पेराई जल्द शुरू करने की नौबत क्यों आई? कम उत्पादन के बावजूद निर्यात बना मुसीबत!

त्योहारी सीजन से पहले चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए चीनी उद्योग ने आगामी पेराई सत्र को सामान्य समय से 10-15 दिन पहले शुरू करने का प्रस्ताव दिया है।

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और उपलब्धता को लेकर चिंताओं के बीच चीनी उद्योग ने 2026-27 के पेराई सत्र को 10-15 दिन पहले शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। उम्मीद है कि इससे त्योहारी सीजन से पहले चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतें काबू में आएंगी। आमतौर पर चीनी सीजन एक अक्टूबर से शुरू होता है और चीनी मिलें नवंबर तक पेराई शुरू करती हैं।  

पिछले एक महीने में चीनी के एक्स-फैक्ट्री भाव लगभग 10 फीसदी बढ़कर 4,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुके हैं। दिल्ली के थोक बाजार में चीनी का भाव 5,100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जबकि खुदरा बाजार में चीनी 58-60 रुपये प्रति किलोग्राम तक बेची जा रही है।

खाद्य मंत्रालय ने जमाखोरी और सट्टेबाजी रोकने के लिए बाजार की निगरानी कड़ी कर दी है। डीलरों पर स्टॉक सीमा लागू करने के साथ-साथ चीनी मिलों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराने के आदेश दिए गए हैं। इसके बावजूद चीनी के दाम कम होते नज़र नहीं आ रहे हैं।

ऐसे में चीनी उद्योग के संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) और नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) ने केंद्र सरकार के साथ चर्चा के बाद आगामी पेराई सत्र सामान्य समय से 10-15 दिन पहले शुरू करने की पेशकश की है। 

उद्योग का मानना है कि समय से पहले पेराई शुरू होने पर अक्टूबर में ही नई चीनी बाजार में आ जाएगी, जिससे त्योहारी मांग के दौरान कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। हालांकि, दोनों उद्योग संगठनों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि समय से पहले पेराई शुरू करने से चीनी मिलों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ की भरपाई के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।

गन्ने की जल्द पेराई से चीनी की रिकवरी कम होती है और चीनी मिलों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में चीनी उद्योग का यह कदम कितना कारगर रहेगा, इसे लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। पेराई सत्र जल्द शुरू करने का फैसला चीनी मिलों के साथ-साथ गन्ना किसानों पर भी निर्भर करता है, जबकि इस बारे में किसानों के साथ कोई औपचारिक विचार-विमर्श नहीं हुआ है।

सरकार से क्या मांगा?

गुरुवार को केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा को भेजे गए संयुक्त पत्र में आईएसएमए के महानिदेशक दीपक बल्लानी और एनएफसीएसएफ के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाईकनवरे ने कहा कि पेराई सत्र जल्द शुरू करने का निर्णय "राष्ट्र हित" में लिया गया है, ताकि बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़े और त्योहारी सीजन के दौरान कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके।

दोनों संगठनों ने चीनी मिलों को जल्द शुरू करने के लिए सरकार से घरेलू बिक्री का अतिरिक्त कोटा देने और घरेलू चीनी बिक्री पर केंद्र के हिस्से के केंद्रीय जीएसटी (CGST) में छूट देने की मांग की है।

उत्पादन लगातार दूसरे वर्ष खपत से कम

चीनी सीजन 2025-26 में देश का चीनी उत्पादन लगभग 2.79 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जबकि घरेलू खपत करीब 2.85 करोड़ टन रहने की संभावना है। लगातार दूसरे वर्ष चीनी उत्पादन घरेलू मांग से कम रहेगा।

सत्र की शुरुआत में चीनी उद्योग ने उत्पादन का अनुमान लगभग 3.09 करोड़ टन लगाया था, जबकि कमजोर मानसून और गन्ने की कम पैदावार के कारण उत्पादन घटने की आशंका जताई जा रही थी। चालू सीजन के दौरान उत्तर प्रदेश में लगभग एक दशक का सबसे कम चीनी उत्पादन दर्ज किया गया, जबकि महाराष्ट्र का उत्पादन भी शुरुआती अनुमान से कम रहा।

चीनी उत्पादन में कमी की आशंका के बावजूद चीनी उद्योग अधिक उत्पादन का दावा करता रहा। इसी आधार पर केंद्र सरकार ने चीनी निर्यात की अनुमति दे दी।

निर्यात और एथेनॉल से बढ़ी आपूर्ति की चिंता

केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी। फरवरी 2026 तक भी उद्योग और सरकार चीनी उत्पादन को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थे। फरवरी में अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी गई। लेकिन अप्रैल में जब चीनी के दाम बढ़ने लगे, तो सरकार हरकत में आई और मई 2026 में चीनी निर्यात पर रोक लगा दी। हालांकि, तब तक देश से करीब 8 लाख टन चीनी का निर्यात हो चुका था।

अनुमानों के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 को नए चीनी सत्र की शुरुआत में देश का शुरुआती चीनी स्टॉक घटकर लगभग 35 लाख टन रह सकता है, जो पिछले कई वर्षों का सबसे निचला स्तर होगा। यदि पेराई सामान्य समय पर शुरू होती है, तो अक्टूबर और नवंबर में चीनी की उपलब्धता और अधिक सीमित हो सकती है।

एक वरिष्ठ उद्योग अधिकारी के अनुसार, अक्टूबर में घरेलू खपत करीब 24 लाख टन रहने की संभावना है। ऐसे में महीने के अंत तक स्टॉक घटकर लगभग 11 लाख टन रह सकता है। यदि अधिकांश स्टॉक उत्तर प्रदेश में केंद्रित रहा, तो पश्चिमी और दक्षिणी भारत में आपूर्ति का दबाव बढ़ सकता है।

ताज्जुब की बात है कि उद्योग संगठन अब भी देश में घरेलू मांग पूरी करने के लिए चीनी की पर्याप्त उपलब्धता का दावा कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर पेराई पहले शुरू करने जैसे कदम भी उठा रहे हैं।

स्टॉक लिमिट लागू, भौतिक सत्यापन के आदेश

चीनी की जमाखोरी और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी कारोबारियों पर स्टॉक सीमा लागू कर दी है।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के आदेश के अनुसार, कोई भी चीनी कारोबारी प्राप्ति की तारीख से 30 दिन से अधिक चीनी अपने पास नहीं रख सकेगा और किसी भी समय या स्थान पर 4,000 क्विंटल से अधिक स्टॉक नहीं रख पाएगा। कारोबारियों को विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर प्रत्येक सप्ताह अपने स्टॉक की घोषणा और अद्यतन जानकारी देना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा विभाग ने 1 से 14 अगस्त के बीच देशभर की सभी चीनी मिलों में उपलब्ध चीनी स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराने का भी आदेश दिया है। रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में किसी भी प्रकार का अंतर पाए जाने पर इसे शुगर कंट्रोल ऑर्डर, 2025 का उल्लंघन माना जाएगा और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 सहित अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।