FSSAI का निर्देश: खाद्य उत्पादों में अश्वगंधा की पत्तियों का इस्तेमाल प्रतिबंधित, केवल जड़ों के उपयोग की अनुमति

FSSAI ने हेल्थ सप्लीमेंट जैसे खाद्य उत्पादों में अश्वगंधा के उपयोग को लेकर सख्त एडवाइजरी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि केवल इसकी जड़ों और उनके अर्क का ही इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि पत्तियों के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। FSSAI ने स्पष्ट किया है कि कंपनियां हेल्थ सप्लीमेंट जैसे उत्पादों में केवल अश्वगंधा की जड़ों और उनके अर्क का ही उपयोग करें, जबकि इसकी पत्तियों या अर्क के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

प्राधिकरण ने निर्देश दिया है कि फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) यह सुनिश्चित करें कि विशेष खाद्य उत्पादों में केवल अश्वगंधा की जड़ों और उनके अर्क का ही उपयोग किया जाए। यह उपयोग भी निर्धारित सीमाओं और अधिसूचित मानकों के अनुरूप होना चाहिए।

FSSAI के संज्ञान में आया है कि कुछ कंपनियां अपने उत्पादों में अश्वगंधा की पत्तियों का इस्तेमाल कर रही हैं, जो मौजूदा नियमों के तहत मान्य नहीं है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक (हेल्थ सप्लीमेंट, न्यूट्रास्यूटिकल्स, फंक्शनल फूड और नॉवेल फूड) विनियम, 2016 के तहत केवल अश्वगंधा की जड़ों और उनके अर्क को ही निर्धारित सीमा के भीतर स्वास्थ्य पूरक और न्यूट्रास्युटिकल्स जैसे उत्पादों में उपयोग की अनुमति दी गई है। आयुष मंत्रालय ने भी 15 अप्रैल, 2026 को जारी अपने एक पत्र में दवा निर्माताओं को केवल अश्वगंधा की जड़ों के इस्तेमाल का निर्देश दिया है।

वैज्ञानिक अध्ययनों में अश्वगंधा की पत्तियों के उपयोग को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं जताई गई हैं । इन पत्तियों में रिएक्टिव विथेनोलाइड्स (reactive withanolides), विशेष रूप से विथेफेरिन-ए (Withaferin-A) की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।

अश्वगंधा (Withania somnifera) का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं के अलावा न्यूट्रास्यूटिकल्स, सप्लीमेंट्स और अब हर्बल चाय, प्रोटीन मिश्रण, पोषण पाउडर तथा वेलनेस ड्रिंक्स जैसे फंक्शनल फूड उत्पादों में भी तेजी से बढ़ा है।

FSSAI ने सभी फूड बिजनेस ऑपरेटरों को नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है और चेतावनी दी है कि उल्लंघन की स्थिति में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।