सरकार ने नाफेड और एनसीसीएफ को मूल्य स्थिरीकरण फंड (पीएसएफ) के तहत दो लाख टन प्याज खरीदने का निर्देश दिया है, लेकिन किसान इन एजेंसियों को प्याज बेचने के लिए तैयार नहीं हैं। वजह है कीमत। महाराष्ट्र की मंडियों में अच्छी क्वालिटी का प्याज 3000 रुपये क्विंटल तक बिक रहा है, जबकि सरकार ने नाफेड और एनसीसीएफ (नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लि) के लिए 1730 रुपये प्रति क्विंटल का खरीद भाव तय कर रखा है।
प्याज की मौजूदा स्थिति का आकलन करने के लिए रूरल वॉयस ने सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव के अलावा नासिक जिले के ही पीपलगांव और मनमाड तथा अहिल्यानगर (पुराना नाम अहमदनगर) के एपीएमसी अधिकारियों से बात की।
लासलगांव एपीएमसी के सचिव नरेंद्र वाधवाने ने रूरल वॉयस को बताया कि इस समय मंडी में रोजाना करीब 25,000 क्विंटल प्याज आ रहा है। किसानों को औसत दाम 2100 रुपये क्विंटल मिल रहा है, जबकि ए ग्रेड का प्याज 2600 रुपये क्विंटल तक बिक रहा है। इसलिए किसान नाफेड और एनसीसीएफ को प्याज नहीं बेच रहे हैं।
सरकार ने नाफेड और एनसीसीएफ की खरीद के लिए पिछले एक महीने में तीन बार दाम बढ़ाए हैं। सबसे पहले 22 मई को इसे 12.70 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 15.80 रुपये किया गया। उसके बाद 13 जून को दाम बढ़कर 16.50 रुपये हुआ। हफ्ते भर बाद ही 20 जून को सरकार ने फिर दाम बढ़ाकर 17.30 रुपये प्रति किलो कर दिया।
दाम के अलावा खरीद की प्रक्रिया और भुगतान में देरी भी कारण हैं। वाधवाने ने बताया कि ओपन मार्केट में किसान जब प्याज लेकर आता है तो ट्रेडर उसी समय सौदा करता है और तत्काल भुगतान कर देता है। लेकिन सरकारी एजेंसियों को बेचने के लिए किसान को पहले रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। उसके बाद एजेंसियां किसान को बुलाती हैं और उनके प्याज की ग्रेडिंग की जाती है। खराब क्वालिटी के प्याज को रिजेक्ट भी कर दिया जाता है। इन सबके बाद किसान को 72 घंटे बाद भुगतान मिलता है।
नासिक जिले की ही मनमाड मंडी के सचिव बलिराम लक्ष्मण गायकवाड़ ने बताया कि वहां किसान अभी रोजाना 7000 से 8000 क्विंटल प्याज लेकर आ रहे हैं। उन्हें ए ग्रेड के प्याज का भाव 2400 रुपये क्विंटल तक मिल रहा है और औसत भाव 2000 रुपये क्विंटल है। यहां भी खुले बाजार में भाव अधिक होने के कारण नाफेड नहीं खरीद रहा है।
नासिक जिले की एक और प्रमुख मंडी पिंपलगांव बसवंत है। इसके सचिव सतीश दिलीपराव जाधव ने बताया कि यहां रोजाना करीब 20,000 क्विंटल प्याज पहुंच रहा है। क्वालिटी के हिसाब से किसानों को 1400 रुपये से 3000 रुपये क्विंटल तक का दाम मिल रहा है। औसत भाव 2200-2300 रुपये क्विंटल है। इसलिए यहां भी किसान सरकारी एजेंसियों को प्याज नहीं बेच रहे हैं।
महाराष्ट्र का अहिल्यानगर जिला भी प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्रों में है। अहिल्यानगर मंडी के सचिव अभय बाबासाहेब भिसे ने बताया कि यहां की मंडी में हर दिन करीब 48,000 क्विंटल प्याज आ रहा है। यहां किसानों को 1700 से 1800 रुपये क्विंटल का भाव मिल रहा है। इस मंडी में आने वाले प्याज का बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों को जा रहा है।