एमपी, छत्तीसगढ़ समेत पांच राज्यों के ग्रामीण निकायों को केंद्र ने 1,789 करोड़ रुपये के 15वें वित्त आयोग अनुदान जारी किए

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के तहत पांच राज्यों के ग्रामीण स्थानीय निकायों को 15वें वित्त आयोग के तहत 1,789 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इस राशि से पंचायतों को बुनियादी सेवाएं मजबूत करने, स्वच्छता और जल आपूर्ति सुधारने तथा स्थानीय विकास कार्यों को गति देने में मदद मिलेगी।

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पांच राज्यों के पंचायती राज संस्थानों और ग्रामीण स्थानीय निकायों को 1,789 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की है। जिन पांच राज्यों को यह राशि दी गई है, उनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, तेलंगाना और मध्य प्रदेश शामिल हैं।

इस राशि में अनटाइड (असंबद्ध) ग्रांट और पहले रोकी गई किस्तें शामिल हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण स्थानीय निकायों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को आगे बढ़ाने और सेवा सुधार करने में सक्षम बनाना है।

राज्यों में मध्य प्रदेश को सबसे अधिक 630 करोड़ रुपये की पहली किस्त मिली है, साथ ही अतिरिक्त रोकी गई राशि भी जारी की गई है। गुजरात को 509 करोड़, तेलंगाना को 256 करोड़, छत्तीसगढ़ को 232 करोड़ और महाराष्ट्र को 151 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई है।

इस राशि से जिला पंचायतों, ब्लॉक पंचायतों और ग्राम पंचायतों को लाभ मिलेगा, जिससे वे विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य कर सकेंगे। ये अनुदान 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर जारी किए गए हैं। इसे वित्त मंत्रालय वितरित करता है, जिसमें पंचायती राज मंत्रालय और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

अनटाइड (असंबद्ध) ग्रांट से स्थानीय निकायों को अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार खर्च करने की स्वतंत्रता मिलती है, हालांकि इनका उपयोग वेतन या प्रशासनिक खर्चों के लिए नहीं किया जा सकता। वहीं टाइड ग्रांट्स का उपयोग स्वच्छता, ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) स्थिति बनाए रखने, कचरा प्रबंधन और पेयजल आपूर्ति जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए किया जाता है।