ईरान युद्ध के बाद भारत ने किया आयात स्रोतों का विस्तार, अप्रैल-जून में 17 देशों से 15 लाख टन यूरिया और 7.1 लाख टन डीएपी खरीदा

ईरान युद्ध के बाद आपूर्ति जोखिमों को देखते हुए भारत ने उर्वरक आयात के स्रोतों का विस्तार किया है। अप्रैल-जून 2026 के दौरान 17 देशों से 15.08 लाख टन यूरिया और 7.11 लाख टन डीएपी आयात किया गया। सरकार के अनुसार खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है और मौजूदा स्टॉक मांग से अधिक बना हुआ है।

फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले से शुरू हुए युद्ध के बाद भारत ने करीब डेढ़ दर्जन देशों से यूरिया और डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) का आयात किया है। इनमें ओमान, कतर और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों के अलावा रूस, अमेरिका, वियतनाम और तुर्की जैसे देश भी शामिल हैं। अप्रैल से जून 2026 के दौरान भारत ने 15.08 लाख टन यूरिया और 7.11 लाख टन डीएपी का आयात किया है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में यह जानकारी दी।
 
उन्होंने बताया कि अप्रैल में 5.83 लाख टन यूरिया और 49 हजार टन डीएपी, मई में 4.10 लाख टन यूरिया और 1.32 लाख टन डीएपी तथा जून में 15.15 लाख टन यूरिया और 5.30 लाख टन डीएपी का आयात किया गया है। जून में अल्जीरिया से 1.65 लाख टन, मिस्र से 3.95 लाख टन, जॉर्जिया से 1.22 लाख टन, नाइजीरिया से 1.38 लाख टन, रूस से 2.84 लाख टन और सऊदी अरब से 1.08 लाख टन यूरिया आयात हुआ है। भारत को यूरिया निर्यात करने वाले अन्य देशों में फिनलैंड, मलेशिया, ओमान, कतर, तुर्की और वियतनाम शामिल हैं।
 
डीएपी का आयात चुनिंदा देशों से ही हुआ है। अप्रैल में सिर्फ मोरक्को से 49 हजार टन डीएपी का आयात किया गया। मई में मोरक्को के अलावा जॉर्डन, सऊदी अरब और दक्षिण कोरिया से इस उर्वरक की खरीद की गई। खरीफ सीजन की जरूरत को देखते हुए जून में आयात के स्रोतों का विस्तार किया गया और अल्जीरिया, चीन, मिस्र, जॉर्डन, मोरक्को, सऊदी अरब और अमेरिका से डीएपी खरीदा गया। 
 
इन तीन महीनों में अमेरिका से सिर्फ जुलाई में 60 हजार टन डीएपी खरीदा गया, और कोई उर्वरक नहीं। इसी तरह चीन से सिर्फ अप्रैल में 29 हजार टन यूरिया और जुलाई में 45 हजार टन डीएपी की खरीद की गई। घरेलू जरूरतों का हवाला देते हुए चीन ने यूरिया निर्यात पर अंकुश लगा दिया था।
 
रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने पिछले चार महीने में यूरिया और डीएपी की उपलब्धता और बिक्री के आंकड़े भी दिए। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2026 को यूरिया का ओपनिंग स्टॉक 54.22 लाख टन और डीएपी का 20.93 लाख टन का था। अप्रैल से 29 जुलाई 2026 तक यूरिया की जरूरत 122.84 लाख टन और डीएपी की 35.44 लाख टन की थी। इसकी तुलना में इनकी उपलब्धता क्रमशः 177.28 लाख टन और 43.03 लाख टन की थी। 
 
अप्रैल से जुलाई तक डीबीटी के तहत 112.53 लाख टन यूरिया और 26.59 लाख टन डीएपी की बिक्री हुई। 29 जुलाई को 64.75 लाख टन यूरिया और 16.44 लाख टन डीएपी का स्टॉक पड़ा था। इनके अलावा 21.21 लाख टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) का भी स्टॉक था। मौजूदा खरीफ सीजन में जून तक देश में 71.55 लाख टन यूरिया और 9.84 लाख टन डीएपी का उत्पादन हुआ।