आरबीआई एमपीसी की बैठकः खाद्य और ईंधन की अस्थिर कीमतों ने बढ़ाई केंद्रीय बैंक की चिंता

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने खाद्य और ईंधन महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का सर्वसम्मत निर्णय लिया। अल नीनो से जुड़े मौसम संबंधी जोखिम और वैश्विक कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों के कारण वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में सीपीआई महंगाई 5.9 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।

खाद्य और ईंधन आपूर्ति में आ रही बाधा भारत की महंगाई की तस्वीर को तेजी से बदल रही है। इसके चलते भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सतर्कता बरतते हुए वेट एंड वॉच का रुख बनाए रखा है। आरबीआई ने 3-5 अगस्त को हुई एमपीसी बैठक के मिनट्स बुधवार को जारी किए। इसके अनुसार, केंद्रीय बैंक ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने और मौद्रिक नीति का रुख तटस्थ रखने का फैसला किया।

जून 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.4 प्रतिशत हो गई। इसमें मुख्य रूप से खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल का योगदान रहा। हालांकि, खाद्य और ईंधन को छोड़कर कोर महंगाई 3.9 प्रतिशत के अपेक्षाकृत नियंत्रित स्तर पर रही। एमपीसी सदस्यों ने कहा कि कमर्शियल एलपीजी, ईंधन और कच्चे माल की बढ़ती लागत का असर अब धीरे-धीरे व्यापक सेवा क्षेत्र में भी दिखने लगा है, जिसमें रेस्तरां शुल्क जैसी सेवाएं शामिल हैं।

समिति ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूरे साल की खुदरा महंगाई 5.0 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। इसके तीसरी तिमाही में बढ़कर 5.9 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और चौथी तिमाही में घटकर 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। एमपीसी सदस्यों ने महंगाई के सामने दोहरे जोखिमों को लेकर गंभीर चिंता जताई।

खाद्य महंगाई का जोखिम: अल नीनो के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून की असमान स्थिति से फसलों की पैदावार और ग्रामीण खपत प्रभावित होने का खतरा है।

ईंधन और ऊर्जा का झटका: पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधानों के कारण ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 90 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गई हैं। इससे भारत के आयातित ईंधन की लागत पर खासा दबाव बन रहा है।

इन दबावों के बावजूद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा और एमपीसी के अन्य सदस्यों ने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी फिलहाल व्यापक मांग में अत्यधिक तेजी के बजाय मुख्य रूप से आपूर्ति-पक्ष की बाधाओं तक सीमित है। कीमती धातुओं को छोड़कर कोर महंगाई 2.3-2.5 प्रतिशत के निचले स्तर पर है। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू मांग ने अभी तक महंगाई पर प्रभाव नहीं डाला है।

हालांकि, डिप्टी गवर्नर डॉ. पूनम गुप्ता और कार्यकारी निदेशक इंद्रनील भट्टाचार्य सहित कई सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि खाद्य और ऊर्जा की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो इनके दूसरे दौर के प्रभाव व्यापक महंगाई को मजबूती दे सकते हैं।

वर्तमान में अनुमानित 6.7 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि को समर्थन देने के लिए ब्याज दर में बढ़ोतरी से परहेज किया गया है। हालांकि, एमपीसी ने संकेत दिया कि यदि लागत संबंधी दबाव अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में और फैलता है, तो वित्त वर्ष के आने वाले महीनों में मौद्रिक नीति को सख्त करने की जरूरत पड़ सकती है।