अक्टूबर 2026 में वैश्विक खाद्य कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। सितंबर की तेजी के बाद कीमतों में आई इस नरमी का प्रमुख कारण अनाज, डेयरी उत्पादों और मांस के दामों में कमी है। इनके दाम में कमी ने चीनी और वनस्पति तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के असर को पीछे छोड़ दिया। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, अक्टूबर में उसका खाद्य मूल्य सूचकांक (FFPI) औसतन 133.9 अंक रहा, जो सितंबर के संशोधित 135.5 अंक के मुकाबले 1.2% कम है।
हालांकि, मासिक आधार पर गिरावट के बावजूद यह सूचकांक एक साल पहले के स्तर से 5.9% अधिक रहा। इसके बावजूद मार्च 2022 के अपने सर्वोच्च स्तर से यह अभी भी 16.4% नीचे है। मार्च 2022 में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आपूर्ति संबंधी व्यवधानों के कारण वैश्विक खाद्य कीमतों में भारी उछाल आया था।
प्रमुख खाद्य जिंसों में FAO के अनाज मूल्य सूचकांक में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। अक्टूबर में यह मासिक आधार पर 4.5% घटकर 116.8 अंक पर आ गया। यह अक्टूबर 2025 के स्तर से भी 12.6% कम रहा।
लगातार चार महीने की बढ़ोतरी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतों में गिरावट आई। इसकी प्रमुख वजह वैश्विक मांग का कमजोर रहना और खासकर अर्जेंटीना में उत्पादन की बेहतर संभावनाएं रहीं। काला सागर क्षेत्र से निर्यात पर प्रतिबंधों में ढील की उम्मीदों ने भी कीमतों पर दबाव बनाया। हालांकि, इस क्षेत्र में रसद संबंधी व्यवधानों के कारण गिरावट सीमित रही।
सितंबर में तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद मक्के की कीमतों में भी नरमी आई। अमेरिका में कटाई के कारण बाजार में बढ़ती आपूर्ति, दक्षिण अमेरिका में पर्याप्त उत्पादन की उम्मीद और काला सागर क्षेत्र में तनाव कम होने की संभावनाओं ने कीमतों को नीचे लाने में योगदान दिया। जौ और ज्वार की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, अक्टूबर में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल की कीमतें 1.6% बढ़ गईं। इसकी वजह कुछ देशों में फसल कटाई में देरी, प्रतिकूल मौसम और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी रही।
FAO का वनस्पति तेल मूल्य सूचकांक अक्टूबर में मामूली 0.3% बढ़कर 199.2 अंक पर पहुंच गया। सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने रेपसीड तेल की कीमतों में गिरावट के असर को पीछे छोड़ दिया, जबकि पाम तेल की कीमतें लगभग स्थिर रहीं। सोयाबीन तेल के दाम 2022 के अंत के बाद के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गए। जैव ईंधन क्षेत्र से मजबूत मांग और दक्षिण अमेरिका से मौसमी रूप से कम आपूर्ति ने कीमतों को सहारा दिया। FAO का मांस मूल्य सूचकांक 1.2% गिरकर 125.5 अंक पर आ गया।
डेयरी मूल्य सूचकांक अक्टूबर में 1.1% घटकर 117.8 अंक पर आ गया। यह अक्टूबर 2025 के स्तर से 16.9% नीचे रहा। पर्याप्त आपूर्ति और कमजोर मांग के कारण मक्खन तथा पनीर की कीमतों में गिरावट आई। दूध पाउडर की कीमतों में बढ़ोतरी इस गिरावट की भरपाई नहीं कर सकी।
इसके विपरीत, FAO का चीनी मूल्य सूचकांक अक्टूबर में 6.6% बढ़कर 121.3 अंक पर पहुंच गया। यह लगातार चौथे महीने की बढ़ोतरी है और दिसंबर 2024 के बाद का सर्वोच्च स्तर है। चीनी की कीमतें एक साल पहले के मुकाबले 28.8% अधिक रहीं।
ब्राजील के प्रमुख सेंटर-साउथ क्षेत्र में बारिश के कारण गन्ने की कटाई और पेराई में आई बाधाएं कीमतों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह रहीं। इसके अलावा, सामान्य से कम और असमान मानसूनी बारिश के बाद भारत में चीनी उत्पादन को लेकर चिंताएं भी बढ़ीं। यूरोपीय संघ और थाईलैंड में 2026-27 के दौरान चीनी उत्पादन कम रहने की आशंकाओं ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों को ऊपर बनाए रखने में योगदान दिया।