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इस सीजन उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बेमौसम आंधी-तूफान और भारी बारिश सहित असामान्य मौसम परिस्थितियों ने आम की फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। इससे उत्पादन में कमी, आपूर्ति बाधित होने और दशहरी व लंगड़ा जैसी लोकप्रिय किस्मों के खुदरा दाम बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि फूल आने और फल बनने के महत्वपूर्ण चरण के दौरान खराब मौसम के कारण हुए नुकसान ने पैदावार को बुरी तरह प्रभावित किया है।
उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध दशहरी आम क्षेत्र मलीहाबाद के किसान विजय कुमार सिंह ने रूरल वॉयस को बताया कि अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश-ओले ने आम के बौर को नुकसान पहुंचाया और इस सीजन फल बनने की प्रक्रिया काफी प्रभावित हुई। सामान्य परिस्थितियों में एक आम का पेड़ लगभग दो क्विंटल फल देता है, लेकिन इस वर्ष अस्थिर मौसम के कारण उत्पादन अनुमान से काफी कम है।
उन्होंने खेती और मजदूरी की लागत में बढ़ोतरी की ओर भी ध्यान दिलाया। कहा कि मजदूरों को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक तय समय के लिए लगभग 500 रुपये प्रतिदिन देने पड़ रहे हैं, जबकि किसानों का मुनाफा घट रहा है।
लखनऊ क्षेत्र के किसान यूनुस, जो पिछले दस वर्षों से पांच एकड़ में आम की खेती कर रहे हैं, ने कहा कि इस वर्ष मौसम से नुकसान बेहद गंभीर रहा। उन्होंने बताया कि पिछले साल अधिक आवक के कारण मंडियों में आम मात्र 10-15 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा था। लेकिन इस बार तूफान और बारिश ने उनके बाग को तबाह कर दिया और लगभग 150-200 क्विंटल आम नष्ट हो गए। उन्होंने कहा कि केवल 10-12 क्विंटल फसल ही बच पाई। उन्होंने यह भी कहा कि बदलते मौसम पैटर्न के कारण आम की खेती लगातार कठिन होती जा रही है।
उत्तर प्रदेश में उत्पादन 60 प्रतिशत कम रहने का अनुमान
भारत के सबसे बड़े आम उत्पादक राज्य माने जाने वाले उत्तर प्रदेश में वर्ष 2025 में लगभग 40 से 44 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन हुआ था। लेकिन इस वर्ष प्रतिकूल मौसम के कारण उत्पादन संभावनाएं काफी खराब हो गई हैं। मैंगो ग्रोवर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एस. इंसराम अली के अनुसार, इस सीजन में उत्पादन घटकर मुश्किल से 15 लाख टन रह सकता है। उत्पादन में यह भारी गिरावट राज्य के हजारों आम उत्पादकों की आय और आजीविका पर सीधा असर डालेगी। अली खुद मलीहाबाद क्षेत्र से हैं।
लखनऊ के आम व्यापारी शशिकांत राजस्थान और पड़ोसी राज्यों में आम की आपूर्ति करते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल रिकॉर्ड उत्पादन के कारण किसानों को मजबूरी में कम कीमतों पर आम बेचना पड़ा था। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश की किस्में अपेक्षाकृत सस्ती थीं, जबकि दशहरी की मांग कई राज्यों में सबसे अधिक बनी रही। लेकिन इस वर्ष मौसम ने बाजार की स्थिति पूरी तरह बदल दी है। शशिकांत के अनुसार अप्रैल-मई में आए तूफान और बारिश ने फसल को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
किसानों और व्यापारियों के अनुसार इस सीजन कम उत्पादन और बाधित आपूर्ति के कारण आम के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। वर्ष 2025 में दशहरी आम मंडियों में 16-18 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा था, जबकि 2026 में इसके 24-26 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने का अनुमान है। पिछले साल लंगड़ा 23-25 रुपये प्रति किलोग्राम और चौसा 34-37 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा था। इस सीजन उत्पादन घटने से आने वाले हफ्तों में कीमतों में और तेजी आने की संभावना है।
महाराष्ट्र में खराब मौसम के साथ फंगस के संक्रमण का भी असर
महाराष्ट्र के रत्नागिरी के तीसरी पीढ़ी के आम उत्पादक आनंद देसाई ने कहा कि पिछले एक दशक में लगातार आने वाले चक्रवातों ने तटीय क्षेत्रों में आम की खेती को बुरी तरह प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि पहले आम की खेती लाभदायक रहती थी, लेकिन अब जलवायु परिवर्तन लगभग हर साल उत्पादन को प्रभावित कर रहा है। किसानों को अभी लाभ मिल रहा है, लेकिन उनका मुनाफा लगातार घटता जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अल्फांसो आम में वैकल्पिक चक्र होता है, जिसमें एक वर्ष अधिक उत्पादन और अगले वर्ष कम उत्पादन होता है। एक किसान दो वर्षों के चक्र में एक एकड़ से लगभग 5,000 आम प्राप्त कर सकता है।
देसाई ने इस वर्ष असामान्य फूल आने की स्थिति का भी उल्लेख किया। जनवरी में नर फूलों की अत्यधिक वृद्धि के कारण फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। हीटवेव और अस्थिर मौसम ने फलों की गुणवत्ता और टिकाऊपन को नुकसान पहुंचाया, जबकि कई बागों में फंगस के संक्रमण से भी फसल खराब हुई।
देसाई के अनुसार सामान्य वर्षों में केवल रत्नागिरी क्षेत्र में लगभग 1.5 लाख टन आम का उत्पादन होता है। इसमें से लगभग 30,000 टन आम कैनिंग इकाइयों को भेजा जाता है, जबकि लगभग 40,000 टन राज्य से बाहर बाजारों में पहुंचता है।
इस सीजन बाजार कीमतों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। सामान्य मौसम में प्रीमियम अल्फांसो आम की एक पेटी बाजार में लगभग 15,000 रुपये तक बिक जाती है। लेकिन इस वर्ष बार-बार आए तूफान, हीटवेव और फसल नुकसान के कारण कई बाजारों में कीमतें गिरकर लगभग 2,000 रुपये प्रति पेटी तक पहुंच गईं, जो गुणवत्ता और आपूर्ति दोनों में गंभीर गिरावट को दर्शाता है।

निर्यात की संभावनाएं भी धूमिल
इस वर्ष आम का निर्यात भी दबाव में है। कोकम अल्फांसो मैंगो ग्रोवर्स एंड सेलर्स को-ऑपरेटिव सोसाइटी के चेयरमैन डॉ. विवेक भिडे ने रूरल वॉयस को बताया कि आम व्यापार अभी तक कोविड-19 महामारी से पैदा हुई आर्थिक बाधाओं से पूरी तरह उबर नहीं पाया है। उन्होंने कहा कि इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध ने परिवहन मार्गों और निर्यात लॉजिस्टिक्स को और प्रभावित किया है।
भारत हर वर्ष लगभग 240 लाख टन आम का उत्पादन करता है, जिसमें अधिकांश घरेलू बाजार में खप जाता है। एपीडा के अनुसार 2024-25 में भारत ने 5.65 करोड़ डॉलर मूल्य के 29,938 मीट्रिक टन आम का निर्यात किया। प्रमुख निर्यात गंतव्य संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, ब्रिटेन, कुवैत और कतर रहे। लेकिन इस वर्ष युद्ध के कारण निर्यातकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति तब और खराब हो गई जब जापान ने अस्थायी रूप से भारत से आम आयात रोक दिया। भारत जापान को अल्फांसो, लंगड़ा, केसर और बंगनपल्ली जैसी प्रीमियम किस्मों का निर्यात करता है। जापान भारतीय आमों के लिए उच्च मूल्य वाला बाजार माना जाता है, जहां गुणवत्ता मानकों को लेकर काफी सख्ती रहती है।
मैंगो ग्रोवर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एस. इंसराम अली के अनुसार, जापान ने सोमवार को भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया, जिससे किसानों और निर्यातकों को बड़ा झटका लगा है। अली ने कहा कि जापान के प्रतिबंध के अलावा मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष ने दुबई, यूएई और ओमान जैसे प्रमुख बाजारों को होने वाले निर्यात को भी प्रभावित किया है, जिससे व्यापारियों और निर्यातकों का संकट और गहरा गया है।
किसानों का कहना है कि मजदूरी, परिवहन और फसल की देखरेख की बढ़ती लागत तथा बार-बार होने वाले मौसम संबंधी नुकसान के कारण आम की खेती हर गुजरते वर्ष के साथ कम लाभकारी होती जा रही है। अनेक किसानों को इस बात की चिंता है कि वे इस वर्ष शायद ही अपनी उत्पादन लागत तक निकाल पाएं। उपभोक्ताओं को ऊंची कीमतों और सीमित उपलब्धता का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता दीर्घकाल में आम की खेती को लेकर है, क्योंकि बदलते जलवायु पैटर्न उत्पादन को लगातार अनिश्चित और कठिन बनाते जा रहे हैं।