मानसून बारिश की कमी घटकर 17% पर आई लेकिन अल नीनो हुआ और मजबूत; जानिए क्या है अगले दो सप्ताह के लिए IMD का पूर्वानुमान

16 से 22 जुलाई के दौरान देश में सामान्य के करीब वर्षा हुई, लेकिन दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम में अब भी कुल वर्षा सामान्य से 17% कम है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कहा कि अल नीनो की स्थिति और मजबूत हो रही है, जिसका मानसून पर असर पड़ सकता है। अगले दो सप्ताह में पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा की संभावना है।

देश में पिछले सप्ताह सामान्य के करीब वर्षा दर्ज की गई जिससे 1 जून से अब तक दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बारिश में कुल कमी घटकर 17 प्रतिशत रह गई है। हालांकि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है, जिससे मानसून के शेष सीजन में वर्षा के वितरण को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले दो सप्ताह के लिए मिश्रित वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान है।

IMD के अनुसार 16 से 22 जुलाई के दौरान पूरे देश में वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) से केवल 1 प्रतिशत कम रही, जिसे सामान्य श्रेणी में रखा जाता है। दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्र को छोड़कर देश के सभी चार क्षेत्रों में सामान्य वर्षा दर्ज की गई। दक्षिण में इस अवधि के दौरान वर्षा सामान्य से 26 प्रतिशत कम रही।

हालांकि पिछले सप्ताह वर्षा में सुधार देखने को मिला, लेकिन पूरे मानसून सीजन की स्थिति अभी भी कमजोर बनी हुई है। 1 जून से 23 जुलाई के बीच देश में 370.9 मिमी की सामान्य वर्षा के मुकाबले 306.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 17 प्रतिशत कम है।

क्षेत्रवार और राज्यवार वर्षा की स्थिति

पूर्व और पूर्वोत्तर भारत सबसे अधिक प्रभावित है, जहां अब तक वर्षा 32 प्रतिशत कम रही है। दक्षिण भारत में वर्षा सामान्य से 26 प्रतिशत कम है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में 10 प्रतिशत और मध्य भारत में केवल 6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। 

फोटोः राज्यवार वर्षा की स्थिति। नीला रंग सामान्य से अधिक, हरा रंग सामान्य और लाल रंग सामान्य से कम बारिश को दर्शाता है।

राज्यवार आंकड़े देखें तो इस मानसून सीजन में अब तक केवल लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। वहीं हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में वर्षा सामान्य रही है। इसके विपरीत पंजाब, हरियाणा, गुजरात, गोवा, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड तथा त्रिपुरा को छोड़कर सभी पूर्वोत्तर राज्यों में अब भी 20 प्रतिशत से 58 प्रतिशत तक वर्षा की कमी बनी हुई है।

अल नीनो की स्थिति हो रही है मजबूत

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है, जिसका असर मानसून के शेष सीजन की वर्षा पर पड़ सकता है। मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान (Sea Surface Temperature) सामान्य से अधिक बना हुआ है। वहीं, मॉनसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के पूर्वानुमान भी संकेत देते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अल नीनो की स्थिति और मजबूत होने की संभावना है।

अगले दो सप्ताह का पूर्वानुमान

IMD के अनुसार 23 से 29 जुलाई के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में कई मौसम प्रणालियां सक्रिय रहेंगी, जिनका मानसून की गतिविधियों पर असर पड़ेगा। सप्ताह के दूसरे हिस्से में मानसून ट्रफ के अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसकने की संभावना है। साथ ही, उत्तर-पूर्व अरब सागर और उससे सटे सौराष्ट्र तट के ऊपर एक असामान्य चक्रवात बनने की संभावना है। इस दौरान सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेंगे।

इन मौसम प्रणालियों के प्रभाव से पश्चिम भारत में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है। दक्षिण-पूर्व राजस्थान, गुजरात क्षेत्र, उत्तर कोंकण और उत्तर मध्य महाराष्ट्र में भारी से बहुत भारी तथा कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा हो सकती है। इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी भारत और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में व्यापक वर्षा गतिविधियां रहने और कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में भी सप्ताह के दूसरे भाग में वर्षा की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। देश के कई हिस्सों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ आंधी आने की भी संभावना है।

IMD के अनुसार, देशभर में अगले दो दिनों तक वर्षा सामान्य रहने की संभावना है, लेकिन इसके बाद सप्ताह के शेष दिनों में यह सामान्य से कम रह सकती है। हालांकि, दक्षिण राजस्थान, पश्चिम और मध्य भारत तथा पूर्वी भारत के कई हिस्सों में वर्षा सामान्य से सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है, जबकि देश के शेष क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है।

30 जुलाई से 5 अगस्त के दौरान मानसून ट्रफ के फिर से अपनी सामान्य स्थिति के करीब लौटने की संभावना है। इस अवधि में उत्तर एवं उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवात बनने का अनुमान है। वहीं, सोमाली जेट के भी मजबूत होकर सामान्य स्थिति के करीब पहुंचने की संभावना है।

इस सप्ताह पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में अधिकांश दिनों में व्यापक बारिश का अनुमान है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है। इसी तरह पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी व्यापक वर्षा की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और सिक्किम में कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है।

पश्चिमी तट पर कोंकण एवं गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल में भी अधिकांश दिनों तक व्यापक वर्षा तथा कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है। प्रायद्वीपीय भारत के अन्य हिस्सों में भी कई स्थानों पर हल्की से मध्यम तथा कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना है।