नेशनल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCDFI) और असम राइफल्स के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों में तैनात असम राइफल्स की 72 इकाइयों को अमूल, नंदिनी सहित विभिन्न डेयरी सहकारी समितियां दूध और दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति करेंगी। इस पहल से डेयरी सहकारी समितियों के लिए प्रतिवर्ष लगभग 44 करोड़ रुपये के कारोबार की संभावना है, जिसका फायदा किसानों को मिलेगा।
प्रस्तावित समझौते के अनुसार, डेयरी सहकारी समितियां असम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में स्थित असम राइफल्स की 72 इकाइयों के अलावा दिल्ली और कोलकाता स्थित उनके प्रतिष्ठानों को भी ताजा दूध उपलब्ध कराएंगी। इसके साथ ही यूएचटी दूध, संपूर्ण दूध पाउडर (WMP), चीज और माल्ट-आधारित खाद्य उत्पादों की आपूर्ति भी की जाएगी।
यह समझौता सचिंदर तिवारी, ब्रिगेडियर (प्रशासन), महानिदेशालय असम राइफल्स और एनसीडीएफआई के प्रबंध निदेशक श्रीनिवास सज्जा के बीच संपन्न हुआ। समझौते पर हस्ताक्षर के मौके पर असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा तथा एनसीडीएफआई एवं राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह उपस्थित रहें।
सहकारी डेयरी करेंगी दुग्ध आपूर्ति
समझौते के तहत अमूल (गुजरात) द्वारा यूएचटी दूध, नंदिनी (कर्नाटक) द्वारा यूएचटी दूध तथा वारणा (महाराष्ट्र) द्वारा संपूर्ण दूध पाउडर की आपूर्ति की जाएगी। वहीं मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा की डेयरी यूनियनें ताजा दूध उपलब्ध कराएंगी। वामुल (असम), दीमापुर मिल्क यूनियन (नागालैंड), भागीरथी मिल्क यूनियन (पश्चिम बंगाल) और अलवर मिल्क यूनियन (राजस्थान) ताजा दूध और मक्खन की आपूर्ति करेंगी।
सालाना 44 करोड़ के कारोबार की उम्मीद
इस व्यवस्था से सहभागी डेयरी सहकारी समितियों को प्रतिवर्ष लगभग 44 करोड़ रुपये का कारोबार मिलने की संभावना है। यह पहल उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए लाभकारी होगी तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास और डेयरी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगी।
किसानों को मिलेगा लाभ
असम राइफल्स से प्राप्त सुनिश्चित मांग के कारण सहकारी समितियां दूध खरीद बढ़ाएंगी, जिससे अधिक डेयरी उत्पादक संगठित सहकारी नेटवर्क से जुड़ सकेंगे। निरंतर मांग के कारण सहकारी समितियां बेहतर दूध खरीद मूल्य प्रदान कर सकेंगी, जिससे डेयरी किसानों की आय में वृद्धि हो सकेगी। साथ ही यह दूध संग्रहण अवसंरचना, चिलिंग सुविधाओं, परिवहन और डेयरी विकास गतिविधियों में निवेश को भी प्रोत्साहित करेगा।
गौरतलब है कि पूर्वोत्तर के कई क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर ताजा दूध का उत्पादन सीमित होने के कारण उपभोक्ता मुख्य रूप से यूएचटी दूध और दूध पाउडर पर निर्भर रहे हैं। अब डेयरी सहकारी समितियों के विस्तार और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला के विकास से उपभोक्ताओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ताजा दूध अधिक मात्रा में मिल सकेगा।