सुपर अल नीनो के कारण अगले 6 माह में 4.51 लाख से अधिक अतिरिक्त मौतों का अनुमान, भारत चौथा सबसे प्रभावित देश

भारत उन देशों में चौथे स्थान पर है, जहां सबसे अधिक मौतों का अनुमान है। भारत में सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच सामान्य वर्ष की तुलना में 15,800 अधिक मौतों का अनुमान लगाया गया है। अंतिम संख्या इस आंकड़े से 1,600 कम या अधिक हो सकती है।

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा सुपर अल नीनो के कारण अगले छह महीनों में दुनिया भर में गर्मी से संबंधित 4.51 लाख से अधिक अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। भारत उन देशों में चौथे स्थान पर है, जहां सबसे अधिक मौतों का अनुमान है। भारत में सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच सामान्य वर्ष की तुलना में 15,800 अधिक मौतों का अनुमान लगाया गया है। अंतिम संख्या इस आंकड़े से 1,600 कम या अधिक हो सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, इन मौतों का संबंध मौजूदा अल नीनो से पैदा होने वाले असामान्य रूप से ऊंचे तापमान से है। यह अल नीनो जून में शुरू हुआ था और उत्तरी गोलार्ध में वसंत ऋतु तक जारी रहने की संभावना है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में वैश्विक स्तर पर भूमि का तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहेगा। इससे सामान्य वर्ष की तुलना में अत्यधिक गर्म दिनों की संख्या 44 फीसदी बढ़ सकती है।

भारत में अनुमानित अतिरिक्त गर्मी से होने वाली मौतों में करीब आधी दिसंबर से फरवरी के बीच होने की आशंका है। रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मी से होने वाली मौतों का असर इसके बाद भी जारी रह सकता है और भारत की गर्मियों में यह संख्या और बढ़ने का अनुमान है।

अल नीनो के पहले छह महीनों में अनुमानित 4.51 लाख मौतें हाल में नेपाल में आई बाढ़ में मृत या लापता माने गए करीब 6,800 लोगों की संख्या से लगभग 65 गुना अधिक हैं। अनुमानित गर्मी से होने वाली मौतों का बड़ा हिस्सा ग्लोबल साउथ में केंद्रित रहने की संभावना है।

अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में अगले छह महीनों में गर्मी से 66,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। इनमें नाइजीरिया में 31,400, सूडान में 17,500, नाइजर में 10,000 और चाड में 8,000 मौतें होने का अनुमान है। दक्षिण-पूर्व एशिया में फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया में अल नीनो से जुड़ी अत्यधिक गर्मी के कारण 19,400 अतिरिक्त मौतें होने का अनुमान है, जबकि इंडोनेशिया में 19,300 मौतों का अनुमान है। दक्षिण अमेरिका में ब्राजील सबसे अधिक प्रभावित देश हो सकता है, जहां 13,300 अतिरिक्त गर्मी से संबंधित मौतों का अनुमान लगाया गया है।

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के अनुसार, अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में तत्काल कदम उठाकर हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है। उसकी एडाप्टेशन इन्वेंटरी में समय रहते चेतावनी प्रणाली, कूलिंग सेंटर और खुले में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा जैसे उपाय शामिल हैं। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार इनमें से कई उपायों का परीक्षण अभी सीमित स्थानों पर ही हुआ है।

इस रिपोर्ट में विकसित देशों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन वर्ष 2026 यूरोप के लिए भी अब तक का सबसे गर्म साल साबित हुआ है। वहां इस वर्ष गर्मी के कारण 35,000 अतिरिक्त मौतें हो चुकी हैं। अकेले जर्मनी में 16,000 लोगों की जान गर्मी के कारण गई है।

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब शोधकर्ताओं ने इस साल के अल नीनो को “भविष्य की एक झलक” बताया है, क्योंकि इस दौरान आने वाला तापमान उस स्तर के करीब है, जिसे जलवायु परिवर्तन के कारण आज से करीब 20 साल बाद सामान्य होने का अनुमान है। रिपोर्ट में तापमान की अधिक सटीक भविष्यवाणी, कूलिंग तकनीकों की व्यापक उपलब्धता और दीर्घकालिक अनुकूलन योजना में निवेश की जरूरत बताई गई है।