चीनी मिलों को इंटीग्रेटेड बायोरिफाइनरी के रूप में विकसित होने की जरूरत: ISBC 2026

इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस 2026 में चीनी उद्योग को पारंपरिक चीनी और इथेनॉल उत्पादन से आगे बढ़कर एकीकृत बायो-एनर्जी इकोसिस्टम में बदलने पर जोर दिया गया। गन्ना और उसके सह-उत्पादों से अधिक मूल्य सृजन, इथेनॉल, स्वच्छ परिवहन, टिकाऊ विमानन ईंधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रमुख चर्चा के विषय रहे।

भारतीय चीनी उद्योग को पारंपरिक चीनी और इथेनॉल उत्पादन से आगे बढ़कर एकीकृत बायोरिफाइनरी के रूप में विकसित होने की जरूरत है, ताकि गन्ना और उसके सह-उत्पादों से अधिकतम मूल्य हासिल किया जा सके। यह बात नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस (ISBC) 2026 में कही।

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) की तरफ से 9-10 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में भारत, थाईलैंड, ब्राजील, यूरोप और अमेरिका से 500 से अधिक प्रतिनिधियों तथा 50 से अधिक वैश्विक वक्ताओं ने हिस्सा लिया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने कहा कि चीनी मिलों को अब केवल चीनी और इथेनॉल उत्पादन इकाइयों के बजाय एकीकृत बायोरिफाइनरी के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने गन्ने और इससे जुड़े विभिन्न सह-उत्पादों तथा से अधिकतम आर्थिक मूल्य हासिल करने की जरूरत पर जोर दिया।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि उद्योग पारंपरिक चीनी उत्पादन से आगे बढ़कर ऐसी एकीकृत बायोरिफाइनरी की दिशा में बढ़ा है, जो गन्ने की पूरी वैल्यू चेन से जुड़े कई स्रोतों से मूल्य पैदा कर सकती हैं।

सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, इथेनॉल मिश्रण, स्वच्छ परिवहन, सर्कुलर मैन्युफैक्चरिंग और टिकाऊ औद्योगिक विकास में चीनी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका पर चर्चा हुई। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के संयुक्त सचिव अश्विनी श्रीवास्तव ने कहा कि भविष्य में चीनी मिलों के प्रदर्शन का आकलन केवल चीनी उत्पादन के आधार पर नहीं होना चाहिए। इसमें गन्ने के कुशल उपयोग, सह-उत्पादों से मूल्य सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक पहुंचने वाले मूल्य को भी शामिल किया जाना चाहिए।

सम्मेलन में वैश्विक चीनी बाजार की स्थिति, 2026-27 में भारत की फसल और व्यापार संभावनाओं, स्वच्छ परिवहन तथा तरल ईंधनों में बदलाव पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने चीनी, बायोरिफाइनरी, जैव ईंधन और इससे जुड़ी वैल्यू चेन के भविष्य पर भी विचार किया। सीईओ लीडरशिप समिट में नीति-निर्माताओं और उद्योग प्रतिनिधियों ने प्रतिस्पर्धा क्षमता, रणनीतिक दिशा और दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं पर चर्चा की।

इस मौके पर ISMA प्रेसिडेंट नीरज शिरगांवकर ने कहा कि चीनी उद्योग पारंपरिक कमोडिटी क्षेत्र से आगे बढ़कर एकीकृत बायोरिफाइनरी इकोसिस्टम में बदल रहा है, जो ऊर्जा सुरक्षा, ग्रामीण समृद्धि और टिकाऊ विकास में योगदान दे रहा है। उन्होंने इस बदलाव को तेज करने के लिए नीतिगत समर्थन, तकनीक को अपनाने और सरकार, उद्योग तथा अन्य हितधारकों के बीच मजबूत सहयोग की जरूरत बताई।

ISMA महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा, “ISBC 2026 ने पारंपरिक चीनी और इथेनॉल उत्पादन से आगे उभर रहे महत्वपूर्ण अवसरों को रेखांकित किया है। इनमें विविधीकृत बायोरिफाइनरी, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF), आधुनिक कृषि और सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े समाधान शामिल हैं।”

सम्मेलन में पारंपरिक चीनी और इथेनॉल से आगे विविधीकृत बायोरिफाइनरी, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, आधुनिक कृषि और सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े अवसरों पर भी जोर दिया गया। सम्मेलन के साथ आयोजित इंडस्ट्री एक्सपो में चीनी और बायो-एनर्जी तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। इसमें हीरो और टोयोटा के फ्लेक्स-फ्यूल वाहन भी प्रदर्शित किए गए।

सम्मेलन का समापन इनोवेशन, प्रतिस्पर्धा क्षमता और भारत के चीनी एवं बायो-एनर्जी इकोसिस्टम में अधिक मूल्य सृजन पर जोर के साथ हुआ। इसके लिए सरकार, उद्योग और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के बीच निरंतर सहयोग को महत्वपूर्ण बताया गया।