जुलाई में वेज थाली 4% और नॉन-वेज थाली 9% महंगी, प्याज-तेल और LPG ने बढ़ाया खर्च

जुलाई में भारत में घर पर तैयार होने वाली शाकाहारी थाली 4% और मांसाहारी थाली 9% महंगी हो गई। प्याज, खाद्य तेल और LPG की बढ़ती कीमतों ने लागत बढ़ाई, जबकि सस्ते आलू और टमाटर ने कुछ राहत दी। क्रिसिल के अनुसार, आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा दबावों के कारण प्याज और खाद्य तेल महंगे रह सकते हैं।

भारत में घर पर तैयार होने वाले भोजन की लागत जुलाई में बढ़ गई। क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में औसत शाकाहारी थाली की कीमत सालाना आधार पर 4% बढ़ी, जबकि मांसाहारी थाली 9% महंगी हुई। महंगे प्याज, खाद्य तेल और LPG ने घरेलू भोजन की लागत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
 
जुलाई में शाकाहारी थाली की औसत लागत बढ़कर 29.1 रुपये हो गई, जो पिछले वर्ष इसी महीने में 28.1 रुपये थी। वहीं, मांसाहारी थाली की कीमत 53.5 रुपये से बढ़कर 58.3 रुपये हो गई।
 
घरेलू भोजन की लागत बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में प्याज की कीमतें शामिल रहीं। जुलाई में प्याज के दाम सालाना आधार पर 20% बढ़े। बाजार में अपेक्षाकृत महंगे रबी प्याज के भंडारण वाले स्टॉक आने के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ा। इसके अलावा, महाराष्ट्र में मार्च और अप्रैल के दौरान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से देर से तैयार होने वाली फसल और उपलब्ध स्टॉक को नुकसान पहुंचा, जिससे आपूर्ति प्रभावित हुई।
 
क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पूषन शर्मा के अनुसार, रबी प्याज की सीमित उपलब्धता और खरीफ प्याज की आवक में संभावित देरी के कारण आने वाले समय में प्याज की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
 
खाना पकाने की लागत पर खाद्य तेल और LPG की बढ़ती कीमतों का भी असर पड़ा। जुलाई में खाद्य तेल की कीमत सालाना आधार पर 11% और LPG सिलेंडर की कीमत 10% बढ़ी। क्रिसिल के मुताबिक, पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़ी आपूर्ति बाधाओं और बढ़ी ऊर्जा लागत ने इन कीमतों को प्रभावित किया है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से माल ढुलाई और आयात लागत भी बढ़ी है, जबकि महंगे पॉलिमर और रेजिन ने पैकेजिंग लागत बढ़ाई है।
 
हालांकि, आलू और टमाटर की कम कीमतों ने थाली की कुल लागत में वृद्धि को कुछ हद तक सीमित किया। जुलाई में आलू की कीमत 12% और टमाटर की कीमत 2% कम रही। आलू की रबी पैदावार में 2-3% की वृद्धि और अधिक रकबे से आपूर्ति बेहतर हुई।
 
आगे क्रिसिल को उम्मीद है कि महंगे कोल्ड-स्टोरेज स्टॉक बाजार में आने से आलू की कीमतें बढ़ सकती हैं। टमाटर के दाम निकट अवधि में स्थिर रह सकते हैं, लेकिन सितंबर से खरीफ आवक में देरी और त्योहारी मांग के कारण इनमें तेजी आ सकती है।