भारत में कृषि उत्पादों की खेत से उपभोक्ता तक डिजिटल निगरानी (ट्रेसबिलिटी) के लिए जल्द ही एक साझा डिजिटल ढांचा विकसित हो सकता है। सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी कंपनी TRST01 ने कृषि ट्रेसबिलिटी के लिए ओपन एग्रीट्रेस स्टैक (Open AgriTrace Stack-OATS) तैयार किया है। यह डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का एक ब्लूप्रिंट है, जिसे विश्व बैंक के सहयोग से तैयार किया गया है।
इस ब्लूप्रिंट को क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेंस के तहत प्रकाशित किया गया है। इसका उद्देश्य कृषि वैल्यू चेन से जुड़े सभी पक्षों के बीच कृषि उत्पादों के उत्पादन, गुणवत्ता और आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित प्रमाणित डिजिटल जानकारी का सुरक्षित और निर्बाध आदान-प्रदान सुनिश्चित करना है।
कंपनी के अनुसार, खाद्य पदार्थों के उत्पादन के बाद की यात्रा को लेकर उपभोक्ताओं की बढ़ती जागरूकता, खाद्य सुरक्षा नियमों के सख्त होने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ट्रेसबिलिटी संबंधी मानकों के कड़े होने से इस तरह के डिजिटल ढांचे की आवश्यकता बढ़ गई है। यूरोप, अमेरिका, जापान और अन्य प्रमुख बाजारों में आयातक अब केवल दस्तावेजों पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि उत्पादन, खेती की प्रक्रिया, प्रयोगशाला परीक्षण और आपूर्ति श्रृंखला का डिजिटल रूप से सत्यापित रिकॉर्ड चाहते हैं। ऐसे रिकॉर्ड के अभाव में भारतीय निर्यातकों को अतिरिक्त जांच, देरी और कई बार खेप रिजेक्ट होने का सामना करना पड़ता है।
ओपन एग्रीट्रेस स्टैक की अवधारणा भारत के आधार और यूपीआई जैसे सफल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यक्रमों से प्रेरित है। इसके माध्यम से किसान, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), निर्यातक, प्रसंस्करण इकाइयां, परीक्षण प्रयोगशालाएं, लॉजिस्टिक्स कंपनियां और नियामक संस्थाएं ओपन स्टैंडर्ड्स के आधार पर आपस में प्रमाणित जानकारी साझा कर सकेंगी।
इस ढांचे में कृषि उत्पादों का खेत से लेकर उपभोक्ता तक छेड़छाड़-रोधी डिजिटल रिकॉर्ड बनाए रखने की व्यवस्था का प्रस्ताव है। इससे खाद्य सुरक्षा संबंधी मामलों में उत्पादों को तेजी से रिकॉल करने की सुविधा मिलेगी, भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पादों के दुरुपयोग पर रोक लगेगी, उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ेगा और निर्यात के लिए आवश्यक अनुपालन प्रक्रिया आसान होगी।
कंपनी का कहना है कि इस डिजिटल ट्रेसबिलिटी प्रणाली में शामिल होने के लिए किसानों से कोई शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए, ताकि छोटे और सीमांत किसान भी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम बाजारों तक पहुंच बना सकें। कंपनी का मानना है कि एक विश्वसनीय राष्ट्रीय ट्रेसबिलिटी ढांचा किसानों की आय बढ़ाने, निर्यात अस्वीकृति कम करने और अनुपालन की लागत घटाने में मदद करेगा। इससे विभिन्न संस्थाएं अपने-अपने मौजूदा सॉफ्टवेयर का उपयोग जारी रखते हुए साझा मानकों के माध्यम से विश्वसनीय डेटा का आदान-प्रदान कर सकेंगी और बार-बार एक ही जानकारी जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।
इस पहल के पहले संभावित क्रियान्वयन 'महाTRACE' पर महाराष्ट्र सरकार विचार कर रही है। इसके लिए TRST01 और GS1 इंडिया को कार्यान्वयन साझेदार के रूप में प्रस्तावित किया गया है। हालांकि, इसका दायरा, किन फसलों को शामिल किया जाएगा और इसे किस चरण में लागू किया जाएगा, इसका अंतिम निर्णय महाराष्ट्र सरकार करेगी।