तापमान बढ़ने के बावजूद गेहूं की फसल फिलहाल सुरक्षित, रात का तापमान बढ़ा तो हो सकता है नुकसान

इस समय दिन का तापमान तो 34-35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, लेकिन रात में तापमान 15 डिग्री से कम रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दिन के साथ रात का तापमान भी तेजी से बढ़ा तो फसल को नुकसान हो सकता है।

पिछले दो हफ्ते में मौसम काफी तेजी से गर्म हुआ है। देश के उत्तरी, पश्चिमी और मध्य क्षेत्र के राज्यों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। हालांकि रात का तापमान अब भी कम है। इसलिए रबी की मुख्य फसल गेहूं के लिए फिलहाल कोई संकट नहीं है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दिन के साथ रात का तापमान भी तेजी से बढ़ा तो फसल को नुकसान हो सकता है।

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। मध्य भारत में भी यह सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री तक पहुंच गया है। उत्तर और पूर्वी भारत के मैदानी क्षेत्रों में तापमान 30 से 34 डिग्री तक गया है। 

हरियाणा के करनाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ व्हीट एंड बार्ले रिसर्च (IIWBR) के पूर्व डायरेक्टर डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने रूरल वॉयस को बताया कि इस समय दिन का तापमान तो 34-35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, लेकिन रात में तापमान 15 डिग्री से कम रहता है। इस कारण फसल में हीट स्ट्रेस की स्थिति नहीं बन रही है। रबी सीजन 2025-26 में रिकॉर्ड 334.1 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई है। 

गेहूं की फसल में अभी बालियों में दूध बना हुआ है। यह धीरे-धीरे कठोर होकर गेहूं की शक्ल लेगा। शुरुआती वैरायटी में भी 5 से 7 प्रतिशत फसल में ही अभी दाने बनने की स्थिति है। डॉ. सिंह के अनुसार, अगले 10 से 15 दिन फसल के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस दौरान अगर तापमान अधिक बढ़ा तो गेहूं के दाने सिकुड़ सकते हैं। 

गौरतलब है कि वर्ष 2022 में अचानक तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल को काफी नुकसान हुआ था। दाने सिकुड़ने के कारण अलग-अलग इलाकों में पैदावार 20 प्रतिशत तक घट गई थी।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट (2024-25) के अनुसार, वर्ष 2021-22 में भारत में गेहूं उत्पादन घट कर 1077.42 लाख टन रह गया था। उससे पहले 2020-21 में उत्पादन 1095.9 लाख टन था। वर्ष 2022-23 में यह 1105.54 लाख टन और 2023-24 में 1132.92 लाख टन रहा। वर्ष 2024-25 में 1174.94 लाख टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ।

हालांकि मौसम विभाग का अनुमान है कि पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 7 से 10 मार्च के दौरान एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ देखने को मिलेगा। इसके प्रभाव से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में हल्की वर्षा और बर्फबारी हो सकती है। तब तापमान में भी कुछ राहत मिल सकती है।

बढ़ते तापमान को देखते हुए डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने किसानों को पौधों में पानी लगाने में सावधानी बरतने की सलाह दी है। हालांकि उनका कहना है कि पानी देने से पहले किसानों को हवा की दिशा और गति का ध्यान रखना चाहिए। अगर हवा की गति ज्यादा है तो पानी न लगाएं, वर्ना पौधे गिर सकते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार सुबह 11.30 बजे सफदरजंग में हवा की गति 14.8 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। शुक्रवार की सुबह यह गति 11 किमी प्रतिघंटा से कुछ अधिक थी।