देश में गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता बढ़ाने और सहकारी क्षेत्र के माध्यम से बीज प्रणाली को मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
यह समझौता सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर हुआ। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट तथा बीबीएसएसएल के प्रबंध निदेशक चेतन जोशी ने समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया।
इस साझेदारी के तहत आईसीएआर के अनुसंधान, उन्नत किस्मों और बीज प्रौद्योगिकियों को बीबीएसएसएल के देशव्यापी सहकारी नेटवर्क से जोड़कर सहकारिता आधारित बीज प्रणाली को मजबूत किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों तक उन्नत किस्मों, हाइब्रिड बीजों, गुणवत्तापूर्ण बीजों और रोपण सामग्री की पहुंच बढ़ाना है।
इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर और केंद्रीय सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल उपस्थित रहे।
समझौते के तहत आईसीएआर, बीबीएसएसएल को ब्रीडर सीड तक पहुंच उपलब्ध कराने और खेत तथा बागवानी फसलों से संबंधित उन्नत प्रौद्योगिकियां साझा करने में सहयोग करेगा। इससे बीज उत्पादन, अनुसंधान, तकनीक प्रसार और गुणवत्तापूर्ण बीजों की समय पर उपलब्धता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
एमओयू के प्रमुख उद्देश्यों में आईसीएआर की अनुसंधान उपलब्धियों और प्रौद्योगिकियों को बीबीएसएसएल के सहकारी नेटवर्क से जोड़ना शामिल है। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सहकारी समितियों, बीज उत्पादकों और किसान समूहों के माध्यम से किसानों तक उन्नत किस्में, हाइब्रिड बीज, गुणवत्तापूर्ण बीज और रोपण सामग्री पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।
समझौते के तहत आईसीएआर द्वारा विकसित किस्मों, हाइब्रिड बीजों, बीज प्रौद्योगिकियों और क्षेत्र-विशिष्ट उत्पादन प्रणालियों के अनुसंधान, परीक्षण और सत्यापन में भी सहयोग किया जाएगा। ब्रीडर सीड, फाउंडेशन सीड और प्रमाणित बीज की उत्पादन श्रृंखला को मजबूत करने के लिए बीज उत्पादन एवं गुणन कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा।
साझेदारी में पारंपरिक और देशी फसल किस्मों के संरक्षण को भी प्रमुखता दी गई है। इसके तहत ऐसी किस्मों की पहचान, विशेषताओं का अध्ययन, शुद्धीकरण, संरक्षण और सहकारी प्रणाली के माध्यम से बीज गुणन किया जाएगा।
आलू, केला, गन्ना, हल्दी और अन्य महत्वपूर्ण फसलों के लिए रोगमुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री से संबंधित पहलों को भी सहयोग दिया जाएगा। देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जलवायु-सहिष्णु और स्थान-विशिष्ट बीज प्रणालियां विकसित करने पर काम किया जाएगा।
आईसीएआर संस्थानों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और बीबीएसएसएल के नेटवर्क के माध्यम से सहभागी परीक्षण, बहु-स्थान परीक्षण, अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन और किसानों के खेतों पर प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। साथ ही पैक्स, एफपीओ, सहकारी संस्थाओं, बीज उत्पादकों, कृषि प्रसार कर्मियों और बीज क्षेत्र के पेशेवरों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और अन्य कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
बीज प्रणाली में पारदर्शिता और पहुंच बढ़ाने के लिए डिजिटल प्रणालियों के उपयोग पर भी जोर दिया गया है। इसके साथ ही सहकारी व्यवस्था के माध्यम से उत्पादित गुणवत्तापूर्ण बीजों और रोपण सामग्री के लिए घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के अवसर भी तलाशे जाएंगे।