ICAR ने एक वर्ष में विकसित कीं 386 उन्नत फसल किस्में, इनमें 94% जलवायु अनुकूल और 29 बायोफोर्टिफाइडः शिवराज

आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पिछले एक वर्ष में 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित की गईं, जिनमें 94% जलवायु-अनुकूल और 29 बायोफोर्टिफाइड हैं। परिषद ने 17 नई कृषि प्रौद्योगिकी जारी की, 72 एमओयू पर हस्ताक्षर किए और बताया कि 2025-26 में कृषि अनुसंधान से 1.70 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य सृजित हुआ।

पिछले एक वर्ष में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित की हैं। इनमें से 94 प्रतिशत जलवायु अनुकूल तथा 29 बायोफोर्टिफाइड किस्में हैं। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आईसीएआर के 98वां स्थापना दिवस (ICAR Foundation Day) के मौके पर यह बात कही। इस अवसर पर विभिन्न फसलों की 43 उन्नत किस्में जारी की गईं और 51 उद्योगों के साथ 72 समझौते भी किए गए।

शिवराज सिंह चौहान ने आईसीएआर को भारत के कृषि परिवर्तन का अग्रदूत बताते हुए कहा कि परिषद के वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचारों ने देश में खाद्यान्न, बागवानी, दुग्ध एवं मत्स्य उत्पादन में रिकॉर्ड उपलब्धियां हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि किसान कृषि की आत्मा हैं, जबकि वैज्ञानिक उसका मस्तिष्क हैं। उन्होंने मांग आधारित अनुसंधान, जलवायु अनुकूल कृषि, दलहन एवं तिलहन में आत्मनिर्भरता, गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा, प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण तथा कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) नेटवर्क के माध्यम से नवाचारों के व्यापक प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।

मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने केवीके नेटवर्क के माध्यम से अनुसंधान की पहुंच का विस्तार करने का आह्वान किया ताकि प्रयोगशालाओं से किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों तक प्रौद्योगिकियों का तेजी से हस्तांतरण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग तथा आईसीएआर के बीच हुए समझौते से अनुसंधान, नवाचार तथा प्रौद्योगिकी प्रसार को और मजबूती मिलेगी, जिससे किसानों की समृद्धि तेज होगी और विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने भी संबोधित किया। 

‘365 दिनों की उपलब्धियों पर दृष्टिपात, विकसित भारत 2047 के लिए कृषि की पुनर्कल्पना’ विषय के अंतर्गत ICAR की उपलब्धियों को प्रस्तुत करते हुए कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने वर्ष 2025-26 के दौरान प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला तथा कृषि अनुसंधान, नवाचार, शिक्षा एवं विस्तार को आगे बढ़ाने के लिए परिषद की भावी रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि फसलों, बागवानी, पशुधन तथा मत्स्य क्षेत्रों में उत्पादन वृद्धि से वर्ष के दौरान लगभग 1.70 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य सृजित हुआ, जिसमें कृषि अनुसंधान का अनुमानित योगदान 55,000 करोड़ रुपये रहा। 

बासमती समेत फसलों की 43 उन्नत किस्में जारी

इस अवसर पर 43 उन्नत फसल किस्मों, 17 उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों तथा 14 प्रकाशनों का विमोचन किया गया। नई प्रौद्योगिकियों में बासमती धान और लवण एवं क्षारीय मिट्टी के प्रति सहनशील जलवायु अनुकूल धान की किस्में, निर्यातोन्मुख आम उत्पादन प्रौद्योगिकी, भारत का पहला स्वदेशी अफ्रीकी स्वाइन फीवर टीका, डिजिटल स्वाइन रोग एटलस तथा लघु किसानों के लिए किफायती कसावा हार्वेस्टर शामिल हैं।

प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण तथा अंतिम छोर तक उसकी पहुंच को गति देने के उद्देश्य से 51 उद्योग साझेदारों के साथ 72 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे आईसीएआर द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों का किसानों तक तेजी से हस्तांतरण सुनिश्चित होगा।