केंद्र सरकार ने पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए नियमों को और सख्त करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत पराली जलाने वाले किसानों के भूमि रिकॉर्ड में 15 महीने के लिए ‘रेड एंट्री’ दर्ज की जाएगी। इस बीच, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य की कार्ययोजना की समीक्षा की।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से जारी मसौदा नियमों में 2023 में लागू और 2024 में संशोधित मौजूदा कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) व्यवस्था को बदलने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित व्यवस्था दिल्ली, पंजाब, हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश और राजस्थान के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में लागू होगी।
मसौदे के अनुसार, जिस खेत में पराली जलाने की घटना दर्ज होगी, उसे 15 महीने के लिए ‘रेड कैटेगरी’ में रखा जाएगा और संबंधित भूमि रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ दर्ज की जाएगी। हालांकि, मसौदे में इस एंट्री के सभी संभावित परिणाम स्पष्ट नहीं किए गए हैं। लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘रेड एंट्री’ का असर मौजूदा पर्यावरणीय जुर्माने से कहीं व्यापक हो सकता है। इसके तहत कुछ सरकारी योजनाओं का लाभ लेने पर रोक, भूमि की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत निर्धारित मंडियों में उपज बेचने के लिए पंजीकरण पर कुछ अवधि तक रोक जैसे प्रावधान संभावित हैं। हालांकि, अंतिम नियमों में ही इसके वास्तविक परिणाम स्पष्ट होंगे।
यदि उसी भूमि पर दोबारा पराली जलाने की घटना सामने आती है या किसान पहली 15 महीने की अवधि में पर्यावरणीय जुर्माने का भुगतान नहीं करता है, तो ‘रेड कैटेगरी’ की अवधि अगले 15 महीने तक बढ़ाई जा सकती है। मसौदे में 2024 में लागू जुर्माने की दरें बरकरार रखी गई हैं। दो एकड़ से कम भूमि पर पराली जलाने पर 5,000 रुपये, दो से पांच एकड़ भूमि पर 10,000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक भूमि पर 30,000 रुपये का जुर्माना प्रस्तावित है। 30 दिनों के भीतर जुर्माना जमा नहीं करने पर इसकी वसूली भूमि राजस्व के बकाये के रूप में की जा सकती है।
सरकार ने अंतिम नियम जारी करने से पहले संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। जुर्माने से मिलने वाली राशि संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या प्रदूषण नियंत्रण समिति को दी जाएगी। इस राशि का इस्तेमाल फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी, बायोमास के भंडारण एवं उपयोग, फसल विविधीकरण, अनुसंधान तथा किसानों के प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों में किया जा सकेगा।
इस बीच, उत्तर प्रदेश की बैठक में भूपेंद्र यादव ने सर्दियों से पहले प्रदूषण नियंत्रण उपायों को तेज करने और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। पराली जलाने के मामले में उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनरी की उपलब्धता में मौजूद कमियों को दूर करने तथा किसानों के प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान को तेज करने को कहा।
बैठक में सड़क की धूल, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण एवं विध्वंस कचरा, नगर निकाय के ठोस कचरे और बायोमास जलाने से जुड़े उपायों की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने इलेक्ट्रिक बसों और चार्जिंग स्टेशनों की तैनाती तेज करने, सड़कों की बेहतर सफाई, औद्योगिक इकाइयों में उत्सर्जन निगरानी प्रणाली लगाने तथा पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के प्रबंधन में तेजी लाने पर जोर दिया।