शाम पांच बजे तक उत्तर प्रदेश में 57 फीसदी, पंजाब में 63 फीसदी मतदान

चुनाव आयोग ने अभिनेता सोनू सूद को मोगा में मतदान केंद्रों पर जाने से रोक लगा दी। आरोप है कि वे मतदाताओं को प्रभावित कर रहे थे। सोनू सूद की बहन मालविका सूद सच्चर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं

पंजाब विधानसभा की 117 सीटों और उत्तर प्रदेश तीसरे चरण की 59 सीटों के लिए मतदान जारी है। उत्तर प्रदेश में शाम पांच बजे तक 57.58 फीसदी वोट डाले गए थे। पंजाब में 63.44 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले थे। उत्तर प्रदेश में जिन सीटों पर मतदान हो रहा है, उनमें करहल सीट भी है, जहां से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की जिन 59 सीटों पर मतदान हो रहे हैं, वे 16 जिलों में हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में इन जिलों में 62.21 फीसदी वोट पड़े थे। तब 59 में से 49 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। समाजवादी पार्टी को नौ और एक पर कांग्रेस को विजय मिली थी। बहुजन समाज पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी।

पंजाब में शाम 6:00 बजे तक वोट डाले जा सकेंगे। यहां 93 महिलाओं समेत कुल 1304 प्रत्याशी मैदान में हैं, इनमें 461 निर्दलीय हैं। करीब 2.14 करोड़ मतदाता उनकी किस्मत का फैसला करेंगे। चुनाव आयोग ने अभिनेता सोनू सूद को मोगा में मतदान केंद्रों पर जाने से रोक लगा दी। आरोप है कि वे मतदाताओं को प्रभावित कर रहे थे। सोनू सूद की बहन मालविका सूद सच्चर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं।

प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल-बसपा गठबंधन, भाजपा-पंजाब लोक कांग्रेस-शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) गठबंधन और किसानों के संगठन संयुक्त समाज मोर्चा के बीच पंचकोणीय मुकाबला हो रहा है। प्रमुख उम्मीदवारों में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, प्रकाश सिंह बादल, राजिंदर कौर भट्ठल, आम आदमी पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा भगवंत मान, पंजाब कांग्रेस के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और पंजाब भाजपा अध्यक्ष अश्विनी शर्मा शामिल हैं। चन्नी अपनी पुरानी सीट चमकौर साहिब के साथ बरनाला जिले की भदौर सीट से भी लड़ रहे हैं।

शिरोमणि अकाली दल लंबे अरसे के बाद भारतीय जनता पार्टी से अलग होकर बहुजन समाज पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। प्रदेश में भाजपा का अपना आधार कम है। उसका प्रदर्शन दूसरे दलों से आए नेताओं पर टिका है। एक तो उसने पंजाब लोक कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है, जिसके प्रमुख अमरिंदर सिंह हैं। लेकिन पंजाब लोक कांग्रेस की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसके कई नेता भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। गठबंधन में शामिल शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के नेता सुखदेव सिंह ढींडसा भी अकाली दल से अलग होकर ही आए हैं। अब देखना है कि भाजपा को इन बुजुर्ग नेताओं से कितनी मदद मिल पाती है।

संयुक्त समाज मोर्चा 22 किसान संगठनों को मिलाकर बनाया गया है, जिसके नेता बलबीर सिंह राजेवाल हैं। इन किसान संगठनों ने कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल से ज्यादा चले आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी। मोर्चा पहली बार चुनाव लड़ रहा है और विश्लेषकों को इसके कुछ खास प्रदर्शन की उम्मीद नहीं है।

मतदाताओं को लुभाने के लिए सभी पार्टियों ने बढ़ चढ़कर वादे किए हैं। आम आदमी पार्टी ने मुफ्त बिजली के साथ सभी महिलाओं को एक 1000 रुपए प्रतिमाह देने का वादा किया है। कांग्रेस ने भी कुछ शर्तों के साथ 1100 रुपए प्रतिमाह देने का वादा किया है। अकाली-बसपा गठबंधन का वादा गरीबी रेखा से नीचे के परिवार की महिलाओं को 2000 रुपए प्रतिमाह देने का है। कांग्रेस के साथ अकाली-बसपा गठबंधन ने भी एक लाख सरकारी नौकरियां देने की बात कही है। चन्नी ने कहा है कि कांग्रेस की अगली सरकार बनी तो कैबिनेट का पहला फैसला सरकारी नौकरियों का होगा। भाजपा गठबंधन ने सरकारी नौकरियों में प्रदेश के युवाओं के लिए 75 फ़ीसदी आरक्षण देने का वादा किया है, तो अकाली-बसपा गठबंधन ने सरकारी के साथ निजी क्षेत्र में भी आरक्षण देने की बात कही है।

2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 77 सीटें जीत कर अकाली-भाजपा गठबंधन के 10 साल के शासन को खत्म किया था। उस चुनाव में आम आदमी पार्टी को 20 और अकाली भाजपा गठबंधन को सिर्फ 18 सीटें मिली थीं। इस बार भाजपा हिंदू बहुल सीटों पर फोकस कर रही है जिनमें पठानकोट, अबोहर, फाजिल्का, मुकेरियां, होशियारपुर, फगवाड़ा, लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और राजपुरा जैसी सीटें शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इन इलाकों में ज्यादा प्रचार किया है।