सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी की गई। पिछले दो सप्ताह से भी कम समय में यह चौथी वृद्धि है। सोमवार को पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। इससे पहले शनिवार को भी पेट्रोल-डीजल के दाम में 91 पैसे प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई थी। इससे पहले 15 मई को लगभग 3 रुपये प्रति लीटर और 19 मई को करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापित होने के संकेतों के बीच सोमवार सुबह एशियाई बाजारों में कच्चा तेल 5% से अधिक गिर गया। ब्रेंट क्रूड लंबे समय के बाद 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे 98 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
ताजा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गई है। लगभग चार वर्षों के अंतराल के बाद ईंधन कीमतों में संशोधन फिर शुरू होने के बाद से पेट्रोल और डीजल के दाम कुल मिलाकर करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ चुके हैं।
कहा जा रहा है कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर बढ़ते दबाव के कारण ईंधन कीमतों में लगातार संशोधन किया जा रहा है। सरकारी तेल कंपनियां वैश्विक बाजार में बढ़ी हुई आयात लागत का बोझ झेल रही हैं और कीमतों में यह वृद्धि उसी दबाव को आंशिक रूप से कम करने के लिए की गई है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पर साफ दिखाई दे रहा है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहा और तेल आपूर्ति मार्ग बाधित रहे, तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। इससे आने वाले दिनों में घरेलू ईंधन कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका है। बढ़ती ईंधन कीमतों का असर महंगाई, परिवहन लागत और कृषि लागत पर भी पड़ सकता है।