसानों का फसल खराबा&nbsp;33&nbsp;प्रतिशत या उससे अधिक हुआ है,&nbsp;उन किसानों से सहकारी समितियों के खरीफ सीजन के चालू फसली ऋण की वसूली स्थगित की जाती है। ऐसे किसानों को रबी सीजन की फसल हेतु नया फसली ऋण भी उपलब्ध करवाया जाएगा। इस निर्णय से लगभग&nbsp;3&nbsp;लाख किसान लाभान्वित होंगे।</p>
<p><b><span lang="HI">बाढ़ प्रभावित<span>&nbsp;</span></span></b><b><span>2,386<span lang="HI">&nbsp;परिवारों को </span><span lang="HI">मुआवजा</span></span></b></p>
<p>इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हाल की भारी वर्षा और बाढ़ जैसे स्थिति से प्रदेश के कई जिलों में हुए नुकसान के लिए घरों,&nbsp;घरेलू सामान और पशुओं की हानि पर &nbsp;प्रभावित&nbsp;2,386&nbsp;परिवारों को कुल&nbsp;4&nbsp;करोड़&nbsp;72&nbsp;लाख&nbsp;6&nbsp;हजार रुपये की राशि सीधे खातों में स्थानांतरित की। इसमें&nbsp;2,371&nbsp;मकानों के नुकसान पर&nbsp;4&nbsp;करोड़&nbsp;67&nbsp;लाख&nbsp;75&nbsp;हजार रुपये और&nbsp;13&nbsp;पशुओं की हानि पर&nbsp;4&nbsp;लाख&nbsp;21&nbsp;हजार रुपये की राशि शामिल है। उन्होंने कहा कि हाल की भारी वर्षा और बाढ़ से प्रदेश के कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। फसल,&nbsp;पशु और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है,&nbsp;लेकिन सरकार हर कदम पर प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है।</p>
<p><strong><br /></strong><strong>क्षतिपूर्ति पोर्टल पर</strong><strong>&nbsp;5.37&nbsp;<span>लाख किसानों ने कराया पंजीकरण</span></strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने बताया कि नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने&nbsp;15&nbsp;सितंबर तक ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला था। इस पर प्रदेश के&nbsp;6,397&nbsp;गांवों के&nbsp;5&nbsp;लाख&nbsp;37&nbsp;हजार किसानों ने&nbsp;31&nbsp;लाख एकड़ क्षेत्र का पंजीकरण कराया है। सत्यापन कार्य प्रगति पर है और जिन क्षेत्रों में पानी से फसलें खराब हुई हैं,&nbsp;वहां प्रति एकड़&nbsp;15&nbsp;हजार रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा।&nbsp;</p>
<p><strong>धान की</strong><strong>&nbsp;3.58&nbsp;</strong><strong>लाख टन खरीद</strong>&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 30 सितंबर तक धान की 5 लाख टन आवक हुई है, जिसमें से 3.58 लाख टन की खरीद पूरी हो चुकी है। किसानों के खातों में अब तक 109 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।</p>
<p><strong>बाजरा एमएसपी का भावांतर भुगतान </strong><strong>&nbsp;</strong>&nbsp;</p>
<p>हरियाणा में 187.30&nbsp; टन बाजरा खरीद संस्थाओं द्वारा तथा 4,970 टन व्यापारियों द्वारा खरीदा गया है। किसानों को 2,775 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। राज्य की खरीद संस्थाओं द्वारा जिस भाव से बाजरा खरीदा जा रहा है, उससे शेष की भरपाई सरकार करेगी। यदि किसी किसान का बाजरा किसी कारण खराब होने की वजह से व्यापारियों द्वारा कम मूल्य पर खरीदा जाता है, तो उस स्थिति में भी सरकार किसानों को उस दिन की निर्धारित भावांतर दर की राशि का भुगतान किया जाएगा।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में ट्यूबवेल बिजली बिलों का भुगतान दिसंबर तक स्थगित, फसली ऋण वसूली भी टली ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र में भारी बारिश से प्याज और अन्य फसलें बर्बाद, किसानों को भारी नुकसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/heavy-rains-in-maharashtra-have-destroyed-onion-and-other-crops-causing-heavy-losses-to-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 24 Sep 2025 06:03:22 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/heavy-rains-in-maharashtra-have-destroyed-onion-and-other-crops-causing-heavy-losses-to-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="245" data-end="425">महाराष्ट्र में लगातार हो रही भारी बारिश ने फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है। प्याज सहित कई प्रमुख फसलें पानी में डूब गई हैं, जिससे किसानों को गंभीर आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है।</p>
<p data-start="427" data-end="822">राज्य के कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त&ndash;सितंबर में हुई मूसलाधार बारिश से 30 जिलों में लगभग <strong data-start="526" data-end="570">17.85 लाख हेक्टेयर (करीब 42.84 लाख एकड़)</strong> क्षेत्र की फसलें प्रभावित हुई हैं। नांदेड, यवतमाल, वाशीम, अकोला, बुलढाणा, सोलापुर और औरंगाबाद सहित कई जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। सोयाबीन, मक्का, कपास, दालें, गन्ना और हल्दी जैसी फसलों के साथ-साथ सब्ज़ियों और फलों को भी व्यापक नुकसान पहुँचा है।</p>
<p data-start="824" data-end="1148">सबसे गंभीर स्थिति प्याज उत्पादक क्षेत्रों की है। नासिक, अहमदनगर, जलगाँव, धुले, पुणे और सोलापुर में खड़ी प्याज की फसलें जलभराव से नष्ट हो गईं। जिन किसानों ने फसल काटकर भंडारण किया था, उनकी उपज भी लगातार नमी के कारण सड़ गई है। नासिक और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर प्याज की उपज खराब हो जाने से किसान गहरे संकट में हैं।</p>
<p data-start="1150" data-end="1469">महाराष्ट्र प्याज उत्पादक किसान संघ के नेता भारत दिघोले ने कहा कि कई वर्षों से किसानों को प्याज का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। इस साल किसानों ने बीज, खाद और मजदूरी पर खर्च कर फसल तैयार की, लेकिन जब उपज बेचने का समय आया तो बारिश ने सब बर्बाद कर दिया। अब या तो खेत में फसल नष्ट हो गई है या गोदामों में प्याज सड़ रही है।</p>
<p data-start="1471" data-end="1784">आमतौर पर किसान गर्मियों की प्याज को स्टोर कर लेते हैं ताकि मानसून सीजन में बेहतर दाम मिल सके। लेकिन इस बार बरसात के दौरान प्याज की कीमतें नहीं बढ़ीं। ऊपर से सितंबर में भारी बारिश ने प्याज की उपज को और नुकसान पहुंचा दिया। पहले किसानों को स्टोरेज पर खर्च करना पड़ा और अब उपज बर्बाद होने से उन पर दोहरी मार पड़ी है।</p>
<p data-start="1786" data-end="2010">राज्य सरकार ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। कृषि मंत्री ने प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवज़ा देने का आश्वासन दिया है। वहीं, महाराष्ट्र प्याज उत्पादक संघ ने प्रति एकड़ <strong data-start="1956" data-end="1988">एक लाख रुपये तक की राहत राशि</strong> देने की माँग की है।</p>
<p data-start="2012" data-end="2180">महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है। सितंबर में हुई भारी बारिश का असर अब थोक और खुदरा बाज़ारों में प्याज और अन्य सब्ज़ियों की कीमतों पर भी दिख सकता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र में भारी बारिश से प्याज और अन्य फसलें बर्बाद, किसानों को भारी नुकसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[धराली के किसानों से उम्दा क्वालिटी का सेब भी खरीदेगी उत्तराखंड सरकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/uttarakhand-government-will-also-buy-good-quality-apples-from-dharali-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 22 Sep 2025 07:56:49 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/uttarakhand-government-will-also-buy-good-quality-apples-from-dharali-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड सरकार आपदा प्रभावित उत्तरकाशी जिले के धराली, हर्षिल क्षेत्र के किसानों से अच्छी क्वालिटी का सेब भी खरीदने के लिए तैयार हो गई है। मुख्यमंत्री <strong>पुष्कर सिंह धामी</strong> ने प्रभावित क्षेत्र से रॉयल डिलीशियस सेब 51 रुपये और ग्रेड सी को छोड़कर दूसरी वैरायटी के सेब को 45 रुपये प्रति किग्रा दर पर खरीदने की घोषणा की है।&nbsp;</p>
<p dir="ltr">प्रदेश के कृषि एवं उद्यान मंत्री <strong>गणेश जोशी</strong> ने कहा कि धराली तथा आसपास के क्षेत्रों में आई आपदा के कारण इन इलाकों में सेब की फसलों को हुए नुकसान तथा क्षतिग्रस्त हुए मार्गों के दृष्टिगत उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से क्षेत्र के सेबों की दरें तय कर उपार्जन करने हेतु निवेदन किया तथा अधिकारियों को इस संबंध में योजना बनाने के निर्देश दिए थे। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है मुख्यमंत्री ने इन क्षेत्रों के रॉयल डिलीशियस सेब का रू 51/- प्रति किलो तथा रेड डिलीशियस व अन्य सेब का रू 45/- प्रति किलो की दर पर उद्यान विभाग द्वारा उपार्जन करने की घोषणा की है।</p>
<p dir="ltr">जोशी का हांकना है कि आपदा की इस घड़ी में धामी सरकार किसान भाइयों के साथ खड़ी है और उनकी सहायता हेतु हरसंभव कदम उठा रही है।</p>
<p style="text-align: center;"><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x_68d0b55bec0b9.jpg" alt="" /></p>
<p>सेब की यह खरीद उद्यान विभाग के माध्यम से की जाएगी, इसके लिए आवश्यक धनराशि की व्यवस्था मुख्यमंत्री घोषणा मद से की जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सचिव कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग को इस दिशा में तत्काल कार्यवाई करने को कहा है।&nbsp;</p>
<p>इस बीच सरकार ने ग्रेड सी सेब के लिए 13 रुपए का समर्थन मूल्य घोषित किया है। जो पिछले साल के बराबर ही है। उत्तरकाशी के जिला उद्यान अधिकारी रजनीश सिंह बताते हैं समर्थन मूल्य तय करने के लिए फसल की लागत को आधार बनाया जाता है।&nbsp;</p>
<p><strong>आठ गांवों में उत्पादन</strong><br />उत्तरकाशी जिले में हर्षिल के आस पास कुल आठ गांव सेब उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। इसमें हर्षिल, धराली, मुखबा, झाला, सुक्खी, जसपुर, पुराली, बगौरी शामिल है। इसमें धराली गांव में सर्वाधिक सेब होता है। जहां पांच अगस्त को &nbsp;क्षीरगंगा में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाते हुए, कई लोगों को जिंदा दफ्न कर दिया, इसके साथ ही यहां करीब ढाई हजार सेब के पेड़ भी पूरी तरह मलबे में दब चुके हैं।</p>
<p>पांच अगस्त को आई प्राकृतिक आपदा के बाद करीब सवा महीने तक हर्षिल घाटी का उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से सम्पर्क कटा रहा। अब पिछले सप्ताह क्षेत्र के लिए सड़क मार्ग बहाल हो गया है, लेकिन निजी खरीददार अब भी यहां नहीं पहुंच पाए हैं, जिस कारण किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया था।&nbsp;</p>
<p><strong>उत्तरकाशी है सेब बास्केट&nbsp;</strong><br />उत्तराखंड में सेब का सालाना उत्पादन करीब 64 हजार मीट्रिक टन होता है, इसमें उत्तरकाशी जिले में ही सर्वाधिक, 4875 हैक्टेयर क्षेत्रफल में सालाना करीब 26 मीट्रिक टन सेब उत्पादन होता है। उत्तरकाशी में हर्षिल वैली सेब उत्पादन के लिए आदर्श मानी जाती है। यहां झाला में ही राज्य सरकार की ओर से कोल्ड स्टोरेज भी बनाया गया है।<br /><br /></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ धराली के किसानों से उम्दा क्वालिटी का सेब भी खरीदेगी उत्तराखंड सरकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड आपदा में मौत का आंकड़ा 103 तक पहुंचा, देहरादून में 24 लोगों की जान गई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/the-death-toll-in-the-uttarakhand-disaster-has-reached-103-24-people-lost-their-lives-in-dehradun.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 20 Sep 2025 15:10:45 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/the-death-toll-in-the-uttarakhand-disaster-has-reached-103-24-people-lost-their-lives-in-dehradun.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="81" data-end="364">उत्तराखंड में इस बार की आपदा से मौत का आंकड़ा 103 तक पहुंच गया है। लौटते मानसून के दौरान इसी सप्ताह पहले देहरादून और फिर नंदानगर (चमोली) में आई आपदाओं में ही 26 लोगों की जान गई है, जिनमें से 24 मौतें अकेले देहरादून में हुई हैं। विभिन्न आपदाओं के बाद से अब तक 110 लोग लापता हैं।</p>
<p data-start="366" data-end="623">इस बार का मानसून सीजन उत्तराखंड पर भारी पड़ा है। उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, एक अप्रैल से अब तक राज्य में आपदाओं से कुल 103 लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि घायलों की संख्या 131 तक पहुंच गई है। इसी अवधि में 110 लोग लापता हुए हैं।</p>
<p data-start="366" data-end="623">मुख्यमंत्री <strong>पुष्कर सिंह धामी</strong> ने शनिवार को जनपद चमोली के आपदा प्रभावित नंदानगर क्षेत्र का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। सीएम धामी का कहना है कि आपदा की इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार प्रभावितों के साथ खड़ी है। प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि पीड़ितों को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए साथ ही विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति को शीघ्र बहाल किया जाए। अधिकारियों को राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x_68ce75e134075.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="366" data-end="623">अगस्त महीने में ही उत्तराखंड ने धराली (उत्तरकाशी) और थराली (चमोली) जैसी बड़ी आपदाएं देखीं। वहीं सैंज (पौड़ी) और नंदानगर (चमोली) में भूस्खलन से भारी नुकसान हुआ। नंदानगर में तो 15 दिनों के भीतर दूसरी बार आपदा आई। इस दौरान 6,781 पशुओं की मौत हुई और साढ़े पाँच हजार से अधिक भवनों को क्षति पहुंची। इनमें आवासीय भवन, होटल, होमस्टे और रिजॉर्ट शामिल हैं। इनमें से 5,204 भवन आंशिक रूप से जबकि 284 भवन पूरी तरह ध्वस्त हो गए। निजी संपत्तियों का नुकसान 600 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। दूसरी ओर सरकारी विभागों को कुल 1,618 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसके मुआवज़े के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से 5,376 करोड़ रुपये की मांग की है। विदित है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले चरण में राज्य को आपदा राहत के लिए 12,000 करोड़ रुपये का पैकेज घोषित कर चुके हैं।</p>
<h3 data-start="1387" data-end="1428">कृषि व उद्यान क्षेत्र को भारी क्षति</h3>
<p data-start="1429" data-end="1818">इस बार की आपदा में राज्य के किसानों और बागवानों को लगभग 80 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। विभागीय सचिव एस.एन. पांडेय के अनुसार, केवल उद्यान क्षेत्र को ही करीब 61 करोड़ रुपये की क्षति हुई है। सबसे अधिक नुकसान उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में हुआ, जहां किसानों के बगीचे मलबे में बह गए। आपदा मानकों के अनुसार किसानों को मुआवज़ा वितरित किया जा रहा है और अन्य तरीकों से भी उनकी मदद की जा रही है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x_68ce76457edbc.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<h3 data-start="1825" data-end="1873">देहरादून में एक ही दिन में सबसे अधिक मौतें</h3>
<p data-start="1874" data-end="2208">लौटता मानसून देहरादून को गहरे घाव दे गया है। सोमवार-मंगलवार की मध्यरात्रि हुई भीषण बारिश और बादल फटने से देहरादून में 24 लोगों की मौत हो गई, जबकि 14 लोग अब भी लापता हैं। सहस्त्रधारा पिकनिक स्थल के पास 25 से अधिक घर, रिजॉर्ट और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गए। आपदा के तीसरे दिन तक दून-पांवटा हाईवे और मसूरी मार्ग पूरी तरह नहीं खुल पाए थे।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x_68ce78ca50c39.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="1874" data-end="2208"><span>सहस्त्रधारा में आई बाढ़ से दर्जनों होटल और दुकानों को क्षति पहुंची है। इससे कारोबारियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है जबकि कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। कई लोगों ने लीज पर लेकर या प्रॉपर्टी खरीदकर होटल चलाना शुरू किया था। जबकि कई लोगों ने होटल बनाकर किराए पर दे रखा था। आपदा में स्वरोजगार से जुड़े लोगों को बड़ा नुकसान पहुंचा है। बाढ़ और भूस्खलन में मकान व दुकानें बर्बाद हो गईं। अब जीवन दोबारा पटरी पर लाना बड़ी चुनौती है।&nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x_68ce7a62baa52.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="1874" data-end="2208"><span></span></p>
<p data-start="2210" data-end="2459"></p>
<p data-start="2461" data-end="2498"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68ce799f503d3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड आपदा में मौत का आंकड़ा 103 तक पहुंचा, देहरादून में 24 लोगों की जान गई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनएच&amp;#45;44 पर जाम से सड़क पर सड़ रहा है कश्मीर का सेब, बागवानों को भारी नुकसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/nh-44-jammed-for-20-days-apples-from-kashmiri-farmers-rotting-on-the-road.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 17 Sep 2025 20:39:03 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/nh-44-jammed-for-20-days-apples-from-kashmiri-farmers-rotting-on-the-road.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कश्मीर घाटी के बागवानों के लिए इस मौसम में सबसे बड़ी चिंता सेब की खेप को समय पर मंडियों तक पहुंचाना है। लेकिन पिछले 20 दिनों से कश्मीर घाटी को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (एनएच-44) पर लगातार जाम लगा हुआ है। इस जाम में फंसे हजारों ट्रकों में भरे सेब अब सड़क पर ही सड़ने लगे हैं। सड़कों पर सड़ते सेब की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।</p>
<p>भारत का लगभग 80 प्रतिशत सेब उत्पादन कश्मीर से होता है। अगस्त के मध्य से, एनएच-44 भारी बारिश और भूस्खलन के कारण लगभग अवरुद्ध है। इस बंद के कारण फलों की खेप जम्मू जाने वाले ट्रकों में ही सड़ रही है। बड़ी मात्रा में सेब को कोल्ड स्टोरेज में रखने के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।</p>
<p>फल व्यवसाय से जुड़े लोगों का अनुमान है कि 14 अगस्त को हाईवे बंद होने के बाद से कश्मीर के किसानों को लगभग 700-750 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। कश्मीर की अर्थव्यवस्था में सेब का महत्वपूर्ण योगदान है और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी है।</p>
<p>परेशान किसान पिछले 20 दिनों से एनएच44 को बहाल करने में सरकार की नाकामी को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि सेब का सीजन बहुत छोटा होता है और अगर फल समय पर बाजार तक नहीं पहुंचा तो उसकी कोई कीमत नहीं रह जाती। ट्रकों में भरे कई हजार पेटी सेब खराब हो चुके हैं, जिससे बागवानों को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।</p>
<p><strong>मंडियों में आपूर्ति प्रभावित</strong></p>
<p>दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा की मंडियों में कश्मीरी सेब की आपूर्ति प्रभावित हो गई है। कारोबारी भी चिंता जता रहे हैं कि यदि समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ तो कीमतें बढ़ेंगी और उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण फल नहीं पहुंच पाएंगे।</p>
<p>व्यापारियों को डर है कि हाईवे पर यातायात पूरी तरह से बहाल हो जाने के बाद, अचानक बड़ी मात्रा में सेब स्टॉक निकलने से दिल्ली और अन्य जगहों के थोक बाज़ारों में फलों की आपूर्ति अचानक बढ़ेगी, जिससे कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है।</p>
<p><strong>हाईवे खोलने की चुनौती</strong></p>
<p>पिछले एक महीने के दौरान भारी बारिश और बादल फटने से श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे को काफी नुकसान हुआ है। खासकर चेनानी और उधमपुर के बीच तथा राजमार्ग के नाशरी व बनिहाल में भारी नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मसले पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से बात की, जिन्होंने समस्या के समाधान के लिए अगले जल्द ही ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बहाल करने के लिए दो-लेन का अस्थायी डायवर्जन बनाया गया है। इससे यातायात को बहाल करने में कुछ मदद मिली है।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68cace60a1dfe.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनएच-44 पर जाम से सड़क पर सड़ रहा है कश्मीर का सेब, बागवानों को भारी नुकसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूरिया की खपत घटाने वाले किसानों को मिलेगा प्रति बोरी 800 रुपये प्रोत्साहन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-who-reduce-urea-consumption-will-get-an-incentive-of-rs-800-per-bag.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 16 Sep 2025 10:52:53 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-who-reduce-urea-consumption-will-get-an-incentive-of-rs-800-per-bag.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="163" data-end="466">आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री <strong>एन. चंद्रबाबू नायडू</strong> ने घोषणा की है कि जो किसान अपनी यूरिया की खपत कम करेंगे, उन्हें सरकार की ओर से प्रति बोरी <strong>800 रुपये</strong> का प्रोत्साहन दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सोमवार को अमरावती में आयोजित जिला कलेक्टरों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह ऐलान किया।</p>
<p data-start="468" data-end="810">उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रधानमंत्री प्रणाम योजना के अंतर्गत मिलने वाली सब्सिडी सीधे किसानों तक पहुंचाई जाए, ताकि उन्हें रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। मुख्यमंत्री नायडू ने यह भी कहा कि राज्य में यूरिया की कोई कमी नहीं है, लेकिन समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बेहतर योजना बनाना आवश्यक है।</p>
<p data-start="468" data-end="810"><span>यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब मौजूदा खरीफ सीजन में किसानों को यूरिया की किल्लत का सामना&nbsp; करना पड़ रहा है। राज्य सरकार ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य किसानों को यूरिया पर अत्यधिक निर्भरता से मुक्त होकर अधिक टिकाऊ पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।</span></p>
<p data-start="812" data-end="1154">नायडू ने आगाह किया कि यूरिया और रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने चीन द्वारा रासायनिक अवशेषों के कारण आंध्र प्रदेश की मिर्च की खेप अस्वीकार किए जाने और पंजाब में कैंसर के बढ़ते मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश भी फिलहाल कैंसर मामलों में देश में पांचवें स्थान पर है।</p>
<p data-start="1156" data-end="1447">मुख्यमंत्री ने किसानों को सुझाव दिया कि वे मांग और आपूर्ति को ध्यान में रखकर फसलों का चयन करें और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाएं। उन्होंने रायलसीमा क्षेत्र में बागवानी फसलों की बढ़ती हिस्सेदारी का उल्लेख करते हुए बताया कि अब अनंतपुर जिले की प्रति व्यक्ति आय कोनासीमा क्षेत्र से अधिक हो गई है।</p>
<p data-start="1449" data-end="1732"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूरिया की खपत घटाने वाले किसानों को मिलेगा प्रति बोरी 800 रुपये प्रोत्साहन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इंदौर दुग्ध संघ ने बढ़ाई किसानों की खरीद दरें, 550 नई समितियां जोड़कर नेटवर्क का विस्तार करेगा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/indore-milk-union-raises-farmer-procurement-rates-adds-550-new-committees-to-expand-dairy-network.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 14 Sep 2025 14:22:42 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/indore-milk-union-raises-farmer-procurement-rates-adds-550-new-committees-to-expand-dairy-network.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंदौर सहकारी दुग्ध संघ ने किसानों के हित में बड़ा कदम उठाते हुए दूध खरीद दरों में बढ़ोतरी की है। 11 सितंबर 2025 से दूध खरीद दर 820 रुपये से बढ़ाकर 840 रुपये प्रति किलोग्राम फैट कर दी गई है। यह वृद्धि 2% से अधिक है। इसके साथ ही संघ अपने नेटवर्क का विस्तार करते हुए 550 नई दुग्ध समितियां गठित करेगा, जिससे समितियों की कुल संख्या 1,658 से बढ़कर 2,208 हो जाएगी।</p>
<p>वर्तमान में इंदौर संघ लगभग 2.8 लाख लीटर दूध प्रतिदिन किसानों से एकत्र करता है। नई समितियों के जुड़ने से करीब 14,000 नए दुग्ध उत्पादक इसमें शामिल होंगे। इससे न केवल दूध संग्रहण क्षमता बढ़ेगी, बल्कि कोल्ड चेन ढांचे को मजबूत करने, गुणवत्ता नियंत्रण में सुधार लाने और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।</p>
<p>संघ का यह कदम किसानों को राहत देने वाला माना जा रहा है, क्योंकि चारे, ईंधन और अन्य इनपुट लागतों में लगातार वृद्धि से दुग्ध उत्पादन महंगा हो गया है। बढ़ी हुई दरें किसानों को बेहतर आय देंगी और दुग्ध व्यवसाय को अधिक टिकाऊ बनाएंगी। इससे किसानों का भरोसा और निष्ठा संघ के प्रति और मजबूत होगी।</p>
<p>ध्यान देने वाली बात यह है कि इंदौर दुग्ध संघ ने खरीद दरें तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसका सीधा असर उपभोक्ता कीमतों पर तुरंत नहीं डाला गया है। संघ के ब्रांड सांची ने इस वर्ष की शुरुआत में ही पैकेज्ड दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। फिलहाल नई दरों का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है।</p>
<p>हालांकि माना जा रहा है कि यदि भविष्य में खरीद लागत और बढ़ी तो उपभोक्ता कीमतों में भी संशोधन करना पड़ सकता है। इस रणनीति की दीर्घकालिक सफलता इनपुट लागतों के कुशल प्रबंधन और सरकार से ढांचागत सहयोग पर निर्भर करेगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इंदौर दुग्ध संघ ने बढ़ाई किसानों की खरीद दरें, 550 नई समितियां जोड़कर नेटवर्क का विस्तार करेगा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ खरीद की तैयारी में जुटी हरियाणा सरकार, सीएम ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-government-preparing-for-kharif-procurement-cm-gave-strict-instructions-to-the-officers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 11 Sep 2025 16:59:52 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-government-preparing-for-kharif-procurement-cm-gave-strict-instructions-to-the-officers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आगामी खरीफ सीजन की फसल खरीद को लेकर हरियाणा सरकार ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री <strong>नायब सिंह सैनी</strong> ने चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय में उच्च स्तरीय बैठक कर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि<span> किसानों की उपज का हर दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा जाए। मंडियों और खरीद केंद्रों में सभी आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं, ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक मंडी में एक निरीक्षक 24 घंटे ड्यूटी पर रहेगा और ड्यूटी में कोताही बरतने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</span></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को एसएमएस द्वारा जानकारी उपलब्ध कराई जाए कि उनकी फसलें किस मंडी में खरीदी जाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि किसानों के मोबाइल पर गेट पास पहुंचे। मंडियों में स्कैनर की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए ताकि किसान मोबाइल से गेट पास डाउनलोड कर सकें।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>सोयाबीन</strong><strong>, </strong><strong>काला तिल और दालों पर बोनस</strong></p>
<p>बैठक में मुख्यमंत्री ने किसानों को <strong>सोयाबीन, काला तिल, उड़द</strong> और <strong>अरहर</strong> जैसी फसलों की ओर प्रोत्साहित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन फसलों पर बोनस दिया जाएगा। उन्होंने सोयाबीन को पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों का प्रमुख स्रोत बताते हुए इसके उत्पादन पर विशेष जोर दिया।</p>
<p><strong>आधुनिक सुविधाएं और नमी जांच</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नमी जांच के लिए <strong>एडवांस टेक्नोलॉजी</strong> की मशीनें खरीदी जाएं,&nbsp;ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। साथ ही मंडियों में नमी जांच के लिए प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएं। उन्होंने मंडियों में डिजिटल कांटे, जल निकासी, पेयजल, शौचालय और स्वच्छता सहित सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बारिश से फसल को नुकसान न हो, इसके लिए पर्याप्त भंडारण और तिरपाल की व्यवस्था करने को भी कहा गया है।</p>
<p><strong>खरीफ फसलों के एमएसपी</strong></p>
<p><span>मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सभी अधिकारियों को किसानों की फसलें एमएसपी पर खरीदने के सख्त निर्देश दिए।&nbsp;</span>खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार द्वारा एमएसपी दरें तय कर दी गई हैं। <strong>धान (कॉमन)</strong> के लिए 2369 रुपये और <strong>ग्रेड-ए धान</strong> के लिए 2389 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी निर्धारित है। <strong>ज्वार (हाईब्रिड)</strong> का एमएसपी 3699 रुपये तथा <strong>मलदंडी ज्वार</strong> का 3749 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। <strong>बाजरा</strong> 2775 रुपये, मक्का 2400 रुपये, <strong>तूर/अरहर</strong> 8000 रुपये, <strong>मूंग</strong> 8768 रुपये, <strong>उड़द</strong> 7800 रुपये, <strong>मूंगफली</strong> 7263 रुपये, <strong>सोयाबीन (पीला)</strong> 5328 रुपये, <strong>तिल</strong> 9846 रुपये और <strong>काला तिल</strong> 9537 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से एमएसपी घोषित किया गया है।&nbsp;<span lang="HI"></span></p>
<p>बैठक में खाद्य,&nbsp;नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री राजेश नागर,&nbsp;मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर,&nbsp;मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता,&nbsp;प्रमुख सचिव खाद्य,&nbsp;नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग डी. सुरेश,&nbsp;महानिदेशक खाद्य,&nbsp;महाप्रबंधक (क्षेत्र) भारतीय खाद्य निगम शरणदीप कौर बराड़,&nbsp;नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अंशज सिंह,&nbsp;मुख्य प्रशासक हरियाणा राज्य&nbsp;कृषि&nbsp;विपणन बोर्ड मुकेश कुमार आहुजा,&nbsp;प्रबंध निदेशक हैफेड मुकुल कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ खरीद की तैयारी में जुटी हरियाणा सरकार, सीएम ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में सुगंधित पौधों की खेती के लिए आएगी &amp;apos;महक क्रांति नीति&amp;apos;]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/aroma-revolution-policy-will-come-for-aromatic-plant-farming-in-uttarakhand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 03 Sep 2025 15:09:56 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/aroma-revolution-policy-will-come-for-aromatic-plant-farming-in-uttarakhand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="125" data-end="365">उत्तराखंड सरकार अगले दस वर्षों के भीतर 22,750 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सुगंधित पौधों यानी एरोमैटिक प्लांट्स की खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए जल्द ही कैबिनेट में <strong>महक क्रांति नीति</strong> लाई जाएगी। इस योजना से करीब 91 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।</p>
<p data-start="2170" data-end="2440">उत्तराखंड के कृषि मंत्री <strong>गणेश जोशी</strong> ने कहा कि महक क्रांति नीति प्रदेश के किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। इस महत्वाकांक्षी योजना का ड्राफ्ट शीघ्र ही मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। इस कार्य में <strong>सगंध पौधा केंद्र, सेलाकुई</strong> सक्रिय भूमिका निभाएगा। यह नीति किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।</p>
<p data-start="367" data-end="973">वर्तमान में उत्तराखंड में लगभग 9 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में एरोमैटिक प्लांट की खेती हो रही है, जिससे करीब 25 हजार किसान सीधे तौर पर जुड़े हैं। राज्य के कई जिलों की विशिष्ट जलवायु के कारण एरोमैटिक पौधों की खेती को आदर्श माना जाता है। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने चमोली के सुगंधित तेल और ऊधमसिंह नगर के पुदीना तेल को <em data-start="685" data-end="714">वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रॉडक्ट</em> योजना में शामिल किया है। इसी क्रम में अब राज्य सरकार भी एरोमैटिक खेती को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए वर्ष 2026 से 2047 तक <em data-start="851" data-end="869">महक क्रांति नीति</em> लागू की जाएगी, जिसके अंतर्गत किसानों को एरोमैटिक खेती हेतु प्रोत्साहन और प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।</p>
<h3 data-start="975" data-end="1007">1050 करोड़ के कारोबार का लक्ष्य</h3>
<p data-start="1008" data-end="1486">महक क्रांति नीति के तहत प्रथम चरण में वर्ष 2026 से 2036 तक 22,750 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर कार्य किया जाएगा। इससे 91 हजार से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही, एरोमैटिक प्लांट से संबंधित उद्योगों का टर्नओवर 1,050 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जो वर्तमान में महज 100 करोड़ रुपये है। वर्तमान में हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जनपदों में स्थित सिडकुल में कई उद्योग एरोमैटिक प्लांट पर आधारित हैं, जिनमें देश के कई नामी ब्यूटी प्रॉडक्ट और वेलनेस ब्रांड शामिल हैं।</p>
<h3 data-start="1488" data-end="1519">जनपदवार योजनाएं</h3>
<p data-start="1520" data-end="2168">महक क्रांति नीति के तहत प्रदेश के विभिन्न जनपदों में औषधीय एवं सुगंधित पौधों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष वैली विकसित की जाएंगी। सुगंध पौध केंद्र, सेलाकुई के निदेशक <strong>डॉ. नृपेंद्र चौहान</strong> के अनुसार, संबंधित जनपद की जलवायु को ध्यान में रखते हुए ही खेती का चयन किया गया है। इसके लिए किसानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।</p>
<p data-start="1520" data-end="2168">चमोली और अल्मोड़ा में 2,000 हेक्टेयर में <em data-start="1706" data-end="1724">डैमस्क रोज़ वैली</em>, चम्पावत और नैनीताल में 5,200 हेक्टेयर में <em data-start="1768" data-end="1781">सिनॉमन वैली</em>, पिथौरागढ़ में 5,150 हेक्टेयर में <em data-start="1816" data-end="1828">तिमूर वैली</em>, हरिद्वार एवं पौड़ी जनपद को मिलाकर 2,400 हेक्टेयर में <em data-start="1883" data-end="1899">लेमनग्रास वैली</em> तथा ऊधमसिंह नगर एवं हरिद्वार में 8,000 हेक्टेयर में <em data-start="1952" data-end="1963">मिंट वैली</em> विकसित की जाएगी।</p>
<p data-start="2442" data-end="2479"></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में सुगंधित पौधों की खेती के लिए आएगी 'महक क्रांति नीति' ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/09/image_750x500_68b80d16aa953.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दुबई एक्सपोर्ट हुआ उत्तराखंड का गढ़वाली सेब, देहरादून में खुलेगा एपीडा का ऑफिस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/apples-from-garhwal-in-uttarakhand-exported-to-dubai-apeda-office-to-open-in-dehradun.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 22 Aug 2025 16:37:48 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/apples-from-garhwal-in-uttarakhand-exported-to-dubai-apeda-office-to-open-in-dehradun.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में खिर्सू के आस-पास उगने वाले किंग रोट किस्म का सेब अपने कुरकुरेपन, स्वाद और प्राकृतिक मिठास के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन सेब उत्पादक किसानों के सामने बाजार तक पहुंच का संकट रहता है। ऐसे में <strong>कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा)</strong>, पौड़ी के सेब उत्पादक किसानों के लिए मददगार बनकर आया है। एपीडा ने 1.2 टन किंग रोट (गढ़वाली सेब) की पहली परीक्षण खेप दुबई के लिए रवाना की है। सब कुछ ठीक रहा तो गढ़वाली सेब दुबई के बाजार में बिकता नजर आएगा।&nbsp;</p>
<p>देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य सचिव <strong>सुनील बर्थवाल</strong> ने दुबई के लिए गढ़वाली सेब (किंग रोट किस्म) की पहली परीक्षण खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सचिव सुनील बर्थवाल ने कहा कि इस परीक्षण खेप के जरिए कोल्ड स्टोरेज मैनेजमेंट, लॉजिस्टिक ढांचे को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त होंगे। इसके बाद आने वाले वर्षों में निर्यात गंतव्य को दक्षिण-पूर्व एशिया और यूरोप तक भी विस्तारित किए जाने की संभावना है। भारत सरकार गढ़वाली सेब जैसे विशिष्ट उत्पादों के जरिए देश की कृषि-निर्यात टोकरी में विविधता लाने का प्रयास कर रही है।</p>
<p>इस अवसर पर एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव, उत्तराखंड सरकार की अपर सचिव झरना कमठान, सेंटर फॉर एरोमैटिक प्लांट्स के निदेशक डॉ. नृपेंद्र चौहान और सेब उत्पादक किसान शामिल हुए।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_68a85b4b8c61b.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>पौड़ी में सेब उत्पादन</strong><br />उत्तराखंड में सेब का सालाना उत्पादन करीब 64 हजार टन होता है। इसमें पौड़ी जिले में अभी मात्र एक हजार टन ही सेब होता है। उत्तराखंड में सर्वाधिक सेब उत्तरकाशी जिले में होता है, जहां लगभग लगभग 4875 हेक्टेयर क्षेत्रफल में करीब 26 हजार टन सेब उत्पादन होता है। पौड़ी में मुख्य रूप से खिर्सू की पहाड़ियों पर ही सेब उत्पादन होता है।&nbsp;</p>
<p><strong>लुलु समूह के साथ किया एमओयू</strong><br />एपीडा के मुताबिक, सेब से शुरू करते हुए आने वाले समय में उत्तराखंड से बासमती चावल, मोटे अनाज, राजमा, मसाले, सुगंधित पौधे, शहद, सेब, कीवी, आम, लीची, आड़ू, सेम, मटर, करेला, आलू जैसे उत्पादों का निर्यात किया जा सकता है। क्षेत्रीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय रिटेल चेन से जोड़ने के लिए लुलु समूह के साथ एमओयू भी किया गया है।</p>
<p><strong>देहरादून में खुलेगा एपीडा का ऑफिस&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>उत्तराखंड से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए देहरादून में एपीडा का क्षेत्रीय कार्यालय खुलेगा। पटना और रायपुर में भी एपीडा के ऑफिस खोले जाएंगे। एपीडा उत्तराखंड के विशिष्ट उत्पादों को जैविक प्रमाणन और जीआई टैगिंग की सुविधा भी उपलब्ध करा रहा है। वर्तमान में, एपीडा के बेंगलुरु, श्रीनगर, जम्मू, लद्दाख, गुवाहाटी, मुंबई, वाराणसी, कोच्चि और भोपाल सहित 16 क्षेत्रीय कार्यालय हैं।</p>
<p><strong>उत्तराखंड से कृषि निर्यात बढ़ाने पर जोर&nbsp;</strong><br />वित्त वर्ष 2024&ndash;25 के दौरान, देश से एपीडा के दायरे में आने वाले उत्पादों का निर्यात 2.43 लाख करोड़ रुपये का रहा, जिसमें उत्तराखंड का योगदान सिर्फ 201 करोड़ रुपये का रहा। उत्तराखंड से मुख्य रूप से गुड़, कन्फेक्शनरी का ही निर्यात होता है। अब ताजे फलों, मोटे अनाज और जैविक उत्पादों के निर्यात के प्रयास किए जा रहे हैं।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_68a85acc0f1b0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ दुबई एक्सपोर्ट हुआ उत्तराखंड का गढ़वाली सेब, देहरादून में खुलेगा एपीडा का ऑफिस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खराब हर्बिसाइड बेचने वाली एचपीएम कंपनी का लाइसेंस निलंबित, तीन जिलों में एफआईआर दर्ज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/government-suspended-manufacturing-licence-of-hpm-chemicals-and-fertilizers-limited-company-product-damaged-soybean-crop-in-madhya-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 21 Aug 2025 18:45:40 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/government-suspended-manufacturing-licence-of-hpm-chemicals-and-fertilizers-limited-company-product-damaged-soybean-crop-in-madhya-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="148" data-end="469">घटिया और नकली खाद व पेस्टीसाइड बनाने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के कुछ ही दिनों बाद सरकार ने <strong data-start="337" data-end="381">एचपीएम केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड</strong> का उत्पादन लाइसेंस निलंबित कर दिया है। साथ ही कंपनी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है।</p>
<p data-start="471" data-end="803">राजस्थान सरकार ने एग्रोकेमिकल बनाने वाली इस कंपनी का उत्पादन लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। कंपनी के उत्पादों के उपयोग से मध्य प्रदेश के कई जिलों में सोयाबीन की फसल को नुकसान पहुँचा था। सैंपल जांच में उत्पाद की <strong>मिसब्रांडिंग</strong> की पुष्टि होने के बाद यह कदम उठाया गया। यह कार्रवाई केंद्रीय कृषि मंत्री के निर्देश पर की गई है।</p>
<p data-start="805" data-end="1462">राजस्थान कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा कंपनी को जारी पत्र में कहा गया है कि आपके उत्पाद के सैंपल की जांच में मिसब्रांडिंग पाई गई है। इसके चलते कंपनी की दोनों उत्पादन इकाइयों का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से निलंबित किया जाता है। अब कंपनी अगले आदेश तक अपने उत्पादों का <strong data-start="1072" data-end="1100">उत्पादन, बिक्री और वितरण</strong> नहीं कर सकेगी। यह निर्णय केंद्रीय कृषि मंत्रालय के <em data-start="1152" data-end="1211">डायरेक्टरेट ऑफ प्लांट प्रोटेक्शन, क्वॉरेंटाइन एंड स्टोरेज</em> से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है, जिसमें कंपनी के उत्पाद <em data-start="1278" data-end="1297">क्लोरीमुरान इथाइल</em> की मिसब्रांडिंग की पुष्टि हुई थी। कार्रवाई <em data-start="1341" data-end="1366">इंसेक्टिसाइड एक्ट, 1968</em> की धारा 14 के तहत की गई है। साथ ही कंपनी के खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर भी दर्ज की गई है।</p>
<p data-start="805" data-end="1462"><span>केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> को मध्य प्रदेश के कई किसानों से शिकायतें मिली थी कि <em data-start="1278" data-end="1297">क्लोरीमुरान इथाइल</em>&nbsp;</span><span>25%&nbsp;</span><span>WP&nbsp;</span><span>नामक खरपतवार नाशक के प्रयोग से किसानों की सोयाबीन फसलें खराब हो रही हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने तुरंत कंपनी एवं डीलर्स पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद सैम्पल जब्त कर जांच की गई। नमूने घटिया पाए जाने पर मध्य प्रदेश के तीन</span><span>&nbsp;जिलों विदिशा</span><span>,&nbsp;</span><span>देवास व धार में डिफॉल्टर कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ ही बचे हुए स्टॉक की बिक्री पर रोक लगाई गई है और डीलरों के लाइसेंस भी निलंबित कर दिए गए हैं।&nbsp;</span></p>
<p data-start="805" data-end="1462"><span>प्रभावित इलाकों में जिन <strong>डीलरों</strong> ने यह खराब गुणवत्ता वाला हर्बिसाइड बेचा था,&nbsp;उनके लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि जब तक सभी जांच परिणाम नहीं आ जाते,&nbsp;डिफॉल्टर कंपनी का विनिर्माण लाइसेंस तत्काल निलंबित किया जाए। इसके अलावा, कंपनी के पास उपलब्ध शेष स्टॉक की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है।&nbsp;</span></p>
<p data-start="1984" data-end="2117">राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री <strong data-start="2022" data-end="2042">किरोड़ी लाल मीणा</strong> ने भी इस कार्रवाई की जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर साझा की है।</p>
<p data-start="1984" data-end="2117"></p>
<p data-start="1984" data-end="2117"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_68a727804471a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खराब हर्बिसाइड बेचने वाली एचपीएम कंपनी का लाइसेंस निलंबित, तीन जिलों में एफआईआर दर्ज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड: हर्षिल के सेब और राजमा पर पड़ी आपदा की मार, किसानों को मदद का इंतजार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/uttarakhand-harshil-apples-and-kidney-beans-hit-by-disaster-farmers-await-compensation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 20 Aug 2025 11:44:05 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/uttarakhand-harshil-apples-and-kidney-beans-hit-by-disaster-farmers-await-compensation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अगस्त मध्य आते-आते, उत्तरकाशी जिले की हर्षिल वैली में, सेब की महक बिखरी रहती है। ठीक इसी वक्त हर्षिल का अर्ली वैरायटी वाला सेब पककर, बाजारों में पहुंचना शुरू होता है। इसके बाद सितंबर अंत तक सेब की पूरी फसल पकने को तैयार हो जाती है। लेकिन बीती पांच अगस्त को आई प्राकृतिक आपदा ने जहां धराली के सेब बगीचों को तहस-नहस कर दिया है, वहीं सड़कें ध्वस्त होने से आस-पास के सेब उत्पादक भी अपनी तैयार फसल बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।</p>
<p>उत्तराखंड में सेब का सालाना उत्पादन करीब 64 हजार टन होता है। इसमें उत्तरकाशी जिले में ही सर्वाधिक, 4875 हेक्टेयर क्षेत्र में सालाना करीब 26 टन सेब पैदा होता है। उत्तरकाशी में हर्षिल वैली सेब उत्पादन के लिए आदर्श मानी जाती है। यहां झाला में ही राज्य सरकार की ओर से कोल्ड स्टोरेज भी बनाया गया है। हर्षिल का सेब अगस्त से ही पकना शुरु होता है, जिस कारण बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिल जाती है। लेकिन इस बार किसानों के चेहरे मायूस हैं। स्थानीय सेब उत्पादक किसान <strong>केएस पंवार</strong> कहते हैं कि इस बार सर्दियों में बर्फ कम गिरने से सेब का उत्पादन प्रभावित हुआ। फिर जैसे तैसे फसल तैयार हुई तो आपदा की मार पड़ गई।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_68a56792e2b15.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>हजारों पेड़ तबाह हुए</strong><br />हर्षिल के आस-पास कुल आठ गांव सेब उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। इसमें हर्षिल, धराली, मुखबा, झाला, सुक्खी, जसपुर, पुराली, बगौरी शामिल है। इसमें धराली गांव में सर्वाधिक सेब होता है। धराली के नव निर्वाचित क्षेत्र पंचायत सदस्य और सेब उत्पादक किसान <strong>सुशील पंवार</strong> कहते हैं कि प्रारंभिक आंकलन के बाद अकेले धराली में ढाई हजार सेब के पेड़ बह गए या फिर मलबे के नीचे दफ्न हो गए हैं। पंवार बताते हैं कि उनका 125 पेड़ों का बगीचा कुछ उंचाई पर होने से सुरक्षित बच गया, लेकिन आपदा में गांव के कई लोग लापता हुए हैं। ऐसे में सेब की सुध कौन ले? उस पर रास्ता बंद होने से इस वक्त सेब बाजार पहुंचाना भी मुमकिन नहीं है।&nbsp;</p>
<p></p>
<p><strong>जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह</strong><br />स्थानीय सेब उत्पादक किसान, <strong>पंकज सिंह</strong> कहते हैं, पहले आस पास के लोग बगीचे से सेब तोड़कर धराली में ही ग्रेडिंग, शॉटिंग और पैकेजिंग का काम करते थे, यहीं पर लोडिंग ट्रक खड़े होते थे। लेकिन इस बार यह पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर बह चुका है, इस कारण बची खुशी फसल भी हाथ आनी मुश्किल है। एक बड़ी समस्या यह है कि आपदा के 12 दिन बाद भी अभी धराली तक सड़क सम्पर्क बहाल नहीं हो पाया है। अभी डबरानी तक ही सड़क मार्ग खुल पाया है, यहां से धराली की दूरी करीब 25 किमी है, इसके बीच दो तीन जगह पर पूरी सड़क नदी मे समा गई है। जबकि दूसरी तरफ खड़ी चट्टान है, इस कारण सड़क मार्ग बहाल होने में अभी लंबा वक्त लगेगा। तब तक सेब का ज्यादातर सीजन निकल चुका होगा।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_68a5677a88f25.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>सब्जियों पर भी पड़ी मार</strong><br />हर्षिल घाटी राजमा के लिए भी जानी जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल फरवरी में, इस क्षेत्र में दौरे पर आए थे, जहां उन्होंने हर्षिल की राजमा की विशेष तौर पर प्रशंसा की थी। हर्षिल की राजमा भी सितंबर शुरुआत से पकनी तैयार होती है। इसके साथ ही हर्षिल में गोभी, ब्रोकली, मटर राजमा, आलू भी बहुतायत में होता है। धराली की <strong>ममता पंवार</strong> बताती हैं कि तैयार सब्जी को एक या दो दिन ही खेत में रखा जा सकता है, लेकिन सड़क बंद होने से फसल मंडी तक पहुंचाने का साधन नहीं है। हालांकि, अब प्रशासन स्थानीय सब्जियों की खरीद कर, इसे आपदा प्रभावितों के लिए चलाए जा रहे कम्यूनिटी किचन में खपा रहा है। लेकिन इससे कास्तकारों को बहुत ज्यादा मदद नहीं हो पाएगी। &nbsp;</p>
<p><strong>प्रशासन ने शुरू किया आंकलन</strong><br />इस बीच जिलाधिकारी <strong>प्रशांत आर्य</strong> ने 16 अगस्त को उपजिलाधिकारी भटवाड़ी शालिनी नेगी की अध्यक्षता में चार सदस्यों वाली कमेटी गठित कर, किसानों और उद्यान स्वामियों को हुए नुकसान का जायजा लेते हुए, राहत वितरण के निर्देश दिए हैं। एसडीएम भटवाड़ी <strong>शालिनी नेगी</strong> के मुताबिक, सर्वे रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार मुआवजा वितरण किया जाएगा।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_68a56765ea449.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड: हर्षिल के सेब और राजमा पर पड़ी आपदा की मार, किसानों को मदद का इंतजार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब सरकार ने विवादित लैंड पूलिंग नीति वापस ली, किसानों के विरोध के चलते पीछे हटी आप सरकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-withdrew-the-controversial-land-pooling-policy-aap-government-backed-down-due-to-farmers-protest.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 11 Aug 2025 20:54:35 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-withdrew-the-controversial-land-pooling-policy-aap-government-backed-down-due-to-farmers-protest.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बढ़ते राजनीतिक विवाद और किसानों के विरोध के चलते पंजाब सरकार ने विवादित लैंड पूलिंग पॉलिसी 2025 को वापस ले लिया है। इस नीति के तहत किए गए सभी संशोधन वापस ले लिए गये हैं। पंजाब सरकार के आवास एवं शहरी विकास विभाग के मुख्य सचिव की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया कि राज्य सरकार ने लैंड पूलिंग पॉलिसी और इसके तहत किए गये सभी संशोधनों, <span>फैसलों आदि को वापस ले लिया है।</span></p>
<p><span>इससे पहले&nbsp;</span>पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने लैंड पूलिंग पॉलिसी के क्रियान्वयन पर चार सप्ताह के लिए अंतरिम रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने नीति के कानूनी औचित्य, पर्यावरण और सामाजिक प्रभाव आकलन और पुनर्वास को लेकर सख्त सवाल उठाए थे।</p>
<p>राज्य भर में किसान संगठन और राजनीतिक दल भगवंत मान सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी का विरोध कर रहे थे। कई पंचायतों ने स्पष्ट शब्दों में भूमि देने से इनकार करते हुए विरोध दर्ज कराया था।</p>
<p>लैंड पूलिंंग पॉलिसी को वापस लिए जाने के फैसले को शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने जनता की जीत बताया। उन्होंने कहा,"मैं बहादुर अकाली कार्यकर्ताओं, किसानों, मजदूरों और दुकानदारों को सलाम करता हूं, जिन्होंने एकजुट होकर अरविंद केजरीवाल को लैंड पूलिंग स्कीम वापस लेने पर पर मजबूर कर दिया। यह असल में जमीन हड़पने की योजना थी, जिसके जरिए आम आदमी पार्टी दिल्ली के बिल्डरों से 30,000 करोड़ रुपये जुटाकर देशभर में पार्टी का विस्तार करना चाहती थी।"</p>
<p>कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी इसे किसानों के संघर्ष की जीत करार दिया और मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि किसानों और विपक्ष के लगातार दबाव के कारण आप सरकार को&nbsp;लैंड पूलिंग पॉलिसी वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा।&nbsp;यह सिर्फ़ नीति वापसी नहीं है&mdash;यह उस सरकार के अंत की शुरुआत है जिसने बार-बार किसानों और पंजाब के लोगों के हितों के खिलाफ काम किया है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_689a0a0ce87aa.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_689a0b2ac9f53.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब सरकार ने विवादित लैंड पूलिंग नीति वापस ली, किसानों के विरोध के चलते पीछे हटी आप सरकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में लैंड पूलिंग पॉलिसी पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद भी किसानों का विरोध जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/despite-the-high-court-interim-stay-on-the-land-pooling-policy-in-punjab-farmers-protest-intensifies.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 11 Aug 2025 14:19:53 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/despite-the-high-court-interim-stay-on-the-land-pooling-policy-in-punjab-farmers-protest-intensifies.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी 2025 पर चार सप्ताह की अंतरिम रोक लगा दी। इसके बाद भी राज्य में लैंड पूलिंग पॉलिसी का विरोध बढ़ता जा रहा है। सोमवार को किसान संगठनों ने पॉलिसी के खिलाफ पंजाब के कई जिलों में बाइक रैलियां निकालीं।</p>
<p>हाईकोर्ट ने पंजाब की लैंड पूलिंग नीति-2025 <span>पर स्टे लगाते हुए राज्य सरकार की &lsquo;जल्दबाजी&rsquo; की आलोचना की। अदालत ने सामाजिक एवं पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन (</span>SIA और EIA) किए बिना ही नीति अधिसूचित करने पर भी सवाल उठाया। जिससे उपजाऊ कृषि भूमि और किसानों के हित खतरे में पड़ सकते हैं।</p>
<p>नीति के खिलाफ किसानों का विरोध लगातार बढ़ रहा है। सोमवार को <strong>किसान मजदूर संघर्ष समिति (केएमएम)</strong> के नेता <strong>सरवन सिंह पंधेर</strong> की अगुआई में अमृतसर के जलियांवाला बाग से अटारी बॉर्डर तक बाइक रैली निकाली गई। प्रदेश के कई जिलों में बाइक रैली निकालकर किसानों ने लैंड पॉलिसी का विरोध किया। किसानों ने भगवंत मान सरकार को चेताया है कि अगर लैंड पूलिंग पॉलिसी वापस नहीं लिया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा, &ldquo;<span>हम चाहते हैं कि भगवंत मान सरकार जल्द से जल्द लैंड पूलिंग नीति वापस ले</span>, <span>वरना उन्हें ऐसा करने पर हमें मजबूर करना पड़ेगा। यह सिर्फ किसानों का मुद्दा नहीं है।</span>&rdquo; <span>किसान एक्टिविस्ट <strong>रमनदीप सिंह मान</strong> का कहना है कि किसान <strong>पॉलिसी</strong> <strong>वापसी</strong> के अलावा किसी बात पर राजी नहीं हैं।</span>&nbsp;</p>
<p>इससे पहले 30 जुलाई को <strong>संयुक्त किसान मोर्चा (SKM)</strong> ने पूरे राज्य में ट्रैक्टर रैलियां निकाली थीं। किसान नेताओं का कहना है कि लैंड पूलिंग पॉलिसी किसानों से उनकी जमीनें छीनने का रास्ता तैयार करती है। उनका आरोप है कि सरकार किसानों से जमीन लेकर कारपोरेट घरानों को देना चाहती है और किसानों को बर्बाद करने पर तुली है।</p>
<p><strong>राजनीतिक विरोध</strong></p>
<p>पंजाब में राजनीतिक दल भी आप सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी का कड़ा विरोध कर रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने भी इस मुद्दे पर 1 सितंबर से 'जमीन बचाओ &ndash; पंजाब बचाओ मोर्चा' शुरू करने की घोषणा की है। अन्य विपक्षी दलों ने आंदोलन तेज़ करने की तैयारी कर रहे हैं।</p>
<p>दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि यह नीति शहरी विकास और किसानों के हितों को साथ लेकर चलने के लिए तैयार की गई है। अब 10 सितंबर को अदालत में होने वाली सुनवाई से तय होगा कि लैंड पूलिंग पॉलिसी का भविष्य क्या होगा।</p>
<p><strong>24 को एसकेएम की महापंचायत</strong>&nbsp;</p>
<p><strong>संयुक्त किसान मोर्चा</strong> 24 अगस्त को समराला में किसान महापंचायत करेगा। भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के राष्ट्रीय अध्यक्ष <strong>बलबीर सिंह राजेवाल</strong> ने बताया कि इस महापंचायत में संघर्ष की रणनीति तय की जाएगी और इसके लिए पूरे पंजाब में जिम्मेदारियां बांटी गई हैं। राजेवाल ने कहा कि किसानों में जबरन जमीन लेने को लेकर गहरा आक्रोश है। अदालत भी मान चुकी है कि प्रभावित गांवों के पुनर्वास की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गलत प्रचार कर किसानों को गुमराह कर रही है, जबकि पंजाब का किसान पूरी तरह इसके खिलाफ है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_6899b61e42c9e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में लैंड पूलिंग पॉलिसी पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद भी किसानों का विरोध जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x500_6899b61e42c9e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हुड्डा के सवाल पर खुलासा: हरियाणा में फसल बीमा भुगतान में 90% की गिरावट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/revealed-in-response-to-hooda-question-90-pc-drop-in-crop-insurance-payments-in-haryana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Aug 2025 19:34:51 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/revealed-in-response-to-hooda-question-90-pc-drop-in-crop-insurance-payments-in-haryana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में <strong>प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)</strong> के तहत बीमा दावों के भुगतान में भारी गिरावट को लेकर सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। लोकसभा में रोहतक सांसद <strong>दीपेंद्र सिंह हुड्डा</strong> के सवाल के जवाब में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री <strong>रामनाथ ठाकुर</strong> ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत हरियाणा में वर्ष 2022-23 में 2,518.66 करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया गया था। वहीं, 2023-24 में यह घटकर 265.23 करोड़ रुपये और 2024-25 में 262.6 करोड़ रुपये रह गया। इस तरह हरियाणा में फसल बीमा भुगतान में करीब 90% की गिरावट आई है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p style="text-align: center;"><strong>प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना</strong> <strong>के अंतर्गत हरियाणा में </strong></p>
<p style="text-align: center;"><strong>विभिन्न वर्षों के</strong> <strong>प्रीमियम अंशदान और दावों का भुगतान </strong>(₹ करोड़ में)</p>
<table style="margin-left: auto; margin-right: auto;">
<thead>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p><strong>वर्ष</strong></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><strong>किसानों का अंशदान </strong></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><strong>केंद्र सरकार का अंशदान </strong></p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p><strong>कुल दावों का भुगतान </strong></p>
</td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p>2020-21</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>345.0</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>482.2</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>1162.7</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p>2021-22</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>313.8</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>447.7</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>1649.0</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p>2022-23</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>345.0</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>481.1</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>2518.7</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p>2023-24</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>154.9</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>246.6</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>265.2</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align: center;">
<p>2024-25</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>280.3</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>388.2</p>
</td>
<td style="text-align: center;">
<p>262.6</p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align: center;"><em>स्रोत: लोकसभा</em></p>
<p>दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि PMFBY के तहत बीमा दावों के भुगतान पर मेरे संसदीय प्रश्न के उत्तर से स्पष्ट हुआ कि न सिर्फ दावा भुगतान में 90% की भारी गिरावट आई है, बल्कि भाजपा सरकार फसल बीमा योजना की आड़ में किसानों की बजाय बीमा कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर की ओर से कहा गया कि फसल बीमा योजना के तहत दावों का निर्धारण संबंधित राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत थ्रेशहोल्ड उपज की तुलना में वास्तविक उपज में कमी के आधार पर योजना के दिशानिर्देशों में दिए गए फार्मूले के अनुसार किया जाता है। इस प्रकार, दावों की गणना प्राकृतिक आपदाओं के कारण उपज में हुए नुकसान पर निर्भर करती हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों को लगातार हो रहे नुकसान के बावजूद बीमा भुगतान में भारी गिरावट पर सवाल उठाया। उन्&zwj;होंने कहा कि बीमा दावों के भुगतान में इतनी बड़ी गिरावट किसानों के लिए आर्थिक संकट पैदा कर सकती है और योजना से उनका विश्वास उठ सकता है।&nbsp;</p>
<p>राज्&zwj;य मंत्री ठाकुर ने यह भी बताया कि आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, झारखंड, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल शुरुआती कार्यान्वयन के बाद इस योजना से बाहर हो गए थे, हालांकि आंध्र प्रदेश और झारखंड अब फिर से इसमें शामिल हो गए हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>फसल बीमा में धांधली का आरोप</strong></p>
<p>पूर्व मुख्यमंत्री <strong>भूपेन्द्र सिंह हुड्डा</strong> ने कहा कि भिवानी जिला में दो दर्जन से अधिक गांवों में हजारों एकड़ जमीन बारिश के कारण जलमग्न हो गई। इसके लिए राज्य सरकार को चाहिए कि वह तुरंत सर्वे करवाकर किसानों को प्रति एकड़ 50 <span>हजार रूपये मुआवजा दे। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों के फसल बीमा में धांधली की जा रही है। प्रीमियम ज्यादा लिया जाता है</span>, <span>जबकि किसानों को मुआवजा कम मिलता है।</span></p>
<p><span></span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_689361686b9ce.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हुड्डा के सवाल पर खुलासा: हरियाणा में फसल बीमा भुगतान में 90% की गिरावट ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विश्वविद्यालयों के टॉपर्स को सीधे प्रवेश देगा आईआईटी रुड़की: प्रोफेसर पंत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/iit-roorkee-will-give-direct-admission-to-toppers-of-universities-said-professor-pant.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 05 Aug 2025 12:45:26 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/iit-roorkee-will-give-direct-admission-to-toppers-of-universities-said-professor-pant.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड के&nbsp;हरिद्वार जिले में स्थित चमन लाल स्वायत्त महाविद्यालय&nbsp;के दीक्षारंभ समारोह में मुख्य अतिथि आईआईटी रुड़की के निदेशक <strong>प्रोफेसर कमल किशोर पंत</strong> ने कहा कि अन्य विश्वविद्यालयों के टॉपर्स को आईआईटी रुड़की में उच्चतर उपाधियों में सीधे प्रवेश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नॉलेज के क्षेत्र में योगदान करने के इच्छुक हर एक युवा के लिए आईआईटी के द्वार खुले हुए हैं।</p>
<p>महाविद्यालय में सोमवार को उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर कुलपति <strong>प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी</strong> की अध्यक्षता में संयुक्त दीक्षारंभ समारोह का आयोजन किया गया।&nbsp;इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में नई पीढ़ी को अधिक सक्रियता के साथ भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि यह सुखद संयोग है कि जिस समय भारत अपनी आज़ादी की शताब्दी मना रहा होगा, ठीक उसी समय रुड़की आईआईटी की स्थापना को 200 वर्ष पूर्ण होंगे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_6891ab5c275a8.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>प्रोफेसर पंत ने कहा कि आईआईटी के द्वार सभी इच्छुक लोगों के लिए खुले हुए हैं। आप अपने विचारों को क्रियान्वित करने के लिए आईआईटी की प्रयोगशालाओं का उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने प्रयोगात्मक शिक्षा को महत्वपूर्ण बताया तथा उन्नत भारत का जिक्र करते हुए ग्रामीण विकास, ऊर्जा संरक्षण, एआई, मशीन लर्निंग का उल्लेख किया। उन्होंने छात्रों को विस्तार से बताया कि पलायन कैसे रोका जाए, गांव में कैसे टेक्नोलॉजी को विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि समग्र विकास के लिए रोजगारपरक अवसरों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उत्तराखंड अनेक संसाधनों से भरा हुआ है, इनका प्रयोग करते हुए नवाचार की आवश्यकता है। प्रोफेसर पंत ने कहा कि अन्य विश्वविद्यालयों के टॉपर्स को सीधे प्रवेश हेतु आईआईटी रुड़की ने अपने यहां व्यवस्था लागू की है। साथ ही निकट क्षेत्र के इंटर कॉलेज के स्टूडेंट्स को आईआईटी में प्रवेश हेतु भी प्रेरित करने का अभियान संचालित किया गया है।</p>
<p>उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में नियमित डिग्री के साथ-साथ आप दूसरी डिग्री भी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा 100 से अधिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिसमें डिप्लोमा, डिग्री, डॉक्टरेट उपाधियां आदि सम्मिलित हैं। उन्होंने कहा कि आज की जरूरत के अनुरूप स्किल बेस्ड एजुकेशन होनी चाहिए। विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से घर बैठे ही संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर अपनी शिक्षा को आगे बढ़ा सकते हैं। कुलपति ने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे भी अपनी अकादमिक योग्यता को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों के माध्यम से और बढ़ाएं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/08/image_750x_6891aee71cb08.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलसचिव <strong>डॉ. के. आर. भट्ट</strong> ने विश्वविद्यालय की योजनाओं और प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि इस साल ओपन यूनिवर्सिटी गांव स्तर तक अभियान चला रही है। महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष <strong>रामकुमार शर्मा</strong> ने आईआईटी निदेशक के आगमन को महाविद्यालय के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि बताया। उन्होंने विज्ञान के शिक्षकों-छात्रों को आईआईटी की शैक्षिक योजनाओं का लाभ उठाने को कहा।</p>
<p>चमन लाल स्वायत्त महाविद्यालय के प्राचार्य <strong>डॉ. सुशील उपाध्याय</strong> ने महाविद्यालय की विगत वर्षों की उपलब्धियों का जिक्र किया। विगत वर्षों में 50 से अधिक छात्र-छात्राओं ने नेट, गेट, जैम की परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं, जो ग्रामीण इलाके के कॉलेज के लिए बड़ी उपलब्धि है। डॉ. उपाध्याय के नेतृत्व में कॉलेज अकादमिक क्षेत्र में उत्कृष्टता की ओर कदम बढ़ा रहा है और खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों को उच्च शिक्षा में आगे बढ़ाने का माध्यम बन रहा है।&nbsp;</p>
<p>मंच का संचालन आईक्यूएसी कोऑर्डिनेटर डॉ. दीपा अग्रवाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रबंध समिति के कोषाध्यक्ष अतुल हरित, ओपन यूनिवर्सिटी के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. बृजेश बनकोटी, दीक्षारंभ के समन्वयक डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. हिमांशु कुमार, डॉ. किरण शर्मा, डॉ. अनामिका चौहान, डॉ. इरफान तथा अनुशासन समिति के सदस्यों द्वारा किया गया।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ विश्वविद्यालयों के टॉपर्स को सीधे प्रवेश देगा आईआईटी रुड़की: प्रोफेसर पंत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज के दाम गिरने से बढ़ी किसानों की मुश्किलें, एमएसपी और किसानों से सीधे खरीद की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-problems-increased-due-to-falling-onion-prices-demand-for-msp-and-direct-purchase-from-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 29 Jul 2025 16:47:13 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-problems-increased-due-to-falling-onion-prices-demand-for-msp-and-direct-purchase-from-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में इन दिनों प्याज के दामों में गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। नासिक और आसपास के जिलों की मंडियों में प्याज का औसत भाव 1200&ndash;1300 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गया है, जिससे किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।</p>
<p>नासिक, लासलगांव, पुणे और अहमदनगर की मंडियों में बड़ी मात्रा में प्याज की आवक हो रही है, लेकिन खरीदारों की संख्या कम होने और मांग में कमी के चलते किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।</p>
<p>आमतौर पर सावन के महीने में प्याज की खपत कम रहती है। इसके अलावा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में खरीफ सीजन का प्याज भी इस समय बाजार में आ रहा है। ऐसे में महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज की मांग कम हो गई है, जिससे कीमतों में गिरावट आई है।</p>
<p><strong>सरकार से हस्तक्षेप की मांग</strong></p>
<p>किसान संगठनों ने प्याज की गिरती कीमतों पर राज्य और केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। <strong>महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक कृषक संघ</strong> के अध्यक्ष <strong>भारत दिघोले</strong> ने कहा कि प्याज का मौजूदा बाजार भाव किसानों के लिए घाटे का सौदा है और सरकार को इस पर तुरंत उचित निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को प्याज निर्यात पर प्रतिबंध न लगाने की स्थायी नीति बनानी चाहिए। साथ ही, कम कीमत पर प्याज बेचने वाले किसानों को कम से कम 1000 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी देनी चाहिए।</p>
<p><strong>एमएसपी और किसानों से सीधी खरीद की मांग&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>प्याज उत्पादक किसानों ने सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करने और गारंटीकृत मूल्य पर तुरंत खरीद शुरू करने की मांग की है। महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक कृषक संघ की मांग है कि मुख्यमंत्री <strong>देवेंद्र फडणवीस</strong> को लासलगांव जैसी प्रमुख मंडी में आकर प्याज के मुद्दे पर किसानों से सीधी बातचीत करनी चाहिए और उनकी समस्याओं का हल निकालना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>भारत दिघोले का कहना है कि केंद्र सरकार दो एजेंसियां के जरिए बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीद करती हैं। उनकी मांग है कि सरकार को सीधे किसानों से 3000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर कृषि उपज मंडियों (APMC) में प्याज की खरीद करनी चाहिए।&nbsp;</p>
<p><strong>केंद्रीय एजेंसियों ने घटाया खरीद मूल्य</strong></p>
<p>दिघोले ने बताया कि केंद्र सरकार की एजेंसिया इस वर्ष बफर स्टॉक के लिए 15-16 रुपये प्रति किलोग्राम के रेट पर प्याज खरीद रही हैं। उनका कहना है कि अगर सरकार ही इतने कम दाम पर प्याज खरीदेगी तो किसानों को घाटे से कौन बचाएगा?&nbsp;</p>
<p>गौरतलब है कि पिछले साल सरकारी एजेंसियों ने औसतन 29 रुपये प्रति किलो के रेट पर बफर स्टॉक के लिए प्याज खरीदा था, जिसे उपभोक्ताओं को 35 रुपये के रेट पर वितरित किया था। लेकिन इस बार प्याज के अधिक उत्पादन और कम दाम के चलते बफर स्टॉक के लिए खरीद का दाम भी कम है।&nbsp;</p>
<p><strong>गिरावट के पीछे कारण</strong></p>
<p>इस बार देश में प्याज का बंपर उत्पादन हुआ है। बागवानी फसल उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वर्ष&nbsp;2024-25&nbsp;में प्याज का उत्पादन पिछले वर्ष के&nbsp;242.67&nbsp;लाख टन की तुलना में लगभग&nbsp;307.72&nbsp;लाख टन होने की उम्मीद है,&nbsp;जो करीब 27 फीसदी अधिक है।&nbsp;मानसून की शुरुआत में बड़ी मात्रा में प्याज की तुड़ाई की गई, जिससे मंडियों में एक साथ अधिक आवक हो गई। वहीं दूसरी ओर, निर्यात में सुस्ती और घरेलू उपभोग में कमी के कारण भी कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज के दाम गिरने से बढ़ी किसानों की मुश्किलें, एमएसपी और किसानों से सीधे खरीद की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में बागवानी फसलों की तार फेंसिंग पर मिलेगा 50 फीसदी अनुदान, पंजीकरण शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/50-pc-subsidy-will-be-available-on-wire-fencing-of-horticultural-crops-in-up-registration-started.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 28 Jul 2025 12:06:36 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/50-pc-subsidy-will-be-available-on-wire-fencing-of-horticultural-crops-in-up-registration-started.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="65" data-end="446">छुट्टा पशुओं और जंगली जानवरों से फसलों को बचाना किसानों के लिए काफी मुश्किल काम होता है। इसके लिए किसानों को खेतों की तार फेंसिंग यानी बाड़बंदी करनी पड़ती है, जिस पर काफी खर्च आता है। इस समस्या के समाधान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार बागवानी फसलों की तार फेंसिंग के लिए 50 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराएगी। एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत किसानों को यह अनुदान प्रदान किया जाएगा।</p>
<p data-start="448" data-end="781">उत्तर प्रदेश के उद्यान एवं कृषि विपणन राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि बागवानी के विकास के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। फल, सब्जी, मसाले, फूल और औषधीय पौधों की खेती पर अनुदान के साथ-साथ तार फेंसिंग की अतिरिक्त सुविधा भी दी जाएगी। यह योजना किसानों की मेहनत की उपज को जानवरों और अवांछनीय तत्वों से बचाने में मदद करेगी।</p>
<p data-start="783" data-end="1128">योजना के तहत एक रनिंग मीटर तार फेंसिंग की अनुमानित लागत 300 रुपये निर्धारित की गई है, जिस पर किसानों को 150 रुपये प्रति मीटर यानी 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जाएगा। प्रत्येक किसान को अधिकतम 1000 मीटर तक की तार फेंसिंग पर अनुदान प्रदान किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने कुल 2.5 लाख मीटर फेंसिंग कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है।</p>
<p data-start="1130" data-end="1327">तार फेंसिंग के लिए लोहे के मजबूत पोल का उपयोग किया जाएगा, जिनके बीच 10 फुट की दूरी रखी जाएगी। इन पोलों के बीच 4 तारों से बाड़बंदी की जाएगी, जिससे किसानों की फसलें जानवरों से सुरक्षित रह सकेंगी।</p>
<p data-start="1329" data-end="1771">तार फेंसिंग पर अनुदान प्राप्त करने के इच्छुक किसान उद्यानिकी विभाग के डीबीटी पोर्टल<strong> <a data-start="1415" data-end="1475" class="" rel="noopener" target="_new" href="http://dbt.uphorticulture.in">http://dbt.uphorticulture.in</a> </strong>पर पंजीकरण करा सकते हैं। इसके लिए किसानों के पास आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, खसरा-खतौनी, बैंक पासबुक आदि दस्तावेज होना आवश्यक है। योजना का लाभ 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर दिया जाएगा। योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए किसान अपने जनपद के जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p data-start="1329" data-end="1771"></p>
<p data-start="1329" data-end="1771"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_68871d0f98512.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में बागवानी फसलों की तार फेंसिंग पर मिलेगा 50 फीसदी अनुदान, पंजीकरण शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जेवर एयरपोर्ट के पास एग्री एक्सपोर्ट हब को यूपी कैबिनेट की मंजूरी, एक्वाकल्चर परियोजना को भी हरी झंडी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-cabinet-approves-agri-export-hub-near-jewar-airport-aquaculture-project-also-gets-green-signal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 23 Jul 2025 15:14:58 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-cabinet-approves-agri-export-hub-near-jewar-airport-aquaculture-project-also-gets-green-signal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार ने <strong>यूपीएग्रीज</strong> (उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल इंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग परियोजना) के अंतर्गत दो प्रमुख योजनाओं के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इनमें पूर्वांचल और बुंदेलखंड के 28 जनपदों में <strong>एक्वाकल्चर परियोजना</strong> तथा जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट&nbsp;<strong>एग्री एक्सपोर्ट हब</strong> की स्थापना शामिल है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा यह निर्णय लिया गया।&nbsp;</p>
<p>यूपीएग्रीज परियोजना विश्व बैंक और राज्य सरकार की साझेदारी (70:30) में 2024-25 से 2029-30 तक 6 वर्षों के लिए चलाई जा रही है। परियोजना के पहले वर्ष की समीक्षा के बाद, विश्व बैंक की सिफारिशों के आधार पर इन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।</p>
<p>यूपी सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, यूपीएग्रीज परियोजना के अन्तर्गत&nbsp;<strong>एक्वाकल्चर परियोजना</strong> के लिए <strong>संयुक्त अरब अमीरात </strong>की बहुराष्ट्रीय कंपनी <strong>'एक्वाब्रिज'</strong> को तथा जेवर अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट <strong>एग्री एक्सपोर्ट हब</strong> की स्थापना के लिए कर्नाटक के <strong>इनोवा फूड पार्क, कोलार</strong> को नीतिगत प्रोत्साहन दिया जाएगा।</p>
<p>एक्वाकल्चर परियोजना की स्थापना के लिए संयुक्त अरब अमीरात की बहुराष्ट्रीय कम्पनी &lsquo;एक्वाब्रिज&rsquo; को सहायता प्रदान की जाएगी। इसके तहत 75 प्रतिशत फ्रण्ट एण्ड लैंड सब्सिडी, औद्योगिक क्षेत्र में 60 एकड़ भूमि, स्टाम्प शुल्क से 100 प्रतिशत छूट, 25 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी, दो वर्षों तक विद्युत शुल्क में छूट तथा 75 प्रतिशत परिवहन सब्सिडी प्रदान की जाएगी।</p>
<p>इसी प्रकार, जेवर हवाई अड्डे के निकट एग्री एक्सपोर्ट हब की स्थापना के लिए इनोवा फूड पार्क, कोलार को 75 प्रतिशत फ्रण्ट एण्ड लैण्ड सब्सिडी, यीडा में 50 एकड़ भूमि, स्टाम्प शुल्क से 100 प्रतिशत छूट, 50 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी तथा दो वर्षों के लिए विद्युत शुल्क में छूट शामिल है। ये सुविधाएं समन्वय विभाग के बजट से दी जाएंगी।</p>
<p>एक्वाकल्चर परियोजना से मछलीपालन के लिए बुनियादी ढांचे के विकास और निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा। 4,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश के अन्तर्गत विश्व स्तरीय ट्रेनिंग सेन्टर और मत्स्य उत्पाद निर्यात के लिए एक बाय-बैक व्यवस्था स्थापित होगी। वहीं, एग्री एक्सपोर्ट हब के माध्यम से कृषि एवं बागवानी उत्पादों का मिडल ईस्ट, यूरोप और रूस जैसे बाजारों में निर्यात आसान होगा।</p>
<p>सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से किसानों और मत्स्य उत्पादकों की आय में वृद्धि और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_6880af05e1a96.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जेवर एयरपोर्ट के पास एग्री एक्सपोर्ट हब को यूपी कैबिनेट की मंजूरी, एक्वाकल्चर परियोजना को भी हरी झंडी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x500_6880af05e1a96.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कैलाश पर्वत के दक्षिणी छोर से बर्फ गायब, मौसम पैटर्न में बदलाव पर वैज्ञानिकों की नजर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/snow-disappears-from-mount-kailash-scientists-are-keeping-an-eye-on-changes-in-weather-patterns.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 21 Jul 2025 17:56:53 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/snow-disappears-from-mount-kailash-scientists-are-keeping-an-eye-on-changes-in-weather-patterns.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत-चीन के बीच मई 2020 में हुई गलवान झड़प के बाद, इस बार उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से पवित्र <strong>कैलाश मानसरोवर यात्रा</strong> फिर शुरू हो गई है। यात्रियों का पहला दल कैलाश मानसरोवर के दर्शन कर वापस लौट आया है। लेकिन यात्री दल ने एक बुरी खबर सुनाई है कि कैलाश पर्वत के दक्षिण छोर पर इस बार बर्फ नजर नहीं आ रही है। वैज्ञानिक समुदाय के मुताबिक, समूचे हिमालयी क्षेत्र में मौसम के पैटर्न में कई बदलाव नजर आ रहे हैं। कैलाश पर्वत से बर्फ गायब होना इसी का संकेत है। पिछले साल ओम पर्वत से भी कुछ दिन के लिए बर्फ गायब होने की खबर चर्चाओं में रही थी।&nbsp;</p>
<p><strong>कैलाश पर्वत</strong> हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्मावलंबियों के लिए आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। 6,638 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह पर्वत हिंदुओं के लिए भगवान शिव का निवास है, जहां प्रसिद्ध ओम पर्वत स्थित है। कैलाश पर्वत बौद्धों के लिए डेमचोक का प्रतीक और जैनियों के लिए आदिनाथ का तीर्थस्थल है। इसके निकट ही पवित्र <strong>मानसरोवर झील</strong> है।&nbsp;</p>
<p>कैलाश पर्वत हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र का भी आधार है। यहां से सिंधु, सतलुज, ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख नदियां निकलती हैं, जो दक्षिण एशिया के बड़े भू-भाग पर जल, कृषि और आजीविका का आधार बनती हैं। लेकिन कैलाश पर्वत पर अब बर्फ कम होने की सूचनाएं आने लगी है। इस बार इसका खुलासा खुद पहले यात्री दल ने किया है।</p>
<p>पांच साल बाद शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला दल, यात्रा पूरी करने के बाद 18 जुलाई को ही उत्तराखंड के पिथौरागढ़ लौटा है। इसी दल में शामिल जयपुर के यात्री <strong>राजेश नागपाल</strong> ने बताया कि कैलाश पर्वत के दक्षिणी हिस्से में बर्फ का नामोनिशान तक नहीं बचा है। पूरा कैलाश पर्वत काला नजर आ रहा है। पिछले साल इन्हीं दिनों ओम पर्वत से भी बर्फ पिघलने की सूचनाएं आई थी, हालांकि इसके दो-तीन दिन बाद ही बर्फबारी हुई और फिर से ओम की आकृति उभर आई थी।</p>
<p>इस साल कैलाश पर्वत के दक्षिणी छोर से बर्फ गायब होने से उच्च हिमालयी क्षेत्र में क्लाइमेंट चेंज को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। कैलाश क्षेत्र कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने और ग्लोबल वॉर्मिंग को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बर्फ के गायब होने से यह क्षमता कमजोर पड़ सकती है।&nbsp;</p>
<p><strong>मौसम बदलाव अहम कारण&nbsp;</strong><br />देहरादून स्थित <strong>वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान (WIHG)</strong> के वैज्ञानिकों के मुताबिक, पूरे हिमालयी क्षेत्र में लगातार मौसमी बदलाव हो रहे हैं। साल दर साल ठंडे दिनों की संख्या कम हो रही है, जबकि गरम दिनों की संख्या बढ़ रही है। इसी अनुपात में बर्फबारी घटने से स्नोलाइन पीछे खिसक रही है। अब कैलाश मनसरोवर में बर्फ कम होना जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरे का संकेत हैं।&nbsp;</p>
<p>देहरादून स्थित <strong>मौसम केंद्र</strong> के निदेशक <strong>विक्रम सिंह</strong> के मुताबिक, आमतौर छह किमी की ऊंचाई तक मानसून काल में बर्फ गायब हो जाती है। हालांकि, उन्होंने बताया कि कैलाश जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फ या बारिश के आंकड़े मौसम विभाग नहीं जुटाता है, इसलिए इस बारे में अंतिम तौर पर कुछ कहना मुश्किल होगा।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कैलाश पर्वत के दक्षिणी छोर से बर्फ गायब, मौसम पैटर्न में बदलाव पर वैज्ञानिकों की नजर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बिजनौर: उत्तम चीनी मिल में बड़ा हादसा, टैंक सफाई के दौरान सुपरवाइजर समेत तीन की मौत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/bijnor-major-accident-at-uttam-sugar-mill-barkatpur-three-people-including-supervisor-died.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 18 Jul 2025 14:35:08 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/bijnor-major-accident-at-uttam-sugar-mill-barkatpur-three-people-including-supervisor-died.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में बरकतपुर स्थित उत्तम शुगर मिल में एक बड़ा हादसा हुआ है। टैंक की सफाई कर रहे दो श्रमिकों और एक सुपरवाइजर की मौत हो गई। एक श्रमिक गंभीर रूप से घायल है। घटना के बाद मृतकों के परिजनों ने चीनी मिल पर हंगामा कर दिया। हादसे को लेकर चीनी मिल प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठ रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, बरकतपुर चीनी मिल में शुक्रवार सुबह एक टैंक की सफाई के लिए श्रमिकों को लगाया गया था। लेकिन जैसे ही टैंक का ढक्कन हटाया तो श्रमिक बेहोश होकर गिर पड़े। अनुमान है कि टैंक में जहरीली गैस बनी हुई थी। उन्हें बचाने की कोशिश में एक श्रमिक घायल हो गया। इस हादसे में गांव तीसोत्रा निवासी कपिल, गांव लालपुर के सौपाल और सुपरवाइजर मुनेश्वर की मौत हो गई।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/07/image_750x_687a0ef950dd5.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>बिजनौर पुलिस के मुताबिक, ईटीपी प्लांट में एक टैंक की सफाई के दौरान यह हादसा हुआ। पहले एक व्यक्ति गिरा, फिर उसे दो लोग बचाने गये, वो भी गिर गये। तीनों लोगों को वहां से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया तो उन्हें मृत घोषित किया गया। एक घायल व्यक्ति को बिजनौर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के संबंध में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।&nbsp;</p>
<p>घटना के बाद मिल परिसर में हड़कंप मच गया। मृतकों के परिजनों में घटना को लेकर काफी रोष व्याप्त है। भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक के प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा कि उत्तम शुगर मिल बरकतपुर में तीन कर्मचारियों की मौत की दुखद घटना हुई है। पीड़ित परिजनों को न्याय दिलाने के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बिजनौर: उत्तम चीनी मिल में बड़ा हादसा, टैंक सफाई के दौरान सुपरवाइजर समेत तीन की मौत ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजफेड और एनसीईएल के बीच एमओयू, राजस्थान के सहकारी उत्पादों को मिलेगा वैश्विक बाजार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/mou-between-rajfed-and-ncel-rajasthan-cooperative-products-will-get-global-market.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 14 Jul 2025 17:56:37 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/mou-between-rajfed-and-ncel-rajasthan-cooperative-products-will-get-global-market.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="136" data-end="493">राजस्थान की सहकारी समितियों के उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचेंगे। इसके लिए <strong>राजस्थान राज्य सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (राजफेड)</strong> और <strong>राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल)</strong> के बीच सोमवार को एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) हुआ। यह समझौता राज्य में &lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; अभियान के तहत सहकारिता को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p data-start="495" data-end="949">राजफेड कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में राजफेड के प्रबंध निदेशक <strong>टीकम चंद बोहरा</strong> और एनसीईएल के प्रबंध निदेशक <strong>अनुपम कौशिक</strong> ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी से राज्य की सहकारी समितियों से जुड़े किसानों, उत्पादकों और अन्य सदस्यों को लाभ मिलेगा। उन्हें अपने उत्पादों को वैश्विक बाजारों में निर्यात करने का अवसर मिलेगा। इससे प्रदेश के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी और सहकारी संस्थाओं की आमदनी में इजाफा होगा।</p>
<p data-start="1180" data-end="1501">गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तीन बहु-राज्यीय सहकारी समितियों का गठन किया है। राज्य सरकार ने राजफेड को इन तीनों समितियों के लिए नोडल एजेंसी नामित किया है। इससे पहले राजफेड <strong>भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल)</strong> और <strong>नेशनल को-ऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल)</strong>&nbsp;के साथ भी एमओयू कर चुका है।</p>
<p data-start="1503" data-end="1689" data-is-last-node="" data-is-only-node="">इस अवसर पर राजफेड के महाप्रबंधक (विपणन) डॉ. अमित शर्मा, &lsquo;सहकार से समृद्धि&rsquo; कार्यक्रम के कंसल्टेंट आर.एस. जोधा, एनसीडीसी के प्रतिनिधि सुनील छापोला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजफेड और एनसीईएल के बीच एमओयू, राजस्थान के सहकारी उत्पादों को मिलेगा वैश्विक बाजार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में पंचायत चुनाव के बावजूद काम नहीं कर पाएंगी ग्राम पंचायतें]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/uttarakhand-gram-panchayats-will-not-be-able-to-work-despite-panchayat-elections.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 09 Jul 2025 13:27:34 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/uttarakhand-gram-panchayats-will-not-be-able-to-work-despite-panchayat-elections.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड में इन दिनों त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की हलचल है। लेकिन चुनाव सम्पन्न होने के बावजूद बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतें काम नहीं कर पाएंगी। इसकी वजह यह है कि ग्राम पंचायत सदस्य के 27,339 पद रिक्त रह गए हैं। इस कारण कई ग्राम पंचायतों में कोरम का संकट खड़ा होना तय है।</p>
<p>उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए 24 और 28 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना 31 जुलाई को होगी। इसके लिए नामांकन प्रक्रिया सम्पन्न होने के बाद कुल 66,418 पदों के सापेक्ष करीब 63 हजार दावेदार मैदान में बचे हैं। यानी, कुल जितने पदों पर चुनाव होने हैं, उससे कम नामांकन हुए हैं।</p>
<p>उत्तराखंड राज्य&nbsp; निर्वाचन आयोग के मुताबिक, यह संकट मुख्य तौर पर ग्राम पंचायत सदस्य के पदों के लिए नामांकन नहीं हो पाने के कारण खड़ा हुआ है। राज्य में कुल 55,587 पंचायत सदस्यों के मुकाबले महज 28,248 ही नामांकन हुए हैं। इस तरह कई पंचायतों में ग्राम प्रधान के निर्वाचन के बावजूद, सैकड़ों की संख्या में ग्राम पंचायतों में पंचायत सदस्यों का कोरम पूरा नहीं हो पाने से, ग्राम प्रधान काम नहीं कर पाएंगे।</p>
<p>पंचायती राज एक्ट के अनुसार, ग्राम पंचायत की कार्यवाही और अन्य वित्तीय फैसलों के लिए पंचायत कार्यकारिणी में दो तिहाई सदस्यों का कोरम होना जरूरी है।</p>
<p><strong>अब उपचुनाव पर टिकी नजर</strong></p>
<p>मुख्य चुनाव में पद नहीं भरने पर अब राज्य निर्वाचन आयोग के सामने उपचुनाव कराने की मजबूरी है। यदि उपचुनाव में भी आरक्षित पदों पर पंचायत सदस्य के पद नहीं भरे जाते हैं तो, पंचायतीराज विभाग यहां आरक्षण बदलने का निर्णय ले सकता है। फिर भी यही पद नहीं भरे गए तो अपरिहार्य स्थिति में शासन मनोनयन के जरिए भी पंचायत सदस्यों के पद भर सकता है।</p>
<p>पिछली बार कोविड के 19 के कारण उपचुनाव नहीं हो पाए थे, इस कारण कई जगह पंचायत सदस्यों का मनोनयन करना पड़ा था। उत्तराखंड में कुल ग्राम पंचायतों की संख्या 7950 है। जिसमें से इस बार 7499 <span>के लिए चुनाव होगा। जिसके लिए कुल </span>47 <span>लाख </span>77 <span>हजार मतदाता</span>, मतदान करेंगे।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में पंचायत चुनाव के बावजूद काम नहीं कर पाएंगी ग्राम पंचायतें ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में 1 लाख एकड़ में प्राकृतिक खेती का लक्ष्य, फसल खरीद के लिए गुरुग्राम में मंडी स्थापित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/target-of-natural-farming-in-one-lakh-acres-in-haryana-mandi-established-in-gurugram-for-purchasing-such-crop.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 07 Jul 2025 12:53:31 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/target-of-natural-farming-in-one-lakh-acres-in-haryana-mandi-established-in-gurugram-for-purchasing-such-crop.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। हरियाणा के कृषि मंत्री<strong> श्याम सिंह राणा</strong> ने कहा कि प्रदेश सरकार ने एक लाख एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती का लक्ष्य तय किया है। फिलहाल करीब 10,000 एकड़ में <span>किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती की जा रही है </span>और यह रकबा लगातार बढ़ रहा है।</p>
<p><span>प्राकृतिक खेती से किसानों द्वारा पैदा की फसल को खरीदने के लिए प्रदेश सरकार ने गुरुग्राम में अनाज मंडी तैयार की है। </span>इस मंडी में फसलों की गुणवत्ता जांचने के लिए एक प्रयोगशाला भी बनाई गई है। गुणवत्ता परीक्षण के बाद गठित समिति द्वारा फसल का मूल्य तय कर उसकी खरीद की जाएगी।</p>
<p>श्याम सिंह राणा रविवार को उप उष्णकटिबंधीय फल केंद्र, लाडवा में आयोजित 7वें फल उत्सव मेले में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने बागवानी क्षेत्र के 10 प्रगतिशील किसानों को ₹5100 नकद, ट्रॉफी और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया। इसके अलावा उन्होंने मेले में लगे स्टॉलों का निरीक्षण किया और आम की किस्मों के बारे में विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की।</p>
<p>कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने और पारंपरिक खेती में बदलाव लाने के उद्देश्य से प्रदेश में ऐसे<strong> 17 केंद्र</strong> खोले जाने हैं, जिनमें से 11 तैयार हो चुके हैं। शीघ्र ही अंबाला में लीची और यमुनानगर में स्ट्रॉबेरी के लिए उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने किसानों से गेहूं और धान के अलावा बागवानी, मछली पालन, मधुमक्खी पालन, डेयरी और अन्य फसलों को भी अपनाने का आह्वान किया।</p>
<p>वर्ष 2016 में लाडवा में इंडो-इज़राइल तकनीक के तहत उप उष्णकटिबंधीय फल केंद्र की स्थापना की गई थी। इसकी शुरुआत 10,000 पौधों से हुई थी, जबकि अब हर वर्ष एक लाख पौधों की पौध तैयार की जा रही है। इस केंद्र में आम, लीची, नाशपाती, आड़ू और चीकू सहित छह फसलों पर अनुसंधान कार्य भी चल रहा है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><span lang="HI">राणा ने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार किसानों के लिए योजनाएं बना रही है। योजना बनने के बाद किसानों की तरफ से जो समस्या</span><span lang="EN-IN">,<span>&nbsp;</span></span><span lang="HI">दिक्कत सामने आती है</span><span lang="EN-IN">,<span> </span></span><span lang="HI">उसी हिसाब से योजनाओं में परिवर्तन कर किसानों को लाभ दिया जाता है। सरकार द्वारा किसानों की फसल का मार्केट में एमएसपी से कम भाव मिलने पर भावांतर भरपाई योजना के तहत क्षतिपूर्ति की जाती है और किसानों के घाटे को सरकार वहन करती है।</span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में 1 लाख एकड़ में प्राकृतिक खेती का लक्ष्य, फसल खरीद के लिए गुरुग्राम में मंडी स्थापित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में पंचायत चुनाव का नया कार्यक्रम जारी, अब 24 और 28 जुलाई को होगा मतदान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/new-schedule-for-panchayat-elections-released-in-uttarakhand-now-voting-will-be-held-on-24-and-28-july.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 28 Jun 2025 20:47:04 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/new-schedule-for-panchayat-elections-released-in-uttarakhand-now-voting-will-be-held-on-24-and-28-july.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को हाईकोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद, राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव का नया कार्यक्रम जारी कर दिया है। अब उत्तराखंड में 24 और 28 जुलाई को पंचायत चुनाव के लिए दो चरणों में मतदान होगा, जबकि मतगणना 31 जुलाई को होगी। उत्तराखंड के राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने शनिवार दोपहर पंचायत चुनाव का नया कार्यक्रम जारी कर दिया है।</p>
<p>विदित है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने गत सप्ताह चुनाव कार्यक्रम जारी करते हुए, 10 और 15 जुलाई का मतदान कराने की घोषणा की थी, लेकिन बुधवार से नामांकन शुरु होने से पहले हाईकोर्ट ने आरक्षण निर्धारण को लेकर चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा थी। इस कारण चुनाव अधर में लटक गए थे।</p>
<p>अब शुक्रवार को चुनाव को हाईकोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद, निर्वाचन आयोग ने शनिवार को नए सिरे से चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है। आयोग के मुताबिक,<span> 12 जिलों में कुल 66</span>,418 पंचायत सदस्यों के लिए मतदान होगा, जिसमें 47 लाख 77 हजार मतदाता भाग लेंगे।</p>
<p><strong>सात महीने देरी से चुनाव&nbsp;</strong></p>
<p>उत्तराखंड में पंचायतों का कार्यकाल नवंबर 2024 में समाप्त हो चुका है। इस तरह अब करीब सात महीने के विलंब से पंचायतों में चुनाव की प्रक्रिया शुरु हुई है। इसके तहत ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव कराए जाएंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>7950 है ग्राम पंचायतों की संख्या </strong></p>
<p>उत्तराखंड में कुल ग्राम पंचायतों की संख्या 7950 है। जिसमें से इस बार 7499 के लिए चुनाव होगा। उत्तराखंड के पलायन प्रभावित पहाड़ी क्षेत्रों में पंचायतों के लिए आबादी का मानक न्यूनतम 500 है, जबकि मैदानी क्षेत्र में एक हजार की न्यूनतम आबादी पर ग्राम पंचायत का गठन किया जाता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में पंचायत चुनाव का नया कार्यक्रम जारी, अब 24 और 28 जुलाई को होगा मतदान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में पंचायत चुनाव स्थगित, आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में उलझी सरकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/panchayat-elections-postponed-in-uttarakhand-government-entangled-in-high-court-over-reservation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Jun 2025 06:36:57 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/panchayat-elections-postponed-in-uttarakhand-government-entangled-in-high-court-over-reservation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को पहले ही सात महीने की देरी हो चुकी है। अब जैसे-तैसे बुधवार से नामांकन के साथ चुनाव प्रक्रिया शुरु होनी थी, लेकिन इससे एक दिन पहले राज्य निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए चुनाव प्रक्रिया स्थगित कर दी है।</p>
<p>उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की अधिसूचना शनिवार को जारी हुई थी। जिसके तहत हरिद्वार को छोड़कर शेष 12 जिलों में जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत के लिए 10 और 15 जुलाई को मतदान होना था। नामांकन की प्रक्रिया 25 जून से शुरू होनी थी। लेकिन इस बीच बागेश्वर निवासी गणेश कांडपाल व अन्य लोगों ने सरकार पर आरक्षण निर्धारण में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए, हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। याचिकाकर्ता का कहना है कि पिछले तीन कार्यकाल से जो सीट आरक्षित वर्ग में थी, चौथी बार भी आरक्षित कर दी गई हैं।</p>
<p>हाईकोर्ट ने सोमवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार की आरक्षण संबंधी पूरी कार्यवाही अग्रिम आदेशों तक स्थगित कर दी थी। हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को नामांकन और चुनाव संबंधी प्रक्रिया पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी। क्योंकि कोर्ट के आदेश के बाद आरक्षित पदों/स्थानों की स्थिति स्पष्ट नहीं है और ऐस में चुनाव कराना संभव नहीं है।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला?&nbsp;</strong></p>
<p>आरक्षण नियमावली की विधिवत अधिसूचना जारी किए बिना ही पंचायत चुनाव की घोषणा को लेकर राज्य सरकार उलझन में पड़ गई है। जबकि मामला कोर्ट में विचाराधीन था। अब सरकार को साबित करना है कि आरक्षण नियमावली की विधिवत अधिसूचना जारी की गई थी और इसमें कोई चूक नहीं हुई।&nbsp;</p>
<p>इस बीच, कोर्ट के आदेश के बाद हरकत में आए पंचायती राज विभाग ने सोमवार को ही नई आरक्षण नियमावली का गजट नोटिफिकेशन प्रकाशित करते हुए, इसे मंगलवार को ही हाईकोर्ट के समक्ष पेश कर दिया। सरकार की तरफ से कहा गया कि आरक्षण संबंधी नियमावली 9 जून को बनाई गई थी और उसका गजट नोटिफिकेशन 14 जून को हो गया था। लेकिन &ldquo;<span>कम्युनिकेशन गैप</span>&rdquo;<span> के </span>चलते सुनवाई के वक्त गजट नोटिफिकेशन हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जा सका था। &nbsp;</p>
<p><strong>आज सुनवाई का इंतजार&nbsp;</strong></p>
<p>हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव संबंधी सभी याचिकाओं की सुनवाई के लिए 25 जून दोहपर 2 बजे तक का समय निर्धारित किया है। इस मामले पर बुधवार को सुनवाई होने की उम्मीद है। इस बीच,<span> राज्य निर्वाचन आयोग को मंगलवार शाम को आनन-फानन में बुधवार से प्रस्तावित नामांकन प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी। फिलहाल पंचायत चुनावों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।</span></p>
<p><strong>नवंबर </strong><strong>2024 </strong><strong>में समाप्त हो चुका कार्यकाल </strong></p>
<p>उत्तराखंड में कुल ग्राम पंचायतों की संख्या 7950 है। जिसमें से 7499 के लिए चुनाव प्रस्तावित है। उत्तराखंड में पंचायतों का कार्यकाल नवंबर, 2024 में समाप्त हो चुका है। इस तरह करीब सात महीने के विलंब से पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन इस पर तत्काल ही ब्रेक लग गया है।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में पंचायत चुनाव स्थगित, आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में उलझी सरकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में पांच नए गोदाम बनाएगा भंडारण निगम, 1.30 लाख टन हुई भंडार क्षमता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/storage-corporation-will-build-five-new-warehouses-in-uttarakhand-storage-capacity-increased-to-over-1-lakh-tonnes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 23 Jun 2025 18:59:12 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/storage-corporation-will-build-five-new-warehouses-in-uttarakhand-storage-capacity-increased-to-over-1-lakh-tonnes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-sourcepos="7:1-7:326">उत्तराखंड राज्य भण्डार निगम खाद्यान्न, उर्वरक और बीज की भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए प्रदेश में पांच नए भंडारण गोदाम बनाएगा। वर्तमान में उत्तराखंड के भंडार गृहों की क्षमता 1.30 लाख टन हो चुकी है। जिससे न सिर्फ भंडार निगम की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि इसका सीधा लाभ स्थानीय काश्तकारों और किसानों को भी मिल रहा है।</p>
<p data-sourcepos="9:1-9:816">उत्तराखंड के सहकारिता मंत्री <strong>डॉ. धन सिंह रावत</strong> ने बताया कि उत्तराखंड राज्य भण्डार निगम ने पिछले कुछ वर्षों में अपने भंडार गृहों की क्षमताओं में विस्तार कर काश्तकारों और किसानों को लाभ पहुंचाया है। निगम ने भंडार गृहों की क्षमता 131550 टन कर दी है। जिसमें रुद्रपुर में 10486 टन, गदरपुर में 16081 टन, गूलरभोज में 3940 टन, किच्छा में 13111 टन, सितारगंज में 8970, हल्द्वानी (नवीन मण्डी) में 6895, कमलुवागांजा हल्द्वानी में 16470, अल्मोड़ा में 5000, हरिद्वार में 5222, विकासनगर में 11613 तथा नकरौंदा में 10172 टन क्षमता का भंडार गृह संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा निगम द्वारा किराये पर भी कई भंडारगृहों का संचालन किया जा रहा है, जिसमें काशीपुर में 5000 टन क्षमता का गोदाम शामिल है। इसी प्रकार रामनगर में 2500 टन, सितारगंज में 7090 टन, तथा नानकमत्ता में 9000 टन क्षमता के भंडार गृह शामिल हैं।</p>
<p data-sourcepos="11:1-11:40"><strong>पांच नए गोदामों के निर्माण की तैयारी</strong></p>
<p data-sourcepos="13:1-13:520">सहकारिता मंत्री ने बताया कि प्रदेश के अन्य स्थानों पर भंडारण की आवश्यकता को देखते हुए आधुनिक सुविधाओं से लैस 5 नये गोदामों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। जिनकी क्षमता 40 हजार टन है। जिसमें 10-10 हजार टन क्षमता का गोदाम ऋषिकेश और हरिद्वार में बनाया जाएगा। इसी प्रकार 5-5 हजार टन क्षमता के गोदाम कोटद्वार और टिहरी में बनाए जाएंगे। जबकि 10 हजार टन क्षमता का भंडार गृह कुमाऊं संभाग में रुद्रपुर व काशीपुर के आस-पास बनाया जाएगा। जिससे बड़े पैमाने पर खाद्यान्न एवं उर्वरकों का भंडारण किया जा सकेगा।</p>
<p data-sourcepos="15:1-15:375">डॉ. रावत का कहना है कि राज्य भंडार निगम ने विगत कुछ वर्षों में भंडारण क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि कर आत्मनिर्भरता हासिल की है। पहले की तुलना में अब निगम की भंडारण क्षमता 131550 मैट्रिक टन तक पहुंच गई है। इसके अतिरिक्त 40 हजार मैट्रिक टन की क्षमता वाले पांच नये गोदामों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे निकट भविष्य में भंडारण क्षमता में और अधिक इजाफा होगा।</p>
<p data-sourcepos="17:1-17:581">इसके अलावा निगम द्वारा पेस्ट कंट्रोल सेवा भी संचालित की जा रही है, जिसके तहत होटलों, रेलवे स्टेशनों, बैंकों, मिलों व सरकारी संस्थानों में पेस्ट कंट्रोल कार्य किया जाता है। जिससे निगम को शुल्क प्राप्त होता है जो निगम की शुद्ध आय का हिस्सा है। इसके साथ ही निगम द्वारा भंडारगृहों के साथ ही धर्मकांटों को भी स्थापित किया गया है। जिन पर सरकारी, सहकारी और निजी खाद्यान्न वाहनों की तुलाई से निगम को आय प्राप्त होती है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, निगम विगत कुछ वर्षों से लाभ की स्थिति में बना हुआ है और भविष्य में भंडारगृहों एवं अन्य सुविधाओं को बढ़ाकर और लाभ अर्जित करेगा।</p>
<p data-sourcepos="17:1-17:581"></p>
<p data-sourcepos="17:1-17:581"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_6859569f4c3d8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में पांच नए गोदाम बनाएगा भंडारण निगम, 1.30 लाख टन हुई भंडार क्षमता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में पंचायत चुनावों की अधिसूचना जारी, दो चरणों में होगा चुनाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/notification-for-panchayat-elections-issued-in-uttarakhand-elections-will-be-held-in-two-phases.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 22 Jun 2025 12:50:08 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/notification-for-panchayat-elections-issued-in-uttarakhand-elections-will-be-held-in-two-phases.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी गई है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की आचार संहिता शनिवार से लागू हो गई है। हरिद्वार को छोड़कर शेष 12 जिलों में जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत के लिए 10 और 15 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना 19 जुलाई को होगी।&nbsp;</p>
<p>उत्तराखंड के राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने पंचायत चुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसके मुताबिक, 12 जिलों में कुल 66, 418 पंचायत सदस्यों के लिए मतदान होगा, जिसमें 47 लाख 77 हजार मतदाता भाग लेंगे। इसके लि 25 से 28 जुलाई के बीच नामांकन होगा। इससे पहले शासन ने गत सप्ताह पंचायतों का आरक्षण निर्धारित करते हुए, आयोग को चुनाव की सिफारिश कर दी थी।</p>
<p>19 <span>जून को पंचायतों में आरक्षण प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी</span>, <span>जिसके बाद पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी गई।</span> राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को चुनाव की निष्पक्षता और सफल संचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। बारिश के मौसम को देखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया है। प्रथम चरण में दूरस्थ और मानसून प्रभावित ब्लॉक शामिल किए गए हैं।&nbsp;</p>
<p>उत्तराखंड पंचायत चुनाव में इस बार 4.57 लाख नए मतदाता चुनाव प्रक्रिया में शामिल होंगे, जो पिछली बार की तुलना में 10.5% अधिक है। कुल मतदाताओं की संख्या करीब 47 लाख है।&nbsp;</p>
<p><strong>सात महीने के विलंब से हो रहे हैं चुनाव</strong></p>
<p>उत्तराखंड में पंचायतों का कार्यकाल नवंबर 2024 में समाप्त हो चुका है। इस तरह करीब सात महीने के विलंब से पंचायतों का चुनाव हो रहा है। हरिद्वार जनपद में यूपी के समय से ही शेष पर्वतीय भू भाग से अलग समय पर चुनाव होते हैं। चुनाव बिना पार्टी सिंबल के होंगे। लेकिन क्षेत्र पंचायत प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे पदों पर पार्टी अपने उम्मीदवार उतारती हैं।</p>
<p><strong>7499 ग्राम पंचायतों के चुनाव</strong></p>
<p>उत्तराखंड में कुल ग्राम पंचायतों की संख्या 7950 है। जिसमें से इस बार 7499 के लिए चुनाव होगा।<span> ग्राम पंचायत सदस्य के 55,587 पदों, ग्राम पंचायत प्रधान के 7,499 पदों, क्षेत्र पंचायत सदस्य के 2,974 पदों और जिला पंचायत सदस्य के 358 पदों पर चुनाव होने हैं।&nbsp;</span></p>
<p>उत्तराखंड के पलायन प्रभावित पहाड़ी क्षेत्रों में पंचायतों के लिए आबादी का मानक न्यूनतम 500 है, जबकि मैदानी क्षेत्र में एक हजार की न्यूनतम आबादी पर ग्राम पंचायत का गठन किया जाता है। राज्य में 10 <span>हजार से अधिक मतदान केंद्र बनाए जा रहे हैं</span>, <span>जिनमें एक बूथ पर औसतन </span>750 <span>मतदाता शामिल होंगे।</span> मतदाता सूची आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में पंचायत चुनावों की अधिसूचना जारी, दो चरणों में होगा चुनाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय का विवाद सुलझाने के लिए 4 सदस्य कमेटी गठित, तीन मंत्री शामिल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/four-member-committee-formed-to-resolve-dispute-at-haryana-agricultural-university-includes-three-ministers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 20 Jun 2025 21:12:46 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/four-member-committee-formed-to-resolve-dispute-at-haryana-agricultural-university-includes-three-ministers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, <span>हिसार में छात्रों और प्रशासन के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने चार सदस्यों की कमेटी गठित की है। </span>शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा समेत चार सदस्य छात्रों से बात कर रिपोर्ट देंगे। उधर, छात्रों ने उनके साथ हुई मारपीट और विभिन्न मांगों को लेकर परीक्षाओं का बहिष्कार कर दिया है और कई दिनों से धरने पर बैठे हैं। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>राज्य सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस कमेटी में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा, लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी और नलवा से विधायक रणधीर पनिहार को शामिल किया गया है। यह कमेटी छात्रों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनेगी और उचित समाधान सुनिश्चित करेगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा सरकार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। सरकार हर स्तर पर युवाओं व छात्रों के साथ खड़ी है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_6855812b18184.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>क्या है मामला?&nbsp;</strong></p>
<p>स्कॉलरशिप में कटौती को लेकर विश्वविद्यालय के छात्र गत 10 जून को कुलपति को ज्ञापन देने पहुंचे थे। आरोप है कि गेट पर सुरक्षा गार्ड ने छात्रों को रोका और उनके साथ मारपीट की। इस घटना के विरोध में छात्र रात को कुलपति आवास के बाहर धरना देने लगे तो सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें दोबारा खदेड़ दिया और लाठी-डंडों से हमला किया। इस दौरान 20 से ज्यादा छात्र घायल हो गये और कई छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।</p>
<p>छात्रों की शिकायत पर पुलिस ने यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार और सिक्योरिटी इंचार्ज सहित कई लोगों पर केस दर्ज किया और लाठीचार्ज के मामले में असिस्टेंट प्रोफेसर राधेश्याम को गिरफ्तार कर लिया। छात्रों ने चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर समेत 17 प्रोफेसरों के खिलाफ मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इन शिक्षकों पर प्रताड़ित करने व धमकाने का आरोप लगाया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से भी 19 छात्रों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है।</p>
<p><strong>24 जून को छात्र महापंचायत&nbsp;</strong></p>
<p><span>आंदोलनकारी छात्रों ने 2</span>4 जून को हिसार में छात्र महापंचायत करने का ऐलान किया है। विश्वविद्यालय की ओर से भी छात्रों से बातचीत के लिए एक कमेटी बनाई थी, लेकिन छात्रों ने इस कमेटी से बात करने से इंकार कर दिया था। आंदोलनकारी छात्रों को विपक्षी दलों, <span>छात्र संगठनों और विधायकों का खूब समर्थन मिल रहा है। मामला के तूल पकड़ने के बाद अब मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। हालांकि</span>, <span>छात्र आरोपियों की बर्खास्तगी और स्कॉलरशिप बहाल करने की मांग पर अड़े हैं।&nbsp;</span></p>
<p><span></span></p>
<p><span></span></p>
<p><span></span></p>
<p><span></span></p>
<p><span></span></p>
<p><span></span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_6855811bd309b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय का विवाद सुलझाने के लिए 4 सदस्य कमेटी गठित, तीन मंत्री शामिल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्यप्रदेश में मूंग खरीद का ऐलान होते ही सक्रिय हुए व्यापारी, कीमतों में उछाल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/moong-procurement-announced-in-madhya-pradesh-prices-rise-sharply-as-traders-step-up-buying.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Jun 2025 21:40:46 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/moong-procurement-announced-in-madhya-pradesh-prices-rise-sharply-as-traders-step-up-buying.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="245" data-end="584">मध्यप्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मूंग और उड़द की खरीद के लिए 19 जून से पंजीकरण शुरू हो गये हैं। हालांकि, पहले दिन ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली के सुचारू रूप से काम न करने के कारण किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।</p>
<p data-start="586" data-end="861">इसी बीच, सरकारी खरीद की घोषणा होते ही निजी व्यापारी भी मूंग खरीद में सक्रिय हो गए हैं, जिससे मूंग के दाम 7,000 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए। जबकि कुछ दिन पहले तक किसान 6,000 रुपये प्रति क्विंटल से भी कम रेट पर मूंग बेचने को मजबूर थे।</p>
<p data-start="863" data-end="1376">राज्य के किसान पिछले काफी दिनों से मूंग खरीद की मांग उठा रहे थे। किसानों के विरोध-प्रदर्शन बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मूंग और उड़द की खरीद का निर्णय लिया। राज्य के 36 मूंग उत्पादक जिलों में मूंग की खरीद 8,682 रुपये प्रति क्विंटल की दर से और 13 उड़द उत्पादक जिलों में उड़द की खरीद 7,400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी। पंजीकरण की अंतिम तिथि 6 जुलाई है, जबकि खरीद प्रक्रिया 7 जुलाई से 6 अगस्त तक चलेगी। राज्य सरकार ने 8 लाख टन मूंग खरीदने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है।</p>
<p data-start="1378" data-end="1659">देवास जिले में भारतीय किसान संघ के युवा किसान नेता <strong>शुभम पटेल</strong> ने <strong><em data-start="1514" data-end="1525">रूरल वॉयस</em> </strong>को बताया कि पहले दिनों किसानों को पंजीकरण कराने में दिक्कतें आईं। ऑनलाइन सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है। उधर, सरकारी खरीद की घोषणा होते ही निजी व्यापारी भी किसानों से मूंग खरीदने में जुट गये हैं। कई जगह मूंग का रेट 7,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंंच गया है।&nbsp;</p>
<p data-start="1378" data-end="1659">आरोप हैं कि कई व्यापारी किसानों के नाम पर पंजीकरण करवा लेते हैं और सस्ते में मूंग खरीदकर एमएसपी पर बेचकर मुनाफा कमाते हैं। इसके अलावा, मूंग में मिट्टी आदि की मिलावट कर सरकारी खरीद एजेंसियों को नुकसान पहुंचाते हैं। पिछले साल भी ऐसी ही गड़बड़ियां सामने आई थीं, जिससे सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।</p>
<p data-start="1378" data-end="1659"><strong>मूंग खरीद की मुश्किल&nbsp;</strong></p>
<p data-start="1987" data-end="2316">मध्यप्रदेश ग्रीष्मकालीन मूंग का प्रमुख उत्पादक है। हाल के वर्षों में किसानों का रुझान मूंग की तरफ बढ़ा है। लेकिन इसकी सरकारी खरीद करवाना सरकार के लिए चुनौती बन गया है। इस साल मूंग की कीमतें 6,000 से 7,000 रुपये प्रति क्विंटल तक गिरने के बाद प्रदेश के किसान सरकारी खरीद को लेकर आंंदोलन की राह पर थे। विपक्षी दल कांग्रेस के नेता भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटे थे। प्रदेश सरकार ने मूंग और उड़द खरीद का ऐलान कर फिलहाल किसानों की नाराजगी को दूर करने का प्रयास किया है।&nbsp;</p>
<p data-start="2538" data-end="2933"><strong>किसान ऐसे कराएं पंजीकरण </strong></p>
<p data-start="2538" data-end="2933">किसान एमपी किसान ऐप, जन सेवा केंद्र, या कृषि उपज मंडियों में जाकर पंजीकरण करा सकते हैं। केवल पंजीकृत किसानों से ही खरीद की जाएगी। पंजीकरण के लिए आधार नंबर, बैंक खाता संख्या, IFSC कोड और भूमि संबंधित रिकॉर्ड की स्वप्रमाणित छायाप्रति अनिवार्य रूप से देनी होगी। बैंक खाता राष्ट्रीयकृत बैंक या जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा में होना चाहिए।</p>
<p data-start="2935" data-end="3261"><strong>21 लाख टन मूंग उत्पादन का अनुमान</strong><br data-start="2971" data-end="2974" />मध्यप्रदेश के 36 जिलों में मूंग की बुवाई होती है, जिसका अनुमानित रकबा लगभग 14.35 लाख हेक्टेयर है और इससे 21 लाख टन मूंग उत्पादन की संभावना है। वहीं उड़द की खेती राज्य के 13 जिलों में की जाती है, जिसका कुल रकबा करीब 0.95 लाख हेक्टेयर और अनुमानित उत्पादन 1.24 लाख टन है।</p>
<p data-start="2935" data-end="3261"></p>
<p data-start="2935" data-end="3261"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_685435bf255b2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्यप्रदेश में मूंग खरीद का ऐलान होते ही सक्रिय हुए व्यापारी, कीमतों में उछाल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी के दशहरी आम का पहली बार दुबई को सीधा निर्यात, मिला 211 रुपये किलो का रेट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/for-the-first-time-dussehri-mango-from-up-was-directly-exported-to-dubai-got-a-rate-of-rs-211.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 16 Jun 2025 10:55:00 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/for-the-first-time-dussehri-mango-from-up-was-directly-exported-to-dubai-got-a-rate-of-rs-211.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="126" data-end="449">उत्तर प्रदेश के दशहरी आमों की मिठास अब सीधे दुबई के बाजारों में पहुंचेगी। पहली बार लखनऊ से दशहरी आमों का निर्यात सीधे दुबई के लिए किया गया है। यूपी के उद्यान एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने रविवार को रहमानखेड़ा स्थित मैंगो पैक हाउस से 1200 किलोग्राम आम की खेप को हरी झंडी दिखाकर दुबई के लिए रवाना किया।</p>
<p data-start="126" data-end="449">इस मौके पर मंत्री <strong>दिनेश प्रताप सिंह</strong> ने कहा कि हम रहमान खेड़ा स्थित&nbsp;<span>मैंगो पैक हाउस </span><span> के माध्यम से सीधे दुनिया के बाजारों तक अपने राज्य का आम पहुंचाने में सफल हो रहे हैं। हमारे वैज्ञानिकों ने आम की सेल्फ लाइफ बढ़ाने में भी सफलता प्राप्त की है। कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ने से किसानों को भी लाभ होगा।&nbsp;</span></p>
<p data-start="451" data-end="762">अब तक ये आम अन्य राज्यों या बड़े व्यापारिक केंद्रों के जरिए विदेश भेजे जाते थे। लेकिन इस बार लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के दशहरी आमों को विशेष गुणवत्ता जांच और पैकेजिंग के बाद हवाई मार्ग से सीधे दुबई के लिए रवाना किया गया। भेजे गए कन्साइनमेंट का कुल मूल्य 2,992 अमेरिकी डॉलर है। इसी मूल्य का एक अन्य 1200 किलोग्राम का कन्साइनमेंट शनिवार को भी दुबई भेजा गया था। निर्यात किए गए दशहरी आम का मूल्य लगभग 211 रुपये प्रति किलोग्राम मिल रहा है, जो कि स्थानीय बाजार मूल्य से कई गुना अधिक है।</p>
<p data-start="975" data-end="1303">इंडो-जर्मन एएमडी प्रोजेक्ट के अंतर्गत लखनऊ क्षेत्र से चयनित तीन एफपीओ को कृषि निर्यात का प्रशिक्षण देकर उनकी क्षमता का विकास किया गया। इनमें से दो एफपीओ - <strong>इरादा फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड</strong> और <strong>मलिहाबाद फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड</strong> को दुबई से दशहरी आम का सीधा ऑर्डर मिला है। दोनों एफपीओ इस वर्ष पहली बार खुद दुबई को आम निर्यात कर रहे हैं।</p>
<p data-start="1305" data-end="1583">मलिहाबाद के एक आम उत्पादक किसान रईस अहमद ने कहा, "हमारे लिए गर्व की बात है कि अब हमारे बागों से आम सीधे विदेश जा रहे हैं। इससे हमारी आमदनी बढ़ेगी और नए बाजार मिलेंगे।" इस तरह के प्रत्यक्ष निर्यात से बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।&nbsp;</p>
<p data-start="1305" data-end="1583">देश भर से कृषि उत्पादों के सीधे निर्यात में <strong>कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA)</strong> की अहम भूमिका रही है। एपीडा देश भर में किसानों और निर्यातकों को प्रशिक्षण, परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निर्यात में मदद कर रहा है। दुबई के बाद अन्य खाड़ी देशों, यूरोप और एशिया के बाजारों तक भी यूपी के आमों के निर्यात की योजना है। इसके लिए एयर कार्गो सुविधाओं, कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स और निर्यात ढांचे को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p data-start="2036" data-end="2230">उत्तर प्रदेश देश का प्रमुख आम उत्पादक राज्य है और मलिहाबाद क्षेत्र दशहरी आम के लिए प्रसिद्ध है। इस पहल के बाद राज्य से अन्य किस्मों के आमों जैसे लंगड़ा और चौसा के भी सीधे निर्यात की योजना बनाई जा रही है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी के दशहरी आम का पहली बार दुबई को सीधा निर्यात, मिला 211 रुपये किलो का रेट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में लगने से पहले ही ‘उजड़’ गया कृषि मेला, लगे भ्रष्टाचार के आरोप]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/agriculture-fair-in-uttarakhand-got-cancelled-even-before-it-could-be-held-allegations-of-corruption.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 14 Jun 2025 13:37:29 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/agriculture-fair-in-uttarakhand-got-cancelled-even-before-it-could-be-held-allegations-of-corruption.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div dir="ltr">
<div>उत्तराखंड का कृषि विभाग इस बार कृषि मेले के आयोजन को लेकर विवादों में घिर गया है। विवाद के केंद्र में है हाईप्रोफाइल ईवेंट 'एग्री मित्र उत्तराखंड - 2025' जिसको लेकर देहरादून शहर को रंग दिया गया था। लेकिन ईवेंट के टेंडर को लेकर उठे विवाद के बीच कृषि विभाग को यह आयोजन स्थगित करना पड़ा।&nbsp;</div>
<div></div>
<div>उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पंवार ने मेले के आयोजन में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उत्तराखंड सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने 14 और 15 जून को देहरादून में 'एग्री मित्र उत्तराखंड&ndash;2025' के आयोजन का निर्णय लिया था। धूमधाम से आयोजन की तैयारियां चल रही थीं।</div>
<div></div>
<div></div>
<div><strong>टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप&nbsp;</strong></div>
<div></div>
<div>विवाद तब शुरु हुआ, जब कृषि मेले के लिए 9 जून को देहरादून के गढ़ी कैंट स्थित जसवंत ग्राउंड में&nbsp;टेंट आदि लगने लगे। इस बीच यह जानकारी सामने आई कि उक्त ईवेंट का टेंडर ही 11 जून को खुलना है। लेकिन टेंडर खुलने से पहले ही ठेकेदारों ने मेला लगाने का काम शुरू कर दिया तो टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे।&nbsp;</div>
<div>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_684d2f885c400.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
</div>
<div style="text-align: center;"><em>कृषि मेले का विज्ञापन और आयोजन में भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले बॉबी पंवार&nbsp;</em></div>
<div></div>
<div></div>
<div>उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पंवार ने मामले का खुलासा कर कृषि मंत्री गणेश जोशी की जोरदार घेराबंदी कर दी। बॉबी पंवार ने आरोप लगाया कि इस प्रकरण से स्पष्ट होता है कि आयोजन का टेंडर पहले से ही फिक्स हो चुका था।&nbsp;यही तरीका अन्य टेंडरों में भी अपनाया जा रहा है जो जांच का विषय है।&nbsp;</div>
<div></div>
<div>रूरल वॉयस से बात करते हुए बॉबी पंवार ने कहा कि एक तरफ उत्तराखंड के किसान खेती व बागवानी को हुए नुकसान से जूझ रहे हैं, वहीं कृषि मेले के नाम पर मिलीभगत और भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है। उनके सवाल उठाने के बाद मेले को रद्द करने से संदेह पुख्ता होता है कि इसमें कोई बड़ा घोटाला हो रहा था। केंद्रीय कृषि मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को इस प्रकरण का संज्ञान लेना चाहिए।&nbsp; &nbsp;</div>
<div></div>
<div></div>
<div>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_684d2f6554712.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
</div>
<div>
<div style="text-align: center;"><em>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को आमंत्रित करते उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी&nbsp;</em></div>
<div></div>
<div></div>
<div><strong>शिवराज सिंह चौहाने को दिया था निमंत्रण&nbsp;</strong></div>
<div>उत्तराखंड के कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने 11 जून को नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर उन्हें इस आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया था। गणेश जोशी ने बयान जारी कर बताया कि शिवराज सिंह चौहान ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है, वो देहरादून में होने वाले इस भव्य आयोजन में शामिल होंगे।&nbsp;इधर, आयोजन की तैयारी जोर शोर से शुरू हो गई थीं। देहरादून शहर में मंत्री गणेश जोशी के बड़े-बड़े कट आउट वाले होर्डिंग लगाए गये। लेकिन कृषि मेला शुरू होने से पहले ही टेंडर को लेकर उठे सवालों के बीच विभाग को यह आयोजन स्थगित करना पड़ा है।</div>
<div></div>
<div>कृषि निदेशक के.सी. पाठक ने 12 जून को सूचना जारी कर बताया कि एग्री मित्र उत्तराखंड &ndash; 2025 को &ldquo;अपरिहार्य कारणों&rdquo; से स्थगित किया जा रहा है। हालांकि, इस बहुप्रचारित कार्यक्रम को अंतिम समय में स्थगित करने का ठोस कारण विभाग ने अब तक नहीं बताया है। इसे लेकर कृषि विभाग की काफी किरकिरी हो रही है।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</div>
</div>
<div>
<div></div>
</div>
<div><strong>कृषि व उद्यान में विवादों की फसल</strong><br />उत्तराखंड का कृषि और उद्यान विभाग काफी समय से तमाम नकारात्मक कारणों से चर्चा में है। हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई उद्यान घोटाले की जांच में कई गड़बड़ियां उजागर हुई, जिस कारण सरकार को तत्कालीन उद्यान निदेशक को हटाना पड़ा था। यह विवाद विभाग के लिए गले की फांस बना हुआ है। ये विवाद उस प्रदेश में सामने आ रहे हैं, जहां लगातार बंजर होते खेतों ओर जंगली जानवरों के प्रकोप से खेती व&nbsp;उद्यान का संकट बढ़ता जा रहा है।</div>
<div></div>
<div></div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में लगने से पहले ही ‘उजड़’ गया कृषि मेला, लगे भ्रष्टाचार के आरोप ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गन्ना उत्पादकता में शामली जिला सातवीं बार प्रदेश में नंबर वन, मुजफ्फरनगर को दूसरा व मेरठ को तीसरा स्थान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/shamli-district-number-one-for-the-seventh-time-in-sugarcane-productivity-muzaffarnagar-is-second-and-meerut-is-third.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Jun 2025 16:27:42 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/shamli-district-number-one-for-the-seventh-time-in-sugarcane-productivity-muzaffarnagar-is-second-and-meerut-is-third.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="220" data-end="563">उत्तर प्रदेश के शामली जिले ने गन्ना उत्पादकता में लगातार सातवीं बार प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस वर्ष शामली जिले की औसत गन्ना उपज 1023.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। वहीं, मुजफ्फरनगर 945.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज के साथ दूसरे स्थान पर और मेरठ 923.84 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार के साथ तीसरे स्थान पर रहा।</p>
<p data-start="565" data-end="797">हर साल गन्ना एवं चीनी आयुक्त कार्यालय, उत्तर प्रदेश की ओर से क्रॉप कटिंग के परिणामों के आधार पर सभी जिलों की गन्ना उत्पादकता रैंकिंग जारी की जाती है। शामली जिला लगातार सात वर्षों से प्रदेश में गन्ना उत्पादन में अव्वल बना हुआ है।</p>
<p data-start="799" data-end="1016">शामली के जिला गन्ना अधिकारी रणजीत सिंह कुशवाहा और जिला कृषि अधिकारी प्रदीप कुमार यादव ने जनपद के किसानों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि किसानों की मेहनत, लगन और वैज्ञानिक तरीकों से की गई खेती का परिणाम है।</p>
<p data-start="1018" data-end="1354">इस वर्ष प्रदेश में गन्ने की फसल पर रोगों और कीटों का प्रकोप देखने को मिला, जिससे पैदावार प्रभावित हुई। शामली जिले की गन्ना उत्पादकता में 12.88 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 2023-24 में जिले की औसत गन्ना उपज 1036.04 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी, जो वर्ष 2024-25 में घटकर 1023.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रह गई।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गन्ना उत्पादकता में शामली जिला सातवीं बार प्रदेश में नंबर वन, मुजफ्फरनगर को दूसरा व मेरठ को तीसरा स्थान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मक्का की खेती को बढ़ावा दे रही यूपी सरकार, बीजों पर 50 फीसदी अनुदान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-government-is-promoting-maize-cultivation-50-percent-subsidy-on-seeds.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 08 Jun 2025 20:35:52 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-government-is-promoting-maize-cultivation-50-percent-subsidy-on-seeds.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार मक्का की खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद औरैया,&nbsp;<span>हरदोई, कन्नौज और इटावा में मक्के की फसल का हवाई निरीक्षण किया&nbsp;</span>और "विकसित कृषि संकल्प अभियान" के तहत नगर पंचायत अजीतमल (औरैया) में मक्का किसान सम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर प्रगतिशील किसानों का सम्मान हुआ और मिनी बीज किट व विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र, चेक वितरित किए गये।&nbsp;<span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"> </span></p>
<p><strong>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ</strong> ने कहा कि जिस प्रदेश में पहले किसान केवल एक या दो फसलों तक सीमित रहते थे, वहां अब 5 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में तीसरी फसल के रूप में मक्का का उत्पादन कर अच्छा लाभ कमा रहे हैं। किसानों की मक्का की फसल देखकर प्रसन्न हुए मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि मक्का के लिए क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_6845aa2dee90c.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>मक्का फसल की फोटो साझा करने की अपील</strong></p>
<p>त्वरित मक्का विकास योजना को प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश के<strong> कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही</strong> ने किसानों से सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी मक्का फसल की फोटो साझा करने की अपील की है। उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा कि किसान भाई अपनी जायद (गर्मी) की मक्का फसल के साथ जनपद का नाम लिखते हुए फोटो भेजें, ताकि आगामी फसल में योजना की जानकारी और लाभ उन्हें मिल सके।&nbsp;</p>
<p>हाल ही में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने उन्नाव, हरदोई और कानपुर नगर के बिल्लौर ब्लॉक अंतर्गत अरवल, मकनपुर, बहरामपुर और सरैया दस्तक सहित विभिन्न गांवों में 'लाइन सोइंग' विधि से बोई गई मक्का फसल का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि <span>त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम (AMDP) </span>का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को मक्का उत्पादन में अग्रणी राज्य बनाना है। प्रदेश में मक्का का उत्पादन वर्ष 2021-22 में 14.67 लाख टन था, जिसे वर्ष 2027 तक बढ़ाकर 27.30 लाख टन करने का लक्ष्य तय किया गया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_6845a65eac780.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम</strong></p>
<p>प्रदेश सरकार ने मक्का उत्पादन को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। मक्का उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने 24 अप्रैल 2024 को 'त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम (AMDP)' की शुरुआत की थी। <span>इसके अंतर्गत मक्का किसानों को बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। यह अनुदान योजना देशी मक्का के साथ साथ संकर मक्का, पॉप कार्न, स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न पर भी लागू है। मक्का किसानों को 15 हजार प्रति क्विंटल की दर से बीजों पर अनुदान मिलता है। इसके अलावा बीजों के प्रदर्शनों में 2,400 - 20,000 रुपये प्रति एकड़ तक का अनुदान मान्य है।</span></p>
<p>प्रदेश सरकार की कोशिशों से जायद में मक्का का क्षेत्र बढ़ा है। वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश में जायद मक्का का रकबा 3.06 लाख हेक्टेयर था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 4.87 लाख हेक्टेयर हो गया।</p>
<p><strong>एथेनॉल</strong> उत्पादन के साथ-साथ मुर्गी दाने, पशु आहार और खाद्य वस्तुओं में मक्का के बढ़ते उपयोग के कारण इसकी मांग में तेजी आई है। पिछले कुछ वर्षों में जायद फसल के रूप में मक्का किसानों की पसंद बनता जा रहा है। कम समय में तैयार होने वाली इस फसल के लिए सरकार ने 2,400 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित किया है।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_6845a5b4a9bf1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मक्का की खेती को बढ़ावा दे रही यूपी सरकार, बीजों पर 50 फीसदी अनुदान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में रणनीतिक सलाहकार परिषद का गठन, सीएम धामी अध्यक्ष, मनु गौड़ समेत 7 सदस्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/strategic-advisory-council-formed-in-uttarakhand-cm-dhami-chairman-7-members-including-manu-gaur.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Jun 2025 21:00:02 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/strategic-advisory-council-formed-in-uttarakhand-cm-dhami-chairman-7-members-including-manu-gaur.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था और विकास को गति देने के उद्देश्य से रणनीतिक सलाहकार समिति का गठन किया है। यह समिति प्रदेश में रोजगार के अवसर सृजित करने, उत्पादन बढ़ाने, बचत एवं निवेश को प्रोत्साहित करने तथा घरेलू मांग में वृद्धि पर केंद्रित रहेगी। समिति के कार्यक्षेत्र में औद्योगिक विकास, कृषि एवं बागवानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और सेवा क्षेत्र शामिल हैं। साथ ही, दक्ष कार्यबल की उपलब्धता, बेहतर बुनियादी ढांचे और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भी यह समिति कार्य करेगी।</p>
<p>रणनीतिक सलाहकार समिति के गठन की अधिसूचना राज्यपाल की स्वीकृति के पश्चात शुक्रवार को जारी की गई। मुख्यमंत्री <strong>पुष्कर सिंह धामी</strong> की अध्यक्षता में गठित इस समिति में सामाजिक कार्यकर्ता <strong>मनु गौड़</strong> को सदस्य, मुख्य सचिव को पदेन सदस्य, नियोजन प्रमुख सचिव को पदेन सदस्य, सेवानिवृत्त आईएएस <strong>इन्दु कुमार पाण्डेय </strong>को सदस्य, सेवानिवृत्त आईएएस <strong>डॉ. राकेश कुमार</strong> को सदस्य तथा सेतु आयोग के सीईओ को पदेन सदस्य सचिव नामित किया गया है।</p>
<p><strong>UCC समिति के सदस्य भी रह चुके हैं मनु गौड़</strong></p>
<p>सामाजिक कार्यकर्ता मनु गौड़ इससे पूर्व उत्तराखंड सरकार के लिए समान नागरिक संहिता (UCC) का ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति में भी सदस्य रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित इस समिति ने दो वर्षों के विस्तृत अध्ययन के बाद UCC का ड्राफ्ट तैयार किया, जिसे इस वर्ष 27 जनवरी से पूरे उत्तराखंड में लागू किया गया। मनु गौड़ UCC के लिए नियम बनाने वाली समिति में भी सदस्य रह चुके हैं। वे भारत में टैक्स सुधारों के प्रमुख पैरोकार माने जाते हैं।</p>
<p><strong>तीन वर्षों का कार्यकाल, विस्तार की संभावना</strong></p>
<p>समिति में मुख्यमंत्री की मंजूरी से समय-समय पर तीन से अधिक अन्य सदस्यों को भी नामित किया जा सकेगा। मुख्य सचिव की ओर से विभागीय अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव तथा विभागाध्यक्षों को विशेषज्ञ समिति की बैठकों में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में आमंत्रित किया जा सकेगा।</p>
<p>समिति का कार्यकाल गठन की तिथि से तीन वर्षों का होगा, जिसे आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री की स्वीकृति से अधिकतम दो वर्षों के लिए बढ़ाया जा सके।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x_68431d23b63ed.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/06/image_750x500_68431b3bf24ce.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में रणनीतिक सलाहकार परिषद का गठन, सीएम धामी अध्यक्ष, मनु गौड़ समेत 7 सदस्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मौसम की मार से खरबूजे की फसल बर्बाद, किसानों की लागत भी डूबी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/the-melon-crop-was-ruined-due-to-bad-weather-the-farmers-cost-was-also-sunk.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 29 May 2025 13:48:58 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
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        <description><![CDATA[ <p data-start="173" data-end="623">गर्मी के मौसम में खरबूजा एक लोकप्रिय मौसमी फल है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के उन्नाव, बाराबंकी, फतेहपुर और रायबरेली जैसे कई जिलों के किसान गर्मियों में बड़े पैमाने पर इसकी खेती करते हैं। लेकिन इस साल मौसम के लगातार उतार-चढ़ाव ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। तेज गर्मी, धूप, बेमौसम बारिश और पुरवा हवाओं के चलते खरबूजे की फसल में कीट और विभिन्न रोग लग गए हैं, जिससे किसानों की मेहनत बर्बाद हो गई।</p>
<p data-start="625" data-end="1056">उन्नाव जिले के बिछिया ब्लॉक के नथईखेड़ा गांव के निवासी <strong>प्रदीप कुमार (42 वर्ष)</strong> ने बटाई पर डेढ़ बीघा खेत में खरबूजे की खेती की थी। प्रदीप अब तक केवल दो हजार रुपये के खरबूजे ही बेच पाए हैं। <strong data-start="812" data-end="825">रूरल वॉयस</strong> से बातचीत में उन्होंने बताया कि डेढ़ बीघा खेत में उन्होंने तीन हजार रुपये प्रति किलो की दर से डेढ़ किलो बीज बोया था। जुताई पर एक हजार रुपये का खर्च आया। सिंचाई हर हफ्ते करनी पड़ती है, जिस पर अब तक तीन हजार रुपये खर्च हो चुके हैं।</p>
<p data-start="1058" data-end="1570">मौसम की मार से फसल में रोग लग गया है, जिसके चलते उन्हें पांच बार दवा का छिड़काव करना पड़ा, जिस पर करीब ढाई हजार रुपये खर्च हो गए। अब जब फसल तैयार हुई तो अधिकतर फूल सूख गए हैं और फल कम लगे हैं। जो फल लगे हैं, उनमें से करीब 60% सड़ चुके हैं या कीड़ों से ग्रस्त हैं। प्रदीप कहते हैं, "इस बार मौसम में बार-बार बदलाव हो रहा है&mdash;कभी गर्मी, कभी बारिश। खरबूजे के लिए लू जरूरी होती है, लेकिन इस साल पुरवा हवा चलने से फसल में कीड़े और रोग लग रहे हैं। लागत लगातार बढ़ रही है और अब तो लगता है कि लगाया गया पैसा भी डूब जाएगा।"</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_683815164f2a2.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="1058" data-end="1570"><strong>तजबूज से मिठास गायब&nbsp;</strong></p>
<p data-start="1572" data-end="1872">सिकंदरपुर कर्ण ब्लॉक के बलऊखेड़ा निवासी <strong>रामदास यादव (52 वर्ष)</strong> पिछले 20 वर्षों से खरबूजे की खेती कर रहे हैं। इस साल उन्होंने तीन बीघा खेत में खरबूजा लगाया था। रामदास बताते हैं, "करीब 20 हजार रुपये की लागत से फसल तैयार की थी, लेकिन फल सड़ने के कारण अब तक केवल तीन हजार रुपये के खरबूजे ही बेच पाया हूं।"</p>
<p data-start="1874" data-end="2184">रामदास कहते हैं कि खरबूजे की फसल के लिए जितनी अधिक गर्मी और लू चलती है, फल उतने ही मीठे और अच्छे होते हैं। इस बार गर्मी तो है, लेकिन मौसम के लगातार बदलाव से फसल पर असर पड़ा है। "जो फल तैयार हो रहे हैं, उनमें मिठास नहीं है, इसलिए बाजार में दाम भी नहीं मिल रहे। इस साल किसानों को घाटा उठाना पड़ेगा," वे कहते हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_683817fff3429.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p data-start="1874" data-end="2184"><strong>तामपान में उतार-चढ़ाव का असर&nbsp;</strong></p>
<p data-start="2186" data-end="2601">कृषि विज्ञान केंद्र धौरा, उन्नाव के वैज्ञानिक <strong>डॉ. जय कुमार</strong> बताते हैं कि खरबूजे के लिए गर्म और शुष्क मौसम उपयुक्त होता है, लेकिन ऐसे मौसम में रोग लगने की संभावना भी बढ़ जाती है। बुआई के समय 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान होना चाहिए, जबकि 30 से 35 डिग्री का तापमान खरबूजे के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। लेकिन इस साल तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव से न तो फल ठीक से लग पा रहे हैं और न ही रोगों से बचाव हो पा रहा है।</p>
<p data-start="2603" data-end="2748">डॉ. कुमार का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह मौसम में बदलाव आया है, उसे देखते हुए पॉलीहाउस खेती जैसे विकल्पों को अपनाना जरूरी हो गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मौसम की मार से खरबूजे की फसल बर्बाद, किसानों की लागत भी डूबी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्यप्रदेश: सूखे की मार झेल रहे मंडला के आदिवासी किसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-tribal-farmers-of-mandla-are-facing-the-brunt-of-drought.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 27 May 2025 16:46:27 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-tribal-farmers-of-mandla-are-facing-the-brunt-of-drought.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्यप्रदेश का मंडला जिला एक आदिवासी क्षेत्र है, जहां ग्रामीण अंचलों में लोग वनों और वनोपज आधारित आजीविका पर निर्भर हैं। पीढ़ियों से यहां के आदिवासी समुदाय चटाई, रस्सी, पत्तल और बर्तन जैसे उत्पाद बनाकर जीवनयापन करते आए हैं। साथ ही कृषि भी लोगों की जीविकोपार्जन का मुख्य साधन है।</p>
<p>लेकिन खेती आसान नहीं है&mdash;यह पानी, बिजली और बीज जैसे कई संकटों से घिरी हुई है। इन सभी में सबसे गंभीर चुनौती है सूखा, जिसने आदिवासी किसानों की आजीविका पर गहरा असर डाला है।</p>
<p><strong>बिछिया तहसील के हालात&nbsp;</strong></p>
<p>मंडला जिले की बिछिया तहसील के धरमपुरी, करंजिया, रीठी, भाग, किसली, राजो कटंगा और भानपुर जैसे गांव सूखे की मार झेल रहे हैं। किसान सुभाष धुर्वे बताते हैं, "सूखे के कारण खेत खाली पड़ रहते हैं। हम सिर्फ बारिश पर निर्भर फसलें ले पाते हैं। खेती न हो पाने से जीवन यापन मुश्किल होता जा रहा है।"&nbsp;</p>
<p>आगे राजमोहन सहित कई अन्य किसान मिलते हैं। राजमोहन बताते हैं, "हमारी पांच एकड़ में से तीन एकड़ जमीन खाली पड़ी है। कहने को तो 5 एकड़ जमीन है लेकिन पानी नहीं होने से जमीन&nbsp;होने का कोई मतलब नहीं रह जाता है।"&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_6835aeedc3fb6.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><span style="color: #34495e;">बिछिया तहसील में पत्तल बेचते आदिवासी&nbsp;</span></p>
<p>किसान सुकल सिंह मरकाम कहते हैं, "मेरे पास एक एकड़ जमीन है, लेकिन सिंचाई की सुविधा न होने से उसमें भी खेती नहीं हो पा रही है। सोचता हूं कि और जमीन ठेके पर लेकर खेती करूं मगर नुकसान के बारे में सोचकर डर जाता हूं।"</p>
<p>आगे हमारी मुलाकात विमला मार्को और अनिता धुर्वे से होती है।&nbsp;विमला बताती हैं कि सिंचाई की सुविधा न होने से केवल बरसात की फसल ले पाते हैं।<strong></strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_6835abd35996a.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><span style="color: #34495e;">सूखे पड़े खेत दिखाता बरखेड़ा गांव का आदिवासी युवा किसान</span><strong><br /><br /></strong></p>
<p><strong>सिंचाई का संकट</strong></p>
<p>विमला मार्को आगे कहती हैं, "हमारे इलाके में हालोन डेम भी बना हुआ है, जिसमें काफी पानी रहता है।&nbsp;लेकिन यह पानी दूसरे क्षेत्रों के लिए जाता है। यदि डेम का पानी हमें दिया जा सके तो सूखे के हालात बदल सकते हैं। यदि लिफ्टिंग सिस्टम से खेतों तक पानी पहुंचाया जाए तो सूखे की समस्या कम हो सकती है।"&nbsp;</p>
<p>अनिता धुर्वे खेती के साथ-साथ मवेशियों को चराने का काम करती है। वे कहती हैं कि सूखे के कारण लोग बड़ी तकलीफ झेलते हैं। पशुओं को पानी पिलाने के लिए बहुत दूर जाना पड़ता है। वहीं, खेत सूखे पड़े रहते हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_6835ae5284715.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><span style="color: #34495e;">बिछिया में हालून डेम के पास निकली एक नहर</span></p>
<p>महान सिंह धुर्वे बताते हैं कि&nbsp;खेती के संसाधन जुटाना छोटे किसानों के लिए आसान नहीं होता। इसलिए बहुत से लोग रोजगार की तलाश में इंदौर, दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं। वह आगे कहते हैं किसूखे के कारण लोग अपने मवेशी&mdash;गाय, बैल, भैंस तक बेचने को मजबूर हो गए हैं।</p>
<p>पंचम सिंह धुर्वे कहते हैं, "सूखा सिर्फ खेती को ही बर्बाद नहीं करता है, यह हमारे लगाए पेड़-पौधों को भी बढ़ने नहीं देता। हरियाली और खुशहाली दोनों सूखने लगती हैं।"</p>
<p>मंडला में सूखे की स्थिति बेहद चिंताजनक है। सवाल यह है कि क्या कभी इन आदिवासी इलाकों में सूखा खत्म होगा? या फिर आदिवासी किसान इसी तरह अपनी कृषि आधारित आजीविका को खोते रहेंगे?</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_6835abbb25fb0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्यप्रदेश: सूखे की मार झेल रहे मंडला के आदिवासी किसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश: बाघ&amp;#45;तेंदुए के हमलों से दहशत में किसान, दो की मौत, वन विभाग पर सवाल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/tiger-and-leopard-attacks-in-bijnor-pilibhit-of-up-many-farmers-died-in-a-week.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 19 May 2025 15:30:59 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/tiger-and-leopard-attacks-in-bijnor-pilibhit-of-up-many-farmers-died-in-a-week.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="137" data-end="363" class="">उत्तर प्रदेश के बिजनौर, पीलीभीत और आसपास के जिलों में बाघ और तेंदुए के हमलों से किसानों का खेतों में जाना मुश्किल हो गया है। उत्तराखंड से सटे इन जिले में पिछले दो-तीन वर्षों से वन्यजीवों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन किसानों पर वन्यजीवों के हमलों की खबरें आती रहती हैं। लेकिन इस समस्या का अब तक कोई कारगर हल नहीं निकला है।&nbsp;</p>
<p data-start="365" data-end="616" class=""><strong>बिजनौर</strong> जिले के चांदपुर क्षेत्र के सब्दलपुर तेली गांव में रविवार को जंगल से चारा लेने गई एक महिला पर तेंदुए ने हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। जब तक लोग उसे बचाने पहुंचे, तेंदुआ महिला का सिर खा चुका था। तेंदुए के आतंक से इलाके में दहशत का माहौल है।</p>
<p data-start="618" data-end="1052" class="">तेंदुए के हमले का शिकार हुई समीना (50) शाम करीब चार बजे खेत में चारा लेने गई थीं। देर शाम तक जब वह वापस नहीं लौटीं तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। समीना का शव गांव के पास पड़ा मिला। ग्रामीणों के अनुसार, तेंदुए ने समीना के गले से ऊपर का हिस्सा खा लिया था और शरीर पर पंजों के निशान मिले। पूरे क्षेत्र में जंगली जानवरों के हमलों के चलते दहशत और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीण कई बार वन विभाग और प्रशासन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर चुके हैं।</p>
<p data-start="1054" data-end="1320" class="">किसान नेता <strong>दिगंबर सिंह</strong> ने कहा कि जंगली जानवरों के हमलों से किसान बेहद परेशान हैं। कई बार धरने-प्रदर्शन और आंदोलन हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। किसान खेतों में जाने से डरने लगे हैं। सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर प्रभावी उपाय करने चाहिए।&nbsp;</p>
<p data-start="1322" data-end="1701" class="">पिछले दिनों बिजनौर के मंडावर थाना क्षेत्र के इनामपुरा गांव में एक तेंदुए की मौत के मामले में वन विभाग ने कई ग्रामीणों के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया। 10 मई को गांव में घुसे एक तेंदुए को ग्रामीणों ने रस्सी से बांधकर बाथरूम में बंद कर दिया था। वन विभाग की टीम ने तेंदुए को वहां से छुड़ाया, लेकिन दो दिन बाद उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों पर मुकदमा दर्ज होने का किसान यूनियनों ने विरोध किया है।</p>
<p data-start="1703" data-end="2148" class=""><strong>पीलीभीत</strong> जिले के पूरनपुर क्षेत्र से भी बाघ के हमले में एक किसान की मौत की खबर है। रविवार को चतीपुर गांव में खेत में पानी लगा रहे राम प्रसाद (45) पर झाड़ियों में छिपे बाघ ने अचानक हमला कर दिया। उसने किसान की गर्दन पकड़कर करीब 500 मीटर तक घसीटा। ग्रामीणों ने बड़ी मुश्किल से शव को बाघ से छुड़ाया। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को रखकर कई घंटे विरोध-प्रदर्शन किया। बताया जाता है कि हंगामे की वजह से वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी चार घंटे तक मौके पर नहीं पहुंचे।</p>
<p data-start="2150" data-end="2435" class="">पीलीभीत जिले के पूरनपुर क्षेत्र में चार दिनों के भीतर यह दूसरी घटना है। इससे पहले 14 मई को नजीरगंज गांव में खेत में सिंचाई करने गए किसान हंसराज (50) पर भी बाघ ने हमला कर दिया था। बाद में उसका शव बरामद हुआ। अभी तक वह बाघ पकड़ा नहीं गया है, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।&nbsp;</p>
<p data-start="2437" data-end="2617" class="">सवाल यह है कि जंगली जानवरों के लगातार हमलों के बावजूद <span>वन विभाग की ओर से ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गये</span>? किसानों का खेतों में जाना मुश्किल हो गया है। आमजन भी भयभीत हैं। इस समस्या का आखिर समाधान क्या है?<span></span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश: बाघ-तेंदुए के हमलों से दहशत में किसान, दो की मौत, वन विभाग पर सवाल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्राकृतिक खेती का गेहूं किसानों से 60 रुपये/किलो खरीद रही हिमाचल सरकार, पंजीकरण शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/himachal-government-is-buying-wheat-grown-through-natural-farming-at-the-rate-of-rs-60kg-registration-started.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 17 May 2025 16:41:24 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/himachal-government-is-buying-wheat-grown-through-natural-farming-at-the-rate-of-rs-60kg-registration-started.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-start="186" data-end="435" class="">हिमाचल प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष अभियान चला रही है। इसके तहत प्राकृतिक खेती से उगाई गई गेहूं, हल्दी समेत कई फसलों की खरीद सरकार द्वारा की जाएगी। प्राकृतिक खेती की उपज बेचने के इच्छुक किसान 15 जून तक पंजीकरण करा सकते हैं।&nbsp;</p>
<p data-start="437" data-end="715" class="">हिमाचल सरकार ने प्राकृतिक खेती के गेहूं, मक्का, कच्ची हल्दी और जौ के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने की पहल की है। प्राकृतिक खेती के गेहूं का एमएसपी 40 रुपये से बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलोग्राम और मक्का का एमएसपी 30 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है।</p>
<p data-start="717" data-end="1088" class="">सरकार कच्ची हल्दी भी किसानों से खरीद रही है, जिसे 90 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जा रहा है। चंबा जिले के पांगी ब्लॉक में पैदा होने वाली जौ के लिए 60 रुपये प्रति किलोग्राम का एमएसपी तय किया गया है। रसायन-मुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने <strong>&lsquo;प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना (PK3Y)&rsquo;</strong> शुरू की है, जिसके तहत इस प्रकार की कई पहलें की जा रही हैं।&nbsp;</p>
<p data-start="1090" data-end="1423" class="">मुख्यमंत्री <strong>सुखविंदर सिंह सुक्खू</strong> ने कृषि विभाग को निर्देश दिए हैं कि इस अभियान को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में मिशन मोड में चलाया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके। कृषि विभाग की ओर से शिविर लगाकर किसानों का पंजीकरण किया जाएगा। राज्य के कुछ जिलों में 15 मई से प्राकृतिक रूप से उगाए गए गेहूं की खरीद शुरू हो चुकी है। कृषि विभाग ने खंड स्तर के अधिकारियों को किसानों की सहायता करने और अभियान से संबंधित उनकी शंकाओं का समाधान करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p data-start="1425" data-end="1779" class="">प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना (PK3Y) के एडिशनल प्रोजेक्ट डायरेक्टर <strong>डॉ. रविंद्र सिंह जसरोटिया</strong> ने बताया कि प्राकृतिक गेहूं की खरीद के लिए कुल 22 खरीद केंद्र बनाए गए हैं। सबसे पहले हमीरपुर, बिलासपुर और सिरमौर जिलों के किसानों से गेहूं खरीदी जाएगी। इसके बाद, जब अन्य जिलों में फसल की नमी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, तो वहां भी खरीद प्रक्रिया शुरू की जाएगी।</p>
<p data-start="1781" data-end="2282" class="">हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने प्राकृतिक रूप से उगाए गए गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। केंद्र सरकार जहां सामान्य गेहूं के लिए 2,425 रुपये प्रति क्विंटल का एमएसपी देती है, वहीं हिमाचल सरकार प्राकृतिक खेती के गेहूं को 60 रुपये प्रति किलोग्राम यानी 6,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद रही है। वे किसान जो खरीद केंद्र से दो किलोमीटर या उससे अधिक दूरी से अपनी उपज लेकर आएंगे, उन्हें 2 रुपये प्रति किलोग्राम परिवहन सब्सिडी भी दी जाएगी। एक किसान अधिकतम 20 क्विंटल गेहूं बेच सकता है।</p>
<p data-start="2284" data-end="2411" class="">इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार पशुपालकों से गाय का दूध 51 रुपये प्रति लीटर और भैंस का दूध 61 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रही है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_68286e1cc5504.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्राकृतिक खेती का गेहूं किसानों से 60 रुपये/किलो खरीद रही हिमाचल सरकार, पंजीकरण शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में चौधरी चरण सिंह के नाम पर बनेंगे 5 सीड पार्क, कैबिनेट ने दी मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/5-seed-parks-will-be-established-in-the-name-of-chaudhary-charan-singh-in-up-cabinet-approval.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 15 May 2025 20:16:13 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/5-seed-parks-will-be-established-in-the-name-of-chaudhary-charan-singh-in-up-cabinet-approval.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>- सुमित यादव&nbsp;</strong></em></p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को बीज उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश में पांच सीड पार्कों की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर स्थापित किए जाने वाले ये सीड पार्क प्रदेश के पांच कृषि जलवायु क्षेत्रों (क्लाइमेटिक जोन) में चरणबद्ध तरीके से स्थापित किए जाएंगे।</p>
<p>गुरुवार को मुख्यमंत्री <strong>योगी आदित्यनाथ</strong> की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया गया, साथ ही 10 अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।</p>
<p><strong>बीज उद्योगों को लीज पर मिलेगी जमीन&nbsp;</strong></p>
<p>प्रदेश के कृषि मंत्री <strong>सूर्य प्रताप शाही</strong> ने बताया कि सरकार इन सीड पार्कों में निवेश करने वाले बीज व्यवसायियों को विभिन्न रियायतें प्रदान करेगी, ताकि निजी निवेश को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि इन सीड पार्कों में बीज उद्योगों को 30 वर्षों की लीज पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी, जिस पर बीज उत्पादन, भंडारण, प्रयोगशालाओं तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। यह लीज आवश्यकता अनुसार 90 वर्षों तक बढ़ाई जा सकेगी।</p>
<p>इस योजना के अंतर्गत पहले सीड पार्क की स्थापना लखनऊ जिले के अटारी स्थित राजकीय कृषि प्रक्षेत्र की 130.63 एकड़ भूमि पर की जाएगी, जिस पर 266.70 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसी तरह चार अन्य सीड पार्क प्रदेश के पश्चिमी, तराई, मध्य, बुंदेलखंड और पूर्वी क्षेत्रों में कृषि जलवायु के अनुरूप विकसित किए जाएंगे।</p>
<p><strong>सीड पार्क से जुड़ेंगे 40 हजार किसान </strong></p>
<p>कृषि मंत्री ने बताया कि एक सीड पार्क से लगभग 1,200 लोगों को प्रत्यक्ष और 3,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही लगभग 40,000 बीज उत्पादक किसान इन पार्कों से सीधे तौर पर जुड़ेंगे। सभी पांच सीड पार्कों की स्थापना से कुल 6,000 प्रत्यक्ष और 15,000 अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होंगे।</p>
<p><strong>प्रतिवर्ष 139 लाख क्विंटल बीज की आवश्यकता</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा कृषि राज्य है, जिसका कुल कृषि क्षेत्रफल 162 लाख हेक्टेयर है। यहां हर वर्ष लगभग 139.43 लाख क्विंटल बीज की आवश्यकता होती है, जिसकी आपूर्ति के लिए प्रदेश को अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। सीड पार्कों की स्थापना से यह निर्भरता समाप्त होगी और किसानों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्ता युक्त बीज उचित मूल्य पर उपलब्ध होंगे। इससे कृषि उत्पादकता और किसानों की आय दोनों में वृद्धि होगी।</p>
<p><strong>बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा यूपी </strong></p>
<p>वर्तमान में उत्तर प्रदेश में बीजों की कुल आवश्यकता का केवल 7 प्रतिशत पूर्ति सरकारी/अर्ध-सरकारी संस्थाओं के माध्यम से, 43 प्रतिशत निजी क्षेत्र से और लगभग 50 प्रतिशत किसान संरक्षित बीजों से होती है। प्रदेश में लगभग 40 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का उत्पादन किया जा रहा है। जबकि शेष बीजों के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। सीड पार्क बनने से बीज उत्पादन में यूपी आत्मनिर्भर बनेगा।</p>
<p><strong>100 </strong><strong>करोड़ की लागत से बनेंगे पंचायत उत्सव भवन</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में विवाह व अन्य सामाजिक आयोजनों के लिए पंचायत उत्सव भवनों के निर्माण की योजना को मंजूरी दी है। मंत्रिपरिषद ने इन भवनों को "पंचायत उत्सव भवन" नाम दिया है। प्रथम चरण में 71 ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में इन भवनों का निर्माण कराया जाएगा, जिस पर 100 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है।</p>
<p>प्रत्येक भवन की अनुमानित लागत 1.41 करोड़ रुपये होगी। इनमें उत्तर प्रदेश मातृ भूमि योजना के तहत 60 प्रतिशत राशि दानदाता द्वारा और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी। इन भवनों के लिए भूमि चयन का कार्य जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समिति द्वारा किया जाएगा।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में चौधरी चरण सिंह के नाम पर बनेंगे 5 सीड पार्क, कैबिनेट ने दी मंजूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में कृषि और ग्रामीण विकास के लिए मिलेगा केंद्र का भरपूर सहयोग: शिवराज सिंह चौहान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/uttarakhand-will-get-full-support-from-the-centre-in-agriculture-and-rural-development-shivraj-singh-chouhan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 06 May 2025 14:26:24 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/uttarakhand-will-get-full-support-from-the-centre-in-agriculture-and-rural-development-shivraj-singh-chouhan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को देहरादून में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ कृषि व ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान कई अहम घोषणाएं की गईं। शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री<strong> पुष्कर सिंह धामी</strong> के नेतृत्व में केंद्र की योजनाओं के क्रियान्वयन और जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। साथ ही उत्तराखंड में किसान कल्याण और ग्रामीण विकास के लिए केंद्र सरकार की तरफ से भरपूर सहयोग का भरोसा दिलाया।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p>इस मौके पर <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने कहा कि <em>हाउस ऑफ हिमालयाज</em> ग्रामीण ब्रांड और प्रीमियम आपूर्ति शृंखला विकसित करने के लिए केंद्र सरकार, उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर काम करेगी। कीवी, शहद जैसे उत्पादों के लिए राज्य में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा। ड्रैगन फ्रूट की खेती और अरोमा मिशन को बढ़ावा देने के लिए भी केंद्र सरकार पर्याप्त आर्थिक सहायता करेगी। श्री अन्न पर शोध और उसकी खरीद में भी सहयोग दिया जाएगा। आलू के बेहतर बीज उत्पादन के लिए भी राशि दी जाएगी।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के क्षेत्र में उत्तराखण्ड में अच्छा कार्य हो रहा है। राज्य में कृषि का क्षेत्रफल घटा है, लेकिन उत्पादन बढ़ा है। उन्होंने कहा कि राज्य में कृषि क्षेत्र के लिए लंबी अवधि की कार्ययोजना पर कार्य किया जाए। राज्य में तात्कालिक रूप से जो कार्य होने हैं, उनके लिए भारत सरकार से जो अपेक्षा है, उसका प्रस्ताव भेजा जाए।</p>
<p><strong>घेरबाड़ योजना के लिए 1053 करोड़ का प्रस्ताव</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कृषि और बागवानी से संबंधित विभिन्न योजनाओं के लिए केंद्र सरकार से सहयोग के लिए अनुरोध किया। राज्य में जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए घेरबाड़ हेतु लगभग 1053 करोड़ रुपये की मांग पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि इसके लिए चरणबद्ध तरीके से प्रस्ताव भेजे जाएं। कृषि यंत्रीकरण के लिए 1000 फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना के लिए 400 करोड़ की मांग पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पहले चरण की धनराशि खर्च करने के बाद दूसरे चरण में धनराशि दी जाएगी।</p>
<p>उत्तराखंड में बीज उत्पादन संस्था को दलहन, तिलहन और सीड हब बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री ने सहयोग का आश्वासन दिया। राज्य में सेब की अति सघन बागवानी के लिए 1150 करोड़ की धनराशि मांगे जाने पर उन्होंने कहा कि इसकी वार्षिक कार्ययोजना का प्रस्ताव बनाकर भेजा जाए।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_6819cf961c97f.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>झंगोरा के लिए एमएसपी की पैरवी </strong></p>
<p>मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि मंडुआ की तर्ज पर राज्य की मुख्य परंपरागत फसल <strong>झंगोरा </strong>के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित किया जाना चाहिए। इस पर केंद्रीय मंत्री ने सकारात्मक रुख जताते हुए विचार करने का भरोसा दिलाया।</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कीवी मिशन के तहत राज्य में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने शहद, मशरूम और एग्जोटिक वेजिटेबल के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने में भी पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। ड्रैगन फ्रूट मिशन और हिमालयन एकेडमी फॉर कैपेसिटी बिल्डिंग एंड रूरल एंटरप्राइजेज फॉर एग्री एंड एलाइड के लिए सहयोग मांगे जाने पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य की ओर से जो सहयोग मांगा गया है, उन सभी कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग के साथ मार्केटिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।</p>
<p><strong>हाउस ऑफ हिमालयाज को मिलेगी वैश्विक पहचान</strong></p>
<p>ग्राम्य विकास की योजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि हाउस ऑफ हिमालयाज लिमिटेड को ग्रामीण से वैश्विक स्तर तक ले जाने के लिए मान्यता मिले। उन्होंने हिमालयन ग्रामीण बैंक की स्थापना और प्रीमियम सप्लाई चेन विकास के लिए भी अनुरोध किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की ये सभी पहल बहुत महत्वपूर्ण हैं। इन्हें राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने के लिए केंद्र की टीम राज्य के साथ विस्तृत योजना बनाएगी।</p>
<p><strong>मनरेगा मजदूरी बढ़वाने का प्रयास </strong></p>
<p>मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिवराज सिंह चौहान से मनरेगा मजदूरी दर बढ़ाने का भी अनुरोध किया। इस पर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर विचार कर निर्णय लिए जाने की बात कही। &nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास निर्माण के लिए अनुदान राशि 1.30 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपये किए जाने का अनुरोध किया। क्योंकि सुदूरवर्ती क्षेत्रों में ढुलाई की लागत अधिक आती है। केंद्रीय मंत्री ने हिमालयी राज्यों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस पर विचार करने का आश्वासन दिया।</p>
<p><strong>ग्रामीण सड़कों का विस्तार </strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के चौथे चरण के लिए 600 किमी लंबाई की 100 से अधिक परियोजनाओं को स्वीकृति के अनुरोध पर केंद्रीय मंत्री ने कहा इसकी स्वीकृति जल्द दी जाएगी। अभी कई बसाहटें ऐसी बचीं हैं जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से नहीं जुड़ीं हैं, इन सभी बसाहटों को PMGSY के चौथे चरण में सम्मिलित कर लिया जाएगा।</p>
<p>बैठक में उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी, मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव राधिका झा, चंद्रेश यादव, एस.एन. पांडेय, <span>रणवीर सिंह चौहान</span>, <span>पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान</span>, <span>भरसार विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रमेंद्र कौशल</span>, <span>भारत सरकार से अपर सचिव आर. आनंद</span>, <span>संयुक्त सचिव अमित शुक्ला उपस्थित थे।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में कृषि और ग्रामीण विकास के लिए मिलेगा केंद्र का भरपूर सहयोग: शिवराज सिंह चौहान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शंभू थाने के घेराव से पहले पंजाब में किसान नेताओं को हिरासत में लिया, डल्लेवाल समेत कई नेता नजरबंद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmer-leaders-detained-in-punjab-a-day-before-protest-at-shambhu-border-leaders-including-dallewal-put-under-house-arrest.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 05 May 2025 17:34:01 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmer-leaders-detained-in-punjab-a-day-before-protest-at-shambhu-border-leaders-including-dallewal-put-under-house-arrest.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में किसान संगठनों के 6 मई को शंभू थाना घेराव के ऐलान को देखते हुए पुलिस ने सोमवार सबेरे से ही बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी। किसान मजदूर मोर्चा और एसकेएम-गैर राजनैतिक से जुडे़ कई किसान नेताओं को उनके घरों पर नजरबंद किया गया है जबकि कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। किसान संगठनों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार की कड़ी आलोचना की है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>किसान नेता <strong>जगजीत सिंह डल्लेवाल</strong> को सुबह 4 बजे फरीदकोट जिले के गांव में घर&zwnj;&zwnj; पर नजरबंद किया गया है। डल्लेवाल ने खुद सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, &ldquo;सबको पता है कि मैं ज्यादा चल-फिर नहीं सकता। इसके बावजूद मुझे घर में नजरबंद कर दिया है। यह देश के लोकतंत्र पर हमला है। हमने शंभू थाने पर केवल एक दिन का शांतिपूर्ण धरना देने का ऐलान किया था।&rdquo; <span>डल्लेवाल ने पंजाब सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह किसानों को एकजुट नहीं होने देना चाहती है। 19 और 20 मार्च को भी पुलिस ने धोखे से किसानों को हिरासत में लिया था और अत्याचार किया था।&nbsp; &nbsp; &nbsp;</span></p>
<p>बता दें कि एमएसपी गारंटी कानूनी सहित कई मांगों को लेकर 13 महीनों तक आंदोलन करने वाले किसानों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब पुलिस ने 19 और 20 मार्च को शंभू व खनौरी बॉर्डर खाली करा दिए थे। यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब किसान नेता चंडीगढ़ में केंद्रीय मंत्रियों के साथ वार्ता कर वापस लौट रहे थे। पुलिस द्वारा बलपूर्वक किसानों को हटाने के विरोध में <strong>किसान मजदूर मोर्चा</strong> और <strong>एसकेएम गैर-राजनैतिक</strong> ने 6 मई को शंभू थाने के घेराव का ऐलान किया था। लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने किसानों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। किसानों को रोकने के लिए जगह-जगह नाकेबंदी की गई है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>इस बीच, पंजाब मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> ने कहा है कि पंजाब में ऐसी कोई भी घोषणा, विरोध या हड़ताल जिससे सड़कें या रेलें अवरुद्ध हों या आम लोगों को परेशान किया जाए, उसे जनता के विरुद्ध माना जाएगा। सभी संस्थाओं, संगठनों और यूनियनों को ध्यान देना चाहिए। विरोध करने के और भी तरीके हैं, सिर्फ लोगों को परेशान करना सही नहीं है। अन्यथा सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें। पुलिस कार्रवाई के खिलाफ किसान संगठनों को 7 मई को रेल रोकने का आह्वान किया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x_6818a84c86bf2.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><span style="background-color: #ffffff; color: #066f1f;"><em>किसान नेता बीबी जसविंदर कौर को 6 मई के विरोध-प्रदर्शन से पहले सुबह 5 बजे ही पंजाब पुलिस ने नजरबंद कर दिया</em></span></p>
<p>किसान नेता<strong> तेजवीर सिंह</strong> ने ट्वीट किया 6 मई को शंभू थाने के सामने होने वाले धरना-प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस किसान नेताओं को गिरफ्तार करने उनके घरों तक जा रही है। किसान मजदूर मोर्चा के नेता बलवंत सिंह बहरामके और बीकेयू दोआबा के प्रदेश अध्यक्ष मंजीत सिंह राय को आज सुबह पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया है। किसान नेता दिलवाग सिंह गिल के घर को पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया है।&nbsp;</p>
<p>किसान नेता <strong>गुरअमनीत सिंह मांगट</strong> के अनुसार, किसान नेता मलकीत सिंह गुलामीवाला को जिला फिरोजपुर में उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। किसान नेता बीबी जसविंदर कौर को सुबह 5 बजे ही पंजाब पुलिस ने नजरबंद कर दिया। गुरअमनीत सिंह ने कहा कि अगर भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल सोचते हैं कि किसान नेताओं को हिरासत में लेने और गिरफ्तार करने से उनकी आवाज़ बंद हो जाएगी, तो वे दोनों किसी अलग दुनिया में जी रहे हैं।&nbsp;<strong></strong></p>
<p>जिन किसान नेताओं को घरों में नजरबंद या पुलिस हिरासत में लिया गया है उनमें बलदेव सिंह सिरसा, सुखजीत सिंह हरदो झंडे, कुलविंदर सिंह पंजोला, हरदेव सिंह चिट्टी, गुरप्रीत सिंह चीना, शेरा अठवाल,&nbsp; हरविंदर सिंह मसानिया, हरसलिंदर सिंह किशनगढ़, अंग्रेज सिंह बूटेवाल, काका सिंह कोटड़ा, बलवंत सिंह बेहरामके, गुरिंदर सिंह भंगू, दिलबाग सिंह गिल आदि शामिल हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>शंभू थाने के घेराव की तैयारी&nbsp; &nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने एक बयान जारी कर पंजाब सरकार की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। किसान संगठनों का कहना है कि&nbsp;किसानों, मजदूरों और आम लोगों को अपनी बात कहने के लिए न तो दिल्ली और न ही चंडीगढ़ जाने की इजाजत दी जा रही है। किसान सड़कों पर बैठते हैं तो मोर्चों पर अत्याचार कर मारपीट और लूटपाट की जाती है। बयान के मुताबिक, 6 मई को केवल शंभू पुलिस स्टेशन के सामने प्रदर्शन होना था। सड़क या रेलवे लाइन को रोकने का कोई कार्यक्रम नहीं था। फिर भी बड़े पैमाने पर नेताओं को गिरफ्तार कर इस विरोध को विफल करने का प्रयास किया गया।&nbsp;</p>
<p>किसान नेताओं ने कहा है कि मंगलवार को पूरे पंजाब से किसान अपने गांवों से निकलकर शंभू पुलिस स्टेशन की ओर जाएंगे। अगर प्रशासन ने रास्ते में लोगों को रोका तो वे वहीं विरोध प्रदर्शन करेंगे। अगर सरकार सड़कें बंद करती है तो लोगों को परेशान करने के लिए भगवंत मान जिम्मेदार होंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>7 मई को चक्का जाम का ऐलान&nbsp;</strong></p>
<p>किसान नेता <strong>सरवन सिंह पंधेर</strong> ने किसानों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ 7 मई को पंजाब में रेल चक्का जाम का ऐलान किया है। पंधेर ने कहा कि 7 मई को देवीदासपुर में अमृतसर-दिल्ली रेल मार्ग जाम किया जाएग। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवंत मान सरकार पंजाब को पुलिस स्टेट बनाने पर आमादा है। राज्य में कई जगह केंद्र के इशारे पर जबरदस्ती किसानों की जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/05/image_750x500_6818a7d423faa.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ शंभू थाने के घेराव से पहले पंजाब में किसान नेताओं को हिरासत में लिया, डल्लेवाल समेत कई नेता नजरबंद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में 60 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 7 लाख टन गेहूं खरीद, क्रय केंद्रों तक किसानों को लाने की कोशिश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/in-up-only-7-lakh-tonnes-of-wheat-procured-against-60-lakh-tonne-target-silence-prevails-at-purchase-centres.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 28 Apr 2025 20:57:32 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/in-up-only-7-lakh-tonnes-of-wheat-procured-against-60-lakh-tonne-target-silence-prevails-at-purchase-centres.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em>- लखनऊ से <strong>सुमित यादव</strong></em></p>
<p>इस साल देश में गेहूं की बंपर पैदावार है। लेकिन देश के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में 60 लाख टन गेहूं खरीद लक्ष्य के मुकाबले अभी तक करीब 7 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हो पाई है। प्रदेश में रबी सीजन की अधिकांश कटाई पूरी हो चुकी है,<span> लेकिन गेहूं खरीद की स्थिति यह है कि कई खरीद केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है।</span>&nbsp;</p>
<p>रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि मध्यप्रदेश सरकार इसके ऊपर 175 रुपये और राजस्थान सरकार 150 रुपये का बोनस दे रही हैं। खुले बाजार में भी गेहूं के दाम एमएसपी के आसपास या इससे ऊपर चल रहे हैं। ऐसे में यूपी के किसान खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने की बजाय व्यापारियों को गेहूं बेच रहे हैं या फिर बेहतर दाम की उम्मीद पर स्टोर कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>यूपी के<strong> खाद्य एवं रसद विभाग</strong> के पोर्टल के अनुसार, राज्य में 28 अप्रैल तक 6.95 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है। इस साल यूपी में गेहूं खरीद के लिए 4.23 लाख किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन अब तक लगभग 1.27 लाख किसानों से सरकारी खरीद हो पाई है। पिछले साल 1.80 लाख किसानों से करीब 9.31 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी।&nbsp;</p>
<p>उत्तर प्रदेश के <strong>रायबरेली</strong> जिले के सरेनी विकासखंड के बसावन खेड़ा के <strong>ओम प्रकाश यादव</strong> (42 <span>वर्ष) के पास चार बीघा गेहूं था। अप्रैल के शुरुआत में गेहूं कटाई के बाद ओम प्रकाश ने स्थानीय व्यापारी को</span>&nbsp;<span>अपनी सारी उपज </span>2300 <span>प्रति</span>/<span>कुंतल के भाव में बेच दिया। <strong>रूरल वॉयस</strong> से बात करते हुए ओम प्रकाश कहते हैं कि सरकारी खरीद केंद्र पर एमएसपी में गेहूं बेचने के बजाय स्थानीय व्यापारी को गेहूं इसलिए बेच दिया क्योंकि मुझे फसल तैयार होने से पहले कुछ पैसों की जरूरत थी जो व्यापारी से उधार लेकर पूरी की थी। तभी वादा किया था कि गेहूं तैयार होते ही तुम्हे तौल दूंगा।</span>&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x_680f9f530662c.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>बहुत से किसान अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थानीय व्यापारियों से पैसा उधार लेते हैं,<span> इसलिए सरकारी खरीद की बजाए उन्हें उपज बेचना मजबूर बन जाता है। फिर खरीद केंद्रों तक उपज ले जाने</span>, <span>सफाई</span>-<span>छनाई के नाम पर कटौती और सरकारी प्रक्रिया के झंझट से बचने के लिए किसान लोकल व्यापारी को उपज बेच देते हैं।</span>&nbsp;</p>
<p>उन्नाव जिले के <strong>सिकंदरपुर कर्ण</strong> ब्लॉक की रानीगंज साधन सहकारी समिति के गेहूं खरीद केंद्र पर अब तक 16 <span>किसानों ने महज </span>317 <span>कुंतल गेहूं बेचा है। राजेन्द्र शुक्ला (</span>50 <span>वर्ष) अमिलाह गाँव के रहने वाले हैं। उनके पास कुल नौ बीघा जमीन है जिसमें से पांच बीघा में गेहूं की फसल थी। किराए के ट्रैक्टर-ट्रॉली से 32 कुंतल गेंहू बेचने आये राजेन्द्र शुक्ला कहते हैं कि सोसाइटी के सचिव नरेंद्र यादव का कई बार फोन गया। बाहर बाजार में भी एमएसपी के आसपास ही गेहूं बिक रहा है। लेकिन सोसायटी का मेंबर होने के कारण यहां बेच रहा हूं।&nbsp;</span></p>
<p>रानीगंज सहकारी समिति के सचिव <strong>नरेंद्र यादव</strong> बताते हैं कि आसपास के किसानों से फोन पर संपर्क कर खरीद केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए कह रहा हूँ। लगातार किसानों के सम्पर्क में हूं। किसानों को केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वह बताते हैं कि गेहूं का बाजार भाव एमएसपी के आसपास होने के कारण किसान खरीद केंद्र पर गेहूं लाना पसंद नहीं करते हैं। पिछले साल भी उनके खरीद केंद्र पर मात्र 334 <span>कुंतल गेहूं की खरीद हो सकी थी। जबकि 5-6 साल पहले लोग गेहूं बेचने के लिए कई-कई दिनों तक केंद्र पर पड़े रहते थे।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>उन्नाव</strong> के जिला विपणन अधिकारी <strong>श्याम मिश्रा</strong> बताते हैं कि गेहूं खरीद बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। सभी केंद्र प्रभारी किसानों से संपर्क कर रहे हैं। उन्नाव जिले में इस साल कुल 92 <span>केंद्रों पर गेहूं खरीद की जा रही है। स्थिति यह है कि </span>23 <span>अप्रैल तक </span>31 <span>केंद्रों पर बोहनी </span>(खरीद की शुरुआत) नहीं हुई थी। जनपद में गेहूं बेचने के लिए पोर्टल के माध्यम से 2779 <span>किसानों ने पंजीकरण कराया है। लेकिन </span>24 <span>अप्रैल तक </span>684 <span>किसानों से </span>2253 <span>टन गेहूं की खरीद की गई है।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>लखनऊ मंडल </strong>के संभागीय खाद्य एवं विपणन अधिकारी <strong>अजीत त्रिपाठी</strong><span>&nbsp;ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि खरीद बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हमारी कोशिश है कि मोबाइल खरीद के माध्यम से अधिक से अधिक खरीद हो। किसी गाँव में अगर हमें </span>100 <span>कुंतल गेहूं बेचने वाले किसान मिल जाते हैं तो हम अपनी मोबाइल वैन भेज कर खरीद करा रहे हैं।&nbsp;</span>&nbsp;</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश</strong> देश का अग्रणी गेहूं उत्पादक राज्य है। <strong>कृषि मंत्रालय</strong> ने वर्ष 2024-25 के दौरान देश में रिकॉर्ड 1154.30 लाख टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया है, <span>जिसमें 357.36 लाख टन</span>&nbsp;गेहूं उत्पादन यूपी में होगा। लेकिन जब सरकारी खरीद की बात आती है तो यूपी देश के टॉप 4 राज्यों में भी शुमार नहीं है। विभिन्न राज्य सरकारी एजेंसियों ने मिलकर देश में अब तक 223.6 <span>लाख टन से अधिक गेहूं खरीद की है। इसमें सर्वाधिक खरीद </span>पंजाब से लगभग 85 लाख टन, हरियाणा से 62 लाख टन, मध्य प्रदेश से 61 लाख टन और राजस्थान से करीब 10 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। जबकि यूपी की खरीद 7 लाख टन की करीब ही पहुंची है।&nbsp;</p>
<p>इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि देश का लगभग एक तिहाई गेहूं पैदा करने वाला उत्तर प्रदेश देश की कुल सरकारी खरीद में बमुश्किल करीब 3 फीसदी का योगदान कर पा रहा है।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में 60 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 7 लाख टन गेहूं खरीद, क्रय केंद्रों तक किसानों को लाने की कोशिश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्यप्रदेश: पराली जलाने वाले किसानों को नहीं मिलेगा सरकारी योजना का लाभ, MSP पर खरीद से भी रहेंगे वंचित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/mp-farmers-who-burn-stubble-to-be-barred-from-govt-schemes-procurement-at-msp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 25 Apr 2025 14:31:29 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/mp-farmers-who-burn-stubble-to-be-barred-from-govt-schemes-procurement-at-msp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रबी फसलों की कटाई के बाद खेतों में फसल अवशेष जलाने की समस्या गंभीर रूप धारण करती जा रही है। इस सीजन में खेतों की आग से सबसे ज्यादा मामले मध्यप्रदेश से आ रहे हैं। ऐसे में वायु एवं मृदा प्रदूषण की रोकथाम के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि खेतों में पराली (नरवाई) <span>जलाई जलाने वाले किसानों मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे किसानों की फसल एमएसपी पर भी नहीं खरीदी जाएगी। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए।</span></p>
<p>मध्यप्रदेश सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, <span>मुख्यमंत्री<strong> डॉ. मोहन यादव</strong> ने कहा है कि फसल कटाई के बाद खेतों में नरवाई जलाने के मामलों में वृद्धि होने से वायु प्रदूषण सहित कई प्रकार से पर्यावरण को बेहद नुकसान हो रहा है। इसके निदान के लिए राज्य सरकार पहले ही नरवाई जलाने को प्रतिबंधित कर चुकी है। </span></p>
<p>मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसके बाद भी यदि कोई किसान अपने खेत में नरवाई जलाता है तो उसे <strong>मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना</strong> का लाभ नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा नरवाई जलाने वाले किसान से अगले साल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर <strong>फसल खरीद</strong> भी नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण, <span>मृदा संरक्षण एवं भूमि की उत्पादकता बनाए रखने के मद्देनजर राज्य सरकार का यह निर्णय <strong>एक मई</strong> से लागू होगा। </span></p>
<p><strong>प्रदेश में 80 लाख फार्मर आईडी बनी </strong></p>
<p>बैठक में बताया गया कि स्वामित्व योजना और फार्मर रजिस्ट्री के मामले में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। स्वामित्व योजना में प्रदेश में ग्रामीण आबादी में निजी लक्षित सम्पत्तियों की संख्या लगभग 45.60 <span>लाख है। इनमें से लगभग </span>39.63 <span>लाख निजी सम्पत्तियों का अधिकार अभिलेख वितरित कर दिया गया है</span>, <span>योजना का </span>88 <span>प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है। बाकी कार्य जून </span>2025 <span>तक पूर्ण कर लिया जाएगा। साथ ही फार्मर रजिस्ट्री के लिए विशेष कैंप एवं स्थानीय युवाओं का सहयोग लिया जा रहा है। प्रदेश में अब तक </span>80 <span>लाख फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं</span>, <span>यह कार्य भी जून </span>2025 <span>तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। </span></p>
<p><strong>वर्ष </strong><strong>2024 <span>से प्रदेशभर में हो रहा फसलों का डिजिटल सर्वे</span></strong></p>
<p>राजस्व विभाग ने गिरदावरी के लिए वर्ष 2024 <span>से फसलों का डिजिटल सर्वे कार्य शुरू किया है। इसमें </span>60 <span>हजार से अधिक ग्रामीण युवाओं द्वारा खेत और फसलों का सर्वे कार्य पूर्ण किया जा रहा है। प्रदेश में </span>190 <span>तरह की फसलों की खेती हो रही है।</span></p>
<p>समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, <span>अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) डॉ. राजेश राजौरा</span>, <span>प्रमुख राजस्व आयुक्त विवेक पोरवाल</span>, <span>राजस्व आयुक्त अनुभा श्रीवास्तव सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। </span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्यप्रदेश: पराली जलाने वाले किसानों को नहीं मिलेगा सरकारी योजना का लाभ, MSP पर खरीद से भी रहेंगे वंचित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में धान की हाइब्रिड किस्मों पर प्रतिबंध से बीज कंपनियां मुश्किल में, जबकि कई राज्यों में रकबा बढ़ा ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/seed-companies-face-trouble-as-punjab-bans-hybrid-paddy-even-as-acreage-rises-in-other-states.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 23 Apr 2025 10:13:30 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/seed-companies-face-trouble-as-punjab-bans-hybrid-paddy-even-as-acreage-rises-in-other-states.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब सरकार ने एक आदेश जारी कर चालू खरीफ सीजन में धान की हाइब्रिड किस्मों के बीजों की बिक्री और बुवाई पर प्रतिबंध लगा दिया है। कृषि निदेशक द्वारा 7 अप्रैल, 2025 को जारी आदेश में धान की पीआर-44 किस्म के साथ ही धान की हाइब्रिड किस्मों की बुवाई और बीज की बिक्री पर रोक लगाई गई है। जबकि कई हाइब्रिड किस्मों को कड़े परीक्षणों के बाद भारत सरकार ने पंजाब में उगाने के लिए नोटिफाई किया था। हरियाणा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में धान की हाइब्रिड किस्मों का रकबा बढ़ रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>पंजाब सरकार</strong> की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) लुधियाना की सिफारिश के अनुसार खरीफ सीजन 2025 के दौरान धान की किस्म पीआर-44 और हाइब्रिड बीजों की बिक्री और बुवाई पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाता है। हाइब्रिड किस्मों पर प्रतिबंध के पीछे इनके महंगे होने और इनकी गुणवत्ता एफसीआई मानकों के अनुरूप नहीं होने को वजह बताया गया है।</p>
<p>गौरतलब है कि पिछले साल पंजाब में राइस मिलर्स ने धान की हाइब्रिड किस्मों में अधिक टूटन और कम रिकवरी का आरोप लगाते हुए इन किस्मों के धान को उठाने से से इंकार कर दिया था। इस मुद्दे के तूल पकड़ने के बाद इस साल पंजाब सरकार ने धान की हाइब्रिड किस्मों की बिक्री और बुवाई पर रोक लगा दी।</p>
<p><strong>फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया</strong><strong>&nbsp;(FSII)&nbsp;</strong>ने पंजाब सरकार के मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री और आला अधिकारियों को पत्र भेजकर धान की हाइब्रिड किस्मों के समर्थन में अपने तर्क दिए हैं। एफएसआईआई के अनुसार, अधिक पैदावार के लिए दुनिया भर में धान की हाइब्रिड किस्मों को अपनाया जा रहा है और पंजाब में प्रतिबंध का कोई आधार नहीं बनता है। नई किस्मों को जारी करने से पहले आईसीएआर द्वारा व्यापक परीक्षण कराए जाते हैं, जिसमें मिलिंग रिकवरी भी देखी जाती है।</p>
<p>सीड इंडस्ट्री की ओर से <strong>पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (PAU)</strong>, <strong>भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद&nbsp;(ICAR)</strong> और <strong>इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट&nbsp;(आईआरआरआई)</strong> जैसे अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों की रिपोर्ट का हवाला देकर दावा किया जा रहा है कि धान की हाइब्रिड किस्मों में अधिक टूटन और कम मिलिंग रिकवरी के दावे गलत हैं। मिलिंग रिकवरी और चावल टूटना कटाई के समय नमी, अनाज की नमी और मिलिंग मशीनरी जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>एफएसआईआई का कहना है कि धान की हाइब्रिड वैराएटी में <strong>मिलिंग रेट</strong> (70-72.5%) और <strong>हेड राइस रिकवरी</strong> (60-63.9%) सरकार द्वारा निर्धारित मानकों से बेहतर है। एफएसआईआई का यह भी तर्क है कि पंजाब में हाइब्रिड धान का क्षेत्र मात्र 5 फीसदी के आसपास है। वहीं हरियाणा, छत्तीसगढ़, यूपी और बिहार जैसे राज्यों में जहां हाइब्रिड किस्मों का रकबा काफी अधिक है, वहां चावल में टूटन और कम रिकवरी की शिकायत नहीं आई है। जबकि पंजाब में यह बड़ा मुद्दा बन गया। गौरतलब है कि पड़ोसी राज्य हरियाणा में लगभग 35% चावल क्षेत्र हाइब्रिड धान की खेती होती है।&nbsp;</p>
<p>इस मुद्दे को लेकर सीड इंडस्ट्री ने <strong>पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी</strong> की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। पंजाब सरकार को लिखे पत्र में एफएसआईआई ने कहा कि इस मसले पर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) का विरोधाभासी रुख देखना हैरान करने वाला है। एक तरफ पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी हाइब्रिड किस्मों के नोटिफिकेशन की प्रक्रिया में शामिल रहती है, वहीं दूसरी ओर पीएयू इन किस्मों के प्रदर्शन पर सवाल उठाती है जिससे किसानों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। एफएसआईआई का कहना है कि धान की हाइब्रिड किस्मों पर प्रतिबंध से पंजाब की अर्थव्यवस्था और किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।&nbsp;</p>
<p>धान की <strong>पीआर-44</strong>&nbsp;किस्म पर पंजाब में पिछले साल भी प्रतिबंध लगाया गया था। इसके पीछे पकने की लंबी अवधि और पानी की अधिक खपत को वजह बताया गया था। इस साल भी पीआर-44&nbsp;पर प्रतिबंध को लेकर यही वजह बताई गई है। पंजाब और हरियाणा में किसान पीआर-44&nbsp;किस्म को अधिक पैदावार के चलते उगाते रहे हैं क्योंकि अभी कोई दूसरी किस्म पैदावार में इसका मुकाबला नहीं कर पाई है। लेकिन कुछ बीज कंपनियों की हाइब्रिड किस्में उत्पादकता के मामले मे पीआर-44&nbsp;के काफी करीब हैं। साथ ही इनकी पकने की अवधि भी कम है।</p>
<p><strong>सीड इंडस्ट्री</strong> के मुताबिक, धान की हाइब्रिड किस्मों की फसल अवधि 120 से 130 दिन होती है। इनकी पैदावार 15-20 फीसदी अधिक है और उत्पादन 6-7 टन प्रति हेक्टेयर के आसपास रहता है। साथ ही इन किस्मों को उगाने से करीब 15-20 फीसदी पानी की बचत होती है। हाइब्रिड किस्मों के धान की डायरेक्ड सीडेड राइस (डीएसआर) प्रक्रिया से बुवाई करने पर 20 फीसदी तक कम पानी की जरूरत पड़ती है। इन किस्मों के बीज हर्बिसाइड टॉलरेंट होने से खरपतवार की समस्या दूर करने में भी किसानों को मदद मिलती है। इस तरह हाइब्रिड किस्में एक ओर अधिक पैदावार के चलते किसानों के लिए फायदेमंद हैं, वहीं कम पानी की जरूरत के कारण पर्यावरण के लिए भी अनुकूल हैं। लेकिन पंजाब सरकार ने इस सभी तर्कों को दरकिनार कर हाइब्रिड किस्मों पर प्रतिबंध लगा दिया है।&nbsp;</p>
<p>हालांकि,&nbsp;हाइब्रिड चावल की किस्मों की बुआई और बीज बिक्री पर प्रतिबंध का आदेश&nbsp;7&nbsp;अप्रैल, 2025&nbsp;&nbsp;को आया है। लेकिन बीज कंपनियों और पंजाब सरकार के बीच इस मुद्दे पर बातचीत का दौर फरवरी से चल रहा था। सूत्रों का कहना है कि इस मुद्दे पर कहीं न कहीं आढ़ती लॉबी का दबाव भी रहा है। जिसके चलते पंजाब में धान की हाईब्रिड किस्मों को प्रोत्साहित किए जाने की बजाए,&nbsp;इन पर पाबंदी लगा दी गई।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में धान की हाइब्रिड किस्मों पर प्रतिबंध से बीज कंपनियां मुश्किल में, जबकि कई राज्यों में रकबा बढ़ा  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आग से फसलों व पशुओं को हुए नुकसान का मुआवजा देगी हरियाणा सरकार, सीएम सैनी के अधिकारियों को निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-government-to-compensate-crop-and-livestock-losses-from-fires-cm-saini-directs-officials.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 21 Apr 2025 19:13:39 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-government-to-compensate-crop-and-livestock-losses-from-fires-cm-saini-directs-officials.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में खेतों में आग लगने की घटनाओं के कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पकी-पकाई फसल जलकर राख हो रही है। इस मुद्दे को लेकर किसान संगठन और विपक्षी दल लगातार मुआवजे की मांग कर रहे हैं। अब प्रदेश सरकार ने आगजनी की घटनाओं से फसलों व पशुओं को हुए नुकसान से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने का निर्णय लिया है।</p>
<p>इस संबंध में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय में आला अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। प्रदेश सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है।</p>
<p><strong>मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी</strong> ने कहा कि हमारी सरकार हर स्थिति में किसानों के साथ खड़ी है। पिछले कुछ दिनों में प्रदेश में हुई आगजनी की घटनाओं से फसलों या पशुओं को जो नुकसान हुआ है,&nbsp;<span>उससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। इसलिए सरकार ने निर्णय लिया है कि ऐसे सभी प्रभावित किसानों को शीघ्र ही मुआवजा दिया जाएगा। मुआवजा कितना और कब दिया जाएगा</span>, <span>इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है। </span>&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों को निर्देश जारी किए हैं कि वे आगजनी से संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट लें। मुआवजा प्राप्त करने के लिए आगजनी से प्रभावित किसान संबंधित उपायुक्तों के समक्ष आवेदन करें,&nbsp;<span>ताकि उन्हें जल्द से जल्द मुआवजा देने की प्रक्रिया अमल में लाई जा सके। हरियाणा सरकार आगजनी से प्रभावित किसानों को आगामी फसलों की बुवाई के लिए बीज और खाद में भी मदद देगी</span>,&nbsp;<span>ताकि किसानों पर आर्थिक रूप को कम किया जा सके।&nbsp;</span></p>
<p>इससे पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को कृषि विभाग से राज्य में आग से हुए नुकसान की रिपोर्ट मांगी थी। अधिकारियों को तुरंत रिपोर्ट सौंपने और <span>आगजनी</span>&nbsp;<span>के कारणों का पता लगाने के लिए कहा गया है। </span></p>
<p><span>आम तौर पर आंधी से बिजली के तारों में शार्ट-सर्किट होने से खेतों में आग लगती है। गेहूं कटाई के दौरान उपज को आगजनी से बचाना किसानों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण काम है। कई बार लापरवाही या बदले की भावना भी खेतों में आगजनी का कारण बनती हैं।&nbsp;</span></p>
<p><strong>8 <span>जिलों में </span>1000 <span>एकड़ फसल राख</span></strong></p>
<p>हरियाणा में हाल के दिनों आंधी और बारिश से किसानों को नुकसान हुआ है। एक तरफ खेत या मंडी में गेहूं और सरसों की फसल भीग गई, जबकि&nbsp;<span>दूसरी तरफ खेतों में आग के कारण तैयार फसल जलकर राख हो गई। प्रदेश के 8 जिलों में आगजनी के कारण लगभग एक हजार एकड़ से अधिक फसल जलने का अनुमान है। कई जगह पशु भी आग की चपेट में आ गये।&nbsp;</span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आग से फसलों व पशुओं को हुए नुकसान का मुआवजा देगी हरियाणा सरकार, सीएम सैनी के अधिकारियों को निर्देश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में मिलेट्स, कीवी और ड्रैगेन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियों और योजनाओं को मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/several-policies-and-schemes-approved-to-promote-the-cultivation-of-millets-kiwi-and-dragon-fruit-in-uttarakhand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 19 Apr 2025 19:33:31 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/several-policies-and-schemes-approved-to-promote-the-cultivation-of-millets-kiwi-and-dragon-fruit-in-uttarakhand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="color: #000000;"><em>- देहरादून से<strong> संजीव कंडवाल</strong></em></span></p>
<p><em><strong></strong></em></p>
<p>उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की खेती में अब तक ज्यादा प्रयोग नहीं हो पाए हैं। इस कारण किसान परम्परागत फल और फसलें ही उगाते हैं। दूसरी तरफ क्लाइमेंट चेंज के चलते परंपरागत फलों और फसलों का उत्पादन कम हो रहा है। वहीं, फसलों को जंगली जानवरों से बचाना भी बहुत चुनौतीपूर्ण काम है।&nbsp;</p>
<p>अब उत्तराखंड सरकार, किसानों को नकदी फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहन दे रही है। इसी क्रम में <strong>पुष्कर सिंह धामी</strong> सरकार ने उत्तराखंड मिलेट्स पॉलिसी, उत्तराखंड कीवी नीति, ड्रैगेन फ्रूट खेती की योजना और सेब उत्पादन योजना के जरिए खेती व बागवानी में नए प्रयोगों की ओर कदम बढ़ाया है। सरकार का दावा है कि इन नीतियों और योजनाओं से राज्य में तीन लाख से अधिक किसानों का लाभ मिलेगा।&nbsp;</p>
<p>उत्तराखंड के कृषि एवं उद्यान मंत्री<strong> गणेश जोशी</strong> ने बताया कि बारहनाजा मिलेट्स उत्तराखंड की पहचान रहे हैं। अब राज्य सरकार मंडुवा, कौणी, झंगोरा जैसे मिलेट्स के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड मिलेट्स पॉलिसी 2025-26 लाई है जो 11 पर्वतीय जनपदों में लागू होगी। पर्वतीय क्षेत्रों को फल-पट्टी के रूप में विकसित करने के लिए कीवी व ड्रैगन फ्रूट्स के उत्पादन की शुरुआत तथा सेब उत्पादन के विस्तार के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए सरकार उत्तराखंड कीवी नीति, ड्रैगन फ्रूट्स खेती योजना, मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना और सेब की तुड़ाई उपरांत प्रबंधन योजना लाई है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से पहाड़ में स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा और पलायन जैसी समस्या की रोकथाम में मदद मिलेगी। &nbsp;</p>
<p><strong>उत्तराखंड स्टेट मिलेट्स पॉलिसी </strong><strong>2025-26</strong></p>
<p>उत्तराखंड स्टेट मिलेट्स पॉलिसी के तहत राज्य सरकार ने वर्ष 2030-31 तक 11 पर्वतीय जिलों के लिए कुल 134.89 करोड रुपये की कार्ययोजना पर मुहर लगाई है। पहले चरण में 2027-28 तक 24 विकास खण्डों में 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल और दूसरे चरण में 2028-29 से 2030-31 तक 44 विकास खण्डों में 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मिलेट्स की खेती का विस्तार किया जाएगा। इसमें मण्डुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी एवं चीना फसलों को सम्मिलित किया गया है। चयनित मिलेट फसलों के बीज एवं जैव उर्वरक को 80 प्रतिशत अनुदान पर किसानों को वितरित किया जाएगा।</p>
<p>मिलेट्स पॉलिसी के तहत किसानों को मिलेट्स की बुवाई करने पर प्रोत्साहन धनराशि दी जाएगी। पंक्ति बुवाई के लिए 4000 प्रति हेक्टेयर और सीधी बुवाई पर 2000 रुपये प्रति हेक्टेयर की प्रोत्साहन धनराशि मिलेगी। किसानों के समूह को मिलेट्स फसलें अपनाने पर 150 रुपये प्रति क्विंटल के स्थान पर 300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन धनराशि का भुगतान किया जायेगा।</p>
<p>प्रत्येक वर्ष विकास खण्ड स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले दो किसानों या समूहों को पुरस्कृत किया जाएगा। साथ ही प्रत्येक विकास खण्ड स्तर पर एक मिलेट प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की जाएगी। योजना के तहत 3 लाख से अधिक किसानों को लाभ देने का लक्ष्य है। मिलेट्स फसलों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में न्यूट्री हब की एक परियोजना प्रबंधन ईकाई गठित की जाएगी। श्रीअन्न फूड पार्क की स्थापना भी करेगी।</p>
<p><strong>उत्तराखंड कीवी नीति</strong></p>
<p>उत्तराखंड कीवी नीति वर्ष 2030-31 तक छह वर्षों के लिए प्रभावी रहेगी। इसके तहत राज्य सरकार कीवी उद्यान के लिए कुल लागत 12 लाख रुये प्रति एकड़ का 70 प्रतिशत सब्सिडी के तौर पर प्रदान करेगी। यह नीति भी हरिद्वार एवं उधमसिंहनगर को छोड़कर राज्य के शेष 11 जनपदों में लागू होगी। कीवी पॉलिसी के अन्तर्गत कुल 894 रुपये करोड़ की कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत 3500 हेक्टेयर क्षेत्र में कीवी उगाने का लक्ष्य है, जिससे करीब 17500 किसान लाभान्वित होंगे। वर्तमान में, राज्य के लगभग 683 हेक्टेयर क्षेत्र में सालाना 382 टन कीवी का उत्पादन किया जा रहा है। अगले छह वर्षों में इसे बढ़ाकर 33 हजार टन और उत्पादकता को लगभग 08 टन प्रति हेक्टेयर करने का लक्ष्य है।</p>
<p><strong>ड्रैगन फूट खेती योजना</strong></p>
<p>आधुनिक पद्धति के माध्मम से ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना के अन्तर्गत <strong>ड्रैगन फूट खेती की योजना</strong> स्वीकृत की गई है। योजना के तहत सात जनपदों - उधमसिंहनगर, हरिद्वार, नैनीताल, बागेश्वर, पौड़ी, देहरादून, टिहरी में ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। योजना के तहत वर्ष 2027-28 तक तीन वर्ष के लिए 15 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की गई है। इससे 450 किसान लाभांवित होंगे।</p>
<p>प्रस्तावित योजना में उद्यान स्थापना के लिए 08 लाख प्रति एकड़ की लागत के हिसाब से 80 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान है, जबकि शेष 20 प्रतिशत खर्च किसानों द्वारा वहन किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2027-28 तक प्रदेश में कुल 228 एकड क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट की खेती का लक्ष्य है, जिसमें 12 से 15 टन प्रति हेक्टेयर की उत्पादकता रहेगी। वर्तमान में राज्य के लगभग 35 एकड़ क्षेत्रफल में 70 टन ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन किया जा रहा है।</p>
<p><strong>सेब तुड़ाई उपरान्त प्रबंधन योजना</strong></p>
<p>सेब तुड़ाई उपरांत प्रबंधन योजना के तहत वित्त वर्ष 2031-32 तक कुल 129.97 करोड़ की धनराशि का प्रावधन किया गया है, जिससे 22 सीए स्टोरेज और 180 सार्टिंग ग्रेडिंग इकाईयों की स्थापना की जाएगी। यह योजना 11 पर्वतीय जनपदों के 76 विकासखण्डों में संचालित होगी। इसके तहत सार्टिंग ग्रेडिंग इकाई स्थापना के लिए मदद दी जाएगी। कंट्रोल एटमॉस्फियर कोल्ड स्टोरेज (CA Storage) के लिए कुल 50% और अधिकतम कुल 4 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। सीए स्टोरेज के लिए स्वयं की भूमि होनी चाहिए या 30 वर्षों की लीज होनी चाहिए। सार्टिंग ग्रेडिंग इकाई के लिए स्वयं की भूमि होनी चाहिए या 15 वर्षों की लीज होनी चाहिए।&nbsp;योजना के तहत 22 सीए स्टोरेज और 180 सार्टिंग ग्रेडिंग इकाई स्थापना का लक्ष्य है। राज्य सरकार ने अगले 07 वर्षों में सेब की अति सघन बागवानी योजना के तहत 5000 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें 25 टन प्रति हेक्टेयर की पैदावार होगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में मिलेट्स, कीवी और ड्रैगेन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियों और योजनाओं को मंजूरी ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आम में बौर तो खूब आया लेकिन फल बहुत कम रह गया, किसानों को नुकसान की चिंता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/mango-blossomed-in-abundance-but-the-fruit-was-very-less-farmers-are-worried-about-loss.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 19 Apr 2025 13:32:01 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/mango-blossomed-in-abundance-but-the-fruit-was-very-less-farmers-are-worried-about-loss.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em>- लखनऊ से<strong> सुमित यादव&nbsp;</strong></em></p>
<p>फलों का राजा कहा जाने वाला आम इस साल किसानों के लिए घाटे का सबब बन रहा है। आम के बागों का जो हाल है उसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस साल उत्पादन कम रहेगा और आम की बागवानी से जुड़े लोगों को नुकसान उठाना पड़ेगा।&nbsp;</p>
<p>उत्तर प्रदेश का&nbsp;<strong>मलिहाबाद</strong><strong>&nbsp;</strong>और&nbsp;<strong>उन्नाव</strong> जनपद आम के लिए देश-विदेश में जाने जाते हैं। यहां का दसहरी आम अपने खास स्वाद के लिए खूब पसंद किया जाता है और विदेशों तक इसका निर्यात होता है। लेकिन इस साल आम की बागवानी कर रहे किसान मायूस हैं। क्योंकि बागों में बौर तो खूब दिखा, लेकिन फसल काफी कमजोर है। जिन बागों में आम दिखाई दे रहा है, वहां भी पेड़ों से कच्चे आम टूट कर गिर रहे हैं। मौसम के उतार-चढ़ाव और हाल की आंधी-बारिश के कारण भी आम को काफी नुकसान हुआ है।&nbsp;</p>
<p><strong>उन्नाव</strong>&nbsp;जिले के सिकन्दरपुर ब्लॉक के पचोड्डा निवासी&nbsp;<strong>पप्पू खान</strong> (30 वर्ष) लकड़ी के ठेकेदार हैं। अपने भाइयों को देखकर पप्पू ने भी इस साल आम का एक बाग 70 हजार रुपये में दो साल के लिए ठेके पर लिया था। जिसमें से वह 15 हजार रुपये बयाने के रूप में दे चुके हैं। डेढ़ बीघे के बाग में चार बार सिंचाई कर चुके हैं। जिस पर लगभग 6000 रुपये खर्च आया। बाग की तीन बार जुताई, खाद, दो बार दवा का छिड़काव, निराई-गुड़ाई और थांवला<strong>&nbsp;</strong>बनाने में लगभग 15 हजार रुपये का खर्च आ चुका है। इतनी देखरेख के बावजूद हालत यह है कि पेड़ों से कच्चा आम टूटकर गिर रहा है। पूरे बाग में आम ही आम गिरा पड़ा है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x_68035774352c8.jpg" alt="बाग में गिरे हुए आमों को दिखाते हुए उन्नाव जिले के किसान पप्पू खान&nbsp;" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" width="750" height="380" /></p>
<p style="text-align: center;"><span style="color: #34495e;"><em> बाग में गिरे हुए आमों को दिखाते हुए उन्नाव जिले के किसान पप्पू खान&nbsp;</em></span></p>
<p>पप्पू खान कहते हैं कि बाग की हालत देखकर हिम्मत टूट रही है! पता नहीं कितना आम तैयार होगा? लागत निकलेगी या नहीं? कच्चा आम टूटने से रोकने के लिए दो बार दवा का छिड़काव कर चुके पप्पू को इसकी वजह भी नहीं पता है। न ही दवा छिड़काव का कोई फायदा हुआ। पप्पू किसी कृषि वैज्ञानिक को नहीं जानते हैं और न ही उन्हें किसान काल सेंटर 18001801551 के बारे में कोई जानकारी है। बाग में फैले कच्चे आम उठाते हुए पप्पू कहते हैं कि अब कभी दुबारा आम का व्यापार नहीं करेंगे।</p>
<p>उन्नाव जिले के ही&nbsp;<strong>अकील खान</strong>&nbsp;(35&nbsp;वर्ष) के आठ बीघे के बाग में लगभग अस्सी पेड़ हैं। जिसमें से लगभग 50 पेड़ों में आम लगे हैं। अकील कहते हैं कि बौर तो खूब आया था, लेकिन आम बहुत कम रह गया है। जो आम बचा है वह भी टूटकर गिर रहा है। आम पकने तक कितना बचेगा,&nbsp;कह पाना मुश्किल है। फसल पहले ही बहुत कम थी,&nbsp;फिर समय से पहले भीषण गर्मी और आंधी-तूफान से नुकसान हो रहा है। ऐसी स्थिति में तो लागत निकलना मुश्किल है।</p>
<p>मलिहाबाद के <strong>ब्रजभान सिंह</strong> (44 वर्ष) का चार बीघा का आम का बाग है। उन्नाव की तरह मलिहाबाद में भी बौर तो बहुत आया, <span>लेकिन उतना आम नहीं बना। ब्रजभान सिंह कहते हैं कि बाग में पिछले कुछ सालों से लागत बहुत बढ़ गई है। बाग की जुताई</span>, <span>सिंचाई के साथ-साथ कई बार दवा का छिड़काव करना पड़ता है। एक बार दवा का छिड़काव करने में 10 हजार रुपये तक का खर्च आता है। वह बताते हैं कि इस बार मौसम के उतार-चढ़ाव से रोग लगने की संभावना बढ़ रही है, जिससे लागत बढ़ जाती है। पिछले साल करीब सवा लाख रुपये का आम बेचने वाले ब्रजभान सिंह इस साल बाग देखकर निराश हैं।</span></p>
<p>आम उत्पादन में उत्तर प्रदेश का देश में प्रथम स्थान है। उत्तर प्रदेश देश के आम उत्पादन में लगभग 24% को हिस्सेदारी रखता है। राज्य में दसहरी, चौसा और लंगड़ा जैसे आम प्रमुख हैं। भारत विश्व का प्रमुख आम निर्यातक देश है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत ने संयुक्त अरब अमीरात, यूके, यूएसए, कुवैत और कतर जैसे देशों को कुल 32.10 हजार टन आम का निर्यात किया था। ताजे आम के अलावा आम के पल्प का भी&nbsp; लगभग इतना ही निर्यात होता है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x_680357f44df4e.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><span style="color: #34495e;"><em>उन्नाव जिले में आम का बगीचे में फल की मौजूदा स्थिति, इस साल उत्पादन में कमी का संकेत</em></span></p>
<p><strong>कृषि विज्ञान केंद्र, उन्नाव</strong> के कृषि वैज्ञानिक&nbsp;<strong>डॉ. जय कुमार यादव</strong> बताते हैं कि आम के फलों का गिरना निषेचन की कमी, द्विलिंगी पुष्पों की कमी, अपर्याप्त परागण, पराग कीटों की कमी, पोषक तत्वों की कमी और बाग में नमी के कारण होता है। इसकी रोकथाम के लिए किसान बाग में नमी बनाए रखें, और प्लानोफिक्स नामक ग्रोथ रेगुलेटर का छिड़काव करें। इससे आम के फलों को गिरने से बचाया जा सकता है।</p>
<p>आम में अत्यधिक बौर आने और बौर झड़ने की समस्या पोषक तत्वों की कमी,&nbsp;कीट व रोगों,&nbsp;पर्यावरणीय और हार्मोनल कारकों के कारण पैदा होती है। इसकी रोकथाम के लिए पुराने पेड़ों की नियमित छंटाई और मिट्टी की जांच करवाकर&nbsp;pH&nbsp;स्तर को संतुलित रखना आवश्यक है।</p>
<p><strong>केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ</strong> के वैज्ञानिक <strong>दुष्यंत मिश्रा </strong>ने बताया कि आम में अन्य फलों की तरह ही परागण होता है जिसमें कुछ मित्र कीट सहयोग करते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से कीटनाशकों का उपयोग अत्यधिक बढ़ता जा रहा है जिससे बागों में पोलिनेशिया कीट भी खत्म हो जाते हैं। परिणामस्वरूप पेड़ों में आम कम आते हैं। जो आम दिखाई देते हैं वह झुमका आम है जो कुछ समय के बाद गिर जाते हैं। किसानों को आम के पेड़ों में रोग देखने के बाद कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से आवश्यकता होने पर ही दवा का छिड़काव करना चाहिए। अगर बौर में 5-6 कीट दिखाई दे रहे हैं तो दवा के छिड़काव की आवश्यकता नही होती हैं। इससे ज्यादा होने पर ही छिड़काव करें।</p>
<p>यदि पिछले वर्ष पेड़ पर बहुत कम या बिल्कुल भी फल नहीं लगे थे, तो इस वर्ष अत्यधिक बौर आ सकता है। यह पेड़ की प्राकृतिक प्रतिक्रिया होती है। मिट्टी में पोषक तत्वों का असंतुलन, खासकर नाइट्रोजन की अधिकता और फास्फोरस व पोटाश की कमी, अत्यधिक बौर को बढ़ावा दे सकती है जो कमजोर और झड़ने वाला बौर होता है। कई बार कीटों और रोगों के कारण भी बौर सूखकर गिर जाता है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आम में बौर तो खूब आया लेकिन फल बहुत कम रह गया, किसानों को नुकसान की चिंता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चम्पावत के कमल गिरी सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर बने सफल उद्यानपति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/kamal-giri-of-champawat-became-a-successful-horticulturist-by-taking-advantage-of-government-schemes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 12 Apr 2025 17:13:06 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/kamal-giri-of-champawat-became-a-successful-horticulturist-by-taking-advantage-of-government-schemes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड के जनपद चम्पावत निवासी 35 वर्षीय, <strong>कमल गिरी</strong>, चार साल पहले तक गांव में ही छोटी-सी दुकान चलाते थे, जिससे कुछ खास आमदनी नहीं हो पा रही थी। अब कमल गिरी 35 नाली जमीन पर सेब, कीवी, आडू, खुबानी जैसे फल और कई सब्जियां उगा रहे हैं। कमल गिरी ने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर, स्वरोजगार के जरिए तरक्की की राह पकड़ी। अब अन्य लोग भी उनसे प्रेरणा लेकर, फल-सब्जियां उगाने के लिए आगे आ रहे हैं।</p>
<p><strong>चम्पावत</strong> जिला मुख्यालय से पांच किमी दूर दूधपोखरा गांव के रहने वाले कमल गिरी को कहीं से सेब की जल्दी पैदावर देने वाली प्रजाति की जानकारी मिली तो वे इसके बारे में पता करने के लिए भीमताल स्थित नर्सरी पहुंच गए। वहां से उन्हें उद्यान विभाग के एप्पल मिशन की जानकारी मिली, जिसमें आवेदन करने के बाद उन्हें सब्सिडी पर सेब के 500 पौधे मिले।&nbsp;</p>
<p>इसी के साथ उन्होंने कीवी मिशन के तहत 10 नाली जमीन में कीवी के पौधे भी लगाए। इसी तरह पांच नाली जमीन पर तेज पत्ता, बड़ी इलाईची लगाने के साथ ही मधु मक्खी पालन का भी शुरू कर दिया। बीते कुछ साल की मेहतन के बाद उनके पास अब कुल 35 नाली का उद्यान हो चुका है। जिसमें वो पॉलीहाउस के जरिए सब्जियां भी उगा रहे हैं। सहायक गतिविधि के रूप में मधुमक्खी पालन और मशरूम उत्पादन भी शुरू कर दिया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x_67fa50a4df339.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>उपज को जंगली जानवरों से बचाया&nbsp;</strong></p>
<p>कमल गिरी बताते हैं कि एप्पल मिशन के तहत उन्हें 60 प्रतिशत सब्सिडी पर पौधे मिले। इसी तरह 80 प्रतिशत सब्सिडी पर उन्होंने पॉलीहाउस भी बनवा लिया। उद्यान विभाग ने कीवी मिशन और तारबाड़ में भी उन्हें सहयोग दिया। इन्हीं प्रयासों से जंगल के बीच में होने के बावजूद उनकी फसल जंगली जानवरों से सुरक्षित रह सकी। अब उनकी मेहनत कामयाब होने लगी है। वह बताते हैं कि पिछले सीजन में उन्होंने 21 कुंतल सेब बेचा और इस सीजन में कीवी का उत्पादन भी शुरू हो गया है। साथ ही 15 कुंतल तेज-पत्ता भी तैयार हो गया है। पॉलीहाउस में वो नियमित सब्जियां भी उगाते हैं।</p>
<p><strong>पलायन रोकने में सक्षम है बागवानी </strong></p>
<p>उत्तराखंड के मुख्यमंत्री <strong>पुष्कर सिंह धामी</strong> का कहना है कि उत्तराखंड के गांवों की आर्थिकी बढ़ाने के लिए औद्यानिकी बेहद जरूरी है। इसके लिए सरकार एप्पल मिशन, कीवी मिशन सहित कई योजनाएं चला रही हैं, जिसके परिणाम अब आने लगे हैं। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ने से पलायन की समस्या का भी ठोस समाधान हो सकेगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x_67fa5095528dd.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67fa5017ac502.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चम्पावत के कमल गिरी सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर बने सफल उद्यानपति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में सरसों खरीद की सीमा 25 से बढ़ाकर 40 क्विंटल की गई, 10 अप्रैल से होगी खरीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/limit-of-mustard-purchase-in-rajasthan-has-been-increased-from-25-to-40-quintals-purchase-will-start-from-april-10.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 04 Apr 2025 19:25:05 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/limit-of-mustard-purchase-in-rajasthan-has-been-increased-from-25-to-40-quintals-purchase-will-start-from-april-10.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान में सरसों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की सीमा 25 <span>से बढ़ाकर </span>40 <span>क्विंटल कर दी गई है। इससे राज्य के किसान अब 40 क्विंटल सरसों एमएसपी पर बेच पाएंगे। राज्य में अभी तक सरसों की खरीद शुरू न होने से किसान कम दाम पर सरसों बेचने को मजबूर हो रहे हैं। </span></p>
<p>पहले सरसों खरीद की मात्रा प्रति किसान 25 <span>क्विंटल निर्धारित की गई थी। इससे अधिक मात्रा में सरसों की उपज किसान समर्थन मूल्य पर नहीं बेच सकते थे। इस बारे में किसानों की मांग को देखते हुए सरकार ने खरीद सीमा को बढ़ाकर </span>40 <span>क्विंटल कर दिया है।&nbsp;</span>&nbsp;</p>
<p>चालू रबी खरीद सीजन 2025-26 के लिए सरकार ने सरसों के लिए 5950 <span>रुपये प्रति क्विंटल का एमएसपी तय किया है। राजस्थान में </span>10 <span>अप्रैल से सरसों और चने की एमएसपी पर खरीद शुरू होगी</span>, <span>जिसके लिए </span>1 <span>अप्रैल से पंजीकरण शुरू हो गए हैं। जबकि&nbsp;</span>पिछले साल 15 <span>मार्च से सहकारी समितियों के जरिए सरसों व चने की खरीद शुरू हो गई थी। </span></p>
<p><span>इस साल मार्च बीतने के बाद भी किसान सरसों खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल राजस्थान की मंडियों में सरसों का भाव </span>5200-5500 <span>रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है। ऐसे में सरसों खरीद में देरी से किसानों को प्रति क्विंटल 500 से 700 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।</span></p>
<p><strong>1 <span>अप्रैल से रजिस्ट्रेशन शुरू</span></strong></p>
<p>समर्थन मूल्य पर सरसों और चना की खरीद के लिए किसान 1 <span>अप्रैल से ई-मित्र के माध्यम से पंजीकरण करवा सकेंगे। इसके लिए गिरदावरी और बैंक पासबुक की आवश्यता होगी।</span></p>
<p><strong>उत्पाद और खरीद लक्ष्य </strong></p>
<p><span>इस वर्ष राजस्थान में सरसों का लगभग </span>62 <span>लाख टन और चने का लगभग </span>23 <span>लाख टन उत्पादन होने की संभावना है। भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप राज्य में सरसों की </span>13.89 <span>लाख टन और चने की </span>6.30 <span>लाख टन खरीद की जाएगी।&nbsp;</span>उन्होंने कहा कि इस बार बाजार भाव की तुलना में समर्थन मूल्य आकर्षक होने की वजह से खरीद केन्द्रों पर सरसों एवं चना की अधिक आवक होने की संभावना है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>पर्याप्त भण्डारण व्यवस्था के निर्देश </strong></p>
<p>सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक ने 10 <span>अप्रैल से शुरू होने जा रही सरसों व चना की खरीद के लिए अधिकारियों को समय रहते सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि खरीद प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी सामने आती है या किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है</span>,&nbsp;<span>तो संबंधित उप रजिस्ट्रार एवं मैनेजर की जिम्मेदारी तय कर सख्त कार्यवाही की जाएगी।</span></p>
<p><span>सहकारिता मंत्री ने गुरुवार को सरसों व चना खरीद की तैयारियों को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने कहा कि इस बार बाजार भाव की तुलना में समर्थन मूल्य आकर्षक होने की वजह से खरीद केन्द्रों पर सरसों एवं चना की अधिक आवक होने की संभावना है। राज्य सरकार भी खरीद के लक्ष्य पूरे करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसे ध्यान में रखते हुए उपज के भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।&nbsp;</span></p>
<p><span lang="HI"><span>दक ने निर्देश दिए कि&nbsp;</span>जिन कार्मिकों के पास लम्बे समय से एक ही खरीद केन्द्र का प्रभार है</span><span>,&nbsp;</span><span lang="HI">उनका सेंटर बदला जाए। साथ ही</span><span>,&nbsp;</span><span lang="HI">खरीद प्रक्रिया के सम्बन्ध में एक गाइडलाइन भी शीघ्र जारी की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में एक-एक विजिलेंस टीम का गठन किया है जो खरीद केन्द्रों पर जाकर निरीक्षण करेगी।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>टोल फ्री नंबर </strong></p>
<p>खरीद में किसानों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो इसके लिए राजफैड में कॉल सेन्टर <strong>18001806001</strong> <span>स्थापित किया गया है। सहकारिता मंत्री ने निर्देश दिए कि टोल फ्री नम्बर पर किसानों की समस्याएं सुनकर उनका शीघ्र निस्तारण करवाया जाए। बारिश की स्थिति में किसानों की उपज को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल का बंदोबस्त किया जाए।&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/04/image_750x500_67efe4b571d05.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में सरसों खरीद की सीमा 25 से बढ़ाकर 40 क्विंटल की गई, 10 अप्रैल से होगी खरीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में किसानों ने आप के मंत्रियों और विधायकों के घरों का घेराव किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/protesting-farmers-in-punjab-surrounded-the-houses-of-aap-ministers-and-mlas.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 31 Mar 2025 16:21:19 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/protesting-farmers-in-punjab-surrounded-the-houses-of-aap-ministers-and-mlas.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में किसान संगठनों ने अब आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शंभू और खनौरी बॉर्डर पर पुलिस कार्रवाई और किसान नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में आंदोलकारी किसानों ने सोमवार को पंजाब में आप के मंत्रियों और विधायकों के घरों का घेराव किया।&nbsp;</p>
<p>गौरतलब है कि 19 मार्च को जब किसान नेता चंडीगढ़ में केंद्रीय मंत्रियों के साथ वार्ता कर लौट रहे थे, तब पंजाब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था और शंभू व खनौरी बॉर्डर पर बड़ी कार्रवाई करते हुए धरनास्थलों को खाली करा लिया था। हालांकि, 19 मार्च को गिरफ्तार हुए सभी किसान नेताओं को रिहा कर दिया गया है लेकिन खनौरी और शंभू बॉर्डर पर 13 महीनों से चला आ रहा धरना हटा दिया गया। पंजाब पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर किसान यूनियनों में काफी रोष है। &nbsp;</p>
<p>सोमवार को पंजाब के विभिन्न हिस्सों में हुए प्रदर्शनों के दौरान किसानों ने मंत्रियों और विधायकों के घरों के बाहर नारेबाजी की और धरना दिया। इस दौरान किसानों ने मोगा जिले के धर्मकोट से विधायक&nbsp;देविन्दरजीत सिंह लाडी ढोस पर किसानों पर हमला करवाने और किसानों से बदसलूकी का आरोप लगाया।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67ea7392dbea2.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>किसान नेताओं का आरोप है कि पंजाब की आप सरकार उनकी मांगों के प्रति गंभीर नहीं है और केंद्र सरकार के साथ मिलकर उनके आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि सरकार की ओर से एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने सरकार पर किसानों को धोखा देने का भी आरोप लगाया।</p>
<p><strong>सीएम मान ने क्या कहा</strong> <br />पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि वह किसानों के विरोध-प्रदर्शन के अधिकार का पूरी तरह से समर्थन करते हैं। अपने हक के लिए लड़ना हर किसी का लोकतांत्रिक अधिकार है। हम किसानों के साथ प्यार से पेश आए हैं। अब तक उन पर कोई लाठी या पानी की बौछार का इस्तेमाल नहीं किया गया है। किसानों का आंदोलन केंद्र सरकार के खिलाफ है। लेकिन बॉर्डर बंद होने से राज्य को आर्थिक नुकसान हो रहा था, इसको देखते हुए शंभू और खनौरी बॉर्डर खाली कराया गया।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में किसानों ने आप के मंत्रियों और विधायकों के घरों का घेराव किया ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में नया नर्सरी विधेयक पारित, खराब पौध बेचने पर सख्ती]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-passes-new-nursery-bill-strict-action-on-selling-defective-plants.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 29 Mar 2025 15:24:44 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-passes-new-nursery-bill-strict-action-on-selling-defective-plants.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा विधानसभा में बजट सत्र के अंतिम दिन छः विधेयक पारित किए गए। इनमें <strong>हरियाणा&nbsp;बागवानी&nbsp;पौधशाला विधेयक, 2025</strong> भी शामिल है। इससे प्रदेश में बागवानी पौधशाला यानी नर्सरी संचालन से जुड़े नियम-कायदे सख्त हो जाएंगे। इससे नकली, रोगग्रस्त व खराब प्रजातियों की पौध बेचने वालों पर अंकुश लगेगा। प्रदेश में सभी नर्सरी संचालकों के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा। नए नर्सरी कानून के तहत एक साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।&nbsp;</p>
<p>विधानसभा में शुक्रवार को हरियाणा के कृषि एवं बागवानी मंत्री <strong>श्याम सिंह राणा</strong> ने &lsquo;हरियाणा बागवानी पौधशाला विधेयक-2025&rsquo; पेश किया था जिसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। अभी तक राज्य में फल पौधशालाओं का संचालन हरियाणा फल पौधशाला अधिनियम 1961 के तहत किया जाता है। लेकिन फल के अलावा अन्य बागवानी पौधशालाओं के लिए नियामक ढांचे का अभाव है, जिसके कारण खराब गुणवत्ता की पौध सामग्री का विक्रय किया जा रहा है। इससे बागवानी उत्पादकता में कमी और किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।</p>
<p>हरियाणा फल पौधशाला अधिनियम, 1961 में सब्जियों, मसालों, फूलों, औषधीय और सुगंधमयी फसलों से संबंधित बागवानी पौधशालाओं के लिए गुणवत्ता नियंत्रण का प्रावधान नहीं है। इस कमी के कारण,&nbsp;अनधिकृत पौधशालाएं संचालित हो रही हैं। पौधशालाओं के वैज्ञानिक प्रबंधन,&nbsp;गुणवत्ता नियंत्रण और बेहतर नियमन की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी,&nbsp;ताकि किसानों को प्रमाणित एवं उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री उपलब्ध हो। इसलिए हरियाणा सरकार बागवानी पौधशालाओं के लिए एक व्यापक कानून लेकर आई। &nbsp;</p>
<p>हरियाणा बागवानी पौधशाला विधेयक, 2025&nbsp;में बागवानी फसलों के तहत सब्जियां, मसाले, फल, फूल, औषधीय व सुगंधित पौधों को शामिल किया गया है। नए कानून के तहत बागवानी पौधशालाओं के संचालन के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार पौधशाला का पंजीकरण कराना होगा। पौध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को नर्सरी संचालन व नियमन के लिए सख्त प्रावधान किए गये हैं।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में नया नर्सरी विधेयक पारित, खराब पौध बेचने पर सख्ती ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों की रिहाई के बाद जगजीत सिंह डल्लेवाल ने जल ग्रहण किया, लेकिन अनशन जारी: एसकेएम (एनपी) व केएमएम ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmer-leader-jagjit-singh-dallewal-drink-water-but-the-fast-continues-skm-np-and-kmm.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 28 Mar 2025 21:55:31 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmer-leader-jagjit-singh-dallewal-drink-water-but-the-fast-continues-skm-np-and-kmm.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को किसानों को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान पंजाब सरकार ने दावा किया कि किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने पानी पीकर अपना अनशन तोड़ दिया है। यह जानकारी पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ को दी।</p>
<p>इस दावे पर आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि जगजीत सिंह डल्लेवाल का अनशन खत्म नहीं हुआ है, सिर्फ पानी पिया है। 10 दिनों से पानी की एक बूंद भी उनके अंदर नहीं गयी थी। उन्होंने कहा था कि जब तक सभी किसान जेलों से बाहर नहीं आएंगे तब तक पानी भी ग्रहण नहीं करूंगा, आज सुबह 2 बजे सभी जेलों से किसानों को रिहा किया गया। एमएसपी की कानूनी गारंटी सहित कई मांगों को लेकर डल्लेवाल 26 नवंबर 2024 से आमरण अनशन शुरू किया था। जनवरी में उन्होंने मेडिकल सहायता भी मुश्किल से ली थी।&nbsp;</p>
<p><strong>संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक)</strong> और <strong>किसान मजदूर मोर्चा</strong> ने कहा है कि जगजीत सिंह डल्लेवाल का आमरण अनशन जारी है। सरकारी तंत्र द्वारा उनके आमरण अनशन समाप्त करने जैसी अफवाहें फैलाई जा रही हैं। दोनों मोर्चों की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, आज सुबह पंजाब की अलग-अलग जेलों में बंद सभी किसानों के रिहा होने के बाद अपने आमरण अनशन के 123वें दिन किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने जल ग्रहण किया और मेडिकल सहायता लेनी शुरू की।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67e6d4acb3b40.jpg" alt="" /></p>
<p>डल्लेवाल फिलहाल पटियाला के एक निजी अस्पताल में हैं। उनकी तबियत बेहद नाजुक बनी हुई है। उन्हें बोलने में भी समस्या आ रही है। हालांकि, पंजाब पुलिस का कहना है कि अभी वह हिरासत में नहीं हैं।</p>
<p>गत 19 मार्च को पंजाब पुलिस ने आंदोलनकारी किसानों को गिरफ्तार कर खनौरी और शंभू बॉर्डर से किसान मोर्चे हटाने की कार्रवाई की थी। शंभू और खनौरी बॉर्डर पर पुलिस कार्रवाई और किसानों की गिरफ्तारी के विरोध में डल्लेवाल ने 19 मार्च से पानी भी नहीं पीया था।</p>
<p>सरवन सिंह पंधेर, काका सिंह कोटडा और अभिमन्यु कोहाड़ सहित 245 किसानों के समूह को शुक्रवार की सुबह पटियाला जेल से रिहा किए जाने के बाद उन्होंने जल ग्रहण किया। विभिन्न जेलों से रिहा होने के बाद, कई किसान नेताओं ने पटियाला के अस्पताल में पहुंचकर डल्लेवाल से मुलाकात की।&nbsp;</p>
<p>70 वर्षीय किसान नेता कैंसर से भी जूझ रहे हैं, जिसके बावजूद उन्होंने अपनी मांगों के लिए लंबा संघर्ष जारी रखा। शीर्ष अदालत ने डल्लेवाल की सराहना करते हुए उन्हें "सच्चा किसान नेता" करार दिया, जिन्होंने बिना किसी राजनीतिक एजेंडे के कृषक समुदाय के वास्तविक मुद्दों को उठाया है। डल्लेवाल का यह अनशन किसान आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, जिसने देश भर में किसानों के मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों की रिहाई के बाद जगजीत सिंह डल्लेवाल ने जल ग्रहण किया, लेकिन अनशन जारी: एसकेएम (एनपी) व केएमएम  ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब पुलिस ने 800 किसानों को रिहा किया, ट्रॉलियां चोरी पर होगी कार्रवाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-police-released-800-farmers-action-will-be-taken-on-trolley-theft.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 24 Mar 2025 20:43:32 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-police-released-800-farmers-action-will-be-taken-on-trolley-theft.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में आंदोलनकारी किसानों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए हिरासत में लेने और धरनास्थल से हटाने के बाद सोमवार को पंजाब पुलिस ने बताया कि 800 किसानों को रिहा कर दिया गया है और राज्य सरकार के निर्देश पर 450 किसानों को रिहा किया जा रहा है।&nbsp;गत 19 मार्च को चंडीगढ़ में केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक से लौटते किसान नेताओं को पंजाब पुलिस ने हिरासत में लिया था। साथ ही खनौरी और शंभू बॉर्डर से किसानों के टेंट और शेड हटाकर धरनास्थलों को खाली करा लिया था।</p>
<p>पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक (मुख्यालय) सुखचैन सिंह गिल ने एक बयान में कहा, "19 मार्च से अब तक करीब 1400 किसानों को हिरासत में लिया गया था। इनमें से 800 किसानों को रिहा कर दिया है। 450 किसानों को आज रिहा किया जाएगा।" उन्होंने बताया कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने महिलाओं, दिव्यांग व्यक्तियों, बीमार और 60 वर्ष से अधिक आयु के किसानों को तत्काल रिहा करने के निर्देश दिए हैं। पंजाब सरकार के निर्देशों के अनुरूप, हम ऐसे किसानों की रिहाई को प्राथमिकता दे रहे हैं।</p>
<p>पिछले 13 महीनों से एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों को हिरासत में लेने और सख्त कार्रवाई करते हुए शंभू व खनौरी बॉर्डर से प्रदर्शनकारियों को हटाने को लेकर आंदोलनकारी किसान आप सरकार की तीखी आलोचना कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान पर उन्होंने किसान विरोधी रवैया अख्तियार करने का आरोप लगाया है।</p>
<p><strong>किसानों की ट्रॉलियां चोरी के आरोप </strong></p>
<p>पुलिस द्वारा शंभू मोर्चा हटाए जाने के बाद किसानों ने उनका सामान और ट्रॉलियां चोरी होने के आरोप लगाए हैं। आईजी गिल ने कहा कि पंजाब सरकार ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं और किसी को भी किसानों के सामान की हेराफेरी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। किसानों के सामान संबंधित दिक्कतों को लेकर पटियाला पुलिस ने एसपी-रैंक के अधिकारी जसबीर सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। कोई भी किसान जिसे अपने सामान से जुड़ी किसी भी तरह की शिकायत है, वह उनसे संपर्क कर सकता है। किसानों की समस्या का तुरंत समाधान किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>धरनास्थल से किसानों की ट्रॉलियों और अन्य सामानों की चोरी के आरोप को लेकर पटियाला पुलिस ने तीन एफआईआर दर्ज की हैं। किसानों का आरोप है कि किसानों पर कार्रवाई के दौरान उनकी ट्रॉलियां चोरी हो गईं। एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को पास के गांव में छिपाया गया था, जिसे बाद में बरामद किया गया। दो अन्य मामलों में जांच और संदिग्धों की तलाश जा रही है।</p>
<p>किसान नेता गुरअमनीत सिंह मांगट ने आरोप लगाया कि शंभू बॉर्डर से चोरी हुई ट्राली आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता के घर से मिली। जब चोरी पकड़ी गई तो किसानों पर जानलेवा हमला किया गया। &nbsp;</p>
<p><strong>28 को एसकेएम का प्रदर्शन&nbsp;</strong></p>
<p>पंजाब पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई की संयुक्त किसान मोर्चा ने कड़ी निंदा करते हुए देश भर के किसानों से 28 मार्च को जिला स्तर पर विरोध-प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। इससे पहले शुक्रवार को पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने पंजाब सरकार की ओर से बुलाई बैठक में शामिल होने से इंकार कर दिया था।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67e17941bb1de.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब पुलिस ने 800 किसानों को रिहा किया, ट्रॉलियां चोरी पर होगी कार्रवाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब की कृषि व्यवस्था में गहराई तक समाई बदहाली: नीतियों और नेतृत्व की नाकामी की कहानी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-agricultural-mess-a-tale-of-systemic-failure-and-lost-reforms.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 23 Mar 2025 16:32:25 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-agricultural-mess-a-tale-of-systemic-failure-and-lost-reforms.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में कृषि की बदहाली को बताने की कोशिश में यह लेख लिखना और अपनी यादें साझा करना मुझे कोई खुशी नहीं देता। वैसे तो पंजाब स्टेट फार्मर्स एंड फार्म वर्कर्स कमीशन के चेयरमैन के रूप में मेरा अनुभव, वर्षों की निराशा के बावजूद बेहद समृद्ध रहा, लेकिन सच यह है कि ज्यादातर मौकों पर संबंधित विभागों को आयोग के पत्रों का संज्ञान लेने तक के लिए मनाना एक कठिन काम था। उनके साथ नीतिगत मामलों पर चर्चा करना तो दूर की बात थी।</p>
<p>आखिरी उपाय के रूप में हमने मुख्यमंत्री कार्यालय से आग्रह किया कि संबंधित विभागों को निर्देश दिया जाए कि वे आयोग से संपर्क के लिए किसी अधिकारी को नामित करें। हमने यह भी अनुरोध किया कि जो विभाग किसान की आजीविका पर असर डालते हैं, वे नीतिगत मामलों पर हमारी राय लें।</p>
<p>अब पीछे मुड़कर देखने पर मैं अपनी कोशिशों पर हंस सकता हूं, लेकिन उस समय हमने अपनी शिकायतें फिर से उठाईं। मुख्य सचिव ने कहा कि पंजाब में विभागों को केवल पत्र लिखे जा सकते हैं, अधिकारियों को आदेश का पालन कराने की कोई शक्ति नहीं है। पंजाब का यही असली हाल है - आप चाहे इसे पसंद करें या नापसंद। निर्देश को अधिकारियों ने अपने क्षेत्र में हस्तक्षेप के रूप में देखा, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं था।</p>
<p>धान की पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए हमने 'आउट ऑफ द बॉक्स' समाधान खोजने का प्रयास किया और पीटर डायमांडिस द्वारा स्थापित एक्स प्राइज से प्रेरित होकर, आयोग ने पैडी स्ट्रॉ चैलेंज फंड की स्थापना का प्रस्ताव दिया। सरकार ने भी बड़ी अनिच्छा के साथ इसे अनुमति दी।</p>
<p>इस पुरस्कार के तहत 15 दिनों में खेत में जैविक तरीके से पराली को गलाने का समाधान विकसित करने वाले को 10 लाख डॉलर दिए जाने थे। विचार यह था कि जब तक समाधान नहीं मिल जाता, हर साल इनाम की राशि दोगुनी की जाएगी। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) को इस समाधान की सत्यता की जांच के लिए अधिकृत किया गया और आयोग से पीएयू को इसे वैश्विक स्तर पर प्रचारित करने के निर्देश दिए गए। कई महीने बाद जब आयोग ने पूछा कि पीएयू ने पुरस्कार के प्रचार के लिए क्या किया, तो यह जानकर हम दंग रह गए कि केवल 15 ईमेल भेजे गए थे। यहां तक कि पीएयू के पास ईमेल प्राप्तकर्ताओं की सूची तक नहीं थी।&nbsp;</p>
<p>पीएयू क्या है? पीएयू की स्थिति को एक तेल रिसाव से सने पक्षी के रूप में देखिए, जो धन, मदद और दिशा के लिए संघर्ष कर रहा हो। PAU को रिवाइव करने के लिए आयोग ने दुनिया भर में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों के साथ कई बार विचार-विमर्श किया। लेकिन यह विचार भी तब खत्म हो गया जब सदस्य सचिव बलविंदर सिद्धू और मैंने आयोग छोड़ दिया। मुझे उन लोगों के प्रति दुख महसूस होता है जिन्होंने इसमें योगदान देने की पेशकश की थी।</p>
<p>पंजाब के किसान को कौन मदद देता है? जमीनी स्तर पर प्रत्येक प्रशासनिक ब्लॉक में 10 से अधिक विभाग हैं जो किसानों को अलग-अलग सेवाएं देने का दावा करते हैं। लेकिन जब हमने अधिकारियों से मुलाकात की, तो यह स्पष्ट हो गया कि उन्होंने कभी भी नीति बनाने या प्रयासों का समन्वय करने के लिए एक साथ बैठना उचित नहीं समझा।</p>
<p>आयोग ने सुझाव दिया कि राज्य प्रत्येक जिले में ब्लॉक-स्तरीय अधिकारियों की त्रैमासिक समन्वय बैठक बुलाए ताकि पारदर्शिता और बेहतर सेवा वितरण सुनिश्चित किया जा सके। लेकिन इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। पंजाब में नेतृत्व की कमी के कारण यह समस्या गहरी जड़ें जमा चुकी है।&nbsp;</p>
<p>आयोग ने पाया कि नई भर्ती वाले कृषि विकास अधिकारियों को बिना किसी प्रशिक्षण या उनके कार्यों की समझ के ही तैनात कर दिया गया था। इस समस्या को समझने के लिए आयोग ने एक दिवसीय संवाद कार्यशाला आयोजित की। लंबे समय से कार्यरत अधिकारियों ने बताया कि 25 वर्षों में किसी ने भी उनकी राय नहीं मांगी और न ही विभागीय मुद्दों को समझने के लिए उन्हें कभी कार्यशाला में बुलाया गया।</p>
<p>मैंने महसूस किया कि ली थायलर के शब्द, जो एक अलग संदर्भ में कहे गए थे, पंजाब की कृषि पर लागू होते हैं: "अधिकांश लोग उस समस्या को पसंद करते हैं जिसे वे हल नहीं कर सकते, बजाय उस समाधान के जिसे वे पसंद नहीं करते।" यह किसान यूनियन नेताओं पर विशेष रूप से लागू होता है।</p>
<p>जब आयोग ने तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों से किसान आत्महत्याओं पर रिपोर्ट मांगी, तो हमें यह कह कर रिपोर्ट देने से इनकार कर दिया गया कि निष्कर्ष 'भड़काऊ' हो सकते हैं। स्पष्ट था कि रिपोर्ट में विसंगतियां थीं और उन्होंने गलत पद्धतियों का इस्तेमाल किया था।</p>
<p>2015 की नीति के तहत, जिला कलेक्टरों को आत्महत्या करने वाले किसान के परिवार के पुनर्वास के लिए जिला-स्तरीय समितियों का गठन करना था। लेकिन आयोग ने पाया कि कलेक्टरों ने कोई पहल नहीं की और जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया। पंजाब के ज्यादातर सरकारी दफ्तरों की तरह जिला कार्यालय भी उपकरणों की कमी, स्टाफ की कमी और काम की अधिकता से जूझ रहे हैं।</p>
<p>आयोग ने रसायनों का उपयोग कम करने, कृषि विस्तार में क्रांति लाने, फसल की गुणवत्ता में सुधार करने और किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास किये। एक ऐप विकसित किया गया, जिसे आठवीं कक्षा का छात्र भी सहजता से संचालित कर सकता था। इसमें किसानों को बेचे गए सभी कृषि इनपुट की जानकारी रियल टाइम में सरकारी सर्वर पर अपलोड करनी थी। दुकानदारों से बार-बार सलाह ली गई और उनके सुझावों को शामिल किया गया। लेकिन विभाग इस ऐप को चालू करने के लिए राज्य में बेचे गए लाइसेंसी कीटनाशकों के डेटा तक उपलब्ध नहीं करा सका। ये घटनाएं उदासीनता नहीं, बल्कि व्यवस्थागत ठहराव का प्रतीक हैं।</p>
<p>जोन डिडियन की किताब 'द व्हाइट शैडो' की शुरुआती पंक्ति है: "हम जीने के लिए कहानियां सुनाते हैं।" दुख की बात है कि पंजाब की कहानी अब बिखरती नजर आ रही है।</p>
<p><em><strong>(अजय वीर जाखड़, भारत कृषक समाज के चैयरमैन हैं और पंजाब स्टेट फार्मर्स एंड फार्म वर्कर्स कमीशन के पूर्व चेयरमैन हैं।)</strong></em></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67e106c52e97b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब की कृषि व्यवस्था में गहराई तक समाई बदहाली: नीतियों और नेतृत्व की नाकामी की कहानी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र ने राजस्थान में गेहूं की सरकारी खरीद के मानकों में छूट दी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/centre-relaxes-standards-for-government-procurement-of-wheat-in-rajasthan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 21 Mar 2025 16:02:59 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/centre-relaxes-standards-for-government-procurement-of-wheat-in-rajasthan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>राजस्थान</strong> में अत्यधिक गर्मी और बारिश के चलते गेहूं की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने राजस्थान में गेहूं की सरकारी खरीद के लिए निर्धारित मानकों में कुछ छूट दी है। इससे किसानों और व्यापारियों को राहत मिलेगी।</p>
<p>भारत सरकार के <strong>खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग</strong> के निर्णय के अनुसार, रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 में गेहूं की सरकारी खरीद के लिए राजस्थान के किसानों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों में ढील प्रदान की गई है।&nbsp;राज्य सरकार के विशेष अनुरोध पर केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया।&nbsp;अत्यधिक गर्मी और बारिश से गेहूं की फसल प्रभावित हुई है जिससे गेहूं के दाने सिकुड़ने और गुणवत्ता खराब होने की आशंका है।</p>
<ul>
<li>सरकारी खरीद में गेहूं के सिकुड़े या टूटे दाने पहले 6 प्रतिशत तक मान्य थे, इसे बढ़ाकर<strong> 20 प्रतिशत</strong> कर दिया है।</li>
<li>क्षतिग्रत व आंशिक क्षतिग्रत दानों का अंश संयुक्त रूप से <strong>6 प्रतिशत</strong> से अधिक नहीं होना चाहिए।</li>
<li>चमकविहीन (लस्टर लॉस) दाने <strong>10 प्रतिशत</strong> तक मान्य होंगे।</li>
</ul>
<p></p>
<ul></ul>
<p>इस छूट पर किसी प्रकार की कटौती सरकार द्वारा नहीं की जाएगी। मानकों में रियायत के तहत खरीदे जाने वाले गेहूं को सामान्य गेहूं से अलग रखने के निर्देश दिए गये हैं। इस प्रकार खरीदे गए गेहूं को राज्य से बाहर नहीं भेजा जाएगा और प्राथमिकता के आधार पर सामान्य गुणवत्ता के गेहूं से पहले निकाला जाएगा।</p>
<p>इस साल केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) <strong>2425 रुपये</strong> प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। इस पर राजस्थान सरकार ने <strong>150 रुपये</strong> प्रति क्विंटल बोनस देने का ऐलान किया है। इस तरह राजस्थान के किसान गेहूं की फसल <strong>2575</strong> रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर बेच सकेंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र ने राजस्थान में गेहूं की सरकारी खरीद के मानकों में छूट दी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में नकली बीज व कीटनाशकों की बिक्री के खिलाफ नए बिल पास, 3 साल की सजा व 5 लाख तक जुर्माने का प्रावधान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-passes-bill-to-curb-sale-of-fake-seeds-pesticides-offenders-face-3-year-jail-5-lakh-fine.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 20 Mar 2025 20:33:33 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-passes-bill-to-curb-sale-of-fake-seeds-pesticides-offenders-face-3-year-jail-5-lakh-fine.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में नकली या मिलावटी बीज और कीटनाशक बेचने वालों के खिलाफ प्रदेश सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है। गुरुवार को विधानसभा में हरियाणा सरकार ने पुराने बीज अधिनियम और कीटनाशक अधिनियम में संशोधन कर नया बिल पास कराए। इसके बाद राज्यपाल की स्वीकृति और अधिसूचना के बाद ये कानून का रूप लेंगे।</p>
<p>संशोधित कानून के तहत नकली बीज और कीटनाशक बनाने वाली कंपनी और विक्रेता दोनों के खिलाफ कड़े प्रावधान किये हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बीज अधिनियम और कीटनाशक अधिनियम में संशोधन का उद्देश्य राज्य में नकली व मिलावटी बीजों और कीटनाशकों की बिक्री पर अंकुश लगाना और दोषियों को कड़ी सजा दिलाना है ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल सकें।&nbsp;</p>
<p>बीज अधिनियम वर्ष 1966 में लागू किया गया, जिसमें 1972 में संशोधन हुआ था। इसी प्रकार, कीटनाशक से संबंधित अधिनियम &nbsp;भारत सरकार द्वारा वर्ष 1968 में बनाया गया था।</p>
<p><strong>संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ी</strong><strong>?</strong>&nbsp;</p>
<p>मौजूदा कानूनों के तहत सजा के प्रावधान पर्याप्त कठोर नहीं होने के कारण नकली व मिलावटी बीज और कीटनाशकों की बिक्री पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। इससे किसान ठगे जा रहे हैं। खेती की लागत बढ़ने के बावजूद फसलों की पैदावार प्रभावित होती है और किसानों के साथ-साथ पर्यावरण का भी नुकसान पहुंचता है।</p>
<p>इसलिए हरियाणा सरकार ने घटिया बीज और कीटनाशकों की बिक्री रोकने के लिए पुराने कानूनों में संशोधन करने का फैसला किया। बीज अधिनियम, 1966 हरियाणा राज्यार्थ की धारा 7 के उल्लंघन के लिए धारा 19 के बाद धारा 19-क रखी गई है। कड़े दण्ड के लिए राज्य सरकार ने नकली या घटिया बीज बेचने को संज्ञेय तथा गैर-जमानती अपराध बनाया है। कीटनाशी अधिनियम, 1968 हरियाणा राज्यार्थ की धारा 29 की उपधारा (1) के उपखण्ड (i) तथा (ii) प्रतिस्थापित किया गया है।</p>
<p><strong>सजा और जुर्माना </strong>&nbsp;</p>
<p>पुराने कानून के तहत पहली बार नकली या&nbsp;मिलावटी बीज बेचने पर केवल 500 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान था। दूसरी बार या बाद के अपराध में अधिकतम छह माह कारावास या&nbsp;1000&nbsp;रुपये तक जुर्माना अथवा दोनों की सजा हो सकती थी। &nbsp;</p>
<p>संशोधित कानून के तहत पहली बार अपराध करने पर दोषी को अधिकतम दो वर्ष कारावास और तीन लाख रुपये तक जुर्माना होगा। दूसरी बार या बाद के अपराध में दोषी को अधिकतम तीन वर्ष कारावास तथा अधिकतम पांच लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान किया गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में नकली बीज व कीटनाशकों की बिक्री के खिलाफ नए बिल पास, 3 साल की सजा व 5 लाख तक जुर्माने का प्रावधान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्रीय मंत्रियों से वार्ता के बाद डल्लेवाल, पंधेर सहित कई किसान नेताओं को हिरासत में लिया, शंभू व खनौरी बॉर्डर खाली कराया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/after-meeting-with-union-ministers-farmer-leaders-including-dallewal-and-pandher-were-detained.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 19 Mar 2025 20:28:59 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/after-meeting-with-union-ministers-farmer-leaders-including-dallewal-and-pandher-were-detained.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय मंत्रियों के साथ बुधवार को चंडीगढ़ में बैठक के बाद किसान नेताओं को पंजाब पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सरवन सिंह पंधेर, जगजीत सिंह डल्लेवाल और कई किसान नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर है। एक तरफ जहां केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सौहार्दपूर्ण माहौल में चर्चा की बात कहकर अगली मीटिंग 4 मई को तय कर गये, वहीं दूसरी तरफ किसान नेताओं पर पंजाब पुलिस का एक्शन शुरू हो गया। खनौरी और शंभू बॉर्डर पर लगे धरने खाली करवाने के लिए यह कार्रवाई की गई। इस दौरान आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई।&nbsp;</p>
<p><strong>इधर बैठक खत्म, उधर हिरासत में लिया</strong></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, सरवन सिंह पंधेर और जगजीत सिंह डल्लेवाल को पंजाब पुलिस ने मोहाली में हिरासत में लिया। किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़, काका सिंह कोटड़ा, मंजीत सिंह राय और अन्य किसानों को भी हिरासत में ले लिया है। केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक खत्म कर जैसे ही किसान नेता अपने मोर्चों की ओर लौटने लगे, तभी पंजाब में प्रवेश करते ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेना शुरू कर दिया।</p>
<p>शंभू बॉर्डर पर मौजूद एक किसान नेता ने बताया कि वहां दिन से ही भारी पुलिस बल तैनात था। किसानों को डर था कि आज शंभू और खनौरी बॉर्डर खाली करवाने की कोशिश की जाएगी। खनौरी बॉर्डर पर किसानों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया और रास्तों में ट्रैक्टर खड़े कर दिए। &nbsp;</p>
<p><strong>खनौरी और शंभू बॉर्डर खाली कराया</strong></p>
<p>रात 9 बजे तक, दोनों किसान मोर्चों के प्रमुख नेताओं को हिरासत में लेकर पंजाब पुलिस ने खनौरी और शंभू बॉर्डर को लगभग खाली करवा दिया। जेसीबी लगाकर किसानों के शेड हटा दिए और बॉर्डर खोलना शुरू कर दिया। दोनों मोर्चों से बड़ी संख्या में किसानों को हिरासत में लिया है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67daed3ce1e4f.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>सातवें दौर की वार्ता बेनतीजा</strong></p>
<p>इससे पहले बुधवार को चंडीगढ़ में किसान नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के बीच सातवें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही। करीब चार घंटे चली बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और अगली मीटिंग 4 मई को होगी। लेकिन बैठक के बाद जैसे ही किसान नेताओं ने मोहाली में प्रवेश किया, पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेना शुरू कर दिया। किसानों को रोकने के लिए मोहाली में भारी बैरिकेडिंग की गई थी।&nbsp;</p>
<p><strong>विपक्ष ने सीएम मान की निंदा की</strong></p>
<p>विपक्षी दलों ने किसान नेताओं पर पंजाब पुलिस की कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान की कड़ी निंदा की है।&nbsp;शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि&nbsp;चुनाव के समय में यही भगवंत मान किसानों के पास जाकर कह रहे थे कि मेरी सरकार बनाइए, MSP की गारंटी मैं दूंगा। सरकार बनाने के बाद वे 3 साल से झूठ बोल रहे हैं... अब हाल यह है कि जब किसान अपना अधिकार मांग रहे हैं तो पुलिस के जोर पर किसान नेताओं को जेल में कैद किया जा रहा है।&nbsp;कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने किसान नेताओं की हिरासत को समूचे कृषि क्षेत्र पर "हमला" करार दिया और पुलिस की कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्रीय मंत्रियों से वार्ता के बाद डल्लेवाल, पंधेर सहित कई किसान नेताओं को हिरासत में लिया, शंभू व खनौरी बॉर्डर खाली कराया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा बजट में महिलाओं को 2100 रुपये प्रतिमाह देने का ऐलान, जानिए कृषि क्षेत्र से जुड़ी अहम घोषणाएं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/2100-per-month-to-women-in-haryana-budget-know-important-announcements-for-rural-and-agriculture-sector.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 17 Mar 2025 20:14:47 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/2100-per-month-to-women-in-haryana-budget-know-important-announcements-for-rural-and-agriculture-sector.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा के मुख्यमंत्री <strong>नायब सिंह सैनी</strong> ने आज बतौर वित्त मंत्री अपना पहला बजट पेश किया। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए हरियाणा सरकार ने 2 लाख 5 हजार 17 करोड़ रुपए का बजट पेश किया जो गत वर्ष से 13.7 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश में महिलाओं को प्रतिमाह 2100 रुपये की सहायता देने के लिए <strong>लाडो लक्ष्मी योजना</strong> का ऐलान किया गया है, जिसके लिए बजट में 5,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है।</p>
<p>मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने बजट भाषण में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के बजट को 19.2 फीसदी बढ़ाकर 4229 करोड़ रुपये, <span>बागवानी विभाग के बजट को 95 फीसदी बढ़ाकर 1069 करोड़ रुपये</span>, <span>पशुपालन विभाग के बजट को 51 फीसदी बढ़ाकर 2083 करोड़ रुपये</span>, <span>मत्स्य पालन विभाग के बजट को 144 फीसदी बढ़ाकर 219 करोड़ रुपये तथा सहकारिता क्षेत्र के बजट को 59 फीसदी बढ़ाकर 1255 करोड़ रुपये करने का ऐलान किया। बजट में सरकार ने किसानों को मिलने वाली विभिन्न अनुदान राशियों को बढ़ाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p><strong>कृषि व संबद्ध क्षेत्रों से जुड़ी अहम घोषणाएं </strong></p>
<ol>
<li><strong>महिला किसानों</strong> को डेयरी व अन्य कार्यों के लिए एक लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण दिया जाएगा</li>
<li><strong>देसी गाय</strong> खरीदने के लिए अनुदान 25 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये होगा</li>
<li>धान की खेती छोड़ने वाले किसानों को प्रति एकड़ 7000 रुपये से बढ़ाकर <strong>8000 रुपये</strong> अनुदान दिया जाएगा</li>
<li><strong>धान की सीधी बुवाई</strong> (डीएसआर) <span>के लिए अनुदान प्रति एकड़ 4000 रुपये से बढ़ाकर 4500 रुपये </span></li>
<li><strong>पराली प्रबंधन</strong> के लिए किसानों को प्रति एकड़ 1000 रुपये के अनुदान को बढ़ाकर 1200 रुपये किया</li>
<li>एक लाख एकड़ में<strong> प्राकृतिक खेती</strong> का लक्ष्य, <span>प्राकृतिक खेती योजना के लिए दो एकड़ भूमि की सीमा को घटाकर एक एकड़ किया</span></li>
<li>फरीदाबाद, <span>रेवाड़ी और कैथल में लागू होगा <strong>बागवानी मिशन</strong></span></li>
<li>सभी जिलों में <strong>बीज परीक्षण लैब</strong> की स्थापना की जाएगी</li>
<li><strong>यूरिया और डीएपी</strong> की बिक्री को मेरी फसल-<span>मेरा ब्यौरा पोर्टल से जोड़ा जाएगा</span></li>
<li>अंबाला में लीची, <span>यमुनानगर में स्ट्रोबेरी और हिसार में खजूर के लिए उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना होगी </span></li>
<li>पलवल जिले में <strong>बागवानी अनुसंधान केंद्र</strong> स्थापित किया जाएगा</li>
<li>प्रदेश के हर ब्लॉक में <strong>दूध संग्रह केंद्र</strong> तथा हर जिले में शीतलन केंद्र बनाया जाएगा</li>
<li>22 जिलों के 400 बागवानी कलस्टर में जापान सरकार की सहायता से <strong>सतत बागवानी प्रोजेक्ट </strong>शुरू किया जाएगा। इसके लिए 138 करोड़ रुपये का प्रावधान</li>
<li>गुरुग्राम में अत्याधुनिक <strong>फूलमंडी</strong> की स्थापना<span>&nbsp;तथा यमुनानगर में एक लाख टन की क्षमता का <strong>सायलो</strong> बनाया जाएगा</span></li>
<li>हर जिले में एक<strong> गौ अभयारण्य</strong> बनाया जाएगा</li>
<li><strong>पशुधन बीमा</strong> योजना के तहत अधिकतम 5 पशुओं की बजाय 10 पशुओं का बीमा होगा</li>
<li>सिरसा और भिवानी में सफेदा झींगा व मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत <strong>एक्वा पार्क</strong> उत्कृष्टता केंद्र स्थापित होंगे</li>
<li>प्रदेश में 750 हरित स्टोर खोले जाएंगे</li>
<li>प्रदेश में 350 नए वीटा बूथ खोले जाएंगे</li>
<li>हिसार में <strong>अमरूद</strong> के लिए अत्याधुनिक प्रसंस्करण व पैकेजिंग प्लांट स्थापित होगा</li>
<li>सिरसा में <strong>किन्नू</strong> के लिए जूस प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना होगी</li>
<li><strong>मोरनी</strong> पहाड़ी क्षेत्र में किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशेष योजना बनाई जाएगी</li>
<li><strong>मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक प्रोत्साहन योजना</strong> के तहत 70 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।</li>
<li>राज्य में 3 लाख टन क्षमता के नए <strong>गोदाम</strong> बनाए जाएंगे</li>
<li><strong>गन्ना कटाई</strong> के लिए हारवेस्टर मशीन पर मिलेगी सब्सिडी</li>
</ol>
<p></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67d83555ee05e.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p></p>
<p><strong>ग्रामीण विकास</strong></p>
<ol>
<li>प्रत्येक गांव में <strong>महिला चौपाल</strong> बनाने के लिए पहले चरण में 754 गांवों में महिला चौपाल निर्माण</li>
<li>गांव के नियोजित विकास के लिए 21 बड़े गांवों में पायलट परियोजना के तौर पर <strong>महाग्राम-महायोजना</strong> तैयार की जाएगी</li>
<li>ऐसे 10 गांव-कस्बों में जहां 10 किलोमीटर तक कोई सरकारी खेल स्टेडियम नहीं है वहां <strong>नए स्टेडियम</strong> बनवाए जाएंगे</li>
<li>हर गांव में एक गली का <strong>स्मार्ट गली</strong> के रूप में कायाकल्प किया जाएगा</li>
<li>1000 से अधिक आबादी वाली पंचायतों में <strong>कच्ची फिरनियों</strong> को पक्का किया जाएगा</li>
<li>प्रदेश में 2200 <strong>नए अमृत सरोवर</strong> बनेंगे</li>
<li>गांवों की सड़कों व अमृत सरोवरों पर लगेंगी <strong>20 हजार लाइटें</strong></li>
<li>64 करोड़ रुपये की राशि से गांवों में 600 से ज्यादा <strong>अधूरे भवनों</strong> का निर्माण पूरा किया जाएगा</li>
</ol>
<p></p>
<p>कृषि क्षेत्र के लिए छह <strong>नीतिगत कदमों</strong> का ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि एफपीओ से माध्यम से बागवानी को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही <strong>नई बागवानी नीति </strong>लाई जाएगी। किसानों को <strong>नकली बीज व कीटनाशक</strong> बेचने वालों के चंगुल से बचाने के लिए इसी सत्र में एक <strong>विधेयक</strong> लेकर आएंगे। <strong>गोबर खाद</strong> को प्रोत्साहन देने के लिए नई नीति बनाई जाएगी। <strong>बकरी और भेड़</strong> की अच्छी नस्लें किसानों को उपलब्ध करवाने के लिए एक <strong>नई योजना</strong> शुरू की जाएगी। &nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री नायब सैनी ने <strong>विकसित हरियाणा </strong>के संकल्प को साकार करने के लिए&nbsp;के लिए <strong>6 अहम प्रस्ताव</strong> रखे, <span>जिनमें भावी चुनौतियों और संभावनाओं के लिए <strong>डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर</strong> नाम से नए विभाग का गठन</span>, <strong><span>हरियाणा </span>AI <span>मिशन</span></strong> की स्थापना, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए निजी निवेशकों को 2000 करोड़ रुपये का <strong>फंड ऑफ फंड्स</strong> बनाने के लिए प्रोत्साहित करना, युवाओं को नशे के जंजाल से बचाने के लिए <strong>संकल्प</strong> नाम से नया प्राधिकरण बनाना, युवाओं को <strong>अंतरराष्ट्रीय रोजगार</strong> दिलवाना तथा <strong>मिशन हरियाणा-2027</strong> के तहत राज्य की जीडीपी को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए प्रभावी योजना बनाना शामिल है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा बजट में महिलाओं को 2100 रुपये प्रतिमाह देने का ऐलान, जानिए कृषि क्षेत्र से जुड़ी अहम घोषणाएं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67d8353929beb.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तमिलनाडु में 45,661 करोड़ का कृषि बजट, धान के लिए विशेष पैकेज, गन्ना किसानों को प्रोत्साहन सहित कई घोषणाएं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/45661-crore-agriculture-budget-in-tamil-nadu-special-package-for-paddy-incentives-for-sugarcane-farmers-and-new-initiatives.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 16 Mar 2025 11:21:57 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/45661-crore-agriculture-budget-in-tamil-nadu-special-package-for-paddy-incentives-for-sugarcane-farmers-and-new-initiatives.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>तमिलनाडु सरकार ने अपना पांचवां कृषि बजट पेश करते हुए कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए कुल आवंटन में 2025-26 <span>वित्त वर्ष के लिए </span>8% <span>की वृद्धि की है। राज्य का कृषि बजट पिछले वर्ष के </span>42,282 <span>करोड़ रुपये से बढ़ाकर </span>45,661 <span>करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसमें किसानों की आय</span>, <span>फसल विविधीकरण</span>, <span>प्राकृतिक खेती</span>, <span>मशीनीकरण और नई पहलों पर जोर दिया गया है।</span></p>
<p>तमिलनाडु के कृषि मंत्री <strong>एम.आर.के. पन्नीरसेल्वम</strong> ने 29 <span>गैर-कावेरी डेल्टा जिलों में धान का क्षेत्र और खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिए </span>102 <span>करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की घोषणा की। इस पैकेज में मशीन प्लांटिंग और गुणवत्तापूर्ण बीजों पर सब्सिडी शामिल है। इसी तरह</span>, <span>कुरुवई मौसम के दौरान खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिए डेल्टा जिलों के लिए </span>58 <span>करोड़ रुपये का पैकेज दिया गया है।</span></p>
<p><strong>किसानों को अंतरराष्ट्रीय तकनीकों का ज्ञान</strong><br /><span>तमिलनाडु सरकार </span>100 <span>प्रगतिशील किसानों को जापान</span>, <span>चीन और वियतनाम की यात्रा करवाएगी ताकि वे खेती के नए तौर-तरीकों और तकनीकों को अपना सकें। इसके लिए सरकार ने </span>2 <span>करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।</span></p>
<p><strong>गन्ना किसानों को 349 रुपये</strong><strong>/</strong><strong>टन प्रोत्साहन </strong><br /><span>तमिलनाडु सरकार ने गन्ना किसानों को </span>349 <span>रुपये प्रति टन का विशेष प्रोत्साहन देने की घोषणा की है जो केंद्र सरकार द्वारा तय उचित और लाभकारी मूल्य (</span>FRP) <span>के अतिरिक्त होगा। इससे किसानों को गन्ने का भाव </span>3,500 <span>रुपये प्रति टन मिल सकेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने </span>297 <span>करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है</span>, <span>जिससे </span>1.3 <span>लाख गन्ना किसान लाभान्वित होंगे। </span></p>
<p><strong>कृषि मशीनीकरण के लिए </strong><strong>215 <span>करोड़ रुपये</span></strong><br /><span>खेती के आधुनिकीकरण के लिए तमिलनाडु सरकार </span>130 <span>कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करेगी</span>, <span>जिन्हें </span>10.5 <span>करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। कृषि मशीनीकरण योजना के तहत </span>215.80 <span>करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे</span>, <span>जिससे </span>17,000 <span>किसानों को लाभ मिलेगा। छोटी धान रोपण मशीनों और पावर वीडर पर सब्सिडी बढ़ाकर क्रमशः </span>1.7 <span>लाख रुपये और </span>85,000 <span>रुपये कर दी गई है।</span></p>
<p><strong>1,000 <span>मुख्यमंत्री किसान सेवा केंद्र</span></strong><br /><span>किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ और खेती से जुड़ी जानकारी व सहायता देने के लिए राज्य में </span>1,000 <span>मुख्यमंत्री किसान सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक केंद्र पर </span>10-20 <span>लाख रुपये का खर्च आएगा</span>, <span>जिसमें </span>30% <span>यानी </span>3-6 <span>लाख रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। इस पहल के लिए </span>42 <span>करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। ये मुख्यमंत्री किसान सेवा केंद्र किसानों को बीज</span>, <span>उर्वरक</span>, <span>विशेषज्ञ सलाह और आधुनिक कृषि तकनीकों तक पहुंच प्रदान करेंगे। </span></p>
<p><strong>तमिलनाडु कृषि वानिकी नीति</strong><br /><span>तमिलनाडु सरकार व्यावसायिक रूप से मूल्यवान पेड़ों के प्लांटेशन को बढ़ावा देने के लिए तमिलनाडु कृषि वानिकी नीति लेकर आएगी। इस नीति के तहत टिंबर पंजीकरण</span>, <span>कटाई</span>, <span>परिवहन और बिक्री की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा।</span></p>
<p><strong>पहाड़ी किसानों के लिए नई योजना</strong><br /><span>पहाड़ी किसानों के लिए एक विशेष योजना लागू की जाएगी</span>, <span>जिसके लिए कृषि बजट में </span>22.80 <span>करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह योजना </span>20 <span>पवर्तीय जिलों के </span>63,000 <span>किसानों को लाभान्वित करेगी जिससे मिलेट खेती</span>, <span>इनपुट वितरण</span>, <span>सब्जी उत्पादन</span>, <span>मशीनीकरण</span>, <span>मूल्य संवर्धन और सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा दिया जाएगा। &nbsp;</span></p>
<p><strong>तेल बीज एवं मिलेट मिशन</strong></p>
<ul>
<li><strong>तमिलनाडु तेल बीज मिशन:</strong> 108.06 <span>करोड़ रुपये का बजट</span>, 90 <span>हजार किसानों को लाभ</span></li>
<li><strong>तमिलनाडु मिलेट मिशन:</strong> मिलेट की खेती और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए 55.44 <span>करोड़ रुपये </span></li>
<li><strong>पोषण कृषि मिशन:</strong> सब्जियां, <span>फल</span>, <span>दालें और छोटे अनाज उत्पादन बढ़ाने के लिए </span>125 <span>करोड़ रुपये</span></li>
</ul>
<p><strong>फसल बीमा योजना</strong><br /><span>सरकार फसल बीमा योजना के तहत </span>841 <span>करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गय है</span>, <span>जिससे </span>35 <span>लाख एकड़ कृषि भूमि कवर होगी और किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाया जाएगा। </span></p>
<p><strong>मक्का उत्पादन वृद्धि</strong><br /><span>मक्का उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए </span>40.27 <span>करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया</span>, <span>जिससे </span>1.87 <span>लाख एकड़ भूमि वाले </span>79,000 <span>किसानों को लाभ होगा।</span></p>
<p><strong>प्राकृतिक खेती को बढ़ावा</strong><br /><span>तमिलनाडु के </span>37 <span>जिलों में दो साल का राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन लागू किया जाएगा</span>, <span>जिसके लिए </span>12 <span>करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इस योजना के तहत प्राकृतिक खेती के क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे</span>, <span>जिससे </span>7,500 <span>किसानों को लाभ मिलेगा।</span></p>
<p><strong>तमिलनाडु काजू बोर्ड</strong><br /><span>काजू आधारित उद्योगों और श्रमिकों के कल्याण के लिए </span>10 <span>करोड़ रुपये की लागत से तमिलनाडु काजू बोर्ड स्थापित किया जाएगा।</span></p>
<p><strong>अनुसूचित जाति/जनजाति किसानों के लिए बढ़ी हुई सब्सिडी</strong><br />SC/ST <span>समुदाय के लघु और सीमांत किसानों के लिए सब्सिडी बढ़ाकर </span>60-70% <span>कर दी गई है। इसके लिए सरकार ने </span>21 <span>करोड़ रुपये आवंटित किए हैं</span>, <span>जिससे एकीकृत कृषि प्रणाली</span>, <span>पॉलीहाउस</span>, <span>सोलर ड्रायर और कृषि उपकरण जैसी योजनाएं शामिल की गई हैं।</span></p>
<p><strong>कृषि अवसंरचना विकास</strong><br />"<span>कलैगनार ऑल विलेज इंटीग्रेटेड एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट प्रोग्राम" के तहत </span>269.50 <span>करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी गई है जिससे </span>2,338 <span>ग्राम पंचायतों में कृषि से जुड़े बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। </span></p>
<p><strong>बीज विकास के लिए 250 करोड़ </strong><br /><span>राज्य में सात बीज प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जाएंगी</span>, <span>जिसमें </span>15.05 <span>करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। </span>7,000 <span>मीट्रिक टन बीज खरीदे और वितरित किए जाएंगे। तमिलनाडु राज्य बीज विकास एजेंसी </span>39,500 <span>मीट्रिक टन उच्च उपज वाले बीज वितरित करेगी</span>, <span>जिसके लिए </span>250 <span>करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।</span></p>
<p><strong>वैकल्पिक फसल खेती योजना</strong><br /><span>जलवायु परिवर्तन से निपटने और मृदा उर्वरता बढ़ाने के लिए मिलेट</span>, <span>दालें और तिलहन जैसी कम जल खपत वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए </span>12.50 <span>करोड़ रुपये की लागत से एक लाख एकड़ भूमि कवर की जाएगी।</span></p>
<p><strong>अन्य घोषणाएं:</strong></p>
<ul>
<li><strong>"<span>मनुईर काथु मनुईर कापोम" योजना:</span></strong> मृदा संरक्षण और स्वास्थ्य सुधार के लिए 142 <span>करोड़ रुपये</span></li>
<li><strong>सौर पंप सेट:</strong> 1,000 <span>किसानों को </span>24 <span>करोड़ रुपये की लागत से सौर पंप स्थापित करने पर </span>70% <span>तक सब्सिडी</span></li>
<li><strong>मिनी डेयरी योजना:</strong> 5,000 <span>दुग्ध उत्पादकों के लिए </span>4% <span>ब्याज सब्सिडी</span></li>
</ul>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ तमिलनाडु में 45,661 करोड़ का कृषि बजट, धान के लिए विशेष पैकेज, गन्ना किसानों को प्रोत्साहन सहित कई घोषणाएं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फिर गिरे प्याज के दाम, किसान नेता राजू शेट्टी ने केंद्र से की निर्यात शुल्क हटाने की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/onion-prices-fall-again-farmer-leader-raju-shetty-raises-demand-to-reduce-export-duty.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 10 Mar 2025 16:47:56 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/onion-prices-fall-again-farmer-leader-raju-shetty-raises-demand-to-reduce-export-duty.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>इस बार देश में प्याज की अच्छी फसल हुई है, लेकिन </span><span>महाराष्ट्र में किसानों को प्याज का सही दाम नहीं मिल पा रहा है। नए सीजन की फसल बाजार में आने के साथ ही प्याज के दाम 10-12 रुपये किलो तक गिर गये हैं। ऐसे में </span>प्याज पर निर्यात शुल्क घटाने की मांग उठ रही है। स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष और महाराष्ट्र से पूर्व सांसद<strong> राजू शेट्टी</strong> ने केंद्र सरकार से प्याज पर निर्यात शुल्क समाप्त करने की मांग की है। फिलहाल प्याज पर 20 फीसदी निर्यात शुल्क लागू है। आज <span>महाराष्ट्र विधानसभा में भी प्याज किसानों का मुद्दा उठा। महाराष्ट्र की प्याज मंडियों में किसानों का आक्रोश देखा जा रहा है। सोमवार को नासिक जिले की लासलगांव मंडी में गुस्साए किसानों प्याज की खरीद बंद करा दी।&nbsp; &nbsp;</span></p>
<p>केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री <strong>पीयूष गोयल</strong> को लिखे पत्र में राजू शेट्टी ने कहा कि इस साल प्याज की बुवाई का क्षेत्र करीब 30 फीसदी बढ़ा है और उत्पादन लगभग 20 फीसदी बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। अगले 15 दिनों में नए सीजन का प्याज बाजार में आने के साथ ही प्याज की कीमतों में गिरावट आ सकती है। ऐसे में प्याज उत्पादक किसानों के हितों को देखते हुए सरकार को प्याज पर निर्यात शुल्क समाप्त करना चाहिए। इससे प्याज की कीमतों में गिरावट को रोकने तथा किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी। राजू शेट्टी ने <strong>रूरल वॉयस&nbsp;</strong>को बताया कि इस साल प्याज की बेहतर फसल है। ऐसे में निर्यात पर शुल्क का कोई औचित्य नहीं है। इसके जारी रहने से प्याज किसानों को कीमतों में गिरावट के रूप में भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा।</p>
<p>शेट्टी ने प्याज किसानों की दिक्कतों की तरफ केंद्र सरकार का ध्यान दिलाते हुए कहा कि अगर अधिक उत्पादन के कारण प्याज की कीमतों में गिरावट जारी रहती है तो किसान अगले सीजन में प्याज की बजाय अन्य फसलों की बुवाई करने पर मजबूर हो जाएंगे।&nbsp;फिलहाल सोयाबीन में इसी तरह की हालत हैं क्योंकि किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बेचने पर मजबूर होना पड़ा। अगर ऐसे ही चलता रहा तो अगले सीजन में सोयाबीन के किसान भी अन्य फसलों का रुख कर सकते हैं<span>। </span>इसलिए सरकार को तुरंत प्याज पर निर्यात शुल्क कम करना चाहिए और किसानों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाने चाहिए। &nbsp;</p>
<p><strong>प्याज निर्यात पर पाबंदियां</strong></p>
<p>पिछले साल सितंबर में&nbsp;<span>महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने प्याज पर 550 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) हटा दिया था और निर्यात शुल्क को 40 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी कर दिया था। केंद्र सरकार ने प्याज उत्पादन में गिरावट की आशंका को देखते हुए दिसंबर, 2023 में प्याज निर्यात पर रोक लगाई थी। लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले 4 मई को प्याज निर्यात खोल दिया गया। लेकिन साथ ही 550 डॉलर प्रति टन का एमईपी और 40 फीसदी निर्यात </span><span></span><span>शुल्क लगा दिया था।&nbsp;</span><span></span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ फिर गिरे प्याज के दाम, किसान नेता राजू शेट्टी ने केंद्र से की निर्यात शुल्क हटाने की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा सीएम सैनी ने कहा, पंजाब भी एमएसपी पर खरीदे सारी फसलें, मान सरकार पर निशाना साधा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-cm-saini-said-punjab-should-also-buy-all-crops-on-msp-targeted-mann-government.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 07 Mar 2025 15:31:47 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-cm-saini-said-punjab-should-also-buy-all-crops-on-msp-targeted-mann-government.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह हरियाणा में किसानों की सभी फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी जा रही है, <span>उसी तरह</span> पंजाब सरकार भी एमएसपी पर फसल खरीदने का ऐलान करे। &nbsp;</p>
<p>चंडीगढ़ में संवाददाताओं से बात करते हुए मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि हरियाणा सरकार हर वह कदम उठा रही है, जिससे किसानों को मजबूत किया जा सके। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा सरकार किसानों की सभी फसलों को एमएसपी पर खरीद रही है।</p>
<p>किसान आंदोलन के बारे में पूछे गये सवाल के जवाब में सीएम सैनी ने कहा कि पंजाब के सीएम को किसानों से बातचीत करनी चाहिए और उन्हें भरोसा दिलाना चाहिए कि उनकी फसलें एमएसपी पर खरीद जाएगी। उन्होंने कहा, "मैं पंजाब के सीएम से कहना चाहता हूं कि किसानों पर लाठियां न चलाएं, बल्कि उन्हें सशक्त बनाएं।"</p>
<p>मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि वह किसान के बेटे हैं और किसानों का दर्द समझते हैं। पहले हरियाणा में 14 फसलों की खरीद एमएसपी पर होती थी, लेकिन अब हम सभी फसलों को एमएसपी पर खरीद रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस झूठ बोलती है और लोगों को इस बात का एहसास हो गया है। इसलिए देश की जनता ने इस पार्टी को नकार दिया है।</p>
<p>गौरलतब है कि विभिन्न मांगों को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और संयुक्त किसान मोर्चा के बीच गत सोमवार को वार्ता टूटने के बाद पंजाब में किसान नेताओं पर छापेमारी और हिरासत में लेने की कार्रवाई की गई, <span>जिसकी किसान संगठनों और राजनीतिक दलों ने कड़ी निंदा की है। हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर किसान पिछले साल भर से एमएसपी की कानूनी गांरटी समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उन्हें दिल्ली कूच करने की अनुमति नहीं दी।&nbsp; &nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67cac4021c21d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा सीएम सैनी ने कहा, पंजाब भी एमएसपी पर खरीदे सारी फसलें, मान सरकार पर निशाना साधा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब: चंडीगढ़ कूच से रोका तो धरने पर बैठे किसान, उगराहां समेत कई नेता गिरफ्तार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-stage-dharna-after-being-stopped-from-marching-to-chandigarh-ugrahan-and-several-leaders-detained.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 05 Mar 2025 19:24:28 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-stage-dharna-after-being-stopped-from-marching-to-chandigarh-ugrahan-and-several-leaders-detained.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>संयुक्त किसान मोर्चा</strong> के आह्वान पर विभिन्न मांगों को लेकर पंजाब के किसान संगठनों ने बुधवार को चंडीगढ़ कूच का प्रयास किया। लेकिन पुलिस ने जगह-जगह बैरीकेड्स और चेक पॉइंट लगाकर किसानों को चंडीगढ़ जाने से रोका। इस दौरान बीकेयू (एकता उगराहां) के नेता जोगिंदर सिंह उगराहां समेत कई किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया और बहुत से किसान नेता नजरअंद हैं। नाराज किसानों ने पंजाब में कई स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन और चक्का जाम किया। किसानों को जहां रोका गया, वहीं धरने पर बैठ गये। &nbsp;</p>
<p><strong>एसकेएम</strong> की ओर से जारी बयान के मुताबिक, पुलिस ने किसानों को चंडीगढ़ जाने से रोका तो पंजाब में किसानों ने 35 से अधिक स्थानों पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। एक दिन पहले पंजाब पुलिस द्वारा 350 किसान नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद आज के विरोध-प्रदर्शन में किसानों ने बड़ी तादाद में भागीदारी की। लेकिन किसानों ने सड़क या रेल को अवरुद्ध नहीं किया, जैसा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक दिन पहले आरोप लगाया था।&nbsp;</p>
<p>एसकेएम ने कहा कि पंजाब पुलिस ने आज जोगिंदर सिंह उगराहां, मुकेश चंद्र शर्मा समेत कई किसान नेताओं को गिरफ्तार किया है। एसकेएम ने बलबीर सिंह राजेवाल और रुलदू सिंह मानसा समेत बुजुर्ग नेताओं को पुलिस हिरासत में रखने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान की कड़ी निंदा की।&nbsp;</p>
<p>इस बीच, रोपड़ रेंज के डीआईजी <strong>हरचरण सिंह भुल्लर</strong> ने कहा कि पंजाब में स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण है। किसान जहां-जहां से आए हैं, वहां की पुलिस ने उन्हें वहीं रोक दिया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67c85d11cf5f5.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>एसकेएम</strong> ने 5 मार्च से चंडीगढ़ में एक सप्ताह के धरने का ऐलान किया था। सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ वार्ता टूटने के बाद प्रदेश भर में किसान नेताओं पर छापेमारी शुरू हो गई और कई किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया। इसके बाद भी एसकेएम के नेता 5 मार्च के &ldquo;चंडीगढ़ चलो&rdquo; के आह्वान पर अडिग रहे।</p>
<p>बुधवार सुबह से ही किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर चंडीगढ़ कूच करना शुरू कर दिया था। लेकिन पुलिस ने किसानों को चंडीगढ़ जाने की अनुमति नहीं दी। चंडीगढ़ जाने वाले मार्गों पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और विभिन्न चेक पॉइंटों पर किसानों को रोका गया। चंडीगढ़ शहर के सभी एंट्री पॉइंट पर सख्त नाकेबंदी की गई। किसानों को रोकने के लिए कई रास्तों पर रेत लदे टिपर भी खड़े किए गए।</p>
<p>संगरूर में किसान नेता <strong>जोगिंदर सिंह उगराहां </strong>को चंडीगढ़ जाते समय हिरासत में लिया गया। उन्हें छाजली पुलिस स्टेशन ले जाया गया। जोगिंदर सिंह उगराहां ने किसानों से अपील की है कि उनहें जहां भी रोका जाए, वहीं शांतिपूर्ण ढंग से सड़क किनारे बैठकर विरोध जताएं। एसकेएम के नेता <strong>रमिंदर सिंह पटियाला</strong> ने पंजाब सरकार के रवैये को अघोषित आपातकाल करार देते हुए कहा कि पुलिस ने कई जगह किसानों को रोका और हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गये किसान नेताओं में बीकेयू राजेवाल के प्रदेश उपाध्यक्ष<strong> मुकेश चंद्र शर्मा</strong> और बीकेयू शादीपुर के अध्यक्ष <strong>बूटा सिंह शादीपु</strong>र भी शामिल हैं।</p>
<p>बीकेयू (शहीद भगत सिंह) के नेता <strong>तेजवीर सिंह</strong> ने बताया कि पंजाब पुलिस ने एसकेएम के चंडीगढ़ कूच को नाकाम करने के लिए किसान मजदूर मोर्चा (KMM) के नेताओं को भी गिरफ्तार किया है। हमारी मांगे सांझी है। हम एक साथ, कन्धे से कन्धा मिलाकर संघर्ष करेंगे। अमृतसर में किसान मजदूर मोर्चा ने सीएम भगवंत मान का पुतला फूंका। किसान नेता <strong>सरवन सिंह पंधेर</strong> ने कहा कि राज्य सरकार का रवैया और अहंकार निंदनीय है। पंजाब के लोगों द्वारा इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67c85d40999bb.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>बीकेयू डकौंदा ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनके अध्यक्ष <strong>मंजीत सिंह धनेर</strong> के साथ मारपीट की। जब पुलिस ने रायकोट के भैणी धरेरा गांव के पास धनेर को गिरफ्तार करने की कोशिश की, तो किसान इकट्ठा हो गए और उन्हें धनेर को ले जाने नहीं दिया।</p>
<p>मोगा में क्रांतिकारी किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष <strong>जतिंदर सिंह</strong> ने बताया कि जब वे चंडीगढ़ जा रहे थे तो पंजाब पुलिस ने उन्हें अजीतवाल में रोक लिया और कई किसानों को हिरासत ले लिया। मोगा के डीसी कॉम्प्लेक्स पर किसानों ने धरना दिया। इस दौरान पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की हो गई। मोहाली में जुटे करीब 50 किसानों को भी हिरासत में लिया गया।</p>
<p>समराला-चंडीगढ़ रोड पर भी पुलिस ने किसानों को चंडीगढ़ जाने से रोका और कई लोगों को हिरासत में लिया। संगरूर, तरनतारन, अमृतसर और अन्य जिलों में भी किसानों ने विरोध-प्रदर्शन किया। बीकेयू उगराहां के महासचिव <strong>सुखदेव सिंह कोकरीकलां</strong> ने कहा कि हर जगह भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। हमें अपने ही राज्य की राजधानी में जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67c85ce183874.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>सीएम के बयान से गुस्साए किसान&nbsp;</strong></p>
<p>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को किसान संगठनों पर आए दिन विरोध-प्रदर्शन करने और पंजाब को "धरनों का प्रदेश" बनाने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री मान ने कहा कि उनकी सरकार किसानों से बातचीत के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन आंदोलन के नाम पर जनता को परेशान करना सही नहीं है।</p>
<p><strong>एसकेएम की मांगें </strong></p>
<p>एसकेएम ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार एमएसपी की कानूनी गारंटी, राज्य की कृषि नीति को लागू करने, राज्य सरकार द्वारा एमएसपी पर बासमती, मक्का, मूंग, आलू सहित छह फसलों की खरीद करने तथा कृषि विपणन पर राष्ट्रीय नीति ढांचे के केंद्र के मसौदे को वापस लेने समेत 18 मांगें रखी हैं। इनमें "जबरन" अधिग्रहण रोकने तथा 2020-21 में किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों को नौकरी और मुआवजा देने की मांग भी शामिल है।</p>
<p><strong>किसान नेताओं पर छापेमारी </strong></p>
<p>मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ सोमवार को वार्ता टूटने के बाद रात में ही पंजाब पुलिस ने किसान नेताओं पर छापेमारी शुरू कर दी थी। इस दौरान किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया गया, जबकि कुछ को नजरबंद कर दिया। जिन किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया, उनमें बलबीर सिंह राजेवाल, रुलदू सिंह मानसा, जंगवीर सिंह चौहान, गुरमीत सिंह भाटीवाल, नछत्तर सिंह जैतों, वीरपाल सिंह ढिल्लों, बिंदर सिंह गोलेवाल, गुरनाम भीखी और हरमेश सिंह ढेसी शामिल हैं। पुलिस कार्रवाई को देखते हुए कई किसान नेता इधर-उधर हो गए।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब: चंडीगढ़ कूच से रोका तो धरने पर बैठे किसान, उगराहां समेत कई नेता गिरफ्तार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कल भगवंत मान से वार्ता टूटी, आज किसान नेताओं पर छापेमारी, कई हिरासत में]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/talks-with-bhagwant-mann-broke-down-yesterday-raids-on-farmer-leaders-today-many-detained.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 04 Mar 2025 12:48:28 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/talks-with-bhagwant-mann-broke-down-yesterday-raids-on-farmer-leaders-today-many-detained.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में किसानों<span>&nbsp;और राज्य सरकार के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। सोमवार को एसकेएम के नेताओं के साथ मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> की बैठक बेनतीजा रही। किसान नेताओं का कहना है कि </span>&lsquo;<span>नाराज</span>&rsquo; <span>मुख्यमंत्री बैठक बीच में ही छोड़कर चले गये। मंगलवार सुबह से ही किसान नेताओं के घरों पर पुलिस की छापेमारी और हिरासत में लिए जाने की खबरें आ रही हैं। किसानों की तरफ से पुलिस कार्रवाई का विरोध किया जा रहा है।</span></p>
<p>एसकेएम ने अपनी मांगों को लेकर 5 <span>मार्च से चंडीगढ़ में पक्का मोर्चा लगाने </span>का ऐलान किया है। लेकिन इससे पहले ही पंजाब भर में पुलिस ने किसान नेताओं पर छापेमारी शुरू कर दी। कल रात से ही पुलिस किसान नेताओं के घर पहुंचने लगी थी। इस दौरान कई किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया या फिर नजरबंद किया है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>बीकेयू (लाखोवाल) के महासचिव <strong>हरिंदर सिंह लाखोवाल</strong> ने बताया कि पंजाब पुलिस ने सुबह-सुबह किसान नेताओं के घरों पर छापेमारी की है। उनके आवास पर भी पुलिसकर्मी तैनात हैं। लाखोवाल ने कहा कि सरकार किसानों की आवाज दबाना चाहती है। बीकेयू (एकता उगराहां) के नेता <strong>जोगिंदर सिंह उगराहां</strong> ने कहा कि हमारे प्रदर्शन को विफल करने के लिए बड़े पैमाने पर छापेमारी की जा रही है। लेकिन पुलिस कार्रवाई के बावजूद विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा। किसान नेता <strong>हरमीत सिंह कादियान</strong> ने सवाल उठाया कि क्या आज पंजाब में भी किसान अपने अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठा सकते?</p>
<p>पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए किसान नेताओं में रुलदू सिंह मानसा, प्रेम सिंह भंगू, परमदीप सिंह बैदवान सहित कई लोग शामिल बताए जा रहे हैं। <span>जिन किसान नेताओं पर पुलिस ने दबिश दी या हिरासत में लिया, उनमें बीकेयू उगराहां,</span>&nbsp;बीकेयू राजेवाल, बीकेयू लाखोवाल, बीकेयू कादियान, कीर्ति किसान यूनियन, बीकेयू डकौंदा, किसान सभा, बीकेयू क्रांतिकारी आदि कई किसान यूनियनों के लोग शामिल हैं। पुलिस कार्रवाई की भनक लगने से कई किसान नेता घरों पर नहीं मिले।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x_67c6a9af9ec0f.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>बैठक छोड़कर गये सीएम मान&nbsp;</strong></p>
<p>किसान नेता <strong>बलबीर सिंह राजेवाल</strong> ने कहा कि पहले की सरकारों के साथ भी बैठक होती रहती थी, <span>लेकिन </span>पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने ऐसा व्यवहार किया है। सोमवार की बैठक में मान बिना किसी बात के भड़क गये। ऐसा बर्ताव सीएम को शोभा नहीं देता है। सीएम ने हमसे पूछा कि हम 5 मार्च को क्या करेंगे। हमने जवाब भी नहीं दिया, लेकिन वे नाराज हो गए और "जाओ, करो जो करना है" कहकर चले गये।</p>
<p><strong>जोगिंदर सिंह उगराहां</strong> ने कहा कि अगर सीएम मान के पास समय नहीं था, तो उन्हें पहले ही बता देना चाहिए था। किसानों की 18 मांगों में से आधी मांगों पर ही चर्चा हो पायी थी, लेकिन तभी मान ने कहा कि उनकी आंख में इंफैक्शन है, जिस कारण उन्हें जाना है।&nbsp;</p>
<p>उधर, <span>मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> का कहना है कि किसानों से बातचीत के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले हैं</span>, लेकिन आंदोलन के नाम पर जनता को असुविधा और परेशान करने से बचना चाहिए। एक बयान में मान ने कहा कि &nbsp;<span>विरोध</span>-<span>प्रदर्शन किसानों का लोकतांत्रिक अधिकार है</span>, <span>लेकिन उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि इससे राज्य को कितना बड़ा नुकसान हो सकता है।</span> उन्होंने किसानों से अपील की कि वे ऐसे तरीके न अपनाएं जो समाज में मतभेद पैदा करते हैं।</p>
<p><strong>एसकेएम की मांगें</strong></p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा राज्य सरकार द्वारा एमएसपी पर छह फसलों की खरीद, <span>एमएसपी की कानूनी गारंटी</span>, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार एमएसपी के निर्धारत, <span>राज्य की कृषि नीति को लागू करने</span>, <span>जबरन भूमि अधिग्रहण रोकने सहित कई मांगों के अलावा कृषि विपणन पर राष्ट्रीय नीति ढांचे के मसौदे का विरोध कर रहा है। सोमवार की बैठक में एसकेएम की ओर से पंजाब सरकार के सामने 18 मांगों का एजेंडा रखा गया था।&nbsp;</span></p>
<p><strong>किसान नेताओं पर कार्रवाई की निंदा</strong></p>
<p>किसान नेताओं पर पुलिस कार्रवाई की विपक्षी दलों ने कड़ी निंदा की है।&nbsp;शिरोमणी अकाली दल के नेता <strong>सुखबीर सिंह बादल</strong> ने कहा कि पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसान नेताओं को धमकाया, जिन्हें कल चंडीगढ़ में बातचीत के लिए बुलाया था। आज सुबह-सुबह पुलिस ने किसान नेताओं के घरों पर छापेमारी शुरू कर दी। इस तरह के तानाशाही तरीके कभी भी अन्नदाता की आवाज को दबा नहीं सकते।&nbsp;</p>
<p>किसान मजदूर मोर्चा के नेता <strong>सरवन सिंह पंधेर</strong> ने पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र पर हमला बताया और किसान यूनियनों से एकजुटता का आह्वान किया।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय मंत्री <strong>रवनीत सिंह बिट्टू</strong> ने किसानों पर पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि भगवंत मान सरकार ने पंजाब में आपातकाल जैसे हालात बना दिए हैं। यह आम आदमी पार्टी की सरकार की किसान विरोधी मानसिकता को साफ तौर पर दर्शाता है।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कल भगवंत मान से वार्ता टूटी, आज किसान नेताओं पर छापेमारी, कई हिरासत में ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छत्तीसगढ़ में 1.65 लाख करोड़ का बजट पेश, कृषि से जुड़ी कई घोषणाएं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/budget-of-rs-1.65-lakh-crore-presented-in-chhattisgarh-many-announcements-related-to-agriculture.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 03 Mar 2025 19:04:24 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/budget-of-rs-1.65-lakh-crore-presented-in-chhattisgarh-many-announcements-related-to-agriculture.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>छत्तीसगढ़ सरकार ने सोमवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.65 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। बजट में कृषि और ग्रामीण विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। राज्य सरकार ने पेट्रोल पर वैट में कटौती का ऐलान किया है जिससे प्रदेश में 1 अप्रैल से <strong>पेट्रोल 1 रुपये सस्ता</strong> हो जाएगा।</p>
<p>छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए <strong>कृषक उन्नति योजना</strong> के लिए 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया, जिसका उद्देश्य कृषि समृद्धि को बढ़ावा देना है।&nbsp;</p>
<p>किसानों के 5 एचपी तक के कृषि पंपों को <strong>मुफ्त बिजली आपूर्ति</strong> के लिए 3,500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।&nbsp;</p>
<p>दलहन एवं तिलहन फसलों की <strong>समर्थन मूल्य पर खरीद</strong> के लिए 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।</p>
<p><strong>भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना</strong> के तहत राज्य के 5.65 लाख भूमिहीन मजदूरों को सालाना 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>फसल बीमा योजना</strong> के लिए 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में सुरक्षा मिलेगी।&nbsp;</p>
<p>मोटे अनाजों के साथ-साथ दलहन, तिलहन बीज उत्पादन एवं वितरण के लिए <strong>कृषक समग्र विकास योजना</strong> बनाई गई है। इसके लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना</strong> के तहत गांवों में सड़कों के निर्माण के लिए 845 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित।&nbsp;</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री जनमन सड़क निर्माण योजना</strong> के तहत अत्यधिक पिछड़े आदिवासी क्षेत्र को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान</p>
<p><strong>पीएम कुसुम योजना </strong>के लिए 362 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।&nbsp;</p>
<p>जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए <strong>परंपरागत कृषि योजना</strong> के तहत 20 करोड़ रुपए और <strong>ऑर्गेनिक प्रमाणीकरण</strong> के लिए 24 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।</p>
<p><strong>डेयरी समग्र विकास परियोजना</strong> के लिए 50 करोड़ रुपये आवंटित।&nbsp;</p>
<p><strong>ग्राम गौरव पथ योजना</strong> के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान</p>
<p>किसानों को सहकारी और ग्रामीण बैंकों से <strong>ब्याज मुक्त ऋण</strong> उपलब्ध कराने के लिए 8,500 करोड़ रुपये की सीमा तय की गई है, जिस पर ब्याज सब्सिडी के लिए 317 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>मत्स्य उत्पादन, डेयरी, पोल्ट्री, बकरी पालन</strong> आदि के लिए 200 करोड़ रुपये।</p>
<p>एकीकृत <strong>बगवानी</strong> के लिये 150 करोड़ रुपये का प्रावधान।</p>
<p><strong>तेन्दूपत्ता</strong> के लिए प्रति मानक बोरा 5,500 रुपये का भुगतान करने के लिए 200 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान। तेन्दूपत्ता संग्राहकों को &ldquo;चरण पादुका&rdquo; प्रदान करने के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>पीएम आवास योजना (ग्रामीण)</strong> के लिए 8500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ छत्तीसगढ़ में 1.65 लाख करोड़ का बजट पेश, कृषि से जुड़ी कई घोषणाएं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्यप्रदेश में गेहूं पर 175 रुपये बोनस, धान खरीद पर 4000 रुपये का प्रोत्साहन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/bonus-of-rs-175-on-wheat-incentive-of-rs-4000-on-purchase-of-paddy-in-madhya-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 03 Mar 2025 11:40:27 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/bonus-of-rs-175-on-wheat-incentive-of-rs-4000-on-purchase-of-paddy-in-madhya-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्यप्रदेश सरकार ने गेहूं की सरकारी खरीद पर 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का ऐलान किया है। इस तरह राज्य में किसानों से गेहूं की खरीद 2600 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर की जाएगी। जबकि केंद्र सरकार ने रबी खरीद सीजन 2025-26 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपये तय किया है।&nbsp;</p>
<p>भोपाल में रविवार को किसान आभार सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री <strong>डॉ. मोहन यादव</strong> ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के साथ है और उनके हित में निरंतर कार्य कर रही है। हम 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद रहे हैं, इसमें 175 रुपये बोनस राशि है। मुख्यमंत्री ने यह भी ऐलान किया कि सरकार वर्ष 2024 में हुई धान खरीद पर 4000 रुपये प्रति हेक्टेयर की प्रोत्साहन राशि देने जा रही है। जिन किसानों से धान की खरीद हुई है, उनके खातों में यह पैसा पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि गेहूं और धान पर दिए जा रहे प्रोत्साहन के समान ही दुग्ध उत्पादन पर भी प्रोत्साहन स्वरूप बोनस प्रदान किया जाएगा।</p>
<p><strong>गेहूं खरीद 15 मार्च से होगी</strong></p>
<p>सरकार ने 15 मार्च से गेहूं खरीद शुरू करने का निर्णय लिया है। पहले यह खरीद एक मार्च से शुरू होनी थी, लेकिन गेहूं कटाई में देरी और अनाज में नमी की अधिकता को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है।</p>
<p>मध्यप्रदेश में इस वर्ष लगभग 80 लाख टन गेहूं की खरीद का अनुमान है। इसके लिए प्रदेश में 4000 खरीद केंद्र बनाए जाएंगे। गेहूं खरीद के लिए प्रदेश में लगभग तीन लाख किसान पंजीकरण करवा चुके हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>2600 रुपए नाकाफी: जीतू पटवारी</strong></p>
<p>प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि गेहूं का 2600 रुपये दाम किसानों के लिए घाटे का सौदा है। क्योंकि खेती की लगत काफी बढ़ गई है। &nbsp;ऐसे में गेहूं के दाम 3000 रुपये से ऊपर होना चाहिए। सरकार अपने वादे से मुकर रही है। गौरतलब है कि भाजपा ने अपने संकल्प-पत्र में गेहूं का समर्थन मूल्य 2700 रुपये देने का वादा किया था।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/03/image_750x500_67c547ca6b019.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्यप्रदेश में गेहूं पर 175 रुपये बोनस, धान खरीद पर 4000 रुपये का प्रोत्साहन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में बारिश व ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान, क्षतिपूर्ति पोर्टल पर दर्ज होगा ब्योरा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/crop-loss-due-to-rain-in-haryana-details-to-be-recorded-on-compensation-portal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 27 Feb 2025 22:01:23 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/crop-loss-due-to-rain-in-haryana-details-to-be-recorded-on-compensation-portal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में बारिश और ओलावृष्टि से कई इलाकों में फसलों को नुकसान पहुंचा है। किसानों को फसल नुकसान से राहत के लिए राज्य सरकार ने क्षतिपूर्ति पोर्टल बनाया है, जिस पर किसान अपनी खराब फसल का ब्योरा खुद दर्ज कर सकते हैं।</p>
<p>पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने के कारण मौसम हरियाणा, पंजाब, दिल्ली एनसीआर और पश्चिमी यूपी में कई स्थानों पर बारिश और बूंदाबांदी हुई है। अगले दो-तीन दिन भी इन इलाकों में बारिश की संभावना है। बारिश के साथ तेज हवाएं चलने से गेहूं और सरसों की फसल गिरने का खतरा है। साथ ही ओले पड़ने की आशंका है।&nbsp;</p>
<p>हरियाणा सरकार ने जिला जींद में 20 फरवरी को हुई बारिश व ओलावृष्टि के कारण फसलों के नुकसान का ब्यौरा किसानों को क्षतिपूर्ति पोर्टल पर दर्ज कराने को&nbsp;कहा है। यह पोर्टल 10 मार्च तक खुला रहेगा। किसानों द्वारा फसलों के खराबे की जानकारी पोर्टल पर दर्ज करने के लिए क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने का अनुरोध किया गया था। इस अनुरोध पर सरकार ने निर्णय लिया है कि जिला जींद के किसान अपनी खराब फसल की जानकारी क्षतिपूर्ति पोर्टल पर 10 मार्च तक दर्ज कर सकते हैं।</p>
<p>खराब फसल की गिरदावरी करने वाले पटवारी एवं अन्य कर्मचारियों पर नुकसान के आंकलन में भेदभाव के आरोप लगते रहे हैं।&nbsp;किसानों की समस्या को समझते हुए सरकार ने क्षतिपूर्ति पोर्टल बनाकर किसानों को यह सुविधा दी कि वे खुद अपनी खराब फसल की जानकारी अपलोड कर सकते हैं। इस पोर्टल के माध्यम से मुआवजा राशि "मेरी फसल-मेरा ब्योरा" पोर्टल पर उपलब्ध करवाए गए काश्तकार के सत्यापित बैंक खाते में सीधे जमा करवाई जाती है।</p>
<p><strong>मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना&nbsp;</strong></p>
<p>हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि अब खराब मौसम से बागवानी किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने राज्य के किसानों से मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजन का लाभ उठाने का आह्वान किया है।</p>
<p>उद्यान विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक अनाज फसलों की बजाए बागवानी फसलों के लिए प्रोत्साहित करना है। "मेरी फसल मेरा ब्यौरा" पोर्टल<strong> https://fasal.haryana.gov.in</strong> पर पंजीकृत सभी किसान इस योजना के लिए नामांकन हेतु पात्र हैं।</p>
<p>राज्य के किसान स्वेच्छा से बीमा के लिए निर्धारित अंशदान की राशि देकर उक्त योजना के लिए पंजीकरण करा सकते हैं। सब्जी व मसाले की फसल का 30 हजार रुपये प्रति एकड़ तथा फलों का 40 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से बीमा किया जाता है। इसमें किसान को सब्जी व मसाले की खेती के लिए 750 रुपये तथा फलों के लिए 1000 रुपये प्रति एकड़ बीमा राशि देनी पड़ती है।</p>
<p>मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के बारे में अधिक जानकारी संबंधित जिला उद्यान अधिकारी अथवा टोल -फ्री नंबर 1800-180-2021 पर सम्पर्क कर प्राप्त कर सकते हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में बारिश व ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान, क्षतिपूर्ति पोर्टल पर दर्ज होगा ब्योरा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र में किसानों के खाते में पहुंचेंगे सालाना 15 हजार, नमो शेतकरी योजना की धनराशि 3 हजार बढ़ेगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-farmers-to-receive-rs-15000-annually-namo-shetkari-yojana-amount-will-be-9000.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 25 Feb 2025 14:57:26 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-farmers-to-receive-rs-15000-annually-namo-shetkari-yojana-amount-will-be-9000.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र में किसानों को सालाना 15 हजार रुपये किसान सम्मान निधि के तौर पर मिलेंगे। पीएम-किसान के 6 हजार रुपये के अलावा महाराष्ट्र सरकार पात्र किसानों को अपनी तरफ से सालाना 6 हजार रुपये देती है। यह धनराशि नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना के तहत दी जाती है, जिसे राज्य सरकार बढ़ाकर 9 हजार रुपये करने जा रही है।</p>
<p>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री <strong>देवेंद्र फडणवीस</strong> ने कहा कि नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना के तहत किसानों को दी जा रही सालाना 6 हजार रुपये की सहायता में 3 हजार रुपये की बढ़ोतरी की जाएगी। इस तरह दोनों योजनाओं के माध्यम से किसानों के खातों में सालाना 15 हजार रुपये जमा किए जाएंगे। इसमें से 9 हजार रुपये राज्य सरकार द्वारा और 6 हजार रुपये केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए जाएंगे।</p>
<p>पीएम-किसान की 19वीं किस्त जारी किए जाने के अवसर सोमवार को नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने पीएम-किसान की तर्ज पर नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना शुरू की है। दोनों योजनाओं में पात्र किसानों को सालाना 6-6 हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। महाराष्ट्र सरकार जल्द ही राज्य योजना में अपना योगदान 3 हजार रुपये बढ़ाकर 9 हजार रुपये करेगी, ताकि किसानों को साल में 15 हजार रुपये मिल सकें। इससे उन्हें खेती के लिए चीजें खरीदने में मदद मिलेगी।&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि यह घोषणा कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों पर आर्थिक बोझ घटाने के महाराष्ट्र सरकार के प्रयासों का हिस्सा है। इस योजना से राज्य के 91 लाख से अधिक किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचा है और उन्हें कृषि जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्काल मदद मिली है। कृषि में प्रौद्योगिकी की मदद से किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयास चल रहे हैं।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र में किसानों के खाते में पहुंचेंगे सालाना 15 हजार, नमो शेतकरी योजना की धनराशि 3 हजार बढ़ेगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में नया भू&amp;#45;कानून पारित, 11 जिलों में बाहरी लोगों के कृषि भूमि खरीदने पर रोक, जानिए और क्या बदला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/new-land-law-passed-in-uttarakhand-outsiders-banned-from-buying-agricultural-land-in-11-districts.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 22 Feb 2025 10:46:53 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/new-land-law-passed-in-uttarakhand-outsiders-banned-from-buying-agricultural-land-in-11-districts.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड में नए भू-कानून का विधेयक विधानसभा से पारित हो गया। सख्त भू-कानून के जरिए राज्य सरकार ने हरिद्वार, <span>उधमसिंहनगर को छोड़कर</span>, <span>उत्तराखंड के 11 जिलों में प्रदेश से बाहर के लोगों के लिए कृषि और उद्यान भूमि खरीदने पर रोक लगा दी है।</span>&nbsp;<span>इसके तहत मुख्य तौर पर </span>2018 <span>में त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के समय किए गए संशोधनों को समाप्त किया गया है।</span></p>
<p>उत्तराखंड में हिमाचल की तर्ज पर भू-कानून लागू करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। जमीनों की अंधाधुंध खरीद-फरोख्त और बदलती डेमोग्राफी की चिंताओं के चलते बीते डेढ़-दो साल से सख्त भू-कानून की मांग काफी जोर पकड़ गई थी। आखिरकार, <span>उत्तराखंड सरकार भू-कानून संशोधन विधेयक लेकर आई</span>, <span>जिसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐतिहासिक कदम करार दिया है।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950) संशोधन विधेयक, 2025&nbsp;</strong><span>विधानसभा में शुक्रवार को ध्वनिमत से पारित किया गया। इस विधेयक के जरिए सरकार ने मुख्य रूप से </span>2018 <span>में किए गए संशोधनों को समाप्त कर दिया है। इस तरह उत्तराखंड में फिर से कृषि और उद्यान श्रेणी की जमीन खरीदने के लिए </span>2018 <span>से पहले की कानूनी स्थिति बन गई है।</span>&nbsp; &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>विधेयक को विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद, <span>उत्तराखंड के मुख्यमंत्री <strong>पुष्कर सिंह धामी</strong> ने कहा कि हमने जन भावनाओं के अनुरूप भू</span>-<span>सुधारों की नींव रखी है। </span>देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संतुलन और आमजन के अधिकारों की रक्षा हेतु सख्त भू-कानून नितांत आवश्यक था। यह अनियंत्रित भूमि खरीद-बिक्री पर रोक लगाएगा और राज्य के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखेगा। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हम उत्तराखंड के संसाधनों, <span>जमीनों को भूमाफियाओं से बचाने को संकल्पित हैं।</span>&nbsp;</p>
<p>विधेयक पर बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष <strong>यशपाल आर्य</strong> ने जल्दबाजी संशोधित भू-कानून को पारित करने की बजाय इसे प्रवर समिति को भेजने और एक माह में रिपोर्ट लेने की मांग की। कांग्रेस के सदस्यों ने नए भू-कानून के कई प्रावधानों को लेकर आशंकाएं जताईं। लेकिन विपक्ष की मांग को दरकिनार करते हुए ध्वनिमत से विधेयक पारित करा लिया गया। &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>यूसीसी के बाद एक और बड़ा फैसला</strong></p>
<p>सख्त भू-कानून की मांग को देखते हुए 2021 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भू-कानूनों की समीक्षा के लिए <span>पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता में&nbsp;</span>एक समिति गठित की, <span>जिसने 2022 में अपनी रिपोर्ट दी थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सशक्त भू-कानून बनाने का वादा किया था। इस तरह भू-कानून में संशोधन कर सीएम धामी ने अपना वादा निभाया है। समान नागरिक संहिता लागू करने के बाद यह धामी सरकार का दूसरा महत्वपूर्ण कदम है।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>क्या बदलाव आएगा</strong></p>
<ul>
<li>संशोधित भू-कानून के अनुसार, <span>हरिद्वार और उधम सिंह नगर को छोड़कर</span>, <span>उत्तराखंड के 13 में से </span>11 <span>जिलों में राज्य के बाहर के व्यक्तियों के लिए कृषि और उद्यान भूमि खरीदने पर रोक लग जाएगी। </span></li>
<li>हालांकि,<span> नगरीय क्षेत्रों में कोई भी व्यक्ति जमीन खरीद सकता है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में भी आवासीय जरूरतों के लिए एक परिवार अधिकतम </span>250 <span>वर्गमीटर जमीन खरीद सकता है। </span></li>
<li>राज्य के बाहर के लोगों को जमीन खरीदने के लिए शपथ-पत्र देना अनिवार्य होगा।&nbsp;</li>
<li>पर्वतीय क्षेत्रों में भूमि का सही उपयोग और अतिक्रमण रोकने के लिए चकबंदी और बंदोबस्ती की जाएगी।</li>
<li>नगर निकाय सीमा के अंतर्गत आने वाली भूमि का उपयोग केवल निर्धारित भू-उपयोग के अनुसार ही किया जा सकेगा।&nbsp;</li>
<li>यदि किसी व्यक्ति ने नियमों के खिलाफ जमीन का उपयोग किया, तो वह जमीन सरकार में निहित हो जाएगी।</li>
</ul>
<p></p>
<p><strong>जिलाधिकारी के अधिकार सीमित </strong></p>
<p>सरकार ने प्रदेश के बाहरी व्यक्तियों को जमीन खरीदने की अनुमति देने के जिलाधिकारी के अधिकार सीमित कर दिए हैं। राज्य में उद्योगों के लिए भूमि क्रय की अनुमति जो कलेक्टर स्तर से दी जाती थी, उसे समाप्त कर दिया है। अब यह अनुमति राज्य सरकार के स्तर से दी जाएगी। साथ ही सभी जिलाधिकारियों को राजस्व परिषद और शासन को नियमित रूप से भूमि खरीद से जुड़ी रिपोर्ट सौंपनी होगी।&nbsp;<strong></strong></p>
<p><strong>पनप रहा था आक्रोश </strong></p>
<p>उत्तराखंड बनने के बाद से ही बाहरी लोगों द्वारा जमीनों की अंधाधुंध खरीद विवादित मुद्दा रहा है। इसे देखते हुए 2003 <span>में एनडी तिवारी सरकार ने प्रदेश के बाहर के लोगों पर पर्वतीय क्षेत्रों में जमीन खरीदने पर 500 वर्गमीटर की सीमा लागू कर दी थी। साथ ही 12.5 एकड़ तक कृषि भूमि खरीद की अनुमति देने का अधिकार डीएम को दिया गया। &nbsp;वर्ष 2007</span><span>&nbsp;में बीसी खंडूरी के समय 500 वर्गमीटर की सीमा को घटाकर 250 वर्गमीटर किया गया। लेकिन 2018 में त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार ने 250 वर्गमीटर की सीमा को समाप्त कर दिया था।</span>&nbsp;</p>
<p><span><strong>वर्ष 2018</strong> में भू-कानून में किए गए संशोधन के बाद ही पहाड़ों में बड़े पैमाने पर जमीनों की खरीद-फरोख्त किए जाने की शिकायतें आई थीं और इस मुद्दे को लेकर लोगों में आक्रोश पनप रहा था। सरकार ने खुद माना है कि राज्य में करीब 600 मामले सामने आए हैं जिसमें लोगों ने नियमों का उल्लंघन कर राज्य में जमीन खरीदी हैं</span>, <span>इसमें से कुछ मामलों में राज्य सरकार ने कानूनी कार्रवाई कर नियम विरुद्ध खरीदी गई जमीन सरकार में निहित की है। </span>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में नया भू-कानून पारित, 11 जिलों में बाहरी लोगों के कृषि भूमि खरीदने पर रोक, जानिए और क्या बदला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड बजट में कृषि सहित 7 क्षेत्रों पर जोर, जानिए ग्रामीण विकास से जुड़ी अहम घोषणाएं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/uttarakhand-budget-focuses-on-7-sectors-including-agriculture-know-top-announcements-for-rural-development.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 20 Feb 2025 17:34:10 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/uttarakhand-budget-focuses-on-7-sectors-including-agriculture-know-top-announcements-for-rural-development.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1,01,175 करोड़ रुपये के व्यय का बजट पेश किया है, जो गत वर्ष की तुलना में 13 फीसदी अधिक है। राज्य में पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश किया गया है।</p>
<p>वित्त मंत्री <strong>प्रेमचंद अग्रवाल</strong> ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए सात बिंदुओं पर फोकस किया गया, जिसमें कृषि, ऊर्जा, अवसंरचना, संयोजकता, आयुष, कृषि व पर्यटन शामिल हैं।&nbsp;</p>
<p>उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2025-26 के बजट में<strong> कृषि और अनुसंधान</strong> के लिए 1259 करोड़ रुपये, सहकारिता के लिए 161 करोड़ रुपये, <strong>ग्रामीण विकास</strong> के लिए 2856 करोड़ रुपये, <strong>बागवानी विकास</strong> के लिए 657 करोड़ रुपये, <strong>सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण</strong> के लिए 1899 करोड़ रुपये, तथा <strong>पशुपालन</strong> के लिए 9329 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान किया है।&nbsp;</p>
<p>बजट में <strong>दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना</strong> के लिए 85.00 करोड़ रुपये, मत्स्य विभाग की ट्राउट प्रोत्साहन योजना के लिए 146 करोड़ रुपये, किसान पेंशन योजना के लिए 42 करोड़ रुपये, मिशन एप्पल के तहत 35 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना के अंतर्गत 25 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>दुग्ध उत्पादन</strong> को बढ़ावा देने के लिए दुग्ध मूल्य प्रोत्साहन योजना हेतु 30 करोड़ रुपये और साइलेज के लिए 40 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान है। <strong>स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवनेशन</strong> के लिए 27 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए 12.43 करोड़ रुपये, गंगा गाय महिला डेयरी विकास के लिए 5 करोड़ रुपये, स्थानीय फसलों को प्रोत्साहन कार्यक्रम के लिए 5.75 करोड़ रुपये, मिलेट मिशन के लिए 4 करोड़ रुपये तथा रेशम फेडरेशन के लिए 5 करोड़ रुपये के रिवोलविंग फंड का प्रावधान किया गया है।</p>
<ul>
<li>उत्तराखंड में <strong>प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)</strong> के लिए 207.18 करोड़ रुपये, उद्यमिता विकास की ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (REAP) को 150 करोड़ रुपये, रूरल बिजनेस इनक्यूबेशन के लिए 20 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।</li>
<li>ग्रामीण विकास के लिए <strong>प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना</strong> को 1065 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है।&nbsp;</li>
<li>पशुपालन विभाग के तहत <strong>ग्राम्य गौ-सेवक योजना</strong> के लिए 50 करोड़ रुपये, गौ-संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 10 करोड़ रुपये तथा निराश्रित पशुओं व गौ-सदनों के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।</li>
<li>ग्रामीण विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए<strong> हाउस ऑफ हिमालया</strong>ज योजना के लिए 15 करोड़ रुपये, वाइब्रेंट विलेज योजना के लिए 20 करोड़, जलवायु परिवर्तन शमन के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट है।&nbsp;</li>
<li>अंत्योदय राशन कार्ड धारकों को सस्ती दरों पर <strong>नमक</strong> उपलब्ध कराने के लिए 34.36 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।</li>
<li>दीनदयाल उपाध्याय<strong> ग्रामीण कौशल योजना</strong> के लिए 21.60 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है।&nbsp;</li>
</ul> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड बजट में कृषि सहित 7 क्षेत्रों पर जोर, जानिए ग्रामीण विकास से जुड़ी अहम घोषणाएं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67b7188eb6439.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी बजट: कृषि को 11 फीसदी आवंटन, जानिए कृषि और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ी अहम घोषणाएं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-budget-11-pc-allocation-to-agriculture-know-top-announcements-for-agriculture-and-rural-sector.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 20 Feb 2025 14:44:51 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-budget-11-pc-allocation-to-agriculture-know-top-announcements-for-agriculture-and-rural-sector.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 8.08 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया है, जो गत वर्ष से 9.8 फीसदी अधिक है। बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कृषि और संबद्ध सेवाओं के लिए 11 फीसदी संसाधन आवंटित करने का ऐलान किया। बजट में बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास पर काफी जोर दिया गया है। 22 फीसदी बजट इंफ्रस्ट्रक्चर के विकास पर, 13 शिक्षा पर, 6 फीसदी स्वास्थ्य पर और 4 फीसदी बजट सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों पर खर्च किया जाएगा।</p>
<p>वित्त मंत्री ने कहा कि गन्ना की खेती और चीनी मिलें, उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास की प्रमुख धुरी हैं। हालांकि, गन्ना मूल्य में कोई वृद्धि नहीं की गई है और न ही गन्ने की फसल में रोगों से हुए नुकसान से किसानों को राहत दिलाने के लिए कोई ऐलान हुआ। गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए 475 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है जो मुख्य रूप से सरकारी और सहकारी चीनी मिलों के लिए है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>पिपराईच चीनी मिल में डिस्टलरी की स्थापना हेतु 90 करोड़ रुपये तथा बंद पड़ी छाता चीनी मिल पर नई चीनी मिल एवं लॉजिस्टिक हब वेयर हाउसिंग कॉम्प्लेक्स की स्थापना के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>कृषि और किसान</strong>&nbsp;</p>
<ul>
<li>प्रदेश में दलहन व तिलहन फसलों का क्षेत्र, उपज और उत्पादन बढ़ाने के लिए निशुल्क मिनीकिट वितरित की जाएंगी। इसके लिए 50 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। सीड पार्क विकास परियोजना के लिए 251 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है।</li>
<li>राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए 124 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।</li>
<li>बागवानी मिशन के लिए 650 करोड़ रुपये का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति, 2022 के अंतर्गत प्रोत्साहन के लिए 300 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है।</li>
<li>पीएम-कुसुम योजना के तहत किसानों के खेतों में सोलर पंपों की स्थापना कराई जा रही है। इसके लिए 509 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।&nbsp;</li>
<li>कृषि विकास की वर्ल्ड बैंक समर्थित यूपी एग्रीज परियोजना के लिए 200 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।</li>
<li>पैक्स के माध्यम से किसानों को कम ब्याज दर पर फसली ऋण उपलब्ध कराने के लिए ब्याज अनुदान के लिए 525 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।</li>
<li>मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के लिए 1050 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है।</li>
<li>कुशीनगर में कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।</li>
<li>गोरखपुर में वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है</li>
</ul>
<p></p>
<p><strong>सिंचाई </strong></p>
<ul>
<li>नहरों और सरकारी नलकूपों से किसानों को मुफ्त सिंचाई की सुविधा के लिए 1300 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।</li>
<li>प्रदेश के 1750 असफल नलकूपों की पुनर्निर्माण के लिए 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था</li>
<li>मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के लिए 1100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।</li>
<li>पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना के तहत माइक्रो इरीगेशन योजना के लिए 720 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे</li>
</ul>
<p></p>
<p><strong>ग्रामीण विकास&nbsp; &nbsp;</strong></p>
<ul>
<li>प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए 4882 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए 1200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।</li>
<li>दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना हेतु 427 करोड़ रुपये का व्यय अनुमान प्रस्तावित है।&nbsp;</li>
<li>प्रदेश के ग्रामीण मार्गों एवं पुलियों के रखरखाव हेतु 2700 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।</li>
<li>मुख्यमंत्री ग्राम योजना के तहत ग्रामीण मार्गों की मरम्मत और मिसिंग लिंक के लिए नई योजना शुरू की जा रही है, जिसके लिए 200 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है।</li>
<li>कृषि विपणन सुविधाओं के लिए ग्रामीण सेतुओं के निर्माण हेतु 1600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।</li>
<li>ग्राम पंचायत स्तर पर डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना के लिए 454 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।</li>
<li>ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण स्टेडियम और ओपन जिम के निर्माण हेतु 125 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।</li>
<li>मुख्यमंत्री ग्राम जोडो योजना के तहत मध्यम श्रेणी की इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए 100 करोड़ रुपये और चार्जिंग स्टेशनों के लिए 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।</li>
<li>&nbsp;प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्र में बारात तथा अन्य सामाजिक आयोजनों के लिए उत्सव भव का निर्माण कराया जाएगा।</li>
</ul>
<p></p>
<p><strong>पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्यपालन &nbsp;</strong></p>
<ul>
<li>नंद बाबा दुग्ध मिशन के लिए 203 करोड़ रुपये का प्रावधान</li>
<li>दुग्ध संघों को सहायता के लिए 107 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है</li>
<li>छुट्टा गोवंश की व्यवस्था के लिए 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वृहद गो-सरंक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए 140 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।</li>
<li>प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत एकीकृत एक्वा मार्केट के निर्माण के लिए 190 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।&nbsp;</li>
</ul>
<p></p>
<p><strong>यूपी में चार नए एक्सप्रेस-वे का निर्माण</strong></p>
<p>राज्य सरकार ने यूपी में चार नए एक्सप्रेस-वे के निर्माण का फैसला लिया है।</p>
<ul>
<li>आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से <strong>गंगा एक्सप्रेस-वे कौसिया</strong><strong>,</strong> जनपद हरदोई वाया फर्रुखाबाद तक प्रवेश नियंत्रित ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराया जाएगा, जिसके लिये 900 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।</li>
<li>गंगा एक्सप्रेस-वे को प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, चंदौली होते हुए सोनभद्र से जोड़ने के लिए <strong>विन्ध्य एक्सप्रेस-वे</strong> के निर्माण के लिएं 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।</li>
<li>मेरठ को हरिद्वार से जोड़ने हेतु <strong>गंगा एक्सप्रेस-वे विस्तारीकरण</strong> एक्सप्रेस-वे का निर्माण प्रस्तावित है जिसके लिए 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था कराई जा रही है।</li>
<li><strong>बुन्देलखण्ड रीवा एक्सप्रेस-वे</strong> का निर्माण निर्माण प्रस्तावित है जिसके लिए 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था कराई जा रही है।<br />बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के साथ <strong>डिफेंस इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर परियोजना</strong> हेतु लगभग 461 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके अन्तर्गत लगभग साढ़े नौ हजार करोड़ रुपये का निवेश अनुमानित है।</li>
</ul>
<p></p>
<p><strong>अन्य प्रमुख घोषणाएं </strong></p>
<ul>
<li>रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के अन्तर्गत कालेज जाने वाली मेधावी छात्राओं को स्कूटी प्रदान किये जाने हेतु 400 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।&nbsp;</li>
<li>प्रदेश की 58 नगर निकायों को 'आदर्श स्मार्ट नगर निकाय' के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए कुल 145 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है।</li>
<li>युवाओं को स्वरोजगार के लिए गारंटी फ्री, ब्याजमुक्त लोन उपलब्ध कराया जाएगा।</li>
<li>58 नगर पालिकाओं को स्मार्ट सिटी बनाया जाएगा।&nbsp;</li>
<li>एक जनपद एक खेल योजना के तहत 72 जिलों में खेलो इंडिया सेंटर</li>
<li>पीएम मित्र योजना के अन्तर्गत टेक्सटाइल पार्क की स्थापना से सम्बन्धित व्यय हेतु 300 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।</li>
<li>उत्तर प्रदेश वस्त्र गारमेन्टिंग पालिसी, 2022 के क्रियान्वयन हेतु 150 करोड़ रुपये की व्यवस्था कराई जा रही है।&nbsp;</li>
</ul> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67b6f19ceb7dd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी बजट: कृषि को 11 फीसदी आवंटन, जानिए कृषि और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ी अहम घोषणाएं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रेखा गुप्ता होंगी दिल्ली की नई मुख्यमंत्री, जानिए उनका सियासी सफर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rekha-gupta-will-be-the-new-chief-minister-of-delhi-know-about-her-political-journey.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 19 Feb 2025 21:05:34 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rekha-gupta-will-be-the-new-chief-minister-of-delhi-know-about-her-political-journey.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रेखा गुप्ता दिल्ली की नई मुख्यमंत्री होंगी। कई दिनों के सस्पेंस के बाद आखिरकार दिल्ली के अगले मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान हो गया। बुधवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से रेखा गुप्ता के नाम पर मुहर लगी। सुषमा स्वराज, शीला दीक्षित और आतिशी के बाद रेखा गुप्ता दिल्ली की चौथी महिला मुख्यमंत्री होंगी। रेखा गुप्ता और दिल्ली सरकार के नए मंत्री गुरुवार को रामलीला मैदान में पद की शपथ लेंगे।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>रेखा गुप्ता पहली बार की विधायक हैं और शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र से चुनकर आई हैं। वे दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ की अध्यक्ष रह चुकी हैं और फिलहाल भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने विधानसभा चुनाव में शालीमार बाग सीट से आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार बंदना कुमारी को 29 हजार से अधिक मतों से हराकर जीत हासिल की थी। दिल्ली के मुख्यमंत्री की दौड़ में कई दिग्गज थे लेकिन <span>रेखा गुप्ता के नाम पर मुहर लगी है।&nbsp;</span>&nbsp;</p>
<p>अरविंद केजरीवाल को नई दिल्ली सीट पर हराने वाले प्रवेश साहिब सिंह वर्मा समेत कई नामों को लेकर अटकलें लगाई जा रही थी। प्रवेश वर्मा के मुख्यमंत्री न बन पाने से दिल्ली के जाट मतदाताओं को मायूसी हाथ लगी है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर <span>भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और विधायक दल को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि मुझ पर विश्वास कर मुख्यमंत्री पद का दायित्व सौंपने के लिए मैं सभी शीर्ष नेतृत्व का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं। दिल्ली को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के इस महत्वपूर्ण अवसर के लिए मैं पूरी तरह से प्रतिबद्ध हूं!&nbsp;</span></p>
<p>विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को शिकस्त देकर भाजपा ने 26 साल बाद दिल्ली की सत्ता में वापसी की है। बुधवार को भाजपा के सभी 48 नवनिर्वाचित विधायक केंद्रीय पर्यवेक्षक रविशंकर प्रसाद और ओपी धनखड़ की मौजूदगी में विधायक दल की बैठक में शामिल हुए थे। भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद रेखा गुप्ता उपराज्यपाल वीके सक्सेना से मुलाकात करेंगी और दिल्ली में भाजपा सरकार बनाने का दावा पेश करेंगी।&nbsp;<br /><br /></p>
<p><strong>रेखा गुप्ता का राजनीतिक करियर&nbsp;</strong></p>
<ul class="po-about-quote rounded-7 leading-26 text-justify">
<li>1994 दौलत राम कॉलेज छात्र संघ की सेक्रेटरी</li>
<li>1995 दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ केन्द्र की सेक्रेटरी</li>
<li>1996 दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की अध्यक्ष</li>
<li>2002 प्रदेश मंत्री, भारतीय जनता युवा मोर्चा&nbsp;</li>
<li>2006 राष्ट्रीय सचिव, भारतीय जनता युवा मोचां</li>
<li>2007 निगम पार्षद, उत्तरी पीतमपुरा (वार्ड नं. 54)</li>
<li>2007 अध्यक्ष, महिला कल्याण एवं बाल विकास समिति</li>
<li>2009 महामंत्री, भाजपा दिल्ली प्रदेश महिला मोर्चा</li>
<li>2010 राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, भारतीय जनता पार्टी</li>
<li>2010 अध्यक्ष, जिला केशवपुरम, भारतीय जनता पार्टी</li>
<li>2012 उत्तरी पीतमपुरा वार्ड 54 से दूसरी बार निगम पार्षद बनी</li>
<li>2012 अध्यक्ष, शिक्षा समिति, दिल्ली नगर निगम</li>
<li>2013 उपाध्यक्ष, स्थायी समिति दिल्ली नगर निगम</li>
<li>2013 मंत्री भाजपा, राष्ट्रीय महिला मोर्चा</li>
<li>2014 महामंत्री, भाजपा, दिल्ली प्रदेश</li>
<li>2015 भाजपा प्रत्याशी, शालीमार बाग विधानसभा चुनाव</li>
<li>2019 सदस्य कार्यकारिणी भाजपा, राष्ट्रीय महिला मोचां</li>
<li>2020 भाजपा प्रत्याशी, शालीमार बाग विधानसभा चुनाव</li>
<li>2021 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, बीजेपी महिला मोर्चा, प्रभारी बीजेपी उत्तर प्रदेश महिला मोर्चा</li>
<li>2022 निगम पार्षद, शालीमार बाग</li>
<li>2024 विधायक, शालीमार बाग&nbsp;</li>
</ul> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ रेखा गुप्ता होंगी दिल्ली की नई मुख्यमंत्री, जानिए उनका सियासी सफर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान बजट: गेहूं पर 150 रुपये बोनस, पीएम&amp;#45;किसान की राशि 9000 सहित 10 बड़े ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/10-big-announcements-in-rajasthan-budget-rs-150-bonus-on-wheat-pm-kisan-amount-of-rs-9000.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 19 Feb 2025 18:07:40 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/10-big-announcements-in-rajasthan-budget-rs-150-bonus-on-wheat-pm-kisan-amount-of-rs-9000.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राजस्थान सरकार का बजट पेश करते हुए डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री दिया कुमारी ने किसानों को गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 150 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देने और पीएम-किसान योजना की राशि को 9000 रुपये करने सहित कई घोषणाएं की।</p>
<p>पीएम-किसान के तहत केंद्र सरकार की 6000 रुपये की राशि के अलावा राज्य सरकार अपनी तरफ से 3000 रुपये जोड़कर किसानों को सालाना 9000 रुपये की सहायता प्रदान करेगी। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पीएम-किसान की धनराशि बढ़ाकर 12000 रुपये करने का वादा किया था।&nbsp;</p>
<p><strong>35 लाख किसानों को ब्याज मुक्त फसली ऋण </strong></p>
<p>कृषि बजट के तहत वित्त मंत्री दिया कुमारी ने प्रदेश के 35 लाख से अधिक किसानों को 25 हजार करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त फसली ऋण उपलब्ध कराने का ऐलान किया है, जिस पर 768 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।</p>
<p>गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के तहत ढाई लाख गोपालक परिवारों को ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पर 150 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।</p>
<p><strong>सिंचाई परियोजनाएं &nbsp;</strong></p>
<p>राजस्थान के बजट में सिंचाई को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। राम जल सेतु लिंक परियोजना का विस्तार करते हुए 9300 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य प्रस्तावित हैं। जल प्रबंधन के लिए ईआरसीपी कॉरपोरेशन को राजस्थान वाटर ग्रिड कॉरपोरेशन के तौर पर अपग्रेड किया जाएगा। आगामी वर्ष में करीब 4000 करोड़ रुपये के कार्य इस कॉरपोरेशन के माध्यम से किए जाएंगे।</p>
<p>सिंचाई के विस्तार से राजस्थान ने खेती और बागवानी में काफी प्रगति की है। बजट में माइक्रो इरिगेशन के लिए 1250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही 25 हजार खेत तालाब, 10 हजार डिग्गियों, 50 हजार सौर पंप संयंत्रों तथा 20 हजार किलोमीटर सिंचाई पाइप लाइन के लिए 900 करोड़ का अनुदान देने की घोषणा की गई है।</p>
<p>50 हजार नए कृषि कनेक्शन देने का ऐलान भी बजट में किया गया है। प्रदेश में एक हजार ट्यूबवैल लगाए जाएंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>कृषि एवं बागवानी विकास </strong></p>
<p>कृषि और बागवानी विकास के लिए <strong>राजस्थान कृषि विकास योजना</strong> के तहत 1350 करोड़ रुपये कार्य किए जाएंगे। योजना के तहत 210 करोड़ रुपये के खर्च से 1000 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे।</p>
<p>किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के लिए 300 करोड़ रुपये के अनुदान की घोषणा की गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि इससे एक लाख किसान लाभन्वित होंगे।</p>
<p>मनरेगा के तहत खेत तालाब, डिग्गी, फलदार पौधारोपण, मेडबंदी आदि कार्यों पर लगभग 700 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने के लिए 180 करोड़ रुपये की लागत से किसानेां को 35 लाख बीज मिनीकिट वितरित की जाएंगी।</p>
<p>प्रदेश में 2000 किसानों को ग्रीन हाउस, पॉलीहाउस/शेडनेट, प्लास्टिक मल्चिंग, लो टनल उपलब्ध करवाने के लिए 225 करोड़ रुपये के अनुदान की घोषणा की गई है।&nbsp;</p>
<p><strong>सेंटर फॉर एक्सीलेंस </strong></p>
<ul>
<li>कृषि में AI के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान सरकार 50 करोड़ रुपये की लागत से Centre of Excellence of Artificial Intelligence in Agriculture की स्थापना करेगी।</li>
<li>मक्का की उत्पादकता और मूल्य संवर्धन के लिए बांसवाड़ा में 20 करोड़ रुपये की लागत से Centre of Excellence for Maize की स्थापना की जाएगी।</li>
<li>भरतपुर में 15 करोड़़ रुपये की लागत से Centre of Excellence for Honey Bee-keeping की स्थापना की जाएगी। बारां में लहसुन उत्पकृष्टता केंद्र बनेगा।</li>
</ul>
<p>मंडी विकास से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं के अलावा अनूपगढ़-श्रीगंगानगर में मिनी फूड पार्क, सांचौर-जालोर में एग्रो फूड पार्क बनाए जाएंगे। चूरू, जयपुर झुंझुंनू, सिरोही, दौसा में फूड प्रोसेसिंग की आधारभूत सुविधाओं के लिए निशुल्क भूमि आवंटन कर पीपीपी मोड में विकसित किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>मिड-डे मिल और आंगनबाड़ी में श्रीअन्न आधारित उत्पाद देने की शुरुआत की जाएगी। प्रत्येक जिले में मिलेट्स उत्पाद आउटलेट खोले जाएंगे। प्रदेश में दो नए कृषि महाविद्यालय भी खोले जाएंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>तारबंदी अनुदान </strong></p>
<p>किसानों की फसलों को जंगली जानवरों व निराश्रित पशुओं से बचाने के लिए प्रदेश के 75 हजार किसानों को तारबंदी हेतु अनुदान दिया जाएगा। इस पर 324 करोड़ का व्यय होगा।</p>
<p><strong>ड्रोन से छिड़काव के लिए अनुदान </strong></p>
<p>राजस्थान में नमो ड्रोन दीदी योजना और कस्टम हायरिंग सेंटर पर उपलब्ध ड्रोन के माध्यम से एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नेनो यूरिया और नेनो डीएपी के छिड़काव के लिए 2500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान दिया जाएगा। &nbsp;</p>
<p><strong>किसानों को विदेश भ्रमण </strong></p>
<p>खेती से जुड़ी आधुनिक तकनीक और तौर-तरीके सीखने के लिए एफपीओ से जुड़े 100 किसानों को इस्राइल सहित अन्य देशों में तथा 5000 किसानों को राज्य के बाहर भ्रमण और प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।&nbsp; &nbsp;</p>
<p><strong>भूमिहीन कृषि श्रमिक</strong></p>
<p>प्रदेश में एक लाख भूमिहीन कृषि श्रमिकों को 5 हजार रुपये तक की लागत के कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। &nbsp;</p>
<p><strong>पशुपालन व डेयरी </strong></p>
<p>मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना का दायरा बढ़ाते हुए बीमित पशुपालकों की संख्या को प्रतिवर्ष दोगुना किया जाएगा। इस पर 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च होगा। अलवर, उदयपुर, बांसवाड़ा, भरतपुर और सवाई माधोपुर में 225 करोड़ रुपये की लागत से नए दुग्ध प्लांट स्थापित किए जाएंगे। गौशालाओं हेतु प्रति पशु अनुदान को बढ़ाकर 50 रुपये प्रतिदिन किया गया है।</p>
<p>वित्त मंत्री दिया कुमारी ने ऐलान किया कि राजस्थान की 200 ग्राम पंचायतों में नए पशु चिकित्सा उपकेंद्र खोले जाएंगे। राज्य में 100 पशु चिकित्सा अधिकारियों और 1000 पशुधन निरीक्षकों की भर्ती की जाएगी।&nbsp;</p>
<p><strong>ग्रीन बजट&nbsp;</strong></p>
<p><span>राजस्थान सरकार ने ग्रीन बजट के तहत टिकाऊ विकास से जुड़ी कई घोषणाएं की हैंं। छोटे किसानों को बैलों से खेती करवाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें प्रतिवर्ष 30 हजार की सहायता राशि दी जाएगी। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए ढाई लाख किसानों को अनुदान मिलेगा।&nbsp;</span></p>
<p><span></span></p>
<p><span></span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान बजट: गेहूं पर 150 रुपये बोनस, पीएम-किसान की राशि 9000 सहित 10 बड़े ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67b5d06554bce.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी सरकार ने नहीं बढ़ाया गन्ने का दाम, 370 रुपये ही रहेगा एसएपी, किसानों को बड़ा झटका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-price-did-not-increase-in-up-sap-will-remain-at-rs-370-big-blow-to-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 18 Feb 2025 14:58:27 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-price-did-not-increase-in-up-sap-will-remain-at-rs-370-big-blow-to-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार ने चालू पेराई सीजन (2024-25) के लिए गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। राज्य में इस बार भी गन्ने का दाम पिछले साल के बराबर यानी 370 रुपये प्रति क्विंटल ही रहेगा। सोमवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन में गन्ना मूल्य यथावत रखने का निर्णय लिया। हालांकि, इस बारे में आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास मंत्री ने गन्ना मूल्य को पिछले सीजन के बराबर रखने के फैसले की पुष्टि की है।&nbsp;</p>
<p>पिछले पेराई सीजन 2023-24 में यूपी सरकार ने गन्ना मूल्य 20 रुपये बढ़ाकर अगैती किस्मों के लिए 370 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। <span>सामान्य प्रजाति के लिए 360 रुपये प्रति क्विंटल और अनुपयुक्त प्रजाति के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल का दाम तय किया गया था।&nbsp;</span>लेकिन चालू पेराई सत्र 2024-25 में राज्य सरकार ने गन्ना मूल्य में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। इस निर्णय का ऐलान भी अधिकांश पेराई सीजन बीतने के बाद किया गया। जबकि किसान खेती की बढ़ती लागत और रोगों से फसल नुकसान को देखते हुए गन्ने का भाव 400 पार होने की आस लगा रहे थे। सरकार के इस फैसले से किसानों में मायूसी है और किसान संगठन रोष जाता रहे हैं।</p>
<p>भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता <strong>राकेश टिकैत</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> से बातचीत में गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी न होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को धोखे में रखा। पूरे सीजन में भाव बढ़ाया नहीं और जब सीजन लगभग निकल गया, तब कहा कि भाव नहीं बढ़ेगा। टिकैत का कहना है कि इतने किसान संगठन बन गये, लेकिन अब आंदोलन नहीं होते। सत्ता और किसान में किसी एक को चुनना पड़ेगा। किसान आंदोलन कमजोर हो गए, इसलिए गन्ने का दाम नहीं बढ़ा।</p>
<p>कभी जोरशोर से गन्ना किसानों के मुद्दे उठाने वाली राष्ट्रीय लोकदल के भाजपा से हाथ मिलाने के बाद गन्ना किसानों की आवाज कमजोर पड़ी है। राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री <strong>जयंत चौधरी</strong> ने मीरापुर उपचुनाव में गन्ने का भाव 400 पार की बात कही थी। लेकिन अब गन्ना मूल्य में कोई बढ़ोतरी न होने पर राष्ट्रीय लोकदल के नेता चुप्पी साध रहे हैं। यह यूपी में गन्ना पॉलिटिक्स के कमजोर होने का संकेत है।&nbsp;</p>
<p>समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और यूपी योजना आयोग के पूर्व सदस्य <strong>प्रो. सुधीर पंवार</strong> ने कहा कि यूपी की भाजपा सरकार ने किसानों को एक बार फिर धोखा दिया है। जो गन्ना मूल्य पेराई सत्र के शुरू में घोषित होता था, उसे पेराई सत्र समाप्त होने पर घोषित किया है। वो भी बिना किसी बढ़ोतरी के, ताकि किसान आंदोलन न कर सके। लागत मूल्य अधिक होने के बाद भी यूपी के किसानों को हरियाणा से 30 रुपये और पंजाब से 31 रुपये प्रति क्विंटल कम रेट मिलेगा। गौरतलब है कि हरियाणा में गन्ने का भाव 400 रुपये और पंजाब में 401 रुपये प्रति क्विंटल है।</p>
<p>जय किसान आंदोलन के राष्ट्रीय प्रवक्ता <strong>मनीष भारती </strong>ने कहा कि गन्ना मूल्य वृद्धि न होने से किसानों पर आर्थिक संकट आएगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सरकार के इस गलत फैसले से किसान कर्ज में डूबेगा। उन्होंने कहा कि महंगाई और उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। सरकार की यह नीति किसानों के साथ अन्याय है।&nbsp;</p>
<p><strong>किसानों का घटता सियासी असर</strong></p>
<p>चीनी, एथेनॉल सहित कई उत्पादों से चीनी मिलों के लाभ को देखते हुए इस साल गन्ने का भाव 400 रुपये तक पहुंचने की उम्मीद की जा रही थी। ऊपर से इस बार सूबे में गन्ने की फसल भी कमजोर थी।</p>
<p>लेकिन यूपी की राजनीति में किसानों के घटते असर और बदले राजनीतिक समीकरणों के चलते इस बार गन्ने का भाव नहीं बढ़ पाया। राष्ट्रीय लोकदल के भाजपा से गठबंधन के बाद पश्चिमी यूपी की गन्ना पॉलिटिक्स में एक खालीपान आया, जिसे भरने में विपक्षी दल और किसान यूनियनें नाकाम रही हैं। फिर ऐतिहासिक किसान आंदोलन के बाद किसान यूनियनों में आए बिखराव का असर भी रहा है। यही वजह है कि गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की मांग को लेकर कोई भी किसान संगठन सरकार पर दबाव नहीं बना पाया।&nbsp;</p>
<p><strong>चीनी मिलों के तर्क से सरकार सहमत</strong></p>
<p>चालू पेराई सीजन की शुरुआत से ही यूपी की चीनी मिलें गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी के पक्ष में नहीं थीं। चीनी उद्योग का कहना है कि उनकी बढ़ती लागत और गन्ने से कम रिकवरी के चलते वे गन्ना का रेट बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं।</p>
<p><strong>चीनी उद्योग</strong> से जुड़े संगठनों के पदाधिकारियों ने<strong> रूरल वॉयस</strong> को बताया कि अगर सरकार गन्ने का दाम बढ़ाती है तो उन्हें नुकसान होगा, क्योंकि चीनी की रिकवरी करीब 10 फीसदी कम है और सरकार चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एसएमपी) में बढ़ोतरी नहीं कर रही है। साथ ही बी-हैवी मोलेसेज से बनने वाले एथेनॉल की कीमत में भी बढ़ोतरी नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गन्ने मूल्य नहीं बढ़ाने के फैसले को देखते हुए लगता है कि वह चीनी मिलों के तर्क से सहमत है।&nbsp;</p>
<p><strong>किसानों पर दोहरी मार&nbsp;</strong></p>
<p>इस साल गन्ने की फसल में रोगों के प्रकोप के कारण पैदावार 10 से 15 फीसदी तक गिर गई है, जिसके चलते किसानों को नुकसान हुआ है। ऐसे में दाम न बढ़ने से किसान पर दोहरी मार पड़ेगी। क्योंकि दाम तो बढ़ा नहीं बल्कि पैदावार घटने व लागत बढ़ने का घाटा भी उसे उठाना पड़ रहा है। उसके लिए सरकार ने किसानों को कोई राहत नहीं दी है।&nbsp; &nbsp; &nbsp;</p>
<p style="text-align: left;"><strong>8 साल में 55 रुपये की बढ़ोतरी </strong></p>
<p>यूपी में पिछले आठ साल में केवल तीन बार गन्ने का एसएपी 10, 25 और 20 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा है और पांच बार इसे यथावत रखा गया। इस तरह आठ वर्षों में गन्ने का दाम कुल 55 रुपये बढ़ाया गया। अक्सर चुनावी साल में ही गन्ने का दाम बढ़ा है। इस लिहाज से अब 2027 में गन्ना मूल्य में वृद्धि की संभावना है।&nbsp;</p>
<p>वर्ष 2017-18 में गन्ने के एसएपी में 10 रुपये की बढ़ोतरी कर 325 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था। इसके बाद अगले तीन साल इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। फिर 2021-22 में गन्ना मूल्य 25 रुपये बढ़ाकर 350 रुपये प्रति क्विंटल किया गया था, क्योंकि फरवरी, 2022 में राज्य विधान सभा के चुनाव होने थे। वहीं, इसके अगले साल कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। जबकि 2023-24 सीजन में गन्ना मूल्य 20 रुपये बढाकर 370 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया था। यह बढ़ोतरी भी 2024 के लोक सभा चुनावों में किसानों की नाराजगी के बचने के लिए की गई थी।&nbsp;</p>
<table width="269" style="margin-left: auto; margin-right: auto;">
<tbody>
<tr>
<td colspan="2" width="269" style="text-align: center;"><strong>यूपी में पिछले 8 वर्षो में गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) </strong><em>(रुपये/क्विंटल)</em></td>
</tr>
<tr>
<td width="112" style="text-align: center;"><strong>पेराई सत्र&nbsp;</strong></td>
<td width="157" style="text-align: center;"><strong>गन्ना मूल्य&nbsp;</strong></td>
</tr>
<tr>
<td width="112" style="text-align: center;">2016-17</td>
<td width="157" style="text-align: center;">315</td>
</tr>
<tr>
<td width="112" style="text-align: center;">2017-18</td>
<td width="157" style="text-align: center;">325</td>
</tr>
<tr>
<td width="112" style="text-align: center;">2018-19</td>
<td width="157" style="text-align: center;">325</td>
</tr>
<tr>
<td width="112" style="text-align: center;">2019-20</td>
<td width="157" style="text-align: center;">325</td>
</tr>
<tr>
<td width="112" style="text-align: center;">2020-21</td>
<td width="157" style="text-align: center;">325</td>
</tr>
<tr>
<td width="112" style="text-align: center;">2021-22</td>
<td width="157" style="text-align: center;">350</td>
</tr>
<tr>
<td width="112" style="text-align: center;">2022-23</td>
<td width="157" style="text-align: center;">350</td>
</tr>
<tr>
<td width="112" style="text-align: center;">2023-24</td>
<td width="157" style="text-align: center;">370</td>
</tr>
<tr>
<td width="112" style="text-align: center;">2024-25</td>
<td width="157" style="text-align: center;">370</td>
</tr>
<tr>
<td colspan="2" width="269" style="text-align: center;"><em>गन्ने की अगैती किस्मों का एसएपी</em></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align: center;"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67b471915d8f8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी सरकार ने नहीं बढ़ाया गन्ने का दाम, 370 रुपये ही रहेगा एसएपी, किसानों को बड़ा झटका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान आंदोलन बंद हो गये, इसलिए घोषित नहीं हुआ गन्ने का भाव: राकेश टिकैत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-agitation-has-stopped-hence-the-price-of-sugarcane-has-not-been-declared-rakesh-tikait.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 17 Feb 2025 20:36:32 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-agitation-has-stopped-hence-the-price-of-sugarcane-has-not-been-declared-rakesh-tikait.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में गन्ने का दाम घोषित न होने समेत कई मुद्दों को लेकर <strong>भारतीय किसान यूनियन (भाकियू)</strong> <span>ने सोमवार को </span>मुजफ्फरनगर में किसान-मजदूर महापंचायत आयोजित की।</p>
<p>मुजफ्फरनगर स्थित कूकड़ा गुड़ मंडी में जुटे कई जिलों के किसानों को संबोधित करते हुए भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता <strong>राकेश टिकैत</strong> ने कहा कि किसानों ने अब आंदोलन करने बंद कर दिए हैं, इसलिए अब तक गन्ने का भाव घोषित नहीं हुआ। किसानों को फिर से आंदोलन करने पड़ेंगे, तभी किसानों को हक मिलेगा और उनकी जमीन बिकने से बच सकेगी।&nbsp;</p>
<p>गन्ना किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. चौधरी अजित सिंह की प्रतिमा के अनावरण पर जब मुख्यमंत्री छपरौली आए तो उम्मीद थी कि वे कुछ घोषणा करके जाएंगे, <span>लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। </span>सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए उन्होंने किसानों से एकजुट होने का आह्वान किया। महापंचायत में किसानों की समस्याओं और कृषि संकट को हल करने के लिए 8 सूत्री मांग प्रस्ताव पारित किया गया।</p>
<p>भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष &nbsp;<strong>नरेश टिकैत</strong> ने सवाल उठाया कि उत्तर प्रदेश में गन्ने सीजन समाप्त होने वाला है लेकिन अभी तक गन्ने का भाव घोषित नहीं किया गया है। पहले के समय में सत्र शुरू होने से पहले सरकारों के द्वारा भाव घोषित किया जाता था। उन्होंने सरकार से इस बारे में जल्द निर्णय लेकर गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति कुंतल घोषित करने और मिलों पर बकाया भुगतान को तुरंत जारी कराने की मांग की।</p>
<p>महापंचायत में किसानों की कर्जमाफी, <span>एमएसपी गारंटी कानून</span>, <span>लागत पर सी</span>+50% फार्मूले के आधार पर एमएसपी के निर्धारण, खेती को जीएसटी और एनजीटी के दायरे से बाहर करने, बिजली का निजीकरण रोकने, <span>किसानों को भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा देने</span>, <span>जीएम फसलों पर रोक और केंद्र</span> सरकार जारी नेशनल पॉलिसी फ्रेमवर्क ऑन एग्रीकल्चर मार्केटिंग के मसौदे को तत्काल रद्द करने की मांग उठाई। भाकियू के नेताओं ने कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों पर कार्यवाही नहीं करती है तो संयुक्त किसान मोर्चा के साथ मिलकर देश भर में किसान जन जागृति अभियान चलाया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा से रमनिंदर सिंह पटियाला, चौधरी युद्धवीर सिंह महासचिव, भाकियू, रतनमान, अध्यक्ष हरियाणा भाकियू, बाबा श्याम सिंह थांबा बहावड़ी, शौकिंदर सिंह बतीसा खाप सहित कई किसान नेताओं व खाप चौधरीयो ने महापंचायत को संबोधित किया।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x_67b34efd6a53e.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" width="824" height="369" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67b34e46b5758.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान आंदोलन बंद हो गये, इसलिए घोषित नहीं हुआ गन्ने का भाव: राकेश टिकैत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67b34e46b5758.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फार्मर आईडी बनवाने का मौका, राजस्थान में 31 मार्च तक चलेगा किसान रजिस्ट्री अभियान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/opportunity-to-get-farmer-id-kisan-registry-campaign-will-run-till-31st-march-in-rajasthan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 17 Feb 2025 17:03:43 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/opportunity-to-get-farmer-id-kisan-registry-campaign-will-run-till-31st-march-in-rajasthan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने <strong>डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन</strong> शुरू किया है। इसके तहत राज्य सरकारों के साथ मिलकर <strong>एग्रीस्टैक</strong> योजना चलाई जा रही है जिसमें <strong>किसान रजिस्ट्री/फार्मर आईडी</strong> बनवाने का काम तेजी से चल रहा है। भविष्य में किसानों को पीएम-किसान और फसल बीमा जैसी योजनाओं का लाभ फार्मर आईडी के आधार पर दिया जाएगा। इस प्रकार किसानों के लिए फार्मर आईडी बनवाना आवश्यक है।</p>
<p>राजस्थान के सभी जिलों में <strong>5 फरवरी से 31 मार्च</strong> तक फार्मर रजिस्ट्री के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रत्येक<strong> ग्राम पंचायत</strong> मुख्यालय पर <strong>तीन दिवसीय शिविर</strong> का आयोजन किया जाएगा, जहां किसानों की यूनिक फार्मर आईडी बनाई जाएगी। इन शिविरों में किसान सुबह 9:30 बजे से सायं 5:30 बजे तक अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकेंगे। देश के अन्य राज्यों में भी फार्मर रजिस्ट्री के लिए इस प्रकार के अभियान चलाए जा रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>अभियान के तहत किसान आईडी तैयार करने के साथ-साथ प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना, मुख्यमंत्री आरोग्य आयुष्मान योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, मंगला पशु बीमा योजना, पशु टीकाकरण, पशु चिकित्सा एवं उपचार सहित विभिन्न विभागों की सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जाएगा।&nbsp;</p>
<p><strong>कैसे बनवाएं फार्मर आईडी</strong><strong>?</strong></p>
<p>ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर शिविर की जानकारी ग्राम पंचायत या तहसील कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है। राजस्थान के किसान शिविर की तिथियों व स्थान की जानकारी <strong>www.rjfrc.Rajasthan.gov.in</strong> पोर्टल से भी प्राप्त कर सकते हैं। शिविर में किसान को रजिस्ट्रेशन होने पर एक एनरोलमेंट स्लिप दी जाएगी। जिसके 24 घंटे के अंदर किसान के मोबाइल नंबर पर फार्मर रजिस्ट्री मैसेज के माध्यम से प्राप्त हो सकेगी।&nbsp;</p>
<p><strong>फार्मर रजिस्ट्री के लिए आवश्यक दस्तावेज</strong></p>
<ol>
<li style="list-style-type: none;">
<ol>
<li>आधार कार्ड</li>
<li>आधार से लिंक मोबाइल नंबर</li>
<li>नवीनतम जमाबंदी की नकल</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p><strong>फार्मर आईडी बनवाने के तरीके</strong></p>
<ul>
<li><strong>ग्राम पंचायत स्तर</strong>&nbsp;पर किसान कृषि विभाग के कर्मचारी, राजस्व लेखपाल, पंचायत सहायक, रोजगार सेवक द्वारा आयोजित किए जा रहे फार्मर रजिस्ट्री कैंप में जाकर अपनी फार्मर आईडी बनवा सकते हैं।</li>
<li><strong>पोर्टल (agristack.gov.in)&nbsp;</strong>एग्री स्टैक के स्टेट पोर्टल पर जाकर भी किसान फार्मर रजिस्ट्री कर सकते हैं। यहां विवरण भरना होगा। मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा। उसे भरेंगे तो फार्मर रजिस्ट्री नंबर मिल जाएगा। राजस्थान के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल <strong>(rjfr.agristack.gov.in)</strong></li>
<li><strong>जन सेवा केंद्र&nbsp;</strong>सेल्फ मोड के साथ-साथ किसान जन सेवा केन्द्र (CSC) के जरिए निर्धारित शुल्क देकर फार्मर आईडी बनवा सकते है।</li>
</ul>
<p><strong>किसानों को मिलेगी 11 अंकों की विशिष्ट पहचान</strong></p>
<p>फार्मर रजिस्ट्री में किसानों की कृषि भूमि और उस पर बोई गई फसलों के विवरण को संकलित किया जाएगा। प्रत्येक किसान को &rsquo;आधार&rsquo; आधारित एक 11 अंकों की एक <strong>यूनिक आईडी</strong> (विशिष्ट किसान आईडी) आवंटित की जाएगी, जिससे किसान डिजिटल रूप से अपनी पहचान प्रमाणित कर सकेंगे। फार्मर आईडी जारी होने के बाद भूमि संशोधन (खसरा जोड़ने या हटाने) के लिए पटवारी, लेखपाल से सम्पर्क किया जा सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>इसलिए जरूरी है किसान रजिस्ट्री </strong></p>
<p>केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का त्वरित लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए फार्मर आईडी का इस्तेमाल किया जाएगा। ऋण और बीमा सेवाएं प्राप्त करने में किसानों को फार्मर आईडी से मदद मिलेगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल बिक्री के लिए भी किसान आईडी की आवश्यकता पड़ेगी।&nbsp;</p>
<p>फार्मर रजिस्ट्री में किसानों के लैंड रिकार्ड को आधार से लिंक किया जाएगा। दावा है कि इससे किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में आसानी होगी। साथ ही कृषि से जुटे सटीक आंकड़े उपलब्ध होने से नीति-निर्माण में मदद मिलेगी। फार्मर आईडी बनने से किसानों को बार-बार केवाईसी करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और लेन-देन व मुआवजे की प्रक्रिया सरल होगी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ फार्मर आईडी बनवाने का मौका, राजस्थान में 31 मार्च तक चलेगा किसान रजिस्ट्री अभियान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्रगतिशील किसानों ने ‘नेचुरल ग्रीनहाउस’ और जैविक खेती को अपनाने का लिया संकल्प]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/progressive-farmers-pledge-to-adopt-natural-greenhouse-and-organic-farming.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 15 Feb 2025 13:27:09 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/progressive-farmers-pledge-to-adopt-natural-greenhouse-and-organic-farming.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिला प्रशासन के कृषि विभाग के मार्गदर्शन में 15 से अधिक गांवों के 50 से अधिक शिक्षित और प्रगतिशील किसानों ने जैविक खेती और नेचुरल ग्रीनहाउस की जानकारी ली। किसान यहां के &lsquo;मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म एवं रिसर्च सेंटर&rsquo; में आए और जैविक खेती की अत्याधुनिक तकनीकों, प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग और कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाले नवाचारों को करीब से समझा।</p>
<p>किसानों ने ऑस्ट्रेलियाई टीक, साल, महुआ, आम, इमली और नारियल के पेड़ों पर उगाई गई काली मिर्च की खेती का निरीक्षण किया। उन्होंने इस पद्धति को देखकर यह महसूस किया कि पारंपरिक खेती से कहीं अधिक उत्पादकता और लाभ जैविक व मिश्रित खेती में है। खेतों के बीच में उगाई गई हल्दी की फसल और औषधीय पौधों में शामिल स्टीविया ने किसानों को सबसे अधिक चौंकाया। स्टीविया के बारे में दावा है कि यह चीनी से 25 गुना अधिक मीठी होने के बावजूद शुगर फ्री है।</p>
<p>मां दंतेश्वरी हर्बल समूह के संस्थापक डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने किसानों को खेती में बढ़ती लागत, जलवायु परिवर्तन, जहरीले केमिकल और जीएम बीजों से होने वाले खतरों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि आने वाला समय जहर मुक्त जैविक खेती का है, और यही खेती किसानों के आर्थिक व पर्यावरणीय स्थायित्व का आधार बनेगी।</p>
<p>उन्होंने अपने नवाचार &lsquo;नेचुरल ग्रीनहाउस&rsquo; के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह पारंपरिक पॉलीहाउस से 20 गुना सस्ता और अधिक टिकाऊ है। इसकी लागत मात्र 2 लाख रुपये प्रति एकड़ है, जबकि पॉलीहाउस में यह खर्च 40 लाख रुपये प्रति एकड़ तक होता है। इस मॉडल से किसानों को न सिर्फ अधिक उत्पादन मिलेगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से भी उनकी फसलें सुरक्षित रहेंगी।</p>
<p>इस कार्यक्रम में निदेशक अनुराग त्रिपाठी, मिशन ब्लैक गोल्ड लीडर जसमती नेताम, मिशन लीडर बलई चक्रवर्ती और मिशन लीडर शंकर नाग ने भी भाग लिया। किसानों ने मौके पर जैविक खेती की आर्थिक संभावनाओं का आकलन किया और यह निश्चय किया कि वे अपने-अपने गांवों में जाकर इसी वर्ष बरसात से जैविक खेती की शुरुआत करेंगे। यह पहल कोंडागांव को जैविक खेती के एक नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67b048b429f9c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्रगतिशील किसानों ने ‘नेचुरल ग्रीनहाउस’ और जैविक खेती को अपनाने का लिया संकल्प ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67b048b429f9c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में मूंगफली खरीद की अवधि 28 फरवरी तक बढ़ी, लेकिन नहीं होंगे नए पंजीकरण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/peanut-purchase-period-extended-till-february-28-in-rajasthan-but-no-new-registrations-will-be-done.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 13 Feb 2025 16:32:22 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/peanut-purchase-period-extended-till-february-28-in-rajasthan-but-no-new-registrations-will-be-done.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान में मूंगफली की सरकारी खरीद की अवधि 28 फरवरी तक के लिए बढ़ाई गई है। हालांकि, इस अवधि में नए पंजीकरण नहीं होंगे।&nbsp;राजस्थान सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, प्रदेश में <span>न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर</span> मूंगफली खरीद की अवधि को 28 फरवरी तक बढ़ाया गया है। सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक ने बताया कि राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को पत्र लिखकर खरीद अवधि बढ़ाने का आग्रह किया था।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>सहकारिता मंत्री ने बताया कि भारत सरकार से प्राप्त स्वीकृति के अनुसार पूर्व में पंजीकरण करवा चुके किसान उक्त बढ़ी हुई अवधि में अपनी मूंगफली की उपज का विक्रय कर सकेंगे। लेकिन इसके अंतर्गत नये पंजीकरण नहीं होंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समस्त पात्र किसानों से नियमानुसार तुलाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे मूंगफली विक्रय के इच्छुक किसान तुलाई से वंचित नहीं रहे। साथ ही, किसानों को तुलाई केन्द्रों पर कोई परेशानी नहीं हो, इसके लिए भी सभी प्रभारियों को निर्देशित किया गया है।&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>राजस्थान में मूंगफली खरीद की अवधि 15 फरवरी तक निर्धारित की गई थी। लेकिन ज्यादा से ज्यादा किसानों से खरीद करने के लिए राज्य सरकार ने भारत सरकार से खरीद अवधि बढ़ाने का आग्रह किया था। राज्य में मूंगफली विक्रय के लिए 1 लाख 33 हजार 296 किसानों ने अपना पंजीकरण करवाया है, जिनमें से अब तक 85 हजार 506 किसानों से खरीद की गई है। अब तक किसानों से 2058 करोड़ रुपये कीमत की 3.03 लाख टन से अधिक मूंगफली की खरीद की जा चुकी है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67add131360ec.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में मूंगफली खरीद की अवधि 28 फरवरी तक बढ़ी, लेकिन नहीं होंगे नए पंजीकरण ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67add131360ec.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एमपी में 2600 रुपये पर होगी गेहूं की खरीद, सीएम मोहन यादव का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-mp-will-get-rs-2600-for-wheat-cm-mohan-yadav-announced.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 11 Feb 2025 20:58:58 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-mp-will-get-rs-2600-for-wheat-cm-mohan-yadav-announced.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्यप्रदेश में किसानों से गेहूं की सरकारी खरीद 2600 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को देवास जिले में आयोजित कार्यक्रम में ऐलान किया कि इस बार किसानों के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य होगा 2600 रुपये होगा। हालांकि, अभी इस बारे में आधिकारिक आदेश का इंतजार है, लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा से स्पष्ट है कि राज्य सरकार गेहूं खरीद पर 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का मन बना चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले साल गेहूं के समर्थन मूल्य को 2700 रुपये से ज्यादा बढ़ाया जाएगा।</p>
<p>रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 150 रुपये बढ़ाकर 2425 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। जिसमें मध्यप्रदेश सरकार अपनी ओर से 175 रुपए का बोनस जोड़कर किसानों को 2600 रुपये को रेट देगी।</p>
<p>गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा ने किसानों को गेहूं का एमएसपी 2700 रुपये प्रति क्विंटल करने का वादा किया था। जबकि भारतीय किसान संघ 3000 रुपये की मांग कर रहा है। किसान संघ और बाकी किसान संगठनों की मांग को देखते हुए राज्य सरकार पर गेहूं के लिए बोनस देने का दबाव है।</p>
<p>पिछले साल मध्यप्रदेश में लगभग 48.40 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई थी जो लक्ष्य के मुकाबले कम थी। इस साल गेहूं की ऊंची कीमतों को देखते हुए सरकारी खरीद के स्तर को बनाए रखने के लिए भी सरकार के लिए गेहूं खरीद का दाम बढ़ाना जरूरी हो गया है।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>गेहूं खरीद के लिए पंजीकरण शुरू </strong></p>
<p>मध्यप्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। किसानों के पंजीकरण कराने की आखिरी तारीख 31 मार्च है।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>81 लाख किसानों के खातें में</strong> <strong>2000 रुपये</strong> <br />देवास जिले के सोनकच्छ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 81 लाख किसानों के खातों में 1624 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की। साथ ही, 1.27 करोड़ लाडली बहनों के खातों में 1553 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में हम लाडली बहनों को 1250 रुपये महीना दे रहे हैं। आगे चलकर इसे 3000 रुपये करेंगे। उन्होंने कार्यक्रम में 144.84 करोड़ रूपये लागत के 53 कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण भी किया।&nbsp;</p>
<p><strong>पानी है सरकार का संकल्प</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि हर खेत को पानी और बिजली सरकार का संकल्प है। उन्होंने सोनकच्छ और आसपास के गांवों को जल्द ही रंजीत सागर परियोजना से सिंचाई का पानी मिलने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के दौरान सीएम ने 144.84 करोड़ रुपये की लागत के 53 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67ab6c04dee46.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एमपी में 2600 रुपये पर होगी गेहूं की खरीद, सीएम मोहन यादव का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67ab6c04dee46.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में तिलहन&amp;#45;दलहन की सरकारी खरीद के लिए तारीखें निर्धारित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/dates-fixed-for-government-purchase-of-oilseeds-and-pulses-in-haryana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 06 Feb 2025 14:32:22 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/dates-fixed-for-government-purchase-of-oilseeds-and-pulses-in-haryana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा सरकार किसानों से दलहन और तिलहन फसलों को खरीदने की तैयारी में जुट गई है। प्रदेश में मसूर की खरीद 20 मार्च से, सरसों की खरीद 28 मार्च से, चने की खरीद 1 अप्रैल से, ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद 15 मई से और सूरजमुखी की खरीद 1 जून से शुरू होगी। किसानों से इन फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाएगी।</p>
<p>हरियाणा के मुख्य सचिव डॉ. विवेक जोशी ने हाल में रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 के लिए तिलहन और दलहन की खरीद को लेकर तैयारियों की समीक्षा की थी। उन्होंने अधिकारियों को खरीद की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने, खरीद केंद्रों को चिन्हित करने, भण्डारण और बारदाने की समुचित व्यवस्था करने तथा समय पर खरीद शुरू करने के निर्देश दिये।</p>
<p>आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में वर्ष 2024-25 के दौरान सरसों की खेती लगभग 21.08 लाख एकड़ भूमि में की गई है, जबकि चना, सूरजमुखी और मसूर की खेती क्रमशः 61 हजार एकड़, 63 हजार एकड़ तथा 98 एकड़ भूमि में की गई है। राज्य में इस वर्ष 74 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से सरसों के 15.59 लाख टन उत्पादन की संभावना है।</p>
<p>इसी प्रकार, चने की औसत उपज 49.4 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से 30 हजार टन उत्पादन तथा 80 क्विंटल प्रति एकड़ की औसत उपज के आधार पर 50 हजार टन सूरजमुखी उत्पादन होने की संभावना है। 70 क्विंटल प्रति एकड़ की औसत उपज के हिसाब से मूंग का उत्पादन 68 हजार टन तक पहुंचने की संभावना है। ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती लगभग 1 लाख एकड़ भूमि पर की गई है और 48 क्विंटल प्रति एकड़ की उपज के हिसाब से इस वर्ष मूंग का उत्पादन 48 हजार टन होने की संभावना है।</p>
<p>वर्ष 2025-26 के लिए सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5950 रुपये, चने का 5650 रुपये, सूरजमुखी का 7280 रुपये, समर मूंग का 8682 रुपये और मसूर का एमएसपी 6700 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।&nbsp;</p>
<p>बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, आनंद मोहन शरण, अतिरिक्त मुख्य सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण, राजा शेखर वुंडरू, निदेशक, कृषि, राजनारायण कौशिक, निदेशक, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, राजेश जोगपाल, प्रबंध निदेशक, हैफेड, मुकुल कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में तिलहन-दलहन की सरकारी खरीद के लिए तारीखें निर्धारित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[27 साल बाद दिल्ली में कमल खिलने के आसार, 9 एग्जिट पोल में भाजपा को बहुमत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/after-27-years-bjp-is-expected-to-come-to-power-in-delhi-bjp-is-ahead-in-9-exit-polls.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 05 Feb 2025 20:50:25 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/after-27-years-bjp-is-expected-to-come-to-power-in-delhi-bjp-is-ahead-in-9-exit-polls.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए बुधवार को मतदान के बाद अब सबकी निगाहें परिणाम पर टिकी हैं। विभिन्न एग्जिट पोल में भाजपा की जीत के दावे किए जा रहे हैं जबकि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी अपना पुराना प्रदर्शन दोहराने में नाकाम नजर आ रही है।</p>
<p>कुल 11 एग्जिट पोल में से 9 में भाजपा को बहुमत मिलता दिख रहा है जबकि दो एग्जिट पोल में आप की सरकार बनने का अनुमान है। कांग्रेस को पिछले चुनावों के मुकाबले कोई खास बढ़त नहीं है। गौरतलब है कि 2020 के दिल्ली चुनावों में, अधिकांश एग्जिट पोल के दावे गलत साबित हुए थे।</p>
<p>इस बार सभी एग्जिल पोल का निचोड़ यानी पोल ऑफ पोल्स में भाजपा को 36-42, आम आदमी पार्टी को 27-33 और कांग्रेस को एक सीट मिलने का अनुमान है। कुछ एग्जिट पोल ने आप और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर दिखाई है, लेकिन भाजपा का पलड़ा भारी है।</p>
<p>दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों पर बुधवार शाम 5 बजे तक 57.70% वोटिंग हो चुकी है। नतीजे 8 फरवरी को घोषित होंगे। सरकार बनाने के लिए 36 सीटों की जरूरत है। आप के पास वर्तमान में 62 विधायक, भाजपा के पास आठ और कांग्रेस का कोई विधायक नहीं है।</p>
<p>आप के कई नेताओं ने एग्जिट पोल को खारिज कर दिया, जबकि भाजपा नेताओं ने कहा कि उन्हें अपनी जीत का भरोसा है।&nbsp;अगर भाजपा को बहुमत मिलता है तो 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में उसकी वापसी होगी। इससे पहले 1993 में भाजपा ने 49 सीटें जीतीं और 5 साल में तीन मुख्यमंत्री - &nbsp;मदनलाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज बनाये थे। उसके बाद से भाजपा दिल्ली की सत्ता से दूर रही है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x_67a380f2bb329.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67a3816cd0535.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ 27 साल बाद दिल्ली में कमल खिलने के आसार, 9 एग्जिट पोल में भाजपा को बहुमत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में फसल बीमा भुगतान में देरी पर कृषि मंत्री ने जताई नाराजगी,  तत्काल मुआवजा जारी करने के निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/uttarakhand-agriculture-minister-expressed-displeasure-over-delay-crop-insurance-payment.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 04 Feb 2025 19:28:46 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/uttarakhand-agriculture-minister-expressed-displeasure-over-delay-crop-insurance-payment.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड में किसानों को फसल बीमा के भुगतान में देरी पर नाराजगी जताते हुए राज्य के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों को तत्काल मुआवजा जारी करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के कई किसानों ने कृषि मंत्री गणेश जोशी से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत वर्ष 2023-24 के मुआवजे का भुगतान नहीं होने की शिकायत की थी।</p>
<p>इस मामले को लेकर मंगलवार को देहरादून में कृषि मंत्री ने विभागीय अधिकारियों और एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में किसानों को फसल बीमा भुगतान में हो रही देरी को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।</p>
<p>कृषि मंत्री गणेश जोशी ने फसल बीमा भुगतान में देरी पर नाराजगी जाहिर करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए। उन्होंने सचिव कृषि को मुआवजा वितरण में हुई देरी के कारणों की जांच के आदेश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता है। अधिकारी पूरी गंभीरता से कार्य करें ताकि किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा मिल सके।</p>
<p>कृषि मंत्री ने सभी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि किसानों को उनका हक समय पर मिले और भविष्य में इस प्रकार की समस्या न हो।&nbsp;बैठक में सचिव कृषि एसएन पांडे, डॉ रतन कुमार, महेंद्र पाल, बीमा कंपनी से विपुश डिमरी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/02/image_750x500_67a21b512d9b7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में फसल बीमा भुगतान में देरी पर कृषि मंत्री ने जताई नाराजगी,  तत्काल मुआवजा जारी करने के निर्देश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में जल्द हो सकता है गन्ना मूल्य का ऐलान, भाव 400 पार होने का इंतजार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-price-may-be-announced-in-up-today-waiting-for-the-price-to-cross-400.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 04 Feb 2025 10:43:04 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-price-may-be-announced-in-up-today-waiting-for-the-price-to-cross-400.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: left;">उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) घोषित कर सकती है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गन्ना मूल्य निर्धारण का मामला आज राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विचार के लिए पेश किया जाना था। हालांकि, आज इस मुद्दे पर कोई घोषणा नहीं हुई। लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही&nbsp;यूपी सरकार चालू पेराई सत्र 2024-25 के लिए गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य को मंजूरी दे सकती है। किसानों की मांग है कि यूपी में भी गन्ने का दाम कम से कम 400 पार होना चाहिए।&nbsp;</p>
<p style="text-align: left;">पिछले सीजन 2023-24 में उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने का एसएपी 20 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर अगैती किस्मों के लिए 370 रुपये तय किया था। लेकिन इस बार पेराई सत्र शुरू हुए कई महीने गुजरने के बाद भी गन्ना मूल्य का ऐलान नहीं हुआ है। जबकि हरियाणा में गन्ने का भाव 400 और पंजाब में 401 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। <span>यूपी में पिछले सात साल में केवल तीन बार गन्ने का एसएपी 10, 25 और 20 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा और चार बार इसे फ्रीज रखा गया। इस तरह सात वर्षों में गन्ने मूल्य कुल 55 रुपये बढ़ाया गया।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: left;">उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें गन्ने से चीनी की रिकवरी दरों में गिरावट, उत्पादन लागत में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए इस साल गन्ना के एसएपी में कोई बढ़ोतरी नहीं चाहती हैं। लेकिन गन्ना किसानों की ओर से भाव बढ़ाने की मांग की जा रही है। क्योंकि चीनी मिलों को चीनी के अलावा एथेनॉल और अन्य सह-उत्पादों से भी कमाई होती है।</p>
<p style="text-align: left;">पिछले दिनों केंद्र सरकार ने एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के लिए सी-हैवी मोलासेस से प्राप्त एथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया था। समय-समय पर सरकार चीनी उद्योग को मदद और रियायतें देती रहती है।&nbsp; &nbsp;</p>
<table width="348" style="border-collapse: collapse; width: 100%; margin-left: auto; margin-right: auto;">
<tbody>
<tr>
<td colspan="2" style="width: 343.496px;">
<p style="text-align: center;"><strong>यूपी में पिछले 8 वर्षो में गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी)</strong></p>
<p style="text-align: center;"><em>(रुपये/क्विंटल)</em></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 169.316px; text-align: center;"><strong>पेराई सत्र&nbsp;</strong></td>
<td style="width: 170.938px; text-align: center;"><strong>गन्ना मूल्य&nbsp;</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 169.316px; text-align: center;">2016-17</td>
<td style="width: 170.938px; text-align: center;">315</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 169.316px; text-align: center;">2017-18</td>
<td style="width: 170.938px; text-align: center;">325</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 169.316px; text-align: center;">2018-19</td>
<td style="width: 170.938px; text-align: center;">325</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 169.316px; text-align: center;">2019-20</td>
<td style="width: 170.938px; text-align: center;">325</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 169.316px; text-align: center;">2020-21</td>
<td style="width: 170.938px; text-align: center;">325</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 169.316px; text-align: center;">2021-22</td>
<td style="width: 170.938px; text-align: center;">350</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 169.316px; text-align: center;">2022-23</td>
<td style="width: 170.938px; text-align: center;">350</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 169.316px; text-align: center;">2023-24</td>
<td style="width: 170.938px; text-align: center;">370</td>
</tr>
<tr>
<td colspan="2" style="width: 343.496px; text-align: center;"><em>गन्ने की अगैती किस्मों के लिए</em></td>
</tr>
</tbody>
</table> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में जल्द हो सकता है गन्ना मूल्य का ऐलान, भाव 400 पार होने का इंतजार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65f97a104d02e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पद्मश्री किसान: “एप्पल मैन ऑफ इंडिया” ने विकसित की सेब की अनूठी किस्म]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/padma-shri-farmer-apple-man-of-india-developed-a-unique-variety-of-apple.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 28 Jan 2025 15:14:20 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/padma-shri-farmer-apple-man-of-india-developed-a-unique-variety-of-apple.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश के इनोवेटिव किसान हरिमन शर्मा को भारतीय कृषि में उनके अहम योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने एचआरएमएन-99&nbsp;नामक सेब की&nbsp;स्व-परागण और कम ठंड में उगने वाली किस्म विकसित की है,&nbsp;जिसने देश में सेब की बागवानी में बड़ा परिवर्तन ला दिया है। इससे कम ठंडे और मैदानी इलाकों में भी सेब की बागवानी संभव हो गई है और इस फल का दायरा बढ़ा है।</p>
<p>आम तौर पर सेब की किस्मों को समशीतोष्ण जलवायु और लंबे समय तक ठंडे मौसम (chilling hours) की आवश्यकता होती है। लेकिन हरिमन शर्मा द्वारा विकसित एचआरएमएन-99&nbsp;किस्म के सेब की बागवानी उष्णकटिबंधीय,&nbsp;उपोष्णकटिबंधीय और मैदानी क्षेत्रों में भी हो सकती है, जहां गर्मियों में तापमान&nbsp;40-45&nbsp;डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इस किस्म के चलते अब उन क्षेत्रों में भी सेब की खेती संभव हो सकती है, जहां पहले इसे अव्यवहारिक माना जाता था।</p>
<p>बचपन में ही अनाथ हो गये हरिमन शर्मा का बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) के छोटे से गांव पनियाला से राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित करने का उनका सफर बेहद प्रेरणादायक है। तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने मैट्रिक तक की शिक्षा पूरी की और खेती-किसानी और फल उपजाने के अपने जुनून को बनाए रखा।</p>
<p>सेब की एचआरएमएन-99 किस्म&nbsp;की शुरुआत&nbsp;1998&nbsp;में तब शुरू हुई जब हरिमन शर्मा ने अपने घर के पिछले हिस्से में सेब के कुछ बीज बोये। इनमें से एक बीज उल्लेखनीय रूप से अगले वर्ष अंकुरित हो गया और&nbsp;1,800&nbsp;फीट की ऊंचाई पर स्थित पनियाला की गर्म जलवायु के बावजूद&nbsp;2001&nbsp;में पौधे ने फल दिये। हरिमन शर्मा ने सावधानीपूर्वक मातृ पौधे की देखभाल की और ग्राफ्टिंग द्वारा कई पौधे लगाए और अंततः सेब का एक समृद्ध बाग तैयार कर लिया।</p>
<p>अगले दशक में,&nbsp;उन्होंने विभिन्न प्रयोगों और ग्राफ्टिंग तकनीकों की मदद से सेब की अभिनव किस्म को सुधारने पर ध्यान केंद्रित किया। शुरुआत में उनके काम की तरफ कृषि और वैज्ञानिक समुदायों का अधिक ध्यान नहीं गया।</p>
<p>वर्ष 2012 में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत स्वायत्त संस्थान राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान (एनआईएफ) ने हरिमन शर्मा के इनोवेशन को पहचाना। एनआईएफ ने सेब किस्म की विशिष्टता की पुष्टि की और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के संस्थानों,&nbsp;कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके),&nbsp;कृषि विश्वविद्यालयों,&nbsp;राज्य कृषि विभागों,&nbsp;किसानों और देश भर के स्वयंसेवी संगठनों के साथ मिलकर आणविक अध्ययन,&nbsp;फल ​​गुणवत्ता परीक्षण और बहु-स्थान परीक्षण की सुविधा प्रदान कर इसके सत्यापन में सहयोग दिया। इन प्रयासों के माध्यम से, यह किस्म 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैल गई है। इसे नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में भी लगाया गया है। एनआईएफ ने इस किस्म के पंजीकरण को पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली में सुगम बनाया।</p>
<p>अपने अभिनव प्रयासों के लिए&nbsp;हरिमन शर्मा को वर्ष&nbsp;2017&nbsp;में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने&nbsp;9वें राष्ट्रीय द्विवार्षिक ग्रासरूट इनोवेशन और उत्कृष्ट पारंपरिक ज्ञान पुरस्कारों के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके अलावा भी उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इनमें कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय,&nbsp;भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय नवोन्मेषी किसान पुरस्कार (2016),&nbsp;आईएआरआई फेलो पुरस्कार (2017),&nbsp;डीडीजी, आईसीएआर द्वारा किसान वैज्ञानिक उपाधि (2017),&nbsp;राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ किसान पुरस्कार (2018),&nbsp;राष्ट्रीय कृषक सम्राट सम्मान (2018)&nbsp;जगजीवन राम कृषि अभिनव पुरस्कार (2019)&nbsp;और कई राज्य और केंद्र सरकार के पुरस्कार शामिल हैं।</p>
<p>सेब की एचआरएमएन-99&nbsp;किस्म&nbsp;कीविशेषता इसका धारीदार लाल-पीला छिलका,&nbsp;मुलायम और रसदार गूदा&nbsp;तथा प्रति पौधा सालाना&nbsp;75&nbsp;किलोग्राम तक फल देने की क्षमता है। सेब की इस किस्म की बागवानी से देश में हजारों किसान लाभान्वित हुए हैं। राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन&nbsp;ने इसकी व्यावसायिक बागवानी को बढ़ावा देने में भी मदद की। परिणामस्वरूप पूर्वोत्तर राज्यों में इस किस्म के एक लाख से अधिक पौधे रोपे गए हैं, जो किसानों के लिए आय का अतिरिक्त स्रोत हैं।</p>
<p>हरिमन शर्मा के नवाचार ने न केवल भारत में सेब की खेती को बदल दिया है, बल्कि असंख्य किसानों को अतिरिक्त आय और बेहतर पोषण प्राप्त करने में भी मदद की है। उनके प्रयासों से, कभी अमीरों का आहार माना जाने वाला सेब, अब आम आदमी की पहुंच में है। उन्हें पद्म श्री से किया जाना राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान करने और सतत विकास में जमीनी स्तर पर नवाचारों की शक्ति को दर्शाता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_6798a6d48bb6b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पद्मश्री किसान: “एप्पल मैन ऑफ इंडिया” ने विकसित की सेब की अनूठी किस्म ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_6798a6d48bb6b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में सोलर कृषि पम्प को शामिल करने की मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/approval-to-include-solar-pump-in-prime-minister-krishak-mitra-surya-yojana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 25 Jan 2025 13:23:06 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/approval-to-include-solar-pump-in-prime-minister-krishak-mitra-surya-yojana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में शुक्रवार को महेश्वर में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक कई अहम फैसले लिए गये। प्रदेश में किसानों को कृषि पम्प कनेक्शन प्रदान करने के लिए "प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना" में वर्तमान में प्रचलित "मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना" के अंतर्गत सोलर कृषि पम्प को भी शामिल करने का निर्णय लिया है। मंत्रि-परिषद के निर्णय अनुसार,<span> "प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना" की अनुदान व्यवस्था को संशोधित किया गया है।&nbsp;</span></p>
<p>योजना के तहत किसानों और कृषक समूहों को सोलर पंप खरीदने के लिए 90 फीसदी तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। किसानों द्वारा लागत का श्रेणीवार 5<span>&nbsp;या&nbsp;</span>10<span> प्रतिशत योगदान मार्जिन मनी के रूप में दिया जाएगा। शेष राशि के लिए किसानों द्वारा ऋण लिया जाएगा</span>, <span>जिस ऋण के भुगतान का संपूर्ण दायित्व राज्य शासन का होगा। </span></p>
<p>मध्यप्रदेश शासन की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, उक्त ऋण का भुगतान सोलर कृषि पम्प लगने की वजह से कृषि उपभोक्ताओं के लिए "अटल कृषि ज्योति योजना" एवं अन्य योजनाओं के अंतर्गत वितरण कंपनियों को देय सब्सिडी में हुई बचत से किया जा सकेगा। योजना के प्रथम चरण में अस्थायी बिजली कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं अथवा अविद्युतिकृत कृषकों को सोलर पम्प का लाभ दिया जाएगा। योजना के आगामी चरणों में स्थायी विद्युत पम्प उपयोग कर रहे कृषकों को भी सोलर पम्प&nbsp;दिया जाना प्रस्तावित है।</p>
<p>योजना का क्रियान्वयन मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा केन्द्र सरकार की "कुसुम योजना" के घटक '<span>ब</span>' <span>अंतर्गत किया जाएगा। सोलर पम्प की स्थापना से विद्युत पम्पों को बिजली आपूर्ति के लिए राज्य सरकार पर पड़ने वाले भार को कम किया जा सकेगा और विद्युत वितरण कम्पनियों के घाटे को कम करने में मदद मिलेगी।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_67949abac96b3.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<h4>123&nbsp;गांवों तक पहुंचेगा नर्मदा जल&nbsp;</h4>
<p>मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महेश्वर-जानापाव उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना का नाम बदलकर लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के नाम पर रखने की घोषणा की है। देवी अहिल्याबाई की 300वीं जयंती के उपलक्ष में महेश्वर में आयोजित डेस्टिनेशन केबिनेट और मण्डलेश्वर से महेश्वर-जानापाव माइक्रो सिंचाई परियोजना सहित 1042.24 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया।</p>
<p>मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 982 करोड़ 59 लाख रुपये की महेश्वर-जानापाव उद्वहन सिंचाई परियोजना के पूर्ण होने पर खरगौन जिले की महेश्वर, धार जिले की पीथमपुर एवं इंदौर जिले की महू तहसील के कुल 123 गांवों के किसानों के खेत में सिंचाई के लिए नर्मदा का जल पहुँचेगा। इससे इन गांवों के किसानों का कृषि उत्पादन बढ़ेगा और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में सोलर कृषि पम्प को शामिल करने की मंजूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं खरीद पर 150 रुपये बोनस देने की मध्यप्रदेश सरकार की तैयारी, पंजीकरण शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-government-will-give-bonus-of-rs-150-on-wheat-registration-started.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 24 Jan 2025 12:44:02 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-government-will-give-bonus-of-rs-150-on-wheat-registration-started.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्यप्रदेश में राज्य सरकार ने गेहूं की सरकारी खरीद पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अलावा 150 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देने योजना बना रही है। राज्य सरकार से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी है। मध्य प्रदेश में गेहूं की कीमत 2800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रही है। कीमतों में तेजी को देखते हुए एमएसपी पर गेहूं की खरीद के 100 लाख टन के लक्ष्य को हासिल करने में मुश्किल हो सकती है ऐसे में सरकार का यह कदम किसानों को सरकारी खरीद में अधिक गेहूं बेचने के लिए आकर्षित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अभी बोनस देने की के लिए औपचारिक अधिसूचना नहीं आई है लेकिन स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा यह फैसला लेने की काफी संभावना है।</p>
<p>चालू रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का एमएसपी 150 रुपये बढ़ाकर 2425 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। लेकिन अगर राज्य सरकार बोनस देती है तो मध्यप्रदेश में किसानों को गेहूं का रेट बोनस सहित 2575 रुपये प्रति क्विंटल मिल सकता है। हालांकि राज्य सरकार ने घोषणा के बावजूद धान की सरकारी खरीद पर बोनस नहीं दिया था।&nbsp;</p>
<p>मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद के लिए 20 जनवरी से किसानों के पंजीकरण शुरू हो गए हैं। किसान गेहूं बेचने के लिए 31 मार्च तक रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। किसानों को किसान ऐप के जरिए भी घर बैठे पंजीयन कराए जाने की सुविधा दी गई है।</p>
<p><strong>2700 रुपये का था वादा</strong></p>
<p>मध्यप्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष केदार सिरोही का कहना है कि चुनाव में भाजपा ने गेहूं की खरीद 2700 रुपये के रेट पर करने का वादा किया था। भाजपा सरकार को अपना वादा निभाना चाहिए। 1&nbsp;</p>
<p><strong>खरीद की तैयारी</strong></p>
<p>मध्य प्रदेश सरकार नए सीजन में गेहूं खरीद की तैयारियों में जुटी है। हालांकि, इस साल सरकार ने गेहूं खरीदी का लक्ष्य घटा दिया है। पिछले साल राज्य में 100 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन इसके मुकाबले सिर्फ 48 लाख टन गेहूं मध्यप्रदेश से खरीदा जा सका था। इसे देखते हुए इस बार राज्य सरकार ने 100 लाख टन गेहूं खरीद की तैयारी की है। इसके लिए 4 हजार उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं।</p>
<p>खुले बाजार में गेहूं के दाम अधिक होने के कारण पिछले साल मध्यप्रदेश से गेहूं की कम खरीद हुई थी। यही स्थिति कमोबेश इस साल भी रह सकती है। रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमानों के बावजूद खुले बाजार में गेहूं के दाम 2800 रुपये के आसपास चल रहे हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>पंजीकरण की व्यवस्था</strong><br />गेहूं की सरकारी खरीद के लिए पंजीकरण की पुख्ता व्यवस्था की गई है। किसान ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं खरीद पर 150 रुपये बोनस देने की मध्यप्रदेश सरकार की तैयारी, पंजीकरण शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बुंदेलखंड का दर्द: तीन पीढ़ियों के सपनों और उम्मीदों का भी पलायन ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/pain-of-bundelkhand-migration-of-dreams-and-hopes-of-three-generations.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 23 Jan 2025 10:02:42 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/pain-of-bundelkhand-migration-of-dreams-and-hopes-of-three-generations.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>नसीरपुर, जालौन (बुंदेलखंड)</strong></p>
<p>&ldquo;हमारे पास अब कुछ बचा नहीं है। हमारा नौजवान पढ़-लिखकर भी बाहर जाकर रोजमर्रा की जिंदगी चलाने के लिए छोटी मोटी नौकरी करता है। यहां अपने बुजुर्ग मां बाप को भगवान भरोसे गांव में छोड़ जाता है। जो उसकी दो तीन एकड़ पुश्तैनी जमीन होती है उसकी भी वो परवाह नहीं करता है। अधिया-बटिया पर देकर चला जाता है। हीनता भावना से ये तय कर दिया गया है कि उसका भविष्य यहां नहीं है। बुंदेलखंड में 67 फीसदी पलायन है। ये युवा जो जा रहा है वह तीन पीढ़ियों का नुकसान कर रहा है। एक पीढ़ी उसके मां- बाप की जो यहां उसके बिना परेशान रहते हैं। एक पीढी वो खुद, उसकी बीवी और तीसरा उसके बच्चे। वो दूसरे शहर में जा रहा है जहां वो बोझ बन जाता है। हर शहर की लोगों को झेलने की क्षमता होती है। पर यहां से हजारों की संख्या में युवा जब किसी शहर में जाते हैं तो वहां मलिन बस्तियां बढ़ती हैं। उस शहर पर भी बोझ़ बढ़ता है। तीसरी पीढ़ी उसके बच्चे जिनको पढ़ना लिखना चाहिए वो भी कुछ नहीं कर पा रहे।"</p>
<p>यह कहना है फिल्म अभिनेता, नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और बुंदेलखंड विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष राजा बुंदेला का जो इन दिनों "गांव-गांव, पांव-पांव" यात्रा के माध्यम से अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग उठा रहे हैं। उनसे जालौन जिले के नसीरपुर गांव में मुलाकात हुई। राजा बुंदेला के शब्द बुंदेलखंड के हालात बयां करते हैं। पिछड़ेपन और पलायन की पीड़ा को महसूस कराते हैं। &nbsp;</p>
<p>राजा बुंदेला कहते हैं कि हमारी सात नदियों का पानी हमें मिल नहीं रहा। हमें सूखा सूखा कहकर केन बेतवा लिंक और हर घर जल, हर नल जल जैसी योजनाओं का मायाजाल बुन दिया जाता है। लगता है अरे वाह, अब हमारी समस्याएं खत्म हुईं। हम बुंदेलखंड में चार जगह बिजली बनाते हैं पर यहां गांव आठ घंटे से ज्यादा अंधेरे में डूबे रहते हैं। आप यहां रुकिये तो आपको पता चलेगा। शिक्षा की व्यवस्था ये है कि महीनों से अध्यापकों को वेतन नहीं मिला। जो होशियार अध्यापक हैं उन्होंने अपनी जगह दो-तीन हजार में यहीं के किसी नौजवान को रख लिया है। उनकी जगह वो पढ़ाता है। अस्पताल का हाल ये है कि मेडिकल कॉलेज रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। आजादी के बाद से अब तक हमें कुछ नहीं मिला है। एक आईआईटी नहीं, एक एम्स नहीं। बुंदेलखंड के 14 जिलों में एक ऐसी फैक्टरी नहीं जिसे कहा जा सके कि ये रोजगार दे रही है। हम किस बात का दम भरें। हम उत्तर प्रदेश हैं ही नहीं!&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_6791cc7db9971.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>देश का दिल बुंदेलखंड&nbsp;</strong><br />अलग बुंदेलखंड राज्य की अलख जगा रहे राजा बुंदेला कहते हैं कि बुंदेलखंड को हार्ट ऑफ इंडिया कहा जाता है। ये मध्य भारत है। लेकिन हमें उत्तर प्रदेश में फंसा दिया गया है। बिजली वो तय करते हैं। पानी वो तय करते हैं। रोजगार वो तय करते हैं। यूपी के 403 विधायकों में हमारे चंद एमएलए क्या योजनाएं ला पाते हैं। सब गोरखपुर, गाजियाबाद में चला जाता है। ऐसे में किसी को तो आवाज उठानी पड़ेगी। यहां का गरीब गुरबा, पेट की लड़ाई के आगे हार ही गया है। वो क्या लड़ाई लड़े। हमने ऐसे कुछ साथियों को तलाशा है जो थोड़ा बेहतर स्थिति में हैं और अपनी जिंदगी परिवार के लिए जी चुके। हमने अलग बुंदेलखड़ राज्य के लिए आंदोलन छेड़ा है। हमें वो बुंदेलखंड चाहिए जहां दूध, दही की नदियां बहती थीं।&nbsp;</p>
<p>राजा बुंदेला कहते हैं कि 1956 में खत्म हुआ बुंदेलखंड वापस चाहिए। बुंदेलखंड आजादी के पहले अलग राज्य था। आजादी के बाद 1956 तक बुंदेलखंड का अलग मुख्यमंत्री रहा। वो बुंदेलखंड जो सूरमाओं के लिए जाना जाता था, हमें वो वापस चाहिए। हम अब उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में उपेक्षित नहीं सकते हैं।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_6791cc9ba92ae.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>तीन विकल्प और आंदोलन की रणनीति:</strong><br />राजा बुंदेला के नेतृत्व में चलाए जा रहे अलग बुंदेलखंड राज्य आंदोलन ने सरकार के सामने तीन विकल्प रखे हैं &mdash;(1) बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाया जाए, (2) इसे दिल्ली की तरह केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाए, या (3) बोडोलैंड की तर्ज पर गवर्निंग काउंसिल बनाई जाए।&nbsp;</p>
<p>राजा बुंदेला कहते हैं कि अगर हमें राज्य नहीं बना सकते हैं तो हमें दिल्ली की तरह बना दीजिए। एक लेफ्टिनेंट गवर्नर बना दीजिए। अगर वो भी नहीं कर सकते तो गवर्निंग काउंसिल बना दीजिए। जैसी अभी बोडोलैंड की बनी है। हमारी जनता की चुनी हुई गवर्निंग काउंसिल हमारी प्राथमिकताओं के हिसाब से विकास करेंगी। हमने ये तीन विकल्प दे दिए हैं। अगर इन विकल्पों पर भी सरकार नहीं मानती है तो ये तय मानिए संघर्ष लंबा है। हम कोई तोड़ फोड़ नहीं करेंगे। बसें और रेल नहीं जलाएंगे। न किसी सरकारी कार्यालय को नुकसान पहुंचाएंगे। हम जेल भरेंगे। जेल भरो आंदोलन चलाएंगे। अभी हमारी "गांव-गांव, पांव-पांव यात्रा" के तीन चरण और बाकी हैं। उसके बाद हम दिल्ली में दो दिन डेरा डालेंगे और फिर जेल भरो आंदोलन चलाएंगे। सांकेतिक हड़ताल करेंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>बुंदेलखंड के तीन सवाल: पलायन, प्यास और रोजगार&nbsp;</strong><br />बुंदेलखंड के तीन बड़े सवाल हैं। पलायन और भुखमरी का सवाल सबसे पहला है। राजा बुंदेला कहते हैं कि नौजवान जब यहां से जाता है तो वो अकेले ही नहीं जाता। वो यहां से सपने और उम्मीदें ले जाता है। नौजवान यहां रहेगा तो अपने मां बाप की देखभाल करेगा। वो अपनी ढाई एकड़ की खेती किसानी करेगा। उसके बाद छोटे मोटे कारोबार करेगा। जब आदमी यहां रुकेगा तो यहां कारोबार भी बढ़ेगा। अभी यहां नौजवान है ही नहीं तो ऐसे में फैक्टरी चलेगी भी कैसे। दूसरा पानी की समस्या। बुंदेलखंड ताल तलैयों के लिए जाना जाता था। ललितपुर चले जाइए। सबसे ज्यादा पानी वाला जिला था वहां सबसे ज्यादा गरीबी है। टीकमगढ़ झीलों के लिए जाना जाता था। आपने बेला ताल को अतिक्रमणों से तबाह कर दिया है। फिर आप कहते हैं कि बुंदेलखंड में पानी का संकट है। हमारा किसान नदियों से पानी लेता ही नहीं था। वह कुओं पर निर्भर था। आपने ऐसी ऐसी योजनाएं लाकर थोप दी हैं, कभी आस्टेलिया से, कभी अमेरिका से, इंग्लैंड से। हर घर जल, हर घर नल योजना आई। आपने पहले सड़कें बनाई। फिर इस योजना के लिए सड़कें तोड़कर पाइपलाइन बिछाई। ठेकेदार काम बीच में ही छोड़ गए। न सडक ठीक है और न ही पाइपलाइन ठीक से बनी। पानी भी सडक पर ही बहता है। तीसरा है मालिकाना हक। जो आपने हमें दिया ही नहीं। हर नए राज्य को केंद्र पंद्रह साल आर्थिक सहायता देता है और उसे आत्मनिर्भर होने तक धीरे-धीरे कम करता जाता है। उत्तरखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़ को भी ऐसे ही मिला।&nbsp;</p>
<p><strong>अपने पैरों चल सकते हैं बुंदेलखंडी&nbsp;</strong><br />मगर बुंदेलखंड को तो इस आर्थिक सहायता की भी जरूरत नहीं। राजा बुंदेला कहते हैं कि हमारे पास अदरक है, मटर है, नींबू है। खनिज में ग्रेनाइट है। बालू है, हीरा है, कोहिनूर है। हमारे पास आयुर्वेद औषधियां हैं। छत्तीसगढ़ और झारखंड के बाद बुंदेलखंड से ही हमदर्द और बाबा रामदेव को सबसे ज्यादा आयुर्वेदिक खनिज जाता है। ये एक बड़ा झूठ है कि बुंदेलखंड अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता। क्यूं नहीं हो सकता, हमें पता है कि रोजगार कहां हो सकता है। दुनिया भर में हमारे जो बुंदेलखंडी भाई काम कर रहे हैं, साइंस में टेक्नोलॉजी में, हमने सबको लिखा है। अपने क्षेत्र में आओ और रोजगार दो। सब तैयार हैं। हमने इसका पूरा तानाबाना बुन लिया है। हम प्रदेश बनने के बाद अगले दस साल किसी मदद पर निर्भर नहीं रहेंगे। हमारी गृहमंत्री अमित शाह जी से मुलाकात हुई। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से भी हम मिले। हमारे दर्द को दोनों ने समझा। लेकिन यूपी सरकार का इसमें ज्यादा रोल नहीं है। हमारी समस्या केंद्र से हल होगी। गृहमंत्री 140 करोड़ भारतवासियों की बात कर रहे हैं। वह कहते हैं कि हमें देश की तमाम समस्याओं का निवारण करना है। हमारी मांग सिर्फ पांच करोड़ बुंदेलखंडियों की जिंदगी से जुड़ी है। हमारा दर्द उनकी जानकारी में है और यूपी का बंटवारा उनके मेनिफेस्टो में है। हमने दो बार शाह जी से बात की। दोनों बार उन्होंने बुंदेलखंड राज्य देने से इनकार नहीं किया। उन्होंने ये जरूर कहा था कि राज्यसभा में बहुमत न होने की वजह से इस प्रस्ताव में अड़चनें हैं। हम फिर नए सिरे से उनके साथ वार्ता करेंगे। महाराष्ट्र और गुजरात एक थे। महाराष्ट्र किसी भी सूरत में गुजरात को छोड़ना नहीं चाहता था। सात जजों की बेंच बैठी तब ये दोनों अलग हुए। छोटे राज्यों की अहमियत को प्रधानमंत्री भी जानते हैं।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_6791cc53335ca.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>आंदोलन के लिए छोड़ी सुख-सुविधाएं</strong><br />अलग बुंदेलखंड राज्य के लिए मांग के लिए अपने आप को पूरी तरह समर्पित कर चुके राजा बुंदेला कहते हैं कि हमारे लिए सबसे ज्यादा जरूरी इस लड़ाई के लिए लोगों का विश्वास जीतना है। हम इसमें कामयाब भी हो रहे हैं। हमारी बात में अगर वजन है तो लोग उसे गुनेंगे भी। मैंने निजी जीवन में भी सारी ऐसी चीजें छोड़ दी हैं जो लोगों का भरोसा जीतने में बाधा थीं। मैं बड़ी कार में घूमूं, नाज नखरे के साथ घूमूं, फिल्म एक्टर बनकर &nbsp;घूमूं तो कोई गंभीरता से नहीं लेगा। बहुत ज्यादा जरूरी है जिंदगी में कि आप सामने वाले को समझें। आंदोलन में सुबह चाय की समस्या होती थी। मैंने चाय ही छोड़ दी। फिर मेरे सोने की दिक्कत होती थी। मैंने जमीन पर ही बिछौना लगा दिया। गरम रोटी खाने की लालसा छोड़ दी। हर वो आदत बदल डाली जिससे हमारे लोगों को लगे कि ये कहता कुछ है और करता कुछ और है। मैं अब सुखी भी हूं। मेरी जरूरतें अब कम हो गई हैं। निजी तौर पर पहले बहुत लाव लश्कर लेकर चलना पड़ता था। अब इसकी जरूरत ही नहीं। ये सब मैंने गांधीजी को पढ़कर सीखा है। गांधी ने खुद को इतना सहज और सरल कर दिया था कि वह अंदर तक लोगों के दिल में उतर गए।&nbsp;</p>
<p><strong>बुंदेलखंडियों के लिए संदेश&nbsp;</strong><br />राजा बुंदेला बुंदेलखंडवासियों से आह्वान करते हैं, "बुंदेलखंड तुम्हारा अपना है। अब समय आ गया है कि अपने आप को पहचानो, बुंदेलखंड को खुद के पैरों पर खड़ा करो। अकेला राजा बुंदेला कुछ नहीं कर सकता। आप सब खड़े हो जाओगे तो दुनिया की कोई ताकत आपको रोकेगी नहीं। यही जेपी ने कहा था, सिंहासन खाली करो जनता आती है। मैं तो सिर्फ एक आवाज हूं। अकेला राजा बुंदेला कुछ नहीं कर सकता, पर संगठित जनता जरूर कर सकती है। बुंदेलखंडियों अपना खोया हुआ राज्य वापस लो। जय जय बुंदेलखंड।&rdquo;</p>
<p><em>(हाल ही में डॉ. रवींद्र प्रताप राणा और पत्रकार राजेश शर्मा ने बुंदेलखंड के पिछड़ेपन और पलायन की समस्या को नजदीक से समझने के लिए एक दौरा किया। यह लेख "गांव-गांव, पांव-पांव यात्रा" में राजा बुंदेला से हुई बातचीत पर आधारित है।)</em></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_6791cc1fb0cc9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बुंदेलखंड का दर्द: तीन पीढ़ियों के सपनों और उम्मीदों का भी पलायन  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_6791cc1fb0cc9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शंभू मोर्चे से 21 जनवरी को दिल्ली कूच करेंगे 101 किसान, डल्लेवाल का अनशन 52वें दिन भी जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/101-protesters-will-march-to-delhi-from-shambhu-border-on-jan-21-dallewal-hunger-strike-continues-on-52nd-day.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 16 Jan 2025 19:25:05 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/101-protesters-will-march-to-delhi-from-shambhu-border-on-jan-21-dallewal-hunger-strike-continues-on-52nd-day.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>शंभू बॉर्डर पर आंदोलनकारी किसानों ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि 21 जनवरी को 101 किसानों का जत्था दिल्ली के लिए कूच करेगा। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि जैसे 6, 8 और 14 दिसंबर को शांतिपूर्ण तरीके से तीन जत्थे दिल्ली की ओर बढ़े थे, वैसे ही 21 जनवरी को 101 किसानों का जत्था दिल्ली के लिए कूच करेगा।</p>
<p>इस जत्थे का नेतृत्व मनजीत सिंह राय (बीकेयू दोआबा प्रदेश अध्यक्ष) और बलवंत सिंह बहिरामके (बीकेयू प्रदेश अध्यक्ष) करेंगे। इस बार भी शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ा जाएगा। उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि या तो आंदोलन की मांगें मान ली जाएं और किसानों को उनके घर वापस भेजा जाए या फिर दिल्ली जाकर अपनी आवाज उठाने का रास्ता दिया जाए।&nbsp;</p>
<p>पंधेर ने कहा कि 5 जनवरी 2022 को फिरोजपुर में प्रधानमंत्री मोदी की रैली के कार्यक्रम रद्द होने पर किसानों पर दर्ज किए गए शून्य एफआईआर और अब पंजाब सरकार द्वारा धारा 307 के तहत मुकदमे दर्ज करना अनुचित है। अगर ऐसी कार्रवाई किसी भी किसान के खिलाफ होती है, तो संगठन कड़ा विरोध करेगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_67890f7ae8e5c.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>हरियाणा-पंजाब के खनौरी बॉर्डर पर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का अनशन 52 दिन से जारी है। उनके समर्थन में 111 किसान भी अनशन पर बैठ गये हैं। पिछले 11 महीनों से किसान मजदूर मोर्चा (भारत) और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) फसलों की खरीद पर एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत 13 मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन अभी तक केंद्र सरकार के साथ वार्ता का रास्ता नहीं खुला है और न ही किसानों को पैदल दिल्ली मार्च की अनुमति दी गई।</p>
<p>आंदोलनकारी किसान नेताओं ने कहा कि हमें यह देखकर हैरानी हुई कि पंजाब सरकार के वकील माननीय सुप्रीम कोर्ट में कहते हैं कि जगजीत सिंह डल्लेवाल जी की तबियत में सुधार है! किसान नेताओं ने सवाल उठाया कि आमरण अनशन पर बैठने से तबियत में सुधार होता है या गिरावट आती है?</p>
<p><strong>एसकेएम की सरकार से मांग&nbsp;</strong></p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि पंजाब-हरियाणा सीमा पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ बातचीत शुरू करे। एसकेएम ने एक बयान जारी कर कहा कि वे 52 दिन से अनशन पर बैठे जगजीत सिंह डल्लेवाल की बिगड़ती सेहत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखेंगे।&nbsp;</p>
<p>एसकेएम ने सभी राज्यों में किसान महापंचायत का आह्वान किया है। एसकेएम की राज्य समन्वय समितियां महापंचायत की तिथि और स्थान तय करने के लिए बैठक करेंगी। 11 फरवरी को पटना में एक विशाल किसान महापंचायत का आयोजन किया जाएगा।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ शंभू मोर्चे से 21 जनवरी को दिल्ली कूच करेंगे 101 किसान, डल्लेवाल का अनशन 52वें दिन भी जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[संजीव बालियान ने सीएम योगी को लिखी चिट्ठी, &amp;quot;पुलिस ने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने पर सुरक्षा हटाई&amp;quot;]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/former-union-minister-sanjeev-balyan-wrote-a-letter-to-cm-yogi-accusing-police-of-removing-his-security.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 14 Jan 2025 13:29:57 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/former-union-minister-sanjeev-balyan-wrote-a-letter-to-cm-yogi-accusing-police-of-removing-his-security.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता संजीव बालियान ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मुजफ्फरनगर पुलिस के रवैये की शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि मुजफ्फरनगर पुलिस के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से उनकी समस्त सुरक्षा वापस ले ली गई है।</p>
<p>सीएम योगी को लिखे पत्र में संजीव बालियान ने जनपद मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर में एक मंदिर और धर्मशाला की जमीन को अधिकारियों की मिलीभगत से कब्जाने का आरोप लगाया है। पत्र में उन्होंने कहा, "खानुपुर गाँव में एक जमीन मंदिर एवं धर्मशाला के लिए मंसूरपुर डिस्टिलरी के कर्मचारियों के द्वारा खरीदी गई थी। पूर्व की सरकार के अधिकारियों से मिलीभगत कर यह जमीन डिस्टिलरी द्वारा अपने नाम दाखिल खारिज करा लिया गया था। 1 जनवरी को मुजफ्फरनगर पुलिस अधिकारियों के साथ साँठगांठ कर डिस्टिलरी द्वारा मंदिर एवं धर्मशाला की जमीन पर कब्जा कर लिया गया था और ग्रामवासियों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए।"</p>
<p>इसके विरोध में 12 जनवरी को ग्रामवासियों के साथ संजीव बालियान खुद मंसूरपुर थाने गये थे। इससे पहले भी उन्होंने कई बार मुजफ्फरनगर पुलिस की संपत्ति विवाद में संलिप्तता की शिकायत पुलिस के आला अधिकारियों को की थी। बालियान ने सीएम योगी से अनुरोध किया कि आपकी जीवन यात्रा को देखते हुए मुझे विश्वास है कि मंदिर एवं धर्मशाला की जमीन कब्जाने के मामले में आप न्यायउचित कार्यवाही करेंगे।</p>
<p>पत्र में संजीव बालियान ने उनकी सुरक्षा हटाने का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने लिखा कि मुजफ्फरनगर पुलिस के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से मेरी समस्त सुरक्षा वापिस ले ली गई है। लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन पर जानलेवा हमला हुआ था। अगर फिर से हमला हुआ तो इसकी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार के अधिकारियों की होगी। अगर एक पूर्व केंद्रीय मंत्री के साथ पुलिस का यह व्यवहार है तो आम भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता के क्या हालात होंगे।&nbsp;</p>
<p>संजीव बालियान भाजपा के प्रमुख जाट नेताओं में शुमार किए जाते हैं। उन्होंने 2014 और 2019 में मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से भाजपा का प्रतिनिधित्व किया और चौधरी अजित सिंह जैसे कद्दावर नेता को हराकर लोकसभा पहुंचे थे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_678616fedf5b1.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ संजीव बालियान ने सीएम योगी को लिखी चिट्ठी, "पुलिस ने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने पर सुरक्षा हटाई" ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी उद्योग रिकवरी में गिरावट से चिंतित, यूपी के मुख्य सचिव को लिखा पत्र]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sugar-industry-worried-about-declining-recovery-wrote-letter-to-chief-secretary-of-up.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 13 Jan 2025 19:55:30 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sugar-industry-worried-about-declining-recovery-wrote-letter-to-chief-secretary-of-up.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल गन्ने की फसल पर रोगों व मौसम की मार के चलते पैदावार प्रभावित हो रही है। इसका असर चीनी उद्योग पर भी पड़ रहा है। चीनी रिकवरी में गिरावट से चिंतित यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन (यूपीइस्मा) ने प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह को पत्र लिखकर उत्पादन लागत में बढ़ोतरी की आशंका जताई है।</p>
<p>उधर, उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी तक गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) घोषित नहीं किया है जिसे लेकर गन्ना किसानों की नाराजगी बढ़ रही है। संभावना है कि जल्द ही राज्य सरकार गन्ना मूल्य में कुछ बढ़ोतरी कर सकती है। इस संभावित बढ़ोतरी के मद्देनजर चीनी उद्योग रिकवरी में कमी और लागत में बढ़ोतरी को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कर रहा है। &nbsp;</p>
<p>यूपी के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में यूपी इस्मा ने कहा है कि पिछले साल की तुलना में चीनी रिकवरी में लगभग एक फीसदी तक गिरावट आई है, जिससे चीनी उत्पादन की लागत 140 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गई है। पिछले साल गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी के बावजूद चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई। चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) वर्ष 2019 से नहीं बढ़ाया गया है।</p>
<p>यूपी इस्मा का कहना है कि माल ढुलाई की लागत अधिक बढ़ने के बावजूद परिवहन छूट की दर बेहद कम है। इसके अलावा, एथेनॉल से होने वाली आय पिछले दो वर्षों में गन्ने मूल्य में हुई वृद्धि के मुकाबले नहीं बढ़ी है। चीनी उद्योग का कहना है कि गन्ने के एसएपी में बढ़ोतरी से उन पर वित्तीय दबाव पड़ेगा, क्योंकि उद्योग किसी भी वृद्धि को वहन करने की स्थिति में नहीं हैं। संगठन ने सरकार से चीनी के एमएसपी और एथेनॉल के दाम बढ़ाने का आग्रह किया है।</p>
<p><strong>गन्ना मूल्य बढ़ाने का दबाव </strong></p>
<p>पिछले सीजन में यूपी सरकार ने गन्ने मूल्य 20 रुपये बढ़ाकर अगैती किस्मों के लिए 370 रुपये, सामान्य किस्मों के लिए 360 रुपये और अस्वीकृत किस्मों के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। पड़ोसी राज्य हरियाणा में पिछले साल ही इस सीजन के लिए गन्ने का दाम 400 रुपये तय कर दिया था जबकि पंजाब सरकार ने 401 रुपये प्रति क्विंटल का भाव घोषित किया है। ऐसे में यूपी सरकार पर भी गन्ना मूल्य बढ़ाने का दबाव है।</p>
<p>भाजपा के सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने मीरापुर विधान सभा उपचुनाव के दौरान गन्ने मूल्य 400 पार होने की बात कही थी। जबकि किसान यूनियनें गन्ने का भाव 450 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग उठा रही हैं। पिछले दिनों यूपी के चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने जनवरी के दूसरे सप्ताह में होने वाली कैबिनेट बैठक में गन्ने मूल्य पर निर्णय होने का संकेत दिया था।</p>
<p><strong>चीनी रिकवरी और उत्पादन में कमी</strong></p>
<p>सहकारी चीनी मिलों के संगठन नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) के आंकड़ों के अनुसार, चालू पेराई सत्र 2024-25 में 31 दिसंबर तक देश का चीनी उत्पादन पिछले साल की तुलना में करीब 16 फीसदी कम है। इस गिरावट का प्रमुख कारण गन्ने की कमजोर फसल और चीनी मिलों का देर से चलना है।&nbsp;</p>
<p>चालू सीजन के पहले तीन महीनों में गन्ने से चीनी की रिकवरी घटकर 8.68 फीसदी रह गई जो पिछले साल 31 दिसंबर तक 9.23 फीसदी थी। यूपी में चीनी रिकवरी 9.65 फीसदी से घटकर 8.90 फीसदी रही है जबकि महाराष्ट्र में चीनी रिकवरी 8.95 फीसदी से घटकर 8.60 फीसदी रही है।</p>
<p>यूपी के चीनी उत्पादन में करीब 2 लाख टन और महाराष्ट्र के चीनी उत्पादन में 8 लाख टन से अधिक की कमी आई है। देश में कुछ चीनी उत्पादन करीब 17.70 लाख टन घटा है। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी उद्योग रिकवरी में गिरावट से चिंतित, यूपी के मुख्य सचिव को लिखा पत्र ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब सरकार ने एग्रीकल्चर मार्केटिंग पर केंद्र के मसौदे को खारिज किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-rejected-the-centre-draft-of-national-policy-framework-on-agricultural-marketing.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 10 Jan 2025 13:11:15 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-rejected-the-centre-draft-of-national-policy-framework-on-agricultural-marketing.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब सरकार ने एग्रीकल्चर मार्केटिंग पर राष्ट्रीय नीति रूपरेखा के मसौदे को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया है। पंजाब सरकार का कहना है कि यह राज्य के अधिकारों का अतिक्रमण और तीन कृषि कानूनों के विवादास्पद प्रावधानों को वापस लाने का एक प्रयास है।</p>
<p>एग्रीकल्चर मार्केटिंग पर राष्ट्रीय नीति रूपरेखा के मसौदे को खारिज करते हुए पंजाब के विशेष सचिव (कृषि) ने मसौदा समिति के संयोजक और केंद्रीय कृषि मंत्रालय में उप कृषि विपणन सलाहकार एसके सिंह को एक पत्र लिखा है। इसमें कहा गया कि नीति रूपरेखा का मसौदा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) <span>के मुद्दे पर पूरी तरह से चुप है जो पंजाब के किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। </span></p>
<p>पत्र में कहा गया है कि 2020 में किसानों के आंदोलन के समय, <span>किसानों की आशंका थी कि भारत सरकार एमएसपी पर गेहूं और धान की खरीद को खत्म करना चाहती है। इस मसौदा नीति में एमएसपी पर खरीद का कोई संदर्भ न होने से फिर से किसानों के मन में वही आशंकाएं पैदा हुई हैं। मसौदा नीति निजी बाजारों और अनुबंध खेती को प्रोत्साहन देने पर भी जोर देती है। </span></p>
<p>पंजाब सरकार ने कहा कि चूंकि कृषि विपणन राज्य का विषय है, <span>इसलिए भारत सरकार को ऐसी कोई नीति नहीं बनानी चाहिए और इस विषय पर अपनी आवश्यकता के अनुसार नीतियां बनाने का काम राज्यों पर छोड़ देना चाहिए। पंजाब सरकार ने ग्रामीण विकास निधि (आरडीएफ) और बाजार विकास निधि (एमडीएफ) दरों में प्रस्तावित कटौती पर भी आपत्ति जताई है। मसौदे में इन्हें घटाकर 1 प्रतिशत करने का सुझाव दिया गया है। इससे मंडी और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को दुरुस्त रखने के राज्य के प्रयासों पर असर पड़ेगा। ऐसे में किसानों के लिए अपनी उपज को मंडी यार्ड में लाना और उसे लाभकारी मूल्य प्राप्त करना मुश्किल होगा</span></p>
<p>कृषि मंत्रालय ने 25 <span>नवंबर को नीति रूपरेखा का मसौदा जारी करते हुए इस पर </span>15 <span>दिसंबर तक सुझाव मांगे थे। इस पर पंजाब सरकार ने विभिन्न पक्षों से विचार-विमर्श करने के बाद जवाब भेजने के लिए </span>10 <span>जनवरी तक का समय लिया था। पंजाब सरकार की ओर से इस बात पर भी आपत्ति जताई गई कि प्रस्तावित नीति रूपरेखा में निजी बाजारों को बढ़ावा देने पर काफी जोर दिया गया है। इससे कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) कमजोर होकर अप्रासंगिक हो जाएंगे और किसान निजी बाजारों के मालिकों की दया पर निर्भर होंगे। जबकि पंजाब के पास कृषि मंडियों का बड़ा नेटवर्क है जो किसानों की अच्छी सेवा कर रहा है। </span></p>
<p>पंजाब सरकार ने नीति रूपरेखा के मसौदे में अनुबंध खेती को बढ़ावा देने, <span>निजी साइलो को डीम्ड मार्केट यार्ड घोषित करने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। पत्र में कहा गया है</span>, "<span>पंजाब सरकार कृषि विपणन पर इस मसौदा नीति से पूरी तरह असहमत है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही केंद्र के इस मसौदे को निरस्त किए गए तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को "वापस लाने" की कोशिश करार दे चुके हैं। </span></p>
<p>पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने मंडियों में एकल राष्ट्रीय कर जैसे प्रावधानों की आलोचना करते हुए इसकी तुलना जीएसटी प्रणाली से की है जिसने राज्यों को वित्तीय रूप से परेशान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा, <span>एसकेएम (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा सहित विभिन्न किसान संगठन भी एग्रीकल्चर मार्केटिंग पर राष्ट्रीय नीति रूपरेखा के मसौदे का विरोध कर रहे हैं। </span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब सरकार ने एग्रीकल्चर मार्केटिंग पर केंद्र के मसौदे को खारिज किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिल्ली के किसानों से मिले शिवराज, आप सरकार पर फिर निशाना साधा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/shivraj-met-the-farmers-of-delhi-and-again-targeted-the-aap-government.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 08 Jan 2025 00:38:17 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/shivraj-met-the-farmers-of-delhi-and-again-targeted-the-aap-government.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार की किसान कल्याण योजनाओं को दिल्ली में लागू करने को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। मंगलवार को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने आवास पर दिल्ली के किसानों से मुलाकात की और दिल्ली की सीएम आतिशी से केंद्र की किसान कल्याण योजनाओं को लागू करने का आग्रह किया।&nbsp;</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली की आप सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार की किसान कल्याण योजनाओं से दिल्ली के किसान वंचित हैं। राज्य सरकार ने योजनाओं को लागू ही नहीं किया। दिल्ली में कृषि मंत्री ही नहीं है। आप सरकार किसानों पर आपदा बनकर टूटी है। उन्होंने कहा, &ldquo;मुझे गाली दो, <span>उससे मुझे कोई अंतर नहीं पड़ता। लेकिन भारत सरकार की किसान कल्याण की योजनाओं को दिल्ली के किसानों के लिए लागू करो। उन्हें योजनाओं का लाभ दे दो।</span>&rdquo;&nbsp;</p>
<p>इससे पहले केंद्रीय कृषि मंत्री ने दिल्ली की सीएम आतिशी को पत्र लिखकर दिल्ली के किसानों को केंद्र की योजनाओं का लाभ नहीं मिलने का मुद्दा उठाया था। इस पर पलटवार करते हुए दिल्ली की सीएम आतिशी ने बयान दिया था कि भाजपा का किसानों के बारे में बोलना ऐसे है जैसे दाऊद इब्राहिम का अहिंसा पर प्रवचन देना।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_677d7a21ab31d.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैंने दिल्ली के किसानों की सारी समस्याएं नोट की हैं। दिल्ली के किसानों के जीवन में अंधेरा है। यहां फसल बीमा योजना लागू नहीं है। एमएसपी पर खरीद नहीं होती। दिल्ली के किसान को भी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि फ्री बिजली की बात करने वाली दिल्ली की सरकार किसानों को सबसे महंगी बिजली दे रही है। <span>यहां सोलर पंप योजना लागू नहीं है।</span> <span>केंद्र सरकार की दर्जनों योजनाएं हैं, जिन्हें दिल्ली सरकार लागू नहीं कर रही है। इसलिए मैंने दुःखी मन से मुख्यमंत्री जी को चिट्ठी लिखी।</span></p>
<p>ऐसे समय जब हरियाणा-पंजाब सीमा पर कई महीनों से किसान आंदोलन कर रहे हैं और किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल करीब डेढ़ महीने से आमरण अनशन पर हैं, <span>कृषि मंत्री अलग-अलग किसान समूहों से मुलाकात कर रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि </span>मैं ऐसा कृषि मंत्री नहीं हूं कि केवल दफ्तर में बैठकर अधिकारियों से ही बात करूं। मैंने मंगलवार का दिन किसानों से मिलने के लिए तय किया है। मेरे लिए हर खेत ही मेरा मंत्रालय है, <span>जहां किसान हैं</span>, <span>वहां मेरा मंत्रालय है।&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_677d79fc13e29.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिल्ली के किसानों से मिले शिवराज, आप सरकार पर फिर निशाना साधा ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिल्ली में 5 फरवरी को मतदान, 8 फरवरी को आएंगे परिणाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/assembly-polls-in-delhi-on-february-5-counting-on-february-8.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 07 Jan 2025 17:31:49 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/assembly-polls-in-delhi-on-february-5-counting-on-february-8.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान हो गया है। चुनाव आयोग की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 5 फरवरी को दिल्ली में वोट डाले जाएंगे साथ ही 8 फरवरी को चुनाव के नतीजे आएंगे। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी चुनाव तारीखों के ऐलान से पहले ही&nbsp;राजधानी की सभी 70 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है। इसी तरह भाजपा अब तक 29 और कांग्रेस 47 उम्मीदवारों का ऐलान&nbsp;कर चुकी है।&nbsp;</p>
<p>दिल्ली चुनाव के संबंध में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि इस बार भी दिल्ली चुनाव एक चरण में संपन्न होंगे। सभी 70 विधानसभा सीटों पर एक ही दिन वोटिंग होगी। चुनाव की अधिसूचना 10 जनवरी को जारी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 17 जनवरी है और मतदान 5 फरवरी को होगा। मतों की गिनती 8 फरवरी को होगी।&nbsp;</p>
<p>मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि दिल्ली में 1.55 करोड़ मतदाता हैं जिनमें 83.49 लाख पुरुष, 71.74 लाख महिलाएं और 1,261 ट्रांसजेंडर व्यक्ति हैं। 25.89 लाख युवा मतदाता हैं जिनमें से 2.08 लाख मतदाता पहली बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। विधानसभा चुनाव के लिए दिल्ली में 13 हजार से अधिक मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे।&nbsp;चुनाव में 85 वर्ष से अधिक आयु के तथा दिव्यांग मतदाताओं के लिए मतदान की सुविधा रहेगी।&nbsp;</p>
<p>दो विधानसभा क्षेत्रों - उत्तर प्रदेश में मिल्कीपुर और तमिलनाडु में इरोड - के लिए उपचुनाव भी इसी कार्यक्रम के अनुसार होंगे, जबकि जम्मू-कश्मीर के दो निर्वाचन क्षेत्रों - बडगाम और नगरोटा - में मौजूदा बर्फीली परिस्थितियों के कारण बाद में चुनाव होंगे।</p>
<p><strong>मतदान में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किया </strong></p>
<p>मतदान में गड़बड़ी और ईवीएम पर उठे सवालों को खारिज करते हुए सीईसी राजीव कुमार ने कहा कि शक का इलाज किसी के पास नहीं है। वोटिंग पर झूठ के गुब्बारे न उड़ाएं।&nbsp;ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि ईवीएम में कोई धांधली संभव नहीं है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट अलग-अलग फैसलों में लगातार यही कह रहे हैं। ईवीएम मतगणना के लिए फुलप्रूफ डिवाइस है। टेम्परिंग के आरोप बेबुनियाद हैं।</p>
<p>राजीव कुमार ने आगे कहा कि ईवीएम में अवैध वोट डालने की संभावना नहीं है। इसे मतदान के बाद सील कर दिया जाता है और इसमें वायरस नहीं जा सकता। ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों के जरिए गिने गए वोटों में कोई विसंगति नहीं पाई गई।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>महिला विरोधी टिप्पणी करने से बचें </strong></p>
<p>मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के नेताओं से चुनाव प्रचार के दौरान महिलाओं के खिलाफ टिप्पणी करने और बच्चों को शामिल करने से बचने का आग्रह किया। उनसे हाल ही में भाजपा नेता रमेश बिधूड़ी द्वारा कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ की गई टिप्पणी के बारे में पूछा गया था। मुख्य चुनाव आयुक्त ने मतदान प्रक्रिया को स्वच्छ रखने और राजनीतिक दलों से सीमाएं न लांघने का अनुरोध किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_677d176f4c96f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिल्ली में 5 फरवरी को मतदान, 8 फरवरी को आएंगे परिणाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने जगजीत सिंह डल्लेवाल से मुलाकात की, चिकित्सा लेने का आग्रह किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/supreme-court-committee-meets-jagjit-singh-dallewal-urges-him-to-seek-medical-treatment.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 06 Jan 2025 20:39:56 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/supreme-court-committee-meets-jagjit-singh-dallewal-urges-him-to-seek-medical-treatment.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमेटी ने आज हरियाणा-पंजाब के खनौरी बॉर्डर पर पहुंचकर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल से मुलाकात की और उनसे चिकित्सा सहायता लेने का आग्रह किया। एमएसपी की कानूनी गारंटी सहित कई मांगों का लेकर डल्लेवाल पिछले 42 दिनों से आमरण अनशन पर हैं और उनकी सेहत काफी चिंताजनक है।</p>
<p>पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस नवाब सिंह की अध्यक्षता वाली कमेटी दोपहर करीब साढ़े तीन बजे 70 वर्षीय किसान नेता डल्लेवाल का हालचाल जानने खनौरी किसान मोर्चे पर पहुंची। कमेटी में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी बीएस संधू, कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा, प्रोफेसर रंजीत सिंह घुम्मण और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्री डॉ. सुखपाल सिंह शामिल हैं।</p>
<p>कमेटी के चेयरमैन नवाब सिंह ने जगजीत सिंह डल्लेवाल के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हम सभी ने उनसे मेडिकल सुविधा लेने का अनुरोध किया है। हम चाहते हैं कि वह जल्द से जल्द ठीक हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अनशन तोड़ने के लिए नहीं कर रहे हैं बल्कि यह कहने आए हैं कि आपका (डल्लेवाल) स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए। उनसे मेडिकल ट्रीटमेंट लेने की अपील कर रहे हैं। &nbsp;</p>
<p>जगजीत सिंह डल्लेवाल ने सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के सदस्यों से कहा कि उनके लिए किसानों के मुद्दे पहले हैं, उनकी सेहत बाद में। एमएसपी गारंटी कानून बनना ज्यादा महत्वपूर्ण है। जब तक वाहेगुरु का आशीर्वाद है तब तक उन्हें कुछ नहीं होगा। केंद्र सरकार को बिना देरी के किसानों के मुद्दों का हल करने का प्रयास करना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>कमेटी के सदस्य कृषि नीति विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने कहा कि हमने डल्लेवाल साहब से कहा कि हम उनसे अनुरोध करने आए हैं कि हमें आपकी जरूरत है। हम पिछले चार महीनों से किसानों से मिलने का इंतजार कर रहे थे। वे नहीं आए। लेकिन हम आए। हम गांवों में जाकर भी किसानों से मिलेंगे। हमारा प्रयास होगा कि किसानों के मुद्दों का व्यावहारिक समाधान निकालने की कोशिश करें।</p>
<p>सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी किसानों की शिकायतों का हल निकालने के उद्देश्य से कमेटी का गठन किया था। कमेटी सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। रिपोर्ट अलग-अलग फेज में होगी।</p>
<p>उधर, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने कहा कि 10 जनवरी को देश भर में गांव स्तर पर मोदी सरकार के पुतले जलाए जाएंगे ताकि सरकार को यह पता चल जाये कि सभी गाँवों के लोग एमएसपी गारंटी कानून और जगजीत सिंह डल्लेवाल के पक्ष में खड़े हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने जगजीत सिंह डल्लेवाल से मुलाकात की, चिकित्सा लेने का आग्रह किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[साल बदला, नेता बदले, लेकिन नहीं बदला गन्ना किसानों का हाल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/year-changed-leaders-changed-but-same-struggles-for-sugarcane-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 06 Jan 2025 17:59:03 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/year-changed-leaders-changed-but-same-struggles-for-sugarcane-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चालू गन्ना पेराई सत्र 2024-25 की शुरुआत हुए तीन महीने से ज्यादा गुजर चुके हैं। आमतौर पर चीनी मिलें अक्टूबर-नवंबर से मार्च-अप्रैल तक चलती हैं। लेकिन चालू पेराई सीजन आधे से अधिक बीतने के बाद भी देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को उनकी उपज का भाव मालूम नहीं है। अभी तक राज्य सरकार ने गन्ना के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में बढ़ोतरी तो दूर, उसकी घोषणा तक नहीं की है। राज्य के किसान तीन महीने से अपनी उपज का भाव जाने बगैर ही चीनी मिलों को गन्ना बेचने को मजबूर हैं। फिर भी यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है।&nbsp;</p>
<p>यह स्थिति इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार इस बार गन्ने के रेट में कोई बढ़ोतरी नहीं करने का फैसला भी ले सकती है। यूपी में पिछले सात साल में केवल तीन बार गन्ने का एसएपी 10, 25 और 20 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा और चार बार इसे फ्रीज रखा गया। इस तरह सात वर्षों में गन्ने मूल्य कुल 55 रुपये बढ़ाया गया। आमतौर पर जिस साल चुनाव नहीं होते, उस साल गन्ने का रेट नहीं बढ़ता।&nbsp;</p>
<table width="348" style="margin-left: auto; margin-right: auto;">
<tbody>
<tr>
<td colspan="2">
<p style="text-align: center;"><strong>यूपी में पिछले 8 वर्षो में गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी)</strong></p>
<p style="text-align: center;"><em>(रुपये/क्विंटल)</em></p>
</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td><strong>पेराई सत्र&nbsp;</strong></td>
<td><strong>गन्ना मूल्य&nbsp;</strong></td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td>2016-17</td>
<td>315</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td>2017-18</td>
<td>325</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td>2018-19</td>
<td>325</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td>2019-20</td>
<td>325</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td>2020-21</td>
<td>325</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td>2021-22</td>
<td>350</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td>2022-23</td>
<td>350</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td>2023-24</td>
<td>370</td>
</tr>
<tr style="text-align: center;">
<td colspan="2" style="text-align: center;"><em>गन्ने की अगैती किस्मों के लिए</em></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align: left;">एक ओर जहां हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर किसान फसलों के न्यनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी समेत कई मांगों का लेकर पिछले दस महीनों से आंदोलन कर रहे हैं। वहीं, गन्ना बेल्ट के नाम से मशहूर पश्चिमी यूपी में किसानों को गन्ने का रेट भी मालूम नहीं है। जबकि पड़ोसी हरियाणा में राज्य सरकार ने पिछले साल ही इस साल के लिए गन्ना मूल्य बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल करने का ऐलान कर दिया था। पिछले साल हरियाणा में गन्ने का रेट 386 रुपये प्रति क्विंटल था। इसी तरह, पंजाब सरकार ने इस साल गन्ने का रेट 391 से बढ़ाकर 401 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जो देश में सर्वाधिक है। लेकिन उत्तर प्रदेश में अभी तक गन्ने के दाम का कुछ अता-पता नहीं है। इस स्थिति का फायदा उठाकर क्रैशर और कोल्हू भी किसानों से कम दाम पर गन्ना खरीद रहे हैं। &nbsp; &nbsp;</p>
<p>किसान राजनीति का गढ़ रहे पश्चिमी यूपी में गन्ने के मुद्दे पर यह उदासीनता सूबे के बदले सियासी माहौल और किसान यूनियनों के बिखराव का परिणाम है। किसानों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाला राष्ट्रीय लोकदल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ही सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से हाथ मिला चुका है और अब केंद्र व यूपी सरकार में भागीदार है। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने <em><strong>रूरल वॉयस</strong> </em>को बताया कि मीरापुर उपचुनाव में राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने बयान दिया था कि गन्ने का भाव 400 पार होना चाहिए। फिलहाल पार्टी इसी स्टैंड पर कायम है। जाहिर है कि रालोद गन्ने का भाव बढ़ाने को लेकर भाजपा सरकार पर दबाव बनाने में अभी तक कामयाब नहीं हुआ है। न ही इस मुद्दे पर पार्टी की तरफ से कोई खास हलचल दिख रही है।<br /><br />विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने भी गन्ना किसानों के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाने में खास रुचि नहीं दिखाई। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर हुए किसान आंदोलन के बाद किसान यूनियनों में ऐसा बिखराव हुआ कि गन्ने का रेट न बढ़ना भी कोई बड़ा मुद्दा नहीं बन पाया। अलग-अलग किसान नेता और संगठन गन्ना का रेट बढ़ाने की मांग तो जरूर कर रहे हैं लेकिन इस मांग को लेकर सरकार पर असर डालने की स्थिति में नहीं है।&nbsp;</p>
<p>गन्ना किसानों के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने वाले राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के नेता <strong>सरदार वीएम सिंह</strong> का कहना है कि किसानों को जाति-धर्म से ऊपर उठकर सरकार बनानी होगी। तभी गन्ने का दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा। इस तरह वह किसानों से एकजुट होकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का आह्वान करते हैं।&nbsp;भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष <strong>नरेश टिकैत</strong> सवाल उठाते हैं कि हरियाणा, पंजाब में 400 से ऊपर गन्ने का रेट है तो यूपी में फर्क क्यों है?&nbsp;बाकी किसान नेता भी अपने बयानों में गन्ने का दाम बढ़ाने की मांग कर रहे हैं लेकिन जमीनी स्तर पर खास सक्रियता नहीं है। जबकि पश्चिमी यूपी में गन्ना किसानों के मुद्दे पर बड़े आंदोलन होते रहे हैं, जिनकी गूंज दिल्ली तक सुनाई देती थी। लेकिन इस बार हालात एकदम अलग हैं।&nbsp;</p>
<p>लखीमपुरी खीरी कांड से सुर्खियों में आए किसान नेता <strong>तजिंदर सिंह विर्क</strong> मानते हैं कि किसानों को अपनी एकजुटता बढ़ानी होगी, तभी सरकार और सियासी दल उनकी आवाज को अनसुना नहीं कर पाएंगे। इसलिए संयुक्त किसान मोर्चा के बिखरे घटकों को साथ लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यूपी के मुजफ्फरनगर के जिले के किसान<strong> संदीप चौधरी</strong> का मानना है कि सूबे की राजनीति में सांप्रदायिक मुद्दों का प्रभाव बढ़ा है। साथ ही रालोद के भाजपा से हाथ मिलाने के बाद गठबंधन की सियासी मजबूरी समझी जा सकती है। जबकि किसानों यूनियनों में आपसी टकराव और गुटबाजी हावी है। मंसूरपुर गन्ना सहकारी समिति के पूर्व चेयरमैन <strong>श्यामपाल डबास</strong> ने बताया कि इस बार सरकार ने अभी तक गन्ने का रेट घोषित नहीं किया है। रेट बढ़ने को लेकर भी अनिश्चितता है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>श्यामपाल बताते हैं कि इस साल पश्चिमी यूपी में गन्ने की फसल पर रेड रॉट व अन्य रोगों का काफी प्रकोप है। रोगग्रस्त किस्म Co 0238 का विकल्प किसानों तक नहीं पहुंचने के कारण गन्ने की पैदावार प्रभावित हुई है। ऐसे में अगर दाम न बढ़ा तो यह गन्ना किसानों पर दोहरी मार होगी।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ साल बदला, नेता बदले, लेकिन नहीं बदला गन्ना किसानों का हाल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[टोहाना में एसकेएम की महापंचायत, किसानों से वार्ता शुरू करने की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/skm-mahapanchayat-in-tohana-opposition-to-the-framework-of-agricultural-marketing.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 04 Jan 2025 19:46:39 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/skm-mahapanchayat-in-tohana-opposition-to-the-framework-of-agricultural-marketing.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने आज हरियाणा के फतेहाबाद जिले के टोहाना में महापंचायत कर किसानों की एकता को मजबूत करने पर जोर दिया। एसकेएम ने मोदी सरकार को चेतावनी दी कि वह कृषि विपणन नीति रूपरेखा (एनपीएफएएम) के मसौदे को तुरंत वापस ले और किसान संगठनों से वार्ता शुरू करे।&nbsp;</p>
<p>एसकेएम के नेताओं ने आमरण अनशन पर बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि उनको कुछ हो गया तो इसके लिए केंद्र और हरियाणा सरकार जिम्मेदार होगी। एसकेएम की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, महापंचायत ने किसानों की एकता को और मजबूत करने का आह्वान किया और पंजाब के खनौरी व शंभू बॉर्डर पर किसानों के संघर्ष के साथ एकजुटता व्यक्त की।&nbsp;</p>
<p>टोहाना अनाज मंडी में आयोजित महापंचायत में राकेश टिकैत<span>, </span>जोगेंद्र सिंह उग्राहां, डॉ. दर्शन पाल समेत संयुक्त किसान मोर्चा के कई नेता शामिल हुए। महापंचायत में महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। महापंचायत की अध्यक्षता सभी संगठनों की ओर बनाए गए अध्यक्ष मंडल ने की। &nbsp;</p>
<p>राकेश टिकैत ने कहा कि अगला आंदोलन केएमपी के चारों ओर करने की योजना संयुक्त किसान मोर्चा के समक्ष रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि <span>24</span> फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर हरियाणा सरकार लोगों को गुमराह कर रही है। मरणव्रत पर बैठे वरिष्ठ नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के जीवन को बचाने के लिए केंद्र सरकार को कदम उठाने चाहिए। उन्होंने बताया कि एकता के लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने जो वरिष्ठ नेताओं की कमेटी गठित की थी वह प्रयासरत है।</p>
<p>किसान नेता जोगिंदर सिंह उग्राहां ने कहा कि <span>25</span> नवंबर को जो मसौदा जारी किया गया है उससे अनाज का व्यापार कॉरपोरेट के हाथ में चला जाएगा। विश्व व्यापार संगठन और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के खिलाफ बहुत तीखी और बड़ी लड़ाई लड़नी पड़ेगी। उन्होंने किसानों से एकता बनाने की अपील की।&nbsp;एसकेएम के किसान नेताओं ने घोषणा की है कि आगामी <span>24</span> जनवरी को दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय जनरल बाडी मीटिंग बुलाई गई है उसमें आगे के आंदोलन के चरण की घोषणा की जाएगी।&nbsp;</p>
<p>महापंचायत में कॉमरेड इंद्रजीत सिंह ने कृषि मंडी के राष्ट्रीय प्रारूप के मसौदे को एक स्वर से अस्वीकार करते हुए सभी ग्राम पंचायतों से आग्रह किया गया कि वह सभी इस प्रस्ताव को नामंजूर करते हुए 10 जनवरी तक केंद्र सरकार को भेजें।</p>
<p>एसकेएम की महापंचायत में रमिंदर पटियाला, कृष्ण प्रसाद<span>, </span>मनजीत सिंह धनेर<span>, </span>सुखदेव जम्मू<span>, </span>आर.वेंकैया<span>, </span>सत्यवान<span>, </span>सुरेश कोथ<span>, </span>बलदेव निहालगढ़<span>, </span>इंद्रजीत सिंह<span>, </span>अमरीक सिंह<span>, </span>किरण जीत शेखों<span>, </span>जोगेंद्र नैन<span>, </span>विकास सीसर<span>, </span>रुलदू सिंह मानसा<span>, </span>प्रेम सिंह गहलावत<span>, </span>कर्म जीत सिंह<span>, </span>मास्टर बलबीर<span>, </span>हरजिंदर ननुआना<span>, </span>बाबा गुरदीप सिंह<span>, </span>सुबेदार रणबीर मलिक<span>, </span>जगमति सांगवान उपस्थित रहे।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_677942fb9f581.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>बस हादसे में तीन महिला किसानों की मौत&nbsp;</strong></p>
<p>पंजाब के बरनाला में बस दुर्घटना में बीकेयू एकता उग्राहां से जुड़ी तीन महिला किसानों की मौत हो गई और <span>30 </span>अन्य घायल हो गईं। यह हादसा उस समय हुआ जब बस में सवार बीकेयू एकता उग्राहां से जुड़ी महिलाएं पंजाब के बठिंडा जिले के एक गांव से हरियाणा के टोहाना में किसान महापंचायत में शामिल होने जा रही थीं। बस <span>52</span> से अधिक लोग सवार थे। बरनाला के एसएचओ कुलजिंदर सिंह ने बताया कि इलाके में कोहरा था और बस दुर्घटनाग्रस्त होकर बाईपास पर पलट गई। मृतकों में जसवीर कौर पत्नी जीत सिंह, सरबजीत कौर पत्नी सुखपाल सिंह (नंबरदार) और बलवीर कौर पत्नी बंत सिंह शामिल हैं।&nbsp;</p>
<p>किसान महापंचायत ने सड़क हादसे में तीन महिला किसानों की दुखद मौत पर शोक व्यक्त किया और पंजाब सरकार से पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा और एक सरकारी नौकरी देने की मांग की।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_67793eda8175a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ टोहाना में एसकेएम की महापंचायत, किसानों से वार्ता शुरू करने की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_67793eda8175a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खनौरी बॉर्डर पर बड़ी तादाद में जुटे किसान, डल्लेवाल बोले – यह मोर्चा तो हम ही जीतेंगे]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-gathered-in-large-numbers-at-khanauri-border-dallewal-said-–-we-will-win-this-front.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 04 Jan 2025 18:59:29 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-gathered-in-large-numbers-at-khanauri-border-dallewal-said-–-we-will-win-this-front.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आज हरियाणा-पंजाब के खनौरी बॉर्डर पर किसानों की विशाल महापंचायत हुई, जिसमें कड़ाके की ठंड के बावजूद बड़ी तादाद में किसान पहुंचे। एमएसपी की कानूनी गारंटी सहित कई मांगों को लेकर पिछले 40 दिन से आमरण अनशन पर बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने किसानों से खनौरी बॉर्डर पहुंचने का आह्वान किया था।</p>
<p>किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि मुझे विश्वास है कि यह मोर्चा हम ही जीतेंगे। उन्होंने कहा कि मैं उन सात लाख किसानों को भूल नहीं पाता हूँ जिन्होंने सरकार की गलत नीतियों की वजह से आत्महत्या कर ली। यह लड़ाई इसलिए लड़नी होगी ताकि कोई किसान आत्महत्या न करे। उन्होंने एमएसपी गारंटी सहित किसानों की मांगों का जिक्र किया।&nbsp;</p>
<p>पिछले 40 दिनों से अनशन पर बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के समर्थन में बड़ी संख्या में किसान खनौरी बॉर्डर पर जुटे। इस दौरान डल्लेवाल को स्ट्रेचर की मदद से मंच तक लाया गया और उन्होंने बिस्तर पर लेटे हुए किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मैं सरकार की गलत नीतियों के सामने झुकने की बजाय सड़क पर लड़ते हुए अपनी शहादत देना पसन्द करूंगा।&nbsp;</p>
<p>डल्लेवाल ने देश भर के किसान संगठनों से अपील की है कि वे अपने राज्यों में एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को मजबूती दें<span>, </span>ताकि केंद्र को संदेश दिया जा सके कि यह अकेले पंजाब की लड़ाई नहीं है। उन्होंने कहा। "पूरे देश को एमएसपी की ज़रूरत है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि हर गांव से एक ट्रॉली खनौरी पहुंचनी चाहिए<span>, </span>ताकि इस मोर्चे को मजबूती मिले।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_6779376c89f97.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>किसान महापंचायत की वजह से नरवाना से लेकर पातड़ा तक रोड़ पूरी तरह जाम रहा। हरियाणा पुलिस ने नरवाना, उझाना, पिपलथा, धनौरी में नाके लगा कर किसानों को रोकने के प्रयास किये जो किसानों की संख्या के कारण फेल हो गए। महापंचायत में किसान नेताओं ने कहा कि 10 जनवरी को देशभर में गांव स्तर पर मोदी सरकार के पुतले जलाए जाएंगे।</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले किसान पिछले साल <span>13</span> फरवरी से पंजाब-हरियाणा के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कई बार दिल्ली कूच का प्रयास किया लेकिन हरियाणा पुलिस ने उन्हें हरियाणा में प्रवेश नहीं करने दिया।</p>
<p>आज की महापंचायत में मुख्य तौर पर काका सिंह कोटड़ा<span>, </span>सुखजीत सिंह हरदोझण्डे<span>, </span>सरवन सिंह पंधेर<span>, </span>दिलबाग हरिगढ़<span>, </span>सुरजीत फूल<span>, </span>अमरजीत मोहड़ी<span>, </span>इंदरजीत सिंह कोटबुड्डा<span>, </span>लखविंदर सिंह औलख<span>, </span>अभिमन्यु कोहाड़<span>, </span>गुरदास सिंह<span>, </span>राजिंदर चहल<span>, </span>बलदेव सिंह सिरसा<span>, </span>सुखदेव भोजराज<span>, </span>सुखजिंदर खोसा<span>, </span>अरुण सिन्हा (बिहार)<span>, </span>जसदेव सिंह (मध्यप्रदेश)<span>, </span>क़ुर्बुरु शांताकुमार (कर्नाटक)<span>, </span>पी आर पांड्यन (तमिलनाडु)<span>, </span>संदीप सिंह<span>, </span>मनिंदर मान व इंदरजीत पन्नीवाला (राजस्थान)<span>, </span>शेरा अटवाल<span>, </span>हरसुलिन्दर सिंह<span>, </span>हरपाल चौधरी<span>, </span>अनिल तालान<span>, </span>जितेंद्र शर्मा<span>, </span>अवनीश पंवार (उत्तर प्रदेश)<span>, </span>वेंकटश्वर नल्लामल्ला (तेलंगाना)<span>, </span>अनिल श्योपुर (मध्यप्रदेश) आदि मौजूद रहे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_67793b951a156.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x500_677937adf2a67.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ खनौरी बॉर्डर पर बड़ी तादाद में जुटे किसान, डल्लेवाल बोले – यह मोर्चा तो हम ही जीतेंगे ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शिवराज ने किसानों के मुद्दों पर दिल्ली सरकार को घेरा, आतिशी का पलटवार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/shivraj-singh-chouhan-surrounded-the-delhi-government-on-the-issues-of-farmers-atishi-hit-back.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 02 Jan 2025 14:47:42 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
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        <description><![CDATA[ <p>किसानों के मुद्दे पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी के बीच आरोप-प्रत्यारोप छिड़ गये हैं। शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली की मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर दिल्ली के किसानों को केंद्र की योजनाओं के लाभ से वंचित करने का आरोप लगाया। इस पर पलटवार करते हुए दिल्ली की सीएम आतिशी ने कहा कि भाजपा का किसानों के बारे में बात करना दाऊद इब्राहिम द्वारा अहिंसा के बारे में उपदेश देने जैसा है। पंजाब में किसान आमरण अनशन पर बैठे हैं।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में किसानों की स्थिति पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री आतिशी को पत्र लिखा है। उन्होंने आम आदमी पार्टी की सरकार पर एकीकृत बागवानी विकास मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और बीज ग्राम कार्यक्रम सहित प्रमुख केंद्रीय योजनाओं को लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाया। साथ ही मुख्यमंत्री आतिशी से किसान कल्याण के मामलों में राजनीतिक मतभेदों को अलग रखने का आग्रह किया है।&nbsp;</p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2025/01/image_750x_67765685cb1b5.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>एक जनवरी को लिखे पत्र में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आप ने दिल्ली में किसानों के हित में कभी उचित निर्णय नहीं लिए। आप की सरकार में किसानों के लिए कोई संवदेना नहीं है। 10 वर्षो से दिल्ली में आप की सरकार है, लेकिन केजरीवाल ने हमेशा किसानों के साथ केवल धोखा किया है। केंद्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं को भी आप सरकार ने दिल्ली में लागू करने से रोका है। दिल्ली के किसान केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। चौहान ने आरोप लगाया कि दिल्ली में आप सरकार का रवैया किसानों के प्रति गैर जिम्मेदाराना है। एकीकृत बागवानी मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, बीज ग्राम कार्यक्रम सहित अनेक योजनाओं का लाभ दिल्ली के किसान नहीं ले पा रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>किसानों के मुद्दों पर आप सरकार को घेरते हुए शिवराज सिंह चौहान ने पत्र में कहा कि दिल्ली में ट्रैक्टर, हार्वेस्टर सहित किसान उपकरण का पंजीकरण कमर्शियल व्हीकल श्रेणी में किया जा रहा है, जिससे किसानों को अधिक दाम देना पड़ रहा है। आप की सरकार फ्री बिजली की बात करती है, लेकिन दिल्ली में किसानों के लिए बिजली की उच्च दरें निर्धारित कर रखी है। कृषि मंत्री ने कहा कि राजनैतिक प्रतिस्पर्धा किसान कल्याण में बाधा नहीं बननी चाहिए, किसान कल्याण सभी सरकारों का कर्तव्य हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>सीएम आतिशी का पलटवार </strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पत्र का जवाब देते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि किसानों की स्थिति कभी भी इतनी खराब नहीं रही, जितनी भाजपा शासन में है। आतिशी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को उपदेश देने की बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पंजाब में आमरण अनशन पर बैठे किसानों से बातचीत करने को कहना चाहिए। आतिशी ने यहां तक कहा डाला कि बीजेपी का किसानों के बारे में बात करना वैसे ही है जैसे दाऊद अहिंसा पर प्रवचन दे रहा हो।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ शिवराज ने किसानों के मुद्दों पर दिल्ली सरकार को घेरा, आतिशी का पलटवार ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों के पंजाब बंद का व्यापक असर, डल्लेवाल का अनशन 35वें दिन भी जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-bandh-by-farmers-has-wide-impact-dallewals-hunger-strike-continues-on-35th-day.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 30 Dec 2024 18:14:12 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-bandh-by-farmers-has-wide-impact-dallewals-hunger-strike-continues-on-35th-day.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा (<span>गैर-राजनीतिक</span>) <span>और किसान मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में किसानों के पंजाब बंद का व्यापक असर दिखा। इस दौरान रेल</span>, <span>बस सेवाएं और सड़क यातायात बाधित होने से जनजीवन प्रभावित हुआ। उधर, किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का आमरण अनशन 35वें दिन भी जारी रहा। इस बीच</span>, <span>पंजाब सरकार उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की कोशिशों में जुटी है। आज खनौरी बॉर्डर पर पंजाब पुलिस के अधिकारियों की टीम पहुंची है।&nbsp;</span></p>
<p>पंजाब बंद के समर्थन में सोमवार सुबह से ही किसान विभिन्न स्थानों पर रास्ते और रेल रोककर धरने पर बैठ गये। सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक रहे बंद के दौरान किसानों ने पटियाला, जालंधर, अमृतसर, फिरोजपुर, बठिंडा, मोहाली और पठानकोट सहित कई स्थानों पर सड़कों और रेलमार्गों पर धरना दिया। अमृतसर के गोल्डन गेट पर, बड़ी संख्या में किसानों ने शहर के एंट्री प्वाइंट के पास धरना दिया। बंद के दौरान 160 से अधिक ट्रेनों को रद्द करना पड़ा। कई जगह यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।</p>
<p>किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने पंजाब बंद को सफल बताते हुए कहा कि रेल सेवाएं और सभी प्रतिष्ठान बंद रहे। बंद को ट्रांसपोर्टरों, कर्मचारियों, व्यापारियों और धार्मिक संस्थाओं का समर्थन मिला। पंधेर ने कहा कि हमारा आंदोलन केंद्र सरकार के खिलाफ है। क्योंकि केंद्र की भाजपा सरकार किसानों की मांगों को मानने और किसानों से बात करने के लिए तैयार नहीं है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_6772953e58b7e.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>केंद्र का साथ देना बंद करें मान: पंधेर </strong><br />पंधेर ने आरोप लगाया कि पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार केंद्र का साथ दे रही है। इसलिए वे मुख्यमंत्री भगवंत मान को बताना चाहते हैं कि केंद्र का साथ देना बंद कर दें। खनौरी बॉर्डर पर जो पुलिस फोर्स तैनात की है उसे हटा दें। पंधेर ने कहा कि अनशन पर बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को वहां से उठाने और उनका अनशन खत्म करने की साजिश हो रही है। इसलिए पंजाब में जितने भी धरने पर किसान बैठे हैं वह खनौरी बॉर्डर आने के लिए तैयार रहें।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_6772957d0d06a.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>पंजाब के अफसरों की टीम खनौरी बॉर्डर पहुंची </strong></p>
<p>रविवार को पंजाब सरकार के अधिकारियों की एक टीम ने 70 वर्षीय डल्लेवाल से मुलाकात की और उनसे अनुरोध किया कि वे अनशन जारी रखने के साथ-साथ चिकित्सा उपचार स्वीकार करें। लेकिन डल्लेवाल ने इनकार कर दिया। सोमवार को भी पंजाब पुलिस की एक टीम खनौरी बॉर्डर पहुंची। डल्लेवाल ने कल रात आरोप लगाया कि पंजाब सरकार मोर्चे पर हमले की तैयारी में है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को आमरण अनशन कर रहे किसान नेता को उपचार प्रदान के लिए 31 दिसंबर तक अस्थायी अस्पताल में शिफ्ट करने को कहा था। इस मामले पर 2 जनवरी को फिर सुनवाई होगी।</p>
<p><strong>13 फरवरी से जारी है आंदोलन </strong></p>
<p>एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत 13 मांगों को लेकर हरियाणा-पंजाब सीमा पर शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन 13 फरवरी से जारी है। इस दौरान किसानों ने कई बार पैदल दिल्ली कूच का प्रयास किया लेकिन हरियाणा पुलिस ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया।&nbsp;आंदोलनकारी किसानों की मांगों में एमएसपी के अलावा, किसान कर्ज माफी, पेंशन, बिजली दरों में बढ़ोतरी न करने, पुलिस मामलों को वापस लेने और 2021 लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय जैसे 13 मुद्दे शामिल हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_67729596d66a9.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_67729416998c9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों के पंजाब बंद का व्यापक असर, डल्लेवाल का अनशन 35वें दिन भी जारी ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा, “स्वेच्छा से अनशन पर हूं, किसी के दबाव में नहीं”]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmer-leader-dallewal-said-i-am-on-hunger-strike-of-my-own-free-will-not-under-anyone-pressure.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 28 Dec 2024 23:26:45 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmer-leader-dallewal-said-i-am-on-hunger-strike-of-my-own-free-will-not-under-anyone-pressure.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा-पंजाब के खनौरी बॉर्डर पर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का आमरण अनशन आज 33वें दिन भी जारी रहा। इस बीच, शनिवार को<span> सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अस्पताल नहीं भेजने के लिए पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अवकाश पीठ ने पंजाब सरकार को डल्लेवाल को अस्पताल में भर्ती करने को मनाने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया है। </span>पीठ ने उन किसान नेताओं की मंशा पर भी संदेह जताया जो 70 वर्षीय किसान नेता को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का विरोध कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई पर जगजीत सिंह डल्लेवाल ने वीडियो के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी है। अपने वीडियो सन्देश में डल्लेवाल ने कहा, &ldquo;<span>मैं अपनी स्वेच्छा से आमरण अनशन कर रहा हूँ और किसी के दबाव में नहीं हूं।</span> केंद्र सरकार के इशारे पर जान-बूझकर यह भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है कि मैं किसी के दबाव में हूँ।&rdquo;<span> उन्होंने कहा कि वह किसानों को उनके हक दिलाने के लिए आमरण अनशन कर रहे हैं।</span></p>
<p>अपने संदेश में डल्लेवाल ने कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को एक पत्र लिखा है, जिसमें केंद्र सरकार को किसानों की मांगों को स्वीकार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। लेकिन इस मुद्दे को जानबूझकर राज्य सरकार तक सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है जबकि हमारी मांगें केंद्र सरकार से हैं। उन्होंने कहा कि एमएसपी गारंटी कानून के मुद्दे पर संसद और सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की सिफारिशों को भी केंद्र सरकार लागू नहीं कर रही है।&nbsp;</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने 4 जनवरी को खनौरी बॉर्डर पर एक बड़ी किसान महापंचायत बुलाई है जिसमें देश भर से किसान पहुंचेंगे। किसान नेताओं ने कहा कि जगजीत सिंह डल्लेवाल की तबीयत बहुत नाजुक है। वो नाजुक स्थिति होने के बावजूद 4 जनवरी को खनौरी किसान मोर्चे पर आयोजित किसान महापंचायत से देशवासियों को अपना सन्देश देंगे। इस बीच, शनिवार को लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने खनौरी बॉर्डर पहुंचकर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल से मुलाकात की।</p>
<p>इस बीच, पंजाब सरकार के अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय टीम ने फिर से डल्लेवाल से मुलाकात की और उनसे अनुरोध किया कि अगर वह अपना अनशन जारी रखना चाहते हैं तो भी चिकित्सा उपचार स्वीकार करें। सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा था उसे आंदोलनकारी किसानों से भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने डल्लेवाल को घेर रखा है और उन्हें अस्पताल ले जाने से रोक रहे हैं।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा, “स्वेच्छा से अनशन पर हूं, किसी के दबाव में नहीं” ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र में 39 मंत्रियों ने ली शपथ, ढाई साल बाद होगी सबके काम की समीक्षा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/39-ministers-sworn-in-maharashtra-cabinet-performance-to-be-reviewed-after-two-and-a-half-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 15 Dec 2024 23:00:09 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/39-ministers-sworn-in-maharashtra-cabinet-performance-to-be-reviewed-after-two-and-a-half-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार का बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार रविवार को नागपुर में हुआ। इसमें 39 मंत्रियों ने शपथ ली। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि मंत्रियों का कार्यकाल ढाई साल का होगा और उसके बाद उनके कामकाज की समीक्षा के आधार पर उनके पद पर बने रहने का निर्णय लिया जाएगा। माना जा रहा है कि इस फॉर्मूले से मंत्रियों पर अच्छे प्रदर्शन का दबाव रहेगा। मिड-टर्म बदलाव से उन विधायकों के भी मंत्री बनने की संभावना होगी जो इस बार शामिल नहीं हो सके।</p>
<p>पवार ने शपथ ग्रहण समारोह से पहले एनसीपी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, "इस सरकार में हमने कुछ मंत्रियों और राज्य मंत्रियों को ढाई साल की जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया है। यह सुनिश्चित करेगा कि अधिक नेताओं को मौका मिले और अधिक जिलों को न्याय मिले।" पवार के अनुसार मुख्यमंत्री फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उन्होंने स्वयं इस व्यवस्था पर सर्वसम्मति व्यक्त की है। शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेताओं का भी कहना है कि रविवार को शपथ लेने वाले मंत्रियों को इसी तरह का संदेश दिया गया है।</p>
<p>राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन ने कुल 39 विधायकों को मंत्रिपद की शपथ दिलाई। इनमें से 33 ने कैबिनेट मंत्री और 6 ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों सहित, राज्य में मंत्रियों की कुल संख्या अब 42 हो गई है। यह निर्धारित सीमा से एक कम है। 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद यह पहली बार है कि राज्य में पूर्ण संख्या के साथ मंत्रिपरिषद होगी।</p>
<p>नव नियुक्त मंत्रियों में भाजपा के पास सबसे बड़ा हिस्सा है, जिसमें 19 (16 कैबिनेट और 3 राज्य मंत्री) मंत्री शामिल हैं। इसके बाद शिवसेना के 11 (9 कैबिनेट और 2 राज्य मंत्री) और एनसीपी के 9 (8 कैबिनेट और 1 राज्य मंत्री) मंत्री हैं।</p>
<p>तीनों सत्तारूढ़ दलों ने पिछले कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों को हटा दिया। भाजपा से सुधीर मुनगंतीवार, रवींद्र चव्हाण, विजयकुमार गावित और सुरेश खाडे को हटाया गया। शिवसेना से तानाजी सावंत, दीपक केसरकर और अब्दुल सत्तार को हटाया गया, जबकि एनसीपी से छगन भुजबल, दिलीप वलसे-पाटिल, धर्मराव अत्रम, अनिल पाटिल और संजय बंसोडे को शामिल नहीं किया गया।</p>
<p>पहली बार कैबिनेट मंत्री बनने वालों में भाजपा से नितेश राणे, शिवेंद्रसिंह भोसले, जयकुमार गोर, संजय सावकारे और आकाश फुंडकर शामिल हैं। शिवसेना से प्रताप सरनाइक, संजय शिरसाट, भारत गोगावले और प्रकाश आबीटकर पहली बार शामिल हुए, जबकि एनसीपी से नरहरि झिरवाल, मकरंद जाधव-पाटिल और बाबासाहेब पाटिल ने पहली बार मंत्री पद की शपथ ली।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र में 39 मंत्रियों ने ली शपथ, ढाई साल बाद होगी सबके काम की समीक्षा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_675f120ca82e1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजू शेट्टी ने बाजार भाव से कम रेट पर चीनी बिक्री का मुद्दा उठाया, अमित शाह को पत्र लिखा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/raju-shetty-raised-issue-of-underpriced-sugar-sales-by-sugar-factories-wrote-a-letter-to-amit-shah.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 14 Dec 2024 16:55:39 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/raju-shetty-raised-issue-of-underpriced-sugar-sales-by-sugar-factories-wrote-a-letter-to-amit-shah.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र और कर्नाटक में कई चीनी मिलें बाजार कीमतों से कम रेट पर चीनी बेच रही हैं। पूर्व सांसद और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी को पत्र लिखकर तुरंत इस मामले में कार्रवाई करने की मांग की है।</p>
<p>पत्र में राजू शेट्टी ने कहा कि मराठवाडा, विदर्भ और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में चीनी मिलों द्वारा बाजार मूल्य से काफी कम रेट पर चीनी की बिक्री की जा रही है। इससे गन्ना किसानों और उपभोक्ताओं के हितों को नुकसान पहुंच रहा है। शेट्टी ने आरोप लगाया कि कई चीनी मिलें औसत बाजार भाव से काफी कम 3100 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर चीनी बेच रही हैं। बड़े व्यापारी इन चीनी मिलों के साथ मिलीभगत कर कम दाम पर चीनी खरीद रहे हैं और इसे छोटे व्यापारियों को 3700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेच रहे हैं। अंत में, उपभोक्ताओं को यही चीनी 4000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदनी पड़ रही है।</p>
<p>राजू शेट्टी ने कहा कि यह चीनी मिलों के अधिकारियों और बड़े व्यापारियों की मिलीभगत है। एक तरफ चीनी मिलें वित्तीय दिक्कतों का हवाला देते हुए गन्ना किसानों को कम भुगतान कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ताओं से ऊंची कीमतें वसूली जा रही हैं। अपनी उपज का उचित दाम पाने के लिए संघर्ष कर रहे किसान इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं जबकि उपभोक्ताओं को सस्ती चीनी नहीं मिल पा रही है। कर्नाटक में भी गन्ना पेराई शुरू होने के बाद से यह सब हो रहा है।</p>
<p>राजू शेट्टी ने केंद्र सरकार से कम कीमतों पर चीनी बिक्री की जांच कराने और ऐसी गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। ताकि निष्पक्ष बाजार संचालन सुनिश्चित हो सके। गन्ना किसानों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए उन्होंने तुरंत सरकार से इस मामले की तरफ ध्यान देने का अनुरोध किया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_675d6c1918e5a.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_675d699c05f9e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजू शेट्टी ने बाजार भाव से कम रेट पर चीनी बिक्री का मुद्दा उठाया, अमित शाह को पत्र लिखा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_675d699c05f9e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के आमरण अनशन का 17वां दिन, बिगड़ती सेहत को लेकर चिंताएं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/17th-day-of-farmer-leader-dallewals-hunger-strike-concern-over-his-deteriorating-health.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 12 Dec 2024 19:12:12 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/17th-day-of-farmer-leader-dallewals-hunger-strike-concern-over-his-deteriorating-health.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा-पंजाब के खनौरी बॉर्डर पर किसान नेता <strong>जगजीत सिंह डल्लेवाल</strong> के आमरण अनशन का आज 17वां दिन है। एमएसपी गारंटी कानून सहित 13 मांगों को लेकर केंद्र सरकार के साथ वार्ता आगे नहीं बढ़ पा रही है और न ही आंदोलनजारी किसानों को दिल्ली कूच करने दिया जा रहा है। इस बीच, किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की बिगड़ती तबीयत को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में पोस्ट किए जा रहे हैं और उनकी सेहत के लिए प्रार्थनाएं की जा रही हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक)</strong> और <strong>किसान मजदूर मोर्चा</strong> ने एक बयान में कहा कि जगजीत सिंह डल्लेवाल का वजन 12 किलो से अधिक कम हो गया है। गुरुवार को डॉक्टरों ने मेडिकल चेकअप करते हुए उनकी तबीयत नाजुक बताई।<span> डॉक्टर उनके वाइटल पैरामीटर्स पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। दोनों मोर्चों </span>ने अपील करते हुए कहा कि कल देश भर में सभी गाँवों में केंद्र व राज्य सरकारों के पुतले जलाएं और 16 दिसंबर को पंजाब के अलावा तमाम राज्यों में जिला और तहसील स्तर पर ट्रैक्टर मार्च निकाले जायें। क्योंकि किसानों के मुद्दों पर कोई भी राजनीतिक पार्टी गंभीर नहीं है।&nbsp;</p>
<p>भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता <strong>राकेश टिकैत</strong> ने कहा है कि किसान मुद्दों की यह लड़ाई हम सब की एक हैं और वे कल खनौरी बॉर्डर पर जाकर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल से मुलाकात करेंगे। उनके साथ में हरेंद्र सिंह लाखोवाल, रतनमान और किसान जत्थेबंदी रहेंगी।</p>
<p>हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री <strong>भूपेंद्र सिंह हुड्डा</strong> ने कहा है कि किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की सेहत लगातार गिर रही है। बीजेपी सरकार को अपनी हठधर्मिता छोड़कर किसानों से बातचीत कर उनकी मांगों का समाधान निकालना चाहिए और अनशन समाप्त कराना चाहिए। किसानों की MSP की कानूनी गारंटी की मांग पूरी तरह जायज है।</p>
<p><strong>पीएम मोदी के नाम खुला पत्र</strong></p>
<p>आमरण अनशन के 17वें दिन किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने अपने खून से हस्ताक्षरित खुला पत्र प्रधानमंत्री<strong> नरेंद्र मोदी</strong> को लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कहा है कि जिन मांगों पर हमारा आंदोलन चल रहा है, ये सिर्फ हमारी मांगें नहीं हैं बल्कि सरकारों द्वारा अलग-अलग समय पर किये गए वायदे हैं। सरकार अपने वादे निभाए या फिर उनके बलिदान के लिए तैयार रहे। हर किसान को MSP सुनिश्चित करना जीवन जीने के मौलिक अधिकार के समान है। उन्होंने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार <strong>C2+50% फॉर्मूले</strong> को लागू करने की मांग भी उठाई।</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में किसान 13 फरवरी से हरियाणा-पंजाब के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं। इस दौरान आंदोलनकारी किसानों ने कई बार दिल्ली कूच का प्रयास किया लेकिन उन्हें हरियाणा में प्रवेश नहीं करने दिया। इस दौरान कई बार आंसू गैस के गोले छोड़े गये। गत 6 और 8 दिसंबर को 101 किसानों के जत्थों ने पैदल दिल्ली जाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ने दिया गया।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के आमरण अनशन का 17वां दिन, बिगड़ती सेहत को लेकर चिंताएं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान के सिरोही में अनूठा ‘आबू सौंफ सामुदायिक जीन बैंक’ स्थापित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/biotech-kisan-launches-rajasthans-first-abu-saunf-community-gene-bank-in-sirohi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 10 Dec 2024 15:35:52 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/biotech-kisan-launches-rajasthans-first-abu-saunf-community-gene-bank-in-sirohi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान में अपनी तरह का पहला और अनूठा सामुदायिक जीन बैंक सिरोही में &lsquo;अबू सौंफ सामुदायिक जीन बैंक&rsquo; के रूप में स्थापित किया गया है। जैव विविधता संरक्षण की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल छोटी जोत वाले किसानों के अथक प्रयासों को समर्पित है जो जैव विविधता के संरक्षक हैं और विशेष रूप से राजस्थान के सिरोही जिले के आदिवासी क्षेत्र में सौंफ की आनुवंशिक संपदा को बचाने में जुटे हैं।&nbsp;</p>
<p>कछौली गांव के किसान इशाक अली के खेत पर स्थापित &ldquo;अबू सौंफ सामुदायिक जीन बैंक&rdquo; सिरोही जिले के सौंफ किसानों की ओर से उभरते राजस्थान को एक उपहार है। साथ ही यह राजस्थान की आनुवंशिक संपदा के संरक्षण, उपयोग और जैव विविधता की सुरक्षा के लिए एक मॉडल भी है। यह पहल भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा समर्थित बायोटेक किसान हब परियोजना के तहत दक्षिण एशिया जैव प्रौद्योगिकी केंद्र (एसएबीसी), जोधपुर और आईसीएआर के केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान, जोधपुर के आरआरएस, पाली के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।&nbsp;</p>
<p>&lsquo;अबू सौंफ सामुदायिक जीन बैंक&rsquo; सिर्फ बीजों का संग्रह मात्र नहीं है, बल्कि आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षक के रूप में तथा जैव विविधता के "इन-सीटू" संरक्षण में किसानों का एक अमूल्य योगदान है। इस सामुदायिक जीन बैंक में राजस्थान के प्रमुख सौंफ उत्पादक क्षेत्रों से एकत्रित सौंफ की 100 से अधिक अनूठी किस्में हैं, जिनमें सिरोही की पारंपरिक किस्मों और जर्म प्लाज्म पर विशेष ध्यान दिया गया है।&nbsp;</p>
<p>बायोटेक किसान परियोजना के तहत, सीमित संसाधनों द्वारा शुरू किया गया &lsquo;अबू सौंफ सामुदायिक जीन बैंक&rsquo; पारंपरिक और उन्नत बीजों, विशेष रूप से किसानों द्वारा विकसित किस्मों के संग्रह, दस्तावेज़ीकरण, भंडारण और आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा। सौंफ की ये किस्में स्थानीय कृषि-जलवायु के अनुकूल हैं और उनका अपना सांस्कृतिक, पारिस्थितिक और आर्थिक महत्व है।</p>
<p>बायोटेक किसान के मार्गदर्शन में अपने खेत पर &lsquo;सामुदायिक जीन बैंक&rsquo; शुरू करवाने वाले किसान इशाक अली आनुवंशिक संसाधनों को संजोने, जैव विविधता के संरक्षण तथा सौंफ की उच्च उपज वाली उन्नत किस्मों के विकास में स्थानीय समुदाय की अहम भूमिका का उदाहरण पेश करते हैं। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों के कारण पारंपरिक फसल विविधता को नुकसान पहुंच रहा है।&nbsp;</p>
<p>यह सामुदायिक जीन बैंक पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने, आनुवंशिक जैव विविधता के सरंक्षण के लिए किसानों को सशक्त बनाने और प्राकृतिक आनुवंशिक संसाधनों के "इन-सीटू" संरक्षण में अहम भूमिका निभाएगा। इससे किसान इशाक अली द्वारा विकसित किस्म &ldquo;अबू सौंफ-440&rdquo; के गुणवत्तापूर्ण बीजों के उत्पादन में भी मदद मिलेगी। सौंफ की इस किस्म को किसान किस्म के रूप में पंजीकृत कराने की प्रक्रिया जारी है।&nbsp;</p>
<p>इस पहल में सीएजेडआरआई के आरआरएस, पाली के डॉ एके शुक्ला, डॉ विजय सिंह और डॉ कमला चौधरी तथा भागीरथ चौधरी, नरेश डूडी, दीपक जाखड़, के एस भारद्वाज, श्रेया मिश्रा और सपना बोहरा सहित दक्षिण एशिया जैव प्रौद्योगिकी केंद्र की टीम का योगदान रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान के सिरोही में अनूठा ‘आबू सौंफ सामुदायिक जीन बैंक’ स्थापित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नोएडा: राकेश टिकैत समेत सभी किसान रिहा, पुलिस को चकमा देने का वीडियो वायरल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/noida-all-farmers-rakesh-tikait-released-video-of-dodging-the-police-goes-viral.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 04 Dec 2024 19:09:37 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/noida-all-farmers-rakesh-tikait-released-video-of-dodging-the-police-goes-viral.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत को बुधवार को पुलिस ने यमुना एक्सप्रेसवे पर हिरासत में ले लिया था। वह ग्रेटर नोएडा के जीरो प्वाइंट पर किसान महापंचायत में शामिल होने जा रहे थे। राकेश टिकैत को पुलिस ने यमुना एक्सप्रेसवे पर रोका और उन्हें टप्पल पुलिस स्टेशन ले जाया गया। इस बीच, टिकैत ने पुलिस को चकमा देने का प्रयास भी किया जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। टिकैत आगे-आगे और पुलिस पीछे दौड़ती नजर आई।</p>
<p>आखिरकार किसानों के विरोध को देखते हुए <span>पुलिस ने राकेश टिकैत को छोड़ दिया। साथ ही नोएडा में दलित प्रेरणा स्थल से जेल भेजे गए सभी 123 किसानों को भी रिहा कर दिया गया है। इनमें&nbsp;<span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">किसान नेता पवन खटाना, </span><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-b88u0q">सुखबीर</span><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"> </span><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-b88u0q">खलीफा,&nbsp;</span><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">सुनील फौजी,&nbsp;</span>रुपेश वर्मा, बॉबी नागर, अमन ठाकुर शामिल थे।&nbsp;इन किसानों को छुड़वाने के लिए ही ग्रेटर नोएडा के जीरो प्वाइंट पर महापंचायत बुलाई गई थी। </span></p>
<p>पश्चिमी यूपी के विभिन्न जिलों से ग्रेटर नोएडा जा रहे किसानों को भी पुलिस ने रोका जबकि कई किसान नेताओं को उनके घरों से ही नहीं निकलने दिया।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_67505b8f1212c.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>बुधवार को ग्रेटर नोएडा में बड़ी तादाद में किसान जुटना शुरू हो गये थे। राकेश टिकैत को हिरासत में लिए जाने की खबर के बाद महापंचायत में हलचल बढ़ गई। महापंचायत के मंच से किसानों ने ऐलान किया है कि अगर एक घंटे में राकेश टिकैत नहीं पहुंचे तो किसान नोएडा के दलित प्रेरणा स्थल की तरफ कूच करेंगे।</p>
<p>इस बीच, पुलिस ने लुकसर जेल में बंद 123 किसानों को रिहा कर दिया। <span>बीकेयू के प्रदेश उपाध्यक्ष कपिल खाटियान ने बताया कि किसानों की रिहाई के बाद ग्रेटर नोएडा के अलावा अन्य स्थानों से धरना हटा लिया गया है। लेकिन जीरो प्वाइंट पर धरना जारी रहेगा। </span>अन्य मुद्दों पर प्रशासन से वार्ता जारी है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_6750631a0128a.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>हिरासत में लिए जाने के बाद राकेश टिकैत ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "<span>हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए जा रहे थे, लेकिन प्रशासन ने हमें जबरन रोका। सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश कर रही है।" टिकैत ने चेतावनी दी कि </span>अगर किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो टप्पल से लखनऊ तक ट्रैक्टर यात्रा शुरू करेंगे। अगर अधिकारियों का यह रवैया जारी रहा, तो किसान आंदोलन और तेज हो जाएगा।</p>
<p>इससे पहले मंगलवार को बीकेयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने मुजफ्फरनगर के सिसौली में किसानों की आपात बैठक बुलाकर नोएडा के किसान आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया था। बीकेयू ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के कार्यकर्ताओं से बुधवार को ग्रेटर नोएडा के जीरो प्वाइंट पर इकट्ठा होने का आह्वान किया था।&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">नोएडा जा रहे किसान नेता राकेश टिकैत आगे-आगे अलीगढ़ पुलिस पीछे-पीछे... <a href="https://t.co/wKG4FCM6L9">pic.twitter.com/wKG4FCM6L9</a></p>
&mdash; आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari (@aditytiwarilive) <a href="https://twitter.com/aditytiwarilive/status/1864238947800330556?ref_src=twsrc%5Etfw">December 4, 2024</a></blockquote>
<p>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x500_67505b780fd22.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नोएडा: राकेश टिकैत समेत सभी किसान रिहा, पुलिस को चकमा देने का वीडियो वायरल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब सहित कई राज्यों में डीएपी की मांग के मुकाबले कम बिक्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/in-many-states-including-punjab-sales-of-dap-are-less-than-the-demand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 04 Dec 2024 17:02:00 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/in-many-states-including-punjab-sales-of-dap-are-less-than-the-demand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रबी सीजन में बुवाई के लिए महत्वपूर्ण काम्प्लेक्स उर्वरक डाई अमोनियम फास्फेट (डीएपी) की बिक्री कई राज्यों में मांग के मुकाबले काफी कम रही है। डीएपी की किल्लत और किसानों की लंबी लाइनें लगने की खबरों के बीच अब सरकारी आंकड़ों से भी डीएपी की कमी की पुष्टि होने लगी है।</p>
<p>राज्य सभा में समाजवादी पार्टी के सांसद <strong>रामजी लाल सुमन</strong> ने डीएपी की किल्लत के बारे में सवाल पूछा था। इसके लिखित जवाब में केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री <strong>जगत प्रकाश नड्डा</strong> ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश में डीएपी की मांग, उपलब्धता और बिक्री का ब्यौरा दिया है।</p>
<p>सरकारी आंकड़ों के अनुसार,<strong> पंजाब</strong> में रबी सीजन में 4.5 लाख टन डीएपी की आवश्यकता है जिसके मुकाबले 1 अक्तूबर से 26 नवंबर के दौरान 3.46 लाख टन डीएपी की उपलब्धता रही और 2.85 लाख टन डीएपी की बिक्री पंजाब में हुई। पंजाब के मुकाबले <strong>हरियाणा</strong> में डीएपी की उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर रही है। <strong>हरियाणा</strong> में रबी सीजन में 2.60 लाख टन डीएपी की आवश्यकता आंकी गई है जिसमें से 26 नवंबर तक 2.36 लाख टन डीएपी की उपलब्धता रही और 2.17 लाख टन डीएपी की बिक्री हुई।</p>
<p>उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के आंकड़े भी इन राज्यों में डीएपी कम बिक्री को दर्शाते हैं। <strong>मध्यप्रदेश</strong> में रबी सीजन में कुल 8 लाख टन डीएपी की आवश्यकता है जबकि उपलब्धता 4.51 लाख टन और बिक्री 3.43 लाख टन डीएपी की हुई। <strong>उत्तर प्रदेश</strong> में 15 लाख टन की सीजनल मांग के मुकाबले 26 नवंबर तक 8.98 लाख टन डीएपी उपलब्धता रही और 7.18 लाख टन डीएपी की बिक्री हुई। राजस्थान में 3 लाख टन डीएपी की मांग के मुकाबले रबी सीजन में 26 नवंबर तक 2.76 लाख डीएपी की उपलब्धता रही जिसमें से 2.34 लाख टन डीएपी बेचा गया।</p>
<p>पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में डीएपी की मांग के मुकाबले उपलब्धता और बिक्री काफी कम रही है। हालांकि, सरकार और फर्टिलाइजर इंडस्ट्री का दावा है कि देश में डीएपी की कोई किल्लत नहीं है और किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस बीच, डीएपी की बजाय अन्य मिश्रित उर्वरकों जैसे एनपी/एनपीके की खपत बढ़ी है।</p>
<p>केंद्रीय रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री <strong>अनुप्रिया पटेल</strong> ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि किसानों को डीएपी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने जरूरत के आधार पर एनबीएस सब्सिडी दरों के अलावा डीएपी पर विशेष पैकेज प्रदान किए हैं। खरीफ 2024 के दौरान डीएपी की प्रति टन सब्सिडी 21676 रुपये थी जबकि रबी 2024-25 के दौरान डीएपी की प्रति टन सब्सिडी 21911 रुपये तय की गई है। वर्ष 2024-25 में, सरकार ने एक अप्रैल से 31 दिसंबर 2024 तक की अवधि के लिए डीएपी की वास्तविक पीओएस बिक्री पर एनबीएस दरों के अतिरिक्त डीएपी पर एकमुश्त विशेष पैकेज को मंजूरी दी है। यह पैकेज पीएंडके उर्वरक कंपनियों को 3500 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से दिया जाएगा। इस पैकेज पर लगभग 2625 करोड़ रुपये का वित्तीय भार पड़ेगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब सहित कई राज्यों में डीएपी की मांग के मुकाबले कम बिक्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नोएडा में किसानों ने 7 दिन का समय दिया, तब तक जारी रहेगा धरना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-march-from-noida-to-delhi-land-acquisition-issue-heated-up.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 02 Dec 2024 16:06:00 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-march-from-noida-to-delhi-land-acquisition-issue-heated-up.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भूमि अधिग्रहण से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर हजारों किसानों ने सोमवार को नोएडा से दिल्ली कूच का प्रयास किया। पिछले कई दिनों से यमुना प्राधिकरण पर धरना दे रहे किसानों ने आज दिल्ली में संसद घेराव का ऐलान किया था। किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए दिल्ली-नोएडा और गाजियाबाद बॉर्डर पर बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात किया गया। लेकिन किसानों ने नोएडा में पुलिस का सुरक्षा घेरा और बैरीकेडिंग तोड़कर दिल्ली की ओर बढ़ने का प्रयास किया। हालांकि, थोड़ी दूर पर किसानों को रोक लिया गया।</p>
<p>आखिरकार पुलिस व प्राधिकरण के साथ वार्ता के बाद किसानों को सात दिन में समाधान का आश्वासन दिया गया। तब तक किसान नोएडा में दलित प्रेरणा स्थल के अंदर ही धरना देंगे। अगर मांगें नहीं मानी गई तो किसान फिर से दिल्ली कूच करेंगे।&nbsp;</p>
<p>आज सुबह से ही किसान नोएडा के महामाया फ्लाईओवर के पास जुटने शुरू हो गये थे। <span>किसान नोएडा से संसद भवन तक विरोध मार्च निकालना चाहते थे। संसद के शीतकालीन सत्र को देखते हुए पुलिस किसानों को नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर ही रोकने की कोशिश करती रही।</span></p>
<p>दिन भर नोएडा में बड़ी संख्या में किसानों का जमावड़ा रहा। इनमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अलावा यमुना अथॉरिटी के भूमि अधिग्रहण से प्रभावित कई जिलों के किसान भी शामिल हैं। किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए पुलिस ने आगे बेरिकेडिंग और मजबूत कर दी। <span>दिल्ली-एनसीआर में कई स्थानों पर रूट डायवर्ट किए गये और सड़कों पर लोग घंटों जाम में फंसे रहे।&nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_674d8e18a2464.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>किसान नेता <strong>सुखवीर खलीफा</strong> ने कहा कि मांगें पूरी होने तक किसान वापस नहीं लौटेंगे। अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो फिर से दिल्ली कूच करेंगे। फिलहाल किसानों ने दलित प्रेरणा स्थल में पड़ाव डाल दिया है।&nbsp;</p>
<p>इससे पहले रविवार को तीनों प्राधिकरण के अधिकारियों, जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर के साथ किसानों की करीब तीन घंटे तक बैठक चली बैठक बेनतीजा रही थी। वार्ता असफल रहने के बाद किसानों ने दिल्ली कूच कर संसद घेराव का ऐलान किया था।</p>
<p>पिछले काफी समय से किसान नोएडा की तीनों अथॉरिटी के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। पिछले साल भी किसानों ने भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर दिल्ली कूच किया था। इस आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा, भारतीय किसान परिषद, वामपंथी किसान संगठनों के अलावा कई किसान यूनियनों ने समर्थन दिया है। किसानों के प्रदर्शन के चलते नोएडा-दिल्ली में यातायात प्रभावित रहा और कई रास्तों पर लंबा जाम लग गया।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/12/image_750x_674d8fde11eb2.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>क्या हैं किसानों की मांगें</strong></p>
<p>नोएडा में आंदोलन कर रहे किसान भूमि अधिग्रहण के बदले 10 फीसदी विकसित भूखंड, 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा, नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार बाजार दर का 4 गुना मुआवजा और सभी लाभ, गौतमबुद्ध नगर में सर्किल रेट बढ़ाने, हाई पावर कमेटी द्वारा किसानों के हक में भेजी गई सिफारिशें लागू किए जाने तथा किसानों के बच्चों को रोजगार व पुनर्विकास के लाभ दिए जाने की मांग कर रहे हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नोएडा में किसानों ने 7 दिन का समय दिया, तब तक जारी रहेगा धरना ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खेतों में गन्ने की पत्ती जलाने पर लगेगा जुर्माना, बंद हो सकती है पर्ची]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/fine-will-be-imposed-for-burning-sugarcane-leaves-sugarcane-slip-may-be-stopped.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 25 Nov 2024 12:23:04 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/fine-will-be-imposed-for-burning-sugarcane-leaves-sugarcane-slip-may-be-stopped.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को लेकर उत्तर प्रदेश में भी काफी सख्ती की जा रही है। कृषि विभाग किसानों फसल अवशेष जैसे पराली, गन्ने की पत्ती, कूड़ा आदि खेतों में न जलाने का अनुरोध कर रहा है।</p>
<p>उप कृषि निदेशक, मुजफ्फरनगर की ओर से जारी सूचना के अनुसार, हर गांव में चैकिंग की जाएगी। किसी भी किसान के खेत में दिन में गन्ने की पत्ती जली हुई नही मिलनी चाहिए। गन्ने की पत्ती जली हुई पाए जाने पर किसान को जुर्माना देय होगा। साथ ही गन्ने की पर्ची भी बंद कर दी जाएगी। खेतों में आग की घटनाओं पर पुलिस, लेखपाल, गन्ना विभाग, कृषि विभाग की टीम छापेमारी करेगी।</p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि विभाग की ओर से खेतों में फसल अवशेष न जलाने और अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। फसल अवशेषों को खेतों में जलाने की घटनाओं की मॉनिटरिेंग सेटेलाइट के माध्यम से की जा रही है जिसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को प्राप्त होती है। सेटेलाइट के द्वारा खेतों का विवरण दर्ज कर लिया जाता है। खेतों में फसल अवशेष जलाने पर 5000 रुपये/ प्रति घटना, दो एकड से पांच एकड के लिए 10000 रुपये/ प्रति घटना और पांच एकड से अधिक क्षेत्र के लिए 30000 रुपये/ प्रति घटना के हिसाब से जुर्माने का प्रावधान है। इस प्रकार की कार्रवाई से बचने के लिए किसानों से फसल अवशेष खेतों में नहीं जलाने की अपील की गई है।</p>
<p>कृषि विभाग के अधिकारियों की ओर से किसानों को अवशेष प्रबंधन के लिए उपलब्ध मशीनों और वेस्ट डिकंपोजर का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया जा रहा है। जिससे फसल अवशेष आसानी से सड़ा सकते हैं और मिट्टी में कार्बन अंश की वृद्धि होगी। किसानों को वेस्ट डिकंपोजर निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खेतों में गन्ने की पत्ती जलाने पर लगेगा जुर्माना, बंद हो सकती है पर्ची ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पराली जलाने वाले किसानों के मुकदमे न लड़ना असंवैधानिक: भारतीय किसान संघ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/bks-condemns-mp-high-court-bar-association-for-denying-legal-representation-to-farmers-held-for-stubble-burning.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 20 Nov 2024 16:53:28 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/bks-condemns-mp-high-court-bar-association-for-denying-legal-representation-to-farmers-held-for-stubble-burning.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय किसान संघ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की पैरवी न करने के निर्णय की कड़ी निंदा की है। भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने इसे अत्यंत दुखद, एकपक्षीय और निंदनीय बताया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न्याय और मानवता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।</p>
<p>भारतीय किसान संघ की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मिश्र ने कहा कि भारत की संवैधानिक न्याय व्यवस्था में आतंकवादियों तक को न्याय पाने का अधिकार दिया गया है और उनके मुकदमों के लिए वकील उपलब्ध कराए जाते हैं लेकिन देश के किसानों को न्याय पाने के अधिकार से वंचित करना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने बार एसोसिएशन के निर्णय को असंवेदनशील और अमानवीय करार दिया है।</p>
<p>मिश्र ने कहा कि जो लोग किसानों का विरोध कर रहे हैं, उन्हें किसानों द्वारा उगाए गए अन्न को भी खाना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसानों को प्रताड़ित करने और उन्हें आंदोलन की ओर धकेलने का प्रयास है, जिससे देश के अन्न उत्पादन और स्थिरता पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। &nbsp;</p>
<p><strong>थर्मल पावर प्लांट से हो रहा सबसे ज्यादा प्रदूषण&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेंद्र सिंह पटेल ने कहा कि देश में सबसे अधिक प्रदूषण औद्योगिक स्रोतों से होता है, जो लगभग 51 फीसदी है। इसके बाद वाहनों से 27 फीसदी, फसल अवशेष जलाने से 17 फीसदी और अन्य स्रोतों से 5 फीसदी प्रदूषण होता है। उन्होंने कहा कि सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, थर्मल पावर प्लांट पराली जलाने की तुलना में 16 गुना अधिक प्रदूषण फैलाते हैं। दिल्ली-एनसीआर में थर्मल पावर प्लांट्स 89 लाख टन पराली जलाने से निकलने वाले 17.8 किलोटन प्रदूषण की तुलना में 281 किलोटन सल्फर डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। भारत वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जक है, जो वैश्विक मानवजनित उत्सर्जन का 20 फीसदी से अधिक है। यह समस्या मुख्य रूप से देश के कोयला-आधारित ऊर्जा क्षेत्र के कारण है। &nbsp;</p>
<p><strong>पराली जलाने पर जुर्माना, थर्मल प्लांट पर पाबंदी नहीं</strong></p>
<p>राघवेंद्र सिंह पटेल ने कहा कि रिपोर्ट में बताया गया है कि पराली जलाने से प्रदूषण में मौसमी बढ़ोतरी होती है जबकि थर्मल पावर प्लांट पूरे साल प्रदूषण का स्थायी स्रोत बने रहते हैं। इसके बावजूद थर्मल पावर प्लांट्स को नियमों में ढील दी जाती है जबकि पराली जलाने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है।&nbsp;</p>
<p>भारतीय किसान संघ का कहना है कि पिछले 50 वर्षों से कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विभागों ने प्रचारित किया कि फसल अवशेष जलाना आवश्यक है, क्योंकि इसमें छिपे कीट और खरपतवार अगली फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यदि इस प्रथा में बदलाव किया गया है, तो किसानों को प्रशिक्षित करना, संसाधन उपलब्ध कराना और पराली निस्तारण के लिए यंत्र प्रदान करना सरकार और शोध संस्थानों की जिम्मेदारी है। इसके लिए किसानों को दोषी ठहराना पूरी तरह से अनुचित है। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पराली जलाने वाले किसानों के मुकदमे न लड़ना असंवैधानिक: भारतीय किसान संघ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में करीब 54 लाख टन धान की खरीद, लक्ष्य के मुकाबले 6 लाख टन कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/nearly-54-lakh-tonnes-of-paddy-purchased-in-haryana-6-lakh-tonnes-less-than-the-target.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 18 Nov 2024 15:39:17 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/nearly-54-lakh-tonnes-of-paddy-purchased-in-haryana-6-lakh-tonnes-less-than-the-target.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खरीफ मार्केटिंग सीजन 2024-25 के लिए हरियाणा में इस बार लगभग 54 लाख टन धान की सरकारी खरीद हुई है। जबकि इस साल सरकार ने हरियाणा में 60 लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। राज्य में 27 सितंबर से शुरू हुई धान खरीद 15 नवंबर तक चलनी थी। &nbsp;</p>
<p>भंडारण की समस्याओं, राइस मिलर्स की हड़ताल और आढ़तियों की मांगों के चलते इस साल धान खरीद की शुरुआत काफी धीमी रही थी। लेकिन बाद में खरीद ने जोर पकड़ा और 15 नवंबर की निर्धारित अवधि तक लगभग 54 लाख टन धान की खरीद हरियाणा में हुई है। इस तरह हरियाणा में लक्ष्य के मुकाबले करीब 6 लाख टन कम धान की खरीद हुई है जो पिछले साल हुई 59 लाख टन की खरीद से भी कम है।&nbsp;</p>
<p>इस साल धान की बंपर पैदावार के बावजूद हरियाणा से धान खरीद में गिरावट कई संदेह और सवाल खड़े करती है। हरियाणा में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हेफेड और हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन धान की खरीद करते हैं। इनमें सबसे ज्यादा करीब 30 लाख टन धान की खरीद राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने की है। जबकि लगभग 15 लाख टन खरीद हेफेड और 9 लाख टन खरीद स्टेट वेयरहाउस कॉरपोरेशन ने की।</p>
<p>प्रदेश में धान की सबसे ज्यादा खरीद कुरुक्षेत्र, करनाल और कैथल फतेहाबाद जिलों में हुई है। &nbsp;पिछले महीने गैर-बासमती चावल के निर्यात पर पाबंदियों हटने के बाद प्राइवेट ट्रेडर्स ने किसानों से धान खरीद में तेजी दिखाई है। इसका असर पर सरकारी खरीद पर पड़ा है। इसके अलावा धान की फसल पकने के समय हुई बारिश के कारण उत्पादन भी प्रभावित हुई है।</p>
<p>एक ओर जहां हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी किसानों से उपज का दाना-दाना खरीदने का दावा रहे हैं, वहीं विपक्षी दल कांग्रेस धान खरीद से जुड़ी दिक्कतों को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस के सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सीएम सैनी पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री ने धान का भाव 3100 रुपये प्रति क्विंटल करने का वादा किया था। लेकिन सत्ता में आते ही अपना वादा भूल गये। दाम बढ़ना तो दूर किसानों को एमएसपी पर अपनी उपज बेचने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में करीब 54 लाख टन धान की खरीद, लक्ष्य के मुकाबले 6 लाख टन कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में महिलाओं को उद्यमिता के लिए मिलेगी 7 फीसदी ब्याज सब्सिडी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-govt-implemented-subsidy-scheme-offering-loans-up-to-rs-5-lakh-for-women-entrepreneurs.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 16 Nov 2024 18:12:44 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-govt-implemented-subsidy-scheme-offering-loans-up-to-rs-5-lakh-for-women-entrepreneurs.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा सरकार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सब्सिडी योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत महिलाओं को किसी भी छोटे उद्यम को स्थापित करने के लिए 5 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाएगा। लाभार्थी महिलाओं को यह ऋण 7 प्रतिशत की ब्याज दर पर तीन वर्षों के लिए दिया जाएगा। योजना के तहत अधिकतम ऋण सीमा 5 लाख रुपये तय की गई है। ऋण के संवितरण के बाद अधिस्थगन अवधि तीन महीने की होगी।</p>
<p>महिलाएं ऑटो रिक्शा, टैक्सी, सैलून, ब्यूटी पार्लर, टेलरिंग, बुटीक, फोटोकॉपी की दुकान, पापड़ बनाने, अचार बनाने, हलवाई की दुकान, फूड स्टॉल, आइसक्रीम बनाने की यूनिट, बिस्कुट बनाने, हैण्ड लूम, बैग बनाने, कैंटीन सर्विस इत्यादि जैसे कार्यों के लिए इस योजना के तहत ऋण ले सकती हैं।</p>
<p>राज्य सरकार की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हरियाणा महिला विकास निगम की एक प्रवक्ता बताया कि योजना के लिए आवेदन करने वाली महिलाओं के लिए हरियाणा का मूल निवासी होना अनिवार्य है। परिवार पहचान पत्र के अनुसार, परिवार की सालाना आय 5 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा ईएमआई के भुगतान के चूक के मामले में विलंबित पर अर्जित ब्याज के लिए कोई सब्सिडी नहीं दी जाएगी। ऋण के लिए आवदेन करते समय लाभार्थी की आयु 18-60 वर्ष होनी चाहिए।</p>
<p>योजना के अंतर्गत ऋण प्राप्त करने के लिए कई दस्तावेज जरूरी है। इनमें आवेदन पत्र, राशन कार्ड/परिवार पहचान पत्र, आधार कार्ड, दो पासपोर्ट साइज फोटो, रिहायशी प्रमाण पत्र, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, ट्रेनिंग सर्टिफिकेट/अनुभव प्रमाण पत्र शामिल है। योजना से जुड़ी अधिक जानकारी या आवेदन करने के लिए महिलाएं हरियाणा महिला विकास निगम की वेबसाइट <a href="https://www.hwdcl.org/"><strong>https://www.hwdcl.org/</strong></a> पर विजिट कर सकती हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_67389146c3edd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में महिलाओं को उद्यमिता के लिए मिलेगी 7 फीसदी ब्याज सब्सिडी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में 70 लाख टन धान की खरीद के लक्ष्य के मुकाबले अभी तक 3.3 लाख की खरीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/only-3.3-lakh-tone-paddy-procurement-in-uttrar-pradesh-against-a-target-of-70-lakh-tonnes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 16 Nov 2024 13:50:13 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/only-3.3-lakh-tone-paddy-procurement-in-uttrar-pradesh-against-a-target-of-70-lakh-tonnes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में धान की सरकारी खरीद शुरू हुए डेढ़ महीने का समय बीत चुका है लेकिन राज्य में अब तक 3.30 लाख टन धान की खरीद हो पाई है जबकि राज्य सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन (2024-25) के लिए 70 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया है। राज्य खाद्य एवं रसद विभाग के आंकड़ों के अनुसार, धान बेचने के लिए 16 नवंबर तक 3,83,949 किसानों ने अपना पंजीकरण करवाया है, जिसमें से 49,137 लाख किसानों से धान खरीदा जा चुका है। जिसके लिए किसानों को 767 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।</p>
<p>हरियाणा और पंजाब धान खरीद की स्थिति उत्तर प्रदेश से बेहतर है। सेंट्रल फूड ग्रेन प्रोक्योरमेंट पोर्टल के अनुसार, हरियाणा में अब तक 51.98 लाख टन धान की खरीद हो चुकी है। हरियाणा सरकार ने इस वर्ष 60 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया है। वहीं, पंजाब में अब तक 147.11 लाख टन धान की खरीद पूरी हो चुकी है। पंजाब सरकार ने इस वर्ष 185 लाख टन धान खरीद के लक्ष्य तय किया है। &nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार ने मौजूदा खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2300 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड ए धान का 2320 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के वर्ष 2024-25 के लिए खरीफ फसलों के उत्पादन के प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुसार, इस साल अच्छे मानूसन के चलते खरीफ सीजन में चावल उत्पादन रिकॉर्ड 11.99 करोड़ टन तक पहुंच सकता है।&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों ही प्रदेश में धान खरीद की समीक्षा की थी। उन्होंने धान खरीद की प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी लाने के निर्देश दिए थे। साथ ही किसानों को 48 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए थे। &nbsp;</p>
<p>प्रदेश में दो चरणों में धान की सरकारी खरीद हो रही है। पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 1 अक्टूबर से धान खरीद शुरू हुई थी, जो 31 जनवरी 2025 तक चलेगी। इसके बाद दूसरे चरण में 1 नवंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान की खरीद शुरू हुई थी, जो 28 फरवरी तक चलेगी। यूपी में धान की उतराई, छनाई और सफाई के लिए किसानों को 20 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त भुगतान भी किया जा रहा है।&nbsp;</p>
<p>प्रदेश सभी जिलों में किसानों द्वारा धान बिक्री के लिए कुल 4160 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। एमएसपी पर धान बेचने के लिए किसानों को खाद्य रसद विभाग की वेबसाइट <strong><a href="https://fcs.up.gov.in/">https://fcs.up.gov.in/</a></strong> पर ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा। अधिक जानकारी के लिए किसान टोल फ्री नंबर 1800-1800-150 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, किसान 'यूपी किसान मित्र' मोबाइल ऐप के माध्यम से भी पंजीकरण कर सकते हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में 70 लाख टन धान की खरीद के लक्ष्य के मुकाबले अभी तक 3.3 लाख की खरीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में किसानों के खातों में 300 करोड़ रुपये का बोनस जारी, आढ़तियों का कमीशन बढ़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/bonus-of-rs-300-crore-released-in-the-accounts-of-farmers-in-haryana-commission-of-aartiyas-increased.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 15 Nov 2024 18:44:13 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/bonus-of-rs-300-crore-released-in-the-accounts-of-farmers-in-haryana-commission-of-aartiyas-increased.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: left;">गुरु नानक देव जी के 555वें प्रकाश पर्व पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश के 2 लाख 62 हजार किसानों के बैंक खातों में 300 करोड़ रुपये की बोनस राशि जारी की।&nbsp;</p>
<p style="text-align: left;">चंडीगढ़ में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने खरीफ-2024 के दौरान प्रतिकूल मौसम के कारण कृषि एवं बागवानी फसलों पर 2000 रुपये प्रति एकड़ बोनस देने का फैसला किया था। पहली किस्त के रूप में 16 अगस्त, 2024 को 496 करोड़ रुपये की बोनस राशि 5 लाख 80 हजार किसानों के खाते में डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की गई थी। आज दूसरी किस्त के रूप में 300 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। <span> शेष तीसरी किस्त भी जल्द जारी कर दी जाएगी।</span>&nbsp;</p>
<p style="text-align: left;">मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर जिन किसानों ने अपना पंजीकरण करवाया हुआ है,&nbsp;उन सभी किसानों को यह बोनस राशि दी जाएगी। कुल&nbsp;1380&nbsp;करोड़ रुपये की राशि किसानों को दी जानी है। अभी तक दो किस्तों में भुगतान किया जा चुका है। सीएम सैनी ने बताया कि तीसरी किस्त के रूप में शेष&nbsp;4&nbsp;लाख&nbsp;94&nbsp;हजार किसानों की बोनस राशि&nbsp;580&nbsp;करोड़ रुपये भी अगले&nbsp;10&nbsp;से&nbsp;15&nbsp;दिनों में डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में वितरित कर दी जाएगी।</p>
<p style="text-align: left;"><span lang="HI">मुख्यमंत्री ने</span><span>&nbsp;</span><span lang="HI">कहा कि</span><span>&nbsp;</span><span lang="HI">फसल खरीद में आढ़तियों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए राज्य सरकार ने उनके हितों का भी ध्यान रखा है। सरकार ने आढ़तिया<span>&nbsp;</span><span class="il">कमीशन</span><span>&nbsp;</span></span><span>46&nbsp;</span><span lang="HI">रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर<span>&nbsp;</span></span><span>55&nbsp;</span><span lang="HI">रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।</span><span>&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: left;"><strong>वाट्सएप से मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण </strong></p>
<p style="text-align: left;">मुख्यमंत्री ने किसानों को व्हाट्सएप के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण की शुरुआत भी की। प्रदेश के 40 लाख किसानों को मोबाइल पर व्हाट्सएप के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जाएंगे। जैसे ही मिट्टी के नमूने के परीक्षण के परिणाम पोर्टल पर ऑनलाइन हो जाएंगे, मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों के व्हाट्सएप नंबर पर पहुंच जाएगा।</p>
<p style="text-align: left;">सीएम सैनी ने कहा कि प्रदेश में हर 3 वर्ष के बाद मिट्टी की जांच कर किसानों को अपने खेतों में बीज की मात्रा, आवश्यक उर्वरकों का उपयोग जैसी जानकारियां दी जाती हैं, जिससे किसान अधिक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार खाद डालने के लिये प्रोत्साहित होंगे। साथ ही, समय पर वितरण से किसानों के बीच मृदा स्वास्थ्य कार्ड का उपयोग बढ़ेगा।</p>
<p style="text-align: left;">हरियाणा राज्य में मिट्टी परीक्षण का एक विस्तृत नेटवर्क है।&nbsp;20-25&nbsp;किलोमीटर की परिधि में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला की उपलब्धता है। राज्य में&nbsp;106&nbsp;मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं,&nbsp;जहां मिट्टी के नमूनों का परीक्षण किया जा रहा है। ये सभी मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं नवीनतम उपकरणों से लैस हैं। विभाग ने इस कार्य के लिए अपना पोर्टल विकसित किया है,&nbsp;जहां मृदा स्वास्थ्य कार्ड के रूप में फसलों में उर्वरक डालने के लिए परामर्श तैयार किया जाता है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: left;"></p>
<p style="text-align: left;">&nbsp;</p>
<p style="text-align: left;"><br /><br /></p>
<p style="text-align: left;">&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_67374753a8265.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में किसानों के खातों में 300 करोड़ रुपये का बोनस जारी, आढ़तियों का कमीशन बढ़ा ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में पराली को लेकर सख्ती, 26 अधिकारी&amp;#45;कर्मचारी सस्पेंड, 250 को नोटिस जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/strictness-regarding-stubble-in-haryana-26-officers-employees-suspended-notice-issued-to-250.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 15 Nov 2024 17:12:37 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/strictness-regarding-stubble-in-haryana-26-officers-employees-suspended-notice-issued-to-250.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं पर काबू पाने के लिए राज्य सरकार काफी सख्ती दिखा रही है। पराली की आग रोकने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के निलंबन और कारण बताओ नोटिस जारी करने की कार्रवाई की जा रही है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>गुरुवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा विधानसभा सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश में 8 नवम्बर तक कुल 906 जगह पराली जलाने की घटनाएं हुई हैं। इनमें से 22 घटनाएं आकस्मिक कारणों से हुई हैं। पिछले वर्ष इस अवधि तक पराली जलाने की 1649 घटनाएं हुई थीं। इस प्रकार पराली जलाने की घटनाओं में इस वर्ष 45 प्रतिशत की कमी आई है।</p>
<p>मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि अपनी जिम्मेदारी का सही ढंग से निर्वाह नहीं करने वाले नोडल अधिकारियों के विरुद्ध भी राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। सरकार ने ऐसे&nbsp;26&nbsp;अधिकारियों व कर्मचारियों को निलंबित किया है। लगभग&nbsp;250&nbsp;अधिकारियों व कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस देकर उनसे जवाब भी मांगा है।&nbsp;प्रदेश में पहली बार ऐसा हुआ है कि अधिकारियों को भी प्रदूषण फैलाने के प्रति जवाबदेह माना गया है।&nbsp;<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>पराली प्रबंधन की योजना</strong></p>
<p>इस वर्ष हरियाणा में लगभग 38 लाख 87 हजार एकड़ क्षेत्र में धान लगाया गया था। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए विस्तृत योजना बनाई गई है। 22 लाख 65 हजार टन पराली को चारे के रूप में उपयोग करने की योजना है। इसके अलावा, 33 लाख टन पराली का प्रबंधन खेतों में ही किया जा रहा है जबकि 25 लाख 39 हजार टन पराली का प्रयोग उद्योगों आदि में किया जा रहा है। फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत वर्ष 2024-25 में 268.।8 करोड़ रुपये की राशि की वार्षिक योजना मंजूर की गई है। इसमें 161 करोड़ रुपये केंद्र सरकार तथा 107 करोड़ रुपये की व्यवस्था राज्य सरकार ने की है।</p>
<p><strong>पराली न जलाने के लिए पैसा </strong>&nbsp;</p>
<p>सीएम सैनी ने कहा कि वर्ष 2023-24 में परानी न जलाने के लिए 1000 रुपये प्रति एकड़ की दर से 120 करोड़ रुपये की राशि एक लाख 10 हजार किसानों को दी गई। इस वर्ष 11 लाख 21 हजार एकड़ भूमि का किसानों ने अब तक पंजीकरण किया है। पंजीकरण के लिए पोर्टल 30 नवम्बर तक खुला है। दिसम्बर के पहले सप्ताह में सभी किसानों को 1000 रुपये प्रति एकड़ की दर से राशि का भुगतान कर दिया जाएगा।&nbsp;</p>
<p><strong>मशीनों पर सब्सिडी </strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने बताया कि पराली प्रबंधन के लिए हरियाणा में 8117 सुपरसीडर और 1727 गांठ बनाने वाली मशीनें दी गई हैं। वर्ष 2018-19 से अब तक राज्य में एक लाख 882 मशीनें किसानों को सब्सिडी पर दी जा चुकी हैं और 6,794 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किये गए हैं। उपकरणों पर कस्टम हायरिंग सेन्टर को 50 प्रतिशत तथा व्यक्तिगत किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। राज्य के किसानों को अब तक 721 करोड़ रुपये सब्सिडी के रूप में प्रदान किये जा चुके हैं।</p>
<p><strong>फसल विविधीकरण पर जोर&nbsp;</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि&nbsp;राज्य सरकार ने&nbsp;धान की जगह दूसरी फसलों की खेती को प्रोत्साहन देकर पराली की मात्रा भी कम की है। प्रदेश में धान के रकबे में लगभग&nbsp;2&nbsp;लाख एकड़ की कमी आई है।&nbsp;धान क्षेत्र में अन्य फसलें बोने पर&nbsp;7,000&nbsp;रुपये प्रति एकड़ की दर से अनुदान दिया जाता है। चालू वित्त वर्ष में&nbsp;33&nbsp;हजार&nbsp;712&nbsp;किसानों ने&nbsp;66&nbsp;हजार&nbsp;181&nbsp;एकड़ भूमि का पंजीकरण फसल विविधिकरण के लिए करवाया है।</p>
<p><strong>उद्योग व गौशालाओं में पराली का उपयोग </strong></p>
<p>सीएम सैनी ने कहा कि उद्योगों को पराली की आपूर्ति करने के लिए 25 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। अब तक उद्योगों से 110 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इसके अलावा, गौशालाओं में पराली की गठरों की ढुलाई के लिए 500 रुपये प्रति एकड़ दिए जाते हैं। एक गौशाला को अधिकतम 15 हजार रुपये की राशि दी जाती है। पराली की खरीद हेतु 2500 रुपये प्रति टन की दर निर्धारित की गई है। इसमें गांठ बनाने से लेकर परिवहन तक का खर्च शामिल है।&nbsp;</p>
<p><strong>पराली से बिजली </strong></p>
<p>खेतों में पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए हरियाणा सरकार ने कुरुक्षेत्र, कैथल, फतेहाबाद एवं जींद में बायोमास परियोजनाएं स्थापित की हैं, जिनसे 30 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। पराली का उपयोग जैव ईंधन में भी किया जा रहा है। इसके लिए पानीपत रिफाइनरी में 2जी एथेनॉल प्लांट स्थापित किया गया है।&nbsp;</p>
<p><span lang="HI">सीएम सैनी ने हरियाणा के विधायकों से कहा कि </span><span lang="HI">पराली पर राजनीति न करें। बल्कि अपने इलाके में किसानों को समझाएं कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठाये और पराली न जलाएं।</span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में पराली को लेकर सख्ती, 26 अधिकारी-कर्मचारी सस्पेंड, 250 को नोटिस जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र में स्वीकृत मात्रा के मुकाबले बहुत कम सोयाबीन खरीद, कांग्रेस ने उठाया मुद्दा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/soybean-purchase-falls-short-of-approved-quantity-in-maharashtra-congress-made-political-issue.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 14 Nov 2024 16:48:47 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/soybean-purchase-falls-short-of-approved-quantity-in-maharashtra-congress-made-political-issue.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सोयाबीन के भाव में गिरावट से किसानों को हो रहे नुकसान से बचाने के लिए सरकारी कवायद नाकाफी साबित हो रही है। केंद्र सरकार ने सोयाबीन उत्पादक महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना राज्यों में एमएसपी पर सोयाबीन की खरीद शुरू करने का ऐलान किया था। लेकिन अब तक महाराष्ट्र में सोयाबीन की स्वीकृत मात्रा के मुकाबले एक फीसदी भी खरीद नहीं हुई है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बीच कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर हल्ला बोला है।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी <strong>जयराम रमेश</strong> ने 11 नवंबर तक हुई सोयाबीन की खरीद का ब्योरा सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए कहा कि <span>सोयाबीन के लिए महाराष्ट्र की खरीद अवधि दूसरे राज्यों के मुकाबले सबसे कम है। यह महज 15 दिन में समाप्त हो जाएगी। इस छोटी सी अवधि में, राज्य ने लगभग 3,888 मीट्रिक टन सोयाबीन खरीदा है, जबकि स्वीकृत मात्रा 13,08,238 मीट्रिक टन है। यानी कि 0.3% लक्ष्य ही पूरा हुआ है। </span>पड़ोसी राज्य तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार है। उसने लगभग 25,000 टन सोयाबीन की खरीद की है, जो अपने लक्ष्य का 50 फीसदी है।&nbsp;</p>
<p>जयराम रमेश द्वारा शेयर किए गये आंकड़ों के अनुसार, 11 नवंबर तक देश में करीब 39 हजार टन सोयाबीन की खरीद हुई है जबकि खरीद की स्वीकृत मात्रा 32.24 लाख टन है। मध्य प्रदेश में 13.68 लाख टन सोयाबीन खरीद की मात्रा स्वीकृत थी लेकिन सिर्फ 9971 टन सोयाबीन की खरीद हुई। इसी तरह राजस्थान में 2.92 लाख टन की स्वीकृत मात्रा के मुकाबले 1096 टन सोयाबीन खरीदा गया है। कर्नाटक में 1.03 लाख टन की स्वीकृत मात्रा के मुकाबले मात्र 188 टन सोयाबीन एमएसपी पर खरीदा गया है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सोयाबीन किसानों को हुए नुकसान का मुद्दा तूल पकड़ रहा है। इस साल प्रदेश में सोयाबीन की बंपर पैदावार हुई लेकिन उपज के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी नीचे आ गये। इस साल सरकार ने सोयाबीन का एमएसपी 4892 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि महाराष्ट्र के किसानों को 3800-4200 रुपये के आसपास सोयाबीन बेचनी पड़ रही है।</p>
<p>कांग्रेस नेता <strong>राहुल गांधी</strong> ने भी महाराष्ट्र के सोयाबीन और कपास किसानों की परेशानियों का मुद्दा उठाते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। मंगलवार को राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के सोयाबीन किसानों के साथ ऑनलाइन बातचीत की थी। राहुल गांधी ने ट्विट किया कि महाराष्ट्र के सोयाबीन और कपास के किसान भाजपा की किसान विरोधी नीतियों के कारण हताश और निराश हैं। सोयाबीन की कीमतें 2021 में 10,000 रुपए प्रति क्विंटल तक थीं लेकिन अब किसान MSP से भी कम दाम में बेचने को मजबूर हैं। सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4,892 रुपए प्रति क्विंटल है लेकिन किसानों को 4,200 रुपए के आसपास बेचना पड़ रहा है। कई किसानों को तो और भी कम कीमत मिल रही है।</p>
<p>राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि <span>आय दुगनी करना तो भूल जाइए, भाजपा ने किसानों को अपनी फसल लागत के तीन-चौथाई दर पर बेचने को मजबूर कर दिया है।&nbsp;</span>महाराष्ट्र में कांग्रेस और महा विकास अघाड़ी गठबंधन ने स्वामीनाथन आयोग के फॉर्मूले के अनुसार MSP तय करने और इसे कानूनी दर्जा दिलाने का वादा किया है। कांग्रेस ने किसानों को तीन लाख रुपये तक की कर्जमाफी का वादा भी किया है।</p>
<p>पूर्व सांसद और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष <strong>राजू शेट्टी</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि महाराष्ट्र में सोयाबीन के किसानों को एमएसपी से बहुत कम भाव मिल रहे हैं। सरकारी खरीद के नाम पर सिर्फ नौटंकी हो रही है और किसानों को अपनी उपज 3800 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेचनी पड़ रही है। शेट्टी का दावा है कि सोयाबीन के अलावा कपास और प्याज के किसान भी सरकार से नाराज हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">सोयाबीन के लिए महाराष्ट्र की ख़रीद अवधि दूसरे राज्यों के मुक़ाबले सबसे कम है। यह महज़ 15 दिन में समाप्त हो जाएगी। इस छोटी सी अवधि में, राज्य ने लगभग 3,888 मीट्रिक टन सोयाबीन ख़रीदा है, जबकि स्वीकृत मात्रा 13,08,238 मीट्रिक टन है। यानी कि 0.3% लक्ष्य ही पूरा हुआ है। <br /><br />पड़ोसी राज्य&hellip; <a href="https://t.co/hZNw5aywYl">https://t.co/hZNw5aywYl</a> <a href="https://t.co/81n2KpcBAW">pic.twitter.com/81n2KpcBAW</a></p>
&mdash; Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) <a href="https://twitter.com/Jairam_Ramesh/status/1856963182264553849?ref_src=twsrc%5Etfw">November 14, 2024</a></blockquote>
<p>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र में स्वीकृत मात्रा के मुकाबले बहुत कम सोयाबीन खरीद, कांग्रेस ने उठाया मुद्दा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एफपीओ व पैक्स को गोदाम बनाने के लिए 1 करोड़ तक का ब्याज मुक्त कर्ज देगी हरियाणा सरकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-government-offers-interest-free-loans-up-to-1-crore-to-fpos-and-pacs-for-warehouse-construction.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 13 Nov 2024 19:55:30 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-government-offers-interest-free-loans-up-to-1-crore-to-fpos-and-pacs-for-warehouse-construction.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए 500 हाई-टेक सीएम पैक्स केंद्र बनाए जाएंगे। एफपीओ और पैक्स को अनाज भंडारण के लिए गोदाम बनाने के लिए सरकार 1 करोड़ रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण देगी।&nbsp;</p>
<p>हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने आज 15वीं विधानसभा के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों के सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार 500 सीएम पैक्स स्थापित करेगी, जो किसानों को प्रशिक्षण और वित्तीय सेवाओं के लिए वन स्टॉप सेंटर्स का काम करेंगे। इसके अलावा, कृषक समूहों और पैक्स को अनाज भंडारण के लिए गोदाम बनाने हेतु एक करोड़ रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण दिया जाएगा। सरकार किसान उत्पाद संघ (एफपीओ) और पैक्स जैसे सहकारी संगठनों का एक बड़ा नेटवर्क बना रही है।</p>
<p>राज्यपाल ने कहा कि रबी सीजन 2023-24 में फसलों को प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के लिए 49 हजार किसानों को 133.75 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मुआवजे के रूप में जारी की गई है। इसकी अलावा, सरकार ने ई-खरीद पोर्टल के माध्यम से 12 लाख किसानों के खातों में एमएसपी पर फसल खरीद का 1 लाख 24 हजार करोड़ रुपये का भुगतान जारी किया है।</p>
<p>बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की वर्तमान जरूरतों को देखते हुए कृषि व्यवस्था में बदलाव ला रही है। किसान ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर हों और उसकी आमदनी बढ़े, इस सोच के साथ नीतियां बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आज नकली खाद, बीज व कीटनाशक कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। राज्य सरकार इन पर रोक लगाने के लिए कड़ा कानून बनाएगी और किसानों को शत-प्रतिशत मुआवजा देना भी सुनिश्चित करेगी।&nbsp;</p>
<p>राज्यपाल ने कहा कि सिंचाई जल की कमी को देखते हुए कम पानी में उगने वाली फसलों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार धान की जगह अन्य फसल बोने या खेत खाली रखने पर किसानों को 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की राशि देगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार रावी-ब्यास नदियों के पानी का अपना वैध भाग प्राप्त करने और सतलुज-यमुना लिंक नहर को पूरा करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। इन मामलों में निरंतर ठोस पैरवी की जा रही है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एफपीओ व पैक्स को गोदाम बनाने के लिए 1 करोड़ तक का ब्याज मुक्त कर्ज देगी हरियाणा सरकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हिमाचल में ड्राई स्पेल से सेब के पेड़ों में रोग फैलने का खतरा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/dry-spell-in-himachal-poses-canker-risk-to-apple-plants-expert-advice-for-protection.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 13 Nov 2024 14:02:34 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/dry-spell-in-himachal-poses-canker-risk-to-apple-plants-expert-advice-for-protection.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश में पिछले दो महीने से ड्राई स्पेल की स्थिति बनी हुई है। बारिश नहीं होने से अब सेब के बगीचे सूखे की चपेट में आ गए हैं। कई जगह बगीचों में सेब के पेड़ों की छाल उखड़ने लगी है, जिससे इनमें कैंकर रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है। सेब का तूड़ान पूरा होने के दो महीने बाद भी प्रदेश में अभी तक बारिश नहीं हुई है, जिससे पेड़ों की ग्रोथ पर असर पड़ रहा है। अगर आगे भी यही हालात रहते हैं और बारिश नहीं होती है तो सेब के पेड़ सूख सकते हैं, जिससे आगले सीजन में सेब की फसल पर असर पड़ सकता है। इस साल पहले ही प्रदेश में सेब की पैदावार कम रहने का अनुमान है।&nbsp;</p>
<p>बागवानी विशेषज्ञों की मानें तो अगर लंबे समय तक बारिश नहीं होती है तो इससे सेब के पेड़ सूख सकते हैं। पेड़ की ग्रोथ के लिए मिट्टी में नमी बनी रहनी चाहिए। नमी का स्तर घटने से मिट्टी सख्त हो जाती है और इसमें गुड बैक्टीरिया खत्म होने लगते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बागवान अक्सर तूड़ान के बाद अपने बगीचों की देखभाल नहीं करते, लेकिन इस समय सतर्क रहना आवश्यक है। बागवानों को नियमित निगरानी रखनी चाहिए और समय पर अपने बागीचों की देखभाल करनी चाहिए ताकि पेड़ों को नुकसान न पहुंचे।</p>
<p><strong>बागवानी विशेषज्ञ </strong>और <strong>डॉ वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय</strong> के रिटायर्ड प्रोफेसर <strong>एसपी भारद्वाज</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया पिछले दो महीने से प्रदेश में बारिश नहीं हुई है, जिससे खासकर सेब के नए पेड़ों की ग्रोथ पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस समय बागवानों को सतर्क रहने की जरूरत है। अपने बगीचों की समय पर निगरानी करें ताकि सेब के पेड़ों को कोई नुकसान न हो। उन्होंने कहा कि बारिश न होने से कई क्षेत्रों में कैंकर रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है। यह समस्या उन जगहों पर अधिक है जहां पूरा दिन धूप रहती है, जिससे सेब के पेड़ों में दरारें आ रही हैं और इनमें आसानी से कैंकर रोग फैल सकता है।&nbsp;</p>
<p>एसपी भारद्वाज ने बताया कि जिन बागवानों के बगीचे ऐसी जगह पर हैं जहां पूरा दिन धूप रहती है या जहां मिट्टी में नमी कम है, वे नियमित रूप से अपने बगीचों में सिंचाई करें। उच्च घनत्व वाले बगीचों में बागवान ड्रिप इरिगेशन का भी उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, बागवान सूखी घास की मोटी परत बिछाकर मल्चिंग कर सकते हैं, जिससे सेब के पेड़ों में नमी बनी रहती है।&nbsp;</p>
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<p>कैंकर रोग की रोकथाम के लिए एसपी भारद्वाज ने कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करने का सुझाव दिया है। इसके लिए 600 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को 200 लीटर पानी में घोलकर पेड़ों पर छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा, पेड़ों के तनों की वाइट वॉशिंग भी जरूरी है ताकि अन्य संक्रमण न फैले। इसके लिए 9 किलो चूना, 1 किलो कॉपर सल्फेट, और 750 मिली एचएमओ (हॉर्टिकल्चर मिनरल ऑयल) को 20 लीटर पानी में घोलकर पेंट तैयार करें और इसे पेड़ों के तनों पर लगाएं।&nbsp;</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p>एसपी भारद्वाज के अनुसार, कैंकर रोग का शुरुआती पता तनों में दरारें और रंग में बदलाव से लग सकता है। बागवानों को इन संकेतों पर नजर रखनी चाहिए और तुरंत आवश्यक उपाय करने चाहिए ताकि पेड़ स्वस्थ रहें।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_67346303b380f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हिमाचल में ड्राई स्पेल से सेब के पेड़ों में रोग फैलने का खतरा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गुजरात में मूंगफली, सोयाबीन, उड़द और मूंग की सरकारी खरीद शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/government-procurement-of-groundnut-soybean-urad-and-moong-started-in-gujarat.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 12 Nov 2024 11:55:58 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/government-procurement-of-groundnut-soybean-urad-and-moong-started-in-gujarat.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गुजरात में समर्थन मूल्य पर मूंगफली, सोयाबीन, उड़द और मूंग की सरकारी खरीद शुरू हो गई है। सोमवार को राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर से इसकी शुरुआत की। इन फसलों की खरीद के लिए राज्य भर में 160 से अधिक खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां अगले 90 दिनों तक किसानों से फसलों की खरीद की जाएगी। गुजरात सरकार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अब तक 3.70 लाख से अधिक किसानों ने समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचने के लिए पंजीकरण कराया है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2024-25 के लिए मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 6,783 रुपये प्रति क्विंटल, मूंग का एमएसपी 8,682 रुपये प्रति क्विंटल, उड़द का एमएसपी 7,400 रुपये प्रति क्विंटल और सोयाबीन का एमएसपी 4,892 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।</p>
<p>हिम्मतनगर में कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुजरात के कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री के प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी का पानी सिंचाई के लिए खेतों तक पहुंचाया गया है, प्रत्येक जिले में 75 अमृत सरोवर बनाए गए हैं, और 'कैच द रेन' पहल के तहत कुओं का विकास किया गया है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में किसानों के लिए पर्याप्त बिजली सुनिश्चित की गई है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का सिंचित क्षेत्र 62 लाख हेक्टेयर तक बढ़ गया है और कृषि उत्पादन 2.7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। प्राकृतिक खेती के बारे में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्रयासों की सराहना भी की, जिनके कारण गुजरात में प्राकृतिक खेती में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मुख्यमंत्री ने सभी उपस्थित किसानों से जल संरक्षण, मिट्टी की सुरक्षा और फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाने का आग्रह किया।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गुजरात में मूंगफली, सोयाबीन, उड़द और मूंग की सरकारी खरीद शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में समय पर कृषि ऋण चुकाने वाले किसानों को मिलेगा 7 प्रतिशत ब्याज अनुदान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-government-implements-interest-subsidy-scheme-for-long-term-agricultural-and-non-agricultural-loan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 08 Nov 2024 20:12:54 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-government-implements-interest-subsidy-scheme-for-long-term-agricultural-and-non-agricultural-loan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान में दीर्घकालीन सहकारी कृषि एवं अकृषि ऋणों (गैर कृषि कार्यों के लिए ऋण) पर ब्याज अनुदान योजना, 2024-25 लागू हो गई है। राज्य के सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक ने शुक्रवार को बताया कि प्रदेश में पहली बार दीर्घकालीन कृषि ऋणों को समय पर चुनाने वाले किसानों को 7 प्रतिशत का ब्याज अनुदान दिया जायेगा। यह अनुदान वर्ष 2024-25 के दौरान वितरित ऋणों का समय से चुकारा करने पर मिलेगा।</p>
<p>सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2024-25 के बजट में 2 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज अनुदान की घोषणा की गई थी, जिसे किसान हित में प्राथमिकता से लागू कर दिया गया है। जिन किसानों द्वारा पूर्व में कृषि ऋण प्राप्त किया है और वे अपने ऋण का समय पर चुकारा कर रहे हैं, ऐसे किसानों को 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान का लाभ मिलेगा।</p>
<p>सहकारिता मंत्री ने कहा पहली बार इस योजना के तहत उत्पादक अकृषि ऋणी किसानों को भी सम्मिलित कर लाभान्वित किया गया है। अब उत्पादक अकृषि ऋणों का समय पर चुकारा करने वाले किसानों को भी 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से समय पर अपने ऋण की किश्तों का भुगतान करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करते हुए किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार अधिकाधिक ऋण की सुविधा उपलब्ध कराना है।</p>
<p>यह योजना प्रदेश के प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक एवं केंद्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से वितरित कृषि एवं अकृषि ऋणों के समय पर चुकारा करने पर लागू होगी। यदि कोई किसान केंद्रीय सहकारी बैंक के माध्यम से सहकार किसान कल्याण योजना के तहत इस वर्ष कृषि ऋण लेता है और वह उसका नियमित चुकारा करता है तो उसे 7 प्रतिशत ब्याज का अनुदान मिलेगा। इस प्रकार उसे मात्र 4 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा।</p>
<p>सहकारिता मंत्री ने कहा कि इस बार ब्याज अनुदान के लिए कुल 39.75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना के लागू होने से किसान आधुनिक खेती के लिये प्रोत्साहित होंगे। साथ ही भूमि सुधार करते हुए उत्पादकता को बढ़ा पाएंगे। जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी और सहकारी बैंक अधिक किसानों को कृषि एवं अकृषि ऋण मुहैया करा पाएंगे।</p>
<p><strong>इतना मिलेगा लाभ&nbsp;</strong></p>
<p>यदि किसान इस वर्ष सहकार किसान कल्याण योजना (कृषि ऋण) के तहत 10 लाख रुपये का ऋण लेता है और वह अपनी किश्तें नियमित चुकाता है तो उसे इस वर्ष 7 प्रतिशत की दर से राशि 68,231 रुपये का ब्याज अनुदान मिलेगा। इस प्रकार 1,07,220 रुपये के बजाय पर किसान को 4 प्रतिशत की दर से सिर्फ 38,989 रुपये का ब्याज देना होगा।</p>
<p>इसी प्रकार यदि किसान खेत पर आवास योजना (अकृषि ऋण) के तहत 50 लाख रुपये का ऋण लेता है और वह अपनी सभी किश्तें समय पर चुकाता है तो उसे इस वर्ष 5 प्रतिशत की दर से राशि 2,46,108 रुपये का ब्याज अनुदान मिलेगा। इस प्रकार 4,18,385 रुपये के बजाय पर किसान को 3.50 प्रतिशत की दर से 1,72,277 रुपये का ब्याज देना होगा।</p>
<p><strong>किसान इन कार्यों के लिए ले सकते हैं ऋण</strong></p>
<p>किसान नलकूप, कूप गहरा करना, पम्पसैट, फव्वारा/ड्रिप सिंचाई, विद्युतीकरण, नाली निर्माण, डिग्गी/हौज का निर्माण, ट्रेक्टर, कृषि यंत्र, थ्रेशर, कम्बाइन हार्वेस्टर, पावर टिलर, भूमि सुधार, भूमि समतलीकरण, तारबंदी, बाउण्ड्रीवाल, डेयरी, कृषि भूमि क्रय, अनाज/प्याज गोदाम निर्माण लिए कृषि ऋण ले सकते हैं। इसके अलावा, कृषि कार्य हेतु सोलर प्लांट, पशुपालन, वर्मी कम्पोस्ट, भेड़/बकरी/सुअर/मुर्गी पालन, उद्यानीकरण, ऊंट/बैलगाडी क्रय, मत्स्य पालन, रेशम कीट पालन, मधुमक्खी पालन और सहकार किसान कल्याण योजना के तहत अन्य सभी कृषि कार्यों के लिए किसान कृषि ऋण योजना का लाभ उठा सकते हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>वहीं, अकृषि सूक्ष्म एवं लघु उद्योग, सेवा इकाइयां, लघु पथ परिवहन, उच्च शिक्षा ऋण, स्वरोजगार क्रेडिट कार्ड, शैक्षणिक संस्थान ऋण, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन सेवा और सूचना प्रौद्योगिकी ऋण एवं खेत पर आवास निर्माण के लिए किसान अकृषि ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में समय पर कृषि ऋण चुकाने वाले किसानों को मिलेगा 7 प्रतिशत ब्याज अनुदान ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र में सोयाबीन किसानों की नाराजगी बन सकती है चुनावी मुद्दा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/soybean-farmers-in-maharashtra-face-setback-with-no-government-purchase-could-impact-elections.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 08 Nov 2024 13:42:12 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/soybean-farmers-in-maharashtra-face-setback-with-no-government-purchase-could-impact-elections.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र में सोयाबीन की सरकारी खरीद अभी तक शुरू नहीं हो पाई है, जिस वजह से सोयाबीन किसानों की नाराजगी बढ़ गई है। महाराष्ट्र की अनाज मंडियों में सोयाबीन के दाम लगातार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे चल रहे हैं। सोयाबीन की गिरती कीमतों के कारण केंद्र सरकार ने सितंबर में प्राइस स्पोर्ट स्कीम के तहत महाराष्ट्र में सोयाबीन खरीद को मंजूरी दी थी। किसानों को उम्मीद थी कि राज्य में जल्दी ही सरकारी खरीद शुरू होगी, जिससे उन्हें कुछ हद तक राहत मिलेगी। लेकिन, सोयाबीन की कटाई पूरी हुए 15 दिन से ज्यादा बीत चुके हैं और अब तक खरीद शुरू नहीं हो पाई है। सोयाबीन की सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों को एमएसपी से कम दाम पर मंडियों में अपनी फसल बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में सोयाबीन किसानों की नाराजगी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बन सकती है, जिसका खामियाजा सत्तरूढ़ महायुति गठबंधन को भुगतना पड़ सकता है।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृष&zwj;ि व क&zwj;िसान कल्याण मंत्रालय के एगमार्कनेट पोर्टल के अनुसार, महाराष्ट्र की मंडियों में किसानों को सोयाबीन का औसत दाम 3800 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है जबिक केंद्र सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2024-25 के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4892 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। मध्य प्रदेश के बाद महाराष्ट्र सोयाबीन का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और पश्चिमी विदर्भ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सोयाबीन की खेती होती है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के वर्ष 2024-25 के लिए खरीफ फसलों के उत्पादन के प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुसार, देश में सोयाबीन का उत्पादन 133.60 लाख टन अनुमानित है। वहीं, सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के अनुसार, महाराष्ट्र में <span>चालू खरीफ सीजन में </span>सोयाबीन उत्पादन बढ़कर 50.16 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल यह 46.91 लाख टन था।</p>
<p>महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के किसान <strong>गजानन लांडे</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि उन्होंने इस साल दो एकड़ में सोयाबीन की फसल लगाई थी, जिससे उन्हें 10 क्विंटल उत्पादन मिला। उन्होंने अभी तक अपनी फसल नहीं बेची है क्योंकि मंडियों में सोयाबीन का दाम काफी कम है और वह सरकारी खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। गजानन लांडे ने कहा कि अगर अगले 10-15 दिनों में खरीद शुरू नहीं हुई, तो उन्हें मंडियों में निजी व्यापारियों को ही अपनी फसल बेचनी पड़ेगी, जहां कम दाम मिलने से उन्हें नुकसान होगा।</p>
<p><strong>महाराष्ट्र के किसान नेता और एमएसपी पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति</strong> के सदस्य <strong>अनिल घनवट</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि महाराष्ट्र में सोयाबीन की सरकारी खरीद की घोषणा के बाद भी खरीद शुरू नहीं हो पाई है, जिससे किसानों में काफी नाराजगी है। उन्होंने कहा कि मंडियो में जो भाव किसानों को मिल रहा है वह बहुत कम है। जिस वजह से किसानों की लागत भी नहीं निकल रही है और उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सोयाबीन का मुद्दा अहम रहने वाला है क्योंकि फसल की कटाई पूरी हो चुकी है और अभी तक खरीद शुरू नहीं हो पाई है।</p>
<p>महाराष्ट्र के <strong>किसान संगठन स्वाभिमानी शेतकरी संघठना</strong> के प्रमुख और <strong>पूर्व सांसद राजू शेट्टी</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि महाराष्ट्र के सोयाबीन किसान भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं क्योंकि मंडियों में सोयाबीन की कीमतें काफी कम हैं और सोयाबीन की सरकार खरीद भी नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि जिस सोयाबीन की कीमतें एक समय में 9 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई थी उसी सोयाबीन को आज किसान 4 हजार रुपये प्रति के भाव पर बेचने को मजबूर हैं।</p>
<p>राजू शेट्टी ने कहा कि सोयाबीन की कम कीमतों के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। सरकार ने बड़े पैमाने पर पाम ऑयल का इंपोर्ट किया और इस पर इंपोर्ट ड्यूटी भी घटाई, जिस वजह से देश में यह हालात बने हैं और सोयाबीन की कीमत में भारी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी नीतियों में सुधार करने की जरूरत है ताकि किसानों को और बेहतर दाम मिल सके। उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा और पश्चिमी विदर्भ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सोयाबीन की खेती होती है। सोयाबीन की सरकारी खरीद नहीं होने से किसानों में काफी नाराजगी है। किसान कटाई पूरी कर चुके हैं और खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। अगर जल्द खरीद शुरू नहीं हुई तो विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी दल को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र में सोयाबीन किसानों की नाराजगी बन सकती है चुनावी मुद्दा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66c9ddff0f114.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पेराई सत्र शुरू, लेकिन यूपी में किसानों को गन्ना मूल्य की घोषणा का इंतजार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/crushing-season-begins-but-farmers-in-up-await-announcement-of-sugarcane-sap.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Nov 2024 19:43:27 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/crushing-season-begins-but-farmers-in-up-await-announcement-of-sugarcane-sap.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में आधिकारिक तौर पर एक अक्टूबर से गन्ना पेराई सत्र (2024-25) की शुरुआत हो चुकी है लेकिन अभी तक उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने का <strong>राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी)</strong> घोषित नहीं किया है। जबकि कायदे से किसानों को फसल की बुवाई से पहले ही फसल का दाम मालूम होना चाहिए, <span>लेकिन यहां तो फसल कटाई के बाद भी किसान भाव जाने बिना ही चीनी मिलों को गन्ना बेचने को मजबूर हैं। इस साल</span>&nbsp;गन्ने का भाव बढ़ाने को लेकर भी कोई खास हलचल नहीं है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार ने इस साल फरवरी में ही 2024-25 शुगर सीजन के लिए गन्ने का<strong> उचित एवं लाभकारी (एफआरपी)</strong> 25 <span>रुपये बढ़ाकर </span>340 <span>रुपये प्रति क्विंटल तय कर दिया था। लेकिन यूपी सरकार ने गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य </span>(<span>एसएपी</span>) <span>पेराई सत्र शुरू होने के एक महीना बाद भी घोषित नहीं किया है। इसकी वजह सूबे के बदले सियासी हालात हैं।&nbsp; &nbsp;</span></p>
<p>यह उस राज्य की स्थिति है जहां करीब 45 लाख किसान परिवार गन्ने की खेती पर निर्भर हैं और प्रदेश की इकोनॉमी में गन्ना सालाना करीब 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का योगदान करता है। यही वजह है कि यूपी की राजनीति पर गन्ना किसानों का दबदबा रहा है। लेकिन पश्चिमी यूपी में असर रखने वाले<strong> राष्ट्रीय लोकदल</strong> के केंद्र और राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा से हाथ मिलाने के बाद हालात बदल गए हैं। इसलिए पेराई सीजन शुरू होने के बाद भी गन्ना मूल्य का ऐलान न होना कोई बड़ा मुद्दा नहीं बन पाया और न ही गन्ने का भाव बढ़ाने की मांग प्रमुखता से उठ रही है। जबकि प्रदेश में नौ विधानसभा सीटों पर आगामी 20 नवंबर को उपचुनाव होने हैं। इनमें से मीरापुर, <span>कुंदरकी और खैर जैसी सीटें गन्ना उत्पादक पश्चिमी यूपी में हैं।</span>&nbsp;</p>
<p>बिजनौर जिले के पुंडरी गांव के किसान <strong>राजेंद्र सिंह</strong> बताते हैं कि इस साल गन्ने के भाव को लेकर न तो राष्ट्रीय लोकदल ने मुद्दा उठाया और न ही किसान यूनियनें बढ़-चढ़कर विरोध-प्रदर्शन कर पा रही हैं। इसका कारण वे किसानों की कमजोर पड़ती ताकत और रालोद के भाजपा से हाथ मिलाने के फैसले को मानते हैं। गौरतलब है कि भाजपा के साथ गठबंधन से पहले रालोद गन्ना किसानों का मुद्दा जोरशोर से उठाती रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>कब होगा गन्ना 400 पार&nbsp;</strong></p>
<p>चीनी के अलावा एथेनॉल और खांडसारी उत्पादन के लिए बढ़ती मांग के कारण पिछले साल खांडसारी इकाईयों ने गन्ना का दाम 400 रुपये प्रति क्विंटल तक दिया था। इसे देखते हुए पिछले साल ही गन्ने का एसएपी 400 रुपये क्विंटल तक बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन इस साल भी गन्ना मूल्य 400 पार होना मुश्किल नजर आ रहा है। <strong>चीनी उद्योग</strong> से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चीनी मिलें इस साल गन्ना मूल्य बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। जबकि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) और एथेनॉल का दाम बढ़ाने की मांग कर रही हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>भारतीय किसान यूनियन</strong> के राष्ट्रीय प्रवक्ता <strong>राकेश टिकैत</strong> ने मांग की है कि बढ़ती महंगाई और लागत को देखते हुए गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए और बकाया भुगतान भी ब्याज सहित कराया जाए। लेकिन गन्ने के रेट के मुद्दे पर भारतीय किसान यूनियन भी इस बार खास सक्रिय नहीं दिख रही है। इसके पीछे ऐतिहासिक किसान आंदोलन के बाद किसान संगठनों में आया बिखराव भी एक बड़ी वजह है। इससे भी सरकार पर किसानों का दबाव कम हुआ है। तराई इलाके के किसान नेता <strong>तजिंदर सिंह विर्क</strong> मानते हैं कि किसानों को अपने मुद्दों पर नए सिरे से एकजुट होने की जरूरत है। अन्यथा सरकार में उनकी सुनवाई नहीं होगी।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>आठ साल में सिर्फ 55 रुपये भाव बढ़ा </strong>&nbsp;&nbsp;</p>
<p>यूपी के मुख्य विपक्षी दल <strong>समाजवादी पार्टी</strong> ने भी अब तक गन्ना मूल्य की घोषणा न होने को लेकर खास हलचल नहीं दिखाई है। जबकि पिछले 8 वर्षों में यूपी में गन्ने का एसएपी मात्र 55 रुपये बढ़ा है। 2017-18 में गन्ने के एसएपी में 10 रुपये की बढ़ोतरी कर 32<span>5 रुपये प्रति क्विंटल का भाव तय किया गया था जो अगले तीन साल फ्रीज रहा। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने</span> 2021<span>-22 सीजन के लिए एसएपी में 25 रुपये की बढ़ोतरी कर रेट 350 रुपये प्रति क्विंटल किया था। तब पेराई सीजन शुरू होने के पहले ही सितंबर</span>, 2021 <span>में एसएपी की घोषणा की गई थी। लेकिन अगले साल पेराई सीजन 2022-23 में जनवरी तक एसएपी का ऐलान नहीं हुआ और आखिर में इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।&nbsp;</span></p>
<table width="348" style="height: 313px;">
<tbody>
<tr style="height: 82px;">
<td colspan="2" style="height: 82px; width: 344.4px; text-align: center;">
<p><strong>&nbsp;यूपी में पिछले 8 वर्षो में गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) </strong></p>
<p style="text-align: center;"><em>(रुपये/क्विंटल)</em></p>
</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 132.4px; text-align: center;"><strong>पेराई सत्र&nbsp;</strong></td>
<td style="height: 20px; width: 209.2px; text-align: center;"><strong>गन्ना मूल्य&nbsp;</strong></td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 132.4px; text-align: center;">2016-17</td>
<td style="height: 20px; width: 209.2px; text-align: center;">315</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 132.4px; text-align: center;">2017-18</td>
<td style="height: 20px; width: 209.2px; text-align: center;">325</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 132.4px; text-align: center;">2018-19</td>
<td style="height: 20px; width: 209.2px; text-align: center;">325</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 132.4px; text-align: center;">2019-20</td>
<td style="height: 20px; width: 209.2px; text-align: center;">325</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 132.4px; text-align: center;">2020-21</td>
<td style="height: 20px; width: 209.2px; text-align: center;">325</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 132.4px; text-align: center;">2021-22</td>
<td style="height: 20px; width: 209.2px; text-align: center;">350</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 132.4px; text-align: center;">2022-23</td>
<td style="height: 20px; width: 209.2px; text-align: center;">350</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td style="height: 20px; width: 132.4px; text-align: center;">2023-24</td>
<td style="height: 20px; width: 209.2px; text-align: center;">370</td>
</tr>
<tr style="height: 20px;">
<td colspan="2" style="height: 20px; width: 344.4px; text-align: center;"><em>गन्ने की अगैती किस्मों के लिए</em></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><span>यूपी में पिछले साल पेराई सत्र शुरू होने के साढ़े तीन महीने बाद 18 जनवरी, 2024 को 2023-24 सीजन के लिए गन्ने के एसएपी का ऐलान हुआ था। तब गन्ना मूल्य 20 रुपये बढ़ाकर अगैती किस्मों के लिए 370 रुपये प्रति क्विंटल, सामान्य किस्मों के लिए 360 रुपये और अनुपयुक्त किस्मों के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया था। इस तरह पिछले सात साल में यूपी में गन्ने का एसएपी तीन बार 10, 25 और 20 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा है। मुख्य तौर पर चुनावी साल में ही गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई।</span></p>
<p><strong>हरियाणा-पंजाब में यूपी से ज्यादा रेट </strong></p>
<p>पिछले साल किसानों को गन्ने का सबसे ज्यादा भाव पंजाब में मिला। <strong>पंजाब</strong> में 2023-24 सीजन के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार ने गन्ने का एसएपी 391 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। <strong>हरियाणा</strong> में गन्ने का एसएपी पिछले साल 386 रुपये प्रति क्विंटल था। साथ ही तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने घोषणा की थी कि अगले सीजन यानी 2024-25 के लिए गन्ने का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल किया जाएगा। वहीं,<span> उत्तराखंड में गन्ने का एसएपी पिछले साल 375 रुपये प्रति क्विंटल था जबकि उत्तर प्रदेश में यह 370 रुपये प्रति क्विंटल था। &nbsp;&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पेराई सत्र शुरू, लेकिन यूपी में किसानों को गन्ना मूल्य की घोषणा का इंतजार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में धान खरीद 57 फीसदी पूरी, धीमी लिफ्टिंग के चलते अब तक 64.5 लाख टन ही हुआ उठान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/paddy-procurement-in-punjab-is-57-percent-complete-only-64.5-lakh-tonnes-have-been-lifted-so-far.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Nov 2024 17:27:27 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/paddy-procurement-in-punjab-is-57-percent-complete-only-64.5-lakh-tonnes-have-been-lifted-so-far.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में धान की सरकारी खरीद 57 फीसदी पूरी हो चुका है। राज्य की मंडियों में अब तक 111 लाख टन से अधिक धान की आवक हुई है, जिसमें से करीब 105 लाख टन धान की सरकारी खरीद जा चुका है। वहीं, किसानों को 22,047 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। बुधवार को पंजाब के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह जानकारी दी। उन्होंने दावा किया अगले 8 से 10 दिनों में धान खरीद का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। चालू खरीफ मार्केटिंग सीजन के दौरान पंजाब में 185 लाख टन धान खरीद का अनुमान है।&nbsp;</p>
<p>लाल चंद कटारूचक ने कहा कि 5 नवंबर तक राज्य में 64.5 लाख टन से अधिक धान की लिफ्टिंग पूरी हो चुकी है और जल्द ही मंडियों में बचा हुआ धान की लिफ्ट कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में कुल 5063 राइस मिलें है, जिसमें में 4752 मिलों ने धान की धान मिलिंग के लिए आवेदन किया था। 4589 मिलों को धान अलॉट कर दिया गया है। जिसमें से 4439 मिलें मंडियों में धान की लिफ्टिंग कर रही हैं।&nbsp;</p>
<p>लाल चंद कटारूचक ने राज्य में धान खरीद के दौरान पेश आ रही दिक्कतों और राज्य में स्टोरेज की समस्या के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि <span>भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) </span>ने राज्य में धान की स्टोरेज के लिए अब तक 18 लाख टन जगह बनाई है लेकिन यह अभी भी कम है। राज्य सरकार ने केंद्र से आग्रह किया है कि जल्द और जगह बनाई जाए, ताकि धान का उठान समय रहते पूरा किया जा सके।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में धान खरीद 57 फीसदी पूरी, धीमी लिफ्टिंग के चलते अब तक 64.5 लाख टन ही हुआ उठान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[झारखंड में इंडिया गठबंधन की 3200 रुपये प्रति क्विंटल पर धान खरीद की गारंटी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/india-alliance-guarantees-paddy-purchase-at-rs-3200-per-quintal-in-jharkhand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 05 Nov 2024 20:15:58 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/india-alliance-guarantees-paddy-purchase-at-rs-3200-per-quintal-in-jharkhand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंडिया गठबंधन ने झारखंड के धान किसानों को 3200 रुपये प्रति क्विंटल का दाम देने का वादा किया है। मंगलवार को इंडिया गठबंधन ने झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए गारंटी पत्र जारी करते हुए यह ऐलान किया। इस गारंटी पत्र को 'एक वोट-सात गारंटी' नाम दिया गया है। इसमें कुल 7 गारंटियां दी गई हैं। इंडिया गठबंधन ने दावा किया है कि अगर झारखंड में उनकी सरकार बनती है, तो धान का सरकारी खरीद मूल्य 2,400 से बढ़ाकर 3,200 रुपये प्रति क्विंटल किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेजेएम), राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और सीपीआई-एम ने गठबंधन किया है। इंडिया गठबंधन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संयुक्त रूप से यह गारंटी पत्र जारी किया। इस दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई दिग्गज नेता वहां मौजूद रहे।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x_672a322e2ab83.jpg" alt="" width="510" height="722" /></p>
<p><strong>इंडिया गठबंधन&nbsp;ने दी 7 गारंटी&nbsp;</strong></p>
<ul>
<li><strong>किसान कल्याण की गारंटी:&nbsp;</strong>धान के सरकारी खरीद मूल्य को 2,400 रुपये से बढ़ाकर 3,200 रुपये करने के साथ-साथ लाह, तसर, करंज, इमली, महुआ, चिरोंजी, साल बीज आदि के खरीद मूल्य में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि की जाएगी।&nbsp;</li>
<li><strong>1932 आधारित खतियान की गारंटी:</strong> 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीयता नीति लाने, सरना धर्म कोड को लागू करवाने के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषा-संस्कृति का संरक्षण किया जाएगा।</li>
<li><strong>मंईयां सम्मान की गारंटी:</strong> दिसंबर 2024 से मंईयां सम्मान योजना के अंतर्गत 2,500 रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी।</li>
<li><strong>सामाजिक न्याय की गारंटी:</strong> एसटी-28 प्रतिशत, एससी-12 प्रतिशत, ओबीसी को 27 प्रतिशत एवं अल्पसंख्यक के हितों का संरक्षण करने के साथ-साथ पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्रालय का गठन किया जाएगा।</li>
<li><strong>खाद्य सुरक्षा की गारंटी:</strong> राशन वितरण 7 किलो प्रति व्यक्ति किया जाएगा। साथ ही, गैस सिलेंडर राज्य के हर गरीब परिवार को 450 रुपये में दिया जाएगा।</li>
<li><strong>रोजगार एवं स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी:</strong> झारखंड के 10 लाख युवक-युवतियों को नौकरी एवं रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। 15 लाख रुपये तक परिवारिक स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा।</li>
<li><strong>शिक्षा की गारंटी:</strong> राज्य के सभी प्रखण्डों में डिग्री कॉलेज तथा जिला मुख्यालयों में इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाएगी। साथ ही, रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए औद्योगिक प्रोत्साहन नीति लाते हुए राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में 500-500 एकड़ का औद्योगिक पार्क बनाया जाएगा।&nbsp;</li>
</ul> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ झारखंड में इंडिया गठबंधन की 3200 रुपये प्रति क्विंटल पर धान खरीद की गारंटी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में 32 चीनी मिलों में पेराई शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-crushing-season-begins-in-uttar-pradesh-70-sugar-mills-start-purchasing.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 05 Nov 2024 18:46:25 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-crushing-season-begins-in-uttar-pradesh-70-sugar-mills-start-purchasing.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश की 32 चीनी मिलों में पेराई सत्र 2024-25 शुरू हो चुका है। वहीं पेराई शुरू कर चुकी मिलों समेत कुल 70 चीनी मिलों ने इंडेंट जारी कर गन्ने की खरीद शुरू कर दी है, इन मिलों में भी जल्दी पेराई शुरू हो जाएगी। हालांकि राज्य सरकार ने चालू पेराई सीजन के लिए अभी तक गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) तय नहीं किया है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग की विज्ञप्ति के अनुसार, गन्ना आयुक्त ने बताया कि सभी चीनी मिलों को गन्ना मूल्य का त्वरित भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं, और सात मिलों ने इसका भुगतान भी शुरू कर दिया है।&nbsp;</p>
<p>गन्ने की खरीद शुरू करने वाली चीनी मिलों में सहारनपुर जिले की छह, मुजफ्फरनगर की आठ, शामली की दो, मेरठ की पांच, बुलन्दशहर की तीन, गाजियाबाद की एक, हापुड़ की दो, बागपत की तीन मुरादाबाद की दो, अमरोहा की तीन और बिजनौर की आठ चीनी मिलें शामिल हैं। इसके अलावा, रामपुर जिले की तीन, संभल की तीन, बरेली की दो, शाहजहांपुर की तीन, बदायूं की एक, पीलीभीत की एक, लखीमपुर-खीरी की छह, सीतापुर की तीन, बाराबंकी की एक, गोंडा की एक और हरदोई की तीन चीनी मिलों ने भी गन्ने की खरीद शुरू कर दी है।&nbsp;</p>
<p><strong>इन चीनी मिलों में पेराई का कार्य शुरू&nbsp;</strong></p>
<ul>
<li><strong>सहारनपुर:</strong> गागनौली और शेरमऊ चीनी मिल।&nbsp;&nbsp;<br /><strong></strong></li>
<li><strong>मुजफ्फरनगर:</strong> टिकौला, खतौली, बुढाना, खाईखेडी, रोहानाकला और मोरना चीनी मिल।&nbsp;<br /><strong></strong></li>
<li><strong>शामली:</strong> थानाभवन चीनी मिल।<br /><strong></strong></li>
<li><strong>मेरठ:</strong> मवाना, दौराला, किनौनी, नंगलामल और सकौतीटांडा चीनी मिल। <br /><strong></strong></li>
<li><strong>गाजियाबाद:</strong> मोदीनगर चीनी मिल।&nbsp; <br /><strong></strong></li>
<li><strong>बागपत:</strong> मलकपुर चीनी मिल।<br /><strong></strong></li>
<li><strong>बिजनौर:</strong> बिलाई, बहादुरपुर, बरकातपुर, बुन्दकी और चांगीपुर चीनी मिल।&nbsp; <br /><strong></strong></li>
<li><strong>अमरोहा:</strong> धनौरा और चन्दनपुर चीनी मिल। <br /><strong></strong></li>
<li><strong>संभल:</strong> मझावली चीनी मिल। <br /><strong></strong></li>
<li><strong>बरेली:</strong> फरीदपुर और बहेड़ी चीनी मिल।&nbsp; <br /><strong></strong></li>
<li><strong>लखीमपुर खीरी:</strong> अजबापुर, ऐरा, कुम्भी और गुलरिया चीनी मिल। <br /><strong></strong></li>
<li><strong>हरदोई:</strong> लोनी और हरियावां चीनी मिल।&nbsp;</li>
</ul> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में 32 चीनी मिलों में पेराई शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66d1ccb68f111.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान के 3 लाख से अधिक दूध उत्पादकों को 183.22 करोड़ रुपये की अनुदान राशि जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-government-releases-rs-183.22-crore-subsidy-to-over-3-lakh-milk-producers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 05 Nov 2024 10:52:25 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-government-releases-rs-183.22-crore-subsidy-to-over-3-lakh-milk-producers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान सरकार ने मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के तहत राज्य के 3 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों को 5 रुपये प्रति लीटर की दर से अनुदान राशि जारी कर दी है। सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, राज्य के दूध उत्पादकों को कुल 183.22 करोड़ रुपये का भुगतान किया है, जिससे 3.25 लाख से अधिक दूध उत्पादक लाभान्वित हुए हैं। इसके अलावा, दीपावली से पहले राज्य की दुग्ध समितियों ने अलग से 20 करोड़ रुपये से अधिक का लाभांश भी वितरित किया है। यह जानकारी&nbsp;</p>
<p>राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फैडरेशन (आरसीडीएफ) की प्रबंध संचालक श्रुति भारद्वाज ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के तहत 600 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया था। राज्य सरकार से राशि प्राप्त होते ही आरसीडीएफ ने डीबीटी के माध्यम से 183.22 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है।</p>
<p>श्रुति भारद्वाज ने कहा कि राज्य की सहकारी डेयरियों में दुग्ध संकलन में हो रही वृद्धि में इस योजना का महत्वपूर्ण योगदान है। आरसीडीएफ ने सभी दुग्ध उत्पादकों को आश्वस्त किया है कि उनकी सामाजिक और आर्थिक समृद्धि के लिए संगठन संकल्पित है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_6729a9ccca9b0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान के 3 लाख से अधिक दूध उत्पादकों को 183.22 करोड़ रुपये की अनुदान राशि जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_6729a9ccca9b0.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में एनिमल हसबेंडरी में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स शुरू होंगे, सरकार बनाएगी नीति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/diploma-and-certificate-courses-in-animal-husbandry-will-start-in-up-government-will-make-policy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 04 Nov 2024 18:07:06 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/diploma-and-certificate-courses-in-animal-husbandry-will-start-in-up-government-will-make-policy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में अब एनिमल हसबेंडरी और पैरा वेटरनरी मेडिसिन में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए जाएंगे। राज्य सरकार जल्द ही इसके लिए नई नीति बनाएगी। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया।</p>
<p>पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करना और प्रशिक्षित पैरावेटरनरी की संख्या बढ़ाना है। इस नई नीति के तहत राज्य में निजी और सरकारी संस्थानों में पशुपालन से जुड़े डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स चलाए जा सकेंगे। इससे पैरा-वेटरनरी को आवश्यक प्रशिक्षण और कौशल विकास में सहायता मिलेगी।</p>
<p>पशुधन मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पैरावेट्स की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य में पशु चिकित्सकों की संख्या कम है। प्रदेश में सिर्फ 8,193 पशु चिकित्सक उपलब्ध हैं। इस वजह से पैरावेट्स को टीकाकरण, घाव की ड्रेसिंग और प्राथमिक उपचार जैसे कार्यों में प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि वे पशु स्वास्थ्य सेवाओं में मदद कर सकें।</p>
<p>इस नई नीति के अंतर्गत पैरावेट्स को टीकाकरण, प्राथमिक उपचार, घाव की देखभाल और पशु स्वास्थ्य सेवाओं के अन्य आवश्यक पहलुओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कदम राज्य में पशुपालन और पैरा वेटरनरी चिकित्सा के क्षेत्र को नई दिशा देगा और पैरावेट्स को पेशेवर रूप से मजबूत बनाएगा।</p>
<p>पशुधन मंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, मथुरा सहित अन्य प्रमुख संस्थान इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इसके साथ ही, निजी महाविद्यालयों को भी संबद्धता (एफिलिएशन) प्रदान करने के मानक बनाए जाएंगे ताकि वहां भी पाठ्यक्रम संचालित किए जा सकें। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ समिति ने इस नीति के लिए एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें संस्थाओं की संबद्धता, पाठ्यक्रमों की एकरूपता और मानक निर्धारित किए गए हैं।&nbsp;इस नीति के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पैरावेट्स की संख्या में वृद्धि होगी और पशुपालन के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।</p>
<p>इसके अलावा, कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश शीरा नीति 2024-25 के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। यह नीति 1 नवंबर 2024 से 31 अक्टूबर 2025 तक के लिए लागू होगी, जिसमें 19 फीसदी शीरा रिजर्वेशन की स्वीकृति दी गई है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_6729c00f99fa2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में एनिमल हसबेंडरी में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स शुरू होंगे, सरकार बनाएगी नीति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_6729c00f99fa2.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में शरदकालीन बुवाई के लिए 45 जिलों में गन्ने का ब्रीडर सीड आवंटित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/breeder-seed-of-sugarcane-allotted-to-45-districts-for-autumn-sowing-in-up.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 04 Nov 2024 12:57:59 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/breeder-seed-of-sugarcane-allotted-to-45-districts-for-autumn-sowing-in-up.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में शरदकालीन गन्ना बुवाई के लिए ब्रीडर सीड गन्ना उत्पादक जिलों को आवंटित किया गया है। चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग की विज्ञप्ति के अनुसार, जिला स्तरीय अधिकारियों को ब्रीडर सीड के वितरण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गये हैं। प्रदेश के सभी गन्ना किसान अपने जिले के जिला गन्ना अधिकारी और गन्ना विकास निरीक्षक से संपर्क कर आवश्यकतानुसार बीज प्राप्त कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>गन्ना आयुक्त ने बताया कि वर्ष 2024-25 की शरदकालीन बुवाई के लिए ब्रीडर सीड का प्रजातिवार आवंटन गन्ना उत्पादक जिलों को कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर के तहत शोध क्षेत्रों, निजी व सहकारी चीनी मिल क्षेत्रों और कृषक क्षेत्रों में उत्पादित ब्रीडर सीड को वर्ष 2024-25 की शरदकालीन बुवाई के लिए आवंटित किया गया है। प्रदेश के 45 जिलों को कुल 61,505 क्विंटल गन्ना बीज आवंटित किया गया है। विभाग की ओर से नई गन्ना किस्म को.लख. की 5 लाख, को.लख 16202 की 10 लाख और को.शा. 17231 की 115 लाख बड का आवंटन भी किया गया है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>नई गन्ना किस्मों की सिंगल बड विधि से बुवाई कर आगामी वर्षों के लिए बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, अयोध्या, देवीपाटन, गोरखपुर और देवरिया मंडलों को नई गन्ना किस्मों की बड का आवंटन किया गया है।&nbsp;</p>
<p>गन्ने की नई किस्मों के ब्रीडर बीज से किसानों के खेतों पर आधार पौधशालाएं तैयार होंगी, जिससे आगामी गन्ना बुवाई के लिए प्रमाणित और रोग-मुक्त बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।</p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/11/image_750x500_6728731e90ca6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में शरदकालीन बुवाई के लिए 45 जिलों में गन्ने का ब्रीडर सीड आवंटित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में किसानों के नाम पर 36 करोड़ की धोखाधड़ी! शुगर मिल के दो मैनेजर गिरफ्तार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/36-crore-fraud-in-the-name-of-farmers-in-uttarakhand-two-sugar-mill-managers-arrested.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 04 Nov 2024 11:48:22 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/36-crore-fraud-in-the-name-of-farmers-in-uttarakhand-two-sugar-mill-managers-arrested.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में किसानों के नाम पर हुए करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। कई किसानों के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर <span>36</span> करोड़ रुपए से अधिक का क्रॉप लोन लेने के आरोप में इकबालपुर शुगर मिल के दो मैनेजरों को गिरफ्तार किया गया है। किसानों के नाम पर धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब किसानों के घर कर्ज अदायगी के नोटिस पहुंचे। पीड़ित किसानों ने मामले की शिकायत डीजीपी के जनता दरबार में की थी।&nbsp;</p>
<p>पुलिस जांच में सामने आया कि इकबालपुर शुगर मिल के तत्कालीन केन मैनेजर पवन ढींगरा और एकाउंट मैनेजर उमेश शर्मा ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर कई किसानों के फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। इन दस्तावेजों के आधार पर किसानों और <span>मजदूरों (जिन्हें किसान दर्शाया गया)</span> के नाम पर <span>पंजाब नेशनल बैंक की इकबालपुर शाखा से क्रॉप लोन लिए गये। जबकि संबंधित व्यक्तियों (किसान एवं मजदूर) को इसकी खबर ही नही थी।</span> बैंक से कुल 36.50 करोड़ का फसल ऋण लिया गया। इनमें से कई लोग तो ऐसे हैं जिनके पास जमीन ही नहीं है।&nbsp;</p>
<p>कई साल तक यह खेल चलता रहा। लेकिन जब <span>लोन की किस्त जमा न होने पर </span>बैंक ने किसानों के घर कर्ज अदायगी के नोटिस भेजे, तब इस फर्जीवाड़े का पता चला। करोड़ों रुपये की इस धोखाधड़ी में पीएनबी की इकबालपुर शाखा के तत्कालीन मैनेजर की मिलीभगत भी सामने आई है।</p>
<p>इस प्रकरण में साल <span>2021</span> में शुगर मिल प्रबंधक और बैंक के तत्कालीन मैनेजर के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था। बाद में मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई। जांच में सामने आया कि यह फर्जीवाड़ा साल <span>2008</span> से साल&nbsp;<span>2020</span> के बीच हुआ। जांच अधिकारी वेद प्रकाश थपलियाल ने पांच आरोपियों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए थे। शनिवार को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शुगर मिल के तत्कालीन केन मैनेजर पवन ढींगरा और एकाउंट मैनेजर उमेश शर्मा को हिरासत में ले लिया।&nbsp;</p>
<p>हरिद्वार पुलिस के मुताबिक, आरोपी पवन ढींगरा और उमेश शर्मा को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है। जबकि पीएनबी के तत्कालीन बैंक मैनेजर समेत तीन अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। पवन ढींगरा वर्तमान में लक्सर शुगर मिल में केन मैनेजर के पद पर तैनात है जबकि उमेश शर्मा फिलहाल शाकुंभरी शुगर मिल, बेहट में एकाउंट मैनेजर के पद पर है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में किसानों के नाम पर 36 करोड़ की धोखाधड़ी! शुगर मिल के दो मैनेजर गिरफ्तार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में उर्वरकों की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए 5 फ्लाइंग स्क्वॉड टीमें गठित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/flying-squads-formed-to-prevent-hoarding-and-black-marketing-of-fertilizers-in-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 02 Nov 2024 11:23:51 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/flying-squads-formed-to-prevent-hoarding-and-black-marketing-of-fertilizers-in-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने रबी सीजन में किसानों को उर्वरकों, गुणवत्ता वाले बीजों और कीटनाशकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पांच उड़न दस्तों का गठन किया है। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि ये टीमें आपूर्ति की निगरानी, मानकों का पालन और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करेंगी। उड़न दस्ते उर्वरकों की अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए छापेमारी भी करेंगे।</p>
<p>सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, ये टीमें खुदरा और थोक विक्रेताओं के साथ-साथ बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की निर्माण और विपणन इकाइयों का निरीक्षण करेंगी और किसानों को दी जाने वाली दरों की भी निगरानी करेंगी। पहली अप्रैल से 31 अक्टूबर तक कृषि विभाग द्वारा चलाए गए गुणवत्ता नियंत्रण अभियान के आंकड़े साझा करते हुए खुड्डियां ने कहा कि इस दौरान विभाग ने कीटनाशकों के 2,063 नमूने एकत्र किए, जिसके परिणामस्वरूप गलत ब्रांडिंग के लिए 43 लाइसेंस रद्द किए गए और तीन एफआईआर दर्ज की गईं।&nbsp;</p>
<p>इसके अलावा, रासायनिक उर्वरकों के 1751, जैव उर्वरकों के 100 और जैविक खाद के 40 नमूने लिए गए। खुड्डियां ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रत्येक दस्ते को चार से पांच जिलों की जिम्मेदारी दी गई है ताकि इन कृषि उत्पादों की मांग और आपूर्ति पर नजर रखी जा सके।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में उर्वरकों की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए 5 फ्लाइंग स्क्वॉड टीमें गठित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में डीएपी के साथ जबरन अन्य उत्पाद बेचने पर होगी कार्रवाई, हेल्पलाइन नंबर पर करें शिकायत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/complain-on-these-helpline-numbers-against-dealers-selling-other-products-along-with-dap-in-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 01 Nov 2024 11:12:41 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/complain-on-these-helpline-numbers-against-dealers-selling-other-products-along-with-dap-in-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में किसानों को डीएपी (डाइ-अमोनियम फॉस्फेट) और अन्य उर्वरकों के साथ जबरन अन्य कृषि उत्पाद बेचने वाले इनपुट डीलर्स और दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पंजाब सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।&nbsp;</p>
<p>अगर कोई भी इनपुट डीलर किसानों को डीएपी<span> के साथ अन्य उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करता है, तो किसान </span>इन हेल्पलाइन नंबरों पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा, किसान डीएपी उर्वरक की अधिक कीमत, अवैध जमाखोरी, और कालाबाजारी जैसी समस्याओं की भी शिकायत कर सकते हैं।</p>
<p><strong>इन हेल्पलाइन नंबरों पर करें शिकायत</strong></p>
<p>- शिकायत दर्ज कराने के लिए किसान हेल्पलाइन नंबर 1100 पर कॉल कर सकते हैं।<br />- व्हाट्सएप के जरिए शिकायत करने के लिए +91-98555-01076 नंबर पर मैसेज भेज सकते हैं।</p>
<p>राज्य सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री <span>गुरमीत सिंह खुड्डियां</span> ने कहा कि सरकार <span>किसानों का शोषण बर्दाश्त नहीं करेगी। यदि कोई दुकानदार या डीलर कृषि उत्पादों के साथ टैगिंग करता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में डीएपी के साथ जबरन अन्य उत्पाद बेचने पर होगी कार्रवाई, हेल्पलाइन नंबर पर करें शिकायत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में 44.58 लाख टन धान की खरीद,  कृषि मंत्री राणा ने सुरजेवाला पर साधा निशाना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/procurement-of-44-lakh-tonnes-of-paddy-in-haryana-agriculture-minister-accuses-surjewala-of-misleading.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 30 Oct 2024 12:03:28 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/procurement-of-44-lakh-tonnes-of-paddy-in-haryana-agriculture-minister-accuses-surjewala-of-misleading.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में धान की सरकारी खरीद को लेकर सियासी तकरार तेज हो गई है। मंगलवार को कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भाजपा सरकार पर <span>हरियाणा-पंजाब में एमएसपी खत्म करने </span>की साजिश करने और किसानों से आंदोलन का बदला लेने का आरोप लगाया था।&nbsp;</p>
<p>हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने पलटवार करते हुए रणदीप सिंह सुरजेवाला पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में धान की खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और किसान सरकार की खरीद प्रणाली से पूरी तरह संतुष्ट हैं। सरकार का पूरा प्रयास है कि किसानों की उपज का एक -एक दाना एमएसपी पर खरीदा जाए। श्याम सिंह राणा ने सुरजेवाला पर निशाना साधते हुए कहा कि हरियाणा सरकार पर झूठे आरोप लगाने के बजाय सुरजेवाला को राजस्थान के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, जहां से उनको राज्यसभा में भेजा गया है।</p>
<p>हरियाणा सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, अब तक विभिन्न मंडियों में 46.62 लाख टन धान की आवक हो चुकी है। कुल आवक में से 44.59 लाख टन धान की खरीद एमएसपी पर की जा चुकी है और किसानों को धान खरीद के लिए 8545 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। मंडियों से धान का निरंतर उठान भी सुनिश्चित किया जा रहा है। <span lang="HI">इस खरीफ सीजन<span>&nbsp;</span></span><span>2024-25</span><span lang="HI"><span>&nbsp;</span>के दौरान धान के लिए "मेरी फसल, मेरा ब्यौरा" पोर्टल पर लगभग<span>&nbsp;</span></span><span>4.85 लाख</span><span lang="HI"><span>&nbsp;</span>किसानों ने पंजीकरण करवाया है जबकि </span><span>28</span><span lang="HI"><span>&nbsp;</span>अक्तूबर</span><span lang="HI"><span>&nbsp;</span>तक </span><span>2.35 लाख किसानों से <span lang="HI">धान की खरीद हुई </span></span><span lang="HI">है।<span>&nbsp;</span></span></p>
<p>भारत सरकार द्वारा धान खरीद के लिए 15 नवंबर तक की समय सीमा निर्धारित की गई है। इस बार हरियाणा से 60 लाख मीट्रिक धान की खरीद का लक्ष्य है, जबकि खरीद एजेंसियों द्वारा 28 अक्तूबर तक 44.58 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है। शेष धान की खरीद अगले दो सप्ताह में होनी है। गत वर्ष हरियाणा से 58.94 लाख टन धान की खरीद हुई थी। सरकार सामान्य धान के लिए 2,300 रुपये प्रति क्विंटल तथा ग्रेड-ए धान के लिए 2,320 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य दे रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>कुरुक्षेत्र से सर्वाधिक धान खरीद </strong></p>
<p>खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अनुसार, कुरुक्षेत्र, करनाल और कैथल में सर्वाधिक क्रमशः 9.57; 8.05 और 7.79 लाख टन धान की खरीद हुई है। इन तीनों जिलों में ही अब तक सर्वाधिक क्रमशः 8.83; 7.15 और 7.46 लाख टन धान का उठान हुआ है।</p>
<p><strong>4.27 लाख टन बाजरा की खरीद </strong></p>
<p>अब तक हरियाणा की विभिन्न मंडियों में 4.39 लाख टन बाजरा की आवक हो चुकी है जिसमें से 4.27 लाख टन बाजरा एमएसपी पर खरीदा जा चुका है। बाजरा के लिए 894 करोड़ रुपये की राशि किसानों के खातों में भेजी जा चुकी है। महेंद्रगढ़ जिले की मंडियों में सर्वाधिक 1.08 लाख मीट्रिक टन बाजरा आ चुका है, जिसमें से 1.07 लाख टन की खरीद हो चुकी है। इसी प्रकार, रेवाड़ी जिले की विभिन्न मंडियों में 95.93 हजार टन बाजरा आ चुका है, जिसमें से 95 हजार टन की खरीद की जा चुकी है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में 44.58 लाख टन धान की खरीद,  कृषि मंत्री राणा ने सुरजेवाला पर साधा निशाना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में &amp;apos;मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना&amp;apos; की 10वीं किस्त जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/mukhyamantri-kisan-kalyan-yojana-10th-installment-released-in-madhya-pradesh-8-lakh-farmers-will-get-benefit.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 29 Oct 2024 18:09:48 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/mukhyamantri-kisan-kalyan-yojana-10th-installment-released-in-madhya-pradesh-8-lakh-farmers-will-get-benefit.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश सरकार ने 'मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना' की दसवीं किस्त जारी कर दी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को <span>मंदसौर जिले से</span> प्रदेश के 81 लाख से अधिक किसानों के खातों में 1624 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में जुड़े।&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना' की तर्ज पर मध्य प्रदेश सरकार भी 'मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना' चला रही है। इस योजना के तहत प्रदेश के किसानों को तीन किस्तों में प्रति वर्ष 6,000 रुपये दिए जाते हैं। वर्ष 2024-25 की यह दूसरी किस्त है, जिसके तहत मंगलवार को किसानों के खातों में 2,000 रुपये की राशि ट्रांसफर की गई। इससे पहले राज्य सरकार ने 5 जुलाई को इस वर्ष की पहली किस्त जारी की थी।</p>
<p>'मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना' का लाभ उन किसानों को मिलता है जो मध्य प्रदेश के मूल निवासी हैं और जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक है। खास बात यह है कि यह लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलता है जो पहले से 'पीएम किसान सम्मान निधि योजना' में पंजीकृत हैं। इससे किसानों को दोगुना लाभ मिलता है। 6 हजार रुपये किसानों को 'पीएम किसान सम्मान निधि' के तहत मिलते हैं जबकि 6 हजार रुपये का लाभ राज्य सरकार की योजना से मिलता है। जिससे किसानों को प्रति वर्ष 12 रुपये का लाभ मिलता है।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में 'मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना' की 10वीं किस्त जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र में चीनी मिलों ने दी पेराई शुरू न कर पाने की चेतावनी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-sugar-mills-warn-of-not-being-able-to-start-crushing-operation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 29 Oct 2024 10:14:01 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-sugar-mills-warn-of-not-being-able-to-start-crushing-operation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गन्ना पेराई शुरू होने के साथ ही शुगर सीजन 2024-25 की शुरुआत हो रही है। यूपी में कई चीनी मिलों ने पेराई शुरू कर दी है। लेकिन महाराष्ट्र में चीनी उद्योग ने चिंता जताई है कि अगर सरकार ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) और एथेनॉल का दाम नहीं बढ़ाया तो कई चीनी मिलें पेराई शुरू नहीं कर पाने के लिए बाध्य होंगी।</p>
<p>वेस्ट इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (WISMA) ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी को दिए ज्ञापन में चीनी के एमएसपी में न्यूनतम 7 रुपये और एथेनॉल की कीमतों में 5 से 7 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की मांग की है। चीनी का एमएसपी 31 रुपये प्रति किलो है जो फरवरी, 2019 में अधिसूचित किया गया था। तब से गन्ने का एफआरपी 275 रुपये से बढ़कर 340 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। लेकिन चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य नहीं बढ़ा है।&nbsp;</p>
<p>उद्योग संगठन का कहना है कि शुगर सीजन 2024-25 के लिए गन्ने के एफआरपी को बढ़ाकर 340 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने के बाद चीनी के एमएसपी में तत्काल बढ़ोतरी की आवश्यकता है। गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) में वार्षिक बढ़ोतरी के बावजूद, 2019 से चीनी का एमएसपी नहीं बढ़ा है, जिससे चीनी मिलें गंभीर वित्तीय संकट में हैं। परिणामस्वरूप ऋण का बोझ उद्योग और गन्ना किसानों दोनों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।</p>
<p>उद्योग संगठन ने ज्ञापन में कहा है कि चीनी व एथेनॉल के दाम तथा गन्ने के एफआरपी के बीच समानता नहीं है। चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 41.66 रुपये प्रति किलो की उत्पादन लागत को ध्यान में रखते हुए बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि चीनी मिलें नवंबर 2024 से पेराई कार्य शुरू कर किसानों को भुगतान सुनिश्चित कर सकें। अन्यथा मिल मालिक सीजन में पेराई शुरू नहीं करने के लिए मजबूर होंगे।</p>
<p>महाराष्ट्र में 2024-25 के लिए पेराई सीजन 15 नवंबर, 2024 से शुरू होने वाला है। राज्य में करीब 14 लाख हेक्टेयर में गन्ने की फसल है। महाराष्ट्र का चीनी उत्पादन 110 लाख टन से अधिक होने का अनुमान है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_6720689d59d93.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र में चीनी मिलों ने दी पेराई शुरू न कर पाने की चेतावनी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब सरकार के आश्वासन के बाद हाईवे से हटे किसान संगठन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-lift-highway-blockades-after-assurance-from-punjab-government.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 28 Oct 2024 11:13:43 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-lift-highway-blockades-after-assurance-from-punjab-government.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में धान की खरीद और उठान को सुचारू बनाने के राज्य सरकार के आश्वासन के बाद किसान संगठनों ने हाईवे से जाम हटाने का ऐलान किया है। हालांकि, किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। किसान मजदूर मोर्चा और एसकेएम (नॉन पॉलिटिकल) के नेताओं ने कहा कि सरकार की ओर से एक-दो दिन में स्थिति सुधारने के आश्वासन के बाद सड़कों से जाम खोलने का फैसला किया गया है, लेकिन सड़क किनारे धरना जारी रहेगा। आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो फिर से कड़े कदम उठाएंगे।&nbsp;</p>
<p>रविवार को पंजाब के खाद्य आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक और कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के साथ बैठक के बाद किसान नेताओं ने हाईवे खाली करने पर सहमति जताई। पंजाब के संगरूर, मोगा, कपूरथला और गुरदासपुर में शनिवार से किसान हाईवे जाम कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे। किसान नेताओं से बैठक के बाद धान की खरीद में तेजी आने की उम्मीद है। उधर, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी कहा है कि पंजाब के किसानों का दाना-दाना उठाया जाएगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_671f263c5efcf.jpg" alt="" /></p>
<p>किसान नेता <strong>सरवन सिंह पंधेर</strong> ने कहा, "केंद्र और राज्य सरकार ने धान की खरीद शुरू होने के 27 दिन बाद भी खरीद और उठाव को सुचारू बनाने के लिए कुछ खास नहीं किया।" किसान नेताओं ने मंडियों में नमी की शर्त पूरी करने के बावजूद उपज खरीद पर लगाए गए अवैध कट का मुद्दा भी उठाया। पंधेर के मुताबिक, मीटिंग में तय हुआ है कि सरकार उन किसानों को भरपाई करेगी जिनकी फसल आढ़तियों ने अधिक नमी के कारण एमएसपी से कम कीमत पर खरीदी है।&nbsp;</p>
<p><strong>40 फीसदी धान का उठान</strong></p>
<p>पंजाब में रविवार तक लगभग 50 लाख मीट्रिक टन धान मंडियों में आ चुका है जिसमें से करीब 20 लाख टन का उठाव किया गया है, जबकि 30 लाख मीट्रिक टन अभी भी मंडियों में पड़ा हुआ है। स्टोरेज की कमी और गोदामों से पिछले साल का अनाज खाली न होने से इस साल खरीद प्रकिया धीमी चल रही है।</p>
<p><strong>डीएपी और पराली का मुद्दा भी उठाया</strong></p>
<p>मंत्रियों के साथ बैठक में डीएपी की कमी के कारण किसानों को गेहूं की बुवाई में कठिनाइयों, पराली जलाने के आरोप में किसानों पर एफआईआर दर्ज करने और जुर्माना लगाने का मुद्दा भी उठाया। पंधेर ने कहा कि सरकार को खेतों में फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए ट्रैक्टर और डीजल उपलब्ध कराना चाहिए।</p>
<p><strong>52 जगहों पर विरोध-प्रदर्शन जारी</strong></p>
<p>पंजाब में धान खरीद में देरी को लेकर बीकेयू (एकता- उगराहां) का 52 जगह विरोध-प्रदर्शन जारी है। पिछले 11 दिनों से धान की खरीद और उठान में तेजी लाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। भाजपा और नेताओं के आवास और कार्यालयों के अलावा टोल प्लाजा के सामने किसान धरने पर बैठे हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब सरकार के आश्वासन के बाद हाईवे से हटे किसान संगठन ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में नकली डीएपी की बड़ी खेप पकड़ी, अवैध रूप से हो रहा था भंडारण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/illegal-consignment-of-fake-dap-fertilizer-seized-in-bikaner-rajasthan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 28 Oct 2024 10:55:51 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/illegal-consignment-of-fake-dap-fertilizer-seized-in-bikaner-rajasthan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रबी सीजन की बुवाई के लिए उर्वरकों की मांग तेज हो गई है। खासकर डीएपी डाईअमोनियम फास्फेट (डीएपी) को लेकर हर-तरफ मारामारी हो रही है। इसी बीच उर्वरकों की कालाबाजारी करने वाले सक्रिय हो गए हैं। साथ ही नकली उर्वरकों का व्यापार भी धड़ल्ले से चल रहा है। इसे रोकने के लिए राजस्थान कृषि विभाग इन दिनों राज्य में विशेष अभियान चला रहा है। जिसके तहत जगह-जगह छापेमारी की जा रही है।&nbsp;रविवार को बीकानेर में कृषि विभाग ने छापेमारी के दौरान नकली डीएपी और अन्य उर्वरकों की बड़ी खेप पकड़ी, जहां इनका अवैध रूप से भंडारण हो रहा था। इस कार्रवाई में 305 बैग नकली डीएपी और अन्य उर्वरक जब्त किए गए हैं।</p>
<p>कृषि विभाग की ओर दी गई जानकारी के अनुसार, विशेष गुण नियंत्रण अभियान के तहत रविवार को कृषि विभाग ने बीकानेर अवैध गोदाम से नकली डीएपी व अन्य उर्वरकों के 305 बैग पकड़े हैं। अवैध रूप से संचालित हो रहे गोदाम में इनके साथ मोलासेज पोटाश के 50 बैग, सागारिका के 3 बैग और 1900 खाली बैग के साथ दो सिलाई मशीन से पैकेज करते 10 श्रमिकों को पकड़ा गया। यह अवैध गोदाम प्लॉट बी-53 दयालदान मकान मालिक के नाम से है। इसे किराये पर हम्मीर बास झुन्झुनू के निवासी निकित लाम्बा को दिया गया था। लाम्बा द्वारा नकली डीएपी व अन्य सामग्री का यहां अवैध भंडारण व पैकेजिंग कार्य किया जा रहा था।&nbsp;</p>
<p>मौके पर बरामद नकली डीएपी व अन्य के कट्टे टीम द्वारा सीज किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 1900 थैले मौके से खाली भी बरामद हुए हैं। कृभको के 13 नकली छपे हूए कट्टों व केआर फर्टीलाईजर के 53 कट्टों सहित खुद के रॉ मेटेरियल के 1900 कट्टों में उक्त भंडारण किया जा रहा था। कार्यवाही के दौरान संयुक्त निदेशक (कृषि) कैलाश चौधरी के नेतृत्व में सहायक निदेशक भैराराम गोदारा, सीआई सुरेन्द्र पचार सहित टीम के अन्य साथी मौजूद रहें।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में नकली डीएपी की बड़ी खेप पकड़ी, अवैध रूप से हो रहा था भंडारण ]]></media:description>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा के उचाना में डीएपी लेने के लिए उमड़ी किसानों की भीड़ पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/police-lathicharged-on-farmers-who-had-gathered-to-get-dap-in-uchana-haryana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 27 Oct 2024 10:14:22 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/police-lathicharged-on-farmers-who-had-gathered-to-get-dap-in-uchana-haryana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा समेत देश के कई राज्यों में रबी सीजन की बुवाई के लिए डाईअमोनियम फास्फेट (डीएपी) की मांग तेज हो गई है, लेकिन डीएपी की कमी के कारण किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन दिनों खाद केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। डीएपी की किल्लत इतनी है कि खाद केंद्रों पर पूरा दिन कतारों में इंतजार करने के बाद भी किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी नहीं मिल रहा है। यहां तक की खाद वितरण में अव्यवस्था बढ़ने पर प्रशासन को पुलिस तैनात करनी पड़ रही है।&nbsp;</p>
<p>शनिवार को हरियाणा के जींद जिले के उचाना में ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। उचाना मंडी के इफको खाद केंद्र पर बड़ी संख्या में किसान सुबह से ही डीएपी के लिए लाइन में लगे हुए थे। किसानों की भीड़ बढ़ती देख पुलिस को मौके पर बुलाया गया। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को किसानों पर लाठीचार्ज करना पड़ा। इस घटना में कई किसान घायल हो गए।&nbsp;</p>
<p>जींद जिले के युवा किसान <strong>अशोक दनोदा<span>&nbsp;</span></strong>ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि जिले में डीएपी की भारी किल्लत है। किसानों को एक आधार कार्ड पर 3 से 4 बैग डीएपी ही मिल रहा है। उचाना मंडी में शनिवार को किसान डीएपी लेने के लिए सुबह से कतार में खड़े थे। लेकिन, भीड़ बढ़ती देखे खाद केंद्र ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें कुछ किसान घायल हो गए।&nbsp;</p>
<p>हरियाणा में खाद की उपलब्धता सीमित होने और किसानों की संख्या अधिक होने से सभी को समय पर खाद नहीं मिल पा रहा है। किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि गेहूं, सरसों, चना और आलू जैसी फसलों की बुवाई के समय उन्हें पर्याप्त खाद नहीं मिलेगा, जिससे उनकी फसलें प्रभावित हो सकती हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि यूरिया के बाद देश में सबसे अधिक उपयोग डीएपी का ही होता है, खासकर बुवाई के समय। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल सितंबर में डीएपी की बिक्री पिछले साल के 15.7 लाख टन के मुकाबले 51 फीसदी घटकर 7.76 लाख टन रह गई है। इस कमी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीएपी के दामों में बढ़ोतरी, उर्वरक सब्सिडी में अनिश्चितता और आयात में आई कमी है।&nbsp;</p>
<p>सरकार किसानों को डीएपी की जगह सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) और यूरिया के उपयोग की सलाह दे रही है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में भी किसानों को डीएपी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा के उचाना में डीएपी लेने के लिए उमड़ी किसानों की भीड़ पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज ]]></media:description>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में रबी सीजन के लिए गेहूं के प्रमाणित बीजों पर मिलेगी 1000 रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-haryana-will-get-rs-1000-per-quintal-subsidy-on-certified-wheat-seeds-for-rabi-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Oct 2024 20:01:23 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-haryana-will-get-rs-1000-per-quintal-subsidy-on-certified-wheat-seeds-for-rabi-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा कृषि विभाग ने आगामी रबी सीजन 2024-25 के लिए गेहूं के प्रमाणित बीजों की बिक्री दरें तय कर दी हैं। कृषि विभाग के निदेशक की तरफ से जारी निर्देशों के तहत, राज्य सरकार ने किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज किफायती दरों पर उपलब्ध कराने के लिए सब्सिडी योजना लागू की है। इसके तहत किसानों को नई कीमत पर 1000 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी दी जाएगी।</p>
<p>हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि आगामी सीजन में फसल उत्पादन में बढ़ोतरी हो सके और कृषि परिणाम बेहतर हों। उन्होंने कहा कि नायब सरकार का यह निर्णय न केवल किसानों को रियायती दरों पर अच्छी गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराएगा, बल्कि उनकी पैदावार बढ़ाकर उनकी आय में भी वृद्धि करेगा।</p>
<p><strong>गेहूं के बीजों पर इतनी मिलेगी सब्सिडी&nbsp;</strong></p>
<p>सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सभी प्रकार के गेहूं बीज की सामान्य बिक्री दर 3875 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है। हालांकि, किसानों को राहत देने के लिए सरकार 1000 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी प्रदान करेगी, जिससे बीज की प्रभावी दर घटकर 2875 रुपये प्रति क्विंटल हो जाएगी। सी-306 किस्म और अधिसूचना के 10 वर्ष से अधिक पुरानी किस्मों को इससे बाहर रखा गया है।</p>
<p><strong>सिर्फ हरियाणा के किसानों को मिलेगा लाभ&nbsp;</strong></p>
<p>प्रमाणित गेहूं के बीज 40 किलोग्राम के प्री-पैक बैग में सब्सिडी वाली दर पर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि किसान रबी सीजन के लिए आसानी से उच्च गुणवत्ता वाले बीज खरीद सकें। यह सब्सिडी केवल हरियाणा के किसानों को दी जाएगी। किसी सरकारी एजेंसी, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), या योजनाओं के तहत प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल किए गए बीजों पर यह लागू नहीं होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रमोशनल गतिविधियों या अन्य सरकारी कार्यक्रमों में उपयोग किए जाने वाले बीजों पर भी कोई सब्सिडी नहीं मिलेगी। &nbsp;</p>
<p>विभाग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए हैं कि बिक्री केंद्रों पर सभी लेन-देन को सावधानीपूर्वक बिक्री रजिस्टर में दर्ज किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी विवाद से बचा जा सके। साथ ही, अधिकारियों को इन निर्देशों से संबंधित सभी कर्मचारियों को तुरंत अवगत कराने को कहा गया है, ताकि वितरण प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में रबी सीजन के लिए गेहूं के प्रमाणित बीजों पर मिलेगी 1000 रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड के तराई में उड़द के खराब बीज से किसानों को नुकसान, कार्रवाई की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-suffer-loss-due-to-substandard-urad-seeds-in-terai-of-uttarakhand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 25 Oct 2024 19:39:06 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-suffer-loss-due-to-substandard-urad-seeds-in-terai-of-uttarakhand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में उड़द की फसल पर फलियां न आने से कई किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसे लेकर किसानों में काफी आक्रोश है। तराई किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष तजिंदर सिंह विर्क ने नकली बीज बेचने वाले विक्रेताओं के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है। विर्क का कहना है कि अगर किसानों को हुए नुकसान के मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो 26 अक्टूबर से किसान अपनी फसल के साथ कलेक्ट्रेट में डेरा डालेंगे और वहीं दीवाली मनाएंगे।</p>
<p><strong>तजिंदर सिंह विर्क</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि 26 तारीख को संयुक्त किसान मोर्चा के सभी संगठन किसानों की इस समस्या को लेकर उधम सिंह नगर जिले में जुटेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि अधिकारियों और बीज प्रमाणीकरण संस्थाओं की मिलीभगत से नकली बीज और कीटनाशकों का अवैध कारोबार चल रहा है। एक तरफ सरकार फसल विविधिकरण और दलहन की खेती को बढ़ावा देने की बात करती है जबकि किसानों को सही बीज और कीटनाशक उपलब्ध नहीं करवाए जा रहे हैं।</p>
<p>उधम सिंह नगर जिले के गदरपुर क्षेत्र के कई गांवों के किसानों ने स्थानीय दुकानों से खरीदे उड़द के बीज से बुवाई की थी। लेकिन ढाई महीने बाद भी फसल में फली नहीं आई। इस संबंध में किसानों ने जिला मजिस्ट्रेट और जिला कृषि अधिकारी को भी शिकायत दर्ज कराई है। करीब डेढ़ सौ एकड़ में उड़द की फसल खराब हुई है।&nbsp;</p>
<p>प्रभावित खेतों का दौरा करके आए तजिंदर सिंह विर्क ने बताया कि किसानों के साथ धोखाधड़ी कर नकली बीज पीयू-31 किस्म के तौर पर गया। उन्होंने प्रभावित किसानों को मुआवजे और घटिया बीज बिक्री के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p>इस मामले में जिला प्रशासन ने बीज विक्रेताओं को नोटिस जारी किए हैं। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने भी प्रभावित फसल का निरीक्षण किया। उत्तराखंड से सटे यूपी के रामपुर जिले में भी उड़द की फसल पर फली नहीं आने की समस्या आई है। इसके पीछे भी घटिया बीज को वजह माना जा रहा है।</p>
<p>उड़द की फसल खराब होने के पीछे येलो मोजेक वायरस का प्रकोप भी बताया जा रहा है लेकिन बीज की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। जिस बीज को किसानों ने पीयू-31 मानकर खरीदा था, पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने खेतों में जाकर देखा तो पीयू-31 की फसल होने से इंकार किया। किसानों द्वारा पीयू-31 के नाम पर घटिया बीज बेचने वालों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड के तराई में उड़द के खराब बीज से किसानों को नुकसान, कार्रवाई की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में सोयाबीन की सरकारी खरीद शुरू,  3 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीकरण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/government-procurement-of-soybean-started-in-madhya-pradesh-more-than-3-lakh-farmers-have-registered.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 25 Oct 2024 12:51:28 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/government-procurement-of-soybean-started-in-madhya-pradesh-more-than-3-lakh-farmers-have-registered.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में सोयाबीन की सरकारी खरीद शुक्रवार, 25 अक्टूबर से शुरू हो गई है। समर्थन मूल्य पर सोयाबीन की सरकारी खरीद के लिए राज्य में 1400 खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। किसानों से सोयाबीन की खरीद 31 दिसंबर 2024, तक की जाएगी। प्रदेश में 7 जिले दतिया, भिंड, कटनी, मंडला, बालाघाट, सीधी और सिंगरौली को छोड़कर अन्य सभी जिलों में सोयाबीन की खरीद होगी। इन जिलों से प्रस्ताव आने पर सरकार यहां सोयाबीन खरीद पर विचार करेगी। केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2024-25 के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4892 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।&nbsp;</p>
<p>प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को औसत अच्छी गुणवत्ता के सोयाबीन की खरीदी कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही खरीदी केन्द्रों पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों को मौजूद रहने को भी कहा गया है, ताकि व्यवस्थित ढंग से सोयाबीन का उपार्जन किया जा सके।</p>
<p>सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समर्थन मूल्य पर सोयाबीन की खरीदी शुक्रवार से शुरू हो रही है। इसके लिए 1400 खरीद केंद्र बनाए गए हैं। अगर जरूरत पड़ी तो खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है। उन्होंने कहा कि अगर केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा के अधिक सोयाबीन की आवक होती है, तो उसकी खरीद प्रदेश सरकार करेगी। मध्य <span>प्रदेश में 13.68 लाख टन सोयाबीन की खरीद का लक्ष्य रखा गया है।&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि सोयाबीन की खरीद के लिए 25 सितंबर से 20 अक्टूबर तक ई-उपार्जन पोर्टल पर 3 लाख 44 हजार किसानी ने पंजीकरण करवाया है। समर्थन मूल्य पर खरीदी गई सोयाबीन का भुगतान किसानों को ऑनलाइन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहली बार प्राइस सपोर्ट स्कीम (समर्थन मूल्य) के तहत सोयाबीन की खरीद हो रही है। इसके लिए कृषि विभाग नोडल विभाग है और मार्कफेड को खरीद का जिम्मा सौंपा गया है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66f3aa46a359b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में सोयाबीन की सरकारी खरीद शुरू,  3 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीकरण ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66f3aa46a359b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में सहकारी बैंकों का कर्ज चुकाने के लिए एकमुश्‍त समाधान योजना लागू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/one-time-settlement-scheme-implemented-for-cooperative-banks-in-rajasthan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 25 Oct 2024 11:46:02 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/one-time-settlement-scheme-implemented-for-cooperative-banks-in-rajasthan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान में सहकारी बैंकों के लिए एकमुश्&zwj;त समाधान योजना-2024 लागू हो गई है। राजस्थान के सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने गुरुवार को बताया कि प्रदेश के जिला सहकारी बैंकों और अपेक्स बैंक सहित सभी ग्राम सेवा सहकारी समितियों व लैम्प्स के लिए एकमुश्&zwj;त समाधान योजना (ओटीएस-2024) लागू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इस योजना के दायरे में ऐसे सभी प्रकार के कृषि एवं अकृषि ऋण आएंगे जो कि 31 मार्च, 2020 को अवधिपार हो गये थे और उसके बाद 31 मार्च, 2023 को बेड एण्ड डाउटफुल श्रेणी में वर्गीकृत किया जा चुका है।</p>
<p><strong>ऐसे मिलेगी राहत&nbsp;</strong></p>
<p>सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एकमुश्त समाधान योजना के तहत ऋण जिस दिन को अवधिपार हुआ है उस दिन से 8 प्रतिशत या ऋण स्वीकृति पत्र में अंकित ब्याज दर, जो भी कम हो से देना होगा। यह ब्याज साधारण दर से वसूल किया जाएगा। जिन ऋणों के विरुद्ध कोलेटरल सिक्योरिटी उपलब्ध नहीं है ऐसे प्रकरणों में यदि मूल राशि के बराबर ब्याज राशि बन रही है और 8 प्रतिशत की साधारण दर से ब्याज की गणना करने पर कुल राशि में से जो भी कम होगी, उसे जमा कराया जाएगा।</p>
<p>व्यक्तिगत ऋण, उपभोक्ता ऋण, स्वरोजगार क्रेडिट कार्ड योजना तथा राज्य प्रवर्तित योजनाओं के तहत लिए गये ऋणों के प्रकरण में ब्याज राशि को आधा ही वसूल किया जायेगा। उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ लेने के लिये आवेदक ऋणी को आवेदन पत्र के साथ कुल वसूल योग्य राशि का 25 प्रतिशत जमा कराना होगा तथा शेष राशि को अधिकतम दो किश्&zwj;तों में 31 मार्च, 2025 तक जमा कराना होगा।</p>
<p><strong>बढ़ा योजना का दायरा&nbsp;</strong></p>
<p>सहकारिता मंत्री ने कहा कि पहली बार इस योजना के तहत दुर्घटना या अन्य किसी कारण से शारीरिक रूप से कमाने की स्थिति में नहीं होने वाले ऋणी को भी शामिल कर राहत दी गई है। उन्होंने कहा कि कई बार प्राकृतिक आपदाओं और औद्योगिक मंदी के कारण ऋणी अपने ऋण को समय पर नहीं चुका पाता है। ऐसे ऋणी सदस्यों को राहत देने के लिए इस योजना को लागू किया गया है। यह योजना 31 मार्च, 2025 तक लागू रहेगी। योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसमें संयुक्त हिन्दू परिवार, प्रोपराईटर/पार्टनरशिप फर्म, प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी, सहकारी संस्थाऐं, स्वयं सहायता समूह आदि को भी सम्मिलित किया गया है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में सहकारी बैंकों का कर्ज चुकाने के लिए एकमुश्‍त समाधान योजना लागू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[धान खरीद को लेकर पंजाब में हाईवे जाम करेंगे किसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-punjab-threatened-to-block-highways-over-paddy-procurement.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 24 Oct 2024 20:34:16 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-punjab-threatened-to-block-highways-over-paddy-procurement.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में किसानों को धान की सरकारी खरीद में बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्टोरेज की किल्लत और पिछले साल के अनाज की लिफ्टिंग न होने से धान खरीद की प्रक्रिया धीमी चल रही है। जबकि किसानों को धान कटाई पूरी कर रबी सीजन की बुवाई करनी है।</p>
<p><strong>किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम)</strong> और <strong>संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक)</strong> <span>ने धान खरीद की समस्या का समाधान न होने पर 26 अक्टूबर से पंजाब में कई जगह नेशनल हाईवे बंद करने का ऐलान किया है। गुरुवार को चंडीगढ़ के किसान भवन में दोनों फोरम के नेताओं ने प्रेस वार्ता कर धान खरीद में आ रही मुश्किलों, और डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता न होने और पराली जलाने से जुड़े मुद्दे उठाए। </span>&nbsp;</p>
<p>किसान नेता <strong>सरवन सिंह पंधेर</strong> ने कहा कि पंजाब सरकार ने समय रहते धान खरीद के पुख्ता प्रबंध नहीं किए जिसके चलते किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पिछले 20 वर्षों से सभी सरकारों ने कभी भी किसानों को मंडी में खरीद को लेकर परेशान नहीं होने दिया। भगवंत मान सरकार बार-बार आश्वासन देती रही, लेकिन समय पर खरीद करने में असमर्थ रही है।&nbsp;</p>
<p>किसान नेताओं ने कहा कि प्रदेश में किसानों को सही मात्रा में डीएपी नहीं मिल पा रहा है।&nbsp;दोनों फोरम के नेताओं ने पंजाब सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शुक्रवार तक प्रदेश की सारी मंडियों में सही मायने से खरीद नहीं हुई तो 26 अक्टूबर को माझा, मालवा और दोआबा में नेशनल हाईवे को धान खरीद की समस्या का समाधान होने तक बंद कर दिया जाएगा। हालांकि, इस दौरान इमरजेंसी सेवाओं के लिए खास इंतजाम किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>किसान नेताओं ने बताया कि गुरुवार दोपहर बाद वे राइस मिल मालिकों के साथ भी मीटिंग करेंगे और धान खरीद की दिक्कतों का हल निकलवाने का प्रयास करेंगे। पंधेर ने कहा कि हम पूरे पंजाब में चक्का जाम कर सकते हैं लेकिन अभी भी सरकार को समय देना चाहते हैं। उन्होंने किसानों की दुर्दशा के लिए पंजाब सरकार के साथ-साथ भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को भी जिम्मेदार ठहराया। साथ ही पराली जलाने के आरोप में किसानों पर केस दर्ज करने और रेड एंट्री की कार्रवाई पर भी ऐतराज जताया।&nbsp;</p>
<p>पंजाब की मंडियों में धान की खरीद इसलिए भी प्रभावित हुई है, क्योंकि राज्य के राइस मिलर्स ने उनकी मांगें पूरी होने तक धान की मिलिंग करने से इनकार कर दिया था। पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर राज्य में अनाज भंडार खाली न करने का आरोप लगाया है, ताकि नई उपज के भंडारण के लिए पर्याप्त जगह न बनाई जा सके।&nbsp;</p>
<p>किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) और संयुक्त किसान मोर्चा (<span>गैर-राजनीतिक</span>) की प्रेस वार्ता में किसान नेता सुरजीत सिंह फूल, मंजीत सिंह राय, अमरजीत सिंह मोहड़ी, दिलबाग सिंह हरीगढ़, सतनाम सिंह बेहरू, जंग सिंह बथेड़ी, गुरदीप सिंह भट्टी, तेजवीर सिंह पंजोखडा साहिब, गुरअमनीत सिंह मांगट, गुरबिंदर सिंह सदरपुर, सुखचैन सिंह, हरप्रीत सिंह बहरामके, गगनदीप सिंह मोहड़ी मौजूद रहे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ धान खरीद को लेकर पंजाब में हाईवे जाम करेंगे किसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हिमाचल में मछली पालन के लिए मिलेगी 9 लाख की सब्सिडी, इन जिलों के किसान कर सकते हैं आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/himachal-government-is-giving-a-subsidy-of-9-lakhs-for-fish-farming.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 24 Oct 2024 11:23:48 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/himachal-government-is-giving-a-subsidy-of-9-lakhs-for-fish-farming.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल सरकार राज्य में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को तालाब निर्माण पर 9.92 लाख रुपये तक की सब्सिडी दे रही है। इस योजना के तहत किसान अधिकतम एक हेक्टेयर या न्यूनतम 500 वर्ग मीटर तक का तालाब बना सकते हैं। एक हेक्टेयर के तालाब पर 9.92 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी, जबकि 500 वर्ग मीटर के तालाब के लिए 49,600 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी।</p>
<p>यह योजना राज्य के 12 जिलों में से आठ जिलों - बिलासपुर, मंडी, हमीरपुर, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर, चंबा और ऊना में लागू की गई है। सरकार की इस योजना का लाभ उठाकर किसान मछली पालन के जरिए अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं।</p>
<p>राज्य सरकार की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए तालाब निर्माण के लिए 80 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि मछली पालक एक हेक्टेयर तालाब से प्रति वर्ष 10.50 लाख रुपये का लाभ कमा सकते हैं, जबकि 500 वर्ग मीटर के तालाब से 50,000 रुपये से अधिक की आय हो सकती है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के तालाबों में प्रमुख रूप से रोहू, कतला, मृगल, कॉमन कार्प और ग्रास कार्प जैसी मछलियों की प्रजातियां पाली जाती हैं, जिनका बाजार में अच्छा मूल्य मिलता है।&nbsp;हिमाचल प्रदेश में मछली उत्पादन भी तेजी से बढ़ रहा है। पिछले साल राज्य में कार्प मछली का उत्पादन 6,767.11 मीट्रिक टन था, जो इस साल बढ़कर 7,367.03 मीट्रिक टन हो गया है। वर्तमान में लगभग 2,600 मछुआरे राज्य में मछली पालन में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं।</p>
<p>मछुआरों को उच्च गुणवत्ता वाले मछली बीज उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। ऊना जिले के गगरेट में एक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया है। इसके अलावा, जयंती रोहू और अमृत कतला जैसी उन्नत मछली प्रजातियों के बीज प्राप्त करने के लिए सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वाकल्चर, भुवनेश्वर के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन नई प्रजातियों की विकास दर पारंपरिक किस्मों से 20-25 प्रतिशत अधिक है और इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी ज्यादा होती है। सरकार की इस योजना का लाभ उठाने और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हिमाचल में मछली पालन के लिए मिलेगी 9 लाख की सब्सिडी, इन जिलों के किसान कर सकते हैं आवेदन ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा ने धान खरीद का आधा लक्ष्य पार किया,  63 फीसदी धान का ही हुआ उठान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/in-haryana-more-than-half-of-the-paddy-procurement-completed-63-percent-paddy-lifted.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 23 Oct 2024 17:58:41 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/in-haryana-more-than-half-of-the-paddy-procurement-completed-63-percent-paddy-lifted.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में धान की सरकारी खरीद को लेकर किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्टोरेज की समस्या और अनाज के धीमे उठान के कारण मंडियां धान से अटी पड़ी है और खरीद प्रक्रिया धीमी चल रही है। इस साल भाव गिरने से किसानों को समर्थन मूल्य के नीचे धान बेचना पड़ा है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>इस बीच, हरियाणा में धान की खरीद में कुछ गति आई है, हालांंकि पिछले साल के मुकाबले खरीद प्रक्रिया धीमी है। चालू खरीफ मार्केटिंग सीजन के दौरान हरियाणा से 60 लाख टन धान खरीद का अनुमान है, जिसमें से 33.47 लाख टन से ज्यादा धान की खरीद एमएसपी पर हो चुकी है। राज्य सरकार का दावा है कि प्रदेश में खरीफ फसलों की खरीद सुचारू रूप से चल रही है और किसानों को समय पर भुगतान हो रहा है। अब तक धान व बाजरा किसानों को 5,419 करोड़ रुपये की राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है।&nbsp;</p>
<p>हरियाणा सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 22 अक्टूबर तक प्रदेश की विभिन्न मंडियों में कुल 37.79 लाख टन धान की आवक हुई थी। इसमें से 33.47 लाख टन धान की खरीद एजेंसियों द्वारा एमएसपी पर हुई। धान खरीद के लिए 1.93 लाख धान किसानों को 4897 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।</p>
<p>अब तक हरियाणा की मंडियों से 23.77 लाख टन धान का उठान हुआ है। यानी मंडियों में जितना धान पहुंचा उसमें से करीब 63 फीसदी धान का उठान हुआ है। करीब 37 फीसदी धान का उठान होना बाकी है। स्टोरेज की कमी और गोदामों से पिछले साल का स्टॉक खाली न होने के कारण इस साल धान की खरीद पर असर पड़ा है। राज्य और केंद्र सरकार इस समस्या को हल करने का प्रयास कर रही हैं। बुधवार को केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि स्टॉक की निकासी के लिए पंजाब और हरियाणा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।</p>
<p>हरियाणा में कुरुक्षेत्र जिले की मंडियों में सर्वाधिक 8.42 लाख टन से अधिक धान पहुंचा है। प्रदेश में 1 अक्टूबर से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बाजरे की खरीद भी जारी है। अब तक 3.9 लाख टन बाजरा खरीदा जा चुका है। बाजरे की खरीद के लिए किसानों को 522 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान सीधा उनके खातों में किया गया है जिससे एक लाख से अधिक किसानों को लाभ पहुंचा है। बाजार की सबसे अधिक सरकारी खरीद महेंद्रगढ़ जिले में हुई है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा ने धान खरीद का आधा लक्ष्य पार किया,  63 फीसदी धान का ही हुआ उठान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में धान की धीमी खरीद के लिए कृषि मंत्री ने केंद्र को जिम्मेदार ठहराया, मिलर्स का धान उठान से इंकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-agri-minister-blames-central-government-for-slow-paddy-procurement.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 23 Oct 2024 17:41:45 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-agri-minister-blames-central-government-for-slow-paddy-procurement.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में धान की धीमी खरीद का मुद्दा गरमाता जा रहा है। राज्य और केंद्र सरकार के दावों के बाद भी पंजाब में धान खरीद की स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है। जिससे किसानों की दिक्कतें और बढ़ गई हैं। एक ओर राइस मिलर्स ने अपनी मांगों पर असहमति के चलते धान उठाने से साफ इंकार कर दिया है, वहीं धान खरीद की मांग को विभिन्न किसान संगठन भी लगातर प्रदर्शन कर रहे हैं। धान की धीमी खरीद से गुस्साए किसानों के राज्य में कई जगह हाइवे और सड़कें जाम कर रखी हैं। राज्य सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब की मंडियों में अब तक 38 लाख टन धान की आवक हो चुकी है। जिसमें से 34.5 लाख टन धान खरीदा जा चुका है। लेकिन उठान सिर्फ 10 लाख टन ही हो पाया है, जिससे खरीद धीमी बनी हुई है।&nbsp;</p>
<p>इस बीच पंजाब के कृषि मंत्री <strong>गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong> ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार जानबूझकर पंजाब के गोदामों से चावल शिफ्ट करने में देरी कर रही है। खुड्डियां ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो जारी कर यह बात कही है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार किसानों की फसलों को पूरी तरह खरीदने के लिए तैयार है। राज्य की मंडियों में अब तक पहुंचे धान का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा सरकार ने खरीद लिया है, लेकिन केंद्र सरकार पंजाब के गोदामों में पहले से रखे चावल को शिफ्ट करने में जानबूझकर देरी कर रही है, जिससे धान की खरीद में रुकावट आ रही है।</p>
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<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="8e52dbda-9452-4177-a2bd-5bb01d8e817c" dir="auto" class="min-h-8 text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5" data-message-model-slug="gpt-4o-mini">
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<p>पंजाब सरकार लगातार राइस मिलर्स और आढ़तियों की मांगों को जल्द हल करने की बात कह रही है। इससे पहले राज्य सरकार ने दावा किया था कि राइस मिलर्स और आढ़तियों से बात कर ली गई है और उनकी हड़ताल खत्म हो गई है। लेकिन, राइस मिलर्स और आढ़ती अभी भी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। सरकार बातचीत के जरिए इनकी मांगों का हल निकालने में जुई है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।</p>
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<article class="w-full text-token-text-primary focus-visible:outline-2 focus-visible:outline-offset-[-4px]" dir="auto" data-testid="conversation-turn-11" data-scroll-anchor="true">
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<div class="group/conversation-turn relative flex w-full min-w-0 flex-col agent-turn">
<div class="absolute">
<div class="flex items-center justify-center">दूसरी ओर, राइस मिलर्स ने धान उठाने से साफ इंकार कर दिया है। पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत भूषण बिंटा ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती, तब तक उठान नहीं किया जाएगा।&nbsp;</div>
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</article>
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<p>दूसरी ओर, धान की धीमी खरीद को लेकर किसान संगठनों का प्रदर्शन भी जारी है। भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के अध्यक्ष <strong>जोगिंदर सिंह उगराहां</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि किसान पक्का मोर्चा लगाकर राज्य में जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा, बीजेपी और आम आदमी पार्टी के विधायकों के घरों के बाहर भी किसान धरना दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक धान की खरीद बेहतर तरीके से नहीं होती।</p>
<p>धान की धीमी खरीद को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने 25 अक्टूबर को पंजाब में चक्का जाम करने का ऐलान किया है। एसकेएम नेता रमिंदर सिंह पटियाला ने कहा कि शुक्रवार, 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक पूरे राज्य में चक्का जाम किया जाएगा। अगर इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 29 अक्टूबर को सभी डिप्टी कमिश्नर के दफ्तरों का घेराव किया जाएगा, और अनाज मंडियों में आने वाले मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों को काले झंडे दिखाए जाएंगे।</p>
<p>पंजाब में 1 अक्टूबर से धान की सरकारी खरीद शुरू हुई थी, लेकिन राइस मिलर्स और आढ़तियों की हड़ताल के चलते धान खरीद की प्रक्रिया सुचारू रूप से नहीं हो पा रही थी। इसके बाद सरकार ने दावा किया था कि हड़ताल खत्म हो गई है और धान खरीद में जल्द तेजी लाई आएगी। लेकिन, किसानों को अभी भी धान बेचने में परेशानी हो रही है। किसानों का कहना है कि 20 दिन बीत जाने के बाद भी पंजाब में धान की खरीद बहुत धीमी हो रही है, जिससे उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में धान की धीमी खरीद के लिए कृषि मंत्री ने केंद्र को जिम्मेदार ठहराया, मिलर्स का धान उठान से इंकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान कृषि विभाग में 241 पदों पर निकली भर्ती, ऐसे करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/recruitment-for-241-posts-in-rajasthan-agriculture-department-apply-like-this.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 21 Oct 2024 17:06:09 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/recruitment-for-241-posts-in-rajasthan-agriculture-department-apply-like-this.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान कृषि विभाग में ऑफिसर लेवल के कई पदों पर भर्तियां निकली हैं। भर्ती अभियान के तहत कुल 241 पद भरे जाने हैं। जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया 21 अक्टूबर से शुरू हो गई है। कृषि विभाग के इन पदों के लिए इच्छुक अभ्यर्थी 19 नवंबर 2024 तक आवेदन कर सकते हैं। अभ्यर्थियों का चयन लिखित परीक्षा के जरिए होगा। इन पदों पर भर्ती के लिए अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु 18-20 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष होनी चाहिए। आरक्षित वर्गों को ऊपरी आयु सीमा में छूट मिलेगी। आयु की गणना 1 जनवरी 2025 से की जाएगी। राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना भी जारी की गई है। अधिसूचना और पदों का पूरा विवरण देखने के लिए अभ्यर्थी राजस्थान लोक सेवा आयोग (<a href="https://rpsc.rajasthan.gov.in/"><strong>आरपीएससी</strong></a>) की वेबसाइस पर विजिट कर सकते हैं। (<a href="https://rpsc.rajasthan.gov.in/Static/RecruitmentAdvertisements/567080A9A9F24B128C1E7BF8355765FF.pdf"><strong>अधिसूचना का लिंक</strong></a>)&nbsp;</p>
<p><strong>इन पदों पर निकली भर्ती&nbsp;</strong></p>
<p>कृषि विभाग ने निकली भर्ती के पदों की कुल संख्य 241 है। इनमें असिस्टेंट एग्रीकल्चर ऑफिसर (एनएसए) के 115 पद, असिस्टेंट एग्रीकल्चर ऑफिसर के 10 पद, स्टैटिस्टिकल ऑफिसर के 18 पद, एग्रीकल्चर रिसर्च ऑफिसर (एग्रोनॉमी) के 5 पद, एग्रीकल्चर रिसर्च ऑफिसर (कृषि वनस्पति विज्ञान/एग्रीकल्चर बॉटनी) के 2 पद, एग्रीकल्चर रिसर्च ऑफिसर (प्लांट पैथोलॉजी) के 2 पद, एग्रीकल्चर रिसर्च ऑफिसर (कीटविज्ञान) के 5 पद, एग्रीकल्चर रिसर्च ऑफिसर (कृषि रसायन विज्ञान) के 9 पद, एग्रीकल्चर रिसर्च ऑफिसर (बागवानी) के 2 पद, असिस्टेंट एग्रीकल्चर रिसर्च ऑफिसर (एग्रोनॉमी) के 11 पद, असिस्टेंट एग्रीकल्चर रिसर्च ऑफिसर (बॉटनी) के 5 पद, असिस्टेंट एग्रीकल्चर रिसर्च ऑफिसर (प्लांट पैथोलॉजी) के 5 पद, असिस्टेंट एग्रिकल्चर रिसर्च ऑफिसर (कीटविज्ञान) के 12 पद और असिस्टेंट एग्रिकल्चर रिसर्च ऑफिसर (कृषि रसायन विज्ञान) के 40 पद शामिल है।&nbsp;</p>
<p><strong>पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता&nbsp;</strong></p>
<p>आवेदन करने के लिए अभ्यर्थियों के पास भारत में किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से बी.एससी. (कृषि) या बी.एससी. (बागवानी) की डिग्री होनी चाहिए। गणित के साथ सांख्यिकी में द्वितीय श्रेणी की एम.एससी. या सांख्यिकी में विशेष विषय के साथ एम.एससी. (कृषि) की होनी चाहीए। कृषि विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, पादप प्रजनन, पादप रोग विज्ञान, कीट विज्ञान, रसायन विज्ञान या मृदा विज्ञान में द्वितीय श्रेणी की एम.एससी. (कृषि/प्राणी विज्ञान/वनस्पति विज्ञान) की होनी चाहिए। इन पदों पर योग्यता से संबंधित पूरा विवरण देखने के लिए अभ्यर्थी आधिकारिक अधिसूचना देख सकते हैं।</p>
<p><strong>आवेदन शुल्क और प्रक्रिया &nbsp;</strong></p>
<p>इन पदों पर आवेदन करने के लिए अभ्यर्थियों को सबसे पहले राजस्थान लोक सेवा आयोग की वेबसाइट <a href="https://rpsc.rajasthan.gov.in/"><strong>https://rpsc.rajasthan.gov.in</strong></a> पर जाना होगा। यहां Apply online link/अप्लाई ऑनलाइन लिंक पर क्लिक करके अभ्यर्थी आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। सामान्य और अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों को 600 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा, जबकि ओबीसी/बीसी/एससी/एसटी वर्ग के लिए शुल्क 400 रुपये है। अगर आवेदन फॉर्म भरने के बाद कोई सुधार करना है, तो 500 रुपये का करेक्शन चार्ज लगेगा। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी राजस्थान लोक सेवा आयोग की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान कृषि विभाग में 241 पदों पर निकली भर्ती, ऐसे करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में पशुओं के मुंहपका रोग के लिए मुफ्त टीकाकरण अभियान शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/free-vaccination-campaign-for-foot-and-mouth-disease-in-cattle-started-in-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 21 Oct 2024 17:05:36 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/free-vaccination-campaign-for-foot-and-mouth-disease-in-cattle-started-in-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब सरकार ने राज्यभर में पशुओं को मुंहपका/खुरपका रोग (एफ.एम.डी.) से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान शुरू करने का फैसला किया है। इस अभियान का उद्देश्य राज्य के सभी पशुओं को इस खतरनाक बीमारी से सुरक्षित रखना है। पशुपालन, डेयरी विकास और मत्स्य पालन मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि 21 अक्टूबर से पशुओं को मुंहपका रोग के लिए टीकाकरण अभियान की शुरुआत हो रही है। इस अभियान को सफलतापूर्वक चलाने के लिए 816 टीमें बनाई गई हैं, जो राज्य के विभिन्न हिस्सों में जाकर पशुओं को टीके लगाएंगी।&nbsp;</p>
<p>खुड्डियां ने कहा कि टीकाकरण के लिए कुल 65,47,800 खुराकें उपलब्ध कराई गई हैं। विभाग के अधिकारियों को नवंबर के अंत तक यह टीकाकरण अभियान पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मुंहपका रोग टीकाकरण अभियान के तहत राज्य के सभी पशुओं का मुफ्त टीकाकरण किया जाएगा, जिससे राज्य के सभी पशुपालक इसका लाभ उठा सकेंगे। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि टीकों को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड चेन के प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित किया जाए। &nbsp;</p>
<p><strong>मुंहपका रोग क्या है?</strong></p>
<p>मुंहपका रोग (फुट एंड माउथ डिजीज- एफएमडी) एक अत्यधिक संक्रामक विषाणुजनित बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय, भैंस, बकरी और अन्य पालतू पशुओं को होती है। यह रोग पशुओं के मुंह और खुरों पर घावों का कारण बनता है, जिससे उन्हें चलने-फिरने और खाने में कठिनाई होती है। इस रोग के कारण पशुओं की उत्पादन क्षमता, जैसे दूध उत्पादन और शारीरिक विकास, पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>मुंहपका रोग के लक्षण</strong></p>
<ul>
<li>प्रभावित पशु को तेज बुखार हो सकता है, जो कुछ दिनों तक रहता है।</li>
<li>पशु के मुंह, जीभ और मसूड़ों पर छोटे-छोटे छाले या घाव बन जाते हैं, जिससे उसे खाना खाने में परेशानी होती है।</li>
<li>खुरों पर भी घाव या सूजन हो सकती है, जिसके कारण पशु लंगड़ा कर चलने लगता है।</li>
<li>पशु के मुंह से अत्यधिक लार गिरने लगती है।</li>
<li>दूध देने वाले पशुओं में दूध उत्पादन में अचानक गिरावट आ जाती है।</li>
<li>लंबे समय तक रोग के प्रभाव में रहने से पशु कमजोर हो सकता है और उसका वजन कम हो सकता है।</li>
</ul>
<p>मुंहपका रोग से बचने का सबसे प्रभावी तरीका नियमित टीकाकरण है। यह वायरस बहुत तेजी से फैलता है, इसलिए पशुओं का टीकाकरण करना जरूरी होता है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे इस मुफ्त टीकाकरण अभियान का उद्देश्य यही है कि राज्य के सभी पशु सुरक्षित रहें और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_6715e87996349.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में पशुओं के मुंहपका रोग के लिए मुफ्त टीकाकरण अभियान शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में पराली जलाने के आरोप में 14 किसानों की गिरफ्तारी, 368 किसानों की रेड एंट्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/13-farmers-arrested-for-burning-stubble-in-haryana-red-entry-of-368-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 21 Oct 2024 14:51:37 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/13-farmers-arrested-for-burning-stubble-in-haryana-red-entry-of-368-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में पराली जलाने वाले किसानों पर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। पराली जलाने के आरोप में पिछले दो दिनों में 14 किसानों को गिरफ्तार किया गया। ये सभी किसान कैथल जिले के हैं। हाल ही में हरियाणा सरकार ने खेतों में पराली जलाने वाले किसानों पर एफआईआर दर्ज करने और दो साल तक उनकी फसल मंडियों में नहीं बिकने देने का आदेश जारी किया था। अब पराली जलाने के आरोप में किसानों की गिरफ्तारी भी शुरू हो गई है।&nbsp;</p>
<p>दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ ही पराली की आग का मुद्दा गरमाने लगा है। अक्सर इसके लिए हरियाणा, पंजाब में पराली की आग को जिम्मेदार ठहराया जाता है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर 23 अक्टूबर को हरियाणा और पंजाब के मुख्य सचिव को जवाब देना है। इससे पहले ही हरियाणा में प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए दो दिन में 57 किसानों पर केस दर्ज कर 14 किसानों को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। लेकिन खेतों की आग के मामले में सख्त कार्रवाई को लेकर किसानों में नाराजगी है।&nbsp;</p>
<p>पराली जलाने के आरोप में हरियाणा में अब तक 368 किसानों की रेड एंट्री हो चुकी है। अकेले कैथल जिले में 43 किसानों की रेड एंट्री की गई है। ये किसान अगले दो सीजन मंडियों में अपनी उपज नहीं बेच पाएंगे। इसके अलावा 317 किसानों के चालान काटकर <span>8.15 </span>लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है।</p>
<p>रविवार को हरियाणा के मुख्य सचिव टीवीएस एन प्रसाद ने सभी जिलों के उपायुक्त व अन्य अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस कर पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी या कर्मचारी खेतों में आग की घटनाओं को रोकने में लापरवाही बरतेंगे, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इस सिलसिले में कृषि विभाग के कई कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गये हैं।</p>
<p>हरियाणा में 15 सितंबर से 20 अक्टूबर तक पराली जलाने के 653 मामले सामने आए हैं जबकि इसी अवधि में पिछले साल 621 मामले आए थे। पराली जलाने के मामले में किसानों पर सबसे ज्यादा 18 केस कैथल में दर्ज किए गये। जबकि करनाल में 12, सोनीपत में 10 और जींद व पानीपत में सात-सात एफआईआर दर्ज की गई हैं। पराली जलाने के सबसे ज्यादा 130 मामले कैथल से सामने आए हैं। उसके बाद कुरुक्षेत्र (90), अंबाला (73) और करनाल (68) का नंबर हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पराली जलाने के मामले में किसानों की गिरफ्तारी और उनकी फसल मंडियों में न बिकने देने के आदेश को &ldquo;किसान विरोधी&rdquo; बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने पराली का एमएसपी तय करने और किसानों से इसे खरीदने की मांग भी उठाई। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा सरकार को किसानों पर कड़े फैसले लेने के बजाय समस्या का समाधान ढूंढना चाहिए। कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी किसानों पर कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार के रवैए की कड़ी आलोचना की है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में पराली जलाने के आरोप में 14 किसानों की गिरफ्तारी, 368 किसानों की रेड एंट्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा: सीएम सैनी संभालेंगे 12 विभाग, श्याम सिंह राणा नए कृषि मंत्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-cm-saini-will-handle-12-departments-shyam-singh-rana-is-the-new-agriculture-minister.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 21 Oct 2024 10:27:08 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-cm-saini-will-handle-12-departments-shyam-singh-rana-is-the-new-agriculture-minister.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में रविवार देर रात मंत्रियों के बीच विभागों को बंटवारा किया गया। गृह और वित्त समेत 12 विभाग मुख्यमंत्री <strong>नायब सिंह सैनी</strong> ने अपने पास रखे, जबकि <strong>अनिल विज</strong> को ऊर्जा और परिवहन विभाग दिए हैं। <strong>श्याम सिंह राणा</strong> हरियाणा के नए कृषि और पशुपालन मंत्री होंगे। उन्हें कृषि एवं किसान कल्याण, पशुपालन एवं डेयरी तथा मत्स्यपालन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।&nbsp;</p>
<p>हरियाणा में नई सरकार के शपथ ग्रहण के तीन दिन बाद राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सलाह पर मंत्रियों को विभागों का आवंटन किया। सीएम नायब सिंह सैनी ने गृह और वित्त के अलावा नियोजन, आबकारी, नगर व ग्राम नियोजन, सूचना एवं जनसंपर्क, सामान्य प्रशासन और कानून समेत 12 विभाग अपने पास रखे हैं। मनोहर लाल खट्टर की सरकार में गृह मंत्री रहे अनिल विज को ऊर्जा और परिवहन के अलावा श्रम विभाग भी दिया है। <strong>श्रुति चौधरी</strong> को महिला एवं बाल विकास के साथ-साथ सिंचाई विभाग देकर उनका कद बढ़ाया गया है।</p>
<p>देर रात जारी सरकारी आदेश के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा <strong>आरती सिंह राव</strong> को दिया गया है। यह विभाग भी पहले अनिज विज के पास था। आरती राव चिकित्सा शिक्षा और आयुष विभाग भी संभालेंगी। <strong>कृष्ण लाल पंवार</strong> को विकास व पंचायत के साथ-साथ खनन विभाग भी मिला है। <strong>राव नरबीर सिंह</strong> को उद्योग व वाणिज्य के अलावा पर्यावरण और वन विभाग भी दिए हैं, जबकि उच्च शिक्षा और स्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी <strong>महिपाल ढांडा</strong> संभालेंगे। ढांडा के पास संसदीय मामलों का विभाग भी रहेगा। &nbsp;</p>
<p><strong>विपुल गोयल</strong> को राजस्व व आपदा प्रबंधन, शहरी स्थानीय निकाय और नागरिक उड्डयन विभाग मिले हैं। <strong>अरविंद शर्मा</strong> सहकारिता, जेल और पर्यटन विभाग संभालेंगे। <strong>रणबीर गंगवा</strong> को लोक निर्माण तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग तथा <strong>कृष्ण कुमार बेदी</strong> को सामाजिक न्याय व एससी-बीसी वेलफेयर विभाग आवंटित किए हैं। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) <strong>राजेश नागर</strong> खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग का जिम्मा संभालंगे, जबकि राज्य मंत्री <strong>गौरव गौतम</strong> (स्वतंत्र प्रभार) को खेल, युवा सशक्तिकरण व उद्यमिता विभाग संभालेंगे।</p>
<p></p>
<p></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_6715dd0c0c262.jpg" alt="" width="457" height="495" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_6715dd294887b.jpg" alt="" width="459" height="512" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_6715dca4d35e3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा: सीएम सैनी संभालेंगे 12 विभाग, श्याम सिंह राणा नए कृषि मंत्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_6715dca4d35e3.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आयात शुल्क बढ़ने से मंहगा हुआ सोयाबीन तेल, सोयाबीन का भाव अभी भी एमएसपी से कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/soybean-oil-prices-increased-by-15-percent-but-soybean-price-is-still-less-than-msp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 18 Oct 2024 16:22:40 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/soybean-oil-prices-increased-by-15-percent-but-soybean-price-is-still-less-than-msp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार द्वारा खाद्य तेलों पर <span>आयात शुल्क बढ़ाने के बाद भी सोयाबीन किसानों को उपज का सही दाम नहीं मिल रहा है। मध्य प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन का दाम अभी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बना हुआ है। मंडियों में किसानों को सोयाबीन का औसत दाम 4000 से 4600 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है, जबकि केंद्र सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2024-25 के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4892 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। </span>प्रदेश में 25 अक्टूबर से सोयाबीन की सरकारी खरीद शुरू होनी है, किसान कम कीमतों को लेकर लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>दूसरी ओर, खाद्य तेलों पर <span>आयात शुल्क बढ़ने के बाद पिछले एक महीने&nbsp;</span>सोयाबीन तेल की कीमतें लगभग 15 फीसदी बढ़ गई हैं। पिछले महीने, 13 सितंबर को केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों पर सीमा शुल्क शून्य से बढ़कर 20 फीसदी कर दिया था। केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के अनुसार, देश में 13 सितंबर को पैक्ड रिफाइंड सोयाबीन तेल का दाम 118.81 रुपये प्रति लीटर था, जो 18 अक्टूबर को बढ़कर 136.61 रुपये प्रति लीटर हो गया है। खाद्य तेलों के सस्ते आयात के कारण सोयाबीन जैसी फसलों की कीमतें इस साल अगस्त महीने में 10 साल के न्यूनतम स्तर पर गिर गईं थी, जिससे किसानों को सोयाबीन की उपज का दाम एमएसपी से भी कम मिल रहा था।&nbsp;</p>
<p>सोयाबीन की कीमतों में गिरावट और सरकारी मदद न मिलने के कारण मध्य प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसान लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, खाद्य तेलों पर सीमा शुल्क बढ़ाने के बाद भी सोयाबीन की कीमतें एमएसपी से कम हैं, जबकि इस फैसले के बाद खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।&nbsp;</p>
<p>मध्य भारत कंसोर्टियम ऑफ एफपीओ के सीईओ <strong>योगेश द्विवेदी</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि मध्य प्रदेश की मंडियों में नई सोयाबीन की आवक शुरू हो गई है, लेकिन कीमतें अभी भी एमएसपी से कम हैं। सरकार ने पिछले महीने खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला किया था। इससे सोयाबीन की कीमतों में कुछ सुधार तो हुआ, लेकिन फिर भी दाम एमएसपी से कम हैं। इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा व्यापारियों को हो रहा है। व्यापारियों ने बिक्री दर तो बढ़ा दी है, जबकि खरीद दर में बढ़ोतरी नहीं की है। इससे सोयाबीन तेल की कीमतें तो बढ़ी हैं, लेकिन अनाज मंडियों में सोयाबीन की कीमतों पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।</p>
<p>भारतीय किसान यूनियन (टिकैत), मध्य प्रदेश के नेता <strong>विजय सिंह मीणा</strong> ने कहा कि किसानों के लिए सोयाबीन की मौजूदा कीमतें इतनी कम हैं कि उनकी लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि आयात शुल्क बढ़ाने से किसानों को कोई राहत नहीं मिली है, बल्कि इसका फायदा व्यापारियों और खाद्य तेल कंपनियों को हो रहा है। वर्तमान में सोयाबीन के दाम 3800 से 4500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है, जो अभी भी एमएसपी से कम हैं। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार सोयाबीन का दाम 6000 रुपये प्रति क्विंटल नहीं तय करती, तब तक किसान अपना आंदोलन जारी रखेंगे।</p>
<p>गौरतलब है इस साल मध्य प्रदेश में सोयाबीन की कीमतें पिछले 10 साल के निचले स्तर पर गिरकर 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गई थीं, जिसके चलते किसान विरोध-प्रदर्शन पर उतर आए थे। पिछले डेढ़ महीने से राज्य के किसान सोयाबीन का भाव 6000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों के आक्रोश को देखते हुए सरकार को सोयाबीन की खरीद करने और खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ा। फिलहाल, सोयाबीन की कीमतें 4000 से 4600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच आ गई हैं, लेकिन ये अभी भी एमएसपी से कम हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66f3b92e62cd8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आयात शुल्क बढ़ने से मंहगा हुआ सोयाबीन तेल, सोयाबीन का भाव अभी भी एमएसपी से कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66f3b92e62cd8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में पराली जलाने वाले किसान मंडियों में नहीं बेच पाएंगे फसल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/the-crop-of-farmers-who-burn-stubble-in-haryana-will-not-be-sold-in-the-mandis.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 18 Oct 2024 14:36:04 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/the-crop-of-farmers-who-burn-stubble-in-haryana-will-not-be-sold-in-the-mandis.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने का मुद्दा फिर से सुर्खियों में है। किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने आदेश निकाला है कि जो किसान खेतों में पराली जलाने में लिप्त पाया जाएगा, उस पर एफआईआर होगी और अगले दो सीजन में वह अपनी फसल मंडियों में नहीं बेच पाएगा। इस तरह पराली जलाने वाले किसानों की फसल एमएसपी पर नहीं बिकेगी।</p>
<p>हरियाणा के कृषि विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, पराली जलाने की घटनाओं पर रोकथाम के लिए राज्य सरकार ने दो अहम निर्णय लिए हैं। पहला, पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, अगर कोई किसान पराली जलाता पाया गया तो &lsquo;मेरी फसल, मेरा ब्योरा&rsquo; के रिकॉर्ड में उसकी रेड एंट्री की जाएगी। इससे वह किसान अगले दो सीजन में ई-खरीद पोर्टल के माध्यम से अपनी उपज मंडियों में नहीं बेच पाएगा।&nbsp;</p>
<p>हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक ने सभी जिलों के नोडल अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। खेतों में आग की सभी घटनाओं के मामले में किसानों और जमीन के खसरा नंबर की एंट्री दर्ज करानी होगी। राज्य में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ने के साथ ही किसानों पर मुकदमे दर्ज कराने और जुर्माना लगाने का सिलसला जोर पकड़ रहा है। जिन कर्मचारियों और अधिकारियों की ड्यूटी खेतों की आग की रोकथाम के लिए लगी है, उन्हें भी कड़ी निगरानी करने को कहा गया है। इस साल 15 सितंबर से 14 अक्टूबर तक हरियाणा में खेतों की आग की 468 घटनाएं दर्ज की गई हैं।&nbsp;</p>
<p>गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न करने को लेकर पंजाब और हरियाणा सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को 23 अक्टूबर को अदालत के समक्ष पेश होने को कहा है। शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण रोकने में विफल रहने पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को भी फटकार लगाई थी।&nbsp;<br /><br /></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_671222cdc2596.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" width="389" height="412" /></p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में पराली जलाने वाले किसान मंडियों में नहीं बेच पाएंगे फसल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में धान की धीमी खरीद से गुस्साए किसानों ने 25 टोल प्लाजा फ्री कराए, विधायकों का करेंगे घेराव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-punjab-make-25-toll-plazas-free-over-slow-paddy-procurement-plan-to-protest-at-mlas-homes-on-friday.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 18 Oct 2024 13:39:12 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-punjab-make-25-toll-plazas-free-over-slow-paddy-procurement-plan-to-protest-at-mlas-homes-on-friday.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में धान की धीमी खरीद का मुद्दा गरमाता जा रहा है। प्रदेश में कई जगह किसान धान खरीद की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) की अगुवाई में किसानों ने राज्य के 25 टोल प्लाजा फ्री कराए। किसानों ने जगह-जगह सड़कों पर प्रदर्शन किए, जिससे राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़कों पर घंटों तक जाम लगा रहा। किसान बठिंडा, अमृतसर, तरनतारन, पटियाला और संगरूर में टोल प्लाजा पर पक्का मोर्चा लगाकर बैठे हैं। गुरुवार को किसानों ने बठिंडा के चार टोल प्लाजा और तरनतारन व अमृतसर में तीन-तीन जगहों पर टोल ऑपरेटरों को टोल वसूलने से रोक दिया गया। पटियाला-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी टोल प्लाजा चार घंटे से ज्यादा समय तक अवरुद्ध रहा।&nbsp;</p>
<p>भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के अध्यक्ष <strong>जोगिंदर सिंह उगराहां </strong>ने<strong> रूरल वॉयस </strong>को बताया कि धान की धीमी खरीद को लेकर गुरुवार को किसानों ने पंजाब के 14 जिलों में 25 टोल प्लाजा फ्री करवाए। उन्होंने कहा कि किसान टोल प्लाजा के बाहर धरना दे रहे हैं और यह तब तक जारी रहेगा जब तक धान की खरीद बेहतर तरीके से नहीं होती। शुक्रवार को किसान बीजेपी और आम आदमी पार्टी के विधायकों के घरों के बाहर भी प्रदर्शन करेंगे।&nbsp;</p>
<p>जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि धान की धीमी खरीद से किसान बहुत परेशान हैं। मंडियों में धान रखने की जगह नहीं बची है और मिलर्स अपनी मांगें पूरी न होने के कारण धान नहीं उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक धान खरीद की समस्या हल नहीं हो जाती, किसान अपना धरना जारी रखेंगे।</p>
<p>गौरतलब है पंजाब में 1 अक्टूबर से धान की सरकारी खरीद शुरू हुई थी, लेकिन राइस मिलर्स और आढ़तियों की हड़ताल के चलते धान खरीद की प्रक्रिया सुचारू रूप से नहीं हो पा रही थी। मिलर्स ने मिलिंग रेट और जगह की कमी की मांगें रखी थीं, पांच अक्टूबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान से बातचीत के बाद उन्होंने हड़ताल खत्म कर दी थी। आढ़तियों ने भी 7 अक्टूबर को हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया था।</p>
<p>सरकार ने आश्वासन दिया था कि उनकी मांगें केंद्र सरकार के सामने रखी जाएंगी और जल्द उन्हें पूरा किया जाएगा। हालांकि, हड़ताल खत्म होने के बावजूद, किसानों को अभी भी धान बेचने में परेशानी हो रही है। किसानों का कहना है कि 15 दिन बीत जाने के बाद भी पंजाब में धान की खरीद बहुत धीमी हो रही है, जिससे उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में धान की धीमी खरीद से गुस्साए किसानों ने 25 टोल प्लाजा फ्री कराए, विधायकों का करेंगे घेराव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बिजनौर में किसान ने तेंदुए को लाठी से किया ढेर, खुद गंभीर रूप से घायल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-bijnor-farmer-killed-a-leopard-by-beating-it-with-a-stick-himself-seriously-injured.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 18 Oct 2024 12:15:48 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-bijnor-farmer-killed-a-leopard-by-beating-it-with-a-stick-himself-seriously-injured.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में कई महीनों से तेंदुए का आतंक मचा है। आए दिन तेंदुए के हमले हो रहे हैं। किसानों का खेतों पर जाना मुश्किल हो गया है। ऐसी ही एक घटना में खेत पर काम कर रहे किसान पर तेंदुए ने हमला कर दिया। जान बचाने के लिए 55 वर्षीय किसान तेगवीर सिंह नेगी ने बहादुरी संघर्ष किया और लाठी से पीटकर तेंदुए को मार डाला। गंभीर रूप से घायल किसान को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।</p>
<p>इंटरनेट पर सुर्खियां बटोर रहा यह मामला बिजनौर जिले के अफजलगढ़ क्षेत्र का है। यह इलाका उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटा है और अक्सर मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर खबरों में रहता है। बुधवार को भिक्कावाला गांव के किसान तेगवीर सिंह नेगी अपने खेत में काम कर रहे थे, तभी तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया। तेंदुए के पंजे से खुद को बचाने के लिए किसान ने खूब हिम्मत दिखाई।</p>
<p>करीब पांच मिनट यह संघर्ष चलता रहा। इस बीच, आसपास के लोग भी वहां पहुंच गये। उन्होंने भी तेंदुए पर लाठी-डंडे बरसाए। लेकिन <span>तेंदुआ किसान को घसीटने लगा। घायल किसान ने पास पड़े एक डंडे से तेंदुए पर ऐसा वार किया कि वो बेदम हो गया। </span>किसान तेगवीर को लहूलुहान हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। जबकि तेंदुए की कुछ देर बाद मौत हो गई।</p>
<p>वन दरोगा सुनील राजौरा ने बताया कि जैसे ही तेंदुए ने तेगवीर को झाड़ियों में खींचने की कोशिश की, किसान ने डंडे से उसके सिर पर वार किया। डंडे के वार से तेंदुआ मर गया। हमले में गंभीर रूप से घायल किसान को काशीपुर के एक अस्पताल में ले गए, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। तेगवीर के शरीर पर तेंदुए के पंजे और दांतों के निशान हैं।</p>
<p>घायल किसान तेगवीर सिंह नेगी रिटायर फौजी हैं। जैसे ही तेंदुए ने उन पर हमला किया, वे उससे भिड़ गये और लाठी से पलटवार किया। जब तक आसपास के लोग पहुंचे, तेगवीर बुरी तरह घायल हो चुके थे। लेकिन उन्होंने तेंदुए का डटकर मुकाबला किया। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>बिजनौर में मानव-पशु संघर्ष की घटनाएं लगातार हो रही हैं। पिछले तीन महीने में छह लोगों की मौत तेंदुए के हमले में हो चुकी है जबकि कई लोग घायल हो चुके हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है। किसान वन्य जीवों के हमलों से बचाने के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बिजनौर में किसान ने तेंदुए को लाठी से किया ढेर, खुद गंभीर रूप से घायल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में निजी नलकूप मुफ्त बिजली योजना के लिए 15 नवंबर तक कर पाएंगे पंजीकरण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/registration-for-private-tube-well-free-electricity-scheme-in-up-till-november-15.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 18 Oct 2024 11:17:45 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/registration-for-private-tube-well-free-electricity-scheme-in-up-till-november-15.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में निजी नलकूपों/ट्यूबवेल के लिए मुफ्त बिजली योजना की अंतिम तिथि एक बार फिर बढ़ा दी गई है। अब प्रदेश के किसान 15 नवंबर, 2024 तक मुफ्त बिजली योजना के लिए पंजीकरण कर सकेंगे। योजना के तहत किसानों को 10 हार्स पावर तक के ट्यूबवेल पर 140 यूनिट/किलोवाट प्रति माह तक बिजली के उपयोग पर 100 फीसदी छूट दी जाएगी। यदि उपभोग 140 यूनिट/किलोवाट प्रति माह से अधिक होता है, तो अतिरिक्त खपत के लिए किसान को सामान्य टैरिफ का भुगतान करना होगा।</p>
<p>सरकार का लक्ष्य 13 लाख किसानों को इस योजना से जोड़ने का है, लेकिन किसानों के धीमे पंजीकरण और उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने योजना की अंतिम तिथि एक बार फिर बढ़ दी है। इससे पहले भी 15 जुलाई, 31 जुलाई, 16 अगस्त और 16 अक्टूबर तक पंजीकरण की तारीख बढ़ाई जा चुकी है।&nbsp;</p>
<p>योजना का लाभ वही किसान उठा सकते हैं जिन्होंने 31 मार्च, 2023 तक के बकाया बिजली बिल का एकमुश्त भुगतान किया हो। जिन किसानों का बिजली बिल बकाया नहीं है, वे बिना कोई पंजीकरण शुल्क दिए पंजीकरण कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>किसानों को किश्तों में पूर्ण भुगतान की सुविधा भी दी गई है। जिन किसानों ने विकल्प बी-3 चुना है, वे अपने बकाया बिल को तीन किश्तों में जमा कर सकते हैं। उन्हें पहली किश्त 31 दिसंबर, 2024 तक, दूसरी किश्त 31 जनवरी, 2025 तक, और तीसरी किश्त 28 फरवरी, 2025 तक जमा करनी होगी। इसी तरह, विकल्प सी-6 चुनने वाले किसान अपने बिल का भुगतान छह किश्तों में कर सकेंगे। उन्हें पहली किश्त 31 दिसंबर, 2024 तक, दूसरी किश्त 31 जनवरी, 2025 तक, तीसरी किश्त 28 फरवरी, 2025 तक, चौथी किश्त 31 मार्च, 2025 तक, पांचवीं किश्त 30 अप्रैल, 2025 तक, और अंतिम किश्त 30 मई, 2025 तक जमा करनी होगी। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन ने किसानों से जल्द से जल्द पंजीकरण करवाने की अपील की है, ताकि वे समय पर इस योजना का लाभ ले सकें।</p>
<p>किसानों को योजना का लाभ उठाने के लिए उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन की वेबसाइट <strong><a href="https://uppcl.org/uppcl/hi/">uppcl.org</a></strong> पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। बिना पंजीकरण किए किसान इस योजना का लाभ नहीं उठा सकेंगे। अधिक जानकारी के लिए किसान कृषि विभाग या बिजली विभाग से संपर्क कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन ने किसानों से जल्द से जल्द पंजीकरण करवाने की अपील की है, ताकि वे समय पर इस योजना का लाभ ले सकें।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में निजी नलकूप मुफ्त बिजली योजना के लिए 15 नवंबर तक कर पाएंगे पंजीकरण ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में उर्वरकों की किल्लत को लेकर कांग्रेस ने लगाए आरोप]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/congress-will-take-out-gaon-khet-yatra-in-madhya-pradesh-accuses-the-government-of-black-marketing-of-fertilizers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 17 Oct 2024 16:40:00 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/congress-will-take-out-gaon-khet-yatra-in-madhya-pradesh-accuses-the-government-of-black-marketing-of-fertilizers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में खाद (उर्वरक) की भारी किल्लत को लेकर कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि राज्य में बड़े पैमाने पर खाद की कालाबाजारी हो रही है, जिसके लिए राज्य सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है। कांग्रेस का आरोप है कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल रही है और उन्हें महंगे दामों पर खाद खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार न केवल इस समस्या को हल करने में असफल रही है, बल्कि इस मुद्दे को गंभीरता से भी नहीं ले रही है। गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, और कांग्रेस किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष केदार सिरोही ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार पर यह आरोप लगाए।</p>
<p>कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि यह मुद्दा राजनीतिक नहीं, बल्कि किसानों का है। उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कहा कि वह खुद को किसान पुत्र कहते हैं, लेकिन किसानों की समस्याओं को हल करने में नाकाम रहे हैं। प्रदेश में खाद की भारी किल्लत से अफरा-तफरी मची हुई है, लेकिन कृषि मंत्री झूठे दावे कर रहे हैं। पटवारी ने शिवराज सिंह को सबसे बड़ा किसान विरोधी बताया।</p>
<p>पटवारी ने कहा कि किसानों को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस "गांव-खेत यात्रा" निकालेगी। कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर किसानों के साथ खेत में खड़े होकर सोशल मीडिया के जरिए सरकार से किए गए वादे पूरे करने की मांग करेंगे। इसमें प्रधानमंत्री मोदी, मुख्यमंत्री मोहन यादव, और देश-प्रदेश के कृषि मंत्रियों से किसानों के वादों को पूरा करने की मांग की जाएगी। कांग्रेस जल्द ही इस यात्रा की तारीखों की घोषणा करेगी।</p>
<p>पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि 1993 से 2003 तक, जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब खाद की कालाबाजारी नहीं होती थी। उस समय सुभाष यादव के पास कृषि विभाग था और सहकारी समितियों के गोदामों में बोवनी से पहले ही खाद उपलब्ध कराई जाती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 2004 में शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री बनने के बाद से कृषि विभाग पूरी तरह से भ्रष्ट हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने झूठे आंकड़े पेश कर हजारों करोड़ का घोटाला किया है, सब्सिडी में किसानों के फर्जी नाम जोड़े गए हैं, और ऑर्गेनिक खाद पर मिलने वाली ग्रांट में भी घोटाले हुए हैं।</p>
<p>दिग्विजय सिंह ने कहा कि पहले कृषि विभाग में भ्रष्टाचार देखने को नहीं मिलता था, लेकिन जब से प्रदेश में भाजपा सरकार आई है, तब से हर तरफ भ्रष्टाचार बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने खाद वितरण की पुरानी व्यवस्था को बदलकर प्राइवेट कंपनियों के हाथों में सौंप दिया, जिससे कालाबाजारी बढ़ गई है। उन्होंने दावा किया कि लाखों टन खाद जो पहले सहकारी गोदामों से वितरित होती थी, अब कालाबाजारी के माध्यम से बेची जा रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट का जिक्र किया, जिसमें प्रदेश भर से किसानों ने खाद की कमी और कालाबाजारी की जानकारी दी।&nbsp;</p>
<p>दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा 40 से 50 प्रतिशत खाद का कोटा निजी कंपनियों को सौंप दिया गया है और बिना कालाबाजारी के एक भी बोरी खाद नहीं मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को नॉन-फर्टिलाइजर उत्पाद जबरन खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो सरकार के आदेशों का उल्लंघन है।&nbsp;</p>
<p>दिग्विजय सिंह यह भी कहा कि सरकार जानबूझकर कम मांग कर रही है और किसानों पर डीएपी की जगह मिश्रित खाद या एनपीके का इस्तेमाल करने का दबाव बनाया जा रहा है, जो डीएपी से महंगी और कम गुणवत्ता वाली है। उन्होंने मांग की कि सरकार प्रदेश की सभी 8 खाद टेस्टिंग लैब्स में सर्वदलीय कमेटी का गठन करे और जितनी कंपनियों की खाद गोदामों में पहुंची है, उसकी जांच हो। अगर एनपीके या मिश्रित खाद में कोई कमी पाई जाती है, तो संबंधित कंपनियों पर कार्रवाई की जाए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में उर्वरकों की किल्लत को लेकर कांग्रेस ने लगाए आरोप ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सैनी और 13 मंत्रियों ने ली शपथ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/naib-saini-sworn-in-as-chief-minister-along-with-13-ministers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 17 Oct 2024 14:05:05 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/naib-saini-sworn-in-as-chief-minister-along-with-13-ministers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नयाब सिंह सैनी ने गुरुवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में दूसरी बार शपथ ली। पंचकुला में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्&zwj;यपाल बंडारू दतात्रेय ने मुख्य मंत्री और मंत्रियों को शपथ दिलाई। सैनी के साथ-साथ अनिल विज, कृष्&zwj;ण लाल पंवार, राव नरबीर सिंह, महिपाल ढांडा, विपुल गोयल, अरविंद कुमार शर्मा, श्&zwj;याम सिंह राणा, रणबीर सिंह गंगवा, कृष्&zwj;ण कुमार बेदी, श्रुति चौधरी, आरती राव, राजेश नागर गुर्जर और गौरव गौतम ने भी मंत्री पद की शपथ ली।&nbsp;</p>
<p>शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्&zwnj;डा, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह और कई राज्यों के मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री भी उपस्थित थे।</p>
<p>सैनी सहित कुल 14 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इनमें से सबसे ज्यादा 5 मंत्री ओबीसी वर्ग से हैं। जाट, ब्राह्मण, और एससी वर्ग से दो-दो मंत्री बनाए गए हैं, और पंजाबी, राजपूत, और वैश्य बिरादरी से एक-एक मंत्री बनाया गया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_6710fdeb497ad.jpg" alt="" /></p>
<p>नए मंत्रियों में अनिल विज, कृष्णलाल पंवार, राव नरबीर, महिपाल ढांडा, विपुल गोयल, और कृष्ण बेदी पहले भी मंत्री रह चुके हैं। रणबीर गंगवा पिछली बीजेपी सरकार में डिप्टी स्पीकर थे। नए चेहरों में अरविंद शर्मा, श्याम सिंह राणा, आरती राव, श्रुति चौधरी, और गौरव गौतम पहली बार मंत्री बने हैं।</p>
<p>नायब सिंह सैनी लगातार दूसरी बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने हैं। इससे पहले उन्होंने 12 मार्च 2024 को हरियाणा&nbsp; के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली थी। सैनी पहले हरियाणा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और 2019 में कुरुक्षेत्र से सांसद भी रह चुके हैं। उनके नेतृत्व में बीजेपी ने हरियाणा में चुनाव लड़ा और 48 सीटें जीतकर राज्य में फिर अपनी सरकार बनाई। 90 विधानसभा सीटों वाले हरियाणा में 5 अक्टूबर को मतदान हुआ था और 8 अक्टूबर को नतीजे आए। बीजेपी ने 48 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की। हरियाणा में बीजपी ने तीसरी बार अपनी सरकार बनाई है।</p>
<p></p>
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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सैनी और 13 मंत्रियों ने ली शपथ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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        <title><![CDATA[छत्तीसगढ़ में 14 नवंबर से शुरू होगी धान की सरकारी खरीद, 160 लाख टन खरीद का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/government-purchase-of-paddy-will-start-from-november-14-in-chhattisgarh-target-to-purchase-160-lakh-tonnes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 17 Oct 2024 11:02:56 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
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        <description><![CDATA[ <p>छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन 2024-25 के लिए किसानों से समर्थन मूल्य पर धान की खरीद 14 नवंबर 2024 से शुरू होगी। यह खरीद 31 जनवरी 2025 तक जारी रहेगी। यह निर्णय बुधवार को राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में धान की उपार्जन और कस्टम मिलिंग की नीति को मंजूरी दी गई।&nbsp;</p>
<p>उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन और कस्टम मिलिंग की नीति को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार ने 2024-25 खरीफ विपणन वर्ष के लिए 160 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है। किसानों के पंजीकरण की प्रक्रिया एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से चल रही है, जो 31 अक्टूबर तक जारी रहेगी।</p>
<p>अरुण साव ने कहा कि समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए बायोमेट्रिक व्यवस्था पूर्व वर्ष की भांति लागू रहेगी। साथ ही खरीदी केन्द्रों में धान के नियंत्रित एवं व्यवस्थित रूप से खरीद के लिए सीमांत एवं छोटे किसानों को अधिकतम दो टोकन तथा दीर्घ कृषकों को अधिकतम तीन टोकन देने का निर्णय भी लिया गया।</p>
<p>सभी खरीदी केन्द्रों में धान की खरीद इलेक्ट्रॉनिक तौल यंत्र के माध्यम से की जाएगी। धान खरीद के लिए जूट आयुक्त के माध्यम से 4.02 लाख बंडल नए जूट बोरों की खरीद को मंजूरी दी गई है, जबकि लगभग 8 लाख बंडल बोरों की जरूरत होगी। इसके साथ ही, कुल 8 लाख गठान बारदाने की आवश्यकता भी होगी।</p>
<p>मंत्रिपरिषद की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में सहकारी समितियों में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटरों को 18,420 रुपये प्रति माह के मान से कुल 12 महीने का मानदेय भुगतान किया जाएगा। इस पर कुल 60 करोड़ 54 लाख रुपये का व्यय भार आएगा, जिसका भुगतान पूर्व वर्षों की भांति मार्कफेड को किया जाएगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ छत्तीसगढ़ में 14 नवंबर से शुरू होगी धान की सरकारी खरीद, 160 लाख टन खरीद का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में मूंग और मूंगफली की सरकारी खरीद के लिए पंजीकरण शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/registration-for-government-purchase-of-moong-and-groundnut-started-in-rajasthan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 15 Oct 2024 14:39:44 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/registration-for-government-purchase-of-moong-and-groundnut-started-in-rajasthan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान में खरीफ सीजन 2024-25 के लिए समर्थन मूल्य पर तिलहन और दलहन की खरीद का पंजीकरण आज, 15 अक्टूबर से शुरू हो गया है। किसान&nbsp;<strong><a href="https://rajsahakar.rajasthan.gov.in/Home">सहकारिता विभाग की वेबसाइट</a></strong> पर ऑनलाइन पंजीकरण करवा सकते हैं। हालांकि, अभी खरीद की तिथि निर्धारित नहीं की गई है। केंद्र सरकार ने इस खरीफ सीजन के लिए मूंग का समर्थन मूल्य 8682 रुपए प्रति क्विंटल और मूंगफली का समर्थन मूल्य 6783 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है।</p>
<p>राजस्थान कृषि विभाग की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, किसान मूंग और मूंगफली के विक्रय के लिए सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। हर किसान एक मोबाइल नंबर पर केवल एक पंजीकरण करवा सकेगा और उसे अपनी कृषि भूमि से संबंधित तहसील में स्थित खरीद केन्द्र पर ही उत्पाद बेचना होगा। अन्य केन्द्रों पर तुलाई का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा। राज्य में 357 केंद्रों पर मूंग और 267 केंद्रों पर मूंगफली की खरीदी की जाएगी।</p>
<p>किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए खरीद केंद्रों पर ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की जाएगी। पंजीकरण के लिए जन आधार कार्ड, बैंक पासबुक, गिरदावरी और बटाईदार की स्थिति में अनुबंध पत्र जैसे दस्तावेज अपलोड करना आवश्यक होगा। किसानों को जन आधार कार्ड में बैंक खाते की जानकारी अपडेट करने और खरीद केंद्र तथा फसल का चयन स्वयं करना होगा।</p>
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<p>सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने कहा कि इस साल सहकारिता विभाग ने समय से पहले पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया है, ताकि किसानों को फसलों की बिक्री में कोई समस्या न हो। उन्होंने कहा कि आमतौर पर पिछले कुछ सालों से सोयाबीन, उड़द और मूंग की खरीद 1 नवंबर से शुरू होती आ रही है और इसके लिए किसानों का रजिस्ट्रेशन चार दिन पहले शुरू किया जाता था। लेकिन इस साल सरकार ने 15 अक्टूबर से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू करने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार से अनुमति मिलते ही राज्य में खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।</p>
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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में मूंग और मूंगफली की सरकारी खरीद के लिए पंजीकरण शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा&amp;#45;पंजाब में धान खरीद का मुद्दा गरमाया, किसानों ने किया चक्का जाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/the-issue-of-slow-procurement-of-paddy-became-heated-farmers-blocked-the-road-in-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 14 Oct 2024 13:52:39 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/the-issue-of-slow-procurement-of-paddy-became-heated-farmers-blocked-the-road-in-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल जहां एक तरफ धान की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे आ गई हैं, वहीं हरियाणा और पंजाब में धान की धीमी खरीद और उठान में देरी किसानों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। मंडियों में धान के ढेर लगे हैं जबकि उठान की प्रक्रिया काफी धीमी है। चावल के निर्यात पर लगी पाबंदियों और खरीफ सीजन की तैयारियों में अव्यवस्था के चलते यह स्थिति पैदा हुई है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>धान खरीद के मुद्दे पर रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान संगठनों ने पंजाब में कई जगह विरोध-प्रदर्शन और चक्का जाम किया। राइस मिलर्स और आढ़तियों ने भी किसानों के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन किया। धान खरीद में दिक्कतों को लेकर पंजाब के विभिन्न जिलों में किसान 12 से तीन बजे तक सड़कों और रेलवे ट्रैक पर डटे रहे। जिससे यातायात ठप रहा और कई ट्रेनें प्रभावित हुईं।</p>
<p>किसानों की मांग है कि खरीद में तेजी लाई जाए और जो धान मंडियों में पड़ा है उसके उठान की व्यवस्था हो। उधर, शैलर संचालकों की मांग है कि गोदामों में रखे पिछले साल के गेहूं और धान को जल्द उठाया जाए। विरोध-प्रदर्शन में बीकेयू उगराहां, बीकेयू कादियान, बीकेयू डकौंदा, बीकेयू राजेवाल, बीकेयू दोआबा सहित कई किसान संगठन शामिल हुए।&nbsp;</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा के नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि अगर किसानों की मांगें न मानी तो और बड़े आंदोलन का ऐलान करेंगे। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा किसानों को अनाज मंडियों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या धान की लिफ्टिंग को लेकर सामने आ रही है, क्योंकि प्रदेश के अधिकतर गोदामों में अनाज भरा हुआ है। मंडियों में धान पहुंच रहा है लेकिन उठान नहीं हो रही। इस कारण खेतों में धान की कटाई में भी देरी हो रही है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>अब तक कितनी खरीद </strong></p>
<p>एक अक्टूबर से शुरू हुए खरीफ मार्केटिंग सीजन में अब तक पंजाब में लगभग 4.5 लाख टन धान की खरीद हो चुकी है। इस साल पंजाब में 185 लाख टन और हरियाणा में 60 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य है। हरियाणा में करीब 20 लाख टन धान मंडियों में पहुंच चुका है जिसमें से 13 लाख टन से ज्यादा धान की खरीद हुई है लेकिन मंडियों से उठान लगभग 4.5 लाख टन धान का हुआ। हरियाणा के <span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कई विधायकों ने अनाज मंडियों में </span><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-b88u0q">धान</span><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"> </span><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3 r-b88u0q">खरीद</span><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3"> का निरीक्षण किया और अधिकारियों को उठान में तेजी लाने के निर्देश दिये।&nbsp;</span></p>
<p><strong>अनाज मंडियों धान से अटी </strong></p>
<p>इस बार मानसून के लौटने में देरी और पिछले दिनों हुई बारिश के कारण धान की पकी फसल भीग गई। नमी वाले धान को बेचने में किसानों को दिक्कतें आ रही हैं। किसानों को खेत खाली कर रबी की बुवाई करनी है इसलिए मंडियों में धान बेचने के लिए किसानों की लाइनें लगी हैं। लेकिन सुस्त उठान के चलते अनाज मंडियां धान से अटी पड़ी हैं। रविवार को हरियाणा की कई मंडियों में धान की खरीद बंद रही ताकि उठान कर जगह खाली की जा सके। इस साल सरकार ने धान का एमएसपी सामान्य किस्म के लिए 2300 रुपये और ए ग्रेड धान का 2320 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। लेकिन मजबूरी में किसानों को पीआर धान 2100-2200 रुपये के भाव पर बेचना पड़ रहा है।&nbsp;</p>
<p>आढ़ती संगठन के प्रधान मनीष कंबोज का कहना है कि जिस स्पीड से धान आ रहा है, उठान उतनी तेजी से नहीं हो रहा। जो धान शुरू में आया था वह अभी भी मंडियों में भरा हुआ है। शेड भी भरे हुए हैं, सड़कों पर भी धान बिखरा हुआ है। उन्होंने सरकार से अपील की कि धान की लिफ्टिंग में ज्यादा ध्यान दिया जाए।&nbsp;</p>
<p><strong>केंद्रीय मंत्री से मिलेंगे पंजाब के मुख्यमंत्री</strong></p>
<p>राइस मिलर्स और आढ़तियों की समस्याओं को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान आज यानी सोमवार को केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रहलाद जोशी से मिलेंगे। आढ़ती अपना कमीशन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं वहीं मिलर्स धान की नई फसल के लिए भंडारण का मुद्दा उठा रहे हैं। मिलर्स ने सरकार से मौजूदा स्टॉक को हटाने की मांग की है। शनिवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंडियों में धान की खरीद, उठान और किसानों को किए जा रहे भुगतान का जायजा लिया। मान ने कहा कि मिलर्स और आढ़तियों की मांगें जायज हैं और केंद्र सरकार को सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए।&nbsp;</p>
<p>उधर, शिरोमणि अकाली दल ने चेतावनी दी है कि अगर पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार 72 घंटे के भीतर मंडियों से धान की खरीद और उठान सुनिश्चित करने में विफल रही तो वह आंदोलन शुरू करेगी।</p>
<p><strong>सुरजेवाला पहुंचे कैथल मंडी</strong></p>
<p>रविवार को राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला और कैथल से नवनिर्वाचित विधायक आदित्य सुरजेवाला ने नई अनाज मंडी पहुंचकर किसानों और आढ़तियों की समस्याएं सुनी। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा का किसान, आढ़ती और मजदूर धान खरीद में धांधली और कुप्रबंधन से पीड़ित है। चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा किसानों से 3100 रुपये के रेट पर धान खरीद के वादे को याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि न तो भाजपा सरकार धान की खरीद कर रही है और न ही किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल रहा है। 1509 किस्म का सुपीरियर क्वालिटी का धान भी पूरी तरह से पिट गया है। <span>हजारों करोड़ का नुकसान किसान झेल रहा है।</span></p>
<p><strong>निर्यात पाबंदियां हटने के बाद भी नहीं बढ़ा भाव </strong></p>
<p>पिछले महीने चावल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटने के बाद भी धान का भाव पिछले साल से काफी कम है। हरियाणा की पानीपत मंडी में 1509 बासमती धान का भाव 2800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है जबकि पिछले साल यह 3500 रुपये से अधिक था। निर्यात पाबंदियां हटने के बाद भी 1509 किस्म के बासमती धान का भाव करीब 100 रुपये ही बढ़ा है। इस तरह किसान को पिछले साल के मुकाबले 500-700 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा-पंजाब में धान खरीद का मुद्दा गरमाया, किसानों ने किया चक्का जाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में नकली उर्वरकों के खिलाफ छापेमारी, 11 हजार से अधिक बैग जब्त, 506 विक्रेताओं को नोटिस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/raids-in-rajasthan-against-fake-fertilizers-over-11000-bags-seized-notice-to-506-sellers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 14 Oct 2024 11:37:42 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/raids-in-rajasthan-against-fake-fertilizers-over-11000-bags-seized-notice-to-506-sellers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान में आगामी रबी सीजन के लिए उर्वरकों की मांग तेज हो गई है। जिसके चलते उर्वरकों की कालाबाजारी करने वाले सक्रिय हो गए हैं। साथ ही नकली उर्वरकों का व्यापार भी धड़ल्ले से चल रहा है। इसे रोकने और किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली खाद उपलब्ध कराने के लिए राजस्थान कृषि विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है। जिसके तहत राज्य में जगह-जगह छापेमारी कर अब तक 11 हजार से अधिक उर्वरक के बैग जब्त किए गए हैं, जबकि 500 से अधिक दुकानदारों को कालाबाजारी और जमाखोरी के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।&nbsp;</p>
<p>कृषि विभाग ने 12 अक्टूबर को डीग जिले में विशेष छापेमारी करते हुए मैसर्स बंसल खाद बीज भंडार सीकरी के 7 अवैध गोदामों से 11,245 उर्वरक के बैग जब्त किए। इनमें 3639 बैग डीएपी, 7046 बैग यूरिया, 540 बैग सुपर फॉस्फेट और 20 बैग जिंक सल्फेट के थे। यह कार्यवाही उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत की गई।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_670cb72cc7147.jpg" alt="" width="517" height="365" /><br /><em>अलवर में कृषि विभाग ने जब्त किए नकली उर्वरक के 314 बैग</em></p>
<p>इसी तरह 8 अक्टूबर को अलवर जिले के झाडोली गांव में छापेमारी के दौरान आस मोहम्मद के घर से 84 बैग नकली डीएपी (इफको मार्का) और 230 बिना मार्का वाले उर्वरक जब्त किए गए। इसके साथ ही 15 खाली बैग इफको मार्का और 60 खाली बिना मार्का बैग भी मिले। सभी नकली उर्वरकों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और आस मोहम्मद पर उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।</p>
<p>कृषि विभाग ने 10 अक्टूबर को एक दिवसीय विशेष अभियान के तहत राज्य में 997 निरीक्षण किए। इस दौरान कृषि आदान निर्माता, विक्रेता एवं खुदरा व्यवसायियों के अनियमितता, कालाबाजारी व जमाखोरी पाये जाने पर 506 दुकानदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, 49 की बिक्री पर रोक लगाई गई और 10 के लाइसेंस निलंबित किए गए। बिना लाइसेंस के काम कर रहे गोदामों पर भी कार्रवाई हुई, जिसमें डीग के बंसल खाद बीज भंडार से 3639 बैग डीएपी, 7046 बैग यूरिया, 540 बैग सुपर फॉस्फेट और 20 बैग जिंक सल्फेट जब्त किए गए।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_670cb73eb181d.jpg" alt="" width="527" height="344" /><br /><em>विशेष अभियान के तहत दुकानों पर निरीक्षण करते कृषि विभाग के अधिकारी</em></p>
<p>कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे किसी अज्ञात व्यक्ति से बिना प्रमाणित उर्वरक न खरीदें। अगर उन्हें किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, तो तुरंत अपने कृषि पर्यवेक्षक, सहायक कृषि अधिकारी या संयुक्त निदेशक को सूचित करें।</p>
<p>राज्य में रबी और खरीफ फसलों की बुआई से पहले हर साल सितंबर, अक्टूबर, मई और जून में कृषि आदानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विशेष गुण नियंत्रण अभियान चलाया जाता है। इस अभियान के तहत उर्वरक, बीज और कीटनाशकों के नमूने "<strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=com.risl.doa&amp;hl=en_IN">RajAgriQC</a></strong>" ऐप के माध्यम से ऑनलाइन लिए जा रहे हैं।</p>
<p>कृषि आयुक्त चिन्मयी गोपाल ने कहा है कि अनियमितता पाए जाने पर कृषि आदान विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लाइसेंस निलंबन, जब्ती और बिक्री पर रोक शामिल है। किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_670cb2298c7da.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में नकली उर्वरकों के खिलाफ छापेमारी, 11 हजार से अधिक बैग जब्त, 506 विक्रेताओं को नोटिस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_670cb2298c7da.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में धान की धीमी खरीद को लेकर 13 अक्टूबर को एसकेएम करेगा चक्का जाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sanyukt-kisan-morcha-to-hold-chakka-jam-on-october-13-over-over-slow-paddy-procurement-in-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 11 Oct 2024 19:26:15 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sanyukt-kisan-morcha-to-hold-chakka-jam-on-october-13-over-over-slow-paddy-procurement-in-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में धान की धीमी खरीद को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) 13 अक्टूबर को पूरे राज्य में चक्का जाम करेगा। शुक्रवार को चंडीगढ़ में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम), राइस मिलर्स और आढ़तियों की एक संयुक्त बैठक हुई। बैठक के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने इस बात का ऐलान किया। पंजाब में धान की धीमी खरीद को लेकर किसानों में काफी रोष है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि आज 11 अक्टूबर हो गई है और 10 दिन बीत जाने के बाद भी धान की सरकारी खरीद सुचारू रूप से नहीं हो रही है। किसानों की समस्याओं को देखते हुए एसकेएम ने निर्णय लिया है कि 13 अक्टूबर को पूरे पंजाब में 3 घंटे के लिए सड़कें जाम की जाएंगी और धान खरीद में हो रही देरी का विरोध किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>राजेवाल ने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है जब अक्टूबर के 10 दिन बीत चुके हैं और धान की खरीद शुरू नहीं हो पाई है। इसके लिए पंजाब और दिल्ली दोनों सरकारें जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि पंजाब के गोदामों में अभी भी धान का पुराना स्टॉक बचा हुआ है, जिस वजह से मिलर्स धान नहीं खरीद रहे हैं। सरकार को जल्द से जल्द गोदामों में जगह खाली करानी चाहिए ताकि नई फसल का भंडारण हो सके। उन्होंने कहा कि 13 अक्टूबर को चक्का जाम के बाद 14 अक्टूबर को सभी संगठनों की एक और संयुक्त बैठक होगी, जिसमें सरकार के खिलाफ सख्त कदम उठाने की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।</p>
<p>गौरतलब है कि पंजाब में धान की सरकारी खरीद वैसे तो 1 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है, लेकिन राइस मिलर्स और आढ़तियों की हड़ताल के चलते राज्य में धान की खरीद सुचारू रूप से नहीं हो पा रही थी। मिलिंग रेट और जगह की कमी जैसी मांगों के कारण राइस मिलर्स ने धान उठाने से इंकार कर दिया था। हालांकि, 5 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ बैठक के बाद मिलर्स ने हड़ताल खत्म कर दी थी। 7 अक्टूबर को आढ़तियों ने भी हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया था। सरकार ने मिलर्स और आढ़तियों को आश्वासन दिया है कि उनकी सभी मांगें केंद्र सरकार के सामने रखी जाएंगी और उन्हें जल्द पूरा करने के लिए काम किया जाएगा।</p>
<p>राइस मिलर्स और मजदूरों की हड़ताल खत्म होने के बावजूद किसानों को धान बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है राज्य में धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर को शुरू हुई थी, लेकिन 10 दिन बाद भी किसानों से धान की खरीदा नहीं हो रही है। कुछ मंडियों में जहां खरीद हो भी रही है, वहां भी यह प्रक्रिया बहुत धीमी है, जिससे किसानों को काफी परेशानी हो रही है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में धान की धीमी खरीद को लेकर 13 अक्टूबर को एसकेएम करेगा चक्का जाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शामली में बकाया गन्ना भुगतान को लेकर किसानों का धरना जारी, बीकेयू का समर्थन  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-protest-continues-in-shamli-over-pending-sugarcane-payment-bku-supports.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 11 Oct 2024 15:20:03 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-protest-continues-in-shamli-over-pending-sugarcane-payment-bku-supports.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के शामली जिले में अपर दोआब शुगर मिल पर बकाया गन्ना भुगतान को लेकर पिछले दो सप्ताह से किसान धरना-प्रदर्शन कर रहे है। लेकिन अभी तक इस मामले का हल नहीं निकला है। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि जब तक ब्याज समेत भुगतान नहीं दिया जाता, तब तक शुगर मिल और कलेक्ट्रेट परिसर में धरना जारी रहेगा। <span>शामली शुगर मिल में किसानों ने मिल का मेंटीनेंस का काम भी रूकवा दिया है।&nbsp;</span></p>
<p>शामली में किसानों के प्रदर्शन को भारतीय किसान यूनियन ने अपना समर्थन दिया है। मंगलवार रात को कलेक्ट्रेट चौराहे पर हाईवे जाम कर बैठे किसानों को हटाने के लिए जैसे ही पुलिस और पीएससी के जवान पहुंचे तो पूरे इलाके में हलचल मच गई। देर रात ही भाकियू युवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष <strong>गौरव टिकैत</strong> किसानों के धरने को समर्थन देने पहुंच गये। इसके बाद किसानों को प्रशासन ने कलक्ट्रेट के अंदर धरना देने की जगह दे दी। फिलहाल शामली में शुगर मिल परिसर और कलेक्ट्रेट परिसर में किसानों के धरने चल रहे हैं। किसानों के विरोध-प्रदर्शन को खाप के नेताओं ने भी समर्थन दिया है।&nbsp;</p>
<p>भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष <strong>कपिल खाटियान</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि कई बार वादे के बाद भी शामली शुगर मिल ने गन्ना किसानों को 2022-23 का भुगतान नहीं किया है। बकाया भुगतान की मांग को लेकर चल रहे किसानों के धरने को भाकियू का पूरा समर्थन है। किसान बकाया भुगतान की मांग को लेकर 2 अक्टूबर से धरना दे रहे हैं। पिछले महीने भी किसानों को बकाया भुगतान के लिए 15 दिनों तक धरना देना पड़ा था जिसके बाद मिल ने 25 करोड़ रुपये का भुगतान किया। अब बकाया 188 करोड़ रुपये के भुगतान के लिए किसानों को संघर्ष करना पड़ रहा है।</p>
<p>गत जून में शामली की लगभग 91 साल पुरानी चीनी मिल का प्रबंधन त्रिवेणी समूह के हाथों में आ गया था। कपिल खाटियान ने बताया कि नए प्रबंधन ने तीन महीने में बकाया भुगतान की बात कही थी। लेकिन भुगतान नहीं किया। फिर यूनिट हेड में एक महीने में भुगतान का आश्वासन दिया। इसके बाद मिल प्रबंधक दो साल में पेमेंट करने की बात करने लगे तो किसानों का धैर्य जबाव दे गया और 2 अक्टूबर से किसान मिल परिसर में धरने पर बैठ गये। सोमवार को किसानों ने शुगर मिल परिसर से कलेक्ट्रेट परिसर की ओर कूच किया तो उन्हें कलेक्ट्रेट के अंदर नहीं घुसने दिया गया। जिसके बाद गुस्साए किसानों ने दिल्ली-सहारनपुर और पानीपत-खटीमा हाईवे जाम कर दिया था। जिला प्रशासन के अनुरोध के बाद किसानों ने हाईवे से तो धरना हटा दिया लेकिन मिल परिसर और कलेक्ट्रेट में धरना जारी है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>किसानों का कहना है कि जिला प्रशासन भी किसानों पर धरना समाप्त करने का दबाव बना रहा है ताकि शुगर मिल में मेंटनेंस के काम पूरे हो सकें। अब मिल प्रबंधन 25 करोड़ रुपये का भुगतान इस महीने, 25 करोड़ दीवाली तक और 25 करोड़ दिसंबर तक करने की बात कह रहा है जिस पर किसान सहमत नहीं हैं। <span>किसानों ने साफ शब्दों में कह दिया कि जब तक उनका बकाया भुगतान होगा, दोनों जगहों पर धरना जारी रहेगा।</span></p>
<p>किसानों का आरोप है कि त्रिवेणी समूह ने किसानों का बकाया भुगतान करने से पहले चीनी मिल के पुराने मालिक सर शादीलाल ग्रुप के प्रमोटर्स को भुगतान क्यों किया। बकाया भुगतान नहीं मिलने के कारण किसानों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि शुगर कंट्रोल ऑर्डर, 1966 के अनुसार, गन्ना किसानों को भुगतान में 14 दिन से अधिक देरी होने पर ब्याज सहित भुगतान होना चाहिए। इस मामले पर किसान नेता सरदार वीएम सिंह की याचिका हाईकोर्ट में लंबित है।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ शामली में बकाया गन्ना भुगतान को लेकर किसानों का धरना जारी, बीकेयू का समर्थन   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हिमाचल में किसानों को देसी गाय खरीदने के लिए मिलेगा 33 हजार रुपये का अनुदान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-will-get-a-subsidy-of-33-thousand-rupees-for-buying-desi-cows-in-himachal-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 11 Oct 2024 12:56:05 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-will-get-a-subsidy-of-33-thousand-rupees-for-buying-desi-cows-in-himachal-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश में किसानों को देसी गाय खरीदने के लिए 33 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा। लेकिन इसके लिए उन्हें एक शर्त पूरी करनी होगी। यह अनुदान सिर्फ प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों को ही दिया जाएगा। साथ ही, गौशाला का फर्श पक्का करने के लिए भी 8 हजार रुपये की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। कृषि विभाग की आतमा परियोजना के तहत बुधवार को&nbsp;हमीरपुर जिले की ग्राम पंचायत मझियार में आयोजित प्राकृतिक खेती जागरूकता कार्यक्रम के दौरान सहायक तकनीकी प्रबंधक नेहा भारद्वाज ने यह बात कही। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में विस्तृत जानकारी दी।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सहायक तकनीकी प्रबंधक ने कहा कि प्राकृतिक खेती में रासायनिक उर्वरकों और जहरीले कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलें स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हैं। साथ ही इससे खेती की लागत भी कम होती है। इस प्रकार की खेती से किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान कर सकते हैं।</p>
<p>नेहा भारद्वाज ने कहा कि देसी गायों के गोबर और मूत्र से प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक घटक जैसे जीवामृत, बीजामृत, धनजीवामृत और देशी कीटनाशक घर पर ही तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती शुरू करने के इच्छुक किसानों को देसी गाय की खरीद के लिए अनुदान भी दिया जाता है। प्राकृतिक खेती कर रहे किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि अधिकारी से योजना की जानकारी प्राप्त कर सकते है।&nbsp;</p>
<p>सहायक तकनीकी प्रबंधक ने किसानों को स्थानीय नस्लों जैसे साहीवाल, रेड सिंधी, राठी, थार और पार्कर के बारे में भी जानकारी दी और बताया कि किसान कैसे इन नस्लों की गायों को अपनाकर अपनी खेती को लाभकारी बना सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में किसानों को मटर के बीज वितरित किए गए, ताकि वे इनका उपयोग प्राकृतिक खेती में कर सकें।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हिमाचल में किसानों को देसी गाय खरीदने के लिए मिलेगा 33 हजार रुपये का अनुदान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद हरियाणा में राइस मिलर्स की हड़ताल खत्म]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-rice-millers-end-strike-after-cm-nayab-saini-assurance.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 11 Oct 2024 11:51:14 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-rice-millers-end-strike-after-cm-nayab-saini-assurance.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में धान की खरीद में अब तेजी आने की उम्मीद है, क्योंकि हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मिले आश्वासन के बाद अपनी हड़ताल समाप्त कर दी है। इससे राज्य भर की मंडियों में धान का उठान फिर से शुरू हो सकेगा। गुरुवार को एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से चंडीगढ़ में मुलाकात की और अपनी मांगें सरकार के समक्ष रखीं।</p>
<p>मुख्यमंत्री<span> ने कहा कि राइस मिलर्स की अधिकतर मांगें एफसीआई व केंद्र सरकार से संबंधित हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों और व्यापारियों को किसी तरह की असुविधा न हो इसके लिए उनकी सभी मांगों को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने&nbsp;</span><span>कहा कि</span> राज्य सरकार मिलिंग शुल्क बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध करेगी। अगर केंद्र सरकार सहमति नहीं देती है, तो मिल मालिकों को बोनस देने पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही ड्रायज चार्ज 0.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 1 प्रतिशत करने और आउट-टर्न अनुपात में कमी के लिए भी केंद्र सरकार से सिफारिश की जाएगी।</p>
<p>हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष <strong>अमरजीत छाबड़ा</strong> ने <strong>रूरल वॉयस </strong>को बताया कि राज्य सरकार के आश्वासन के बाद मिलर्स ने धान का उठान शुरू करने का निर्णय लिया है। हालांकि, मिलर्स की कुछ मांगें अभी भी लंबित हैं, जिन पर सरकार से सहमति नहीं बन पाई है। लेकिन, सरकार ने आश्वासन दिया है कि इन मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा।</p>
<p>गौरतलब है कि हरियाणा में धान की खरीद 23 सितंबर से शुरू होनी थी, लेकिन सरकार ने अचानक तारीख बदलकर 1 अक्टूबर कर दी। जब किसान मंडियों में पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि खरीद की तारीख आगे बढ़ा दी गई है। धान खरीद में हो रही देरी के कारण किसानों ने अनाज मंडियों के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। जिसके बाद सरकार को फिर तारिख बदलनी पड़ी और हरियाणा में&nbsp;27 सितंबर से धान की खरीद प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन इस दौरान मिलर्स की हड़ताल के चलते किसानों को एक बार फिर परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान राज्य में विधानसभा चुनाव भी थे, जिससे खरीद धीमी रही।&nbsp;</p>
<p>चुनाव खत्म होने के बाद भी किसान धीमी खरीद को लेकर परेशान हैं। गुरुवार को करनाल मंडी के बाहर ट्रैक्टरों की लंबी कतार देखने को मिली। किसान धान की फसल लेकर मंडी पहुंचे, लेकिन उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा। इस वजह से नेशनल हाईवे पर भी कई घंटों तक जाम लगा रहा। किसानों का कहना है कि मंडियों में खरीद बहुत धीमी गति से हो रही है और खरीदी गई धान भी मंडियों में ही पड़ी है। मंडियों में जगह की कमी के चलते उन्हें सड़कों पर ही धान डालने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जबकि अधिकारी भी चुप्पी साधे बैठे हैं। इससे किसानों में रोष बढ़ रहा है। हालांकि, राइस मिलर्स की हड़ताल खत्म होने से धान खरीद में तेजी आने की उम्मीद है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_6708c1e31b55e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद हरियाणा में राइस मिलर्स की हड़ताल खत्म ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में कृषि यंत्रों पर अनुदान पाने का मौका, 23 अक्टूबर तक बुकिंग खुली]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/opportunity-to-get-subsidy-on-agricultural-equipment-in-uttar-pradesh-booking-open-till-23rd-october.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 10 Oct 2024 19:01:48 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/opportunity-to-get-subsidy-on-agricultural-equipment-in-uttar-pradesh-booking-open-till-23rd-october.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए कृषि यंत्रों पर अनुदान पाने का अवसर है। सरकार कृषि यंत्रीकरण की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कृषि यंत्र, कृषि रक्षा उपकरण, कस्टम हायरिंग सेंटर, हाईटेक हब फॉर कस्टम हायरिंग, थ्रेसिंग फ्लोर और स्मॉल गोदाम पर अनुदान दे रही है। इसके लिए बुकिंग <strong>9 अक्टूबर</strong> से शुरू हो गई है। किसान <strong>23 अक्टूबर</strong> तक कृषि यंत्रों पर अनुदान प्राप्त करने के लिए बुकिंग करा सकते हैं। 10,000 रुपये तक अनुदान वाले समस्त कृषि यंत्रों के लिए किसान कृषि विभाग के <strong><a href="https://agriculture.up.gov.in">पोर्टल</a> </strong>पर स्वयं बुकिंग कर सकेंगे।</p>
<p><strong>कैसे करें आवेदन?</strong></p>
<ul>
<li>कृषि यंत्रों पर अनुदान प्राप्त करने के लिए कृषि विभाग के पोर्टल <a href="http://www.agriculture.up.gov.in/"><strong>agriculture.up.gov.in</strong> </a>पर जाएं</li>
<li><strong>&lsquo;कृषि यंत्रों हेतु</strong> <strong>यहां बुकिंग करें&rsquo;</strong> लिंक पर क्लिक करें</li>
<li>विभागीय पोर्टल पर दर्ज <strong>मोबाइल नंबर</strong> पर ओटीपी प्राप्त कर प्रक्रिया पूर्ण करें</li>
<li>कृषि यंत्र की खरीद का बिल, बुकिंग की तिथि से 10 दिन के अंदर पोर्टल पर अपलोड अनिवार्य है</li>
<li>निर्धारित अवधि में विभागीय पोर्टल पर बिल अपलोड न होने पर बुकिंग स्वत: <strong>निरस्त</strong> हो जाएगी</li>
</ul>
<p><strong>कितना अनुदान मिलेगा</strong></p>
<p>समस्त कृषि यंत्रों पर मूल्य अधिकतम <strong>50 फीसदी</strong>, कस्टम हायरिंग सेंटर व हाईटेक हब फॉर कस्टम हायरिंग पर अधिकतम <strong>40 फीसदी</strong> तथा फार्म मशीनरी बैंक अधिकतम <strong>80 फीसदी</strong> अनुदान दिया जाएगा।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>बुकिंग धनराशि</strong><br />10 हजार से एक लाख रुपये तक अनुदान वाले कृषि यंत्रों के लिए बुकिंग धनराशि 2500 रुपये है जबकि एक लाख से अधिक अनुदान के कृषि यंत्रों के लिए बुकिंग धनराशि 5000 रुपये है। किसानों को आवेदन के समय ही यंत्रवार निर्धारित बुकिंग धनराशि <strong>ऑनलाइन</strong> जमा करनी होगी। लक्ष्य शेष न रहने या ई-लॉटरी में चयनित न होने वाले किसानों को बुकिंग धनराशि वापस कर दी जाएगी।</p>
<p><strong>कैसे होगा लाभार्थियों का चयन </strong></p>
<p>कृषि यंत्र पर अनुदान प्राप्त करने के इच्छुक किसान 23 अक्टूबर की रात्रि 12 बजे तक तक आवेदन कर सकेंगे। विभागीय पोर्टल पर लक्ष्य से अधिक आवेदन की दशा में डीएम की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय कार्यकारी समिति के समक्ष विभागीय पोर्टल पर<strong> ई-लॉटरी</strong> के माध्यम से ब्लॉकवार लक्ष्यों के सापेक्ष लाभार्थी का चयन किया जाएगा।&nbsp;ई-लॉटरी हेतु स्थल, तिथि एवं समय की जानकारी आवेदकों को संबंधित जनपदीय उप कृषि निदेशक द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।</p>
<p>लाभार्थियों के चयन/बुकिंग टोकन कन्फर्म होने की तिथि से कृषि यंत्र खरीद कर विभागीय पोर्टल पर क्रय रसीद, यंत्रों की फोटो व सीरियल नंबर तथा संबंधित अभिलेख अपलोड करने के लिए 30 दिन तथा कस्टम हायरिंग सेंटर, हाईटेक हब फॉर कस्टम हायरिंग व फार्म मशीनरी बैंक के लिए अधिकतम 45 दिन का समय मिलेगा। किसान निर्धारित मानक के यंत्रों को <a href="http://upyantratracking.in/">upyantratracking.in&nbsp;</a>पर पंजीकृत यंत्र निर्माताओं द्वारा पोर्टल पर अपलोड इन्वेंट्री में से किसी से भी खरीद सकेंगे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_6707d6018ef60.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_6707d5864af2a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में कृषि यंत्रों पर अनुदान पाने का मौका, 23 अक्टूबर तक बुकिंग खुली ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_6707d5864af2a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब&amp;#45;हरियाणा में धान की धीमी खरीद बनी परेशानी, सड़कों पर ढ़ेरी लगाने को मजबूर किसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/slow-purchase-of-paddy-in-punjab-haryana-has-become-a-problem-for-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 10 Oct 2024 15:51:29 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/slow-purchase-of-paddy-in-punjab-haryana-has-become-a-problem-for-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब-हरियाणा में धान की सरकारी खरीद को शुरू हुए 10 दिन के ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन अभी भी मंडियों में धान की खरीद सुचारू रूप से नहीं हो पा रही है। हरियाणा में राइस मिलर्स और सरकार के बाद सहमति होने के बाद उन्होंने धान का उठान शुरू कर दिया है लेकिन किसानों का कहना है कि अभी स्थिति सामान्य नहीं है। इसी तरह पंजाब में मजदूरों और मिलर्स की हड़ताल खत्म होने के बाद भी किसान परेशान हैं।</p>
<p>हरियाणा के किसानों का कहना है कि मंडियों में केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, और सरकार नाममात्र की खरीद कर रही है। खरीदी गई फसल भी मंडियों में पड़ी है। इससे किसान सड़क पर धान डालने को मजबूर हैं और अधिकारी भी चुप्पी साधकर बैठे हैं। धान खरीद में आ रही दिक्कतों के चलते किसानों में काफी रोष है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>पंजाब में 7 सितंबर को मजदूरों और मिलर्स की हड़ताल खत्म हुई थी। जिसके बाद मंगलवार से खरीद शुरू तो हुई, लेकिन किसानों को अभी भी बिक्री में दिक्कतें पेश आ रही हैं। किसानों का कहना है कि एक तो खरीद धीमी हो रही है, ऊपर से नमी और क्वालिटी के नाम पर धान की रिजेक्ट किया जा रहा है। जिससे किसान काफी परेशान है।&nbsp;</p>
<p>पंजाब के भारतीय किसान यूनियन के नेता <strong>नछत्तर सिंह </strong>ने <strong>रूरल वॉयस</strong> बताया कि पंजाब में मजदूरों और मिलर्स की हड़ताल के कारण धान की खरीद में पहले ही देरी हो चुकी है। हड़ताल खत्म होने के बाद भी खरीद बहुत धीमी चल रही है। कई जगह बारिश के कारण धान को नुकसान हुआ है, और आढ़ती अधिक नमी के कारण धान नहीं खरीद रहे हैं।</p>
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<p>पंजाब मंडी बोर्ड के सचिव <strong>रामवीर सिंह</strong> ने<strong> रूरल वॉयस </strong>को बताया कि मजदूरों और आढ़तियों की हड़ताल अब खत्म हो चुकी है। राज्य में मंगलवार से धान की खरीद जारी है। मंडियों में धान खरीद में देरी की कोई शिकायत अभी तक बोर्ड के पास नहीं आई है। उन्होंने कहा कि बुधवार को राज्य की 600 से अधिक मंडियों में धान आया, जिसमें से 425 मंडियों में खरीद हुई। हालांकि, नमी और गुणवत्ता को लेकर किसानों की कुछ शिकायतें हैं, लेकिन खरीद नियमों के अनुसार की जा रही है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_6707af5f7bcdd.jpg" alt="" width="686" height="436" /><br /><em>कुरुक्षेत्र में अनाज मंडी के बारह धान की ढेरी</em></p>
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<p>हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि राज्य सरकार के आश्वासन के बाद मिलर्स ने धान का उठान शुरू कर दिया है। लेकिन मिलर्स की कई मांगें हैं, जिन पर अभी सरकार से सहमति नहीं बन पाई है। उन्होंने कहा कि मिलर्स चाहते हैं कि इन मांगों का जल्दी समाधान हो, ताकि खरीद सही तरीके से हो सके और मिलर्स भी धान की मिलिंग कर सकें।</p>
<p>हरियाणा के जिंद जिले के युवा किसान नेता <strong>आशोक धनोदा</strong> ने बताया कि राज्य में धान की सरकारी खरीद 27 सितंबर से शुरू है। रोजाना हजारों टन धान मंडियों में पहुंच रहा है, लेकिन अभी केवल 10 से 15 प्रतिशत ही खरीद हो रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव के चलते भी खरीद प्रक्रिया पर असर पड़ा और खरीद धीमी रही। लेकिन अब इसमें तेजी आई है। कई मंडियों में खरीद हो रही है, लेकिन उठान नहीं हो रहा, जिससे किसानों का धान खुले में पड़ा है। उन्होंने कहा कि बुधवार को हुई बारिश से कुरुक्षेत्र मंडी में खुले में पड़ा धान पानी में बह गया। उन्होंने कहा कि मंडियों में धान रखने के लिए जगह नहीं है, इसलिए किसान सड़कों पर धान की ढेर लगा रहे हैं। अब जब चुनाव खत्म हो गए हैं, तो उम्मीद है कि अगले 3-4 दिनों में धान की खरीद सही से होगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_6707b016a2790.jpg" alt="" width="691" height="440" /><br /><em>अनाज मंडी में भीगा खुले में पड़ा धान</em></p>
<p>गौरतलब है कि हरियाणा में पहले धान की खरीद 23 सितंबर से होनी थी, लेकिन सरकार ने अचानक तारीख बदलकर 1 अक्टूबर कर दी। जब किसान मंडियों में पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि खरीद की तारीख बढ़ा दी गई है। धान खरीद में हो रही देरी को लेकर किसानों ने अनाज मंडियों के बाहर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिए। जिसके बाद सरकार को तारिख बदलनी पड़ी। 27 सितंबर से धान की खरीद शुरू तो हुई, लेकिन खरीददार न मिलने और मिलर्स की हड़ताल चलते किसानों को एक बार फिर परेशान होना पड़ा। इस दौरान हरियाणा में विधानसभा चुनाव के चलते भी खरीद धीमी रही। लेकिन, चुनाव खत्म होने के बाद भी किसान खरीद को लेकर परेशान नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर पंजाब के किसान भी धीमी खरीद की बात कह रहे हैं।&nbsp; &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब-हरियाणा में धान की धीमी खरीद बनी परेशानी, सड़कों पर ढ़ेरी लगाने को मजबूर किसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान राज्य सहकारी बैंक में 450 से अधिक पदों पर भर्ती, इनके लिए 20 फीसदी पद आरक्षित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/recruitment-for-more-than-450-posts-in-rajasthan-state-cooperative-bank.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 10 Oct 2024 12:50:53 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/recruitment-for-more-than-450-posts-in-rajasthan-state-cooperative-bank.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान के 29 जिला केन्द्रीय सहकारी बैंकों और राजस्थान राज्य सहकारी बैंक में 450 से अधिक पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक ने बुधवार को कहा कि इन सहकारी बैंकों में बैंकिंग सहायक, प्रबंधक, वरिष्ठ प्रबंधक और कंप्यूटर प्रोग्रामर के पदों पर भर्ती होगी, ताकि बैंकों के कार्य निष्पादन में जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p>मंत्री ने कहा कि ग्राम सेवा सहकारी समितियों में काम कर रहे व्यवस्थापकों के लिए जिला केन्द्रीय सहकारी बैंकों में बैंकिंग सहायक के पदों में 20 प्रतिशत पद आरक्षित किए गए हैं, ताकि जमीनी स्तर पर काम कर रहे इन व्यवस्थापकों के अनुभव का लाभ लिया जा सके। इसके लिए नियम भी जारी कर दिए गए हैं।</p>
<p>सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंकों में 299 पदों पर बैंकिंग सहायक, 92 पदों पर प्रबंधक और 7 पदों पर कंप्यूटर प्रोग्रामर की भर्ती के प्रस्ताव पहले ही प्राप्त हो चुके हैं। वहीं, राजस्थान राज्य सहकारी बैंक में 46 पदों पर बैंकिंग सहायक, 7 पदों पर प्रबंधक और 5 पदों पर वरिष्ठ प्रबंधक के पदों की भर्ती की जाएगी। सभी बैंकों से रिक्त पदों की अद्यतन जानकारी जुटाई जा रही है, और सहकारी भर्ती बोर्ड के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान राज्य सहकारी बैंक में 450 से अधिक पदों पर भर्ती, इनके लिए 20 फीसदी पद आरक्षित ]]></media:description>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में नकली उर्वरकों के खिलाफ छापेमारी, डीएपी के 314 बैग जब्त]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/314-bags-of-fake-dap-seized-in-rajasthan-agriculture-department-took-action-under-special-campaign.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 09 Oct 2024 12:19:41 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/314-bags-of-fake-dap-seized-in-rajasthan-agriculture-department-took-action-under-special-campaign.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान में आगामी रबी सीजन के लिए उर्वरकों की मांग तेजी से बढ़ गई है। इस बढ़ती मांग के चलते राज्य में उर्वरकों की कालाबाजारी और नकली उर्वरकों का व्यापार भी धड़ल्ले से चल रहा है। सरकारी अभियान और कार्रवाई के बावजूद नकली और घटिया उर्वरकों की बिक्री के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।</p>
<p>किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली खाद और बीज उपलब्ध कराने के लिए राजस्थान कृषि विभाग इन दिनों विशेष अभियान चला रहा है। इस अभियान के तहत, सोमवार को अलवर जिले में कृषि विभाग के&nbsp; अधिकारियों ने बड़ी कार्रवाई की। कृषि विभाग की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अधिकारियों ने झाडोली गांव के निवासी आस मोहम्मद के घर से 84 बैग नकली डीएपी खाद (इफको मार्का) और 230 बैग बिना मार्का वाले उर्वरक बरामद किए। इसके अलावा 15 खाली बैग इफको मार्का और 60 खाली बैग बिना मार्का भी जब्त किए गए।&nbsp;</p>
<p>सभी नकली उर्वरकों के नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। आस मोहम्मद के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत मामला दर्ज किया गया है।</p>
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<p>कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि अगर कोई व्यक्ति गांव में आकर बिना इजाजत उर्वरक बेचता है, तो ये नकली हो सकते हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहें और अगर ऐसा हो तो तुरंत अपने कृषि पर्यवेक्षक, सहायक कृषि अधिकारी या संयुक्त निदेशक कृषि को इसकी सूचना दें।</p>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में नकली उर्वरकों के खिलाफ छापेमारी, डीएपी के 314 बैग जब्त ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बकाया गन्ना भुगतान को लेकर शामली में किसानों ने किया हाइवे जाम, कलेक्ट्रेट का घेराव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-protest-in-shamli-over-pending-sugarcane-payments.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 07 Oct 2024 18:51:15 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-protest-in-shamli-over-pending-sugarcane-payments.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>- शामली से आशीष कुमार</strong></em></p>
<p>उत्तर प्रदेश के शामली में सर शादीलाल अपर दोआब शुगर मिल परिसर में पिछले एक हफ्ते से धरने पर बैठे गन्ना किसानों ने सोमवार को पानीपत-खटीमा हाईवे जाम कर दिया। चीनी मिल पर पेराई सीजन 2022-23 का 188 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया है। इस बकाया भुगतान की मांग पर कोई नतीजा नहीं निकलने पर किसानों ने सोमवार को शामली कलेक्ट्रेट की ओर कूच करने का फैसला लिया। सैकड़ों की संख्या में किसान धरना स्थल से कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। जानकारी मिलते ही पुलिस ने कलेक्ट्रेट के बाहर बैरिकेड लगा दिए और किसानों को अंदर घुसने नहीं दिया गया। गुस्साए किसानों ने कलेक्ट्रेट के सामने पानीपत-खटीमा हाईवे पर जाम लगा दिया, जिससे वहां वाहनों की लंबी कतार लग गईं। किसान देर शाम 9 बजे तक हाईवे पर जमे थे।&nbsp;</p>
<p>गन्ना किसान पेराई सीजन 2022-23 का शामली की सर शादीलाल शुगर मिल पर बकाया का पूरा भुगतान तुरंत करने की मांग रहे हैं। इस मांग को लेकर किसान पिछले एक हफ्ते से चीनी मिल परिसर मेंं धरना दे रहे हैं। बकाया भुगतान को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच अब तक कई बार वार्ता हो चुकी की, लेकिन अभी तक किसानों को समस्या का हल नहीं निकल पाया है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_6703e18d49b96.jpg" alt="" width="588" height="374" /><br /><em>शामली कलेक्ट्रेट के बारह किसानों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाते पुलिस कर्मी</em></p>
<p>देश की सबसे पुरानी चीनी मिलों में शुमार शामली स्थित सर शादीलाल शुगर मिल पर किसानों का वर्ष 2022-2023 का करीब 213 करोड रुपए बकाया था। इसके साथ ही पिछले पेराई सीजन 2023-2024 के शुरू में भी इस मांग को लेकर किसानों ने धरना दिया था और उसके चलते चीनी मिल में देरी से पेराई शुरू हो सकी थी। वहीं 2023-24 सीजन का भुगतान चीनी मिल ने अगस्त माह में पूरा कर दिया है। लेकिन 2022-23 का बकाया बरकरार है। सितंबर में इस मुद्दे पर चीनी मिल प्रबंधन और किसानों के बीच स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर यह भुगतान चार किस्तों में देने पर सहमति बनी थी। जिसकी 25 करोड़ रुपये की पहली किस्त का भुगतान किसानों को सितंबर के तीसरे सप्ताह में हो गया है। लेकिन तय भुगतान फार्मूला को चीनी मिल द्वारा लागू नहीं किये जाने का आरोप किसान लगा रहे हैं। जिसके मुताबिक अक्तूबर में सारा भुगतान होना था। मिल द्वारा पहली किस्त के बाद भुगतान रोक दिया गया है और उसके चलते चीनी मिल पर 188 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान बकाया है।</p>
<p>शामली सर शादीलाल अपर दोआब चीनी मिल पिछले कई साल से वित्तीय संकट से गुजर रही थी। जिसके चलते इसे त्रिवेणी समूह ने खरीद लिया है। कंपनी ने पहले मिल के एक साझीदार से इक्विटी खरीदी, उसके बाद ओपन ऑफर निकाला और अब इसका प्रबंधन त्रिवेणी समूह के पास है। आंदोलनरत किसान संजीव शास्त्री का कहना है कि&nbsp; इस मालिकाना बदलाव को किसान एक सकारात्मक रूप में देख रहे थे और उन्हें उम्मीद थी कि इस बड़े समूह द्वारा मिल को खऱीदे जाने के बाद उनका भुगतान समय पर हो सकेगा। लेकिन अब वह निराश हैं।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_6703e19c3d203.jpg" alt="" width="595" height="378" /><br /><em>हाईव पर जाम लगाकर प्रदर्शन करते किसान</em></p>
<p>समय पर भुगतान नहीं होने पर किसानों ने एक बार फिर आंदोलन शुरू किया और शुगर मिल के अंदर धरना दे दिया। किसानों ने प्रशासन को सोमवार दोपहर 2 बजे तक अल्टीमेटम दिया था। जिसके बाद किसानों ने शामली कलेक्ट्रेट की तालाबंदी का घोषणा कर दी। जब किसान कलेक्ट्रेट पहुंचकर तालाबंदी करने की कोशिश करने लगे, तो प्रशासन ने उन्हें रोक दिया और भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। इसके बाद किसानों ने कलेक्ट्रेट के बाहर हंगामा किया और हाईवे जाम लगा दिया। किसान नेताओं की मांग है कि शुगर मिल पर 188 करोड़ का बकाया भुगतान किया जाए, तब वे अपना आंदोलन खत्म कर देंगे। किसानों के हाईवे जाम करने से वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बकाया गन्ना भुगतान को लेकर शामली में किसानों ने किया हाइवे जाम, कलेक्ट्रेट का घेराव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

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        <title><![CDATA[पंजाब में शुरू होगी धान की खरीद, आढ़तियों और सरकार के बीच बनी सहमति, हड़ताल खत्म]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/paddy-procurement-will-begin-in-punjab-strike-of-the-commission-agents-ends-after-meeting-with-the-cm-bhagwant-mann.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 07 Oct 2024 16:56:12 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/paddy-procurement-will-begin-in-punjab-strike-of-the-commission-agents-ends-after-meeting-with-the-cm-bhagwant-mann.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में धान खरीद को लेकर सरकार और आढ़तियों के बीच सहमति बन गई है। अब जल्द ही राज्य में धान की सरकारी खरीद शुरू हो पाएगी। सोमवार को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री भगवंत मान और आढ़ती एसोसिएशन के बीच बैठक हुई, जिसमें सरकार के आश्वासन के बाद आढ़तियों ने हड़ताल खत्म करने पर हामी भरी। बैठक में आढ़तियों के सभी मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें ढाई प्रतिशत कमीशन (आढ़त) का मुद्दा भी शामिल था। आढ़तियों का कहना है कि ढाई रुपये कमीशन काफी कम है, जबकि महंगाई काफी बढ़ गई है। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी सभी मांगों को जल्द पूरा किया जाएगा। &nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि आढ़तियों की मांगों को जल्द केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आढ़तियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि धान की खरीद बिना किसी रुकावट के की जाएगी। अगर आढ़तियों को कोई परेशानी होगी, तो पंजाब सरकार उसका समाधान करेगी।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद आढ़तियों ने हड़ताल खत्म कर दी है। बैठक में आढ़तियों की मांगों पर चर्चा हुई, और मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि 2.50 प्रतिशत कमीशन और बाकी मांगें केंद्र के सामने रखी जाएंगी। अगर जरूरत पड़ी, तो पंजाब सरकार खुद इस कमीशन का भुगतान करेगी। अब धान की खरीद से जुड़ी सभी समस्याओं का हल हो गया है, और आढ़ती फसल की ढुलाई के लिए तैयार हैं।</p>
<p>पंजाब में धान की सरकारी खरीद वैसे तो 1 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है, लेकिन राइस मिलर्स और आढ़तियों की हड़ताल के चलते राज्य में धान की खरीद सुचारू रूप से नहीं हो पा रही थी। <span>धान मिलिंग का रेट, जगह की कमी सहित अन्य मांगों के चलते राइस मिलर्स ने धान उठाने से इंकार कर दिया था। </span>हालांकि, 5 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ हुई बैठक के बाद राइस मिलर्स ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी थी।</p>
<p>राइस मिलर्स के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा था कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के समक्ष जगह की कमी का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद केंद्र सरकार दिसंबर 2024 तक राज्य में 40 लाख टन जगह और मार्च 2025 तक 90 लाख टन जगह खाली करने पर सहमति जताई है। इससे राज्य में अनाज स्टोर करने के लिए जगह की कमी नहीं होगी।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_6703c1ff8a052.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में शुरू होगी धान की खरीद, आढ़तियों और सरकार के बीच बनी सहमति, हड़ताल खत्म ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिल्ली&amp;#45;एनसीआर में 65 रुपये के रेट पर टमाटर की बिक्री शुरू, इन स्थानों से खरीद सकेंगे उपभोक्ता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/tomato-sale-starts-in-delhi-ncr-at-the-rate-of-rs-65-per-kg-consumers-can-buy-from-these-places.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 07 Oct 2024 15:41:56 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/tomato-sale-starts-in-delhi-ncr-at-the-rate-of-rs-65-per-kg-consumers-can-buy-from-these-places.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दिल्ली-एनसीआर में रियारती दर पर प्याज की बिक्री के बाद अब टमाटर की बिक्री भी शुरू हो गई है। टमाटर की बढ़ती कीमतों को से उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) ने सोमवार से रियायती दरों पर टमाटर की बिक्री शुरू कर दी है। उपभोक्ताओं को 65 रुपये प्रति किलोग्राम के रेट पर टमाटर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।&nbsp;उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने सोमवार को दिल्ली में 65 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से टमाटर बेचने वाली एनसीसीएफ की वैन को हरी झंडी दिखाई।</p>
<p>मंडियों में लगातार अच्छी मात्रा में आवक के बावजूद हाल के हफ्तों में टमाटर की खुदरा कीमत में अनुचित वृद्धि हुई है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में भारी बारिश और उच्च आर्द्रता के कारण टमाटर फसल को नुकसान पहुंचा है। साथ ही गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है। सप्लाई बाधित होने से टमाटर की कीमतों में तेज उछाल आया है। देश में फिलहाल टमाटर की मौजूदा औसत खुदरा कीमतें 70 से 90 रुपये किलोग्राम के बीच हैं। जबकि, एक महीने पहले टमाटर 40 से 60 रुपये किलो ग्राम में बिक रहा था।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">उपभोक्ताओं के लिए 65 रुपये प्रति किलो की दर से सस्ते टमाटर NCCF के माध्यम से 7 अक्टूबर, सोमवार से उपलब्ध होंगे। <a href="https://twitter.com/hashtag/PriceStablisation?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#PriceStablisation</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/TomatoesPrices?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#TomatoesPrices</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/NCCF?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#NCCF</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/DelhiNCR?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#DelhiNCR</a> <a href="https://t.co/QeQiD2mmGB">pic.twitter.com/QeQiD2mmGB</a></p>
&mdash; Consumer Affairs (@jagograhakjago) <a href="https://twitter.com/jagograhakjago/status/1842905826337386522?ref_src=twsrc%5Etfw">October 6, 2024</a></blockquote>
<p><span>
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</span></p>
<p>देश के कई शहरों में टमाटर का भाव 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। ऐसे में उपभोक्ताओं को सस्ता टमाटर उपलब्ध कराने के लिए एनसीसीएफ ने यह कदम उठाया है। पिछले साल भी देश में टमाटर की कीमतें बढ़ी थी। उस समय भाव 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था। जिसके बाद सरकार को हस्तक्षेप कर सस्ती दरों पर टमाटर बिकवाना पड़ा था।</p>
<p>मंत्रालय की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञपति के अनुसार, एनसीसीएफ ने मंडियों से सीधे टमाटर खरीदकर और उन्हें 65 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बेचकर बाजार में हस्तक्षेप शुरू किया है। यह हस्तक्षेप उपभोक्ताओं को टमाटर की कीमतों में हाल ही में हुई वृद्धि से बचाने और बिचौलियों को होने वाले अप्रत्याशित लाभ को रोकने के लिए किया गया है। एनसीसीएफ देश भर के प्रमुख शहरों में खुदरा उपभोक्ताओं को सरकारी बफर से 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्याज भी बेच रहा है।</p>
<p><strong>दिल्ली-एनसीआर में इन स्थानों पर मिलेगा सस्ता टमाटर&nbsp;</strong></p>
<p>दिल्ली-एनसीआर में एनसीसीएफ रिटेल स्टोर्स और मोबाइल वैन के जरिए टमाटरों की बिक्री कर रहा है। एनसीसीएफ के तीन रिटेल स्टोर्स राजीव चौक, पटेल चौक मेट्रो स्टेशन और नेहरू प्लेस पर उपभोक्ता टमाटर खरीद सकते हैं। मोबाइल वैन से टमाटर की बिक्री साउथ एक्सटेंशन, सीजीओ, कृषि भवन गेट नंबर-1, एनसीयूआई कॉम्प्लेक्स, द्वारका सेक्टर 1, रोहिणी सेक्टर 2, पार्लियामेंट स्ट्रीट, आरके पुरम सेक्टर 10, जसोला, काका नगर, यमुना विहार-सी ब्लॉक, मॉडल टाउन, प्रीत विहार, आईएनए मार्केट, महरौली, मोती नगर, काली बाड़ी, नजफगढ़, मायापुरी, लोधी कॉलोनी, नेहरू प्लेस, राजीव चौक, मेट्रो स्टेशन, पटेल चौक, मेट्रो स्टेशन, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, मुनिरिका, नांगल राया, दौलाकुआं, करोल बाग, राजौरी गार्डन, मालवीय नगर, साकेत, घिटोरनी, सर्वप्रिया विहार, हरकेश नगर, कालका जी, सादिक नगर, मॉडर्न टाउन, चांदनी चौक, आईटीओ, बदरपुर बॉर्डर, उत्तम नगर ओखला फेज-2, कड़कड़डूमा, शास्त्री पार्क, किदवई नगर फेज-1, कश्मीरी गेट, दरियागंज, शालीमार बाग, शाहदरा और दिलशाद गार्डन</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिल्ली-एनसीआर में 65 रुपये के रेट पर टमाटर की बिक्री शुरू, इन स्थानों से खरीद सकेंगे उपभोक्ता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में &amp;apos;फसल अवशेष प्रबंधन ऋण योजना&amp;apos; शुरू, मशीनों पर मिलेगी 80 फीसदी तक सब्सिडी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/crop-residue-management-loan-scheme-started-in-punjab-up-to-80-percent-subsidy-on-machines.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 07 Oct 2024 13:31:08 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/crop-residue-management-loan-scheme-started-in-punjab-up-to-80-percent-subsidy-on-machines.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने के मामले सामने आने लगे हैं। राज्य में पराली जलाने पर प्रतिबंध के बाद भी राज्य कृषि विभाग को पराली जलाने की शिकायतें मिल रही हैं। किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए पंजाब सरकार ने 'फसल अवशेष प्रबंधन ऋण योजना' शुरु की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार को इस योजना की शुरुआत की, जिसके तहत किसान पराली प्रबंधन के लिए सहकारी बैंकों से लोन ले सकेंगे। साथ ही यह मशीनें और कृषि उपकरण किसानों को 50 से 80 फीसदी तक सब्सिडी पर दिए जाएंगे। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि किसान अब फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सहकारी बैंकों से आसानी से ऋण (लोन) ले सकते हैं। यह योजना राज्य के सभी सहकारी बैंकों की 802 शाखाओं में शुरू की गई है। लोन चुकाने की अवधि 5 वर्ष होगी और इसे 10 अर्धवार्षिक किस्तों में भी चुकाया जा सकेगा। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।</p>
<p>माने कहा कि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां (पीएसी), कॉमन हायरिंग सेंटर (सीएचसी) या अन्य संस्थाएं योजना के तहत कृषि उपकरणों की खरीद पर 80 फीसदी सब्सिडी का लाभ उठा सकती हैं।&nbsp;इसके अलावा, किसान बेलर और सुपरसीडर जैसी मशीनों पर 50 फीसदी तक सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं। इस योजना का उद्देश्य किसानों को पराली जलाने की बजाय वैकल्पिक प्रबंधन के तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की अच्छी नीतियों के चलते पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने के मामलों में 72 फीसदी की कमी आई है। सरकार किसानों को जागरूक कर रही है और उन्हें पराली प्रबंधन के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध करा रही है, ताकि राज्य का पर्यावरण स्वच्छ और सुरक्षित रह सके।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में 'फसल अवशेष प्रबंधन ऋण योजना' शुरू, मशीनों पर मिलेगी 80 फीसदी तक सब्सिडी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एग्जिट पोलः हरियाणा में 10 साल बाद होगी कांग्रेस की वापसी, जम्मू&amp;#45;कश्मीर में कांग्रेस&amp;#45;एनसी गठबंधन को बढ़त]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-exit-poll-congress-will-return-to-power-after-10-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 05 Oct 2024 19:11:38 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-exit-poll-congress-will-return-to-power-after-10-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में 10 साल बाद कांग्रेस पार्टी की सरकार बनती दिख रही है। शनिवार को मतदान के बाद जारी विभिन्न एग्जिट पोल में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत के साथ 54 से 62 सीटें मिलने तक का अनुमान जताया गया है। राज्य की 90 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 46 सीटें चाहिए। वोटों की गिनती 8 अक्तूबर को होगी। यहां कुल 1031 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें 101 महिलाएं और 464 निर्दलीय हैं।&nbsp;</p>
<p>जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के गठबंधन को बहुमत मिल सकता है। अलग-अलग एग्जिट पोल में राज्य की 90 सीटों में से कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस को 31 से 48 सीटें तक मिलने की संभावना जताई गई है। भाजपा गठबंधन (एनडीए) को 20 से 32 सीटें तक मिलने की उम्मीद है। यहां भी बहुमत के लिए 46 सीटों की जरूरत है।</p>
<p>ध्रुव रिसर्च के मुताबिक हरियाणा में कांग्रेस को 90 में से 50 से 64 सीटें और भाजपा को 27 सीटें मिल सकती हैं। पीपुल्स पल्स के मुताबिक कांग्रेस को 49 से 61 सीटें, भाजपा को 20 से 32, इनेलो-बसपा को 2 से 3 और अन्य को 3 से 5 सीटें मिल सकती हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, कांग्रेस को 55 से 62 सीटें, भाजपा को 18 से 24 सीटें, इनेलो को 3 से 6 सीटें, जेजेपी को 0 से 3 सीटें और अन्य को 2 से 5 सीटें मिलने का अनुमान है।</p>
<p>रिपब्लिक-मैट्रिज के मुताबिक, कांग्रेस को 55 से 62, भाजपा को 18 से 24 और अन्य को 3 से 6 सीटें मिल सकती हैं। डेटाअंश और द रेड माइक के अनुसार, कांग्रेस को 50 से 55, भाजपा को 20 से 25, इनेलो को 3 से 5 और अन्य को 3 से 5 तक सीटें मिलने की संभावना है। सीएनएन 24 के मुताबिक, कांग्रेस को 59 सीटें, भाजपा को 21 और अन्य को 10 सीटें मिल सकती हैं। इंडिया टुडे-माई एक्सिस के मुताबिक, कांग्रेस को 59 सीटें, भाजपा को 21 और अन्य को 2 से 6 सीटें मिल सकती हैं। न्यूज-18 के अनुसार, हरियाणा में कांग्रेस को 59, भाजपा को 21, इनेलो को 4, जेजेपी को 2 सीटें मिलती दिख रही हैं।</p>
<p><strong>हरियाणा के पिछले एग्जिट पोल</strong></p>
<p>हरियाणा में वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में मतदान 15 अक्टूबर को हुआ था, और परिणाम चार दिन बाद घोषित किए गए थे। उस चुनाव में रिकॉर्ड 76.54 फीसदी मतदान हुआ था, जिसमें भाजपा ने 47 सीटों पर जीत हासिल की थी। उस साल अधिकांश एग्जिट पोल ने भाजपा की स्पष्ट जीत की भविष्यवाणी की थी। इंडिया टीवी-सी वोटर, एबीपी न्यूज-नीलसन, टाइम्स नाउ और न्यूज 24-चाणक्य ने भाजपा को 37 से 52 सीटें मिलने का अनुमान लगाया था। लेकिन 2019 के हरियाणा चुनाव में एग्जिट पोल उतने सटीक नहीं साबित हुए। तब भाजपा को 2014 की तुलना में सात कम, 40 सीटें मिलीं। एग्जिट पोल के अनुमानों में उसे 51 से 78 सीटें मिलने का दावा किया गया था। एबीपी न्यूज-सी वोटर ने सबसे अधिक 78 सीटों का अनुमान लगाया था। बहुमत के लिए 46 सीटों से कम होने के बावजूद, भाजपा ने जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के साथ गठबंधन कर और सात निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाई। मनोहर लाल खट्टर दोबारा मुख्यमंत्री बने और जेजेपी के दुष्यंत चौटाला उपमुख्यमंत्री बने।</p>
<p><strong>जम्मू-कश्मीर के पिछले एग्जिट पोल</strong></p>
<p>जम्मू-कश्मीर में इस बार लगभग एक दशक बाद विधानसभा चुनाव हुए हैं। यहां 18 सितंबर से 1 अक्टूबर 2024 के बीच तीन चरणों में मतदान हुए और कुल 63.45 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। यहां 2014 के विधानसभा चुनाव में सी-वोटर समेत कई एग्जिट पोल में भाजपा को 27 से 33 सीटें, कांग्रेस को 4 से 10 सीटें, नेशनल कॉन्फ्रेंस 8 से 14 सीटें औरर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) को 32 से 38 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। अंततः पीडीपी 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। भाजपा 25 सीटों के साथ दूसरे, नेशनल कॉन्फ्रेंस 15 सीटों के साथ तीसरे और कांग्रेस 12 सीटों के साथ चौथे स्थान पर रही।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एग्जिट पोलः हरियाणा में 10 साल बाद होगी कांग्रेस की वापसी, जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस-एनसी गठबंधन को बढ़त ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर शामली में किसानों का प्रदर्शन, रालोद पर भी साधा निशाना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-protest-continues-in-shamli-demanding-payment-of-sugarcane-dues-questions-raised-on-rld.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 05 Oct 2024 17:50:59 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-protest-continues-in-shamli-demanding-payment-of-sugarcane-dues-questions-raised-on-rld.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>- <em><strong>शामली से आशीष कुमार</strong></em></p>
<p>उत्तर प्रदेश के शामली स्थित अपर दोआब शुगर मिल पर किसान बकाया गन्ना भुगतान को लेकर कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। शनिवार को गुस्साए किसान उपलों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर चीनी मिल परिसर पहुंचे और आत्मदाह की चेतावनी दे डाली। इससे मिल प्रबंधन और पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया। किसानों ने बकाया भुगतान होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। गन्ना किसानों के आंदोलन को खाप चौधरियों ने भी समर्थन दिया है।</p>
<p>शामली शुगर मिल पर वर्ष 2022-23 का करीब 213 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया था जिसमें से 25 करोड़ रुपये की एक किस्त का भुगतान ही चीनी मिल ने किया है। पेराई सीजन 2023-24 सीजन का भुगतान अगस्त माह में ही पूरा हुआ था। इस शुगर मिल को त्रिवेणी समूह ने खरीद लिया है जिसने 2023-24 का भुगतान तो किया, लेकिन किसानों का वर्ष 2022-2023 का भुगतान अटका हुआ है। इसी को लेकर पिछले आठ दिनों से किसान मिल परिसर में धरना दे रहे हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_67013bf28236d.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>शुक्रवार को गठवाल खाप के थांबेदार (बहावड़ी) बाबा श्याम सिंह किसानों के धरने को समर्थन देने पहुंचे। उन्होंने केंद्रीय मंत्री और रालोद नेता जयंत चौधरी पर भी निशाना साधा। श्याम सिंह मलिक ने कहा कि जयंत चौधरी किसानों का बकाया भुगतान कराएं या फिर इस्तीफा देकर किसानों के साथ आएं। लोकदल खुद को किसानों की हितैषी पार्टी बताती है लेकिन आज उनके सत्ता में रहते हुए भी किसानों का बकाया भुगतान नहीं हो पा रहा है।</p>
<p>शामली विधान सभा सीट से लोक दल के विधायक प्रसन्न चौधरी को धरना स्थल पर दो दिन पहले किसानों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। धरना दे रहे किसानों का कहना है कि प्रसन्न चौधरी ने 2 सितंबर से चल रहे धऱने में 16 सितंबर को बकाया गन्ना भुगतान करने पर सहमति बनी थी जिसके तहत चार किस्तों में 2022-23 सीजन का भुगतान किया जाना था। इस समझौते की पहली किस्त 25 करोड़&nbsp; रुपये का ही भुगतान हुआ है। उसके बाद किसी भी किस्त का भुगतान नहीं हुआ है। अभी 2022-23 सीजन का 188 करोड़ रुपये का बकाया है। इस समझौते के समय स्थानीय शामली विधायक प्रसन्न चौधरी और कैराना सांसद इकरा हसन भी मौजूद थी।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>वहीं, मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने भुगतान को लेकर दो दिन का समय मांगा है। इस पर किसानों ने कहा कि वे दो दिन के बाद आगे की रणनीति बनाएंगे। जब तक बकाया गन्ना भुगतान नहीं होता है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। एडीएम संतोष कुमार सिंह ने कहा कि अगले दो दिन में शामली मिल को संचालित करने वाले त्रिवेणी समूह से बात कर किसानों की मांगों को रखा जाएगा।</p>
<p>करीब एक महीना पहले भी बकाया भुगतान को लेकर मिल प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ किसानों की वार्ता हुई थी। समझौते के अनुसार किस्तों में किसानों को भुगतान होना था। जिसमें से एक ही किस्त किसानों के खाते में भेजी गई, लेकिन बाकी बचा भुगतान नहीं हुआ। इसी को लेकर किसान कई दिनों से शामली की शुगर मिल में प्रदर्शन कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>चीनी मिल परिसर में चल रहे धरने में विनय पंवार भैंसवाल, जयवीर मलिक, सोराम सिंह, सतेंद्र पप्पू, चरण सिंह, नारायण सिंह, कृष्णपाल, अनिल बिटटू, सुभाष आर्य, सोमपाल सिंह, लक्ष्मण सिंह, सुरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।</p>
<p>&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर शामली में किसानों का प्रदर्शन, रालोद पर भी साधा निशाना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब के गोदामों से 40 लाख टन चावल शिफ्ट करेगा एफसीआई, मिलर्स की हड़ताल जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/fci-will-shift-40-lakh-tonnes-of-rice-from-punjab-warehouses-till-december-2024-there-will-be-no-problem-in-storage.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 05 Oct 2024 11:21:02 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/fci-will-shift-40-lakh-tonnes-of-rice-from-punjab-warehouses-till-december-2024-there-will-be-no-problem-in-storage.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) पंजाब के गोदामों से दिसंबर, 2024 तक लगभग 40 लाख टन चावल शिफ्ट करेगा। पंजाब में राइस मिलर्स की हड़ताल और चावल भंडारण के लिए आवश्यक स्थान सुनिश्चित करने की मांग को देखते हुए&nbsp;एफसीआई ने यह कदम उठाया है। दरअसल, राज्य के गादामों में नई उपज को रखने के लिए जगह की कमी और अन्य मांगों के चलते राज्य के राइस मिलर्स इन दिनों हड़ताल पर हैं। जिस वजह से राज्य में 1 अक्टूबर से शुरू हुई धान की खरीद प्रभावित हो रही है।&nbsp;</p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
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<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>राइस मिलर्स ने एफसीआई के पास चावल पहुंचाने के लिए जगह की कमी का मुद्दा राज्य सरकार के सामने उठाया था। पंजाब राइस इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत भूषण बिंटा के नेतृत्व में चावल मिलर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने पिछले महीने सितंबर में मुख्यमंत्री भगवंत मान और केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की थी। मिलर्स ने केंद्र सरकार से राज्य के गोदामों में चावल भंडारण के लिए बेहतर व्यवस्था की मांग की थी, ताकि खरीद सीजन में कोई परेशानी न हो। इस पर ध्यान देते हुए एफसीआई ने राज्य से 40 लाख टन चावल शिफ्ट करने का फैसला किया है।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p>पंजाब के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक ने कहा कि पंजाब सरकार धान के सीजन के मद्देनजर भंडारण के लिए पर्याप्त जगह सुनिश्चित करेगी। राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के कारण, भारतीय खाद्य निगम अक्टूबर के अंत तक पंजाब से 15 लाख टन चावल अन्य राज्यों में शिफ्ट करेगा। 20 ट्रेनों, 3 कंटेनरों और कुछ छोटे ट्रकों के माध्यम से इस काम को पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर, 2024 तक राज्य के गोदामों से लगभग 40 लाख टन चावल एकत्र किया जाएगा ताकि नई फसल के भंडारण के लिए आवश्यक स्थान प्रदान किया जा सके। उन्होंने कहा कि अगले साल मार्च तक अतिरिक्त भंडारण क्षमता स्थापित की जाएगी इससे अनाज को स्टोर करने के लिए जगह की कमी नहीं होगी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब के गोदामों से 40 लाख टन चावल शिफ्ट करेगा एफसीआई, मिलर्स की हड़ताल जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में धान, ज्वार और बाजरा की सरकारी खरीद के लिए 14 अक्टूबर तक होंगे पंजीकरण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/registration-date-for-purchase-of-paddy-jowar-and-millet-in-madhya-pradesh-extended-till-october-14.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 05 Oct 2024 10:25:18 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/registration-date-for-purchase-of-paddy-jowar-and-millet-in-madhya-pradesh-extended-till-october-14.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में खरीफ मार्केटिंग सीजन 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार और बाजरा की सरकारी खरीद के लिए किसान अब 14 अक्टूबर तक पंजीकरण कर पाएंगे। पहले पंजीकरण कराने की अंतिम तिथि 4 अक्टूबर थी, जिसे राज्य सरकार ने बढ़ा दिया है। किसानों की सुविधा के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है।</p>
<p>खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री की अगुवाई में किसानों के कल्याण के लिए लगातार नई योजनाएं और कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि हर किसान को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिले और उन्हें किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि तिथि बढ़ने से अधिक से अधिक किसान पंजीयन करवा सकेंगे और समर्थन मूल्य का लाभ उठा सकेंगे।</p>
<p>खाद्य मंत्री ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीकरण करा लें, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो। उन्होंने कहा कि किसान पंजीकरण की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। किसान स्वयं के मोबाईल से घर बैठे पंजीकरण कर सकेंगे। किसानों को पंजीकरण केन्द्रों में लाईन लगाकर पंजीकरण कराने की समस्या से मुक्ति मिलेगी।</p>
<p><strong>पंजीकरण की नि:शुल्क व्यवस्था</strong></p>
<p>किसानों के मोबाईल से पंजीकरण करने की सुविधा के अतिरिक्त अन्य व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और तहसील कार्यालयों में बने सुविधा केंद्रों पर पंजीकरण नि:शुल्क किया जा सकता है। इसके अलावा, सहकारी समितियों और सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीकरण केंद्रों पर और एमपी किसान ऐप के माध्यम से भी नि:शुल्क पंजीकरण हो सकता है।</p>
<p>सशुल्क पंजीकरण की सुविधा एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर, लोक सेवा केंद्र और निजी साइबर कैफे पर उपलब्ध है। इन केंद्रों पर पंजीकरण के लिए शुल्क 50 रुपये से अधिक नहीं होगा, जिसकी जानकारी कलेक्टर देंगे।&nbsp;पंजीकरण के लिए किसानों को अपनी भूमि के दस्तावेज, आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों की जांच करानी होगी। सिकमी, बटाईदार, कोटवार और वन पट्टाधारी किसानों का पंजीकरण केवल सहकारी समितियों द्वारा किया जाएगा, और इनका सत्यापन राजस्व विभाग करेगा।</p>
<p><strong>अपडेट रखें मोबाइल नंबर और बैंक खाता</strong></p>
<p>किसानों को अपनी उपज का भुगतान आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। अगर आधार लिंक खाते में समस्या आती है, तो पंजीकरण के समय दिए गए बैंक खाते में भुगतान किया जाएगा। किसान को पंजीकरण के समय बैंक खाता नंबर और IFSC कोड देना अनिवार्य होगा। निष्क्रिय बैंक खाते, संयुक्त खाते या फिनो, एयरटेल, पेटीएम जैसे बैंक खाते मान्य नहीं होंगे। किसानों को अपना आधार और बैंक खाता मोबाइल नंबर से लिंक कर उसे अपडेट रखना जरूरी है।</p>
<p><strong>आधार नंबर का वेरिफिकेशन</strong></p>
<p>पंजीकरण और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन जरूरी है। यह वेरिफिकेशन ओटीपी या बायोमेट्रिक डिवाइस के माध्यम से किया जा सकेगा। किसान का पंजीकरण तभी हो सकेगा जब भू-अभिलेख और आधार कार्ड पर दर्ज नाम एक जैसा हो। अगर नाम में कोई अंतर हो, तो सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में धान, ज्वार और बाजरा की सरकारी खरीद के लिए 14 अक्टूबर तक होंगे पंजीकरण ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[लखीमपुर खीरी कांड की बरसी पर कई जगह किसानों का रेल रोको प्रदर्शन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-punjab-haryana-stage-rail-roko-andolan-over-lakhimpur-kheri-incident-msp-law-and-other-demands.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 03 Oct 2024 18:55:59 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-punjab-haryana-stage-rail-roko-andolan-over-lakhimpur-kheri-incident-msp-law-and-other-demands.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>लखीमपुर खीरी कांड में जान गवाने वाले किसानों को न्याय, एमएसपी की कानूनी गारंटी सहित अन्य मांगों को लेकर गुरुवार को पंजाब और हरियाणा में विभिन्न किसान संगठनों ने 'रेल रोको' आंदोलन किया। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के आह्वान पर किसानों ने कई स्थानों पर दोपहर 12.30 से 2:50 बजे तक रेलवे ट्रैक जाम किए। जिससे ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई। इस दौरान काफी संख्या में महिलाएं भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं।</p>
<p>कई किसानों ने रेल-रोको आंदोलन के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर शेयर किए,जिसमें लखीमपुर खीरी कांड में जान गंवाने वाले किसानों के लिए न्याय की मांग की गई। इस दौरान किसानों ने अमृतसर, लुधियाना, होशियारपुर, अंबाला सहित अन्य स्थानों पर प्रदर्शन किया। हालांकि, दो बजे के बाद किसानों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया, जिसके बाद ट्रेनों की आवाजाही फिर से शुरू हो पाई।&nbsp;</p>
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<div class="result-streaming markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560">
<p lang="hi" dir="ltr">लखीमपुर_खीरी नरसंहार में शहीद हुए किसानों के लिए इन्साफ की ज़ंग जारी है,<br />अंबाला के गाँव मोहडा में BKU शहीद भगत सिंह का आज रेल चक्का जाम किया ।<br />आज 12.30 से 2.30 बजे तक रेल का चक्का जाम है। <a href="https://twitter.com/hashtag/FarmerProtest?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#FarmerProtest</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/justice4lakhimpurfarmer?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#justice4lakhimpurfarmer</a> <a href="https://t.co/ScASDjEJYa">pic.twitter.com/ScASDjEJYa</a></p>
&mdash; ashokdanoda (@ashokdanoda) <a href="https://twitter.com/ashokdanoda/status/1841759896192127465?ref_src=twsrc%5Etfw">October 3, 2024</a></blockquote>
<p><span>
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</span></p>
</div>
</div>
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</div>
<div class="absolute">
<div class="flex items-center justify-center">2021 में आज ही के दिन (3 अक्टूबर, 2021) तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करते समय उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। किसान संगठनों की मांग है कि लखीमपुर खीरी कांड के दोषियों को सजा दी जाए। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी किसान फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं।</div>
<div class="flex items-center justify-center"><br />किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) के संयोजक सरवन सिंह पंढेर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उनका किसी भी सरकार से कोई झगड़ा नहीं है और न ही वे किसी के विरोधी हैं। वे बस यही चाहते हैं कि किसानों की लंबित मांगें पूरी की जाएं। जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक किसानों का विरोध सत्तारूढ़ पार्टियों को सहना पड़ेगा।</div>
<div class="flex items-center justify-center"><br />इस दौरान उन्होंने भाजपा सांसद कंगना रनौत और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज कंगना और रवनीत बिट्टू लगातार किसानों के खिलाफ बोल रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले रवनीत बिट्टू किसानों की आवाज उठाते थे, लेकिन आज वे किसानों के खिलाफ बयान दे रहे हैं, और यह सब भाजपा के कहने पर कर रहे हैं। दूसरी ओर, कंगना रनौत बिना सोचे समझे किसानों पर बयान देती हैं।</div>
<div class="flex items-center justify-center"><br />पंढेर ने कहा कि सरकार एमएसपी की बात करती है लेकिन हरियाणा-पंजाब में किसानों से खरीद ही नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र और राज्य सरकारों ने समय रहते आढ़तियों और मजदूर यूनियन की मांगों को अमल नहीं किया, तो फिर किसान भी इस आंदोलन में शामिल होंगे और आढ़तियों और मजदूरों के साथ मिलकर हड़ताल में भाग लेंगे।</div>
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</article>
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</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ लखीमपुर खीरी कांड की बरसी पर कई जगह किसानों का रेल रोको प्रदर्शन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि सोलर पंप पर 2.6 लाख तक की सब्सिडी दे रही यूपी सरकार, ऐसे करें आवेदन ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-government-is-giving-subsidy-of-up-to-2.6-lakhs-on-solar-pump-apply-here.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 03 Oct 2024 16:30:26 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-government-is-giving-subsidy-of-up-to-2.6-lakhs-on-solar-pump-apply-here.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार आगामी रबी सीजन (2024-25) के मद्देनजर किसानों को सिंचाई के लिए सब्सिडी पर कृषि सोलर पंप मुहैया कराएगी। यह पंप प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम योजना) के तहत दिए जाएंगे। किसानों को सोलर पंप की कुल लागत का सिर्फ 40 फीसदी भुगतान करना होगा, जबकि 60 फीसदी राशि सरकार की ओर से सब्सिडी के रूप में दी जाएगी। किसानों को पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर यह सोलर पंप दिए जाएंगे। योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। किसान इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>कृषि सोलर पंप पर 2.5 लाख तक की सब्सिडी&nbsp;</strong></p>
<p>किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए 2 एचपी, 3 एचपी, 5 एचपी, 7.5 एचपी और 10 एचपी के सोलर पंप लगाने पर सब्सिडी मिलेगी। 2 एचपी डीसी और 2 एचपी एसी सरफेस पंप की कुल कीमत 1,71,716 रुपये है, जिसमें से सरकार 1.03 लाख रुपये की सब्सिडी देगी। किसान को सिर्फ 63,686 रुपये और 5 हजार रुपये टोकन के रूप में जमा करने होंगे।&nbsp;</p>
<p>इसी तरह, 2 एचपी डीसी सबमर्सिबल पंप की कीमत 1,74,541 रुपये है, जिस पर किसान को 1,04,725 रुपये की सब्सिडी मिलेगी और उसे 64,816 रुपये देने होंगे। 3 एचपी डीसी सबमर्सिबल पंप की कीमत 2,32,721 रुपये है, जिस पर 1,39,633 रुपये की सब्सिडी के बाद किसान को 88,088 रुपये देने होंगे। 3 एचपी एसी सबमर्सिबल पंप 87,178 रुपये, 5 एचपी एसी सबमर्सिबल पंप 1,25,999 रुपये, 7.5 एचपी एसी पंप 1,72,638 रुपये और 10 एचपी पंप 2,86,164 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। इन सभी पर 5 हजार रुपये टोकन राशि जमा करनी होगी।</p>
<p><b><strong>सोलर पंप के लिए</strong>&nbsp;ऐसे करें आवेदन</b></p>
<p>योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट <strong><a href="https://www.agriculture.up.gov.in/">www.agriculture.up.gov.in</a></strong> पर जाकर पंजीकरण करना होगा। किसान वेबसाइट पर "अनुदान पर सोलर पंप की बुकिंग करें" लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। योजना से जुड़ी शेष नियम एवं शर्तें विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध हैं। वहीं, जिन किसानों के टोकन 25 जून 2024 को कंफर्म हुए थे और जिन्हें 9 जुलाई 2024 तक अपनी राशि जमा करनी थी, लेकिन नहीं कर सके, उनके टोकन फिर से 10 अक्टूबर 2024 को कंफर्म किए जाएंगे। टोकन कंफर्म होने की जानकारी किसानों को उनके रजिस्टर्ड&nbsp;मोबाइल नंबर पर भेजी जाएगी।</p>
<p><strong>किसान हो सकते हैं ठगी का शिकार&nbsp;</strong></p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
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<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>कृषि विभाग ने किसानों को योजना के प्रति अलर्ट किया है। विभाग ने कहा है कि किसानों को सिर्फ मोबाइल पर मैसेज आने के बाद ही बाकी राशि जमा करनी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति फोन करके पैसे जमा करने को कहता है, तो उसकी बात पर ध्यान न दें, वरना ठगी का शिकार हो सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने जिले के उप कृषि निदेशक कार्यालय से संपर्क करें या विभाग की वेबसाइट पर जाएं।</p>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_66fe76b1e1b52.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि सोलर पंप पर 2.6 लाख तक की सब्सिडी दे रही यूपी सरकार, ऐसे करें आवेदन  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रबी सीजन के लिए आईएआरआई से प्राप्त करें गेहूं की उन्नत किस्मों के बीज, ऑनलाइन भी कर सकते हैं बुकिंग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/icar-to-distribute-improved-varieties-of-wheat-seeds-from-3-to-9-october-to-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 03 Oct 2024 11:58:50 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/icar-to-distribute-improved-varieties-of-wheat-seeds-from-3-to-9-october-to-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आगामी रबी सीजन (2024-25) को ध्यान में रखते हुए पूसा अनुसंधान, नई दिल्ली, किसानों के लिए गेहूं की उन्नत किस्मों के बीज उपलब्ध करवा रहा है। हर साल की तरह इस साल भी किसान भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा, आईसीएआर नई दिल्ली) में आकर बीज प्राप्त कर सकते हैं। यह बीज 3 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक उपलब्ध होंगे। देश के किसी भी राज्य के किसान यहां आकर इन बीजों को प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<p>किसानों के लिए इस बार गेहूं की आठ किस्मों के बीज उपलब्ध होंगे, जिसमें एचडी 3271, एचडी3298, एचडी3406, एचडी3226, एचडी3369, और एचडी3059 शामिल है। जिनका प्रत्येक 40 किलो का बैग 2000 रुपये में मिलेगा। इसके अलावा, नई किस्में एचडी 3385 और एचडी 3386 भी उपलब्ध हैं, जिनका 10 किलो का पैक 500 रुपये में दिया जाएगा। नई किस्मों के बीज प्रति किसान 10 किलो तक ही मिलेंगे, जबकि बाकी किस्मों का बीज भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं। यह बीज पहले-आओ, पहले-पाओ के आधार पर वितरित किया जाएगा।</p>
<p>किसानों की सुविधा के लिए ऑनलाइन बुकिंग की भी व्यवस्था की गई है। हालांकि, एचडी 3385 और एचडी 3386 की बुकिंग ऑनलाइन नहीं की जा सकती, बाकी सभी किस्मों के लिए किसान दिए गए लिंक पर जाकर बुकिंग कर सकते हैं: <strong><a href="https://pusabeej.iari.res.in/register.php">https://pusabeej.iari.res.in/register.php</a> <a href="https://pusabeej.iari.res.in/register.php">https://pusabeej.iari.res.in/register.php</a></strong>। बीज से संबंधित या किसी अन्य कृषि जानकारी के लिए किसान इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं: 01125841670, 01125841039, और टोल-फ्री नंबर 1800118989।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_66fe36b78ed68.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रबी सीजन के लिए आईएआरआई से प्राप्त करें गेहूं की उन्नत किस्मों के बीज, ऑनलाइन भी कर सकते हैं बुकिंग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में राइस मिलर्स और सरकार के बीच असहमति के चलते धान की खरीद प्रभावित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/paddy-procurement-affected-in-haryana-due-to-disagreement-between-rice-millers-and-government.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 02 Oct 2024 16:29:18 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/paddy-procurement-affected-in-haryana-due-to-disagreement-between-rice-millers-and-government.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में धान की सरकारी खरीद 27 सितंबर, 2024 से शुरू हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद राज्य की मंडियों में धान की खरीद सुचारू रूप से नहीं हो पा रही है। सरकार और राइस मिलर्स के बीच पीआर धान की खरीद पर सहमति न बनने के कारण किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राइस मिलर्स अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, जिससे खरीद प्रभावित हो रही है।प्रदेश में धान की कटाई का काम जोरों पर है। रोजाना हजारों टन धान मंडियों में पहुंच तो रहा है लेकिन किसानों को खरीददार नहीं मिल रहे हैं।</p>
<p>किसानों का कहना है कि जिन मंडियों में खरीद हो रही है वहां सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जा रही है। सरकारी एजेंसियां नाममात्र की खरीद कर रही हैं। वहीं जो फसल अब तक खरीदी गई है, वह भी मंडियों में ही पड़ी है। क्योंकि मिलर्स के हड़ताल पर होने से धान का उठान नहीं हो पा रहा है। मंडियों में जगह न होने के चलते किसान सड़कों पर ही धान डालने को मजबूर हैं। राज्य में यह सब विधानसभा चुनाव के बीच हो रहा है। 5 अक्टूबर को हरियाणा में वोटिंग होनी है।&nbsp;धान खरीद में आ रही दिक्कतों के चलते किसानों में काफी रोष है। जगह-जगह से किसानों के विरोध प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही हैं। कहीं किसान मंडियों में ताले जड़ रहे हैं तो कहीं ट्रैक्टरों में धान रखकर प्रदर्शन कर रहे हैं। अगले कुछ दिन भी अगर हालात ऐसे ही रहे तो <span>इसका असर चुनाव पर भी पड़ सकता है।&nbsp;</span></p>
<p>हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन के एक सदस्य और प्राइवेट मिलर ने नाम न छापने की शर्त पर <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि मिलर्स कि कई मांगें हैं, जिन पर अभी तक सरकार से सहमति नहीं बन पाई है। इसी वजह से मिलर्स ने अभी तक पीआर धान की मिलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। उन्होंने कहा कि मिलर्स एक नई मिलिंग पॉलिसी की मांग कर रहे हैं, क्योंकि मौजूदा पॉलिसी 30 साल पुरानी है। इतने सालों में बहुत कुछ बदल गया है, इसलिए पॉलिसी में भी बदलाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि मिलिंग के दौरान धान टूटने से उन्हें काफी नुकसान होता है, क्योंकि अब ज्यादातर किसान हाइब्रिड धान उगाते हैं, जिसमें टूटन ज्यादा होती है। इसीलिए मिलर्स चाहते हैं कि सरकार 100 किलो धान के बदले 60 किलो चावल लेने का नियम बनाए।</p>
<p>मिलर ने कहा कि धान की मिलिंग का रेट 30 साल से 10 रुपए प्रति क्विंटल चला आ रहा है, जबकि अब खर्चा काफी बढ़ चुका है। वे चाहते हैं कि इस रेट को संशोधित किया जाए और पिछले साल की बकाया राशि का भुगतान भी जल्द किया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक ये मांगें पूरी नहीं होतीं, मिलर्स पीआर धान की मिलिंग शुरू नहीं करेंगे।</p>
<p>कैथल जिले के किसान <strong>अनूप सिंह</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि वह एक हफ्ता पहले अपनी धान की फसल लेकर मंडी आए थे, लेकिन उन्हें खरीददार नहीं मिला। उन्होंने कहा कि धान मंडी लाते वक्त&nbsp; बारिश में भीग गई थी। अब फसल काली पड़ने लगी है और अंकुरित भी हो रही है। उन्होंने कहा कि वह इसे सूखा तो रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता की खरीद तक तक शुरू होगी।</p>
<p>जींद जिले की नरवाना मंडी के आढ़ती <strong>देवी दयाल शर्मा</strong> ने बताया कि मंडी में अभी तक धान की सरकारी खरीद शुरू नहीं हो पाई है। मिलर्स हड़ताल पर हैं और किसानों को धान बेचने के लिए खरीददार नहीं मिल रहे है। मिलर्स की हड़ताल के चलते किसान मंडियों में धान की ढेरी लगाने को मजबूर हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि हरियाणा में पहले धान की सरकारी खरीद 23 सितंबर से शुरू होनी थी, लेकिन सरकार ने अचानक तारीख बदलकर 1 अक्टूबर कर दी। जब किसान मंडियों में धान लेकर पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि खरीद की तारीख आगे बढ़ा दी गई है, जिसका किसानों ने विरोध किया। धान खरीद में हो रही देरी को लेकर किसानों ने अनाज मंडियों के बाहर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिए। जिसके बाद सरकार को तारिख बदलनी पड़ी। 27 सितंबर से धान की खरीद शुरू तो हुई, लेकिन खरीददार न मिलने और मिलर्स की हड़ताल चलते किसान एक बार फिर परेशान हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_66fd14036a264.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में राइस मिलर्स और सरकार के बीच असहमति के चलते धान की खरीद प्रभावित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छत्तीसगढ़ में 160 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य, 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से होगी खरीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/paddy-procurement-target-of-160-lakh-tonnes-in-chhattisgarh-purchase-rate-set-at-21-quintals-per-acre.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 01 Oct 2024 15:11:43 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/paddy-procurement-target-of-160-lakh-tonnes-in-chhattisgarh-purchase-rate-set-at-21-quintals-per-acre.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ सीजन 2024-25 के लिए 160 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य तय किया है। रायपुर में सोमवार को आयोजित कैबिनेट उप-समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसकी अध्यक्षता राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयालदास बघेल ने की। बैठक में यह तय किया गया कि राज्य के पंजीकृत किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से धान की खरीद की जाएगी, और सभी खरीद केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीनों की व्यवस्था की जाएगी। <span>केंद्र सरकार ने इस खरीफ सीजन के लिए सामान्य धान का एमएसपी 2300 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का एमएसपी 2320 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। हालांकि, छत्तीसगढ़ सरकार किसानों से </span>3100 रुपये के समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी करती है।</p>
<p>इसके अलावा जूट के बोरे की खरीद जूट कमिश्नर और जेम पोर्टल के माध्यम से की जाएगी ताकि धान खरीद प्रक्रिया को सरल और सुव्यवस्थित किया जा सके। वहीं, धान उठाव, कस्टम मिलिंग, केन्द्रीय पूल और छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम में चावल जमा करने और परिवहन पर भी चर्चा हुई। यह तय किया गया कि पिछले साल की तरह इस साल भी धान की खरीदी के साथ-साथ उठाव होगा और 31 मार्च तक इसे अनिवार्य रूप से पूरा किया जाएगा।</p>
<p><span>बैठक में राज्य स्थापना दिवस राज्योत्सव को ध्यान में रखते हुए धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू करने पर भी चर्चा हुई। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया जाएगा। पिछले सीजन में छत्तीसगढ़ ने समर्थन मूल्य पर रिकॉर्ड 144.92 लाख टन धान खरीदा था, और इस सीजन में यह आंकड़ा 160 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। </span><span>धान की खरीद 2,058 सहकारी समितियों और 2,739 धान खरीद केंद्रों के माध्यम से की जाएगी। खाद्य मंत्री ने अधिकारियों को </span>खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए सभी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। <span></span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x500_66fbc0dcd0c40.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ छत्तीसगढ़ में 160 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य, 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से होगी खरीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में बारिश से सोयाबीन और दलहल फसलों को भारी नुकसान, किसान बोले&amp;#45; मुआवजा दे सरकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/heavy-damage-to-soybean-and-pulse-crops-due-to-rain-in-madhya-pradesh-farmers-said-government-should-give-compensation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 01 Oct 2024 12:53:14 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/heavy-damage-to-soybean-and-pulse-crops-due-to-rain-in-madhya-pradesh-farmers-said-government-should-give-compensation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="6a81eb82-a54b-43f4-b163-ef93f9818cec" dir="auto" class="min-h-8 text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>मध्य प्रदेश में सोयाबीन की कम कीमतों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों की मेहनत पर बारिश ने पानी फेर दिया है। प्रदेश में हुई भारी बारिश के चलते किसानों की सोयाबीन और अन्य दलहन फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। जिससे कई किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि पहले वे सोयाबीन की कम कीमतों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन अब फसल ही नहीं बची वे क्या करेंगे? उन्हें चाहिए कि सरकार फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को उचित मुआवजा दे।&nbsp;</p>
<p>सितंबर के आखिरी हफ्ते में हुई भारी बारिश के चलते प्रदेश के कई जिलों में खरीफ की सोयाबीन, मूंग, उड़द और मक्का की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। बारिश इतनी हुई है कि खेत के खेत पानी में डूब गए हैं जबकि सोयाबीन किसान पहले ही पीला मोजेक और इल्ली जैसे रोग से परेशान थे। वहीं अब बारिश ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है।&nbsp;</p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="ab6ff37d-679a-47f7-84d1-d2826ab958ea" dir="auto" class="min-h-8 text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>बारिश के चलते मध्य प्रदेश के ज्यादातर सोयाबीन उत्पादन वाले जिलों में फसलों को नुकसान हुआ है, लेकिन राजगढ़, धार, सिहोर, रायसेन, दमोह, देवास, मंदसौर और सागर जिलों में यह नुकसान 50 फीसदी से ज्यादा बताया जा रहा है। कई इलाकों में तो किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो गई है। वहीं, सोयाबीन का भाव 6000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग के साथ-साथ अब किसान संगठन फसलों के नुकसान के लिए मुआवजे की भी मांग कर रहे हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/10/image_750x_66fba5fe1ea50.jpg" alt="" width="619" height="394" /></p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p>मंदसौर जिले के गरोठ गांव के किसान <strong>राजेंद्र सिंह</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि उन्होंने 10 बीघा में सोयाबीन की फसल लगाई थी, लेकिन बारिश के कारण पूरे खेत में पानी भर गया। इससे वे फसल की कटाई नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेत में इतना कीचड़ है कि कटाई करना मुश्किल हो रहा है और मशीन भी खेत तक नहीं पहुंच पा रही है, जिससे फसल सड़ने लगी है। अगर कोई किसान किसी तरह कटाई कर भी लेता है, तो मंडी में उसे सही दाम नहीं मिल रहा। व्यापारी नमी के कारण 4000 रुपये का सोयाबीन 2000 रुपये में खरीद रहे हैं। ऐसे में किसान क्या करे?</p>
<p>सीहोर जिले के झालकी गांव के किसान <strong>जगदीश वर्मा</strong> ने बताया कि उन्होंने सोयाबीन की कटाई शुरू ही की थी कि बारिश आ गई, जिससे उन्हें कटाई रोकनी पड़ी। जिन खेतों में कटाई हो चुकी थी, वहां भी पानी भर गया, जिससे फसल खराब हो गई। उन्होंने कहा कि लगातार बारिश की वजह से कटाई में देरी हो रही है। अगर समय पर कटाई नहीं हुई तो फसल खेत में ही सड़ जाएगी।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
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<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>किसान उत्पादक संगठनों से जुड़े मध्य भारत कंसोर्टियम ऑफ एफपीओ के सीईओ <strong>योगेश द्विवेदी</strong> ने <strong>रूरल वॉयस </strong>बताया कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश के कारण सोयाबीन, मूंग, मक्का और उड़द की फसलों को नुकसान पहुंचा है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान सोयाबीन की फसल को हुआ है। उन्होंने कहा कि कई जिलों में सोयाबीन की फसल को 50 फीसदी से ज्यादा नुकसान हुआ है और कई इलाकों में तो किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो गई है। जहां कटाई हो चुकी थी, वहां भी खेतों में रखी फसल पानी में डूब गई। जिससे फसल खराब होनी शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि खेतों में पानी भरने से कटाई तो प्रभावित होगी ही साथ ही उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। क्योंकि बारिश के पानी के चलते खेत में खड़ी फसल गलना शुरू हो जाएगी। जिससे सोयाबीन के दाने न बेचने लायक रहेंगे और न अगले सीजन में बोने लायक।&nbsp; &nbsp;</p>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में बारिश से सोयाबीन और दलहल फसलों को भारी नुकसान, किसान बोले- मुआवजा दे सरकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र सरकार ने 49 लाख कपास और सोयाबीन किसानों को जारी की 2398 करोड़ रुपये की सब्सिडी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-government-released-subsidy-of-rs-2398-crore-to-49-lakh-soyabean-and-cotton-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 30 Sep 2024 16:54:30 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-government-released-subsidy-of-rs-2398-crore-to-49-lakh-soyabean-and-cotton-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र सरकार ने कपास और सोयाबीन उत्पादक किसानों को खरीफ सीजन 2023 के लिए सब्सिडी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सोमवार को राज्य कैबिनेट की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार ने सब्सिडी वितरण के पहले चरण की शुरूआत की। सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) से 49.5 लाख पंजीकृत किसानों के खातों में 2,398.93 करोड़ रुपये जमा किए।&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र के कृषि मंत्री धनंजय मुंडे ने कहा कि 96 लाख किसान इस योजना के लाभ के लिए पात्र हैं। आधार वेरिफिकेशन और अन्य प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद चरणबद्ध तरीके से बाकी किसानों को भी सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा।</p>
<p>पिछले साल खरीफ सीजन में सोयाबीन और कपास की फसल को काफी नुकसान हुआ था। जिसके बाद सरकार ने प्रति हेक्टेयर 5,000 रुपये की सब्सिडी देने की घोषणा की थी। एक किसान सिर्फ दो हेक्टेयर तक ही इस सब्सिडी का लाभ उठा सकता है। कृषि में बढ़ती इनपुट लागत और अप्रत्याशित मौसम के कारण जूझ रहे किसानों को वित्तीय राहत प्रदान करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। &nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र में नवंबर से पहले विधानसभा चुनाव होने हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान प्याज किसानों की नाराजगी के चलते सत्तारूढ़ दलों को इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ा था। वहीं, अब विधानसभा चुनाव में ऐसी स्थिति न बने इसलिए सरकार सोयाबीन और कपास उत्पादक किसानों को नाराज नहीं करना चाहती।&nbsp;</p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="de6f37fe-a3ad-4cac-89fe-c6a46643fd7e" dir="auto" class="min-h-8 text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>महाराष्ट्र में प्याज के अलावा सोयाबीन और कपास की खेती बड़े पैमाने पर होती है।&nbsp;इन फसलों की कम कीमतों के कारण किसान इन दिनों काफी परेशान हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र दौरे के दौरान कहा था कि इस सीजन में कपास और सोयाबीन की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाएगी। वहीं केंद्र सरकार ने कच्चे खाद्य तेल पर आयात शुल्क भी बढ़ा दिया है, जिससे सोयाबीन की कीमतों में तेजी जरूर आई है, लेकिन कीमतें अभी भी एमएसपी के बराबर या उससे नीचे हैं।&nbsp;</p>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र सरकार ने 49 लाख कपास और सोयाबीन किसानों को जारी की 2398 करोड़ रुपये की सब्सिडी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में दो हजार से अधिक केंद्रों पर होगी धान की खरीद, 185 लाख टन खरीद का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/paddy-will-be-purchased-at-more-than-2-thousand-centers-in-punjab-target-to-purchase-185-lakh-tonnes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 30 Sep 2024 11:34:48 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/paddy-will-be-purchased-at-more-than-2-thousand-centers-in-punjab-target-to-purchase-185-lakh-tonnes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में खरीफ सीजन (2024-25) में 185 लाख टन धान की खरीद की जाएगी। इसके लिए राज्य में 2,000 से अधिक खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। रविवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और अधिकारियों के साथ बैठक कर राज्य में धान खरीद की तैयारियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि धान की खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होगी और इसके लिए केंद्र सरकार ने पंजाब को 185 लाख टन धान खरीद की अनुमति दी है। राज्य सरकार ने 190 लाख टन धान खरीद की तैयारी की है।&nbsp;</p>
<p>मान ने कहा कि इस बार राज्य में 32 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई की गई है, जिससे अच्छे उत्पादन की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने खरीफ सीजन 2024-25 के लिए 41,378 करोड़ रुपये जारी किए हैं। <span>केंद्र सरकार ने इस खरीफ सीजन के लिए सामान्य धान का एमएसपी 2300 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का एमएसपी 2320 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।&nbsp;</span></p>
<p>मान ने कहा कि सरकार ने किसानों की फसलों की खरीद के लिए पहले से ही पर्याप्त व्यवस्थाएं कर ली हैं और किसानों को उनके बैंक खातों में तुरंत भुगतान सुनिश्चित करने के लिए एक उपयुक्त तंत्र विकसित किया गया है। मुख्यमंत्री ने जिला उपायुक्तों को मंडियों में धान की सुचारू खरीद प्रक्रिया और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।&nbsp;मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जो 750 मिल मालिक पहले आवेदन करेंगे, उन्हें नीति के अनुसार आवंटित धान से 25 प्रतिशत अधिक धान आवंटित किया जाएगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में दो हजार से अधिक केंद्रों पर होगी धान की खरीद, 185 लाख टन खरीद का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66f3f0fa836a2.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में धान की सरकारी खरीद शुरू, किसानों के विरोध के बाद सरकार ने बदली तारीख]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/paddy-procurement-started-in-haryana-government-changed-the-decision-after-farmers-displeasure.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 27 Sep 2024 11:49:47 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/paddy-procurement-started-in-haryana-government-changed-the-decision-after-farmers-displeasure.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div class="whitespace-pre-wrap">
<div class="whitespace-pre-wrap">हरियाणा में धान की सरकारी खरीद आज, 27 सितंबर से शुरू हो गई है। धान खरीद में हो रही देरी और खरीद की तारीख बढ़ाए जाने के बाद किसानों की नाराजगी को देखते हुए हरियाणा सरकार के आग्रह पर केंद्र सरकार ने धान खरीद की तारीख में बदलाव किया है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। जिसमें कहा गया है कि हरियाणा में धान की सरकारी खरीद जो 1 अक्टूबर, 2024 से शुरू होनी थी, उसे 27 सितंबर, 2024 से शुरू किया जा रहा है।&nbsp;<br /><br />हरियाणा सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से धान खरीद शुरू करने का अनुरोध किया था, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार करते हुए धान खरीद शुरू करने का फैसला किया है। प्रदेश में धान की सरकारी खरीद 27 सितंबर से 11 नवंबर तक होगी।&nbsp;<br /><br /></div>
<div class="whitespace-pre-wrap">
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66f656718f60f.jpg" alt="" width="636" height="416" /></p>
<p><br />गौरतलब है कि पहले राज्य में धान की सरकारी खरीद 23 सितंबर से शुरू होनी थी, लेकिन सरकार ने अचानक तारीख बदलकर 1 अक्टूबर कर दी। जब किसान धान लेकर अनाज मंडियों में पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि तारीख आगे बढ़ा दी गई है, जिसका किसानों ने विरोध किया। धान खरीद में हो रही देरी को लेकर किसानों ने अनाज मंडियों के बाहर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिए। <span>धान खरीद में हो रही देरी और किसानों की समस्याओं को <strong>रूरल वॉयस</strong> ने शुरुआत से ही प्रमुखता से उठाया है। रूरल वॉयस ने किसानों की मांगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया, जिसका असर </span><span> यह हुआ कि किसानों की बढ़ती नाराजगी और विधानसभा चुनाव को देखते सरकार ने धान खरीद शुरू करने का फैसला लिया है।&nbsp;</span></p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:<a href="https://www.ruralvoice.in/states/delay-in-paddy-procurement-in-haryana-led-to-farmers-paddy-being-exposed-to-rain-resulting-in-losses-for-farmers.html"> हरियाणा की मंडियों में भीगा खुले में पड़ा धान, खरीद में देरी से किसान नाराज</a></strong></p>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.ruralvoice.in/states/issue-of-low-price-of-paddy-and-delay-in-government-procurement-heated-up-amid-haryana-elections.html">हरियाणा चुनाव के बीच गरमाया धान के भाव और सरकारी खरीद में देरी का मुद्दा</a></strong></p>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.ruralvoice.in/national/price-of-1509-basmati-rice-500-to-700-rupees-lower-than-last-year.html">बासमती धान की 1509 किस्म का दाम पिछले साल से 500-700 रुपये कम</a></strong></p>
<p><strong>ये भी पढे़ं: <a href="https://www.ruralvoice.in/states/mandi-gate-pass-will-be-made-online-in-haryana-download-this-app.html">हरियाणा में किसान मोबाइल ऐप के जरिए बनवा सकेंगे मंडी पास</a></strong></p>
</div>
</div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66f64c44f2675.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में धान की सरकारी खरीद शुरू, किसानों के विरोध के बाद सरकार ने बदली तारीख ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66f64c44f2675.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[झारखंड सरकार ने 400.66 करोड़ रुपये का कृषि लोन माफ किया, 1.76 लाख किसानों को होगा लाभ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/jharkhand-government-waives-off-loans-of-up-to-rs-2-lakh-of-1.76-lakh-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 26 Sep 2024 18:56:45 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/jharkhand-government-waives-off-loans-of-up-to-rs-2-lakh-of-1.76-lakh-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>झारखंड सरकार ने गुरुवार को 'किसान कर्ज माफी योजना' के तहत प्रदेश के 1.76 लाख किसानों का 2 लाख रुपये तक का कर्ज माफ कर दिया। रांची के प्रभात तारा मैदान में आयोजित &lsquo;किसान सम्मेलन&rsquo; के दौरान सीएम हेमंत सोरेन ने कुल 1 लाख 76 हजार 977 किसानों के कर्ज की रकम&nbsp;सरकारी खजाने से ट्रांसफर की। योजना के तहत कुल 400.66 करोड़ रुपये की राशि लोन अकाउंट्स में ट्रांसफर की गई। झारखंड सरकार ने पिछले महीने 7 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में किसानों के कर्ज माफी की सीमा 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने का फैसला किया था।&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार किसानों, मजदूरों, महिलाओं, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के हित में लगातार काम कर रही है। इससे पहले सरकार ने 50 हजार रुपये तक का कृषि ऋण माफ किया था, और अब यह सीमा बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है। इस निर्णय से राज्य के लगभग 1.76 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे पहले लगभग 4.73 लाख किसानों के 50 हजार रुपये तक के कृषि ऋण माफ किए जा चुके हैं।&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पास बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों का करोड़ों रुपये का कर्ज माफ करने के लिए पैसा है, लेकिन किसानों की फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने, बुजुर्गों और जरूरतमंदों को पेंशन देने, और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए धन नहीं है। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसान और मजदूर मिलकर संघर्ष करते हैं, तो सभी को झुकना पड़ता है।&nbsp;</p>
<p>सोरेन ने आगे कहा, 'जब हम गरीबों, किसानों, और महिलाओं के लिए काम करते हैं, तो कुछ लोग उसमें रुकावट डालते हैं। लोकसभा चुनाव से पहले झूठे आरोप लगाकर मुझे जेल में डाल दिया गया, लेकिन अब मैं जनता के आशीर्वाद से फिर आपके सामने हूं।' उन्होंने कहा कि वह राज्य के विकास के लिए काम कर रहे हैं और लगातार करते रहेंगे।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ झारखंड सरकार ने 400.66 करोड़ रुपये का कृषि लोन माफ किया, 1.76 लाख किसानों को होगा लाभ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा की मंडियों में भीगा खुले में पड़ा धान, खरीद में देरी से किसान नाराज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/delay-in-paddy-procurement-in-haryana-led-to-farmers-paddy-being-exposed-to-rain-resulting-in-losses-for-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 26 Sep 2024 15:57:54 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/delay-in-paddy-procurement-in-haryana-led-to-farmers-paddy-being-exposed-to-rain-resulting-in-losses-for-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा की अनाज मंडियों में खुले में पड़ा किसानों का धान बारिश के चलते भीग रहा है। समय पर खरीद शुरू नहीं होने से किसान खुले में अपना धान रखने को मजबूर हैं, जिससे किसानों की नाराजगी और बढ़ गई है। राज्य में धान की सरकारी खरीद पहले 23 सितंबर से शुरू होने थी, लेकिन सरकार ने अचानक आदेश जारी कर खरीद की तारीख बढ़ाकर 1 अक्टूबर कर दी। किसान जब धान लेकर अनाज मंडियों में पहुंचे तो उन्हें पता चला की खरीद अब 1 अक्टूबर से होगी। जिस वजह से किसानों को मंडियो में धान की ढेरी लगानी पड़ी। वहीं बुधवार को हुई बारिश के चलते करनाल और कुरुक्षेत्र की मंडियों में खुले में रखा किसानों का धान भीग गया। अनाज मंडियों में भीग रहे धान के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे मंडियों में उचित व्यवस्था न होने के चलते किसान की मेहनत बारिश में बह रही है।&nbsp; &nbsp;</p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="9d7f07a0-d5d9-42ef-9f28-fe8eec68e806" dir="auto" class="min-h-8 text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>हरियाणा की अनाज मंडियों में अगेती बुवाई वाले धान की आवक शुरू हो गई है। मंडियों में 1509 धान के साथ मोटे धान (पीआर) भी आ रहा है। हालांकि, सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसान अपना धान प्राइवेट खरीदार को बेचने को मजबूर हैं। प्राइवेट खरीदार धान को कम दाम पर खरीद रहे हैं, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है। पिछले साल 1509 धान का भाव 3500 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक था, लेकिन फिलहाल इसका रेट 2800-3000 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। वहीं, मोटा धान भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 300 से 400 रुपये कम दाम पर मंडियों में बिक रहा है। <span>केंद्र सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2024-25 के लिए सामान्य धान का एमएसपी 2300 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का एमएसपी 2320 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।</span> &nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560">
<p lang="hi" dir="ltr">ये वीडियो हरियाणा के करनाल जिले के तरावड़ी की मंडी की है जहां किसानों की 6 महीने की मेहनत बारिश में बह रही है, इसका कारण है भाजपा के तुगलकी फरमान! पहले आदेश था कि 23 सितंबर से पीआर धान की सरकारी खरीद होगी लेकिन अचानक से भाजपा ने आदेश दिया कि अब खरीद 1 अक्टूबर से होगी जिसके कारण&hellip; <a href="https://t.co/NCrb0k40WR">pic.twitter.com/NCrb0k40WR</a></p>
&mdash; Abhimanyu Kohar (@KoharAbhimanyu) <a href="https://twitter.com/KoharAbhimanyu/status/1839184877658234924?ref_src=twsrc%5Etfw">September 26, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p>भारतीय किसान नौजवान यूनियन के संयोजक <strong>अभिमन्यु कोहाड़</strong> ने रूरल वॉयल को बताया कि अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल और आसपास के क्षेत्रों में धान की फसल तैयार है, लेकिन सरकारी खरीद में देरी के कारण किसानों को एमएसपी से कम दाम पर अपनी फसल बेचनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि पीआर धान पर किसानों को प्रति क्विंटल 200 से 300 रुपये का नुकसान हो रहा है। कोहाड़ ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर किसानों को परेशान करने के लिए खरीद में देरी कर रही है। उन्होंने कहा कि मंडियों में खरीद को लेकर उचित व्यवस्था भी नहीं की गई है, जिससे बीते दिनों हुई बारिश में किसानों का धान भीग गया।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>बता दें कि प्रदेश में धान खरीद में हो रही देरी से किसानों में काफी रोष है, जिससे प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। किसानों ने धान की खरीद में देरी के मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। जिसका असर हरियाणा विधानसभा पर पड़ सकता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा की मंडियों में भीगा खुले में पड़ा धान, खरीद में देरी से किसान नाराज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में बारिश से सोयाबीन और दहलन किसानों को नुकसान, कटाई भी प्रभावित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/post-harvest-losses-to-farmers-due-to-untimely-rain-in-madhya-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 26 Sep 2024 12:28:02 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/post-harvest-losses-to-farmers-due-to-untimely-rain-in-madhya-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सोयाबीन की कम कीमतों को लेकर परेशान मध्य प्रदेश के किसानों के सामने अब एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। सोयाबीन की कटाई शुरू होते ही प्रदेश में हो रही बारिश किसानों की परेशानी का कारण बनी हुई है। प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश के चलते कई जिलों में सोयाबीन और मूंग की फसल को नुकसान पहुंचा है। कई जिलों में कटाई के बाद खेतों में सूखने के लिए रखी फसल ही बह गई है जबकि जिन जगहों पर कटाई नहीं हुई थी, वहां पूरी फसल पानी में डूब गई है।</p>
<p>राजगढ़, धार, सुजानपुर, उज्जैन, दमोह, नीमच, मंदसौर, सीहोर, खरगोन और देवास जैसे कई जिलों में बारिश की वजह से सोयाबीन की फसल को नुकसान पहुंचा है। बारिश के कारण फसल के सड़ने और फफूंद लगने का खतरा बढ़ गया है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। लगातार बारिश होने से कटाई में भी देरी हो रही है। वहीं मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक मध्य प्रदेश में बारिश होने की चेतावनी दी है।</p>
<p>दूसरी तरफ, किसान संगठन सोयाबीन का भाव 6000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार यह कीमत तय नहीं करती, वह प्रदर्शन जारी रखेंगे।</p>
<p>सीहोर जिले के झालकी गांव के किसान <strong>जगदीश वर्मा</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि उन्होंने सोयाबीन की कटाई शुरू ही की थी कि बारिश आ गई। इस वजह से उन्हें कटाई रोकनी पड़ी। जिन खेतों में कटाई हो चुकी थी, वहां पानी भर गया, जिससे फसल को नुकसान हुआ है। लगातार बारिश के कारण कटाई में भी देरी हो रही है।</p>
<p>भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेता <strong>अनिल पटेल</strong> ने बताया कि प्रदेश के कई जिलों में बारिश से सोयाबीन और मूंग की फसल प्रभावित हुई है। बारिश के चलते खासकर सोयाबीन की कटाई पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि कई जिले तो ऐसे हैं जहां पूरी फसल पानी में डूब गई है। जिससे उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। बारिश से फसलों में नमी बढ़ गई है, और जैसे ही धूप निकलेगी, फसल चटकने लगेगी, जिससे उसकी गुणवत्ता और खराब हो जाएगी। वहीं पानी में डूबी फसलों में फफूंद भी लगने लगी है, जिससे उनके सड़ने का खतरा बढ़ गया है।&nbsp;</p>
<p>किसान सत्याग्रह मंच के सदस्य <strong>शिवम बघेल</strong> ने बताया कि प्रदेश में हो रही लगातार बारिश से सोयाबीन फसल उत्पादन पर असर पड़ सकता है। अगर बारिश इसी तरह जारी रही तो सोयाबीन और दलहन फसलें खराब हो जाएंगी। किसान पहले ही कम कीमतों से परेशान हैं, और अगर उत्पादन पर असर पड़ा तो उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।</p>
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<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p><strong>सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा)</strong> के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में पिछले कुछ सालों में सोयाबीन के उत्पादन में गिरावट आई है। मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन 2023 में 52.47 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ था, जबकि 2022 में उत्पादन 54.13 लाख टन, 2021 में 52.29 लाख टन और 2020 में 41.77 लाख टन रहा था। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक, देश में 2023-24 में 130.62 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ था। पिछले साल राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के हिस्सों में लंबे समय तक बारिश नहीं होने के चलते सोयाबीन के उत्पादन पर असर पड़ा था।&nbsp; &nbsp;</p>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में बारिश से सोयाबीन और दहलन किसानों को नुकसान, कटाई भी प्रभावित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा चुनाव के बीच गरमाया धान के भाव और सरकारी खरीद में देरी का मुद्दा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/issue-of-low-price-of-paddy-and-delay-in-government-procurement-heated-up-amid-haryana-elections.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Sep 2024 14:57:04 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/issue-of-low-price-of-paddy-and-delay-in-government-procurement-heated-up-amid-haryana-elections.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा विधानसभा चुनाव की हलचल के बीच धान की सरकारी खरीद में देरी और कीमतों में गिरावट का मुद्दा गरमा रहा है। राज्य में धान की सरकारी खरीद 23 सितंबर से शुरू होनी थी लेकिन ऐन वक्त पर सरकार ने <span>एक अक्तूबर से खरीद शुरू करने का फरमान जारी कर दिया है।</span> इसके पीछे राज्य में अधिक बारिश को वजह बताया जा रहा है। लेकिन धान खरीद में देरी के चलते किसानों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। हरियाणा में धान का भाव पिछले साल के मुकाबले 500-700 रुपये नीचे आ गया है। सरकारी खरीद शुरू न होने से किसानों को कम भाव पर धान बेचना पड़ रहा है। <span>&nbsp;</span></p>
<p>हरियाणा में धान खरीद को लेकर राजनीति गरमा रही है। किसानों ने धान की खरीद में देरी के मुद्दे पर<strong> विरोध-प्रदर्शन</strong> शुरू कर दिए हैं। मंगलवार को यमुनानगर और कैथल में किसानों ने प्रदर्शन किये। <span>यमुनानगर में किसान धान लेकर लघु सचिवालय पहुंच गये और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। गुस्साए किसानों ने कैथल-दिल्ली मार्ग पर चक्का जाम भी किया। चुनाव के बीच विपक्षी दल और किसान संगठन धान का मुद्दा उठा रहे हैं।&nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66f40f6aabeda.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष <strong>बजरंग पूनिया</strong> ने ट्विट किया कि मंडियों में खरीद न होने के कारण किसान एमएसपी से कम रेट पर धान बेचने के लिए मजबूर है और कृषि मंत्री एमएसपी को मजबूत करने के जुमले फेंक रहे हैं। हरियाणा के जींद जिले के युवा किसान नेता <strong>अशोक दनोदा</strong> का कहना है कि धान का एमएसपी सरकार ने 2300 और 2320 रुपये तय किया है लेकिन किसानों को 2000 रुपये में धान बेचना पड़ रहा है क्योंकि धान की सरकारी खरीद में देरी हो रही है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>हरियाणा में अगेती बुवाई वाला धान मंडियों में आना शुरू हो गया है। <span>राज्य में 15 जून से धान लगना शुरू हो जाता है। </span>अनाज मंडियों में 1509 धान के साथ मोटे धान (पीआर) की आवक भी शुरू हो गई है। लेकिन अभी मंडियों में खरीद के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। प्राइवेट खरीदार कम भाव पर धान खरीद रहे हैं। पिछले साल 1509 धान का भाव 3500 रुपये क्विंटल से अधिक था लेकिन फिलहाल इसका रेट 2800-3000 रुपये के आसपास है।&nbsp;</p>
<p><strong>चुनाव में अहम होंगे किसानों के मुद्दे</strong></p>
<p>भारतीय किसान यूनियन (शहीद भगत सिंह) के नेता <strong>तेजवीर सिंह</strong> ने बताया कि किसान मंडियों में धान लेकर आ रहे हैं लेकिन खरीद की कोई व्यवस्था नहीं है। 23 सितंबर से धान की खरीद शुरू होनी थी जिसे बढ़ाकर 1 अक्टूबर कर दिया। तेजवीर सिंह का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में किसानों के मुद्दे निर्णायक साबित होंगे। किसान भाजपा से 10 साल का हिसाब मांग रहे हैं। 22 सितंबर को पीपली में हुई किसान महापंचायत में बड़ी तादाद में किसान जुटे थे। आगामी 3 अक्टूबर को <strong>रेल</strong> <strong>रोको</strong> आंदोलन की तैयारी है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>गौरतलब है कि 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी कांड की बरसी है। जबकि 5 अक्टूबर को हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। इससे बीच धान खरीद का मुद्दा कृषि प्रधान हरियाणा के सियासी मूड पर बड़ा असर डाल सकता है।&nbsp;</p>
<p>ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष <strong>विजय सेतिया</strong> का कहना है कि धान के भाव का मुद्दा किसानों की नाराजगी बढ़ाएगा। इसका असर चुनाव पर भी पड़ सकता है। सेतिया का मानना है कि हाल के वर्षों में खाद्यान्न से जुड़ी नीतियों में खामियों के चलते किसान, व्यापारी और आम जनता सभी को नुकसान पहुंचा है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p><strong>धान और हरियाणा की अर्थव्यवस्था </strong></p>
<p>हरियाणा देश का प्रमुख धान उत्पादक राज्य है। हरियाणा की अर्थव्यवस्था और राजनीति के लिहाज से धान का बड़ा महत्व है। खरीफ सीजन में हरियाणा में होने वाली कुल बुवाई का <strong>लगभग आधा</strong> (49 फीसदी) हिस्सा <strong>धान</strong> का होता है। बाकी आधे में कपास, बाजारा, ग्वार जैसी खरीफ की अन्य फसलें हैं। धान में भी लगभग 56 फीसदी यानी आधे से अधिक क्षेत्र हरियाणा में बासमती धान की किस्मों का होता है। गैर-बासमती किस्मों की खरीद सरकारी एजेंसियों द्वारा एमएसपी पर हो जाती है जबकि बासमती धान को अधिकतर निर्यात या घरेलू मांग के लिए प्राइवेट व्यापारी खरीदते हैं। धान की सरकारी खरीद और भाव का मुद्दा हरियाणा की राजनीति पर असर डालते हैं।</p>
<p>यही वजह है कि&nbsp;चुनाव से पहले किसानों को लुभाने के लिए <span>हरियाणा के मुख्यमंत्री <strong>नायाब सिंह सैनी</strong> ने सभी 24 फसलों की खरीद एमएसपी पर करने का ऐलान किया था। अब देखना है कि धान खरीद के मामले में सीएम सैनी अपने वादे पर कितना खरा उतरते हैं।&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66f3f302c4e7c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा चुनाव के बीच गरमाया धान के भाव और सरकारी खरीद में देरी का मुद्दा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में 13.68 लाख टन सोयाबीन खरीद का लक्ष्य,  किसानों का पंजीकरण शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/government-to-procure-13.68-lakh-tonnes-of-soybean-in-madhya-pradesh-registration-started.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Sep 2024 12:14:01 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/government-to-procure-13.68-lakh-tonnes-of-soybean-in-madhya-pradesh-registration-started.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="df82a4dc-794d-4468-a8f6-21dc4f60a574" dir="auto" class="min-h-8 text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
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<p>मध्य प्रदेश में खरीफ मार्केटिंग सीजन 2024-25 के लिए सोयाबीन खरीद का लक्ष्य तय किया गया है। प्रदेश में 13.68 लाख टन सोयाबीन की खरीद की जाएगी। जिसके लिए किसानों के पंजीकरण की प्रक्रिया आज से शुरू हो रही है। सोयाबीन खरीद के लिए राज्य में 1400 खरीद केंद्र बनाए जाएंगे। राज्य सरकार का कहना है कि सोयाबीन की आवक और खरीद की स्थिति को देखते हुए खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। वहीं, अगर सोयाबीन की आवक लक्ष्य से ज्यादा होती है तो राज्य सरकार अपने स्तर पर सोयाबीन की खरीद करेगी। यह फैसला मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p>मध्य प्रदेश सरकार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मंत्रिपरिषद की बैठक में खरीफ वर्ष 2024 (विपणन वर्ष 2024-25) में केंद्र सरकार की प्राईस सपोर्ट स्कीम के तहत पंजीकृत किसानों से सोयाबीन खरीद का निर्णय लिया गया। सोयाबीन की सरकारी खरीद के लिए 4892 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किया गया है। मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ किसानों से सोयाबीन की खरीद करेगा जबकि स्टेट वेयरहाउसिंग कारपोरेशन भंडारण की व्यवस्था देखेगा। सरकार का दावा है कि खरीद के तीन दिन में किसानों के खाते में भुगतान कर दिया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>प्रदेश में 25 अक्टूबर से सोयाबीन की खरीद शुरू होगी, जो 31 दिसंबर, 2024 तक चलेगी। इसके लिए किसानों को पहले पंजीकरण करना होगा, जिसकी शुरुआत आज (25 सितंबर) से हो गई है। किसान मध्य प्रदेश ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर 20 अक्टूबर तक अपना पंजीकरण करा सकते हैं।&nbsp;</p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
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<p>सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन 2023 में 52.47 लाख टन, खरीफ सीजन 2022 में 54.13 लाख टन, खरीफ सीजन 2021 में 52.29 लाख टन और खरीफ सीजन 2020 में 41.77 लाख टन उत्पादन हुआ था।&nbsp;प्रदेश में हर साल 50 लाख टन से अधिक सोयाबीन का उत्पादन होता है। इस हिसाब से देखें तो सरकारी खरीद उत्पादन की आधी भी नहीं है।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p>गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में सोयाबीन के दाम घटकर एमएसपी के नीचे आ गये हैं और पिछले लगभग एक महीने से राज्य के किसान सोयाबीन का भाव 6000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों के आक्रोश को देखते हुए सरकार ने सोयाबीन की खरीद शुरू करने का निर्णय लिया है। साथ ही कच्चे और रिफाइंड खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में 20 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में 13.68 लाख टन सोयाबीन खरीद का लक्ष्य,  किसानों का पंजीकरण शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में किसान मोबाइल ऐप के जरिए बनवा सकेंगे मंडी पास]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/mandi-gate-pass-will-be-made-online-in-haryana-download-this-app.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 24 Sep 2024 12:22:59 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/mandi-gate-pass-will-be-made-online-in-haryana-download-this-app.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में एक अक्टूबर से धान सहित अन्य खरीफ फसलों की सरकारी खरीद शुरू होने जा रही है। कृषि मंडी में उपज बेचने के लिए किसानों को सबसे पहले मंडी गेट पास लेना पड़ता है। इसके लिए किसानों को लाइनों में खड़े होकर घंटों इंतजार करना पड़ता है। हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (एचएसएएमबी) ने किसानों को एक नए मोबाइल एप से डिजिटल गेट पास जारी करने की प्रक्रिया शुरू की है। दावा किया जा रहा है कि गेट पास लेने के लिए किसानों को मंडी जाकर लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा। किसान आसानी से ऑनलाइन अपना मंडी गेट पास बना पाएंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>&nbsp;ई-खरीद मोबाइल एप्लीकेशन </strong></p>
<p>डिजिटल गेट पास लेने के लिए किसानों को गूगल प्ले स्टोर से ई-खरीद मोबाइल एप्लीकेशन&nbsp; (<strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=com.ditech.ekharid.module&amp;hl=en_IN">https://play.google.com/store/apps/details</a></strong>) डाउनलोड करना होगा। इस मोबाइल एप के जरिए किसान डिजिटल मंडी गेट पास प्राप्त कर पाएंगे। इसके अलावा हरियाणा सरकार के कृषि खरीद वेबसाइट/ पोर्टल (<strong><a href="https://ekharid.haryana.gov.in/Search.aspx">ekharid.haryana.gov.in</a></strong>) पर जाकर भी किसान अपना मंडी गेट पास बना सकेंगे।</p>
<p>इस ऐप से किसान अपने गेट पास, जे फॉर्म और भुगतान की जानकारी देख सकते हैं। वे मंडी और तारीख चुनकर अपनी रजिस्टर्ड उपज के लिए गेट पास बना सकते हैं। हरियाणा में सरकारी योजनाओं को लाभ लेने और कृषि उपज बेचने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर अत्यधिक निर्भरता किसानों में नाराजगी का कारण भी बन रही है। यह पोर्टल राज विधानसभा चुनाव में भी मुद्दा बन रहा है।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में किसान मोबाइल ऐप के जरिए बनवा सकेंगे मंडी पास ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में धान खरीद की तारीख में बदलाव, अब 1 अक्टूबर से होगी सरकारी खरीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/paddy-procurement-date-changed-in-haryana-now-government-purchase-will-be-done-from-october-1-to-november-15.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 23 Sep 2024 13:18:44 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/paddy-procurement-date-changed-in-haryana-now-government-purchase-will-be-done-from-october-1-to-november-15.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में धान की सरकारी खरीद की तारीख में बदलाव किया गया है। अब खरीद एक अक्टूबर 2024 से शुरू होगी, जबकि पहले तारीख 23 सितंबर निर्धारित की गई थी। केंद्रीय <span>उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने </span>इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। 20 सितंबर, 2024 को जारी आदेश में कहा गया है कि हरियाणा में धान खरीद की तारीख बदल दी गई है। अब 1 अक्टूबर से 15 नवंबर तक धान की खरीद की जाएगी। केंद्र सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2024-25 के लिए सामान्य धान का एमएसपी 2300 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का एमएसपी 2320 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।</p>
<p>हरियाणा में सितंबर के महीने में अब तक काफी बारिश हुई है, जिससे फसलों में नमी बढ़ गई है। इससे किसानों को फसल काटने और सुखाने में देरी हो सकती है। वहीं राइस मिलर्स भी यह कह चुके हैं कि अभी उनके पास पहले से ही स्टॉक बचा हुआ है, इसलिए वह नया स्टॉक तब तक नहीं खरीदेंगे जब तक गोदाम खाली नहीं हो जाते। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने खरीद की तारीख बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस बीच, कई जिलों में किसानों ने जानकारी के अभाव में धान लेकर मंडी पहुंचना शुरू कर दिया है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66f12b012eaa0.jpg" alt="" /></p>
<p>राज्य कृषि विभाग ने खरीफ सीजन 2024-25 के लिए लगभग 60 लाख टन धान की खरीद की संभावना जताई है। खरीद के लिए प्रदेश में 241 केंद्र बनाए गए हैं, जहां किसानों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। वहीं राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने किसानों के लिए 1800-180-2600 हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। इसके अलावा, खरीफ की अन्य फसलों की एमएसपी पर खरीद की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में धान खरीद की तारीख में बदलाव, अब 1 अक्टूबर से होगी सरकारी खरीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में पराली जलाने वालों पर सख्ती, रद्द होंगे हथियारों के लाइसेंस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/no-arms-licenses-for-stubble-burners-in-punjab-existing-licenses-wont-be-renewed.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 23 Sep 2024 12:10:16 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/no-arms-licenses-for-stubble-burners-in-punjab-existing-licenses-wont-be-renewed.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में धान की कटाई शुरू होते ही पराली जलाने के मामले सामने आने लगे हैं। राज्य में पराली जलाने पर प्रतिबंध के बाद भी राज्य कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन को पराली जलाने की शिकायतें मिल रही हैं। किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए पटियाला जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए आदेश जारी किया है कि जो किसान पराली जलाते पकड़े जाएंगे, उन्हें नए हथियार का लाइसेंस नहीं मिलेगा। साथ ही उनके मौजूदा लाइसेंस का नवीनीकरण भी नहीं किया जाएगा और उसे रद्द कर दिया जाएगा।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>जिला प्रशासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की जाएगी।&nbsp;जब कोई व्यक्ति नया लाइसेंस लेने या पुराने लाइसेंस का नवीनीकरण करवाने के लिए आवेदन करेगा, तो सबसे पहले उसका रिकॉर्ड चेक किया जाएगा। अगर रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' होगी, तो आर्म्ज एक्ट 1959 एवं 2016 की धारा 14(1) (बी) (1) (3) के तहत उसे लाइसेंस के लिए अयोग्य मानते हुए उसका आवेदन रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही पुराने लाइसेंस का नवीनीकरण भी नहीं किया जाएगा।</p>
<p>पटियाला की अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर कंचन ने कहा कि यह आदेश प्रदूषण नियंत्रण के लिए बेहद जरूरी है। पराली जलाने से हवा में जहरीली गैसें फैलती हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है और बच्चों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। साथ ही, इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी कम हो जाती है।&nbsp;</p>
<p>प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि पराली जलाने पर रोक लगाने का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण की सुरक्षा और प्रदूषण पर नियंत्रण है। इसके अलावा, पराली जलाने से निकलने वाले धुएं से कई बीमारियों का खतरा बढ़ता है और आग से भूमिगत तापमान में भी वृद्धि होती है, जिससे मिट्टी की जल अवशोषण क्षमता घट जाती है। इसलिए फसलों के अवशेष जलाने पर सख्ती से रोक लगाने के लिए यह आदेश जारी किया गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में पराली जलाने वालों पर सख्ती, रद्द होंगे हथियारों के लाइसेंस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में सोयाबीन के दाम को लेकर 23 को ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे राकेश टिकैत, एक अक्टूबर के चक्का जाम में नहीं शामिल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/skm-and-rakesh-tikait-distanced-himself-from-the-farmers-chakka-jam-on-october-1-in-madhya-pradesh-over-soyabean-low-prices.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 21 Sep 2024 13:59:16 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/skm-and-rakesh-tikait-distanced-himself-from-the-farmers-chakka-jam-on-october-1-in-madhya-pradesh-over-soyabean-low-prices.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में सोयाबीन की सरकारी खरीद के दाम को 6000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता <strong>राकेश टिकैत</strong> ने कहा है कि वह 23 सितंबर को सिवनी मालवा में ट्रैक्टर तिरंगा मार्च निकालेंगे क्योंकि किसानों को सोयाबीन की सही कीमत नहीं मिल रही है। वहीं संयुक्त किसान मोर्चा, मध्य प्रदेश के बैनर तले 30 किसान संगठनों ने एक अक्टूबर को पूरे प्रदेश में चक्का जाम करने का ऐलान किया है। इस बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में राकेश टिकैत ने कहा कि मध्य प्रदेश में सोयाबीन किसानों को अपनी फसल 3500 रुपये से 4000 रुपये प्रति क्विटंल पर बेचनी पड़ रही है। सरकार ने 4892 रुपये प्रति क्विटंल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किया। यह एमएसपी किसानों की लागत से कम है। इसलिए किसान सोयाबीन के लिए अधिक दाम की मांग कर रहे हैं। इसके लिए सिवनी मालवा में 23 सितंबर को ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा और वह उसमें शामिल होंगे।</p>
<p>राकेश टिकैत ने कहा कि कुछ संगठनों ने एक अक्तूबर को इस मुद्दे पर चक्का जाम का ऐलान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा उस चक्का जाम का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि सोयाबीन की कम कीमतों को लेकर अलग-अलग संगठन अपना आंदोलन कर रहे हैं। कुछ राजनीतिक लोग भी इससे जुड़े हैं, जो इसे राजनीतिक बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति से प्रेरित जो भी लोग इस आंदोलन में शामिल हैं, वह अपना आंदोलन अलग से चलाएं। ऐसे लोग किसानों के आंदोलन में शामिल न हों, इससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने कहा कि&nbsp;एसकेएम लगातार सोयाबीन के मुद्दे पर किसानों की आवाज उठा रहा है। सोयाबीन का दाम फिलहाल काफी कम है। सरकार इसमें तुरंत संज्ञान ले।&nbsp; &nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">मध्य प्रदेश में सोयाबीन के भाव को लेकर चल रहे आंदोलन में 23/9/2024 को सिवनी मालवा में आयोजित ट्रैक्टर तिरंगा मार्च में हिस्सा लेंगे।<br />"फसल हमारी <br />भाव तुम्हारे <br />नहीं चलेंगे <br />नहीं चलेंगे"<a href="https://twitter.com/OfficialBKU?ref_src=twsrc%5Etfw">@OfficialBKU</a> <a href="https://twitter.com/ANI?ref_src=twsrc%5Etfw">@ANI</a> <a href="https://t.co/eUi8nCppkS">pic.twitter.com/eUi8nCppkS</a></p>
&mdash; Rakesh Tikait (@RakeshTikaitBKU) <a href="https://twitter.com/RakeshTikaitBKU/status/1837361830009704780?ref_src=twsrc%5Etfw">September 21, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा, मध्य प्रदेश के सदस्य <strong>राम इनानिया</strong> ने राकेश टिकैत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि एक अक्टूबर को होने वाले चक्का जाम का फैसला संयुक्त किसान मोर्चा, मध्य प्रदेश की ओर से लिया गया है। जिसमें प्रदेश के 30 किसान संगठन शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि राकेश टिकैत का बयान संयुक्त किसान मोर्चा, दिल्ली को ओर से आया है। इससे उनका कोई संबंध नहीं है।&nbsp;उन्होंने कहा कि एक अक्टूबर को प्रदेश में हर हाल में चक्का जाम होगा। किसान अपनी मांगों को लेकर प्रदेशभर में हाईवे जाम करेंगे। यह तीन घंटे का सांकेतिक चक्का जाम होगा। इसके साथ ही 24 से 30 सितंबर तक गांव-गांव मशाल जुलूस भी निकाले जाएंगे।</p>
<p>भारतीय किसान संघ भी सोयाबीन का दाम 6000 रुपये करने की मांग कर रहा है, लेकिन उनका आंदोलन अलग चल रहा है। सोयाबीन की कम कीमतों के खिलाफ किसानों ने सोशल मीडिया पर भी मुहिम छेड़ रखी है। केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2024-25 के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4,892 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जबकि किसान 6,000 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं। प्रदेश में हाल ही में सोयाबीन की कीमतें 10 साल पुराने स्तर पर आ गई थीं, जहां मंडियों में भाव 3,500 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गया था। हालांकि कीमतों में अब कुछ सुधार हुआ है और कीमतें 4,000 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच हैं, लेकिन यह अब भी एमएसपी से कम हैं।</p>
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<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="8fbaa85e-3f04-4a18-9364-deadf1b95b50" dir="auto" class="min-h-[20px] text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5">
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<p><iframe width="560" height="314" style="border: none; overflow: hidden;" src="https://www.facebook.com/plugins/video.php?height=314&amp;href=https%3A%2F%2Fwww.facebook.com%2F61550900280173%2Fvideos%2F1211873340139582%2F&amp;show_text=false&amp;width=560&amp;t=0" scrolling="no" frameborder="0" allow="autoplay; clipboard-write; encrypted-media; picture-in-picture; web-share" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में सोयाबीन के दाम को लेकर 23 को ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे राकेश टिकैत, एक अक्टूबर के चक्का जाम में नहीं शामिल ]]></media:description>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    <item>
        <title><![CDATA[झारखंड में धान पर 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/paddy-farmers-in-jharkhand-will-get-rs-100-per-quintal-bonus-on-msp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 21 Sep 2024 12:17:18 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/paddy-farmers-in-jharkhand-will-get-rs-100-per-quintal-bonus-on-msp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>झारखंड में किसानों को धान पर 100 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस मिलेगा।&nbsp;झारखंड सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 में धान की फसल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अलावा 100 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देने की घोषणा की है। यह निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। इसके लिए सरकार ने 60 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी है।&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2024-25 में धान की सामान्य किस्म के लिए 2,300 रुपये और ग्रेड-ए किस्म के लिए 2,320 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी तय किया है। लेकिन झारखंड सरकार ने किसानों को धान पर एमएसपी के अलावा 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का फैसला लिया है, जिससे प्रदेश के किसानों को ज्यादा दाम मिलेगा।&nbsp;</p>
<p>कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने कहा कि बैठक में केंद्र के एमएसपी के अतिरिक्त धान पर 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। राज्य सरकार इस सीजन में 6 लाख मीट्रिक टन धान किसानों से खरीदेगी। उन्होंने कहा कि इस बोनस से झारखंड के किसानों को सहायता मिलेगी और उनकी आय में भी सुधार होगा।</p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
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<p>मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 36 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें राज्य की 29,604 &lsquo;जल सहिया&rsquo; को 12 हजार रुपये के स्मार्टफोन देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली।&nbsp;</p>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ झारखंड में धान पर 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का ऐलान ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में यूरिया&amp;#45;डीएपी के साथ जबरन अन्य उत्पाद बेचने पर होगी सख्त कार्रवाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/strict-action-will-be-taken-against-forcibly-tagging-other-products-with-urea-dap-sale-in-rajasthan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 21 Sep 2024 11:34:51 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/strict-action-will-be-taken-against-forcibly-tagging-other-products-with-urea-dap-sale-in-rajasthan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान में उर्वरकों के साथ टैगिंग कर अन्य उत्पाद बेचने वालों दुकानदारों और इनपुट डीलर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राजस्थान की कृषि आयुक्त <strong>चिन्मयी गोपाल</strong> ने उर्वरकों की मांग, आपूर्ति, उपलब्धता एवं वितरण के संबंध में शुक्रवार को हुई बैठक में विभागीय अधिकारियों को यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां किसानों को यूरिया और डीएपी के साथ अन्य उत्पाद जबरन बेचे जा रहे हैं। अगर कोई दुकानदार या इनपुट डीलर ऐसा करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि सभी खाद विक्रेताओं को अपने पास मौजूद स्टॉक और उसकी कीमत की सूची भी दिखानी होगी। यदि कोई शिकायत मिलती है तो एफसीओ, 1985 के तहत कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>कृषि आयुक्त ने अधिकारियों को किसानों को डीएपी की जगह सिंगल सुपर फास्फेट और एनपीके का अधिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि इस साल अच्छे मानसून के कारण रबी फसलों की बुआई के लिए उर्वरकों की मांग बढ़ेगी, लेकिन किसानों की जरूरत के अनुसार पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं।&nbsp;किसानों की मांग के अनुरूप समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं।</p>
<p>कृषि आयुक्त ने जिला अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह खाद विक्रेताओं के स्टॉक की जांच करें और सुनिश्चित करें कि कालाबाजारी या जमाखोरी न हो। राज्य के बॉर्डर एरिया से खाद बाहर न जाए, इस पर भी नजर रखें।</p>
<p>बैठक में अतिरिक्त निदेशक कृषि (आदान) डॉ. सुवा लाल जाट, संयुक्त निदेशक कृषि (आदान) लक्ष्मण राम, संयुक्त निदेशक कृषि (गुण नियंत्रण) गजानंद यादव, उप निदेशक कृषि (उर्वरक) बी.एल. कुमावत सहित विभागीय अधिकारी और समस्त अतिरिक्त निदेशक कृषि (विस्तार) खण्ड व समस्त संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) जिला परिषद वीडियो कॉन्फ्रेन्स के माध्यम से उपस्थित रहे।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में यूरिया-डीएपी के साथ जबरन अन्य उत्पाद बेचने पर होगी सख्त कार्रवाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में किसानों को खाद के साथ गैर जरूरी उत्पाद  बेचने पर सख्ती]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-will-take-action-against-input-dealers-on-tagging-of-products-with-fertilizer-sale.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 20 Sep 2024 13:59:00 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-will-take-action-against-input-dealers-on-tagging-of-products-with-fertilizer-sale.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में किसानों को खाद के साथ जबरन अन्य कृषि उत्पाद बेचने (टैगिंग) वाले इनपुट डीलर्स और दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पंजाब कृषि और किसान कल्याण विभाग ने चार टीमें गठित की हैं। इन टीमों की निगरानी संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी करेंगे। पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने गुरुवार को अपने कार्यालय में माझा किसान संघर्ष समिति के साथ बैठक के बाद इन टीमों के गठन के निर्देश दिए।</p>
<p>कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार किसानों का शोषण बर्दाश्त नहीं करेगी। यदि कोई&nbsp; दुकानदार या डीलर किसान को खाद के साथ अन्य उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।&nbsp;</p>
<p>गुरमीत सिंह खुड्डियां ने किसान प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि पंजाब में आगामी रबी सीजन के लिए डाइअमोनियम फॉस्फेट )(डीएपी) और&nbsp; एनपीके व एसएसपी जैसे कांप्लेक्स उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि पंजाब में लगभग 35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई होने का अनुमान है, जिसके लिए साढ़े पांच लाख&nbsp; टन डीएपी की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि पिछले महीने केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री के साथ बैठक में खाद की आवश्यक आपूर्ति सुनिश्चित करने पर चर्चा की गई थी।&nbsp;</p>
<p>इसके अलावा, गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर कृषि मंत्री ने कहा कि 27 सितंबर को प्रांतीय गन्ना नियंत्रण बोर्ड के साथ बैठक निर्धारित की गई है, जिसमें गन्ने के दाम बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में किसानों को खाद के साथ गैर जरूरी उत्पाद  बेचने पर सख्ती ]]></media:description>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कोल्ड स्टोरेज लगाने के लिए मिलेगा 1.40 करोड़ रुपये तक का अनुदान, 4 अक्टूबर से पहले करना होगा आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-government-is-giving-subsidy-of-up-to-rs-1-crore-40-lakh-for-setting-up-cold-storage-for-farmers-apply-before-4.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 20 Sep 2024 11:56:42 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-government-is-giving-subsidy-of-up-to-rs-1-crore-40-lakh-for-setting-up-cold-storage-for-farmers-apply-before-4.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>फसल की कटाई के बाद भंडारण की कमी के कारण किसानों को अक्सर फसल खराब होने से नुकसान उठाना पड़ता है। इस समस्या का समाधान करने और किसानों की फसल को सुरक्षित रखने के लिए राजस्थान सरकार ने कोल्ड स्टोरेज निर्माण के लिए योजना की शुरुआत की है। जिसके तहत किसानों को कोल्ड स्टोरेज निर्माण के लिए 1.40 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। योजना का लाभ उठाने के लिए इच्छुक किसान 4 अक्टूबर तक आवेदन कर सकते हैं। &nbsp; &nbsp;</p>
<p>राजस्थान कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के प्रमुख शासन सचिव वैभव गालरिया ने कहा कि यह योजना किसानों या किसान समूहों के लिए है, जो अपने क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज स्थापित करना चाहते हैं। कोल्ड स्टोरेज बनाने पर अधिकतम 1 करोड़ 40 रुपये तक का अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि आवेदनकर्ता 4 अक्टूबर तक सम्बन्धित जिले के उद्यानिकी विभाग कार्यालय में आवेदन कर अनुदान का लाभ ले सकते हैं। &nbsp;</p>
<p>गालरिया ने गुरुवार को जयपुर के पंत कृषि भवन के सभा कक्ष में राजस्थान हॉर्टिकल्चर डवलपमेन्ट सोसायटी की बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कोल्ड स्टोरेज पर राष्ट्रीय हॉर्टिकल्चर मिशन योजना के अन्तर्गत 250 टन से लेकर अधिकतम 5 हजार&nbsp; टन &nbsp;का कोल्ड स्टोरेज बनाने पर अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। कोल्ड स्टोरेज बनाने पर इकाई लागत का 8 हजार रुपये प्रति टन से गणना कर अधिकतम 5 हजार टन पर इकाई लागत का 35 प्रतिशत या अधिकतम 1 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुदान दिया जाता है।</p>
<p>इस दौरान कोल्ड स्टोरेज व हाईटेक नर्सरी स्थापना के परियोजना प्रस्तावों का पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुतीकरण भी किया गया। बैठक में आयुक्त कृषि सुश्री चिन्मयी गोपाल, आयुक्त उद्यानिकी सुरेश कुमारओला, प्रबन्ध निदेशक राजस्थान राज्य बीज निगम श्रीमती निमिषा गुप्ता, अतिरिक्त निदेशक उद्यान केसी मीना, सहायक निदेशक रामचन्द्र जीतरवाल सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कोल्ड स्टोरेज लगाने के लिए मिलेगा 1.40 करोड़ रुपये तक का अनुदान, 4 अक्टूबर से पहले करना होगा आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोयाबीन का सही दाम न मिलने से नाराज किसान 1 अक्टूबर को करेंगे चक्का जाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/angry-farmers-in-madhya-pradesh-will-do-chakka-jam-october-1-for-not-getting-the-right-price-for-soybean.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 19 Sep 2024 11:42:53 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/angry-farmers-in-madhya-pradesh-will-do-chakka-jam-october-1-for-not-getting-the-right-price-for-soybean.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में सोयाबीन के सही दाम न मिलने से नाराज किसान अब बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा, मध्य प्रदेश ने ऐलान किया है कि सोयाबीन के मुद्दे को लेकर एक अक्टूबर को पूरे प्रदेश में चक्का जाम किया जाएगा। यह निर्णय बुधवार को राजधानी भोपाल में हुई संयुक्त किसान मोर्चा (मध्य प्रदेश) की बैठक के दौरान लिया गया। केंद्र सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन (2024-25) के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4,892 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि किसान 6000 रुपये प्रति क्विंटल का दाम मांग रहे हैं।</p>
<p>एसकेएम मध्य प्रदेश के बैनर तले होने वाले इस प्रदर्शन में 30 विभिन्न किसान संगठन शामिल होंगे, लेकिन भारतीय किसान संघ इसका हिस्सा नहीं है। हालांकि भारतीय किसान संघ भी सरकार से सोयाबीन का दाम 6000 रुपये करने की मांग कर रहा है, लेकिन उसका आंदोलन अलग से चल रहा है। बैठक में प्रदेश के 30 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और सोयाबीन के मुद्दे पर हो रहे प्रदेश व्यापी प्रदर्शन की आगामी रूपरेखा पर चर्चा की।</p>
<p>चक्का जाम के साथ ही किसान संगठनों ने 24 से 30 सितंबर तक गांव-गांव मशाल जुलूस निकालने का भी फैसला किया है। इस जुलूस का मकसद गांव-गांव में लोगों को इस मुद्दे से अवगत कराना और आंदोलन को और व्यापक बनाना है। सोयाबीन का भाव 6 हजार रुपये करने की मांग को लेकर प्रदेश के किसान संगठन लगातर प्रदर्शन कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी किसानों ने सोयाबीन की कम कीमतों को लेकर मुहिम छेड़ रखी है।&nbsp;</p>
<p>किसानों की मांग है कि सोयाबीन का भाव 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए। फिलहाल, केंद्र सरकार ने आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन (2024-25) के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4,892 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो किसानों के मुताबिक, उनकी लागत से कम है। प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन की कीमतें 4000 से 4500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच हैं, जो एमएसपी से भी कम हैं। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती, वे आंदोलन जारी रखेंगे।</p>
<p>प्रदेश में हाल ही के दिनों में सोयाबीन का भाव पिछले 10 सालों के निचले स्तर तक पहुंच गया था। एक माह पहले मंडियों में सोयाबीन की कीमतें 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गई थीं। हालांकि अब इनमें सुधार हुआ है और यह बढ़कर 4000 से 4500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच आ गई हैं। लेकिन दाम अभी भी एमएसपी से कम हैं।</p>
<p><strong>25 अक्टूबर से शुरू होगी खरीद&nbsp;</strong></p>
<p>प्रदेश में 25 अक्टूबर से सोयाबीन की खरीद प्रक्रिया शुरू होगी, जो 31 दिसंबर, 2024 तक चलेगी। इसके लिए किसानों को ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जिसकी अंतिम तारीख 15 अक्टूबर है। खरीद की प्रक्रिया मार्कफेड द्वारा की जाएगी और स्टेट वेयरहाउसिंग कारपोरेशन भंडारण की जिम्मेदारी संभालेगा। सरकार ने किसानों को आश्वासन दिया गया है कि खरीद के तीन दिन के भीतर उनके खातों में भुगतान कर दिया जाएगा।</p>
<p><strong>तेज होगा आंदोलन </strong></p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा मध्य प्रदेश के सदस्य राम इनानिया ने <strong>रूरल वॉयस</strong> से कहा कि सोयाबीन की कम कीमतों के कारण किसानों का आंदोलन अब तेजी पकड़ रहा है। किसान लगातार सोयाबीन के लिए 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि अब किसान अपनी मांगों को लेकर 1 अक्टूबर को प्रदेशभर में हाईवे जाम करेंगे, जो 3 घंटे का सांकेतिक चक्का जाम होगा। इसके साथ ही 24 से 30 सितंबर तक गांव-गांव मशाल जुलूस भी निकाले जाएंगे।</p>
<p>इनानिया ने चेतावनी दी कि अगर सरकार इसके बाद भी उनकी मांग नहीं मानती, तो किसान भोपाल कूच की तैयारी करेंगे। उन्होंने कहा कि 25 अक्टूबर से प्रदेश में सोयाबीन की खरीद शुरू हो रही है। केंद्र सरकार ने एमएसपी पर खरीद का ऐलान तो किया है, लेकिन यह किसानों की लागत से कम है। उन्होंने कहा कि सभी खर्चे मिलाकर किसान अपनी प्रति एकड़ लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। इसलिए 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल का भाव पूरी तरह उचित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों को नुकसान से बचाने के लिए सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66ebbcba3032f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोयाबीन का सही दाम न मिलने से नाराज किसान 1 अक्टूबर को करेंगे चक्का जाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोयाबीन भाव 6000 की मांग ने जोर पकड़ा, मध्यप्रदेश में किसानों के विरोध&amp;#45;प्रदर्शन जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/demand-for-soybean-price-6000-gained-momentum-farmers-protest-in-madhya-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 16 Sep 2024 15:45:26 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/demand-for-soybean-price-6000-gained-momentum-farmers-protest-in-madhya-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सोयाबीन का सही दाम न मिलने से नाराज मध्यप्रदेश के किसान का विरोध-प्रदर्शन जोर पकड़ा रहा है। सोशल मीडिया पर सोयाबीन की कीमतों में गिरावट का मुद्दा उठाने के बाद अब मध्यप्रदेश में किसान रैलियां और ट्रैक्टर मार्च निकाल रहे हैं। आज भारतीय किसान संघ ने जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया। प्रदेश में जगह-जगह किसानों के विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। खंडवा में भारतीय किसान संघ ने ट्रैक्टर मार्च निकाला और किसान रैली की।&nbsp;</p>
<p>किसानों के आक्रोश को देखते हुए मध्य प्रदेश में <strong>25 सितंबर</strong> से सोयाबीन की खरीद शुरू होने जा रही है। लेकिन प्रदेश के किसान 4892 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को नाकाफी बता रहे हैं। विपक्षी दल कांग्रेस जहां <strong>किसान न्याय यात्रा</strong> के जरिए सोयाबीन का भाव 6000 रुपये करने की मांग उठा रहा है वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषांगिक संगठन <strong>भारतीय किसान संघ</strong> ने सोमवार को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष <strong>केदारी सिरोही</strong> का कहना है कि सोयाबीन भाव 6000 रुपये की मांग प्रदेश के किसानों की आज सबसे बड़ी मांग है। इस मुद्दे पर प्रदेश भर के किसान एकजुट हो रहे हैं।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66e814951dd25.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>भारतीय किसान संघ से जुड़े युवा किसान <strong>शुभम पटेल</strong> ने बताया कि प्रदेश में जिला मुख्यालयों पर आज भारतीय किसान संघ ने प्रदर्शन किया और सोयाबीन का भाव 6000 रुपये करने की मांग उठाई। खंडवा में एक सप्ताह में दूसरी बार बड़ी तादाद में किसान जुटे। किसान संघ गेहूं, धान और मक्का का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग भी कर रहा है।&nbsp;</p>
<p>इससे पहले गत शनिवार को मध्यप्रदेश के हरदा में हजारों किसान अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे और बड़ी ट्रैक्टर रैली निकाली थी। किसानों का कहना है कि हरदा की<span>&nbsp;</span>किसान रैली में लगभग ढाई हजार ट्रैक्टर जुटे थे। विदिशा में किसान नेता शिवकुमार कक्काजी ने किसानों के साथ प्रदर्शन किया और ट्रैक्टर रैली निकाली। इन प्रदर्शनों में संयुक्त किसान मोर्चा मध्यप्रदेश, भारतीय किसान यूनियन, आम किसान यूनियन, किसान स्वराज समेत प्रदेश के विभिन्न किसान संगठन शामिल हैं।</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा मध्यप्रदेश के मीडिया प्रभारी <strong>रंजीत किसानवंशी</strong> का कहना है कि राज्य सरकार ने सोयाबीन के एमएसपी के मुद्दे पर किसानों को भ्रमित करने का प्रयास किया है। 4892 रुपये एमएसपी की जो घोषणा केंद्र सरकार जून महीने में कर चुकी थी<span>, </span>उसे राज्य सरकार ने हालिया बढ़ोतरी की तरह पेश करने का प्रयास किया। लेकिन यह झूठ पकड़ा गया। किसानों को सोयाबीन का भाव 6 हजार रुपये से कम मंजूर नहीं है। क्योंकि इससे कम भाव पर किसानों को घाटा उठाना पड़ेगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66e80b034f061.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>इस साल मध्यप्रदेश में सोयाबीन की पैदावार तो अच्छी हुई लेकिन किसानों को उपज का सही दाम नहीं मिल पा रहा है। सोयाबीन का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी नीचे चला गया और किसानों को <strong>दस साल</strong> पुराने रेट पर सोयाबीन बेचने को मजबूर होना पड़ा तो किसानों का धैर्य जवाब दे गया। पिछले करीब एक महीने से किसान अलग-अलग तरीकों से अपना विरोध जता रहे हैं। पहले&nbsp;चरण में गांव-गांव ज्ञापन का कॉल संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा दिया गया था।&nbsp; इसके बाद तहसील स्तर व जिला पर ट्रैक्टर रैली निकालकर ज्ञापन का कार्यक्रम जारी है। इस बीच, केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों पर<strong> इंपोर्ट ड्यूटी</strong> 20 प्रतिशत बढ़ा दी। लेकिन अब भी किसान सोयाबीन का भाव 6000 रुपये करने की मांग पर अडिग हैं।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66e80b47292ba.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66e811442fc85.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोयाबीन भाव 6000 की मांग ने जोर पकड़ा, मध्यप्रदेश में किसानों के विरोध-प्रदर्शन जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66e811442fc85.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खेतों की तारबंदी के लिए 60 फीसदी तक अनुदान पाने का मौका, जानिए क्या है योजना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/opportunity-to-get-up-to-60-percent-grant-for-fencing-of-fields-know-what-is-the-scheme.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Sep 2024 16:47:16 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/opportunity-to-get-up-to-60-percent-grant-for-fencing-of-fields-know-what-is-the-scheme.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसानों को जंगली जानवरों और बेसहारा पशुओं से खेती को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए खेतों की तारबंदी करनी पड़ती है। इस पर काफी खर्च आ जाता है जो किसान पर एक अतिरिक्त बोझ है। राजस्थान सरकार खेतों की तारबंदी के लिए किसानों को अनुदान देने की योजना चला रही है। इसके तहत किसानों को 400 रंनिग मीटर तक तारबंदी करने पर <strong>लघु एवं सीमान्त कृषकों</strong> को लागत का 60 प्रतिशत अथवा अधिकतम राशि 48 हजार रुपये (जो भी कम हो) तथा <strong>सामान्य किसानों</strong> को लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम राशि 40 हजार रुपये (जो भी कम हो) का अनुदान दिया जाता है।</p>
<p>अगर कई किसान मिलकर तारबंदी करना चाहते हैं तो सामुदायिक आवेदन में 10 या अधिक किसानों के समूह न्यूनतम 5 हेक्टेयर में तारबंदी करने पर लागत का 70 प्रतिशत या अधिकतम राशि 56 हजार रुपये (जो भी कम हो) की दर से अनुदान प्राप्त कर सकते हैं। प्रति कृषक 400 रनिंग मीटर तक अनुदान देय होगा।</p>
<p></p>
<p><strong>आवेदन की शर्तें </strong></p>
<ul>
<li>इस योजना का लाभ सभी श्रेणी के कृषकों को दिया जाएगा</li>
<li>व्यक्तिगत एवं कृषक समूह में आवेदनकर्ता के पास न्यूनतम 1.5 हेक्टर भूमि एक ही स्थान पर होनी चाहिए</li>
<li>अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में जोत का आकार कम होने के कारण न्यूनतम 0.5 हेक्टर भूमि एक ही स्थान पर होना आवश्यक है।</li>
<li>सामुदायिक आवेदन में 10 या अधिक कृषकों के समूह में न्यूनतम 5 हेक्टेयर भूमि तथा समूह की भूमि की सीमाएं निर्धारित पेरीफेरी में होना आवश्यक है।&nbsp;</li>
</ul>
<p></p>
<p><strong>आवेदन प्रक्रिया&nbsp;</strong></p>
<ul>
<li><a href="https://rajkisan.rajasthan.gov.in/Rajkisanweb/Home"><strong>राज किसान साथी पोर्टल</strong></a> पर जनआधार के माध्यम से स्वयं या नजदीकी ई-मित्र केन्द्र पर जाकर आवेदन कर सकते हैं</li>
<li>आवेदन-पत्र के साथ आवश्यक दस्तावेज: आधार कार्ड, जन आधार कार्ड, जमाबंदी की नकल (छः माह से अधिक पुरानी नहीं हो), बैंक खाते सम्बन्धित विवरण</li>
<li>आवेदन-पत्र ऑनलाइन जमा किए जाने की प्राप्ति रसीद ऑनलाइन ही प्राप्त होगी</li>
</ul>
<p></p>
<p><strong>मुख्य बातें&nbsp;</strong></p>
<ul>
<li>जिन कृषकों के जन आधार पर लघु एवं सीमान्त कृषक श्रेणी में पंजीयन (सिडिंग) है उनको ही लघु एवं सीमान्त कृषक मानते हुए अनुदान के लिए पात्र समझा जाएगा। यदि जन आधार में लघु/सीमान्त कृषक के पंजीयन की सुविधा नहीं है तो ऐसी स्थिति में कृषकों को आवेदन के समय सक्षम स्तर से जारी लघु/सीमान्त का प्रमाण पत्र संलग्न करना होगा।</li>
<li>आवेदन&nbsp; के उपरान्त कृषि विभाग द्वारा तारबंदी&nbsp; स्थापना के लिए प्रशासनिक स्वीकृति जारी की जाएगी। इसकी&nbsp; सूचना मोबाईल संदेश/कृषि पर्यवेक्षक&nbsp; के द्वारा प्राप्त होगी</li>
<li>तारबन्दी किये जाने से पूर्व व कार्य पूर्ण होने पर विभाग द्वारा मौका/सत्यापन व जियोटेगिंग के बाद अनुदान राशि सीधे कृषक के खाते में जमा होगी।</li>
</ul> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खेतों की तारबंदी के लिए 60 फीसदी तक अनुदान पाने का मौका, जानिए क्या है योजना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में 25 अक्टूबर से शुरू होगी सोयाबीन की खरीद, पंजीकरण करना जरूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/soybean-procurement-will-start-in-madhya-pradesh-from-25-october-to-31-december-registration-starts-from-25-september.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 Sep 2024 10:59:41 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/soybean-procurement-will-start-in-madhya-pradesh-from-25-october-to-31-december-registration-starts-from-25-september.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में सोयाबीन खरीद की तारीख निर्धारित कर दी गई है। प्रदेश में 25 अक्टूबर से सोयाबीन की खरीद शुरू होगी, जो 31 दिसंबर, 2024 तक चलेगी। इसके लिए किसानों को रजिस्ट्रेशन भी करना होगा, जिसकी अंतिम तिथि 15 अक्टूबर है। गुरुवार को भोपाल में मुख्य सचिव वीरा राणा की अध्यक्षता में खरीदी कार्य के लिए उत्कृष्ट व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए संपन्न हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।</p>
<p>मध्य प्रदेश सरकार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्य सचिव ने बैठक में खरीफ कृषि उपज की समीक्षा करते हुए सोयाबीन खरीदी की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए राजस्व विभाग को गिरदावरी का कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों से अपनी फसल बेचने के लिए ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर 25 सितंबर से 15 अक्टूबर तक रजिस्ट्रेशन कराने की अपील भी की। साथ ही अधिकारियों को ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर किसानों द्वारा रजिस्ट्रेशन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुविधाजनक रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।</p>
<p>बैठक में निर्णय लिया गया है कि समर्थन मूल्य पर सोयाबीन खरीदी की एजेंसी मार्कफेड होगी तथा भंडारण की व्यवस्था स्टेट वेयरहाउसिंग कारपोरेशन और बारदाना की व्यवस्था मार्कफेड द्वारा की जायेगी।</p>
<p>किसानों से फेयर एवरेज क्वालिटी (एफएक्यू) की सोयाबीन खरीदी के लिए सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जायेंगी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि खरीदी के दौरान केंद्रों पर किसानों को सुविधाजनक सुविधाएं और वातावरण दिया जाए। वहीं खरीद के तीन दिन में किसानों के खाते में भुगतान कर दिया जाएगा।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में 25 अक्टूबर से शुरू होगी सोयाबीन की खरीद, पंजीकरण करना जरूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोयाबीन का एमएसपी 6000 रुपये करने के लिए आंदोलित किसानों की भोपाल कूच की तैयारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-agitating-for-increasing-soybean-msp-to-rs-6000-are-preparing-to-march-to-bhopal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 12 Sep 2024 12:30:17 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-agitating-for-increasing-soybean-msp-to-rs-6000-are-preparing-to-march-to-bhopal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाकर 6000 रुपये प्रति क्विंटल करने के लिए राज्य में आंदोलन कर रहे किसान राजधानी भोपाल कूच की तैयारी कर रहे है। आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन (2024-25) के लिए केंद्र सरकार ने सोयाबीन का एमएसपी 4,892 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। किसानों का कहना है कि यह एमएसपी उनकी लागत से काफी कम है। वहीं प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन का दाम 4000 से 4500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है, जो मौजूदा एमएसपी से नीचे है। किसान संगठनों का कहना है कि जब तक सरकार सोयाबीन के लिए 6 हजार प्रति क्विंटल का दाम तय नहीं करती, प्रदेश में आंदोलन जारी रहेगा।&nbsp;</p>
<p>प्रदेश में सोयाबीन का भाव हाल ही के दिनों में 10 साल पुराने स्तर पर पहुंच गया था। एक माह पहले प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन की कीमतें 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गईं थी। हालांकि किमतों में अब सुधार हुआ है और यह बढ़कर 4000 से 4500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच आ गई हैं लेकिन दाम अभी भी एमएसपी से कम हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>नेफेड और एनसीसीएफ करेगा खरीद&nbsp;</strong></p>
<p>मध्य प्रदेश सरकार की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सोयाबीन खरीद की तारीख जल्द ही तय की जाएगी। राज्य सरकार द्वारा निर्धारित तारीख से सोयाबीन का उपार्जन 90 दिनों तक किया जाएगा। पंजीकृत किसानों से ही समर्थन मूल्य पर सोयाबीन की खरीद होगी। खरीद भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नेफेड) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) द्वारा की जाएगी। खरीद के तीन दिन में किसानों के खाते में भुगतान होगा।</p>
<p>तिलहन और दालों के लिए केंद्र सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत केंद्रीय एजेंसियां खरीद करती हैं। सोयाबीन के लिए नेफेड और एनसीसीएफ को अधिकृत करने की जानकारी राज्य सरकार ने दी है।</p>
<p><strong>अधिक बारिश से फसल को पहुंचा नुकसान&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>प्रदेश के किसान सोयाबीन के उत्पादन को लेकर भी चिंतित है क्योंकि मानसून में अधिक बारिश के चलते कई जिलों में सोयाबीन की फसल को नुकसान पहुंचा है। वहीं प्रदेश में सोयाबीन का उत्पादन पिछले कुछ वर्षों में घटा है। <strong>सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा)</strong>&nbsp;के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन 2023 में 524.70 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ था, जो खरीफ सीजन 2022 में 541.38 लाख टन, खरीफ सीजन 2021 में 522.92 लाख टन और खरीफ सीजन 2020 में 417.74 लाख टन था।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>किसानों का दावा एमएसपी है लागत से कम&nbsp;</strong></p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा मध्य प्रदेश के सदस्य <strong>राम इनानिया</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि किसानों ने यह आंदोलन सोयाबीन की कम कीमतों को लेकर शुरू किया था क्योंकि मौजूदा कीमतों से किसान अभी लागत भी नहीं निकाल पा रहे है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एमएसपी पर खरीद की बात तो कही, लेकिन यह किसानों की लागत से कम है। उन्होंने कहा कि सोयाबीन की प्रति एकड़ लागत करीब 22 से 23 हजार रुपये बैठती है जबकि प्रति एकड़ 4 से 5 क्विंटल किसानों को मिलती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सोयाबीन पर 4892 रुपये प्रति क्विंटल का एमएसपी दे रही है। सभी खर्चों को अगर मिला लें तो यह किसानों अपनी प्रति एकड़ लगात भी नहीं निकाल पा रहे हैं। ऐसे में किसान सोयाबीन के लिए 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं, जो वाजिव है।&nbsp;</p>
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<p>इनानिया ने कहा कि पहले कभी किसानों को सोयाबीन के लिए आंदोलन करने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि सोयाबीन हमेश अच्छे दाम पर बिकी। लेकिन इस साल कीमतों में भारी गिरावट के कारण किसान चिंतित हैं। उन्होंने कहा मध्य प्रदेश में सोयाबीन पर कभी एमएसपी था ही नहीं क्योंकि इससे पहले कभी सोयाबीन की सरकारी खरीद नहीं हुई। इस साल जब दाम गिरे हैं तो किसान एमएसपी की मांग कर रहे हैं लेकिन यह उनकी लागत से कम है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन गांव और तहसील स्तर से शुरू हुआ है और अब जिला स्तर पर पहुंच चुका है। अगर सरकार सोयाबीन के लिए 6 हजार रुपये का एमएसपी तय नहीं करती तो किसान राजधानी भोपाल में बड़ा आंदोलन करेंगे। जिसकी रूपरेखा जल्द तैयार की जाएगी।&nbsp;</p>
<p><strong>उत्पादन पर पड़ सकता है असर</strong></p>
</div>
</div>
</div>
</div>
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<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
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<p>मध्य प्रदेश कांग्रेस किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष <strong>केदार शंकर सिरोही</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि सोयाबीन की कम कीमतों से किसान काफी परेशान हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने राज्य में एमएसपी पर सोयाबीन खरीद की अनुमति दी है, लेकिन किसान 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं। सिरोही ने कहा कि किसान सिर्फ अपनी लागत की भरपाई चाहते हैं, क्योंकि मौजूदा एमएसपी से यह संभव नहीं है। हालांकि राज्य में सोयाबीन का अच्छा उत्पादन होता है, लेकिन इस साल बारिश के कारण फसल प्रभावित हो सकती है। ऐसे में केंद्र सरकार को एमएसपी बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं और कांग्रेस उनके साथ खड़ी है।&nbsp;</p>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोयाबीन का एमएसपी 6000 रुपये करने के लिए आंदोलित किसानों की भोपाल कूच की तैयारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में गन्ने में फैला रोग, बचाव के लिए शुगरकेन रिसर्च काउंसिल की एडवाइजरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-council-of-sugarcane-research-issued-advisory-regarding-yellowing-of-sugarcane-leaves-and-disease.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 12 Sep 2024 10:37:00 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-council-of-sugarcane-research-issued-advisory-regarding-yellowing-of-sugarcane-leaves-and-disease.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल में बड़े पैमाने पर उकठा रोग लग गया है। जिससे फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। गन्ने की विभिन्न किस्मों, जैसे को. 11015, को. 15027, को.वी.एस.आई. 8005, को.वी.एस.आई. 3102, को.वी.एस.आई. 0434 को इस रोग ने ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा गन्ने की फसल में जड़ बेधक कीट का प्रकोप भी पाया गया है, जो रोगग्रस्त और स्वस्थ दोनों तरह के गन्नों को प्रभावित कर रहा है। गन्ने की फसल को रोग से सुरक्षित करने और किसानों को नुकसान से बचाने के लिए उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ सुगरकेन रिसर्च, शाहजहांपुर (यूपी गन्ना शोध परिषद) ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी की है।</p>
<p><strong>उकठा रोग (विल्ट) और जड़ बेधक कीट की पहचान</strong></p>
<p>उकठा रोग फ्यूजेरियम सैकेरी नामक फफूंद से उत्पन्न होता है। यह मिट्टी-जनित रोग है जो जड़ों और तनों की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है, जिससे पौधे की पत्तियों का रंग पीला पड़ने लगता है। यह स्थिति खासतौर से 5 माह पुरानी फसल में देखी जाती है। पत्तियों का आगे का भाग पीला हो जाता है और धीरे-धीरे पूरा पौधा मुरझा जाता है। गन्ने के तने को काटने पर हल्के गुलाबी या लाल धारियां और जड़ के आंतरिक हिस्से में लाल धब्बे दिखाई देते हैं। अत्यधिक प्रभावित पौधों के तनों में सिकुड़न होती है और पत्तियों की मध्य शिराएं भी पीली हो जाती हैं।</p>
<p>जड़ बेधक कीट जड़ों और तनों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे पौधे के पोषक तत्वों का प्रवाह बाधित हो जाता है और पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। यह कीट उकठा रोग से प्रभावित और स्वस्थ दोनों प्रकार के गन्नों में पाया गया है।</p>
<p>कम बारिश, उच्च तापमान (30 से 35 डिग्री सेल्सियस), और कम नमी (50-60 प्रतिशत) जैसी मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां इस रोग और कीट प्रकोप को बढ़ावा देती हैं। लंबे समय तक सूखा और कम बारिश भी इसके अनुकूल होती हैं।</p>
<p><strong>उकठा रोग और जड़ बेधक कीट के प्रबंधन के उपाय</strong></p>
<p>फफूंदनाशक का उपयोग: थायोफेनेट मिथाईल 70 डब्लू पी (13 ग्राम प्रति लीटर पानी) या कार्बेन्डाजिम 50 डब्लू पी (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) का घोल बनाकर 15-20 दिनों के अंतराल पर दो बार ड्रेंचिंग करें। इसके बाद हल्की सिंचाई करें।</p>
<p>कीटनाशक का उपयोग: क्लोरपाइरीफॉस 20 प्रतिशत ई.सी. (2 लीटर), क्लोरपाइरीफॉस 50 प्रतिशत ई.सी. (1 लीटर), इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. (200 मिली), या बाइफेन्थ्रिन 10 ई.सी. (400 मिली) का 750 लीटर पानी में मिलाकर ड्रेंचिंग करें।</p>
<p><strong>आगामी फसल में बचाव के उपाय</strong></p>
<ul>
<li><strong>स्वस्थ बीज:</strong> स्वस्थ बीज का उपयोग अनिवार्य रूप से करें ताकि प्राथमिक संक्रमण से बचा जा सके।</li>
<li><strong>फसल चक:</strong> गन्ना रोग से प्रभावित खेतों में अन्य फसलों की बुआई करें।</li>
<li>बीज उपचार: बीज के टुकड़ों को 0.1 प्रतिशत कार्बेन्डाजिम 50 डब्लूपी अथवा थायोफेनेट मिथाईल 70 डब्लूपी तथा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस एल (0.5 मिली 1 लीटर पानी) कीटनाशक के साथ पारम्परिक विधि द्वारा 10-30 मिनट तक शोधन या भिगोकर अवश्य बुआई करें। एक या दो आंख के टुकड़ों 0.1 प्रतिशत कार्बेन्डाजिम 50 डब्लू.पी. अथवा थायोफेनेट मिथाईल 70 डब्लू.पी. के साथ सेट ट्रीटमेन्ट डिवाइस में 30 मिनट तक से उपचारित अवश्य करें।</li>
<li><strong>उकठा रोग नियंत्रण:</strong> उकठा रोग से बचाव के लिए मिट्टी में बोरेक्स (बोरिक एसिड) की 6 किलोग्राम तथा जिंक सल्फेट की 10 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से प्रयोग अवश्य करें।</li>
<li><strong>जैविक उपचार:</strong> बुआई के समय जैव-नियन्त्रक ट्राइकोडर्मा हारजिएनम को 4 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से 40-80 किलोग्राम कम्पोस्ट खाद के साथ मिलाकर खेत की तैयारी अथवा गन्ना बुआई के समय नालियों में तथा व्यांत व ग्रोथ अवस्था में अवश्य प्रयोग करें।</li>
<li><strong>जड़ बेधक कीट नियंत्रण:</strong> जड़ बेधक तथा अन्य कीट के नियन्त्रण के लिए बुआई के समय गन्ने के टुकडों पर प्रति एकड़ की दर से फिप्रोनिल 0.3 जी 8 किलोग्राम अथवा क्लोरपाइरीफॉस 20 प्रतिशत ई.सी. 2 लीटर अथवा क्लोरपाड्रीफॉस 50 प्रतिशत ई.सी. 1 लीटर अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 200 मिली. अथवा बाइफेन्थ्रिन 10 ई.सी. का 400 मिली को 750 लीटर पानी के साथ मिलाकर ड्रेन्चिंग करें।</li>
<li>एक निश्चित समय अन्तराल पर खेतों में आवश्यकतानुसार सिचाई करते रहे।</li>
</ul>
<p><strong>सिंचाई प्रबंधन</strong></p>
<p>खेत में समय-समय पर सिंचाई करते रहें ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे और पौधों को आवश्यक पोषण मिलता रहे। इस एडवाइजरी के पालन से गन्ना किसानों को अपनी फसलों को उकठा रोग और जड़ बेधक कीट से बचाने में मदद मिलेगी, जिससे उपज में सुधार होगा और फसल को नुकसान से बचाया जा सकेगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में गन्ने में फैला रोग, बचाव के लिए शुगरकेन रिसर्च काउंसिल की एडवाइजरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूनिवर्सल कार्टन उपलब्ध न होने से उत्तराखंड के सेब उत्पादक परेशान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/apple-growers-of-uttarakhand-troubled-due-to-non-availability-of-universal-carton.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Sep 2024 17:16:30 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/apple-growers-of-uttarakhand-troubled-due-to-non-availability-of-universal-carton.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड में हर्षिल से लेकर नौगांव तक सेब की उपज तैयार है। इस साल किसानों को शुरुआत में प्रति 10 किलो की पेटी का दाम 1700 रुपए तक भी मिला, जो पिछले वर्षों के मुकाबले बेहतर है। लेकिन सेब उत्पादक किसानों को एक और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस बार अब तक मार्केट में यूनिवर्सल पेटियां उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में टेलीस्कोपिक पेटियों में ही सेब पैक करना पड़ा रहा है।&nbsp;</p>
<p>टेलीस्कोपिक बॉक्स में जहां सेब खराब होने की ज्यादा आशंका रहती है, वहीं इसमें घटतौली की शिकायत भी आम है। इसलिए किसान यूनिवर्सल कार्टन में सेब बेचना चाहते हैं।&nbsp;किसानों की शिकायत के बाद उत्तराखंड के कृषि एवं उद्यान मंत्री <strong>गणेश जोशी</strong> ने विभाग को दस दिन के अंदर यूनिवर्सल कार्टन की उपलब्धता सुनिश्चित कराने को कहा है।&nbsp;उन्होंने पेटी की डिजाइनिंग और उसमें प्रयोग होने वाली निर्माण सामाग्री पर भी विशेष ध्यान दिये जाने के निर्देश दिये।&nbsp;</p>
<p><b>दोनों कार्टन में क्या है अंतर&nbsp;</b><br /><span>टेलीस्कोपिक कार्टन में जहां दो कार्टन का एक बॉक्स बनाया जाता है। इसमें इनर और आउटर दो कार्टन होते हैं। अगर आउटर कार्टन को इनर कार्टन से ऊपर उठाया जाए तो 20 किलो के कार्टन में 30 किलो तक सेब आ सकता है। इसमें दिक्कत यह होती है कि हर कार्टन को तौलना पड़ता है। </span><span></span><span>वहीं, यूनिवर्सल कार्टन सिंगल पीस कार्टन होता है। इसमें फिक्स मात्रा में 20 किलो के आसपास ही सेब भरा जाता है। </span><span>इसको तौलने की जरूरत नहीं होती और ना ही किसानों का अधिक सेब भरा जाता है।&nbsp;</span>किसानों का आरोप है कि आढ़तियों की साठगांठ के चलते इसकी कम सप्लाई हो रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>टेलीस्कोपिक कार्टन से नुकसान&nbsp;</strong></p>
<p>यमुना घाटी के सेब उत्पादक किसान <strong>संजय थपलियाल</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> बताया कि उत्तराखंड में ज्यादातर सेब बगीचे सड़क से काफी दूर हैं। इस कारण सेब को पेटियों में पैक कर खच्चर से सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। उबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों से सेब बाजारों तक पहुंचता है। टेलीस्कोपिक कार्टन में सेब को नुकसान पहुंचता है क्योंकि उसमें 20 किलों से ज्यादा सेब भरा होता है। जबकि यूनिवर्सल कार्टन में सेब खराब होने की संभावना कम रहती है। लेकिन यूनिवर्सल कार्टन की उपलब्धता न होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। थपलियाल का कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों में उद्यान विभाग के प्रयासों से सेब के बॉक्स की उपलब्धता तो बढ़ी है लेकिन इस साल यूनिवर्सल कार्टन मिलना मुश्किल हो रहा है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66e19a475045f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूनिवर्सल कार्टन उपलब्ध न होने से उत्तराखंड के सेब उत्पादक परेशान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66e19a475045f.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में दूध संघों का संचालन करेगा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/national-dairy-development-board-will-operate-milk-unions-in-madhya-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Sep 2024 17:02:05 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/national-dairy-development-board-will-operate-milk-unions-in-madhya-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश राज्य कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (सांची) और इससे जुड़े दूध संघों का प्रबंधन अब राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा किया जाएगा। यह निर्णय मंगलवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई डेयरी विकास योजना, दूध&nbsp;उत्पादन बढ़ाने और सांची दुग्ध संघ के कार्यों पर आयोजित समीक्षा बैठक में लिया गया। इसके लिए आवश्यक कानूनी प्रावधान किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा इस बैठक में लिये गये फैसलों के लिए जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है।&nbsp;</p>
<p>बैठक में केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी सचिव अलका उपाध्याय और एनडीडीबी के चेयरमैन मीनेश शाह भी उपस्थित थे। इस दौरान मध्य प्रदेश में दूध&nbsp;उत्पादन, एकत्रीकरण और सांची दुग्ध संघ के विषय में कार्ययोजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को दूध उत्पादन में अग्रणी बनाने और किसानों एवं पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जरूरत पड़ने पर सहकारिता अधिनियम में संशोधन भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बाद मध्य प्रदेश दूध उत्पादन में प्रमुख स्थान पर है। प्रदेश में प्रतिदिन 5.5 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता के मामले में भी राज्य का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। देश में प्रति व्यक्ति 459 ग्राम प्रतिदिन की तुलना में मध्य प्रदेश में यह 644 ग्राम है। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में राज्य का दूध उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य है, जिसके लिए सहकारी आंदोलन को मजबूत किया जाएगा और किसानों एवं पशुपालकों को लाभ पहुंचाया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के करीब 40 हजार गांवों में दूध&nbsp;उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे, जिनमें से वर्तमान में 10 हजार से 15 हजार गांवों में स्थिति संतोषजनक है। शेष गांवों में विभिन्न उपायों से उत्पादन में सुधार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।&nbsp;</p>
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<p>बैठक में गोबर से रसोई गैस और जैविक खाद प्राप्त करने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई। आगर-मालवा में इस दिशा में पहल की गई है। वर्तमान में प्रदेश में 233 संयंत्र स्थापित कर बायोगैस की सुविधा प्रदान की जा रही है। ऐसे किसान और पशुपालक जिनके पास कम से कम दो या तीन पशु हैं, उन्हें गोबर के उपयोग की जानकारी दी जाएगी और इस छोटे संयंत्र की स्थापना में सहायता दी जाएगी। इस संयंत्र के लिए किसानों को लगभग 10 हजार रुपये खर्च करने होंगे।</p>
</div>
</div>
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</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में दूध संघों का संचालन करेगा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ]]></media:description>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में एमएसपी पर होगी सोयाबीन की खरीद, केंद्र ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को दी मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/center-will-purchase-soybean-at-msp-in-madhya-pradesh-approves-state-government-proposal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Sep 2024 12:30:40 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/center-will-purchase-soybean-at-msp-in-madhya-pradesh-approves-state-government-proposal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र और कर्नाटक के बाद अब मध्य प्रदेश में भी सोयाबीन की सरकारी खरीद होगी। मंगलवार को मध्य प्रदेश सरकार ने सोयाबीन की सरकारी खरीद के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था, जिसे स्वीकृति मिल गई है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसान सोयाबीन की कम कीमतों से परेशान हैं, क्योंकि दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे चले गए हैं। किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। जल्द ही प्रदेश में सोयाबीन की सरकारी खरीद शुरू होगी।&nbsp;</p>
<p>प्रदेश में सोयाबीन का भाव हाल ही के दिनों में 10 साल पुराने स्तर पर पहुंच गया था। 15 से 20 दिनों पहले प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन की कीमतें 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गईं थी। किमतों में अब सुधार हुआ है और यह बढ़कर 4000 से 4500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच आ गई हैं। हालांकि दाम अभी भी केंद्र सरकार द्वारा आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन (2024-25) के लिए तय 4892 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी से कम हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि और किसान कल्याण हमारी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हाल ही में केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों को एमएसपी पर सोयाबीन की खरीदी की अनुमति दी थी। कल रात मध्य प्रदेश सरकार का भी सोयाबीन खरीदने का प्रस्ताव आया, जिसे स्वीकृति दे दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सोयाबीन की खरीद एमएसपी पर होगी। किसानों को उनकी मेहनत का पूरा दाम मिलेगा।&nbsp;</p>
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<p>सोयाबीन की कीमतों के एमएसपी से नीचे जाने के चलते किसानों की नाराजगी झेल रही मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को केंद्र सरकार को सोयाबीन की सरकारी खरीद के लिए प्रस्ताव भेजा था। जिसमें प्रदेश में सोयाबीन की सरकारी खरीद का आग्रह किया गया था। वहीं अब केंद्र से राज्य सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। जल्द ही प्रदेश में सोयाबीन की सरकारी खरीद शुरू होगी।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>मध्य प्रदेश में सोयाबीन की कीमतों को लेकर किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदेश भर के किसानों ने सोयाबीन की कम कीमतों को लेकर सोशल मीडिया पर मुहिम छेड़ रखी है। सोशल मीडिया के जरिए किसान लगातार सोयाबीन की कम कीमतों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। हाल ही में <span>1 से 7 सितंबर तक प्रदेश के विभिन्न किसान संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा मध्य प्रदेश के तत्वाधान में </span>गांवों में <span>पंचायत सचिवों के माध्यम से प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजे थे। जिसमें</span> सोयाबीन का दाम 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग की गई थी।&nbsp;</p>
</div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में एमएसपी पर होगी सोयाबीन की खरीद, केंद्र ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को दी मंजूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    <item>
        <title><![CDATA[बढ़ती कीमतों पर अंकुश के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने गेहूं पर लगाई स्टॉक लिमिट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-imposed-limit-on-wheat-stock-after-the-centre-government.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 10 Sep 2024 13:34:28 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-imposed-limit-on-wheat-stock-after-the-centre-government.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार ने भी गेहूं पर स्टॉक लिमिट लागू कर दी है। यह आदेश 9 सितंबर से लागू कर दिया गया है, जो 31 मार्च 2025 तक जारी रहेगा। इसके तहत, प्रदेश के थोक व्यापारी तीन हजार टन और रिटेलर 10 टन गेहूं ही भंडारण कर सकेंगे। गेहूं की लगातार बढ़ती कीमतों और गेहूं की जमाखोरी को रोकने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है।&nbsp;</p>
<p>मध्य प्रदेश की मंडियों में गेहूं की कीमतें लगातार ऊपर बनी हुई हैं। सामान्य किस्म के गेहूं का औसत दाम 2700 रुपये प्रति क्विटल के आसपास बना हुआ है, जबकि रबी मार्केटिंग सीजन 2023-24 के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2275 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। राज्य सरकार ने अतिरिक्त बोनस दिया था जिसके चलते यहां किसानों को सरकारी खरीद में गेहूं की बिक्री करने पर 2400 रुपये प्रति क्विंटल का दाम मिला था।</p>
<p><span>मध्य प्रदेश में कृषि उत्पादों की थोक खऱीद व बिक्री करने वाले एक एफपीओ के एक अधिकारी ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि&nbsp; पिछले 15 से 20 दिनों में गेहूं का दाम 2700 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है, जबकि टॉप क्वालिटी के शरबती गेहूं का दाम 3000 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा स्टॉक लिमिट लगाये जाने से कीमतें रुक गई हैं और इनमें कुछ कमी भी आ सकती है। </span></p>
<p><span>मध्य प्रदेश देश के सबसे ज्यादा गेहूं उत्पादन वाले राज्यों की में से एक है। लेकिन पिछले रबी सीजन 2023-24 में राज्य में प्रतिकूल मौसम के चलते गेहूं की फसल प्रभावित हुई थी जिसके चलते यहां गेहूं की सरकारी खऱीद में भी गिरावट आई रबी मार्केटिंग सीजन (2024-25) में देश में 266 लाख टन की कुल सरकारी खरीद हुई। इसमें मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 48 लाख टन रही। मध्य प्रदेश में सालाना करीब 200 लाख टन गेहूं का उत्पादन होता है।&nbsp;</span></p>
<p>केंद्र सरकार ने जून में गेहूं पर स्टॉक लिमिट लागू की थी ताकि गेहूं की जमाखोरी और महंगाई पर अंकुश लगाया जा सके। गेहूं पर स्टॉक लिमिट लगाने का निर्णय उस समय लिया गया था, जब सरकार ने गेहूं के रिकॉर्ड 11.29 करोड़ टन उत्पादन का दावा किया था। हालांकि, वित्त वर्ष 2023-24 में गेहूं की कम सरकारी खरीद और स्टॉक लिमिट लगाने का फैसला उत्पादन के अनुमान पर सवाल उठाता है। उस समय ने सरकार ने तर्क दिया था कि गेहूं की कीमतों को स्थिर रखने के लिए यह फैसला लिया गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बढ़ती कीमतों पर अंकुश के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने गेहूं पर लगाई स्टॉक लिमिट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में 20 हजार सोलर पंप सेट पर मिलेगी 80 फीसदी तक सब्सिडी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-is-giving-up-to-80-percent-subsidy-on-solar-pump-apply-like-this.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 09 Sep 2024 11:40:06 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-is-giving-up-to-80-percent-subsidy-on-solar-pump-apply-like-this.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि सोलर पंप सेट के लिए नए बिजली कनेक्शन प्राप्त करने में पेश आ रही समस्याओं को देखते हुए पंजाब सरकार किसानों को 20 हजार सोलर पंप सेट उपलब्ध कराएगी। किसानों को विभिन्न श्रेणियों में 80 फीसदी तक सब्सिडी दी जाएगी। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया 9 सितंबर से शुरू हो गई है, जो 30 सितंबर तक चलेगी। किसान सोलर पंप के लिए <a href="https://pmkusum.peda.gov.in/PB/landing.html"><strong>www.pmkusum.peda.gov.in</strong></a> पर आवेदन कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>योजना के तहत किसानों को चार प्रकार के सोलर पंप सेट के विकल्प दिए गए हैं, जिनमें 3 एचपी, 5 एचपी, 7.5 एचपी, और 10 एचपी शामिल हैं। 3 एचपी पंप की कीमत करीब 2.9 लाख रुपये, 5 एचपी की 3.3 लाख रुपये, 7.5 एचपी की 4.15 लाख रुपये, और 10 एचपी पंप की कीमत 5.57 लाख रुपये है। पंजाब सरकार सामान्य श्रेणी के किसानों को 60 फीसदी और अनुसूचित जाति (एससी) के किसानों को 80 फीसदी तक की सब्सिडी देगी। अनुसूचित जाति के किसानों के लिए 2000 सोलर पंप और ग्राम पंचायतों के लिए 3000 पंप आरक्षित किए गए हैं। इन पंपों का आवंटन 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर किया जाएगा।</p>
<p>पंजाब सरकार की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, डार्क जोन क्षेत्रों में इन पंपों को प्राथमिकता दी जाएगी। खासतौर पर उन किसानों को पंप मिलेंगे जिनकी मोटरों पर पहले से माइक्रो इरीगेशन सिस्टम (ड्रिप या स्प्रिंकलर) लगा हुआ है। इसके अलावा, जिन किसानों या पंचायतों के पास पानी निकालने के लिए डीजल पंप हैं, वे भी इस योजना के लिए पात्र होंगे। हालांकि, जिन किसानों के पास पहले से पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के बिजली कनेक्शन हैं या उनके नाम पर सोलर पंप पहले से लगे हैं, वे इस योजना के तहत आवेदन नहीं कर पाएंगे।&nbsp; किसान इस योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट पर जा सकते हैं और वहां से ब्रोशर भी डाउनलोड कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>पंजाब एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (पेडा) ने राज्य के 12 जिलों के 37 ब्लॉकों की पहचान की है, जहां भूजल का स्तर सुरक्षित है। इन जिलों में बठिंडा, श्री मुक्तसर साहिब, फाजिल्का, फिरोजपुर, गुरदासपुर, होशियारपुर, मानसा, एसबीएस नगर, पठानकोट, पटियाला, रोपड़ और एसएएस नगर शामिल हैं। इन सुरक्षित ब्लॉकों के किसान बिना किसी अतिरिक्त शर्त के इस योजना के तहत सोलर पंप के लिए आवेदन कर सकते हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में 20 हजार सोलर पंप सेट पर मिलेगी 80 फीसदी तक सब्सिडी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा चुनाव: कांग्रेस गोल दागने के लिए सर्किल के भीतर लेकिन भाजपा को अभी गोलकीपर की तलाश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-polls-congress-feels-inside-the-circle-ready-to-score-bjp-searching-for-a-goalie.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 08 Sep 2024 18:18:51 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-polls-congress-feels-inside-the-circle-ready-to-score-bjp-searching-for-a-goalie.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चुनाव के दौर से गुजर रहा हरियाणा अपने लोगों की सीधी बात के लिए जाना जाता है। हरियाणा वासी जो महसूस करते हैं वही बोलते हैं। डिप्लोमेटिक तरीके से बातचीत करना उन्हें कम आता है।</p>
<p>ग्राउंड रिपोर्ट से वहां की जो स्थिति का पता चलता है वह कुछ इस प्रकार है- 90 सीटों वाली विधानसभा के लिए टिकटों का वितरण अभी जारी है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और उसे चुनौती देने वाली कांग्रेस दोनों कि फिलहाल यही स्थिति है। चुनौती देने वाली टीम यानी कांग्रेस में आत्मविश्वास का स्तर काफी ऊंचा लग रहा है जबकि पिछले चुनाव में जीत दर्ज करने वाली टीम अभी तक यह तय नहीं कर पा रही है कि उनके गोल पोस्ट की रक्षा कौन करेगा।&nbsp;</p>
<p>भाजपा कड़ी टक्कर देना चाहती है लेकिन वह इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं है कि गोलकीपर किसे बनाया जाए। क्या यह जिम्मेदारी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को दी जाए जिन्हें लोकसभा चुनाव से ठीक पहले एंटी इनकंबेंसी से जूझ रहे मनोहर लाल खट्टर की जगह लाया गया था? हालांकि सैनी भी संसदीय चुनाव में कांग्रेस को आगे बढ़ने से नहीं रोक पाए और 10 लोकसभा सीटों में से पांच मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के खाते में चली गईं।<br />कांग्रेस को लग रहा है कि वह गोल डालने के लिए सर्कल के भीतर पहुंच चुकी है। कुछ-कुछ जगहों पर प्रभाव रखने वाली आम आदमी पार्टी राहुल गांधी को यह समझाने में लगी है कि वह कांग्रेस को पेनल्टी कॉर्नर दिला सकती है। लेकिन वह इसकी कीमत चाहती है जो कांग्रेस की हरियाणा टीम के कप्तान और पुराने राजनीतिज्ञ भूपेंद्र सिंह हुड्डा नहीं देना चाहते।</p>
<p>यह खेल आखिर कौन सा करवट लेगा? हालात चुनौती देने वाली टीम के पक्ष में लग रहे हैं, बशर्ते राहुल गांधी इसके खिलाड़ियों में टीम भावना जागने में सफल रहें। चाहे कुमारी शैलजा हों या रणदीप सुरजेवाला, सब भाजपा के गोल पोस्ट में गेंद डालने के लिए तैयार हैं और बड़ा स्कोर करने की तमन्ना रखते हैं। लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कद इतना बड़ा है कि उन्हें नाराज नहीं किया जा सकता है। इसलिए इस खेल का अंत निश्चित ही काफी रोचक होने वाला है। &nbsp;</p>
<p>क्या भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर जीत दर्ज कर हैट्रिक करने की स्थिति में है? इसकी चुनौतियां सिर्फ 10 साल के शासन के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी नहीं बल्कि चौटाला परिवार के दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी भी है, जिसके साथ गठबंधन में उसकी सरकार चली। खट्टर सरकार में जेजेपी ने काफी मोल भाव किया था और सिर्फ 10 विधानसभा सीटें जीतने के बावजूद उपमुख्यमंत्री का पद लिया था। &nbsp;लेकिन इस बार अभी तक जेजेपी के लिए दो सीटें जीत पाना भी मुश्किल लग रहा है। भाजपा चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के साथ हाथ मिलाने की सोच रही है जिसका अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं पर प्रभाव है। अभी मतदान में 3 सप्ताह का समय बाकी है।</p>
<p>हरियाणा राज्य आकार में भले ही छोटा हो यहां के लोगों में 5 अक्टूबर को होने वाले मतदान के लिए काफी उत्साह है। उम्मीद की जाती है कि यह उत्साह 95 लाख से कुछ अधिक महिला मतदाता और कुल 2.3 करोड़ मतदाताओं वाले राज्य में मतदान प्रतिशत में भी नजर आएगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा चुनाव: कांग्रेस गोल दागने के लिए सर्किल के भीतर लेकिन भाजपा को अभी गोलकीपर की तलाश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Rajasree Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66dd9d1866b88.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड के युवा को इंटीग्रेटेड फार्मिंग से मिली कामयाबी ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/youth-of-uttarakhand-got-success-through-integrated-farming.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 08 Sep 2024 14:05:33 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/youth-of-uttarakhand-got-success-through-integrated-farming.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कुछ साल पहले तक नरेश सजवाण पहाड़ के उन युवाओं में से एक थे जिन्हें आजीविका की तलाश में पहाड़ से पलायन करना पड़ा। इस बीच 2019 में, उन्हें पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते&nbsp; संविदा की नौकरी त्यागकर वापस गांव लौटना पड़ा। लेकिन सवाल फिर भी वही था कि गांव में करेंगे क्या?</p>
<p>नरेश ने आटा चक्की शुरू करने की सोची। उन्होंने कृषि विभाग की मदद से 80 प्रतिशत सब्सिडी पर गांव में आटा चक्की शुरू की और साथ ही खेती और पशुपालन से जुड़े कामों में संभावनाएं तलाशने लगे। आटा चक्की से शुरु करते हुए नरेश अब पॉलीहाउस, दुग्ध उत्पादन, मुर्गी और मत्स्य पालन के साथ ही आर्गेनिक सब्जियां उगाकर, इंटीग्रेटेड फार्मिंग का सफल मॉडल खड़ा कर चुके हैं। इस काम में उन्होंने उत्तराखंड सरकार की तमाम कल्याणकारी योजनाएं की मदद ली। इंटीग्रेटेड फार्मिंग के सफल मॉडल के लिए नरेश को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।&nbsp;</p>
<p>नरेश सजवाण बताते है कि उन्होंने पशुपालन विभाग की मदद से गांव में मुर्गी पालन शुरू किया। इस काम पर उनकी कुल लागत तीन हजार रुपये ही आई, लेकिन दो साल के भीतर वो इससे करीब एक लाख रुपये कमाने में कामयाब रहे। इससे हौसला बढ़ा तो उन्होंने उद्यान विभाग की योजना के तहत 80 प्रतिशत सब्सिडी पर पॉलीहाउस भी बनवा लिया, इसमें वो सब्जियां उगाते हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66dd98a2d60da.jpg" alt="" /></p>
<p>नरेश बताते हैं कि वो इस खरीफ के सीजन में ही करीब 40 हजार रुपये की सब्जियां बेच चुके हैं। वह उद्यान विभाग की मदद से 80 प्रतिशत सब्सिडी पर 500 पेड़ सेब भी लगा चुके हैं। अगले साल तक इन पड़ों से सेब उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इसके अलावा इस समय उनके खेत में राजमा, पंचरंगी दाल, कुलथ की दालें भी लहलहा रही हैं। नरेश सजवाण ने इस बीच स्वजल और मनरेगा का लाभ लेते हुए अपने लिए गोबर गैस प्लांट भी लगा दिया है। नरेश बताते हैं कि इसके बाद उन्होंने सितंबर 2023 से रसोई गैस का सिलेंडर नहीं भराया है। घर में तीनों वक्त का खाना गोबर गैस से ही बनता है। गोबर गैस प्लांट से निकला वर्मी कम्पोस्ट युक्त गोबर पॉलीहाउस में काम आ जाता है।&nbsp;</p>
<p>नरेश बताते हैं कि उन्होंने अब प्रयोग के तौर पर मछली पालन भी शुरू किया है, साथ ही दुग्ध उत्पादन करते हुए इसके सहायक उत्पाद के रूप में पनीर भी नजदीकी बाजार में बेच रहे हैं। इन सब कामों से वो अपने गांव में रहकर ही नौकरी से ज्यादा कमा लेते हैं। नरेश कहते हैं कि यदि राज्य सरकार इन योजनाओं पर भारी भरकम सब्सिडी नहीं देती तो उनके जैसे किसान कभी भी इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं।</p>
<p>नरेश पहाड़ के युवाओं को अपने गांव आकर, गांव को आबाद करने का सुझाव देते हैं। इसके लिए उत्तराखंड सरकार की तमाम योजनाएं चल रही हैं। इससे पलायन से खाली होते उत्तराखंड के गांवों में भी नया जीवन लौट सकता है। विदित है कि उत्तराखंड के गांवों में पलायन एक बड़ी समस्या है, पलायन आयोग के मुताबिक राज्य बनने के बाद 1800 से अधिक गांव निर्जन हो चुके हैं</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड के युवा को इंटीग्रेटेड फार्मिंग से मिली कामयाबी  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66dd8c2f586aa.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हिमाचल में भांग की खेती वैध करने की कवायद, राज्य सरकार जल्द लाएगी नीति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/efforts-to-legalize-cannabis-cultivation-in-himachal-state-government-will-soon-bring-policy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 07 Sep 2024 18:25:22 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/efforts-to-legalize-cannabis-cultivation-in-himachal-state-government-will-soon-bring-policy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती को औषधीय और औद्योगिक (गैर-मादक) उद्देश्यों के लिए वैध करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में इस मुद्दे पर बनी कमेटी ने शुक्रवार, 6 सितंबर को हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में अपनी रिपोर्ट पेश की। सदन में इस रिपोर्ट की सिफारिशों को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। इस रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती को वैध करने के साथ-साथ इसके आर्थिक लाभों पर भी बात की गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस कदम से राज्य को पहले कुछ वर्षों में 400 से 500 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। साथ ही किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।&nbsp;</p>
<p>राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हिमाचल में भांग की खेती को वैध बनाने के लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट को सदन में मंजूरी मिल गई है, जो यह दर्शाता है कि प्रदेश के लोग भांग की खेती के पक्ष में हैं। इसका उपयोग दवा इंडस्ट्री में किया जाएगा, इससे न केवल राज्य की आय में बढ़ोतरी होगी बल्कि किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि अब हिमाचल में भांग की खेती का रास्ता साफ हो गया है और सरकार जल्द ही इसके लिए नीति और एसओपी लाएगी, ताकि इस पर काम शुरू किया जा सके।&nbsp;</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, कमेटी ने राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा किया और जनप्रतिनिधियों से बातचीत कर उनके विचार जाने। इसके अलावा, भांग की खेती को लेकर अधिक जानकारी जुटाने के लिए कमेटी ने जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश का दौरा भी किया। इन राज्यों के अनुभवों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और जलवायु भांग की खेती के लिए अनुकूल है। यह पौधा राज्य के कई जिलों में जंगली रूप से उगता है, जिसे नशीली दवाओं के प्रयोग के डर से नष्ट किया जा रहा है। सरकार इस अनछुई क्षमता का फायदा उठा सकती है और भांग की खेती को विनियमित कर किसानों को लाभ पहुंचा सकती है। भांग की खेती से औद्योगिक उत्पाद जैसे कपड़े, कागज, जैव ईंधन और स्वास्थ्य देखभाल उत्पादों के निर्माण के लिए नए उद्योगों को आकर्षित किया जा सकता है, जिससे राज्य की आय में वृद्धि होगी। प्रारंभिक वर्षों में इस पहल से 400 से 500 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है। भांग की खेती से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे राज्य से युवाओं का पलायन कम होगा।</p>
<p><strong>भांग की खेती को लेकर की गईं सिफारिशें</strong></p>
<ul>
<li>एनडीपीएस अधिनियम 1985 की धारा 10 के तहत राज्य सरकार को दी गई शक्तियों के आधार पर, नियंत्रित वातावरण में औषधीय और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए भांग की खेती, उत्पादन, निर्माण, कब्जा, परिवहन, आयात, निर्यात और बिक्री की अनुमति देने के लिए हिमाचल प्रदेश एनडीपीएस नियम 1989 में संशोधन किया जाएगा।&nbsp;</li>
<li>एनडीपीएस अधिनियम 1985 की धारा 14 के तहत, केवल फाइबर या बीज प्राप्त करने या बागवानी और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भांग की खेती की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी जा सकती है।&nbsp;</li>
<li>खेती और उत्पादन की प्रक्रियाओं के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं बनाई जाएंगी।</li>
<li>राज्य स्तर पर एक प्राधिकरण बनेगा जो गैर-मादक उद्देश्यों के लिए भांग की खेती को विनियमित करेगा, जैसे कि बीज बैंक की स्थापना, उपज की खरीद और औद्योगिक व फार्मा इकाइयों की स्थापना।&nbsp;</li>
<li>कृषि/बागवानी विभाग, विशेषज्ञों और विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर बीज बैंक बनाए जा सकते हैं।&nbsp;</li>
<li>सीएसके कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर और डॉ. वाई.एस. परमार विश्वविद्यालय, नौणी की मदद से अनुसंधान और विकास तकनीक विकसित की जा सकती &nbsp;है।&nbsp;</li>
<li>भूमि की जियो टैगिंग का काम राजस्व, आईटी और अन्य विभाग करेंगे।&nbsp;</li>
<li>आय का कुछ हिस्सा अनुसंधान, जागरूकता और क्षमता निर्माण के लिए अलग रखा जाएगा।&nbsp;</li>
<li>अतिरिक्त काम के लिए राज्य आबकारी और कराधान विभाग को विशेष कर्मचारी मिलेंगे।&nbsp;</li>
</ul>
<p><strong><br />एचपी एनडीपीएस नियम में होगा संशोधन</strong></p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, भांग की खेती को वैध बनाने के लिए हिमाचल प्रदेश नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) नियम, 1989 में संशोधन किया जाएगा। एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 10 और 14 के तहत राज्य सरकार को भांग की खेती की अनुमति देने की शक्तियां प्राप्त हैं। राज्य सरकार औषधीय और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए भांग की खेती को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए यह संशोधन करेगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हिमाचल में भांग की खेती वैध करने की कवायद, राज्य सरकार जल्द लाएगी नीति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हिमाचल सरकार पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय की जमीन पर्यटन विभाग को देने पर अडिग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/decision-to-transfer-palampur-agricultural-university-land-to-tourism-department-is-final-notification-soon-said-cm-sukhvinder-sukhu.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 07 Sep 2024 11:35:45 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/decision-to-transfer-palampur-agricultural-university-land-to-tourism-department-is-final-notification-soon-said-cm-sukhvinder-sukhu.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में 'टूरिज्म विलेज' के लिए चौधरी सरवन कुमार कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर (सीएसके) की 112 हेक्टेयर जमीन को पर्यटन विभाग को सौंपने का फैसला अंतिम है। यह जमीन जल्द ही 'टूरिज्म विलेज' बनाने के लिए हस्तांतरित की जाएगी। यह बात प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा सत्र के दौरान कही।&nbsp;</p>
<p>कांगड़ा की सुलह विधानसभा से भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार द्वारा पूछे गए सवाल पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला सावधानी से लिया गया है। उन्होंने साफ किया कि इस जमीन पर कोई कैसीनो नहीं बनेगा और 'टूरिज्म विलेज' के लिए जमीन हस्तांतरण के खिलाफ याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है।</p>
<p>सुक्खू ने यह भी कहा कि पिछले 48 वर्षों में विश्वविद्यालय ने 50 हेक्टेयर जमीन भी विकसित नहीं की है। भविष्य में विश्वविद्यालय को जरूरत पड़ने पर निजी जमीन उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि पर्यटन हिमाचल प्रदेश की ताकत है और जमीन हस्तांतरण के लिए अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी।</p>
<p>विपिन सिंह परमार ने इस जमीन हस्तांतरण का विरोध करते हुए सुझाव दिया कि बागोड़ा में 3000 बीघा जमीन उपलब्ध है, जिसका उपयोग किया जा सकता है। विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने भी कहा कि विश्वविद्यालय के पास 'टूरिज्म विलेज' बनने से शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो सकता है और किसी अन्य स्थान पर यह परियोजना शुरू करने का सुझाव दिया।</p>
<p>कांगड़ा जिले में 'टूरिज्म विलेज' बनाने के लिए पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय की 112 हेक्टेयर जमीन को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव पर विवाद लगातार जारी है। विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्र इस फैसले का विरोध कर रहे हैं, जबकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय अंतिम है। छात्रों का कहना है कि यह प्रस्ताव अनुचित है क्योंकि सरकार विश्वविद्यालय को अधिक जमीन देने के बजाय मौजूदा भूमि घटाने की कोशिश कर रही है। छात्र संगठनों का कहना है कि यह जमीन छात्रों के प्रायोगिक कार्यों और अनुसंधान के लिए उपयोगी है, और इसके हस्तांतरण से विश्वविद्यालय के पास मौजूदा क्षेत्र कम हो जाएगा, जिससे उत्तर पश्चिमी हिमालय के लिए केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय बनने की संभावना खत्म हो जाएगी।</p>
<p>सरकार ने विश्वविद्यालय को इसके बदले दूसरी जमीन देने की पेशकश की है, लेकिन शिक्षकों और छात्रों का कहना है कि यह वैकल्पिक जमीन बंजर है और विश्वविद्यालय से काफी दूर है। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि विश्वविद्यालय की मौजूदा भूमि को करोड़ों रुपये खर्च कर विकसित किया गया है, और नई जमीन उपयोगी नहीं होगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66dbea4a20462.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हिमाचल सरकार पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय की जमीन पर्यटन विभाग को देने पर अडिग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66dbea4a20462.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में धान, ज्वार और बाजरा की खरीद के लिए 19 सितंबर से शुरू होगा पंजीकरण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/registration-for-purchase-of-paddy-jowar-and-millet-will-start-from-september-19-in-madhya-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 07 Sep 2024 09:20:06 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/registration-for-purchase-of-paddy-jowar-and-millet-will-start-from-september-19-in-madhya-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में खरीफ मार्केटिंग सीजन 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार और बाजरा की खरीद के लिए किसान पंजीकरण प्रक्रिया का निर्धारण कर दिया गया है। किसान 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक अपना पंजीकरण कर पाएंगे। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीकरण करा लें, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो। उन्होंने कहा कि किसान पंजीकरण की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। किसान स्वयं के मोबाईल से घर बैठे पंजीकरण कर सकेंगे। किसानों को पंजीकरण केन्द्रों में लाईन लगाकर पंजीकरण कराने की समस्या से मुक्ति मिलेगी।</p>
<p><strong>पंजीकरण की नि:शुल्क व्यवस्था</strong></p>
<p>राज्य कृषि विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, किसानों के मोबाईल से पंजीकरण करने की सुविधा के अतिरिक्त अन्य व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। पंजीकरण की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीकरण केन्द्र पर तथा एमपी किसान एप पर भी की गई है।</p>
<p>पंजीकरण की सशुल्क व्यवस्था एमपी ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। इन केन्द्रों पर पंजीकरण के लिये शुल्क राशि प्राप्त करने के संबंध में कलेक्टर निर्देश जारी करेंगे। प्रति पंजीकरण के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क निर्धारित नहीं किया जाएगा। किसान पंजीकरण के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोट पहचान पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य होगा। सिकमी/बटाईदार/कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीकरण की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था &zwnj;द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा।</p>
<p><strong>अपडेट रखें मोबाईल नंबर और बैंक खाता&nbsp;</strong></p>
<p>किसान द्वारा समर्थन मूल्य पर विक्रय उपज का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किसान के आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते में भुगतान करने में किसी कारण से समस्या उत्पन्न होने पर किसान &zwnj;द्वारा पंजीकरण में उपलब्ध कराये गए बैंक खाते में भुगतान किया जा सकेगा। किसान पंजीकरण के समय किसान को बैंक खाता नंबर और आईएफएससी कोड की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। अक्रियाशील बैंक खाते, संयुक्त बैंक खाते एवं फिनो, एयरटेल, पेटीएम, बैंक खाते पंजीकरण में मान्य नहीं होंगे। पंजीकरण व्यवस्था में बेहतर सेवा प्राप्त करने के लिए यह जरूरी होगा कि किसान अपने आधार नंबर से बैंक खाता और मोबाईल नंबर को लिंक कराकर उसे अपडेट रखें।</p>
<p>सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीकरण केन्द्रों को क्रियाशील रखा जाए ताकि किसान वहां जाकर आसानी से अपना मोबाईल नंबर एवं बायोमेट्रिक अपडेट करा सके। इस कार्य के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय आवश्यक होगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन के लिए पंजीकरण के दौरान ही 1 रुपये का ट्रांजेक्शन मध्य प्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा।</p>
<p><strong>आधार नंबर का वेरिफिकेशन</strong></p>
<p>पंजीकरण कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से या बायोमेट्रिक डिवाईस से किया जा सकेगा। किसान का पंजीकरण केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि किसान के भू-अभिलेख के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही उक्त पंजीयन मान्य होगा।</p>
<p><strong>किसानों को करें एसएमएस</strong></p>
<p>विगत रबी एवं खरीफ के पंजीकरण में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं। किसान पंजीकरण की सभी प्रक्रियाएं समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66db14b19173e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में धान, ज्वार और बाजरा की खरीद के लिए 19 सितंबर से शुरू होगा पंजीकरण ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66db14b19173e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जम्मू&amp;#45;कश्मीर में भाजपा ने किया किसानों को सालाना 10 हजार देने का वादा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/bjp-promises-to-give-ten-thousand-rupees-annually-to-farmers-in-jammu-and-kashmir.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Sep 2024 18:30:51 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/bjp-promises-to-give-ten-thousand-rupees-annually-to-farmers-in-jammu-and-kashmir.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू-कश्मीर के किसानों को सालाना 10 हजार रुपये देने का वादा किया है। शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर चुनाव के लिए भाजपा का संकल्प पत्र जारी करते हुए यह ऐलान किया। भाजपा का दावा है कि अगर जम्मू-कश्मीर में उनकी सरकार बनती है, तो किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान नीधि योजना के 6 हजार रुपये समेत 4 हजार रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे।&nbsp;</p>
<p>वर्तमान में पीएम किसान योजना के तहत किसानों को सालाना 6 हजार रुपये मिलते हैं। भाजपा का दावा है कि अगर जम्मू-कश्मीर में उनकी सरकार बनती है, तो किसानों को मौजूदा 6 हजार रुपये के अतिरिक्त 4 हजार रुपये और दिए जाएंगे। जिससे किसानों को कुल 10 हजार रुपये प्राप्त होंगे। इसके अलावा किसानों के लिए बिजली की दरों को 10 कृषि गतिविधियों के लिए 50 फीसदी तक कम किया जाएगा, जिससे सिंचाई पंप और अन्य मशीनरी चलाना आसान होगा।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">जम्मू-कश्मीर के लिए भाजपा का संकल्प<br /><br />प्रदेश के किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 10,000 रुपये प्रदान करेंगे एवं कृषि गतिविधियों के लिए बिजली की दरों को 50% तक कम करेंगे।<a href="https://twitter.com/hashtag/BJPJnKSankalpPatra?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#BJPJnKSankalpPatra</a> <a href="https://t.co/RCyg2Am8FJ">pic.twitter.com/RCyg2Am8FJ</a></p>
&mdash; BJP (@BJP4India) <a href="https://twitter.com/BJP4India/status/1832018900646539623?ref_src=twsrc%5Etfw">September 6, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>भाजपा के संकल्प पत्र के अनुसार, किसानों की आय बढ़ाने के लिए गेहूं, चावल, मक्का, दालों और अन्य कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर में हिमाचल प्रदेश की तरह बागवानी उत्पादों के प्रसंस्करण और विपणन सहकारी को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे स्थानीय किसानों को सशक्त किया जा सके।&nbsp;</p>
<p>बागवानी, विदेशी फूलों की खेती, मधुमक्खी पालन, मछली पालन और एकीकृत खेती जैसी विविध कृषि प्रथाओं को आधुनिक तकनीकों और स्मार्ट मार्केटिंग का उपयोग कर बढ़ावा दिया जाएगा। सेब, केसर, अखरोट, बादाम, लीची, आम और ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती पर ध्यान दिया जाएगा, साथ ही इनकी निर्यात क्षमता को भी बढ़ाया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>किसानों को मदद देने के लिए कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं विकसित की जाएंगी। कृषि उपकरणों और उर्वरकों पर सब्सिडी बढ़ाई जाएगी। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रमाणीकरण सहायता, जैविक इनपुट और जैविक खेती के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी, खासकर उन फसलों के लिए जिनमें निर्यात की संभावनाएं ज्यादा हैं। किसानों को कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। कश्मीरी सेब को आयातित सेबों के प्रभाव से बचाने के लिए जीआई (जीआई) टैग दिलाने के कदम भी उठाए जाएंगे।</p>
<p>भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में महिलाओं को हर साल 18 हजार रुपये देने, हर साल दो मुफ्त सिलेंडर, पर्यटन को बढ़ावा देने, वृद्ध पेंशन में बढ़ोतरी, युवाओं को 10 हजार तक की मुफ्त कोचिंग फीस, 5 लाख रोजगार अवसर पैदा करने सहित कई अन्य वादे किए हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66dafad4766af.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने किया किसानों को सालाना 10 हजार देने का वादा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66dafad4766af.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश के हर जिले में ‘किसान न्याय यात्रा’ निकालेगी कांग्रेस, मंदसौर से शुरुआत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/congress-will-take-out-kisan-nyay-yatra-in-every-district-of-madhya-pradesh-start-from-mandsaur.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Sep 2024 17:56:56 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/congress-will-take-out-kisan-nyay-yatra-in-every-district-of-madhya-pradesh-start-from-mandsaur.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में कांग्रेस किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरने में जुटी है। किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी&nbsp;<span>और <strong>सोयाबीन</strong> का भाव 6 हजार रुपये करने की मांग को लेकर कांग्रेस हर जिले में &lsquo;किसान न्याय यात्रा&rsquo; निकालेगी।</span> <span>इसका आगाज </span>10 <span>सितंबर को मंदसौर जिले के गरोठ से किया जाएगा।&nbsp;</span></p>
<p><span> </span>कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष <strong>जीतू पटवारी</strong> ने भोपाल में आयोजित एक प्रेस वार्ता में कहा कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार किसानों की आमदनी पर वार कर रही है। किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रदेश के हर जिले में &lsquo;<span>किसान न्याय यात्रा</span>&rsquo; <span>निकाली जाएगी। कांग्रेस </span>20<span> सितंबर को फसलों के एमएसपी बढ़ाने की मांग को लेकर पूरे प्रदेश में प्रदर्शन करेगी। </span>'<span>किसान न्याय यात्रा</span>' <span>के तहत उस दिन सभी </span>55<span> जिलों के कलेक्टर कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार किसानों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस इस मांग और किसानों के साथ हो रहे अन्याय को मुखरता से उठाएगी।</span></p>
<p>केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए जीतू पटवारी ने कहा, "<span>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों की आय दोगुनी करने की बात करते हैं</span>, <span>लेकिन किसानों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। हम चाहते हैं कि राज्य सरकार किसानों से सोयाबीन </span>6,000<span> रुपये प्रति क्विंटल</span>, <span>गेहूं </span>2,700<span> रुपये प्रति क्विंटल और धान </span>3,100<span> रुपये प्रति क्विंटल खरीदे। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने घोषणा-पत्र में गेहूं के लिए </span>2700<span> रुपये और धान के लिए </span>3100<span> रुपये एमएसपी देने का वादा किया था</span>, <span>लेकिन सत्ता में आने के बाद भाजपा यह वादा भूल गई।</span>&rdquo;</p>
<p>पटवारी ने आरोप लगाया कि कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते 5 सितम्बर को मध्य प्रदेश के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। कृषि मंत्रालय ने ट्वीट कर बताया कि <strong>प्राइस सपोर्ट स्कीम</strong> के माध्यम से सोयाबीन की समर्थन मूल्य पर खरीद की जाएगी। मगर मध्य प्रदेश को इस योजना से बाहर रखा गया है। प्रदेश के साथ सौतेला व्यवहार करते हुए किसानों के हितों पर कुठाराघात किया गया है।</p>
<p><strong>सोयाबीन</strong> की कीमतों का मुद्दा उठाते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश में सोयाबीन का भाव लगभग 4000 रूपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। जबकि समर्थन मूल्य 4892 रुपये प्रति क्विंटल है जो नाकाफी है। मोदी सरकार ने सोयाबीन का समर्थन मूल्य तय करते वक्त लागत मूल्य 3261 रुपये निर्धारित किया है। जबकि मध्य प्रदेश सरकार ने कृषि लागत और मूल्य आयोग (<span>सीएसीपी</span>)<span> को सूचित किया था कि राज्य में सोयाबीन की उत्पादन लागत </span>4455 रुपये प्रति क्विंटल आती है। इस तरह किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है और लागत मूल्य कम दिखाकर किसानों को सही दाम से वंचित रखा जा रहा है। &nbsp;</p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश के हर जिले में ‘किसान न्याय यात्रा’ निकालेगी कांग्रेस, मंदसौर से शुरुआत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छोटी नर्सरी लगाने के लिए मिलेगा 7.5 लाख तक का अनुदान, यहां करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-of-rajasthan-will-get-a-grant-of-up-to-7.5-lakhs-for-setting-up-a-small-nursery-apply-here.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Sep 2024 12:15:17 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-of-rajasthan-will-get-a-grant-of-up-to-7.5-lakhs-for-setting-up-a-small-nursery-apply-here.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत अब कोई भी किसान नर्सरी लगा सकता है। इसके लिए राजस्थान सरकार किसानों को अनुदान देगी, जिससे वे अपने खेतों में नर्सरी बनाकर लाखों रुपये कमा सकते हैं। छोटी नर्सरी के लिए काश्तकार (किसान) को भू स्वामित्व और अन्य जरूरी दस्तावेजों के साथ जिला उद्यानिकी विभाग में ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिसे स्वीकृति के बाद राज्य सोसायटी निदेशालय में भेजा जाएगा।</p>
<p>योजना के तहत किसान फलीय और बहुफलीय पौधे लगा सकते हैं, जिसमें फलों और उनकी किस्मों का स्पष्ट उल्लेख करना होगा। नर्सरी पर उच्च गुणवत्ता वाले पौधों का मातृ वृक्ष ब्लॉक आवश्यक होगा, जिसके लिए पौधे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान या राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों से प्राप्त होंगे। नर्सरी पर राष्ट्रीय बागवानी मिशन से अनुदानित बोर्ड लगाना होगा, जिसमें स्थापना का वर्ष, कुल लागत और मातृ वृक्षों की जानकारी होगी।</p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="d32e3054-1590-4729-b610-a162bce06e60" dir="auto" class="min-h-[20px] text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 whitespace-normal break-words [.text-message+&amp;]:mt-5 overflow-x-auto">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>काश्तकारों को उन्नत किस्म के पौधों के लिए मातृ वृक्ष ब्लॉक नेचुरली वेंटिलेटेड ग्रीन हाउस सुविधाएं विकसित करनी होंगी।&nbsp;हाइटेक ग्रीनहाउस में फॉगिंग और सिंचाई की व्यवस्था करनी होगी। रखरखाव के लिए 35 फीसदी लाइट फिल्टरिंग और सूक्ष्म सिंचाई के साथ शेडनेट हाउस बनाना होगा। साथ ही, मिट्टी की सफाई के लिए स्टरलाइजेशन प्रणाली भी तैयार करनी होगी।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p>नर्सरी की स्थापना पर किसानों को 50 फीसदी तक का अनुदान, यानी 7.5 लाख रुपये तक दिया जाएगा। परियोजना लागत का 70 से 75 फीसदी बैंक लोन स्वीकृति पत्र भी आवेदन के साथ प्रस्तुत करना होगा। छोटी नर्सरी की प्रति हेक्टेयर लागत 15 लाख रुपये तय की गई है, और अनुदान राशि तीन साल की अवधि के बाद समायोजित की जाएगी। यदि परियोजना सफलतापूर्वक लागू नहीं होती, तो अनुदान राशि वापस ली जाएगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ छोटी नर्सरी लगाने के लिए मिलेगा 7.5 लाख तक का अनुदान, यहां करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब सीएम से किसान नेताओं की मुलाकात, 30 सितंबर तक कृषि नीति होगी सार्वजनिक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/cm-mann-announced-to-make-punjab-agriculture-policy-public-by-september-30-during-a-meeting-with-farmer-leaders.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Sep 2024 11:26:49 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/cm-mann-announced-to-make-punjab-agriculture-policy-public-by-september-30-during-a-meeting-with-farmer-leaders.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चंडीगढ़ में किसान नेताओं के साथ हुई बैठक के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 30 सितंबर तक कृषि नीति सार्वजनिक करने की घोषणा की है। गुरुवार को हुई बैठक में कृषि नीति समते किसानों के अन्य पर चर्चा हुई। जिसमें कई मांगों पर सहमति भी बनी। किसानों ने दावा किया है कि सरकार ने उनकी अधिकतर मांगें मान ली हैं और किसानों के कर्ज माफी को लेकर भी सरकार जल्द नीति लाएगी। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद पिछले पांच दिनों से चंडीगढ़ में धरना दे रहे किसानों ने अपना आंदोलन खत्म कर दिया।&nbsp;</p>
<p>किसान संगठनों की ओर जारी संयुक्त प्रेस विज्ञपति के अनुसार, गुरुवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ किसान संगठनों की एक लंबी बैठक हुई । जिसका मुख्य उद्देश्य पंजाब सरकार द्वारा तैयार की गई 1600 पन्नों की कृषि नीति पर चर्चा करना था। सरकार ने वादा किया है कि 30 सितंबर तक कृषि नीति का ड्राफ्ट दोनों संगठनों को सौंप दिया जाएगा, जिसके बाद दो हफ्तों में फीडबैक के लिए फिर से बैठक होगी।</p>
<p>कृषि नीति के अलावा, किसानों और मजदूरों की कई अन्य महत्वपूर्ण मांगों पर भी चर्चा हुई। इनमें भूमि बंधक बैंकों और सहकारी बैंकों के ऋणों का निपटारा, खेत मजदूरों को सहकारी समितियों का सदस्य बनाकर ऋण उपलब्ध कराना, गांवों में दस एकड़ तक की नजूल भूमि पर मजदूरों को मालिकाना हक देना, और 2010 के बाद आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल था।</p>
<p>इसके अलावा, किसानों से पाइप और नहरों के लिए लिया जाने वाला 10 फीसदी शुल्क खत्म करने, प्लॉट काटने पर रोक लगाने, फैक्ट्रियों से प्रदूषित पानी को नदियों में छोड़ने से रोकने जैसी मांगों पर भी सहमति बनी। बठिंडा के घुदा गांव में जली हुई गेहूं के लिए 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा और रायके कलां में मरे हुए पशुओं के लिए 30 सितंबर तक मुआवजा देने की घोषणा भी हुई।</p>
<p>बैठक के बाद किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां और अन्य नेताओं ने कहा कि वह कृषि नीति पर सरकार के साथ सकारात्मक चर्चा करने में सफल रहे हैं। आज सेक्टर 34 में सभी किसान बैठक करेंगे, जहां सरकार के दिए गए प्रस्ताव की समीक्षा की जाएगी। समीक्षा के बाद, किसान आगे की रणनीति पर निर्णय लेंगे।</p>
<div class="mt-1 flex gap-3 empty:hidden -ml-2">
<div class="items-center justify-start rounded-xl p-1 flex">
<div class="flex items-center">
<div class="flex items-center pb-0">बैठक में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां, मुख्य सचिव अनुराग वर्मा, डीजीपी गौरव यादव बीकेयू एकता उगराहां के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां, महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी कलां, वरिष्ठ उपाध्यक्ष झंडा सिंह जेठूके, पंजाब खेत मजदूर यूनियन के अध्यक्ष जोरा सिंह नसराली, महासचिव लक्ष्मण सिंह सेवेवाला और अन्य किसान नेता उपस्थित थे।<br /><span class="overflow-hidden text-clip whitespace-nowrap text-sm"></span></div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब सीएम से किसान नेताओं की मुलाकात, 30 सितंबर तक कृषि नीति होगी सार्वजनिक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि नीति पर हितधारकों के साथ चर्चा के बाद होगा फैसला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/discussion-on-punjab-agriculture-policy-in-cabinet-meeting-finance-minister-said-announcement-will-be-made-soon.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Sep 2024 18:14:23 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/discussion-on-punjab-agriculture-policy-in-cabinet-meeting-finance-minister-said-announcement-will-be-made-soon.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में कृषि नीति को लेकर चर्चा जोर पकड़ रही है। गुरुवार को चंडीगढ़ में हुई पंजाब कैबिनेट की बैठक में इस पर चर्चा हुई। सरकार का कहना है कि कृषि नीति का मसौदा तैयार है, लेकिन इसे लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से चर्चा की जाएगी।&nbsp;बैठक के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि बैठक में कई अहम फैसले हुए, जिसमें कृषि नीति पर भी चर्चा शामिल थी। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही कृषि नीति की घोषणा करेगी।</p>
<p>इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करने और बिजली पर दी जाने वाली डबल सब्सिडी को खत्म करने का भी निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले से 300 यूनिट बिजली मुफ्त दे रही है, ऐसे में सब्सिडी को खत्म कर दिया गया है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>बुधवार को पंजाब विधानसभा के तीन दिवसीय सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कृषि नीति के मुद्दे पर अपनी सरकार का बचाव करते हुए कहा था कि कृषि नीति का मसौदा तैयार है, लेकिन सभी हितधारकों से विचार-विमर्श जरूरी है ताकि सबकी सहमति से नीति लागू की जा सके। उन्होंने 2020 के तीन कृषि कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा था कि भाजपा बिना चर्चा के कृषि कानून लेकर आई थी, लेकिन बाद में उसे कानून वापस लेने पड़े थे। इसलिए पंजाब सरकार किसान यूनियनों और अन्य संगठनों से बात करके ही कोई कदम उठाएगी।&nbsp;वहीं, कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां का कहना है कि किसान आयोग ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अब इस पर सरकार आगे का फैसला लेगी।</p>
<p>दूसरी ओर, कृषि नीति लागू करने की मांग को लेकर चंडीगढ़ के सेक्टर 34 के दशहरा ग्राउंड में किसान यूनियनों का प्रदर्शन जारी है। भारती किसान यूनियन (एकता) और पंजाब खेत मजदूर यूनियन के बैनर तले किसान रविवार से यहां प्रदर्शन कर रहे हैं। पंजाब खेत मजदूर यूनियन के महासचिव लक्ष्मण सिंह सेवेवाल ने आम आदमी पार्टी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता में आने के ढाई साल बाद भी कृषि नीति लागू नहीं हुई है। सरकार ने अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।&nbsp;</p>
<p>किसानों की प्रमुख मांगों में सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद, खेती को कॉरपोरेट कब्जे से बचाना, रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देना, किसान-मजदूरों के कर्ज माफ करना, आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा देना, दिल्ली आंदोलन की लंबित मांगों को पूरा करना, और राज्य में नशे की समस्या पर रोक लगाना शामिल हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि नीति पर हितधारकों के साथ चर्चा के बाद होगा फैसला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोयाबीन की कीमतों में गिरावट के बाद अब उत्पादन गिरने का खतरा, &amp;apos;पीली मोजेक&amp;apos; ने बढ़ाई किसानों की चिंता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/yellow-mosaic-has-increased-the-concern-of-farmers-in-madhya-pradesh-soybean-production-may-decrease.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Sep 2024 13:07:11 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/yellow-mosaic-has-increased-the-concern-of-farmers-in-madhya-pradesh-soybean-production-may-decrease.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में सोयाबीन किसानों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है। पहले ही कम कीमतों से जूझ रहे किसानों की फसल पर अब 'पीली मोजेक' का खतरा मंडरा रहा है। नीमच, मंदसौर, धार, खरगोन और देवास सहित कई जिलों में सोयाबीन की फसल पीली पड़ने लगी है जबकि कुछ जगहों पर लाल और भूरे धब्बे भी दिखाई दे रहे हैं। सोयाबीन की फसल में पीलेपन ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अगर समय रहते 'पीली मोजेक' को कंट्रोल नहीं किया गया तो इससे पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। वहीं, इस साल अच्छे उत्पादन की आस लिए बैठे किसान परेशान दिख रहे हैं क्योंकि इससे सोयाबीन के उत्पादन में गिरावट का सकती है।</p>
<p><strong>रूरल वॉयस</strong> ने इस बारे में खरगोन कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक <strong>डॉ. जी.एस. कुल्मी</strong> से बात की। डॉ. कुल्मी ने बताया कि 'पीली मोजेक' एक कीट (वेक्टर) से फैलने वाला रोग है। यह व्हाइट फ्लाई के चलते सोयाबीन की फसल में फैलता है।<span> इस रोग के कारण पौधों की पत्तियां पीली होने लगती हैं और ग्रोथ रुक जाती है।&nbsp;</span>पीली मोजेक के चलते सोयाबीन के पत्तों पर पीले और भूरे रंग के धब्बे पड़ जाते है। साथ ही फलियों का आकार छोटा हो जाता है और दाने सिकुड़ जाते हैं।उन्होंने कहा कि अगर इस रोग को शुरुआत में कंट्रोल कर लिया जाए तो ठीक है लेकिन इसके फैलने के बाद इस पर नियंत्रण करना काफी मुश्किल है। फसल पीली होकर गिरने लगती है और बर्बाद हो जाती है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>डॉ. कुल्मी ने कहा कि फसल पर जो पीले पत्ते दिख रहे हैं उसकी एक वजह खेतों से पानी की निकासी नहीं होना भी हो सकती है। प्रदेश में इन दिनों भारी बारिश हो रही है। जिसके कारण खेतों में पानी भरने की समस्या आ रही है। यदि पानी ज्यादा समय तक भरा रहता है तो इससे फसल को नुकसान होगा और वह पीली पड़ने लगेगी। इसलिए किसान अपनी फसल को सुरक्षित करने के लिए मेड़ों से पानी निकासी का इंतजाम कर दें, जिससे फसलें सुरक्षित रहें।</p>
<p>सीहोर जिले के झालकी गांव के किसान <strong>जगदीश वर्मा</strong> ने <strong>रूरल वॉयल</strong> को बताया कि उन्होंने समय पर सोयाबीन की बुवाई की थी और फसल अच्छी स्थिति में थी, लेकिन अब पीला मोजेक फैलने से उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है। जगदीश ने कहा कि उन्हें इस बार सोयाबीन की फसल से अच्छे मुनाफे की उम्मीद थी लेकिन रोग के कारण फसल कमजोर हो गई है। अगर स्थिति ऐसी ही रही तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>फसल में पीलापन दिखाई देने पर करें ये काम&nbsp;</strong></p>
<p>रोग से बचाव के लिए फसल में जब भी पीलापन दिखाई दे तो 1 मिलीमीटर पानी में 1 मिलीमीटर गंधक का तेजाब और 0.5 फीसदी फैसर सल्फेट का छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा मोजेक रोग से बचाव के लिए पौधों को उखाडकर नष्ट करें। इसमें मिथोएट, मेटासिस्टोक्स पांच सौ से छह सौ ग्राम दवा को पांच सौ से छह सौ लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। साथ ही पौधों पर नीम ऑयल का छिड़काव करें। सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए खेत में 'पीला स्टिकी ट्रैप' लगाएं।&nbsp;</p>
<p>मध्य प्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष <strong>केदार शंकर सिरोही</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि इस साल राज्य में सोयाबीन की अच्छी फसल की उम्मीद थी, लेकिन अब 'पीली मोजेक' ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश के 5 से 6 जिलों में यह समस्या देखी जा रही है। इन जिलों के किसानों ने सोयाबीन की फसल के पीले पड़ने की शिकायत की है। सिरोही ने कहा कि इन जिलों में सोयाबीन की मुख्य खेती होती है। अगर 'पीली मोजेक' पर समय रहते नियंत्रण नहीं गया, तो इसका असर उत्पादन पर पड़ेगा। किसानों को जल्द से जल्द सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि उनकी मेहनत बेकार न हो।</p>
<p>किसान सत्याग्रह मंच के सदस्य <strong>शिवम बघेल</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कुछ जिलों में पीली मोजेक फैल रहा है, और इसे जल्द नियंत्रित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि 2018-19 में भी इस रोग से किसानों को भारी नुकसान हुआ था और लाखों की फसल बर्बाद हो गई थी। पीली मोजेक में सोयाबीन की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, जिससे कुछ ही दिनों में पूरी फसल नष्ट हो जाती है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में इस रोग की पहचान करना मुश्किल है। जब फसल पीली पड़ती है, तब किसानों को इसका पता चलता है। इसलिए बुवाई के बाद ही कीटनाशकों का उपयोग जरूरी है, ताकि फसल सुरक्षित रहे।</p>
<p><strong>सोयाबीन के दाम 10 साल पुराने स्तर पर</strong></p>
<div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="0e92935c-ffc6-4ff2-accd-aeb7449e7d25" dir="auto" class="min-h-[20px] text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 break-words [.text-message+&amp;]:mt-5 overflow-x-auto whitespace-normal">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden first:pt-[3px]">
<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>मध्य प्रदेश में सोयाबीन की कीमतें 10 साल पुराने स्तर पर पहुंच गई हैं। प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल में बिक रही है। सीजन शुरू होने से पहले ही कीमतों में आई गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ी दी है। सोयाबीन का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी नीचे चला गया है। आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए केंद्र सरकार ने सोयाबीन का एमएसपी <span>4892&nbsp;</span>रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।</p>
<p><strong>लगातार घट रहा सोयाबीन का उत्पादन&nbsp;</strong></p>
<p><strong>सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा)</strong> के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सोयाबीन के उत्पादन में गिरावट आई है। मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन 2023 में 52.47 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ, जो खरीफ सीजन 2022 में 54.13 लाख टन, खरीफ सीजन 2021 में 52.29 लाख टन और खरीफ सीजन 2020 में 41.77 लाख टन था।&nbsp;</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.ruralvoice.in/national/soybean-prices-are-at-10-year-old-level-price-in-mandis-remains-at-rs-3500-per-quintal-in-madhya-pradesh.html">सोयाबीन की कीमतें 10 साल पुराने स्तर पर, मंडियों में 3500 रुपये प्रति क्विंटल रह गया दाम</a></strong></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोयाबीन की कीमतों में गिरावट के बाद अब उत्पादन गिरने का खतरा, 'पीली मोजेक' ने बढ़ाई किसानों की चिंता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में कृषि यंत्रों पर 50 फीसदी तक सब्सिडी पाने का मौका, यहां करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-government-50-percent-subsidy-on-agricultural-equipment-apply-here.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 05 Sep 2024 10:35:04 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-government-50-percent-subsidy-on-agricultural-equipment-apply-here.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खेती-किसानी में बुआई, जुताई और बिजाई जैसे कठिन कार्यों को आसान बनाने के लिए राजस्थान सरकार ने "सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन" योजना के तहत किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों पर अनुदान देने का फैसला किया है। इससे न सिर्फ किसानों पर आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि कृषि कार्य भी सरल हो जाएंगे और उनकी आय में वृद्धि होगी।</p>
<p>कृषि आयुक्त कन्हैया लाल स्वामी ने बताया कि इस योजना के तहत राज्य में करीब 66 हजार किसानों को 200 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए किसान 13 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अनुसूचित जाति, जनजाति, लघु, सीमांत और महिला किसानों को ट्रैक्टर की बीएचपी के आधार पर लागत का अधिकतम 50 फीसदी और अन्य श्रेणी के किसानों को 40 फीसदी तक अनुदान दिया जाएगा। लघु और सीमांत किसानों को आवेदन से पहले जन आधार में अपनी श्रेणी दर्ज कराना अनिवार्य है।</p>
<p>किसान 'राज किसान साथी पोर्टल' पर ई-मित्र के माध्यम से आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। राज्य में प्रचलित सभी प्रकार के ट्रैक्टर संचालित कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जाएगा, जैसे रोटावेटर, थ्रेसर, कल्टीवेटर, आदि। सत्यापन के बाद अनुदान राशि किसान के जन आधार से जुड़े बैंक खाते में जमा की जाएगी।</p>
<p>एक जन आधार पर एक ही आवेदन स्वीकार होगा। तीन साल की अवधि में एक किसान को एक प्रकार के यंत्र पर केवल एक बार अनुदान मिलेगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में कृषि यंत्रों पर 50 फीसदी तक सब्सिडी पाने का मौका, यहां करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में मुआवजे की जगह बीमा कंपनी ने लौटाया प्रीमियम, किसानों ने दिया अल्टीमेटम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/instead-of-giving-compensation-the-insurance-company-returned-the-premium-to-farmers-in-sirsa-haryana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 04 Sep 2024 15:56:41 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/instead-of-giving-compensation-the-insurance-company-returned-the-premium-to-farmers-in-sirsa-haryana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में पिछले साल बर्बाद हुई कपास की फसल का मुआवजा लेने के लिए किसानों को काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। एक साल से किसान मुआवजे की बाट जोह रहे हैं। खरीफ 2023 की बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा अभी तक किसानों को नहीं मिला है, जिससे किसान परेशान हैं। हरियाणा के सिरसा जिले में बीमा कंपनी ने मुआवजा देने के बजाय किसानों का प्रीमियम ही वापस लौटा दिया है। प्रीमियम की राशि वापस लौटाए जाने से किसानों में भारी रोष है। किसानों ने बीमा कंपनी और प्रशासन को मुआवजे के लिए एक हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें एक हफ्ते के भीतर मुआवजा नहीं मिला, तो वे उप कृषि निदेशक कार्यालय का घेराव करेंगे।</p>
<p>मंगलवार को किसानों ने सिरसा के प्रमुख जिला प्रबंधक (एलडीएम) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया, जिसमें भारतीय किसान एकता के प्रदेशाध्यक्ष <strong>लखविंदर सिंह औलख</strong> समेत कई किसान नेता शामिल हुए। औलख का कहना है कि पिछले साल गुलाबी सुंडी के कारण नरमे (कपास) की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी। इंश्योरेंस कंपनी और कृषि विभाग ने बर्बाद हुई फसलों का निरीक्षण भी किया था, लेकिन किसानों को मुआवज नहीं मिला। उन्होंने कहा कि हर साल की तरह पिछले साल भी बैंकों ने 31 जुलाई 2023 तक किसानों के खातों से खरीफ फसल का बीमा प्रीमियम काटा था। लेकिन अभी तक मुआवजा जारी नहीं हुआ है। इसके बजाय कंपनी ने किसानों का प्रीमियम ही लौटा दिया, जो किसानों के साथ धोखा है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>औलख ने कहा कि पिछले साल सिरसा जिले के लगभग सभी गांवों में गुलाबी सुंडी से नरमे की फसल को नुकसान पहुंचा था, लेकिन कृषि विभाग ने सिर्फ 93 गांवों में ही फसलों को नुकसान बताया। इनमें से भी 7 गांवों का नुकसान 32 से 674 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दिखाया गया। उन्होंने कहा कि हजारों किसानों का बीमा प्रीमियम वापस किया जा रहा है, जिसमें भारतीय स्टेट बैंक के 16,405 किसान भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अगर समय पर मुआवजा नहीं मिला, तो किसान प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में मुआवजे की जगह बीमा कंपनी ने लौटाया प्रीमियम, किसानों ने दिया अल्टीमेटम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में मुफ्त दी जाएंगी पॉपकॉर्न बनाने की मशीनें, ऐसे करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/popcorn-making-machines-will-be-given-free-in-up-apply-like-this.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 04 Sep 2024 11:22:54 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/popcorn-making-machines-will-be-given-free-in-up-apply-like-this.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार परंपरागत कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनकी आजीविका को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इसके तहत परंपरागत कारीगरों को पॉपकॉर्न बनाने की मशीनें मुफ्त दिलाई जाएंगी। उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड भुर्जी व भड़भूजा समाज के कारीगरों और स्वरोजगार में रुचि रखने वालों को पॉपकॉर्न बनाने की आधुनिक मशीनें नि:शुल्क वितरित करेगा। कारीगरों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसका मकसद स्वरोजगार को बढ़ावा देना है।</p>
<p>राज्य सरकार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में लखनऊ के जिला ग्रामोद्योग अधिकारी ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य उन कारीगरों को सहायता प्रदान करना है जो पारंपरिक तरीके से पॉपकॉर्न बनाने का कार्य करते हैं। पॉपकॉर्न उत्पादन और बिक्री के व्यवसाय में लगे लखनऊ जिले के कारीगर नि:शुल्क पॉपकॉर्न मशीन के लिए अपना आवेदन दिनांक 5 सितंबर तक <strong>जिला ग्रामोद्योग अधिकारी</strong>, 8 कैण्ट रोड, कैसरबाग, लखनऊ स्थित कार्यालय में जमा कर सकते हैं। अन्य जिलों के लोग इस योजना की जानकारी के लिए जिला ग्रामोद्योग अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।</p>
<p><strong>ऐसे करें आवेदन </strong></p>
<p>आवेदन करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों में आधार कार्ड, राशन कार्ड, शैक्षिक योग्यता प्रमाण पत्र, प्रधान द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, और बैंक पासबुक की छायाप्रति शामिल हैं। इसके साथ ही, आवेदन करने वाले को अपना नाम, पिता/पति का नाम, पूर्ण पता और मोबाइल नंबर भी आवेदन पत्र में दर्ज करना होगा। पात्र लाभार्थियों का चयन &rsquo;पहले आओ, पहले पाओ&rsquo; के आधार पर किया जाएगा, जिसके लिए सभी दस्तावेजों की सत्यापन समिति द्वारा जांच की जाएगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66d7f566c2e7d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में मुफ्त दी जाएंगी पॉपकॉर्न बनाने की मशीनें, ऐसे करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि प्रशिक्षण के लिए विदेश जाएंगे राजस्थान के 100 युवा किसान, ऐसे होगा चयन   ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/100-young-farmers-of-rajasthan-will-go-abroad-for-agricultural-training-know-the-selection-process.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 04 Sep 2024 11:02:02 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/100-young-farmers-of-rajasthan-will-go-abroad-for-agricultural-training-know-the-selection-process.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान सरकार ने किसानों की जानकारी बढ़ाने के लिए 'नॉलेज इनहांसमेंट प्रोग्राम' शुरू करने का निर्णय लिया है। इस प्रोग्राम के तहत वर्ष 2024-25 में 100 युवा और प्रगतिशील किसानों को प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजा जाएगा। प्रोग्राम के पहले चरण में चयनित युवा किसानों को उन देशों में भेजा जाएगा जहां कृषि और पशुपालन में नई तकनीकों और नवाचारों का उपयोग हो रहा है। चयनित 100 युवा किसानों से 80 कृषि क्षेत्र और 20 डेयरी एवं पशुपालन क्षेत्र से होंगे।</p>
<p>कृषि क्षेत्र में आवेदन करने वाले किसानों की उम्र 50 वर्ष से कम होनी चाहिए, जबकि डेयरी एवं पशुपालन क्षेत्र के लिए उम्र सीमा 45 वर्ष से कम निर्धारित की गई है। इसके अलावा, वैध पासपोर्ट होना भी अनिवार्य है। इस कार्यक्रम के तहत कोटा संभाग से 9 प्रगतिशील युवा कृषि और 1 युवा डेयरी क्षेत्र से, जयपुर संभाग से 12 कृषि और 4 डेयरी क्षेत्र से, तथा भरतपुर संभाग से 10 कृषि और 1 युवा डेयरी क्षेत्र से चयनित किया जाएगा। इसी तरह अन्य संभागों और जिलों से भी प्रगतिशील युवा किसानों और पशुपालकों को विदेश में प्रशिक्षण के लिए चुना जाएगा।&nbsp;</p>
<p>उद्यान विभाग, अजमेर की उप निदेशक आरती यादव ने बताया कि 'नॉलेज इनहांसमेन्ट प्रोग्राम' के तहत चयन प्रक्रिया के लिए कुछ मापदंड तय किए गए हैं, जैसे कि किसान के पास कम से कम एक हेक्टेयर कृषि भूमि होनी चाहिए और वह पिछले 10 वर्षों से खेती कर रहा हो। किसान द्वारा संरक्षित खेती, सूक्ष्म सिंचाई, मल्चिंग, सौर ऊर्जा पंप, ड्रोन, फर्टिगेशन, ऑटोमेशन, फार्म पोंड, डिग्गी आदि जैसी उच्च कृषि तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा हो।</p>
<p>उप निदेशक&nbsp;ने बताया कि युवा किसानों को अलग-अलग मापदंडों के लिए अंक दिए जाएंगे। इनमें एक हैक्टेयर कृषि भूमि होने पर 5 अंक, 10 साल से खेती कर रहे कृषक को 10 अंक, कृषि में उच्च तकनीक के उपयोग के लिए 20 अंक, कृषि क्षेत्र में जिला एवं राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त कृषक को 20 अंक, पंचायती राज संस्था, सहकारी संस्था, वाटर यूजर एसोसिएशन, कृषि मंडी आदि में पिछले 10 वर्षों में किसी पद पर रहनेे या एफपीओ सदस्य होने पर 15 अंक, 50 वर्ष से कम आयु होने पर 10 अंक, किसी तरह का आपराधिक प्रकरण नहीं होने पर 5 अंक, 10वीं उत्तीर्ण होने के 10 अंक एवं वैध पासपोर्ट होने पर 5 अंक मिलेंगे।</p>
<p>डेयरी और पशुपालन के क्षेत्र में भी चयन के लिए मापदंड तय किए गए हैं। इसमें किसान के पास 20 गाय-भैंस या 10 ऊंट या 50 भेड़-बकरी होनी चाहिए। इसके साथ ही, किसान पिछले 10 वर्षों से पशुपालन के पेशे में जुड़ा होना चाहिए और उच्च तकनीकों का उपयोग कर रहा होना चाहिए। डेयरी क्षेत्र में किसान का चयन जिला या राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए हुआ हो तथा जिसकी अपने क्षेत्र में प्रगतिशील पशुपालक के रूप में पहचान हो।</p>
<p>इन मापदंडों को पूरा करने वाले युवा प्रगतिशील किसान अपने नजदीकी ई-मित्र केन्द्र के माध्यम से <strong><a href="https://rajkisan.rajasthan.gov.in/">राजकिसान साथी पोर्टल</a></strong> पर <strong>10 सितंबर तक ऑनलाइन</strong> आवेदन कर सकते हैं। कार्यक्रम से संबंधित जानकारी के लिए युवा कृषक कृषि, उद्यान अथवा पशुपालन विभाग में संपर्क कर सकते हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि प्रशिक्षण के लिए विदेश जाएंगे राजस्थान के 100 युवा किसान, ऐसे होगा चयन    ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में किसानों को डीएपी के स्थान पर एसएसपी व यूरिया के उपयोग की सलाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-rajasthan-advised-to-use-alternative-fertilizers-instead-of-dap.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 03 Sep 2024 19:57:21 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-rajasthan-advised-to-use-alternative-fertilizers-instead-of-dap.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान सरकार के कृषि विभाग की ओर किसानों को डीएपी के स्थान पर सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) और यूरिया के उपयोग की सलाह दी गई है। विभाग की ओर से जारी <a href="https://agriculture.rajasthan.gov.in/press-release/945/165619">विज्ञप्ति</a> के अनुसार, संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) दौसा डॉ. प्रदीप कुमार अग्रवाल ने बताया कि फसलों की बुवाई के समय किसानों द्वारा फॉस्फेटिक उर्वरक के रूप में डीएपी के उपयोग का प्रचलन अधिक है। किसानों द्वारा फॉस्फेटिक उर्वरक के रूप में केवल डीएपी पर अधिक निर्भर होने के कारण मांग के अनुरूप डीएपी खाद उपलब्ध कराने में कठिनाई आती है तथा भूमि में संतुलित पोषक तत्वों की भी आपूर्ति नहीं होती है। <span lang="HI">समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) के उद्देश्य से उर्वरकों के संतुलित उपयोग के लिए जिले के किसानों को कृषि विभाग के माध्यम से आवश्यक तकनीकी सलाह के लिए आगामी रबी सीजन से पूर्व<span>&nbsp;</span></span><span>02&nbsp;</span><span lang="HI">से<span>&nbsp;</span></span><span>15&nbsp;</span><span lang="HI">सितंबर तक प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर किसान संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा।<span>&nbsp;</span></span></p>
<p>कृषि अधिकारी दौसा (प्रशिक्षण) अशोक कुमार मीणा ने बताया कि किसान बुवाई के समय डीएपी खाद के विकल्प के रूप में&nbsp;1&nbsp;बैग डीएपी के स्थान पर&nbsp;3&nbsp;बैग सिंगल सुपर फास्फेट (एसपी) व&nbsp;1&nbsp;बैग यूरिया का उपयोग करें। सिंगल सुपर फास्फेट में उपलब्ध फास्फोरस तत्व के अलावा अन्य आवश्यक पोषक तत्व यथा- सल्फर,&nbsp;जिंक सल्फेट,&nbsp;बोरोन आदि पोषक तत्व भी उपलब्ध होते हैं।&nbsp;3&nbsp;बैग सिंगल सुपर फास्फेट एवं&nbsp;1&nbsp;बैग यूरिया में उपलब्ध पोषक तत्वों की लागत डीएपी में उपलब्ध पोषक तत्वों की लागत से कम होती है। मीणा ने बताया कि भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाए जाने हेतु कार्बनिक खादों यथा गोबर खाद,&nbsp;कम्पोस्ट खाद,&nbsp;वर्मी कम्पोस्ट,&nbsp;खली,&nbsp;प्रोम,&nbsp;फोम,&nbsp;एलफॉम,&nbsp;ऑर्गेनिक मैंन्योर इत्यादि का अधिक से अधिक उपयोग किया जाना चाहिए। किसान खेतों से मिट्टी नमूने की जांच के आधार पर बनाए गए,&nbsp;मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार भूमि में उर्वरकों का उपयोग करें।</p>
<p>गौरतलब है कि पिछले दिनों <strong>रूरल वॉयस</strong> ने <a href="https://www.ruralvoice.in/national/dap-price-reaches-620-dollar-low-imports-may-lead-to-shortage-for-farmers.html">खबर</a> प्रकाशित की थी कि कैसे आगामी रबी सीजन में डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की उपलब्धता को लेकर किसानों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते उर्वरक कंपनियों ने डीएपी का आयात कम किया है। जबकि इस साल अप्रैल से जून तक डीएपी का आयात पिछले साल के मुकाबले करीब 46 फीसदी घटा है। ऐसे में अगर अगले एक माह के भीतर आयात में बढ़ोतरी नहीं होती है तो गेहूं और दूसरी रबी फसलों के लिए किसानों को डीएपी की उपलब्धता को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66d71d8b0df42.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में किसानों को डीएपी के स्थान पर एसएसपी व यूरिया के उपयोग की सलाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में 50 नई ग्राम पंचायतों का गठन, आबादी के मानकों में दी राहत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/50-new-gram-panchayats-formed-in-uttarakhand-relaxation-in-population-norms.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 03 Sep 2024 14:37:51 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/50-new-gram-panchayats-formed-in-uttarakhand-relaxation-in-population-norms.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड में 50 नई ग्राम पंचायतें गठित हुई हैं। पंचायती राज विभाग ने उत्तराखंड के 12 पहाड़ी जिलों में ग्राम पंचायतों का परिसीमन फाइनल कर दिया है। अब राज्य में ग्राम पंचायतों की संख्या 7795 से बढ़कर 7832 हो गई है।&nbsp;</p>
<p>उत्तराखंड में हरिद्वार जिले को छोड़कर शेष जिलों में पंचायतों का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। नए चुनाव से पहले पंचायती राज विभाग ने ग्राम पंचायतों के परिसीमन के प्रस्ताव मांगे थे। इसी आधार पर कुल 50 नई ग्राम पंचायतें गठित हुई हैं। सर्वाधिक 16 ग्राम पंचायतें टिहरी जिले में बनी हैं, इसके बाद उत्तरकाशी में 13, देहरादून में आठ, यूएसनगर में चार, चमोली में पांच, बागेश्वर में तीन और चम्पावत में एक नई ग्राम पंचायत गठित हुई हैं। इसी के साथ राज्य में 13 ग्राम पंचायतों का विलय कर दिया गया है। पौड़ी और यूएसएनगर से पांच-पांच पंचायतों का विलय किया गया है। इस तरह कुल बढ़ोतरी 37 ग्राम पंचायतों की हुई है। पंचायतों का परिसीमन फाइनल होने के बाद अब पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ होगी।&nbsp;</p>
<p><strong>आबादी के मानकों में राहत</strong><br />पहाड़ में ग्राम पंचायत के लिए न्यूनतम 500 की आबादी होनी आवश्यक है। इधर, कई ग्राम पंचायतों में पलायन के कारण यह मानक पूरा नहीं हो पा रहा है। लेकिन विभाग ने इस मामले में राहत देते हुए पुरानी पंचायतों को बरकरार रखने का निर्णय लिया है। विदित है कि पहाड़ में दुर्गम भूगोल के कारण पंचायतों का परिसीमन बेहद मुश्किल होता है। इस बार विभाग ने आसपास के खंड गांव को एक ही पंचायत में रखने का प्रयास किया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66d6d1dd19519.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66d6d18c402be.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में 50 नई ग्राम पंचायतों का गठन, आबादी के मानकों में दी राहत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x500_66d6d18c402be.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब के किसानों का चंडीगढ़ में धरना&amp;#45;प्रदर्शन शुरू, उगराहां समेत कई यूनियनें शामिल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/protest-by-farmers-of-punjab-begins-in-chandigarh-many-unions-including-ugrahan-participate.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 02 Sep 2024 13:01:53 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/protest-by-farmers-of-punjab-begins-in-chandigarh-many-unions-including-ugrahan-participate.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब के किसान संगठनों ने नई कृषि नीति लागू करने सहित कई मांगों को लेकर चंडीगढ़ में पांच दिवसीय धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। रविवार को <strong>भारती किसान यूनियन (उगराहां)</strong> और <strong>पंजाब खेत मजदूर यूनियन</strong> के बैनर तले राज्य के विभिन्न हिस्सों से किसान बसों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर चंडीगढ़ के सेक्टर 34 स्थित मेला ग्राउंड में एकजुट हुए। किसान संगठनों ने आज से शुरू होने जा रहे पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विधानसभा की ओर कूच करने का ऐलान किया है।&nbsp;</p>
<p><strong>बीकेयू उगराहां</strong> की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, विरोध-प्रदर्शन के पहले दिन सैकड़ों की संख्या में किसान, मजदूर और पूर्व सैनिकों सहित महिलाओं ने विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लेने पहुंचे। आज 2 सितंबर को पंजाब विधानसभा के सत्र के दौरान आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों के साथ बड़ी संख्या में किसान विधानसभा की ओर मार्च करेंगे और मुख्यमंत्री के अलावा विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे। चंडीगढ़ के 34 सेक्टरों में मोर्चा बनाने के लिए जगह मिलना उनके मोर्चे की पहली जीत है।</p>
<p>पंजाब में किसान संगठन <strong>कृषि नीति</strong> लागू करने में हो रही देरी को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि पंजाब सरकार ने इस दिशा में अब तक कोई कदम नहीं उठाया है। <strong>पंजाब खेत मजदूर यूनियन</strong> के महासचिव <strong>लक्ष्मण&nbsp;सिंह सेवेवाल</strong> ने पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि आप सरकार ने ढाई साल पहले सत्ता संभाली थी, लेकिन वादे के अनुसार कृषि नीति अभी तक लागू नहीं हुई है। &nbsp;उन्होंने बताया कि किसानों की मांगों में सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद, खेती को कॉरपोरेट के कब्जे से बचाना, &nbsp;रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देना, किसान व मजदूरों के कर्जों की माफी, आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा, दिल्ली आंदोलन की लंबित मांगों को पूरा करना और राज्य में नशीली दवाओं की समस्या पर अंकुश लगाना शामिल है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/09/image_750x_66d569982f54d.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>विधानसभा मार्च का ऐलान &nbsp;</strong></p>
<p>भारती किसान यूनियन (उगराहां) के महासचिव <strong>सुखदेव सिंह कोकरीकलां </strong>ने कहा कि किसान सोमवार को पंजाब विधानसभा की ओर मार्च करेंगे और मुख्यमंत्री तथा विपक्षी नेताओं को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे। आज से ही पंजाब विधानसभा का तीन दिवसीय सत्र शुरू हो रहा है।</p>
<p>किसान नेताओं का कहना है कि वह चार सितंबर तक इंतजार करेंगे। अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो पांच सितंबर को अगले कदम का ऐलान किया जाएगा। किसानों के कूच को देखते हुए चंडीगढ़ तथा पंजाब पुलिस को तैनात किया गया है। प्रशासन ने केवल 11 किसानों को विधानसभा जाने की अनुमति दी है। लेकिन किसान ट्रैक्टरों पर मार्च करते हुए भारी संख्या में विधानसभा कूच करने पर अड़े हुए हैं।</p>
<p>चंडीगढ़ में जुटे किसान विरोध-प्रदर्शन करने के लिए पूरी तैयारी के साथ आए हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में वे काफी दिनों का राशन लेकर चले हैं। किसानों का कहना है कि अगर सरकार उनकी मांगों को अनसुना करती है तो विरोध-प्रदर्शन लंबा भी चल सकता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब के किसानों का चंडीगढ़ में धरना-प्रदर्शन शुरू, उगराहां समेत कई यूनियनें शामिल ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तारीख बदली, अब 5 अक्टूबर को मतदान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-assembly-election-date-changed-voting-now-on-october-5.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 31 Aug 2024 19:35:30 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-assembly-election-date-changed-voting-now-on-october-5.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चुनाव आयोग ने हरियाणा विधानसभा चुनाव की तारीख बदल दी है। अब हरियाणा में 1 अक्टूबर की बजाय <strong>5 अक्टूबर</strong> को मतदान होगा। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव की तारीख में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के चुनाव नतीजे 4 अक्टूबर की बजाय<strong> 8 अक्टूबर</strong> को आएंगे। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>चुनाव आयोग की ओर से जारी सूचना के अनुसार, बिश्नोई समुदाय के सदियों पुराने त्योहार को ध्यान में रखते हुए हरियाणा में चुनाव कार्यक्रम में बदलाव किया गया है। हरियाणा से बड़ी तादाद में बिश्नोई समुदाय के लोग गुरु जम्भेश्वर की याद में असोज अमावस पर्व पर राजस्थान में अपने पैतृक गांव जाते हैं।</p>
<p>इसके मद्देनजर आयोग को हरियाणा विधानसभा चुनाव की तारीख बदलने के लिए भाजपा के अलावा अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा की ओर से भी ज्ञापन मिला था।&nbsp;इस वर्ष यह त्यौहार 2 अक्टूबर को है। हरियाणा में रहने वाले बिश्नोई परिवार इस दिन राजस्थान की यात्रा पर होंगे। इसे देखते हुए हरियाणा के चुनाव कार्यक्रम में बदलाव किया गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तारीख बदली, अब 5 अक्टूबर को मतदान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड के किसानों के जैविक उत्पाद खरीदेगी नेशनल कोऑपरेटिव आर्गेनिक्स लिमिटेड]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/national-cooperative-organics-limited-will-buy-organic-products-from-farmers-of-uttarakhand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 31 Aug 2024 16:15:13 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/national-cooperative-organics-limited-will-buy-organic-products-from-farmers-of-uttarakhand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड में किसानों के जैविक उत्पादों को बाजार मुहैया कराने में केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के अधीन गठित नेशनल कोऑपरेटिव आर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल) मदद करेगा। इसके लिए शुक्रवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड तथा उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद के बीच अनुबंध पर हस्ताक्षर हुए। इससे उत्तराखंड के जैविक उत्पादों की बाजार मिलेगा और जैविक खेती करने वाले किसानों को बेहतर दाम पाने के अवसर मिल सकेंगे।&nbsp;</p>
<p>इस मौके पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री <strong>अमित शाह</strong> ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को विश्व के सबसे बड़े ऑर्गेनिक फूड का उत्पादन करने वाला देश बनाने का लक्ष्य रखा है। आज पूरी दुनिया में ऑर्गेनिक उत्पादों के प्रति जागरूकता आई है और इसका एक बहुत बड़ा वैश्विक बाजार मौजूद है। इस बाजार का दोहन कर जब हम भारत के हिस्से को बढ़ाते हैं तो जैविक उत्पादों के मुनाफे वाले व्यापार में हमारे किसानों का हिस्सा बढ़ेगा और उनकी आय में बढ़ोतरी होगी।&nbsp;</p>
<p>अमित शाह ने कहा कि जैविक खेती के साथ देश के नागरिकों का स्वास्थ्य भी जुड़ा हुआ है। इसे बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार ने नेशनल कोऑपरेटिव आर्गेनिक्स लिमिटेड की स्थापना की। उन्होंने कहा कि अमूल और एनसीओएल मिलकर देश भर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशालाओं का नेटवर्क स्थापित करेंगे जो ऑर्गेनिक भूमि और उत्पाद, दोनों का परीक्षण करेंगे। उन्होंने कहा कि ये दोनों मान्यता प्राप्त संस्थाएं भारत और अमूल ब्रांड के साथ विश्वसनीय ऑर्गेनिक उत्पाद उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराने का काम करेंगी।&nbsp;</p>
<p><strong>किसानों से आह्वान </strong></p>
<p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने देश भर के ऑर्गेनिक खेती में लगे किसानों से राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक लिमिटेड के साथ जुड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों द्वारा उत्पादित हुआ सारा ऑर्गेनिक चावल, दलहन और गेहूं खरीदेगी। कुछ ही समय में एनसीओएल मुनाफे को सीधा किसानों के बैंक अकाउंट में भेजने का एक सुचारू तंत्र बना देगी। ऐसा सिर्फ सहकारी संस्था में ही संभव हो सकता है। शाह ने उत्तराखंड के किसानों से अपने खेतों को पूरी तरह से जैविक बनाने और अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अगर पूरा उत्तराखंड जैविक हो जाएगा तो वहां फर्टिलाइजर खरीदने वाले लोग ही नहीं बचेंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>किसानों को होगा लाभ: गणेश जोशी</strong>&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि इसी अगस्त माह में दिल्ली दौरे के दौरान उन्होंने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री से मिलकर उत्तराखण्ड के जैविक उत्पादों विशेषकर बासमती चावल, चौलाई, मिलेट्स, दालें इत्यादि को एनसीओएल के माध्यम से क्रय कराये जाने का आग्रह किया गया था। गणेश जोशी ने प्रसन्नता प्रकट करते हुए कहा कि एक माह के अन्दर ही प्रदेश के किसानों से एनसीओएल द्वारा उत्पाद क्रय किये जाने हेतु अनुबंध किया गया है। इसके लिए मंत्री गणेश जोशी ने केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया।</p>
<p>मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि इस एमओयू के माध्यम से किसानों को अपने उत्पादों को ऊंचे दामों पर बेचने के अवसर प्राप्त होंगे। अगले एक माह के बाद किसानों का आर्गेनिक चावल राष्ट्रीय सहकारी आर्गेनिक लिमिटेड खरीदेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने जैविक खेती के क्षेत्र में नई उंचाइयों को छुआ है। जहां पहले प्रदेश के कुल कृषि क्षेत्र का 1 या 2 प्रतिशत क्षेत्र में ही जैविक खेती होती थी, वहीं अब लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र में जैविक कृषि की जा रही है। राज्य में जैविक खेती से 4.80 लाख किसान जुड़े हैं और 2.23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती हो रही है।</p>
<p>इस अवसर पर केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर,एनसीओएल के चेयरमैन मिनीश शाह, सचिव सहकारिता आशीष भूटानी, उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद के प्रबंध निदेशक विनय कुमार, एनसीओएल के प्रबंध निदेशक विपुल मित्तल सहित कई लोग उपस्थित रहे।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड के किसानों के जैविक उत्पाद खरीदेगी नेशनल कोऑपरेटिव आर्गेनिक्स लिमिटेड ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में धान खरीद के लिए पंजीकरण शुरू, 1 अक्टूबर से होगी खरीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/registration-for-paddy-purchase-starts-in-uttar-pradesh-purchase-will-start-from-1st-october.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 31 Aug 2024 15:58:19 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/registration-for-paddy-purchase-starts-in-uttar-pradesh-purchase-will-start-from-1st-october.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में धान की खरीद के लिए पंजीकरण शुरू हो गया है। प्रदेश में धान की खरीद 1 अक्टूबर 2024 से शुरू होगी। किसान इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण के लिए किसानों को उत्तर प्रदेश खाद्य विभाग की वेबसाइट fcs.up.gov.in पर जाना होगा। केंद्र सरकार ने आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए कॉमन धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2300 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड 'ए' धान के लिए 2320 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। सरकार ने खरीफ सीजन 2024-25 के लिए 485 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है।&nbsp;</p>
<p>खाद्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान की खरीद 1 अक्टूबर 2024 से शुरू होगी और 31 जनवरी 2025 तक चलेगी। इस क्षेत्र में हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर, बरेली, मुरादाबाद, मेरठ, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़, और झांसी जिले शामिल हैं। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान की खरीद 1 नवंबर 2024 से शुरू होकर 28 फरवरी 2025 तक चलेगी। इसमें लखनऊ, रायबरेली, उन्नाव, चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, देवीपाटन, बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी, मिर्जापुर और प्रयागराज शामिल हैं। धान की खरीद सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक होगी।</p>
<p>खरीद प्रक्रिया शुरू होने से पहले, किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपना बैंक खाता सक्रिय कर लें। इसके लिए आवश्यक है कि खाते में पिछले तीन महीने में कुछ लेन-देन हुआ हो। जिन किसानों ने पिछले रबी या खरीफ विपणन वर्ष में पंजीकरण कराया था, उन्हें दोबारा पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन पंजीकरण का नवीनीकरण करना होगा।&nbsp;</p>
<p>धान की बिक्री के लिए ओटीपी आधारित पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। किसान अपना मोबाइल नंबर पंजीकरण के लिए दर्ज कराएं और एमएमएस द्वारा भेजे गए ओटीपी को भरकर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करें। यदि किसान बिक्री के समय क्रय केंद्र पर स्वयं उपस्थित नहीं हो सकते, तो पंजीकरण फॉर्म में परिवार के किसी नामित सदस्य का विवरण और आधार नंबर दर्ज कराना अनिवार्य है।</p>
<p>किसान किसी भी सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-1800-150 पर संपर्क कर सकते हैं या अपने जिले के खाद्य विपणन अधिकारी, तहसील के क्षेत्रीय विपणन अधिकारी, या ब्लॉक के विपणन निरीक्षक से संपर्क कर सकते हैं।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में धान खरीद के लिए पंजीकरण शुरू, 1 अक्टूबर से होगी खरीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्राकृतिक कृषि उत्पादों पर एमएसपी देने वाला पहला राज्य बना हिमाचल: सुखविंदर सिंह सुक्खू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/himachal-became-the-first-state-to-give-msp-on-natural-agricultural-products-said-sukhvinder-singh-sukhu.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 31 Aug 2024 12:04:09 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/himachal-became-the-first-state-to-give-msp-on-natural-agricultural-products-said-sukhvinder-singh-sukhu.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक कृषि उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने वाला पहला राज्य बन गया है। राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों से प्राकृतिक रूप से उगाए गए गेहूं के लिए 40 रुपये प्रति किलोग्राम और मक्का के लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से एमएसपी प्रदान कर रही है। इसके अलावा, गाय का दूध 45 रुपये प्रति लीटर और भैंस का दूध 55 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है। यह बात हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने शुक्रवार को फ्रांसीसी राष्ट्रीय कृषि, खाद्य और पर्यावरण अनुसंधान संस्थान (आईएनआरएई) के वैज्ञानिकों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान कही।&nbsp;</p>
<p>सुखविंदर सिंह सुखू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हिमाचल देश का पहला ऐसा राज्य है जो प्राकृतिक खेती के तरीकों से उगाए गए उत्पादों के लिए एमएसपी प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश अगले पांच से छह वर्षों में प्राकृतिक खेती में देश का अग्रणी राज्य बनने के लिए तैयार है। राज्य में सीईटीएआरए प्रमाणन प्रणाली लागू की गई है, जिसका उद्देश्य किसानों के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की हिम उन्नति योजना के तहत क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण के साथ 2,600 कृषि समूहों की स्थापना की जा रही है, जिसमें लगभग 50 हजार किसान शामिल होंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य रसायन मुक्त उपज का उत्पादन और प्रमाणन करना है।</p>
<p>आईएनआरएई के वैज्ञानिकों ने हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की और सीईटीएआरए प्रमाणन प्रणाली की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आईएनआरएई अन्य देशों में इस प्रमाणन प्रणाली को अपनाने की संभावनाएं तलाशेगा। यह दौरा यूरोपीय आयोग द्वारा वित्तपोषित एक्रोपिक्स परियोजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कृषि-पारिस्थितिक फसल संरक्षण में सह-नवाचार को आगे बढ़ाना है।</p>
<p>इस अवसर पर आईएनआरएई की टीम का नेतृत्व प्रोफेसर एलिसन मैरी लोकोंटो कर रही थीं, जो लैबोरेटोयर इंटरडिसिप्लिनरी साइंसेज इनोवेशन सोसाइटीज (एलआईएसआईएस) की उप निदेशक हैं। हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती में हुई प्रगति का आकलन करने के लिए यह टीम हिमाचल आई है, जो आने वाले दिनों में वाईएस परमार बागवानी और वानिकी विश्वविद्यालय, नौनी और राज्य के अन्य विभिन्न स्थानों का दौरा करेगी। इस टीम में प्रोफेसर मिरेइल मैट, डॉ. एवलिन लोस्टे और डॉ. रेनी वैन डिस भी शामिल हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66d2b5b5ee673.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्राकृतिक कृषि उत्पादों पर एमएसपी देने वाला पहला राज्य बना हिमाचल: सुखविंदर सिंह सुक्खू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66d2b5b5ee673.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[वर्मी कंपोस्ट इकाई लगाने के लिए इस राज्य के किसानों को मिलेगा 50 हजार रुपये तक का अनुदान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-will-get-a-grant-of-up-to-50-thousand-rupees-for-setting-up-vermicompost-unit-in-rajasthan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 31 Aug 2024 10:46:08 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-will-get-a-grant-of-up-to-50-thousand-rupees-for-setting-up-vermicompost-unit-in-rajasthan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान सरकार ने राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और मिट्टी की उर्वरकता को सुधारने के लिए वर्मी कंपोस्ट इकाई निर्माण योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत 5 हजार वर्मी कंपोस्ट इकाइयां स्थापना करने का लक्ष्य तय किया गया है। सरकार द्वारा किसानों को इकाई की स्थापना के लिए 50 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की जैविक और भौतिक स्थिति में सुधार करना है, जिससे मृदा की उर्वरकता और पर्यावरण संतुलन बना रहेगा।</p>
<p>कृषि आयुक्त कन्हैयालाल स्वामी ने बताया कि वर्मी कंपोस्ट इकाई लगाने के लिए किसानों को 30 फीट x 8 फीट x 2.5 फीट आकार के पक्के निर्माण पर खर्च का 50 फीसदी या अधिकतम 50 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। यह अनुदान जिला अधिकारी या कृषि पर्यवेक्षक/सहायक कृषि अधिकारी द्वारा इकाई के भौतिक सत्यापन के बाद ही जारी होगा। वर्मी कंपोस्ट इकाई लगाने के लिए किसान के पास न्यूनतम 0.4 हैक्टेयर कृषि योग्य भूमि होनी चाहिए।&nbsp;</p>
<p><span class="overflow-hidden text-clip whitespace-nowrap text-sm"><span>कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि</span></span> पक्के शेड की ऊंचाई बीच में कम से कम 10 फीट और किनारों पर 8 फीट होनी चाहिए। एक इकाई के लिए कम से कम 60 किलोग्राम केंचुए किसान एटीसी, रजिस्टर्ड एनजीओ, गौशाला, कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि अनुसंधान केंद्र, कृषि कॉलेज आदि से खरीद सकते हैं। प्रत्येक बेड में 400-400 ग्राम ट्राइकोडर्मा, पीएसबी, एजोटोबेक्टर कल्चर और 1.0 किलो नीम की खली का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 5 हजार वर्मी कंपोस्ट इकाइयों को स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है।&nbsp;</p>
<p><span class="overflow-hidden text-clip whitespace-nowrap text-sm"><span>संयुक्त निदेशक ने कहा </span></span>किसान <strong>'राज किसान साथी पोर्टल'</strong> <strong><a href="https://rajkisan.rajasthan.gov.in/">https://rajkisan.rajasthan.gov.in/</a></strong> या नजदीकी ई-मित्र केंद्र पर जाकर जन आधार के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ऑफलाइन आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे। आवेदन के लिए किसान के पास न्यूनतम 6 माह पुरानी जमाबंदी का होना आवश्यक है। पोर्टल पर आवेदन करने पर पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर किसान को अनुदान मिलेगा। आवेदन अधिका की स्थिति में लॉटरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।</p>
<p>यह योजना किसानों को रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती लागत से राहत दिलाने और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जैविक खेती को प्रोत्साहित करती है। जैविक खेती से फसलों को उचित पोषण मिलता है, जिससे उनकी वृद्धि होती है और किसानों की आय में बढ़ोतरी होती है। साथ ही, जैविक खाद से मिट्टी की संरचना और भूजल स्तर भी बनाए रखा जा सकता है, जिससे पर्यावरण को भी लाभ होता है।</p>
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	<media:description type='plain'><![CDATA[ वर्मी कंपोस्ट इकाई लगाने के लिए इस राज्य के किसानों को मिलेगा 50 हजार रुपये तक का अनुदान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में पांच लाख पशुपालक किसानों को मिलेगा एक लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त कर्ज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/five-lakh-animal-husbandry-farmers-in-rajasthan-will-get-interest-free-loan-up-to-one-lakh-rupees.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 30 Aug 2024 11:05:48 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/five-lakh-animal-husbandry-farmers-in-rajasthan-will-get-interest-free-loan-up-to-one-lakh-rupees.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान सरकार इस वर्ष पांच लाख पशुपालक किसानों को एक लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त कर्ज देगी। किसानों को ब्याज मुक्त कर्ज देने के लिए प्रदेश सरकार ने 'गोपाल क्रेडिट कार्ड ऋण योजना पोर्टल' की शुरुआत की है, जिसके जरिए किसान को लोन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।&nbsp;बुधवार को सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक ने इस पोर्टल का उद्घाटन किया।</p>
<p>दक ने बताया कि यह योजना देश में पहली बार राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत गोपालक किसान परिवारों के लिए शुरू की गई है। योजना के तहत, एक लाख रुपये तक का अल्पकालीन ब्याज मुक्त ऋण एक वर्ष की अवधि के लिए प्रदान किया जाएगा। यदि किसान निर्धारित समय पर ऋण का भुगतान कर देते हैं, तो उन्हें किसी प्रकार का ब्याज नहीं देना होगा।</p>
<p>सहकारिता मंत्री ने कहा कि गोपालक किसान परिवारों को गाय या भैंस के लिए शैड, खेली निर्माण और चारा व अन्य आवश्यक उपकरण खरीदने के लिए धन की कमी का सामना करना पड़ता था। इस कमी के कारण वे अपने गोपालन से मिलने वाले पूरे लाभ से वंचित रह जाते थे। इस समस्या को हल करने के लिए सरकार ने यह ब्याज मुक्त ऋण योजना पेश की है।</p>
<p>दक ने यह भी बताया कि ऋण वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने के लिए आवेदन से लेकर स्वीकृति तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से की जाएगी। किसान ई-मित्र केंद्र या संबंधित ग्राम सेवा सहकारी समिति के माध्यम से ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके साथ ही, आवेदनकर्ता का प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति का सदस्य होना अनिवार्य होगा।</p>
<p>सहकारिता मंत्री ने यह भी घोषणा की कि योजना के तहत अधिकतम किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए राज्य के विभिन्न दुग्ध संघों और केंद्रीय सहकारी बैंकों के सहयोग से विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर सहकारिता विभाग, राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) और सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में पांच लाख पशुपालक किसानों को मिलेगा एक लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त कर्ज ]]></media:description>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

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        <title><![CDATA[महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में गरमाएगा सोयाबीन कीमतों में गिरावट का मुद्दा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/soybean-issue-may-affect-maharashtra-assembly-elections-prices-fall-by-up-to-rs-3000-per-quintal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 29 Aug 2024 16:04:16 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/soybean-issue-may-affect-maharashtra-assembly-elections-prices-fall-by-up-to-rs-3000-per-quintal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>प्याज और दूध की कीमतों के बाद अब सोयाबीन के मुद्दे पर महाराष्ट्र की सियासत गरमा रही है। इस साल मध्यप्रदेश और </span>महाराष्ट्र के सोयाबीन उत्पादक किसानों को उपज का सही दाम नहीं मिल रहा है। कीमतें पिछले एक दशक के निम्नतम स्तर पर हैं जिससे विपक्ष को एक नया मुद्दा मिल गया है। आगामी विधानसभा चुनाव में विपक्षी दल सोयाबीन की कीमतों में गिरावट के मुद्दे को भी भुनाने का प्रयास करेंगे।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र की मंडियों में सोयाबीन के दाम 3200 से 3700 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बने हुए हैं, जो केंद्र सरकार द्वारा आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) <span>4892&nbsp;</span>रुपये प्रति क्विंटल से काफी नीचे हैं। इस गिरावट के चलते किसानों को प्रति क्विंटल 1000 से 1500 रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है।&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों में सोयाबीन की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इस साल किसानों ने रिकॉर्ड सोयाबीन की बुवाई की है, लेकिन फसल की कटाई से पहले ही कीमतों में आई गिरावट ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के अनुसार, सोयाबीन का भाव 10 साल पुराने स्तर पर पहुंच गया है। 2013-14 में सोयाबीन का न्यूनतम भाव लगभग 2,900 रुपये प्रति क्विंटल था, जो मौजूदा समय में लगभग उसी स्तर पर पहुंच गया है।&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र की मंडियों में जल्दी बोई गई सोयाबीन की आवक भी शुरू हो गई है, लेकिन मौजूदा कीमतों इतनी कम हैं की किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। अगर जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो यह मुद्दा राज्य में राजनीतिक तनाव का कारण बन सकता है, जिससे सरकार पर फसल की उचित कीमतें सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ेगा।&nbsp;राज्य में पहले से ही प्याज और दूध के मुद्दों पर सियासी माहौल गरमाया हुआ है। ऐसे में सोयाबीन की कीमतों में गिरावट और किसानों की नाराजगी आगामी चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन सकती है।&nbsp;</p>
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<article class="w-full text-token-text-primary focus-visible:outline-2 focus-visible:outline-offset-[-4px]" dir="auto" data-testid="conversation-turn-19" data-scroll-anchor="true">
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<p><span>महाराष्ट्र के किसान संगठन<strong>&nbsp;शेतकरी संघठना</strong>&nbsp;के नेता और एमएसपी पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के सदस्य&nbsp;<strong>अनिल घनवट</strong>&nbsp;ने&nbsp;<strong>रूरल वॉयस</strong> बताया कि महाराष्ट्र में </span>अगले महीने से सोयाबीन की कटाई शुरू होनी है, लेकिन उससे पहले ही कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।<span>&nbsp;जिससे किसान काफी चिंतित हैं। </span>उन्होंने कहा कि&nbsp;महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर सोयाबीन की खेती होती है, और इस स्थिति से आगामी विधानसभा चुनाव में यह एक प्रमुख मुद्दा बन सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों को नुकसान से बचाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। घनवट ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश की तर्ज पर अब महाराष्ट्र में भी सोयाबीन की कीमतों को लेकर किसान बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।</p>
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<p>मध्य प्रदेश में भी सोयाबीन के दाम को लेकर किसान संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन की तैयारी हो रही है। किसानों की मांग है कि सोयाबीन का भाव 6000 रुपये प्रति क्विटंल पर तय किया जाए। इसके लिए 1 सिंतबंर से मध्य प्रदेश में आंदोलन शुरू होने जा रहा है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में गरमाएगा सोयाबीन कीमतों में गिरावट का मुद्दा ]]></media:description>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इस राज्य में प्रगतिशील किसानों को मिलेंगे 50 हजार तक के पुरस्कार, मांगे आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-government-will-honor-farmers-under-the-krishi-unnati-yojana-applications-invited.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 28 Aug 2024 12:25:00 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
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        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान सरकार ने किसानों और पशुपालकों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। कृषि उन्नति योजना के तहत प्रगतिशील किसानों और पशुपालकों को उनके उत्कृष्ट कार्य और नवाचार के लिए सम्मानित किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत 50,000 रुपये तक के नकद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।&nbsp;</p>
<p>योजना के तहत किसानों को तीन कैटेगरी पंचायत, जिला और राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। पंचायत स्तर पर चयनित किसानों को 10,000 रुपये, जिला स्तर पर 25,000 रुपये, और राज्य स्तर पर 50,000 रुपये की नकद राशि पुरस्कार स्वरूप दी जाएगी।&nbsp;</p>
<p>कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, प्रगतिशील किसानों से आवेदन पत्र <strong>30 सितम्बर </strong> तक मांगे गए हैं। <span>निर्धारित आवेदन पत्र कृषि विभाग कार्यालय क्षेत्र में कार्यरत सहायक कृषि अधिकारी से प्राप्त किया जा सकता है।&nbsp;</span>आवेदन पत्र जमा करने के बाद, एक चयन समिति इन किसानों का चयन करेगी। राज्य स्तर पर चयनित सर्वश्रेष्ठ 10 किसानों को सम्मानित किया जाएगा। योजना के तहत पहले सम्मानित हो चुके किसान इसके लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p>चयनित किसानों को एक समारोह में सम्मानित किया जाएगा। राज्य के प्रत्येक जिले में पंचायत स्तर पर पांच-पांच किसानों का चयन किया जाएगा। वहीं, जिला स्तर पर चयनित 10 सर्वश्रेष्ठ किसानों को राज्य स्तरीय सम्मान के लिए चुना जाएगा।</p>
<p>झुंझुनूं के कृषि विभाग के सहायक निदेशक शीशराम के मुताबिक, यदि किसी किसान को इस सम्मान के योग्य समझा जाता है, तो वह या उनके निर्वाचित जनप्रतिनिधि, संस्थाएं, या विभाग निर्धारित प्रारूप में आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं। आवेदन में किसान के कार्य का विवरण और गतिविधि की 5 से 7 फोटो शामिल होनी चाहिए। सरकार की यह योजना न केवल किसानों के उत्कृष्ट कार्य को पहचान दिलाएगी, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित भी करेगी।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इस राज्य में प्रगतिशील किसानों को मिलेंगे 50 हजार तक के पुरस्कार, मांगे आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

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        <title><![CDATA[सोयाबीन के भाव में गिरावट का मुद्दा गरमाया, एक सितंबर से आंदोलन की चेतावनी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/soybean-issue-gains-momentum-farmers-will-protest-against-low-prices-from-september-1-in-madhya-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 27 Aug 2024 15:32:54 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/soybean-issue-gains-momentum-farmers-will-protest-against-low-prices-from-september-1-in-madhya-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में सोयाबीन की कीमतों में आई भारी गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। हालात यह है कि प्रदेश में सोयाबीन का भाव 10 साल पुराने स्तर पर पहुंच गया। प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन की कीमतें 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गई हैं, जो कि केंद्र सरकार द्वारा आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) <span>4892&nbsp;</span>रुपये प्रति क्विंटल से कम है। जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है। सोयाबीन की कम कीमतों के चलते किसानों के लिए लागत निकालना तक मुश्किल हो गया है। ऐसे में अब प्रदेश के किसान आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>प्रदेश भर के किसानों ने सोशल मीडिया पर इसके लिए मुहिम छेड़ दी है। सोशल मीडिया के जरिए किसान लगातार सोयाबीन की कम कीमतों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। वहीं, एक सितंबर को इसे लेकर औपचारिक आंदोलन की शुरुआत भी होने जा रही। जिसमें प्रदेशभर के विभिन्न संगठनों के करीब 2000 किसान नेता और पांच हजार गांवों के किसान शामिल होंगे।&nbsp;</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा मध्य प्रदेश के सदस्य <strong>राम इनानिया</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि सोयाबीन की कीमतों को लेकर प्रदेश के किसान बड़ा आंदोलन करने जा रहे हैं। इस आंदोलन के तहत, 1 से 7 सितंबर तक गांवों में पंचायत सचिवों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। उनके जरिए यह ज्ञापन आगे सरकार तक भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा मध्य प्रदेश के तत्वाधान में प्रदेश के 25 छोटे बड़े किसान संगठन इस आंदोलन में शामिल होंगे और सोयाबीन की कम कीमतों को लेकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>राम इनानिया</strong> ने कहा कि ज्ञापन के जरिए सोयाबीन का भाव 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग की जाएगी। अगर 7 सितंबर के बाद भी सरकार सोयाबीन की कीमतों को लेकर कोई फैसला नहीं लेती, तो उसके बाद &nbsp;संयुक्त किसान मोर्चा मध्य प्रदेश की एक बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।&nbsp;</p>
<p>किसान सत्याग्रह मंच के संस्थापक सदस्य <strong>शिवम बघेल</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि सोयाबीन की कीमतें 10 साल पुराने स्तर पर आ गई हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सोयाबीन की कीमतों में लगातार गिरावट आई है, और इस साल दाम 3500 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गए हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादन लागत और मौजूदा कीमतों के बीच बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि सोयाबीन की प्रति एकड़ लागत 15 से 20 हजार रुपये आती है, जबकि प्रति एकड़ 4 से 5 क्विंटल उत्पादन होता है। मौजूदा दाम के हिसाब से किसानों को उत्पादन लागत निकालना कठिन हो रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर कीमतें ऐसे ही गिरती रही, तो किसानों को मजबूरन सोयाबीन की खेती छोड़नी पड़ेगी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोयाबीन के भाव में गिरावट का मुद्दा गरमाया, एक सितंबर से आंदोलन की चेतावनी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बीमा कंपनी को महाराष्ट्र के परभणी के किसानों का 225 करोड़ का लंबित क्लेम एक हफ्ते में जारी करने का निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/tac-ordered-the-insurance-company-to-release-the-pending-claim-of-rs-225-crore-of-farmers-of-parbhani-maharashtra-within-a-week.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 24 Aug 2024 18:45:06 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/tac-ordered-the-insurance-company-to-release-the-pending-claim-of-rs-225-crore-of-farmers-of-parbhani-maharashtra-within-a-week.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) ने महाराष्ट्र की बीमा कंपनी को परभणी जिले के किसानों के लगभग 200 से 225 करोड़ रुपये के लंबित क्लेम का भुगतान एक सप्ताह के भीतर करने का आदेश दिया है। इससे मराठवाड़ा क्षेत्र के करीब दो लाख सोयाबीन किसानों को लाभ होगा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी है। हालांकि इसमें बीमा कंपनी का नाम नहीं बताया गया है।</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 21 अगस्त को महाराष्ट्र के नांदेड़ में किसानों के साथ संवाद किया था। इस दौरान परभणी जिले के किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री को सोयाबीन फसल के बीमा दावों की लंबित राशि की समस्या से अवगत कराया था। किसानों ने बताया था कि फसल खराब होने के बावजूद उन्हें बीमा राशि नहीं मिली, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों को इस मुद्दे का त्वरित समाधान करने का निर्देश दिया।</p>
<p>इस निर्देश के परिणामस्वरूप 22 अगस्त को राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समिति की बैठक हुई। इस बैठक में बीमा कंपनी द्वारा उठाई गई आपत्तियों को खारिज कर दिया गया और बीमा कंपनी को लंबित दावों का शीघ्र भुगतान करने का आदेश दिया गया। इसके बाद 24 अगस्त को टीएसी ने बीमा कंपनी को एक सप्ताह के भीतर सभी लंबित दावों का भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश जारी किया है।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66c9e2d842d61.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बीमा कंपनी को महाराष्ट्र के परभणी के किसानों का 225 करोड़ का लंबित क्लेम एक हफ्ते में जारी करने का निर्देश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66c9e2d842d61.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हिमाचल में किसानों&amp;#45;पशुपालकों से गोबर खाद खरीदने के लिए प्रक्रिया शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/committees-will-be-formed-at-the-block-level-to-buy-organic-manure-from-farmers-in-himachal-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 24 Aug 2024 10:32:15 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/committees-will-be-formed-at-the-block-level-to-buy-organic-manure-from-farmers-in-himachal-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div class="flex max-w-full flex-col flex-grow">
<div data-message-author-role="assistant" data-message-id="f317745f-d23e-4b60-b9a9-dca90737a5b5" dir="auto" class="min-h-[20px] text-message flex w-full flex-col items-end gap-2 break-words [.text-message+&amp;]:mt-5 overflow-x-auto whitespace-pre-wrap">
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<p>हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने विधानसभा चुनाव के दौरान किसानों और पशुपालकों से गोबर खाद खरीदने का वादा किया था, जिसे अब अमल में लाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने ब्लॉक स्तर पर कमेटियों के गठन का निर्णय लिया है। इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p>अधिसूचना के अनुसार, ब्लॉक की कमेटियों में कृषि विभाग के विषय विशेषज्ञ, पशु चिकित्सा अधिकारी और कृषि विकास अधिकारी सदस्य होंगे। ये कमेटियां किसानों का पंजीकरण और प्रमाणीकरण करेंगी। साथ ही किसानों द्वारा तैयार की गई खाद के सैंपलों की जांच भी की जाएगी। कृषि सचिव पी. पालरासु ने इस योजना को लेकर अधिसूचना जारी की है।</p>
<p>प्रदेश के कृषि मंत्री प्रोफेसर चंद्र कुमार ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि गोबर खरीद शुरू करने से पहले ब्लॉक स्तर पर क्लस्टर तैयार किए जाएं। योजना का पहला चरण उन ब्लॉकों में शुरू होगा जहां कृषि या बागवानी विभाग के फार्म स्थित हैं।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66c8a32b8dc18.jpg" alt="" width="659" height="667" /></p>
<p>इस योजना के तहत, पशुपालकों और किसानों से गोबर खाद दो रुपये प्रति किलो की दर से खरीदी जाएगी, जिसका उपयोग कृषि और बागवानी फार्म में किया जाएगा। इसके अलावा, किसान और बागवान भी इस खाद को प्राकृतिक खेती के लिए खरीद सकेंगे। सरकार की इस पहल से किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हिमाचल में किसानों-पशुपालकों से गोबर खाद खरीदने के लिए प्रक्रिया शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में 25 फीसदी फसलें बर्बाद मगर किसानों को नहीं मिलेगा मुआवजा, मंत्री ने बताई वजह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/25-percent-crops-destroyed-in-uttarakhand-but-farmers-will-not-get-compensation-minister-gives-reason.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 24 Aug 2024 10:29:55 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/25-percent-crops-destroyed-in-uttarakhand-but-farmers-will-not-get-compensation-minister-gives-reason.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नरेश नौटियाल, उत्तरकाशी में फलपट्टी के रूप में पहचान रखने वाले नौगांव ब्लॉक में देवलसारी गांव के प्रगतिशील किसान है। उनका खुद का कंडाऊं गांव में 300 पेडों का सेब का बगीचा है, साथ ही नरेश पहाड़ के जैविक कृषि उत्पादों को बड़े शहरों में बाजार मुहैया कराने वाले उद्यमी के रूप में भी पहचान रखते हैं।</p>
<p>नरेश नौटियाल की सेब की फसल अब तैयार है। इस बार रेट भी ठीक मिल रहा है, लेकिन एक समस्या सेब के आकार को लेकर खड़ी हो गई है। नरेश नौटियाल बताते हैं कि इस साल दिसंबर से फरवरी तक बारिश- बर्फबारी नहीं हुई और कूलिंग पीरियड नहीं मिलने के कारण फूल को पनपने का मौका नहीं मिला। उस पर जो फल तैयार हुआ है, उसका भी इस बार साइज छोटा है। इस कारण आढ़ती अच्छा दाम देने से कतरा रहा है।</p>
<p>इसी गांव के कास्तकार अरविंद डोभाल बताते हैं कि बारिश व बर्फबारी न होने से सेब, नाशपाती, आडू, पुलम का उत्पादन 40 से 50 प्रतिशत कम हुआ है। उस पर मार्च अप्रैल में हुई ओलावृष्टि ने रही सही कसर पूरी कर दी। इसी तरह धारी कफनौल के किसान दौलतराम बहुगुणा बताते हैं कि इस बार कम बारिश, बर्फबारी के कारण उनका कुल सेब उत्पादन 100 पेटी का ही हुआ है, पिछली बार पांच सौ पेटी तक होती थी।&nbsp;</p>
<p>इधर, किसानों की इस समस्या को उत्तराखंड सरकार स्वीकार तो कर रही है, लेकिन आपदा के मानकों पर विवाद के कारण सरकार किसानों को मुआवजा नहीं दे पा रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>सदन में बोली सरकार, मानक पूरे नहीं&nbsp;</strong></p>
<p>शुक्रवार को गैरसैंण में आयोजित मानसून सत्र के दौरान धनोल्टी से भाजपा विधायक <strong>प्रीतम सिंह पंवार</strong> ने प्रश्नकाल के दौरान यह सवाल उठाते हुए पूछा कि दिसंबर से फरवरी तक बारिश, बर्फबारी न होने के कारण किसानों की फसल व्यापक तौर पर प्रभावित हुई, सरकार इस नुकसान की भरपाई के लिए क्या किसानों को मुआवजा देगी?&nbsp;</p>
<p>इसके लिखित जवाब में कृषि मंत्री <strong>गणेश जोशी</strong> ने स्वीकार किया है कि बारिश, बर्फबारी न होने से नकदी फसलों का उत्पादन 25 प्रतिशत तक प्रभावित होने का अनुमान है। मंत्री ने बताया कि कम उत्पादन के बावजूद नुकसान की भरपाई केवल फसल बीमा योजना के तहत आवेदन करने वाले किसानों की ही हो पाएगी।&nbsp;</p>
<p>भाजपा विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने दूसरे सवाल के जरिए सरकार से सर्दियों के सीजन में कम बारिश से गेंहू, सरसों, जौ, चना, आलू, मसूर के कम उत्पादन से हुए नुकसान का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि सरकार क्या इन सीमांत किसानों को भी मुआवजा देगी ?&nbsp;</p>
<p>इसके जवाब में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने मुआवजा देने से साफ इंकार करते हुए कहा कि उक्त नुकसान एसडीआरएफ, एनडीआरएफ के मानक 33 प्रतिशत से कम हुआ है, इसलिए मुआवजा संभव नहीं है।&nbsp;</p>
<p>तो इस तरह सरकार किसानों को हुए नुकसान को स्वीकार करते हुए भी मुआवजा देने को तैयार नहीं है। किसानों को पूरी तरह फसल बीमा योजना के भरोसे छोड़ दिया गया है। जबकि जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत सुरक्षा कवर लिया था, उनको भी मुआवजा लैंड रिकॉर्ड संबंधित विवाद के कारण नहीं मिल पा रहा है, इस पर रूरल वॉयस ने बीते दिनों विस्तृत रिपोर्ट की थी।&nbsp;</p>
<p><em><strong>यहां पढ़ें:</strong> <a href="https://www.ruralvoice.in/states/crisis-of-apple-farmers-in-uttarakhand-insurance-company-refused-to-take-premium-and-compensation..html">उत्तराखंड में सेब किसानों का संकट, मुआवजे से मुकर गई बीमा कंपनी</a></em></p>
<p><strong>मानकों पर सवाल</strong>&nbsp;</p>
<p>कृषि विभाग और बीमा कंपनियों का कहना है कि फसलों को हुए नुकसान का आंकलन मुख्य तौर पर मौसम के आंकड़ों और राजस्व पटवारी की रिपार्ट के आधार पर किया जाता है। लेकिन इस प्रक्रिया पर कई सवाल उठते हैं। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि पहाड़ में बारिश, अतिवृष्टि, तूफान जैसे वेदर इवेंट घाटी दर घाटी बदलते जाते हैं। उस पर पहाड़ में मौसम विभाग का नेटवर्क भी बहुत सीमित है। ऐसे में विभाग के आंकड़े ही बहुत पुख्ता नहीं होते हैं, उस पर राजस्व पटवारी की रिपोर्ट भी जमीनी वास्तविकता से दूर हो सकती है। मौसम के आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया और उनकी प्रामाणिकता से किसान अनभिज्ञ रहते हैं।&nbsp;</p>
<p>किसान नरेश नौटियाल के मुताबिक, क्षेत्र में ज्यादातर किसान कम जोत वाले हैं। इस कारण ज्यादातर के पास फसल बीमा का कवर नहीं होता है। ऐसे में उन्हें आपदा मद से ही सहायता की उम्मीद रहती है, लेकिन सरकार हर बार मानक पूरे न होने की बात कहते हुए हाथ खड़े कर देती है। जबकि अब पहाड़ में सर्दियों की बारिश और बर्फबारी का पैर्टन लगातार बदल रहा है। सर्दियों में कम बारिश और बर्फबारी आम हो चुकी है। चरम मौसमीय घटनाएं भी बढ़ रही हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में 25 फीसदी फसलें बर्बाद मगर किसानों को नहीं मिलेगा मुआवजा, मंत्री ने बताई वजह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में इंसान और खेती दोनों के पीछे पड़े जंगली जानवर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/in-uttarakhand-wild-animals-are-after-both-humans-and-agriculture.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 23 Aug 2024 09:14:10 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/in-uttarakhand-wild-animals-are-after-both-humans-and-agriculture.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em>- </em><em>देहरादून से <strong>संजीव कंडवाल</strong>&nbsp;<br />&nbsp;</em></p>
<p>उत्तराखंड में जंगली जानवर खेती को बड़ा नुकसान पहुंचा रहे हैं। जानवरों के खौफ से लोग खेतीबाड़ी छोड़ने को मजबूर है और जो लोग खेती कर रहे हैं उनकी फसलें जंगली जानवर बर्बाद कर देते हैं। <strong>उत्तराखंड वन विभाग</strong> के आंकड़े बताते हैं कि राज्य का कोई भी हिस्सा जंगली जानवरों के लिहाज से खेती के लिए सुरक्षित नहीं है। विभाग के पास साल 2021 से 2023 तक खेती को नुकसान की सर्वाधिक 1028 शिकायतें हरिद्वार फॉरेस्ट डिविजन से आई हैं। इसके बाद तराई पश्चिम से 426 और देहरादून डिविजन से 250 शिकायतें आई हैं, इसके बाद क्रमश: कार्बेट, तराई केंद्रीय, भूमि संरक्षण कालसी, तराई पूर्वी और लैंसडाउन डिविजन से शिकायतें आई हैं।&nbsp;</p>
<p>अधिकारी मानते हैं कि ये वो मामले हैं, जिसमें लोग मुआवजा मांगने सामने आए हैं। जंगली जानवरों से फसल बर्बादी के ज्यादातर मामले तो बिना रिपोर्ट के ही रह जाते हैं। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में जहां बंदर खेती को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं, वहां से विभाग के पास बहुत कम शिकायतें आई हैं। इसकी प्रमुख वजह यह है कि नुकसान की भरपाई मामूली होती है, जबकि इसके लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना होता है। मुआवजा सामान्य तौर पर जनहानि और पशुहानि के मामले में ही मिल पाता है।</p>
<p><strong>मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं</strong><br /><strong>वर्ष &nbsp; &nbsp; &nbsp; घायल &nbsp; &nbsp;मृतक</strong><br />2022 &nbsp; &nbsp; 325 &nbsp; &nbsp; &nbsp;82<br />2023 &nbsp; &nbsp; 325 &nbsp; &nbsp; &nbsp;66<br />2024 &nbsp; &nbsp; 165 &nbsp; &nbsp; &nbsp;38</p>
<p><em>स्रोत: पलायन आयोग, उत्तराखंड&nbsp;</em><br />(नोट- 2024 की घटनाएं 15 अगस्त तक की हैं)<br /><br />उत्तराखंड राज्य का कुल 63 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र के रूप में चिन्हित है। पर्वतीय जिलों में सीढ़ीदार खेत वैसे ही खेती-किसानी को बहुत चुनौतीपूर्ण बना देते हैं। इस कारण राज्य के पास कृषि योग्य भूमि महज 11.65 प्रतिशत ही बचती है। यह जमीन भी मुख्य रूप से तीन मैदानी मैदानी जिलों में उपलब्ध है, लेकिन इन मैदानी जिलों में हाल के वर्ष में पहाड़ी जिलों के साथ ही राज्य के बाहर से भी बड़ी संख्या में आबादी बसी है, इस कारण उत्तराखंड में कृषि योग्य भूमि लगातार घट रही है। राज्य गठन के बाद से कृषि योग्य भूमि का क्षेत्र लगभग 1.49 लाख हेक्टेयर घट चुका है।</p>
<p>लेकिन इससे बड़ी चुनौती राज्य के सामने बची खुची खेती को जंगली जानवरों से बचाने की आन पड़ी है।&nbsp;प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में हाथी, नील गाय और पर्वतीय क्षेत्रों में बंदर और जंगली सुअर फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। इस कारण किसान खेतीबाड़ी छोड़ कर आजीविका के लिए दूसरे विकल्प तलाशने को मजबूर हो रहे हैं।</p>
<p>उत्तराखंड में वन क्षेत्र अधिक होने के साथ-साथ जंगली जानवरों की संख्या भी अधिक है। प्रदेश में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए 6 नेशनल पार्क और 7 वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के अलावा कई संरक्षित क्षेत्र हैं जिनके आसपास कृषि और आबादी वाले क्षेत्र हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रदेश में पुरानी समस्या है जिससे खेती को नुकसान के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं।</p>
<p><strong>ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग</strong> ने जानवरों से लोगों के साथ-साथ खेती-बाड़ी को होते नुकसान को राज्य में तेज होते पलायन के प्रमुख कारणों में से एक माना है। इसके अलावा कमजोर शिक्षा व्यवस्था को भी पलायन की वजह के रूप में चिन्हित करते हुए, आयोग इसके लिए विशेष सिफारिशें करने जा रहा है। जंगली जानवरों से खेती को हो रहे नुकसान पर पलायन आयोग एक रिपोर्ट तैयार कर रहा है। &nbsp;</p>
<p>ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष&nbsp;<strong>डॉ. एसएस नेगी&nbsp;</strong>का कहना है कि पहाड़ में पलायन के पीछे जंगली जानवरों का प्रकोप एक अहम कारण सामने आया है। हमने वन विभाग से आंकड़े मांगकर अध्ययन किया है। इस समस्या का निदान कैसे हो सकता है, इसके लिए दूसरे राज्यों का भी अध्ययन किया जा रहा है। बिहार ने नीलगायों से बचाव और दिल्ली ने बंदरों को पकड़ने के मामले में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, इस मॉडल को यहां भी अपनाया जा सकता है। जल्द रिपोर्ट सीएम को सौंपी जाएगी।</p>
<p><strong>जंगली जानवरों द्वारा खेती को नुकसान की घटनाएं</strong><br /><strong>जानवर &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;घटनाएं</strong><br />हाथी &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; 1998<br />जंगली सूअर&nbsp; 145<br />सांभर&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;14<br />नीलगाय&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; 07<br />बंदर&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;12<br />हिरन&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; 34<br />लंगूर&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; 15</p>
<p><em>स्रोत: पलायन आयोग, उत्तराखंड&nbsp;</em><br />(नोट- 2024 की घटनाएं 15 अगस्त तक की हैं)</p>
<p><strong></strong></p>
<p><strong>खेती छोड़कर बकरीपालन</strong><br />पौड़ी जिले का यमकेश्वर ब्लॉक राजाजी राष्ट्रीय पार्क से सटा हुआ है। इस कारण यहां जगंली जानवरों की समस्या कुछ ज्यादा ही है। इसी ब्लॉक में खेड़ा मल्ला गांव के किसान&nbsp;<strong>दिनेश कुकरेती&nbsp;</strong>बताते हैं कि कुछ साल पहले तक गांव में बचे खुचे परिवार धान, गेंहू, मंडुवा, झंगोरा, उड़द, मसूर, चौलाई जैसी फसल लगा ते थे, लेकिन पलायन के कारण अब ज्यादातर खेत बंजर हो गए हैं, इस कारण जंगली जानवर गांव के और करीब आ गए हैं, नतीजा फसल की रखवाली मुश्किल काम हो गया है। कुछ समय पहले तक गांव में मोर की समस्या नहीं थी, लेकिन अब मोर घर के आगे की सब्जी भी चट कर जा रहे हैं। इसके बजाय ग्रामीणों ने अब फसल के बजाय बकरी पालन शुरू कर दिया है। हालांकि बकरियों को भी गुलदार का खतरा रहता है, लेकिन बकरियों की रखवाली दिन में चार पांच घंटे जंगल ले जाते समय ही करनी है। यह काम खेती की 24 घंटे की रखवाली के मुकाबले आसान है। इसलिए गांव में 90 प्रतिशत खेत अब बंजर हो चुके हैं।&nbsp;&nbsp;<strong></strong><strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>विभाग कई,</strong><strong> पुख्ता योजना नहीं </strong></p>
<p>जंगली जानवरों से फसलों की बर्बादी और खेती का उजड़ना वन विभाग के साथ-साथ कृषि, उद्यान, ग्राम्य विकास जैसे कई विभागों के दायरे में आता है लेकिन किसी भी विभाग के पास इस समस्या के समाधान के लिए कोई पुख्ता योजना नहीं है।</p>
<p>उत्तराखंड के कृषि एवं उद्यान मंत्री&nbsp;<strong>&nbsp;</strong><strong>गणेश जोशी</strong>&nbsp;का कहना है कि जंगली जानवर मैदान से लेकर पहाड़ तक खेती को व्यापक नुकसान पहुंचा रहे हैं। हम इसके लिए किसानों को वैकल्पिक खेती का प्रयोग करने के साथ ही तारबाड़ में भी मदद कर रहे हैं। वन विभाग, उरेडा जैसी संस्थाएं इस दिशा में मिलकर काम कर रही हैं।</p>
<p><strong>लिविंग विद लैपर्ड<br /></strong>मानव वन्यजीव संघर्ष को लेकर भी उत्तराखंड लगातार सुर्खियों में बना रहता है। इसमें पहाड़ी क्षेत्र में गुलदार और मैदानी क्षेत्रों में हाथी का आंतक प्रमुख है। इस रक्षाबंधन के दिन पौड़ी रिखणीखाल विकासखंड के गुठेरना ग्राम पंचायत के कोटा खंड गांव में गुलदार ने ठीक रक्षाबंधन के दिन पांच साल के एक बच्चे को आंगन से उठा लिया। बच्चा अपनी मां के साथ राखी मनाने अपने ननिहाल आया हुआ था। बाद में बच्चे का शव एक किमी दूर मिला।&nbsp;</p>
<p>उत्तराखंड के एडिशनल पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) उत्तराखंड&nbsp;<strong>डॉ. विवेक पांडेय</strong> के मुताबिक, मानव-वन्य जीव संघर्ष रोकने के साथ ही खेती को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए कई विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। साथ ही लिविंग विद लैपर्ड प्रोग्राम को भी बढ़ाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत ग्रामीणों को लैपर्ड की हकीकत को स्वीकार करते हुए, अपनी दिनचर्या में इसके अनुसार बदलाव करने को कहा जा रहा है।</p>
<p>गुलदार के आंतक के कारण पहाड़ में जिलाधिकारी रात्रिकालीन कर्फ्यू लगा रहे हैं, साथ ही कई बार हफ्तों तक स्कूल बंद रहना आम बात है। इस साल के शुरुआत में तो श्रीनगर जैसे प्रमुख शहर में कई दिनों तक रात्रिकालीप कर्फ्यू लागू करना पड़ा।&nbsp;<br /><br /><br /><strong><br /><br /></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में इंसान और खेती दोनों के पीछे पड़े जंगली जानवर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में मूंग किसानों की मुश्किलें बढ़ीं, अब भुगतान में देरी से किसान परेशान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/moong-farmers-in-madhya-pradesh-facing-problems-due-to-delay-in-payment.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 21 Aug 2024 13:57:33 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/moong-farmers-in-madhya-pradesh-facing-problems-due-to-delay-in-payment.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में मूंग किसानों के सामने अब एक नई समस्या खड़ी हो गई है। हजारों किसानों को अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बेची गई ग्रीष्मकालीन मूंग का भुगतान नहीं मिला है। कई किसान तो ऐसे भी हैं जिनकी फसल का भुगतान पिछले एक महीने से लंबित है। प्रदेश में यह हाल तब है जब राज्य सरकार ने मूंग खरीद शुरू होने से पहले 7 दिनों के अंदर फसल खरीद का भुगतान करने का दावा किया था। लेकिन प्रदेश में अभी भी हजारों किसान ऐसे हैं जिन्हें फसल का भुगतान नहीं मिल पाया है।</p>
<p>सीहोर&nbsp;जिले के किसान और किसान स्वराज संगठन के संस्थापक <strong>भगवान मीणा</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि पिछले डेढ़ महीने से उनकी फसल का भुगतान लंबित है। ऐसे हजारों किसान हैं जिन्हें अभी तक उनका पैसा नहीं मिला है। मीणा ने कहा कि किसान की आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर होती है। अगर फसल का भुगतान समय पर नहीं होता, तो किसान अपने परिवार का भरण-पोषण और अगली फसल की तैयारी कैसे करेगा? उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों का भुगतान जल्द से जल्द किया जाए।</p>
<p>मध्य प्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष <strong>केदार शंकर सिरोही</strong> ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि प्रदेश में करीब 10 लाख मूंग किसान हैं, जिनमें से आधे किसानों को अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। सिरोही ने कहा कि सरकार ने पहले दावा किया था कि 3 से 7 दिनों के भीतर भुगतान हो जाएगा, लेकिन हकीकत इससे अलग है। उन्होंने सरकार से किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर समय पर किसानों का भुगतान नहीं होता है, तो किसान एक बार फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।&nbsp;</p>
<p>प्रदेश में मूंग खरीद की प्रक्रिया शुरुआत से ही सवालों के घेरे में है। पूरी खरीद के दौरान किसानों ने कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पहले प्रति हेक्टेयर और प्रति दिन मूंग बेचने की सीमा को लेकर किसानों परेशान हुए। इसके बाद सॉफ्टवेयर में तकनीकी गड़बड़ी के कारण स्लॉट बुकिंग में किसानों को काफी मुश्किलें आईं। इतना ही नहीं समय से पहले खरीद बंद होने से भी किसान काफी परेशान हुए। जिसके विरोध में किसानों ने प्रदर्शन तक किए।&nbsp;हालांकि सरकार ने खरीद की तारीख तो बढ़ाई, लेकिन सॉफ्टवेयर में लगातार गड़बड़ी के कारण फिर से किसानों को स्लॉट बुकिंग में समस्याएं आईं, जिससे कई किसान एमएसपी पर अपनी फसल नहीं बेच पाए।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668be138010ae.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में मूंग किसानों की मुश्किलें बढ़ीं, अब भुगतान में देरी से किसान परेशान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पश्चिम बंगाल सरकार ने दूसरे राज्यों को 2 लाख टन आलू भेजने की अनुमति दी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/west-bengal-government-gives-partial-relaxation-on-inter-state-potato-trade-allows-export-of-up-to-2-lakh-tonnes-in-a-week.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 21 Aug 2024 12:06:54 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/west-bengal-government-gives-partial-relaxation-on-inter-state-potato-trade-allows-export-of-up-to-2-lakh-tonnes-in-a-week.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार को आलू के अंतर-राज्यीय व्यापार पर लगी पाबंदी में आंशिक ढील देते हुए अगले एक सप्ताह के लिए अन्य राज्यों को 2 लाख टन तक आलू बेचने की अनुमति दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में आलू व्यापारियों और अन्य हितधारकों के साथ विस्तार से चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि राज्य में आलू की कमी नहीं होगी और कीमतें नियंत्रण में रहेंगी।</p>
<p>बैठक के बाद पंचायत मंत्री प्रदीप मजूमदार ने बताया कि आलू की पर्याप्त उपलब्धता को देखते हुए, अगले एक सप्ताह के लिए 2 लाख टन आलू के व्यापार की अनुमति दी जा रही है। इसमें से 1 लाख टन उत्तर बंगाल और 1 लाख टन दक्षिण बंगाल से भेजा जाएगा। हालांकि, इसके लिए पहले पड़ोसी राज्यों को मांग करनी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू बाजार में आपूर्ति सुचारू बनी रहे और कीमतों में किसी भी प्रकार की अस्थिरता न हो।&nbsp;</p>
<p>मजूमदार ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य राज्यों के साथ आलू व्यापार की अनुमति इस शर्त पर दी जा रही है कि कीमतें स्थिर रहेंगी। उन्होंने कहा कि कीमतें घट सकती हैं, लेकिन बढ़नी नहीं चाहिए। अगर कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो सरकार इस अवधि को आगे बढ़ाने पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एक सप्ताह बाद राज्य में आलू की कीमतों पर आलू व्यापार के प्रभाव की समीक्षा करेंगी।&nbsp;</p>
<p>इस बैठक में पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन और प्रगतिशील आलू व्यवसायी समिति के प्रतिनिधि भी शामिल थे। बैठक के बाद व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि आलू की कीमतें स्थिर रहेंगी और आलू व्यापार की अवधि को बढ़ाया जाएगा। प्रगतिशील आलू व्यापारी संघ के सचिव लालू मुखर्जी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बुधवार से अन्य राज्यों के साथ आलू व्यापार की अनुमति दी है, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि कीमतें मौजूदा स्तर से अधिक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार आलू की कीमतों पर कड़ी नजर रखेगी और यदि कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो मुख्यमंत्री आलू व्यापार अवधि की अनुमति को आगे बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं।&nbsp;</p>
<p>सरकार ने पिछले महीने आलू की कीमतों में अचानक वृद्धि के बाद अंतर-राज्यीय व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस फैसले का आलू उत्पादकों और व्यापारियों ने विरोध किया था, क्योंकि उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा था। पश्चिम बंगाल देश का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है और हर साल अन्य राज्यों के साथ 20 से 25 लाख टन आलू का व्यापार करता है।&nbsp;व्यापारियों का कहना है कि आलू व्यापार पर रोक के कारण पश्चिम बंगाल को अपने प्रमुख बाजारों जैसे ओडिशा, आंध्र प्रदेश, बिहार और असम में उत्तर प्रदेश से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इन राज्यों की मांग को पूरा करने के लिए बंगाल के आलू पर काफी निर्भरता रहती है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पश्चिम बंगाल सरकार ने दूसरे राज्यों को 2 लाख टन आलू भेजने की अनुमति दी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान के पशुपालकों को पशु खरीदने के लिए मिलेगा एक लाख तक का ब्याज मुक्त लोन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-cattle-farmers-will-get-interest-free-loan-up-to-rs-1-lakh-to-buy-new-cattle.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 20 Aug 2024 11:50:51 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-cattle-farmers-will-get-interest-free-loan-up-to-rs-1-lakh-to-buy-new-cattle.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान के पशुपालक अब आसानी से पशु खरीद पाएंगे। राज्य सरकार ने पशुपालक के लिए बिना ब्याज के 1 लाख रुपए तक का लोन देने की योजना शुरू की है। पशुपालकों को यह सुविधा उनके 'गोपालक कार्ड' के माध्यम से मिलेगी। यह घोषणा प्रदेश के पशुपालन, गोपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने सोमवार को हनुमानगढ़ में गोगामेड़ी मेले के शुभारंभ अवसर पर की।&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</p>
<p>मंत्री ने राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि ऊंटनी के पहले बच्चे के पालन-पोषण के लिए मुख्यमंत्री द्वारा 20 हजार रुपए का अनुदान देने की घोषणा की गई है। राज्य में रोजगार के दृष्टिकोण से पशुपालन दूसरा सबसे बड़ा व्यवसाय है। सरकार ने दूध देने वाले पशुओं के लिए बीमा योजना भी शुरू की है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके। इसके साथ ही, राज्य में पशुपालकों की सहायता के लिए 536 मोबाइल यूनिट्स की शुरुआत की गई है, जो घर-घर जाकर पशुओं का इलाज करेंगी।&nbsp;</p>
<p>मंत्री कुमावत ने बताया कि गायों के अनुदान में 10 फीसदी की वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पंचायत में गौशाला और हर पंचायत समिति में नंदी शाला खोलने की योजना पर काम हो रहा है। नई गौशाला के लिए 10 लाख रुपए खर्च करने पर सरकार 90 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दे रही है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान के पशुपालकों को पशु खरीदने के लिए मिलेगा एक लाख तक का ब्याज मुक्त लोन ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सोयाबीन का सही भाव नहीं मिला, किसान ने 10 बीघा में खड़ी फसल पर चला दिया ट्रैक्टर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/not-getting-the-right-price-for-soybean-farmer-ran-tractor-over-10-bigha-standing-crop-in-madhya-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 19 Aug 2024 19:53:29 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/not-getting-the-right-price-for-soybean-farmer-ran-tractor-over-10-bigha-standing-crop-in-madhya-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश के एक किसान की निराशा ने उसे अपनी 10 बीघा सोयाबीन की फसल को ट्रैक्टर से नष्ट करने पर मजबूर कर दिया। दरअसल, मन्दसौर जिले के देवरिया गांव के किसान कमलेश पाटीदार अपनी पिछले साल की फसल मंडी में बेचने गए थे, लेकिन उन्हें उसका सही दाम नहीं मिला। जिसके चलते उन्होंने 10 बीघा में खड़ी सोयाबीन की फसल पर ट्रैक्टर चला दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें किसान को अपनी आपबीती बताते हुए सुना जा सकता है।&nbsp;</p>
<p>वीडियो में कमलेश पाटीदार बताते हैं कि वे मन्दसौर जिले की गरोठ तहसील के देवरिया गांव के निवासी हैं और उन्होंने लगभग 10 बीघा जमीन पर सोयाबीन की फसल लगाई थी। उन्होंने फसल को नष्ट करने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि उन्हें सोयाबीन की खेती घाटे का सौदा लग रही थी। कमलेश ने बताया कि उनके पास पिछले साल की 140 क्विंटल सोयाबीन बची थी, जिसे उन्होंने 16 अगस्त को मंडी में 3800 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में बेचा। जिससे उन्हें नुकसान हुआ और वह लागत तक नहीं निकाल पाए।&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8C%E0%A4%B0?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#मंदसौर</a> के <a href="https://twitter.com/hashtag/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A0?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#गरोठ</a> में चौंकाने वाला, फिर से चिंता बढ़ाने वाला घटनाक्रम हुआ! किसान श्री कमलेश पाटीदार जी ने <a href="https://twitter.com/hashtag/%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%A8?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#सोयाबीन</a> की फसल पर केवल इसलिए ट्रैक्टर चला दिया, क्योंकि बाजार का भाव नफा की बजाय नुकसान का सौदा दे रहा था!<a href="https://twitter.com/DrMohanYadav51?ref_src=twsrc%5Etfw">@DrMohanYadav51</a> जी,<br />कृषि कल्याण के झूठे दावे <a href="https://twitter.com/BJP4India?ref_src=twsrc%5Etfw">@BJP4India</a> की पहचान&hellip; <a href="https://t.co/c5Unjzytsz">pic.twitter.com/c5Unjzytsz</a></p>
&mdash; Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) <a href="https://twitter.com/jitupatwari/status/1825185595980967979?ref_src=twsrc%5Etfw">August 18, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए सोयाबीन बोने से अच्छा है, खेत को खाली रख दिया जाए, ताकि खेत की उर्वरा शक्ति बची रहे। उन्होंने अन्य किसानों से अपील करते हुए कहा कि अगर आने वाले समय में सोयाबीन 3000 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल बिकता है तो सोयाबीन की खेती पूरी तरह से घाटे का सौदा होगा। आज तमाम तरह की दवाईयां खाद बीज की कीमतें आसमान छू रही हैं, जबकि सोयाबीन को मिल रही कीमत से किसान लागत तक नहीं निकाल पा रहे। उन्होंने कहा कि सोयाबीन की फसल बोने से अच्छा है कि खेत खाली रख दें या ऐसी फसल बोये जिससे लागत निकालना आसान हो। सरकार और देश का पेट भरने के चक्कर में कब तक किसान अपने परिवार व जमीन का बलिदान देंगे।&nbsp;</p>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66c3537649cc4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सोयाबीन का सही भाव नहीं मिला, किसान ने 10 बीघा में खड़ी फसल पर चला दिया ट्रैक्टर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में फसल विविधीकरण से बढ़ी बासमती की खेती, रकबा 12.58 फीसदी बढ़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/basmati-acreage-increased-by-12.58-percent-under-crop-diversification-in-punjab-said-gurmeet-singh-khuddian.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 19 Aug 2024 10:58:23 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/basmati-acreage-increased-by-12.58-percent-under-crop-diversification-in-punjab-said-gurmeet-singh-khuddian.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में फसल विविधीकरण अभियान के तहत इस खरीफ सीजन के दौरान बासमती की खेती के क्षेत्र में 12.58 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने रविवार को इस बात की जानकारी दी। मंत्री ने बताया कि इस खरीफ सीजन लंबे दाने वाले चावल की खेती 6.71 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के 5.96 लाख हेक्टेयर से अधिक है।</p>
<p>खुड्डियां ने बताया कि बासमती की खेती के मामले में अमृतसर जिला 1.46 लाख हेक्टेयर के साथ सबसे आगे है। इसके बाद मुक्तसर में 1.10 लाख हेक्टेयर, फाजिल्का में 84.9 हजार हेक्टेयर, तरनतारन में 72.5 हजार हेक्टेयर और संगरूर में 49.8 हजार हेक्टेयर में बासमती की खेती की गई है। इन जिलों में बासमती की खेती के क्षेत्रफल में सबसे ज्यादा योगदान देखा गया है।</p>
<p>मंत्री खुड्डियां ने यह भी बताया कि इस साल चावल की सीधी बुवाई (डीएसआर) के तहत क्षेत्र में 46.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि पानी की बचत करने वाली इस डीएसआर पद्धति का उपयोग 2023 के खरीफ सीजन में 1.72 लाख एकड़ से बढ़कर 2.52 लाख एकड़ हो गया है।</p>
<p>राज्य सरकार ने बासमती की निर्यात गुणवत्ता को बढ़ाने के उद्देश्य से 10 कीटनाशकों के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगाया है, ताकि इसे विश्व स्तरीय मानकों के अनुरूप बनाया जा सके। पंजाब सरकार के इस प्रयास से बासमती की खेती में वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66c2d49bb2e85.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में फसल विविधीकरण से बढ़ी बासमती की खेती, रकबा 12.58 फीसदी बढ़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्रीपेड मीटर के विरोध में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने किया मेरठ ऊर्जा भवन का घेराव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rashtriya-kisan-mazdoor-sangathan-gheraoed-meerut-urja-bhawan-in-protest-against-prepaid-meters.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 17 Aug 2024 18:30:17 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rashtriya-kisan-mazdoor-sangathan-gheraoed-meerut-urja-bhawan-in-protest-against-prepaid-meters.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नलकूप के बिजली बिल बिना शर्त माफ करने, नलकूप कनेक्शन वारिसों के नाम निशुल्क करने और प्रीपेड मीटर लगाने से पहले फसलों का नगद भुगतान सुनिश्चित करने की मांग को लेकर किसानों ने शनिवार को उर्जा भवन मेरठ का घेराव किया। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के आह्वान पर हुई इस प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन के राष्ट्रीय संयोजक वीएम सिंह ने किया, जिसमें संगठन के अन्य पदाधिकारी और जिला कार्यकर्ता भी शामिल रहे।</p>
<p>धरना स्थल पर पहुंची विद्युत विभाग की प्रबंध निदेशक ने किसानों को आश्वासन दिया कि अगले 6 महीने तक कोई प्रीपेड मीटर नहीं लगाया जाएगा। अन्य दो मांगों के समाधान के लिए उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री और उच्च अधिकारियों तक लिखित में उनकी मांगें पहुंचाने का वादा किया। इसके बाद, सरदार वीएम सिंह ने सभी किसानों के साथ विचार-विमर्श कर ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे क्रमिक अनशन को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया।</p>
<p>उन्होंने कहा अगर 15 सितंबर तक किसानों की मांगे पूरी नहीं हुईं, तो अगली महापंचायत बिजनौर में होगी, जिसकी तारीख जल्द घोषित की जाएगी। वी एम सिंह ने सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से बिजनौर में दस गुनी संख्या में एकत्रित होने और किसान एकता दिखाने का आह्वान किया।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66c09be2776d1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्रीपेड मीटर के विरोध में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने किया मेरठ ऊर्जा भवन का घेराव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में चुनाव से पहले किसानों के खातों में 2000 रुपये प्रति एकड़ का बोनस जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/before-haryana-elections-cm-saini-released-bonus-of-rs-2000-per-acre-to-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 16 Aug 2024 14:12:43 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/before-haryana-elections-cm-saini-released-bonus-of-rs-2000-per-acre-to-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किसानों के खातों में दो हजार रुपये प्रति एकड़ का बोनस पहुंचाने की शुरुआत कर दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों जो बारिश कम हुई, उसके कारण किसानों का खर्चा बढ़ रहा था। <span>कैबिनेट ने फैसला लिया था कि किसानों को 2000 रुपये प्रति एकड़ बोनस के रूप में देंगे। आज इस बोनस की पहली किस्त जारी की है। </span>चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने यह जानकारी दी।&nbsp;</p>
<p><strong>5.20 लाख किसानों को पहली किस्त जारी</strong></p>
<p>हरियाणा के पांच लाख 20 हजार किसानों के खातों में 525 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की गई है। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। एक से दो दिनों में किसानों के खातों में पैसा पहुंच जाएगा। जिस भी किसान का रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर होगा, उनके खातों में 2 हजार प्रति एकड़ पहुंचाने का काम सरकार करेगी।&nbsp;</p>
<p><strong>8 </strong><strong>जिलों में खुलेंगे पशु पॉलीक्लिनिक</strong><br />फिलहाल हरियाणा के 14 जिलों में पशु चिकित्सा पॉलीक्लिनिक है। राज्य के शेष आठ जिलों पंचकूला, कैथल, करनाल, हिसार, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद और यमुनानगर में भी पशुओं के लिए पॉलीक्लिनिक खोले जाएंगे। इससे पशुओं के इलाज के लिए पैथालॉजी, गायनोकॉलोजिस्ट, माइक्रो बायोलॉजी, सर्जरी, एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिलेगी।&nbsp;</p>
<p><strong>दूध विक्रेताओं का बीमा</strong><br />सीएम सैनी ने कहा कि घर-घर दूध पहुंचाने वाले दूध विक्रेताओं को दयालु योजना के तहत लाया जाएगा। सरकार दूधियों का बीमा कराएगी। प्रधानमंत्री बीमा योजना के तहत इन्हें कवर किया जाएगा। जिनकी आय 3.20 लाख हजार से कम है, उनको प्रदेश की दयालु योजना से जोड़ा जाएगा। इस योजना के तहत परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होने पर उन्हें वित्तीय सहायता दी जाएगी, क्योंकि दूधिए हर मौसम में लोगों को सेवाएं देते हैं।&nbsp;</p>
<p><span lang="HI">मुख्यमंत्री ने </span><span lang="HI">स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर </span><span>35</span><span lang="HI">&nbsp;हजार दूध उत्पादकों को अप्रैल</span><span>,&nbsp;</span><span lang="HI">मई और जून</span><span>, 2024</span><span lang="HI">&nbsp;के लिए&nbsp;</span><span>15</span><span lang="HI">&nbsp;करोड़&nbsp;</span><span>59</span><span lang="HI"> लाख रुपये की सब्सिडी जारी की थी। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री बीमा योजना के तहत घरों तक दूध सप्लाई करने वालों का बीमा प्रीमियम राज्य सरकार वहन करेगी।</span></p>
<p><strong>कांग्रेस पर तीखे सवाल</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कांग्रेस पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए जो घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं उनसे पूछना चाहता हूं कि कांग्रेस के 10 साल के शासन काल में कितनी फसलें एमएसपी पर खरीदी। 2005 से 2014 तक किसान आलू, प्याज जैसी फसल किसान सड़क पर फेंकने के लिए मजबूर होता था। दो रुपये का चेक देकर किसानों का अपमान क्यों किया? सीएम सैनी ने कहा कि किसानों को पूरा भाव देने का काम हमारी सरकार कर रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66bf1353a63c0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में चुनाव से पहले किसानों के खातों में 2000 रुपये प्रति एकड़ का बोनस जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66bf1353a63c0.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्राकृतिक खेती उत्पादों की अलग ट्रेडमार्क से मार्केटिंग करेगा हिमाचल प्रदेश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/himachal-pradesh-will-market-natural-farming-products-with-distinctive-trademark.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 14 Aug 2024 16:39:32 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/himachal-pradesh-will-market-natural-farming-products-with-distinctive-trademark.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। हिमाचल सरकार प्राकृतिक खेती के उत्पादों की अलग ट्रेडमार्क से ब्रांडिंग और मार्केटिंग करेगी। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करते हुए राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से तैयार किए उत्पादों के विशिष्ट ट्रेडमार्क के तहत ब्रांडिंग की जाए ताकि किसानों को उनकी उपज के बेहतर दाम मिल सकें। उन्होंने उत्पादों के प्रमाणीकरण के लिए व्यापक तंत्र विकसित करने और राज्य में मिट्टी की जांच के लिए विशेष लैब स्थापित करने के भी निर्देश दिए।&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बढ़ रहे कैंसर के मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए किसानों से रसायन मुक्त खेती को अपनाने का आग्रह किया।&nbsp;मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कृषि विभाग में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए विभाग में खाली पदों को तुरंत भरने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 70 फीसदी आबादी खेतीबाड़ी से जुड़ी हुई है और सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए 2024-25 के बजट में विशेष पहल की गई हैं।&nbsp;</p>
<p>कृषि विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य में प्राकृतिक खेती के विस्तार पर जोर दिया और अधिकारियों से प्राकृतिक खेती उत्पादों के प्रमाणीकरण, पैकेजिंग और विपणन के लिए एक व्यापक प्रणाली विकसित करने को कहा है। उन्होंने कहा कि मिट्टी की जांच और उपज को प्रमाणित करने के लिए राज्य में एक विशेष प्रयोगशाला भी स्थापित की जाएगी।&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में कृषि विभाग और जल शक्ति विभाग, जाइका व शिवा परियोजनाओं के सहयोग से एकीकृत सिंचाई योजनाओं को क्रियान्वित करेगा, ताकि किसानों को अधिकतम लाभ मिले और इन योजनाओं को व्यावहारिक बनाया जा सके। उन्होंने संबंधित जिलों में विशिष्ट फसल उत्पादन आवश्यकताओं के अनुसार कोल्ड स्टोर स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। जाइका के तहत गेहूं और मक्का के भंडारण के लिए साइलो स्थापित किए जाएंगे।&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>गाय-भैंस की खरीद पर बढ़ेगा अनुदान&nbsp;</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। भैंस और गाय के दूध का खरीद मूल्य बढ़ाकर 55 और 45 रुपये किया गया है। उन्होंने कहा कि पशुपालन और प्राकृतिक खेती दोनों ही संबद्ध गतिविधियां हैं, इसलिए राज्य सरकार प्राकृतिक खेती क्लस्टरों में देशी गायों और भैंसों की खरीद के लिए किसानों को वित्तीय सहायता बढ़ाने पर भी विचार कर रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>एकीकृत कृषि पर जोर</strong>&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य की जलवायु डेयरी क्षेत्र के लिए सबसे अनुकूल है और इसका लाभ उठाकर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है, जिससे उनकी आर्थिकी भी मजबूत होगी। उन्होंने प्राकृतिक खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन को एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जाइका और मिल्कफेड के कामकाज की भी समीक्षा की और कार्य में डिजिटल पद्धति अपनाने के निर्देश दिए।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>समीक्षा बैठक में प्रदेश के&nbsp;<span>कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, सचिव कृषि सी. पालरासू, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, निदेशक कृषि कुमुद सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्राकृतिक खेती उत्पादों की अलग ट्रेडमार्क से मार्केटिंग करेगा हिमाचल प्रदेश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[क्यों किसानों के लिए पशुपालन बोझ बनता जा रहा है?]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/why-is-animal-husbandry-becoming-a-burden-for-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 12 Aug 2024 17:17:12 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/why-is-animal-husbandry-becoming-a-burden-for-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div dir="ltr">
<div class="gmail_signature" dir="ltr" data-smartmail="gmail_signature">
<div dir="ltr">
<div>
<blockquote type="cite">
<div dir="ltr">
<div class="gmail_signature" dir="ltr" data-smartmail="gmail_signature">
<div dir="ltr">
<div><span><strong>- लूणकरणसर, राजस्थान</strong></span></div>
</div>
</div>
</div>
</blockquote>
</div>
<div><span>हमारे देश में किसानों के लिए कृषि कार्य जितना लाभकारी है उतना ही पशुपालन भी उनकी आय का एक बड़ा माध्यम है। देश के लगभग सभी किसान कहीं न कहीं खेती के साथ साथ पशुपालन भी जरूर करते हैं। इससे जहां उन्हें कृषि संबंधी कार्यों में सहायता मिलती है तो वहीं वह उनके अतिरिक्त आय का स्रोत भी होता है। देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में पशुपालन भी एक प्रमुख साधन है। लेकिन हाल के कुछ वर्षों में राजस्थान के कई ग्रामीण इलाकों में पशुपालन किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित होता जा रहा है। कभी बढ़ती महंगाई तो कभी मवेशियों में फैलती जानलेवा बीमारी किसानों को पशुपालन से दूर करती जा रही है। कई किसान परिवार अब अपने मवेशियों को बोझ समझ कर पशुपालन का काम छोड़ने पर विचार करने लगे हैं। जो न केवल किसानों के लिए बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकता है।</span></div>
<div><span>&nbsp;</span></div>
<div><span>राज्य के बीकानेर जिला स्थित लूणकरणसर ब्लॉक का&nbsp;करणीसर&nbsp;गांव&nbsp;भी इसका एक उदाहरण है। जहां किसानों के लिए मवेशी पालना आय का अतिरिक्त स्रोत नहीं बल्कि घाटे का कारण बनता जा रहा है।&nbsp;</span><span>ब्लॉक मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर इस गांव में 543 परिवार हैं। इनमें लगभग सभी परिवार खेती किसानी के साथ साथ पशुपालन का काम भी करते हैं। गांव में प्रवेश करते ही जगह-जगह पालतू मवेशी खुले में घूमते नजर आ जाएंगे। इनमें सबसे अधिक संख्या गायों की है। इस संबंध में 35 वर्षीय किसान लालचंद बताते हैं कि पहले की अपेक्षा अब मवेशी पालना कठिन हो गया है। जितनी उससे आमदनी नहीं होती है उससे अधिक उनके चारे में खर्च हो जाता है। वह बताते हैं कि वर्षों से उनके परिवार की परंपरा रही है कि कृषि के साथ साथ गाय भी पाली जाती हैं। इस समय उनके पास भी 6 गायें हैं। लेकिन अब उनके लिए इस परंपरा को जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि इन गायों से जितना दूध नहीं मिलता है उससे कहीं अधिक उनके लिए चारे की व्यवस्था करनी पड़ती है। लगातार बढ़ती महंगाई भी उनके लिए बहुत बड़ी समस्या है। लालचंद बताते हैं कि फसल कटाई के समय मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध हो जाता है, जो अगले कुछ महीनों के लिए काफी होता है। लेकिन उसके बाद चारा खरीदना पड़ता है जो पहले की अपेक्षा महंगा मिलता है।&nbsp;</span><span><br /></span></div>
<div><span>&nbsp;</span></div>
<div><span>वहीं एक अन्य किसान रविदास स्वामी बताते हैं कि कृषि कार्य के साथ-साथ उनके पास 10 गायें भी हैं। जिनके लिए अब चारे की व्यवस्था बहुत मुश्किल से होती है। वह बताते हैं कि करणीसर गांव में पीने के पानी की बहुत बड़ी समस्या है। जो पानी बावड़ी या अन्य स्रोतों से उपलब्ध होता है वह बहुत खारा होता है। जिसे इंसान ही नहीं मवेशी भी पीकर बीमार हो जाते हैं। वह कहते हैं कि गांव में कोई भी आर्थिक रूप से इतना संपन्न नहीं है कि अकेले अपने परिवार के लिए पीने के पानी का टैंकर मंगवा सके। इसलिए सभी गांव वाले आपस में पैसा इकठ्ठा करके हर हफ्ते पानी का टैंकर मंगाते हैं। ऐसे में भला मवेशियों के लिए पीने का अच्छा पानी कैसे उपलब्ध करा सकते हैं। मजबूरी में उन्हें खारा पानी पिलाते हैं जिसे पीकर मवेशी अक्सर बीमार हो जाते हैं और कई बार उनकी मौत भी हो जाती है। वह बताते हैं कि करणीसर गांव या लूणकरणसर ब्लॉक में भी जानवरों का कोई अस्पताल नहीं है। ऐसे में उन्हें 200 किमी दूर बीकानेर में जानवरों के सरकारी अस्पताल में ले जाना पड़ता है जो बहुत खर्चीला साबित होता है।&nbsp;</span></div>
<div>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66b9f6c66c7d5.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
</div>
<div><span>&nbsp;</span></div>
<div><span>एक अन्य ग्रामीण अजीत कहते हैं कि कृषि कार्यों के अतिरिक्त उनके पास करीब 40 गायें थीं। लेकिन धीरे-धीरे गायें बीमार होकर मरती गईं और अब उनके पास केवल 8 गायें रह गई हैं। उनके लिए भी चारा और अन्य व्यवस्था करना बहुत मुश्किल होता जा रहा है। अब वह पशुपालन का काम छोड़ने की सोच रहे हैं। गांव में किसानों के लिए पशुपालन कितना मुश्किल होता जा रहा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने बची सभी आठ गायों को बेचना चाहा, लेकिन गांव में किसी ने उन्हें खरीदने में रूचि नहीं दिखाई। वह बताते हैं कि बहुत से किसानों ने अब पशुपालन का काम छोड़कर केवल कृषि कार्यों पर अपना ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि करणीसर गांव में बहुत अधिक पशु खुले में घूमते नजर आ जाएंगे, जिनके मालिकों ने उन्हें खुला छोड़ दिया है। अजीत कहते हैं कि सरकार की योजनाओं से ज्यादातर पशुपालक अनभिज्ञ हैं। इसलिए वह सरकारी योजनाओं का योजना का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं।&nbsp; &nbsp;</span></div>
<div><span>&nbsp;</span></div>
<div><span>हालांकि, राज्य सरकार की ओर से पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए काफी प्रयास किये जा रहे हैं। पिछले माह जुलाई में राज्य का पूर्णकालिक <a href="https://laptopyojana.in/mukhyamantri-mangla-pashu-bima-yojana-rajasthan/#:~:text=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%89%E0%A4%AA%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%20%E0%A4%B5%20%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4,%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%8F%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%20%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A5%A4" rel="noopener" target="_blank" data-saferedirecturl="https://www.google.com/url?q=https://laptopyojana.in/mukhyamantri-mangla-pashu-bima-yojana-rajasthan/%23:~:text%3D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%2520%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2580%2520%25E0%25A4%2589%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%2596%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%2582%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2580%2520%25E0%25A4%25B5%2520%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25A4,%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%25AA%25E0%25A4%258F%2520%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BE%2520%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%2580%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BE%2520%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%2520%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%258F%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%25BE%25E0%25A5%25A4&amp;source=gmail&amp;ust=1723549294422000&amp;usg=AOvVaw2I06QW-Dj77QXAoNY7M8J9">बजट</a> प्रस्तुत करते हुए राजस्थान सरकार की ओर से 'मुख्यमंत्री मंगला पशु योजना' शुरू करने की घोषणा की गई है। जिसके तहत दुधारू गाय-भैंसों का बीमा कराया जाएगा। वहीं ऊंटों के लिए एक लाख रुपए का बीमा होगा। इस योजना के तहत भेड़-बकरियों के भी बीमा की बात कही गई है। साथ ही ऊंट संरक्षण और विकास मिशन पर भी जोर दिया गया है। इस योजना का लाभ राज्य के सभी छोटे व सीमांत किसानों व पशुपालकों को दिया जाएगा। पशुपालकों की सुविधा के लिए चरणबद्ध तरीके से राज्य के सभी जिलों में पशु मेले का आयोजन करने की घोषणा की गई है। इस योजना के लिए 250 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। योजना के आरंभ में राज्य के 21 लाख पशुओं का बीमा किया जाएगा। राजस्थान विधानसभा ने पशुपालन एवं मत्स्य विभाग के लिए 1558.15 करोड़ रुपये की अनुदान मांगे भी पारित की हैं। यह राज्य में कृषि के साथ साथ पशुपालन को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगा।</span></div>
<div><span>&nbsp;</span></div>
<div><span>इस संबंध में 28 वर्षीय महिला पशुपालक पूनम कहती हैं कि सरकार द्वारा बनाई गई योजना तो ठीक है। लेकिन योजना धरातल पर किस तरह लागू होगी वह देखना होगा। कई बार पशुपालकों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारियां ही नहीं होती है। जिससे वह इनका लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं और पशुपालन को ही छोड़ देते हैं। वह कहती हैं कि यदि सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में इन योजनाओं का प्रचार किया जाए तो ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिल सकता है। इसमें पंचायतें बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। पंचायत की बैठकों में इन योजनाओं पर न केवल चर्चा की जानी चाहिए बल्कि इसके लिए किसानों को प्रोत्साहित भी किया जाना चाहिए ताकि पशुपालन उनके लिए बोझ नहीं बल्कि एक बार फिर से आमदनी का माध्यम बन सके। <em>(चरखा फीचर)</em></span></div>
</div>
</div>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ क्यों किसानों के लिए पशुपालन बोझ बनता जा रहा है? ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में सेब किसानों का संकट, मुआवजे से मुकर गई बीमा कंपनी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/crisis-of-apple-farmers-in-uttarakhand-insurance-company-refused-to-take-premium-and-compensation..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 10 Aug 2024 18:48:20 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/crisis-of-apple-farmers-in-uttarakhand-insurance-company-refused-to-take-premium-and-compensation..html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em>- देहरादून से <strong>संजीव</strong> की रिपोर्ट</em>&nbsp;</p>
<p>उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले के सेब उत्पादक किसानों के लिए अगस्त का महीना सामान्य तौर पर अपनी सेब की फसल मंडी तक पहुंचाने का समय होता है। लेकिन इस बार इसके बजाय यहां के सेब उत्पादक किसान, प्रदेश के उद्यान मंत्री से लेकर फसल बीमा कंपनी के चक्कर काट रहे हैं। बीमा कंपनी ने दिसंबर व जनवरी महीने में इन किसानों की सेब की फसल का बीमा किया था, लेकिन अब आठ महीने के बाद किसानों का बीमा तकनीकी आधार पर निरस्त किया जा रहा है। जबकि इस बीच अप्रैल माह में हुई ओलावृष्टि से किसान अपनी लाखों की फसल गंवा चुके हैं। किसानों का आरोप है कि फसल बर्बाद होने के बाद बीमा भुगतान से बचने के लिए कंपनी बीमा पॉलिसी को निरस्त कर रही है जबकि बीमा कंपनी इसके लिए उत्तराखंड के जटिल भू-बंदोबस्त को जिम्मेदार ठहरा रही है।&nbsp;</p>
<p>हिमाचल प्रदेश से सटे उत्तरकाशी जिले में मोरी, पुरोला, नौगांव ब्लॉक को उत्तराखंड के सेब उत्पादक क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। हिमाचल जैसी जलवायु और उद्यान संस्कृति होने के कारण यहां किसान सेब की खेती करते हैं। किसान अपनी उपज को सुरक्षित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से चल रही फसल बीमा योजना के तहत बीमा करवाते हैं। उत्तरकाशी सहित उत्तराखंड के दस जिलों में इस साल फसल बीमा के लिए राज्य सरकार ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी से अनुबंध किया हुआ है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66b767c710d46.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>इस साल ओलावृष्टि से सेब के बगीचों में हुआ नुकसान&nbsp;</em></p>
<p><strong>क्यों खारिज हुआ बीमा?</strong></p>
<p>नौगांव ब्लॉक में तियां गांव के प्रगतिशील किसान <strong>संजय थपलियाल</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि क्षेत्र के किसानों ने दिसंबर महीने में सेब की फसल का बीमा करवाते हुए&nbsp; कंपनी को पूरा प्रीमियम भी दे दिया था। लेकिन अब अगस्त महीने में कंपनी की तरफ से बहुत से किसानों की पॉलिसी या तो निरस्त कर दी गई या फिर उसमें 90 प्रतिशत तक कटौती करते हुए, शेष प्रीमियम वापस कर दिया है। थपलियाल कहते हैं कि इस बीच मार्च-अप्रैल में हुई ओलावृष्टि से किसानों की फसल को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। अब किसान फसल बीमा से भरपाई की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन कंपनी ने सात से आठ महीने बाद तकनीकी आधार पर बीमा खारिज कर दिया। किसानों को इस कारण तीन से चार लाख रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।</p>
<p>उद्यान स्वामियों ने देहरादून में प्रदेश के कृषि व उद्यान मंत्री गणेश जोशी से मुलाकात कर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। जिसके बाद जोशी ने सभी पक्षों की बैठक की और किसानों का पक्ष जायज करार देते हुए बीमा कंपनी को मुआवजा देने को कहा है। इस बारे में उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री को भी पत्र लिखा है।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>बिखरी जोत से जटिल हुई समस्या</strong></p>
<p>इस बारे में <strong>एबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी </strong>के स्टेट हेड <strong>विपुल डिमरी</strong> ने बीमा निरस्त किए जाने या बीमा राशि में कटौती किए जाने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि ऐसा मुख्य तौर पर किसानों के स्तर से जमीन के कागज पूरे नहीं लगाए जाने के कारण हुआ है। डिमरी ने बताया कि पहाड़ में किसानों की जमीनें अलग-अलग जगह बिखरी हुई हैं। फसल बीमा योजना के तहत कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) से आवेदन के समय, यह लापरवाही बरती गई कि किसानों के सभी खसरे नंबर इसमें दर्ज नहीं किए गए। इस कारण सत्यापन के समय ज्यादातर किसानों की जमीन कम पाई गई। उदाहरण के लिए, यदि किसी किसान के पास पचास नाली जमीन है, लेकिन बीमा के लिए आवेदन के समय पांच नाली जमीन के ही दस्तावेज अपलोड किए गए। इस कारण उक्त किसान को प्रति नाली छह पेड़ के हिसाब से सिर्फ 30 पेड़ों पर ही बीमा कवर दिया गया। जबकि शेष बीमा प्रीमियम को लौटा दिया गया है।</p>
<p>उत्तराखंड में चकबंदी न होने और किसानों की जमीनें संयुक्त खातेदारी में होने की वजह से भी इस तरह की समस्याएं आती हैं। लेकिन सवाल यह है कि बीमा कंपनी को यह समस्या फसल बीमा का प्रीमियम लेते समय ध्यान में क्यों नहीं आई। जब खराब फसल का मुआवजा देने की बारी आई है, तब किसानों को बीमा क्यों खारिज किया जा रहा है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66b767e99e3ee.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>सेब किसानों की समस्या के बारे में अधिकारियों के साथ बैठक करते उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी</em></p>
<p><strong></strong></p>
<p><strong>इंटरनेट नेटवर्क की भी समस्या </strong></p>
<p>किसान संजय थपलियाल बताते हैं कि सीएससी के जरिए 500 एमबी की फाइल ही अपलोड हो पा रही हैं। इस कारण बिखरी जोतों के सभी पेपर अपलोड ही नहीं हो पाए। थपलियाल सवाल उठाते हैं कि अगर जमीन के कागजात की समस्या थी तो बीमा कंपनी ने बीते तीन-चार साल से इस पर आपत्ति क्यों नहीं जताई। यह समस्या प्रीमियम जमा कराने के समय ही बतानी चाहिए थी। थपलियाल के मुताबिक, बीमा कंपनी सरकार द्वारा जारी उद्यान कार्ड के आधार पर खराब फसलों का मुआवजा दे सकती है। फिर बीमा खारिज क्यों किया जा रहा है?</p>
<p><strong>तत्काल बीमा राशि जारी करने के निर्देश </strong></p>
<p>उत्तराखंड के कृषि मंत्री <strong>गणेश जोशी </strong>ने विभागीय अधिकारियों और बीमा कंपनी को तत्काल बीमा राशि किसानों को जारी कराने के निर्देश दिए हैं। इस बाबत कृषि मंत्री ने कृषि महानिदेशक, उद्यान निदेशक तथा एसबीआई बीमा कंपनी के स्टेट हेड के साथ बैठक की। कृषि मंत्री ने महानिदेशक को तत्काल अपने स्तर से कार्यवाही करने और ब्लॉक, तहसील स्तर पर बीमा कंपनी द्वारा अधिकारी व कर्मचारी की तैनाती करवाने को कहा है। उनका कहना है कि किसानों ने अतिवृष्टि, सूखा या ओलावृष्टि से फसलों की सुरक्षा के लिए बीमा कराया है तो उन्हें इसका मुआवजा मिलना ही चाहिए। इस बारे में उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री को भी पत्र लिखा है और केंद्र सरकार से सरकारी पोर्टल को पुनः खोलने का अनुरोध किया है ताकि सेब की फसल का बीमा पुनः हो सके।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66b767b92c928.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में सेब किसानों का संकट, मुआवजे से मुकर गई बीमा कंपनी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66b767b92c928.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हिमाचल में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, गेहूं 40 रुपये और मक्का 30 रुपये प्रति किलो पर खरीदेगी सरकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/himachal-government-will-buy-naturally-grown-wheat-at-rs-40-and-maize-at-rs-30-per-kg.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 10 Aug 2024 11:40:26 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/himachal-government-will-buy-naturally-grown-wheat-at-rs-40-and-maize-at-rs-30-per-kg.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए किसानों से 40 रुपये प्रति किलोग्राम में गेहूं और 30 रुपये प्रति किलोग्राम में मक्का की खरीद की जाएगी। शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना के लिए सरकार की ओर से शुरू की गई<strong> 'हिम-उन्नति योजान'</strong> का अनावरण करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की हमारी प्रतिबद्धता के हिस्से के रूप में, राज्य सरकार <strong>प्रति परिवार 20 क्विंटल</strong> प्राकृतिक रूप से उगाए गए अनाज की खरीद करेगी। जिसमें <strong>गेहूं के लिए 40 रुपये प्रति किलोग्राम</strong> और <strong>मक्का के लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम</strong> की दर से खरीद होगी।&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य राज्य में रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देना और कृषि उद्यमिता को मजबूत करना है। इसके लिए 150 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिससे लगभग 1.92 लाख किसानों को लाभ होगा, जो पहले से ही 32,149 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर रसायन मुक्त खेती कर रहे हैं। योजना के तहत छोटे किसानों को एकीकृत कर थोक उत्पादन को सक्षम किया जाएगा, जिससे विपणन योग्य अधिशेष सुनिश्चित होगा।</p>
<p>सुक्खू ने कहा कि यह योजना विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों, महिला किसानों, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), और गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों को लाभान्वित करेगी। इसके साथ ही, 2,600 केंद्रित कृषि समूहों के निर्माण के माध्यम से लगभग 50 हजार किसानों के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इस योजना के माध्यम से सब्जियों और अनाजों की उत्पादकता में 15-20 प्रतिशत तक की वृद्धि होने का भी अनुमान है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हिमाचल में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, गेहूं 40 रुपये और मक्का 30 रुपये प्रति किलो पर खरीदेगी सरकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शिमला में एसजेवीएन विद्युत परियोजनाओं से प्रभावित किसानों ने सरकार से की रोजगार की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-affected-by-sjvn-power-projects-in-shimla-demanded-employment-from-the-government-2802.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 10 Aug 2024 10:36:31 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-affected-by-sjvn-power-projects-in-shimla-demanded-employment-from-the-government-2802.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एसजेवीएन लिमिटेड की लूहरी और सुन्नी विद्युत परियोजनाओं से प्रभावित कई पंचायतों के किसानों ने राज्य सरकार से अपनी जमीन गंवाने वालों को रोजगार देने की मांग की है। सीपीआईएम नेता और ठियोग से पूर्व विधायक राकेश सिंघा के नेतृत्व में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात की और अपनी विभिन्न मांगों से अवगत कराया।&nbsp;</p>
<p>प्रतिनिधिमंडल ने किसानों को मुआवजा और जलविद्युत परियोजनाओं में अपनी जमीन खोने वालों के लिए रोजगार&nbsp;की मांग उठाई। मुख्यमंत्री ने उनकी चिंताओं के समाधान का आश्वासन दिया और कहा कि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। उन्होंने पिछली भाजपा सरकार के दौरान राज्य के लोगों के हितों की अनदेखी की ओर इशारा करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार राज्य के वाजिब अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी।</p>
<p>210 मेगावाट लूहरी जलविद्युत परियोजना चरण-I, 66 मेगावाट धौलासिद्ध विद्युत परियोजना और 382 मेगावाट सुन्नी विद्युत परियोजना पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को रोजगार&nbsp;और स्थानीय क्षेत्र विकास प्राधिकरण (लाडा) के फंड नहीं मिले हैं और पशुपालन पर पड़ने वाले प्रभाव पर विचार नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि एसजेवीएनएल सरकार द्वारा मांगे गए रॉयल्टी प्रतिशत पर सहमत नहीं होता है, तो राज्य इन परियोजनाओं का अधिग्रहण कर लेगा।&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस मुद्दे को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ शिमला में एसजेवीएन विद्युत परियोजनाओं से प्रभावित किसानों ने सरकार से की रोजगार की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    <item>
        <title><![CDATA[संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भाकियू ने निकाला ट्रैक्टर मार्च]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/bharatiya-kisan-union-took-out-a-tractor-tiranga-march-on-the-call-of-the-samyukta-kisan-morcha.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 09 Aug 2024 17:24:34 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/bharatiya-kisan-union-took-out-a-tractor-tiranga-march-on-the-call-of-the-samyukta-kisan-morcha.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में ट्रैक्टर तिरंगा मार्च का आयोजन किया। ट्रैक्टर मार्च का नेतृत्व भाकियू&nbsp;के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किया, जिसमें ग्रेटर नोएडा से लेकर सहारनपुर तक और प्रदेश के कई अन्य जिलों में किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकाला। हजारों किसानों ने इस मार्च में भाग लिया और जिला मुख्यालयों पर अधिकारियों को अपनी मांगों के ज्ञापन सौंपे।</p>
<p>मार्च के दौरान, भारी पुलिस बल तैनात था और कई स्थानों पर पुलिस ने किसानों को रोकने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की की घटनाएं भी हुईं। मुजफ्फरनगर में राकेश टिकैत ने भी ट्रैक्टर मार्च में भाग लिया और डीएम को किसानों की मांगों का ज्ञापन सौंपा।</p>
<p>राकेश टिकैत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि किसानों ने आज अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है। 13 अगस्त तक देश में जगह-जगह किसान ट्रैक्टर मार्च का आयोजन करेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को लेकर लगातार संघर्ष जारी है। सरकार जल्द किसानों की मांगों को पूरा करे। उन्होंने सरकार से अगस्त को 'क्रांति दिवस' के रूप में घोषित किए जाने की मांग भी उठाई।&nbsp;</p>
<p>टिकैत ने एनजीटी के 10 साल पुराने ट्रैक्टरों पर प्रतिबंध संबंधी नियमों को लेकर भी निराश जताई। उन्होंने कहा कि आज के मार्च में ज्यादातर 10 से 15 साल पुराने ट्रैक्टरों का उपयोग किया गया क्योंकि किसान एनजीटी के नियमों का विरोध कर रहे हैं, जो केवल कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाए गए हैं।&nbsp;</p>
<p>टिकैत ने किसानों से एकजुटता का आह्वान किया और कहा कि सरकारें उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कर रही हैं, जबकि अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं करती, तो किसान आंदोलन को और तेज करेंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भाकियू ने निकाला ट्रैक्टर मार्च ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में 1 अक्टूबर से शुरू होगी धान की खरीद, समय सारणी जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/paddy-procurement-will-begin-from-october-1-in-uttar-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 09 Aug 2024 13:06:32 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/paddy-procurement-will-begin-from-october-1-in-uttar-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में <strong>धान की खरीद</strong> प्रक्रिया <strong>1 अक्टूबर</strong> से शुरू होगी। राज्य खाद्य एवं रसद विभाग ने इस संबंध में समय सारणी जारी कर दी है। समय सारणी के अनुसार, प्रदेश के <strong>पश्चिमी जिलों में 1 अक्टूबर</strong> से और <strong>पूर्वी जिलों में 1 नवंबर</strong> से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान की खरीद शुरू होगी। हालांकि, प्रदेश में धान की कितनी खरीद की जाएगी, इस संबंध में अभी तक कोई निश्चित लक्ष्य तय नहीं किया गया है।</p>
<p>खाद्य एवं रसद विभाग ने धान खरीद की तैयारी के निर्देश जारी किए हैं। पश्चिमी यूपी के जिलों में धान की गुणवत्ता परीक्षण के लिए उपकरणों की व्यवस्था 15 सितंबर तक पूरी की जाएगी, जबकि पूर्वी यूपी के जिलों में यह काम 15 अक्टूबर तक किया जाएगा। इसके साथ ही, ठेकेदारों (हैंडलिंग और परिवहन) की नियुक्ति का कार्य पश्चिमी यूपी के जिलों में 25 अगस्त और पूर्वी यूपी के जिलों में 31 अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा। यह कार्य ई-टेंडर के माध्यम से किया जाएगा।</p>
<p>राज्य के खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति मंत्री, <strong>सतीश शर्मा</strong> ने धान खरीद की तैयारियों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए <strong>धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2300 रुपये प्रति क्विंटल</strong> तय किया गया है। यह समर्थन मूल्य कॉमन धान के लिए है, जबकि <strong>ए-ग्रेड धान के लिए 2320 रुपये प्रति क्विंटल</strong> का समर्थन मूल्य तय किया गया है।</p>
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<div class="result-streaming markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p>एमएसपी पर धान बेचने के लिए किसानों को खाद्य रसद विभाग की वेबसाइट <strong><a rel="noreferrer" target="_new" href="https://fcs.up.gov.in/">https://fcs.up.gov.in/</a></strong> पर ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा। अधिक जानकारी के लिए किसान टोल फ्री नंबर <strong>1800-1800-150</strong> पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, किसान <strong>'यूपी किसान मित्र'</strong> मोबाइल ऐप के माध्यम से भी पंजीकरण कर सकते हैं।</p>
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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में 1 अक्टूबर से शुरू होगी धान की खरीद, समय सारणी जारी ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में सभी खरीफ फसलों पर 2 हजार रुपये प्रति एकड़ बोनस का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-government-will-give-2000-rupees-per-acre-bonus-on-all-kharif-crops-cm-naib-saini-announced.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 08 Aug 2024 16:18:19 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-government-will-give-2000-rupees-per-acre-bonus-on-all-kharif-crops-cm-naib-saini-announced.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में बारिश की कमी को देखते हुए सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने<strong> चालू खरीफ सीजन</strong> में सभी फसलों के ऊपर बोनस देने का ऐलान किया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री नायब सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया।</p>
<p><strong>2 हजार रुपये प्रति एकड़ बोनस मिलेगा</strong></p>
<p>कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि राज्य में पिछले साल के मुकाबले इस साल कम बारिश हुई है, जिससे फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि किसानों को फसल उगाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। किसानों की इन्हीं दिक्कतों को देखते हुए राज्य सरकार ने चालू खरीफ सीजन में <strong>सभी फसलों के ऊपर 2 हजार रुपये प्रति एकड़ बोनस</strong> देने का निर्णय लिया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">इस सीजन की सभी चालू खरीफ फसलों पर प्रति एकड़ ₹2,000 बोनस देने को कैबिनेट ने दी मंज़ूरी<br /><br />इस बोनस को सीधे अपने बैंक खाते में पाने के लिए प्रदेश के किसान भाई 15 अगस्त, 2024 तक अपनी फसलों का ब्यौरा 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' पोर्टल (<a href="https://t.co/LFwfFkvpr0">https://t.co/LFwfFkvpr0</a>) पर दर्ज करवा दें <a href="https://t.co/CPZlOk82bM">pic.twitter.com/CPZlOk82bM</a></p>
&mdash; CMO Haryana (@cmohry) <a href="https://twitter.com/cmohry/status/1821513456044200017?ref_src=twsrc%5Etfw">August 8, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p><strong>छोटे किसानों को भी मिलेगा लाभ&nbsp;</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बोनस सभी फसलों पर लागू होगा। <strong>फल, फूल और सब्जियां</strong> उगाने वाले किसानों को भी यह लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि <span><strong>एक एकड़ या उससे कम जमीन वाले किसानों</strong> को भी इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि मैं भी एक किसान का बेटा हूं और किसानों के दर्द को समझता हूं।</span></p>
<p>मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि प्रदेश के सभी किसान भाई <strong>15 अगस्त, 2024</strong> तक <strong>'मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल'</strong> पर अपना पंजीकरण करा लें, ताकि उन्हें 2 हजार रुपये प्रति एकड़ का लाभ मिले सके।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66b4afb781d3a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में सभी खरीफ फसलों पर 2 हजार रुपये प्रति एकड़ बोनस का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66b4afb781d3a.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[झारखंड में किसानों के कर्ज माफी की सीमा बढ़ी, अब 2 लाख रुपये तक का कर्ज होगा माफ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/limit-of-loan-waiver-for-farmers-in-jharkhand-has-been-increased-now-loans-up-to-rs-2-lakh-will-be-waived.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 08 Aug 2024 11:04:36 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/limit-of-loan-waiver-for-farmers-in-jharkhand-has-been-increased-now-loans-up-to-rs-2-lakh-will-be-waived.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>झारखंड सरकार ने किसानों के कर्ज माफी की सीमा बढ़ाकर<strong> 2 लाख रुपये</strong> करने का निर्णय लिया है। बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 'कृषि ऋण माफी योजना' का दायरा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। पहले यह सीमा 50,000 रुपये थी, जिसे अब 2 लाख रुपये तक कर दिया गया है।</p>
<p>कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने बताया कि इस नई सीमा का लाभ लगभग 1.91 लाख किसानों को मिलेगा। इसके लिए अंतिम तिथि 31 मार्च, 2020 निर्धारित की गई है। राज्य सरकार ने पहले 2021-22 में 50,000 रुपये तक के फसल ऋण माफ करने की घोषणा की थी और अब तक 4.73 लाख से अधिक किसानों के ऋण माफ किए जा चुके हैं, जिसमें बैंकों को 1,900 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई है।</p>
<p><strong>ग्राम प्रधानों का मासिक मानदेय होगा दोगुना</strong></p>
<p>कैबिनेट ने कुल 37 प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिनमें झारखंड कार्यपालिका नियमावली 2000 में संशोधन कर केंद्रीय एजेंसियों से संबंधित मामलों को कैबिनेट सचिवालय एवं सतर्कता विभाग को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव भी शामिल था। आदिवासी गांवों के ग्राम प्रधानों के मासिक मानदेय को दोगुना करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। अब मानकी-मुंडा का मानदेय 3,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रति माह और ग्राम प्रधानों का 2,000 रुपये से बढ़ाकर 4,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। डाकुआ का मानदेय 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये प्रति माह किया गया है।</p>
<p>राज्य संचालित एयर एंबुलेंस सेवा के किराए में भी 50 फीसदी तक की कटौती की गई है। रांची से दिल्ली का मौजूदा एकतरफा किराया 5 लाख रुपये से घटाकर 3.10 लाख रुपये कर दिया गया है। वंदना दादेल ने कहा, "लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किराये में कटौती की गई।"</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">झारखंड की महागठबंधन सरकार ने आज बड़ा ऐतिहासिक फ़ैसला लिया है। <br /><br />झारखंड में किसानों का ₹2 लाख तक का कर्ज माफ किया जाएगा। कांग्रेस ने अपने मैनिफेस्टो में भी वादा किया था कि हमारी सरकार कर्ज में डूबे किसानों को आर्थिक रूप से सहायता करने के लिए किसानों के ऋण माफ़ करेगी। <br /><br />श्री&hellip; <a href="https://t.co/yoDMDtZyq4">pic.twitter.com/yoDMDtZyq4</a></p>
&mdash; Dipika Pandey Singh (@DipikaPS) <a href="https://twitter.com/DipikaPS/status/1821190410242265256?ref_src=twsrc%5Etfw">August 7, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p><strong>कृषि के लिए बनेगा सकारात्मक माहौल&nbsp;</strong></p>
<p>बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पत्रकारों से बातचीत में 'कृषि ऋण की सीमा' बढ़ाने के निर्णय को राज्य के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में कृषि के लिए सकारात्मक माहौल बनेगा और किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। पारंपरिक ग्राम प्रधानों के सम्मान राशि बढ़ाने के निर्णय को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया, जिससे राज्य पर 85.59 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ झारखंड में किसानों के कर्ज माफी की सीमा बढ़ी, अब 2 लाख रुपये तक का कर्ज होगा माफ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हिमाचल में गढ़ के हिसाब से नहीं बिका सेब तो करेंगे आंदोलन, संयुक्त किसान मंच की चेतावनी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/himachal-samyukt-kisan-manch-raised-the-demand-of-selling-apples-according-to-garh-in-the-state.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 06 Aug 2024 19:46:46 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/himachal-samyukt-kisan-manch-raised-the-demand-of-selling-apples-according-to-garh-in-the-state.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश संयुक्त किसान मंच ने प्रदेश की मंडियों में दर के बजाय गढ़ के हिसाब से सेब बेचने की मांग उठाई है। संयुक्त किसान मंच का कहना है कि अगर जल्द यह व्यवस्था लागू नहीं की गई तो बागवान आंदोलन करेंगे। मंगलवार को शिमला जिले के रोहडू में सेब सीजन को लेकर हिमाचल संयुक्त किसान मंच की बैठक हुई। जिसमें बागवानों को पेश आ रही दिक्कतों पर चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि बागवान दर के बजाय गढ़ के हिसाब से अपना सेब बेचेंगे। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड (एपीएमसी) और प्रदेश सरकार पर दबाव डाला जाएगा।</p>
<p><strong>छोटे सेब के दामों में की जा रही कटौती</strong></p>
<p>बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए हिमाचल प्रदेश संयुक्त किसान मंच के प्रदेश संयोजक <strong>हरीश चौहान</strong> ने कहा कि प्रदेश में सालों से गढ़ के हिसाब से सेब बिकता आया है। लेकिन पहली बार दर-आधारित व्यवस्था शुरू की गई है, जिससे बागवान खुश नहीं है। उन्होंने कहा कि मंडियों में छोटे सेब के दामों पर दर लगाकर 30 प्रतिशत की कटौती की जा रही है। जिससे बागवानों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि छोटे सेब का वजन, रंग और पोषण मूल्य बड़े सेब के बराबर ही होता है। इसके बावजूद छोटे सेबों के दाम में कटौती की जा रही है। उन्होंने कहा कि सेब गढ़ के हिसाब से ही बिकना चाहिए। बागवान सालों से इसी व्यवस्था से सेब बेचते आए हैं और प्रदेश के बाहर की मंडियों में भी इसी व्यवस्था के तहत सेब बेचा जाता है।&nbsp;</p>
<p><strong>माल भाड़े का समाधान निकाले सरकार</strong></p>
<p>चौहान ने सेब के परिवहन माल भाड़े को बॉक्स के बजाय वजन के हिसाब से करने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले साल इसका आकलन किया था, लेकिन यह व्यवस्था अभी तक लागू नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि हर साल माला भाड़ा तय करने से पहले बागवानों, ट्रक ऑपरेटरों और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक होती है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया। प्रशासन ने अपने स्तर पर दाम तय किए हैं, जो बागवानों के लिए ज्यादा हैं। साथ ही, विभिन्न उपमंडलों में दाम अलग-अलग निर्धारित किए गए हैं, जिससे बागवानों को असमंजस का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिससे ट्रक ऑपरेटरों को समस्याएं न हों और बागवानों को भी नुकसान न उठाना पड़े।</p>
<p><strong> 9 अगस्त को एपीएमसी को सौंपेंगे ज्ञापन</strong></p>
<p>हरीश चौहान ने कहा कि संयुक्त किसान मंच का एक प्रतिनिधिमंडल 9 अगस्त को एपीएमसी शिमला-किन्नौर और प्रशासनिक अधिकारियों को बागवानों की मांगों का ज्ञापन सौंपेगा। अधिकारियों को इन मांगों पर विचार करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया जाएगा। यदि इस अवधि में मांगें पूरी नहीं की गईं, तो बागवान सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हिमाचल में गढ़ के हिसाब से नहीं बिका सेब तो करेंगे आंदोलन, संयुक्त किसान मंच की चेतावनी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी के किसानों को विदेश भेजेगी प्रदेश सरकार! जानें क्या है &amp;apos;यूपी&amp;#45;एग्रीस&amp;apos; योजना का पूरा प्लान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-farmers-will-go-abroad-for-training-in-new-agricultural-techniques-under-up-agris-project.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 06 Aug 2024 11:27:58 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-farmers-will-go-abroad-for-training-in-new-agricultural-techniques-under-up-agris-project.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में कृषि क्षेत्र को पुनर्जीवित करने और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए "कृषि विकास और ग्रामीण उद्यमिता सुदृढ़ीकरण (यूपी-एग्रीस)" कार्यक्रम की शुरुआत करने जा रही है। यह परियोजना विश्व बैंक की सहायता से शुरू होगी, जिसके तहत किसानों, कृषक उत्पादक संगठनों और कृषि उद्यमियों को हर संभव तकनीकी सहायता और इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा प्रदान की जाएगी। विश्व बैंक इसके लिए उत्तर प्रदेश को 4000 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करेगा। इस योजना के तहत प्रदेश के किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण के लिए विभिन्न देशों में भी भेजा जाएगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को इस संबंध में विश्व बैंक के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। बैठक के दौरान 'यूपी-एग्रीस' कार्यक्रम को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। इस योजना के तहत फसल उत्पादकता बढ़ाने और मूंगफली, मिर्च, और हरी मटर जैसी फसलों के लिए क्लस्टर विकसित करने के साथ-साथ निर्यात को बढ़ावा देने के लिए संबंधित उद्योगों के लिए नए क्लस्टर बनाए जाएंगे।</p>
<p><strong>10 लाख किसानों को मिलेगा लाभ&nbsp; &nbsp;</strong></p>
<p>सरकार द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह परियोजना 6 वर्ष की होगी। 4000 करोड़ रुपये की इस परियोजना का सीधा लाभ कृषक, कृषक समूहों, मत्स्य पालकों और कृषि सेक्टर से जुड़ी एमएसएमई इकाइयों को मिलेगा। यूपी एग्रीस परियोजना, पूर्वी उत्तर प्रदेश के 21 और बुंदेलखंड के सात जिलों में संचालित की जाएगी। इस परियोजना के माध्यम से 10 लाख किसानों को प्रत्यक्ष सहायता मिलेगी, जिनमें से 30 प्रतिशत महिला किसान होंगी।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">आज लखनऊ में 5,कालीदास मार्ग मुख्यमंत्री आवास पर मा0 मुख्यमंत्री श्री <a href="https://twitter.com/myogiadityanath?ref_src=twsrc%5Etfw">@MYogiAdityanath</a> जी की अध्यक्षता में आयोजित उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल इंटरप्राइजेज ईकोसिस्टम स्ट्रेंथिंग (यूपीएग्रीज) परियोजना को लागू किए जाने के सम्बंध में बैठक की।<a href="https://twitter.com/spshahibjp?ref_src=twsrc%5Etfw">@spshahibjp</a> <a href="https://twitter.com/CMOfficeUP?ref_src=twsrc%5Etfw">@CMOfficeUP</a> <a href="https://t.co/0AJ6a8W2qj">pic.twitter.com/0AJ6a8W2qj</a></p>
&mdash; Baldev Singh Aulakh (@BaldevAulakh) <a href="https://twitter.com/BaldevAulakh/status/1820470315002061054?ref_src=twsrc%5Etfw">August 5, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p><strong>किसानों को विदेश भेजने की योजना</strong></p>
<p>इस योजना के तहत किसानों को नई तकनीकों के प्रति जागरूक किया जाएगा और उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण के लिए विभिन्न देशों में भेजा जाएगा। विश्व बैंक की मदद से शुरू की गई इस परियोजना का उद्देश्य किसानों, किसान-उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और कृषि उद्यमियों को व्यापक तकनीकी सहायता और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना है।</p>
<p>विश्व बैंक के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 187.70 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि है, जो इसे एकमात्र ऐसा राज्य बनाता है जहां कुल उपलब्ध भूमि के 76 प्रतिशत हिस्से पर खेती की जाती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जनशक्ति, शुद्ध पानी की उपलब्धता और विविध जलवायु क्षेत्रों की वजह से यह राज्य देश के कृषि क्षेत्र का पावरहाउस बनने की पूरी क्षमता रखता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राज्य की 7 प्रतिशत आबादी वाले बुंदेलखंड का कृषि उत्पादन में केवल 5.5 प्रतिशत योगदान है। इस परियोजना के जरिए हमारा उद्देश्य इन क्षेत्रों में जलवायु-लचीले और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य तरीके से कृषि खाद्य प्रणाली को विकसित करना है। मुख्यमंत्री ने कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए गौतम बुद्ध नगर में जेवर हवाई अड्डे के पास एक निर्यात केंद्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी के किसानों को विदेश भेजेगी प्रदेश सरकार! जानें क्या है 'यूपी-एग्रीस' योजना का पूरा प्लान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में गौशालाओं के लिए सीएम सैनी की कई घोषणाएं, प्रदेश में चलेगा &amp;apos; बेसहारा गौवंश मुक्त अभियान&amp;apos;]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-cm-nayab-singh-saini-announcement-for-gaushalas-cash-payment-for-capturing-helpless-cows.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 05 Aug 2024 20:03:12 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-cm-nayab-singh-saini-announcement-for-gaushalas-cash-payment-for-capturing-helpless-cows.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा के पंचकूला में आयोजित गौसेवा सम्मेलन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश में गौवंश और गौशालाओं के लिए कई घोषणाएं की। अब प्रदेश में नई गौशाला के लिए जमीन खरीदने पर कोई स्टाम्प डयूटी नहीं लगेगी। साथ ही बेसहारा गोवंश को पकड़कर गौशाला में लाने के लिए 600 रुपये प्रति गाय और 800 रूपये प्रति नंदी की दर से तुरंत नकद भुगतान किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>बेसहारा गौवंश को सड़कों पर न भटकना पड़े इसके लिए हरियाणा सरकार <strong>बेसहारा गौवंश मुक्त अभियान</strong> चलाएगी। अभियान का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ऐलान किया कि पकड़े गए बेसहारा पशुओं में से बछड़ा/बछड़ी के लिए 20 रुपये, गाय के लिए 30 रुपये तथा नन्दी के लिए 40 रुपये प्रतिदिन चारे के लिए अनुदान दिया जाएगा।</p>
<p>&nbsp;<strong>चारे का अनुदान 4 रुपए से बढ़ाकर 20 रुपये&nbsp;</strong></p>
<p>अभी तक गौशालाओं को प्रति गाय 4 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से चारे के लिए अनुदान दिया जाता है। इसे मुख्यमंत्री ने एक अगस्त से बढ़ाकर गाय के लिए 20 रुपये प्रतिदिन, नन्दी के लिए 25 रुपये प्रतिदिन तथा बछड़ा/बछड़ी के लिए 10 रुपये प्रतिदिन करने का ऐलान किया है।&nbsp;</p>
<p><strong>बेसहारा गौवंश के लिए बनेगी समिति&nbsp;</strong><br />हर शहर में पशुचिकित्सक, नगर निकाय प्रशासक तथा गौशाला के प्रतिनिधियों की एक समिति गौशालाओं में गौवंश संख्या की तस्दीक करेंगी। शहर में जब भी बेसहारा गौवंश सड़कों पर दिखेगा, गौशालाओं को उन्हें पकड़ने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा तथा एक आरएफआईडी टैग द्वारा इन बेसहारा गौवंश की निगरानी भी की जाएगी।</p>
<p><strong>देसी गाय रखने पर 30 हजार रुपये का अनुदान</strong></p>
<p>प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जो किसान देसी गाय रखेगा, उसे हरियाणा सरकार प्रति गाय 30 हजार रूपये वार्षिक अनुदान देगी। सीएम सैनी ने कहा कि गौशालाओं को एक हजार गाय तक के लिए एक तथा इससे अधिक गाय के लिए दो ई-रिक्शा खरीद के लिए 1.25 लाख रुपये प्रति ई-रिक्शा अनुदान दिया जाएगा। अभी तक गौशालाओं से केवल एक मीटर पर दो रुपए यूनिट की दर से बिजली बिल लिया जाता था। लेकिन अब गौशालाएं से एक से अधिक कनेक्शन पर भी दो रुपए प्रति यूनिट की दर से ही बिजली बिल शुल्क लिया जाएगा।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66b0efbfd77aa.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>ग्राम पंचायत गौशाला के लिए पट्टे पर दे सकेंगी जमीन </strong></p>
<p>मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने घोषणा करते हुए कहा कि अब कोई भी पंचायत अपनी भूमि गौशाला की स्थापना के लिए 20 साल के पट्टे पर किसी संस्था को दे सकती है। अब तक दो गौशालाओं को पंचायती भूमि पट्टे पर देने का काम किया है, जिसमें जिला नूहूं की ग्राम पंचायत हसनपुर और रांगला शामिल हैं। इसके लिए कैबिनेट की बजाय मुख्यमंत्री कार्यालय से ही मंजूरी मिल जाएगी।</p>
<p><strong>गौशालाओं को कई रियायतें&nbsp;</strong></p>
<p>हरियाणा में पंजीकृत 675 गौशालाओं में से 331 गौशालाओं में सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित किये जा चुके हैं। सौर ऊर्जा प्लांट के लिए गौसेवा आयोग की तरफ से 5 प्रतिशत और हरेडा की तरफ से 85 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। नई गौशाला के लिए ना तो सीएलयू लेने की आवश्यकता होगी और ना ही कोई ईडीसी या और किसी किस्म की फीस देनी होगी। गौशाला में एक ट्यूबवैल लगाने के लिए कोई अनुमति आवश्यक नहीं होगी। साथ ही<span> गौशालाओं की प्रापर्टी पर प्रॉपर्टी टैक्स भी नहीं लगेगा।&nbsp;</span></p>
<p>पशुपालन एवं डेयरी मंत्री <strong>कंवर पाल</strong> ने कहा कि प्रदेश सरकार गौसेवा आयोग के बजट को 40 करोड़ रूपये से बढ़ाकर करीब 510 करोड़ रुपए किया है। आवश्यकता पड़ने पर इसे और बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि गौशालाओं की दिक्कतों को दूर करने के लिए राज्य सरकार कई कदम उठा रही है।&nbsp;</p>
<p>स्थानीय शहरी निकाय मंत्री <strong>सुभाष सुधा</strong> ने सभी को गौभक्तों से आह्वान किया कि वो सुनिश्चित करें कि कोई भी गौवंश सड़कों पर ना रहे। उन्होंने हिसार की माॅडल गौशाला का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदेश की सभी गौशालाओं में सभी आवश्यक सुविधाएं दी जानी चाहिए।&nbsp;</p>
<p>हरियाणा गौसेवा आयोग के अध्यक्ष <strong>श्रवण गर्ग</strong> ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 675 पंजीकृत गौशालाएं हैं, जिसमें 4.50 लाख गौवंश है। उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने प्रदेश की गौशलाओं की विभिन्नों मांगों को रखा। सम्मेलन को गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने भी संबोधित किया।</p>
<p>इस अवसर पर हरियाणा गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष पूर्ण यादव, पशुधन विकास बोर्ड अध्यक्ष धर्मवीर मिर्जापुर, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. राजा सेखर वंदरु, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के महानिदेशक डॉ. एल.सी. रंगा, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के सचिव विकास गुप्ता समेत अन्य गणमान्य मौजूद रहे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में गौशालाओं के लिए सीएम सैनी की कई घोषणाएं, प्रदेश में चलेगा ' बेसहारा गौवंश मुक्त अभियान' ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में 24 फसलों की एमएसपी पर होगी खरीद, कैबिनेट ने दी मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/24-crops-will-be-purchased-at-msp-in-haryana-government-approved-the-proposal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 05 Aug 2024 18:40:07 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/24-crops-will-be-purchased-at-msp-in-haryana-government-approved-the-proposal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में सभी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। सोमवार को राज्य कैबिनेट ने एमएसपी पर 10 और फसलों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह निर्णय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा कुरुक्षेत्र में 'विजय शंखनाद' रैली में की गई घोषणा के एक दिन बाद लिया गया है, जिसमें उन्होंने सभी फसलों को एमएसपी पर खरीदने का ऐलान किया था। इसके अलावा उन्होंने नहरी पानी के बकाया सिंचाई शुल्क को माफ करने की भी घोषणा की थी।</p>
<p><strong>एमएसपी पर होगी 24 फसलों की खरीद</strong></p>
<p>सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि राज्य सरकार पहले से ही 14 फसलों को एमएसपी पर खरीद रही है। अब इस सूची में 10 और फसलों को जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि रागी, सोयाबीन, कलातिल (नाइजरसीड), कुसुम, जौ, मक्का, ज्वार, जूट, खोपरा और ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद भी अब एमएसपी पर होगी। इसका खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इसके साथ ही सरकार कुल 24 फसलों को एमएसपी पर खरीदेगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि इस कदम से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा। सरकार के इस फैसले के बाद हरियाणा देश का पहला राज्य बनेगा जो सभी फसलों को एमएसपी पर खरीदेगा। उन्होंने पंजाब सरकार से भी अनुरोध किया कि वह कुछ फसलों को एमएसपी पर खरीदे।&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">मैं प्रदेश के सभी किसान भाइयों को बधाई देता हूँ। आज कैबिनेट ने फसलों को <a href="https://twitter.com/hashtag/MSP?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#MSP</a> पर खरीद के संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।<br /><br />इसके साथ ही सभी फसलों को MSP पर खरीदने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य बन गया है: मुख्यमंत्री श्री <a href="https://twitter.com/NayabSainiBJP?ref_src=twsrc%5Etfw">@NayabSainiBJP</a> <a href="https://t.co/Jzt3KcfyYo">pic.twitter.com/Jzt3KcfyYo</a></p>
&mdash; CMO Haryana (@cmohry) <a href="https://twitter.com/cmohry/status/1820436198185189686?ref_src=twsrc%5Etfw">August 5, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p><strong>आबियाना खत्म करने का प्रस्तावा भी पास&nbsp;</strong></p>
<p>कैबिनेट ने 'आबियाना' (नहर के पानी से सिंचाई शुल्क) खत्म करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। अब 1 अप्रैल 2024 से किसानों से 'आबियाना' नहीं लिया जाएगा, जिससे किसानों को हर साल 54 करोड़ रुपये का फायदा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 अप्रैल 2024 के बाद जारी किए गए 'आबियाना' संग्रह के नोटिस वापस ले लिए जाएंगे और अगर किसी किसान ने 1 अप्रैल के बाद शुल्क का भुगतान किया है, तो वह राशि वापस कर दी जाएगी।</p>
<p><strong>भूमिहीन ग्रामीण परिवारों को दिए जाएंगे प्लॉट&nbsp;</strong></p>
<p>कैबिनेट ने मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के विस्तार को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत अब 1 लाख 80 हजार रुपये वार्षिक आय वाले भूमिहीन ग्रामीण परिवारों को प्लॉट दिए जाएंगे, जिससे राज्य के ग्रामीण परिवारों को महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।&nbsp;</p>
<p>गौरतलब है कि यह घोषणाएं इस साल के अंत में होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनावों से पहले की गई हैं, जो राज्य के किसानों के लिए विशेष महत्व रखती हैं। इससे पहले राज्य सरकार कांस्टेबल, वन रक्षक और जेल वार्डन की भर्ती में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा भी कर चुकी है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66b0dfb3e290b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में 24 फसलों की एमएसपी पर होगी खरीद, कैबिनेट ने दी मंजूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66b0dfb3e290b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में सभी फसलों को एमएसपी पर खरीदेगी सरकार, सीएम सैनी का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/government-will-buy-all-crops-on-msp-in-haryana-cm-saini-announced.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 04 Aug 2024 18:53:17 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/government-will-buy-all-crops-on-msp-in-haryana-cm-saini-announced.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आज कुरुक्षेत्र से विजय शंखनाद रैली की शुरुआत करते हुए किसानों के लिए कई बड़े ऐलान किए। सीएम सैनी ने सभी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार किसान की प्रत्येक फसल को एमएसपी पर खरीदेगी। पहले 14 फसलों को एमएसपी पर खरीदते थे, लेकिन अब से 9 नई फसलें भी एमएसपी पर खरीदी जाएंगी। इस तरह हरियाणा में 14 की जगह 23 फसलों की एमएसपी पर खरीद होगी। गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से कुल 23 फसलों पर ही एमएसपी घोषित किया जाता है।</p>
<p>एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर किसानों के विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर मुख्यमंत्री नायब सैनी की सभी फसलों को एमएसपी पर खरीदने की घोषणा काफी मायने रखती है। हालांकि, फसलों की खरीद कैसे और कितनी होगी? इस पर कितना खर्च आएगा? ये जानकारियां आनी बाकी हैं। लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार की तरफ से यह बड़ा ऐलान है।&nbsp;</p>
<p><strong>133 करोड़ की बकाया माफी का ऐलान</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पिछले आबियाने की 133.55 करोड़ रुपये की बकाया राशि की माफी ऐलान भी किया। साथ ही 2023 से पहले प्राकृतिक आपदा से खराब फसलों के मुआवजे के 137 करोड़ रुपये एक सप्ताह में जारी किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन किसानों के ट्रांसफॉर्मर बिजली निगमों द्वारा लगाए गए हैं, उनके ट्रांसफॉर्मर खराब होने पर बिजली निगमों द्वारा अपने खर्च पर बदले जाएंगे और किसानों से कोई पैसा नहीं लिया जाएगा। ट्यूबवेल के लिए थ्री स्टार मोटर बेचने वाली देश भर की कंपनियां विभाग के पोर्टल पर अपना पंजीकरण करवा सकेंगी। किसान किसी भी कंपनी की थ्री स्टार मोटर खरीद पाएंगे। किसानों को ट्यूबवेल के नए कनेक्शन दिए जाएंगे।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66af824ae8532.jpg" alt="" /></p>
<p>कुरुक्षेत्र से बीजेपी की विजय शंखनाद रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हम 90 की 90 विधानसभा में भव्य रैलियां करेंगे। भाजपा सरकार &lsquo;हरियाणा एक, हरियाणवी एक&rsquo; के भाव से हर क्षेत्र का समान रूप से विकास कर रही है।&nbsp;</p>
<p><strong>कांग्रेस पर साधा निशाना</strong><br />मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश भर में जहां भी कांग्रेस की सरकार हैं वहां सिर्फ वही दो फसलें एमएसपी पर खरीदी जाती हैं जिनका पैसा एफसीआई के माध्यम से केंद्र सरकार देती है। हरियाणा का हमारा किसान कांग्रेस के झूठ और बहकावे में आने वाला नहीं है।</p>
<p>कुरुक्षेत्र की थानेसर विधानसभा में हुई में रैली में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, धर्मेंद्र प्रधान के अलावा प्रदेश प्रभारी सतीश पूनिया तथा हरियाणा भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में सभी फसलों को एमएसपी पर खरीदेगी सरकार, सीएम सैनी का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश के मूंग किसानों का बढ़ा संकट, स्लॉट बुक न होने से एमएसपी पर उपज बेचना मुश्किल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/moong-farmers-of-madhya-pradesh-to-struggle-as-procurement-at-msp-becomes-difficult.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 04 Aug 2024 09:22:50 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/moong-farmers-of-madhya-pradesh-to-struggle-as-procurement-at-msp-becomes-difficult.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मूंग खरीद एक बार फिर विवादों में है। सड़क से लेकर संसद तक इस मुद्दे पर घमासान मचा हुआ है। मूंग खरीद को लेकर राज्य के किसान सड़कों पर हैं। वहीं, संसद में भी यह मुद्दा उठाया जा चुका है। वजह है किसानों से मूंग की पूरी खरीद नहीं होना, जबकि प्रदेश में इस साल मूंग की अच्छी पैदावार हुई है। प्रदेश में मूंग खरीद की प्रक्रिया शुरुआत से ही सवालों के घेरे में है।</p>
<p>बीते दिनों प्रदेश सरकार ने किसानों के विरोध के बाद <span>ग्रीष्मकालीन</span> मूंग की खरीद की तारीख बढ़ाने का ऐलान किया था। किसानों को स्लॉट बुकिंग के लिए एक दिन का समय भी दिया गया था। 1 अगस्त को स्लॉट बुकिंग होनी थी। लेकिन, सॉफ्टवेयर में आई गड़बड़ी के कारण एक बार फिर किसानों को स्लॉट बुकिंग में मुश्किलें आईं। ऐसे में जो किसान अपना स्लॉट बुक नहीं करवा पाए, अब उन्हें मजबूरी में एमएसपी से कम भाव पर मूंग बेचनी पड़ेगी। फिलहाल बाजार में मूंग का भाव 6500 से 8000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है, जबकि एमएसपी 8558 रुपये प्रति क्विंटल है। इस तरह किसानों को सीधा डेढ़ से दो हजार रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान होगा।</p>
<p><strong>स्लॉट बुक नहीं करवा पाए हजारों किसान&nbsp;</strong></p>
<p>मध्य प्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष <strong>केदार शंकर सिरोही</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि प्रदेश सरकार ने मूंग खरीद की प्रक्रिया को बढ़ाते हुए किसानों को स्लॉट बुकिंग के लिए 1 अगस्त का समय दिया था। लेकिन 1 अगस्त को स्लॉट बुकिंग का पोर्टल सिर्फ 2 से 3 घंटे चल पाया। जिस कारण हजारों किसान अपना स्लॉट बुक नहीं करवा पाए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा, क्योंकि बाजार में मूंग का भाव एमएसपी से कम है।&nbsp;</p>
<p><strong>खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप</strong></p>
<p>केदार सिरोही ने मूंग खरीद में गड़बड़ी का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मूंग किसानों से दो तरीके से लूट की जा रही है। कई खरीद केंद्रों पर किसानों से मूंग खरीदने के एवज में प्रति ट्रॉली 5 से 10 हजार रुपये लिए जा रहे हैं। ऐसे कई मामले पूरी खरीद प्रक्रिया के दौरान सामने आए हैं। इतना ही नहीं, अच्छी क्वालिटी न होने का हवाला देकर भी किसानों से अतिरिक्त मूंग तुलवाकर लूट की जा रही है।</p>
<p><strong>क्यों परेशान हैं मूंग किसान&nbsp;</strong></p>
<p>मूंग खरीद शुरू होने के बाद से ही किसान विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं। शुरुआत में प्रति हेक्टेयर और प्रति दिन मूंग बेचने की सीमा को लेकर किसानों में नाराजगी थी, जिसे बाद में बढ़ाया गया। सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी और समय से पहले खरीद बंद होने के कारण नाराज किसान सड़कों पर उतर आए थे। किसानों के विरोध के बाद सरकार ने 5 अगस्त तक खरीद जारी रखने का ऐलान तो किया, लेकिन सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण फिर स्लॉट बुकिंग में दिक्कतें आई। वहीं, कांग्रेस का दावा है कि अब भी हजारों किसान मूंग बेचने से वंचित रह गए हैं।</p>
<p><strong>दालों की शत-प्रतिशत खरीद का दावा</strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार यह दावा कर रहे हैं कि सरकार किसानों से अरहर, उड़द और मसूर की शत-प्रतिशत खरीद करेगी। किसान ये दालें जितनी भी पैदा करेंगे, सरकार पूरा खरीदेगी। लेकिन, कृषि मंत्री के गृह राज्य मध्य प्रदेश में ही किसान मूंग की उपज बेचने के लिए परेशान हैं। यहां सवाल यह भी है कि जब प्रदेश में किसानों को दाल उत्पादन के लिए प्रेरित किया जा रहा है, तो सरकार को खरीद भी उसी स्तर पर करनी चाहिए थी।</p>
<p>हाल ही केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री राम नाथ ठाकुर ने संसद में दालों के आयात का आंकड़ा पेश किया था। जिसके अनुसार देश में वित्त वर्ष 2023-24 में दालों का आयात 90 फीसदी तक बढ़ा है। एक ओर तो सरकार दालों के मामले में आत्मनिर्भर होने की बात कहती है, वहीं अगर किसानों से खरीद ही नहीं होगी तो सरकार की यह योजना कैसे सिर चढ़ेगी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश के मूंग किसानों का बढ़ा संकट, स्लॉट बुक न होने से एमएसपी पर उपज बेचना मुश्किल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में फिर बढ़ानी पड़ी निजी नलकूपों के लिए मुफ्त बिजली योजना की तारीख, अब 16 अगस्त तक करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/last-date-for-free-electricity-scheme-for-tube-wells-in-up-has-been-extended-till-16th-august.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 03 Aug 2024 13:32:19 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/last-date-for-free-electricity-scheme-for-tube-wells-in-up-has-been-extended-till-16th-august.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी नलकूपों/ट्यूबवेल के लिए <strong>मुफ्त बिजली योजना</strong> की अंतिम तारीख एक बार फिर बढ़ा दी है। अब प्रदेश के किसान <strong>16 अगस्त, 2024</strong> तक मुफ्त बिजली योजना के लिए पंजीकरण कर सकते हैं। इससे पहले भी सरकार ने दो बार योजना की तारीख बढ़ाई थी। पहले 15 जुलाई और फिर 31 जुलाई तक। </span><span>अब अंतिम तिथि 16 अगस्त तक बढ़ा दी गई है।</span><span></span></p>
<p><strong><span>पंजीकरण </span>शर्तों का विरोध कर रहे किसान </strong></p>
<p>प्रदेश में मुफ्त बिजली योजना के लिए किसानों का उत्साह कम है, क्योंकि वे रजिस्ट्रेशन की कुछ शर्तों का विरोध कर रहे हैं। किसान चाहते हैं कि मीटर लगाने की अनिवार्यता और प्रति कनेक्शन एक निश्चित सीमा तक ही बिजली के उपभोग पर 100 फीसदी की छूट की शर्तें हटाई जाएं। किसानों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए अब <span>उत्तर प्रदेश </span>पावर कॉरपोरेशन रजिस्ट्रेशन की शर्तों को आसान बनाने की योजना बना रहा है।</p>
<p>हाल ही में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) की एक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में किसान नेताओं ने सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेने में आ रही समस्याओं के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद, मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने किसानों को आश्वासन दिया कि सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाने में उन्हें किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।&nbsp;</p>
<p><strong>बकाया बिजली बिल का एकमुश्त करना होगा भुगतान</strong></p>
<p><span>योजना का लाभ वही किसान उठा सकते हैं जिन्होंने 31 मार्च, 2023 तक के बकाया बिजली बिल का एकमुश्त भुगतान किया हो। किसानों को अधिकतम 6 किश्तों में पूर्ण भुगतान की सुविधा भी दी गई है। जिन किसानों का 31 मार्च, 2023 तक का बिजली बिल बकाया नहीं है, वे बिना कोई पंजीकरण शुल्क दिए अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। पावर कारपोरेशन ने किसानों से जल्द से जल्द पंजीकरण करवाने की अपील की है।</span></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">प्रदेश के सम्मानित किसानों के लिए मुफ्त बिजली पाने का सुनहरा मौका। किसानों के हित व सुविधा के दृष्टिगत इस योजना की पंजीकरण की अंतिम तिथि दिनांक 16 अगस्त 2024 तक बढ़ा दी गई है। किसान उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि शीघ्र पंजीकरण करवाकर योजना का लाभ उठायें।<a href="https://twitter.com/ChairmanUppcl?ref_src=twsrc%5Etfw">@ChairmanUppcl</a> <a href="https://twitter.com/mduppcl?ref_src=twsrc%5Etfw">@mduppcl</a> <a href="https://t.co/V2ddClqu9X">pic.twitter.com/V2ddClqu9X</a></p>
&mdash; UPPCL (@UPPCLLKO) <a href="https://twitter.com/UPPCLLKO/status/1819244205086216635?ref_src=twsrc%5Etfw">August 2, 2024</a></blockquote>
<p><strong>ऐसे उठाएं मुफ्त बिजली योजना का लाभ&nbsp;</strong></p>
<p><span>मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाने के लिए, किसानों को उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन की आधिकारिक वेबसाइट <strong><a href="https://uppcl.org/uppcl/hi/">uppcl.org</a></strong> पर जाकर पंजीकरण करना होगा। पंजीकरण किए बिना किसान इस योजना का लाभ नहीं उठा पाएंगे। अधिक जानकारी के लिए कृषि और बिजली विभाग में संपर्क किया जा सकता है।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में फिर बढ़ानी पड़ी निजी नलकूपों के लिए मुफ्त बिजली योजना की तारीख, अब 16 अगस्त तक करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों की सूझबूझ से हरियाणा में टला रेल हादसा, मोबाइल टॉर्च से ट्रेन को रुकवाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rail-accident-averted-in-haryana-due-to-alertness-of-farmers-train-stopped-with-mobile-torch.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 03 Aug 2024 12:37:19 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rail-accident-averted-in-haryana-due-to-alertness-of-farmers-train-stopped-with-mobile-torch.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा के सिरसा जिले में कुछ किसानों की तत्परता और सूझबूझ से एक बड़ा रेल हादसा होने से बच गया। ऐलनाबाद के पास बेहरवाला और तलवाड़ा खुर्द के बीच बारिश के कारण रेलवे अंडरपास में पानी भर गया था और रेल की पटरियों के नीचे से मिट्टी व रोड़ी बह गई थी। इस कारण जयपुर से श्रीगंगानगर चलने वाली रेलगाड़ी संख्या 04706 गुरुवार रात किसी बड़े हादसे का शिकार हो सकती थी। लेकिन रेलवे ट्रैक के नीचे से मिट्टी धंसी देख स्थानीय किसान अलर्ट हो गये। उन्होंने मोबाइल टॉर्च की रोशनी दिखाकर ट्रेन को रुकवाया। इतना ही नहीं किसानों ने रेलकर्मियों के साथ मिलकर ट्रैक को ठीक भी कराया। तब जाकर ट्रेन की आवाजाही सुचारू हुई।&nbsp;</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, तलवाड़ा खुर्द निवासी किसान भीम सेन और उनका बेटे वकील चंद रात करीब 9 बजे खेतों की ओर जा रहे थे। तभी उन्होंने अंडरपास से कुछ गिरने की आवाज सुनी। वहां जाकर देखा तो पटरी के नीचे से मिट्टी और पत्थर गिर रहे थे। उन्होंने फोन कर आसपास के किसानों को बुलाया। इसी दौरान ऐलनाबाद की ओर से ट्रेन आती दिखी। पटरियों की ऐसी हालत में कोई बड़ा हादसा हो सकता था। इसलिए ट्रेन रुकवाने के लिए भीम सेन मोबाइल फोन की लाइट दिखाते हुए रेलगाड़ी की ओर दौड़ पड़े और ड्राईवर को रेल रोकने का इशारा किया। लोको पायलट ने आपात स्थिति को भांपकर इमरजेंसी ब्रेक लगा दिये। उसने किसानों के साथ जाकर देखा तो अंडरपास पर पटरी के नीचे से मिट्टी और रोड़ी निकली हुई थी। इसकी सूचना तत्काल रेलवे पुलिस और उच्च अधिकारियों को दी। वहां पहुंचे रेलकर्मियों ने किसानों की मदद से रेलवे ट्रैक को ठीक किया। तब जाकर ट्रेन को धीरे-धीरे वहां से निकाला गया।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66add4882dcb2.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66add719cb90c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों की सूझबूझ से हरियाणा में टला रेल हादसा, मोबाइल टॉर्च से ट्रेन को रुकवाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र में ट्रैक्टर पर एक लाख रुपये तक सब्सिडी, कृषि उपकरणों पर भी अनुदान दे रही सरकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-government-is-giving-subsidy-on-tractor-power-tiller-and-many-other-agricultural-equipment.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 02 Aug 2024 16:43:37 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-government-is-giving-subsidy-on-tractor-power-tiller-and-many-other-agricultural-equipment.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र में किसानों को बागवानी के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने <strong>मशीनीकरण सब्सिडी योजना</strong> की शुरुआत की है। इस योजना के तहत किसानों को ट्रैक्टर, पावर टिलर समेत कई अन्य उपकरणों की खरीद पर सब्सिडी दी जा रही है। सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए किसान महाराष्ट्र सरकार के पोर्टल <a href="https://mahadbt.maharashtra.gov.in/"><strong>mahadbt.maharashtra.gov.in</strong></a> पर आवेदन कर सकते हैं।</p>
<p><strong>ट्रैक्टर पर एक लाख रुपये तक की सब्सिडी&nbsp;</strong></p>
<p>20 हॉर्स पावर तक के ट्रैक्टर के लिए लागत 3 लाख रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई है। सामान्य श्रेणी के किसानों को इस पर 25 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी, जो अधिकतम 75 हजार रुपये प्रति यूनिट तक होगी। विशेष श्रेणी (एससी, एसटी, महिलाएं और छोटे और सीमांत किसान) के किसानों को ट्रैक्टर पर 35 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी, जो अधिकतम एक लाख रुपये प्रति यूनिट तक होगी।</p>
<p><strong>पॉवर टिलर पर 70 हजार रुपये तक सब्सिडी</strong></p>
<p>सरकार पॉवर टिलर पर भी किसानों को सब्सिडी दे रही है। 8 हॉर्स पावर से कम के पावर टिलर के लिए लागत एक लाख रुपये प्रति यूनिट तय की गई है। अन्य लाभार्थियों के लिए अधिकतम 40 हजार रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी दी जाएगी, जबकि विशेष श्रेणियों के लिए 50 हजार रुपये प्रति यूनिट तक की सब्सिडी दी जाएगी।</p>
<p>8 हॉर्स पावर से अधिक के पावर टिलर के लिए लागत 1.50 लाख रुपये प्रति यूनिट तय की गई है। अन्य लाभार्थियों के लिए अधिकतम 60 हजार रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी दी जाएगी, जबकि विशेष श्रेणियों के लिए 75 हजार रुपये प्रति यूनिट तक की सब्सिडी दी जाएगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66acc04b17928.jpg" alt="" width="674" height="647" /></p>
<p><strong>इन कृषि उपकरणों पर भी मिल रही सब्सिडी</strong></p>
<p>20 हॉर्स पावर से कम के ट्रैक्टर या पावर टिलर के साथ उपयोग किए जाने वाले उपकरणों, जैसे <strong>एमबी हल, डिस्क हल, कल्टीवेटर, हैरो, लेवलर ब्लेड, केजव्हील, फरौ ओपनर और रिजर</strong> पर भी सरकार सब्सिडी दे रही है। इन उपकरणों के लिए लागत 30 हजार रुपये प्रति यूनिट तय की गई है। अन्य लाभार्थियों के लिए अधिकतम 12 हजार रुपये प्रति यूनिट और विशेष श्रेणियों के लिए 15 हजार रुपये प्रति यूनिट तक की सब्सिडी दी जाएगी।</p>
<p><strong>मैनुअल स्प्रेयर</strong> (नॉकसैक और फुट स्प्रेयर) के लिए लागत 1,200 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है। अन्य लाभार्थियों के लिए अधिकतम 500 रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी दी जाएगी, जबकि विशेष श्रेणियों के लिए 600 रुपये प्रति यूनिट तक की सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र के लिए बागवानी प्रदर्शन के लिए नए पौधों और उपकरणों के आयात पर भी 100 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी।</p>
<p><strong>सब्सिडी के लिए यहां करें आवेदन&nbsp;</strong></p>
<p>इन उपकरणों पर सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए किसानों-बागवानों को महाराष्ट्र सरकार के आधिकारिक पोर्टल <strong><a href="https://mahadbt.maharashtra.gov.in/">mahadbt.maharashtra.gov.in</a></strong> पर आवेदन करना होगा। अधिक जानकारी के लिए महाराष्ट्र कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट <a href="https://krishi.maharashtra.gov.in/"><strong>krishi.maharashtra.gov.in</strong></a> पर विजिट करें या कृषि विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800 2334 0000 पर संपर्क करें।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66acc5d7d04c3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र में ट्रैक्टर पर एक लाख रुपये तक सब्सिडी, कृषि उपकरणों पर भी अनुदान दे रही सरकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x500_66acc5d7d04c3.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मूंग खरीद में गड़बड़ी का आरोप, दिग्विजय सिंह ने उठाई जांच की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/allegations-of-corruption-in-the-moong-procurement-process-in-madhya-pradesh-digvijay-singh-wrote-a-letter-to-cm-mohan-yadav.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 02 Aug 2024 13:05:36 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/allegations-of-corruption-in-the-moong-procurement-process-in-madhya-pradesh-digvijay-singh-wrote-a-letter-to-cm-mohan-yadav.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में मूंग खरीद का मुद्दा अभी शांत नहीं हुआ है। बीते दिनों समय से पहले मूंग खरीद बंद होने से गुस्साए किसानों के विरोध के बाद प्रदेश सरकार ने मूंग खरीद की अंतिम तारीख 5 अगस्त तक बढ़ाने का ऐलान किया था। वहीं, अब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मूंग खरीद प्रक्रिया में अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को इस संबंध में पत्र भी लिखा है, जिसमें उन्होंने सरकार से किसानों को पेश आ रही दिक्कतों को हल करने और मूंग खरीद में हो रहे भ्रष्टाचार की जांच की मांग की है।</p>
<p><strong>किसानों को होगा 2 से 3 हजार रुपये का नुकसान</strong></p>
<p>दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा कि सीहोर, नर्मदापुरम, हरदा, नरसिंहपुर सहित प्रदेश के सभी जिलों से मूंग खरीदी में अनियमितताएं किए जाने की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मूंग खरीदी की अंतिम तिथि 31 जुलाई तय की गई थी, जबकि 22 जुलाई से ही बुकिंग स्लॉट बंद हैं। उन्होंने लिखा कि कई क्षेत्रों में किसान बुकिंग नहीं करवा पा रहे हैं, जबकि अभी तक सिर्फ 18 से 20 प्रतिशत ही खरीदा हुई है। समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं होने से किसानों को प्रति क्विंटल 2 से 3 हजार रुपये कम पर बाजार में बेचना पड़ेगा।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/08/image_750x_66ac8b1fb1021.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि अभी तीन दिन पहले केन्द्रीय कृषि मंत्री के लोकसभा क्षेत्र में बुदनी तहसील के ग्राम आमोन के लोगों ने तुलाई बंद करने पर कई घंटों तक चक्काजाम कर दिया था। तब एसडीएम ने जाकर तुलाई शुरू कराते हुए किसानों का आक्रोश शांत कराया था।</p>
<p><strong>वेयरहाउसों में व्यापक स्तर पर हो रहा भ्रष्टाचार</strong></p>
<p>दिग्विजय सिंह ने यह भी लिखा कि खरीद केन्द्रों पर किसानों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है और वेयरहाउसों में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। विगत माह खरीदी गई मूंग का भुगतान भी अभी तक किसानों को नहीं किया गया है, जबकि सरकार ने 7 दिन के भीतर भुगतान का वादा किया था। ऐसे में सरकार से अनुरोध है कि मूंग खरीदी में हो रही विसंगतियों और अनियमितताओं की जांच की जाए तथा किसानों को पेश आ रही दिक्कतों का समय पर समाधान किया जाए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मूंग खरीद में गड़बड़ी का आरोप, दिग्विजय सिंह ने उठाई जांच की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में फसल बीमा कराने की आखिरी तारीख 10 अगस्त तक बढ़ी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/last-date-for-pm-fasal-bima-yojana-in-up-has-been-extended-till-10th-august.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 01 Aug 2024 19:28:52 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/last-date-for-pm-fasal-bima-yojana-in-up-has-been-extended-till-10th-august.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों को फसलों का बीमा कराने के लिए राहत दी है। <a href="https://pmfby.gov.in/"><strong>प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई)</strong></a> की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी गई है। पहले यह तिथि 31 जुलाई थी। अब प्रदेश के किसान 10 अगस्त तक अपनी फसलों का बीमा करवा सकते हैं। प्रदेश के कृषि मंत्री <strong>सूर्य प्रताप शाही</strong> ने किसानों से अपील की है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण अपनी फसलों का बीमा कराएं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से अनुरोध करके पीएम फसल बीमा योजना की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 10 अगस्त करवाया गया है। प्रदेश के सभी किसान समय रहते अपनी फसलों का बीमा करा लें।&nbsp;</p>
<p><strong>किसानों को कितना प्रीमियम देना होगा</strong></p>
<p>शाही ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से मौसम में अस्थिरता देखी जा रही है, जिससे उत्पादकता और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इससे निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश पर केंद्र सरकार द्वारा किसानों की फसलों का बीमा कराया जाता है। खरीफ की फसलों के लिए किसानों को केवल दो प्रतिशत और रबी की फसलों के लिए 1.50 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा, बाकी प्रीमियम राज्य और केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">प्रिय किसान भाइयों, आपकी सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मा कृषि मंत्री श्री <a href="https://twitter.com/spshahibjp?ref_src=twsrc%5Etfw">@spshahibjp</a> जी द्वारा केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री <a href="https://twitter.com/ChouhanShivraj?ref_src=twsrc%5Etfw">@ChouhanShivraj</a> जी से अनुरोध करके फसल बीमा की अंतिम तिथि जो की 31 जुलाई थी उसे बढ़ाकर 10 अगस्त करवाया गया है<a href="https://twitter.com/BaldevAulakh?ref_src=twsrc%5Etfw">@BaldevAulakh</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/UPCM?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#UPCM</a> <a href="https://t.co/Nak3YKk7MN">pic.twitter.com/Nak3YKk7MN</a></p>
&mdash; Krishi Vibhag Gov UP (@jdabureau) <a href="https://twitter.com/jdabureau/status/1818966762593161311?ref_src=twsrc%5Etfw">August 1, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p><strong>'2.6 करोड़ किसान, सिर्फ 25 लाख कराते हैं बीमा'</strong></p>
<p>शाही ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 2.6 करोड़ किसान हैं, लेकिन उनमें से केवल 22 से 25 लाख किसान ही अपनी फसलों का बीमा कराते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे वर्तमान मौसम को देखते हुए तुरंत अपनी फसलों का बीमा कराएं। फसल की सुरक्षा के लिए किसान अपनी फसलों का बीमा नजदीकी बैंक में जाकर करा सकते हैं। किसी भी तरह के नुकसान की स्थिति में किसानों को 25 से 50 प्रतिशत तक के नुकसान की भरपाई की जाएगी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में फसल बीमा कराने की आखिरी तारीख 10 अगस्त तक बढ़ी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सेब पर मौसम की मार, पहले सूखा, अब बारिश का कहर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/apple-crop-damaged-due-to-heavy-rain-and-storm-in-shimla-production-may-decrease.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 01 Aug 2024 18:11:43 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/apple-crop-damaged-due-to-heavy-rain-and-storm-in-shimla-production-may-decrease.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश में सेब की फसल पर मौसम की मार पड़ रही है। प्रदेश में हो रही भारी बारिश ने सेब की फसल को नुकसान पहुंचाया है। पहले ही भीषण गर्मी और सूखे की समस्या से जूझ रहे बागवान अब मानसून की बारिश से परेशान हैं। शिमला जिले के प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों में बुधवार को आई बारिश और तूफान से सेब की फसल को भारी नुकसान हुआ है। ऊपरी शिमला के जुब्बल, रोहड़ू, कोटखाई, चौपाल, रामपुर, ठियोग समेत कई क्षेत्रों में तेज तूफान के चलते सेब झड़ गए और टहनियां टूट गईं। इससे बागवानों पर दोहरी मार पड़ी है। कई स्थानों पर तो सेब के पेड़ ही गिर गए हैं।</p>
<p>हिमाचल प्रदेश सब्जी और फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष <strong>हरीश चौहान</strong> ने <strong>रूरल वॉयस </strong>को बताया कि शिमला जिले के कई क्षेत्रों में तूफान के कारण बगीचों में पौधे उखड़ गए हैं और हेलनेट भी पूरी तरह से टूट गए हैं। उन्होंने कहा कि इस तूफान ने सेब की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। अधिकतर बगीचों में फल गिरने से बागवान चिंतित हैं और खेत में सेब के ढेर लग गए हैं। उन्होंने कहा कि बागवान पहले ही भीषण गर्मी और सूखे की मार झेल रहे थे, और अब इस तूफान ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है।&nbsp;</p>
<p>हरीश चौहान ने कहा कि बागवानों को हर तरफ से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पहले, समय पर बारिश न होने के कारण सेब के आकार और रंग पर असर पड़ा। फिर, रोहडू, कोटखाई, जुब्बल और ठियोग में 70 से 80 फीसदी पौधों में अल्टरनेरिया लगने से सेब पर भूरे और काले दाग पड़ने लगे। इसके चलते फल समय से पहले गिरने लगे, और अब भारी बारिश ने बागवानों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।</p>
<p>हरीश चौहान ने कहा कि पिछले सीजन में भी बागवानों को फसल का उचित दाम नहीं मिल पाया था। उस दौरान औसतन 1400 से 1500 रुपये (प्रति बॉक्स) के बीच किसानों का सेब बिका था। साथ ही, ईरान और तुर्की जैसे देशों से आयात होने वाले सेब ने भी प्रदेश की बागवानी पर असर डाला है, जिससे बागवानों को अपनी फसल घाटे में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने प्रदेश सरकार से&nbsp;बागवानों को हुए नुकसान का आकलन कर उन्हें मुआवजा दिए जाने की मांग उठाई है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सेब पर मौसम की मार, पहले सूखा, अब बारिश का कहर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में मूंग खरीद की तारीख 5 अगस्त तक बढ़ी, मुख्यमंत्री का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/moong-procurement-date-extended-in-madhya-pradesh-farmers-will-be-able-to-sell-the-produce-till-5th-august-2024.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 31 Jul 2024 19:29:39 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/moong-procurement-date-extended-in-madhya-pradesh-farmers-will-be-able-to-sell-the-produce-till-5th-august-2024.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश के मूंग किसानों के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश में मूंग की खरीद 5 अगस्त, 2024 तक जारी रहेगी। समय से पहले मूंग खरीद बंद होने से गुस्साए किसानों की मांगों पर गौर करते हुए सरकार ने खरीद की तारीख बढ़ा दी है। अब किसान 5 अगस्त तक अपनी उपज बेच पाएंगे। किसानों को एक दिन स्&zwj;लाट बुकिंग के लिए दिया गया है। 1 अगस्त को स्&zwj;लाट बुकिंग होगी और अगले चार दिन किसानों से खरीद की जाएगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया इस बात का ऐलान किया।&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "प्रदेश सरकार के लिए किसान हित सर्वोपरि है। प्रदेश के किसान भाइयों की मांग को ध्यान में रखते हुए तिथि में संशोधन किया है। ग्रीष्&zwj;मकालीन मूंग के लिए उपार्जन की तिथि 31 जुलाई तक निर्धारित थी, लेकिन किसानों के हित में निर्णय लिया है कि अब उपार्जन संबंधी समस्&zwj;त जिलों में एक दिनकिसानों को स्&zwj;लाट बुकिंग करने के लिए दिया जा रहा है, जिससे 5 अगस्त तक मूंग का विक्रय किया जा सकेगा। संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि समय सीमा को ध्यान में रखते हुए यह भी ध्यान देना है कि वर्षाकाल होने से किसानों को कोई असुविधा न हो।"&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">प्रदेश सरकार के लिए किसान हित सर्वोपरि है।<br /><br />प्रदेश के किसान भाइयों की मांग को ध्यान में रखते हुए तिथि में संशोधन किया है। <br /><br />ग्रीष्&zwj;मकालीन मूंग के लिए उपार्जन की तिथि 31 जुलाई तक निर्धारित थी, लेकिन किसानों के हित में निर्णय लिया है कि अब उपार्जन संबंधी समस्&zwj;त जिलों में एक दिन आप&hellip;</p>
&mdash; Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) <a href="https://twitter.com/DrMohanYadav51/status/1818593373843800104?ref_src=twsrc%5Etfw">July 31, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p><br />प्रदेश में मूंग खरीद की प्रक्रिया शुरुआत से ही सवालों के घेरे में थी। खासकर प्रति हेक्टेयर और प्रति दिन मूंग बेचने की लिमिट को लेकर किसान काफी परेशान हुए। पहले प्रति हेक्टेयर 8 क्विंटल की सीमा थी, जिसे बाद में 12 क्विंटल किया गया। इसी प्रकार, प्रति दिन अधिकतम 25 क्विंटल मूंग बेचने की सीमा बढ़ाकर 40 क्विंटल कर दी गई। इस दौरान, सॉफ्टवेयर में आई गड़बड़ी के कारण किसानों को स्लॉट बुकिंग में भी मुश्किलें आईं। वहीं, समय से पहले खरीद बंद होने की वजह से नाराज किसान सड़कों पर उतर आए थे। किसानों ने विरोध-प्रदर्शन कर सरकार को आंदोलन की चेतावनी दी थी। &nbsp;</p>
<p>मध्य प्रदेश में किसानों को मूंग खरीद में आ रही दिक्कतों को <strong>रूरल वायस</strong> ने शुरुआत से ही प्रमुखता से प्रकाशित किया है। रूरल वायस ने किसानों की मांगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया, जिसका असर भी दिखा। किसानों के हित में प्रदेश सरकार को प्रति हेक्टेयर और प्रति दिन मूंग बेचने की सीमाएं बढ़ानी पड़ीं। इसके अलावा, अब सरकार ने मूंग खरीद की तारीख भी बढ़ा दी है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:<span>&nbsp;</span></strong><a href="https://www.ruralvoice.in/national/farmers-are-not-getting-the-benefit-of-increase-in-msp-of-moong-in-madhya-pradesh-and-punjab.html"><strong>किसानों को नहीं मिल रहा मूंग की एमएसपी में बढ़ोतरी का फायदा&nbsp;</strong></a></p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong><a href="https://www.ruralvoice.in/states/congress-raised-the-issue-of-not-purchasing-the-entire-moong-crop-in-madhya-pradesh.html"><strong>&nbsp;मध्य प्रदेश सरकार ने मूंग की प्रति हेक्टयर खरीद दर घटाई, दाम एमएसपी से कम</strong></a></p>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.ruralvoice.in/states/daily-procurement-of-moong-and-urad-in-madhya-pradesh-has-now-been-increased-from-25-quintals-to-40-quintals.html">मध्य प्रदेश में मूंग खरीद में छूट, अब एक दिन में 40 क्विंटल मूंग बेच पाएंगे किसान</a></strong></p>
<p><strong>ये भी पढ़ें: </strong><a href="https://www.ruralvoice.in/states/per-hectare-moong-procurement-in-madhya-pradesh-will-increase-from-8-quintals-to-12-quintals.html"><strong>मध्य प्रदेश में मूंग किसानों को मिलेगी राहत! खरीद लिमिट 8 से बढ़कर 12 क्विंटल होगी</strong></a></p>
<p><strong>ये भी पढ़ें: </strong><a href="https://www.ruralvoice.in/national/there-is-confusion-among-farmers-regarding-moong-procurement-in-madhya-pradesh.html"><strong>मध्य प्रदेश में मूंग खरीद को लेकर असमंजस की स्थिति</strong></a></p>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.ruralvoice.in/states/mung-procurement-stopped-before-time-in-madhya-pradesh-angry-farmers-blocked-the-roads.html">मध्य प्रदेश में समय से पहले मूंग खरीद बंद, नाराज किसानों ने किया चक्का जाम</a></strong></p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong> <a href="https://www.ruralvoice.in/states/claim-to-buy-100-percent-tur-urad-and-masur-from-farmers-but-farmers-are-worried-about-buying-moong.html"><strong>किसानों से शत-प्रतिशत खरीद का दावा, लेकिन मूंग खरीद बंद होने से किसान परेशान</strong></a></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667d5e2427782.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में मूंग खरीद की तारीख 5 अगस्त तक बढ़ी, मुख्यमंत्री का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मुंबई में भी 60 रुपये में टमाटर की बिक्री शुरू, इन स्थानों से खरीदें उपभोक्ता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sale-of-tomatoes-in-mumbai-started-at-the-rate-of-60-rupees-per-kg-buy-from-these-places.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 31 Jul 2024 12:47:05 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sale-of-tomatoes-in-mumbai-started-at-the-rate-of-60-rupees-per-kg-buy-from-these-places.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दिल्ली-एनसीआर के बाद मुंबई में भी भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) ने रियायती दरों पर टमाटर की बिक्री शुरू कर दी है। बुधवार से मुंबई के चार स्थानों पर उपभोक्ताओं को 60 रुपये प्रति किलोग्राम के दर पर टमाटर उपलब्ध कराए जाएंगे। ये स्थान हैं एनसीसीएफ ऑफिस, सिऑन सर्कल, वर्ली नाका, और अशोकवन बोरीवली ईस्ट।</p>
<p>एनसीसीएफ ने इस पहल को 'टमाटर मेगा सेल' नाम दिया है, जिसका उद्देश्य टमाटर की बढ़ती कीमतों से उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करना है। फिलहाल, प्रत्येक व्यक्ति को केवल 1 किलो टमाटर ही उपलब्ध कराया जाएगा। एनसीसीएफ का कहना है कि यह बिक्री तब तक जारी रहेगी जब तक बाजार में टमाटर की कीमतें कम नहीं हो जातीं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr">Tomorrow Wednesday (31/07/2024) point of sale &amp; Mobile Van locations.<a href="https://twitter.com/hashtag/Vanlocatons?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Vanlocatons</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Pointofsale?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Pointofsale</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Sale?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Sale</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Retailoutlet?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Retailoutlet</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Tomato?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Tomato</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Mumbai?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Mumbai</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Maharastra?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Maharastra</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/nccf?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#nccf</a> <a href="https://t.co/WlBllnAEoY">pic.twitter.com/WlBllnAEoY</a></p>
&mdash; NCCF of India Limited (@Nccf_India) <a href="https://twitter.com/Nccf_India/status/1818337909013201370?ref_src=twsrc%5Etfw">July 30, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p><strong>टमाटर का भाव 100 रुपये के पार&nbsp;</strong></p>
<p>देशभर में बारिश के कारण टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे सप्लाई में कमी और कीमतों में तेज उछाल आया है। वर्तमान में टमाटर की औसत खुदरा कीमतें 80 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच हैं, जबकि एक महीने पहले यह 40 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा था। दिल्ली-एनसीआर, मुबई समेत देश के कई शहरो में टमाटर का भाव 100 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर पहुंच गया है।</p>
<p><strong>जल्द अन्य शहरों में भी शुरू होगी बिक्री</strong></p>
<p>पिछले साल भी टमाटर की कीमतें 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थीं, जिसके बाद सरकार को हस्तक्षेप कर सस्ते दरों पर टमाटर उपलब्ध कराना पड़ा था। फिलहाल दिल्ली-एनसीआर और मुंबई के इलाकों में रियायती दरों पर टमाटर की बिक्री शुरू की गई है। एनसीसीएफ आने वाले दिनों में देश के अन्य हिस्सों में भी टमाटर की बिक्री शुरू करेने की योजना बना रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>दिल्ली में इन स्थानों पर मिल रहा सस्ता टमाटर</strong></p>
<p>मुंबई के अलावा, एनसीसीएफ ने पहले दिल्ली-एनसीआर में भी इसी प्रकार की रियायती दरों पर टमाटर की बिक्री शुरू की थी। दिल्ली-एनसीआर में यह बिक्री एनसीसीएफ के रिटेल स्टोर्स और मोबाइल वैन के माध्यम से की जा रही है। इनमें राजीव चौक, पटेल चौक मेट्रो स्टेशन और नेहरू प्लेस शामिल हैं। जबकि मोबाइल वैन ने जरिए कृषि भवन, सीजीओ कॉम्प्लेक्स, लोधी कॉलोनी, और अन्य प्रमुख इलाकों में सस्ते टमाटर उपलब्ध कराया जा रहा है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a9e46da16ab.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मुंबई में भी 60 रुपये में टमाटर की बिक्री शुरू, इन स्थानों से खरीदें उपभोक्ता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a9e46da16ab.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तेलंगाना में &amp;apos;किसान कर्ज माफी योजना&amp;apos; के दूसरे चरण की शुरुआत, 6.40 लाख किसानों को मिलेगा फायदा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/second-phase-of-crop-loan-waiver-scheme-launched-in-telangana-cm-revanth-reddy-releases-6198-crore-rupees.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 30 Jul 2024 17:05:41 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/second-phase-of-crop-loan-waiver-scheme-launched-in-telangana-cm-revanth-reddy-releases-6198-crore-rupees.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>तेलंगाना में किसानों की आर्थिक सहायता के लिए<strong> 'फसल ऋण माफी योजना'</strong> के दूसरे चरण की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने सोमवार को इस योजना के तहत 6,198 करोड़ रुपये की राशि जारी करने की घोषणा की। जिससे 6.40 लाख किसान परिवारों को लाभ मिलेगा। योजना के दूसरे चरण में 1.50 लाख रुपये तक के कृषि ऋण माफ किए जाएंगे, जबकि पहले चरण में एक लाख रुपये तक के कृषि ऋण माफ किए गए थे।</p>
<p><strong>अगस्त में होगी तीसरे चरण की शुरुआत</strong></p>
<p>रेवंत रेड्डी ने इस मौके पर कहा कि कांग्रेस ने 2022 में किसानों की मदद के लिए दो लाख रुपये तक के कर्ज माफ करने का वादा किया था, जिसे अब पूरा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 18 जुलाई को पहले चरण में 11,34,412 किसानों के खातों में 6,034.96 करोड़ रुपए भेज गए थे। आज दूसरे चरण में 6,40,223 किसानों के खातों में 6190.01 करोड़ रुपए की राशि भेजी गई है। उन्होंने कहा कि अगस्त में तीसरे चरण के तहत 17.75 लाख किसानों के खातों में 12,224 करोड़ रुपये की राशि जमा की जाएगी। जिसके साथ ही दो लाख रुपये तक के कर्ज माफी का वादा पूरा हो जाएगा।&nbsp; &nbsp;</p>
<p><strong>18 लाख किसानों का कर्ज किया माफ</strong></p>
<p>रेवंत रेड्डी ने पिछली बीआरएस सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपने 10 साल के शासन में 25,000 करोड़ रुपये के कर्ज माफी के वादे को पूरा करने में असफल रही। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने 18 लाख किसानों के 1.50 लाख रुपये तक के कर्ज माफ करके अपनी ईमानदारी साबित की है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी सरकार ने पिछली बीआरएस सरकार द्वारा लिए गए ऋणों पर छह महीने में 43,000 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में भुगतान किया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="te" dir="ltr">స్వతంత్ర భారత చరిత్రలో ఇప్పటి వరకు ఏ రాష్ట్రం తలపెట్టలేనంత పెద్ద మొత్తంలో రైతులకు రుణమాఫీ చేస్తూ తెలంగాణ ప్రజాప్రభుత్వం రికార్డు నెలకొల్పిందని ముఖ్యమంత్రి <a href="https://twitter.com/revanth_anumula?ref_src=twsrc%5Etfw">@revanth_anumula</a> గారు అన్నారు.<br /><br />తొలి రెండు విడతల్లో రూ.1.50లక్షల లోపు రుణాల మాఫీ కింద లక్షల మంది రైతుల ఖాతాల్లోకి రూ.12,224&hellip; <a href="https://t.co/sHAzAF0UTc">pic.twitter.com/sHAzAF0UTc</a></p>
&mdash; Telangana CMO (@TelanganaCMO) <a href="https://twitter.com/TelanganaCMO/status/1818207362123006116?ref_src=twsrc%5Etfw">July 30, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि तेलंगाना में कांग्रेस सरकार ने 31 हजार करोड़ रुपये की कर्ज माफी लागू करके देश में एक नया रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने कहा कि जब कॉरपोरेट लोन माफ किया जा सकता है, तो कृषि ऋण क्यों नहीं। सरकार किसानों के ऋण का&nbsp;एकमुश्त निपटान कर रही है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a8cb1842df8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ तेलंगाना में 'किसान कर्ज माफी योजना' के दूसरे चरण की शुरुआत, 6.40 लाख किसानों को मिलेगा फायदा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बिहार में कृषि उत्पाद के लिए गोदाम निर्माण पर मिलेगा 10 लाख तक का अनुदान, 1 अगस्त से करें आवेदन ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/godam-nirman-yojana-2024-in-bihar-grant-up-to-10-lakhs-will-be-given-apply-from-1st-august.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 30 Jul 2024 14:54:08 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/godam-nirman-yojana-2024-in-bihar-grant-up-to-10-lakhs-will-be-given-apply-from-1st-august.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बिहार कृषि विभाग ने कृषि उत्पाद भंडारण के लिए गोदाम निर्माण पर किसानों को अनुदान देने का फैसला लिया है। इसके लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत <strong>गोदाम निर्माण योजना 2024-25</strong> की शुरुआत की गई है। जिसका उद्देश्य किसानों को कृषि उत्पादों को बेहतर तरीके से संचित करने के लिए आवश्यक सुविधाएं प्रदान करना है। योजना के लिए किसान 1 अगस्त, 2024 से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त तय की गई है। इसके बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।</p>
<p><strong>ऑनलाइन लॉटरी से होगा चयन&nbsp;</strong></p>
<p>कृषि विभाग ने योजना के तहत कुल 154 गोदाम बनाए जाने का लक्ष्य रखा है। इसमें 100 मीट्रिक टन के 108 और 200 मीट्रिक टन के 46 गोदाम बनाए जाएंगे। योजना के लिए लाभथियों का चयन 16 सितंबर, 2024 को ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। चयनित लाभार्थियों को 18 सितंबर, 2024 तक अपना पंजीकरण पूरा करना होगा।&nbsp;अगर कोई किसान पंजीकरण में अयोग्य पाया गया, तो प्रतीक्षा सूची से अगले किसान को चुना जाएगा।</p>
<p><strong>कितना मिलेगा अनुदान&nbsp;</strong></p>
<p>100 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम की अनुमानित लागत 14 लाख 20 हजार रुपये है। सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों को इस पर 5 लाख 50 हजार रुपये या लागत का 40 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। अनुसूचित जाति/जनजाति के लाभार्थियों के लिए यह अनुदान 7 लाख रुपये या लागत का 50 प्रतिशत होगा। वहीं, 200 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम की अनुमानित लागत 20 लाख 25 हजार रुपये है। सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों को 8 लाख रुपये या लागत का 40 प्रतिशत अनुदान मिलेगा, जबकि अनुसूचित जाति/जनजाति के लाभार्थियों को 10 लाख रुपये या लागत का 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा।</p>
<p><strong>कैसे करें आवेदन&nbsp;</strong></p>
<p>किसान आवेदन के लिए डीबीटी पोर्टल <strong><a href="https://dbtagriculture.bihar.gov.in/">dbtagriculture.bihar.gov.in</a></strong> पर जाकर "गोदाम निर्माण हेतु आवेदन, वर्ष 2024-25" लिंक पर क्लिक कर सकते हैं। ध्यान दें कि पहले इस योजना का लाभ उठा चुके किसान इस बार आवेदन नहीं कर पाएंगे।&nbsp;योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं या कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बिहार में कृषि उत्पाद के लिए गोदाम निर्माण पर मिलेगा 10 लाख तक का अनुदान, 1 अगस्त से करें आवेदन  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा&amp;#45;पंजाब में घटिया कीटनाशकों के खिलाफ छापेमारी, बठिंडा में बड़ी खेप पकड़ी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/raids-against-substandard-pesticides-in-haryana-punjab-huge-consignment-seized-in-bathinda.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 30 Jul 2024 12:14:04 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/raids-against-substandard-pesticides-in-haryana-punjab-huge-consignment-seized-in-bathinda.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा-पंजाब में अमानक और घटिया कीटनाशकों का व्यापार धड़ल्ले से चल रहा है। सरकारी अभियान और कार्रवाई के बावजूद, घटिया कीटनाशकों की बिक्री के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। सोमवार को पंजाब के मानसा जिले के झंडूके गांव में कृषि विभाग ने विशेष अभियान के तहत&nbsp;एक बीज की दुकान पर छापेमारी की। जहां 8.82 क्विंटल पाउडर और 29 लीटर तरल कीटनाशक जब्त किए गए, जिनकी कीमत 6 लाख रुपये से अधिक है।</p>
<p>पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री <strong>गुरमीत सिंह खुड्डियां </strong>ने बताया कि गुणवत्ता नियंत्रण अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है। इसके अलावा, विभिन्न कीटनाशकों के छह नमूने भी लिए गए हैं। कृषि मंत्री ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि घटिया या नकली कीटनाशकों के संबंध में कोई शिकायत मिलने पर प्राथमिकता के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।</p>
<p><strong>बिना लाइसेंस के पंजाब भेजी जा रही खेप जब्त&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>बठिंडा में भी कृषि विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कीटनाशकों की एक बड़ी खेप पकड़ी। यह खेप बिना लाइसेंस के हरियाणा से पंजाब में लाई जा रही थी। विभाग को सूचना मिली थी कि बिना लाइसेंस के कीटनाशकों की एक खेप पंजाब आ रही है, जिस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए गाड़ी को जब्त कर लिया गया। अब विभाग इन नकली कीटनाशकों की सप्लाई करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।</p>
<p>पंजाब में घटिया कीटनाशकों के व्यापार को रोकने के लिए कृषि विभाग ने विशेष अभियान चला रखा है। इस अभियान के तहत राज्य में जगह-जगह छापेमारी की जा रही है। हाल ही में पंजाब में दो उर्वरक कंपनियों के लाइसेंस भी रद्द कर दिए गए थे, जो राज्य में घटिया डायमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की आपूर्ति कर रही थीं।&nbsp;</p>
<p><strong>सिरसा में एक्सपायर कीटनाशक बेच रहा था व्यापारी&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>सोमवार को हरियाणा के सिरसा जिले में किसान यूनियन ने एक दुकान पर छापेमारी कर एक्सपायर कीटनाशकों की खेप पकड़ी। छापेमारी के दौरान पता चला कि एक्सपायर हो चुके कीटनाशकों पर नई लेबल लगाकर उन्हें फिर से बेचा जा रहा था। किसान यूनियन ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए सरकार से ऐसे व्यापारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यूनियन ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाई जाए, ताकि किसानों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल सकें।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">हरियाणा सिरसा दुकानदार कीटनाशक कालाबाजारी करने वाले के ऊपर किसान युनियन की रेड, दो दो साल पुरानी (एक्सपायरी डेट) दवाओं को दो बार सील करके बेच रहे थे।<a href="https://twitter.com/JPDALALBJP?ref_src=twsrc%5Etfw">@JPDALALBJP</a> <a href="https://twitter.com/cmohry?ref_src=twsrc%5Etfw">@cmohry</a> <a href="https://t.co/bz2ZMDTiON">pic.twitter.com/bz2ZMDTiON</a></p>
&mdash; ashokdanoda (@ashokdanoda) <a href="https://twitter.com/ashokdanoda/status/1818122322093490280?ref_src=twsrc%5Etfw">July 30, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a88844c4c83.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा-पंजाब में घटिया कीटनाशकों के खिलाफ छापेमारी, बठिंडा में बड़ी खेप पकड़ी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड के किसानों के उत्पाद खरीदेगी नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड, जल्द होगा एमओयू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/national-cooperative-organics-limited-will-buy-agricultural-products-from-uttarakhand-mou-will-be-signed-soon.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 29 Jul 2024 18:19:09 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/national-cooperative-organics-limited-will-buy-agricultural-products-from-uttarakhand-mou-will-be-signed-soon.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। संसद भवन में हुई मुलाकात के बाद प्रेस को जारी बयान में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि उत्तराखंड के किसानों के विशेष उत्पादों जैसे बासमती चावल, चौलाई, मिलेट्स, दालें आदि को खरीदने में सहकारिता मंत्रालय के अधीन स्थापित नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल) ने रुचि दिखाई है। इस बाबत उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद तथा एनसीओएल के बीच बैठक भी हो चुकी है।</p>
<p>कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि दोनों संस्थाओं के मध्य एक औपचारिक अनुबंध किया जाना प्रस्तावित है, जिसके बाद प्रदेश के किसानों के जैविक उत्पादों की एनसीओएल द्वारा खरीद प्रारम्भ की जाएगी। कृषि मंत्री ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसानों की आय बढ़ाने के संकल्प तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश के किसानों के जैविक उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।</p>
<p>केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नेशनल कोआपरेटिव आर्गेनिक लिमिटेड के माध्यम से उत्तराखण्ड के आर्गेनिक उत्पादों को ख़रीदने के लिए सहमति दी। बैठक के दौरान गणेश जोशी ने गृह मंत्रालय द्वारा राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थिति के दृष्टिगत वाईब्रेट वीलेज कार्यक्रम के तहत जारी की गई धनराशि के लिए गृह मंत्री का आभार भी जताया।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a78fb72e802.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड के किसानों के उत्पाद खरीदेगी नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड, जल्द होगा एमओयू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय की जमीन &amp;apos;टूरिज्म विलेज&amp;apos; को देने का विरोध, आंदोलन की चेतावनी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/controversy-over-transfer-of-land-of-palampur-agricultural-university-for-tourism-village-students-and-teachers-warned-of-agitation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 29 Jul 2024 17:55:26 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/controversy-over-transfer-of-land-of-palampur-agricultural-university-for-tourism-village-students-and-teachers-warned-of-agitation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में 'टूरिज्म विलेज' के निर्माण के लिए पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय की 112 हेक्टेयर जमीन हस्तांतरित करने के प्रस्ताव पर विवाद खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया है। छात्रों का कहना है कि जमीन हस्तांतरण का प्रस्ताव पूरी तरह अनुचित है। विश्वविद्यालय को अधिक जमीन&nbsp;आवंटित करने के बजाय सरकार मौजूदा क्षेत्र को कम करने का प्रयास कर रही है।&nbsp;</p>
<p>अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल के प्रदेश मंत्री आकाश नेगी ने इस निर्णय को किसानों, विद्यार्थियों, और शोधार्थियों के लिए अन्यायपूर्ण करार दिया है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा को पर्यटन की राजधानी बनाने का विचार तो सही है, लेकिन इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय की जमीन लेना गलत है। नेगी ने आरोप लगाया कि सरकार इस जमीन&nbsp;हस्तांतरण के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति और अन्य अधिकारियों पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने का दबाव बना रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस जमीन&nbsp;का उपयोग छात्रों के प्रायोगिक कार्यों और अनुसंधान गतिविधियों के लिए किया जाना चाहिए। इस कदम से विश्वविद्यालय के पास मौजूदा क्षेत्र कम हो जाएगा और उत्तर पश्चिमी हिमालय के लिए केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय बनने की संभावना भी समाप्त हो जाएगी। विद्यार्थियों ने जनवरी 2024 में मुख्य संसदीय सचिव, शहरी विकास एवं शिक्षा, आशीष बुटैल को एक ज्ञापन सौंपकर इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था, लेकिन अभी तक सरकार ने अपना निर्णय नहीं बदला है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने निर्णय नहीं बदला, तो इसके विरोध में छात्र आंदोलन करेंगे। जिसकी जिम्मेदार सरकार होगी।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a78941df4bb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय की जमीन 'टूरिज्म विलेज' को देने का विरोध, आंदोलन की चेतावनी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों से शत&amp;#45;प्रतिशत खरीद का दावा, लेकिन मूंग खरीद बंद होने से किसान परेशान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/claim-to-buy-100-percent-tur-urad-and-masur-from-farmers-but-farmers-are-worried-about-buying-moong.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 29 Jul 2024 12:08:41 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/claim-to-buy-100-percent-tur-urad-and-masur-from-farmers-but-farmers-are-worried-about-buying-moong.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का दावा है कि सरकार किसानों से अरहर, उड़द और मसूर की शत-प्रतिशत खरीद करेगी। किसान ये दालें जितनी भी पैदा करेंगे, सरकार पूरा खरीदेगी। इसके लिए ई-समृद्धि पोर्टल बनाया गया है, जिस पर किसानों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा और सरकार पूरी उपज खरीदेगी। शुक्रवार को राज्यसभा में भी कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भरोसा दिलाया।</p>
<p>लेकिन कृषि मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> के गृह राज्य मध्य प्रदेश में ही किसान मूंग की उपज बेचने के लिए परेशान हैं। इस साल मध्य प्रदेश में मूंग की अच्छी पैदावार हुई, लेकिन बाजार में मूंग के दाम एमएसपी से नीचे चल रहे हैं। ऐसे में किसानों की आस सरकारी खरीद पर टीकी थी। मध्य प्रदेश में मूंग की खरीद 24 जून से शुरू करने का ऐलान किया गया था। तब राज्य सरकार ने कहा था कि मूंग की खरीद <strong>31 जुलाई</strong> तक होगी। लेकिन सरकार ने अंतिम तिथि से एक सप्ताह पहले ही मूंग की खरीद बंद कर दी। इससे बहुत से किसान मूंग की तुलाई करवाने से वंचित रह गये हैं। इससे नाराज किसान खरीद दोबारा शुरू करवाने की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_66a7398702ce3.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>मध्य प्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष <strong>केदार शंकर सिरोही</strong> का कहना है कि अभी तक राज्य में मूंग के कुल उत्पादन का 17 फीसदी ही सरकार द्वारा खरीदा गया है। पहले खरीद शुरू करने में देरी हुई। फिर साफ्टवेयर में दिक्कत के कारण किसानों को रजिस्ट्रेशन, स्लॉट बुकिंग और बिलिंग में समस्याएं आईं। इस कारण तुलाई कार्य धीरे चला। सिरोही का कहना है कि मध्य प्रदेश सरकार ने कुल पंजीकृत किसानों की संख्या और पंजीकृत रकबे की जानकारी सार्वजनिक नहीं है, जिससे छूटे हुए किसानों की संख्या का अनुमान लगाना कठिन है। लेकिन प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान मूंग की तुलाई करवाने से वंचित रह गये हैं।</p>
<p><strong>मूंग खरीद में आईं कई दिक्कतें&nbsp;</strong></p>
<p>खरीद समय से पहले बंद होने के अलावा भी मध्य प्रदेश में किसानों को मूंग की तुलवाने में कई दिक्कतें आईं। शुरुआत में किसानों पर<strong> 8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर</strong> की लिमिट लगाई गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 12 क्विंटल किया गया। इसी तरह किसानेां पर प्रतिदिन अधिकतम 25 क्विंटल मूंग तुलाई की लिमिट थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रतिदिन किया गया था। इन पाबंदियों के चलते भी बहुत से किसान समय रहे अपनी पूरी मूंग की तुलाई नहीं करवा पाए। विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार से मूंग की खरीद तुरंत चालू करने और सभी किसानों से मूंग की खरीद पूरी करने की मांग की है। &nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_66a739f7934d4.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>इस साल भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने <strong>प्राइस स्टेबलाजेशन स्कीम</strong> (पीएसएस) के तहत मध्य प्रदेश में 3.30 लाख टन मूंग खरीद को मंजूरी दी थी। इसमें से 2.25 लाख टन मूंग की खरीद 21 जुलाई तक हो चुकी थी। इसे देखते हुए नेफेड ने मध्य प्रदेश सरकार की एजेंसी मार्कफेड को मूंग की खरीद बंद करने को कहा था। अब देखना है कि क्या मध्य प्रदेश में किसानों से मूंग की खरीद दोबारा शुरू हो पाती है या फिर शत-प्रतिशत खरीद का दावा मूंग के मामले में फेल हो जाएगा।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों से शत-प्रतिशत खरीद का दावा, लेकिन मूंग खरीद बंद होने से किसान परेशान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान के मुख्यमंत्री ने बाजरा खरीद को लेकर दिया आश्वासन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/cm-bhajan-lal-sharma-assures-purchase-of-bajra-at-msp-in-rajasthan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 27 Jul 2024 13:49:23 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/cm-bhajan-lal-sharma-assures-purchase-of-bajra-at-msp-in-rajasthan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान में न्यूनतम समर्थम मूल्य (एमएसपी) पर बाजरे की खरीद को लेकर राज्य सरकार विचार करेगी। यह बात राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को विधानसभा में कही। भजनलाल विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान बाजरे की खरीद पर पूछे गए प्रश्न पर स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने इस संबंध में केन्द्र सरकार को पत्र लिखा है।&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री शर्मा ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले पांच सालों में प्रदेश के किसानों के साथ धोखा हुआ और एमएसपी पर बाजरे की खरीद नहीं की गई। उन्होंने कहा कि गत सरकार के समय में बाजरे के किसानों को 1400 रुपए से 1500 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर अपनी फसल बेचने को मजबूर होना पड़ा, जबकि उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और मध्य प्रदेश के किसानों का बाजरा 2300 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा था।&nbsp;मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि वर्तमान सरकार किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है और बाजरे की पहली फसल पर ही कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने भी राज्य सरकार की किसानों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जैसे गेहूं पर बोनस, किसान सम्मान निधि, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी, और कृषि कनेक्शन जारी करना। <span>उन्होंने कहा कि लंबे समय से प्रदेश में एमएसपी पर बाजरे की खरीद नहीं की गई है, लेकिन हमारी सरकार इस पर गंभीरता&nbsp; से विचार करेगी।&nbsp;</span></p>
<p>मंत्री सुमित गोदारा ने बताया कि 2022-23 में प्रदेश में 59.18 लाख टन और 2023-24 में 43.82 लाख टन बाजरे का उत्पादन हुआ, लेकिन एमएसपी पर बाजरे की खरीद का लक्ष्य निर्धारित नहीं होने के कारण खरीद नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में आने वाली खरीफ फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद का लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान के मुख्यमंत्री ने बाजरा खरीद को लेकर दिया आश्वासन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बिहार में सिंचाई के लिए सब्सिडी पर मिलेगा डीजल, 30 अक्टूबर तक करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/diesel-subsidy-scheme-for-irrigation-equipment-in-bihar-started-apply-till-30th-october-2024.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 27 Jul 2024 12:14:55 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/diesel-subsidy-scheme-for-irrigation-equipment-in-bihar-started-apply-till-30th-october-2024.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बिहार में बारिश की कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने खरीफ सीजन के लिए डीजल अनुदान योजना शुरू कर दी है। इस योजना के तहत किसानों को सिंचाई के लिए सब्सिडी पर डीजल मिलेगा। योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया 26 जुलाई से शुरू हो चुकी है। किसान 30 अक्टूबर तक आवेदन कर सकते हैं। योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को बिहार कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाकर आवेदन करना होगा।&nbsp;</p>
<p>एक एकड़ जमीन की सिंचाई के लिए औसतन 10 लीटर डीजल की जरूरत होती है। खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को प्रति एकड़-प्रति सिंचाई 750 रुपये की दर से अनुदान दिया जाएगा। वहीं, धान और जूट की फसल की दो बार सिंचाई के लिए 1500 रुपये प्रति एकड़ मिलेंगे। इसी तरह, अन्य खरीफ फसलों के लिए तीन बार सिंचाई पर 2250 रुपये प्रति एकड़ दिए जाएंगे।</p>
<p>अधिकतम 8 एकड़ तक के लिए किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। यह लाभ परिवार के एक ही सदस्य को मिलेगा। रैयत और गैर-रैयत दोनों तरह के किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। रैयत किसानों को आवेदन के समय लगान रसीद अपलोड करनी होगी। जबकि गैर-रैयत किसानों की पहचान संबंधित वार्ड सदस्य, वार्ड पार्षद, मुखिया, सरपंच, या पंचायत समिति के सदस्य और कृषि समन्वयक द्वारा की जाएगी।</p>
<p>डीजल का उपयोग केवल सिंचाई के लिए होना चाहिए और इसकी जांच कृषि समन्वयक करेंगे। अधिकृत पेट्रोल पंप से खरीदे गए डीजल की डिजिटल पावती रसीद मान्य होगी, जिसमें किसान का 13 अंकों का पंजीकरण संख्या का अंतिम दस अंक अंकित होना चाहिए। राज्य के बाहर के पेट्रोल पंप से खरीदे गए डीजल पर सब्सिडी नहीं मिलेगी।</p>
<p>यह योजना केवल ऑनलाइन पंजीकृत किसानों के लिए है। आवेदन में किसी त्रुटि के कारण अस्वीकृत होने पर किसान दोबारा आवेदन कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए किसान कृषि विभाग, बिहार सरकार की वेबसाइट<a href="https://dbtagriculture.bihar.gov.in"><strong> https://dbtagriculture.bihar.gov.in</strong></a> पर जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<p>बिहार के कृषि मंत्री <strong>मंगल पाण्डेय</strong> ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण जलवायु में हो रहे निरंतर परिवर्तन से राज्य की खेती प्रभावित हो रही है। इस साल सामान्य बारिश की उम्मीद थी, लेकिन अब तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, जिससे किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए, मुख्यमंत्री ने किसानों को सिंचाई सुविधा प्रदान करने के लिए डीजल अनुदान योजना शुरू करने का निर्देश दिया है। इस योजना के तहत, किसानों द्वारा खरीदे गए डीजल की राशि उन्हें सब्सिडी के रूप में वापस की जाएगी। यह सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी, जिससे उन्हें तत्काल राहत मिलेगी।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a499862fa88.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बिहार में सिंचाई के लिए सब्सिडी पर मिलेगा डीजल, 30 अक्टूबर तक करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में समय से पहले मूंग खरीद बंद, नाराज किसानों ने किया चक्का जाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/mung-procurement-stopped-before-time-in-madhya-pradesh-angry-farmers-blocked-the-roads.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 26 Jul 2024 18:14:10 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/mung-procurement-stopped-before-time-in-madhya-pradesh-angry-farmers-blocked-the-roads.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में मूंग खरीद का मुद्दा अब सड़कों पर आ गया है। समय से पहले ही खरीद बंद होने से नाराज किसान विरोध-प्रदर्शन पर उतर आए। मध्य प्रदेश कृषि विभाग ने 23 जुलाई को कहा था कि प्रदेश में मूंग की खरीद जारी रहेगी। लेकिन मूंग की खरीद अचानक बंद कर दी गई। जिससे बहुत से किसान मूंग बेचने से रह गये हैं। गुस्साए किसानों ने शुक्रवार को देवास जिले के संदलपुर फाटा, खातेगांव में चक्का जाम कर दिया। किसानों ने खरीद केंद्र के बाहर अपने ट्रैक्टर खड़े किए और बारिश में ही धरने पर बैठ गए। प्रदेश के अन्य जिलों से भी मूंग की खरीद बंद होने को लेकर किसान विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>मध्य प्रदेश में मूंग खरीद को लेकर यह हाल तब है जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों से शत-प्रतिशत दलहन खरीद का दावा कर रहे हैं। शुक्रवार को राज्यसभा में बजट पर चर्चा के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में अधिकतम एमएसपी पर फसलों की खरीद हुई है। इस साल भी सरकार किसानों से उनकी पूरी उपज खरीदेगी।&nbsp;</p>
<p>मध्य प्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष<strong> केदार शंकर सिरोही</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि प्रदेश में सभी जगह मूंग की खरीद बंद कर दी गई है। क्योंकि भारत सरकार द्वारा निर्धारित 3.30 लाख टन ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद का लक्ष्य पूरा चुका है। जबकि किसानों को अनुमान था कि मूंग की खरीद 31 जुलाई तक जारी रहेगी। इस तरह समय से पहले ही मूंग की खरीद बंद होने से किसान नाराज हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>सिरोही का कहना है कि अभी तक मध्यप्रदेश में मूंग की कुल पैदावार का सिर्फ 17 प्रतिशत हिस्सा ही सरकार ने खरीदा है। प्रदेश में अभी भी बहुत से किसान हैं जो अपनी मूंंग की उपज नहीं बेच पाए। क्योंकि खरीद की शुरुआत में प्रति हेक्टेयर 8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की लिमिट तय थी जिसे बाद में बढ़ाकर 12 हेक्टेयर किया गया। किसानों पर प्रति दिन अधिकतम 25 क्विंटल मूंग बेचने की लिमिट भी लागू थी जो बाद में 40 क्विंटल की गई। इस दौरान सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के चलते भी किसानों को स्लॉट बुक करवाने में दिक्कतें आई।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_66a3a7fb0acce.jpg" alt="" /></p>
<p>मूंग खरीद की शुरुआत में सरकार की तरफ से 31 जुलाई तक खरीद की बात को प्रचारित किया गया था। लेकिन समय से पहले बंद होने से किसानों को अब मजबूरी में एमएसपी से कम भाव पर मूंंग बेचनी पड़ेगी। फिलहाल बाजार में मूंग का भाव 6500 से 8000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है। जबकि मूंग का एमएसपी 8558 रुपये प्रति क्विंटल है। इस तरह किसानों को डेढ़ से दो हजार रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ सकता है।&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a397614d59d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में समय से पहले मूंग खरीद बंद, नाराज किसानों ने किया चक्का जाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में कपास मुआवजे के 65 करोड़ जारी, कृषि यंत्रों के लिए 101 करोड़ का अनुदान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rs-65-crore-released-for-cotton-compensation-in-haryana-rs-101-crore-for-agricultural-equipments-subsidy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 26 Jul 2024 14:08:51 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rs-65-crore-released-for-cotton-compensation-in-haryana-rs-101-crore-for-agricultural-equipments-subsidy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खरीफ सीजन 2023 के दौरान कपास की फसल को हुए नुकसान की भरपाई के लिए हरियाणा सरकार ने प्रभावित किसानों को 65 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि जारी करने की घोषणा की है। इससे प्रदेश के लगभग 15,314 किसानों को मदद मिलेगी। इसके अलावा <span>101 करोड़ रुपये की राशि किसानों के खातों में कृषि यंत्रों की खरीद के लिए जमा करवाई गई है।</span></p>
<p>हरियाणा के कृषि मंत्री कंवर पाल ने बताया कि क्लस्टर-दो के सात जिलों अम्बाला, हिसार, गुरुग्राम, जीन्द, करनाल, महेन्द्रगढ़ तथा सोनीपत में कपास की फसल को पिछले साल काफी नुकसान हुआ था। प्रभावित किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए&nbsp;<strong>हरियाणा फसल सुरक्षा योजना</strong> के तहत किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है।</p>
<p><span>कृषि मंत्री ने बताया कि खरीफ 2024 के लिए कलस्टर-एक में <strong>प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना</strong> के अंतर्गत एग्रीकल्चर इंश्योरेंस बीमा कम्पनी द्वारा बीमा किया जा रहा है जबकि क्लस्टर-दो में एचडीएफसी एर्गो और क्लस्टर-तीन में रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी का चयन फसल बीमा करने के लिए किया गया है।</span></p>
<p>कृषि मंत्री ने किसानों को सलाह दी कि वे अपनी केसीसी में दर्ज फसल को बदलकर नई फसल की जानकारी बैंक शाखा को दें, ताकि सही फसल का बीमा हो सके और क्लेम राशि समय पर मिल सके। जिन किसानों ने बैंकों से फसली ऋण नहीं लिया है, वे सीएससी केंद्रों पर जाकर अपनी फसलों का बीमा करवा सकते हैं। किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की वेबसाइट <a href="https://www.pmfby.gov.in/"><strong>www.pmfby.gov.in</strong></a> पर जाकर भी अपनी फसलों का बीमा कर सकते हैं।</p>
<p><strong>कृषि यंत्रों के लिए 101 करोड़ रुपये का अनुदान&nbsp;</strong></p>
<p>कृषि मंत्री कंवर पाल ने बताया कि <span>राज्य सरकार पिछले कई वर्षों से फसल अवशेष प्रबंधन हेतु विभिन्न योजनाएं चला रही है। जिनके तहत किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। वर्तमान में 101 करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के खातों में कृषि यंत्रों की खरीद पर अनुदान के रूप में जमा करवाई गई है। </span></p>
<p><span>चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की खरीद पर अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन विभाग की वेबसाइट <strong><a href="https://agriharyana.gov.in/">https://agriharyana.gov.in</a> </strong>पर 4 अगस्त, 2024 तक आमंत्रित किये गये हैं। जो किसान इस योजना में लाभ लेना चाहते है व जल्द से जल्द विभाग की वेबसाइट पर जाकर अपना आवेदन कर सकते है।&nbsp;</span></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a3642a2cfe9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में कपास मुआवजे के 65 करोड़ जारी, कृषि यंत्रों के लिए 101 करोड़ का अनुदान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हिमाचल में एमआईएस के तहत नहीं बढ़ा सेब का समर्थन मूल्य, 12 रुपये ही रहेगा दाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/himachal-government-did-not-increase-the-support-price-of-apple-under-mis-price-will-remain-at-12-rupees-per-kg.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 25 Jul 2024 20:02:32 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/himachal-government-did-not-increase-the-support-price-of-apple-under-mis-price-will-remain-at-12-rupees-per-kg.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल सरकार ने बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) के तहत सेब के समर्थन मूल्य में कोई बढ़तरी नहीं की है। इस साल भी 12 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से एमआईएस के तहत सेब की खरीद की जाएगी। गुरुवार को हुई हिमाचल कैबिनट की बैठक में समर्थन मूल्य के प्रस्ताव पर चर्चा तो हुई, लेकिन सरकार ने इसे 12 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। सरकार ने एमआईएस के तहत सेब, किन्नू, माल्टा, संतरा और आम की खरीद 12 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से करने को मंजूरी दी है। जबकि गलगल की खरीद दर 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से होगी।</p>
<p>पिछले साल सरकार ने एमआईएस के तहत सेब के समर्थन मूल्य में डेढ़ रुपये की बढ़ोतरी की थी। जिसके बाद सरकारी एजेंसियों ने बागवानों से 12 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से सेब खरीदा था। सेब सीजन को देखते हुए बागवानों को इस साल भी उम्मीद थी की सेब के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की जाएगी, लेकिन बागवानों को फिलहाल निराशा ही हाथ लगी है। &nbsp;</p>
<p>एमआईएस के तहत सरकार "सी या डी ग्रेड" का सेब बागवानों से खरीदती है। यह वह सेब होता है, जो बाजार में नहीं बिकता। क्योंकि, आढ़ती या तो इसके बड़े कम दाम देते हैं, या खरीदने से इनकार कर देते हैं। लिहाजा बागवानों को नुकसान ने बचाने के लिए सरकारी एजेंसियों के माध्यम से "सी या डी ग्रेड" का सेब खरीदा जाता है। जिसका इस्तेमाल जैम, जूस, फ्रूट वाइन, फ्रूट कॉन्सन्ट्रेट समेत कई अन्य चीजों को बनाने में होता है। प्रदेश में हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम लिमिटेड (एचपीएमसी) और हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी विपणन एवं उपभोक्ता संघ लिमिटेड (हिमफेड) यह खरीद करते हैं।&nbsp;</p>
<p>हिमाचल प्रदेश फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष <strong>हरीश चौहान</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि प्रदेश में इस साल कम बारिश और बीमारियों के चलते सेब का उत्पादन प्रभावित हुआ है। पहले ज्यादा गर्मी पड़ने से सेब की ड्रॉपिंग बढ़ी, फिर बारिश नहीं होने से सेब के आकार और रंग पर असर पड़ा। वहीं, अब फंगल बीमारियों के चलते सेब की फसल खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि सेब पर प्रति किलोग्राम लागत 30 रुपये आती है। जबकि, सरकार एमआईएस के तहत 12 रुपये प्रति किलो में बागवानों से सेब खरीदती है।</p>
<p>चौहान ने कहा कि बागवान लंबे समय से समर्थन मूल्य को 20 से 25 रुपये करने की मांग कर रहे हैं, ताकि वह अपनी लागत निकाल सकें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने भी वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में एमआईएस के लिए कोई प्रावधान नहीं किया है। वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में एमआईएस के लिए 1500 करोड़ रुपये रखे गए थे। जिसे 2023-24 में घटाकर मात्र 1 लाख रुपये कर दिया गया था। जबकि, इस साल बजट में इसका कोई जिक्र नहीं है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a25d92436b3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हिमाचल में एमआईएस के तहत नहीं बढ़ा सेब का समर्थन मूल्य, 12 रुपये ही रहेगा दाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66a25d92436b3.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में सिंचाई के लिए 12 घंटे मिलेगी बिजली, यूपीपीसीएल ने जारी किया आदेश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/agricultural-feeders-will-get-electricity-for-12-hours-for-irrigation-in-up-order-issued.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 25 Jul 2024 14:54:30 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/agricultural-feeders-will-get-electricity-for-12-hours-for-irrigation-in-up-order-issued.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में किसानों को सिंचाई के लिए अब 12 घंटे बिजली मिलेगी। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने कृषि फीडरों पर 12 घंटे बिजली आपूर्ति करने के संबंध में आदेश जारी किए हैं। कम बारिश के कारण उत्पन्न हुई सूखे की स्थिति और किसानों को पेश आ रही दिक्कतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। पहले कृषि फीडरों पर 10 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही थी, जिसे अब 12 घंटे कर दिया गया है।&nbsp;</p>
<p>यूपीपीसीएल के प्रबन्ध निदेशक, <strong>पंकज कुमार</strong> ने यह आदेश जारी किया है, जो 10 अगस्त 2024 तक लागू रहेगा। आदेश में कहा गया है कि प्रदेश के कम बारिश के चलते सूखे की स्थिति बनी हुई है। कई क्षेत्रों में नहर की व्यवस्था न होने के कारण किसान सिंचाई के लिए निजी/सरकारी नलकूपों पर निर्भर रहते हैं। किसानों को सिंचाई में पेश आ रही दिक्कतों को देखते हुए विद्युत आपूर्ति की अवधि 10 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे की जा रही है। विद्युत वितरण निगम लिमेटड के प्रबन्ध निदेशक, मुख्य अभियन्ता (वितरण) व मुख्य अभियन्ता (पीएमसी) द्वारा नियमित इसकी निगरानी की जाएगी। कम बारिश वाले क्षेत्रों में वर्षा की स्थिति सामान्य होने पर निर्धारित रोस्टर के आधार पर ही विद्युत आपूर्ति की जाएगी।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_66a216187e440.jpg" alt="" /></p>
<p>प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा कि कई जिलों में इस बार कम बारिश हुई है। जिस कारण किसानों को फसलों की सिंचाई में बाधा आ रही है। किसानों को खरीफ फसलों की रोपाई सिंचाई और कृषि से जुड़े अन्य कार्यों में किसी तरह की समस्या न हो, इसे ध्यान में रखते हुए नलकूपों से सिंचाई की सुविधा हेतु कृषि फीडरों से दी जाने वाली 10 घंटे के लिए निर्धारित बिजली में बढ़ोत्तरी कर के उसे 12 घंटे कर दिया गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में सिंचाई के लिए 12 घंटे मिलेगी बिजली, यूपीपीसीएल ने जारी किया आदेश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में कृषि यंत्रों पर 50 फीसदी सब्सिडी पाने का मौका, यहां करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-agriculture-department-giving-50-percent-subsidy-on-agricultural-equipment-for-crop-residue-management.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 20 Jul 2024 12:17:18 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-agriculture-department-giving-50-percent-subsidy-on-agricultural-equipment-for-crop-residue-management.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा सरकार का कृषि विभाग किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन वाले कृषि यंत्रों पर 50 फीसदी सब्सिडी दे रहा है। किसानों को यह सब्सिडी प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फॉर इन सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेज्डयू यानी फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) योजना के तहत दी जा रही है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया <strong>17 जुलाई, 2024</strong> से शुरू हो चुकी है। किसान <strong>4 अगस्त, 2024</strong> तक इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>किसानों को यह सब्सिडी <strong>श्रुब मास्टर/रोटरी स्लेशर, सुपर सीडर, बेलिंग मशीन और स्ट्रॉ रेक</strong> पर दी जाएगी। किसान चार तरह की बेलिंग मशीन और दो तरह की स्ट्रॉ रेक पर सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं। इनमें मिनी बेलर (16 किलोग्राम), मीडियम बेलर (16-25 किलोग्राम), बड़ा गोल बेलर (180-200 किलोग्राम), बड़ा आयताकार बेलर (18-20 किलोग्राम), छोटी और बड़ी स्ट्रॉ रेक शामिल हैं। एक किसान अधिकतम चार प्रकार की मशीनों (बेलिंग यूनिट की 3 मशीनें और कोई अन्य मशीन) पर सब्सिडी का लाभ ले सकता है।&nbsp;</p>
<p>योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को कृषि विभाग की आधिकारी वेबसाइट<strong><a href="https://agriharyana.gov.in/"> https://agriharyana.gov.in/</a> </strong>पर पंजीकरण करना होगा। पंजीकरण के लिए सबसे पहले विभाग की वेबसाइट पर जाएं और फार्मर कॉर्नर के विकल्प पर क्लिक करें। ऐसा करते ही एक नया पेज खुलेगा, जहां आपको फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) के तहत कृषि मशीनरी और उपकरण के लिए आवेदन-वित्तीय वर्ष 2024-25 का विकल्प मिलेगा। इस पर क्लिक करते ही पंजीकरण (क्लिक फॉर रजिस्ट्रेशन) का विकल्प दिखेगा, जहां किसान अपना पंजीकरण कर पाएंगे।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_669a0a1973222.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में कृषि यंत्रों पर 50 फीसदी सब्सिडी पाने का मौका, यहां करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हिमाचल में मानसून पर लगा ब्रेक! अब तक 32 फीसदी कम बारिश, खेती&amp;#45;बागवानी प्रभावित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/agriculture-and-horticulture-affected-due-to-less-monsoon-rain-in-himachal-32-percent-less-rain-so-far.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 19 Jul 2024 17:44:28 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/agriculture-and-horticulture-affected-due-to-less-monsoon-rain-in-himachal-32-percent-less-rain-so-far.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। जिससे खेती-बागवानी के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कम बारिश होने से खरीफ की मक्का, धान समेत अन्य फसलों की बुवाई में दोरी हो रही है। साथ ही सेब की पैदावार पर भी असर पड़ा है। हिमाचल में इस बार मानसून की एंट्री भले ही समय पर हुई हो, लेकिन अभी तक प्रदेश में <strong>33 फीसदी कम बारिश</strong> हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक, हिमाचल में 19 जुलाई तक 146 मीमी बारिश होनी चाहिए थी। लेकिन अब तक प्रदेश में सिर्फ 99 फीसदी बारिश हुई है, जो सामान्य से 33 फीसदी कम है।</p>
<p>हिमाचल के सभी जिलों में अब तक की बारिश सामान्य से कम है। सबसे कम बारिश लाहौल स्पीति जिले में हुई है, जो सामान्य से 88 कम है। इसी तरह, बिलासपुर में 27 फीसदी, चंबा में 38 फीसदी, हमीरपुर में 30 फीसदी, कांगड़ा में 2 फीसदी, किन्नौर में 40 फीसदी, कुल्लू में 37 फीसदी, मंडी में 1 फीसदी, शिमला में 11 फीसदी, सिरमौर में 59 फीसदी, सोलन में 41 फीसदी और ऊना में 44 फीसदी कम बारिश हुई है।&nbsp;</p>
<p>हिमाचल प्रदेश फल, सब्जी एवं फूल उत्पादक संघ के अध्यक्ष <strong>हरीश चौहान</strong>&nbsp;ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि हिमाचल प्रदेश की आधे से ज्यादा आबादी कृषि और बागवानी पर निर्भर है। प्रदेश में फल, सब्जियों समेत कई फसलें उगाईं जाती हैं। जिसके लिए किसान बारिश के पानी पर निर्भर रहते हैं। लेकिन, समय पर बारिश नहीं होने से बागवानी और खेती दोनों प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि इस बार हिमाचल में सेब की फसल कम बारिश से प्रभावित हुई है। कम बारिश से सेब के आकार और रंग पर असर पड़ा है। वहीं, प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में खरीफ फसलों की बुवाई में भी देरी हुई है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक <strong>सुरेंद्र पॉल </strong>ने बताया कि बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओं के कमजोर पड़ने से हिमाचल में कम बारिश हो रही है। अब तक हिमाचल में जितनी भी बारिश हुई है, वह अरब सागर से आने वाली हवाओं के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि इस बार पश्चिम विक्षोभ भी ज्यादा सक्रिय नहीं है, जिस वजह से हिमाचल में कमजोर मानसून की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, बंगाल की खाड़ी अब सक्रिय हो रही है, जिससे आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जुलाई के अंत या फिर अगस्त के पहले हफ्ते तक प्रदेश में बारिश का दौर शुरू हो जाएगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हिमाचल में मानसून पर लगा ब्रेक! अब तक 32 फीसदी कम बारिश, खेती-बागवानी प्रभावित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब ने केंद्र से पराली प्रबंधन के लिए 100 फीसदी फंडिंग और बीजी&amp;#45;3 कपास बीजों को मंजूरी देने की मांग की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-demands-rs-100-crore-funding-for-stubble-management-and-approval-of-bg-3-cotton-seeds-from-centre.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 19 Jul 2024 13:23:13 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-demands-rs-100-crore-funding-for-stubble-management-and-approval-of-bg-3-cotton-seeds-from-centre.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि तथा ग्रामीण विकास मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> की राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ बैठकों के क्रम में गुरुवार को दिल्ली स्थित कृषि भवन में पंजाब के कृषि मंत्री <strong>गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong> के साथ बैठक हुई। इस दौरान पंजाब में खेती-किसानी से जुड़े को लेकर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।</p>
<p>पंजाब सरकार ने <strong>फसल अवशेष प्रबंधन योजना (सीआरएम)</strong> के लिए केंद्र सरकार से 100 फीसदी फंडिंग का अनुरोध किया है। 2018-19 में जब यह योजना शुरू हुई तो केंद्र सरकार 100 फीसदी फंडिंग करती थी। लेकिन 2023-24 में योजना के फंडिंग पैटर्न को बदलकर 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी राज्य सरकार की हिस्सेदारी कर दी। पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में पंजाब के योगदान को देखते हुए सीआरएम योजना के लिए 100 फीसदी केंद्रीय फंडिंग को फिर से बहाल करने का आग्रह किया है।&nbsp;</p>
<p>पंजाब सरकार ने केंद्र से <strong>फसल विविधिकरण योजना (सीडीपी)</strong> के तहत धान की बजाय अन्य फसलें उगाने वाले किसानों को 7000 रुपये प्रति एकड़ का प्रोत्साहन देने की मांग भी की है। पंजाब के कृषि मंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ बैठक में इन मांगों सहित कई मुद्दों पर चर्चा की। खुड्डियां ने रबी सीजन के दौरान फॉस्फेटिक उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।&nbsp;</p>
<p>कपास पर <strong>कीटों के हमलों</strong> की रोकथाम के लिए पंजाब के कृषि मंत्री ने <strong>बीजी-3 कपास</strong> बीजों के अनुसंधान में तेजी लाने और जल्द मंजूरी देने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कपास की फसल पर कीटों के हमलों, खासकर गुलाबी बॉलवर्म और सफेद मक्खी के हमले को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि मौजूदा बीजी-2 कपास के बीजों को उन्नत बीजों से बदलने की जरूरत है।&nbsp;</p>
<p>गुरमीत सिंह खुड्डियां ने <strong>राज्य कृषि सांख्यिकी प्राधिकरण (एसएएसए)</strong> को मंजूरी देने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह पहल कृषि सांख्यिकी प्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पंजाब के कृषि मंत्री ने <strong>राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) </strong>के तहत धनराशि जारी करने, बीजों को बदलने के लिए सब्सिडी सहित राज्य के कृषि से जुड़े मुद्दों से शिवराज सिंह चौहान को अवगत कराया।&nbsp;</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने कहा कि किसानों को ड्रैगन फ्रूट, कीनू आदि उगाहने सहित बागवानी एवं अन्य फसलों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि पराली की समस्या कमतर हो और किसानों की आमदनी भी बढ़ सकें। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के संबंध में केंद्रीय कृषि मंत्री ने पंजाब सरकार को पूरी मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तरह पंजाब को भी पर्याप्त खाद-बीज की आपूर्ति होती रहेगी। हम मिल-जुलकर खेती-किसानी के विकास के लिए लगातार काम करते रहेंगे। बैठक में कृषि सचिव संजीव चोपड़ा सहित वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_669a1c4f81d37.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब ने केंद्र से पराली प्रबंधन के लिए 100 फीसदी फंडिंग और बीजी-3 कपास बीजों को मंजूरी देने की मांग की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में खाद&amp;#45;बीज डीलर लाइसेंस पाने का मौका, ऐसे करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/seed-fertilizer-pesticide-dealer-license-online-apply-in-up.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 19 Jul 2024 12:39:37 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/seed-fertilizer-pesticide-dealer-license-online-apply-in-up.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में खाद-बीज और कीटनाशक का व्यापार करने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए अब डीलर लाइसेंस प्राप्त करना आसान हो गया है। वैसे तो इसके लिए ऑफलाइन आवेदन किया जा सकता है। लेकिन ऑनलाइन आवेदन कर डीलर लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं। चाहे आपको नया डीलर लाइसेंस बनवाना हो या फिर डुप्लीकेट कॉपी जारी करवानी हो, दोनों के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। ऑनलाइन लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आपको कामन सर्विस सेंटर (सीएससी), साइबर कैफे या खुद से उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट <strong><a href="https://agriculture.up.gov.in/">upagriculture. com</a> </strong>पर आवेदन करना होगा।&nbsp;</p>
<p>डीलर लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदक को <strong>बीएससी एग्रीकल्चर, बीएससी केमिस्ट्री</strong> या कम से कम <strong>एग्रीकल्चर</strong> में डिप्लोमा किया होना चाहिए। आवेदन करते समय आवेदक के पास पहचान प्रमाण (आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड आदि), &nbsp;व्यवसाय पंजीकरण प्रमाण पत्र, स्थान का पता प्रमाण (किराया समझौता, बिजली बिल, पानी बिल आदि), खाद और बीज के नमूने खाद मिक्सर, कम्पोस्ट बिन, खाद बैग जैसे उपकरणों का विवरण, लाइसेंस फीस के भुगतान का प्रमाण और कृषि प्रशिक्षण प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज होना आवश्यक है।</p>
<p>ऑनलाइन आवेदन के लिए यूपी कृषि विभाग की वेबसाइट <strong><a href="https://agriculture.up.gov.in/">upagriculture. com</a></strong> पर जाएं और जनहित गारंटी के विकल्प पर क्लिक करें। यहां आपको ऑनलाइन लाइसेंस का विक्लप दिखाई देगा। इस पर क्लिक करते ही उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ऑनलाइन लाइसेंसिंग सिस्टम की वेबसाइट खुलेगी। आप सीधा भी इस&nbsp; <strong><a href="http://agrilicense.upagriculture.com/#/">agrilicense.upagriculture.com</a></strong> वेबसाइट पर आ सकते हैं। यहां आपको "खाद-बीज लाइसेंस" के लिए आवेदन करने का विकल्प दिखाई देगा। इसके बाद आवेदन फॉर्म भरें, जिसमें आपका नाम, पता, संपर्क विवरण और व्यवसाय का विवरण शामिल होगा। आवश्यक दस्तावेजों जैसे पहचान प्रमाण, आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि को अपलोड करें। लाइसेंस फीस का भुगतान ऑनलाइन करें। फीस की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध है। आवेदन जमा करने के बाद, आपको लाइसेंस जारी होने का इंतजार करना होगा। लाइसेंस जारी होने पर आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6698bcacefb9a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में खाद-बीज डीलर लाइसेंस पाने का मौका, ऐसे करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम किसान योजना के फर्जी लिंक से सावधान, ठगी का शिकार हो सकते हैं किसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/beware-of-fake-app-links-of-pm-kisan-yojana-cyber-fraud.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 18 Jul 2024 17:20:23 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/beware-of-fake-app-links-of-pm-kisan-yojana-cyber-fraud.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश के करीब आठ करोड़ किसान <strong>प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पीएम किसान योजना)</strong> का लाभ उठा रहे हैं। इस योजना को लेकर लगातार कोई न कोई अपडेट आता रहता है। जिस वजह से किसान भी इस पर ध्यान देते हैं। लेकिन, इन दिनों सोशल मीडिया पर पीएम किसान योजना की मोबाइल एप्लिकेशन का एक लिंक खूब शेयर किया जा रहा है। लिंक पर क्लिक करने से किसान ठगी का शिकार हो सकते हैं। पुलिस ने किसानों से इस लिंक पर क्लिक न करने का कहा है। पीएम किसान योजना का लाभ उठाने के लिए किसान सिर्फ आधिकारिक वेबसाइट<strong><a href="https://pmkisan.gov.in/"> https://pmkisan.gov.in/</a></strong> का ही इस्तेमाल करें। किसान गूगल प्ले स्टोर से योजना की <strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=com.nic.project.pmkisan">मोबाइल एप्लिकेशन</a></strong> डाउनलोड कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>दरअसल, यह मामला राजस्थान के जोधपुर का है। जहां ग्रमीण अनजाने में सोशल मीडिया पर मोबाइल एप्लिकेशन के एपीके लिंक को शेयर कर रहे हैं। जिसके बाद पुलिस ने लोगों को अलर्ट करते हुए कहा है कि वह सोशल मीडिया या व्हाट्सएप पर आए ऐसे लिंक पर क्लिक न करें। यह एक <strong>साइबर फ्रॉड</strong> है। लिंक पर क्लिक करते ही एक एप्लीकेशन मोबाइल में डाउनलोड हो जाती है और फोन हैक हो जाता है। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंच सकता है। पुलिस ने यह भी कहा है कि लोग इस लिंक को सोशल मीडिया पर शेयर और दूसरों को फॉरवर्ड करने से बचें।&nbsp;</p>
<p>देश में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद है कि वह अब सरकारी योजनाओं के नाम पर भी लोगों के साथ ठगी कर रहे हैं। ऐसे में अगर आपके पास भी इस तरह का लिंक आता है, तो इस पर क्लिक न करें। साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या वेबसाइट <strong><a href="https://cybercrime.gov.in/">cybercrime.gov.in</a></strong> पर कंप्लेंट दर्ज करवाएं। &nbsp;&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">अभी कुछ दिनों से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में PM KISAN YOJNA नाम से एक एप्लीकेशन को अनजाने में ग्रामीणजन सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। <br />ये एक साइबर फ्रॉड हैं। इस एप्लीकेशन को डाउनलोड करते ही आपके फ़ोन और सिम को हैकर अपने कंट्रोल में ले लेता हैं, इससे आपको नुक़सान हो सकता है l</p>
&mdash; Jodhpur Rural Police (@JdprRuralPolice) <a href="https://twitter.com/JdprRuralPolice/status/1802972602358800811?ref_src=twsrc%5Etfw">June 18, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6697aff8cea47.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम किसान योजना के फर्जी लिंक से सावधान, ठगी का शिकार हो सकते हैं किसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6697aff8cea47.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में अग्निवीरों के लिए कई ऐलान, नौकरियों में 10% आरक्षण, मिलेगा ब्याज मुक्त लोन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/many-concessions-announced-for-agniveer-in-haryana-reservation-in-government-jobs-interest-free-loan-will-be-provided.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 17 Jul 2024 19:08:38 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/many-concessions-announced-for-agniveer-in-haryana-reservation-in-government-jobs-interest-free-loan-will-be-provided.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा सरकार ने अग्निवीरों के लिए कई रियायतों का ऐलान किया है। <span>चंडीगढ़ में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए </span> मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि अग्निवीरों को पुलिस कांस्टेबल, फॉरेस्ट गार्ड, माइनिंग गार्ड, जेल वार्डन और एसपीओ की सीधी भर्ती में 10 फीसदी <span> हॉरिजोंटल</span> आरक्षण दिया जाएगा। <span>अग्निवीरों को ग्रुप-बी और सी में सरकारी पदों के लिए निर्धारित अधिकतम आयु में 3 वर्ष की छूट प्रदान की जाएगी। हालांकि, अग्निवीरों के पहले बैच को आयु में छूट 5 वर्ष की होगी। ग्रुप सी में सिविल पदों पर सीधी भर्ती में 5 फीसदी हॉरिजेंटल आरक्षण और ग्रुप B में 1 फीसदी हॉरिजेंटल आरक्षण दिया जाएगा।</span></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि <span>अगर अग्निवीर को किसी भी औद्योगिक इकाई द्वारा प्रतिमाह 30 हजार रुपये से अधिक वेतन दिया जाता है, तो राज्य सरकार उस औद्योगिक इकाई को 60 हजार रुपये वार्षिक की सब्सिडी देगी। अब अग्निवीर द्वारा कोई भी लघु उद्योग स्थापित करने पर 5 लाख तक के लोन की ब्याज रहित सहायता प्रदान की जाएगी। साथ ही अग्निविरों को प्राथमिकता के आधार पर आर्म लाइसेंस प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों/ बोर्डों/निगमों में तैनाती चाहने वाले अग्निवीरों को मैट्रिक्स स्कोर में प्राथमिकता भी दी जाएगी।&nbsp;</span></p>
<p>नायब सैनी ने कहा कि <span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">हरियाणा सरकार अग्निवीरों के कल्याण में सबसे आगे बढ़कर काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी</span><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">&nbsp;की नीतियों के अनुरूप किसान और जवान का हम प्राथमिकता के आधार पर ख्याल रख रहे हैं।&nbsp;</span>&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">हरियाणा सरकार ने अग्निवीरों के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।सरकारी भर्तियों से लेकर प्राइवेट उद्योगों तक उनके हितों का ख्याल अब हरियाणा सरकार बख़ूबी रखेगी।<br /><br />प्रदेश सरकार में भर्ती किए जाने वाले कांस्टेबल, माइनिंग गार्ड,फॉरेस्ट गार्ड,जेल वार्डन और SPO के पदों पर भर्ती&hellip; <a href="https://t.co/iIisI4Y1th">pic.twitter.com/iIisI4Y1th</a></p>
&mdash; Nayab Saini (@NayabSainiBJP) <a href="https://twitter.com/NayabSainiBJP/status/1813533146195120201?ref_src=twsrc%5Etfw">July 17, 2024</a></blockquote>
<p><span>
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</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6697c6da1d1e9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में अग्निवीरों के लिए कई ऐलान, नौकरियों में 10% आरक्षण, मिलेगा ब्याज मुक्त लोन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अंबाला में किसान नेताओं को हिरासत में लेने के बाद छोड़ा, रिहाई के बाद नवदीप का सम्मान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmer-leaders-were-detained-in-ambala-and-then-released-strict-vigil-on-roads.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 17 Jul 2024 16:15:41 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmer-leaders-were-detained-in-ambala-and-then-released-strict-vigil-on-roads.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा के अंबाला में आज पुलिस और किसान नेताओं के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई। अंबाला में पुलिस ने किसान नेता अमरजीत सिंह मोहड़ी समेत कई किसानों को हिरासत में ले लिया था। हालांकि, बाद में सभी किसान नेताओं को रिहा कर दिया गया। जिसके बाद किसानों ने अंबाला से शंभू मोर्चा तक फतेह मार्च निकाला। इसके बाद शंभू बॉर्डर पर युवा किसान <span>नवदीप सिंह जलबेडा और गुरकीरत सिंह का सम्मान किया गया।&nbsp;</span></p>
<p>बीती रात युवा किसान नवदीप सिंह जलबेड़ा की चार महीने बाद जेल से रिहाई हुई थी। आज किसान अंबाला अनाज मंडी में नवदीप का सम्मान करना चाहते थे। लेकिन पुलिस ने किसानों को अंबाला में इकट्ठा नहीं होने दिया और कई किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया। हिसार-अम्बाला हाईवे पर बलाना गांव के पास बेरिकेड और बसें लगाकर किसानों का रास्ता रोका गया। किसान नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर सुनकर वहां काफी तादाद में किसान पहुंच गये।<a href="https://twitter.com/ashokdanoda/status/1813521923621679213?ref_src=twsrc%5Etfw"></a></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_6697a8b9dc365.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</p>
<p>किसान नेता तेजवीर सिंह के मुताबिक, हिरासत में लिए गये किसान नेताओं में अमरजीत सिंह मोहड़ी, जसविंदर सिंह लोंगोवाल, रंजीत सिंह राजू, गुरप्रीत सिंह संघा, बलकार सिंह, मंजीत सिंह, दलजीत सिंह, हरविंदर सिंह सहित किसान शामिल थे। किसान नेताओं के समर्थन में बारिश के बावजूद भारी संख्या में किसान हिसार-अम्बाला हाईवे पर इकट्ठा हो गए और बैरिकेड्स के सामने रास्ता खोलने के लिए प्रदर्शन पर बैठ गए।&nbsp;</p>
<p>किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि अंबाला अनाज मंडी में इकट्ठा होकर किसान नवदीप का सम्मान करना चाहते हैं लेकिन पुलिस ने किसानों को वहां जाने से रोक दिया। मिली जानकारी के अनुसार, किसान अंबाला अनाज मंडी से शंभू बॉर्डर तक शांतिपूर्ण मार्च निकालना चाहते थे। लेकिन हरियाणा पुलिस ने सुबह से ही किसानों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। अंतत: किसानों के विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने सभी किसान नेताओं को छोड़ दिया। इसके बाद किसानों ने विजय मार्च निकाला। <span>नवदीप सिंह जलबेडा और गुरकीरत सिंह की रिहाई के बाद शंभू मोर्चा पर उनका सम्मान किया गया।&nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_6697d1f1c5bdb.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>युवा किसान नवदीप सिंह जलबेड़ा पहले किसान आंदोलन में वाटर कैनन बॉय के नाम से चर्चित हुआ था। 13 फरवरी से हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन के सिलसिले में हरियाणा पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। उसकी रिहाई के लिए किसान संगठन काफी दिनों से संघर्ष कर रहे थे। जमानत मिलने पर मंगलवार रात को नवदीप 111 दिनों बाद जेल से बाहर आया।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_6697d20c6e39a.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6697a0cb6965c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ अंबाला में किसान नेताओं को हिरासत में लेने के बाद छोड़ा, रिहाई के बाद नवदीप का सम्मान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6697a0cb6965c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में निजी नलकूपों के लिए मुफ्त बिजली योजना की आखिरी तारीख 31 जुलाई तक बढ़ी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/government-extend-registration-date-of-free-electricity-scheme-for-tubewell-in-up-till-31st-july-2024.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 16 Jul 2024 17:23:21 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/government-extend-registration-date-of-free-electricity-scheme-for-tubewell-in-up-till-31st-july-2024.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों को एक बार फिर राहत दी है। निजी नलकपू/ट्यूबवेल के लिए शुरू की गई <strong>मुफ्त बिजली योजना</strong> के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 जुलाई, 2024 तक बढ़ा दी गई है। किसानों की सुविधा को देखते हुए प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया है। पहले सरकार ने इसके लिए अंतिम तिथि 15 जुलाई निर्धारित की थी, लेकिन अब किसान 31 जुलाई तक मुफ्त बिजली योजना के लिए पंजीकरण करा पाएंगे।</p>
<p>योजना के तहत किसानों 10 हार्स पावर तक 140 यूनिट/किलोवाट प्रति माह उपयोग करने पर सौ प्रतिशत की छूट मिलेगी। इसी तरह 140 यूनिट/किलोवाट प्रति माह से अधिक उपयोग करने पर किसान को अतिरिक्त खपत के टैरिफ का भुगतान करना होगा। इस योजना का लाभ वही किसान उठा पाएंगे, जिन्होंने 31.03. 2023 तक के बकाया बिजली बिल का एकमुश्त भुगतान किया हो। किसानों को अधिकतम 6 किश्तों में पूर्ण भुगतान करने की सुविधा भी दी गई है। वहीं, जिन किसानों का 31.03.2023 तक का बिजली बिल बकाया नहीं है, वह बिना कोई पंजीकरण शुल्क दिए अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। पावर कारपोरेशन ने किसानों से जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन करवाने को कहा है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">प्रदेश के सम्मानित किसानों के लिए मुफ्त बिजली पाने का अंतिम सुनहरा मौका।<br />किसानों के हित व सुविधा के दृष्टिगत इस योजना की पंजीकरण की अंतिम तिथि दिनांक 31 जुलाई 2024 तक बढ़ा दी गई है। किसान उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि शीघ्र पंजीकरण करवाकर योजना का लाभ उठायें।<a href="https://twitter.com/ChairmanUppcl?ref_src=twsrc%5Etfw">@ChairmanUppcl</a> <a href="https://twitter.com/mduppcl?ref_src=twsrc%5Etfw">@mduppcl</a> <a href="https://t.co/7gxOyn5ad2">pic.twitter.com/7gxOyn5ad2</a></p>
&mdash; UPPCL (@UPPCLLKO) <a href="https://twitter.com/UPPCLLKO/status/1813105811419504768?ref_src=twsrc%5Etfw">July 16, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>प्रदेश सरकार ने 13 लाख किसानों को मुफ्त बिजली देने का लक्ष्य रखा है। लेकिन, 30 जून तक करीब 90 हजार किसान ही इस योजना के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवा पाए। जिसके बाद सरकार ने पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 जुलाई तक बढ़ी दी थी। हालांकि, किसान इसे 30 जुलाई तक बढ़ाने की मांग कर रहे थे। किसानों की इसी मांग पर गौर करते हुए अब सरकार ने पंजीकरण की अंतिम तिथि फिर बढ़ा दी है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन की आधिकारिक वेबसाइट <strong><a href="https://uppcl.org/uppcl/hi/">https://uppcl.org/uppcl/hi/</a> </strong>पर जाकर पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण किए बिना किसान इस योजना का लाभ नहीं उठा पाएंगे।&nbsp;वहीं, योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए कृषि और बिजली विभाग में संपर्क किया जा सकता है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_669654fe18d83.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में निजी नलकूपों के लिए मुफ्त बिजली योजना की आखिरी तारीख 31 जुलाई तक बढ़ी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_669654fe18d83.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कपास पर फिर पिंक बॉलवर्म का प्रकोप, पंजाब में निगरानी के लिए 128 टीमें गठित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/agriculture-department-forms-128-monitoring-teams-to-prevent-pink-bollworm-pest-attacks-on-cotton-crops-in-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 16 Jul 2024 11:21:16 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/agriculture-department-forms-128-monitoring-teams-to-prevent-pink-bollworm-pest-attacks-on-cotton-crops-in-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कपास उत्पादक क्षेत्रों में इस बार फिर पिंक बॉलवर्म का प्रकोप किसानों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।&nbsp;पंजाब में कपास की फसल पर पिंक बॉलवर्म (गुलाबी सुंडी) और सफेद मक्खी (व्हाइटफ्लाई) का प्रकोप दिखने लगा है। कीटों ने कपास की फसल पर हमला तेज कर दिया है जिससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। पंजाब सरकार ने कपास की फसलों की नियमित निगरानी और कीटों की रोकथाम के लिए संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारियों के सुपरविजन में 128 कीट निगरानी दल गठित किए हैं। ये टीमें प्रभावित क्षेत्रों में कपास की फसल का निरीक्षण करेंगे तथा कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने में किसानों की मदद करेंगी।&nbsp;</p>
<p>पंजाब के कृषि मंत्री <strong>गुरमीत सिंह खुड्डियां </strong>ने बताया कि कृषि विभाग ने कपास की फसलों पर कीटों के हमले की रोकथाम के लिए टीमें गठित की हैं। ये टीमें मुक्तसर साहिब, फाजिल्का, फरीदकोट, मोगा, बठिंडा, मानसा, बरनाला और संगरूर सहित कपास उत्पादक क्षेत्रों में खेतों का दौरा करेंगी। कृषि विभाग की टीमों ने सोमवार को फाजिल्का जिले के 73 गांवों में कपास के खेतों का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान तीन स्थानों पर गुलाबी सुंडी और आठ स्थानों पर सफेद मक्खी का प्रकोप दिखा। अधिकारियों को प्रभावित फसल पर कीटनाशकों का छिड़काव करवाने को कहा गया है।&nbsp;</p>
<p>कृषि मंत्री ने कहा कि कीटों के हमले और उनकी रोकथाम के लिए किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। कृषि विभाग की ओर से गठित टीमों को कपास के खेतों का दौरा कर किसानों को कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने में मदद करने को कहा गया है। जमीनी स्तर तक संदेश फैलाने के लिए&nbsp;कृषि विभाग ने प्रमुख कपास उत्पादक जिलों के 989 गांवों में किसान जागरूकता शिविर लगाए हैं। उन्होंने किसानों से विशेषज्ञों की सलाह का पालन करने और बताए गये कीटनाशकों का उपयोग करने का आग्रह किया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66960404451ab.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कपास पर फिर पिंक बॉलवर्म का प्रकोप, पंजाब में निगरानी के लिए 128 टीमें गठित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66960404451ab.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हिमाचल प्रदेश में फीकी रही सेब सीजन की शुरुआत, बागवानों को नहीं मिल रहा अच्छा दाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/apple-season-starts-in-himachal-prices-are-lower-than-last-year-tydeman-apple-box-is-being-sold-for-800-to-400-rupees.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 15 Jul 2024 16:57:11 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/apple-season-starts-in-himachal-prices-are-lower-than-last-year-tydeman-apple-box-is-being-sold-for-800-to-400-rupees.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश में 15 जुलाई से सेब सीजन की शुरुआत हो चुकी है। पिछले सीजन के मुकाबले इस सीजन में बागवानों को सेब के कम दाम मिल रहे हैं। क्योंकि अभी बेहतरीन क्वालिटी का सेब मंडियों में नहीं पहुंचा है। इस साल सेब की उपज पर मौसम की मार पड़ी है, जिसके कारण उत्पादन प्रभावित हुआ और बागवानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>शिमला की भट्ठाकुफर और पराला फल मंडी में टाइडमैन और रेड जून सेब की वैरायटी पहुंच रही है। टाइडमैन सेब की पेटी (18 से 20 किग्रा वजन) को इस साल 800 से 1,400 रुपये का दाम मिल रहा है। जबकि पिछले साल की शुरुआत में यह पेटी 1400 से 1500 रुपये में बिकी थी। वहीं, रेड जून वैरायटी के सेब की एक पेटी 300 से 600 रुपये में बिक रही है। इस साल हिमाचल प्रदेश में सेब की फसल पर बीमारियों का प्रकोप भी रहा है। इससे भी उपज प्रभावित हुई है।&nbsp;</p>
<p>प्रदेश की फल मंडियों में अर्ली वैरायटी का सेब पहुंचना शुरू हो चुका है। इस साल सीजन की शुरुआत 10-15 दिन देरी से हुई है। आमतौर पर इस समय तक फल मंडियों में बेहतर गुणवत्ता वाले सेब की खेप पहुंचनी शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। मौसम के बदले मिजााज के चलते इस साल सेब की गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है। यही वजह है कि बागवानों को सेब का बेहतर दाम नहीं मिल रहा है। आढ़तियों का कहना है कि भीषण गर्मी और कम बारिश के कारण अधिकांश क्षेत्रों में पैदावार प्रभावित हुई है, जिससे फसल का आकार और रंग सही नहीं आया है। फिलहाल जो सेब बाजार में आ रहे हैं, उनकी क्वालिटी बहुत बेहतर नहीं हैं। इस वजह से बागवानों को फसल के अच्छे दाम नहीं मिल पा रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>पराला फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट <strong>सुशील ठाकुर</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि सेब सीजन भले ही आज शुरू हुआ हो, लेकिन पराला मंडी में सेब की आवक हफ्ते भर पहले शुरू हो चुकी है। उन्होंने बताया कि बीते हफ्ते से मुकाबले इस हफ्ते सेब की आवक बढ़ी है। लेकिन अभी भी बेस्ट क्वालिटी का सेब मंडी में नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि पिछले साल 15 जुलाई तक टाइडमैन, गाला और स्पर वैरायटी का सेब मंडी में पहुंचना शुरू हो गया था। लेकिन इस साल अभी तक सिर्फ टाइडमैन वैरायटी का सेब ही मंडी में पहुंचा है। जिसका आकार छोटा और रंग भी फीका है। अगर आने वाले दिनों में मौसम अनुकूल रहा तो आवक बढ़ने के साथ बागवानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>इस साल अधिक गर्मी और बारिश में कमी के कारण सेब उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ा है। साथ ही समय पर तुड़ान न होने के चलते मंडियों में वह सेब नहीं पहुंचा, जिसका आढ़तियों खरीदारों का इंतजार रहता है। बागबानों की मानें तो इस साल सेब का उत्पादन कम है। जबकि बागबानी विभाग पिछले साल से ज्यादा उत्पादन का दावा कर रहा है। उद्यान विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो 2023-24 में हिमाचल प्रदेश में 2.11 करोड़ से अधिक पेटी सेब का उत्पादन हुआ था। वहीं विभाग इस साल 2.91 करोड़ पेटी से अधिक सेब उत्पादन का अनुमान लगा रहा है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66950eea2e0d4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हिमाचल प्रदेश में फीकी रही सेब सीजन की शुरुआत, बागवानों को नहीं मिल रहा अच्छा दाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66950eea2e0d4.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में घटिया उर्वरक सप्लाई करने वाली दो फर्टिलाइजर कंपनियों के लाइसेंस रद्द, जानिए कौन हैं ये कंपनियां]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/licenses-of-two-companies-supplying-spurious-fertilizers-in-punjab-cancelled-know-name-of-companies.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 15 Jul 2024 12:28:55 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/licenses-of-two-companies-supplying-spurious-fertilizers-in-punjab-cancelled-know-name-of-companies.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कई फर्टिलाइजर कंपनियों किसानों को नकली या घटिया उर्वरक बेचती हैं। ऐसी शिकायतें किसान अक्सर करते रहते हैं। लेकिन पंजाब में कुछ कंपनियों ने सहकारी समितियों को भी घटिया उर्वरक की आपूर्ति कर दी। ऐसी कंपनियों के खिलाफ अभियान चलाने हुए राज्य सरकार ने दो उर्वरक कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। साथ ही केंद्र सरकार को भी इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।&nbsp;</p>
<p>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कृषि विभाग को नकली उर्वरकों के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अभियान की शुरुआत करते हुए पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने राज्य की सहकारी समितियों को घटिया <strong>डाई-अमोनियम फास्फेट (डीएपी)</strong> की आपूर्ति करने के आरोप में दो उर्वरक कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। जिन कंपनियों के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं, उनमें मैसर्स <strong>मध्य भारत एग्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड </strong>और मैसर्स <strong>कृष्णा फॉस्कैम प्राइवेट लिमिटेड </strong>शामिल&nbsp;हैं। ये दोनों कंपनियां राजस्थान के ओस्तवाल ग्रुप से जुड़ी हैं और भीलवाड़ा में एक ही पते पर रजिस्टर्ड हैं। इनके कई डायरेक्ट भी कॉमन हैं। ओस्तवाल ग्रुप <strong>अन्नदाता ब्रांड</strong> से फर्टिलाइजर व अन्य उत्पाद बेचता है।&nbsp;</p>
<p>एक प्रेस विज्ञप्ति में पंजाब के कृषि मंत्री <strong>गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong> ने बताया कि इन कंपनियों द्वारा <strong>मार्कफेड</strong> को आपूर्ति किए गए डीएपी स्टॉक से <strong>40</strong><strong> नमूने</strong> एकत्र किए गए थे। इनमें से <strong>24</strong><strong> नमूने</strong> उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के अनुसार गैर-मानक पाए गए और 2 नमूनों के परिणाम अभी आने हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भी इस बारे में सूचित कर दिया गया है। कृषि मंत्री ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि घटिया/नकली उर्वरकों या किसी अन्य कृषि उत्पाद के संबंध में कोई शिकायत मिलने पर प्राथमिकता के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने चेतावनी दी है कि किसी की ओर से लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।</p>
<p>पंजाब के कृषि विभाग ने राज्य में गुणवत्ता नियंत्रण अभियान चलाया है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 4700 उर्वरक नमूनों की जांच का लक्ष्य रखा है। कृषि निदेशक<strong> जसवंत सिंह</strong> ने बताया कि गुणवत्ता नियंत्रण अभियान के तहत अब तक उर्वरकों के 1004 नमूने एकत्रित कर जांच के लिए विभिन्न प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं। प्रत्येक जिलों में लक्ष्य के अनुसार उर्वरकों की सैंपलिंग लगातार की जा रही है तथा डीएपी (18:46) व अन्य उर्वरकों की आवक के संबंध में निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में घटिया उर्वरक सप्लाई करने वाली दो फर्टिलाइजर कंपनियों के लाइसेंस रद्द, जानिए कौन हैं ये कंपनियां ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में सोलर पंप पर 75 फीसदी सब्सिडी पाने का मौका, आवेदन प्रक्रिया शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-farmers-will-get-solar-pumps-at-75-percent-subsidy-apply-here.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 12 Jul 2024 18:27:01 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-farmers-will-get-solar-pumps-at-75-percent-subsidy-apply-here.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खरीफ सीजन को देखते हुए हरियाणा सरकार किसानों को सोलर पंप मुहैया कराएगी। किसानों को यह पंप 75 फीसदी अनुदान पर दिए जाएंगे। यानी किसानों को सोलर पंप की कुल लागत का सिर्फ 25 फीसदी भुगतान ही करना होगा। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम योजना) के अंतर्गत किसानों को कुल 6 श्रेणियों (3 एचपी से 10 एचपी) के सोलर पंप पर सब्सिडी दी जाएगी। सोलर पंप के लिए आवेदन प्रक्रिया 11 जुलाई, 2024 से शुरू हो चुकी है, जो 25 जुलाई, 2024 तक जारी रहेगी। किसान अपनी आवश्यकतानुसार किसान सरल पोर्टल की आधिकारिक वेबसाईट <strong><a href="https://saralharyana.gov.in/">saralharyana.gov.in</a></strong> पर पंप के लिए आवेदन कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>कितने में मिलेगा सोलर पंप</strong></p>
<p>किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए 3 एचपी, 5 एचपी, 7.5 एचपी और 10 एचपी के सोलर पंप सेट लगवाने के लिए अनुदान दिया जाएगा। 3 एचपी डीसी पंप लगवाने के लिए किसानों को 53,926 रुपये का भुगतान करना होगा। इसी तरह किसानों को 7.5 एचपी डीसी, सबमर्सिबल पंप के लिए 1,13,629 रुपये, 10 एचपी डीसी, सबमर्सिबल पंप (नॉर्मल कंट्रोलर) के लिए 1,42,170, 10 एचपी एसी, सबमर्सिबल पंप (नॉर्मल कंट्रोलर) के लिए 1,40,759 रुपये, 10 एचपी डीसी, सबमर्सिबल पंप (यूनिवर्सल कंट्रोलर) के लिए 2,02,253 रुपये, 10 एचपी एसी, सबमर्सिबल पंप (यूनिवर्सल कंट्रोलर) के लिए 2,06,486 रुपये का भुगतान करना होगा।&nbsp;</p>
<p><strong>इन किसानों को मिलेगी प्राथमिकता &nbsp;</strong></p>
<p>बिजली आधारित कनैक्शन के मौजूदा आवेदकों को सौर ऊर्जा पंप के कनैक्शन के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए उन्हें पहले अपने मौजूदा बिजली कनैक्शन का समर्पण करना पड़ेगा। साथ ही वर्ष 2019 से 2021 तक के मौजूदा किसान जिन्होनें 1 एचपी. 10 एचपी बिजली आधारित कृषि ट्यूबवैल के लिए DISCCOM (UHBVN/DHBVN) में आवेदन किया था, उन्हें भी प्राथमिकता दी जाएगी। लाभार्थी किसानों का चयन परिवार की वार्षिक आय व भूमि धारण के आधार पर किया जाएगा। पुराने सभी आवेदकों (20.02.2024 से 05.03.2024 तक के आवेदकों को छोड़कर) को योजना के लिए फिर से आवेदन करना होगा।&nbsp;</p>
<p><strong>योजना की नियम और शर्तें</strong></p>
<p>योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को कुछ नियम और शर्तों का पालन करना होगा। किसानों के पास सभी जरूरी दस्तावेज होने चाहिए। जैसे परिवार पहचान पत्र, जमीन के कागज, आधार कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड, जमीन का नक्शा आदि। ध्यान रहे कि लाभार्थी के परिवार के नाम पर पहले से सोलर का कनैक्शन न हो। साथ ही आवेदक के नाम पर बिजली आधारित पंप भी नहीं होना चाहिए। धान उगाने वाले किसान जिनके क्षेत्र में हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के आधार पर भूजल स्तर 40 मीटर से नीचे गिर गया है, वह किसान इस योजना के पात्र नहीं है। योजना से जुड़ी जानकारी के लिए किसान<a href="https://hareda.gov.in/"><strong> http://hareda.gov.in</strong> </a>पर विजिट कर सकते हैं। इसके अलावा जिले के अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय में भी संपर्क किया जा सकता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6691250a6b81f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में सोलर पंप पर 75 फीसदी सब्सिडी पाने का मौका, आवेदन प्रक्रिया शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में मूंग किसानों को मिलेगी राहत! खरीद लिमिट 8 से बढ़कर 12 क्विंटल होगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/per-hectare-moong-procurement-in-madhya-pradesh-will-increase-from-8-quintals-to-12-quintals.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 12 Jul 2024 12:42:59 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/per-hectare-moong-procurement-in-madhya-pradesh-will-increase-from-8-quintals-to-12-quintals.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में जारी मूंग खरीद में आ रही दिक्कतों और किसानों के विरोध के बाद प्रदेश सरकार मूंग खरीद की मात्रा बढ़ाने पर सहमत हो गई है। किसानों से प्रति हेक्टेयर खरीद की सीमा 8 क्विंटल से बढ़ाकर 12 क्विंटल की जाएगी। अब किसान प्रति हेक्टेयर 12 क्विंटल तक उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बेच पाएंगे। पहले सरकार ने मूंग खरीद की लिमिट 8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक सीमित कर दी थी। जबकि, राज्य में मूंग की उत्पादकता औसतन 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। वहीं, कुछ जिलों में यह 15-16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। जिस वजह से किसान अपनी पूरी उपज सरकार को नहीं बेच पा रहे थे और उन्हें ओपन मार्केट में एमएसपी से कम दाम पर अपनी फसल बेचने को मजबूर होना पड़ा रहा था। ओपन मार्केट में मूंग का दाम 6500 से 8000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है। जबकि, मूंग का एमएसपी 8558 रुपये प्रति क्विंटल है। जिससे किसानों को 2000 हजार रुपये तक का नुकसान हो रहा था।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>राज्य परिवहन एंव शिक्षा मंत्री <strong>उदय प्रताप सिंह</strong> ने मंगलवार को मूंग खरीद की मात्रा बढ़ाने की घोषणा की। वह <span>कृषि उपज मंडी, हरदा में भारतीय किसान संघ के विरोध प्रदर्शन को खत्म करने और किसानों से बात करने पहुंचे थे। उन्होंने कहा, "</span>आज माननीय मुख्यमंत्री जी ने किसान संघ के आग्रह पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए किसानों के हित में 8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर बढ़ाकर अब 12 क्विंटल <span class="html-span xdj266r x11i5rnm xat24cr x1mh8g0r xexx8yu x4uap5 x18d9i69 xkhd6sd x1hl2dhg x16tdsg8 x1vvkbs"><a class="html-a xdj266r x11i5rnm xat24cr x1mh8g0r xexx8yu x4uap5 x18d9i69 xkhd6sd x1hl2dhg x16tdsg8 x1vvkbs" tabindex="-1"></a></span>हेक्टेयर दर से मूंग खरीदने व प्रतिदिन मूंग खरीदी की लिमिट 25 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल करने पर सहमति प्रदान की है।"&nbsp;</p>
<p>सरकार के इस फैसले से किसानों को कुछ हद तक जरूरी राहत मिलेगी। लेकिन प्रति हेक्टेयर खरीदी की सीमा अभी भी पिछले साल से कम है। मध्यप्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष <strong>केदार शंकर सिरोही</strong> ने कहा कि पिछले साल सरकार ने मूंग खरीद की मात्रा 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तय की थी, लेकिन इस बार पहले 8 और अब इसे बढ़ाकर 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है। जबकि, प्रदेश में इस बार मूंग का उत्पादन बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जब उत्पादन बढ़ा है तो सरकार को मूंग खरीद की मात्रा भी बढ़ानी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। सरकार ने भले ही मूंग खरीद की मात्रा 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने का फैसला लिया है, लेकिन यह अभी भी पिछले वर्ष से कम है।&nbsp;</p>
<p>मध्य प्रदेश में मूंग खरीद शुरू होने के बाद से किसान कई तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। यहां सारा विवाद मूंग खरीद की मात्रा को लेकर है। जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है। हालांकि, सरकार ने किसानों की दो मुख्य मांगों पर गौर करते हुए उन्हें थोड़ी राहत दी है। लेकिन, किसानों का कहना है कि उन्हें और छूट दी जा सकती थी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में मूंग किसानों को मिलेगी राहत! खरीद लिमिट 8 से बढ़कर 12 क्विंटल होगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र के दूध किसानों को नहीं मिल रहा सब्सिडी का लाभ, कम दामों पर जारी है दूध की खरीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-milk-farmers-are-not-getting-the-benefit-of-subsidy-still-milk-is-being-purchased-at-low-price.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 11 Jul 2024 12:08:57 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-milk-farmers-are-not-getting-the-benefit-of-subsidy-still-milk-is-being-purchased-at-low-price.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र में दूध किसानों की परेशानी खत्म होती नजर नहीं आ रही है। राज्य के दूध उत्पादक किसानों को राहत देते हुए सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में 5 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी जारी रखने का ऐलान किया था। सरकार ने कहा था कि डेयरी कंपनियों को न्यूनतम 30 रुपये प्रति लीटर की दर से गाय का दूध खरीदना होगा। जिस पर सरकार किसानों को 5 रुपये सब्सिडी देगी। 1 जुलाई, 2024 से किसानों को यह सब्सिडी दी जानी थी। लेकिन, घोषणा होने के 10 दिन बाद भी किसानों से 24 से 26 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध खरीदा जा रहा है। जिससे किसानों का नुकसान हो रहा है।&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र में स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के अध्यक्ष और पूर्व सांसद <strong>राजू शेट्टी</strong> ने इस संबंध में राजस्व एवं डेयरी विकास मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील को पत्र लिखा है। उन्होंने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि राज्यभर में गाय के दूध की खरीद 30 रुपये प्रति लीटर की दर से करने को लेकर अधिकारियों को निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही किसानों को कम भुगतान कर रही कंपनियों पर कार्रवाई की जाए।</p>
<p>राजू शेट्टी ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि राज्य सरकार ने 1 जुलाई से गाय के दूध के लिए 30 रुपये प्रति लिटर की दर और 5 रुपये सब्सिडी देने की घोषणा की थी। लेकिन, राज्य में कई डेयरी कंपनियां अभी भी कम दामों पर किसानों से दूध खरीद रही हैं। उन्होंने कहा कि सांगली और कोल्हापुर को छोड़कर राज्य के सभी जिलों में किसानों को दूध का कम दाम मिल रहा है। &nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_668e9991abaa4.jpg" alt="" /></p>
<p>उन्होंने कहा कि सांगली और कोल्हापुर में कई दूध सहकारी समितियां और उत्पादक कंपनियां 3.5 फीसदी फैट वाले दूध के लिए किसानों को 30 से 33 रुपये प्रति लीटर का भुगतान किया जा रहा है। यानी सब्सिडी मिलाकर दूध उत्पादकों को 35 से 38 रुपये मिल रहे हैं। वहीं, शोलापुर नगर, पुणे और राज्य के अन्य जिलों के सहकारी और कई निजी दूध कंपनियां अभी भी 24 से 26 रुपये की दर से दूध खरीद रही हैं। जिस वजह से इन जिलों के दूध उत्पादकों को सब्सिडी का लाभ नहीं मिल रहा है।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि सब्सिडी सीधे किसानों के खाते में आती है। इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक ऑनलाइन सिस्टम विकसित किया है, जिसमें दूध उत्पादकों का सारा डाटा दर्ज होता है। जैसे किसान के पास कितनी गाय है, उसने प्रति दिन कितना दूध बेचा, बैंक अकाउंट डिटेल, आदि। इस डाटा के आधार पर ही किसानों के खातों में सब्सिडी भेजी जाती है। उन्होंने कहा कि यह डाटा दूध सहकारी समितियों और उत्पादक कंपनियों को आगे भेजना होता है।&nbsp;लेकिन, कई कंपनियां न तो दूध उत्पादकों का रिकॉर्ड रख रही हैं और न ही इसे सरकारी अधिकारियों को भेज रही हैं। जिस वजह से दूध उत्पादक किसान सब्सिडी का लाभ लेने से वंचित रह जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत इस मामले की ओर ध्यान देने की जरूरत है और ताकि किसानों का उनका लाभ मिल सके।&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र के दूध उत्पादक किसान पिछले 6 महीनों से दूध की कीमतों पर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले मार्च और अप्रैल में राज्य सरकार ने किसानों को दूध पर पांच रुपये लीटर की सब्सिडी दी थी, जिसे मई में बंद कर दिया गया था। जिसके बाद दूध उत्पादकों ने फिर प्रदेश भर में आंदोलन की चेतावनी दी थी। हालांकि, 28 जून को महाराष्ट्र सरकार ने बजट में सब्सिडी जारी रखने का ऐलान किया था। 1 जुलाई से किसानों को सब्सिडी का लाभ मिलना था। लेकिन, अभी भी राज्य में दूध की खरीद कम दाम पर की जा रही है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668e99f867c70.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र के दूध किसानों को नहीं मिल रहा सब्सिडी का लाभ, कम दामों पर जारी है दूध की खरीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668e99f867c70.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान बजट: 5 साल में 4 लाख भर्तियां, 35 लाख किसानों को ब्याज मुक्त लोन का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-budget-4-lakh-recruitments-in-5-years-announcement-of-interest-free-loan-to-35-lakh-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 10 Jul 2024 18:06:21 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-budget-4-lakh-recruitments-in-5-years-announcement-of-interest-free-loan-to-35-lakh-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान की उपमुख्यमंत्री तथा वित्त मंत्री दिया कुमारी ने बुधवार को वित्त वर्ष 2024-2025 के लिए राज्य सरकार का बजट पेश किया। यह राजस्थान में भाजपा की भजनलाल सरकार का पहला पूर्ण बजट है।&nbsp;बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री दिया कुमारी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अगले 5 साल में <strong>4 लाख भर्तियां</strong> करने का संकल्प लिया है। इस साल एक लाख से अधिक पदों पर भर्तियां की जाएंगी। वित्त मंत्री ने कहा कि हर साल समय पर भर्ती परीक्षाएं कराकर युवाओं को रोजगार दिया जाएगा। राजस्थान सरकार नई युवा नीति और कौशल नीति लाएगी। बजट में 1500 डॉक्टरों और 4000 नर्सिंग कर्मियों की भर्ती की घोषणा की गई है।</p>
<p><strong>कृषि बजट</strong> पेश करते हुए वित्त मंत्री दिया कुमारी ने प्रदेश में किसानों को 23 हजार करोड़ रुपये के<strong> ब्याज मुक्त</strong> अल्पकालीन फसली ऋण वितरित करने का ऐलान किया। इस पर 736 करोड़ रुपये का खर्च आएगा और 5 लाख नए किसान भी ब्याज मुक्त ऋण प्राप्त कर सकेंगे। योजना से कुल 35 लाख किसान लाभान्वित होंगे। प्रदेश में 500 नए किसान उत्पादक संगठन बनाए जाएंगे तथा 150 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 100-150 <span>टन के गोदामों का निर्माण होगा। एग्री स्टैक के माध्यम से किसानों को खुद<strong> फसल गिरदावरी</strong> की सुविधा उपलब्ध देने का ऐलान भी बजट में किया गया है।&nbsp;</span></p>
<p>राजस्थान में नई <strong>मंडियों</strong> की स्थापना की जाएगी। साथ ही <strong>भुसावर-भरतपुर</strong> में एग्रो प्रोसेसिंग प्लांट, <span><strong>सवाई माधोपुर</strong> में अमरुद</span>, <span>आंवला एवं मिर्च</span>, <span><strong>मेड़ता सिटी</strong> में जीरा</span>, <span><strong>सिरोही</strong> में ईसबगोल</span>, <span><strong>जोधपुर व बारां</strong> में मसाले</span>, <span><strong>बालोतरा</strong> में अनार के प्रोसेसिंग प्लांट निजी क्षेत्र के सहयोग से स्थापित किए जाएंगे। &nbsp;&nbsp;</span>&nbsp;</p>
<p><strong>सिंचाई व्यवस्था</strong> में सुधार के <strong>राजस्थान इरीगेशन वाटर ग्रिड मिशन</strong> शुरू करने की घोषणा की गई है। इस मिशन के तहत 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कार्य कराए जाएंगे। बाढ़ के पानी के सदुपयोग के लिए <strong>रन ऑफ वाटर ग्रिड स्थापित के तहत</strong> 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक कार्य प्रस्तावित हैं। कृषि कार्य के लिए 31 मार्च, 2024 तक लंबित विद्युत कनेक्शन आवेदनों की पेंडेंसी समाप्त करने के लिए किसानों को इस साल एक लाख 45 हजार विद्युत कनेक्शन जारी किए जाएंगे।</p>
<p>प्रदेश में कृषि और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की तर्ज पर <strong>राजस्थान कृषि विकास योजना </strong>शुरू की जाएगी। इसके तहत इस साल 650 करोड़ रुपये के कार्य प्रस्तावित हैं। किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद के लिए 200 करोड़ रुपये का अनुदान उपलब्ध करावाया जाएगा। &nbsp;</p>
<p>वित्त मंत्री ने राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए <strong>जैविक एवं परंपरागत कृषि बोर्ड</strong> गठित करने की घोषणा की। जैविक उत्पादों के प्रमालीकरण हेतु जिलों में यूनिट और लैब की स्थापना की जाएगी। ब्लॉक स्तर पर 50-50 किसानों को जैविक खाद उत्पादन के लिए <strong>गौवर्धन जैविक उर्वरक योजना</strong> शुरू करते हुए प्रति किसान 10 हजार रुपये तक की सहायता दी जाएगी। राज्य सरकार ने चीनी और गुड पर मंडी शुल्क समाप्त कर दिया है।</p>
<p><strong>महिला स्वयं सहायता समूहों</strong> को कृषि कार्य हेतु ड्रोन उपलब्ध करवाने के साथ ही नैनो यूरिया या कीटनाशकों का छिड़काव करने पर प्रति हेक्टेयर 2500 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। प्रदेश के 100 प्रगतिशील युवा किसानों को इस्राइल सहित अन्य देशों तथा 5 हजार युवाओं को देश के विभिन्न राज्यों में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।</p>
<p>राजस्थान में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए 250 करोड़ का<strong> मुख्यमंत्री पशुपालन विकास कोष </strong>बनाने की घोषणा की गई है। राज्य में 125 पशु चिकित्सकों, 525 पशुधन सहायकों के नए पदों का सृजन किया जाएगा। साथ ही 500 पशु चिकित्सा उपकेंद्र भी खोले जाएंगे। वित्त मंत्री ने दुधारू पशुओं के साथ-साथ अन्य पशुओं को भी शामिल करते हुए <strong>मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना </strong>शुरू करने की घोषणा की है। इस पर कुल 400 करोड़ रुपये का खर्च होगा। अब प्रदेश में सभी जिलो में पशु मेले आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p><strong>ऊंट संरक्षण और विकास मिशन </strong>शुरू करने की घोषणा भी बजट में की गई है। नवजात ऊंटों की देखभाल के लिए ऊंटपालकों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की बजाय 20 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। पाली में मिल्क पाउडर प्लांट तथा कोटा में कैटल फीड प्लांट स्थापित किया जाएगा।</p>
<p>राजस्थान में <strong>पेयजल</strong> की समस्या दूर करने के लिए <strong>25 लाख ग्रामीण घरों</strong> में नल से जल पहुंचाने के लिए 15 हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा है। जल जीव मिशन के तहत 5846 अतिरिक्त गांवों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 20,370 करोड़ रुपये की लागत से 6 बड़ी पेयजल परियोजनाएं का काम शुरू होगा।&nbsp;</p>
<p><strong>पीएम सूर्य घर</strong> मुफ्त बिजली योजना के तहत हर जिले में <strong>आदर्श सौर ग्राम</strong> बनाये जाना प्रस्तावित है। प्रत्येक गांव में 2 मेगा वाट तक के सोलर पावर प्लांट लगाए जाएंगे। इसके लिए 40 फीसदी अनुदान मिलेगा।&nbsp;</p>
<p>इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर जोर देते हुए वित्त मंत्री ने प्रदेश में पहली बार 2750 किलोमीटर से अधिक लंबाई के<strong> 9 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे</strong> बनाने का ऐलान किया है। शहरों के बाहर पेरी-अरबन क्षेत्रों के विकास के लिए <strong>राजस्थान रीजनल एंड अरबन प्लानिंग बिल-2024</strong> लाने की घोषणा भी वित्त मंत्री ने की है। &nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668e803b5185b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान बजट: 5 साल में 4 लाख भर्तियां, 35 लाख किसानों को ब्याज मुक्त लोन का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ट्रांसमिशन टावर के लिए अब हरियाणा के किसानों को मिलेगा 200 फीसदी मुआवजा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-haryana-will-get-200-percent-compensation-for-installing-transmission-towers-in-their-fields.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 10 Jul 2024 14:32:43 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-haryana-will-get-200-percent-compensation-for-installing-transmission-towers-in-their-fields.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा सरकार ने ट्रांसमिशन परियोजनाओं से प्रभावित भूमि मालिकों और किसानों के लिए नई मुआवज नीति का ऐलान किया है। खेतों के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन बिजली की लाइनों व खेत में बनने वाले ट्रांसमिशन टावर की एवज में अब किसानों को 200 फीसदी मुआवजा मिलेगा। सरकार की यह नीति भूमि मालिकों विशेष रूप से किसानों और बिजली कंपनियों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों का समाधान करने में मदद करेगी।&nbsp;</p>
<p>हरियाणा सरकार ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के ट्रांसमिशन लाइनों के लिए राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) के मुआवजे के दिशा-निर्देशों के तहत इस नीति को मंजूरी दी है। ट्रांसमिशन लाइन के लिए स्थापित किए जाने वाले टावर के लिए भूमि अधिग्रहण के बिना ही अब किसानों को 200 फीसदी मुआवजा दिया जाएगा। जबकि, पहले किसानों को 100 फीसदी की दर से मुआवजा दिया जाता था।&nbsp;</p>
<p>इसके साथ ही ट्रांसमिशन लाइन कॉरिडोर के लिए भूमि मूल्य के 30 फीसदी की दर पर राइट ऑफ वे कॉरिडोर के लिए भी मुआवजे का प्रावधान किया गया है। जबकि, पिछली नीति में राइट ऑफ वे कॉरिडोर के लिए मुआवजा शामिल नहीं था। किसानों के लिए फसलों का मुआवजा पूर्व नीति के अनुसार ही दिया जाएगा। मुआवजे की दरें भूमि के सर्किल रेट अथवा कलेक्टर रेट के आधार पर निर्धारित की जाएंगी।</p>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>इसके अलावा, जहां भूमि के मार्किट रेट सर्किल/कलेक्टर रेट से अधिक होते हैं, वहां मुआवजे की गणना करने के लिएभूमि दर निर्धारित करने के लिए जिला स्तर पर उप-विभागीय मजिस्ट्रेट, जिला राजस्व अधिकारी और अधीक्षण अभियंता (एचवीपीएनएल) की एक &lsquo;उपयोगकर्ता समिति&rsquo;का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि इस नई नीति से किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे में पर्याप्त वृद्धि होगी। इसका उद्देश्य प्रभावित भूमि मालिकों के लिए उचित मुआवजा सुनिश्चित करते हुए ट्रांसमिशन लाइनों के कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित करना है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668e4bf9b9ff2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ट्रांसमिशन टावर के लिए अब हरियाणा के किसानों को मिलेगा 200 फीसदी मुआवजा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668e4bf9b9ff2.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में मूंग खरीद में छूट, अब एक दिन में 40 क्विंटल मूंग बेच पाएंगे किसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/daily-procurement-of-moong-and-urad-in-madhya-pradesh-has-now-been-increased-from-25-quintals-to-40-quintals.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 10 Jul 2024 11:29:13 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/daily-procurement-of-moong-and-urad-in-madhya-pradesh-has-now-been-increased-from-25-quintals-to-40-quintals.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में जारी मूंग खरीद में आ रही दिक्कतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने किसानों को प्रतिदिन खरीद में छूट दे दी है। केंद्र सरकार ने प्रतिदिन खरीद को 25 क्विंटल के बढ़ाकर 40 क्विंटल कर दिया है। अब किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर एक दिन में 40 क्विंटल मूंग बेच पाएंगे। केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रायल की ओर से केंद्रीय खरीद एजेंसियों <a jsname="UWckNb" href="https://trifed.tribal.gov.in/hi/nafed#:~:text=%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A4%BF%20%E0%A4%AE%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%80%2C%20%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%A3%20%E0%A4%94%E0%A4%B0%20%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF,%E0%A4%B8%E0%A5%87%20%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%82%20%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%97%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A5%A4" data-ved="2ahUKEwjqwv2p5JuHAxX5b2wGHVN9BbgQFnoECBYQAw" ping="/url?sa=t&amp;source=web&amp;rct=j&amp;opi=89978449&amp;url=https://trifed.tribal.gov.in/hi/nafed%23:~:text%3D%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2583%25E0%25A4%25B7%25E0%25A4%25BF%2520%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25B6%25E0%25A5%2580%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2580%252C%2520%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A4%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A3%2520%25E0%25A4%2594%25E0%25A4%25B0%2520%25E0%25A4%2585%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF,%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%2587%2520%25E0%25A4%25B6%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2582%2520%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%2520%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%2520%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A5%25A4&amp;ved=2ahUKEwjqwv2p5JuHAxX5b2wGHVN9BbgQFnoECBYQAw"></a>भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ<span> (</span>नेफेड) और <span>राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (</span>एसीसीएफ) को इस संबंध पत्र भेज गया है। जिसमें मूंग और उड़द की प्रतिदिन खरीद मात्रा को 25 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल करने को कहा गया है।&nbsp;</p>
<p>सरकार ने भले ही प्रतिदिन मूंग खरीद की लिमिट बढ़ा दी हो, लेकिन कांग्रेस लगातार इस पर सवाल उठा रही है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को प्रतिदिन खरीदी की मात्रा और बढ़ानी चाहिए थी। जिससे किसानों को ज्यादा राहत मिलती। मध्यप्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष <strong>केदार शंकर सिरोही</strong> ने कहा कि आजकल तो ट्रॉली की कैपिसिटी ही 80 से 100 कुंटल हो चुकी है। इस हिसाब से अगर एक किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचता है, तो वह सिर्फ आधी फसल ही बेच पाएगा। यानी उसे फिर मंडी के चक्कर लगाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि खरीद बढ़ाने का मकसद छोटे और मध्यम किसानों को राहत देना था। लेकिन, किसान अभी भी खरीद प्रक्रिया से खुश नहीं हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_668e21acb9619.jpg" alt="" /></p>
<p>मध्य प्रदेश में मूंग खरीद शुरू होने के बाद से किसान कई तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। सरकार ने इस बार मूंग खरीद की मात्रा 8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक सीमित कर दी है। जबकि, राज्य में मूंग की उत्पादकता औसतन 10 से 12 कुंटल प्रति हेक्टेयर है। जिस वजह से किसान अपनी पूरी उपज सरकार को नहीं बेच पा रहे हैं और उन्हें ओपन मार्केट में एमएसपी से कम दाम पर अपनी फसल बेचने को मजबूर होना पड़ा रहा है। मूंग का एमएसपी 8558 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि ओपन मार्केट में किसानों को 6500 से 8000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच अपनी फसल बेचनी पड़ रही है। जिससे उन्हें नुकसान हो रहा है।</p>
<p>दूसरी ओर सरकार ने प्रतिदिन खरीद भी 25 क्विंटल तक सीमित कर दी थी। जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बार-बार मंडियों के चक्कर लगाने पड़ रहे थे। हालांकि, अब सरकार ने छूट देते हुए प्रतिदिन खरीद 40 क्विंटल तक बढ़ा दी है। मध्य प्रदेश में किसानों को मूंग खरीद में पेश आ रही दिक्कतों को <strong>रूरल वायस</strong> ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है।&nbsp;</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें: </strong><a href="https://www.ruralvoice.in/national/farmers-are-not-getting-the-benefit-of-increase-in-msp-of-moong-in-madhya-pradesh-and-punjab.html"><strong>किसानों को नहीं मिल रहा मूंग की एमएसपी में बढ़ोतरी का फायदा&nbsp;</strong></a></p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong><a href="https://www.ruralvoice.in/states/congress-raised-the-issue-of-not-purchasing-the-entire-moong-crop-in-madhya-pradesh.html"><strong>&nbsp;मध्य प्रदेश सरकार ने मूंग की प्रति हेक्टयर खरीद दर घटाई, दाम एमएसपी से कम</strong></a></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668e2142f1d91.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में मूंग खरीद में छूट, अब एक दिन में 40 क्विंटल मूंग बेच पाएंगे किसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी के कृषि मंत्री ने दाल का भाव बताया 100 रुपये किलो, उठे रहे हैं सवाल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-agriculture-minister-surya-pratap-shahi-said-that-the-price-of-any-pulse-in-the-market-is-not-more-than-100-rupees-per-kg.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 09 Jul 2024 17:21:47 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-agriculture-minister-surya-pratap-shahi-said-that-the-price-of-any-pulse-in-the-market-is-not-more-than-100-rupees-per-kg.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री <strong>सूर्यप्रताव शाही</strong> ने एक ऐसा बयान दिया है, जिस पर विवाद खड़ा हो गया है। सूर्यप्रताव शाही का कहना है, "बाजार में दाल की कीमत 100 रुपये किलो से ज्यादा कहीं नहीं है।" मंगलवार को यूपी के कृषि मंत्री सूर्यप्रताव शाही राजधानी लखनऊ के लोकभवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। उनके साथ राज्य कृषि मंत्री बलदेव सिंह औलख भी थे। वह प्रदेश में प्राकृतिक खेती के विकास की रणनीतियों के संबंध में बात कर रहे थे। इस दौरान जब पत्रकारों ने उनसे दाल की बढ़ती कीमतों को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि बाजर में दाल की कीमत 100 रुपये किलो से ज्याद नहीं है।&nbsp;<a href="https://twitter.com/luffyspeaking/status/1810637699919036641?ref_src=twsrc%5Etfw"></a></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">लोकसभा नतीजों ने इन लोगों को आंटे तेल का भाव तो बता दिया। अगले विधानसभा चुनाव के नतीजे इनको दाल का भाव भी बता देंगे। <a href="https://t.co/c4NOWZzJpA">pic.twitter.com/c4NOWZzJpA</a></p>
&mdash; UP Congress (@INCUttarPradesh) <a href="https://twitter.com/INCUttarPradesh/status/1810645404670652498?ref_src=twsrc%5Etfw">July 9, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>हद तो तब हो गई है, जब पत्रकारों ने उनसे पूछा, "कहां मिल रही 100 रुपये दाल, हमें भी बताएं।" जिसके जवाब में कृषि मंत्री हंसने लगे। दालों की महंगाई पर उनका यह जवाब अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि देश के बड़े सूबे के कृषि मंत्री को दाल का भाव भी मालूम नहीं है। यूजर्स ये तक कह रहे हैं कि अगर उन्हें आटे-दाल का भाव भी नहीं पता तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>वहीं, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने भी कृषि मंत्री के इस बयान की कड़ी आलोचना की है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "<span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">लोकसभा नतीजों ने इन लोगों को आंटे तेल का भाव तो बता दिया। अगले विधानसभा चुनाव के नतीजे इनको दाल का भाव भी बता देंगे।"</span></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668d20fcf084c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी के कृषि मंत्री ने दाल का भाव बताया 100 रुपये किलो, उठे रहे हैं सवाल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668d20fcf084c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शुभकरण सिंह के परिवार को पंजाब सीएम ने दिया एक करोड़ का चेक, बहन को नौकरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-gave-1-crore-rupees-to-the-family-of-farmer-shubhkaran-singh-and-job-to-one-member.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 09 Jul 2024 15:50:29 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-gave-1-crore-rupees-to-the-family-of-farmer-shubhkaran-singh-and-job-to-one-member.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब की भगवंत मान सरकार ने किसान आंदोलन के दौरान मारे गए युवा किसान शुभकरण सिंह के परिवार को एक करोड़ रुपये और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को मृतक शुभकरण के परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने परिवार को 1 करोड़ रुपये का चेक और बहन को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र सौंपा। शुभकरण की इसी साल फरवरी में खनौरी बॉर्डर पर किसान प्रदर्शन के दौरान मौत हुई थी। जिसके बाद से किसान संगठन लगातार परिवार को मुआवजा और नौकरी दिए जाने की मांग उठा रहे थे। &nbsp;</p>
<p>पंजाब के शंभू बॉर्डर पर पिछले चार महीने से फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) समेत कई मांगों को लेकर किसान धरने पर बैठे हैं। इसी साल फरवरी में यहां किसानों और सुरक्षाबलों के बीच टकराव हुआ था। इस दौरान युवा किसान शुभकरण सिंह की मौत हो गई थी। आरोप है कि सुरक्षाबलों द्वारा की गई फायरिंग में शुभकरण की मौत हुई थी। जिसके बाद मामले ने काफी तूल पकड़ा था और किसानों ने इसके विरोध में प्रदर्शन भी किया था। बाद में मामला हाईकोर्ट जा पहुंचा था। जिसके बाद मामले की जांच के लिए एक न्यायिक कमेटी गठित की गई थी।&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="pa" dir="ltr">ਕਿਸਾਨੀ ਅੰਦੋਲਨ ਦੌਰਾਨ ਖਨੌਰੀ ਬਾਰਡਰ 'ਤੇ ਨੌਜਵਾਨ ਕਿਸਾਨ ਸ਼ੁਭਕਰਨ ਸਿੰਘ ਗੋਲੀ ਲੱਗਣ ਕਾਰਨ ਸ਼ਹੀਦ ਹੋ ਗਿਆ ਸੀ.. ਸ਼ਹੀਦ ਕਿਸਾਨ ਦੇ ਪਰਿਵਾਰ ਨਾਲ ਮੁਲਾਕ਼ਾਤ ਕੀਤੀ... ਵਾਅਦੇ ਮੁਤਾਬਕ ਪਰਿਵਾਰ ਨੂੰ 1 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦਾ ਚੈੱਕ ਤੇ ਇੱਕ ਜੀਅ ਨੂੰ ਸਰਕਾਰੀ ਨੌਕਰੀ ਦਾ ਨਿਯੁਕਤੀ ਪੱਤਰ ਦਿੱਤਾ...<br /><br />ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੀ ਆਪਣੀ ਸਰਕਾਰ ਹਰ ਦੁੱਖ-ਸੁੱਖ ਵਿੱਚ&hellip; <a href="https://t.co/oUSG62iY9y">pic.twitter.com/oUSG62iY9y</a></p>
&mdash; Bhagwant Mann (@BhagwantMann) <a href="https://twitter.com/BhagwantMann/status/1810575588807372821?ref_src=twsrc%5Etfw">July 9, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>तीन सदस्यीय कमेटी की अध्यक्षता पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्व जस्टिस जयश्री ठाकुर को सौंपी गई थी। उनके साथ हरियाणा के एडीजीपी अमिताभ सिंह ढिल्लों व पंजाब के एडीजीपी प्रमोद बन को कमेटी का हिस्सा बनाया गया था। कमेटी को जांच करनी थी कि शुभकरण की मौत हरियाणा के क्षेत्राधिकार में हुई थी या पंजाब के क्षेत्र में, मौत का कारण क्या था और किस हथियार का इस्तेमाल किया गया था। इसके साथ ही आंदोलनकारियों पर किया गया बल प्रयोग क्या परिस्थितियों के अनुरूप था या नहीं। फिसहाल, मामले की जांच चल रही है। कमेटी की ओर से फाइनल रिपोर्ट आना अभी बाकी है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668d0cd55f8f0.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ शुभकरण सिंह के परिवार को पंजाब सीएम ने दिया एक करोड़ का चेक, बहन को नौकरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668d0cd55f8f0.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मराठवाड़ा में 6 महीनों में 430 किसानों ने की आत्महत्या, बीड में सबसे ज्यादा मामले]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/430-farmers-committed-suicide-in-marathwada-in-6-months-beed-has-the-highest-number-of-cases.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 08 Jul 2024 19:47:16 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/430-farmers-committed-suicide-in-marathwada-in-6-months-beed-has-the-highest-number-of-cases.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र में किसानों के आत्महत्या के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। मराठवाड़ा क्षेत्र में बीते 6 महीनों में 430 किसानों ने आत्महत्या की है। इनमें सबसे ज्यादा आत्महत्या के मामले बीड जिले से सामने आए हैं। यहां 101 किसानों ने आत्महत्या की है। हैरान करने वाली बात तो यह है कि राज्य के कृषि मंत्री और एनसीपी नेता धनंजय मुंडे भी इसी क्षेत्र से आते हैं। बीड उनका गृह क्षेत्र है।&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र का मराठवाड़ा सूखे की मार झेलने वाला क्षेत्र है। बारिश की कमी के चलते फसलों का उत्पादन प्रभावित होता है और किसान आर्थिक संकट में फंस जाते हैं। पिछले दिनों एक आरटीआई से मिली जानकारी में सामने आया था कि महाराष्ट्र में पिछले 5 महीनों में 1046 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। यानी हर महीने करीब 209 किसान राज्य में आत्महत्या कर रहे हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>डिविजन कमिश्नर ऑफिस की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024 के पहले छह महीनों में महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में कुल 430 किसानों ने आत्महत्या की है। सबसे ज्यादा आत्महत्या बीड में हुई है। छत्रपति संभाजीनगर में 64, जालना में 40, परभणी में 31, हिंगोली में 17, नांदेड़ में 68, लातूर में 33 और धाराशिव में 76 किसानों ने आत्महत्या की।&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के बढ़ते मामले राज्य में सूखे और कृषि संकट की ओर इशारा करते हैं। इस मुद्दे पर विपक्षी दल केंद्र और राज्य सरकार को घेरने में जुटे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में यह बड़ा मुद्दा बन सकता है।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मराठवाड़ा में 6 महीनों में 430 किसानों ने की आत्महत्या, बीड में सबसे ज्यादा मामले ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पहाड़ों से मैदानों तक भारी बारिश का अलर्ट, जुलाई में अब तक 33 फीसदी ज्यादा बारिश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/heavy-rain-alert-in-many-states-33-percent-more-rainfall-in-july-so-far.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 08 Jul 2024 14:42:08 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/heavy-rain-alert-in-many-states-33-percent-more-rainfall-in-july-so-far.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मानसून अब पूरे देश में सक्रिय हो गया है। जिसका असर भारी बारिश के रूप में देखने को मिल रहा है। खासकर पहाड़ों में इन दिनों जमकर बारिश हो रही है। भारी बारिश के चलते जहां पहाड़ों पर लैंडस्लाइड का खतरा बना हुआ है। वहीं, मैदानों इलाकों में भारी बारिश के चलते बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। मौसम विभाग ने अगले 4 से 5 दिनों के अंदर देश के कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना जाताई है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों जैसे उत्तराखंड और हिमाचल के लिए अलर्ट जारी किया गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>मौसम विभाग (आईएमडी)</strong> के अनुसार जुलाई के पहले हफ्ते में ही सामान्य से 33 फीसदी अधिक बारिश हो चुकी है। वहीं, आने वाले दिनों में और अधिक बारिश होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे मैदानी क्षेत्रों में भारी बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं। जिसके चलते कई क्षेत्रों में किसानों की फसल भी प्रभावित हुई हैं। वहीं, पहाड़ों में बादल फटने और लैंडस्लाइड जैसी घटनाओं से भारी नुकसान हुआ है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>मौसम विभाग के डेली बुलेटिन के अनुसार, अगले 5 दिनों के दौरान जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, पश्चिमी राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य भारत और पूर्वोत्तर में गरज और बिजली के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। आईएमडी ने 10 से 12 जुलाई के दौरान हिमाचल प्रदेश और राजस्थान, 8 से 12 जुलाई के बीज उत्तराखंड, हरियाणा-चंडीगढ़, मध्य प्रदेश, 8 और 9 जुलाई को उत्तर प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की संभावना जताई है।&nbsp;</p>
<p>इसी तरह, 8 से 12 जुलाई के बीच अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, 10 से 12 जुलाई के दौरान गोवा, मध्य महाराष्ट्र, केरल, माहे, लक्षद्वीप, कर्नाटक, गुजरात क्षेत्र, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और पुडुचेरी में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668b9d5c2934f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पहाड़ों से मैदानों तक भारी बारिश का अलर्ट, जुलाई में अब तक 33 फीसदी ज्यादा बारिश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में आम की उन्नत किस्मों के पौधे 102 रुपये में मिलेंगे, किसान यहां करें संपर्क]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-up-can-buy-improved-varieties-of-mango-plants-for-102-rupees.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 08 Jul 2024 13:57:05 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-in-up-can-buy-improved-varieties-of-mango-plants-for-102-rupees.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आम उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर आता है। देश में 40 फीसदी आम का उत्पादन अकेला उत्तर प्रदेश ही करता है। प्रदेश में आम उत्पादन कई किसानों और बागवानों की आय का एक मुख्य स्त्रोत है। आम की खेती को बढ़ावा देने के लिए <strong>सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर फ्रूट्स (बस्ती)</strong> किसानों को आम की उन्नत किस्मों के पौधे उपलब्ध करवा रहा है। यह पौधे बाजर से कम दरों पर किसानों को दिए जाएंगे। किसान मात्र 102 से 122 रुपये में आम की उन्नत किस्मों के पौधे प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<p>किसानों को परंपरागत के साथ हाइब्रिड किस्मों के पौधे भी उपलब्ध करवाए जाएंगे। रंगीन हाइब्रिड किस्मों में पूसा सूर्या, पूसा श्रेष्ठ, पूसा लालिमा, पूसा पिताम्बर, अरुणिका, पूसा प्रतिभा, टामीएटकिंस, पूसा मनोहरी, संसेशन, पूसा अरूणिमा, अम्बिका व एक्सपोर्ट ओरिएन्टेड किस्में शामिल है। किसानों को यह किस्में 122 रुपये प्रति पौधे के हिसाब से दी जाएंगी। इसी तरह, आम की अन्य सामान्य प्रजातियां दशहरी, वाराणसी लंगड़ा, लखनऊ सफेदा व आम की अन्य प्रजातियां 102 रुपये प्रति पौधे के हिसाब से दी जाएंगी।&nbsp;</p>
<p>इसके अलावा अतिरिक्त रंगीन एवं एक्सपोर्ट क्वालिटी साइनउड किस्मों की दरें 20 प्रति साइनउड तथा अन्य सामान्य किस्मों की दरें 15 प्रति साइनउड तय की गई हैं। साथ ही साथ एक ही मूल स्टॉक से जुड़े एक से अधिक ग्राफ्ट वाले पौधों के खरीद मूल्य पर प्रति अतिरिक्त ग्राफ्टिंग 50 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए किसान सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर फ्रूट्स या अपने नजदीकी कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668b87bc678f2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में आम की उन्नत किस्मों के पौधे 102 रुपये में मिलेंगे, किसान यहां करें संपर्क ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में ऑनलाइन हाजिरी के खिलाफ शिक्षकों का विरोध तेज, क्या है पूरा मामला   ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/teachers-protest-against-online-attendance-intensifies-in-up-what-is-the-whole-matter.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 08 Jul 2024 13:11:53 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/teachers-protest-against-online-attendance-intensifies-in-up-what-is-the-whole-matter.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को आज से ऑनलाइन हाजिरी लगानी होगी। इस नई व्यवस्था के खिलाफ शिक्षक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। रविवार को विभिन्न शिक्षक संगठनों ने बैठक कर अपनी समस्याओं को लेकर ऑनलाइन उपस्थिति का विरोध किया। साथ ही सोमवार से काली पट्टी बांधकर काम करने और 15 जुलाई को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।&nbsp;</p>
<p>रविवार को प्रदेश भर के शिक्षकों ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया। <strong>#boycottऑनलाइनहाजिरी</strong> सोशल मीडिया पर टॉप ट्रेंड में रहा है। इस पर कल से चार लाख से ज्यादा ट्विट हो चुके हैं। शिक्षकों के विरोध को देखते हुए उन्हें हाजिरी लगाने में 30 मिनट की छूट दी गई है लेकिन इससे भी शिक्षकों का विरोध शांत होता नहीं दिख रहा है।&nbsp;</p>
<p>विभिन्&zwj;न शिक्षक संगठन अलग-अलग तरह से अपना विरोध जता रहे हैं।&nbsp;<strong>उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ</strong> के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में लखनऊ में हुई बैठक में 11, 12 जुलाई को ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों से बैठक कर आगे के आंदोलन का निर्णय लिया है। <span><strong>राष्&zwj;ट्रीय शैक्षिक महासंघ</strong> ने सोमवार को प्रदेश के सभी जिलों में डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने का ऐलान किया है।</span>&nbsp;<span><strong>उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ</strong> ने भी डिजिटल अटेंडेंस का विरोध किया है। <strong>उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ </strong>ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर ऑनलाइन उपस्थिति से पहले उनकी समस्याओं के समाधान का आग्रह किया है। </span>सोमवार को कई शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर नए आदेश का विरोध किया।&nbsp;</p>
<p></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">शिक्षकों द्वारा बांह में काली पट्टी बांधकर किया जा रहा ऑनलाइन उपस्थिति का बहिष्कार! <a href="https://t.co/rD1qQdAp9P">pic.twitter.com/rD1qQdAp9P</a></p>
&mdash; बेसिक शिक्षा: सूचना और सामग्री (@Info_4Education) <a href="https://twitter.com/Info_4Education/status/1810162222934413442?ref_src=twsrc%5Etfw">July 8, 2024</a></blockquote>
<p>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</p>
<p><strong>क्या है आदेश?&nbsp;</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा विद्यालयों के डिजिटलीकरण के संबंध में 18 जून को जारी पत्र में प्रेरणा पोर्टल पर <strong>'डिजिटल रजिस्टर'</strong> नाम से विकसित मॉड्यूल की जानकारी दी गई थी। प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को प्रतिदिन विद्यालय आने और जाने का समय 15 जुलाई से<strong> डिजिटल अटेंडेंस रजिस्टर</strong> में दर्ज कराने का निर्देश दिया गया था। <span>लेकिन बाद में ऑनलाइन अटेंडेंस <strong>8 जुलाई</strong> से शुरू करने को कहा गया। </span>शिक्षकों को स्कूल शुरू होने से पहले सुबह 7.45 से 8 बजे तक अपनी डिजिटल हाजिरी लगानी होगी। शिक्षकों के साथ-साथ बच्चों की हाजिरी भी ऑनलाइन लगेगी।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>क्यों है विरोध?&nbsp;</strong></p>
<p>ऑनलाइन हाजिरी का विरोध कर रहे शिक्षकों का कहना है कि सुदूर ग्रामीण इलाकों में बारिश-आंधी के दौरान कई बार स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। इंटरनेट कनेक्टिविटी और सिग्नल की समस्या भी आती है। ऐसे में हाजिरी ना लगने से शिक्षकों का वेतन काटा जाएगा। शिक्षकों की मांगों और व्यावहारिक दिक्कतों पर विचार किए बगैर ऑनलाइन हाजिरी का आदेश जारी किया गया है। शिक्षकों का कहना है कि उनका विरोध हाजिरी को लेकर नहीं है, बल्कि मनमाने आदेश को लेकर है। <span>उनकी 31 ईएल, हाफ डे लीव, कैशलेस चिकित्सा जैसी मांगों को पूरा नहीं किया गया, लेकिन नया आदेश थोप दिया।&nbsp;</span></p>
<p><strong>लाखों ट्विट के बाद मिली 30 मिनट की छूट&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>ऑनलाइन हाजिरी के विरोध में लेकर सोशल मीडिया पर लाखों की तादाद में ट्विट और पोस्ट हुए, जिससे बेसिक शिक्षा विभाग और शीर्ष अधिकारियों में खलबली मचा गई। शिक्षकों के विरोध को देखते हुए विभाग ने हाजिरी लगाने में <strong>30 मिनट</strong> की छूट देने का फैसला किया है। अब शिक्षक 8.30 बजे तक हाजिरी लगा सकेंगे। लेकिन उन्हें देरी का कारण बताना होगा।&nbsp;</p>
<p><strong>बेसिक शिक्षा विभाग</strong>&nbsp;ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "हमें है आपकी समस्याओं का ख़याल, 30 मिनट बाद तक बना सकेंगे हाजिरी। परिषदीय विद्यालयों के डिजिटली हस्ताक्षर के आदेश दिये गये हैं। लेकिन अब निर्धारित समय से 30 मिनट बाद तक हाजिरी बनाने का मौका मिला है। बेसिक शिक्षा अधिकारियों और खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिये जा चुके हैं। हां, इतना जरूर है कि देर से स्कूल पहुँचने का कारण मेंशन करना होगा।"</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">प्राथमिक विद्यालय सोनगढा जनपद बलरामपुर के शिक्षक विषम परिस्थित मे विद्यालय जाते हुए...ऐसे में<br />15 जुलाई से शिक्षक और बच्चों दोनो की डिजिटल उपस्थिति जायेगी।शिक्षक यदि सेकंड भर लेट हुआ तो पूरे दिन की सैलरी गई।इसलिए हाफ सीएल और ई एल बहुत जरूरी है।<a href="https://twitter.com/DrDCSHARMAUPPSS?ref_src=twsrc%5Etfw">@DrDCSHARMAUPPSS</a> <a href="https://twitter.com/Aamitabh2?ref_src=twsrc%5Etfw">@Aamitabh2</a> <a href="https://t.co/rFjtVyCpsl">pic.twitter.com/rFjtVyCpsl</a></p>
&mdash; राकेश यादव (@yadavrakesh475) <a href="https://twitter.com/yadavrakesh475/status/1809453773158339069?ref_src=twsrc%5Etfw">July 6, 2024</a></blockquote>
<p>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668b940892386.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में ऑनलाइन हाजिरी के खिलाफ शिक्षकों का विरोध तेज, क्या है पूरा मामला    ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_668b940892386.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[शिमला में सेब माल भाड़ा तय, पेटियों के बजाए अब किलो के आधार पर होगी ढुलाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/apple-freight-rates-fixed-in-shimla-now-transportation-will-be-done-on-kilo-basis-instead-of-boxes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 06 Jul 2024 14:08:54 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/apple-freight-rates-fixed-in-shimla-now-transportation-will-be-done-on-kilo-basis-instead-of-boxes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश के सेब बेल्ट कहे जाने वाले शिमला जिले में सेब माल भाड़ा तय हो गया है। इस बार सेब की ढुलाई पेटियों के बजाए वजन (किलो) के आधार पर की जाएगी। इस संबंध में एसडीएम ने स्थानीय ट्रक ऑपरेटर यूनियन तथा सेब उत्पादक संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। जिसके बाद परिवहन शुल्क तय किया गया है। <strong>उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप</strong> ने बताया कि सेब उत्पादकों की सुविधा के लिए सेब परिवहन हेतु परिवहन शुल्क निर्धारित किया गया है ताकि उत्पादकों से उनकी फसल मंडियों तक पहुंचाने में कोई अधिक वसूली न कर सके। &nbsp;</p>
<p>उन्होंने बताया कि उपमंडल ठियोग से दिल्ली तक जाने वाले छः पहिया एवं छः पहियों से अधिक वाले ट्रक का 90 पैसे प्रति किलोमीटर, चण्डीगढ़ तक टाटा 407 एवं आईशर चार पहिया वाहन का एक रुपया 50 पैसे प्रति किलोमीटर, 20 किलोमीटर से अधिक दूरी के लिए पिकअप से परिवहन के लिए 2 रुपये 30 पैसा प्रति किलोमीटर तथा 20 किलोमीटर तक के दायरे के भीतर संपर्क मार्ग में चलने वाली पिकअप की दर 2 रुपये 50 पैसे प्रति किलोमीटर निर्धारित की गई है। उपमंडल रोहडू से दिल्ली तक जाने वाले ट्रक एवं अन्य वाहनों की दर 90 पैसे प्रति किलोमीटर, चण्डीगढ़ तक ट्रक एवं अन्य वाहनों की दर एक रुपया 30 पैसे प्रति किलोमीटर, 20 किलोमीटर से अधिक दूरी हेतु पिकअप से परिवहन के लिए 2 रुपये 30 पैसा प्रति किलोमीटर तथा 20 किलोमीटर तक के दायरे के भीतर संपर्क मार्ग में चलने वाली पिकअप की दर 2 रुपये 50 पैसे प्रति किलोमीटर निर्धारित किया गया है।</p>
<p>उपमंडल डोडरा-क्वार से चण्डीगढ़ से दूर स्थित मंडियों व दिल्ली तक जाने वाली गाड़ियों की दर 90 पैसे प्रति किलोमीटर तथा चंडीगढ़ तक जाने वाली गाड़ियों की दर 1 रुपया 30 पैसे प्रति किलोमीटर निर्धारित की गई है। उपमंडल कोटखाई से चंडीगढ़ तक तथा 250 किलोमीटर से कम दूरी तक परिवहन शुल्क 1 रुपये 30 पैसे प्रति किलोमीटर तथा दिल्ली एवं 250 किलोमीटर से अधिक दूरी के लिए परिवहन शुल्क 90 पैसे प्रति किलोमीटर निर्धारित की गई है। उपमंडल रामपुर से चंडीगढ़ तक एक रुपये 50 पैसे प्रति किलोमीटर तथा दिल्ली के लिए 90 पैसे प्रति किलोमीटर परिवहन शुल्क निर्धारित किया गया है।</p>
<p>उपमंडल जुब्बल से चंडीगढ़ तक तथा 250 किलोमीटर से कम दूरी तक एक रुपये 30 पैसे प्रति किलोमीटर एवं दिल्ली तथा 250 किलोमीटर से अधिक दूरी के लिए 90 पैसा प्रति किलोमीटर परिवहन शुल्क निर्धारित किया गया है। उपमंडल कुमारसैन से दिल्ली तक जाने वाले छः पहिया ट्रक एवं इससे अधिक के लिए 90 पैसा प्रति किलोमीटर, चंडीगढ़ तक टाटा 407 एवं चार पहिया आईशर के लिए एक रुपये 50 पैसा प्रति किलोमीटर, 30 किलोमीटर से अधिक दूरी के लिए चलने वाली पिक-अप के लिए 2 रुपये 70 पैसे प्रति किलोमीटर एवं संपर्क मार्ग में 30 किलोमीटर के दायरे के भीतर चलने वाली पिकअप का परिवहन शुल्क 3 रुपये 30 पैसे प्रति किलोमीटर निर्धारित किया गया है। &nbsp;</p>
<p>उपमंडल कुपवी और चैपाल से चंडीगढ़ से दूर स्थित मंडियों व दिल्ली तक छः पहिया ट्रक तथा इससे अधिक का 95 पैसा प्रति किलोमीटर, चंडीगढ़ तक छः पहिया ट्रक तथा इससे अधिक का 1 रुपये 20 पैसे प्रति किलोमीटर, चंडीगढ़ तक जाने वाले टाटा 407 एवं आईशर चार पहिया का 1 रुपये 30 पैसे प्रति किलोमीटर, 20 किलोमीटर से अधिक दूरी तक चलने वाली पिकअप का 2 रुपये 50 पैसे प्रति किलोमीटर, संपर्क मार्ग में 20 किलोमीटर तक चलने वाली पिकअप का 2 रुपये 60 पैसा प्रति किलोमीटर परिवहन शुल्क निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह दरें प्रति क्विंटल के हिसाब से निर्धारित की गई है। अधिक वसूली पर डिफॉल्टर ट्रक, मिनी ट्रक, पिकअप, ऑपरेटर यूनियनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6688f12e722ed.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ शिमला में सेब माल भाड़ा तय, पेटियों के बजाए अब किलो के आधार पर होगी ढुलाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6688f12e722ed.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[युवाओं को डेयरी सेक्टर में स्वरोजगार के गुर सिखाए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/teach-youth-the-tricks-of-self-employment-in-dairy-farming-and-vermicompost.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 05 Jul 2024 18:53:58 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/teach-youth-the-tricks-of-self-employment-in-dairy-farming-and-vermicompost.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>युवा अगर वैज्ञानिक तरीके से डेयरी व्यवसाय करेंगे तो उन्हें ज्यादा लाभ मिलेगा। यह बात ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई) निदेशक दीपक कुमार ने डेयरी फार्मिंग एवं वर्मी कम्पोस्ट पर माटकी झरौली (सहारनपुर) में आयोजित 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि आरएसईटीआई ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को कौशल प्रदान कर स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रयासरत है। डेयरी व्यवसाय प्राचीन काल से देश की आर्थिक उन्नति की नींव रही है। यदि इस व्यवसाय को नई तकनीक एवं बेहतर प्रशिक्षण के साथ किया जाए, तो युवाओं को इसका लाभ जल्द मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद भी लगातार दो वर्षों तक युवाओं का मार्गदर्शन किया जाता है, ताकि उन्हें किसी भी तहत की दिक्कतों का सामना न करना पड़े।&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पधारे ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार एवं भारतीय आर्थिक सेवा के पूर्व अधिकारी डॉ. महिपाल सिंह ने कहा कि भारत सरकार जनपद स्तर पर ग्रामीण युवाओं को आरएसईटीआई के माध्यम से प्रशिक्षित कर स्वावलंबी बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में जैविक खाद की जरूरत दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। खाद का प्रभाव कई साल तक बना रहता है। डेयरी व्यवसाय का यह प्रशिक्षण आपकी सफलता की प्रथम सीढ़ी साबित होगी।&nbsp;</p>
<p>वहीं, कार्यक्रम के संयोजक अमित कुमार चौबे ने कहा कि 10 दिवसीय प्रशिक्षण में पशुओं की नस्ल रोग एवं निदान स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, जैविक खाद निर्माण, मार्केटिंग, मार्केट सर्वे के साथ-साथ खेती से जुड़े अन्य व्यवसाय के बारे में 29 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भी प्रशिक्षण में लिया हिस्सा। इस दौरान उन्हें कई सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ युवाओं को डेयरी सेक्टर में स्वरोजगार के गुर सिखाए ]]></media:description>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सदन में घोषणा के बाद भी नहीं हुआ मोरना चीनी मिल का विस्तार, अब जयंत चौधरी ने सीएम को लिखा पत्र  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/morna-sugar-mill-did-not-expand-even-after-the-announcement-in-the-house-jayant-chaudhary-wrote-a-letter-to-the-cm-yogi-adityanath.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 05 Jul 2024 11:58:11 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
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        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में स्थित मोरना शुगर मिल के विस्तारीकरण का मामला कई साल से अटका हुआ है। किसानों के तमाम विरोध-प्रदर्शन और सरकार के आश्वासनों के बावजूद अभी तक मोरना चीनी मिल की क्षमता में विस्तार नहीं हो पाया। अब इस मुद्दे पर भाजपा के सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है।</p>
<p>जयंत चौधरी ने मोरना में द गंगा किसान सहकारी चीनी मिल लिमिटेड मोरना के विस्तारीकरण के संबंध में बिजनौर के सांसद चंदन चौहान के अनुरोध का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने तथा भंडारण व्यवस्था में सुधार का अनुरोध किया है। जयंत चौधरी ने अपने पत्र में सरकार द्वारा 2021 में सदन में की गई घोषणा का जिक्र भी किया है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>पिछले कई वर्षों से मोरना चीनी मिल के विस्तारीकरण की मांग उठ रही है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने 16 दिसंबर, 2021 को मोरना चीनी मिल के विस्तारीकरण की घोषणा की थी। राज्य सरकार ने बजट में मोरना चीनी मिल के अपग्रेडेशन के लिए 65 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया था। लेकिन मुख्यमंत्री के ऐलान के बावजूद मिल के विस्तारीकरण का काम आगे नहीं बढ़ पाया।</p>
<p>मोरना चीनी मिल की वर्तमान क्षमता 2500 टन प्रतिदिन (टीसीडी) है जो क्षेत्र में गन्ने के बढ़ते उत्पादन को देखते हुए नाकाफी है। क्षेत्र के किसान काफी समय से चीनी मिल के विस्तार की मांग कर रहे हैं। कई बार इस मुद्दे पर किसान संगठन धरने-प्रदर्शन भी कर चुके हैं। साल 2021 में प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा और खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोरना शुगर मिल के विस्तारीकरण का ऐलान किया था, जो चुनावी शिगूफा साबित हुआ। 2022 में भाजपा के भारी बहुमत से दोबारा सरकार बनाने के बाद भी किसानों की यह मांग पूरी नहीं हो पाई।</p>
<p>विपक्ष में रहते हुए राष्ट्रीय लोकदल मोरना चीनी मिल विस्तार के मुद्दे भाजपा सरकार पर काफी हमलावर थी लेकिन अब भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार में भागीदार है। विपक्ष में रहते हुए चंदन चौहान पूर्व गन्ना मंत्री सुरेश राणा और भाजपा सरकार पर चीनी मिल के विस्तारीकरण पर झूठ बोलने का आरोप लगाते थे। अब देखना है कि सरकार में भागीदार रालोद के नेता इस मांग को कब तक पूरा करवा पाते हैं।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_6687908ccac8d.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6687919c5c34f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सदन में घोषणा के बाद भी नहीं हुआ मोरना चीनी मिल का विस्तार, अब जयंत चौधरी ने सीएम को लिखा पत्र   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों को खेत तालाब के लिए मिलेगा 1.35 लाख रुपये तक का अनुदान, ऐसे करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-will-get-a-grant-of-up-to-rs-135-thousand-for-farm-pond-apply-like-this.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 04 Jul 2024 19:01:17 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-will-get-a-grant-of-up-to-rs-135-thousand-for-farm-pond-apply-like-this.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गिरते भू-जल स्तर के कारण खेती-किसानी पर सीधा असर पड़ रहा है। सिंचाई के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा कई योजनाऐं चलाई जा रही है। गिरते भू-जल स्तर को रोकने और पानी के कुशलतम उपयोग को बढ़ावा देने के लिए &lsquo;&lsquo;पर ड्रोप मोर क्रोप&lsquo;&lsquo; और अदर इन्टरवेशन योजना अन्तर्गत खेत तालाब का निर्माण करवाया जा रहा है।&nbsp;</p>
<p>राजस्थान के कृषि आयुक्त <strong>कन्हैया लाल स्वामी</strong> ने बताया कि योजना के अन्तर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं सीमान्त किसानों को 1200 घन मीटर पर लागत का 70 फीसदी या अधिकतम 73500 रुपये कच्चे फार्म पौण्ड पर, लागत का 90 फीसदी या 1 लाख 35 हजार रुपये प्लास्टिक लाईनिंग फार्म पौण्ड पर और अन्य श्रेणी के किसानों को लागत का 60 फीसदी या अधिकतम 63 हजार रूपये कच्चे फार्म पौण्ड पर तथा लागत का 80 फीसदी या 1 लाख 20 हजार रुपये प्लास्टिक लाईनिंग फार्म पौण्ड पर जो भी कम हो, अनुदान दिया जा रहा है। यह अनुदान न्यूनतम 400 घन मीटर क्षमता के खेत तालाब (फार्म पौण्ड) पर ही मिलता है।&nbsp;</p>
<p>जिस किसान के पास स्वयं के नाम एक ही स्थान पर न्यूनतम 0.3 हेक्टेयर एवं संयुक्त खातेदारी की स्थिति में भी 0.3 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि हो, वे अनुदान के पात्र होंगे। अनुदान हेतु किसान को जमाबंदी की नकल जो 6 माह से पुरानी न हो और जिस खसरे में फार्म पौण्ड बनाना है उसका राजस्व विभाग द्वारा जारी नक्शा देना होगा।&nbsp;</p>
<p>खेत तालाब के लिए अनुदान के आवेदन की प्रक्रिया पूर्ण रूप से ऑनलाइन है। किसान इस योजना का लाभ लेने के लिए <a href="https://rajkisan.rajasthan.gov.in/">राज किसान साथी पोर्टल</a> पर जन आधार के माध्यम से अथवा ई-मित्र पर जाकर आवेदन कर सकते है। योजना का फायदा उठाने के लिए किसान के पास जमाबंदी 6 माह से पुरानी न हो, खेत का नक्शा और आधार कार्ड होना आवश्यक है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों को खेत तालाब के लिए मिलेगा 1.35 लाख रुपये तक का अनुदान, ऐसे करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का इस्तीफा, लोकसभा चुनाव में हार का असर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-agriculture-minister-kirori-lal-meena-resigns-impact-of-defeat-in-lok-sabha.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 04 Jul 2024 12:05:42 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-agriculture-minister-kirori-lal-meena-resigns-impact-of-defeat-in-lok-sabha.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान में भाजपा के कद्दावर नेता और प्रदेश के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके एक सहयोगी ने इस्तीफे की जानकारी दी है। इसे राजस्थान में भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि, अभी उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ और भाजपा उन्हें मानाने की कोशिश कर सकती है।</p>
<p>लोकसभा चुनाव के दौरान किरोड़ी लाल मीणा ने ऐलान किया था कि अगर उनके प्रभाव वाली सीटों पर भाजपा हार गई तो वे मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। भाजपा उनके गृह क्षेत्र दौसा में ही चुनाव हार गई थी। तभी से उनके इस्तीफे की अटकलें लगाई जा रही थी। विपक्षी दल कांग्रेस के नेता उन्हें इस्तीफे की चुनौती दे रहे थे। अब मंत्री पद से इस्तीफा देकर किरोड़ी लाल मीणा प्रदेश के भजन लाल शर्मा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>लोकसभा चुनाव में राजस्थान की 25 सीटों में से 11 सीटों पर हार से भाजपा संगठन में घमासान मचा हुआ है। कई दिनों से राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा के इस्तीफा की अटकलें लगाई जा रही थीं। बताया जा रहा है कि किरोड़ीलाल मीणा ने दो दिन पहले ही इस्तीफा दे दिया था। मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद किरोड़ी लाल मीणा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया, <em>&ldquo;रघुकुल रीति सदा चलि आई। प्राण जाई पर बचन न जाई।&ldquo;&nbsp;</em></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किरोड़ी लाल मीणा को राजस्थान की सात सीटों - भरतपुर, <span>धौलपुर करौली</span>, <span>अलवर</span>, <span>जयपुर ग्रामीण</span>, <span>दौसा</span>, <span>टोंक सवाई माधोपुर और झालावाड़ पर बीजेपी को जिताने की जिम्मेदारी दी थी। लेकिन इन सात सीटों में चार सीटें भाजपा हार गई। किरोड़ी लाल मीणा को सबसे बड़ा झटका उनके गृह क्षेत्र दौसा और टोंक-सवाईमाधोपुर सीट पर लगा। दौसा में कांग्रेस के मुरारी लाल मीणा ने भाजपा प्रत्याशी को 2.37 लाख वोटों से हराया।&nbsp;</span></p>
<p>लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद किरोड़ी लाल मीणा ने सरकारी गाड़ी छोड़ दी थी और अपने विभाग नहीं जा रहे थे। इसके बाद अब मंत्री किरोड़ी लाल मीना ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। अब देखना है कि क्या किरोड़ी लाल मीणा का इस्तीफा भाजपा को राजस्थान सरकार में नेतृत्व परिवर्तन के लिए मजबूर करेगा! विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद भाजपा ने तमाम दिग्गज नेताओं को दरकिनार करते हुए एक नए चेहरे भजन लाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया था।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का इस्तीफा, लोकसभा चुनाव में हार का असर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश बजट: कृषि व संबद्ध क्षेत्रों के बजट में 23 फीसदी बढ़ोतरी, कई अहम घोषणाएं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-budget-23-percent-hike-in-the-budget-of-agriculture-and-allied-sectors-many-important-announcements-for-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 03 Jul 2024 19:29:21 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-budget-23-percent-hike-in-the-budget-of-agriculture-and-allied-sectors-many-important-announcements-for-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश सरकार ने बुधवार को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 3.65 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16 प्रतिशत की वृद्धि है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री तथा वित्त मंत्री <strong>जगदीश देवड़ा</strong> ने बजट पेश करते हुए कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए <strong>66 हजार 605 करोड़</strong> रुपये का प्रावधान किया गया है जो गत वर्ष की तुलना में 23 फीसदी अधिक है।&nbsp;</p>
<p>वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए एमएसपी के अलावा गेहूं खरीद पर 125 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है। इसके लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में सिंचाई अंतर्गत क्षेत्र को वर्ष 2025-26 तक वर्तमान 50 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। सिंचाई परियोजनाओं के लिए 13,596 करोड़ का प्रावधान किया गया है।</p>
<p>बजट में कृषि क्षेत्र का आवंटन पिछले वित्त वर्ष के 22,732 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 26,126 करोड़ रुपये कर दिया गया है। <strong>श्री अन्न उत्पादन</strong> को बढ़ावा देने के लिए लिए <strong>मध्यप्रदेश राज्य मिलेट मिशन</strong> शुरू किया गया है। कोदो-कुटकी की खरीद पर 10 रुपये प्रति किलो अतिरिक्त राशि दी जाएगी। जिला डिंडोरी में <strong>श्री अन्न अनुसंधान केंद्र</strong> की स्थापना प्रस्तावित है।&nbsp;</p>
<p><strong>मिट्टी परीक्षण</strong> लैब को एफपीओ और कृषि स्नातक उद्यमियों के माध्यम से संचालित करने के लिए <strong>50 करोड़</strong> रुपये बजट रखा गया है। कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए उज्जैन जिले में <strong>चना</strong> तथा ग्वालियर जिले में <strong>सरसों अनुसंधान संस्थान</strong> की स्थापना की जाएगी। किसानों को ट्रैक्टरों एवं कृषि उपकरण सब्सिडी के लिए <strong>208 करोड़</strong> के बजट का प्रावधान किया गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>अनुसूचित जाति एवं जनजाति</strong> के एक हेक्टेयर तक के भूमिधारकों को 5 हॉर्सपावर तक के विद्युत पंप उपयोग पर निशुल्क बिजली तथा <strong>अटल कृषि ज्योति योजना</strong> के अंतर्गत 10 हॉर्सपावर तक के किसानों को ऊर्जा प्रभार में सब्सिडी दी जा रही है। इसके लिए बजट में 11 हजार 65 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। <strong>प्राकृतिक खेती</strong> को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने 30 करोड़ रुपये का बजट रखा है।&nbsp;</p>
<p>किसानों को <strong>शून्य ब्याज</strong> पर अल्पकालीन फसल ऋण उपलब्ध कराने के लिए बजट में 600 करोड़ रुपये का प्रावधान है। वित्त मंत्री ने बताया कि इससे प्रदेश के 32 लाख से अधिक किसान लाभान्वित होंगे। राज्य सरकार ने वर्ष 2024-25 में किसानों को 23 हजार करोड़ रुपये का फसल कर्ज वितरण का लक्ष्य रखा है जबकि गत वर्ष किसानों को 19 हजार 946 करोड़ रुपये का फसल कर्ज वितरित किया था।&nbsp;<strong>राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन</strong> के लिए वर्ष 2024-25 में 800 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है जो पिछले वर्ष की तुलना में 33 फीसदी अधिक है।</p>
<p>वित्त मंत्री ने दुग्ध उत्पादकों की आय में बढ़ोतरी के लिए <strong>मुख्यमंत्री सहकारी दुग्ध उत्पादक प्रोत्साहन योजना</strong> शुरू करने का ऐलान किया है। इसके लिए 150 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। गौशालाओं में पशु आहार के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली राशि को प्रति गौवंश प्रति दिन 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये किया जाएगा। पशुपालकों तथा गौसंवर्धन से संबंधित योजनाओं का बजट पिछले वर्ष के 335 करोड़ रुपये से<strong> 76 फीसदी</strong> बढ़ाकर वर्ष 2024-25 में 590 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश बजट: कृषि व संबद्ध क्षेत्रों के बजट में 23 फीसदी बढ़ोतरी, कई अहम घोषणाएं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हिमाचल में यूनिवर्सल कार्टन के दाम तय, अब इतनी होगी कीमत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/government-fixed-universal-carton-prices-in-himachal-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 02 Jul 2024 19:41:12 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/government-fixed-universal-carton-prices-in-himachal-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश में यूनिवर्सल कार्टन के दाम तय कर दिए गए हैं। हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड (एचपीएमसी) ने पिछले साल के मुकाबले कार्टन के दामों में कटौती की है। जिसमें ब्राउन यूनिवर्सल कार्टन का दाम 48 रुपये और सफेद यूनिवर्सल कार्टन का दाम 56 रुपये तय किया गया है। इस कीमत पर बागवानों को जीएसटी अलग से चुकाना होगा। पिछले साल ब्राउन कार्टन का दाम 51.50 रुपये और सफेद का दाम 63.50 रुपये था। दोनों कार्टन की कीमतों में 7.50 और 3.50 रुपये की कटौती की गई है। इस लिहाज से बागवानों को कार्टन के दाम पर कुछ हद तक राहत मिली है। हालांकि, बागवानों का कहना है कि दाम और कम किए जा सकते थे।&nbsp;</p>
<p>बागवानों को यूनिवर्सल कार्टन उपलब्ध करवाने के लिए सोमवार को एचपीएमसी ने टेंडर प्रक्रिया पूरी की। जानकारी के अनुसार, एचपीएमसी ने कार्टन कंपनियों द्वारा प्राप्त आवेदनों की जांच की और दी गई कीमतों का आकलन किया। टेंडर प्रक्रिया में शिवालिक कंटेनर्ज, जेज पैकर्स और जसमेर मेकर्स को शॉर्टलिस्ट किया गया। अब यही कंपनियां एचपीएमसी को कार्टन उपलब्ध कराएंगे। एचपीएमसी ने तीनों कंपनियों को एक हफ्ते के अंदर कार्टन उपलब्ध करवाने को कहा है। इस साल कार्टन पर जीसएटी की दरें भी पिछले साल के मुकाबले 6 फीसदी कम है। हाल ही में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में कार्टन पर जीएसटी 18 से घटाकर 12 फीसदी कर दिया गया है। जिसका फायदा हिमाचल के बागवानों को भी हुई है।&nbsp;</p>
<p>महाप्रबंधक, एचपीएमसी, <strong>सन्नी शर्मा</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> से बात करते हुए बताया कि इस साल हिमाचल में सेब सिर्फ यूनिवर्सल कार्टन में ही बेचा जाएगा। जिसके लिए यूनिवर्सल कार्टन की कीमतें तय कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि बागवानों को ब्राउन यूनिवर्सल कार्टन 48 रुपये और सफेद यूनिवर्सल कार्टन 56 रुपये में उपलब्ध करवाया जाएगा। इस पर बागवानों को 12 फीसदी जीएसटी अतिरिक्त चुकानी होगी।</p>
<p>वहीं, प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष <strong>लोकेंद्र सिंह बिष्ट</strong> ने रूरल वॉयस को बताया कि सरकार ने भले ही कार्टन की कीमतों में कटौती की है। लेकिन, दाम 2 से 5 रुपये और कम किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में &nbsp;हर साल 3 से 4 करोड़ पेटी सेब होता है। जबकि, एचपीएसी हर साल सिर्फ 15-20 लाख कार्टन ही उपलब्ध करवा पाता है। एचपीएमसी का दाम हर साल मार्केट रेट से 2 से 10 रुपये तक ज्यादा होता है। सरकारी एजेंसी का रेट ज्यादा होने से बाजार में भी कीमत बढ़ जाती है। ऐसे में एचपीएमसी को अपना दाम और कम करना चाहिए था।&nbsp;</p>
<p><strong>यूनिवर्सल और टेलीस्कोपिक कार्टन में अंतर</strong></p>
<p>यूनिवर्सल कार्टन में जहां एक सिंगल पीस बॉक्स होता है। वहीं, &nbsp;टेलीस्कोपिक कार्टन में दो बॉक्स होते हैं। इसमें 5 लेयर की पेटी को बढ़ाकर 7 लेयर तक किया जा सकता है। जबकि, यूनिवर्सल कार्टन फिक्स होता है और इसमें 5 लेयर ही पैक की जा सकती है। जिसका वजन 20 किलो तक होता है। यूनिवर्सल कार्टन का फायदा यह होगा की बागवानों को अब तय वजन के हिसाब से सेब का पैसा मिलेगा। जबकि, पहले टेलीस्कोपिक कार्टन में उन्हें ज्यादा सेब कम भाव में देना पड़ता था। यूनिवर्सल कार्टन के आने से बागवानों को कितना फायदा होता है, यह तो मौजूदा सेब सीजन खत्म होने के बाद ही पता चल पाएगा। फिलहाल, प्रदेश सरकार ने राज्य में सेब के लिए यूनिवर्सल कार्टन अनिवार्य कर दिया है।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6683d853183f3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हिमाचल में यूनिवर्सल कार्टन के दाम तय, अब इतनी होगी कीमत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी के हाथरस में भगदड़ मचने से 120 से ज्यादा लोगों की मौत, 150 घायल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/stampede-during-a-satsang-in-hathras-up-many-people-died-many-injured.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 02 Jul 2024 19:13:22 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/stampede-during-a-satsang-in-hathras-up-many-people-died-many-injured.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में मंगलवार को बड़ा हादसा हो गया। जिले के सिकंदराराऊ कस्बे के फुलरई गांव में एक सत्संग के दौरान भगदड़ मच गई। जिसमें 120 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है। वहीं, 150 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को नजदीकी अस्पातल में भर्ती कराया गया है। हादसे में मरने वालों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।&nbsp;</p>
<p>प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर दुख जताते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्&zwj;होंने कहा कि पीड़ितों की हर संभव मदद की जाएगी। मुख्&zwj;यमंत्री योगी आदित्&zwj;यनाथ ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश भी दिए हैं।&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">जनपद हाथरस की दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना में हुई जनहानि अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है।<br /><br />मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं।<br /><br />संबंधित अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों के युद्ध स्तर पर संचालन और घायलों के समुचित उपचार हेतु निर्देश दिए हैं। <br /><br />उत्तर प्रदेश सरकार में मा.&hellip;</p>
&mdash; Yogi Adityanath (@myogiadityanath) <a href="https://twitter.com/myogiadityanath/status/1808103722851225625?ref_src=twsrc%5Etfw">July 2, 2024</a></blockquote>
<p>हाथरस के डीएम आशीष कुमार ने भगदड़ मचने से 50 से 60 लोगों की मौत की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन घटना की सक्रियता से जांच कर रहा है। घायलों को अस्पताल ले जाया जा रहा है और लोगों की हालत में सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति एसडीएम ने दी थी और यह एक निजी कार्यक्रम था। मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। प्रशासन का प्राथमिक ध्यान घायलों और मृतकों के परिजनों को हर संभव मदद मुहैया कराना है।</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, सत्संग में हजारों लोग जुटे थे। सत्संग खत्म होते ही श्रद्धालु बाहर निकलने लगे। सत्संग हॉल का गेट छोटा होने के कारण लोग एक दूसरे से पहले निकलने की होड़ करने लगे। इस चक्कर में वहां भगदड़ मच गई। भगदड़ के कारण लोग एक दूसरे गिर पड़े और वहां चीख पुकार मच गई।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6684024897814.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी के हाथरस में भगदड़ मचने से 120 से ज्यादा लोगों की मौत, 150 घायल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी एग्रीटेक नीति को मंजूरी, डिजिटल एग्रीकल्चर पर जोर, 20% ग्रोथ का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-agritech-policy-approved-emphasis-on-digital-agriculture-target-of-20-agricultural-growth-rate.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 02 Jul 2024 18:50:46 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-agritech-policy-approved-emphasis-on-digital-agriculture-target-of-20-agricultural-growth-rate.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यूपी एग्रीटेक नीति-2024 को मंजूरी दी गई। प्रदेश में डिजिटल एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने के साथ-साथ <span>वर्तमान कृषि विकास दर 10 फीसदी को दोगुना कर 20 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।</span> इसी के साथ उत्तर प्रदेश चारा नीति 2024-29 को भी स्वीकृति मिल गई है।<span></span></p>
<p>कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में डिजिटल आधारित खेती में क्रांतिकारी परिवर्तन के लिए यूपी एग्रीटेक नीति लाई गई है। इससे कृषि तकनीक, सरकारी योजनाओं, मौसम आदि की जानकारी किसानों को समय पर दी जाएगी। कृषि विभाग को पूरी तरह डिजिटल किया जाएगा और किसानों तक रियल टाइम पर सूचनाएं पहुंचाई जाएंगी।</p>
<p>कृषि मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब डिजिटल कृषि की ओर बढ़ रहा है। कृषि में एडवांस तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, ब्लॉक चेन आदि का इस्तेमाल होगा। प्रदेश में किसान रजिस्ट्री का काम शुरू हो गया है। कृषि स्टार्टअप को भी बढ़ावा दिया जाएगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत में ऑटोमेटिक रेन गेज स्टेशन और प्रत्येक ब्लॉक में ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन लगाए जा रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि पशुधन विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। पांच वर्ष के लिए पशुधन, <span>कुक्कुट एवं मत्स्य आहार प्रोत्साहन नीति </span>2024 <span>का प्रस्ताव पारित किया गया है। इसके माध्यम से पशुओं के लिए संतुलित आहार को बढ़ावा देने का लक्ष्य है। मवेशियों को कृत्रिम गर्भाधान के लिए पंजीकृत करने वाले किसानों को योगी सरकार प्रोत्साहित करेगी। दुग्धापादन के लिए अच्छी नस्ल की गायों के वृद्धि के लिए आहार नीति लाई गई है।</span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6683fd329b686.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी एग्रीटेक नीति को मंजूरी, डिजिटल एग्रीकल्चर पर जोर, 20% ग्रोथ का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में निजी नलकूपों के लिए मुफ्त बिजली योजना, पंजीकरण की आखिरी तारीख 15 जुलाई तक बढ़ी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/free-electricity-scheme-for-tube-wells-in-up-last-date-for-registration-extended-till-15th-july.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 02 Jul 2024 12:46:21 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/free-electricity-scheme-for-tube-wells-in-up-last-date-for-registration-extended-till-15th-july.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के निजी नलकूपों/ट्यूबवेल के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की योजना शुरू की है। इस योजना के लिए आवेदन की अंतिम तिथि पहले 30 जून थी। लेकिन, राज्य सरकार ने किसानों की सुविधा को देखते हुए यह अंतिम तारीख 15 जुलाई तक बढ़ा दी है। योजना के तहत किसानों को 10 हार्स पावर तक 140 यूनिट/किलोवाट प्रति माह उपयोग करने पर सौ प्रतिशत की छूट मिलेगी। इसी तरह 140 यूनिट/किलोवाट प्रति माह से अधिक उपयोग करने पर किसान को अतिरिक्त खपत के टैरिफ का भुगतान करना होगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x_6683a98b63a6c.jpg" alt="" /></p>
<p>सरकार ने 13 लाख किसानों को मुफ्त बिजली देने का लक्ष्य रखा है। लेकिन, 30 जून तक करीब 90 हजार किसान ही इस योजना के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवा पाए। ऐसे में किसानों को राहत देते हुए उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने रजिस्ट्रेशन की अवधि 15 दिनों के लिए बढ़ी दी है। पावर कारपोरेशन ने किसानों से जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन करवाने को कहा है। हालांकि, किसानों ने रजिस्ट्रेशन के लिए दो महीने की छूट देने की मांग की थी।&nbsp;</p>
<p>मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाने के लिए किसान उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन की आधिकारिक वेबसाइट <strong><a href="https://uppcl.org/uppcl/hi/">https://uppcl.org/uppcl/hi/</a> </strong>पर जाकर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। किसानों के लिए यह रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, तभी किसान मुफ्त बिजली का लाभ उठा पाएंगे। वहीं, योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए कृषि और बिजली विभाग में संपर्क किया जा सकता है।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6683a6af6403c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में निजी नलकूपों के लिए मुफ्त बिजली योजना, पंजीकरण की आखिरी तारीख 15 जुलाई तक बढ़ी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_6683a6af6403c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों पर मिलेगी 50 फीसदी सब्सिडी, करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/uttar-pradesh-agriculture-department-is-giving-50-percent-subsidy-on-crop-residue-management-agricultural-equipments.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 01 Jul 2024 14:39:06 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/uttar-pradesh-agriculture-department-is-giving-50-percent-subsidy-on-crop-residue-management-agricultural-equipments.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश कृषि विभाग किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन वाले कृषि यंत्रों पर अनुदान का मौका दे रहा है। यह अनुदान प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फॉर इन सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेज्डयू (सी.आर.एम.) योजना के तहत दिया जा रहा है। इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया 2 जुलाई, 2024 को दोपहर 12 बजे से शरू हो रही है। किसान 16 जुलाई दोपहर 12 बजे तक इसके लिए आवेदन कर सकेंगे।&nbsp;</p>
<p>किसानों को सुपर सीडर समेत 11&nbsp;कृषि यंत्रों पर 50 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी। इनमें <strong>सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (सुपर एसएमएस), हैप्पी सीडर/स्मार्ट सीडर, सुपर सीडर, पैडी स्ट्रा चोपर/ श्रेडर, मास्टर/रोटरी स्लैशर, सरफेस सीडर, हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, बेलिंग मशीन, स्ट्रा रेक, जीरो टिल सीड कम फर्टीलाइजर डिल, क्रॉप पर ट्रैक्टर माउंटेड / सेल्फ प्रोपेल्ड और सेल्फ प्रोपेल्ड रीपर कम बाइंडर</strong> शामिल हैं।</p>
<p>योजना के तहत किसान एक या उससे अधिक यंत्र भी खरीद पाएंगे। लेकिन, इसके लिए किसानों को समय पर आवेदन करना होगा। फसल अवशेष प्रबंधन वाले कृषि यंत्रों पर अधिकतम 50 फीसदी अनुदान और कस्टम हायरिंग सेंटर पर अधिकतम 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए कृषि विभाग ने एक लक्ष्य भी तय किया है। हालांकि, तय लक्ष्य से अधिक आवेदन प्राप्त होने की स्थिति में &nbsp;जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कार्यकारी समिति का गठन किया जाएगा। जिसके बाद समिति ई-लॉटरी के माध्यम से लाभार्थियों का चयन करेगी।&nbsp;</p>
<p>आवेदन करते समय किसानों को यंत्रवार निर्धारित जमानत राशि ऑनलाइन जमा करनी होगी। एक लाख तक अनुदान के कृषि यंत्रों पर जमानत धनराशि 2,500 रुपये होगी। जबकि, एक लाख से अधिक अनुदान के कृषि यंत्रों पर जमानत राशि 5 हजार रुपये होगी। योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को कृषि विभाग की आधिकारी वेबसाइट <strong><a href="https://agriculture.up.gov.in/">https://www.agriculture.up.gov.in</a></strong> पर जाना होगा। जहां "यंत्र पर अनुदान हेतु टोकन निकालें" लिंक पर क्लिक कर किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। &nbsp;</p>
<p>कृषि यंत्र की खरीद के बाद किसान को विभागीय पोर्टल पर रसीद की फोटो व सीरियल नंबर एवं संबंधित अभिलेख अपलोड करने होंगे। इसके लिए किसान को अधिकतम 30 दिन और स्टम हायरिंग सेंटर को 45 दिन का समय दिया जाएगा। विभाग के पोर्टल पर सूचीबद्ध किसी भी कंपनी से किसान कृषि यंत्र खरीद सकते हैं। टोकन कंफर्म होने पर किसान को निर्धारित समयावधि में कृषि यंत्र की खरीद करनी होगी। ऐसा न करने पर आवेदन रद्द कर दिया जाएगा।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66827d5bcee6d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों पर मिलेगी 50 फीसदी सब्सिडी, करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66827d5bcee6d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फसल विविधीकरण के लिए मक्का की खेती पर 6 हजार की वित्तीय सहायता देगी पंजाब सरकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-will-give-financial-assistance-of-6-thousand-rupees-on-maize-cultivation-for-crop-diversification.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 01 Jul 2024 14:06:36 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-will-give-financial-assistance-of-6-thousand-rupees-on-maize-cultivation-for-crop-diversification.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग फसल विविधीकरण के लिए मक्का की खेती पर किसानों को 6 हजार की वित्तीय सहायता देगा। साथ ही&nbsp;खरीफ मक्का के हाइब्रिड बीजों पर सब्सिडी भी दी जाएगी। इस वर्ष कृषि विभाग ने मक्का की खेती के तहत 4,700 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को कवर करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए किसानों को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना द्वारा प्रमाणित और अनुशंसित हाइब्रिड मक्का के बीज दिए जाएंगे। विभाग प्रत्येक 1 किलोग्राम बीज की खरीद पर किसान को 100 रुपये की सब्सिडी देगा।&nbsp;</p>
<p>पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि कृषि विभाग हाइब्रिड खरीफ मक्का के बीजों के लिए किसानों को सब्सिडी दे रहा है। यह सब्सिडी अधिकतम 5 एकड़ क्षेत्र या प्रति किसान 40 किलोग्राम के लिए प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों को कुल 2,300 क्विंटल बीज रियायती मूल्य पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही किसानों को उर्वरक और कीटनाशकों सहित विभिन्न इनपुट के लिए 6 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की वित्तीय सहायता भी मिलेगी।&nbsp;</p>
<p>कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य के किसानों को पानी की अधिक खपत करने वाली धान की फसल से दूर रखने और भूजल को बचाने के लिए सरकार ने रिकॉर्ड 2 लाख हेक्टेयर में खरीफ मक्का की खेती का लक्ष्य रखा है। यह पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना है। खुदियां ने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लाभार्थी किसानों को डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सब्सिडी राशि बैंक खातों में भेजी जाएगी।&nbsp;उन्होंने कहा कि राज्य के इच्छुक किसान हाइब्रिड मक्का के बीज पर सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल<strong><a href="https://agrimachinerypb.com/"> agrimachinerypb.com</a> </strong>पर अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66827a473577b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ फसल विविधीकरण के लिए मक्का की खेती पर 6 हजार की वित्तीय सहायता देगी पंजाब सरकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66827a473577b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विदेशी सेब पर 100 फीसदी आयात शुल्क लगाने की मांग, प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/apple-grower-harish-chauhan-wrote-a-letter-to-prime-minister-modi-demanding-100-percent-import-duty-on-foreign-apples.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 01 Jul 2024 11:52:47 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/apple-grower-harish-chauhan-wrote-a-letter-to-prime-minister-modi-demanding-100-percent-import-duty-on-foreign-apples.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश सब्जी और फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने विदेश से आयात हो रहे सेब पर 100 फीसदी आयात शुल्क लागू करने की मांग की है। पत्र के जरिए उन्होंने प्रधानमंत्री को सेब बागवानों से किए उनके वादे को याद दिलाया है। साथ ही उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) गारंटी कानून बनाने की भी मांग की है।</p>
<p>यहां खास बात यह है कि हरीश चौहान ने प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया के सबसे ऊंचे हिस्किम पोस्ट ऑफिस से पत्र लिखा है। यह पोस्ट ऑफिस हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले के 14,567 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।&nbsp;</p>
<p>उन्होंने पत्र में लिखा, "मोदी जी, हिमाचल के बागवान बाहरी देशों से आयात हो रहे सेब के चलते भारी नुकसान उठा रहे हैं। आपने चुनावों में हमसे वादा किया था कि विदेशी सेब पर आयात शुल्क बढ़ाया जाएगा। ऐसे में प्रदेश के दो लाख बागवान परिवारों की आप से गुहार है कि जल्द से जल्द विदेशी सेब पर आयात शुल्क 100 फीसदी लागू किया जाए।" उन्होने आगे लिखा, "देश के किसान लंबे समय से एमएसपी गारंटी कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। सरकार को इस ओर भी ध्यान देने की जरूरत है।"</p>
<p><strong>रूरल वॉयस</strong> से बात करते हुए <strong>हरीश चौहान</strong> ने कहा कि भारत में कई देशों से सेब आयात होता है। जिसमें 60 फीसदी सेब तुर्की, इटली और ईरान जैसे देशों से आता है। उन्होंने कहा कि सितंबर में सेब सीजन खत्म होने के बाद कई बागवान अपना सेब कोल्ड स्टोर में रखते हैं, ताकि बाद में सेब को अच्छी कीमत पर बेच सकें। लेकिन दिसंबर-जनवरी में विदेशी सेब भारतीय बाजारों में अपनी दस्तक देते हैं, जो सस्ते होते हैं। जिस वजह से बागवानों को दाम नहीं मिलता और उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार लोकल वोकल फॉर का नारा देती है। दूसरी तरफ बागवानों के साथ ऐसा व्यवहार करती है, जो ठीक नहीं।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66824865055c2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ विदेशी सेब पर 100 फीसदी आयात शुल्क लगाने की मांग, प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/07/image_750x500_66824865055c2.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में धान की सीधी बुवाई पर मिलेगी 4 हजार रुपये सब्सिडी, 10 जुलाई तक कराना होगा पंजीकरण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/agriculture-department-is-giving-subsidy-of-4-thousand-rupees-on-direct-sowing-of-paddy-in-haryana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 29 Jun 2024 11:42:42 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/agriculture-department-is-giving-subsidy-of-4-thousand-rupees-on-direct-sowing-of-paddy-in-haryana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में धान की सीधी बुवाई (डीएसआर)&nbsp;पर कृषि विभाग किसानों को 4 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दे रहा है। योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को 10 जुलाई, 2024 तक "मेरी फसल-मेरा ब्यौरा" पोर्टल <a href="https://fasal.haryana.gov.in/"><strong>https://fasal.haryana.gov.in/</strong> </a>पर पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण कराने के लिए किसानों के पास फैमिली आईडी होना जरूरी है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रोत्साहन राशि सीधे लाभार्थी किसान के बैंक खाता में भेज दी जाएगी।</p>
<p>जानकारी के अनुसान, कृषि विभाग ने इस साल 3.02 लाख एकड़ में धान की सीधी बुवाई करने का लक्ष्य रखा है। जबकि, पिछले साल यह लक्ष्य 2.25 लाख एकड़ था। इस योजना के लिए कृषि विभगा ने 120.80 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। धान की सीधी बुवाई करके किसान पानी की खपत को 20 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं। ऐसे में कृषि विभाग किसानों को धान की सीधी बुवाई के लिए प्रेरित कर रहा है। &nbsp;</p>
<p><strong>बुवाई मशीन पर भी मिल रही सब्सिडी&nbsp;</strong></p>
<p>धान की बुवाई पर प्रोत्साहन राशि के अलावा कृषि विभाग किसानों को बुवाई की मशीन (डीएसआर मशीन) पर भी सब्सिडी दे रही है। किसानों को मशीन पर 40 फीसदी अनुदान राशि दी जा रही है। इसके लिए किसान कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट <strong><a href="https://www.agriharyana.gov.in/">https://www.agriharyana.gov.in/ </a></strong>पर आवेदन कर सकते हैं।&nbsp; अधिक जानकारी के लिए किसान टोल फ्री नंबर 1800-180-2117 या संबंधित खंड कृषि कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में धान की सीधी बुवाई पर मिलेगी 4 हजार रुपये सब्सिडी, 10 जुलाई तक कराना होगा पंजीकरण ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र बजट: किसानों को मुफ्त बिजली, दूध सब्सिडी जारी रखने का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-budget-announcement-of-waiver-of-electricity-bills-of-farmers-and-continuation-of-milk-subsidy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 28 Jun 2024 19:40:44 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-budget-announcement-of-waiver-of-electricity-bills-of-farmers-and-continuation-of-milk-subsidy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार का वित्त वर्ष 2024-25 का बजट पेश किया गया। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार ने बजट पेश करते हुए किसानों से जुड़े कई ऐलान किये। उन्होंने दूध उत्पादक किसानों के लिए 5 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी 1 जुलाई के बाद भी जारी रखने की घोषणा की है। हालांकि, किसान 10 रुपये लीटर दूध सब्सिडी की मांग कर रहे हैं। महाराष्ट्र में किसान दूध के भाव के लिए विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>वित्त मंत्री अजित पवार ने 'मुख्यमंत्री माझी लडकी बहन योजना' की घोषणा की है जिसके तहत राज्य सरकार 21 से 60 वर्ष की आयु की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये भत्ता देगी। यह योजना जुलाई से शुरू होगी और इसके लिए हर साल 46,000 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।&nbsp;</p>
<p>किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का दावा करते हुए अजित पवार ने कहा कि 7.5 हार्सपावर तक के कृषि पंप के लिए बिजली बिल का खर्च सरकार वहन करेगी। इससे 44.06 लाख किसानों को मदद मिलेगी और इस योजना के लिए सब्सिडी के रूप में 14,761 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाएगा।</p>
<p><strong>8 लाख से ज्यादा किसानों को मिलेंगे सोलर पंप&nbsp;</strong></p>
<p>महाराष्ट्र सरकार 8.5 लाख किसानों को सौर ऊर्जा पंप उपलब्ध कराएगी। वित्त मंत्री ने कहा कि यह पहल कृषि बिजली ग्रिडों को अलग करने और उन्हें सौर ऊर्जा से संचालित करने की परियोजना का हिस्सा है ताकि किसानों को दिन के समय निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जा सके।</p>
<p><strong>वन्य जीव हमले के मुआवजे में बढ़ोतरी&nbsp;</strong></p>
<p>महाराष्ट्र सरकार ने जंगली जानवरों के हमले से होने वाली मौतों पर मुआवजा राशि बढ़ा दी है। अब मृतकों के परिजनों को 20 लाख की जगह 25 लाख रुपये मिलेंगे। साथ ही कृषि फसल क्षति के लिए देय अधिकतम राशि भी 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है।</p>
<p><strong>कपास और सोयाबीन पर मिलेगा बोनस&nbsp;</strong></p>
<p>राज्य सरकार ने कपास और सोयाबीन की फसल पर बोनस देने का भी ऐलान किया है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार कपास और सोयाबीन की फसल के लिए सभी किसानों को 5 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर बोनस देगी। साथ ही, खरीफ और रबी सीजन में नाफेड के माध्यम से आधार मूल्य के अनुसार दलहन और तिलहन की खरीद के लिए 100 करोड़ रुपए का रिवॉल्विंग फंड भी उपलब्ध कराया जाएगा।&nbsp;</p>
<p><strong>गांव दसवें गोदाम</strong></p>
<p>पवार ने कहा कि कृषि उपज के भंडारण की सुविधा प्रदान करने के लिए 'गांव दसवें गोदाम' (हर गांव में गोदाम) नामक एक नई योजना लागू की जाएगी। इसके तहत पहले चरण में 100 नए गोदामों का निर्माण और मौजूदा गोदामों की मरम्मत की जाएगी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र बजट: किसानों को मुफ्त बिजली, दूध सब्सिडी जारी रखने का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश सरकार ने मूंग की प्रति हेक्टयर खरीद दर घटाई, दाम एमएसपी से कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/congress-raised-the-issue-of-not-purchasing-the-entire-moong-crop-in-madhya-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 28 Jun 2024 18:27:56 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/congress-raised-the-issue-of-not-purchasing-the-entire-moong-crop-in-madhya-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग को लेकर किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहले तो राज्य सरकार ने काफी इंतजार के बाद 24 जून से मूंग की खरीद शुरू की जो 31 जुलाई तक चलेगी। फिर मूंग खरीद की मात्रा प्रति हेक्टेयर 8 कुंतल तक सीमित कर दी है जबकि कई जिलों में मूंग की पैदावार 15 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक है। ऐसे में किसानों की पूरी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर नहीं बिक पाएगी और उन्हें खुले बाजार में उपज बेचनी पड़ेगी जहां मूंग का दाम एमएसपी से नीचे चल रहा है।</p>
<p>मूंग का एमएसपी 8558 रुपये प्रति कुंतल है, जबकि मंडियों में मूंग का भाव 6 से 8 हजार प्रति कुंतल के बीच मिल रहा है। वहीं, केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मूंग का औसत खुदरा मूल्य (बाजार भाव) 118 रुपये प्रति किलो के आसपास है। जहां किसनों को मूंग का भाव 60-80 रुपये प्रति किलो मिल रहा है वहीं बाजार में आम उपभोक्ताओं को मूंग 120-150<span> रुपये प्रति&nbsp; किलो के रेट पर खरीदनी पड़ रही है।&nbsp;</span></p>
<p>मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री<strong> दिग्विजय सिंह</strong> ने किसानों से मूंग की पूरी फसल नहीं खरीदने का मुद्दा उठाते केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से पूछा कि उनके कृषि मंत्री रहते हुए किसानों की पूरी फसल क्यों नहीं खरीदी जा रही है। साथ ही उन्होंने मूंग की फसल आने से पहले विदेशों से आयात पर भी सवाल उठाया। इस साल मध्यप्रदेश सरकार ने मूंग की खरीद को अधिकतम 8 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक सीमित कर दिया है। जबकि राज्य में मुंग की उत्पादकता औसतन 10 से 12 कुंटल प्रति हेक्टेयर है। वहीं, कुछ जिलों में उत्पादन 15 कुंटल प्रति हेक्टेयर से ज्यादा है। देश में मूंग की पैदावार का राष्ट्रीय औसत 9.85 कुंतल प्रति हेक्टेयर है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">माननीय कृषि मंत्री जी <a href="https://twitter.com/ChouhanShivraj?ref_src=twsrc%5Etfw">@ChouhanShivraj</a> (आप अभी तक Modi Pariwar में हैं जबकि बाक़ी सब Modi Pariwar से निकल चुके हैं) आपके चुनाव क्षेत्र में व नर्मदा घाटी में बड़े पैमाने पर मूँग की फसल होती है। आपके कृषि मंत्री रहते हुए किसानों की पूरी फसल क्यों नहीं ख़रीदी जा रही है? यह भी पता&hellip;</p>
&mdash; Digvijaya Singh (@digvijaya_28) <a href="https://twitter.com/digvijaya_28/status/1805938593191587977?ref_src=twsrc%5Etfw">June 26, 2024</a></blockquote>
<p>इस हिसाब से देखें तो किसानों से उपज की पूरी खरीदी नहीं होगी। उन्हें अपनी उपज मंडियों में बेचनी पड़ेगी। जबकि, मंडियों में दाम एमएसपी से नीचे चल रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस साल मूंग का उत्पादन बढ़ा है, ऐसे में सरकार को खरीद भी बढ़ानी चाहिए थी। लेकिन, सरकार ने प्रति हेक्टयर खरीद घटा दी है। जिससे किसानों को अपनी उपज एमएसपी से कम दाम पर मंडियों में बेचनी पड़ेगी।&nbsp;</p>
<p>मध्यप्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष <strong>केदार शंकर सिरोही</strong>&nbsp;ने<strong> रूरल वॉयस</strong> को बताया कि मूंग का एमएसपी 8558 रुपये प्रति कुंतल है, जबकि मंडियों में मूंग का भाव 6 से 8 हजार प्रति कुंतल के बीच मिल रहा है। मूंग का उत्पादन बढ़ने के साथ सरकार को खरीद बढ़ानी चाहिए थी लेकिन सरकार ने खरीद को सीमित कर दिया है। सिरोही का कहना है कि एक तरफ सरकार विदेशोंं से दालों का आयात करवा रही है, वहीं दूसरी तरफ देश मे उत्पादित दलहन की खरीदें में आनाकानी की जा रही है। आगामी खरीफ सीजन के लिए केंद्र सरकार ने मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य मात्र 1.45 फीसदी बढ़ाकर 8682 रुपयं प्रति कुंतल तय किया है। <span>जबकि इनपुट लागत 6.1 फीसदी बढ़ गई है।&nbsp;</span></p>
<p><span>मध्य प्रदेश में गत वर्षों में ग्रीष्मकालीन मूंग के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। इसके पीछे दालों का एमएसपी बढ़ाना और किसानों को अच्छा दाम मिलना वजह रहा है। लेकिन इस साल किसानों को मूंग का सही दाम नहीं मिल पा रहा है और सरकारी खरीद में दिक्कतें आ रही हैं।&nbsp;</span></p>
<p>&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet"></blockquote> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश सरकार ने मूंग की प्रति हेक्टयर खरीद दर घटाई, दाम एमएसपी से कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र में दूध किसानों का विधानसभा के बाहर प्रदर्शन, कीमतों में गिरावट से परेशान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/milk-farmers-protest-outside-maharashtra-assembly-upset-over-falling-prices.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 28 Jun 2024 15:34:11 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/milk-farmers-protest-outside-maharashtra-assembly-upset-over-falling-prices.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र में दूध के दाम को लेकर किसानों के विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला जोर पकड़ रहा है। महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन किसानों ने दूध की कीमतों में वृद्धि की मांग को लेकर मुंबई में विधान भवन के सामने प्रदर्शन किया। दूध की कीमतों में गिरावट से नाराज किसानों ने दूध सड़क पर बिखेर दिया। किसानों का कहना है कि उन्हें दूध पर प्रति लीटर 10 से 15 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसलिए सरकार से दूध पर कम से कम 10 रुपये लीटर सब्सिडी देनी चाहिए।</p>
<p>अखिल भारतीय किसान सभा के नेता <strong>डॉ. अजित नवले</strong> ने बताया कि दूध की कीमत में बढ़ोतरी की मांग को लेकर शुक्रवार से राज्य भर में विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने भी महाराष्ट्र में दूध खरीद की कीमतों में बढ़ोतरी की मांग करते हुए विरोध-प्रदर्शन की चेतावनी दी है। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष <strong>नाना पटोले</strong> ने कहा है कि विभिन्न राज्यों में दूध का दाम 45 रुपये लीटर तक मिलता है। लेकिन महाराष्ट्र में किसानों को 27 रुपये लीटर के रेट पर दूध बेचना पड़ रहा है। जबकि उपभोक्ताओं से ऊंचा दाम वसूला जा रहा है। महाराष्ट्र विधानसभा में मानसून सत्र के दूसरा दिन विपक्ष ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए किसानों की कर्जमाफी और दूध के दाम का मुद्दा उठाया।&nbsp;</p>
<p>कुछ दिन पहले ही देश के बड़े दूध ब्रांड की कीमतों में प्रति लीटर दो रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, महाराष्ट्र के डेयरी किसान दूध की कीमतें घटने से संकट में हैं। राज्य में गाय के दूध की कीमत गिरकर 26 रुपये प्रति लीटर तक आ गई हैं। लोकसभा चुनाव से पहले मार्च और अप्रैल में राज्य सरकार ने किसानों को दूध पर पांच रुपये लीटर की सब्सिडी दी थी जिसे मई में बंद कर दिया गया। शुक्रवार को महाराष्ट्र का बजट आ रहा है। किसान संगठनों ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए दूध पर सात रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी दे। अगर ऐसा नहीं होता है तो एक जुलाई से राज्य भर में किसान दूध की बेहतर कीमतों के लिए आंदोलन शुरू कर देंगे।</p>
<p>महाराष्ट्र में स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के अध्यक्ष और पूर्व सांसद <strong>राजू शेट्टी</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि राज्य में हर रोज करीब 120 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। इसका एक हिस्सा ही संगठित क्षेत्र में जाता है। वहीं, करीब 20 लाख लीटर दूध मध्य प्रदेश और कर्नाटक से आ रहा है। इस स्थिति में दूध किसानों को गाय के दूध (तीन फीसदी फैट) के लिए 25 से 26 रुपये प्रति लीटर दाम ही मिल पा रहा है। जबकि पिछले साल यह कीमत 38 रुपये प्रति लीटर तक चली गई थी।</p>
<p>दूध की कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) की कीमत का गिरना है। इसकी वजह से एसएमपी का उत्पादन करने वाली निजी डेयरी कंपनियां किसानों को दूध के कम दाम दे रही हैं। वैश्विक बाजार में एसएमपी की जो वर्तमान कीमतें हैं, उसके चलते भारत से एसएमपी का निर्यात प्रतिस्पर्धी नहीं रह गया है। शेट्टी का कहना है कि सरकार को एसएमपी निर्यात पर भी सब्सिडी देनी चाहिए। इससे किसानों को दूध का बेहतर दाम मिल सकेगा।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667e8a9147d97.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र में दूध किसानों का विधानसभा के बाहर प्रदर्शन, कीमतों में गिरावट से परेशान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667e8a9147d97.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि नलकूपों पर लोड बढ़ा सकेंगे हरियाणा के किसान, 1 जुलाई के शुरू होगा आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-farmers-will-be-able-to-apply-from-july-1-to-increase-the-load-on-agricultural-tube-wells.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 28 Jun 2024 12:18:27 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-farmers-will-be-able-to-apply-from-july-1-to-increase-the-load-on-agricultural-tube-wells.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा के किसान अब कृषि नलकूपों (ट्यूबवेल) पर लोड बढ़ा सकेंगे। राज्य सरकार ने किसानों को लोड बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए 1 जुलाई, 2024 से किसान आवेदन कर पाएंगे। अगले महीने से खरीफ सीजन शुरू हो रहा है। ऐसे में किसानों को सिंचाई के दौरान कोई परेशानी न हो, इसलिए गुरुवार, 27 जून को हुई राज्य मंत्रिमण्डल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। कृषि नलकूपों पर लोड बढ़ाने के लिए किसानों को राज्य सरकार के कृषि पोर्टल पर आवेदन करना होगा। आवेदन के लिए 15 जुलाई, 2024 अंतिम तिथि तय की गई है।&nbsp;</p>
<p>इसके अलावा, बैठक में एक ट्यूबवेल फेल होने के बाद दूसरा ट्यूबवेल लगाने के लिए सौर ऊर्जा की शर्त को भी समाप्त कर दिया गया है। अब यदि कोई किसान दूसरा ट्यूबवेल लगाता है तो उसे पहले के कनेक्शन पर ही बिजली आपूर्ति की अनुमति होगी। इससे पहले नियम यह था कि दूसरा ट्यूबवेल लगाने पर सौर ऊर्जा से ही ट्यूबवेल को कनेक्शन दिया जाएगा।&nbsp;</p>
<p><strong>हरियाणा ट्यूबवेल योजना</strong></p>
<p>बता दें कि हरियाणा सरकार किसानों के लिए ट्यूबवेल योजना चला रही है। यह राज्य सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य किसानों को कृषि कार्यों के लिए पानी की सुविधा प्रदान करना है। इस योजना के तहत सरकार किसानों को ट्यूबवेल लगाने के लिए वित्तीय सहायता, सब्सिडी, और अन्य तकनीकी सहायता प्रदान करती है। किसान हरियाणा कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट <strong><a href="https://www.agriharyana.gov.in/">https://www.agriharyana.gov.in/</a> </strong>पर इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी कृषि अधिकारी का कृषि विज्ञान केंद्र पर संपर्क करें।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667e58a32432b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि नलकूपों पर लोड बढ़ा सकेंगे हरियाणा के किसान, 1 जुलाई के शुरू होगा आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667e58a32432b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मुश्किल में महाराष्ट्र के दूध किसान, कीमतें 26 रुपये लीटर तक गिरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-milk-farmers-in-trouble-prices-go-up-to-rs-26-per-liter.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 27 Jun 2024 19:31:48 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-milk-farmers-in-trouble-prices-go-up-to-rs-26-per-liter.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कुछ दिन पहले ही देश के बड़े दूध ब्रांड की कीमतों में प्रति लीटर दो रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, महाराष्ट्र के डेयरी किसान दूध की कीमतें घटने से संकट में हैं। राज्य में गाय के दूध की कीमत गिरकर 26 रुपये प्रति लीटर तक आ गई हैं। लोकसभा चुनाव से पहले मार्च और अप्रैल में राज्य सरकार ने किसानों को दूध पर पांच रुपये लीटर की सब्सिडी दी थी जिसे मई में बंद कर दिया गया। शुक्रवार को महाराष्ट्र का बजट आ रहा है। किसान संगठनों ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए दूध पर सात रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी दे। अगर ऐसा नहीं होता है तो एक जुलाई से राज्य भर में किसान दूध की बेहतर कीमतों के लिए आंदोलन शुरू कर देंगे।</p>
<p>महाराष्ट्र में स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के अध्यक्ष और पूर्व सांसद <strong>राजू शेट्टी</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि राज्य में हर रोज करीब 120 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। इसका एक हिस्सा ही संगठित क्षेत्र में जाता है। वहीं, करीब 20 लाख लीटर दूध मध्य प्रदेश और कर्नाटक से आ रहा है। इस स्थिति में दूध किसानों को गाय के दूध (तीन फीसदी फैट) के लिए 25 से 26 रुपये प्रति लीटर दाम ही मिल पा रहा है। जबकि पिछले साल यह कीमत 38 रुपये प्रति लीटर तक चली गई थी।</p>
<p>शेट्टी स्वाभीमानी फार्मर्स प्रॉड्यूसर कंपनी के तहत डेयरी भी संचालित करते हैं। शेट्टी का कहना है कि हम किसानों को 32 रुपये प्रति लीटल की कीमत दे रहे हैं। वहीं कोल्हापुर जिले में वारना और गोकुल सहकारी समितियां भी 32 रुपये प्रति लीटर की कीमत दे रही हैं क्योंकि यहां डेयरी संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा है। लेकिन राज्य के कई हिस्सों में ऐसा नहीं है। राज्य की डेयरी फेडरेशन महानंदा की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं है। ऐसे में बड़ी संख्या में किसानों को दूध का वाजिब दाम नहीं मिल रहा है।</p>
<p>पिछले दिनों जो दूध की खुदरा कीमतें बढ़ी हैं, उससे उपभोक्ता की जेब पर तो बोझ बढ़ा है लेकिन किसानों को इस बढ़ोतरी का फायदा नहीं मिल रहा है। इसके उलट महाराष्ट्र में तो दूध की कीमत कम हो गई हैं। जुलाई से दूध का फ्लश सीजन शुरू हो जाएगा और बाजार में दूध की आपूर्ति बढ़ जाएगी। ऐसे में शुक्रवार को पेश होने वाला महाराष्ट्र का बजट राज्य के किसानों के लिए अहम है। राज्य में अक्तूबर में विधान सभा चुनाव होने हैं। राजनीतिक नुकसान से बचने के लिए सरकार इस मामले में किसानों के हित में कोई कदम उठा सकती है।</p>
<p>दूध की कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) की कीमत का गिरना है। इसकी वजह से एसएमपी का उत्पादन करने वाली निजी डेयरी कंपनियां किसानों को दूध के कम दाम दे रही हैं। वैश्विक बाजार में एसएमपी की जो वर्तमान कीमतें हैं, उसके चलते भारत से एसएमपी का निर्यात प्रतिस्पर्धी नहीं रह गया है। शेट्टी का कहना है कि सरकार को एसएमपी निर्यात पर भी सब्सिडी देनी चाहिए। इससे किसानों को दूध का बेहतर दाम मिल सकेगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667d708e243a3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मुश्किल में महाराष्ट्र के दूध किसान, कीमतें 26 रुपये लीटर तक गिरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667d708e243a3.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मिजोरम सरकार किसानों से अदरक, हल्दी और मिर्च खरीदेगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/mizoram-government-will-buy-ginger-turmeric-and-chilli-from-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 27 Jun 2024 14:29:51 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/mizoram-government-will-buy-ginger-turmeric-and-chilli-from-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मिजोरम सरकार ने स्थानीय किसानों से चार कृषि उत्पादों की सरकारी खरीद का ऐलान किया है। राज्य के कृषि मंत्री पीसी वनलालरुआता ने कहा कि सरकार किसानों से अदरक, <span>हल्दी</span>, <span>मिर्च और झाड़ू खरीदेगी। मिजोरम में सत्तारूढ़ जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम</span>) <span>ने पिछले साल दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में किसानों से इन उत्पादों की खरीद का वादा किया था। &nbsp;</span></p>
<p>मिजोरम के कृषि मंत्री वनलालरुआता ने कहा कि राज्य सरकार किसानों से इन उत्पादों की खरीद बागवानी विभाग और सोसायटी के माध्यम से करेगी। सरकार चार नई फसलों के लिए समर्थन मूल्य निर्धारित करेगी। साथ ही किसानों के उत्पादों को बाजार मुहैया कराने के लिए बाजार लिंकेज पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। अदरक की छंटाई, ग्रेडिंग और सुखाने के अलावा उसका पेस्ट और पेय पदार्थ बनाने के लिए प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जाएंगे।</p>
<p>मिजोरम में 10 लाख क्विंटल से अधिक अदरक उत्पादन का अनुमान है। राज्य सरकार अदरक की खरीद के लिए बड़ी कंपनियों के साथ समझौते भी करेगी ताकि वे मिजोरम के किसानों से अदरक खरीदें। कृषि उत्पादों की खरीद और बिक्री की सभी प्रक्रियाएं स्थानीय कृषि समितियों के माध्यम से की जाएंगी। सरकार फसलों की खरीद के लिए खरीदार ढूंढने के लिए स्थानीय कृषि समितियों के माध्यम से निविदा जारी करेगी। किसानों और उनके द्वारा प्रति वर्ष उत्पादित की जाने वाली फसलों की मात्रा का एक डाटाबेस विकसित किया जाएगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मिजोरम सरकार किसानों से अदरक, हल्दी और मिर्च खरीदेगी ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में कृषि योजनाओं का लाभ उठाने के लिए बनवाना होगा किसान कार्ड]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/now-farmers-in-uttar-pradesh-will-have-to-make-another-card-to-avail-the-benefits-of-government-schemes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 27 Jun 2024 13:41:45 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/now-farmers-in-uttar-pradesh-will-have-to-make-another-card-to-avail-the-benefits-of-government-schemes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किसानों को एक नया कार्ड बनवाना होगा। आधार कार्ड की तर्ज पर प्रदेश सरकार किसानों के लिए किसान कार्ड बनाएगी। जिसमें किसानों की पूरी जानकारी शामिल होगी, जैसे आधार नंबर, खेत का रकबा, खसरा नंबर आदि। इस कार्ड के जरिए किसानों को किसान नंबर जारी होगा, जिसके आधार पर उन्हें पीएम-किसान जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। किसान कार्ड बनाने के लिए प्रदेश भर में 1 जुलाई से किसान रजिस्ट्री की शुरुआत हो रही है।</p>
<p>यह कार्ड केंद्र सरकार की एग्रीस्टैक योजना के तहत बनाए जाएंगे। एग्रीस्टैक योजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य किसानों की सहायता के लिए डिजिटल और तकनीकी समाधानों का विकास करना है। एग्रीस्टैक एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो कृषि क्षेत्र से संबंधित सभी जानकारी को एक ही स्थान पर संगठित और उपलब्ध कराता है।</p>
<p>इस अभियान के तहत प्रदेश के किसानों का डाटा किसान मोबाइल एप पर दर्ज किया जाएगा, ताकि किसानों को समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ और कृषि से जुड़ी जानकारी मिल सके। प्रदेश में किसान रजिस्ट्री का कार्य 31 जुलाई तक चलेगा। इसके लिए गांव-गांव में शिविर लगाए जाएंगे। जहां, कृषि विभाग के कर्मचारी किसान का पूरा विवरण दर्ज होने के बाद एक नंबर जारी करेंगे। रजिस्ट्री का कार्य पूरा होने के बाद किसानों को कार्ड जारी होंगे जिसके जरिए किसान सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।&nbsp;</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, किसान कार्ड बनाने का कार्य दो चरणों में किया जाएगा। पहला चरण एक से 31 जुलाई तक चलेगा। हर गांव में शिविर लगेंगे, जहां कृषि विभाग के कर्मचारी तैनात रहेंगे। वे किसान की भूमि, आधार आदि के जरिए पूरा विवरण मोबाइल एप पर अपलोड करेंगे। इसके लिए किसान की सहमति भी लेंगे।</p>
<p>वहीं, दूसरे चरण की शुरुआत एक अगस्त से होगी। दूसरे चरण में किसान अपना विवरण खुद दर्ज करेंगे। किसान मोबाइल एप अथवा जन सुविधा केंद्र पर जाकर विवरण विवरण दर्ज करा सकेंगे। खुद से दर्ज कराने वालों का अलग से सत्यापन कराया जाएगा। पहले एक नंबर जनरेट होगा। इस नंबर के जरिए ही संबंधित किसान का पूरा विवरण देखा जा सकेगा। रजिस्ट्री का कार्य पूरा होने के बाद किसान कार्ड बनाया जाएगा।&nbsp;दावा किया जा रहा है की पूरे प्रदेश में एक साथ किसान रजिस्ट्री शुरू करने वाला उत्तर प्रदेश पहला राज्य है।&nbsp;इस कार्ड के जरिए किसानों को सत्यापन, विपणन और अन्य वित्तीय मामलों में भी सहूलियत होगी।&nbsp; &nbsp; &nbsp;</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में कृषि योजनाओं का लाभ उठाने के लिए बनवाना होगा किसान कार्ड ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में मूंग और उड़द की खरीद शुरू, 31 जुलाई तक रहेगी जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/procurement-of-moong-and-urad-started-in-madhya-pradesh-will-continue-till-31-july.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 26 Jun 2024 19:04:20 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/procurement-of-moong-and-urad-started-in-madhya-pradesh-will-continue-till-31-july.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मूंग और उड़द की खरीदी करने की तारीख की घोषणा कर दी है। खरीद प्रक्रिया 24 जून 2024 से शुरू हो चुकी है, जो 31 जुलाई तक जारी रहेगी। मूंग की खरीद 32 जिलों और उड़द की खरीद 10 जिलों में की जाएगी। इसके लिए उपार्जन केन्द्रों को सक्रिय कर दिया गया है। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, मध्य प्रदेश ने अधिसूचना भी जारी कर दी है।&nbsp;</p>
<p>कृषि विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, &nbsp;मूंग की खरीद नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, रायसेन, हरदा, सीहोर, जबलपुर, देवास, सागर, गुना, खण्डवा, खरगोन, कटनी, दमोह, विदिशा, बडवानी, मुरैना, बैतूल, श्योपुरकला, भिण्ड, भोपाल, सिवनी, छिन्दवाडा, बुरहानपुर, छत्तरपुर, उमरिया, भार, राजगढ़, मण्डला, शिवपुरी, अशोकनगर, इंदौर और बालाघाट जिले में जाएगी। इसी तरह, उड़द की खरीद जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, दमोह, छिन्दवाडा, पन्ना, मण्डला, उमरिया, सिवनी और बालाघाट में होगी।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x_667c17a61dd17.jpg" alt="" /></p>
<p>उपार्जन केन्द्रों पर हफ्ते के पांच दिन (सोमवार से शुक्रवार) सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक खरीद की जाएगी। केन्द्रों पर किसा तौल पर्ची शाम 6 बजे तक जारी की जाएगी। जिन किसानों की उपज की तौल अपरिहार्य कारणों से सोमवार से शुक्रवार तक नहीं हो सकी, ऐसी स्थिति में उनकी तौल शनिवार को की जाएगी।</p>
<p>भारत सरकार ने हाल ही में विपणन वर्ष 2024-25 के लिए मूंग एवं उड़द का समर्थन मूल्य बढ़ाने की घोषणा की थी। सरकार ने मूंग पर 8558 प्रति क्विंटल तथा उड़द पर 6950 प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तय किया है। उपार्जन केन्द्रों पर किसानों से इसी मूल्य पर खरीद की जाएगी।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में मूंग और उड़द की खरीद शुरू, 31 जुलाई तक रहेगी जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बिहार में अरहर की खेती पर 3600 रुपये प्रति एकड़ अनुदान दे रहा कृषि विभाग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/bihar-agriculture-department-is-giving-a-subsidy-of-3600-rupees-per-acre-on-the-cultivation-of-arhar-dal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 26 Jun 2024 16:41:21 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/bihar-agriculture-department-is-giving-a-subsidy-of-3600-rupees-per-acre-on-the-cultivation-of-arhar-dal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बिहार में अरहर की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर हैं। राज्य में अरहर की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने खरीफ अरहर प्रोत्साहन कार्यक्रम 2024-25 की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम के तहत किसानों को अरहर की खेती के लिए <strong>3600 रुपये प्रति एकड़ </strong>का अनुदान दिया जा रहा है। बिहार कृषि विभाग किसानों को सब्सिडी पर अरहर के बीज भी उपलब्ध करवा रह है। इसके लिए किसान कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>खरीफ अरहर प्रोत्साहन कार्यक्रम 2024-25 का संचालक राज्य के सभी 38 जिलों में किया जा रहा है। योजना का कार्यान्वयन क्लस्टर में किया जाएगा, जिसमें एक क्लस्टर 25 एकड़ का होगा। वहीं, किसान कम से कम एक एकड़ और अधिक से अधिक दो एकड़ की खेती पर सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं। अरहर की खेती पर कृषि विभाग 3600 रुपये प्रति एकड़ का अनुदान दे रहा है। इसमें 10 वर्ष से अधिक पुराने बीज 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से दिए जा रहे हैं। वहीं, प्रमाणित बीज उत्पादन प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत कृषि विभाग ने 5000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कुल 2980 क्विंटल अरहर का प्रमाणित बीज उत्पादन का लक्ष्य रखा है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x_667bfaa594d6d.jpg" alt="" width="714" height="714" /></p>
<p>अरहर के बीजों पर सब्सिडी का लाभ लेने के लिए किसान बिहार कृषि विभाग की आधिक आधिकारिक वेबसाइट <strong><a href="https://dbtagriculture.bihar.gov.in/">https://dbtagriculture.bihar.gov.in/</a></strong> पर आवदेन कर सकते हैं। इसके अलावा योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्रीय कृषि पदाधिकारी से भी संपर्क किया जा सकता है।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667bf4a9d9146.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बिहार में अरहर की खेती पर 3600 रुपये प्रति एकड़ अनुदान दे रहा कृषि विभाग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में सन बर्न से झुलसी गन्ने की फसल, पैदावार प्रभावित होने की आशंका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-crop-scorched-in-extreme-heat-yield-likely-to-be-affected.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 25 Jun 2024 18:14:08 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-crop-scorched-in-extreme-heat-yield-likely-to-be-affected.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल देश में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर खेती पर भी पड़ रहा है। इस साल लगातार अधिक तापमान को जलवायु परिवर्तन के असर के रूप में देखा जा रहा है। गन्ना बेल्ट के नाम से मशहूर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गन्ने की फसल लगातार गर्मी और लू के कारण झुलस गई है। गन्ने पर मौसम की यह मार काफी बड़े क्षेत्र में दिखाई पड़ रही है। जबकि यह इलाका नहरों और ट्यूबवैल से सिंचाई सुविधाओं से संपन्न है। फसलों पर गर्मी का यह प्रभाव पश्चिमी यूपी जैसे सिंचित क्षेत्र में पड़ रहा है। असिंचित क्षेत्रों में स्थिति और भी खराब है क्योंकि इस साल प्री-मानसून बारिश नहीं हुई और अब मानसून का इंतजार लंबा खिंच सकता है।</p>
<p>शामली जिले के&nbsp; भैंसवाल गांव के किसान और जिला पंचायत सदस्य <strong>उमेश पंवार</strong> का कहना है कि गन्ने की फसल पर भीषण गर्मी का प्रभाव पड़ा है। गन्ने की हरी पत्तियां झुलस गई हैं। ऐसा गन्ने की कुछ किस्मों में अधिक देखा जा रहा है जिनकी पत्तियां एकदम सूख गई हैं। गन्ने के अलावा हरे चारे और सब्जियों पर भी भीषण गर्मी की मार पड़ रही है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x_667ac54e501f4.jpg" alt="" /></p>
<p>शामली जिले में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी <strong>डॉ. संदीप चौधरी</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि लगातर गर्मी और हीटवेव के कारण गन्ने की किस्म सीओ 0238 में सन बर्न का असर देखा जा रहा है। जिसके कारण पत्तियां सूख रही है। डॉ. चौधरी का कहना है कि ऐसा गन्ने की केवल एक किस्म में देखा गया है। बाकी वैरायटी में ऐसा नहीं है। जब लगातार कई दिनों तक तापमान सामान्य से अधिक रहता है तो गन्ना वैराएटी 0238 में सन बर्न हो जाता है। यह हीट स्ट्रेस है जो पहले भी होता रहा है। इसके लिए अलग से कोई उपाय करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने फसलों को गर्मी के प्रभाव से बचाने के लिए किसानों को आवश्यकता अनुसार सिंचाई करने की सलाह दी है।&nbsp;</p>
<p>शामली स्थित अपर दोआब शुगर मिल के महाप्रबंधक (<span>गन्ना</span>) <strong>सतीश<span>&nbsp;बालियान</span></strong><span> बताते हैं कि लगातार अत्यधिक गर्मी और हीटवेव के कारण गन्ने की फसल में पानी की पूर्ति के लिए पत्तियां सूख रही हैं। यह कोई बीमारी या कीट का प्रकोप नहीं है बल्कि फसल पर भीषण गर्मी का प्रभाव है</span>, <span>जिसके कारण पिछले 15 दिनों से गन्ने की ग्रोथ रूकी हुई है। बालियान का मानना है कि पत्तियों का झुलसना गन्ने की दो वैरायटी सीओ 0238 और 98014 में देखा जा रहा है। इससे गन्ने की पैदावार पर कुछ ना कुछ असर जरूर पड़ेगा क्योंकि हीट स्ट्रेस बना हुआ है।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x_667ac589b8da5.jpg" alt="" /></p>
<p>पिछले साल पश्चिमी यूपी में गन्ने की फसल पर रेड रॉट का प्रकोप रहा था, <span>जिसके कारण गन्ने की पैदावार और चीनी रिकवरी प्रभावित हुई थी। गन्ने की कमी के चलते पश्चिमी यूपी की कई चीनी मिलों को पेराई सत्र समय से पहले पूरा करना पड़ा था। </span><span>गन्ने की बेहतर वृद्धि और उत्पादन के लिए नम जलवायु आवश्यक है। तापमान लगातार 44 डिग्री से ऊपर रहने और हीटवेव के कारण सिंचित क्षेत्रों में भी फसलों पर गर्मी की मार पड़ रही है। इससे गन्ने की वृद्धि</span>, <span>पैदावार और मिठास में कमी आ सकती है। </span></p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667abb8a7d5f2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में सन बर्न से झुलसी गन्ने की फसल, पैदावार प्रभावित होने की आशंका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667abb8a7d5f2.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश सरकार मिट्टी परीक्षण के लिए कृषि स्नातकों को देगी मौका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-government-will-give-employment-to-agriculture-graduates-for-soil-testing.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 25 Jun 2024 15:31:03 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-government-will-give-employment-to-agriculture-graduates-for-soil-testing.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश में कृषि स्नातकों के लिए अच्छी खबर है। राज्य की मोहन सरकार कृषि स्नातकों को अवसर देगी।&nbsp;मंगलवार, 24 जून को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कृषि स्नातकों को अवसर देने के संबंध में प्रस्ताव पर मुहर लगी। राज्य सरकार ने मिट्टी परीक्षण के लिए एग्रीकल्चर कॉलेज के छात्रों को मौका देने का निर्णय लिया है। हर बॉक्क में कृषि स्नातकों को मिट्टी परीक्षण के लिए रखा जाएगा, जो किसानों को समझाकर मिट्टी परीक्षण के लिए प्रेरित करेंगे। इस तरह किसानों को मिट्टी की सही रिपोर्ट मिलेगी और कृषि स्नातकों को भी अवसर मिलेगा।&nbsp;</p>
<p>मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जानकारी देते हुए नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि बैठक में प्रदेश के विकास खंडों में सॉयल टेस्टिंग लैब की शुरुआत को लेकर प्रस्ताव रखा गया था। जिसे&nbsp;मंजूरी दे दी गई है। सभी विकासखंडों में स्थापित मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं (सॉयल टेस्टिंग लैब) का संचालन कृषि स्नातक और कृषि क्षेत्र में काम करने वाली सहकारी समितियां करेंगी। प्रत्येक विकासखंड में 45-45 नमूनों की जांच के लिए राशि राज्य सरकार देगी। इसके बाद संचालनकर्ता स्वयं मृदा परीक्षण करेंगे और राशि प्राप्त करेंगे।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय कैबिनेट बैठक में हुए महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दे रहे हैं <a href="https://twitter.com/hashtag/CabinetDecisionsMP?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#CabinetDecisionsMP</a> <a href="https://t.co/A1mnSqs6z7">https://t.co/A1mnSqs6z7</a></p>
&mdash; Jansampark MP (@JansamparkMP) <a href="https://twitter.com/JansamparkMP/status/1805501364212003190?ref_src=twsrc%5Etfw">June 25, 2024</a></blockquote>
<blockquote class="twitter-tweet"></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>मध्यप्रदेश सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, विकास खण्ड स्तर पर मिट्टी परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए खोली गई नवीन मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं के भवन तथा प्रयोगशाला उपकरणों को युवा उद्यमियों/संस्थाओं को उपलब्ध कराए जाने की स्वीकृति दी गई है। इससे युवा उद्यमियों/संस्थाओं के माध्यम से किसानों के मृदा नमूनों का परीक्षण कराकर मृदा स्वास्थ्य कार्ड (स्वाइल हैल्थ कार्ड) उपलब्ध कराये जाएंगे।</p>
<p><strong>इन प्रस्तावों पर भी लगी मुहर&nbsp;</strong></p>
<ul>
<li>मध्य प्रदेश में मंत्री अपना इनकम टैक्स अब खुद भरेंगे। प्रदेश सरकार मंत्रियों का टैक्स जमा नहीं करेगी। सरकार ने आयकर की दृष्टि से 1972 के नियम में बदलाव के प्रस्ताव को मंजूदी दी है।&nbsp;</li>
<li>प्रदेश के किसी जवान के शहीद होने पर दी जाने वाली सहायता राशि में से 50 फीसदी शहीद की पत्नी और 50 फीददी राशि माता-पिता को दी जाएगी।</li>
<li>जेल सुधार में कैसे सुविधाएं बढ़ाई जाएं और कैदियों को रोजगार से जोड़ा जाए। इस दिशा में सरकार जल्द ही विधानसभा में विधेयक लाएगी।</li>
<li>सैनिक स्कूलों में राज्य से बाहर पढ़ रहे छात्रों को भी अब मध्य प्रदेश सरकार स्कॉलरशिप देगी।&nbsp;</li>
<li>भारतीय खेल प्राधिकरण भोपाल को अतिरिक्त एक एकड़ जमीन देने के प्रस्ताव को मंजूरी।</li>
<li>प्रदेश में रेल परियोजनाएं की मॉनिटरिंग अब लोक निर्माण विभाग करेगा। पहले यह मॉनिटरिंग परिवहन विभाग करता था।</li>
<li>मध्यप्रदेश नगर पालिका (संशोधन) विधेयक 2024 को मंजूरी।&nbsp;<br />&nbsp;&nbsp;<span></span></li>
</ul> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667a91a3d642d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश सरकार मिट्टी परीक्षण के लिए कृषि स्नातकों को देगी मौका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_667a91a3d642d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[खरीफ सीजन के लिए फ्री में मिल रहे उन्नत किस्मों के बीज, राजस्थान कृषि विभाग ने शुरू की योजना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-agriculture-department-is-providing-hybrid-seeds-to-farmers-free-of-cost-for-kharif-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 25 Jun 2024 11:51:33 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-agriculture-department-is-providing-hybrid-seeds-to-farmers-free-of-cost-for-kharif-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खरीफ फसलों की खेती के लिए राजस्थान कृषि विभाग इन दिनों किसानों को निःशुल्क 'बीज मिनी किट मुहैया करवा रहा है। विभाग ने 26 लाख किसानों को निःशुल्क बीज मिनी किट प्रदान करने का लक्ष्य तय किया है। जिसमें ज्वार, बाजरा, मूंग, मोठ व मक्का की उन्नत किस्मों के बीज शामिल हैं।&nbsp;</p>
<p>कृषि आयुक्त कन्हैया लाल स्वामी ने बताया कि प्रदेश के 12 लाख किसानों को मक्का, 8 लाख को बाजरा, 4 लाख को मूंग और एक-एक लाख कृषकों को ज्वार व मोठ बीज के मिनी किट वितरित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाजरा मिनी किट का वजन 1.5 किलोग्राम, ज्वार, मोठ व मूंग मिनी किट का वजन 4 &nbsp;किलोग्राम और मक्का मिनी किट का वजन 5 किलोग्राम है।&nbsp;</p>
<p>इनका वितरण अनुसूचित जाति व जनजाति, लघु व सीमान्त और महिला कृषकों को संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच, एक महिला वार्ड पंच, एक अनुसूचित जाति या जनजाति के वार्ड पंच व कृषि पर्यवेक्षक की कमेटी द्वारा किया जा रहा है। संबंधित संयुक्त निदेशक कृषि जिला परिषद द्वारा समस्त किसानों को मिनी किट वितरण कार्यक्रम की जानकरी विभागीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कृषक गोष्ठियों और किसान सेवा केन्द्रों के माध्यम से दी जा रही है।&nbsp;</p>
<p>कृषि आयुक्त ने बताया कि कृषकों को मिनी किट का वितरण राज किसान साथी पोर्टल पर जन आधार कार्ड के माध्यम से ऑनलाईन किया जा रहा है। एक पात्र किसान परिवार को एक बीज मिनी किट ही वितरित किया जाएगा। कृषकों द्वारा आवेदन करने पर प्राप्त आवेदनों को कमेटी के समक्ष प्रस्तुत कर किसानों का चयन किया जा रहा है, जिसका रिकॉर्ड संबंधित कृषि पर्यवेक्षक द्वारा रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की बजट घोषणा की अनुपालना करते हुए कृषि विभाग द्वारा प्रमुख खरीफ फसलों की उपज बढ़ाने के उद्देश्य से यह बीज वितरित किए जा रहे हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ खरीफ सीजन के लिए फ्री में मिल रहे उन्नत किस्मों के बीज, राजस्थान कृषि विभाग ने शुरू की योजना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मिनी स्प्रिंकलर सेट पर 60 फीसदी तक सब्सिडी पाने का मौका, यहां करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-agriculture-department-is-giving-subsidy-on-mini-sprinkler-set.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 25 Jun 2024 03:25:44 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-agriculture-department-is-giving-subsidy-on-mini-sprinkler-set.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश कृषि विभाग किसानों को सिंचाई के लिए "मिनी स्प्रिंकलर सेट" उपलब्ध करवा रहा है। इसके लिए विभाग ने किसानों से आवेदन मांगे हैं, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में "मिनी स्प्रिंकलर सेट" खरीदने के इच्छुक किसान राज्य सरकार की सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं। आइए आपको बताते हैं की स्प्रिंकलर सेट पर सब्सिडी प्राप्त करने के लिए आपको क्या-क्या करना होगा।&nbsp;</p>
<p><strong>कितनी सब्सिडी मिलेगी</strong></p>
<p>मध्य प्रदेश कृषि विभाग 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' के तहत यह सब्सिडी दे रहा है। योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया 24 जून, सोमवार से शुरू हो चुकी है। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्राप्त आवेदनों के आधार पर लॉटरी का आयोजन किया जाएगा। जिसके माध्यम से सब्सिडी के लिए किसानों का चयन होगा। योजना के तहत किसानों को अधिकतम 60 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान रखा गया है। कृषि विभाग के ई&ndash;कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर उपलब्ध सब्सिडी कैलकुलेटर के जरिए किसान सिंचाई यंत्र पर मिलने वाली सब्सिडी पता कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज</strong></p>
<p>किसानों को आवेदन के समय एवं लॉटरी में चयन के बाद फील्ड अधिकारी द्वारा सत्यापन के दौरान कुछ दस्तावेज अपने पास रखने होंगे। जिसमें आधार कार्ड की कॉपी, बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ की कॉपी, सक्षम अधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र (केवल अनुसूचित जाति एवं जनजाति के किसानों हेतु), बी-1 की प्रति और बिजली बिल की कॉपी शामिल हैं। &nbsp;</p>
<p><strong>कैसे करें आवेदन&nbsp;</strong></p>
<p>मिनी स्प्रिंकलर सेट पर अनुदान लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। <strong><a href="https://farmer.mpdage.org/home/LandingIndex">e-कृषि यंत्र</a></strong> अनुदान पोर्टल पर जाकर किसान इसके लिए आसानी से आवेदन कर सकते हैं। पोर्टल पर नए किसानों को सबसे पहले अपना पंजीकरण करवाना होगा। वहीं, पहले से पंजीकृत किसान आधार ओटीपी के माध्यस से लॉगिन कर आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए किसान e-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं। अपने ब्लॉक या जिले के कृषि विभाग कार्यालय में भी योजना से जुड़ी जानकारी के लिए संपर्क किया जा सकता है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मिनी स्प्रिंकलर सेट पर 60 फीसदी तक सब्सिडी पाने का मौका, यहां करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में वित्तीय अनियमितता वाली सहकारी समितियों की एसआईटी जांच के निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sit-investigation-of-cooperative-societies-having-financial-irregularities-in-uttarakhand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 24 Jun 2024 19:59:55 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sit-investigation-of-cooperative-societies-having-financial-irregularities-in-uttarakhand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड की उन सहकारी समितियों के खिलाफ एसआईटी जांच के निर्देश दे दिये गये हैं, जिनमें वित्तीय अनियमितता पाई गई हैं। राज्य के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है कि समितियों के वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी करने वाले विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। समितियों में कम्प्यूटराइजेशन के फलस्वरूप बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी के मामले उजागर हो रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>डॉ. धन सिंह रावत ने बताया है कि विभागीय जांच में जिन सहकारी समितियों में वित्तीय अनियमितता व गबन के मामले पाए गये हैं, उन समितियों के खिलाफ एसआईटी जांच की जाएगी, जिसके उच्च स्तरीय निर्देश दे दिए गये हैं। उन्होंने बताया कि समय-समय पर उन्हें विभिन्न माध्यमों से सहकारी समितियों में वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी की सूचानएं मिल रही थी, जिस पर उन्होंने पूर्व में विभागीय जांच के निर्देश अधिकारियों को दिये थे।</p>
<p>प्रथम चरण की विभागीय जांच में प्रदेश भर की कई समितियों में वित्तीय गड़बड़ी व गबन के मामले सामने आये। इनमें पौड़ी जनपद में डाण्डामंडी व चांदपुर एम्पैक्स, देहरादून जनपद में विकासनगर, त्यूणी, दसऊ व भानियावाला एम्पैक्स, रूद्रप्रयाग में दैड़ा बहुउद्देश्यीय साधन सहकारी समिति, टिहरी में मेगाधार (भिलंगना), बड़कोट (जाखणीधार), सांदणा (जाखणीधार), पडिया, रौणिया (प्रतापनगर) एम्पैक्स, अल्मोड़ा में फलसीमा व भवाली एम्पैक्स, हरिद्वार में बहुउद्देश्यीय किसान सेवा सहकारी समिति बेल्डा, मंगलौर पूर्वी, खेलपुर, बहुउद्देश्यीय साधन सहकारी समिति जवाहरखान, खेडी सिकोहपुर, जवाहरखान मौ0 बुजुर्ग, धनपुरा, बहुउद्देश्यीय प्रारम्भिक कृषि ऋण सहकारी समिति सलेमपुर, चमोली में मसोली एम्पैक्स, उत्तरकाशी में जखौल एम्पैक्स, नैनीताल में ल्योलीकोट व सुयालवाड़ी और ऊधमसिंह नगर में फौजीमटकोटा किसान सेवा सहकारी समिति, रूद्रपुर शामिल हैं।</p>
<p>सहकारिता मंत्री ने बताया कि जांच में समितियों के वित्तीय लेन-देन में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को भी दोषी पाया गया। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाही करने तथा गबन की गई धनराशि को ब्याज के साथ वसूने के निर्देश दे दिये गये हैं। डॉ. रावत ने कहा कि सहकारिता विभाग में भ्रष्टचार कतई भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन भी समितियों में गड़बड़ी सामने आएगी, उनकी एसआईटी जांच की जाएगी। ताकि घोटाले और घपलेबाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर समितियों का संचालन पारदर्शिता से किया जा सके और आम लोगों को सहकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके।</p>
<p>&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में वित्तीय अनियमितता वाली सहकारी समितियों की एसआईटी जांच के निर्देश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तालाब निर्माण पर 90 फीसदी अनुदान पाने का मौका, आवेदन प्रक्रिया शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/bihar-agriculture-department-giving-subsidy-on-pond-and-irrigation-well-construction.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 24 Jun 2024 11:58:46 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/bihar-agriculture-department-giving-subsidy-on-pond-and-irrigation-well-construction.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>"हर खेत तक सिंचाई का पानी" अभियान के अंतर्गत बिहार में निजी एवं सामुदायिक भूमि पर कूप निर्माण तथा निजी भूमि पर जल संचयन तालाब व फार्म पौंड निर्माण की योजना चलाई जा रही है। इसके </span>तहत किसानों को तालाब और सिंचाई कूप निर्माण पर 80 से 100 फीसदी तक का अनुदान दिया जा रहा है। यह योजना बिहार के 16 जिलों में लागू की गई है। भूमि एवं जल संरक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में जो किसान अपने खेतों में तालाब और सिंचाई कूप का निर्माण कराना चाहते हैं, वह इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>योजना के तहत किसान निजी एवं सामुदायिक भूमि पर तालाब और सिंचाई कूप का निर्माण करवा सकते हैं। निजी जमीन पर 10 फीट व्यास एवं 30 फीट गहराई के सिंचाई कूप का निर्माण किया जाएगा। इसी तरह सामुदायिक/सरकारी जमीन पर 15 फीट व्यास एवं 30 फीट गहराई के सिंचाई कूप का निर्माण कराया जाएगा। वहीं, निजी भूमि पर 150 फीट लंबे, 100 फीट चौड़े एवं 8 फीट ऊंचे तालाब और सामुदायिक/सरकारी जमीन पर 100 फीट लंबे, 66 फीट चौड़े एवं 10 फीट ऊंचे तालाब के निर्माण पर अनुदान दिया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>निजी भूमि पर कराए जाने वाले सिंचाई कूप निर्माण पर 80 फीसदी अनुदान, जबकि सामुदायिक भूमि पर कराए जाने वाले सिंचाई कूप निर्माण पर 100 फीसदी अनुदान दिया जाएगा। वहीं, निजी भूमि पर कराए जाने वाले जल संचयन तालाब के निर्माण पर 90 फीसदी अनुदान देने का प्रावधान किया गया है।&nbsp;</p>
<p>कृषि विभाग ने सर्वेक्षण के बाद इस योजना के लिए 16 जिले चिन्हित किए हैं। इनमें बांका, मुंगेर, जमुई, नवादा, गया, औरंगाबाद, रोहतास, अरवल, जहानाबाद, नालंदा, पटना, शेखपुरा, लखीसराय, भागलपुर, भोजपुर और बक्सर शामिल हैं। इन जिलों में 158 तालाब तथा 91 कूप (कुल 249 संरचना) का निर्माण किया जाएगा। जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया 21 जून से शुरू हो चुकी है, जो 19 जुलाई तक जारी रहेगी। किसान "पहले आओ पहले पाओ" के आधार पर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।</p>
<p>योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले बिहार कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाईट <strong><a href="https://state.bihar.gov.in/krishi/CitizenHome.html">https://state.bihar.gov.in/krishi/ CitizenHome.html</a></strong> पर जाएं। इसके बाद होम पेज पर दिए गए लिंक या URL लिंक<strong><a href="https://bwds.bihar.gov.in/"> https://bwds.bihar.gov.in</a> </strong>पर किसान आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करते समय DBTinAgriculture के 13 अंकों का पंजीयन संख्या जरूर याद रखें। वहीं, अधिक &nbsp;जानकारी के लिए संबंधित जिला के उप निदेशक (कृषि), भूमि संरक्षण एवं सहायक निदेशक (शष्य) से संपर्क किया जा सकता है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_66766c9046d42.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ तालाब निर्माण पर 90 फीसदी अनुदान पाने का मौका, आवेदन प्रक्रिया शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_66766c9046d42.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तेलंगाना में 31 हजार करोड़ की किसान कर्ज माफी की घोषणा, किसानों का दो लाख रुपये तक का लोन होगा माफ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/telangana-announces-loan-waiver-of-up-to-2-lakh-rupees-for-farmers-total-amount-is-31-thousand-crore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 22 Jun 2024 13:36:22 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/telangana-announces-loan-waiver-of-up-to-2-lakh-rupees-for-farmers-total-amount-is-31-thousand-crore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>तेलंगाना सरकार ने किसानों के लिए कर्ज माफी का ऐलान किया है। किसानों का दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया जाएगा। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार, 21 जून को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद इस बात की घोषणा की। उन्होंने कहा कि 12 दिसंबर, 2018 से 9 दिसंबर, 2023 के बीच जिन किसानों ने दो लाख रुपये तक का कर्ज लिया है। उनका कर्ज एकमुश्त माफ कर दिया जाएगा।</p>
<p>उन्होंने कहा, ''मंत्रिमंडल ने 12 दिसंबर, 2018 से नौ दिसंबर, 2023 तक पांच साल की अवधि के लिए राज्य के किसानों द्वारा लिए गए दो लाख रुपये के कर्ज को माफ करने का फैसला किया है। पात्रता शर्तों सहित ऋण माफी का विवरण जल्द ही एक सरकारी आदेश (जीओ) में घोषित किया जाएगा। कर्ज माफी के चलते राज्य के खजाने पर लगभग 31 हजार करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।"</p>
<p>इसके साथ ही उन्होंने पिछली बीआरएस सरकार पर किसानों से वादाखिलाफी का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्व बीआरएस सरकार ने 11 दिसंबर, 2018 को कट-ऑफ तिथि के साथ दूसरे चरण की कर्ज माफी की थी। लेकिन, कर्ज माफी के अपने वादे को ईमानदारी से लागू नहीं किया।&nbsp;जिसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ा। रेड्डी ने कहा कि उनकी सरकार दो लाख रुपये के कृषि ऋण माफी के अपने चुनावी वादे को पूरा कर रही है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने 'रायथु भरोसा' की किसानों की निवेश सहायता योजनाओं के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने के लिए उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क की अध्यक्षता में एक कैबिनेट उप-समिति के गठन की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि कैबिनेट उप-समिति राजनीतिक दलों और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श करेगी और 15 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार विधानसभा के आगामी बजट सत्र में पैनल की रिपोर्ट पेश करेगी। विधायकों की राय लेने के बाद योजना के तौर-तरीके तय किए जाएंगे।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">तेलंगाना के किसान परिवारों को बधाई! <br /><br />कांग्रेस सरकार ने आपके 2 लाख रू तक के सभी ऋण माफ कर &lsquo;किसान न्याय&rsquo; के संकल्प को पूरा करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है - जो 40 लाख से ज़्यादा किसान परिवारों को कर्ज़ मुक्त बनाएगा।<br /><br />जो कहा, कर के दिखाया - यही नियत है और आदत भी।<br /><br />कांग्रेस&hellip;</p>
&mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) <a href="https://twitter.com/RahulGandhi/status/1804404863666700655?ref_src=twsrc%5Etfw">June 22, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p>वहीं, <span>तेलंगाना सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि </span><span>कांग्रेस सरकार ने 2 लाख रुपये तक के सभी ऋण माफ कर &lsquo;किसान न्याय&rsquo; के संकल्प को पूरा करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। तेलंगाना सरकार का यह कदम </span><span>40 लाख से ज़्यादा किसान परिवारों को कर्ज़ मुक्त बनाएगा। उन्होंने कहा कि हमारा वादा है - कांग्रेस जहां भी सरकार में होगी, हिंदुस्तान का धन &lsquo;हिंदुस्तानियों&rsquo; पर खर्च करेगी, &lsquo;पूंजीपतियों&rsquo; पर नहीं।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6676846d4197d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ तेलंगाना में 31 हजार करोड़ की किसान कर्ज माफी की घोषणा, किसानों का दो लाख रुपये तक का लोन होगा माफ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6676846d4197d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ओडिशा सरकार 3,100 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदेगी धान, राज्य के कृषि मंत्री का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/odisha-government-announced-to-buy-paddy-at-3100-rupees-per-quintal-in-kharif-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 21 Jun 2024 14:30:06 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/odisha-government-announced-to-buy-paddy-at-3100-rupees-per-quintal-in-kharif-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन में ओडिशा सरकार किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ी हुई कीमत पर धान खरीदने कि घोषणा की है। ओडिशा के खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता कल्याण मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा ने 20 जून को यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में सरकार ने यह फैसला लिया है। इसके साथ ही आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन से किसानों को उनकी उपज की बिक्री करने के 48 घंटे के भीतर बिना किसी कटौती के तुरंत भुगतान किया जाएगा।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>किसानों को नहीं होगी परेशानी&nbsp;</strong></p>
<p>पात्रा ने कहा कि बीजेपी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान धान का एमएसपी बढ़ाकर 3100 रुपये करने का वादा किया था। सरकार बनने के बाद अब यह प्रतिबद्धता पूरी हो रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा धान के लिए 2,300 रुपये प्रति क्विंटल की घोषणा के बाद राज्य सरकार के लिए बढ़ी हुई कीमत देना थोड़ा सस्ता हो गया है। अन्यथा, राज्य सरकार को हालिया कीमत से 800 रुपये की बजाय 917 रुपये अधिक चुकाने पड़ते। उन्होंने कहा कि सरकार अब धान पर बढ़ी हुई कीमत प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो। किसानों से अनाज संग्रहण में तेजी लाई जाएगी, ताकि उन्हें कई दिनों तक मंडी में इंतजार न करना पड़े।&nbsp;</p>
<p><strong>भुवनेश्वर में खुलेंगे चावल एटीएम</strong></p>
<p>मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में चावल एटीएम खोलने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि आने वाले सप्ताह में राशन कार्ड लाभार्थियों के लिए भुवनेश्वर में चावल एटीएम शुरू किए जाएंगे। लाभार्थी अपना कार्ड स्वाइप करके इन मशीनों से सीधे चावल प्राप्त कर पाएंगे। अन्य जिलों में भी चावल एटीएम की सुविधा देने के लिए कदम उठाए जाएंगे। सरकार इसे बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए आवश्यक तकनीकी सहायता प्राप्त करने के लिए विश्व खाद्य कार्यक्रम के अधिकारियों के साथ बातचीत कर रही है। इस बीच, खाद्य आपूर्ति मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार फर्जी राशन कार्डों पर सक्रियता से काम कर रही है। अब तक लगभग 50 लाख फर्जी लाभार्थियों की पहचान की गई है। फर्जी कार्ड वापस लेने और वास्तविक लाभार्थियों को शामिल करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_66753f771b8a8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ओडिशा सरकार 3,100 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदेगी धान, राज्य के कृषि मंत्री का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_66753f771b8a8.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में रोटावेटर समेत इन कृषि यंत्रों पर मिल रही है सब्सिडी, जल्द करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-government-giving-subsidy-on-agricultural-equipment-including-rotavator.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 20 Jun 2024 15:03:44 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/madhya-pradesh-government-giving-subsidy-on-agricultural-equipment-including-rotavator.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश सरकार ने कृषि यंत्रों की खरीद पर किसानों को सब्सिडी देने का फैसला लिया है। जिसके तहत कृषि विभाग ने रोटावेटर समेत 6 कृषि यंत्रों पर सब्सिडी के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। किसानों को यह सब्सिडी कृषि यंत्र अनुदान योजना के तहत दी जाएगी। इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। किसान ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर जाकर इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।&nbsp;</p>
<p>कृषि विभाग कुल 6 कृषि यंत्रों पर सब्सिडी दे रहा है। जिसमें रोटावेटर, सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, जीरो टिल सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, रेज्ड बेड प्लान्टर, रिजफरो प्लान्टर, मल्टीक्रॉप प्लान्टर शामिल हैं। आवेदन प्रक्रिया 19 जून से शुरू हो चुकी है, जो 26 जून 2024 तक जारी रहेगी। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्राप्त आवेदनों के आधार पर 27 जून 2024 को लॉटरी का आयोजन किया जाएगा। जिसके माध्यम से सब्सिडी के लिए किसानों का चयन होगा।&nbsp;</p>
<p>आवेदन के साथ किसान को स्वयं के बैंक खाते से एक डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) संबंधित जिले के सहायक कृषि यंत्री के नाम से बनवाकर जमा करना अनिवार्य होगा। डीडी बनवाने के बाद ही आप योजना में आवेदन कर पाएंगे। कृषि यंत्र रोटावेटर के लिए 5,000 रुपये और कृषि यंत्र सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल/ जीरो टिल सीड कम फर्टीलाइजर ड्रिल/ रेज्ड बेड प्लान्टर/ रिजफरो प्लान्टर/ मल्टीक्रॉप प्लान्टर के लिए किसानों को 2,000 रुपये की धरोहर राशि जमा करनी होगी।&nbsp;</p>
<p>योजना के लिए आवेदन करते समय किसानों के पास कुछ जरूरी दस्तावेज होना आवश्यक है। जिसमें आधार कार्ड, बैंक पासबुक, जाति प्रमाण पत्र , बी-1 की प्रति, बिजली कनेक्शन प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, मोबाइल नंबर आदि शामिल हैं। योजना के लिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। किसान सब्सिडी प्राप्त करने के लिए ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल <strong><a href="https://farmer.mpdage.org/Home/Index">https://farmer.mpdage.org/Home/Index</a></strong> पर आवेदन कर सकते हैं। वहीं, अधिक जानकारी के लिए कृषि विभाग की <a href="https://mpkrishi.mp.gov.in/Englishsite_New/indexEnglish_New.aspx"><strong>आधिकारिक वेबसाइट</strong> </a>और किसान हेल्पलाइन पर भी संपर्क किया जा सकता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6673f69eb2817.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में रोटावेटर समेत इन कृषि यंत्रों पर मिल रही है सब्सिडी, जल्द करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आप ने भाजपा पर पंजाब के रूरल डेवलपमेंट फंड का 7 हजार करोड़ अटकाने का आरोप लगाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/aap-accused-the-center-of-withholding-rs-7-thousand-crore-of-punjab-rural-development-fund.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 19 Jun 2024 13:31:26 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/aap-accused-the-center-of-withholding-rs-7-thousand-crore-of-punjab-rural-development-fund.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और केंद्र सरकार के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। पंजाब के रूरल डेवलपमेंट फंड (आरडीएफ) का 7 हजार करोड़ रुपये रोकने को लेकर आप ने भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।</p>
<p>आम आदमी पार्टी के विधायक दिनेश चड्ढा ने भाजपा पर पंजाब के मंडी सिस्टम को खत्म करने की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र ने रूरल डेवलपमेंट फंड (आरडीएफ) का 7,000 करोड़ रुपया रोक रखा है। इसके कारण पंजाब के ग्रामीण इलाकों में सड़कों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। इसके लिए उन्होंने केंद्र द्वारा आरडीएफ रोके जाने को जिम्मेदार ठहराया। आरडीएफ का इस्तेमाल पंजाब के ग्रामीण इलाकों में सड़कों की मरम्मत और मंडियों के विकास के लिए किया जाता है। दिनेश चड्ढा ने सभी सांसदों से इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उठाने और आरडीएफ जारी करवाने की अपील की।</p>
<p>आप विधायक ने आरोप लगाया कि भाजपा पंजाब के किसानों से बदला ले रही है, क्योंकि उन्होंने मोदी सरकार को किसान विरोधी बिल वापस लेने के लिए मजबूर किया था। उन्होंने कहा, "आज भी भाजपा की वही मंशा है, यानी पंजाब में मंडी व्यवस्था को खत्म करना है। इसीलिए पंजाब का आरडीएफ का पैसा जारी नहीं कर रहे हैं।" चड्ढा ने भाजपा के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह किसान का बेटे होने का दावा करते हैं, लेकिन कभी किसानों के हक में आवाज नहीं उठाते।&nbsp;&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560">
<p lang="pa" dir="ltr">ਆਪ ਵਿਧਾਇਕ ਐਡ. ਦਿਨੇਸ਼ ਚੱਢਾ ਇੱਕ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਮੁੱਦੇ ਤੇ ਮੀਡੀਆ ਨੂੰ ਸੰਬੋਧਨ ਕਰਦੇ ਹੋਏ Live.. <a href="https://t.co/rMxBaxDJ8e">https://t.co/rMxBaxDJ8e</a></p>
&mdash; AAP Punjab (@AAPPunjab) <a href="https://twitter.com/AAPPunjab/status/1802953346187161730?ref_src=twsrc%5Etfw">June 18, 2024</a></blockquote>
<p>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</p>
<p>पंजाब मंडी बोर्ड ग्रामीण इलाकों में सड़कों का रखरखाव करता है। लेकिन आरडीएफ का पैसा जारी न होने के कारण इन सड़कों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। वहीं मंडियों में होने वाले विकास कार्य भी रूके पड़े हैं। पंजाब सरकार केंद्रीय पूल के लिए गेहूं और धान की सरकारी खरीद पर 3 फीसदी रूरल डेवलपमेंट फंड (आरडीएफ) और 3 फीसदी मंडी डेवलपमेंट फंड (एमडीएफ) चार्ज करती है।&nbsp;</p>
<p>पिछले साल पंजाब में बाढ़ की वजह से ग्रामीण इलाकों में बहुत-सी सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गये थे। आरडीएफ जारी न होने से इनकी मरम्मत नहीं हो पाई है। पंजाब मंडी बोर्ड हर साल सड़कों की मरम्मत करवाता था। मंडी बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि पिछले तीन साल से आरडीएफ जारी नहीं हुआ, जिससे सड़कों की मरम्मत का काम रूका पड़ा है। वहीं, पंजाब पर आरडीएफ को तीन फीसदी से घटाकर दो फीसदी करने का दबाव बनाया जा रहा है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_66728e142f5c1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आप ने भाजपा पर पंजाब के रूरल डेवलपमेंट फंड का 7 हजार करोड़ अटकाने का आरोप लगाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पश्चिमी यूपी में हार से भाजपा में घमासान, क्या है इस झगड़े की जड़]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/tussle-between-bjp-due-to-defeat-in-western-up-what-is-the-root-of-this-fight.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 14 Jun 2024 08:06:27 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/tussle-between-bjp-due-to-defeat-in-western-up-what-is-the-root-of-this-fight.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पश्चिमी यूपी में लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच घमासान मचा हुआ है। इसके पीछे नेताओं के साथ-साथ जातियों के वर्चस्व की लड़ाई भी है जो लोकसभा चुनाव से पहले ही शुरू हो गई थी। लोकसभा चुनावों में मुजफ्फरनगर, कैराना और सहारनपुर में भाजपा की हार और मेरठ में मामूली अंतर से जीत के बाद पार्टी के अंदरूनी टकराव सतह पर आ गये हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और पूर्व विधायक संगीत सोम एक-दूसरे पर तीखे प्रहार कर रहे हैं। जुबानी तकरार भ्रष्टाचार के आरोपों तक पहुंच गई है। यह उस पश्चिमी यूपी में हो रहा है जो 2014 में मोदी लहर का एपिसेंटर था।</p>
<p>राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन, अरुण गोविल जैसे बाहरी उम्मीदवार को टिकट और कई नेताओं की आपसी कलह के कारण पश्चिमी यूपी में भाजपा संगठन के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। लोकसभा चुनाव से पहले ही ठाकुरों की नाराजगी की बातें उठने लगी थी। मुंबई से अरूण गोविल को लाकर भाजपा ने जिस तरह मेरठ का टिकट दिया, उससे पश्चिमी यूपी के पार्टी के ब्राह्मण नेता भी उनकी अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं।</p>
<p>भाजपा के एक वरिष्ठ ब्राह्मण नेता ने <strong>रूरल वॉयस</strong> के साथ बातचीत में कहा कि पार्टी ने वादा किया था कि गाजियाबाद की सीट वैश्य उम्मीदवार को देने की स्थिति में मेरठ से किसी ब्राह्मण को लड़ाया जाएगा। लेकिन अरूण गोविल को बाहर से लाकर थोप दिया गया जो खुद वैश्य है और उनकी जीत के छोटे अंतर को लोग पार्टी की लगभग हार के रूप में देख रहे हैं। उनके मुताबिक, 2009 में राजनाथ सिंह जब गाजियाबाद से चुनाव लड़ने आये तो उस समय फार्मूला था कि गाजियाबाद से वैश्य और मेरठ से ब्राह्मण उम्मीदवार होगा, लेकिन राजनाथ सिंह के गाजियाबाद आने की स्थिति में मेरठ से राजेंद्र अग्रवाल को टिकट दिया गया।</p>
<p>लेकिन अब 2024 में जब गाजियाबाद सीट से वैश्य उम्मीदवार को टिकट मिला तो मेरठ में ब्राह्मण उम्मीदवार का दावा बनता था। इस सीट पर तीन लाख ब्राह्मण वोट हैं। ऐसे में जिस तरह से अरूण गोविल की जीत बहुत मामूली हुई है वह ब्राह्मणों की नाराजगी को भी जाहिर करती है। फिर यूपी में सपा और कांग्रेस का जो उभार हुआ है, उससे भाजपा के कई नाराज नेता कांग्रेस में उम्मीद देखने लगे हैं। &nbsp;</p>
<p>पश्चिमी यूपी में भाजपा के लिए सबसे बड़ा झटका मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान की हार रही। अपनी हार के लिए संजीव बालियान ने सरधना के पूर्व विधायक संगीत सोम पर निशाना साधा। पत्रकारों से बात करते हुए संगीत सोम से जुड़े सवाल के जवाब में संजीव बालियान ने कहा, &ldquo;जिन्होंने खुले तौर पर समाजवादी पार्टी का चुनाव लड़ाया और यहां बड़ी पोजिशन लिए हुए हैं और सरकारी सुविधाएं भी ले रहे हैं। मेरा निवेदन रहेगा कि पार्टी इस पर ध्यान देगी और कार्रवाई करेगी।&rdquo;&nbsp;</p>
<p>पलटवार करते हुए संगीत सोम ने मेरठ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और संजीव बालियान पर निशाना साधा। संगीत सोम ने कहा कि उनके सरधना विधानसभा क्षेत्र में भाजपा नहीं हारी जबकि बुढाना और चरथावल में अपने गढ़ में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है।&nbsp;राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन के बारे में संगीत सोम ने कहा कि इसका भाजपा को कोई फायदा नहीं हुआ,&nbsp;क्योंकि&nbsp;जो सीटें हम जीत रहे थे वह भी हार गए। आरएलडी अपनी सीटें ही जीतने में कामयाब रही।</p>
<p>संगीत सोम की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजीव बालियान के खिलाफ कथित रूप से एक पर्चा भी बांटा गया,&nbsp;जिसमें कई गंभीर आरोप लगाए गये हैं। बाद में जब मामले ने तूल पकड़ा तो सोम ने इस पर्चे से पल्ला झाड़ दिया। लेकिन पश्चिमी यूपी में भाजपा के दो प्रमुख नेताओं के बीच खुलेआम आरोप-प्रत्यारोप से पार्टी की काफी फजीहत हो रही है। &nbsp;</p>
<p>इस बीच भाजपा की नई सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल के व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित अग्रवाल भी इस झगड़े में कूद गये। अग्रवाल ने कहा कि संगीत सोम जैसे नेता ने &ldquo;जयचंद&rdquo; का काम किया, जिसके कारण भाजपा मुजफ्फरनगर में हारी। हालांकि, राष्ट्रीय लोकदल पार्टी ने रोहित अग्रवाल के इस बयान का समर्थन नहीं किया और उन्हें नोटिस जारी कर ऐसी बयानबाजी पर चेतावनी दी।</p>
<p>मुजफ्फरनगर में भाजपा की हार पर इसलिए भी बवाल मचा है क्योंकि इसी क्षेत्र से 2014 में भाजपा की राष्ट्रीय लहर की शुरुआत हुई थी। संजीव बालियान और संगीत सोम दोनों ही 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद सुर्खियों में आए। संजीव बालियान 2014 में मुजफ्फरनगर से सांसद और फिर केंद्रीय मंत्री बने। वहीं, संगीत सोम 2012 से सरधना से भाजपा विधायक थे लेकिन 2022 में उन्हें सपा-रालोद गठबंधन से हार का सामना करना पड़ा था। तब संगीत सोम की हार के लिए भी भीतरघात को वजह माना गया था। तभी से संगीत सोम और संजीव बालियान के बीच जुबानी जंग जारी है। इस बीच, खतौली उपचुनाव में भाजपा की हार ने भी पश्चिमी यूपी में भाजपा की गुटबाजी को बढ़ा दिया। लोकसभा चुनाव के दौरान भी संजीव बालियान और संगीत सोम एक दूसरे पर तंज कसते रहे।&nbsp;</p>
<p>जब राष्ट्रीय लोकदल के साथ भाजपा का गठबंधन हुआ तो संजीव बालियान की मुजफ्फरनगर सीट को काफी सेफ माना जा रहा था। लेकिन तभी ठाकुरों की नाराजगी का मुद्दा उठा जो पूरे चुनाव में छाया रहा। पश्चिमी यूपी में पीएम मोदी और सीएम आदित्यनाथ की कई रैलियों के बावजूद भाजपा को मुजफ्फरनगर, कैराना और सहारनपुर में हार का सामना करना पड़ा। जबकि मेरठ सीट भी बहुत कम अंतर से जीती।&nbsp;</p>
<p>इस बीच, मुजफ्फरनगर में भाजपा को नुकसान पहुंचाने वाले बसपा प्रत्याशी दारा सिंह प्रजापति को मायावती ने पश्चिमी यूपी का प्रभारी बनाकर अतिपिछड़ा वर्ग को साधने का प्रयास किया है। त्यागी समाज श्रीकांत त्यागी प्रकरण के बाद से ही भाजपा के लिए चुनौती बना हुआ है। जबकि राष्ट्रीय लोकदल से गठबंधन भाजपा के परंपरागत मतदाताओं के गले नहीं उतर रहा है।</p>
<p>उधर, जाट समुदाय अभी भी पूरी तरह भाजपा के पाले में नहीं गया है। लेकिन इस गठबंधन ने भाजपा के भीतर खींचतान को जरूर बढ़ा दिया है। रालोद के 9 विधायकों और दो सांसदों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भाजपा नेताओं में असुरक्षा की भावना है क्योंकि वे रालोद की वजह से हारे बैठे हैं और अब गठबंधन के कारण भविष्य में टिकट कटने की आशंका है। यह भी भाजपा में बढ़ती गुटबाजी की वजह है।</p>
<p>हाल के लोकसभा चुनाव और उसके बाद के घटनाक्रम से साफ हो गया है कि भाजपा को पश्चिमी यूपी में नेताओं के बीच समन्वय और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान देना पड़ेगा। पश्चिमी यूपी में सियासी समीकरण बदल रहे हैं। ऐसे में भाजपा के साथ मजबूती से जुड़े रहे कई नेताओं और समुदायों को नई परिस्थितियों में साथ जोड़े रखना बड़ी चुनौती होगा। सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के बूते पश्चिमी यूपी में कामयाबी हासिल करती रही भाजपा के सामने अब विभिन्न समुदायों और उनके नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई से उबरने की चुनौती है।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_666b03deb05e5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पश्चिमी यूपी में हार से भाजपा में घमासान, क्या है इस झगड़े की जड़ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पश्चिम बंगाल के किसानों को खरीफ सीजन के लिए  2,900 करोड़ की वित्तीय सहायता, रबी सीजन के लिए मुआवजा भी देगी राज्य सरकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/cm-mamata-banerjee-has-announced-financial-assistance-of-2900-crore-rupees-to-1-crore-farmers-under-the-krishak-bandhu-scheme.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 13 Jun 2024 11:19:39 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/cm-mamata-banerjee-has-announced-financial-assistance-of-2900-crore-rupees-to-1-crore-farmers-under-the-krishak-bandhu-scheme.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पश्चिम बंगाल के किसानों को आने वाले खरीफ सीजन के लिए वित्तीय सहायता का ऐलान किया गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कृषक बंधु (नूतन) योजना के तहत राज्य के एक करोड़ से अधिक किसानों को वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है। योजना के तहत किसानों के खाते में 2,900 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे। जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही सीएम ममता बनर्जी ने रबी सीजन के दौरान हुए फसलों के नुकसान पर भी मुआवजे का ऐलान किया है। जिसके लिए किसानों को 293 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>साल के अंत में जारी होगी दूसरी किस्त&nbsp;</strong></p>
<p>सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बात की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, " मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि हम आज से 2900 करोड़ रुपये सीधे हमारे कृषक बंधु (नूतन) योजना के तहत नामांकित लगभग 1.05 करोड़ किसानों (बटाईदारों सहित) के बैंक खातों में जारी कर रहे हैं। यह खरीफ सीजन 2024 के लिए वित्तीय सहायता की पहली किस्त है, और इसी साल के अंत में रबी सीजन के लिए दूसरी किस्त दी जाएगी। एक एकड़ से अधिक की खेती योग्य भूमि के लिए, एक किसान को 10000/- रुपये मिलते हैं, और कम मात्रा में भूमि के लिए, आनुपातिक राशि न्यूनतम 4000/- रुपये प्रति वर्ष मिलती है। 2019 में इस योजना की शुरुआत के बाद से18,234 करोड़ की राशि किसानों के खातों में पहुंच चुकी है।"</p>
<p><strong>रबी सीजन के लिए मुआवजे का ऐलान&nbsp;</strong></p>
<p>इसके साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रबी सीजन के दौरान हुए फसलों के नुकसान के लिए मुआवजा जारी करने का भी ऐलान किया। उन्होंने लिखा, "आज हम राज्य के 2.10 लाख किसानों के बैंक खातों में सीधे 293 करोड़ रुपये की राशि जारी कर रहे हैं, जिन्हें रबी सीजन के दौरान प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण फसल का नुकसान हुआ था। यह हमारी अनूठी बांग्ला शस्य बीमा (बीएसबी) के तहत किया जाता है, जो हमारी अनूठी फसल बीमा योजना है, जहां राज्य सरकार सभी फसलों के लिए संपूर्ण प्रीमियम का भुगतान करती है। 2019 में शुरुआत से लेकर अब तक प्रभावित एक करोड़ किसानों के बैंक खातों में 3133 करोड़ रुपये पहुंच चुके हैं!"</p>
<p><strong>क्या है कृषक बंधु (नतून) योजना&nbsp;</strong></p>
<p>कृषक बंधु (नतून) योजना पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा चलाई गई एक कृषि सहायता योजना है, जो किसानों को वार्षिक वित्तीय सहायता (4000-10000 रुपये) और 2 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर प्रदान करती है। इसका उद्देश्य किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारना और कृषि उत्पादन बढ़ाना है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_666a865aea4a5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पश्चिम बंगाल के किसानों को खरीफ सीजन के लिए  2,900 करोड़ की वित्तीय सहायता, रबी सीजन के लिए मुआवजा भी देगी राज्य सरकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_666a865aea4a5.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बिहार में करना चाहते हैं नारियल की खेती, महज 21 रुपये में मिलेगा पौधा, इस लिंक पर करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/bihar-government-is-giving-subsidy-on-coconut-plant-buy-it-for-just-21-rupees-apply-from-this-link.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 12 Jun 2024 11:38:28 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/bihar-government-is-giving-subsidy-on-coconut-plant-buy-it-for-just-21-rupees-apply-from-this-link.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बिहार में किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार तरह-तरह की योजनाएं चला रही है। वहीं, अब बिहार सरकार ने प्रदेश में नारियल की खेती बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है की इससे प्रदेश में नारियल की खेती बढ़ेगी और किसान अच्छी कमाई कर पाएंगे। नारियल की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार 75 फीसदी तक अनुदान भी दे रही है। ऐसे में अगर आप भी बिहार के किसान हैं और नारियल की खेती करना चाहते हैं, तो जल्द से जल्द सरकार की इस योजना का लाभ उठाएं। &nbsp;</p>
<p><strong>किसान कमा सकते हैं अधिक मुनाफा</strong></p>
<p>बिहार में किसान पारंपरिक फसलों की खेती ज्यादा करते हैं। ऐसे में सरकार किसानों को नकदी फसलों की खेती करने के लिए प्रेरित करती रहती है। इसी वजह से सरकार ने उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए पहली बार उद्यानिकी में नारियल को शामिल किया है। इसी कड़ी में सरकार ने नारियल की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 75 फीसदी तक अनुदान देने का निर्णय लिया है। उद्यान विभाग की ओर से इस योजना का संचालन किया जा रहा है। इस योजना से ज्यादा से ज्यादा किसान लाभान्वित हों इसके लिए विभाग किसानों को जागरूक भी कर रहा है।&nbsp;</p>
<p><strong>महज 21 रुपये में मिलेगा पौधा</strong></p>
<p>विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत एक किसान को अधिकतम चार हेक्टेयर में नारियल की खेती करने के लिए अनुदान दिया जाएगा। आम लोगों को भी अपने घर के दरवाजे और आंगन में लगाने के लिए नारियल के अधिकतम पांच पौधा सब्सिडी दर पर दिए जाएंगे। किसानों को नारियल विकास बोर्ड के माध्यम से यह पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पर किसानों को 75 प्रतिशत का अनुदान दिया जाएगा। पौधे का मूल्य 85 रुपया प्रति पौधा है। जिसके लिए किसान को 21.25 रुपया जमा करने होंगे। सरकार प्रत्येक पौधे पर 63.75 रुपये का अनुदान दे रही है।&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr">नारियल पौधा वितरण कार्यक्रम (2024-25), यह योजना राज्य के सभी 38 जिलों में कार्यान्वित की जायेगी। योजना के <a href="https://t.co/xwT7hDfK3C">https://t.co/xwT7hDfK3C</a> पर उपलब्ध फल से सम्बन्धित योजना पर आवेदन किया जा सकता है। <a href="https://twitter.com/mangalpandeybjp?ref_src=twsrc%5Etfw">@mangalpandeybjp</a> <a href="https://twitter.com/SanjayAgarw_IAS?ref_src=twsrc%5Etfw">@SanjayAgarw_IAS</a> <a href="https://twitter.com/abhitwittt?ref_src=twsrc%5Etfw">@abhitwittt</a> <a href="https://twitter.com/HorticultureBih?ref_src=twsrc%5Etfw">@HorticultureBih</a> <a href="https://twitter.com/AgriGoI?ref_src=twsrc%5Etfw">@AgriGoI</a> <a href="https://twitter.com/IPRD_Bihar?ref_src=twsrc%5Etfw">@IPRD_Bihar</a> <a href="https://t.co/pEBDz1982e">pic.twitter.com/pEBDz1982e</a></p>
&mdash; Agriculture Department, Govt. of Bihar (@Agribih) <a href="https://twitter.com/Agribih/status/1800718356884144415?ref_src=twsrc%5Etfw">June 12, 2024</a></blockquote>
<p><span>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</span></p>
<p><strong>कहां मिलेगा पौधा</strong></p>
<p>जिन किसानों को योजना का लाभ लेना है, उन्हें जमीन की रसीद आवेदन के साथ अटैच करनी होगी। योजना का लाभ लेने के लिए सबसे पहले उद्यान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट<strong> <a href="https://horticulture.bihar.gov.in">https://horticulture.bihar.gov.in</a> </strong>पर जाएं। यहां आपको "फल से सम्बंधित योजना " का विकल्प दिखाई देगा। जैसे ही आप इस पर क्लिक करेंगे तो आपके सामने "नारियल पौधा वितरण योजना" के लिए आवेदन लिंक खुल जाएगा। किसान यहां से योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। जिसके बाद ही किसानों को योजना का लाभ मिलेगा।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6669335c1e8f4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ बिहार में करना चाहते हैं नारियल की खेती, महज 21 रुपये में मिलेगा पौधा, इस लिंक पर करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में कृषि स्नातकों के लिए स्वरोजगार का अवसर, 6 लाख रुपये लोन देगी सरकार, 15 जुलाई से पहले करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/apply-for-agricultural-entrepreneur-self-reliance-scheme-before-15th-july-agri-junction-yojana-uttar-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 11 Jun 2024 12:28:13 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/apply-for-agricultural-entrepreneur-self-reliance-scheme-before-15th-july-agri-junction-yojana-uttar-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार कृषि स्नातकों के लिए रोजगार का सुनहरा अवसर लाई है। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने "प्रशिक्षित कृषि उद्यमी स्वावलम्बन" (एग्रीजंक्शन) योजना की शुरूआत की है। जिसके तहत कृषि, डेयरी या फिर हॉर्टिकल्चर की पढ़ाई करने वालों को उद्यमी बनाया जाएगा। चयनित युवाओं को सरकार उद्यम चलाने का प्रशिक्षण देने के साथ-साथ खाद, बीज और दवा आदि की बिक्री करने का मुफ्त लाइसेंस भी देगी। इसके साथ ही चयनित युवाओं को सरकार की तरफ से लोन भी दिया जाएगा। जिससे युवा अपना उद्यम स्थापित कर पाएं।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या है योजना?</strong></p>
<p>इस योजना के तहत बीज और खाद की दुकानों पर बैठने वाले गैर जानकारों को रोकने के लिए बढ़ावा मिलता है, साथ ही कृषि क्षेत्र में शिक्षित युवाओं को रोजगार का अवसर प्रदान किया जाता है। क्योंकि, यह एक कृषि योजना है इसलिए इसका लाभ किसानों को भी मिलता है। किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि निवेश के साथ-साथ कृषि प्रसार सेवायें उपलब्ध कराना भी इस योजना का उद्देश्य है। किसानों को कृषि यंत्र, खाद, बीज सहित कई सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती हैं। साथ ही बीज, उर्वरक और कीटनाशक के संबंध में सुझाव भी दिए जाते हैं। इस योजना से जुड़कर युवा 'वन स्टाप शॉप या एग्री जंक्शन' की शुरुआत कर सकते हैं।</p>
<p><strong>योजना की पात्रता</strong></p>
<p>अगर आप भी इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं तो आपके पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कृषि एवं सम्बद्ध विषयों में स्नातक की डिग्री होनी चाहिए। योजना के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष तय की गई है। जिसमें अनुसूचित जाति, जनजाति एवं महिलाओं को आयु में अधिकतम 5 वर्ष की छूट दी जाएगी।&nbsp;</p>
<p><strong>6 लाख रुपये का लोन देगी सरकार&nbsp;</strong></p>
<p>कृषि विभाग की तरफ से कई सूचना माध्यमों से इस संबंध में जानकारी प्रकाशित की गई है। जानकारी&nbsp;के मुताबिक, योजना के तहत कृषि की पढ़ाई करने वाले युवा दुकान संचालित करने के साथ-साथ किसानों को खाद, बीज व दवा आदि के संबंध में जानकारी भी दे सकेंगे। क्योंकि अन्य दुकानदार ऐसा नहीं कर पाते। चयनितों को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान की ओर से शिक्षण दिया जाएगा। इसमें उन्हें बिजनेस प्लान भी समझाया जाएगा, ताकि वे बेहतर उद्यमी बन सकें।</p>
<p>हर लाभार्थी को 6 लाख रुपये की मदद की जाएगी। इसमें 1 लाख रुपये उसे खुद लगाना होगा, जबकि 5 लाख रुपये का बैंक से ऋण दिलाया जाएगा। इसके साथ ही एक साल तक उनकी दुकान के किराये (अधिकतम एक हजार रुपये) का भी भुगतान सरकार करेगी। योजना में चयनितों को खाद, बीज व दवा के लिए मुफ्त में लाइसेंस भी दिलाया जाएगा। चयनित वहां पर खेती से जुड़ी अन्य सामानों की भी बिक्री कर पाएंगे।</p>
<p><strong>15 जुलाई से पहले करें आवेदन&nbsp;</strong></p>
<p>कृषि विषय में योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी अपना आवेदन समस्त दस्तावेजों के साथ 15 जुलाई को शाम 5 बजे तक डाक के माध्यम से उप कृषि निदेशक लखनऊ कार्यालय में प्रस्तुत कर सकते हैं। योजना के लिए आवेदन फॉर्म उत्तर प्रदेश के कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट <strong><a href="https://agriculture.up.gov.in/">https://agriculture.up.gov.in/</a></strong>&nbsp;पर उपलब्ध है। जहां से आप इसे डाउनलोड करके आवेदन कर सकते हैं। आवेदन मात्र डाक माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा। व्यक्तिगत आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। वहीं, अधिक जानकारी के लिए युवा अपने नजदीकी कृषि कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6667f322ca004.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में कृषि स्नातकों के लिए स्वरोजगार का अवसर, 6 लाख रुपये लोन देगी सरकार, 15 जुलाई से पहले करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा ने खेती&amp;#45;मजदूर जीवन सुरक्षा योजना के लिए आयु सीमा घटाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-government-reduced-the-age-limit-for-kheti-mazdoor-jeevan-suraksha-yojana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 08 Jun 2024 15:25:31 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-government-reduced-the-age-limit-for-kheti-mazdoor-jeevan-suraksha-yojana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा सरकार ने किसानों, कृषि मजदूरों और मंडी मजदूरों के लिए मुख्यमंत्री किसान एवं खेतीहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना के लिए आयु सीमा की सीमा हटाने का फैसला लिया है। अब 10 वर्ष से कम आयु के बच्चे और 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति भी इस योजना का लाभ उठा पाएंगे। इस योजना के तहत, कृषि मशीनरी चलाते समय मृत्यु या विकलांगता की स्थिति में किसानों, कृषि मजदूरों और मंडी मजदूरों को 37,500 रुपये से 5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।</p>
<p>यह निर्णय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में कृषि, बागवानी विभाग तथा हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की परियोजनाओं की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक में लिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाएं, किसी भी स्तर पर कोई देरी न हो। किसी भी स्तर पर कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्य मंत्री ने कहा कि 15 जुलाई से कालका की सेब मंडी में सेब की खरीद-फरोख्त भी शुरू हो जाएगी।</p>
<p><strong>किसानों के लिए कैंटीन की सुविधा</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया है कि हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा प्रदेश की 40 मंडियों में अटल कैंटीन संचालित की जा रही हैं। इन कैंटीनों में कोई भी नागरिक, विशेषकर किसान व मजदूर मात्र 10 रुपये में पौष्टिक भोजन प्राप्त कर सकते हैं। पहले यह कैंटीन मौसम के अनुसार संचालित होती थीं, लेकिन पिछले चार महीनों से ये पूरे वर्ष संचालित हो रही हैं।</p>
<p><strong>मंडी बोर्ड की सड़कों की होगी मरम्मत&nbsp;</strong></p>
<p>बैठक में बताया गया कि खेतों को जाने वाली 5 करम सड़कों में से अधिकतर को पक्का कर दिया गया है, तथापि 490 किलोमीटर ऐसी सड़कें हैं, जहां बीच में 5 करम सड़कों की चौड़ाई कम है, जिन्हें पक्का किया जाना है। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि शेष बची हुई सभी 5 करम सड़कों को पक्का किया जाए। इसके अलावा मंडी बोर्ड की जो भी सड़कें खराब हैं, उनकी मरम्मत की जाए। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया को उचित योजना बनाकर 10 दिन में पूरा किया जाए।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6664297f1d43c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा ने खेती-मजदूर जीवन सुरक्षा योजना के लिए आयु सीमा घटाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हिमाचल में अब नए फॉर्मूले से तय होगा सेब का मालभाड़ा, सीजन से पहले बागवानों को बड़ी राहत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/freight-charges-of-apples-in-himachal-will-be-decided-according-to-weight-and-distance-said-horticulture-minister-jagat-singh-negi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 08 Jun 2024 14:16:10 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/freight-charges-of-apples-in-himachal-will-be-decided-according-to-weight-and-distance-said-horticulture-minister-jagat-singh-negi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल में जुलाई से शुरू होने वाले सेब सीजन से पहले बागवानों के लिए खुशखबरी है। हिमाचल सरकार ने सेब का मालभाड़ा तय करने का नया फॉर्मूला तैयार किया है। प्रदेश में पहली बार सेब का मालभाड़ा वजन और दूरी (किलोग्राम और किलोमीटर) के आधार पर तय किया जाएगा। इससे प्रदेश के लाखों बागवानों को बड़ी राहत मिलेगी। सेब सीजन को लेकर प्रदेश सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को राज्य सचिवालय शिमला में एक बैठक की गई, जिसकी अध्यक्षता बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने की।&nbsp;</p>
<p>बैठक के बाद उन्होंने कहा कि हिमाचल सेब उत्पादन के लिए विश्व भर विख्यात है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सेब का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। ऐसे में सरकार सेब सीजन को लेकर गंभीर है। पहली बार इस सीजन में यूनिवर्सल कार्टन को उपयोग में लाया जा रहा है, जिससे बागवानों को मंडियों में सेब बेचते वक्त नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। बागवानी मंत्री ने साफ किया कि इस सीजन से मंडियों में सेब सिर्फ यूनिवर्सल कार्टन में बिकेगा। बाहरी राज्यों को भी सेब यूनिवर्सल कार्टन में ही भेजा जाएगा।&nbsp;</p>
<p><strong>'केजी और किमी' के आधार पर तय होगा मालभाड़ा &nbsp;</strong></p>
<p>जगत सिंह नेगी ने आगे कहा कि यूनिवर्सल कार्टन लागू करने के बाद सरकार ने वजन और दूरी (किलोग्राम और किलोमीटर) के आधार पर सेब का मालभाड़ा तय करने का फैसला लिया है। नेगी ने अधिकारियों को मालभाड़ा तय करने के नियमों में बदलाव के लिए उपयुक्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इसके अलावा, उन्होंने व्यापारियों के पंजीकरण और उन्हें लाइसेंस देने और फल उत्पादकों को समय पर भुगतान करने के निर्देश भी जारी किए। नेगी ने शिमला जिला प्रशासन को मांग के अनुसार पेटियों सहित सेब को समय पर मंडियों में पहुंचाने के लिए ट्रकों और पिकअप की उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा।&nbsp;</p>
<p>बैठक के दौरान बागवानी मंत्री ने सड़कों के रखरखाव के निर्देश भी दिए। उन्होंने शिमला जिले के फागू में मुख्य नियंत्रण कक्ष स्थापित करने और पुलिस विभाग को सेब सीजन के दौरान यातायात व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। बैठक में लोक निर्माण विभाग को फल उत्पादक क्षेत्रों को टर्मिनल मंडियों से जोड़ने वाली सड़कों के उचित रखरखाव और भारी बारिश और लैंडस्लाइड से बाधित सड़कों को समय पर बहाल करने के निर्देश भी दिए गए।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हिमाचल में अब नए फॉर्मूले से तय होगा सेब का मालभाड़ा, सीजन से पहले बागवानों को बड़ी राहत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में किसान सम्मान निधि 2 हजार रुपये बढ़ी, किसानों को मिलेंगे सालाना 8 हजार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/kisan-samman-nidhi-increased-by-rs-2-thousand-in-rajasthan-farmers-will-get-rs-8-thousand-annually.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 08 Jun 2024 13:18:17 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/kisan-samman-nidhi-increased-by-rs-2-thousand-in-rajasthan-farmers-will-get-rs-8-thousand-annually.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान में भाजपा सरकार पीएम सम्मान निधि की राशि बढ़ाने जा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पीएम किसान सम्मान निधि की राशि में 2 हजार रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। योजना के तहत केंद्र सरकार किसानों को तीन किस्तों में सालाना 6 हजार रुपये दे रही है। लेकिन राजस्थान के किसानों को 8 हजार रुपये हर साल मिलेंगे।&nbsp;</p>
<p>शनिवार को राजस्थान के सीएम ने सोशल मीडिया पोस्ट में किसान सम्मान निधि बढ़ाने की जानकारी दी। इसे लोकसभा चुनाव में भाजपा को राजस्थान में हुए 11 सीटों के नुकसान और किसानों की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। चुनाव परिणाम आते ही मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने किसानों की सुध ली।</p>
<p>इससे पहले राजस्थान के बजट में राज्य सरकार ने किसान सम्मान निधि बढ़ाने का ऐलान किया था। इससे राजस्थान सरकार पर हर साल 1300 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, "प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के समग्र उत्थान की दिशा में पीएम किसान सम्मान निधि में 2 हजार रुपये की वृद्धि की गई। जिससे किसानों के लिए केंद्र सरकार की 6 हजार रूपए की सालाना राशि बढ़कर अब हुई 8 हजार रुपये। अन्नदाताओं के सर्वांगीण उन्नयन हेतु प्रदेश सरकार संकल्पबद्ध है।"</p>
<p>भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में किसान सम्मान निधि को हर साल बढ़कर 12 हजार रुपये करने का वादा किया था। इस वादे के अनुसार, आने वाले वर्षों में किसान सम्मान निधि में बढ़ोतरी होगी।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_66642f58460a3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में किसान सम्मान निधि 2 हजार रुपये बढ़ी, किसानों को मिलेंगे सालाना 8 हजार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_66642f58460a3.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आवारा पशुओं से खेतों की सुरक्षा के लिए तारबंदी योजना, ऐसे करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-tarbandi-yojana-government-is-giving-a-grant-of-48-thousand-for-fencing-of-fields-apply-soon.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 04 Jun 2024 07:07:57 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-tarbandi-yojana-government-is-giving-a-grant-of-48-thousand-for-fencing-of-fields-apply-soon.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>जानवरों से फसलों को सुरक्षित रखना किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती है। किसानों को इस समस्या से आए दिन जूझना पड़ता है। कई बार आवारा पशु किसानों की पूरी तरह खराब कर देते हैं। जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।&nbsp;किसानों की इस समस्या को दूर करने के लिए राजस्थान सरकार एक योजना लेकर आई है। जिसके तहत फसलों को आवारा पशुओं और जंगली जानवरों से बचाने के लिए खेतों की तारबंदी की जाएगी। आइए आपको इस योजना के के बारे में विस्तार से बाताते हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>राजस्थान के किसानों को मिलेगा लाभ</strong></p>
<p>आपको बता दें कि तारबंदी की यह योजना राजस्थान सरकार लेकर आई है। ऐसे में राजस्थान के किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। योजना के तहत राज्य सरकार ने खेतों को आवारा पशुओं और जंगली जानवरों से बचाने के लिए तारबंदी पर अनुदान देने का फैसला लिया है। किसान इस योजना का लाभ उठाकर खेतों में तारबंदी कर सकते हैं, जिससे जंगली जानवरों से खेतों में खड़ी फसलों को होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।&nbsp;</p>
<p><strong>तारबंदी पर मिलेगा 60% का अनुदान</strong></p>
<p>सरकार ने यह योजना खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए शुरू की है। योजना के तहत छोटे किसानों को खेतों में 400 रनिंग मीटर तारबंदी के लिए 60 प्रतिशत यूनिट कॉस्ट या अधिकतम 48 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। जबकि अन्य किसानों को यूनिट कॉस्ट का 25 प्रतिशत या कम से कम 40 हजार रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। सामुदायिक आवेदन में 10 या अधिक किसानों के समूह में न्यूनतम 5 हेक्टेयर में तारबंदी किए जाने पर, प्रत्येक किसान को 400 मीटर तक यूनिट कॉस्ट का 70 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है, जो अधिकतम 56 हजार रुपये है।</p>
<p>इस योजना का फायदा लेने के लिए किसान के पास न्यूनतम 1.5 हेक्टेयर किसान भूमि का एक ही स्थान पर होना जरूरी है। इससे कम भूमि होने पर भी राज्य सरकार द्वारा दो या दो से अधिक किसानों के कृषक समूह, जिनके पास 1.5 हेक्टेयर या अधिक भूमि हो, को योजना का फायदा दिए जाने का प्रावधान है। वहीं, अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में जोत का आकार छोटा होने के कारण एक ही स्थान पर कम से कम 0.5 हेक्टेयर जमीन होनी चाहिए।&nbsp;</p>
<p><strong>योजना के लिए जरूरी दस्तावेज</strong></p>
<p>अगर आप इस योजना के लिए आवेदन करना चाहते हैं तो आपके पास कुछ जरूरी दस्तावेज होना आवश्यक है। जैसे- आधार कार्ड, जन आधार कार्ड, जमीन की जमाबंदी की कॉपी, &nbsp;पहचान पत्र, निवास प्रमाण, शपथ पत्र, मोबाइल नंबर, पासपोर्ट साइज फोटो, बैंक खाता पासबुक पत्र आदि।&nbsp;</p>
<p><strong>कैसे करें आवेदन?</strong></p>
<p>तारबंदी योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। अगर आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं तो आपको राज किसान साथी पोर्टल पर जन आधार के माध्यम से आवदेन करना होगा। वहीं, ई-मित्र पर जाकर भी किसान इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। आइए आपको ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताते हैं।&nbsp;</p>
<ul>
<li>योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले राज किसान साथी पोर्टल की <strong><a href="https://rajkisan.rajasthan.gov.in/Rajkisanweb/login/2?SubsidyId=12">आधिकारिक वेबसाइट</a></strong> पर जाएं।&nbsp;</li>
<li>यहां होम पजे पर किसान के ऑप्शन पर क्लिक करें।&nbsp;</li>
<li>इसके बाद कृषि विभाग के सेक्शन में खेतों की तारबंदी के ऑप्शन पर क्लिक करें।&nbsp;</li>
<li>अब एक नया पेज खुलेगा। जहां आपको इस योजना के तहत मिलने वाले लाभों की जानकारी दिखाई देगी।&nbsp;</li>
<li>इसके बाद आवेदन करने के लिए पेज पर यहां क्लिक करें के ऑप्शन पर क्लिक करें।&nbsp;</li>
<li>ऐसा करते ही आपके सामने किसान पंजीकरण लॉगिन पेज खुल जाएगा।</li>
<li>यहां आपको जन आधार आईडी अथवा एसएसओ आईडी के द्वारा लॉगिन करना होगा।</li>
<li>इसके बाद आपके सामने पंजीकरण फॉर्म खुल जाएगा।</li>
<li>अब आपको यह आवेदन फॉर्म डाउनलोड कर इसका प्रिंटआउट निकाल लेना होगा।</li>
<li>इसके बाद आपको आवेदन फार्म में पूछी गई सभी जानकारी जैसे आवेदक का नाम, आधार नंबर, पिता का नाम, मोबाइल नंबर, बैंक खाता विवरण आदि को दर्ज करना होगा।</li>
<li>सभी जानकारी दर्ज करने के बाद आपको आवेदन फॉर्म के साथ मांगे गए जरूरी दस्तावेजों को संलग्न करना होगा।</li>
<li>अब आपको यह आवेदन फॉर्म अपने नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय में जाकर जमा कर देना होगा।&nbsp;</li>
<li>संबंधित अधिकारियों द्वारा आपके आवेदन फॉर्म की जांच की जाएगी।&nbsp;</li>
<li>सही पाए जाने पर आपको योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।</li>
</ul> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/06/image_750x500_6662eb22865dc.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आवारा पशुओं से खेतों की सुरक्षा के लिए तारबंदी योजना, ऐसे करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Brijesh Chauhan (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में फलों की पैदावार में भारी गिरावट, गर्म होती जलवायु का असर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/changing-horticultural-production-in-uttarakhand-under-conditions-of-global-warming.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 03 Jun 2024 15:37:36 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/changing-horticultural-production-in-uttarakhand-under-conditions-of-global-warming.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>साल 2000 में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से ही राज्य को बागवानी प्रदेश के तौर पर विकसित करने के दावे होते रहे हैं, लेकिन गर्म होती जलवायु के कारण राज्य का फल उत्पादन संकट में पड़ गया है। कभी नाशपाती, आड़ू, आलूबुखारा और खुबानी के बड़े उत्पादकों में शुमार रहा उत्तराखंड सेब उत्पादन के लिए भी जाना जाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से उत्तराखंड में प्रमुख फलों की पैदावार में भारी गिरावट आई है। साथ ही फल उत्पादन का क्षेत्र भी घटा है। इसके पीछे बढ़ती गर्मी और घटती ठंड को वजह माना जा रहा है।&nbsp;</p>
<p>पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था <strong>क्लाइमेट ट्रेंड्स</strong> के अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2020 से उत्तराखंड में प्रमुख फलों के क्षेत्र और पैदावार पर खासा प्रभाव पड़ा है। यह प्रभाव ट्रॉपिकल यानी उष्णकटिबंधीय फलों की तुलना में टेंपरेट यानी शीतोष्ण फलों के उत्पादन में खासतौर पर देखा जा रहा है। उत्तराखंड में फल उत्पादन में बदलाव को तापमान के बदलते पैटर्न से जोड़कर देखा जा रहा है। बढ़ती गर्मी के कारण कई पहाड़ी फलों के उत्पादन पर असर पड़ा है और किसानों का रुझान उष्णकटिबंधीय फलों की ओर बढ़ रहा है जो बदली जलवायु परिस्थितियों का सामना करने में अधिक सक्षम हैं।&nbsp;</p>
<p style="text-align: left;"><strong>उत्तराखंड में 2016-17 से 2022-23 तक बागवानी उत्पादन</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x_6659cc7e5782e.jpg" alt="" width="593" height="381" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p></p>
<p><strong>प्रमुख फलों के क्षेत्र और उत्पादन का ट्रेंड</strong></p>
<p>उत्तराखंड में फलों की पैदावार के साथ-साथ फलों के उत्पादन क्षेत्र में भी गिरावट देखी जा रही है। हिमालयी क्षेत्र के ऊंचाई वाले स्थानों पर आड़ू, खुबानी, आलूबुखारा और अखरोट जैसे फलों के उत्पादन में सबसे अधिक कमी देखी गई है। वर्ष 2016-17 में उत्तराखंड में 25,201.58 हेक्टेयर में सेब का उत्पादन किया जाता था जो वर्ष 2022-23 में घटकर 11,327.33 हेक्टेयर हो गया है। इस अवधि में सेब के उत्पादन में 30 प्रतिशत की कमी आई है। इसी तरह नींबू की विभिन्न प्रजातियों में 58 प्रतिशत की कमी देखी गई है। जबकि अमरूद का क्षेत्र 36 फीसदी और उत्पादन लगभग 95 फीसदी बढ़ा है।&nbsp;</p>
<p><strong>उत्तराखंड में फल उत्पादन और क्षेत्र में आई कमी<em>&nbsp;</em></strong></p>
<p>&nbsp;2016-17 से 2022-23 के बीच उत्तराखंड में फलों के क्षेत्र और उत्पादन में कमी<em>&nbsp;</em></p>
<p>वर्ष 2016-17 से 2022-23 के बीच उत्तराखंड में लीची और आम के क्षेत्र में क्रमशः 49 और 42 प्रतिशत की कमी आई है जबकि इनके उत्पादन में क्रमशः 20 एवं 24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में फलों के उत्पादन में कमी विभिन्न प्रकार के फलों को उगाने के पैटर्न में बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रही है। इसके पीछे कृषि के तौर-तरीकों, भूमि उपयोग और बाजार की परिस्थितियों में बदलाव के साथ-साथ संभवतः कुछ फलों पर पड़ रहे पर्यावरणीय प्रभाव का भी असर है। अमरूद और करौंदा के उत्पादन में वृद्धि बताती है कि राज्य के किसान इस प्रकार के फलों को उगाने में दिलचस्पी ले रहे हैं जो स्थानीय मांग और परिस्थितियों के हिसाब से अधिक अनुकूल हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p style="text-align: center;"><strong>विभिन्न फलों के क्षेत्र और उत्पादन में बदलाव (%)</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x_6659cd8bca76a.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" width="626" height="261" /></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x_6659cdaeb134d.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" width="624" height="340" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>स्रोतः बागवानी विभाग, उत्तराखंड सरकार</em></p>
<p>उत्तराखंड में फलों के क्षेत्र और उत्पादन में आई गिरावट को जिलेवार देखें तो सबसे ज्यादा फलों का क्षेत्र टिहरी, देहरादून और अल्मोड़ा जिलों में घटा है जबकि फल उत्पादन में सबसे अधिक कमी अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और हरिद्वार जनपदों में दर्ज की गई है। अल्मोड़ा में फलों का उत्पादन 84 प्रतिशत कम हो गया है जो उत्तराखंड के सभी जिलों में सर्वाधिक है। चमोली में वर्ष 2016-17 से 2022-23 के बीच बागवानी के क्षेत्रफल में केवल 13 प्रतिशत की कमी हुई है, लेकिन फल उत्पादन 53 प्रतिशत घट गया है।</p>
<p style="text-align: left;"><strong>जिलेवार फलों के क्षेत्रफल और मुख्य फलों के उत्पादन में बदलाव</strong>&nbsp;</p>
<p style="text-align: left;"><google-sheets-html-origin>
<style type="text/css"><!--td {border: 1px solid #cccccc;}br {mso-data-placement:same-cell;}--</style>
</google-sheets-html-origin></p>
<p></p>
<p style="text-align: left;"><google-sheets-html-origin>
<style type="text/css"><!--td {border: 1px solid #cccccc;}br {mso-data-placement:same-cell;}--></style>
</google-sheets-html-origin></p>
<p>इस दौरान एकमात्र उधमसिंह नगर जिले में फलों का क्षेत्र 5 फीसदी बढ़ा है जो तराई में बागवानी के बढ़ते रुझान का संकेत है। उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग में बागवानी के क्षेत्रफल में क्रमशः 43 और 28 प्रतिशत की कमी होने के बावजूद फलों के उत्पादन में 26.5 और 11.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।</p>
<p><strong>फल उत्पादन पर बढ़ते तापमान का प्रभाव</strong></p>
<p>उत्तराखंड में बागवानी के बदलते पैटर्न को बढ़ते तापमान से जोड़कर देखा जा रहा है। तापमान के पैटर्न में बदलाव फलों की वृद्धि, विकास और समग्र उत्पादकता पर सीधा प्रभाव डालता है। अधिक तापमान के कारण फलों पर गर्मी, पानी की कमी और बारिश के बदलते पैटर्न का असर पड़ता है, जिससे पैदावार प्रभावित होती है। बदलते तापमान के कारण फलों में कीटों और रोगों का प्रकोप भी बढ़ सकता है, जिससे कीट व रोग नियंत्रण की जरूरत बढ़ जाती है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p style="text-align: left;"><strong>1970 से 2022 के बीच उत्तराखंड में तापमान का ट्रेंड</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x_6659d0e011dfe.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p style="text-align: center;"><em>स्रोतः क्लाइमेट सेंट्रल</em></p>
<p>क्लाइमेट सेंट्रल के अनुसार, वर्ष 1970 से 2022 के बीच उत्तराखंड में औसत तापमान 0.02 प्रतिशत वार्षिक की दर से बढ़ा है। राज्य में इस दौरान करीब 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ा है और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गर्मी बढ़ी है। शोध दर्शाते हैं कि अपेक्षाकृत गर्म सर्दियों के कारण ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ तेजी से पिघली है जिससे हिमाच्छादित क्षेत्र तेजी से सिकुड़ रहा है।&nbsp;</p>
<p>बीते बीस वर्ष में उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सर्दियों का तापमान प्रति दशक 0.12 डिग्री सेल्सियस की दर से बढ़ा है। जबकि हर दशक में बारिश 11.3 मिमी की दर से कम हुई है जिससे बर्फ से ढके क्षेत्र में प्रति दशक 58.3 वर्ग किमी की दर से कमी आई है।&nbsp;उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग जिलों में बर्फ से ढका क्षेत्र वर्ष 2000 की तुलना में वर्ष 2020 में 90-100 वर्ग किमी तक सिमट गया है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>हिमालयी क्षेत्रों में सर्दियों की ठंड और बर्फबारी सेब, नाशपाती, आड़ू, आलूबुखारा, अखरोट, खुबानी आदि फलों के लिए बहुत जरूरी है। बढ़ती गर्मी के कारण हिम क्षेत्र के घटने तथा बारिश व बर्फबारी में कमी के कारण पहाड़ी फलों को जरूरी ठंडक (चिलिंग रिक्वायरमेंट) नहीं मिल पा रही है। इससे फलों के उत्पादन पर असर पड़ा है।&nbsp;</p>
<p><strong>शीतोष्ण फलों के लिए ठंड की जरूरत</strong></p>
<p>आईसीएआर-सीएसएलआइआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक तथा बागवानी विशेषज्ञ <strong>डॉ. पंकज नौटियाल</strong> कहते हैं, "सेब जैसे परंपरागत शीतोष्ण फल को दिसंबर से मार्च के दौरान 1200-1600 घंटे के लिए 7 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान की चिलिंग रिक्वायरमेंट होती है। उत्तराखंड में पिछले 5-10 वर्षों में हुई बर्फबारी की तुलना में सेब को 2-3 गुना अधिक बर्फबारी चाहिए। कम बर्फबारी के कारण सेब की गुणवत्ता और पैदावार प्रभावित हुई है।"</p>
<p>रानीखेत के किसान <strong>मोहन चौबटिया</strong> कहते हैं, "बारिश और बर्फ कम होने से फल उगाने में बहुत दिक्कत हो रही है। अल्मोड़ा में बीते दो दशक में ठंडे स्थानों पर होने वाले फलों का उत्पादन आधा रह गया है। सबसे अधिक नुकसान उन किसानों को हुआ है जो सिंचाई का खर्च नहीं उठा सकते हैं।"</p>
<p><strong>बागवानी में बदलाव</strong></p>
<p>गर्म जलवायु उष्णकटिबंधीय फलों की खेती के अनुकूल होती है जबकि बढ़ती गर्मी शीतोष्ण फलों के विकास में बाधक है। इसलिए, उत्तराखंड के किसान धीरे-धीरे उष्णकटिबंधीय फलों की ओर रुख कर रहे हैं। कुछ जिलों में किसान सेब की कम ठंड की जरूरत वाली किस्मों को चुन रहे हैं या फिर आड़ू, अखरोट और खुबानी जैसे फलों की जगह कीवी और अनार जैसे उष्णकटिबंधीय विकल्प अपना रहे हैं। उत्तरकाशी जिले के निचले पहाड़ी क्षेत्रों में आम की सघन किस्में भी उगाई जा रही हैं जो अधिक लाभ देती हैं।</p>
<p><strong>आपदाओं की मार&nbsp;</strong></p>
<p>उत्तराखंड अक्सर प्राकृतिक आपदाओं की मार झेलने वाला राज्य है। भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन और ओलावृष्टि से कृषि और बागवानी को नुकसान पहुंचता है। वर्ष 2023 में चरम मौसमी घटनाओं के कारण उत्तराखंड में 44,882 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान हुआ था। कृषि की कठिन परिस्थितियों के कारण पर्वतीय क्षेत्रों से मैदानी इलाकों में पलायन बढ़ा है जो राज्य में बागवानी के घटते क्षेत्र का बड़ा कारण है।&nbsp;</p>
<p><strong>जलवायु अनुकूल कृषि की जरूरत&nbsp;</strong></p>
<p>फलों की घटती पैदावार के कारण उत्तराखंड के बागवानी उद्योग के सामने संकट खड़ा हो गया है। नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में कृषि भौतिकी विभाग के प्रमुख <strong>डॉ. सुभाष नटराज </strong>का कहना है कि तापमान में अल्पकालिक परिवर्तन और प्रवृत्तियां चिंताजनक हैं। मौसम की दीर्घकालिक प्रवृत्तियों और कृषि उपज के साथ इसके संबंध का अध्ययन करने की आवश्यकता है।&nbsp;</p>
<p>जलवायु दशाओं में परिवर्तन के कारण उत्तराखंड अपनी फल किस्मों की समृद्ध विविधता खोने के कगार पर है। इस सकंट से बागवानी को बचाने के लिए जलवायु अनुकूल कृषि की ओर रुख करना आवश्यक है। इसके लिए डॉ. नटराज स्थान विशेष के हिसाब से जलवायु अनुकूल किस्मों की पहचान और विकास पर जोर देते हैं। मौसम की मार से किसानों को बचाने के लिए क्लाइमेट फाइनेंसिंग भी जरूरी है। साथ ही गांव के स्तर पर मौसम संबंधी सलाह समयबद्ध तरीके से पहुंचनी चाहिए ताकि किसान विपरीत परिस्थितियों की समय रहते तैयारी कर सकें।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_6659d8443b59e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में फलों की पैदावार में भारी गिरावट, गर्म होती जलवायु का असर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नरेश टिकैत 14 साल पुराने मामले में अदालत में पेश हुए, मिल गई जमानत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/naresh-tikait-appeared-in-court-in-14-year-old-case-got-bail-immediately.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 24 May 2024 23:17:56 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/naresh-tikait-appeared-in-court-in-14-year-old-case-got-bail-immediately.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>- जोगिंदर कल्याण, सहारनपुर</strong></em></p>
<p>भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत अंबाला हाईवे सरसावा में 14 वर्ष पहले सड़क जाम करने के मामले में शुक्रवार को सहारनपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई। इस दौरान बड़ी तादाद में भाकियू कार्यकर्ता सहारनपुर पहुंचे थे जिसे देखते हुए कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए थे।</p>
<p>वर्ष 2010 में जाम लगाने को लेकर भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत और पूर्व विधायक इमरान मसूद समेत 24 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज़ किया गया था। इस मामले में इमरान मसूद व अन्य लोगों ने अपनी जमानत करा ली थी। लेकिन नरेश टिकैत के खिलाफ कुछ दिनों पहले वारंट जारी कर दिए गए थे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x_6650d7506a1af.jpg" alt="" /></p>
<p>चौधरी नरेश टिकैत भाकियू कार्यकर्ताओं के साथ रोहाना टोल से सहारनपुर के लिए रवाना हुए थे। न्यायालय में पेश होने के पश्चात वह 15 मिनट न्यायालय में रूके और बीस मिनट में उन्हें जमानत दे दी गई। जमानत मिलने के बाद नरेश टिकैत ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उन्हें न्यायालय की ओर से नोटिस जारी किया गया था। इसी प्रकरण में आज वह न्यायालय पहुंचे थे। उन्हें न्यायलय से जमानत मिल गई है। इस दौरान सपा के राष्ट्रीय महासचिव पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक भी कोर्ट परिसर में मौजूद थे।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x_6650d7cd0ec02.jpg" alt="" /></p>
<p>जमानत मिलने के बाद भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत ने मीडिया से कहा कि खबर पढ़कर ही उन्हें इस मामले की जानकारी हुई थी। हम तो जाम लगाने में नहीं, जाम खुलवाने में लगे रहते हैं। पुलिस ने कभी इस मामले की जानकारी नहीं दी थी। पुलिस-प्रशासन को ऐसा नहीं करना चाहिए। किसानों का विश्वास उनके साथ है, यही वजह है कि सभी साथ जा रहे हैं। लेकिन सभी कार्यकर्ताओं से कह दिया गया है कि अदालत से दूर रहें।</p>
<p>भाजपा को लेकर नरेश टिकैत ने कहा कि जीत-हार तो होती रहती है, लेकिन इस बार भाजपा का विरोध काफी है। लोगों में भाजपा के प्रति नाराजगी है। बाकी चार जून को परिणाम सभी के सामने आ जाएंगे।</p>
<p>भाकियू अध्यक्ष के कोर्ट में उपस्थित होने के दौरान भाकियू के विनय कुमार, राजपाल सिंह, चौधरी अशोक कुमार, अरुण राणा, मुकेश तोमर, नीरज पहलवान, योगेश शर्मा, अनुपम शांडिल्य, बिजेन्द्र बालियान, सतेन्द्र चौहान सहित भारी संख्या में भाकियू कार्यकर्ता मौजूद रहे।</p>
<p></p>
<p><br />&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_6650d413d975e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नरेश टिकैत 14 साल पुराने मामले में अदालत में पेश हुए, मिल गई जमानत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_6650d413d975e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[झारखंड के बाद केरल में एवियन फ्लू का प्रकोप सामने आया, अलर्ट जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/after-jharkhand-avian-flu-outbreak-in-state-run-poultry-farm-in-keralas-kottayam-alert-issued.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 24 May 2024 14:08:55 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/after-jharkhand-avian-flu-outbreak-in-state-run-poultry-farm-in-keralas-kottayam-alert-issued.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>झारखंड के बाद केरल में भी एवियन फ्लू का प्रकोप सामने आया है। केरल के मन्नारकड स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में एवियन फ्लू (एच5एन1) फैल गया। जिला प्रशासन ने इसकी पुष्टि की है। इस फार्म में लगभग नौ हजार मुर्गियां पाली जा रही थीं।</p>
<p><span>कोट्टायम जिला प्रशासन ने कहा कि प्रकोप के बाद पोल्ट्री फार्म के एक किलोमीटर के दायरे में सभी पालतू पक्षियों को मारने का निर्णय किया गया है। प्रशासन की ओर से जिले में चिकन, बत्तख, बटेर और अन्य पक्षियों के पोल्ट्री उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा दी गई है।&nbsp;</span><span></span>पोल्ट्री फार्म से 1 से 10 किमी के दायरे को निगरानी क्षेत्र घोषित किया गया है।</p>
<p>मध्य प्रदेश के भोपाल में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज लैब द्वारा केरल के पोल्ट्री फार्म में बड़ी संख्या में मरने वाली मुर्गियों के नमूनों का परीक्षण करने के बाद एवियन फ्लू (H5N1) के प्रकोप की पुष्टि की गई।&nbsp;इसके बाद केरल के कोट्टायम जिले में चिकन, बत्तख, बटेर और अन्य पक्षियों के पोल्ट्री उत्पादों की बिक्री और आयात पर प्रतिबंध लगाया गया था।</p>
<p>इससे पहले झारखंड सरकार ने बुधवार को रांची के एक पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू के मामले सामने आने के बाद अलर्ट जारी किया था। इस घटना के बाद रांची के मोरहाबादी में राम कृष्ण आश्रम द्वारा संचालित पोल्ट्री फार्म दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र में 770 <span>बत्तखों सहित </span>920 <span>पक्षियों को मार दिया गया था। </span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_66505171f19e3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ झारखंड के बाद केरल में एवियन फ्लू का प्रकोप सामने आया, अलर्ट जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_66505171f19e3.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[रतलाम में मिर्च का भाव ना मिलने से किसान हताश, सड़क पर फेंकी उपज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-frustrated-due-to-not-getting-the-price-of-chilli-in-ratlam-crop-thrown-on-the-road.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 20 May 2024 16:42:45 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-frustrated-due-to-not-getting-the-price-of-chilli-in-ratlam-crop-thrown-on-the-road.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसानों को गेहूं, धान जैसी परंपरागत फसलों के बजाय अन्य फसलें और फल-सब्जियां उगाने की सलाह खूब दी जाती है। अक्सर किसान इस पर अमल भी करते हैं लेकिन बाजार के उतार-चढ़ाव से बचना मुश्किल होता है। अब मध्यप्रदेश के रतलाम क्षेत्र में किसानों को मिर्च की उपज का उचित भाव नहीं मिल पा रहा है। हताशा में किसान मिर्ची की उपज को सड़क पर फेंककर अपना रोष जता रहे हैं।</p>
<p>मध्यप्रदेश में हरी मिर्च की गिरती कीमतों से परेशान किसी किसान ने अपनी उपज को रतलाम शहर की एक कॉलोनी में सड़क पर फेंक दिया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।&nbsp;</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, रतलाम और आसपास के क्षेत्रों में किसानों को हरी मिर्च का थोक भाव मात्र 10-12 रुपये प्रति किलोग्राम या उससे भी कम मिल रहा है। इससे पहले मध्यप्रदेश में प्याज और लहसुन के सही दाम नहीं मिलने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। किसान सरकार से मिर्च के उचित दाम दिलाने की मांग कर रहे हैं।</p>
<p>मध्यप्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष<strong> केदार सिरोही</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि रतलाम और आसपास के क्षेत्रों में हरी मिर्च के दाम 5 से 10 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर गये हैं। जबकि मिर्च की तुड़ाई का खर्च ही चार-पांच रुपये प्रति किलोग्राम आ जाता है। ऐसे में किसानों के लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि मिर्च सड़कों पर फेंकने की नौबत आ गई है।&nbsp;</p>
<p>मध्यप्रदेश में रतलाम के आसपास का इलाका मिर्च की खेती के लिए भी जाना जाता है। रतलाम मंडी में गुजरात और राजस्थान से भी मिर्च बिकने आती है। मंडी में आवक बढ़ने पर दाम गिर जाते हैं जिससे किसानों को सही भाव नहीं मिल पाता है।&nbsp;सब्जी उत्पादक किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। ना ही मिर्च जैसी उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद का प्रावधान होता है। ऐसे में किसान पूरी तरह बाजार के भरोसे होते हैं।&nbsp; &nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_664b297fc29b3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ रतलाम में मिर्च का भाव ना मिलने से किसान हताश, सड़क पर फेंकी उपज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में 5 दिन पहले शुरू होगी धान की बुवाई&amp;#45;रोपाई, नोटिफिकेशन जारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sowing-and-transplanting-of-paddy-will-start-5-days-earlier-in-punjab-notification-issued.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 14 May 2024 11:43:34 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
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        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में धान की रोपाई के लिए राज्य सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस बार पंजाब के कई जिलों के किसान धान की रोपाई 11 जून से शुरू कर सकेंगे जबकि गत वर्ष धान की रोपाई 16 जून से शुरू हुई थी। धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) 15 मई से शुरू होगी, जिसकी तारीख पिछले साल 20 मई थी।&nbsp;</p>
<p>पंजाब सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर धान बुवाई और रोपाई का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। राज्य सरकार ने धान की बुवाई के लिए किसानों को आठ घंटे बिजली आपूर्ति का आश्वासन दिया है। धान की रोपाई के कार्यक्रम के लिए राज्य को दो हिस्सों में बांटा गया है।</p>
<p>पंजाब में गिरते भूजल स्तर को देखते हुए धान की सीधी बुवाई पर जोर दिया जा रहा है। इस बार पंजाब के मुक्तसर, बठिंडा, फाजिल्का, फरीदकोट, मानसा और फिरोजपुर जिलों के किसानों 11 जून से धान की रोपाई कर सकेंगे। इन इलाकों के लिए 11 जून से नहर में पानी की सप्लाई की जाएगी। वहीं, पंजाब के बाकी सभी जिलों में धान की बुवाई 15 जून से शुरू होगी। गत वर्ष धान की रोपाई आखिरी चरण में 21 जून से शुरू हुई थी। धान की सीधी बुवाई के लिए 15 से 31 मई तक की अवधि निर्धारित की गई है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>धान की रोपाई के समय बिजली का संकट पैदा न हो, इसके लिए बिजली विभाग ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। अत्यधिक जल दोहन को रोकने के लिए पंजाब सरकार ने लंबी अवधि की धान किस्म पूसा-44 किस्म की बुवाई पर प्रतिबंध लगा दिया है।&nbsp; सरकार कम अवधि और कम पानी की खपत वाली किस्मों की बुवाई पर जोर दे रही है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में 5 दिन पहले शुरू होगी धान की बुवाई-रोपाई, नोटिफिकेशन जारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राकेश टिकैत ने सीएम योगी को लिखा पत्र, किसानों की बिजली समस्या के समाधान की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rakesh-tikait-wrote-a-letter-to-cm-yogi-demanding-solution-to-the-electricity-problem-of-farmers..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 13 May 2024 16:50:07 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
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        <description><![CDATA[ <p>भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों की बिजली से जुड़ी एक समस्या के समाधान के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। राकेश टिकैत का कहना है कि राज्य के बहुत से किसान गांव से दूर खेतों में घर बनाकर रहते हैं जहां सिर्फ दिन में लाइट आती है।&nbsp; रात में बिजली आपूर्ति नहीं होने से खेत में घर बनाकर रहने वाले किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए राकेश टिकैत ने सरकार से खेतों पर बने घरों के लिए रात में बिजली आपूर्ति करने की मांग की है।</p>
<p>इस बारे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे टिकैत के पत्र के मुताबिक, खेतों को बिजली सप्लाई के फीडर ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी विद्युत लाईनों से अलग कर दिए गए हैं। कृषि विद्युत लाईनों की सप्लाई दिन के समय होती है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति दिन व रात्रि दोनों में होती है। जो किसान खेत में आवास बनाकर रह रहे हैं। रात्रि में विद्युत न रहने के कारण उन्हें अनेकों समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के पड़ोसी राज्य हरियाणा में एग्रीकल्चर फीडर पर दिन में सिंचाई हेतु पावर सप्लाई दी जाती है और रात में एक फेस में विद्युत सप्लाई दी जाती है। जिससे किसान अपने आवास पर बिजली का इस्तेमाल करते हैं। राकेश टिकैत ने यूपी में हरियाणा की तर्ज पर किसानों को खेतों पर बने घरों के लिए रात में बिजली आपूर्ति की योजना लागू करने की मांग की है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राकेश टिकैत ने सीएम योगी को लिखा पत्र, किसानों की बिजली समस्या के समाधान की मांग ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में जंगलों की आग तो बुझी मगर भारी बारिश से कई जगह आफत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/forest-fire-extinguished-in-uttarakhand-but-now-heavy-rains-cause-trouble-at-many-places.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 09 May 2024 17:06:11 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
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        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड में हुई बारिश से जंगलों की आग तो बुझ गई लेकिन कई जगह भारी बारिश, ओलावृष्टि और बादल फटने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बागेश्वर जिले के कपकोट और अल्मोड़ा के सोमेश्वर में मूसलाधार बारिश से घरों में मलवा घुस गया और कई मकानों क्षतिग्रस्त हो गये हैं। उत्तरकाशी के पुरोला में ओलावृष्टि हुई है।</p>
<p>भारी बारिश के बाद बोल्डर और मलवा आने से अल्मोड़ा-कौसानी राजमार्ग बन्द हो गया और कई रास्ते अवरुध हैं। ऋषिकेश-बदीरनाथ नेशनल हाईवे सिरोबगड़ में देर रात हुई भारी बारिश के कारण बंद रहा। इसे कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद खोला जा सका।</p>
<p>सोमेश्वर के चनौदा और अघूरिया में भारी बारिश से काफी नुकसान हुआ। वहां बादल फटने से सैलाब आ गया। कई मकानों में दरारें पड़ गईं। लोग घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ पड़े। प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया है। कई वाहन भी मलवे की चपेट में आ गए हैं, कुछ के बहने की सूचना है। कपकोट में सड़क पर खड़ी बीआरओ की पोकलेन बहकर गधेरे में जा गिरी। जिला अस्पताल के वार्ड में भी पानी भर गया।&nbsp;</p>
<p>भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 13 मई तक उत्तराखंड में बारिश की संभावना जताई है। कई जिलों में तेज आंधी-तूफान आ सकते हैं। उत्तरकाशी, चमोली,रुद्रप्रयाग,टिहरी गढ़वाल, देहरादून,पौड़ी गढ़वाल,पिथौरागढ़, बागेश्वर,अल्मोड़ा और चंपावत में बिजली चमकने और गरज के साथ बारिश हो सकती है।</p>
<p>राज्य में 10 मई से चार धाम यात्रा शुरू हो रही है। मौसम विभाग ने यात्रियों को बारिश के दौरान पहाड़ियों पर यात्रा करने से बचने की चेतावनी दी है। लेकिन मौसम सुहावना होने से 10 अप्रैल से उत्तराखंड में पर्यटकों की तादाद बढ़ेगी। इस सप्ताह के अंत में दिल्ली-एनसीआर और देश के अन्य इलाकों से बड़ी तादाद में सैलानियों के उत्तराखंड पहुंचने की संभावना है।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में जंगलों की आग तो बुझी मगर भारी बारिश से कई जगह आफत ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में धान बीज के लिए क्यों मची मारामारी, कालाबाजारी के आरोप]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-troubled-by-shortage-and-black-marketing-of-paddy-seeds-in-haryana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 08 May 2024 22:20:25 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-troubled-by-shortage-and-black-marketing-of-paddy-seeds-in-haryana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसानों को कभी फसल बेचने के लिए तो कभी खाद-बीज खरीदने के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ता है। अब हरियाणा में धान की हाईब्रिड किस्म सवा 7501 और सवा 7301 के बीजों के लिए मारामारी हो रही है। गेहूं की कटाई के बाद किसान धान बुवाई की तैयारी में जुटे हैं लेकिन धान के बीज के लिए किसानों को भीषण गर्मी में लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है या फिर कई गुना अधिक दाम चुकाने को मजबूर हैं।&nbsp;</p>
<p>हरियाणा के कैथल जिले के किसान <strong>अशोक दनौदा</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि धान की जिस 7501 किस्म के बीज के लिए लंबी लाइनें लग रही हैं वो एक प्राइवेट कंपनी का बीज है। इसे किसानों ने पिछले साल आजमाया था। इससे एक हेक्टेअर में करीब 8-10 टन तक पैदावार हुई जो प्रचलित किस्मों के मुकाबले काफी अधिक है। इसलिए इस बार ज्यादा से ज्यादा किसान यह बीज खरीदना चाहते हैं। हालत यह है कि बीज की दुकानों पर सुबह से ही किसानों की लंबी लाइनें लग जाती हैं। 1715 रुपये की तीन किलो बीज की थैली ब्लैक में साढ़े तीन हजार रुपये तक बिकने के आरोप लग रहे हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>आईसीएआर के एक <strong>वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि 7501 किस्म से पहले धान की पूसा 44 वैराएटी भी करीब 10 टन प्रति हेक्टेअर तक पैदावार देती थी। लेकिन लंबी अवधि में पकने और पानी की अधिक खपत के कारण पूसा 44 किस्म को प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रतिबंध के पहले पूसा 44 पंजाब में सबसे अधिक क्षेत्र में बोई जाने वाले धान की किस्म बन गई थी। उनके मुताबिक धान की विभिन्न किस्मों के बीजों का रेट 250 से 350 रुपये प्रति किलोग्राम होता है। यही नहीं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) तो बासमती धान के बीज की कीमत सिर्फ 100 रुपये किलो ही लेता है, जबकि 7501 किस्म का बीज 572 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>पूसा 44</strong> पर प्रतिबंध के कारण भी धान की 7501 किस्म के बीज के लिए मारामारी अधिक है। जबकि धान की अन्य किस्में आमतौर पर सात से साढ़े सात टन तक पैदावार देती हैं। ऐसे में अधिक से अधिक किसान 7501 किस्म का बीज खरीदना चाहते हैं। लेकिन मांग के मुकाबले डीलरों के पास सप्लाई कम है। किसान नेता <strong>गुरनाम सिंह चढूनी</strong> ने बताया कि धान के बीज को लेकर किसान बेहद परेशान हैं और कई गुना अधिक दाम पर बीज खरीदने को मजबूर हैं। लेकिन सरकार इस बारे में कुछ नहीं कर रही है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x_663c9a90dd3a8.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" width="634" height="395" /></p>
<p>इनेलो के नेता <strong>अभय सिंह चौटाला</strong> कैथल में धान के बीज की कालाबाजारी की सूचना मिलने पर किसानों के बीच पहुंचे और समस्या को लेकर अधिकारियों से बात की। उन्होंने कहा कि प्रदेश का किसान यह बात जान चुका है की कौन किसानों का हितैषी है और किसकी गारंटी में दम है।</p>
<p>धान के बीज की किल्लत की समस्या<strong>&nbsp;कुरुक्षेत्र,</strong>&nbsp;<strong>कैथल </strong>और<strong> यमुनानगर</strong> जिलों में सबसे अधिक है। किसानों को आधार कार्ड दिखाने पर तीन किलो बीज की सिर्फ एक थैली ही दी जा रही है जबकि एक थैली से एक एकड़ की पनीरी (पौध) भी तैयार नहीं होती। ऐसे में किसानों को तपती धूप में कई बार लाइनों में लगना पड़ रहा है। दिन भर लाइनों में लगकर बड़ी मुश्किल से बीज मिलता है और वह भी पूरा नहीं मिलता। बीज की कालाबाजारी रोकने के लिए कृषि विभाग ने कुछ ही विक्रेताओं को बीज बेचने के लिए अधिकृत किया है। लेकिन ब्लैक में कई गुना महंगे दामों पर बीज बिकने की बातें सुनने में आ रही हैं।&nbsp;</p>
<p>कांग्रेस महासचिव <strong>रणदीप सिंह सुरजेवाला</strong> ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार किसानों को धान के बीज से वंचित कर रही है। किसान, महिलाएं और युवा भीषण गर्मी में घंटों लाइनों में लगे रहते हैं फिर भी उन्हें धान का बीज नहीं मिल पा रहा है। पुलिस के पहरे के बीच एक किसान को आधार कार्ड दिखाने पर बीज की तीन किलो की एक थैली ही दी जा रही है। यह परेशानी कैथल जिले के किसान पिछले 10 दिनों से झेल रहे हैं। लेकिन भाजपा सरकार को किसानों के हितों से कोई सरोकार नहीं है।&nbsp;</p>
<p>स्थिति यह है कि सुबह से ही बीज की दुकानों पर किसानों की भीड़ लग जाती है। व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं। साथ ही कृषि विभाग के अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है। लेकिन प्राइवेट कंपनी का बीज होने की वजह से कृषि विभाग के अधिकारी ज्यादा कुछ करने की स्थिति में नहीं हैं। बीज विक्रेता डिमांड ज्यादा और सप्लाई कम होने की बात कह रहे हैं। लेकिन सवाल है कि सरकार किसानों को यह बीज आसानी से उपलब्ध क्यों नहीं करवा पा रही है। असल में यह मुद्दा बीजों पर मोनोपोली और किसानों के बीज अधिकार से भी जुड़ा है।&nbsp;</p>
<p>किसान अशोक दनौदा का कहना है कि इस संकट के चलते बाजार में नकली बीज की बिक्री की भी आशंका बढ़ गई है। वहीं सवाल यह भी उठता है कि निजी कंपनियों का अगर इस तरह बीज पर अधिक कब्जा हो जाएगा तो वह किसानों के लिए मुश्किल भरे दिन ला सकता है। हालांकि राज्य सरकार के कृषि विभाग के अधिकारी किसानों से अनुरोध कर रहे हैं कि किसी एक किस्म पर अधिक जोर देने की बजाय अन्य किस्मों पर भी विचार करें।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में धान बीज के लिए क्यों मची मारामारी, कालाबाजारी के आरोप ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[संयुक्त कृषि सेवा परीक्षा के आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक, जल्द करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/last-date-of-application-for-up-combined-agricultural-service-examination-is-near-apply-soon.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 08 May 2024 07:00:37 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/last-date-of-application-for-up-combined-agricultural-service-examination-is-near-apply-soon.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के कृषि विभाग में सरकारी नौकरी पाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए बड़ा अवसर है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की ओर से संयुक्त राज्य कृषि सेवाएं परीक्षा 2024 का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए योग्य उम्मीदवार 10 मई तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन में करेक्शन की विंडो 16 मई तक खुली रहेगी। इस भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन 10 अप्रैल से शुरू हुए थे।</p>
<p>यह परीक्षा जुलाई में आयोजित की जाएगी। संयुक्त कृषि सेवाएं परीक्षा 2024 के जरिए कृषि से जुड़ी विभिन्न सेवाओं के कुल 268 पदों पर निुयक्तियां होंगी। यह परीक्षा अप्रैल के पहले सप्ताह में आयोजित होने वाली थी, लेकिन लोकसभा चुनावों के कारण परीक्षा टल गई।</p>
<p>संयुक्त कृषि सेवाएं परीक्षा 2024 के लिए ऑनलाइन आवेदन यूपी लोक सेवा आयोग की वेबसाइट <strong>https://uppsc.up.nic.in/&nbsp;</strong> पर जाकर करना है। उत्तर प्रदेश संयुक्त कृषि सेवाएं परीक्षा (CSASE 2024) के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 10 मई है। इस भर्ती परीक्षा के लिए उम्मीदवारों की उम्र 1 जुलाई 2024 को 21 साल से 40 साल के बीच होनी चाहिए। विभिन्न श्रेणियों के उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र सीमा में नियमानुसर छूट का प्रावधान है।</p>
<p>सिविल सेवा परीक्षा की तरह उत्तर प्रदेश कृषि सेवा परीक्षा भी तीन चरणों की होगी- सबसे पहले प्रारंभिक परीक्षा, फिर मुख्य परीक्षा और अंत में इंटरव्यू। इंटरव्यू सिर्फ ग्रुप ए कैटेगरी के पदों के लिए होता है. ग्रुप बी कैटेगरी के पदों के लिए इंटरव्यू नहीं होता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ संयुक्त कृषि सेवा परीक्षा के आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक, जल्द करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आग से धधक रहे उत्तराखंड के वन, 5 लोगों की मौत, खेतों में फसल अवशेष जलाने पर रोक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/forests-of-uttarakhand-are-blazing-with-fire-5-people-died-burning-of-crop-residue-in-fields-banned.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 06 May 2024 14:47:49 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/forests-of-uttarakhand-are-blazing-with-fire-5-people-died-burning-of-crop-residue-in-fields-banned.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड के जंगलों में भीषण आग लगी है। जंगलों की आग रोकने की पुख्ता प्लानिंग और उपायों के अभाव में हर साल गर्मियों में ये घटनाएं होती हैं। उत्तराखंड में इस साल जंगलों की आग में पांच लोगों की मौत हो चुकी है जबकि वनाग्नि की 910 से अधिक घटनाओं में 1145 हेक्टअर वन प्रभावित हुए हैं। &nbsp;</p>
<p>वनों में आग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने खेतों में फसल कटाई के बाद अवशेषों को जलाने पर रोक लगा दी है। शहरी निकाय भी अपने ठोस कूड़े को वन या वनों के आसपास नहीं जला सकेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्य सचिव को सभी जिलाधिकारियों को एक सप्ताह तक प्रतिदिन वनाग्नि की निरंतर मॉनिटरिंग करने के निर्देश तत्काल जारी करने को कहा है।मुख्यमंत्री द्वारा जिलाधिकारियों को सभी प्रकार के फसल अवशेष जलाने पर तत्काल प्रभाव से एक सप्ताह के लिए पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही शहरी निकायों को भी अपने ठोस कूड़े को वन या वनों के आसपास जलने पर रोक लगाने को कहा गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>आग में झुलसने से बुजुर्ग महिला की मौत </strong></p>
<p>जंगल की आग की चपेट में आने से एक बुजुर्ग महिला की रविवार को एम्स ऋषिकेश में मौत हो गई। पौड़ी तहसील के थापली गांव की रहनी वाली 65 वर्षीय सावित्री देवी घास की गठरी को आग से बचाने के प्रयास में बुरी तरह झुलस गई।&nbsp;उन्हें इलाज के लिए एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया था, जहां रविवार को उनकी मौत हो गई है।</p>
<p><strong>दूनागिरी मंदिर तक पहुंची वनाग्नि</strong></p>
<p>अल्मोड़ा में जंगल की आग दूनागिरी मंदिर तक पहुंच गई। इससे श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई और जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। वन विभाग की टीम ने स्थानीय लोगों और पीआरडी जवानों की मदद से आग पर काबू पाया जिस कारण कोई जनहानि नहीं हुई।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>वनाग्नि की 910 घटनाएं,</strong><strong> 1145 </strong><strong>हेक्टेअर क्षेत्र प्रभावित </strong></p>
<p>वन विभाग द्वारा रविवार शाम चार बजे जारी बुलेटिन के अनुसार, पिछले 24 घंटों में राज्य में जंगल में आग लगने की 24 घटनाएं सामने आईं, जिससे 23.75 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ। बीते साल एक नवंबर से अब तक उत्तराखंड में वनाग्नि की 910 <span>घटनाएं हुईं हैं जिनसे करीब </span>1145 <span>हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है</span>। इनमें सबसे ज्यादा 482 घटनाएं कुमाऊं क्षेत्र और 355 घटनाएं गढ़वाल क्षेत्र में हुई। वन्यजीव क्षेत्र में आग की 73 घटनाएं हुई हैं जबकि सरकारी बुलेटिन के अनुसार, <span>किसी पशु को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। &nbsp;</span>&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x_66389b1a97fc5.jpg" alt="" width="611" height="434" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p><strong>351 केस दर्ज, वीडियो बनाने वाले तीन युवक गिरफ्तार</strong></p>
<p>जंगलों में आग लगाने को लेकर उत्तराखंड में अब तक 351 केस दर्ज हुए हैं। इसमें 61 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 290 मामले अज्ञात के खिलाफ दर्ज किए गए हैं। कुछ युवकों ने अपने इंस्टाग्राम पर जंगल में आग लगाने संबंधी वीडियो शेयर किया था। जांच में वीडियो चमोली जिले के गैरसैंण मेहलचौरी का निकला। इस मामले में पुलिस ने बिहार के रहने वाले तीन युवकों ब्रजेश कुमार, <span>सलमान और सुखलाल को गिरफ्तार किया है।</span> पिथौरागढ़ की गंगोलीहाट रेंज में जंगल में आग लगाने के आरोप में चार लोगों पीयूष सिंह, <span>आयुष सिंह</span>, <span>राहुल सिंह और अंकित के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।</span><span> अराजक तत्वों द्वारा वनों में आग लगाये जाने के मामलों में पुलिस और वन विभाग द्वारा कड़ी कार्रवाई की जा रही है।&nbsp;</span></p>
<p><strong>क्यों लगती है जंगलों में आग</strong></p>
<p>उत्तराखंड के जंगलों में फरवरी से जून के बीच हर साल आग भीषण आग है। गर्म हवा में सूखी पत्तियां तेजी से आग पकड़ती हैं। कई बार पर्यटकों की लापरवाही से भी आग लगती है जबकि कई बार स्थानीय लोग नई घास उगाने, पेड़ों की अवैध कटान को छुपाने, अवैध शिकार आदि के लिए भी जंगलों में आग लगा देते हैं। उत्तराखंड के जंगलो में सबसे ज्यादा आग चीड़ के पेड़ की वजह से लगती है क्योंकि इसकी सूखी पत्तियां यानी पिरूल तेजी से आग पकड़ती हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान बढ़ने से भी वनाग्नि की घटनाएं बढ़ रही हैं। जंगलों की आग की रोकथाम के लिए व्यापक प्लानिंग और ठोस उपायों की कमी हर साल भीषण आग के रूप में दिखाई पड़ती है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>7-8</strong><strong> मई तक बारिश की संभावना</strong></p>
<p>देहरादून में मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने कहा कि राज्य में 7-8 मई तक बारिश होने की संभावना है, जो 11 मई से तेज हो जाएगी। इससे जंगल की आग बुझाने में मदद मिल सकती है। कुमाऊं क्षेत्र में 7 मई से और गढ़वाल क्षेत्र में 8 मई से बारिश शुरू हो जाएगी।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x500_6638a0360ff40.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आग से धधक रहे उत्तराखंड के वन, 5 लोगों की मौत, खेतों में फसल अवशेष जलाने पर रोक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब: भाजपा उम्मीदवार परनीत कौर के खिलाफ विरोध&amp;#45;प्रदर्शन में किसान की मौत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-farmer-dies-in-protest-against-bjp-candidate-preneet-kaur.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 04 May 2024 20:07:19 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-farmer-dies-in-protest-against-bjp-candidate-preneet-kaur.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में भाजपा उम्मीदवारों को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को पटियाला लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करते समय एक किसान की मौत हो गई। यह प्रदर्शन राजपुरा के पास गांव सेहरा में हो रहा था। इस दौरान धक्का-मुक्की हुई और किसान सुरिंदर पाल सिंह (45) <span>जमीन पर गिर पड़े। उन्हें तुरंत राजपुरा सिविल अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सुरिंदर पाल राजपुरा के गांव आकड़ी के रहने वाले थे। </span></p>
<p>किसान नेता तेजवीर सिंह ने कहा कि घटना के समय पुलिस मौके पर थी। उन्होंने ट्वीट किया, "<span>पंजाब के पटियाला में बीजेपी MP कैंडीडेट परनीत कौर के इशारे पर आम आदमी पार्टी की पुलिस की धक्का शाही में किसान सुरिंदर सिंह की मौत हो गई।"&nbsp;</span>किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता सरवन सिंह पंधेर ने इसे हत्या करार देते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। पंधेर ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और किसान-मजदूर संघर्ष मोर्चा के किसान नेताओं को बुला लिया है।&nbsp;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/05/image_750x_66364ef159f35.jpg" alt="" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;" /></p>
<p>उधर,<span> परनीत कौर का कहना है कि किसान को धक्का नहीं मारा गया</span>, <span>बल्कि वह खुद ही गिर गए।</span> घटना से जुड़ा एक<span>&nbsp;वीडियो भी जारी किया गया। </span>परनीत कौर गांव सेहरा में चुनाव प्रचार के लिए पहुंची थीं। इसकी जानकारी मिलते ही वहां काफी संख्या में किसान और खेत मजदूर पहुंच गए और उनके काफिले को घेर कर नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान हुई धक्का-मुक्की में किसान सुरिंदर पाल सिंह बेहोश होकर जमीन पर गिर गए।&nbsp;</p>
<p>मृतक किसान की पत्नी चरणजीत कौर और बेटे रेशम सिंह ने प्रेस को बताया कि जिस तरह की बयानबाजी बीजेपी नेता हरविंदर सिंह कर रहे हैं, उसने तनावपूर्ण माहौल पैदा कर दिया, जिसके चलते किसान सुरिंदर पाल&nbsp;सिंह की मौत हो गई। परिवार ने उन्हें न्याय दिलाने और बीजेपी नेता हरविंदर सिंह हरपालपुर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि सुरिंदर पाल सिंह बीजेपी नेताओं से उनकी जायज मांगों के बारे में सवाल करने गए थे। परिवार ने कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>किसान संगठनों ने मृतक किसान के परिवार का कर्ज माफ करने, मुआवजा दिए जाने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि दुख की इस घड़ी में सभी संगठन परिवार के साथ खड़े हैं और किसान सुरिंदर पाल सिंह के जज्बे को सलाम करते हैं। इस मौके पर सुरजीत सिंह फूल, सुखजीत सिंह हरदोझंडे, दिलबाग सिंह हरिगढ़, मंजीत सिंह घुमना, जंग सिंह भतेरी, बलविंदर सिंह, हरप्रीत सिंह, सतनाम सिंह बाहरू, मलकीत सिंह, दिलबाग सिंह गिल मौजूद रहे।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब: भाजपा उम्मीदवार परनीत कौर के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन में किसान की मौत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सूखा राहत के लिए धरने पर बैठे कर्नाटक के सीएम, केंद्र पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/karnataka-cm-sat-on-strike-for-drought-relief-said-modi-and-shah-hate-the-farmers-of-karnataka.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 23 Apr 2024 16:21:52 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/karnataka-cm-sat-on-strike-for-drought-relief-said-modi-and-shah-hate-the-farmers-of-karnataka.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>सूखा राहत राशि जारी करने में देरी को लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सीएम सिद्धारमैया समेत कांग्रेस के कई नेताओं ने केंद्र के रवैये के खिलाफ मंगलवार को बेंगलुरु में धरना दिया। </span></p>
<p><span>मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि मोदी और शाह ''</span><span>कर्नाटक और उसके किसानों से नफरत करते हैं'' </span><span>जिसके कारण सात महीने से गंभीर सूखे के बाद भी सूखा राहत राशि जारी नहीं की गई। जबकि </span>राज्य में 100 साल का सबसे भीषण सूखा पड़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर कर्नाटक के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया।&nbsp;</p>
<p><span>सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि हमने 22 सितंबर को केंद्र सरकार को ज्ञापन दिया था। राज्य के 223 तालुके सूखे पड़े हैं। लेकिन अमित शाह ने कहा कि राज्य सरकार ने ज्ञापन देर से जारी किया। सूखे से किसान परेशान हैं। निर्मला सीतारमण और नरेंद्र मोदी की वजह से कर्नाटक को राहत नहीं दी गई। अब तक हमने किसानों को 650 करोड़ रुपये बांटे हैं। सिद्धारमैया का कहना है कि कानून के अनुसार कर्नाटक को 17,800 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए। हम कानून के अनुसार, </span><span>सूखा राहत की मांग कर रहे हैं।'</span></p>
<p><strong>कर्नाटक के साथ बहुत बड़ा अन्याय: सुरजेवाला </strong></p>
<p><span>कर्नाटक सरकार केंद्र से एनडीआरएफ के मानदंडों के अनुसार सूखा राहत सहायता प्रदान करने की मांग कर रही है। कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार कर्नाटक के किसानों और लोगों से बदला लेना चाह रही है। कर्नाटक के साथ बहुत बड़ा अन्याय किया जा रहा है। जबकि राज्य ने आकलन किया कि उसे एनडीआरएफ मानदंडों के अनुसार सूखा राहत के लिए 18,171 करोड़ रुपये की आवश्यकता है।</span></p>
<p><strong>भयंकर सूखे की चपेट में कर्नाटक </strong></p>
<p><span>कर्नाटक का 95 फीसदी हिस्सा गंभीर सूखे की चपेट में है। पिछले 10 महीनों से बारिश नहीं हुई। सिद्धारमैया ने कहा कि कम बारिश के कारण 48,000 हेक्टेयर में खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं। राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से प्रत्येक किसान को 2,000 रुपये का भुगतान किया, </span><span>जिससे 34 लाख किसानों पर 650 करोड़ रुपये का खर्च आया है। उन्होंने पूछा कि मोदी और शाह किस मुंह से कर्नाटक में चुनाव प्रचार कर रहे हैं।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार </strong></p>
<p><span>सूखा राहत के मामले पर कर्नाटक सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा चुकी है। सिद्धारमैया ने कर्नाटक को सूखा राहत राशि प्रदान करने के मुद्दे पर "हस्तक्षेप" के लिए सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि चुनाव आयोग ने सूखा प्रबंधन के लिए वित्तीय सहायता के संबंध में कर्नाटक द्वारा उठाए गए मुद्दे से निपटने के लिए उसे मंजूरी दे दी है। सिद्धारमैया ने कहा, "</span><span>कर्नाटक के लोगों के लिए न्याय और राहत सुनिश्चित करने की हमारी लंबी लड़ाई में यह एक मील का पत्थर और सफलता है।"</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सूखा राहत के लिए धरने पर बैठे कर्नाटक के सीएम, केंद्र पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हिमाचल में लोकसभा उम्मीदवारों को घेरेंगे सेब बागवान, पांच साल संसद में क्यों नहीं उठाया उनका मुद्दा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/apple-growers-will-question-lok-sabha-candidates-in-himachal-why-did-they-not-raise-the-issue-in-parliament-for-five-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 22 Apr 2024 15:09:53 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/apple-growers-will-question-lok-sabha-candidates-in-himachal-why-did-they-not-raise-the-issue-in-parliament-for-five-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश में लोकसभा चुनाव की हलचल के बीच सेब बागवान अपनी समस्याओं को लेकर राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस पर सेब उत्पादकों के मुद्दों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए संयुक्त किसान मंच ने दोनों दलों के उम्मीदवारों को अपने सवालों से घेरने का फैसला किया है।</p>
<p>संयुक्त किसान मंच का आरोप है कि प्रदेश के सांसदों ने पांच साल सेब बागवानों का मुद्दा लोकसभा में नहीं उठाया। जब प्रत्याशी वोट मांगने आएंगे तो उनसे इस बाबत सवाल पूछे जाएंगे कि बागवानों की समस्याओं को लेकर आपने क्या किया। हिमाचल प्रदेश के किसान विदेशी सेब के आयात और जीएसटी समेत कई मांगों को लेकर राजनीतिक दलों के रवैये से नाराज है।&nbsp;</p>
<p>संयुक्त किसान मंच के संयोजक<strong> हरीश चौहान</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि विदेशी सेब पर आयात शुल्क न बढ़ने के कारण भारी मात्रा में अमेरिका समेत कई देशों से सेब का आयात हो रहा है जिससे हिमाचल के सेब उत्पादकों को नुकसान पहुंच रहा है। बागवान सरकार से सेब पर 100 फीसदी आयात शुल्क 100 लगाने की मांग कर रहे हैं, मगर केंद्र सरकार ने आयात शुल्क नहीं बढ़ाया। सेब और अन्य फलों की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले बॉक्स और बागवानी उपकरणों पर जीएसटी खत्म करने की मांग भी पूरी नहीं हुई।&nbsp;</p>
<p>हरीश चौहान का कहना है कि जिस तरह कोरोना काल में जम्मू-कश्मीर में नेफेड के माध्यम से ए ग्रेड सेब 60 रुपये, बी ग्रेड 44 और सी ग्रेड 24 रुपये किलोग्राम की दर से खरीद हुई थी, उसी तर्ज पर अब तीनों सेब उत्पादक राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से <span>ए ग्रेड सेब 80 रुपये, बी ग्रेड 60 रुपये और सी ग्रेड 45 रुपये किलोग्राम की दर से खरीद की व्यवस्था होनी चाहिए। </span>उन्होंने हिमालयी राज्यों में कृषि और बागवानी के विकास के लिए हिल स्टेट हॉर्टिकल्चर फोरम के माध्यम से बागवानी से जुड़े मुद्दा के समाधान पर जोर दिया है।&nbsp;</p>
<p>हिमाचल प्रदेश की राजनीति में सेब बागवान काफी प्रभाव रखते हैं। पिछले दो लोकसभा चुनाव में प्रदेश की सभी चार सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। लेकिन संयुक्त किसान मंच का मानना है कि सेब बागवानों की समस्याओं को संसद में उठाने में हिमाचल प्रदेश के सांसद नाकाम रहे हैं। इसलिए अब चुनाव में वोट मांगने वाले उम्मीदवारों से सवाल उठाए जाएंगे।&nbsp;</p>
<p>भारत में अमेरिका के अलावा ईरान, अफगानिस्तान, न्यूजीलैंड, चिली और ब्राजील से सेब का आयात होता है। ईरान का सेब अफगानिस्तान के रास्ते बिना शुल्क चुकाए भी भारत में पहुंच रहा है। साफ्टा (दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र) के चलते बिना शुल्क चुकाए अफगानिस्तान के रास्ते ईरानी सेब भारत पहुंचता है। इसके अलावा चाइना सेब भी नेपाल के रास्ते भारत में अवैध रूप से आता है। इससे घरेलू सेब उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ता है।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_662630365d21e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हिमाचल में लोकसभा उम्मीदवारों को घेरेंगे सेब बागवान, पांच साल संसद में क्यों नहीं उठाया उनका मुद्दा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_662630365d21e.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों की रिहाई के लिए शंभू स्टेशन पर रेलवे ट्रैक जाम, दर्जनों ट्रेन प्रभावित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/railway-track-jammed-at-shambhu-station-for-release-of-farmers-dozens-of-trains-affected.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 18 Apr 2024 15:27:15 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/railway-track-jammed-at-shambhu-station-for-release-of-farmers-dozens-of-trains-affected.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब-हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों ने शंभू रेलवे स्टेशन पर रेलवे ट्रैक जाम कर दिया है। बुधवार दोपहर से किसान रेलवे ट्रैक पर बैठ हुए हैं। पंजाब पुलिस ने उन्हें रोकने की भरसक कोशिश की<span>, </span>मगर किसानों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और ट्रैक पर धरना लगाकर बैठ गये। किसान सरकार से युवा किसान नवदीप सिंह जलबेड़ा समेत तीन किसानों की रिहाई की मांग कर रहे हैं। आज सुबह से बड़ी तादाद में किसान शंभू रेलवे स्टेशन पर मौजूद हैं। इसमें महिलाएं भी शामिल हैं।<span>&nbsp;</span></p>
<p><strong>संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक)</strong> और <strong>किसान मजदूर मोर्चा</strong> के आह्वान पर किसानों द्वारा शंभू बॉर्डर पर रेलवे ट्रैक जाम करने से 5<span>0</span> से ज्यादा ट्रेन प्रभावित हुई हैं। कई ट्रेनों को पूरी तरह से कैंसिल कर दिया गया है। जबकि कई ट्रेनों के रूट डायवर्ट किए गए हैं।<span> किसान नेताओं ने ऐलान कर दिया कि जब तक युवा किसानों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक रेल मार्ग बंद रहेगा। जल्द ही हरियाणा और पंजाब में धरने के पॉइंट बढ़ा दिए जाएंगे।&nbsp;</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x_6620f26aa83b6.jpg" alt="" /></p>
<p>एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत कई मांगों को लेकर किसान 13 फरवरी से शंभू बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं। इस दौरान हरियाणा पुलिस ने नौजवान किसान<strong> नवदीप सिंह जलबेड़ा, गुरकीरत सिंह शाहपुर </strong>और<strong> अनीश खटकड़</strong> को गिरफ्तार कर लिया था। आंदोलनकारी किसान इनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>किसान नेता <strong>जगजीत डल्लेवाल</strong> ने कहा कि सरकार ने भरोसा देकर भी उन्हें रिहा नहीं किया। हमारा किसान साथी जेल में मरणव्रत पर बैठा है। जब तक सरकार उसे रिहा नहीं करती<span>, </span>हम ट्रैक खाली नहीं करेंगे। आम लोगों की परेशानी को लेकर डल्लेवाल ने कहा कि हमारा साथी जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है<span>, </span>इसमें लोग हमें सहयोग करें।&nbsp;</p>
<p>किसान मजदूर मोर्चा के संयोजक&nbsp;<strong>सरवन सिंह पंढेर</strong>&nbsp;ने कहा कि हम रेल नहीं रोकना चाहते थे<span>, </span>मगर सरकार ने इसके लिए मजबूर किया। सरकार ने <span>16</span> अप्रैल तक रिहाई का भरोसा देकर वादाखिलाफी की है। जब हमारे किसानों को रिहा नहीं किया गया, तो हमने रेल ट्रैक पर बैठने का फैसला किया। पंढेर ने कहा है कि अगर आने वाले दिनों में तीनों किसानों को रिहा नहीं किया तो वे और अधिक रेल पटरियों पर बैठ जाएंगे।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x_6620f6284485b.jpg" alt="" /></p>
<p>आंदोलनकारी किसानों ने <span>9</span> अप्रैल को शंभू रेलवे स्टेशन पर रेल मार्ग जाम करने का ऐलान किया था। फिर पंजाब और हरियाणा प्रशासन ने मीटिंग कर किसानों को भरोसा दिलाया गया कि <span>16</span> अप्रैल तक सभी किसानों को रिहा कर दिया जाएगा। लेकिन उन्हें रिहा नहीं किया तो किसान रेलवे ट्रैक पर उतर आए। पंजाब पुलिस ने किसानों को रेलवे ट्रैक पर जाने से रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाए थे, लेकिन किसान वहां पहुंच गए और अंबाला-लुधियाना रेल ट्रैक जाम कर दिया।&nbsp;</p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_6620ee45772b6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों की रिहाई के लिए शंभू स्टेशन पर रेलवे ट्रैक जाम, दर्जनों ट्रेन प्रभावित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/04/image_750x500_6620ee45772b6.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गन्ना संकट: चीनी मिलें समय से पहले बंद, किसानों को दिया 420 रुपये तक का भाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-crisis-sugar-mills-closed-prematurely-farmers-given-price-up-to-rs-420.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 11 Apr 2024 13:24:56 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-crisis-sugar-mills-closed-prematurely-farmers-given-price-up-to-rs-420.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गन्ना संकट के कारण उत्तर प्रदेश में चीनी मिलें समय से पहले बंद हो रही हैं। पेराई सत्र के आखिरी दिनों में गन्ना खरीदने के लिए चीनी मिलों में होड़ लगी है, जिसके चलते गन्ने का भाव कहीं-कहीं <strong>400 से 420 रुपये</strong> प्रति क्विंटल तक भी दिया जा रहा है। गन्ना उत्पादन में गिरावट इस साल यह स्थिति पैदा हुई है।&nbsp;</p>
<p>यूपी की गन्ना बेल्ट में <strong>शामली</strong> जिले की तीन में से दो चीनी मिलें<strong> 'नो केन'</strong> के कारण पेराई बंद कर सीजन समाप्त कर चुकी है। पेराई सीजन के आखिरी दिनों में किसानों से ज्यादा से ज्यादा गन्ना खरीदने के लिए ऊन शुगर मिल ने 420 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव दिया जबकि राज्य सरकार ने गन्ना का भाव (एसएपी) 370 रुपये घोषित किया है। ऊन चीनी मिल ने इस साल 89.50 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की है, जबकि पिछले साल 95 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी।&nbsp;</p>
<p><strong>शामली जिले</strong> के भैंसवाल गांव के किसान <strong>योगेंद्र सिंह</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि ऊन शुगर मिल ने किसानों को 400 से 420 रुपये तक का पेमेंट दिया है। हालांकि, शामली शुगर मिल और जिला प्रशासन के दबाव के चलते यह सिलसिला अधिक दिनों तक नहीं चल सका और ऊन शुगर मिल को 8 अप्रैल को सीजन समाप्ति का ऐलान करना पड़ा। भैंसवाल गांव के एक अन्य किसान सुभाष चौधरी का कहना है कि सरकार को गन्ना सीजन की शुरुआत में ही 400 रुपये का रेट घोषित करना चाहिए था। जब कुछ खांडसारी यूनिट और चीनी मिलें 400 रुपये का रेट दे सकती हैं तो किसानों को सही भाव से क्यों वंचित रखा गया।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>मुजफ्फरनगर</strong> जिले में भी गन्ना ना मिलने के कारण अधिकांश चीनी मिलें समय से पहले बंद हो चुकी हैं। खाईखेड़ी, टिकौला, <span>रोहाना और भैसाना चीनी मिलों के पेराई सत्र का समापन हो चुका है। जबकि </span>खतौली, तितावी और मंसूरपुर चीनी मिल 25 अप्रैल तक चलने की संभावना है। इस साल पेराई सत्र की शुरुआत से ही चीनी मिलों के सामने गन्ना आपूर्ति का संकट रहा था। फरवरी के आखिर में ही उत्तर प्रदेश की कई चीनी मिलें बंद होने की स्थिति में आ गई थीं और सेंटर बंद होने लगे थे। 15 मार्च तक यूपी में 121 में से 18 चीनी मिलें बंद हो चुकी थीं जबकि पिछले साल इस अवधि तक केवल 9 चीनी मिलें बंद हुई थीं।&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>चीनी मिलों</strong> को पर्याप्त गन्ना न मिल पाने के पीछे गन्ने की बुवाई के क्षेत्र में कमी और फसल पर मौसम व रोगों की मार प्रमुख कारण हैं। इस बार गन्ने की पैदावार के साथ-साथ चीनी रिकवरी भी कम रही है। <strong>कृषि मंत्रालय</strong> के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, <strong>वर्ष 2023-24</strong> में देश में 44.64 करोड़ टन गन्ना उत्पादन की संभावना है जबकि 2022-23 में देश में 49.05 करोड़ टन गन्ने का उत्पादन हुआ था। इस प्रकार गन्ना उत्पादन में लगभग 9 फीसदी की गिरावट आई है। वर्ष 2023-24 में देश में गन्ने की बुवाई का क्षेत्र घटकर 56.48 लाख हेक्टेअर रहा था जो इससे पिछले साल 58.85 लाख हेक्टेअर था।</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश</strong> में गन्ने की फसल पर बारिश, बाढ़ और रोगों की मार के चलते उत्पादन पर असर पड़ा है। गन्ने की रोगग्रस्त किस्मों का विकल्प ना मिलने से किसानों को पुरानी किस्मों की बुवाई करनी पड़ी। इससे भी गन्ने की पैदावार प्रभावित हुई है। इन्हीं कारणों से इस साल उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन <strong>105 लाख टन</strong> के आसपास रहने की संभावना है जबकि सीजन के शुरुआत में राज्य में 110 लाख टन चीनी उत्पादन की संभावना जताई गई थी।</p>
<p>उधर, <strong>महाराष्ट्र</strong> में चीनी उत्पादन 106 से 107 लाख टन तक पहुंचने की संभावना है। इस प्रकार उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन में जो गिरावट होगी, उसकी भरपाई महाराष्ट्र में होने से देश में कुल चीनी उत्पादन 320 लाख टन रहने का अनुमान है। यह मात्रा एथेनॉल के लिए डायवर्ट की गई 17 लाख टन चीनी से अलग है।</p>
<p>एक ओर जहां सरकार <strong>ऐथनॉल</strong> के उत्पादन को बढ़ावा देना चाहती है वहीं, गन्ना उत्पादन में कमी के चलते चीनी उद्योग का अपनी पूरी क्षमता इस्तेमाल न कर पाना खतरे की घंटी है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गन्ना संकट: चीनी मिलें समय से पहले बंद, किसानों को दिया 420 रुपये तक का भाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब को वापस लेना पड़ा कॉरपोरेट साइलो को गेहूं खरीद केंद्र बनाने का फैसला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/decision-to-convert-corporate-silo-into-wheat-procurement-center-in-punjab-had-to-be-withdrawn.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 03 Apr 2024 14:16:34 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/decision-to-convert-corporate-silo-into-wheat-procurement-center-in-punjab-had-to-be-withdrawn.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में प्राइवेट साइलो को गेहूं खरीद केंद्र घोषित करने का आदेश वापस लेना पड़ा। किसान संगठनों के विरोध को देखते हुए पंजाब मंडी बोर्ड ने मंगलवार को राज्य में 12 प्राइवेट साइलो को गेहूं खरीद केंद्र बनाने का आदेश रद्द कर दिया। लोकसभा चुनाव से पहले पंजाब में यह मुद्दा तूल पकड़ रहा था। आखिरकार पंजाब सरकार को अपने निर्णय से पीछे हटना पड़ा।</p>
<p><strong>संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक)</strong> और <strong>किसान मजदूर मोर्चा</strong> ने पंजाब में प्राइवेट साइलो को गेहूं खरीद केंद्र बनाने का विरोध करते हुए रविवार को व्यापक प्रदर्शन का ऐलान किया था। <strong>संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम)</strong> ने भी इस फैसले की आलोचना की थी। पंजाब मंडी बोर्ड के अध्यक्ष <strong>हरचंद सिंह बरसट</strong> ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साइलो को सब यार्ड घोषित करने के आदेश को रद्द करने का निर्देश दिया है। किसानों की मांगों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।</p>
<p>मंगलवार को <strong>पंजाब मंडी बोर्ड</strong>&nbsp;सचिव अमृत गिल की ओर जारी नए नोटिफिकेशन में कहा गया है, "निदेशक, खाद्य और नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग से प्राप्त पत्र के अनुसार, 15 मार्च और 22 मार्च को जारी की गई दो अधिसूचनाएं अब वापस ले ली गई हैं।"</p>
<p>पंजाब मंडी बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि साइलो का उपयोग केवल भंडारण उद्देश्यों के लिए किया जाएगा और कोई भी मंडी समिति भंग नहीं की जाएंगी। कॉरपोरेट के साइलो को गेहूं खरीद केंद्र घोषित किए जाने के फैसले को किसान संगठन पिछले दरवाजे से मंडियों को खत्म करने की साजिश करार देते हुए इसका विरोध कर रहे थे।</p>
<p><strong>पंजाब मंडी बोर्ड</strong> ने 15 मार्च और 23 मार्च को जारी आदेश में 1 अप्रैल से शुरू होने वाले रबी खरीद सीजन के लिए प्राइवेट कंपनियों द्वारा संचालित नौ जिलों में कुल 12 साइलो को खरीद, बिक्री और भंडारण केंद्र घोषित किया था। साइलो, इस्पात के बने बड़े-बड़े भंडार होते हैं। पंजाब और हरियाणा में प्राइवेट कंपनियों ने साइलो बनाए हैं जिन्हें सरकार भी अनाज भंडारण के लिए किराए पर लेती है।</p>
<p>एक अप्रैल से शुरू हुए गेहूं खरीद के लिए पंजाब में कुल <strong>1,907</strong> खरीद केंद्र बनाए गये हैं। इनमें प्राइवेट कंपनियों के 11 साइलो को भी खरीद केंद्र का दर्जा दिया गया था। जिसका किसान संगठनों ने विरोध किया। आशंका जताई गई कि कॉरपोरेट साइलो अनाज मंडियों को खत्म कर देंगे।</p>
<p>एसकेएम (गैर राजनीतिक) नेता <strong>जगजीत सिंह डल्लेवाल</strong> ने पंजाब में कॉरपोरेट साइलो को खरीद केंद्र घोषित करने के फैसले की निंदा करते हुए कहा था कि पंजाब सरकार ने केंद्र के इशारे पर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि यह कदम कृषि मंडियों को खत्म करने का प्रयास है। इस मामले को लेकर <strong>बीकेयू उग्राहां</strong> ने आम आदमी पार्टी के विधायकों को चेतावनी पत्र भेजने शुरू कर दिए थे। कांग्रेस और अकाली दल भी पंजाब सरकार के फैसले पर सवाल उठा रहे थे। &nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब को वापस लेना पड़ा कॉरपोरेट साइलो को गेहूं खरीद केंद्र बनाने का फैसला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में सरसों की खरीद शुरू, लेकिन अधूरी तैयारियों से किसान परेशान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/mustard-procurement-starts-in-haryana-but-preparations-are-inadequate.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 27 Mar 2024 19:11:23 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/mustard-procurement-starts-in-haryana-but-preparations-are-inadequate.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में 26 मार्च से सरसों की सरकारी खरीद शुरू हो गई है। लेकिन पहले दिन किसानों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई किसानों की फसल का सत्यापन नहीं होने से मंडियों में गेट पास जारी नहीं हुए। ऐसे किसानों को वापस लौटना पड़ा या फिर मिलर्स को कम दाम पर सरसों बेचनी पड़ी। कई मंडियों में किसान सरसों लेकर नहीं पहुंचे। इस साल बाजार में सरसों का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम होने के कारण किसान एमएसपी पर सरसों बेचना चाहते हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल हरियाणा में <strong>10.52 लाख</strong> से ज्यादा किसानों ने कुल 61.45 लाख एकड़ रबी फसल क्षेत्र का रजिस्ट्रेशन कराया है। राज्य में किसानों से सरसों खरीद के लिए <strong>104 खरीद केंद्र</strong> बनाए गये हैं जहां 5650 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरसों खरीद जाएगी।</p>
<p><strong>रेवाड़ी, नारनौल</strong> समेत राज्य की कई मंडियों में पहले दिन किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा दिक्कत मंडी गेट पर टोकन मिलने में आ रही है। <strong>चरखी दादरी</strong> मंडी के आढ़तियों ने मंडी प्रशासन पर अधूरी तैयारियों का आरोप लगाते हुए अपनी मांगों को लेकर सरसों की खरीद का बहिष्कार किया। <span>चरखी दादरी में पहले दिन सरसों की कोई खरीद नहीं हुई।</span><span>&nbsp;</span><span><strong>भिवानी</strong> अनाज मंडी में पहले दिन सरसों की खरीद नहीं हुई। क्योंकि पहले दिन कोई किसान नहीं पहुंचा। </span>कई मंडियों में सरसों की आवक कम है क्योंकि किसान अभी फसल कटाई में लगे हैं और फसल में नमी भी अधिक है। &nbsp;</p>
<p><strong>भारतीय किसान यूनियन चढूनी</strong> के रेवाड़ी जिलाध्यक्ष <strong>समय सिंह</strong> ने डीसी राहुल हुड्&zwnj;डा को सरसों खरीद की बेहतर व्यवस्था बनाने के लिए ज्ञापन दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 26 मार्च को बहुत से किसान सरसों की फसल लेकर मंडी में पहुंचे, लेकिन दोपहर 2 बजे तक भी सरसों की खरीद शुरू नहीं हुई थी। जिससे किसानों में रोष है।</p>
<p><strong>यमुनानगर</strong> में कौन-सा विभाग सरसों की खरीद करेगा, इसे लेकर ही असमंजस की स्थिति बनी रही। पहले कहा जा रहा था हरियाणा वेयर हाउस की तरफ से सरसों की खरीद की जाएगी। परंतु मंगलवार को पता चला कि सरसों की खरीद हैफेड की ओर की जाएगी। जिले में कुल 13 अनाज मंडियां हैं। परंतु पूरे जिले में केवल जगाधरी अनाज मंडी में ही सरसों के लिए खरीद केंद्र बनाया गया है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>कई मामलों में किसानों ने <strong>रजिस्ट्रेशन</strong> तो करवा लिया था लेकिन फसल का सत्यापन न होने के कारण ई-खरीद पोर्टल पर रिकॉर्ड अपलोड नहीं हो पाया। इसलिए मंडी में गेट पास जारी नहीं हुए। हरियाणा में सरसों की खरीद के लिए हैफेड और हरियाणा स्टेट वेयर हाउस कारपोरेशन को अधिकृत किया गया है।</p>
<p><strong>कैसे मिलेगा गेट पास</strong></p>
<p>किसानों को सरसों बिक्री के लिए <strong>मेरी फसल</strong><strong>,</strong><strong> मेरा ब्योरा</strong> पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। पंजीकरण के प्रमाण के साथ आधार कार्ड और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज कराने के बाद ही गेट पास मिलेगा। गेट पास वाले किसानों से ही मंडी में सरसों की सरकारी खरीद होगी।</p>
<p><strong>8 फीसदी नमी का मानक</strong></p>
<p>किसानों से अधिकतम 8 फीसदी नमी वाली सरसों की खरीद होगी। मगर शुरुआत में सरसों में अधिक नमी रहती है। इसलिए किसानों से फसल को अच्छी तरह सुखाकर मंडी में लाने का आग्रह किया जा रहा है।&nbsp; &nbsp;</p>
<p><strong>25 क्विंटल खरीद की लिमिट</strong></p>
<p>राज्य सरकार ने एक किसान के लिए एक दिन में 25 क्विंटल सरसों की खरीद की लिमिट निर्धारित की है। अगर किसान की उपज 25 क्विंटल से ज्यादा है तो उसे अगले दिन फसल खरीद के लिए आना होगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में सरसों की खरीद शुरू, लेकिन अधूरी तैयारियों से किसान परेशान ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मदर डेयरी मध्य और दक्षिण भारत में करेगी कारोबार का विस्तार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/mother-dairy-will-expand-in-central-and-south-india.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 18 Mar 2024 13:18:52 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/mother-dairy-will-expand-in-central-and-south-india.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की पूर्ण स्वामित्व वाली मदर डेयरी मध्य और दक्षिण भारत में अपने कारोबार का विस्तार करेगी। कंपनी 650 करोड़ रुपये का निवेश कर महाराष्ट्र और कर्नाटक में दो नए फूड प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने जा रही है। इसके अलावा कंपनी अपने मौजूदा प्लांट की क्षमताओं का विस्तार करने के लिए 100 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस तरह मदर डेयरी अपनी फूड प्रोसेसिंग की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 750 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च करेगी। साथ ही डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को भी बढ़ाएगी।&nbsp;</p>
<p>मदर डेयरी लगभग 525 करोड़ रुपये के निवेश के साथ महाराष्ट्र के नागपुर में एक बड़ा डेयरी प्लांट लगा रही है। इसकी क्षमता 6 लाख लीटर दूध प्रसंस्करण की होगी, जिसे प्रतिदिन 10 लाख लीटर तक बढ़ाया जा सकता है। यह डेयरी प्लांट मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों के बाजारों में मदर डेयरी की पहुंच बढ़ाएगा। मदर डेयरी अपने सफल ब्रांड के तहत 125 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर कर्नाटक में एक नया फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट शुरू करने की भी योजना बना रही है।</p>
<p>वर्तमान में, मदर डेयरी के पास डेयरी के लिए कंपनी के स्वामित्व वाले नौ प्रोसेसिंग प्लांट हैं, जिनकी कुल दूध प्रसंस्करण क्षमता प्रति दिन 50 लाख लीटर से अधिक है। मदर डेयरी की स्थापना 1974 में हुई थी। अब यह राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। दिल्ली-एनसीआर में दूध बूथ के साथ-साथ सफल रिटेल आउटलेट भी हैं। मदर डेयरी दिल्ली-एनसीआर में प्रतिदिन 35 लाख लीटर से अधिक दूध बेचती है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मदर डेयरी मध्य और दक्षिण भारत में करेगी कारोबार का विस्तार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नायब सिंह सैनी बने हरियाणा के मुख्यमंत्री, जेजेपी से गठबंधन टूटा ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/nayab-saini-will-be-the-chief-minister-of-haryana-in-place-of-khattar-alliance-with-jjp-broken.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 12 Mar 2024 15:52:36 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/nayab-saini-will-be-the-chief-minister-of-haryana-in-place-of-khattar-alliance-with-jjp-broken.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा की राजनीति में काफी उथल-पुथल मची है। आज सुबह से चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सीएम की कुर्सी से विदाई हो गई। उनकी जगह भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और कुरुक्षेत्र से सांसद नायब सिंह सैनी हरियाणा के नए मुख्यमंत्री बने। <span>उन्होंने चंडीगढ़ के राजभवन में हरियाणा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस अवसर पर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी इस दौरान मौजूद रहे।</span></p>
<p>मंगलवार को चंडीगढ़ में हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में पार्टी के ओबीसी नेता नायब सिंह सैनी को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। इसी के साथ हरियाणा में पांच साल पुराना भाजपा-जेजेपी गठबंधन टूट गया है।&nbsp;</p>
<p>भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद नायब सैनी ने हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था। नायब सैनी को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने ओबीसी कार्ड खेलते हुए गैर-जाट मतदाताओं को लामबंद करने का प्रयास किया है।</p>
<p>नायब सैनी के हरियाणा का सीएम बनने के एलान के बाद पूर्व सीएम मनोहर लाल के लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री पद से खट्टर की विदाई को हरियाणा-पंजाब में जारी किसान आंदोलन से जोड़कर भी देखा जा रहा है। आंदोलनकारी किसानों के खिलाफ दमनकारी कार्रवाईयों को लेकर खट्टर सरकार की काफी आलोचना हो रही थी।</p>
<p>विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा-जेजेपी गठबंधन टूटने को विपक्षी वोटों में सेंधमारी की साजिश करार दिया है। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि यह गठबंधन स्वार्थ के लिए तोड़ा गया है।खट्टर सरकार की नौ साल की नाकामयाबी को छिपाने के लिए गठबंधन तोड़ने का नाटक किया जा रहा है।&nbsp; &nbsp; &nbsp;</p>
<p><span>भाजपा ने मुख्यमंत्री बदलकर और जेजेपी से गठबंधन तोड़कर सियासी समीकरण साधने की कोशिश की है। कांग्रेस, इनेलो और जेजेपी अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं, तो जाट वोटों का विभाजन हो सकता है। जबकि गैर-जाट मतदाताओं को साधने के लिए भाजपा ने ओबीसी नेता नायब सैनी को मुख्यमंत्री बनाया है।&nbsp;</span></p>
<p></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/03/image_750x500_65f0478ee7a5c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ नायब सिंह सैनी बने हरियाणा के मुख्यमंत्री, जेजेपी से गठबंधन टूटा  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गारंटी का हाल, एमपी&amp;#45;राजस्थान में किसानों को 2700 की बजाय 2400 रुपये मिलेगा गेहूं का भाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/wheat-purchase-guarantee-was-rs-2700-but-farmers-in-mp-rajasthan-will-get-the-price-of-rs-2400.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 12 Mar 2024 15:22:03 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/wheat-purchase-guarantee-was-rs-2700-but-farmers-in-mp-rajasthan-will-get-the-price-of-rs-2400.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को गेहूं की खरीद पर 2275 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य (<span>एमएसपी</span>) <span>के अलावा 125 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का ऐलान किया है। इस साल राज्य में गेहूं की सरकारी खरीद पर किसानों को 2400 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलेगा। जबकि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने किसानों को गेहूं का एमएसपी 2700 रुपये करने का वादा किया था।</span>&nbsp;</p>
<p>मध्य प्रदेश से पहले राजस्थान की भाजपा सरकार भी गेहूं पर 125 रुपये बोनस देने का ऐलान कर चुकी है। सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में गेहूं की खरीद पर प्रति क्विंटल 125 रुपये बोनस के तौर पर देने का निर्णय लिया गया। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि गेहूं पर 125 रुपये का अतिरिक्त बोनस देने से इस साल करीब 3850 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपने संकल्प-पत्र में गेहूं का एमएसपी बढ़ाकर 2700 रुपये और धान का एमएसपी 3100 रुपये प्रति क्विंटल करने का वादा किया था। एमएसपी की कानूनी गारंटी को लेकर हरियाणा-पंजाब के किसान आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में सभी की निगाहें भाजपा शासित राजस्थान और हरियाणा पर थीं। लेकिन राजस्थान के बाद अब मध्यप्रदेश सरकार भी चुनावी गारंटी से मुकर गई है। किसानों को वादे के मुताबिक गेहूं का भाव 2700 रुपये प्रति कुंतल देने के लिए प्रति कुंतल 425 रुपये का बोनस देना पड़ता। इसकी बजाय सिर्फ 125 रुपये बोनस दिया गया है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>मध्य प्रदेश सरकार ने गेहूं खरीद के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन चुनावी वादे के मुताबिक गेहूं का रेट 2700 रुपये नहीं मिलने से किसानों में नाराजगी है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष<strong> केदार सिरोही</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि पूरे चुनाव में भाजपा ने गेहूं का भाव 2700 रुपये देने का खूब प्रचार किया था। जबकि असल में 300 रुपये कम भाव दिया है। इससे किसानों को प्रति एकड़ करीब 6 हजार रुपये का नुकसान होगा। साल भर में जो किसान सम्मान निधि सरकार दे रही है, उतना भाव का नुकसान तो एक एकड़ में हो रहा है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>मध्य प्रदेश के खुले बाजारों में गेहूं की कीमतें 2,700 रुपये से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच हैं। अगर सरकार बोनस नहीं देगी तो गेहूं खरीद लक्ष्य से कम होने की आशंका हैं।&nbsp;मध्य प्रदेश और राजस्थान की भाजपा सरकारों द्वारा गेहूं की सरकारी खरीद पर 125 रुपये प्रति क्विटंल का बोनस देने से भाजपा की हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार पर भी दबाव बनेगा। लोक सभा चुूनावों के साल में अगर एक ही पार्टी की सरकार दो राज्यों में बोनस देगी और उनसे सटे दो राज्यों में बोनस नहीं देगी तो यह राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। आंदोलनरत किसानों के लिए यह&nbsp; एक नया मुद्दा हाथ में आ जाएगा और इसका असर पंजाब पर भी पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूुं उत्पादक राज्य है लेकिन सरकारी खऱीद में यह पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश से पीछे रहता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गारंटी का हाल, एमपी-राजस्थान में किसानों को 2700 की बजाय 2400 रुपये मिलेगा गेहूं का भाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर और कैबिनेट मंत्रियों का इस्तीफा, जेजेपी से गठबंधन टूटा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/resignation-of-haryana-chief-minister-khattar-and-cabinet-ministers-alliance-with-jjp-on-the-verge-of-breaking.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 12 Mar 2024 12:41:32 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/resignation-of-haryana-chief-minister-khattar-and-cabinet-ministers-alliance-with-jjp-on-the-verge-of-breaking.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा की राजनीति में सियासी घमासान मचा हुआ है। मुख्यमंत्री <strong>मनोहर लाल खट्टर</strong> समेत पूरी कैबिनेट ने इस्तीफा दे दिया है। इसी के साथ <strong>दुष्यंत चौटाला</strong> की जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) और भारतीय जनता पार्टी का पांच साल पुराना गठबंधन टूट गया। <span>पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि स्वार्थ के लिए ये गठबंधन तोड़ा गया है।</span></p>
<p>हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और उनके कैबिनेट मंत्रियों ने मंगलवार को हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय को अपना इस्तीफा सौंप दिया। हरियाणा के मंत्री चौधरी कंवर पाल ने कहा है कि राज्यपाल बंडारू दतात्रेय ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। कंवर पाल ने अपना इस्तीफा सौंपने के बाद हरियाणा निवास के बाहर संवाददाताओं से कहा कि खट्टर मुख्यमंत्री बने रहेंगे। हालांकि, <span>हरियाणा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नायब सिंह सैनी को सीएम बनाए जाने की भी अटकलें लगाई जा रही हैं।&nbsp;</span></p>
<p>आज शाम तक हरियाणा के नए मुख्यमंत्री नई कैबिनेट के साथ शपथ ले सकते हैं। भाजपा को निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है जबकि <strong>जेजेपी</strong> के कई विधायक भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं।&nbsp;लोकसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और जेजेपी में सीटों के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पाई। इस बीच यह घटनाक्रम सामने आया है।</p>
<p>हरियाणा की 90 सदस्यों की विधानसभा में भाजपा के 41 विधायक हैं, जेजेपी के 10 विधायक और विपक्षी दल कांग्रेस के 30 विधायक हैं। माना जा रहा है कि भाजपा गठबंधन को सात में से छह निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इंडियन नेशनल लोकदल तथा हरियाणा लोकहित पार्टी के पास एक-एक सीट है। निर्दलीय विधायकों के समर्थन से भाजपा 46 सीटों का बहुमत का आंकड़ा हासिल कर सकती है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>कांग्रेस नेता <strong>दीपेंद्रर हुड्डा</strong> ने कहा कि आज की घटनाक्रम पर मैंने 3 महीने पहले सिरसा में रिएक्शन दिया था। मैंने प्रदेश वासियों को बता दिया था कि बीजेपी-जेजेपी में समझौता तोड़ने का <strong>अघोषित समझौता</strong> हो गया है। और इस बार बीजेपी के इशारे पर जेजेपी और इनेलो वाले कांग्रेस की वोट में सेंध मारने अलग से फिर आएंगे। हरियाणा के सियासी हलकों में काफी दिनों से अटकलें थीं कि भाजपा-जेजेपी का गठबंधन चुनाव से पहले से पहले टूट जाएगा। इसे जाट मतों में सेंधमारी की अघोषित रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।&nbsp;</p>
<p>आज भाजपा ने चंडीगढ़ में अपने विधायकों की बैठक बुलाई है। भाजपा के पर्यवेक्षक अर्जुन मुंडा और तरुण चुघ चंडीगढ़ पहुंच चुके हैं। बैठक में भाजपा विधायक दल का नया नेता यानी हरियाणा का नया मुख्यमंत्री चुना जा सकता है। हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने भी आज दिल्ली में अपने आवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की बैठक बुलाई है।<strong> कांग्रेस</strong> ने भी अपने विधायकों को दिल्ली बुलाया है।&nbsp;</p>
<p>आज सुबह हरियाणा के निर्दलीय विधायक <strong>नयन पाल रावत</strong> ने कहा कि हमने पहले ही सीएम मनोहर लाल के नेतृत्व वाली सरकार को अपना समर्थन दे दिया है। आज मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात में लोकसभा चुनाव की रणनीति पर भी चर्चा हुई। बातचीत से मुझे ऐसा आभास हुआ था जजपा से गठबंधन तोड़ने की शुरुआत हो चुकी है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर और कैबिनेट मंत्रियों का इस्तीफा, जेजेपी से गठबंधन टूटा ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में किसानों को ट्यूबवेल के लिए मुफ्त बिजली, खराब फसलों के मुआवजे के लिए 23 करोड़ स्वीकृत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/free-electricity-for-tube-wells-in-up-to-farmers-rs-23-crore-approved-for-compensation-for-ruined-crops.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 05 Mar 2024 18:52:59 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/free-electricity-for-tube-wells-in-up-to-farmers-rs-23-crore-approved-for-compensation-for-ruined-crops.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों से जुड़े दो महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री <strong>योगी आदित्यनाथ</strong> की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में किसानों को निजी नलकूपों के बिजली बिल में 100 फीसदी छूट देने का निर्णय लिया गया। यह छूट 1 अप्रैल, 2023 के बाद के बिजली बिलों पर मिलेगी। इसके अलावा राज्य सरकार ने ओलावृष्टि और बारिश से प्रभावित नौ जिलों में किसानों को फसल नुकसान मुआवजे के लिए 23 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।</p>
<p>यूपी के ऊर्जा मंत्री <strong>एके शर्मा</strong> ने बताया कि किसानों को ट्यूबवेल के बिजली बिल पर 100 फीसदी छूट देने के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल ने मंजूरी प्रदान की है। अब किसानों को 1 अप्रैल, 2023 के बाद से ट्यूबवेल के बिजली बिल <span>देने की आवश्यकता नहीं होगी। </span>इसके पहले का यदि कोई बकाया है तो उसके लिए राज्य सरकार ब्याज छूट योजना लाएगी। प्रदेश में कुल 14 लाख 78 हजार नलकूपों पर बिजली बिल में छूट का लाभ मिलेगा। इससे लगभग डेढ़ करोड़ किसान लाभान्वित होंगे।</p>
<p>भाजपा ने 2022 में अपने चुनाव संकल्प-पत्र में किसानों को <strong>मुफ्त बिजली</strong> देने का वादा किया था। पिछले महीने पेश हुए राज्य सरकार के बजट में भी इस बारे में घोषणा की गई थी। अब राज्य मंत्रिमंडल ने किसानों के निजी नलकूपों पर बिजली बिल में 100 फीसदी छूट देने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है।&nbsp;</p>
<p>इसके लिए वित्त वर्ष 2023-24 में राज्य सरकार ने 2400 करोड़ और 2024-25 में 1800 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है। कृषि मंत्री <strong>सूर्य प्रताप शाही</strong> ने किसानों के हित में इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए सीएम योगी का आभार जताया। यूपी में किसानों को मुफ्त बिजली का मामला काफी महत्वपूर्ण है और इसे आगामी लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्षी दल और किसान संगठन मुफ्त बिजली के मुद्दे को लेकर सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहे थे।</p>
<p>उधर,<strong> बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि</strong> से प्रभावित राज्य के नौ जिलों में फसलों के मुआवजे के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 23 करोड़ रुपये की धनराशि एडवांस के रूप में मंजूर कर दी है। <span></span><span>मुख्यमंत्री ने </span>राहत विभाग को सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों के खातों में तुरंत मुआवजा राशि ट्रांसफर करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने को कहा था। इसके बाद खराब मौसम से सर्वाधिक प्रभावित नौ जिलों के जिलाधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी। इसी के आधार पर नौ जिलों के किसानों को <span>23</span> करोड़ रुपये का मुआवजा देने का निर्णय लिया गया।&nbsp;</p>
<p>जिन जिलों में किसानों के लिए मुआवजा राशि मंजूर की गई है उनमें <strong>बांदा, बस्ती, चित्रकूट, जालौन, झांसी, ललितपुर, महोबा, सहारनपुर और शामली</strong> जिले शामिल हैं। जालौन के लिए सबसे ज्यादा <span>5</span> करोड़ रुपये का मुआवजा मंजूर किया गया है<span>, </span>जबकि ललितपुर<span>, </span>महोबा और सहारनपुर को <span>3-3</span> करोड़ रुपये दिए गए हैं। बांदा<span>, </span>बस्ती<span>, </span>झांसी और शामली के लिए <span>2-2</span> करोड़ रुपये और चित्रकूट के लिए <span>1</span> करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।&nbsp;</p>
<p>यह मुआवजा उन किसानों को मिलेगा जिनकी फसलें <strong>33 प्रतिशत</strong> से अधिक खराब हो गई हैं। हाल के दिनों में बारिश, आंधी और ओले पड़ने से राज्य में किसानों की खड़ी फसलों को नुकसान हुआ है। कई जिलों में गेहूं, सरसों और आलू समेत अन्य फसलें बर्बाद हो गई हैं। हालांकि, किसानों के वास्तविक नुकसान को देखते हुए 23 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि नाकाफी है। लेकिन इससे किसानों को तत्काल मुआवजा मिलना शुरू हो जाएगा।&nbsp; &nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में किसानों को ट्यूबवेल के लिए मुफ्त बिजली, खराब फसलों के मुआवजे के लिए 23 करोड़ स्वीकृत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड बजट में स्टेट मिलेट मिशन और प्राकृतिक कृषि योजना का ऐलान ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/state-millet-mission-and-natural-agriculture-scheme-announced-in-uttarakhand-budget.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 27 Feb 2024 15:41:52 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/state-millet-mission-and-natural-agriculture-scheme-announced-in-uttarakhand-budget.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड विधानसभा में वित्त मंत्री <strong>प्रेमचंद अग्रवाल </strong>ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए राज्य सरकार का बजट पेश किया। इस बार बजट व्यय में 15 फीसदी की बढ़ोतरी करते हुए लगभग 89 हजार करोड़ का बजट पेश किया है। इसमें राजस्व व्यय 55815 करोड़ और पूंजीगत व्यय 33414 करोड़ रुपये रहा। बजट को अग्रणी उत्तराखंड की अवधारणा पर आधारित बताते हुए वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि सरकार गरीब, युवा, अन्नदाता और नारीशक्ति को केंद्र में रखकर प्रदेश की समृद्धि सुनिश्चित कर रही है। बजट में किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं।&nbsp;</p>
<p>उत्तराखंड के बजट में कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार <strong>स्टेट मिलेट मिशन</strong> और <strong>मुख्यमंत्री प्राकृतिक कृषि योजना</strong> शुरू करने जा रही है। इनके लिए राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है। मिलेट मिशन के लिए वर्ष 2024-25 में सात करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। मिशन ऐपल के लिए 35 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। किसान पेंशन योजना के लिए आगामी वित्त वर्ष में 46 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि मिशन दालचीनी और मिशन तिमरू के लिए 10 वर्षीय कार्ययोजना तैयार की जा रही है।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना</strong> के तहत इकाई स्थापित करने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में 25 फीसदी अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। इसके लिए 26.77 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए 12 करोड़ रुपये का प्रावधान है। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के लिए 144 करोड़ तथा मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। वाइब्रेंट विलेज योजना के अन्तर्गत पर्यटन विभाग को 25 करोड़ रुपये तथा ग्राम्य विकास विभाग को 29.85 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है।&nbsp;</p>
<p><strong>पलायन</strong> उत्तराखंड में बड़ा मुद्दा है। लेकिन राज्य के बजट में मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना के लिए मात्र 10 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए प्रति गोवंश 30 रुपये की राशि को बढ़ाकर 80 रुपये किया गया है। पशुपालन विभाग के अन्तर्गत गौ संरक्षण को बढ़ावा देने तथा गौ सदनों के संचालन के लिए कुल मिलाकर 37.57 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)</strong> के लिए उत्तराखंड के बजट में लगभग 391 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मिनी स्टेडियम बनाने के लिए 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। ग्रामीण व्यवसाय इनक्यूबेटर के लिए दस करोड़ रुपये का बजट है।</p>
<p>पर्यटन विभाग के अन्तर्गत <strong>वाइब्रेंट विलेज योजना</strong> में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास हेतु 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त ग्राम्य विकास विभाग में भी वाइब्रेंट विलेज योजना के अन्तर्गत 29.85 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड बजट में स्टेट मिलेट मिशन और प्राकृतिक कृषि योजना का ऐलान  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा बजट में कुछ फसल ऋणों पर ब्याज माफी, 21 फल&amp;#45;सब्जियां भावांतर योजना में शामिल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/interest-waiver-on-crop-loans-in-haryana-budget-21-fruits-and-vegetables-included-in-bhavantar-yojana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 23 Feb 2024 17:25:48 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/interest-waiver-on-crop-loans-in-haryana-budget-21-fruits-and-vegetables-included-in-bhavantar-yojana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 1.89 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। अपने बजट भाषण में उन्होंने कहा कि 30 सितम्बर 2023 तक लिए गए फसली ऋण पर 31 मई, 2024 तक मूलधन का भुगतान करने पर ब्याज व जुर्माने की माफी की घोषणा की, बशर्ते किसान &ldquo;मेरी फसल, मेरा ब्यौरा&rdquo; पोर्टल पर पंजीकृत हो। इसका लाभ प्राथमिक कृषि क्रेडिट सोसायटी (<span>PACS) </span>के माध्यम से फसल कर्ज लेने वाले किसानों को मिलेगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा कि उनकी सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए कई कदम उठाए हैं और 14 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिया जा रहा है। किसानों के जोखिम को कम करने के लिए 21 सब्जियों और फलों की फसलों को भावांतर भरपाई योजना में शामिल किया गया है। भावांतर सहायता की 178 करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के खातों में डाली गई। वित्त वर्ष 2023-24 में मुआवजे के रूप में अब तक 297.58 करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के खातों में जमा करवाई गई है।&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार किसानों के योगदान को समझती है और हम हरसंभव तरीके से उनके साथ खड़े होने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अब तक मुआवजे के रूप में 297.58 करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के खातों में जमा की जा चुकी है।&nbsp;2023-24 में कृषि उत्पादन 8.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। पिछले 3 वर्षों में, सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 14 फसलों की खरीद की जिसका भुगतान सीधे किसानों के खातों में हो रहा है। सरकार ने खरीफ और रबी सीजन 2023 में 29,876 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे किसानों के खातों में जमा किया।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में ग्रामीण क्षेत्र के लिए 7,276.77 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव है, जो कि चालू वित्त वर्ष के 6,213.27 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमानों की तुलना में 17.11 प्रतिशत ज्यादा है।</p>
<p>राज्य में 6 स्थानों पर बॉटनिकल गार्डन विकसित करने का प्रस्ताव है और इसके साथ ही तीन नए उत्कृष्टता केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। ड्रोन निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए 10 करोड़ रुपये का स्टार्टअप फंड स्थापित किया जाएगा। राज्य सरकार महिलाओं को कृषि उद्देश्यों के लिए ड्रोन चलाने के लिए प्रशिक्षित भी करेगी। वर्ष 2024-25 के दौरान 500 महिला स्वयं सहायता समूहों की 5000 बहनों को ड्रोन संचालन व रखरखाव के लिए प्रशिक्षित कर उन्हें प्रति समूह एक-एक ड्रोन देने का प्रस्ताव है।&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में 67 प्रतिशत की गिरावट आई है। ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए प्राप्त 27,826 आवेदनों में से 27,740 के लिए डिमांड नोटिस जारी किए जा चुके हैं और कनेक्शन जारी करने का काम जल्द पूरा होने की संभावना है। पीएम कुसुम के तहत राज्य में 67,418 सौर पंप स्थापित किए गये तथा 2024-25 में 70,000 सौर पंप स्थापित करने का लक्ष्य है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/02/image_750x500_65d88796b1a6e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा बजट में कुछ फसल ऋणों पर ब्याज माफी, 21 फल-सब्जियां भावांतर योजना में शामिल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड तक पहुंची किसान आंदोलन की आंच, डोईवाला और रुद्रपुर में विरोध&amp;#45;प्रदर्शन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/impact-of-farmers-movement-in-uttarakhand-protests-in-doiwala-and-rudrapur.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 21 Feb 2024 21:26:21 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/impact-of-farmers-movement-in-uttarakhand-protests-in-doiwala-and-rudrapur.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन का असर उत्तराखंड तक पहुंच गया है। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य समेत कई मांगों को लेकर बुधवार को उत्तराखंड के डोईवाला और रुद्रपुर में किसान संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन किया। रुद्रपुर में किसान ट्रैक्टरों पर सवाल होकर नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और वहां धरने पर बैठ गये। डोईवाला से किसान ट्रैक्टर और जेसीबी लेकर देहरादून के लिए निकले, जिन्हें पुलिस ने रास्ते में रोक लिया।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>तराई किसान संगठन के नेता तजिंदर सिंह विर्क ने रूरल वॉयस से कहा कि किसान अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन सरकार जिस तरह से किसानों के दमन की कार्रवाई कर रही है, <span>वह लोकतंत्र के लिए शर्मसार करने वाला है। </span>संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर उधमसिंह नगर के किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली और डीएम को 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। विर्क ने बताया कि कल 22 फ़रवरी को चंडीगढ़ में संयुक्त किसान मोर्चा की राष्ट्रीय स्तर की अहम बैठक बुलाई गई है जिसमें देश भर के किसान नेता शामिल होंगे और इस बैठक में सरकार के दमन के खिलाफ कई अहम निर्णय लिए जा सकते हैं। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>भारतीय किसान यूनियन के आह्वान पर किसान बाजपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग 74 पर एकत्र हुए और वहां से ट्रैक्टर मार्च निकालते हुए रुद्रपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शनकारी किसानों ने पंजाब और हरियाणा के किसानों के ऊपर पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई।&nbsp;</p>
<p>डोईवाला में सैकड़ों किसानों ने एमएसपी की गारंटी सहित कई मांगों को ट्रैक्टर मार्च निकालकर देहरादून के लिए कूच किया। लेकिन पुलिस ने किसानों को लच्छीवाला टोल प्लाजा पर ही रोक लिया। यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर हजारों किसान फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन और कृषि ऋण सहित विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली कूच का प्रयास कर रहे हैं।</p>
<p>उत्तराखंड में हुए किसानों के विरोध-प्रदर्शन में बाजपुर, जसपुर और काशीपुर के किसान शामिल हुए। उधम सिंह नगर जिले के खटीमा से किसान ट्रैक्टरों से रुद्रपुर के लिए रवाना हुए।&nbsp;किसानों ने मांग की है कि सरकार उनकी मांगों को मानें या फिर उनके दिल्ली जाने के लिए रास्ता खोले।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड तक पहुंची किसान आंदोलन की आंच, डोईवाला और रुद्रपुर में विरोध-प्रदर्शन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तमिलनाडु में अलग कृषि बजट, किसानों को मुफ्त बिजली और गांवों के विकास पर जोर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/seperate-agriculture-budget-in-tamil-nadu-emphasis-on-free-electricity-to-farmers-and-development-of-villages.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 21 Feb 2024 10:57:04 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/seperate-agriculture-budget-in-tamil-nadu-emphasis-on-free-electricity-to-farmers-and-development-of-villages.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>तमिलनाडु के कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम ने मंगलवार को विधानसभा में 2024-25 के लिए अलग कृषि बजट पेश किया। राज्य सरकार ने कृषि और अन्य संबंधित विभागों के लिए 42,281 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। इसमें 10,500 करोड़ रुपये खाद्य सब्सिडी के लिए हैं, वहीं तमिलनाडु सरकार की धान खरीद के लिए प्रोत्साहन के रूप में 500 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे।</p>
<p>कृषि मंत्री पन्नीरसेल्वम ने कहा कि सरकार किसानों को <strong>टैरिफ-मुक्त बिजली</strong> आपूर्ति के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए राज्य डिस्कॉम तमिलनाडु जेनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन (TANGEDCO) को 7,280 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा। कृषि मंत्री ने कहा, "द्रमुक सरकार के सत्ता में आने के बाद से किसानों को लगभग 1.50 लाख बिजली कनेक्शन दिए गए हैं, 50 हजार कनेक्शन और दिए जा रहे हैं।"&nbsp;</p>
<p>2024-2025 के लिए <strong>फसल ऋण</strong> वितरण का लक्ष्य 16,500 करोड़ रुपये तय किया गया है। दक्षिणी जिलों में प्राकृतिक आपदाओं के कारण उपज के नुकसान के लिए 2.74 लाख किसानों को 208.20 करोड़ रुपये की इनपुट सब्सिडी शीघ्र ही वितरित की जाएगी। जिन किसान जिन्होंने 2023-2024 पेराई सत्र के लिए चीनी मिलों को गन्ने की आपूर्ति की है, उन्हें केंद्र द्वारा घोषित <strong>एफआरपी</strong>&nbsp;के अलावा 215 रुपये प्रति मीट्रिक टन का पहली बार <strong>विशेष प्रोत्साहन</strong> (एसआई) का भुगतान किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देने और मिट्टी की उर्वरता सुधारने के लिए <strong>मुख्यमंत्री मन्नुयिर काथु मन्नुयिर कप्पोम योजना</strong> (सीएम एमके एमकेएस) शुरू करने का ऐलान किया गया। इसके लिए 206 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना के तहत हरी खाद और वर्मीकंपोस्ट के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही नीम जैसे पेड़ उगाने का अभियान छेड़ा जाएगा। तमिलनाडु सरकार औषधीय गुणों वाली <strong>पारंपरिक धान</strong> की खेती को भी बढ़ावा देगी। <strong>नेल जयारमन मिशन</strong> के तहत पारंपरिक धान की किस्मों के बीज किसानों को वितरित किए जाएंगे।&nbsp;</p>
<p>जलवायु परिवर्तन के संकट का सामना करने के लिए सरकार <strong>जलवायु स्मार्ट गांव</strong> विकसित करेगी। राज्य के 15,280 राजस्व गांवों में <strong>एक गांव-एक फसल </strong>योजना शुरू की जाएगी। इसके तहत राज्य सरकार हर गांव में किसी एक फसल पर विशेष ध्यान देगी। <strong>कलैगनारिन ऑल विलेज इंटीग्रेटेड एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट प्रोग्राम</strong> के तहत हर गांव को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए परती भूमि को खेती योग्य भूमि में परिवर्तित किया जाएगा। 2024-2025 में यह योजना 2,<span>482 चयनित ग्राम पंचायतों में 200 करोड़ रुपये के बजट से लागू की जाएगी।</span></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ तमिलनाडु में अलग कृषि बजट, किसानों को मुफ्त बिजली और गांवों के विकास पर जोर ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हिमाचल बजट में दूध का एमएसपी और मनरेगा मजदूरी बढ़ाने का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/himachal-cm-announced-hike-in-msp-of-milk-and-mnrega-wages-in-the-budget.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 17 Feb 2024 19:28:26 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/himachal-cm-announced-hike-in-msp-of-milk-and-mnrega-wages-in-the-budget.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को वित्त वर्ष 2024-24 का बजट पेश करते हुए कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास पर जोर दिया। कुल 58,444 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट में मुख्यमंत्री ने दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 8 रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। साथ ही मनरेगा की दैनिक मजदूरी भी बढ़ाई है।&nbsp;</p>
<p><strong>दूध का एमएसपी</strong> तय करने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने गाय के दूध का एमएसपी 38 रुपये से बढ़ाकर <strong>45 रुपये</strong> प्रति लीटर और भैंस के दूध का एमएसपी 47 रुपये से बढ़ाकर <strong>55 रुपये</strong> प्रति लीटर करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सभी दुग्ध सहकारी समितियों की देनदारियां माफ कर दी जाएंगी और दूध खरीद व प्रसंस्करण के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर 150 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।</p>
<p>मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि हम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए संकल्पित हैं। किसानों और पशुपालकों को समृद्ध बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। सरकार की ओर से गोवंश के लिए <strong>1200 रुपये प्रति गोवंश</strong> अनुदान दिया जाएगा। <strong>भेड़ बकरी पालक प्रोत्साहन</strong> योजना के तहत 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बजट में मुख्यमंत्री ने <strong>मनरेगा</strong> मजदूरों की दैनिक मजदूरी 60 रुपये बढ़ाकर 240 से 300 रुपये प्रतिदिन करने की घोषणा की।</p>
<ul>
<li><strong>प्राकृतिक खेती</strong> पर बढ़ावा देने के लिए हिमाचल सरकार <strong>राजीव गांधी प्राकृतिक खेती योजना</strong> शुरू करेगी। इसके तहत प्रत्येक पंचायत के 10 किसानों और पूरे प्रदेश से 36,000 किसानों को प्राकृतिक खेती में प्रशिक्षित किया जाएगा।&nbsp;</li>
<li><strong>सेब पैकेजिंग</strong> के लिए यूनिवर्सल कार्टन पेश किए जाएंगे और <strong>बागवानी पर्यटन</strong> को प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने 2026 तक हिमाचल प्रदेश को <strong>ग्रीन स्टेट</strong> बनाने के संकल्प को दोहराया।</li>
<li>हिमाचल सरकार ने <strong>पंचायतों</strong> और <strong>शहरी निकायों</strong> के जन प्रतनिधियों के <strong>मानदेय</strong> में बढ़ोतरी की है। अब हिमाचल में ग्राम प्रधान का मानदेय 7200 रुपये तथा <span>जिला परिषद अध्यक्ष व नगर निगम के महापौर का मानदेय 24</span>,<span>000 रुपये प्रतिमाह होगा। </span></li>
<li>राज्य में <strong>आंगनवाड़ी</strong> कार्यकर्ताओं का मानदेय 500 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 10,<span>000 रुपये</span>,<span> आशा कार्यकर्ता का मनदेय 300 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 5500 रुपये और मिड-डे मील वर्क्स का मानदेय 500 रुपये बढ़ाकर 4500 रुपये प्रतिमाह किया गया है।</span><span></span></li>
</ul>
<p>सीएम सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार स्टार्टअप को बढ़ावा देने, खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के अलावा हिमाचल प्रदेश को फिल्म निर्माताओं के लिए एक प्रमुख गंतव्य बनाने और अवैध खनन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए नई नीतियां पेश करेगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हिमाचल बजट में दूध का एमएसपी और मनरेगा मजदूरी बढ़ाने का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कर्नाटक बजट में सहकारी बैंकों के ओवरड्यू लोन पर ब्याज माफी का ऐलान, कृषि से जुड़ी कई घोषणाएं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/interest-waiver-on-overdue-loans-of-cooperative-banks-in-karnataka-budget-many-announcements-on-agriculture.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 16 Feb 2024 19:27:13 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/interest-waiver-on-overdue-loans-of-cooperative-banks-in-karnataka-budget-many-announcements-on-agriculture.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को वित्त मंत्री के रूप में अपना रिकॉर्ड 15वां और वर्तमान कांग्रेस सरकार का दूसरा बजट पेश किया। कर्नाटक विधानसभा में बजट पेश करते हुए उन्होंने 'विकास के कर्नाटक मॉडल' पर जोर दिया और कृषि क्षेत्र के लिए कई बड़ी घोषणाएं कीं। &nbsp;</p>
<p>कर्नाटक सरकार ने <strong>जिला सहकारी सेंट्रल </strong>(डीसीसी) तथा <strong>प्राथमिक सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास</strong> (पीआईसीएआरडी) बैंकों के मध्यम और दीर्घकालिक ओवरड्यू लोन पर ब्याज माफ करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दावा किया है कि इससे 57 हजार किसानों को राहत मिलेगी। सरकार इस योजना के तहत बैंकों को मुआवजे के रूप में 450 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस फैसले से इन बैंकों की वित्तीय स्थिति में सुधार आएगा।&nbsp;</p>
<p><strong>कृषि से जुड़ी प्रमुख घोषणाएं&nbsp;</strong></p>
<p>सिद्धारमैया ने कहा कि 2023-24 में ब्याज मुक्त अल्पावधि ऋण की सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर <strong>5 लाख</strong> रुपये करने का निर्णय लिया गय। इसी तरह, तीन फीसदी की रियायती ब्याज दर मिलने वाले मध्यम और दीर्घकालिक ऋण की लिमिट को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर <strong>15 लाख</strong> रुपये कर दिया है। इंटीग्रेटेड फार्मिंग को बढ़ावा देने और किसानों को कृषि संबंधी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए <strong>कर्नाटक रैयत समृद्धि योजना</strong> शुरू करने का ऐलान किया गया है। विभिन्न विभागों की कृषि से जुड़ी नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में <strong>कृषि विकास प्राधिकरण</strong> का गठन किया जाएगा। किसानों को एक ही छत के नीचे बागवानी संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन, बाजार कनेक्टिविटी और कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के लिए कई जिलों में <strong>किसान मॉल</strong> खोले जाएंगे।</p>
<p>राज्य के सूखा प्रभावित और वर्षा आधारित क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए पांच साल में 5,000 तालाब बनाए जाएंगे। कृषि और बागवानी उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए <strong>सार्वजनिक-निजी भागीदारी</strong> के तहत हवाई अड्डों के नजदीक फूड पार्क स्थापित किए जाएंगे। ये फूड पार्क शिवमोगा जिले के सोगने, विजयपुरा जिले के इट्टांगीहाला और बेंगलुरु ग्रामीण जिले के पुजेनहल्ली गांव में स्थापित किए जाएंगे।</p>
<p>फूलों की बिक्री और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत बेंगलुरु में अंतरराष्ट्रीय <strong>फ्लोरीकल्चर मार्केट</strong> विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मसालों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत चिक्कमगलुरु जिले में एक <strong>स्पाइस पार्क</strong> विकसित किया जाएगा। एक नया कार्यक्रम <strong>नम्मा मिलेट</strong> शुरू किया जाएगा, जिसके तहत प्रसंस्कृत बाजरा और मूल्यवर्धित बाजरा सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराया जाएगा।</p>
<p>कर्नाटक सरकार ने प्रदेश के <strong>36 लाख</strong> से अधिक किसानों को <strong>27,000 करोड़</strong> रुपये का रिकॉर्ड फसल ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि महिलाओं के बीच डेयरी फार्मिंग को प्रोत्साहित करने के लिए गाय/भैंस खरीदने के लिए कर्ज पर <strong>6 प्रतिशत</strong> ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी। घुमंतू चरवाहों और उनकी संपत्तियों पर अत्याचार की रोकथाम के लिए एक अधिनियम बनाया जाएगा।&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; &nbsp;</p>
<p><strong>स्वामीनाथन फार्मूले के आधार पर एमएसपी की मांग&nbsp;</strong></p>
<p>बजट भाषण में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कृषि के क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न से सम्मानित करने के केंद्र सरकार के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि इसी भावना के तहत हम केंद्र सरकार से स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू कर खेती की लागत पर 50 प्रतिशत लाभ के फॉर्मूले के आधार पर एमएसपी देने का अनुरोध करेंगे।&nbsp;कर्नाटक सरकार केंद्र से सुपारी, प्याज, अंगूर, आम, केला और अन्य बागवानी फसलों के लिए स्वामीनाथन फार्मूले के आधार पर एमएसपी तय करने की मांग करेगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कर्नाटक बजट में सहकारी बैंकों के ओवरड्यू लोन पर ब्याज माफी का ऐलान, कृषि से जुड़ी कई घोषणाएं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किन्नू सड़कों पर फिंकने की नौबत, किसानों ने उपज पर चलाया ट्रैक्टर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-threw-kinnow-on-the-roads-drove-the-tractor-after-throwing-the-produce.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 10 Feb 2024 17:51:00 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-threw-kinnow-on-the-roads-drove-the-tractor-after-throwing-the-produce.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किन्नू के लिए मशहूर पंजाब के अबोहर क्षेत्र के किसान इस साल फल का सही भाव ना मिलने से परेशान हैं। इसे लेकर फाजिल्&zwj;का में किसानों ने डीसी ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया और किन्नू से भरी ट्रॉलियां उलटकर रोष जताया। इस दौरान किसानों ने किन्नू सड़क पर फेंककर उसके ऊपर ट्रैक्टर चढ़ा दिया। &nbsp;</p>
<p>शुक्रवार दोपहर को अबोहर के कई बागवान किसान संगठनों के साथ डीसी कार्यालय पर विरोध करने निकले थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में बैरिकेट्स लगाकर रोक लिया। किसान डीसी कार्यालय जाकर बातचीत करने पर अड़े रहे और धरने पर बैठ गये। देर शाम किसान डीसी कार्यालय के बाहर पहुंचे और किन्नू से भरी ट्रॉलियां पलटते हुए ट्रैक्टर चला दिया। इस विरोध-प्रदर्शन में भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धपुर और भारती किसान यूनियन राजेवाल से जुड़े किसान शामिल थे।&nbsp;</p>
<p>अबोहर क्षेत्र में किन्नू का भाव मुश्किल से 7-8 रुपये किलो मिल रहा है क्योंकि पर्याप्त मात्रा में किन्नू की खरीद नहीं हो पा रही है। यह पिछले साल के 20-25 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में आधा भी नहीं है। किसानों की मांग है कि कम से कम 12 रुपये के भाव पर किन्नू की खरीद होनी चाहिए। सही भाव ना मिलने किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। किसान यूनियनों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गई तो मंगलवार को 200 ट्रॉलियां लाकर डीसी कार्यालय के सामने प्रदर्शन करेंगे। &nbsp;</p>
<p>इस साल पंजाब में किन्नू की बंपर पैदावार हुई है। लेकिन उपज का सही दाम और खरीदार नहीं मिलने से किसान निराश हैं। अबोहर के पंजावा गांव के किसान सतनाम सिंह ने अपना 10 एकड़ का बाग उखाड़ दिया था। किसान किन्नू का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की मांग भी कर रहे हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किन्नू सड़कों पर फिंकने की नौबत, किसानों ने उपज पर चलाया ट्रैक्टर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान में पीएम&amp;#45;किसान की राशि बढ़कर 8 हजार रुपये, गेहूं पर 125 रुपये बोनस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/pm-kisan-amount-increased-to-rs-8-thousand-in-rajasthan-bonus-of-rs-125-on-wheat.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 09 Feb 2024 17:41:09 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/pm-kisan-amount-increased-to-rs-8-thousand-in-rajasthan-bonus-of-rs-125-on-wheat.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को पेश हुए अंतरिम बजट में किसानों के लिए कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं। राज्य की उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री <strong>दीया कुमारी</strong> ने वर्ष 2024-25 का अंतरिम पेश करते हुए जवान, किसान और महिला उत्थान पर विशेष ध्यान देने की बात कही।</p>
<p>राजस्थान सरकार ने <strong>पीएम-किसान</strong> सम्मान निधि&nbsp;<span>योजना की राशि को सालाना 6 हजार रुपये से बढ़ाकर 8 हजार रुपये कर दिया है। पीएम-किसान की धनराशि में 2000 रुपये की बढ़ोतरी के लिए 1400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। </span>साथ ही गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,275 रुपये प्रति क्विंटल पर 125 रुपये बोनस देने का ऐलान किया है। इस पर 250 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।&nbsp;</p>
<p>राजस्थान की भजनलाल सरकार ने अपना पहला लेखानुदान पेश करते हुए कृषि क्षेत्र के लिए 2000 करोड़ रुपये का <strong>राजस्थान एग्रीकल्चर इन्फ्रा मिशन</strong> का ऐलान किया है। इसके अंतर्गत 20 हजार फ्रॉम पोंड्स, 10 हजार किमी सिंचाई पाइपलाइन, 50 हजार किसानों के लिए तारबंदी जैसे कार्य कराए जाएंगे तथा ड्रोन जैसी नई तकनीक भी उपलब्ध कराई जाएगी।&nbsp;</p>
<p>सरकार निम्न आय वर्ग, लघु, <span>सीमांत</span>, <span>बटाईदार </span>किसानों और खेत मजदूरों के परिवार के छात्र-छात्राओं के लिए "केजी से पीजी" (किंडरगार्टन से पोस्ट ग्रेजुएशन) तक <strong>मुफ्त शिक्षा</strong> प्रदान करेगी। <span>कृषकों और आमजन को राहत देते हुए चीनी और गुड़ पर <strong>मंडी टैक्स</strong> भी समाप्त किया गया है। इसके लिए कृषि विपणन विभाग की तरफ से आदेश जारी किए जाएंगे। आगामी वर्षों में 25 लाख ग्रामीण घरों में नल से जल उपलब्ध कराया जाएगा। इस पर लगभग 15 हजार करोड़ रुपये व्यय किया जाना प्रस्तावित है।&nbsp;</span></p>
<p>कृषि के साथ डेयरी पर निर्भर परिवारों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर <strong>गोपाल क्रेडिट योजना</strong> शुरू की जाएगी। इसके लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है जिसके तहत पहले चरण में 5 लाख गोपालक परिवारों को एक लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश में मिलेट्स के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार <span>12 लाख किसानों को मक्का, 8 लाख को बाजरा, </span><span>7 लाख किसानों को सरसों और 4 लाख को मूंग के बीज उपलब्ध कराएगी। </span></p>
<p>वित्त चर्ष 2024-25 के पहले चार महीनों के लिए <strong>1.75 लाख</strong> करोड़ रुपये के व्यय वाला अंतरिम बजट राज्य विधानसभा द्वारा पारित किया गया है। दो दशकों में यह पहला मौका है जब किसी पूर्णकालिक वित्त मंत्री ने बजट पेश किया है। अपने भाषण के दौरान, कुमारी ने पिछली कांग्रेस सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन, दूरदर्शिता की कमी, भ्रष्टाचार और गलत नीतियों का आरोप लगाया।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान में पीएम-किसान की राशि बढ़कर 8 हजार रुपये, गेहूं पर 125 रुपये बोनस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तीन केंद्रीय मंत्रियों की चंडीगढ़ में किसान नेताओं से मीटिंग, दिल्ली कूच पर अडिग किसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/meeting-of-three-union-ministers-with-farmer-leaders-in-chandigarh-farmers-adamant-on-march-to-delhi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 09 Feb 2024 11:38:24 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/meeting-of-three-union-ministers-with-farmer-leaders-in-chandigarh-farmers-adamant-on-march-to-delhi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसान संगठनों की 13 फरवरी को दिल्ली कूच की तैयारियों को देखते हुए केंद्र सरकार हरकत में आ गई है। गुरुवार को दिल्ली से तीन केंद्रीय मंत्री <strong>पीयूष गोयल, </strong><span><strong>अर्जुन मुंडा</strong> और <strong>नित्यानंद राय</strong> किसान नेताओं से मुलाकात करने चंडीगढ़ पहुंचे। इस बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> भी मौजूद थे। इस दौरान किसानों की मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। लेकिन किसान संगठन 13 फरवरी को दिल्ली कूच के कार्यक्रम पर अडिग हैं। </span></p>
<p>बैठक के बाद किसान नेता <strong>जगजीत सिंह डल्लेवाल</strong> ने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक बहुत पॉजिटिव माहौल में हुई। हमने एमएसपी गारंटी के कानून समेत सभी मांगों को पूरे तथ्यों के साथ सामने रखा।&nbsp;जिस पर केंद्रीय मंत्रियों ने गंभीरता से विचार करने और जल्द ही दोबारा बैठक कर हल निकालने का विश्वास दिलाया है। अगर सरकार 13 फरवरी से पहले बैठक करके हमारे मुद्दों का समाधान करती है, तो ठीक है। अन्यथा, हमारा 13 फरवरी का कार्यक्रम अभी भी कायम है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता <strong>सरवन सिंह पंधेर</strong> ने कहा कि 13 फरवरी का दिल्ली आंदोलन जारी रहेगा। देश भर से किसान दिल्ली आएंगे। केंद्रीय मंत्रियों से अच्छी वार्ता हुई। लेकिन हरियाणा में जिस तरह के आदेश जारी हो रहे हैं कि ट्रैक्टरों में डीजल नहीं डलने देंगे, <span>ट्रैक्टरों को सड़कों पर नहीं उतरने देंगे,&nbsp;</span><span>वह ठीक नहीं है। किसानों को शांतिपूर्ण आंदोलन करने का हक है। अगर सरकार वार्ता जारी रखना चाहती है तो हमारे दरवाजे हमेशा खुले हैं। </span>अगर प्रधानमंत्री चाहें तो एमएसपी की गारंटी पर कानून अभी बनाया जा सकता है क्योंकि संसद सत्र चल रहा है। यह इच्छा शक्ति की बात है।&nbsp;</p>
<p>पंजाब के मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> का कहना है कि केंद्रीय मंत्री और किसान नेता पहले दौर की मीटिंग के दौरान कई बातों पर सहमत हुए हैं। इनमें पिछले आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज केस वापस लेना और नकली बीजों और रसायनों के लिए सख्त सजा शामिल है। मान ने कहा कि पंजाब का सीएम होने के नाते किसानों का पक्ष रखना उनकी जिम्मेदारी है। वह नहीं चाहते कि मांगें मनवाने के लिए फिर से किसानों को ट्रैक्टर लेकर जाना पड़े, बैरिकेड्स और वाटर कैनन का सामना करना पड़े।&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>संयुक्त किसान मोर्चा (अराजनीतिक)</strong> और <strong>किसान मजदूर मोर्चा (केएमएस)</strong> के बैनर तले किसानों के कई संगठनों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सहित कई मांगों को लेकर 13 फरवरी को 'दिल्ली कूच' का ऐलान किया है। इनमें स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने<span>, </span>किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन व कर्ज माफी<span>, किसान आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमें वापस लेने, </span>लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने और आशीष मिश्रा की जमानत रद्द कर सभी दोषियों को सजा की मांग शामिल हैं।</p>
<p>हालांकि, 13 फरवरी के दिल्ली कूच को<strong> संयुक्त किसान मोर्चा</strong> का समर्थन नहीं है, लेकिन पिछले कई हफ्तों से दिल्ली कूच की तैयारियां जोरों से चल रही हैं। यही वजह है कि केंद्र सरकार के तीन मंत्रियों को किसान नेताओं से वार्ता करने चंडीगढ़ जाना पड़ा। दूसरी तरफ हरियाणा पुलिस किसानों को दिल्ली मार्च करने से रोकने में जुट गई है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ तीन केंद्रीय मंत्रियों की चंडीगढ़ में किसान नेताओं से मीटिंग, दिल्ली कूच पर अडिग किसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नोएडा के किसान संगठनों का आज दिल्ली कूच, धारा 144 लागू, भीषण जाम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/noida-farmer-organizations-delhi-march-today-section-144-imposed-border-sealed.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 08 Feb 2024 12:16:56 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/noida-farmer-organizations-delhi-march-today-section-144-imposed-border-sealed.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भूमि अधिग्रहण और मुआवजे संबंधी मांगों को लेकर नोएडा के किसान संगठनों ने आज दिल्ली कूच का ऐलान किया है। आज दोपहर किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ दिल्ली के लिए रवाना होंगे। किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए नोएडा में धारा 144 लागू कर दी गई है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गये हैं। कई रास्तों पर नो-एंट्री और रूट डाइवर्जन की ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की गई है। आज सुबह से ही नोएडा और गाजियाबाद से दिल्ली जाने वाली सड़कों पर भारी जाम लगा हुआ है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली कूच के ऐलान को देखते हुए आज सुबह से ही पुलिस ने किसान नेताओं को रोकना शुरू कर दिया है। कई किसान नेताओं को उनके घर से ही नहीं निकलने दिया। किसानों को किसी भी जगह इकट्ठा होने से रोका जा रहा है। इसे लेकर कई जगह किसानों और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई। नोएडा में जगह-जगह भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है।&nbsp;</p>
<p>नोएडा में अलग-अलग मांगों को लेकर किसानों के कई धरने चल रहे हैं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बाहर अखिल भारतीय किसान सभा का धरना जारी है जबकि एनटीपीसी मुख्यालय और नोएडा प्राधिकरण के ऑफिस पर भारतीय किसान परिषद के नेतृत्व में किसान धरने पर बैठे हैं। किसानों की आज दोपहर 12 बजे महामाया फ्लाईओवर पर इकट्ठा होकर चिल्ला बॉर्डर के रास्ते दिल्ली की ओर बढ़ने की तैयारी है। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>नोएडा के डीआइजी, अपर. सीपी (एल एंड ओ) <strong>शिवहरि मीणा</strong> ने कहा, &ldquo;धारा 144 लागू कर दी गई है और सभी सीमाओं को 24 घंटे के लिए सील कर दिया गया है। किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया गया है। लोगों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए व्यवस्था की गई है। हम किसानों से बातचीत कर रहे हैं...सभी वाहनों की जांच की जा रही है।&rdquo;</p>
<p><strong>क्या हैं किसानों के मुद्दे?</strong>&nbsp;</p>
<p>नोएडा और ग्रेटर नोएडा के किसान अधिग्रहीत भूमि के बदले बढ़े हुए मुआवजे और 10 फीसदी आवासीय भूखंडों की मांग के अलावा लीजबैक मामलों के निस्तारण, युवाओं को स्थानीय कंपनियों में नौकरी, भूमिहीन किसानों को 40 मीटर के प्लॉट और और क्योस्क में स्थानीय महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना सहित कई मांगों को लेकर कई महीनों से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन में करीब <strong>160 गांवों</strong> के किसान शामिल हैं और बड़ी संख्या में महिलाएं भी हिस्सा ले रहीं हैं। प्रशासन के साथ कई दौर की वार्ता के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला तो किसान संगठनों ने गुरुवार को दिल्ली कूच कर संसद मार्च का ऐलान किया है।</p>
<p>भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष <strong>सुखबीर खलीफा</strong> का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर हमने हर स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। अब किसान अधिकारियों के बहकावे में नहीं आएंगे। जिनकी जमीन पर शहर बसा हुआ है। उन्हीं को ही नजर अंदाज किया जा रहा है। किसान ऐसे अधिकारियों की वजह से दिल्ली जाकर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हैं। किसान सभा के जिला अध्यक्ष <strong>रूपेश वर्मा</strong> ने कहा कि किसानों की समस्या हल करने के बजाय पुलिस गांवों में जाकर किसानों को धरने में आने से रोक रही है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नोएडा के किसान संगठनों का आज दिल्ली कूच, धारा 144 लागू, भीषण जाम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी  के बजट में 5.1 फीसदी कृषि विकास दर का लक्ष्य, चार नई योजनाओं का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/target-of-5.1-percent-agricultural-growth-rate-in-up-budget-announcement-of-four-new-schemes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 05 Feb 2024 14:45:54 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/target-of-5.1-percent-agricultural-growth-rate-in-up-budget-announcement-of-four-new-schemes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री <strong>सुरेश कुमार खन्ना</strong> ने आज योगी आदित्यनाथ सरकार का 8वां बजट पेश किया। वित्त वर्ष 2024-25 <span>के लिए कुल <strong>7.36 लाख</strong> करोड़ रुपये का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य में कृषि क्षेत्र के लिए 5.1 प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य रखा गया है। कृषि से जुड़ी तीन नई योजनाओं के लिए 460 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना भी शुरू करने का प्रस्ताव है।&nbsp;</span></p>
<p>यूपी के बजट में किसानों के <strong>निजी नलकूपों</strong> को रियायती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए <strong>2400 करोड़</strong> रुपये के खर्च की व्यवस्था की गई है। यह राशि चालू वित्तीय वर्ष में उपलब्ध कराए गए बजट से 25 प्रतिशत अधिक है। <strong>पीएम कुसुम योजना </strong>के लिए लगभग 450 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है जो चालू वित्त वर्ष के आवंटन से दोगुने से भी अधिक है। नहरों और सरकारी नलकूपों से किसानों को मुफ्त सिंचाई की सुविधा हेतु 1100 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि <strong>डार्क जोन</strong> में नए निजी नलकूप कनेक्शन देने पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया गया है जिससे लगभग एक लाख किसानों को फायदा हुआ। डार्क जोन के असफल 569 नलकूपों के लिये 70 करोड़ रुपये का बजट दिया है।</p>
<p>कृषि को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार <strong>तीन नई योजनाएं</strong> शुरू करने करने जा रही हैं। इनमें <strong>राज्य कृषि विकास योजना</strong> और विश्व बैंक समर्थित <strong>यूपी एग्रीस योजना</strong> के लिए 200-200 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। ब्लॉकों और पंचायतों में <strong>ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन</strong> &ndash; <span>ऑटोमैटिक रेन गेज लगाने के लिए 60 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। </span>किसानों के खेतों की सुरक्षा के लिए सरकार एक नई योजना शुरू करने जा रही है। <strong>मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना</strong> के लिए 50 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। <strong>महिला किसान सशक्तिकरण </strong>परियोजना के तहत वर्ष 2024-2025 में 200 उत्पादक समूहों का गठन कर तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>वित्त मंत्री <strong>सुरेश कुमार खन्ना</strong> ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश हर क्षेत्र में नई ऊंचाईयों को छू रहा है। हमने उत्तर प्रदेश के <strong>बीमारू</strong> प्रदेश होने के नैरेटिव को सिरे से खारिज कर दिया है। बजट को उन्होंने विशेष रूप से युवा, <span>महिला</span>, <span>किसान और गरीबों के उत्थान को समर्पित बताया। उन्होंने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 7.36 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जो चालू वित्त वर्ष के 6.90 लाख करोड़ रुपये से करीब 6.70 फीसदी अधिक है।</span></p>
<p>बजट में <strong>इंफ्रास्ट्रक्चर</strong> के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री <strong>योगी आदित्यनाथ</strong> ने कहा कि यह बजट लोक मंगल की अवधारणा के साथ प्रभु श्रीराम को समर्पित है। हमने बिना कोई अतिरिक्त कर लगाए प्रदेश के राजस्व को बढ़ाया है। पहली बार पूंजीगत व्यय के लिए <strong>2.03 लाख करोड़</strong> रुपये से अधिक की धनराशि का प्रावधान किया गया है। बजट में करीब 25 हजार करोड़ रुपये की <strong>नई योजनाएं</strong> शामिल हैं।</p>
<p><span>बजट में </span>कुशीनगर में<strong> महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय</strong> की स्थापना के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। जनपद गोरखपुर एवं भदोही में <strong>पशुचिकित्सा महाविद्यालयों</strong> की स्थापना के लिए भी 100 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। जनपद मथुरा में 30 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के <strong>नवीन डेरी प्लान्ट</strong> के निर्माण हेतु 23 करोड़ रूपये के बजट रखा है। <strong>पशुरोग नियंत्रण</strong> योजना हेतु लगभग 196 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे जो वर्तमान वर्ष की तुलना में 68 प्रतिशत अधिक है। <strong>फूड प्रोसेसिंग</strong> को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति, 2022 के अन्तर्गत वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए 300 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है।&nbsp;</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी  के बजट में 5.1 फीसदी कृषि विकास दर का लक्ष्य, चार नई योजनाओं का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छत्तीसगढ़ में धान खरीद 1 मार्च तक बढ़ाने और 3100 रुपये का भाव देने की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/demand-to-extend-paddy-purchase-in-chhattisgarh-till-march-1-and-give-a-price-of-rs-3100.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 25 Jan 2024 11:39:22 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/demand-to-extend-paddy-purchase-in-chhattisgarh-till-march-1-and-give-a-price-of-rs-3100.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>खरीफ सीजन 2023-24 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीद में अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ में लाखों किसान अब तक अपना धान नहीं बेच पाए। विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य में धान खरीद अभियान को एक मार्च तक बढ़ाने की मांग की है। एक नवंबर को शुरू हुई धान की खरीद 31 जनवरी को पूरी होने वाली है।</p>
<p><strong>छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस</strong> के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद <strong>दीपक बैज</strong> ने कहा कि धान खरीद अभियान को 1 मार्च तक बढ़ाया जाना चाहिए ताकि किसान अपनी उपज बेच सकें। बैज का कहना है कि चुनाव के चलते बहुत-से किसानों ने धान नहीं बेचा था। अभी भी 5 लाख से ज्यादा किसानों का धान बेचना बाकी है। एक नवंबर से जारी धान खरीद अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में 23 लाख किसानों से लगभग 130 लाख टन धान की खरीद हो चुकी है।&nbsp;</p>
<p>दिसंबर में नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने प्रति एकड़ <strong>21 क्विंटल</strong> धान खरीदने का आदेश दिया था। लेकिन इससे पहले बड़ी संख्या में किसान पिछली सरकार द्वारा निर्धारित प्रति एकड़ 20 क्विंटल के हिसाब से धान बेच चुके थे। ऐसे किसानों को अतिरिक्त एक क्विंटल धान बेचना बाकी है।</p>
<p>छत्तीसगढ़ में पिछली कांग्रेस सरकार ने खरीफ सीजन 2023-24 में <strong>135 लाख</strong> मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा था। प्रति एकड़ 21 क्विंटल खरीद के फैसले के बाद खरीद लक्ष्य भी बढ़ जाएगा। बैज ने कहा कि राज्य में कम से कम <strong>150 लाख</strong> मीट्रिक टन धान की खरीद होनी चाहिए।</p>
<p>प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने धान खरीद केंद्रों पर कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए दावा किया कि किसानों को टोकन जारी करने और उपज की तौल की प्रक्रिया धीमी हो गई है। भाजपा ने किसानों को धान का भाव 3,100 रुपये प्रति क्विंटल देने का वादा किया था। लेकिन किसानों को अभी तक यह भाव नहीं मिला है। धान की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा रही है जो कि सामान्य ग्रेड धान के लिए 2,183 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड ए धान के लिए 2,203 रुपये है। कांग्रेस ने किसानों को धान का भाव 3,100 रुपये प्रति क्विंटल दिए जाने की मांग की है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65b1fb55916db.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ छत्तीसगढ़ में धान खरीद 1 मार्च तक बढ़ाने और 3100 रुपये का भाव देने की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65b1fb55916db.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी सरकार ने गन्ने का भाव 20 रुपये बढ़ाया, किसानों को थी ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-government-increased-the-price-of-sugarcane-by-rs-20-farmers-were-expecting-a-higher-increase..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 18 Jan 2024 12:43:25 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-government-increased-the-price-of-sugarcane-by-rs-20-farmers-were-expecting-a-higher-increase..html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>लंबे इंतजार के बाद आखिरकार उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्य में 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में चालू पेराई सत्र 2023-24 के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 20 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने का निर्णय लिया गया। हालांकि, किसानों को चुनावी साल में गन्ना मूल्य अधिक बढ़ने की उम्मीद थी। क्योंकि इस साल गन्ना उत्पादन में कमी के चलते चीनी उत्पादन में गिरावट का अनुमान है और चीनी मिलें एथेनॉल के जरिए भी कमाई कर रही हैं।&nbsp;</p>
<p>मंत्रिमंडल के निर्णय की जानकारी देते हुए गन्ना मंत्री<strong> लक्ष्मी नारायण चौधरी</strong> ने बताया कि अगैती प्रजातियों के गन्ना का मूल्य गत वर्ष के 350 रुपये क्विंटल से बढ़कर 370 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार सामान्य प्रजाति के लिए गत वर्ष के 340 रुपये प्रति क्विंटल के मूल्य को बढ़ाकर 360 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य तय किया गया है। अनुपयुक्त प्रजाति के लिए गन्ना मूल्य गत वर्ष 335 रुपये प्रति क्विंटल था, जिसे बढ़ाकर 355 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। गन्ना मंत्री चौधरी ने बताया कि चीनी मिलों के वाह्य क्रय केंद्र से गन्ने का परिवहन मिल गेट तक कराए जाने में होने वाली ढुलाई कटौती की दर 45 पैसे प्रति क्विंटल प्रति किलोमीटर अधिकतम 9 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है। गन्ना समितियों एवं गन्ना विकास परिषदों को देय अंशदान की दर 5.50 रुपये प्रति क्विंटल रखी गई है।</p>
<p>पड़ोसी राज्य हरियाणा में गन्ना मूल्य 386 रुपये और पंजाब में 391 रुपये प्रति क्विंटल घोषित हुआ है। <span>इसके पहले 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी सरकार ने 2021 में गन्ना मूल्य में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी। योगी सरकार के पिछले सात वर्षों के कार्यकाल में गन्ने का भाव तीसरी बार बढ़ाया गया है। वर्ष 2017 में&nbsp; योगी सरकार जब पहली बार सत्ता में आई थी तो गन्ना मूल्य में 10 रुपये/क्विंटल की वृद्धि हुई थी।</span></p>
<p><strong>7 वर्षों में 55 रुपये बढ़ा दाम</strong></p>
<p><span>इस प्रकार सात वर्षों में यूपी में गन्ना मूल्य कुल मिलाकर 55 रुपये बढ़ा है। इस साल राज्य के किसान कम से कम 400 रुपये क्विंटल गन्ना भाव की मांग कर रहे थे। गन्ने की बढ़ी मांग के चलते पश्चिमी यूपी में गुड़ और खांडसारी इकाइयां किसानों को 375-400 रुपये तक भाव देने लगी थी, जिसे देखते हुए गन्ने के एसएपी में बंपर बढ़ोतरी की उम्मीद थी। </span><span>अक्टूबर में शुरू हुए पेराई सत्र में गन्ना मूल्य की घोषणा में देरी को लेकर विपक्षी दल और किसान संगठन भाजपा सरकार पर निशाना साध रहे थे।&nbsp;</span></p>
<p><strong>राकेश टिकैत ने बढ़ोतरी को बताया नाकाफी </strong></p>
<p>भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने गन्ना मूल्य में 20 रुपये की बढ़ोतरी को नाकाफी बताते हुए कहा कि खेती महंगी हो रही है इतनी बढ़ोतरी से क्या होगा। कृषि यंत्रों, कीटनाशक, जुताई, डीजल समेत अन्य चीजों के दाम बढ़े हैं।&nbsp;उन्होंने कहा कि सरकार ने 20 रुपये बढ़ाए हैं, लेकिन यह लाभकारी मूल्य नहीं है। इस दाम से किसान की आय दोगुनी नहीं हो सकती है।<span></span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी सरकार ने गन्ने का भाव 20 रुपये बढ़ाया, किसानों को थी ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नोएडा में किसानों के विरोध&amp;#45;प्रदर्शन, कई रूट डायवर्ट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/preparation-for-farmers-protest-in-noida-many-routes-diverted.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 16 Jan 2024 11:32:00 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/preparation-for-farmers-protest-in-noida-many-routes-diverted.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div dir="auto">
<p>उत्तर प्रदेश के नोएडा में किसानों के विरोध-प्रदर्शन जोर पकड़ रहे हैं। विभिन्न मांगों को लेकर किसान लगभग एक महीने से नोएडा प्राधिकरण और एनटीपीसी के कार्यालय पर प्रदर्शन कर रहे हैं। मंगलवार को प्रदर्शनकारी किसानों ने गौतम बुद्ध नगर डीएम आवास के घेराव का ऐलान किया है। किसानों के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए नोएडा कमिश्नरेट पुलिस ने शहर के कई प्रमुख मार्गों पर रूट डायवर्ट किया है।&nbsp;</p>
<p>मिली जानकारी के मुताबिक, किसान संगठनों के लोग मंगलवार सुबह बारह बजे नोएडा स्टेडियम के सामने इकट्ठा होकर पैदल मार्च करते हुए डीएम का घेराव करेंगे। सेक्टर-6 में नोएडा प्राधिकरण और सेक्टर-24 में एनटीपीसी दफ्तर के सामने भी किसान धरने पर बैठे हैं। नोएडा ट्रैफिक पुलिस ने जगह-जगह होने वाले धरना-प्रदर्शन को देखते हुए शहर की कई सड़कों के ट्रैफिक का डायवर्जन किया है।&nbsp;</p>
<p>नोएडा और ग्रेटर नोएडा के किसान पिछले एक महीने से ज्यादा समय से नोएडा प्राधिकरण और एनटीपीसी दफ्तर के बाहर धरना दे रहे हैं। किसानों की मांग है कि जिन किसानों को जमीन सालों पहले एनटीपीसी ने अधिग्रहण किया था, उनको एक समान मुआवजा और 10% प्लाट के साथ नौकरी दी जाए। कड़ाके की ठंड के बीच किसान लगातार अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।&nbsp;</p>
<p>एनटीपीसी के लिए नोएडा के गांवों की जमीन 30- 35 साल पहले ली गई थी। लेकिन मुआवजे और विभिन्न मांगों को लेकर नोएडा के किसान अभी तक संघर्ष कर रहे हैं। इन किसानों का एक समूह बीते 18 दिसम्बर से सेक्टर 24, नोएडा में एनटीपीसी दफ्तर के बाहर कड़ाके की सर्दी में धरना दे रहा है।&nbsp;</p>
</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नोएडा में किसानों के विरोध-प्रदर्शन, कई रूट डायवर्ट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम कुसुम के तहत सोलर पंप पर 60% सब्सिडी पाने का मौका, 74 हजार किसानों को मिलेगा लाभ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/opportunity-to-get-60-per-cent-subsidy-on-solar-pumps-in-up-74-thousand-farmers-will-get-benefit.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 13 Jan 2024 14:01:47 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/opportunity-to-get-60-per-cent-subsidy-on-solar-pumps-in-up-74-thousand-farmers-will-get-benefit.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में किसानों को पीएम कुसुम योजना के तहत खेतों में सोलर पंप लगवाने के लिए 60 फीसदी सब्सिडी मिलती रहेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सोलर पंप पर टॉप अप सब्सिडी देने का निर्णय लिया गया। किसानों को सोलर पंप के लिए निविदा मूल्य पर 60 फीसदी सब्सिडी मिलेगी। इस पर जो अतिरिक्त खर्च आएगा, <span>उसे राज्य सरकार वहन करेगी। योजना का लाभ <strong>पहले आओ</strong></span><strong>, </strong><span><strong>पहले पाओ</strong> के आधार पर दिया जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर आवेदन 16 से 20 जनवरी के बीच शुरू होने जा रहे हैं।</span>&nbsp;</p>
<p>पीएम कुसुम योजना के तहत 60 फीसदी सब्सिडी सरकार देती है जबकि 40 फीसदी कीमत किसानों को चुकानी होती है। लेकिन इस बार जो टेंडर हुए हैं, <span>उनमें सोलर पंप की कीमतें बेंचमार्क मूल्य से अधिक हैं जबकि केंद्र सरकार द्वारा बेंचमार्क मूल्य पर ही अनुदान दिया जाता है। इससे किसानों पर अधिक बोझ पड़ रहा था।</span></p>
<p>किसानों को निविदा मूल्य पर 60 फीसदी अनुदान पर सोलर पंप लगवाने के लिए अतिरिक्त खर्च की भरपाई राज्य सरकार ने टॉप अप सब्सिडी के माध्यम से करने का निर्णय लिया है। इसके लिए मंत्रिपरिषद ने 168.63 करोड़ रुपए की अतिरिक्त धनराशि को मंजूरी दी है। योजना के तहत यूपी में वर्ष 2023-24 में 30 हजार और 2024-25 में 44,250 सोलर पंप स्थापित किए जाएंगे। इस प्रकार कुल 74,250 सोलर सिंचाई पंप किसानों को मिलेंगे।&nbsp;</p>
<p><strong>बढ़े सोलर पैनल के दाम</strong></p>
<p>सोलर पम्प के कच्चे माल के दाम में वृद्धि होने से सोलर पैनल के टेंडर मूल्य में 18<span>-</span>20 <span>फीसदी की वृद्धि हुई है। योजना के लोकप्रियता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने सोलर पम्प के निविदा मूल्य पर ही किसानों को </span>60 <span>फीसदी अनुदान जारी रखने का निर्णय लिया है। इसके लिए वर्ष </span>2023-24<span> हेतु </span>68.29<span> करोड़ रुपये और वर्ष </span>2024-25<span> के लिए </span>100.34<span> करोड़ रुपये यानी कुल </span>168.63<span> करोड़ रुपए की अतिरिक्त धनराशि का अनुमोदन मंत्रिपरिषद द्वारा किया गया है। सोलर पंपों की स्थापना पर वर्ष </span>2023-24 <span>में </span>285.39 <span>करोड़ रुपये तथा वर्ष </span>2024-25 <span>में </span>406.56 <span>करोड़ रुपये यानी कुल </span>691.95 <span>करोड रुपये का व्यय प्रदेश सरकार के द्वारा किया जाएगा।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>कैसे उठाएं योजना का लाभ</strong><strong>, <span>क्या हैं नियम</span></strong></p>
<ul>
<li>सोलर पंप की योजना का लाभ उठाने हेतु किसानों का विभागीय वेबसाइट <strong>agriculture.up.gov.in</strong> <span>पर पंजीकरण अनिवार्य है। </span></li>
<li>वेबसाइट agriculture.up.gov.in <span>पर <strong>"अनुदान पर सोलर पंप हेतु बुंकिंग करें"</strong> लिंक पर क्लिक कर ऑनलाइन बुकिंग की जाएगी। </span></li>
<li>किसानों की बुकिंग जनपद के लक्ष्य की सीमा से 110 प्रतिशत तक <strong>"पहले आओ पहले पाओ"</strong> के आधार पर की जायेगी।</li>
<li>कृषकों को ऑनलाइन बुकिंग के साथ <strong>5,000 रुपये</strong> टोकन मनी के रूप में ऑनलाइन जमा करना होगा।</li>
<li>टोकन कन्फर्म करने के <strong>एक सप्ताह</strong> के अंदर किसानों को कृषक अंश की धनराशि का ऑनलाइन टोकन जनरेट कर चालान द्वारा इंडियन बैंक की किसी भी शाखा में अथवा ऑनलाइन जमा करना होगा अन्यथा कृषक का चयन स्वतः <strong>निरस्त</strong> हो जाएगा और टोकन मनी की धनराशि <strong>जब्त</strong> कर ली जायेगी।</li>
<li>जिन किसानों के ट्यूबवेल पर सोलर पम्प स्थापित किये जाएंगे, <span>उन लाभार्थियों के ट्यूबवेल पर पूर्व से स्थापित<strong> विद्युत कनेक्शन काट</strong> दिए जाएंगे</span></li>
<li>जिन किसानों के ट्यूबवेल पर सोलर पम्प की सुविधा दी जाएगी ऐसे लाभार्थियों को भविष्य में भी उस बोरिंग पर <strong>विद्युत कनेक्शन नहीं</strong> दिया जाएगा।</li>
<li>2 एचपी हेतु 4 इंच, <span>3 एवं 5 एचपी हेतु 6 इंच तथा 7.5 एचपी एवं 10 एचपी हेतु 8 इंच की बोरिंग होना<strong> अनिवार्य</strong> है। </span></li>
<li>किसान की स्वयं की बोरिंग होगी। सत्यापन के समय उपयुक्त बोरिंग न पाए जाने पर टोकन मनी की <strong>धनराशि जब्त</strong> कर ली जायेगी एवं आवेदन निरस्त हो जाएगा।</li>
<li>22 फीट तक 2 एचपी सर्फेस, <span>50 फीट तक 2 एचपी सबमर्सिबल</span>, <span>150 फीट तक 3 एचपी सबमर्सिबल</span>, <span>200 फीट तक 5 एचपी सबमर्सिबल</span>, <span>300 फीट तक की गहराई पर उपलब्ध जल स्तर हेतु 7.5 एचपी तथा 10 एचपी सबमर्सिबल सोलर पंप <strong>उपयुक्त</strong> होते हैं।</span></li>
<li><strong>दोहित एवं अति दोहित क्षेत्रों</strong> में नए सोलर पंपों की स्थापना नहीं की जाएगी। किन्तु यदि कृषक सूक्ष्म सिंचाई तकनीक का उपयोग करे तो पूर्व से स्थापित डीजल पंप सेटों को सोलर पंप में परिवर्तित किया जा सकता है।</li>
<li>किसान द्वारा बैंक से ऋण लेकर कृषक अंश जमा करने पर <strong>कृषि अवस्थापना निधि (</strong><strong>AIF) </strong>से नियमानुसार ब्याज में छूट अनुमन्य है।</li>
<li>किसान सोलर पंप स्थापित होने के पश्चात <strong>स्थल परिवर्तन</strong> नहीं करेंगे। यदि स्थल परिवर्तन किया जाता है तो संपूर्ण अनुदान की धनराशि कृषक से वसूल कर ली जाएगी।&nbsp;&nbsp;</li>
</ul>
<p><strong>आवेदन प्रारंभ मध्याह्न </strong><strong>12:00 <span>बजे से लक्ष्य की समाप्ति तक</span></strong></p>
<p>16.01.2024 <span>से चित्रकूट धाम</span>, <span>वाराणसी एवं प्रयागराज मंडलों के जनपद</span></p>
<p>17.01.2024 <span>से बरेली</span>, <span>कानपुर</span>, <span>मिर्जापुर एवं बस्ती मंडलों के जनपद</span></p>
<p>18.01.2024 <span>से मेरठ</span>, <span>लखनऊ एवं अयोध्या मंडलों के जनपद</span></p>
<p>19.01.2024 <span>से सहारनपुर</span>, <span>मुरादाबाद</span>,&nbsp;<span>आगरा एवं अलीगढ़ मंडलों के जनपद</span></p>
<p>20.01.2024 <span>से झाँसी</span>, <span>गोरखपुर</span>, <span>आजगमढ़ एवं देवीपाटन मंडलों के जनपद</span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम कुसुम के तहत सोलर पंप पर 60% सब्सिडी पाने का मौका, 74 हजार किसानों को मिलेगा लाभ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[झारखंड के 158 ब्लॉक सूखाग्रस्त, किसानों को 3500 रुपये की मदद का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/158-blocks-of-jharkhand-affected-by-drought-announcement-of-rs-3500-assistance-to-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 11 Jan 2024 12:22:49 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/158-blocks-of-jharkhand-affected-by-drought-announcement-of-rs-3500-assistance-to-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>झारखंड में सूखे की मार झेल रहे 17 जिलों के 158 ब्लॉकों को सूखा प्रभावित घोषित करने का फैसला किया गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आपदा प्रबंधन विभाग को सभी 158 ब्लॉकों को सूखाग्रस्त घोषित करने का प्रस्ताव जल्द से जल्द तैयार करने का निर्देश दिया, <span>ताकि इसे मंत्रिपरिषद की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जा सके। मुख्यमंत्री ने पिछले साल की तरह इस वर्ष भी सूखा प्रभावित किसानों को तत्काल राहत के तौर पर </span>3,500 <span>रुपये अनुग्रहित राशि देने का निर्देश दिया। जिन किसानों की फसल कम बारिश की वजह से </span>33 <span>प्रतिशत तक क्षतिग्रस्त हुई है</span>, <span>उन्हें इनपुट अनुदान राशि का भुगतान किया जाएगा।</span></p>
<p>झारखंड सीएमओ ने पोस्ट किया, "17 <span>जिलों के </span>158 <span>प्रखंड को सुखाड़ क्षेत्र घोषित करने की अनुशंसा। आपदा प्रबंधन विभाग को प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिपरिषद की बैठक में भेजने के लिए मुख्यमंत्री का निर्देश। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सूखा प्रभावित किसानों को </span>3500 <span>रुपये अनुग्रहित राशि देने का निर्देश दिया।"</span></p>
<p>मानसून 2023 में कम बारिश के बाद कृषि विभाग द्वारा जमीनी स्थिति के आकलन के बाद राज्य सरकार ने 158 प्रखंडों को सूखाग्रस्त घोषित करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों से वित्तीय सहायता के लिए केंद्र को एक प्रस्ताव भेजने को भी कहा। मानसून सीजन के दौरान झारखंड में सामान्य से 26 फीसदी कम बारिश हुई थी।</p>
<p>झारखंड लगातार दूसरे साल सूखे की मार झेल रहा है। इससे राज्य में धान के उत्पादन पर असर पड़ा और किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार ने 2022 में भी राज्य के 260 ब्लॉकों में से 226 को सूखा प्रभावित घोषित किया था और प्रत्येक प्रभावित किसान परिवार को 3,500 रुपये की नकद राहत प्रदान करने का निर्णय लिया था। झारखंड में करीब 33 लाख किसानों को सूखे की वजह से फसल का नुकसान उठाना पड़ा है।&nbsp;</p>
<p><strong>सूखा प्रभावित जिले </strong></p>
<p>चतरा, <span>देवघर</span>, <span>धनबाद</span>, <span>दुमका</span>, गढ़वा,&nbsp;<span>गिरिडीह</span>, गोड्डा, <span>गुमला</span>, हजारीबाग, <span>जामताड़ा</span>, <span>खूंटी</span>, <span>कोडरमा</span>, <span>लातेहार</span>, <span>लोहरदगा</span>, <span>पाकुड़</span>, <span>पलामू&nbsp;</span><span>और रांची </span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_659f919d53859.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ झारखंड के 158 ब्लॉक सूखाग्रस्त, किसानों को 3500 रुपये की मदद का ऐलान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_659f919d53859.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कश्मीर से उत्तराखंड तक बर्फबारी को तरसे पहाड़, किसानों को उठाना पड़ेगा नुकसान  ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/mountains-long-for-snowfall-from-kashmir-to-uttarakhand-horticulture-will-be-harmed.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 10 Jan 2024 18:00:43 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/mountains-long-for-snowfall-from-kashmir-to-uttarakhand-horticulture-will-be-harmed.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जहां कड़ाके की ठंड पड़ रही है, वहीं जम्मू-कश्मीर से लेकर हिमाचल और उत्तराखंड के पर्वतीय इलाके बर्फबारी से तरस रहे हैं। बर्फबारी के लिए मशहूर गुलमर्ग और पहलगाम जैसी जगहों से पर्यटक निराश होकर लौट रहे हैं जबकि मौसम का यह बिगड़ा मिजाज पर्वतीय किसानों के लिए भी परेशानी पैदा करेगा। इस साल जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और लद्दाख में बर्फबारी में भारी कमी आई है।&nbsp;</p>
<p>नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता <strong>उमर अब्दुल्ला</strong> ने बर्फबारी की कमी पर चिंता व्यक्त जताते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि उन्होंने गुलमर्ग को सर्दियों में इतना सूखा कभी नहीं देखा। अगर जल्द ही बर्फ नहीं पड़ी तो गर्मियां बहुत भीषण होंगी। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने 6 जनवरी 2022 और 2023 को गुलमर्ग में भरपूर बर्फ के साथ ली गई अपनी दो तस्वीरें भी पोस्ट कीं। सोशल मीडिया पर लोग गत वर्षों की बर्फबारी और इस साल सूखे पहाड़ों की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। पूरे दिसंबर में कश्मीर घाटी में 79% वर्षा की कमी हुई और बर्फबारी लगभग नगण्य रही। मौसम विभाग के मुताबिक 12 जनवरी तक शुष्क मौसम की स्थिति बनी रहेगी।</p>
<p>हिमाचल के सेब उत्पादक किसान <strong>हरीश चौहान</strong> ने रूरल वॉयस को बताया कि इस साल ऊंचे इलाकों में भी बर्फबारी ना होने से बागवानी उपज बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। सेब की अच्छी फसल के लिए बर्फबारी बहुत जरूरी है। कम बर्फबारी और बारिश से बागवानी फसलों पर सूखे की मार पड़ने की आशंका है। नदियों और जल स्रोतों में पानी की उपलब्धता के लिए भी बर्फबारी बहुत जरूरी है। सर्दियों में कम बर्फ पड़ने से गर्मियों में सिंचाई का संकट पैदा हो सकता है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>हिमाचल प्रदेश में लाहौल, स्पीति और किन्नौर जैसे इलाके सर्दियों के दौरान बर्फ से ढके रहते थे लेकिन इस साल बर्फबारी को तरस गए हैं। बरसात में बाढ़ की आपदा झेलने के बाद अब हिमाचल प्रदेश में सूखे के हालत हैं। इसी तरफ उत्तराखंड में केदारनाथ, नंदा देवी और ओली में पिछले एक महीने में बर्फबारी नहीं हुई है। यहां तक कि बर्फ से लदे रहने वाले हेमकुंड साहिब में भी अपेक्षाकृत कम बर्फ पड़ी है। हिमाचल प्रदेश में बारिश और बर्फबारी की कमी के चलते कुल्लू मनाली घाटी में जंगल की आग की घटनाएं भी बढ़ी हैं। जनवरी में कश्मीर और हिमाचल के जंगलों में आग अकल्पनीय घटनाएं हैं।</p>
<p>उत्तराखंड के देहरादून स्थिति मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक<strong> बिक्रम सिंह</strong> का कहना है कि इस साल सर्दियों के मौसम में राज्य में काफी कम बारिश और बर्फबारी हुई है। मानसून सीजन के बाद से ही पश्चिमी विक्षोभ कमजोर रहा है। हिमालयी क्षेत्रों में वर्षा वाले बादल विकसित नहीं हो सके। मौसम सामान्य से अधिक शुष्क बना हुआ है।&nbsp;</p>
<p>उत्तराखंड में भी दिसंबर शुरू होते ही उच्च हिमालयी क्षेत्र बर्फ की चादर ओढ़ लेते थे। लेकिन इस साल बर्फबारी के लिए मशहूर औली, धनोल्टी, चोपता, दयारा बुग्याल, काणाताल मुक्तेश्वर और मुनस्यारी जैसी जगहों पर भी लगभग ना के बराबर बर्फबारी हुई है। मौसम के इस बदले मिजाज को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखा जा रहा है। इसका असर पर्यटन के साथ-साथ पवर्तीय कृषि और बागवनी पर भी पड़ेगा।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_659e8dc52c361.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कश्मीर से उत्तराखंड तक बर्फबारी को तरसे पहाड़, किसानों को उठाना पड़ेगा नुकसान   ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कृषि बजट को लेकर गहलोत सरकार की सराहना की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-agriculture-minister-dr-kirori-lal-meena-praised-gehlot-government-for-agriculture-budget.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 10 Jan 2024 14:29:47 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rajasthan-agriculture-minister-dr-kirori-lal-meena-praised-gehlot-government-for-agriculture-budget.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राजस्थान में भाजपा सरकार बनने के बाद कांग्रेस राज की योजनाओं और फैसलों के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। लेकिन कृषि एवं बागवानी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अलग से कृषि बजट पेश करने के गहलोत सरकार के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि यह परंपरा <span> ठीक है। प्रदेश में एक बड़ा तबका है, जो खेती से जुड़ा है। अलग से कृषि बजट पेश करने से उन्हें ज्यादा फायदा मिल सकता है।&nbsp;</span></p>
<p>विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि <span>कृषि बजट अलग से पेश करने को वह अच्छी पहल मानते हैं। हालांकि योजना का लाभ आम किसान तक नहीं पहुंच सका था। हम प्रयास करेंगे कि अलग से कृषि बजट पेश किया जा सके और किसानों तक इसका लाभ पहुंचे।&nbsp;</span></p>
<p>डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का कहना है कि कल्याणकारी योजनाओं को बंद करना उचित नहीं है। पिछली सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए जो भी योजनाएं चलाई थीं, <span>उन्हें आगे भी जारी रखने के प्रयास किए जाएंगे। लेकिन इन योजनाओं का धरातल पर कितना असर हुआ है</span>, <span>इसकी समीक्षा की जाएगी।</span> उन्होंने अ<span>फसरों को 100 दिन की कार्ययोजना तय समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं।&nbsp;</span></p>
<p><strong>किसानों की आय दोगुना करने पर जोर</strong> <br />राजस्थान के कृषि मंत्री ने अधिकारियों को किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कृषि के क्षेत्र में नवाचार अपनाने के निर्देश दिए। डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि संकल्प पत्र में तैयार की गई 100 दिवसीय कार्य योजनाओं में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 1,000 करोड़ की फसल क्षति का आकलन कर राहत राशि का वितरण, राज्य में 500 कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना, पीएम कुसुम योजना के तहत मौजूद ट्यूब वैलों का सौर ऊर्जा द्वारा संचालन सुनिश्चित करने के लिए 5 हजार सोलर पम्प स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा 27 हजार हैक्टेयर क्षेत्रफल में ड्रिप एवं मिनि स्प्रिकंलर व 54 हजार हैक्टेयर क्षेत्रफल में स्प्रिकंलर लगाये जाएंगे।<strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>मिलेट्स उत्पादन को बढ़ावा देने की जरूरत </strong></p>
<p>डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मिलेट्स उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मिलेट्स के उत्पादन व विपणन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को सुनने व समझने के लिए जल्द ही किसान यूनियनों की मिटिंग बुलाई जायेगी। बैठक में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के सचिव डॉ. पृथ्वी, <span>कृषि विभाग के आयुक्त कन्हैया लाल स्वामी</span>, <span>उद्यानिकी विभाग के आयुक्त लक्ष्मण सिंह कुड़ी</span>, <span>संयुक्त शासन सचिव</span>, <span>कैलाश नारायण मीणा एवं राजस्थान राज्य बीज निगम के एमडी जसवंत सिंह सहित विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहे।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कृषि बजट को लेकर गहलोत सरकार की सराहना की ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ठंड को देखते हुए हरियाणा में किसानों को ट्यूबवैल के लिए दिन में मिलेगी बिजली]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/in-view-of-the-cold-farmers-in-haryana-will-get-electricity-during-the-day..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 09 Jan 2024 12:48:31 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/in-view-of-the-cold-farmers-in-haryana-will-get-electricity-during-the-day..html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। ऐसे में किसानों के लिए रात के समय खेतों में पानी देना बड़ा मुश्किल हो जाता है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश में बढ़ती ठंड के कारण किसानों को खेतों में पानी देने में आ रही परेशानी को दूर करते हुए एक अहम फैसला लिया है। <span>मुख्यमंत्री ने ट्यूबवेलों पर दी जाने वाली बिजली सप्लाई के समय में परिवर्तन किया है। </span>अब राज्य में किसानों को दिन के समय दो शिफ्टों में बिजली मिलेगी, <span>जिससे किसान रात के बजाय दिन के समय अपने खेतों में पानी दे सकेंगे।</span>&nbsp;</p>
<p>हरियाणा के मुख्यमंत्री <strong>मनोहर लाल</strong> ने बिजली विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को सुबह 5 बजे से दोपहर 1 बजे तक तथा सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक बिजली आपूर्ति दी जाए। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश भर से किसानों द्वारा सरकार को इस परेशानी से अवगत कराया जा रहा था, <span>जिसके बाद मुख्यमंत्री ने यह निर्णय लिया है। सरकार के इस निर्णय से किसानों को सहूलियत होगी और वे दिन के समय में अपने सिंचाई कर सकेंगे।</span>&nbsp;</p>
<p>सोमवार को उत्तर हरियाणा बिजली वितरण<span>&nbsp;निगम लिमिटेड (यूएचबीवीएनएल)</span> ने प्रदेश के 22 <span>जिलों का नया शेड्यूल जारी कर दिया है। </span>इसमें सात जिलों के किसानों को सुबह पांच से दोपहर एक बजे तक, <span>वहीं बाकी </span>15 <span>जिलों में सुबह </span>10 <span>से लेकर शाम छह बजे तक बिजली सप्लाई दी जाएगी। यूएचबीवीएन ने ये निर्देश दिए हैं कि एपी फीडरों पर पूरे आठ घंटे तक निर्बाध बिजली सप्लाई होनी चाहिए। </span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ठंड को देखते हुए हरियाणा में किसानों को ट्यूबवैल के लिए दिन में मिलेगी बिजली ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[देश के चीनी उत्पादन में गिरावट, फिर भी यूपी के किसानों को गन्ना मूल्य की घोषणा का इंतजार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/decline-in-countrys-sugar-production-still-farmers-of-up-wait-for-announcement-of-sugarcane-price.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 02 Jan 2024 05:10:10 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/decline-in-countrys-sugar-production-still-farmers-of-up-wait-for-announcement-of-sugarcane-price.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>शामली जिले के किसान राजपाल सिंह को पिछले सीजन (2022-23) में शामली चीनी मिल को बेचे गए गन्ने का केवल 15 जनवरी, 2023 तक का भुगतान मिला है जबकि मिल मई तक चली थी। दो साल 2021-22 और 2022-23 से उत्तर प्रदेश में गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 350 रुपये प्रति क्विंटल ही स्थिर है। पिछले साल एसएपी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी और शामली चीनी मिल के किसानों का आधे से अधिक सीजन के गन्ने का भुगतान बकाया है, वहीं चालू पेराई सीजन 2023-24 (अक्तूबर, 2023 से सितंबर, 2024) के लिए राज्य सरकार ने इस खबर के लिखे जाने तक गन्ने का एसएसपी निर्धारित नहीं किया है। यानी राज्य के राजपाल सिंह जैसे करीब 45 लाख गन्ना किसानों को अभी यह मालूम नहीं है कि उन्होंने चीनी मिलों को पिछले दो माह से अधिक समय से जो गन्ना आपूर्ति की है, उसका क्या दाम उन्हें मिलेगा।</p>
<p>असल में, गन्ने का दाम सीजन शुरू होने के पहले घोषित हो जाना चाहिए। किसानों की यह अनदेखी तब है जब देश में इस साल गन्ने का उत्पादन गिरने से चीनी उत्पादन तीन साल के निचले स्तर पर रहेगा। वहीं चीनी मिलों को चीनी और एथेनॉल का बेहतर दाम मिलने के चलते उनका मुनाफा भी बेहतर हुआ है। उत्तर प्रदेश के पड़ोसी राज्य हरियाणा की सरकार ने चालू पेराई सीजन के लिए गन्ना भाव में 14 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 386 रुपये प्रति क्विटंल का एसएपी तय किया है। जबकि पंजाब सरकार 391 रुपये प्रति क्विटंल गन्ना भाव दे रही है।</p>
<p>चालू पेराई सीजन में उत्तर प्रदेश करीब 110 लाख टन चीनी उत्पादन के साथ देश में सबसे अधिक चीनी उत्पादन करने वाला राज्य रहेगा। पिछले साल यहां 104.80&nbsp; लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस साल उत्तर प्रदेश का चीनी उत्पादन देश के कुल अनुमानित चीनी उत्पादन करीब 290 लाख टन के एक तिहाई से अधिक रह सकता है। कमजोर मानसून के चलते महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की फसल को नुकसान हुआ है। कमजोर फसल के चलते वहां चीनी उत्पादन 85 लाख टन और 38 लाख रहने का अनुमान उद्योग ने लगाया है। जो पिछले साल महाराष्ट्र में 105.30 लाख टन और कर्नाटक में 59.80 लाख टन रहा था। इन परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चालू सीजन के लिए गन्ने के एसएपी का तय नहीं किया जाना किसानों की मुश्किल तो बढ़ा ही रहा है, चीनी मिलों को भी हैरान कर रहा है।</p>
<p><strong> चीनी उद्योग</strong> के सूत्रों ने <strong>रूरल वॉयस</strong> के साथ एक बातचीत में कहा कि हमें भी इस देरी की कोई वजह नहीं दिख रही है। अभी कोई चुनाव भी नहीं है। जिसकी वजह से देरी हो रही है। अगर सरकार दाम घोषित कर देती है तो हमारे लिए भी स्थिति साफ हो जाएगी कि हमें कितना भुगतान करना है।&nbsp; राज्य की अधिकांश चीनी मिलें समय से भुगतान कर रही है।&nbsp; कुछ चीनी मिलें और बजाज हिंदुस्थान जैसा सबसे अधिक क्षमता वाला चीनी मिल समूह भी गन्ना मूल्य भुगतान में पिछड़ा हुआ है।</p>
<p>गन्ना मूल्य को लेकर किसानों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है। सरकार पर गन्ना किसानों के प्रति लापरवाही का रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए <strong>भारतीय किसान यूनियन</strong> ने तय किया है कि पांच जनवरी को उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन करेगी। इस प्रदर्शन की मुख्य वजह गन्ने के एसएपी में बढ़ोतरी नहीं किया जाना है।</p>
<p>चीनी और गुड़ व खांडसारी उद्योग को समझ आ रहा है कि इस साल गन्ने की कमी है और दाम बढ़ेंगे। शामली जिले में ऊन के पास एक अत्याधुनिक गुड़ संयंत्र चलाने वाले उद्यमी <strong>केपी सिंह</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि वह अभी गन्ने का दाम 340 रुपये प्रति क्विंटल दे रहे हैं और कल यानी 2 जनवरी से हम दाम बढ़ाकर 350 रुपये प्रति क्विंटल कर देंगे। चौबीस घंटे क्षमता के 60 फीसदी पर चल रही उनकी गुड़ इकाई के सारे गुड़ की खपत हो रही है और वह पंजाब को गुड़ की आपूर्ति कर रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने के दाम 340 रुपये से 370 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गये हैं। ऐसे में सरकार अगर गन्ने के एसएपी में अधिक बढ़ोतरी नहीं करेगी तो चीनी मिलों और गुड़ उद्योग के बीच दाम को लेकर प्रतिस्पर्धा रहेगी। वहीं गुड़ खांडसारी इकाइयों में जल्द भुगतान के चलते किसान चीनी मिलों को आपूर्ति कम कर सकते हैं।</p>
<p>गन्ने के एसएपी को लेकर उत्तर प्रदेश की मौजूदा भाजपा नेतृत्व सरकार का रवैया उदासीनता भरा रहा है। साल 2017 में सत्ता में आई भाजपा सरकार ने पहली बार 2017-18 में गन्ने के एसएपी में 10 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर इसे 325 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। वहीं उसके बाद तीन सीजन में गन्ने का एसएपी फ्रीज रखा था। यहां तक कि 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान भी राज्य सरकार ने दाम नहीं बढ़ाया था। उसके बाद 2022 के राज्य विधान सभा चुनाव के पहले एसएपी में 25 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 350 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। उसके बाद 2022-23 सीजन में भी इसे 201-22 पेराई सीजन के 350 रुपये प्रति क्विटंल दाम पर ही फ्रीज रखा था। जबकि पड़ौसी राज्य हरियाणा सरकार ने इसे बढ़ाकर 372 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया था। यानी <strong>छह साल में मात्र 35 रुपये प्रति क्विटंल की बढ़ोतरी उत्तर प्रदेश सरकार ने की है।</strong> जबकि इस दौरान गन्ना उत्पादन की हर तरह की लागत में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है जिसके चलते किसानों की आय प्रभावित हुई है।</p>
<p>साल 2024 में लोक सभा के चुनाव हैं और भारतीय जनता पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश की 80 लोक सभा सीटें बहुत अहम हैं। राज्य के 45 लाख गन्ना किसान एक बड़ा वोट बैंक हैं लेकिन जिस तरह से पिछले चुनावों के नतीजे रहे हैं उनसे लगता है कि राज्य की गन्ना राजनीति अब कमजोर हो गई है। मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बसपा ने गन्ना किसानों के दाम को लेकर कोई बड़ा प्रदर्शन या विरोध नहीं किया। थोड़ा बहुत राष्ट्रीय लोक दल ही इस मुद्दे पर बोलता रहा है लेकिन&nbsp; इस साल उसका भी गन्ना एसएपी को लेकर कोई बड़ा प्रदर्शन या विरोध देखने को नहीं मिला है।</p>
<p>भारतीय किसान यूनियन पांच जनवरी को प्रदेश में प्रदर्शन करेगी वह राज्य सरकार पर कितना दबाव बना पाएगी, यह देखना होगा। हालांकि यह ज्यादातर स्टेकहोल्डर मान रहे हैं कि इस साल सरकार एसएपी में बढ़ोतरी करेगी। लेकिन कब करेगी यह अपने आप में एक रहस्य की तरह है क्योंकि मौजूदा परिस्थिति में एसएपी तय करने में देरी करने और दाम नहीं बढ़ाने की कोई वजह नहीं दिखती है। लेकिन यह भी सच है कि जैसा शामली जिले के किसान राजपाल सिंह की स्थिति है, पारदर्शी नीति के अभाव में राज्य के लाखों गन्ना किसानों की मुश्किल एक जैसी ही है। जब दाम बेहतर मिल सकता है और समय से मिल सकता है तब भी सरकार की यह उदासीनता न किसानों के लिए अच्छी है और न ही उद्योग के हित में है।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ देश के चीनी उत्पादन में गिरावट, फिर भी यूपी के किसानों को गन्ना मूल्य की घोषणा का इंतजार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तराखंड में खेती के लिए बाहरी लोगों के जमीन खरीदने पर फिलहाल रोक लगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/ban-on-outsiders-buying-land-for-farming-in-uttarakhand.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 01 Jan 2024 19:56:58 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/ban-on-outsiders-buying-land-for-farming-in-uttarakhand.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div dir="auto">उत्तराखंड में मजबूत भू-कानून की मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। कृषि और बागवानी के लिए बाहरी लोगों के जमीन खरीदने पर फिलहाल रोक लगा दी है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भू-कानून की प्रारूप समिति अभी अपना काम कर रही, इसलिए फिलहाल यह रोक लगाई गई है। इससे पहले धामी सरकार जमीन खरीदने वालों की पृष्ठभूमि की जांच का फैसला भी ले चुकी है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भू-कानून के संबंध में एक उच्च स्तरीय बैठक कर अधिकारियों को निर्देश दिए कि भू-कानून समिति की रिपोर्ट आने या अग्रिम आदेशों तक जिलाधिकारी राज्य से बाहर के व्यक्तियों को कृषि एवं उद्यान के उद्देश्य से भूमि क्रय करने की अनुमति नहीं देंगे।&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर जमीनों की बिक्री को लेकर चिंताएं जाहिर की जा रही हैं। सशक्त भू-कानून और मूल निवास 1950 की मांग को पिछले दिनों लेकर विभिन्न संगठनों ने देहरादून में एक बड़ी रैली निकाली थी। तभी से लग रहा था कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर कोई बड़ा कदम उठा सकती है।&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि भू-कानून के लिए बनाई गई कमेटी द्वारा बड़े पैमाने पर जन सुनवाई की जाए और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों और विशेषज्ञों की राय ली जाए। भू-कानून के लिए विकेंद्रीकृत व्यवस्था के लिए गढ़वाल और कुमाऊं कमिश्नर को भी शामिल किया जाए।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">उत्तर प्रदेश जमींदारी एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 की धारा 154 में वर्ष 2004 में किए गए संशोधन के अनुसार ऐसे व्यक्ति जिनके पास उत्तराखंड में 12 सितंबर 2003 से पूर्व अचल संपत्ति नहीं है, उन्हें कृषि व उद्यान के लिए भूमि क्रय करने की अनुमति जिला अधिकारी द्वारा प्रदान की जाती है। वर्तमान में उत्तराखंड के लिए नया भू-कानून तैयार करने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रारूप समिति गठित की गई है।&nbsp;&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भू-कानून समिति द्वारा विशेषज्ञों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के सुझावों के आधार पर जल्द ड्राफ्ट बनाया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य की जनभावनाओं के अनुरूप और जो राज्यहित में जो सर्वोपरि होगा, सरकार द्वारा उस दिशा में निरंतर कार्य किए जाएंगे।&nbsp;</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">उत्तराखंड में सशक्त भू-कानून की मांग जोर पकड़ रही है। मुख्यमंत्री धामी ने भू-कानून को लेकर पहले सुभाष कुमार की समिति बनाई थी। यह समिति सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है। इसी रिपोर्ट से अब नए भू-कानून का प्रारूप तैयार किया जा रहा है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">
<p></p>
</div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_6592cba5c71cd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तराखंड में खेती के लिए बाहरी लोगों के जमीन खरीदने पर फिलहाल रोक लगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हिमाचल सरकार आज से सस्ती दरों पर बागवानी उपकरण उपलब्ध कराएगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/himachal-government-will-provide-horticulture-equipment-at-affordable-rates-from-today.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 01 Jan 2024 08:36:08 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/himachal-government-will-provide-horticulture-equipment-at-affordable-rates-from-today.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हिमाचल प्रदेश सरकार किसानों को सस्ती दरों पर बागवानी उपकरण उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि प्रदेश सरकार बागवानी क्षेत्र के विकास तथा बागवानों की आय बढ़ाने की दिशा में अनेक निर्णय ले रही है। इसी के तहत 1 जनवरी, 2024 से बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) के माध्यम से सस्ती दरों पर बागवानी उपकरण, खाद और कीटनाशक उपलब्ध करवाए जाएंगे।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि एचपीएमसी ने अपने मुनाफे के मार्जिन को 15 प्रतिशत से घटाकर नौ प्रतिशत कर दिया है, जिससे सेब उत्पादकों को किफायती दरों पर गुणवत्ता वाले उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे। एचपीएमसी ने किसानों को सस्ती दरों पर जरूरी सामान उपलब्ध करवाने के लिए उत्पादक कंपनियों से सीधी खरीद के लिए 38 एमओयू किए हैं।&nbsp;मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारी सरकार सेब उत्पादकों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है, और मार्जिन कम करने का निर्णय हिमाचल में सेब उत्पादकों की भलाई के प्रति हमारे समर्पण को दर्शाता है।"&nbsp;</p>
<p><strong>ऑनलाइन प्रणाली&nbsp;</strong></p>
<p>प्रदेश सरकार ने अपने पहले बजट में एचपीएमसी के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बागवानी उत्पाद खरीदने के लिए ऑनलाइन प्रणाली स्थापित करने का प्रावधान किया है। यह ऑनलाइन सुविधा निगम के वातानुकूलित भण्डारों की बुकिंग के लिए भी उपलब्ध होगी। किसान घर से उपज की बिक्री के अतिरिक्त एचपीएमसी द्वारा बेचे जा रहे उपकरण व अन्य सामग्री भी ऑनलाइन ही बुक कर सकेंगे।</p>
<p><strong>स्थापित होंगे ग्रेडिंग व पैकिंग हाउस, कोल्ड स्टोरेज&nbsp;</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान उत्पादक संगठनों के सहयोग से किन्नौर के भावानगर, चिड़गांव के समीप संदासू, जुब्बल के अणु, शिमला के चौपाल व खड़ापत्थर, सोलन जिला के जाबली, मंडी के सुन्दरनगर तथा रामपुर बुशहर के दत्तनगर में ग्रेडिंग व पैकिंग हाउस, वातानुकूलित व शीत भण्डार स्थापित किए जाएंगे।</p>
<p><strong>यूनिवर्सल कार्टन में होगी सेब बिक्री</strong></p>
<p>हिमाचल सरकार ने सेब उत्पादकों की लंबित मांग पूरी करते हुए किलोग्राम की दर से सेब बिक्री सुनिश्चित की है। इससे सेब बागवानों के लाभ में भी वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले सेब सीजन में यूनिवर्सल कार्टन में सेब की बिक्री सुनिश्चित की जाएगी।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2024/01/image_750x500_65922a7b389d3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हिमाचल सरकार आज से सस्ती दरों पर बागवानी उपकरण उपलब्ध कराएगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब: मिड&amp;#45;डे मील में हर हफ्ते मिलेगा केला, गाजर देने की मांग भी उठी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/banana-will-be-available-every-week-in-mid-day-meal-in-punjab-now-demand-for-giving-carrots-also-raised..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 29 Dec 2023 14:05:18 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/banana-will-be-available-every-week-in-mid-day-meal-in-punjab-now-demand-for-giving-carrots-also-raised..html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में स्कूली बच्चों को मिड-डे मील में हर सप्ताह केला दिया जाएगा। पंजाब राज्य मिड-डे मील सोसाइटी ने यूकेजी से आठवीं कक्षा के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में लगभग 19 लाख छात्रों को साप्ताहिक रूप से केला देने का फैसला किया है। मिड-डे मील में फलों और पौष्टिक आहार को शामिल करने के अभिभावकों और शिक्षकों के सुझाव के बाद यह निर्णय लिया गया। स्कूलों में छात्रों को परोसे जाने वाले भोजन के मेन्यू में काले चने, <span>कढ़ी और राजमा चावल को भी शामिल किया गया है। </span></p>
<p>केंद्र सरकार के निर्देश पर पंजाब सरकार के शिक्षा विभाग ने मिड-डे मील योजना को लेकर राज्य के 10 जिलों में पंजाब यूनिवर्सिटी से सोशल ऑडिट करवाया था। इस दौरान हुई जन सुनवाई में अभिभावकों और शिक्षकों ने दोपहर भोजन में फलों और पौष्टिक आहार को शामिल करने का सुझाव दिया था। शिक्षा विभाग ने जनवरी से मार्च महीने के लिए मिड-डे मील का नया मेन्यू जारी किया है। छात्रों को हर सोमवार को केला देने के लिए राज्य सरकार स्कूलों को 5 रुपये प्रति केला के हिसाब से फंड जारी करेगी। योजना के तहत, छात्रों को पका भोजन प्रदान किया जाता है, जिसके लिए केंद्र सरकार द्वारा खाद्यान्न (चावल और गेहूं) उपलब्ध कराया जाता है। खाना पकाने की लागत केंद्र और राज्य सरकार 60:40 के अनुपात में साझा करती हैं।</p>
<p><strong>मिड-डे मील में गाजर और अंडे की मांग &nbsp;</strong></p>
<p>मिड-डे मील में केले को शामिल करने के बाद अब गाजर को शामिल करने की मांग भी उठ रही है। भारत कृषक समाज के अध्यक्ष अजय वीर जाखड़ ने <strong><a href="https://twitter.com/Ajayvirjakhar/status/1740568346117210427">ट्विट</a></strong> किया कि मिड-डे मील में अन्य राज्यों से आयात होने वाले केले के बजाय पंजाब में पैदा होने वाली गाजरें उपलब्ध करानी चाहिए। आर्थिक रूप से यह ज्यादा उचित है। इससे गाजर उत्पादन के हब अबोहर को फायदा होगा। जाखड़ का कहना है कि उन महीनों में केले दे सकते हैं जब गाजर या अन्य स्थानीय फल और सब्जियां उपलब्ध नहीं हैं। मिड-डे मील में गाजर देने से प्रति माह 40,000 से अधिक मानव दिनों का रोजगार पैदा होगा। इससे बचाए गए धन का उपयोग अन्य अच्छे उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_658e825b06f08.jpg" alt="" /></p>
<p>अजय वीर जाखड़ ने अबोहर के विधायक संदीप जाखड़ से इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री भगवंत मान और संबंधित विभागों से बात करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि कृषि के क्षेत्र में अग्रणी प्रदेश होने के बावजूद पंजाब में फलों के निर्यात से ज्यादा आयात होता है। उन्होंने मिड-डे मील में गांव के छोटे और भूमिहीन किसानों की पोल्ट्री से खरीदे गए अंडे उपलब्ध कराने का भी सुझाव दिया है। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब: मिड-डे मील में हर हफ्ते मिलेगा केला, गाजर देने की मांग भी उठी ]]></media:description>
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        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरसों के सबसे बड़े उत्पादक राज्य में इस वजह से घट गया बुवाई का रकबा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sowing-area-decreased-in-the-largest-mustard-producing-state.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 29 Dec 2023 07:00:09 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sowing-area-decreased-in-the-largest-mustard-producing-state.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रबी सीजन की प्रमुख तिलहन फसल सरसों की बुवाई का कुल रकबा बढ़ने से उत्पादन सरकार के तय लक्ष्य से ज्यादा होने की संभावना बढ़ गई है। एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश में सरसों की बुवाई के रकबे में 32 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, वहीं दूसरी ओर सरसों के सबसे बड़े उत्पादक राज्य राजस्थान में बुवाई का रकबा करीब 6 फीसदी घट गया है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 22 दिसंबर तक सरसों की बुवाई का कुल रकबा 2 फीसदी बढ़कर 95.23 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है। पिछले साल की समान अवधि में 93.46 लाख हेक्टेयर में सरसों की बुवाई हुई थी। उत्तर प्रदेश में सरसों की बुवाई रकबे में इस अवधि तक 4.30 लाख हेक्टेयर यानी 32 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी ओर, राजस्थान में सरसों एवं रैपसीड की बुवाई का रकबा 22 दिसंबर तक 2.20 लाख हेक्टेयर घटकर 36,06,471 हेक्टेयर रह गया है। राजस्थान कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल की समान अवधि तक राज्य में सरसों एवं रैपसीड की बुवाई का रकबा 38,27,170 हेक्टेयर रहा था, जबकि कुल बुवाई 45,52,000 हेक्टेयर रही थी।</p>
<p>राजस्थान के किसानों के हितों के लिए काम करने वाले जोधपुर स्थित साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर के फाउंडर डायरेक्टर भगीरथ चौधरी ने इसकी वजह बताते हुए <strong>रूरल वॉयस</strong> से कहा, &ldquo;जिस तरह से पिछले एक साल में पाम ऑयल के आयात में बढ़ोतरी हुई है, उससे घरेलू बाजार में सरसों की कीमत पर असर पड़ा है। मौजूदा समय में सरसों का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे चल रहा है। इस साल ज्यादातर समय सरसों का भाव एमएसपी के आसपास ही रहा है, जबकि दो-तीन साल पहले भाव 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था। जिन फसलों का भाव बढ़ता रहता है उसकी खेती करने को तो किसान उत्साहित रहते हैं लेकिन वाजिब कीमत नहीं मिलने से किसान निराश होते हैं और दूसरी फसल की ओर रुख कर लेते हैं। राजस्थान के सरसों किसान भी यही कर रहे हैं।&rdquo;</p>
<p>भगीरथ चौधरी के मुताबिक, राजस्थान के सरसों किसान जीरा, सौंफ, इसबगोल की खेती करने की ओर रुख कर रहे हैं क्योंकि उन्हें इनकी कीमत ज्यादा मिल रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण जीरा है। तीन-चार साल पहले तक किसानों को जीरा का दाम 15-16 हजार रुपये क्विंटल से ज्यादा नहीं मिलता था। इस साल किसानों को इसकी कीमत 70 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक मिली है, जबकि औसत कीमत भी बढ़कर 35-40 हजार रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई है। इसी तरह, सौंफ और इसबगोल के भी उन्हें बेहतर दाम मिल रहे हैं। इसलिए प्रदेश के किसान इनकी ओर रुख कर रहे हैं।</p>
<p>राजस्थान की मंडियों में सामान्य किस्म के सरसों का मौजूदा भाव 4900 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है, जबकि उच्च गुणवत्ता वाले सरसों का भाव 5400 रुपये प्रति क्विंटल है। सरकार ने रबी सीजन 2023-24 के लिए सामान्य किस्म वाले सरसों का एमएसपी 5450 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने चालू रबी सीजन के लिए 131.40 लाख टन सरसों के उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। सरसों की बुवाई का कुल रकबा बढ़ने से यह उम्मीद जताई जा रही है कि कुल उत्पादन इस लक्ष्य से ज्यादा रह सकता है। 2022-23 में सरसों का कुल उत्पादन 128.43 लाख टन रहा था।</p>
<p>खाद्य तेल उत्पादकों के संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के आंकड़ों के मुताबिक, &nbsp;पिछले तेल वर्ष 2022-23 (नवंबर-अक्टूबर) में खाद्य तेलों के कुल आयात में पाम ऑयल की हिस्सेदारी 56 फीसदी से बढ़कर 59 फीसदी पर पहुंच गई है। इस दौरान आरबीडी पामोलिन का आयात 18.4 लाख टन से बढ़कर 21.1 लाख टन, कच्चे पाम ऑयल (सीपीओ) का आयात, 54.9 लाख टन के मुकाबले 75.9 लाख टन और कच्चे पाम कर्नेल ऑयल (सीपीकेओ) का आयात 79,740 टन की तुलना में बढ़कर 94,148 टन पर पहुंच गया। तेजी से बढ़ते आयात के चलते सरसों की घरेलू कीमतें घटी हैं जिससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरसों के सबसे बड़े उत्पादक राज्य में इस वजह से घट गया बुवाई का रकबा ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नारायणगढ़ चीनी मिल के बकाया भुगतान को लेकर किसान धरने&amp;#45;प्रदर्शन को मजबूर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-forced-to-protest-for-payment-of-dues-from-narayangarh-sugar-mill.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 28 Dec 2023 14:54:52 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-forced-to-protest-for-payment-of-dues-from-narayangarh-sugar-mill.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में अंबाला जिले की नारायणगढ़ चीनी मिल के भविष्य और बकाया भुगतान को लेकर किसान चिंतित हैं। कोर्ट से चीनी मिल की संपत्ति अटैचमेंट के आदेश के बाद किसान संगठन बकाया भुगतान को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं जबकि प्रशासन मामले का हल निकालने में नाकाम रहा है। घपले-घोटालों और वित्तीय संकट से जूझ रही नारायणगढ़ चीनी मिल के सामने नीलामी का खतरा मंडरा रहा है।</p>
<p>नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) से जुड़े एक मामले में कोर्ट ने चीनी मिल की संपत्ति अटैच करने का आदेश दिया था। जब से किसानों को इस आदेश की जानकारी मिली है, तभी से मिल के बिकने या नीलामी की अटकलें लगाई जा रही हैं। चीनी मिल को गन्ना बेच चुके किसान अपने भुगतान को लेकर परेशान हैं। पिछले और इस सीजन का मिलकार करीब 70 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है जबकि कई अन्य संस्थानों की देनदारियां भी हैं।</p>
<p>बकाया भुगतान को लेकर बुधवार को बीकेयू शहीद भगत सिंह, संयुक्त किसान मजदूर इंकलाब यूनियन और गन्ना किसान कमेटी ने नारायणगढ़ में एसडीएम कार्यालय पर धरना दिया। किसान नेता <strong>तेजवीर सिंह</strong> ने बताया कि जब तक किसानों के बकाया भुगतान का मामला नहीं सुलझता, आंदोलन जारी रहेगा। किसान चीनी मिल नीलाम होने की स्थिति में भुगतान की गारंटी प्रशासन से चाहते हैं। चीनी मिल पर इस सीजन का करीब 50 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया है कि जबकि पिछले सीजन का 18 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है। इसके अलावा चीनी मिल पर 35 करोड़ रुपये के फसल कर्ज में घपले के आरोप भी हैं। यह कर्ज चीनी मिल ने किसानों ने नाम पर उठाया गया था। हरियाणा के हरको बैंक और इरेडा की देनदारी चीनी मिल पर है।</p>
<p>बीकेयू (चढ़ूनी) के नेता <strong>गुरनाम सिंह चढ़ूनी</strong> ने रूरल वॉयल को बताया कि किसानों को उनका बकाया भुगतान ब्याज सहित मिलना चाहिए। किसानों ने मिल को अपनी उपज बेची है, कोई लोन नहीं दिया है। अगर मिल की नीलामी होती है या कोई इसे खरीदता है तो सबसे पहले किसानों की बकाया राशि का भुगतान होना चाहिए। इस मुद्दे पर आगामी 2 जनवरी को नारायणगढ़ में किसान पंचायत बुलाई गई है, जिसमें निर्णय लेकर प्रशासन को अवगत कराया जाएगा।</p>
<p>उधर, शुगर मिल प्रबंधन का कहना है कि मिल की कुर्की के आदेश नहीं हुए बल्कि संपत्ति अटैचमेंट के ऑर्डर हुए हैं। कोर्ट में मामला अभी विचाराधीन है। लेकिन सवाल यह भी है कि अगर मिल बंद होती है तो किसान गन्ना कहां बेचेंगे। किसानों का जो बकाया है, उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। फिलहाल यह मिल सरकारी नियंत्रण में चल रही हैं और हजारों किसान इस पर निर्भर हैं।&nbsp;</p>
<p><strong>क्या है मामला?</strong></p>
<p>वेयरहाउस में रखी कृषि उपज पर लोन और निवेश जुड़ा एनएसईएल घोटाला 2013 में सामने आया था। इस मामले में याथुरी एसोसिएट्स नाम की एक कंपनी का नाम भी आया जो नारायणगढ़ चीनी मिल के मालिकों से जुड़ी है। गत अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने याथुरी एसोसिएट्स की संपत्ति को अटैच करने का आदेश दिया था, जिसकी चपेट में नारायणगढ़ चीनी मिल भी आ गई। नारायणगढ़ शुगर मिल के मालिक राहुल आनंद पर अलग-अलग कंपनियों के जरिए एनएसईएल में लगभग 122 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। फिलहाल राहुल आनंद जेल में हैं और दो साल से मिल का संचालन सरकार करवा रही है।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नारायणगढ़ चीनी मिल के बकाया भुगतान को लेकर किसान धरने-प्रदर्शन को मजबूर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ग्राम उन्नति ने एक लाख एकड़ भूमि को गरमा धान से वसंतकालीन मक्का की खेती में परिवर्तित करने को यूपी सरकार से किया समझौता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/gram-unnati-ties-up-with-up-government-to-transition-1-lakh-acre-land-from-summer-paddy-to-spring-maize.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 21 Dec 2023 17:17:35 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/gram-unnati-ties-up-with-up-government-to-transition-1-lakh-acre-land-from-summer-paddy-to-spring-maize.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एकीकृत कृषि समाधान कंपनी ग्राम उन्नति ने घोषणा की है कि फसलों के विविधीकरण के उद्देश्य से एक व्यापक परिवर्तनकारी पहल के लिए उसने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। इसके तहत प्रदेश की एक लाख एकड़ भूमि को गरमा धान की खेती से वसंतकालीन मक्का की खेती में तब्दील किया जाएगा। फसल विविधीकरण की इस परियोजना से प्रदेश के छह जिलों अमरोहा, बरेली, बुलंदशहर, मुरादाबाद, रामपुर और संभल जिलों के किसानों को लाभ होगा।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह और मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार डॉ. के.वी. राजू की मौजूदगी में लखनऊ स्थित आईआईए भवन में इस परियोजना का अनावरण किया गया। इस परियोजना को आईएफसी के इंडिया एगटेक एडवाइजरी प्रोजेक्ट (आईएएपी) का भी समर्थन प्राप्त है। इसका लक्ष्य पश्चिमी यूपी के छह जिलों अमरोहा<span>, </span>बरेली<span>, </span>बुलंदशहर<span>, </span>मुरादाबाद<span>, </span>रामपुर और संभल में <span>1</span>,<span>00,000 </span>एकड़ भूमि को ग्रीष्मकालीन धान से वसंत मक्का में स्थानांतरित करना है। साथ ही तीन से पांच साल की अवधि में इसके जरिये किसानों की आय बढ़ाना और महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना है।</p>
<p>इस परियोजना की शुरुआत पर मनोज कुमार सिंह ने कहा, &ldquo;यह पहल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कृषि स्थिरता और सामाजिक आर्थिक विकास में मील का पत्थर है। हम ग्राम उन्नति को एक महत्वपूर्ण परियोजना के लिए एक मूल्यवान भागीदार के रूप में पाकर बेहद खुश हैं<span>, </span>जो टिकाऊ कृषि की दिशा में एक परिवर्तनकारी यात्रा के लिए आधार तैयार करेगा। यह परियोजना फसल विविधीकरण के माध्यम से सामाजिक-आर्थिक प्रगति की क्षमता को प्रदर्शित करेगी और उत्तर प्रदेश के इन छह जिलों के किसानों को वित्तीय लाभ दिलाएगी।&rdquo;</p>
<p>इसका प्राथमिक उद्देश्य किसानों की आय को <span>15% </span>से <span>25% </span>तक बढ़ाना और महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना है। इसमें सिंचाई के लिए पानी के उपयोग को <span>60% </span>से <span>80% </span>तक कम करना शामिल है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_6584254e8e55e.jpg" alt="" /></p>
<p>ग्राम उन्नति के सीईओ और संस्थापक अनीश जैन ने कहा<span>, "</span>विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के महीनों के प्रयास को साकार होता देख हम बहुत सम्मानित महसूस कर रहे हैं। हमारी प्रतिबद्धता हितधारकों के बीच तालमेल पैदा करना है। एक मॉडल जो न केवल किसानों की समृद्धि को बढ़ावा देता है<span>, </span>बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी समर्थन करता है। सरकार<span>, </span>मक्का प्रोसेसर<span>, </span>इनपुट आपूर्तिकर्ताओं और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र में अन्य आवश्यक हितधारकों के बीच साझेदारी को सुविधाजनक बनाना परियोजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।"</p>
<p>ग्राम उन्नति एक एग्रीटेक कंपनी है जो सलाहकार सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले इनपुट तक किसानों की पहुंच बनाने, सीमांत किसानों को बाजार से जोड़ने, कृषि उपज के अनुकूलित उत्पादन<span>, </span>लॉजिस्टिक्स और एंड-टू-एंड गुणवत्ता नियंत्रण के साथ संस्थागत खरीदार है। इसकी स्थापना आईआईटी खड़गपुर के स्नातक अनीश जैन ने 2013 में की थी</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_6584253fe5a2e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ग्राम उन्नति ने एक लाख एकड़ भूमि को गरमा धान से वसंतकालीन मक्का की खेती में परिवर्तित करने को यूपी सरकार से किया समझौता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इस साल 10 महीने में महाराष्ट्र में 2,366 किसानों ने आत्महत्या की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rural-crisis-2366-farmers-committed-suicide-in-maharashtra-in-10-months-this-year.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 15 Dec 2023 13:20:33 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rural-crisis-2366-farmers-committed-suicide-in-maharashtra-in-10-months-this-year.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या से जुड़ा चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। महाराष्ट्र में इस साल जनवरी से अक्टूबर के बीच 2,366 किसानों ने आत्महत्या की है। यह जानकारी महाराष्ट्र के राहत और पुनर्वास मंत्री अनिल भाईदास पाटिल ने राज्य विधानसभा में दी। कांग्रेस विधायक कुणाल पाटिल द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में मंत्री ने कहा कि अमरावती राजस्व मंडल में किसानों की आत्महत्या से सबसे अधिक 951 मौतें हुईं।</p>
<p>मंत्री <strong>अनिल पाटिल</strong> ने बताया, "महाराष्ट्र सरकार को रिपोर्ट मिली है कि इस साल जनवरी से अक्टूबर तक 2,366 किसानों की आत्महत्या से मौत हो गई।" रिपोर्ट के अनुसार, अमरावती राजस्व मंडल में 951 किसानों ने अपनी जान दे दी, इसके बाद छत्रपति संभाजीनगर मंडल में 877, नागपुर मंडल में 257, नासिक मंडल में 254 और पुणे मंडल में 27 किसानों ने अपनी जान दे दी। राज्य सरकार आत्महत्या से मरने वाले किसानों के परिजनों को 1 लाख रुपये देती है। आत्महत्या से मरने वाले किसानों के परिवार के सदस्यों को सरकार 1 लाख रुपये की सहायता देती है।</p>
<p>महाराष्ट्र में इस साल 10 महीने में किसानों की आत्महत्या के आंकड़े के हिसाब से राज्य में औसतन लगभग 240 किसान हर महीने और सात किसान हर दिन अपनी जान दे रहे हैं। विदर्भ क्षेत्र में किसानों की आत्महत्या के सबसे अधिक मामले&nbsp;दर्ज किए गये हैं। महाराष्ट्र के नेता प्रतिपक्ष<strong> विजय वडेट्टीवार</strong> ने राज्य सरकार पर किसानों की दुर्दशा के प्रति उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है। &nbsp;प्रकृति की मार और महायुति सरकार की उपेक्षा के कारण प्रतिदिन औसतन सात किसान आत्महत्या कर रहे हैं।&nbsp;भारत के लगभग 37% किसान अकेले महाराष्ट्र में आत्महत्या करते हैं। फसल की विफलता और बढ़ते कर्ज के कारण 1 जुलाई, 2022 से 1 जुलाई, 2023 तक एक वर्ष में राज्य में 3,000 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_657c04cbaf6c1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ इस साल 10 महीने में महाराष्ट्र में 2,366 किसानों ने आत्महत्या की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_657c04cbaf6c1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मखाना की खेती और भंडारण गृह बनाने के लिए मिलेगी 75 फीसदी सब्सिडी, यहां करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/75-percent-subsidy-will-be-available-for-makhana-cultivation-apply-here.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 14 Dec 2023 06:35:31 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/75-percent-subsidy-will-be-available-for-makhana-cultivation-apply-here.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बिहार का मिथिलांचल और सीमांचल इलाका मखाना की खेती के लिए मशहूर है। देश के कुल मखाना उत्पादन में से 90 फीसदी हिस्सा इन्हीं इलाकों में उत्पादित होता है। मखाना की खेती को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार ने मखाना विकास योजना बनाई है। इसकी खेती और भंडारण गृह बनाने के लिए 75 फीसदी सब्सिडी दी जाती है। राज्य बागवानी मिशन के तहत बिहार सरकार के उद्यान निदेशालय ने सब्सिडी पाने के इच्छुक किसानों के लिए ऑनलाइन आवेदन मंगवाए हैं।</p>
<p>मखाना को जीआई टैग भी मिल चुका है। मखाना विकास योजना का लाभ राज्य के 10 जिलों के किसान उठा सकते हैं। इन जिलों में पूर्णियां, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा, अररिया, किशनगंज, सुपौल, खगड़िया, दरभंगा और मधुबनी शामिल हैं। मखाना की उन्नत प्रजाति के बीज का उत्पादन, बीज वितरण, नए क्षेत्र का विस्तार, मखाना भंडार गृह (5 टन) तथा प्रशिक्षण के माध्यम से मखाना के उत्पादन एवं उत्पादकता के साथ-साथ किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से मखाना विकास योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।</p>
<p>इसके तहत न्यूनतम 0.25 एकड़ (0.1 हेक्टेयर) एवं अधिकतम 10 एकड़ (4 हेक्टेयर) की खेती के लिए सब्सिडी दी जाएगी। सब्सिडी की राशि किसानों के बैंक खाते में भेजी जाएगी। किसानों के चयन में 30 फीसदी महिलाओं, 16 फीसदी अनुसूचित जाति तथा 1 फीसदी अनुसूचित जनजाति की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।</p>
<p><strong>कितनी मिलेगी सब्सिडी</strong></p>
<p>स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 के उन्नत किस्म की खेती के लिए लागत प्रति हेक्टेयर 97 हजार रुपये तय की गई है। एक हेक्टेयर खेती के लिए किसानों को 72,750 रुपये (75 फीसदी) सब्सिडी मिलेगी। पूर्णिया, मधेपुरा, दरभंगा और किशनगंज के किसानों को इसका लाभ मिलेगा। इसके अलावा, नए क्षेत्र का विस्तार करने पर भी किसानों को इतनी ही सब्सिडी दी जाएगी। इसका लाभ लक्षित सभी 10 जिलों के किसान उठा सकते हैं।</p>
<p>यही नहीं, इस योजना के तहत 5 टन तक का मखाना भंडारण गृह बनाने के लिए भी राज्य सरकार सब्सिडी दे रही है। भंडारण गृह की लागत 10 लाख रुपये तय की गई है। इस पर 7.5 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी। साथ ही, मखाना किसानों को बीज बांटने के लिए भी सब्सिडी दी जाएगी। बीज की कीमत प्रति हेक्टेयर 5,400 रुपये तय की गई है जिसके लिए 75 फीसदी सब्सिडी मिलेगी। 10 जिलों के किसानों को इसका लाभ मिलेगा।</p>
<p><strong>ऐसे करें आवेदन</strong></p>
<p>अगर आप भी बिहार के किसान हैं और आपने अपना पंजीकरण करवा रखा है, तो मखाना खेती के लिए सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं। योजना का लाभ उठाने के लिए इस तरीके से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं-</p>
<ul>
<li>सबसे पहले आपको बिहार सरकार के कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट <a href="https://horticulture.bihar.gov.in">https://horticulture.bihar.gov.in</a> पर जाना होगा।</li>
<li>आपके सामने वेबसाइट का होम पेज खुल जाएगा जिस पर बिहार सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के नाम दिखाई देंगे।</li>
<li>आपको मखाना विकास योजना पर आवेदन करें के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।</li>
<li>क्लिक करते ही नया पेज खुल जाएगा।</li>
<li>इस पेज पर कुछ नियम और शर्तें दिखाई देगी जिसे ध्यानपूर्वक पढ़ने के बाद अपनी सहमति देने के लिए Agree के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।</li>
<li>क्लिक करते ही आवेदन फॉर्म खुल जाएगा।</li>
<li>अब आप आवेदन फॉर्म में पूछी गई सभी आवश्यक जानकारी को ध्यानपूर्वक दर्ज करें।</li>
<li>सभी जानकारी दर्ज करने के बाद मांगे गए दस्तावेजों को अपलोड करना होगा।</li>
<li>अंत में आपको सबमिट के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा और आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।</li>
</ul>
<p>आवेदन करने के लिए आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, भूमि से संबंधित दस्तावेज, बैंक खाता पासबुक जैसे दस्तावेजों के अलावा मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो की जरूरत होगी। आवेदक का बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक होना चाहिए। विशेष जानकारी हासिल करने के लिए किसान संबंधित जिले के उद्यान सहायक निदेशक से संपर्क कर सकते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_65798ff5296d1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मखाना की खेती और भंडारण गृह बनाने के लिए मिलेगी 75 फीसदी सब्सिडी, यहां करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_65798ff5296d1.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मिलेट्स स्टोर खोलने के लिए 20 लाख की सब्सिडी, जानिए पूरी प्रक्रिया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/subsidy-of-rs-20-lakh-to-open-millets-store-know-the-complete-process.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 13 Dec 2023 11:50:46 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/subsidy-of-rs-20-lakh-to-open-millets-store-know-the-complete-process.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारत सरकार मोटे अनाजों यानी मिलेट्स को खूब बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। साल 2023 को 'इंटरनेशनल मिलेट्स ईयर' के घोषित किया गया। राज्य सरकारें भी मिलेट्स से जुड़ी कई योजनाएं चला रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि विभाग ने मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत मिलेट्स बीज उत्पादन के लिए 4 लाख रुपये की सीडमनी दी जाएगी। इसके अलावा मिलेट्स प्रोसेसिंग, <span>पैकिंग व मार्केटिंग सेंटर की </span>स्थापना के लिए अधिकतम 47.50 लाख रुपये और मिलेट्स मोबाइल आउटलेट एवं मिलेट्स स्टोर खोलने के लिए 20 लाख रुपये तक का अनुदान मिलेगा। &nbsp; &nbsp;</p>
<p>इस योजना का लाभ किसान, <span>एफपीओ</span>, <span>स्वयं सहायता समूहों और उद्यमी उठा सकते हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश के कृषि विभाग </span>के पोर्टल <strong>agriculture.up.gov.in</strong> <span>पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। ऑनलाइन आवेदन की अवधि <strong>11 दिसंबर</strong> दोपहर 12 बजे से <strong>16 दिसंबर</strong> रात 12 बजे तक चलेगी। मिलेट्स स्टोर</span>, <span>मिलेट्स सेंटर या बीज उत्पादन करने के इच्छुक किसान या एफपीओ 16 दिसंबर तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। </span></p>
<p><strong>मिलेट्स बीज उत्पादन के लिए सीडमनी</strong></p>
<p>मिलेट्स बीज उत्पादन के लिए केवल कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) ही आवेदन कर सकते हैं। चयनित एफपीओ को 4 लाख रुपये की धनराशि सीडमनी के तौर पर दी जाएगी। इसके लिए सिर्फ वे एफपीओ पात्र होंगे जिन्होंने खरीफ-2023 में मिलेट्स का बीज उत्पादन किया हो और जिनके पास विभिन्न फसलों के 100 क्विंटल मिलेट्स बीजों का भंडारण हो।</p>
<p><strong>मिलेट्स प्रोसेसिंग, </strong><span><strong>पैकेजिंग व मार्केटिंग सेंटर</strong> &nbsp;&nbsp;</span></p>
<p>इसके लिए किसान उत्पादन संगठन (एफपीओ) और उद्यमी आवेदन कर सकते हैं। इन्हें मिलेट्स प्रोसेसिंग, <span>पैकेजिंग व मार्केटिंग सेंटर की स्थापना के लिए प्रोजेक्ट लागत का 50 फीसदी अथवा अधिकतम 47.50 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। एफपीओ कम से कम तीन साल पुराना और टर्नओवर एक करोड़ रुपये होना चाहिए। </span></p>
<p><strong>मिलेट्स मोबाइल आउटलेट एवं मिलेट्स स्टोर </strong></p>
<p>किसान, <span>एफपीओ</span>, <span>स्वयं सहायता समूह और उद्यमी मिलेट्स मोबाइल आउटलेस और मिलेट्स स्टोर खोलने के लिए आवेदन कर सकते हैं। मिलेट्स मोबाइल आउटलेट खोलने के लिए अधिकतम </span>10 लाख रुपये और मिलेट्स स्टोर के लिए अधिकतम 20 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। मिलेट्स आउटलेट के लिए वाहन और मिलेट्स स्टोर के लिए दुकान आवेदनकर्ता के पास होनी चाहिए। साथ ही बैंक खाते में 10 लाख रुपये की पूंजी उपलब्ध होना अनिवार्य है।</p>
<p><strong>ऐसे करें आवेदन</strong></p>
<p>सबसे पहले योजना के लिए आवेदन अपनी पात्रता जांच ले</p>
<p><strong>यूपी कृषि विभाग के पोर्टल </strong><a href="http://www.agriculture.up.gov.in">www.agriculture.up.gov.in</a> पर जाएं</p>
<p>होम पेज पर <a href="https://agriculture.up.gov.in/milletpage.html">मिलेट्स के विस्तृत विज्ञापन एवं आवेदन हेतु क्लिक करें</a> दिखाई देगा। वहां क्लिक करें</p>
<p>मिलेट्स के विज्ञापन के साथ ये तीन विकल्प दिखाई देंगे</p>
<ul>
<li>सीडमनी हेतु आवेदन</li>
<li>मिलेट्स प्रसंस्करण, पैकिंग सह विपणन केंद्र की स्थापना हेतु आवेदन</li>
<li>मिलेट्स मोबाईल आउट्लेट/मिलेट्स स्टोर की स्थापना हेतु आवेदन</li>
</ul>
<p>ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हेतु उपलब्ध लिंक पर क्लिक कर अपना विवरण भरकर सबमिट करें।</p>
<p>सबमिट के बाद रजिस्ट्रेशन के प्रिंट का ऑप्शन आएगा। उसे प्रिंट कर लें। रजिस्ट्रेशन के प्रिंट के साथ आवेदन के साथ संलग्न किए जाने वाले जरूरी दस्तावेजों की चेकलिस्ट भी प्राप्त होगी।</p>
<p>आवेदनकर्ता द्वारा रजिस्ट्रेशन के प्रिंट को समस्त वांछित दस्तावेजों सहित संबंधित जनपदीय उप कृषि निदेशक कार्यालय में जमा किया जाएगा।</p>
<p>आनलाइन रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि: 16 दिसंबर, 2023</p>
<p>जनपदीय उप कृषि निदेशक कार्यालय में समस्त दस्तावेजों सहित आवेदन जाम कराने की अतिम तिथि: 25 दिसंबर, 2023</p>
<p>अधिक जानकारी के लिए कृषि विभाग के पोर्टल <a href="http://www.agriculture.up.gov.in">www.agriculture.up.gov.in</a> पर उपलबध है। &nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_65794d0866d6c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मिलेट्स स्टोर खोलने के लिए 20 लाख की सब्सिडी, जानिए पूरी प्रक्रिया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तमिलनाडु के नारियल किसान 13 दिसंबर से दिल्ली में करेंगे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/coconut-farmers-of-tamil-nadu-will-go-on-indefinite-hunger-strike-at-jantar-mantar-from-december-13.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 12 Dec 2023 16:02:31 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/coconut-farmers-of-tamil-nadu-will-go-on-indefinite-hunger-strike-at-jantar-mantar-from-december-13.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>तमिलनाडु के नारियल उत्पादक बुधवार से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चिकालीन भूख हड़ताल करेंगे। उनकी मांग है कि सरकार द्वारा खरीदे गए एक लाख टन खोपरा नारियल को तेल में बदलकर भारत आटा की तर्ज पर भारत नारियल तेल नाम से उसकी बिक्री की जाए। उनका कहना है कि मांग पूरी होने तक उनका विरोध जारी रहेगा।</p>
<p>तमिलनाडु फार्मर्स प्रोटेक्शन एसोसिएशन के संस्थापक ईसन मुरुगासामी ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया, &ldquo;नेफेड ने किसानों से 108.60 रुपये प्रति किलो पर खोपरा नारियल खरीदा है। &nbsp;अकेले तमिलनाडु से एक लाख टन की खरीद हुई है। अब नेफेड नारियल को खुले बाजार में बेचने की व्यवस्था कर रहा है। इसका फायदा उठाते हुए नारियल तेल कारोबार में शामिल बड़ी कंपनियों ने एक सिंडिकेट बनाया है और 65 रुपये प्रति किलो पर बोली लगाने की योजना बनाई है।&rdquo;</p>
<p>उन्होंने कहा कि कुल खोपरा नारियल उत्पादन का केवल 10 फीसदी केंद्र सरकार द्वारा खरीदा जाता है, शेष 90 फीसदी नारियल खुले बाजार में बेचे जाते हैं। कर्नाटक में नेफेड द्वारा खरीदे गए खोपरा का 20 फीसदी खुले बाजार में बेचा गया था। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में खोपरा की कीमत 90 रुपये से घटकर 85 रुपये हो गई है। नेफेड द्वारा एक लाख टन खोपरा बेचने पर प्रति किलो खोपरा की कीमत 85 रुपये से गिरकर 50 रुपये हो जाएगी, जबकि नारियल की कीमत 12 रुपये से घटकर 5 रुपये हो जाएगी।</p>
<p>मुरुगासामी ने आशंका जताई कि कीमतें घटने से देश के एक करोड़ नारियल किसान गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि नेफेड जिस तरह से गेहूं का आटा भारत आटा के नाम से, दाल भारत दाल के नाम से और प्याज भारत प्याज के नाम से बेचता है, उसी तरह से किसानों के हितों की रक्षा के लिए भारत नारियल तेल के नाम से नारियल तेल की बिक्री करे। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि नेफेड खोपरा नारियल खरीद रहा है और उन्हें खोपरा के रूप में बाजार में बेच रहा है। इससे नारियल किसान बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए नारियल किसानों और सभी किसान संघों की ओर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की जा रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नेफेड द्वारा खरीदे गए एक लाख टन खोपरा नारियल को तेल में बदलने की मांग पूरी होने तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने कोकोनट ग्रोअर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, तमिलनाडु फार्मर्स प्रोटेक्शन एसोसिएशन, तमिलनाडु कावेरी फार्मर्स प्रोटेक्शन एसोसिएशन और तमिलनाडु फार्मर्स सोसायटीज के संयुक्त आंदोलन की ओर से कहा कि हम सभी से बड़ी संख्या में भूख हड़ताल में भाग लेने का अनुरोध करते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_6578366451865.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ तमिलनाडु के नारियल किसान 13 दिसंबर से दिल्ली में करेंगे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_6578366451865.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्याज निर्यात पर प्रतिबंध के खिलाफ महाराष्ट्र विधानसभा में  प्रदर्शन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/demonstration-in-maharashtra-assembly-against-ban-on-onion-export.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 11 Dec 2023 14:06:53 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/demonstration-in-maharashtra-assembly-against-ban-on-onion-export.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में हडकंप मच गया है। केंद्र सरकार के इस फैसले से किसान और प्याज व्यापारी काफी नाराज हैं। सोमवार को विपक्षी विधायकों ने प्याज निर्यात पर रोक के खिलाफ महाराष्ट्र विधान भवन की सीढ़ियों पर विरोध-प्रदर्शन किया। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले कई विपक्षी विधायकों ने प्याज की मालाएं पहनकर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विरोध प्रदर्शन करने वालों में विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार, विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे, राकांपा नेता अनिल देशमुख शामिल थे।&nbsp;</p>
<p>प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध के बाद महाराष्ट्र के नासिक जिले में किसानों ने हाईवे जाम कर विरोध-प्रदर्शन किया। नासिक जिले के लासलगांव, नंदगांव, पिंपलगांव और उमराने की प्याज मंडियों में पिछले चार-पांच दिनों से किसान विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जिसके चलते इन मंडियों में प्याज की नीलामी बंद है। विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम को "किसान विरोधी" करार देते हुए प्रतिबंध हटाने की मांग की है।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>इस साल प्याज की महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाये। अगस्त में प्याज पर 40 फीसदी निर्यात शुल्क लगा दिया था। इससे प्याज का निर्यात नहीं रुका तो प्याज के निर्यात पर 800 अमेरिकी डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) लगा दिया। अंतत: पिछले सप्ताह सरकार ने प्याज के निर्यात पर मार्च, 2024 तक रोक लगा दी।&nbsp;</p>
<p><strong>कोई रास्ता निकालेंगे: शिंदे</strong></p>
<p>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कहना है कि उनकी सरकार कोई ना कोई रास्ता निकालेगी ताकि प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध से किसानों को नुकसान न पहुंचे। नागपुर में पत्रकारों से बात करते हुए सीएम शिंदे ने कहा कि उन्होंने प्याज के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से टेलीफोन पर बातचीत की और महाराष्ट्र की स्थिति से अवगत कराया। इस मसले का कोई ना कोई हल निकाला जाएगा।</p>
<p><strong>जनवरी तक नीचे आएंगी प्याज की कीमतें </strong></p>
<p>प्याज के दाम जनवरी तक घटने के आसार हैं। उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने उम्मीद जताई कि जनवरी तक प्याज की कीमतें मौजूदा औसत 57.02 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 40 रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे आ जाएंगी।&nbsp;एक सम्मेलन के दौरान रोहित कुमार सिंह ने कहा कि प्याज के दाम 60 रुपये प्रति किलोग्राम को पार नहीं करेंगे। उनका कहना है कि प्याज निर्यात पर प्रतिबंध से किसानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। व्यापारियों का एक छोटा समूह भारतीय और बांग्लादेश के बाजारों में कीमतों के बीच अंतर का फायदा उठा रहा है। निर्यात प्रतिबंध से सिर्फ उन व्यापारियों को नुकसान होगा, जबकि भारतीय उपभोक्ताओं का फायदा होगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_6576ce6c2e6b9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्याज निर्यात पर प्रतिबंध के खिलाफ महाराष्ट्र विधानसभा में  प्रदर्शन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Ajeet Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_6576ce6c2e6b9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मेघालय की लाकाडोंग हल्दी को मिला जीआई टैग, दुनिया की बेहतरीन हल्दियों में से है एक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/gi-tag-for-meghalaya-lakadong-turmeric.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 07 Dec 2023 07:07:48 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/gi-tag-for-meghalaya-lakadong-turmeric.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दुनिया में हल्दी की सबसे अच्छी किस्मों में से एक मानी जाने वाली मेघालय की लाकाडोंग हल्दी को जीआई टैग मिला है। इस किस्म में हल्दी के प्रमुख तत्व कुरकुमिन की मात्रा काफी अधिक होती है। राज्य के जैन्तिया हिल्स के लाकाडोंग इलाके में इसकी प्रमुखता से खेती की जाती है।</p>
<p>लाकाडोंग हल्दी को दुनिया की सबसे अच्छी किस्म की हल्दी में से एक माना जाता है। इसमें कुरकुमिन की मात्रा लगभग 6.8-7.5 फीसदी तक होती है। इसका रंग गहरा होता है और इसे उर्वरकों के उपयोग के बिना जैविक रूप से उगाया जाता है।</p>
<p>मेघालय की कृषि मंत्री अम्परीन लिंगदोह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि लाकाडोंग हल्दी की खेती जैन्तिया हिल्स के लाकाडोंग क्षेत्र में होती है। इसमें कुरकुमिन की मात्रा अधिक होती है। वैज्ञानिक रूप से यह बात साबित हो चुकी है कि कुरकुमिन स्वास्थ्य के लिए कितना लाभदायक है। इसमें हृदय की सेहत सुधारने और अल्जाइमर एवं कैंसर को रोकने की क्षमता है। साथ ही यह शक्तिशाली सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट है। अवसाद और गठिया को ठीक करने में भी यह मदद कर सकता है।</p>
<p>लिंग्दोह ने कहा कि इस हल्दी को जीआई टैग मिलने से किसानों को इसकी मार्केटिंग में मदद मिलेगी और उन्हें बाजार में इसके बेहतर दाम मिलेंगे। जीआई टैग के लिए पहल करने वाले हितधारकों को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा, "जीआई टैग किसानों को मार्केटिंग में मदद करेगा और ग्राहकों को प्रामाणिक उत्पाद मिलेगा।" लाकाडोंग क्षेत्र के 43 गांवों के लगभग 14,000 किसान वर्तमान में 1,753 हेक्टेयर भूमि पर हल्दी की खेती करते हैं।</p>
<p>लाकाडोंग के किसान ट्रिनिटी साइओ ने इसके लिए मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा के प्रति खुशी और आभार जताते हुए कहा, "मुझे बहुत खुशी है कि लाकाडोंग हल्दी को जीआई टैग मिला है। यह जैंतिया हिल्स के लोगों के लिए एक आशीर्वाद है।" उन्होंने कहा कि इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लाकाडोंग किसानों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिलेगा और आजीविका के अधिक अवसर पैदा होंगे। राज्य में अधिक से अधिक किसानों को हल्दी की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए 2021 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। &nbsp;</p>
<p>लाकाडोंग हल्दी के अलावा, मेघालय के गारो डाकमांडा (पारंपरिक पोशाक), लारनाई मिट्टी के बर्तन और गारो चुबिची (मादक पेय) को प्रतिष्ठित जीआई टैग दिया गया है। डाकमांडा हाथ से बुना हुआ टखने तक का कमर से नीचे पहनने वाला पोशाक है जो मेघालय की गारो महिलाओं की पारंपरिक पोशाक का हिस्सा है। चुबिची चावल से बनने वाला मादक पेय है, जो गारो समुदायों के दावतों और समारोहों के दौरान परोसा जाता है। दूसरी ओर, लारनाई मिट्टी के बर्तन लारनाई गांव की काली मिट्टी से बने होते हैं। यह कला पीढ़ियों से चली आ रही है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_657061b66cc4c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मेघालय की लाकाडोंग हल्दी को मिला जीआई टैग, दुनिया की बेहतरीन हल्दियों में से है एक ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_657061b66cc4c.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कर्नाटक को सूखा राहत के लिए 18,171 करोड़ रुपये दे केंद्र, खड़गे ने की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/center-should-give-rs-18171-crore-to-karnataka-for-drought-relief-kharge-demanded.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Dec 2023 16:43:22 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/center-should-give-rs-18171-crore-to-karnataka-for-drought-relief-kharge-demanded.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अल-नीनो के मजबूत होने और मानसून की अनियमितता के चलते कर्नाटक में सूखे के हालात हैं। इसकी वजह से गन्ना सहित प्रमुख फसलों के उत्पादन पर असर पड़ा है। इसे देखते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार से कर्नाटक के लिए राष्ट्रीय आपदा कोष (एनडीआरएफ) से 18,171 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की है। कर्नाटक खड़गे का गृह प्रदेश भी है।</p>
<p>बुधवार को शून्यकाल के दौरान राज्यसभा में यह मामला उठाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कर्नाटक 123 वर्षों में सबसे गंभीर सूखे से जूझ रहा है और फसलों को 35,162 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि फसलों को 40-90 फीसदी तक नुकसान हुआ है।</p>
<p>खड़गे ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने सूखे से प्रभावित किसानों की मदद के लिए एनडीआरएफ से 18,171 करोड़ रुपये मांगे हैं। इसे जल्द से जल्द जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "यह वित्तीय सहायता इनपुट सब्सिडी, प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने और कम बारिश के कारण अन्य तत्काल उपायों को लागू करने के लिए महत्वपूर्ण है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि बारिश में कमी के कारण विभिन्न जलाशयों में पानी का स्तर चिंताजनक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गया है। इससे आने वाले दिनों में पीने के पानी की भी कमी हो सकती है। खड़गे ने चेन्नई सहित तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में बाढ़ की स्थिति की ओर भी सरकार का ध्यान दिलाया।</p>
<p>गौरतलब है कि कर्नाटक में सूखे की वजह से इस साल गन्ना के उत्पादन पर असर पड़ा है। इसकी वजह से चीनी का उत्पादन घटने का अनुमान है। चालू चीनी वर्ष (2023-24) में कर्नाटक में सबसे ज्यादा 36 फीसदी उत्पादन घटने का अनुमान है। पिछले सीजन (2022-23) में कर्नाटक में 59.8 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था, जिसके इस साल घटकर 38 लाख टन रह जाने का अनुमान चीनी उद्योग ने लगाया है। देश का कुल चीनी उत्पादन भी 41 लाख टन घटकर 290 लाख टन रहने का अनुमान उद्योग ने लगाया है। &nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_6570571c4fbb3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कर्नाटक को सूखा राहत के लिए 18,171 करोड़ रुपये दे केंद्र, खड़गे ने की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आंवला, नींबू व कटहल की बागवानी के लिए यह राज्य दे रहा 50 फीसदी सब्सिडी, ऐसे उठाएं योजना का लाभ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/bihar-horticulture-department-50-percent-subsidy-for-the-cultivation-of-amla-lemon-bael-jackfruit.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Dec 2023 06:52:44 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/bihar-horticulture-department-50-percent-subsidy-for-the-cultivation-of-amla-lemon-bael-jackfruit.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>आंवला, नींबू और बेल न सिर्फ सेहत के लिए फायदेमंद हैं, बल्कि इसकी खेती भी आर्थिक सेहत को मजबूत बनाती है। बाजार में इनका बेहतर दाम मिलता है। इनकी खेती के जरिये किसान स्थायी आमदनी का स्रोत बना सकते हैं। जलवायु परिवर्तन को देखते हुए बिहार सरकार ने फसल विविधीकरण योजना के तहत शुष्क बागवानी को बढ़ावा देने की योजना बनाई है।</p>
<p>बिहार सरकार के शुष्क बागवानी कार्यक्रम के तहत आंवला, नींबू, बेल और कटहल की खेती करने के लिए किसानों को 50 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। इनकी खेती के इच्छुक किसानों के लिए प्रदेश कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय ने 29 नवंबर से ऑनलाइन आवेदन मंगवाना शुरू किया है। प्रदेश के सात जिलों के किसान इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। इन जिलों में मानसून के दौरान कम बारिश होती है। इनमें गया, जमुई, मुंगेर, नवादा, औरंगाबाद, कैमूर और रोहतास जिले शामिल हैं। पात्र किसानों को पहले आओ पहले पाओ के आधार पर योजना का लाभ मिलेगा।</p>
<p><strong>कितनी मिलेगी सब्सिडी</strong></p>
<p>इस योजना के तहत किसानों को आंवला, नींबू, बेल और कटहल के पौधे लगाने पर कुल लागत का 50 फीसदी या अधिकतम 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाएंगे। न्यूनतम 5 पौधों से लेकर अधिकतम 4 हेक्टेयर तक की खेती करने के लिए सब्सिडी दी जाएगी। योजना के तहत प्रति हेक्टेयर आंवला एवं नींबू के 400 पौधे और बेल एवं कटहल के 100 पौधे लगा सकते हैं। सब्सिडी राशि का लाभ सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से भेजा जाएगा।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x_656f07efb8736.jpg" alt="" /></p>
<p>&nbsp;<strong>कौन कर सकते हैं आवेदन</strong></p>
<ul>
<li>आवेदक को बिहार का निवासी होना चाहिए और डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत होना आवश्यक है।</li>
<li>राज्य के छोटे एवं सीमांत किसान आवेदन करने के लिए पात्र होंगे।</li>
<li>आवेदक के पास शुष्क फलों की खेती के लिए खुद की भूमि होनी चाहिए।</li>
<li>किसान का बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक होना चाहिए।</li>
</ul>
<p><strong>ऐसे करें आवेदन </strong></p>
<p>अगर आप भी बिहार के किसान हैं और आपने अपना पंजीकरण करवा रखा है, तो इनकी खेती के लिए सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं। योजना का लाभ उठाने के लिए इस तरीके से ऑनलाइन कर सकते हैं-</p>
<ul>
<li>सबसे पहले आपको बिहार सरकार के कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट <a href="https://horticulture.bihar.gov.in">https://horticulture.bihar.gov.in</a> पर जाना होगा।</li>
<li>आपके सामने वेबसाइट का होम पेज खुल जाएगा जिस पर बिहार सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के नाम दिखाई देंगे।</li>
<li>आपको फसल विविधीकरण योजना आवेदन करें के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।</li>
<li>क्लिक करते ही नया पेज खुल जाएगा।</li>
<li>इस पेज पर कुछ नियम और शर्तें दिखाई देगी जिसे ध्यानपूर्वक पढ़ने के बाद अपनी सहमति देने के लिए Agree के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।</li>
<li>क्लिक करते ही आवेदन फॉर्म खुल जाएगा।</li>
<li>अब आप आवेदन फॉर्म में पूछी गई सभी आवश्यक जानकारी को ध्यानपूर्वक दर्ज करें।</li>
<li>सभी जानकारी दर्ज करने के बाद मांगे गए दस्तावेजों को अपलोड करना होगा।</li>
<li>अंत में आपको सबमिट के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा और आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।</li>
</ul>
<p>आवेदन करने के लिए आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, भूमि से संबंधित दस्तावेज, बैंक खाता पासबुक जैसे दस्तावेजों के अलावा मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो की जरूरत होगी। विशेष जानकारी हासिल करने के लिए किसान संबंधित जिले के उद्यान सहायक निदेशक से संपर्क कर सकते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_656f07d607639.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आंवला, नींबू व कटहल की बागवानी के लिए यह राज्य दे रहा 50 फीसदी सब्सिडी, ऐसे उठाएं योजना का लाभ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_656f07d607639.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[योजनाओं पर सब्सिडी के लिए उत्तर प्रदेश के किसान मोबाइल ऐप से भी आवेदन कर सकते हैं किसान, जानिये क्या है सुविधाएं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-can-also-apply-for-subsidy-on-agricultural-schemes-through-mobile-app-know-what-are-the-facilities.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 04 Dec 2023 14:16:34 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-can-also-apply-for-subsidy-on-agricultural-schemes-through-mobile-app-know-what-are-the-facilities.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कृषि क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं तक किसानों की पहुंच आसान बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने कृषि मोबाइल ऐप विकसित किया। इस ऐप का पूरा नाम यूपी पारदर्शी किसान ऐप है। इस एक ऐप पर एक ही जगह सभी संबंधित योजनाओं की जानकारी ली जा सकती है और उनका लाभ उठाया जा सकता है। अलग-अलग योजनाओं का लाभ पाने के लिए किसानों को विभिन्न प्लेटफार्मों पर खुद को पंजीकृत कराने की कोई आवश्यकता नहीं है। &nbsp;</p>
<p>यूपी सरकार ने कृषि मशीनरी सब्सिडी योजना 2023 लागू की है। इसके तहत किसानों को कृषि उपकरणों की खरीद पर 50 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है। खेत की जुताई से लेकर उपज की कटाई तक, छोटी से लेकर बड़ी कृषि मशीनरियों पर यह सब्सिडी दी जा रही है। यूपी पारदर्शी मोबाइल ऐप पर इस योजना की जानकारी हासिल की जा सकती है और सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए ऐप के जरिये ही आवदेन किया जा सकता है।</p>
<p>कृषि यंत्रों पर सब्सिडी पाने के लिए अभी उत्तर प्रदेश सरकार की बुकिंग खुली हुई है, जो 14 दिसंबर, 2023 की रात 12 बजे बंद होगी। अगर आप भी कोई कृषि यंत्र खरीदना चाह रहे हैं और सब्सिडी हासिल करना चाहते हैं, तो इस ऐप के जरिये आवदेन कर सकते हैं। सब्सिडी के लिए आवेदन करने वाले लाभार्थियों का चयन लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।</p>
<p><strong>इस ऐप पर किसानों के लिए निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध हैं-</strong></p>
<ul>
<li>कृषि विभाग से मिलने वाली सुविधाओं एवं सब्सिडी की जानकारी।</li>
<li>विभिन्न योजनाओं के लिए सब्सिडी पाने के लिए घर बैठे मोबाइल से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा।</li>
<li>सब्सिडी के लिए बीज, कृषि यंत्र, कृषि रक्षा उपकरण, कृषि रक्षा रसायन, भूमि उपचार आदि चुनने की सुविधा।</li>
<li>अपने पंजीकृत डाटा में आधार नंबर और मोबाइल नंबर जोड़ने की सुविधा ताकि पहचान के सत्यापन में दिक्कत न हो और सब्सिडी के लिए चयन की सूचना एवं अन्य आवश्यक मैसेज मिले।</li>
<li>कृषि यंत्रों पर सब्सिडी के लिए चयनित होने पर आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने की सुविधाएं।</li>
<li>डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांजेक्शन से जुड़ी जानकारी भी इस ऐप पर मिलेगी।</li>
<li>किसी भी फसली मौसम में बीज सब्सिडी के लिए पात्रता की जानकारी भी किसान यहां से हासिल कर सकते हैं।</li>
</ul>
<p><strong>ऐसे करें ऐप डाउनलोड</strong></p>
<ul>
<li>इस मोबाइल ऐप को सभी एंड्रॉयड फोन पर गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है।</li>
<li>प्ले स्टोर पर यूपी पारदर्शी (UP Pardarshi) टाइप करें और सर्च करें।</li>
<li>ऐप का पूरा नाम UP Pardarshi Kisan App और इस पर पारदर्शी किसान सेवा योजना का लोगो बना हुआ है।</li>
<li>ऐप डाउनलोड करने के बाद इसे अपने फोन पर इन्सटॉल करें। इन्सटॉल करते समय कुछ परमिशन मांगे जाएंगे जिसे देना होगा।</li>
</ul> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ योजनाओं पर सब्सिडी के लिए उत्तर प्रदेश के किसान मोबाइल ऐप से भी आवेदन कर सकते हैं किसान, जानिये क्या है सुविधाएं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गन्ना मूल्य में 11 रुपये की वृद्धि से पंजाब के किसान संगठन नाराज, विरोध&amp;#45;प्रदर्शन शुरू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-farmers-organizations-angry-over-rs-11-increase-in-sugarcane-price-protest-begins.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 02 Dec 2023 14:06:39 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-farmers-organizations-angry-over-rs-11-increase-in-sugarcane-price-protest-begins.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब सरकार द्वारा चालू पेराई सीजन (2023-24) के लिए गन्ना के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में 11 रुपये की बढ़ोतरी से राज्य के किसान संगठन संतुष्ट नहीं हैं। किसान नेताओं ने इसे "धोखा" करार दिया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री की घोषणा से नाराज किसानों ने संयुक्त गन्ना संघर्ष कमेटी की अगुवाई में होशियारपुर जिले में मुकेरियां चीनी मिल के सामने प्रदर्शन किया। किसान गन्ने से भरी ट्रॉलियां लेकर पहुंचे और जालंधर-पठानकोट नेशनल हाईवे जाम कर दिया। शनिवार को भी मुकेरियां में किसानों का धरना-प्रदर्शन जारी रहा। ताजा जानकारी के अनुसार, पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों को जबरन उठाकर जाम खुलवाया। इस दौरान कई किसान नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।&nbsp;</p>
<p>पंजाब के मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> ने 11 रुपये की बढ़ोतरी को शुभ शगुन बताते हुए देश में गन्ना किसानों को सबसे ज्यादा 391 रुपये भाव देने का ऐलान किया था। इस फैसले को आम आदमी पार्टी अपनी उपलब्धि के तौर पर प्रचारित कर रही है, लेकिन पंजाब के किसान इससे संतुष्ट नहीं हैं। पंजाब के कई इलाकों में गन्ना किसान विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>बीकेयू लाखोवाल के नेता <strong>नछत्तर सिंह</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि दो साल पहले गन्ने की लागत 388 रुपये प्रति क्विंटल के आधार पर किसान गन्ना का भाव 450 रुपये करने की मांग कर रहे थे। अब दो साल बाद भी गन्ना का भाव मात्र 11 रुपये बढ़कर 391 रुपये हुआ है। यह बेहद मामूली बढ़ोतरी है। केंद्र सरकार को भी गन्ने का एमएसपी 315 रुपये से बढ़ाकर 415 रुपये करना चाहिए।</p>
<p>बीकेयू (दोआबा) के अध्यक्ष <strong>मंजीत सिंह राय</strong> ने मीडिया से कहा कि कहा, "गन्ना मूल्य में 11 रुपये की बढ़ोतरी किसानों के साथ धोखा है। हम इस बढ़ोतरी को सिरे से खारिज करते हैं। पिछले हफ्ते चंडीगढ़ में बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा था कि हरियाणा ने हाल ही में गन्ने के दाम में 14 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। पंजाब में 14 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी होगी। इसलिए, हम अधिक बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे थे। जब तक सरकार गन्ना मूल्य में उचित बढ़ोतरी नहीं करती है, किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। &nbsp;&nbsp; &nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p>पंजाब के किसान राज्य में चीनी मिलों के नहीं चलने से भी नाराज हैं। इस साल पंजाब में भारी बारिश और बाढ़ के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। क्षतिग्रस्त फसलों के मुआवजे के लिए भी किसानों को संघर्ष करना पड़ रहा है। गन्ना मूल्य बढ़ाने को लेकर पिछले सप्ताह किसानों ने जालंधर में नेशनल हाईवे जाम कर दिया था। मुख्यमंत्री मान के आश्वासन के बाद किसानों ने अपना आंदोलन समाप्त करने का फैसला किया था। अब फिर से किसान और सरकार के बीच टकराव बढ़ सकता है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_656b2256c7ef9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गन्ना मूल्य में 11 रुपये की वृद्धि से पंजाब के किसान संगठन नाराज, विरोध-प्रदर्शन शुरू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_656b2256c7ef9.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में गन्ने का भाव 11 रुपये बढ़ा, देश में सर्वाधिक 391 रुपये क्विंटल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-price-increased-by-rs-11-in-punjab-highest-in-the-country-at-rs-391-per-quintal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 01 Dec 2023 12:44:14 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-price-increased-by-rs-11-in-punjab-highest-in-the-country-at-rs-391-per-quintal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>किसानों के आंदोलन और धरने-प्रदर्शनों के बाद पंजाब सरकार ने गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (SAP)<span> 11 </span>रुपये बढ़ाकर 391 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। यह देश में गन्ने का सर्वाधिक मूल्य है। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार गन्ना किसानों को देश में सबसे अधिक दाम देगी। अब देखना है कि देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में गन्ना मूल्य कितना बढ़ाया जाता है। गन्ना किसानों की निगाहें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ हैं।&nbsp;&nbsp;</p>
<p>गन्ने मूल्य में बढ़ोतरी का ऐलान करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब में 11 रुपये को शुभ माना जाता है... आज पंजाब के गन्ना किसानों के लिए 11 रुपये की कीमत बढ़ाकर शुभ संकेत दिया गया है। पंजाब में गन्ने का रेट देश के बाकी हिस्सों से अधिक 391 रुपये है। इसके पहले हरियाणा सरकार ने चालू सीजन के लिए गन्ने का एसएपी 12 रुपये बढ़ाकर 384 रुपये प्रति क्विंटल करने का फैसला लिया था। साथ ही राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने घोषणा की थी कि राज्य में अगले सीजन 2024-25 के लिए गन्ने का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल किया जाएगा। वहीं देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्यों में शुमार उत्तर प्रदेश में सरकार ने पिछले सीजन के लिए गन्ने के एसएपी में कोई बढ़ोतरी नहीं कर उसे 350 रुपये प्रति क्विंटल पर फ्रीज रखा था। चालू सीजन में चीनी मिलों में पेराई शुरू होने के बावजूद अभी तक उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने का एसएपी घोषित नहीं किया है।</p>
<p><strong>किसान आंदोलन का असर</strong></p>
<p>गन्ने के दाम और बकाया भुगतान के मुद्दे पर पंजाब में किसान आंदोलित थे। कई जगह धरने-प्रदर्शन और चक्का जाम के बाद मान सरकार गन्ना मूल्य 8 रुपये बढ़ाने को राजी हो गई थी। इस पर भी किसान नहीं माने तो आखिरकार पंजाब सरकार ने गन्ना मूल्य में 11 रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया है।&nbsp;</p>
<p><strong>फायदे का सौदा है गन्ना&nbsp;</strong></p>
<p>इस साल देश में चीनी उत्पादन करीब 12 फीसदी घटने का अनुमान है। जिसे देखते हुए बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी रहेगी। चीनी के अलावा एथनॉल और अन्य उत्पादों से भी शुगर मिल्स अच्छी कमाई कर रही हैं। ऐसे में गन्ने का दाम बढ़ावा चीनी मिलों के लिए घाटे का सौदा नहीं होगा।</p>
<p><strong>यूपी पर नजर&nbsp;</strong></p>
<p>पंजाब के गन्ना मूल्य में 11 रुपये की बढ़ोतरी के फैसले का असर बाकी राज्यों पर भी पड़ सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कोई भी सरकार गन्ना किसानों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहेगी। लेकिन अभी तक देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश ने गन्ना मूल्य का ऐलान नहीं किया है। जबकि यूपी में गन्ने का दाम मात्र 350 रुपये क्विंटल है। यूपी में गन्ना मूल्य पिछले पांच साल में सिर्फ एक बार बढ़ा है और इस साल अच्छी खासी बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है। जबकि चालू सीजन में चीनी का उत्पादन देश में सबसे अधिक 110 लाख टन रहने का उद्योग का अनुमान है जबकि कुल उत्पादन 290 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_6569872202c09.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में गन्ने का भाव 11 रुपये बढ़ा, देश में सर्वाधिक 391 रुपये क्विंटल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/12/image_750x500_6569872202c09.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि यंत्रों पर 50 फीसदी तक सब्सिडी, 30 नवंबर से बुकिंग शुरू, ऐसे करें आवेदन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-to-give-50-percent-subsidy-on-agricultural-implements-booking-starts-from-november-30.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 29 Nov 2023 06:56:35 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-to-give-50-percent-subsidy-on-agricultural-implements-booking-starts-from-november-30.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए कृषि यंत्रों पर 50 फीसदी तक सब्सिडी पाने का अच्छा मौका है। तमाम कृषि यंत्रों, कस्टम हायरिंग सेंटर और छोटे गोदाम के लिए राज्य सरकार सब्सिडी दे रही है। कृषि विभाग द्वारा 10 हजार रुपये तक के अनुदान वाले कृषि यंत्रों की बुकिंग 9 नवंबर को शुरू हो चुकी है, जबकि 10 हजार रुपये से अधिक अनुदान वाले कृषि यंत्रों की बुकिंग 30 नवंबर से बुकिंग शुरू होने जा रही है। इसके लिए किसानों को विभागीय पोर्टल <strong>agriculture.up.gov.in</strong> पर आवेदन करना होगा। बुकिंग प्रकिया 14 दिसंबर तक चलेगी।&nbsp;</p>
<p><strong>ऐसे करें आवेदन</strong></p>
<ul>
<li>कृषि विभाग के पोर्टल <strong>agriculture.up.gov.in</strong> पर जाकर <strong>&ldquo;</strong><strong>यंत्र पर अनुदान हेतु टोकन निकालें</strong><strong>&rdquo;</strong> लिंक पर क्लिक करें</li>
<li>बुकिंग के लिए किसान अपना मोबाइल नंबर डालें, <span>जिस पर ओटीपी प्राप्त होगा। इसमें सावधानी बरतें। जिस किसान को सब्सिडी लेनी है</span>, <span>उसी का फोन नंबर डालें </span></li>
<li>पोर्टल पर पहले से दर्ज लाभार्थी के मोबाइल नम्बर पर ओटीपी प्राप्त करने का विकल्प होगा। यदि पोर्टल पर उपलब्ध मोबाइल नम्बर बंद है, तो लाभार्थी के नए मोबाइल नम्बर पर ओटीपी प्राप्त कर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं</li>
<li>किसान अपने या अपने परिवार (<span>ब्लड रिलेशन</span>) <span>के सदस्य के मोबाइल नंबर से ही आवेदन करें। सत्यापन के समय इसकी पुष्टि की जाएगी</span></li>
</ul>
<p><strong>कितना अनुदान मिलेगा </strong></p>
<p>विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्रों पर अधिकतम 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।&nbsp;</p>
<p><strong>कौन होंगे लाभार्थी </strong></p>
<p>कृषि यंत्रों के लिए किसान, <span>पंजीकृत किसान सहकारी समिति</span>, सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHGs) जो कि राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) एवं कृषि विभाग से सम्बन्धित हों, ग्राम पंचायत एवं एफपीओ लाभार्थी होंगे। कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना के लिए एफपीओ का upfposhakti.com पोर्टल पर पंजीकृत होना अनिवार्य है।</p>
<p><strong>नियम व शर्तें </strong></p>
<ul>
<li>10 हजार रुपये तक अनुदान वाले समस्य कृषि यंत्रों के लिए किसानों से कोई जमानत राशि नहीं ली जाएगी। दस हजार से एक लाख रुपये तक अनुदान वाले कृषि यंत्रों के लिए 2500 रुपये तथा एक लाख से अधिक अनुदान वाले कृषि यंत्रों के लिए 5 हजार रुपये जमानत राशि जमा करानी होगी।</li>
<li>आवेदन के समय ही किसानों को निर्धारित जमानत धनराशि ऑनलाइन जमा करनी होगी। अनुदान के लिए चयनित न होने वाले किसानों को जमानत धनराशि वापस कर दी जाएगी।</li>
<li>कृषि यंत्र की खरीद के लिए कम से कम 50 फीसदी धनराशि का भुगतान किसान के खुद के खाते से किए जाने पर ही सब्सिडी मिलेगी। किसान परिवार के ब्लड रिलेशन वाले सदस्यों के खाते से भुगतान किया जा सकता है। &nbsp;&nbsp;</li>
</ul>
<p><strong>कैसे होगा लाभार्थियों का चयन </strong></p>
<ul>
<li>10 हजार रुपये तक अनुदान वाले यंत्रों के लिए लाभार्थियों का चयन पहले आओ, <span>पहले पाओ के आधार पर होगा </span></li>
<li>10 हजार रुपये से अधिक अनुदान वाले यंत्रों के लक्ष्य से अधिक आवेदन प्राप्त होने की दशा में जनपद स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति ई-लाटरी के माध्यम से ब्लॉकवार लाभार्थी का चयन करेगी</li>
<li>ई-लाटरी के स्थल, तिथि एवं समय की जानकारी सम्बन्धित जनपद के उप कृषि निदेशक द्वारा स्थानीय समाचार पत्रों एवं अन्य माध्यमों के द्वारा प्रसारित की जाएगी।</li>
</ul>
<p><strong>बुकिंग कन्फर्म होने के बाद क्या करें </strong></p>
<p>लाभार्थियों का चयन/बुकिंग टोकन कन्फर्म होने के बाद कृषि यंत्र खरीदकर विभागीय पोर्टल पर खरीद रसीद, <span>यंत्र की फोटो और सीरियल नंबर अपलोड करना होगा। इसके लिए किसानों को अधिकतम </span>30 दिन और कस्टम हायरिंग सेन्टर के लिए अधिकतम 45 दिवस का समय दिया जाएगा। विभाग में सूचीबद्ध कृषि यंत्र निर्माताओं में से किसी से भी यंत्र खरीद सकते हैं। लेकिन अनुदान केवल उन्हीं यंत्रों पर मिलेगा जिन्हें कम्पनियों ने upyantratracking.in पोर्टल पर अपलोड किया है।</p>
<p><strong>इन यंत्रों पर मिलेगी सब्सिडी </strong></p>
<p>लेजर लैण्ड, लेवलर, पोस्टहोल, डीगर, पोटैटो प्लान्टर, पौटैटो डीगर, शुगर केन कटर प्लान्टर, शुगर केन श्रेस कटर, शुगर केन रेटून, मैनेजर, हैरो, कल्टीवेटर, पावर स्प्रेयर, मल्टीकाप थ्रेसर, पावर चैफ कटर, स्ट्रा रीपर, ब्रश कटर, मिनी राईस मिल, मिनी दाल मिल, मिलेट मिल, सोलर ड्रायर, आयल मिल विंथ फिल्टर प्रेस खरीदने पर किसानों को सब्सिडी मिलेगी। इसके अलावा, पैकिंग मशीन, रोटा वेटर, ट्रैक्टर, माउण्टेड, स्प्रेयर, ब्रिकेट मेकिंग मशीन, यूरिया डीप प्लेसमेंट एप्लीकेटर, सेल्फ प्रोपेल्ड यंत्र, पावर टीलर, पावर वीडर, कम्बाइन हार्वेस्टर विद सुपर एस. एम.एस., राईस ट्रांसप्लान्टर, जीरोटिल मल्टी क्राप प्लान्टर, मेज शेलर, हेप्पी सीडर, रीपर कम वाइन्डर, HDPE पाइप, PVC पाइप, HDPE लैमिनेडेट ओविन, फ्लैट ट्यूब (लपेटा), सामुदायिक थ्रेसिंग फ्लोर, छोटा गोदाम इत्यादि पर भी सब्सिडी दी जाएगी।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_6565cda26a99d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि यंत्रों पर 50 फीसदी तक सब्सिडी, 30 नवंबर से बुकिंग शुरू, ऐसे करें आवेदन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तमिलनाडु की निजी चीनी मिलों के खिलाफ  गन्ना किसानों की बड़ी जीत, हाईकोर्ट ने दिया 220 करोड़ रुपये के भुगतान का आदेश ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/madras-high-court-orders-private-mill-owners-to-pay-rupees-220-cr-to-sugarcane-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 25 Nov 2023 18:00:11 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/madras-high-court-orders-private-mill-owners-to-pay-rupees-220-cr-to-sugarcane-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गन्ने के बकाया भुगतान के मुद्दे पर तमिलनाडु के गन्ना किसानों ने निजी मिलों के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल की है। मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निजी मिलों को गन्ना नियंत्रण अधिनियम, 1966 की धारा 5ए के फार्मूले के अनुसार गन्ना किसानों को 220 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। यह 2014 से जारी तमिलनाडु गन्ना किसान संघ के लंबे राजनीतिक और कानूनी संघर्ष का परिणाम है।</p>
<p>अदालत के आदेश के अनुसार, ईआईडी परी, शक्ति शुगर्स, राजश्री, धरानी, बन्नारी अम्मन, कोठारी, पोन्नी, थिरामंदाकुडी अरूरन, पेन्नादम अंबिका सहित 16 निजी चीनी मिलों को 2004-05 से 2008-09 &nbsp;के दौरान गन्ना आपूर्ति करने वाले गन्ना किसानों को 220 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। इस फैसले से गन्ने की खेती करने वाले करीब एक लाख से अधिक किसान परिवारों लाभान्वित होंगें।</p>
<p>इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत 2015 में तमिलनाडु गन्ना किसान संघ द्वारा दायर की गई 29 रिट याचिकाओं से हुई है, जिसमें किसानों और चीनी मिलों के बीच लाभ साझा करने के फॉर्मूले के अनुसार उनके वैध हिस्से की मांग की गई थी। मद्रास उच्च न्यायालय ने किसानों के पक्ष में निर्णय सुनाया। 13 सहकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की चीनी मिलों ने किसानों को 98 करोड़ रुपये वितरित किए। लेकिन राजनीतिक रूप से शक्तिशाली निजी चीनी मिल मालिकों ने अदालत के आदेश का पालन करने और देय राशि वितरित करने से इनकार कर दिया था।</p>
<p>नतीजतन, तमिलनाडु गन्ना किसान संघ ने मद्रास उच्च न्यायालय की एकल पीठ का दरवाजा खटखटाया। &nbsp;19 अक्तूबर, 2023 को दिए गए आदेश में साउथ इंडिया शुगर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एसआईएसएमए) की अपील के बावजूद, मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने पिछले आदेश को बरकरार रखा और एसआईएसएमए की याचिका को खारिज करते हुए, कार्यान्वयन का निर्देश दिया।</p>
<p>इस आदेश से गन्ना नियंत्रण अधिनियम, 1966 की चीनी के प्राथमिक उत्पादकों की उचित हिस्सेदारी देने की मंशा को बल मिला है। अखिल भारतीय गन्ना किसान महासंघ, तमिलनाडु ने गन्ना किसान संघ को लगभग एक दशक लंबे राजनीतिक और कानूनी संघर्षों के लिए बधाई दी है। अखिल भारतीय गन्ना किसान महासंघ ने कहा है कि मामले को लंबा खींचकर निजी चीनी मिलों को नियंत्रित करने वाली चीनी मिलों की निंदा की है।</p>
<p>महासंघ ने तमिलनाडु सरकार और राज्य चीनी विभाग से मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को तत्काल लागू करने की मांग की है। महासंघ का कहना है कि यह आदेश देश के अन्य चीनी उत्पादक राज्यों में इसी तरह के मामलों पर भी लागू होता है और इसलिए संबंधित राज्य सरकारों को भी इसे लागू करना चाहिए।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_6561e85b2753a.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ तमिलनाडु की निजी चीनी मिलों के खिलाफ  गन्ना किसानों की बड़ी जीत, हाईकोर्ट ने दिया 220 करोड़ रुपये के भुगतान का आदेश  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तराई में राइस मिलों पर खाद्य मंत्री की छापेमारी, मिली कई गड़बड़ियां]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/food-minister-raids-rice-mills-in-terai-many-irregularities-found.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 25 Nov 2023 12:22:44 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/food-minister-raids-rice-mills-in-terai-many-irregularities-found.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तराखंड के तराई में खाद्य मंत्री रेखा आर्या ने कई राइस मिलों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस दौरान कई गड़बड़ियां और मानकों का पालन ना होने के मामले पकड़ में आए। ऐसी मिलों के खिलाफ खाद्य मंत्री ने कड़ी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। अधिकारियों की मिलीभगत पाए जाने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई करने की बात कही है। &nbsp;</p>
<p>शुक्रवार को खाद्य मंत्री रेखा आर्या ने बाजपुर और जसपुर स्थित कई राइस मिलों का औचक निरीक्षण किया। कई जगह राइस मिलों के संचालन में गड़बड़ियां देखकर मंत्री दंग रह गईं। इस दौरान खाद्य मंत्री ने धनलक्ष्मी फूड्स, धनलक्ष्मी सीड्स, उत्तरांचल फूड, महावीर फूड, एएसएम फूड्स और जसपुर में पंजाब फूड्स प्लांट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान धनलक्ष्मी सीड्स, महावीर फूड, एएसएम फूड्स और पंजाब फूड्स में खामियां देखने को मिली। <span>एक प्लांट बंद मिला। जिससे संभवत: डमी के रूप में लगाया गया है। कई राइस मिलों में सौरटैक्स मशीन</span>, <span>ड्रायर प्लांट</span>, <span>ब्लेन्डिंग मशीन का ना होना पाया गया।</span><span></span></p>
<p>खाद्य मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ऐसी सभी मिल जो नियमों के विपरीत काम कर रही हैं,<span> उनके इम्पैनलमेंट को समाप्त किया जाए। सचिव खाद्य को तीन दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट देने और कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। जो राइस मिलें नियमों का पालन नहीं कर रही हैं</span>, <span>उनके लक्ष्य को निरस्त कर ठीक तरीके सक काम करने वाली मिलों को आवंटित करने को कहा गया है। मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि कई राइस मिलें नियमों को ताक पर रखकर काम कर रही हैं। इसे कतई बर्दास्त नहीं किया जाएगा। विभागीय सचिव को ऐसी मिलों के खिलाफ और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x_6561a0bed1f98.jpg" alt="" /></p>
<p>उत्तराखंड का तराई इलाका धान की खेती और राइस मिलों के गढ़ के रूप में जाना जाता है। मंत्री के औचक निरीक्षण में जिस तरह के फर्जीवाड़े पकड़ में आए उससे लगता है कि तराई में कई राइस मिलों को डमी के रूप में लगाया गया है। जिनका उद्देश्य धान खरीदना नहीं है।</p>
<p>सरकार राइस मिलों से धान की कस्टम मिलिंग कराती और खरीद करती है। मिलें धान की खरीद करती हैं और मिलिंग के बाद सरकार को चावल बेचती है। तराई किसान संगठन के अध्यक्ष तजिंदर सिंह विर्क ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि सरकार राइस मिलों के जरिये धान की खरीद की व्यवस्था में सुधार कर किसानों से मंडी के जरिये खरीद करे। मौजूदा व्यवस्था पारदर्शी नहीं है। कई बार राइस मिलें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे धान की खरीद करती हैं।&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_65619987d4fd9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ तराई में राइस मिलों पर खाद्य मंत्री की छापेमारी, मिली कई गड़बड़ियां ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में पराली पर बढ़ रहा टकराव, सुप्रीम कोर्ट ने कहा&amp;#45; किसानों को बनाया जा रहा विलेन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/conflict-increasing-over-stubble-burning-issue-in-punjab-supreme-court-said-farmers-are-being-made-villains.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 21 Nov 2023 13:44:07 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/conflict-increasing-over-stubble-burning-issue-in-punjab-supreme-court-said-farmers-are-being-made-villains.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब में पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ हो रही कार्रवाई के विरोध में किसानों और प्रशासन के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। सरकार द्वारा पराली प्रबंधन के ठोस उपाय नहीं निकाले जाने से भी किसानों में गुस्सा है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने पराली के मामले पर मंगलवार को हुई सुनवाई में पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि किसानों को खलनायक बनाया जा रहा है और उनकी बात कोई नहीं सुन रहा है।</p>
<p>पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ पुलिस एफआईआर दर्ज कर रही है। राज्य में अब तक 1,100 से अधिक किसानों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है और उन पर करीब 2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके विरोध में किसान संगठन राज्यव्यापी प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में&nbsp;पटियाला में किसानों ने मिनी सचिवालय का घेराव किया और गेट पर ट्रॉलियां खड़ी कर दीं। जबकि बरनाला में डीसी ऑफिस के गेट के सामने किसानों ने पराली जमा कर दिया। वहीं फतेहगढ़ साहिब में भारतीय किसान यूनियन-एकता सिधुपुर के प्रदेश अध्यक्ष जगजीत सिंह दलेवाल के नेतृत्व में किसानों ने पराली से लदी अपनी ट्रॉलियां सड़कों पर खड़ी कर दी। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद उन्होंने सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया।&nbsp;</p>
<p>उधर, सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर मंगलवार को हुई सुनवाई में अदालत ने पंजाब सरकार को खूब फटकार लगाई। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ सुनवाई कर रही है। पीठ के जज जस्टिस हिमांशु धूलिया ने कहा कि किसानों को खलनायक बनाया जा रहा है, उनकी समस्या को कोई नहीं सुन रहा। पराली जलाने के कुछ तो कारण होंगे। हमें इस पर विचार करने की जरूरत है। जबकि जस्टिस कौल ने कहा कि पराली जलाने वालों को धान उगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसानों को आर्थिक प्रोत्साहन देने को लेकर पंजाब को हरियाणा से सीखना चाहिए।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य को राजनीति छोड़कर इस मुद्दे पर विचार करना चाहिए कि पंजाब में धान की खेती को किस तरह हतोत्साहित किया जा सकता है। अगर इसी तरह आरोप-प्रत्यारोप चलता रहा तो राज्य में सूखे की स्थिति पैदा हो जाएगी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 5 दिसंबर को तय की है।</p>
<p>पंजाब में पराली जलाने के कुल मामले बढ़कर 35,093 तक पहुंच गए हैं। फाजिल्का में पराली जलाने के सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए हुए हैं। पुलिस और नागरिक अधिकारियों सहित 1,085 उड़न दस्ते पराली जलाने पर निगरानी रख रहे हैं। इस बीच, बठिंडा 302 की औसत एक्यूआई के साथ राज्य का सबसे प्रदूषित शहर बना हुआ है। इसके बाद जालंधर में एक्यूआई 247, लुधियाना में 220, पटियाला में 209, अमृतसर में 207, मंडी गोबिंदगढ़ में 190 और खन्ना में 150 दर्ज किया गया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_655c665f3d7ce.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में पराली पर बढ़ रहा टकराव, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- किसानों को बनाया जा रहा विलेन ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ओडिशा के मिलेट्स किसानों की आय बढ़ाने और आजीविका सहायता प्रदान करने को 2,500 करोड़ का निवेश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/odisha-investing-over-rs-2500cr-for-providing-income-livelihood-support-to-millet-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 10 Nov 2023 14:23:05 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/odisha-investing-over-rs-2500cr-for-providing-income-livelihood-support-to-millet-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा है कि उनकी सरकार मोटा अनाज उगाने वाले राज्य के किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आजीविका सहायता प्रदान करने के लिए 2,500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर रही है। राज्य सरकार ने मोटा अनाज के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने पर ध्यान देने के साथ वर्ष 2017 में ओडिशा मिलेट्स मिशन शुरू किया है।</p>
<p>भुवनेश्वर में मिलेट्स पर आयोजित दो दिवसीय (9-10 नवंबर) अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि मिलेट्स को बढ़ावा देना वर्षा पर निर्भर किसानों को न्याय और समानता प्रदान करने के लिए है। राज्य सरकार ने मिलेट्स किसानों के लिए प्रत्यक्ष लाभ प्रोत्साहन बढ़ा दिया है और रागी की सुनिश्चित खरीद की व्यवस्था की है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "आदिवासी समुदायों की आजीविका और पोषण पर ध्यान देने के साथ जन-केंद्रित मिलेट्स मिशन को डिजाइन करने में ओडिशा अग्रणी है। मेरी सरकार ओडिशा को मिलेट्स उत्कृष्टता का केंद्र बनाने और ओडिशा के लोगों के आर्थिक विकास, कल्याण और स्वास्थ्य में योगदान देने के सभी प्रयास करेगी।"</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र ने 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स ईयर घोषित किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करने वाला ओडिशा पहला राज्य है। मिलेट्स &nbsp;मूल्य श्रृंखला में मिशन शक्ति महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि मिलेट्स शक्ति के ब्रांड के तहत इन स्वयं सहायता समूहों ने दुनिया को दिखाया है कि कैसे मिलेट्स आधारित उद्यम आजीविका में सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस मौके पर उन्होंने सुंदरगढ़, कोरापुट, रायगड़ा और नुआपाड़ा को मिलेट्स में सर्वश्रेष्ठ उत्पादन के लिए पुरस्कृत किया। साथ ही उत्पादन में असाधारण सफलता हासिल करने के लिए 5 मिलेट्स किसानों को सम्मानित भी किया।</p>
<p>इस मौके पर राज्य के कृषि और किसान अधिकारिता मंत्री रणेंद्र प्रताप स्वैन ने कहा कि राज्य के 177 ब्लॉकों में मिलेट्स की खेती की जाती है और मिशन शक्ति की महिलाएं अनाज की खेती और प्रसंस्करण का नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मिलेट्स खरीद की व्यवस्था शुरू की गई है। 2018-19 में लगभग 17,000 क्विंटल की खरीद की गई थी जो अब केवल चार वर्षों में बढ़कर 6 लाख क्विंटल से अधिक हो गई है।</p>
<p>केंद्रीय कृषि सचिव मनोज आहूजा ने कहा कि ओडिशा मिलेट्स मिशन न केवल ओडिशा और भारत में सफल है, बल्कि इसने दुनिया भर में धूम मचा दी है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक हिमांशु पाठक ने कहा कि आईसीएआर ने पिछले 5 वर्षों में 9 मिलेट्स की 125 किस्में विकसित की हैं और यह अनाज के विकास में सहायता प्रदान करेगी।</p>
<p>भारत में खाद्य एवं कृषि संगठन के प्रतिनिधि, ताकायुकी हागिवारा ने कहा कि भारत और ओडिशा मिलेट्स के चैंपियन हैं। यह भारत के कृषि परिदृश्य को बदल सकता है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_654def1049264.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ ओडिशा के मिलेट्स किसानों की आय बढ़ाने और आजीविका सहायता प्रदान करने को 2,500 करोड़ का निवेश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_654def1049264.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने शामली को ट्रैक्टरों से किया जाम, जिले में 338 करोड़ रुपये से ज्यादा है बकाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-blocked-shamli-with-tractors-demanding-sugarcane-payment-outstanding-is-more-than-rs-330-crore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 09 Nov 2023 16:59:32 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-blocked-shamli-with-tractors-demanding-sugarcane-payment-outstanding-is-more-than-rs-330-crore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के शामली जिले के गन्ना किसान भुगतान में देरी के संकट का सामना कर रहे हैं। जिले की तीन चीनी मिलों पर 8 नवंबर तक पिछले पेराई सीजन (2022-23) का 338.82 करोड़ रुपये का बकाया है। इस बकाया भुगतान को लेकर शामली स्थित चीनी मिल पर गन्ना किसान 80 दिन से धरना दे रहे हैं, लेकिन सबसे अधिक 221.62 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान वाली इस चीनी मिल से भुगतान को लेकर अभी तक कोई आश्वासन किसानों नहीं मिल सका है। बकाया गन्ना भुगतान को लेकर शामली चीनी मिल पर चल रहे धरना को गुरुवार को राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी समर्थन देने पहुंचे। उन्होंने धरने को संबोधित भी किया। इस मौके पर शहर में करीब पांच हजार किसानों की मौजूदगी और ट्रैक्टरों से पूरा शहर जाम हो गया।</p>
<p>खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले पेराई सीजन में गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी और अगैती किस्म के लिए एसएपी 350 रुपये प्रति क्विंवटल पर ही स्थिर रखा था। वहीं इस जिले के साथ सीमा लगने वाले राज्य हरियाणा की सरकार ने चालू पेराई सीजन (2023-24) के लिए गन्ना के एसएपी को बढ़ाकर 386 रुपया प्रति क्विंटल कर दिया है, जो पिछले साल 372 रुपये प्रति क्विंटल था। इस सीजन में अभी हरियाणा में देश में सबसे ज्यादा एसएपी है। वहीं दूसरी ओर पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को अपने बकाये का भुगतान पाने के लिए प्रदर्शन करना पड़ रहा है। जबकि दोनों राज्यों में भाजपा की ही सरकार है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x_654cc2743e514.jpg" alt="" /></p>
<p>गन्ना बकाये के भुगतान की मांग को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली में पिछले 80 दिन से किसानों का धरना-प्रदर्शन चल रहा है। मांग नहीं माने जाने पर गुरुवार को हजारों प्रदर्शनकारी किसानों ने शामली शहर को ट्रैक्टरों से जाम कर दिया। मुख्य शहर की हर सड़क पर ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर दिख रहे थे। राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी और भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने भी किसानों के इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया।&nbsp;</p>
<p>शामली के जिला पंचायत सदस्य और रालोद नेता उमेश पंवार ने रूरल वॉयस को बताया कि किसानों की भारी संख्या आज के धरने में मौजूद थी, लेकिन चीनी मिल की ओर से कोई समाधान सामने नहीं आया है। चीनी मिल किसानों के भुगतान को लेकर पिछले कई साल से देरी कर रही है। जिले में सबसे अधिक हालत शामली चीनी मिल को गन्ना आपूर्ति करने वाले किसानों की है। किसान लगातार आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहे हैं और अभी चीनी मिल में पेराई शुरू कब होगी इसको लेकर भी स्थिति साफ नहीं है।</p>
<p>भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश महामंत्री कपिल खाटियान ने रूरल वॉयस को बताया कि गुरुवार के धरने में पांच&nbsp; हजार से अधिक किसान शामिल थे। राकेश टिकैत ने कहा कि स्थानीय स्तर पर धरना दे रहे किसानों की समिति जो भी फैसला लेगी हम उसके साथ हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x_654ce31599de6.jpg" alt="" /></p>
<p>शामली जिले की तीन चीनी मिलों पर 8 नवंबर तक 338.82 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया है। इनमें&nbsp; सबसे ज्यादा शामली शहर स्थित सर शादीलाल द अपर दोआब शुगर मिल्स पर करीब 221.62 करोड़ रुपये का बकाया है और इस मिल ने अभी 12 जनवरी, 2023 तक के आपूर्ति के गन्ना का ही भुगतान किया है जबकि इस चीनी मिल ने 20 मई तक पेराई की थी। यह देश की सबसे पुरानी चीनी मिलों में से एक है। चालू पेराई सत्र (2023-24) में अभी इस मिल में गन्ना पेराई की शुरुआत नहीं हुई है। इसी तरह, जिले के ऊन स्थित चीनी मिजल पर करीब 73 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। शामली जिले के थाना भवन स्थित बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल पर किसानों का 44.11 करोड़ रुपये का बकाया है। इस मिल ने 24 मार्च, 2023 तक का भुगतान किया है, जबकि मिल 13 अप्रैल तक चली थी।</p>
<p>पूरे उत्तर प्रदेश में गन्ना बकाये की बात करें, तो राज्य सरकार की वेबसाइट पर 5 अक्तूबर तक के ही आंकड़े उपलब्ध हैं जिनके मुताबिक मुताबिक पांच अक्तूबर, 2023 तक पेराई सत्र 2022-23 में राज्य की चीनी मिलों ने गन्ना किसानों को 33,943.81 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। यह कुल भुगतान का 89.21 फीसदी था। पिछले सत्र में प्रदेश में 1098.82 लाख टन गन्ने की पेराई हुई और 104.82 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x_654cddfaebeaf.jpg" alt="" /></p>
<p>राज्य के गन्ना किसानों की हालत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि एक तरफ उन्हें अपने बकाये का भुगतान पाने के लिए महीनों प्रदर्शन करना पड़ता है, दूसरी तरफ खेती की लागत बढ़ने के बावजूद राज्य सरकार गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) नहीं बढ़ा रही है। पिछले पेराई सत्र में भी गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ाया गया था और यह 350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर है। नया पेराई सत्र (सितंबर-अक्टूबर) शुरू होने के बावजूद राज्य सरकार ने अभी तक चालू पेराई सत्र (2023-24) के लिए एसएपी की घोषणा नहीं की है।</p>
<p>दूसरी ओर, हरियाणा सरकार ने पिछले पेराई सत्र में भी 10 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की थी। मनोहर लाल खट्टर सरकार ने चालू सत्र के लिए 14 रुपये प्रति क्विंटल और अगले सत्र (2024-25) के लिए भी अभी ही 14 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है। 2023-24 के लिए गन्ने का मूल्य 386 रुपये और 2024-25 के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/11/image_750x500_654ce7091f4f9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने शामली को ट्रैक्टरों से किया जाम, जिले में 338 करोड़ रुपये से ज्यादा है बकाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा के गन्ना किसानों को मिलेगी ज्यादा कीमत, 386 रुपये प्रति क्विंटल हुआ मूल्य, अगले साल के लिए दाम 400 रुपये तय]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-sugarcane-farmers-will-get-higher-price-price-increased-to-rs-386-per-quintal-rs-400-for-next-year.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 07 Nov 2023 16:17:10 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-sugarcane-farmers-will-get-higher-price-price-increased-to-rs-386-per-quintal-rs-400-for-next-year.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने गन्ना किसानों को त्योहारी तोहफा देते हुए चालू पेराई सत्र (2023-24) और अगले पेराई सत्र (2024-25) के लिए गन्ने के दाम तय कर दिए हैं। चालू पेराई सत्र के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 14 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 386 रुपये प्रति क्विंटल करने की सरकार ने घोषणा की है। इस बढ़ोतरी के बाद हरियाणा किसानों को गन्ने का सबसे ज्यादा मूल्य देने वाला राज्य बन गया है। इससे पहले पंजाब में सबसे ज्यादा 380 रुपये प्रति क्विंटल पर गन्ने की खरीद हो रही थी। &nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अगले पेराई सत्र के लिए भी गन्ने का मूल्य बढ़ाने की घोषणा अभी ही कर दी है। अगले साल के लिए मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इसके पीछे की वजह बताते हुए राज्य &nbsp;सरकार ने कहा है कि जिस समय गन्ने का मूल्य घोषित किया जाता है, अगले साल उस समय शायद आचार संहिता लगी होगी। इसलिए अगले साल के मूल्य भी अभी तय कर दिए गए हैं। इस साल राज्य में 424 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का लक्ष्य रखा गया है।</p>
<p>पिछले पेराई सत्र (2022-23) के लिए 25 जनवरी को गन्ने का मूल्य बढ़ाया गया था। तब इसे 10 रुपये की वृद्धि के साथ 372 रुपये प्रति क्विंटल गया था। हालांकि, किसानों के प्रदर्शन के बाद ही राज्य सरकार ने यह बढ़ोतरी की थी। पिछले हफ्ते ही गन्ना नियंत्रण बोर्ड की बैठक में राज्य के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने इस बात के संकेत दिए थे कि जल्द ही गन्ने का मूल्य बढ़ाने की घोषणा हो सकती है। दलाल ने बताया था कि पेराई सत्र 2022-23 के दौरान गन्ना किसानों को 2,819 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि चीनी मिलों ने 770.73 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की, जिसमें 9.70 फीसदी की चीनी रिकवरी हुई।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा के गन्ना किसानों को मिलेगी ज्यादा कीमत, 386 रुपये प्रति क्विंटल हुआ मूल्य, अगले साल के लिए दाम 400 रुपये तय ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र की 45 सहकारी चीनी मिलों पर संकट, पर्यावरण नियमों को तोड़ने पर सीपीसीबी ने बंद करने का दिया आदेश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/crisis-on-45-cooperative-sugar-mills-of-maharashtra-central-pollution-control-board-orders-closure.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Oct 2023 16:04:04 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/crisis-on-45-cooperative-sugar-mills-of-maharashtra-central-pollution-control-board-orders-closure.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चीनी वर्ष 2023-24 में उत्पादन घटने की आशंका पहले से जताई जा रही है, अब एक नई मुसीबत चीनी उद्योग और गन्ना किसानों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। दरअसल, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के आरोप में महाराष्ट्र की 45 सहकारी चीनी मीलों को बंद करने का नोटिस दिया है। महाराष्ट्र में 1 नवंबर से गन्ना पेराई का सत्र शुरू होता है। ऐसे में इन सहकारी मिलों के बंद होने से न सिर्फ किसानों को अपना गन्ना बेचने में दिक्कत आएगी, बल्कि निजी मिलों की मनमानी बढ़ सकती है।</p>
<p>कहा जा रहा है कि इन सहकारी मिलों में से ज्यादातर पर शरद पवार गुट और कांग्रेस समर्थित कोऑपरेटिव सोसोयटीज का कब्जा है। पर्यावरण नियमों की अवहेलना करने पर चीनी मिलों को पहले भी नोटिस जारी होते रहे हैं, मगर यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में मिलों को नोटिस जारी किया गया है। महाराष्ट्र में कुल 190 चीनी मीलें हैं जिनमें से 105 चालू हालत में हैं। इन 105 में से अगर 45 बंद हो गई तो गन्ना किसानों की हालत क्या होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।</p>
<p>केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसकी सूचना महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) को भी पत्र के जरिये दी है। पत्र में कहा गया है कि जिन चीनी मीलों ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा 5 का पालन नहीं किया है उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। धारा 5 के तहत केंद्र को किसी भी उद्योग को बंद करने का अधिकार है। इसके तहत प्रतिष्ठान का संचालन बंद करने, बिजली और पानी की आपूर्ति या अन्य सेवा को रोकने या नियंत्रित करने सहित आवश्यक कार्रवाई का निर्देश देने की शक्तियां हैं।</p>
<p>सीपीसीबी के एक अधिकारी के मुताबिक, जिन चीनी मीलों को बंद करने का नोटिस भेजा गया है उनकी बिजली आपूर्ति रोकने के लिए एमपीसीबी राज्य बिजली बोर्ड को जरूर निर्देश देगा। सीपीसीबी ने सभी 45 मीलों के निरीक्षण और सत्यापन की जिम्मेदारी भी एमपीसीबी को दी है। एमपीसीबी को 10 नवंबर तक कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।</p>
<p>सीपीसीबी ने सख्त लहते में कहा है कि 45 सहकारी चीनी मिलों को बंद करने के आदेश को जब तक रद्द नहीं किया जाता तब तक ये मिलें गन्ना पेराई सत्र 2023-24 में अपना परिचालन शुरू नहीं करेंगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र की 45 सहकारी चीनी मिलों पर संकट, पर्यावरण नियमों को तोड़ने पर सीपीसीबी ने बंद करने का दिया आदेश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कोच्ची में आयोजित हुआ मत्स्य संपदा जागरूकता अभियान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/fisheries-awareness-campaign-organized-in-kochi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 24 Oct 2023 16:17:52 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/fisheries-awareness-campaign-organized-in-kochi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय मत्स्य पालन, <span>पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग के तहत आने वाले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलॉजी एंड ट्रेनिंग (एनआईएफपीएचएटीटी) ने कोच्चि में मत्स्य संपदा जागृति अभियान पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। मत्स्य पालन विभाग ने </span>15 <span>सितंबर, </span>2023 <span>को</span>&nbsp;&ldquo;<span>मत्स्य संपदा जागृति अभियान</span>&rdquo; <span>शुरू किया है जो मछली पालक किसानों और </span>3<span>,</span>477 <span>तटीय गांवों तक पहुंचने के लिए एक जनसम्पर्क कार्यक्रम है। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मत्स्य पालन योजनाओं को बढ़ावा देना</span>, <span>विभिन्न मत्स्य पालन गतिविधियों का प्रदर्शन करना</span>, <span>मछुआरों और तटीय गांवों तक पहुंचना</span>, <span>मत्स्य पालन में विविध गतिविधियों के बारे में जागरूकता पैदा करना और क्षेत्रीय उपलब्धियों और सफलता की कहानियों को प्रदर्शित करना है।</span></p>
<p>इस कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि आईसीएआर- केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) के निदेशक डॉ. ए. गोपालकृष्णन ने किया। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में बताया और देश भर में योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पीएमएमएसवाई को मछली उत्पादन, <span>उत्पादकता और गुणवत्ता से लेकर प्रौद्योगिकी</span>, <span>हार्वेस्टिंग के बाद के बुनियादी ढांचे और विपणन तक मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण कमियों को दूर करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन से मूल्य श्रृंखला को आधुनिक और मजबूत किया जा सकता है</span>, <span>जानकारी प्राप्त करने की क्षमता में वृद्धि हो सकती है और मछुआरों और मछली किसानों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण को सुनिश्चित करने के साथ-साथ एक मजबूत मत्स्य प्रबंधन ढांचा स्थापित किया जा सकता है।</span></p>
<p>कार्यशाला में केरल के मत्स्य पालन विभाग के संयुक्त निदेशक (मध्य क्षेत्र) एस. महेश ने केरल में पीएमएमएसवाई के माध्यम से मत्स्य पालन विकास योजनाओं के कार्यान्वयन पर एक प्रस्तुति दी। एनआईएफपीएचएटीटी के निदेशक डॉ. शाइन कुमार सी.एस. ने सभा का स्वागत करते हुए कहा कि 2019<span> में</span> मंत्रालय के गठन और 20,050<span> करोड़</span> रुपये&nbsp;के व्यय के साथ पीएमएमएसवाई योजना शुरू होने से देश के मत्स्य पालन क्षेत्र में एक मजबूत आधार&nbsp;बना&nbsp;है।&nbsp;उन्होंने देश में मत्स्य पालन क्षेत्र के प्रगतिशील विकास में इंडो नॉर्वेजियन प्रोजेक्ट, <span>इंटीग्रेटेड फिशरीज प्रोजेक्ट और एनआईएफपीएचएटीटी की भूमिका के बारे में भी बताया।</span></p>
<p>कार्यक्रम ने मछलीपालन और जलीय कृषि तकनीकों, <span>आधुनिक और नवीन मछली पालन प्रौद्योगिकियों</span>, <span>मछली प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन में महत्वपूर्ण जानकारी</span>, <span>सर्वोत्तम प्रथाओं और नवीनतम प्रगति को मछली किसानों और अन्य मत्स्य पालन हितधारकों की बड़ी संख्या तक प्रसारित और प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान किया। कार्यशाला ने मछुआरों और अन्य हितधारकों को उन्नत प्रथाओं को अपनाने में मदद की</span>, <span>जिससे दक्षता और लाभप्रदता में वृद्धि हुई। कार्यशाला ने जिम्मेदार मत्स्य पालन प्रबंधन</span>, <span>टिकाऊ जलीय कृषि</span>, <span>मछली प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा देने और इस महत्वपूर्ण क्षेत्र पर निर्भर समुदायों के समग्र कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। </span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_6537a0b8a8111.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कोच्ची में आयोजित हुआ मत्स्य संपदा जागरूकता अभियान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_6537a0b8a8111.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पश्चिम चंपारण के मर्चा धान को मिला जीआई टैग, बिहार के पांच कृषि उत्पादों को पहले मिल चुकी है यह पहचान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/marcha-paddy-of-west-champaran-got-gi-tag-five-agricultural-products-of-bihar-have-already-got-this-recognition.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 18 Oct 2023 06:29:58 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/marcha-paddy-of-west-champaran-got-gi-tag-five-agricultural-products-of-bihar-have-already-got-this-recognition.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के मर्चा धान को जीआई टैग मिला है। इस धान का चिड़वा सुंगंध से भरपूर और स्वाद में अनूठा होता है। इससे अब यहां मर्चा धान की खेती को न सिर्फ बढ़ावा मिलेगा बल्कि चिड़वा का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर किया जा सकेगा। इसका फायदा मर्चा धान उगाने वाले किसानों को होगा और उनकी आमदनी में बढ़ोतरी होगी। मर्चा धान को वैश्विक पहचान मिलने से इसके चिड़वा निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। यह बिहार का छठा कृषि उत्पाद है जिसे जीआई टैग मिला है।</p>
<p>मर्चा धान की खेती पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर, नरकटियागंज, मैनाटांड़, गौनाहा, लौरिया और चनपटिया के लगभग के 300 एकड़ में होती है। जिला प्रशासन के सहयोग से कृषि विभाग इस धान का रकबा बढ़ाने की कोशिश में लगा है ताकि मर्चा चिड़वा का निर्यात बढ़ाया जा सके। निर्यात बढ़ने से किसानों को उनकी उपज की अच्छी कीमत मिल सकेगी और यहां नए चिड़वा मिल खुलेंगे जिससे रोजगार का भी सृजन होगा।</p>
<p>कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम चंपारण की मिट्टी इस धान के लिए बेहद उपयुक्त है। इस धान की सुगंध और स्वाद बेहतर बेहतर है। इस कारण इसकी मांग बढ़ती जा रही है। मर्चा चिड़वा को जीआई टैग दिलाने में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि वैज्ञानिकों और धान उत्पादक प्रगतिशील समूह के किसानों का बड़ा योगदान रहा है। पश्चिम चंपारण जिले के आनंदी का भुजा और जर्दा आम को अब जीआई टैग दिलाने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>इसके साथ ही बिहार के छह कृषि उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। इससे पहले मुजफ्फरपुर की लीची, भागलपुर के कतरनी चावल और जर्दालु आम, मिथिला क्षेत्र के मखाना और नवादा के मगही पान को जीआई टैग मिल चुका है। अब पश्चिम चंपारण के मर्चा चिड़वा को जीआई टैग मिला है।</p>
<p><strong>क्या होता है जीआई टैग और क्या है इसका फायदा</strong></p>
<p>जीआई का फुल फॉर्म है जियोग्रैफिकल इंडिकेशन यानी भौगोलिक संकेत। जीआई टैग वह प्रतीक है, जो किसी उत्पाद को उसके उत्पादन वाले क्षेत्र से जोड़ने के लिए दिया जाता है। आसान शब्दों में कहें तो यह टैग बताता है कि वह उत्पाद किस जगह पैदा होता है या उसे कहां बनाया जाता है। यह उन उत्पादों को दिया जाता है जो किसी विशेष क्षेत्र में पैदा होते हैं या बनाए जाते हैं। केंद्र सरकार यह टैग देती है जिसकी शुरुआत 2003 में हुई थी। सबसे पहले पश्चिम बंगाल की दार्जलिंग चाय को 2004 में जीआई टैग मिला था।</p>
<p>जीआई टैग से उस उत्पाद को कानूनी संरक्षण मिलता है। उस नाम से दूसरा उत्पाद नहीं लाया जा सकता है। &nbsp;साथ ही यह किसी उत्पाद की अच्छी गुणवत्ता का पैमाना भी होता है। इससे देश के साथ-साथ विदेशों में भी उस उत्पाद के लिए बाजार आसानी से मिल जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो जीआई टैग के जरिये उस उत्पाद के लिए रोजगार से लेकर आमदनी बढ़ाने तक के दरवाजे खुल जाते हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_652e5b09c3049.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पश्चिम चंपारण के मर्चा धान को मिला जीआई टैग, बिहार के पांच कृषि उत्पादों को पहले मिल चुकी है यह पहचान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_652e5b09c3049.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दिल्ली हाट में लगा एफपीओ मेला, किसानों के सशक्तिकरण को बढ़ावा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/mela-in-delhi-haat-showcases-fpo-products-to-boost-farmer-empowerment.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 12 Oct 2023 14:01:14 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/mela-in-delhi-haat-showcases-fpo-products-to-boost-farmer-empowerment.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी) और सीएससी ने मिलकर आईएनए मार्केट स्थित दिल्ली हाट में एफपीओ (किसान उत्पादक संघ) मेले का आयोजन किया। इस मेले में देश के प्रमुख एफपीओ ने भाग लिया और 20<span> से अधिक एफपीओ ने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। इससे मेले में </span>आने वाले लोगों को प्राकृतिक उत्पादों का नया अनुभव मिला।</p>
<p>किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) किसानों का एक समूह होता <span>है जो अपने क्षेत्र में फसल उत्पादन से लेकर खेती-किसानी से जुड़ी तमाम व्यावसायिक गतिविधियां चलाता है। इसके जरिये किसानों को न सिर्फ कृषि उपकरण के साथ खाद</span>, <span>बीज</span>, <span>उर्वरक जैसे कई उत्पाद</span> के थोक मूल्य पर छूट मिलते हैं<span>, </span>बल्कि ये तैयार फसल एवं उसकी प्रोसेसिंग करके उत्पाद को मार्केट में बेचते हैं। एफपीओ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दे रहे हैं। बाजारों तक किसानों की पहुंच आसान बनाने के लिए आज देश के हर ब्लॉक में एक एफपीओ या तो बन चुका है या जल्द ही बन जाएगा। इसके माध्यम से <strong>8 </strong>लाख किसानों के <strong>2165 </strong>से ज्यादा संगठन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ओएनडीसी के साथ जुड़कर व्यापार कर रहे हैं।</p>
<p>यह मेला 10 अक्टूबर को आयोजित किया गया था। इस मौके पर सीएससी एसपीवी के प्रबंध निदेशक और सीईओ श्री संजय राकेश ने कहा, &ldquo;सीएससी ने हमेशा विभिन्न पहलों के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास किया है। किसान और कृषि हमारी पहल का अभिन्न अंग हैं। देश के दूर-दराज इलाकों में मौजूद सीएससी के विशाल नेटवर्क की बदौलत पहले से ही हम किसानों को टेली-परामर्श, <span>फसल बीमा</span>,<span> ई-पशु चिकित्सा, किसान क्रेडिट कार्ड और पीएम किसान योजनाओं के जरिये विभिन्न सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इसी कड़ी में हम देश भर में एफपीओ के गठन में पूरे जोश के साथ काम कर रहे हैं। एफपीओ के जरिये हम किसानों के सशक्तिकरण में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।"</span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x_6527ae7d102d7.jpg" alt="" /></p>
<p>गौरतलब है कि देश के दूरदराज इलाकों में स्थित साढ़े पांच लाख से अधिक सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) ने ग्रामीणों के जीवन में सराहनीय बदलाव किया है। ग्रामीण नागरिक सीएससी केंद्रों की मदद से अपने घर पर ही विभिन्न विभागों की सेवाएं प्राप्त करने में सक्षम हैं, <span>उदाहरण के लिए</span>, <span>जाति</span>, <span>आय</span>, <span>अधिवास</span>, <span>चरित्र प्रमाण पत्र और रोजगार पंजीकरण आदि। इन सेवाओं की मदद से </span>CSC<span> ने गांव के लोगों को ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में मदद करके एक उल्लेखनीय कार्य किया है। &nbsp;</span></p>
<p>एक अनुमान के मुताबिक भारत में 12 करोड़ से अधिक छोटे और सीमांत किसान हैं, जिनकी औसत जोत का आकार 1.1 हेक्टेयर से कम है। अधिकांश छोटे और सीमांत किसानों को उत्पादन और उत्पादन के बाद के काम जैसे टेक्&zwj;नोलॉजी तक पहुंच, <span>उचित कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण साजो-सामान</span>, <span>बीज उत्पादन</span>, <span>खेती की मशीनरी की इकाई</span>, <span>मूल्य वर्धित उत्&zwj;पाद</span>, <span>प्रसंस्करण</span>, <span>ऋण</span>, <span>निवेश और सबसे महत्वपूर्ण बाजार दोनों में जबरदस्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। एफपीओ के गठन से ऐसी चुनौतियों का समाधान करने और किसानों की आय बढ़ाने में बहुत महत्वपूर्ण है। </span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दिल्ली हाट में लगा एफपीओ मेला, किसानों के सशक्तिकरण को बढ़ावा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पिंक बॉलवॉर्म का कहरः गहलोत सरकार ने कपास किसानों के लिए दिया 1125 करोड़ का राहत पैकेज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/gehlot-government-gave-relief-package-of-rs-1125-crore-for-cotton-farmers-pink-bollworm-has-caused-huge-loss.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 10 Oct 2023 14:35:04 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/gehlot-government-gave-relief-package-of-rs-1125-crore-for-cotton-farmers-pink-bollworm-has-caused-huge-loss.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिंक बॉलवॉर्म (गुलाबी सुंडी) के भयानक प्रकोप से राजस्थान में कपास की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। श्रीगंगानगर, हनुमागढ़ और अनूपगढ़ जैसे प्रमुख कपास उत्पादक जिलों में तो कुछ जगहों पर 90 फीसदी फसल बर्बाद हो गई है। नुकसान की भरपाई के लिए काफी समय से किसान मुआवजे की मांग को लेकर इन जिलों में प्रदर्शन कर रहे थे। किसानों की मांग मानते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 1125 करोड़ रुपये के राहत पैकेज को स्वीकृति दे दी है। इस संबंध में मुख्यमंत्री के एक्स हैंडल से ट्वीट कर जानकारी दी गई है।</p>
<p>भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राजस्थान के अध्यक्ष राजा राम मील ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया, &ldquo;मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से 8 अक्टूबर को संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने मुआवजे की मांग को लेकर मुलाकात की थी। किसानों की मांग मानते हुए उन्होंने राहत पैकेज देने का फैसला किया और 1125 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। अभी नुकसान के आकलन के लिए गिरदावरी चल रही है। इसके पूरा होने के बाद प्रति एकड़ नुकसान की भरपाई की राशि तय की जाएगी।&ldquo;</p>
<p>स्वराज इंडिया के संस्थापक और किसान नेता योगेंद्र यादव ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरों के साथ की इस संबंध में पोस्ट किया है। संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों में योगेंद्र यादव भी शामिल थे। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>योगेंद्र यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा है, "राजस्थान में बारिश और गुलाबी सुंडी की वजह से कपास की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी। किसान बदहाल था-परेशान था। संयुक्त किसान मोर्चा ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी से मुलाकात कर राहत पैकेज की मांग की। अशोक गहलोत जी ने 1125 करोड़ रुपये का राहत पैकेज जारी किया। किसानों की ओर से धन्यवाद।"</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/national/terrible-outbreak-of-pink-bollworm-cotton-crop-in-punjab-haryana-and-rajasthan-got-damaged-up-to-70-percent.html" title="पिंक बॉलवॉर्म का प्रकोप" target="_blank" rel="noopener">यह भी पढ़ेंः पिंक बॉलवॉर्म से राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा में कपास की फसल को बड़ा नुकसान, उत्पादन पर पड़ेगा असर</a></p>
<p>जोधपुर स्थित दक्षिण एशिया बायोटेक्नोलॉजी केंद्र के संस्थापक भगीरथ चौधरी ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया, &ldquo;पिछले काफी समय से हमलोग विभिन्न माध्यमों से राज्य सरकार का ध्यान इस ओर दिलाने की कोशिश कर रहे थे और किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग कर रहे थे। गहलोत सरकार ने देर से ही सही, किसानों के लिए राहत पैकेज जारी करने का जो फैसला किया उसका मैं स्वागत करता हूं। किसानों को इसकी सख्त जरूरत थी।&rdquo;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x_65254179ba6c7.jpg" alt="" /></p>
<p>पिंक बॉलवॉर्म काफी घातक कीट है जो कपास के बीज को खाता है और पौधे के रेशे को नष्ट कर देता है। इसकी वजह से कपास की गुणवत्ता खराब हो जाती है और पैदावार घट जाती है। राजस्थान में पहली बार पिंक बॉलवॉर्म का इतना भयानक प्रकोप देखा गया है। जब तक किसानों को इसकी जानकारी मिली और वे जागरूक हुए तब तक उनकी फसल खराब हो चुकी थी।</p>
<p>भगीरथ चौधरी ने बताया कि राजस्थान में मौजूदा समय में करीब 8 लाख हेक्टेयर में कपास की खेती होती है। इनमें से करीब 4 लाख हेक्टेयर रकबा श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और अनूपगढ़ का है जहां गुलाबी सुंडी का प्रकोप सबसे ज्यादा है। &nbsp;</p>
<p>राजस्थान के अलावा हरियाणा और पंजाब के प्रमुख कपास उत्पादक जिलों में भी गुलाबी सुंडी से 50-70 फीसदी तक फसल बर्बाद हुई है। इससे इस साल उत्पादन घटने की आशंका है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_6525133e49ee4.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पिंक बॉलवॉर्म का कहरः गहलोत सरकार ने कपास किसानों के लिए दिया 1125 करोड़ का राहत पैकेज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सिंजेंटा इंडिया एमपी के हरदा जिले में 57 से अधिक गांवों में बिजली की आपूर्ति करेगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/syngenta-india-to-supply-electricity-to-over-57-hamlets-in-harda-district.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 07 Oct 2023 13:28:35 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/syngenta-india-to-supply-electricity-to-over-57-hamlets-in-harda-district.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>सिंजेटा इंडिया ने मध्य प्रदेश के हरदा जिले में गरीबों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए 57 से अधिक गांवों में बिजली उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इससे जिले के 6500 से अधिक लोगों को लाभ होगा। कंपनी इस परियोजना पर 2.5 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इस परियोजना का उद्घाटन राज्य के कृषि मंत्री कमल पटेल ने किया।</p>
<p>सिंजेंटा इंडिया ने एक बयान में कहा कि कंपनी के सीएसआर कदम की सराहना करते हुए कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा कि गरीब समुदायों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए सस्ती बिजली तक पहुंच आवश्यक है। यह रौशनी, खाना पकाने और संचार जैसी बुनियादी आवश्यकताओं तक पहुंच को सक्षम बनाता है। साथ ही आर्थिक विकास और शैक्षिक अवसरों को बढ़ावा देता है।</p>
<p>पटेल ने कहा, "सिंजेंटा इंडिया जैसी कॉरपोरेट संस्थाओं की सीएसआर पहल से समाज के वंचित वर्गों के लिए बिजली सुनिश्चित करने, गरीबी को दूर करने और सतत विकास को बढ़ावा देने में काफी मदद मिलेगी।" उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी सिंजेंटा इंडिया ने लोगों की परेशानियों को दूर करने में मदद की थी। वह समय मानवता के सामने आए सबसे चुनौतीपूर्ण समय में से एक था। &nbsp;</p>
<p>कृषि मंत्री ने कहा कि सिंजेंटा ने दो साल पहले भी हरदा के जिला अस्पताल में 100 मुहैया कराए थे। एक बार फिर कंपनी सरकार का समर्थन करने के लिए आगे आई है और उसने हरदा में 57 से अधिक बस्तियों के ग्रामीण विद्युतीकरण की परियोजना के लिए 2.5 करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की है। इससे 6500 से अधिक लोगों को लाभ होगा।</p>
<p>सिंजेंटा इंडिया के चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर डॉ. केसी रवि ने कहा कि यह पहल विशेष रूप से महिलाओं को अपनी पारिवारिक आय में पूरक योगदान देने की गतिविधियों के लिए सशक्त बनाएगी और उन बच्चों के लिए वरदान साबित होगी जो बिजली नहीं होने की वजह से रात में ठीक से पढ़ नहीं सकते और जो ऑनलाइन कक्षाएं लेते हैं। उन्होंने कहा, "किसान अपने खेतों की सिंचाई के लिए पंप चला सकेंगे और घरों में भी पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे महिलाओं को घरेलू काम और खाना पकाने के लिए पानी लाने में लगने वाले समय और श्रम की बचत होगी।"</p>
<p>डॉ. रवि ने कहा, &ldquo;मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान सिंजेंटा इंडिया ने 2 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से मुरैना जिले के अंबाह सिविल अस्पताल में एक सीटी स्कैन सेंटर समर्पित किया जिससे 815 गांव और कई हजार लोग लाभान्वित हुए। अब तक 1200 से अधिक लोगों ने सीटी स्कैन मशीन का लाभ उठाया है और निजी टेस्टिंग लैब की तुलना में फीस में 60 लाख रुपये की बचत की है। इससे मरीजों को यात्रा में लगने वाले समय और धन की भी बचत हुई है।''</p>
<p>सिंजेंटा इंडिया के एमडी और कंट्री हेड सुशील कुमार ने कहा कि सिंजेंटा मध्य प्रदेश के कई जिलों में ग्रामीण समुदायों को लगातार समर्थन दे रहा है। कृषि रसायनों और अन्य कृषि पद्धतियों के सुरक्षित उपयोग को लेकर कंपनी किसानों के लिए नियमित रूप से कक्षाएं और कार्यशालाएं आयोजित करती है। कंपनी हमेशा विपरीत परिस्थितियों में ग्रामीण समुदायों और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आई है, जैसे बाढ़ या सूखे या किसी अन्य आपदा के समय सुरक्षा किट, दवाएं, किराना सामान आदि का वितरण कंपनी की ओर से किया गया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सिंजेंटा इंडिया एमपी के हरदा जिले में 57 से अधिक गांवों में बिजली की आपूर्ति करेगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एमपी के मुरैना जिले में 160 करोड़ की लागत से बनेगा हॉर्टिकल्चर कॉलेज, केंद्र ने दी मंजूरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/horticulture-college-will-open-in-morena-district-of-mp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 Oct 2023 13:07:56 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/horticulture-college-will-open-in-morena-district-of-mp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत आने वाले कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग ने रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के तहत मुरैना जिले में हॉर्टिकल्चर कॉलेज खोलने का फैसला किया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की पहल पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इसकी मंजूरी दे दी है। मध्य प्रदेश सरकार ने जिले के पोरसा तहसील में इसके लिए लगभग 300 एकड़ भूमि का आवंटन भी कर दिया है। कॉलेज की स्थापना पर करीब 160 करोड़ रुपये की लागत आएगी जिसका वहन केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा। &nbsp;</p>
<p>इस अंचल में यह कॉलेज अपनी तरह का पहला कॉलेज होगा। इसमें स्नातक स्तर की पढ़ाई होगी जिसमें फल विज्ञान, सब्जी विज्ञान, फूलों की खेती और भू-निर्माण, पौध संरक्षण, सामाजिक विज्ञान, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, बुनियादी विज्ञान आदि जैसे विभिन्न विभाग होंगे। कॉलेज के माध्यम से हॉर्टिकल्चर संबंधी अनुसंधान कार्यों को भी गति मिलेगी। साथ ही नए रोजगार भी सृजित होंगे और क्षेत्र के किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी यह सहायक होगा।</p>
<p>मुरैना बुंदेलखंड क्षेत्र में आता है। जिले में कृषि, बागवानी एवं डेयरी मुख्य व्यवसाय है। यहां बागवानी फसलों के अंतर्गत अमरूद, नींबू, आम जैसे फल तथा आलू, टमाटर, बैंगन, मिर्च, खीरा आदि सब्जियां उगाई जाती हैं। धनिया, अदरक, हल्दी, फनल, लहसुन जैसे विभिन्न मसालों के साथ-साथ गेंदा, गुलाब एवं गिलार्डिया जैसे फूलों की भी यहां खेती की जाती है।</p>
<p>मुरैना विभिन्न फलों, सब्जियों एवं फूलों के बड़े उत्पादक के रूप में उभर रहा है। हाल के दशक में बागवानी फसलों की खेती अत्यधिक लाभकारी उद्यम के रूप में उभरी है, फिर भी यह जिले में सकल फसल क्षेत्र का करीब 2.5% ही है। इसलिए प्रस्तावित कॉलेज न केवल मुरैना जिले, बल्कि चंबल-ग्वालियर क्षेत्र की समग्र प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए मील का पत्थर साबित होगा &nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_651fb938d96dd.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ एमपी के मुरैना जिले में 160 करोड़ की लागत से बनेगा हॉर्टिकल्चर कॉलेज, केंद्र ने दी मंजूरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/10/image_750x500_651fb938d96dd.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी के गन्ना किसानों का 4000 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया, नया पेराई सीजन शुरू लेकिन पिछले के भुगतान का इंतजार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/new-crushing-season-starts-with-more-than-rs-4000-crore-sugarcane-arears-in-uttar-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 03 Oct 2023 17:26:13 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/new-crushing-season-starts-with-more-than-rs-4000-crore-sugarcane-arears-in-uttar-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गन्ना पेराई के नए सीजन (1 अक्टूबर, 2023- 30 सितंबर, 2024) की शुरुआत हो चुकी है लेकिन उत्तर प्रदेश के किसानों को पिछले पेराई सीजन (2022-23) के गन्ना बकाये का पूरा भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। प्रदेश के गन्ना किसानों का करीब एक दर्जन से ज्यादा चीनी मिलों पर करीब 4000 करोड़ रुपये का बकाया है। इनमें से कुछ मिलें ऐसी हैं जिन्होंने दिसंबर 2022 तक का ही भुगतान किया है। यही नहीं, चालू सीजन के लिए राज्य सरकार ने गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) भी घोषित नहीं किया है, जबकि सीजन शुरू होने से पहले ही इसकी घोषणा हो जानी चाहिए। पिछले सीजन (2022-23) में गन्ने की अगैती किस्म के लिए एसएपी 350 रुपये प्रति क्विंटल था।</p>
<p>उत्तर प्रदेश गन्ना विकास विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, गन्ना किसानों को 29 सितंबर, 2023 तक 33,826.53 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है जो कुल भुगतान का 88.90 फीसदी है। इस लिहाज से देखें तो यूपी के चीनी मिलों पर गन्ना किसानों की कुल देनदारी लगभग 38,000 करोड़ रुपये बनती है, जबकि बकाया करीब 4,200 करोड़ रुपये बैठता है। शामली, ऊन (शामली), मलकपुर (बागपत), सिंभावली, मोदी चीनी मिलें जैसी करीब एक दर्जन से ज्यादा मिलें हैं जिन पर किसानों का बकाया है।</p>
<p>शामली और ऊन की चीनी मिलों ने तो किसानों को पिछले पेराई सीजन के सिर्फ दो से ढाई महीने का ही भुगतान किया है। नवंबर 2022 से इन मिलों में पेराई शुरू हुई थी और इन्होंने दिसंबर 2022 तक का ही गन्ना भुगतान किया है, जबकि मई 2023 तक इन मिलों में पेराई हुई। इस लिहाज से किसानों का 5 महीने का बकाया है। नियमतः किसानों द्वारा मिलों को गन्ना देने के 14 दिन के भीतर भुगतान हो जाना चाहिए। उसके बाद हुए भुगतान को बकाया भुगतान माना जाता है जिस पर मिलों को ब्याज देना होता है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>शामली जिले के भैंसवाल गांव के गन्ना किसान भोपाल सिंह शामली चीनी मिल को अपना गन्ना बेचते हैं। वह छोटे किसान हैं। भोपाल सिंह ने बताया कि शामली मिल ने दिसंबर 2022 तक का ही भुगतान किया है, जबकि अब नया पेराई सीजन शुरू हो चुका है। इतने लंबे समय तक भुगतान नहीं होने से उन्हें आर्थिक रूप से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। चीनी मिलों द्वारा बकाये का भुगतान नहीं होने से भोपाल सिंह पिछला फसल कर्ज ही नहीं चुका पाए हैं, जबकि मौजूदा फसल भी कटने को तैयार है। भोपाल सिंह कहते हैं कि, मेरी आमदनी का जरिया खेती ही है। गन्ना बकाये की वजह से बच्चों की पढ़ाई, इलाज के लिए दवाई सहित अन्य सारे खर्चों का बोझ उठा पाना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। शामली जिले के हजारों किसानों की स्थिति उन जैसी ही है।</p>
<p>सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पेराई सीजन 2022-23 में उत्तर प्रदेश में 1098.82 लाख टन गन्ने की पेराई हुई और 104.82 लाख चीनी का उत्पादन हुआ। पेराई सीजन 2021-22 में 1016.26 लाख टन गन्ने की पेराई यूपी के मिलों द्वारा की गई और 101.98 लाख टन चीनी का उत्पादन किया गया। 2021-22 में किसानों को 35,158.93 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया जो कुल भुगतान का 99.88 फीसदी था। &nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/05/image_750x500_609fcc3fcaab6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी के गन्ना किसानों का 4000 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया, नया पेराई सीजन शुरू लेकिन पिछले के भुगतान का इंतजार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/05/image_750x500_609fcc3fcaab6.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तमिलनाडु के गन्ना किसानों को मिली जीत, किसानों से धोखाधड़ी कर थिरु अरूरन शुगर्स ने लिया था 130 करोड़ का कर्ज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-farmers-got-victory-against-the-sugar-mill-of-tamil-nadu-thiru-arooran-sugars-had-taken-a-loan-of-rs-130-crore-in-the-name-of-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 29 Sep 2023 15:56:13 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sugarcane-farmers-got-victory-against-the-sugar-mill-of-tamil-nadu-thiru-arooran-sugars-had-taken-a-loan-of-rs-130-crore-in-the-name-of-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>तमिलनाडु के तंजावुर स्थित थिरु अरूरन चीनी मिल द्वारा गन्ना किसानों से की गई धोखाधड़ी के मामले में आंदोलनरत किसानों को बड़ी जीत मिली है। किसानों की सहमति के बगैर इस चीनी मिल ने बैंकों से 130 करोड़ रुपये का कर्ज ले लिया था और कागजों में उसे &nbsp;किसानों द्वारा लिया गया कर्ज बताया गया था। किसानों को इस कर्ज से अब मुक्ति मिल गई है। अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) ने तंजावुर के गन्ना किसानों को इस जीत की बधाई दी है।</p>
<p>अखिल भारतीय गन्ना किसान संघ, एआईकेएस से संबद्ध तमिलनाडु गन्ना किसान संघ के नेतृत्व में राज्य के प्रमुख निजी चीनी मिल थिरु अरूरन शुगर्स लिमिटेड द्वारा की गई धोखाधड़ी के खिलाफ गन्ना किसान मिल परिसर में पिछले 300 दिनों से अधिक समय से आंदोलन कर रहे थे। उनकी मांग थी कि चीनी मिल द्वारा लिए गए इस कर्ज से किसानों को मुक्ति दी जाए।</p>
<p>26 सितंबर को जिला कलेक्टर के नेतृत्व में आंदोलनरत किसानों और अरूरन शुगर्स का अधिग्रहण करने वाली काल्स डिस्टिलरी लिमिटेड के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई। &nbsp;अरूरन शुगर्स द्वारा किसानों के नाम पर लिया गया 115 करोड़ का कर्ज इस डिफॉल्टर कंपनी के नाम पर ही ट्रांसफर कर दिया गया और इस तरह किसानों को कर्ज से मुक्ति मिल गई। काल्स डिस्टिलरी लिमिटेड गन्ना किसानों का पूरा बकाया भी भुगतान करने पर सहमत हुई है।</p>
<p>थिरु अरूरन शुगर्स तमिलनाडु की सबसे पुरानी चीनी मिलों में से एक है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की चेन्नई पीठ ने कथित डिफॉल्ट के लिए भारतीय स्टेट बैंक द्वारा दायर एक मामले के आधार पर 2021 में थिरु अरूरन शुगर्स के परिसमापन का आदेश दिया। काल्स डिस्टिलरीज ने एनसीएलटी के आदेश के आधार पर थिरु अरूरन शुगर्स का अधिग्रण कर लिया और उसकी संपत्ति पर कब्जा कर लिया। हालांकि, किसानों ने नए प्रबंधन के तहत चीनी मिल के कामकाज का विरोध किया।</p>
<p>किसानों ने इस बात पर जोर दिया कि अनुशंसा से पहले किसानों के नाम पर दिए गए कर्ज को अरूरन शुगर्स के प्रबंधन को हस्तांतरित किया जाना चाहिए और किसानों को कर्ज से मुक्त किया जाना चाहिए। किसानों ने यह भी मांग की कि उन्हें अरूरन शुगर्स द्वारा गन्ना बकाया का पूरा भुगतान ब्याज सहित किया जाना चाहिए।</p>
<p>तमिलनाडु गन्ना किसान संघ इन मांगों को उठाते हुए 22 नवंबर 2022 से अरूरन शुगर्स के परिसर में आंदोलन आयोजित कर रहा है। संघर्ष के 300वें दिन तमिलनाडु गन्ना किसान संघ और तमिलनाडु किसान सभा द्वारा तंजावुर जिला कलेक्टरेट के सामने धरना देने का आह्वान किया गया था। अखिल भारतीय गन्ना किसान महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और एआईकेएस के उपाध्यक्ष डी रवींद्रन, तमिलनाडु एआईकेएस के राज्य सचिव सामी नटराजन के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन में भाग लेने आए गन्ना किसानों को पुलिस ने रोका और जबरन गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने तंजावुर जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने एकत्र हुए किसानों और पदाधिकारियों को भी गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद जिला कलेक्टर के नेतृत्व में वार्ता हुई और इस मामले का निपटारा किया गया।</p>
<p>एआईकेएस ने एक बयान में कहा है कि यह कॉरपोरेट डिफॉल्टरों के खिलाफ संघर्षरत किसानों की एक बड़ी जीत है जिन्होंने किसानों का शोषण और धोखाधड़ी करके भारी मुनाफा कमाया। तमिलनाडु गन्ना किसान संघ ने अन्य सभी मांगें पूरी होने तक अरूरन के परिसर में आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। उदाहरण के लिए, अरूरन शुगर्स ने वर्ष 2014 और 2015 में बैंकों को फसल कर्ज का भुगतान करने में चूक की थी। चीनी मिल ने किसानों से पैसे तो काट लिए लेकिन उस राशि को विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों में जमा करने में विफल रही जहां से किसानों ने कर्ज लिया था। गन्ना किसान संघ की मांग है कि काल्स डिस्टिलरीज को परिचालन शुरू करने से पहले इसका निपटान करना चाहिए।</p>
<p>एआईकेएस के अध्यक्ष अशोक धवले और महासचिव विजू कृष्णन ने कहा, "यह संघर्ष और जीत चीनी उद्योग में विभिन्न चीनी उत्पादक राज्यों में फैले ऐसे ही कॉरपोरेट डिफॉल्टरों के लिए एक चेतावनी है जिन्होंने किसानों को धोखा दिया है। यह अन्य जगहों पर गन्ना किसानों के संघर्ष को प्रेरित करेगा।"</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ तमिलनाडु के गन्ना किसानों को मिली जीत, किसानों से धोखाधड़ी कर थिरु अरूरन शुगर्स ने लिया था 130 करोड़ का कर्ज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नंदिनी दूध हुआ 3 रुपये प्रति लीटर महंगा, नई दर एक अगस्त से होगी लागू]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/karnataka-govt-hikes-nandini-milk-price-by-rs-3-a-litre-from-august-1.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 28 Jul 2023 16:51:35 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/karnataka-govt-hikes-nandini-milk-price-by-rs-3-a-litre-from-august-1.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कर्नाटक के दूध उत्पादक किसानों की मांग को देखते हुए सिद्धारमैया सरकार ने नंदिनी दूध की कीमत 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी है। नई दरें 1 अगस्त से लागू होंगी। कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) नंदिनी ब्रांड नाम से दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री करती है। गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार ने यह फैसला किया।</p>
<p>मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस फैसले का बचाव करते हुए शुक्रवार को कहा कि पूरे देश की तुलना में कर्नाटक में कम कीमत पर दूध की बिक्री होती है। अभी टोंड दूध की कीमत 39 रुपये प्रति लीटर है जो बढ़कर 42 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। दूसरे राज्यों में इसकी कीमत 54-56 रुपये प्रति लीटर तक है। तमिलनाडु में यह 44 रुपये प्रति लीटर में मिलता है।</p>
<p>उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि दूध के बढ़े दाम किसानों की जेब में जाएंगे। दुग्ध उत्पादकों के यूनियन दूध की खरीद कीमत बढ़ाने की मांग कर रहे थे जिसे देखते हुए यह फैसला किया गया है। इससे किसानों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में पूरे देश में टोंड दूध 56 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। दाम बढ़ाने के बावजूद कर्नाटक के लोगों को दूसरे राज्यों की तुलना में काफी कम कीमत चुकानी होगी।</p>
<p>कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के प्रतिनिधियों के साथ एक हफ्ते पहले हुई बैठक के बाद कैबिनेट ने दूध के दाम बढ़ाने का फैसला किया है। उस बैठक में केएमएफ की ओर से कहा गया था कि निजी कंपनियां दुग्ध उत्पादकों को ज्यादा कीमत दे रही हैं जिसकी वजह से केएमएफ दूध की कम खरीद कर पा रही है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में नंदिनी दूध के मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया था जिसकी वजह से भाजपा को काफी नुकसान झेलना पड़ा था।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नंदिनी दूध हुआ 3 रुपये प्रति लीटर महंगा, नई दर एक अगस्त से होगी लागू ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बिना फैक्ट्री लगाए ही किसान कर सकेंगे गुड़ का उत्पादन और बिक्री, मुजफ्फरनगर में बन रहा 450 क्विंटल रोजाना क्षमता वाला पहला सीएफसी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-will-produce-and-sell-jaggery-without-setting-up-a-factory-the-first-cfc-is-being-built-in-muzaffarnagar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 26 Jul 2023 11:44:23 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-will-produce-and-sell-jaggery-without-setting-up-a-factory-the-first-cfc-is-being-built-in-muzaffarnagar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में 5.10 करोड़ रुपये की लागत से कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) बनाया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार 90 फीसदी सब्सिडी दे रही है। बाकी 10 फीसदी पूंजी शेयरहोल्डर्स लगा रहे हैं। इस सीएफसी में सेमी ऑटोमैटिक गुड़ फैक्ट्री लगाई जा रही है जिसकी क्षमता 450 क्विंटल प्रतिदिन होगी। इसकी खासियत यह है कि यहां कोई भी किसान अपना गन्ना लाकर गुड़ बनवा सकते हैं और उसे बाजार में बेच सकते हैं। गुड़ बनाने के लिए उन्हें अलग से फैक्ट्री लगाने की जरूरत नहीं है।&nbsp;</p>
<p>मुजफ्फरनगर में यह सीएफसी &ldquo;एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी)&rdquo; योजना के तहत बनाया जा रहा है। ओडीओपी के तहत मुजफ्फरनगर जिले को गुड़ उत्पादन के लिए चुना गया है। जिले का पहला सीएफसी जिला मुख्यालय से 17 किलोमीटर दूर सैदपुर कलां में बन रहा है, जहां अगले साल जनवरी से गुड़ उत्पादन शुरू होने की संभावना है।</p>
<p>यह सीफएसी बधाई एग्रीबिजनेस प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड बना रही है। यह एक तरह का एफपीओ (किसान उत्पादक संघ) है। इसके चेयरमैन अरविंद मलिक ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया, &ldquo;मुजफ्फरनगर जिले के बधाई कलां और सैदपुर कलां गांव सहित आसपास के सात गांवों के 125 किसान बधाई एग्रीबिजनेस के सदस्य हैं। इसके 21 शेयरहोल्डर्स हैं। इस सीएफसी में न सिर्फ गुड़ फैक्ट्री लगाई जा रही है, बल्कि यहां पैकेजिंग, ग्रेडिंग और लैब टेस्टिंग की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सदस्य किसानों के अलावा कोई भी किसान यहां अपना गन्ना लाकर उससे गुड़ बनवा सकता है और उसकी पैकेजिंग करवा कर अपने ब्रांड नाम से उसे बाजार में बेच सकता है। इसके बदले में किसानों को फीस चुकानी होगी। यह फीस बोर्ड मेंबर्स और जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र के उपायुक्त द्वारा तय की जाएगी।&rdquo;</p>
<p>उन्होंने बताया, &ldquo;इस सीएफसी में केमिकल फ्री गुड़ का उत्पादन किया जाएगा। धीरे-धीरे ऑर्गेनिक गुड़ बनाने पर मुख्य रूप से ध्यान दिया जाएगा। जिले में कुछ किसान ऑर्गेनिक गन्ना उगाते हैं। प्लांट की सफाई के बाद पहले ऑर्गेनिक किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी। अगर किसान अपने गुड़ की मार्केटिंग और उसका निर्यात करना चाहते हैं तो इसके लिए हमने अलग से बधाई फूड के नाम से एक कंपनी रजिस्टर्ड कराई है। इसके माध्यम से भी वे अपना गुड़ बेच सकते हैं। जिस तरह से लोग स्वास्थ्य के नजरिये से चीनी को छोड़कर गुड़ खाने पर ध्यान दे रहे हैं उसे देखते हुए गुड़ का बाजार बढ़ने और निर्यात की काफी संभावनाएं हैं।&rdquo;</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/07/image_750x_64c0b846975a5.jpg" alt="" /></p>
<p>मलिक ने बताया, &ldquo;सीएफसी का संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी हमारी ही होगी, लेकिन शुरुआत के साढ़े चार साल तक राज्य सरकार जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र के जरिये इसकी निगरानी करेगी। उसके बाद इसे हमें सौंप दिया जाएगा। इसके जरिये होने वाली आमदनी में से संचालन और रखरखाव खर्च के बाद जो मुनाफा होगा उसे शेयरधारकों में बांटा जाएगा। किसी भी शेयरधारक को 5 फीसदी से ज्यादा शेयर नहीं दिया गया है।&rdquo;</p>
<p>&ldquo;एक जिला एक उत्पाद&rdquo; योजना के तहत सीएफसी विकसित करने की घोषणा वर्ष 2018 में की गई थी। इसके तहत सीएफसी की स्थापना, संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी एस.पी.वी. (स्पेशल परपस व्हीकल) को दी जाती है। स्वयं सहायता समूह, सहकारी संस्थाएं, स्वयं सेवी संस्थाएं, प्रोड्यूसर कंपनी, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, लिमिटेड कंपनी या लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनर एस.पी.वी. हो सकते हैं। एस.पी.वी. की शर्तों के तहत किसी भी संस्था में न्यूनतम 20 सदस्य होने चाहिए और कुल सदस्यों में से न्यूनतम दो-तिहाई सदस्य ओडीओपी उत्पाद से संबंधित होने चाहिए।</p>
<p>संस्था रजिस्टर्ड होनी चाहिए और संस्था के किसी भी सदस्य के पास संस्था के 10 फीसदी से अधिक शेयर नहीं होने चाहिए। सीएफसी की स्थापना के लिए अधिकतम 15 करोड़ रुपये तक की परियोजनाएं लगाई जा सकती हैं। इसमें 90 फीसदी राशि सरकार देती है। 15 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं भी लगाई जा सकती है लेकिन ऐसी परियोजनाओं में 12.75 करोड़ रुपये या परियोजना लागत में से जमीन की लागत कम करने के बाद शेष बची लागत में से, जो भी कम हो, वह सरकार देगी। एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत सीएफसी की स्थापना के लिए विस्तृत जानकारी जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र से हासिल की जा सकती है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बिना फैक्ट्री लगाए ही किसान कर सकेंगे गुड़ का उत्पादन और बिक्री, मुजफ्फरनगर में बन रहा 450 क्विंटल रोजाना क्षमता वाला पहला सीएफसी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 6000 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/cane-farmers-owe-over-rs-6000-crore-to-sugar-mills-in-uttar-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 03 Jul 2023 18:03:26 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/cane-farmers-owe-over-rs-6000-crore-to-sugar-mills-in-uttar-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का पेराई सत्र 2022-23 (अक्टूबर-सितंबर) का 6000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। उत्तर प्रदेश गन्ना विकास विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक चालू पेराई सत्र के लिए 3 जुलाई तक चीनी मिलों ने 31,822.38 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। जबकि चीनी मिलों द्वारा पूरे सीजन मे पेराई किये गये गन्ने का कुल भुगतान करीब 38,052 करोड़ रुपये बनता है।</p>
<p>आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून, 2023 तक चीनी मिलों ने चालू पेराई सत्र में 1098.82 लाख टन गन्ने की पेराई की है। उत्तर प्रदेश में गन्ने की अगेती किस्म के लिए राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 350 रुपये प्रति क्विंटल है। यह पिछले पेराई सत्र (2021-22) के बराबर ही है क्योंकि चालू पेराई सीजन में इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी। राज्य में चीनी मिलों द्वारा खरीदी जाने वाली तीनों श्रेणियों के गन्ने की औसत खरीद लागत 346.3 रुपये प्रति क्विटंल आ रही है। चालू पेराई सीजन में गन्ने की पेराई के आधार पर पूरे सीजन का कुल भुगतान करीब 38,052 करोड़ रुपये बैठता है। इसमें से चीनी मिलों ने 3 जुलाई तक 31,822.38 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। इस स्थिति में गन्ना किसानों का अभी भी 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान चीनी मिलों पर बकाया है। नियमतः किसानों द्वारा चीनी मिलों को गन्ना देने के बाद 14 दिन में भुगतान हो जाना चाहिए। उसके बाद भुगतान की स्थिति में इसे बकाया भुगतान माना जाता है और उस पर ब्याज देना होता है।</p>
<p>राज्य में सभी चीनी मिलों में मई में पेराई बंद हो गई थी। जाहिर है जो भुगतान नहीं हुआ है वह बकाया की श्रेणी में ही आता है। हालांकि अभी तक चीनी मिलें बकाया पर ब्याज नहीं दे रही हैं लेकिन यह मामला लंबे समय से न्यायालय में है। उत्तर प्रदेश इस साल महाराष्ट्र से करीब 10 हजार टन चीनी का अधिक उत्पादन कर देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य बना है।</p>
<p>ताजा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सत्र में 104.82 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। पिछले पेराई सत्र 2021-22 में 101.98 लाख टन चीनी का उत्पादन राज्य में हुआ था। पिछले सत्र में 1016.26 लाख टन गन्ने की पेराई हुई थी जिसका भुगतान 35,154.56 करोड़ रुपये किया गया है। यह कुल बकाये का 99.87 फीसदी भुगतान है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक चालू सीजन के कुल भुगतान का 83 फीसदी गन्ना मूल्य भुगतान हो चुका है। यह जानकारी विभाग की वेबसाइट पर दी गई है लेकिन कुल भुगतान की पूरी गणना की जानकारी नहीं दी गई है। किन चीनी मिलों पर अधिक बकाया है इसकी जानकारी नहीं दी गई है। <strong>रूरल वॉयस</strong> ने चीनी मिलों को पदाधिकारियों के साथ जो बातचीत की है उसमें यह बात सामने आई है कि कुछ चीनी मिलों ने अधिकांश गन्ना मूल्य का भुगतान कर दिया है। मगर कुछ चीनी मिलें ऐसी हैं जिनका भुगतान का स्तर बहुत कम है और ये शुरुआती एक या दो माह का ही भुगतान कर सकी हैं। ऐसे में इन चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति करने वाले किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार प्रभावित हो रही है। इनमें कुछ ऐसे चीनी मिल समूह हैं जिनकी चीनी मिलों की संख्या काफी अधिक है।</p>
<p>2020-21 में राज्य की सभी चीनी मिलों ने 1027.50 लाख टन गन्ने की पेराई की थी और चीनी का उत्पादन 110.59 लाख टन हुआ था। किसानों को इसके लिए 33,010.31 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया जो कुल बकाये का 99.99 फीसदी है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_61fd4795cd304.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 6000 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आम के कम दाम से किसान परेशान, बंगाल के उत्पादकों की सरकार से हस्तक्षेप की मांग]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/west-bengal-mango-growers-seek-govt-support.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 22 Jun 2023 13:22:54 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/west-bengal-mango-growers-seek-govt-support.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के आम उत्पादक घटती कीमतों की वजह से परेशान हैं। आम की बंपर पैदावार के बावजूद वे मुनाफा नहीं कमा पा रहे हैं। उन्हें इस सीजन में उत्पादन की लागत वसूलने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मालदा से अन्य राज्यों और विदेशों में 'फलों के राजा' के अधिक निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। बंगाल का मालदा और मुर्शिदाबाद जिला गर्मियों के इस स्वादिष्ट फल के उत्पादन के लिए मशहूर है।</p>
<p>मालदा मर्चेंट्स एसोसिएशन ने उत्पादकों और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए मालदा में आम परीक्षण और निर्यात सुविधा केंद्रों के साथ-साथ आम प्रसंस्करण सुविधा उपलब्ध कराने की भी सरकार से मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष उज्ज्वल साहा ने कहा कि सरकार ने पूर्व में दोनों जिलों को आम के लिए निर्दिष्ट निर्यात क्षेत्र के रूप में मान्यता दी थी। मगर यह सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया। पिछले दो-तीन वर्षों में इस क्षेत्र में करीब 200 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि पर आम के बाग लगाए गए हैं। आम उत्पादकों को इस साल बाग के स्तर पर केवल 10 रुपये प्रति किलो का दाम मिल रहा है, जबकि उत्पादन की लागत लगभग 15 रुपये प्रति किलो है। बंपर उत्पादन और पड़ोसी राज्यों को निर्यात के बावजूद मांग में कमी है जिससे उत्पादकों को वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है।</p>
<p>इस सीजन में मालदा में आम का उत्पादन लगभग 4,00,000 टन होने का अनुमान है जो पिछले साल के 3,00,000 टन से अधिक है। वर्तमान में लगभग 31,000 हेक्टेयर भूमि पर आम की खेती होती है। विदेशी निर्यात मांग अभी अच्छी नहीं है और उत्तर भारत से कुछ मांग है। उज्जवल साहा ने कहा, "हमें लाभकारी मूल्य पाने के लिए रोजाना लगभग 100 ट्रक निर्यात करने की जरूरत है लेकिन दैनिक आपूर्ति लगभग 40 ट्रक ही होती है। इस साल फल की अधिक पैदावार होने के कारण जिले के आम किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ है।" परीक्षण केंद्रों और फसल संरक्षण सुविधाओं सहित सरकारी पहल की कमी उत्पादकों की समस्या को और बढ़ा रही है।</p>
<p>एसोसिएशन ने केंद्र और राज्य सरकारों से स्थानीय आम उद्योग को समर्थन देने के लिए कार्रवाई करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले। राज्य बागवानी विभाग ने स्वीकार किया है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष आम के दाम काफी कम हैं। हालांकि, विभाग की भूमिका बहुत सीमित है और एसोसिएशन द्वारा उठाई गई चिंताओं को दूर करने की गुंजाइश उनके पास नहीं है। अधिक परीक्षण केंद्र स्थापित करने के मुद्दे पर विभाग का कहना कि आम व्यवसाय की मौसमी प्रकृति के कारण मौजूदा केंद्रों को ही सर्वाइव करना मुश्किल है।</p>
<p>दिल्ली में पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से आम उत्सव का आयोजन किया गया था एक पखवाड़े तक चलने वाले उत्सव का समापन 19 जून को हुआ। इस दौरान 35 टन आम ​​बेचने में मदद मिली। राज्य के कुल सात आम उत्पादक जिलों ने इसमें भाग लिया था।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_6493fd9080810.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ आम के कम दाम से किसान परेशान, बंगाल के उत्पादकों की सरकार से हस्तक्षेप की मांग ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/06/image_750x500_6493fd9080810.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जीएम फसलों के परीक्षण की मंजूरी तत्काल वापस ले हरियाणा सरकारः भारतीय किसान संघ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-government-should-immediately-withdraw-approval-for-testing-of-gm-crops-demand-by-bharatiya-kisan-sangh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 14 Jun 2023 17:47:50 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-government-should-immediately-withdraw-approval-for-testing-of-gm-crops-demand-by-bharatiya-kisan-sangh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय किसान संघ ने हरियाणा सरकार से जीएम फसलों के परीक्षण की मंजूरी को तत्काल वापस लेने की मांग है। भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने इस संबंध में विरोध दर्ज कराते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखा है।</p>
<p>मोहिनी मोहन मिश्र ने अपने पत्र में कहा है कि 17 मई, 2023 को जीईएसी की 149वीं बैठक में हरियाणा सरकार ने जीएम फसल, विशेषकर हर्बीसाईड टोलरेंट (एचटीबीटी) फसल को अपने राज्य में परीक्षण के लिए अनुमति दी है। जबकि इन फसलों के दुष्परिणाम को देखते हुए तेलंगाना, महाराष्ट्र और गुजरात की सरकारों ने अनुमति देने से मना कर दिया है। उन्होंने पत्र में कहा है कि हरियाणा सरकार के इस निर्णय के खिलाफ भारतीय किसान संघ अपना विरोध जताता है। <br />भारतीय किसान संघ की ओर से बुधवार को जारी एक बयान में मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा है कि जीएम फसल अवैज्ञानिक एवं एक विफल तकनीक है। यह फसल कैंसर पैदा करती है। पर्यावरण मंत्रालय भी यह मानता है। यह फसल जैव-विविधता के लिए बड़ा खतरा है। जीएम फसल तकनीक किसान व कृषि क्षेत्र के साथ-साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाने वाली है।</p>
<p>उनका कहना है कि जीएम फसल राष्ट्र अहितकारी विरोधी तत्वों का हथकंडा है। ऐसे में हरियाणा सरकार इस प्रकार की फसलों को कैसे अनुमति दे सकती है? भारतीय किसान संघ की मांग है कि जीएम फसलों के किसी भी प्रकार के परीक्षण या खेती के लिए हरियाणा सरकार द्वारा दी गई अनुमति तत्काल वापस ले।<br /><br /></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जीएम फसलों के परीक्षण की मंजूरी तत्काल वापस ले हरियाणा सरकारः भारतीय किसान संघ ]]></media:description>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों का प्रदर्शनः कुरुक्षेत्र के पिपली में जम्मू&amp;#45;दिल्ली नेशनल हाईवे किया बंद, मांगें माने जाने तक जाम लगाने का टिकैत का ऐलान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-protest-continued-in-haryana-jammu-delhi-national-highway-closed-in-pipli.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 12 Jun 2023 17:36:44 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-protest-continued-in-haryana-jammu-delhi-national-highway-closed-in-pipli.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सूरजमुखी की खरीद को लेकर हरियाणा में चल रहा किसानों का विरोध-प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। सोमवार को कुरुक्षेत्र के पिपली अनाज मंडी में किसानों की एमएसपी महापंचायत हुई। इसके बाद नाराज किसानों ने पीपली में जम्मू-दिल्ली नेशनल हाईवे 44 <span>को बंद कर दिया। </span>इससे पहले किसानों और सरकार के बीच बातचीत विफल हो गई जिससे किसानों की नाराजगी और बढ़ गई। एमएसपी के अलावा किसानों की मांग है कि गुरनाम सिंह चढ़ूनी सहित गिरफ्तार किए गए अन्य किसान नेताओं को खट्टर सरकार जल्द से जल्द रिहा करे।</p>
<p>भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक ट्विट कर कहा, &ldquo;पीपली अनाज मंडी में एमएसपी महापंचायत में फैसला लिया गया की हम अपनी मांगें माने जाने तक हाईवे को बंद रखेंगे। अतः सभी प्रदेशों की इकाई अग्रिम सूचना तक कुरुक्षेत्र पर नजर बनाए रखें और अगले आदेश का इंतजार करें। सरकार की यह दमनकारी नीति देश का अन्नदाता बर्दाश्त नहीं करेगा।&ldquo;</p>
<p>पिपली में हाईवे पर बैठे राकेश टिकैत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमारी केवल दो मांगें हैं। जिन किसानों को गिरफ्तार किया गया है उनको छोड़ा जाए और सूरजमुखी के बीजों को तय एमएसपी पर खरीदा जाए। उन्होंने कहा कि हम सरकार से बातचीत को तैयार हैं। पिपली में किसानों की '<span>एमएसपी दिलाओ-किसान बचाओ रैली</span>' <span>हुई। इसमें हरियाणा के अलावा राजस्थान</span>, <span>पंजाब</span>, <span>उत्तराखंड</span>, <span>हिमाचल प्रदेश और यूपी से हजारों की संख्या में किसान पहुंचे। </span>मालूम हो कि छह जून को जब किसान सूरजमुखी की एमएसपी पर खरीद की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे तो गुरनाम सिंह चढ़ूनी सहित कुछ किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था। बाद में अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।</p>
<p>सरकार ने 2022-23 के लिए सूरजमुखी का एमएसपी 6400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। जबकि 2023-24 के लिए एमएसपी 6760 रुपये प्रति क्विंटल करने की घोषणा केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते ही की है। मगर इसकी सरकारी खरीद नहीं हो रही है। मजबूरन किसानों को निजी व्यापारियों को अपनी फसल बेचनी पड़ रही है। सस्ते और बेधड़क आयात से खुले बाजार में सूरजमुखी का भाव गिरकर 4000-4500 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। इससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। &nbsp;</p>
<p>हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने किसानों के नुकसान की भरपाई भावांतर योजना के जरिये करने की बात कही है लेकिन इस योजना के तहत 1000 रुपये प्रति क्विंटल की ही भरपाई की जाती है। इस योजना से भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा। यही वजह है कि वे इसका विरोध कर रहे हैं और एमएसपी पर ही खरीद की मांग पर अड़े हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों का प्रदर्शनः कुरुक्षेत्र के पिपली में जम्मू-दिल्ली नेशनल हाईवे किया बंद, मांगें माने जाने तक जाम लगाने का टिकैत का ऐलान ]]></media:description>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[इंडियन पोटाश लिमिटेड की दो चीनी मिलों को मिला उत्कृष्टता पुरस्कार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/two-sugar-mills-of-indian-potash-limited-get-excellence-award.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 12 Jun 2023 16:10:14 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/two-sugar-mills-of-indian-potash-limited-get-excellence-award.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) की उत्तर प्रदेश स्थित दो चीनी मिलों को उत्कृष्टता पुरस्कार से नवाजा गया है। यूपी गन्ना विकास विभाग की ओर से आईपीएल की मेरठ जिला स्थित सकौतीटांडा चीनी मिल को पहला पुरस्कार और मुजफ्फरनगर जिले के रोहानाकलां स्थित चीनी मिल को द्वितीय पुरस्कार दिया गया है।</p>
<p>राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में यह पुरस्कार दिया। आईपीएल के अधिशासी निदेशक नीरज शर्मा और यूनिट हेड कुलदीप सिंह एवं दीपेंद्र कुमार ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास कार्यों को गति प्रदान के उद्देश्य से उत्कृष्ट कार्य करने वाले मिलों को यह पुरस्कार दिया जाता है।</p>
<p>आईपीएल ने 2010 में इन चीनी मिलों को राज्य चीनी निगम से खरीदा था। उस समय इन मिलों की हालत बहुत खराब थी और मशीनरी जर्जर अवस्था में थी। आईपीएल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. पीएस गहलोत के नेतृत्व में न केवल इन चीनी मिलों में करोड़ों रुपये का निवेश कर इनका आधुनिकीकरण किया गया बल्कि इनकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया गया। इसकी बदौलत दोनों चीनी मिलें गन्ना किसानों को समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान कर रही हैं।</p>
<p>आईपीएल ने उत्कृष्टता पुरस्कार के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया है। पुरस्कार दिए जाने के मौके पर राज्य के गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी और गन्ना आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव संजय आर भूसरेड्डी भी मौजूद थे।</p>
<p>&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ इंडियन पोटाश लिमिटेड की दो चीनी मिलों को मिला उत्कृष्टता पुरस्कार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[प्रो. सुरिंदर गुप्ता बने शेर&amp;#45;ए&amp;#45;कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/prof-surinder-k-gupta-becomes-skuast-acting-vc.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 09 Jun 2023 16:17:32 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/prof-surinder-k-gupta-becomes-skuast-acting-vc.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रो. सुरिंदर गुप्ता को जम्मू के शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एसकेयूएएसटी) का कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया गया है। उन्होंने अपना पदभार ग्रहण कर लिया है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नए कुलपति के कार्यभार ग्रहण करने तक वह कुलपति कार्यालय के नियमित कार्य देखेंगे।</p>
<p>कार्यभार ग्रहण करने के बाद प्रो. गुप्ता ने विश्वविद्यालय की प्रगति के लिए कार्य करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति के युग में शेर-ए-कश्मीर कृषि विश्विद्यालय की प्रमुख भूमिका है। उन्होंने आशा जताई कि वह अपने छात्रों, किसानों, वैज्ञानिकों और हितधारकों को प्रगतिशील बनाने में सक्षम होंगे।</p>
<p>पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने जैविक खेती अनुसंधान केंद्र और हनी बी यूनिट का दौरा किया और केंद्रीय रिजर्व पुलिस के अधिकारियों को कार्प बीज भी वितरित किए। प्रो. गुप्ता ने विश्वविद्यालय में चल रहे विभिन्न शिक्षण, अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों का जायजा लिया और विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सभी कर्मचारियों का सहयोग मांगा। उन्होंने कहा कि वे किसानों और वैज्ञानिकों के बीच की खाई को पाटने को उच्च प्राथमिकता देंगे। उन्होंने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के सतत विकास के लिए सक्षम मानव संसाधन बनाने के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिकों से टीम भावना के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया।</p>
<p>प्रो. गुप्ता ने 1983 में बिहार वेटनरी कॉलेज, पटना से पशु चिकित्सा विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की है। उसके बाद 1987 में राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, बिहार से पशु चिकित्सा में मास्टर की उपाधि प्राप्त की। 1995 में उन्हें एचएयू, हिसार से पशु चिकित्सा में डॉक्टरेट की उपाधि मिली।</p>
<p>प्रो. गुप्ता इससे पहले यूनिवर्सिटी में डीन एफवीएससी सहित कई प्रमुख प्रशासनिक पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने कृषि समुदाय की बेहतरी के लिए अपनी नेतृत्व क्षमताओं और प्रतिबद्धता का लगातार प्रदर्शन किया है। स्थानीय कृषि पारिस्थितिकी तंत्र की उनकी गहरी समझ और कृषि उन्नति के प्रति उनके अटूट समर्पण ने विश्विद्यालय के भविष्य को आकार देने, कृषि शिक्षा में प्रगति करने और अत्याधुनिक अनुसंधान का नेतृत्व करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ), 2023 के तहत कृषि विश्वविद्यालयों में पांचवां स्थान हासिल किया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ प्रो. सुरिंदर गुप्ता बने शेर-ए-कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा के सूरजमुखी किसान क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन, दिल्ली से भी बड़े आंदोलन की टिकैत ने दी चेतावनी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/why-are-the-sunflower-farmers-of-haryana-protesting-rakesh-tikait-warned-of-a-bigger-movement-than-delhi.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 07 Jun 2023 13:38:34 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/why-are-the-sunflower-farmers-of-haryana-protesting-rakesh-tikait-warned-of-a-bigger-movement-than-delhi.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा में एक बार फिर से किसानों का आंदोलन शुरू हो गया है। सूरजमुखी की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर करने की मांग को लेकर मंगलवार को शुरू हुआ प्रदर्शन पुलिसिया लाठीचार्ज के बाद बुधवार को उग्र हो गया। मंगलवार को पुलिस ने कुरुक्षेत्र में हाईवे जाम कर बैठे किसानों पर लाठीचार्ज किया और किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी सहित 150 किसानों को हिरासत में ले लिया। जबकि प्रदर्शनकारी 700 किसानों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसके बाद बवाल और बढ़ गया।</p>
<p>किसान नेताओं की रिहाई की मांग को लेकर बुधवार को किसानों ने राज्य के कई जिलों में टोल प्लाजा पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। राज्य के हिसार, सिरसा, रोहतक, करनाल, अंबाला और कुरूक्षेत्र समेत अन्य जिलों में किसान टोल प्लाजा पर धरने पर बैठ गए हैं। किसानों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनके नेताओं एवं अन्य किसानों की रिहाई नहीं हुई तो पूरे हरियाणा के टोल प्लाजा को जाम कर देंगे।</p>
<p>इस बीच, भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा है कि एमएसपी को लेकर यह देश में पहला लाठीचार्ज है। अगर लाठीचार्ज होगा तो जाम भी होगा। एमएसपी को लेकर अब दिल्ली से भी बड़ा आंदोलन देशभर में करना पड़ेगा। इसके लिए सभी किसान संगठनों से बातचीत कर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।</p>
<p>सरकार ने सूरजमुखी का एमएसपी 6,400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है मगर इसकी सरकारी खरीद नहीं हो रही है। खुले बाजार में निजी व्यापारी 4000-4500 रुपये प्रति क्विंटल पर इसकी खरीद कर रहे हैं। इससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने भावांतर योजना के तहत सूरजमुखी की खरीद करने की बात कही है लेकिन किसानों ने सरकार के इस फैसले को ठुकरा दिया है। भावांतर योजना के तहत बाजार मूल्य पर हुई खरीद में नुकसान की भरपाई सरकार करती है। इसके तहत सरकार किसानों को 1000 रुपया प्रति क्विंटल देती है। भावांतर योजना के तहत अगर खरीद की जाती है तब भी किसानों को 1000-1500 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ेगा। यही वजह है कि किसान एमएसपी पर ही खरीद की मांग पर अड़े हैं। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>दरअसल, एक तरफ सरकार सूरजमुखी और सरसों जैसी तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए एमएसपी की ऊंची दर तय करती है जिससे किसान इनकी खेती के लिए प्रोत्साहित होते हैं। मगर दूसरी तरफ खाद्य तेलों का धड़ल्ले से आयात किया जाता है जिससे इन फसलों का बाजार भाव घट जाता है। इसका खमियाजा किसानों को उठाना पड़ता है। सूरजमुखी के मामले में भी इस साल यही हो रहा है। सूरजमुखी के प्रमुख उत्पादक यूक्रेन और रूस के पास युद्ध की वजह से काफी स्टॉक पड़ा हुआ था जिसे वे नई फसल के लिए कम दाम पर खाली करने लगे। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सूरजमुखी का दाम काफी नीचे आ गया जिसका असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है। इस साल पहली बार ऐसा हुआ कि सूरजमुखी का दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल से भी नीचे चला गया।</p>
<p>किसानों पर हुए लाठीचार्ज की विपक्षी दलों ने एक स्वर में निंदा की है। कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा, ''भाजपा का किसान विरोधी चेहरा बार-बार सामने आ रहा है। कभी भूमि अधिग्रहण अध्यादेश और काले कृषि कानून लाकर किसानों पर हमले किए जाते हैं तो कभी उन पर सीधा हमला किया जाता है। कुरुक्षेत्र में किसानों पर हुए लाठीचार्ज की हम कड़ी भर्त्सना करते हैं। सरकार को एमएसपी की उनकी मांग पूरी करनी चाहिए न कि बेरहमी से उनकी आवाज को दबाने का प्रयास।'' हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्&zwnj;डा ने कहा कि किसानों पर लाठीचार्ज बेहद निंदनीय है। क्या एमएसपी की मांग करना गुनाह है? सरकार की हठधर्मिता के कारण किसान 6400 रुपये एमएसपी की फसल 4000-4500 में बेचने को मजबूर हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा के सूरजमुखी किसान क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन, दिल्ली से भी बड़े आंदोलन की टिकैत ने दी चेतावनी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान के किसानों के लिए शुरू हुई ‘अनार शोध यात्रा’, आधुनिक और व्यवहारिक बागवानी तकनीक की लेंगे जानकारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/pomegranate-research-yatra-started-for-the-farmers-of-rajasthan-will-get-information-about-modern-horticulture-techniques.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 06 Jun 2023 16:59:37 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/pomegranate-research-yatra-started-for-the-farmers-of-rajasthan-will-get-information-about-modern-horticulture-techniques.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर एक सप्ताह चलने वाली &ldquo;अनार शोध यात्रा&rdquo; में राजस्थान के जोधपुर और बाड़मेर जिलों के तीन एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) से जुड़े दो दर्जन से ज्यादा किसान शामिल हुए हैं। ये किसान देश में अनार पर किए जा रहे शोध, उच्च गुणवता उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात से संबंधित प्रमुख सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों का दौरा करेंगे। इसके साथ ही महाराष्ट्र के पुणे, बारामती और शोलापुर के प्रमुख अनार उत्पादन क्षेत्रों, प्रगतिशील किसानों के बगीचों व इन किसानों से मिलकर प्रयोगात्मक जानकारी लेंगे। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की कृषि क्षेत्र विकास विभाग द्वारा संचालित कृषि निर्यात प्रोहत्सान केंद्र और साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर, जोधपुर द्वारा इस यात्रा का संचालन किया जा रहा है। &nbsp;</p>
<p>&ldquo;अनार शोध यात्रा" में बुड़ीवाड़ा से शिव किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, गुड़ामालानी से अनंदित किसान उत्पादक संगठन और बाप से मरू उनन्ती किसान उत्पादक संगठन से जुड़े किसान हिस्सा ले रहे हैं। नाबार्ड, जोधपुर के जिला विकास प्रबंधक मनीष मंडा का कहना है कि कृषि निर्यात प्रोत्साहन केंद्र द्वारा आयोजित "अनार शोध यात्रा" एक अनूठी पहल है जिसका लाभ निश्चित रूप से पश्चिमी राजस्थान के किसानों को मिलेगा। साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर के डॉ. भागीरथ चौधरी ने बताया कि पश्चिमी राजस्थान अनार उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभर रहा हैं। यहां के प्रगतिशील अनार उत्पादकों को आधुनिक बागवानी तकनीक एवं व्यवहारिक जानकारी देना जरूरी है। इस यात्रा का मुख्य मकसद राजस्थान के प्रगतिशील किसानों को अनार उत्पादन की आधुनिक तकनीक का अध्ययन करवाना है। इसी के तहत महाराष्ट्र के शोलापुर और बारामती क्षेत्र के अनार बगीचों एवं राष्ट्रीय अनार अनुसंधान केंद्र, शोलापुर में भ्रमण, अनार विशेषज्ञों एवं कृषकों से संवाद, चर्चा एव रूबरू हो कर कृषि ज्ञान का आदान-प्रदान किया जाएगा।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/latest-news/geac-approves-field-trial-of-new-gm-variety-of-bt-cotton.html" title="बीटी कॉटन की नई किस्म के ट्रायल को मंजूरी" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः बीटी कॉटन की नई जीएम किस्म के फील्ड ट्रायल को मंजूरी, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र का ट्रायल से इन्कार, एचटीबीटी पर नहीं हुआ फैसला</strong></a></p>
<p>बाड़मेर के नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक महेंद्र सिंह उमट का कहना है कि पश्चिम राजस्थान के थार क्षेत्र का यह रेगिस्तान तेल उत्पादन के बाद अनार उत्पादन में अपनी नई पहचान कायम कर रहा है। नाबार्ड और कृषि निर्यात संवर्धन केंद्र ने "अनार शोध यात्रा" द्वारा इस दिशा में एक नया कदम बढ़ाया है। राजस्थान के बाड़मेर, जालोर, सिरोही व जोधपुर जिले अनार उत्पादन के मुख्य हब बनकर उभर रहे हैं। यहां के अनार किसान आधुनिक तकनीकें अपना रहे हैं लेकिन अनार का आकार, फलों का फट जाना, कुछ बीमरियां, इसके स्थायित्व, गुणवत्ता, मूल्य संवर्द्धन और निर्यात पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र के शोलापुर और पुणे में अनार अनुसंधान, कीटनाशक अवशेष प्रबंधन प्रयोगशाला एवं प्रसंस्करण केंद्र, अनार मार्केट और निर्यात संस्थान तथा कृषि विज्ञान केंद्र, बारामती को चुना गया है।</p>
<p>महाराष्ट्र में देश के कुल अनार उत्पादन का 65 फीसदी उत्पादन होता है। शोलापुर सर्वाधिक उत्पादन करने वाला जिला है। देश में 2.76 लाख हेक्टेयर में कुल 315 लाख मीट्रिक टन अनार का उत्पादन होता है। राजस्थान में अनार का उत्पादन 12 हजार हेक्टेयर में 82 हजार मीट्रिक टन है जो राष्ट्रीय औसत उत्पादकता का लगभग आधे के बराबर है। राजस्थान में अनार उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। जरूरत इस बात की है कि किसानों को उच्चतम गुणवत्ता वाले टिश्यू कल्चर, भगवा सिंधुरी किस्मों की पौध उपलब्ध कराई जाए, उत्पादन की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किया जाए और अनार प्रसंस्करण, मूल्य संवर्द्धन और निर्यात की श्रृंखला से जोड़ा जाए।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान के किसानों के लिए शुरू हुई ‘अनार शोध यात्रा’, आधुनिक और व्यवहारिक बागवानी तकनीक की लेंगे जानकारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एनडीबीबी डेयरी सर्विसेज उत्तर प्रदेश की तीन महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियों को दे रही तकनीकी सहायता]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/ndbb-dairy-services-providing-technical-assistance-to-three-women-milk-producing-companies-of-up.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 20 May 2023 11:16:47 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/ndbb-dairy-services-providing-technical-assistance-to-three-women-milk-producing-companies-of-up.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीबीबी) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज (एनडीएस) उत्तर प्रदेश में महिला स्वामित्व वाली तीन दुग्ध उत्पादक कंपनियों को सशक्त बनाने के लिए तकनीकी सहायता दे रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने महिला सामर्थ्य योजना के तहत महिला सशक्तिकरण एवं उनकी उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए इन कंपनियों की स्थापना की है। इसके तहत 1.5 लाख महिला डेयरी किसानों को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी एनडीएस को सौंपी गई है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा दूध उत्पादक राज्य है। राज्य सरकार ने 2021-22 के बजट में 200 <span>करोड़ रुपये के आवंटन के साथ महिला सामर्थ्य योजना (</span>MSY)<span> शुरू की थी। इसके तहत महिलाओं के स्वामित्व वाले &nbsp;उद्यमों को बढ़ावा दिया जाता है। </span></p>
<p>एनडीएस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि वह यूपी स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन (यूपीएसआरएलएम) द्वारा संचालित परियोजना को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है। यूपीएसआरएलएम और एनडीएस के बीच एक समझौते के तहत तीन महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियों को शामिल किया गया है। ये तीन महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियां हैं- रायबरेली स्थित सामर्थ्य दुग्ध उत्पादक कंपनी, गोरखपुर स्थित श्री बाबा गोरखनाथ कृपा दुग्ध उत्पादक कंपनी एवं बरेली स्थित श्रीजनी दुग्ध उत्पादक कंपनी। एनडीएस के मुताबिक, इस समझौते के तहत राज्य के 17 जिलों के 2,800 से अधिक गांवों में 1.5 लाख महिला डेयरी किसानों को जोड़ा जाएगा। इसके जरिये संचालन के पांचवें वर्ष तक रोजाना 7 लाख लीटर से अधिक दूध खरीदा जाएगा।</p>
<p>झांसी की 'बलिनी दुग्ध उत्पादक कंपनी' और वाराणसी की 'काशी दुग्ध उत्पादक कंपनी' की सफलता से प्रेरित होकर उत्तर प्रदेश सरकार ने महिला स्वामित्व वाले उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देने के लिए 'महिला सामर्थ्य योजना' शुरू करने की घोषणा की थी। इस परियोजना के संचालन का दारोमदार उत्तर प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के कंधों पर है, जबकि एनडीएस तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है। श्री बाबा गोरखनाथ कृपा दुग्ध उत्पादक कंपनी देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर और महाराजगंज जिले की महिला किसानों को सशक्त बनाएगी। जबकि सामर्थ्य दुग्ध उत्पाक कंपनी का कार्यक्षेत्र रायबरेली, सुल्तानपुर, अमेठी, अयोध्या, फतेहपुर, कानपुर नगर और प्रतापगढ़ है। श्रीजनी का संचालन बरेली, रामपुर, पीलीभीत, खीरी, सीतापुर और शाहजहांपुर जिले के लिए किया जा रहा है।</p>
<p>इस पहल पर यूपीएसआरएलएम की मिशन निदेशक सी इंदुमती ने कहा, "महिला सामर्थ्य योजना ग्रामीण महिलाओं के कौशल विकास और उनकी उद्यमिता के जरिये महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाली अभूतपूर्व योजना है। एनडीएस की विशेषज्ञता का भरपूर उपयोग करते हुए यूपीएसआरएलएम का उद्देश्य ग्रामीण उत्तर प्रदेश में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ इन महिलाओं और उनके परिवार के जीवन में आधारभूत परिवर्तन लाना है।"</p>
<p>एनडीडीबी एवं एनडीएस के प्रबंध निदेशक मीनेश शाह ने कहा, "उत्तर प्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक प्रदेश है। यहां पर अपार संभावनाएं हैं। राज्य में उत्पादक स्वामित्व वाले संगठनों के माध्यम से सुनियोजित योजनाएं 'भारत को दुनिया की डेयरी बनाने' की दिशा में केंद्र सरकार के प्रयास में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। महिला डेयरी किसानों को एक साथ लाने की यह पहल न सिर्फ इन महिला किसानों के लिए आजीविका के साथ-साथ बाजार में पहुंच सुनिश्चित करेगी, बल्कि ग्रामीण परिवेश वाले इन 17 जिलों की महिलाओं की उद्यमशीलता को भी पंख लगाएगी।"</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एनडीबीबी डेयरी सर्विसेज उत्तर प्रदेश की तीन महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियों को दे रही तकनीकी सहायता ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा के किसानों को खराब गेहूं के भी मिलेंगे पूरे दाम, 14 लाख टन गेहूं की हो चुकी है खरीद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-farmers-will-get-full-price-for-damage-wheat-procurement-reached-at-14-lakh-tonnes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 14 Apr 2023 14:42:32 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-farmers-will-get-full-price-for-damage-wheat-procurement-reached-at-14-lakh-tonnes.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा सरकार ने नुकसान से प्रभावित गेंहू की पूरी कीमत देने का फैसला किया है। मनोहर लाल खट्टर सरकार ने यह घोषणा करते हुए कहा है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की पूरी कीमत दी जाएगी। चालू रबी मार्केटिंग सीजन के लिए गेहूं का एमएसपी 2,125 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने बताया है कि राज्य में अब तक 14 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है, जबकि कुल पैदावार 90 लाख टन होने का अनुमान है।</p>
<p>दरअसल, मार्च के दूसरे पखवाड़े में गेहूं उत्पादक कई राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। इसे देखते हुए राज्यों ने केंद्र सरकार से गेहूं की सरकारी खरीद मानकों में छूट देने की मांग की थी। केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश सहित हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को खरीद मानकों में छूट दे दी है, जबकि उत्तर प्रदेश की मांग पर अभी फैसला नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>राज्य सरकार करेगी कटौती की भरपाई </strong></p>
<p>खरीद मानकों में दी गई छूट के मुताबिक, गेहूं की चमक 10 फीसदी से कम रहने पर कीमत में कोई कटौती नहीं की जाएगी। जबकि 18 फीसदी तक सिकड़े-टूटे गेहूं की भी सरकारी खरीद की जाएगी। मगर इसमें शर्त यह लगा दी गई है कि 6 फीसदी तक सिकुड़े-टूटे गेहूं की कीमत में कटौती नहीं होगी और उससे ऊपर में कटौती होगी। वहीं 10 फीसदी से 80 फीसदी तक चमकविहीन गेहूं की कीमतों में भी कटौती करने का निर्देश केंद्र ने दिया है। ऐसे गेहूं की कीमतों में कटौती 32 रुपये प्रति क्विंटल तक होगी। केंद्र के इस फैसले से किसानों में नाराजगी बढ़ रही थी। इसे देखते हुए हरियाणा सरकार ने केंद्र से इस पर दोबारा फैसला करने का अनुरोध किया है। साथ ही किसानों को राहत देते हुए कहा है कि चमकविहीन और सिकुड़े-टूटे गेहूं में जो कटौती की जाएगी उसकी भरपाई हरियाणा सरकार द्वारा की जाएगी।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/from-the-ground/how-cumin-became-a-diamond-for-farmers-read-the-full-story.html" title="जीरा बना हीरा" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः जीरा कैसे बना किसानों के लिए &lsquo;हीरा&rsquo;, यहां पढ़ें पूरी कहानी</strong></a></p>
<p><strong>इतनी होगी कटौती</strong></p>
<p>6 फीसदी से ज्यादा और 8 फीसदी तक के खराब गेहूं में 5.31 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती होगी। इसी तरह 8-10 फीसदी तक 10.62 रुपये प्रति क्विंटल, 10-12 फीसदी तक 15.93 रुपये और 12-14 फीसदी तक 21.24 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती की जाएगी। वहीं 14-16 फीसदी तक में 26.5 रुपये और 16-18 फीसदी तक सिकुड़े एवं टूटे गेहूं की कीमतों में 31.86 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती करने का निर्देश केंद्र की ओर से दिया गया है। गेहूं की फसल को हुए नुकसान से किसान पहले से हलकान हैं। ऊपर से यह कटौती उनके लिए नई मुसीबत थी जिसे दूर करते हुए हरियाणा सरकार ने अपनी ओर से इसकी भरपाई करने का आदेश दिया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x_643918767e345.jpg" alt="" /></p>
<p><strong>14 लाख टन गेहूं की हुई खरीद </strong></p>
<p>हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मंडियों में गेहूं की आवक तेज हो गई है। अब तक 17.85 लाख टन गेहूं मंडियों में आ चुकी है जिसमें से 13.97 टन की सरकारी खरीद हो चुकी है। हालांकि, यह मात्रा पिछले साल के मुकाबले कम है। 2022 में खरीद शुरू होने के 12 दिन के भीतर ही 20.16 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी थी। बेमौसम बारिश की वजह से राज्य में फसलों की कटाई देर से शुरू हुई इसलिए गेहूं की मंडियों में आवक में देरी हुई। मगर अब मंडियों में आवक तेज हो गई है और फसलों की कटाई में भी तेजी आ चुकी है।</p>
<p><a href="https://www.ruralvoice.in/national/centre-asks-states-to-act-against-traders-not-showing-tur-dal-stock.html" title="अरहर कारोबारियों के खिलाफ सख्ती" target="_blank" rel="noopener"><strong>यह भी पढ़ेंः अरहर दाल के स्टॉक की पूरी जानकारी नहीं देने वाले कारोबारियों के खिलाफ होगी कार्रवाई, केंद्र ने राज्यों को दिया निर्देश</strong></a><br />&nbsp;</p>
<p><strong>इतना मिलेगा मुआवजा</strong></p>
<p>बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को हरियाणा सरकार ने राहत देने का भी ऐलान किया है। अभी फसलों के नुकसान के सर्वे का काम चल रहा है। जेपी दलाल ने बताया कि सर्वे पूरा होने के बाद किसानों को मई में मुआवजा दे दिया जाएगा। राज्य सरकार ने 25-50 फीसदी फसल खराब होने पर 9,000 रुपये प्रति एकड़, 51-75 फीसदी तक 12,000 रुपये प्रति एकड़, 75 फीसदी से लेकर पूरी फसल खराब होने पर 15,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने का ऐलान किया है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा के किसानों को खराब गेहूं के भी मिलेंगे पूरे दाम, 14 लाख टन गेहूं की हो चुकी है खरीद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सिड्स फार्म ने हैदराबाद, बेंगलुरु में उतारा बटरमिल्क, रिसाइकिल पैक में होगा उपलब्ध]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/sids-farm-introduces-buttermilk-in-hyderabad-bengaluru.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 10 Apr 2023 17:27:45 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/sids-farm-introduces-buttermilk-in-hyderabad-bengaluru.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>तेलंगाना स्थित डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (डी2सी) डेयरी ब्रांड सिड्स फार्म ने सोमवार को अपने पसंदीदा बटरमिल्क को लॉन्च करने की घोषणा की है। आगामी गर्मियों के दौरान उपभोक्ताओं के लिए संपूर्ण और ताजा विकल्प के रूप में एक नई सुविधाजनक पैकेजिंग में इसे उतारा गया है।</p>
<p>कंपनी ने एक बयान में बताया है कि 200 मिलीलीटर पैक की कीमत 20 रुपये रखी गई है। रिसाइकिल करने योग्य खाद्य-ग्रेड डिस्पोजेबल कप में इसे पैक किया गया है। यह हर उम्र के लोगों के लिए एक सस्ता और स्वस्थ विकल्प है। सिड्स फार्म के डी2सी चैनल के माध्यम से बुकिंग के अगले दिन बटरमिल्क की होम डिलीवरी की जाएगी। यह हैदराबाद और &nbsp;बेंगलुरु में उपलब्ध होगा। इन शहरों के चुनिंदा आधुनिक रिटेल स्टोर्स के अलावा ई-कॉमर्स और एग्रीगेटर चैनलों के माध्यम से इसकी बिक्री की जाएगी।</p>
<p>सिड्स फार्म के संस्थापक डॉ. किशोर इंदुकुरी ने इस नए उत्पाद के बारे में कहा, "अगर कोई एक चीज है जो हमारी छाछ को अलग करती है तो वह है बेमिसाल प्राकृतिकता। इसे दही और प्राकृतिक अवयवों के साथ बनाया गया है। गर्मी में इसे सबसे स्वास्थ्यप्रद विकल्प के रूप में चुन सकते हैं। सुविधाजनक और रिसाइकिल पैकेजिंग के साथ हम उम्मीद कर रहे हैं कि हमारे युवा उपभोक्ता भी संभावित रूप से गर्मियों में इस पारंपरिक पेय का अधिक सेवन करेंगे।'</p>
<p>सिड्स फार्म की स्थापना 2016 में हुई थी। कंपनी शुद्ध, मिलावट मुक्त दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री करती है और कड़े मानदंडों का पालन करती है। उच्चतम गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए कंपनी हर दिन 6,500 से अधिक परीक्षण करती है। खरीद से लेकर वितरण तक सिड्स फार्म यह सुनिश्चित करने के लिए चार स्तरों पर परीक्षण करती है कि उसके डेयरी उत्पाद प्रिजरवेटिव्स, एडिटिव्स, एंटीबायोटिक, हार्मोन या किसी अन्य मिलावट से मुक्त हैं।</p>
<p>सिड्स फार्म तेलंगाना का प्रीमियम डेयरी ब्रांड है। यह ब्रांड शुद्ध, स्वस्थ, मिलावट मुक्त दूध और दुग्ध उत्पादों की अवधारणा में क्रांति ला रहा है। इसके उत्पादों की श्रेणी में मलाई निकाला हुआ दूध, भैंस का दूध, गाय का दूध, घी, मक्खन, दही, प्रोबायोटिक दही, पनीर, पेड़ा और लस्सी शामिल हैं।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_6433f9595880d.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ सिड्स फार्म ने हैदराबाद, बेंगलुरु में उतारा बटरमिल्क, रिसाइकिल पैक में होगा उपलब्ध ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x500_6433f9595880d.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमूल की बेंगलुरु के बाजार में एंट्री पर बढ़ा राजनीतिक विवाद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/political-controversy-over-amul-entry-in-bengaluru.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 10 Apr 2023 12:56:35 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/political-controversy-over-amul-entry-in-bengaluru.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बेंगलुरु में अमूल की एंट्री की घोषणा ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। प्रमुख विपक्षी दलों कांग्रेस और जेडीएस सहित स्थानीय लोगों और होटल संगठन बृहत बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि सत्तारूढ़ भाजपा स्थानीय लोकप्रिय ब्रांड नंदिनी को खत्म करने की साजिश कर रही है। वहीं भाजपा ने इसे विपक्ष द्वारा फैलाया जा दुष्प्रचार बताया है। अमूल ब्रांड नाम से डेयरी उत्पाद बेचने वाला गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क फेडरेशन (GCMMF) देश का सबसे बड़ा डेयरी कोऑपरेटिव है, जबकि नंदिनी ब्रांड कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) का है जो देश का दूसरा सबसे बड़ा डेयरी कोऑपरेटिव है।</p>
<p>कांग्रेस और जेडीएस ने जहां घोषणा कर दी है कि वे अमूल की एंट्री नहीं होने देंगे, वहीं बृहत बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन ने कहा है कि वे अमूल के उत्पादों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। कर्नाटक के किसानों के समर्थन में सिर्फ नंदिनी ब्रांड का ही उपयोग करेंगे। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष पीसी राव ने सभी होटलों को निर्देश दिया है कि वे कर्नाटक के डेयरी किसानों और नंदिनी के समर्थन में कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के उत्पादों का ही इस्तेमाल करें।</p>
<p>सूत्रों से <strong>रूरल वॉयस</strong> को मिली जानकारी के मुताबिक, अमूल अभी बेंगलुरु में सिर्फ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ही दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री करेगी। यह विवाद काफी चौंकाने वाला है क्योंकि कर्नाटक में अमूल की मौजूदगी वर्ष 2015 से ही है। हुबली और धारवाड़ इलाके में तब से अमूल के डेयरी उत्पादों की बिक्री हो रही है। जबकि नंदिनी के उत्पादों की बिक्री कर्नाटक से बाहर मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, केरल और गोवा तक में हो रही है। जहां तक बाजार पर कब्जे की बात है तो जब नंदिनी कर्नाटक से बाहर कारोबार फैला सकती है तो अमूल क्यों नहीं। यह कानूनी तौर पर और बाजार नियमों के मुताबिक कहीं से भी गलत नहीं है। शायद नंदिनी को डर है कि अमूल की आक्रामक मार्केटिंग उसके कारोबार के लिए खतरा पैदा साबित हो सकती है। शायद इसलिए कर्नाटक में होने वाले आगामी चुनावों को देखते हुए इसे भावनात्मक मुद्दा बना दिया गया है और इसे राजनीतिक रंग दे दिया गया है। &nbsp;</p>
<p>नंदिनी के एक लीटर टोन्ड दूध का दाम 39 रुपये है, जबकि अमूल का टोन्ड दूध गुजरात को छोड़कर बाकी राज्यों में 54 रुपये लीटर बिकता है। गुजरात में अमूल के टोन्ड दूध की कीमत 52 रुपये लीटर है। जबकि अमूल के फुल क्रीम दूध की कीमत 66 रुपये लीटर है। वहीं नंदिनी के फुल क्रीम दूध वाले एक लीटर पैकेट की कीमत पिछले महीने मार्च की शुरुआत तक 50 रुपये और आधे लीटर वाले पैकेट की कीमत 24 रुपये थी। लागत बढ़ने से केएमएफ ने दाम में बढ़ोतरी तो नहीं की लेकिन मात्रा घटा दी। फेडरेशन ने अब एक लीटर वाले पैकेट को 900 एमएल का और 500 एमएल वाले पैकेट को 450 एमएल का कर दिया है। इसी तरह नंदिनी दही की कीमत 47 रुपये प्रति किलो है, जबकि अमूल का दही 66 रुपये प्रति किलो पर मिलता है। अमूल के 450 एमएल दही के पैकेट की कीमत 30 रुपये है।</p>
<p>मालूम हो कि राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी दिए जाने की वजह से ही नंदिनी दूध की कीमत कम है। सरकार दूध किसानों को 6 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी देती है। केएमएफ के दुग्ध उत्पादकों को सब्सिडी देने की शुरुआत सितंबर 2008 में भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीएस. येद्दियुरप्पा ने की थी। तब उन्होंने केएमएफ से जुड़े किसानों को 2 रुपये प्रति लीटर सब्सिडी देने की घोषणा की थी। मई 2013 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सिद्धारमैया सरकार ने इसे बढ़ाकर पहले 4 रुपये लीटर, फिर नंवबर 2016 में 5 रुपये लीटर कर दिया। नवंबर 2019 में येद्दियुरप्पा सरकार ने सब्सिडी में फिर से वृद्धि की और इसे 6 रुपये प्रति लीटर कर दिया।</p>
<p><strong>विवाद </strong><strong>कैसे शुरू हुआ </strong></p>
<p>5 अप्रैल को अमूल की ओर से एक ट्वीट कर बताया गया कि वह बेंगलुरु में एंट्री के लिए तैयार है। अमूल ने ट्विटर पर लिखा, "दूध और दही के साथ ताजेपन की एक नई लहर जल्द बेंगलुरु आ रही है। इस पर ज्यादा जानकारी जल्द दी जाएगी।" अमूल की इस घोषणा के बाद कर्नाटक के लोगों ने ट्विटर पर ही विरोध शुर कर दिया। ट्विटर पर नंदिनी बचाओ (#SaveNandini) और अमूल वापस जाओ (#GobackAmul) जैसे हैशटैग ट्रेंड होने लगे। सोशल मीडिया पर लोग ये भी कहने लगे कि अमूल के आने से दूध का दाम बढ़ जाएगा। सोशल मीडिया पर लोगों के बढ़ते विरोध को देखते हुए कांग्रेस ने इस मुद्दे को लपक लिया और भावनात्मक रंग देते हुए राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया।</p>
<p><strong>राजनीति हावी</strong></p>
<p>अमूल के ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर जब लोगों का विरोध बढ़ने लगा तो 8 अप्रैल को पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अमूल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और नंदिनी को राज्य की पहचान से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि सभी कन्नड़ साथियों को शपथ लेनी चाहिए कि वे अमूल के उत्पाद नहीं खरीदेंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि राज्य को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की डबल इंजन सरकार से सतर्क हो जाना चाहिए। ये लोग कन्नड़ लोगों की संपत्ति बेच देंगे। गुजरात के बैंक ऑफ बड़ौदा में हमारे विजया बैंक का विलय कर दिया गया। हमारे बंदरगाहों एवं हवाई अड्डों को गुजरात के अडानी के हवाले कर दिया गया। अब गुजरात की अमूल की योजना हमारी केएमएफ (नंदिनी) को खत्म करने की है। ये अब केएमएफ, जिसे हमारे किसानों ने बनाया है, को बर्बाद करना चाहते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को टैग करते हुए पूछा कि क्या वे (कर्नाटकवासी) गुजरातियों के दुश्मन हैं।</p>
<p>विपक्ष का आरोप यह भी है कि केंद्र सरकार अमूल और नंदिनी का विलय करना चाहती है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि दिसंबर 2022 में जब केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह कर्नाटक के मांड्या में केएमएफ की 260 करोड़ रुपये की मेगा डेयरी का उद्घाटन करने आए थे तो उन्होंने कहा था कि नंदिनी और अमूल को साथ मिलकर काम करना चाहिए। अमित शाह ने कहा था कि अमूल और नंदिनी मिलकर कर्नाटक के हर गांव में प्राइमरी डेयरी स्थापित करने के लिए काम करेंगे। इससे अगले 3 साल में कर्नाटक में एक भी ऐसा गांव नहीं बचेगा जहां प्राइमरी डेयरी नहीं होगी। तभी से विलय की अटकलों को हवा मिलनी शुरू हो गई थी जिसे उस समय तो दबा दिया गया लेकिन अब यह विवाद फिर से उभर आया है। शाह के इस बयान पर विपक्ष का कहना है कि भाजपा कर्नाटक के एक अहम ब्रांड को खत्म करना चाहती है।</p>
<p>कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने नंदिनी को अमूल से बेहतर ब्रांड बताते हुए कहा कि हम अपने दूध और किसानों की रक्षा करना चाहते हैं। हमारे पास पहले से ही नंदिनी ब्रांड है जो अमूल से काफी अच्छा है। हमें कोई अमूल नहीं चाहिए। हमारा पानी, हमारा दूध और हमारी मिट्टी काफी मजबूत है। जेडीएस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भी कहा कि भाजपा कन्नड़ों की जीवन रेखा को ही खत्म करना चाहती है। उन्होंने कहा- एक देश, एक अमूल, एक दूध और एक गुजरात अब केंद्र सरकार की आधिकारिक नीति हो गई है।</p>
<p><strong>राज्य सरकार का जवाब</strong></p>
<p>इस विवाद पर मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने विपक्ष पर अमूल की एंट्री के राजनीतिकरण के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि हम अमूल को लेकर बिल्कुल स्पष्ट हैं। नंदिनी भी एक राष्ट्रीय ब्रांड है। हमने इसे भी अन्य राज्यों में लोकप्रिय बनाया है। राज्य में न सिर्फ दूध उत्पादन बढ़ा है, बल्कि उत्पादकों की आर्थिक सहायता भी बढ़ाई गई है। स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर ने कहा, "नंदिनी के उत्पाद दूसरे राज्यों और देश में भी बेचे जाते हैं। &nbsp;नंदिनी किसी भी प्रतियोगी ब्रांड का सामना करने के काबिल है। कांग्रेस किसानों के लिए घड़ियाली आंसू बहा रही है।" केएमएफ की स्थापना 1974 में हुई थी। फेडरेशन का टर्नओवर करीब 25 हजार करोड़ रुपये है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमूल की बेंगलुरु के बाजार में एंट्री पर बढ़ा राजनीतिक विवाद ]]></media:description>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सिंभावली चीनी मिल के गन्ना भुगतान में पीएम से हस्तक्षेप का दानिश अली ने किया अनुरोध]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/danish-ali-requested-the-intervention-of-the-prime-minister-in-the-cane-payment-of-simbhaoli-sugar-mill.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 08 Apr 2023 18:19:07 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/danish-ali-requested-the-intervention-of-the-prime-minister-in-the-cane-payment-of-simbhaoli-sugar-mill.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अमरोहा के सांसद कुंवर दानिश अली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सिंभावली चीनी मिल पर गन्ना किसानों का बकाया के भुगतान में हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। इस सिलसिले में पिछले दिनों उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर यह अनुरोध किया। सिंभावली चीनी मिल पर गन्ना किसानों का 380 करोड़ रुपये बकाया है।</p>
<p>बसपा सांसद दानिश अली ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर अनुरोध किया कि वे उत्तर प्रदेश सरकार को गन्ना किसानों की बकाया राशि का भुगतान करवाने का निर्देश दें। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण किसान पहले से ही पीड़ित हैं। सिंभावली चीनी मिल द्वारा बकाये का भुगतान नहीं किए जाने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा। सिंभावली चीनी मिल अमरोहा संसदीय क्षेत्र में स्थित है। इस ज्ञापन में उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़ी अन्य मांगें भी प्रधानमंत्री के सामने रखीं।</p>
<p>ज्ञापन में कहा गया है कि करीब दो दशक पहले गजरौला से संभल वाया हसनपुर रेलवे लाइन का सर्वे किया गया था और सकारात्मक रिपोर्ट पेश की गई थी। लाइन की स्वीकृति अभी बाकी है। अमरोहा/मुरादाबाद से मुंबई के लिए सीधी ट्रेन की लंबे समय से लंबित एक और मांग है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में विश्व स्तरीय सामान बनाने वाले कारीगर हैं। मुंबई से सीधा जुड़ाव उन्हें आकर्षक बाजारों में अपना माल बेचने में मदद करेगा। उन्होंने मांग की है कि अमरोहा में एक पासपोर्ट केंद्र खोला जाए क्योंकि पासपोर्ट के लिए आवेदन करते समय लोगों को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। साथ ही गढ़मुक्तेश्वर/अमरोहा में पश्चिमी यूपी के लिए उच्च न्यायालय की एक पीठ खोलने की भी उन्होंने मांग की है। अभी पश्चिमी यूपी के लोगों को उच्च न्यायालय से न्याय पाने के लिए 500 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। इस इलाके में पीठ खुलने से लोगों को न्याय पाने में आसानी होगी। दानिश अली ने अमरोहा में आईआईटी और एम्स स्थापित करने की भी प्रधानमंत्री से मांग की है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सिंभावली चीनी मिल के गन्ना भुगतान में पीएम से हस्तक्षेप का दानिश अली ने किया अनुरोध ]]></media:description>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गेहूं नुकसान के आकलन में गांव स्तर पर तेजी लाने का हरियाणा सरकार ने अधिकारियों को दिया निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-government-directs-officials-to-assess-damage-to-wheat-crop-soon.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 08 Apr 2023 16:34:37 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-government-directs-officials-to-assess-damage-to-wheat-crop-soon.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और दूसरी फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा किसानों को जल्द से जल्द दिलाने के लिए हरियाणा सरकार ने गांव के स्तर पर ही नुकसान के आकलन का निर्देश अधिकारियों को दिया है। हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इस संबंध में राज्य के सभी डिप्टी कमिश्नर को निर्देश दिया है जिसके तहत गांव के स्तर पर ही नुकसान का आकलन करने के लिए क्षतिपूर्ति सहायक की नियुक्ति की जाएगी। राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एक ट्वीट कर यह जानकारी दी है।</p>
<p>मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने ट्वीट में लिखा है, &ldquo;पूरे प्रदेश में हुई बेमौसम बरसात, ओलावृष्टि और तेज हवाओं से किसान भाईयों की गेहूं की फसल खराब हुई है। किसानों द्वारा क्षतिपूर्ति पोर्टल पर भी खराब फसल का ब्योरा डाला जा रहा है। सरकार ने निर्णय लिया है कि गांव स्तर पर ही क्षतिपूर्ति सहायक द्वारा क्षतिपूर्ति आकलन का कार्य पूरा करवाया जाएगा ताकि किसानों को उचित मुआवजा बिना देरी के मिल सके। सरकार हर सुख दुख में किसानों के साथ खड़ी है।&ldquo; ट्वीट के साथ उन्होंने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देश की कॉपी भी शेयर की है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/04/image_750x_643149f62daa5.jpg" alt="" /></p>
<p>राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से जारी निर्देश में डिप्टी कमिश्नर्स को कहा गया है कि फसलों के नुकसान का आकलन जल्द से जल्द करने के लिए वे तत्काल जरूरी कदम उठाएं। इसके लिए 500 एकड़ का क्षतिपूर्ति ब्लॉक बनाकर हर ब्लॉक के लिए एक क्षतिपूर्ति सहायक की नियुक्ति करें जो फसलों के नुकसान का आकलन करेगा। क्षतिपूर्ति सहायक पटवारी को सहयोग करेंगे और नुकसान का वेरिफिकेशन करेंगे। इसके अलावा किसानों के पूरे ब्योरे के साथ नुकसान से प्रभावित फसलों के खेतों की फोटो ई-फसल क्षतिपूर्ति और ई-स्पेशल गिरदावरी पोर्टल पर अपलोड करेंगे। साथ ही नुकसान से प्रभावित किसी किसान ने अगर फसल बेच दी है तो खरीदार और फसल की कीमत का ब्योरा भी उन्हें पोर्टल पर अपलोड करना होगा।</p>
<p>सरकार ने अपने निर्देश में कहा है कि हर क्षतिपूर्ति ब्लॉक में कम से कम एक सहायक की नियुक्ति की जाए और उन्हें 5,000 रुपये दिए जाएं। हरियाणा के किसानों ने अभी तक नुकसान का जो ब्योरा राज्य सरकार के पोर्टल पर दिया है उसके मुताबिक, करीब 7.5 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित हुई है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गेहूं नुकसान के आकलन में गांव स्तर पर तेजी लाने का हरियाणा सरकार ने अधिकारियों को दिया निर्देश ]]></media:description>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अमूल ने गुजरात में भी बढ़ाए दूध के दाम, 2 रुपये प्रति लीटर की हुई बढ़ोतरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/amul-milk-price-hike-in-gujrat.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 01 Apr 2023 19:39:10 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/amul-milk-price-hike-in-gujrat.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अमूल ने दूध की कीमतों में एक बार फिर से बढ़ोतरी करने की घोषणा की है। हालांकि यह बढ़ोतरी सिर्फ गुजरात में की गई है। गुजरात के ग्राहकों को अब अमूल के सभी प्रकार के दूध के लिए 2 रुपये प्रति लीटर ज्यादा देना होगा। नई दरें शनिवार यानी 1 अप्रैल, 2023 से लागू हो गई हैं।</p>
<p>इससे पहले अमूल ने अगस्त 2022 में गुजरात के ग्राहकों के लिए दूध के दाम बढ़ाए थे। जबकि देश के बाकी इलाकों में फरवरी 2023 में अंतिम बढ़ोतरी की गई थी। तब गुजरात में कीमतों में वृद्धि नहीं की गई थी। अमूल के वरिष्ठ अधिकारी ने मूल्य वृद्धि की जानकारी <strong>रूरल वॉयस</strong> को देते हुए बताया कि ताजा वृद्धि के बावजूद गुजरात में अमूल दूध की कीमत देश के बाकी राज्यों की तुलना में 2 रुपये प्रति लीटर कम है। अमूल के भैंस के दूध की कीमत गुजरात में 68 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि बाकी राज्यों में यह 70 रुपये प्रति लीटर पहले से बिक रहा है। इसी तरह फुल क्रीम दूध अब 64 रुपये प्रति लीटर हो गया है। बाकी राज्यों में इसकी कीमत 66 रुपये प्रति लीटर है।</p>
<p>गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (GCMMF) अमूल ब्रांड नाम से दूध एवं दुग्ध उत्पाद बेचती है। यह गुजरात की सबसे बड़ी डेयरी कोऑपरेटिव है। ताजा बढ़ोतरी के बाद अमूल गोल्ड, अमूल शक्ति और अमूल ताजा की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हो चुका है। गुजरात में अब आधा लीटर वाले फुल क्रीम दूध जिसे अमूल गोल्ड के नाम से बेचा जाता है, के लिए 32 रुपये चुकाने होंगे। अमूल ताजा के आधा लीटर पैक के लिए 26 रुपये और अमूल शक्ति के लिए 29 रुपये चुकाना होगा। एक लीटर अमूल शक्ति के लिए 58 रुपये और अमूल ताजा के लिए 52 रुपये देना होगा।</p>
<p><strong>क्यों बढ़े दाम</strong></p>
<p>जीसीएमएमएफ ने कहा है कि पिछले कुछ महीनों में दूध के उत्पादन लागत में बढ़ोतरी हुई है। पशु चारे की कीमतों में 13-14 फीसदी की बढ़त हुई है। ऐसे में दूध उत्पादकों की लागत में तेजी से इजाफा हुआ है। इसे देखते हुए ही कंपनी ने दूध की कीमतें बढ़ाने का फैसला किया है। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अमूल ने गुजरात में भी बढ़ाए दूध के दाम, 2 रुपये प्रति लीटर की हुई बढ़ोतरी ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब सरकार ने धान का विकल्प ढूंढने के लिए गठित की समिति, पानी की कम खपत और ज्यादा आय वाली फसलों पर फोकस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-govt-sets-up-panel-to-look-at-alternative-crops-to-paddy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 30 Mar 2023 19:22:41 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-govt-sets-up-panel-to-look-at-alternative-crops-to-paddy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब सरकार ने धान के वैकल्पिक फसलों के बारे में पता लगाने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। यह समिति उन वैकल्पिक फसलों की खेती को अपनाने के बारे में अपनी राय देगी जिसमें धान की तुलना में पानी की कम खपत होती है। राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरुवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>मुख्यमंत्री मान ने कहा कि वर्षों से धान की परंपरागत खेती की वजह से भूमिगत जल स्तर में कमी और पराली जलाने से संबंधित मुद्दों सहित कई समस्याएं पैदा हुई हैं। एक वीडियो संदेश में उन्होंने बताया कि उन्होंने मुख्य सचिव के नेतृत्व में एक समिति बनाई है जो विभिन्न गांवों में किसानों से मुलाकात करेगी और यह देखेगी कि कौन सी फसल कम पानी की खपत करती है और धान के बदले किसानों को अधिक आय दिलाती है। यह समिति मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।</p>
<p>भगवंत मान ने कहा कि उनकी सरकार बासमती, कपास, मूंग और दालों को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रही है। उनकी सरकार कपास की फसल का रकबा बढ़ाना चाहती है। उन्होंने बताया कि एक अप्रैल से कपास की फसल की सिंचाई के लिए नहर का पानी उपलब्ध कराया जाएगा।</p>
<p>मान ने कहा कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) द्वारा प्रमाणित कपास के बीजों पर 33 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। पीएयू ने कपास की फसल पर कीटों के हमले को रोकने के लिए नए कीटनाशकों को अपनाने के लिए शोध किया है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/04/image_750x500_62584b70674aa.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब सरकार ने धान का विकल्प ढूंढने के लिए गठित की समिति, पानी की कम खपत और ज्यादा आय वाली फसलों पर फोकस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में माइक्रो इरिगेशन एवं संरक्षित खेती को मिलेगा बढ़ावा, 3 साल में पानी की मांग एवं आपूर्ति का अंतर होगा 45 फीसदी कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/micro-irrigation-and-conservation-tillage-will-get-boost-in-haryana-reduce-water-gap-by-45-percent-in-3-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 29 Mar 2023 08:21:39 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/micro-irrigation-and-conservation-tillage-will-get-boost-in-haryana-reduce-water-gap-by-45-percent-in-3-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा इन दिनों गंभीर जल असंतुलन से गुजर रहा है। इसकी वजह से खेती प्रभावित हो रही है। एक तरफ राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में भूजल का स्तर गिरकर 100 फुट से नीचे पहुंच चुका है, वहीं कई इलाके ऐसे हैं जहां जल-जमाव की समस्या गंभीर होती जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण ने अगले तीन साल में जल असंतुलन को कम करने की योजना बनाई है। पानी की उपलब्धता और पानी की मांग के अंतर को वर्ष 2026 तक 45 फीसदी तक कम करने की योजना बनाई गई है। इसके तहत पानी की बर्बादी रोकने के उपाय किए जाएंगे ताकि भविष्य के संभावित जल संकट से निपटा जा सके।</p>
<p>हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण की एकीकृत जल कार्य योजना 2023-26 के मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 में पानी के अंतर को 10 फीसदी तक कम किया जाएगा। हाल ही में जल संरक्षण पर आयोजित एक कार्यक्रम में&nbsp; हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण की चेयरपर्सन केशनी आनंद अरोड़ा ने इस कार्य योजना को पेश किया। इसमें बताया गया है कि वित्त वर्ष 2024-25 में 15 फीसदी और 2025-26 में 20 फीसदी यानी तीन साल में पानी की मांग एवं आपूर्ति का अंतर 45 फीसदी तक कम किया जाएगा। इसके लिए कृषि क्षेत्र में माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ फसलों के विविधिकरण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा और नहरों एवं पानी के स्रोतों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। साथ ही धान की सीधी बुवाई की प्रक्रिया अपनाने और गंदे पानी को साफ कर उसका फिर से इस्तेमाल करने पर जोर दिया जाएगा। धान की सीधी बुवाई के रकबे को मौजूदा 70 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर 2 लाख हेक्टेयर करने की योजना है। धान की खेती में ही सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है। सीधी बुवाई से पानी की काफी बचत होती है।&nbsp;</p>
<p>इसके अलावा भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए बारिश के पानी को फिर से जमीन में संरक्षित करने, तालाबों एवं चेक डैम में उन्हें सहेज कर रखने के आधुनिक उपाय किए जाएंगे। यही नहीं मत्स्य पालन में भी पानी का कम से कम इस्तेमाल हो इसकी भी कोशिश की जा रही है। इस कार्य योजना में संरक्षित खेती को भी बढ़ावा देना शामिल है ताकि खेतों में कम पानी का इस्तेमाल हो। इसके मुताबिक अगले तीन साल में 15.06 लाख हेक्टेयर जमीन को संरक्षित खेती के दायरे में लाया जाएगा ताकि फसलों की सिंचाई के लिए पानी की कम जरूरत पड़े। इस योजना में सबसे ज्यादा फोकस (32 फीसदी) इसी पर किया गया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/03/image_750x_6422e6c363043.jpg" alt="" /></p>
<p>इसके बाद फसलों के विविधिकरण पर ध्यान दिया गया है। तीन साल में राज्य की 2.42 लाख हेक्टेयर जमीन को इसके लिए तैयार किया जाएगा और किसानों को अलग-अलग फसल लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। कार्य योजना में इसकी हिस्सेदारी 17 फीसदी रखी गई है। जबकि तीसरी सबसे बड़ी योजना भूजल के स्तर को बढ़ाने, तालाबों और चेक डैम में बारिश के पानी को संरक्षित रखने की है जिसकी हिस्सेदारी 14 फीसदी है। इसके बाद माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा देने की योजना है जिसकी हिस्सेदारी 10 फीसदी रखी गई है। 2026 तक राज्य के 3.35 लाख हेक्टेयर जमीन को माइक्रो इरिगेशन की सुविधा से लैस करने की प्राधिकरण ने योजना बनाई है।</p>
<p>इस एकीकृत कार्य योजना के तहत सबसे पहले प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर पानी की उपलब्धता, पानी की मांग और पानी के अंतर का आकलन किया जाएगा। साथ ही राज्य में पानी को लेकर मुख्य चुनौतियों की पहचान की जाएगी। इस योजना को गांव और पंचायत के स्तर पर लागू किया जाएगा। इसके जरिये राज्य में बेहतर जल शासन, जल प्रबंधन आदतों को बढ़ाना और पानी के बुनियादी ढांचे एवं तकनीक में निवेश को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।</p>
<p>फिलहाल राज्य में कृषि क्षेत्र में सबसे ज्यादा पानी (85.96 फीसदी) की मांग है। जबकि बागवानी क्षेत्र में 4.71 फीसदी पानी की जरूरत पड़ती है। घरेलू जरूरतों के लिए 3.47 फीसदी, उद्योगों में 2.99 फीसदी, भंडारण में 0.88 फीसदी और मत्स्य पालन में 0.81 फीसदी पानी का इस्तेमाल किया जाता है। कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में पानी की जरूरतों को नहरों एवं चेक डैम के अलावा भूजल से पूरा किया जाता है। इसकी वजह से कई जिलों के गांवों में भूजल का स्तर 100 फुट से नीचे चला गया है जो बहुत ही गंभीर स्थिति है। पिछले 20 साल में स्थिति काफी बदतर हो गई है और ऐसी जमीनों के रकबे में 5 गुना की वृद्धि हुई है जहां भूजल का स्तर सबसे गंभीर अवस्था में पहुंच चुका है। &nbsp;</p>
<p>वर्ष 2000 में राज्य की 2 लाख हेक्टेयर जमीन भूजल स्तर के गंभीर संकट में थी जो वर्ष 2010 में बढ़कर 5.76 लाख हेक्टेयर हो गई। 2020 में गांवों की ऐसी जमीनों का रकबा 10.88 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। इसी तरह से गांवों में गंभीर रूप से जल-जमाव वाले जमीनों का रकबा वर्ष 2000 के 2,450 हेक्टेयर की तुलना में 2020 में 6 गुना बढ़कर 12,730 हेक्टेयर पर पहुंच चुका है। जबकि संभावित जल जमाव वाले जमीनों का रकबा 1.47 लाख हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 2.32 लाख हेक्टेयर हो चुका है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में माइक्रो इरिगेशन एवं संरक्षित खेती को मिलेगा बढ़ावा, 3 साल में पानी की मांग एवं आपूर्ति का अंतर होगा 45 फीसदी कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा में एमएसपी से कम पर बिक रही सरसों, खाद्य तेलों का आयात बढ़ने से घरेलू कीमत हो रही प्रभावित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/mustard-sold-below-msp-in-haryana-increasing-import-of-edible-oils-affecting-domestic-prices.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 27 Mar 2023 10:13:07 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/mustard-sold-below-msp-in-haryana-increasing-import-of-edible-oils-affecting-domestic-prices.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले दो साल से सरसों का अच्छा भाव मिलने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 400 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को देखते हुए देशभर के किसान इस साल सरसों की खेती को लेकर उत्साहित थे। यही वजह है कि रबी सीजन 2022-23 में रिकॉर्ड 98.02 लाख हेक्टेयर में सरसों की बुवाई हुई। मगर खाद्य तेलों का आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की वजह से किसानों को इसका नुकसान झेलना पड़ रहा है। पिछले दो साल से सरसों एमएसपी से 1,000-1,500 रुपये प्रति क्विंटल ऊपर बिक रहा था मगर इस साल भाव एमएसपी से 1,000 रुपये कम पर बिक रहा है। सरकार ने 2022-23 के लिए सरसों का एमएसपी 5,450 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। बाजार भाव को देखते हुए हरियाणा के किसान भी एमएसपी से कम कीमत पर सरसों बेचने को मजबूर हैं।</p>
<p>हरियाणा की ज्यादातर मंडियों में सरसों का औसत भाव 4,600-4,800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है। हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के 22 मार्च तक के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की विभिन्न मंडियों में विभिन्न किस्मों और विभिन्न गुणवत्ता वाले सरसों का न्यूनतम भाव 4,200 रुपये और अधिकतम भाव 5,700 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। जबकि हरियाणा सरकार की एजेंसी हैफेड 5,450 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी पर सरसों की खरीद कर रही है। पानीपत, हिसार, हांसी, शहजादपुर, कैथल, घरुंदा, समलखा, फतेहाबाद, बरवाला, आदमपुर, सिरसा, डबवाली, कलनवाली, ऐलनाबाद, भिवानी, सोहना जैसी 30 मंडियों में हैफेड किसानों से एमएसपी पर सरसों की खरीद कर रही है। जबकि इन मंडियों सहित राज्य की 52 मंडियों में सरसों की आवक हो रही है जहां निजी व्यापारी गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग भावों पर किसानों से सरसों खरीद रहे हैं।</p>
<p>इस साल सरसों की गुणवत्ता भी भाव पर असर डाल रही है। दरअसल, जनवरी में उत्तर भारत में शीतलहर का दौर लंबा चल गया था जिसकी वजह से हरियाणा के कई इलाकों में सरसों की फसल प्रभावित हुई और दाने छोटे रह गए। इस वजह से भी किसानों को कीमत के मोर्चे पर नुकसान झेलना पड़ रहा है। मंडी बोर्ड के आंकड़ों मुताबिक, शहजादपुर में सरसों का न्यूनतम भाव 5,050 रुपये और अधिकतम भाव 5,730 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। बरवाला में भाव 4,550-5,250 रुपये, पलवल में 4,800-5,025 रुपये, हिसार में 4,100-5,000 रुपये, नूह में 4,500-5,200 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। जबकि फारुखनगर मंडी में तो न्यूनतम भाव गिरकर 3,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। जुलाना में भाव 4,441-5,200 रुपये और नरवाना में 4,850-5,265 रुपये है। नारनौल में भाव 5,010 रुपये प्रति क्विंटल है। नारनौल महेंद्रगढ़ जिले का मुख्यालय है। महेंद्रगढ़ जिले में ही राज्य में सरसों का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है। यहां शीतलहर के प्रकोप से सरसों की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। सरसों उत्पादन एवं बुवाई रकबे के मामले में पहले नंबर पर राजस्थान है। जबकि दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश, तीसरे पर उत्तर प्रदेश और हरियाणा चौथे नंबर पर है।&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p><strong>लगातार बढ़ रहा खाद्य तेलों का आयात</strong></p>
<p>एमएसपी में बड़ी बढ़ोतरी की वजह से इस बार बुवाई का रकबा तो रिकॉर्ड स्तर पर रहा लेकिन आयात शुल्क में छूट से खाद्य तेलों का आयात लगातार बढ़ता जा रहा है। इसकी वजह से समर्थन मूल्य में वृद्धि का फायदा सरसों किसानों को नहीं मिल पा रहा है। अंतरराष्ट्रीय कीमतें घटने की वजह से जनवरी 2023 में रिकॉर्ड 16.61 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया गया। जनवरी 2022 के मुकाबले यह 31 फीसदी ज्यादा और सितंबर 2021 के बाद सबसे ज्यादा है। जबकि फरवरी में आयात 12 फीसदी बढ़कर 10.98 लाख टन पर पहुंच गया। खाद्य तेलों के संगठन साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के मुताबिक, फरवरी 2022 में 9.83 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया गया। जबकि अखाद्य तेलों का आयात फरवरी 2023 में घटकर 16,006 टन रह गया जो पिछले साल इसी महीने 36,389 टन था। भारत अपनी जरूरत का करीब 65 फीसदी खाद्य तेल का आयात करता है।&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा में एमएसपी से कम पर बिक रही सरसों, खाद्य तेलों का आयात बढ़ने से घरेलू कीमत हो रही प्रभावित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब के बजट में कृषि पर फोकस, आवंटन 20 फीसदी बढ़कर हुआ 13,888 करोड़, ढाई हजार किसान मित्रों को नियुक्त करेगी मान सरकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/focus-on-agriculture-in-punjab-budget-allocation-increased-by-20-percent-mann-govt-will-appoint-kisan-mitra.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 10 Mar 2023 20:17:16 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/focus-on-agriculture-in-punjab-budget-allocation-increased-by-20-percent-mann-govt-will-appoint-kisan-mitra.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए 1.96 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। वित्त वर्ष 2022-23 की तुलना में इसमें कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए आवंटन में 20 फीसदी की वृद्धि हुई है। जबकि कुल बजट में 26 फीसदी की वृद्धि हुई है। इससे पता चलता है कि राज्य सरकार कृषि को कितना महत्व दे रही है। वैसे भी पंजाब कृषि आधारित राज्य है, इसलिए भी कृषि पर सरकार का फोकस है। आम आदमी पार्टी की सरकार के पहले पूर्ण बजट में 2,574 किसान मित्रों की नियुक्ति, मौसम की मार से बचाने के लिए फसल बीमा, और कृषि पंपों के सोलराइजेशन जैसी कई घोषणाएं कृषि क्षेत्र के लिए की गई। इसके अलावा ढाई लाख नौकरियां देने का वादा किया गया है।</p>
<p><strong>जनहितैषी बजटः भगवंत मान</strong></p>
<p>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बजट के बाद ट्वीट किया, &ldquo;आज हमारी सरकार ने आम जनता का बजट पेश किया है जिसमें कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है। बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, रोजगार और व्यापार पर विशेष ध्यान दिया गया है। वित्त मंत्री हरपाल चीमा को जनहितैषी बजट बनाने के लिए बधाई।&rdquo; पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने शुक्रवार को विधानसभा में अपना दूसरा बजट पेश किया। बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि मैं डॉ. एमएस स्वामीनाथन के वह शब्द दोहराता हूं जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि कृषि असफल हो जाती है तो कुछ भी सफल नहीं हो सकता है। अपने बजट में उन्होंने कृषि और संबधित क्षेत्र के लिए 20 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 13,888 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। चीमा ने कहा कि सरकार जल्द ही नई कृषि नीति लेकर आएगी। इसके लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित की गई है। बजट में फसल विविधीकरण के लिए 1,000 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है, जबकि बासमती धान की खरीद के लिए एक रिवॉल्विंग फंड बनाया गया है। इसके अलावा किसानों को उनकी फसल की कम कीमत मिलने पर उन्हें होने वाले नुकसान से बचाने के लिए फसल बीमा योजना &ldquo;भाव अंतर भुगतान&rdquo; योजना शुरू करने की घोषणा बजट में की गई है।</p>
<p>बजट पेश करते हुए चीमा ने कहा कि धान और मूंग की फसल की सीधी बुवाई के लिए 125 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। राज्य में पराली जलाने की बड़ी समस्या है। इस मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं में 30 फीसदी की कमी आई है। साथ ही उन्होंने कहा कि अब ईट भट्ठों में कोयले की जगह पराली जलाई जाएगी। 2023-24 के बजट में कृषि क्षेत्र के लिए 9,331 करोड़ रुपये की बिजली सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा आम उपभोक्ताओं को 300 यूनिट बिजली मुफ्त में देने की राज्य सरकार ने बजट में घोषणा की है।</p>
<p>मार्च 2022 में सत्ता में आने के बाद भगवंत मान सरकार ने सबसे पहले 22 मार्च को लेखानुदान पारित किया। फिर उसने बाकी समय के लिए जून में अपना बजट पेश किया। यह इस सरकार का पहला पूर्ण बजट है जो &nbsp;कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र पर केंद्रित है। बजट में कृषि एवं किसान कल्याण और सहकारिता क्षेत्र के लिए की गई घोषणाएं निम्नलिखित हैः-</p>
<p><strong>कृषि और किसान कल्याण क्षेत्र</strong></p>
<ul>
<li>कृषि क्षेत्र के लिए 13,888 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान।</li>
<li>फसलों के विविधीकरण की एक विशेष योजना के लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान।</li>
<li>किसानों को जागरूक करने के लिए 2,574 किसान मित्रों की होगी नियुक्ति।</li>
<li>धान की सीधी बिजाई और मूंग की फसल के लिए 125 करोड़ रुपये का आवंटन।</li>
<li>पराली प्रबंधन के लिए 350 करोड़ रुपये का प्रावधान।</li>
<li>किसानों को मुफ्त बिजली के लिए 9,331 करोड़ का प्रावधान।</li>
<li>बागवानी क्षेत्र के लिए 253 करोड़ रुपये देने की घोषणा।</li>
<li>पांच नए बागवानी एस्टेट बनेंगे। लुधियाना, गुरदासपुर, पटियाला, बठिंडा और फरीदकोट में लगने वाले इन बागवानी एस्टेट के लिए 40 करोड़ रुपये रखे गए हैं।</li>
<li>पंजाब कृषि विश्वविद्लाय ने टिशू कल्चर तकनीक से सेब की नई किस्म विकसित की है जो गर्म क्षेत्र के लिए है। इससे आने वाले दो सालों में पंजाब में सेब के अपने बागान होंगे।</li>
<li>कपास के बीज पर 33 फीसदी सब्सिडी देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फंड बनाया गया है।</li>
<li>बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ट्रैक एंड ट्रेस मैकेनिज्म की घोषणा।</li>
<li>धान की फसल के लिए डीएसआर तकनीक अपनाने वाले 30,312 किसानों को प्रति एकड़ 1,500 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा</li>
<li>गन्ना किसानों को समर्थन देने के लिए शुगरफेड को 400 करोड़ रुपये देने का प्रावधान किया गया है। इसमें 250 करोड़ रुपये अगले वित्त वर्ष के लिए है।</li>
</ul>
<p><strong>सहकारिता </strong></p>
<ul>
<li>गन्ने की कुशल प्रोसेसिंग और मूल्यवर्धन के लिए बटाला और गुरदासपुर में नए शुगर कांप्लेक्सों की स्थापना की घोषणा।</li>
<li>मार्कफेड द्वारा खन्ना में कच्चे पाम ऑयल की प्रोसेसिंग के लिए नई रिफाइनरी और वनस्पति प्लांट लगाने की घोषणा</li>
<li>मार्कफेड सरसों की फसल की प्रोसेसिंग के लिए बुढलाडा और गिदड़बाहा में दो नई तेल मिलें स्थापित करेगा।</li>
</ul> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब के बजट में कृषि पर फोकस, आवंटन 20 फीसदी बढ़कर हुआ 13,888 करोड़, ढाई हजार किसान मित्रों को नियुक्त करेगी मान सरकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी के बजट में कृषि पर फोकस, आवारा पशुओं से निपटने के लिए 750 करोड़ रुपये का प्रावधान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-budget-focus-on-agriculture-rs-750-cr-for-maintenance-of-stray-cattle.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 22 Feb 2023 19:02:16 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-budget-focus-on-agriculture-rs-750-cr-for-maintenance-of-stray-cattle.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को वित्त वर्ष 2023-24 का 6,90,242.43 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। योगी आदित्यनाथ सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह दूसरा और अब तक का सबसे बड़ा बजट है। 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए यह बजट अहम माना जा रहा है। इस बजट में कृषि क्षेत्र पर खास ध्यान दिया गया है। इसमें न सिर्फ सिंचाई के लिए सस्ती बिजली देने के लिए 1,950 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है बल्कि प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी समस्या बन चुके आवारा पशुओं से निपटने के लिए भी 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही सरकार ने किसानों को हाईटेक बनाने और खेती में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के प्रशिक्षण के लिए 17 हजार किसान पाठशाल खोलने का भी ऐलान किया है। &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>
<p>वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने लगातार सातवीं बार बजट पेश किया। बजट पेश करते हुए उन्होंने सबसे पहले किसानों की बात की। वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के लिए 631.93 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के लिए 113.52 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इस योजना से 49 जिलों में गौ-आधारित प्राकृतिक खेती की शुरुआत की गई है जिसमें गंगा नदी से जुड़े 26 जनपद शामिल हैं। किसानों के निजी नलकूपों को सस्ते दरों पर बिजली देने के लिए 1,950 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बजट में किया गया है। वहीं राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 984.54 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। राष्ट्रीय फसल बीमा योजना के लिए राज्य सरकार ने 753.70 करोड़ रुपये का प्रावधान इस बजट में किया है। आत्मनिर्भर कृषक समन्वित योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। यूपी मिलेट्स रिवाइवल प्रोग्राम को लागू करने के लिए योगी सरकार ने 55.6 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।</p>
<p>कृषि क्षेत्र के लिए किए गए अन्य प्रावधानों में पंडित दीन दयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के लिए 102.81 करोड़ और दालों व ऑयलसीड्स के बीजों की वितरण योजना के लिए 15-15 करोड़ रुपये के प्रावधान बजट में किए गए हैं। राज्य सरकार का फोकस किसानों की आमदनी बढ़ाने पर भी है। एग्रीटेक स्टार्टअप स्कीम के तहत कृषि शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने के लिए चार कृषि विश्वविद्यालयों को 20 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया जाएगा। महात्मा बुद्ध एग्रीकल्चर एवं टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, कुशीनगर के लिए 50 करोड़ और कानपुर, अयोध्या, बांदा और मेरठ के कृषि विश्वविद्यालयों को इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए 35 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। &nbsp;</p>
<p><strong>वित्त मंत्री की ओर से कृषि क्षेत्र के लिए किए गए अन्य प्रावधान-</strong></p>
<ul>
<li>नंद बाबा दुग्ध मिशन के लिए 61.21 करोड़ रुपये प्रस्तावित।</li>
<li>मौजूदा दुग्ध समूहों को मजबूती देने के लिए 86.95 करोड़ रुपये प्रस्तावित।</li>
<li>मेरठ और वाराणसी जनपद के डेयरी प्रोजेक्ट्स के लिए 60 करोड़ रुपये प्रस्तावित।</li>
<li>उत्तर प्रदेश डेयरी डेवलपमेंट एवं दुग्ध उत्पादन नीति, 2022 के तहत डेयरी उद्योग को वित्तीय अनुदान एवं छूट देने के लिए 25 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान</li>
<li>गौ संरक्षण केन्द्रों की स्थापना, पशु रोग नियंत्रण और भेड़ पालन योजना के लिए कुल 239.96 करोड़ रुपये प्रस्तावित।</li>
<li>प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत थोक मछली बाजार के लिए 257.50 करोड़ रुपये प्रस्तावित।</li>
<li>प्रधानमंत्री फॉर्मलाइजेशन ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंटरप्राइजेज के लिए 741.98 करोड़ रुपये का प्रावधान</li>
<li>नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन के लिए 206.27 करोड़ रुपये का प्रावधान</li>
<li>उत्तर प्रदेश फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री पॉलिसी, 2022 को लागू करने के लिए 100 रुपये का प्रावधान वित्त मंत्री ने किया है।</li>
<li>62 जिलों में दो साल के अंदर 2100 नए नलकूप बनाए जाएंगे। इससे 05 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है। कुल 1.03 लाख किसानों को इससे फायदा होगा। इसके लिए 502 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।</li>
<li>30 जिलों के डार्क जोन में स्थित 569 असफल राजकीय नलकूपों को अगले दो सालो में ठीक कराया जाएगा। इससे 90 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता बढ़ेगी। 39,800 किसानों को इससे फायदा होगा। इसके लिए 100 करोड़ रुपये प्रस्तावित।</li>
<li>मुख्य सिंचाई परियोजना के लिए 5,332.50 करोड़ रुपये, मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 2,220.20 करोड़ रुपये तथा लघु सिंचाई परियोजनाओं के लिए 3,400 करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में किया गया है।</li>
<li>सिंचाई सहित अन्य परियोजनाओं के लिए 2,516 करोड़ रुपये प्रस्तावित।</li>
</ul>
<p><strong>आत्मनिर्भर यूपी का बजटः योगी आदित्यनाथ</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि यह बजट प्रदेश को चहुंमुखी विकास और 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर करेगा। यह बजट उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने वाला है। पिछले छह साल में सरकार ने सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के नारे को सुनिश्चित किया है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में बजट पेश करने के बाद कहा कि यह उत्तर प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा बजट है। पिछले साल सरकार ने 6.15 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था जबकि दिसंबर में 33,769.55 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया था। इस तरह वित्त वर्ष 2022-23 के बजट का कुल आकार 6.5 लाख करोड़ रुपये था।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63f61935c0d8b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी के बजट में कृषि पर फोकस, आवारा पशुओं से निपटने के लिए 750 करोड़ रुपये का प्रावधान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2023/02/image_750x500_63f61935c0d8b.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजाराम से मिले राकेश टिकैत, कहा&amp;#45; एमएसपी गारंटी के मुद्दे पर किसान संगठन हैं एकजुट]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rakesh-tikait-met-rajaram-tripathi-said-all-farmer-organizations-are-united-on-the-issue-of-msp-guarantee.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 15 Feb 2023 20:43:59 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rakesh-tikait-met-rajaram-tripathi-said-all-farmer-organizations-are-united-on-the-issue-of-msp-guarantee.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एमएसपी गारंटी कानून के मुद्दे पर सभी किसान संगठन एकजुट हैं। किसानों की एकता को कमजोर करने के लिए जानबूझकर सोची-समझी योजना के तहत भ्रामक खबरें फैलाई जाती है। हकीकत यह है कि देश के किसान संगठनों ने अपनी एकजुटता को पहले भी कई बार साबित किया है और आगे भी करेंगे। चाहे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) गारंटी कानून का मुद्दा हो या किसानों का अन्य कोई मुद्दा हो, सभी किसान संगठन एकमत और एकजुट हैं। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा) के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने यह बात कही है। बुधवार को राजाराम त्रिपाठी से मिलने राकेश टिकैत कोंडागांव पहुंचे थे।</p>
<p>दोनों किसान नेताओं की हुई इस मुलाकात में बस्तर के किसानों की जल, जंगल, जमीन सहित अंचल के किसानों की अन्य प्रमुख समस्याओं के साथ-साथ देश के कृषि एवं किसानों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर भी चर्चा हुई। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि मौजूदा समय में एमएसपी गारंटी कानून किसानों का सबसे बड़ा मुद्दा है। डॉ. त्रिपाठी एमएसपी गारंटी कानून के लिए बनाए गए 223 किसान संगठनों के सबसे बड़े मोर्चे "एमएसपी गारंटी-किसान मोर्चा" के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। इसके अध्यक्ष वरिष्ठ किसान नेता सरदार वीएम सिंह हैं। यह पूछे जाने पर कि आप लोगों में आपसी मतभेद की खबरें आती रहती हैं, असल में माजरा क्या है? इस पर उन्होंने कहा कि किसानों की एकता को कमजोर करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से ऐसी भ्रामक खबरें फैलाई जाती है। चाहे एमएसपी गारंटी कानून का मुद्दा हो या अन्य कोई मुद्दा, सभी किसान संगठन एकमत तथा एकजुट हैं। राकेश टिकैत ने भी किसान संगठनों की एकता और एकजुटता की पुष्टि करते हुए इस बात पर अपनी मुहर लगाई।</p>
<p>राकेश टिकैत ने कोंडागांव में "मां दंतेश्वरी हर्बल समूह" द्वारा की जा रही जैविक खेती, खासकर ऑस्ट्रेलियन टीक, काली मिर्च एवं औषधीय पौधों की खेती की सराहना की। उन्होंने कहा, "मैं पहले भी यहां आकर उनके खेत देख चुका हूं और इससे बहुत प्रभावित हुआ हूं। अब हम भी मां दंतेश्वरी हर्बल समूह के साथ जुड़ कर अपने खेतों में ऑस्ट्रेलियन टीक और काली मिर्च लगाने जा रहे हैं। दरअसल, मौजूदा समय में इस पद्धति की खेती की पूरे देश को जरूरत है।" टिकैत ने कहा कि चाहे कोई भी पार्टी हो, सरकार में आने के बाद वह किसानों को ही भूल जाती है। छत्तीसगढ़ के अपने पांच दिवसीय दौरे में वे यहां के किसानों की समस्याओं को समझना चाहते हैं। इस बैठक में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय महासचिव राजवीर सिंह जादौन, यूनियन के छत्तीसगढ़ प्रभारी प्रवीर श्योकंद और स्थानीय किसान नेता शामिल थे। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजाराम से मिले राकेश टिकैत, कहा- एमएसपी गारंटी के मुद्दे पर किसान संगठन हैं एकजुट ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Avishek Raja (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा घोषणा पत्र में किसानों पर विशेष फोकस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/gujarat-polls-bjp-manifesto-eyes-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Nov 2022 17:09:55 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/gujarat-polls-bjp-manifesto-eyes-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>गुजरात में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को अपना घोषणा पत्र जारी किया। पुराने अनुभवों से सीखते हुए केसरिया पार्टी ने किसानों से जुड़े मुद्दों पर विशेष फोकस किया है। राज्य में 1 दिसंबर और 5 दिसंबर को दो चरणों में मतदान होंगे। वोटों की गिनती 8 दिसंबर को की जाएगी।</p>
<p>राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी ने एग्री मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 10,000 करोड़ रुपए का फंड बनाने का वादा किया है। दक्षिण गुजरात में सिंचाई की सुविधाओं के विस्तार के लिए 25000 करोड़ रुपए खर्च करने का वादा है। इसके अलावा सौराष्ट्र में 2 सी फूड पार्क बनाने की बात भी कही गई है।</p>
<p>खासकर सौराष्ट्र क्षेत्र में किसानों की खराब हालत के कारण भारतीय जनता पार्टी को सीटों का नुकसान हुआ है। 2012 में उसे 115 सीटें मिली थी जबकि 2017 के विधानसभा चुनाव में वह 99 सीटों पर सिमट गई। गुजरात विधानसभा में कुल 182 सीटें हैं।</p>
<p>घोषणा पत्र में कहा गया है कि अगर पार्टी फिर से सत्ता में आती है तो खेदूत मंडियों, आधुनिक कृषि उपज मार्केट कमेटी (एपीएमसी), सोर्टिंग और ग्रेडिंग यूनिट, कोल्ड चैन, वेयरहाउस, प्राइमरी प्रोसेसिंग सेंटर आदि विकसित करने के लिए 10,000 करोड़ रुपए का गुजरात कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर कोष बनाएगी।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि सुजलाम सुफलाम, सावनी, लिफ्ट इरिगेशन, माइक्रो इरीगेशन और ड्रिप इरिगेशन जैसे प्रोजेक्ट के जरिए वह मौजूदा सिंचाई नेटवर्क का विस्तार करेगी। 500 करोड़ रुपए के अतिरिक्त बजट से गौशालाओं की स्थिति सुधारी जाएगी। इसके अलावा 1000 अतिरिक्त मोबाइल पशु चिकित्सा यूनिट स्थापित की जाएंगी।</p>
<p>लंपी स्किन रोग के कारण राज्य के डेयरी सेक्टर को काफी नुकसान हुआ है। प्रदेश के किसानों के लगभग 5800 मवेशियों की मौत इस बीमारी से हुई है। इस साल की शुरुआत में राज्य के किसानों ने अपर्याप्त बिजली सप्लाई के खिलाफ प्रदर्शन किया था। कुछ उपज की कम कीमत के खिलाफ रैली निकाली थी और नमक का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की मांग की थी।</p>
<p>पार्टी ने दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र में सी फूड पार्क स्थापित करने का वादा किया है। इसके अलावा यहां देश का पहला ब्लू इकोनॉमी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर स्थापित करने की भी बात है। इसके लिए फिशिंग से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा।</p>
<p>2017 में जब पार्टी की सीटों की संख्या घटकर 99 रह गई थी, तब इसके कई कारण बताए गए थे। एक कारण तो पाटीदार आंदोलन बताया गया। फिर कहा गया कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर भी लोगों में नाराजगी थी। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कारण किसानों की खराब हालत को माना गया, खासकर सौराष्ट्र के किसानों की।</p>
<p>सौराष्ट्र के किसानों की स्थिति कम बारिश और सूखे की वजह से काफी प्रभावित हुई थी। लगातार दो साल 2016 और 2017 में यह स्थिति रही। कपास और मूंगफली के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य उस समय लागू नहीं किया गया था, इससे भी किसानों में सरकार के प्रति नाराजगी थी।</p>
<p>उन समस्याओं का समाधान तो काफी हद तक हो गया है, लेकिन अनेक इलाकों में पानी और बिजली की किल्लत जैसी समस्याएं अभी बरकरार हैं। कुछ उत्पादों में कम रिटर्न को लेकर भी चिंता है, खास कर नमक के मामले में। इससे सत्तारूढ़ पार्टी का गणित गड़बड़ा सकता है। लंपी स्किन रोग के कारण डेयरी सेक्टर में किसानों को हुए नुकसान ने भी पार्टी की चिंता बढ़ा दी है।</p>
<p>राज्य के आदिवासियों के लिए भाजपा ने सभी 56 ट्राईबल सब प्लान तालुका में राशन की मोबाइल डिलीवरी करने का वादा किया है। वन बंधु कल्याण योजना 2.0 के तहत 100000 करोड़ रुपए खर्च करने की बात है। इस राशि का इस्तेमाल आदिवासियों के सामाजिक आर्थिक विकास में किया जाएगा।</p>
<p>घोषणा पत्र में यह भी कहा गया है कि अगर पार्टी फिर से चुनाव जीतती है तो राज्य में समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) लागू किया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>पार्टी प्रमुख जेपी नड्डा की तरफ से गांधीनगर में घोषणा पत्र जारी किया गया। इसमें केजी कक्षा से लेकर पीजी यानी पोस्टग्रेजुएट तक लड़कियों को मुफ्त शिक्षा देने का वादा किया गया है। आयुष्मान भारत योजना के तहत चिकित्सा बीमा कवरेज की राशि 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने का वादा है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा घोषणा पत्र में किसानों पर विशेष फोकस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र के गन्ना किसानों को चाहिए एथेनॉल की कमाई में हिस्सा और एफआरपी में बढ़ोतरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-sugarcane-farmers-demand-share-in-ethanol-earning-and-higher-frp.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 10 Nov 2022 08:33:40 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/maharashtra-sugarcane-farmers-demand-share-in-ethanol-earning-and-higher-frp.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र के गन्ना किसानों ने चीनी के डायवर्जन से तैयार एथेनॉल की कमाई में हिस्सेदारी की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने गन्ने के फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस (एफआरपी) को 10.25 फीसदी के चीनी रिकवरी के आधार स्तर पर बढ़ाकर 3250 रुपये प्रति टन करने के लिए कहा है।&nbsp; इस कीमत में गन्ना कटाई और ढुलाई (एचएंडटी) खर्च को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार ने चालू शुगर सीजन (2022-23) के लिए गन्ने का एफआरपी 305 रुपये प्रति क्विटंल तय किया है। गन्ने के तौल में गड़बड़ी से किसानों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सभी चीनी मिलों और खरीद केंद्रों को इंटरनेट के जरिये सेंट्रल सिस्टम से नियंत्रित करने की जरूरत है। स्वाभीमानी शेतकरी संघटना के अध्यक्ष और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने <strong>रूरल वॉयस</strong> के साथ एक बातचीत में यह बातें कहीं। स्वाभीमानी शेतकरी संगठन ने 7 नवंबर को पुणे में चीनी आयुक्त के कार्यालय पर इन मांगो को लेकर एक बड़ा प्रदर्शन किया जिसमें हजारों गन्ना किसानों ने हिस्सा लिया।</p>
<p>राजू शेट्टी ने कहा कि हमने इस संबंध में चीनी आयुक्त को अपनी मांगे सौंप दी हैं। उन्होंने कहा कि एफआरपी तय करने का फार्मूला बदलना चाहिए क्योंकि पहले चीनी का डायर्जन कर कर एथनॉल नहीं बनता था। मिलें किसानों को एक फीसदी चीनी रिकवरी के बदले में 297 रुपये प्रति टन देते हैं। जबकि एक फीसदी चीनी कम करने पर बनने वाले एथनॉल से चीनी मिलों को करीब 1200 रुपये की कमाई होती। लेकिन किसानों को मिलें केवल 297 रुपये दे रही हैं। हमें इसमें अधिक हिस्सा चाहिए। इसलिए एफआरपी तय करने का फार्मूला बदलने का समय आ गया है। इसके बारे में मैं सीएसीपी के चेयरमैन से भी मिलने वाला हूं।</p>
<p>उन्होंने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि गन्ना आपूर्ति के समय वेट मीजरमेंट में बहुत बड़ी धोखाधड़ी होती है। हम चाहते हैं कि गन्ना तौल को डिजिटलाइज किया जाए। पेट्रोलियम कंपनियों ने एक सॉफ्टवेयर के जरिये हजारों पेट्रोल पंप को सेंट्रलाइज कर रखा है। अगर यह वहां संभव है तो महारष्ट्र की 200 चीनी मिलों में गन्ना के वेट मीजरमेंट को भी इसी तर्ज पर सेंट्रलाइज करना संभव है। इसका नियंत्रण चीनी आयुक्त कार्यालय के पास होना चाहिए। ऐसे में अगर इससे कोई भी मिल छेड़छाड़ करेगा तो पता लग जाएगा।</p>
<p>शेट्टी करते हैं कि राज्य सरकार द्वारा एफआरपी का भुगतान दो किस्तों करने वाला फैसला हमें मंजूर नहीं है। एफआरपी केंद्र सरकार का कानून है और इसकी प्रक्रिया में राज्य सरकार कोई बदलाव नहीं कर सकती है। इसके खिलाफ हम बॉम्बे हाई कोर्ट में गये हैं। उन्होंने कहा कि पूरे एफआरपी का एक साथ भुगतान करने के लिए करीब 40 चीनी मिलें तैयार हो गयी हैं। इसलिए हमें उम्मीद है कि बाकी चीनी मिलें भी एफआरपी का पूरा भुगतान एक साथ करने के लिए तैयार हो जाएंगी।</p>
<p>महाराष्ट्र सरकार ने फैसला लिया है कि गन्ना किसानों को गन्ने के 10.25 फीसदी की चीनी रिकवरी के आधार पर एफआरपी के रूप में पहली किस्त में 3050 रुपये प्रति टन में से कटाई और ढुलाई का खर्च काट कर भुगतान होगा। उसके बाद सीजन समाप्त होने पर एफआरपी की बकाया राशि का भुगतान होगा। राजू शेट्टी ने बताया कि इसी का विरोध स्वाभीमानी शेतकरी संघटना ने किया है। सरकार के फैसले के खिलाफ अगली संघटना की याचिका पर अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी।</p>
<p>पिछले चीनी सीजन (2021-22) में महाराष्ट्र के बार फिर पांच साल के बाद उत्तर प्रदेश को पछाड़ते हुए देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य बन गया था। 30 सितंबर को समाप्त हुए चीनी सीजन (अक्तूबर 2021 से सितंबर 2022) में वहीं महाराष्ट्र का चीनी उत्पादन 137.30 लाख टन रहा जिसके चालू चीनी सीजन (2022-23) &nbsp;में 150 लाख टन को पार कर जाने&nbsp;की उम्मीद है। वहीं पिछले सीजन में उत्तर प्रदेश का चीनी उत्पादन 102.50 लाख टन रह गया है और चालू सीजन में इसके 90 से 100 लाख टन के बीच रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र के गन्ना किसानों को चाहिए एथेनॉल की कमाई में हिस्सा और एफआरपी में बढ़ोतरी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारत ने इस सीजन में लद्दाख से सिंगापुर समेत तीन देशों को 35 टन खुबानी का निर्यात किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/india-exports-35-tons-of-apricots-in-season-2022-to-three-countries.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 30 Oct 2022 11:18:23 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/india-exports-35-tons-of-apricots-in-season-2022-to-three-countries.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">भारत से 2022 के सीजन में सिंगापुर, मॉरीशस और वियतनाम को 35 टन खुबानी का निर्यात किया गया है। लद्दाख की इस मशहूर पैदावार के निर्यात के लिए वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने काफी मदद की है। इसका निर्यात &lsquo;लद्दाख एप्रिकॉट&rsquo; ब्रांड नाम के तहत किया जा रहा है। &lsquo;लद्दाख एप्रिकॉट&rsquo; को भौगोलिक पहचान (जीआई) टैग दिलाने की प्रक्रिया भी चल रही है। इसका स्थानीय नाम &lsquo;चुली&rsquo; है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मंत्रालय की एक्सपोर्ट प्रमोशन संस्था एपीडा ने खुबानी की वैल्यू चेन से जुड़े सभी पक्षों को प्रमोट किया है। इसने 2021 में लद्दाख के ताजे खुबानी की निर्यात के लिए पहचान की। 2021 के सीजन के अंत में कुछ शिपमेंट दुबई भेजी थी। अलग स्वाद और सुगंध के कारण इसे वहां काफी पसंद किया गया।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भारत में खुबानी का सबसे अधिक उत्पादन लद्दाख में ही किया जाता है। पिछले सीजन में यहां 15,789 टन खुबानी का उत्पादन हुआ। सुखाने के बाद 1999 टन खुबानी उत्पादन हुआ। लद्दाख में 2303 हेक्टेयर में इसकी खेती होती है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;"> खुबानी&nbsp;और इस क्षेत्र के अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने से क्षेत्रीय विकास भी होने की उम्मीद है। एपीडा की निर्यात संवर्धन नीति के तहत खुबानी के बागों के प्रबंधन पर ध्यान दिया जाता है ताकि बेहतर क्वालिटी के फल मिल सकें। इस नीति से निरंतर मार्केटिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, रिसर्च-डेवलपमेंट और ब्रांड प्रमोशन में मदद मिलेगी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एपीडा ने लद्दाख के बागवानी विभाग के साथ कारगिल और लेह में भी जागरूकता फैलाने की योजना बनाई है, जहां शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (SKAUST-Kashmir) और डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च (DIHAR) के वैज्ञानिक किसानों की मदद करेंगे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">लद्दाख में पैदा होने वाले ज्यादातर खुबानी की खपत स्थानीय स्तर पर ही हो जाती है। बहुत कम मात्रा सुखाकर बेची जाती है। परवाज (PARVAZ) मार्केट लिंकेज स्कीम के तहत एपीडा हवाई मार्ग से लॉजिस्टिक्स की मदद बढ़ाने पर काम कर रहा है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एपीडा ने इस साल जून में लेह में एक अंतरराष्ट्रीय बायर-सेलर मीट का आयोजन किया था। उसमें भारत, अमेरिका, बांग्लादेश, ओमान, दुबई और मॉरीशस से 30 से ज्यादा खरीदार पहुंचे थे। लद्दाख के खुबानी की प्रीमियम क्वालिटी को देखते हुए इसके निर्यात की काफी संभावनाएं हैं।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारत ने इस सीजन में लद्दाख से सिंगापुर समेत तीन देशों को 35 टन खुबानी का निर्यात किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/10/image_750x500_635d551d99859.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तीन दिन धरने के बाद हरियाणा प्रशासन ने उत्तर प्रदेश के किसानों को दी धान बेचने की अनुमति]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/western-up-farmers-allowed-to-sale-basmati-paddy-in-haryana-after-40-hour-dharna-and-traffic-jam.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 22 Oct 2022 12:48:53 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/western-up-farmers-allowed-to-sale-basmati-paddy-in-haryana-after-40-hour-dharna-and-traffic-jam.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">हरियाणा में बिक्री के लिए उत्तर प्रदेश से आने वाले धान पर लगी रोक को समाप्त कर उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा हरियाणा में धान की बिक्री का रास्ता साफ कर दिया है। इसके पहले हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के आदेश के बाद करनाल जिला प्रशासन ने&nbsp; उत्तर प्रदेश के किसानों को हरियाणा में धान बेचने पर रोक लगा दी थी। जिसके विरोध में किसानों ने शामली जिले में मेरठ-करनाल हाइवे पर धरना शुरू कर दिया था। इस स्थिति में शामली जिले के उत्तर प्रदेश -हरियाणा सीमा पर धान से लदी करीब 500 ट्रैक्टर ट्रॉलियां फंस गई थी। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के कार्यकर्ताओं ने यमुना ब्रिज पर प्रदर्शन शुरू कर&nbsp; उसे धऱने में तब्दील कर दिया था। तीन दिन धरना चलने और भारी जाम लगने के बाद शुक्रवार की आधी रात को&nbsp; हरियाणा सरकार ने उत्तर प्रदेश के किसानों को धान की ट्रैक्टर ट्रालियां हरियाण ले जाने की अनुमति दी।&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">शामली में हरियाणा सीमा पर यमुना पुल पर गुरुवार से किसानों के धरने के चलते मेरठ-करनाल हाइवे पर बिडौली यमुना पुल से झिंझाना की ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष कपिल खटियान वहां किसानों और कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठे गये थे।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">कपिल खटियान ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि उत्तर प्रदेश के किसान अपनी उपज को बेहतर कीमत पर बेचने के लिए हरियाणा जाते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से हरियाणा इसकी अनुमति देने से हिचक रहा है। नियमों के अनुसार, किसान अपनी फसल कहीं भी बेच सकते हैं। लेकिन सरकारें किसानों को अपमानित कर रही हैं। खटियान ने बताया कि हरियाणा पुलिस ने किसानों पर लाठियां बरसाईं और किसानों के साथ दुर्व्यवहार किया। हरियाणा पुलिस की कार्रवाई का विरोध करते हुए उत्तर प्रदेश के किसानों ने सीमा पर जाम लगा दिया था। करीब 40 घंटे चक्का जाम के बाद हरियाणा ने उत्तर प्रदेश के किसानों हरियाणा में जाने के लिए अनुमति दे दी है। पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान बासमती धान की बिक्री के लिए हरियाणा मजबूरी में जाते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को बासमती धान की बिक्री करने के लिए हरियाण ही जाना पड़ता है क्योंकि उत्तर प्रदेश में इसका मार्केट नहीं है जहां किसान इस धान को बेच सकें।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">हालांकि शामली जिले में राज्य सरकार ने&nbsp; गैर बासमती धान कि खरीद के लिए 12 बनाने की घोषणा की है लेकिन यह सांकेतिक खरीद है और उनके बाद धान खरीदने की पुख्ता व्यवस्था नहीं है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">किसानों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में उचित खरीद व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें हरियाणा के व्यापारियों को अपनी फसल बेचनी पड़ रही है। हरियाणा की मंडियों में एजेंट किसानों को तुरंत भुगतान करते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में उन्हें भुगतान देर से मिलता है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/10/image_750x500_6352af4e8f2e1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ तीन दिन धरने के बाद हरियाणा प्रशासन ने उत्तर प्रदेश के किसानों को दी धान बेचने की अनुमति ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[किसानों की मांगों को  लेकर महासमुंद में किसान महाबैठक का आयोजन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-to-raise-their-demands-in-meeting-at-mahasamund-in-chhattisgarh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 20 Oct 2022 21:26:26 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-to-raise-their-demands-in-meeting-at-mahasamund-in-chhattisgarh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और केंद्र व राज्य सरकार के समक्ष <span>अन्य जरूरी मांगो को लेकर किसानों की एकजुटता और आगामी रणनीति निर्धारण के लिए शुक्रवार को छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ /संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले </span>12 <span>बजे से शाम </span>5 <span>बजे तक कृषि उपज मंडी महासमुन्द में "किसान - महाबइठका" का आयोजन किया गया है।</span>&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">किसान &ndash;महाबइठका आयोजन कमेटी के संयोजक तेजराम विद्रोही ने बताया कि <span>इस महत्वपूर्ण विषय पर मुख्य वक्ता अखिल भारतीय किसान महासभा (आइफा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजाराम त्रिपाठी होंगे। उन्होंने केन्द्र सरकार के कृषि</span>, <span>किसान और आम उपभोक्ता विरोधी कानून का पूरी तरह अध्ययन कर किसान संगठन के नेताओं को उनके होने वाले दुष्परिणाम के बारे में अवगत कराया तथा लगातार गाजीपुर बॉर्डर में रहकर आंदोलन का समर्थन किया था। </span><span>तेजराम विद्रोही ने सभी किसान </span>, <span>मजदूर </span>, <span>छात्र, युवा</span>, <span>बुध्दिजीवियों और </span><span>आम नागरिकों को इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया है ताकि वह ज्यादा से ज्यादा संख्या में उपस्थित होकर हमारी एकजूटता को मजबूती प्रदान करें ।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>किसान मजदूर महासंघ /संयुक्त किसान मोर्चा की मांग है कि</span><span>&nbsp;</span><span>स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सभी फसलों का लागत से डेढ़ गुणा न्यूनतम समर्थन मूल्य तय हो। </span><span>सभी कृषि उपजों को पूरे साल न्यूनतम समर्थन मूल्य में खरीदी की कानूनी गारंटी दी जाए। </span><span>प्रधानमंत्री किसान सम्मान राशि का लाभ सभी किसानों को अनिवार्य रूप से प्रदान किया जाये।</span>&nbsp;<span>प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ सभी पात्र हितग्राहियों को प्रदान किया जाये तथा सभी बकाया किस्त की राशि तत्काल प्रदान की जाये।</span>&nbsp;<span>यूरिया</span>, <span>डीएपी जैसे सभी प्रकार की खाद की उपलब्ता बढ़ायी जाये कालाबाजारी पर रोक लगायी जाए।</span></p>
<p style="text-align: justify;">वहीं इस मोर्चा ने राज्य सरकार से 16 मांगे रखी हैं। जिनमें <span>सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों की पूरी धान खरीदी,</span><span>भाजपा सरकार के समय का दो साल का धान का बोनस किसानों को प्रदान किया जाये।</span>&nbsp;<span>चिटफंड कंपनियों से किसान</span>, <span>मजदूर</span>&nbsp;<span>एवं आम अभिकर्ता / निवेशकों की राशि वापस दिलाया जाये।</span>&nbsp;<span>छत्तीसगढ़ में किसान आयोग का गठन किया जाये।</span>&nbsp;<span>प्रधानमंत्री आवास योजनान्तर्गत बकाया सभी किस्त हितग्राहियों को शीघ्र प्रदान की जाये ताकि अधूरे आवास का निर्माण पूरा किया जा सके तथा योजना से वंचित गरीब किसान मजदूरों आवास हेतु स्वीकृति प्रदान किया जाये। </span><span>ऋणी एवं अऋणी सभी किसानों को सहकारी समितियों में खाद की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध करायी जाये ।</span>&nbsp;<span>राईस मीलों द्वारा खरीदे गए धान का बकाया भुगतान सुनिश्चित करने जैसी मांगे शामिल हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>महाबइठका में तैयार प्रस्ताव को राज्य से संबंधित विषयों को ज्ञापन के रूप में मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ सरकार और केन्द्र से संबंधित विषयों को ज्ञापन के रूप में केन्द्र सरकार को सौंपा जायेगा। इसके आयोजकों में </span>&nbsp;तेजराम विद्रोही संयोजक,<span>जागेश्वर जुगनू चन्द्राकर संयोजक किसान भुगतान संघर्ष समिति महासमुन्द्र</span>&nbsp; <span>लक्ष्मीनाराण चन्द्राकर अध्यक्ष छत्तीसगढ़ अभिकर्ता/निवेशक कल्याण संघ</span>, <span>अजय राहू संयोजक किसान भुगतान संघर्ष समिति सांकरा</span>, <span>पवन सक्सेना सदस्य कृषक बिरादरी शामिल हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों की मांगों को  लेकर महासमुंद में किसान महाबैठक का आयोजन ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[भारी बारिश से खेतों में  आलू की अगेती फसल हुई खराब, आलू की मुख्य फसल की बुवाई में होगी देरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rain-damages-early-potato-crop-main-crop-sowing-will-be-delayed.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 13 Oct 2022 00:11:34 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rain-damages-early-potato-crop-main-crop-sowing-will-be-delayed.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश &nbsp;की आलू बेल्ट के कई जिलों में किसानों ने आलू की अगेती फसल &nbsp;की थी लेकिन बेमौसम की भारी बारिश से &nbsp;खेतों में पानी भरने के कारण &nbsp;बीज सड़ गया है। &nbsp;इसके चलते अगेती आलू की फसल के &nbsp;उत्पादन और एरिया में कमी आ सकती है। वहीं &nbsp;मुख्य आलू की फसल की बुवाई में भी &nbsp;20 दिन की देरी होने की संभावना है जिसका &nbsp;आलू उत्पादन पर प्रतिकूल असर होगा&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश के प्रमुख आलू उत्पादक जिलों आगरा, <span>फर्रुखाबाद</span>, <span>फिरोजाबाद</span>, <span>मथुरा</span>, <span>एटा</span>, <span>कन्नौज</span>, <span>फतेहपुर</span>, <span>बुलंदशहर</span>, <span>अलीगढ़</span>, <span>कानपुर</span>, <span>बदायूं</span>, <span>बरेली</span>, <span>कौशाम्बी</span>, <span>इलाहाबाद</span>, <span>उन्नाव</span>, <span>प्रतापगढ़</span>, <span>लखनऊ</span>, <span>अयोध्या</span>, <span>बाराबंकी</span>, <span>सुल्तानपुर</span>, <span>गोरखपुर, बस्ती और हाथरस जिले के किसानों ने अगेती आलू&nbsp; की फसल की बुवाई की थी। लेकिन खेतों में जलभराव के कारण बड़े पैमाने पर आलू का बीज खेतों में सड़ने की स्थिति बन गई है। इससे अगेती आलू की फसल का उत्पादन और रकबा घट सकता है । वहीं मुख्य आलू की फसल में 20 दिन की देरी होने की संभावना है जिससे आलू का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। आलू की बुवाई का &nbsp;सही समय 15 अक्टूबर से माना जाता है। उत्तर प्रदेश में आलू की खेती लगभग 6.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में होती राज्य हर साल औसतन 150.30 लाख टन आलू का उत्पादन होता है।</span>&nbsp;<span>देश में कुल आलू उत्पादन का 35 फीसदी उत्तर प्रदेश में होता है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के क्षेत्रीय केंद्र मोदीपुरम, मेरठ के संयुक्त निदेशक मनोज कुमार और इस केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक नेम सिंह ने <strong>रूरल वॉयस</strong> से बातचीत के दौरान कहा कि इस बारिश के कारण आलू के खेतों में पानी भर जाने से मेड़ की मिट्टी में हवा का अवागमन रुक जाता है और उपरी &nbsp;मिट्टी की कठोर&nbsp; परत बन जाती है, <span>जिससे आलू के अंकुरण में बाधा आती है। वहीं तापमान में वृद्धि &nbsp;होने के कारण आलू के बीज सड़ने लगते हैं। </span>उन्होंने बताया कि अगेती आलू की फसल की बुवाई का समय 15 सितंबर से 10 अक्टूबर तक है। अब समय समाप्त होने के कारण किसान अगेती आलू की बुआई नहीं कर सकते हैं। अब उन्हें आलू की मुख्य फसल बोनी चाहिए, <span>जिसके लिए बुवाई के लिए 15 नवंबर तक का पर्याप्त समय &nbsp;है। बशर्ते कि आने वाले हफ्तों में बारिश नहीं हो। केंद्र के </span><span>ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. मनोज कुमार ने किसानों को सुझाव दिया है कि अगेती आलू की फसल के खेतों में जहां जलभराव हो उन खेतों से जल निकासी की व्यवस्था करें। अगर खेत चिकनी और दोमट मिट्टी वाले है तो आलू की क्यारियों पर उपरी की मिट्टी की सख्त परत बन जाती है</span>, <span>इसलिए हल्की टिलर या खुरफी से इसे ढीला कर दें। जहां पर ज्यादा नमी है उन खेतों में आलू की &nbsp;बुवाई ना करे ऐसा करने से आलू का बीज सड़ जाएगा। इसके लिए अभी किसान को खेत में उचित नमी का इंतजार करना चाहिए।</span></p>
<p style="text-align: justify;">फर्रूखाबाद जिले के झिझौटा बुजुर्ग के किसान शैलेन्द्र कुमार ने&nbsp; <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया &nbsp;कि हम लोग &nbsp;मुख्य रूप से रबी में आलू की खेती बड़े पैमाने पर करते है बाजरा और उर्द मूंग की कटाई के बाद किसान आलू की खेती करते है उन्होंने बताया कि हमने आलू की बुवाई के लिए खेत तैयार किए थे लेकिन &nbsp;खेतों में पानी भरने से बुवाई में दो से तीन सप्ताह की देरी होगी&nbsp; जिसके चलते&nbsp; उत्पादन प्रभावित होगा। शैलेन्द्र ने कहा कि एक तरफ बारिश के कारण खरीफ की बाजरा की फसल खराब हो गई वहीं दूसरी तरफ आलू की मुख्य फसल में देरी होने से कम लाभ मिलेगा।</p>
<p style="text-align: justify;">गांव भिठौली जिला आगरा के किसान विनोद शर्मा ने&nbsp; <strong>रूरल वायस</strong> से कहा कि हमारे एरिया में किसान बाजरा के बाद आलू, सरसों और गेहूं के खेती करते है लेकिन किसानों ने बाजरा काट कर अभी खेतों मे आलू की बुवाई के लिए खेत तैयार कर रहे थे लेकिन&nbsp; इस बेमौसम की तेज बाऱिश के कारण हमारे खेतों में पानी का भराव हो गया जिसकी वजह से एक तो बाजरा की कटी फसल खराब हो गई वहीं आलू की समय से बुवाई की किसानों की योजना पर पानी फिर गया। उन्होंने बताया कि बहुत से किसानों ने खेत तैयार कर अगेती आलू की फसल लगा रखी थी खेतों में की उसका बीज खराब हो गया।</p>
<p style="text-align: justify;">मथुरा जिला के भूरेखा गांव के किसान सुधीर अग्रवाल ने <strong>रूरल वॉयस</strong> से कहा कि .हमारे एरिया के किसानों ने अगेती बासमती की धान की खेती की थी उसकी कटाई कर बहुत से किसानों ने खेतों की तैयारी कर अगेती आलू&nbsp; की बुवाई की थी। अगेती आलू की उपज से बेहतर दाम मिलने की उम्मीद थी लेकिन इस बारिश के कारण &nbsp;हमारे खेत में एक से डेढ़ फूट तक पानी का भरने कारण बोये हुए खेतों में आलू का बीज सड़ गया। वहीं दूसरी तरफ बहुत से किसानों के धान और बाजरा की फसल पक गई थी । वह किसान इन&nbsp; फसलों की&nbsp; कटाई कर आलू की &nbsp;खेती की &nbsp;करने की &nbsp;योजना बना रहे थे लेकिन&nbsp; इस बारिश के कारण खेत में पानी भरने रहने से खेतों में फसल गिर गई और अब &nbsp;हम न फसल &nbsp;की कटाई कर सकते हैं न जुताई कर सकते हैं। इसके कारण हमारी आलू खेती &nbsp;में देरी होगी।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">चन्द्रशेखर आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी&nbsp; विश्वविद्यालय, कानपुर के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक और कन्नौज केवीके के हेड बी. के. कनौजिया ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि इस बारिश के कारण अगेती आलू की फसल के उत्पादन और एरिया में कमी आ सकती है। बहुत से किसान अगेती आलू की बुवाई कर चुके थे लेकिन इस बारिश के कारण खेत में आलू के बीज सड़ गया है जिसके कारण अगेती आलू की बुवाई कर फिर नवम्बर &ndash; दिसम्बर में&nbsp; गेहूं की बुवाई या प्याज की बुवाई करते हैं। अब किसान केवल आलू की मुख्य फसल की बुवाई करेगा या गेहूं की बुवाई करेगा। इस तरह से अगेती आलू की फसल का उत्पादन और एरिया घट सकता है। डॉ. कनौजिया का कहना है कि आलू की मुख्य फसल के लिए किसान 15 अक्टूबर से बुवाई की तैयारी करते हैं लेकिन इस बारिश के कारण आलू की&nbsp; खेती की तैयारी में देरी होगी ।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ भारी बारिश से खेतों में  आलू की अगेती फसल हुई खराब, आलू की मुख्य फसल की बुवाई में होगी देरी ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नाबार्ड ने जोधपुर में कृषि निर्यात सुविधा केंद्र बनाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/nabard-initiative-establishment-of-agricultural-export-facility-center-in-jodhpur.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 12 Oct 2022 11:29:15 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/nabard-initiative-establishment-of-agricultural-export-facility-center-in-jodhpur.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबर्ड) ने कृषि विकास कोष के तहत जोधपुर में कृषि और खाद्य निर्यात सुविधा केंद्र (एईएफसी) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इसके माध्यम से राजस्थान से कृषि और खाद्य पदार्थों के निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि निर्यात इकोसिस्टम बनाया जाएगा और कृषि उत्पादों के निर्यात को सुगम बनाया जाएगा। जोधपुर स्थित दक्षिण एशिया जैव प्रौद्योगिकी केंद्र (एसएबीसी) स्थानीय संगठनों, किसान उत्पादक संगठनों, कृषि विपणन बोर्ड, मसाला सेल और कृषि निर्यातकों के सहयोग से एईएफसी का कार्यान्वयन करेगा करेगा।</p>
<p style="text-align: justify;">नाबार्ड के राजस्थान क्षेत्रीय कार्यालय, जयपुर के मुख्य महाप्रबंधक, बैज्जू. एन. कुरूप ने एईएफसी का जोधपुर में उद्घाटन किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि एईएफसी को 'वन स्टॉप शॉप' के रूप में स्थापित किया गया है जहां हम कृषि निर्यात संभावनाओं पर चर्चा कर सकते हैं, ज्ञान का आधार बना सकते हैं, निर्यात प्रोटोकॉल लागू कर सकते हैं, निर्यात प्रोत्साहन निकायों के साथ विभिन्न संबंध स्थापित कर सकते हैं और किसान उत्पादक संगठनों को सशक्त बना सकते हैं। ऑपरेटरों और निर्यातकों की राजस्थान से कृषि निर्यात से संबंधित जटिलताओं को दूर किया जा सके।</p>
<p style="text-align: justify;">एसएबीसी के&nbsp; फाउंडर डायरेक्टर डॉ. भागीरथ चौधरी ने कहा कि कृषि निर्यात के क्षेत्र में की गई इस पहल से राजस्थान से मसालों, मोटे अनाज, ग्वारगम, तिलहन, सुगंधित और औषधीय पौधों के निर्यात के अच्छे अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि एईएफसी सक्षम कृषि उद्यमियों, किसान उत्पादक संगठनों और कृषि निर्यातकों को एक साथ लाएगा और मसाला बोर्ड, एपीडा (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण), कृषि विपणन बोर्ड और मसाला सेल के सहयोग से व्यापार के अवसर प्रदान करेगा ताकि वह कृषि निर्यात नीति, 2018 और राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय और कृषि निर्यात संवर्धन नीति, 2019 के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस अवसर पर नाबार्ड के राजस्थान क्षेत्रीय कार्यालय, जयपुर के महाप्रबंधक&nbsp; बी.के. त्रिपाठी, मनीष मंडा, जिला विकास अधिकारी, जोधपुर, भारतीय मसाला बोर्ड के उपनिदेशक डॉ. एम. वाई. हुनूर और दक्षिण एशिया जैव प्रोद्यौगिकी केंद्र, जोधपुर के डॉ. डी. कुमार डॉ. नेहा बुलचंदानी भी उपस्थित थे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नाबार्ड ने जोधपुर में कृषि निर्यात सुविधा केंद्र बनाया ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बारिश से धान के साथ तिल और सब्जी की फसलों को भी नुकसान, रबी की बुवाई में भी होगी देरी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/the-rains-of-october-have-spoiled-the-calculation-of-kharif-and-rabi-crops..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 10 Oct 2022 10:10:54 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/the-rains-of-october-have-spoiled-the-calculation-of-kharif-and-rabi-crops..html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में चार दिनों से हो रही बारिश ज्यादातर किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। बारिश से किसानों की खड़ी फसल बर्बाद हो गई है। अगेती धान की फसल, तिल और सब्जी की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि सूखा पड़ने के कारण खेत खाली थे। उन खेतों में &nbsp;किसानों ने आलू, सब्जियां, तिलहन, तोरिया, लाई की फसल बोई थी लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से फसल खराब हो गई। अचानक हुई बारिश के कारण धान की कटाई में देरी हुई। इस कारण सरसों, चना और मटर जैसी रबी फसलों की बुवाई में भी देरी होगी जिसका पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस तरह अक्टूबर की बारिश ने खरीफ और रबी दोनों के नुकसान के आसार बन गए हैं।&nbsp;</p>
<p>गोरखपुर जिले के सहजनवा के किसान और ब्रह्म कृषि जैव ऊर्जा किसान उत्पादक संगठन के निदेशक अजय कुमार सिंह ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि उनके एफपीओ समूह ने 60 एकड़ में लौकी, खीरा, करेला और बैंगन लगाया था। बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है। पौधे सड़ रहे हैं और गिर रहे हैं। अजय सिंह ने कहा कि उन्होंने लगभग 25 एकड़ में धान लगाया था, जिसमें लगभग 10 एकड़ में धान की किस्म सरजू-52 लगाई थी। वह पांच से 10 दिनों में कटाई के लिए तैयार होने वाली थी। धान की कटाई बाद सरसों की बुवाई करनी थी। लेकिन इस बारिश से धान की फसल की कटाई में देरी होगी। खेतों में पानी भर गया है। इसलिए कंबाइन मशीन से कटाई करना संभव नहीं है। कटाई मजदूरों से कराने पर लागत बढ़ जाएगी।</p>
<p>महराजगंज जिले के किसान वीरेंद्र कुमार चौरसिया ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि उन्होंने साढ़े तीन एकड़ में लौकी और टमाटर की फसल लगाई थी, जिसकी लगात खर्च डेढ़ लाख रुपये आई थी। लेकिन अचानक हुई इस बारिश से सब्जी की फसल जलमग्न हो गई और खराब हो रही है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/10/image_750x_634296d58e57d.jpg" alt="" /></p>
<p style="text-align: justify;">गांव खरिहानी, जिला आजमगढ़ के किसान प्रवीण कुमार राव ने कहा कि इस वर्ष सूखे के कारण धान के खेतों में इंजन से पानी देना पड़ा। लेकिन इस बारिश के धान की कटाई में देरी होगी। प्रवीण ने कहा, मैंने कभी नहीं सोचा था कि अक्टूबर में इतनी बारिश होगी।</p>
<p style="text-align: justify;">कानपुर के गांव केंडा कल्याणपुर के किसान रघुनाथ सिंह ने बताया कि उन्होंने डेढ़ एकड़ में सुनहरी बासमती की फसल लगाई थी, जिसे काटकर खेतों में रखा था। बारिश के काऱण पानी खेत में भर गया जिसके कारण फसल खराब होने का डर है। उन्होंने कहा कि उनके एरिया के अधिकतर किसानों को धान की फसल 10-15 दिन में तैयार हो जाती, लेकिन बारिश के कारण कटाई में देऱी होगी। उन्होंने बताया कि बारिश के कारण तिल, मूंगफली और लहसुन की फसल को भी नुकसान हुआ है। कई किसानों ने तोरिया-आलू की बुआई की है। जलभराव होने से इन फसलों को नुकसान पहुंचा है। कुछ खेतों में आलू की बुवाई की तैयारी चल रही थी, लेकिन भारी बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।</p>
<p style="text-align: justify;">जिला बुलंदशहर के ग्राम नेकपुर के बायो एनर्जी फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के निदेशक किसान प्रीतम सिंह ने <strong><em>रूरल वॉयस</em></strong> को बताया कि हमारे एफपीओ के सदस्य किसान मुख्य रूप से बासमती की खेती करते हैं. उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र में क्रमश: 7, 8 और 9 अक्टूबर को 15, 40 और 70 मिमी बारिश हुई है.उन्होंने बताया कि उनके एरिया में स्थापित वर्षा मापी यंत्र&nbsp; से&nbsp; आंकडा लिया गया है। इस बारिश से धान के खेतों में अगेती काटी गई बासमती फसल पूरी तरह भीग गई है। देर से पकने वाली बासमती किस्मों की 60 प्रतिशत तक फसल खेतों में गिर चुकी है। जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है।</p>
<p style="text-align: justify;">सहारनपुर जिले के जंधेड़ी गांव&nbsp; के किसान अमरनाथ खटाना ने <em><strong>रूरल वॉयस</strong></em> को बताया कि हमारे क्षेत्र में धान की अगेती फसल कट गई है, लेकिन इस बारिश के कारण खेतों में ज्यादा नमी के काऱण अब सरसों की बुवाई में देरी होगी। धान की सामान्य फसल खड़ी है। खेतों में नमी के कारण उनकी कटाई में देरी हो रही है जिससे रबी फसलों की बुवाई में देरी होगी।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>विशेषज्ञों की सलाह</strong><br />इस संबंध में मऊ के कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. एल सी वर्मा ने <strong>रूरल वॉयस &nbsp;</strong>को बताया कि अचानक हुई बारिश से किसानों की धान की फसल की कटाई में देरी होगी, जिससे रबी फसलों, मुख्य रूप से तोरिया, सरसों और आलू की बुवाई में देरी होगी। खेतों में जलभराव के कारण कंबाइन से धान कटाई करना मुश्किल होगा। नमी के कारण चावल के दाने अधिक टूटते हैं। उन्होंने बताया कि इस बारिश के कारण मुख्य रूप से अरहर, मूंग और तिल की फसलों को नुकसान हुआ है। दलहनी फसलों में ज्यादा पानी लगने से नुकसान होगा, क्योंकि अधिक पानी खेतों लगने से पौधे मुरझा जाएगे। इसलिए किसान खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था करें।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">आजमगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर. पी. सिंह ने कहा कि इस बारिश से सब्जियों की फसलों का नुकसान बढ़ गया है। किसानों को सब्जी के खेतों में नालियां बनाकर पानी निकालना चाहिए। और मिट्टी को जड़ों के पास रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि धान की कटाई और बारिश के कारण गेहूं की बुवाई में देरी होने पर किसान पिछले साल के हीट वेब को देखते हुए गेहूं अनुसंधान केंद्र करनाल द्वारा विकसित कम अवधि की गेहूं की किस्मों की बुवाई करें।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बारिश से धान के साथ तिल और सब्जी की फसलों को भी नुकसान, रबी की बुवाई में भी होगी देरी ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य़ प्रदेश  के मुरैाना में राष्ट्रीय बीज निगम  स्थापित करेगा जैविक बीज फार्म]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/nsc-will-establish-organic-seed-farm-on-morena-foundation-laid-by-agriculture-minister.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 27 Sep 2022 14:10:51 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
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        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">मध्य़ प्रदेश मुरैना में राष्ट्रीय बीज निगम (एनएससी) के जैविक बीज फार्म स्थापित करेगा। इसके शुरू होने से &nbsp;मध्य प्रदेश के किसानों को नये जैविक तिलहन बीज उपलब्ध होंगे। इस फार्म से किसानों को आधुनिक तरीकों को भी अवगत कराया जाएगा और उन्हें अधिक उपज देने वाले बीज&nbsp; उपलब्ध कराया जाएगा, इससे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकेगा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इसकी आधारशिला रखी।</p>
<p style="text-align: justify;">इस अवसर पर तोमर ने कहा कि पर्यावरण, <span>वन</span>, <span>जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय चंबल वन्यजीव अभयारण्य की तरफ </span>207<span> हेक्टेयर भूमि डी नोटिफिकेशन की -अधिसूचना की सिफारिश करने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया गया है। यह अभयारण्य क्षेत्र &nbsp;में राजस्व भूमि &nbsp;होने से रेत की उपलब्धता स्थानीय स्तर पर होगी,</span>&nbsp;<span>जिससे रोजगार भी बढ़ेगा।</span></p>
<p style="text-align: justify;">केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने उबड़-खाबड़ क्षेत्र में भूमि सुधार कर जैविक बीजों के उत्पादन के लिए मुरैना में एक फार्म स्थापित करने का निर्णय लिया है. इसके लिए मध्य प्रदेश. सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय को मुरैना के 4<span> गांवों (गडोरा</span>, <span>जखौना</span>, <span>रिठौरा खुर्द</span>, <span>गोरखा) में </span>885.34<span> हेक्टेयर. जमीन आवंटित कर दी गई है। यह भूमि चंबल का उबड़-खाबड़ इलाका है और क्षेत्र में बीहड़ों की मौजूदगी के कारण कृषि कार्य नहीं हो सका</span>,<span>लेकिन एनएससी किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है इसलिए </span>15<span> लाख क्विंटल गुणवत्तायुक्त प्रमाणित बीज उत्पादित कर किसानों को &nbsp;किसानों को उपलब्ध करा रहा है।इसलिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने मुरैना में जैविक बीजों के उत्पादन के लिए खेतों को विकसित करने की जिम्मेदारी एनएससी को सौंपी है। </span></p>
<p style="text-align: justify;">कृषि मंत्री ने कहा कि बीज फार्म विकसित करने से मुरैना में भूमि में सुधार होगा और भूमि उपजाऊ बनेगी। इससे स्थानीय किसान भी प्रेरित होंगे और वैज्ञानिक पद्धति से बीज उत्पादन कर अपने खेतों में भूमि का सुधार करेंगे और खेती में कम लागत में अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त करेंगे। यहां किसानों को बीज उत्पादन की नवीनतम तकनीक सीखने को मिलेगी। एनएससी विशेषज्ञ स्थानीय और क्षेत्रीय किसानों को प्रशिक्षण के माध्यम से नवीनतम बीज उत्पादन तकनीक सिखाएंगे।</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;कृषि मंत्री तोमर कहा कि मुरैना के स्थानीय श्रमिकों को खेत में भूमि सुधार व बीज उत्पादन से रोजगार मिलेगा। मुरैना फार्म से नवीनतम एवं आनुवंशिक एवं भौतिक रूप से शुद्ध जैविक तिलहन प्राप्त करने से किसानों को अच्छा उत्पादन प्राप्त होगा। इससे न केवल राज्य के किसानों के सामाजिक-आर्थिक स्तर में सुधार होगा, <span>बल्कि किसानों को पोषण सुरक्षा भी मिलेगी। मुरैना का बीज फार्म किसानों की प्रगति के लिए विज्ञान और अनुसंधान का पूरा उपयोग करेगा।</span></p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;तोमर ने कहा कि बीज कृषि का आधार हैं। खेती के लिए अच्छे बीजों की उपलब्धता से कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र और समग्र रूप से अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है, <span>इसके अलावा उत्पादकता और किसानों के लिए उच्च आय में वृद्धि होती है। केंद्र सरकार राज्यों में बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बीज वितरण में मदद करती है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने गुणवत्ता बीज उत्पादन और फसलों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए 2014-15 से बीज और रोपण सामग्री सब्सिडी लागू की है</span>, <span>ताकि किसानों को पर्याप्त बीज मिल सके।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य़ प्रदेश  के मुरैाना में राष्ट्रीय बीज निगम  स्थापित करेगा जैविक बीज फार्म ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कम बारिश से बिहार में धान की पैदावार में 20% गिरावट की आशंका, झारखंड में भी स्थिति खराब]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/20-percent-decline-in-the-production-of-paddy-in-bihar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 25 Sep 2022 09:20:45 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/20-percent-decline-in-the-production-of-paddy-in-bihar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>पटना, 25 सितंबर,2022&nbsp;</strong></em></p>
<p><span style="font-weight: 400;"> बिहार में इस साल धान की फसल को बाढ़ और सुखाड़ दोनों का सामना करना पड़ा है। राज्य में&nbsp; लगभग 34 लाख हेक्टयर में धान की खेती की जाती है, लेकिन इस जुलाई में हुई कम बारिश से लगभग 20 प्रतिशत क्षेत्र में धान की खेती नहीं हो पाई। बाद में भी कहीं ज्यादा बारिश हुई तो कहीं बहुत कम। विशेषज्ञों के अनुसार इसका असर धान के उत्पादन पर पड़ना तय है। इसमें 15 से 20 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। कम बारिश के कारण झारखंड में भी धान की फसल प्रभावित हुई है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भारतीय कृषि अनुंसधान परिषद (आईसीएआर, पूर्वी क्षेत्र, पटना) के डायरेक्टर डॉ आशुतोष उपाध्याय ने रूरल वॉयस से बातचीत में कहा कि धान की समय से बुवाई और रोपाई का पैदावार से गहरा संबध है। इसलिए जुलाई-अगस्त में कम बारिश के कारण बिहार में धान की उपज में लगभग 20 प्रतिशत गिरावट आएगी। अभी जो बारिश हो रही है, उससे पहले हो चुके नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">डॉ उपाध्याय ने कहा कि बिहार में मानसून 25 जून के आसपास प्रवेश करता है, लेकिन जुलाई में औसत से 87 प्रतिशत कम बारिश हुई। जुलाई में ही किसान धान की रोपाई करते हैं, लेकिन कम बारिश के कारण रोपाई नहीं हो पाई थी। जून से अगस्त तक पूरे बिहार में 60 प्रतिशत बारिश हुई है। लेकिन, राज्य में कई जिले ऐसे हैं, जहां बारिश का औसत सिर्फ 40 फीसदी रहा है। इस काऱण इस साल बिहार में धान के कुल उत्पादन में लगभग 15 से 20 फीसदी गिरावट की आशंका है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आईसीएआर पूर्वी क्षेत्र पटना के एक्सटेंशन हेड डॉ उज्ज्वल कुमार ने रूरल वॉयस को बताया कि राज्य सरकार ने इस साल 35.12 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य रखा था। अगर सामान्य बारिश होती तो जुलाई में कम से कम 40 प्रतिशत एरिया में धान की रोपाई पूरी हो जाती। लेकिन कम बारिश के काऱण केवल 19 प्रतिशत एरिया में धान की रोपाई हो पाई। बचे हुए एरिया में किसानों ने भले देरी से रोपाई की हो, लेकन इससे पैदावार में गिरावट तय है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">डॉ उज्जवल कुमार ने कहा कि बिहार में धान की खेती का एक बड़ा हिस्सा बारिश पर निर्भर है। जुलाई-अगस्त में कम बारिश के चलते उत्पादन में लगभग 15 से 20 प्रतिशत गिरावट आएगी। धान फसल में पानी के अभाव में पौधों में कल्ले नहीं निकलते हैं। उन्होंने कहा कि दो लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में धान की कम खेती होने का अनुमान है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">डॉ कुमार ने बताया कि झारखंड में जुलाई-अगस्त में कम बारिश की वजह से ऐसा पहली बार हुआ कि 30 फीसदी जमीन पर ही खेती हुई है। पिछले वर्ष इस समय तक 91 प्रतिशत से अधिक भूमि पर धान की खेती हुई थी। 2020 में 90 प्रतिशत भूमि पर, 2019 में 50 प्रतिशत और 2018 में 71 प्रतिशत भूमि पर धान की खेती की गई थी। इस बार कुछ जगहों पर मक्का, दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती की गई है। कुल मिलाकर खरीफ की फसल 37.19 प्रतिशत ही हुई है, जो पिछली बार के मुकाबले 46 फीसदी कम है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आईसीएआर पूर्वी क्षेत्र पटना के पादप प्रजनन के कृषि वैज्ञानिक डॉ संतोष कुमार ने बताया कि जुलाई अगस्त में जब धान में कल्ले फूटने की अवस्था होती है, उस समय पानी नहीं मिला तो जिस पौध में 10 कल्ले फूटने चाहिए उसमें पांच से सात कल्ले ही निकलेंगे और बालियां भी कम बनेंगी। इस तरह शुरू में ही कम बारिश के चलते धान की फसल में लगभग 15 से 20 प्रतिशत का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि धान की फसल में कुछ अवस्थाओं में पानी का होना बहुत जरूरी है। उस समय पानी की किल्लत हो गई तो उपज पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस समय जो बारिश हो रही है, उससे पुराने नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती है। </span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कम बारिश से बिहार में धान की पैदावार में 20% गिरावट की आशंका, झारखंड में भी स्थिति खराब ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चीनी के मामले में महाराष्ट्र से क्यों पिछड़ रहा है उत्तर प्रदेश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/why-uttar-pradesh-is-lagging-behind-maharashtra-in-sugar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 19 Sep 2022 10:07:12 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/why-uttar-pradesh-is-lagging-behind-maharashtra-in-sugar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पिछले साल तक देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य का तमगा रखने वाला उत्तर प्रदेश इस&nbsp;मामले में बहुत तेजी से महाराष्ट्र से पिछड़ता जा रहा है। 30 सितंबर को समाप्त होने वाले चालू सीजन (अक्तूबर 2021 से सितंबर 2022) में राज्य का चीनी उत्पादन 102.50 लाख टन रह गया है और आगामी सीजन में इसके 90 से 100 लाख टन के बीच रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं महाराष्ट्र का चीनी उत्पादन चालू सीजन में 137.30 लाख टन रहा जिसके&nbsp;आगामी सीजन में 150 लाख टन को पार कर जाने&nbsp;की उम्मीद है। यही नहीं,&nbsp;कर्नाटक जैसे राज्य में आगामी सीजन में चीनी उत्पादन 75 लाख टन तक पहुंच जाने&nbsp;का अनुमान है। जाहिर है कि उत्तर प्रदेश के पिछड़ने से यहां&nbsp;के किसानों और चीनी उद्योग दोनों को नुकसान हो रहा है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में गन्ना और चीनी उत्पादन में कमी का एक प्रमुख कारण तो यह है कि राज्य में 80 फीसदी से अधिक गन्ने की खेती सीओ-0238 किस्म की हो रही है जिस पर बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है। वहीं उद्योग सूत्रों का कहना है कि निर्यात, एथनॉल और बगास से बनने वाली बिजली की दरों के मामले में यहां के उद्योगों का महाराष्ट्र जैसे राज्य की तुलना में कमजोर स्थिति में होना भी बड़ी वजह हैं।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में इस साल कम&nbsp;बारिश के चलते गन्ने के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ा&nbsp;है, हालांकि&nbsp;इसका असर&nbsp;मध्य उत्तर प्रदेश में अधिक है।&nbsp;राज्य के जिन हिस्सों में सिंचाई की सुविधा कमजोर है और किसानों के पास सिंचाई के बेहतर संसाधन नहीं हैं वहां कमजोर बारिश का प्रतिकूल असर अधिक है।&nbsp;दूसरी बड़ी वजह गन्ना की फसल में बीमारी का प्रकोप है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक पूरे उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल रेड रॉट बीमारी से प्रभावित है। कुछ हिस्सों में बीमारी का असर कम है तो कुछ हिस्सों में बहुत अधिक है। इसके चलते जहां किसानों को उत्पादन घटने का नुकसान है तो&nbsp;चीनी की रिकवरी में कमी से चीनी मिलों को भी&nbsp;नुकसान है।</p>
<p>दरअसल, गन्ने की सबसे कामयाब मानी जाने&nbsp;वाली&nbsp;किस्म सीओ-0238 बीमारी से बुरी तरह प्रभावित हो&nbsp;गई है। आईसीएआर के कोयंबतूर सेंटर में डॉ. बख्सीराम द्वारा विकसित यह किस्म 2009 में रिलीज की गई थी। इस किस्म ने उत्पादकता और चीनी रिकवरी के नये रिकॉर्ड बनाए। उत्तर प्रदेश में साल 2014-15 में 21 लाख हैक्टेयर गन्ना क्षेत्र में से केवल दो लाख हैक्टेयर, यानी आठ फीसदी में&nbsp;सीओ-0238 किस्म&nbsp;की खेती हुई थी। लेकिन उसके बाद इसका क्षेत्रफल तेजी से बढ़ा और 2020-21 में राज्य के कुल 27 लाख हैक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल का 87 फीसदी हिस्सा (24 लाख हैक्टेयर)&nbsp;इस किस्म के तहत आ गया।</p>
<p>इस बीच राज्य में गन्ने की औसत उत्पादकता 65.15 टन से बढ़कर 81.50 टन प्रति हैक्टेयर पर पहुंच गई। वहीं चीनी की रिकवरी&nbsp;भी&nbsp;9.54 फीसदी से बढ़कर 11.73&nbsp;फीसदी पर पहुंच गई। लेकिन&nbsp;पिछले&nbsp;साल यह घटकर 11.46&nbsp;फीसदी पर&nbsp;आ गई। चालू सीजन में&nbsp;भी&nbsp;रिकवरी घटकर 11.15 फीसदी रहने का अनुमान है। यानी दो सीजन से रिकवरी&nbsp;घट रही है।</p>
<p>इसी तरह, चालू सीजन में गन्ने की उत्पादकता भी घटकर 79.50 टन प्रति हैक्टेयर रह गई। इसका संकेत चीनी मिलों में गन्ने की पेराई के आंकड़े भी दे रहे हैं। साल 2019-20 में 11.28 करोड़ टन गन्ने की पेराई हुई थी जो 2020-21 में यह घटकर 10.28 करोड़ टन और चालू सीजन में 10.09 करोड़ टन रह गई। जबकि कुल गन्ना क्षेत्रफल पिछले साल 27 लाख हैक्टेयर और चालू सीजन में 28 लाख हैक्टेयर रहा। हालांकि चालू सीजन में सीओ-0238 के तहत गन्ने का क्षेत्रफल&nbsp; पांच फीसदी घटकर 82 फीसदी रह गया।</p>
<p>इस बारे में <strong>रूरल वॉयस</strong> ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों से बात की तो उन्होंने कहा, राज्य सरकार को यह&nbsp;बात समझनी&nbsp;चाहिए कि किसी भी फसल&nbsp;के कुल क्षेत्रफल में किसी एक किस्म की&nbsp;हिस्सेदारी इतनी&nbsp;अधिक नहीं होनी&nbsp;चाहिए। सिंगल वेरायटी होना भी बीमारी बढ़ने की एक बड़ी वजह है। इस वेरायटी को रिप्लेस करने के लिए&nbsp;पर्याप्त&nbsp;काम भी&nbsp;नहीं हुआ है। वैज्ञानिकों&nbsp;के अनुसार किसी भी किस्म के लिए 12-13 साल का समय बहुत लंबा होता है,&nbsp;इसके विकल्प को तेजी से&nbsp;अपनाने की जरूरत है।</p>
<p>चीनी उद्योग से जुड़े सूत्रों की मानें तो अभी इस किस्म का कोई विकल्प उस तरह नहीं उभरा जिसे किसान तेजी से अपना सकें। इस मामले में राज्य का एक्सटेंशन डिपार्टमेंट नाकाम साबित होता दिख रहा है। मौजूदा परिस्थिति में सीओ-0238 को रिप्लेस करना ही समाधान&nbsp;है,&nbsp;लेकिन यह तभी संभव है जब उत्पादकता और चीनी रिकवरी के मामले में सही विकल्प उपलब्ध हो सके।</p>
<p>उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों का कहना है कि वे निर्यात के मामले में भी महाराष्ट्र से पिछड़ रही हैं। बंदरगाह के करीब होने के चलते अधिकांश निर्यात महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक की चीनी मिलें ही कर रही हैं। कुल 112 लाख टन निर्यात में उत्तर प्रदेश से करीब 10 लाख टन चीनी का ही निर्यात हुआ है, जबकि महाराष्ट्र से 65 लाख टन और कर्नाटक से 35 लाख टन चीनी का निर्यात हुआ।</p>
<p>मिलों का कहना है कि लागत अधिक होने के चलते हमें एथनॉल उत्पादन का दाम&nbsp;भी&nbsp;कम मिलता है। खासतौर से गन्ने के रस से सीधे एथनॉल उत्पादन में हम नुकसान की स्थिति में हैं। इसका नतीजा यह होगा कि राज्य में गन्ने के रस से सीधे एथनॉल उत्पादन बढ़ने की संभावना कमजोर हो जाएगी। बेहतर होगा कि केंद्र सरकार एथनॉल की कीमतें क्षेत्रीय आधार पर तय करे।</p>
<p>एक अन्य मुद्दा चीनी मिलों द्वारा अतिरिक्त बगास से तैयार बिजली की कीमत को लेकर है। उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों के सूत्रों का कहना है कि राज्य में चीनी मिलें करीब 1200 मेगावाट बिजली उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) को बेचती हैं,&nbsp;लेकिन रेट अन्य राज्यों की तुलना में कम है। उत्तर प्रदेश बिजली नियामक आयोग (यूपीईआरसी) ने&nbsp;ही बिजली की दर कम तय की&nbsp;है। उद्योग का कहना है कि जब बगास की कीमतें आसमान छू रही हैं तब&nbsp;यूपीईआरसी ने बगास की दर 1010 रुपये प्रति टन तय की है, और इसी आधार पर&nbsp;बिजली की कीमत तय&nbsp;की जाती है।</p>
<p>केंद्रीय बिजली नियामक आयोग (सीईआरसी) ने उत्तर प्रदेश के लिए बगास की दर 2095 रुपये प्रति टन तय कर रखी है। गुजरात में नियामक ने बगास की कीमत 2075 रुपये प्रति टन और महाराष्ट्र में 2509 रुपये प्रति टन तय कर रखी है। बगास की कीमत को&nbsp;आधार बनाने&nbsp;के कारण उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों को बिजली का&nbsp;कम दाम मिल रहा है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में एक बड़ी समस्या किसानों को समय पर गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने की है। राज्य सरकार के तमाम दावों के उलट किसानों को गन्ने के मूल्य का समय से भुगतान नहीं हो रहा है। इस मुद्दे पर हाल ही में शामली जिले में किसानों ने लंबा धरना-प्रदर्शन किया। अमरोहा से लोकसभा सांसद कुंवर दानिश अली को भेजे एक पत्र में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने बताया कि एक सितंबर, 2022 तक उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर किसानों का 4832.49 करोड़ रुपये का बकाया था। हो सकता है कि इसमें कुछ भुगतान हो गया हो लेकिन राज्य सरकार भुगतान के बकाया के आंकड़े जारी करने को लेकर बहुत उत्साहित नहीं दिखती है। हालांकि उद्योग का कहना है कि अधिकांश चीनी मिलों ने भुगतान कर दिया है, केवल कुछ समूहों और चीनी मिलों पर ही बकाया है। इस समय उद्योग की आय की जो स्थिति है, उसमें किसानों को समय से भुगतान करना मुश्किल नहीं है और कई समूह गन्ना आपूर्ति के 14 दिन में भुगतान कर रहे हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी के मामले में महाराष्ट्र से क्यों पिछड़ रहा है उत्तर प्रदेश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पहले अत्यधिक बारिश और फिर सूखे जैसे हालात से राजस्थान की प्रमुख फसलों  की पैदावार में भारी गिरावट की  आशंका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/due-to-uneven-rains-the-yield-of-main-crops-of-rajasthan-is-likely-to-decline-drastically..html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 18 Sep 2022 09:33:05 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/due-to-uneven-rains-the-yield-of-main-crops-of-rajasthan-is-likely-to-decline-drastically..html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">राजस्थान में इस साल मानसून की अच्छी शुरूआत के बाद किसानों ने बड़े पैमाने पर उड़द और मूंग की बुवाई की, लेकिन बुवाई के कुछ ही दिनों बाद हुई अत्यधिक बाऱिश और फिर सूखे जैसे हालात के चलते इन फसलों में 40 से 50 फीसदी तक नुकसान का अंदेशा जताया जा रहा है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रूरल वॉयस से बातचीत करते हुए कृषि अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान अटारी जोधपुर के डायरेक्टर डॉ एस. के. सिहं ने बताया कि अगस्त में हुई भारी बारिश से मूंग औऱ उड़द की फसल को काफी नुकसान हुआ है। ज्य़ादा बारिश से कई जगह फसलें गिर गईं और गलने लगीं। जो फसल बची है उसमें ज्यादा फलिया नहीं बन रही हैं। उन्होंने बताया कि अधिक बारिश के चलते पौधों में ज्यादा वानस्पतिक वृद्धि होती है और फलियां कम बनती हैं। इस समय बारिश ना होने से नमी की कमी और अधिक तापमान के कारण भी उपज में गिरावट आएगी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">डॉ. सिंह के अनुसार ज्यादा बारिश होने से सबसे ज्यादा ज्वार और मूंग की फसल खराब हुई है।&nbsp; इसके अलावा कई इलाकों में उड़द, मक्का, ग्वार, सोयाबीन और मूंगफली की फसलें खराब हुई हैं। फसल खराब होने के कारण किसानों को लागत निकलना भी मुश्किल लग रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में अगस्त में अधिक बारिश और बाद में सूखे के कारण तिल की उपज में भी गिरावट आएगी।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उन्होंने कहा कि राजस्थान में बाजरा सबसे अधिक होता है। इसकी खेती लगभग 40 से 45 लाख हेक्टयर में की जाती है। बाजरा की पैदावार सात से लेकर दस फीसदी तक कम हो सकती है। बाजरा में दाना बनने की अवस्था पानी की जरूरत होती है, लेकिन उस समय बारिश न होने से बालियों में दाने का वजन का कम होगा।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">डॉ सिंह ने कहा कि शुरू में अधिक बारिश और बीच में सूखे जैसे हालात के कारण राजस्थान की प्रमुख फसलों ग्वार, मोठ और मक्का की पैदावार में गिरावट आएगी। अगर सितम्बर में बारिश हो जाती है तो तोरिया सरसो और दलहनी फसलों की अच्छी बुवाई हो जाएगी नहीं तो रबी फसलों पर भी इस सूखे का असर पड़ेगा।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/09/image_750x500_6325c567a2903.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पहले अत्यधिक बारिश और फिर सूखे जैसे हालात से राजस्थान की प्रमुख फसलों  की पैदावार में भारी गिरावट की  आशंका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[विशेषज्ञों का अनुमान, यूपी में दो हफ्ते बारिश नहीं हुई तो 20% तक घट सकता है धान उत्पादन]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/if-rainfall-does-not-improve-paddy-production-may-decline-up-to-20-percent-in-uttar-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 12 Sep 2022 07:27:10 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/if-rainfall-does-not-improve-paddy-production-may-decline-up-to-20-percent-in-uttar-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">उत्तर प्रदेश में अगले दो सप्ताह में बारिश नहीं हुई तो सूखे के कारण धान का उत्पादन 20 फीसदी तक गिर सकता है। उत्तर प्रदेश के कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, (अटारी) कानपुर के तत्वाधान में मेरठ स्थित सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि और प्रौद्योगकी विश्वविद्यालय में आयोजित कृषि विज्ञान केन्द्रों की 29वीं वार्षिक तीन दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने यह आशंका जताई। इस कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के डायरेक्टर और हर जिले के कृषि विज्ञान केन्द्रों ने हिस्सा लिया।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रूरल वॉयस के साथ चर्चा में रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के प्रसार निदेशक डॉ एस. एस. सिंह ने कहा कि पिछले सालों में अच्छी बारिश और नहर की सिंचाई व्यवस्था बेहतर होने से बुन्देलखंड एरिया में धान का रकबा बढ़ा है। पिछले साल झांसी जिले में नौ हजार हेक्टयर में धान की खेती की गई थी, जबकि इस साल किसानों ने 28 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इसी तरह, मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में पिछले साल 90 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की गई जबकी उसकी तुलना में इस साल किसानो ने दो लाख हेक्टयर में धान की खेती की है। अगर बारिश नहीं हुई तो सूखे के कारण उत्पादन में गिरावट आएगी। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में दलहनी फसलों मूंग और उड़द के उत्पादन में 30 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। बारिश नहीं हुई तो बुंदेलखंड में रबी की फसलें भी प्रभावित होंगी।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">चन्द्रशेखर आजाद कृषि और प्रौद्योगकी विश्वविद्यालय कानपुर के प्रसार निदेशक डॉ अरविन्द सिंह ने कहा कि कानपुर और उससे सटे जिलों में अगर एक दो सप्ताह में बारिश नहीं हुई तो धान की फसल ज्यादा प्रभावित होगी। धान के उत्पादन में 30 फीसदी तक गिरावट आएगी। उन्होंने कहा कि दूसरी फसलों पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि और प्रौद्योगकी विश्वविद्यालय मेरठ के प्रसार निदेशक डॉ पी.के.&nbsp; सिंह ने कहा कि मेरठ औऱ नजदीकी जिलों में गन्ने की फसल पर सूखे का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। कृषि विज्ञान केन्द्र हापुड़ के हेड डॉ. हंसराज सिंह ने कहा कि एक-दो सप्ताह बारिश नहीं हुई तो पश्चिमी जिलों में अगेती धान के उत्पादन में सात से दस फीसदी गिरावट की आएगी और देर से पकने वाली धान की फसलों में 20 से 25 फीसदी तक उत्पादन घटने की आशंका है। कृषि विज्ञान केन्द्र बुलन्दशहर के हेड ड़ॉ लक्ष्मी कान्त ने कहा कि पश्चिमी जिलों में गन्ना की फसल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन धान के उत्पादन में गिरावट आ सकती है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">केन्द्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, रीजनल सेंटर लखनऊ के प्रिंसिपल साइंसिस्ट डॉ संजय अरोड़ा ने कहा कि उत्तर प्रदेश के क्षारी क्षेत्र वाले जिलों कन्नौज, कानपुर, लखनऊ, रायबरेली, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, इलाहाबाद औऱ आजमगढ़ जिलों में बारिश नहीं होने के काऱण भूमि के ऊपर नमक आ जाता है जिसके काऱण धान के पौधे मरने लगते हैं। इन जिलों में धान की फसल को ज्यादा नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की भूमि में बारिश ना होने से फसलों पर दीमक का प्रकोप भी बढ़ा जाता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">कृषि विज्ञान केन्द्र बहराइच के हेड बीपी शाही ने कहा कि उनके इलाके में बारिश ना होने के काऱण धान के उत्पादन में लगभग 30 फीसदी गिरावट हो सकती है। मक्के की भी फसल प्रभावित हो रही है। उन्होंने गन्ने के उत्पादन में सात से दस फीसदी गिरावट की आशंका व्यक्त की।&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ विशेषज्ञों का अनुमान, यूपी में दो हफ्ते बारिश नहीं हुई तो 20% तक घट सकता है धान उत्पादन ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार  किसानों को  तोरिया का निशुल्क बीज वितरण करेगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/uttar-pradesh-government-will-distribute-free-toria-seeds-to-the-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 02 Sep 2022 17:09:44 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/uttar-pradesh-government-will-distribute-free-toria-seeds-to-the-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रीपरिषद की गई बैठक में &nbsp;निर्णय लिया गया कि कमजोर मानसून के कारण &nbsp;जिन जिलों औऱ क्षेत्रो में खरीफ की बुवाई नहीं हो पाई है। ऐसे क्षेत्रों में खाली पड़े खेतों में बुवाई के लिए तोरिया की निःशुल्क बीज मिनीकिट का वितरण किया जायेगा। जिससे कि खरीफ में सूखे कारण हुए किसानों के नुकसान&nbsp; को&nbsp; कम किया जा सके। इस निःशुल्क बीज मिनीकिट के वितरण में लघु,<span>सीमान्त किसानों&nbsp; को प्राथमिकता दी जाएगी।</span></p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सुर्यप्रताप शाही ने बताया कि खरीफ मौसम में कमजोर मौसम के कारण &nbsp;राज्य में लगभग दो लाख हेक्टेयर एरिया में फसलों की बुवाई नहीं हो पूरी हुई है। उन एरिया में रबी फसलों के पहले किसानों के खाली खेतों में कमजोर मानसून से हुए नुकसान की भरपाई हो सके। &nbsp;क्योंकि तोरिया कम दिन की फसल है गेहूं की बुवाई पहले तोरिया&nbsp; की फसल तैयार हो जाती है। इसके बाद किसान आसानी से गेहूं की बुवाई कर सकता है। &nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इस योजना के तहत 100 <span>फीसदी राज्य सहायता के आधार पर दो किलो प्रति पैकेट तोरिया बीज मिनीकिट किसानों को निःशुल्क वितरण किया जायेगा। </span>निःशुल्क बीज मिनी किट वितरण के लिए &nbsp;प्रमाणित बीजों पर अनुदान के मद में 4.57 करोड़ <span>रुपये की धनराशि की व्यवस्था के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया ।</span></p>
<p style="text-align: justify;">तोरिया के निःशुल्क बीज मिनीकिट का वितरण पारदर्शिता मे पार्दिशता बनी रहे। इसके लिए सरकार ने&nbsp; ग्राम पंचायतों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों के सहयोग एवं उनकी उपस्थिति में तोरिया का मिनी किट का वितरण किया &nbsp;जायेगा। तोरिया के निःशुल्क बीज मिनीकिट का वितरण में 25 <span>फीसदी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित-जनजाति के किसानो प्राथमिकता दी जाएगी &nbsp;और बचे &nbsp;शेष अन्य किसानो &nbsp;को दिया जाएगा। इस वितरण में यह प्रयास किया जाएगा चयनित किसानों में </span>30 <span>फीसदी महिला किसानों की भागीदारी सुनिश्चित हो। सरकार को अनुमान है इस</span> योजना के क्रियान्वयन से राज्य को लगभग चार लाख क्विंटल अतिरिक्त तोरिया का उत्पादन प्राप्त होगा&nbsp; जिससे लाभार्थी किसानों को औसतन 8000 <span>रुपये प्रति हेक्टेयर का लाभ मिलेगा ।</span></p>
<p style="text-align: justify;">भारतीय कृषि अंनुसंधान संस्थान पूसा के सस्य विज्ञान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ राजीव कुमार सिंह ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि तोरिया एक खरीफ और रबी के बीच बोई जाने वाली तिलहन फसल है। इसकी खेती कर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है। यह फसल &nbsp;85 से &nbsp;90 दिनों में पक जाती है। अगर किसान उन्नत किस्मों की बुवाई करे 12 से 15 क्विंटल प्रति हैक्टेयर की उपज प्राप्त हो जाती&nbsp; है। अगर खेत में गेहूं की फसल बोनी है तो किसानों को तोरिया की &nbsp;सितंबर के पहले पखवाड़े में बुवाई कर देनी चाहिए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश सरकार  किसानों को  तोरिया का निशुल्क बीज वितरण करेगी ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश के 15 जिलों में लंपी स्किन रोग से 5823 पशु  प्रभावित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/lumpy-skin-disease-spread-in-15-districts-of-uttar-pradesh-5823-animals-affected.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 26 Aug 2022 16:44:05 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/lumpy-skin-disease-spread-in-15-districts-of-uttar-pradesh-5823-animals-affected.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">दुधारू पशुओं में लंपी स्किन रोग गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब &nbsp;के बाद उत्तर प्रदेश के 15 &nbsp;जिलों के 563 गांवों फैल चुका है। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग के अपर मुख्य&nbsp; सचिव रजनीश दुबे ने दो दिन पहले दी । उन्होंने बताया कि लंपी स्किन रोग से राज्य में 5823 पशु प्रभावित हुए हैं। राज्य में तेजी फैल रहे इस रोग से सरकार और पशुपालक चिंतित हैं&nbsp; क्योंकि राजस्थान में इससे दुधारू पशुओं की भारी क्षति हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार इसके प्रसार को रोकने के लिए अलर्ट मोड़ में आ चुकी है। पशुपालन विभाग की तरफ से जानकारी दी गई है कि राजस्थान, हरियाणा से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों में इसका प्रभाव है और अलीगढ़, सहारनपुर, मेरठ, बरेली, मुरादाबाद, आगरा मंडल के जिलों के पशुओं में &nbsp;लंपी स्किन रोग देखने को मिल रहा है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस रोग के संक्रमण और नुकसान को देखते हुए अपर मुख्य सचिव पशुधन एवं डेयरी विकास डॉ. रजनीश दुबे ने कहा कि पशु पालन विभाग उत्तर प्रदेश की तरफ से &nbsp;17.50 लाख वैक्सीन की आपात व्यवस्था की जा रही है। उत्तर प्रदेश में डॉक्टरों के साथ-साथ पैरावेट और गौ सेवकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पशुपालन निदेशालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है। पशुपालन निदेशालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है। जिनका नंबर 0522-2741191, <span>टोल फ्री नंबर 18001805141 और मोबाइल नंबर 7880776657 है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">लंपी स्किन रोग की निगरानी के लिए पशुपालन विभाग पशुधन और दुग्ध उत्पादन मंत्री धर्मपाल सिंह&nbsp; के नेतृत्व मे &nbsp;टीम -9 का गठन किया है &nbsp;जो राज्य के सभी मंडलों की निगरानी करेगी। पशुधन और दुग्ध उत्पादन मंत्री धर्मपाल सिंह ने विभागीय अधिकारियों को ढेलेदार रोग नियंत्रण के लिए मिशन मोड में इस छह दिवसीय अभियान को पूरा करने को कहा है। उन्होंने कहा कि लंपी स्किन रोग की रोकथाम के लिए उपचार, <span>टीकाकरण</span>, <span>जन जागरूकता एवं प्रशिक्षण गतिविधियों की नियमित रूप से समीक्षा की जाए और दवाओं</span>, <span>उपकरणों एवं पशुओं के चारे की व्यवस्था की जाए। पशुपालन निदेशालय में स्थापित नियंत्रण कक्ष में प्राप्त शिकायतों</span>, <span>सुझावों एवं सूचनाओं की नियमित रूप से समीक्षा की जाये। दुग्ध समितियों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करें।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;<strong>रूरल वॉयस</strong>&nbsp;<span>ने नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज&nbsp; के सहायक प्रध्यापक</span>&nbsp;<span>और पशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजपाल दिवाकर से बात की तो उन्होंने बताया कि यह रोग गायों एवं भैंसों में कैंप्री पॉक्स वायरस के संक्रमण से होता है। यह मच्छर</span><strong>,&nbsp;</strong><span>मक्खी के पशुओं को लार,जूठे जल एवं पशु के चारे के द्वारा फैलता है। संक्रमित पशु के शरीर पर बैठने वाली किलनी</span><strong>,&nbsp;</strong><span>मच्छर व मक्खी&nbsp; से भी यह फैलता है। इससे सिर और गर्दन के हिस्सा में काफी तेज दर्द होता है। पशुओं की दूध देने की क्षमता भी कम हो जाती है। बीमार पशुओं को एक दूसरे जगह ले जाने या उसके संपर्क में आने वाले स्वस्थ पशु भी संक्रमित हो जाते हैं। गायों और भैंसों के एक साथ तालाब में पानी पीने</span><strong>-</strong><span>नहाने और एकत्रित होने से भी रोग का प्रसार हो सकता है।</span></p>
<p>डॉ. दिवाकर ने बताया कि लंपी स्किन बीमारी का प्रकोप गर्म एवं नमी वाले मौसम में अधिक होता है। मौजूदा समय में जिस तरह से गर्मी व उमस बढ़ रही है उससे रोग फैलने का खतरा भी बढ़ा है। हालांकि ठंड के मौसम में स्वतः इसका प्रभाव कम हो जाता है।</p>
<p>वेटनरी हास्पिटल हरसौली, जयपुर&nbsp; <span>के प्रभारी</span>&nbsp;<span>औऱ पशु चिकित्सक डॉ. बंशीधर यादव ने चिकित्सा के दौरान अपने फील्ड के</span>&nbsp; <span>अनुभव के बारे में बताया कि इसमें पहले पशु</span>&nbsp; <span>लंगड़ा कर चलते हैं</span>, <span>फिर पैरो में सूजन</span>, <span>शरीर पर गांठ बन रही। पशु को </span>105 <span>डिग्री तेज बुखार हो जा रहा है। इसके साथ पशु के मुंह से लार गिरने लगती है और वह खाना-पीना छोड़ देता है।</span>&nbsp;<span>उन्होंने बताया था कि रोग लक्षण दिखाई देने पर पशु का इलाज कराए . और जिन पशु में रोग का लक्षण नही है उनका तुरन्त &nbsp;वैक्सीनेशन कराए ।</span></p>
<p>डॉ. बंशीधर ने बताया कि अगर प्रकार कोई भी लक्षण दिखने पर किसान तुरन्त घरेलू इलाज शुरू कर दें। 500 <span>ग्राम हल्दी</span>, 500 <span>ग्राम काली जीरी</span>, 100 <span>ग्राम काली मिर्च</span>, 300 <span>ग्राम अजवायन</span>, <span>नीम के पत्ते</span>, <span>गिलोय पत्ते और एक किलो गुड़ को पांच लीटर पानी में मिलाकर गर्म करके करके बीमार पशु को सुबह-शाम </span>150 <span>मिलीलीटर देने से पशुओं में सुधार देखा गया है। अगर सुधार नहीं हो रहा है तो तुरन्त पशु चिकित्सक की सलाह लें।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश के 15 जिलों में लंपी स्किन रोग से 5823 पशु  प्रभावित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[राजस्थान के 18 जिलों में फैला लंपी रोग, अब तक  हजारों मवेशियों की मौत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/animal-husbandry-is-worried-about-lumpy-skin-disease-spreading-rapidly-in-rajasthan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 19 Aug 2022 11:41:59 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/animal-husbandry-is-worried-about-lumpy-skin-disease-spreading-rapidly-in-rajasthan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-weight: 400;">पशुओं में लंपी स्किन रोग राजस्थान के 18 जिलों में फैल गया है। इससे अब तक कई हजार मवेशियों की मौत हो चुकी है और चार लाख से ज्यादा अभी प्रभावित हैं। प्रदेश में तेजी फैल रहे इस रोग से सरकार और पशुपालक परेशान हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रूरल वॉयस ने ग्राउंड रिपोर्ट जानने के लिए जयपुर जिले के ग्राम लोहरवाड़ा के पशुपालक मोहन लाल यादव से संम्पर्क किया तो उन्होंने बताया कि उनके पास 15 दूधारू पशु हैं जिनमें से तीन लंपी स्किन रोग से ग्रसित हैं। उन्होंने बताया कि पहले हमारी गाय लंगड़ा कर चल रही थी, फिर पैरों में सूजन आ गया। उसके शरीर पर एक से डेढ़ इंच की गांठ बनने लगी, तेज बुखार आने लगा और मुंह से लार गिरने लगा। इसके बाद गाय ने चारा लेना छोड़ दिया। पशु चिकित्सक ने गायों को इंजेक्शन औऱ दवाई दी है और अभी पशुओं की सेहत में सुधार है। यादव ने बताया कि उनके गांव में 20-25 पशु लंपी रोग से ग्रसित हैं।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">जयपुर के ही ग्राम मोहम्मदाबाद के पशुपालक हल्दी राम चौधरी ने रूरल वॉयस को बताया कि उनके पांच दूधारू पशुओं में से एक लंपी स्किन रोग से ग्रसित है। इलाज के बाद अभी सुधार है। उनके गांव में सात पशु लंपी स्किन रोग से ग्रसित हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">राजस्थान के पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया ने बुधवार को कृषि विभाग के प्रमुख शासन सचिव दिनेश कुमार, पशुपालन विभाग के शासन सचिव पीसी किशन एवं विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्थिति की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">कटारिया ने कहा कि राज्य सरकार पूरी गंभीरता व संवेदनशीलता के साथ लम्पी रोग पर नियंत्रण के लिए कार्य कर रही है। संक्रमण से बचने के लिए सफाई रखने, सोडियम हाइपोक्लोराइट का छिड़काव करने और फॉगिंग करने के आदेश दिए गए हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">राजस्थान पशुपालन विभाग के शासन सचिव पीसी किशन के मुताबिक लम्पी स्किन रोग की रोकथाम के लिए गोट पॉक्स वैक्सीन की 41 लाख डोज खरीदने की तैयारी है। उन्होंने बताया कि अजमेर जिला दुग्ध उत्पादक संघ ने वैक्सीन के&nbsp; एक लाख डोज खरीद कर टीकाकरण शुरू कर दिया है। अलवर जिला दुग्ध उत्पादक संघ ने 6.80 लाख, कोटा ने एक लाख तथा उदयपुर ने दो लाख गोट पॉक्स वैक्सीन की डोज खरीदने के आदेश जारी किए हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">वेटनरी हास्पिटल हरसौली जयपुर&nbsp; के प्रभारी&nbsp; औऱ पशु चिकित्सक डॉ बंशीधर यादव ने चिकित्सा के दौरान अपने फील्ड के&nbsp; अनुभव में बताया कि इसमें पहले पशु&nbsp; लंगड़ा कर चलते हैं, फिर पैरो में सूजन, शरीर पर गांठ बन रही। पशु को 105 डिग्री तेज बुखार हो जा रहा है। इसके साथ पशु के मुंह से लार गिरने लगती है और वह खाना-पीना छोड़ देता है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">डॉ बंशीधर ने बताया कि अगर प्रकार कोई भी लक्षण दिखने पर किसान तुरन्त घरेलू इलाज शुरू कर दें। 500 ग्राम हल्दी, 500 ग्राम काली जीरी, 100 ग्राम काली मिर्च, 300 ग्राम अजवायन, नीम के पत्ते, गिलोय पत्ते और एक किलो गुड़ को पांच लीटर पानी में मिलाकर गर्म करके करके बीमार पशु को सुबह-शाम 150 मिलीलीटर देने से पशुओं में सुधार देखा गया है। अगर सुधार नहीं हो रहा है तो तुरन्त पशु चिकित्सक की सलाह लें।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">लंपी स्किन बीमारी एक संक्रामक रोग है जो वायरस के कारण तेजी से फैलता है। अभी इसका कोई ठोस इलाज नहीं है, इसलिए वैक्सीन से ही रोकथाम की जा सकती है। यह रोग किलनी मच्छर</span><b>, </b><span style="font-weight: 400;">मक्खी के पशुओं लार जूठे जल एवं पशु चारे के द्वारा फैलता है। संक्रमित पशु के शरीर पर बैठने वाली किलनी</span><b>, </b><span style="font-weight: 400;">मच्छर व मक्खी से यह स्वस्थ पशु के शरीर में पहुंचता है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/08/image_750x500_62fe4c837a2d2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ राजस्थान के 18 जिलों में फैला लंपी रोग, अब तक  हजारों मवेशियों की मौत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कम बारिश वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए आईसीएआर ने  क्रॉप कंटीन्जेंसी प्लान जारी किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/icar-gives-crop-contingency-plan-for-eastern-uttar-pradesh-to-reduce-the-loss-of-farmers-due-to-less-rainfall.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 12 Aug 2022 18:51:34 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/icar-gives-crop-contingency-plan-for-eastern-uttar-pradesh-to-reduce-the-loss-of-farmers-due-to-less-rainfall.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">मुख्य धान उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी के कारण मौजूदा खरीफ सीजन में धान की बुवाई &nbsp;13<span> फीसदी &nbsp;कम होने के आंकड़े आ रहे हैं । पश्चिमी उत्तर प्रदेश में </span>36 <span>फीसदी की कमी &nbsp;बारिश कम हुई और </span>&nbsp;<span>वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश में </span>43 <span>फीसदी की कमी है। जुलाई माह में पूर्वी उत्तर प्रदेश के बहुत से जिलों में बारिश नहीं होने के कारण धान की खेती काफी प्रभावित हुई । पिछले साल की अपेक्षा इस साल धान का रकबा घटा है। जिसके चलते किसानों को हो रहे नुकसान को देखते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों के नुकसान को कम करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने आकस्मिक फसल योजना यानि क्रॉप कंटीन्जेंसी प्लान जारी किया है। &nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए फसल कंटीन्जेंसी प्लान के संबंध में आईसीआर के संस्थान एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट कानपुर&nbsp; (अटारी) के डायरेक्टर डॉ यू एस गौतम ने<strong> रूरल वॉयस</strong> से आकस्मिक फसल योजना के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि जिन क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों की बुवाई नहीं हो पाई है, उन एरिया के किसान &nbsp;कम अवधि या काफी कम अवधि वाली धान की किस्मों का चुनाव करें। 15 अगस्त तक रोपाई &nbsp;का कार्य पूरा कर ले। इसके लिए एनडीआर 118 जैसी छोटी अवधि की किस्मों का उपयोग करें। 21 दिन पुरानी नर्सरी या 12 दिन पुरानी एसआरआई विधि से रोपाई करें वर्षा सिंचित क्षेत्र में पारंपरिक रोपाई पर डाइरेक्ट सीड राइस तकनीक &nbsp;(डीएसआर) से बुवाई करे करें या धान सीधी बुवाई के लिए ड्रम सीडर का उपयोग करें।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>धान की जगह किसान वैकल्पिक फसलों की खेती करें</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अटारी के डायरेक्टर डॉ. गौतम ने कहा कि धान की जगह वैकल्पिक फसलें, जैसे बाजरा, मक्का, तिल, उड़द की बुवाई &nbsp;जानी चाहिए। खेतो में नमी संरक्षण के उपाय जैसे खेत की मेड़, मेड़ और कुंड, संरक्षण कुंड, चौड़ी क्यारी और कुंड प्रणाली, मल्चिग का किसान इस्तेमाल करें।उन्होंने कहा कि असिंचित क्षेत्रों में, पशुओं के चारा के लिए बाजरा, ग्वार और लोबिया को उगाएं।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सूखे से बचाने के लिए &nbsp;यूरिया के घोल का छिडकाव करें</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डॉ.&nbsp; गौतम ने सूखे वाले एरिया के किसानों को सुझाव दिया कि खेतों में लगी फसलों के लिए एक से तीन फीसदी यूरिया 0,5 जिंक सल्फेट के साथ या उसके साथ &nbsp;डीएपी, दो प्रतिशत 13:0:45 <span>या दो प्रतिशत 19</span>:19:19 <span>घोल का &nbsp;पर्णीय छिड़काव रुक-रुक करें। सूखे के दौरान और बारिश के तुरंत बाद फसलों को फिर से जीवंत करने के लिए यह कारगर होगा। खेत में फसलों की नमी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जैविक खाद का उपयोग करें।फसल के अच्छे विकास के लिए &nbsp;के फसल के क्रांतिक अवस्थाओं पर सिंचाई की व्यवस्था करें&nbsp; यानि फसलों को बचाने के लिए जीवन रक्षक सिंचाई करें, अगर संभव हो तो स्प्रिंकलर या ड्रिप प्रणाली के माध्यम से सिंचाई करें।</span></p>
<p style="text-align: justify;">डॉ. गौतम ने कहा कि किसानों को मौसम आधारित बीमा सहित फसल बीमा सुविधा का लाभ उठाना चाहिए जिससे कि क्षति की भरपाई हो सके। उन्होंने कहा कि किसानो को अपने एरिया के क्षेत्र के लिए उपलब्ध कृषि मौसम मौसम परामर्श का पालन करें। उन्होंने कहा कि किसानों को इस परिस्थिति में क्षेत्र के लिए अनुशंसित मध्यम और कम <span>सूखा सहिष्णु किस्मों को बुवाई करनी चाहिए।</span><span></span></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>किसान अपने एरिया के अनुसार फसल की किस्मों का करे चुनाव</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इसके लिए उन्होंने कहा कि किसानों को अपने एरिया के अनुसार &nbsp;धान की प्रजाति <span>पीआर-113, बरनी दीप, सीएसआर-36, सहभागी, आईआर-64, सुशाक सम्राट, नरेंद्र उसर-3, स्वर्ण उप-1,एनडीआर उसर-2008, एनडीआर-97, सरजू-52 का चुनाव करना चाहिए। वहीं&nbsp; ज्वार प्रजाति &nbsp;प्रजाति जेकेएसएच-22, तथा बाजरा &nbsp;की प्रजाति </span>&nbsp;9444, <span>एमपी-7792, 86एम86, बायो-448, एलकेबीएच-676, जेकेबीएच-26, कावेरी सुपर बॉस और मक्का की प्रजाति &nbsp;डीकेसी-7074, 900 एम गोल्ड, डिकल्व डबल, जेकेएमएच-502, प्रजातियों का चुनाव करना चाहिए।</span></p>
<p style="text-align: justify;">वहीं&nbsp; किसानों को दलहनी फसलों के लिए&nbsp; उड़द की प्रजाति पंत-31, पंत-40, शेखर-3, आजाद-3, पीयू-35, प्रसाद, आईपीयू 02-43, टी-9 मूंग की आईपीएम 02-14, आईपीएम 02-3, पंत-5, एचयूएम-1, एचयूएम-12,एचयूएम-16, मेहा, पीडीएम-139, एसएमएल-668,&nbsp; अरहर की प्रजाति बहार, एनडीआर-अरहर-2, एमए-13, एमए-6, यूपीएएस-120, एनडीआर-अरहर-1, यूपीएएस-10, एएल-201, पारस, आईसीपीएल-87 लगानी चाहिए।</p>
<p style="text-align: justify;">तिलहनी फसलों में सोयाबीन की प्रजाति एसएल-525, <span>डीएस 97-12, पीएस 1347, डीएस 98-14, पीएस-1225, एसएल-668, बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए &nbsp;अहिल्या-4, प्रतिष्ठा, जेएस 93-05, मौस-81, जेएस 97-52।&nbsp; वहीं मूंगफली की प्रजाति राज मुंगफली-1, प्रकाश, जीजी-14, जीजी-21, जीजी 37ए, उत्कर्ष, एचएनजी-123, टीपीजी-41, विकास, मल्लिका और &nbsp;तिल की प्रजाति टी-78, शेखर, आरटी-346, जेटीएस-8, तरुण, जवाहर तिल-11, आरटी-346 का चुनाव करना चाहिए। इन फसलों और प्रजातियों की खेती कर के पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित राज्य के अन्य भागों के किसान&nbsp; कम बारिश से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कम बारिश वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए आईसीएआर ने  क्रॉप कंटीन्जेंसी प्लान जारी किया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पीएम फसल बीमा योजना राज्य सरकार के अधीन लाने की मांग, किसानों ने कहा उनकी समस्या राज्य सरकारें बेहतर समझती हैं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/tamil-nadu-farmers-demand-pm-fasal-yojana-should-come-under-state-government.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 31 Jul 2022 11:17:56 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/tamil-nadu-farmers-demand-pm-fasal-yojana-should-come-under-state-government.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>फसल बीमा योजना को लेकर केंद्र सरकार और कई राज्यों के बीच विवाद के बीच तमिलनाडु के किसानों ने कहा है कि योजना को राज्य सरकार के अधीन किया जाना चाहिए। राज्य में खरीफ की धान की फसल के लिए बीमा कराने की अंतिम तारीख 31 जुलाई है। किसानों का कहना है कि मुआवजा दिए जाते वक़्त कई तरह के स्थानीय मुद्दों पर विचार नहीं किया जाता है, इसलिए इसे राज्य सरकार के अधीन रखा जाना चाहिए।</p>
<p>अभी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसलों का इंश्योरेंस किया जाता है। यह एक अंब्रेला स्कीम है जिसे राज्य सरकारों के माध्यम से लागू किया जाता है। किसानों की शिकायत है कि मौजूदा व्यवस्था में स्थानीय परिस्थितियों पर विचार नहीं किया जाता है। अभी जो व्यवस्था है उसके मुताबिक अगर पूरे गांव में धान की फसल किसी प्राकृतिक आपदा या कीटों के हमले का शिकार होती है तभी वहां के किसानों को मुआवजा मिल सकता है। दूसरी फसलों के मामले में भी बड़े इलाके में फसल प्रभावित होने पर ही बीमा दिए जाने का प्रावधान है। इसलिए स्थानीय किसान नेताओं का कहना है कि फसल बीमा को राज्य सरकार के अधीन रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि राज्य सरकारें स्थानीय मुद्दों को केंद्र सरकार से बेहतर समझती हैं। इसके अलावा अभी जो किसान मक्का, केला या दूसरी फसलें उगाते हैं उन्हें इस योजना के तहत कवरेज नहीं मिल पाती है।</p>
<p>योजना पर उठे विवादों के कारण कई राज्य इससे अलग हो गए थे। हालांकि बाद में कई राज्यों ने इसमें वापसी भी की है। पिछले दिनों आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सरकारों ने भी इस योजना के तहत आने का फैसला किया। तेलंगाना सरकार की मांग थी कि इस योजना में किसानों का यूनिवर्सल कवरेज किया जाए। माना जा रहा है कि केंद्र की तरफ से इस मांग को मानने जाने के बाद ही तेलंगाना सरकार योजना के तहत आने को राजी हुई है। हालांकि तेलंगाना में यह योजना 2023 के रबी सीजन से ही लागू होगी। उससे पहले अधिक प्रीमियम का हवाला देते हुए आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और गुजरात राज्य इससे अलग हो चुके थे।</p>
<p>योजना के तहत किसानों को भुगतान में भी शिकायतें आ रही हैं। जैसे, 2021 में उड़ीसा के किसानों को खरीफ फसल के दौरान प्राकृतिक आपदा से नुकसान हुआ था। ऐसे किसानों की संख्या करीब 14.27 लाख है। नई खरीफ फसल का समय आ जाने के बावजूद राज्य के किसानों को अभी तक पिछले साल का मुआवजा नहीं मिला है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम फसल बीमा योजना राज्य सरकार के अधीन लाने की मांग, किसानों ने कहा उनकी समस्या राज्य सरकारें बेहतर समझती हैं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अधिक तापमान के कारण  मक्का किसानों को झेलना पड़ा भारी नुकसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/due-to-high-temperature-grains-did-not-form-in-the-corn-earrings-the-farmer-suffered-heavy-loss....html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 19 Jul 2022 12:23:43 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/due-to-high-temperature-grains-did-not-form-in-the-corn-earrings-the-farmer-suffered-heavy-loss....html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इस साल अचानक तापमान बढ़ने से फसलों को काफी नुकसान हो रहा है। इस साल बढ़ते तापमान से गेहूं की उपज में 15 से 20 फीसदी के गिरावट&nbsp; दर्ज की गई थी। अब&nbsp; पूर्वांचल के &nbsp;किसानों के सामने &nbsp;अधिक तापमान के चलते एक और समस्या आ गई है। मार्चऔर अप्रैल में बोई जाने वाली&nbsp; मक्का की जायद फसल में बालियों में &nbsp;दाने नहीं बनने के मामले सामने आये हैं। &nbsp;पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों का कहना है कि मक्का की&nbsp; फसल में बालियां&nbsp; तो बन गई लेकिन इन बालियों &nbsp;में दाने नही बने हैं&nbsp; इससे&nbsp; उनको भारी नुकसान हुआ है।</p>
<p style="text-align: justify;">किसानों के मुताबिक सरसों, मटर और चना इत्यादि फसलों की कटाई करके जायद वाली मक्का की बुवाई मार्च - अप्रैल में करते है और हर साल अच्छी फसल होती है। लेकिन इस &nbsp;फसल अच्छी हुई बालियां भी बनी &nbsp;लेकिन बालियों में दाने नहीं पड़े है। गांव पराना पट्टी जिला वाराणसी के किसान फौजदार यादव ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि उन्होंने 15 से 20 अप्रैल के बीच में ढाई एकड़ में&nbsp; भुट्टे वाले मक्के की बुवाई की थी। उनकी मक्के की फसल का&nbsp; बढ़वार भी अच्छा हुआ और पौधे में बालियां भी लगी । लेकिन&nbsp; मक्के की &nbsp;बालियों में दाने नहीं बने है। जिससे उनको काफी नुकसान हुआ है । उन्होंने बताया&nbsp; कि हम हर साल मक्के फसल बोते थे ।हमारी फसल बहुत अच्छी होती थी। लेकिन इस साल बीज का भी दाम नहीं निकल पाया है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस संबध में संबध में <strong>रूरल वॉयस</strong> ने रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के फसल विज्ञान के कृषि वैज्ञानिक और &nbsp;प्रसार निदेशक डॉ. एस. एस. सिहं के साथ बातचीत की तो उन्होंने बताया&nbsp;कि जायद मक्के की फसल के परागण के वक्त तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहता है तो कोई ज्यादा दिक्कत नहीं&nbsp; होती है। &nbsp;अगर इससे ऊपर तापमान चला जाता है तो परागण में&nbsp; दिक्कत हो जाती है । लेकिन &nbsp;इस साल &nbsp;जिस एरिया में मक्के के परागण के वक्त &nbsp;तापमान 40 &nbsp;या उससे अधिक &nbsp;था। उस एरिया में &nbsp;मक्के की फसल के &nbsp;परागकण झुलस गये औऱ नष्ट हो गये । इस काऱण से मक्के फसल में परागण नहीं&nbsp; हो पाया है औऱ मक्के की बालियों मे &nbsp;दाने नहीं बन पाएं&nbsp; है।</p>
<p style="text-align: justify;">ग्राम मनोलेपुर जिला वाराणसी के राममनोहर सिंह ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया की वह हर साल अप्रैल में भुट्टे&nbsp; वाली&nbsp; मक्के की खेती करते&nbsp; हैं और अच्छी पैदावार मिलती है। लेकिन इस साल दो एकड़ में मक्के की फसल लगाई थी। लेकिन अधिक तापमान के कारण&nbsp; मक्के बालियों में दाने नहीं बने जिससे उन्हें काफी नुकसान हो गया । उन्होंने आगे&nbsp; बताया कि इस साल आम बाग में&nbsp; फलत&nbsp; कम आने से पहले से काफी नुकसान में थेऔर अब मक्के की खेती से और अधिक आर्थिक नुकसान हो गया है।</p>
<p>गांव पांडे चौरा जिला आजमगढ़ &nbsp;के किसान राम बचन राय ने कहा कि उनके पास सिंचाई की सुविधा थी। इस साल हमने चना की कटाई कर जायद वाले मक्के बुवाई मार्च में करके ज्यादा लाभ कमाना चाहा औऱ&nbsp; हमारी फसल भी अच्छी थी। हर पौधे में तीन से चार बालियां लगी थी, लेकिन&nbsp; बालियों में दाने नहीं पड़े । उन्होंने बताया कि हमारे एरिया के बहुत से किसानों के मक्के के फसल में दाने नहीं बने हैं।इससे किसानों का बहुत ही नुकसान हुआ है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस संबध में संबध में <strong>रूरल वॉयस</strong> ने रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के फसल विज्ञान के कृषि वैज्ञानिक और &nbsp;प्रसार निदेशक डॉ. एस. एस. सिहं के साथ बातचीत की तो उन्होंने बताया कि किसी भी फसल की अच्छी या खराब पैदावार में मौसम के तापक्रम का बड़ा योगदान होता है।&nbsp; उन्होंने बताया कि मक्का का फूल निकलने के समय और ग्रेन सेटिंग के वक्त एक निश्चित तापमान का रहना जरूरी है, क्योंकि मक्का में दाने &nbsp;बनने के लिए परागण होना जरूरी है। लेकिन इस साल अचानक तापमान में बढ़ोतरी हो गई। इससे मक्का में परागण की क्रिया बाधित हुई और बालियों &nbsp;में दाने &nbsp;नहीं बन पाए ।</p>
<p style="text-align: justify;">डॉ एस. एस. सिंह ने कहा कि&nbsp; किसी भी फसल के अंकुरण , बढ़वार, और परागण और दाना सेट होने के लिए एक निश्चित तापमान होता है और &nbsp;उस निश्चित तापमान पर ही&nbsp; बीज अंकुरित होते हैं, बढ़वार करते हैं , परागण होता है औऱ बालियों में दाने सेट होते है। इसमे भी &nbsp;परागण और दाना सेट होने की अवस्था &nbsp;तापमान के प्रति बेहद संवेदनशील होती है ।अगर इस अवस्था पर तामपान में अंतर आता है तो फसल में परागण नहीं&nbsp; होता है और दाने नहीं बनते हैं । इससे फसल की उपज में गिरावट होती है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अधिक तापमान के कारण  मक्का किसानों को झेलना पड़ा भारी नुकसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी की चीनी मिलें राख से पोटाश बनाएंगी, इससे इसका आयात कम करने में भी मिलेगी मदद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-sugar-mills-asked-to-manufacture-potash-from-ash.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 28 Jun 2022 20:38:44 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-sugar-mills-asked-to-manufacture-potash-from-ash.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ऐसे समय जब रूस-यूक्रेन युद्ध समेत विभिन्न कारणों से दुनिया भर में उर्वरकों के दाम बढ़ रहे हैं, उत्तर प्रदेश सरकार ने चीनी मिलों से उनके बॉयलर से निकलने वाली राख से पोटाश बनाने को कहा है। उत्तर प्रदेश भारत के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्यों में एक है। यहां लगभग 120 चीनी मिले हैं जो हर साल लगभग 120 लाख टन चीनी का उत्पादन करती हैं।</p>
<p>प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गन्ना विकास और चीनी उद्योग) संजय भूसरेड्डी ने प्रदेश की स्टैंडअलोन और ग्रुप चीनी मिलों को राख से पोटाश बनाने का निर्देश दिया है। भारत पोटाश का बड़ी मात्रा में आयात करता है। इसका इस्तेमाल मिट्टी के पोषण और उर्वरक के तौर पर किया जाता है। सचिव के अनुसार घरेलू उत्पादन से विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिलेगी।</p>
<p>भारत पोटाश के सबसे बड़े आयातकों में एक है। यहां हर साल लगभग 50 लाख टन पोटाश की खपत होती है। इसका बड़ा हिस्सा आयात होता है। लगभग एक तिहाई आयात बेलारूस और रूस से किया जाता है। बेलारूस के पास समुद्र तट ना होने की वजह से वह रूस और लिथुआनिया के बंदरगाहों के रास्ते निर्यात करता है।</p>
<p>भारत चार तरह के उर्वरकों का आयात करता है। यूरिया, डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी), म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) और नाइट्रोजन फॉस्फोरस पोटेशियम (एनपीके)। सरकार पोटाश पर भी सब्सिडी देती है ताकि वह किसानों के लिए सस्ता पड़े।</p>
<p>रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों के दाम काफी बढ़ गए हैं। दूसरी तरफ, सप्लाई की भी दिक्कत है। इससे आने वाले महीनों में अनाज की कमी की आशंका हो गई है।</p>
<p>चीनी मिलें अगर पोटाश बनाती हैं तो इससे ना केवल पर्यावरण के अनुकूल तरीके से राख का निपटान किया जा सकेगा, बल्कि इससे चीनी उद्योग को अतिरिक्त राजस्व की कमाई भी होगी। इससे मिलों को गन्ना किसानों का भुगतान करने में भी मदद मिलेगी।</p>
<p>बाबा रामदेव का पतंजलि समूह भी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों से राख की आपूर्ति करने का आग्रह कर चुका है। यह समूह खेती में इसका इस्तेमाल करना चाहता है। सूत्रों के अनुसार पतंजलि ने उत्तर प्रदेश चीनी मिल एसोसिएशन को राख की थोक आपूर्ति करने के लिए पत्र लिखा था। पत्र के मुताबिक समूह पोटाश और अन्य जैव उर्वरक बनाने में इसका इस्तेमाल करना चाहता है। अभी प्रदेश की चीनी मिलें औद्योगिक इनपुट के तौर पर राख का निपटान करती हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी की चीनी मिलें राख से पोटाश बनाएंगी, इससे इसका आयात कम करने में भी मिलेगी मदद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा सरकार 7 जिलों में दलहन और तिलहन को बढ़ावा देगी, किसानों को प्रति एकड़ 4000 रुपए की मदद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-govt-to-promote-pulses-and-oilseeds-in-seven-districts.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 25 Jun 2022 15:58:00 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-govt-to-promote-pulses-and-oilseeds-in-seven-districts.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हरियाणा सरकार ने प्रदेश के 7 जिलों में बाजरा की जगह दलहन और तिलहन की फसलों को बढ़ावा देने का फैसला किया है। फसल विविधीकरण योजना के तहत राज्य सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है।</p>
<p>दक्षिण हरियाणा के जिन 7 जिलों में दलहन और तिलहन की फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा उनमें भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, झज्जर, हिसार और नूह शामिल हैं। राज्य सरकार की तरफ से जारी एक बयान के मुताबिक इस योजना के तहत दलहन और तिलहन की खेती प्रदेश में कम से कम एक लाख हेक्टेयर में करने की का लक्ष्य है।</p>
<p>बयान में कृषि एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा के हवाले से कहा गया है कि केंद्र सरकार ने दालों और तिलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की है इससे इनका रकबा बढ़ाने में मदद मिलेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत दालों में मूंग, अरहर और उड़द तथा तिलहन की फसलों में कैस्टर, मूंगफली और तिल की खेती की जा सकती है।</p>
<p>योजना के तहत किसानों को प्रति एकड़ 4000 रुपये की आर्थिक मदद भी दी जाएगी। इसके लिए किसानों को पहले 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। वेरिफिकेशन के बाद रकम उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।</p>
<p>सुमिता मिश्रा ने कहा कि फसलों की नई वैरायटी और आधुनिक प्रौद्योगिकी के बारे में किसानों को जानकारी दी जा रही है। बयान में कहा गया है कि दालों की खेती बढ़ाने से मिट्टी की सेहत भी बेहतर होगी और वह अधिक उपजाऊ बनेगी।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/07/image_750x500_60e1e2ee11b84.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा सरकार 7 जिलों में दलहन और तिलहन को बढ़ावा देगी, किसानों को प्रति एकड़ 4000 रुपए की मदद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 5 फीसदी गेहूं की सरकारी खरीद, समय बढ़ाने का भी असर नहीं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-wheat-procurement-slumps-to-332000-tonnes-against-targetof-6-million-tonnes.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 22 Jun 2022 17:49:27 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
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        <description><![CDATA[ <p>वर्तमान रबी विपणन सत्र 2022-23 में उत्तर प्रदेश में गेहूं की खरीद लगभग 3,32,<span>000 टन पर अटक गई है</span>, <span>जबकि सरकार ने 60 लाख टन का लक्ष्य रखा था। इस तरह वास्तविक खरीद लक्ष्य के </span>5.5 <span>फीसदी तक ही पहुंच सकी। पिछले साल राज्य सरकार और भारतीय खाद्य निगम के खरीद केंद्रों ने 2021-22 रबी विपणन सत्र के लिए 55 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 10 जून 2021 तक 50 लाख टन गेहूं खरीदा था। इस तरह देखा जाए तो इस वर्ष पिछले साल की तुलना में 10 फीसदी गेहूं की भी सरकारी खरीद नहीं हुई है।</span></p>
<p>आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सरकारी एजेंसियों ने अब तक राज्य के लगभग 87,<span>000 गेहूं किसानों से लगभग 3,31</span>,<span>000 टन गेहूं की खरीद की है। सरकारी खरीद कम होने के कारण हाल ही योगी आदित्यनाथ सरकार ने गेहूं खरीद की अवधि दो सप्ताह बढ़ाकर 30 जून कर दी थी।</span></p>
<p><span>चालू सीजन में गेहूं की खरीद के एवज में अब तक किसानों को 615 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। पिछले साल इसी अवधि में एक लाख से अधिक किसानों को लगभग 10</span><span>,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। अब जून में बाकी बचे करीब एक हफ्ते में कम ही रहने की उम्मीद है। </span><span>सरकारी एजेंसियां ​​2,015 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद रही हैं। खरीद सीजन एक अप्रैल से शुरू हो गया था और राज्य सरकार द्वारा समय सीमा बढ़ाने से पहले 15 जून को समाप्त होने वाला था। उत्तर प्रदेश सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन के दौरान किसानों से गेहूं खरीदने के लिए 6</span><span>,000 खरीद केंद्र खोलने की योजना की घोषणा की थी।</span></p>
<p><span>रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गेहूं की कीमतों में उछाल के कारण रबी विपणन सत्र की शुरुआत में ही गेहूं की खरीद कम होने की उम्मीद थी। रूस और यूक्रेन विश्व स्तर पर बड़े गेहूं उत्पादक और निर्यातक रहे हैं। निर्यात बाजार में गेहूं की मांग में वृद्धि के कारण इसकी घरेलू कीमतों में भी वृद्धि हुई थी। हालांकि भारत सरकार ने बाद में घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 5 फीसदी गेहूं की सरकारी खरीद, समय बढ़ाने का भी असर नहीं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की प्राकृतिक खेती की वकालत, उत्तर प्रदेश को जैविक राज्य बनाने का आह्वान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/yogi-bats-for-natural-farming-envisions-up-as-organic-state.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 19 Jun 2022 10:39:33 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/yogi-bats-for-natural-farming-envisions-up-as-organic-state.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य को जैविक प्रदेश के रूप में विकसित करने का आह्वान किया है। लखनऊ में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के 33 वें स्थापना दिवस के मौके पर उन्होंने किसानों से जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने को कहा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बीते 5 वर्षों में राज्य के कृषि विभाग ने जैविक खेती और फसल विविधीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, सबसे बड़ी चुनौती कम खर्च में रसायन मुक्त खेती सुनिश्चित करना है। इसके लिए जैविक खेती को बढ़ावा देना और इसे बड़े पैमाने पर अपनाना जरूरी है। उन्होंने इस दिशा में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की।</p>
<p>जैविक और प्राकृतिक खेती के महत्व को रेखांकित करते हुए योगी ने कम इनपुट लागत, अच्छे उत्पादन और जहरीले तत्वों से मुक्त खेती के प्रति जागरूकता फैलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, मैं सभी कृषि वैज्ञानिकों से इसे बढ़ावा देने का आग्रह करता हूं। इससे न सिर्फ किसानों की आमदनी कई गुना बढ़ाने में मदद मिलेगी बल्कि अनेक तरह की बीमारियों की रोकथाम भी की जा सकती है।</p>
<p>योगी ने बताया कि राज्य सरकार मंडल मुख्यालय स्तर पर परीक्षण लैब स्थापित कर रही है। वहां बीज सर्टिफिकेशन और उत्पादन का कार्य किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट में गाय पर निर्भर प्राकृतिक खेती के प्रावधान का समर्थन किया। केंद्र और राज्य दोनों सरकारें गंगा नदी के किनारे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर कार्य कर रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार समूचे बुंदेलखंड क्षेत्र में प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के किसानों के व्यापक हित में हमारी सरकार ने 2017 में फसल ऋण माफ किया था। दशकों से लंबित पड़े सिंचाई प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से पूरे करके हमने किसानों के जीवन में व्यापक बदलाव लाने में सफलता पाई है। उत्तर प्रदेश में चीनी उद्योग को रिवाइव करने के सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए योगी ने कहा कि कोविड-19 संकट के समय भी राज्य में 120 चीनी मिलें कार्य कर रही थीं।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की प्राकृतिक खेती की वकालत, उत्तर प्रदेश को जैविक राज्य बनाने का आह्वान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी को देश की पहली एक ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य, मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को दिए कार्य योजना बनाने के निर्देश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/yogi-tasks-officials-with-trillion-dollar-economy-plan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 16 Jun 2022 20:01:40 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/yogi-tasks-officials-with-trillion-dollar-economy-plan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश को देश की पहली एक ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी वाला राज्य बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शीर्ष अधिकारियों को कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया है। एक उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश एक लोकप्रिय निवेश स्थान के रूप में उभरा है। राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक 10 लाख करोड़ रुपए नए निवेश आकर्षित करने का है।</p>
<p>अधिकारियों को शॉर्ट टर्म और लांग टर्म के लिए कार्य योजना बनाने का निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए पूरा प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास और जनकल्याण की स्कीमों के लिए बजट बढ़ाया गया है। साथ ही सरकार औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा दे रही है।</p>
<p>उन्होंने 80 हजार करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट की समीक्षा भी की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 जून को लखनऊ में एक समारोह में इन प्रोजेक्ट को लांच किया था। उन्होंने संबंधित विभागों को उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ बातचीत का माध्यम खुला रखने का निर्देश दिया ताकि उनके प्रोजेक्ट समय पर पूरे किए जा सकें। उन्होंने कहा कि बीते 5 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में जो उल्लेखनीय कार्य हुए हैं उनसे नए निवेशकों को प्रदेश में आकर्षित करने में मदद मिलेगी।</p>
<p>3 जून को 1406 प्रोजेक्ट लांच किए गए थे। इनसे प्रत्यक्ष तौर पर 5 लाख और परोक्ष रूप से 20 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। लगभग 25 फ़ीसदी प्रोजेक्ट डाटा सेंटर के हैं। इसके बाद 14 फ़ीसदी प्रोजेक्ट कृषि और संबंधित उद्योग के, 10 फ़ीसदी आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स के, 8 फ़ीसदी इंफ्रास्ट्रक्चर के, 8 फ़ीसदी मैन्युफैक्चरिंग के, 7 फ़ीसदी हैंडलूम एंड टैक्सटाइल के, छह फ़ीसदी अक्षय ऊर्जा के और इतने ही एमएसएमई सेक्टर के हैं।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी को देश की पहली एक ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य, मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को दिए कार्य योजना बनाने के निर्देश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब के मुख्यमंत्री मान का वादा, धान रोपाई के लिए किसानों को मिलेगी नियमित बिजली]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/mann-promises-uninterrupted-power-supply-during-paddy-season.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 14 Jun 2022 09:47:54 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/mann-promises-uninterrupted-power-supply-during-paddy-season.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसानों को धान के सीजन में नियमित और अबाधित बिजली सप्लाई करने का वादा किया है। एक बयान में मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार ने भूजल को संरक्षित करने का फैसला किया है। इसके लिए 10 जून से 17 जून तक राज्य में धान की रोपाई के लिए चरणबद्ध तरीके से बिजली सप्लाई की जाएगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री के अनुसार पंजाब राज्य बिजली निगम लिमिटेड को मौजूदा धान सीजन में किसानों को रोजाना कम से कम 8 घंटे बिजली की सप्लाई करने का निर्देश दिया गया है। प्रदेश में भूजल के तेजी से घटते स्तर को पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों से पानी का समुचित इस्तेमाल करने का आग्रह किया। बयान में कहा गया है कि पंजाब राज्य विद्युत निगम को अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं खासकर घरेलू उपभोक्ताओं को भी भीषण गर्मी के दौरान बिजली की नियमित आपूर्ति करने का निर्देश दिया गया है।</p>
<p>बयान में दावा किया गया है कि पंजाब राज्य विद्युत निगम ने 15000 मेगा वाट की अनुमानित मांग को पूरा करने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। राज्य के बाहर से बिजली खरीदने के लिए ट्रांसमिशन क्षमता 7100 मेगा वाट से बढ़ाकर 8500 मेगा वाट की गई है। बयान के मुताबिक बाकी 6500 मेगा वाट बिजली का इंतजाम राज्य के भीतर के स्रोतों से किया जा रहा है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब के मुख्यमंत्री मान का वादा, धान रोपाई के लिए किसानों को मिलेगी नियमित बिजली ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कुशीनगर में हल्दी की खेती को बढ़ावा दे सकती है यूपी सरकार, किसानों को होगा बड़ा फायदा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/turmeric-to-change-fortunes-of-farmers-in-kushinagar.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 11 Jun 2022 20:27:48 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/turmeric-to-change-fortunes-of-farmers-in-kushinagar.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>औषधीय गुणों से युक्त पारंपरिक भारतीय मसाला हल्दी पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के किसानों की किस्मत बदलने वाली है। राज्य सरकार एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत कुशीनगर को हल्दी उत्पाद का जिला घोषित कर सकती है। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हल्दी के किसानों के लिए अनेक संभावनाएं खुल सकती हैं।</p>
<p>एक जिला एक उत्पाद योगी आदित्यनाथ सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में एक है। इसका लक्ष्य प्रदेश के 75 जिलों में पारंपरिक और घरेलू उद्योगों को पुनर्जीवित करना तथा उन्हें मजबूती प्रदान करना है। यदि कुशीनगर को इस योजना के तहत हल्दी के लिए निर्धारित किया जाता है तो यह बौद्ध धर्म स्थल दूसरे राज्यों के इरोड, सांगली और निजामाबाद जैसे अन्य जिलों की श्रेणी में आ सकता है।</p>
<p>हल्दी की खेती में कुशीनगर का लंबा इतिहास रहा है। यहां मुख्य रूप से दुदाही, रामकोला, बिसुनपुरा, खड्डा, सेवरही, कप्तानगंज, कठकुइयां और फाजिलनगर ब्लॉक में इसकी खेती की जाती है। वर्ष 2014 में टाटा ट्रस्ट के साथ मिलकर काम करने वाले संगठन सस्टेनेबल ह्यूमन डेवलपमेंट एसोसिएशन (एसएचडीए) ने यहां हल्दी की खेती का योजनाबद्ध प्रयास शुरू किया था।</p>
<p>सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुशीनगर के लगभग 800 हेक्टेयर क्षेत्र में हल्दी की खेती की जाती है। रामकोला इलाके में ही इसकी खेती लगभग 200 हेक्टेयर में होती है। इस समय जिले के करीब 10000 किसान हल्दी की खेती से जुड़े हैं। प्रति हेक्टेयर उत्पादन का औसत 36.77 क्विंटल है। हालांकि स्थानीय और विकसित किस्मों की उपज 150 से 400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। अब राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सिद्धार्थनगर जिले के काला नमक चावल की तरह कुशीनगर की हल्दी को भी एक ब्रांड के तौर पर स्थापित करे।</p>
<p>कृषि अधिकारी बी.एम. त्रिपाठी के अनुसार कुशीनगर के कृषि जलवायु क्षेत्र में राजेंद्र सोनिया, राजेंद्र सोनाली, नरेंद्र हल्दी-1 सबसे अधिक पैदावार देने वाली किस्में हैं, बशर्ते किसानों को उत्पादन के बेहतर तरीकों के बारे में प्रशिक्षित किया जाए। अगर अच्छी क्वालिटी का बीज उपलब्ध कराने के साथ प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग में संस्थागत मदद मिले तो हल्दी यहां के किसानों की किस्मत बदल सकती है। इस बीच, हल्दी की खेती को बढ़ावा देने के लिए 1150 किसानों को मिलाकर एक कंपनी गठित की गई है। सभी किसान इसमें स्टेकहोल्डर हैं। इस कंपनी ने सीमित क्षमता वाली एक प्रोसेसिंग इकाई लगाई है।</p>
<p>एशिया, अफ्रीका और कैरेबियाई देशों के व्यंजनों में हल्दी के इस्तेमाल का पुराना इतिहास है। यह को सबसे अधिक पोषक तत्व वाले खाद्य पदार्थों में गिना जाता है। हल्दी यह बैक्टीरिया और इन्फ्लेमेशन रोधी होने के कारण दर्द, चोट और दांत की बीमारियों में लाभदायक है। यह व्यक्ति के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ रक्त को शुद्ध करता है। यह त्वचा के लिए लाभदायक होने के साथ इसमें पाया जाने वाला तत्व मिलेटोनिन अच्छी नींद में भी सहायक है। हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व भी पाया जाता है जिसकी वजह से इसका रंग पीला होता है, यह कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं को फैलने से रोकता है।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कुशीनगर में हल्दी की खेती को बढ़ावा दे सकती है यूपी सरकार, किसानों को होगा बड़ा फायदा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र सरकार ने बीआरएलफ के साथ  मिलकर मानव विकास इंडेक्स परियोजना शुरू की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/human-development-index-project-launched-by-maharashtra-government.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 06 Jun 2022 16:07:46 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/human-development-index-project-launched-by-maharashtra-government.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">महाराष्ट्र सरकार ने विदर्भ क्षेत्र के खराब प्रदर्शन करने वाली तालुकाओं में जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए एक परियोजना की शुरुआत की है। इस उच्च प्रभाव वाली मानव विकास इंडेक्स परियोजना की शुरुआत एक मई 2022 को हुई जो 30 अप्रैल 2023 तक चलेगी। इसके लिए भारत रूरल लाइवलीहुड्स फाउंडेशन ने मानव विकास आयुक्तालय के साथ भागीदारी की है। इसका लक्ष्य एचडीसी विभाग की शिक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए मौजूदा योजनाओं की निगरानी एवं प्रभावी क्रियान्वयन करना है। यह स्मार्ट, अभिनव सर्वोत्तम-उपयुक्त आजीविका हस्तक्षेपों की योजना बनाकर उनके क्रियान्वयन के लिए एक समूह के साथ निर्धन समुदाय के साथ गहरा जुड़ाव पैदा करेगा। इस परियोजना के पहले चरण का लक्ष्य विदर्भ क्षेत्र, महाराष्ट्र के यवतमल, गढ़चिरौली, नंदुरबार-धडगांव, नंदुरबार-अक्कलकुवा और गोंदिया जिलों के लगभग 25,000 गरीब परिवारों के जीवन में सुधार लाना है। यह परियोजना सिलसिलेवार ढंग से क्रियान्वित की जानी है, जिसका पहला चरण 1 मई 2022 से 30 अप्रैल 2023 तक एक वर्ष का होगा। एक वर्ष पूरा होने के बाद संयुक्त समीक्षा की जाएगी तथा परियोजना के आउटपुट और परिणामों के आधार पर 2 वर्षों के लिए निर्णय लिया जाएगा, जो 1 मई 2023 से 30 अप्रैल 2025 तक की अवधि के लिए होगी। परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए बीआरएलएफ के मुख्य परिचालन अधिकारी कुलदीप सिंह ने बताया कि यह परियोजना जनजातीय विकास विभाग और मानव विकास आयुक्तालय,महाराष्ट्र सरकार के साथ भागीदारी में छह नागरिक सामाजिक संगठनों (सीएसओ) की ओर से महाराष्ट्र के 23 प्रखण्डों में क्रियान्वित की जाएगी। इस परियोजना से 25,000 परिवारों को लाभ मिलेगा।<br /><strong>परियोजना की मुख्य बातें :</strong><br />1. 25,000 निर्धन परिवारों के जीवन स्तर में सुधार और कल्याण लाना<br />2. लिंग आधारित असमानताओं को दूर करके महिलाओं और किशोरियों के कल्याण में<br />सुधार करना<br />3. वर्तमान स्वास्थ्य और शिक्षा योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना</p>
<p style="text-align: justify;">4. आजीविका हस्तक्षेपों के क्रियान्वयन, विशेष रूप से कृषि, गैर-इमारती वनोपज<br />(एनटीएफपी) और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के लिए एचडीसी विभाग को तकनीकी सहायता<br />प्रदान करना।<br />इस सहयोग के बारे में राज्य के मानव विकास विभाग, में आयुक्त नितिन पाटिल ने बताया कि मानव विकास विभाग इस परियोजना के माध्यम से चयनित प्रखण्डों में गरीब परिवारों को लाभान्वित करेगा। बीआरएलएफ के साथ हमारी भागीदारी सीएसओ के साथ ज्ञान प्रबंधन, क्रियान्वयन, समन्वय की सुविधा प्रदान करने में सहायता करेगा तथा निगरानी एवं मूल्यांकन फ्रेमवर्क स्थापित करेगा। मानव विकास विभाग लक्षित परिवारों के लिए आजीविका विकल्पों में अभिसरण बनाने के लिए संबंधित विभागों जैसे मनरेगा,सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी), एमएएचआईएम, राज्य ग्रामीणआजीविका मिशन (एसआरएलएम), जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी), वन, बागवानी, कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, और राज्य सरकार के अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय करेगा।<br />महाराष्ट्र में, बीआरएलएफ, जनजातीय विकास विभाग (टीडीडी), महाराष्ट्र सरकार, और सीएसओ के साथ भागीदारी में विदर्भ क्षेत्र के जनजातीय बहुल तालुकाओं पर लक्षित उच्च प्रभाववाली आजीविका वर्धन वाली अन्य परियोजना का क्रियान्वयन कर रहा है । इस राज्य भागीदारी परियोजना केअधीन, 15,000 अति कमजोर जनजातीय परिवारों की आजीविका स्थिति में सुधार करने की योजना है। यह परियोजना शबरी आदिवासी वित्त व विकास महामंडल मर्यादित के साथ परामर्श में सह-निर्मित और परिकल्पित की गई थी। एचडी परियोजना आसपास के तालुकों में क्रियान्वित की जाएगी, जहां जनजातीय विकास विभाग (टीडीडी) परियोजना चल रही है, टीडीडी के लिए तैनात टीम अतिरिक्त टीम के लिएकेंद्रक और केंद्र बिंदु होगी। टीडीडी टीम लीडर परियोजना का नेतृत्व करेगा और आसपास के तालुकों में तैनात टीम को सभी मार्गदर्शन और आवश्यक फील्ड सहयोग प्रदान करेगा। तीन सदस्यीय टीम में तीन पेशेवर शामिल होंगे जो टीडीडी टीम लीडर के पर्यवेक्षण और मार्ग दर्शनमें 2 तालुकों की देखभाल करेंगे। इस परियोजना को क्रियान्वित करने हेतु 92 मानव संसाधन को शामिल करते हुए 15 इकाइयां तैनात होंगी। एचडी परियोजना चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित की जानी है, जिसका पहला चरण 01जनवरी 2022 से 31 दिसम्बर 2022 तक एक वर्ष का होगा। पहला चरण पूरा होने के पश्चात,एक संयुक्त समीक्षा की जाएगी, तथा परियोजना के आउटपुट और परिणामों के आधार पर दो वर्षों के दूसरे चरण पर निर्णय लिया जाएगा, जो 1 मई 2023 से प्रारंभ होकर 31 दिसम्बर 2024 तक की अवधि के लिए होगी।</p>
<p style="text-align: justify;">मानव विकास आयुक्तालय (एचडीसी) की स्थापना महाराष्ट्र के 125 पिछड़े तालुकों में स्वास्थ्य,शिक्षा और आजीविका योजनाओं के माध्यम से लक्षित हस्तक्षेपों के क्रियान्वयन के लिए की गई थी। तालुकों की सामाजिक-आर्थिक, भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों को ध्यान मेंरखते हुए विशिष्ट योजनाएं तैयार की गई हैं। इन पिछड़े तालुकों की पहचान 2010-11 में दो संकेतकों - महिला साक्षरता, ग्रामीण (2001 की जनगणना के अनुसार), और 2002 के सर्वेक्षण के अनुसार बीपीएल जनसंख्या के प्रतिशत पर विचार करके की गई थी। 2022-23 के दौरानलगभग 950 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान एचडीसी को प्रस्तावित किया गया है।<br /><br />भारत रूरल लाइवलीहुड्स फाउंडेशन (बीआरएलएफ) की स्थापना भारत सरकार ने की है। जो ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत एक स्वतंत्र समाज के रूप में केंद्र और राज्य सरकारों के साथसाझेदारी में नागरिक समाज के कार्य को बढ़ाने वाली संस्था है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नागरिकसमाज संगठनों के साथ साझेदारी में सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के बेहतर कार्यान्वयन और पहुंच को सुनिश्चित करने के लिए 3 सितंबर 2013 को एक कैबिनेट निर्णय के माध्यम से भारत रूरल लाइवलीहुड्स फाउंडेशन (बीआरएलएफ) बनाने का निर्णय लिया गया था। बीआरएलएफ 9 राज्यों में ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने, इनकी निर्धन जनसंख्या, विशेष रूपसे स्थानीय जनजातियों के जीवन को सुधारने और भारत सरकार और विभिन्न राज्यों की सरकारों के साथ समन्वय से सरकार और भारतीय लोकतंत्र में उनके विश्वास को मजबूत करने के लिए कार्य कर रही</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र सरकार ने बीआरएलफ के साथ  मिलकर मानव विकास इंडेक्स परियोजना शुरू की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[योगी सरकार का निजी बिजली उत्पादन कंपनियों को भी कोयला आयात न करने का निर्देश, केंद्र ने दी थी आयात की सलाह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/coal-crisis-up-orders-private-power-plants-not-to-import-coal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 01 Jun 2022 20:43:40 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/coal-crisis-up-orders-private-power-plants-not-to-import-coal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केंद्र सरकार की सलाह के विपरीत उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी निजी बिजली संयंत्रों को कोयला आयात न करने के लिए कहा है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने स्वतंत्र बिजली उत्पादकों (आईपीपी) को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि वे अपने प्लांट में घरेलू कोयले के साथ आयातित कोयला मिश्रित करने के लिए कोयले का आयात न करें।</p>
<p>इन स्वतंत्र बिजली उत्पादकों में रिलायंस पावर, बजाज हिंदुस्तान ग्रुप और लेंको शामिल हैं। राज्य में बिजली सप्लाई करने वाली चार अन्य निजी कंपनियों आरकेएम पावरजेन, केएसके महानदी, टीआरएन और एमबी पावर को भी कोयले का आयात न करने के लिए कहा गया है।</p>
<p>इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने यूपी राज्य विद्युत उत्पादन निगम के ताप बिजली घरों के लिए कोयला आयात नहीं करने का फैसला किया था, जबकि इन बिजली घरों के लिए कोयले के संकट को देखते हुए केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने सभी राज्यों से कोयले का आयात करने को कहा था।</p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार का निर्देश आने से पहले राज्य के स्वतंत्र बिजली उत्पादकों ने कोयला आयात करने का टेंडर जारी कर दिया था ताकि बिजली उत्पादन में किसी तरह की बाधा ना आए। गर्मियों में बिजली की अधिक मांग को देखते हुए इन संयंत्रों में कोयले का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। एक सूत्र ने बताया कि राज्य की बिजली वितरण कंपनियों को आपूर्ति करने वाले संयंत्रों को अपना टेंडर निरस्त करना पड़ेगा।</p>
<p>इससे पहले उत्तर प्रदेश के एक बिजली उपभोक्ता और एक्टिविस्ट अवधेश कुमार वर्मा ने राज्य के सरकारी और निजी बिजली संयंत्रों द्वारा कोयले के आयात पर रोक लगाने की मांग की थी। उनका दावा था कि घरेलू कोयले में 10 फ़ीसदी आयातित कोयला मिश्रित करने पर लागत 11000 करोड़ रुपए बढ़ जाएगी। इससे बिजली की कीमत एक रुपया प्रति यूनिट बढ़ेगी। वर्मा के अनुसार इसका बोझ उत्तर प्रदेश के तीन करोड़ बिजली उपभोक्ताओं पर आएगा।</p>
<p>गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश देश में सबसे महंगी बिजली वाले राज्यों में शामिल है। फिलहाल योगी आदित्यनाथ सरकार बिजली की कीमत नहीं बढ़ाना चाहती इसलिए उसने कोयला आयात नहीं करने का फैसला किया है। बिजली संकट के एक समाधान के तौर पर यूपीपीसीएल दो रणनीतियों पर काम कर रही है। पहला, बिजली सप्लाई का रोस्टर यानी शेड्यूल तैयार करना और दूसरा, एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदना।</p>
<p>इस बीच ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने केंद्रीय बिजली मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह 28 अप्रैल को जारी अपना निर्देश वापस ले जिसमें राज्यों को कोयला आयात करने के लिए कहा गया था। फेडरेशन का कहना है कि अगर राज्यों को कोयला आयात करने के लिए बाध्य किया जाता है तो अतिरिक्त लागत का बोझ केंद्र सरकार उठाए। इसका बोझ बिजली वितरण कंपनियों और उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ना चाहिए।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ योगी सरकार का निजी बिजली उत्पादन कंपनियों को भी कोयला आयात न करने का निर्देश, केंद्र ने दी थी आयात की सलाह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[एचएचसीएल फाउंडेशन ने की फ्लिपकार्ट के साथ साझेदारी, ग्रामीण महिलाओं को आजीविका प्रदान करने की पहल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/hcl-foundation-and-flipkart-to-empower-rural-women-artisans.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 29 May 2022 16:14:11 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/hcl-foundation-and-flipkart-to-empower-rural-women-artisans.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>एचसीएल फाउंडेशन ने उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के अवसर प्रदान करने के लिए फ्लिपकार्ट के साथ साझेदारी की है। इसके तहत पारंपरिक कला और कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह साझेदारी एचसीएल फाउंडेशन के एचसीएल 'समुदाय' और फ्लिपकार्ट के 'समर्थ' अभियान के बीच हुई है।&nbsp;</p>
<p>इस पहल के तहत एचसीएल समुदाय ने लखनऊ में 'समुदाय क्राफ्ट' आयोजित किया। इसमें उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की 500 ग्रामीण महिलाओं कारीगरों द्वारा तैयार प्रोडक्ट रखे गए हैं। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इसे लांच किया गया।</p>
<p>अलंकार ब्रांड नाम से घर सजाने के उत्पादों की अलग रेंज भी लांच की गई है। यह सभी प्रोडक्ट फ्लिपकार्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे। उत्तर प्रदेश सरकार हरदोई जिले के 11 ब्लॉक में एचसीएल फाउंडेशन के साथ मिलकर कार्य कर रही है। यह कार्य स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, जल एवं स्वच्छता, इंफ्रास्ट्रक्चर और आजीविका 6 क्षेत्रों में हैं।</p>
<p>इस मौके पर उप मुख्यमंत्री मौर्य ने कहा, "आजीविका कार्यक्रम के माध्यम से 22,000 से अधिक ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने में सफल रही हैं। फ्लिपकार्ट के साथ एचसीएल फाउंडेशन की साझेदारी से ग्रामीण महिला कलाकारों को अपना हस्तशिल्प बेचने के लिए बड़ा प्लेटफार्म मिल सकेगा।" हस्तशिल्प ग्रामीण महिलाओं के लिए वैकल्पिक आमदनी का एक महत्वपूर्ण जरिया है। इनके बनाए प्रोडक्ट की कीमत 200 से 3500 रुपए तक होती है।&nbsp;</p>
<p>एचसीएल फाउंडेशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आलोक वर्मा ने कहा, "लगभग 2000 महिला कारीगरों को अतिरिक्त आय के रूप में फायदा हुआ है। हमें लगता है कि अगर हम उन्हें सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ दें तो और अधिक महिलाओं को इसका फायदा मिल सकता है। फ्लिपकार्ट समर्थ के साथ हमारी साझीदारी इसी दिशा में एक कदम है। हमें उम्मीद है कि इस साझेदारी से इन महिलाओं को प्रतिमाह 8 से 10 हजार रुपए की अतिरिक्त आमदनी होगी।"</p>
<p>फ्लिपकार्ट समर्थ पहल 2019 में लांच की गई थी इसका मकसद हाशिए पर खड़े समुदायों, कलाकारों, बुनकरों और शिल्पियों को ई-कॉमर्स के माध्यम से राष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है। फ्लिपकार्ट ग्रुप के चीफ कॉरपोरेट्स अफेयर ऑफिसर रजनीश कुमार ने कहा, "इस पहल के माध्यम से हम देशभर में लाखों लोगों की मदद करने में सफल रहे हैं। एचसीएल समुदाय के साथ साझेदारी में हम इन प्रतिभाशाली महिला शिल्पियों को डिजिटल अर्थव्यवस्था में अवसर देना चाहते हैं तथा उनके स्थानीय शिल्प को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।"</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ एचएचसीएल फाउंडेशन ने की फ्लिपकार्ट के साथ साझेदारी, ग्रामीण महिलाओं को आजीविका प्रदान करने की पहल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों पर फोकस, इनके लिए 30,000 करोड़ रुपये का प्रावधान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/yogi-government-allocates-30000-crore-for-rural-economy-and-agriculture.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 26 May 2022 20:53:16 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/yogi-government-allocates-30000-crore-for-rural-economy-and-agriculture.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए खास</strong></p>
<p><strong>-पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के लिए 7,000 करोड़, मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए 508 करोड़ का प्रावधान</strong></p>
<p><strong>-पीएम ग्राम सड़क योजना के लिए 7,374 करोड़, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए 3,155 करोड़ रुपये आवंटित </strong></p>
<p><strong>-पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के मकसद से पंचायती राज संस्थाओं के लिए 7,466 करोड़ रुपये का प्रावधान</strong></p>
<p><strong>-गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिए 1,000 करोड़, चीनी मिलों की मदद के लिए 380 करोड़ रुपये का प्रावधान</strong></p>
<p><strong>-दुग्ध संघों को मजबूत करने के लिए 60 करोड़ रुपये प्रस्तावित, वाराणसी और मेरठ जिलों में ग्रीनफील्ड डेयरी प्लांट पर 80 करोड़ खर्च होंगे</strong></p>
<p><strong>-सिंचाई के लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान, मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत दुर्घटना बीमा के लिए 650 करोड़ प्रस्तावित</strong></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/05/image_750x_6274077290926.jpg" alt="" /></p>
<p><span>उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के मुद्दों पर फोकस किया है। इस साल मार्च में दोबारा सत्ता में आई योगी सरकार ने गुरुवार को पेश बजट में कृषि, संबद्ध गतिविधियों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि बुनियादी ढांचे तथा वैल्यू चेन को मजबूत बनाने के लिए 30,000 करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए हैं।&nbsp;</span></p>
<p>यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने राज्य विधानसभा में 6,<span>15</span>,<span>000 करोड़ रुपये का बजट पेश किया जो 2021-22 के बजट की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। बजट दस्तावेजों के अनुसार</span>, <span>प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए 7</span>,<span>000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है</span>, <span>जबकि मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए 508 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।</span></p>
<p><span>श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन के तहत चालू वित्त वर्ष के लिए 156 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 7,374 करोड़ रुपये का आवंटन है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए 3,155 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।</span></p>
<p><span>15वें केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्य पंचायतों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के मकसद से पंचायती राज संस्थाओं के लिए 7,466 करोड़ रुपये का प्रावधान है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) योजना के तहत 1,788 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान योजना के तहत पंचायतों की क्षमता वृद्धि, प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 540 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।</span></p>
<p><span>संपूर्ण परिवार सर्वेक्षण उत्तर प्रदेश योजना के लिए 10 करोड़ रुपये रखे गए हैं। नमामि गंगे स्वच्छता अभियान के निर्मल गंगा कार्यक्रम के तहत तटीय क्षेत्र में भूमि एवं जल प्रबंधन योजना के लिए 97 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों का बकाया भुगतान करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये दिए गए हैं। साथ ही चीनी मिलों के जीर्णोद्धार एवं आधुनिकीकरण तथा नये संयंत्रों की स्थापना पर 380 करोड़ रुपये व्यय करने का प्रस्ताव है।</span></p>
<p><span>राज्य में दुग्ध संघों को मजबूत और पुनर्जीवित करने के लिए 60 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। मथुरा में 3,000 लीटर प्रतिदिन की क्षमता के नए डेयरी प्लांट के निर्माण के लिए 8 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वाराणसी और मेरठ जिलों में निर्माणाधीन ग्रीनफील्ड डेयरी प्लांट पर लगभग 80 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।</span></p>
<p><span>मत्स्यपालन को बढ़ावा देने के लिए दो करोड़ रुपये की लागत से मत्स्य किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना शुरू की जाएगी। ग्राम सभा तालाबों के मत्स्य पट्टाधारकों एवं मछुआरों को नाव खरीदने में सहायता करने के लिए निषादराज नौका अनुदान योजना का प्रस्ताव किया गया है, जिसके लिए दो करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।&nbsp;असंगठित क्षेत्रों की खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को प्रशिक्षण, नई तकनीक, विपणन और ऋण सुविधाएं प्रदान करने के मकसद से प्रधानमंत्री खाद उद्योग उन्नयन योजना के तहत बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए 121 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।</span></p>
<p><span>सहकारी संस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए इन संस्थाओं के माध्यम से किसानों को रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इस मकसद से 'ब्याज अनुदान' योजना के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। &nbsp;रासायनिक उर्वरकों के अग्रिम भंडारण के लिए 150 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय खादी विपणन विकास सहायता योजना के लिए 15 करोड़ रुपये का प्रावधान है। बजट के बाद प्रेस वार्ता में योगी ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं की शिक्षा, रोजगार, महिलाओं और किसानों के सशक्तीकरण, कानून व्यवस्था के साथ-साथ राज्य के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है। </span></p>
<p><span>बजट में सरकारी नलकूपों और छोटी नहरों के साथ-साथ मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के तहत 1,000 करोड़ रुपये के अनुदान के माध्यम से मुफ्त सिंचाई का प्रस्ताव है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत दुर्घटना बीमा के लिए 650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।&nbsp;</span></p>
<p><span>बजट में लगभग 5,90,000 करोड़ रुपये की कुल प्राप्तियों का अनुमान है। इसमें 4,99,000 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्तियां और 91,739 करोड़ रुपये की पूंजीगत प्राप्तियां शामिल हैं। राजकोषीय घाटा 81,000 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है जो प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 3.96 प्रतिशत है।</span></p>
<p><span></span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/05/image_750x500_628f9b48aa813.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों पर फोकस, इनके लिए 30,000 करोड़ रुपये का प्रावधान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[योगी सरकार बागवानी को बढ़ावा देने  के लिए सभी जिलों में सीओई  की स्थापित  करेगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-government-to-set-up-mini-centers-of-excellence-in-all-districts.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 24 May 2022 22:20:25 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-government-to-set-up-mini-centers-of-excellence-in-all-districts.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सभी 75 <span>जिलों में सेंटर ऑफ एक्सिलेंस</span>&nbsp; (<span>सीओई) और मिनी सेंटर ऑफ एक्सिलेंस</span>&nbsp; (<span>मिनी सीओई</span>)<span> और हाई-टेक नर्सरी की स्थापित करेगी।</span>राज्य ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को बढ़ावा देकर कृषि आय को दोगुना करने की व्यापक योजना के तहत अगले पांच वर्षों में बागवानी फसलों के रकबे को11.6 <span>फीसदी से </span> बढ़ाकर 16 <span>फीसदी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">राज्य में&nbsp; बहराइच, <span>अंबेडकर नगर</span>, <span>मऊ</span>, <span>फतेहपुर</span>, <span>अलीगढ़</span>, <span>रामपुर और हापुड़ जिलों में हाई-टेक नर्सरी पहले से ही चालू हो चुकी हैं. जबकि चंदौली</span>, <span>कौशाम्बी</span>, <span>सहारनपुर</span>, <span>लखनऊ और कुशीनगर में सीओई का निर्माण जारी</span>&nbsp; <span>है। इसी बीच</span>, <span>बस्ती और कन्नौज जिलों में</span>&nbsp; <span>फलों और सब्जियों से संबंधित भारत-इजरायल सीओई स्थापित किया गया है।इसके अलावा</span>, <span>सोनभद्र</span>, <span>मुरादाबाद</span>, <span>आगरा</span>, <span>संत कबीरनगर</span>, <span>महोबा</span>, <span>झांसी</span>, <span>बाराबंकी</span>, <span>लखनऊ</span>, <span>चंदौली</span>, <span>गोंडा</span>, <span>बलरामपुर</span>, <span>बदायूं</span>, <span>फिरोजाबाद</span>, <span>शामली और मिर्जापुर</span>&nbsp; <span>जिले में मिनी सीओई &nbsp;</span>और हाई-टेक नर्सरी निर्माणाधीन हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">एक वरिष्ठ अधिकारी ने&nbsp; <span>कहा</span>, <span>सरकार ने फलों</span>, <span>सब्जियों और मसालों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के साथ-साथ अधिक और गुणवत्ताउपज के लिए बागवानी फसलों की खेती के क्षेत्र को </span>11.6 <span>फीसदी से बढ़ाकर </span>16 <span>प्रतिशत करने का</span>&nbsp;<span>लक्ष्य निर्धारित किया है।</span>सरकार इन सीओई से अच्छी गुणवत्ता वाले पौधों और बीज&nbsp; <span>की अच्छी उपज लेने की योजना बना रही है</span>&nbsp; <span>। इस कदम के पीछे का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की बढ़ती संख्या</span>&nbsp; <span>मे आपूर्त्ति करना है।</span></p>
<p>उत्तर प्रदेश ने पिछले पांच वर्षों में फलों और सब्जियों के उत्पादन में 0.7 <span>फीसदी की वृद्धि देखी है</span>, <span>क्योंकि इसकी खेती अतिरिक्त </span>100,000 <span>हेक्टेयर में हुई है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">जाने माने सब्जी वैज्ञानिक डॉ एस पी सिंह का कहना है कि कृषि आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका है सभी प्रकार के फलों, <span>सब्जियों और मसालों की खेती करना &nbsp;क्योकि राज्य के सभी नौ कृषि-जलवायु क्षेत्रों संपन्न किया जा सकता है।&nbsp; उन्होंने कहा कि </span><span>छोटे और सीमांत किसान</span>, <span>की&nbsp; सख्यां </span>90 <span>फीसदी &nbsp;हैं</span>, <span>यह सभी उपयुक्त जलवायु में विभिन्न प्रकार के फलों</span>, <span>सब्जियों और फूलों को उगाकर इस योजना मे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। डॉ सिंह के अनुसार&nbsp; वर्तमान में अधिकांश किसान धान</span>, <span>गेहूं और गन्ना जैसी पारंपरिक फसलों की खेती में लगे हुए हैं</span>; <span>हालांकि</span>, <span>उन्हें अधिक वित्तीय लाभ के लिए फल</span>, <span>सब्जियां और फूल उगाने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है।</span></p>
<p>इसके अलावा, <span>योगी आदित्यनाथ सरकार</span>&nbsp; <span>ऑफ-सीजन सब्जियो को उगाने के लिए इंडो-इज़राइल तकनीक के माध्यम से संरक्षित खेती को बढ़ावा दे रही है।</span>पिछले 5 <span>वर्षों में</span>, <span>फूलों और सब्जियों की उपज बढ़ाने के लिए </span>177 <span>हेक्टेयर में पॉली हाउस और &nbsp;शेड-नेट का विस्तार किया गया है</span>, <span>जिससे </span>5,549 <span>किसानो को लाभ मिला है.</span></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ योगी सरकार बागवानी को बढ़ावा देने  के लिए सभी जिलों में सीओई  की स्थापित  करेगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में महामारी के दौरान 15 करोड़ लाभार्थियों को दो करोड़ टन अनाज वितरित करने का दावा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-doles-out-20-million-tonnes-of-food-grain-during-pandemic.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 21 May 2022 10:01:15 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-doles-out-20-million-tonnes-of-food-grain-during-pandemic.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में बीते दो वर्षों में कोविड-19 महामारी के दौरान 15 करोड़ लाभार्थियों को दो करोड़ टन मुफ्त अनाज वितरित किया गया। राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2020 से मार्च 2022 तक महामारी के दौरान लोगों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मुफ्त अनाज का वितरण किया गया। यह वितरण राज्य की लगभग 80 हजार उचित मूल्य (राशन) की दुकानों के जरिए किया गया।</p>
<p>उन्होंने बताया कि मुफ्त में दिए गए अनाज तथा अन्य चीजों की कीमत 4500 करोड़ रुपए के आसपास है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार जब मार्च 2022 में दूसरी बार सत्ता में आई तो उसने मुफ्त राशन वितरण की योजना तीन महीने के लिए बढ़ा दी थी। इस योजना के तहत लाभार्थी परिवारों को 35 किलो अनाज के अलावा दालें, चीनी, खाद्य तेल और नमक दिया जाता है। मुफ्त राशन प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के पांचवें चरण के तहत वितरित किया जा रहा है।</p>
<p>इस बीच राज्य सरकार ने प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में लोगों को रोजगार मुहैया कराने तथा स्वरोजगार के अवसर पैदा करने के लिए योजनाओं को गति दी है। मार्च 2020 में महामारी की पहली लहर के दौरान जब पूरे देश में लॉकडाउन लगा था, तब प्रदेश के बाहर रहने वाले अनेक लोग यहां लौट आए थे। राज्य सरकार उन्हें रोजगार मुहैया कराने के साथ मुफ्त अनाज के रूप में मदद करने की कोशिश कर रही है।</p>
<p>बैंकों से लघु एवं छोटे उद्यमियों को आसान शर्तों पर कार्यशील पूंजी का कर्ज देने को कहा गया है। सरकारी और निजी एजेंसियों ने युवाओं के कौशल विकास के कार्यक्रम भी चलाए हैं। उक्त अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के लिए जो एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का सपना देखा है, वह तभी पूरा हो सकता है जब एमएसएमई सेक्टर फले-फूले। इससे अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी निकलेंगे।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में महामारी के दौरान 15 करोड़ लाभार्थियों को दो करोड़ टन अनाज वितरित करने का दावा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मक्के की खेती पर उत्तर प्रदेश का जोर, पांच साल में उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-looking-to-double-maize-output-in-5-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 13 May 2022 09:38:55 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-looking-to-double-maize-output-in-5-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span>ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार 2027 तक मक्के का उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य बना रही है। अभी इसका उत्पादन 14.7 लाख टन के आसपास है, इसे 27.3 लाख टन तक ले जाने का लक्ष्य है। मक्का को रकबा के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण अनाज माना जाता है। इसे </span><span>'अनाज की रानी' भी कहा जाता है। राज्य सरकार किसानों को गैरपारंपरिक फसलों से आय बढ़ाने के लिए मक्के की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। वहीं, प्रति हेक्टेयर मक्का उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।</span></p>
<p><span>राज्य सरकार के एक अधिकारी के अनुसार मक्का की अधिक खेती से किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है। मक्के का उपयोग भोजन, पोल्ट्री फीड और ईंधन (अनाज आधारित इथेनॉल) के रूप में किया जाता है। इसका इस्तेमाल दवा, कॉस्मेटिक, कपड़ा, कागज और अल्कोहल उद्योगों में भी किया जाता है। मक्के का सेवन मूल्यवर्धित खाद्य पदार्थों जैसे आटा, 'ढोकला', बेबी कॉर्न और पॉपकॉर्न के रूप में किया जाता है। इसके विविध उपयोगों के कारण वैश्विक बाजार में मक्का की मांग लगातार बढ़ रही है।</span></p>
<p><span>मक्का की खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार किसानों को खेती के उन्नत तरीकों के बारे में बताने के अलावा बीज प्रतिस्थापन (सीड रिप्लेसमेंट) दर को भी बढ़ावा देगी। किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए सरकार पहले ही इसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के दायरे में ला चुकी है।</span></p>
<p><span>मक्का स्टार्च, फाइबर, प्रोटीन, वसा, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, कैरोटीन और आवश्यक खनिजों जैसे मैक्रोन्यूट्रिएंट्स के कारण भी लोकप्रिय है। इसमें मैग्नीशियम, जस्ता, फास्फोरस, तांबा जैसे खनिज पाए जाते हैं। इसे कुपोषण से लड़ने में एक बेहतर साधन के रूप में भी देखा जाता है।&nbsp;</span></p>
<p><span>उत्तर प्रदेश में 2021-22 में 691,000 हेक्टेयर में मक्के की खेती की गई, जबकि उपज लगभग 14.7 लाख टन थी। राज्य में मक्का की प्रति हेक्टेयर पैदावार 21.63 क्विंटल है, जो राष्ट्रीय औसत 26 क्विंटल से काफी कम है। तमिलनाडु में औसत उपज 59.39 क्विंटल है जो भारत में सबसे अधिक है।</span></p>
<p><span>कृषि विशेषज्ञों के अनुसार प्रति हेक्टेयर औसत उपज 100 क्विंटल तक संभव है। अमेरिका में प्रति हेक्टेयर उत्पादन लगभग 96 क्विंटल है। इससे पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में मक्के की खेती के लिए काफी संभावनाएं हैं।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ मक्के की खेती पर उत्तर प्रदेश का जोर, पांच साल में उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब सरकार का किसानों से आग्रह, बिजली की कमी को देखते हुए अलग&amp;#45;अलग समय पर करें धान की बुवाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-requests-farmers-to-adopt-staggered-paddy-sowing-schedule-amid-power-shortage.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 May 2022 10:02:44 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-requests-farmers-to-adopt-staggered-paddy-sowing-schedule-amid-power-shortage.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बिजली की कमी को देखते हुए पंजाब के बिजली मंत्री हरभजन सिंह ने किसानों से अलग-अलग समय पर धान की बुवाई करने का आग्रह किया है। विभिन्न किसान संगठनों के साथ बातचीत में मंगलवार को उन्होंने उनसे यह आग्रह किया। हालांकि इससे पहले राज्य सरकार ने जो बिजली सप्लाई और धान की बुवाई का शेड्यूल दिया था किसान उसे मानने से इंकार कर चुके हैं।</p>
<p>राज्य सरकार की तरफ से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि अगर किसान अलग-अलग समय पर धान की बुवाई करें तो बिजली के साथ-साथ खाद और श्रमिकों की कमी की समस्या से भी निपटा जा सकता है। बिजली मंत्री के अनुसार अगर किसान कृषि विशेषज्ञ की सलाह मानें तो उनकी उपज पर प्रभावित नहीं होगी।</p>
<p>प्रदेश में धान की बुवाई का सीजन अगले महीने से शुरू होने वाला है। राज्य सरकार ने जो पिछला प्रस्ताव जारी किया था उसके मुताबिक किसानों को 18 जून से धान की बुवाई शुरू करनी थी। यह बुवाई अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग समय पर की जानी थी ताकि बिजली की मांग अचानक बहुत ज्यादा ना बढ़ जाए। लेकिन 8 मई को 16 किसान संगठनों ने राज्य सरकार का शेड्यूल खारिज करते हुए कहा था कि वह 10 जून से ही धान की बुआई करेंगे।</p>
<p>सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक 18 जून से जो बुवाई शुरू होनी थी उसमें सबसे पहले संगरूर, बरनाला, मालेरकोटला, लुधियाना, पटियाला और फतेहगढ़ साहिब जिलों में बुवाई होनी थी।&nbsp; उसके बाद 22 जून से बठिंडा, मानसा, मोगा, फरीदकोट, फिरोजपुर, फाजिल्का जिला में किसानों को बुवाई करनी थी। 24 जून से मोहाली, एसबीएस नगर, कपूरथला, मुक्तसर जिलों में और 26 जून से गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर, अमृतसर, तरनतारन जिलों में बुवाई शुरू की जानी थी।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब सरकार का किसानों से आग्रह, बिजली की कमी को देखते हुए अलग-अलग समय पर करें धान की बुवाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपीः ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के ब्लूप्रिंट के लिए बोली की समय सीमा बढ़ी, 24 मई तक जमा हो सकेगी बोली]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/yogi-government-relaxes-global-bidding-deadline-for-trillion-dollar-blueprint.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 06 May 2022 00:00:00 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/yogi-government-relaxes-global-bidding-deadline-for-trillion-dollar-blueprint.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 2027 तक एक ट्रिलियन डॉलर (लगभग 75 लाख करोड़ रुपए) का बनाने का ब्लूप्रिंट तैयार करने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने वैश्विक सलाहकारों के लिए बोली लगाने की समय सीमा करीब एक महीने बढ़ा दी है। पहले ई-बोली 29 अप्रैल तक जमा करना अनिवार्य था। यूपी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अब समय सीमा को बढ़ा कर 24 मई कर दिया गया है। वैश्विक ई-बोली प्रक्रिया के लिए हाल ही हुई प्री-बिड मीटिंग में कई सुझावों पर विचार करते हुए बोली की समय सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p>सरकार ने वैश्विक प्रक्रिया के वांछित उद्देश्यों को प्राप्त करने और इसे अधिक व्यापक बनाने के लिए बोली दस्तावेज में उन सुझावों को भी शामिल करने का निर्णय लिया गया। एक ट्रिलियन डॉलर का ब्लूप्रिंट तैयार करने के लिए ई-बोली प्रक्रिया के तहत सलाहकार का चयन किया जाएगा। इसके लिए राज्य योजना विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। विभाग ने संशोधित बोली दस्तावेज पर काम करना शुरू कर दिया है और बोली लगाने वालों के लिए जल्द ही संशोधित दस्तावेज अपलोड किया जाएगा।</p>
<p><span>यूपी सरकार वर्तमान में अपने विभिन्न विभागों को दुरुस्त करने की प्रक्रिया में भी है। यह राज्य के समग्र सामाजिक आर्थिक विकास के लिए 100 दिन का रोडमैप तैयार कर रही है। बोली प्रक्रिया को स्थगित करने का यह भी एक कारण है। </span><span>यूपी का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) अभी 230 अरब डॉलर है। 2027 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने का मतलब राज्य की अर्थव्यवस्था का चार गुना से अधिक विस्तार होगा। अर्थशास्त्री और समाज विज्ञानी प्रोफेसर ए.पी. तिवारी इसे एक कठिन कार्य मानते हैं।</span><span>यूपी सरकार निकट भविष्य में भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंडे के साथ अपने ट्रिलियन डॉलर की योजना को मिलाकर चलना चाहती है। </span></p>
<p><span>इससे पहले</span><span>, मोदी ने खुद यूपी और महाराष्ट्र को प्रतिस्पर्धा करने को कहा था कि दोनों राज्यों में से कौन भारत की पहली ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनता है।</span><span>सरकार ने जो रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) दस्तावेज़ जारी किया था, उसमें कहा गया था कि उत्तर प्रदेश सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। देश की जीडीपी में इसकी आठ फीसदी हिस्सेदारी है। इसलिए भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।</span><span>आरएफपी के अनुसार, </span><span>&ldquo;</span><span>इस </span><span>कठिन कार्य के लिए राज्य सरकार को कुछ बड़े कदम उठाने की जरूरत है। इसके लिए निरंतर कुछ सुविचारित और दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता है। अधिक प्रभावी शासन, तेजी से निर्णय लेने की प्रक्रिया और बेहतर जवाबदेही के लिए सांगठनिक पुनर्गठन</span><span>, </span><span>फोकस वाली </span><span>नीतियों और नियमों की भी आवश्यकता होगी।</span><span>&rdquo;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपीः ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के ब्लूप्रिंट के लिए बोली की समय सीमा बढ़ी, 24 मई तक जमा हो सकेगी बोली ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब में 5 मई से गेहूं खरीद चरणबद्ध तरीके से बंद होगी, आवक घटने के कारण सरकार ने लिया फैसला]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-to-conclude-procurement-from-may-5-as-wheat-arrivals-decline.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 03 May 2022 17:40:45 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-to-conclude-procurement-from-may-5-as-wheat-arrivals-decline.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब की मंडियों में गेहूं की आवक में भारी गिरावट को देखते हुए खाद्य, <span>नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने राज्य भर की मंडियों में फसल की खरीद बंद करने का फैसला किया है। खाद्य</span>, <span>नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री लाल चंद कटारुचक ने मंगलवार को कहा कि राज्य की मंडियों में चरणबद्ध तरीके से 5 मई से गेहूं की खरीद बंद की जाएगी। इस संबंध में अधिसूचना पंजाब मंडी बोर्ड द्वारा जारी की जाएगी। </span></p>
<p><span>उन्होंने खरीद की गति और एमएसपी के सीधे किसानों के बैंक खातों में तेजी से वितरण पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा</span><span>, यह खराब मौसम से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद हुआ, जिसके परिणामस्वरूप राज्य के अधिकांश हिस्सों में गेहूं सिकुड़ गया था। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर गेहूं की कीमतों में तेजी के बाद, अधिकांश राज्यों में गेहूं की सरकारी खरीद में भारी गिरावट देखी गई, लेकिन केंद्रीय पूल में गेहूं की सबसे बड़ी मात्रा में योगदान देने में पंजाब ने एक बार फिर देश का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि राज्य ने अब तक 93 लाख टन से अधिक गेहूं की खरीद की है।</span></p>
<p><span>रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की मांग में वृद्धि हुई है और निजी व्यापारी गेहूं की ज्यादा खरीद कर रहे हैं। सिकुड़े हुए दाने के लिए मानदंडों में ढील देने में देरी के बारे में उन्होंने कहा कि केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने समस्या की सीमा का पता लगाने के लिए अधिकारियों का एक दूसरा दल भेजने का फैसला किया था। राज्य में पहले 132 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया था।</span></p>
<p><span></span></p>
<p><span>यह भी पढ़ें... </span><strong>लक्ष्य से आधे पर तो नहीं अटक जाएगी गेहूं की सरकारी खरीद</strong></p>
<p><strong><a href="https://www.ruralvoice.in/national/wheat-procurement-by-government-could-stuck-at-half-the-target.html">https://www.ruralvoice.in/national/wheat-procurement-by-government-could-stuck-at-half-the-target.html</a></strong></p>
<p><strong></strong></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/05/image_750x500_62711bbd3cced.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में 5 मई से गेहूं खरीद चरणबद्ध तरीके से बंद होगी, आवक घटने के कारण सरकार ने लिया फैसला ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/05/image_750x500_62711bbd3cced.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब सरकार का ऐलान, डायरेक्ट सीडिंग तकनीक से धान की बुवाई करने पर प्रति एकड़ 1500 रुपए की मदद मिलेगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-govt-to-give-rs-1500-per-acre-to-paddy-growers-using-direct-seeding-technique.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 30 Apr 2022 19:02:26 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-govt-to-give-rs-1500-per-acre-to-paddy-growers-using-direct-seeding-technique.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब के जो किसान धान की बुवाई के लिए डायरेक्ट सीडिंग (डीएसआर) तकनीक का इस्तेमाल करेंगे उन्हें पंजाब सरकार प्रति एकड़ 1500 रुपए आर्थिक मदद देगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि किसान 20 मई से डीएसआर तकनीक से धान की बुवाई शुरू कर सकते हैं। राज्य में भूजल का स्तर और गिरने से रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री ने किसानों से ज्यादा से ज्यादा जमीन पर डीएसआर तकनीक से धान की बुवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इसे अपनाने वाले किसानों को ना सिर्फ प्रति एकड़ 1500 रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी बल्कि कृषि विभाग भी जरूरी मदद मुहैया कराएगा।&nbsp;</p>
<p>डीएसआर तकनीक में मशीन के जरिए खेतों में ड्रिलिंग करके धान के बीज बोए जाते हैं और साथ में कीटनाशकों का भी छिड़काव किया जाता है। पारंपरिक तरीके में पहले किसान नर्सरी में धान के छोटे पौध तैयार करते हैं फिर उन्हें उखाड़ कर खेतों में बोया जाता है।</p>
<p>भूजल के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों से इसे बचाने की जरूरत पर जोर दिया। पारंपरिक तरीके से धान की बुवाई में पानी की जरूरत बहुत ज्यादा पड़ती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वजह से पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है। राज्य के कुछ जिले तो रेड जोन कैटेगरी में आ गए हैं।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएसआर तकनीक पर्यावरण के लिए फायदेमंद तो है ही किसानों के लिए भी कम खर्चीला है। जिन खेतों में इस विधि से धान की बुवाई की जाएगी उनमें गेहूं की पैदावार भी अधिक होगी। पिछले साल धान की बुवाई वाले 28 लाख हेक्टेयर में से छह लाख हेक्टेयर क्षेत्र में डीएसआर विधि से बुवाई हुई थी। मुख्यमंत्री ने 17 अप्रैल को 24 किसान संगठनों के साथ बैठक की थी। उसमें भी उन्होंने भूजल के गिरते स्तर पर चिंता जताई थी। उन्होंने अधिकारियों से भी किसानों को डीएसआर तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करने को कहा है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब सरकार का ऐलान, डायरेक्ट सीडिंग तकनीक से धान की बुवाई करने पर प्रति एकड़ 1500 रुपए की मदद मिलेगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फिनो बैंकिंग कॉरस्पॉडेंट सखियों ने ग्रामीण उत्तर प्रदेश में बैंकिंग सुविधा बढ़ाई, 34 सखियां की गईं सम्मानित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/fino-bc-sakhis-pushing-rural-banking-in-up-hinterland.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 30 Apr 2022 18:29:42 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/fino-bc-sakhis-pushing-rural-banking-in-up-hinterland.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बिजनेस कॉरस्पॉडेंट सखी प्रोजेक्ट के एक साल पूरे होने पर फिनो पेमेंट्स बैंक ने 34 बिजनेस कॉरस्पॉडेंट सखियों को सम्मानित किया है। इन महिला बैंकिंग एजेंटों ने ग्रामीण उत्तर प्रदेश में घर-घर बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराई है। लॉकडाउन के समय उत्तर प्रदेश में फिनो के 50,000 से अधिक मर्चेंट पॉइंट के साथ माइक्रो एटीएम से युक्त बिजनेस कॉरस्पॉडेंट सखियों ने दूरदराज के क्षेत्रों में भी अपनी सेवाएं दीं।</p>
<p>बिजनेस कॉरस्पॉडेंट खाताधारकों को जिस तरह की सेवाएं मुहैया कराते हैं उनमें नकद राशि, खासकर बुजुर्गों को और मनरेगा, प्रधानमंत्री किसान योजना जैसी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीमों के तहत मिलने वाली राशि उपलब्ध कराना शामिल है। उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ग्रामीण विकास) मनोज कुमार सिंह ने बताया कि डीबीटी के माध्यम से हर साल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में लगभग 75000 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जाते हैं।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में लगभग 60,000 राजस्व गांव हैं और हर जगह पारंपरिक बैंक शाखा खोलना मुमकिन नहीं है। इसलिए घर-घर बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बिजनेस कॉरस्पॉडेंट सखी मॉडल अपनाया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्र की पढ़ी-लिखी महिलाओं को रोजगार भी मिलता है।</p>
<p>फिनो पेमेंट्स बैंक के सीईओ मेजर आशीष आहूजा ने बताया, लगभग 860000 केंद्रों के जरिए समस्त भारत में डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क उपलब्ध कराना हमारी मजबूती है। इनके जरिए हम ग्राहकों को कई तरह की बैंकिंग सुविधाएं मुहैया कराते हैं। बिजनेस कॉरस्पॉडेंट सखियां हमारे इस प्रयास में पूरक का काम करती हैं। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत फिनो ने अभी तक 11 जिलों में 4700 महिलाओं को रोजगार दिया है। हालांकि उसे स्वयं सहायता समूह की 10000 महिलाओं को सखी नियुक्त करना है।</p>
<p>फिनो पेमेंट्स बैंक के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट अमित कुमार जैन ने बताया, बिजनेस कॉरस्पॉडेंट सखियां 4700 ग्राम पंचायतों में हर महीने लगभग 50 करोड़ का लेनदेन कर रही हैं। यह काफी उत्साहजनक है। जल्दी ही हम 5000 और सखियों को जोड़ेंगे ताकि ग्रामीण इलाकों में भी लोगों को डिजिटल बैंकिंग के करीब लाया जा सके।</p>
<p>फिनो प्वाइंट और बिजनेस कॉरस्पॉडेंट सखियों के माध्यम से लोग पैसे जमा करने, निकालने, ट्रांसफर करने जैसी नियमित सेवाओं के अलावा स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा और वाहन बीमा भी खरीद सकते हैं। ग्राहक इनके माध्यम से बिजली तथा अन्य यूटिलिटी बिल, बीमा प्रीमियम और लोन की ईएमआई का भी भुगतान कर सकते हैं।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ फिनो बैंकिंग कॉरस्पॉडेंट सखियों ने ग्रामीण उत्तर प्रदेश में बैंकिंग सुविधा बढ़ाई, 34 सखियां की गईं सम्मानित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बिजली संयंत्रों के लिए यूपी सरकार की 19 लाख टन कोयला आयात करने की योजना, उत्पादन लागत बढ़ने पर उपभोक्ताओं के लिए भी बढ़ सकती है कीमतें]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-plans-to-import-1.9-million-tonnes-of-coal-worth-rs-2900-crore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 28 Apr 2022 10:53:53 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-plans-to-import-1.9-million-tonnes-of-coal-worth-rs-2900-crore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की विद्युत इकाई ने 19 लाख टन कोयला आयात करने की योजना बनाई है। आयात किए जाने वाले इस कोयले की कीमत लगभग 2900 करोड़ रुपए होगी। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम की इकाइयों में कोयले की भारी कमी हो रही है। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने के कारण बिजली की मांग भी काफी बढ़ गई है। निगम को रोजाना लगभग 87,900 टन कोयले की जरूरत है जबकि इसे आपूर्ति सिर्फ 61,000 टन की हो रही है। यानी जरूरत का सिर्फ 70 फ़ीसदी कोयला इसे मिल रहा है।</p>
<p>इसलिए निगम ने जरूरत का 10 फ़ीसदी यानी 18.95 लाख टन कोयला आयात करने का फैसला किया है। आयातित कोयला महंगा होगा और इस पर करीब 2900 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इसलिए बिजली उत्पादन की लागत भी 70 पैसे प्रति यूनिट बढ़ जाने की उम्मीद है। निगम के प्रबंध निदेशक पी गुरुप्रसाद ने बताया कि कोयला आयात की कीमत 15341 रुपए प्रति टन आंकी गई है। यह अनुमान एनटीपीसी के विंध्याचल रिहंद थर्मल पावर प्रोजेक्ट की तरफ से कोयला आयात के लिए जारी टेंडर के आधार पर निकाला गया है।</p>
<p>हालांकि कोयला आयात के प्रस्ताव को उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की मंजूरी की जरूरत है। हाल ही आयोग के सचिव संजय कुमार सिंह ने निगम को नोटिस भेजा था जो कोयला आयात के सिलसिले में था। उत्तर प्रदेश बिजली उपभोक्ता फोरम के प्रेसिडेंट अवध कुमार वर्मा की याचिका पर आयोग के सचिव ने निगम को पत्र भेजा था।</p>
<p>अब वर्मा का दावा है कि यदि कोयला आयात का प्रस्ताव मंजूर किया गया तो निगम को अनुमान की तुलना में काफी ज्यादा रकम, 5000 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि अभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में जो भाव चल रहे हैं उसके मुताबिक आयात की कीमत 17000 रुपए प्रति टन के आसपास बैठेगी जबकि निगम ने एनटीपीसी के जनवरी के टेंडर के आधार पर अनुमान निकाला है। उन्होंने कहा कि इससे उत्तर प्रदेश में बिजली उत्पादन की लागत एक रुपए प्रति यूनिट बढ़ जाएगी जिसे अंततः राज्य के उपभोक्ताओं पर ही डाला जाएगा।</p>
<p>इस बीच उत्तर प्रदेश के विद्युत विभाग ने कोयला आयात की जिम्मेदारी निगम पर डाल दी है और कहा है कि केंद्र और विद्युत नियामक आयोग के निर्देशों के आधार पर वह जनहित को देखते हुए फैसला करे। इससे पहले आयोग ने निगम से सवाल किया था कि आयातित कोयला जिसकी ग्रॉस कैलोरीफिक वैल्यू (जीसीवी) अधिक होगी क्या उन्हें राज्य के विद्युत संयंत्रों में इस्तेमाल किया जा सकेगा क्योंकि वह संयंत्र कम जीसीवी के आधार पर बनाए गए हैं।</p>
<p>आयोग ने इस बात पर आश्चर्य जताया था कि जब राज्य की दूसरी विद्युत उत्पादन कंपनियां कोयला आयात नहीं कर रही हैं तो उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत निगम ही आयात क्यों करना चाहता है। आयोग ने उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) को सप्लाई की जाने वाली बिजली के बारे में भी पूछा था और जानना चाहा था कि कोयले की कमी के कारण इसमें कोई बाधा आ रही है या नहीं। उत्तर प्रदेश में बिजली की दैनिक मांग 21,000 मेगा वाट से ऊपर पहुंच चुकी है जबकि सप्लाई 19,000 से 20,000 मेगावाट तक ही है। इससे जगह-जगह बिजली कटौती की जा रही है।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बिजली संयंत्रों के लिए यूपी सरकार की 19 लाख टन कोयला आयात करने की योजना, उत्पादन लागत बढ़ने पर उपभोक्ताओं के लिए भी बढ़ सकती है कीमतें ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में बिजली उत्पादन के लिए कोयला आयात पर सवाल, नियामक आयोग ने पूछा आयातित कोयला इस्तेमाल कैसे होगा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-energy-watchdog-frowns-upon-coal-import-tender.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 21 Apr 2022 12:25:50 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-energy-watchdog-frowns-upon-coal-import-tender.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में बिजली संयंत्रों के लिए कोयला आयात करने पर नया विवाद खड़ा हो गया है। सरकारी बिजली उत्पादन कंपनी उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने कोयले की उपलब्धता के संकट को देखते हुए इसका आयात करने का फैसला किया है, लेकिन राज्य विद्युत नियामक आयोग यूपीईआरसी ने इस पर सवाल उठाए हैं। आयोग के सचिव संजय कुमार सिंह ने निगम के चेयरमैन को पत्र लिखकर पूछा है कि क्या आयातित कोयला, जिनकी ग्रॉस कैलोरीफिक वैल्यू (जीसीवी) अधिक होगी, निगम के बिजली संयंत्रों में इस्तेमाल किया जा सकेगा। दरअसल निगम के प्लांट काफी पुराने हो चुके हैं और वे कम जीसीवी वाले कोयले के हिसाब से बनाए गए थे।</p>
<p>आयोग ने निगम से यह भी पूछा है कि कोयला आयात करने के लिए पूर्व अनुमति ली गई थी या नहीं। यह भी कि सिर्फ यूपी राज्य विद्युत उत्पादन निगम कोयला आयात कर रहा है जबकि अन्य बिजली उत्पादन कंपनियां ऐसा नहीं कर रही हैं। आयोग ने इसके लिए मीडिया रिपोर्ट के साथ-साथ उत्तर प्रदेश बिजली उपभोक्ता फोरम के प्रेसिडेंट अवधेश कुमार वर्मा के पत्र का हवाला दिया है।</p>
<p>आयोग ने विद्युत उत्पादन निगम की तरफ से उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) को सप्लाई की गई बिजली के बारे में भी पूछा है। उसने जानना चाहा है कि बीते एक महीने में उत्पादन लक्ष्य की तुलना में कितनी बिजली सप्लाई की गई है। आयोग ने यूपीईआरसी जनरेशन टैरिफ रेगुलेशन 2019 के क्लॉज 23(4)1 का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया है सरकार द्वारा नोटिफाई की गई कीमतों से इतर अन्य कीमत पर इंधन खरीदने पर तभी विचार किया जा सकता है जब वह पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए प्रतिस्पर्धी नीलामी पर आधारित हो।</p>
<p>आयोग के सचिव ने लिखा है, &ldquo;इसलिए इस संदर्भ में मुझे निम्न स्पष्टीकरण लेने का निर्देश दिया गया है, (डी) क्या प्रशासित मूल्य वाले कोयले की कमी है, अगर हां तो यह कमी कोयला खदान के स्तर पर है या रेल वैगन की उपलब्धता न होने के कारण। यदि कोयले की कमी रेल वैगन की अनुपलब्धता के कारण है तो आयातित कोयले को प्लांट तक लाने में ट्रांसपोर्टेशन की समस्या कैसे दूर होगी, वह भी तब जब घरेलू कोयले को प्लांट तक लाने में समस्या आ रही है।&rdquo;</p>
<p>उत्तर प्रदेश में बिजली की दैनिक मांग 21,000 मेगावाट को पार कर चुकी है जबकि सप्लाई 19,000 से 20,000 मेगावाट तक ही हो रही है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे के अनुसार देश के ताप बिजली घरों में कोयले के स्टॉक की कमी को देखते हुए आने वाले दिनों में बिजली संकट गहरा हो सकता है।&nbsp;</p>
<p>दुबे ने रविवार को कहा था कि अक्टूबर 2021 के बाद 12 राज्यों में कोयले की कमी बनी हुई है। उन्होंने दावा किया था कि ताप बिजली घरों को कोयले की सप्लाई के लिए रेलवे के 453 वैगन की जरूरत है जबकि अप्रैल के पहले हफ्ते में सिर्फ 379 वैगन उपलब्ध कराए गए थे। अब यह संख्या बढ़कर 415 हुई है।</p>
<p>हालांकि उत्तर प्रदेश में कोयले का संकट अभी तक गंभीर नहीं हुआ है, फिर भी दुबे के अनुसार विद्युत उत्पादन निगम के संयंत्रों में मानक की तुलना में 26 फ़ीसदी कोयले का भंडार ही उपलब्ध है। निगम के चार ताप बिजली घर हैं जिनमें 19.7 लाख टन कोयले का स्टॉक होना चाहिए जबकि यह सिर्फ 5,11,700 टन है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/04/image_750x500_626102225ea8b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में बिजली उत्पादन के लिए कोयला आयात पर सवाल, नियामक आयोग ने पूछा आयातित कोयला इस्तेमाल कैसे होगा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब का 20 दिनों में लक्ष्य का आधा गेहूं खरीदने का दावा, लेकिन केंद्र की खरीद 32 फीसदी घटी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-achieves-50-per-cent-of-wheat-procurement-target.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 21 Apr 2022 00:14:29 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-achieves-50-per-cent-of-wheat-procurement-target.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब सरकार ने गेहूं खरीद शुरू होने के पहले 20 दिनों में लक्ष्य का आधा गेहूं खरीद लेने का दावा किया है। राज्य में एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू हुई है। मौजूदा मार्केटिंग सीजन में राज्य सरकार ने 130 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। राज्य की मंडियों में 20 अप्रैल तक 67.5 लाख टन गेहूं की आवक हुई जिसमें से 65.4 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है।</p>
<p>सरकार की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है। बयान में कहा गया है कि पिछले साल की तुलना में इस वर्ष 27 फीसदी अधिक गेहूं आया है। पिछले साल रबी सीजन में इस तारीख तक 53.35 लाख टन गेहूं आया था। इस वर्ष अभी तक जो गेहूं आया है उसमें से 61.95 लाख टन गेहूं की खरीद सरकारी एजेंसियों ने की है जबकि 3.45 लाख टन गेहूं निजी एजेंसियों ने खरीदा है।</p>
<p>संगरूर में सबसे अधिक गेहूं मंडियों में आया है। वहां 19 अप्रैल तक 7.27 लाख टन गेहूं मंडियों में आया जिसमें से 7.18 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। फिरोजपुर में 5.4 लाख टन और पटियाला में 5.31 लाख टन गेहूं की आवक हुई है। राज्य में 35.02 लाख लाख हेक्टेयर इलाके में गेहूं की बुवाई हुई थी और इस वर्ष कुल 171 लाख टन उत्पादन की उम्मीद है</p>
<p>पंजाब सरकार ने भले ही 20 दिनों में लक्ष्य का आधा गेहूं खरीदने का दावा किया हो, केंद्र की तरफ से गेहूं की खरीद में गिरावट आई है। खबरों के मुताबिक 17 अप्रैल तक केंद्र की तरफ से गेहूं की खरीद 32 फीसदी गिर कर 69.24 लाख टन थी। एक साल पहले रबी मार्केटिंग सीजन में इस तारीख तक 102 लाख टन गेहूं की खरीद की गई थी। रबी का मार्केटिंग सीजन अप्रैल से मार्च तक चलता है लेकिन ज्यादातर खरीद जून तक पूरी हो जाती है। केंद्र सरकार ने इस वर्ष 444 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। पिछले साल भी 433.44 लाख लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी जो अब तक का सर्वाधिक है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/04/image_750x500_6260547d566d9.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब का 20 दिनों में लक्ष्य का आधा गेहूं खरीदने का दावा, लेकिन केंद्र की खरीद 32 फीसदी घटी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब के 85 फ़ीसदी घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली का तोहफा, आप ने पूरा किया चुनावी वादा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/aap-government-announces-free-electricity-up-to-300-units-in-punjab.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 17 Apr 2022 10:13:01 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/aap-government-announces-free-electricity-up-to-300-units-in-punjab.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने प्रदेश के 85 फ़ीसदी घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली का तोहफा दिया है। दरअसल अपने चुनावी वादे को पूरा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए हर 2 महीने में 600 यूनिट बिजली मुफ्त करने की घोषणा की, यानी प्रतिमाह औसतन 300 यूनिट। राज्य में घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से 85 फ़ीसदी यानी लगभग 62 लाख घरों में प्रतिमाह 300 यूनिट से कम बिजली खर्च होती है। हालांकि नई योजना 1 जुलाई 2022 से लागू होगी। औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए दरों में भी अभी कोई वृद्धि नहीं की जाएगी।</p>
<p>मुफ्त बिजली योजना की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि सामान्य वर्ग के परिवार अगर 2 महीने के चक्र में 600 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करते हैं तो उनसे पूरी यूनिट का शुल्क लिया जाएगा। यानी अगर किसी ने 625 यूनिट बिजली खर्च की है तो उसे पूरे 625 यूनिट के पैसे देने पड़ेंगे, सिर्फ 25 यूनिट के नहीं।&nbsp;</p>
<p>लेकिन अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, गरीबी रेखा से नीचे के लोगों और स्वतंत्रता सेनानियों को इससे छूट दी गई है। अगर यह लोग 600 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करते हैं तो उन्हें उस अतिरिक्त यूनिट के लिए ही पैसे देने पड़ेंगे। अभी तक इनके लिए मुफ्त बिजली की सीमा 200 यूनिट थी। मान ने कहा कि जिनका लोड 2 किलो वाट तक है और उनका बिजली बिल बकाया है, तो 31 दिसंबर 2021 तक का बकाया माफ कर दिया जाएगा। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या कितनी है।</p>
<p>2 महीने में 600 यूनिट यानी 300 यूनिट प्रतिमाह बिजली मुफ्त देने से राज्य सरकार पर करीब 5500 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। अभी किसानों को जो मुफ्त बिजली दी जा रही है उसका खर्च लगभग 6000 करोड़ रुपए आता है। इसके अलावा अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और गरीबी रेखा से नीचे के करीब 22 लाख परिवारों को मिल रही सब्सिडी करीब 4000 करोड़ रुपए की है।</p>
<p><em><strong>(प्रकाश चावला सीनियर इकोनॉमिक जर्नलिस्ट है और आर्थिक नीतियों पर लिखते हैं)</strong></em></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/04/image_750x500_62584b70674aa.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब के 85 फ़ीसदी घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली का तोहफा, आप ने पूरा किया चुनावी वादा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[अब मछली पालन पर उत्तर प्रदेश सरकार का फोकस, 100 दिनों में किसानों को 20 करोड़ मछली के बीज वितरित करेगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/yogi-government-to-usher-to-usher-in-blue-revolution.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 17 Apr 2022 00:00:00 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/yogi-government-to-usher-to-usher-in-blue-revolution.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>फिशरीज यानी मछली पालन को बढ़ावा देकर और रोजगार के नए अवसर पैदा करके नीली क्रांति लाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार मछली के 20 करोड़ बीज वितरित करने की योजना बना रही है। यह बीज उन लोगों को वितरित किए जाएंगे जो मछली पालन कर रहे हैं। सरकारी सूत्रों ने रूरल वॉयस को बताया कि यह कार्य अगले 100 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा।&nbsp;</p>
<p>योगी आदित्यनाथ सरकार अपनी दूसरी पारी में रोजगार के अवसर के तौर पर लघु और छोटी औद्योगिक इकाइयों को बढ़ावा दे रही है। इसी योजना के तहत मछली पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें कम पूंजी में अधिक मुनाफा कमाने की संभावना होती है। इस योजना के तहत अच्छी क्वालिटी के मछली बीज उत्तर प्रदेश फिशरीज डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा संचालित हैचरी के किसानों के साथ-साथ निजी हैचरी चलाने वालों को भी दिए जाएंगे।</p>
<p>इस योजना से प्रदेश में मछली उत्पादन काफी बढ़ने की संभावना है और साथ ही बड़े पैमाने पर किसानों को आजीविका का साधन भी मिलेगा। इसके अलावा सरकार रिवर रैंचिंग को भी प्रमोट करेंगी जिसके तहत विभिन्न प्रजाति की मछलियों के 5 लाख बच्चे नदी में छोड़े जाएंगे। इससे नदी में मछलियों की संख्या बढ़ेगी और मछुआरा समुदाय को आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।</p>
<p>सरकार विभिन्न तालाबों के पानी और मिट्टी के करीब 4000 सैंपल एकत्र करके उनका परीक्षण करेगी। इस परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर आगे कदम उठाए जाएंगे। राज्य सरकार की योजना 750 हेक्टेयर अतिरिक्त जलीय क्षेत्र को फिशरीज में शामिल करने की है। मछलियों के बीज ग्राम सभा के आवंटित तालाबों और निजी तालाबों में जमा किए जाएंगे।</p>
<p><strong>पूर्वी उत्तर प्रदेश में आलू की खेती को बढ़ावा</strong></p>
<p>मछली पालन के अलावा उत्तर प्रदेश सरकार पूर्वी क्षेत्र में आलू की खेती को भी बढ़ावा देना चाहती है। इसके लिए कुशीनगर में आलू पर एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोला जाएगा। यहां से किसानों को उच्च क्वालिटी के आलू के बीज मुहैया कराए जाएंगे। इससे भी किसानों को बागवानी फसलों में तथा अपनी आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।</p>
<p>सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए वर्कशॉप भी आयोजित करेगा। इसमें कृषि विशेषज्ञ रहेंगे जो किसानों को उनकी समस्याओं के व्यवहारिक समाधान बताएंगे, जैसे कम पानी में ज्यादा उत्पादन कैसे हासिल किया जा सकता है।</p>
<p>2024 के आम चुनाव में अब सिर्फ 2 साल रह गए हैं और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी उससे पहले खेती पर फोकस करना चाहती है। इसलिए खेती में भी अलग अलग क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए विभिन्न योजनाएं लागू की जा रही हैं। इन योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए पर्याप्त फंड भी मुहैया कराया जा रहा है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ अब मछली पालन पर उत्तर प्रदेश सरकार का फोकस, 100 दिनों में किसानों को 20 करोड़ मछली के बीज वितरित करेगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[क्लस्टर अप्रोच है उत्तर प्रदेश के विकास का सही रोडमैप ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/cluster-approach-is-the-right-road-map-of-development-for-uttar-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 12 Apr 2022 11:01:24 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/cluster-approach-is-the-right-road-map-of-development-for-uttar-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में एक विज्ञापन दिया था कि वह&nbsp; राज्य की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर पर ले जाने के लिए&nbsp; एक कंसल्टेंट नियुक्ति करना चाहती है। जो इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था के तेज विकास को लेकर काफी गंभीर है। उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनावों के नतीजे भारतीय जनता पार्टी को दोबारा सत्ता में लेकर आए हैं और राज्य में यह कई दशकों के बाद हुआ है कि किसी पार्टी के मुख्यमंत्री की दोबारा सत्ता में वापसी हुई है। यह बात भी सही है कि पांच साल सत्ता में रहने के बावजूद राज्य की पिछली सरकार प्रदेश को आर्थिक और मानव विकास के आंकड़ों में बहुत ऊपर नहीं ला पाई थी। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार के पास फिर से एक मौका आया है कि वह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही वहां के लोगों के जीवन स्तर को बेहतर करे। दूसरे कार्यकाल में उसे नई रणनीति और नीतिगत पहल के साथ काम करना चाहिए। उत्तर प्रदेश में एक मजबूत अर्थव्यवस्था बनने की तमाम संभावनाएं और कौशल मौजूद हैं बशर्ते कि उनको एक बेहतर रोडमैप के जरिये उपयोग में लाया जाए। देश के कई राज्यों और खासतौर से तमिलनाडु में आर्थिक क्लस्टर अप्रोच के जरिये नतीजे हासिल किये गये हैं।</p>
<p>इस रोडमैप के तहत उत्तर प्रदेश को आर्थिक गतिविधियों के क्लस्टरों के रूप में देखने की जरूरत है। राज्य का सबसे बड़ा उद्योग गन्ना और चीनी उद्योग है। सहारनपुर से शुरू होकर देवरिया तक राज्य के पश्चिमी और उत्तरी हिस्से में गन्ना उत्पादन होता है। यहां की भौगोलिक स्थिति व जलवायु इसके लिए अनुकूल है। साथ ही यहां गन्ने की फसल के लिए जरूरी पानी भी उपलब्ध है। पिछले करीब दो दशकों में इस पूरे इलाके में चीनी मिलों का जाल बिछ गया है। इस समय उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य होने के साथ ही एथनॉल का भी सबसे बड़ा उत्पादक है। एथनॉल उत्पादन के लिए उपयोग होने वाली डिस्टीलरी के अपशिष्ट में पोटाश होता है और केंद्र सरकार ने उससे बनने वाले उर्वरक को न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनबीएस) स्कीम के तहत सब्सिडी के लिए मान्य कर दिया है। चीनी बनाने की प्रक्रिया के तहत अलग किये जाने वाले प्रेसमड से कंप्रैस्ड सीएनजी का उत्पादन कई इकाइयां शुरू कर चुकी हैं। वहीं अतिरिक्त बगास (खोई) से बिजली का उत्पादन कर चीनी मिलें राज्य सरकार को बेच रही हैं। गन्ने से बनने वाले उत्पादों और उस पर आधारित उद्योग में संभावनाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। इन संभावनाओं का बेहतर उपयोग कर राज्य के करीब 45 लाख किसानों की आर्थिक स्थिति में भारी सुधार संभव है। इसलिए इस उद्योग के लिए राज्य सरकार को नए सिरे से नीति बनाने की जरूरत है। यह उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में ही स्थापित हैं, ऐसे में ग्रामीण इलाकों के आर्थिक कायाकल्प के लिए इनका बेहतर उपयोग करने पर काम होना चाहिए।</p>
<p>राज्य के केंद्रीय हिस्से में हाथरस, आगरा, कन्नौज, इटावा, एटा, फर्रूखाबाद, शिकोहाबाद, बहराइच में आलू की खेती बड़े पैमाने पर होती है और उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है। आलू किसानों और कारोबारियों ने यहां बड़े पैमाने पर कोल्ड स्टोर भी स्थापित किये हैं। देश में सबसे अधिक कोल्ड स्टोर इस क्षेत्र में ही हैं। आलू कीमतों में उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए यहां आलू से स्टार्च बनाने के संयंत्र और वोदका बनाने के प्लांट स्थापित किये जा सकते हैं। साथ ही यहां बड़ी संख्या में मौजूद कोल्ड स्टोरों का उपयोग दूसरे कृषि उत्पादों के भंडारण के लिए भी किया जा सकता है।</p>
<p>सहारनपुर में वुड वर्क का कौशल है और यहां के उत्पाद दुनिया भर में मशहूर हैं। वहीं बिजनौर का एक अनजान का कस्बा शेरपुर पेंट ब्रश उत्पादन का देश का सबसे बड़ा केंद्र है। मेरठ में स्पोर्ट्स गुड्स इंडस्ट्री है। मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट उत्पादों का केंद्र है। रामपुर, मुरादाबाद, बदायूं और बरेली मैंथा उत्पादन के केंद्र हैं। दुनिया का 70 फीसदी मिंट भारत में उत्पादित होता है और इसका अधिकांश हिस्सा उत्तर प्रदेश के इन जिलों में पैदा होता है, जिसकी निर्यात संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वहीं कन्नौज इत्र उत्पादन का केंद्र है। लखनऊ में चिकनकरी है तो बनारस में साड़ियों का पारंपरिक केंद्र है। भदोही-मिर्जापुर में कालीन उद्योग है। फिरोजाबाद में ग्लासवेयर और बैंगल्स की इकाइयां हैं। कानपुर और उन्नाव में टैनरीज हैं। वहां बैग, बैल्ट, जूते और शेडलरी का उत्पादन होता है, तो आगरा का शू उद्योग लैदर का इस्तेमाल करने वाला उद्योग है। इन केंद्रों को बड़े क्लस्टरों के रूप में विकसित करने की संभवनाएं हैं।</p>
<p>साथ ही राज्य में पांच से छह अरब डॉलर का मीट निर्यात करने की क्षमता वाले 40 स्लॉटरहाउस यानी मीट प्लांट्स हैं। ये आटोमैटिड हैं और अपीडा में पंजीकृत हैं। निर्यात के साथ ही यह संयंत्र घरेलू लैदर इंडस्ट्री के लिए कच्चे माल (फ्रैश साल्टेड हाइड) की भी आपूर्ति करते हैं। साथ ही जिलेटिन की आपूर्ति भी ये संयंत्र करते हैं जो कैप्सूल बनाने के काम आता है। इसे एक बड़ी बिजनेस संभावना के रूप में देखते हुए नीतिगत फैसले लेने की जरूरत है। &nbsp;</p>
<p>इसके साथ ही राज्य के अधिकांश हिस्सों में एक्सप्रेसवे बनने से ढांचागत सुविधाएं मजबूत हुई हैं जो औद्योगिक विकास के लिए जरूरी है। इसके साथ ही फ्रेट कॉरीडोर बनने से ढांचागत सुविधाएं और बेहतर होंगी।</p>
<p>विभिन्न स्थानों पर स्थित औद्योगिक क्लस्टर्स का किस तरह फायदा उठाया जाता है, उसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार और नीति निर्धारकों को तमिलनाडु का उदाहरण देखने की जरूरत है। तमिलनाडु का शिवकासी देश में सबसे कम बारिश वाले इलाके में है। मदुरै से करीब 50 किलोमीटर दूर यह शहर दुनिया भर में पटाखों, सेफ्टी मैच बॉक्स और प्रिटिंग का केंद्र है। यहां की अर्थव्यवस्था दस हजार करोड़ रुपये से अधिक है। जिसके चलते यहां बड़े पैमाने पर रोजगार भी उपलब्ध है और कारोबार के मौके भी हैं।</p>
<p>तमिलनाडु का तिरुपुर जो कोयंबतूर से करीब 40 किलोमीटर दूर है, निटेड गारमेंट्स के निर्यात का देश का सबसे बड़ा केंद्र है। दुनिया के सभी बड़े ब्रांड यहां से गारमेंट्स की आउटसोर्सिंग करते हैं। हर घर कहीं न कहीं इस कारोबार से जुड़ा है और बड़े पैमाने पर गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं जो बेहतर कार्य करने की सुविधाओं वाले उद्योगों के सभी मानकों को पूरा करती हैं और कर्मचारियों को बेहतर वेतन के साथ काम का बेहतर माहौल देती हैं। खासतौर से महिला कर्मचारियों की यहां बड़ी तादाद है। एक समय लुधियाना से निटिंग मशीन लाकर यहां काम शुरू करने वाले बिजनेसमैन अब दुनिया की सबसे बेहतर तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। यहां कई ऐसे समूह हैं जो यार्न उत्पादन से लेकर गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग तक का सारा काम खुद करते हैं जो उनके मुनाफे को बढ़ाने के साथ वैश्विक बाजार में उन्हें अधिक प्रतिस्पर्धी बनाता है।</p>
<p>तमिलनाडु का कोयंबतूर इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल का पुराना हब है और यहां के उत्पादों की मार्केट देश भर में है। इरोड हल्दी प्रोसेसिंग का बड़ा केंद्र है साथ ही सेलम पावरलूम का सेंटर है तो करूर बस कोच बिल्डिंग का केंद्र है। नामक्कल देश की अंडा राजधानी है। देश के सबसे बड़े लॉरी फ्लीट ट्रांसपोर्टर यहां से ही हैं। तमिलनाडु के रानीपेट और आम्बूर में लैदर बैल्ट का उत्पादन होता है तो छत्रपति में सर्जिकल कॉटन उत्पाद बनते हैं जो पूरे देश की जरूरत पूरी करते हैं। नायम में व्हाइट शर्ट का उत्पादन होता है जो कीमत के मामले बहुत ही किफायती हैं।</p>
<p>तमिलनाडु के यह उदाहरण इसलिए दिये गये हैं ताकि जिस तरह तमिलनाडु ने अलग-अलग आर्थिक क्लस्टरों का उपयोग कर राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत किया है, उसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश सरकार यहां मौजूद क्लस्टरों को मजबूत करे, कारोबार की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए और नीतिगत फैसले करे। उसके लिए राज्य के आर्थिक विकास का एक ऐसा रोडमैप बनाना होगा जो इन क्लस्टरों को केंद्र रखकर तैयार किया गया हो।</p>
<p>पिछले कुछ बरसों से उत्तर प्रदेश में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रॉडक्ट स्कीम को लेकर काफी चर्चा हुई और उसे बहुत महत्वाकांक्षी माना गया है। लेकिन सही मायने में यह बेहतर रणनीति नहीं है। हर जिले को अलग इकाई मानने की बजाय पहले से मौजूद क्लस्टरों में मौजूद संभावनाओं का फायदा उठाया जाए। साथ ही खास बात यह है कि यह क्लस्टर राज्य के सभी हिस्सों में मौजूद हैं, न कि केवल किसी एक हिस्से में। इसलिए इनके जरिये पूरे राज्य में आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करना संभव है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश की आर्थिक गति के रास्ते में कुछ प्रशासनिक बाधाएं भी हैं। यहां सब फैसले दो जगह होते हैं लखनऊ और इलाहबाद। इन दोनों जगह पर जो फैसले होते हैं वह पूरे राज्य पर असर छोड़ते हैं। लखनऊ की नौकरशाही और इलाहबाद की अदालतों का विकेंद्रीकरण जरूरी है ताकि फैसलों के केंद्र राज्य के दूसरे हिस्से भी बन सकें। राज्य केवल लखनऊ या इलाहबाद से न चलकर बाकी जगहों से भी चले तो राज्य में मौजूद आर्थिक संभावनाओं को बेहतर तरीके से उपयोग में लाया जा सकता है। नई सरकार के रोडमैप में सत्ता विकेंद्रीकरण का एजेंडा भी शामिल किया जाना चाहिए।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ क्लस्टर अप्रोच है उत्तर प्रदेश के विकास का सही रोडमैप  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[धान खऱीद के मुद्दे पर केंद्र के खिलाफ तेलंगाना के  मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को मिला राकेश टिकैत  का साथ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/kcr-raised-paddy-procurement-issue-in-delhi-gets-rakesh-tikait-support.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 11 Apr 2022 18:48:42 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/kcr-raised-paddy-procurement-issue-in-delhi-gets-rakesh-tikait-support.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>नई दिल्ली, 11 अप्रैल, 2022</strong></em></p>
<p>धान की खऱीद के मुद्दे पर केंद्र और तेलंगाना की सरकार के बीच चल रहा विवाद अब दिल्ली पहुंच गया है। सोमवार को केंद्र सरकार द्वारा राज्य में किसानों का सारा धान खऱीदने की मांग लेकर सोमवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव अपनी पूरी कैबिनेट और विधायकों के साथ हजारों किसानों को लेकर दिल्ली पहुंचे और यहां धरना दिया। इस मौके पर उन्हें भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत का भी साथ मिल गया और वह इस धरने प्रदर्शन में शामिल हुए।&nbsp;<br />तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने राज्य से आए सैकड़ों आंदोलनरत किसानों को तेलंगाना भवन पर आयोजित धरना-प्रदर्शन को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री पीयूष गोयल से अपील की कि जिस तरह केंद्र सरकार बाकी राज्यों से धान खरीदती है उसी तरह तेलंगाना का धान भी खरीदे। वह प्रधानमंत्री के निर्णय का 24 घंटे इंतजार करेंगे। 24 घंटे बाद वह सही फैसला लेंगे। के. चंद्रशेखर राव ने कहा कि वह तेलंगाना के किसानों को उनका हक दिलवाकर ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि हम इतने गरीब नहीं हैं, हम सारे देश के किसानों के हक की लड़ाई लड़ेंगे। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि देश के जिस कोने में भी किसानों की समस्या को लेकर कोई आवाज उठाएगा, भाकियू और एसकेएम उसका पुरजोर समर्थन करेगा। साथ ही देश के किसानों को एकजुट कर एक देश एक कृषि नीति की मांग को लेकर व्यापक आंदोलन चलाएगा।<br />मुख्यमंत्री केसीआर ने कहा कि तेलंगाना राज्य के सभी मंत्रिगण, सांसद, विधायकगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि इस प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे। तेलंगाना के किसान करीब दो हजार किलोमीटर दूर चलकर दिल्ली पहुंचे।&nbsp;<br />इस अवसर पर मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने कहा कि सभी विधायक व किसाान इतनी कड़ी धूप में क्यों आए, उनकी क्या मजबूरी थी। क्या धान उगाना पाप था? नरेन्द्र मोदी जी आप किसानों के साथ अन्याय न करें। भारत में जहां भी कष्ट पाकर किसानों की आह निकले, वहां की सरकार जरूर सत्ता से बाहर निकले। कोई भी सत्ता स्थायी नहीं होती। आपके खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री पीयूष गोयल का बर्ताव बहुत ही अपमानजनक था। हमारे कृषि मंत्री निरंजन रेड्डी जब तेलंगाना के किसानों की मांग को लेकर पीयूष गोयल के पास पहुंचे तो उनका व्यवहार बुरा और अपमानजनक था। पीयूष गोयल ने कहा कि आप तेलंगाना की जनता को किनकी (टूटा हुआ चावल) खाने की आदत डालें। यह व्यवहार उचित नहीं है। उन्हें देश के कोने-कोने के बारे में क्या मालूम है, यह मुझे समझ में नहीं आता। तेलंगाना में 20 लाख बोरवैल चलते हैं, करोड़ों का खर्च कर किसानों ने मोटर खरीदी और धान उगाने का काम किया। तेलंगाना बनने के पूर्व पानी का स्तर जमीन से हजार मीटर नीचे था। महबूब नगर के लाखों लोग कामकाज की तलाश में अन्य राज्यों को चले गए थे, लेकिन तेलंगाना राज्य बनने के बाद स्थिति में भारी परिवर्तन आया है। किसानों को 24 घंटे मुफ्त बिजली देने वाला एकमात्र राज्य तेलंगाना है। तेलंगाना में कृषि भूमि में एक करोड़ एकड़ की बढ़ोतरी हुई है। प्रधानमंत्री जी आपके मंत्री उल्टा मेरा अपमान भी कर रहे हैं। क्या धान उगाना ही किसानों का दोष है।&nbsp;<br />केसीआर ने कहा कि किसानों का महासंग्राम शुरू होगा। इस देश के किसान भिखारी नहीं हैं। तेलंगाना के किसानों की मांग है कि आप एग्रीकल्चर पॉलिसी बनाइए। हम भी इसमें अपना योगदान देंगे। अगर ऐसा नहीं हो सका तो तेलंगाना जब लड़ने निकलता है तो अंतिम विजय प्राप्त करने तक रुकता नहीं है। आपको बताता हूं कि तेलंगाना सरकार इतनी कमजोर नहीं है। वह अपने किसानों को बचा लेगी, लेकिन हम चाहते हैं कि सारे देश को पता चले कि इनका व्यवहार क्या है। क्या केन्द्र सरकार के पास धान खरीदने का धन नहीं या नरेन्द्र मोदी का मन नहीं। यह षड्यंत्र देश में आगे नहीं चलेगा। केसीआर ने कहा कि केन्द्र सरकार किसानों को कॉरपोरेट के वश में करना चाहती है। यही इनकी नीति है। उन्होंने कहा कि अगर किसानों के हक में केन्द्र सही फैसले नहीं लेता है और सही एग्रीकल्चर पॉलिसी नहीं बनती है तो देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा बनेगी। इसमें वे अन्य विपक्षी दलों के साथ भी बातचीत करेंगे।<br />तेलंगाना की मौजूदा एमएलसी और पूर्व सांसद के. कविथा ने कहा कि जब तक तेलंगाना के किसानों से उसकी फसल के एक-एक दाने की खरीद नहीं होगी तब तक हम चुप नहीं बैठेंगे। हमारा सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रहेगा।<br />इस मौके पर राकेश टिकैत ने कहा कि एक राज्य का मुख्यमंत्री पूरी कैबिनेट के साथ दिल्ली में धरना दे और वह भी फसल खरीद के लिए, इससे शर्मनाक बात केंद्र सरकार के लिए और क्या हो सकती है। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली में चारों ओर किसान धरने पर बैठे तब भी केंद्र सरकार ने किसानों से सौतेला व्यवहार किया। उन्हें बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ी गई। किसानों ने हक मांगा तो उन पर मुकदमे लाद दिए गए। लेकिन हम झुके नहीं और तीन बिल वापसी के बाद ही किसान घर को लौटे। एक तरफ संसद में कहा जाता है कि कृषि प्रदेश का मामला है और एमएसपी केंद्र सरकार तय करती है। राज्यों का कोटा वह निर्धारित करती है। तीन काले कृषि कानून भी संसद में लाने का काम किया गया।&nbsp;<br />टिकैत ने कहा कि तेरह महीने दिल्ली में चले किसान आंदोलन का ही नतीजा है कि आज एक राज्य किसानों की मांग को लेकर दिल्ली में धरने पर बैठा है। इसके अलावा भी कोई राज्य किसानों के मुद्दे उठाएगा तो वह हर उस मंच पर जाकर किसानों की आवाज उठाएंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ धान खऱीद के मुद्दे पर केंद्र के खिलाफ तेलंगाना के  मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को मिला राकेश टिकैत  का साथ ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[योगी सरकार 750 करोड़ रुपए में 1500 बसें खरीदेगी, ग्रामीण इलाकों को प्रमुख शहरों से जोड़ने का प्रस्ताव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/yogi-govt-hammers-out-rs-750-crore-metro-bus-service-for-hinterland.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 04 Apr 2022 10:35:38 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/yogi-govt-hammers-out-rs-750-crore-metro-bus-service-for-hinterland.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>साल 2024 के आम चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने ग्रामीण इलाकों को प्रदेश के बड़े शहरों से जोड़ने के लिए 750 करोड़ रुपए की मेट्रो बस सेवा शुरू करने की योजना बनाई है। यह बस सेवा ग्रामीण इलाकों को सीधे दिल्ली और लखनऊ जैसे बड़े शहरों से जोड़ेगी।</p>
<p>इस सेवा के लिए राज्य सरकार ने 1500 बसें खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इन बसों के खरीदने पर 750 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। सूत्रों के मुताबिक ग्रामीण मेट्रो बस सेवा 6 से 9 महीने में शुरू की जाएगी। इस सेवा को तीन चरणों में लागू किया जाएगा।</p>
<p>पहले चरण में करीब 900 बसें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में लगाई जाएंगी ताकि वहां के ग्रामीण क्षेत्र को सीधे दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ा जा सके।</p>
<p>दूसरे और तीसरे चरण में 300-300 बसें बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्र में शुरू की जाएंगी जो गांवों को लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, झांसी जैसे शहरों से जोड़ेंगी। इस नई बस सेवा के लिए अलग बस डिपो तैयार करने का प्रस्ताव है। यात्रा का समय कम करने के लिए नए रूट भी तय किए जाएंगे।</p>
<p>इस समय उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम यूपीएसआरटीसी 85 हजार से अधिक गांवों में बस सेवा मुहैया कराता है। इसके बावजूद लगभग 12000 गांव ऐसे हैं जहां बस सेवा नहीं है। प्रस्तावित ग्रामीण मेट्रो बस सेवा के जरिए वित्त वर्ष 2022-23 खत्म होने से पहले इस कमी को दूर करने का लक्ष्य है।</p>
<p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/04/image_750x500_624a7c9846a29.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ योगी सरकार 750 करोड़ रुपए में 1500 बसें खरीदेगी, ग्रामीण इलाकों को प्रमुख शहरों से जोड़ने का प्रस्ताव ]]></media:description>
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        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में पंचायतों को मजबूती देकर ‘लोकल को वोकल’ करना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/making-local-vocal-through-strengthening-panchayats-in-uttar-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 02 Apr 2022 10:49:14 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/making-local-vocal-through-strengthening-panchayats-in-uttar-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वोकल फॉर लोकल यानी देश में बनी वस्तुओं को बढ़ावा देने की बात करते हैं। लेकिन यह कैसे संभव होगा? इसका एक रास्ता उत्तर प्रदेश के पंचायती राज संस्थानों को मजबूत करना हो सकता है, जहां आठ लाख से अधिक चुने गए प्रतिनिधियों को प्रभावी तरीके से साथ लेने की जरूरत है। इस लेख में लोकल को कैसे वोकल बनाया जा सकता है, इस बात पर जोर दिया गया है। लेकिन उससे पहले कुछ बातें बजट के बारे में। इस लेखक ने उत्तर प्रदेश के 2021-22 के बजट का जो विश्लेषण <strong>रूरल वॉयस</strong> में किया था उसमें बताया गया था कि ग्रामीण विकास के लिए 2020-21 में 31,402 दो करोड़ रुपए का बजट अनुमान था। साल 2021-22 के बजट अनुमान में इसे घटाकर 27,455 करोड़ रुपए कर दिया गया। यानी इसमें 13 फ़ीसदी की कटौती की गई।</p>
<p>इसके विपरीत शहरी विकास का बजट जो 2020-21 में 20,461 करोड़ था उसे 2021-22 के बजट अनुमान में 17 फ़ीसदी से अधिक बढ़ाकर 23,980 करोड़ रुपए कर दिया गया। अगर 2021-22 के शहरी विकास विभाग के बजट अनुमानों को 2020-21 के संशोधित अनुमानों से तुलना करें तो यह 58 फ़ीसदी अधिक होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी विकास को अधिक महत्व दिया गया। जबकि शहरी क्षेत्रों में जो समस्याएं हैं वह एक तरह से ग्रामीण क्षेत्रों से ही वहां पहुंची हैं। विश्लेषण में यह भी पता चला कि राज्य के कुल व्यय में 5.4 फ़ीसदी हिस्सा ग्रामीण विकास के लिए था जो सभी राज्यों के राष्ट्रीय औसत 6.1 फ़ीसदी से कम है।</p>
<p>राज्य में 75 जिला पंचायतें, 822 क्षेत्र पंचायतें और 75,212 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें 8,26,458 चुने हुए प्रतिनिधि सदस्य, विषय समिति के चेयरपर्सन और ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत के अध्यक्ष के रूप में काम कर रहे हैं। आठ लाख से अधिक चुने हुए प्रतिनिधियों के वोकल होने के लिए उनके पास अधिक क्षमता होनी चाहिए, उनके पास अधिक अधिकार और संसाधन होने चाहिए।</p>
<p>संविधान का 73वां संशोधन क्षेत्र पंचायतों, जिला पंचायतों और ग्राम पंचायतों से आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजना बनाने की उम्मीद रखता है। खासकर संविधान की 11वीं अनुसूची में दिए गए 29 विषयों के बारे में। इन 29 विषयों में कृषि, गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण और समुदाय की संपत्ति का रखरखाव भी शामिल हैं। इस समय आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाओं के बजाए ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के स्तर पर विकास की योजनाएं बनाई जा रही हैं।</p>
<p>यह कार्य पंचायतों द्वारा अपने संसाधनों के जरिए पूरा किए जाने की उम्मीद की जाती है। क्योंकि अपने संसाधन जुटाने के कारण वे स्थानीय स्तर पर एक जिम्मेदार संस्थान के रूप में कार्य कर सकते हैं और स्थानीय स्तर पर अपनी बात रख सकते हैं। मौजूदा संदर्भ में हम यह देखते हैं कि जब संसद में पंचायत विधेयक पेश किया गया था तब सरकार के उद्देश्य और उसकी जिम्मेदारियां क्या थीं</p>
<p>तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री जी. वेंकटस्वामी ने 1 दिसंबर 1992 को 73वां संविधान संशोधन विधेयक पेश करते हुए कहा था, &ldquo;यह केंद्र के साथ-साथ राज्यों का भी कर्तव्य है कि वे ग्राम प्रधान की व्यवस्था स्थापित करें और उसे प्रभावी तथा स्वशासन संस्थान के रूप में विकसित करें। यह विधेयक प्रस्तुत करके सरकार महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार कर रही है।&rdquo; तीन दशक पहले जो बात कही गई थी क्या वह हो सकी? क्या गांधीजी का सपना पूरा हुआ? संसद में विधेयक पेश करते समय राज्य की जो भूमिका बताई गई थी वह कहां है?</p>
<p>इस पृष्ठभूमि में राज्य में लोकल को वोकल बनाने की प्रक्रिया मजबूत करने के लिए यह सुझाव दिए जा रहे हैं-</p>
<p>पहला, ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत प्रभावी तरीके से काम करें, इसके लिए जरूरी है कि कृषि, उद्योग एवं निर्माण समिति, शिक्षा एवं जन स्वास्थ्य समिति, समता समिति, कार्य एवं विकास समिति आदि गठित की जाएं तथा उन्हें क्रियाशील किया जाए ताकि वे सदस्यों को शामिल करते हुए ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के विभिन्न कार्यों को पूरा कर सकें।</p>
<p>दूसरा, विकेंद्रीकृत लोकतंत्र के सबसे निचले पायदान को मजबूत बनाने के लिए वार्ड स्तर पर भी एग्जीक्यूटिव अधिकार दिए जाने चाहिए। उत्तर प्रदेश इस मामले में बिहार से सीख ले सकता है जहां इस तरह के प्रयोग पहले से चल रहे हैं। तीसरा, बजट, अकाउंट और ऑडिट का रखरखाव पंचायत ही करें। 15वें वित्त आयोग ने पंचायतों के खातों के लिए शर्तें निर्धारित की हैं। अगर उनके खाते मेंटेन नहीं हो रहे हैं तो वित्त आयोग पंचायतों को फंड जारी नहीं करेगा। राज्य वित्त आयोग को भी इस पर गौर करना चाहिए और अपने स्तर पर कदम उठाने चाहिए।</p>
<p>चौथा, चुने गए प्रतिनिधियों और अधिकारियों, दोनों को उचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। विभिन्न स्तरों पर प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी जिला और क्षेत्रीय स्तर पर संस्थानों की चेन है। उनके पास प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर होने चाहिए। प्रशिक्षित लोगों का उचित फॉलोअप किया जाना चाहिए जिससे यह पता चल सके कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें जो जानकारी और कौशल सिखाया गया उसका उन्होंने इस्तेमाल किया है या नहीं। अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया है तो सुधारात्मक उपाय किए जाने चाहिए। प्रशिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षुओं को स्मार्टफोन की मदद से प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण देने के बाद प्रशिक्षक प्रशिक्षुओं का 6 महीने तक फॉलोअप करके यह देखेंगे कि उनमें किस स्तर की समझ विकसित हुई है। हर महीने प्रशिक्षक प्रशिक्षुओं से उन्हें दिए गए प्रशिक्षण के व्यावहारिक पहलुओं के बारे में पूछेंगे। उदाहरण के लिए ग्राम पंचायत की बैठक में वार्ड सदस्य को आमंत्रित किया गया या नहीं। अगर नहीं तो प्रशिक्षक उसे रिकॉर्ड करेगा और रिकॉर्ड किए हुए संदेश को कार्रवाई के लिए सरकार की तरफ से नियुक्त उचित अधिकारी को भेजेगा। प्रशिक्षण के दौरान बताए गए अन्य कार्यों के लिए भी इस तरह का तरीका अपनाया जा सकता है। जांच करने, मूल्यांकन और आवश्यक कार्रवाई के लिए पहले से तय व्यवस्था होनी चाहिए।</p>
<p>पांचवां, एसडीजी क्या है? पंचायत स्तर पर इसका कैसे स्थानीयकरण किया जा सकता है? वह कौन से क्षेत्र हैं जिन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है? इन सब मुद्दों पर काम किया जाना चाहिए। यदि पंचायत में वैसे ही काम हो जैसी कि उम्मीद की जाती है तो एसडीजी के लक्ष्यों को हासिल करने में कोई समस्या नहीं आएगी। छठा, पंचायतें वित्तीय और तकनीकी रूप से इतनी सक्षम नहीं होती हैं कि वे जलापूर्ति, ग्रामीण सड़क, स्ट्रीट लाइट, स्वच्छता और प्राथमिक स्वास्थ्य जैसे मुख्य कार्यों को पूरा कर सकें।</p>
<p>दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग की भी राय थी कि पंचायत स्तर पर आंतरिक संसाधन जुटाने का कार्य इसलिए कमजोर है क्योंकि टैक्स उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और वे रेवेन्यू संग्रह के कदम उठाने से बचते हैं। अतः जलापूर्ति सिस्टम, सॉलिड लिक्विड वेस्ट डिस्पोजल सिस्टम, सार्वजनिक पार्क, खेल के मैदान, बाजार परिसर, सार्वजनिक लाइब्रेरी, तालाब जैसे सामाजिक आर्थिक एसेट सृजित करने के लिए पर्याप्त पूंजी निवेश की जरूरत है। पंचायतें इन सेवाओं के लिए यूजर चार्ज तय कर सकती हैं अथवा अपने एसेट को लीज पर देकर आमदनी बढ़ा सकती हैं। क्योंकि फंड साझा किए बिना या अपने संसाधन के स्रोत (ओएसआर) के बिना स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी। अंत में, लोकल को वोकल बनाने के लिए राज्य के गवर्नेंस में भागीदारी गवर्नेंस, प्लानिंग और विकास को अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।</p>
<p><em><strong>(लेखक इंडियन इकोनॉमिक सर्विस के पूर्व अधिकारी हैं)</strong></em></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में पंचायतों को मजबूती देकर ‘लोकल को वोकल’ करना ]]></media:description>
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        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर बदले जा सकते हैं ब्यूरोक्रेट, जानिए क्यों ऐसा करेंगे योगी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/major-bureaucratic-reshuffle-likely-soon-in-up.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 01 Apr 2022 14:15:48 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/major-bureaucratic-reshuffle-likely-soon-in-up.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में योगी सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू होने के बाद आने वाले हफ्तों में नौकरशाही में बड़े पैमाने पर फेरबदल की उम्मीद की जा रही है। अभी राज्य में विधान परिषद केr कई सीटों के लिए चुनाव होने हैं। इसलिए राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू है। इस कारण नौकरशाही में फेरबदल फिलहाल स्थगित है।</p>
<p>वैसे यह परंपरा रही है कि राज्य में जब भी कोई नई सरकार गठित होती है तो उसके विजन और एजेंडा के अनुसार अफसरशाही में फेरबदल किए जाते हैं। हालांकि योगी आदित्यनाथ 35 साल के बाद लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाले पहले नेता हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने अब अपनी नजरें अगले लोकसभा चुनाव पर टिका दी हैं। आम चुनाव बस दो साल दूर हैं इसलिए भगवा पार्टी ने उस बड़ी लड़ाई के लिए जमीन अभी से तैयार करनी शुरू कर दी है।</p>
<p>आम चुनाव को ध्यान में रखकर ही योगी ने अपने दूसरे कार्यकाल में मंत्रिपरिषद में कई पुराने चेहरों को हटाकर नए चेहरों को जगह दी है। इसके अलावा काम के प्रदर्शन को देखते हुए कुछ मंत्रियों के विभाग भी बदले गए हैं।</p>
<p>राज्य में आने वाले हफ्तों में कई शीर्ष आईएएस अधिकारी रिटायर होने वाले हैं। यह भी एक कारण है कि योगी सरकार ने एग्रीकल्चरल प्रोडक्शन कमिश्नर, इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कमिश्नर, यूपी रेवेन्यू बोर्ड चेयरमैन जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए उत्तर प्रदेश काडर के अधिकारियों की पहचान शुरू कर दी है। विभिन्न विभागों में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी और प्रिंसिपल सेक्रेटरी के पदों में भी फेरबदल किया जाना है। हालांकि चुनाव आयोग की तरफ से आचार संहिता खत्म होने के बाद ही यह किया जाएगा।</p>
<p>एक रोचक बात यह है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी यह अनुमान लगा रहे थे कि विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की हार होगी और इसलिए उन्होंने विपक्ष के नेताओं के साथ तालमेल बढ़ाना शुरू कर दिया था। उन्हें इस फेरबदल में दरकिनार किए जाने की उम्मीद है। कुछ जिला मजिस्ट्रेट और चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर को भी किनारे किया जा सकता है। उनकी जगह नए अधिकारी नियुक्त किए जा सकते हैं ताकि 2024 के चुनावों से पहले सरकारी योजनाओं की डिलीवरी बेहतर की जा सके।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर बदले जा सकते हैं ब्यूरोक्रेट, जानिए क्यों ऐसा करेंगे योगी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[दूसरी बार सत्ता में आते ही नौकरशाही को  योगी का संदेश काम में कोई ढील मंजूर नहीं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/yogi-signals-perform-or-perish-mantra-for-top-bureaucrats.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 29 Mar 2022 18:46:50 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/yogi-signals-perform-or-perish-mantra-for-top-bureaucrats.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में लगातार दूसरी बार शपथ लेने के तुरंत बाद नौकरशाहों के लिए एक कड़ा संकेत देते हुए &nbsp;एक मंत्र दिया है कि&nbsp; बेहतर प्रदर्शन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।</p>
<p>हाल ही में राज्य के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक में योगी ने कहा कि सरकार को अतिरिक्त प्रय़ास करने की जरूरत है क्योंकि उनका मानना है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार &nbsp;को&nbsp; राज्य के मतदाताओं ने जिस विश्वास से दोबारा चुना है उनके उस विश्वास को कायम रखने के लिए अब उन्हें अपने खुद के काम से प्रतिस्पर्धा करनी होगी ताकि &nbsp;हम पहले से बेहतर काम कर सकें ।</p>
<p>पिछली योगी सरकार के कई मंत्रियों का इस बार विधायक चुने जाने के बावजुद नई मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं किया जाना अधिकारियों के लिए एक सीधा संदेश है कि &nbsp;अधिकारियों को सरकार के एजेंडे के प्रति सचेत रहना ही पडेगा &nbsp;।</p>
<p>इस बार योगी कैबिनेट का गठन 2024 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए जातिय औऱ क्षेत्रीय समीकरणों के गणित के &nbsp;आधार पर की&nbsp; गई है । सभी लोग&nbsp; मुख्य मंत्री से यह &nbsp;अपेक्षा कर रहे है कि वह ऐसा रोडमैप तैयार करेगें जिससे सरकार के विभिन्न सेक्टरो में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए एक दूसरे से अच्छा तालमेल हो । इसके साथ ही &nbsp;अच्छा काम करने वाले को प्रोत्साहित और&nbsp; पुरस्कृत किया जाए। राज्य के विभन्न विभागों पर प्रमुख पदो पर बैठे &nbsp;अक्षम अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है ।</p>
<p>योगी ने&nbsp; एक संक्षिप्त संदेश में कहा कि &nbsp;हमें नागरिकों के प्रति संवेदनशील होना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी सरकार की हर नीति के केंद्र में गांव, गरीब, किसान, महिलाएं और युवा बने रहें।&nbsp; उन्होंने शासन में दक्षता और पारदर्शिता पर जोर देते हुए योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में अंतर-विभागीय समन्वय और सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग पर जोर दिया ।</p>
<p>योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए 10 प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करें &nbsp;ताकि &nbsp;आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था एक ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच जाए । इस संबंध में विभाग प्रमुखों को अगले 100 दिन, छह माह और एक साल की कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है.। इन योजनाओं को पुन:निरीक्षण और समय पर कार्यान्वयन के लिए यूपी मंत्रिपरिषद के समक्ष पेश किया जाना है। अधिकारियों को 'ई-ऑफिस' के साथ-साथ 'नागरिक चार्टर' को पूरी तरह से लागू करने का भी निर्देश दिया गया है, जिससे एक निश्चित समय सीमा के भीतर सार्वजनिक शिकायतों का समाधान &nbsp;किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि अधिकारी 'लोक कल्याण संकल्प पत्र' जो कि भाजपा का चुनाव घोषणापत्र है , उसके &nbsp;प्रत्येक बिंदु को याद रखकर उस दिशा में काम करे जिससे&nbsp; लक्ष्यो को प्राप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि चुनाव के पूर्व &nbsp;किए &nbsp;गये सभी वादों को पूरा करने के लिए गंभीर प्रयास करना होगा।</p>
<p>मुख्य मंत्री ने उत्तर प्रदेश को भारत की शीर्ष अर्थव्यवस्था बनाने के अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि इस संकल्प की पूर्ती के लिए अंतर-विभागीय समन्वय स्थापित कर हर स्तर से&nbsp; टीम उत्तरप्रदेश&nbsp; को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है । इस बीच, योगी ने विभिन्न विभागों द्वारा संसाधन जुटाकर और बजट का उपयोग करके राज्य के राजस्व को बढ़ाने पर जोर दिया ।</p>
<p>उन्होंने अधिकारियों से मौजूदा वित्त वर्ष 2022-23 के लिए पूर्ण बजट की तैयारी शुरू करने को कहा है ।&nbsp; योगी आदित्यनाथ सरकार &nbsp;ने दिसंबर 2021 में 2022-23 के लिए अंतरिम बजट पेश किया गया था क्योंकि उस&nbsp; वक्त कुछ महीनो बाद उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव होने वाले थे। इसके चलते अंतरिम बजट पेश किया गया था ।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ दूसरी बार सत्ता में आते ही नौकरशाही को  योगी का संदेश काम में कोई ढील मंजूर नहीं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[योगी की नई मंत्रिपरिषद में कई पुराने चेहरे गायब, आर्थिक विभागों से जुड़े मंत्री बदले]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/several-prominent-faces-missing-from-yogi-govt.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Mar 2022 13:33:30 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/several-prominent-faces-missing-from-yogi-govt.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ के गोमतीनगर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ दो उपमुख्यमंत्री और 50 अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। लेकिन इस शपथ ग्रहण समारोह की खास बात यह रही कि पिछली योगी सरकार के कई बड़े चेहरों को मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं किया गया।</p>
<p>योगी की नई कैबिनेट में जिन नामों को जगह नहीं मिल पाई उनमें दिनेश शर्मा, सिद्धार्थ नाथ सिंह, श्रीकांत शर्मा, सतीश महाना और रमापति शास्त्री भी शामिल हैं। दिनेश शर्मा पिछली सरकार में उप मुख्यमंत्री थे लेकिन इस बार उनकी जगह ब्राह्मण चेहरा बृजेश पाठक को उप मुख्यमंत्री बनाया गया है। दिनेश शर्मा उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य हैं।</p>
<p>एक खास बात यह भी है कि गाजियाबाद और कानपुर उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र हैं। यहां से किसी भी विधायक को मंत्री पद नहीं मिला है। यही नहीं, पिछली योगी सरकार में जिन मंत्रियों के पास आर्थिक और उद्योग से जुड़े विभाग थे उन्हें इस बार मंत्रिपरिषद से बाहर रखा गया है।</p>
<p>श्रीकांत शर्मा कुछ दिनों पहले तक प्रदेश के ऊर्जा मंत्री थे और सिद्धार्थ नाथ सिंह के पास एमएसएमई मंत्रालय का जिम्मा था। यह दोनों अब सिर्फ विधायक रहेंगे। इसी तरह सतीश महाना जो कानपुर के महाराजपुर क्षेत्र से चुनकर आए हैं उन्हें भी कोई मंत्रालय नहीं मिला है। पिछली सरकार में उनके पास उद्योग विभाग की जिम्मेदारी थी।</p>
<p>रमापति शास्त्री गोंडा जिले के मनकापुर से भाजपा विधायक हैं। पिछली सरकार में समाज कल्याण मंत्री रहे शास्त्री को इस बार मंत्रिपरिषद में जगह नहीं मिली है। इसी तरह जय प्रताप सिंह, रामनरेश अग्निहोत्री, आशुतोष टंडन, नीलकंठ तिवारी और महेंद्र सिंह भी मंत्रिपरिषद में जगह पाने में नाकाम रहे हैं।</p>
<p>पिछली मंत्रिपरिषद में मोहसिन रजा एकमात्र मुस्लिम मंत्री थे। इस बार उनकी जगह दानिश आजाद अंसारी एकमात्र मुस्लिम मंत्री हैं। इसके अलावा मुकुट बिहारी वर्मा और स्वाति सिंह समेत कई मंत्रियों को भारतीय जनता पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया था।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ योगी की नई मंत्रिपरिषद में कई पुराने चेहरे गायब, आर्थिक विभागों से जुड़े मंत्री बदले ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[योगी आदित्यनाथ की डबल इंजन सरकार की वापसी पर बजाज समूह की बधाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/bajaj-group-congratulates-double-engine-government-of-yogi-adityanath.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Mar 2022 12:39:27 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/bajaj-group-congratulates-double-engine-government-of-yogi-adityanath.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बजाज समूह (कुशाग्र) ने उत्तर प्रदेश में श्योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में भाजपा सरकार की वापसी पर अपनी बधाई दी है। भारी बहुमत से पुनः निर्वाचित होने को कुशल प्रशासन और सम्पूर्ण विकास के प्रति जनता के भरोसे का साक्ष्य बताते हुए समूह ने सरकार को आगे भी सफल होने की शुभकामनाएं दी हैं।</p>
<p>इस अवसर पर बजाज ग्रुप के चेयरमैन कुशाग्र बजाज ने डबल इंजन सरकार को राज्य में स्थिरता, विकास और एक बेहतर कल का संकेत बताया। उन्होंने कहा, &ldquo;हमें प्रसन्नता है कि राज्य में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में सरकार की ऐतिहासिक वापसी हुई है और हम इसके लिए उन्हें और प्रदेश की जनता को बधाई देते हैं। हमें पूरा विश्वास है कि राज्य सरकार बीते पांच वर्षों की तरह आगे भी व्यापार और उद्योग को बिना किन्हीं अड़चनों के फलने-फूलने में पूरा सहयोग करती रहेगी।&rdquo;</p>
<p>देश के सबसे बड़े व प्रतिष्ठित व्यापार समूहों में से एक लगभग सौ साल पुराने बजाज समूह का उत्तर प्रदेश से गहरा संबंध रहा है। चीनी, उर्जा, और कंज्यूमर गुड्स व्यवसाय में लिप्त बजाज समूह ने राज्य में अपनी पहली गन्ना मिल सन् 1926 में लगाई थी। इसके अतिरिक्त वर्तमान में समूह की 14 गन्ना मिलें व 6 डिस्टिलरी राज्य में चल रही हैं। कुशाग्र बजाज ने कहा कि समूह को उत्तर प्रदेश से अपने प्रगाढ़ संबंधों पर गर्व है&zwnj; और वे आने वाले समय में इन संबंधों को और भी सुदृढ़ करने का प्रयास करते रहेंगे।&zwnj;&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा, &ldquo;मैं अपनी और पूरे बजाज समूह की ओर से सभी को विश्वास दिलाता हूं कि हम उत्तर प्रदेश सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते रहेंगे और राज्य की 25 करोड़ जनता, जिसका एक बड़ा हिस्सा हमसे किसी न किसी रूप से जुड़ा हुआ है, की भलाई और विकास के लिए अपना पूरा सहयोग करते रहेंगे।&rdquo;&nbsp;</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ योगी आदित्यनाथ की डबल इंजन सरकार की वापसी पर बजाज समूह की बधाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में भाजपा के चुनावी वादों को पूरा करने के लिए 55 हजार करोड़ रुपए की पड़ेगी जरूरत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/bjp-prepoll-populism-to-cost-up-exchequer-rs-55000-crore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 22 Mar 2022 16:47:30 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/bjp-prepoll-populism-to-cost-up-exchequer-rs-55000-crore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए लोगों से जो वादे किए थे उन्हें पूरा करना पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। ऐसे समय जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए पदभार ग्रहण करने वाले हैं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन वादों को पूरा करने के लिए रोडमैप पर काम करना शुरू कर दिया है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार भाजपा ने उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए जो लोक कल्याण संकल्प पत्र नाम से घोषणा पत्र जारी किया था उसे अमल में लाने के लिए 55 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा रकम की जरूरत पड़ेगी। विभिन्न लोकप्रिय घोषनाएं कृषि, सामाजिक सुरक्षा, डेयरी, गन्ना, इंफ्रास्ट्रक्चर, कौशल विकास, रोजगार आदि क्षेत्रों से जुड़ी हैं। खास बात यह है कि यह अतिरिक्त खर्च राज्य सरकार जनकल्याण के लिए अभी जो योजनाएं चला रही है उसके अतिरिक्त होगा।&nbsp;</p>
<p>भाजपा के 2022 के चुनाव घोषणा पत्र के अनुसार सरकार कोल्ड चेन और वेयरहाउस नेटवर्क स्थापित करने के लिए 25000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। यहां बागवानी फसलों की ग्रेडिंग की जाएगी। इससे किसानों को सरदार वल्लभभाई पटेल एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत उनकी फसलों की बेहतर कीमत मिल सकेगी।</p>
<p>एक अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम के लिए 10000 करोड रुपए निवेश करने का वादा पार्टी ने किया है। इसके अलावा सिंचाई पर 5000 करोड़ रुपए खर्च करने की बात है। चीनी मिलों के आधुनिकीकरण की योजना के लिए पार्टी ने 5000 करोड़ रुपए खर्च करने का वादा किया है।</p>
<p>इस बीच योगी आदित्यनाथ 25 मार्च को लखनऊ में अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेने वाले हैं। इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के अलावा पार्टी के अन्य बड़े नेता भी मौजूद रहेंगे। दिसंबर 2021 में योगी सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए 5.48 लाख करोड़ रुपए का अंतरिम बजट पेश किया था।</p>
<p>नई सरकार के गठन के बाद जल्दी ही पूर्ण बजट पेश किया जाएगा जिसमें चुनाव पूर्व किए गए वादों को पूरा करने के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने का ब्लूप्रिंट पेश किए जाने की उम्मीद है। अंतरिम बजट इसलिए पेश किया जाता है ताकि चुनाव के कारण विकास के कार्य और दूसरे सरकारी कामकाज में रुकें। योगी सरकार ने अंतरिम बजट में लेखानुदान के जरिए वित्त वर्ष के पहले 4 महीने (अप्रैल से जुलाई) के लिए 1.68 लाख करोड़ रुपए की ग्रांट लेखानुदान के जरिए ली थी।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में भाजपा के चुनावी वादों को पूरा करने के लिए 55 हजार करोड़ रुपए की पड़ेगी जरूरत ]]></media:description>
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        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में तीन डिप्टी सीएम बनाये जाने  की  संभावना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/the-possibility-of-including-three-deputy-cms-in-the-second-term-of-the-yogi-government.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 15 Mar 2022 17:41:58 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/the-possibility-of-including-three-deputy-cms-in-the-second-term-of-the-yogi-government.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि जातिगत गणित को साधने के लिए उनके दूसरे कार्यकाल के कैबिनेट में तीन उप मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बनाये जा सकते हैं।&nbsp; आदित्यनाथ के पहले कार्यकाल में केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा दो डिप्टी सीएम बनाये गये थे। आने वाले 2024 के महत्वपूर्ण लोकसभा चुनावों को देखते हुए जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार तीसरी &nbsp;बार भाजपा केंद्र में सत्ता पर काबिज होना चाहेगी तो उसके लिए पार्टी द्वारा राज्य में जाति के जटिल गणित को संतुलित करने के लिए&nbsp; तीन डिप्टी सीएमये जाने के फार्मूले की बात हो रही है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">सूत्रों के मुताबिक <span>प्रस्तावित यूपी मंत्रिपरिषद में लगभग 60 सदस्य होंगे</span><span>&nbsp;जिनमें सीएम</span>, <span>तीन डिप्टी सीएम</span>, <span>28 कैबिनेट मंत्री और शेष राज्य मंत्री के रूप मे शामिल होंगे।</span></p>
<p style="text-align: justify;">पूर्व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य <span>&nbsp;कौशांबी जिले के सिराथू विधानसभा क्षेत्र से हाल ही में&nbsp; विधानसभा चुनाव हार गए हैं। माना जा रहा है कि</span><span> आगामी लोकसभा चुनावों से पहले उनको पार्टी&nbsp; में महत्वपूर्ण पद दिए जाने की संभावना है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में बीजेपी ने जहां 255 सीटें जीती हैं, वहीं उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी (सपा) ने 111 सीटों पर कब्जा जमाया है।. कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी &nbsp;ने क्रमश: दो और एक सीट जीती। शेष सीटें अपना दल (सोनेलाल), निषाद पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी &nbsp;ने जीती हैं।साल 2017 के &nbsp;उत्तर प्रदेश के विधान सभा &nbsp;चुनाव में जब बीजेपी ने जीत हासिल की थी। उस समय केशव प्रसाद मौर्य भाजपा ती उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष थे। उन्होंने गैर-यादव और अन्य पिछड़ी जातियों को भाजपा की ओर खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वास्तव में वह यूपी के सीएम बनने के कतार में सबसे आगे थे लेकिन अंततः आदित्यनाथ से हार गए जो उस समय गोरखपुर के सांसद थे ।</p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश में बनने वाली भाजपा सरकार की&nbsp; मंत्रीपरिषद में विभागों के बंटवारे में सभी जातियों और क्षेत्रों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की तैयारी हो रही है। बीजेपी के सहयोगी दल अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी को भी योगी सरकार के कैबिनेट में मंत्री पद का कोटा दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align: justify;">इस बीच, उत्तर प्रदेश में बीजेपी की शानदार जीत के बाद आदित्यनाथ का &nbsp;नई दिल्ली में&nbsp; मोदी सहित बीजेपी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर सरकार बनाने और मंत्रियों के नाम और उनके विभागों को अंतिम रूप देने &nbsp;पर चर्चा &nbsp;परिचर्चा करने का सिलसिला जारी &nbsp;है।</p>
<p style="text-align: justify;">उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य और उत्तर प्रदेश विधान परिषद के एमएलसी, रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट अरविंद शर्मा जो मोदी के करीबी औऱ विश्वासपात्र माने जाते है वह&nbsp; डिप्टी सीएम पद की दौड़ में शामिल हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को सत्तारूढ़ भाजपा में संगठनात्मक जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है।</p>
<p style="text-align: justify;">योगी कैबिनेट में अधिकांश वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों को कैबिनेट में रखे जाने की संभावना है जबकि जो लोग चुनाव हार गए हैं उनको मंत्रीमंडल से बाहर रखा जाएगा इसके सात ही जो मंत्री पद मे रहते हुए अच्छा प्रर्दशन नहीं कर पाए थे&nbsp; उन्हें उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद से बाहर किया जा सकता है और उनकी जगह पर नए चेहरों को शामिल किया जाएगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में तीन डिप्टी सीएम बनाये जाने  की  संभावना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आवारा पशु की समस्या योगी सरकार की प्राथमिकता में, दूसरे राज्यों के मॉडल पर भी विचार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/stray-cattle-menace-is-topmost-priority-of-yogi-government.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 14 Mar 2022 00:00:00 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/stray-cattle-menace-is-topmost-priority-of-yogi-government.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों से एक बात स्पष्ट होती है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ किसानों की तथाकथित नाराजगी को विपक्ष जिस तरह मुद्दा उठा बना रहा था, वह दरअसल काफी बढ़ा चढ़ाकर किया गया दावा था। फिर भी योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश के किसानों की वास्तविक चिंताओं से वाकिफ लगती है। किसानों के सामने तत्काल सबसे बड़ा मुद्दा आवारा पशुओं का है। ये पशु ना सिर्फ किसानों की खड़ी फसल को बर्बाद करते हैं बल्कि हाईवे और अन्य सड़कों पर यातायात के लिए भी खतरा बनते हैं।</p>
<p>किसानों की इस समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश की चुनावी सभाओं में इसका जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि प्रदेश में भाजपा की सरकार दोबारा बनाने पर वह आवारा पशुओं की समस्या का स्थाई समाधान ढूंढेगी।</p>
<p>अब जब योगी सरकार दोबारा सत्ता में आ रही है तो केसरिया दल के नेताओं ने इस समस्या का हल ढूंढ़ने के लिए दिन-रात एक कर दिया है। दरअसल लोकसभा चुनाव में अब सिर्फ 2 साल रह गए हैं और भाजपा नहीं चाहती कि यह समस्या तब तक बनी रहे और विपक्ष को सरकार पर आरोप लगाने का मौका मिले। यही नहीं, अगर इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो पार्टी के प्रति लोगों का भरोसा कम हो सकता है।</p>
<p>विधानसभा चुनावों के दौरान विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी ने आवारा पशुओं से किसानों को हो रही समस्याओं को जोर-शोर से उठाया था। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बार-बार कहा कि किसानों को आवारा पशुओं से अपनी खड़ी फसल बचाने के लिए खेतों की रखवाली करनी पड़ती है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे दूसरे हिंदी भाषी राज्यों में इस समस्या से निपटने के लिए उठाए गए कदमों का अध्ययन कर रही है। इन राज्यों ने जो कदम उठाए वह काफी सफल रहे हैं।</p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार आवारा पशुओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाकर एक टिकाऊ मॉडल विकसित करना चाहती है। इसमें गाय के गोबर, गोमूत्र, ऑर्गेनिक खाद जैसे बायप्रोडक्ट की मार्केटिंग करना भी शामिल है। सरकार व्यक्ति, सोसायटी, कोऑपरेटिव और स्वयं सहायता समूहों की मदद से एक वैल्यू चैन खड़ी करना चाहती है। इससे ग्रामीण इलाकों में न सिर्फ रोजगार के अवसर पैदा होंगे बल्कि आवारा पशु लोगों के लिए एसेट बन जाएंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आवारा पशु की समस्या योगी सरकार की प्राथमिकता में, दूसरे राज्यों के मॉडल पर भी विचार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छत्तीसगढ़ में भी लागू होगी पुरानी पेंशन स्कीम, 2022&amp;#45;23 में कृषि बजट सिर्फ 3.3 फीसदी बढ़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/agriculture-budget-of-chhattisgarh-for-fy23-increased-by-mere-3.3-percent.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 09 Mar 2022 17:58:10 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/agriculture-budget-of-chhattisgarh-for-fy23-increased-by-mere-3.3-percent.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को राज्य विधानसभा में 2022-23 का बजट पेश किया। इसमें कृषि क्षेत्र के बजट में सिर्फ 3.3 फ़ीसदी की वृद्धि की गई है। पंचायत और ग्रामीण विकास का बजट भी पिछले साल के बराबर ही रखा गया है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत 6000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इस योजना के तहत प्रति एकड़ 10000 रुपए की सहायता राशि दी जाती है। बीते 2 वर्षों में 20 लाख से अधिक किसानों को 10152 करोड़ रुपए की सहायता राशि दी जा चुकी है। राज्य सरकार ने फसल बीमा योजना के लिए 575 करोड़, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के लिए 323 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। किसानों को उच्च क्वालिटी वाले बीज उपलब्ध कराने के लिए कृषक समग्र विकास योजना में 123 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की घोषणा की। छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की तरफ से आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में स्थानीय प्रतिभागियों के लिए परीक्षा शुल्क माफ कर दिया गया है। बजट में किसी नए कर का प्रस्ताव नहीं है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x_62289d281a1b2.jpg" alt="" /></p>
<p>2022-23 मई कुल 104000 करोड़ रुपए का व्यय अनुमानित है। बजट में सामाजिक क्षेत्र के लिए 37 फ़ीसदी, आर्थिक क्षेत्र के लिए 40 फ़ीसदी और सेवा क्षेत्र के लिए 23 फ़ीसदी रकम प्रस्तावित है। राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.3 फीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।</p>
<p>बजट में 2021-22 के संशोधित अनुमान 8974 करोड़ के मुकाबले कृषि क्षेत्र के लिए 2022-23 में 9272 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यानी इसमें सिर्फ 3.3 फ़ीसदी की वृद्धि की गई है। पंचायत और ग्रामीण विकास के लिए 8828 करोड़ के संशोधित अनुमानों की तुलना में लगभग समान 8830 करोड़ का प्रावधान है। इसमें 1702 करोड़ मनरेगा के लिए हैं। शिक्षा के लिए 18198, स्वास्थ्य के लिए 6357, महिला एवं बाल विकास के लिए 2289, शहरी विकास के लिए 3848 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x_62289d3db452e.jpg" alt="" /></p>
<p>बजट घोषणा के मुताबिक कृषि भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए दुर्ग जिले में इंटीग्रेटेड पैक हाउस की स्थापना की जाएगी। इसके लिए 24 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। नाबार्ड की सहायता से सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण के लिए 690 करोड़, लघु सिंचाई परियोजनाओं के लिए 931 करोड़, स्टॉप डैम और एनीकट निर्माण के लिए 260 करोड़ तथा तटबंध निर्माण के लिए 125 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।</p>
<p>बजट में ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत अभी तक 822832 आवास बनाए गए हैं। इस योजना के लिए अगले वित्त वर्ष में 800 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के लिए 1675 करोड़ तथा 15 वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर पंचायतों को अनुदान के मद में 1114 करोड़ रुपए का प्रावधान है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के तहत वार्षिक सहायता राशि 6000 से बढ़ाकर 7000 रुपए करने की घोषणा की। प्रदेश के गौशालाओं को महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क के तौर पर विकसित किया जाएगा। इन औद्योगिक पार्कों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बिजली पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 600 करोड़ रुपए का प्रावधान बजट में किया गया है।</p>
<p>जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली रकम भी इस बजट में बढ़ाई गई है। विधायक निधि की राशि दो करोड रुपए से बढ़ाकर 4 करोड़ रुपए कर दी गई है। इसके लिए 364 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य, जनपद पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य के लिए भी पंचायत विकास निधि योजना में राशि बढ़ाई गई है। जिला पंचायत अध्यक्षों का मानदेय 15000 से बढ़ाकर 25000 प्रति माह, उपाध्यक्ष का 10000 से बढ़ाकर 15000 और जिला पंचायत सदस्यों का 6000 से बढ़ाकर 10000 प्रतिमाह किया गया है। जनपद पंचायत अध्यक्षों, उपाध्यक्षों व सदस्यों और सरपंचों के मानदेय तथा भत्ते में भी वृद्धि की गई है।</p>
<p>एक दिन पहले विधानसभा में पेश किए गए राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2021-22 में जीएसडीपी वृद्धि दर 11.54 पहने का अनुमान व्यक्त किया गया था। प्रति व्यक्ति आय 118401 रुपए हो जाने का अनुमान है। मौजूदा वित्त वर्ष में स्थिर मूल्यों पर राज्य की जीएसडीपी 2.78 लाख करो रुपए हो जाएगा जो पिछले वित्त वर्ष में 2.49 लाख करोड़ रुपए था। कृषि क्षेत्र में 3.88 फ़ीसदी, औद्योगिक क्षेत्र में 15.44 फ़ीसदी और सेवा क्षेत्र में 8.54 फ़ीसदी वृद्धि अनुमानित है।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_62289d0960862.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ छत्तीसगढ़ में भी लागू होगी पुरानी पेंशन स्कीम, 2022-23 में कृषि बजट सिर्फ 3.3 फीसदी बढ़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_62289d0960862.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[हरियाणा सरकार ने कृषि बजट 28 फीसदी बढ़ाया, 2022&amp;#45;23 के बजट में महिलाओं पर विशेष फोकस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/haryana-increases-agriculture-budget-by-28-percent-in-budget.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 08 Mar 2022 20:18:58 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/haryana-increases-agriculture-budget-by-28-percent-in-budget.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="margin: 0in 0in 12.0pt 0in;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">हरियाणा सरकार वित्त वर्ष </span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">2022<span lang="HI">-</span>23 <span lang="HI">में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों पर </span>5988.76 <span lang="HI">करोड़ रुपए खर्च करेगी। यह </span>2021-22 <span lang="HI">के तुलना में </span>27.7 <span lang="HI">फ़ीसदी अधिक है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मंगलवार को विधानसभा में वित्त वर्ष </span>2022<span lang="HI">-</span>23 <span lang="HI">का बजट पेश किया, जिसमें कृषि क्षेत्र के लिए यह आवंटन किया गया है। मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती पर नई योजना शुरू करने का भी प्रस्ताव दिया</span>।</span><o:p></o:p></p>
<p style="margin: 12.0pt 0in 12.0pt 0in;"><span style="white-space: pre-wrap;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">खट्टर ने कहा कि केंद्र सरकार ने खरीफ के मक्के के लिए जो न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की है, उसका फायदा अगली गर्मियों में बोई जाने वाली फसल के लिए भी मिलेगा। फल, सब्जी और मसालों के क्षेत्र में फसलों के विविधीकरण के लिए नई योजना प्रस्तावित है। </span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">68 <span lang="HI">पन्नों का बजट खट्टर ने करीब ढाई घंटे में पढ़ा। इसमें सरकारी स्कूलों के </span>10<span lang="HI">वीं और </span>12<span lang="HI">वीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को टैबलेट देने का प्रावधान किया गया है</span>।</span></span><o:p></o:p><span style="white-space: pre-wrap;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;"></span></span></p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x_62276c6c35fee.jpg" alt="" /></p>
<p style="margin: 12.0pt 0in 12.0pt 0in;"><span style="white-space: pre-wrap;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">मुख्यमंत्री ने अगले वित्त वर्ष के लिए </span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">1.77 <span lang="HI">लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया। यह मौजूदा वित्त वर्ष के </span>1.53 <span lang="HI">लाख करोड़ से </span>15.6 <span lang="HI">फ़ीसदी अधिक है। इसमें किसी नए कर का प्रावधान नहीं है। बजट में आर्थिक विकास, जीवन स्तर सुधारने और महिलाओं के विकास पर फोकस किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाकर विकास दर बढ़ाई जाएगी</span>।</span></span><o:p></o:p></p>
<p style="margin: 12.0pt 0in 12.0pt 0in;"><span style="white-space: pre-wrap;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">बजट के मुताबिक अगले वित्त वर्ष में राज्य पर कर्ज की देनदारी </span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">2.43 <span lang="HI">लाख करोड़ रुपए पहुंचने का अनुमान है, जो मौजूदा वित्त वर्ष में </span>2.23 <span lang="HI">लाख करोड़ रुपए रहेगी। </span>2022<span lang="HI">-</span>23 <span lang="HI">के बजट अनुमानों के मुताबिक कुल राजस्व प्राप्तियां </span>1.06 <span lang="HI">लाख करोड़ रुपए रहने की उम्मीद है। इसमें कर राजस्व </span>73<span lang="HI">,</span>727 <span lang="HI">करोड़, गैर कर राजस्व </span>12<span lang="HI">,</span>206 <span lang="HI">करोड़, केंद्रीय करों में हिस्सा </span>8<span lang="HI">,</span>926 <span lang="HI">करोड़ और ग्रांट </span>11<span lang="HI">,</span>565 <span lang="HI">करोड़ रुपए है। प्रदेश का राजकोषीय घाटा </span>2021-22 <span lang="HI">में प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) </span>2.99 <span lang="HI">फ़ीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। अगले वित्त वर्ष में इसके </span>2.98 <span lang="HI">फीसदी रहने का अनुमान है। राज्य सरकार ने पूंजीगत खर्च के लिए बड़ी रकम का प्रावधान किया है। इसके लिए </span>61<span lang="HI">,0</span>57 <span lang="HI">करोड़ रुपए रखे गए हैं</span>।</span></span><o:p></o:p></p>
<p style="margin: 12.0pt 0in 12.0pt 0in;"><span style="white-space: pre-wrap;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">बजट में महिलाओं पर खासतौर से फोकस किया गया है। पूर्व भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज के नाम पर एक अवार्ड की घोषणा की गई है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को यह पुरस्कार दिया जाएगा। इसमें प्रशस्ति पत्र के अलावा पांच लाख रुपए की नकद राशि दी जाएगी। </span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;"><o:p></o:p></span></span></p>
<p style="margin: 12.0pt 0in 12.0pt 0in;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति उद्यमिता स्कीम की भी घोषणा की जिसका मकसद महिलाओं को उद्यमी बनाने में मदद करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों की सालाना आमदनी पांच लाख रुपए से कम है (परिवार पहचान पत्र के आधार पर) उन्हें तीन लाख का कर्ज दिया जाएगा। यह कर्ज हरियाणा महिला विकास निगम के जरिए वितरित किया जाएगा। इसमें ब्याज पर </span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">3 <span lang="HI">साल तक </span>7 <span lang="HI">फ़ीसदी की छूट मिलेगी</span>।</span><o:p></o:p></p>
<p style="margin: 12.0pt 0in 12.0pt 0in;"><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;" lang="HI">महिलाओं के लिए एक और पहल का ऐलान करते हुए खट्टर ने कहा कि सरकारी जमीन पर कामकाजी महिलाओं के लिए आवास बनाए जाएंगे। सहभागिता स्कीम के तहत </span><span style="font-family: 'Mangal','serif'; color: black;">2022<span lang="HI">-</span>23 <span lang="HI">में फरीदाबाद, गुरुग्राम और पंचकूला में यह आवास बनेंगे। महिलाओं के लिए तीन सरकारी कॉलेज खोलने की भी घोषणा की गई है</span>।</span><o:p></o:p></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/03/image_750x500_62276f333e9ed.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ हरियाणा सरकार ने कृषि बजट 28 फीसदी बढ़ाया, 2022-23 के बजट में महिलाओं पर विशेष फोकस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[ओडिशा सरकार ने लखनऊ में किया रोड शो, उत्तर प्रदेश के उद्योगपतियों को निवेश के लिए किया आमंत्रित]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/odisha-rolls-out-red-carpet-for-up-investors.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 06 Mar 2022 23:11:37 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/odisha-rolls-out-red-carpet-for-up-investors.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ओडिशा ने उत्तर प्रदेश के उद्योगपतियों और बिजनेस समुदाय से राज्य में निजी निवेश आमंत्रित किया है। ओडिशा सरकार ने उद्योग संगठन कनफेडरेशन आफ इंडियन इंडस्ट्रीज (सीआईआई) के साथ मिलकर लखनऊ में एक रोड शो का आयोजन किया, जिसमें प्रदेश में बेहतर औद्योगिक वातावरण और प्रोएक्टिव नीतियों, पर्याप्त बिजली की उपलब्धता और सिंगल विंडो क्लीयरेंस सुविधा आदि के बारे में बताया गया।</p>
<p>ओडिशा के उद्योग, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव और आईडीसीओ तथा आईपीआईसीओएल के चेयरमैन हेमंत शर्मा ने उद्योगपतियों को ओडिशा आमंत्रित किया जहां खनिजों का भंडार है तथा आयरन और स्टील उद्योग पहले ही स्थापित है।</p>
<p>उन्होंने प्रदेश में मौजूद प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधनों तथा कुशल मानव संसाधनों के बारे में जानकारी दी। यह ओडिशा में औद्योगिकरण की पहल की दिशा में बड़ा उत्प्रेरक का काम करता है। उन्होंने बताया कि बेसिक मेटल के अलावा प्रदेश में मरीन प्रोसेसिंग, आईटी और आईटीईएस, फूड प्रोसेसिंग अपैरल और गारमेंट उद्योग बड़े पैमाने पर मौजूद है। इस रोड शो में मेटल, माइनिंग, फूड प्रोसेसिंग, अपैरल, गारमेंट इत्यादि क्षेत्रों में निवेश के अवसरों के बारे में बताया गया।</p>
<p>शर्मा ने बताया कि बंदरगाह आधारित विकास का मॉडल, जिससे ओडिशा ने अपनाया है, पूरे देश में अलग तरह का है। राज्य में 22 वर्षों से अधिक समय से राजनीतिक स्थिरता है और इससे यहां काफी हद तक पारदर्शिता आई है। उन्होंने बताया कि ओडिशा ने इज ऑफ डूइंग बिजनेस, बेहतर पॉलिसी फ्रेमवर्क बनाने और अत्याधुनिक औद्योगिक केंद्र इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दिशा में कई पहल की है ताकि कंपनियों को बिजनेस स्थापित करने और उसे आगे बढ़ाने में सहूलियत हो सके।</p>
<p>शर्मा ने निवेशकों को मेटल डाउनस्ट्रीमिंग, एयरोस्पेस, डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर फैब, सोलर पीवी सेल मैन्युफैक्चरिंग जैसे नए जमाने के उद्योग क्षेत्रों के बारे में प्रदेश की नीतियों से अवगत कराया। इस मौके पर उत्तर प्रदेश एसआईडीएम के चेयरमैन और पीटीसी इंडस्ट्रीज के सीएमडी सचिन अग्रवाल ने वैल्यू ऐडेड मैन्युफैक्चरिंग में उत्तर प्रदेश की क्षमताओं के बारे में बताया।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ ओडिशा सरकार ने लखनऊ में किया रोड शो, उत्तर प्रदेश के उद्योगपतियों को निवेश के लिए किया आमंत्रित ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी सरकार का दावा, 75 में से 44 जिलों में आवारा पशुओं की कोई समस्या नहीं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-government-says-there-is-no-problem-of-stray-animals-in-44-districts.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 27 Feb 2022 12:43:52 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-government-says-there-is-no-problem-of-stray-animals-in-44-districts.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आवारा पशुओं की समस्या बड़ा मुद्दा बनने के बाद राज्य सरकार ने सफाई पेश की है। सरकार ने कहा है कि यह समस्या चुनिंदा इलाकों तक सीमित है। इसका दावा है कि प्रदेश के 75 <span>जिलों में से </span>44 <span>में आवारा पशुओं की कोई समस्या नहीं है</span>।</p>
<p>राज्य सरकार की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि मंडी परिषद में सेस के रूप में जो आमदनी होगी उसका इस्तेमाल गोसेवा आयोग के जरिए रजिस्टर्ड गौशालाओं में आवारा पशुओं की देखभाल में किया जाएगा। अभी उत्तर प्रदेश गौशाला एक्ट के तहत स्वयं सहायता समूहों द्वारा चलाई जा रही 572 <span>गौशालाएं रजिस्टर्ड हैं। इनमें से फिलहाल </span>394 <span>सक्रिय हैं। </span>45 <span>रजिस्टर्ड गौशालाओं को </span>20<span> करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है</span>।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि राज्य सरकार जनवरी 2019 <span>में अस्थाई गौशाला बनाने और उनके प्रबंधन की नीति लेकर आई थी। अभी प्रदेश में </span>6000 <span>से अधिक अस्थाई गौशालाएं हैं जिनमें आठ लाख से अधिक मवेशियों की देखभाल की जाती है। गोवंश पजेशन स्कीम के तहत एक लाख रुपए से अधिक मवेशी किसानों को दिए गए हैं। इस स्कीम के तहत किसानों को प्रति माह </span>900<span> रुपए भत्ता दिया जाता है। बयान के मुताबिक आवारा पशुओं को चारा खिलाने के लिए जिला मजिस्ट्रेटों को </span>474 <span>करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं</span>।</p>
<p>पिछले रविवार को उन्नाव में आयोजित एक चुनावी सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 10 <span>मार्च के बाद आवारा पशु की समस्या के समाधान के लिए नई नीति लाई जाएगी उन्होंने कहा था कि ऐसी व्यवस्था की जाएगी जिससे लोग गाय के गोबर से कमाई कर सकें</span>। उसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था, हमने अवैध बूचड़खाने को पूरी तरह बंद कर दिया है। मैं वादा करता हूं कि हम गोमाता की हत्या नहीं होने देंगे, <span>लेकिन साथ ही साथ किसानों के खेत को भी आवारा पशुओं से बचाएंगे। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में गौशालाएं बनाई जाएंगी जहां गायों को रखा जाएगा।</span></p>
<p>उसी समय प्रचार अभियान के दौरान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि अगर उनकी पार्टी की सरकार बनती है तो आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ की तरह योजना लागू की जाएगी। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने गाय का गोबर खरीदने की विशेष योजना लागू की है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी सरकार का दावा, 75 में से 44 जिलों में आवारा पशुओं की कोई समस्या नहीं ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[महाराष्ट्र सरकार लेकर आई अपनी कृषि निर्यात नीति, किसानों की आय बढ़ाने में मिलेगी मदद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/to-enhance-income-of-farmers-maharashtra-launches-own-agri-export-policy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 26 Feb 2022 18:53:30 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/to-enhance-income-of-farmers-maharashtra-launches-own-agri-export-policy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>महाराष्ट्र सरकार ने अपनी अलग कृषि निर्यात नीति लांच की है। इस नीति के तहत राज्य सरकार 21 <span>कृषि कमोडिटी के निर्यात को बढ़ावा देने पर फोकस करेगी। प्रदेश के मुख्य सचिव </span>(<span>कोऑपरेशन और मार्केटिंग</span>)<span> अनूप कुमार के अनुसार राज्य सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने का फैसला इसलिए किया क्योंकि इससे किसानों की आमदनी </span>40 <span>से </span>45 <span>फ़ीसदी बढ़ सकती है। घरेलू बाजार में किसानों को अच्छी कीमत मिलने की एक सीमा होती है। निर्यात से उन्हें बेहतर कीमत मिल सकती है।</span></p>
<p>दरअसल केंद्र सरकार दिसंबर 2018 <span>में कृषि निर्यात नीति लेकर आई थी। इसमें राज्यों से अपनी-अपनी अलग नीति तैयार करने को कहा गया था। केंद्र के उसी दिशानिर्देश के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार ने मई </span>2019 <span>में अपनी नीति का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया था।</span></p>
<p>प्रदेश की कृषि निर्यात नीति लांच करते हुए अनूप कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार को एक्सपोर्ट चेन में बाधा नहीं डालनी चाहिए। होता यह है कि केंद्र के नीति बदलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में खरीदार हमारे ऊपर भरोसा नहीं कर पाते, जिसका नुकसान अंततः किसानों को उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि विदेशी खरीदारों की सबसे बड़ी शिकायत निर्यात नीति में अचानक होने वाला बदलाव है।</p>
<p>महाराष्ट्र से प्याज का काफी निर्यात होता है। लेकिन इसमें भी अनेक बार नीतिगत परिवर्तन होते रहते हैं। दिसंबर 2010 <span>से दिसंबर </span>2020 <span>तक केंद्र सरकार बार-बार न्यूनतम निर्यात मूल्य लागू करती रही। यानी निर्यातक उस मूल्य से कम कीमत पर प्याज का निर्यात नहीं कर सकते। इन </span>10 <span>वर्षों में </span>34 <span>बार प्याज पर न्यूनतम निर्यात मूल्य लागू किया गया। यही नहीं घरेलू बाजार में कीमत कम करने के लिए चार बार प्याज के निर्यात पर पाबंदी भी लगाई गई।</span></p>
<p>महाराष्ट्र सरकार ने जिन वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देने की नीति बनाई है, उनमें प्याज के अलावा केला, अनानास, अल्फांसो आम, केसर आम, संतरा, अंगूर, काजू, फूल, रेजिन, सब्जियां गैर बासमती चावल, दाल, अनाज, तिलहन, गुड़, मसाले, दुग्ध उत्पाद, मछलियां शामिल हैं। इनका निर्यात बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया जाएगा। फसल कटाई के बाद प्रबंधन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के सलाहकार नियुक्त करने जैसे कदम उठाए जाएंगे।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_621a29c8e0661.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र सरकार लेकर आई अपनी कृषि निर्यात नीति, किसानों की आय बढ़ाने में मिलेगी मदद ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को 203 करोड़ की मदद, सीएम शिवराज ने ऑनलाइन भेजी रकम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/cm-chouhan-transfers-financial-assistance-of-203-crore-to-more-than-146000-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 18 Feb 2022 12:29:15 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/cm-chouhan-transfers-financial-assistance-of-203-crore-to-more-than-146000-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्यप्रदेश में जनवरी 2022 <span>में प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदा ने फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया। ओलावृष्टि और असमय बारिश की वजह से प्रदेश के </span>26 जिलों के किसानों की फसलों को नुकसान हुआ था। किसानों पर आए संकट की घड़ी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को नुकसान की भरपाई करने हेतु राहत राशि का वितरण किया। 17 <span>फरवरी को मुख्यमंत्री ने </span>26 <span>जिलों के प्रभावित </span>1 <span>लाख </span>46 <span>हजार से अधिक किसानों के खाते में </span>202 <span>करोड़ </span>90 <span>लाख रुपये की राहत राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से डाली। कोविड पॉजिटिव होने की वजह से मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में वर्चुअली उपस्थित रहे। </span></p>
<p>मुख्यमंत्री ने प्रभावित किसान भाई-बहनों से संवाद कर फसल नुकसान, <span>फसल का सर्वे और दी गई राहत राशि के बारे में बातचीत की। उन्होंने किसानों से कृषि कल्याण और अन्य योजनाओं से मिलने वाले लाभ के बारे में भी चर्चा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा</span>, &ldquo;<span>किसान भाइयों के हर संकट के समय सरकार खड़ी है। फसल बीमा योजना की राशि और मिलेगी</span>, <span>इसके लिए भी हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।&rdquo; चौहान ने कहा कि दो साल में जीरो परसेंट ब्याज पर 29 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि किसानों को दिलवाई गई है।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>26 <span>जिलों की फसलों को हुआ था नुकसान</span>&nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>प्रदेश में गत दिनों असामयिक वर्षा एवं ओला-वृष्टि से 26 <span>जिलों के किसानों की फसलों को नुकसान हुआ था। प्रदेश में एक लाख </span>34 <span>हजार </span>19 <span>हेक्टेयर क्षेत्र की फसलें प्रभावित हुई थी। सर्वे के बाद प्रभावित किसानों को फसल क्षति की राशि का वितरण किया गया है।</span><strong>&nbsp;</strong></p>
<p><strong>मुख्यमंत्री ने लिया था नुकसान का जायजा</strong></p>
<p>ओलावृष्टि और असामयिक वर्षा से प्रभावित जिलों में मुख्यमंत्री ने क्षतिग्रस्त सरसों, <span>गेहूं</span>,<span> चना और मसूर की फसलों का जायजा लिया था। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विदिशा</span>, <span>राजगढ़</span>, <span>निवाड़ी और अशोकनगर जिले के प्रभावित गांवों में फसलों का अवलोकन कर किसानों को राहत राशि देने का आश्वासन दिया था।</span>&nbsp;</p>
<p><strong>फसल बीमा योजना की सबसे बड़ी सहायता राशि का वितरण</strong></p>
<p>12 <span>फरवरी को मुख्यमंत्री ने बैतूल से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में देश में सबसे बड़ी </span>7618 <span>करोड़ रुपये की सहायता राशि का वितरण सिंगल क्लिक से किया था। </span>पीएम फसल बीमा योजना में प्रदेश के 49 <span>लाख दावों के लिए किसानों को </span>7600 <span>करोड़ रुपये का भुगतान सिंगल क्लिक के माध्यम से किया गया था। इस फसल बीमा में खरीफ 2020 </span><span>और रबी 2020-21 </span><span>की फसलों के दावे शामिल थे। </span>इससे पूर्व भी फसलें खराब होने पर 2876 <span>करोड़ रुपये सीधे किसानों के खाते में डाले गए थे। किसानों को राज्य सरकार द्वारा अब तक </span>10 <span>हजार </span>494 <span>करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी की गई है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620f43bbb4abb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को 203 करोड़ की मदद, सीएम शिवराज ने ऑनलाइन भेजी रकम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
        <media:thumbnail url="http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2022/02/image_750x500_620f43bbb4abb.jpg" width="220"/>
    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छत्तीसगढ़ के महुआ की महक अब विदेश तक, राज्य में सालाना 170 करोड़ के महुआ फूल का संग्रहण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/chhattisgarh-mahua-reaches-abroad-annual-collection-reaches-170-crore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 18 Feb 2022 12:06:55 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/chhattisgarh-mahua-reaches-abroad-annual-collection-reaches-170-crore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022 <span>में </span>2000 <span>क्विंटल फूड ग्रेड महुआ फूल संग्रहण का लक्ष्य रखते हुए संघ में विक्रय </span>के लिए अग्रिम निविदा जारी की गई हैं। प्रथम चरण में 1150 क्विंटल महुआ फूल 116 <span>र</span>ुपए प्रति किलोग्राम दर पर बिका हुआ। ब्रिटेन के एक निजी संस्थान ने 750 <span>क्विंटल महुआ ख़रीदा है।</span> &nbsp;<br /><span>छत्तीसगढ़ में हर वर्ष लगभग </span>170 <span>करोड़ र</span>ुपए मूल्य के 5 <span>लाख क्विंटल महुआ फूल का संग्रहण होता है। अपनी गुणवत्ता और राज्य सरकार द्वारा दी जा रही नई तकनीक आदि के कारण इसकी मांग में लगातार वृद्धि हो रही है।</span> राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा खाद्य योग्य अर्थात फूड ग्रेड महुआ फूल बनाने के लिए प्रक्रिया विकसित की गई है। जिससे वनवासियों को महुआ फूल के संग्रहण से अधिक से अधिक आमदनी हो सके। <br /><span>परंपरागत रूप से संग्रहित महुआ फूल के स्थान पर संघ द्वारा विकसित उन्नत तकनीकी से संग्रहित महुआ फूल के लिए ग्रामीणों को </span>33 <span>र</span>ुपए प्रति किलोग्राम के स्थान पर 50 <span>र</span>ुपए प्रति किलोग्राम प्राप्त होंगे। इसी तरह संग्राहकों को वनोपज संग्रहण तथा प्रसंस्करण कार्य में उन्नत तकनीकी का पालन करने के फलस्वरूप प्राप्त फूड ग्रेड महुआ की वर्तमान में 116 <span>र</span>ुपए प्रति किलोग्राम दर प्राप्त हो रही है।</p>
<p>वर्तमान में संघ द्वारा स्थापित महुआ आधारित प्रसंस्करण केन्द्र जशपुर में महुआ सेनेटाइजर का निर्माण किया जा रहा है। इसी तरह महुआ प्रसंस्करण केन्द्र राजनांदगांव में महुआ लड्डू, <span>जूस</span>, <span>कुकीज</span>, <span>चॉकलेट</span>, <span>आचार</span>, <span>जैम आदि तैयार कर</span> &lsquo;<span>छत्तीसगढ़ हर्बल्स</span>&lsquo; <span>के नाम पर विक्रय किया जा रहा है। प्रबंध संचालक</span>, राज्य लघु वनोपज संघ,&nbsp;संजय शुक्ला ने बताया कि महुआ फूल खाद्य योग्य बनाने के लिए राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा प्रक्रिया विकसित की गई है। इसके तहत महुआ वृक्ष के चारों ओर संग्रहण नेट बांधकर महुआ फूल संग्रहण किया जाता है। महुआ फूल को 10 <span>र</span>ुपए (सूखा फूल 50 <span>र</span>ुपए प्रति किलोग्राम) प्रति किलोग्राम की दर पर राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा संग्रहण किया जाएगा। इस प्रकार संग्रहित साफ-सुथरे ताजा महुआ फूल को वनधन केन्द्र के पास सोलाट टनल में सुखाया जाएगा। <br /><span>वन&nbsp;विभाग के प्रमुख&nbsp;सचिव&nbsp;मनोज पिंगुआ तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा महुआ फूल संग्राहकों को लाभ देने के लिए इस वर्ष </span>33 <span>र</span>ुपए प्रति किलोग्राम न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है, <span>जो विगत वर्ष से </span>3 <span>र</span>ुपए प्रति किलोग्राम अधिक है। राज्य में आगे फूड ग्रेड महुआ संग्रहण में वृद्धि होने से संग्राहक ग्रामीणों को इसका अधिक से अधिक लाभ मिलेगा। वर्तमान में यहां महुआ फूल का उपयोग देसी शराब बनाने के लिए किया जाता है।</p>
<p>राज्य शासन द्वारा वनोपज प्रसंस्करण को अधिक महत्व दिए जाने के कारण इस पर राज्य लघु वनोपज संघ के माध्यम से शोध प्रारंभ कराया गया है। सीएफटीआरआई मैसूर की सहायता से महुआ एनर्जी बार, <span>महुआ गुड़</span>, <span>आदि उत्पाद बनाने के तकनीक विकसित की गई है</span>। इसके लिए पाटन क्षेत्र में केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई में उससे संबंधित उद्योग शीघ्र स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में राज्य में वनवासियों को लघु वनोपजों के संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण आदि कार्यों के माध्यम से अधिक से अधिक लाभ दिलाने के निरंतर प्रयास हो रहे हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ छत्तीसगढ़ के महुआ की महक अब विदेश तक, राज्य में सालाना 170 करोड़ के महुआ फूल का संग्रहण ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>Sunil Kumar Singh (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छत्तीसगढ़ में चार सालों में चार गुना बढ़ गया सरसों का रकबा ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/mustard-acreage-in-chhattisgarh-increased-four-times-in-four-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 16 Feb 2022 12:01:27 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/mustard-acreage-in-chhattisgarh-increased-four-times-in-four-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>रायपुर, 16 फरवरी 2022</strong></em></p>
<p>छत्तीसगढ़ राज्य में परंपरागत तौर पर धान की खेती करने वाले कृषक अब धान के साथ-साथ अन्य लाभकारी फसलों की खेती करने लगे हैं। रबी सीजन में सरसों की खेती की ओर राज्य के किसानों का रूझान तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि चार सालों में सरसों की खेती का रकबा 41 हजार हेक्टेयर से बढ़कर अब एक लाख 66 हजार हेक्टेयर हो गया है। कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली सरसों की खेती का बढ़ता रकबा कृषि के क्षेत्र में समृद्धि का एक सुखद संकेत है। वर्ष 2017-18 के रबी सीजन में राज्य में 41,430 हेक्टेयर में सरसों की खेती किसानों ने की थी। वर्ष 2021-22 रबी सीजन में राज्य में 1,66,450 हेक्टेयर में सरसों की खेती की जा रही है।&nbsp;</p>
<p>छत्तीसगढ़ राज्य के रायगढ़ जिले में चार सालों में सरसों की खेती के रकबे में लगभग 18 गुना की बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2017-18 में इस जिले में मात्र 1,290 हेक्टेयर में सरसों की खेती होती थी, जिसका रकबा अब बढ़कर 22,800 हेक्टेयर हो गया है। सरगुजा संभाग के लगभग सभी जिलों में सरसों की खेती की ओर किसानों का रूझान तेजी से बढ़ा है और रकबे में दो से तीन गुना की वृद्धि हुई है। बलरामपुर जिले में 8,030 हेक्टेयर सरसों का रकबा बढ़कर अब 27,950 हेक्टेयर हो गया है। जशपुर जिले में पहले 3,600 हेक्टेयर में सरसों की खेती होती थी, जो अब बढ़कर 11,950 हेक्टेयर हो गई है। सूरजपुर जिले में सरसों का रकबा 4,000 हेक्टेयर से बढ़कर 11,000 हेक्टेयर और सरगुजा में 5,500 हेक्टेयर से बढ़कर 12,000 हेक्टेयर पहुंच गया है। &nbsp;</p>
<p>राज्य के रायपुर जिले में भी सरसों के रकबे में लगभग सवा चार गुना की बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2017-18 में रायपुर जिले में मात्र 1,340 हेक्टेयर में सरसों की खेती होती थी, जो अब बढ़कर 5,690 हेक्टेयर हो गई है। गरियाबंद जिले में सरसों की खेती का रकबा 40 हेक्टेयर से बढ़कर 2940 हेक्टेयर हो गया है। इस जिले में चार सालों में सरसों के रकबे में लगभग 73 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। राज्य के बेमेतरा और बालोद जिले में भी सरसों के रकबे में अच्छी-खासी बढ़ोत्तरी हुई है। बस्तर जिले में सरसों का रकबा 1000 हेक्टेयर से बढ़कर 5,750 हेक्टेयर हो गया है। कोण्डागांव जिले के किसान भी अब सरसों की पैदावार करने लगे हैं। कोण्डागांव जिले में सरसों का रकबा 70 हेक्टेयर से बढ़कर 11,340 हेक्टेयर पहुंच चुका है। नारायणपुर जिले में 4100 हेक्टेयर में, कांकेर में 6000 हेक्टेयर में सरसों की खेती होने लगी है। पहले इन जिलों में सरसों की खेती गिनती के किसान किया करते थे। कोण्डागांव, बस्तर, नारायणपुर के किसानों से प्रेरित होकर अब दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर के किसान भी सरसों की खेती को अपनाने लगे हैं।&nbsp;</p>
<p>छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों के चलते राज्य में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिला है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत धान के बदले अन्य फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ के मान से 10,000 रूपए की आदान सहायता ने किसानों को अन्य लाभकारी फसलों की खेती को अपनाने के लिए प्रेरित किया है। राज्य में बीते वर्ष सरसों की खेती 1,36,000 हेक्टेयर में की गई थी, इस साल इसमें लगभग 30,000 हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी हुई है और इसका रकबा बढ़कर 1,66,450 हेक्टेयर हो गया है। राज्य में चालू रबी सीजन में सरसों की बुआई पूर्णता की ओर है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ छत्तीसगढ़ में चार सालों में चार गुना बढ़ गया सरसों का रकबा  ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में बाढ़ और प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान के एवज में 535 करोड़ रुपये मुआवजा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-government-allocated-rs-535-crore-for-crop-loss-compensation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 20 Jan 2022 08:03:45 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-government-allocated-rs-535-crore-for-crop-loss-compensation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश सरकार ने बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को होने वाले नुकसान के मुआवजे के तौर पर 535 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह आवंटन मौजूदा वित्त वर्ष 2021-22 के लिए है। तीन केंद्रीय कृषि कानूनों, जिन्हें सरकार ने पिछले महीने वापस ले लिया, के खिलाफ किसानों की ती नाराजगी को देखते हुए प्रदेश की योगी सरकार ने उन्हें लुभाने के लिए इस तरह के कई फैसले किए हैं।</p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार स्टेट डिजैस्टर रेस्पांस फंड (एसडीआरएफ) से 535 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इससे उन करीब 15 लाख किसानों को मदद राशि दी जाएगी जिनकी फसलों को 2021-22 में बाढ़ से नुकसान हुआ था। पिछले दिनों बारिश और ओले से भी किसानों की फसलों को काफी नुकसान हुआ है। उसके मुआवजे के तौर पर राज्य सरकार ने 38 करोड़ रुपये जारी किए हैं।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) मनोज कुमार सिंह ने बताया कि राहत आयुक्त कार्यालय को निर्देश दिया गया है कि वह बारिश से फसलों को नुकसान का विवरण उपलब्ध कराए, ताकि मुआवजे की रकम सीधे किसानों के बैंक खाते में जमा कराई जा सके। बेमौसम बारिश और ओले से राज्य में रबी की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में बाढ़ और प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान के एवज में 535 करोड़ रुपये मुआवजा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[फसल में बीमारी फैलने से लाल मिर्च के दाम तीन सप्ताह में  30 फीसदी बढ़ेः आरकेपीए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/chilli-prices-up-over-30-per-cent-across-various-markets-in-telangana-says-rkpa.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 12 Jan 2022 21:07:35 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/chilli-prices-up-over-30-per-cent-across-various-markets-in-telangana-says-rkpa.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">किसानों के संगठन राष्ट्रीय किसान प्रगतिशील संघ (आरकेपीए) ने कहा है कि बॉटनिकल और केमिकल कीटनाशकों के परीक्षण के दौरान पाया गया कि लाल मिर्च की फसल पर थ्रिप्स के हमले पर लगाम लगाने के लिए स्पिनोसेड 0.015% <span>का उपयोग कारगर है। इनकी </span><span>सही मात्रा के उपयोग से</span>&nbsp;<span>लाल मिर्च की फसल को थ्रिप्स के हमले से बचाया जा सकता है। कीटों को नियंत्रित करने के लिए फसल के शुरुआती दौर में उचित कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए ताकि क्षेत्र में लाल मिर्च उगाने वाले किसानों को कोई आर्थिक नुकसान न हो। आरकेपीए द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में यह बातें कही गई हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">आरकेपीए का कहना है किसानों को आर्थिक नुकसान न हो इसके लिए जरूरी है कि मिट्टी और खेत को ध्यान में रखते हुए उचित मात्रा में कीटनाशकों का प्रयोग किया जाए। फसलों में <span>सही मात्रा और सही गुणवत्ता के अलावा कीटनाशकों के प्रयोग का समय भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। इन सभी कारको को ध्यान में रखकर थ्रिप्स पैराविस्पिनस जैसे कीट पर नियंत्रण पाया जा सकता है। आरकेपीए द्वारा राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें वक्ताओं ने कहा कि </span><span>ड्रोन</span>, <span>रोबोटिक्स और एआई जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से यहां तक </span>​​कि कीटनाशकों का भी समान रूप से छिड़काव किया जा सकता है। लाल मिर्च की फसल पर नए कीट '<span>थ्रिप्स</span>' <span>की समस्या सबसे पहले </span>2020<span> में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में देखी गई थी। अक्टूबर </span>2021<span> तक कीड़ों की आबादी इतनी बढ़ गई कि ये कीड़े फसल के फूलों को पूरी तरह से खाने लगे। कीटों के हमले के कारण फूल फल नहीं बन पाता है जिससे फसल की उत्पादकता में भारी गिरावट आती है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इस समस्या के चलते तेलंगाना और गुंटूर के कई बाजारों में पिछले दो से तीन सप्ताह में लाल मिर्च के दाम 30<span> फीसदी तक बढ़ गए हैं। </span>'<span>थ्रिप्स पर जल्द से जल्द अंकुश लगाने की जरूरत है</span>, <span>जिससे लाल मिर्च की फसल को भारी नुकसान हो रहा है और फसल में लीफ कर्ल रोग का मुख्य कारण बना हुआ है। यदि इन कीटों को नियंत्रित नहीं किया गया</span>, <span>तो निकट भविष्य में फसलों की उत्पादकता </span>30<span> से </span>50<span> प्रतिशत तक कम हो सकती है</span>, <span>जो कि किसानों के लिए बहुत बड़ा नुकसान होगा।</span></p>
<p style="text-align: justify;">यह नया आक्रामक कीट दोनों राज्यों के कई जिलों में लाल मिर्च की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। यह कीट फूल आने पर फसल पर हमला करता है, <span>जिससे फसल का विकास ठीक से नहीं हो पाता है। हाल के महीनों में हुई भारी बारिश से यह समस्या और भी गंभीर हो गई है। कीटों के कारण फसल की उत्पादकता अच्छी नहीं होने से किसान चिंतित हैं। उनकी समस्या को हल करने के लिए</span>, <span>आरकेपीए ने कहा कि </span><span>बीज</span>, <span>उर्वरक और उपयुक्त कीटनाशकों की उचित मात्रा जैसे सही कृषि आदानों का उपयोग करके समस्या का समाधान किया जा सकता है। भारत में किसानों को दोहरी समस्या का सामना करना पड़ता है। एक ओर जहां बाजार में उपलब्ध कीटनाशक नकली हैं</span>, <span>वहीं दूसरी ओर किसानों को अपनी फसलों की रक्षा के लिए कृषि रसायनों के उचित उपयोग के बारे में जानकारी नहीं है।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>इस अवसर आरकेपीए ने </span>दो प्रमुख राज्यों आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मिर्च उत्पादकों को एकजुट होने की सलाह दी। एसोसिएशन ने उनसे ऐसे नियामक तत्वों के खिलाफ एकजुट होने और अभियान चलाने का आग्रह किया जो उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले कृषि इनपुट से किसानों को वंचित कर रहे हैं। साथ ही किसानों को '<span>थ्रिप्स पैराविस्पिनस</span>' <span>जैसे आक्रामक कीटों से निपटने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करने की सलाह दी गई।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ फसल में बीमारी फैलने से लाल मिर्च के दाम तीन सप्ताह में  30 फीसदी बढ़ेः आरकेपीए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश  सरकार ने  कृषि के लिए बिजली की दरें की आधी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/electricity-price-for-farmers-has-halved-in-uttar-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 07 Jan 2022 20:04:38 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/electricity-price-for-farmers-has-halved-in-uttar-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div dir="auto" style="text-align: justify;"></div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">कुछ ही दिनों में उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव के तारीखों का ऐलान होना है। उत्तर प्रदेश में &nbsp;विधानसभा चुनाव-2022 से पहले सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार ने किसानों को बड़ा तोहफा दिया है और राज्य सरकार ने सिंचाई के लिए निजी नलकूपों की मौजूदा बिजली दरों में 50 फीसदी की कमी की है. इसे प्रदेश की योगी सरकार का बेहद अहम फैसला माना जा रहा है।&nbsp; राज्य सरकार के इस फैसले से प्रदेश के 13 लाख किसानों को सीधा फायदा होगा और उनकी सिंचाई लागत आधी हो जाएगी।</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;"></div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले के बाद राज्य में निजी नलकूप के नए बिलों में ग्रामीण मीटर् कनेक्शन में बिजली दर 2 रुपये/यूनिट से घटकर 1 रुपये/यूनिट और फिक्स चार्ज 70 रुपये प्रति हॉर्स पावर से घटकर 35 रुपये/हॉर्स पावर होगा। अनमीटर्ड कनेक्शन में फिक्स चार्ज 170 रुपये/हॉर्स पावर की जगह 85 रुपये/हॉर्स पावर होगा।</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;"></div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">शहरी मीटर्ड कनेक्शन में बिजली दर 6 रुपये/यूनिट से घटकर 3 रुपये/यूनिट और फिक्स चार्ज 130 रुपये/हॉर्स पावर से घटकर 65 रुपये/हॉर्स पावर होगा. एनर्जी एफिशिएंट पंप में दर 1.65 रुपये/यूनिट से घटकर 83 पैसे/यूनिट और फिक्स चार्ज 70 रुपये/हॉर्स पावर की जगह 35 रुपये/हॉर्स पावर होगा.</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;"></div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">नई दरों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में मीटर्ड कनेक्शन पर जहां अभी दो रुपये प्रति यूनिट की दर से बिल देना है। वहीं अब एक रुपये प्रति यूनिट देना होगा। इस कनेक्शन के लिए फिक्स चार्ज 70 की जगह 35 रुपये प्रति हार्स पावर लगेगा। इसी तरह अनमिटर्ड कनेक्शन के लिए फिक्स चार्ज 170 रुपये प्रति हार्स पावर की जगह 85 रुपये प्रति हार्स पावर की दर से देना होगा। योगी आदित्यनाथ सरकार के इस फैसले से 50 फीसदी बिजली बिल कम होगा। सीएम योगी के इस फैसले से 13 लाख किसानों को सीधा फायदा होगा।</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;"></div>
<div dir="auto">विधान सभा चुनाव से पहले किसानों को अपने पाले में लाने के लिए योगी सरकार ने बिजली की कीमतें आधी करने का फैसला किया है.दरअसल, राज्य में किसानों के निजी नलकूपों की बिजली की दर 2 रुपये से 6 रुपये प्रति यूनिट के बीच है और फिक्स चार्ज भी 70 रुपये से 130 रुपये प्रति हॉर्स पावर (एचपी) है। इसलिए विपक्षी दल किसानों को मुफ्त बिजली देने का वादा कर रहे हैं और महंगी बिजली को मुद्दा बनाकर प्रदेश की योगी सरकार को घेर रहे हैं. राज्य में चुनावी साल में सभी राजनीतिक दलों ने किसानों को मुफ्त बिजली देने का वादा किया है. लेकिन योगी सरकार ने अब इस पर फैसला कर लिया है. प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं और योगी सरकार ने विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले गुरुवार को बड़ा दांव खेलकर किसानों को सस्ती बिजली का बड़ा तोहफा देने का भी ऐलान किया है.</div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/12/image_750x500_61ba22c1ee96b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश  सरकार ने  कृषि के लिए बिजली की दरें की आधी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[तेलंगाना ने उत्तर प्रदेश से आलू आने पर लगाई रोक, इस फैसले के राजनीति रंग लेने की संभावना   ]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/telangana-banned-import-of-potatoes-from-up-decision-may-take-political-color.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 02 Jan 2022 09:03:26 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/telangana-banned-import-of-potatoes-from-up-decision-may-take-political-color.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और तेलंगाना की सरकार केंद्र की भाजपा सरकार से दूरी बना रही है। केंद्र सरकार के साथ धान की सरकारी खरीद को लेकर खींचतान के बाद अब तेलंगाना सरकार ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की मुश्किलें बढ़ाने वाला फैसला लिया है। यह फैसला है तेलंगाना में उत्तर प्रदेश से जाने वाले आलू पर रोक लगाने का। उत्तर प्रदेश से हर रोज करीब 100 ट्रक आलू तेलंगाना में जाता है। इसमें से आधे ट्रक आगरा जिले से ही जाते हैं। तेलंगाना द्वारा उत्तर प्रदेश के आलू पर रोक लगाने का मतलब है उत्तर प्रदेश के आलू किसानों से एक बाजार का छिनना और उसका असर आलू की कीमतों में गिरावट के रूप में सामने आ सकता है। वहीं तेलंगाना सरकार का कहना है कि वह राज्य में आलू उत्पादन को बढ़ावा देना चाहती है इसलिए उत्तर प्रदेश से आलू आने पर प्रतिबंध लगाया गया है।</p>
<p>तेलंगाना में पिछले कुछ साल के अंदर सिंचाई परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ है। जिसका नतीजा यह हुआ कि वहां धान का उत्पादन बहुत तेजी से बढ़ा है और साथ ही वहां की सरकार की बेहतर व्यवस्था के चलते धान की सरकारी खरीद तेजी से बढ़ी है। जिसके चलते पांच साल के भीतर ही धान की सरकारी खऱीद मामले में तेलंगाना पंजाब के बाद केंद्रीय पूल में धान की खरीद करने वाला दूसरा सबसे बड़ा राज्य बन गया है। 2015-16 के मार्केटिंग सीजन में तेलंगाना में धान की सराकरी खरीद 23.57 लाख टन रही थी जो 2020-21 के मार्केटिंग सीजन में बढ़कर 141.09 लाख टन पर पहुंच गई। कपास खरीद के मामले में भी तेलंगाना ने सबसे अधिक हिस्सेदारी हासिल कर ली है। कपास उत्पादन में तीसरा राज्य होने के बावजूद कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया की खऱीद यहां सबसे अधिक हो रही है।</p>
<p>तेलंगाना सरकार का कहना है कि राज्य में आलू की नई फसल आ गई है इसलिए उत्तर प्रदेश से पिछले सीजन की फसल का कोल्ड स्टोरेज का पुराना आलू मंगाने का कोई तर्क नहीं है। इसका राज्य के आलू किसानों पर प्रतिकूल असर पड़ता है। तेलंगाना सरकार धान के बढ़ते उत्पादन के चलते किसानों को फसल विविधिकरण अपनाने पर जोर दे रही है। उसका कहना है कि तेलंगाना आलू उत्पादन के लिए बेहतर राज्य है। अभी यहां सांगारेड्डी जिले के जहीराबाद इलाके में करीब चार हजार एकड़ में आलू की खेती हो रही है। हमारा लक्ष्य इसका क्षेत्रफल एक लाख एकड़ तक ले जाने का है।</p>
<p>इस कहानी में एक दिलचस्प राजनीतिक ट्विस्ट भी है और वह एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का। औवेसी उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव लड़ना चाहते हैं वहीं मुख्य मंत्री के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति पार्टी की सरकार में ओवैसी की पार्टी साझीदार है। ऐसे में तेलंगाना सरकार का उत्तर प्रदेश से आने वाले आलू पर रोक लगाने का फैसला उनके लिए मुश्किल खड़ी करेगा। अब देखना होगा कि ओवैसी इस स्थिति से कैसे निपटते हैं।</p>
<p>वहीं आगरा के एक बड़े आलू उत्पादन और कोल्ड स्टोरेज चलाने वाले उद्यमी का कहना है कि तेलंगाना सरकार का फैसला हमारे लिए नुकसान लेकर आयेगा। हर रोज उत्तर प्रदेश से करीब 700 ट्रक आलू दूसरे राज्यों को जाता है इसमें से करीब दोतिहाई ट्रक आलू महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु को जाता है। उत्तर प्रदेश में आलू की फसल आने के समय फरवरी और मार्च में केवल 20 से 25 फीसदी फसल की बिक्री होती है और बाकी फसल कोल्ड स्टोरों में भंडारण के लिए चली जाती है। अभी भी आलू की फसल का एक बड़ा हिस्सा कोल्ड स्टोरों में है। ऐसे में इस तरह की रोक आलू उत्पादकों और स्टोरेज मालिकों के लिए नुकसानदेह साबित होगी।</p>
<p>ऐसे में साल भर से अधिक समय तक चलेत और हाल ही में समाप्त किसान आंदोलन के चलते पैदा हुई नाराजगी को खत्म करने के लिए केंद्र की भाजपा के नेतृत्व वाली ससरकार ने तीन कृषि कानूनों को पिछले दिनों रद्द कर दिया था। &nbsp;वहीं तेलंगाना सरकार के इस कदम से उत्तर प्रदेश के आलू किसानों का अपने हितों के संरक्षण को लेकर दबाव बन सकता है।</p>
<p>वहीं बाजार में नवंबर में नया आलू भी आने लगता है जो 65 से 70 दिन की फसल का होता है लेकिन इसे स्टोरेज नहीं किया जा सकता है। फरवरी और मार्च के शुरू में आने वाली फसल ही कोल्ड स्टोरेज में रखी जाती है। इस स्थिति में स्टोर में रखे आलू की कीमतों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। &nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ तेलंगाना ने उत्तर प्रदेश से आलू आने पर लगाई रोक, इस फैसले के राजनीति रंग लेने की संभावना    ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में धान की खरीद  38 लाख टन के पार पहुंची]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-paddy-procurement-picks-momentum-crossed-38-lakh-tonne.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 28 Dec 2021 23:13:34 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-paddy-procurement-picks-momentum-crossed-38-lakh-tonne.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div class="adn ads" data-message-id="#msg-a:r-8253553610106498522" data-legacy-message-id="17e021a5715b2ce7">
<div class="gs">
<div class="">
<div id=":1ir" class="ii gt" jslog="20277; u014N:xr6bB; 4:W251bGwsbnVsbCxbXV0.">
<div id=":1iq" class="a3s aiL ">
<div dir="auto">
<div dir="auto" style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश में चालू खरीफ विपणन सत्र 2021-22 में धान की सरकारी खरीद 38 लाख टन से अधिक हो गई है। प्रदेश में आने वाले&nbsp; विधानसभा चुनाव से पहले यह एक बड़ी उपलब्धि है। जहां बीते 28 नवंबर तक मात्र 11 लाख टन की खरीद हुई थी वही दिसंबर माह में धान खरीद में 345 फीसदी&nbsp; की वृद्धि दर्ज की गई।</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">राज्य सरकार के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत अब तक पांच लाख 48 हजार किसान लाभान्वित हुए हैं जबकि लगभग 12.7 लाख&nbsp; किसानों इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। किसानों से सीधे धान की खरीद के लिए भारतीय खाद्य निगम द्वारा संचालित केंद्रों सहित लगभग 4600 खरीद केंद्र प्रदेश में स्थापित किए गए हैं।</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;"></div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">प्रदेश के खाद्य और नागरिक आपूर्ति आयुक्त सौरव बाबू ने बताया कि इस वर्ष ग्रेड ए और सामान्य किस्म के धान के लिए एमएसपी क्रमशः 1960 रुपए प्रति क्विंटल और 1940 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है। प्ऱदेश में आसन्न विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सत्तारूढ़ भाजपा मतदाताओं के विभिन्न वर्गों विशेषकर किसानों को खुश करने की हरसंभव कोशिश कर रही है।</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;"></div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">विवादास्पद केंद्रीय कृषि कानूनों के रद्द किए जाने के बाद अब योगी सरकार बहुत सावधानी बरत रही है ताकि बीजेपी को गरीब और किसान विरोधी ना चित्रित किया जा सके।&nbsp;इसीलिए योगी सरकार ने अधिकारियों को धान की निर्बाध खरीद सुनिश्चित करने और किसानों को एमएसपी का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;"></div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को मौके का निरीक्षण करने का निर्देश दिया था ताकि धान खरीद से बिचौलियों को दूर रखा जा सके जिस से किसानों को भुगतान पाने में कोई परेशानी ना हो।</div>
</div>
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</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में धान की खरीद  38 लाख टन के पार पहुंची ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गन्ना तौल में गड़बड़ी करने वाली चीनी मिलों के  खिलाफ उत्तर प्रदेश  सरकार सख्त]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/uttar-predesh-government-red-flags-under-weighment-of-sugarcane.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 25 Dec 2021 19:56:44 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/uttar-predesh-government-red-flags-under-weighment-of-sugarcane.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश में गन्ने की पेराई जोर पकड़ रही है, वहीं राज्य सरकार ने नकदी फसल गन्ना की खरीद में गड़बड़ी को लेकर चेतावनी दी है। चालू गन्ना पेराई सत्र (अक्टूबर-सितंबर) 2021-22 में 119 मिलों के साथ उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य है। इन चीनी मिलों द्वारा&nbsp; गन्ने की खरीद के लिए&nbsp; किसानों को सालाना करीब 35,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश गन्ना एवं चीनी आयुक्त संजय भुसारेड्डी के अनुसार, राज्य में चीनी मिलों के गेट और गन्ना खरीद केंद्रों के निरीक्षण के दौरान 213 अनियमितताएं पाई गईं। इनमें 17 गंभीर मामले शामिल हैं। इसके बाद चीनी मिल मालिकों और तुलाई लिपिकों को अनियमितता के 128 मामलों में नोटिस जारी किए गए जबकि 14 तुलाई लिपिकों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए। साथ ही कम वजन व अवैध रूप से गन्ने की खरीद के गंभीर मामले में चार पुलिस प्रकरण दर्ज किये गये हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">इस दौरान चीनी मिलों को गन्ने की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ ही किसानों के हितों की रक्षा के लिए गन्ना कम वजन के मामलों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई तौल उपकरण निर्माता, सॉफ्टवेयर प्रोवाइडर और एएमसी प्रोवाइडर के बीच मिलीभगत के कारण गन्ना तौल में कम वजन की धोखाधड़ी के तरीकों को अपनाने के संबंध में शिकायतों के बाद की गई है।</p>
<p style="text-align: justify;">लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 और प्रासंगिक नियम 2011 के तहत यह सॉफ्टवेयर प्रोवाइडर की जिम्मेदारी है कि जब इसे तौल के लिए उपयोग किया जाता है तो उपकरण और सॉफ्टवेयर को दोषों से मुक्त रखें।</p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश की&nbsp; गन्ना&nbsp; मिलों ने 5 दिसंबर तक 20 लाख टन से अधिक चीनी का उत्पादन किया था।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गन्ना तौल में गड़बड़ी करने वाली चीनी मिलों के  खिलाफ उत्तर प्रदेश  सरकार सख्त ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[योगी सरकार  किसानों  के लिए ला सकती है  पीएम किसान सम्मान निधि जैसी  योजना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/yogi-to-woo-farmers-with-largesse-modelled-on-pm-kisan.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 15 Dec 2021 22:08:34 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/yogi-to-woo-farmers-with-largesse-modelled-on-pm-kisan.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">साल 2022 में होने वाले आगामी विधान सभा चुनावों के पहले योगी आदित्यनाथ सरकार पीएम किसान सम्मान योजना पर आधारित कृषि अनुदान की घोषणा कर सकती है जिसमे छोटे और सीमांत किसानों के लिए प्रत्येक वर्ष 6000 रूपये देने का प्रवधान होगा। उत्तर प्रदेश के किसानों को केन्द्र सरकार से मिलने वाले सहायता से यह अतिरिक्त राशि होगी ।</p>
<p style="text-align: justify;">इस घोषणा से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच सरकार के प्रति नाराजगी कम हो सकती है क्योंकि हाल ही में केंद्र&nbsp; सरकार द्वारा तीन कृषि कानून संसद मे लिए जाने के फैसले से किसानों की नाराजगी भी कम होने की संभावना बनी है। इन कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन में सबसे ज्यादा भागीदारी इस क्षेत्र के किसानों की ही थी और सरकार के प्रति नराजागी भी राज्य के इस हिस्से में ही देखने को मिली थी।</p>
<p style="text-align: justify;">सूत्रों के मुताबिक इस योजना को इसी सप्ताह राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा। उत्तर प्रदेश विधान सभा का शीतकालीन सत्र अब शुरू हो गया है, मुख्यमंत्री द्वारा गुरुवार को अपने सदन के संबोधन में योजना की घोषणा करने की उम्मीद है। राज्य सरकार चालू 2021-22 वित्तीय वर्ष के लिए अनुपूरक भी बजट पेश करेगी।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि उत्तर प्रदेश के कृषि अनुदान की व्यापक रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा रहा है और छोटे और सीमांत किसानों को भुगतान 3,600 रुपये से &nbsp;लेकर 6,000 रुपये तक सालना देने की घोषणा की जा सकता है।</p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश में अनुमानित 2.4 करोड़ किसान परिवारों में से 2.15 करोड़ किसान&nbsp; यानी 90 प्रतिशत से अधिक छोटे और सीमांत किसानों की श्रेणी से संबंधित हैं, जिनके पास छोटी भूमि जोत और कम कृषि आय पर &nbsp;जीवन यापन करते है। दिलचस्प बात यह है कि उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य रहा है।</p>
<p style="text-align: justify;">प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 के लोकसभा चुनावों के पहले किसानों के बड़े हिस्से के लिए 2018 में पीएम किसान सम्मान निधि योजना शुरू की थी। इस योजना से किसान सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राजनीतिक फायदा मिला था और मोदी सरकार की भारी बहुमत के साथ &nbsp;दोबारा सरकार में वापसी हुई थी। 2022 के शुरुआती महीनों में जब राज्य में चुनाव होने हैं, तो योगी सरकार पीएम किसान के जादू को फिर से भुनाने की कोशिश कर रही है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ योगी सरकार  किसानों  के लिए ला सकती है  पीएम किसान सम्मान निधि जैसी  योजना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में धान की खरीद 11 लाख टन पर पहुंची]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-clocks-11-lakh-tonnes-in-paddy-procurement.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 30 Nov 2021 21:44:12 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-clocks-11-lakh-tonnes-in-paddy-procurement.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश में धान की सरकारी खरीद 11 लाख टन के आंकड़े &nbsp;को पार कर गई है। मौजूदा खरीफ विपणन सत्र में, भारतीय खाद्य निगम के साथ राज्य एजेंसियों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य ( एमएसपी) के तहत धान की 11 लाख से अधिक की खरीद की है।&nbsp;</p>
<p>उत्तर प्रदेश के खाद्य और नागरिक आपूर्ति आयुक्त सौरभ बाबू ने कहा कि 2,200 करोड़ रुपये की खरीद से 162,569 किसानों को फायदा हुआ है और आने वाले &nbsp;हफ्तों में इस प्रक्रिया में और भी तेजी आएगी।</p>
<p>चालू खरीफ मार्केटिंग सीजन (2021-22) के लिए ग्रेड ए और सामान्य किस्म के धान का एमएसपी क्रमशः 1,960 रुपये प्रति क्विंटल और 1,940 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।</p>
<p>इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीजन में धान की निर्बाध खरीद के लिए अधिकारियों को &nbsp;नियमित निगरानी और औचक निरीक्षण सुनिश्चित करने का &nbsp;निर्देश दिया था। किसानों से सीधी खरीदारी &nbsp;के लिए लगभग 4,010 सरकारी खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं।</p>
<p>इसके अलावा, सरकार ने बिचौलियों और दलालों को दूर रखने के लिए भी सख्त कदम उठाए हैं ताकि केवल वास्तविक तौर पर किसान को ही एमएसपी का लाभ मिल सकें।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में धान की खरीद 11 लाख टन पर पहुंची ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[योगी सरकार ने कृषि राहत के लिए  415 करोड़ रुपये आवंटित किए]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/yogi-government-accelerates-agricultural-relief.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 22 Nov 2021 23:42:52 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/yogi-government-accelerates-agricultural-relief.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em>लखनऊ </em></p>
<p style="text-align: justify;">यूपी में बाढ़ और बारिश से प्रभावित किसानों को सरकार ने बड़ी राहत दी है। योगी सरकार ने बाढ़ और भारी बारिश से हुए नुकसान के लिए चालू वित्त वर्ष 2021-22<span> में लगभग </span>11<span> लाख किसानों को राहत कोष में </span>415<span> करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए गए हैं। इसको लेकर सरकार ने अधिकारियों को किसानों को सहायता मुहैया कराने के निर्देश भी दिए हैं।&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>उत्तर प्रदेश चुनावों के लिए केवल कुछ महीने शेष हैं भाजपा सरकार&nbsp; राज्य में बाढ़ प्रभावित कारकों को वित्तीय सहायता के वितरण में तेजी लाई है। राज्य के किसानों लगातार काम कर रही है। इस बार बाढ़ और भारी बारिश ने किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इन किसानों की दुर्दशा को समझने और कम करने के लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने सभी प्रभावित जिलों के अधिकारियों को प्रभावित किसानों का सर्वेक्षण कर उन्हें तत्काल राहत प्रदान करने के निर्देश दिए थे। नतीजतन, प्रशासन ने इन किसानों को तुरंत राहत राशि पहुंचाई।</span></p>
<p style="text-align: justify;">एक अधिकारी ने बताया कि <span>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि हर किसान</span>, <span>जिसकी फसल बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुई है उस</span><span>को मुआवजा दिया जाना चाहिए और प्राथमिकता के आधार पर काम किया जाना चाहिए।</span></p>
<p style="text-align: justify;">सितंबर और अक्टूबर 2021<span> की शुरुआत में मूसलाधार बारिश और भारी बाढ़ के कारण प्रभावित किसानों की फसल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी।</span>जिला कोषालय से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) मोड के तहत मुआवजे की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में स्थानांतरित की जाएगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ योगी सरकार ने कृषि राहत के लिए  415 करोड़ रुपये आवंटित किए ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश के किसानों की बीच पोषक तत्वों से भरपूर  ब्रोकली की खेती हो रही लोकप्रिय]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/broccoli-the-mineral-rich-vegetable-getting-popular.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 07 Nov 2021 20:34:20 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/broccoli-the-mineral-rich-vegetable-getting-popular.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>लखनऊ</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">पोषक तत्वों से भरपूर विदेशी सब्जी ब्रोकली &nbsp;उत्तर प्रदेश में किसानों के बीच धीरे-धीरे काफी लोकप्रिय हो रही है। पौष्टिक गुणों के कारण उपभोक्ताओं में ब्रोकली की मांग बढ़ रही है। जिसके कारण ब्रोकली सहित की विदेशी सब्जियां की खेती किसान अपना रहे हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">लखनऊ स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (सीआएसएच) के अनुसार, लगभग 30,000 ब्रोकली के पौधे उन किसानों को प्रदान किए गए हैं, जो बाजार में अधिक मांग और उंची कीमतो के कारण इसकी खेती करने में &nbsp;ज्यादा रुचि&nbsp; रखते हैं। सीआईएसएच के निदेशक शैलेंद्र राजन ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया की कहा, "इसके पोषण मूल्य और बायोएक्टिव यौगिकों की उच्च सांद्रता के कारण विदेशी सब्जी ब्रोकली की लखनऊ में ज्यादा मांग है। डॉ. राजन ने कहा कि किसानों को पीक सीजन के दौरान फूलगोभी और गोभी जैसी पारंपरिक सब्जी फसलों से अच्छा रिटर्न नहीं मिलने के काऱण ब्रोकली की खेती गांवों में आम बात हो गई है क्योंकि किसान उसी जमीन से ब्रोकली की खेती करके इन फसलों की तुलना ज्यादा रिटर्न ले रहे हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">शहरी लोग विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाने के लिए विदेशी सब्जियों का उपयोग करने &nbsp;में ज्यादा रुचि रखते हैं। जिसके कारण बाजार में मांग बढ़ती है और किसान अपनी उपज को थोक बाजार में बेचने में सक्षम होते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">इस बीच, लगभग 250,000 शीतकालीन सब्जियों के पौधे कम संसाधन वाले किसानों को वितरित किये जा रहे हैं। इसके लिए सीआईएसएच जो आईसीएआर की एक विशेष प्रयोगशाला है। राजन ने कहा कि सर्दियों के मौसम में किसानों को पौध उपलब्ध करायी जाती है ताकि वह न केवल बढ़े बल्कि पोषक उद्यानों के महत्व को समझें और अपनी सब्जियां खुद उगाएं।</p>
<p style="text-align: justify;">राजन ने कहा कि साल 2020 के अनुभव के आधार पर हम कह सकते है इस चालू सीजन में&nbsp; किसानों &nbsp;द्वारा 30 लाख रुपये से अधिक दाम के सब्जियों का उत्पादन करने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि वह अपनी अतिरिक्त उपज को&nbsp; ग्रामीण बाजार में बेचते हैं, जिससे उन्हें आय का एक स्थिर स्रोत मिलता है।</p>
<p style="text-align: justify;">अमृत भारत महोत्सव कार्यक्रम के हिस्से के रूप में किसानों को ग्राफ्टेड पौधे और पौधे जैसे इनपुट प्रदान कर आईसीएआर स्थानीय कृषक समुदाय में भोजन और पोषण के बारे में जागरूकता पैदा करता है। राजन ने रेखांकित किया कि सामान्य स्वास्थ्य के लिए फलों और सब्जियों का नियमित सेवन जरूरी है। आम और अमरूद जैसे फल फ्लेवोनोइड्स, पॉलीफेनोलिक एसिड और विटामिन जैसे बायोएक्टिव पदार्थों के समृद्ध स्रोत हैं, जो मधुमेह, कैंसर और हृदय रोग के जोखिम को कम करते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">संसाधनों के मामले में कमजोर किसानों को आईसीएआर-सीआईएसएच विभिन्न फलों और सब्जियों की फसलों के लिए क्वालिटी&nbsp; वाली पौध सामग्री की आपूर्ति करने के साथ-साथ उच्च पैदावार, बेहतर उत्पाद की गुणवत्ता और बेहतर बनाने&nbsp; के लिए सर्वोत्तम प्रबंधन सिस्टम को लागू करने में उनकी सहायता करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश के किसानों की बीच पोषक तत्वों से भरपूर  ब्रोकली की खेती हो रही लोकप्रिय ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में  2021&amp;#45;22 सीजन में  57 लाख टन शीरा उत्पादन का अनुमान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-molasses-output-estimated-at-5.7-million-tonnes-in-2021-22.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 05 Nov 2021 18:51:19 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-molasses-output-estimated-at-5.7-million-tonnes-in-2021-22.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>लखनऊ</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश (यूपी) सरकार ने चालू गन्ना सीजन (नवंबर-अक्टूबर) 2021-22<span> में राज्य की चीनी मिलों द्वारा </span>57<span> लाख टन शीरा उत्पादन का अनुमान लगाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में देशी शराब निर्माताओं और डिस्टिलरी के लिए </span>1.17<span> टन से अधिक का कोटा रिजर्व किया है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">शीरा गन्ने के रस से चीनी उत्पादन प्रक्रिया के दौरान निकलने वाला काला सिरप जैसे दिखने वाला उत्पाद है। गन्ने की पेराई से लगभग 4.75<span> फीसदी शीरा की रिकवरी होती है। शीरे को एथाइल अल्कोहल और मिथाइल अल्कोहल बनाने के लिए प्रोसेस किया जाता है। इसका इस्तेमाल दवा और रसायन इंडस्ट्रीज में इनपुट के रूप में किया जाता है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश को उत्पाद शुल्क से सालाना करीब 30,000<span> करोड़ रुपये से अधिक की आय होती है। </span><span>जिसमें लगभग </span>50<span> फीसदी देशी शराब के उत्पादन से मिलती है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">दिलचस्प बात यह है कि यूपी की निजी चीनी मिलें लंबे समय से देशी शराब के लिए शीरा के कोटा को खत्म करने की मांग कर रही हैं। <span>इसकी वजह से उनके कैश फ्लो पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। एथनॉल के उत्पादन के लिए शीरे की उपलब्धता कम हो गई है</span>, <span>जिसका उपयोग पेट्रोल में ब्लैंडिंग के लिए किया जाता है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि सरकार ने पाया है कि यह निर्णय देशी शराब के लिए पर्याप्त मात्रा में शीरे की आपूर्ति बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया था जिसका सेवन समाज के निचले तबके में किया जाता है। राज्य अच्छी गुणवत्ता वाली देशी शराब के उत्पादन को सुविधाजनक बनाना चाहता है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><span>नवंबर, 2019 में योगी सरकार ने देशी शराब का कोटा </span>16<span> फीसदी से बढ़ाकर </span>18<span> फीसदी कर दिया था। दिलचस्प बात यह है कि राज्य ने सितंबर </span>2019<span> के महीने में ही उक्त कोटा को </span>12.5<span> प्रतिशत से बढ़ाकर </span>16<span> फीसदी कर दिया था।</span>&nbsp;<span>इससे यूपी के चीनी मिलों में काफी निराशा हुई थी।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">इस बीच <span>यूपी गन्ना पेराई सीजन (अक्टूबर-सितंबर) </span>2021-22<span> पहले से ही चल रहा है और पश्चिमी क्षेत्र की चीनी मिलों का पहले चरण में परिचालन शुरू हो गया है।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">नई यूपी शीरा नीति के अनुसार, <span>चीनी मिलों को आरक्षित और अनारक्षित कोटे के बीच </span>1:4.55<span> के वार्षिक निकास अनुपात को बनाए रखना अनिवार्य है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा, <span>अलग-अलग मिलों को जनवरी </span>2022 <span>तक रिजर्व शीरे के अपने पूरे वार्षिक कोटा को अनिवार्य रूप से समाप्त करना होगा। अन्य राज्यों से शीरा आयात करने वाली किसी भी डिस्टिलरी या इकाई को आबकारी विभाग से पूर्व अनुमति लेनी होगी।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में  2021-22 सीजन में  57 लाख टन शीरा उत्पादन का अनुमान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गन्ने और धान की राजनीतिक अर्थव्यवस्था उत्तर प्रदेश के 2022 विधान सभा चुनावों के लिए अहम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/political-economy-of-sugarcane-paddy-crucial-for-2022-up-polls.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 15 Oct 2021 15:02:23 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/political-economy-of-sugarcane-paddy-crucial-for-2022-up-polls.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">साल 2022<span> में उत्तर प्रदेश होने विधान सभा चुनावों के लिए पांच महीने से भी कम समय बचा है। राष्ट्रीय राजनीति को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले राज्य&nbsp; उत्तर प्रदेश के सिंहासन के लिए राजनीतिक दलों ने बड़ी लड़ाई के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है । चुनाव के पहले अभी से ही राज्य में राजनीतिक महौल चुनाव गतिविधियों से भर गया है। किसान नेता</span>&nbsp;<span>केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।</span>&nbsp;<span> किसान नेता केन्द्र और राज्य में सत्ता चला रही भाजपा और विशेष रूप से प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को अगले साल होने वाले चुनावों के पहले ही किसानों के मुद्दे पर सरकार की कमियां दिखा कर उनको घेर रहे हैं। हाल ही में लखीमपुर खीरी में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा पर अन्य लोगों के साथ मिलकर चार किसानों की कथित तौर पर हत्या का आरोप लगा है, इस घटना ने&nbsp; उत्तर प्रदेश </span><span>में किसान आंदोलन में उबाल ला दिया है ।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">इस दौरान भी मोदी सरकार नए कृषि कानूनों पर अडिग रही है, <span>जिन्हें भविष्य के कृषि </span>'<span>फार्म टू फोर्क</span>' <span>आपूर्ति श्रृंखला के लिए अनिवार्य बताया गया है और किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलने के लिए इनको लाने की बात कही गई है। वहीं&nbsp; </span><span>आंदोलनकारी किसान नेता यूपी में भाजपा के खिलाफ चुनाव प्रचार का उपयोग कर उसे अपने&nbsp; शक्ति प्रदर्शन के अवसर के रूप में देख रहे &nbsp;हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">किसानों के एक बड़े नेता राकेश टिकैत न केवल यूपी के मुजफ्फरनगर जिले से ताल्लुक रखते हैं और इस आंदोलन शामिल होने वाले ज्यादातर किसान पंजाब, <span>हरियाणा और पश्चिमी यूपी के जिलों से ताल्लुक रखते है। योगी आदित्यनाथ सरकार यूपी के किसानों के एक वर्ग के बीच असंतोष&nbsp; से पूरी अवगत है जो राज्य के कई विधानसभा क्षेत्रों में मतदान को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">विपक्षी दल किसानों की नराजगी को लपकने के लिए बाजीगरी दिखा रहे है आज के वक्त में भाजपा &nbsp;इस मुद्दे पर अंसमजस में है और&nbsp; विपक्षी दल भगवा पार्टी पर हमला करने के लिए किसानों के आंदोलन और महामारी की सामाजिक आर्थिक चुनौतियों का अच्छी तरह से उपयोग कर रहे हैं। &nbsp;इस तरह चलता रहा तो चुनाव आयोग द्वारा यूपी चुनाव का बिगुल बजाए जाने के पहले ही राजनीतिक हमले कटु होते जाएंगे। योगी आदित्यनाथ के पास इस महौल में आंदोलनकारी किसानों को शांत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।</p>
<p style="text-align: justify;">किसानों के उत्तर प्रदेश में तेजी से फैलते आंदोलन के बीच भाजपा मोदी-योगी जादू के आधार पर फिर से चुनाव जीतने की उम्मीद कर रही है। उसकी संभावनाओं पानी ना फिर जाय&nbsp; इसलिए योगी सरकार को इस मझदार से पार पाने के लिए किसानों का जल्द से जल्द पिछले सत्र &nbsp;का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान और धान की खरीद प्रकिया को सुविधा जनक बनाना होगा। साथ ही किसानों को उनकी उपज के मूल्य का&nbsp; शीध्र भुगतान करके&nbsp; उनकी नराजगी को कम करने का सबसे मुख्यमंत्री के पास गन्ना और धान की संयुक्त राजनीतिक अर्थव्यवस्था का एक &nbsp;कारगर उपाय है। विपक्ष की तरफ से हो रहे हमले &nbsp;के जवाब के रूप में सरकार किसानों अपने साथ ले सकती है । इस साल यूपी में गन्ना और धान का उत्पादन अधिक होने के अनुमान है। इस सीजन में किसान फसलों से मिलने वाली बंपर उपज अपने खेतों से खरीद केंद्रों &nbsp;पहुंचाने &nbsp;में व्यस्त रहेंगे । आने वाले चुनाव को देखते हुए इस दौरान किसानों के जल्द से जल्द उनके उपज के मूल्य के&nbsp; भुगतान से &nbsp;राज्य सरकार के प्रति नराजगी के बदले किसान को अपने पाले में लाने की संभावना देख सकती है।</p>
<p style="text-align: justify;">योगी सरकार ने पिछले महीने <span>नए गन्ना पेराई सत्र (अक्टूबर-सितंबर) </span>2021-22<span> के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) </span>25<span> रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर </span>350<span> रुपये प्रति क्विंटल करने की घोषणा की थी। अनुमान है कि राज्य के किसानों को सीजन में </span>4,000<span> करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई होगी और कुल भुगतान के&nbsp; </span>38,000<span> करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर को छूने की उम्मीद है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">संयोग से ब्राजील और थाईलैंड में गन्ना के कम &nbsp;उत्पादन के अनुमानों के कारण &nbsp;आने वाले सीजन में भी चीनी निर्यात बाजार में तेजी दिख रही है। यह चीनी मिलों को अपने स्टॉक को कम करने और किसानों के बकाया को तेजी से निपटाने के लिए बहुत सकारात्मक परिस्थिति तैयार करेगा।</p>
<p style="text-align: justify;">पश्चिमी यूपी में गन्ने की खेती अधिक प्रमुख है, <span>जो राज्य में कृषि आंदोलन का केंद्र है। इसके अलावा</span>, <span>यूपी सरकार ने मौजूदा खरीफ विपणन सत्र में &nbsp;एमएसपी के आधार पर &nbsp;धान (सामान्य और ग्रेड ए धान के लिए क्रमशः </span>1,940<span> रुपये और </span>1,960<span> रुपये प्रति क्विंटल) की </span><span>&nbsp;</span>7<span>0 लाख टन सरकारी खरीद का लक्ष्य रखा गया है।</span> यह खरीदारी<span>&nbsp;</span>1<span> अक्टूबर से शुरू हुई है और </span>28<span> फरवरी</span>, 2022<span> तक जारी रहेगी। यह मतदान से पहले यूपी के किसानों को </span>13,000<span> करोड़ रुपये से अधिक के प्रत्यक्ष भुगतान में तब्दील हो जाएगा।</span></p>
<p style="text-align: justify;">अकारण ही नहीं &nbsp;मोदी और योगी दोनों कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों जैसे अधिक एमएसपी, <span>पीएम किसान भुगतान</span>, <span>फसल ऋण &nbsp;छूट</span>,<span> और &nbsp;फसल बीमा आदि के बहुआयामी दृष्टिकोणों के माध्यम से ग्रामीण आय को बढ़ावा देने की बात करते है और स्वयं की सत्तारूढ़ भाजपा सरकार की प्रंशसा करते है और &nbsp;सरकार की किसान समर्थक नीतियों के बारे में बात करते हैं । </span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार उनकी सरकार ने मार्च </span>2017<span> में सत्ता संभालने के बाद किसानों और दलितों सहित समाज के विभिन्न वर्गों को&nbsp; कुल </span>5<span> लाख करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) हुआ है। </span>2017<span> के बाद से </span>1.42<span> लाख&nbsp; करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान उनके किसान समर्थक रुख का प्रमाण है</span>, <span>साथ ही गेहूं और धान फसलों की रिकॉर्ड खरीद भी है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि कृषि मुद्दे कुल राजनीतिक परिदृश्य का केवल एक हिस्सा हैं, <span>फिर भी घरेलू अर्थव्यवस्था की प्रकृति</span>, <span>जो मुख्य रूप से कृषि प्रधान है उसके&nbsp; </span><span>रोजगार और अन्य क्षेत्रों पर सामाजिक आर्थिक प्रभाव को देखते हुए चुनावों के दौरान यह एक महत्वपूर्ण विषय है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/10/image_750x500_615d8dc42e62f.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ गन्ने और धान की राजनीतिक अर्थव्यवस्था उत्तर प्रदेश के 2022 विधान सभा चुनावों के लिए अहम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में धान खरीद केंद्र के नियमों को लेकर परेशान हो रहें है  किसान]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/farmers-are-getting-worried-about-the-rules-of-paddy-procurement-center-in-uttar-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 11 Oct 2021 19:35:15 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/farmers-are-getting-worried-about-the-rules-of-paddy-procurement-center-in-uttar-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;"><strong>सहारनपुर, उत्तर प्रदेश</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><span>एक अक्टूबर से</span> &nbsp;केंद्र सरकार द्वारा धान की निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य ( एम एस पी)&nbsp; 1,<span>940 रुपये और ग्रेड-ए धान 1</span>,<span>960 रुपये प्रति क्विंटल</span> दर पर किसानों से<span> उत्तर प्रदेश </span><span>सरकार द्वारा नियुक्त एजेंसियां पश्चिमी उत्तर प्रदेश के</span><span> जिलों में धान की&nbsp; खरीदारी कर&nbsp; रही हैं । लेकिन&nbsp; इन&nbsp; धान खरीदी केंद्रों में किसान सरकारी खरीद के </span>'<span>नियमों</span>' <span>से परेशान हो रहे&nbsp; हैं। नमी&nbsp; और रंग जैसे बिंदुओं पर किसानों का धान&nbsp; नहीं खरीदा जा रहा है। इससे कई किसान इन&nbsp; केंद्रों से बिना अपना धान&nbsp; बेचे&nbsp; निराश होकर लौट रहे हैं और खुले बाजार में अपने धान की उपज&nbsp; को 1300 रुपये प्रति क्विंटल तक की कीमतों पर&nbsp; बेचने को मजबूर हैं।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रूरल वॉयस</strong> ने सहारनपुर जिले की नकुड़ तहसील के किसान अरविंद कुमार चौधरी से बात की तो उन्होंने बताया कि यहां पर&nbsp; में एफसीआई द्वारा धान क्रय केन्द्र खोला गया है । यहां पर नियुक्त कर्मचारी नमी की अधिकता और अगर &nbsp;धान की उपज &nbsp;कुछ दाने &nbsp;थोड़ा हरा हैं तो उसे कमी बताकर धान की उपज को रिजेक्ट कर दे रहे हैं और किसानों को वापस कर दिया जा रहा&nbsp; है। अगर किसान धान को ज्यादा सुखाकर ले जा रहा है तो अधिक सूखने वजह से धान के बोरी में एक दो&nbsp; चावल दिख रहा है, तो धान को नही खरीदा जा रहा हैं। इससे हम धान उत्पादन करने वाले किसान को ज्यादा परेशानी और नुकसान झेलना&nbsp; पड़ रहा है।&nbsp; उन्होंने बताया कि एक तरफ धान&nbsp; ढुलाई के लिए गये वाहन का किराया भुगतान करना पड़ रहा है जिससे आर्थिक नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ अपने धान की उपज को 1200 से 1300 रुपये <span>&nbsp;प्रति क्विंटल</span> की दर पर मंडियो में बेचनने को मजबूर हैं । उनकी शिकायत है कि धान क्रय केन्द्रों पर अनुभवहीन कर्मिचारियों के चलते यह परेशानी और ज्यादा बढ़ रही है ।</p>
<p style="text-align: justify;">धान की खेती करने वाले कैधा कानपुर के निवासी&nbsp; किसान रघुनाथ सिंह कहना था कि&nbsp; रजिस्ट्रेशन के समय केवल धान की नमी&nbsp; कितनी रहनी चाहिए इसके बारे में&nbsp; सरकारी कर्मचारियों द्वारा जानकारी दी&nbsp; जाती है लेकिन उन्होंने पिछले साल का धान केन्द्र पर&nbsp; अपने कड़वे अनुभवों का&nbsp; जिक्र किया और बताया कि धान क्रय केन्द्र पर&nbsp; धान ले जाने के बाद उपज में कई तरह कमियां बताई जाती हैं। उनका कहना है कि मानक तय करने में व्यावहारिक रवैया अपनाया जाए ताकि सभी किसानों को इसका लाभ मिल सके।</p>
<p style="text-align: justify;">राज्य सरकार के अनुसार&nbsp; राज्य भर में लगभग 4000 धान खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। छोटे किसानों को धान खरीद में सुविधा दी गई है। सप्ताह में पांच दिन छोटे किसानों से खरीदारी की जाएगी।&nbsp; जिन किसानों के पास 50 क्विंटल से अधिक धान है, <span>वह शनिवार और रविवार को ही धान बाजार में बेच सकेंगे।&nbsp; </span>, <span>ताकि छोटे किसानों को धान खरीद केंद्रों पर कोई परेशानी न हो. इससे अधिक धान वाले किसान शनिवार और रविवार को धान बेच सकेंगे। इसका मकसद छोटे किसानों को रियायत देना है।.</span></p>
<p style="text-align: justify;">राज्य&nbsp; सरकार ने&nbsp; चालू <span>खरीफ विपणन सत्र में 70 लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए</span> 4,000 धान खरीद <span>&nbsp;केंद्र खोले जाएंगे। जिसमें </span>1,500 <span>यूपी सहकारी संघ (पीसीएफ) और </span>1,100 <span>केंद्र यूपी खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा स्थापित किए जाएंगे। </span><span>इसके बाद यूपी सहकारी संघ </span>600 <span>केंद्र </span>, <span>यूपी उपभोक्ता सहकारी संघ </span>300 <span>केंद्र</span>, <span>खाद्य भारतीय निगम </span>300 <span>केंद्र और यूपी राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद </span>200 <span>सरकारी खरीद केंद्र स्थापित करने के लिए कहा अभी राज्य के पश्चिमी क्षेत्रों में धान की खरीद </span>1 <span>अक्टूबर</span>, 2021<span> की जा रही है जो &nbsp;</span>31 <span>जनवरी</span>, 2022 <span>के बीच तक &nbsp;की जाएगी । जबकि पूर्वी क्षेत्र में </span>1 <span>नवंबर</span>, 2021 <span>से </span>28 <span>फरवरी</span>, 2022 <span>तक धान की खरीद होगी।</span>&nbsp;<span>इन केंद्रों को लखनऊ स्थित रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (आरएसएसी) की मदद से जियो-टैग किया जाएगा।</span></p>
<p style="text-align: justify;"></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/10/image_750x500_6164442e2f06c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में धान खरीद केंद्र के नियमों को लेकर परेशान हो रहें है  किसान ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश के रटौल आम को मिला जीआई  टैग , ब्रांड वैल्यू बढ़ने से उत्पादकों को होगा फायदा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/rataul-mango-gets-gi-tag.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 10 Oct 2021 22:59:22 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/rataul-mango-gets-gi-tag.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश के &nbsp;प्रसिद्ध आम &nbsp;रटौल को&nbsp; जियोग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री ने प्रतिष्ठित जियोग्राफिकल इन्डिकेशन &nbsp;(जीआई) प्रमाण पत्र दे दिया है। &nbsp;रटौल आम का नाम बागपत जिले के रटौल गांव से पड़ा है, जहां से इसकी उत्पत्ति मानी जाती है। &nbsp;उत्तर प्रदेश के दशहरी आम के लिए &nbsp;इसके पहले जीआई &nbsp;टैग मिल चुका है। अब रटौल आम भी इस समूह में शामिल हो गया है। देश में चेन्नई&nbsp; स्थित जियोग्राफिकल इन्डिकेशन रजिस्ट्री द्वारा जीआई सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। जीआई पंजीकरण किसी खास जियोग्राफी में उत्पादित होने वाले उत्पाद की खासियत के लिए दिया जाता है और उसके&nbsp; नाम से दूसरे स्थान के उत्पाद को मार्केट नहीं किया जा सकता है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><span>लखनऊ जिले में विशेष रूप से मलिहाबाद और काकोरी बेल्ट में पैदा होने वाले दशहरी आम को पहले ही जीआई&nbsp; टैग मिल चुका है। जीआई टैग के लिए रटौल मैंगो प्रोड्यूसर एसोसिएशन पिछले </span>10 <span>साल से भी अधिक समय से प्रयास कर रही थी । मगर इसकी सर्टिफेशन की&nbsp; प्रक्रिया ने साल &nbsp;</span>2020 <span>से &nbsp;गति पकड़ी जब सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (सीआईएसएच</span>), <span>लखनऊ ने एक सूत्रधार के रूप में काम किया। रटौल आम अपनी बेहतरीन सुगंध और स्वाद के लिए जाना जाता है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इस रटौल आम पर <span>पाकिस्तान भी अपने&nbsp; ब्रांड का मलिकाना हक का दावा करता है क्योंकि </span>1947 <span>में विभाजन के दौरान कुछ प्रवासी इस किस्म&nbsp; को अपने साथ लेकर चल गये थे और पाकिस्तान में इसकी बागवानी करने लगे थे।&nbsp; इसके बाद इस आम की किस्म को पाकिस्तान से खाड़ी देशों में अनवर रटौल के नाम से &nbsp;निर्यात किया जाने लगा ।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि जीआई टैग मिलने से रटौल &nbsp;आम को&nbsp; बडे&nbsp; स्तर पर&nbsp; आम प्रेमियों और &nbsp;आम के शौकिन लोगों के वर्ग तक पहुंचने में मदद मिलगी।&nbsp; <span>इसके अलावा निर्यात और बढ़ती मांग का सटीक अंदाजा लगेगा &nbsp;क्योंकि अनवर रटौल पहले से ही खाड़ी में भारतीय आम के शिपमेंट को कड़ी टक्कर दे रहा है।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>सीआईएसएच के निदेशक शैलेंद्र राजन के अनुसार, यूपी के चौसा और गौरजीत आम के भी जीआई पंजीकरण के लिए भी आवेदन जमा किया&nbsp; गया हैं। </span>&nbsp;<span>इन दो किस्मों का जीआई पंजीकरण होने की बाद उत्तर प्रदेश पश्चिम बंगाल के बराबर आ जाएगा। वर्तमान में पश्चिम बंगाल&nbsp; में </span>3 <span>जीआई टैग वाली किस्में&nbsp; फाजली</span>, <span>हिमसागर और लखन भोग &nbsp;हैं। उन्होंने बताया की इसके अलावा</span>, <span>बनारसी लंगड़ा के लिए जीआई पंजीकरण प्रक्रिया भी चल रही है। </span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश के रटौल आम को मिला जीआई  टैग , ब्रांड वैल्यू बढ़ने से उत्पादकों को होगा फायदा ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का पिछले पेराई सीजन का 4450 करोड़ रुपये का बकाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-sugar-mills-owe-4450-crores-to-sugarcane-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 08 Oct 2021 20:59:22 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-sugar-mills-owe-4450-crores-to-sugarcane-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश में गन्ना पेराई का नया सीजन (2021-22) शुरू हो गया है लेकिन गन्ना किसानों को पिछले सीजन का पूरा भुगतान नहीं हुआ। राज्य के चीनी उद्योग और गन्ना विकास विभाग द्वारा 8 अक्टूबर,2021 को जारी आंकड़ों के अनुसार चीनी मिलों पर गन्ना किसानों करीब 4450 करोड़ रूपये का भुगतान बकाया है। इन आंकड़ों के मुताबिक अभी तक गन्ना किसानों को पिछले पेराई सत्र (2020-21) में आपूर्ति किये गये गन्ने के लिए 28574.71 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। वहीं पिछले दिनों राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक पिछले&nbsp; पेराई सत्र में किसानों को होने वाले भुगतान की राशि 33025 करोड़ रुयपे बनती है। इस आधार पर चीनी मिलों पर किसानों का बकाया करीब 4450 करोड़ रुपये बनता है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का यह बकाया केवल निजी चीनी मिलों पर ही नहीं बल्कि राज्य की सहकारी चीनी मिलों पर भी बकाया है। हालांकि राज्य सरकार द्वारा 8 अक्तूबर को जारी आंकड़ों में चीनी मिलों के आधार पर आंकड़े नहीं दिये गये हैं। लेकिन पिछले दिनों के उपलब्ध आंकड़ों में सितंबर के पहले सप्ताह में सहकारी चीनी मिलों पर 31 फीसदी से ज्यादा का बकाया था। इनमें राज्य की पश्चिमी हिस्से की कई चीनी मिलों जिनमें बागपत, रमाला, नानौता और मोरना की चीनी मिलों पर 300 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया था। अभी तक इसमें से कितना भुगतान हुआ है उसकी ताजा जानकारी उपलब्ध नहीं है। खास बात यह है कि राज्य के इसी हिस्से में नये केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन का असर अधिक है और यहां पर गन्ना किसानों की तादाद काफी ज्यादा है। वहीं निजी चीनी मिलों में सबसे कम भुगतान करने वाली कई चीनी मिलें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही हैं। साथ ही राज्य के गन्ना विकास और चीनी उद्योग मंत्री सुरेश राणा का गृह जिला शामली भी इसी हिस्से मेें है और उनके चुनाव क्षेत्र में आने वाली थानाभवन चीनी मिल पर काफी अधिक भुगतान बकाया है।</p>
<p style="text-align: justify;">सहकारी चीनी मिलों पर 6 सितम्बर, 2021 तक गन्ना किसानों का &nbsp;875 .84 करोड़ रुपये का &nbsp;गन्ना मूल्य भुगतान बकाया था। आज दिए गये आंकड़ों में&nbsp; इसका विवरण नही दिया गया कि 4450 करोड़ रुपए के गन्ना मूल्य बकाया में सहकारी चीनी मिलों पर बकाया कि कितनी हि्स्सेदारी है लेकिन यह भी सच है कि अभी तक इनका पूरा भुगतान नहीं हुआ। बागपत जिले की रमाला सहकारी चीनी मिल को गन्ना आपूर्ति करने वाले एक किसान ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि पहले रमाला चीनी मिल का भुगतान काफी बेहतर था लेकिन अब यह चीनी मिल भी देर से भुगतान करने वाली चीनी मिलों में शामिल हो गयी है। ऐसे&nbsp; में जब राज्य सरकार द्वारा संचालित सहकारी चीनी मिलें ही समय से भुगतान नहीं कर रही हैं तो वह निजी चीनी&nbsp; मिलों पर &nbsp;जल्द भुगतान करने का दबाव कैसे बना रही होगी वह इससे साफ हो जाता है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">चालू पेराई सीजन के लिए राज्य सरकार ने गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 25 रुपये प्रति क्विटंल बढ़ाकर 350 रुपये प्रति क्विटंल किया है। पिछले तीन साल राज्य सरकार ने गन्ने के एसएपी में कोई बढ़ोतरी नहीं की। राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सत्ता में आने के पहले पेराई सीजन 2017-18 में केवल 10 रुपये प्रति क्विटंल की बढ़ोतरी की थी। पूरे कार्यकाल में मौजूदा सरकार द्वारा पांच साल में केवल 35 रुपये प्रति क्विटंल की बढ़ोतरी हुई है। जबकि इसके पहले की सरकारों ने इससे कहीं अधिक बढ़ोतरी की थी। वहीं पड़ोसी राज्य हरियाणा ने गन्ने के एसएपी 362 रुपये प्रति क्विटंल और पंजाब ने 360 रुयपे प्रति क्विटंल तय किया है। इसके चलते भी गन्ना किसान राज्य सराकर से नाखुश हैं।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का पिछले पेराई सीजन का 4450 करोड़ रुपये का बकाया ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने का एसएपी बढ़ाकर 350 रुपये किया, पांच साल में केवल 35 रुपये की वृद्धि, पिछली दोनों सरकारों से कम]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-govt-announced-rs-25-increase-for-sugarcane-sap-bjp-govt-increased-sap-only-rs-35-in-five-years.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 26 Sep 2021 21:11:01 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-govt-announced-rs-25-increase-for-sugarcane-sap-bjp-govt-increased-sap-only-rs-35-in-five-years.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने आगामी पेराई सीजन (2021-22) के लिए&nbsp; गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में 25 रुपये प्रति क्विटंल की बढ़ोतरी करने की घोषणा कर दी। सरकार ने यह घोषणा आगामी 1 अक्तूबर से शुरू होने वाले पेराई सीजन के लिए की है। इसके बाद राज्य में गन्ने की अगेती प्रजाति के लिए एसएपी 350 रुपये प्रति क्विंटल, सामान्य प्रजाति के लिए 340 रुपये प्रति क्विंटल और अस्वीकृत प्रजाति के लिए एसएपी 335 रुपये प्रति क्विटंल हो गया है। खास बात यह है कि राज्य सरकार ने आगामी पेराई सीजन समेत पांच पेराई सीजन में केवल दो बार गन्ने के एसएपी में बढ़ोतरी की है। सत्ता में आने के पहले साल 2017-18 सीजन के लिए 10 रुपये प्रति क्विंटल और आगामी सीजन 2021-22 के लिए 25 रुपये की वृद्धि एसएपी में की है। इस तरह से पांच साल के दौरान भाजपा की उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने का एसएपी केवल 35 रुपये प्रति क्विटंल बढ़ाया है। वहीं इसकी पूर्ववर्ती अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार ने अपने कार्यकाल में गन्ने का एसएपी 65 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया था जबकि उसके पहले मायावती के नेतृत्व वाली बसपा सरकार ने अपने कार्यकाल में अभी तक की सबसे अधिक 120 रुपये प्रति क्विटंल की बढ़ोतरी गन्ने के एसएपी में की थी।</p>
<p>मायावती की सरकार के आने के समय 2006-07 में गन्ने का एसएपी सामान्य प्रजाति के लिए 125 रुपये प्रति क्विटंल और अगेेती प्रजाति के लिए 130 रुपये प्रति क्विंटल था जो 2011-12 के पेराई सीजन में सामान्य प्रजाति के लिए 240 रुपये और अगेती प्रजाति के लिए 250 रुपये प्रति क्विटंल हो गया था। मायावती के कार्यकाल में गन्ने के एसएपी में 120 रुपये प्रति क्विटंल की बढ़ोतरी हुई थी। वहीं अखिलेश यादव की सरकार के समय में गन्ने की इन दो प्रजातियों का एसएपी 2011-12 के 240 और 250 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2016-17 में 305 और 315 रुपये प्रति क्विटंल पर पहुंच गया था और यह वृद्धि 65 रुपये प्रति क्विंटल की थी। वहीं मौजूदा योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने पहले साल 2017-18 में एसएपी में दस रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर इसे सामान्य प्रजाति के लिए 315 रुपये और अगेती प्रजाति के लिए 325 रुपये प्रति क्विंटल किया था। इसके बाद 2018-19, 2019-20 और 2020-21 पेराई सीजन के लिए गन्ने के एसएपी में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। आगामी सीजन के लिए की गई 25 रुपये प्रति क्विटंल की बढ़ोतरी के साथ मौजूदा सरकार के कार्यकाल में गन्ने का एसएपी मात्र 35 रुपये प्रति क्विटंल बढ़ेगा।</p>
<p>मौजूदा सरकार की इस घोषणा के बाद राज्य के 45 लाख से अधिक गन्ना किसानों की नाराजगी का कम होना संभव नहीं लगता है क्योंकि पड़ोसी राज्य हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने आगामी सीजन के लिए गन्ने का एसएपी 362 रुपये प्रति क्विटंल घोषित किया है। वहीं पंजाब की कांग्रेस सरकार ने गन्ने का एसएपी 360 रुपये प्रति क्विंटल घोषित कर रखा है। इस स्थिति में पहले से ही आंदोलनरत गन्ना किसानों की नाराजगी कम कैसे होगी क्योंकि वह 400 रुपये प्रति क्विटंल से अधिक दाम मांग रहे हैं। केंद्र सरकार के तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन करने वाले किसानों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों की संख्या सबसे अधिक है। वहीं अभी भी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का चालू पेराई सीजन (2019-20) का करीब चार&nbsp; हजार करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान बकाया है।</p>
<p>अहम बात यह है कि देश में चीनी की बिक्री का&nbsp; कारोबार काफी हद तक सरकार द्वारा नियंत्रित है और सरकार ने चीनी की बिक्री के लिए 31 रुपये प्रति किलो का न्यूनतम&nbsp; बिक्री मूल्य (एमएसपी) तय कर रखा है। सभी मिलों की बिक्री के लिए केंद्र सरकार बिक्री का मासिक कोटा तय करती है और निर्यात का कोटा तय करती है। वैश्विक बाजार में चीनी की कमी के चलते चालू साल में 60 लाख टन से अधिक चीनी का निर्यात हआ है। इसके पहले साल भी करीब इतनी मात्रा का निर्यात हुआ था और केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को दो साल के लिए निर्यात पर सब्सिडी भी दी है। वहीं आगामी साल में भी ब्राजील व थाइलैंड में चीनी उत्पादन कम रहने के चलते भारत से 50 लाख टन से अधिक निर्यात होने की संभावना है। वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर पर चल रही हैं। यही वजह है कि घरेलू बाजार में चीनी की खुदरा कीमतें 40 रुपये प्रति किलो को पार कर गई हैं। यानी चीनी मिलों के लिए कमाई का अच्छा मौका मौजूद हैं। उनका मुनाफा बढ़ रहा और इसी के चलते स्टॉक मार्केट में चीनी मिलों के सूचीबद्ध स्टॉक्स की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। यह अनुकूल स्थिति पूरे देश की चीनी मिलों के लिए है इसलिए इसके बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गन्ने के एसएपी में पड़ोसी राज्यों से कम बढ़ोतरी करना सही नहीं माना जा सकता है और इससे किसानों की नाराजगी बढ़ सकती है।</p>
<p>&nbsp;राज्य सरकार ने दावा किया है कि एसएपी में इस बढ़ोतरी से राज्य के 45.44 लाख गन्ना किसानों को चालू सीजन के मुकाबले 2500 से&nbsp; 3000 करोड़ रुपये का अधिक भुगतान होगा और यह 38 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।</p>
<p>लेकिन सवाल है कि सरकार ने आठ फीसदी से कम की बढ़ोतरी की है जबकि पिछले तीन साल में किसानों के लिए बिजली करीब तीन गुना महंगी हुई और डीजल का दाम 20 रुपये प्रति लीटर से अधिक बढ़ा है। ऐसे में तीन साल के फ्रीज के बाद केवल 25 रुपये प्रति क्विटंल की बढ़ोतरी को तर्कसंगत ठहराया जाना मुश्किल है और वह भी चुनावी साल में। राज्य में आगामी फरवरी- मार्च माह में विधान सभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में विपक्ष सरकार के खिलाफ गन्ना किसानों की नाराजगी को भुनाने की पूरी कोशिश करेगा।</p>
<p>वहीं सरकार के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि गन्ना के एसएपी में केवल 25 रुपये प्रति क्विटंल की बढ़ोतरी योगी सरकार द्वारा&nbsp; किसानों के साथ किया गया एक क्रूर मजाक है। जाति और धर्म के नाम पर वोट मांगने वाली भाजपा किसानों को कुचलने में लगी है और उसका संकल्प पत्र जुमला साबित हुआ है। पड़ोसी राज्य हरियाणा में गन्ने का एसएपी 362 रुपये प्रति क्विटंल है। उत्तर प्रदेश की गन्ना मूल्य परामर्शदात्री समिति ने गन्ने की लागत 350 रुपये प्रति क्विटंल बताई थी। भाजपा के खुद के सांसद वरूण गांधी ने पत्र लिखकर गन्ने का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग की थी। पिछले विधान सभा चुनाव के पहले भाजपा ने अपने घोषणापत्र में गन्ने का एसएपी 370 रुपये क्विटंल करने और 14 दिन के भीतर भुगतान करने का वादा किया था। इस वादाखिलाफी का जवाब किसान और मजदूर बिरादरी चुनावों में जरूर देगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने का एसएपी बढ़ाकर 350 रुपये किया, पांच साल में केवल 35 रुपये की वृद्धि, पिछली दोनों सरकारों से कम ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[चुनावी साल में योगी  सरकार  का 70 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/yogi-government-is-targeting-to-procure-seven-mt-of-paddy.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 26 Sep 2021 07:40:17 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/yogi-government-is-targeting-to-procure-seven-mt-of-paddy.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div dir="auto" style="text-align: justify;"><em><strong>लखनऊ</strong></em></div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;"><em><strong></strong></em></div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 2022 चुनावों देखते 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले खरीफ विपणन सत्र में 70 लाख&nbsp; धान की खरीद का लक्ष्य रखा है। अगर यूपी सरकार अपने खरीद लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होती है, तो राज्य के धान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)&nbsp; के तहत प्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरण (डीबीटी) में 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिलेगी।</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;"></div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">इस खरीफ विपणन सीजन के लिए समान्य धान के लिए एमएसपी 1,940 रुपये प्रति क्विंटल और&nbsp; ए ग्रेड धान के लिए 1,960 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। यूपी सरकार के अनुसार, धान की फसल जल्द ही बाजार में आने की उम्मीद है और राज्य ने सभी 75 जिलों में 4,000 खरीद केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है।</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;"></div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">हाल ही में रबी विपणन सीजन में, यूपी सरकार की एजेंसियों ने चुनावों से पहले किसानों को अच्छे मूड में रखने के लिए लगभग 66 लाख टन गेहूं की खरीद की थी। सत्तारूढ़ भाजपा सामाजिक आर्थिक चुनौतियों के बीच और कृषि बिल के किसानों द्वारा विरोध और महामारी के बीच फिर से सत्ता हासिल करने के लिए चुनाव में उतरेगी।&nbsp;&nbsp;</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;"></div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">धान खरीद के 4,000 खरीद केंद्रों में से 1,500 यूपी सहकारी संघ (पीसीएफ) और 1,100 केंद्र यूपी खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा स्थापित किए जाएंगे। इसके बाद यूपी सहकारी संघ 600 केंद्र , यूपी उपभोक्ता सहकारी संघ 300 केंद्र, खाद्य भारतीय निगम 300 केंद्र और यूपी राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद 200 सरकारी खरीद केंद्र स्थापित करेगी।&nbsp;इन केंद्रों को लखनऊ स्थित रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (आरएसएसी) की मदद से जियो-टैग किया जाएगा।</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;"></div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">किसानों को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति पोर्टल<span>&nbsp;</span><a href="http://www.fcs.up.gov.in/" target="_blank" data-saferedirecturl="https://www.google.com/url?q=http://www.fcs.up.gov.in&amp;source=gmail&amp;ust=1632707833446000&amp;usg=AFQjCNFAIxV2yWFOj1GeHfu6C7eHkr4LvQ" rel="noopener">www.fcs.up.gov.in</a><span>&nbsp;</span>पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ परचेज (ई-पॉप) मशीनों के माध्यम से किसानों के बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद धान की खरीद की जाएगी।</div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;"></div>
<div dir="auto" style="text-align: justify;">राज्य के पश्चिमी क्षेत्रों में धान की खरीद 1 अक्टूबर, 2021 से 31 जनवरी, 2022 के बीच की जाएगी जबकि पूर्वी क्षेत्र में 1 नवंबर, 2021 से 28 फरवरी, 2022 तक धान की खरीद होगी।</div> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/09/image_750x500_615010d4396c6.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ चुनावी साल में योगी  सरकार  का 70 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[नेफेड ने कश्मीर की डल झील का  कचरा प्रबंधन  का जिम्मा उठाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/nafed-takes-the-task-of-managing-the-waste-of-dal-lake-in-kashmir.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 22 Sep 2021 08:30:02 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/nafed-takes-the-task-of-managing-the-waste-of-dal-lake-in-kashmir.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">नेशनल एग्रीकल्चरल कोआपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमटेड (नेफेड) ने श्रीनगर की डल झील की सुन्दरता औऱ स्वच्छ पर्यावरण के लिए जम्मू कश्मीर लेक्स एंड&nbsp; वाटरवेज डवलपमेंट अथॉरिटी&nbsp; (जेकेएलडब्लूयूडीए) के साथ&nbsp; 25 साल के लिए&nbsp; एक समझौते पर&nbsp; हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत नेफेड डल झील से निकले हुए कचरे की प्रोसेसिंग करेगी। इसके चलते डल झील का पर्यावरण साफ और सुथरा रहेगा । वहां रहने वाले समुदाय को स्वस्थ औऱ सुंदर माहौल मिल सके जिससे वहां आने पर्यटकों को और आकर्षित किया जा सके । इस समझौते पर जेकेएलडब्लूयूडीए की तरफ से वाइस प्रसिडेंट बशीर भट और नेफेड की तरफ से एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ईडी)&nbsp; कमलेंद्र श्रीवास्तव ने श्रीनगर में एक आयोजित&nbsp; बैठक में हस्ताक्षर किए ।</p>
<p style="text-align: justify;">इसी साल फरवरी में माह में जम्मू परिषद &nbsp;ने नेफेड द्वारा एकीकृत ठोस कचरा प्रबंधन परियोजना की स्थापना को मंजूरी दी थी। जम्मू नगर निगम ने 350 टन की क्षमता के साथ एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र स्थापित करने के लिए नेफेड के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर &nbsp;किए था।</p>
<p style="text-align: justify;">नेफेड ने &nbsp;हाल में कश्मीर में&nbsp; किसानों और कृषि के विकास के लिए &nbsp;कृषि, <span>बागवानी</span>, <span>&nbsp;में सहकारी क्षेत्र को बढ़ावा &nbsp;देने के लिए कश्मीर के कृषि संबधित कई संस्थानों से कई &nbsp;समझौते किए है। इनका मकसद है कि सेब, अखरोट, चेरी और फूलों की खेती को बढ़ावा देकर&nbsp; इन कृषि उत्पादो का उचित दाम मिल सके।&nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;">नेफेड ने अभी हाल ही में नेफेड ब्रांड के तहत खरीदे गए केसर का शुभारंभ किया। नेफेड ने कश्मीर में फार्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन ( एफपीओ ) को नेफेड बाजार के आउटलेट के माध्यम से मार्केट लिंकेज प्रदान किया है। जिससे कि एफपीओ द्वारा उत्पादित और प्रोसेसिंग उत्पादों को&nbsp; बाजार में नेफेड के ब्रांड तहत मार्केट किया जा सके। इससे एफपीओ के सदस्यों&nbsp; और किसानों&nbsp; को अपने उत्पादो का उचित मूल्य मिल सकेगा।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">नेफेड भारत की एक <span>बहुराज्यीय सहकारी संस्था है </span>&nbsp;<span>जिसका मुख्य उद्देश्य है कृषि सहयोग और किसान कल्याण। इसका&nbsp; मुख्य कार्य सहकारी क्षेत्र में कृषि उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देना है&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ नेफेड ने कश्मीर की डल झील का  कचरा प्रबंधन  का जिम्मा उठाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी की चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 5275 करोड़ रुपये का बकाया राज्य सरकार पर गन्ने का एसएपी बढ़ाने का दबाव]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-sugar-mills-owe-5275-crores-to-sugarcane-farmers-state-govt-under-pressure-to-increase-sap.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 12 Sep 2021 21:29:53 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-sugar-mills-owe-5275-crores-to-sugarcane-farmers-state-govt-under-pressure-to-increase-sap.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 5275 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया है। चालू पेराई सीजन (अक्तूबर,2020 से सितंबर, 2021) के दौरान 33,025 करोड़ रुपये मूल्य के 10.28 करोड़ टन गन्ने की पेराई की गई। इसके लिए किसानों को 27,750 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया जबकि 5275 करोड़ रुपये का बकाया है। राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 11 सितंबर को गन्ना भुगतान के संबंध में एक समीक्षा बैठक की। उसके बाद भुगतान की ताजा स्थिति की जानकारी दी गई।&nbsp;</p>
<p>राज्य की 53 चीनी मिलों ने गन्ने का पूरा भुगतान कर दिया है लेकिन कई चीनी मिलें ऐसी भी हैं जिनका अभी तक का जनवरी, 2021 के दौरान की गई गन्ने की आपूर्ति का भी पूरा भुगतान नहीं मिला है। यह स्थिति शामली स्थित अपर दोआब सरशादीलाल चीनी मिल की है। इस मिल को गन्ने की आपूर्ति करने वाले एक किसान ने रूरल वॉयस को बताया कि अभी तक जनवरी का भी पूरा भुगतान नहीं मिला है जबकि इस चीनी मिल ने मई तक गन्ने की पेराई की थी। वैसे इस जिले की तीन चीनी मिलें गन्ना भुगतान के मामले में बुरी स्थिति में हैं।&nbsp;</p>
<p>वहीं उत्तर प्रदेश सरकार पर जहां गन्ना भुगतान पूरा कराने का दबाव है क्योंकि नये पेराई सीजन (2021-22) के शुरू होने में 18 दिन ही बचे हैं। वहीं राज्य सरकार ने राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में पिछले तीन सीजन में कोई बढ़ोतरी नहीं की है और चार सीजन में केवल 10 रुपये प्रति क्विटंल की बढ़ोतरी की थी जो 2017-18 पेराई सीजन में की गई थी। वहीं पंजाब में किसानों द्वारा गन्ना मूल्य बढ़ोतरी के लिए आंदोलन खड़ा करने के चलते पिछले दिनों वहां की सरकार ने आगामी पेराई सीजन के लिए गन्ने का एसएपी बढ़ाकर 360 रुपये प्रति क्विटंल कर दिया है। जबकि हरियाणा सरकार ने एसएपी में 12 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे अगले सीजन के लिए 362 रुपये प्रति क्विटंल कर दिया है। इस स्थिति में उत्तर प्रदेश सरकार पर गन्ने के एसएपी में भारी बढ़ोतरी का दबाव बन रहा है क्योंकि राज्य में अगले साल फरवरी-मार्च में विधान सभा चुनाव होने हैं। लेकिन जिस तरह से पंजाब और हरियाणा ने गन्ने का एसएपी 360 रुपये और 362 रुपये प्रति क्विटंल कर दिया है इसके चलते अब उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर एसएपी में भारी बढ़ोतरी करने का दबाव बन रहा है।&nbsp;</p>
<p>समीक्षा बैठक के बाद राज्य सरकार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार&nbsp; द्वारा अब तक 45 लाख गन्ना किसानों को 1 लाख 42 हजार 650 करोड़ रुपये का भुगतान <span>45 </span>लाख गन्ना किसानों को कराया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया की बकाये गन्ना मूल्य का भुगतान अविलम्ब कराए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि डिफॉल्टर चीनी मिलों से गन्ना किसानों के बकाया मूल्य का तत्काल भुगतान कराया जाए। गन्ना किसानों के हितों की अनदेखी करने वाली चीनी मिलों के प्रबन्धन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। राज्य सरकार गन्ना किसानों के हित में हर सम्भव कदम उठा रही है।</p>
<p>इस समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि पेराई सत्र 2020-2021 में राज्य में कुल 120 चीनी मिलों का संचालन किया गया<span>, </span>जिसमें 10.28 करोड़ टन की खरीद के मुकाबले 33<span>,</span>025 करोड़ रुपये का गन्ना देय है। इस लक्ष्य के मुकाबले चीनी मिलों द्वारा 27<span>,</span>750 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।</p>
<p>बैठक के दौरान अधिकारियो नें मुख्यमंत्री&nbsp; को अवगत कराया कि 53 चीनी मिलों द्वारा पेराई सत्र 2020-2021 का शत-प्रतिशत गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित किया गया है। 67 चीनी मिलों का आंशिक गन्ना मूल्य भुगतान लंबित है। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के कारण यह रिकॉर्ड भुगतान संभव हुआ है। इसके अलावा शीरा<span>, </span>एथेनॉल<span>, </span>खोई ने यह भुगतान करने में मदद की है। राज्य में गुड़ या गन्ने के रस से बने एथेनॉल के उत्पादन और बिक्री से बड़े पैमाने पर सैनिटाइज़र का निर्माण हुआ। इससे गन्ना मूल्य भुगतान में भी तेजी आई है।</p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी की चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 5275 करोड़ रुपये का बकाया राज्य सरकार पर गन्ने का एसएपी बढ़ाने का दबाव ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि मंत्री ने कश्मीर  दौरे में नेफेड ब्रांड  के केसर और कैन्ड चैरी उत्पादों को लांच किया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/nafed-got-support-to-promote-kashmir-agricultural-products.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 11 Sep 2021 13:34:43 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/nafed-got-support-to-promote-kashmir-agricultural-products.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिहं तोमर ने श्रीनगर में सहकारी क्षेत्र की शीर्ष संस्था नेशनल एग्रीकल्चरल कोआपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमटेड (नेफेड) के ब्रांड के तहत केसर और कैन्ड चैरी उत्पाद लांच किये। नेफेड कश्मीर में फार्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन ( एफपीओ ) को नेफेड बाजार के आउटलेट के माध्यम से मार्केट लिंकेज प्रदान कर रही है। जिससे एफपीओ द्वारा उत्पादित और प्रोसेसिंग किये गये उत्पाद को&nbsp; बाजार में नेफेड के ब्रांड वैल्यू के तहत मार्केट किया जा सके ताकि&nbsp; एफपीओ के सदस्यों&nbsp; और किसानों &nbsp;को अपने उत्पादों का उचित मूल्य मिल सके। &nbsp;&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">नेफेड भारत की&nbsp; <span>बहुराज्य सहकारी संस्था है जिसका मुख्य उद्देश्य है कृषि सहयोग और किसान कल्याण और&nbsp; सहकारी क्षेत्र में कृषि उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देना है । नेफेड ने उपभोक्ता विपणन में अपनी गतिविधियों को विविधिकरण की दिशा में बढ़ाया है</span>&nbsp;<span>ताकि दैनिक आवश्यकता की वस्तुओं&nbsp; का उत्पादन करने वाले किसानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य मिल सके और इनका&nbsp; उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं को उचित दर पर सही वस्तुओं को उपलब्ध कराया जा सके। दालों</span>,&nbsp;<span>मसालों</span>,&nbsp;<span>चाय और अन्य उत्पादों का नेफेड ब्रांड बेहतर गुणवत्ता के कारण उपभोक्ताओं के बीच काफी </span>लोकप्रिय है।</p>
<p style="text-align: justify;">आजादी का अमृत महोत्सव समारोह में भाग लेने के लिए&nbsp; कृषि मंत्री तोमर कश्मीर दौरे पर हैं। उन्होंने इस दौरे के दौरान अंतर्राष्ट्रीय कश्मीर केसर व्यापार केंद्र &nbsp;पुलवामा में &nbsp;ड्रायिंग सेक्शन, स्टिग्मा सेप्रेशन, कोल्ड स्टोरेज, हाई-टेक क्वालिटी कंट्रोल लैब, पैकेजिंग सेक्शन और ई-ऑक्शन सेंटर सहित अन्य आधुनिक सुविधाओं का &nbsp;भी जायजा लिया ।</p>
<p style="text-align: justify;">कृषि मंत्री ने अपने &nbsp;इस दौरे के दौरान &nbsp;श्रीनगर में नेफेड के द्वारा बनाए गये 10 एफपीओ&nbsp; को इनकार्पोरेशन सर्टिफिकेट भी दिये। इस दौरान और नेफेड ब्रांड के केसर और कैंन्ड चैरी की लांचिंग के मौके पर कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी और शोभा&nbsp; कंरदलाजे और नेफेड के मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव चड्ढा&nbsp; भी उपस्थित थे। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि मंत्री ने कश्मीर  दौरे में नेफेड ब्रांड  के केसर और कैन्ड चैरी उत्पादों को लांच किया ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[सरकार कश्मीर में  कृषि  और किसान के विकास के लिए प्रतिबद्ध है : कृषि मंत्री]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/government-of-india-is-committed-to-the-development-of-agriculture-and-farmers-in-kashmir.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 10 Sep 2021 20:46:23 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/government-of-india-is-committed-to-the-development-of-agriculture-and-farmers-in-kashmir.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कश्मीर दौरे के दूसरे दिन पुलवामा के पम्मोर स्थित भारत अंतरराष्ट्रीय&nbsp; कश्मीर केसर व्यापार केंद्र&nbsp; (आईआईकेएसटीसी) में किसान किसानों से रूबरू होते हुए किसानों को बताया कि केंद्र सरकार ने 400 <span>करोड़ रूपये के राष्ट्रीय केसर मिशन के अंतर्गत कश्मीर को अभी तक </span>266 <span>करोड़ रूपये से ज्यादा राशि प्रदान की है</span>, वहीं कश्मीर केसर व्यापार केंद्र को केन्द्र सरकार ने 38 करोड़ रूपये &nbsp;से ज्यादा राशि&nbsp; प्रदान की गई है।</p>
<p style="text-align: justify;">जम्मू-कश्मीर को भारत का ताज बताते हुए कृषि मंत्री ने &nbsp;कहा कि भारत सरकार इसके विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य में कृषि क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र द्वारा पैसे की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।</p>
<p style="text-align: justify;">केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर भारत सरकार के सार्वजनिक आउटरीच कार्यक्रम के तहत यहां आये हुए हैं। इस जन संपर्क कार्यक्रम के तहत उन्होंने किसानों-बागवानों, <span>कृषि वैज्ञानिकों और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत की। </span>इस दौरान किसानों ने कहा कि पहले उन्हें केसर के लगभग एक लाख रूपये प्रति किलो के भाव ही मिल पाते थे लेकिन प्रोसेसिंग, <span>ग्रेडिंग व अन्य सुविधाएं विकसित होने से उन्हें उनकी केसर की दोगुनी से ज्यादा कीमत मिल पा रही है और केसर की क्वालिटी बेहतर होने के कारण निर्यात के भी बेहतर अवसर उपलब्ध हुए हैं तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय केसर की पहचान बनेगी। अब उत्पादकता बढ़ रही है और अच्छी पैकेजिंग व सही क्वालिटी होने से उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिल पाएगा</span>, <span>वरना पहले कई बार कश्मीरी केसर के नाम पर मिलावटी केसर की भी बिक्री होती थी।</span>&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">सभा को संबोधित करते हुए &nbsp;केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों-केसर उत्पादकों से कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए सभी प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देश में किसानों के कल्याण के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं और इससे जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। एक लाख करोड़ रूपये के एग्री इंफ्रा फंड से किसानों को खेतों के पास ही काफी सुविधाएं मिलेगी।&nbsp; उन्होंने जम्मू-कश्मीर के किसानों से आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि केंद्र व राज्य सरकार पूरी तरह से आपके साथ है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">केंद्रीय कृषि मंत्री श्री तोमर, कृषि <span>राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी व सुश्री शोभा करंदलाजे तथा संसद सदस्यों ने अंतर्राष्ट्रीय कश्मीर केसर व्यापार केंद्र में ड्रायिंग सेक्शन</span>, <span>स्टिग्मा सेप्रेशन</span>, <span>कोल्ड स्टोरेज</span>, <span>हाई-टेक क्वालिटी कंट्रोल लैब</span>, <span>पैकेजिंग सेक्शन और ई-ऑक्शन सेंटर सहित अन्य आधुनिक सुविधाओं का जायजा लिया। कश्मीर के कृषि निदेशक चौधरी मोहम्मद इकबाल व विशेषज्ञों ने उन्हें &nbsp;आई आई के एस टी सी &nbsp;के कामकाज की जानकारी दी। निदेशक ने बताया कि जियो टैगिंग सुविधा ने विपणन मूल्य के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विपणन मंच पर केसर की पहुंच में वृद्धि की है। आईआईकेएसटीसी में किसानों को ई-नीलामी सुविधा प्रदान की जाती है</span>, <span>जो उन्हें उनकी उपज के लिए एक बहुआयामी विपणन सुविधा सुनिश्चित करती है। इससे किसान एक बहुस्तरीय विपणन प्रणाली में शामिल होते हैं</span>, <span>जहां उन्हें अपनी उपज का अधिकतम लाभ मिलता है।</span>&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">कार्यक्रम में उप राज्यपाल के सलाहकार श्री फारूक खान, <span>केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल</span>, <span>अतिरिक्त सचिव&nbsp; विवेक अग्रवाल</span>, <span>संसदीय मामलों के केंद्रीय अतिरिक्त सचिव सत्य प्रकाश</span>, <span>नेफेड के प्रबंध निदेशक संजीव कुमार चड्ढा</span>,&nbsp; <span>केंद्रीय संयुक्त सचिव (बागवानी) राजबीर सिंह</span>, <span>कश्मीर के महानिदेशक (बागवानी)&nbsp; एजाज अहमद भट भी उपस्थित थे।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ सरकार कश्मीर में  कृषि  और किसान के विकास के लिए प्रतिबद्ध है : कृषि मंत्री ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[पंजाब सरकार ने गन्ना मूल्य में 50 रुपये प्रति  क्विंटल  की बढ़ोतरी की]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-sugarcane-price-hike-rs-50-per-quintal.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 25 Aug 2021 16:43:17 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/punjab-government-sugarcane-price-hike-rs-50-per-quintal.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">कांग्रेस शासित राज्य पंजाब &nbsp;की &nbsp;कैप्टन अमरिंदर सिंह &nbsp;की सरकार ने &nbsp;राज्य के गन्ना किसानों की बड़ी मांग स्वीकारते हुए गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में 50 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि करके आगामी पेराई सीजन के लिए इसे 360 रुपये प्रति क्विटंल कर दिया है। &nbsp;पंजाब के किसान गन्ने के रेट में बढ़ोतरी को लेकर कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे। उन्होंने अपनी मांगों के लिए रेलवे ट्रैक और हाइवे जाम कर रखे थे। इस तरह सरकार द्वारा नए रेट की घोषणा करने के बाद किसानों ने अपना प्रदर्शन वापस ले लिया।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इसके पहले पंजाब के गन्ना उत्पादक किसान संगठन के नेताओं व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच गन्ने के मूल्य को लेकर वार्ता हुई। इस दौरान कैप्टन ने गन्ने के एसएपी में 35 <span>रुपये और वृद्धि कर दी है। इससे पहले पंजाब सरकार ने कीमत में </span>15 <span>रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया था। इससे किसान नाखुश थे।</span>&nbsp;<span>पेराई सीजन </span>2021-22 <span>के लिए एसएपी में </span>35 <span>रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि से गन्ने की कीमत </span>360 <span>रुपये हो जाएगी। यह पड़ोसी राज्य हरियाणा से दो</span>&nbsp;<span>रुपये ज्यादा है। कैप्टन की घोषणा के साथ ही किसानों ने आंदोलन वापसी की घोषणा कर दी है। </span></p>
<p style="text-align: justify;">इससे पहले भी किसान संगठनों व पंजाब सरकार के बीच वार्ता हुई थी, <span>जो विफल रही। मामला गन्ने के लागत मूल्य को लेकर फंसा हुआ था। किसान संगठन गन्ने की लागत </span>388 <span>रुपये बता रहे थे</span>, <span>जबकि पंजाब सरकार ने पिछले सप्ताह एसएपी </span><span>में </span>15 <span>रुपये की वृद्धि करके इसे </span>325 <span>रुपये कर दिया था। किसान संगठनों ने इसे मामूली वृद्धि बताया था</span>&nbsp;<span>जिसके कारण किसान संगठनों ने जालंधर के पास धरना लगा दिया। </span></p>
<p style="text-align: justify;">पंजाब सरकार की इस घोषणा ने उत्तर प्रदेश सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। उत्तर प्रदेश में चार साल में सिर्फ 10 <span>रुपये क्विंटल बढ़ा है औऱ अभी यूपी में </span>325 <span>रुपये प्रति</span> क्विंटल एसएपी पर ही गन्ने की खरीदारी हो रही &nbsp;है प्रदेश &nbsp;के किसान नेता, <span>आए दिन &nbsp;मांग कर रहे है गन्ना की में खेती पर लागत खर्च बढ़ता जा रहा है और &nbsp;कमाई सिमटती जा रही है। ऐसे में गन्ना मूल्य बढ़ाने की जरूरत है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश गन्ने का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। गन्ना&nbsp; किसानों और चीनी मिलों&nbsp; के टकराव का राजनीतिक मसला हमेशा रहा है क्योकि यह राज्य लगभग सालाना लगभग 17.9 करोड़ टन <span>यानी देश का </span>44.75 <span>फीसदी गन्ना उत्पादन करता है। राज्य में करीब </span>48 <span>लाख किसान गन्ने की खेती में लगे हुए हैं। पंजाब सरकार द्वारा गन्ने का एसएपी 360 रुपये प्रति क्विटंल करने से अन्य राज्यों में भी इसको लेकर </span><span>अब सियासत तेज होने की उम्मीद है।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब सरकार ने गन्ना मूल्य में 50 रुपये प्रति  क्विंटल  की बढ़ोतरी की ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[योगी सरकार डेयरी क्षेत्र के जरिए बढ़ा रही ग्रामीण रोजगार के अवसर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/yogi-government-milking-dairy-sector-for-rural-jobs.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 24 Aug 2021 22:30:46 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/yogi-government-milking-dairy-sector-for-rural-jobs.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong><em>लखनऊ, 24 अगस्त,&nbsp; 2021</em></strong></p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश &nbsp;दूध उत्पादन में &nbsp;देश में&nbsp; उंचा स्थान रखने&nbsp; वाला राज्य है&nbsp; और यहां पशुधन की संख्या भी सबसे अधिक है। अगले साल 2022<span> होने वाले उत्तर प्रदेश के विधान सभा&nbsp; चुनाव में&nbsp; ह महीने से भी कम समय बचा है, उसको देखते हुए राज्य सरकार&nbsp; ग्रामीण रोजगार पैदा करने के लिए डेयरी क्षेत्र को गति दे रही है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि दुधारू पशु पालन कर दूध का कारोबार करने वाले ग्रामीणों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके चलते उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र में किए जा रहे नए निवेश ने ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">पिछले चार साल में अमूल समेत छह बड़ी कंपनियों ने राज्य में 172<span> करोड़ रुपये के निवेश से अपने कैप्टिव डेयरी प्लांटलगाए हैं</span>, <span>जबकि सात और यूनिट लगाने का काम चल रहाहै. वहीं</span>, <span>राज्य सरकार द्वारा </span>15<span> नए निवेश प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जा रहा है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश &nbsp;का दूध उत्पादन सालाना औसतन 0.9<span> मिलियन टन से अधिक की दर से बढ़ रहाहै। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार</span>, <span>राज्य का दूध उत्पादन </span>2016-17<span> में </span>27.77<span> मीट्रिक टन से बढ़कर </span>2019-20<span> में </span>31.86<span> मीट्रिक टन होगया है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">आज उत्तर प्रदेश कुल दूध उत्पादन में 17<span> प्रतिशत से अधिक का योगदान देकर देश के दूध चार्ट में सबसे ऊपर है। राज्य दुग्ध व्यवसाय में सुधार के लिए डेयरी सोसायटियों का और विकास कर रहा है। वर्तमान में</span>, <span>यूपी में </span>21,537<span> दुग्ध समितियां हैं। इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए</span>, <span>सरकार ने विशेष रूप से कानपुर</span>, <span>लखनऊ</span>, <span>वाराणसी</span>, <span>मेरठ</span>, <span>बरेली</span>, <span>कन्नौज</span>, <span>गोरखपुर</span>,<span>फिरोजाबाद</span>, <span>अयोध्या और मुरादाबाद जिलों में ग्रीनफील्ड डेयरियों की स्थापना के साथ दुधारू पशुओं को संरक्षित&nbsp; करना शुरू कर दिया है। झांसी</span>, <span>नोएडा</span>, <span>अलीगढ़ और प्रयागराज में चार मौजूदा डेयरियों को अपग्रेड किया जा रहा है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा, <span>योगी सरकार ने सुनसान गोवंश के संरक्षणऔर रखरखाव के लिए </span>75<span> जिलों में गौ संरक्षण केंद्रों की&nbsp; स्थापना के लिए </span>272<span> करोड़ रुपये की मंजूरी दी। </span></p>
<p style="text-align: justify;">20<span>वीं पशुगणना के अनुसार</span>, <span>यूपी में 2 करोड़ से से अधिक गोजातीय पशु हैं।उन्होंने कहा</span>, <span>इन सभी प्रयासों ने सामूहिक रूप से डेयरीउद्योग में &nbsp;निवेशकों में काफी रुचि पैदा की है</span>, <span>जिनमें से कई &nbsp;निवेषकों ने &nbsp;पहले ही अपने संयंत्र स्थापित कर लिए हैं</span>, <span>जबकि कई अन्य इस पर काम कर रहे हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">यूपी में अब तक कई डेयरी प्लांट लग चुके हैं। इनमें गाजीपुर, <span>बिजनौर</span>, <span>मेरठ</span>, <span>गोंडा</span>, <span>बुलंदशहर और लखनऊ में&nbsp; क्रमशः पूर्वांचल एग्रीको</span>, <span>श्रेष्ठ फूड</span>, <span>देसी डेयरी</span>, <span>न्यू अमितफूड</span>, <span>क्रीमी फूड और सीपी मिल्क की इकाइयां शामिल हैं ।पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए</span>, <span>राज्यने गोकुल पुरस्कार और नंद बाबा पुरस्कार की शुरुआत कीहै ताकि देशी गाय की नस्लों के दूध के उच्चतम उत्पादक को लाया जा सके।</span></p>
<p style="text-align: justify;">ये किसी को बताने की जरूरत ही नही है क्योकि लगभग सभी लोग को&nbsp; मालूम है कि उत्तर प्रदेश &nbsp;दूध उत्पादन में &nbsp;देश में&nbsp; उंचा स्थान रखने&nbsp; वाला राज्य है&nbsp; और यहां पशुधन की संख्या भी सबसे अधिक है। अगले साल 2022<span> होने वाले उत्तर प्रदेश के विधान सभा&nbsp; चुनाव&nbsp; के&nbsp; जो छह महीने से भी कम समय बचा है, उसको देखते हुए राज्य सरकार ने ग्रामीण रोजगार पैदा करने के लिए डेयरी क्षेत्र को गति दे रही है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश ने डेयरी क्षेत्र में किए जा रहे नए निवेश ने ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। राज्यसरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दुधारू पशु पालन कर दूध का कारोबार करने वाले ग्रामीणों की संख्या लगातार बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align: justify;">पिछले चार साल में अमूल समेत छह बड़ी कंपनियों ने राज्य में 172<span> करोड़ रुपये के निवेश से अपने कैप्टिव डेयरी प्लांट लगाए हैं</span>, <span>जबकि सात और यूनिट लगाने का काम चल रहाहै. वहीं</span>, <span>राज्य सरकार द्वारा </span>15<span> नए निवेश प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जा रहा है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश का दूध उत्पादन सालाना औसतन नौ लाख टन <span>से अधिक की दर से बढ़ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार</span>, <span>राज्य का दूध उत्पादन </span>2016-17<span> में </span>277.7 लाख<span>&nbsp; टन से बढ़कर </span>2019-20<span> में </span>318.6<span> टन हो गया है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">आज उत्तर प्रदेश कुल दूध उत्पादन में 17<span> प्रतिशत से अधिक का योगदान देकर देश के दूध उत्पादन चार्ट में&nbsp; सबसे ऊपर है। राज्य के दुग्ध व्यवसाय में सुधार के लिए डेयरी सोसायटियों का और विकास कर रहा है। वर्तमान में</span>, <span>यूपी में </span>21,537<span> दुग्ध समितियां हैं। इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए</span>, <span>सरकार ने विशेष रूप से कानपुर</span>, <span>लखनऊ</span>, <span>वाराणसी</span>, <span>मेरठ</span>, <span>बरेली</span>, <span>कन्नौज</span>, <span>गोरखपुर</span>,<span>फिरोजाबाद</span>, <span>अयोध्या और मुरादाबाद जिलों में ग्रीनफील्ड डेयरियों की स्थापना के साथ दुधारू पशुओं को संरक्षित&nbsp; करना शुरू कर दिया है। झांसी</span>, <span>नोएडा</span>, <span>अलीगढ़ और प्रयागराज में चार मौजूदा डेयरियों को अपग्रेड किया जा रहा है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा, <span>योगी सरकार ने कम दूध देने वाले&nbsp; गोवंश के संरक्षण और रखरखाव के लिए </span>75<span> जिलों में गौ संरक्षण केंद्रों की&nbsp; स्थापना के लिए </span>272<span> करोड़ रुपये की मंजूरी दी। </span></p>
<p style="text-align: justify;">20<span>वीं पशुगणना के अनुसार</span>, उत्तर प्रदेश<span>&nbsp;में दो करोड़ से से अधिक गौवंश पशु हैं। उन्होंने कहा</span>, <span>इन सभी प्रयासों ने सामूहिक रूप से डेयरी उद्योग में &nbsp;निवेशकों में काफी रुचि पैदा की है</span>, <span>जिनमें से कई &nbsp;निवेशकों ने &nbsp;पहले ही अपने संयंत्र स्थापित कर लिए हैं</span>, <span>जबकि कई अन्य इस पर काम कर रहे हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश में अब तक कई डेयरी प्लांट लग चुके हैं। इनमें गाजीपुर, <span>बिजनौर</span>, <span>मेरठ</span>, <span>गोंडा</span>, <span>बुलंदशहर और लखनऊ में&nbsp; क्रमशः पूर्वांचल एग्रीको</span>, <span>श्रेष्ठ फूड</span>, <span>देसी डेयरी</span>, <span>न्यू अमितफूड</span>, <span>क्रीमी फूड और सीपी मिल्क की इकाइयां शामिल हैं ।पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए</span>, <span>राज्य ने गोकुल पुरस्कार और नंद बाबा पुरस्कार की शुरुआत की है ताकि देशी गाय की नस्लों से भी&nbsp; दूध के उच्चतम उत्पादन लिया&nbsp; जा सके।</span></p>
<p><strong><em>( वीरेंद्र सिंह रावत, लखनऊ में कार्यरत जर्नलिस्ट हैं। वह इकोनॉमी, बजट, एग्रीकल्चर और समसामयिक विषयों पर लिखते हैं।)</em></strong></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ योगी सरकार डेयरी क्षेत्र के जरिए बढ़ा रही ग्रामीण रोजगार के अवसर ]]></media:description>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[योगी  सरकार ने  चीनी मिलों को पचपन सौ करोड़ रुपये से अधिक की  वित्तीय सहायता दी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/yogi-governments-bailout-to-sugar-mills-topped-rs-5500-crore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 21 Aug 2021 14:24:01 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/yogi-governments-bailout-to-sugar-mills-topped-rs-5500-crore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>लखनऊ</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार ने चीनी उद्योग के बाजार में &nbsp;चीनी&nbsp; की कीमतों के उतार-चढ़ाव और गन्ना मूल्य भुगतान के बकाया को निपटाने &nbsp;के लिए पिछले तीन साल में राज्य के चीनी मिलों को को 5,500<span> करोड़ रुपये से अधिक का बेलआउट पैकेज दिया। इस फंड&nbsp; का एक बड़ा हिस्सा सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की मिलों को&nbsp; बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के निपटाने में मदद के लिए ऋण के रूप में वित्तीय सहायता के तहत प्रदान किया गया।</span></p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, <span>वित्तीय सहायता देने के लिए एक विशेष योजना के तहत </span><span>निजी क्षेत्र की 53 मिलों को </span>2,916<span> करोड़ रुपये का ऋण साधारण ब्याज पर दिया गया है । राज्य ने पेराई सत्र के दौरान मिलों को </span>4.50<span> रुपये प्रति क्विंटल की अतिरिक्त राहत भी प्रदान की</span>&nbsp;<span>जिसकी&nbsp; कुल &nbsp;राशि </span>484<span> करोड़ रुपये थी।</span></p>
<p style="text-align: justify;">सरकार ने पिछले तीन वर्षों में चीनी मिलों को दी गई वित्तीय सहायता के&nbsp; संबंध में पूछे गये में एक सवाल के जवाब &nbsp;में 18 अगस्त को विधान सभा को सूचित किया। &nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इसी तरह, <span>यूपी स्टेट शुगर कॉरपोरेशन लिमिटेड (</span>UPSSCL) को<span>&nbsp;किसानों के बकाया भुगतान के निपटाने के लिए </span>2018-19<span> में </span>23<span> करोड़ रुपये और </span>2019-20<span> और </span>25<span> करोड़ रुपये की ऋण सहायता दी गई थी।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा, <span>यूपी सहकारी चीनी कारखाना संघ की मिलों को गन्ना किसनों को भुगतान करने के लिए </span>2018-19<span> में </span>885<span> करोड़ रुपये </span>2019-20 में 700<span> करोड़ रुपये और </span>2020-21<span> में </span>500<span> करोड़ रुपये की क्रेडिट विंडो प्रदान की गई थी। यूपी में </span>120<span> चीनी मिलों में से 94 </span><span>निजी क्षेत्र में हैं </span><span>और सहकारी क्षेत्र में &nbsp;</span>24<span> इकाइयां हैं</span>, <span>जबकि यूपीएसएससीएल राज्य में दो मिलों का संचालन करती है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इस बीच, <span>योगी आदित्यनाथ सरकार ने महत्वपूर्ण चुनावी वर्ष में अतिरिक्त खर्च को पूरा करने के लिए चालू वित्त वर्ष </span>2021-22<span> के लिए राज्य विधानमंडल &nbsp;में </span>7,300<span> करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट पेश किया है। </span></p>
<p style="text-align: justify;">राज्य के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा मुख्यमंत्री की उपस्थिति में पेश किया गया यह अनुपूरक बजट 22<span> फरवरी</span>, 2021<span> को पेश किए गए&nbsp; साढ़े पांच लाख </span><span>रुपये के वार्षिक बजट </span>2021-22 <span>&nbsp;का लगभग </span>1.33<span> प्रतिशत हिस्सा है ।</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ योगी  सरकार ने  चीनी मिलों को पचपन सौ करोड़ रुपये से अधिक की  वित्तीय सहायता दी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में  धान का क्षेत्रफल 60 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/Paddy-area-in-UP-increases-to-6-million-hectares.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 11 Aug 2021 20:39:17 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/Paddy-area-in-UP-increases-to-6-million-hectares.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;"><strong><em>लखनऊ</em>&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश में इस साल कोरोना महामारी की दूसरी लहर के संकट के <span>बावजूद </span><span>लगातार</span>&nbsp; <span>दूसरे साल धान के उत्पादन में एक नया रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर है ।</span><span>&nbsp;इस साल</span>&nbsp; <span>राज्य में धान की खेती का रकबा पिछले साल 58.9 लाख हेक्टयर &nbsp;की तुलना में इस साल 60 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर पहुच गया है। इस साल खरीफ सीजन में अनुकूल मौसम</span>, <span>बेहतर बारिश के कारण पिछले साल की तुलना में 10 लाख टन अधिक धान का उत्पादन होने की संभावना है। पिछले साल &nbsp;250.7 लाख टन धान का उत्पादन हुआ था।</span></p>
<p style="text-align: justify;">कृषि विभाग ने इस खरीफ सीजन में 96.03 लाख हेक्टेयर खेती क्षेत्रफल में से 60 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर धान की खेती करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसमे से 4 अगस्त तक 57.72 लाख हेक्टयर क्षेत्रफल पर &nbsp;धान की बुवाई पूरी की जा चुकी है। शेष बची हुई क्षेत्रफल पर 15 अगस्त तक धान की बुवाई पूरी होने की संभावना है।</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;धान की बुवाई के क्षेत्रफल के आधार पर आंकलन किया जा रहा है कि इस साल धान के उत्पादन में एक नया रिकार्ड कायम होगा। राज्य के 18 डिवीजनों&nbsp; में से सर्वाधिक बुवाई बरेली डिवीजन में हुई है औऱ यहां पर &nbsp;धान का उत्पादन सबसे अधिक होने की संभावना है। इस सीजन मे राज्य में अनुकूल मौसम के कारण मोटे अनाज जैसे बाजरा और मक्का के उत्पादन में भी एक नया रिकॉर्ड बनने की संभावना है । इस तरह उत्तर प्रदेश अपना&nbsp; देश की फूड बास्केट में &nbsp;अपना अंशदान औऱ बढ़ा सकेगा।</p>
<p style="text-align: justify;">एक सरकारी अधिकारी &nbsp;ने दावा किया है कि इस लक्ष्य को पाने के लिए &nbsp;बुवाई के समय से खाद और बीजों का वितरण सुनिश्चित किया गया। किसानो को &nbsp;फसल के लिए आगे भी &nbsp;यूरिया, <span>डीएपी</span>, <span>एनपीके</span>, <span>जिंक और पोटाश जैसे उर्वरकों की कोई कमी न हो, यह सुनिश्चित किया गया है। </span></p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि रबी फसलों के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है । इसके लिए सरकार की तरफ से किसानों को कृषि उपकरण और उन्नत बीज उपलब्ध कराए गए ।&nbsp; वहीं कोराना काल में गेहूं की समय से कटाई हो इसके लिए मशीनों की आवाजाही हमेशा की तरह जारी रहे। और अब सरकार धान, <span>बाजरा</span>, <span>मक्का</span>, <span>मूंगफली सोयाबीन</span>, <span>तिल</span>, <span>तूर सहित अन्य खरीफ फसलों के रिकॉर्ड उत्पादन में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। इसी बीच उत्पादन में अनुमानित वृद्धि को देखते हुए</span>&nbsp;<span>उत्तर प्रदेश सरकार खाद्यान्न भंडारण क्षमता को बढ़ाने पर काम कर रही है । 2017 में</span>, <span>राज्य में भंडारण क्षमता 29 लाख टन थी</span>,<span>इसे बढ़ाकर 51 लाख टन कर दिया गया है। अब</span>, <span>राज्य 2022 तक 70 लाख टन तक भंडारण क्षमता का लक्ष्य रख रहा है।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/08/image_750x500_6113e7f93a970.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में  धान का क्षेत्रफल 60 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश में दो लाख  टन मूंग की एमएसपी पर खरीद की तैयारी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/Government-to-procure-two-lakh-metric-tons-of-moong-at-MSP.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 03 Aug 2021 16:12:43 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/Government-to-procure-two-lakh-metric-tons-of-moong-at-MSP.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;">मध्य प्रदेश इस बार 12.16 लाख <span>टन मूंग की बंपर पैदावार हुई है। लेकिन मध्य प्रदेश सरकार को केंद्र से एक लाख 34 हजार टन ग्रीष्म कालीन मूंग की ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने की अनुमति मिली थी। मूंग का न्यूतनम समर्थन मूल्य 7196 रुपये प्रति क्विंटल है। लेकिन राज्य बहुत से किसान मार्केटिंग सीजन की तय अवधि में सरकारी खरीद में मूंग नही बेच पाए थे । &nbsp;</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>ग्रीष्म कालीन मूंग की पैदावार को &nbsp;देखते हुए &nbsp;मध्य प्रदेश ने केंद्र सरकार से दोबारा मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की अनुमति मांगी है। मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा है कि ग्रीष्म कालीन मूंग किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी । उन्होंने बताया कि हमारी सरकार ने दो लाख टन से अधिक मूंग को &nbsp;समर्थन मूल्य पर खरीदने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति&nbsp; मांगी है। </span></p>
<p style="text-align: justify;">मूंग के समर्थन मूल्य पर खरीदारी के लिए मध्य प्रदेश सरकार के कृषि उत्पादन आयुक्त के. के. सिंह विशेष अनुमति प्राप्त करने के लिए दिल्ली में है। प्रदेश के कृषि मंत्री ने कहा है कि राज्य को पहले एक लाख 34 हजार टन ग्रीष्म कालीन मूंग को एमएसपी पर खरीदने की अनुमति&nbsp; मिली थी लेकिन राजस्व विभाग के सर्वे में &nbsp;इस बार राज्य में 6 लाख 82 हजार हेक्टेयर में मूंग की खेती हुई थी &nbsp;किसानों ने 12 लाख 16 <span>हजार टन मूंग का उत्पादन&nbsp; किया है। </span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>कृषि मंत्री पटेल&nbsp; ने बताया कि दो लाख टन मूंग की खरीदारी के लिए&nbsp; उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी से बात की है। कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को चिंता करने की जरूरत नही है मूंग की न्यूनतम समर्मूथन मूल्य पर&nbsp; खरीदारी के लिए जो भी जरूरी कदम हैं उठाए जाएंगे।</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/08/image_750x500_61096ada74ddb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश में दो लाख  टन मूंग की एमएसपी पर खरीद की तैयारी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[गन्ना भुगतान बकाया वाली चीनी मिलों पर उत्तर प्रदेश सरकार की गाज]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/UP-slaps-recovery-notices-on-private-sugar-mills.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 30 Jul 2021 15:43:54 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/UP-slaps-recovery-notices-on-private-sugar-mills.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="text-align: justify;"><em><strong>लखनऊ,30 जुलाई 2021</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की पांच चीनी मिलों के खिलाफ गन्ना किसानों के बकाया को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए उनके खिलाफ "वसूली प्रमाण पत्र" रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी)&nbsp; जारी किये हैं। यह चीनी मिलें बजाज हिंदुस्थान समूह, मोदी समूह, और सिंभावली जैसे बड़े चीनी उद्योग समूहों द्वारा संचालित होती हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">चालू पेराई सीजन&nbsp; (2020-21) में गन्ना पेराई समाप्त हो चुकी है। राज्य में ज्यादातर चीनी मिले निजी क्षेत्र की हैं। निजी क्षेत्र की चीनी मिलों की संख्या 94 है। इन पर अभी भी लगभग 7,500 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य&nbsp; भुगतान बकाया है।</p>
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश&nbsp; के गन्ना विकास और चीनी आयुक्त संजय भूसरेड्डी &nbsp;द्वारा जारी आरसी के आदेश में कहा गया हैं कि,इन मिलों से संबन्धित जिला प्रशासन गन्ना मूल्य भुगतान को "भू-राजस्व" यानी&nbsp; "लैंड रेवेन्यू" के रूप में वसूल कर सकता है।&nbsp; जिसका इस्तेमाल किसानों के गन्ना मूल्य बकाया को चुकाने में किया जाएगा । जो चीनी मिल बार-बार चेतावनी देने के बाद भी किसानों का भुगतान चुकाने में असफल रहीं हैं, उन सभी पर कार्रवाई की गई है। साथ ही कहा गया है कि गन्ना मूल्य भुगतान की नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है। जिन पांच चीनी मिलों के लिए आरसी जारी किए गए हैं&nbsp; उनके भुगतान के प्रति ढीले रवैये को देखते हुए कार्यवाही की गई है। निर्देशों का पालन नहीं करने वाली अन्य मिलों&nbsp; के खिलाफ भी&nbsp; सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align: justify;">चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के मुद्दे पर <strong>रूरल वॉयस</strong> पर लगातार कवरेज होती रही है। इस विषय पर <strong>रूरल वॉयस</strong> द्वारा 27 जुलाई, 2021 को की गई खबर को आप इस लिंक को क्लिक कर पढ़ सकते हैं https://www.ruralvoice.in/states/UP-Sugar-Mills-have-about--Rupees-eight-thousand-crores-sugarcane-arrears.html</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;पिछले कुछ वक़्त से किसानों मद्देनजर रखकर किसान आंदोलन, गन्ना बकाया की समस्या और खाद्यान्न की खरीद के मुद्दों को &nbsp;देखते हुए यूपी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है कि 2022 के राज्य विधानसभा चुनावों में यह उनके लिए किसानों की नाराजगी राजनीतिक रूप से घातक साबित न हो।</p>
<p style="text-align: justify;">भूसरेड्डी ने आगे बताया हैं कि किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और भुगतान की स्थिति की प्रतिदिन&nbsp; समीक्षा मुख्यालय स्तर पर और जिला स्तर पर की जा रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि गन्ना मूल्य भुगतान जल्द से जल्द सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य की 22 चीनी मिलों ने पेराई सत्र 2020-21 के लिए 100 प्रतिशत गन्ना भुगतान कर &nbsp;दिया है जबकि 40 चीनी मिलों ने 80 प्रतिशत से अधिक भुगतान किया है जिनमें से 27 मिलों ने 90 प्रतिशत तक भुगतान करने का बंदोबस्त कर लिया है।</p>
<p style="text-align: justify;">भारत के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश ने चालू पेराई सीजन (अक्तूबर,2020 से सितंबर,2021) में लगभग 110 लाख&nbsp; टन चीनी का उत्पादन दर्ज किया है&nbsp; जो देश के कुल चीनी उत्पादन के 310 लाख&nbsp; टन का लगभग एक तिहाई है । जबकि 2021-22 सीज़न में, जून 2021 में इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) द्वारा किये गए सैटेलाइट सर्वे के प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार राज्य में 23 लाख हेक्टेयर में गन्ना की फसल लगाई गई है।&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;बहरहाल यह कहा जा सकता हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चीनी मिलों के प्रति कड़ा रुख और किसानों के प्रति उसकी यह सहानुभूति 2022 विधानसभा चुनाव की तैयारी का आगाज़ हैं।</p>
<p style="text-align: justify;"></p>
<p style="text-align: justify;"><em><strong>( वीरेंद्र सिंह रावत, लखनऊ में कार्यरत जर्नलिस्ट हैं। वह इकोनॉमी, बजट, एग्रीकल्चर और समसामयिक विषयों पर लिखते हैं।)</strong></em></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ गन्ना भुगतान बकाया वाली चीनी मिलों पर उत्तर प्रदेश सरकार की गाज ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण लघु उद्यमों के विकास के लिए करेगी 1000 करोड़  का निवेश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-government-to-invest-1000-cores-for-the-development-of-rural-small-enterprises.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 28 Jul 2021 14:03:51 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-government-to-invest-1000-cores-for-the-development-of-rural-small-enterprises.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div style="display: none;"></div>
<p style="text-align: justify;"><strong>&nbsp;<em>लखनऊ, 27 जुलाई, 2021</em></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><span>नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों के आंदोलन हंगामों के बीच</span>&nbsp;<span>उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण उद्यमों से सीधे उत्पादों की खरीद के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक हजार</span><span>&nbsp;करोड़ रुपये का निवेश करने का फैसला किया है। </span>सरकार के इस वित्तीय पैकेज से राज्य के 75 जिलों&nbsp; के दूर दराज वाले इलाको में व्यापार और स्वरोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस ब्ल्यूप्रिंट के तहत&nbsp; उत्तर प्रदेश सरकार 58,<span>189 ग्राम पंचायतों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर 1</span>,<span>000 करोड़ रुपये से अधिक के सामान और सामग्री की खरीद करेगी। खरीद के दौरान वित्तीय नियमों का अनुपालन निर्वाचित पंचायत निकायों द्वारा सुनिश्चित किया जायेगा।</span>राज्य के &nbsp;पंचायती राज विभाग ने पंचायतों से अपने -अपने &nbsp;ग्राम सचिवालय से यह कार्य करने को कहा है । इसके लिए अपने &nbsp;ग्राम सचिवालय कर्यालय अब &nbsp;फर्नीचर, <span>कंप्यूटर</span>, <span>इंटरनेट</span>, <span>सौर ऊर्जा सामग्री इत्यादि &nbsp;से लैस होंगे। </span></p>
<p style="text-align: justify;">इस बीच, <span>राज्य सरकार &nbsp;ने स्पष्ट किया है कि ग्राम सचिवालयों के लिए फर्नीचर और उपकरणों की खरीद स्थानीय स्तर पर पंचायतों द्वारा की जाएगी । &nbsp;इस प्रकार ब्लॉक या जिला स्तर पर किसी भी प्रकार से हस्तक्षेप नही होगा । यह सुनिश्चित किया गया है कि इससे अर्जित आय का इस्तेमाल केवल स्थानीय उद्यमों में निवेश किया जाएगा ।&nbsp; </span>सरकार ने प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए कुर्सियों, <span>मेजों</span>,<span>अलमारी</span>, <span>सोलर पैनल</span>, <span>कालीन</span>, <span>पंखे</span>, <span>कंप्यूटर</span>, <span>सीसीटीवी कैमरा आदि की खरीद के लिए एक लाख 75 हजार रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है ।</span></p>
<p style="text-align: justify;">एक सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को कहा, "<span>कुल मिलाकर</span>, <span>राज्य की सभी ग्राम पंचायतों पर राज्य को 1</span>,<span>000 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आएगा।"</span>जबकि 33,<span>577 गांवों में पहले से ही पंचायत ब्लॉकों का निर्माण किया जा रहा है और &nbsp;शेष 24</span>,<span>617 पंचायत भवन का भी निर्माण जल्द शुरू होगा । इनमें से 2</span>,<span>088 पंचायत भवनों का निर्माण राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) के तहत और 22</span>,<span>529 पंचायत भवनों का निर्माण वित्त आयोग और मनरेगा के तहत किया जा रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि निर्माणाधीन पंचायत भवनों &nbsp;के निर्माण अगले तीन महीनों में पूरा होने की संभावना है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
<p><strong><em>( </em></strong><strong><em>वीरेंद्र सिंह रावत</em></strong><strong><em>, </em></strong><strong><em>लखनऊ में कार्यरत जर्नलिस्ट हैं। वह इकोनॉमी</em></strong><strong><em>, </em></strong><strong><em>बजट</em></strong><strong><em>, </em></strong><strong><em>एग्रीकल्चर और समसामयिक विषयों पर लिखते हैं।)</em></strong></p>
<p>&nbsp;<strong></strong><strong><em></em></strong></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण लघु उद्यमों के विकास के लिए करेगी 1000 करोड़  का निवेश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का करीब आठ हजार करोड़ रुपये का बकाया]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/up-sugar-mills-have-about-rupees-eight-thousand-crores-sugarcane-arrears.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 27 Jul 2021 10:53:00 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/up-sugar-mills-have-about-rupees-eight-thousand-crores-sugarcane-arrears.html</guid>
        <description><![CDATA[ <div style="display: none;"></div>
<p>उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों पर इस साल दोहरी मार पड़ी है। एक ओर जहां राज्य में गन्ना उत्पादन में गिरावट के चलते किसानों को करीब तीन हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है वहीं चीनी मिलों पर अभी भी गन्ना किसानों का करीब आठ हजार करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। खास बात यह है कि चीनी मिलों को किसानों को गन्ना आपूर्ति के 14 के भीतर भुगतान करना होता है और उसके बाद ब्याज का प्रावधान है। लेकिन कानूनी प्रावधान के बावजूद किसान ब्याज के भुगतान का भी इंतजार ही कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के 26 जुलाई, 2021 तक के आंकड़ों के मुताबिक चालू पेराई सीजन (2020-21) में राज्य की चीनी मिलों ने कुल 10.275 करोड़ टन गन्ने की पेराई की है। इसके लिए गन्ना किसानों को अभी तक 25,056.03 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है जो कुल भुगतान का 75.87 फीसदी है। यानी अभी तक 24.13 फीसदी मूल्य का भुगतान नहीं हुआ है। पूरे साल के भुगतान का आकलन करने पर चालू सीजन में गन्ना मूल्य भुगतान&nbsp; 33,024.95 करोड़ रुपये बनता है। इस आकलन के आधार पर 26 जुलाई तक चीनी मिलों पर किसानों का 7,968.92 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है।</p>
<p>इसके अलावा चीनी मिलों द्वारा देरी से भुगतान करने पर ब्याज की जो देनदारी बनती है उसके बारे में सरकार ने कोई बात नहीं की है। वैसे पिछली सरकार के समय का ही करीब 2500 करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान बकाया है। वहीं मौजूदा योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ब्याज के आंकड़ों को लेकर लगभग चुप है। किसान संगठनों का दावा है कि ब्याज जोड़ने की स्थिति में किसानों का बकाया 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक बनता है।</p>
<p>अब सवाल है कि केंद्र सरकार द्वारा निर्यात प्रोत्साहन से लेकर एथनॉल उत्पादन करने, उत्पादन के लिए डिस्टीलरी स्थापित करने व एथनॉल की कीमतों में इजाफे जैसे प्रोत्साहनों के बावजूद गन्ना किसानों को समय से भुगतान नहीं हो रहा है। वहीं 14 दिन की अवधि के बाद भुगतान पर ब्याज के प्रावधान पर भी राज्य सरकार ने चुप्पी साधी हुई है।</p>
<p>हालांकि राज्य सरकार लगातार दावा कर रही है कि उसके कार्यकाल में गन्ना मूल्य का रिकार्ड भुगतान हुआ है। लेकिन यह बात बात भी सच है कि राज्य में गन्ना मूल्य भुगतान में देरी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा है। भाजपा ने सत्ता में आने के पहले 14 दिन में गन्ना मूल्य भुगतान का वादा कियाा था। लेकिन चालू पेराई सत्र के शुरू होने के कई माह बाद तक पिछले सीजन का भुगतान पूरा हुआ था। यह स्थिति सीजन दर सीजन जारी है। आगामी चुनावों में विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश जरूर करेगा। वहीं किसान संगठन भी भुगतान में देरी और पिछले तीन सीजन में गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में बढ़ोतरी नहीं करने को लगातार मुद्दा बना रहे हैं।&nbsp;</p>
<p>इस साल गन्ने की पेराई में कमी को भी किसानों के लिए एक नुकसान के रूप में देखा जा रहा है। शामली जिले के किसान जितेंद्र सिंह हुड्डा ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि इस साल कमजोर फसल के चलते पेराई घटी है और जिसका सीधा असर किसानों की कमाई पर पड़ा है। इसके पहले पेराई सीजन (2019-20) में राज्य की चीनी मिलों ने 35,898.85 करोड़ रुपये मूल्य के 11.18 करोड़ टन गन्ने की पेराई की थी। यह राज्य सरकार के आधिकारिक आंकड़े हैं। जो साबित करते हैं कि चालू सीजन में किसानों की कमाई करीब तीन हजार करोड़ रुपये घटी है।</p>
<p>इसके साथ ही एक कड़वी सचाई यह है कि गन्ने की उत्पादन लागत में भारी बढ़ोतरी के बावजूद राज्य सरकार ने चालू पेराई सीजन समेत तीन पेराई सीजन में गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी)&nbsp; में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। राज्य सरकार ने अपने पहले साल में पेराई सीजन 2017-18 में गन्ने का एसएपी दस रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया था। इसके बाद 218-19, 2019-20 और 2020-21 पेराई सत्र में इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं कर इसे फ्रीज रखा है। यही नहीं एसएपी की घोषणा में सबसे अधिक देरी का रिकॉर्ड भी मौजूदा सरकार के खाते में ही जाता है। वैसे तो तकनीकी रूप से पेराई सीजन अक्तूबर से सितंबर तक होता है लेकिन उत्तर प्रदेश में अधिकांश चीनी मिलें नवंबर से ही पेराई शुरू करती हैं। लेकिन सरकार ने गन्ने का एसएपी 14 फरवरी, 2021 को घोषित किया था यानी व्यवहारिक रूप से भी पेराई सीजन करीब मध्य तक पहुंच गया था क्योंकि राज्य की लगभग सभी चीनी मिलें मई तक पेराई समाप्त कर देती हैं। अपवाद स्वरूप ही कोई चीनी मिल इसके बाद चलती है।</p>
<p>गन्ना भुगतान के बकाया के मुद्दे पर&nbsp; <strong>रूरल वॉयस</strong> के साथ बात करते हुए भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि राज्य में भाजपा किसानों को गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान का वादा कर सत्ता में आई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ समेत राज्य में तीन रैलियों में यह वादा किया था। साथ ही भाजपा ने इस वादे को चुनाव घोषणा पत्र में भी शामिल किया था। लेकिन स्थिति जस की तस है जो चीनी मिल समूह गन्ना मूल्य भुगतान में में पहले देरी करते थे वह अभी भी देर से भुगतान कर रहे है बल्कि कई चीनी मिलें इस श्रेणी में और जुड़ गई हैं। इससे साबित होता है कि राज्य सरकार किसानों की बजाय चीनी मिलों के साथ है। टिकैत का कहना है कि&nbsp; इसके साथ ही उच्च न्यायालय&nbsp; के आदेश के बावजूद राज्य सरकार चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के भुगतान में देरी के बाद ब्याज देने के प्रावधान को भी लागू नहीं कर रही है। चीनी मिलों पर किसानों का करीब पांच हजार करोड़ रुपये का ब्याज बकाया है। यह स्थिति&nbsp; बताती कि भाजपा की उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की बजाय चीनी मिलों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर में एक बड़ी किसान पंचायत कर रही है। उसके बाद यह पंचायतें मंडल स्तर पर होंगी जो राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों का विरोध करने के लिए आयोजित होंगी।&nbsp;</p>
<p>अब नया सीजन शुरू होने में करीब दो माह का वक्त बचा है और चीनी मिलों पर करीब आठ हजार करोड़ रुपये का बकाया है। वह भी ऐसे समय में जब कोरोना महामारी में देश में आम आदमी की आर्थिक हालत काफी कमजोर हो गई है। उत्तर प्रदेश में बड़ी तादाद में गन्ना किसान सीमान्त और लघु किसान कि श्रेणी में आते हैं जिनकी जोत का आकार एक हेक्टेयर से भी कम है। देरी से भुगतान की स्थिति में इनकी आर्थिक मुश्किलों को समझा जा सकता है। &nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का करीब आठ हजार करोड़ रुपये का बकाया ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[जीआई टैग के सहारे कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देगा उत्तर प्रदेश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/GI-tag-to-spur-farm-MSME-exports-in-UP.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Fri, 23 Jul 2021 14:15:59 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/GI-tag-to-spur-farm-MSME-exports-in-UP.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p></p>
<p><em><strong>लखनऊ, 23 जुलाई, 2021</strong></em></p>
<p>भारत और पाकिस्तान के बीच 'बासमती' चावल की उत्पत्ति के दावे को लेकर विवाद जारी है, इसी तरह का विवाद पारंपरिक भारतीय मिठाई 'रसगुल्ला' या 'रोशोगुल्ला' को लेकर पश्चिम बंगाल और ओडिशा के बीच हुआ जो हमारी यादों में अभी भी ताजा है।</p>
<p>इन दोनों मामलों में इन प्रतिद्वंदियों ने इन प्रतिष्ठित ब्रांडो पर स्वामित्व हासिल करने के लिए इन उत्पादों से संबंधित अपने दावे &nbsp;को लेकर जोरदार तर्क दिए थे क्योंकि उनके इन पर स्वामित्व हासिल करने के पीछे इन उत्पादों से जुड़े गौरव के साथ साथ उनका मूल तत्व व्यवसायिक था जो ज्यादा आकर्षित कर रहा था ।</p>
<p>कोई भी उत्पाद हो उसकी एक विशिष्ट भौगोलिक&nbsp; वंशावली होती है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिसे जियोग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री( GI) द्वारा प्रमाणित किया जाता है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश ने साल 2018 में उद्योगों, हस्तशिल्प औऱ कृषि क्षेत्र में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक जिला एक उत्पाद &nbsp;(ओडीओपी)&nbsp; योजना&nbsp; कीशुरुआत की थी। अब विभिन्न वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक जीआई बोर्ड बनाने का निर्णय लिया गया है। प्रस्तावित बोर्ड राज्य के स्थानीय उत्पाद जो अधिकतर एमएसएमई सेक्टर से जुड़े हैं ,उनकी मार्केटिंग और ब्रांडिंग के लिए&nbsp; &nbsp;रणनीति तैयार करेगा।</p>
<p>भारत में जीआई का रजिस्ट्रेशन चेन्नई स्थित जियोग्राफिकल इंडिकेशन&nbsp; रजिस्ट्री द्वारा विशिष्ट एऱिया के पाराम्परिक औद्योगिक हस्तशिल्प या प्राकृतिक उत्पाद जैसे&nbsp; लखनऊ चिकन जरदोजी, दशहरी आम,बनारसी साड़ी के अधिकारों के दावों की जांच एक लंबी प्रक्रिया के बाद दिया जाता है । जीआई पंजीकरण भौगोलिक उत्पत्ति और विकास वाले उत्पादों प्रामाणिकता का &nbsp;एक यूनीक प्रतीक चिन्ह है। जो &nbsp;मार्केटिंग में शीघ्र ही ब्रांड को रिकॉल में मदद करता है। यह उत्पाद ज्योग्राफिकल इंडिकेशंस ऑफ द गुड्स (रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन) एक्ट, 1999 के तहत आते हैं।&nbsp;</p>
<p>उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जीआई बोर्ड विश्व स्तर पर उत्पादों को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार करेगा। यह पारंपरिक उत्पादों के प्रचार, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात में लगे वैधानिक राष्ट्रीय निकायों के साथ समन्वय स्थापित करेगा। इसके अलावा, जीआई बोर्ड पंजीकरण के लिए संभावित उत्पादों की पहचान करेगा और स्थानीय उद्यमियों को संगठित करेगा।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आर.के.तिवारी ने अधिकारियों से जीआई बोर्ड के शीघ्र गठन का खाका तैयार करने को कहा है ताकि राज्य के सभी 75 जिलों के लोगों को लाभ मिल सके। साथ ही राज्य सरकार ने केंद्र से तेजी से एयर कार्गो &nbsp;की आवाजाही के लिए वाराणसी में कस्टम क्लीयरेंस सुविधा प्रदान करने का भी आग्रह किया है।&nbsp;अहम बात यह है कि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने भदोही स्थित इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) को फिर से खोलने को लेकर एक अध्ययन करा&nbsp; रही है जिसकी क्षमता हर महीने 6,000 कंटेनर भेजने की हो।</p>
<p><em><strong>( वीरेंद्र सिंह रावत, लखनऊ में कार्यरत जर्नलिस्ट हैं। वह इकोनॉमी, बजट, एग्रीकल्चर और समसामयिक विषयों पर लिखते हैं।)</strong></em></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ जीआई टैग के सहारे कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देगा उत्तर प्रदेश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>jpagrimedia73@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[बसपा सांसद दानिश अली ने प्रधानमंत्री से की यूपी के  गन्ना किसानों के बकाया भुगतान में  तेजी की गुजारिश]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/BSP-MP-writes-to-PM-for-clearing-UP-sugarcane-farmers-arrears.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Thu, 27 May 2021 11:29:13 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/BSP-MP-writes-to-PM-for-clearing-UP-sugarcane-farmers-arrears.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के नेता और उत्तर प्रदेश की अमरोहा लोक सभा सीट से सांसद कुंवर दानिश अली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनका वह वादा याद दिलाया है जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को आपूर्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही थी। उत्तर प्रदेश के 2017 के विधान सभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री किसानों से यह वादा किया था। बसपा सांसद ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को समय से भुगतान मिलने की बात तो दूर उन्हें तीन गन्ना पेराई सीजन मेंं गन्ना के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में कोई बढ़ोतरी भी नहीं मिली जबकि गन्ना उत्पादन लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते राज्य के गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति बदतर हो रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 12 मई तक राज्य की चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का करीब 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बकाया था। किसानों की स्थिति और कोरोना महामारी को देखते हुए किसानों को यह भुगतान तुरंत होना चाहिए।</p>
<p>इस पत्र में उन्होंने कहा है कि&nbsp; प्रदेश लगातार दूसरे साल देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य रहा है जिस में इस राज्य के करीब 40 लाख से अधिक गन्ना किसान का योगदान है। साथ ही यह किसान राज्य की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि राज्य के औद्योगिक विकास में चीनी उद्योग एक मज़बूत स्तंभ है। पिछले साल देश से लगभग 60 लाख टन चीनी का निर्यात हुआ था और उसमें सबसे अधिक भागीदारी उत्तर प्रदेश की रही क्योंकि यहां पर चीनी का उत्पादन महाराष्ट्र से लगभग दो गुना था। चालू वर्ष में भी क़रीब 60 लाख टन चीनी के निर्यात का अनुमान है। उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के इतने बड़े आर्थिक योगदान के बाद भी विडंबना यह है कि वे स्वयं बड़े आर्थिक संकट से गुज़र रहे हैं। गन्ना उत्पादन की तेज़ी से बढ़ती लागत के बावजूद लगातार तीन पेराई सीज़न में गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में कोई भी बढ़ोतरी राज्य सरकार ने नहीं की है जबकि बिजली, खाद, पेस्टीसाइड, डीज़ल और मजदूरी इन सब लागतों में भारी बढ़ोतरी होने से गन्ना किसानो की कमाई में भारी कमी आई है।<br />राज्य सरकार के ही आंकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा है कि&nbsp; जिस गन्ने को साल भर की मेहनत और लागत से पैदा करता है और चीनी मिलों को समय से गन्ने की आपूर्ति करता है उस पर उसे समय पर भुगतान नहीं मिलता। उत्तर प्रदेश &nbsp;सरकार के तमाम दावों के विपरीत पिछले पेराई सत्र (2019-20) जो अप्रैल-मई 2020 में समाप्त हो गया था उसका भुगतान राज्य की चीनी मिलों से लाखों किसानों को जनवरी-फरवरी, 2021 तक हो पाया। चालू पेराई सीजन (2020 -21) जो लगभग समाप्त हो गया है उसका 12 मई, 2021 तक चीनी मिलों पर 11 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक का बक़ाया है।<br />राज्य सरकार के खुद के दस्तावेज़ों के अनुसार 12 मई तक राज्य की चीनी मिलों के लिए कुल गन्ना भुगतान 32,348.66 करोड़ रुपये था। गन्ने की आपूर्ति के 14 दिन बाद की वैधानिक बक़ाया की गणना में भी यह आंकड़ा 31,487.75 करोड़ रुपये था। इस में से 19,615.05 करोड़ रुपयका ही भुगतान उक्त चीनी मिलों ने 12 मई तक किया है। इस के बाद भी 11,872.70 करोड़ रुपये का बक़ाया चीनी मिलों पर है। राज्य सरकार के अनुसार 12 मई तक कुल बक़ाया का 62.29 प्रतिशत भुगतान ही हुआ है जबकि 37.71 प्रतिशत अभी बाक़ी है। जबकि महाराष्ट्र में पिछले साल चीनी मिलों का चीनी उत्पादन आधा था और चालू सीज़न में भी उत्तर प्रदेश से कम है लेकिन 30 अप्रैल तक वहां की चीनी मिलों ने 92.4 प्रतिशत भुगतान कर दिया है जो उत्तर प्रदेश के 12 मई तक के भुगतान से 1,000 करोड़ रुपये अधिक है।<br />इस से साफ़ ज़ाहिर होता है कि चीनी के निर्यात और घरेलू बाज़ार से होने वाली कमाई के बावजूद चीनी मिलें किसानों का भुगतान समय से नहीं कर रही हैं। केंद्र सरकार ने गन्ने से सीधे एथनॉल बनाने, डिस्टलिरी लगाने में ब्याज सब्सिडी देने जैसे फ़ायदे इस उद्योग को इसलिए देने का दावा किया था कि उससे किसानों को समय से भुगतान मिलेगा। चीनी मिलें बिजली उत्पादन से भी कमाई कर रही हैं। निर्यात के लिए पिछले साल और चालू साल में भी सब्सिडी दी गई है। इसकी घोषणा के समय भी कहा गया था कि इससे गन्ना किसानों का भुगतान होगा। लेकिन इसका कोई फ़ायदा किसानों को अभी तक नहीं हुआ है। ऐसा तभी हो सकता है जब आपकी केंद्र सरकार और राज्य में आपकी पार्टी की सरकार चीनी मिलों के ऊपर भुगतान के लिए दबाव नहीं बनाती और किसानों के हितों की परवाह नहीं करती है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के नाम एक रिकॉर्ड और भी है। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में मलकपुर स्थित मोदी समूह की चीनी मिल ऐसी है जिसने सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक चालू सीजन 12 &nbsp;मई 2021 तक के लिए गन्ना किसानों को शून्य भुगतान किया है। मलकपुर चीनी मिंल पर किसानों का 378.76 करोड़ रुपये बक़ाया है। भुगतान में देरी करने वाली ज़्यादातर चीनी मिलें पश्चिम उत्तर प्रदेश में है जो की सबसे महत्वपूर्ण गन्ना उत्पादक क्षेत्र है। यह क्षेत्र हरितक्रांति का वाहक रहा है जिस में अमरोहा, हापुड़, बिजनोर, मुरादाबाद, ग़ाज़ियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, मुज़फ्फरनगर, शामली, बागपत, बुलन्दशहर आदि ज़िले शामिल हैं।<br />मेरे लिए और तकलीफ का विषय यह है कि मेरे संसदीय क्षेत्र अमरोहा में स्थित शुगर मिलों का पेराई सत्र समाप्त हो चुका है, लेकिन अभी भी किसानों का 594.97 करोड़ रुपये से अधिक गन्ना मूल्य भुगतान मिलों पर बकाया है। कोरोना कर्फ्यू में किसानों को भुगतान नहीं मिलने से उन्हें गम्भीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। मेरे संसदीय क्षेत्र अमरोहा-गढ़मुक्तेश्वर की (3+1) चार शुगर मिलों पर 220+374.97 = 594.97 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। सिंभावली समूह की चीनी मिलों की बात करें तो उन्होंने 12 मई 2021 तक केवल 21.24 प्रतिशत भुगतान किया है ।मेरे क्षेत्र की सिम्भावली शुगर मिल पर अभी भी किसानों का 374.97 करोड़ रुपये का बकाया है।<br />चीनी मिलें डिस्टीलरी भी चलाती हैं और अल्कोहल व एथनॉल का उत्पादन कर भरपूर कमाई कर रही हैं। ऐसी मिलों की कुल कमाई को ध्यान में रखकर सरकार को उनके ऊपर गन्ना भुगतान में देरी की स्थिति में कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। महामारी के दौर में गन्ना भुगतान में देरी से छोटे किसान सबसे अधिक प्रभावित हैं क्योंकि इनमें बहुत से किसानों का गन्ने का सालाना भुगतान एक लाख रुपये से भी कम है। जब इन किसानों के गन्ने का भुगतान समय से नहीं होगा तो आप समझ सकते हैं उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति कैसी होगी।<br />प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में दानिश अली ने कहा है कि&nbsp; 2017 में उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनावों की तमाम जन सभाओं में किसानों से वादा किया था कि 14 दिन के अन्दर गन्ना किसानों को भुगतान किया जायेगा। इस वादे पर न तो आप और न ही आप की पार्टी की राज्य सरकार खरी उतर रही है। राज्य सरकार का चीनी मिलों के साथ नरम रवैया है उस में तब्दीली लाये बिना यह संभव नहीं है। ऐसी लचर व्यवस्था बरकरार रही तो, ये न तो देशहित में है और न ही किसानों के हित में है।&nbsp;<br />&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ बसपा सांसद दानिश अली ने प्रधानमंत्री से की यूपी के  गन्ना किसानों के बकाया भुगतान में  तेजी की गुजारिश ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों की गन्ना मूल्य भुगतान की अजब दास्तान, मलकपुर मिल का भुगतान शून्य लेकिन परसेंडी का 99.95 फीसदी]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/some-up-mills-made-above-90-per-cent-sugarcane-payment-malakpur-mill-made-no-payment.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 16 May 2021 09:35:29 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
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        <description><![CDATA[ <div style="display: none;"></div>
<p>उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें गन्ना किसानों के लिए किस तरह से हीरो और विलेन साबित हो रही हैं यह जानने के लिए मिलों द्वारा किसानों को चालू पेराई सीजन 2020-21 के लिए 12 मई, 2021 तक किये गये भुगतान का ब्यौरा देखने की जरूरत है जो चौंकाने वाली तसवीर पेश करता है।<strong> रुरल वॉयस </strong>&nbsp;की गन्ना मूल्य भुगतान पर स्टोरी सिरीज की तीसरी स्टोरी में इसका विश्लेषण किया गया है। राज्य की बागपत जिले में मलकपुर स्थित मोदी समूह की चीनी मिल ऐसी है जिसने सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक चालू सीजन के लिए गन्ना किसानों को शून्य भुगतान किया है। वहीं राज्य की बहराइच जिले के परसेंडी स्थित चीनी मिल ऐसी भी है जिसने गन्ना किसानों को 99.95 फीसदी भुगतान कर दिया है। असल में इन आंकड़ों के मुताबिक राज्य की कई निजी चीनी मिलें और चीनी मिल समूह ऐसे हैं जिन्होंने 90 फीसदी या उससे अधिक भुगतान कर दिया है। लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने 12 मई तक केवल डेढ़ फीसदी से 20 फीसदी तक का ही भुगतान किया है। वहीं उक्त तिथि तक राज्य के भुगतान का कुल औसत 62.29 फीसदी है। इन आंकड़ों से समझा जा सकता है कि राज्य के कुछ किसानों के लिए भुगतान की स्थिति बेहतर है तो कुछ के लिए आर्थिक संकट का कारण बन रहा है और 11,872.70 करोड़ रुपये के गन्ना मूल्य भुगतान के बकाये में राज्य की सभी चीनी मिलें एक जैसी स्थिति में नहीं हैं। भुगतान के बकाया में राज्य की चीनी निगम की मिलें और सहकारी चीनी मिलें भी कम भुगतान वाली श्रेणी का हिस्सा हैं।</p>
<p>पहले उन चीनी मिंलों और समूहों की बात करते हैं जो गन्ना मूल्य भुगतान में सबसे फिसड्डी हैं। राज्य में यदु समूह की दो चीनी मिलें हैं और उसने 12 मई तक सबसे कम केवल 1.5 फीसदी भुगतान ही किया है। इसके उपर किसानों का 114.41 करोड़ रुपये का भुगतान बनता है। उसने केवल 1.72 करोड़ रुपये का भुगतान 12 मई के आंकड़ों के मुताबिक किया था। उसके बाद इस पर 112.69 करोड़ रुपये का बकाया है। वहीं उमेश मोदी समूह की दो चीनी मिंलें हैं और इस ग्रुप ने केवल 1.75 फीसदी भुगतान ही किया है। इस समूह पर 617.06 करोड़ रुपये का बकाया है। मोदी की मलकपुर मिल ने चालू सीजन के लिए कोई भुगतान नहीं किया है और शून्य का रिकॉर्ड इसके खाते में ही है। मलकपुर चीनी मिंल पर किसानों का 378.76 करोड़ रुपये बकाया है। मोदी की दूसरी चीनी मिल मोदीनगर में है। इस चीनी मिल ने अभी तक 4.41 फीसदी भुगतान किया है। बड़े समूहों में राज्य में सबसे अधिक 14 चीनी मिलों वाले बजाज समूह ने अभी तक केवल 12.59 फीसदी भुगतान ही किया है। इसके उपर गन्ना किसानों का 4385.09 करोड़ रुपये का भुगतान बनता था जिसमें से केवल 549.96 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया है और इस समूह पर किसानों का 3835.12 करोड़ रुपये बकाया हैं। वहीं सिंभावली समूह की तीन चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 607.49 करोड़ रुपये का बकाया है और इसने केवल 21.24 फीसदी भुगतान ही 12 मई तक किया है।</p>
<p>अब बात उन चीनी मिलों और चीनी मिल समूहों की जो गन्ना किसानों के लिए बेहतर साबित हो रहे हैं। राज्य में सबसे अधिक भुगतान बहराइच के परसेंडी में स्थित आर एस नेवतिया की चीनी मिल ने किया है। इस चीनी मिल ने 12 मई तक किसानों को 99.95 फीसदी भुगतान कर दिया और उक्त तिथि तक इससे उपर किसानों का मात्र 10.47 लाख रुपये का बकाया था। यह दिलचस्प बात है इसी उत्तर प्रदेश में मलकपुर चीनी मिल है जो जिसने इस सीजन का गन्ना किसानों का कोई भुगतान नहीं किया है और दूसरी ओर बहराइच के परसेंडा स्थित मिल है जो लगभग पूरा भुगतान कर चुकी है।</p>
<p>बड़े चीनी मिल समूहों में भी कई बेहतर भुगतान स्थिति में हैं। दस चीनी मिल वाले बलरामपुर समूह ने 93.38 फीसदी भुगतान 12 मई तक कर दिया था। वहीं तीन चीनी मिल वाले डालमिया समूह ने 94.86 फीसदी भुगतान कर दिया है। डीएससीएल की चार चीनी मिलें हैं और 12 मई तक उसने 92.22 फीसदी भुगतान कर दिया था। तीन चीनी मिल वाले द्वारिकेश समूह ने 92.88 फीसदी और सात चीनी मिल वाले त्रिवेणी समूह ने 89.43&nbsp; फीसदी भुगतान कर दिया है। वहीं पांच चीनी मिल वाले धामपुर समूह ने 88.2 फीसदी भुगतान कर दिया है।</p>
<p>लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य के गन्ना विकास और चीनी उद्योग मंत्री सुरेश राणा के गृह जिले शामली की तीन चीनी मिलों ने मात्र 23.24 फीसदी भुगतान किया है। शामली स्थित सर शादीलाल चीनी मिल ने केवल 17 फीसदी भुगतान किया है। जिले की इन तीन चीनी मिलों पर 12 मई तक गन्ना किसानों का 843.55 करोड़ रुपये का बकाया था।</p>
<p>इसके साथ ही एक और तथ्य सामने आ रहा है कि राज्य सरकार के नियंत्रण वाली सहकारी और राज्य चीनी निगम की मिलों के मुकाबले निजी क्षेत्र का भुगतान औसत अधिक है। राज्य चीनी निगम की चीनी मिलों ने &nbsp;12 मई तक &nbsp;केवल 45.92 फीसदी ही भुगतान किया है जबकि राज्य सरकार के प्रबंधन में ही चलने वाली सहकारी चीनी मिलों का भुगतान भी केवल 37.71 फीसदी है। निजी चीनी मिलों का भुगतान 64.75 फीसदी है। इससे साफ होता है कि &nbsp;राज्य सरकार गन्ना किसानों के भुगतान को लेकर खुद भी गंभीर नहीं है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों की गन्ना मूल्य भुगतान की अजब दास्तान, मलकपुर मिल का भुगतान शून्य लेकिन परसेंडी का 99.95 फीसदी ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों का बकाया 12 हजार करोड़ पार, चीनी मिलों को रिकॉर्ड कमाई]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/Sugarcane-arrears-crossed-twelve-thousand-crore-in-UP-mill-are-making-good-profit.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sat, 15 May 2021 06:49:26 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/Sugarcane-arrears-crossed-twelve-thousand-crore-in-UP-mill-are-making-good-profit.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में सबसे अधिक चीनी उत्पादन करने वाले राज्य उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए हर नया सीजन मुश्किलें लेकर आता है। जिस तरह से बिजली की दरें बढ़ी, डीजल के दाम बढ़े और अब उर्वरकों के दाम बढ़े वह गन्ना किसानों के मुश्किल का सबब बन रहे हैं क्योंकि जहां तीन सीजन में गन्ना के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है वहीं किसानों की लागतें लगातार बढ़ी हैं। वहीं साल दर साल गन्ना का बकाया भुगतान में देरी होती जा रही है। इस समय चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें अगर ब्याज को जोड़ लें तो यह आंकड़ा करीब 15 हजार करोड़ रुपये हो जाता है। वहीं दूसरी ओर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कई चीनी मिलों का मुनाफा लगभग दो गुना हो गया है। इसके साथ ही स्टॉक मार्केट में सूचीबद्ध चीनी मिलों के शेयरों के दाम में पिछले कुछ माह के दौरान ही 75 फीसदी तक का उछाल आया है। यानी जहां चीनी मिल मिलों का मुनाफा बढ़ता जा रहा है वहीं शेयरों के दाम बढ़ने से भी उनके मालिक &nbsp;मालामाल हो रहे हैं।</p>
<p>अगर मौजूदा और पिछली दो सरकारों की बात करें तो गन्ना के एसएपी में सबसे कम बढ़ोतरी योगी सरकार के समय में हुई है। साल 2007 में मुख्यमंत्री मायावती की बहुजन समाज पार्टी की सरकार आई तो राज्य में गन्ने का एसएपी 125 रुपये प्रति क्विटंल था&nbsp; लेकिन उनके कार्यकाल में यह 240 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया यानी कुल 115 रुपये प्रति क्विटंल की बढ़ोतरी उनके कार्यकाल में हुई। मायावती सरकार के कार्यकाल में गन्ने के एसएपी में जब बढ़ोतरी हुई तो वह 12 फीसदी से 24 फीसदी तक रही। साल 2012 में सत्ता में आई मुख्य मंत्री अखिलेश यादव की सरकार ने गन्ने के एसएपी में कुल 65 रुपये की बढ़ोतरी दो बार में कर इसे 305 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंचाया लेकिन तीन साल एसएपी को स्थिर रखा। उनकी सरकार के कार्यकाल में दो बार की गन्ने के एसएपी की बढ़ोतरी 9 फीसदी और 17 फीसदी रही। लेकिन इन दोनों सरकारों के उलट भाजपा की मौजूदा सरकार ने 2017-18 के सीजन की अकेली 10 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की जो तीन फीसदी बैठती है। वहीं इसके बाद के तीन सीजन 2018-19, 2019-20 और चालू सीजन 2020-21 में &nbsp;एसएपी में कोई बढ़ोतरी नहीं की और उसे स्थिर रखा है। चालू पेराई सीजन का एसएपी घोषित करने के देरी का रिकॉर्ड भी मौजूदा सरकार ने ही बनाया और इसका फैसला 14 फरवरी, 2021 को लिया गया। जबकि गन्ना का पेराई सीजन अक्तूबर से सितंबर होता है।&nbsp;</p>
<p>इस सबके बीच दिलचस्प बात यह है कि राज्य सरकार रिकॉर्ड भुगतान का दावा करती है और इसके लिए पिछले चार सीजन के आंकड़े जोड़कर बताती है, जबकि ताजा आंकड़ों में चालू पेराई सीजन (2020-21) का कितना बकाया है इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा वह देने को तैयार नहीं है । उसी तरह की चुप्पी राज्य के निजी चीनी उद्योग के संगठन यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन ने भी साध रखी है।</p>
<p>हर चीनी मिल को गन्ने की आपूर्ति, उसकी पेराई और चीनी उत्पादन के साथ रिकवरी का स्तर जैसे तमाम आंकड़े सरकार के पास अपडेट होते रहते हैं। ऐसे में बकाया गन्ना भुगतान का आंकड़ा जारी नहीं करने की कोई वजह नहीं है। लेकिन इसके राजनीतिक मुद्दा बनने और उससे नुकसान की आशंका में आंकड़े जारी नहीं किये जा रहे हैं।</p>
<p>असल में दिलचस्प बात यह है कि 10 मई तक के गन्ना पेराई के आंकड़े 10.1 करोड़ टन के हैं। अगर 320 रुपये प्रति क्विंटल के औसत से भी देखें तो गन्ना मूल्य भुगतान करीब 32 150 करोड़ रुपये बैठता है। वहीं चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग की वेबसाइट पर 13 मई, 2021 तक का जो आंकड़ा जारी किया है उसके मुताबिक 19658.39 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। लेकिन 10 मई से 13 मई के बीच गन्ना का पेराई का आंकड़ा भी बढ़ा होगा। हालांकि 10 मई तक के पेराई के आंकड़ों के आधार पर भी बकाया करीब 12500 करोड़ रुपये बैठता है। वैसे चीनी मिलों पर बाकया&nbsp; आकलन गन्ना आपूर्ति के 14 दिन बाद होता है क्योंकि वैधानिक रूप से उन्हें इस अवधि में भुगतान करना होता है। इसके बाद की अवधि पर ब्याज देने का प्रावधान है। राज्य की अधिकांश चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं इसलिए 14 दिन के बाद के बकाया आंकड़ा उपर की गई गणना के आसपास ही होगा। इसके साथ ही इसमें अगर चीनी मिलों पर बकाया ब्याज को भी जोड़ देंगे तो बकाया का स्तर &nbsp;आंकड़ा करीब 15 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच जाएगा। विभाग की 13 मई, 2021 की सूचना के मुताबिक 2017-18, 2018-19, 2019-20 और चालू पेराई सीजन 2020-21 की मौजूदा अवधि तक राज्य के गन्ना किसानों को 1,34,898.85 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।</p>
<p>गन्ना मूल्लय बकाया और इससे जुड़े मुद्दों पर <strong>रुरल वॉयस</strong>&nbsp; के साथ एक बातचीत में उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास और चीनी उद्योग मंत्री सुरेश राणा ने बताया कि मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अपनी पूर्ववर्ती सरकार के समय का 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कराया था। वहीं हमारे कार्यकाल में किसी भी पिछले सीजन का बकाया नहीं है। हमने अपने चार साल के कार्यकाल में गन्ना किसानों को 1.34 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कराया है जो अभी तक का सबसे अधिक है। जहां तक चालू सीजन की बात है तो कोरोना महामारी के बावजूद अभी तक चालू पेराई सीजन का 62 फीसदी भुगतान किसानों को किया जा चुका है और हमारी कोशिश है कि बहुत जल्दी अधिकांश भुगतान करा दिया जाए। कोरोना के चलते चीनी मिलों से चीनी का उठाव बहुत कम हो गया है।</p>
<p>अपने गृह जिले शामली और विधान सभा क्षेत्र में चीनी मिलों पर रिकार्ड बकाया के बारे में पूछे गये सवाल पर सुरेश राणा ने कहा कि राज्य की अधिकांश चीनी मिलों ने 80 फीसदी या उससे ज्यादा भुगतान कर दिया है। लेकिन करीब आधा दर्जन चीनी मिल समूह ऐसे हैं जिनका भुगतान कम है। शामली जिले की तीनों चीनी मिलें इसमें शामिल हैं। मेरी विधान सभा थानाभवन में बजाज हिंदुस्थान समूह की चीनी मिल में सबसे अधिक गन्ना जाता है और बकाया वाली मिलों में यह समूह शामिल है। हम ऐसी चीनी मिलों पर सख्ती कर रहे हैं ताकि किसानों को भुगतान में तेजी लाई जा सके।</p>
<p>गन्ना भुगतान में देरी पर भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत ने <strong>रुरल वॉयस</strong> के साथ बातचीत में कहा कि सरकार को चीनी मिलों पर शुगरकेन एक्ट के तहत कार्रवाई करनी चाहिए। जब किसानों को पैसे की सबसे अधिक जरूरत है और गांव कोरोना संक्रमण से जूझ रहे हैं ऐसे समय में चीनी मिल मालिक किसान का पैसा ले कर बैठ गये हैं। ऐसे में सरकार को किसानों के हित को देखते हुए चीनी मिलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और किसी भी कीमत पर गन्ना किसानों का भुगतान कराना चाहिए। अगर में इसमें ढील होती तो यूनियन किसान के हक के लिए सरकार पर हर तरह से दबाव बनाने के लिए कदम उठाएगी। &nbsp;&nbsp;</p>
<p>इस मुद्दे पर <strong>रुरल वॉयस</strong> &nbsp;से बात करते हुए राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वी एम सिंह कहते हैं कि पहले तो यह बात समझ से बाहर है कि सरकार ताजा बकाया आंकड़े बताने की बजाय चार सीजन के भुगतान को जोड़कर बताती है। इसका कोई मतलब नहीं है। किसान इस आपदा के दौर में अपने गन्ना भुगतान का इंतजार कर रहा है और सरकार आंकड़ों को भी सार्वजनिक नहीं कर रही है। दूसरे इस महामारी में किसानों को एडवांस मिलना चाहिए लेकिन एडवांस की बात तो वह सोच ही नहीं सकता कम से कम उसे उसके गन्ना का बकाया भुगतान को तो समय पर करना चाहिए। महामारी के संकट में उसे पैसे की जरूरत है। वी एम सिंह कहते हैं कि सरकार खुद स्वीकार कर रही है कि अभी तक केवल 60 फीसदी ही भुगतान हुआ है और 40 फीसदी बकाया है जबकि सीजन समाप्त हो रहा है। वहीं चीनी मिलों का फायदा घरेलू बाजार और निर्यात दोनों से बढ़ता जा रहा है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों का बकाया 12 हजार करोड़ पार, चीनी मिलों को रिकॉर्ड कमाई ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[लाकडाउन में आम की ऑनलाइन मार्केटिंग से किसानों को मिल सकती है राहत]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/Lock-down-to-spur-online-marketing-of-Indian-mango-will-give-some-relief-to-farmers.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 12 May 2021 07:40:24 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/Lock-down-to-spur-online-marketing-of-Indian-mango-will-give-some-relief-to-farmers.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><em><strong>लखनऊ, 12 मई&nbsp;</strong></em></p>
<p>&nbsp;कोरोना महामारी और लॉकडाउन&nbsp; के दौर में जहां खरीदार थोक औऱ फुटकर बाजार में जाने से कतरा रहे है । इस परिस्थिति मे जब पेड़ो पर पक रहे आम की उपज को अगले महीने से आम उद्यमी किसान ऑन लाइन मार्केटिंग के जरिए बेचकर होने वाले घाटे को कम कर सकते हैं । &nbsp;पिछले साल 2020 में कोरोना महामारी के चलते आम उत्पादक&nbsp; किसानों को काफी घाटा उठाना पड़ा था.क्योकि इस बीमारी के प्रकोप के काऱण आम के पीक सीजन में देश लाकडाउन में था जिसके चलते आम का व्यापार काफी प्रभावित हुआ था । इस साल भी इस कोरोना की दूसरी लहर &nbsp;के बीच कई राज्यों में &nbsp;लगते लाकडाउन और कर्फ्यू&nbsp; के चलते राहत &nbsp;की कोई उम्मीद नही दिख रही है।</p>
<p>इस दौर में जहां खरीदार&nbsp; थोक औऱ फुटकर बाजार में जाने से बच रहे हैं, वहीं ,इस समय पेड़ों पर आम के फल पक रहे है । आम की उपज को अगले महीने से ग्राहक आनलाइन मार्केटिंग के जरिए मलीहाबाद के आम को खरीदकर रसीले आमों के स्वाद का आन्नद ले सकते है ।</p>
<p>मलीहाबाद &nbsp;लखनऊ जिले की एक ग्रामीण तहसील है, आम के लिए मलीहाबाद और कोकोरी काफी प्रचलित है। यहां की दशहरी आम की किस्म पूरी दुनिया में अपने स्वाद और गुणवत्ता के लिए अपनी एक खास पहचान बनाए हुए है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के लखनऊ के रहमान खेड़ा स्थित संस्थान सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (सीआईएसएच) ने इस &nbsp;महामारी के दौरान मोबाइल ऐप के माध्यम से आम उत्पादकों को आनलाइन मार्केटिंग करने की जानकारी मुहैया करा रहा है।</p>
<p>सीआईएसएच के निदेशक शैलेन्द्र राजन के अनुसार, मालिहाबादी आम की किस्में उत्तर भारतीय राज्यों में काफी लोकप्रिय हैं। उन्होंने बताया कि जब आम पकने लगेंगे तो लखनऊ वासियों को दशहरी आम के स्वाद का आनंद लेना तो आसान होगा, &nbsp;लेकिन उन्होंने अफसोस जताया कि लखनऊ से&nbsp; दूसरे शहरों में&nbsp; इन आम की किस्मों&nbsp; को पहुंचाना&nbsp; मुश्किल होगा।&nbsp; क्योंकि सामान्य दशा में लखनऊ से &nbsp;आम पेटियों में पैक &nbsp;किए जाते हैं और पार्सल और गाड़ियों से उनके गंतव्य स्थान तक भेजे जाते हैं। लेकिन इस समय शहरों में कोरोना महामारी के चलते, अनिश्चित ट्रेन संचालन और आवागमन प्रतिबंधित होने के &nbsp;कारण आम को पुराने तरीके से भेजना अब मुश्किल होगा ।</p>
<p>शैलेन्द्र राजन&nbsp; ने अपने संस्थान सीआईएसच द्वारा उठाये जा रहे कदमों के बारे में बताया कि लखनऊ के आम की मार्केटिंग के लिए पहली बार मोबाइल ऐप विकसित की गई है । उन्होंने &nbsp;बताया कि इस काम के लिए हमारे संस्थान के एग्रीबिजनेस इनक्यूबेसन सेंटर ने पहल की है । इस ऐप के जरिए आम के ग्राहको से आम उद्यमियों को अच्छी प्रतिकिया मिली । इसके जरिए आम के उद्यमियों को&nbsp; किसान के आम के बाग से लेकर आम के ग्राहक तक की सप्लाई चेन के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला। फलों का चयन, इसकी ग्रेडिंग, पैकेजिंग और वितरण इसमें शामिल है। इसके अलावा आम के सीजन में ग्राहकों की बड़ी संख्या को संभालने के लिए किस तरह का प्रबंधन होना चाहिए । इन सब कार्यों के लिए विशेष अनुभव की आवश्यकता होती है ।</p>
<p>शैलेन्द्र राजन ने बताया कि पिछले साल आम की ऑनलाइन मार्केटिंग लगभग दो महीने तक ही संभव थी। आम के ग्राहक आसानी से आनलाइन आर्डर तो दे देते थे लेकिन पिछले साल दूसरे शहरों तक आम का &nbsp;परिवहन औऱ ग्राहकों तक वितऱण करना एक मुश्किल कार्य था । लॉकडाउन और शहर के अंदर कोरोना प्रतिबंधों के कारण आम ग्राहकों तक वितरित नही हो पाते थे। दूसरी तरफ आम जल्दी खराब होने वाला उत्पाद है &nbsp;जिसके काऱण ज्यादा परेशानी होती थी।</p>
<p>वर्तमान में कोराना महामारी की दूसरी लहर में लोगों की आवाजाही फिर से सीमित हो गई है और हर कोई अपने दरवाजे पर आम को मंगवाना चाहता है। लोगों ने फिर उन उद्यमियों से &nbsp;संपर्क करना शुरू कर दिया है जो &nbsp;पिछले साल ऑनलाइन आम मार्केटिग में शामिल थे।</p>
<p>शैलेन्द्र &nbsp;राजन ने पिछले साल का अनुभव साझा करते हुए बताया कि आम उद्यमियों को केवल आम के लिए ऑनलाइन मार्केटिंग के साथ इस व्यवसाय मॉडल को स्थाई बनाए रखना एक बड़ी समस्या है। यह आनलाइन मार्केटिंग केवल ताजे आम की बिक्री तक&nbsp; ही सीमित है । एक बार आम का मौसम समाप्त हो जाने के बाद बनाया गया पिछले साल वाला नेटवर्क और सुविधाएं निष्क्रिय हो गई। इसलिए संस्थान ने आनलाइन मार्केटिंग साल भर सुचारू रूप से संचालित हो सके उसके लिए उद्यमियों को इसमे अन्य वस्तुओं को शामिल करने के लिए प्रेरित किया । इसमें आम आधारित और अन्य फलों के मूल्यवर्धित उत्पादों को शामिल &nbsp;किया जा सके जिसकी मांग की अच्छी संभावना है। हालांकि उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आम के उत्पादन के कारण आनलाइन के उद्यमियों द्वारा आम की मार्केटिंग बडी मात्रा में नहीं की जा सकती है। लेकिन इसके द्वारा छोटे किसानों को बड़ी संख्या में इस कड़ी के साथ जोड़ा जा सकता है। ऑनलाइन मार्केटिंग के जरिए आसानी से ग्राहक के दरवाजे तक कार्बाइड मुक्त आम की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है। आम की स्थाई ऑनलाइन मार्केटिंग के लिए मौसम के अनुसार आम की गुणवत्ता बनाए ऱखना जरूरी है ।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में आम का उत्पादन सालाना लगभग 40 लाख टन अनुमानित है लेकिन यह उत्पादन आम में आने वाले बौऱ के समय रहने वाले मौसम और जलवायु &nbsp;पर निर्भर करता है जिसके कारण &nbsp;एक वर्ष से दूसरे वर्ष आम के उत्पादन में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। चूंकि भारत दुनिया में सबसे बड़ा आम उत्पादक है, दुनिया में होने वाले आम उत्पादन में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत की है । इसके बाद चीन, थाईलैंड और पाकिस्तान आते हैं, फिर भी फलों का एक बड़ा हिस्सा घरेलू बाजार में ही खपत होता है केवल थोड़ी मात्रा में &nbsp;ही निर्यात किया जाता है।</p>
<p><em><strong>(वीरेंद्र सिंह रावत लखनऊ के &nbsp;पत्रकार हैं, जो उद्योग, अर्थव्यवस्था, कृषि, बुनियादी ढांचे, बजट इत्यादि &nbsp;&nbsp;समकालीन मुद्दों पर लिखते हैं)</strong></em></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ लाकडाउन में आम की ऑनलाइन मार्केटिंग से किसानों को मिल सकती है राहत ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कोरोना चुनौती के बीच गेहूं खरीद का एक महीना]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/Wheat-procurement-Haryana-amid-Covid-pandemic.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 02 May 2021 16:00:42 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/Wheat-procurement-Haryana-amid-Covid-pandemic.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>चंडीगढ़ से अनुराधा</strong></p>
<p>हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जयप्रकाश दलाल ने कहा, &ldquo;कोरोना की प्रचंड दूसरी लहर से लड़ते हुए हरियाणा सरकार के समक्ष मंडियों में गेहूं की की खरीद भी एक चुनौती से कम नहीं हैं। कोरोना के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए हमारे किसान भाइयों और आढ़तियों के सहयोग से इस बार हरियाणा रिकॉर्ड गेहूं खरीद की ओर बढ़ रहा है&rdquo;। उन्होंने बताया कि इस रबी सीजन में 80 लाख टन गेहूं खरीद अपेक्षित थी पर 30 अप्रैल तक मंडियों में 83 लाख टन गेहूं की आवक में से 80 लाख टन की खरीद में किसानों के बैंक खातों में 9,300 करोड़ रुपए का भुगतान हो चुका है। उम्मीद है कि इस बार 15 मई तक जोरो पर होने वाली खरीद 90 लाख टन के पार जा सकती है। इससे पहले हरियाणा में 2019 में गेहूं की 87 लाख टन की रिकॉर्ड खरीद हुई थी और 2020 में कोरोना की पहली लहर के दौरान 74 लाख टन गेहूं सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा की गई।&nbsp;</p>
<p>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि सुशासन और इसके कार्यान्वयन में हमेशा अव्वल रहे हरियाणा ने किसान कल्याण की दिशा में भी एक कदम आगे बढ़ते हुए कई बड़ी पहल की हैं। किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हमारे मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी के मागदर्शन में गेहूं की इस तेज गति से खरीद और 72 घंटों के भीतर सीधे किसान के बैंक खाते में भुगतान संभव हुआ है। कोरोना की चुनौती से पार पाने के प्रयासों के बीच जहां सरकार की पहले से ही&nbsp; किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान की ऑनलाइन तैयारी थी वहीं आई फॉर्म जारी होने के 72 घंटे के भीतर जिन किसानों को किसी वजह से भुगतान में देरी हुई उन्हें उस देरी के बदले ब्याज (9 प्रतिशत वार्षिक) देने की पहल करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य है। करीब 18,000 किसान ऐसे हैं जिन्हें भुगतान में एक दिन की देरी पर भी 20 लाख रुपए से अधिक ब्याज का भुगतान किया गया। मुख्यमंत्री का जोर हर कल्याणकारी नीति को लक्षित लाभकारी वर्ग के आखिरी आदमी तक पहुंचाने पर है। उनकी अगुवाई में राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी नागरिकों के परिवार पहचान पत्र जारी करने का बीड़ा उठाया है। इसी के तहत किसानों और उनकी खेती-फसलों का ब्यौरा डिजिटल किया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि &ldquo;मेरी फसल मेरा ब्यौरा&rdquo; पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को न केवल उनकी फसलों का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जा सकेगा बल्कि फसल बीमा योजना जैसी तमाम किसान कल्याणकारी योजनाओं का पारदर्शी ढंग से लाभ असल किसानों को मिल रहा है।&nbsp; किसानों की आय दोगुनी करने के हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के लक्ष्य की पूर्ति के लिए किसानों को फसलों के भुगतान और अन्य स्कीमों का लाभ सीधे उनके बैंक खातों करने की हरियाणा की पहल इस दिशा में बढ़ता एक कदम है।</p>
<p>दलाल के मुताबिक हरियाणा के किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) राज्य सरकार द्वारा कृषि भूमि के रिकॉर्ड का सफलतापूर्वक डिजीटाइजेशन और इसे व्यक्तिगत तौर पर किसान के बैंक खाते से जोड़ने से संभव हुआ है। इससे सरकार को बोई जाने वाली फसलों और उनकी उत्पादकता का हर वर्ष पता लगाने में आसानी होगी। &lsquo;मेरी फसल मेरा ब्यौरा&rsquo; पोर्टल की मदद से मंडियों में फसल बेचने वाले किसानों की तमाम जानकारी इस आसान प्रक्रिया से स्वत: ही सरकार को मिल रही है।</p>
<p>कृषि मंत्री ने कहा, टैक्नालॉजी आधारित सुशासन की मदद से न केवल किसानों को अपनी फसलें बेचने के लिए मंडियों में पहले की तरह हफ्तो इंतजार करना पड़ रहा है बल्कि उनकी भुगतान की प्रक्रिया में भी क्रांतिकारी बदलाव आया है। आढ़ती से हफ्तों बाद भुगतान की प्रक्रिया चंद घंटों में हो गई है। आढ़ती भी खरीद प्रक्रिया का अहम हिस्सा हैं, उनके बगैर इसे पूरा करना मुश्किल है पर डिजीटल माध्यम से न केवल किसानों की बल्कि आढ़तियों की भी कई समस्याएं हल हुई हैं। खरीद एजेंसियों द्वारा आढ़तियों को भी उनकी ढाई फीसदी का भुगतान उनके बैंक खातों में किया जा रहा है। इससे आढ़तियों को भी आसानी हुई है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि मंडियों में खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने और इसे सुचारु रुप से आगे बढ़ाने के लिए किसानों के डिजिटल पंजीकरण के अलावा हर जिले में वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया गया है। राज्य में एक अप्रैल से शुरु हुई खरीद प्रक्रिया के पहले दिन से ही मैने कई मंडियों का दौरा किया। पिछले साल भी गेहूं का खरीद सीजन शुरु होते की कोरोना की चुनौतियां सामने थी जिनसे सबक लेते हुए हम इस बार अधिक तेजी से खरीद और भुगतान में सफल रहे हैं। खरीद प्रक्रिया में वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किए जाने से मंडियों से अनाज के उठान में तेजी आई है। कुछेक मंडियां जहां सिर्फ गेहूं की आवक जोरों पर हैं वहां अप्रैल के दूसरे हफ्ते में लाखों टन गेहूं एकदम आने से उठान में कुछ देरी हुई है पर दक्षिण हरियाणा के जिलों में गेहूं के बराबर ही सरसों व अन्य रबी फसलों की आवक के चलते मंडियों से गेहूं का उठान समयबद्ध जारी रहा।</p>
<p>कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल का कहना है कि सुशासन से किसानों की आय वृद्धि में भी मदद मिलेगी। खरीद प्रक्रिया के लिए जुटाए गए किसानों के डिजिटल डाटा से हमें किसानों की कई समस्याएं समझने में मदद मिलेगी। &ldquo;मेरी फसल मेरा ब्यौरा&rdquo; पोर्टल पर जुटाए गए डाटा से हरेक किसान की भूमि की उत्पादकता का डाटा जुटाया जा रहा है। जो किसान सॉयल हेल्थ कार्ड नहीं पा सके उन्हें सॉयल हेल्थ कार्ड के जरिए हमारे कृषि विशेषज्ञ सलाह देंगे कि उन्हें कौन सी खाद कितनी प्रयोग करनी है, कैसे टपका सिंचाई विधि से वे पानी की बचत कर खर्च घटा सकते हैं। प्रत्येक फसल की उत्पादकता का विश्लेषण आसान होगा जिससे प्रत्येक किसान को उसकी जरुरत मुताबिक कृषि विशेषज्ञ समाधान प्रदान करेंगे। अगले कुछ ही साल में हम किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल करेंगे।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कोरोना चुनौती के बीच गेहूं खरीद का एक महीना ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में एसएचजी के जरिये गन्ने की नर्सरी तैयार कर ग्रामीण महिलाओं  को मिला उद्यमी बनने का मौका]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/Women-SHG-in-UP-got-an-opportunity-to-become-entrepreneurs.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 21 Apr 2021 06:47:20 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/Women-SHG-in-UP-got-an-opportunity-to-become-entrepreneurs.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कोरोना महामारी से पूरा देश त्रस्त है । महामारी की वजह से अनिश्चितताओं का माहौल है। बावजूद इसके देश के लिए अच्छी खबर है । अच्छी खबर है खेती से खास कर गन्ने से जुड़ी । देश में साल&nbsp;2020&nbsp;के मुकाबले इस साल कोरोना महामारी के बावजूद भी गन्ने का घरेलू उत्पादन अधिक होने की संभावना है । इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना की खेती करने वाले एरिया में जमीनी स्तर पर ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के लिए एक सांचे में ढाल रही है ।</p>
<p>गन्ने की फसल की लिहाज से अगर बात की जाए तो यूपी और महाराष्ट्र देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य हैं ।&nbsp;अकेले इन दोनों राज्यों का योगदान भारत के घरेलू उत्पादन का&nbsp;50&nbsp;प्रतिशत से भी अधिक का है,&nbsp;जो सालाना 300 लाख टन से अधिक है ।&nbsp;</p>
<p>इसी को देखते हुए यूपी सरकार अब महिला सशक्तिकरण के लिए बनाई गई मिशन शक्ति योजना के तहत,&nbsp;ग्रामीण महिलाओं को सफल उद्यमी के रूप में तैयार करने के लिए गन्ने की खेती प्रक्रिया में महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दे रही है।&nbsp;<br />यूपी सरकार के गन्ना और चीनी आयुक्त,&nbsp;संजय भूसरेड्डी का कहना है कि&nbsp;प्रत्येक गन्ना विकास परिषद क्षेत्र में महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की संख्या&nbsp;10&nbsp;से बढ़ाकर&nbsp;25&nbsp;कर दी गई है। प्रत्येक एसएचजी में महिला सदस्यों की संख्या&nbsp;10&nbsp;से लेकर&nbsp;35&nbsp;की है।</p>
<p>इससे संबंधित आंकड़ों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि यूपी के&nbsp;36&nbsp;गन्ना बहुल जिलों में अब तक&nbsp;1964&nbsp;महिला एसएचजी का गठन किया जा चुका है,&nbsp;जिसमें&nbsp;41,113&nbsp;ग्राणीण महिला उद्यमी पंजीकृत हैं । उनका कहना है कि इन समूहों से संबंधित महिलाओं को गन्ना विभाग द्वारा प्रशिक्षित कर गन्ने से बड चिप विधि यानि कि गन्ने की एक कली से गन्ने की नर्सरी पौध तैयार करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है । संजय भूसरेड्डी जी ने बताया कि एसएचजी द्वारा&nbsp;10&nbsp;करोड़ से अधिक पौधे तैयार किए जा चुके हैं,&nbsp;और लगभग&nbsp;9&nbsp;करोड़ नर्सरी पौध की किसानों को बिक्री कर सामूहिक रूप से अब तक&nbsp;27&nbsp;करोड़ रुपये की आय अर्जित की जा चुकी है। उनका कहना है कि गन्ने की नर्सरी के जरिए एक सीजन में प्रत्येक महिला उद्यमी को औसतन&nbsp;59,000&nbsp;रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है,&nbsp;जबकि इस कार्यक्रम के तहत लगभग नौ लाख दिनों का रोजगार सृजित हुआ है।&nbsp;</p>
<p>पिछले दिनों <strong>रुरल वॉयस&nbsp;&nbsp;</strong>ने ऐसे ही एक स्वयं सहायता समूह के सदस्यों से मुलाकात की थी। यह उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के हरियावां में काम करता है। डीसीएम श्रीराम समूह की हरियावां चीनी मिल के साथ यह समूह काम कर रहा है। नीचे गये फोटो में डीसीएम श्रीराम के सीईओ रोशन लाल टामक स्वयं सहायता समूह की सदस्यों के साथ बातचीत कर रहे हैं।</p>
<p><img src="https://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/04/image_750x_607fca5e12b57.jpg" alt="" /></p>
<p><br />गन्ना विकास परिषद द्वारा&nbsp;&ldquo;मिशन शक्ति&rdquo;&nbsp;के तहत ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों और इससे जुड़ी जानकारियों पर कार्यशालाएं भी करा रहा है । इसका उद्देश्य महिलाओं में उद्यमिता की भावना विकसित करने के साथ ही आत्मनिर्भर बनाना है ।&nbsp;&nbsp;इससे पहले,&nbsp;ग्रामीण महिलाओं और लड़कियों के आत्मनिर्भरता और अधिक आमदनी के लिए&nbsp;&ldquo;मिशन शक्ति के तहत महिला रोजगार सृजन कार्यक्रम&rdquo; की गन्ना आयुक्त भूसरेड्डी ने शुरुआत की थी ।</p>
<p>यह कार्यक्रम यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में महिला सशक्तिकरण के लिए शुरू किया था।&nbsp;&nbsp;इसमें मुख्यमंत्री ने प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए थे । चीनी आयुक्त भूसरेड्डी की मानें तो इस कार्यक्रम की अपार सफलता और लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लखनऊ में अंतररार्ष्ट्रीय महिला दिवस समारोह के अवसर पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सम्मानित राज्य की&nbsp;11&nbsp;सर्वश्रेष्ठ महिलाओं में से दो महिलाएं इस योजना से जुड़ी हुई हैं। यह अन्नपूर्णा महिला एसएचजी,बरेली की अध्यक्ष कुसुम और &nbsp;मनमती&nbsp;मां वैष्णो देवी महिला एसएचजी अयोध्या की अध्यक्ष हैं। &nbsp;</p>
<p>इसी दौरान,&nbsp;यूपी में&nbsp;120&nbsp;चीनी मिलों ने चालू पेराई सत्र&nbsp;2020-21&nbsp;में&nbsp;100 लाख टन से अधिक चीनीका उत्पादन किया है, जबकि इनमें से 54 इकाइयां पहले ही अपना गन्ने&nbsp;&nbsp;का पेराई सत्र संचालन करअगले&nbsp;&nbsp;सीजन तक के लिए बंद हो चुकी हैं ।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;<em><strong>(वीरेंद्र सिंह रावत लखनऊ के &nbsp;पत्रकार हैं, जो उद्योग, अर्थव्यवस्था, कृषि, बुनियादी ढांचे, बजट इत्यादि &nbsp;&nbsp;समकालीन मुद्दों पर लिखते हैं)</strong></em></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में एसएचजी के जरिये गन्ने की नर्सरी तैयार कर ग्रामीण महिलाओं  को मिला उद्यमी बनने का मौका ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कोविड महामारी के प्रतिबंधों के बीच गेहूं की खरीद के लिए यूपी सरकार ने कृषक संगठनों को साथ जोड़ा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/UP-ropes-in-farm-entrepreneurs-to-procure-wheat.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 14 Apr 2021 07:42:22 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/UP-ropes-in-farm-entrepreneurs-to-procure-wheat.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong><em>लखनऊ, 14 अप्रैल, 2021</em></strong><strong><em><br />&nbsp;</em></strong></p>
<p>&nbsp;चालू रबी सीजन में गेहूं की खरीद प्रक्रिया को ज्यादा प्रभावी तरीके लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 150 कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और किसान सहकारी समितियों को साथ लिया है। गेहूं की सरकारी खरीद का सीजन 1 अप्रैल, 2021 से शुरू हो चुका है और यह 15 जून, 2021 तक चलेगा। राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार का कहना है का सभी 75 जिलों में गेहूं की सरकारी खरीद की व्यवस्था की गई है और जब तक किसान खरीद केंद्रों पर गेहूं लाते रहेंगे, खरीद जारी रहेगी।</p>
<p>चालू रबी सीजन के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1975 रुपये प्रति क्विटंल तय किया गया है। इसके तहत अभी तक &nbsp;26 हजार किसानों से 287 करोड़ रुपये मूल्य का 1.45 लाख टन गेहूं एमएसपी पर खरीदा जा चुका है। इस साल राज्य में गेहूं खरीद के लिए 5332 केंद्र बनाये गये हैं जिसमें से 104 खरीद केंद्र भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) चला रहा है। राज्य सरकार का दावा है कि आने वाले दिनों में गेहूं की खरीद तेजी पकड़ेगी और उस समय करीब 6000 सरकारी खरीद केंद्र सक्रिय रहेंगे।</p>
<p>राज्य सरकार का कहना है कि कोविड-19 के केस बढ़ने के बावजूद गेहूं की सरकारी खरीद सामान्य। कोविड-19 से सुरक्षा लिए निर्धारित सभी नियमों और मानदंडों का पालन करने की व्यवस्था की गई है। किसानों को पहले खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति (एफसीएस) विभाग के पोर्टल पर खुद को पंजीकृत करना है और उसके बाद ही वह गेंहूं की बिक्री कर सकेंगे। सरकार का यह कदम किसानों को बिचौलियों से दूर रखने के लिए है। गेहूं की खरीद के बाद इसका भुगतान सीधे किसानों के खातों में किया जा रहा है। इससे साथ ही राज्य सरकार ने पहली बार इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल (ईपोएस) मशीन पर इस्तेमाल शुरू किया है ताकि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और किसान के नाम पर आने वाले बिचौलिया को दूर रखा जा सके। उदाहरण के लिए अगर कोई किसान 100 क्विंटल गेहूं बेचना चाहता है तो राज्य के राजस्व विभाग द्वारा उसके खाते का प्रमाणीकरण किया जा जाता है, जो पारदर्शिता के लिए जरूरी है। इसके साथ ही सभी खरीद केंद्रों और वेयरहाउस की जियो टैगिंग की गई है।</p>
<p>राज्य सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि बायोमिट्रिक ऑथेंटिकेशन और ईपोएस मशीन उपयोग करने वाला उत्तर प्रदेश पहला राज्य है। यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से सभी खरीद केंद्रों पर लागू कर दी जाएगी।</p>
<p>केंद्र सरकार ने गेहूं के एमएसपी को पिछले साल (2020-21) के 1925 रुपये से बढ़ाकर चालू सीजन (2021-22) के लिए 1975 रुपेय प्रति क्विटंल कर दिया है। राज्य सरकार का कहना है कि उसने 2017 से अभी तक के चार सीजन में गेहूं किसानों को 29 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया है। चालू साल&nbsp; लिए राज्य सरकार ने गेहूं की खऱीद का कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया है। इसके पीछे चुनावों के पहले किसानों के गेहूं की अधिक से अधिक खरीद कर उनको खुश रखने की रणनीति हो सकती है। इस साल राज्य सरकार ने खरीफ विपणन साल (2020-21) में 66 लाख टन धान की रिकार्ड खरीद की है। जबकि लक्ष्य 55 लाख टन का रखा गया था।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद </strong></p>
<table>
<tbody>
<tr>
<td width="56">
<p><strong>Year</strong></p>
</td>
<td width="158">
<p><strong>खरीद का लक्ष्य</strong></p>
<p><strong>(</strong><strong>मिलियन टन</strong><strong>)</strong></p>
</td>
<td width="154">
<p><strong>खरीद</strong></p>
<p><strong>(</strong><strong>मिलियन टन</strong><strong>)</strong></p>
</td>
<td width="104">
<p><strong>एमएसपी</strong></p>
<p><strong>(</strong><strong>रुपये प्रति क्विंटल</strong><strong>)</strong></p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="56">
<p>2013</p>
</td>
<td width="158">
<p>6.0</p>
</td>
<td width="154">
<p>0.7</p>
</td>
<td width="104">
<p>1,350</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="56">
<p>2014</p>
</td>
<td width="158">
<p>4.5</p>
</td>
<td width="154">
<p>0.6</p>
</td>
<td width="104">
<p>&nbsp;1,400</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="56">
<p>2015</p>
</td>
<td width="158">
<p>3.0</p>
</td>
<td width="154">
<p>2.2</p>
</td>
<td width="104">
<p>&nbsp;1,450</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="56">
<p>2016</p>
</td>
<td width="158">
<p>4.5</p>
</td>
<td width="154">
<p>0.8</p>
</td>
<td width="104">
<p>&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; &nbsp;1,525</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="56">
<p>2017</p>
</td>
<td width="158">
<p>8.0</p>
</td>
<td width="154">
<p>3.7</p>
</td>
<td width="104">
<p>1,625</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="56">
<p>2018</p>
</td>
<td width="158">
<p>5.0</p>
</td>
<td width="154">
<p>5.3</p>
</td>
<td width="104">
<p>1,735</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="56">
<p>2019</p>
</td>
<td width="158">
<p>5.5</p>
</td>
<td width="154">
<p>3.8</p>
</td>
<td width="104">
<p>1,840</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="56">
<p>2020</p>
</td>
<td width="158">
<p>5.5</p>
</td>
<td width="154">
<p>3.5</p>
</td>
<td width="104">
<p>1,925</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td width="56">
<p><strong>2021</strong></p>
</td>
<td width="158">
<p><strong>कोई लक्ष्य नहीं</strong></p>
</td>
<td width="154">
<p><strong>0.145 (13 अप्रैल तक)</strong></p>
</td>
<td width="104">
<p><strong>&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; </strong><strong>1,975</strong></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><em>*</em><em>टेबल &ndash; वीरेंद्र सिंह रावत </em></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पिछले साल राज्य सरकार की एजेंसियों और एफसीआई ने मिलकर 35 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद की थी जबकि लक्ष्य 55 लाख टन का रखा गया था।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong><em>(</em><em>वीरेंद्र सिंह रावत लखनऊ स्थित पत्रकार हैं। वह उद्योग, इकोनॉमी, कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और बजट से जुड़े मामलों पर लिखते हैं</em><em>)</em></strong></p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/04/image_750x500_6076a04f5396c.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ कोविड महामारी के प्रतिबंधों के बीच गेहूं की खरीद के लिए यूपी सरकार ने कृषक संगठनों को साथ जोड़ा ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[केंद्र  के साथ सहमति के बाद  पंजाब में गेहूं खरीद शुरू, आढ़तियों के साथ बैकफुट पर कैप्टन सरकार]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/Wheat-procurement-started-in-Punjab-with-DBT-provision-Aarthiya-resumed-work-on-assurance-of-CM.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 12 Apr 2021 11:03:48 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/Wheat-procurement-started-in-Punjab-with-DBT-provision-Aarthiya-resumed-work-on-assurance-of-CM.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="font-weight: 400;"><strong>अनुराधा</strong></p>
<p style="font-weight: 400;"><strong>चंडीगढ़ , 12 अप्रैल</strong><strong></strong></p>
<p style="font-weight: 400;">किसानों को गेहूं की फसल का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले के विरोध में आढ़तियों की लॉबी के साथ खड़ी पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सरकार भी बैक फुट पर आ गई है। 10 अप्रैल से शुरु हुई गेहूं की सरकारी खरीद से पहले हड़ताल की धमकी देने वाले आढ़तियों को सरकार ने ही हथियार डालने को कहा क्योंकि केंद्र सरकार सीधे भुगतान की प्रक्रिया लागू होने की स्थिति में ही सरकारी खरीद शुरू करने के फैसले पर अड़ गई थी। केंद्र ऐसा करता तो गेहूं की सरकारी खरीद की प्रक्रिया पटरी से उतर रखती थी, ऐसे में कैप्टन को किसानों की नाराजगी झेलनी पड़ती। कैप्टन नहीं चाहते कि आढ़तियों की लॉबी के दबाव में किसानों की नाराजगी मोल ली जाए। पंजाब की कैप्टन सरकार केंद्र के तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के समर्थन में है और इसका लाभ कांग्रेस पार्टी को स्थानीय निकाय और नगर पंचायत परिषद चुनावों में भारी जीत के रूप में मिला है।</p>
<p style="font-weight: 400;">मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के मनाने पर आढ़तियों की हड़ताल ख़त्म होने से पिछले तीन दिन से पंजाब में गेहूं की खरीद शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ने खरीद प्रक्रिया में आढ़तियों को बढ़ चढ़ कर भाग लेने और उनके बकाया 131 करोड़ रुपए भी एफसीआई से जारी कराने का आश्वासन दिया गया है। मुख्यमंत्री के आदेशों पर राज्य के खाद्य एवं सिविल आपूर्ति विभाग ने खरीद सम्बन्धी सॉफ्टवेयर में संशोधन कर दिया है, जिससे किसानों को फ़सल की अदायगी जारी करने की प्रक्रिया में आढ़तियों का सम्मिलन सुधारे गए रूप में ही सही, बनी ज़रूर रहेगी, जबकि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित समय के अनुसार किसानों को 72 घंटों में उनके बैंक खातों में अदायगी मिल जाएगी।&nbsp;</p>
<p style="font-weight: 400;">कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा है कि आढ़तियों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से बाहर रखने संबंधी भारत सरकार के निर्देशों के बावजूद वह खरीद प्रक्रिया के साथ हमेशा जुड़े रहेंगे। उन्होंने कहा, &lsquo;&lsquo;जब तक मैं यहाँ हूँ, आप व्यवस्था का हिस्सा बने रहोगे और आपकी भूमिका हमेशा कायम रहेगी।&rsquo;&rsquo; उन्होंने कहा कि वह यकीन दिलाते हैं कि एपीएमसी एक्ट के अंतर्गत आढ़तिया कमीशन और अन्य लागतें जारी रहेंगी।</p>
<p style="font-weight: 400;">भारत सरकार द्वारा सीधी अदायगी की प्रणाली को मुल्तवी करने के लिए राज्य सरकार की अपील को मानने से इनकार कर देने पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, &lsquo;&lsquo;इस मुद्दे पर हमने केंद्र से सख़्त लड़ाई लड़ी, परन्तु वह अड़े रहे और यहाँ तक कि सीधी अदायगी की प्रणाली को लागू न करने की सूरत में पंजाब से खरीद न करने की धमकी देने तक गए।&rsquo;&rsquo;</p>
<p style="font-weight: 400;">मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग को 131 करोड़ रुपए की बकाया राशि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई.) का इंतज़ार किए बिना तुरंत जारी करने के हुक्म दिए, क्योंकि कुछ आढ़तियों द्वारा विवरण अपलोड न करने के कारण एफसीआई. ने यह राशि रोकी थी। उन्होंने कहा कि इन आढ़तियों को उस समय पर शायद ऐसे लोगों ने रोक दिया हो, जो राजनीति खेलना चाहते हों। उन्होंने कहा कि एफसीआई. से यह राशि अभी आनी है लेकिन उनकी सरकार इसका इंतज़ार किए बिना तुरंत जारी करेगी। मुख्यमंत्री ने आढ़तियों को भरोसा दिया कि उनकी सरकार एफसीआई. द्वारा लेबर की अदायगी में 30 फीसदी की कटौती का मुद्दा केंद्र सरकार के पास उठाएगी।</p>
<p style="font-weight: 400;">कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने फेडरेशन ऑफ आढ़तिया एसोसिएशन ऑफ पंजाब के प्रधान अपने बेहद करीबी विजय कालड़ा को हड़ताल खत्म करने का श्रेय देते हुए कहा कि हड़ताल वापस न होती तो किसानों को नुकसान बर्दाश्त करना पड़ता।</p>
<p style="font-weight: 400;">आढ़तियों की भूमिका को अहम बताते हुए कैप्टन ने कहा कि आढ़तिया प्रणाली तब भी चलती थी जब वह छोटे थे और अपने दादा जी के साथ मंडियों में जाते थे। उन्होंने आगे कहा कि यह बात समझ से बाहर है कि भारत सरकार इस प्रणाली को बर्बाद करने पर क्यों तुली हुई है, क्योंकि आढ़तिये कोई बिचौलिया नहीं हैं बल्कि सेवाएं प्रदान करते हैं और निजी क्षेत्र का कामकाज मौजूदा प्रणाली के साथ चल सकता है, इसलिए मौजूदा प्रणाली को बदले जाने की कोई ज़रूरत नहीं है। आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कालड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार, किसान आंदोलन खड़ा करने के लिए पंजाब को सज़ा देने पर तुली हुई है</p>
<p style="font-weight: 400;"><span>&nbsp;</span></p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/04/image_750x500_607428d52d612.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ केंद्र  के साथ सहमति के बाद  पंजाब में गेहूं खरीद शुरू, आढ़तियों के साथ बैकफुट पर कैप्टन सरकार ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[मध्य प्रदेश सरकार के नियमों से सहकारी क्षेत्र में एफपीओ गठित करना हुआ मुश्किल]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/MP-Government-rule-of-land-ownership-is-a-hurdle-in-FPO-formation.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 24 Mar 2021 20:34:17 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/MP-Government-rule-of-land-ownership-is-a-hurdle-in-FPO-formation.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मध्य प्रदेश सहकारिता विभाग ने कृषक उत्पादक सहकारी संगठन (एफपीओ) स्थापित करने लिए जो नियम तय किये हैं उनके तहत राज्य में सहकारी क्षेत्र में एफपीओ स्थापित करना आसान नहीं रह गया है। भूमि के मालिकाना हक की शर्त और महिलाओं की एकतिहाई भागीदारी के साथ यह शर्त पूरा करना मुश्किल हो गया है। सहकारिता विभाग द्वारा दिसंबर और फरवरी में जारी सर्कुलर में इन शर्तों का उल्लेख है। जिसमें सदस्य के पास कम से कम एक एकड़ कृषि भूमि होना अनिवार्य है। इन शर्तों के चलते राज्य में सहकारिता क्षेत्र में एफपीओ गठित करने की व्यवहारिकता पर ही सवाल उठने लगे हैं। देश में और मध्य प्रदेश में महिलाओं के पास कृषि भूमि के मालिकाना हक के स्तर को देखते हुए एकतिहाई महिलाओं के सदस्य होने के नियम को पूरा करना लगभग असंभव है। इसके चलते केंद्र सरकार की किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिए एफपीओ स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अपने गृह राज्य में ही पिछड़ सकती है। केंद्र सरकार ने दस हजार एफपीओ स्थापित करने लक्ष्य रखा है और उसके लिए केंद्रीय बजट में इक्विटी ग्रांट के लिए प्रावधान किया गया है।</p>
<p>राज्य सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा 15 दिसंबर, 2020 और 12 फरवरी, 2021 को जारी सर्कुलरों के जरिये यह नियम लागू किये गये हैं। इनके अनुसार अलग-अलग परिवारों के 21 किसानों द्वारा एफपीओ गठित करने प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके बाद कलस्टर का अध्ययन सीबीबीओ द्वारा किया जाएगा और सीबीबीओ की नियुक्ति क्रियान्वयन एजेंसियों एजेंसियों नाबार्ड, एसएफएसी और एनसीडीसी द्वारा की जाएगी। इसके आकलन करने के बाद ही एफपीओ का गठन होगा और जिसमें 300 सदस्यों का होना जरूरी है। एफपीओ स्थापित करने वाले एक समूह से जुड़े लोगों ने <strong>रुरल वॉयस</strong> &nbsp;को बताया कि कुछ नियमों को तो पूरा करना संभव है। लेकिन इसके साथ ही एक मुश्किल शर्त जोड़ी गई है। जिसमें कहा गया है कि एफपीओ में 33 फीसदी महिला सदस्यों के पास कम से कम एक एकड़ भूमि का मालिकाना हक होना चाहिए। इस शर्त को पूरा किये बिना एफपीओ के लिए राज्य के सहकारी विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर एफपीओ का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता है। देश में महिलाओं के पास भूमि के मालिकाना हक का स्तर काफी कम है। अधिकांश राज्यों में भूमि का मालिकाना हक पुरुषों के पास है।</p>
<p>इसके साथ ही एफपीओ के सदस्यों को एक एकड़ कृषि भूमि के मालिका हक के कागजात &nbsp;&nbsp;पोर्टल पर अपलोड करने हैं। ऐसे में 33 फीसदी ऐसे महिला सदस्य जिनके पास कम से कम एक एकड़ भूमि का मालिकाना हक होने की शर्त के साथ भूमि के मालिकाना हक के पेपर अपलोड करने की शर्त पूरा करना लगभग असंभव है।</p>
<p>&nbsp;इस मुददे पर <strong>रुरल वॉयस</strong> के साथ बातचीत में मध्य भारत कंसोर्सियम ऑफ एफपीओ लिमिटेड के सीईओ योगेश कुमार द्विवेदी ने कहा कि हमारी सरकार को राय रही है कि एफपीओ की स्थापना में भूमिहीन बंटाईदार किसानों को भी शामिल किया जाए। इसके साथ ही लघु और सीमांत किसानों की भागीदारी का भी हमने सुझाव दिया है। ऐसा करने से एफपीओ का दायरा बढ़ेगा और ग्रामीण आबादी के बड़े हिस्से को प्रतिनिधित्व मिल सकेगी। कृषि जुड़े कई दूसरे कार्यों में मध्य प्रदेश सरकार बटाईदार किसानों को मान्यता दे रखी है। लेकिन जमीन के मालिकाना हक के नियम से महिलाओं की भागीदारी और बटाईदार किसानों की भागीदारी सीधे प्रभावित हो सकती है क्योंकि अधिकांश महिलाओं के पास कृषि भूमि का मालिकाना हक नहीं होता है।</p>
<p>इंडियास्पेंडडॉटकॉम की फरवरी, 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में महिलाओं के पास भूमि के मालिकाना हक का औसत 0.93 हैक्टेयर है जबकि पुरुषों के मामले में यह 1.18 हैक्टेरयर है। वहीं भूमिके मालिकाना हक में देश का औसत 1.15 हैक्टेयर है। जहां तक कुल मालिकाना हक में महिलाओं की हिस्सेदारी का सवाल है तो उसमें दक्षिण के राज्य कुछ बेहतर स्थिति में हैं। सबसे ऊपर 17.2 फीसदी महिलाओं के पास आंध्र प्रदेश में भूमि का मालिकाना हक है। जबकि मध्य प्रदेश में केवल 8.6 फीसदी महिलाओं के पास भूमि का मालिकाना हक है। उत्तर प्रदेश के मामले में यह स्तर 6.1 फीसदी है और राजस्थान के मामले में 7.1 फीसदी महिलाओं के पास भूमि का मालिकाना हक है। वहीं सबसे कम 0.8 फीसदी महिलाओं के साथ पंजाब निचली पायदान पर है।</p>
<p>इन आंकड़ों के मद्देनजर मध्य प्रदेश में एफपीओ के सदस्यों के रूप में एक तिहाई ऐसी महिला सदस्य जिनके पास कम से कम एक एकड़ भूमि है, मिलना मुश्किल होगा। हो सकता है कि कुछ गांवों में यह संभव हो सके लेकिन पूरे प्रदेश में यह शर्त पूरी नहीं हो सकेगी। राज्य के सहकारिता विभाग के यह नियम सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना के रास्ते में बड़ी बाधा बन सकते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/03/image_750x500_605b54d003ac2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ मध्य प्रदेश सरकार के नियमों से सहकारी क्षेत्र में एफपीओ गठित करना हुआ मुश्किल ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार का  ‘कालानमक’ चावल की ग्लोबल ब्रांडिंग पर फोकस]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/UP-Government-looking-at-global-branding-of--kalanamak-rice.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 17 Mar 2021 16:49:07 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/UP-Government-looking-at-global-branding-of--kalanamak-rice.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>फार्म टू फोर्क कांसेप्ट के तहत उत्तर प्रदेश सरकार कालानमक चावल की स्थानीय और पोषकता के भरपूर किस्म को प्रोत्साहित करने के लिए एग्रीकल्चर वैल्यू चेन को मजबूत कर रही है ताकि स्थानीय स्तर पर किसानों को इसका फायदा मिल सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कालानमक को प्रोत्साहित करने में दिलचस्पी को देखते हुए संबंधित अधिकारी और विभाग इसके लिए काफी संजीदगी से काम कर रहे हैं।&nbsp; खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही राज्य सरकार ने कालानमक को एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल किया है। जिसके जरिये कालानमक किस्म को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने के लिए कदम उठाये जा रहे हैं।</p>
<p>देश में तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के दौर में उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार एक ऐसी फसल को प्रोत्साहित कर रही है जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था के तहत नहीं आती है। लेकिन किसानो को बेहतर दाम मिलने की इस फसल में काफी संभावना है। अमीर लोगों की पसंदीदा बासमती चावल की किस्म को टक्कर देने की कालानमक किस्म में क्षमता है। कालानमक चावल में जहां बासमती की तरह अरोमा है वहीं इसका चावल भी बासमती की तरह लंबा और सफेद होता है। दुनियाभर में एक प्रीमियम किस्म में शुमार बासमती का बड़े स्तर पर मध्यपूर्व, ईरान और यरोपीय देशों को निर्यात होता है। असल में कालानमक किस्म के धान का रंग काला होता है लेकिन इसके अंदर जो चावल होता है वह बासमती की तरह की सफेद होता है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में कालानमक किस्म का उत्पादन इसके पूर्वी हिस्से में होता है। जिसमें सिद्धार्थ नगर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, संत करीबर नगर, बस्ती, बहराइच, बलरामपुर, गोंडा और श्रावस्ती जिले शामिल हैं। इन जिलों कालानमक के उत्पादन के लिए जलवायु और मिट्टी दोनों अनुकूल हैं। कालानमक चावल केवल बेहतर अरोमा और लंबे ग्रेन के कारण की खास नहीं है बल्कि इसके अंदर आयरन और जिंक जैसे कई पोषक मिनरल्स भी होते हैं जो डायबटीज और अलजाइमर जैसी बीमारियों से बचाव करते हैं। कालानमक चावल की औसतन उत्पादन लागत 30 से 40 रूपये किलो के बीच आती है जबकि बाजार में इसकी बेहतर ग्रेडिंग और पैकेजिंग के बाद कीमत 100 से 300 रुपये किलो तक मिल जाती है।</p>
<p>हाल ही में राज्य सरकार ने&nbsp; सिद्धार्थ नगर जिले में कालानमक राइस फेस्टिवल आयोजित किया था। उसका एक वर्चुअल कार्यक्रम के जरिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन किया था। उनका जोर था कि कालानमक की खासियत को देखते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक प्रीमियम चावल की तरह ब्रांड किया जाना चाहिए। इसके पहले राज्य सरकार ने घोषणा की थी सिद्धार्थ नगर से बुद्धा राइस ब्रांड के तहत 20 टन कालानमक चावल का निर्यात सिंगापुर को किया जाएगा।</p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव, एमएसएमई और एक्सपोर्ट प्रमोशन, नवनीत सहगल का कहना है, &ldquo; राज्य सरकार खास किस्म के जार की पैकेजिंग में कालानमक चावल का निर्यात करेगी जो इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांडिंग में कारगर साबित होगा। हम पूर्वी एशिया के उन देशों के बाजार पर फोकस कर रहे हैं जहां बौद्ध आबादी काफी अधिक है।&ldquo;</p>
<p>इसके अलावा सिद्धार्थ नगर में वाराणसी स्थित राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर एक कालानमक राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापित करने की भी योजना है। लोकोक्ति में कालानमक को बुद्ध का महाप्रसाद भी कहा जाता है। कहा जाता है कि भगवान बुद्ध के दौर में सिद्धार्थ नगर जिले के बजाहा गांव में कालानमक चावल की खेती होती थी। लेकिन बाद में चावल की अन्य किस्मों के आने से इसकी पहचान अलग नहीं रह सकी। बासमती चावल की लोकप्रियता और बाजार में दबदबे के चलते यह मुख्यधारा से पिछड़ गया। लेकिन अब राज्य की योगी सरकार स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाली फसलों की किस्मों और बागवानी उत्पादों को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने कालानमक, गुड़ और स्ट्राबरी फेस्टिवल आयोजित किये हैं। ड्रैगन फ्रूट फेस्टिवल आयोजित करने की भी योजना है। इसका मकसद स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाले कृषि उत्पादों को बढ़ावा देकर किसानों की आय वृद्धि करना है।<br />सहगल कहते हैं, &ldquo; जिन फसलों को ओडीओपी योजना में शामिल किया गया है उनके लिए एग्रो फेस्टिवल आयोजित करने की योजना है। इनमें मौजूद संभावनाओं का फायदा उठाकर उनको खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के साथ जोड़ना भी इसका मकसद है। यह कदम किसानों की आय में वृद्धि करने वाला साबित होगा।&ldquo;<br /><br /></p>
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<div id=":35p" class="a3s aiL ">
<div dir="ltr"><i>(<strong>वीरेंद्र सिंह रावत लखनऊ&nbsp; में कार्यरत&nbsp; जर्नलिस्ट हैं और वह समसामयिक विषयो, इंडस्ट्री, इकोनॉमी , एग्रीकल्चर और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विषयों पर लिखते हैं )</strong></i></div>
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</div> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उत्तर प्रदेश सरकार का  ‘कालानमक’ चावल की ग्लोबल ब्रांडिंग पर फोकस ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छत्तीसगढ़ सरकार ने किसान न्याय योजना के तहत 19 लाख किसानों को दिए 4,500 करोड़ रुपए, चौथी किस्त इसी माह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/Chattisgarh-Government-disbursed-4500-crore-to-farmers-under-Rajiv-Gandhi-Nyay-Yojana-209.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 09 Mar 2021 16:35:03 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/Chattisgarh-Government-disbursed-4500-crore-to-farmers-under-Rajiv-Gandhi-Nyay-Yojana-209.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="font-weight: 400;">किसानों की आय में बढ़ोतरी और उनको वित्तीय मदद के लिए अपने तरह की देश की पहली योजना लागू कर रही छत्तीसगढ़ सरकार<span>&nbsp;</span>&lsquo;राजीव गांधी किसान न्याय&rsquo;<span>&nbsp;</span>योजना के तहत मौजूदा वित्त वर्ष (2020-21) में<span>&nbsp;</span>19<span>&nbsp;</span>लाख किसानों को<span>&nbsp;</span>4,500<span>&nbsp;</span>करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है। इस तरह इस साल के लिए तय लक्ष्य की 78<span>&nbsp;</span>फीसदी रकम किसानों को दी जा चुकी है। किसानों को यह सहायता राशि तीन किस्तों में दी गई है। मार्च के अंत तक चौथी किस्त भी दे दी जाएगी। इस योजना के तहत कुल<span>&nbsp;</span>5,750<span>&nbsp;</span>करोड़ रुपये की सहायता किसानों को दी जानी है।</p>
<p style="font-weight: 400;"><strong>धान किसानों को अधिकतम 10,000 रुपए प्रति एकड़ की दर से सहायता</strong></p>
<p style="font-weight: 400;">योजना में धान,<span>&nbsp;</span><span>मक्का</span>,<span>&nbsp;</span><span>दलहन</span>,<span>&nbsp;</span><span>तिलहन और गन्ना को शामिल किया गया है। खरीफ&nbsp;</span>2019<span>&nbsp;</span><span>में जिन किसानों ने धान की फसल ली थी उन्हें सहकारी समितियों के माध्यम से अधिकतम&nbsp;</span>10,000<span>&nbsp;</span><span>रुपये प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि दी जा रही है। लाभार्थी किसानों में&nbsp;</span>9.53<span>&nbsp;</span><span>लाख सीमांत</span>, 5.60<span>&nbsp;</span><span>लाख लघु और&nbsp;</span>3.20<span>&nbsp;</span><span>लाख बड़े किसान शामिल हैं। संभाग स्तर पर देखा जाए तो सबसे ज्यादा&nbsp;</span>5.60<span>&nbsp;</span><span>लाख किसान रायपुर संभाग में हैं। इसके बाद&nbsp;</span>5.55<span>&nbsp;</span><span>लाख किसान दुर्ग और&nbsp;</span>4.55<span>&nbsp;</span><span>लाख बिलासपुर संभाग में हैं। गन्ने की फसल के लिए पेराई वर्ष&nbsp;</span>2019-20<span>&nbsp;</span><span>में&nbsp;</span>261<span>&nbsp;</span><span>रुपये प्रति क्विंटल एफआरपी और&nbsp;</span>93.75<span>&nbsp;</span><span>रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन और आदान सहायता राशि दी जा रही है। इस तरह प्रति क्विंटल&nbsp;</span>355<span>&nbsp;</span><span>रुपये तक का भुगतान किया जा रहा है। देश में गन्ना किसानों को मिलने वाला यह सबसे अधिक दाम है। जबकि देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में वहां की सरकार ने पिछले तीन साल से गन्ना मूल्य में कोई बढ़ोतरी ही नहीं की है और वहां इस समय गन्ने की अग्रिम किस्म का मूल्य 325 रुपये प्रति क्विटंल है।</span></p>
<p style="font-weight: 400;"><strong>90 फीसदी लाभान्वित किसान कमजोर वर्ग के</strong></p>
<p style="font-weight: 400;">छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है,<span>&nbsp;</span>जिसने किसानों को मदद पहुंचाने के लिए उनके खाते में सीधे राशि दी है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना,<span>&nbsp;</span>गरीब किसानों को मदद पहुंचाने की योजना है। राज्य सरकार का कहना है कि&nbsp; इससे आदिवासियों,<span>&nbsp;</span>ग्रामीणों एवं गरीबों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिली है। योजना से लाभान्वित होने वालों में<span>&nbsp;</span>90<span>&nbsp;</span>प्रतिशत लघु और सीमांत किसान अनुसूचित जाति,<span>&nbsp;</span>जनजाति,<span>&nbsp;</span>पिछड़ा वर्ग एवं गरीब तबके के हैं।</p>
<p style="font-weight: 400;"><strong>इस माह के अंत तक चौथी किस्त भी दे दी जाएगी</strong></p>
<p style="font-weight: 400;">राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत राज्य के<span>&nbsp;</span>19<span>&nbsp;</span>लाख किसानों को अब तक तीन किस्तों में<span>&nbsp;</span>4500<span>&nbsp;</span>करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।<span>&nbsp;</span>पहली किस्त का भुगतान<span>&nbsp;</span>21<span>&nbsp;</span>मई<span>&nbsp;</span>2020<span>&nbsp;</span>को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की<span>&nbsp;</span>पुण्यतिथि पर किया गया।<span> उस समय </span>18.34<span>&nbsp;</span>लाख से ज्यादा किसानों को<span>&nbsp;</span>1500<span>&nbsp;</span>करोड़ रुपये की पहली किस्त उनके खाते में हस्तांतरित की गई।<span>&nbsp;</span>दूसरी किस्त का भुगतान राजीव गांधी के जन्मदिन<span>&nbsp;</span>20<span>&nbsp;</span>अगस्त<span>&nbsp;</span>2020<span>&nbsp;</span>को किया गया जिसमें किसानों को<span>&nbsp;</span>1500<span>&nbsp;</span>करोड़ की सहायता राशि दी<span>&nbsp;</span>गई।<span>&nbsp;</span>तीसरी किस्त का भुगतान छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस,<span>&nbsp;</span>1<span>&nbsp;</span>नवंबर<span>&nbsp;</span>को किया गया। उस दिन भी<span>&nbsp;</span>1500<span>&nbsp;</span>करोड़ रुपये की सहायता राशि किसानों के खातों में ट्रांसफर की<span>&nbsp;</span>गई।<span> राज्य सरकार का कहना है कि </span>मार्च<span>&nbsp;</span>2021<span>&nbsp;</span>के अंत तक चौथी किस्त की राशि किसानों को दे दी जाएगी। इस योजना के तहत कुल<span>&nbsp;</span>5750<span>&nbsp;</span>करोड़ रुपए की आदान सहायता किसानों को दी जानी है।</p>
<p style="font-weight: 400;"><strong>21 मई 2020 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुरू की थी योजना</strong></p>
<p style="font-weight: 400;">मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर<span>&nbsp;</span>21<span>&nbsp;</span><span>मई&nbsp;</span>2020<span>&nbsp;</span><span>को इस योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत किसानों के बैंक खाते में राशि ट्रांसफर की जाती है। किसानों को यह राशि आदान सहायता के रूप में उपलब्ध कराई जा रही है। इस योजना का लाभ लेने वाले किसानों के लिए&nbsp;</span>विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण कराना जरूरी है। फसल अवशेष जलाने वाले किसानों को इसका लाभ नहीं मिलेगा।</p> ]]></description>

	<media:content url='http://www.ruralvoice.in/uploads/images/2021/03/image_750x500_60475637cb16e.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='538' height='190'>
	<media:description type='plain'><![CDATA[ छत्तीसगढ़ सरकार ने किसान न्याय योजना के तहत 19 लाख किसानों को दिए 4,500 करोड़ रुपए, चौथी किस्त इसी माह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छत्तीसगढ़ सरकार ने किसान न्याय योजना के तहत 19 लाख किसानों को दिए 4,500 करोड़ रुपए, चौथी किस्त इसी माह]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/Chattisgarh-Government-disbursed-4500-crore-to-farmers-under-Rajiv-Gandhi-Nyay-Yojana.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 09 Mar 2021 16:35:00 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/Chattisgarh-Government-disbursed-4500-crore-to-farmers-under-Rajiv-Gandhi-Nyay-Yojana.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p style="font-weight: 400;">किसानों की आय में बढ़ोतरी और उनको वित्तीय मदद के लिए अपने तरह की देश की पहली योजना लागू कर रही छत्तीसगढ़ सरकार<span>&nbsp;</span>&lsquo;राजीव गांधी किसान न्याय&rsquo;<span>&nbsp;</span>योजना के तहत मौजूदा वित्त वर्ष (2020-21) में<span>&nbsp;</span>19<span>&nbsp;</span>लाख किसानों को<span>&nbsp;</span>4,500<span>&nbsp;</span>करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है। इस तरह इस साल के लिए तय लक्ष्य की 78<span>&nbsp;</span>फीसदी रकम किसानों को दी जा चुकी है। किसानों को यह सहायता राशि तीन किस्तों में दी गई है। मार्च के अंत तक चौथी किस्त भी दे दी जाएगी। इस योजना के तहत कुल<span>&nbsp;</span>5,750<span>&nbsp;</span>करोड़ रुपये की सहायता किसानों को दी जानी है।</p>
<p style="font-weight: 400;"><strong>धान किसानों को अधिकतम 10,000 रुपए प्रति एकड़ की दर से सहायता</strong></p>
<p style="font-weight: 400;">योजना में धान,<span>&nbsp;</span><span>मक्का</span>,<span>&nbsp;</span><span>दलहन</span>,<span>&nbsp;</span><span>तिलहन और गन्ना को शामिल किया गया है। खरीफ&nbsp;</span>2019<span>&nbsp;</span><span>में जिन किसानों ने धान की फसल ली थी उन्हें सहकारी समितियों के माध्यम से अधिकतम&nbsp;</span>10,000<span>&nbsp;</span><span>रुपये प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि दी जा रही है। लाभार्थी किसानों में&nbsp;</span>9.53<span>&nbsp;</span><span>लाख सीमांत</span>, 5.60<span>&nbsp;</span><span>लाख लघु और&nbsp;</span>3.20<span>&nbsp;</span><span>लाख बड़े किसान शामिल हैं। संभाग स्तर पर देखा जाए तो सबसे ज्यादा&nbsp;</span>5.60<span>&nbsp;</span><span>लाख किसान रायपुर संभाग में हैं। इसके बाद&nbsp;</span>5.55<span>&nbsp;</span><span>लाख किसान दुर्ग और&nbsp;</span>4.55<span>&nbsp;</span><span>लाख बिलासपुर संभाग में हैं। गन्ने की फसल के लिए पेराई वर्ष&nbsp;</span>2019-20<span>&nbsp;</span><span>में&nbsp;</span>261<span>&nbsp;</span><span>रुपये प्रति क्विंटल एफआरपी और&nbsp;</span>93.75<span>&nbsp;</span><span>रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन और आदान सहायता राशि दी जा रही है। इस तरह प्रति क्विंटल&nbsp;</span>355<span>&nbsp;</span><span>रुपये तक का भुगतान किया जा रहा है। देश में गन्ना किसानों को मिलने वाला यह सबसे अधिक दाम है। जबकि देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में वहां की सरकार ने पिछले तीन साल से गन्ना मूल्य में कोई बढ़ोतरी ही नहीं की है और वहां इस समय गन्ने की अग्रिम किस्म का मूल्य 325 रुपये प्रति क्विटंल है।</span></p>
<p style="font-weight: 400;"><strong>90 फीसदी लाभान्वित किसान कमजोर वर्ग के</strong></p>
<p style="font-weight: 400;">छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है,<span>&nbsp;</span>जिसने किसानों को मदद पहुंचाने के लिए उनके खाते में सीधे राशि दी है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना,<span>&nbsp;</span>गरीब किसानों को मदद पहुंचाने की योजना है। राज्य सरकार का कहना है कि&nbsp; इससे आदिवासियों,<span>&nbsp;</span>ग्रामीणों एवं गरीबों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिली है। योजना से लाभान्वित होने वालों में<span>&nbsp;</span>90<span>&nbsp;</span>प्रतिशत लघु और सीमांत किसान अनुसूचित जाति,<span>&nbsp;</span>जनजाति,<span>&nbsp;</span>पिछड़ा वर्ग एवं गरीब तबके के हैं।</p>
<p style="font-weight: 400;"><strong>इस माह के अंत तक चौथी किस्त भी दे दी जाएगी</strong></p>
<p style="font-weight: 400;">राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत राज्य के<span>&nbsp;</span>19<span>&nbsp;</span>लाख किसानों को अब तक तीन किस्तों में<span>&nbsp;</span>4500<span>&nbsp;</span>करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।<span>&nbsp;</span>पहली किस्त का भुगतान<span>&nbsp;</span>21<span>&nbsp;</span>मई<span>&nbsp;</span>2020<span>&nbsp;</span>को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की<span>&nbsp;</span>पुण्यतिथि पर किया गया।<span> उस समय </span>18.34<span>&nbsp;</span>लाख से ज्यादा किसानों को<span>&nbsp;</span>1500<span>&nbsp;</span>करोड़ रुपये की पहली किस्त उनके खाते में हस्तांतरित की गई।<span>&nbsp;</span>दूसरी किस्त का भुगतान राजीव गांधी के जन्मदिन<span>&nbsp;</span>20<span>&nbsp;</span>अगस्त<span>&nbsp;</span>2020<span>&nbsp;</span>को किया गया जिसमें किसानों को<span>&nbsp;</span>1500<span>&nbsp;</span>करोड़ की सहायता राशि दी<span>&nbsp;</span>गई।<span>&nbsp;</span>तीसरी किस्त का भुगतान छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस,<span>&nbsp;</span>1<span>&nbsp;</span>नवंबर<span>&nbsp;</span>को किया गया। उस दिन भी<span>&nbsp;</span>1500<span>&nbsp;</span>करोड़ रुपये की सहायता राशि किसानों के खातों में ट्रांसफर की<span>&nbsp;</span>गई।<span> राज्य सरकार का कहना है कि </span>मार्च<span>&nbsp;</span>2021<span>&nbsp;</span>के अंत तक चौथी किस्त की राशि किसानों को दे दी जाएगी। इस योजना के तहत कुल<span>&nbsp;</span>5750<span>&nbsp;</span>करोड़ रुपए की आदान सहायता किसानों को दी जानी है।</p>
<p style="font-weight: 400;"><strong>21 मई 2020 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुरू की थी योजना</strong></p>
<p style="font-weight: 400;">मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर<span>&nbsp;</span>21<span>&nbsp;</span><span>मई&nbsp;</span>2020<span>&nbsp;</span><span>को इस योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत किसानों के बैंक खाते में राशि ट्रांसफर की जाती है। किसानों को यह राशि आदान सहायता के रूप में उपलब्ध कराई जा रही है। इस योजना का लाभ लेने वाले किसानों के लिए&nbsp;</span>विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण कराना जरूरी है। फसल अवशेष जलाने वाले किसानों को इसका लाभ नहीं मिलेगा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ छत्तीसगढ़ सरकार ने किसान न्याय योजना के तहत 19 लाख किसानों को दिए 4,500 करोड़ रुपए, चौथी किस्त इसी माह ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना में 80.42 करोड़ का भुगतान, महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/Chattisgarh-Godhan-scheme-is-going-strong-payment-crossed-80-crore.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 28 Feb 2021 15:52:11 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/Chattisgarh-Godhan-scheme-is-going-strong-payment-crossed-80-crore.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना कई मायने में सफल साबित हो रही है। इससे पशुपालक किसानों की आमदनी तो बढ़ी ही है, हजारों लोगों को रोजगार भी मिला है, खास तौर से ग्रामीण महिलाओं को। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 25 फरवरी को इस योजना की 14वीं किस्त के रूप में प्रदेश के 1.54 लाख पशुपालकों के खाते में 4.94 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए। योजना के अंतर्गत अब तक 80.42 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। इस योजना के तहत जहां लोगों को रोजगार का नया विकल्प मिल रहा है वहीं महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं। साथ ही योजना के तहत तैयार हो रहा वर्मी कंपोस्ट किसानों को जैविक खेती की ओर बढ़ने में मददगार साबित रहा है जिसके चलते किसानों की आय में बढ़ोतरी की संभावनाएं बन रही हैं।&nbsp;</p>
<p>दो हजार करोड़ रुपए का होगा वर्मी कम्पोस्ट का कारोबार</p>
<p>इस योजना की कामयाबी और अहमियत पर जोर देते हुए राज्य के मुुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि गोधन न्याय योजना सहित प्रदेश के गौठानों में मशरूम उत्पादन, कुक्कुट उत्पादन, मछली पालन, बकरी पालन, राइस मिल, कोदो-कुटकी और लाख प्रोसेसिंग जैसी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से हजारों लोगों को रोजगार मिला है। उन्होंने बताया कि गौठानों में महिला स्व-सहायता ने लगभग 6 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया है। कुछ दिनों में वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन 12 लाख क्विंटल हो जाने का अनुमान है। यदि साल भर में 20 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन होता है, तो इसका व्यापार दो हजार करोड़ रुपए का होगा।&nbsp;</p>
<p>लघु वनोपजों के प्रसंस्करण के काम भी गौठानों से जुड़ेंगे</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठानों में महिला स्व-सहायता समूहों को लघु वनोपजों के प्रसंस्करण की गतिविधियों से जोड़ा जाना चाहिए। गौठानों में तैयार वर्मी कम्पोस्ट सहित अन्य उत्पादित वस्तुओं के विक्रय की सक्रिय पहल की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि गौठानों में तैयार वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री के लिए सहकारिता और अन्य विभागों के साथ मिलकर योजना बनाई गई है। सरगुजा से बस्तर तक लघु वनोपजों के प्रसंस्करण के काम को भी गौठानों तक जोड़ा जाएगा।</p>
<p>गौठानों में 8 हजार महिला स्व-सहायता समूह</p>
<p>गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट के अलावा मशरूम उत्पादन, मछली पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, गोबर दीया, गमला, अगरबत्ती निर्माण सहित अन्य गतिविधियां भी हो रही हैं। इन गतिविधियों से महिला स्व-सहायता समूहों को अब तक 10 करोड़ रुपए की आमदनी हुई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्वावलंबी गौठानों की संख्या 226 से बढ़कर 251 हो गई है। गौठानों में लगभग 8 हजार महिला स्व-सहायता समूहों की 59 हजार 942 महिलाएं विभिन्न आर्थिक गतिविधियां संचालित कर रही हैं।&nbsp;</p>
<p>योजना के तहत हर 15 दिन में होता है भुगतान</p>
<p>मुख्यमंत्री बघेल ने 20 <span>जुलाई </span>2020 <span>को गोधन न्याय योजना शुरू की थी। मंत्रिमंडल की उपसमिति की सिफारिशों के आधार पर भूमिहीन लोगों से दो रुपए प्रति किलो की दर से गोबर खरीदने का निर्णय लिया गया। योजना के अंतर्गत हर </span>15 <span>दिन में गोबर खरीदने के बदले राशि का भुगतान पशुपालकों और गोबर संग्राहकों को किया जा रहा है। </span>योजना के तहत अब तक 33 <span>लाख क्विंटल गोबर की खरीदी की जा चुकी है। योजना का एक और फायदा यह है कि गांवों में गोबर के उपले बनाकर उसे जलाने पर रोक से पर्यावरण भी शुद्ध हो रहा है। वर्मी कंपोस्ट के इस्तेमाल से प्रदेश में जैविक खेती बढ़ रही है। जिन लोगों के पास कृषि योग्य भूमि या मवेशी नहीं हैं</span>, <span>वे भी इस योजना के माध्यम से अच्छी आय प्राप्त कर रहे हैं।</span></p>
<p>लाभार्थियों में 40.5 फीसदी महिलाएं</p>
<p>इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना जरूरी है। उसके पास आधार कार्ड, अपना बैंक खाता, मोबाइल नंबर आदि होना चाहिए। आवेदक को अपने पशुओं की संख्या के बारे में संबंधित विभाग को जानकारी देनी पड़ेगी। बड़ी जोत वाले किसान और व्यापारी इस योजना का लाभ नहीं ले सकते हैं। इस योजना के तहत गोबर विक्रेताओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के 51.51%, अनुसूचित जाति वर्ग के 37.91% और अनुसूचित जाति वर्ग के 8.36% लाभार्थी शामिल हैं। इसके अलावा 59.42% लाभार्थी पुरुष और बाकी 40.56% महिलाएं हैं। लाभार्थियों में 57 हजार से अधिक भूमिहीन किसान हैं।</p>
<p>इस योजना से लोगों का जीवन किस तरह से बदल रहा है उसे सामने रखने के लिए हमने लाभार्थियों के साथ बातचीत की। उसके आधार पर तैयार इन दो केस स्टडी के जरिये योजना के उद्देश्य और उसके फायदे को समझा&nbsp; जा सकता है।</p>
<p><strong>केस स्टडी - 1</strong></p>
<p><img src="https://ruralvoice.in/uploads/images/2021/02/image_750x_603b6e1b7e018.jpg" alt="" /></p>
<p>पति के लिए सीता देवी ने खरीदी बाइक&nbsp;</p>
<p>कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ जनपद पंचायत की सीता देवी की इच्छा थी कि उनके पति के पास अपनी मोटरसाइकल हो ताकि दोनों अपनी इच्छा के अनुसार अपने परिचितों के यहां आना-जाना कर सकें। गोधन न्याय योजना के जरिए उन्होंने अपना सपना साकार किया है। अब तक लगभग 40<span> टन गोबर बेचकर इस परिवार को </span>80<span> हजार रुपए मिले हैं। परिवार के पास </span>13<span> गाय, बैल और भैंसें हैं। </span></p>
<p><strong>&nbsp;केस स्टडी-&nbsp; 2</strong></p>
<p>महेश ने गाड़ी मॉडिफाई कराई, रोजाना कमा रहे हैं एक हजार रुपए&nbsp;&nbsp;</p>
<p>गोधन न्याय योजना का लाभ उठाने के लिए दुर्ग जिले के आदर्श नगर निवासी महेश हसवानी ने अपनी स्कॉर्पियो को 23 हजार रुपए खर्च कर मॉडिफाई कराया। इसमें वे हर दिन अपने और पड़ोसी गोपालकों का गोबर क्रय केंद्रों तक पहुंचाते हैं। वे हर दिन लगभग 600 किलो गोबर लेकर जाते हैं। केवल गाड़ी के भाड़े से महेश को हर दिन एक हजार रुपए की आमदनी हो रही है। यानी डीजल आदि का खर्च निकालने के बाद भी उन्हें 30 हजार रुपए महीने की आय हो रही है। अब उनकी योजना अपनी डेयरी बढ़ाने की है। इस स्टोरी की मुख्य फोटो में महेश हसवानी और उनकी मोडिफाइड कराई गई गाड़ी दिख रहे हैं।&nbsp;&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना में 80.42 करोड़ का भुगतान, महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आईआईएम लखनऊ की मदद से होगा यूपी की कृषि उपज मंडियों का आधुनिकीकरण]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/iim-lucknow-to-help-in-modernisation-of-up-farm-mandis.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 21 Feb 2021 13:26:11 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/iim-lucknow-to-help-in-modernisation-of-up-farm-mandis.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>लखनऊ. 21 फरवरी, 2021</strong></p>
<p>&nbsp;&nbsp;</p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की कृषि उपज मंडियों के आधुनिकीकरण के लिए देश के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) लखनऊ के साथ मिलकर काम करेगी। इसके लिए राज्य सरकार आईआईएम के साथ एक समझौता करने जा रही है। हाल ही में राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई यूपी एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड की एक बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में तय किया गया कि आईआईएम लखनऊ राज्य सरकार के नॉलेज पार्टनर की तरह काम करेगा और मंडियों के आधुनिकीकरण व इनके जरिये राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी के लिए जरूरी कदमों के लिए रोडमैप तैयार करेगा। इस समय राज्य में 250 अधिसूचित मंडियां हैं और 2018-19 में उनके जरिये हो कहे कृषि कारोबार का स्तर 67 हजार करोड़ रुपये रहा था।</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि राज्य सरकार ने मंडियों के आधुनिकीकरण का रोडमैप तैयार करने के लिए आईआईएम को साथ लेने का यह कदम उस समय उठाया जब देशभर में किसान तीन नये केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की भाजपा सरकार का दावा है कि उसके द्वारा लाये गये तीन नये कृषि कानून किसानों को एक नया मार्केटिंग विकल्प देंगे जो विभिन्न राज्यों द्वारा पहले से मौजूद एग्रीकल्चरल प्रॉड्यूस मार्केट कमेटी (एपीएमसी) कानून के तहत स्थापित मंडियों के अतिरिक्त होगा।</p>
<p>वहीं आंदोलनरत किसानों और विपक्षी दलों का कहना है कि नये कानून मंडी व्यवस्था को कमजोर करेंगे जो आने वाले दिनों में किसानों के नुकसानदेह साबित होंगे। वहीं कृषि उत्पादों की खरीद व्यवस्था और कारोबार में यह कानून बड़े कारपोरेट की भूमिका को मजबूत करेंगे।</p>
<p>उत्तर प्रदेश मंडी परिषद के डायरेक्टर जेपी सिंह का कहना है कि आईआईएम के साथ समझौते की शर्तों और नियमों को जल्दी ही अंतिम रूप दिया जाएगा। जिनके तहत तय होगा कि आईआईएम लखनऊ एक तय व्यवसायिक शुल्क के आधार पर बोर्ड को अपनी सलाह और सुझाव देगा। उन्होंने कहा कि आईआईएम लखनऊ में एग्री बिजनेस पर पहले से ही एक विभाग है और इसका फायदा हम दोनों को मिलेगा। हम आपसी सहमति के जरिये आपसी साझेदारी के नियम और शर्तें तय करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि &nbsp;मंडी परिषद के राजस्व में पिछले चार साल से लगातार बेहतर स्थिति बनी हुई है जो हमें आगे बढ़ने के लिए मजबूत आधार प्रदान करती है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के देश के सबसे बड़े खाद्यान्न और हार्टिकल्चर उत्पादन करने वाले राज्यों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां का कुल खाद्यान्न उत्पादन पांच करोड़ टन से अधिक है। राज्य के अधिकांश कृषि उत्पादों का विपणन अधिसूचित मंडियों के जरिये ही होता है। उत्तर प्रदेश मंडी परिषद ने आगामी वित्त वर्ष 2021-22 के लिए तीन हजार करोड़ रुपये का बजट बनाया है। इसमें 800 करोड़ रुपये के एक फंड के अलावा 845 करोड़ रुपये का निवेश मंडियों के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए चल रही परियोजनाओं और मंडियों के विस्तार पर किया जाएगा। बजटीय प्रावधान के आवंटन में आगामी रबी और खरीफ विपणन सीजन के दौरान राज्य में गेहूं और धान की सरकारी खरीद के लिए जरूरी वित्तीय संसाधनों को शामिल किया गया है। इसके अलावा मंडी परिषद वेयरहाउस, इंटीग्रेटेड पैक हाउसेज बनाने और पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन के साथ मंडियों में ढांचागत सुविधाओं को बेहतर करने पर भी व्यय करेगी। योगी आदित्यनाथ ने मंडी परिषद के पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह राज्य के किसानों के फायदे के लिए मंडियों में आधुनिक सुविधाएं बढ़ाने पर काम करें। साथ मौजूदा माहौल में मंडियां किस तरह से प्रतिस्पर्धी बनी रहें इसे ध्यान में रखकर संसाधनों का बेहतर तरीके से उपयोग करने की सलाह उन्होंने अधिकारियों को दी।</p>
<p>राजस्व में बढ़ोतरी के लिए राज्य सरकार की योजना मंडी परिसरों के व्यवसायिक उपयोग के लिए बढ़ावा देने की भी है। राज्य सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को हासिल करने पर काम कर रही है। इसके लिए अन्य कदमों के साथ सरकार ने &nbsp;साल 2024 तक राज्य से कृषि निर्यात को 35 हजार करोड़ रुपये पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मंडियों के आधुनिकीकरण की सरकार की योजना कृषि क्षेत्र के लिए ऐसा रोडमैप है जो राज्य में फार्म वैल्यू चेन को बढ़ावा देने और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विस्तार में सहायक साबित होगा। <br />योगी आदित्यनाथ सरकार ने साल 2018 में यूपी एग्रीकल्चर प्रॉड्यूस मार्केट कमेटी (एपीएमसी) एक्ट में संशोधन कर राज्य में प्राइवेट मंडियों के आपरेशन को अनुमति दे दी थी। इसके तहत प्राइवेट कंपनियां मौजूदा मंडियों के परिसरों के बाहर खरीद केंद्र स्थापित कर किसानों से सीधे उनके उत्पाद खरीद सकती हैं। सरकार ने कानून में यह बदलाव किसानों को उनके उत्पादों की खरीदारी के अधिक विकल्प देने और बेहतर कीमत मिलने की संभवनाओं को केंद्रित कर किये थे। &nbsp;<br /><br /><br /><strong><em>(वीरेंद्र सिंह रावत लखनऊ में काम करने वाले जर्नलिस्ट हैं। वह&nbsp; कृषि, इकोनॉमी, इंडस्ट्री , बजट और करेंट अफेर्स&nbsp; जैसे&nbsp; विषयों पर&nbsp; लिखते हैं )</em></strong></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आईआईएम लखनऊ की मदद से होगा यूपी की कृषि उपज मंडियों का आधुनिकीकरण ]]></media:description>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में लगातार तीसरे साल गन्ना मूल्य में कोई बढ़ोतरी नहीं]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/No-increase-in-sugarcane-price-for-the-third-consecutive-year-in-UP.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Mon, 15 Feb 2021 07:48:42 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/No-increase-in-sugarcane-price-for-the-third-consecutive-year-in-UP.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span style="font-size: 14pt;">केंद्र सरकार के तीन नये कृषि कानूनों खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के तीसरे महीने में प्रवेश करने के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार ने लगातार तीसरे साल गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। रविवार देर शाम मिली सूचना के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने&nbsp; गन्ना मूल्य पिछले पेराई सीजन के बराबर रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। पेराई सत्र 2020-21 में भी सामान्य प्रजाति के गन्ने का भाव 315 रुपये प्रति क्विंटल, अगेती प्रजाति के गन्ने का भाव 325 रुपये प्रति क्विटंल और अस्वीकृत प्रजाति के गन्ने का भाव 310 रुपये प्रति क्विंटल रहेगा। यह लगातार तीसरा साल है जब गन्ने का एसएपी नहीं बढ़ाया गया है।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt;">उत्तर प्रदेश सरकार के <strong>उच्च पदस्थ सूत्रों</strong> ने <strong>रूरल वॉयस</strong> को बताया कि चालू सीजन में भी गन्ने का दाम पिछले साल के बराबर रखने का फैसला मंत्रिमंडल ने लिया है, जिसकी अधिसूचना जल्दी ही जारी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता इस समय ज्यादा से ज्यादा गन्ना भुगतान कराने की है।&nbsp; कोरोना संकट के बावजूद हमने चीनी मिलें चलवाई गईं। पहले जहां 18 हजार करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा जाता था, अब करीब 36 हजार करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा जा रहा है। दाम नहीं बढ़ाने पर किसानों की नाराजगी के सवाल पर उक्त सूत्र का कहना है कि किसान भी इस बात को समझते हैं कि कोरोना के काल में चीनी मिलें चलना और गन्ना मूल्य का भुगतान होना अहम है। साथ ही हमने घटतौली पर भी अंकुश लगाया है। उनका कहना है कि चालू सीजन में पिछले साल के एसएपी के आधार पर भुगतान हो रहा है और बकाया ज्यादा नहीं है।</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt;">साल 2017 में उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद भारतीय जनता पार्टी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2017-18 के पेराई सत्र में गन्ने के दाम में 10 रुपये प्रति क्विटंल की बढ़ोतरी करते हुए अस्वीकृत, सामान्य और अगेती प्रजाति के गन्ने का दाम 310, 315 और 325 रुपये प्रति क्वविंटल तय किया था। इसे बाद 2018-19, 2019-20 और 2020-21 में गन्ने के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसे लेकर गन्ना किसानों में काफी नाराजगी है। पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन के फैलने के पीछे&nbsp; गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी न होना और उसकी घोषणा में देरी एक प्रमुख वजह रही है।</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt;">इस बारे में चीनी उद्योग के साथ <strong>रुरल वॉयस</strong> ने बात की तो राज्य में चीनी मिलों के संगठन <strong>यूपीइस्मा</strong> के पदाधिकारियों ने केवल यह कहा कि हम सरकार के आधिकारिक आदेश का इंतजार कर रहे हैं। उसके बाद ही हम कोई बयान दे सकते हैं।&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt;"><strong>गन्ना किसानों में नाराजगी&nbsp;</strong></span></p>
<p><span style="font-size: 14pt;">किसान आंदोलन में जोर पकड़ रहे गन्ना किसानों के मुद्दे को देखते हुए इस साल गन्ना मूल्य मेंबढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन पेराई सत्र शुरू होने के चार महीने बाद घोषित भाव से किसानों को निराशा ही हाथ लगी है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि यह सरकार की हठधर्मिता और किसान विरोधी रवैये का प्रमाण है कि इतने बड़े आंदोलन के बावजूद गन्ने का दाम नहीं बढ़ा है। इस मुद्दे पर आंदोलन तेज किया जाएगा।</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt;"><strong>चार महीने देरी से फैसला</strong><strong>, </strong><strong>नतीजा जीरो</strong></span></p>
<p><span style="font-size: 14pt;">हर साल गन्ना पेराई सीजन की शुरुआत अक्टूबर में होती है। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी तक गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य तय नहीं किया था। जिन पर्चियों के आधार पर किसान चीनी मिलों को गन्ना बेच रहे हैं, उन पर भाव की जगह शून्य लिखा है। यह मुद्दा किसान आंदोलन में भी खूब उठ रहा है। किसान नेता यह सवाल भी उठा रहे हैं कि जब गन्ना मूल्य में कोई इजाफा नहीं करना था तो घोषणा में चार महीने की देरी क्यों की गई। साथ ही गन्ना मूल्य को लेकर फैसला होने में भी देरी का रिकार्ड बन गया है। इसके पहले अखिलेश यादव सरकार में गन्ना का एसएपी जनवरी के तीसरे सप्ताह में घोषित किया गया था जो इस साल के पहले अभी तक का गन्ना एसएपी निर्धारण में सबसे देरी से किया गया फैसला था।</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt;"><strong>गन्ने दाम बढ़ाने में मायावती का मुकाबला नहीं&nbsp;</strong></span></p>
<p><span style="font-size: 14pt;">माना जा रहा है कि योगी सरकार अगले वर्ष चुनावी साल में गन्ने का दाम बढ़ाएगी। अखिलेश यादव की सरकार में भी पहले और आखिरी साल में गन्ने का दाम बढ़ाया गया था। हालांकि, अखिलेश यादव के समय गन्ना मूल्य में कुल 65 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई थी। </span></p>
<p><span style="font-size: 14pt;">गन्ने का दाम बढ़ाने के मामले में यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का रिकॉर्ड सपा और भाजपा से बेहतर है। मायावती के कार्यकाल में गन्ना मूल्य में कुल 115 रुपये क्विटंल की बढ़ोतरी हुई थी।</span><span style="font-size: 14pt;">&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt;">&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt;">&nbsp;</span></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में लगातार तीसरे साल गन्ना मूल्य में कोई बढ़ोतरी नहीं ]]></media:description>
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	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[आपदा की पूर्व चेतावनी तो दूर सीएम को भी सोशल मीडिया से पता चला!]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/cm-also-came-to-know-about-the-disaster-from-social-media.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Sun, 07 Feb 2021 18:07:19 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/cm-also-came-to-know-about-the-disaster-from-social-media.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रविवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे देश को सोशल मीडिया के जरिये उत्तराखंड के चमोली जिले में आए सैलाब की जानकारी मिली। भयानक जल प्रलय के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। पता चला कि जोशीमठ के पास तपोवन रैणी क्षेत्र में संभवत: ग्लेशियर टूटने या हिम-स्खलन से नदी में पानी का बहाव अचानक बहुत तेज हो गया है। इससे ऋषिगंगा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। वहां कम से कम 30 मजदूर लापता हैं। धौलीगंगा पर एनटीपीसी के निर्माणाधीन तपोवन पावर प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचा है। आपदा में लगभग 125 लोग लापता बताये जा रहे हैं। कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है।</p>
<p>फिलहाल राहत व बचाव कार्य जारी हैं। आईटीबीपी के जवानों ने बड़ी मशक्कत के बाद 16 लोगों को तपोवन सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि, दोपहर बाद कर्णप्रयाग में पानी के बहाव और जलस्तर की स्थिति से बाढ़ की सम्भावना कम हो गई है। लेकिन<span>&nbsp;</span><strong>इस आपदा ने चेतावनी प्रणाली की खामियों को उजागर कर दिया है।&nbsp;</strong>आपदा के बारे में प्रेस वार्ता करते हुए उत्तराखंड के<span>&nbsp;</span><strong>मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि खुद उन्हें इसकी जानकारी<span>&nbsp;</span>सुबह 11.20<span>&nbsp;</span>बजे सोशल मीडिया के माध्यम से मिली</strong>। मुख्यमंत्री का कहना है कि आपदा करीब 10.45 बजे आई और तुरंत राहत व बचाव का काम शुरू हो गया। वे खुद आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और राहत कार्यों को देखा।</p>
<p>चमोली आपदा के बारे में सुबह सवा 11 बजे से ही सोशल मीडिया पर वीडियो और मैसेज आने लगे थे। लेकिन उत्तराखंड सरकार की ओर से इस बारे में सूचनाएं करीब 11.30 बजे से आनी शुरू हुईं। हालांकि, राज्य और केंद्र सरकार के दल तुरंत मौके पर पहुंचकर आपदा में फंसे लोगों को बचाने में जुट गये। लेकिन इतनी बड़ी आपदा की जानकारी सरकार को भी सोशल मीडिया से मिलना समूचे आपदा प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है। जिस राज्य ने 2013 में केदारनाथ जैसी भीषण आपदा देखी है। जहां कई साल से आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, वहां आपदा की पहले से चेतावनी न मिलना कई सवाल खड़े करता है।</p>
<p>उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन और पब्लिक पॉलिसी के क्षेत्र में सक्रिय<span>&nbsp;</span><strong>अनूप नौटियाल</strong><span>&nbsp;</span>का कहना है कि हमें देखना चाहिए कि राज्य में आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली की क्या स्थिति है। ऐसी कोई प्रणाली है भी या नहीं। अगर है तो वह राज्य के किन क्षेत्रों और किस तरह की आपदाओं को कवर करती है। नौटियाल का कहना है कि आज जो एकमात्र चेतावनी प्रणाली कारगर रही वो सोशल मीडिया था, जिसने लोगों को अलर्ट किया। सैटेलाइट, राडार आदि से हमें कोई सूचना या चेतावनी नहीं मिली।</p>
<p><span>रविवार सुबह 11 बजे से ही चमोली आपदा के वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने शुरू हो गए थे। लेकिन आपदा को लेकर उत्तराखंड सरकार की ओर से <strong>पहली सूचना सुबह 11 बजकर 29 मिनट पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के ट्वीट</strong> के रूप में आई।&nbsp;</span><span>जिस चमोली में जिले आपदा आई, वहां के पुलिस-प्रशासन ने 11.42 बजे अलकनंदा नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सूचना दी। लगता है जिला प्रशासन भी सोशल मीडिया देखकर ही जागा। अगर राज्य सरकार की मानें तो आपदा 10.45 बजे आई, तब भी जिला प्रशासन सूचना देने में करीब एक घंटा लेट था। वैसे, कई स्थानीय लोगों का मानना है कि आपदा सुबह 10 बजे के आसपास आई। उत्तराखंड जनसंपर्क विभाग ने तो ट्विटर पर आपदा के बारे में पहली सूचना दोपहर 12.22 बजे जारी की।</span></p>
<p>चमोली आपदा के बारे में देहरादून स्थित <strong>वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी</strong> के पूर्व वैज्ञानिक और<span>&nbsp;</span><strong>भूगर्भशास्त्री डॉ. डीपी डोभाल</strong><span>&nbsp;</span>ने बताया कि ऐसा लगता है कि हिम-स्खलन (एवलांच) से <span>का मलबा जमा होने के कारण नदी का पानी इकट्ठा हुआ, जो किसी वजह से टूटकर बह गया।</span> क्योंकि वहां अभी न बारिश पड़ रही है और न ही बर्फबारी हो रही है, इसलिए यह पहले से जमा पानी हो सकता है। सटीक जानकारी पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही सामने आएगी।</p>
<p>इस <strong>आपदा की जानकारी पहले से क्यों नहीं मिल पाई?</strong> इस बारे में डॉ. डोभाल का कहना है कि चेतावनी प्रणाली भी वहीं कारगर है, जहां लोग आते-जाते रहते हैं और लगातार मॉनिटरिंग होती है। चमोली जिले के जिस तपोवन-रैणी इलाके में यह संभावित हिम-स्खलन हुआ, वह बहुत दुर्गम क्षेत्र है। इसलिए जब पानी का तेज बहाव आया, तभी आपदा की जानकारी मिल पायी। <strong>केंद्रीय जल आयोग</strong><span> </span>इस आपदा को<span>&nbsp;</span><strong>ग्लेशियर आउटबर्स्ट</strong><span>&nbsp;</span>का नतीजा मान रहा है। <span>इसमें ग्लेशियर पर एक झील बन जाती है, जिसके टूटने या फैलने से बाढ़ और मलबा तबाही मचाते हैं। </span> आयोग का कहना है कि जोशीमठ के पास अलकनंदा नदी का जलस्तर 2 घंटे में 16 मीटर तक उठा और फिर घंंटे भर में 11 मीटर तक आ गया।</p>
<p><span>चमोली आपदा के कारणों को लेकर भी अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। राज्य सरकार इसे एवलांच या ग्लेशियर टूटने की घटना मान रही है। चमोली पुलिस-प्रशासन का कहना है कि तपोवन रैणी क्षेत्र में ग्लेशियर आने के कारण नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। ग्लेशियर आने का क्या मतलब है? ग्लेशियर टूटना या फिर <strong>ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF)</strong>? ठंड में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट के दावे से कई जानकार सहमत नहीं हैं। 2013 में केदारनाथ त्रासदी के लिए भी <strong>ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड </strong>को वजह माना गया था।&nbsp;&nbsp;</span></p>
<p><span>आपदा के कारणों के बारे में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री <strong>त्रिवेंद्र सिंह रावत</strong> का कहना है कि इस बारे में विशेषज्ञ ही बता सकते हैं। फिलहाल उनका पूरा ध्यान लोगों का जीवन बचाने पर है। इस बीच, राहत की बात यह है कि अलकनंदा में आया उफान थमता दिख रहा है। शाम 7 बजे के आसपास पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर में अलकनंदा नदी खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही थी। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, ग्लेशियल लेक बर्स्ट का असर केवल जोशीमठ तक रहा।</span></p>
<p><span>आपदा के कारणों का पता लगाने के लिए डीआरडीओ के विशेषज्ञों का दल कल उत्तराखंड पहुंच रहा है। आपदा की वजह कुछ भी हो, मगर एक बात स्पष्ट है कि इस आपदा का पता लोगों को किसी चेतावनी प्रणाली से नहीं बल्कि सोशल मीडिया से चला। इससे आपदाओं में सोशल मीडिया की अहमियत और सरकारी सुस्ती का पता चलता है।</span></p>
<p></p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ आपदा की पूर्व चेतावनी तो दूर सीएम को भी सोशल मीडिया से पता चला! ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>a.arokianathan@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[कृषि कानूनों के विरोध में अभय सिंह चौटाला का हरियाणा विधान सभा  से इस्तीफा]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/inld-mal-abhay-singh-chautala-resigns-from-haryana-assembly-over-farm-laws.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 27 Jan 2021 22:55:57 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/inld-mal-abhay-singh-chautala-resigns-from-haryana-assembly-over-farm-laws.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला ने कृषि कानूनों के विरोध में हरियाणा विधान सभा से इस्तीफा&nbsp;&nbsp;दिया है। हरियाणा विधान सभा में ऐलनााबाद सीट से इनेलो के एकमात्र विधायक अभय चौटाला ने अल्टीमेटम दिया था कि अगर केंद्र सरकार ने 26 जनवरी तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं लिए तो वह किसानों के समर्थन में 27 जनवरी को हरियाणा विधानसभा की सदस्&zwj;यता से इस्तीफा दे देंगे।अभय चौटाला ने कहा कि वह प्रदेश भर में कृषि क़ानूनों और भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाएंगे। क़ानूनों को बनाने से पहले केंद्र सरकार ने किसान संगठनों से राय लेना जरूरी नहीं समझा। अभय चौटाला ने कहा कि सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचने के लिए जीएसटी में संशोधन कर सकती है, लेकिन किसानों की मांग होने के बावजूद कृषि कानूनों को रद नहीं किया जा रहा है। सरकार किसानों के साथ गलत कर रही है और मैं इसके खिलाफ हूं। उनके इस्तीफे को विधान सभा अध्यक्ष ज्ञान चंद ने स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि किसानों के समर्थन में मैंने विधान सभा से इस्तीफा दिया है और अगर सरकार किसानों की बात नहीं मानती तो मैं&nbsp; उनके साथ धरने पर बैठूंगा।</p>
<p>इस्तीफे के बाद पत्रकारों के साथ बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं किसानों के सबसे बड़े नेता चौधरी देवी लाल के वारिस होने का दावा करने वाले जेजेपी के विधायकों से कहता हूं कि वह हिम्मत दिखाएं और किसानों के हितों के लिए हरियाणा विधान सभा से इस्तीफा दें। अभय चौटाला के इस्तीफे से हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पर राजनीतिक दबाव बढ़ जाएगा क्योंकि पहले से ही राज्य के किसान उनके भाजपा के साथ सरकार में रहने की भारी आलोचना और मुखालफत कर रहे हैं।</p>
<p>करीब दो साल पहले इनेलो से टूट कर अभय के भाई अजय चौटाला और उनके बेटे दुष्यंत चौटाला ने अपनी अलग पार्टी जननायक जनता पार्टी(जजपा) बना ली थी। 2019 के विधानसभा चुनाव में जजपा के खाते में 10 सीटें आई जबकि इनेलो एक सीट पर सिमट कर रह गई। 2014 के विधानसभा चुनाव में 20 सीटें जीतकर विपक्ष के नेता की भूमिका में रहे अभय चौटाला मौजूदा हरियाणा विधानसभा में इनेलो के अकेले विधायक थे । जबकि जजपा भाजपा के साथ गठबंधन में सरकार की प्रमुख भागीदार है। जजपा नेता दुष्यंत चौटाला उपमुख्यमंत्री के तौर पर सरकार में नंबर दो की भूमिका में हैं। किसान आंदोलन के मुद्दे पर जजपा पर भी इसके बागी विधायकों का सरकार से समर्थन वापस लेने का दबाव बना हुआ है। देवी लाल की किसानी सियासी विरासत को आगे बढ़ाने का दावा करने वाली जजपा के नेता उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का हरियाणा की तमाम खाप पंचायतों ने किसान आंदोलन मसले पर बहिष्कार किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संकट के समय किसानों से दूरी बनाए रखना जजपा की ग्रामीण सियासत पर भारी पड़ सकता है और इसका खामियाजा भाजपा जजपा गठबंधन सरकार को आगामी ग्राम पंचायत चुनाव में भारी हार के रूप में भुगतना पड़ सकता है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ कृषि कानूनों के विरोध में अभय सिंह चौटाला का हरियाणा विधान सभा  से इस्तीफा ]]></media:description>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[लॉकडाउन का माइक्रोफाइनेंस बिजनेस पर असर जारी, 7 फीसदी घटे ग्राहक]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/impact-on-microfinance-business-in-lockdown.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 12 Jan 2021 05:12:21 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/impact-on-microfinance-business-in-lockdown.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>क्रेडिट ब्यूरो सीआरआईएफ हाई मार्क ने त्रैमासिक रिपोर्ट सीआरआइएफ माइक्रोलेंड के 13वें संस्करण को जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2020 तक माइक्रो फाइनेंस का आकार 224 हजार करोड़ रुपये था। लॉकडाउन की वजह से जून 2020 के बाद से पोर्टफोलियो में गिरावट जारी है और इसमें 1.15 फीसदी की और गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, सालाना आधार पर इसमें 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2020 की दूसरी तिमाही में सक्रिय ग्राहकों की संख्या में 7 फीसदी की कमी आई और इनकी संख्या घटकर करीब 5.7 करोड़ रह गई। वहीं ऐक्टिव लोन बेस में भी करीब 1.5 फीसदी की कमी आई और सक्रिय लोन की संख्या 10.5 करोड़ रह गई।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पिछले साल की दूसरी तिमाही के मुकाबले इस बार (लोन) वैल्यू और वॉल्यूम दोनों में 50 फीसदी की गिरावट आई। वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही में माइक्रोफाइनेंस लोन का औसत आकार 34.7 हजार रुपये रहा। कर्ज के शुरुआती भुगतान में चूक (1-30 DPD) की दर 15.7 फीसदी रही, जो माइक्रोफाइनेंस कारोबार के संचालन में लॉकडाउन के बाद सामान्य हुई स्थिति बहाल होने के बाद हुई बढ़ोतरी को दर्शाता है। सितंबर 2020 तक शीर्ष 10 राज्यों की राष्ट्रीय जीएलपी (सकल कर्ज पोर्टफोलियो) में 83 फीसदी हिस्सेदारी रही। पिछली तिमाही के मुकाबले इस सेक्टर का क्षेत्रीय वितरण कमोबेश समान ही रहा। 34.7 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ पूर्वी क्षेत्र का इस सेक्टर में दबदबा रहा। इसके बाद 26.3 फीसदी की हिस्सेदारी दक्षिणी क्षेत्र की, 14.6 फीसदी हिस्सेदारी पश्चिमी क्षेत्र, सेंट्रल रीजन की हिस्सेदारी 7.7 फीसदी हिस्सेदारी और पूर्वोत्तर क्षेत्र की हिस्सेदारी 6.9 फीसदी रही। हालांकि, पूर्वोत्तर क्षेत्रों को छोड़कर सभी क्षेत्रों के सकल कर्ज पोर्टफोलियो यानी जीएलपी में गिरावट आई। पूर्वोत्तर क्षेत्र के सकल कर्ज पोर्टफोलियो में पिछली तिमाही के मुकाबले 2 फीसदी की तेजी आई।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पूर्वी क्षेत्र में बैंकों की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी रही और इसके बाद दक्षिणी भौगोलिक क्षेत्रों में यह हिस्सेदारी बेहद कम 14 फीसदी दर्ज की गई। सितंबर 2020 तक दक्षिणी और पूर्वी क्षेत्रों में गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थान और सूक्ष्म वित्त संस्थाओं (एनबीएफसी एमएफआई) की हिस्सेदारी करीब-करीब बराबर यानी क्रमश: 29 फीसदी और 28 फीसदी रही। वहीं सूक्ष्म वित्तीय बैंकों (SFB) का पोर्टफोलियो दक्षिणी क्षेत्र में काफी मजबूत रहा। इस क्षेत्र के कुल बाजार में उनकी हिस्सेदारी 41 फीसदी रही।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राष्ट्रीय जीएलपी (सकल कर्ज पोर्टफोलियो) के मुकाबले 15 फीसदी की हिस्सेदारी के साथ पिछली तिमाही के मुकाबले सितंबर 2020 में पश्चिम बंगाल शीर्ष पायदान पर रहा। तमिलनाडु 14 फीसदी की हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर जबकि बिहार की इस क्षेत्र में हिस्सेदारी 11 फीसदी दर्ज की गई। तिमाही आधार पर बंगाल में वृद्धि दर 2.2 फीसदी रही, जबकि तमिलनाडु और बिहार में वृद्धि दर क्रमश: 1.6 फीसदी और 2.9 फीसदी दर्ज की गई।&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>शीर्ष 10 राज्यों में लोन मोराटोरियम की अवधि खत्म होने के बाद भुगतान की स्थिति दबाव में दिखा है। पीएआर 1-30 डीपीडी के आधार पर देखा जाए तो 31.2 फीसदी के साथ पश्चिम बंगाल की स्थिति ज्यादा तनाव में दिखी वहीं, असम में यह प्रतिशत 27.3 फीसदी रहा। महाराष्ट्र और बिहार में 17.5 फीसदी के साथ पीएआर 1-30 डीपीडी की स्थिति ऊच्च दिखी, जो ओडिशा के 18.9 फीसदी से थोड़ा ही कम रहा। असम में सूक्ष्म वित्त कर्ज खातों पर ज्यादा दबाव दिखा। यहां पीएआर 31-180 15 फीसदी के स्तर पर चला गया। वहीं उत्तर प्रदेश में पीएआर 31-180 डीपीडी एक फीसदी पर रहा। पीएआर 180(+) महाराष्ट्र में अधिकतम रहा और यहां ऐसे मामलों की संख्या कुल पोर्टफोलियो की 7.4 फीसदी रही, जबकि कर्नाटक में यह प्रतिशत 5.1 और असम में ऐसे मामलों का प्रतिशत 4.7 फीसदी रहा।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ लॉकडाउन का माइक्रोफाइनेंस बिजनेस पर असर जारी, 7 फीसदी घटे ग्राहक ]]></media:description>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[यूपी में गन्ना किसानों को न दाम का पता, न भुगतान का]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/Sugar-farmers-are-in-crisis-in-uttar-pradesh.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 06 Jan 2021 12:31:57 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/Sugar-farmers-are-in-crisis-in-uttar-pradesh.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p>उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य के गन्ना किसानों के लिए नये कीर्तिमान बनाने के दावे कर रही है। राज्य की 120 चीनी मिलों को चालू सीजन (अक्तूबर,2020 से सितंबर, 2021) के लिए पेराई शुरू किये हुए दो माह से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन उत्तर प्रदेश के करीब 40 लाख गन्ना किसानों को अभी तक न तो यह पता है कि इस सीजन में उन्हें गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) कितना मिलेगा और न ही यह पता कि उसे भुगतान कब होगा। यही नहीं सरकार के तमाम दावों के उलट राज्य के कुछ किसानो का पिछले सीजन का भी करीब 40 फीसदी तक गन्ना मूल्य भुगतान बकाया है। यह स्थिति तब है जिस न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी बनाने के &nbsp;लिए पिछले 40 दिन से अधिक समय से लाखों किसान दिल्ली के बार्डरों पर आंदोलन कर रहे हैं जबकि गन्ने के मामले में फेयर एंड रिम्यूनेरेटिव प्राइस (एफआरपी) की कानूनी गारंटी पहले से ही है और इसके भुगतान की भी आपूर्ति के 14 दिन बाद अनिवार्यता है। उसके बाद बकाया पर ब्याज भुगतान का प्रावधान है। इसके पहले उत्तर प्रदेश में एसएपी की घोषणा में सबसे अधिक देरी अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व वाली सरकार में हुई थी जब &nbsp;2016 में 18 जनवरी को एसएपी की घोषणा की गई थी। है। अभी तक चीनी मिलों को किसानों द्वारा गन्ना की जो आपूर्ति की जा रही है उसकी पर्ची पर न तो गन्ने का एसएपी लिखा जा रहा है और न ही आपूर्ति किये गये गन्ने का कुल मूल्य।</p>
<p>वैसे अखिलेश यादव सरकार और मौजूदा योगी आदित्यनाथ सरकार में गन्ना किसानों के मामले में कई समानताएं हैं। मसलन अखिलेश सरकार ने पांच साल के कार्यकाल में केवल दो बार गन्ना के एसएपी में बढ़ोतरी की थी और तीन साल उसे फ्रीज रखा था। उसी तरह योगी सरकार ने भी पिछले तीन सीजन में केवल एक बार मात्र 10 रुपये प्रति क्विटंल&nbsp; बढ़ोतरी की है और चौथे सीजन के एसएपी की घोषणा का अभी तक इंतजार है। इसके अलावा अखिलेश यादव सरकार ने देरी से गन्ना मूल्य भुगतान पर चीनी मिलों द्वारा दिये जाने वाले ब्याज को &lsquo;जनहित&rsquo; में माफ कर दिया था। वहीं मौजूदा योगी सरकार न्यायालय के आदेश के बावजूद अभी तक किसानों को देरी से हुए गन्ना भुगतान पर चीनी मिंलों से ब्याज नहीं दिलवा पाई है।</p>
<p>यह स्थिति तब है राज्य सरकार गन्ना किसानों के हित में कदम उठाने के दावे करते नहीं थकती है। लेकिन इस समय उसकी चिंता कुछ दूसरी भी है। सूत्रों के मुताबिक यह चिंता केंद्र &nbsp;सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ &nbsp;40 दिन से अधिक समय से दिल्ली के बार्डरों पर चल रहा किसान आंदोलन है। इनमें दिल्ली- उत्तर प्रदेश का गाजीपुर बार्डर पर चल रहा आंदोलन भी शामिल है। राज्य सरकार को आशंका है कि अगर दाम में बढ़ोतरी नहीं की गई या कम बढ़ोतरी की गई तो किसानों के आंदोलन में गन्ना मुख्य मुद्दा बन सकता है क्योंकि उत्तर प्रदेश के अधिकांश किसानों के लिए गन्ना सबसे अहम फसल है और तीन साल से एसएपी न बढ़ने का मामला गरमा सकता है। इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार आंदोलन के परिणाम को देखना चाहती है। वैसे यह आंदोलन लंबा खिंच रहा है और ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार के पास एसएपी पर फैसला टालने का बहुत अधिक समय नही है। हालांकि आंदोलन में अब इस मुद्दे पर सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि सरकार अगर दाम नहीं बढ़ाती है तो लखनऊ में भी आंदोलन होगा। इसके अलावा 8 जनवरी के बाद गांव-गांव जनजागरण के कार्यक्रम में गन्ना का मुद्दा लोगों के बीच ले जाया जाएगा। वैसे भी गाजीपुर धरने में आये अधिकांश किसान गन्ना उत्पादक किसान हैं और उनमें एसएपी में बढ़ोतरी नहीं होने और भुगतान में देरी को लेकर भारी गुस्सा है। यह चौथा सीजन है जब उत्तर प्रदेश में गन्ने का एसएपी 325 रुपये प्रति क्विटंल है जबकि पिछले दिनों ही पड़ोसी राज्य हरियाणा ने इसे बढ़ाकर 350 रुपये प्रति क्विटंल कर दिया है।</p>
<p>राज्य सरकार के गन्ना आयुक्त कार्यालय के मुताबिक 1 जनवरी, 2021 तक 317.43 लाख टन गन्ने की खरीद की गई थी। जो पूरे साल में होने वाली पेराई की करीब एक तिहाई है। ऐसे में करीब 35898 करोड़ रुपये के पिछले सीजन (2019-20) के कुल गन्ना खरीद मूल्य&nbsp; को आधार बनाया जाए तो पुराने एसएपी पर ही इस गन्ने का मूल्य दस हजार करोड़ रुपये&nbsp; से अधिक बैठता है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक पिछले सीजन का 2470 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया है। हालांकि गन्ना आयुक्त कार्यालय गन्ना मूल्य बकाया के आंकड़े जारी नहीं कर रहा है। इसकी वजह दाम का तय नहीं होना है ऐसे में बकाया की गणना व्यवहारिक नहीं है। हालांकि चालू सीजन के लिए चीनी मिलों ने भुगतान जरूर शुरू किया है। चीनी उद्योग के सूत्रों ने <strong>रुरल वॉयस</strong>&nbsp; को बताया कि हम पिछले सीजन के दाम के आधार पर भुगतान कर रहे है और अधिकांश मिलों ने 30 फीसदी तक भुगतान कर दिया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक चालू सीजन में 5 जनवरी, 2021 तक केवल 2427 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है जबकि आपूर्ति किये गये गन्ने का मूल्य पिछले साल की कीमत पर ही करीब 11 हजार करोड़ रुपये बैठता है।</p>
<p>बागपत जिले की मलकपुर चीनी मिल में गन्ना आपूर्ति करने वाले छपरौली के किसान रणबीर सिंह ने <strong>रुरल वॉयस</strong> को बताया कि उनका पिछले सीजन का करीब आधा गन्ना मूल्य भुगतान बकाया है। इस साल हमें क्या दाम मिलेगा इसको लेकर हम पूरी तरह&nbsp; अंधेरे में हैं। दूसरी ओर पिछले तीन साल में&nbsp; सरकार ने बिजली की दरों में करीब दो गुना की बढ़ोतरी की है, डीजल के दाम डेढ़ गुना से ज्यादा बढ़ गये हैं, उर्वरकों के दाम बढ़े हैं, मजदूरी बढ़ी है। इसका सीधा असर गन्ना उत्पादन लागत पर आया है। लेकिन इसके बावजूद गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी न होने से&nbsp; हमारी आर्थिक स्थिति पर कितना प्रतिकूल असर पड़ रहा है यह हम ही समझ सकते हैं।</p>
<p>राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष और एआईकेएससीसी के संयोजक वी एम सिंह <strong>रुरल वॉयस</strong> से &nbsp;कहते हैं कि न्यायालय के निर्देश के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को देरी से होने वाले भुगतान पर चीनी मिलों से ब्याज का भुगतान नहीं करा पा रही है। इसके पहले अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी सरकार ने गन्ना भुगतान के बकाया पर ब्याज के भुगतान को चीनी मिलों पक्ष में माफ कर दिया था और अब तीन साल बीत जाने के बाद भी भाजपा सरकार किसानों को उनका हक नहीं दिलवा पा रही है। हम न्यायालय के जरिये किसानों को चीनी मिलों से ब्याज का भुगतान करा कर रहेंगे। अब कोर्ट खुल रहे हैं और हम वहां पर दोबारा जाएंगे।</p>
<p>पश्चिमी उत्तर प्रदेश किसानों के लिए कृषि बिलों की तरह ही गन्ना मूल्य का मुद्दा अहम है। जिस तरह से आंदोलन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानो की शिरकत बढ़ रही है उसी तेजी&nbsp; के साथ गन्ना मूल्य और बकाया भुगतान में देरी का मुद्दा गरमाता जा रहा है। आने वाले दिनों में दिल्ली के आंदोलन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की तादाद और बढ़ सकती है। खास बात यह है कि राज्य के चीनी&nbsp; उद्योग और गन्ना विकास मंत्री पश्चिमी उत्तर प्रदेश की शामली जिले की थानाभवन विधान सभा से विधायक हैं। उनकी विधान सभा में स्थित थानाभवन चीनी मिल और शामली जिले की बाकी मिलों ने अभी तक पिछले साल का पूरा भुगतान नहीं किया है। जो उनकी इस मुद्दे पर उदासीनता का संकेत है। शामली जिले के किसान जीतेंद्र सिंह हुड्डा कहते हैं कि पिछले तीन साल में लागत बढ़ती जा रही है लेकिन गन्ना का एसएपी नहीं बढ़ रहा है ऊपर से&nbsp; भुगतान में देरी से हम लोगों की वित्तीय हालत खराब होती जा रही है। अगर सरकार इस साल दाम में अधिक बढ़ोतरी नहीं करती है तो इसे किसानों की नाराजगी का सामना करना पड़ेगा। वहीं आने वाले दिनों में पंचायत चुनावों में भाजपा को इस नाराजगी का असर दिखेगा। वैसी ही तीन कानूनों का विरोध हम लोग कर रहे हैं ऐसे में सरकार को गन्ना के मुद्दे पर भी नाराजगी झेलनी पड़ेगी।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ यूपी में गन्ना किसानों को न दाम का पता, न भुगतान का ]]></media:description>
	<media:credit role='author' scheme='urn:ebu'>Rural Voice</media:credit>
	</media:content>
	
        
        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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    </item>

    <item>
        <title><![CDATA[छत्तीसगढ: मंडी एक्ट में बदलाव कर भूपेश बघेल ने चला दांव, राज्यपाल के पाले में गेंद]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/Chhattisgarh-government-changed-the-mandi-act.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Wed, 23 Dec 2020 08:18:17 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
        <guid>https://www.ruralvoice.in/states/Chhattisgarh-government-changed-the-mandi-act.html</guid>
        <description><![CDATA[ <p><strong>रायपुर से रवि भोई</strong></p>
<p>छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने केंद्र के तीन कृषि कानूनों की काट के लिए अक्टूबर महीने में ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर मंडी संशोधन विधेयक लाकर किसानों का दिल जीतने और अपने पाले में करने की रणनीति अपना ली। राजभवन में विधेयक के अटकने से सरकार की मंशा पर सवाल भी उठाने लगे हैं। वैसे भी राज्य के किसानों से सरकार समर्थन मूल्य से करीब साढ़े छह सौ अधिक मूल्य देकर धान की खरीदी कर रही है। 2500 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने वाला छत्तीसगढ़ का देश में एकमात्र राज्य है। धान का अधिकतम मूल्य मिलने से किसान गदगद हैं , यही वजह है कि मोदी सरकार के कृषि कानूनों में बदलाव के खिलाफ किसानों के गुस्से की आंच दिखाई नहीं पड़ रही है। जरूर कुछ किसान संगठन और कम्युनिस्ट पार्टी के लोग राष्ट्रीय स्तर के किसान आंदोलन से जुड़कर बिगुल बजा रहे हैं।</p>
<p>कृषि वैज्ञानिक&nbsp; डॉ. संकेत ठाकुर का मानना है कि केंद्र के नए कृषि कानून लागू होते हैं तो उसका प्रभाव तो यहां निश्चित रूप से पड़ेगा , भले अभी किसानों को यह समझ में नहीं आ रहा है। भूपेश बघेल सरकार द्वारा लाए गए नए मंडी कानून से केंद्र के नए कृषि कानून निष्प्रभावी नहीं होने वाले हैं, उलटे भूपेश सरकार ने डीम्ड मंडी की बात कर मोदी सरकार के कृषि कानून का एकतरह से समर्थन कर दिया है।&nbsp; छत्तीसगढ़&nbsp; सरकार ने कृषि उपज मंडी कानून में बदलाव कर विधानसभा में विधेयक&nbsp; पारित कर&nbsp; राज्यपाल को भेज दिया है। मगर&nbsp; राज्यपाल अनुसूईया उइके के पास विधेयक अटका हुआ है।&nbsp; राज्यपाल के&nbsp; हस्ताक्षर के बाद ही कानून बनेगा। छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे कहते हैं राज्य के मंडी कानून में प्रस्तावित संशोधन से गरीबों, मजदूरों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हो सकेगी। उनका कहना है -केंद्र सरकार के नए कानूनों से कृषि व्यवस्था में पूंजीपतियों का नियंत्रण बढ़ जाएगा। इसकी वजह से महंगाई बढ़ने, समर्थन मूल्य में धान खरीदी और सार्वभौमिक वितरण प्रणाली के प्रभावित होने की आशंका है।</p>
<p>छत्तीसगढ़ में नए कानून में सरकार ने निजी मंडियों, गोदामों और खाद्य प्रसंस्करण कारखानों को डीम्ड मंडी घोषित करने का प्रावधान कर दिया है। इस नई व्यवस्था से निजी मंडियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ जाएगा। सरकार की कोशिश है कि जहां कहीं भी कृषि उपजों की खरीद बिक्री हो, वहां मंडी कानून लागू हो ताकि किसानों को धोखाधड़ी से बचाया जा सके। कृषि वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर का कहना है छत्तीसगढ़ का विधेयक राज्य सरकार को निजी मंडियों से टैक्स वसूलने, जांच करने, रिकार्ड देखने, लेखा-जोखा की जांच करने के बहाने सरकारी छापा मारने का अधिकार देता है, लेकिन किसानों को किसी भी तरह के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपज विक्रय की कोई गारंटी नहीं देता। यह कांट्रैक्ट फार्मिंग को औपचारिक स्वरूप देता है। जिन तीन कानूनों की खिलाफत मुख्यमंत्री कर रहे हैं उन तीनों पर यह विधेयक मौन है और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भी इसी तरह चुप्पी बरकरार है। इससे छत्तीसगढ़ के किसानों को कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है। छत्तीसगढ़ किसान-मजदूर महासंघ के तेजराम विद्रोही, रूपन चंद्राकर, जुगनू चंद्राकर का कहना है छत्तीसगढ़ को पंजाब की तर्ज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य में खरीदी को लेकर एक कड़ा कानून लाया जाना चाहिए था, पंजाब के कानून में एमएसपी से कम की खरीदी पर संबंधित व्यापारिक प्रतिष्ठान, कारपोरेट और मंडी अधिकारियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का प्रावधान होता।</p>
<p>छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच के अध्यक्ष राजकुमार गुप्त का कहना है न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी न देकर सरकार ने किसानों की भावनाओं को आहत किया है। मंच ने न्यूनतम मूल्य की स्पष्ट गारंटी देने वाले कानूनी प्रावधानों की मांग की है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है संसद में जो कानून पारित होता है तो समवर्ती सूची वाले विषयों पर केंद्र का कानून ही मान्य होगा, हम उसे टच नहीं कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि उन कानूनों से छत्तीसगढ़ के किसानों का नुकसान न हो। बहरहाल छत्तीसगढ़ में मंडी कानून संशोधन विधेयक लाए जाने केंद्र के कानून से हटकर चलने की मंशा सरकार ने जाता दी है। राज्य के भाजपा नेता केंद्र के कृषि कानून से किसानों को किसी तरह का नुकसान न होने की बात कर रहे हैं।&nbsp; छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता अशोक बजाज का कहना है केंद्र के नए कृषि कानून लागू होने के बाद नई पीढ़ी खेती की तरफ आकर्षित होंगे।&nbsp; इस कानून से किसानों को किसी प्रकार की हानि नहीं होगी।&nbsp;</p>
<p>किसान नेता वीरेंद्र पांडे कहते हैं केंद्र सरकार नए कानून के जरिए लोगों को भ्रमित&nbsp;&nbsp; कर रही है।&nbsp; किसानों को न्यूनतम मूल्य की गारंटी मिलनी चाहिए। अभी भी किसानों को खुले बाजार में बिक्री की छूट है। श्री पांडे का कहना है कि भाजपा शासित हरियाणा और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ही अपने राज्य में दूसरे राज्यों की फसल को लाने के खिलाफ बोल रहे हैं , तो फिर ओपन मार्केट का लाभ किसानों को कैसे मिलेगा ? किसान नेता ललित चन्द्रनाहू का कहना है राज्य के किसान अभी भले कुछ नहीं बोल रहे हैं, लेकिन कानून के लागू होने से समस्या आएगी।&nbsp; छत्तीसगढ़ किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता का कहना है केंद्र के कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन अलग-अलग रूपों में चलता रहेगा। दोनों का आरोप है कि कारपोरेट के कहने पर ही केंद्र सरकार ने यह कानून लाया है।&nbsp;</p>
<p>छत्तीसगढ़ में केंद्र के कृषि कानून को लेकर भले बवाल नहीं मचा है, पर कुछ संगठन और लोग राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे आंदोलन के साथ खड़े दिख रहे हैं।&nbsp; आंदोलन के चलते जान देने वालों की याद और सम्मान में दीये और मोमबत्ती जलाने के अलावा जुलुस भी निकाला गया।&nbsp; छत्तीसगढ़ में किसान आंदोलन की नींव तो पड़नी शुरू हो गई , पर आम किसान की जगह राजनीतिक ज्यादा दिखती है।&nbsp; असल किसान खड़े होंगे तब वास्तविकता सामने आएगी।</p>
<p></p>
<p><strong>मंडी संशोधन विधेयक में क्या है&nbsp; प्रावधान</strong></p>
<ul>
<li>राज्य सरकार कृषि उपज के क्रय-विक्रय, प्रसंस्करण या विनिर्माण, कोल्ड स्टोरेज, साइलोज, भण्डागार, इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग तथा लेन-देन प्लेटफार्म और ऐसे अन्य स्थान अथवा संरचनाओं को डीम्ड मंडी घोषित कर सकेगी।</li>
<li>मण्डी समिति का सचिव या बोर्ड या मण्डी समिति का कोई भी अधिकारी या सेवक और राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अधिकारी या सेवक, किसी ऐसे व्यक्ति से, जो किसी भी किस्म की अधिसूचित कृषि उपज का व्यापार करता हो उसके रजिस्टर और व्यापार से जुड़े दस्तावेज मांग सकता है।</li>
<li>ऐसे अधिकारी व्यापारी के कार्यालय, व्यापार के स्थान, भण्डागार, स्थापना, प्रसंस्करण या विनिर्माण इकाई या वाहनों का निरीक्षण कर सकेंगे।</li>
<li>ऐसे अधिकारी को अगर संदेह है कि संबंधित व्यापारी ने निर्धारित प्रारूप में लेखे एवं दस्तावेज नहीं रखे हैं अथवा गलत लेखा रख रहा है तो दस्तावेजों को जब्त कर सकेगा।</li>
<li>ऐसा अधिकारी किसी भी व्यापार के स्थान, भण्डागार, कार्यालय, स्थापना, गोदाम, प्रसंस्करण या विनिर्माण इकाई या वाहन में, जिसके संबंध में ऐसे अधिकारी या सेवक के पास यह विश्वास करने का कारण हो कि उनमें ऐसा व्यक्ति अपने व्यापार के लेखे, रजिस्टर या दस्तावेज, प्रारूप या अपने व्यापार के संबंध में अधिसूचित कृषि उपज के स्टॉक रखता है या उस समय रखा है में तलाशी ले सकेगा।</li>
<li>अधिसूचित कृषि उपज के क्रय-विक्रय से संबंधित लेखा पुस्तकें या अन्य दस्तावेज, प्रारूप गलत पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के विरूद्ध सक्षम अधिकारी वाद दायर कर सकेगा।</li>
<li>राज्य सरकार, अधिसूचित कृषि उपज के विक्रय में कृषकों को अपने उत्पाद को स्थानीय मंडी के साथ-साथ प्रदेश की अन्य मंडियों तथा अन्य राज्यों के व्यापारियों को गुणवत्ता के आधार पर पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से बेचकर बेहतर कीमत प्राप्त करने तथा समय पर आनलाईन भुगतान हेतु इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफार्म की स्थापना कर सकेगी।</li>
<li>लेखा-पुस्तकें या अन्य दस्तावेज, प्रारूप में संधारित मात्रा से अधिक या कम अधिसूचित कृषि उपज रखता हो, तो वह दोष सिद्धि पर 3 महीने का कारावास अथवा पांच हजार रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों से दंडित होगा.दोबारा ऐसा होने पर छह महीने का कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान होगा।</li>
</ul>
<p>&nbsp;</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ छत्तीसगढ: मंडी एक्ट में बदलाव कर भूपेश बघेल ने चला दांव, राज्यपाल के पाले में गेंद ]]></media:description>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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        <title><![CDATA[उधार के ‘अच्छे दिन’]]></title>
        <link><![CDATA[https://www.ruralvoice.in/states/किसानों-का-भ्रुगतान-लटकाए-रखकर-चीनी-मिलें-ब्याज-मुक्त-पूंजी-के-बिजनेस-मॉडल-पर-अच्छे-दिन-का-मजा-ले-रही-हैं-और-सरकार-भी-बेफिक्र-है.html]]></link>
		<pubDate><![CDATA[ Tue, 15 Dec 2020 07:55:30 GMT]]></pubDate>
		<category>states</category>		
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        <description><![CDATA[ <p>देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में चीनी उद्योग संगठन के एक पदाधिकारी के मुताबिक<span>, </span>चीनी मिलों ने किसानों का पिछले साल का लगभग पूरा भुगतान कर दिया है। केवल चुनिंदा चीनी मिलों ने ही अभी तक पूरा भुगतान नहीं किया है<span>, </span>जिनका रिकॉर्ड लगातार खराब रहा है। हां<span>, </span>इस साल के भुगतान में काफी तेजी है। संगठन के एक प्रतिनिधि की इस लेखक के साथ <span>14</span> मार्च की बातचीत से तो यही लगता है कि <span>&lsquo;</span>अच्छे दिन<span>&rsquo; </span>आ गए। बकौल उनके<span>, </span>इस साल करीब <span>59</span> फीसदी गन्ना मूल्य का भुगतान <span>13</span> मार्च तक हो गया। लेकिन ध्यान से देखेंगे तो तसवीर उलट जाती है। सच्&zwj;चाई यह है कि पिछले पेराई सीजन यानी अक्तूबर <span>2018</span> से सितंबर <span>2019</span> के लिए किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान फरवरी <span>2020</span> तक ही अधिकांश चीनी मिलें कर सकीं। अभी उस साल का <span>278.81</span> करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। राज्य में चीनी मिलें अप्रैल-मई में ही बंद हो जाती हैं। गन्ना आपूर्ति के <span>14</span> दिन के भीतर भुगतान का कानून है<span>, </span>उसके बाद इस पर ब्याज देय होता है लेकिन किसान भुगतान मिल जाने को गनीमत मानता है।</p>
<p>अब बात <span>2019-20</span> के चालू पेराई सीजन की। यह सीजन अक्तूबर <span>2019</span> में शुरू हुआ और सितंबर <span>2020</span> तक चलेगा। चीनी मिलें अप्रैल-मई में ही बंद होने लगेंगी। चीनी के लिए न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था लागू होने<span>, </span>दुनिया के बाजार में चीनी की खपत उत्पादन से अधिक होने के चलते कीमतों में सुधार और निर्यात पर सब्सिडी देने के साथ ही सरकार ने <span>40</span> लाख टन चीनी का बफर स्टॉक भी बना रखा है जिसके भंडारण और ब्याज का खर्च सरकार उठाती है। उसके बाद भी चीनी मिलों पर <span>13</span> मार्च<span>, 2020</span> तक गन्ना किसानों का <span>9,053.25</span> करोड़ रुपये का बकाया है। वैसे<span>, </span>यह <span>14</span> दिन पहले तक का बकाया है यानी इन <span>14</span> दिनों में जो गन्ना आपूर्ति हुई है<span>, </span>उसे जोड़ने पर आंकड़ा इससे अधिक रहेगा।</p>
<p>&nbsp;दूसरे पिछले दो साल में राज्य की योगी सरकार ने गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) नहीं बढ़ाया है। सरकार जल्दी ही तीन साल पूरे होने का जश्न मनाएगी लेकिन राज्य के करीब <span>45</span> लाख गन्ना किसानों के लिए तीन साल की उपलब्धियों में कोई जगह नहीं होगी। ऐसा कौन-सा कारोबार है जिसमें तीन साल बिना कोई कीमत बढ़े फायदा हो सकता है जबकि खाद<span>, </span>बीज<span>, </span>बिजली और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं। ऊपर से किसानों को उनके गन्ने का भुगतान के लिए आठ से दस माह तक का इंतजार करना पड़े।</p>
<p>असल में यही वह उधार का अर्थशास्त्र है जो चीनी मिलों के लिए अच्छे दिन लेकर आता है। बाजार में कीमतों में कमी के नाम पर केंद्र सरकार पर दबाव बनाकर तमाम सहूलियतें ली गईं। राज्य सरकार को गन्ने के एसएपी में बढ़ोतरी नहीं करने के लिए मनाया गया। गन्ना किसानों को भुगतान नहीं करके कच्चे माल को लंबे समय तक उधार की तरह इस्तेमाल किया गया। इस उधार पर&nbsp; ब्याज भी नहीं देना पड़ता। अगर इस साल के नौ हजार करोड़ रुपये के लिए चीनी मिलों को बैंकों से कर्ज लेना पड़ता तो आप समझ सकते हैं कि ब्याज का कितना बोझ पड़ता।</p>
<p>वैसे<span>, </span>चीनी मिलों को <span>14</span> दिन के भीतर भुगतान न करने पर ब्याज देना होता है। इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। इलाहाबाद हाइकोर्ट ने ब्याज देने का आदेश भी दे दिया। राज्य सरकार के गन्ना आयुक्त कार्यालय ने इसकी गणना भी की। पूर्ववर्ती अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी सरकार के समय ब्याज की राशि दो हजार करोड़ रुपये को पार कर गई थी<span>, </span>लेकिन उस सरकार ने <span>&lsquo;</span>जनहित<span>&rsquo; </span>में ब्याज माफ कर दिया था। मामला फिर अदालत में गया तो योगी सरकार को इस मुद्दे पर विचार करने का आदेश मिला। राज्य सरकार ने फैसला लटकाए रखा तो वीएम सिंह ने अदालत की अवमानना का केस दायर किया। इस पर राज्य सरकार ने मुनाफे और घाटे वाली चीनी मिलों के लिए ब्याज की दो दरें तय कीं। लेकिन ब्याज भुगतान पर अभी तक अमल नहीं किया है। अगर अमल हो जाता है तो चीनी मिलें ब्याज मुक्त पूंजी के इस बिजनेस मॉडल को छोड़कर किसानों को समय पर भुगतान करने पर मजबूर होंगी।</p>
<p>हालांकि इस फार्मूले को ईजाद करने में उन नेताओं की भूमिका कम नहीं है जो दिन-रात किसानों के हितैषी होने का दम भरते रहते हैं। यह दीगर है कि पिछले कुछ बरसों में गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी और समय पर भुगतान के लिए किसान आंदोलन अब नहीं दिखते जो सरकारों पर दबाव बना सकें। शायद किसान भी अब किसान होने की बजाय धर्म और जाति के खांचे में ज्यादा फिट हो गया है। ऐसे में जायज हक की बात का कम होना स्वाभाविक है।</p> ]]></description>

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	<media:description type='plain'><![CDATA[ उधार के ‘अच्छे दिन’ ]]></media:description>
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        <author>harvirpanwar@gmail.com (Rural Voice)</author>
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