भारत के सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अगले वर्ष की शुरुआत में कोलंबिया का दौरा करेगा। इसका उद्देश्य पाम ऑयल की खरीद, व्यापार और सहयोग के नए अवसर तलाशना है। एसोसिएशन का कहना है कि वैश्विक बाजार में हो रहे बदलावों के बीच खाद्य तेलों की आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने की कोशिशों के तहत वह ऐसा कर रहा है।
SEA और कोलंबिया के नेशनल फेडरेशन ऑफ ऑयल पाम ग्रोअर्स (Fedepalma) के बीच जल्द ही एक समझौता ज्ञापन (MoU) होने की भी संभावना है। इससे पाम ऑयल क्षेत्र में भारत और कोलंबिया के बीच सहयोग का नया रास्ता खुल सकता है।
यह पहल मुंबई में SEA की 55वीं वार्षिक आम बैठक और 29वें ग्लोबऑयल के दौरान SEA और कोलंबियाई प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई बैठक के बाद सामने आई है। कोलंबियाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत में कोलंबिया के राजदूत विक्टर ह्यूगो एचेवेरी जारामिलो और Fedepalma के एक्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट निकोलस पेरेज मारुलांडा ने किया।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया के प्रमुख पाम ऑयल उत्पादक इंडोनेशिया और मलेशिया तेजी से पाम ऑयल का इस्तेमाल बायोडीजल उत्पादन में बढ़ा रहे हैं। इससे खाद्य उपयोग के लिए उपलब्ध पाम ऑयल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और वैकल्पिक स्रोतों का महत्व बढ़ सकता है।
SEA प्रेसिडेंट अंग्शु मलिक ने कहा, “पारस्परिक लाभ के अवसर तलाशने के लिए कोलंबिया का दौरा करने का निमंत्रण सकारात्मक पहल है। SEA अगले वर्ष की शुरुआत में प्रतिनिधिमंडल के दौरे की योजना बना रहा है।”
SEA के कार्यकारी निदेशक डॉ. बी.वी. मेहता ने कहा, “इंडोनेशिया और मलेशिया में बायोडीजल मिश्रण बढ़ने से अधिक पाम ऑयल खाद्य क्षेत्र से ईंधन क्षेत्र की ओर जा सकता है। ऐसे में भारत को आगे की तैयारी करते हुए आपूर्ति के वैकल्पिक और पूरक स्रोत तलाशने होंगे।”
उन्होंने कहा कि बढ़ते उत्पादन और निर्यात योग्य अधिशेष के कारण कोलंबिया भारत के लिए एक संभावित स्रोत हो सकता है। हाल में भारत कोलंबिया से करीब 2 लाख टन क्रूड पाम ऑयल का आयात कर चुका है। कोलंबिया सालाना करीब 20 लाख टन पाम ऑयल का उत्पादन करता है और लैटिन अमेरिका का सबसे बड़ा पाम ऑयल उत्पादक है। यह पहल ऐसे समय हुई है जब भारत ने हाल में क्रूड खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती की है और त्योहारी मौसम में घरेलू खाद्य तेल मांग भी बढ़ रही है।