ईरान युद्ध शुरू होने के बाद अब तक 21.8 लाख टन उर्वरकों का आयात, 86.2 लाख टन का घरेलू उत्पादन

ईरान युद्ध के बाद भारत ने अब तक 21.8 लाख टन उर्वरकों का आयात किया है, जबकि घरेलू उत्पादन 86.2 लाख टन रहा। खरीफ 2026 सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने डीएपी, एनपीके, टीएसपी, अमोनिया और सल्फर के वैश्विक टेंडर जारी किए हैं।

ईरान युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने अभी तक 21.8 लाख टन उर्वरकों का आयात किया है। इसमें आधा से ज्यादा यूरिया का ही आयात हुआ है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार डाई अमोनियम फास्फेट (डीएपी) और एनपीके के कुछ सौदे किए गए हैं जिनके मई और जून में भारत पहुंचने का अनुमान है। ट्रिपल सुपर फास्फेट (टीएसपी) और अमोनियम सल्फेट के भी ग्लोबल टेंडर जारी किए गए हैं ताकि पीक सीजन के दौरान उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।

अंतर मंत्रालयी बैठक में पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद 13.29 लाख टन यूरिया, 0.88 लाख टन डीएपी, 4.09 लाख टन एनपीके और 3.49 लाख टन म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) का आयात किया गया है। इस तरह युद्ध शुरू होने के बाद अभी तक 21.8 लाख टन उर्वरकों का आयात हुआ है। इस दौरान 86.2 लाख टन उर्वरकों का घरेलू उत्पादन भी हुआ है। इसमें 52.1 लाख टन यूरिया, 7.03 लाख टन डीएपी, 17.33 लाख टन एनपीके और 9.76 लाख टन सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) उर्वरकों का उत्पादन हुआ है।

युद्ध शुरू होने के बाद घरेलू उत्पादन और आयात, दोनों मिलाकर स्टॉक में 108 लाख टन की बढ़ोतरी हुई है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने खरीफ 2026 के लिए कुल 390.54 लाख तन उर्वरकों की जरूरत का अनुमान लगाया है। अभी 200.98 लाख टन उर्वरक उपलब्ध है जो कुल जरूरत का 51 प्रतिशत है। आम तौर पर इस समय जरूरत का 33 प्रतिशत उर्वरक उपलब्ध रहता है। 

मंत्रालय के अनुसार भारत ने 13.5 लाख टन डीएपी और 7 लाख टन एनपीके उर्वरकों के आर्डर दिए हैं। मई-जून तक उनके भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचने का अनुमान है। इसके अलावा भारतीय उर्वरक कंपनियों ने चार लाख टन ट्रिपल सुपर फास्फेट (टीएसपी) और 3 लाख टन अमोनियम सल्फेट खरीदने के टेंडर निकाले हैं। भारतीय कंपनियों ने कुल 5.36 लाख तक अमोनिया और 5.94 लाख टन सल्फर के ग्लोबल टेंडर निकाले हैं।