महिला नेतृत्व वाले बकरी उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए चार मॉडल गांवों की घोषणा, आईसीएआर-सीआईआरजी की पहल

आईसीएआर-सीआईआरजी ने महिला नेतृत्व वाले बकरी उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए चार मॉडल बकरी गांव स्थापित करने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन, बेहतर मार्केट लिंकेज, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की आय, उद्यमिता और आजीविका को मजबूत बनाना तथा बकरी क्षेत्र का सतत विकास सुनिश्चित करना है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (ICAR-CIRG) ने वैज्ञानिक तरीके से संचालित महिला नेतृत्व वाले बकरी पालन उद्यमों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चार मॉडल बकरी गांवों की स्थापना की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना और महिलाओं को सफल उद्यमी के रूप में विकसित करना है।

यह घोषणा महिला-नेतृत्व वाले बकरी उद्यमों को सशक्त बनाने के विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान की गई। इस कार्यशाला का संयुक्त आयोजन आईसीएआर-सीआईआरजी और हीफर इंटरनेशनल की सहायक संस्था पासिंग गिफ्ट्स की तरफ से अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष की भावना के अनुरूप किया गया। कार्यशाला में देशभर से 150 से अधिक महिला किसान, वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, विकास संगठनों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के विशेषज्ञ और पशुपालन क्षेत्र से जुड़े हितधारक शामिल हुए।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए डुवासु (उत्तर प्रदेश पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान) के कुलपति डॉ. अभिजीत मित्रा ने बकरी पालन को वैज्ञानिक आधार पर विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया और इसे ग्रामीण विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। आईसीएआर-सीआईआरजी के निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेतली ने कहा कि भारत का बकरी क्षेत्र लगभग 3.2 करोड़ ग्रामीण परिवारों की आजीविका से जुड़ा है तथा देश में करीब 14.8 करोड़ बकरियां हैं। यह देश के सबसे बड़े पशुधन क्षेत्रों में शामिल है।

डॉ. चेतली ने चार मॉडल बकरी गांवों की घोषणा करते हुए कहा कि वैज्ञानिक नवाचार, बेहतर नस्ल सुधार, उन्नत पशु स्वास्थ्य प्रबंधन और मजबूत बाजार संपर्क बकरी पालन को लाभकारी एवं टिकाऊ उद्यम में बदलने की कुंजी हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र विशेष रूप से महिलाओं और लघु किसानों के लिए आय, पोषण और रोजगार का महत्वपूर्ण स्रोत है।

कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि बकरी पालन अब केवल पारंपरिक आजीविका नहीं रह गया है, बल्कि यह महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, पोषण सुरक्षा और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने वाला एक टिकाऊ व्यवसाय बन चुका है। कार्यक्रम के दौरान "किसानों की सेवा में विज्ञान", "महिला उद्यमियों की सफलता की कहानियां" तथा "बकरी क्षेत्र के विकास में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) की भूमिका" विषयों पर तीन पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, ओडिशा और हरियाणा की महिला किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। बिहार के सीतामढ़ी की रीना देवी ने बताया कि प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग की बदौलत उन्होंने दो बकरियों से शुरुआत कर आज 23 बकरियों का सफल उद्यम खड़ा किया है।

कार्यशाला का समापन अनुसंधान, नवाचार, क्षमता निर्माण और बाजार विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। साथ ही 'हर्डिंग होप' मंच के तहत बकरी क्षेत्र के लिए एक राष्ट्रीय गठबंधन (नेशनल कोएलिशन फॉर द गोट सेक्टर) बनाने पर भी चर्चा हुई, ताकि अनुसंधान संस्थानों, सरकारी एजेंसियों, उत्पादक संगठनों, नागरिक समाज, विकास भागीदारों और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।