कमजोर मानसून से तिलहन उत्पादन पर संकट, खाद्य तेल आयात बिल 1.75 लाख करोड़ के पार पहुंचने की आशंका

कमजोर मानसून के बीच देश में तिलहन की बुआई पिछले वर्ष की तुलना में 8.6 लाख हेक्टेयर कम रही है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) ने आशंका जताई है कि अगस्त-सितंबर में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो तिलहन उत्पादन प्रभावित हो सकता है और चालू वर्ष में भारत का खाद्य तेल आयात बढ़कर 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकता है।

देश में कमजोर और असमान मानसून के कारण खरीफ तिलहन फसलों की बुआई प्रभावित हुई है, जिससे खाद्य तेलों में भारत की आयात निर्भरता और बढ़ने की आशंका जताई गई है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने कहा है कि चालू वर्ष में भारत का खाद्य तेल आयात बिल बढ़कर 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है जो पिछले वर्ष 1.61 लाख करोड़ रुपये था।

SEA अध्यक्ष ने सदस्यों को लिखे पत्र में कहा कि 17 जुलाई तक देश में कुल तिलहन बुआई 147 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 155.7 लाख हेक्टेयर थी। यानी तिलहन की बुवाई के क्षेत्र में 8.6 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। मूंगफली, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसी प्रमुख फसलों की बुआई पिछले वर्ष की तुलना में पीछे चल रही है।

अगस्त-सितंबर के दौरान फूल आने की महत्वपूर्ण अवस्था में यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो तिलहन उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इससे जलाशयों का जलस्तर भी प्रभावित होगा और आगामी रबी सीजन पर भी दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, आने वाले सप्ताहों में अच्छी बारिश होती है, तो बुआई का रकबा बढ़ सकता है और उत्पादन पर असर सीमित रह सकता है।

सात महीने में आयात 20,000 करोड़ बढ़ा

SEA के अनुसार चालू तेल वर्ष के पहले सात महीनों में भारत ने 104 लाख टन से अधिक खाद्य तेल का आयात किया है। इस दौरान आयात बिल 99,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.19 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, यानी केवल सात महीनों में आयात बिल में 20,000 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई।

रुपये की कमजोरी, कमजोर मानसून की आशंका, तिलहन बुआई में देरी और वैश्विक परिस्थितियों ने खाद्य तेलों की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। इंडोनेशिया के बायोडीजल कार्यक्रम के विस्तार के कारण अधिक पाम ऑयल ईंधन क्षेत्र में जा रहा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति सीमित हो रही है। इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव, ऊंची समुद्री मालभाड़ा और बीमा लागत भी आयात को महंगा बना रहे हैं।

आयात नहीं, उत्पादन बढ़ाना होगा समाधान

अस्थाना ने कहा कि भारत की दीर्घकालिक रणनीति अधिक आयात करने की नहीं बल्कि घरेलू तिलहन उत्पादन बढ़ाने की होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के अध्यक्ष प्रो. एस. महेंद्र देव द्वारा तिलहन और दलहन की ओर प्रोत्साहन आधारित फसल विविधीकरण की वकालत का स्वागत किया।

उन्होंने कहा कि किसानों को बेहतर बाजार मूल्य, गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक तकनीक, सुनिश्चित खरीद और प्रभावी विस्तार सेवाएं उपलब्ध कराकर ही फसल विविधीकरण को सफल बनाया जा सकता है।

3,400 मॉडल फार्म स्थापित करेगा SEA

SEA ने बताया कि उसने सॉलिडैरिडैड (Solidaridad) के सहयोग से वर्ष 2026-27 के लिए सस्टेनेबल ऑयलसीड मिशन शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा में 3,400 मॉडल फार्म विकसित किए जाएंगे। इनमें खरीफ सीजन के लिए 400 मॉडल फार्म (मूंगफली और सोयाबीन) तथा रबी सीजन के लिए 3,000 मॉडल फार्म (सरसों) शामिल होंगे।

वर्ष 2019-20 में केवल 100 मॉडल फार्म से शुरू हुआ यह सरसों मिशन अब देश की सबसे बड़ी तिलहन उत्पादकता पहलों में शामिल हो चुका है। वैज्ञानिक फसल प्रबंधन और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों के माध्यम से उत्पादकता और किसानों की आय में सुधार दर्ज किया गया है।