चीन में 2026-27 के दौरान अनाज उत्पादन बढ़ने का अनुमान, खाद्य सुरक्षा के लिए सोयाबीन आयात भी बढ़ाएगा

चीन में 2026-27 के सीजन में बेहतर पैदावार के जरिए अनाज उत्पादन बढ़ने का अनुमान है। अमेरिका की फॉरेन एग्रीकल्चरल सर्विस का कहना है कि पशु-चारा मांग बढ़ने से सोयाबीन आयात 10.8 करोड़ टन तक पहुंच सकता है।

अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की फॉरेन एग्रीकल्चरल सर्विस (FAS) के अनुसार, 2026-27 में चीन का अनाज उत्पादन बढ़ने का अनुमान है। इसमें प्रमुख भूमिका बेहतर उत्पादकता और नीतिगत समर्थन की है, न कि खेती के क्षेत्र में बड़े विस्तार की।

इस सीजन के दौरान चीन में मक्का उत्पादन 30.5 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है, जो बेहतर पैदावार और आनुवंशिक रूप से संशोधित किस्मों के बढ़ते उपयोग से संभव होगा। हालांकि, खपत 32.3 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो उत्पादन से अधिक है। इस कारण चीन 80 लाख टन मक्के का आयात कर सकता है। मक्का चीन के पशु-चारा क्षेत्र का मुख्य आधार है, जहां इसका उपयोग 24.1 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। प्रमुख अनाजों का कुल चारा उपयोग 29.07 करोड़ टन रहने का अनुमान है।

चीन आयात को टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के माध्यम से सख्ती से नियंत्रित करता है। दूसरी तरफ, घरेलू उत्पादन बढ़ाने तथा भंडार प्रबंधन पर जोर देता है। ज्वार और जौ जैसे अनाज चारा मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण बने हुए हैं। इस वर्ष ज्वार आयात 78 लाख टन और जौ आयात 105 लाख टन रहने का अनुमान है।

गेहूं उत्पादन बढ़कर 14.01 करोड़ टन रहने की संभावना है, जबकि खपत 15 करोड़ टन तक पहुंच सकती है। गेहूं की खाद्य मांग स्थिर बनी हुई है, लेकिन बदलती खान-पान आदतों और बढ़ती उम्र की आबादी के कारण पारंपरिक आटा उपयोग में कमी आ रही है, वहीं ब्रेड और बेकरी उत्पादों की मांग बढ़ रही है। चावल उत्पादन 21 करोड़ टन तक पहुंच सकता है, जबकि इसकी खपत घटकर 14.5 करोड़ टन रह सकती है। इसका कारण जनसंख्या में कमी और खान-पान की बदलती प्रवृत्तियां हैं।

सोयाबीन का अधिक आयात करेगा चीन

अनाज के साथ चीन सोयाबीन आयात भी बढ़ाने जा रहा है ताकि प्रोटीन युक्त चारे की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। 2026-27 में सोयाबीन आयात 10.8 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष से 20 लाख टन अधिक होगा। यह वृद्धि विशेष रूप से पोल्ट्री और एक्वाकल्चर में मांग बढ़ने से हो रही है।

अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव कम होने के बाद चीन ने अमेरिकी सोयाबीन की खरीद फिर से शुरू कर दी है, और द्विपक्षीय समझौतों के तहत बड़ी मात्रा में खरीद पहले ही की जा चुकी है। घरेलू सोयाबीन उत्पादन थोड़ा बढ़कर 202 लाख टन रहने की संभावना है, हालांकि यह मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

सोयाबीन क्रशिंग (पेराई) में भी वृद्धि का अनुमान है, हालांकि कुल क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। सरकार तिलहन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए अनुसंधान, प्रोत्साहन और रकबा विस्तार पर काम कर रही है। इसके अलावा, कनाडा से कैनोला आयात भी फिर शुरू होने की संभावना है, क्योंकि टैरिफ में कमी की गई है। इससे तिलहन बाजार में संतुलन बनेगा और विकल्पों पर निर्भरता कम होगी।