चीनी मिलों के स्टॉक का होगा भौतिक सत्यापन, लग सकती है स्टॉक लिमिट, बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार सतर्क  

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने सभी चीनी मिलों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराने का फैसला किया है। जल्द ही सरकार चीनी पर स्टॉक लिमिट लगाने जैसे कदम भी उठा सकती है।

देश में चीनी की अचानक बढ़ती कीमतों और आपूर्ति को लेकर केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने सभी चीनी मिलों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराने का फैसला किया है। चीनी की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार जल्द ही स्टॉक लिमिट लगाने जैसा कदम भी उठा सकती है। खाद्य मंत्रालय में इस पर भी विचार-विमर्श शुरू हो गया है।  

चीनी एवं वनस्पति तेल निदेशालय की ओर से सभी चीनी मिलों को 24 जुलाई को दिए गये निर्देश के अनुसार, भारत सरकार ने 1 अगस्त से 14 अगस्त 2026 के बीच देशभर की चीनी मिलों में उपलब्ध चीनी का भौतिक सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। यह सत्यापन राज्य सरकारों के शुगर एवं गन्ना आयुक्तों के सहयोग से होगा। निरीक्षण दल में केंद्र के निदेशालय और संबंधित राज्य सरकारों के अधिकारी शामिल होंगे।

यदि किसी मिल के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर पाया गया तो इसे शुगर कंट्रोल ऑर्डर, 2025 का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित मिल के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 सहित अन्य प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। सभी चीनी मिलों को निर्देश दिया है कि बिक्री रजिस्टर और अन्य अभिलेखों को पूरी तरह अद्यतन रखा जाए, ताकि निरीक्षण के समय वास्तविक स्टॉक का सही मिलान किया जा सके।

जून के स्टॉक को बनाया जाएगा आधार

निदेशालय के अनुसार, भौतिक सत्यापन के लिए जून 2026 की पी-2 रिटर्न में दर्ज चीनी स्टॉक को आधार माना जाएगा। जुलाई 2026 के दौरान मिलों द्वारा बेची या भेजी गई चीनी को समायोजित करने के बाद निरीक्षण की तारीख पर उपलब्ध वास्तविक स्टॉक का मिलान किया जाएगा।

लग सकती है स्टॉक लिमिट

चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंतित खाद्य मंत्रालय ने पिछले सप्ताह चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किया था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चीनी की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए स्टॉक लिमिट लगाने जैसे कदम उठाने का सुझाव दिया गया, जिस पर सरकार  विचार कर रही है।

कीमतों में तेज उछाल के बीच सरकार की सख्ती

देश में चीनी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। पिछले एक महीने में एक्स-मिल कीमतों में लगभग 15 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश में एम-ग्रेड चीनी की एक्स-मिल कीमतें Rs. 4,450-4,550 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं, जबकि महाराष्ट्र और कर्नाटक में एस-ग्रेड चीनी 4,200-4,300 प्रति क्विंटल बिक रही है। दिल्ली के थोक बाजार में चीनी की कीमतें 4,750 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुकी हैं।

उत्पादन लगातार दूसरे वर्ष खपत से कम

उद्योग के अनुमानों के अनुसार, चीनी वर्ष 2025-26 में भारत का चीनी उत्पादन लगभग 279 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि घरेलू खपत लगभग 285 लाख टन के आसपास है। लगातार दूसरे वर्ष उत्पादन खपत से कम रहेगा।

सीजन की की शुरुआत में उद्योग ने करीब 309 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया था, लेकिन कमजोर मानसून और गन्ने की कम उत्पादकता के कारण उत्पादन घट गया। उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन लगभग एक दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि महाराष्ट्र में भी अनुमान से कम उत्पादन हुआ।

कम स्टॉक और निर्यात ने बढ़ाया दबाव

इस साल चीनी उत्पादन में कमी के बावजूद केंद्र सरकार ने दिसंबर 2025 में 15 लाख टन तथा फरवरी 2026 में अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। हालांकि मई 2026 में निर्यात पर रोक लगा दी गई। लेकिन तब तक लगभग 8 लाख टन चीनी का निर्यात हो चुका था।

उत्पादन में कमी, निर्यात और एथेनॉल के लिए गन्ने के उपयोग के कारण विशेषकर महाराष्ट्र और कर्नाटक में स्टॉक तेजी से घटा है, जिससे बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ा है।

स्टॉक कई वर्षों के न्यूनतम स्तर पर

अनुमानों के अनुसार, चालू चीनी सीजन 2025-26 की समाप्ति के बाद और नये सीजन के शुरू में 1 अक्टूबर 2026 को देश में चीनी का ओपनिंग स्टॉक 33-35 लाख टन के बीच रह सकता है। यह देश में अब तक का सबसे कम क्लोजिंग स्टॉक होगा। यदि नए सत्र में पेराई समय पर शुरू नहीं हुई तो अक्टूबर-नवंबर में आपूर्ति और अधिक तंग हो सकती है।