पिंपलगांव मंडी में लगा एग्रोग्रेड का स्वचालित प्याज ग्रेडिंग सिस्टम, मैनुअल श्रम की जरूरत करीब 80% घटी

एग्रोग्रेड ने महाराष्ट्र के पिंपलगांव में स्वचालित प्याज ग्रेडिंग सिस्टम स्थापित किया है, जो प्रति घंटे 10 टन तक प्याज की प्रोसेसिंग कर सकता है। कंपनी के अनुसार, इससे मैनुअल श्रम की जरूरत करीब 80 प्रतिशत घटेगी और ग्रेडिंग की सटीकता 99 प्रतिशत तक होगी।

कृषि प्रौद्योगिकी कंपनी एग्रोग्रेड ने महाराष्ट्र के नासिक जिले के प्रमुख प्याज कारोबार और निर्यात केंद्र पिंपलगांव में एक किसान उत्पादक कंपनी के यहां अपना स्वचालित ग्रेड प्लस प्रो (GradePlus Pro) प्याज ग्रेडिंग सिस्टम स्थापित किया है। कंपनी के अनुसार, यह सिस्टम प्रति घंटे 10 मीट्रिक टन तक प्याज की प्रोसेसिंग कर सकता है और मैनुअल छंटाई की तुलना में ग्रेडिंग के लिए आवश्यक श्रम को करीब 80 प्रतिशत तक कम करता है।

कंपनी के मुताबिक, मशीन प्याज की ग्रेडिंग 99 प्रतिशत सटीकता के साथ करती है और इसमें अनलोडिंग तथा बैगिंग की प्रक्रिया भी स्वचालित है। इससे प्याज की कटाई के बाद होने वाली हैंडलिंग को अधिक तेज और कुशल बनाने में मदद मिल सकती है। एग्रोग्रेड का दावा है कि यह सिस्टम मैनुअल प्रक्रिया की तुलना में क्षमता को तीन से पांच गुना तक बढ़ा सकता है।

इस तकनीक को कंपनी की वेव मोशन टेक्नोलॉजी पर आधारित बनाया गया है। इसका उद्देश्य ग्रेडिंग लाइन में प्याज ले जाने के दौरान होने वाले संपर्क को कम करना है, जिससे प्याज की बाहरी परत पर खरोंच और छिलने की समस्या को कम किया जा सके।

भारत में प्याज की ग्रेडिंग पारंपरिक रूप से हाथ से की जाती रही है। कंपनी के अनुसार, स्वचालित ग्रेडिंग मशीनों को अपनाने में एक बड़ी चुनौती भारतीय प्याज की पतली बाहरी परत को होने वाला नुकसान रहा है। प्याज की त्वचा को नुकसान पहुंचने पर उसकी शेल्फ लाइफ और किसानों तथा निर्यातकों को मिलने वाली कीमत प्रभावित हो सकती है। कंपनी का कहना है कि करीब 1.25 करोड़ रुपये की लागत वाली आयातित मशीनों से भी प्याज की त्वचा छिलने की समस्या सामने आई थी।

एग्रोग्रेड ने ट्रैक्टर पर लगाए जा सकने वाले ग्रेडिंग सिस्टम का संस्करण भी विकसित किया है। इसे खेतों, पैकहाउस, कोल्ड स्टोरेज और मंडियों के बीच ले जाया जा सकता है, जिससे ग्रेडिंग का काम किसी एक केंद्र के बजाय खेतों के करीब किया जा सकेगा।

कंपनी के सह-संस्थापक राकेश कुमार बराई ने कहा कि कंपनी ने भारतीय प्याज आपूर्ति श्रृंखला की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तकनीक विकसित की है। उनके अनुसार, इस मशीन के जरिए ग्रेडिंग की लागत करीब 5 पैसे प्रति किलोग्राम तक लाई गई है और सिस्टम प्रतिदिन 200 मीट्रिक टन तक की क्षमता पर काम कर सकता है।