केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र के डिजिटलीकरण को गति देने के लिए मौजूदा खरीफ सीजन में डिजिटल फसल सर्वेक्षण (Digital Crop Survey-DCS) का दायरा बड़े स्तर पर बढ़ाने जा रही है। सरकार का लक्ष्य देश के लगभग 5.53 लाख गांवों में स्थित 45 करोड़ खेतों का डिजिटल सर्वेक्षण करना है। इस पहल का उद्देश्य फसल क्षेत्र और उत्पादन का अधिक सटीक आकलन करना, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को पारदर्शी बनाना तथा किसानों तक लक्षित सेवाएं पहुंचाना है।
डिजिटल फसल सर्वेक्षण को एग्रीस्टैक (AgriStack) और किसान आईडी (Farmer ID) परियोजना के साथ जोड़ा जा रहा है। अब तक 20 राज्यों में 10.15 करोड़ किसान आईडी तैयार की जा चुकी हैं, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 87 प्रतिशत है। सरकार का मानना है कि किसान आईडी और डिजिटल फसल डेटा के एकीकरण से कृषि सेवाओं का वितरण अधिक प्रभावी होगा।
रिमोट सेंसिंग से होगा डेटा का सत्यापन
डिजिटल फसल सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए सरकार रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट आधारित तकनीकों का उपयोग करेगी। डिजिटल रिकॉर्ड और उपग्रह आधारित फसल क्षेत्र के आकलन का मिलान कर डेटा का सत्यापन किया जाएगा। इससे फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और सरकारी रिकॉर्ड में सटीकता बढ़ने की उम्मीद है।
रबी के मुकाबले बड़ा विस्तार
सरकार ने पिछले रबी सीजन में 4.41 लाख गांवों के 31.3 करोड़ खेतों का डिजिटल सर्वेक्षण कराया था। खरीफ 2026 में इसका दायरा बढ़ाकर 5.53 लाख गांवों और 45 करोड़ खेतों तक ले जाने की योजना है। अधिकारियों के अनुसार, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इस प्रणाली से लगभग वास्तविक समय में फसल क्षेत्र और उत्पादन का आकलन करने में सफलता मिली है। इसी अनुभव के आधार पर अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक बनाया जा रहा है।
किसानों को मिलेंगी व्यक्तिगत कृषि सेवाएं
केंद्र सरकार भविष्य में डिजिटल फसल सर्वेक्षण और किसान आईडी के आधार पर किसानों को व्यक्तिगत कृषि सलाह (Personalised Advisory) उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है। इसमें फसल चयन, मौसम, मिट्टी की स्थिति, पोषक तत्व प्रबंधन और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी किसानों तक डिजिटल माध्यम से पहुंचाई जा सकेगी। इससे खेती को अधिक वैज्ञानिक और डेटा-आधारित बनाने में मदद मिलेगी।
किसान आईडी के साथ अनेक योजनाओं को जोड़ा जा रहा है। सरकार का मानना है कि डिजिटल फसल सर्वेक्षण से वास्तविक फसल क्षेत्र और उत्पादन के आंकड़े उपलब्ध होने पर कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही, नीति निर्माण के लिए भी अधिक विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध होंगे।