भारत का सोयाबीन तेल आयात अगस्त में रिकॉर्ड 6.20 लाख टन तक पहुंच सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमतों, घरेलू मांग में मजबूती और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण सूरजमुखी तेल की आपूर्ति में व्यवधान से भारतीय रिफाइनर सोयाबीन तेल की खरीद बढ़ा रहे हैं। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के प्रेसिडेंट संजीव अस्थाना के अनुसार, अगस्त का संभावित आयात मौजूदा मार्केटिंग वर्ष के 4.25 लाख टन के औसत मासिक आयात से करीब 46 प्रतिशत अधिक होगा।
त्योहारी सीजन नजदीक आने के साथ सूरजमुखी तेल की आपूर्ति प्रभावित होने और पाम तेल से प्रतिस्पर्धा के बीच सोयाबीन तेल एक पसंदीदा विकल्प बनकर उभर रहा है। हालांकि, आयात में इस संभावित उछाल ने भारत की आयात निर्भरता को लेकर चिंता भी बढ़ाई है, खासकर ऐसे समय में जब घरेलू सोयाबीन रकबे और उत्पादन पर मौसम संबंधी अनिश्चितताओं का असर पड़ रहा है।
SEA प्रमुख के अनुसार, 14 अगस्त तक देश में खरीफ तिलहन का कुल रकबा 184.46 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 185.36 लाख हेक्टेयर से मामूली कम है। सोयाबीन का रकबा घटकर 120.84 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि पिछले साल यह 122.61 लाख हेक्टेयर था। दूसरी ओर, मूंगफली, तिल और सूरजमुखी के रकबे में बढ़ोतरी दर्ज की गई। अरंडी के रकबे में अपेक्षाकृत अधिक गिरावट आई है।
अस्थाना ने कहा कि अब केवल रकबे के बजाय फसल की स्थिति, उत्पादकता, मौसम और किसानों को मिलने वाले रिटर्न पर ध्यान देना जरूरी है। इन्हीं कारकों से तय होगा कि भारत 2026-27 में अपने घरेलू तिलहन और खाद्य तेल संतुलन को कितना बेहतर कर पाता है।
SEA प्रमुख ने खाद्य तेलों के भोजन से ईंधन की ओर बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक की टिप्पणियों को भी महत्वपूर्ण बताया। बायोडीजल के लिए पाम तेल और अन्य वनस्पति तेलों के बढ़ते वैश्विक इस्तेमाल से निर्यात के लिए उपलब्धता घट सकती है और अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। भारत के लिए इसका सीधा असर आयात बिल, घरेलू कीमतों और खाद्य महंगाई पर पड़ सकता है।
अस्थाना ने राइस ब्रान (चावल की भूसी) से निकलने वाले तेल के अधिक उपयोग पर भी जोर दिया है। वर्ष 2025-26 में करीब 23 करोड़ टन धान और 15.4 करोड़ टन चावल उत्पादन के अनुमान के साथ भारत लगभग 1.31 करोड़ टन राइस ब्रान और करीब 23 लाख टन राइस ब्रान ऑयल का उत्पादन कर सकता है। हालांकि, वर्तमान में राइस ब्रान ऑयल का उत्पादन केवल करीब 11 लाख टन है। एसोसिएशन ने इस अंतर को कम करने के लिए मिलों के आधुनिकीकरण, अनुसंधान एवं विकास, जीएसटी से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने और वैल्यू चेन को मजबूत करने का सुझाव दिया है।
भारत की आयात निर्भरता व्यापार आंकड़ों से भी स्पष्ट होती है। नवंबर 2025 से शुरू हुए तेल वर्ष में जुलाई 2026 तक वनस्पति तेलों का आयात 5 प्रतिशत बढ़कर 121.50 लाख टन हो गया, जबकि खाद्य तेलों का आयात 119.23 लाख टन रहा। अकेले जुलाई में खाद्य तेल आयात जून के 11.11 लाख टन से बढ़कर 14.81 लाख टन हो गया। इसमें पाम तेल का आयात 7.19 लाख टन और सोयाबीन तेल का आयात 4.98 लाख टन रहा।
इस बीच, अप्रैल-मई 2026 में खाद्य तेलों का निर्यात मात्रा के लिहाज से 16 प्रतिशत घटकर 41,438 टन रह गया, लेकिन निर्यात मूल्य करीब 2 प्रतिशत बढ़कर 720.85 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में तिलहन निर्यात 1.52 लाख टन रहा, जबकि तिलहन आयात बढ़कर 4.31 लाख टन पहुंच गया। इसमें अकेले सोयाबीन बीज का आयात 4.13 लाख टन रहा।
ऑयलमील निर्यात में मई में कुछ सुधार देखने को मिला। मई 2026 में इसका निर्यात सालाना आधार पर 19 प्रतिशत बढ़कर 3.74 लाख टन हो गया। हालांकि, अप्रैल-मई के दौरान कुल तेलखली निर्यात 5.3 प्रतिशत घटकर 7.39 लाख टन रहा। माल ढुलाई की चुनौतियों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का निर्यात पर दबाव बना हुआ है।