कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से सिद्धारमैया का इस्तीफा, डीके शिवकुमार संभालेंगे कमान

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस हाईकमान के निर्देश के बाद इस्तीफा दे दिया है, जिससे उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के अगले मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। सिद्धारमैया ने कहा कि वह कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहेंगे और राज्यसभा जाने से इनकार कर दिया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने गुरुवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कई महीनों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में राज्यपाल कार्यालय को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद कहा कि उन्होंने कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर पद छोड़ा है। इस्तीफा सौंपे जाने के समय राज्यपाल थावर चंद गहलोत शहर में मौजूद नहीं थे।

इस्तीफा देने के बाद पत्रकारों से बातचीत में सिद्धारमैया ने कहा, “दो दिन पहले हाईकमान ने मुझसे इस्तीफा देने को कहा था। मैंने कहा था कि मैं आज इस्तीफा दूंगा और मैंने दे दिया।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय बने रहेंगे और राष्ट्रीय राजनीति में जाने की उनकी कोई इच्छा नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने राज्यसभा जाने का प्रस्ताव ठुकरा दिया।

सिद्धारमैया ने अपने राजनीतिक जीवन में समर्थन के लिए कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कांग्रेस सरकार की कल्याणकारी और गारंटी योजनाओं का भी बचाव किया और दावा किया कि विपक्ष की आलोचनाओं के बावजूद कर्नाटक आर्थिक रूप से मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा, “लोगों ने कहा था कि गारंटी योजनाएं राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएंगी, लेकिन कर्नाटक प्रति व्यक्ति आय में देश में पहले और जीएसटी संग्रह में दूसरे स्थान पर है।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार पूरी तरह स्थिर है और विधानसभा में उसे पूर्ण बहुमत हासिल है। उन्होंने कहा, “हमारे पास 136 विधायक हैं और निर्दलीय सदस्यों का भी समर्थन है। सरकार पर कोई खतरा नहीं है।”

सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद अब कांग्रेस नेता और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री बनना तय हो गया है। पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही राजनीतिक खींचतान और सत्ता संतुलन की चर्चा के बीच यह बदलाव हुआ है।

कर्नाटक कांग्रेस के प्रमुख संकटमोचन माने जाने वाले शिवकुमार ने राज्य में राजनीतिक संकटों को संभालने और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने वर्षों के दौरान जमीनी स्तर पर संगठन निर्माण और राजनीतिक प्रबंधन की मजबूत छवि बनाई।

कनकपुरा से आने वाले प्रभावशाली वोक्कालिगा नेता शिवकुमार ने 1980 के दशक में छात्र राजनीति से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। वे आठ बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं और कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक विधायक रहने वाले नेताओं में शामिल हैं।

हालांकि उनका राजनीतिक जीवन विवादों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई से भी जुड़ा रहा है। आयकर छापे, प्रवर्तन निदेशालय की जांच, आय से अधिक संपत्ति और अवैध खनन से जुड़े आरोपों को लेकर वे लगातार चर्चा में रहे हैं। शिवकुमार इन सभी आरोपों से इनकार करते रहे हैं और उन्हें राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते रहे हैं।

यह नेतृत्व परिवर्तन कांग्रेस के 2023 में कर्नाटक में सत्ता में लौटने के लगभग तीन साल बाद हो रहा है। तब से सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता साझेदारी को लेकर लगातार अटकलें लगती रही थीं, हालांकि पार्टी नेतृत्व ने कभी सार्वजनिक रूप से किसी रोटेशन फार्मूले की पुष्टि नहीं की।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवकुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के भीतर गुटबाजी को संतुलित करना, सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखना और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी को मजबूत करना होगी। कांग्रेस नेतृत्व जल्द ही नेतृत्व परिवर्तन और शपथ ग्रहण कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा कर सकता है।