देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, लेकिन बारिश का वितरण समय और क्षेत्र, दोनों स्तरों पर बेहद असमान बना हुआ है। जून में सामान्य से करीब 40 फीसदी कम बारिश के बाद जुलाई के पहले सप्ताह में मॉनसून ने जोरदार वापसी की। आईएमडी के अनुसार, 2 से 8 जुलाई के दौरान देशभर में 83.6 मिलीमीटर बारिश हुई, जो इस अवधि की सामान्य बारिश 57.5 मिलीमीटर से 45 फीसदी अधिक है। इसके बावजूद 1 जून से 10 जुलाई तक देश में संचयी बारिश सामान्य से 15 फीसदी कम रही। एक जुलाई से 9 जुलाई तक रोजना देश में औसत बारिश सामान्य से अधिक रही है।
मॉनसून के मोर्चे पर अगली चुनौती अब मध्य और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के सामने आने वाली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, अगले 6-7 दिनों के दौरान मध्य और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियां कम रहने की संभावना है।
अगले 5 से 7 दिनों के दौरान दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के अधिकांश हिस्सों में मुख्य रूप से शुष्क मौसम रहने की संभावना है। इसके चलते देशभर में बारिश की गतिविधियों में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है।
मॉनसून की अक्षीय रेखा के उत्तर की ओर खिसकने से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश बढ़ सकती है। इन क्षेत्रों में अगले 5 से 7 दिनों के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। करीब 10 दिनों की सक्रिय बारिश के बाद जुलाई के दूसरे सप्ताह में ही इस तरह की परिस्थितियां बनना अपेक्षाकृत जल्दी माना जा रहा है।
बारिश में भारी क्षेत्रीय असमानता
आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 10 जुलाई के बीच देश में कुल 212.7 मिलीमीटर बारिश हुई, जो इस अवधि के दीर्घावधि औसत (एलपीए) 248.3 मिलीमीटर से 15 फीसदी कम है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 37 फीसदी कम बारिश हुई है। उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश सामान्य से 6 फीसदी कम रही, जबकि मध्य भारत में सामान्य से 1 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश सामान्य से 16 फीसदी कम रही।
पंजाब, बिहार, झारखंड, केरल और असम समेत 10 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश बारिश की कमी वाली श्रेणी में हैं।

बारिश को तरसा पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत
पिछले 10 दिनों के दौरान एक ओर मध्य भारत और पश्चिमी तट के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हुई, वहीं पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की बड़ी कमी बनी हुई है।
2 से 8 जुलाई के दौरान मध्य भारत में बारिश सामान्य से 137 फीसदी अधिक रही। उत्तर-पश्चिम भारत में 18 फीसदी और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 6 फीसदी अधिक बारिश हुई। इसके विपरीत, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में इसी सप्ताह बारिश सामान्य से 46 फीसदी कम रही। इस तरह देश के बड़े हिस्से में अच्छी बारिश के बावजूद पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्र मॉनसून की कमजोरी से जूझते रहे।
दोहरे असंतुलन से गुजर रहा मॉनसून
मॉनसून अब तक दोहरे असंतुलन से गुजर रहा है। एक ओर समय के लिहाज से जून में बारिश की भारी कमी और जुलाई की शुरुआत में अचानक तेज बारिश, तो दूसरी ओर क्षेत्रीय स्तर पर पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में गंभीर कमी तथा मध्य और पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में अत्यधिक बारिश।
आने वाले सप्ताह खरीफ फसलों, जलाशयों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि जुलाई और अगस्त की बारिश ही यह तय करेगी कि शुरुआती कमी की भरपाई कितनी हो पाती है।
मौसम वैज्ञानिकों की नजर कमजोर एल नीनो परिस्थितियों पर भी है। आईएमडी के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में कमजोर एल नीनो की स्थिति बनी हुई है और मॉनसून सीजन के दौरान इसके और मजबूत होने की संभावना है। वहीं, हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) फिलहाल तटस्थ बना हुआ है।