भारत के ग्रामीण श्रम बाजार में फरवरी 2026 के दौरान स्थिरता देखने को मिली है। गांवों में कामकाजी गतिविधियों में भागीदारी मजबूत बनी रही और महिलाओं की श्रम भागीदारी में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की तरफ से जारी पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के नवीनतम मासिक बुलेटिन में दी गई है।
सर्वे के अनुसार 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों के लिए श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) फरवरी 2026 में 55.9% पर स्थिर रही, जो जनवरी के समान है। हालांकि ग्रामीण भारत में यह दर 58.7% रही, जो शहरी क्षेत्रों की 50.4% दर से काफी अधिक है। यह दर्शाता है कि गांवों में कृषि और उससे जुड़े कार्य आज भी आजीविका का प्रमुख आधार बने हुए हैं।
महिलाओं की श्रम भागीदारी में भी हल्की वृद्धि दर्ज की गई। महिला LFPR जनवरी के 35.1% से बढ़कर फरवरी में 35.3% हो गया। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी अधिक मजबूत रही, जहां ग्रामीण महिला श्रम बल भागीदारी दर 39.7% से बढ़कर 40% हो गई। इससे संकेत मिलता है कि गांवों में अधिक महिलाएं कृषि और गैर-कृषि कार्यों में शामिल हो रही हैं।
रोजगार का स्तर भी लगभग स्थिर रहा। वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR), जो काम करने वाले लोगों का अनुपात दर्शाता है, राष्ट्रीय स्तर पर 53.2% रहा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 56.3% दर्ज किया गया, जो यह बताता है कि ग्रामीण आर्थिक गतिविधियां रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभा रही हैं।
सर्वे में ग्रामीण बेरोजगारी की स्थिति भी स्थिर पाई गई। फरवरी में ग्रामीण बेरोजगारी दर 4.2% पर बनी रही, जबकि शहरी बेरोजगारी दर जनवरी के 7.0% से घटकर 6.6% हो गई। इससे राष्ट्रीय स्तर पर कुल बेरोजगारी दर हल्की गिरावट के साथ 4.9% पर आ गई। महिलाओं बेरोजगारी दर में भी कमी दर्ज की गई। कुल महिला बेरोजगारी दर 5.6% से घटकर 5.1% रह गई, जबकि ग्रामीण महिलाओं में बेरोजगारी दर 4.3% से घटकर 4.0% पर आ गई।
यह निष्कर्ष 3.74 लाख से अधिक व्यक्तियों से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं, जिनमें से 2.13 लाख से अधिक लोग ग्रामीण क्षेत्रों से शामिल थे। उल्लेखनीय है कि रोजगार और बेरोजगारी के रुझानों पर अधिक नियमित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए पीएलएफएस का मासिक बुलेटिन 2025 से जारी किया जा रहा है।