आलू उत्पादन को बढ़ावा देने वाले किसानों चैंपियनों को HyFarm ने किया सम्मानित

HyFarm ने गुजरात में आलू उत्पादन को बढ़ावा देने वाले किसानों को अपने दूसरे पाठशाला दीक्षांत समारोह में सम्मानित किया। इस कार्यक्रम से 6,000 से अधिक किसान जुड़े हैं। प्रतिभागियों ने खेती की लागत में 10-12%, उर्वरक खर्च में 15% और सिंचाई के लिए पानी की खपत में 30-35% बचत दर्ज की है।

HyFun Foods की एग्री बिजनेस व्यवसाय इकाई HyFarm ने अपने दूसरे पाठशाला दीक्षांत समारोह में आलू के सस्टेनेबल उत्पादन को बढ़ावा देने वाले किसानों को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में उन किसानों को किसान चैंपियन के रूप में सम्मानित किया गया, जिन्होंने स्वेच्छा से अपने खेतों में प्रदर्शन इकाइयां स्थापित कीं, खेती की बेहतर तकनीक को अपनाया और प्रसंस्करण के लिए आलू उगाने वाले अन्य किसानों को प्रशिक्षित किया।

गुजरात के साबरकांठा और बनासकांठा जिलों में 17 माइक्रो-क्लस्टर और 33 प्रदर्शन खेतों के माध्यम से संचालित HyFarm पाठशाला पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक कृषि विज्ञान के साथ जोड़ती है। इस पहल में प्रदर्शन खेतों और ‘प्रशिक्षक को प्रशिक्षित करने’ (Train-the-Trainer) के मॉडल के जरिए किसानों को बेहतर कृषि पद्धतियों और नई तकनीक का ज्ञान दिया जाता है, ताकि वे आसपास के गांवों में भी इसे साझा कर सकें।

इस कार्यक्रम से अब तक 6,000 से अधिक किसान जुड़ चुके हैं। इसमें अनुभवी किसानों के साथ युवा और महिला किसान भी शामिल हैं, जिन्होंने प्रदर्शन के लिए स्वेच्छा से अपने खेत उपलब्ध कराए। HyFarm की अनुशंसित कृषि पद्धतियों को अपनाने वाले ये किसान अब अपने समुदायों में प्रशिक्षक और मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं।

कंपनी के अनुसार, कार्यक्रम में भाग लेने वाले किसानों ने खेती की कुल लागत में लगभग 10-12 प्रतिशत, उर्वरक खर्च में 15 प्रतिशत और सिंचाई जल की खपत में 30-35 प्रतिशत तक बचत दर्ज की है। 

इस पहल में मृदा स्वास्थ्य और रीजेनरेटिव कृषि पद्धतियों पर विशेष जोर दिया जाता है। वैज्ञानिक मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, बेहतर बुवाई पद्धतियां, सटीक सिंचाई और खेतों की नियमित निगरानी के माध्यम से संसाधनों का बेहतर उपयोग, मिट्टी की उत्पादकता बनाए रखने और प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त आलू की गुणवत्ता सुधारने का प्रयास किया जाता है।

HyFarm के सीईओ सुंदरराजन एस. ने कहा कि पाठशाला पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक कृषि विज्ञान को जोड़कर किसानों को लागत घटाने, संसाधनों का संरक्षण करने तथा गुणवत्ता और लाभप्रदता बढ़ाने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि किसानों का प्रशिक्षक और मार्गदर्शक बनना आलू उत्पादन से जुड़े पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रहा है।

समारोह में कृषि पद्धतियों, सटीक कृषि, डिजिटल तकनीकों को अपनाने और प्रसंस्करण के लिए आलू की गुणवत्ता के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को सम्मानित किया गया। इस आयोजन ने गुजरात में अधिक टिकाऊ और उत्पादक आलू उत्पादन व्यवस्था विकसित करने में किसान-से-किसान ज्ञान साझाकरण की भूमिका को रेखांकित किया।