भारतीय स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी टेकमी2स्पेस (TakeMe2Space) ने स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी क्यूओएसमिक (QOSMIC) के साथ साझेदारी की है। दोनों कंपनियां मिलकर भारत का पहला स्वदेशी ऑप्टिकल इंटर-सैटेलाइट लिंक (OISL) नेटवर्क विकसित करेंगी। इसका उद्देश्य प्रिसिजन खेती, फसलों में तनाव (क्रॉप स्ट्रेस) की निगरानी, आपदा प्रबंधन और पर्यावरणीय निगरानी जैसे क्षेत्रों के लिए सैटेलाइट डेटा के प्रसारण में होने वाली देरी को कम करना है।
कंपनियों के अनुसार, यह लेजर-आधारित संचार नेटवर्क सैटेलाइटों को आपस में सीधे अंतरिक्ष में डेटा साझा करने में सक्षम बनाएगा। इससे सैटेलाइटों को डेटा पृथ्वी पर स्थित ग्राउंड स्टेशन के ऊपर पहुंचने तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इस तकनीक के जरिए लगभग वास्तविक समय (रियल टाइम) में सैटेलाइट से प्राप्त जानकारी उपलब्ध कराई जा सकेगी और संवेदनशील डेटा के लिए विदेशी डेटा रिले नेटवर्क पर निर्भरता भी कम होगी।
कंपनियों ने बताया कि OISL नेटवर्क को टेकमी2स्पेस के एमओआई (MOI) सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन में इंटीग्रेट किया जाएगा। इसके तहत किसी भी सैटेलाइट द्वारा एकत्रित डेटा को हाई-स्पीड लेजर लिंक के माध्यम से अन्य सैटेलाइटों तक पहुंचाया जा सकेगा। इसके बाद डेटा को निकटतम उपलब्ध रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) गेटवे या क्यूओएसमिक के ऑप्टिकल ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए पृथ्वी तक भेजा जाएगा।
इस साझेदारी के तहत अंतरिक्ष में ही डेटा प्रोसेसिंग की सुविधा भी विकसित की जाएगी, जिससे डेटा पृथ्वी पर पहुंचने से पहले ही उसका विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे कृषि, आपदा राहत, पर्यावरण निगरानी और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में तेजी से निर्णय लेने में मदद मिलने की उम्मीद है।
टेकमी2स्पेस के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रोनक कुमार सामंतराय ने कहा कि ऑप्टिकल इंटर-सैटेलाइट संचार भविष्य के अंतरिक्षीय बुनियादी ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। उन्होंने कहा कि कंपनी बड़े पैमाने पर ऑर्बिटल कंप्यूटिंग और ऑर्बिटल डेटा सेंटर विकसित करने की दिशा में काम कर रही है, जहां सैटेलाइटों के बीच संचार क्षमता कंप्यूटिंग क्षमता जितनी ही महत्वपूर्ण होगी।
समझौते के तहत क्यूओएसमिक ऑप्टिकल कम्युनिकेशन टर्मिनल विकसित करेगी, जबकि टेकमी2स्पेस उच्च-परिशुद्धता वाला OISL गिम्बल सिस्टम, सैटेलाइट बस इंटरकनेक्ट, तथा एटीट्यूड डिटरमिनेशन एंड कंट्रोल सिस्टम (ADCS) के हार्डवेयर और फर्मवेयर का विकास करेगी, ताकि सैटेलाइटों की सटीक दिशा-निर्धारण और लेजर संचार की स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
दोनों कंपनियों का संयुक्त कार्यक्रम सिस्टम डिजाइन, विकास, स्पेस क्वालिफिकेशन और कक्षा में परीक्षण (ऑन-ऑर्बिट वैलिडेशन) तक चलेगा। पहला ऑप्टिकल कम्युनिकेशन टर्मिनल वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (Q2) में लॉन्च किए जाने की योजना है।
कंपनियों ने बताया कि इस प्रणाली के दो संस्करण विकसित किए जा रहे हैं। वैरिएंट-ए एक कॉम्पैक्ट और उच्च दक्षता वाला सिस्टम होगा, जो 2,500 किलोमीटर की दूरी तक संचार के लिए होगा। वहीं वैरिएंट-बी को गहरे मेष (डीप-मेश्ड) ऑर्बिटल नेटवर्क के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसकी संचार क्षमता 8,000 किलोमीटर तक होगी।
कंपनियों का कहना है कि लेजर-आधारित इंटर-सैटेलाइट संचार और ऑप्टिकल ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर के संयोजन से भारत एक स्वदेशी स्पेस-आधारित डेटा रिले नेटवर्क विकसित कर सकेगा, जो भविष्य में उन्नत सैटेलाइट सेवाओं और ऑर्बिटल कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती प्रदान करेगा।