देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल लॉन्च की है। यह कार E20 से लेकर E100 तक किसी भी एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर चल सकती है।
नई वैगनआर में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) कैलिब्रेशन दिया गया है, जो E20 (20% एथेनॉल) से लेकर E100 (लगभग 100% एथेनॉल) तक किसी भी मिश्रण के अनुसार इंजन के प्रदर्शन को समायोजित कर सकता है।
भारत सरकार लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम की जा सके। वर्तमान में देशभर में 20 फीसदी एथेनॉल वाला E20 पेट्रोल उपलब्ध कराया जा रहा है। अब सरकार E85 तथा E100 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण की दिशा में कदम बढ़ाने पर विचार कर रही है।
गुरुवार को वाहन लॉन्च कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने कहा कि भारत ऊर्जा आयातक से ऊर्जा निर्यातक देश बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि देश हर वर्ष ईंधन आयात पर लगभग 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। जीवाश्म ईंधनों पर यह निर्भरता न केवल आर्थिक बोझ है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों को अपनाना समय की आवश्यकता है।
इस्मा ने किया स्वागत
चीनी और जैव-ऊर्जा निर्माता कंपनियों के संगठन इस्मा ने मारुति सुजुकी द्वारा देश की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार का स्वागत करते हुए इसे भारत की स्वच्छ ईंधन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। संगठन ने कहा कि एथेनॉल को देश की ऊर्जा सुरक्षा का प्रमुख आधार बनाने के लिए वर्षों से किए जा रहे प्रयासों को अब वास्तविक रूप मिलता दिखाई दे रहा है।
इस्मा ने यह भी घोषणा की कि वह भारत में इस फ्लेक्स-फ्यूल वाहन का पहला ग्राहक बना है। संगठन का मानना है कि E20 कार्यक्रम की सफलता के बाद फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का आगमन देश में एथेनॉल आधारित परिवहन प्रणाली के अगले चरण की शुरुआत है।
किसानों को मिलेगा लाभ
इस्मा के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि यह केवल ऑटोमोबाइल क्षेत्र की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक रणनीतिक परिवर्तन है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के बाजार में आने से एथेनॉल की मांग बढ़ेगी, जिससे कृषि आधारित जैव-ईंधन उद्योग को नई गति मिलेगी और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती प्राप्त होगी।
इस्मा के अनुसार, एथेनॉल आधारित ईंधन नीति केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कच्चे तेल के आयात बिल को कम करने का भी प्रभावी माध्यम बन सकती है। गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाला एथेनॉल देश को स्वदेशी, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा विकल्प प्रदान करता है।