क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड और वैश्विक कृषि कंपनी कॉर्टेवा ने भारत में नई फसल सुरक्षा फॉर्मूलेशन और मिश्रित उत्पादों के विकास, निर्माण और व्यावसायीकरण के लिए सहयोग एवं आपूर्ति समझौता किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य किसानों को कीट एवं खरपतवार प्रबंधन के लिए अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक समाधान उपलब्ध कराना है।
समझौते के तहत कॉर्टेवा तकनीकी ग्रेड के सक्रिय अवयव (Technical Grade Active Ingredients) उपलब्ध कराएगी, जबकि क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन इनका फॉर्मूलेशन विकसित करने, निर्माण करने और भारतीय बाजार में मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभालेगी। दोनों कंपनियों का कहना है कि यह सहयोग विज्ञान आधारित फसल सुरक्षा तकनीकों को तेजी से किसानों तक पहुंचाने में मदद करेगा, जिससे उत्पादकता बढ़ेगी और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अंकुर अग्रवाल ने कहा कि यह साझेदारी प्रमुख कीटों और खरपतवारों से निपटने के लिए किसान-केंद्रित समाधानों के विकास को गति देगी। उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य नवाचार के माध्यम से किसानों को प्रभावी और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराना है।
भारत में लगभग 4.8 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में धान तथा 1.3 करोड़ हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास की खेती होती है। इसके अलावा मिर्च, टमाटर, बैंगन, भिंडी और अनार जैसी बागवानी फसलें भी बड़े क्षेत्र में उगाई जाती हैं। इन फसलों को चूसक कीटों, इल्ली, माइट्स तथा विभिन्न प्रकार के खरपतवारों से भारी नुकसान होता है, जिससे उत्पादन और किसानों की आय प्रभावित होती है।
कंपनियों ने कहा कि भारत की विविध जलवायु और कृषि परिस्थितियों में किसानों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप सुरक्षित, विश्वसनीय और किफायती फसल सुरक्षा समाधानों की आवश्यकता है। विज्ञान आधारित नवाचार और उन्नत तकनीकें फसलों की सुरक्षा, उत्पादकता बढ़ाने और टिकाऊ कृषि प्रणाली को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कॉर्टेवा के दक्षिण एशिया अध्यक्ष सुब्रतो गीड ने कहा कि यह सहयोग दोनों कंपनियों की तकनीकी विशेषज्ञता, उत्पाद विकास क्षमता और बाजार पहुंच को एक साथ लाकर किसानों को उन्नत फसल सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि इससे किसान बदलती कीट एवं खरपतवार चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकेंगे और अधिक लचीली कृषि प्रणाली विकसित होगी। दोनों कंपनियों ने कहा कि यह समझौता भारतीय कृषि में नवाचार को बढ़ावा देने और किसानों की दीर्घकालिक समृद्धि एवं टिकाऊ कृषि विकास के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।