बारिश से प्रभावित किसानों के लिए राहत की मांग; पंजाब सरकार ने दिए विशेष गिरदावरी के आदेश

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से उत्तर भारत में रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है। ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) ने मुआवजा, कर्ज माफी और फसल बीमा में सुधार की मांग की है। इस बीच, पंजाब ने गेहूं नुकसान के आकलन के लिए विशेष गिरदावरी के आदेश दिए हैं।

बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने उत्तर भारत के कई राज्यों में खड़ी रबी फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसान संगठनों में चिंता बढ़ गई है और सरकारों को नुकसान के आकलन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। पंजाब सरकार ने फसल नुकसान का आकलन करने के लिए विशेष गिरदावरी के आदेश दिए हैं।

ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) ने हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश व बिहार के कुछ हिस्सों में भारी नुकसान की बात कही है। गेहूं, चना, मक्का, फल और सब्जियों जैसी फसलें कटाई से ठीक पहले बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे कुल रबी उत्पादन में गिरावट की आशंका बढ़ गई है।

किसान संगठन ने कहा कि खराब मौसम के इस ताजा दौर ने उन लाखों किसानों और कृषि मजदूरों की उम्मीदों को तोड़ दिया है, जो इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद कर रहे थे। संगठन ने यह भी बताया कि अनेक किसान अभी तक 2025 के खरीफ सीजन में उत्तर भारत के कई राज्यों में आई बाढ़ से हुए नुकसान से उबर नहीं पाए हैं, और उन्हें उस अवधि का मुआवजा अब तक नहीं मिला है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) की आलोचना करते हुए एआईकेएस ने आरोप लगाया कि यह योजना किसानों को समय पर और पर्याप्त मुआवजा देने में विफल रही है, जबकि बीमा कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है। संगठन ने तुरंत खेत स्तर पर सर्वे करने, पूरा मुआवजा देने, कर्ज माफी और खरीद पर बोनस देने की मांग की है। इसके साथ ही, मुआवजे के मानकों में संशोधन कर संभावित आय के नुकसान को भी शामिल करने और बढ़ते जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के तहत किसान-हितैषी फसल बीमा प्रणाली लागू करने की मांग की है।

इस बीच, पंजाब सरकार ने बेमौसम बारिश से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए विशेष गिरदावरी के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसानों को आश्वासन दिया है कि उन्हें हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा।

पंजाब में लगभग तैयार खड़ी गेहूं की फसल बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं के कारण गिर गई है, खासकर दक्षिण मालवा और माझा क्षेत्रों में। उत्तर भारत में सक्रिय मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के कारण मुक्तसर, फाजिल्का, बठिंडा, अमृतसर और तरनतारन जैसे जिलों में फसल गिरने की घटनाएं सामने आई हैं।

प्रदेश के किसानों ने तुरंत नुकसान के आकलन की मांग की है और उत्पादन में कमी के साथ-साथ ‘ब्लैक पॉइंट’ जैसे फंगल रोगों के खतरे को लेकर चिंता जताई है। बारिश के कारण गेहूं की कटाई में कम से कम दो सप्ताह की देरी होने की संभावना है। हालांकि 1 अप्रैल से खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन मंडियों में आवक अभी धीमी है, क्योंकि अनाज में नमी बढ़ने से कटाई प्रभावित हुई है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को इस सिलसिले में बैठक की और बारिश तथा ओलावृष्टि से हुई व्यापक फसल क्षति का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को नुकसान का त्वरित आकलन करने के निर्देश दिए। चौहान ने कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर खड़ी फसलों को हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट जुटाने को कहा है।