कृषि श्रमिक संगठनों की आगामी विधानसभा चुनावों में सांप्रदायिक राजनीति को नकारने की अपील

अखिल भारतीय कृषि एवं ग्रामीण श्रमिक संगठन ने संयुक्त बयान में पांच राज्यों के मतदाताओं से चुनावों में सांप्रदायिक राजनीति और भाजपा को नकारने की अपील की है। संगठनों ने श्रमिक व किसान विरोधी नीतियों, श्रम सुधारों, कृषि विधेयकों और कल्याणकारी बदलावों पर चिंता जताते हुए वामपंथी विकल्पों का समर्थन करने का आह्वान किया।

पांच राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर अखिल भारतीय कृषि एवं ग्रामीण श्रमिक संगठन ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। इसमें मतदाताओं से सांप्रदायिक राजनीति और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने की अपील की गई है। संगठनों का आरोप है कि भाजपा की नीतियों ने ग्रामीण और कामकाजी वर्गों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।
 
गौरतलब है कि केरल, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में चुनाव तारीखों की घोषणा की गई है। संगठनों ने दावा किया कि भाजपा की जीत से सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा मिलेगा और कल्याणकारी योजनाएं कमजोर होंगी। बयान में हाल के श्रम सुधारों और मनरेगा (MGNREGA) को नई योजना से बदलने की आलोचना करते हुए कहा गया कि इससे रोजगार की गारंटी और श्रमिकों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
 
संगठनों ने प्रस्तावित सीड्स बिल और बिजली विधेयक 2025 को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इन नीतियों से छोटे और सीमांत किसानों की लागत बढ़ेगी और पहले से ही कमजोर कृषि श्रमिक वर्ग पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, जो ज्यादातर असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है।
 
केरल का उदाहरण देते हुए बयान में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार की सराहना की गई और वहां के मतदाताओं से वामपंथी नीतियों का समर्थन जारी रखने की अपील की गई। साथ ही यह भी कहा गया कि केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने पहले भी भाजपा की राजनीति को नकारा है, जबकि असम और पुडुचेरी के मतदाताओं से भाजपा को सत्ता से हटाने का आह्वान किया गया।
 
संगठनों ने कृषि और ग्रामीण श्रमिकों से चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने और भाजपा विरोधी गठबंधनों, विशेष रूप से वामपंथी उम्मीदवारों का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने इन विकल्पों को “कॉरपोरेट-सांप्रदायिक राजनीति” के खिलाफ एक मजबूत विकल्प बताया।