केंद्र सरकार ने उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 (FCO) के तहत एनहाइड्रस अमोनिया (Anhydrous Ammonia) उर्वरक के गुणवत्ता मानक अधिसूचित कर दिए हैं। इसके साथ ही किसी भी पात्र मैन्युफैक्चरिंग इकाई के लिए अगले तीन वर्षों तक इस उर्वरक के निर्माण का रास्ता खुल गया है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से जारी गैजेट नोटिफिकेशन के अनुसार, इस उर्वरक में भार के आधार पर न्यूनतम 82 प्रतिशत नाइट्रोजन होना अनिवार्य होगा। इतनी अधिक नाइट्रोजन मात्रा के कारण यह देश में स्वीकृत सबसे अधिक कंसेंट्रेशन वाले नाइट्रोजन उर्वरकों में से एक होगा। हालांकि एनहाइड्रस अमोनिया उर्वरक बनाने के लिए अमोनिया कहां से आएगी, यह बड़ा सवाल है।
यह अधिसूचना मुख्य रूप से रेगुलेटरी मंजूरी है। सरकार ने इस उर्वरक पर कोई सब्सिडी घोषित नहीं की है, न इसकी खरीद की व्यवस्था की है और न ही किसानों के लिए इसका उपयोग अनिवार्य किया है। इस अधिसूचना में केवल इस उर्वरक के लिए आधिकारिक गुणवत्ता मानक तय किया गया है, ताकि निर्धारित मानकों का पालन करते हुए इसे बनाया और बेचा जा सके।
सबसे अधिक नाइट्रोजन वाला उर्वरक
एनहाइड्रस अमोनिया (NH₃) विश्व स्तर पर सबसे अधिक नाइट्रोजन सांद्रता वाले उर्वरकों में गिना जाता है। इसमें लगभग 82 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है, जो भारत में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले अन्य नाइट्रोजन उर्वरकों की तुलना में काफी अधिक है। तुलनात्मक रूप से देखें तो देश में सबसे अधिक उपयोग होने वाले यूरिया में 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है, जबकि अमोनियम सल्फेट में लगभग 21 प्रतिशत और कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट में लगभग 26 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है।
अधिक नाइट्रोजन होने से समान मात्रा में पोषक तत्व उपलब्ध कराने के लिए अपेक्षाकृत कम उर्वरक की आवश्यकता होती है, जिससे परिवहन और भंडारण की लागत में कमी आने की संभावना रहती है।
उपयोग के लिए विशेष व्यवस्था जरूरी
हालांकि, एनहाइड्रस अमोनिया का उपयोग सामान्य उर्वरकों से काफी अलग है। इसे प्रेशर के तहत तरल गैस के रूप में संग्रहित किया जाता है और विशेष उपकरणों की सहायता से सीधे मिट्टी के भीतर इंजेक्ट किया जाता है। यदि यह खुले वातावरण के संपर्क में आ जाए तो नाइट्रोजन गैस के रूप में उड़ सकती है।
इसके उपयोग के लिए विशेष भंडारण टैंक, दबावयुक्त परिवहन व्यवस्था, खेतों में इंजेक्शन देने वाली मशीनें तथा प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता होती है, क्योंकि यह एक खतरनाक रसायन भी माना जाता है। इसलिए इसका उपयोग उन क्षेत्रों में ही संभव होगा जहां आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षित लोग उपलब्ध होंगे।
नियामक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम
इस अधिसूचना के साथ एनहाइड्रस अमोनिया उर्वरक को औपचारिक रूप से उर्वरक (नियंत्रण) आदेश के दायरे में शामिल कर लिया गया है। इससे सरकार ने इसके निर्माण और बिक्री के लिए कानूनी आधार तैयार किया है तथा गुणवत्ता की निगरानी का भी प्रावधान सुनिश्चित किया है।
हालांकि अधिसूचना में इस निर्णय के पीछे कोई विशेष नीतिगत उद्देश्य नहीं बताया गया है, लेकिन इसे देश में नाइट्रोजन उर्वरकों के विकल्पों का विस्तार करने और दीर्घकाल में पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नियामक पहल माना जा रहा है।