इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) ने 17 लाख टन प्रिल्ड या ग्रैन्युलर यूरिया आयात का टेंडर निकाला है। इसमें 10 लाख टन यूरिया भारत के पश्चिमी तट और 7 लाख टन पूर्वी तट के बंदरगाहों के लिए रखा गया है। आईपीएल ने यह टेंडर रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग की ओर से जारी किया है।
टेंडर दस्तावेज के अनुसार, यूरिया उर्वरक ग्रेड के निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए और इसमें नाइट्रोजन की मात्रा कम से कम 46 प्रतिशत होनी चाहिए। यूरिया प्रिल्ड या ग्रैन्युलर, किसी भी रूप में पेश किया जा सकता है, लेकिन एक ही जहाज में दोनों प्रकार के यूरिया की आपूर्ति नहीं की जा सकती।
IPL ने यह टेंडर 23 सितंबर 2026 को जारी किया था। हालांकि उसी तारीख को जारी संशोधन संख्या-1 के जरिए अनुबंधित मात्रा के लिए लोडिंग पोर्ट से शिपमेंट की अंतिम तारीख 15 दिसंबर 2026 से घटाकर 1 दिसंबर 2026 कर दी गई है।
बोली लगाने वालों को 7 अक्टूबर 2026 की सुबह 11:30 बजे तक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपनी पेशकश जमा करनी होगी। तकनीकी वाणिज्यिक बोलियां उसी दिन दोपहर 12 बजे खोली जाएंगी, जबकि पात्र बोली लगाने वालों की मूल्य वाली बोलियां दोपहर 12:30 बजे खोली जाएंगी। सभी बोलियां 15 अक्टूबर की रात 8 बजे तक वैध रहनी चाहिए, जबकि बिड बांड 14 दिसंबर तक वैध होना आवश्यक है।
कैटेगरी-I के तहत आने वाले उत्पादक FOB आधार पर बोली दे सकते हैं, जबकि कैटेगरी-II और कैटेगरी-III के बोली लगाने वालों को FOB और CFR (कॉस्ट एंड फ्रेट) दोनों कीमतें देनी होंगी। IPL पूर्वी और पश्चिमी तट के लिए बोलियों का अलग-अलग मूल्यांकन करेगा।
टेंडर में वित्तीय सुरक्षा से जुड़ी शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। उत्पादकों को बोली सुरक्षा राशि से छूट दी गई है, जबकि मान्यता प्राप्त आपूर्तिकर्ताओं को 3 डॉलर प्रति टन और अन्य पात्र बोली लगाने वालों को 10 डॉलर प्रति टन की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। सफल बोलीदाताओं को उनकी श्रेणी के आधार पर अनुबंध मूल्य के 1 से 10 प्रतिशत तक की परफॉर्मेंस गारंटी देनी होगी।
IPL ने समय पर यूरिया की आपूर्ति के लिए बाध्यकारी शर्त बनाई है। देरी होने पर टेंडर की शर्तों के अनुसार लिक्विडेटेड डैमेज, अनुबंध रद्द करने और परफॉर्मेंस गारंटी जब्त करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। आयातित यूरिया की गुणवत्ता और मात्रा की जांच माल उतारने वाले बंदरगाह पर की जाएगी। अंतिम वजन संयुक्त ड्राफ्ट सर्वे के आधार पर निर्धारित किया जाएगा, जबकि गुणवत्ता की जांच स्वतंत्र निरीक्षण एजेंसियों या केंद्रीय उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण एवं प्रशिक्षण संस्थान, फरीदाबाद अथवा उसकी क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं के माध्यम से की जाएगी।