अखिल भारतीय कृषि श्रमिक यूनियन (AIAWU) ने केंद्र सरकार की ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी-जी राम जी योजना की अधिसूचना का कड़ा विरोध किया है। यूनियन का कहना है कि नई योजना मनरेगा के तहत बनी ग्रामीण रोजगार गारंटी व्यवस्था को कमजोर करेगी। इसने 15 मई को कृषि और ग्रामीण मजदूरों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान भी किया है।
यूनियन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश की एकमात्र मांग-आधारित रोजगार गारंटी योजना को ऐसी व्यवस्था से बदलना चाहती है, जिसमें रोजगार की गारंटी कमजोर होगी और राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा। यूनियन के अनुसार, सरकार का 125 दिनों के रोजगार का वादा भरोसेमंद नहीं है, क्योंकि मौजूदा मनरेगा व्यवस्था में भी कई क्षेत्रों में औसतन 55 दिनों का भी रोजगार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
यूनियन ने फेस रिकग्निशन आधारित उपस्थिति और डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की भी आलोचना की। उसका कहना है कि भ्रष्टाचार रोकने के बजाय इन व्यवस्थाओं से वास्तविक मजदूरों का बहिष्कार बढ़ा है। संगठन ने मजदूरी भुगतान में देरी और कई क्षेत्रों में लगभग दो महीने तक काम बंद रहने पर भी चिंता जताई, जिससे कृषि मजदूरों की सौदेबाजी क्षमता कमजोर हुई है।
एआईएडब्ल्यूयू ने कहा कि केंद्र ने पहली बार स्पष्ट किया है कि योजना के खर्च का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को वहन करना होगा। यूनियन का कहना है कि आर्थिक दबाव झेल रहे कई राज्यों के लिए यह संभव नहीं होगा, जिससे ग्रामीण रोजगार के अवसर और घट सकते हैं।
लिबटेक इंडिया के आंकड़ों का हवाला देते हुए यूनियन ने कहा कि आंध्र प्रदेश में मनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार पूरा करने वाले परिवारों की संख्या में 57.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
संगठन ने एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों का भी जिक्र किया, जिनके अनुसार 2024 में खेती-किसानी क्षेत्र से जुड़े 10,500 से अधिक लोगों ने आत्महत्या की। यूनियन का कहना है कि ग्रामीण रोजगार समर्थन कमजोर होने से यह संकट और गहरा सकता है। यूनियन ने वीबी-जी राम जी योजना वापस लेने, 200 दिनों के रोजगार और 700 रुपये दैनिक मजदूरी वाली मजबूत मनरेगा व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।