पिछले एक महीने में गैर-बासमती चावल की कीमतें 15-20 फीसदी तक बढ़ने से निर्यातकों के लिए मुश्किल बढ़ गई है। पुरानी कीमतों पर सौदे करने वाले कई निर्यातकों के लिए निर्यात घाटे का सौदा बन गया है। इसलिए वे डिफॉल्ट कर रहे हैं। बढ़ते शिपिंग खर्च, चावल की कमी और कमजोर मानसून के बीच कीमतों में आगे भी तेजी तथा सरकारी खरीद प्रभावित होने की आशंका है।
निर्यात के लिए बड़ी मात्रा में छत्तीसगढ़ से गैर-बासमती चावल जाता है। यहां पिछले करीब एक माह में पारबॉयल्ड गैर-बासमती चावल की कीमत 2800-2900 रुपये प्रति क्विंटल फ्री ऑन बोर्ड (एफओबी, काकीनाडा बंदरगाह पहुंच) से बढ़कर 3300-3400 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। इसके चलते पुरानी कीमतों के आधार पर सौदे कर चुके निर्यातकों के लिए संकट पैदा हो गया है। कुछ निर्यातक तो डिफॉल्ट भी कर रहे हैं।
एक बड़े चावल निर्यातक ने रूरल वॉयस को बताया कि वैश्विक बाजार में दाम 360 से 370 डॉलर तक हैं। इसके चलते घरेलू बाजार में चावल की बढ़ी कीमतों पर निर्यात संभव नहीं रह गया है। वहीं शिपिंग चार्जेज में जो बढ़ोतरी हुई है उसकी वजह से गैर-बासमती का निर्यात घाटे का सौदा हो गया है। भारत से गैर-बासमती चावल का बड़ा निर्यात अफ्रीकी देशों को होता है। वहां के लिए बल्क और कंटेनर दोनों तरह के शिपिंग के लिए भाड़ा काफी बढ़ गया है।
उक्त सूत्र के मुताबिक गैर-बासमती ब्रोकन राइस की कीमत में भी इस अवधि में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसके दाम पिछले एक माह में करीब 20 फीसदी बढ़कर 2650 से 2700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गये हैं। गौरतलब है कि सरकार ने एथेनॉल उत्पादकों के लिए केंद्रीय पूल से ब्रोकन राइस की कीमत 2200 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रखी है। जिस तरह से बाजार में ब्रोकन राइस के दाम बढ़े हैं उसे देखते हुए घोषित कीमत पर एथेनॉल के लिए चावल की आपूर्ति को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
इस दौरान बासमती चावल की कीमतें भी बढ़ी हैं, लेकिन खाड़ी युद्ध के चलते इसके सबसे बड़े निर्यात बाजार संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ईरान और इराक को बासमती निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद बासमती की कीमतों में करीब पांच फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
अधिकांश निर्यातक पहले चावल खरीदकर स्टॉक नहीं करते। बल्कि पहले वे निर्यात सौदा करते हैं और उसके बाद चावल की खरीद करते हैं। निर्यात के डेस्टिनेशन के आधार पैकेजिंग और प्रिंटिंग होती है। मौजूदा हालात में कम कीमत पर किये गये सौदों के लिए ऊंची कीमत पर चावल खरीदकर निर्यात करने में मुश्किल हो रही है।
इस बीच, चावल की कमी की भी खबरें आ रही हैं। रायपुर स्थित बिग मिंट कंसल्टेंसी के एक पदाधिकारी ने रूरल वॉयस को बताया, “गुरुवार को मैं धमतरी में था लेकिन वहां चावल की काफी शार्टेज है। कीमतों में तेजी के चलते निर्यातकों को चावल नहीं मिल पा रहा है।”
हालांकि सरकार ने आंकड़े जारी किये हैं कि 2025-26 में देश में रिकॉर्ड चावल का उत्पादन हुआ है और भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। लेकिन जिस तरह से कीमतों में इजाफा हुआ है और चालू मानसून सीजन में बारिश कम होने के चलते धान का क्षेत्रफल पिछले साल के मुकाबले कम चल रहा है, उसका उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ना तय है।
इस स्थिति में चावल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ ही खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 में सरकारी खरीद भी प्रभावित हो सकती है। इसका असर चावल की कीमतों में और बढ़ोतरी के रूप में सामने आ सकता है। चावल निर्यात करने वाली एक बड़ी कंपनी के एक पदाधिकारी का कहना है कि चालू साल में देश से गैर-बासमती चावल निर्यात पिछले साल के मुकाबले कम रहने की संभावना है।