श्री श्री नैसर्गिक लेकर आया डीएपी का जैविक विकल्प ‘वरदान’, इसमें हैं 14 सूक्ष्मजीवों के समूह

आर्ट ऑफ लिविंग श्री श्री नैसर्गिक ने 14 माइक्रोबियल कंसोर्टिया युक्त जैव उर्वरक वरदान को फॉस्फेट की उपलब्धता और मिट्टी की सेहत सुधारने के जैविक विकल्प के रूप में पेश किया है। डीएपी के विकल्प के रूप में इसका उपयोग फसल और मिट्टी की जरूरतों पर निर्भर करेगा।

किसानों के रबी सीजन की तैयारी के बीच आर्ट ऑफ लिविंग श्री श्री नैसर्गिक, जैव उर्वरक वरदान को मिट्टी में फॉस्फेट की उपलब्धता और मृदा स्वास्थ्य सुधारने के प्राकृतिक विकल्प के रूप में लेकर आया है। इस उत्पाद में 14 माइक्रोबियल कंसोर्टिया (सूक्ष्मजीवों के समूह) हैं, जो फॉस्फेट को घुलनशील बनाने और फसलों द्वारा पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करते हैं।

वरदान फॉस्फेट से भरपूर जैविक खाद है, जिसे कोल्ड-प्रेस्ड तकनीक से तैयार किया जाता है। कंपनी का कहना है कि इस तकनीक का उद्देश्य लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता को बनाए रखना है। इसके फॉर्मूलेशन में शामिल 14 माइक्रोबियल कंसोर्टिया मिट्टी में मौजूद फॉस्फेट के उन रूपों को पौधों के लिए उपलब्ध रूपों में बदलने में मदद करते हैं, जिन्हें पौधे सीधे अवशोषित नहीं कर पाते।

फॉस्फेट जड़ों के विकास और पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक है। हालांकि, मिट्टी के खनिजों के साथ प्रतिक्रिया के कारण डाले गए फॉस्फेट का एक बड़ा हिस्सा पौधों के लिए अनुपलब्ध हो सकता है। इससे उर्वरकों के इस्तेमाल की दक्षता प्रभावित होती है।

पारंपरिक उर्वरक जहां सीधे पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं, वहीं वरदान जैसे जैविक उत्पाद मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों को बढ़ावा देकर पोषक तत्वों की उपलब्धता सुधारने का प्रयास करते हैं। इसे मिट्टी के पुनरुद्धार और पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग पर जोर देते हुए पारंपरिक डीएपी आधारित उर्वरक के विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है।

कंपनी के अनुसार, वरदान का उपयोग खेत की तैयारी के दौरान या फसल की शुरुआत के समय किया जा सकता है। इसका उद्देश्य जड़ों की स्थापना और पौधों के विकास में मदद करना है। फसल विशेष के अनुसार इसे अनाज, दलहन और बागवानी फसलों के पोषण प्रबंधन कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है।

कंपनी ने कहा कि इसके उपयोग में मिट्टी की जांच के नतीजों, फसल की पोषक तत्वों की जरूरत और कृषि विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखना चाहिए, ताकि फसलों को पर्याप्त पोषण मिल सके। इसलिए डीएपी के विकल्प के रूप में इसका इस्तेमाल मिट्टी और फसल की विशिष्ट जरूरतों पर निर्भर करेगा।

यह उत्पाद श्री श्री नैसर्गिक के मिट्टी के पुनरुद्धार और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। मिट्टी में जैविक कार्बन की घटती मात्रा, पोषक तत्वों के कम होते उपयोग और खेती की बढ़ती लागत के बीच ऐसे विकल्पों पर फोकस बढ़ रहा है।

कंपनी का जोर ऐसी एकीकृत पोषण व्यवस्था पर है, जिसमें पर्याप्त पोषक तत्वों की आपूर्ति के साथ लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को भी शामिल किया जाए, ताकि लंबे समय तक कृषि उत्पादकता बनाए रखी जा सके।