कर्नाटक में पेट्रोल में 31.2% तक एथेनॉल मिला, उपभोक्ताओं पर सालाना 1.01 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ

कर्नाटक सरकार की जांच में पेट्रोल के 14 नमूनों में से 11 में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित E20 सीमा से अधिक मिली। सबसे अधिक मात्रा 31.2% दर्ज की गई। राज्य सरकार ने वाहन की अनुकूलता, माइलेज में कमी और मरम्मत खर्च को लेकर चिंता जताते हुए पारदर्शिता, उपभोक्ता मुआवजे और सख्त निगरानी की मांग की है।

कर्नाटक सरकार ने एथेनॉल मिश्रण नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य सरकार की ओर से कराई गई जांच में पेट्रोल के अधिकांश नमूनों में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित E20 सीमा से अधिक पाई गई है। प्रयोगशाला जांच में 14 नमूनों में से 11 में एथेनॉल की मात्रा 20% से ज्यादा दर्ज की गई। सबसे अधिक 31.2% एथेनॉल इंडियन ऑयल (IOCL) के पेट्रोल के एक नमूने में पाया गया।

लीगल मेट्रोलॉजी विभाग की ओर से शुक्रवार, 6 नवंबर को जारी जांच रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं को बेचे जा रहे पेट्रोल की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं और केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण देने का आग्रह किया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले एवं विधिक माप विज्ञान मंत्री रिजवान अरशद के निर्देश पर राज्य के सात जिलों- बेंगलुरु, कोलार, चिक्कबल्लापुर, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु से नमूने एकत्र किए गए थे।

जांच के अनुसार, इंडियन ऑयल के पेट्रोल में एथेनॉल की सर्वाधिक 31.2% मात्रा मिली। इसके बाद हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) के एक नमूने में 30.5% एथेनॉल पाया गया। HPCL के एक अन्य नमूने में यह मात्रा 27%, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) में 26.5% और नायरा के पेट्रोल में 26.1% एथेनॉल मिला। शेल के एक नमूने में एथेनॉल की मात्रा 25.5% थी।

BPCL के दो अन्य नमूनों में 24.2% और 22.6% एथेनॉल मिला, जबकि HPCL के एक नमूने में 22.4%, IOCL में 20.8% और नायरा में 20.6% मात्रा दर्ज की गई। केवल तीन नमूनों में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20% की सीमा में थी। इनमें BPCL का नमूना 19.9%, मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) का 19.2% और शेल का 13.5% था।

नागरिक आपूर्ति विभाग के अनुसार, राज्यभर में प्रमुख तेल विपणन कंपनियों के 63 नमूने एकत्र किए गए थे। यह जांच इस भरोसे के आधार पर शुरू की गई थी कि उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार के निर्धारित मानक के अनुरूप E20 पेट्रोल उपलब्ध कराया जा रहा है।

मंत्री रिजवान अरशद ने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र के इस आश्वासन पर भरोसा किया था कि E20 पेट्रोल से उपभोक्ताओं को कोई प्रतिकूल परेशानी नहीं होगी। उनका कहना है कि निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मिलने से उपभोक्ताओं के हितों और जवाबदेही को लेकर सवाल उठते हैं। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री से देश में बेचे जा रहे पेट्रोल में एथेनॉल की वास्तविक मात्रा स्पष्ट करने की मांग की है।

लीगल मेट्रोलॉजी विभाग ने अतिरिक्त एथेनॉल मिश्रण से उपभोक्ताओं पर सालाना करीब 1.01 लाख करोड़ रुपये का संभावित आर्थिक बोझ पड़ने का अनुमान लगाया है। इसमें वाहनों का माइलेज घटने से लगभग 62,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च और मरम्मत पर करीब 39,000 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च शामिल है। मरम्मत खर्च में ईंधन फिल्टर, पंप, इंजेक्टर, पाइप और सील को होने वाले संभावित नुकसान को शामिल किया गया है।

विभाग का दावा है कि देश के करीब 35 करोड़ वाहनों में से लगभग 99% वाहन E20 से अधिक एथेनॉल मिश्रण के अनुकूल नहीं हैं। अप्रैल 2023 के बाद बेचे गए वाहनों को भी अधिकतम E20 मिश्रण के लिए ही प्रमाणित किया गया है।

कर्नाटक सरकार ने सभी पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल की मात्रा प्रदर्शित करने, उपभोक्ताओं को अलग-अलग मिश्रण वाले ईंधन का विकल्प देने और निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बेचने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, उसने वाहनों को प्रमाणित नुकसान के आधार पर मुआवजा देने के लिए E20 क्षतिपूर्ति कोष बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत अधिकृत सर्विस सेंटर से नुकसान की पुष्टि के बाद समयबद्ध तरीके से दावों का निपटारा करने की मांग की गई है।

राज्य सरकार ने मोटर स्पिरिट एवं हाई स्पीड डीजल (आपूर्ति एवं वितरण का विनियमन तथा कदाचार की रोकथाम) आदेश, 2005 के तहत पेट्रोल के नमूनों की जांच जारी रखने की बात कही है। इस आदेश के तहत जिला प्रशासन और अधिकृत पुलिस अधिकारियों सहित राज्य के विभिन्न अधिकारियों को ईंधन की आपूर्ति एवं वितरण में अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है।